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    <title>Attention India Hindi &amp; : एजुकेशन</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : एजुकेशन</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>NEET विवाद के बाद NTA में बड़ा फेरबदल, जानें सरकार इसमें कैसे दे सकती है दखल और कया है कानूनी स्थिति?</title>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है. लगातार उठे सवालों के बीच के केंद्र सरकार ने एजेंसी में बड़े स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है. नए पदों पर नियुक्ति से लेकर सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, जांच व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे तक कई बदलाव किए जा रहे हैं. साथ ही एनटीए से जुड़े 47 अधिकारियों को हटाने और कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है.
इस इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठने लगा है कि जब एनटीए एक स्वायत्त संस्था है, तो सरकार इसमें कैसे दखल दे सकती हैं, क्या केंद्र सरकार सीधे बदलाव कर सकती है और इसकी कानूनी स्थिति क्या है?&amp;nbsp;&amp;nbsp;
आखिर एनटीए में बदलाव की क्यों पड़ी जरूरत&amp;nbsp;
पिछले दो सालों में एनटीए की विश्वसनीयता पर कई सवाल उठे. नीट यूजी 2024 पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस और बाद में सीबीआई की जांच शुरू हुई. वहीं यूजीसी नेट परीक्षा संभावित पेपर लीक की आशंका के चलते रद्द करनी पड़ी. इससे पहले सीयूईटी यूजी के शुरुआती संस्करण में भी तकनीकी और संचालन संबंधी गड़बड़ियां सामने आई. वहीं हाल ही में नीट यूजी पेपर 2026 लीक होने के बाद भी लगातार सवाल उठ रहे हैं और पेपर लीक को लेकर देशभर में प्रदर्शन जारी है. इन घटनाओं के बाद परीक्षा सुरक्षा, प्रश्न पत्रों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और एजेंसी की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी के बाद केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व प्रमुख प्रो. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी बनाई है, जिसने एनटीए में संस्थागत सुधारों की सिफारिश की. अब उन्हीं सिफारिश को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.
एनटीए में क्या-क्या किए जा रहे हैं बदलाव&amp;nbsp;
एनटीए ने पहली बार चार वरिष्ठ स्तर के जनरल मैनेजर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. इन अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल परीक्षा आयोजित करना ही नहीं होगी, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और वैज्ञानिक भी बनाना होगी. रिपोर्ट के अनुसार एनटीए ने 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर की है. इनमें कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और अपराधी कार्रवाई भी की जा सकती है. सरकार का कहना है कि कदम एजेंसी में जवाबदेही तय करने और व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है. आने वाले समय में प्रशासनिक राज्य और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में भी बदलाव किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
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एनटीए में कैसे दखल दे सकती है सरकार&amp;nbsp;
एनटीए को एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन इसका संचालन पूरी तरह सरकार से अलग नहीं है. एजेंसी शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है और इसके प्रशासनिक व नीतिगत फैसलों में केंद्र सरकार की बड़ी भूमिका रहती है. एनटीए का गठन 2017 में शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया था. यह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड हैं और सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आती है. वहीं एनटीए की गवर्निंग बॉडी का नेतृत्व उच्च शिक्षा विभाग के सचिव करते हैं, यही निकाय एजेंसी की नीतियां, प्रशासनिक दिशा और बड़े फैसलों को मंजूरी देता है. इसलिए आवश्यकता पड़ने पर शिक्षा मंत्रालय एनटीए में सुधारों को लागू कर सकता है. एनटीए में स्थायी पदों की संख्या भी सीमित है, कई अधिकारी डेपुटेशन के जरिए विभिन्न सरकारी विभाग और संस्थाओं से आते हैं. ऐसे में वरिष्ठ स्तर की नियुक्तियों और प्रशासनिक बदलाव में केंद्र सरकार की बड़ी भूमिका बनी रहती है. हालिया विवादों के बाद भी केंद्र सरकार एजेंसी के पूरे ढांचे की समीक्षा कर रही है. विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था, परीक्षा संचालन और कई बदलाव किए जा रहे हैं.
एनटीए की कानूनी हैसियत&amp;nbsp;
एनटीए कोई संवैधानिक संस्था नहीं है, एनटीए को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बनाया गया है. वहीं इसका गठन शिक्षा मंत्रालय के तहत किया गया है और यह एक रजिस्टर्ड सोसाइटी के रूप में काम करती है. इसलिए एजेंसी को संचालन में स्वायत्तता जरूर प्राप्त है, लेकिन नीतिगत और प्रशासनिक संस्थागत स्तर पर केंद्र सरकार की इसमें भूमिका बनी रहती है. इसलिए जरूरत पड़ने पर सरकार इसमें सुधार, पुनर्गठन और प्रशासनिक बदलाव कर सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कैसे काम करता है NTA का सिस्टम, UGC&amp;CBSE और UPSC से कितनी अलग है व्यवस्था?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कैसे-काम-करता-है-nta-का-सिस्टम-ugc-cbse-और-upsc-से-कितनी-अलग-है-व्यवस्था</link>
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        <description><![CDATA[ पेपर लीक को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार एनटीए को लेकर एक्शन मोड में नजर आ रही है. सरकार एनटीए में बड़े बदलाव के साथ ही अगले एक महीने के अंदर इसके पूरे ढांचे को फिर से तैयार करने की योजना बना रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह बदलाव हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश के आधार पर किए जा रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली को पहले से ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके. इन बदलाव के साथ ही अब एनटीए में साइबर सिक्योरिटी जांच और साइकोमेट्रिक्स जैसे अहम क्षेत्र के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी.
पेपर लीक और इन सभी मामलों के बीच अब एनटीए से यूजीसी-सीबीएसई और यूपीएससी परीक्षा एजेंसियों को लेकर भी से तुलना की जाने लगी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एनटीए का पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और यूजीसी-सीबीएसई और यूपीएससी से इसकी व्यवस्था कितनी अलग है.&amp;nbsp;
क्या है एनटीए और क्यों बनाई गई है यह एजेंसी?&amp;nbsp;
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए की स्थापना 2017 में केंद्र ने शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में की थी. इसे सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड किया गया है और यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में भी आती है. वहीं एनटीए बनाने का उद्देश्य देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को एक पेशेवर, पारदर्शी और तकनीकी आधारित प्रणाली के जरिए आयोजित करना था. इससे पहले अलग-अलग संस्थाएं अपनी-अपनी परीक्षाएं करती थी, जिससे परीक्षा प्रणाली में एकरूपता की कमी मानी जाती थी.&amp;nbsp;
एनटीए किन-किन परीक्षाओं का करता है आयोजन?&amp;nbsp;
वर्तमान में एनटीए देश की कई प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करता है, जिसमें जेईई मेन, नीट यूजी, सीयूईटी यूजी, सीयूईटी पीजी, यूजीसी नेट, सीएसआईआर यूजीसी नेट, सीएमएटी, जीपीएटी और होटल मैनेजमेंट और दूसरी प्रवेश परीक्षाएं शामिल है. इन्हीं परीक्षाओं के जरिए हर साल लाखों छात्र देशभर के अलग-अलग यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेते हैं.&amp;nbsp;
एनटीए का सिस्टम कैसे करता है काम?&amp;nbsp;
अक्सर माना जाता है कि एनटीए का काम सिर्फ परीक्षा आयोजित करना है, लेकिन एजेंसी की जिम्मेदारी इससे कहीं ज्यादा व्यापक है. परीक्षा केंद्रों का चयन, प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था, परीक्षा संचालन, डेटा प्रबंधन, रिजल्ट जारी करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नई तकनीक का उपयोग भी एनटीए की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा होता है. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों का चयन पहले से स्वीकृत सरकारी स्कूलों, सीबीएसई से जुड़े इंस्टीट्यूट और जरूरत पड़ने पर एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेज की लिस्ट से किया जाता है. हर साल परीक्षा केंद्रों की सहमति और मानकों की दोबारा समीक्षा भी की जाती है.&amp;nbsp;
सीबीएसई और यूजीसी नेट से कैसे अलग है एनटीए?
एनटीए बनने से पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी नेशनल एडमिशन परीक्षाएं मुख्य रूप से सीबीएसई आयोजित करता था. वहीं यूजीसी, यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं से जुड़े नियम और पात्रता तय करता था. एनटीए बनने के बाद जिम्मेदारी अलग कर दी गई, अब यूजीसी केवल उच्च शिक्षा से जुड़े नियम और पात्रता तय करता है, जबकि परीक्षा करने की पूरी तकनीक और प्रशासनिक जिम्मेदारी एनटीए के पास है. इसी तरह सीबीएसई अब मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा और बोर्ड परीक्षाओं पर केंद्रित है. वहीं एनटीए बनने के बाद कई परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाया गया. इसके अलावा आवेदन, एडमिट कार्ड और रिजल्ट जैसी ज्यादातर प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई. एनटीए बनने के पहले इस तरह की कई प्रक्रियाएं ज्यादातर ऑफलाइन होती थी.&amp;nbsp;
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एनटीए और यूपीएससी में क्या है अंतर?&amp;nbsp;
पेपर लीक विवादों के बाद एनटीए की तुलना यूपीएससी से भी की जा रही है, क्योंकि दोनों राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करते हैं. हालांकि दोनों संस्थाओं की संरचना और कार्य प्रणाली में बहुत अंतर है. यूपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित एक संवैधानिक संस्था है, जबकि एनटीए सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत बनी एक स्वायत्त संस्था है. वहीं यूपीएससी के पास अपना स्थायी प्रशासनिक ढांचा और लंबे समय से विकसित गोपनीय परीक्षा प्रणाली है, जबकि एनटीए में बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रतिनिधि नियुक्ति, संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से काम करते हैं. इसके अलावा यूपीएससी की मुख्य परीक्षा सब्जेक्टिव होती है, जबकि एनटीए की ज्यादातर परीक्षाएं ऑब्जेक्टिव और ओएमआर या कंप्यूटर आधारित होती है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NTA Vacancy: 4 जीएम और 16 यंग प्रोफेशनल्स की भर्ती करेगा एनटीए, भर्ती प्रोसेस क्या होगा?</title>
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        <description><![CDATA[ NTA Vacancy: नीट पेपर लीक और कई दूसरी परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर लंबे समय से आलोचनाओं का सामना कर रही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए अपने ढांचे में बदलाव करने जा रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इस संस्था ने एक बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 4 वरिष्ठ जनरल मैनेजर पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है और साथ ही यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल के लिए भी आवेदन मांगे गए हैं. यह कदम प्रो. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेष समिति की सिफारिश को लागू करने की दिशा में पहला ठोस प्रयास माना जा रहा है.&amp;nbsp;
जनरल मैनेजर (असेसमेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एंड साइकोमेट्रिक्स)
चारों जनरल मैनेजर पदों पर नियुक्ति शुरुआत में 3 साल के अनुबंध के आधार पर की जाएगी. इनमें पहला पद जनरल मैनेजर का हैं जो एनटीए के एकेडमिक और मूल्यांकन रिसर्च कार्यों का नेतृत्व करेगा. इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को प्रश्न बैंक विकास, परीक्षा नॉर्मलाइजेशन पद्धति, इक्वेटिंग और कैलिब्रेशन प्रक्रिया के साथ-साथ कंप्यूटर अडैप्टिव टेस्टिंग और एआई आधारित मूल्यांकन से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट्स की निगरानी भी करनी होगी. इस पद के लिए आवेदक के पास साइको मैट्रिक्स, एजुकेशनल मेजरमेंट, सांख्यिकी या संबंधित विषय में डॉक्टरेट की डिग्री और कम से कम 12 साल का पोस्ट डॉक्टोरल एक्सपीरियंस होना जरूरी है, जिसमें से 5 साल किसी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग संस्था में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका में बिताए हो.&amp;nbsp;
जनरल मैनेजर (टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशंस)
दूसरा पद जनरल (टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशंस) का है जो देश भर के 500 से ज्यादा शहरों और कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में फैले परीक्षा ढांचे की देखरेख करेगा. इस भूमिका में टेस्ट सेंटर के चयन, क्षमता योजना, गुणवत्ता आश्वासन, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए सुविधा, परीक्षा के दिन का संचालन और राज्य व जिला प्रशासन के साथ तालमेल जैसी जिम्मेदारियां शामिल है. इसके लिए आवेदक के पास कम से कम 200 स्थानों के नेटवर्क का प्रबंधन करने का वरिष्ठ परिचालन एक्सपीरियंस होना जरूरी है.&amp;nbsp;
जनरल मैनेजर (इंर्फोमेशन सिक्योरिटी)&amp;nbsp;
तीसरा पद जनरल मैनेजर (इंर्फोमेशन सिक्&amp;zwj;योरिटी) &amp;nbsp;का है जो एजेंसी के चीफ इंर्फोमेशन सिक्योरिटी ऑफिसर की भूमिका भी निभाएगा. यह पद एनटीए के साइबर सुरक्षा कामकाज का नेतृत्व करेगा, जिसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट 2023, आईटी एक्ट 2000 और सीआरटी-इन के दिशा निर्देशों के पालन के साथ 24*7 सिक्योरिटी ऑपरेशन केंद्र की निगरानी भी शामिल है. इसके लिए आवेदक के पास 12 साल का इंर्फोमेशन सिक्&amp;zwj;योरिटी का एक्सपीरियंस होना चाहिए.&amp;nbsp;
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जनरल मैनेजर (विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन एंड फोरेंसिक्स) &amp;nbsp;
चौथा पद जनरल मैनेजर विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन एंड फोरेंसिक्स का है, जो एनटीए की आंतरिक सतर्कता और डिजिटल फॉरेंसिक कामकाज का नेतृत्व करेगा. इस भूमिका में परीक्षा में हुई किसी भी संदिग्ध गड़बड़ी की जांच करना, इन-हाउस डिजिटल फॉरेंसिक क्षमता विकसित करना और पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत आने वाले मामलों में सीबीआई, आईबी, ईडी, राज्य पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट जैसी एजेंसी के साथ तालमेल बिठाना शामिल है.&amp;nbsp;
पहली बार प्रतिभा सेतु पोर्टल से होगी भर्ती&amp;nbsp;
इसके अलावा एनटीए ने यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह पहला मौका है जब एजेंसी ने भर्ती के लिए इस पोर्टल का इस्तेमाल किया है. यह अवसर उन उम्मीदवारों के लिए खुला है, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी थी और जिनका नाम प्रतिभा सेतु पोर्टल पर लिस्टेड है. इन 16 पदों में से 12 पद एकेडमिक रिसर्च के लिए, 2 पद विधिक रिसर्च के लिए और 2 पद वित्त एवं लेखा विभाग के लिए है. चुने गए उम्मीदवारों को एनटीए के एकेडमिक विधिक और वित्त एवं लेखा विभागों में 24 महीने के लिए तैनात किया जाएगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाया जा सकता है. &amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-5 साल में दोगुनी हुई NTA की इनकम, एग्जाम से कमाए 1100 करोड़ से ज्यादा&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>क्या प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय संभालने के लिए अलग से मिलेगी सैलरी? यहां जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ देश के केंद्रीय राजनीतिक गलियारे से एक बड़ी खबर सामने आई है. परीक्षा धांधली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi को देश के शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. हालांकि, इतने बड़े मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने के बाद भी Pralhad Joshi की सैलरी में एक रुपये का भी इजाफा नहीं होगा.
कैबिनेट मंत्री को कितनी मिलती है सैलरी?
भारत में किसी भी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का वेतन और भत्ते &#039;संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम&#039; के तहत तय किए जाते हैं. एक केंद्रीय मंत्री को प्रति माह 1,00,000 रुपये का मूल वेतन मिलता है. इसके अलावा, अपने संसदीय क्षेत्र की देखरेख के लिए 70,000 रुपये प्रतिमाह का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय के खर्चों के लिए 60,000 रुपये प्रतिमाह का कार्यालय भत्ता दिया जाता है. संसद सत्र या बैठकों में शामिल होने पर प्रतिदिन 2,000 रुपये का दैनिक भत्ता भी मिलता है. इन सभी भत्तों को मिलाकर एक केंद्रीय मंत्री की कुल अनुमानित मासिक सैलरी लगभग 2.30 लाख रुपये से 2.50 लाख रुपये के बीच होती है. वेतन के अलावा उन्हें लुटियंस दिल्ली में सरकारी बंगला, गाड़ी, ड्राइवर, मुफ्त यात्रा टिकट और मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं.
नया मंत्रालय मिलने पर भी क्यों नहीं बढ़ेगी सैलरी?
भारतीय संविधान और संसदीय नियमों के तहत &#039;लाभ के पद&#039; के सिद्धांत का सख्ती से पालन किया जाता है. इसके अनुसार, कोई भी सांसद या मंत्री केवल एक ही पद के वेतन का हकदार होता है. चाहे किसी मंत्री के पास केवल एक विभाग की जिम्मेदारी हो या चार विभागों की, उन्हें मिलने वाला वेतन कैबिनेट मंत्री के एक ही पद का रहेगा. किसी भी अतिरिक्त मंत्रालय का प्रभार &#039;अतिरिक्त प्रभार&#039; माना जाता है, जिसके लिए अलग से कोई अतिरिक्त वेतन, भत्ता या बोनस देने का प्रावधान नहीं है.
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तीन बड़े मंत्रालयों की कमान संभालेंगे Pralhad Joshi
कर्नाटक के बीजापुर से आने वाले Pralhad Joshi को केंद्र सरकार के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है. वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार (2004 से 2024 तक) चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं. पूर्व में संसदीय कार्य मंत्री रह चुके Pralhad Joshi वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के अध्यक्ष भी हैं. शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब उनके पास कुल तीन महत्वपूर्ण मंत्रालय हो गए हैं. &amp;nbsp;शिक्षा मंत्रालय (नया अतिरिक्त प्रभार). उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>देश में MBBS सीटें 1.36 लाख के पार, 778 लोगों पर एक डॉक्टर&amp;लोकसभा में जेपी नड्डा ने जारी किए आंकड़े </title>
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        <description><![CDATA[ MBBS: देश में मेडिकल शिक्षा और डॉक्टरों की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि पिछले दो शैक्षणिक वर्षों में एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन की मेडिकल सीटों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही देश का डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात भी बेहतर होकर 1:778 तक पहुंच गया है जो डब्ल्यूएचओ के एक डॉक्टर प्रति 1000 आबादी के मानक से बेहतर माना जाता है.
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सार्वजनिक किए आंकड़े&amp;nbsp;
लोकसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि शैक्षणिक स्तर 2023-24 में एमबीबीएस की 1,09,115 सीटें थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,28, 976 हो गई. इसी अवधि में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,360 तक पहुंच गई है. यह आंकड़े नेशनल मेडिकल कमीशन के रिकॉर्ड पर आधारित है. सरकार के अनुसार मेडिकल शिक्षा के विस्तार का उद्देश्य देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है. खास तौर पर दूर दराज और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नए मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ने से भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होगी.&amp;nbsp;
778 लोगों पर एक डॉक्टर&amp;nbsp;
सरकार ने लोकसभा में यह भी बताया कि भारत का डॉक्टर जनसंख्या अनुपात अब 1:778 हो गया है. भारतीय चिकित्सा रजिस्टर के अनुसार देश में &amp;nbsp;15,35,155 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर है. इसके अलावा आयुष प्रणाली के तहत 7,51,768 रजिस्टर्ड चिकित्सक भी मौजूद हैं. दोनों प्रणालियों के कुल 22,86,923 रजिस्टर्ड डॉक्टर में से अगर 80 प्रतिशत को एक्टिव सेवा में उपलब्ध माना जाए तो देश का डॉक्टर जनसंख्या अनुपात 1:778 बैठता है. सरकार का कहना है कि यह अनुपात विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से बेहतर है.&amp;nbsp;
2026-27 में फिर बढ़ी एमबीबीएस सीटें&amp;nbsp;
इसी बीच नेशनल मेडिकल काउंसिल ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए राज्यवार एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स भी जारी किया था. नए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 9,911 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी गई, जिन्हें पहले से नवीनीकृत 1,27,028 सीटों के साथ जोड़ने पर कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,36,939 हो गई है.यह सीटें देश भर के 823 मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होगी. हालांकि इस लिस्ट में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान शामिल नहीं है. वहीं सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और सीटों में लगातार वृद्धि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. नए मेडिकल कॉलेज के जरिए विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके.&amp;nbsp;
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2014 के बाद तेजी से बढ़ा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर&amp;nbsp;
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी लोकसभा में बताया कि 2014 से अब तक देश में मेडिकल कॉलेज की संख्या अच्छा इजाफा हुआ है. अवधि में एमबीबीएस सीटें लगभग 51 हजार से बढ़कर 1 लाख 39 हजार से ज्यादा यूजी मेडिकल सीटें और पीजी मेडिकल सीटें 31 से बढ़कर 86 हजार के पार तक पहुंच गई है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम को भी शामिल किया गया है. इसके तहत मेडिकल कॉलेज गांव को अपनाते हैं और एमबीबीएस छात्र उन गांव के परिवारों के साथ जुड़कर सामुदायिक चिकित्सा का अनुभव प्राप्त करते हैं.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देश, में, MBBS, सीटें, 1.36, लाख, के, पार, 778, लोगों, पर, एक, डॉक्टर-लोकसभा, में, जेपी, नड्डा, ने, जारी, किए, आंकड़े </media:keywords>
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        <title>Naresh Pal Gangwar: कौन हैं उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव नरेश पाल गंगवार? पढ़ाई से लेकर सैलरी तक जानिए सबकुछ </title>
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        <description><![CDATA[ Naresh Pal Gangwar: देश भर में नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) का नया सचिव नियुक्त किया है. वह विनीत जोशी की जगह लेंगे, जिन्हें सचिव स्तर के बड़े प्रशासनिक पर बदलाव के तहत पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है. इस नियुक्ति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. चलिए तो अब आपको बताते हैं कि उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव नरेश पाल गंगवार कौन है और कहां से पढ़ाई की और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी.&amp;nbsp;
कौन है नरेश पाल गंगवार?&amp;nbsp;
नरेश पाल गंगवार राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, उन्होंने 1993 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की थी. नियुक्ति से पहले वह मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे. अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की कमान सौंपी गई है. करीब 3 दशक के लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने अपने राज्य और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई. राजस्थान सरकार में भी वह कई विभागों के प्रमुख सचिव रहे हैं. वहीं केंद्र सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के रूप में काम कर चुके हैं.&amp;nbsp;
कहां से की है नरेश पाल गंगवार ने पढ़ाई?
नरेश पाल गंगवार की एजुकेशनल क्वालीफिकेशन काफी मजबूत मानी जाती है. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक के बाद आईआईटी दिल्ली से कम्युनिकेशन एंड रडार इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की. तकनीकी शिक्षा के बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए भी किया.&amp;nbsp;
राजस्थान के कई जिलों में रहे कलेक्टर&amp;nbsp;
राजस्थान सरकार में सेवा के दौरान नरेश पाल गंगवार कई जिलों के जिला कलेक्टर भी रहे. 2001 में उन्हें टोंक का कलेक्टर बनाया गया, इसके बाद उन्हें सवाई माधोपुर, झालावाड़, जोधपुर और भरतपुर जैसे जिलों में भी कलेक्टर की जिम्मेदारी निभाई. 2014 में उन्हें राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया, जहां उन्होंने लंबे समय तक काम किया.&amp;nbsp;
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अब क्या होगी उनकी जिम्मेदारियां?
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में नरेश पाल गंगवार देश की उच्च शिक्षा से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे. उनके कार्य क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी, यूजीसी, तकनीकी शिक्षण संस्थान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े कई बड़े फैसले होंगे. इसके अलावा मौजूदा समय में शिक्षा मंत्रालय के सामने परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है.&amp;nbsp;
आईएएस सचिव की कितनी होती है सैलरी?&amp;nbsp;
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में नरेश पाल गंगवार को भारत सरकार के सचिव स्तर का वेतन मिलेगा. सातवें वेतन आयोग के अनुसार भारत सरकार के सचिव का मूल वेतन 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह तक होता है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता, सरकारी आवास, आधिकारिक वाहन, ड्राइवर, स्टाफ और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आंदोलन से झुकी सरकार? NTA में सुधारों को लेकर रात 8 बजे बड़ा एलान संभव</title>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और Gen-Z के उत्पात के बाद केंद्र सरकार अलर्ट मोड में है. मोदी कैबिनेट ने परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए बिल को मंजूरी दे दी है, जिसे संसद में जल्द ही पेश किया जा सकता है. इसी कड़ी में खबर आ रही है कि शिक्षा मंत्रालय आज रात यानी 24 जुलाई को बड़ा ऐलान कर सकता है, जिसके तहत एनटीए में बड़े बदलाव की घोषणा हो सकती है.&amp;nbsp;
क्या है सरकार का प्लान?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, NTA में सुधारों को लेकर शिक्षा मंत्रालय आज रात 8 बजे बड़ा ऐलान कर सकता है. माना जा रहा है कि इस ऐलान में एनटीए में सुधार को लेकर कई बड़ी घोषणाएं की जाएंगी. सूत्रों की मानें तो मंत्रालय को उम्मीद है कि इन रिफॉर्म्स से दिल्ली में जारी छात्रों के प्रदर्शन पर सकारात्मक असर पड़ेगा.
कड़ी सजा वाले बिल को मंजूरी
गौरतलब है कि नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक बुलाई थी, जिसमें पेपर लीक को लेकर सख्त सजा वाले बिल को मंजूरी दी गई. इसमें पेपर लीक करने वालों को 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है. माना जा रहा है कि यह बिल इसी सप्ताह संसद में पेश कर दिया जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि नीट परीक्षा का पेपर लीक होने की खबरों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने इसके विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसे मशहूर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का समर्थन मिला. इस दौरान सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू कर दिया और उनका साथ देने के लिए देशभर के Gen-Z सड़क पर उतर आए. इसके बाद सरकार ने सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों पर सहमति जताई. ऐसे में सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन खत्म किया.&amp;nbsp;
शिक्षा विभाग में हुआ बड़ा बदलाव
इस बिल को मंजूरी देने से पहले भी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिसके तहत शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया. ऐसे में सरकार ने 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त कर दिया. इससे पहले विनीत जोशी यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET Paper Leak: NTA की पेपर लीक पर बड़ी कार्रवाई, बर्खास्त किए गए 47 अधिकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी परीक्षा संचालन संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए पर पिछले कुछ वक्त से पेपर लीक के गंभीर आरोप लग रहे थे. लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के दावे के बीच अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है. भर्ती और परीक्षा व्यवस्था की साख वापस लौटाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर सफाई अभियान शुरू कर दिया है. इस पूरी कवायद के तहत एजेंसी के अंदर मौजूद ढिलाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सख्त फैसले लिए जा रहे हैं. इसी क्रम में नीट पेपर लीक मामले में एनटीए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 47 अफसरों को बर्खास्त कर दिया है. चलिए इस बारे में विस्तार से जानें.
एनटीए के 47 अधिकारियों की सेवा समाप्त
नीट समेत कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने वाले संस्थान एनटीए ने गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है. एजेंसी ने अपने 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. सिर्फ इतना ही नहीं, पेपर लीक और घपले में शामिल कुछ अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के अलावा आपराधिक मुकदमे और कानूनी शिकंजा कसने की भी पूरी तैयारी की जा रही है. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का साफ कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से समझौता करने वाले दोषी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे.
अगले एक महीने में एनटीए का पूरा ढांचा बदलने का प्लान
शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो बर्खास्तगी की यह बड़ी कार्रवाई एनटीए ने पूरे प्रशासनिक और कार्यपालक ढांचे को फिर से नए सिरे से तैयार करने का हिस्सा है. पिछले काफी समय से विवादों के घेरे में रहने के बाद अब एजेंसी के पुनर्गठन की समयसीमा तय कर दी गई है. सरकार अगले एक महीने के अंदर एनटीए की पूरी कार्यप्रणाली, अधिकारियों की जिम्मेदारी और अंदरूनी प्रबंधन को पूरी तरीके से बदल देगी. इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश की प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है.
विशेषज्ञों की सिफारिश पर आउटसोर्सिंग नियमों में बदलाव
परीक्षाओं में गड़बड़ी का एक मुख्य कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आउटसोर्सिंग को माना जा रहा था. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी यानी विशेषज्ञों की एक विशेष समिति की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत अब एनटीए द्वारा बाहरी एजेंसियों को काम सौंपने के पूरे ढर्रे को बदल दिया जाएगा. निजी एजेंसियों और वेंडरों के चयन के लिए नए और कड़े नियम बनाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में कभी भी पेपर लीक न हो सके.&amp;nbsp;
भविष्य के लिए तैयार की जा रही लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली
एनटीए ने संपूर्ण पुनर्गठन का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षा तंत्र खड़ा करना है जिसे कोई भेद न सके. इसके लिए लीक प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है, जिससे तकनीक और मानव संसाधन दोनों का कड़ा पहरा होगा. केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छात्रों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं होगी और आने वाले दिनों में सुधार के कई और बड़े कड़े कदम उठाए जाएंगे.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RRB Group D Exam: रेलवे ने जारी की RRB ग्रुप D परीक्षा की सिटी स्लिप, 3 अगस्त को होना है एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ RRB Group D Exam: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने रेलवे ग्रुप D परीक्षा के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप 2026 जारी कर दी है. 3 अगस्त, 2026 को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के लिए जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा फॉर्म भरें हैं, वे अपने नामित सिटी सेंटर, परीक्षा की तारीख और शिफ्ट देख सकते हैं. आधिकारिक परीक्षा कार्यक्रम के मुताबिक, रेलवे ग्रुप D CBT 2026 देश भर में कई परीक्षा केंद्रों पर 3 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा.
&amp;nbsp;ऐसे डाउनलोड करें RRB ग्रुप D सिटी स्लिप
RRB ग्रुप D सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले अपने संबंधित RRB की आधिकारिक वेबसाइट RRB www.rrbcdg.gov.in पर जाएं, इसके बाद CEN 09/2025 Group D City Intimation Slip लिंक पर क्लिक करें. वहां पर रेलवे RRB ग्रुप D सिटी स्लिप खोज कर उस पर क्लिक करें. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड या जन्मतिथि दर्ज करके लॉगिन करें. अगला ऑपशन सिक्योरीटी कैपचा को पूरा करें. फिर अपना आवंटित सिटी सेंटर, तारीख और सिटिंग जांचे. इसे लॉगिन करते ही आपकी सिटी स्लिप स्क्रीन पर दिखाई देगी, जिसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं. अगर स्लिप डाउनलोड करने में समस्या आए तो कुछ समय बाद दोबारा प्रयास करें या अपने क्षेत्रीय RRB हेल्पडेस्क से संपर्क करें.
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रेलवे ग्रुप D सिटी इंटिमेशन स्लिप पर दी गई जानकारी चेक करें&amp;nbsp;
RRB की ओर से जारी सिटी इंटिमेशन स्लिप में उम्मीदवार का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, परीक्षा की तारीख, सिटी सेंटर, शिफ्ट और जरूरी निर्देश दिए जाते हैं. परीक्षा केंद्र की पूरी जानकारी केवल एडमिट कार्ड में उपलब्ध होगी, जिन उम्मीदवारों का का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर, परीक्षा की तारीख, शिफ्ट का समय, रिपोर्टिंग का समय और उम्मीदवार की श्रेणी होगी. अगर आपके सूची पर्ची में किसी तरह की गलती दिखे तो तुरंत RRB से संपर्क करें.
महत्वपूर्ण निर्देश पालन करें&amp;nbsp;
तय किए गए शहर के आधार पर यात्रा की प्लान बनाएं. अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अपनी रजिस्ट्रेशन की जानकारी सुरक्षित रखें. परीक्षा केंद्र पर एक वैध फोटो आईडी और अपना एडमिट कार्ड साथ लाएं. रिपोर्टिंग के समय से काफी पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं. RRB ग्रुप D की कंप्यूटर आधारित परीक्षा &amp;nbsp;3 अगस्त से शुरू होकर 21 अगस्त तक विभिन्न चरणों में आयोजित की जाएगी. जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 3 अगस्त को है, उनके लिए सिटी स्लिप जारी हो चुकी है, जबकि एडमिट कार्ड परीक्षा से चार दिन पहले उपलब्ध कराया जाएगा. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही अपडेट प्राप्त करें और परीक्षा से पहले अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें. &amp;nbsp;शहर की जानकारी वाली पर्ची पर दी गई सभी जानकारी देख लें.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>RRB, Group, Exam:, रेलवे, ने, जारी, की, RRB, ग्रुप, परीक्षा, की, सिटी, स्लिप, अगस्त, को, होना, है, एग्जाम</media:keywords>
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        <title>MBBS in Russia: रूस से करना चाहते हैं MBBS, जानें कितनी लगती है फीस और कितना है रहने&amp;खाने का खर्च?</title>
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        <description><![CDATA[ MBBS in Russia: विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के बीच रूस लंबे समय से सबसे पसंदीदा देशों में शामिल रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यहां का कम खर्च, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त मेडिकल यूनिवर्सिटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है. भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में जहां एमबीबीएस की पढ़ाई पर 60 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का खर्च आता है, वहीं रूस में यही कोर्स यूनिवर्सिटी और शहर के अनुसार बहुत कम खर्चे में पूरा किया जा सकता है.
हालांकि कई बार स्टूडेंट केवल कम फीस देखकर यूनिवर्सिटी का चयन कर लेते हैं, जो सही नहीं माना जाता है. छात्रों को यह भी तय करना चाहिए कि संबंधित यूनिवर्सिटी एनएमसी के नियमों और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग से जुड़े मानकों को पूरा करती हो. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आप भी रूस से एमबीबीएस करना चाहते हैं, तो इसकी फीस कितनी लगती है और वहां रहने खाने का खर्च कितना आता है.&amp;nbsp;
कितनी आती है एमबीबीएस की कुल फीस?
रूस में एमबीबीएस की फीस अलग-अलग यूनिवर्सिटी में अलग-अलग है. कई सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी कम फीस पर पढ़ाई का मौका देती है, ज्यादातर इंस्टीट्यूट में सालाना ट्यूशन फीस करीब 2.5 लाख रुपये से 6.5 लाख रुपये के बीच है. वहीं 6 साल के पूरे कोर्स की ट्यूशन और हॉस्टल फीस मिलाकर कुल खर्च करीब 18 से 45 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. कुछ बड़े इंस्टीट्यूट में यह खर्च और ज्यादा भी हो सकता है.&amp;nbsp;
टॉप यूनिवर्सिटीज की मेडिकल फीस&amp;nbsp;
रूस के कई मेडिकल यूनिवर्सिटी भारतीय छात्रों के बीच पॉपुलर है. इनमें Astrakhan State Medical University, Bashkir State Medical University, Belgorod State University, Chuvash State University, Dagestan State Medical University और Sechenov First Moscow State Medical University शामिल है. इन यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस लगभग 2.5 लाख रुपये से शुरू होकर 9.6 लाख रुपये तक जाती है. वहीं हॉस्टल फीस आमतौर पर 14 हजार से 90 हजार प्रति वर्ष के बीच रहती है.&amp;nbsp;
रहने खाने पर कितना आता है खर्च&amp;nbsp;
ट्यूशन फीस के अलावा छात्रों को रहने और रोजमर्रा के खर्च का भी ध्यान रखना होता है. रूस के छोटे और मीडियम वर्ग के शहरों में रहने वाले छात्रों का महीने का खर्च कम होता है. एक छात्रा के लिए हर महीने लगभग 11,000 से 17,000 रुपये का खर्चा आरामदायक लाइफस्टाइल के लिए सही माना जाता है. इसमें खाना, स्थानीय परिवहन, मोबाइल, इंटरनेट, स्टेशनरी, रोजाना की जरूरत का सामान और दूसरे छोटे-मोटे खर्च शामिल है.&amp;nbsp;
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रूस में पढ़ाई के लिए कौन से शहर है किफायती?
रूस में पढ़ाई का कुल खर्च इस बात पर भी निर्भर करता है कि छात्र किस शहर में पढ़ाई कर रहा है. माॅस्को जैसे बड़े शहरों में रहने, खाने और परिवहन का खर्च ज्यादा होता है. वहीं टवर, इवानोवो, ग्रोज्नी, कालिनिनग्राद और दूसरे शहर कम सस्ते माने जाते हैं. ऐसे शहरों में हॉस्टल, खाने और रोजाना की जरूरत पर कम खर्च आता है, जिससे 6 साल के दौरान अच्छी खासी बचत हो जाती है.
लोन और स्कॉलरशिप से भी खर्च हो सकता है कम&amp;nbsp;
रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए भारत के कई राष्ट्रीयकृत बैंक और वित्तीय संस्थान एजुकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं. इसके लिए नीट, यूजी स्कोर, मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में एडमिशन और आवश्यक डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं. कई मामलों में ट्यूशन फीस, हॉस्टल बीमा और हवाई यात्रा का खर्च भी लोन के दायरे में शामिल किया जाता है. इसके अलावा रूस सरकार भी सीमित संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप उपलब्ध कराती है. इन छात्रवृत्तियों के तहत ट्यूशन फीस का पूरा खर्च वहन किया जाता है, हालांकि रहने, खाने और यात्रा का खर्च छात्रों को खुद उठना होता है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE Practical Exam Guidlines: 29 जुलाई से होंगी CBSE 12वीं सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल परीक्षाएं, बोर्ड ने जारी की नई गाइडलाइन</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Practical Exam Guidlines:&amp;nbsp;केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले छात्रों के लिए प्रैक्टिकल परीक्षाओं से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है. बोर्ड के अनुसार सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल परीक्षा 29 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी. यह परीक्षा केवल उन छात्रों के लिए होंगी, जिन्हें कंपार्टमेंट कैटेगरी में Repeat Practical या Repeat Theory and Practical Both &amp;nbsp;के तहत रखा गया है. इसी के साथ बोर्ड ने स्कूलों, परीक्षा केंद्रों और क्षेत्रीय कार्यालयों को परीक्षा आयोजन, परीक्षकों की नियुक्ति और प्रैक्टिकल अंकों के अपलोड से जुड़े जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं. छात्रों को सलाह दी गई है कि वह समय रहते अपने स्कूल या परीक्षा केंद्र से कांटेक्ट कर परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त कर लें.
किन छात्रों को देना होगा प्रैक्टिकल एग्जाम?
सीबीएसई की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल परीक्षा दो कैटेगरी के छात्रों के लिए अनिवार्य होगी. पहली कैटेगरी Repeat Practical की है. &amp;nbsp;इस श्रेणी में आने वाले छात्रों को केवल प्रैक्टिकल परीक्षा देनी होगी, उनके मुख्य परीक्षा में प्राप्त थ्योरी अंक यथावत मान्य रहेंगे और उन्हें दोबारा थ्योरी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी. दूसरी कैटेगरी Repeat Theory and Practical Both की है. इस कैटेगरी के छात्रों को सप्लीमेंट्री परीक्षा के दौरान थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों परीक्षाओं में शामिल होना होगा.
कहां होंगे प्रैक्टिकल एग्जाम?
नियमित छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं उनके संबंधित स्कूलों में आयोजित की जाएगी. वहीं प्राइवेट उम्मीदवारों को उनके आवंटित थ्योरी परीक्षा केंद्रों पर प्रैक्टिकल परीक्षाएं देनी होगी. अगर किसी परीक्षा केंद्र पर किसी विशेष विषय के प्रेक्टिकल की आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय छात्रों के लिए किसी नजदीकी स्कूल या परीक्षा केंद्र पर प्रैक्टिकल परीक्षा आयोजित करेगा.
स्कूल खुद नियुक्त नहीं कर सकेंगे एक्सटर्नल एग्जामिनर
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कूल अपने स्तर पर बाहरी एक्सटर्नल एग्जामिनर नियुक्त नहीं करेंगे. सभी एक्सटर्नल एग्जामिनर की नियुक्ति संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय करेगा, हालांकि इंटरनल एग्जामिनर की नियुक्ति स्कूल या परीक्षा केंद्र की अधीक्षक अपने संस्थान के शिक्षकों में से करेंगे. वहीं सीबीएसई ने सभी स्कूलों और परीक्षा केंद्रों को निर्देश दिया है कि जिस दिन प्रैक्टिकल परीक्षा आयोजित हो, उसी दिन छात्रों के अंक बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाए. बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि एक बार अंक पोर्टल पर अपलोड होने के बाद उन्हें अंतिम माना जाएगा. इसके बाद किसी भी प्रकार के संशोधन का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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छात्रों के लिए बोर्ड की सलाह
बोर्ड ने छात्रों से कहा है कि वह 27 जुलाई तक अपने स्कूल या परीक्षा केंद्र से कांटेक्ट करें. इस दौरान वह अपनी मार्कशीट या रिजल्ट की कॉपी और एडमिट कार्ड साथ लेकर आए, ताकि प्रैक्टिकल परीक्षा की डेट, समय और स्थान की पुष्टि की जा सके. इसके बाद छात्रों को निर्धारित तिथि और समय पर अपने स्कूल या परीक्षा केंद्र में उपस्थित होना होगा.
स्कूलों और क्षेत्रीय कार्यालय को भी निर्देश मिले
सीबीएसई ने स्कूलों को पात्र छात्रों की विषयवार लिस्ट तैयार करने, क्षेत्रीय कार्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर एक्सटर्नल एग्जामिनर की नियुक्ति सुनिश्चित करने और समय रहते छात्रों को परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. वहीं क्षेत्रीय कार्यालय को प्रैक्टिकल परीक्षाओं का समय पर आयोजन, परीक्षकों की नियुक्ति, प्रैक्टिकल अंकों का समय पर अपलोड और उत्तर पुस्तिकाओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Practical, Exam, Guidlines: 29, जुलाई, से, होंगी, CBSE, 12वीं, सप्लीमेंट्री, प्रैक्टिकल, परीक्षाएं, बोर्ड, ने, जारी, की, नई, गाइडलाइन</media:keywords>
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        <title>IGNOU स्टूडेंट्स और एलुमनाई के लिए बड़ा मौका, शुरू होने वाली है प्लेसमेंट ड्राइव</title>
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        <description><![CDATA[ 


IGNOU Placement Drive 2026: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने अपने छात्रों और एलुमनाई के लिए नई कई केंपस प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करने की घोषणा की है. इन प्लेसमेंट ड्राइव के जरिए उम्मीदवारों को आईटी, मार्केटिंग, एचआर, डेटा एनालिटिक्स, एविएशन और कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्र में नौकरी के अवसर मिलेंगे. विश्वविद्यालय के कैंपस प्लेसमेंट सेल के अनुसार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 27 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलेगी.
इस बार इग्नू ने एआई, ब्लॉकचेन और स्किल बेस्ड हायरिंग पर काम करने वाले स्टार्टअप प्रूफ ऑफ स्किल के साथ साझेदारी की है. इस भर्ती अभियान के तहत फुल टाइम रिमोट जॉब्स के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा, जहां सालाना 12 लाख रुपये तक सीटीसी दिया जा सकता है.



इन पदों पर होगी भर्ती

UI/UX Designer
Business Development Executive
Marketing Executive
Copywriter
Customer Success Executive
Data Analyst
HR Executive


Campus Placement Cell, IGNOU, is organizing a Campus Placement Drive for IGNOU learners and alumni.Details of the Placement Drive :Date: 27 &amp;amp; 28th July, 2026 (Mon-Tue)Time: 10:00 AM onwardsVenue: Dr. B.R. Ambedkar Convention Centre, IGNOU Headquarters pic.twitter.com/WGAHt0iNs3
&amp;mdash; IGNOU (@OfficialIGNOU) July 22, 2026



कैसे होगा चयन और कौन कर सकता है आवेदन?
रिमोट जॉब्स के लिए उम्मीदवारों को तीन चरणों की चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा. सबसे पहले एआई आधारित इंटरव्यू होगा, इसके बाद असाइनमेंट राउंड आयोजित किया जाएगा. अंतिम चरण में उम्मीदवारों का इंटरव्यू कंपनी के फाउंडर या डिपार्टमेंट हेड के साथ ऑनलाइन होगा. सभी इंटरव्यू गूगल मीट या जूम के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे. इस भर्ती अभियान में किसी भी विषय से ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमबीए, बीसीए और एमसीए डिग्री धारक आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवारों के पास अच्छी अंग्रेजी संचार क्षमता, टाइम मैनेजमेंट, मल्टी टास्किंग की क्वालिटी और तेज गति में काम वाले एनवायरमेंट में काम करने की इच्छा होना जरूरी है.&amp;nbsp;
28 जुलाई को होगी एविएशन प्लेसमेंट ड्राइव
इग्नू ने बर्ड फ्लाइट सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से एविएशन और एयरपोर्ट ऑपरेशन क्षेत्र के लिए भी अलग से केंपस ड्राइव प्लेसमेंट आयोजित करने की घोषणा की है. यह भर्ती 28 जुलाई 2026 को सुबह 10:00 से इग्नू मुख्यालय मैदान गढ़ी स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा. इस भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति दिल्ली एयरपोर्ट ऑपरेशन में की जाएगी. इसमें कस्टमर सर्विस एजेंट और कस्टमर सर्विस होस्ट जैसे पदों पर मौका मिलेगा.&amp;nbsp;
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एविएशन ड्राइव के लिए एलिजिबिलिटी&amp;nbsp;
इन पदों के लिए फ्रेशर्स और एक्सपीरियंस दोनों उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार के पास ग्रेजुएशन की डिग्री या लास्ट सेमेस्टर में अध्ययनरत होने की योग्यता होनी चाहिए. इसके अलावा अच्छी अंग्रेजी बोलने की क्षमता, कस्टमर सर्विस का दृष्टिकोण, पॉजिटिव बिहेव और 24*7 शिफ्ट व रोटेशनल ड्यूटी में काम करने की इच्छा भी आवश्यक है.&amp;nbsp;
इंटरव्यू में साथ ले जाने होंगे ये डॉक्यूमेंट
यूनिवर्सिटी ने उम्मीदवारों को इंटरव्यू के समय अपना अपडेटेड रिज्यूमे, सरकारी फोटो पहचान पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जिसमें 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन की मार्कशीट शामिल हो सकती है. पासपोर्ट साइज फोटो और इग्नू आईडी कार्ड साथ लाने के निर्देश दिए हैं.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ISRO दे रहा स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप का मौका, जानें कौन कर सकता है अप्लाई? </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isro-दे-रहा-स्टूडेंट्स-को-इंटर्नशिप-का-मौका-जानें-कौन-कर-सकता-है-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ ISRO Internship: अगर आप अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग या नई तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो ISRO इंटर्नशिप आपके लिए बड़ा अवसर लेकर आया है. इसरो ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े छात्रों के लिए इंटर्नशिप और स्टूडेंट ट्रेनी प्रोग्राम की जानकारी जारी की है. इसके तहत चयनित छात्रों को इसरो के वैज्ञानिकों के साथ काम करने, रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ा व्यावहारिक एक्सपीरियंस हासिल करने का मौका मिलेगा. इच्छुक छात्र अपनी पसंद की इसरो यूनिट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
ISRO की इंटर्नशिप के लिए कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
इसरो की इंटर्नशिप के लिए केवल भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने वाले छात्र विज्ञान व प्रौद्योगिकी से जुड़े किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन या रिसर्च कर रहा हो या हाल ही में डिग्री पूरी की हो. वहीं एलिजिबिलिटी के लिए अभ्यर्थी के पास कम से कम 60 प्रतिशत अंक या 10 प्वाइंट स्केल पर 6.32 सीजीपीए होना जरूरी है. अलग-अलग इसरो केंद्र में आवेदन के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक शर्तें भी लागू हो सकती है.&amp;nbsp;
VSSC इंटर्नशिप के लिए क्या है शर्तें?&amp;nbsp;
विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर की इंटर्नशिप के लिए बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, बीएससी, एमएससी, बीएस-एमएस, इंटीग्रेटेड एमएससी, इंटीग्रेटेड एमटेक और पीएचडी के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं. ग्रेजुएट्स स्टूडेंट का निर्धारित सेमेस्टर पूरा होना जरूरी है, जबकि एमई, एमटेक और एमएससी छात्रों का पहला सेमेस्टर तथा पीएचडी विद्यार्थियों का कोर्सवर्क पूरा होना चाहिए. आवेदन के लिए नियमित कोर्स करने वाले छात्रों या 14 फरवरी 2025 के बाद अपना पूरा कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों से स्वीकार किए जाएंगे.&amp;nbsp;
कितने समय की होगी इंटर्नशिप?
इस इंटर्नशिप की अवधि न्यूनतम 21 दिन और अधिकतम 45 दिन तय की गई है. इस दौरान छात्रों को इसरो की प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स के मार्गदर्शन में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा. हालांकि यह पूरी तरह प्रशिक्षण आधारित कार्यक्रम है. चयनित उम्मीदवारों को किसी प्रकार का स्टाइपेंड, मानदेय, रहने या खाने की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी. वहीं इंटर्नशिप के लिए चयनित छात्रों की शैक्षणिक योग्यता उपलब्ध सीटों और संबंधित इसरो केंद्र में प्रयोगशाला वह संसाधनों की उपलब्धता के आधारित पर किया जाएगा. चयनित उम्मीदवारों को ईमेल के माध्यम से सूचना भेजी जाएगी. इसरो ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को अपनी एक डिग्री के दौरान केवल एक ही बार इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा.&amp;nbsp;
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कब से शुरू होंगे आवेदन?
बीएससी इंटर्नशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त 2026 को सुबह 10:00 बजे से शुरू होगी और 14 सितंबर 2026 की रात 11:59 बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे. इंटर्नशिप का आयोजन 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 के बीच किया जाएगा. आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को अपनी मार्कशीट, तकनीकी कौशल, प्रोजेक्ट वर्क, काम का एक्सपीरियंस और कॉलेज के परमिशन लेटर सहित जरूरी डॉक्यूमेंट से एक पीडीएफ फाइल में अपलोड करने होंगे.&amp;nbsp;
किन-किन इसरो केंद्रों में कर सकते हैं आवेदन?
उम्मीदवार अपनी रुचि के अनुसार इसरो की अलग-अलग यूनिट में आवेदन कर सकते हैं. इनमें यू. आर. राव. सैटलाइट सेंटर (बेंगलुरु), स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (अहमदाबाद), विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (तिरुअनंतपुरम), सतीश धवन स्पेस सेंटर (श्रीहरिकोटा), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (देहरादून), मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी, आईएसटीआरएसी फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी और दूसरे केंद्र शामिल है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Delhi School: दिल्ली में लॉन्च हुई नेशनल स्कूल सेफ्टी टूलकिट, साइबर सुरक्षा से लेकर डिजास्टर तैयारी पर होगा फोकस </title>
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        <description><![CDATA[ Delhi School: दिल्ली में स्कूलों को ज्यादा सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने गुरुवार को नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट लॉन्च की. उन्होंने कहा कि आज के दौर में स्कूल सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हो गया है. अब यह केवल स्कूल भवन, आग से सुरक्षा या इमरजेंसी एग्जिट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा परिवहन और आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी शामिल है.
नई दिल्ली के पीएचडी हाउस में आयोजित नेशनल सबमिट ऑन सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026 को संबोधित करते हुए लोग ने कहा कि यह टूल किट स्कूलों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य स्कूलों को केवल सुरक्षित बनाना नहीं, बल्कि उन्हें हर तरह की समस्या से निपटने के लिए तैयार करना भी है.&amp;nbsp;
स्कूल सुरक्षा की बदली परिभाषा&amp;nbsp;
एलजी संधू ने कहा है कि समय के साथ स्कूल सुरक्षा की अवधारणा में बड़ा बदलाव आया है. पहले जहां ध्यान मुख्य रूप से भवनाें की सुरक्षा, फायर फाइटिंग व्यवस्था और इमरजेंसी रिस्पाॅन्स पर रहता था, वहीं अब डिजिटल दुनिया से जुड़े खतरों को भी गंभीरता से लेना जरूरी हो गया. उन्होंने कहा कि छात्रों की साइबर सुरक्षा, मेंटल हेल्थ, सुरक्षित परिवहन और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी आधुनिक स्कूल सुरक्षा का अहम हिस्सा है.&amp;nbsp;
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दिल्ली की जिम्मेदारी ज्यादा क्यों?&amp;nbsp;
कार्यक्रम में इस टूलकिट को लेकर एलजी ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण दिल्ली की जिम्मेदारी दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा है. घनी आबादी और विविध सामाजिक परिवेश वाले शहरों में स्कूलों को ऐसा सुरक्षित, समावेशी और मजबूत एनवायरमेंट विकसित करना चाहिए, जो देश के अन्य हिस्सों के लिए भी उदाहरण बन सके. उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षण वातावरण तैयार करना केवल प्रशासन ही कि नहीं, बल्कि सभी शिक्षण संस्थानों की भी जिम्मेदारी है. तरणजीत संधू ने स्कूल प्रमुखों और प्रबंधन से सुरक्षा को लेकर नियमों का पालन तक सीमित न रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इसे संस्थागत नेतृत्व का हिस्सा बनाया जाना चाहिए. उन्होंने सभी स्कूलों में नियमित सेफ्टी ऑडिट, आपातकालीन तैयारी की स्पष्ट योजना, समय-समय मॉक ड्रिल, प्रशिक्षित स्टाफ और सरकारी एजेंसियों तथा स्थानीय समुदाय के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया है.&amp;nbsp;
चाइल्ड सेफ्टी मंथ के बीच लॉन्च हुई टूलकिट&amp;nbsp;
उपराज्यपाल कार्यालय से जारी एक नोट के अनुसार एलजी ने इस बात पर जोर दिया है कि जुलाई महीने में दिल्ली में चाइल्ड सेफ्टी मंथ मनाया जा रहा है. इसलिए ऐसे समय में नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूल किट का लॉन्च बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम पहल है. उन्होंने कहा कि यह टूलकिट स्कूलों में रोकथाम, तैयारी और जोखिम प्रबंधन की संस्कृति विकसित करने में मदद करेगी, ताकि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026: जब NEET LEAK पर हो रहे थे प्रदर्शन, तब इस लड़के ने कर दिखाया कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026: देशभर में नीट यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है. हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इस बीच नीट यूजी 2026 री एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करने वाले हरियाणा के पंशुल बंसल का बयान चर्चा में है. पंशुल का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन में जाने के बजाय अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और उसी का रिजल्ट उन्हें बेहतर स्कोर के रूप में मिला.&amp;nbsp;
परीक्षा रद्द होने पर पहले हुई निराशा, फिर बदला नजरिया
पंशुल बंसल ने बताया कि 3 मई को हुई मूल नीट यूजी परीक्षा रद्द होने की खबर सुनकर उन्हें भी शुरुआत में निराशा और दुख हुआ था. उन्हें लगा कि उनका पेपर अच्छा गया और सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलने लायक अंक आ सकते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिया से देखा और इसे खुद को बेहतर करने का मौका मान लिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने तय किया था कि नकारात्मक सोच में समय बिताने के बजाय दोबारा परीक्षा की तैयारी पर पूरे फोकस करेंगे.&amp;nbsp;
प्रोटेस्ट में क्यों जाऊं, घर पर पढ़ाई करना बेहतर है&amp;nbsp;
एक मीडिया हाउस से बातचीत में पंशुल बंसल ने कहा कि जब परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में प्रदर्शन हो रहे थे, तब उन्होंने अलग रास्ता चुना. उन्होंने कहा मैंने सोचा कि मुझे विरोध प्रदर्शन में क्यों जाना चाहिए, इसके बजाय मैं घर पर रहकर पढ़ाई कर सकता हूं. अपनी क्षमताओं को बेहतर बना सकता हूं और अपना स्कोर बढ़ा सकता हूं. उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह की नकारात्मकता से दूरी बनाकर केवल अपने टारगेट पर ध्यान दिया. पंशुल का मानना था कि परीक्षा खत्म होने के बाद तनाव और चिंता भी खत्म हो जाएगी, इसलिए उन्होंने अपना पूरा समय तैयारी में लगाया.&amp;nbsp;
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मूल परीक्षा के 706 अंक से पहुंचे 715 अंक तक&amp;nbsp;
पंशुल ने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने की उम्मीद थी. वहीं री एग्जाम में उन्होंने 715 अंक हासिल किए और 99.9999 परसेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की. उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त समय में उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं किया, बल्कि पहले की तरह नियमित पढ़ाई जारी रखी है. उनके अनुसार पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने पूरी मेहनत की और बाकी भगवान पर छोड़ दिया. पंशुल का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए नियमित पढ़ाई, अनुशासन और लगातार प्रेक्टिस सबसे जरूरी है. पंशुल ने छात्रों को सलाह दी कि वह दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान दे और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Exclusive: NEET UG पेपर लीक रोकने का ब्लूप्रिंट तैयार था, फिर क्यों फेल हुआ सिस्टम? जानिए अंदर की खबर</title>
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        <description><![CDATA[ 3 मई 2026 को NEET UG की परीक्षा हुई. करीब 22.7 लाख छात्र बैठे. इस दौरान परीक्षा से पहले से व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हो रहा &#039;गेस पेपर&#039; सामने आया. इसके 720 में से करीब 600 अंकों के सवाल असली पेपर से मैच कर गए. 12 मई को NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी. 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा हुई, लेकिन लाखों छात्रों का भरोसा टूट चुका था. सियासत अपनी जगह है, लेकिन असल बात फैक्ट्स की होनी चाहिए. यानी पेपर लीक रोकने का पूरा ब्लूप्रिंट सरकार के पास करीब दो साल पहले से मौजूद था. शिक्षा मंत्रालय की हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी ने खुद यह रिपोर्ट तैयार की थी. अब सबसे बड़ी पहेली यही है कि वह ब्लूप्रिंट समय पर लागू क्यों नहीं हुआ...
दो साल पहले ही मिल गए थे चेतावनी और समाधान
NEET 2024 के बड़े विवाद के बाद 22 जून 2024 को शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय हाई लेवल कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी ने 23 बैठकों के बाद 21 अक्टूबर 2024 को अपनी 184 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी.
इसमें सिर्फ कमजोरियां ही नहीं गिनाई गई थीं, बल्कि उन्हें दूर करने के लिए पूरी 101 सिफारिशें भी दी गई थीं. इनमें से बड़ी संख्या ऐसी थी जिन्हें 2025 से ही लागू करने की बात कही गई थी. कमेटी ने 37 हजार से ज्यादा छात्रों, अभिभावकों और एक्सपर्ट्स से सुझाव लेने के साथ ही IIT, AIIMS, राज्यों और जांच एजेंसियों के एक्सपीरियंस की भी स्टडी की थी. रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि इन सुधारों को &#039;मिशन मोड&#039; में लागू किया जाना चाहिए.
पेपर लीक की सबसे बड़ी वजह और इलाज मिला
कमेटी ने बड़ी सफाई से समझाया कि पेन-पेपर परीक्षा में सबसे बड़ा खतरा उस समय पैदा होता है जब प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से निकलकर गोदामों, ट्रांसपोर्ट और फिर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचता है. सीधी बात है- जितने ज्यादा हाथों से पेपर गुजरेगा, उतनी ज्यादा लीक की संभावना होगी. यानी छपाई, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन ही सबसे कमजोर कड़ी थी. इसका समाधान भी तैयार था- &#039;कंप्यूटर असिस्टेड सिक्योर पेपर बेस्ड टेस्टिंग.&#039;
इस मॉडल में प्रश्नपत्र पहले से छपकर देशभर में नहीं भेजे जाने थे. एन्क्रिप्टेड पेपर सीधे परीक्षा केंद्र के सुरक्षित सर्वर तक पहुंचते और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उसी केंद्र के अंदर हाई-स्पीड प्रिंटर से प्रिंट करके छात्रों को दिए जाते. कमेटी का मानना था कि इससे प्रिंटिंग, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान पेपर लीक होने की आशंका काफी हद तक खत्म हो जाएगी. कमेटी ने एक और अहम बात लिखी थी कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले इसका पायलट टेस्ट किया जाए. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समाधान 2024 में तैयार था, तो उसका पायलट आज तक क्यों नहीं हुआ?
रिपोर्ट की 10 बड़ी सस्पेंस वाली सिफारिशें कौन सी थीं?
राधाकृष्णन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जो 101 सिफारिशें दी थीं, उनमें से दस ऐसी हैं जो सीधे पेपर लीक की जड़ पर वार करती थीं...

पेपर पहले से छपकर देश भर में न घूमे, सवाल कोड में बदलकर सीधे परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर तक जाएं और परीक्षा वाले दिन वहीं छपें. कमेटी ने यह भी कहा था कि पहले एक जगह आजमाकर देखो, लेकिन आजमाया ही नहीं गया.
छपाई वाली जगह पर किसी के पास मोबाइल या कैमरा न हो, हर कर्मचारी की आते-जाते तलाशी हो, कैमरे की रिकॉर्डिंग एक साल तक रखी जाए और हर पेपर पर उसका अलग नंबर हो.
पेपर कहां से चला और किस-किस के हाथ से गुजरा यह पहले से लिखा हो, पेटी सील हो, गाड़ी पर लोकेशन ट्रैकर लगे और हर केंद्र पर NTA का एक जिम्मेदार अफसर बैठा हो, जैसे चुनाव में होता है.
हर जिले में DM की अगुवाई में एक टीम हो जिसमें SP भी हों, जिस स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाना है उसके मालिक की पूरी जांच हो और केंद्र पुलिस के सामने बंद हों और उन्हीं के सामने खुलें.
केंद्र इंसान नहीं कंप्यूटर चुने और जिन केंद्रों पर पहले गड़बड़ी हो चुकी है वे बाहर रहें.
छात्र को अपने ही जिले में केंद्र मिले और अगर बहुत सारे बच्चे अचानक किसी एक दूर के केंद्र को चुन रहे हैं तो यह परीक्षा से पहले पकड़ा जाए, बाद में नहीं.
जब दो लाख से ज्यादा बच्चे बैठ रहे हों तो परीक्षा एक ही दिन में नहीं, बल्कि कई दिन में हो.
एक नहीं तीन से ज्यादा पेपर तैयार रखे जाएं, सेट के नाम A, B, C और D जैसे आसान न हों और हर सेट में सवालों का क्रम बदला हो.
पूरी परीक्षा का ठेका किसी एक कंपनी को न दिया जाए.
इन सब पर अमल हो रहा है या नहीं, यह देखने वाली एक कमेटी हर महीने शिक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट भेजे.

हालांकि, इनमें से कौन सी बात कितनी लागू हुई, इसकी सूची सरकार ने अब तक सामने नहीं रखी है.
NEET 2026 रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को &#039;बहुत दर्दनाक&#039; बताया. सुप्रीम कोर्ट ने NTA पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उसने &#039;कोई सबक नहीं सीखा&#039; और जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होती, समस्या नहीं रुकेगी.&amp;nbsp;
अब सरकार का पक्ष और जमीनी हकीकत
सरकार की तरफ से बार-बार यह कहा गया है कि कमेटी की कई सिफारिशों को लागू किया जा चुका है और कुछ पर काम जारी है. DM और SP की अगुवाई वाली राज्य और जिला स्तरीय समन्वय समितियां बनाई गईं. 2025 और 2026 की परीक्षाओं में एक्टिव रहीं. हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी भी 14 नवंबर 2024 को गठित कर दी गई, जिसे हर महीने शिक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट भेजनी थी. लेकिन हकीकत यह है कि सबसे अहम &#039;कंप्यूटर असिस्टेड सिक्योर पेपर बेस्ड टेस्टिंग&#039; का पायलट ही नहीं हो पाया, जिसे कमेटी ने सबसे पहले आजमाने की सलाह दी थी.
सरकार ने अब तक यह नहीं बताया कि रिपोर्ट की 101 सिफारिशों में से कौन सी या कितनी लागू हुई और कौन सी अटकी हुई है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान है कि सिफारिशों का पालन किया गया, लेकिन &#039;कमांड चेन में ब्रेक&#039; आ गया. एक संसदीय समिति ने भी माना कि सुधारों की शुरुआत तो हुई है, लेकिन एक रोडमैप आज तक जनता के सामने नहीं रखा गया.
मल् ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Exclusive:, NEET, पेपर, लीक, रोकने, का, ब्लूप्रिंट, तैयार, था, फिर, क्यों, फेल, हुआ, सिस्टम, जानिए, अंदर, की, खबर</media:keywords>
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        <title>JSSC भर्ती परीक्षा में 75% अभ्यर्थी नहीं हुए शामिल, परीक्षा केंद्रों की दूरी और लेट एडमिट कार्ड पर उठे सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ JSSC Exam Controversy: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की अनुपस्थिति ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आयोग की ओर से 510 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में रजिस्टर्ड उम्मीदवारों में से करीब 75 प्रतिशत परीक्षा देने ही नहीं पहुंचे. कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें परीक्षा केंद्र घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मिला, जबकि कुछ का कहना है कि एडमिट कार्ड जारी होने की सूचना वाला ईमेल परीक्षा के बाद मिला या समय पर मिला ही नहीं. हालांकि, आयोग का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी पहले से जेएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध थी.&amp;nbsp;
3.22 लाख में से सिर्फ 86 हजार परीक्षा देने पहुंचे&amp;nbsp;
जेएसएससी ने 2024 में फील्ड वर्कर के 510 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था. करीब 2 साल बाद 19 जुलाई 2026 को परीक्षा आयोजित की गई. भर्ती के लिए कुल 3,22,867 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा में केवल 86,444 उम्मीदवार शामिल हुए, यानी लगभग 26 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी जबकि करीब 74 से 75 प्रतिशत उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हुए.&amp;nbsp;
दूर के परीक्षा केंद्र होने से छोड़ी परीक्षा&amp;nbsp;
कई उम्मीदवारों का कहना है कि उन्हें ऐसे जिलों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जहां कम समय में पहुंचना संभव नहीं था. पूर्वी सिंहभूमि जिले के बहरागोड़ा की रहने वाली एक अभ्यर्थी को हजारीबाग में परीक्षा केंद्र मिला था, जो उनके घर से 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर था. उनका कहना है कि परीक्षा से कुछ दिन पहले ही केंद्र की जानकारी मिली. इतने कम समय में यात्रा, ठहरने की व्यवस्था और खर्च जुटाना संभव नहीं था, इसलिए परीक्षा छोड़नी पड़ी. इसी तरह साहिबगंज के अभ्यर्थी को लगभग 550 किलोमीटर दूर गुमला में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया. उनका दावा है कि एडमिट कार्ड संबंधी ईमेल परीक्षा वाले दिन दोपहर में मिला, जब परीक्षा शुरू हो चुकी थी. वहीं हजारीबाग के एक अभ्यर्थी ने बताया कि उनका केंद्र देवघर में था. आर्थिक स्थिति और कम समय के कारण वह यात्रा नहीं कर सके. इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि एडमिट कार्ड से जुड़ी कोई ईमेल उसे नहीं मिला और वेबसाइट देखने पर ही परीक्षा केंद्र की जानकारी मिली.&amp;nbsp;
बिहार के अभ्यर्थियों ने भी लगाए यही आरोप&amp;nbsp;
परीक्षा में शामिल होने वाले कुछ अभ्यर्थी बिहार से भी थे, उनका कहना है कि उन्हें एडमिट कार्ड जारी होने की सूचना समय पर नहीं मिली. कई उम्मीदवारों का आरोप है कि ईमेल परीक्षा समाप्त होने के बाद मिला, जिसके कारण वह परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके.&amp;nbsp;
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कोचिंग संचालक बोले 2 साल पुरानी भर्ती&amp;nbsp;
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले एक ऑनलाइन कोचिंग संचालक ने कहा कि यह भर्ती 5 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसे बाद में 19 जुलाई तक टाल दिया गया. उनके अनुसार उम्मीदवारों को आयोग की वेबसाइट देखते रहना चाहिए, लेकिन करीब 2 साल पुरानी भर्ती के लिए हर अभ्यर्थी लगातार वेबसाइट पर नजर रखें यह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि सारे उम्मीदवारों के पास स्मार्टफोन की सुविधा भी नहीं होती है. उनके अनुसार करीब 75 प्रतिशत अभ्यर्थियों का परीक्षा में शामिल न होना भर्ती प्रणाली में खामियों की ओर इशारा करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>JSSC, भर्ती, परीक्षा, में, 75, अभ्यर्थी, नहीं, हुए, शामिल, परीक्षा, केंद्रों, की, दूरी, और, लेट, एडमिट, कार्ड, पर, उठे, सवाल</media:keywords>
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        <title>UTU Paper Leak: दिल्ली में प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक, दो एग्जाम रद्द</title>
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        <description><![CDATA[ UTU Paper Leak: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक को लेकर लगातार चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच अब उत्तराखंड में एक और पेपर लीक की खबर सामने आई है. उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी देहरादून ने इंजीनियरिंग के दो पेपर लीक होने के बाद दो सेमेस्टर परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. यूनिवर्सिटी की शुरुआती जांच में प्रश्न पत्र की गोपनीयता में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है. इस मामले में एक सहायक प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है, जबकि पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है.
दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच आई पेपर लीक की खबर
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी से पेपर लीक की यह खबर उस समय सामने आई है, जब राजधानी दिल्ली समेत देशभर में पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है. देशभर में छात्र लगातार पेपर लीक घटनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं छात्रों का यह मामला शांत नहीं हुआ था इस बीच अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से यह पेपर लीक की खबर सामने आई है, जिससे यह मामला और बड़ा हो गया.
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शिकायत के बाद गठित हुई जांच समिति
मामले की शुरुआत मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स की परीक्षा को लेकर मिली शिकायत से हुई. शिकायत मिलने के बाद कुलपति के निर्देश पर यूनिवर्सिटी ने उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया. साथ ही शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग देहरादून ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच कराई. जांच में सामने आया कि प्रश्न पत्र तैयार करने वाले बाहरी एक्सपर्ट और शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता ने परीक्षा से पहले कथित तौर पर वही प्रश्न कॉलेज के इंटरनल पोर्टल और एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया था.
90 प्रतिशत प्रश्नों के मेल खाने का दावा
यूनिवर्सिटी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स की परीक्षा में पूछे गए करीब 90 प्रतिशत प्रश्न उन सवालों से मिलते थे जो परीक्षा से पहले छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किए गए थे. जांच समिति ने इसे परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर उल्लंघन माना. इसी दौरान जांच में यह भी पता चला कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी के प्रश्न पत्र में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आने की आशंका है. दोनों प्रश्न पत्र एक ही शिक्षक ने तैयार किए थे, इसके बाद यूनिवर्सिटी ने दोनों परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है.
प्रोफेसर पर एफआईआर और 7 साल का बैन
यूनिवर्सिटी ने आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से अगले 7 वर्षों तक विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी निभाने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. यूनिवर्सिटी में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि संस्थान अपने स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में परीक्षा की गोपनीयता से कोई समझौता न हो.
कुलपति ने क्या कहा?
यूनिवर्सिटी की कुलपति त्रिप्ता ठाकुर ने कहा है कि जैसे ही पेपर लेकर सूचना मिली, यूनिवर्सिटी ने तत्काल जांच शुरू कर दी. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है. जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया गया, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. यूनिवर्सिटी ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वह परीक्षा रद्द होने और पुनर्परीक्षा से जुड़ी जानकारियां तुरंत छात्रों तक पहुंचाएं, ताकि उन्हें तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके साथ ही सभी संस्थाओं से आदेश को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने को कहा गया है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>DU में हिंदी को प्राथमिकता, अब दो भाषाओं में तैयार होंगे जरूरी डॉक्यूमेंट्स; जानिए इसके फायदे और नुकसान </title>
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        <description><![CDATA[ DU Hindi Policy: डीयू ने यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. यूनिवर्सिटी के कुलसचिव की ओर से सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, कॉलेज प्राचार्य, निदेशकों और अधिकारियों को विस्तृत सर्कुलर जारी किया गया है. इसमें भारत सरकार के राजभाषा अधिनियम 1963 और राजभाषा नियम 1976 के प्रभावी पालन के निर्देश दिए गए हैं. नए निर्देशों के तहत यूनिवर्सिटी के सभी प्रमुख डॉक्यूमेंट अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किए जाएंगे, जिनमें हिंदी को प्राथमिक स्थान दिया जाएगा. इसके साथ ही कार्यालय कामकाज, वेबसाइट और पत्राचार में भी हिंदी के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है.&amp;nbsp;
डॉक्यूमेंट में होगा बदलाव
सर्कुलर के अनुसार यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े सभी संस्थानों में नोटिस बोर्ड सूचना बुलेटिन, फाइल कवर, रबर स्टैंप, पहचान पत्र, प्रोस्पेक्टस, लाइब्रेरी कार्ड, बैनर, होर्डिंग, निमंत्रण पत्र और लिफाफे पर लिखे एड्रेस सभी प्रमुख दस्तावेज हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किए जाएंगे. इनमें हिंदी पहले और अंग्रेजी बाद में समान फॉन्ट साइज में लिखी जाएगी. इसके अलावा राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के तहत जारी होने वाले आदेश, अधिसूचनाएं, ज्ञापन, नियम, निविदाएं, अनुबंध, प्रशासनिक रिपोर्ट और प्रेस विज्ञप्तियां भी दोनों भाषाओं में जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
हिंदी में ही होगा ज्यादा कार्यालयी काम&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ने निर्देश दिए हैं कि हिंदी में प्राप्त होने वाले पत्रों का उत्तर अनिवार्य रूप से हिंदी में दिया जाएगा. क और ख क्षेत्र से आने वाले पत्रों के साथ-साथ केंद्र सरकार के कार्यालय से अंग्रेजी में प्राप्त पत्रों के उत्तर भी हिंदी में देने पर जोर दिया गया है. कार्यालय में यूनिकोड के माध्यम से हिंदी टंकण को बढ़ावा देने, सेवा पुस्तिकाओं और अभिलेखों में हिंदी में प्रविष्टियां करने और सभी रजिस्टरों के शीर्षक दोनों भाषाओं में रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा सर्कुलर के अनुसार डीयू की वेबसाइट डिफॉल्ट रूप से हिंदी में खुलेगी, हालांकि अन्य भाषाओं का भी ऑप्शन रहेगा. वहीं जर्नल और मानक संदर्भ पुस्तकों को छोड़कर पुस्तकालय अनुदान का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा हिंदी पुस्तकों, अनुवाद संबंधी साहित्य की खरीद और हिंदी डिजिटल सामग्री पर खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं.
नियमों के पालन नहीं करने पर देनी होगी जवाबदेही&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है की राजभाषा से जुड़े निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी. अगर इन नियमों की अनदेखी की होती है तो संबंधित अधिकारी स्वयं इसके लिए जवाबदेह होंगे. वहीं अरविंदो कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हंसराज सुमन ने इस पहल का स्वागत किया है. उनका कहना है कि हर कॉलेज में हिंदी सप्ताह और हिंदी पखवाड़ा आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़े. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हिंदी पत्रकारिता, रंगमंच, फिल्म, रेडियो जॉकी, ब्लॉग लेखन, सोशल मीडिया और हिंदी शिक्षण जैसे विषयों पर इंटर कॉलेज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए, जिससे हिंदी को रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जा सके.&amp;nbsp;
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डीयू में हिंदी को प्राथमिकता के फायदें&amp;nbsp;

एक्सपर्ट्स के अनुसार डीयू में हिंदी को प्राथमिकता देने से छात्रों और कर्मचारियों को हिंदी में डॉक्यूमेंट उपलब्ध होंगे.
हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं ज्यादा आसान हो सकती है.
सरकारी राजभाषा नीति का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा.
कार्यालय में हिंदी के प्रयोग और डिजिटल हिंदी को बढ़ावा मिलेगा.
हिंदी को बढ़ावा मिलने से छात्रों की दूसरे हिंदी आधारित क्षेत्रों में रुचि बढ़ेगी.&amp;nbsp;

क्या हो सकते हैं इसके नुकसान

डीयू में हिंदी को बढ़ावा देने से सभी डॉक्यूमेंट्स को दो भाषाओं में तैयार करने से प्रशासन का काम बढ़ सकता है.
डॉक्यूमेंट के नियमित अपडेट में ज्यादा समय और संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है.
अगर अनुवाद की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो दोनों भाषाओं के संस्करण में अंतर हो सकता है.&amp;nbsp;
वेबसाइट, रिकॉर्ड और दूसरी डिजिटल सामग्री को दोनों भाषा में रखने से भी प्रशासनिक काम बढ़ेंगे.

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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जंतर&amp;मंतर पर गए तो होगी सख्त कार्रवाई, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों&amp;शिक्षकों के लिए जारी की एडवाइजरी</title>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और 20 जुलाई के हिंसक घटनाक्रम के बाद तनाव का माहौल बना हुआ है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट विवाद को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है. इस माहौल को देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) प्रशासन ने एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. विश्वविद्यालय ने अपने सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें जंतर-मंतर पर होने वाले किसी भी धरना-प्रदर्शन या विरोध सभा में शामिल होने पर सख्त मनाही की गई है.
जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूर रहने की इजाजत
दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर सूचना जारी कर अपने सभी छात्रों और अध्यापकों से अपील की है कि वे जंतर-मंतर पर चल रहे किसी भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा न बनें. विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अपनी निजी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है. जंतर-मंतर पर हाल ही में हुई पुलिस झड़पों और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन नहीं चाहता कि परिसर के छात्र किसी भी तरह के जोखिम या शारीरिक चोट का शिकार बनें. इसलिए छात्रों को विवादित स्थलों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है.
पढ़ाई और करियर पर पड़ सकता है बुरा असर
विश्वविद्यालय का कहना है कि किसी भी तरह के उग्र या अवैध धरना-प्रदर्शनों में भाग लेने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा पहुंचती है. इस तरह के आंदोलनों में लगातार शामिल रहने से न केवल पढ़ाई का नुकसान होता है, बल्कि छात्रों के भविष्य और पेशेवर अवसरों पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. विश्वविद्यालय ने कहा है कि अनुशासनात्मक या कानूनी मामलों में फंसने से छात्र-छात्राओं के करियर रिकॉर्ड पर दाग लग सकता है, जो आगे चलकर देश-विदेश में मिलने वाली नौकरियों या उच्च शिक्षा के अवसरों को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है.
गैरकानूनी प्रदर्शन में शामिल होने पर कड़ी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए बिल्कुल साफ कर दिया है कि अगर किसी ने नियम तोड़ा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. यदि दिल्ली यूनिवर्सिटी का कोई भी छात्र या शिक्षक जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले किसी भी गैरकानूनी प्रदर्शन या अनधिकृत सभा में शामिल पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी व अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे. विश्वविद्यालय के नियमों और देश के कानूनों का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ-साथ संस्थान से निष्कासन जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bank Job:  बैंक में नौकरी का सुनहरा मौका, IBPS PO और SO भर्ती के लिए बढ़ी आवेदन की तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Job:&amp;nbsp;अगर आप बैंक में नौकरी करने की तैयारी कर रहे हैं और अभी तक आईबीपीएस पीओ या एसओ भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं तो आपके लिए राहत की खबर आई है. दरअसल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन ने प्रोबेशनरी ऑफिसर और स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती परीक्षा 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है. अब इच्छुक उम्मीदवार 26 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया आईबीपीएस की आधिकारिक वेबसाइट ibps.in पर जारी है.&amp;nbsp;
IBPS भर्ती प्रक्रिया के तहत कितने भरे जाएंगे पद
इस भर्ती अभियान के जरिए देश के विभिन्न भागीदारी वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कुल 7,460 पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. इनमें 6,715 पद प्रोबेशनरी ऑफिसर और 745 पद स्पेशलिस्ट ऑफिसर के लिए निर्धारित है. ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने अब तक आवेदन नहीं किया वह तय समय सीमा के अंदर अपना फॉर्म भर सकते हैं.&amp;nbsp;
पीओ पद के लिए क्या है योग्यता?
प्रोबेशनरी ऑफिसर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए या केंद्र सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त समकक्ष योग्यता होनी चाहिए. इसके अलावा आवेदन के समय उम्मीदवार के पास डिग्री या मार्कशीट उपलब्ध होना जरूरी है. ऑनलाइन फॉर्म भरते समय ग्रेजुएशन के अंक भी दर्ज करने होंगे.
एसओ पद के लिए अलग-अलग पात्रता नियम&amp;nbsp;
स्पेशलिस्ट ऑफिसर के विभिन्न पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है. इसलिए उम्मीदवार को आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में संबंधित पद की पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं आवेदन?

आईबीपीएस पीओ और एसओ पद पर आवेदन करने के लिए सबसे पहले ibps.in वेबसाइट पर जाएं.
इसके बाद आईबीपीएस पीओ या एसओ रिक्रूटमेंट 2026 के आवेदन लिंक पर क्लिक करें.
अब पहले रजिस्ट्रेशन करें और फिर लॉगिन करके आवेदन पत्र भरें.
जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद आवेदन फीस का पेमेंट करें.
लास्ट में फॉर्म सबमिट कर फॉर्म की कन्फर्मेशन कॉपी डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें&amp;nbsp;

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कितना देनी होगी आवेदन फीस?&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए जनरल कैटेगरी और दूसरे एलिजिबल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन फीस 850 रुपये निर्धारित की गई है. वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बेंचमार्क दिव्यांग पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 175 रुपये आवेदन फीस देनी होगी. फीस का भुगतान डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से किया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Ex Agniveer Reservation: एक्स&amp;अग्निवीरों को नई भर्ती में 50% आरक्षण, भर्ती से लेकर उम्र, सैलरी और नौकरी तक जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Ex Agniveer Reservation:&amp;nbsp;अग्निपथ योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और असम राइफल्स में कांस्टेबल और राइफल मैन के पदों पर भर्ती में एक्स- अग्निवीरों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. इसके साथ ही उन्हें भर्ती प्रक्रिया में कई अहम रियायतें भी दी जाएगी. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए इसकी जानकारी दी. सरकार का कहना है की अग्नि वीरों के लिए भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से एक्स अग्निवीर नाम से नई कैटेगरी बनाई गई है. इसके तहत आरक्षण, आयु सीमा में छूट और भर्ती प्रक्रिया में विशेष रियायतें दी जाएगी.&amp;nbsp;
किन पदों पर मिलेगा 50 प्रतिशत आरक्षण?&amp;nbsp;
गृह मंत्रालय के अनुसार यह आरक्षण सीएपीएफ में कांस्टेबल और असम राइफल्स में राइफलमैन के पदों पर भर्ती के दौरान लागू होगा. हर भर्ती वर्ष में इन पदों की 50 प्रतिशत रिक्तियां एक्स-अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेंगी. इससे पहले मार्च 2023 में सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था. अब इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है. बीएसएफ और सीआईएसएफ जैसी कई केंद्रीय और सुरक्षा बलों ने भी पहले अपने भर्ती नियमों में संशोधन कर आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव लागू किया था.&amp;nbsp;
भर्ती प्रक्रिया में क्या मिलेगी छूट?
गृह मंत्रालय ने एक्स-अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में कई जरूरी छूट देने का फैसला किया है. इसके तहत उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा से छूट, फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट से छूट और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट से छूट दी जाएगी. सरकार का मानना है कि 4 साल की सैन्य सेवा के दौरान अग्नि वीरों को आवश्यक फिजिकल और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिल चुका होता है, इसलिए उन्हें इन चरणों में छूट दी जा रही है. &amp;nbsp;
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आयु सीमा में भी मिलेगी राहत&amp;nbsp;
सरकार ने एक्स-अग्निवीरों के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी छूट देने का फैसला किया है. सभी एलिजिबल &amp;nbsp;एक्स-अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की छूट मिलेगी. अग्निपथ योजना के पहले बैच के उम्मीदवारों को अतिरिक्त 5 साल की आयु छूट भी दी जाएगी. वहीं गृह मंत्रालय ने भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट से छूट की घोषणा कर दी है, लेकिन मेरिट कैसे तैयार की जाएगी इसे लेकर अभी कोई अलग निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. सरकार ने कहा है कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
पहला बैच कब होगा एलिजिबल?
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहला बैच अभी अपनी 4 वर्ष की सेवा पूरी नहीं कर पाया है. नौसेना में नवंबर 2022 में शामिल हुए पहले बैच के करीब 2,600 अग्निवीर इस साल सेवा पूरी करेंगे. इसके बाद वे सीएपीएफ और असम राइफल्स में नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>OMR में 305 नंबर, रिजल्ट में सिर्फ 64! NEET रिजल्ट की कहां करें शिकायत, क्या दोबारा होगी जांच?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET OMR Sheet Controversy:&amp;nbsp; री-नीट 2026 का रिजल्ट का 16 जुलाई को जारी होने के बाद से ही रिजल्ट को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही है. वहीं अब तक भी यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. रिजल्ट को लेकर मध्य प्रदेश के छात्र ने अपने अंको पर सवाल उठाते हुए संबंधित हाई कोर्ट का रुख किया है. छात्र का दावा है कि आधिकारिक ओएमआर शीट और फाइनल आंसर की के आधार पर उसके अंक कहीं ज्यादा बनते हैं, लेकिन एनटीए की ओर से जारी रिजल्ट में काफी कम अंक दिए गए हैं. इस बीच कई अभ्यर्थियों के मन में कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर रिजल्ट या ओएमआर शीट में किसी तरह की गड़बड़ी नजर आए तो शिकायत कहां करें और क्या दोबारा जांच कराई जा सकती है.&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश के छात्र ने लगाया 241 अंकों के अंतर का आरोप&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश के झाबुआ निवासी छात्र लोकेंद्र सिंह खड़िया ने इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. छात्र का दावा है कि एनटीए की ऑफिशियल ओएमआर शीट और फाइनल आंसर की के अनुसार उसे फिजिक्स में 104, केमिस्ट्री में 125 और बायोलॉजी में 76 अंक मिलने चाहिए थे. इसी हिसाब से उसके कुल अंक 305 बनते हैं, लेकिन 16 जुलाई को घोषित परिणाम में उसे सिर्फ 64 अंक दिए गए हैं, यानी उसके अनुसार 241 अंको का अंतर है. याचिका में कहा गया है कि 14 जुलाई को जब एनटीए ने ओएमआर शीट पोर्टल पर अपलोड की तो पहली बार लॉगिन करने पर फिजिक्स और केमिस्ट्री सेक्शन के जवाब खाली दिखाई दिए. कुछ देर बाद दोबारा लॉगिन करने पर दूसरी ओएमआर शीट दिखाई दी, जिसमें सभी उत्तर दर्ज थे. छात्र ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए और ओएमआर डेटा प्रोसेसिंग मूल्यांकन या रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि का आरोप लगाया है.&amp;nbsp;
हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब&amp;nbsp;
मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. अब इस मामले में अगले सुनवाई 28 जुलाई को होगी. इस याचिका में केवल अंकों की कथित गड़बड़ी का मुद्दा ही नहीं उठाया गया, बल्कि एनटीए की कानूनी और संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि एनटीए संसद की ओर से बनाई गई वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत रजिस्टर्ड एक समिति है, इसलिए उसकी कानूनी स्थिति की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए. &amp;nbsp;
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गड़बड़ी होने पर कहां कर सकते हैं शिकायत?&amp;nbsp;
अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि उसके ओएमआर शीट और रिजल्ट में अंतर है, तो सबसे पहले उसे एनटीए की ऑफिशियल ओएमआर शीट और फाइनल आंसर की के आधार पर अपने अंक दोबारा मिलाने चाहिए. अगर इसके बाद भी अंतर दिखाई दे तो संबंधित डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखना जरूरी है. वहीं एनटीए उम्मीदवारों की शिकायत अपने आधिकारिक शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से स्वीकार करता है.
अभ्यर्थी एनटीए की वेबसाइट पर उपलब्ध ग्रीवेंस पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा एनटीए की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भी पूरी जानकारी और जरूरी डॉक्यूमेंट भेजे जा सकते हैं. अगर इससे शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो उम्मीदवार केंद्रीय लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. नीट, जेईई और यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं के लिए एनटीए हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध रहती है. जहां आवेदन संख्या के साथ समस्या दर्ज कराई जा सकती है.&amp;nbsp;
क्या दोबारा हो सकती है जांच?&amp;nbsp;
अगर उम्मीदवार के पास ओएमआर शीट, फाइनल आंसर की और स्कोर कार्ड के बीच अंतर का डॉक्यूमेंट प्रमाण हो तो वह एनटीए से स्वतंत्र सत्यापन की मांग कर सकता है. ऐसे मामलों में उम्मीदवार मूल्यांकन प्रक्रिया, ओएमआर डेटा और अंक गणना की जांच का अनुरोध कर सकते हैं. अगर एनटीए से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और मामला एडमिशन को प्रभावित करता है, तो अभ्यर्थी कोर्ट का भी रुख कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Sonia Sehrawat: कॉकरोच पर इंस्टा स्टोरी लगाने वाली सोनिया सहरावत की सैलरी कितनी, RAF में कैसे मिलती है जॉब?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sonia-sehrawat-कॉकरोच-पर-इंस्टा-स्टोरी-लगाने-वाली-सोनिया-सहरावत-की-सैलरी-कितनी-raf-में-कैसे-मिलती-है-जॉब</link>
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        <description><![CDATA[ Sonia Sehrawat: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए बीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत अचानक चर्चा में आ गई. प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की. वहीं दो दिन बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर की गई एक स्टोरी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उनके विरोध में भी उत्तर आए. आपको बता दें कि सोनिया सहरावत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की रैपिड एक्शन फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट है. वह हरियाणा के रहने वाली है और यूपीएससी की सीएपीएफ परीक्षा पास करके सीआरपीएफ में शामिल हुए. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इंस्टा पर कॉकरोच की स्टोरी लगाने वाली सोनिया सहरावत की सैलरी कितनी है और आरएएफ में कैसे जॉब मिलती है.
जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद आई चर्चा में सोनिया
20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान आरएएफ की तैनाती की गई. इसी दौरान हुई झड़प में सोनिया सहरावत घायल हो गई. बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी तरफ से पूरी घटना का विवरण दिया. इसके दो दिन बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक स्टोरी वायरल हुई, जिसमें एक मरे हुए कॉकरोच की तस्वीर के साथ लिखा था &amp;nbsp;CAN&#039;T FIX THEMSELVES AND THEY WANNA FIX THE COUNTRY. इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई. बाद में यह स्टोरी डिलीट कर दी गई, हालांकि इसके स्क्रीनशॉट पहले ही वायरल हो चुके थे. इसके बाद सोनिया शेरावत को खूब ट्रोल किया जा रहा है.
क्या है आरएएफ?
रैपिड एक्शन फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की विशेष यूनिट है. जिसे दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाया गया है. &amp;nbsp;इसका गठन 1992 में किया गया था. यह ऐसी विशेष फोर्स है, जिसे किसी भी संवेदनशील स्थिति में कम समय में तैनात किया जा सकता है. आरएएफ की टीमों को नॉन लैथल हथियारों के इस्तेमाल, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों के लिए प्रत्येक कंपनी में महिला जवानों की अलग टीम भी शामिल होती है.
कैसे बनते हैं आरएएफ में असिस्टेंट कमांडेंट?
आरएएफ में असिस्टेंट कमांडेंट की सीधी भर्ती अलग से नहीं होती, इसके लिए उम्मीदवारों को संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा पास करनी होती है. चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति सीआरपीएफ सहित अलग-अलग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में की जाती हैं. यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है, जिसमें लिखित परीक्षा, फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट और मेडिकल टेस्ट, इंटरव्यू और पर्सनैलिटी टेस्ट भी होता है. वहीं इसके बाद मेरिट के आधार पर चयनित होने के बाद उम्मीदवारों को संबंधित बल में नियुक्ति दी जाती है.
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आरएएफ बनने की योग्यता?
सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में आवेदन के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना जरूरी है. इसके अलावा वह भारतीय नागरिक होना चाहिए और आयु 20 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए. आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट मिलती है और उम्मीदवारों को निर्धारित फिजिकल और मेडिकल मानकों को भी पूरा करना होता है.
कितनी मिलती है सैलरी?
सातवें वेतन आयोग के अनुसार सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट का पद ग्रुप ए का अधिकारी होता है. इसे पे लेवल 10 के आधार पर सैलरी दी जाती है, जो सैलरी 67,700 से 2,08,700 प्रतिमाह तक हो सकती है. बेसिक सैलरी के अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Sonia, Sehrawat:, कॉकरोच, पर, इंस्टा, स्टोरी, लगाने, वाली, सोनिया, सहरावत, की, सैलरी, कितनी, RAF, में, कैसे, मिलती, है, जॉब</media:keywords>
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        <title>Boss Warning Signs: बॉस देने लगे ये इशारे तो समझो डूब गई नैया, भूलकर भी अपने सीनियर से न बोलें ये बात</title>
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        <description><![CDATA[ Boss Warning Signs: बॉस देने लगे ये इशारे तो समझो डूब गई नैया, भूलकर भी अपने सीनियर से न बोलें ये बात ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bullet Train Driver: बुलेट ट्रेन चलाने का है सपना, भारत में कैसे बन सकेंगे इसके ड्राइवर, क्या होनी चाहिए योग्यता?</title>
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        <description><![CDATA[ Bullet Train Driver: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर 15 अगस्त 2027 तक बुलेट ट्रेन शुरू करने का टारगेट रखा गया है. ऐसे में कई युवाओं के मन में यह सवाल है कि आखिर भारत में बुलेट ट्रेन के ड्राइवर कैसे बनेंगे, इसके लिए क्या योग्यता होगी और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी. इसी बीच नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने परियोजना से जुड़े तकनीकी और संचालन पदों पर भर्ती भी निकाली है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सामने आए हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर आपका भी बुलेट ट्रेन चलाने का सपना है तो भारत में आप बुलेट ट्रेन के ड्राइवर कैसे बन सकते हैं और इसके लिए क्या-क्या योग्यता होनी चाहिए.
तेजी से चल रहा भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम
मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है. करीब 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर मुंबई से अहमदाबाद सहित कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं. रेलवे मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना का संचालित 15 अगस्त 2027 तक शुरू होने का टारगेट रखा गया है. बुलेट ट्रेन का संचालन अत्याधुनिक ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जाएगा. हालांकि ट्रेन में मौजूद पायलट की जिम्मेदारी कंट्रोल सेंटर के निर्देशों का पालन करना, सिस्टम की निगरानी करना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लेना होगा.
भारत में कैसे बन सकेंगे बुलेट ट्रेन के ड्राइवर?
भारत में अभी बुलेट ट्रेन सेवा शुरू नहीं हुई है, इसलिए इसके लिए अलग से ड्राइवर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है. हालांकि हाई स्पीड रेल परियोजना से जुड़े तकनीकी और संचालन स्टाफ की भर्ती एनएचएसआरसीएल के माध्यम से की जा रही है. भविष्य में बुलेट ट्रेन के संचालन के लिए रेलवे, मेट्रो या हाई स्पीड रेल सिस्टम में अनुभवी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर पायलट बनाया जा सकता है. इसके लिए पहले से रेलवे संचालन का एक्सपीरियंस रखने वाले कर्मचारियों को जापान में स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी, क्योंकि भारत की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना जापान की तकनीक पर आधारित है. हालांकि फिलहाल बुलेट ट्रेन परियोजना में काम करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एनएचएसआरसीएल ने विभिन्न तकनीकी और ऑपरेशन से जुड़े पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है.
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एनएचएसआरसीएल में निकली 224 पदों पर भर्ती
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कुल 224 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. इनमें 209 नॉन-एग्जीक्यूटिव और 15 एग्जीक्यूटिव पद शामिल है. भर्ती के तहत जूनियर इंजीनियर, स्टेशन-ट्रेन मैनेजर, डिपो एवं ऑपरेशन कंट्रोलर, सूचना प्रौद्योगिकी और सिक्योरिटी से जुड़े पदों पर नियुक्ति की जाएगी. जूनियर इंजीनियर के पद सिविल, ट्रैक, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग एवं टेलीकॉम, रोलिंग स्टॉक और ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन जैसे डिपार्टमेंट में उपलब्ध है.
इन पदों के लिए कौन कर सकता है आवेदन?
भर्ती अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की अधिकतम आयु 31 में 2026 तक 45 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अभ्यर्थियों के पास संबंधित पद के अनुसार 3 साल का डिप्लोमा या बीई-बीटेक की डिग्री होनी जरूरी है. इसके अलावा रेलवे, मेट्रो या रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस क्षेत्र में कम से कम 3 साल का एक्सपीरियंस भी रखा गया है. वहीं चयनित उम्मीदवारों का चयन डीबीटी परीक्षा के आधार पर और फिर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षा से होगा.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Karnataka Teacher Recruitment 2026: इस राज्य में होने जा रही 15000 पदों पर शिक्षक भर्ती, कैबिनेट ने दी मंजूरी&amp; जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Karnataka Teacher Recruitment 2026: सरकारी शिक्षकों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर कई तरह की भर्ती प्रक्रियाएं शुरू की जाती है. वहीं इस बार सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर आई है. दरअसल कर्नाटक सरकार ने राज्य के सरकारी, प्राथमिक और हाई स्कूल में 15,000 शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दे दी है. राज्य कैबिनेट ने कर्नाटक एजुकेशन सर्विसेज स्पेशल रूल्स फॉर रिक्रूटमेंट टू सर्टेन टीचिंग पोस्ट्स 2026 को मंजूरी देकर भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया है.
अब स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग जल्द ही भर्ती का विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करेगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राज्य सरकार के अनुसार यह भर्ती लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के लिए की जा रही है. शिक्षा विभाग को निर्धारित भर्ती नियमों के तहत पूरी चयन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि नियमित भर्ती होने तक स्कूलों में गेस्ट टीचर के जरिए व्यवस्था चलाई जा रही थी, लेकिन अब स्थायी नियुक्तियां की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.&amp;nbsp;
किन क्षेत्रों में कितने पदों पर होगी भर्ती?&amp;nbsp;
सरकार की ओर से जारी स्वीकृत पदों के अनुसार 15,000 पदों को दो क्षेत्र में बांटा गया है. इनमें 6,967 पद कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए और 8,033 पद गैर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए स्वीकृत किए गए हैं. कर्नाटक कल्याण क्षेत्र के पदों में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर के 3,328 पद, असिस्टेंट मास्टर के 2,214 पद, प्राइमरी स्कूल टीचर के 800 पद, फिजिकल एजुकेशन टीचर के 425 पद और कंप्यूटर साइंस टीचर के 300 पद शामिल है. वहीं गैर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के पदों में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर के 5,272 पद, असिस्टेंट मास्टर के 2,286 पद प्राइमरी स्कूल टीचर के 100 पद, फिजिकल एजुकेशन टीचर के 175 पद, कंप्यूटर साइंस टीचर के 200 पद शामिल है.&amp;nbsp;
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जल्दी जारी होगा नोटिफिकेशन&amp;nbsp;
स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने बताया कि कर्नाटक ने पहले शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर काम किया है, जिसके कारण नियमित भर्ती में कुछ समय लगा. अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अंतिम भर्ती की सूचना जल्द जारी की जाएगी और पात्र अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी. उन्होंने कहा कि विभाग को निर्धारित भर्ती नियमों के अनुसार सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नियुक्तियां जल्द से जल्द की जा सके.&amp;nbsp;
अब तक गेस्ट टीचर से चल रही थी व्यवस्था&amp;nbsp;
सरकार के अनुसार राज्य के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए अस्थायी तौर पर गेस्ट टीचर की नियुक्ति की गई थी. हालांकि यह केवल अंतरिम व्यवस्था थी. अब नियमित शिक्षकों की भर्ती के जरिए रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>AISHE Report: देश में पहली बार घटे अंडरग्रेजुएट एडमिशन, आखिर क्यों कम हो रहे दाखिले और क्या हैं इसके मायने?</title>
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        <description><![CDATA[ AISHE Report: देश में हायर एजुकेशन को लेकर पहली बार एक नया ट्रेंड सामने आया है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार पहली बार देशभर के हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में अंडर ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. वहीं दूसरी और पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि हायर एजुकेशन के प्रति छात्रों की बदलती सोच, व्यावसायिक शिक्षा पर बढ़ता जोर और जनसंख्या के बदलते स्वरूप का भी संकट की ओर भी संकेत करता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि देश में पहली बार यूजी एडमिशन में कमी क्यों आ रही है और इसके मायने क्या है.
AISHE की Report में क्या आया है सामने?
AISHE की 2022-23 और 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में यूजी पाठ्यक्रमों एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या पिछले साल की तुलना में करीब 1 लाख कम हो गई. हालांकि कुल उच्च शिक्षा नामांकन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2022-23 में जहां कुल नामांकन 4.46 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया. इस अवधि में छात्राओं की संख्या भी 2.18 करोड़ से बढ़कर 2.24 करोड़ पहुंच गई. वहीं 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो भी 29.5 से बढ़कर 30 हो गया.
पहली बार क्यों घटे यूजी एडमिशन?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे कई कारण है. पूर्व यूजीसी अध्यक्ष प्रोफेसर सुखदेव थोराट के अनुसार नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है. अब कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में छात्र पारंपरिक डिग्री कोर्स के बजाय स्किल आधारित ऑप्शन चुन रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 4 वर्षीय ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम मल्टीपल एग्जिट सिस्टम और कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट जैसे बदलाव का भी एडमिशन पर असर पड़ा है. मल्टीपल एग्जिट व्यवस्था के कारण कई छात्र डिग्री पूरी करने से पहले ही सर्टिफिकेट या डिप्लोमा लेकर पढ़ाई छोड़ रहे हैं.
कॉलेज फीस और स्कॉलरशिप भी बनी वजह
रिपोर्ट के अनुसार एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई स्कॉलरशिप योजनाएं बंद होने और सरकारी फंडिंग कम होने का असर भी छात्रों पर पड़ा है. सार्वजनिक संस्थानों में वित्तीय दबाव बढ़ने से फीस में वृद्धि हुई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना पहले की तुलना में कठिन हो गया है. प्रोफेसर थोराट के अनुसार राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा, सेकेंडरी एजुकेशन के लिए लड़कियों की प्रोत्साहन योजना, बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति और मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप जैसी कई योजनाएं बंद होने से भी छात्रों को नुकसान हुआ है. उनका मानना है कि इन बदलावों का असर विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है.
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युवाओं की बदलती सोच भी बड़ी वजह
अंडर ग्रेजुएट में एडमिशन की कमी को लेकर AISHE की रिपोर्ट पर हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर फुरकान कमर का कहना है कि अब केवल नीतिगत बदलाव ही नहीं, बल्कि युवाओं की सोच भी बदल रही है. उनके अनुसार स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या पहले से कम हो रही है क्योंकि युवा आबादी में गिरावट आ रही है. वहीं दूसरी ओर कई छात्र और उनके परिवार यह महसूस कर रहे हैं कि हायर एजुकेशन के बाद रोजगार की गारंटी नहीं है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट प्राइवेट क्षेत्र में है, जहां फीस काफी ज्यादा है. ऐसे में कई परिवार अपने बच्चों को महंगी शिक्षा दिलाने में सक्षम नहीं है और छात्र वैकल्पिक करियर या स्किल डेवलपमेंट कोर्स की ओर रुख कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>AISHE, Report:, देश, में, पहली, बार, घटे, अंडरग्रेजुएट, एडमिशन, आखिर, क्यों, कम, हो, रहे, दाखिले, और, क्या, हैं, इसके, मायने</media:keywords>
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        <title>QS Ranking 2027: पढ़ाई के लिए सियोल दुनिया का बेस्ट शहर, मुंबई भारत में नंबर&amp;1 और दिल्ली सबसे किफायती स्टूडेंट सिटी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/qs-ranking-2027-पढ़ाई-के-लिए-सियोल-दुनिया-का-बेस्ट-शहर-मुंबई-भारत-में-नंबर-1-और-दिल्ली-सबसे-किफायती-स्टूडेंट-सिटी</link>
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        <description><![CDATA[ QS Ranking 2027: पढ़ाई के लिए सियोल दुनिया का बेस्ट शहर, मुंबई भारत में नंबर-1 और दिल्ली सबसे किफायती स्टूडेंट सिटी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NEET 2026 Success Story: पेंटिंग कर परिवार चलाया, अब NEET में 583 अंक लाकर बूंदी के बेटे ने MBBS की सीट की पक्की</title>
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        <description><![CDATA[ NEET 2026 Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले सूरज सैनी ने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती है. परिवार की मदद के लिए गांव-गांव जाकर घरों की पेंटिंग करने वाले सूरज ने इस साल नीट यूजी 2026 में 583 अंक हासिल किए. इस स्कोर के साथ उन्हें मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि 12वीं कक्षा तक उन्हें नीट परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. धीरे-धीरे जानकारी मिली, तैयारी शुरू की और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज तक का सफर तय कर लिया.&amp;nbsp;
12वीं तक नहीं पता था नीट क्या होता है?
सूरज बूंदी जिले के कापरेन स्थित एक हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल के छात्र रहे हैं. उन्होंने दसवीं में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. &amp;nbsp;सूरज बताते हैं कि स्कूल के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर था. उन्हें नीट परीक्षा के बारे में पहली बार उनकी बुआ से पता चला, इसके बाद उन्होंने फरवरी 2024 में आवेदन किया और पहली बार परीक्षा दी. सूरज के अनुसार पहले प्रयास में उनकी तैयारी बहुत सीमित थी, परीक्षा देने के बाद उन्हें लगा कि प्रश्न पत्र अपेक्षा से ज्यादा आसान था. &amp;nbsp;उन्हें एहसास हुआ की समस्या पेपर नहीं, बल्कि उनकी तैयारी में थी. इस वजह से उन्होंने दोबारा पूरी गंभीरता के साथ पूरी तैयारी शुरू की.&amp;nbsp;
घर पर पढ़ाई से कोटा तक का सफर&amp;nbsp;
पहले प्रयास के बाद सूरज ने घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखी. बाद में उन्हें कोटा स्थित कोचिंग के कार्यक्रम के तहत फ्री कोचिंग और रहने की सुविधा मिली. कोटा पहुंचने के बाद उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की सही रणनीति समझ आई. शुरुआत में उन्हें लगा कि दूसरे छात्र उनसे काफी आगे हैं, क्योंकि वह कई वर्षों से तैयारी कर रहे थे. लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें धीरे-धीरे अपनी तैयारी भी मजबूत कर ली. सूरज का कहना है कि नीट की तैयारी के लिए केवल कोचिंग ही जरूरी नहीं होती, बल्कि सही दिशा मिलना ज्यादा जरूरी होता है. उनके अनुसार शिक्षक यह समझाने में मदद करते हैं कि क्या पढ़ना है, कितना पढ़ना है और किस तरह तैयारी को आगे बढ़ाना है.&amp;nbsp;
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पढ़ाई के साथ-साथ करते थे घरों की पेंटिंग&amp;nbsp;
कोटा जाने से पहले सूरज छुट्टियों और खाली समय में आसपास के गांव में घरों की पेंटिंग का काम करते थे. इससे होने वाली कमाई से वह परिवार की आर्थिक मदद करते थे. सूरज ने बताया कि यह काम उसने किसी से सीखा नहीं था, बल्कि लोगों को काम करते देखकर खुद सीख लिया. धीरे-धीरे यही काम परिवार की एक्स्ट्रा आय का साधन बन गया. वहीं सूरज की मां घीसी बाई खेतों में मजदूरी करती है, आर्थिक तंगी की वजह से उसकी छोटी बहन गरिमा को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने पढ़ी और वह अपनी मां के साथ खेतों में काम करने लगी. सूरज अब सूरज चाहते हैं कि उनकी बहन दोबारा स्कूल जाए.
अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तैयारी&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 में 583 अंक हासिल करने के बाद सूरज का अगला टारगेट मेडिकल काउंसलिंग है. उन्हें भरोसा है कि इस स्कोर के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिल जाएगी. वहीं अपने अनुभव के आधार पर सूरज का कहना है कि जो छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, उन्हें 11वीं से ही नीट की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. उनका मानना है कि समय रहते तैयारी शुरू करने के बाद में अतिरिक्त दबाव नहीं बनता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>High Paying Career: विदेश जाकर करनी है मोटी कमाई? इन कॉर्स में आज ही ले लें एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ High Paying Career: आज के समय में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र 12वीं के बाद ऐसे कोर्स की तलाश करते हैं, जिनकी मदद से वे विदेश में मोटी कमाई कर सके और उन्हें विदेश में ग्लोबल एक्सपोजर और लग्जरी लाइफस्टाइल भी दे सके. आजकल ऑलमोस्ट हर स्टूडेंट और उनके पेरेंट्स का एक ही सपना होता है, कि मेरे बच्चे की विदेश में जॉब, स्ट्रांग पैकेज और सिक्योर फ्यूचर हो. लेकिन प्रॉब्लम यहां पर आती है कि 12th के बाद आपके पास ऑप्शन बहुत ज्यादा होते हैं. &amp;nbsp;और जो गाइडेंस होती है, वो बहुत ही कम होती है. हालांकि, सिर्फ विदेश जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही कोर्स और सही स्किल का चुनाव सबसे अहम होता है. दुनिया भर में कुछ ऐसे प्रोफेशन हैं जिनकी लगातार मांग बनी हुई है और इनमें करियर बनाने वाले उम्मीदवारों को मोटी कमाई का चांस ज्यादा मिल सकता है.
मेडिकल, इंजीनियरिंग और AI जैसे सेक्टर में सबसे ज्यादा डिमांड
अगर आपकी रुचि मेडिकल फील्ड में है तो MBBS के बाद संबंधित देश की मेडिकल लाइसेंस परीक्षा (जैसे USMLE, PLAB, AMC आदि) पास करने पर अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों में डॉक्टर के रूप में काम करने का मौका मिल सकता है. अनुभव और स्पेशलाइजेशन के साथ मोटी कमाई में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.
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वहीं टेक्नोलॉजी सेक्टर में Computer Science Engineering, Artificial Intelligence (AI), Cyber Security, Data Science और Software Engineering सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में शामिल हैं. इन क्षेत्रों में अनुभवी प्रोफेशनल्स की दुनिया भर में मांग बनी हुई है. इसके अलावा Chemical Engineering, Aerospace Engineering और Robotics जैसे कोर्स भी कई देशों में अच्छा मौका देते हैं.
हेल्थकेयर और स्पेशलाइज्ड स्किल्स भी बन सकती हैं करियर की मजबूत नींव
अगर MBBS नहीं करना चाहते, तो Physiotherapy, Nursing, Occupational Therapy, Medical Laboratory Science और अन्य हेल्थकेयर कोर्स भी विदेशों में मोटी कमाई का जरिया बन सकते हैं. क्योंकि दुनिया भर के अस्पताल, क्लीनिक और चिकित्सा संस्थान में मांग लगातार बढ़ रही है.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी भी कोर्स से मोटी कमाई की गारंटी नहीं होती. कमाई कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे आपका अनुभव, स्किल, यूनिवर्सिटी, देश, नौकरी का पद और संबंधित देश की लाइसेंसिंग प्रक्रिया. इसलिए सिर्फ मोटी कमाई के लालच में कोर्स चुनने के बजाय अपनी पसंद, क्षमता और लंबे समय के करियर मकसद &amp;nbsp;को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए. सही फैसला, मजबूत स्किल्स और अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड के मुताबिक तैयारी आपको विदेश में मोटी कमाई में मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG counselling 2026: कब शुरू हो सकती है काउंसिलिंग? जानिए रजिस्ट्रेशन से लेकर डॉक्यूमेंट्स तक पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Counselling 2026:&amp;nbsp; नीट यूजी 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों की नजर मेडिकल काउंसिल कमेटी एमसीसी की ओर से जारी होने वाले काउंसलिंग शेड्यूल पर टिकी है. एमबीबीएस, बीडीएस, बीएससी नर्सिंग समेत अलग-अलग मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है. शेड्यूल जारी होते ही अभ्यर्थियों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा, जिसके बाद सीट आवंटन और एडमिशन के प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
बता दें कि इस साल नेशनल मेडिकल कमिशन के सीट मैट्रिक्स के अनुसार देश भर में एमबीबीएस की कुल 1,36,939 सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. इनमें 11.21 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी नीट यूजी 2026 परीक्षा में सफल हुए हैं. ऐसे में सीमित सीटों के कारण मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए बड़ा कंपटीशन देखने को मिल सकता है.
कब शुरू हो सकती है काउंसलिंग?&amp;nbsp;
रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल काउंसिल कमेटी कभी भी नीट यूजी काउंसलिंग शुरू करवा सकती है. हालांकि इसे लेकर एमसीसी ने अभी तक कोई ऑफिशियल घोषणा नहीं की है. लेकिन उम्मीद लगाई जा रही है कि 16 जुलाई को नीट यूजी का रिजल्ट जारी होने के बाद अब एमसीसी कभी भी काउंसलिंग की घोषणा कर सकता है. वहीं एमसीसी की काउंसलिंग के माध्यम से 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा की एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के अलावा एम्स, जेआईपीएमईआर, केंद्रीय विद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों, एएफएमएस इंस्टीट्यूट और बीएससी नर्सिंग की सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. वहीं 85 प्रतिशत राज्य कोटा की सीटों पर संबंधित राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी प्रवेश प्रक्रिया पूरी करेगी.&amp;nbsp;
काउंसलिंग के लिए ऐसे होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
काउंसलिंग शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को एमसीसी के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नया रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद नीट आवेदन से जुड़ी जानकारी भरकर लॉगिन करना होगा. निर्धारित रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट किया जा सकेगा. अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वह आवेदन पूरा होने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर फ्यूचर के लिए से सुरक्षित भी रख सकते हैं.&amp;nbsp;
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काउंसलिंग में हो सकते हैं चार राउंड&amp;nbsp;
पिछले वर्षों के पैटर्न को देखते हुए इस बार भी काउंसलिंग चार चरणों में आयोजित की जा सकती है. इसमें राउंड-1, राउंड-2, मॉप अप राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड शामिल रहेंगे. हर एक चरण में सीट आवंटन के बाद उम्मीदवार को निर्धारित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा.&amp;nbsp;
ये जरूरी डॉक्यूमेंट पहले से रखें तैयार&amp;nbsp;
काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों को कई जरूरी डॉक्यूमेंट देने होंगे. इनमें नीट यूजी 2026 का एडमिट कार्ड, स्कोर कार्ड, 10वीं और 12वीं की मार्कशीट एवं प्रमाण पत्र, वैलिड फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, दिव्यांग प्रमाण पत्र और सीट आवंटन के बाद मिलने वाला प्रोविजनल अलॉटमेंट लेटर शामिल है. डॉक्यूमेंट में किसी प्रकार की कमी होने पर एडमिशन प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, counselling, 2026:, कब, शुरू, हो, सकती, है, काउंसिलिंग, जानिए, रजिस्ट्रेशन, से, लेकर, डॉक्यूमेंट्स, तक, पूरी, जानकारी</media:keywords>
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        <title>बिहार के नए सरकारी डिग्री कॉलेजों का रियलिटी चेक, कई जगह न शिक्षक, न लाइब्रेरी और न स्थायी भवन</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार सरकार ने राज्य के 211 प्रखंडों में नए सरकारी डिग्री काॅलेज खोलने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए &amp;nbsp;दूर न जाना पड़े. 15 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राज चौधरी ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन कॉलेजों का उद्घाटन भी किया. सरकार के दावा है कि इस &amp;nbsp;पहल से छात्रों को अपने जिले और आसपास ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा. हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति अभी सरकार के दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. कई नए कॉलेजों में न तो स्थायी भवन है, न पर्याप्त शिक्षक और न ही पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध है.&amp;nbsp;
कई कॉलेज अभी अस्थायी भवन से संचालित&amp;nbsp;
जमीनी पड़ताल से सामने आया है कि राज्य के कई सरकारी डिग्री कॉलेज फिलहाल पहले स्थायी परिसर में नहीं चल रहे हैं. कई जगह कॉलेजों को इंटर कॉलेज, स्कूल या अन्य सरकारी भवनों में अस्थायी रूप से शुरू किया गया है. स्थायी भवनों का निर्माण अभी बाकी है. कई संस्थानों में लाइब्रेरी के लिए कमरे तो बनाए गए हैं, लेकिन वहां किताबें उपलब्ध नहीं है. वहीं फर्नीचर, लैब और दूसरे शैक्षणिक संसाधनों का काम भी कई जगह अधूरा है. सरकार का कहना है कि सभी सुविधाएं चरणबाद तरीके से विकसित की जाएगी&amp;nbsp;
एडमिशन शुरू लेकिन शिक्षकों की भारी कमी&amp;nbsp;
कॉलेज में इतिहास, हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में प्रवेश परीक्षा शुरू हो चुकी है. इसके बावजूद अधिकांश कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी. फिलहाल कई संस्थाओं का संचालन प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए प्राचार्यों, बर्सर और शिक्षकों के भरोसे किया जा रहा है. कई विषय ऐसे हैं, जिनमें छात्र तो एडमिशन ले चुके हैं, लेकिन पढ़ने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं है.
पूर्णिया में लाइब्रेरी है, लेकिन किताबें नहीं&amp;nbsp;
पूर्णिया जिले में केनगर, &amp;nbsp;श्रीनगर, जलालगढ़, रुपौली और बायसी समेत 6 नए सरकारी डिग्री कॉलेज खोले गए हैं. केनगर सरकारी डिग्री कॉलेज में करीब 120 छात्रों ने एडमिशन लिया है. यहां कक्षाएं संचालित करने के लिए कमरे, टेबल और बेंच उपलब्ध है, लेकिन लाइब्रेरी में किताबें नहीं है. कॉलेज में 6 विषयों में पढ़ाई की योजना है, लेकिन फिलहाल केवल दो शिक्षक ही कार्यरत है. एक शिक्षक प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि दूसरे शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर तैनात है. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के बाद सभी विषयों की कक्षाएं शुरू कर दी जाएगी.&amp;nbsp;
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मुजफ्फरपुर में इतिहास के छात्र ज्यादा, शिक्षक नहीं&amp;nbsp;
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड स्थित सरफुद्दीनपुर सरकारी डिग्री कॉलेज में अब तक 21 छात्र ने एडमिशन लिया है. इनमें सबसे ज्यादा 13 छात्रों ने इतिहास &amp;nbsp;विषय चुना है. लेकिन कॉलेज में इतिहास का कोई टीचर मौजूद ही नहीं है. &amp;nbsp;यह कॉलेज फिलहाल एक मध्य विद्यालय परिसर से संचालित हो रहा है, जहां स्कूल के 10 कमरों को डिग्री कॉलेज के लिए उपलब्ध कराया गया है. कॉलेज में अभी केवल प्रभारी प्राचार्य, बर्सर और एक नाइट गार्ड कार्यरत हैं. प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद सभी विषयों की नियमित पढ़ाई शुरू होगी.
उच्च शिक्षा मंत्री ने भी मानीं कमियां&amp;nbsp;
बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने स्वीकार किया है कि कई नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में अभी न तो स्थायी भवन तैयार है और न ही पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति हो सकी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले कॉलेजों की शुरुआत करने का फैसला लिया है, जबकि भवन निर्माण, शिक्षकों की भर्ती और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. मंत्री के अनुसार विभाग लगातार काम कर रहा है और आने वाले समय में इन सभी कॉलेजों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधा मिल सकें.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिहार, के, नए, सरकारी, डिग्री, कॉलेजों, का, रियलिटी, चेक, कई, जगह, न, शिक्षक, न, लाइब्रेरी, और, न, स्थायी, भवन</media:keywords>
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        <title>DU No Tolerance Policy: डीयू में रैगिंग पर नो टॉलरेंस पॉलिसी! बदसलूकी पर एडमिशन&amp;डिग्री रद्द, क्रिमिनल केस भी होगा दर्ज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/du-no-tolerance-policy-डीयू-में-रैगिंग-पर-नो-टॉलरेंस-पॉलिसी-बदसलूकी-पर-एडमिशन-डिग्री-रद्द-क्रिमिनल-केस-भी-होगा-दर्ज</link>
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        <description><![CDATA[ DU No Tolerance Policy: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले कैंपस में रैगिंग, छेड़छाड़ और अनुशासनहीनता पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं. विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेज, डिपार्टमेंट, हॉस्टल्स और संबंधित इंस्टीट्यूट को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और एंटी रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन ने साफ किया है कि रैगिंग के मामलों में अब नो टोलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ निलंबन, निष्कासन, प्रवेश रद्द करने, डिग्री निरस्त करने से लेकर आपराधिक मामला दर्ज करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.
डीयू के कैंपस में भी बढ़ेगी निगरानी&amp;nbsp;
विश्वविद्यालय ने निर्देश दिए हैं कि हॉस्टल, कैंटीन, कॉमन रूम, पार्किंग और दूसरी स्टूडेंट एक्टिविटी वाली जगह पर नियमित निगरानी रखी जाएगी. विजिलेंस स्क्वाड में जरूरत के अनुसार एनसीसी और एनएसएस के स्वयंसेवकों की मदद भी ली जाएगी. इसके अलावा कॉलेज को परिसर में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एंटी रैगिंग पोस्टर और हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है. छात्रों की शिकायतों के बाद सील बंद शिकायत पेटियां लगाने और हेल्पलाइन ईमेल तथा कंट्रोल रूम की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्र बिना किसी डर की शिकायत दर्ज करा सके.&amp;nbsp;
नॉर्थ और साउथ कैंपस में बनेंगे कंट्रोल रूम&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 28 जुलाई से 7 अगस्त तक नॉर्थ कैंपस और साउथ कैंपस में संयुक्त कंट्रोल रूम संचालित करने का फैसला किया है. इन कंट्रोल रूम में यूनिवर्सिटी प्रशासन और दिल्ली पुलिस के अधिकारी मौजूद रहेंगे, ताकि रैगिंग या किसी भी अनुशासनहीनता की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. इसके अलावा डीयू ने प्रत्येक कॉलेज और विभाग को एक डिसिप्लिनरी रिसोर्स पर्सन नियुक्त करने का निर्देश दिए हैं. इनकी जानकारी यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर कार्यालय को भेजनी होगी, ताकि अनुशासन से जुड़े मामलों में बेहतर तरीके से समन्वय बनाया जा सके. इंस्टीट्यूट को अपने स्तर पर भी विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप पर अतिरिक्त अनुशासनात्मक प्रावधान लागू करने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
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आईडी कार्ड साथ रखना होगा जरूरी&amp;nbsp;
विश्वविद्यालय ने छात्रों को हर समय अपना पहचान पत्र साथ रखने की निर्देश दिए हैं. कैंपस में प्रवेश पहचान पत्र के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही कॉलेज को समय-समय पर हॉस्टल, कैफेटेरिया और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर औचक निरीक्षण करने के लिए कहा गया है. नए छात्रों की मदद के लिए फैकल्टी मेंटर सिस्टम लागू करने की भी सिफारिश दी गई है, ताकि वह यूनिवर्सिटी के माहौल में आसानी से खुद को ढाल सकें और किसी भी समस्या की स्थिति में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें.&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस भी रहेगी अलर्ट&amp;nbsp;
बैठक में दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है. कॉलेज और हॉस्टल के बाहर पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी. जरूरत पड़ने पर पुलिस पिकेट भी तैनात किए जाएंगे, जबकि छात्राओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की जाएगी. यूनिवर्सिटी ने बाहरी लोगों के कैंपस में प्रवेश पर भी सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Tolerance, Policy:, डीयू, में, रैगिंग, पर, नो, टॉलरेंस, पॉलिसी, बदसलूकी, पर, एडमिशन-डिग्री, रद्द, क्रिमिनल, केस, भी, होगा, दर्ज</media:keywords>
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        <title>IBPS PO की रिवाइज्ड वैकेंसी में पदों की संख्या बढ़ी, आवेदन का आज आखिरी मौका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ibps-po-की-रिवाइज्ड-वैकेंसी-में-पदों-की-संख्या-बढ़ी-आवेदन-का-आज-आखिरी-मौका</link>
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        <description><![CDATA[ IBPS PO recruitment 2026: बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है. इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन में प्रोबेशनरी ऑफिसर और स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती 2026 की वैकेंसी में बड़ा इजाफा किया है. संशोधित नोटिफिकेशन के अनुसार दोनों भर्तियों में कुल 8,400 पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. वहीं इन भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का आज यानी 21 जुलाई को आखिरी मौका है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वह बिना देरी किए आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
रिवाइज्ड वैकेंसी में बढ़ी पदों की संख्या&amp;nbsp;
आईबीपीएस की ओर से 20 जुलाई को जारी संशोधित वैकेंसी लिस्ट के अनुसार पीओ भर्ती में पदों की संख्या 6,715 से बढ़कर 7,365 कर दी गई है, यानी कुल 650 नए पद जोड़े गए हैं. वहीं स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती में 745 से बढ़ाकर 1035 पद कर दिए गए हैं. इस तरह दोनों भर्तियों में कुल 940 नई वैकेंसी बढ़ाई गई है.&amp;nbsp;
पीओ भर्ती में किस बैंक में कितनी वैकेंसी?&amp;nbsp;
संशोधित लिस्ट के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा में सबसे ज्यादा 1900 पद है. इसके बाद केनरा बैंक में 1500 पद, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 1100 पद, इंडियन बैंक में 650 पद, इंडियन ओवरसीज बैंक में 550 पद, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 500-500 पद, पंजाब नेशनल बैंक में 504 और पंजाब एंड सिंध बैंक में 161 पद हैं. यूके बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अभी तक अपनी रिक्तियां रिपोर्ट नहीं की है, इसलिए आगे भी वैकेंसी बढ़ने की संभावना बनी हुई है. इसके अलावा अगर कैटेगरी के आधार पर देखें तो आईबीपीएस पीओ भर्ती में सामान्य वर्ग के लिए 2936, ओबीसी के लिए 2,015, एससी के लिए 1,131, एसटी के लिए 562 और ईडब्ल्यूएस के लिए 721 पद निर्धारित किए गए हैं. पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी का आरक्षण इन्हीं व्यक्तियों में शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
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कौन कर सकता है आवेदन?
आईबीपीएस पीओ भर्ती के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी जरूरी है. 1 जुलाई 2026 के अनुसार उम्मीदवार की आयु 20 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया और अंतिम तिथि&amp;nbsp;
उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, पर्सनैलिटी टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा प्रारंभिक परीक्षा 22 और 23 अगस्त को आयोजित होगी, जबकि मुख्य परीक्षा 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है. आईबीपीएस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि आज यानी 21 जुलाई है. आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उम्मीदवार को ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे और आवेदन फीस भरनी होगी. &amp;nbsp;वहीं अंतिम समय में तकनीकी परेशानी से बचने के लिए अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Union Bank Recruitment 2026:  यूनियन बैंक में स्पेशलिस्ट ऑफिसर के 395 पदों पर भर्ती, मिलेगा 47 लाख तक का पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ Union Bank Recruitment 2026:&amp;nbsp; बैंकिंग सेक्टर में अधिकारी बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भर्ती निकाली है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भर्ती परियोजना 2026-27 के तहत स्पेशलिस्ट ऑफिसर, जनरल बैंकिंग ऑफिसर और डोमेन एक्सपर्ट ऑफिसर के कुल 395 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 जुलाई से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 10 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं. यह भर्ती नियमित आधार पर की जाएगी और चयनित उम्मीदवारों की पोस्टिंग बैंक की आवश्यकता के अनुसार देश भर में की जाएगी.&amp;nbsp;
किन पदों पर कितनी भर्ती होगी भर्ती&amp;nbsp;
इस भर्ती अभियान के तहत मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और डिप्टी जनरल मैनेजर स्तर के पद भरे जाएंगे. सबसे ज्यादा 163 पद मैनेजर के लिए, 153 पद सीनियर मैनेजर के लिए, 52 पद चीफ मैनेजर के लिए, 20 पद असिस्टेंट जनरल मैनेजर के लिए और 7 पद डिप्टी जनरल मैनेजर के लिए निर्धारित किए गए हैं.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए आवेदन, फीस और आयु सीमा&amp;nbsp;
एससी, एसटी और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 177 रुपये रखा गया है, जबकि दूसरी सभी कैटेगरी के अभ्यर्थियों को 1180 रुपये फीस देनी होगी. आयु सीमा भी पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है. अधिकांश पदों के लिए न्यूनतम आयु 22 वर्ष है, जबकि अधिकतम आयु 30 से 50 वर्ष तक रखी गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट भी मिलेगी.
सभी पदों पर क्या होगी चयन प्रक्रिया&amp;nbsp;
एमएमजीएस-2 और एमएमजीएस-3 स्तर के पदों पर उम्मीदवारों का चयन आवश्यकता पड़ने पर ऑनलाइन परीक्षा, इसके बाद ग्रुप डिस्कशन, पर्सनल इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाएगा. वहीं एसएमजीएस-4 से टीईजीएस-6 तक के वरिष्ठ पदों पर ग्रुप डिस्कशन, दूसरे मूल्यांकन और इंटरव्यू आयोजित किए जा सकते हैं. स्पेशलिस्ट ऑफिसर पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा में मुख्य रूप से संबंधित विषय का प्रोफेशन नॉलेज पूछा जाएगा, जबकि जनरल बैंकिंग ऑफिसर पदों के लिए रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टिट्यूड, इंग्लिश लैंग्वेज और प्रोफेशनल नॉलेज से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे. गलत उत्तर पर 0.25 अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी.&amp;nbsp;
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47 लाख रुपये तक का मिलेगा सालाना पैकेज&amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतन मिलेगा. मैनेजर स्तर पर शुरुआती वेतनमान 64,820 रुपये से शुरू होगा, जबकि डिप्टी जनरल मैनेजर पद तक वेतनमान 1,56,500 तक जाएगा. बैंक के अनुसार अलग-अलग पदों पर अनुमानित वार्षिक सीटीसी करीब 21 लाख रुपये से लेकर 47 लाख रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, मेडिकल सुविधा, लीव फेयर कंसेशन और दूसरे भत्तों का लाभ भी मिलेगा.&amp;nbsp;
प्रोबेशन और सर्विस बॉन्ड
चयनित &amp;nbsp;उम्मीदवारों को 2 वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूरी करनी होगी. साथ ही नियुक्ति के बाद 3 वर्ष का सर्विस बॉन्ड भी लागू रहेगा. अगर कोई उम्मीदवार तय अवधि पूरी होने से पहले नौकरी छोड़ता है, तो उस पद के अनुसार निर्धारित बॉन्ड राशि और लागू करों का पेमेंट करना होगा.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वकालत करने के लिए बेस्ट हैं देश के ये 5 लॉ कॉलेज, एडमिशन ले लिया तो करियर की हो जाएगी बल्ले बल्ले</title>
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        <description><![CDATA[ वकालत करने के लिए बेस्ट हैं देश के ये 5 लॉ कॉलेज, एडमिशन ले लिया तो करियर की हो जाएगी बल्ले बल्ले ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>UP Police Recruitment 2026: यूपी पुलिस में 81 हजार से ज्यादा पदों पर होगी भर्ती, कॉन्स्टेबल से लेकर एसआई तक मिलेंगे मौके</title>
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        <description><![CDATA[ UP Police Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में 81,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती आवेदन का ऐलान किया है. यह भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी. अलग-अलग पदों के लिए नोटिफिकेशन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे, जिनमें पदवार रिक्तियां, योग्यता, आयु सीमा, आवेदन तिथि और दूसरी जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी. उनका कहना है कि इस भर्ती अभियान से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा. आपको बता दें कि इस भर्ती प्रक्रिया के लिए अप्रैल महीने में भी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से ऐलान किया गया था.&amp;nbsp;
यूपी पुलिस भर्ती और पदों के लिए योग्यता&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पुलिस डिपार्टमेंट के कई पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. जिसमें कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर, जेल वार्डर, &amp;nbsp;रेडियो कैडर, कंप्यूटर ऑपरेटर क्लर्क के साथ अलग-अलग तकनीकी और मिनिस्ट्रियल पद शामिल है. वहीं इस भर्ती में शामिल पदों के अनुसार शिक्षण की योग्यता भी अलग-अलग तय की जाएगी कांस्टेबल पदों के लिए 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे जबकि सब इंस्पेक्टर पदों के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य होगा कुछ तकनीक और कंप्यूटर आधारित पदों के लिए 12वीं के साथ-साथ कंप्यूटर से संबंधित प्रमाण पत्र या स्पेशल योग्यता भी मांगी जा सकती है उम्मीदवारों को आवेदन सलाह दी गई है क्या आवेदन करने से पहले संबंधित पद का आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर देखें.&amp;nbsp;
क्या रहेगी चयन प्रक्रिया?
यूपी पुलिस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत कंप्यूटर आधारित परीक्षा से होगी. परीक्षा में जनरल नॉलेज, जनरल हिंदी, रीजनिंग, मानसिक योग्यता, संख्यात्मक क्षमता और करंट अफेयर से जुड़े प्रश्न पूछेंगे. सब इंस्पेक्टर के पदों के लिए भर्ती को कानून और संविधान से जुड़े प्रश्नों का भी सामना करना होगा. वहीं लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा, जिनमें लंबाई, सीना और दूसरे फिजिकल मानकों की जांच की जाएगी. इसके बाद अभ्यर्थी को फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट देना होगा, जिसमें दौड़ सहित निर्धारित फिजिकल दक्षता का परीक्षण किया जाएगा. अंतिम चरण में दस्तावेज डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण के बाद योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
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ऑनलाइन होगी आवेदन प्रक्रिया
इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. आवेदन शुरू होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले यूपीपीआरपीबी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर संबंधित भर्ती का नोटिफिकेशन पढ़ सकेंगे. इसके बाद मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करना होगा. कई भर्तियों में वन टाइम रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी. रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवारों को आवेदन फाॅर्म में व्यक्तिगत, शैक्षिक और दूसरी जरूरी जानकारी भरनी होगी. निर्धारित प्रारूप में फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद कैटेगरी के अनुसार आवेदन फीस जमा करनी होगी. लास्ट में फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी डिटेल की जांच करके प्रिंट निकाल सकते हैं.&amp;nbsp;
उम्मीदवारों के लिए जरूरी सलाह&amp;nbsp;
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड सभी पदों के लिए अलग-अलग चरणों में नोटिफिकेशन जारी करेगा. इसलिए उम्मीदवारों को नियमित रूप से बोर्ड के ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. भर्ती से जुड़ी रिक्तियों का पदवार विवरण, आवेदन की डेट, परीक्षा कार्यक्रम और जरूरी निर्देश आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद उपलब्ध कराए जाएंगे.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Police, Recruitment, 2026:, यूपी, पुलिस, में, हजार, से, ज्यादा, पदों, पर, होगी, भर्ती, कॉन्स्टेबल, से, लेकर, एसआई, तक, मिलेंगे, मौके</media:keywords>
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        <title>NEET UG Result 2026 Controversy: सवालों के घेरे में NEET UG का रिजल्ट, कहीं OMR शीट बदली तो कहीं आंसर&amp;की से मैच नहीं कर रहा स्कोर!</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026 Controversy: NEET UG 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट जारी होने के बाद एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) विवादों में घिर गई है. सोशल मीडिया पर कई छात्र दावा कर रहे हैं कि उनके ऑफिशियल स्कोरकार्ड में दिख रहे नंबर उनकी OMR शीट और फाइनल आंसर-की से मैच नहीं हो रही हैं. किसी ने OMR शीट बदलने का आरोप लगाया है तो किसी का कहना है कि कुछ ही घंटों में उसके स्कोर बदल गए. इन आरोपों के बीच NTA ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिन मामलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनकी जांच की जा चुकी है और एजेंसी के रिकॉर्ड में मौजूद मूल OMR शीट सही है.
NTA के अनुसार, संबंधित उम्मीदवारों को OMR रिस्पॉन्स-की चैलेंज विंडो के दौरान उनकी असली OMR शीट रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजी जा चुकी थी. एजेंसी का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ OMR शीट्स डिजिटल रूप से बदली गईं या AI की मदद से तैयार की गई हैं. NTA ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में घोषित परिणाम सही हैं और फर्जी OMR शीट बनाना, उसमें छेड़छाड़ करना या उसे सोशल मीडिया पर साझा करना Public Examinations Act, 2024 के तहत दंडनीय अपराध है
OMR शीट बदलने का आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र के वाडवणी की छात्रा ज्ञानेश्वरी पवार ने आरोप लगाया है कि NTA की वेबसाइट पर अपलोड की गई OMR शीट उनकी नहीं है. उनके पिता अनिल कुमार पवार का कहना है कि उनके पास परीक्षा के दौरान इस्तेमाल किया गया मूल प्रश्नपत्र मौजूद है, जिससे उन्हें लगता है कि वेबसाइट पर अपलोड की गई OMR शीट अलग है. परिवार का दावा है कि उन्होंने NTA की आधिकारिक आंसर-की से अपने उत्तर मिलाए थे, जिसके आधार पर करीब 720 में से 702 अंक बनने चाहिए थे, लेकिन ऑफिशियल स्कोरकार्ड में केवल 87 अंक दिखाई दिए.&amp;nbsp;
कानपुर की छात्रा का दावा, दो घंटे में बदल गए नंबर
कानपुर की छात्रा आर्या सिंह ने भी रिजल्ट में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पहले OMR शीट में प्रश्नों का क्रम गलत था, जिसकी शिकायत उन्होंने NTA से की थी. बाद में NTA ने संशोधित OMR उपलब्ध कराई, लेकिन स्कोर वही रहा. आर्या के अनुसार 16 जुलाई की रात करीब 12 बजे जब उन्होंने रिजल्ट देखा तो 540 अंक दिखाई दे रहे थे, लेकिन करीब दो घंटे बाद दोबारा वेबसाइट खोलने पर स्कोर घटकर केवल 167 अंक रह गया फिलहाल वेबसाइट पर 167 अंक ही दिखाई दे रहे हैं. आर्या ने इस संबंध में सभी डॉक्यूमेंट्स के साथ NTA और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ईमेल भेजकर जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सही कार्रवाई नहीं हुई तो वह राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक अपनी शिकायत पहुंचाएंगी.
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NTA ने आरोपों पर दिया जवाब
सोशल मीडिया पर OMR शीट और स्कोर को लेकर उठ रहे दावों के बीच NTA ने भी अपना पक्ष रखा है. एजेंसी का कहना है कि जिन उम्मीदवारों के मामले सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, उनके रिकॉर्ड की जांच की गई है और NTA के पास मौजूद मूल OMR शीट पूरी तरह सही है. एजेंसी के अनुसार, OMR रिस्पॉन्स-की चैलेंज विंडो के दौरान सभी संबंधित उम्मीदवारों को उनकी असली OMR शीट रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजी जा चुकी थी. NTA ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कुछ OMR शीट्स में डिजिटल छेड़छाड़ की गई है.

Regarding claims by Ms. Arya Singh (App No. 260410434102) about her NEET (UG) 2026 OMR answer sheet:NTA has verified the record.The genuine OMR of the candidate is with NTA. It was also emailed to her at the registered e-mail address during the OMR Response Key challenge&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) July 20, 2026



NTA ने क्या कहा?
एजेंसी के मुताबिक, आर्या सिंह की वायरल OMR शीट में इनविजिलेटर के हस्ताक्षर का समय बदला गया था, जबकि लक्ष्य सिंह के मामले में डिजिटल तरीके से अतिरिक्त उत्तर भरे गए थे. वहीं अभय यादव के दावों को भी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने वाला बताया गया. NTA ने साफ किया कि आर्या सिंह के 167, लक्ष्य सिंह के 116 और अभय यादव के 164 अंक सही हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इनमें कोई गड़बड़ी नहीं है. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि फर्जी OMR शीट बनाना, उसमें छेड़छाड़ करना या उसे सोशल मीडिया पर फैलाना Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत दंडनीय अपराध है और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UGC NET June 2026 Answer Key: NTA कभी भी जारी कर सकता है UGC NET जून परीक्षा की आंसर&amp;की, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET June 2026 Answer Key: UGC NET जून 2026 परीक्षा दिए हुए उम्मीदवारों का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है. परीक्षा खत्म हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अभी तक प्रोविजनल आंसर-की और रिस्पॉन्स शीट जारी नहीं की है. हर साल परीक्षा के कुछ दिनों के अंदर आंसर-की जारी कर दी जाती है, लेकिन इस बार देरी होने से अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है.
उम्मीदवार लगातार आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देख रहे हैं और जल्द आंसर-की जारी होने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि NTA ने अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक NTA कभी भी UGC NET जून परीक्षा की आंसर-की जारी कर सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसे कैसे डाउनलोड करें.
क्यों हो रही है UGC NET जून 2026 की आंसर-की में देरी?
UGC NET जून 2026 परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की अब तक जारी नहीं हुई है. आमतौर पर परीक्षा खत्म होने के 7 से 10 दिन के भीतर आंसर-की जारी कर दी जाती है, लेकिन इस बार 15 दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इसे जारी नहीं किया गया. कुछ दिन पहले हरियाणा के रोहतक के छात्र नेता दीपक धनखड़ और अंकित सिंह फोगाट ने दावा किया था कि UGC NET के सोशियोलॉजी विषय का पेपर परीक्षा से पहले उनके पास पहुंच गया था और बाद में वह सर्कुलेट भी हुआ. इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे. हालांकि NTA ने इन पेपर लीक के दावों को खारिज कर दिया था.
रिपोर्ट्स में जांच की बात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेपर लीक के दावे के बाद सोशियोलॉजी विषय के प्रश्नपत्र को लेकर कई उम्मीदवारों ने स्पेलिंग मिस्टेक, गलत अनुवाद और कुछ प्रश्नों में गलतियों की शिकायत की है. शिक्षा मंत्रालय ने इस पूरे मामले की जांच करने के लिए NTA से कहा है. माना जा रहा है कि इसी वजह से प्रोविजनल आंसर-की जारी होने में देरी हो रही है. हालांकि NTA की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
87 विषयों के लिए हुई थी परीक्षा
UGC NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 जून से 30 जून 2026 के बीच देशभर में 87 विषयों के लिए दो शिफ्ट में किया गया था. पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित हुई. वहीं पंजाब के जालंधर के एक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा रद्द होने के कारण वहां के उम्मीदवारों के लिए 5 जुलाई 2026 को दोबारा परीक्षा कराई गई थी.
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आंसर-की जारी होने के बाद क्या होगा?
प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान कर सकेंगे और यह अनुमान लगा पाएंगे कि परीक्षा में उनका प्रदर्शन कैसा रहा. अगर किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपत्ति होती है, तो उम्मीदवार तय समय सीमा के अंदर प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे. विषय विशेषज्ञों की जांच के बाद फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी और उसी के आधार पर रिजल्ट तैयार होगा.
UGC NET जून 2026 Answer Key ऐसे करें डाउनलोड
1. आंसर-की जारी होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले NTA की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.&amp;nbsp;
2. होमपेज पर UGC NET June 2026 Answer Key/Challenge Link पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
3. अब अपना एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड या जन्म तिथि और सिक्योरिटी पिन दर्ज करके लॉगिन करें.&amp;nbsp;
4. लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर आपकी रिस्पॉन्स शीट और प्रोविजनल आंसर-की दिखाई देगी.&amp;nbsp;
5.आंसर-की डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, June, 2026, Answer, Key:, NTA, कभी, भी, जारी, कर, सकता, है, UGC, NET, जून, परीक्षा, की, आंसर-की, ऐसे, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026: रिक्शा चालक के पोते ने रचा इतिहास, बिहार के छोटे से गांव में पहली बार किसी ने NEET UG किया क्रैक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-ug-2026-रिक्शा-चालक-के-पोते-ने-रचा-इतिहास-बिहार-के-छोटे-से-गांव-में-पहली-बार-किसी-ने-neet-ug-किया-क्रैक</link>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 : अक्सर कहा जाता है कि मेहनत और लगन के सामने परिस्थितियां कभी बड़ी नहीं होती. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक छोटे से गांव के छात्र ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. जिस परिवार की पहचान कभी रिक्शा चलाकर घर चलाने से होती थी, आज उसी परिवार का बेटा अपनी मेहनत के दम पर पूरे गांव का नाम रोशन कर रहा है.
मुजफ्फरपुर के रत्नौली गांव के रहने वाले आदित्य ने NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 946 और कैटेगरी रैंक 295 हासिल की है और वह अपने गांव से NEET UG क्वालिफाई करने वाले पहले छात्र बन गए हैं.&amp;nbsp;
रिक्शा चालक के पोते ने रचा इतिहास&amp;nbsp;
आदित्य बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड स्थित रत्नौली गांव के रहने वाले हैं. उनके दादा सौखी साहनी पहले रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे. वहीं उनके पिता हरेंद्र साहनी एक निजी नौकरी करके परिवार का खर्च उठाते हैं. सीमित संसाधनों के बाद भी आदित्य ने पढ़ाई नहीं छोड़ी और अपनी मेहनत के दम पर देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET UG में सफलता हासिल की.&amp;nbsp;
आदित्य ने अपनी पढ़ाई कहां से &amp;nbsp;शुरू की
आदित्य ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की, उन्होंने बिहार बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा पास की और इसके बाद RDS कॉलेज से इंटरमीडिएट में 87 प्रतिशत नंबर हासिल किए. इसके बाद उन्होंने NEET UG की तैयारी की और पहले ही प्रयास में AIR 946 और कैटेगरी रैंक 295 प्राप्त कर अपने गांव का नाम राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया. आदित्य की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही. उनके गांव रत्नौली के लोगों के लिए भी यह गर्व का विषय बन गया है. गांव से पहली बार किसी छात्र ने NEET UG जैसी प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की है.
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मुजफ्फरपुर के कई छात्रों ने भी किया शानदार प्रदर्शन
आदित्य के अलावा मुजफ्फरपुर जिले के कई अन्य छात्रों ने भी NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है. वीरपुर (कांटी) के सुमित सर्राफ ने AIR 6013 हासिल की, जबकि धरफरी गांव (पारू) की तन्नू ने 587 अंक प्राप्त किए. &amp;nbsp;चंपकड़ी (सरैया) के आकाश कुमार ने 608 अंक, AIR 7637 और EWS रैंक 821 हासिल की. वहीं बिसुनपुर पट्टी (साहेबगंज) के दिव्य चेतन ने 633 अंक, AIR 3135 और EWS रैंक 284 प्राप्त किए. बैरिया के आर्य प्रकाश ने 646 अंक, AIR 1701 और कैटेगरी रैंक 934 हासिल की, जबकि मीनापुर के कौस्तुभ ने AIR 11014 के साथ परीक्षा पास कर जिले का नाम रोशन किया.&amp;nbsp;
राष्ट्रीय मेरिट लिस्ट में भी बिहार का दमदार प्रदर्शन
NEET UG 2026 में केवल मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया. रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय मेरिट लिस्ट के टॉप-100 में बिहार के चार छात्रों ने जगह बनाई. &amp;nbsp;नवादा के आयुष भलोतिया ने AIR 4, रिया रंजन ने AIR 6, रवि कांत दिवाकर ने AIR 55 और बेगूसराय के आदित्य कुमार ने AIR 73 हासिल की.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>H&amp;1B Visa Fee Hike : H&amp;1B वीजा की फीस कई गुना बढ़ी, भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ?</title>
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        <description><![CDATA[ H-1B Visa Fee Hike : अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए हालात पहले की तुलना में काफी मुश्किल होते दिखाई दे रहे हैं. H-1B वीजा से जुड़े नियमों में हुए बड़े बदलावों का असर अब साफ नजर आने लगा है. वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी, आवेदन प्रक्रिया में बदलाव और रिन्यूअल से जुड़ी मुश्किलों ने कई लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
इसका सबसे बड़ा संकेत H-1B वीजा के लिए आने वाले आवेदनों में आई बड़ी गिरावट है. कई भारतीय प्रोफेशनल्स को वीजा इंटरव्यू के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोगों का वीजा रिन्यू नहीं होने की वजह से नौकरी भी चली गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि H-1B वीजा की फीस बढ़ने से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ.&amp;nbsp;
H-1B वीजा की फीस कई गुना बढ़ी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. सबसे बड़ा बदलाव वीजा फीस में किया गया है. पहले H-1B वीजा की फीस 1,000 डॉलर (करीब 85 हजार रुपये) थी, जिसे बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) कर दिया गया है. ऐसे में फीस में लगभग 100 गुना बढ़ोतरी की गई है.
फीस बढ़ने के बाद 1.32 लाख कम हुए आवेदन
वीजा फीस बढ़ने का असर सीधे H-1B आवेदन संख्या पर देखने को मिला है. साल 2027 के लिए H-1B वीजा लॉटरी में केवल 2,11,600 भारतीय प्रोफेशनल्स ने आवेदन किया है. जबकि 2026 के लिए यह संख्या 343981 थी, इस बार करीब 1.32 लाख आवेदन कम आए हैं.&amp;nbsp;
H-1B वीजा लॉटरी के नियम भी बदले
अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने 15 जुलाई को बताया कि अब H-1B वीजा लॉटरी के लिए नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसके साथ ही इस साल से लॉटरी प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. पहले H-1B वीजा के लिए साल में दो बार लॉटरी निकाली जाती थी, लेकिन अब केवल एक बार ही लॉटरी होगी.&amp;nbsp;
जुलाई में होता है H-1B वीजा का रिन्यूअल
अमेरिका में H-1B वीजा का रिन्यूअल जुलाई महीने में होता है. इस बार कई भारतीय प्रोफेशनल्स अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. वीजा रिन्यूअल में आ रही दिक्कतों की वजह से कई लोगों की नौकरी और करियर पर असर पड़ रहा है.&amp;nbsp;
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ?
H-1B वीजा नियमों में हुए बदलावों के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाकर काम करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. सबसे बड़ी वजह H-1B वीजा फीस का 1,000 डॉलर (करीब 85 हजार रुपये) से बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) किया जाना है. इसका असर आवेदन संख्या पर भी दिखा है. इसके अलावा अब H-1B वीजा के लिए साल में सिर्फ एक बार लॉटरी होगी, जबकि पहले दो बार मौका मिलता था. कई भारतीय प्रोफेशनल्स को वीजा इंटरव्यू के लिए 10 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं कुछ लोगों का वीजा रिन्यू नहीं होने से उनकी नौकरी भी चली गई है. ऐसे में बढ़ी हुई लागत, सख्त नियम और लंबी प्रक्रिया ने भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी हासिल करना और वहां टिके रहना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है.&amp;nbsp;
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H-1B वीजा पाने वालों में सबसे ज्यादा भारतीय
पिछले पांच सालों के आंकड़ों के अनुसार, H-1B वीजा हासिल करने वालों में हर 10 में से करीब 7 लोग भारतीय रहे हैं. साल 2021 में भारतीयों की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत थी, जो 2022 और 2023 में 73 प्रतिशत रही. इसके बाद 2024 में यह घटकर 71 प्रतिशत और 2025 में 70 प्रतिशत हो गई. हालांकि प्रतिशत में हल्की गिरावट आई है, लेकिन H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय अब भी सबसे बड़ा समूह बने हुए हैं.&amp;nbsp;
किन कंपनियों ने सबसे ज्यादा H-1B वीजा हासिल किए
आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा हासिल करने के मामले में बड़ी टेक कंपनियां सबसे आगे हैं. सबसे ज्यादा 14,532 H-1B वीजा अमेजन के हिस्से आए. इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को 5,293, माइक्रोसॉफ्ट को 4,863, मेटा को 4,740, एपल को 4,610 और गूगल को 4,509 H-1B वीजा मिले. &amp;nbsp;अमेरिकी और वैश्विक टेक कंपनियां कुशल विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय आईटी और टेक टैलेंट, को नियुक्त करने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET OMR विवाद&amp; NTA जांच में AI से बनाई गई फर्जी शीट का खुलासा, छेड़छाड़ के दावे खारिज</title>
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        <description><![CDATA[ NEET OMR Sheet Controversy: री नीट यूजी 2026 के रिजल्ट के बाद सामने आए ओएमआर शीट विवाद की एनटीए ने जांच पूरी कर दी है. एजेंसी का कहना है कि जिन मामलों में उम्मीदवारों में ओएमआर शीट में गड़बड़ी और अंकों में बड़े अंतर का आरोप लगाया था. जांच में उनमें से एक ओएमआर सीट एआई की मदद से तैयार की गई फर्जी शीट निकली, जबकि दूसरे मामले में दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने की पुष्टि हुई है. इसके बाद एनटीए ने साफ किया की परीक्षा प्रक्रिया को बदनाम करने के लिए फर्जी या एआई से तैयार दस्तावेज जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?&amp;nbsp;
रिजल्ट जारी होने के बाद महाराष्ट्र के पुणे में एक छात्र ने दावा किया कि उसे दो अलग-अलग ओएमआर शीट मिली है. छात्र के अनुसार एक ओएमआर शीट उसने 13 जुलाई की रात एनटीए की वेबसाइट से डाउनलोड की थी, जबकि दूसरी 15 जुलाई को ईमेल के माध्यम से मिली. दोनों शीट पर उसका नाम था, लेकिन दोनों में दर्ज उत्तर अलग-अलग थे. छात्र के पिता का दावा था कि पहले ओएमआर शीट को आधिकारिक आंसर-की से मिलाने पर उनके बेटे के 707 अंक बन रहे थे, जबकि घोषित परिणाम में उसे केवल 217 अंक मिले. इस तरह महाराष्ट्र के बीड जिले के एक दूसरे छात्र ने आरोप लगाया कि उसे आधिकारिक स्कोरकार्ड में 95 अंक दिए गए, जबकि अंतिम आंसर-की के आधार पर उसके 522 अंक बनने चाहिए थे.&amp;nbsp;
जांच में क्या आया सामने?
एनटीए ने दोनों मामलों की जांच के बाद कहा कि पुणे की छात्र की ओर से &amp;zwnj; प्रस्तुत ओएमआर शीट पूरी तरह एआई की मदद से तैयार की गई थी. वहीं बीड के छात्र के मामले में एजेंसी ने पाया कि प्रस्तुत डॉक्यूमेंट के साथ छेड़छाड़ की गई थी. एजेंसी के अनुसार जांच में सामने आया कि डॉक्यूमेंट मूल ओएमआर शीट से मेल नहीं खाते थे.&amp;nbsp;
एनटीए ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी&amp;nbsp;
जांच पूरी होने के बाद एनटीए ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि एजेंसी सभी शिकायतों की लगातार निगरानी और जांच कर रही है. एनटीए ने छात्रों और पेरेंट्स से केवल मूल ओएमआर शीट ही जांच के लिए प्रस्तुत करने की अपील की है. एजेंसी ने कहा कि अगर कोई शिकायत फर्जी या एआई से तैयार ओएमआर शीट के आधार पर की जाती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती हैं. &amp;nbsp;इस बात के बीच कांग्रेस ने भी एक उम्मीदवार की मार्कशीट में गठित गड़बड़ी का आरोप लगाया है. पार्टी ने दावा किया है कि एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट किसी दूसरे उम्मीदवार की शीट से बदल दी गई और इस मामले को लेकर केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाए थे.&amp;nbsp;
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कई राज्यों से सामने आए थे शिकायतों के मामले&amp;nbsp;
ओएमआर विवाद केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, कर्नाटक सहित कुछ दूसरे राज्यों से भी उम्मीदवारों ने आरोप लगाए कि उनके अंतिम परिणाम में दिए गए अंक अंतिम आंसर की के आधार पर निकाले गए अंकों से मेल नहीं खाते हैं. कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उनके अंक कम होने से उनकी ऑल इंडिया रैंक में भी बड़ा बदलाव आया. प्रभावित छात्रों ने एनटीए से स्पष्टीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NMC का बड़ा फैसला, मेडिकल कॉलेज अब खुद करेंगे फैकल्टी की नियुक्ति और प्रमोशन</title>
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        <description><![CDATA[ NMC New Rules: देशभर के मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की नियुक्ति और प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर एनएमसी ने बड़ा बदलाव किया है. अब मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और दूसरे नियुक्ति प्राधिकरण अपने यहां फैकल्टी की नियुक्ति, पदोन्नति और पदनाम से जुड़े फैसले खुद करेंगे. एनएमसी अब सामान्य मामलों में पात्रता प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा और न ही ऐसे मामलों में नियमित रूप से हस्तक्षेप करेगा. एनएमसी के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और फैकल्टी सदस्यों और एनबीईएमएस से मान्यता प्राप्त अस्पताल की ओर से पात्रता से जुड़े ऐसे मामले भेजे जा रहे थे, जिनका समाधान पहले से लागू नियमों के तहत संस्थान खुद कर सकते थे.&amp;nbsp;
मेडिकल कॉलेज को सौंपी गई ज्यादा जिम्मेदारी&amp;nbsp;
एनएमसी ने स्पष्ट किया कि मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स क्वालिफिकेशन ऑफ फैकल्टी रेगुलेशन 2025 में फैकल्टी पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, शिक्षण अनुभव, रिसर्च पब्लिकेशन और प्रशिक्षण से जुड़े सभी मानदंड पहले से तय है. ऐसे में किसी उम्मीदवार की नियुक्ति प्रमोशन या पदनाम के लिए पात्रता करने की जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और नियुक्ति प्राधिकरण की होगी. इसी वजह से अब पीजीएमईबी उन मामलों पर विचार नहीं करेगी, जिनका निर्णय सीधे इन नियमों के आधार पर किया जा सकता है.
किन मामलों में एनएमसी करेगा हस्तक्षेप?&amp;nbsp;
एनएमसी के अनुसार अब केवल ऐसे मामलों पर विचार किया जाएगा, जहां नियमों की व्याख्या को लेकर अस्पष्टता हो, योग्यता की समानता का प्रश्न हो, ट्रांजिशन से जुड़े प्रावधान हो या किसी दूसरे नियामकीय नियम साथ समन्वय की जरूरत हो. ऐसे मामलों को संबंधित संस्थान के डीन, डायरेक्टर, प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार के माध्यम से ही भेजा जा सकेगा. आवेदन के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि एमआई क्यूएफआर-2025 के किस प्रावधान को लेकर भ्रम है और उसके साथ उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी देने होंगे.&amp;nbsp;
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25,000 फीस के साथ भेजना होगा मामला&amp;nbsp;
ऐसे विशेष मामलों में एनएमसी को भेजे जाने वाले प्रत्येक आवेदन के साथ 25,000 प्रोसेसिंग फीस और उस पर लागू 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करना होगा. यह राशि वापस नहीं की जाएगी. &amp;nbsp;एनएमसी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति सीधे आयोग को आवेदन भेजता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही उसे पर कोई कार्रवाई होगी. वहीं अगर कोई मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी किसी वास्तविक मामले को आवेदन मिलने के 60 दिन बाद भी एनएमसी को नहीं भेजता है, तो संबंधित उम्मीदवार सीधे पीजीएमआईबी के पास आवेदन कर सकता है. इसके लिए उम्मीदवार को एक हस्ताक्षरित घोषणा, संस्थान की ओर से निर्धारित समय में कार्रवाई न करने के प्रमाण, सभी जरूरी डॉक्यूमेंट और 25,000 के साथ जीएसटी जमा करना होगा. ऐसी स्थिति में अगर संस्थान ने पहले फीस ली थी, तो उसे उम्मीदवार को वापस करनी होगी.&amp;nbsp;
कब से लागू होंगे नियम?&amp;nbsp;
एनएमसी ने बताया कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. हालांकि 16 जुलाई से पहले प्राप्त आवेदन पुराने नियमों के तहत निपटाए जाएंगे, जबकि उसके बाद प्राप्त सभी आवेदन नई प्रक्रिया के अनुसार ही देखे जाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Rising Education Cost in India: स्कूल फीस ही नहीं, कोचिंग से कॉलेज तक... पढ़ाई पर बढ़ता खर्च बन रहा परिवारों के लिए आर्थिक बोझ</title>
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        <description><![CDATA[ Rising Education Cost in India: भारत में लंबे समय से माना जाता रहा है कि बच्चों की शिक्षा पर किया गया खर्च सबसे अहम निवेश होता है. परिवार अपनी दूसरी जरूरतों में कटौती कर सकते हैं, लेकिन बच्चों पढ़ाई पर समझौता नहीं करना चाहते हैं. हालांकि अब स्थिति यह है कि केवल स्कूल फीस भरना ही पर्याप्त नहीं रह गया, ट्यूशन, कोचिंग, ट्रांसपोर्ट, यूनिफॉर्म, किताबें, डिजिटल डिवाइस, एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज और आगे चलकर कॉलेज फीस जैसी कई जरूरतों ने बच्चों की शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ा दिया है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते वित्तीय योजनाओं नहीं बनाने वाले परिवारों पर भविष्य में बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है.&amp;nbsp;
सरकारी और प्राइवेट स्कूल के खर्चे में बड़ा अंतर&amp;nbsp;
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के Comprehensive Modular Survey on Education 2025 के अनुसार सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र परिवार का औसत वार्षिक खर्च करीब 2,863 रुपये है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में यही खर्च बढ़कर 25,002 तक पहुंच जाता है. रिपोर्ट के अनुसार स्कूल फीस के अलावा किताबें, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म और परिवहन पर भी परिवारों का बड़ा खर्च होता है. शहरी क्षेत्र में रहने वाले परिवार ग्रामीण इलाकों की तुलना में शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं.&amp;nbsp;
कोचिंग का बढ़ता ट्रेंड बढ़ा रहा खर्च&amp;nbsp;
आज के समय में स्कूल की पढ़ाई के साथ निजी कोचिंग भी बड़ी जरूर बनती जा रही है. सर्वे के अनुसार चार में से एक से ज्यादा छात्र स्कूल के अलावा अलग से कोचिंग ले रहे हैं. हायर सेकेंडरी स्तर पर शहरी परिवार एक छात्र की कोचिंग पर औसतन 9,950 रुपये सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह खर्च करीब 4,548 रुपये है. चूंकी अधिकांश छात्र अपनी पढ़ाई के लिए परिवार पर ही निर्भर रहते हैं, इसलिए शिक्षा का बढ़ता खर्च अब सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर रहा है.&amp;nbsp;
सिर्फ फीस नहीं कई और खर्च भी जोड़ते हैं बोझ&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स का कहना है कि शिक्षा की वास्तविक लागत केवल स्कूल फीस तक सीमित नहीं है. स्कूलों में समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों, डेवलपमेंट फीस, स्पोर्ट्स और दूसरे कार्यक्रमों के नाम पर एक्स्ट्रा शुल्क भी देना पड़ता है. इसके अलावा कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए लैपटॉप, टैबलेट, इंटरनेट, ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म, प्रोफेशनल कोर्स, स्किल डेवलपमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी लगातार खर्च कर रहे हैं. बदलती तकनीक और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए इन खर्चों को वैकल्पिक नहीं, बल्कि जरूरी माना जा रहा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;ये भी पढ़ें-IIT Transfer Rules: क्या मेडिकल आधार पर IIT बदल सकते हैं छात्र? सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला, AIIMS करेगा जांच
शिक्षा की महंगाई सामान्य महंगाई से अलग&amp;nbsp;
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि कई अभिभावक यह मानकर चलते हैं कि शिक्षा का खर्चा सामान्य महंगाई की दर से ही बढ़ेगा, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है. उनके अनुसार ट्यूशन फीस के अलावा कोचिंग, हॉस्टल, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल उपकरण और प्रोफेशनल कोर्स जैसे खर्च तेजी से बढ़ते हैं. ऐसे में केवल सामान्य महंगाई को आधार पर बनाकर भविष्य की योजना बनाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता. उदाहरण के तौर पर अगर किसी प्रोफेशनल कोर्स की वर्तमान लातग 20 लाख रुपये है, तो आने वाले वर्षों में शिक्षा लागत बढ़ने के साथ यही कोर्स से कई गुना महंगा हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स अलग-अलग संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वित्तीय योजना बनाने की सलाह देते हैं.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक के स्कूल का क्या नाम है, यहां कैसे मिलता है एडमिशन?</title>
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        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk Hunger Strike: देशभर में इन दिनों सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक चर्चा में हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में वह बीते 22 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं. एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था. सोनम वांगचुक की इस भूख हड़ताल के बीच लोग उनके शिक्षा मॉडल और उस स्कूल के बारे में भी जानना चाहते हैं, जिसे उन्होंने लद्दाख में शुरू करने में जरूरी भूमिका निभाई थी. ऐसे में आइए जानते हैं कि सोनम वांगचुक के स्कूल का क्या नाम है और यहां एडमिशन कैसे मिलता है.&amp;nbsp;
सोनम वांगचुक के स्कूल का क्या नाम है ?
सोनम वांगचुक के शिक्षा संस्थान का नाम SECMOL (Students Educational and Cultural Movement of Ladakh) है. यह लद्दाख के फेय (Phey) गांव में स्थित है. इसकी शुरुआत 1988 में लद्दाख के कुछ कॉलेज छात्रों ने मिलकर की थी, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल थे. यह संस्थान पारंपरिक स्कूलों से बिल्कुल अलग तरीके से शिक्षा देता है और व्यावहारिक सीखने पर ज्यादा जोर देता है.
यहां क्या पढ़ाया जाता है?
SECMOL में सामान्य स्कूलों की तरह केवल किताबों पर आधारित पढ़ाई नहीं होती है. यहां छात्रों को प्रैक्टिकल साइंस, सामाजिक मुद्दों की समझ, पब्लिक स्पीकिंग, बागवानी, पशुओं और पेड़ों की देखभाल, लद्दाखी संस्कृति, लोकगीत और पारंपरिक एक्टिविटी से जुड़ी कई चीजें सिखाई जाती हैं. यहां का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि छात्रों में लाइफ से जुड़ी स्किल्स और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना है.&amp;nbsp;
स्कूल की खासियत क्या है?
इस संस्थान का कैंपस करीब 20 एकड़ में फैला हुआ है और पूरा परिसर सोलर एनर्जी से संचालित होता है. यहां कैंपस की कई जिम्मेदारियां खुद छात्र संभालते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें रोजाना अलग-अलग काम दिए जाते हैं.&amp;nbsp;
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यहां एडमिशन कैसे मिलता है?
स्कूल की वेबसाइट के अनुसार, यहां 10वीं में फेल, ड्रॉपआउट या 10वीं पास करने के बाद पढ़ाई में कुछ साल का गैप रखने वाले छात्र एडमिशन ले सकते हैं. हालांकि आवेदन करने वाले छात्र को लद्दाखी भाषा आनी जरूरी होती है. दिव्यांग छात्र, अनाथ बच्चे और अकेली मां की संतान जैसे आवेदकों को विशेष प्राथमिकता भी दी जाती है. जरूरतमंद छात्रों के लिए स्पॉन्सरशिप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.&amp;nbsp;
पढ़ाई का खर्च कितना है?
SECMOL में पढ़ाई के लिए कोई ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है. छात्रों से सिर्फ खाने के लिए हर महीने 2,000 रुपये लिए जाते हैं. इसके अलावा रहने, पढ़ाई और अन्य सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं. बदले में छात्रों को कैंपस के रोजमर्रा के कामों और जिम्मेदारियों में एक्टिव भागीदारी निभानी होती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET result 2026: नीट के बाद कितने नंबर पर मिलेगा कौन सा कॉलेज, 700+, 650+, 600+ स्कोर वाले स्टूडेंट्स यहां देखें</title>
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        <description><![CDATA[ NEET result 2026: री-नीट 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों के मन में बड़ा सवाल यही है कि उनके स्कोर पर सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की कितनी संभावना है. हर साल की तरह इस बार भी एमबीबीएस सीटों के लिए बड़ा कंपटीशन देखने को मिल रहा है. ऐसे में 550, 600, 650 से 700 अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि उनके लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की कितनी संभावना बनती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट पास करने के बाद कितने नंबर पर कौन सा कॉलेज मिलेगा.
&amp;nbsp;700+ अंक वालों के लिए क्या संभावना
नीट यूजी में 700 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में माने जाते हैं. इस स्कोर में प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज और टॉप इंस्टीट्यूट में एडमिशन की संभावना ज्यादा रहती है. ऐसे उम्मीदवारों को एम्स नई दिल्ली, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, वीएमएमसी, जेआईपीएमईआर पुडुचेरी और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट में एडमिशन का मौका मिल सकता है.&amp;nbsp;
650+ अंक वालों के लिए मेडिकल कॉलेज&amp;nbsp;
650 से 699 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार काफी मजबूत स्थिति में माने जाते हैं. इस स्कोर पर कई प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ कुछ नए एम्स कैंपस में भी एडमिशन मिलने की संभावना रहती है. ऑल इंडिया कोटा के तहत भी ऐसे उम्मीदवारों के पास अच्छी संभावना रहती है.&amp;nbsp;
600+ अंक वालों के लिए कॉलेज&amp;nbsp;
600+ अंक के आसपास स्कोर करने वाले छात्रों के लिए भी सरकारी एमबीबीएस कॉलेज के दरवाजे खुले रहते हैं. राज्य कोटा के तहत कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिलने की संभावना रहती है. हालांकि टॉप एम्स या सबसे ज्यादा कंपटीशन वाले कॉलेजों में एडमिशन मुश्किल हो सकता है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए स्कोर पर अवसर और बेहतर हो सकते हैं&amp;nbsp;
550+ अंक वालों के लिए कॉलेज
550+ अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज की संभावना है. पूरी तरह राज्य कैटेगरी और काउंसलिंग पर निर्भर करती है. कम कट ऑफ वाले राज्यों में राज्य कोटा के जरिए सीट मिलने के अवसर बन सकते हैं, जबकि ज्यादा कंपटीशन वाले राज्यों में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह स्कोर बहुत कम माना जाता है.&amp;nbsp;
किन बातों से तय होती है, मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ?&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 में सरकारी मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ कई चीजों पर निर्भर करती है. इनमें परीक्षा का कठिन स्तर, कुल अभ्यर्थियों की संख्या, एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी, कैटेगरी बार आरक्षण, ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या और ऑल इंडिया व राज्य कोटा की काउंसलिंग शामिल है.&amp;nbsp;
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काउंसलिंग के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि उम्मीदवारों को काउंसलिंग के हर राउंड पर नजर बनाए रखनी चाहिए. सीट प्रत्येक राउंड में बदलती रहती है, क्योंकि कई उम्मीदवार अपनी सीट छोड़ देते हैं या अपग्रेडेशन का ऑप्शन चुनते हैं. काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों को कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकताएं सोच-समझकर भरनी चाहिए. सभी जरूरी डॉक्यूमेंट पहले से तैयार रखने चाहिए, एमसीसी और राज्य काउंसलिंग के अधिकारी वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन नियमित रूप से देखते रहना चाहिए और प्रत्येक काउंसलिंग राउंड में भाग लेने का अवसर नहीं छोड़ना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>NEET, result, 2026:, नीट, के, बाद, कितने, नंबर, पर, मिलेगा, कौन, सा, कॉलेज, 700, 650, 600, स्कोर, वाले, स्टूडेंट्स, यहां, देखें</media:keywords>
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        <title>NEET UG Result 2026: नीट टॉपर आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल दोनों को मिले 715 नंबर, फिर क्यों मिली AIR&amp;1 और AIR&amp;2?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Re Exam 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल को लेकर हो रही है. दोनों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में 720 में से 715 हासिल किए हैं, जो इस साल का हाईएस्ट स्कोर रहा. इसके बावजूद दोनों की रैंक अलग-अलग है. एनटीए की मेरिट लिस्ट में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिला.
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि जब दोनों के अंक समान हैं तो रैंक अलग-अलग कैसे हो गई? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट टॉपर आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के 715-715 अंक आए फिर दोनों रैंक-1 और रंक-2 कैसे मिली और इसे लेकर एनटीए के ट्राई ब्रेकिंग नियम क्या बने हैं.&amp;nbsp;
क्या है एनटीए का ट्राई ब्रेकिंग नियम?
अगर दो छात्रों के कुल अंक बराबर होते तो सबसे पहले बायोलॉजी यानी बॉटनी और जूलॉजी के अंक देखे जाते हैं. जिन उम्मीदवारों के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है. मेडिकल प्रवेश परीक्षा होने के कारण इस विषय को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है. अगर बायोलॉजी के अंक भी समान हो तो अगला चरण केमिस्ट्री के अंकों का होता है, इसमें भी बराबरी रहने पर फिजिक्स के अंक देखे जाते हैं. अगर तीनों विषयों में भी अंक समान निकले तो फिर यह देखा जाता है कि दोनों उम्मीदवारों ने सही और गलत उत्तरों का अनुपात कैसा रखा है, जिस उम्मीदवार ने कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात कम होता है, उसे ऊपर की रैंक मिलती है. अगर इन सभी चरणों के बाद भी बराबरी बनी रहती है, तो एक स्वतंत्र एक्सपर्ट समिति की निगरानी में रैंडम प्रक्रिया के जरिए अंतिम रैंक तय की जाती है.
आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में क्या हुआ?&amp;nbsp;
दोनों उम्मीदवारों ने कुल 715 अंक प्राप्त किए, लेकिन उनकी विषयवार परफॉर्मेंस पूरी तरह सामान नहीं थी. एनटीए के टाई ब्रेकिंग नियम के अनुसार जिस उम्मीदवार का प्रदर्शन पहले तुलना वाले चरण में बेहतर पाया गया, उसे मेरिट लिस्ट में ऊपर स्थान मिला. इस प्रक्रिया के तहत आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 दिया गया. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में दोनों को संयुक्त टॉपर बताया गया था, क्योंकि दोनों के अंक समान थे लेकिन आधिकारिक मेरिट लिस्ट में रैंक एनटीए के तय नियमों के अनुसार जारी की गई.&amp;nbsp;
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काउंसलिंग में क्यों अहम है एक रैंक का अंतर?
नीट में टॉप रैंक पर एक या दो स्थान का अंतर भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. एम्स दिल्ली, एमएएमसी और दूसरे प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में सीटें सीमित होती है. ऐसे में काउंसलिंग के दौरान केवल अंक नहीं, बल्कि ऑल इंडिया रैंक के आधार पर सीटें आवंटित की जाती है. इसलिए समान अंक होने के बावजूद बेहतर रैंक वाले उम्मीदवार को पहले सीट चुनने का अवसर मिलता है.&amp;nbsp;
पहले उम्र से टूटता था टाई, अब नियम बदल चुके हैं&amp;nbsp;
पहले नीट में टाई की स्थिति बनने पर ज्यादा उम्र वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी. बाद में इस नियम को लेकर विवाद हुआ और इसे हटा दिया गया. इसके बाद आवेदन संख्या जैसे मानदंड भी समाप्त कर दिए गए, अब एनटीए केवल विषयवार अंकों और सही गलत उत्तरों के अनुपात के आधार पर ही टाई का समाधान करता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Result, 2026:, नीट, टॉपर, आर्यन, गुप्ता, और, पांशुल, बंसल, दोनों, को, मिले, 715, नंबर, फिर, क्यों, मिली, AIR-1, और, AIR-2</media:keywords>
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        <title>Bank of india में 779 पदों पर भर्ती, आवेदन की आखिरी तारीख 20 जुलाई </title>
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        <description><![CDATA[ Bank of India Recruitment 2026: अगर आप बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर आई है. बैंक ऑफ इंडिया ने क्रेडिट ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 779 रिक्त पदों को भरा जाएगा, इच्छुक और पात्रों उम्मीदवार बैंक ऑफ इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 तय की गई है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वह समय रहते अपना फॉर्म भर सकते हैं.&amp;nbsp;
इतने पदों पर होगी भर्ती&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग मैनेजमेंट ग्रेड में नियुक्तियां की जाएगी. जैसे एमएमजीएस-II के 667 पदों पर भर्ती होगी. एमएमजीएस-III के 61 पदों पर भर्ती होगी और एसएमजीएस-IV के 41 पदों पर भर्ती होगी. कुल मिलाकर 779 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
क्या होगी शैक्षणिक योग्यताएं?&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन के डिग्री होनी चाहिए. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम में 60 प्रतिशत अंक या फिर ग्रेड अनिवार्य है, जबकि एससी, एसटी, ओबीसी और पीडब्ल्यू बीडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 55 प्रतिशत अंक पर्याप्त है. इसके अलावा सीए, सीएमए, सीएस या एएफए जैसी प्रोफेशनल योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन करने के पात्र हैं. इस भर्ती के लिए अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग आयु सीमा भी निर्धारित की गई है. जैसे एमएमजीएस-II पद के लिए 25 से 32 वर्ष, एमएमजीएस-III पदों के लिए 28 से 38 वर्ष और एसएमजीएस-IV पदों के लिए 32 से 45 वर्ष उम्मीदवार की आयु होनी चाहिए.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए क्या होगी चयन प्रक्रिया?
उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा या पर्सनल इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा. यह प्रक्रिया आवेदन करने वाले योग्य उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर तय होगी. ऑनलाइन परीक्षा में कुल 125 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनके लिए 125 अंक निर्धारित होंगे. इनमें 25 प्रश्न अंग्रेजी भाषा और 100 प्रश्न संबंधित पद के प्रोफेशनल नॉलेज से होंगे. परीक्षा की कुल अवधि 120 मिनट होगी. अंग्रेजी भाषा को छोड़कर अन्य सभी प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होंगे. अंग्रेजी भाषा का पेपर केवल क्वालीफाइंग होगा और उसके लिए अंक अंतिम मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं किए जाएंगे. सामान्य और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को अंग्रेजी भाषा तथा प्रोफेशनल नॉलेज दोनों टेस्ट में न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा. अंतिम मेरिट लिस्ट केवल प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में प्राप्त अंकों के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी के लिए तैयार की जाएगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET UG Result 2026: नीट री-एग्जाम में 58% लड़कियां सफल, फिर भी टॉप- 10 में लड़कों का दबदबा
कैसे करें आवेदन?&amp;nbsp;

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को बैंक ऑफ इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा.
इसके बाद होम पेज पर दिए गए रिक्रूटमेंट सेक्शन में जाए.&amp;nbsp;
अब क्रेडिट ऑफिसर रिक्रूटमेंट लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
इसके बाद नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें.&amp;nbsp;
फिर लॉगिन कर आवेदन पत्र में मांगी के सभी जानकारियां भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड कर आवेदन शुल्क जमा करें .&amp;nbsp;
सभी जानकारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट कर दें
लास्ट में फ्यूचर के लिए कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके उसका प्रिंट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Bank, india, में, 779, पदों, पर, भर्ती, आवेदन, की, आखिरी, तारीख, जुलाई </media:keywords>
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        <title>मैथ्स में मिले थे सिर्फ 51 नंबर, लेकिन हौसला था बड़ा, पवन चंदाना ने बना दिया भारत का पहला प्राइवेट स्पेस रॉकेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मैथ्स-में-मिले-थे-सिर्फ-51-नंबर-लेकिन-हौसला-था-बड़ा-पवन-चंदाना-ने-बना-दिया-भारत-का-पहला-प्राइवेट-स्पेस-रॉकेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/मैथ्स-में-मिले-थे-सिर्फ-51-नंबर-लेकिन-हौसला-था-बड़ा-पवन-चंदाना-ने-बना-दिया-भारत-का-पहला-प्राइवेट-स्पेस-रॉकेट</guid>
        <description><![CDATA[ Pawan Chandana Success Story: स्कूल की परीक्षा में गणित में सिर्फ 51 अंक आने के बाद शायद ही किसी ने सोचा होगा यही छात्र आगे चलकर भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर का बड़ा चेहरा बनेगा. लेकिन पवन कुमार चंदाना ने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल अंकों से तय नहीं होती. आज उनकी कंपनी स्काई रूट एयरोस्पेस का विकसित विक्रम-1 रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट बन गया है. यह उपलब्धि न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है.&amp;nbsp;
गणित में थे कमजोर, लेकिन मशीनों में खास दिलचस्प&amp;nbsp;
हैदराबाद में पले-बढ़े पवन चंदाना एक साधारण मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. बचपन से ही उनकी रुचि मशीन और तकनीक को समझने में थी. हालांकि पढ़ाई के दौरान गणित उनका मजबूत विषय नहीं था और एक परीक्षा में उन्हें सिर्फ 51 अंक मिले थे. इसके बावजूद उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा. खासकर उनके पिता ने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया, जिससे उनका अपना विश्वास बना रहा. वहीं समय के साथ गणित और विज्ञान जो कभी उन्हें चुनौती लगते थे वहीं उनके करियर की सबसे मजबूत नींव बन गए.&amp;nbsp;
पहली कोशिश में आईआईटी, फिर मिला इसरो में मौका&amp;nbsp;
करीब दो दशक पहले पवन चंदाना ने पहली ही कोशिश में आईआईटी में एडमिशन परीक्षा पास की और आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन लिया. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें केंपस प्लेसमेंट के जरिए इसरो में काम करने का अवसर मिला. प्राइवेट कंपनियों की तुलना में इसरो की नौकरी में वेतन भले कम था, लेकिन चंदाना के लिए सबसे बड़ी बात तो देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा बनना था.&amp;nbsp;
जीएसएलवी एमके-3 प्रोजेक्ट पर किया काम&amp;nbsp;
इसरो में अपने 6 साल के कार्यकाल के दौरान पवन चंदाना ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर तिरुवनंतपुरम में भारत के सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल जीएसएलवी एमके-3 के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया. उनके योगदान के लिए उन्हें संस्थान के अंदर इनोवेशन अवार्ड भी मिला. इसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि भारत में प्राइवेट सेक्टर भी रॉकेट निर्माण के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.&amp;nbsp;
इसरो छोड़कर शुरू की Skyroot Aerospace
जून 2018 में पवन चंदाना ने अपने साथी और पूर्व इसरो वैज्ञानिक नागा भरत डाका के साथ हैदराबाद में स्काई रूट एयरोस्पेस की स्थापना की. उस समय भारत में प्राइवेट स्पेस से स्टार्टअप की शुरुआत करना आसान नहीं था. निवेशक भी इस क्षेत्र को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे. शुरुआती दौर में फ्लिपकार्ट के को-ऑनर और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र बिन्नी बंसल ने कंपनी में 15 लाख डॉलर का निवेश किया. कोविड-19 महामारी के दौरान फंडिंग की रफ्तार धीमी पड़ गई, लेकिन बाद में ग्रीनको ने आर्थिक सहयोग देकर कंपनी की आगे की यात्रा को गति दी.&amp;nbsp;
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लगातार मिली बड़ी सफलताएं &amp;nbsp;
जुलाई 2020 में स्क्वायर रूट भारत की पहली प्राइवेट कंपनी बनी, जिसने सफलतापूर्वक रॉकेट इंजन का परीक्षण किया. इस इंजन का नाम नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन के सम्मान में रमन-1 रखा गया. इसके बाद भारत सरकार की ओर से प्राइवेट क्षेत्र के लिए स्पेस सेक्टर खोलने के बाद स्काई रूट, इसरो के साथ समझौता करने वाली पहली प्राइवेट कंपनी बनी. कंपनी ने बाद में 51 बिलियन डॉलर की बड़ी फंडिंग भी हासिल की, जिसे उस समय भारत के डीप सेक्टर के सबसे बड़े निवेशों में गिना गया.&amp;nbsp;
विक्रम-एस लेकर विक्रम-1 तक का सफर&amp;nbsp;
18 नवंबर 2022 को स्काई रूट में विक्रम एस लॉन्च किया, जो भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित सब ऑर्बिटल रॉकेट था. इस लॉन्च ने देश के प्राइवेट सेक्टर उद्योग के लिए नई शुरुआत की. इसके बाद कंपनी लगातार अपने लॉन्च व्हीकल और तकनीक पर काम करती रही. हाल ही में विक्रम-1 ने अंतरिक्ष पर पहुंचकर भारत में पहले प्राइवेट रूप से विकसित स्पेस रॉकेट के रूप में इतिहास रच दिया. इसे भारतीय प्राइवेट अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>NCTE Investigation: मध्य प्रदेश के 4 B.Ed कॉलेजों में अनियमितताओं की जांच, NCTE ने बनाई 5 सदस्यीय जांच समिति</title>
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        <description><![CDATA[ NCTE Investigation: मध्य प्रदेश के 4 B.Ed कॉलेज में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन ने 5 सदस्यीय स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग और वेरिफिकेशन कमेटी का गठन किया है. इन संस्थानों पर तय पते से संचालित नहीं होने और मानकों के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न होने के आरोप लगे हैं. एनसीटीई ने समिति को मौके पर जांच कर पांच कार्य दिवस के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. 15 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार समिति अपनी रिपोर्ट के साथ डॉक्यूमेंट साक्ष्य, फोटो और वीडियो रिकॉर्ड भी जमा करेगी. एनसीटीई का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.&amp;nbsp;
मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जांच&amp;nbsp;
यह जांच बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी से संबंध तीन बीएड कॉलेजों में अनियमितताओं नेताओं से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद शुरू की गई. शुरुआती वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारियों को पता चला कि उसी परिसर से एक और बीएड कॉलेज संचालित हो रहा है. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाकर कुल चार संस्थानों तक कर दिया गया. एनसीटीई के अनुसार समिति 17 जुलाई को मध्य प्रदेश पहुंचे और सभी चार कॉलेजों का भौतिक निरीक्षण शुरू कर दिया.&amp;nbsp;
समिति में कौन-कौन शामिल?&amp;nbsp;
जांच समिति की अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के पूर्व कुलपति एच.सी.एस राठौर कर रहे हैं. समिति में यूजीसी के संयुक्त सचिव आशिमा मंगला, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल और जे.पी. सिंह, मध्य प्रदेश सरकार के एक नामित प्रतिनिधि तथा एनसीटीई की वेस्टर्न रीजनल कमेटी के क्षेत्रीय निदेशक विंग कमांडर विजय राणा भी शामिल है. &amp;nbsp;मिले.&amp;nbsp;
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किन पहलुओं की होगी जांच?
समिति को कॉलेजों का ऑन साइट निरीक्षण करने के लिए कहा गया है. जांच के दौरान जियोटैग्ड फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि संस्थान अपने स्वीकृत पते से ही संचालित हो रहे हैं या नहीं. इसके अलावा समिति कॉलेजों की ओर से जमा किए गए मान्यता संबंधी दस्तावेज, परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड को भी मिलान करेगी. निरीक्षण के दौरान यह देखा देखा जाएगा कि संबंधित संस्थान एनसीटीई एक्ट 1993 और एनसीटीई रेगुलेशन और मान्यता के लिए मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं. इसमें भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, भूमि, शिक्षण संसाधन, फैकल्टी की उपलब्धता और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी जांच की जाएगी.&amp;nbsp;
नियमों के उल्लंघन पर होगी करवाई&amp;nbsp;
एनसीटीई ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि जांच में किसी संस्थान की ओर से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. परिषद के अनुसार सभी तत्वों की 360 डिग्री व्यापक समीक्षा के बाद दोषी पाए जाने वाले संस्थानों पर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Air Force Pilot vs Commercial Pilot Salary : एयरफोर्स पायलट या कमर्शियल पायलट... कौन कमाता है ज्यादा? पहली सैलरी से रिटायरमेंट तक का जानें गणित</title>
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        <description><![CDATA[ Air Force Pilot vs Commercial Pilot Salary : आसमान में उड़ान भरना कई युवाओं का सपना होता है, लेकिन जब बात करियर चुनने की आती है तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि एयरफोर्स पायलट बनें या कमर्शियल पायलट, दोनों ही प्रोफेशन जिम्मेदारी वाले होते हैं, लेकिन सैलरी, करियर ग्रोथ और कमाई का तरीका काफी अलग होता है. एक तरफ भारतीय वायुसेना के पायलट देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कमर्शियल पायलट यात्रियों और कार्गो विमानों का संचालन करते हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि एयरफोर्स पायलट या कमर्शियल पायलट कौन ज्यादा कमाता है.&amp;nbsp;
एयरफोर्स पायलट को शुरुआत में कितनी मिलती है सैलरी?
एयरलाइन में शामिल होने के बाद पायलट पहले ट्रेनिंग से गुजरते हैं. इस दौरान उन्हें आमतौर पर 63 हजार से 65 हजार रुपये प्रति माह तक मिलते हैं. इसके बाद जब जूनियर फर्स्ट ऑफिसर बनते हैं तो उनकी मासिक सैलरी लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
कितनी बढ़ती है कमाई?
लाइन ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पायलट फर्स्ट ऑफिसर बन जाते हैं. इस स्तर पर उनकी कमाई आमतौर पर 2 लाख से 3 लाख रुपये प्रति माह या उससे ज्यादा हो सकती है. वहीं करीब 1000 फ्लाइंग ऑवर पूरे करने के बाद कई एयरलाइंस सैलरी में बढ़ोतरी करती हैं. इस समय एक्सपीरियंस फर्स्ट ऑफिसर की कमाई 2.5 लाख से 4 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है. इसके बाद सीनियर फर्स्ट ऑफिसर बनने पर सैलरी लगभग 4 लाख से 6 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकती है.
एयरफोर्स पायलट की सैलरी कैसे तय होती है?
भारतीय वायुसेना में पायलट की कमाई केवल बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं होती है. उन्हें पद, एक्सपीरियंस और जिम्मेदारियों के आधार पर अलग-अलग भत्ते भी मिलते हैं. करियर की शुरुआत में सैलरी कम होती है, लेकिन एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ इसमें लगातार बढ़ोतरी होती रहती है. इसके अलावा कई सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं.
कमर्शियल पायलट को शुरुआत में कितनी मिलती है सैलरी?
कमर्शियल पायलट के करियर का सबसे बड़ा कैप्टन बनना माना जाता है. कैप्टन विमान, यात्रियों और पूरी उड़ान की जिम्मेदारी संभालते हैं. भारत में कई कैप्टन की सैलरी 6 लाख से 12 लाख रुपये प्रति माह या इससे भी ज्यादा हो सकती है. यह सैलरी एयरलाइन, विमान के प्रकार और एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है. कुछ एयरलाइंस में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भरने वाले एक्सपीरियंस कैप्टन 8 लाख से 15 लाख रुपये प्रति माह या उससे ज्यादा भी कमा सकते हैं.&amp;nbsp;कमर्शियल पायलट की सैलरी कैसे तय होती है?
कमर्शियल पायलट की कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस एयरलाइन में काम कर रहा है, कितने फ्लाइंग ऑवर पूरे कर चुका है, कौन-सा विमान उड़ा रहा है और उसका पद क्या है. नए पायलट और एक्सपीरियंस कैप्टन की सैलरी में काफी बड़ा अंतर होता है.
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कमर्शियल पायलट बनने के बाद कौन-कौन से फायदे मिलते हैं?
सैलरी के अलावा कई एयरलाइंस पायलटों को अतिरिक्त सुविधाएं भी देती हैं. इनमें मुफ्त या रियायती हवाई यात्रा, होटल और लेओवर भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, यात्रा भत्ता और परिवार के लिए ट्रैवल बेनिफिट्स शामिल हो सकते हैं. कई एक्सपीरियंस पायलट आगे चलकर इंस्ट्रक्टर या एग्जामिनर जैसे पदों पर भी पहुंचते हैं.&amp;nbsp;
एयरफोर्स पायलट या कमर्शियल पायलट कौन ज्यादा कमाता है?
एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ कमर्शियल पायलट, खासकर एयरलाइन कैप्टन, आमतौर पर एयरफोर्स पायलटों की तुलना में ज्यादा सैलरी कमा सकते हैं. हालांकि एयरफोर्स पायलटों को सरकारी नौकरी की स्थिरता, भत्ते, मेडिकल सुविधा और कई अन्य फायदे &amp;nbsp;मिलते हैं. वहीं कमर्शियल पायलट की कमाई एयरलाइन, उड़ान के घंटे और एक्सपीरियंस के साथ तेजी से बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Air, Force, Pilot, Commercial, Pilot, Salary, एयरफोर्स, पायलट, या, कमर्शियल, पायलट..., कौन, कमाता, है, ज्यादा, पहली, सैलरी, से, रिटायरमेंट, तक, का, जानें, गणित</media:keywords>
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        <title>NMC draft 2026: अब For&amp;Profit कंपनियां भी खोल सकेंगी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, क्या इससे और महंगी होगी मेडिकल की पढ़ाई? </title>
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        <description><![CDATA[ NMC draft 2026: देश में मेडिकल एजुकेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है. नेशनल मेडिकल कमीशन ने नए मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़े नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है. अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तब केवल नॉन प्रॉफिट इंस्टीट्यूट तक ही मेडिकल कॉलेज खोलने का अधिकार सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी एक्ट 2013 के तहत रजिस्टर लाभ कमाने वाली For-Profit कंपनियां भी मेडिकल कॉलेज स्थापित कर सकेंगी. इस मसौदे पर 30 दिनों के अंदर आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं.&amp;nbsp;
क्या है एनएमसी का नया प्रस्ताव?&amp;nbsp;
फिलहाल लागू नियमों के तहत केवल सेक्शन 8 कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति है. ये ऐसी नॉन प्रॉफिट कंपनियां होती है, जिनकी अतिरिक्त आय को केवल संस्थान के विकास या सामाजिक कार्यों में ही खर्च किया जा सकता है. लेकिन प्रस्तावित संशोधन के बाद कंपनी एक्ट 2013 के तहत रजिस्टर्ड किसी भी कंपनी को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति मिल सकेगी.&amp;nbsp;
2017 में भी किया गया था, ऐसा बदलाव?
यह पहला मौका नहीं है, जब कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति देने की बात सामने आई है. 2017 में तत्कालीन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी नियमों में संशोधन कर कंपनीज एक्ट 1956 के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की इजाजत दी थी. उसी समय ट्रस्ट और सोसायटी को कंपनी में बदलने का ऑप्शन भी दिया गया था. हालांकि 2019 में एनएमसी बनने के बाद नए नियम लागू हुए और फिर से केवल सेक्शन 8 कंपनियों तक ही अनुमति सीमित कर दी गई.&amp;nbsp;
सरकार ने क्यों जरूरी बताया यह बदलाव?&amp;nbsp;
सरकार का तर्क रहा है कि नॉन प्रॉफिट की शर्त के कारण बड़ी कंपनियां मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में निवेश करने से बचती है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कई संस्थानों में लाभ कमाने का काम पहले से हो रहा है, लेकिन वह पारदर्शी तरीके से सामने नहीं आता. ऐसे में कानूनी रूप से कंपनियों को अनुमति मिलने की व्यवस्था और ज्यादा स्पष्ट होगी और सरकार को टैक्स के रूप में भी राजस्व मिलेगा.&amp;nbsp;
फीस को लेकर भी उठते रहे सवाल&amp;nbsp;
देश के कई डीम्ड यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज ट्रस्ट और सोसायटी के तहत संचालित होते हैं, लेकिन उनकी फीस काफी ज्यादा होती है. इन संस्थानों की फीस पर राज्यों का सीधा नियंत्रण नहीं होता है और इनमें कम फीस वाले सरकारी कोटे की सीटें भी उपलब्ध नहीं होती है. ऐसे में नए प्रस्ताव के बाद मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 1993 और 2001 के अपने फैसलों में कहा था कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता है और संस्थानों को मुनाफाखोरी की अनुमति नहीं है. हालांकि संस्थानों को अपने विस्तार और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए उचित अधिवेशन रखने की छूट दी गई थी. वर्ष 2009 तक सरकार का भी यही रुख रहा कि शिक्षा लाभ कमाने का माध्यम नहीं हो सकती है. वहीं 2010 में केंद्र सरकार ने कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति दी, लेकिन यह स्पष्ट किया था कि अगर संस्थान शिक्षा का व्यवसायीकरण करेंगे, तो उनकी अनुमति वापस ली जा सकती है.&amp;nbsp;
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क्या मेडिकल की पढ़ाई होगी और महंगी?
एनएमसी के इस प्रस्ताव के बाद माना जा रहा है कि प्राइवेट क्षेत्र से मेडिकल शिक्षा में निवेश बढ़ सकता है और नए मेडिकल कॉलेज खुल सकते हैं. हालांकि इसके साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि लाभ कमाने वाली कंपनियों के आने से क्या मेडिकल की फीस और बढ़ जाएगी. फिलहाल यह केवल मसौदा है और अंतिम फैसला सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियों पर विचार की करने के बाद दिया जाएगा, लेकिन फीस को लेकर बहस भी हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NMC, draft, 2026:, अब, For-Profit, कंपनियां, भी, खोल, सकेंगी, प्राइवेट, मेडिकल, कॉलेज, क्या, इससे, और, महंगी, होगी, मेडिकल, की, पढ़ाई </media:keywords>
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        <title>CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड का रिजल्ट घोषित, DigiLocker पर ऐसे देखें अपना स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा (Second Board Exam 2026) का परिणाम घोषित कर दिया है. परीक्षा में शामिल हुए 6.8 लाख से अधिक छात्रों का इंतजार अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है. बोर्ड ने नतीजों की घोषणा के साथ ही स्कोरकार्ड डाउनलोड करने का लिंक भी एक्टिवेट कर दिया है. छात्र अब आधिकारिक रूप से अपने परिणाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं.
नई शिक्षा नीति के तहत आयोजित कराई गई थी दो परीक्षाएं
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शनिवार, 18 जुलाई 2026 को कक्षा 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा &amp;nbsp;का परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिया है. नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इस साल पहली बार छात्रों को एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने का ऐतिहासिक अवसर दिया गया था. बोर्ड की नीति के अनुसार, छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए दोनों परीक्षाओं (मुख्य और दूसरी परीक्षा) में से उनके बेहतर प्रदर्शन यानी &#039;बेस्ट स्कोर&#039; को आधार माना गया है. परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र अब डिजीलॉकर के आधिकारिक रिजल्ट पोर्टल पर जाकर अपने नतीजे ऑनलाइन चेक कर सकते हैं.
इम्प्रूवमेंट परीक्षा में 59.95% छात्रों ने सुधारे अपने अंक
सीबीएसई ने जो आंकड़े जारी किए हैं उनके अनुसार, इस साल दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 6,64,027 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 6,63,777 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 5,13,955 छात्र ऐसे थे जिन्होंने मुख्य परीक्षा में कम अंक आने के बाद अपना स्कोर सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा दी थी. बोर्ड के लिए यह प्रयोग काफी सफल रहा, क्योंकि 3,08,095 छात्रों ने मुख्य परीक्षा की तुलना में इस बार अपने अंकों में बेहतरीन सुधार दर्ज किया है.
कंपार्टमेंट श्रेणी के पास प्रतिशत में भी हुआ सुधार
दूसरी बोर्ड परीक्षा के साथ आयोजित हुई कंपार्टमेंट परीक्षा में इस बार कुल 1,49,822 छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 78,503 छात्रों ने सफलता हासिल की है. इस साल कंपार्टमेंट श्रेणी का कुल पास प्रतिशत 52.40 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 48.68 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर है. मुख्य परीक्षा और इस दूसरी बोर्ड परीक्षा दोनों के आंकड़ों को मिलाकर, साल 2026 के लिए कक्षा 10वीं का अंतिम और कुल पास प्रतिशत शानदार 96.78 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
डिजीलॉकर और स्कूलों से ऐसे मिलेंगे डिजिटल दस्तावेज
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि सभी संबद्ध स्कूलों को उनके Registered ईमेल आईडी पर छात्रों के परिणाम और डिजिटल शैक्षणिक दस्तावेज भेज दिए जाएंगे. विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों के छात्र भी डिजीलॉकर के माध्यम से अपना रिजल्ट और सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं.
रेगुलर स्टूडेंट्स: नियमित रूप से स्कूल जाने वाले छात्रों की मूल मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट उनके संबंधित स्कूलों से ही वितरित किए जाएंगे.
प्राइवेट स्टूडेंट्स: निजी परीक्षार्थियों यानी Private Candidates को उनके डिजिटल दस्तावेज सीधे डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराए जाएंगे.
दिल्ली के छात्र: दिल्ली पूर्व और दिल्ली पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले निजी छात्र डिजीलॉकर के अलावा अपने अलॉटेड परीक्षा केंद्र से भी जाकर डॉक्यूमेंट्स कलेक्ट कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Medical Courses Besides MBBS:  MBBS नहीं मिला तो न हों निराश, NEET के बाद ये 10 शानदार मेडिकल कोर्स भी हैं बेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Medical Courses Besides MBBS:  MBBS नहीं मिला तो न हों निराश, NEET के बाद ये 10 शानदार मेडिकल कोर्स भी हैं बेस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 AIR 2 Panshul Bansal: एग्जाम रद्द होने पर 2 घंटे तक रोते रहे पंशुल बंसल, फिर की ऐसी वापसी कि बन गए AIR&amp;2</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के पंशुल बंसल ने अपनी मेहनत और हौसले से लाखों छात्रों के लिए मिसाल पेश की है. बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले पंशुल ने इस साल अपने पहले ही प्रयास में देशभर में दूसरी रैंक हासिल की. एबीपी न्यूज से खास बातचीत में उन्होंने अपनी तैयारी, परीक्षा के दौरान आई मुश्किलों और सफलता के पीछे की कहानी साझा की.
बचपन से ही देखा था यह सपना
पंशुल ने बताया कि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने बचपन में ही देख लिया था. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पढ़ाई की शुरुआत मजबूत आधार बनाने से की. उनका कहना है कि किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए बुनियादी तैयारी सबसे ज्यादा मायने रखती है.
8वीं से ही शुरू कर दी थी तैयारी
उन्होंने बताया कि गणित और विज्ञान की मजबूत नींव रखने के लिए उन्होंने 8वीं कक्षा से ही नियमित और गंभीर पढ़ाई शुरू कर दी थी. इसके बाद 10वीं कक्षा से उन्होंने पूरी तरह NEET की तैयारी पर फोकस कर दिया. इसी साल उन्होंने 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी दी और उसके साथ-साथ NEET की तैयारी जारी रखी.
जब दो घंटे तक रोते रहे थे पंशुल
हालांकि, इस सफर में एक ऐसा पल भी आया, जिसने उन्हें पूरी तरह झकझोर दिया. पंशुल ने बताया कि जब NEET UG 2026 की पहली परीक्षा रद्द होने की खबर मिली तो वह खुद को संभाल नहीं पाए. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा था और वह करीब दो घंटे तक लगातार रोते रहे. उन्हें लग रहा था कि उनकी कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने खुद को संभाला. उन्होंने तय किया कि निराश होकर बैठने से कुछ नहीं होगा. इसके बाद उन्होंने पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ दोबारा तैयारी शुरू की. अगर उस समय वह हार मान लेते तो शायद आज यह सफलता नहीं मिलती. उन्होंने दोबारा पूरे मन से पढ़ाई की और अपनी कमजोरियों पर काम किया.
परिवार को दिया पूरा श्रेय
पंशुल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार, खासकर अपने पिता को दिया. उन्होंने कहा कि उनके पिता हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. जब भी पढ़ाई के दौरान तनाव महसूस होता था या आत्मविश्वास कम होता था, तब परिवार ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.&amp;nbsp;
कैसे रहे थे एग्जाम?
परीक्षा के बारे में पंशुल ने बताया कि इस बार फिजिक्स का पेपर काफी लंबा था. कई छात्रों को समय की कमी महसूस हुई, लेकिन उन्होंने नियमित अभ्यास और बेहतर टाइम मैनेजमेंट की वजह से पूरे पेपर को समय पर पूरा कर लिया. उनका मानना है कि केवल पढ़ाई करना ही काफी नहीं होता, बल्कि परीक्षा के दौरान समय का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है. तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना नियमित पढ़ाई की और किसी भी विषय को लंबे समय तक अधूरा नहीं छोड़ा. जहां भी कमजोरी महसूस हुई, वहां अतिरिक्त समय देकर उसे बेहतर बनाया.&amp;nbsp;
दूसरे स्टूडेंट्स को दी यह सीख
पंशुल ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य, मेहनत और सकारात्मक सोच सबसे जरूरी होती है. अगर कभी असफलता मिले या परिस्थितियां आपके खिलाफ हो जाएं, तब भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कई बार मुश्किलें हमें और बेहतर बनने का मौका देती हैं. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है.
ये भी पढ़ें: पेपर रद्द होने पर रो पड़े थे आर्यन गुप्ता, फिर 16 घंटे की पढ़ाई से बने ऑल इंडिया टॉपर ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG Result 2026: इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची नीट की कटऑफ, जनरल में 69 और आरक्षित वर्ग में 64 अंकों का उछाल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026: एनटीए की ओर से नीट यूजी परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब जल्द ही एमबीबीएस कॉलेज में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इस बार रिजल्ट नीट के रिजल्ट ने कई नए रिकॉर्ड भी बनाएं. हालांकि, सबसे दिलचस्प तस्वीर यह देखने को मिली है कि एक ओर परीक्षा क्वालीफाइंग कट ऑफ अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, वहीं दूसरी और पिछले साल की तुलना में करीब 1.15 लाख कम उम्मीदवार परीक्षा में क्वालीफाई कर सके.
इसे लेकर एनटीए का कहना है कि री एग्जाम के कारण उम्मीदवारों को तैयारी के लिए एक्स्ट्रा समय मिला और परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिसकी वजह से कट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
जनरल में 69 तो आरक्षित वर्ग में 64 अंकों की बढ़ोतरी&amp;nbsp;
इस साल जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए क्वालीफाइंग कट ऑफ 144 अंकों से बढ़कर 213 अंक हो गई. यानी सिर्फ एक साल के अंदर 69 अंकों का उछाल आया है. वहीं ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए कट ऑफ 113 से बढ़कर 177 अंक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 64 अंक ज्यादा है. यह नीट यूजी के इतिहास की सबसे बड़ी क्वालीफाइंग कट ऑफ मानी जा रही है.&amp;nbsp;
3 साल में कैसे बदली क्वालीफाइंग कट ऑफ?&amp;nbsp;
अगर पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कट ऑफ में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2024 में जनरल और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग स्कोर 162 अंक था. 2025 में यह घटकर 144 रह गया, लेकिन 2026 में सीधे 213 अंक तक पहुंच गया. इस तरह ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग में न्यूनतम स्कोर 2024 में 127, 2025 में 113 और इस साल यानी 2026 में 177 हो गया.
ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 Result: सबसे कम रैंक पर कहां मिल सकता है MBBS? पिछले साल के ट्रेंड से समझिए पूरा गणित
कम छात्र पहुंचे थे परीक्षा देने, इसलिए आया बड़ा अंतर&amp;nbsp;
इस बार के नीट एग्जाम में रजिस्ट्रेशन की संख्या लगभग पिछले साल के बराबर रही. इस बार करीब 22.80 लाख छात्रों ने आवेदन किया, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 22.76 लाख था, लेकिन परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या इस बार घट गई. पिछले साल जहां 22.09 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे वहीं इस बार केवल 19.99 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए. इसके कारण उपस्थित प्रतिशत 97.1 से घटकर 87.7 प्रतिशत रह गया. इसके अलावा इस साल कुल 11.21 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा क्वालीफाई की, जबकि पिछले साल यह संख्या 12.37 लाख थी. यानी इस बार करीब 1.15 लाख कम छात्र सफल हुए. हालांकि परीक्षा देने वाले छात्रों के हिसाब से सफलता दर लगभग 56 प्रतिशत बनी रही. इससे संकेत मिलता है कि क्वालीफाई करने वालों की संख्या इसलिए घटी क्योंकि इस बार बड़ी संख्या में रजिस्टर्ड उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हुए.
किस कैटेगरी का प्रदर्शन रहा सबसे बेहतर?&amp;nbsp;
इस बार ईडब्ल्यूएस वर्ग का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा है. इस कैटेगरी के 61.8 प्रतिशत उम्मीदवार क्वालीफाई करने में सफल रहे, इसके बाद ओबीसी वर्ग का सफलता प्रतिशत 60.7 रहा. एसी वर्ग में 52.4 प्रतिशत जनरल वर्ग में 51.2 प्रतिशत और एसटी वर्ग में 49 प्रतिशत उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की. पहली बार ईडब्ल्यूएस और ओबीसी दोनों वर्ग में परीक्षा देने वाले 60 प्रतिशत से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए हैं. वहीं आंकड़ों की बात करें तो एनटीए के अनुसार सबसे ज्यादा 5.2 लाख ओबीसी उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की, इसके बाद जनरल वर्ग के 2.91 लाख, एसी के 1.59 लाख, ईडब्ल्यूएस के 95,026 और एसटी वर्ग के 63,716 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए हैं. वहीं पीडब्ल्यू बीडी कैटेगरी में 8,912 में से 3,666 सफल रहे.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें- किस रैंक पर मिलेगा MBBS, BDS, BAMS? यहां देखें Category-wise लिस्ट
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG Result 2026: नीट में पिछले साल से 1.15 लाख कम हुए सफल अभ्यर्थी, सिर्फ 11.21 लाख ने परीक्षा की क्वालिफाई</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026: एनटीए ने नीट यूजी 2026 री एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है. पेपर लीक के आरोपी के बाद दोबारा आयोजित की गई इस परीक्षा के नतीजों के साथ अब मेडिकल, डेंटल, आयुष और दूसरे अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इस बार भी देशभर से लाखों छात्रों ने परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए जो पिछले वर्षों से अलग तस्वीर दिखाते हैं. खास बात यह है कि महिला अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पुरुषों से बेहतर रहा और टॉप स्कोरर भी दो छात्रों ने संयुक्त रूप से हासिल किया.
इन दो छात्रों ने टॉप की नीट परीक्षा
इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया. पूरे देश में केवल 19 उम्मीदवार ही 700 से ज्यादा अंक हासिल कर सके, जबकि 138 छात्रों ने 690 से ज्यादा स्कोर किया. इन टॉप 138 उम्मीदवारों में 93 प्रतिशत पहली बार नीट देने वाले थे और 99 प्रतिशत की उम्र 17 से 19 वर्ष के बीच रही.
पिछले साल से 1.15 लाख छात्र कम हुए सफल
एनटीए के अनुसार इस बार कुल 11.21 लाख छात्रों ने परीक्षा क्वालीफाई की है, पिछले साल यह संख्या 12.37 लाख थी. यानी इस बार करीब 1.15 लाख कम उम्मीदवार सफल हुए, हालांकि सफलता दर लगभग 56 प्रतिशत रही, जिससे साफ है कि सफल उम्मीदवारों की संख्या घटने की बड़ी वजह कम अटेंडेंस रही. करीब 22.80 लाख छात्रों ने आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा में लगभग 20 लाख उम्मीदवार ही शामिल हुए थे. वहीं नीट री एग्जाम 21 जून को देश के 551 शहर और विदेश के 14 शहरों में बनाए गए 5,440 केंद्रों पर आयोजित किया गया.
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किस कैटेगरी में कितने सफल उम्मीदवार?
एनटीए की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी से रहे. इसके बाद जनरल, ईडब्ल्यूएस और एसटी कैटेगरी के उम्मीदवारों का स्थान रहा. ओबीसी एनसीएल कैटेगरी के 5.12 लाख उम्मीदवार सफल रहे, जनरल कैटेगरी के 2.91 लाख उम्मीदवार सफल रहे, एससी के 1.59 लाख, ईडब्ल्यूएस के 95,026 उम्मीदवार सफल रहे. इनके अलावा एसटी के 63,716, पीडब्ल्यूबीडी 3,666 और पीडब्ल्यूडी के 303 उम्मीदवार सफल रहे.
कितने छात्रों ने कितने अंक हासिल किए?
इस बार परीक्षा में हाई स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या भी सामने आई है. 700 या 700 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले 19 उम्मीदवार थे, वहीं 650 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 1,492 उम्मीदवार थे. इसके अलावा 600 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 10,160 उम्मीदवार थे, वहीं 500 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 90,780 उम्मीदवार थे.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक वर्षीय PG कोर्स में सीटें बढ़ाने की मांग पर ABVP का प्रदर्शन, प्रशासन पर छात्र हितों की अनदेखी का आरोप</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय में एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में सीमित सीटों को लेकर छात्र असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है. इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की दिल्ली इकाई ने कला संकाय के बाहर प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठायी. प्रदर्शन के बाद परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने डीयू रजिस्ट्रार प्रो. विकास गुप्ता को ज्ञापन सौंपते हुए एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में तत्काल सीटें बढ़ाने की मांग की. प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए.
चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के बाद सीटों की कमी बना बड़ा मुद्दा
ABVP का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुरूप एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीटें नहीं बढ़ाई गई हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में योग्य और पात्र छात्र केवल सीटों की कमी के कारण प्रवेश से वंचित हो रहे हैं. परिषद ने मांग की कि सभी एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में पर्याप्त सीट वृद्धि की जाए ताकि किसी भी योग्य विद्यार्थी को उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े.
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन के सामने रखीं मांगें
कला संकाय के बाहर आयोजित प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उच्च शिक्षा तक समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रवेश क्षमता बढ़ाना जरूरी है. छात्रों ने एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शीघ्र सीट वृद्धि की मांग करते हुए प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया.
यह भी पढ़ें: RPSC का बड़ा फैसला! 24 जुलाई तक फॉर्म करें Edit या Withdraw, वरना बैन और FIR
ABVP बोली- सीटों की कमी छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय
अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय देशभर के लाखों विद्यार्थियों की पहली पसंद है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में सीटों की कमी छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय कर रही है. उनका कहना था कि चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के बाद एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सीटों में पर्याप्त वृद्धि करनी चाहिए.
आंदोलन के बाद बनी समिति, 10 दिन में निर्णय का दावा
अभाविप के अनुसार प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिष्ठाता (नामांकन) के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है. यह समिति एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीट वृद्धि से जुड़े मुद्दे पर अध्ययन कर 10 दिनों के भीतर छात्रों के हित में निर्णय लेने का प्रयास करेगी. विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो छात्रों के हित में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची नीट की कटऑफ, जनरल में 69 और आरक्षित वर्ग में 64 अंकों का उछाल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में कैंपस खोलेगी ऑस्ट्रेलिया की Victoria University, गुरुग्राम में अगस्त से शुरू होगी पढ़ाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-कैंपस-खोलेगी-ऑस्ट्रेलिया-की-victoria-university-गुरुग्राम-में-अगस्त-से-शुरू-होगी-पढ़ाई</link>
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        <description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी (Victoria University) को भारत में अपना कैंपस खोलने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. यह कैंपस दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में खोला जाएगा. इस मंजूरी के बाद यूनिवर्सिटी भारत में अपने शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू कर सकेगी. इस घोषणा को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा सहयोग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
पीएम मोदी के दौरे के वक्त मिली मंजूरी
इस मंजूरी की जानकारी उस समय सामने आई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे. मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस फैसले का स्वागत किया. इस मौके पर भारत के ऑस्ट्रेलिया में उच्चायुक्त नागेश सिंह ने विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को मंजूरी पत्र सौंपा.
कौन-कौन से कोर्स में होगी पढ़ाई?
गुरुग्राम स्थित इस कैंपस में छात्रों के लिए कई लोकप्रिय और रोजगार से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे. इनमें बिजनेस, डेटा साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, ग्लोबल एमबीए और मास्टर ऑफ एप्लाइड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम होंगे. इन कोर्स को पूरा करने वाले छात्रों को ऑस्ट्रेलिया की मान्यता प्राप्त डिग्री मिलेगी.
यूनिवर्सिटी ने दी यह जानकारी
यूनिवर्सिटी का कहना है कि यहां पढ़ने वाले छात्रों को वही शैक्षणिक अनुभव देने की कोशिश होगी, जो ऑस्ट्रेलिया के कैंपस में मिलता है. इसके लिए यूनिवर्सिटी अपने विशेष ब्लॉक मॉडल के तहत पढ़ाई कराएगी. इस मॉडल में छात्र एक समय में केवल एक विषय पर ध्यान देंगे. छोटे बैच, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक सीखने की व्यवस्था के जरिए छात्रों की समझ और प्रदर्शन बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा.
स्टूडेंट्स को क्या होगा फायदा?
यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया है कि भारत में पढ़ने वाले छात्रों को आगे चलकर मेलबर्न स्थित कैंपस में सेमेस्टर एक्सचेंज, ट्रांसफर और उच्च शिक्षा के अवसर भी मिल सकेंगे. इसके अलावा योग्य छात्रों को मेरिट के आधार पर हर साल तीन लाख रुपये तक की स्कालरशिप भी दी जाएगी. विक्टोरिया यूनिवर्सिटी की भारत ब्रांच की प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर कैरेन डॉड ने कहा कि मंजूरी मिलने के बाद अब यूनिवर्सिटी अपने पहले बैच का स्वागत करने के लिए तैयार है. उनका कहना है कि संस्थान का उद्देश्य छात्रों को ऐसा माहौल देना है, जहां वे नई तकनीक, उद्योग की जरूरतों और काम से जुड़े जरूरी हुनर के साथ बेहतर करियर बना सकें.
वहीं, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी इंडिया के Chief Operating Officer - (COO) अभिषेक शर्मा ने कहा कि पिछले कई महीनों से कैंपस की तैयारी की जा रही थी. यहां आधुनिक कक्षाएं, छात्र सहायता सेवाएं, उद्योग से जुड़ाव और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्रों को भारत में ही ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय जैसा अनुभव मिल सके. करीब 110 साल पुराने इतिहास वाली विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में दुनिया भर के लगभग 52 हजार छात्र पढ़ते हैं. भारत में कैंपस शुरू होने से दोनों देशों के बीच शिक्षा, शोध और अकादमिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य को भी आगे बढ़ाता है, जिसके तहत भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, में, कैंपस, खोलेगी, ऑस्ट्रेलिया, की, Victoria, University, गुरुग्राम, में, अगस्त, से, शुरू, होगी, पढ़ाई</media:keywords>
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        <title>NEET Result Rank Controversy: 585 नंबर, लेकिन रैंक 2500 से 15000 पार... NEET 2026 रिजल्ट पर छात्रों ने उठाए सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ 


NEET Result Rank Controversy: एनटीए ने नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का परिणाम घोषित कर दिया है. इसके साथ ही लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म हो गया है, लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर रैंकिंग को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. कई अभ्यर्थियों का दावा है कि इस बार परीक्षा कठिन होने के बावजूद अपेक्षा से ज्यादा छात्रों ने ऊंचे अंक हासिल किए हैं. इस वजह से सामान अंकों पर रैंक में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिस पर छात्र सवाल उठा रहे हैं.



नीट रिजल्ट को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहे पोस्ट में दावा किया गया है कि 2025 में 585 अंकों पर जहां करीब 2500 रैंक मिली थी, वहीं 2026 में इतने ही अंकों पर रैंक लगभग 15,500 तक पहुंच गई. कुछ छात्रों ने इसे लेकर परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि कठिन पेपर के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में इतने ऊचें अंक कैसे आए? वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं क&amp;zwj;ि अच्छे अंक के बाद उनकी भी रैंक में कमी आई. हालांकि, एनटीए की ओर से पेपर लीक या रिजल्ट में किसी तरह की गड़बड़ी को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है.

2025 :585 marks : ~2.5k rank2026 :585 marks : ~15.5k rankPaper this year was actually difficult. Was it leaked again ???#neet2026 #reneet #reneet2026 https://t.co/pg6bErMZZ1
&amp;mdash; Vedant (@VedxntR) July 16, 2026&amp;nbsp;



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दो छात्रों ने किया टॉप
री नीट 2026 में पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पंशुल बंसल संयुक्त रूप से देश के टॉपर बने हैं. दोनों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए हैं. एनटीए ने रिजल्ट के साथ मेरिट लिस्ट और कैटेगरी वाइज कट ऑफ भी जारी कर दी है, जिसके आधार पर अब 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
नीट यूजी की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी, लेकिन कथित पेपर लीक मामले के आरोपों के बाद इसे रद्द कर दिया गया था. इसके बाद 21 जून 2026 को देशभर के 5,440 केंद्रों पर और विदेश के 14 केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई, जिसमें 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 में किस राज्य के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी, यहां देखें स्टेट वाइज पूरी लिस्ट </title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 Result: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए ने नीट यूजी 2026 री एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस बार करीब 20 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने मेडिकल, डेंटल, आयुष और दूसरे अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालीफाई किया है. रिजल्ट जारी होने के बाद अब मेडिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. वहीं आपको बता दे कि इस साल परीक्षा का आयोजन 21 जून को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में बने 543 परीक्षा केंद्र पर 13 भाषाओं में किया गया था. एनटीए के अनुसार रिजल्ट समय पर जारी किए गए, ताकि काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया निर्धारित शेड्यूल में पूरी की जा सके. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि एनटीए यूजी 2026 रिजल्ट में किस राज्य के सबसे ज्यादा छात्रों ने बाजी मारी है और स्टेट वाइज क्वालीफाइंग उम्मीदवारों का पूरा आंकड़ा क्या है.&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा उम्मीदवार हुए सफल&amp;nbsp;
एनटीए के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 1.70 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने नीट यूजी 2026 में सफलता हासिल की. वहीं लक्षद्वीप से सबसे कम 43 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए हैं. एजेंसी ने बताया कि देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है.&amp;nbsp;
इन टॉप 10 राज्यों के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी
एनटीए की ओर से जारी राज्यवार आंकड़ों के अनुसार नीट यूजी 2026 में उत्तर प्रदेश के बाद इन राज्यों में सबसे ज्यादा क्वालीफाई उम्मीदवार थे. वहीं एनटीए की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश न केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की संख्या में बल्कि कुल भागीदारी के मामले में भी सबसे आगे रहा.

उत्तर प्रदेश: 1,70,770 क्वालिफाइड उम्मीदवार
राजस्थान: 1,33,140 क्वालिफाइड उम्मीदवार
महाराष्ट्र: 1,07,304 क्वालिफाइड उम्मीदवार
बिहार: 68,968 क्वालिफाइड उम्मीदवार
कर्नाटक: 65,901 क्वालिफाइड उम्मीदवार
तमिलनाडु: 61,306 क्वालिफाइड उम्मीदवार
पश्चिम बंगाल: 52,746 क्वालिफाइड उम्मीदवार
केरल: 51,782 क्वालिफाइड उम्मीदवार
गुजरात: 38,146 क्वालिफाइड उम्मीदवार
तेलंगाना: 38,026 क्वालिफाइड उम्मीदवार&amp;nbsp;

कुल 11.21 लाख उम्मीदवारों ने किया क्वालीफाई&amp;nbsp;
इस बार कुल 11.21 लाख उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए हैं, इनमें 58 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं शामिल है. महिलाओं का क्वालिफिकेशन प्रतिशत पुरुषों की तुलना में थोड़ा ज्यादा रहा. वहीं परीक्षा में कुल 138 उम्मीदवारों ने 690 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 19 उम्मीदवारों ने 700 से ज्यादा अंक हासिल किए. एनटीए के अनुसार 1,492 उम्मीदवारों ने 650 से उससे ज्यादा, 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे ज्यादा और 90,780 उम्मीदवारों ने 500 या उससे ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं.&amp;nbsp;
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ओबीसी वर्ग से सबसे ज्यादा क्वालीफाइंग उम्मीदवार&amp;nbsp;
कैटेगरी वाइज रिजल्ट की बात करें तो सबसे ज्यादा 5.12 लाख उम्मीदवार ओबीसी एनसीएल वर्ग से क्वालीफाई हुए हैं. इसके अलावा जनरल कैटेगरी से 2.91 लाख, एससी से 1.59 लाख, जनरल ईडब्ल्यूएस से 95,026, एसटी से 63,716, पीडब्ल्यूडी बीडी से 3,666 और पीडब्ल्यूडी से 303 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए हैं.&amp;nbsp;
13 भाषाओं में हुई थी परीक्षा&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 का आयोजन हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 13 भाषाओं में किया गया था. परीक्षा में करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे. एनटीए ने रिजल्ट जारी करने से पहले अंतिम आंसर की भी जारी की थी और बताया था कि मूल्यांकन प्रक्रिया को इस बार ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए अलग-अलग चरणों को समांतर तरीके से पूरा किया गया है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, में, किस, राज्य, के, ज्यादा, बच्चों, ने, मारी, बाजी, यहां, देखें, स्टेट, वाइज, पूरी, लिस्ट </media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026 Result: किस रैंक पर कौन&amp;सा मेडिकल कॉलेज मिलेगा? सरकारी या प्राइवेट; यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी परीक्षा का रिजल्ट 16 जुलाई को जारी कर दिया है. वहीं इस बार परीक्षा में 11.21 लाख से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए हैं. अब रिजल्ट आने के बाद बड़ा सवाल यही आ रहा है कि ऑल इंडिया रैंक के आधार पर स्टूडेंट्स को कौन सा मेडिकल कॉलेज मिल सकता है और सरकारी एमबीबीएस सीट मिलने की संभावना कितनी है. हालांकि अंतिम सीट आवंटन केवल रैंक से तय नहीं होता, बल्कि इसमें कैटेगरी, राज्य कोटा, सीटों की उपलब्धता, काउंसलिंग राउंड और उम्मीदवारों की कॉलेज प्राथमिकताएं भी बड़ी भूमिका निभाती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सरकारी या प्राइवेट किस रैंक पर कौन सा मेडिकल कॉलेज मिल सकता है.
नीट में केवल अंक नहीं ऑल इंडिया रैंक तय करती है कॉलेज&amp;nbsp;
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन केवल अंकों के आधार पर नहीं होते, बल्कि ऑल इंडिया रैंक और दूसरे मानक भी इसमें मायने रखते हैं. काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवार की कैटेगरी, राज्य का डोमिसाइल, आरक्षण नियम, सीट मैट्रिक्स और पसंदीदा कॉलेज की लिस्ट को भी ध्यान में रखा जाता है. यही वजह है कि समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग राज्य और कैटेगरी के उम्मीदवारों को अलग-अलग कॉलेज मिल सकते हैं.&amp;nbsp;
किस रैंक पर कौन सा कॉलेज मिलने की उम्मीद&amp;nbsp;

पिछले वर्षों के काउंसलिंग ट्रेंड के आधार पर उम्मीदवार अपने संभावित कॉलेज का अनुमान लगा सकते हैं, जैसे ऑल इंडिया रैंक 1 से 100 &amp;nbsp;वाले छात्रों को एम्स दिल्ली सहित देश के टॉप एम्स और प्रीमियम सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की बड़ी संभावना है.
वहीं ऑल इंडिया रैंक 101 से 1000 में एम्स, जेआईपीएमईआर और देश के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलने की अच्छी खासी संभावना रहती है.
इसके बाद ऑल इंडिया रैंक 1000 से 5000 देश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी एमबीबीएस प्रवे की संभावना रहती है.
ऑल इंडिया रैंक 5000 से 10,000 में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों &amp;nbsp;में एडमिशन का अवसर मिल सकता है.
वहीं ऑल इंडिया रैंक 10,000 से 20,000 में ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोट के माध्यम से सरकारी एमबीबीएस कॉलेज मिलने की संभावना रहती है.
ऑल इंडिया रैंक 20,000 से 50,000 &amp;nbsp;में भी राज्य कोट के जरिए सरकारी या प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीएस सीट मिल सकती है.
ऑल इंडिया रैंक 50,000 &amp;nbsp;से 1 लाख &amp;nbsp;आने पर प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीएस सीट मिलने के बेहतर अवसर रहते हैं.
ऑल इंडिया रैंक 1 लाख से 1 लाख 50 हजार पर प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस सीट मिल सकती है.
ऑल इंडिया रैंक 1 लाख 50 हजार से 2 लाख 50 हजार प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस या बीडीएस के ऑप्शन उपलब्ध हो सकते हैं.
ऑल इंडिया रैंक &amp;nbsp;2 लाख 50 हजार से &amp;nbsp;ऊपर से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के अलावा बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस और दूसरे आयुष कोर्स में एडमिशन की संभावना ज्यादा रहती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 में किस राज्य के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी, यहां देखें स्टेट वाइज पूरी लिस्ट&amp;nbsp;
एमबीबीएस की कुल कितनी सीटों पर मिलेगा एडमिशन&amp;nbsp;
नेशनल मेडिकल काउंसिल के अनुसार 2026 के लिए देश भर में 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध है. इनमें 63,296 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में जबकि 73,643 सीटें प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में है. इस वर्ष एडमिशन पिछले साल की तुलना में कुल 9,911 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई है, जिनमें सरकारी और मेडिकल दोनों इंस्टीट्यूट की सीटें शामिल है. वहीं एमसीसी के माध्यम से 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के अलावा एम्स जेआईपीएमईआर, बीएचयू, एएमयू, ईएसआईसी, केंद्रीय विद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी और कुछ बीएससी नर्सिंग इंस्टीट्यूट की सीटों पर भी काउंसलिंग कराई जाएगी. वहीं विशेष सरकारी मेडिकल कॉलेज की 85 प्रतिशत सीटों के लिए अलग राज्यों की काउंसलिंग एजेंसियां प्रक्रिया पूरी करेगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET Result Rank Controversy: 585 नंबर, लेकिन रैंक 2500 से 15000 पार... NEET 2026&amp;nbsp;रिजल्ट पर छात्रों ने उठाए सवाल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, Result:, किस, रैंक, पर, कौन-सा, मेडिकल, कॉलेज, मिलेगा, सरकारी, या, प्राइवेट, यहां, जानें</media:keywords>
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        <title>NEET Rank vs Course 2026: किस रैंक पर मिलेगा MBBS, BDS, BAMS? यहां देखें Category&amp;wise लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-rank-vs-course-2026-किस-रैंक-पर-मिलेगा-mbbs-bds-bams-यहां-देखें-category-wise-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/neet-rank-vs-course-2026-किस-रैंक-पर-मिलेगा-mbbs-bds-bams-यहां-देखें-category-wise-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ NEET Rank vs Course 2026: एनटीए ने नीट यूजी 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है, जिसमें इस साल करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे. एनटीए के रिजल्ट के अनुसार परीक्षा में 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है. अब रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह आ रहा है कि किस रैंक पर एमबीबीएस, बीडीएस, &amp;nbsp;बीएएमएस या फिर अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन मिलने की संभावना है.
आपको बता दें कि एनटीए ने किसी भी कोर्स के लिए अलग-अलग कट ऑफ जारी नहीं की है. एजेंसी केवल क्वालीफाइंग कट ऑफ घोषित करती है, जबकि एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी और अन्य कोर्स में एडमिशन काउंसलिंग के दौरान ऑल इंडिया रैंक, कैटेगरी, सीटों की उपलब्धता और कॉलेज के क्लोजिंग रैंक के आधार पर तय होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि किस रैंक पर एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस मिलेगा.&amp;nbsp;
MBBS, BDS और BAMS के लिए कट ऑफ&amp;nbsp;
कई छात्रों को लगता है कि एनटीए हर मेडिकल कोर्स के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी करता है, लेकिन ऐसा नहीं है. नीट में क्वालीफाई करने के लिए उम्मीदवार अलग-अलग मेडिकल और AYUSH कोर्स की काउंसलिंग में भाग लेने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं. इसके बाद सीट आवंटन उम्मीदवार की रैंक, &amp;nbsp;कैटेगरी, राज्य कोटा, ऑल इंडिया कोटा और संबंधित कॉलेज के क्लोजिंग रैंक पर निर्भर करता है. वहीं नीट स्कोर के आधार पर एमबीबीएस, बीडीएस बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी और बीएससी नर्सिंग कोर्स में भाग लेने वाले इंस्टीट्यूट में एडमिशन मिलता है.&amp;nbsp;
किस रैंक पर किस कोर्स में मिल सकता है एडमिशन?&amp;nbsp;
स्टूडेंट की रैंक के आधार पर कॉलेज और कोर्स बदलते रहते हैं. पिछले वर्षों के काउंसलिंग ट्रेंड के अनुसार ऑल इंडिया रैंक 1 से 100 पाने वाले उम्मीदवारों के पास देश के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट जैसे एम्स और दूसरे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पाने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है. ऑल इंडिया रैंक 100 से 5000 के बीच के बीच रैंक आने वाले छात्रों को केंद्रीय संस्थानों और प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की अच्छी संभावना रहती है.
राज्य कोटा के तहत भी कई बार अच्छे ऑप्शन उपलब्ध रहते हैं. वहीं 5000 से 20,000 के बीच रैंक पाने वाले उम्मीदवारों को भी कई राज्यों में एमबीबीएस कॉलेज मिल सकते हैं, हालांकि अंतिम सीट आवंटन कैटेगरी, राज्य और काउंसलिंग राउंड पर निर्भर करता है. वह इसके अलावा 20,000 के बाद की रैंक पर कई उम्मीदवार को सरकारी &amp;nbsp;बीडीएस बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी एंड एएच या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के ऑप्शन मिल सकते हैं. सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग राउंड के अनुसार संभावनाएं भी बदलती रहती है.&amp;nbsp;
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किस कोर्स के लिए कितना रहता है कंपटीशन?&amp;nbsp;
पिछले वर्षों के ट्रेंड के अनुसार एमबीबीएस में सबसे ज्यादा कंपटीशन देखने को मिलता है. इसके बाद बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीवीएससी एंड एएच और दूसरे आयुष कोर्स आते हैं. वहीं इनमें प्राइवेट कॉलेज और राज्य के अनुसार स्थिति अलग-अलग भी होती है.&amp;nbsp;
किस आधार पर मिलता है कोर्स में एडमिशन?
नीट क्वालीफाई करने के बाद केवल स्कोर ही पर्याप्त नहीं होता. एडमिशन के दौरान कई दूसरे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है. जैसे ऑल इंडिया रैंक, उम्मीदवार की कैटेगरी, ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा, उपलब्ध सीटों की संख्या, कॉलेज का क्लोजिंग रैंक, काउंसलिंग का राउंड और उम्मीदवार की ओर से भरे गए कॉलेज और कोर्स ऑप्शन के आधार पर एडमिशन मिलता है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 में किस राज्य के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी, यहां देखें स्टेट वाइज पूरी लिस्ट&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Engineering Biology UG Course: देश में पहली बार शुरू होगा इंजीनियरिंग बायोलॉजी यूजी कोर्स, बायोटेक में करियर के खुलेंगे नए रास्ते</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/engineering-biology-ug-course-देश-में-पहली-बार-शुरू-होगा-इंजीनियरिंग-बायोलॉजी-यूजी-कोर्स-बायोटेक-में-करियर-के-खुलेंगे-नए-रास्ते</link>
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        <description><![CDATA[ Engineering Biology UG Course: भारत में हायर एजुकेशन और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने देश में पहली बार इंजीनियरिंग, बायोलॉजी में ग्रेजुएशन स्तर का कोर्स शुरू करने की घोषणा की है. इसके साथ ही सरकार ने 2035 तक भारत को वैश्विक बायो इकोनामी हब बनाने के लिए राष्ट्रीय रोडमैप भी लॉन्च किया है. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि नया कोर्स इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान, चिकित्सा और नई तकनीक के बीच की दूरी को कम करेगा और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करेगा. मंत्री ने कहा कि जिस तरह कंप्यूटर साइंस में डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाया है, उसी तरह इंजीनियरिंग बायोलॉजी आने वाले समय में भारत की बायोटेक्नोलॉजी ग्रोथ की आधारशिला बनेगी. उन्होंने कहा कि देश को अपने अपना मजबूत और आत्मनिर्भर बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार करना होगा, ताकि विज्ञान, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सके.
क्या है इंजीनियरिंग बायोलॉजी?
इंजीनियरिंग बायोलॉजी एक ऐसा विषय है,जो इंजीनियरिंग, बायोलॉजी, मेडिकल साइंस और आधुनिक तकनीकों को एक साथ जोड़ता है. क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स बायोलॉजिकल सिस्टम, मेडिकल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग के संयोजन से नई तकनीकों और समाधान विकसित करेंगे. सरकार का मानना है कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस मेडिकल रिसर्च में ऐसे विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ेगी.
मेडिकल और इंजीनियरिंग के बीच बनेगा नया सेतु
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब मेडिकल और इंजीनियरिंग अलग-अलग क्षेत्र नहीं रहे गए हैं. आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में कई तकनीकें ऐसी हैं, जहां डॉक्टरों और इंजीनियरों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों में भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने बताया कि आईटीआई समेत कई प्रमुख संस्थानों ने मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम शुरू करने की प्रस्ताव भी भेजे हैं, जिससे इंजीनियरिंग और मेडिकल एजुकेशन के बीच सहयोग बढ़ेगा.
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भारत के बायो इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने बिल्डिंग इंडिया एस ए लीडिंग बायो इकोनॉमी पावर हाउस बाय 2035 नाम से राष्ट्रीय रोडमैप भी जारी किया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी लगभग 10 अरब डॉलर की थी, जो अब बढ़कर 95 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है. सरकार का टारगेट इसे 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर और आगे चलकर 2035 तक वैश्विक स्तर पर अग्रणी बायो इकोनॉमी में बदलना है. उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में 11,000 से ज्यादा बायोटेक स्टार्टअप कम कर रहे हैं, जो क्षेत्र में तेजी से बढ़ते नवाचार और निवेश का संकेत है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>MBBS Seats in India: देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा MBBS सीटें, यहां देख लें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ MBBS Seats in India: देश में मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए एमबीबीएस सीटों की संख्या सबसे अहम होती है. हर साल नीट यूजी के जरिए सरकारी और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिया जाता है. ऐसे में कई छात्रों के मन में सवाल रहता है कि आखिर किस राज्य में सबसे ज्यादा सीटें उपलब्ध हैं और किन राज्यों में मेडिकल कॉलेज की संख्या अधिक है. &amp;nbsp;
हाल ही में नेशनल मेडिकल कमिशन ने शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए देशभर की एमबीबीएस सीटों की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी की है और इस बार सीटों की संख्या में अच्छा खासा इजाफा भी देखने को मिला है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं.&amp;nbsp;
एनएमसी ने कुल कितनी बढ़ाई सीटें?&amp;nbsp;
नेशनल मेडिकल कमीशन के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के अनुसार, इस साल देश भर में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. इनमें 1,27,028 सीटें पहले से मंजूर थीं, जबकि इस साल 9,911 नई सीटों को स्वीकृति दी गई है. इसके अलावा 25 नए मेडिकल कॉलेज को भी मंजूरी दी गई है, जिनमें करीब 2400 सीटें भी इसी बढ़ोतरी का हिस्सा है. अब देशभर के कुल 823 मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाएगी.&amp;nbsp;
किस राज्य में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें?&amp;nbsp;
एनएमसी के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटों के मामले में कर्नाटक पहले स्थान पर है. यहां सरकारी और मेडिकल कॉलेज को मिलाकर सबसे ज्यादा सीटें उपलब्ध हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना का नंबर आता है. इन राज्यों में बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज होने के कारण छात्रों के लिए सीटों के अवसर भी ज्यादा है. वहीं इन राज्यों में कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1300 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई है, जिससे यहां कुल सीटों की संख्या बढ़कर 15,395 हो गई. इसी के साथ कर्नाटक एक बार फिर देश का सबसे बड़ा मेडिकल एजुकेशन हब और सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटों वाला राज्य बन गया.&amp;nbsp;
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दूसरे राज्यों में इतनी बढ़ी सीटें
कर्नाटक के बाद तमिलनाडु का नंबर आता है, जहां करीब 950 नई सीटें जुड़ने के बाद कुल सीटों की संख्या 13,999 हो गई है. इसके अलावा राजस्थान में करीब 900 सीटें जुड़ी है, जिससे कुल सीटों की संख्या 8,080 पर पहुंच गई है. पश्चिम बंगाल में करीब 825 नई सीटें जुड़ने से कुल संख्या 7,200 हो गई है, जबकि तेलंगाना में करीब 810 नई सीटों के साथ कल सिम 10,250 तक पहुंच गई है. उत्तर प्रदेश में भी करीब 800 नई सीटें जोड़ी गई है, जिससे राज्य में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 14,000 हो गई है. इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी सीटों में अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेज में बढ़ी सीटें&amp;nbsp;
इस बार सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है. देश के 441 मेडिकल सरकारी मेडिकल कॉलेज में अब कुल 63,996 सीटें उपलब्ध होंगी, जिनमें इस साल 2,111 नई सीटें जोड़ी गई है. वहीं 382 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में कुल 73,643 सीटें होंगी. इनमें इस साल सबसे ज्यादा यानी 7,800 सीटों की बढ़ोतरी की गई है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>IIT Hyderabad Placement: दो डिपार्टमेंट में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट, छात्रों को 90 लाख तक का पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ IIT Hyderabad Placement: आईआईटी हैदराबाद ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 के प्लेसमेंट आंकड़े जारी कर दिए हैं. इस बार प्लेसमेंट सीजन में छात्रों को देश-विदेश की प्रमुख कंपनियों से शानदार ऑफर मिले. सबसे बड़ा पैकेज 90 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा, जबकि औसत सालाना पैकेज 22.5 लाख रुपये दर्ज किया गया. खास बात यह है कि दो विशेष कार्यक्रमों में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हासिल हुआ और पीएचडी छात्रों को भी 81 लाख रुपये तक का पैकेज मिला.
आईआईटी हैदराबाद के अनुसार, प्लेसमेंट प्रक्रिया 1 दिसंबर 2024 से शुरू हुई थी और इसे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया गया. इस दौरान 320 कंपनियों ने कैंपस भर्ती में हिस्सा लिया और इंजीनियरिंग, साइंस, डिजाइन और मैनेजमेंट समेत अलग-अलग क्षेत्र के छात्रों को नौकरी के अवसर दिए गए. संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, कुल 493 छात्रों का चयन हुआ और उन्हें 521 जॉब ऑफर मिले. इनमें 87 प्री प्लेसमेंट ऑफर और 43 अंतर्राष्ट्रीय ऑफर शामिल रहे. अंडर ग्रेजुएट स्तर पर प्लेसमेंट दर 70.99 प्रतिशत, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर 69.74% दर्ज की.&amp;nbsp;
कंप्यूटर साइंस में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट&amp;nbsp;
डिपार्टमेंटवार आंकड़ों में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे आगे रहा. इस डिपार्टमेंट के 111 में से 96 छात्रों को नौकरी मिली. इसके बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 97 में से 81 छात्रों का चयन हुआ. इसके अलावा मैकेनिकल एंड एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के 94 में से 65 सिविल इंजीनियरिंग के 73 में से 36 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 45 में से 36 और केमिकल इंजीनियरिंग के 56 में से 32 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. वहीं मटेरियल साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग साइंस और मैथमेटिक्स एंड मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग जैसे डिपार्टमेंट के छात्रों को भी अच्छी संख्या में ऑफर मिले.&amp;nbsp;
दो डिपार्टमेंट में 100% प्लेसमेंट&amp;nbsp;
संस्थान के अनुसार, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम में सभी 8 छात्रों को नौकरी मिली और इस विभाग ने 100 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज किया. वहीं पीएचडी कार्यक्रम में भी सभी योग्य छात्रों का चयन हुआ और यहां भी 100 प्रतिशत प्लेसमेंट रिकॉर्ड किया गया. पीएचडी छात्रों को अधिकतम 81 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला.&amp;nbsp;
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प्रोग्रामवार कैसा रहा प्रदर्शन?&amp;nbsp;
बीटेक छात्रों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा. मीटिंग में 74.56 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज किया गया और अधिकतम पैकेज 90 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा. वहीं एमटेक छात्रों के लिए सबसे बड़ा पैकेज 58 लाख रुपये रहा और प्लेसमेंट दर 66.28 प्रतिशत रही. इसके अलावा बीडिजाइन का अधिकतम पैकेज 14 लाख रुपये, एमडिजाइन का 29.32 लाख रुपये और एमएससी छात्रों का अधिकतम पैकेज 58 लाख रुपये दर्ज किया गया.&amp;nbsp;
700 छात्रों को मिले जॉब ऑफर&amp;nbsp;
संस्थान में 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के विस्तृत प्लेसमेंट आंकड़े भी जारी किए हैं. इसके अनुसार 1,146 ग्रेजुएट होने वाले छात्रों में से 943 छात्रों ने प्लेसमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया. जिनमें से 700 छात्रों को नौकरी के ऑफर मिले. इस चरण में सबसे बड़ा पैकेज 66.13 लाख रुपये और औसत पैकेज 20.26 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा साथ ही 53 अंतरराष्ट्रीय ऑफर भी छात्रों को मिले.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>MBBS Seats Matrix 2026: सरकारी कॉलेज ज्यादा, फिर भी MBBS सीटें प्राइवेट में अधिक... NMC के आंकड़ों से समझिए पूरा गणित </title>
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        <description><![CDATA[ MBBS Seats Matrix 2026: देश में नेशनल मेडिकल कमिशन ने शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीटों का मैट्रिक्स जारी कर दिया है, जिसमें 9911 नई सीटों को मंजूरी दे दी गई है. इसके साथ ही देश में एमबीबीएस सीटों की कुल संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 1,36,939 हो गई है. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि देश में सरकारी मेडिकल कॉलेज की संख्या प्राइवेट कॉलेज से ज्यादा होने के बावजूद एमबीबीएस सीटें प्राइवेट इंस्टीट्यूट से ज्यादा है. &amp;nbsp;
एनएमसी की ओर से जारी सीट मैट्रिक्स के अनुसार, इस साल कुल 1,27,028 एमबीबीएस सीटों का नवीनीकरण किया गया है, जबकि 9,911 नई सीटें जोड़ी गई है. यह सीटें नए मेडिकल कॉलेज और पहले से संचालित कॉलेज में सीट बढ़ाने के जरिए उपलब्ध हुई है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब हर साल 22 लाख से ज्यादा छात्र नीट यूजी परीक्षा देते हैं, लेकिन एमबीबीएस सीटों की संख्या उनकी तुलना में काफी कम लगती है.
सरकारी कॉलेज ज्यादा, फिर भी प्राइवेट में सीटें अधिक क्यों&amp;nbsp;
एनएमसी के आंकड़ों के अनुसार देश में इस समय 823 मेडिकल कॉलेज है. इनमें 441 सरकारी और 382 प्राइवेट कॉलेज शामिल है, यानी कॉलेज की संख्या के मामले में सरकारी संस्थान आगे हैं. इसके बावजूद सीटों की बात करें तो सरकारी कॉलेज में कुल 63,996 एमबीबीएस सीटें हैं, जबकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 73,643 सीटें उपलब्ध हैं, यानी प्राइवेट कॉलेज में सरकारी संस्थाओं की तुलना में 10 हजार से ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं. यही वजह है कि सरकारी कॉलेजों की संख्या अधिक होने के बावजूद कुल एमबीबीएस सीटों में प्राइवेट कॉलेजों की हिस्सेदारी ज्यादा दिखाई देती है. इस साल बढ़ाई गई 9,911 सीटों में से 7,800 सीट प्राइवेट कॉलेज को मिली है, जबकि सरकारी कॉलेज में केवल 2,111 सीटें बढ़ाई गई है यानी इस बार मंजूर हुई अतिरिक्त सीटों में करीब 79 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की रही.&amp;nbsp;
सीटों में इतनी तेजी से कैसे हुई बढ़ोतरी?&amp;nbsp;
एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के रेजिडेंट सदस्य एम के रमेश के अनुसार यह बढ़ोतरी ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 में किए गए बदलाव की वजह से संभव हुई है. पहले कोई मेडिकल कॉलेज अपनी पहली बैच की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकता था. नए नियम लागू होने के बाद अब कॉलेज निर्धारित मानकों को पूरा करने पर दूसरे वर्ष से ही सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इससे सीट विस्तार की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो गई.&amp;nbsp;
कितनी सीटें नए कॉलेज और कितनी पुराने कॉलेजों में बढ़ी?
एनएमसी के अनुसार इस साल मंजूर हुई 9,911 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों में से 2400 सीटें 25 नए मेडिकल कॉलेज से जुड़ी है. इनमें 7 सरकारी और 18 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज शामिल है. वहीं बाकी 7,511 सीटें पहले से चल रहे मेडिकल कॉलेज में सीट बढ़ाने के जरिए जोड़ी गई है. इसके अलावा राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 88 मेडिकल कॉलेज हैं, इनमें 49 सरकारी कॉलेज है, जो देश में सबसे ज्यादा है. राज्य में कुल 14,000 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध है. वहीं कर्नाटक में कुल 75 मेडिकल कॉलेज है, लेकिन यहां 15,395 एमबीबीएस सीटों के साथ देश में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं. राज्य में 51 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा महाराष्ट्र में 86 मेडिकल कॉलेज है और 13,099 सीटें जबकि तमिलनाडु में 78 मेडिकल कॉलेज और 13,999 एमबीबीएस सीटें हैं. राजस्थान में 51 मेडिकल कॉलेज है, जहां कुल 80 मेडिकल सीटें उपलब्ध हैं.&amp;nbsp;
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कॉलेज को एनएमसी की सख्त चेतावनी&amp;nbsp;
एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज को तय क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश नहीं देने की चेतावनी भी दी है. आयोग ने कहा कि स्वीकृत सीटों से ज्यादा एडमिशन देने पर एनएमसी एक्ट 2019 के तहत नियामकीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. साथ ही सभी बड़े मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग शुरू होने से पहले अपनी स्वीकृत सीटों का वेरिफिकेशन करने और किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड को जानकारी देने के लिए कहा गया है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 Topper: पेपर रद्द होने पर रो पड़े थे आर्यन गुप्ता, फिर 16 घंटे की पढ़ाई से बने ऑल इंडिया टॉपर</title>
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        <description><![CDATA[ डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए गुरुवार (16 जुलाई) का दिन बहुत बड़ी खबर लेकर आया. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के नतीजे घोषित किए. इस एग्जाम में लुधियाना के रहने वाले आर्यन गुप्ता ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया. उनके साथ हरियाणा के पंशुल बंसल भी संयुक्त रूप से पहले नंबर पर रहे. दोनों ही छात्रों ने 720 में से 715 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया.
लुधियाना में जश्न का माहौल
एनटीए ने जैसे ही नीट एग्जाम के नतीजे घोषित किए, आर्यन गुप्ता के घर और लुधियाना में खुशी की लहर दौड़ गई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आर्यन के घरवाले और जानकार जश्न मनाते नजर आ रहे हैं. आर्यन की इस शानदार कामयाबी पर सिर्फ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा शहर गर्व महसूस कर रहा है.
आर्यन के लिए आसान नहीं था यह सफर
आर्यन को यह सफलता रातों-रात नहीं मिली. इसके पीछे बेहद कड़ी मेहनत और संघर्ष है. बता दें कि इस साल नीट की परीक्षा कई विवादों में थी. पहले यह परीक्षा 12 मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के शक और अन्य विवादों की वजह से उसे रद्द कर दिया गया.
आर्यन बताते हैं कि जब परीक्षा रद्द होने की खबर आई तो वह टूट गए थे और खूब रोए थे. उन्हें लगा था कि उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. एमबीबीएस कर रहे उनके बड़े भाई आदित्य ने उन्हें हिम्मत दी. इसके बाद आर्यन ने दोबारा किताबें उठाईं और 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (Re-test) के लिए दोगुनी मेहनत से पढ़ाई शुरू कर दी.
रोजाना 16 से 17 घंटे करते थे पढ़ाई
अपनी कामयाबी पर आर्यन ने बताया कि वह रोजाना करीब 16 से 17 घंटे पढ़ाई करते थे. हालांकि, उन्होंने खुद को किताबों तक ही सीमित नहीं रखा. जब भी वह लगातार पढ़कर थक जाते थे तो ब्रेक जरूर लेते थे. अपना दिमाग शांत करने के लिए आर्यन सोशल मीडिया इस्तेमाल करते थे. टीवी पर फिल्में देखते थे और परिवार के साथ समय बिताते थे.
कैसी रही आर्यन की पढ़ाई-लिखाई?
आर्यन की स्कूलिंग लुधियाना के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से हुई. वह सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि गेम्स में भी काफी आगे रहे. वह स्टेट लेवल के टेबल टेनिस प्लेयर भी रह चुके हैं. उन्होंने 12वीं कक्षा में भी 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे.
डॉक्टरों के परिवार से आते हैं आर्यन
आर्यन के खून में ही डॉक्टरी है. उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थेटिस्ट हैं और उनकी मां डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं. उनके बड़े भाई ने पिछले साल नीट की परीक्षा में ऑल इंडिया 54वीं रैंक हासिल की थी. आर्यन ऑन्कोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. दरअसल, जब वह सिर्फ तीन साल के थे, तब कैंसर के कारण उनकी दादी का निधन हो गया था. इस वजह से वह कैंसर के डॉक्टर बनना चाहते हैं.
NEET-UG 2026 के खास आंकड़े

इस साल करीब 20 लाख छात्रों ने नीट की परीक्षा दी
इनमें से कुल 11.21 लाख स्टूडेंट्स पास हुए
पास होने वालों में 58 प्रतिशत से अधिक लड़कियां
आर्यन और पंशुल के अलावा 19 छात्रों ने 700 से ज्यादा अंक हासिल किए
राजस्थान के उपलक्ष्य गोयल को देश में तीसरी रैंक मिली
बिहार के आयुष भालोटिया चौथे स्थान पर रहे
महाराष्ट्र की श्रावणी कृष्णा कुडाले ने पांचवीं रैंक हासिल की

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 AIR 4 Ayush Bhalotia: बिहार के लाल ने कर दिखाया कमाल! NEET में AIR&amp;4, अब AIIMS Delhi में होगा दाखिला</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार के नवादा जिले के छोटे से कस्बे वारिसलीगंज में जश्न का माहौल है. वजह है यहां के एक होनहार छात्र की शानदार कामयाबी. दरअसल, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने गुरुवार (16 जुलाई) को नीट-यूजी के नतीजे घोषित किए. इसमें वारिसलीगंज के रहने वाले छात्र आयुष भलोटिया ने पूरे भारत में चौथा स्थान हासिल किया.&amp;nbsp;
वारिसलीगंज में जश्न का माहौल
जैसे ही यह खुशखबरी आयुष के गांव और आस-पड़ोस के लोगों तक पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. परिजनों और शुभचिंतकों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा करवा रहे हैं, मिठाइयां बांट रहे हैं और जमकर पटाखे फोड़ रहे हैं. हर किसी का यही कहना है कि एक छोटे से शहर से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा में चौथा स्थान हासिल करना कोई मामूली बात नहीं है.
AIIMS दिल्ली में पढ़ने का सपना साकार
मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हर छात्र का सबसे बड़ा सपना होता है कि उसे दिल्ली के एम्स में दाखिला मिले. एम्स दिल्ली को देश का सबसे बेहतरीन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल माना जाता है. आयुष ने अपनी मेहनत से इस सपने को हकीकत में बदल दिया.&amp;nbsp;
अपनी शानदार रैंक की वजह से अब आयुष का दिल्ली के एम्स में पढ़ना पूरी तरह तय हो चुका है. उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा से मरीजों की सेवा करने और अच्छा डॉक्टर बनने का सपना देखा था, जो अब पूरा होने जा रहा है.
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आयुष की सफलता से जुड़ी खास बातें

रैंक: पूरे भारत में चौथा स्थान
लक्ष्य: एम्स नई दिल्ली में पढ़ाई
प्रेरणा: सीमित संसाधनों के बाद भी हार न मानना
मूल मंत्र: कड़ी मेहनत, अनुशासन और माता-पिता का आशीर्वाद

सीमित संसाधनों में पाई असीमित सफलता
आयुष की यह कामयाबी उन सभी छात्रों के लिए सबक है, जिन्हें लगता है कि अच्छी पढ़ाई सिर्फ बड़े शहरों में ही हो सकती है. वारिसलीगंज जैसे इलाके में महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं और बड़े-बड़े कोचिंग सेंटर आसानी से नहीं मिलते. इसके बावजूद आयुष ने साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का दृढ़ संकल्प हो तो इंसान किसी भी ऊंचे मुकाम पर पहुंच सकता है.
आयुष रोजाना पूरे अनुशासन के साथ कई घंटे पढ़ाई करते थे. उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपनी किताबों पर लगाया. इस सफलता के लिए उन्होंने कई चीजों का त्याग किया और अपनी मंजिल से ध्यान नहीं भटकने दिया.&amp;nbsp;
माता-पिता और शिक्षकों को दिया श्रेय
आयुष ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और अपने शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. जब भी वह पढ़ाई करते-करते थक जाते या निराश महसूस करते तो उनके परिवार ने उन्हें हिम्मत दी. वहीं, टीचर्स ने उन्हें हमेशा सही रास्ता दिखाया और उन्हें परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार किया.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कितने पढ़े&amp;लिखे हैं जंतर&amp;मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक, कहां से ली है उन्होंने डिग्री?</title>
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        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk Education:&amp;nbsp;सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से अनशन पर बैठे हैं. उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है और वजन में भी काफी कमी आई है. आज सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का 18वां दिन है. तबीयत बिगड़ने के बावजूद भी वह अपने फैसले पर अडिग हैं.
कई जानी-मानी हस्तियां वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील कर रही हैं, लेकिन सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार की तरफ से जवाबदेही तय नहीं की जाती है, वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि सोनम वांगचुक कितने पढ़े लिखे हैं और उन्होंने कहां से डिग्री ली है?&amp;nbsp;
साधारण गांव से शुरू हुआ वांगचुक का सफर&amp;nbsp;
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के छोटे से गांव और उलेटोकपो में हुआ था. उनके पिता का नाम सोनम वांग्याल और मां का नाम शेरिंग बताया जाता है. उनका बचपन बहुत साधारण परिवार और चुनौतियों से भरा रहा. उस दौर में उनके गांव में आधुनिक शिक्षा जिसे कोई सुविधा मौजूद नहीं थी, यही वजह है कि वह 9 साल की उम्र तक स्कूल जाकर औपचारिक पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए. बाद में उन्हें पढ़ाई के लिए श्रीनगर भेजा गया, लेकिन वहां भी उनके लिए राह आसान नहीं थी क्योंकि उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं को समझने और सीखने में शुरुआत में काफी दिक्कतें आई. इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और हार नहीं मानी.&amp;nbsp;
एनआईटी श्रीनगर से की इंजीनियरिंग&amp;nbsp;
अपनी शुरुआती मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए सोनम वांगचुक ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाया, इसके लिए वह दूसरे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे. यह उनके संघर्षशील स्वभाव और आत्मनिर्भरता की शुरुआत की झलक थी, जो आगे चलकर उनके पूरे करियर की पहचान बन गई.&amp;nbsp;
शिक्षा सुधार की दिशा में रखा पहला कदम&amp;nbsp;
इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर पूरी करने के बाद सोनम वांगचुक अपनी ऊर्जा लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में लगा दी. 1988 में उन्होंने स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी सेकमॉल की स्थापना की. इस संस्था का मकसद स्थानीय बच्चों को उनकी अपनी भाषा और संस्कृति के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना था. उन्होंने पारंपरिक रटंत प्रणाली को चुनौती देते हुए बच्चों को हाथों से काम करके सीखने का एक नया और व्यावहारिक तरीका अपनाया. बाद में उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख की भी स्थापना की जिसे आज वैकल्पिक शिक्षा और रिसर्च का बड़ा केंद्र माना जाता है.&amp;nbsp;
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आइस स्तूपा तकनीक ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान&amp;nbsp;
सोनम वांगचुक सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने लद्दाख की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक ही यानी पानी की किल्लत को सुलझाने के लिए भी नवाचार किया. उन्होंने आइस स्तूपा तकनीक विकसित की जो बर्फ से बनाए गए कृत्रिम ग्लेशियर की तरह काम करती है और गर्मियों में पिघलाकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है. इस तकनीक की मदद से लिए क्षेत्र में सैकड़ों हेक्टेयर बंजर जमीन की सिंचाई संभव हो पाई और वहां हजारों पेड़ पौधे और बगीचे लगाए जा सके. इस इनोवेशन ने उन्हें भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजी एडमिशन के लिए आज जारी होगी पहली लिस्ट, 18 जुलाई तक करनी होगी सीट एक्सेप्ट</title>
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        <description><![CDATA[ DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए आज बड़ा दिन है. यूनिवर्सिटी आज 16 जुलाई शाम 5 बजे कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम के तहत पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी करेगा. जिन उम्मीदवारों ने सीएसएएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और कॉलेज कोर्स की प्रेफरेंस लॉक की है. वह ऑफिशियल पोर्टल पर लॉगिन करके अपना अलॉटेड कॉलेज और कोर्स देख सकेंगे.
पहली लिस्ट जारी होने के साथ ही एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. इस साल डीयू में 69 कॉलेज और डिपार्टमेंट में 73 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की कुल 71,624 सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. यूनिवर्सिटी के अनुसार इस बार 2,08,043 उम्मीदवारों ने अपनी अंतिम प्रेफरेंस से लॉक की है. ऐसे में हर सीट के लिए लगभग तीन छात्रों के बीच मुकाबला है.&amp;nbsp;
आज शाम 5:00 बजे जारी होगी पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट&amp;nbsp;
पहले सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी होने के बाद जिन छात्रों को सीट मिलेगी, उन्हें 16 जुलाई से 18 जुलाई रात 11:59 बजे तक अपनी सीट स्वीकार करनी होगी. तय समय में सीट एक्सेप्ट नहीं करने वाले उम्मीदवार सीएसएएस काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे. इसके साथ ही संबंधित कॉलेज 16 जुलाई से 20 जुलाई शाम 4:59 बजे तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करेंगे. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को 21 जुलाई रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करनी होगी. फीस जमा होने के बाद ही प्रोविजनल एडमिशन कंफर्म माना जाएगा. वहीं दूसरी सीट अलॉटमेंट लिस्ट 25 जुलाई को जारी की जाएगी.
ऐसे चेक करें अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस&amp;nbsp;

अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस जानने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले डीयू यूजी एडमिशन पोर्टल की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा.
इसके बाद Candidate Login के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपना सीयूईटी यूजी 2026 एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड डालें.
इसके बाद सिक्योरिटी कैप्चा भरकर लॉगिन करें.
लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड पर मौजूद First Round Allotment Status वाले लिंक पर क्लिक करें, जहां आपको अलॉट किए गए कॉलेज और कोर्स की पूरी जानकारी मिल जाएगी.&amp;nbsp;
फ्यूचर में इस्तेमाल के लिए इस अलॉटमेंट डिटेल को डाउनलोड करके सुरक्षित भी रख सकते हैं.&amp;nbsp;

सीट मिलने के बाद क्या करना होगा?
सीट अलॉट होने के बाद उम्मीदवारों को सबसे पहले एक्सेप्ट अलॉटेड सीट ऑप्शन चुनना होगा. इसके बाद संबंधित कॉलेज अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट की जांच करेगा. अगर कॉलेज किसी अतिरिक्त जानकारी या डॉक्यूमेंट की मांग करता है तो उम्मीदवारों को अपने डैशबोर्ड पर नियमित रूप से अपडेट देखते रहना होगा. डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के बाद ऑनलाइन फीस जमा करनी होगी, तभी एडमिशन प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी.&amp;nbsp;
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इस बार टूटा रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड&amp;nbsp;
इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन को लेकर छात्रों में गजब का उत्साह देखने को मिला. 2022 में सीएसएएस पोर्टल शुरू होने के बाद से इस बार सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं. कुल 2,73,751 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें 2,18,284 ने फेज 1 की प्रक्रिया पूरी की और 2,80,043 उम्मीदवारों ने अपनी कॉलेज और कोर्स प्राथमिकताएं लॉगिन कर दी. इस बार यूनिवर्सिटी में कुल 71,624 ग्रेजुएशन सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. इसके अलावा रजिस्ट्रेशन आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार भी लड़कियों की भागीदारी लड़कों के मुकाबले ज्यादा रही. कुल 2,18,284 उम्मीदवारों में से 1,20,509 यानी करीब 55.5 प्रतिशत आवेदक महिलाएं हैं, जबकि 44.8 प्रतिशत आवेदक पुरुष है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Admission, 2026:, दिल्ली, यूनिवर्सिटी, में, यूजी, एडमिशन, के, लिए, आज, जारी, होगी, पहली, लिस्ट, जुलाई, तक, करनी, होगी, सीट, एक्सेप्ट</media:keywords>
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        <title>ISRO Scientist Job: ISRO में कैसे मिलती है जॉब, कितनी होती है सैलरी और शिफ्ट टाइमिंग; यहां इस्तीफा देने का क्या है नियम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isro-scientist-job-isro-में-कैसे-मिलती-है-जॉब-कितनी-होती-है-सैलरी-और-शिफ्ट-टाइमिंग-यहां-इस्तीफा-देने-का-क्या-है-नियम</link>
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        <description><![CDATA[ ISRO Scientist Job: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक बनना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है. चंद्रयान से लेकर गगनयान तक इसरो ने जिस तरह से दुनिया में भारत का डंका बजाया है, उसके पीछे यहां काम करने वाले वैज्ञानिक और इंजीनियर की मेहनत छिपी है. लेकिन हाल ही में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. दरअसल] सामने आए आंकड़े के अनुसार हर साल इसरो से करीब 120 वैज्ञानिक इस्तीफा दे रहे हैं.
इस वजह को देखते हुए अब सरकार ने इसरो के एग्जिट यानी इस्तीफे से जुड़े नियमों को पहले से ज्यादा सख्त बना दिया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इसरो में नौकरी कैसे मिलती है, यहां सैलरी और शिफ्ट टाइमिंग कैसी होती है. अगर कोई वैज्ञानिक इस्तीफा देना चाहे, तो उसके लिए क्या नियम तय किए गए हैं.&amp;nbsp;
हर साल इसरो से इस्तीफा दे रहे 120 वैज्ञानिक&amp;nbsp;
रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिकों ने इसरो छोड़ा है. इनमें यूआर राव सैटलाइट सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के कई एक्सपीरियंस वैज्ञानिक शामिल है. कुछ अधिकारी गगनयान, चंद्रयान-3 और दूसरे प्रमुख मिशनों से भी जुड़े हैं. स्थिति को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया आंतरिक निर्देश जारी किया है. अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर काम कर रहे ग्रुप ए वैज्ञानिकों के इस्तीफे या वीआरएस को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी. ऐसे सभी मामलों में अंतिम फैसला केंद्र स्तर पर लिया जाएगा. वहीं माना जा रहा है कि भारत में तेजी से बढ़ रहे प्राइवेट स्पेस सेक्टर के कारण एक्सपीरियंस वैज्ञानिकों की मांग बढ़ी है. &amp;nbsp;वहीं कहीं प्राइवेट कंपनियां बेहतर सैलरी और नेतृत्व की भूमिका दे रही है, जिसके चलते वैज्ञानिक प्राइवेट सेक्टर का रुख कर रहे हैं.
कैसे मिलती है इसरो में नौकरी&amp;nbsp;
अगर आपका भी इसरो में वैज्ञानिक या इंजीनियर बनने का सपना है, तो सबसे पहले आपके पास 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स सब्जेक्ट होने चाहिए. इसके बाद उम्मीदवार इलेक्ट्रॉनिक, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, सिविल, एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग या फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट में बीई बीटेक या संबंधित डिग्री कर सकते हैं. वैज्ञानिक और इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित करता है. ज्यादातर पदों के लिए कम से कम 65 प्रतिशत या निर्धारित सीजीपीए जरूरी होता है. इसरो में चयन लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर किया जाता है. इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नॉलोजी से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी इसरो में अवसर मिलने की संभावना ज्यादा रहती है.&amp;nbsp;
कितनी होती है इसरो वैज्ञानिकों की सैलरी&amp;nbsp;
इसरो में साइंटिस्ट पद का शुरुआती वेतन सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे लेवल 10 पर मिलता है. बेसिक सैलरी 56,100 रुपये प्रतिमाह होती है. इसके साथ महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, प्रोफेशनल अपडेट अलाउंस, एनपीएस योगदान समेत दूसरी सुविधाएं भी मिलती है. ऐसे में कुल महीने का वेतन पोस्टिंग के स्थान और बच्चों के आधार पर करीब 95,000 से लेकर 1 लाख रुपये से अधिक पहुंच सकता है. वहीं वैज्ञानिकों के प्रमोशन के साथ सैलरी में भी बढ़ोतरी की जाती है.&amp;nbsp;
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इसरो में कैसा होता है काम का माहौल और शिफ्ट टाइमिंग
इसरो में सामान्य तौर पर काम का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होता है. जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक परियोजनाओं के अनुसार अतिरिक्त समय भी काम करते हैं. यहां सप्ताह में 5 दिन काम करना होता है और 2 दिन का अवकाश रहता है. ऑफिस परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर भी बैन रहता है, संस्थान में वैज्ञानिकों को रिसर्च आधारित माहौल, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन और दूसरे कर्मचारी लाभ भी दिए जाते हैं.&amp;nbsp;
इसरो में इस्तीफा देने के नियम&amp;nbsp;
पहले इसरो के विभिन्न केंद्रों के निदेशक कुछ स्तर तक वैज्ञानिकों की स्थिति और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति को मंजूरी दे सकते थे, लेकिन नए निर्देशों के बाद गगनयान और दूसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की स्थिति पर सीधे मंजूर नहीं होंगे. संबंधित केंद्र के निदेशक अपनी सिफारिश के साथ आवेदन अंतरिक्ष विभाग को भेजेंगे, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG Result 2026: 20 जुलाई तक जारी हो सकता है रिजल्ट, neet.nta.nic.in वेबसाइट पर ऐसे चेक कर पाएंगे अपना स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026:&amp;nbsp;एनटीए जल्द ही री-नीट यूजी 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार 20 जुलाई तक नीट यूजी 2026 का रिजल्ट घोषित होने की संभावना है. रिजल्ट जारी होने के बाद 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए उम्मीदवारों को अपनी आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा.
आपको बता दें कि री-नीट परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की गई थी. इससे पहले 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा को पेपर लीक की आरोपी के बाद रद्द कर दिया गया था. दोबारा आयोजित परीक्षा देश भर के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई थी. परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था. यह परीक्षा अंग्रेजी और हिंदी समेत कुल 13 भाषाओं में आयोजित हुई थी.&amp;nbsp;
फाइनल आंसर की के आधार पर जारी होगा रिजल्ट&amp;nbsp;
एनटीए ने 13 जुलाई को प्रोविजनल आंसर की जारी की थी. उम्मीदवारों को 15 जुलाई तक आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया था. प्रत्येक प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 200 प्रति प्रश्न की प्रोसेसिंग फीस निर्धारित की गई थी, जिसका पेमेंट डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग के माध्यम से किया गया. वहीं सभी आपत्तियों की जांच विषय एक्सपर्ट्स की समिति करेगी. अगर किसी उम्मीदवार की आपत्ति सही पाई जाती है, तो संबंधित उत्तर में संशोधन किया जाएगा और संशोधित उत्तर सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होगा. इसके बाद तैयार की गई फाइनल आंसर की के बाद ही नीट यूजी 2026 का रिजल्ट अब घोषित किया जाएगा&amp;nbsp;
रि-चेकिंग या रि-इवैल्युएशन की सुविधा नहीं&amp;nbsp;
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि नीट यूजी की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच या पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है. एजेंसी के अनुसार ओएमआर शीट का मूल्यांकन पूरी तरह मशीन आधारित सॉफ्टवेयर से किया जाता है, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष रहती है. उम्मीदवारों को पहले ही ओएमआर और आंसर की पर आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया जा चुका है. इसके अलावा रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों की स्कैन की गई ओएमआर शीट और स्कोरकार्ड डिजिलॉकर पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे परीक्षार्थी भविष्य में जरूरत पड़ने पर आसानी से अपने डॉक्यूमेंट से डाउनलोड कर सकेंगे.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक कर सकेंगे नीट यूजी 2026 का रिजल्ट&amp;nbsp;

नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टूडेंट्स को सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाना होगा.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर नीट यूजी 2026 रिजल्ट लिंक पर क्लिक करना होगा.
अब आवेदन संख्या, पासवर्ड और दूसरी मांगी गई डिटेल भरनी होगी.
इस डिटेल को सबमिट करते ही स्क्रीन पर स्कोर कार्ड दिखाई देगा.
स्टूडेंट्स अपने स्कोर कार्ड को फ्यूचर के लिए डाउनलोड करके भी रख सकते हैं.

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Result, 2026:, जुलाई, तक, जारी, हो, सकता, है, रिजल्ट, neet.nta.nic.in, वेबसाइट, पर, ऐसे, चेक, कर, पाएंगे, अपना, स्कोरकार्ड</media:keywords>
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        <title>Science of Happiness Course: DU में &amp;apos;साइंस ऑफ हैप्पीनेस&amp;apos; का बढ़ा क्रेज, जानें आखिर क्यों बढ़ रही है इस कोर्स की लोकप्रियता?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/science-of-happiness-course-du-में-साइंस-ऑफ-हैप्पीनेस-का-बढ़ा-क्रेज-जानें-आखिर-क्यों-बढ़-रही-है-इस-कोर्स-की-लोकप्रियता</link>
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        <description><![CDATA[ Science of Happiness Course : आज के समय में युवाओं के बीच पढ़ाई के साथ-साथ मेंटल हेल्थ, इमोशनल सपोर्ट और बेहतर लाइफस्टाइल को लेकर भी छात्रों की सोच तेजी से बदल रही है. यही वजह है कि अब ऐसे कोर्स भी लोकप्रिय हो रहे हैं, जो सिर्फ किताबों की जानकारी नहीं बल्कि लाइफ को बेहतर तरीके से जीने का नजरिया भी सिखाते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी का साइंस ऑफ हैप्पीनेस ऐसा ही एक कोर्स है, जिसे शुरू हुए अभी दो साल ही हुए हैं, लेकिन इस दौरान 2,000 से ज्यादा छात्र इसमें एडमिशन ले चुके हैं. यह बढ़ती संख्या बताती है कि छात्रों के बीच मेंटल वेलबिंग और पॉजिटिव साइकोलॉजी से जुड़े विषयों में इंटरेस्ट लगातार बढ़ रहा है. तो आइए जानते हैं कि यह कोर्स क्या है और आखिर इसकी लोकप्रियता इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है.
दो साल में 2,000 से ज्यादा छात्रों ने लिया एडमिशन
दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक, साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स शुरू होने के बाद से अब तक 2,000 से ज्यादा छात्र इसमें एडमिशन ले चुके हैं. हाल ही में कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस कोर्स के प्रोग्रेस पर चर्चा की गई. बैठक में उन कॉलेजों के प्रिंसिपल और प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जहां यह कोर्स पढ़ाया जा रहा है. सभी ने अपने एक्सपीरियंस शेयर किए और बताया कि छात्रों के बीच इस कोर्स को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.
कैसे शुरू हुआ साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने मार्च 2024 में रेखी फाउंडेशन फॉर हैप्पीनेस के साथ एक समझौता (MoU) किया था. इसके तहत रेखी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पीनेस की स्थापना की गई. इसके बाद यूनिवर्सिटी ने अंडर ग्रेजुएट (UG) छात्रों के लिए एक सेमेस्टर का यह वैल्यू एडेड कोर्स शुरू किया.
अभी किन छात्रों के लिए उपलब्ध है यह कोर्स?
यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर के. रत्नाबली के अनुसार, फिलहाल यह कोर्स अंडर ग्रेजुएट के पहले चार सेमेस्टर के छात्रों के लिए उपलब्ध है. उन्होंने यह भी बताया कि इसे पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड पेपर के रूप में शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है.
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आखिर क्यों बढ़ रही है इस कोर्स की लोकप्रियता?
समीक्षा बैठक के दौरान कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि खुश रहना लाइफ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और इसे पॉजिटिव सोच साथ ही अच्छे कामों के जरिए हासिल किया जा सकता है. उनका कहना था कि दुनिया एक बेहतर जगह है और अगर व्यक्ति अच्छे काम करता है तो उसे अच्छे रिजल्ट भी मिलते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पहले खुशी और इमोशनल हेल्थ जैसे विषयों पर आधारित कोर्स बहुत कम देखने को मिलते थे, लेकिन बदलते सामाजिक माहौल और युवाओं की जरूरतों को देखते हुए अब ऐसे कोर्स पहले से ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं. यही वजह है कि छात्रों का इंटरेस्ट भी तेजी से इस दिशा में बढ़ रहा है.
कहां पढ़ाया जा रहा है यह कोर्स?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार, फिलहाल यह कोर्स यूनिवर्सिटी के 17 कॉलेजों और डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलॉजी में पढ़ाया जा रहा है. जिन प्रमुख कॉलेजों में यह कोर्स उपलब्ध है, उनमें मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन, हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), गार्गी कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज और आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज शामिल हैं.
माइंड लैब &amp;nbsp;पर भी दिया जा रहा है जोर
इस कोर्स को और प्रभावी बनाने के लिए कई कॉलेज अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित कर रहे हैं. मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज ने यूनिवर्सिटी को जानकारी दी कि उन्होंने इस कोर्स से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए माइंड लैब स्थापित की है. वहीं अन्य कॉलेज भी इसी तरह की सुविधाएं शुरू करने की योजना बना रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>MSME सेक्टर में करियर का सुनहरा अवसर, ICAI के Corporate Mitra प्रोग्राम के लिए आवेदन शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ Corporate Mitra Scheme 2026: अगर आप ग्रेजुएट हैं और अकाउंटिंग, टैक्सेशन या फाइनेंस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो आपके लिए बड़ी खबर आई है. दरअसल, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट (ICAI) ने कॉर्पोरेट मित्र प्रोग्राम के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 जुलाई से शुरू कर दी है. इच्छुक उम्मीदवार 31 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित पैरा-प्रोफेशनल तैयार करना है, जो देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अकाउंटिंग, टैक्सेशन, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कार्यों में सहयोग दे सकें.
यह कार्यक्रम केंद्रीय बजट में घोषित किया गया था. इसके तहत सरकार ने आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई को मिलकर एमएसएमई सेक्टर के लिए प्रोफेशनल्स तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी. इस पहल के तहत आईसीएआई ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से इस कोर्स को SWAYAM Plus प्लेटफार्म पर शुरू किया है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
इस कार्यक्रम में भारत का कोई भी नागरिक आवेदन कर सकता है, जिसने किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया हो. ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्र भी आवेदन के पात्र हैं, लेकिन उन्हें प्रमाण पत्र तभी मिलेगा जब वह अपनी डिग्री सफलतापूर्वक पूरी कर लेंगे. आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 20 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए. वहीं कॉर्पोरेट मित्र कोर्स SWAYAM Plus प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया गया है. इसके लिए 3000 फीस निर्धारित किया गया है, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना होगा.&amp;nbsp;
150 घंटे की पढ़ाई और 6 महीने की ट्रेनिंग&amp;nbsp;
यह कार्यक्रम IITM Pravartak के माध्यम से संचालित किया जाएगा. इसमें कुल 150 घंटे की पढ़ाई होगी और इससे एनसीआरएफ लेवल 5.5 के तहत क्रेडिट योग्य बनाया गया है. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को 6 महीने की ऑन द जॉब ट्रेनिंग भी करनी होगी. इसके बाद ही अंतिम मूल्यांकन और प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी होगी.&amp;nbsp;
प्रोग्राम में क्या-क्या सिखाया जाएगा?&amp;nbsp;
इस कोर्स को 6 प्रमुख मॉडलों में विभाजित किया गया है. इसमें अकाउंटिंग, टैक्सेशन, बैंकिंग, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, लीगल एंड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग जैसे सब्जेक्ट शामिल है. अकाउंटिंग मॉड्यूल में जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, बैंक रिकॉन्सिलिएशन, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट तैयार करना सिखाया जाएगा. साथ ही एमएस एक्सेल और टेली जैसे डिजिटल टूल्स का भी उपयोग कराया जाएगा. टैक्सेशन मॉड्यूल में इनकम टैक्स, टैक्स रिटर्न फाइलिंग, टीडीएस, टीसीएस, एडवांस टैक्स और जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी.
वहीं बैंकिंग मॉड्यूल में एमएसएमई के लिए बैंकिंग सिस्टम, क्रेडिट आवश्यकताओं, डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी पर फोकस रहेगा. फाइनेंशियल मैनेजमेंट में फाइनेंशियल स्टेटमेंट का विश्लेषण, वर्किंग कैपिटल और जरूरी डॉक्यूमेंट की जानकारी दी जाएगी. लीगल एंड सेक्रेटेरियल मॉड्यूल में कंपनी कानून, एमएसएमई रजिस्ट्रेशन, लेबर कोड, बोर्ड मीटिंग, एजीएम, सेबी नियम और एमएसएमई ऑनलाइन डिस्प्यूट रेजोल्यूशन पोर्टल से जुड़ी जानकारी शामिल होगी. वहीं कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग में कास्टिंग, बजटरी कंट्रोल और स्टैंडर्ड कॉस्टिंग जैसे सब्जेक्ट पढ़ाए जाएंगे.
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ऐसे होगा मूल्यांकन&amp;nbsp;
कोर्स पूरा करने और 6 महीने की ऑन द जॉब ट्रेनिंग के बाद उम्मीदवारों का सेंटर आधारित एमसीक्यू परीक्षा के जरिए मूल्यांकन किया जाएगा. परीक्षा का आयोजन आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई संयुक्त रूप से करेंगे. परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को SWAYAM Plus का वेरीफाएबल सर्टिफिकेट दिया जाएगा. जो व्यक्ति परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें दोबारा पूरे कार्यक्रम के लिए नया रजिस्ट्रेशन कर फीस जमा करनी होगी, क्योंकि एक ही मूल्यांकन में दोबारा परीक्षा देने की सुविधा नहीं होगी.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cheap Engineering Colleges in USA: USA से करनी है इंजीनियरिंग? ये हैं 5 सबसे सस्ते और अच्छे बीटेक कॉलेज</title>
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        <description><![CDATA[ Cheap Engineering Colleges in USA:&amp;nbsp;विदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका सबसे पसंदीदा देश में गिना जाता है. यहां की यूनिवर्सिटीज आधुनिक रिसर्च, लैब, इंडस्ट्री से जुड़ी पढ़ाई और बेहतर प्लेसमेंट के लिए दुनिया भर में पहचान रखती है. हालांकि अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई महंगी मानी जाती है, लेकिन कई ऐसी यूनिवर्सिटी भी है, जहां अपेक्षाकृत कम फीस में अच्छी शिक्षा हासिल की जा सकती है. ऐसे में अगर आप भी अमेरिका से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो चलिए आज हम आपको 5 सबसे सस्ते और अच्छे बीटेक कॉलेज बताते हैं.&amp;nbsp;
अमेरिका में इंजीनियरिंग पढ़ने के फायदे&amp;nbsp;
अमेरिका में भारत की तरह बीटेक नाम की डिग्री नहीं दी जाती. इसकी जगह छात्रों को बैचलर ऑफ साइंस इन इंजीनियरिंग या इंजीनियरिंग साइंस की डिग्री मिलती है. यह 4 साल का अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम होता है. जिसमें बीटेक की तरह ही कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे कई ऑप्शन उपलब्ध होते हैं. वहीं अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में छात्रों को आधुनिक लैब्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलता है. कई संस्थाओं के बड़े टेक कंपनियों के साथ मजबूत संबंध होते हैं, जिससे पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप के बाद में नौकरी के अवसर बढ़ जाते हैं. यहां का फ्लेक्सिबल कोर्स स्ट्रक्चर छात्रों को इंजीनियरिंग के साथ बिजनेस या डेटा साइंस जैसे विषय भी पढ़ने की सुविधा देता है.&amp;nbsp;
अमेरिका के पांच सस्ते और अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज&amp;nbsp;
1. मिनट स्टेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
नॉर्थ डकोटा के मिनोट शहर में स्थित यह यूनिवर्सिटी कम फीस वाले ऑप्शंस में शामिल है. यहां चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की औसत फीस करीब 19,788 डॉलर है. यूनिवर्सिटी में हजारों छात्र पढ़ाई करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र भी शामिल है.&amp;nbsp;
2. फेयेटविले स्टेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
नॉर्थ कैरोलिना स्थिति यह यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग और अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए किफायती मानी जाती है. यहां औसत वार्षिक फीस लगभग 19,857 डॉलर है. इसके अलावा शहर में रहने का खर्च भी अमेरिका के कई अन्य शहरों की तुलना में कम माना जाता है.&amp;nbsp;
3. डेल्टा स्टेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
मिसिसिपी के क्लीवलैंड शहर में स्थित इस यूनिवर्सिटी में कई इंजीनियरिंग संबंधित प्रोग्राम उपलब्ध है. यहां 1 वर्ष की औसत फीस करीब 20,336 डॉलर है. छोटा कैंपस और सुरक्षित माहौल इसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आकर्षक बनाता है.&amp;nbsp;
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4. ला रोश यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में स्थित यूनिवर्सिटी की सालाना फीस लगभग 21,818 डॉलर है. यहां विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई का अच्छा माहौल उपलब्ध है और शहर भी शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है.&amp;nbsp;
5. वेस्टर्न कैरोलिना यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
नॉर्थ कैरोलिना के कुल्लोही शहर में स्थित इस यूनिवर्सिटी में लगभग 10 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं. यहां 1 साल की औसत फीस लगभग 22,042 डॉलर है. प्राकृतिक वातावरण और शांत कैंपस के कारण यह छात्रों के बीच लोकप्रिय ऑप्शन माना जाता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जल्द, 18 जुलाई से पहले जारी होने की उम्मीद</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा का परिणाम जल्द जारी कर सकता है. संभावना है कि रिजल्ट 18 जुलाई से पहले घोषित कर दिया जाए. हालांकि, बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में छात्रों को सलाह है कि वे रिजल्ट से जुड़ी जानकारी के लिए केवल बोर्ड के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर ही नजर रखें.
कैसे देख सकेंगे अपना रिजल्ट?
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र ऑनलाइन अपना परिणाम देख सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्म तिथि जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी. इसके अलावा छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट भी डाउनलोड कर सकेंगे.
बोर्ड ने क्यों दो हिस्सों में कराई परीक्षा?
इस साल सीबीएसई ने पहली बार 10वीं की बोर्ड परीक्षा दो चरणों में आयोजित की है. पहली परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य थी, जबकि दूसरी परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई, जिन्होंने अपने अंकों में सुधार करने के लिए दोबारा परीक्षा देने का विकल्प चुना था. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को एक और मौका देना है, ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें.
दो परीक्षा दीं तो क्या होगा?
बोर्ड के नियमों के अनुसार, अगर &amp;nbsp;किसी छात्र ने दोनों परीक्षाएं दी हैं तो अंतिम परिणाम में उसी विषय के अधिक अंक मान्य होंगे, जिसमें छात्र का प्रदर्शन बेहतर रहा है. इससे विद्यार्थियों को बिना किसी अतिरिक्त नुकसान और प्रेशर के अपने मार्क्स सुधारने का मौका मिलता है.
कैसे मिलेगी ओरिजिनल मार्कशीट?
रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्र अपनी ऑनलाइन मार्कशीट देख और डाउनलोड कर सकेंगे. बाद में संबंधित स्कूलों के माध्यम से Original Marksheet और &amp;nbsp;जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जाएंगे. अगर &amp;nbsp;किसी छात्र को अपने मार्क्स &amp;nbsp;को लेकर कोई परेशानी होती है तो बोर्ड द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार वह आगे की कार्रवाई के लिए आवेदन कर सकेगा.
कहां देख सकते हैं रिजल्ट?

सीबीएसई (CBSE)की आधिकारिक वेबसाइट पर
डिजिलॉकर
उमंग ऐप

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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU SOL Admission 2026: DU के SOL में यूजी&amp;पीजी दाखिले शुरू, इस बार दो नए कोर्स भी; WhatsApp पर मिलेगा एडमिशन अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) ने academic session 2026-27 के लिए ग्रेजुएशन (यूजी) और पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) कोर्स में एडमिशन शुरू कर दिए हैं. अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन एप्लीकेशन भर सकते हैं. SOL उन छात्रों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है, जो नियमित कॉलेज नहीं जा सकते, नौकरी के साथ पढ़ाई करना चाहते हैं या किसी और कारण से ओपन और डिस्टेंस मोड में पढ़ाई करना चाहते हैं. दाखिले डिपार्टमेंट ऑफ डिस्टेंस एंड कंटीन्यूइंग एजुकेशन (DDCE) के तहत लिए जा रहे हैं.
शुरू हो रहे दो नए केस
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग (COL) की निदेशक प्रो. पायल मागो ने Abp news को बताया कि इस बार SOL दो नए कोर्स शुरू कर रहा है. इनमें एमबीए (हेल्थकेयर) और बीएससी कंप्यूटर साइंस शामिल हैं. इन नए पाठ्यक्रमों के शुरू होने से छात्रों को स्वास्थ्य प्रबंधन और कंप्यूटर साइंस जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में पढ़ाई का नया अवसर मिलेगा. इन दोनों कोर्स को लेकर पहले से तैयारी की जा रही थी और अब इन्हें नए सत्र में शुरू किया जा रहा है.
एडमिशन प्रोसेस में जोड़ी नई सुविधा
इस साल एडमिशन प्रक्रिया में एक नई सुविधा भी जोड़ी गई है. अब आवेदन करने वाले छात्रों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए ओटीपी और एडमिशन से जुड़े जरूरी अपडेट भी मिलेंगे. इससे छात्रों को बार-बार वेबसाइट देखने की जरूरत कम होगी और आवेदन प्रक्रिया पहले से आसान हो जाएगी. SOL के कुछ पाठ्यक्रमों में दाखिले पहले से चल रहे हैं. इनमें एमबीए, एम.लिब. साइंस, बी.लिब. साइंस और पीजीडीएडीएलएम जैसे कोर्स शामिल हैं. इन कार्यक्रमों के लिए आवेदन 17 जून से ही लिए जा रहे हैं.
विदेशी भाषा सीखने के भी ऑप्शंस
इसके अलावा कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के ओपन लर्निंग डेवलपमेंट सेंटर (OLDC) में जो छात्र विदेशी भाषा सीखना चाहते हैं, उनके लिए भू एप्लीकेशन खुली हैं. यहां एक साल के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कराए जा रहे हैं. छात्र जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, इटैलियन, पुर्तगाली, चीनी, जापानी और कोरियाई जैसी आठ विदेशी भाषाएं सीख सकते हैं. इन कोर्सों का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के संबंधित भाषा विभागों के सहयोग से किया जा रहा है.
ऑनलाइन पढ़ाई कराने की भी तैयारी
प्रो. पायल मागो ने बताया कि आने वाले समय में इन विदेशी भाषा पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन मोड में भी शुरू करने की तैयारी है. इससे दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों के छात्र भी आसानी से इन कोर्सों का लाभ उठा सकेंगे. कुल मिलाकर इस बार SOL ने नए कोर्स, डिजिटल सुविधाओं और भाषा से संबंधित कोर्स के जरिए छात्रों के लिए पढ़ाई के ज़्यादा ऑप्शंस दिए हैं.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SOL, Admission, 2026:, के, SOL, में, यूजी-पीजी, दाखिले, शुरू, इस, बार, दो, नए, कोर्स, भी, WhatsApp, पर, मिलेगा, एडमिशन, अपडेट</media:keywords>
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        <title>Telangana UPSC Free Coaching:  तेलंगाना में फ्री UPSC कोचिंग, हर महीने मिलेगा 5000 रुपये स्टाइपेंड; जानें कैसे करें अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Telangana UPSC Free Coaching:&amp;nbsp;अगर आप भी UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं लेकिन महंगी कोचिंग फीस की वजह से पीछे हट जाते हैं, तो तेलंगाना सरकार की तरफ से एक बेहतरीन मौका सामने आया है. आपको बता दें की तेलंगाना बैकवर्ड क्लासेज वेलफेयर डिपार्टमेंट ने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा 2027 के लिए एक फ्री लॉन्ग टर्म कोचिंग प्रोग्राम शुरू किया है. यह कोचिंग हैदराबाद के साईबाबाद इलाके में स्थित TG BC स्टडी सर्कल में TGBCESDTC यानी तेलंगाना BC Employability Skill Development and Training Center के जरिए कराई जाएगी.&amp;nbsp; उम्मीदवार इसके लिए ऑफिशियल वेबसाइट tgbcstudycircle.cgg.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
आवेदन की तारीखें और चयन प्रक्रिया

15 जुलाई 2026 &amp;ndash; कोचिंग प्रोग्राम का नोटिफिकेशन जारी
17 जुलाई 2026 &amp;ndash; ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू
7 अगस्त 2026 &amp;ndash; ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख
13 अगस्त 2026 &amp;ndash; हॉल टिकट डाउनलोड करना शुरू
16 अगस्त 2026 &amp;ndash; स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित होगा
19 अगस्त 2026 &amp;ndash; रिजल्ट घोषित किया जाएगा
21 अगस्त 2026 &amp;ndash; सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू
24 अगस्त 2026 &amp;ndash; क्लासेज शुरू होंगी, जो मई 2027 तक चलेंगी

चयन प्रक्रिया:

कुल 150 उम्मीदवारों को दाखिला मिलेगा
100 उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए होगा
50 उम्मीदवार जो पहले से UPSC प्रीलिम्स पास कर चुके हैं, उन्हें बिना टेस्ट के सीधे दाखिला मिलेगा (योग्यता शर्तें पूरी करने पर)

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स्टाइपेंड, सुविधाएं और योग्यता शर्तें
इस कोचिंग प्रोग्राम की सबसे खास बात है कि इसमें चुने गए उम्मीदवारों को हर महीने 5000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए अटेंडेंस की शर्तें पूरी करनी होंगी. इसके अलावा एक बार के लिए 5000 रुपये का बुक ग्रांट भी मिलेगा, साथ ही स्टडी सर्कल की लाइब्रेरी इस्तेमाल करने की सुविधा और अनुभवी फैकल्टी से पढ़ाई कराई जाएगी.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;इस कोचिंग के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए, साथ ही उसे UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा 2027 की सभी योग्यता शर्तें भी पूरी करनी होंगी. इसके साथ ही परिवार की सालाना आय ग्रामीण क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए 1.5 लाख रुपये और शहरी क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>School Sex Education:  स्कूलों में जल्द अनिवार्य हो सकती है सेक्स एजुकेशन, सुप्रीम कोर्ट की चिंता पर सरकार का अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ देश के स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ी पहल होती दिख रही है. सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि इस विषय पर 26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है. अब अदालत की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है. इस पहल का उद्देश्य किशोरों को सही जानकारी देना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और पॉक्सो कानून के संभावित दुरुपयोग को कम करना है.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सरकार ने दी अहम जानकारी
यह मामला किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा था कि स्कूलों में यौन शिक्षा को लेकर क्या तैयारी की गई है. इसके जवाब में सरकार ने बताया कि विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा.
15 से 18 वर्ष के किशोरों से जुड़े मामलों पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों पर चिंता जताई. कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों को हर परिस्थिति में गंभीर आपराधिक अपराध की श्रेणी में रखना उचित नहीं हो सकता. इसी वजह से किशोरों के अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने तैयार किया रोडमैप
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. समिति में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के विशेषज्ञ, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. समिति को ऐसा व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे किशोरों को उनके अधिकारों, यौन सुरक्षा और पॉक्सो कानून के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके.
&#039;सेक्स एजुकेशन समय की जरूरत&#039;, पैरेंट्स एसोसिएशन ने किया समर्थन
इस मामले पर एबीपी लाइव से बातचीत में पैरेंट्स एसोसिएशन के डायरेक्टर अशोक अग्रवाल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में लंबे समय से व्यापक सेक्स एजुकेशन की आवश्यकता महसूस की जा रही है. उनके अनुसार आज के बच्चे पहले की तुलना में अधिक जागरूक और जिज्ञासु हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार भ्रमित हो जाते हैं. यदि स्कूलों में वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से इस विषय की पढ़ाई कराई जाएगी तो किशोर बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होंगे और अनावश्यक भ्रम से बच सकेंगे.
परिवारों में संवाद की कमी से बढ़ती हैं गलतफहमियां
अशोक अग्रवाल का कहना है कि अधिकांश परिवारों में आज भी यौन शिक्षा जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत नहीं होती. ऐसे में बच्चों को सही जानकारी नहीं मिल पाती और वे अधूरी या भ्रामक सूचनाओं के आधार पर फैसले लेने लगते हैं. उनका मानना है कि स्कूलों में व्यवस्थित शिक्षा मिलने से किशोर रिश्तों, सीमाओं और जिम्मेदारियों को अधिक परिपक्वता के साथ समझ सकेंगे.
&#039;बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता दोनों बढ़ेंगी&#039;
सोशल वर्कर योगिता भयाना ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि किशोरों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यौन शिक्षा को अनिवार्य बनाने का सुझाव महत्वपूर्ण है. उनके मुताबिक इससे पॉक्सो कानून के संभावित दुरुपयोग में कमी आने के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि इस तरह की शिक्षा केवल कानूनी जानकारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों को सुरक्षित व्यवहार, व्यक्तिगत अधिकार और जिम्मेदार फैसले लेने की समझ भी विकसित करेगी.
अदालत की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
फिलहाल विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास है. अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद स्कूलों के पाठ्यक्रम में व्यापक यौन शिक्षा को शामिल करने की दिशा में औपचारिक कदम उठाए जा सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>UP Police Constable Result 2026: इस दिन जारी हो सकता है यूपी कांस्टेबल भर्ती का रिजल्ट, एक क्लिक में दूर हो जाएंगे सारे शक</title>
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        <description><![CDATA[ UP Police Constable Result 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में शामिल लाखों परीक्षार्थियों का इंतजार अब जल्दी खत्म होने वाला है. बोर्ड की ओर से जल्द ही कांस्टेबल भर्ती का रिजल्ट जारी किया जा सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, परिणाम जुलाई 2026 के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना जताई जा रही है. रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर कार्ड और मेरिट लिस्ट देख सकेंगे. हालांकि, बोर्ड की ओर से अभी तक रिजल्ट की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है.
आपको बता दें कि यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का आयोजन 8, 9 और 10 जून 2026 को ऑफलाइन मोड में किया गया था. परीक्षा के कुछ दिन बाद बोर्ड ने प्रोविजनल आंसर की भी जारी कर दी थी. अब अभ्यर्थियों की नजरें सिर्फ रिजल्ट पर टिकी हैं. इस भर्ती अभियान के जरिए 32,679 कांस्टेबल पदों पर नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए करीब 29 लाखों में उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिससे यह प्रदेश की सबसे बड़े पुलिस भर्तियों में शामिल हो गई.&amp;nbsp;
रिजल्ट के साथ जारी होगी मेरिट लिस्ट&amp;nbsp;
यूपीपीआरपीबी रिजल्ट के साथ मेरिट लिस्ट भी जारी करेगा. मेरिट लिस्ट पीडीएफ में चयनित परीक्षार्थियों के रोल नंबर शामिल होंगे. उम्मीदवार पीडीएफ डाउनलोड करने के बाद कंट्रोल एफ की मदद से अपना रोल नंबर आसानी से खोल सकेंगे. जिन उम्मीदवारों का नाम मेरिट लिस्ट में होगा, उन्हें भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों के लिए बुलाया जाएगा.&amp;nbsp;
ऐसे चेक कर सकेंगे रिजल्ट&amp;nbsp;

रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले यूपीपीआरपीबी के आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर यूपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर या बर्थ डेट दर्ज करें.
सबमिट करते ही स्क्रीन पर रिजल्ट और स्कोर कार्ड दिखाई देगा.
फ्यूचर के लिए आप रिजल्ट डाउनलोड करके इसका प्रिंट आउट ले सकते हैं.&amp;nbsp;

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स्कोरकार्ड में क्या-क्या होगा?
रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों के स्कोर कार्ड में कोई जरूरी जानकारियां दर्ज होंगी. इनमें उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, कैटेगरी, अंक, क्वालीफाइंग स्टेटस और अगले चरण से जुड़े दिशा-निर्देश शामिल होंगे. अगर बोर्ड कट ऑफ जारी करता है तो उसकी जानकारी भी रिजल्ट के साथ-साथ उपलब्ध कराई जाएगी.
रिजल्ट के बाद क्या होगा?
वहीं लिखित परीक्षा पास करना अंतिम चरण नहीं माना गया है. सफल उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होना होगा. इसके तहत सबसे पहले फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट, फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट, इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल एग्जामिनेशन कराया जाएगा. इन सभी चरणों में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का नाम अंतिम मेरिट लिस्ट में शामिल किया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Police, Constable, Result, 2026:, इस, दिन, जारी, हो, सकता, है, यूपी, कांस्टेबल, भर्ती, का, रिजल्ट, एक, क्लिक, में, दूर, हो, जाएंगे, सारे, शक</media:keywords>
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        <title>US Army Recruitment Rules: क्या किसी भारतीय को मिल सकती है अमेरिकन स्पेशल फोर्स में नौकरी, जानिए क्या है नियम?</title>
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        <description><![CDATA[ US Army Recruitment Rules: अमेरिका में नौकरी और नागरिकता पाने का सपना देखने वाले कई भारतीयों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या वे सीधे अमेरिका या स्पेशल फोर्स में शामिल हो सकते हैं? हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी चर्चा हुई है. बता दें, अमेरिकी सेना भर्ती और इमीग्रेशन नियम इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट हैं. किसी विदेशी नागरिक के लिए अमेरिकी सेना में भर्ती होना संभव तो है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या किसी भारतीय को अमेरिकी स्पेशल फोर्स में नौकरी मिल सकती है और इसे लेकर अमेरिका नियम क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या भारतीय ज्वाइन कर सकते हैं, अमेरिकन स्पेशल फोर्स?&amp;nbsp;
किसी भारतीय नागरिक के लिए भारत से सीधे अमेरिकी स्पेशल फोर्स या सेना में भर्ती होने का नियम नहीं है. अमेरिकी सेना में भर्ती होने के लिए केवल अमेरिका पहुंचना ही पर्याप्त नहीं है, सबसे पहले उस नागरिक को अमेरिका में वैध स्थायी निवासी यानी ग्रीन कार्ड का दर्जा हासिल करना होगा. इसके बाद ही वह अमेरिकी सेना में भर्ती के लिए आवेदन कर सकता है. स्पेशल फोर्स में चयन भी सामान्य भर्ती के बाद तय प्रक्रिया और पात्रता के आधार पर होता है. मौजूदा नियमों के अनुसार ऐसे लोग जो स्टूडेंट विजा, वर्क वीजा, टूरिस्ट वीजा या किसी अन्य स्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं, वह सेना में भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकते.&amp;nbsp;&amp;nbsp;सेना में शामिल होने के लिए पहले था एक विशेष कार्यक्रम&amp;nbsp;
अमेरिका में पहले मिलिट्री एक्सेसन्स वाइटल टू द नेशन इंटरेस्ट नाम का एक कार्यक्रम चलाया जाता था. इसके तहत कुछ स्पेशल कौशल जैसे चिकित्सा सेवाओं, चुनिंदा विदेशी भाषाओं का ज्ञान रखने वाले गैर अमेरिकी नागरिकों को बिना ग्रीन कार्ड की भी सेना में शामिल होने का मौका मिल सकता था. हालांकि यह कार्यक्रम फिलहाल बंद है और नए आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या सेना में सेवा से जल्दी मिल सकती है नागरिकता?&amp;nbsp;
अमेरिकी कानून के तहत सेना में सम्मान जनक सेवा देने वाले ग्रीन कार्ड धारकों को सामान्य आवेदन की तुलना में नागरिकता के लिए कुछ विशेष छूट मिल सकती है. अमेरिकी इमीग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 328 और 329 के तहत योग्य सैन्यकर्मी तय शर्तें पूरी करने पर जल्दी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. शांति काल में कम से कम 1 वर्ष की सम्मान जनक सेवा देने वाले स्थायी निवासी नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र हो सकते हैं. वहीं अमेरिका की ओर से घोषित विशेष सैन्य परिस्थितियों के दौरान सेवा देने वाले कुछ सैनिकों को सामान्य निवास संबंधी शर्तों से भी राहत मिल सकती है, हालांकि केवल सेना में भर्ती होना नागरिकता के गारंटी नहीं है. आवेदक के अच्छे आचरण, अंग्रेजी भाषा की जानकारी और नागरिक शास्त्र से जुड़े नियमों सहित दूसरे कानूनी मानकों को भी पूरा करना होता है.
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क्या विदेश से किया जा सकता है आवेदन?
अमेरिकी सेना नियमों के अनुसार, कोई भी विदेशी नागरिक अपने देश में रहते हुए अमेरिकी सेना में भर्ती नहीं हो सकता. भर्ती के लिए उम्मीदवार को अमेरिका में मौजूद होना और उसके पास वैलिड ग्रीन कार्ड होना अनिवार्य है. यानी भारत में रहकर सीधे अमेरिकी सेना या स्पेशल फोर्स में शामिल होने का ऑप्शन उपलब्ध नहीं है.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Army, Recruitment, Rules:, क्या, किसी, भारतीय, को, मिल, सकती, है, अमेरिकन, स्पेशल, फोर्स, में, नौकरी, जानिए, क्या, है, नियम</media:keywords>
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        <title>MBBS Seats Increased in India 2026: मेडिकल छात्रों के लिए खुशखबरी! NMC ने बढ़ाईं 9911 MBBS सीटें, 25 नए मेडिकल कॉलेजों की मिली मंजूरी </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mbbs-seats-increased-in-india-2026-मेडिकल-छात्रों-के-लिए-खुशखबरी-nmc-ने-बढ़ाईं-9911-mbbs-सीटें-25-नए-मेडिकल-कॉलेजों-की-मिली-मंजूरी</link>
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        <description><![CDATA[ MBBS Seats Increased in India 2026:&amp;nbsp;नीट यूजी 2026 के जरिए एमबीबीएस में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए खुशखबरी है. नेशनल मेडिकल काउंसिल ने शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीटों की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है. इस बार देशभर में एमबीबीएस सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा किया गया है.
नई सीटों से जुड़ने के बाद अब 823 मेडिकल कॉलेज में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन होगा. इसके साथ ही 25 नए मेडिकल कॉलेज को भी मंजूरी दी गई है, जिससे मेडिकल एजुकेशन का दायरा और बढ़ेगा. यह सीट मैट्रिक्स नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के दौरान एडमिशन का आधार बनेगा.&amp;nbsp;
9911 नई सीटें बढ़ीं, कुल सीटें 1.36 लाख के पार&amp;nbsp;
एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए देशभर में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी. इनमें 1,27,028 पहले से स्वीकृत सीटें हैं, जबकि इस वर्ष 9,911 नई सीटों को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा 25 नए मेडिकल कॉलेजों में 2,400 नई सीटें भी जोड़ी गई है.&amp;nbsp;
सरकारी और निजी दोनों कॉलेजों में बढ़ीं सीटें&amp;nbsp;
इस बार सरकारी और प्राइवेट दोनों मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या में बढ़ाई गई है. देश में 441 सरकारी मेडिकल कॉलेज में अब कल 63,296 सीटें उपलब्ध होंगी. इनमें 2,111 नई सीटें जोड़ी गई है. वहीं 382 प्राइवेट कॉलेज में कुल 73,643 सीटें होंगी, जहां इस वर्ष 7,800 सीटों का इजाफा किया गया है.
25 नए मेडिकल कॉलेजों को भी मिली मंजूरी&amp;nbsp;
एनएमसी ने इस शैक्षणिक सत्र के लिए 25 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है. इनमें 7 सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल है, जहां कुल 400 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी. वहीं 18 नए प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 2,000 सीटों पर एडमिशन मिलेगा. बाकी नई सीटें पहले से संचालित मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश क्षमता बढ़ाकर जोड़ी गई है. इसके अलावा नेशनल मेडिकल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि सभी मेडिकल कॉलेज को केवल उन्हीं सीटों पर एडमिशन देना होगा, जिन्हें आधिकारिक मंजूरी मिली है. किसी भी कॉलेज को स्वीकृत क्षमता से ज्यादा छात्रों का एडमिशन देने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी संस्थान की सीटों में आगे बदलाव होता है, तो एमएआरबी संशोधित आदेश जारी करेगा और नई सीट मैट्रिक्स आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी.&amp;nbsp;
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प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के लिए 7 दिन की समय सीमा&amp;nbsp;
जिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को इस वर्ष नया संस्थान शुरू करने या सीटें बढ़ाने की मंजूरी मिली है, उन्हें 7 दिनों के अंदर इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी जमा करनी होगी. सभी औपचारिकताएं पूरी होने और डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के बाद मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड संबंधित संस्थाओं को लेटर ऑफ परमिशन जारी करेगा.&amp;nbsp;
इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ीं एमबीबीएस सीटें&amp;nbsp;
नई सीटों के वितरण में देश के कई राज्यों को बड़ा फायदा मिला है. सबसे ज्यादा 1300 सीटें कर्नाटक में बढ़ाई गई है, इसके बाद तमिलनाडु में 950, राजस्थान में 900, पश्चिम बंगाल में 825, तेलंगाना में 810 और उत्तर प्रदेश में 800 नई सीटों को मंजूरी मिली है. बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भी सीटों में अच्छी बढ़ोतरी की गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>MBBS, Seats, Increased, India, 2026:, मेडिकल, छात्रों, के, लिए, खुशखबरी, NMC, ने, बढ़ाईं, 9911, MBBS, सीटें, नए, मेडिकल, कॉलेजों, की, मिली, मंजूरी </media:keywords>
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        <title>MCD Edulife 2.0 Portal Launched: MCD स्कूल होंगे हाईटेक, EduLife 2.0 से छात्रों की पढ़ाई, रिकॉर्ड और स्कूल प्रबंधन अब पूरी तरह डिजिटल</title>
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        <description><![CDATA[ MCD Edulife 2.0 Portal Launched:&amp;nbsp; दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मंगलवार को लॉन्च किए गए EduLife 2.0 पोर्टल के माध्यम से 1500 से अधिक एमसीडी स्कूलों के छात्र रिकॉर्ड, शैक्षणिक योजना, स्कूल प्रशासन और अभिभावकों से जुड़ी व्यवस्थाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा. इसका उद्देश्य स्कूलों की कार्यप्रणाली को ज्यादा व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है.
स्कूलों का पूरा रिकॉर्ड अब एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा
EduLife 2.0 के जरिए सभी स्कूलों की आवश्यक जानकारी केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध रहेगी. इससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आरटीआई, हाउस और संसदीय प्रश्नों के साथ-साथ नीति निर्माण से जुड़ी सूचनाओं के लिए बार-बार स्कूलों से अलग-अलग रिपोर्ट मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पोर्टल पर जानकारी नियमित रूप से अपडेट होती रहेगी, जिससे अधिकारियों को हर समय नया डेटा मिलेगा. इसके साथ ही शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर डेटा संकलन का अतिरिक्त बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा.
टीचर्स को मिलेगा डिजिटल सपोर्ट, कागजी काम होगा कम
पोर्टल में शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप लेसन प्लान, वर्कशीट, मूल्यांकन उपकरण, डिजिटल प्लानर और अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है. शिक्षक छात्रों के मूल्यांकन संबंधी विवरण ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, उनकी शैक्षणिक प्रगति पर नजर रख सकेंगे और डिजिटल कंटेंट का उपयोग भी कर पाएंगे. इससे कागजी कार्यवाही घटेगी और शिक्षक विद्यार्थियों के साथ ज्यादा समय बिता सकेंगे.
पेरेंट्स घर बैठे देख सकेंगे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल एक्टिविटी
इस पोर्टल के जरिए अभिभावक अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, अटेंडेंस, मिड-डे मील से जुड़ी जानकारी और स्कूल की गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी कर सकेंगे. स्कूल पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) की रिपोर्ट और अभिभावकों से मिले सुझाव भी डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे. इससे स्कूल और अभिभावकों के बीच संवाद को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
मेधावी छात्रों को मिलेगी पहचान, पूर्व छात्रों से भी जुड़ेगा स्कूल
EduLife 2.0 में Alumni Corner और Success Story जैसे विशेष सेक्शन भी जोड़े गए हैं. इनके माध्यम से पूर्व छात्र अपने स्कूलों से जुड़े रह सकेंगे, जबकि प्रतिभाशाली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा. शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि मेधावी छात्रों के नाम पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, ताकि खेल अकादमियों और अन्य संस्थानों को ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिल सके.
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शिक्षा व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि EduLife 2.0 शैक्षणिक योजना, छात्रों की प्रगति की निगरानी, डिजिटल शिक्षण संसाधनों और स्कूल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल है. उनका कहना था कि इससे अभिभावकों की भागीदारी भी मजबूत होगी और आधुनिक तकनीक के जरिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जा सकेगा.
नई व्यवस्था से शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ
सदन के नेता जय भगवान यादव ने कहा कि नई तकनीक को अपनाने में शुरुआती स्तर पर कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन समय के साथ यही व्यवस्था शिक्षकों को छात्रों की प्रगति का बेहतरीन विश्लेषण करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगी.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE Three Language Policy: थर्ड लैंग्वेज में हुए फेल तो नहीं मिलेगा 10th का सर्टिफिकेट, Cbse ने लागू किया नियम</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Three Language Policy:&amp;nbsp;केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10वीं के लिए थर्ड लैंग्वेज को लेकर बड़ा बदलाव किया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के तहत लागू किए गए नए नियमों के अनुसार अब केवल बोर्ड परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा. अगर छात्र स्कूल स्तर पर होने वाले थर्ड लैंग्वेज के स्कूल बेस्ड असेसमेंट में सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें कक्षा 10 का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा. हालांकि इस विषय की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन इंटरनल असेसमेंट पास करना अनिवार्य हो होगा. यह नियम उन छात्रों पर लागू होगा जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में प्रवेश लेंगे और 2027-28 में कक्षा 10 की परीक्षा देंगे. वर्तमान स्तर में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे छात्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.&amp;nbsp;
थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं, लेकिन पास होना जरूरी&amp;nbsp;
सीबीएसई के 10 जुलाई को जारी गाइडलाइन के अनुसार कक्षा 10 में थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. इसके बावजूद छात्रों को स्कूल की ओर से कराए जाने वाले इंटरनल असेसमेंट में सफल होना अनिवार्य होगा. इसी के आधार पर उन्हें सेकेंडरी स्कूल एग्जामिनेशन पास सर्टिफिकेट मिलेगा. अगर कोई छात्र कक्षा 10 में इस इंटरनल असेसमेंट में असफल हो जाता है, तो संबंधित स्कूल को बोर्ड रिजल्ट घोषित होने से पहले उसका दोबारा री-असेसमेंट करना होगा.&amp;nbsp;
कक्षा 9 में फेल होने पर भी मिलेगा प्रमोशन&amp;nbsp;
सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई छात्र कक्षा 9 में थर्ड लैंग्वेज के स्कूल आधारित मूल्यांकन में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा. हालांकि उसे कक्षा 10 के दौरान ही कक्षा 9 की लंबित थर्ड लैंग्वेज परीक्षा भी पास करनी होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों का एक साल खराब होने से बचाना है, लेकिन पास सर्टिफिकेट के लिए भाषा संबंधी शर्तें पूरी करना जरूरी होगा.&amp;nbsp;
एनईपी 2020 के तहत लागू होगा तीन भाषा फार्मूला&amp;nbsp;
नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू की जा रही है. इसके अनुसार 2026-27 से कक्षा 9 के सभी छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य हैं. जिन छात्रों ने पहले से अंग्रेजी के साथ फ्रेंच, जर्मन या किसी अन्य विदेशी भाषा का चयन किया हुआ है, उन्हें एक बार की राहत दी गई है. ऐसे छात्र अपनी विदेशी भाषा जारी रख सकेंगे, लेकिन इसके साथ उन्हें एक भारतीय भाषा भी तीसरी भाषा के रूप में पढ़नी होगी. वहीं 2026-27 से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए भविष्य में यही तीसरी भाषा कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा का भी हिस्सा बनेगी, क्योंकि उनके लिए नया पाठ्यक्रम और किताबें चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है.&amp;nbsp;
स्कूलों को भी दिए गए निर्देश&amp;nbsp;
सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि थर्ड लैंग्वेज का मूल्यांकन निर्धारित स्कूल आधारित प्रणाली के तहत किया जाए. इसके लिए मूल्यांकन ढांचा पहले ही जारी किया जा चुका है. वहीं भाषा सीखने से जुड़े संसाधन एनसीईआरटी की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि स्कूलों को नई व्यवस्था लागू करने में सुविधा हो.&amp;nbsp;
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला&amp;nbsp;
तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नई व्यवस्था को सत्र शुरू होने के बाद लागू किया गया, जबकि कई स्कूलों में अभी पर्याप्त शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं है. साथ ही छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ बढ़ाने की भी चिंता जताई गई है. इस याचिका के जवाब में सीबीएसई और केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि बोर्ड से संबंधित लगभग आधे स्कूल पहले से ही कक्षा 9 में दो या दो से अधिक भारतीय भाषाएं पढ़ा रहे हैं. वहीं 99 प्रतिशत से ज्यादा स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा का शिक्षक उपलब्ध है. बोर्ड ने यह भी कहा है कि उसके 29 और 30 जुलाई को जारी सर्कुलर में याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए कई आरोप का समाधान किया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>बैन के बाद खुला राज! 2022 से जम्मू यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में मौजूद थी विवादित किताब</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में कथित तौर पर विवादित सामग्री वाली किताबें मिलने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. मामले में तीन प्रकाशकों की गिरफ्तारी के साथ-साथ अब विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में मौजूद किताबों की भी जांच शुरू कर दी गई है. प्रशासन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी किसी भी सामग्री की जगह नहीं हो सकती, जो आतंकवाद, अलगाववाद या देश विरोधी विचारों को बढ़ावा देती हो.
जांच के दौरान सामने आया कि &#039;Personalities and Legends of J&amp;amp;K&#039; नाम की किताब पिछले कुछ वर्षों से जम्मू विश्वविद्यालय की केंद्रीय लाइब्रेरी में भी मौजूद थी. यह किताब राजनीतिक विज्ञान विभाग की मांग पर पुस्तकालय के लिए खरीदी गई थी. विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इसे लाइब्रेरी से हटाकर सील कर दिया है. विभाग की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.
क्यों उठे किताब पर सवाल?
इस किताब पर आरोप है कि इसमें कुछ अलगाववादी नेताओं और उग्रवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है. पुलिस ने इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रकाशकों को गिरफ्तार किया. अधिकारियों का कहना है कि किताब की सामग्री की विस्तृत जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इसे स्कूलों और पुस्तकालयों तक किस प्रक्रिया के तहत पहुंचाया गया.
कैसे पहुंची पुस्तक विश्वविद्यालय तक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह किताब पहली बार वर्ष 2017 में प्रकाशित हुई थी. बाद में छात्रों और शोधार्थियों की मांग के आधार पर इसे विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के लिए खरीदा गया. विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि किताबों की खरीद निर्धारित नियमों के तहत होती है. विभाग पहले मांग भेजते हैं, फिर अधिकृत विक्रेताओं से पुस्तकें खरीदी जाती हैं. अधिकारियों ने यह भी बताया कि संबंधित किताब को बहुत कम छात्रों ने इश्यू कराया था.
अब पूरे अकादमिक सिस्टम की होगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सभी सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में मौजूद शैक्षणिक सामग्री का व्यापक ऑडिट शुरू कर दिया है. इस जांच में किताबों के अलावा शोध पत्र, जर्नल, थीसिस, डिसर्टेशन और डिजिटल सामग्री भी शामिल होगी. उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संस्थान में ऐसी सामग्री मौजूद न हो, जो आतंकवाद, उग्रवाद, कट्टरपंथ या अलगाववाद को बढ़ावा देती हो.यह भी पढ़ें - स्कूलों में जल्द शुरू हो सकती है कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन, जानिए क्या है CSE और बच्चों को क्या पढ़ाया जाएगा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पुस्तक खरीदने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सभी किताबें अधिकृत विक्रेताओं से खरीदी जाती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हजारों पुस्तकों की सामग्री को खरीद से पहले पूरी तरह पढ़ पाना संभव नहीं होता. आमतौर पर प्रकाशकों की कैटलॉग और छात्रों या शोधार्थियों की मांग के आधार पर किताबों का चयन किया जाता है.
स्कूलों तक कैसे पहुंचीं विवादित किताबें?
जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय में मौजूद संस्करण और सरकारी स्कूलों में पहुंचा संस्करण अलग-अलग प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित किया गया था. स्कूलों में भेजी गई प्रतियां केंद्र सरकार की समग्र शिक्षा योजना के तहत वितरित की गई थीं. इन्हीं प्रतियों को लेकर विवाद सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की.
250 से ज्यादा प्रतियां पहुंचीं सरकारी स्कूलों
अधिकारियों के अनुसार दोनों विवादित पुस्तकों की 250 से अधिक प्रतियां जम्मू, उधमपुर, रामबन और बारामूला समेत कई जिलों के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची थीं. इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी.यह भी पढ़ें - देश के किस राज्य में जूनियर डॉक्टर को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी? देखें सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की पूरी डिटेल ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली हाई कोर्ट HJS भर्ती  कल है आवेदन की लास्ट डेट, 1.94 लाख तक मिलेगी महीने की सैलरी</title>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Open AI Career Tips : ओपन एआई से करियर को लेकर ऐसे मांगे मदद, बेहतरीन टिप्स के लिए जरूर पूछें ये 5 सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Open AI Career Tips : आज के समय में नौकरी या इंटर्नशिप ढूंढना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. हर एक जॉब के लिए हजारों एप्लिकेशन आते हैं और कंपनियां अब इन &amp;nbsp;एप्लिकेशन को तेजी से जांचने के लिए AI का भी इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में सिर्फ अच्छा रिज्यूमे होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपका प्रोफाइल बाकी उम्मीदवारों से अलग और प्रभावशाली भी दिखना चाहिए. यही वजह है कि अब ChatGPT, Microsoft Copilot और Google Gemini जैसे AI टूल्स छात्रों और नौकरी ढूंढ रहे युवाओं के लिए बड़े मददगार बन रहे हैं. तो आइए जानते हैं कि करियर से जुड़ी बेहतर सलाह पाने के लिए ओपन AI से कौन से 5 सवाल जरूर पूछने चाहिए.
नौकरी की तलाश में AI क्यों बन रहा है मददगार?
आज बड़ी कंपनियों को हर दिन हजारों जॉब एप्लिकेशन मिलते हैं. लिंक्डइन के अनुसार पिछले एक साल में नौकरी के लिए भेजे गए एप्लिकेशन की संख्या 45 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है और हर मिनट करीब 11 हजार आवेदन भेजे जा रहे हैं. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक लगभग 10 में से 9 नियोक्ता अब AI की मदद से उम्मीदवारों के आवेदन पहले ही स्कैन और रैंक करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आपका रिज्यूमे और प्रोफाइल अलग नजर आए और सही तरीके से तैयार हो.&amp;nbsp;
AI को अपना करियर कोच कैसे बनाएं?
OpenAI का ChatGPT सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह करियर प्लानिंग, रिज्यूमे सुधारने, इंटरव्यू की तैयारी, नई स्किल्स पहचानने और करियर से जुड़े फैसले लेने में भी मदद कर सकता है. इसके लिए सबसे पहले AI को अपनी शिक्षा, स्किल्स, एक्सपीरियंस और करियर गोल साफ-साफ बताएं, जिससे वह उसी आधार पर बेहतर सुझाव दे सके.&amp;nbsp;
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बेहतरीन टिप्स के लिए जरूर पूछें ये 5 सवाल
1. AI से पूछें &amp;nbsp;मेरे लिए सबसे अच्छे करियर ऑप्शन कौन से हैं - &amp;nbsp;अगर आप करियर को लेकर कंफ्यूजन में हैं, तो AI को अपनी पढ़ाई, स्किल्स और इंटरेस्ट के बारे में बताएं. इसके बाद उससे पूछें कि आपकी प्रोफाइल के हिसाब से कौन-कौन से करियर ऑप्शन सबसे बेहतर हो सकते हैं. AI आपको मौजूदा जॉब मार्केट और उभरते हुए करियर ऑप्शनों की जानकारी भी दे सकता है.&amp;nbsp;
2. अपने गोल तक पहुंचने के लिए कौन-सी नई स्किल्स सीखनी चाहिए - अगर आपने पहले से कोई जॉब रोल तय कर लिया है, तो AI से पूछें कि उस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए किन तकनीकी और सॉफ्ट स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग है. इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि किन स्किल्स पर काम करना जरूरी है और आगे की तैयारी कैसे करनी चाहिए.&amp;nbsp;
3. रिज्यूमे को जॉब के अनुसार कैसे बेहतर बनाएं - हर नौकरी के लिए एक जैसा रिज्यूमे भेजना सही तरीका नहीं माना जाता है. AI को अपना मौजूदा रिज्यूमे और जिस नौकरी के लिए आवेदन करना है उसका Job Description दें. इसके बाद उससे ATS-Friendly रिज्यूमे तैयार करने, बेहतर कीवर्ड जोड़ने और उपलब्धियों को प्रभावशाली तरीके से लिखने के लिए कहें. हालांकि AI के तैयार किए गए ड्राफ्ट को बिना जांचे इस्तेमाल न करें और उसमें अपनी जानकारी जरूर जांच लें.&amp;nbsp;
4. इंटरव्यू में कौन-कौन से सवाल पूछे जा सकते हैं - इंटरव्यू की तैयारी के लिए AI काफी मददगार साबित हो सकता है. कंपनी का नाम और जॉब रोल बता कर AI से संभावित तकनीकी और व्यवहारिक इंटरव्यू सवाल तैयार करने के लिए कहें. इसके बाद उन सवालों के जवाब खुद तैयार करें और प्रैक्टिस करें. AI से मिले जवाबों को सीधे याद करने की जगह उन्हें अपने एक्सपीरियंस और शब्दों में चेंज करना बेहतर रहता है.&amp;nbsp;
5. करियर में आ रही परेशानी का समाधान कैसे निकालें - अगर आपको प्रमोशन नहीं मिल रहा, करियर बदलना चाहते हैं या वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो AI से अपनी स्थिति विस्तार से बताकर समाधान और एक साफ एक्शन प्लान मांग सकते हैं. AI आपकी समस्या के आधार पर अलग-अलग विकल्प और आगे बढ़ने के सुझाव दे सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी पुलिस सब&amp;इन्स्पेक्टर भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी, ऐसे करें फटाफट चेक</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड UPPRPB ने यूपी पुलिस सब-इन्स्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है. जो भी उम्मीदवार इस भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में शामिल हुए थे, वे अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं और फाइनल सिलेक्शन लिस्ट की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं.
4,543 पदों पर हुई है फाइनल भर्ती
भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन संख्या PRPB-B Sub-Inspector Cadre -03/2025 के तहत कुल 4,543 खाली पदों को भरने के लिए यह फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की है. इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए निम्नलिखित पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया है.
सब-इन्स्पेक्टर (सिविल पुलिस)
प्लाटून कमांडर पीएसी (PAC)
एसआई आर्म्ड पुलिस
स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF)
लेडी सब-इन्स्पेक्टर
इस फाइनल लिस्ट में जिन उम्मीदवारों का रोल नंबर शामिल है, उन्हें अब नियुक्ति से पहले अगले चरण यानी मेडिकल एग्जामिनेशन और कैरेक्टर वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा.
कितने उम्मीदवारों की जारी की गई लिस्ट?
14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित की गई लिखित परीक्षा के बाद, अगले चरणों में सफल रहे अभ्यर्थियों की मेरिट और आरक्षण नियमों के आधार पर कुल 4,543 उम्मीदवारों की अंतिम चयन सूची बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है. सफल घोषित किए गए सभी उम्मीदवारों को भर्ती बोर्ड ने हार्दिक बधाई दी है. उम्मीदवार अपना रिजल्ट बोर्ड की वेबसाइट के अलावा सीधे इस आधिकारिक लिंक siupexam25.com/sifinalresults पर जाकर भी चेक कर सकते हैं.
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22 जुलाई से देख सकेंगे अपने नॉर्मलाइज्ड मार्क्स&amp;nbsp;
इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए एक और जरूरी जानकारी है. लिखित परीक्षा में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रसामान्यीकृत अंक यानी Normalised Score यानी उनका फाइनल स्कोर कार्ड जल्द ही जारी किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा उम्मीदवारों के मार्क्स देखने के लिए 22 जुलाई 2026 से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर एक नया लिंक एक्टिव कर दिया जाएगा, जिसके माध्यम से सभी अभ्यर्थी परीक्षा में मिले अपने अंकों को आसानी से चेक कर सकेंगे.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, पुलिस, सब-इन्स्पेक्टर, भर्ती, का, फाइनल, रिजल्ट, जारी, ऐसे, करें, फटाफट, चेक</media:keywords>
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        <title>CCI Recruitment 2026: कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 148 पदों पर भर्ती, 9 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है.कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अलग-अलग पदों पर भर्ती का ऐलान किया है. इस भर्ती के तहत कुल 148 खाली पद भरे जाएंगे.आवेदन की प्रक्रिया &amp;nbsp;उम्मीदवार 24 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.
किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान के तहत कई अलग-अलग पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.इनमें सहायक प्रबंधक (राजभाषा) का 1 पद, सहायक प्रबंधक (आईटी) का 1 पद, प्रबंधन प्रशिक्षु (मार्केटिंग) के 8 पद, प्रबंधन प्रशिक्षु (अकाउंट्स) के 8 पद, जूनियर कॉमर्शियल एग्जीक्यूटिव के 50 पद, जूनियर असिस्टेंट (अकाउंट्स) के 50 पद और जूनियर असिस्टेंट (जनरल) के 30 पद शामिल हैं.कुल मिलाकर 148 पदों पर भर्ती की जाएगी.
योग्यता
हर पद के लिए योग्यता अलग-अलग तय की गई है.उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में बीई, बीटेक, बीएससी, बीकॉम, एमसीए, एमबीए, सीए, सीएम या अन्य निर्धारित डिग्री होनी चाहिए. आवेदन करने से पहले उम्मीदवार को अपने पद के अनुसार योग्यता जरूर जांच लेनी चाहिए.
उम्र सीमा&amp;nbsp;इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है.अधिकतम आयु पद के अनुसार 30 वर्ष या 32 वर्ष तक निर्धारित की गई है.आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT BHU Recruitment 2026: आईआईटी बीएचयू में गैर-शिक्षण पदों पर निकली भर्ती, 10 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन
आवेदन शुल्क
इस भर्ती के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 1500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग और पूर्व सैनिक उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये रखा गया है. शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम जैसे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से किया जा सकेगा.
चयन प्रक्रिया
भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी. परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद मेडिकल जांच होगी. सभी चरण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को अंतिम नियुक्ति दी जाएगी.
आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की आधिकारिक वेबसाइट www.cotcorp.org.in पर जाएं.
वेबसाइट के होमपेज पर CCI Recruitment 2026 या Careers सेक्शन में जाएं.
संबंधित भर्ती के लिंक पर क्लिक करके नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें.
इसके बाद Apply Online पर क्लिक करें और अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें.
रजिस्ट्रेशन के बाद लॉग इन करके आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें.
जरूरी डाक्यूमेंट्स अपलोड करें.
अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें.
सभी जानकारी एक बार जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करें.
अंत में आवेदन पत्र का प्रिंटआउट या पीडीएफ अपने पास सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कर्नाटक में 4,723 सरकारी पदों पर भर्ती शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन?</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक में 4,723 सरकारी पदों पर भर्ती शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Medical Courses Without Neet: NEET क्लियर नहीं हुआ तो मत लो टेंशन ! बिना डॉक्टर बने कमाएं लाखों, इन कोर्स के लिए करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ Medical Courses Without Neet: हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट यूजी परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन समिति सीटों और कंपटीशन के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार सफलता हासिल नहीं कर पाते. समय के साथ कई छात्र यह मान लेते हैं कि अब यह मेडिकल फील्ड में करियर बनाना मुश्किल है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. मेडिकल सेक्टर सिर्फ एमबीबीएस या बीडीएस तक सीमित नहीं है. आज हेल्थ केयर इंडस्ट्री में ऐसे कई प्रोफेशनल कोर्स मौजूद है, जहां बिना नीट के भी शानदार करियर बनाया जा सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि हेल्थ केयर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें डॉक्टर के साथ-साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की भी मांग लगातार बढ़ रही है. अगर किसी छात्र का नीट क्लियर नहीं हुआ, तो उसके पास कई ऑप्शन है, जहां अच्छी सैलरी के साथ-साथ बेहतर करियर बनाया जा सकता है.&amp;nbsp;
नीट क्लियर नहीं हुआ तो यह है ऑप्शन&amp;nbsp;
बीएससी नर्सिंग&amp;nbsp;
अगर आपकी रुचि मरीजों की देखभाल और हेल्थ केयर सेवाओं में है तो बीएससी नर्सिंग बेहतर ऑप्शन हो सकता है. यह 4 साल का कोर्स है, जिसमें मरीजों की देखभाल कम्युनिटी हेल्थ, आईसीयू मैनेजमेंट और अस्पताल संचालक से जुड़ी पढ़ाई कराई जाती है. कोर्स पूरा करने के बाद अस्पताल क्लीनिक हेल्थ सेंटर और विदेशों तक नौकरी में अवसर मिल सकते हैं. शुरुआती स्तर पर लगभग 3 से 6 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है.&amp;nbsp;
बैचलर ऑफ फार्मेसी&amp;nbsp;
दवाइयां के निर्माण उनके प्रभाव और दवा प्रबंधन में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए बी फार्मा अच्छा ऑप्शन है. यह 4 साल का कोर्स है, इसके बाद फार्मासिस्ट, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, ड्रग इंस्पेक्टर, क्लिनिकल रिसर्च या फार्मा कंपनी में नौकरी के अवसर मिलते हैं. इच्छुक छात्र अपना मेडिकल स्टोर भी शुरू कर सकते हैं, शुरुआती सैलरी करीब 3.5 से 6 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-इन पांच तरीकों को पढ़ाई में कर लें शामिल, कभी स्टडी से नहीं भटकेगा फोकस
बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी&amp;nbsp;
फिजियोथैरेपी का क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह 4.5 साल का कोर्स है. इसमें मरीज को एक्सरसाइज और थेरेपी के जरिए ठीक करने की ट्रेनिंग दी जाती है. स्पोर्ट्स इंजरी, एक्सीडेंट, लकवा और रिहैबिलिटेशन जैसी स्थिति में फिजियोथेरेपिस्ट की अहम भूमिका होती है. क्षेत्र में शुरुआती सैलरी 3 से 7 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है.&amp;nbsp;
बीएससी बायोटेक्नोलॉजी&amp;nbsp;
बायोटेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए बीएससी बायोटेक्नोलॉजी बेहतर ऑप्शन माना जाता है. यह 3 साल का कोर्स है, जिसमें नई रिसर्च, नई दवाईयों के विकास और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं. कोर्स के बाद रिसर्च लैब, बायोटेक कंपनियों और फार्मा इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर मिलते हैं. इस क्षेत्र में 5 से 12 लाख रुपये तक का सालाना पैकेज मिलता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Medical, Courses, Without, Neet:, NEET, क्लियर, नहीं, हुआ, तो, मत, लो, टेंशन, बिना, डॉक्टर, बने, कमाएं, लाखों, इन, कोर्स, के, लिए, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>NEET UG की OMR शीट जारी, अब अपने जवाबों का करें मिलान; गलती मिलने पर ऐसे दर्ज करें आपत्ति</title>
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        <description><![CDATA[ NTA ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में शामिल हुए लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स जारी कर दिए हैं. अब उम्मीदवार अपने द्वारा दिए गए उत्तरों का मिलान कर सकते हैं. अगर उन्हें रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स में किसी तरह की गड़बड़ी या अंतर दिखाई देता है, तो वे तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं.
NTA ने यह सुविधा अपनी आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर उपलब्ध कराई है. इसके साथ ही उम्मीदवारों की स्कैन की गई OMR शीट उनके रजिस्टर्ड ई-मेल आईडी पर भी भेजी गई है, ताकि उन्हें रिकॉर्ड देखने में किसी तरह की परेशानी न हो. एजेंसी ने इस बार सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए OTP आधारित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी लागू किया है. यानी लॉगिन करने के बाद उम्मीदवारों को मोबाइल या ई-मेल पर प्राप्त OTP के जरिए अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी.
इस प्रक्रिया के जरिए अभ्यर्थी यह जांच सकते हैं कि परीक्षा के दौरान उन्होंने OMR शीट पर जो उत्तर भरे थे, वही सिस्टम में सही तरीके से दर्ज हुए हैं या नहीं. यदि किसी प्रश्न के रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स में अंतर दिखाई देता है, तो उसके खिलाफ ऑनलाइन चुनौती दर्ज कराई जा सकती है.
15 जुलाई तक आपत्ति
NTA के अनुसार, रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स चैलेंज की प्रक्रिया 13 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 15 जुलाई 2026 तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. प्रत्येक प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 200 रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा. यह शुल्क ऑनलाइन डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से जमा किया जा सकता है. निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद या बिना शुल्क जमा किए किसी भी चुनौती पर विचार नहीं किया जाएगा.
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हालांकि, एजेंसी ने साफ किया है कि यह सुविधा केवल OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स में संभावित त्रुटियों के लिए उपलब्ध है. उत्तर कुंजी (Answer Key) पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. इसलिए अब उत्तर कुंजी से जुड़ी कोई नई चुनौती स्वीकार नहीं की जाएगी.
बता दें कि NEET UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी. इसके बाद 6 मई को अनंतिम उत्तर कुंजी जारी की गई, लेकिन बाद में परीक्षा रद्द कर दी गई. इसके बाद NTA ने 21 जून 2026 को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पुनर्परीक्षा आयोजित की. इस परीक्षा में देशभर से 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे. अब OMR शीट जारी होने के बाद उम्मीदवार अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहे हैं.
ऐसे करें OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स चेक
OMR शीट देखने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें. लॉगिन के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ई-मेल पर आए OTP को दर्ज कर वेरिफिकेशन पूरा करें. इसके बाद &quot;View/Challenge OMR Sheet &amp;amp; Recorded Responses&quot; लिंक पर क्लिक करें. यहां उम्मीदवार अपनी स्कैन की गई OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स देख सकते हैं.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>NEET, की, OMR, शीट, जारी, अब, अपने, जवाबों, का, करें, मिलान, गलती, मिलने, पर, ऐसे, दर्ज, करें, आपत्ति</media:keywords>
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        <title>AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-से-फसलों-को-बचाने-वाली-रिसर्च-का-बनें-हिस्सा-हंसराज-कॉलेज-में-jrf-और-प्रोजेक्ट-एसोसिएट-की-भर्ती-5-अगस्त-तक-करें-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप बायोइन्फॉर्मेटिक्स, कंप्यूटर साइंस, कृषि या प्राकृतिक विज्ञान की पढ़ाई कर चुके हैं और रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध हंसराज कॉलेज ने एक महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजना के लिए जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) और प्रोजेक्ट एसोसिएट-I के पद पर आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह परियोजना अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के वित्तीय सहयोग से संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य खेती को नुकसान पहुंचाने वाले वायरस से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक विकसित करना है.
इस भर्ती के तहत कुल एक पद भरा जाएगा. इच्छुक उम्मीदवार 5 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. कॉलेज की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, परियोजना की कुल अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति शुरुआती तौर पर दो वर्ष के लिए होगी. परियोजना के प्रदर्शन और नियमों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.
AI की मदद से होगा फसलों की सुरक्षा पर शोध
यह शोध परियोजना कृषि क्षेत्र की एक गंभीर चुनौती पर आधारित है. टमाटर और खीरा जैसी फसलों को प्रभावित करने वाले टमाटर लीफ कर्ल पालमपुर वायरस और ककड़ी मोज़ेक वायरस के खिलाफ नई तकनीक विकसित करने पर काम किया जाएगा. इसके लिए शोधकर्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर ऐसे एंटीवायरल पेप्टाइड्स तैयार करेंगे, जो इन वायरसों को रोकने में प्रभावी साबित हो सकें. यदि यह शोध सफल होता है, तो भविष्य में किसानों को वायरल बीमारियों से होने वाले नुकसान को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है.
JRF पद के लिए क्या होनी चाहिए योग्यता?
जूनियर रिसर्च फेलो पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास बायोइन्फॉर्मेटिक्स या कंप्यूटर साइंस में पोस्टग्रेजुएट डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा, प्रोफेशनल कोर्स में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री के साथ CSIR-UGC NET या GATE का वैध स्कोर होना अनिवार्य है. चयनित अभ्यर्थी को 37,000 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप के साथ नियमानुसार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी मिलेगा.यह भी पढ़ें -बिहार में निकली फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की भर्ती, इस डेट से कर सकेंगे अप्लाई; पढ़ें डिटेल्स
प्रोजेक्ट एसोसिएट-I के लिए ये अभ्यर्थी कर सकते हैं आवेदन
प्रोजेक्ट एसोसिएट-I पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास प्राकृतिक विज्ञान, कृषि, कंप्यूटर साइंस, गणितीय विज्ञान या भौतिक विज्ञान में चार वर्षीय स्नातक डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा प्राकृतिक विज्ञान, कृषि विज्ञान, बीवीएससी, फार्मेसी, इंजीनियरिंग या चिकित्सा विषय में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं. इस पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष तय की गई है.
इन उम्मीदवारों को मिलेगी प्राथमिकता
कॉलेज ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) तथा Linux प्लेटफॉर्म पर Python या R प्रोग्रामिंग का अनुभव होगा, उन्हें चयन प्रक्रिया में वरीयता दी जाएगी. ऐसे कौशल रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह अवसर करियर को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है.
योग्यता के अनुसार मिलेगा वेतन
चयनित उम्मीदवारों को उनकी पात्रता और पद के अनुसार 37,000 रुपये + HRA या 30,000 रुपये + HRA प्रतिमाह दिया जाएगा. यह परियोजना उन युवाओं के लिए बेहतर अवसर मानी जा रही है, जो कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और AI के मेल पर काम करना चाहते हैं.
ऐसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना से आवेदन पत्र डाउनलोड कर उसे पूरी तरह भरना होगा. इसके साथ सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्र, मार्कशीट, अनुभव प्रमाणपत्र और यदि कोई शोध प्रकाशन संलग्न करनी होगी. सभी दस्तावेजों को एक PDF फाइल में तैयार कर pooja@hrc.du.ac.in पर ईमेल भेजना होगा. ईमेल के विषय (Subject) में &quot;Application for position in ANRF Project&quot; लिखना है. आवेदन भेजने की अंतिम डेट 5 अगस्त 2026 है.यह भी पढ़ें - Government Medical Colleges: AIIMS ही नहीं, इन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी मिलता है शानदार करियर का मौका ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>देश में बढ़ा पढ़ाई का क्रेज, 173 देशों के 58 हजार से ज्यादा विदेशी स्टूडेंट्स ले रहे एजुकेशन; ये देश सबसे आगे</title>
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        <description><![CDATA[ अब भारत सिर्फ अपने छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के विद्यार्थियों के लिए भी उच्च शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है. पिछले दस वर्षों में देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान भारत में पढ़ने आने वाले छात्रों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा देशों के विद्यार्थी भी भारतीय संस्थानों का रुख कर रहे हैं.
शिक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2023-24 में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 173 देशों के 58,134 विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे थे. अगर एक दशक पहले यानी 2013-14 के आंकड़ों से तुलना करें तो उस समय भारत में 158 देशों के 39,517 विदेशी छात्र नामांकित थे. यानी दस साल में विदेशी छात्रों की संख्या में करीब 18,600 से अधिक का इजाफा हुआ है, जो लगभग 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है. वहीं भारत में पढ़ने आने वाले देशों की संख्या भी 158 से बढ़कर 173 हो गई है.
विदेशी छात्रों की बात करें तो नेपाल लगातार भारत के लिए सबसे बड़ा स्रोत देश बना हुआ है. वर्ष 2023-24 में भारत में पढ़ रहे कुल विदेशी छात्रों में 24.1 प्रतिशत छात्र नेपाल से थे. एक दशक पहले भी नेपाल पहले स्थान पर था, लेकिन तब उसकी हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत थी. इससे साफ है कि भारतीय शिक्षा संस्थानों में नेपाली छात्रों का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है.
यहां से सबसे ज्यादा छात्र
हालांकि, दूसरे देशों की तस्वीर पिछले दस साल में काफी बदल गई है. वर्ष 2013-14 में नेपाल के बाद अफगानिस्तान, भूटान, मलेशिया, सूडान और इराक से सबसे ज्यादा छात्र भारत आते थे. लेकिन अब यह सूची पूरी तरह बदल चुकी है. मौजूदा समय में नेपाल के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दूसरे स्थान पर है. इसके बाद अमेरिका और बांग्लादेश का स्थान है, जबकि नाइजीरिया और जिम्बाब्वे भी भारत में पढ़ाई के लिए छात्रों को भेजने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गए हैं.यह भी पढ़ें - बिहार में निकली फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की भर्ती, इस डेट से कर सकेंगे अप्लाई; पढ़ें डिटेल्स
नई रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत की पहुंच अब पहले से कहीं ज्यादा देशों तक हो चुकी है. अब लेबनान, बुर्किना फासो, मंगोलिया, मैक्सिको, कजाकिस्तान, बेलारूस और चिली जैसे देशों के छात्र भी भारतीय संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय उच्च शिक्षा की पहचान अब केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी इसका आकर्षण बढ़ा है.
हालांकि विदेशी छात्रों के स्रोत देशों में बदलाव आया है, लेकिन टॉप 10 देशों का दबदबा अब भी कायम है. वर्ष 2013-14 में कुल विदेशी छात्रों में से लगभग 65 प्रतिशत छात्र सिर्फ शीर्ष 10 देशों से आते थे. वर्ष 2023-24 में भी यह आंकड़ा 63.8 प्रतिशत रहा, यानी अधिकांश विदेशी छात्र अब भी कुछ चुनिंदा देशों से ही भारत पहुंच रहे हैं.
यहां पढ़ रहे सबसे ज्यादा विदेशीरिपोर्ट के मुताबिक, भारत आने वाले अधिकांश विदेशी छात्र यूजी कोर्स को प्राथमिकता देते हैं. कुल विदेशी छात्रों में करीब 73.6 प्रतिशत छात्र ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई कर रहे हैं. वहीं राज्यों की बात करें तो कर्नाटक विदेशी छात्रों की पहली पसंद बनकर उभरा है. यहां सबसे अधिक 7,914 विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. इसके बाद पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान है.यह भी पढ़ें - AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>IIT BHU Recruitment 2026: आईआईटी बीएचयू में गैर&amp;शिक्षण पदों पर निकली भर्ती, 10 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप किसी बड़े सरकारी संस्थान में नौकरी करना चाहते हैं तो यह आपके लिए अच्छा मौका है. आईआईटी बीएचयू, वाराणसी ने गैर-शिक्षण (Non-Teaching) पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं.इस भर्ती के जरिए प्रशासनिक, तकनीकी, लाइब्रेरी, सिस्टम, राजभाषा और खेल विभाग सहित कई कैडर में कुल 16 पद भरे जाएंगे.आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
किन पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती में अलग-अलग विभागों के लिए नियुक्तियां की जाएंगी. इनमें सहायक रजिस्ट्रार, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, लाइब्रेरी से जुड़े पद, सिस्टम विश्लेषक, कार्यकारी अभियंता, सहायक कार्यकारी अभियंता, हिंदी अधिकारी, मुख्य खेल अधिकारी और खेल अधिकारी जैसे पद शामिल हैं.अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और अनुभव भी अलग निर्धारित किया गया है, इसलिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ लेना चाहिए.
क्या है योग्यता
अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी अलग रखी गई है.किसी पद के लिए मास्टर डिग्री मांगी गई है तो किसी के लिए बीई, बीटेक, एमटेक, एमसीए या पीएचडी की जरूरत होगी. कई पदों पर 3 से 10 साल तक का अनुभव भी मांगा गया है. वहीं लाइब्रेरी, हिंदी और खेल विभाग के पदों के लिए संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन और अनुभव जरूरी होगा.इसलिए उम्मीदवार अपने पद के अनुसार पात्रता जरूर जांच लें.यह भी पढ़ें - AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन
आवेदन शुल्क कितना देना होगा
इस पद पर आवेदन के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा.वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग और सभी महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में पूरी छूट दी गई है.
चयन कैसे होगाउम्मीदवारों का चयन पद के अनुसार स्क्रीनिंग टेस्ट, लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन, प्रेजेंटेशन और इंटरव्यू के जरिए किया जा सकता है. संस्थान ने यह भी साफ किया है कि सिर्फ न्यूनतम योग्यता पूरी कर लेने से चयन प्रक्रिया में शामिल होने की गारंटी नहीं मिलेगी. जरूरत पड़ने पर बेहतर योग्यता और अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदनआवेदन करने के लिए सबसे पहले आईआईटी बीएचयू के SAMARTH भर्ती पोर्टल पर जाएं. वहां नया रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करने के बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें.इसके बाद सभी जरूरी &amp;nbsp;डॉक्यूमेंट अपलोड करें. आखिर में पूरी जानकारी जांचकर फॉर्म सबमिट कर दें और उसका प्रिंट अपने पास सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - देश में बढ़ा पढ़ाई का क्रेज, 173 देशों के 58 हजार से ज्यादा विदेशी स्टूडेंट्स ले रहे एजुकेशन; ये देश सबसे आगे ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>इन पांच तरीकों को पढ़ाई में कर लें शामिल, कभी स्टडी से नहीं भटकेगा फोकस</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती किताबें नहीं, बल्कि ध्यान भटकना बन गई है. कई छात्र पूरी एनर्जी के साथ पढ़ने बैठते हैं, लेकिन कुछ ही मिनट बाद उनका ध्यान मोबाइल, सोशल मीडिया, नोटिफिकेशन या दूसरे कामों की ओर चला जाता है. घंटों तक किताब के सामने बैठे रहने का मतलब यह नहीं की पढ़ाई भी उतनी ही प्रभावित हो रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छी पढ़ाई सिर्फ लंबे समय तक बैठने से नहीं, बल्कि सही तरीके से पढ़ने से होती है. अगर पढ़ाई के दौरान फोकस बना रहे और सीखी हुई बातें लंबे समय तक याद रहे तो कम समय में भी सही रिजल्ट मिल सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप कौन से 5 तरीकों को पढ़ाई में शामिल कर सकते हैं, जिनसे आपका स्टडी से फोकस कभी नहीं भटकेगा.&amp;nbsp;
पढ़ाई के लिए छोटे-छोटे स्टडीज सेशन बनाएं&amp;nbsp;
लगातार कई घंटे तक पढ़ाई करने के बजाय 25 से 30 मिनट तक पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करें और फिर 5 मिनट का छोटा ब्रेक लें. इस दौरान आप थोड़ा टहल सकते हैं, पानी पी सकते हैं या आंखों को आराम दे सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि नियमित छोटे ब्रेक लेने से दिमाग तरोताजा रहता है और दोबारा पढ़ाई पर ध्यान लगाना आसान हो जाता है. लंबे समय तक बिना रुके पढ़ने से मानसिक थकान बढ़ती है और याद रखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
मोबाइल और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से दूरी बनाएं&amp;nbsp;
आज पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन मोबाइल फोन और सोशल मीडिया को माना जाता है. हर कुछ मिनट में आने वाले नोटिफिकेशन दिमाग पर फोकस तोड़ देते हैं. पढ़ाई शुरू करने से पहले फोन को साइलेंट या डू नॉट डिस्टर्ब मोड पर रखें. अगर संभव हो तो मोबाइल को दूसरे कमरे में रख दें. ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे ,हैं तो केवल जरूरी ऐप्स का ही इस्तेमाल करें और बाकी सभी नोटिफिकेशन बंद कर दें. जितना कम डिजिटल डिस्टर्ब होगा, उतनी बेहतर एकाग्रता बनी रहेगी.&amp;nbsp;
एक समय में केवल एक ही सब्जेक्ट पर फोकस करें&amp;nbsp;
कई छात्र पढ़ाई के दौरान एक साथ कई काम करने लगते हैं, जैसे गाने सुनना, चैट करना या बार-बार सब्जेक्ट बदलना. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मल्टीटास्किंग से दिमाग पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है और जानकारी को सही तरीके से याद रखना मुश्किल हो जाता है. इसलिए पढ़ाई के दौरान एक समय में सिर्फ एक सब्जेक्ट पर ध्यान दें और पहले उसे पूरा करने की कोशिश करें. छोटे-छोटे टारगेट तय करने से पढ़ाई आसान और प्रभावी बनती है.&amp;nbsp;
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अच्छी नींद और संतुलित खाना खाएं&amp;nbsp;
फोकस और याददाश्त बनाए रखने के लिए पर्याप्त नींद बहुत जरूरी होती है. अगर नींद पूरी नहीं होगी तो दिमाग नई जानकारी को लंबे समय तक याद नहीं रख पाएगा. रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने की सलाह दी जाती है. इसके साथ ही फल, हरी सब्जियां, मेवे, बीज और प्रोटीन से भरपूर खाना लेना चाहिए. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में कम पानी की कमी होने पर भी एकाग्रता प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
मेडिटेशन और रिवीजन को बनाए स्टडी का जरूरी हिस्सा&amp;nbsp;
रोजाना कुछ मिनिट मेडिटेशन या गहरी सांस लेने का अभ्यास करने से तनाव कम होता है और दिमाग शांत रहता है. इससे पढ़ाई के दौरान फोकस फोकस बेहतर होता है. अगर मेडिटेशन करना मुश्किल लगे तो कुछ मिनट तक केवल अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें. इसके अलावा पढ़े हुए विषय का नियमित रिवीजन भी जरूरी है. बार-बार एक साथ पढ़ने की बजाय समय पर दोहराने से जानकारी लंबे समय तक याद रहती है और परीक्षा के समय तैयारी बेहतर होती है.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>1200 से ज्यादा सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका, ITI से लेकर इंजीनियरिंग और CA तक कर सकते हैं आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने वर्ष 2026 के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1213 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. खास बात यह है कि इस भर्ती में आईटीआई पास युवाओं से लेकर इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), मानव संसाधन, मार्केटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवरों तक के लिए अवसर मौजूद हैं.
भर्ती के तहत सबसे ज्यादा 1005 पद जूनियर टेक्नीशियन के लिए निकाले गए हैं. इसके अलावा 208 पद जूनियर मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, वरिष्ठ प्रबंधक, सलाहकार और अतिरिक्त महाप्रबंधक जैसी कार्यकारी श्रेणी के पदों के लिए हैं. इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 11 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
सबसे ज्यादा भर्ती इन ट्रेडों में
तकनीकी पदों की बात करें तो फिटर (जनरल) के लिए सबसे अधिक 400 पद उपलब्ध हैं. इसके बाद मशीनिस्ट के 216 पद, इलेक्ट्रीशियन के 84 पद, इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक के 69 पद, रॉ मटेरियल मैनेजमेंट (OMHE) के 66 पद और वेल्डर के 55 पद भरे जाएंगे. इसके अलावा फाउंड्रीमैन, क्वालिटी एश्योरेंस, पेंटर, इलेक्ट्रोप्लेटर, मैकेनिक मशीन टूल मेंटेनेंस और अन्य ट्रेडों में भी भर्ती होगी.
कार्यकारी श्रेणी में सबसे अधिक 92 पद जूनियर मैनेजर (मैकेनिकल) के हैं. वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मानव संसाधन, मेटलर्जी, राजभाषा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्त, सूचना प्रौद्योगिकी, मार्केटिंग, कंपनी सेक्रेटरी, जनसंपर्क, साइबर सुरक्षा और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों में भी नियुक्तियां की जाएंगी.
देशभर की यूनिटों में मिलेगी पोस्टिंग
चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति AVNL की विभिन्न इकाइयों में होगी. इनमें चेन्नई के अवाडी स्थित HVF, जबलपुर की OFMK, मेडक की MTPF, अंबरनाथ की EFA समेत देश के अन्य केंद्र शामिल हैं. सभी नियुक्तियां फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (Fixed Term Employment) के आधार पर की जाएंगी.
किस पद के लिए क्या योग्यता चाहिए?
जूनियर टेक्नीशियन पदों के लिए संबंधित ट्रेड में आईटीआई (NTC/NAC) प्रमाणपत्र अनिवार्य है. वहीं जूनियर मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर और डिप्टी मैनेजर जैसे पदों के लिए संबंधित विषय में BE/BTech या अन्य निर्धारित स्नातकोत्तर डिग्री मांगी गई है.
मानव संसाधन, वित्त, मार्केटिंग, राजभाषा, कंपनी सेक्रेटरी और जनसंपर्क जैसे पदों के लिए संबंधित विषय में डिग्री या पोस्ट ग्रेजुएशन जरूरी है. वहीं सलाहकार (वित्त एवं ऑडिट) पद के लिए उम्मीदवार का चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) होना और कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए. बिजनेस डेवलपमेंट के अतिरिक्त महाप्रबंधक पद के लिए सेवानिवृत्त सेना अधिकारी (कम से कम कर्नल रैंक) और 15 वर्ष का अनुभव आवश्यक है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन
आयु सीमा और आवेदन शुल्क
जूनियर टेक्नीशियन से लेकर डिप्टी मैनेजर तक के पदों के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है. हालांकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी. वरिष्ठ प्रबंधक, उप महाप्रबंधक, अतिरिक्त महाप्रबंधक और सलाहकार पदों के लिए अधिकतम आयु 65 वर्ष तय की गई है.
आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 300 रुपये शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और महिला उम्मीदवारों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को AVNL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर करियर &amp;nbsp;सेक्शन में रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद मोबाइल और ईमेल पर प्राप्त OTP से सत्यापन कर लॉगिन करना होगा. आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरने के बाद फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. अंतिम चरण में आवेदन शुल्क (यदि लागू हो) का ऑनलाइन भुगतान कर फॉर्म जमा करना होगा.यह भी पढ़ें - IIT BHU Recruitment 2026: आईआईटी बीएचयू में गैर-शिक्षण पदों पर निकली भर्ती, 10 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Delhi University PG Admission 2026:  DU ने बदला पीजी एडमिशन का शेड्यूल, अब 15 जुलाई तक करनी होगी फीस जमा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/delhi-university-pg-admission-2026-du-ने-बदला-पीजी-एडमिशन-का-शेड्यूल-अब-15-जुलाई-तक-करनी-होगी-फीस-जमा</link>
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        <description><![CDATA[ Delhi University PG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 2026-27 सेशन के लिए PG एडमिशन के तीसरे राउंड के टाइम-टेबल में बदलाव किया है. यूनिवर्सिटी ने शनिवार, 12 जुलाई को अपने एडमिशन पोर्टल पर नया कैलेंडर जारी किया, जिसमें सीट Accept करने, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करने की नई तारीखें बताई गई हैं.&amp;nbsp; यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि CW, स्पोर्ट्स और वार्ड कोटे के तहत आने वाले सुपरन्यूमेररी सीटों के एलोकेशन का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया था. इसलिए नई समय-सारणी के अनुसार, जिन कैंडिडेट्स को तीसरे राउंड में सीट अलॉट हुई है, उन्हें 13 जुलाई 2026 की रात 11:59 बजे तक एडमिशन पोर्टल के जरिए अपनी सीट Accept करनी होगी.
सीट Accept करने के बाद संबंधित डिपार्टमेंट, सेंटर और कॉलेज उन आवेदनों की जांच और मंजूरी देंगे, यह प्रक्रिया 14 जुलाई की रात 11:59 बजे तक चलेगी. जिन कैंडिडेट्स के एडमिशन को मंजूरी मिल जाएगी, उन्हें आखिर में 15 जुलाई की रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन फीस जमा करके अपना एडमिशन कन्फर्म करना होगा.&amp;nbsp; यूनिवर्सिटी ने सभी चुने गए कैंडिडेट्स से कहा है कि वो इन नई तारीखों का ध्यान से पालन करें, ताकि उनका एडमिशन प्रोसेस बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके.&amp;nbsp;
आगे और भी राउंड होने की संभावना
यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ किया है कि तीसरे राउंड के पूरा होने के बाद अगर कुछ सीटें अब भी खाली रह जाती हैं, तो पोस्टग्रेजुएट सीट एलोकेशन के लिए आगे और राउंड भी शुरू किए जा सकते हैं. यह पूरा बदलाव इसलिए किया गया है ताकि सभी कैटेगरी के तहत एडमिशन प्रोसेस आपस में तालमेल बनाकर चले और किसी भी योग्य कैंडिडेट को इससे कोई नुकसान न हो. इसीलिए यूनिवर्सिटी ने सभी कैंडिडेट्स को सलाह दी है कि वो नियमित रूप से DU के ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल को चेक करते रहें, ताकि उन्हें खाली सीटों, आगे होने वाले एलोकेशन राउंड और काउंसलिंग से जुड़ी हर जानकारी समय पर मिलती रहे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः 10वीं के बाद बनें आयुर्वेद डॉक्टर! केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया NEET-PA कोर्स
अंडरग्रेजुएट एडमिशन का काम भी जारी
PG एडमिशन के साथ-साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट एडमिशन का काम भी कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS के जरिए चल रहा है, जो 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए किया जा रहा है. यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1.90 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, जबकि इनमें से 1,64,098 कैंडिडेट्स अपनी प्रोग्राम और कॉलेज प्रेफरेंस भरकर फेज-2 का काम पूरा कर चुके हैं.
यह भी पढ़ेंः Delhi University Admission 2026: DU में एडमिशन का बजा बिगुल! 1.9 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, 16 जुलाई को आएगी पहली सीट लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>JMI University Exam Update: जामिया मिलिया इस्लामिया का बड़ा फैसला, अब कंपार्टमेंट एग्जाम से क्लियर होगा बैकलॉग</title>
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        <description><![CDATA[ JMI University Exam Update:&amp;nbsp; जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने अपने परीक्षा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को काफी राहत मिलने वाली है.&amp;nbsp; अक्सर देखा जाता है कि किसी स्टूडेंट का सिर्फ एक बैकलॉग पेपर बाकी रहने की वजह से भी उसकी पूरी डिग्री कई महीनों के लिए लटक जाती है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए यूनिवर्सिटी ने अपने परीक्षा नियमों में बदलाव किया है.&amp;nbsp;
यह फैसला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने ऑर्डिनेंस-15 में संशोधन करके मंजूर किया है. नए नियम के तहत, जो स्टूडेंट्स एनुअल सिस्टम के तहत फाइनल सेमेस्टर या फाइनल ईयर में पढ़ रहे हैं और उनके पास किसी भी पिछले सेमेस्टर या साल का बैकलॉग पेपर बाकी है, वो अब अपनी फाइनल सेमेस्टर या फाइनल एनुअल परीक्षा के बाद सीधे कंपार्टमेंट परीक्षा दे सकेंगे.
इसका मतलब है कि उन्हें अगले पूरे रेगुलर एग्जाम साइकिल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनकी डिग्री समय पर पूरी हो सकेगी. हालांकि यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ किया है कि यह नया नियम सिर्फ रेगुलर कोर्स में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स पर ही लागू होगा. जो स्टूडेंट्स डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए कोई कोर्स कर रहे हैं, उन्हें इस बदलाव का फायदा नहीं मिलेगा.&amp;nbsp; कंपार्टमेंट परीक्षाओं का शेड्यूल कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन का ऑफिस अलग से जारी करेगा.&amp;nbsp;
री-इवैल्यूएशन के नियम में भी हुआ संशोधन
परीक्षा नियमों में एक और अहम बदलाव किया गया है, जो री-इवैल्यूएशन यानी उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन से जुड़ा है. ऑर्डिनेंस-15 के क्लॉज 24.4 में हुए संशोधन के मुताबिक, जो कोर्स कैरी-ओवर सिस्टम का पालन करते हैं, उनमें आमतौर पर कंपार्टमेंट परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी. लेकिन फाइनल ईयर या फाइनल सेमेस्टर के स्टूडेंट्स के लिए इसमें एक खास छूट दी गई है, ताकि वो अपने बैकलॉग पेपर कंपार्टमेंट परीक्षा के जरिए ही क्लियर कर सकें.
इसके साथ ही क्लॉज 23.1 में भी संशोधन किया गया है, जिसके तहत अब फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स अपनी उत्तर पुस्तिका के री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की बजाय सीधे कंपार्टमेंट परीक्षा में बैठने का विकल्प चुन सकते हैं. वहीं दूसरे साल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी, यानी वो रिजल्ट आने के 15 दिनों के अंदर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, जैसा कि पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया है.&amp;nbsp;
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स्टूडेंट्स को कैसे मिलेगा इसका फायदा
यूनिवर्सिटी के इस फैसले को स्टूडेंट्स के लिए काफी राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई और आगे की योजनाओं में देरी नहीं होगी. पहले जिन स्टूडेंट्स का बैकलॉग पेपर बाकी रह जाता था, उन्हें अगली रेगुलर परीक्षा तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनकी डिग्री, आगे की पढ़ाई या नौकरी के मौके भी पीछे छूट जाते थे. लेकिन अब कंपार्टमेंट परीक्षा का सीधा विकल्प मिलने से स्टूडेंट्स कम समय में अपना बैकलॉग क्लियर कर पाएंगे और समय पर ग्रेजुएशन पूरी कर सकेंगे. यह पूरा फैसला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने मंजूर किया है और इसे ऑर्डिनेंस-15 में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Study Abroad Trends: स्टडी अब्रॉड का नया ट्रेंड! विदेश पढ़ने गए भारतीय क्यों लौट रहे जल्दी? एक्सपर्ट ने बताई वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Study Abroad Trends : विदेश में पढ़ाई करना लंबे समय से भारतीय छात्रों का बड़ा सपना रहा है. बेहतर शिक्षा, अच्छी नौकरी और अंतरराष्ट्रीय एक्सपीरियंस के लिए हर साल लाखों छात्र दूसरे देशों का रुख करते हैं. हालांकि अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है. हाल के सालों में न सिर्फ विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है, बल्कि कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले की तुलना में जल्दी भारत लौट रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह बढ़ता खर्च, सख्त इमिग्रेशन नियम, बदलता जॉब मार्केट और भारत में बढ़ते करियर के अवसर जैसे कई कारण हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर भारतीय छात्र अब पहले से जल्दी भारत क्यों लौट रहे हैं.
विदेश पढ़ने का नजरिया क्यों बदल रहा है?
MSM Unify के संस्थापक और निदेशक संजय लॉल के अनुसार, विदेश में पढ़ाई को लेकर छात्रों की सोच पहले जैसी नहीं रही है. पहले अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को स्थायी रूप से विदेश में बसने का रास्ता माना जाता था, लेकिन अब छात्र ज्यादा व्यावहारिक तरीके से फैसले ले रहे हैं. उनका कहना है कि आज के छात्र अपने करियर और फ्यूचर को ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं. अगर उन्हें भारत में बेहतर अवसर दिखाई देते हैं, तो वे जल्दी वापस लौटने का फैसला कर रहे हैं.
विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में आई गिरावट
शिक्षा मंत्रालय की ओर से संसद में पेश ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले कुछ सालों में कम हुई है. साल 2023 में 9.08 लाख से ज्यादा छात्र विदेश पढ़ने गए थे. यह संख्या 2024 में घटकर 7.7 लाख रह गई. वहीं 2025 में यह और घटकर 6.26 लाख पहुंच गई. दो साल के अंदर विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में करीब 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.
विदेश पढ़ने गए भारतीय छात्र क्यों लौट रहे जल्दी?
संजय लॉल के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इमिग्रेशन नियम पहले से ज्यादा सख्त हो गए हैं. वीजा मिलने में ज्यादा समय लग रहा है और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने की स्थिति भी पहले जैसी आसान नहीं रही. खासकर एआई आधारित बदलावों के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद करियर को लेकर कंफ्यूजन बढ़ा है.&amp;nbsp;
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एक्सपर्ट ने बताई ये बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में पढ़ाई की फीस लगातार बढ़ रही है. इसके साथ रहने का खर्च भी पहले से ज्यादा हो गया है. वहीं रुपये की कीमत में गिरावट के कारण विदेश में पढ़ाई और महंगी पड़ रही है. कई देशों में पढ़ाई शुरू करने से पहले फंड का प्रमाण दिखाने की राशि भी काफी बढ़ा दी गई है. ऐसे में खासकर मिडिल क्लास परिवार अब विदेश में पढ़ाई पर होने वाले खर्च और उसके बदले मिलने वाले फायदा का पहले से ज्यादा सावधानी से आकलन कर रहे हैं.
भारत में बढ़ रहे हैं बेहतर करियर के अवसर&amp;nbsp;
संजय लॉल के अनुसार, भारत का जॉब मार्केट भी तेजी से बदल रहा है. देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNC), एआई आधारित कंपनियां और स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए अच्छी सैलरी वाली नौकरियों के अवसर बढ़े हैं. यही वजह है कि कई छात्र विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए जल्दी भारत लौटना पसंद कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की अहमियत कम होने का संकेत नहीं है. बल्कि छात्रों की सोच बदल रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Government School Report : 10 साल में देश में बंद हुए 94000 सरकारी स्कूल, हर दिन 25 स्कूलों पर लग रहा ताला</title>
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        <description><![CDATA[ Government School Report : सरकारी स्कूलों को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने देशभर का ध्यान खींचा है. पिछले 10 सालों में भारत में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं. इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, दो या उससे ज्यादा स्कूलों को मिलाकर एक स्कूल बना देना, घटता जन्म दर और बड़ी कक्षाओं तक छात्रों को स्कूल में बनाए रखने की चुनौतियां इस बदलाव की प्रमुख वजहें हैं. रिपोर्ट में सरकारी और निजी स्कूलों की संख्या, छात्रों के नामांकन और ड्रॉपआउट से जुड़े कई अहम आंकड़े भी सामने आए हैं.
10 साल में बंद हुए 94 हजार सरकारी स्कूल
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में देशभर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं. इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014-15 में देश में 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गए. इसी दौरान सरकारी सहायता प्राप्त (Government Aided) स्कूलों की संख्या 83 हजार से घट कर 79 हजार हो गई. &amp;nbsp;वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख पहुंच गई.
छात्रों के नामांकन में भी आई बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दशक में स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या भी कम हुई है. 2014-15 में कुल नामांकन 26.95 करोड़ था, जो 2024-25 में घटकर 24.69 करोड़ रह गया. इस दौरान करीब 2.26 करोड़ छात्रों का नामांकन कम हुआ है.
बड़ी कक्षाओं में बढ़ रहा ड्रॉपआउट
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर काफी कम है. पहली से पांचवीं कक्षा तक ड्रॉपआउट रेट केवल 0.3 प्रतिशत है. लेकिन छठी से आठवीं में यह बढ़कर 3.5 प्रतिशत और नौवीं-दसवीं तक 11.5 प्रतिशत हो जाता है. वहीं आठवीं से नौवीं कक्षा में जाने वाले छात्रों की दर 2014-15 के 91.58 प्रतिशत से घट कर 2024-25 में 86.6 प्रतिशत रह गई. रिपोर्ट के अनुसार, पुडुचेरी और केरल में यह दर 99.6 प्रतिशत है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह काफी कम दर्ज की गई है.
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नीति आयोग की रिपोर्ट School Education System in India: Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement के अनुसार, इस गिरावट की कई वजहें हैं. इनमें घटती प्रजनन दर, स्कूल जाने की उम्र वाले बच्चों की कम होती आबादी, कम छात्रों वाले पास-पास के स्कूलों को बंद करके सभी बच्चों को एक ही स्कूल में पढ़ाना &amp;nbsp;और ऊंची कक्षाओं तक छात्रों को स्कूल में बनाए रखने की चुनौती शामिल है.
स्कूलों के मर्ज होने पर क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक, कम छात्र संख्या वाले आसपास के सरकारी स्कूलों को आपस में मिलाकर संसाधनों का बेहतर यूज करने की नीति अपनाई गई. हालांकि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे कई इलाकों में बच्चों का स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो गया. खासकर लड़कियों के लिए स्कूल की दूरी बढ़ने के कारण कई मामलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और नामांकन भी घटा.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Indian Army Agniveer result 2026 : भारतीय सेना अग्निवीर रिजल्ट घोषित, ऐसे करें अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Army Agniveer result 2026 : भारतीय सेना में अग्निवीर बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. इंडियन आर्मी ने अग्निवीर कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड चेक कर सकते हैं.
रिजल्ट अलग-अलग आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO) और जोन के अनुसार पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया गया है. इसमें अगले चरण के लिए चुने गए उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर शामिल हैं. अगर आपने भी यह परीक्षा दी थी, तो अब अपना रिजल्ट देखकर आगे की चयन प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि अपना अग्निवीर रिजल्ट और स्कोरकार्ड डाउनलोड कैसे करें.&amp;nbsp;
किन पदों के लिए जारी हुआ रिजल्ट?
भारतीय सेना ने अग्निवीर भर्ती के कई पदों के लिए CEE परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है. इसमें Agniveer General Duty (GD), Agniveer Technical, Agniveer Tradesman (8वीं और 10वीं पास), Office Assistant/Clerk, Women Military Police, Sepoy Pharma और Soldier Technical Nursing Assistant जैसी श्रेणियां शामिल हैं. लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को अब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होने का मौका मिलेगा.
कैसे डाउनलोड करें अग्निवीर रिजल्ट और स्कोरकार्ड?
1. सबसे पहले भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाएं.
2. होमपेज पर Agniveer CEE Result 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
3. अब अपना संबंधित Army Recruitment Office (ARO) या जोन चुनें.
4. स्क्रीन पर मेरिट लिस्ट की पीडीएफ खुल जाएगी.
5. इसके बाद अपना रोल नंबर या नाम सर्च करें.
6. आखिर में रिजल्ट पीडीएफ डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें.
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लिखित परीक्षा पास करने के बाद क्या होगा?
कॉमन एंट्रेंस एग्जाम पास कर लेना लास्ट चयन नहीं माना जाएगा. भारतीय सेना में भर्ती के लिए उम्मीदवारों को सभी तय चरण पूरे करने होंगे. इसके बाद ही लास्ट मेरिट तैयार की जाएगी. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी आगे की सभी अपडेट, अगले चरण की तारीख और जरूरी निर्देशों के लिए समय-समय पर भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर नजर बनाए रखें.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया के अगले चरण
1. फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT) - इसमें 1.6 किलोमीटर दौड़ के साथ पुल-अप्स, पुश-अप्स और सिट-अप्स जैसे शारीरिक परीक्षण होंगे.
2. फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट (PMT) - इस चरण में उम्मीदवार की लंबाई, वजन और सीने का माप तय मानकों के अनुसार जांचा जाएगा.
3. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन - शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाएगी.
4. मेडिकल टेस्ट - उम्मीदवार की सैन्य सेवा के लिए शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी फिटनेस की जांच होगी.
5. एडेप्टेबिलिटी टेस्ट - भर्ती नियमों के अनुसार जरूरत होने पर यह टेस्ट भी आयोजित किया जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में खुली 35 हजार किताबों और 1 करोड़ ई&amp;बुक्स वाली लाइब्रेरी, फ्री Wifi का भी मिलेगा मजा</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और किताबें पढ़ने के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, दिल्ली में एनडीएमसी ने उद्यान मार्ग पर अत्याधुनिक जयप्रकाश नारायण पब्लिक लाइब्रेरी शुरू की है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया.&amp;nbsp;
लाइब्रेरी में क्या-क्या मिलेगा?
यह लाइब्रेरी करीब 2265 वर्गमीटर में बनी है और यहां एक साथ करीब 200 लोग बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं. यहां 35 हजार से ज्यादा किताबें, शोध पत्रिकाएं और संदर्भ पुस्तकें मौजूद हैं. इसके अलावा ई-लाइब्रेरी के जरिए 1 करोड़ से ज्यादा ई-बुक्स पढ़ने की सुविधा भी इस लाइब्रेरी में मिलेगी.
लाइब्रेरी में आधुनिक रीडिंग एरिया, रिसर्च सेंटर, बच्चों के लिए अलग किड्स जोन, मल्टीपर्पज ऑडिटोरियम, फ्री वाई-फाई और आरएफआईडी आधारित बुक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं हैं. इसे नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से भी जोड़ा जाएगा.
गृहमंत्री ने कही यह बात
अमित शाह ने कहा कि किसी देश का भविष्य खेती, बाजार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में पढ़ने आने वाले युवाओं से तय होता है. उन्होंने कहा कि किताबें पढ़ने से सोचने और समझने की क्षमता बढ़ती है, &amp;nbsp;इसलिए हर युवा को किसी न किसी पुस्तकालय से जरूर जुड़ना चाहिए.
उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके शहर की लाइब्रेरी ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला. बचपन में कहानी की किताबें पढ़ते-पढ़ते उनकी रुचि वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गई. उन्होंने कहा कि बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए, क्योंकि सही सोच किताबों से ही आती है.
उन्होंने दिल्ली सरकार से अपील की कि राजधानी के सभी सार्वजनिक पुस्तकालयों को आपस में जोड़ा जाए और उन्हें स्कूलों से भी कनेक्ट किया जाए. उन्होंने जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी के कर्मचारियों से कहा कि वे आसपास के स्कूलों के छात्रों को लाइब्रेरी आने के लिए प्रेरित करें, ताकि युवाओं में पढ़ने की आदत बढ़े.
छात्रों के लिए बड़ी सुविधा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह लाइब्रेरी दिल्ली के युवाओं और छात्रों के लिए बड़ी सौगात है. खासकर यूपीएससी और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को यहां बेहतर माहौल और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह लाइब्रेरी युवाओं को अपने सपने पूरे करने में मदद करेगी.
एनडीएमसी के अध्यक्ष केशव चंद्र ने बताया कि यह लाइब्रेरी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की याद में बनाई गई है. वहीं, एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि यह लाइब्रेरी आने वाले समय में युवाओं के लिए पढ़ाई, रिसर्च और नई सोच का बड़ा केंद्र बनेगी.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rajasthan Senior Teacher Recruitment Exam: राजस्थान में कड़े इंतजामों के बीच शुरू हुई वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा, 9651 पदों पर होनी है भर्ती </title>
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        <description><![CDATA[ Rajasthan Senior Teacher Recruitment Exam: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की वरिष्ठ अध्यापक (सेकेंड ग्रेड) भर्ती परीक्षा आज से शुरू हो गई है. यह परीक्षा 18 जुलाई तक प्रदेशभर में आयोजित की जाएगी. भर्ती के जरिए 9,651 वरिष्ठ अध्यापक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. परीक्षा 41 जिलों के 1,917 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में सुबह 10 बजे से 12.30 बजे तक और दोपहर की पाली में 3 बजे से 5.30 बजे तक आयोजित की जा रही है.&amp;nbsp;
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए 12 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. अभ्यर्थियों को सघन तलाशी के बाद ही एंट्री दी जा रही है.महिला अभ्यर्थियों की भी कड़ी तलाशी हो रही है.
यह भी पढ़ें: CA की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर, ICAI ने सितंबर-नवंबर एग्जाम के लिए खोला पोर्टल
इन विषयों के लिए आयोजित की जा रही परीक्षा&amp;nbsp;
यह भर्ती परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, उर्दू, पंजाबी और सिंधी सहित विभिन्न विषयों के लिए आयोजित की जा रही है. सभी केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की सघन तलाशी ली गई. पहचान पत्र और प्रवेश पत्र का मिलान करने के बाद ही परीक्षा कक्ष में भेजा गया.&amp;nbsp;नकल और पेपर लीक रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. परीक्षा केंद्रों की पूरी वीडियोग्राफी कराई जा रही है. संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है, जबकि उड़नदस्ते और निगरानी दल लगातार निरीक्षण कर रहे हैं.
एग्जाम सेंटर के आसपास धारा 163 लागू&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 163 लागू कर अनावश्यक भीड़ पर रोक लगाई गई है. प्रशासन ने अभ्यर्थियों से समय से पहले केंद्र पहुंचने और सभी नियमों का पालन करने की अपील की है.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>10वीं के बाद बनें आयुर्वेद डॉक्टर! केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया NEET&amp;PA कोर्स</title>
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        <description><![CDATA[ आयुर्वेद के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-प्री आयुर्वेद (NEET-PA) की अधिसूचना जारी कर दी है. इस नई व्यवस्था के तहत अब संस्कृत के साथ-साथ किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास छात्र-छात्राएं प्री-आयुर्वेद कार्यक्रम में प्रवेश लेकर आगे बीएएमएस की पढ़ाई कर सकेंगे और आयुर्वेद चिकित्सक बनने का रास्ता तय कर सकेंगे.
देशभर के आयुर्वेद गुरुकुलों में मिलेगा प्रवेश का अवसर
विश्वविद्यालय की ओर से शुरू किया गया यह कार्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) से अनुमोदित है. इसे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध देशभर के विभिन्न आयुर्वेद गुरुकुलों में संचालित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य संस्कृत शिक्षा और आयुर्वेद को एक साथ जोड़ते हुए पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित है पाठ्यक्रम
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और भारतीय ज्ञान परंपरा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उनके अनुसार संस्कृत का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद के मूल ग्रंथों, संहिताओं और शास्त्रीय अवधारणाओं को समझना अपेक्षाकृत आसान होता है. गुरुकुल आधारित शिक्षण मॉडल आयुर्वेद की पारंपरिक प्रामाणिकता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी मदद करेगा.
जुलाई के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. पवन कुमार के मुताबिक, नीट-पीए के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जुलाई के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी. प्रवेश परीक्षा अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाने की योजना है. परीक्षा देशभर में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी.
साढ़े सात साल में पूरा होगा पूरा शैक्षणिक कार्यक्रम
यह समेकित पाठ्यक्रम कुल साढ़े सात वर्ष का होगा. इसमें पहले दो वर्ष प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम कार्यक्रम के लिए निर्धारित हैं. इसके बाद साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस पाठ्यक्रम कराया जाएगा. अंत में एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होगी, जिसके बाद विद्यार्थी आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे.
जानिए कौन कर सकता है आवेदन?
इस कार्यक्रम के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे.
आयु सीमा में किसी भी वर्ग को नहीं मिलेगी छूट
प्रवेश के लिए 31 दिसंबर तक अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि आयु सीमा में किसी भी श्रेणी के अभ्यर्थियों को छूट देने का प्रावधान नहीं रखा गया है.
ऐसे होगी नीट-पीए प्रवेश परीक्षा
नीट-पीए परीक्षा ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट पर आयोजित की जाएगी. अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 150 मिनट यानी ढाई घंटे का समय मिलेगा. परीक्षा में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा. इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. प्रश्नपत्र संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विभिन्न पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को सुविधा मिल सके.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Delhi University Admission 2026: DU में एडमिशन का बजा बिगुल! 1.9 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, 16 जुलाई को आएगी पहली सीट लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi University Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस साल यानी 2026-27 सेशन के लिए UG&amp;nbsp; में एडमिशन को लेकर स्टूडेंट्स का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS के जरिए अब तक कुल 1,90,645 यानी करीब 1.9 लाख कैंडिडेट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया है.&amp;nbsp; इनमें से 1,64,098 यानी 1.64 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने फेज-2 का प्रोसेस भी पूरा कर लिया है, जिसमें सब्जेक्ट मैपिंग के साथ-साथ कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकताएं भरने का काम शामिल था.&amp;nbsp;
इस साल यूनिवर्सिटी में कुल 73 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में एडमिशन दिया जाएगा, जो 69 कॉलेजों और डिपार्टमेंट्स में उपलब्ध हैं.&amp;nbsp; इन सभी कोर्सेज को मिलाकर कुल 71,624 सीटें भरी जाएंगी। खास बात यह है कि यूनिवर्सिटी इस बार लगभग 150 अलग-अलग बीए प्रोग्राम कॉम्बिनेशन भी ऑफर कर रही है, और पूरा सीट मैट्रिक्स पहले ही डीयू की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है.&amp;nbsp;
16 जुलाई को आएगी पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट
अब सभी स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स की नजरें 16 जुलाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन CSAS की पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी की जाएगी. जिन स्टूडेंट्स को सीट अलॉट होगी, उन्हें सीट स्वीकार करके एडमिशन फीस जमा करनी होगी. इसके बाद स्टूडेंट्स के पास दो ऑप्शन होंगे, या तो वो अपना एडमिशन फ्रीज कर सकते हैं, यानी उसी कॉलेज और कोर्स में बने रह सकते हैं, या फिर अगले राउंड में अपग्रेड का ऑप्शन चुन सकते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः दिल्ली में खुली 35 हजार किताबों और 1 करोड़ ई-बुक्स वाली लाइब्रेरी, फ्री Wifi का भी मिलेगा मजा
फीस पेमेंट होगी अब पहले से आसान
एडमिशन प्रोसेस को और आसान बनाने के लिए इस बार यूनिवर्सिटी ने एक नया वर्चुअल वॉलेट सिस्टम शुरू किया है. इस सिस्टम की खास बात यह है कि अगर किसी स्टूडेंट ने पहले राउंड में फीस जमा कर दी है, और बाद में उसे किसी दूसरे कॉलेज या कोर्स में अपग्रेड कर दिया जाता है, तो उसकी पहले जमा की गई राशि खुद-ब-खुद एडजस्ट हो जाएगी. इससे स्टूडेंट्स को बार-बार फीस भरने की झंझट से राहत मिलेगी और समय की भी बचत होगी.&amp;nbsp; यूनिवर्सिटी की योजना है कि नया एकेडमिक सेशन शुरू होने से पहले, यानी 28 जुलाई तक, एडमिशन के दो राउंड पूरे कर लिए जाएं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Rajasthan Senior Teacher Recruitment Exam: राजस्थान में कड़े इंतजामों के बीच शुरू हुई वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा, 9651 पदों पर होनी है भर्ती&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कभी भी जारी हो सकती है UGC NET की आंसर की, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET जून 2026 परीक्षा में शामिल हुए लाखों उम्मीदवार अब प्रोविजनल आंसर की का इंतजार कर रहे हैं.नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर आंसर की रिस्पांस शीट का क्वेश्चन पेपर जारी कर सकती है. आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान कर सकेंगे और यदि किसी उत्तर पर आपत्ति हो तो निर्धारित शुल्क के साथ ऑनलाइन चुनौती भी दर्ज कर सकेंगे.
जल्द जारी हो सकती है UGC NET 2026 की प्रोविजनल आंसर की
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने UGC NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 जून से 30 जून 2026 के बीच देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर कराया था. परीक्षा खत्म होने के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर प्रोविजनल आंसर की पर है.उम्मीद की जा रही है कि NTA किसी भी समय आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर Answer Key जारी कर सकती है. इसके साथ ही उम्मीदवारों की रिस्पांस सीट और क्वेश्चन पेपर भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
पिछले वर्षों का ट्रेंड क्या बताता है
अगर पिछले वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो NTA आमतौर पर परीक्षा समाप्त होने के एक से दो सप्ताह के भीतर प्रोविजनल आंसर की जारी करती है. वर्ष 2025 में परीक्षा 25 से 29 जून तक हुई थी और 6 जुलाई को आंसर की जारी कर दी गई थी.वहीं 2024 और 2023 में भी परीक्षा खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद प्रोविजनल आंसर की जारी की गई थी. इसी ट्रेंड को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार भी उम्मीदवारों का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है.
UGC NET Answer Key में क्या-क्या मिलेगा
प्रोविजनल आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने प्रश्न पत्र, रिस्पॉन्स शीट और आधिकारिक उत्तरों का मिलान कर सकेंगे. इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में उनके कितने उत्तर सही हैं और संभावित स्कोर कितना बन सकता है.यदि किसी उत्तर पर संदेह होता है तो उम्मीदवार उसे चुनौती देने का विकल्प भी चुन सकते हैं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशनAnswer Key पर ऐसे दर्ज करें आपत्ति
अगर आपको प्रोविजनल आंसर की में किसी सवाल के जवाब पर आपत्ति है, तो NTA की ओर से तय समय के भीतर ऑनलाइन चुनौती दर्ज कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले ugcnet.nta.nic.in वेबसाइट पर जाएं और Challenge Answer Key लिंक पर क्लिक करें.इसके बाद अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि या पासवर्ड डालकर लॉगिन करें. अब जिस सवाल के उत्तर पर आपत्ति दर्ज करनी है, उसे चुनें और उसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.इसके बाद प्रति प्रश्न निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करके अपनी आपत्ति सबमिट कर दें. आवेदन जमा होने के बाद उसकी रसीद डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें.
UGC NET 2026 Answer Key ऐसे करें डाउनलोड
स्टेप 1: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.
स्टेप 2: होम पेज पर दिखाई देने वाले UGC NET June 2026 Provisional Answer Key लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3: अब अपना Application Number और Date of Birth या Password दर्ज करके लॉगिन करें.
स्टेप 4: लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर आपकी प्रोविजनल आंसर की और रिस्पॉन्स शीट दिखाई देगी.
स्टेप 5: सभी उत्तरों का ध्यान से मिलान करें और भविष्य के लिए Answer Key का PDF डाउनलोड करके उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;देशभर में हर दिन बंद हुए 13 स्कूल, सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में, UDISE रिपोर्ट ने चौंकाए आंकड़े ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कभी, भी, जारी, हो, सकती, है, UGC, NET, की, आंसर, की, ऐसे, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>CUET और बोर्ड एग्जाम देने वाले छात्रों का डेटा लीक! कई वेबसाइट पर बेची जा रही निजी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ CUET 2026 और विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में शामिल छात्रों के डेटा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ वेबसाइटें छात्रों की निजी जानकारी बेच रही हैं. इस खबर के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपने सिस्टम को पूरी तरह सुरक्षित बताया है.
डेटा बेचने का दावा करने वाली वेबसाइटें चर्चा में
रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट पर कुछ वेबसाइटें दावा कर रही हैं कि उनके पास CUET 2026 और अन्य बोर्ड परीक्षाओं में शामिल छात्रों का डेटाबेस उपलब्ध है.इन वेबसाइटों के बारे में कहा गया है कि वे निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और एडमिशन से जुड़े संस्थानों को छात्रों का डेटा उपलब्ध कराती हैं. बताया जा रहा है कि डेटाबेस की कीमत उसके आकार और जानकारी के आधार पर करीब 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक रखी गई है.
छात्रों की कौन-कौन सी जानकारी होने का दावा
बताया गया है कि कथित डेटाबेस में छात्रों का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आवेदन संख्या, जन्मतिथि, माता-पिता के नाम, जेंडर और कैटेगरी जैसी कई निजी जानकारियां शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ वेबसाइटों ने संभावित खरीदारों को भरोसा दिलाने के लिए सीमित संख्या में रिकॉर्ड सैंपल के रूप में भी दिखाए हैं.हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है.यह भी पढ़ें - देशभर में हर दिन बंद हुए 13 स्कूल, सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में, UDISE रिपोर्ट ने चौंकाए आंकड़े
अगर किसी छात्र की निजी जानकारी बिना अनुमति के किसी के पास पहुंचती है या बेची जाती है, तो उसका गलत इस्तेमाल होने का खतरा बढ़ जाता है.ऐसे डेटा का उपयोग फर्जी एडमिशन कॉल, स्पैम मैसेज, साइबर ठगी या पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है. यही वजह है कि डेटा सुरक्षा से जुड़े मामलों को बेहद गंभीर माना जाता है.
NTA ने क्या कहा
पूरे मामले पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कहा है कि उम्मीदवारों की जानकारी की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. एजेंसी के अनुसार परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ा डेटा केवल सुरक्षित सरकारी प्लेटफॉर्म और सहमति आधारित प्रक्रिया के माध्यम से साझा किया जाता है.NTA का कहना है कि उसके आधिकारिक सिस्टम सुरक्षित हैं और उम्मीदवारों की जानकारी की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय अपनाए जाते हैं.यह भी पढ़ें - IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सरकारी MBBS कॉलेज में एडमिशन के लिए कितने नंबर हो सकते हैं जरूरी, जानें संभावित कटऑफ</title>
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        <description><![CDATA[ Re NEET UG 2026 परीक्षा पूरी होने के बाद अब लाखों उम्मीदवार रिजल्ट और कटऑफ का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी MBBS कॉलेज में दाखिले के लिए कितने अंक सुरक्षित माने जाएंगे. पिछले वर्षों के ट्रेंड और काउंसलिंग के आधार पर संभावित सेफ स्कोर का अनुमान लगाया गया है.
सरकारी MBBS कॉलेज में एडमिशन के लिए कितना स्कोर चाहिए?Re NEET UG 2026 के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए मुकाबला पहले की तरह कड़ा रहने की उम्मीद है. अनुमान के मुताबिक सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 610 या उससे अधिक अंक सुरक्षित माने जा सकते हैं.वहीं EWS के लिए 600+, OBC के लिए 590+, SC के लिए 520+ और ST के लिए 490+ अंक अच्छे माने जा रहे हैं. हालांकि अंतिम कटऑफ रिजल्ट और काउंसलिंग के बाद ही तय होगी.
अगर किसी उम्मीदवार के 680 या उससे ज्यादा अंक आते हैं तो उसे AIIMS और देश के बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की मजबूत संभावना हो सकती है.650 से 679 अंक वाले छात्रों के लिए भी बेहतरीन सरकारी कॉलेज मिलने के अच्छे अवसर रहेंगे. 620 से 649 अंक लाने वाले उम्मीदवारों के पास AIQ और स्टेट कोटा दोनों में अच्छी संभावना हो सकती है.600 से 619 अंक वाले छात्रों को कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट मिलने की उम्मीद रहेगी, जबकि 550 से 599 अंक वालों का एडमिशन राज्य, कैटेगरी और काउंसलिंग पर निर्भर करेगा.
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15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा में कितनी रह सकती है कटऑफ
15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत हर साल पूरे देश के छात्र एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं, इसलिए यहां कटऑफ आमतौर पर ज्यादा रहती है.अनुमान है कि सामान्य वर्ग के लिए 615 से 630+, EWS के लिए 610 से 625+, OBC के लिए 590 से 610+, SC के लिए 520 से 550+ और ST के लिए 500 से 540+ अंक तक कटऑफ जा सकती है.
किन वजहों से बदल सकती है कटऑफइस साल की कटऑफ कई बातों पर निर्भर करेगी.अगर परीक्षा आसान रही और ज्यादा छात्रों ने अच्छे अंक हासिल किए तो कटऑफ बढ़ सकती है.वहीं पेपर कठिन होने पर कटऑफ में थोड़ी कमी आ सकती है.इसके अलावा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या, उपलब्ध MBBS सीटें, आरक्षण नीति और काउंसलिंग का ट्रेंड भी अंतिम कटऑफ तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
रिजल्ट के बाद क्या करें उम्मीदवाररिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने स्कोर और रैंक के अनुसार AIQ और स्टेट कोटा काउंसलिंग की तैयारी शुरू करें.पसंदीदा मेडिकल कॉलेजों की सूची पहले से तैयार रखें और जरूरी दस्तावेज समय रहते व्यवस्थित कर लें.इससे काउंसलिंग के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन ]]></description>
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        <title>BPSC 72वीं प्रारंभिक परीक्षा की तारीख तय, 26 जुलाई को दो घंटे की होगी परीक्षा; जल्द जारी होंगे एडमिट कार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है. आयोग ने 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (Combined Preliminary Examination) की परीक्षा तिथि घोषित कर दी है. आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह परीक्षा 26 जुलाई 2026 को राज्य के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी. परीक्षा का समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक निर्धारित किया गया है.
परीक्षा की तारीख सामने आने के बाद अब उम्मीदवारों का पूरा ध्यान एडमिट कार्ड और परीक्षा केंद्र की जानकारी पर है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश पत्र, परीक्षा केंद्र और अन्य जरूरी निर्देश जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे. ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर आयोग की वेबसाइट और आधिकारिक सूचना पर नजर बनाए रखें.
BPSC की संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा बिहार की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल है. हर साल लाखों युवा प्रशासनिक और अन्य राज्य सेवाओं में नौकरी पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं. इस बार भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के आवेदन करने की उम्मीद है, इसलिए परीक्षा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं.
आयोग की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित होगी. राज्य के अलग-अलग जिलों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवार निर्धारित समय के अनुसार परीक्षा देंगे. अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी गई है, ताकि दस्तावेजों की जांच और प्रवेश प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सके.
परीक्षा डेट की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में BPSC ने अपनी 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी किया था. इस परीक्षा में आयोग ने रिकॉर्ड 2,027 उम्मीदवारों का चयन किया, जो आजादी के बाद राज्य सेवा परीक्षाओं में सबसे अधिक चयन माना जा रहा है. इस उपलब्धि ने BPSC परीक्षाओं को लेकर युवाओं का उत्साह और बढ़ा दिया है.
70वीं परीक्षा के नतीजों में उत्तर प्रदेश की श्रद्धा पांडेय ने पहला स्थान हासिल किया था. टॉप-10 में चार महिला उम्मीदवारों ने जगह बनाई, जबकि टॉप-100 में 45 महिलाओं का चयन हुआ. आयोग के अनुसार, यह परिणाम राज्य सेवा परीक्षाओं के इतिहास में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले परिणामों में शामिल रहा.
पिछली भर्ती का हाल
पिछली भर्ती प्रक्रिया में कुल 2,027 पदों पर नियुक्ति की गई थी. इनमें अधिकांश पद बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के लिए थे. इसके अलावा बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) और वित्तीय प्रशासनिक अधिकारी जैसे पद भी शामिल थे. 70वीं परीक्षा के लिए करीब 4.83 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि लाखों उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए थे.
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क्या करें कैंडिडेट्स?
अब 72वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी उम्मीदवारों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है. अभ्यर्थियों को नए विषय शुरू करने के बजाय रिवीजन, मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. इससे परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन और आत्मविश्वास दोनों बेहतर होंगे.
क्या करें?आयोग की ओर से एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवारों को उसमें दर्ज नाम, फोटो, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए. किसी भी तरह की गलती मिलने पर तुरंत आयोग से संपर्क करना जरूरी होगा.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कॉलेज का पहला साल आसान बनाना है, तो पहले दिन से अपनाएं ये 5 आदतें</title>
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        <description><![CDATA[ कॉलेज की शुरुआत हर छात्र के लिए एक नया सफर होती है. यहां नई पढ़ाई, नए दोस्त, नए शिक्षक और बिल्कुल अलग माहौल मिलता है। ऐसे में कई छात्र शुरुआत में घबरा जाते हैं. लेकिन अगर आप पहले दिन से सही आदतें अपना लें, तो कॉलेज का पहला साल न सिर्फ आसान बल्कि आपके पूरे करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है.
पहले दिन से एक्टिव रहें, खुद को पीछे न रखें
कॉलेज में दाखिला लेने के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि खुद को अकेला महसूस न करें. क्लास में हिस्सा लें, कॉलेज की गतिविधियों में शामिल हों और नए लोगों से मिलने की कोशिश करें. जितना जल्दी आप नए माहौल में घुल-मिल जाएंगे, उतनी ही आसानी से कॉलेज लाइफ का आनंद ले पाएंगे.
शिक्षकों से खुलकर बात करें
अगर किसी विषय में परेशानी हो या करियर को लेकर कोई सवाल हो, तो अपने प्रोफेसर से बात करने में बिल्कुल संकोच न करें. शिक्षक सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं होते, बल्कि सही दिशा दिखाने में भी मदद करते हैं.उनसे अच्छा तालमेल भविष्य में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और नौकरी के अवसरों में भी काम आ सकता है.
अच्छे दोस्तों का साथ बनाएगा सफर आसान
कॉलेज में बने दोस्त सिर्फ क्लास तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई बार जिंदगीभर साथ निभाते हैं. इसलिए सहपाठियों से बातचीत करें, ग्रुप स्टडी करें और एक-दूसरे की मदद करें। इससे पढ़ाई आसान होगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा और परीक्षा का तनाव भी कम महसूस होगा.
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सिर्फ किताबों तक खुद को सीमित न रखें
कॉलेज जीवन का असली फायदा तब मिलता है, जब आप पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं. इंटर्नशिप, वर्कशॉप, सेमिनार, रिसर्च प्रोजेक्ट, क्लब और कैंपस इवेंट्स में भाग लेने से नए अनुभव मिलते हैं. यही अनुभव आगे चलकर आपके रिज्यूमे और करियर को मजबूत बनाते हैं.
खुद पर भरोसा रखें और सीखते रहें
कई बार नए छात्रों को लगता है कि वे दूसरों जितने अच्छे नहीं हैं. ऐसी सोच सामान्य है, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी न होने दें. याद रखें कि आपने अपनी मेहनत के दम पर कॉलेज में जगह बनाई है.अगर कोई कठिनाई आए तो मदद लें, सवाल पूछें और लगातार सीखते रहें. यही आदत आपको आगे बढ़ने में सबसे ज्यादा मदद करेगी.
कॉलेज का पहला साल तय कर सकता है आपका भविष्य
कॉलेज का शुरुआती समय सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का भी मौका होता है.अगर आप सीखने की इच्छा बनाए रखें, नए लोगों से जुड़ें, हर अवसर का फायदा उठाएं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो यही पहला साल आपके बेहतर करियर और सफल भविष्य की मजबूत शुरुआत बन सकता है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कॉलेज, का, पहला, साल, आसान, बनाना, है, तो, पहले, दिन, से, अपनाएं, ये, आदतें</media:keywords>
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        <title>PM YASASVI Scholarship 2026: पढ़ाई के लिए मिलेगी 75 हजार से 1.25 लाख रुपये तक की मदद, जानें कौन कर सकता है आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ PM YASASVI Scholarship 2026: पढ़ाई के लिए मिलेगी 75 हजार से 1.25 लाख रुपये तक की मदद, जानें कौन कर सकता है आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>देशभर में हर दिन बंद हुए 13 स्कूल, सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में, UDISE रिपोर्ट ने चौंकाए आंकड़े</title>
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        <description><![CDATA[ देश में स्कूलों की स्थिति को लेकर शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक पूरे साल में औसतन हर दिन 13 स्कूल बंद हुए. सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश में बंद हुए हैं. वहीं कई राज्यों में छात्रों की संख्या भी कम हुई है, जबकि कुछ राज्यों में नए स्कूल भी खोले गए हैं.
देशभर में 4,791 स्कूल हुए बंद
रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 के दौरान पूरे भारत में कुल 4,791 स्कूल बंद हुए. इसका मतलब है कि हर दिन औसतन 13 स्कूल बंद हुए.देश में कुल स्कूलों की संख्या 14,71,473 से घटकर 14,66,682 रह गई. सबसे ज्यादा 2,426 स्कूल मध्य प्रदेश में बंद हुए.इसके बाद तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश का स्थान रहा.
कुछ राज्यों में खुले नए स्कूल
जहां कई राज्यों में स्कूलों की संख्या घटी, वहीं बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में नए स्कूल शुरू किए गए. बिहार में 946, छत्तीसगढ़ में 234 और दिल्ली में 87 नए स्कूल जुड़े. हालांकि इन राज्यों में छात्रों के नामांकन में कमी दर्ज की गई.
छात्रों की संख्या में भी आई गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में सबसे ज्यादा 4.37 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कम हुआ.इसके अलावा छत्तीसगढ़ और दिल्ली में भी पिछले साल की तुलना में छात्रों की संख्या घटी.इससे साफ है कि कई राज्यों में स्कूल तो बढ़े, लेकिन उनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम रही.
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बिना छात्रों वाले स्कूल पहली बार हुए कम
रिपोर्ट में एक राहत की बात भी सामने आई. पहली बार ऐसे स्कूलों की संख्या घटी है, जिनमें एक भी छात्र पढ़ाई नहीं कर रहा था. 2024-25 में ऐसे स्कूल 7,993 थे, जो अब घटकर 5,663 रह गए हैं.हालांकि इन स्कूलों में अब भी 20,667 शिक्षक कार्यरत हैं.
उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले
पश्चिम बंगाल में बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 4,133 हो गई है, जहां हजारों शिक्षक तैनात हैं. वहीं उत्तर प्रदेश में ऐसे स्कूलों की संख्या 81 से बढ़कर 313 हो गई. इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है. छत्तीसगढ़ में भी पहली बार 149 ऐसे स्कूल दर्ज किए गए, जहां कोई छात्र नामांकित नहीं है.
UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट बताती है कि देश में कई जगह स्कूलों की संख्या और छात्र नामांकन दोनों में बदलाव हो रहा है. कुछ राज्यों में नए स्कूल खुल रहे हैं, जबकि कई राज्यों में स्कूल बंद हो रहे हैं. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और छात्रों को स्कूलों से जोड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत मानी जा रही है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Pregnancy Glow: क्या होता है प्रेग्नेंसी ग्लो, क्या सच में निखर जाती है स्किन?</title>
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        <description><![CDATA[ Pregnancy Glow: क्या होता है प्रेग्नेंसी ग्लो, क्या सच में निखर जाती है स्किन? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>India First Bullet Train Recruitment 2026: भारत की पहली बुलेट ट्रेन चलाने के लिए निकली भर्ती! फटाफट करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ NHSRCL Recruitment 2026: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में नौकरी करने का मौका सामने आया है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने टेक्नीशियन के 237 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार NHSRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
NHSRCL भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम कर रही सरकारी कंपनी है. इसके तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच देश का पहला हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जा रहा है. यह देश के सबसे बड़े रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड भारत सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की संयुक्त कंपनी है, जिसे देश में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने के लिए बनाया गया है.
कितने पदों पर निकली भर्ती और कब तक करें आवेदन?
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने कुल 237 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार 5 अगस्त 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट nhsrcl.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति NHSRCL या मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट में कहीं भी की जा सकती है.
किन-किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती के तहत कई तकनीकी ट्रेड में टेक्नीशियन नियुक्त किए जाएंगे. इनमें इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन (77 पद), सिग्नलिंग और टेलीकॉम टेक्नीशियन (63 पद), सिविल/ट्रैक फिटर (18 पद), सिविल/ट्रैक मैकेनिक (16 पद), रोलिंग स्टॉक इलेक्ट्रीशियन (13 पद) और रोलिंग स्टॉक फिटर (10 पद) शामिल हैं. इसके अलावा नोटिफिकेशन में ड्राफ्ट्समैन, सर्वेयर, वेल्डर, प्लंबर, पेंटर और अन्य तकनीकी ट्रेड के पद भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक/एसएसएलसी पास किया होना चाहिए. इसके साथ संबंधित ट्रेड में आईटीआई, अप्रेंटिसशिप या तीन साल का इंजीनियरिंग डिप्लोमा होना जरूरी है. इसके अलावा उम्मीदवार के पास भारतीय रेलवे, सरकार के स्वामित्व वाली रेलवे, मेट्रो रेलवे या आरआरटीएस के ऑपरेशन मेंटेनेंस विभाग में कम से कम दो साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए. आवेदन के समय एक्सपीरियंस या कंपीटेंसी सर्टिफिकेट भी देना होगा. आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम उम्र 35 वर्ष तय की गई है.
चयन प्रक्रिया कैसे होगी?
इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा. जिसमें सबसे पहले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) आयोजित होगा. इसके बाद सफल उम्मीदवारों के डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन किया जाएगा. लास्ट में मेडिकल एग्जामिनेशन होगा. परीक्षा की तारीख और शेड्यूल बाद में NHSRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा. सभी चरण कलियर करने वाले उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.
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सैलरी, प्रोबेशन और आवेदन फीस&amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति NE-2 पे लेवल के तहत Absorption Basis पर की जाएगी. उन्हें 35,000 रुपये से 1,10,000 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलेगा. नियुक्ति के बाद उम्मीदवारों को एक साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा करना होगा. इसके साथ ही जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 400 रुपये शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी और महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है.
आवेदन कैसे करें?
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले NHSRCL की आधिकारिक वेबसाइट nhsrcl.in पर जाएं. वहां भर्ती से संबंधित लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें. आवेदन के दौरान सभी जरूरी जानकारी सही-सही दर्ज करें और मांगे गए डॉक्यूमेंट अपलोड करें. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंट अपने पास सुरक्षित रख लें. आवेदन करने की लास्ट डेट 5 अगस्त 2026 है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - NEET UG 2026 Fee Refund : नीट रिफंड के लिए 14 जुलाई तक अपडेट कर सकते हैं बैंक डिटेल्स, जान लें पूरा तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>India, First, Bullet, Train, Recruitment, 2026:, भारत, की, पहली, बुलेट, ट्रेन, चलाने, के, लिए, निकली, भर्ती, फटाफट, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>DTU में एडमिशन का मौका, BTech, BBA और MBA के लिए आवेदन जारी, जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छा मौका है. यूनिवर्सिटी ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कई अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्सों में दाखिले शुरू कर दिए हैं. अलग-अलग कोर्सों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख, योग्यता और प्रवेश प्रक्रिया भी तय कर दी गई है. ऐसे में समय रहते आवेदन करना जरूरी है.
इन कोर्सों में मिल रहा है एडमिशन
DTU इस साल BTech, BBA, BA (Hons) Economics, BDes, MTech, MBA, Executive MBA, MSc, MDes और PhD जैसे कई कोर्सों में दाखिला दे रहा है. हर कोर्स के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा और पात्रता निर्धारित की गई है.इसलिए आवेदन करने से पहले अपने कोर्स की शर्तें जरूर देख लें.
BTech एडमिशन के लिए JAC Delhi की चौथे राउंड की सीट अलॉटमेंट 14 जुलाई 2026 को जारी होगी, जबकि अपग्रेडेशन राउंड 21 जुलाई को होगा. Executive MBA के लिए आवेदन की लास्ट डेट 12 जुलाई है. BBA के लिए आवेदन 14 जुलाई तक किए जा सकते हैं.MBA में अंतिम एडमिशन 7 अगस्त और BBA में 18 अगस्त 2026 तक पूरे किए जाएंगे.
किस कोर्स के लिए कौन-सी परीक्षा जरूरी है
BTech में एडमिशन JEE Main के आधार पर मिलेगा. BBA और BA (Hons) Economics के लिए CUET UG स्कोर जरूरी है.MBA में CAT या MAT स्कोर के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा.वहीं MTech के लिए GATE, MSc के लिए CUET PG और BDes के लिए UCEED स्कोर मान्य होंगे.
योग्यता क्या होनी चाहिए
BTech में आवेदन करने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए. BBA और BA (Hons) Economics के लिए 12वीं में 50 प्रतिशत अंक और अंग्रेजी विषय जरूरी है. MBA के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन होना चाहिए. अलग-अलग आरक्षित वर्गों के लिए नियमानुसार अंकों में छूट भी दी गई है.
कितनी है फीस
BTech की कुल फीस करीब 11.85 लाख रुपये है. BBA और BA (Hons) Economics की फीस लगभग 5.32 लाख रुपये रखी गई है. MBA की कुल फीस करीब 6.20 लाख रुपये और MTech की फीस लगभग 2.58 लाख रुपये है. अलग-अलग कोर्सों के हिसाब से फीस में अंतर हो सकता है.
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एडमिशन के समय ये दस्तावेज रखें तैयार
उम्मीदवारों के पास 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, प्रवेश परीक्षा का स्कोरकार्ड, ग्रेजुएशन की मार्कशीट (PG कोर्स के लिए), आधार कार्ड या अन्य फोटो आईडी, पासपोर्ट साइज फोटो, ट्रांसफर या माइग्रेशन सर्टिफिकेट और आरक्षण प्रमाणपत्र (अगर लागू हो) होना चाहिए.
आरक्षण का मिलेगा लाभयूनिवर्सिटी में SC, ST, OBC-NCL, EWS, PwD और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार सीटों में आरक्षण दिया जाएगा. इसलिए आवेदन करते समय सही श्रेणी से जुड़े सभी जरूरी प्रमाणपत्र साथ रखें.
स्कॉलरशिप का भी मिलेगा फायदाDTU में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को कई सरकारी और यूनिवर्सिटी स्तर की स्कॉलरशिप का लाभ भी मिलता है. इनमें SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक और मेधावी छात्रों के लिए अलग-अलग योजनाएं शामिल हैं. पात्र छात्र आवेदन के बाद इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं.
ऐसे होगा आवेदन
BTech के उम्मीदवारों को पहले JEE Main में शामिल होना होगा और उसके बाद JAC Delhi पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. BBA और MBA के लिए CMAC पोर्टल पर आवेदन करना होगा. MTech के अभ्यर्थी DTU की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.आवेदन के दौरान जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और निर्धारित फीस जमा करनी होगी.इसके बाद मेरिट लिस्ट, काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के जरिए एडमिशन पूरा होगा.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UPSC टॉपर भी हो सकते हैं फेल! LBSNAA के नियम जानकर रह जाएंगे हैरान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रेलवे में 29,200 रुपये तक की सरकारी नौकरी का मौका, 29 जुलाई है आवेदन की आखिरी तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन ग्रेड-I और टेक्नीशियन ग्रेड-III के कुल 6,557 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. आवेदन की शुरुआत 30 जून से हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 29 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऐसे में उम्मीदवारों के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है.
इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत इसकी आकर्षक सैलरी है. चयनित अभ्यर्थियों को पद के अनुसार अच्छा शुरुआती वेतन मिलेगा. टेक्नीशियन ग्रेड-I पर चयन होने वाले उम्मीदवारों को 29,200 रुपये प्रति माह का शुरुआती वेतन मिलेगा, जबकि टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए चुने गए उम्मीदवारों को 19,900 रुपये प्रति माह की शुरुआती सैलरी दी जाएगी. इसके अलावा रेलवे के अन्य भत्तों का लाभ भी मिलेगा.
भर्ती अभियान के तहत कुल 6,557 रिक्तियां भरी जाएंगी. इनमें 323 पद टेक्नीशियन ग्रेड-I और 6,234 पद टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए निर्धारित किए गए हैं. रेलवे में स्थायी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह साल की बड़ी भर्तियों में से एक मानी जा रही है.
कौन अप्लाई कर सकता है?
योग्यता की बात करें तो टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना जरूरी है. वहीं संबंधित पदों के अनुसार निर्धारित तकनीकी योग्यता या इंजीनियरिंग से जुड़ी शैक्षणिक पात्रता भी मांगी गई है. आयु सीमा ग्रेड-I के लिए 18 से 33 वर्ष और ग्रेड-III के लिए 18 से 30 वर्ष तय की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट भी मिलेगी. एससी और एसटी वर्ग को पांच वर्ष तथा ओबीसी वर्ग को तीन वर्ष की छूट दी जाएगी.
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कैसे होगा चयन
उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) के जरिए होगा. परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें सामान्य जागरूकता, गणित, रीजनिंग, जनरल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर से जुड़े सवाल शामिल होंगे. परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी और प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू रहेगी.
ये हैं जरूरी डेट्स
जो उम्मीदवार आवेदन करने जा रहे हैं, उनके लिए जरूरी तारीखों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. ऑनलाइन आवेदन की अंतिम डेट 29 जुलाई 2026 है. आवेदन शुल्क 31 जुलाई तक जमा किया जा सकेगा. यदि आवेदन पत्र में किसी प्रकार की गलती रह जाती है, तो 1 अगस्त से 10 अगस्त 2026 तक उसमें सुधार करने का मौका भी दिया जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>BAMS Admission 2026: अब संस्कृत के छात्र भी बन सकेंगे आयुर्वेदिक डॉक्टर, 10वीं के बाद मिलेगी सीधे BAMS की राह</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने 10वीं तक संस्कृत की पढ़ाई की है और डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, तो अब आपके लिए भी मौका है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्री-आयुर्वेद (NEET-PA) प्रवेश परीक्षा की घोषणा कर दी है. इस परीक्षा के जरिए छात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की पढ़ाई शुरू कर सकेंगे.
10वीं के बाद मिलेगा BAMS में प्रवेश का मौका
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए नया इंटीग्रेटेड प्री-आयुर्वेद कार्यक्रम शुरू किया है. इस कोर्स में प्रवेश लेने के लिए छात्रों को NEET-PA नाम की प्रवेश परीक्षा देनी होगी.परीक्षा में सफल होने के बाद छात्र आयुर्वेद गुरुकुल में पढ़ाई करेंगे और आगे चलकर BAMS की डिग्री हासिल कर सकेंगे.
साढ़े 7 साल में पूरा होगा कोर्स
पूरा कोर्स कुल 7.5 साल का होगा. इसमें पहले 2 साल प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम की पढ़ाई होगी। इसके बाद 4.5 साल का BAMS कोर्स कराया जाएगा. आखिर में 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी. इसके बाद छात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में अपना करियर शुरू कर सकेंगे.किसे मिलेगा आवेदन का मौका
इस प्रवेश परीक्षा के लिए वही छात्र आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड, राज्य संस्कृत बोर्ड या उसके समकक्ष बोर्ड से 10वीं पास की हो.सामान्य वर्ग के छात्रों के कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए. वहीं SC, ST, OBC और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं.
आयु सीमा क्या होगी
आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र 31 दिसंबर 2026 तक कम से कम 15 वर्ष और अधिकतम 25 वर्ष होनी चाहिए.विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि किसी भी वर्ग के उम्मीदवार को आयु सीमा में छूट नहीं मिलेगी.
कब शुरू होंगे आवेदन
विश्वविद्यालय के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जुलाई 2026 के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी.प्रवेश परीक्षा अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में देशभर के तय परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी.
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कैसे होगी प्रवेश परीक्षा
NEET-PA परीक्षा ऑफलाइन OMR शीट पर होगी.परीक्षा का समय ढाई घंटे यानी 150 मिनट रहेगा. इसमें कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे.हर सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा और किसी भी गलत उत्तर पर नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. परीक्षा संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी तीन भाषाओं में आयोजित की जाएगी.
सिलेबस में क्या-क्या शामिल है
विश्वविद्यालय ने परीक्षा का सिलेबस भी जारी कर दिया है. इसमें संस्कृत साहित्य, व्याकरण, दर्शन, पुराण, इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) से जुड़े विषय शामिल किए गए हैं.इन विषयों के आधार पर ही प्रश्न पूछे जाएंगे.
NCISM से मिली मंजूरी
यह पूरा कार्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) से मान्यता प्राप्त है. इसी साल केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और NCISM ने आयुर्वेद गुरुकुलों को जोड़ने के लिए एक विशेष पोर्टल भी शुरू किया था. अब प्रवेश परीक्षा की घोषणा के साथ इस नई व्यवस्था को लागू किया जा रहा है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - कॉन्स्टेबल के बंपर पदों पर भर्ती शुरू, 64 हजार मिलेगी सैलरी; तुरंत करें अप्लाई ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>NCERT की किताबों के कागज पर विवाद, शिक्षा मंत्रालय ने मांगी पूरी रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों के लिए कागज सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का मामला अब शिक्षा मंत्रालय तक पहुंच गया है. इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जांच के आदेश दिए हैं. मंत्रालय यह पता लगाएगा कि कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई सही प्रक्रिया के तहत हुई या नहीं और अदालत में एनसीईआरटी की तरफ से हुई लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है.अब इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्रालय और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों की नजर बनी हुई है.एनसीईआरटी ने आरोप लगाया कि कागज सप्लाई करने वाली कंपनी तय समय पर पेपर नहीं दे सकी.इसी वजह से 22 जून को कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. इसके बाद कंपनी को एनसीईआरटी के नए टेंडर और खरीद प्रक्रिया में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया.
कंपनी ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी.सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से कोई अधिकारी मौजूद नहीं था. इसके बाद कोर्ट ने फिलहाल कंपनी को राहत देते हुए एनसीईआरटी को उसकी 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक गारंटी भुनाने से रोक दिया.
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शिक्षा मंत्रालय ने जांच क्यों बैठाई?
शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि अदालत में एनसीईआरटी अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पाया.इसी वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.साथ ही यह भी कहा है कि अगर किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
कंपनी ने क्या सफाई दी?
कंपनी का कहना है कि सप्लाई में देरी उसकी वजह से नहीं हुई. उसका दावा है कि ईरान में युद्ध के कारण कागज बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी रसायन समय पर नहीं मिल पाया. इसी वजह से पेपर तैयार करने और सप्लाई करने में देरी हुई.अब इस मामले में दो स्तर पर कार्रवाई होगी. एक तरफ दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर शिक्षा मंत्रालय अपनी जांच करेगा.जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि एनसीईआरटी की कार्रवाई पूरी तरह नियमों के मुताबिक थी या नहीं. साथ ही अदालत में सही तरीके से पक्ष नहीं रखने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>बारिश या ट्रैफिक जाम की वजह से छूटा एग्जाम तो कौन होगा इसका जिम्मेदार, कहां कर सकते हैं शिकायत?</title>
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        <description><![CDATA[ Exam Missed Due To Rain: कंपटीशन एग्जाम और यूनिवर्सिटी एग्जाम के दौरान समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना हर छात्र के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. हालांकि, कई बार बारिश के मौसम में बारिश, ट्रैफिक जाम या दूसरी वजह से कई छात्र चाहकर भी परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाते. ऐसे मामले में कई बार सवाल उठाते हैं कि अगर बड़ी संख्या में छात्रों का एग्जाम छूट जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और क्या छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिल सकता है.
हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां भारी बारिश और सड़क धंसने की घटना के कारण 300 से ज्यादा छात्र अपने यूनिवर्सिटी परीक्षा देने समय पर नहीं पहुंच सके. इसके बाद छात्रों ने परीक्षा दोबारा आयोजित करने की मांग उठाई. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बारिश या ट्रैफिक जाम की वजह से एग्जाम छूट गया तो कौन जिम्मेदार होगा और क्या इसके लिए दूसरा मौका मिल सकता है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
महाराष्ट्र के नासिक में बारिश ने बिगाड़ा छात्रों का परीक्षा शेड्यूल
महाराष्ट्र के नासिक में लगातार हो रही बारिश और एक निर्माणाधीन स्थल पर जमीन धंसने के कारण नासिक त्र्यंबकेश्वर रोड पर कई घंटे तक लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है. इसी रास्ते में संदीप फाऊंडेशन कॉलेज, ब्रह्मा वैली कॉलेज, सपकाल कॉलेज, समेत कई इंस्टिट्यूट के छात्र सुबह 10 बजे होने वाली परीक्षा देने जा रहे थे. बताया गया कि कई छात्र सुबह 8 बजे से ही जाम में फंस गए और समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके. इसका सबसे ज्यादा असर इंजीनियरिंग के फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर और फार्मेसी के सेकंड ईयर और थर्ड ईयर के छात्रों पर पड़ा. करीब 300 से ज्यादा छात्रों की परीक्षा छूट गई. इसके बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि बुधवार को हुई परीक्षाओं को रद्द कर उनके लिए नई तारीख घोषित की जाए. छात्रों का कहना है की स्थिति पूरी तरह प्राकृतिक कारणों से बनी थी और इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्या ऐसे मामलों में दोबारा होती है परीक्षा?
अगर किसी प्राकृतिक आपदा, भारी बारिश, बाढ़, सड़क बंद होने या दूसरी असाधारण परिस्थितियों की वजह से बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा से वंचित रह जाते हैं, तो कई बार परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी अलग व्यवस्था कर सकती है. हालांकि इसका कोई एक नियम नहीं है और अंतिम फैसला संबंधित परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या कॉलेज ही लेता है. जरूरत पड़ने पर एजेंसी प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा, नई परीक्षा तिथि या दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती हैं, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह स्थिति और संबंधित परीक्षा प्राधिकरण पर निर्भर करता है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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गुजरात सरकार ने दिया था दूसरा मौका
ऐसा पहले भी देखने को मिला है गुजरात में बारिश और जल बराबर के कारण कई छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा नहीं दे सके थे. इसके बाद राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि जिन छात्रों की परीक्षा बारिश की वजह से छूट गई, उनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित की जाएगी. शिक्षा विभाग ने छात्रों से कहा था कि वह अपनी तैयारी जारी रखें क्योंकि मौजूदा सप्लीमेंट्री परीक्षा समाप्त होने के बाद उनके लिए नई परीक्षा आयोजित की जाएगी. &amp;nbsp;
कहां कर सकते हैं शिकायत?
अगर किसी छात्र का एग्जाम प्राकृतिक आपदा, प्रशासनिक व्यवस्था या बड़े स्तर पर ट्रैफिक जाम होने की वजह से छूट जाता है, तो सबसे पहले संबंधित विश्वविद्यालय, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या बोर्ड से कांटेक्ट किया जा सकता है. अगर बड़ी संख्या में परीक्षार्थी प्रभावित हुए हैं, तो परीक्षा प्राधिकरण परिस्थितियों की समीक्षा कर दोबारा परीक्षा या वैकल्पिक व्यवस्था का फैसला ले सकता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>AI से लेकर Python तक... CBSE छात्रों को देगा भविष्य की टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग; शुरू किए फ्री के कोर्स</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सीबीएसई से पढ़ाई कर रहे हैं और नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पाइथन प्रोग्रामिंग या साइबर सिक्योरिटी सीखना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए 19 फ्री ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध कराए हैं. इन कोर्स की मदद से छात्र स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल दुनिया की नई स्किल्स भी सीख सकेंगे.
ये सभी कोर्स एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. सबसे खास बात यह है कि इन कोर्स के लिए छात्रों को कोई फीस नहीं देनी होगी. विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं.
8वीं से 12वीं तक के छात्र उठा सकते हैं फायदा
इन ऑनलाइन कोर्स का लाभ कक्षा 8वीं से 12वीं तक के छात्र ले सकते हैं. बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराना है. इससे उन्हें स्कूल स्तर पर ही उन विषयों की शुरुआती समझ मिल जाएगी, जिनकी आने वाले समय में सबसे ज्यादा मांग रहने वाली है.
AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे विषय शामिल
इन 19 कोर्स में कई ऐसे विषय शामिल किए गए हैं, जो आज की डिजिटल दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनरेटिव AI, पाइथन प्रोग्रामिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, VLSI डिजाइन, 3D प्रिंटिंग और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की जानकारी हासिल कर सकेंगे.
इसके अलावा AWS DevSecOps के बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस स्तर के कोर्स, कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स, चिपक्राफ्ट, डीपक्राफ्ट स्टूडियो, RTL, IP Integration और SoC Signoff जैसे विशेष पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए गए हैं.यह भी पढ़ें - बेटियां लिख रही हैं हायर एजुकेशन की नई कहानी, लगातार सातवें साल लड़कों से आगे; STEM में भी बढ़ी मजबूत भागीदारी
भविष्य के करियर की तैयारी में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे. ऐसे में अगर छात्र स्कूल के दौरान ही इन तकनीकों की बुनियादी जानकारी हासिल कर लेते हैं, तो उन्हें उच्च शिक्षा और करियर में काफी फायदा मिलेगा. यही वजह है कि सीबीएसई छात्रों में डिजिटल स्किल्स और प्रोग्रामिंग की समझ विकसित करने पर जोर दे रहा है.
डेढ़ घंटे से लेकर 20 घंटे तक के कोर्स
इन ऑनलाइन कोर्स की अवधि एक जैसी नहीं है. कुछ कोर्स ऐसे हैं जिन्हें करीब डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकता है, जबकि कुछ एडवांस कोर्स 20 घंटे या उससे अधिक समय के हैं. छात्र अपनी रुचि और उपलब्ध समय के अनुसार किसी भी कोर्स का चयन कर सकते हैं.
ऐसे करें आवेदन
इन कोर्स में दाखिला लेने के लिए इच्छुक छात्रों को NIELIT Digital University (NDU) के ऑनलाइन पोर्टल पर जाना होगा. वहां अपनी पसंद का कोर्स चुनकर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>से, लेकर, Python, तक..., CBSE, छात्रों, को, देगा, भविष्य, की, टेक्नोलॉजी, की, ट्रेनिंग, शुरू, किए, फ्री, के, कोर्स</media:keywords>
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        <title>AI के दौर में संस्कृत की बढ़ी वैल्यू, इन यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लेकर बना सकते हैं करियर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप ग्रेजुएशन के बाद ऐसा कोर्स करना चाहते हैं, जिसमें भविष्य में अच्छे करियर की संभावना हो, तो संस्कृत आपके लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है. डिजिटल टेक्नोलॉजी और नई शिक्षा नीति के बाद इस भाषा की मांग पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है.यही वजह है कि देश के कई बड़े विश्वविद्यालय संस्कृत के आधुनिक और रोजगार से जुड़े कोर्स चला रहे हैं.
AI और भाषा तकनीक में बढ़ रही है संस्कृत की जरूरत
आज दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारतीय भाषाओं पर तेजी से काम हो रहा है. भाषा आधारित तकनीकों को बेहतर बनाने के लिए संस्कृत की व्याकरणिक संरचना को उपयोगी माना जाता है. इसी कारण भाषा तकनीक, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में संस्कृत जानने वाले युवाओं की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है. आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अवसर बढ़ने की उम्मीद है.
पढ़ाई के बाद मिल सकते हैं कई करियर विकल्प
संस्कृत की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए अब सिर्फ शिक्षक बनने का ही रास्ता नहीं है.इस विषय के जरिए छात्र रिसर्च, कंटेंट राइटिंग, ट्रांसलेशन, डिजिटल एजुकेशन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषा तकनीक और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे कई क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं. कई छात्र यूपीएससी और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान भी संस्कृत को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं.
इन यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के अवसर
देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय संस्कृत में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और अन्य विशेष कोर्स कराते हैं. सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा में एमए संस्कृत के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है. इसके अलावा सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी (नई दिल्ली), श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) और नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी (तिरुपति) भी संस्कृत के कई आधुनिक और पारंपरिक कोर्स उपलब्ध कराते हैं.
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पारंपरिक ज्ञान के साथ मिलती हैं आधुनिक स्किल्स
इन संस्थानों में छात्रों को केवल संस्कृत साहित्य ही नहीं पढ़ाया जाता, बल्कि कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन, भाषा विज्ञान, डिजिटल मैन्युस्क्रिप्ट, रिसर्च और अन्य आधुनिक विषयों की भी जानकारी दी जाती है. इससे छात्र बदलती तकनीक और नौकरी की जरूरतों के अनुसार खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं पर बढ़ते फोकस के कारण आने वाले वर्षों में संस्कृत की उपयोगिता और बढ़ेगी. अगर आप ऐसा विषय चुनना चाहते हैं जिसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक करियर की भी संभावना हो, तो संस्कृत एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. सही विश्वविद्यालय और सही कोर्स का चयन आपके करियर को नई दिशा दे सकता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र बदला, 2027&amp;28 से 1 अप्रैल से शुरू होगा नया अकादमिक सत्र, सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने का फैसला लिया है. स्कूल शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से पूरे राज्य में शिक्षा सत्र का संचालन 1 अप्रैल से 31 मार्च तक करने का निर्णय लिया है. इस बदलाव का उद्देश्य राज्य की शिक्षा व्यवस्था को देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों के अनुरूप बनाना और विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से शैक्षणिक गतिविधियां अधिक व्यवस्थित होंगी और विद्यार्थियों को समय पर अध्ययन सामग्री मिलने से पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी.
वर्तमान शिक्षा सत्र में होगा बदलाव
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र 16 जून से 30 अप्रैल तक संचालित होता है. अब इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक सत्र प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक चलेगा. इससे राज्य का शिक्षा कैलेंडर देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों और मंडलों के समान हो जाएगा. सरकार का मानना है कि एक समान शैक्षणिक सत्र होने से प्रशासनिक कार्यों, परीक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में भी बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा.
ग्रीष्मकालीन अवकाश में नहीं होगा कोई बदलाव
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा सत्र में बदलाव का असर विद्यार्थियों की गर्मी की छुट्टियों पर नहीं पड़ेगा. पहले की तरह ही 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा. यानी छात्रों और शिक्षकों को मिलने वाली छुट्टियों की अवधि में कोई कटौती नहीं की गई है. केवल शैक्षणिक सत्र की समय-सीमा में बदलाव किया गया है ताकि पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां समयबद्ध तरीके से संचालित हो सकें.
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सत्र के पहले दिन से मिलेंगी सभी सुविधाएं
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं. अब प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को नए सत्र की शुरुआत के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव आयोजित किया जाएगा. इसी दिन से विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण, सरस्वती सायकल योजना के तहत सायकलों का वितरण, स्कूली गणवेश उपलब्ध कराना तथा अन्य छात्रहितैषी योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा. इससे विद्यार्थियों को सत्र शुरू होने के बाद लंबे समय तक किताबों, यूनिफॉर्म या अन्य सुविधाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
शिक्षण व्यवस्था होगी अधिक प्रभावी
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से विद्यालयों में शिक्षण कार्य पहले दिन से ही नियमित रूप से शुरू हो सकेगा. विद्यार्थियों को सभी आवश्यक संसाधन समय पर मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शिक्षकों को भी पूरे सत्र की शैक्षणिक योजना तय समय पर लागू करने में सुविधा मिलेगी. इसके अलावा शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षाओं और विभिन्न छात्र कल्याण योजनाओं का संचालन भी अधिक सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा. शिक्षा विभाग का मानना है कि यह निर्णय राज्य की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>छत्तीसगढ़, में, शिक्षा, सत्र, बदला, 2027-28, से, अप्रैल, से, शुरू, होगा, नया, अकादमिक, सत्र, सरकार, का, बड़ा, फैसला</media:keywords>
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        <title>UGC&amp;NET Paper Leak: NEET के बाद UGC NET भी लीक! दावा&amp; 2.5 लाख में बिका पेपर, 90 सवाल सेम टू सेम </title>
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        <description><![CDATA[ UGC-NET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसियों में शुमार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. नीट यूजी पेपर लीक विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब यूजीसी नेट परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगने लगे हैं. दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 को हुई यूजीसी नेट की सोशियोलॉजी परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें मौजूद लगभग 90 सवाल असली पेपर से मिलते-जुलते पाए गए. इस खुलासे के बाद अभ्यर्थियों में गुस्सा और एनटीए की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं.
100 पन्नों की पीडीएफ पर उठे सवाल &amp;nbsp;
अभ्यर्थियों का कहना है की परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर 100 पन्नों की पीडीएफ शेयर की जा रही थी. दावा किया गया कि यह कोई सामान्य नोट्स नहीं बल्कि प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़ा डॉक्यूमेंट था. परीक्षा होने के बाद छात्रों ने आरोप लगाया कि इस पीडीएफ में दिए गए लगभग 90 प्रश्न और उनके विकल्प परीक्षा में पूछे गए सवालों में काफी हद तक मेल खाते हैं. बताया जा रहा है कि पीडीएफ का मेटाडेटा परीक्षा देने वाले सुबह दिन सुबह का था, जबकि परीक्षा दोपहर में आयोजित हुई थी. इससे छात्रों ने पेपर लीक की &amp;nbsp;आशंका जताई है.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
2.25 लाख रुपये में पेपर बेचने का दावा &amp;nbsp;&amp;nbsp;
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब आरोप लगे कि यह कथित प्रश्न पत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में लगभग 2.25 लाख रुपये में बेचा जा रहा था. कुछ छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि इस नेटवर्क ने आने वाले सीएसआईआर-नेट, एचटीईटी और एडीए जैसी परीक्षाओं के पेपर उपलब्ध कराने का दावा भी किया था. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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राहुल गांधी ने सरकार और एनटीए पर उठाए सवाल&amp;nbsp;
इन प्रश्न पत्र को लेकर उठ रहे सवालों के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार और एनटीए पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पहले से प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़ा दस्तावेज सामने आना बहुत गंभीर मामला है. उनका दावा है कि वायरल पीडीएफ के कई प्रश्न असली सोशियोलॉजी पेपर से मेल खाते हैं. राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि कथित प्रश्न पत्र कई राज्यों में लाखों रुपये बेचा जा रहा था. उन्होंने कहा कि लगातार परीक्षा संबंधी विवादों के बावजूद छात्रों को जवाबदेही और न्याय नहीं मिल पा रहा. इसके अलावा राहुल गांधी ने कहा की बार-बार हुई गड़बड़ियों के बावजूद सरकार आंखें मूंदे बैठी है, क्योंकि छात्रों की मेहनत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती. वहीं कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एनटीए से पूरे मामले की जांच करने और तथ्यों का पता लगाने को कहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Affordable MBBS Colleges: नीट में कम नंबरों पर भी मिलेगा मेडिकल कॉलेज, ये हैं देश के सबसे कम फीस वाले MBBS संस्थान</title>
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        <description><![CDATA[ Affordable MBBS Colleges India: देशभर में लाखों छात्र हर साल डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट परीक्षा देते हैं. हालांकि, सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीमित सीटों और कंपटीशन के चलते हर उम्मीदवार को मनचाहा कॉलेज नहीं मिल पाता. ऐसे में कई छात्रों और पेरेंट्स की सबसे बड़ी चिंता एमबीबीएस फीस की होती है, क्योंकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में पूरे कोर्स का खर्चा लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है.
अगर सही जानकारी और समझदारी से कॉलेज का चयन किया जाए तो कम फीस में भी एमबीबीएस की पढ़ाई संभव है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट में कम नंबरों पर भी मेडिकल कॉलेज एडमिशन कैसे मिलेगा और देश के सबसे कम फीस वाले एमबीबीएस इंस्टीट्यूट कौन से हैं.
सरकारी और प्राइवेट कॉलेज की फीस में बड़ा अंतर
भारत में एमबीबीएस की फीस कॉलेज के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है. सरकारी मेडिकल कॉलेज में पूरे कोर्स की फीस कुछ हजार रुपये से लेकर लगभग 6 लाख रुपये तक हो सकती है. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में यह खर्च 40 लाख रुपये से लेकर 2 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा भी पहुंच सकता है. सबसे कम फीस वाले इंस्टीट्यूट में एम्स का नाम सबसे ऊपर आता है. यहां पूरे साढ़े पांच साल के एमबीबीएस कोर्स की कुल फीस को हजारों रुपये के आसपास रहती है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में छात्र एम्स में एडमिशन पाने का टारगेट रखते हैं .
देश के सबसे कम फीस वाले एमबीबीएस कॉलेज &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर
अगर आपका नीट का स्कोर टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट की कट ऑफ तक नहीं पहुंचा है, तब भी कई मेडिकल सरकारी मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं, जहां पिछले सालों के ट्रेंड के अनुसार कम रैंक पर एडमिशन मिलता है. इन कॉलेज में सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर भी शामिल है, पिछले कुछ वर्षों के ट्रेंड में करीब 19,000 तक की क्लोजिंग रैंक पर यहां एडमिशन मिला है. यहां एमबीबीएस की फीस भी सरकारी कॉलेज के हिसाब से काफी किफायती है. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज, लातूर
महाराष्ट्र में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज लातूर में लगभग 20,000 के आसपास की क्लोजिंग रैंक तक सीटें मिली है. यहां फीस भी दूसरे इंस्टीट्यूट की तुलना में बहुत कम रहती है. &amp;nbsp;
शाहिद हसन खान मेवाती सरकारी मेडिकल कॉलेज, हरियाणा
हरियाणा के इस मेडिकल कॉलेज में भी अंतिम राउंड तक कम रैंक वाले छात्रों को एडमिशन मिले हैं. इसके अलावा इस कॉलेज की फीस भी महंगे एमबीबीएस वाले कॉलेज से बहुत कम बताई जाती है.
लेट बालीराम कश्यप मेमोरियल सरकारी मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में स्थित यह कॉलेज कम फीस और सरकारी सीटों के कारण छात्रों के पसंदीदा कॉलेज में शामिल रहता है. नीट में कम नंबर आने पर यहां भी आसानी से एडमिशन मिल जाता है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश
&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी कम फीस के साथ स्टूडेंट्स एमबीबीएस कर सकते हैं. यहां की क्लोजिंग रैंक लगभग 26,148 बताई जाती है.&amp;nbsp;
अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज
त्रिपुरा के अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी अंतिम राउंड तक कम रैंक वाले छात्रों को सीट मिलने का ट्रेंड देखा गया है.
कम फीस वाले प्राइवेट कॉलेज
सरकारी कॉलेज में सीटें नहीं मिलने पर कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी ऐसे हैं, जहां दूसरे प्राइवेट इंस्टीट्यूट की तुलना में फीस कम है. इन कॉलेज में शादान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, गंगा रेड्डी भी शामिल है. यहां एमबीबीएस की फीस कम मानी जाती है. &amp;nbsp;इसके अलावा सिमएसआरसी बेंगलुरु भी लिस्ट में शामिल है, जिसे कम फीस वाले प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में गिना जाता है. वहीं डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नई दिल्ली भी इस लिस्ट में शामिल है. यहां एमबीबीएस की कुल फीस कई प्राइवेट कॉलेज की तुलना में बहुत कम है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>MNC Companies Cost Cutting : मुनाफे में होने के बाद भी क्यों Cost Cutting कर रहीं बड़ी MNC कंपनियां? ये है असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ MNC Companies Cost Cutting&amp;nbsp;: अब कॉर्पोरेट की दुनिया तेजी से बदल रही है. आज दुनिया की कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां शानदार मुनाफा कमाने के बाद भी कॉस्ट कटिंग कर रही हैं और कर्मचारियों की संख्या भी घटा रही हैं. कंपनियों की रणनीति अब पहले जैसी नहीं रही, अब केवल कमाई बढ़ाना ही गोल नहीं है, बल्कि खर्च को कंट्रोल करना, कामकाज को ज्यादा आसान बनाना और फ्यूचर की तकनीकों में निवेश बढ़ाना भी उतना ही जरूरी हो गया है.
यही वजह है कि कई कंपनियां पुराने और ज्यादा कर्मचारियों वाले विभागों में खर्च कम कर रही हैं, जबकि उसी पैसे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑटोमेशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि मुनाफे में होने के बाद भी बड़ी MNC कंपनियां क्यों कॉस्ट कटिंग कर रही हैं.&amp;nbsp;
मुनाफा होने के बाद भी क्यों हो रही है कॉस्ट कटिंग?
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अब पूरे कारोबार में कटौती नहीं कर रहीं, बल्कि अपने खर्च करने के तरीके बदल रही हैं. कई कंपनियां उन विभागों से पैसा और कर्मचारियों को हटा रही हैं जिनकी फ्यूचर में जरूरत कम मानी जा रही है और उसी संसाधन को उन क्षेत्रों में लगा रही हैं जहां आने वाले सालों में ज्यादा ग्रोथ हो सकती है. ऐसे में कोई कंपनी एक तरफ बिक्री और मुनाफा बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ टीमों, विभागों या कार्यालयों को बंद भी कर सकती है. इसका मतलब यह माना जाता है कि कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल को बदल रही हैं.&amp;nbsp;
2026 में कंपनियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?
अमेरिका में 2026 के लिए कंपनियों की रणनीति को लेकर किए गए सर्वे बताते हैं कि अब नियोक्ताओं का सबसे बड़ा फोकस लागत को कंट्रोल करना है. सर्वे के अनुसार, 2026 में कंपनियों की दो सबसे बड़ी प्राथमिकताएं बिजनेस के लिए बेनिफिट्स की लागत कम करना और कर्मचारियों पर बेनिफिट्स का वित्तीय बोझ घटाना है. पहले कंपनियां कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए ज्यादा सुविधाएं, लचीली वर्क पॉलिसी और बेहतर वेतन पर जोर दे रही थीं, लेकिन अब उनका ध्यान खर्च कम करने और वित्तीय अनुशासन पर ज्यादा है.&amp;nbsp;
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कंपनियां खर्च कम करने पर इतना जोर क्यों दे रही हैं?
कई आर्थिक कारण इस बदलाव के पीछे जिम्मेदार हैं. जिसमें सबसे बड़ा कारण हेल्थकेयर और कर्मचारी फायदों की बढ़ती लागत है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 में कर्मचारियों के हेल्थ बेनिफिट्स पर कंपनियों का खर्च लगभग 6.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. अगर कंपनियां लागत कम करने के कदम नहीं उठातीं तो यह बढ़ोतरी करीब 9 प्रतिशत तक पहुंच सकती थी. &amp;nbsp;इसके अलावा महंगाई, ऊंची ब्याज दरें, कंपनी के लिए निवेश या फंड जुटाना मुश्किल होना और दुनियाभर में आर्थिक हालात को लेकर चिंता ने भी कंपनियों को खर्च पर कंट्रोल रखने के लिए मजबूर किया है.&amp;nbsp;
कॉस्ट कटिंग का कर्मचारियों पर क्या असर पड़ रहा है?
जब कंपनियां अपने खर्च घटाती हैं तो सबसे पहले इसका असर कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर दिखाई देता है. कई कंपनियां नई भर्तियां रोक रही हैं, बोनस कम कर रही हैं, बेनिफिट्स सीमित कर रही हैं और कर्मचारियों को फिर से ऑफिस बुलाने की नीति अपना रही हैं. &amp;nbsp;ऐसे बदलावों का असर खासकर उन कर्मचारियों पर ज्यादा पड़ता है जो बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ को प्राथमिकता देते हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम संसाधनों में ज्यादा काम करने का दबाव कर्मचारियों में तनाव और बर्नआउट भी बढ़ा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>MNC, Companies, Cost, Cutting, मुनाफे, में, होने, के, बाद, भी, क्यों, Cost, Cutting, कर, रहीं, बड़ी, MNC, कंपनियां, ये, है, असली, वजह</media:keywords>
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        <title>CMA फाउंडेशन का रिजल्ट जारी, मेरिट लिस्ट में दक्षिण भारत का दबदबा; ये रहे टॉपर</title>
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        <description><![CDATA[ इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI) ने CMA Foundation जून 2026 परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं. परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख सकते हैं. इसके लिए अभ्यर्थियों को अपना रजिस्ट्रेशन या आइडेंटिफिकेशन नंबर दर्ज करना होगा.
इस बार जारी हुई मेरिट लिस्ट में दक्षिण भारत के छात्रों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला. चेन्नई के विग्नेश एस ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि गुंटूर के टिप्पुलुरी जगन मोहन रेड्डी दूसरे स्थान पर रहे. तीसरी रैंक आगरा की गौरांगी शुक्ला ने हासिल की. वहीं जयपुर की सोनक्षिका शारदा भी टॉप-10 में जगह बनाने में सफल रहीं. मेरिट सूची में गुंटूर, हैदराबाद, चेन्नई और विशाखापत्तनम जैसे शहरों के छात्रों की मजबूत मौजूदगी रही.
ICMAI ने रिजल्ट के साथ उम्मीदवारों के विषयवार अंक भी जारी कर दिए हैं. ऐसे छात्र जिन्होंने परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है, वे अब CMA कोर्स के अगले स्तर में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं और आगे की पढ़ाई की तैयारी शुरू कर सकते हैं.
14 जून को हुई थी परीक्षा
CMA Foundation जून 2026 परीक्षा का आयोजन 14 जून को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर किया गया था. प्रश्नपत्र में 50 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न शामिल थे, जिनके लिए कुल 100 अंक निर्धारित थे. प्रत्येक सही उत्तर के लिए दो अंक दिए गए, जबकि इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई थी. इससे उम्मीदवारों को सभी प्रश्नों का प्रयास करने का अवसर मिला.
पास होने के लिए क्या है नियम?
CMA Foundation परीक्षा में सफल घोषित होने के लिए सिर्फ अच्छे कुल अंक लाना ही पर्याप्त नहीं है. उम्मीदवार को हर विषय में कम से कम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है. इसके अलावा सभी विषयों को मिलाकर कुल 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करना भी जरूरी है. दोनों शर्तें पूरी होने पर ही अभ्यर्थी को परीक्षा में सफल माना जाता है.
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यदि कोई उम्मीदवार किसी एक विषय में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाता या कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं करता, तो उसे परीक्षा दोबारा देनी होगी. इसलिए परिणाम देखते समय छात्रों को विषयवार अंक भी ध्यान से जांचने की सलाह दी गई है.
टॉप-10 में इन छात्रों ने बनाई जगह
मेरिट सूची में पहले स्थान पर विग्नेश एस (चेन्नई), दूसरे स्थान पर टिप्पुलुरी जगन मोहन रेड्डी (गुंटूर) और तीसरे स्थान पर गौरांगी शुक्ला (आगरा) रहीं. इसके अलावा गुंटूर, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, मदुरै, जयपुर, राउरकेला, अहमदाबाद और कटक के छात्रों ने भी टॉप-10 में अपनी जगह बनाई.
ऐसे डाउनलोड करें स्कोरकार्ड
रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले ICMAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद CMA Foundation June 2026 Result/Scorecard लिंक पर क्लिक करें. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या आइडेंटिफिकेशन नंबर दर्ज कर सबमिट करें. स्क्रीन पर आपका स्कोरकार्ड दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जामिया में एमएससी बायोटेक्नोलॉजी से लेकर डिजिटल स्किल कोर्स तक दाखिले शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ हायर एजुकेशन के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल हासिल करने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय ने एक ओर एमएससी बायोटेक्नोलॉजी में दाखिले का कार्यक्रम जारी किया है, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए डिजिटल और उद्यमिता से जुड़े शॉर्ट टर्म स्किल कोर्स में भी आवेदन मांगे हैं.
एमएससी बायोटेक्नोलॉजी में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन 10 जुलाई से शुरू होंगे. इच्छुक अभ्यर्थी 20 जुलाई तक विश्वविद्यालय के एडमिशन पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे. यह दो वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के सहयोग से संचालित किया जाता है. प्रवेश पूरी तरह GAT-B (Graduate Aptitude Test-Biotechnology) के स्कोर के आधार पर होगा और विश्वविद्यालय की आरक्षण नीति लागू रहेगी.
इस कोर्स में कुल 10 सीटें उपलब्ध हैं. आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास बी.फार्मा, बीएससी बायोटेक्नोलॉजी, बायोलॉजिकल साइंसेज, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, जेनेटिक्स या आधुनिक जीवविज्ञान से संबंधित किसी विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए.
इन कोर्स के लिए भी कर सकते हैं अप्लाई
वहीं, बदलती तकनीक और डिजिटल दुनिया की जरूरतों को देखते हुए विश्वविद्यालय ने युवाओं के लिए कई शॉर्ट टर्म स्किल कोर्स भी शुरू किए हैं. इन पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 12 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ये कोर्स सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप और स्मार्ट अकादमी फॉर डिजिटल टेक्नोलॉजी एंड डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप के तहत संचालित किए जाएंगे. इनका उद्देश्य युवाओं को सिर्फ सर्टिफिकेट देना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल से लैस करना है.
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स्किल कोर्स में डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप, एडवांस डिजिटल मार्केटिंग, एआई ड्रिवन डेटा एनालिसिस और यूआई/यूएक्स डिजाइन जैसे आधुनिक विषय शामिल किए गए हैं. सभी कक्षाएं ऑफलाइन मोड में होंगी, जहां छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिलेगा. विश्वविद्यालय का कहना है कि इन कार्यक्रमों को स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय पहलों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इनका मकसद युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ना, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें स्टार्टअप व डिजिटल बिजनेस के लिए तैयार करना है. ज्यादा डिटेल्स के लिए छात्र-छात्राएं आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.यह भी पढ़ें - CMA फाउंडेशन का रिजल्ट जारी, मेरिट लिस्ट में दक्षिण भारत का दबदबा; ये रहे टॉपर ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मेडिकल कॉलेजों के लिए NMC की सख्ती, 70 संस्थानों को नोटिस; तुरंत लगानी होगी CCTV व्यवस्था</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपका मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो अब मुश्किल बढ़ सकती है. आयोग ने ऐसे 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों की पहचान की है, जिन्होंने अब तक अनिवार्य CCTV कैमरे और निगरानी प्रणाली से जुड़े नियम पूरे नहीं किए हैं. एनएमसी ने इन सभी संस्थानों को तुरंत नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है.
एनएमसी की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस में साफ कहा गया है कि उसके दायरे में आने वाले सभी मेडिकल कॉलेजों को तय मानकों के मुताबिक परिसर में 25 सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे. इसके साथ ही नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (NVR) लगाना और कम से कम 30 दिनों तक कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना भी जरूरी है. इतना ही नहीं, कॉलेजों को अपने एनवीआर की फीड आयोग के साथ भी साझा करनी होगी.
आयोग ने बताया कि यह कोई नया नियम नहीं है. इन निर्देशों को पहले भी अलग-अलग नियमों और अधिसूचनाओं के जरिए जारी किया जा चुका है. इनमें यूजी मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशंस (UGMSR-2023), पीजी मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशंस (PGMSR-2023 संशोधन) और एमएआरबी रेगुलेशंस-2023 शामिल हैं. इसके बावजूद कई मेडिकल कॉलेज अब तक इनका पालन नहीं कर पाए हैं.
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NMC ने क्या कहा?
एनएमसी के मुताबिक, जिन संस्थानों ने अभी तक अपने सीसीटीवी सिस्टम और एनवीआर को आयोग से नहीं जोड़ा है, उनसे लगातार संपर्क किया गया. कई बार याद दिलाने के बाद भी कुछ कॉलेजों ने आवश्यक व्यवस्था नहीं की. इसी वजह से अब आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संस्थानों को तुरंत नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं.
आयोग का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इससे संस्थानों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है और नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है.
नोटिस में उन 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों का जिक्र किया गया है, जो अभी तक निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं. आयोग ने इन संस्थानों से बिना देरी किए सीसीटीवी कैमरे लगाने, एनवीआर स्थापित करने और उसकी फीड साझा करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG छात्रों के लिए राहत, फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल अपडेट करने की डेडलाइन बढ़ी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने NEET UG 2026 की 3 मई को हुई परीक्षा दी थी और अब तक फीस रिफंड के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट नहीं की है, तो आपके पास एक और मौका है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने छात्रों की सुविधा को देखते हुए बैंक डिटेल अपडेट करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई से बढ़ाकर 14 जुलाई 2026 कर दी है. एजेंसी का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र अभी भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं.
दरअसल, 3 मई को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के बाद रद्द कर दी गई थी. इसके बाद एनटीए ने सभी पंजीकृत अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क वापस करने का फैसला लिया. इसके लिए छात्रों से उनके बैंक खाते की जानकारी मांगी जा रही है, ताकि रिफंड की राशि सीधे उनके खाते में भेजी जा सके.
हालांकि, रिफंड प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अब तक अपेक्षा के अनुरूप छात्रों ने बैंक डिटेल अपडेट नहीं की है. एनटीए के मुताबिक, 10,28,223 अभ्यर्थियों ने अपने बैंक खाते की जानकारी सफलतापूर्वक अपडेट कर दी है और उनके रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. लेकिन परीक्षा में शामिल हुए 22 लाख से अधिक छात्रों की तुलना में यह संख्या आधी से भी कम है. यानी करीब 12 लाख छात्र अब भी इस जरूरी प्रक्रिया से दूर हैं.
इसी वजह से एजेंसी ने अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि कोई भी छात्र फीस रिफंड से वंचित न रह जाए. एनटीए ने सभी अभ्यर्थियों से जल्द से जल्द अपनी बैंक जानकारी सत्यापित करने की अपील की है.
कब आ सकता है पैसा?
एनटीए के अनुसार, जिन छात्रों की बैंक जानकारी सही पाई जाएगी, उनके खाते में बैंक डिटेल अपडेट होने के लगभग 7 से 15 दिनों के भीतर रिफंड की राशि भेज दी जाएगी. इसलिए आवेदन करते समय बैंक खाता नंबर और अन्य जानकारी बिल्कुल सही भरना जरूरी है. गलत जानकारी होने पर रिफंड में देरी हो सकती है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NCERT 8वीं की नई सोशल साइंस किताब जारी, न्यायपालिका चैप्टर में हुए बड़े बदलाव
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक बैंक डिटेल अपडेट नहीं की है, वे 14 जुलाई 2026 से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर लें. तय समय के भीतर जानकारी अपडेट करने पर ही फीस रिफंड की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सकेगी.
ऐसे करें बैंक डिटेल अपडेट
फीस रिफंड के लिए छात्रों को सबसे पहले NEET UG 2026 के आधिकारिक रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाना होगा. इसके बाद अपने आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन पूरा करने के बाद &quot;Bank Account Details Confirmation/Updation&quot; लिंक पर क्लिक करें. यहां अपना बैंक खाता नंबर, IFSC कोड और अन्य जरूरी जानकारी सावधानी से भरें. चाहें तो कैंसिल चेक की कॉपी भी अपलोड कर सकते हैं. सभी विवरण जांचने के बाद फॉर्म सबमिट कर दें.
यह भी पढ़ें - मेडिकल कॉलेजों के लिए NMC की सख्ती, 70 संस्थानों को नोटिस; तुरंत लगानी होगी CCTV व्यवस्था ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Government School Report : देश के इन राज्यों में सबसे खस्ता है सरकारी स्कूलों का हाल, वहां जाकर पढ़ना ही नहीं चाहते बच्चे</title>
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        <description><![CDATA[ Government School Report : सरकारी स्कूल पहले लाखों परिवारों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों की जगह प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं. पिछले दो सालों में सरकारी स्कूलों से लाखों बच्चों का नाम कट गया, जबकि प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है. यह बदलाव सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े राज्यों में देखने को मिला है. तो आइए जानते हैं कि देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है.&amp;nbsp;
क्या है शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट?
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस शिक्षा मंत्रालय का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस है. इसके जरिए देशभर के स्कूलों में छात्रों के एडमिशन, शिक्षकों की संख्या, स्कूलों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025-26 में देशभर के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के स्कूलों में कुल 24.72 करोड़ छात्रों का एडमिशन दर्ज किया गया. वहीं, 2023-24 में यह संख्या करीब 24.80 करोड़ थी. कुल एडमिशन में ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला.
सरकारी स्कूलों में 86 लाख छात्रों की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 12.75 करोड़ छात्र पढ़ रहे थे. साल 2025-26 में यह संख्या घटकर 11.89 करोड़ रह गई. &amp;nbsp;दो साल में करीब 86 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई. इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या 9 करोड़ से बढ़कर 9.89 करोड़ हो गई. लगभग 88 लाख नए छात्रों ने प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लिया.
देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है
1. बिहार में सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, लेकिन यहां भी एडमिशन में गिरावट दर्ज की गई. साल 2023-24 में यहां 1.71 करोड़ छात्र थे, जो 2025-26 में घटकर 1.66 करोड़ रह गए.&amp;nbsp;
2. उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 1.48 करोड़ से घटकर 1.41 करोड़ हो गई. यहां दो साल में 7.07 लाख छात्र कम हुए.
3. मध्य प्रदेश में छात्रों की संख्या 81.28 लाख से घटकर 79.70 लाख रह गई.&amp;nbsp;
4. राजस्थान में सरकारी स्कूलों में एडमिशन 77.82 लाख से घटकर 74.49 लाख हो गया. यहां करीब 3.32 लाख छात्र कम हुए.
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5.महाराष्ट्र में भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन में गिरावट आई. यहां छात्रों की संख्या 51.08 लाख से घटकर करीब 49.79 लाख रह गई.&amp;nbsp;
6. पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य रहा, जहां सरकारी स्कूलों में एडमिशन बढ़े. यहां छात्रों की संख्या 1.49 करोड़ से बढ़कर 1.54 करोड़ हो गई. यहां करीब 4.61 लाख नए छात्र सरकारी स्कूलों में जुड़े.
सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की संख्या में क्या बदलाव आया?
साल 2025-26 में देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या घटकर 10,05,245 रह गई, जबकि 2023-24 में यह 10,13,322 थी. वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है. साल 2023-24 में देश में करीब 3.39 लाख प्राइवेट स्कूल थे, जो 2025-26 में बढ़कर 3.40 लाख से ज्यादा हो गए. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इनमें कुछ कमी दर्ज की गई.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>इंजीनियरों के लिए 153 पदों पर निकली भर्ती, 71 हजार तक मिलेगी सैलरी; इस डेट तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL) ने देशभर में अपने विभिन्न कार्यालयों और प्रोजेक्ट साइट्स के लिए 153 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती के तहत ग्रेजुएट इंजीनियर और डिप्लोमा इंजीनियर के अलग-अलग पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इच्छुक उम्मीदवार 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
यह भर्ती पूरी तरह कॉन्ट्रैक्ट आधार पर होगी. शुरुआती नियुक्ति एक साल के लिए की जाएगी, जिसे उम्मीदवार के प्रदर्शन और कंपनी की जरूरत के अनुसार बढ़ाकर अधिकतम तीन साल तक किया जा सकता है. चयनित उम्मीदवारों की पोस्टिंग देश में कहीं भी कंपनी के कार्यालय या प्रोजेक्ट साइट पर हो सकती है.
किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान में ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-1 से स्केल-4 और डिप्लोमा इंजीनियर स्केल-1 से स्केल-3 तक के पद शामिल हैं. सबसे ज्यादा 70 रिक्तियां ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-2 के लिए हैं. इसके अलावा ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-1 के 29, स्केल-3 के 24 और स्केल-4 के 7 पद भरे जाएंगे. वहीं डिप्लोमा इंजीनियर स्केल-1 के 13, स्केल-2 के 8 और स्केल-3 के 2 पदों पर भर्ती होगी.
सैलरी कितनी मिलेगी?
पद के अनुसार उम्मीदवारों को आकर्षक मासिक वेतन मिलेगा. ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-4 के लिए 71,000 रुपये, स्केल-3 के लिए 63,000 रुपये, स्केल-2 के लिए 56,000 रुपये और स्केल-1 के लिए 47,000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे. वहीं डिप्लोमा इंजीनियरों को स्केल के अनुसार 31,000 रुपये से 40,000 रुपये तक मासिक वेतन मिलेगा.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस भर्ती में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन, प्रोसेस, कंप्यूटर साइंस, फायर एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी, ह्यूमन रिसोर्स, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, मटेरियल मैनेजमेंट और केमिस्ट्री जैसे विषयों के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.
उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है. सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक, जबकि एससी और एसटी वर्ग के लिए 55 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं.
आयु सीमा भी पद के अनुसार
भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष से 43 वर्ष तक तय की गई है. आयु और अनुभव की गणना 30 जून 2026 के आधार पर की जाएगी.
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ऐसे होगा चयन
भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी. सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन की स्क्रीनिंग की जाएगी. इसके बाद पात्र उम्मीदवारों को व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इंटरव्यू की सूचना ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी. इंटरव्यू पीडीआईएल भवन, ए-14, सेक्टर-1, नोएडा में आयोजित होगा. पात्र उम्मीदवारों को कंपनी के नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता (TA) भी दिया जाएगा.
आवेदन शुल्क
सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 800 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा, जबकि एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए शुल्क 400 रुपये निर्धारित किया गया है.
ऐसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को पीडीआईएल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Career सेक्शन में जाएं. आधार नंबर से रजिस्ट्रेशन करने के बाद आवेदन फॉर्म भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें, ऑनलाइन शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंट अपने पास रख लें.यह भी पढ़ें - NEET UG छात्रों के लिए राहत, फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल अपडेट करने की डेडलाइन बढ़ी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>UPTET 2026 पर बड़ी खबर: विभाग ने जारी की प्रोविजनल आंसर की, ऐसे करें फटाफट चेक</title>
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        <description><![CDATA[ UPTET Answer Key 2026: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी UPTET 2026 की प्रोविजनल आंसर-की आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है. जो भी अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब बिना किसी देरी के आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसे चेक और डाउनलोड कर सकते हैं.
आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी शेयर करते हुए बताया कि परीक्षा के मास्टर सेट की आंसर-की को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है. परीक्षा में शामिल हुए सभी अभ्यर्थी अब बिना किसी देरी के आयोग के पोर्टल पर जाकर अपने उत्तरों का मिलान कर सकते हैं.
आंसर की कैसे डाउनलोड करें?
अभ्यर्थी नीचे दिए गए आसान स्टेप्स का पालन करके अपनी आंसर की चेक कर सकते&amp;nbsp;हैं
1.ऑफिशियल पोर्टल खोलें: स्टेप 1.सबसे पहले उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://upessc.up.gov.in पर जाएं.
2.लिंक का चयन करें: होमपेज पर फ्लैश हो रहे &quot;UPTET 2026 Provisional Answer Key&quot; के एक्टिव लिंक पर क्लिक करें.
3.क्रेडेंशियल भरें: लॉगिन पेज पर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि दर्ज करके सबमिट करें.
4.मिलान और सेव करें: मास्टर सेट की आंसर-की स्क्रीन पर दिखने लगेगी. इसे डाउनलोड करें और अगर कोई आपत्ति हो, तो &#039;रेज ऑब्जेक्शन&#039; लिंक पर जाकर 14 जुलाई से पहले सबूत के साथ सबमिट कर दें.
परीक्षा का शेड्यूल और मास्टर सेट
इस साल यूपी टीईटी परीक्षा का आयोजन राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर 02, 03 और 04 जुलाई को किया गया था. परीक्षा के सुचारू संचालन के बाद आयोग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आंसर-की जारी की है. अभ्यर्थी ध्यान दें कि वेबसाइट पर परीक्षा के &#039;मास्टर सेट&#039; की आंसर-की अपलोड की गई है, जिससे आपको अपने प्रश्न पत्र के सेट का मिलान करना होगा.
यह भी पढ़ें: Government School Report : देश के इन राज्यों में सबसे खस्ता है सरकारी स्कूलों का हाल, वहां जाकर पढ़ना ही नहीं चाहते बच्चे
14 जुलाई तक दर्ज कराएं आपत्ति&amp;nbsp;
चूंकि यह एक प्रोविजनल आंसर-की है, इसलिए आयोग ने उम्मीदवारों को अपने संदेह दूर करने का मौका दिया है. अगर किसी अभ्यर्थी को आयोग द्वारा जारी किसी प्रश्न के उत्तर पर कोई गलती या आपत्ति नजर आती है, तो वह इसके खिलाफ अपनी चुनौती दर्ज करा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Education Report Card: स्कूलों की ग्रेडिंग में देश का एक भी जिला टॉप पर नहीं, दिल्ली से हरियाणा तक की पूरी रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और जिलों की स्कूल शिक्षा पर नई रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस राज्य और जिले में स्कूलों की स्थिति कैसी है और बच्चों की पढ़ाई कितनी अच्छी हो रही है?
क्या है इस रिपोर्ट कार्ड में?
जानकारी के मुताबिक, यह राज्यों और जिलों की स्कूल शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड है. जैसे बच्चों को परीक्षा में नंबर मिलते हैं, वैसे ही राज्यों और जिलों को भी उनके काम के आधार पर अंक और ग्रेड दिए गए हैं.&amp;nbsp;
किन पॉइंट्स पर किया गया फोकस?
इस रिपोर्ट में सिर्फ यह नहीं देखा गया कि स्कूल कितने हैं, बल्कि यह भी देखा गया है कि बच्चे ठीक से पढ़ और सीख रहे हैं या नहीं? स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हैं या नहीं? बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं? बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और पढ़ाई में डिजिटल तकनीक का कितना इस्तेमाल हो रहा है?
इन 6 मानकों पर हुआ मूल्यांकन
रिपोर्ट के मुताबिक, जिलों का मूल्यांकन 6 बड़े मानकों पर किया गया है. इनमें सीखने के नतीजे (Outcomes), कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता (Effective Classroom Interactions), स्कूलों का बुनियादी ढांचा और छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं (Infrastructure &amp;amp; Student Entitlements), स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण (School Safety &amp;amp; Child Protection), डिजिटल लर्निंग (Digital Learning) और शिक्षा व्यवस्था का संचालन (Governance Process) शामिल हैं.
कैसे दिए गए ग्रेड?
रिपोर्ट में राज्यों और जिलों को उनके कुल अंकों के आधार पर अलग-अलग ग्रेड दिए गए हैं.

उत्कर्ष: 91 से 100 प्रतिशत
उत्तम-1: 81 से 90 प्रतिशत
उत्तम-2: 71 से 80 प्रतिशत
उत्तम-3: 61 से 70 प्रतिशत
प्रचेष्टा-1: 51 से 60 प्रतिशत
प्रचेष्टा-2: 41 से 50 प्रतिशत
प्रचेष्टा-3: 31 से 40 प्रतिशत
आकांशी-1: 21 से 30 प्रतिशत
आकांशी-2: 11 से 20 प्रतिशत
आकांशी-3: 10 प्रतिशत तक

राष्ट्रीय तस्वीर क्या बताती है?
जारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में देश का कोई भी जिला सबसे ऊंचे &amp;lsquo;उत्कर्ष&amp;rsquo; (91-100%) या &amp;lsquo;उत्तम-1&amp;rsquo; (81-90%) ग्रेड तक नहीं पहुंच सका. सबसे zyada जिले &amp;lsquo;प्रचेष्टा-1&amp;rsquo; (51-60%) और &amp;lsquo;प्रचेष्टा-2&amp;rsquo; (41-50%) श्रेणी में रहे. इसके मुकाबले &amp;lsquo;आकांशी&amp;rsquo; श्रेणियों में जिलों की संख्या काफी कम रही. इससे संकेत मिलता है कि बहुत खराब प्रदर्शन वाले जिलों की संख्या घटी है, लेकिन शीर्ष स्तर तक पहुंचने वाले जिले अब भी नहीं हैं. राष्ट्रीय स्तर पर 2023-24 की तुलना में &amp;lsquo;प्रचेष्टा-1&amp;rsquo; और &amp;lsquo;उत्तम-3&amp;rsquo; श्रेणी में जिलों की संख्या बढ़ी है, जबकि &amp;lsquo;प्रचेष्टा-2&amp;rsquo; और &amp;lsquo;प्रचेष्टा-3&amp;rsquo; में जिलों की संख्या कम हुई है. इसका मतलब है कि कई जिले धीरे-धीरे बेहतर ग्रेड की ओर बढ़े हैं.
दिल्ली का प्रदर्शन
दिल्ली के 13 जिलों की बात करें तो 2024-25 में 9 जिले &amp;lsquo;उत्तम-3&amp;rsquo; (61-70%), 4 जिले &amp;lsquo;उत्तम-2&amp;rsquo; (71-80%) और 3 जिले &amp;lsquo;प्रचेष्टा-1&amp;rsquo; (51-60%) श्रेणी में रहे. दिल्ली का कोई भी जिला &amp;lsquo;उत्कर्ष&amp;rsquo; या &amp;lsquo;उत्तम-1&amp;rsquo; ग्रेड हासिल नहीं कर सका, लेकिन एक भी जिला &amp;lsquo;आकांशी&amp;rsquo; श्रेणी में नहीं है. इससे साफ है कि दिल्ली के सभी जिले अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन वाले वर्ग में बने हुए हैं.&amp;nbsp;
रिपोर्ट में अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर जिलों की रैंकिंग भी दी गई है. उदाहरण के तौर पर डिजिटल लर्निंग श्रेणी में दक्षिण (South) जिला 39 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि नई दिल्ली और दक्षिण-पश्चिम-बी (South West B-I) 36-36 number के साथ उसके बाद रहे. वहीं, नॉर्थ वेस्ट-ए (North West A) को इस श्रेणी में 33 नंबर मिले.
दूसरे राज्यों की हाल
रिपोर्ट में राज्यों के अंदर भी जिला स्तर की तुलना की गई है. उदाहरण के लिए, गोवा के दोनों जिले &amp;lsquo;प्रचेष्टा&amp;rsquo; श्रेणी में हैं, जबकि हरियाणा के अधिकांश जिले भी &amp;lsquo;प्रचेष्टा-2&amp;rsquo; और &amp;lsquo;प्रचेष्टा-3&amp;rsquo; ग्रेड में दिखाई देते हैं. इससे साफ है कि लगभग सभी राज्यों में शिक्षा सुधार की गुंजाइश अभी बनी हुई है.
सरकार का कहना है कि इस रिपोर्ट का मकसद राज्यों और जिलों की कमियां पहचानना और उन्हें बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि पूरे देश में स्कूलों की पढ़ाई की गुणवत्ता सुधर सके. यह रिपोर्ट केवल रैंकिंग बताने के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए भी है कि किस क्षेत्र में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Education Report 2025&amp;26: अब एक टीचर पर होंगे कम बच्चे, जानें UDISE+ 2025&amp;26 रिपोर्ट की सबसे बड़ी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के स्कूलों से जुड़ी UDISE+ (Unified District Information System for Education Plus) 2025-26 रिपोर्ट जारी कर दी है. यह रिपोर्ट देश के सरकारी और निजी स्कूलों की स्थिति की सबसे बड़ी आधिकारिक तस्वीर पेश करती है. इसमें छात्रों की संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल शिक्षा, ड्रॉपआउट, छात्र-शिक्षक अनुपात और लड़कियों की भागीदारी जैसे कई अहम पहलुओं का आकलन किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में स्कूल शिक्षा के कई क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है. हालांकि कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां अभी और काम करने की जरूरत है.
स्कूलों में बढ़े शिक्षक, बच्चों को मिलेगा ज्यादा समय
रिपोर्ट के अनुसार, देश में शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2022-23 में 94.83 लाख शिक्षक थे, जो बढ़कर 2025-26 में 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से ज्यादा हो गए हैं. इसका मतलब यह है कि तीन साल में शिक्षकों की संख्या में करीब 8.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. आसान भाषा में समझें तो अब एक शिक्षक पर पहले की तुलना में कम बच्चों की जिम्मेदारी होगी, जिससे बच्चों को पढ़ाई में ज्यादा ध्यान मिल पाएगा.
एक शिक्षक पर कम बच्चे, पढ़ाई होगी बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil Teacher Ratio) में भी सुधार हुआ है. शुरुआती कक्षाओं (Foundational) में अब एक शिक्षक पर औसतन 10 बच्चे हैं.

Preparatory स्तर पर 12 बच्चे
Middle स्तर पर 17 बच्चे
Secondary स्तर पर 21 बच्चे

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में एक शिक्षक पर अधिकतम 30 छात्रों की सिफारिश की गई है. मौजूदा आंकड़े इस लक्ष्य से बेहतर हैं.
स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटी
रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल बीच में छोड़ने वाले बच्चों (Dropout) की संख्या में भी कमी आई है. Preparatory स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.3% से घटकर 1.8% हो गई. Secondary स्तर पर यह 8.2% से घटकर 7% रह गई. हालांकि, Middle स्तर पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है. यह दर 3.5% से बढ़कर 3.6% हो गई. इससे संकेत मिलता है कि पहले की तुलना में ज्यादा बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं.&amp;nbsp;
अब ज्यादा बच्चे पूरी कर रहे पढ़ाई
रिपोर्ट बताती है कि बच्चों के स्कूल में टिके रहने (Retention Rate) में भी सुधार हुआ है. Middle स्तर पर यह 82.8% से बढ़कर 83.7% हो गया. Secondary स्तर पर सबसे बड़ा सुधार देखने को मिला. यहां रिटेंशन 47.2% से बढ़कर 51.9% पहुंच गया. सरकार का कहना है कि माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या बढ़ने से ज्यादा बच्चों को आगे पढ़ने का मौका मिला है.
माध्यमिक कक्षाओं में बढ़े दाखिला
Secondary स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) भी बढ़ा है. यह 68.5% से बढ़कर 71.7% हो गया है. इसका मतलब है कि अब पहले की तुलना में ज्यादा बच्चे माध्यमिक स्तर तक पहुंच रहे हैं और पढ़ाई जारी रख रहे हैं. एक कक्षा से दूसरी कक्षा में पहुंचने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, अब पहले से ज्यादा बच्चे बिना पढ़ाई छोड़े अगली कक्षा में पहुंच रहे हैं.

Foundational से Preparatory स्तर पर जाने की दर 98.6% से बढ़कर 99.2% हो गई
Preparatory से Middle स्तर पर 92.2% से बढ़कर 93.8%
Middle से Secondary स्तर पर 86.6% से बढ़कर 88.3%&amp;nbsp;

सिंगल टीचर और खाली स्कूलों की संख्या घटी

देश में ऐसे स्कूलों की संख्या भी कम हुई है, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक है.
Single Teacher Schools की संख्या 1,04,125 से घटकर 1,00,843 रह गई.
जिन स्कूलों में एक भी छात्र नहीं है (Zero Enrolment Schools), उनकी संख्या 7993 से घटकर 5663 हो गई.

स्कूलों में बढ़ीं डिजिटल सुविधाएं

69.9% स्कूलों में अब कंप्यूटर उपलब्ध, पिछले साल यह आंकड़ा 64.7% था.
67.4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है, जो पिछले साल 63.5% थी.
इससे ऑनलाइन पढ़ाई, स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी हुईं बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश स्कूलों में अब बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं

95% स्कूलों में बिजली है
99.5% स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध
98.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय
97.2% स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय
96.9% स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा मौजूद
90.5% स्कूलों में लाइब्रेरी

हालांकि, प्लेग्राउंड वाले स्कूलों का प्रतिशत 83% से घटकर 81.9% हो गया है, जो चिंता का विषय माना जा सकता है.
दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएं बढ़ीं
दिव्यांग छात्रों की सुविधा के लिए रैंप और हैंडरेल वाले स्कूलों की संख्या भी बढ़ी है. अब 58.2% स्कूलों में रैंप और हैंडरेल उपलब्ध हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 54.9% था. महिला शिक्षकों और छात्राओं की भागीदारी बढ़ी. रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब 54.9% शिक्षक महिलाएं हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 54.2% था. वहीं, छात्राओं का नामांकन भी थोड़ा बढ़ा है. 48.4% छात्राएं अब स्कूलों में पढ़ रही हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 48.3% था.
क्या कहती है पूरी रिपोर्ट?
UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में स्कूल शिक्षा की तस्वीर कई मामलों में बेहतर हुई है. शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, एक शिक्षक पर छात्रों का बोझ कम हुआ है, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटी है और डिजिटल और बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है. हालांकि, खेल मैदान जैसी कुछ सुविधाओं और कुछ levels पर बच्चों को स्कूल में बनाए रखने जैसे क्षेत्रों में अभी और काम करने की जरूरत है. कुल मिलाकर रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था में सुधार की पॉजिटिव तस्वीर पेश करती है.
ये भी पढ़ें: स्कूलों की ग्रेडिंग में देश का एक भी जिला टॉप पर नहीं, दिल्ली से हरियाणा तक की पूरी रिपोर्ट ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Education, Report, 2025-26:, अब, एक, टीचर, पर, होंगे, कम, बच्चे, जानें, UDISE, 2025-26, रिपोर्ट, की, सबसे, बड़ी, बातें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>JNVST 2027: नवोदय विद्यालय में क्लास 6 के दाखिले शुरू, 31 जुलाई तक करें आवेदन; जानें कौन कर सकता है अप्लाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/jnvst-2027-नवोदय-विद्यालय-में-क्लास-6-के-दाखिले-शुरू-31-जुलाई-तक-करें-आवेदन-जानें-कौन-कर-सकता-है-अप्लाई</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/jnvst-2027-नवोदय-विद्यालय-में-क्लास-6-के-दाखिले-शुरू-31-जुलाई-तक-करें-आवेदन-जानें-कौन-कर-सकता-है-अप्लाई</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आपका बच्चा इस समय कक्षा 5 में पढ़ रहा है और आप उसे जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला दिलाना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने JNVST 2027 के तहत कक्षा 6 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए हैं. इच्छुक अभिभावक और छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है. इसके बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. वहीं, प्रवेश परीक्षा 28 नवंबर 2026 को आयोजित होगी. पूरी प्रवेश प्रक्रिया अगस्त 2027 तक पूरी होने की संभावना है.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस प्रवेश परीक्षा में वही छात्र आवेदन कर सकते हैं, जो 2026-27 सत्र में किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ रहे हैं. इसके साथ ही छात्र ने कक्षा 3, 4 और 5 की पढ़ाई भी मान्यता प्राप्त स्कूल से की होनी चाहिए.
उम्मीदवार उसी जिले का स्थायी निवासी होना चाहिए, जहां के जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश लेना चाहता है. अगर कोई छात्र पड़ोसी जिले के स्कूल में पढ़ रहा है, तो वह तभी आवेदन कर सकेगा, जब उसका स्कूल उसके घर से 10 किलोमीटर की तय सीमा के भीतर हो. गलत जिले के लिए किया गया आवेदन बाद में रद्द कर दिया जाएगा, चाहे छात्र का चयन ही क्यों न हो जाए.
आवेदन करने वाले छात्र का जन्म 1 मई 2015 से 31 जुलाई 2017 के बीच होना चाहिए. जो छात्र पहले से कक्षा 5 पास कर चुके हैं या दोबारा कक्षा 5 पढ़ रहे हैं, वे इस परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे. इसके अलावा, JNVST परीक्षा केवल एक बार ही दी जा सकती है.यह भी पढ़ें - IIM नागपुर का बड़ा प्लान! पुणे में बनेगा नया कैंपस, दुनिया के टॉप 100 बिजनेस स्कूलों में शामिल होने का लक्ष्य
सीटों का आरक्षण कैसे होगा?
नवोदय विद्यालयों में कम से कम 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित रहेंगी. बाकी सीटों पर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा. इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षण मिलेगा. वहीं, कम से कम एक-तिहाई सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित रहेंगी. दिव्यांग छात्रों को भी नियमानुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा.
कैसी होगी परीक्षा?
प्रवेश परीक्षा OMR शीट पर ऑफलाइन होगी. इसमें 80 MCQ प्रश्न पूछे जाएंगे, जो कुल 100 अंकों के होंगे. प्रश्न मानसिक क्षमता (Mental Ability), पर्यावरण अध्ययन (EVS), अंकगणित और भाषा से पूछे जाएंगे. हर सही उत्तर पर 1.25 अंक मिलेंगे और सबसे राहत की बात यह है कि गलत जवाब देने पर कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. परीक्षा की अवधि 2 घंटे होगी. चयन के लिए छात्रों को मानसिक क्षमता और ईवीएस में तय न्यूनतम अंक तथा अन्य विषयों में भी निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करने होंगे.यह भी पढ़ें - CA सितंबर और नवंबर परीक्षा के लिए फॉर्म भरना शुरू, जानें लास्ट डेट और पूरा एग्जाम शेड्यूल ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>JNVST, 2027:, नवोदय, विद्यालय, में, क्लास, के, दाखिले, शुरू, जुलाई, तक, करें, आवेदन, जानें, कौन, कर, सकता, है, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>FMGE Result 2026: विदेश से MBBS करने वालों को बड़ा झटका, FMGE में सिर्फ 5,086 उम्मीदवार हुए सफल</title>
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        <description><![CDATA[ विदेश से MBBS की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है.नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने FMGE जून 2026 परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है. इस परीक्षा में शामिल हुए हजारों उम्मीदवार अब अपना परिणाम देख सकते हैं.वहीं स्कोरकार्ड डाउनलोड करने की तारीख भी घोषित कर दी गई है. आइए जानते हैं आगे की पूरी प्रक्रिया.
NBEMS ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) जून 2026 का परिणाम जारी कर दिया है.यह परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है जिन्होंने विदेश से MBBS की पढ़ाई पूरी की है और भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी योग्यता हासिल करना चाहते हैं. परीक्षा 28 जून 2026 को देश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी. अब उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं.
कितने उम्मीदवार हुए सफल, कितने नहीं कर पाए परीक्षा पास
इस बार FMGE जून 2026 परीक्षा में कुल 37,448 उम्मीदवार शामिल हुए थे. इनमें से 5,086 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की है. वहीं 31,645 उम्मीदवार सफल नहीं हो सके.इसके अलावा 1,148 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए. हर साल इस परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्र हिस्सा लेते हैं, क्योंकि भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए यह परीक्षा जरूरी होती है.
स्कोरकार्ड कब मिलेगा और कितने समय तक रहेगा उपलब्ध
NBEMS के अनुसार उम्मीदवार अपना व्यक्तिगत स्कोरकार्ड 16 जुलाई 2026 से डाउनलोड कर सकेंगे. स्कोरकार्ड में उम्मीदवार के प्राप्त अंक और अन्य जरूरी जानकारी दी जाएगी. बोर्ड ने साफ किया है कि स्कोरकार्ड केवल जारी होने की तारीख से छह महीने तक ही वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा. इसलिए सभी उम्मीदवार समय रहते अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें. तय समय के बाद इसे दोबारा जारी नहीं किया जाएगा.
FMGE स्कोरकार्ड डाउनलोड करने का आसान तरीका
स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद FMGE June 2026 Scorecard लिंक पर क्लिक करें. अब अपना यूजर आईडी और पासवर्ड या मांगी गई लॉगिन जानकारी दर्ज करें. लॉगिन करने के बाद आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा. इसे डाउनलोड करें और भविष्य में जरूरत के लिए प्रिंट निकालकर सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - Education Report 2025-26: अब एक टीचर पर होंगे कम बच्चे, जानें UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट की सबसे बड़ी बातें
क्या स्कोरकार्ड से मेडिकल रजिस्ट्रेशन हो जाएगा
NBEMS ने स्पष्ट किया है कि वेबसाइट से डाउनलोड किया गया स्कोरकार्ड मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए मान्य दस्तावेज नहीं है. मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के लिए उम्मीदवारों को FMGE पास सर्टिफिकेट की जरूरत होगी.यह पास सर्टिफिकेट दस्तावेजों और पहचान की जांच पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को व्यक्तिगत रूप से दिया जाएगा. पास सर्टिफिकेट वितरण की तारीख और स्थान की जानकारी बाद में NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी.
गलत प्रश्नों को लेकर बोर्ड ने क्या बताया
बोर्ड ने जानकारी दी है कि परीक्षा के सभी प्रश्नों और उत्तरों की विशेषज्ञों की टीम ने दोबारा जांच की. जिन प्रश्नों में तकनीकी गलती पाई गई, उनके अंक सभी उम्मीदवारों को दिए गए. वहीं जिन सवालों के दो सही उत्तर थे, उनमें दोनों में से किसी भी सही विकल्प को चुनने वाले उम्मीदवारों को पूरे अंक दिए गए.इससे यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो.यह भी पढ़ें - JNVST 2027: नवोदय विद्यालय में क्लास 6 के दाखिले शुरू, 31 जुलाई तक करें आवेदन; जानें कौन कर सकता है अप्लाई? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए जूनियर असिस्टेंट के 14 पदों पर भर्ती, 81100 तक मिलेगी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए जूनियर असिस्टेंट के 14 पदों पर भर्ती, 81100 तक मिलेगी सैलरी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ग्रेजुएट, उम्मीदवारों, के, लिए, जूनियर, असिस्टेंट, के, पदों, पर, भर्ती, 81100, तक, मिलेगी, सैलरी</media:keywords>
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        <title>दक्षिण एशिया की यूनिवर्सिटी ने क्यों रोकी अफगानी स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप? समझ लें पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय ने अफगानिस्तान के छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप फिलहाल बंद कर दी है. विश्वविद्यालय का कहना है कि यह फैसला किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं लिया गया, बल्कि SAARC सदस्य देशों के बीच फंडिंग को लेकर उठे विवाद के बाद सभी नियमों को समान रूप से लागू करने के लिए किया गया है.
विश्वविद्यालय के अनुसार अफगानिस्तान पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय में तय वित्तीय योगदान नहीं दे पाया है. इसी मुद्दे पर भूटान ने आपत्ति जताई और कहा कि जो देश समय पर अपना हिस्सा जमा कर रहे हैं, उनके साथ समान व्यवहार होना चाहिए. इसके बाद विश्वविद्यालय ने अफगान छात्रों की स्कॉलरशिप रोकने का फैसला&amp;nbsp;
SAU के अध्यक्ष प्रो. के.के. अग्रवाल ने बताया कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद इस मामले पर अफगानिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हो पाई है. भारत सरकार ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, इसलिए विश्वविद्यालय भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक संवाद स्थापित नहीं कर सका. यही वजह है कि फंडिंग से जुड़ा विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है.
दी जाएगी ये सुविधा
हालांकि विश्वविद्यालय ने यह भी साफ किया कि अफगान छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं. अगर अफगान प्रशासन सहमत होता है, तो खासकर छात्राओं के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा शुरू की जा सकती है. विश्वविद्यालय का कहना है कि उसे बड़ी संख्या में अफगान छात्रों, विशेषकर महिलाओं के ईमेल मिलते हैं, जो शिक्षा जारी रखना चाहती हैं लेकिन महिलाओं की पढ़ाई पर पाबंदियों और वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण ऐसा नहीं कर पा रहीं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रो. अग्रवाल का कहना है कि किसी भी देश का विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक उसकी आधी आबादी शिक्षा से वंचित रहे. उन्होंने कहा कि SAARC का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग और शिक्षा को बढ़ावा देना है, इसलिए विश्वविद्यालय ऑनलाइन शिक्षा के विकल्प पर काम करने को तैयार है.
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कब शुरू हो सकती है सुविधा
विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि अगर कोई SAARC सदस्य देश या कोई अन्य संस्था अफगानिस्तान की ओर से वित्तीय योगदान देने को तैयार होती है, तो अफगान छात्रों की स्कॉलरशिप दोबारा शुरू की जा सकती है. साथ ही शिक्षा मंत्रालय से भी अपील की गई है कि SAU में पढ़ने के इच्छुक अफगान छात्रों के लिए ICCR के माध्यम से छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए.
विश्वविद्यालय के वित्तीय रिकॉर्ड बताते हैं कि 2021 से 30 जून 2026 के बीच भारत सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा और उसने करीब 6.59 करोड़ अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया. इसके बाद बांग्लादेश, मालदीव, भूटान और नेपाल का स्थान रहा. वहीं पाकिस्तान ने कई वर्षों के अंतराल के बाद 2025 में केवल एक बार भुगतान किया. विश्वविद्यालय के अनुसार, फिलहाल SAU में पाकिस्तान का कोई छात्र नामांकित नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2024-25 सत्र में विश्वविद्यालय में अफगानिस्तान के 10 छात्र पढ़ रहे थे, लेकिन 2026 प्रवेश सत्र में आवेदन मिलने के बावजूद कोई भी अफगान छात्र दाखिला नहीं ले सका. नए बैच में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के छात्रों ने प्रवेश लिया है, जबकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भूटान, मालदीव और SAARC से बाहर के देशों से इस बार कोई छात्र शामिल नहीं हुआ.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>CA सितंबर और नवंबर परीक्षा के लिए फॉर्म भरना शुरू, जानें लास्ट डेट और पूरा एग्जाम शेड्यूल</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप इस साल CA की परीक्षा देने वाले हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है.ICAI ने सितंबर और नवंबर 2026 में होने वाली CA फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना शुरू कर दिया है.उम्मीदवार 19 जुलाई तक बिना लेट फीस के आवेदन कर सकते हैं.
CA परीक्षा के लिए आवेदन शुरूICAI ने 6 जुलाई 2026 से CA फाउंडेशन, CA इंटरमीडिएट और CA फाइनल परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए हैं.जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, वे समय रहते अपना फॉर्म भर दें.आखिरी दिनों में वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने की वजह से परेशानी हो सकती है, इसलिए जल्दी आवेदन करना बेहतर रहेगा.बिना लेट फीस के आवेदन करने की आखिरी तारीख 19 जुलाई 2026 रात 11:59 बजे है. अगर किसी वजह से इस तारीख तक फॉर्म नहीं भर पाते हैं, तो 22 जुलाई 2026 तक 600 रुपये लेट फीस देकर आवेदन कर सकते हैं. इसके बाद फॉर्म में कोई गलती रह जाए तो 23 से 25 जुलाई 2026 तक उसे ठीक करने का मौका भी मिलेगा.
CA फाउंडेशन परीक्षा कब होगी?
CA फाउंडेशन की परीक्षा 2, 5, 7 और 9 सितंबर 2026 को होगी. जिन उम्मीदवारों ने फाउंडेशन कोर्स के लिए आवेदन किया है, उन्हें अभी से अपनी तैयारी तेज कर देनी चाहिए ताकि परीक्षा के समय कोई परेशानी न हो.
CA इंटरमीडिएट की ग्रुप-1 परीक्षा 1, 3 और 6 सितंबर को होगी.वहीं ग्रुप-2 की परीक्षा 8, 10 और 12 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी.
CA फाइनल की ग्रुप-1 परीक्षा 2, 4 और 6 नवंबर 2026 को होगी. इसके बाद ग्रुप-2 की परीक्षा 9, 11 और 13 नवंबर 2026 को कराई जाएगी. उम्मीदवार अपने ग्रुप के हिसाब से परीक्षा की तारीखें पहले ही नोट कर लें.यह भी पढ़ें - IIM नागपुर का बड़ा प्लान! पुणे में बनेगा नया कैंपस, दुनिया के टॉप 100 बिजनेस स्कूलों में शामिल होने का लक्ष्य
फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
फॉर्म भरते समय अपना नाम, जन्मतिथि, कोर्स, परीक्षा केंद्र और बाकी सभी जानकारी ध्यान से भरें. फॉर्म सबमिट करने से पहले एक बार पूरी जानकारी जरूर जांच लें.अगर कोई गलती रह जाती है, तो उसे सिर्फ करेक्शन विंडो के दौरान ही ठीक किया जा सकेगा.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
सबसे पहले ICAI की ई-सेवाएं वेबसाइट पर जाएं.अपने अकाउंट से लॉगिन करें या नया रजिस्ट्रेशन करें.इसके बाद सितंबर या नवंबर 2026 परीक्षा वाले लिंक पर क्लिक करें. अपना कोर्स चुनें, आवेदन फॉर्म भरें, जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और ऑनलाइन फीस जमा करें.आखिर में फॉर्म सबमिट करके उसका प्रिंट या पीडीएफ अपने पास सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - दक्षिण एशिया की यूनिवर्सिटी ने क्यों रोकी अफगानी स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप? समझ लें पूरा मामला ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बिना मौका गंवाए करें आवेदन, 148 पदों पर निकली भर्ती; जानें फीस और सिलेक्शन प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अलग-अलग पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के तहत मैनेजमेंट ट्रेनी, जूनियर कमर्शियल एग्जीक्यूटिव और जूनियर असिस्टेंट समेत कई पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 24 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं.
इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए CCI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. आवेदन प्रक्रिया 9 जुलाई से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आखिरी तारीख का इंतजार करने की बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लें.
148 पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 148 रिक्त पद भरे जाएंगे. इनमें जूनियर कमर्शियल एग्जीक्यूटिव और जूनियर असिस्टेंट (अकाउंट्स) के 50-50 पद शामिल हैं. इसके अलावा जूनियर असिस्टेंट (जनरल) के 30 पद, मैनेजमेंट ट्रेनी (मार्केटिंग) और मैनेजमेंट ट्रेनी (अकाउंट्स) के 8-8 पदों पर भर्ती होगी. वहीं असिस्टेंट मैनेजर (राजभाषा) और असिस्टेंट मैनेजर (आईटी) के एक-एक पद के लिए भी आवेदन मांगे गए हैं.
कौन कर सकता है आवेदन?
हर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग तय की गई है. उम्मीदवार के पास संबंधित क्षेत्र में BE, BTech, BSc, BCom, MCA, MBA, CA या CMA जैसी डिग्री या प्रोफेशनल योग्यता होनी चाहिए. इसलिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को संबंधित पद की योग्यता जरूर जांच लेनी चाहिए.
उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए. अधिकतम आयु पद के अनुसार 30 या 32 वर्ष निर्धारित की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा.
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ऐसे होगा चयन
उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा. सबसे पहले लिखित परीक्षा होगी. इसमें सफल अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद मेडिकल परीक्षण होगा. सभी चरण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को अंतिम नियुक्ति दी जाएगी.
आवेदन शुल्क कितना है?
आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. ऑफलाइन या किसी अन्य तरीके से भेजे गए फॉर्म मान्य नहीं होंगे. जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 1,500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी और पूर्व सैनिक उम्मीदवारों के लिए शुल्क 500 रुपये रखा गया है. फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>NCERT 8वीं की नई सोशल साइंस किताब जारी, न्यायपालिका चैप्टर में हुए बड़े बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप या आपके घर में कोई छात्र कक्षा 8वीं में पढ़ता है, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. NCERT ने 8वीं की सोशल साइंस की नई किताब जारी कर दी है.इस बार न्यायपालिका वाले चैप्टर में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. कुछ पुराने टॉपिक हटा दिए गए हैं और उनकी जगह नए विषय जोड़े गए हैं, ताकि छात्र आसान तरीके से न्याय व्यवस्था को समझ सकें.
कुछ महीने पहले जारी हुई सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कुछ हिस्सों पर विवाद हुआ था.इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की. NCERT ने कोर्ट को बताया कि किताब में बदलाव किए जाएंगे. अब कोर्ट के निर्देश के बाद नई किताब जारी कर दी गई है और पुरानी किताब की जगह यही किताब पढ़ाई जाएगी.
न्यायपालिका वाले चैप्टर में क्या नया जोड़ा गयानई किताब में न्यायपालिका वाला पूरा चैप्टर नए तरीके से लिखा गया है. अब इसमें सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) जैसे विषय शामिल किए गए हैं. साथ ही यह भी बताया गया है कि आम लोग जरूरत पड़ने पर अदालत तक कैसे पहुंच सकते हैं.
कई पुराने टॉपिक हटा दिए गएनई किताब से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, अदालतों में लंबित मामलों, जजों की कमी और न्याय व्यवस्था की चुनौतियों से जुड़े हिस्से हटा दिए गए हैं.इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कुछ चर्चित फैसलों का जिक्र भी अब किताब में नहीं मिलेगाm चैप्टर की शुरुआत में दिए गए सवाल भी बदल दिए गए हैं.
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PIL को आसान भाषा में समझाया गयाइस बार किताब में जनहित याचिका यानी PIL पर खास जोर दिया गया है.छात्रों को बताया गया है कि अगर कोई मामला आम लोगों के हित से जुड़ा हो, तो अदालत में याचिका दायर की जा सकती है. इसे समझाने के लिए कुछ प्रसिद्ध मामलों के उदाहरण भी दिए गए हैं, ताकि छात्रों को विषय आसानी से समझ आए.
एक्सपर्ट कमेटी ने तैयार की नई किताबNCERT ने बताया कि यह बदलाव शिक्षा मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी की सलाह और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किए गए हैं. न्यायपालिका वाले पूरे चैप्टर को दोबारा लिखा गया है. इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में होनी है.NCERT लगातार नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार नई किताबें तैयार कर रहा है.कक्षा 1 से 9 तक की कई नई किताबें पहले ही जारी की जा चुकी हैं. कक्षा 8वीं की यह नई सोशल साइंस किताब भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है. NCERT का कहना है कि नई किताब आसान भाषा में तैयार की गई है, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ संविधान और न्याय व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से समझ सकें.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>NCERT, 8वीं, की, नई, सोशल, साइंस, किताब, जारी, न्यायपालिका, चैप्टर, में, हुए, बड़े, बदलाव</media:keywords>
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        <title>NEET UG Result 2026: इस तारीख को आ सकता है NEET UG 2026 का रिजल्ट, जानें कब से शुरू होगी काउंसलिंग</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result Date 2026: इस साल NEET UG परीक्षा का सफर थोड़ा अलग रहा है. पहले यह परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी, लेकिन पेपर लीक की खबरों के चलते नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया था. इसके बाद फिर से परीक्षा 21 जून 2026 को कराई गई, जिसमें करीब 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे.
अब लाखों छात्र लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि, अभी तक NTA ने रिजल्ट की कोई पक्की तारीख नहीं बताई है, लेकिन ज्यादातर रिपोर्ट्स के मुताबिक रिजल्ट 20 जुलाई 2026 तक या उससे पहले जारी हो सकता है. NTA ने अपने नोटिस में कहा है कि रिजल्ट से पहले फाइनल आंसर की भी जारी होगी, जिसके आधार पर मार्क्स तय किए जाएंगे.
रिजल्ट कैसे देखें
रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले neet.nta.nic.in वेबसाइट पर जाना होगा. वहां NEET UG 2026 Result वाले लिंक पर क्लिक करना होगा, जो होमपेज पर Candidate Activity या News &amp;amp; Events सेक्शन में दिखेगा. इसके बाद एडमिट कार्ड में दिए गए एप्लीकेशन नंबर, जन्मतिथि और कैप्चा कोड भरकर सबमिट करना होगा. इसके बाद स्क्रीन पर स्कोरकार्ड दिख जाएगा, जिसमें नाम, रोल नंबर, मार्क्स, परसेंटाइल, ऑल इंडिया रैंक और क्वालिफिकेशन स्टेटस जैसी जानकारी होगी. सलाह दिया जाता है कि इस स्कोरकार्ड को डाउनलोड करके प्रिंट भी निकाल लें, क्योंकि आगे काउंसलिंग और एडमिशन में इसकी जरूरत पड़ेगी. &amp;nbsp;
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काउंसलिंग कब से शुरू होगी
रिजल्ट आने के बाद अगला बड़ा कदम काउंसलिंग है. MCC यानी मेडिकल काउंसलिंग कमेटी 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) सीटों के लिए काउंसलिंग कराती है, जिसमें एम्स, जिपमर और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सीटें भी शामिल होता हैं. अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार काउंसलिंग की शुरुआत 21 जुलाई 2026 के आसपास होने की उम्मीद है, हालांकि इसमें बदलाव भी हो सकता है क्योंकि दोबारा परीक्षा होने से पूरा शेड्यूल पहले से करीब दो महीने पीछे चल रहा है. &amp;nbsp;काउंसलिंग कुल चार से पांच राउंड में होगी, जिसमें राउंड 1, राउंड 2, मॉप-अप राउंड और स्ट्रे वेकेंसी राउंड शामिल हैं.
रिज्लट के बाद काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन mcc.nic.in वेबसाइट पर ऑनलाइन होगा, जहां छात्रों को अपनी रैंक और कैटेगरी के हिसाब से कॉलेज और कोर्स के लिए च्वाइस भरनी होगी.&amp;nbsp;
संभावित कटऑफ कितनी रह सकती है
एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक, दोबारा हुई NEET परीक्षा के लिए कैटेगरी के हिसाब से कटऑफ कुछ इस तरह रह सकती है. जनरल (UR) और EWS कैटेगरी के छात्रों के लिए संभावित कटऑफ 700 में 135 अंकों के बीच रह सकती है. वहीं OBC, SC और ST कैटेगरी के लिए यह 150 से 120 अंकों के बीच रहने का अनुमान है.&amp;nbsp; UR/EWS-PwD कैटेगरी के छात्रों के लिए कटऑफ 150 से 110 अंकों के बीच रह सकती है, जबकि OBC/SC/ST-PwD कैटेगरी के लिए यह 130 से 115 अंकों के बीच अनुमानित है.&amp;nbsp; हालांकि यह सिर्फ एक अनुमान है, असली कटऑफ रिजल्ट के साथ ही NTA द्वारा जारी की जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 10:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में शुरू हुए इन कोर्स में एडमिशन, इस डेट तक कर लें अप्लाई, जानें प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप 12वीं के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए BA और BEd समेत ग्रेजुएशन कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है. इच्छुक अभ्यर्थी 15 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन समर्थ एडमिशन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे.
विश्वविद्यालय ने इस बार दाखिला प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसे दो चरणों में बांटा है. पहले चरण में उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन करना होगा और अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी. इसके बाद दूसरे चरण में पसंदीदा कोर्स का चयन कर आवेदन शुल्क जमा करना होगा. दोनों चरणों की सभी प्रक्रियाएं 15 जुलाई तक पूरी करनी होंगी.
BA में मिलेंगे कई विषय चुनने के विकल्प
विश्वविद्यालय ने इस बार BA कोर्स के लिए 83 विषय संयोजन (Subject Combinations) उपलब्ध कराए हैं. इनमें से अभ्यर्थियों को कम से कम 40 विकल्प चुनने होंगे. वहीं BSc (मैथमेटिक्स) में कुल 14 विषय संयोजन हैं और सभी का चयन करना अनिवार्य होगा. इसी तरह BSc (बायोलॉजी) में 12 विषय संयोजन दिए गए हैं, जिनका चयन भी सभी उम्मीदवारों को करना होगा. हालांकि, विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि अंतिम रूप से कौन-सा विषय संयोजन मिलेगा, यह सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.
आवेदन से पहले तैयार रखें ये दस्तावेज
ऑनलाइन आवेदन शुरू करने से पहले कुछ जरूरी दस्तावेज अपने पास तैयार रखें. इनमें 10वीं और 12वीं की मार्कशीट व प्रमाणपत्र, हाल की पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर (JPG/JPEG फॉर्मेट) और यदि लागू हो तो EWS, OBC, SC या ST श्रेणी का केंद्रीय प्रारूप में जारी वैध प्रमाणपत्र शामिल है. आवेदन के दौरान इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी.यह भी पढ़ें - UPSC परीक्षा से पहले बड़ा एक्शन, AI से की फॉर्मों की जांच, 569 उम्मीदवारों के आवेदन हुए रद्द
15 जुलाई के बाद नहीं मिलेगा मौका
विश्वविद्यालय ने साफ कर दिया है कि रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल अपडेट, कोर्स चयन और फीस जमा करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 ही है. इसके बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. ऐसे में जो छात्र इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना चाहते हैं, उन्हें सलाह है कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि किसी तकनीकी परेशानी की वजह से मौका न छूटे.
ऐसे करें आवेदन
सबसे पहले समर्थ एडमिशन पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करें. इसके बाद मांगी गई सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरकर प्रोफाइल अपडेट करें. फिर दूसरे चरण में अपने पसंदीदा प्रोग्राम का चयन करें और ऑनलाइन फीस जमा करें. आवेदन पूरा होने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>UGC NET आंसर&amp;की को लेकर बड़ा अपडेट, जानें कब और कैसे डाउनलोड कर पाएंगे</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने UGC NET जून 2026 की परीक्षा दी है, तो आपके लिए अच्छी खबर है.नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जल्द ही प्रोविजनल आंसर-की जारी कर सकती है. इसके साथ उम्मीदवारों को अपनी रिस्पॉन्स शीट और प्रश्न पत्र भी देखने का मौका मिलेगा. इससे छात्र अपने उत्तरों का मिलान कर सकेंगे और रिजल्ट आने से पहले अपने संभावित स्कोर का अंदाजा लगा सकेंगे.
जल्द जारी हो सकती है UGC NET Answer Key
UGC NET जून 2026 की परीक्षा 22 जून से 30 जून के बीच देशभर के कई परीक्षा केंद्रों पर कराई गई थी. अब परीक्षा खत्म होने के बाद लाखों उम्मीदवार आंसर-की का इंतजार कर रहे हैं. हर साल की तरह इस बार भी उम्मीद है कि NTA जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर प्रोविजनल आंसर-की जारी करेगा.
पिछले सालों का ट्रेंड क्या बताता है?
अगर पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड देखें तो NTA ने हर बार जुलाई के पहले सप्ताह में आंसर-की जारी की है.साल 2025 में परीक्षा 25 से 29 जून के बीच हुई थी और 6 जुलाई को आंसर-की जारी हुई थी. वहीं 2024 में 18 से 26 जून तक परीक्षा हुई और 6 जुलाई को ही आंसर-की आई थी. साल 2023 में भी परीक्षा 13 से 22 जून के बीच हुई थी और आंसर-की 6 जुलाई को जारी की गई थी. इसी ट्रेंड को देखते हुए उम्मीदवारों को उम्मीद है कि इस बार भी आंसर-की जल्द जारी हो सकती है.
आंसर-की के साथ क्या मिलेगा?
आंसर-की जारी होने के साथ ही उम्मीदवार अपनी रिस्पॉन्स शीट और प्रश्न पत्र भी डाउनलोड कर सकेंगे. इससे वे अपने दिए गए जवाबों का मिलान कर पाएंगे और यह समझ सकेंगे कि उनके कितने सवाल सही हुए हैं.यह भी पढ़ें - इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में शुरू हुए इन कोर्स में एडमिशन, इस डेट तक कर लें अप्लाई, जानें प्रक्रिया
अगर किसी जवाब पर आपत्ति हो तो क्या करें?
अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि आंसर-की में किसी सवाल का जवाब गलत दिया गया है, तो वह तय समय के अंदर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकता है. इसके लिए संबंधित सवाल के समर्थन में जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और हर सवाल के लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा. सभी आपत्तियों की जांच के बाद NTA फाइनल आंसर-की जारी करेगा.
ऐसे डाउनलोड करें UGC NET Answer Key 2026
UGC NET की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.होमपेज पर UGC NET June 2026 Provisional Answer Key के लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि या पासवर्ड दर्ज करके लॉगिन करें. लॉगिन करने के बाद आपकी स्क्रीन पर आंसर-की दिखाई देगी. इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए एक कॉपी अपने पास सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - UPSC परीक्षा से पहले बड़ा एक्शन, AI से की फॉर्मों की जांच, 569 उम्मीदवारों के आवेदन हुए रद्द ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Job Interview Tips: जॉब इंटरव्यू में रिजेक्ट होने की क्या होती है सबसे बड़ी वजह, क्या कहते हैं HR प्रोफेशनल्स?</title>
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        <description><![CDATA[ Job Interview Tips: जॉब इंटरव्यू में रिजेक्ट होने की क्या होती है सबसे बड़ी वजह, क्या कहते हैं HR प्रोफेशनल्स? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>कॉलेज के बाद नहीं मिल रही नौकरी, एक्सपर्ट बता रहे हैं किन स्किल्स की सबसे ज्यादा जरूरत?</title>
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>PM Yashasvi Yojna 2026 : ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों को सालाना 1.25 लाख तक की आर्थिक मदद, आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक</title>
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        <description><![CDATA[ PM Yashasvi Yojna 2026 : हर छात्र का सपना होता है कि वह अच्छी पढ़ाई कर सकें, लेकिन कई परिवारों के लिए बढ़ता शिक्षा खर्च बड़ी चुनौती बन जाता है. फीस, किताबें, हॉस्टल और दूसरी जरूरी जरूरतों का खर्च उठाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता है. ऐसे में केंद्र सरकार की पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना (PM YASASVI Yojana) आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में अच्छे छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. इस योजना के तहत योग्य छात्रों को हर साल 75 हजार रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे छात्र बिना आर्थिक परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पात्र छात्र तय समय सीमा के अंदर आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या है पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना?
पीएम यशस्वी योजना केंद्र सरकार की एक छात्रवृत्ति योजना है, जिसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय संचालित करता है. इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता देना है. इसके तहत छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े दूसरे जरूरी खर्चों के लिए मदद दी जाती है, जिससे परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम हो सके.&amp;nbsp;
कितनी मिलती है आर्थिक सहायता?
योजना के तहत कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले छात्रों को 75,000 रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति दी जाती है. वहीं कक्षा 11 और 12 के छात्रों को 1,25,000 रुपये प्रति वर्ष तक की सहायता मिलती है. इसके अलावा उच्च शिक्षा या व्यावसायिक कोर्स करने वाले छात्रों को ट्यूशन फीस, किताबों का खर्च, हॉस्टल फीस और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों में भी आर्थिक सहायता दी जाती है. कुछ मामलों में रहने-खाने का खर्च और जरूरी शैक्षणिक सामग्री, जैसे लैपटॉप, भी उपलब्ध कराया जाता है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना का फायदा लेने के लिए छात्र का ओबीसी (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EBC) या विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजाति (DNT) समुदाय से होना जरूरी है. इसके साथ ही परिवार की वार्षिक इनकम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. छात्र कक्षा 9 या कक्षा 11 में पढ़ रहा हो और उसके स्कूल का बोर्ड लगातार 100 प्रतिशत रिजल्ट देने वाला होना चाहिए. इन सभी शर्तों को पूरा करने वाले छात्र आवेदन के पात्र होंगे.&amp;nbsp;
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आवेदन की आखिरी तारीख कब है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. नए और नवीनीकरण दोनों तरह के आवेदन 1 जून 2026 से किए जा रहे हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है. इसके बाद शिक्षण संस्थान 15 सितंबर 2026 तक आवेदन का वेरिफिकेशन करेंगे, जबकि मंत्रालय स्तर पर वेरिफिकेशन की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 तय की गई है.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन?
आवेदन करने के लिए सबसे पहले NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Register ऑप्शन चुनना होगा. इसके बाद नाम, ईमेल आईडी, जन्मतिथि और पासवर्ड जैसी जरूरी जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आवेदन से जुड़ी PDF डाउनलोड की जा सकती है, जिसमें एप्लीकेशन नंबर दिया जाएगा. चयनित छात्रों की छात्रवृत्ति की राशि DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिससे फीस और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्च आसानी से पूरे किए जा सकें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>देशभर के स्कूलों में बदल रही पढ़ाई की तस्वीर,अब किताबों के साथ AI भी बनेगा छात्रों का नया साथी</title>
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        <description><![CDATA[ अब स्कूलों में सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं होगी.आने वाले समय में छोटे बच्चे भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक के बारे में सीखेंगे. सरकार ने कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों के लिए नया सिलेबस तैयार किया है, ताकि बच्चे शुरू से ही बदलती दुनिया के साथ कदम मिला सकें.
अब कक्षा 3 से बच्चे सीखेंगे AI
सरकार ने स्कूलों की पढ़ाई में बड़ा बदलाव किया है.अब कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) की पढ़ाई कराई जाएगी. इसका मकसद बच्चों को नई तकनीक से जोड़ना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है.
नए सिलेबस में क्या पढ़ाया जाएगा?
इस नए सिलेबस में बच्चों को आसान तरीके से सोचने, किसी समस्या का हल निकालने और तकनीक का सही इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा. पढ़ाई को मजेदार और आसान बनाने के लिए नई किताबें और शिक्षकों के लिए अलग गाइड भी तैयार की गई हैं.
बच्चों को क्या होगा फायदा?
आज के समय में AI का इस्तेमाल हर जगह बढ़ रहा है.ऐसे में अगर बच्चे स्कूल से ही इसकी जानकारी हासिल करेंगे, तो उन्हें आगे की पढ़ाई और नौकरी में काफी मदद मिलेगी. इससे उनकी सोचने की क्षमता बढ़ेगी और नई चीजें सीखना भी आसान होगा.
यह भी पढ़ें - Loco Pilot Medical Test Criteria: लोको पायलट के लिए मेडिकल टेस्ट, किन पैरामीटर्स पर खरा उतरना होगा? जानिए एक-एक डिटेल
सरकार का क्या है मकसद?
सरकार चाहती है कि भारत के बच्चे समय के साथ आगे बढ़ें और नई तकनीक को अच्छे से समझें. इसी वजह से स्कूलों में AI की पढ़ाई शुरू की जा रही है, ताकि आने वाले समय में देश के युवा नई तकनीक के क्षेत्र में बेहतर काम कर सकें.
अब पढ़ाई होगी पहले से ज्यादा स्मार्ट
इस नए सिलेबस को लागू करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. पहले शिक्षकों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बच्चों को आसान भाषा में AI और नई तकनीक से जुड़ी बातें समझा सकें. इसके बाद स्कूलों में नई किताबों और पढ़ाई के तरीके के साथ इस सिलेबस को लागू किया जाएगा. सरकार का मानना है कि अगर बच्चों को छोटी उम्र से ही नई तकनीक की सही जानकारी मिलेगी, तो वे आगे चलकर पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे.यह भी पढ़ें - PM Yashasvi Yojna 2026 : ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों को सालाना 1.25 लाख तक की आर्थिक मदद, आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली यूनिवर्सिटी में 1 साल के PG कोर्स का एडमिशन शुरू,जानें कौन कर सकता है आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी में 1 साल के PG कोर्स का एडमिशन शुरू,जानें कौन कर सकता है आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AICTE ने देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेज और 950 से ज्यादा कोर्स किए बंद,जानें क्या है वजह?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. AICTE ने देशभर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेज बंद करने का फैसला लिया है. इसके साथ ही 950 से ज्यादा इंजीनियरिंग और तकनीकी कोर्स भी बंद कर दिए गए हैं. हालांकि जिन छात्रों ने पहले से इन कॉलेजों में एडमिशन ले रखा है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. उनकी पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी और वे अपनी डिग्री पूरी कर सकेंगे.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा कॉलेज बंद हुए?
सबसे ज्यादा 12-12 कॉलेज उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बंद किए गए हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश में 8 कॉलेज बंद हुए हैं। तेलंगाना और पंजाब में 4-4, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में 3-3, जबकि गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 2-2 कॉलेज बंद हुए हैं. हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी 1-1 कॉलेज बंद किया गया है.
आखिर कॉलेज बंद क्यों किए गए?
AICTE का कहना है कि कई कॉलेजों में काफी समय से छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही थी. कई जगह योग्य शिक्षक नहीं थे और कुछ संस्थान जरूरी सुविधाओं व तय नियमों को भी पूरा नहीं कर पा रहे थे. बार-बार मौका देने के बाद भी सुधार नहीं हुआ, इसलिए इन कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया गया.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; देशभर के स्कूलों में बदल रही पढ़ाई की तस्वीर,अब किताबों के साथ AI भी बनेगा छात्रों का नया साथी
क्या पहले से पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई रुकेगी?
AICTE ने साफ कहा है कि पहले से पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ये कॉलेज सिर्फ नए छात्रों का एडमिशन नहीं लेंगे. पुराने छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और उन्हें तय समय पर डिग्री भी मिलेगी.
&#039;प्रोग्रेसिव क्लोजर&#039; क्या है?
इस फैसले के तहत कॉलेज धीरे-धीरे बंद किए जाते हैं. यानी नए छात्रों का दाखिला रोक दिया जाता है, लेकिन जो छात्र पहले से पढ़ रहे हैं, उनकी पढ़ाई पूरी कराई जाती है इसे ही &#039;प्रोग्रेसिव क्लोजर&#039; कहा जाता है.
एडमिशन लेने से पहले ये बात जरूर जांच लेंअगर आप इस साल इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने वाले हैं, तो पहले यह जरूर देख लें कि जिस कॉलेज में आप आवेदन कर रहे हैं, उसे AICTE से मान्यता मिली हुई है या नहीं. इससे आगे चलकर किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है.यह भी पढ़ें - दिल्ली यूनिवर्सिटी में 1 साल के PG कोर्स का एडमिशन शुरू,जानें कौन कर सकता है आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चतुर्थ श्रेणी में हो गया है सेलेक्शन! जानिए किस पद पर मिलेगी नियुक्ति और क्या होगा आपका काम</title>
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        <description><![CDATA[ चतुर्थ श्रेणी भर्ती का रिजल्ट आने के बाद चयनित अभ्यर्थियों के मन में कई सवाल होते हैं. सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर अब किस पद पर नियुक्ति मिलेगी और रोजाना क्या काम करना होगा. अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. यहां हम पूरी जानकारी बता रहे हैं.
किन पदों पर हो सकती है नियुक्ति?
चतुर्थ श्रेणी भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को अलग-अलग सरकारी विभागों में जरूरत के हिसाब से नियुक्त किया जाता है.किसी को चपरासी, किसी को कार्यालय सहायक, चौकीदार, सफाई कर्मचारी, माली, हेल्पर, अटेंडेंट या दफ्तरी जैसे पद मिल सकते हैं.कौन-सा पद मिलेगा, यह संबंधित विभाग और उपलब्ध रिक्तियों पर निर्भर करता है.
नौकरी में क्या-क्या काम करना होगा?
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का काम किसी भी सरकारी कार्यालय या संस्थान के रोजमर्रा के कामकाज को आसान बनाना होता है. इसमें फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचाना, दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना, कार्यालय की साफ-सफाई में सहयोग करना, अधिकारियों के निर्देशानुसार जरूरी काम करना और आने वाले लोगों की सहायता करना शामिल हो सकता है. अगर नियुक्ति स्कूल, अस्पताल या किसी अन्य विभाग में होती है, तो वहां के हिसाब से जिम्मेदारियां भी बदल सकती हैं.
जॉइनिंग से पहले पूरी करनी होंगी ये औपचारिकताएं
चयन के बाद उम्मीदवारों को सबसे पहले अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराना होता है. इसके बाद मेडिकल जांच या अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं.सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद संबंधित विभाग नियुक्ति पत्र जारी करता है और तय तारीख पर उम्मीदवार को अपनी ड्यूटी जॉइन करनी होती है.यह भी पढ़ें - देशभर के स्कूलों में बदल रही पढ़ाई की तस्वीर,अब किताबों के साथ AI भी बनेगा छात्रों का नया साथी
कितनी मिलेगी सैलरी?
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार वेतन दिया जाता है. बेसिक सैलरी के अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं. समय-समय पर वेतन में बढ़ोतरी और अन्य लाभ भी सरकारी नियमों के अनुसार दिए जाते हैं.
क्या आगे प्रमोशन का मौका मिलता है?
कई उम्मीदवारों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या चतुर्थ श्रेणी की नौकरी में प्रमोशन मिलता है. विभागीय नियमों और सेवा अवधि के आधार पर कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं. हालांकि यह पूरी तरह संबंधित विभाग के नियमों पर निर्भर करता है.
यह भी पढ़ें - AICTE ने देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेज और 950 से ज्यादा कोर्स किए बंद,जानें क्या है वजह? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Foreign University Campuses in India: गिफ्ट सिटी के बाद अब इन शहरों में खुलने जा रहे हैं इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस, देखें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/foreign-university-campuses-in-india-गिफ्ट-सिटी-के-बाद-अब-इन-शहरों-में-खुलने-जा-रहे-हैं-इंटरनेशनल-कॉलेजों-के-कैंपस-देखें-पूरी-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/foreign-university-campuses-in-india-गिफ्ट-सिटी-के-बाद-अब-इन-शहरों-में-खुलने-जा-रहे-हैं-इंटरनेशनल-कॉलेजों-के-कैंपस-देखें-पूरी-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ Foreign University Campuses in India: विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करना हर छात्र का सपना होता है, लेकिन भारी फीस और विदेश में रहने का खर्च इस सपने को कई बार मुश्किल बना देता है. लेकिन अब छात्रों के लिए बड़ी और अच्छी अपडेट सामने आई है. दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटियां भारत में अपने कैंपस शुरू करने जा रही हैं. जिससे आने वाले समय में विदेश जाकर पढ़ाई करने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है. गिफ्ट सिटी के बाद अब कई बड़े शहरों में इंटरनेशनल कॉलेज कैंपस के नए केंद्र बनने वाले हैं. इससे छात्रों को भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई, इंटरनेशनल डिग्री और ग्लोबल फैकल्टी का फायदा मिलने का मौका मिलेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि गिफ्ट सिटी के बाद अब किन शहरों में इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस खुलने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
भारत में खुलेंगे 15 इंटरनेशनल कॉलेज कैंपस
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 15 इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज को भारत में अपने स्वतंत्र कैंपस खोलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया जा चुका है. इनमें से ज्यादातर कॉलेज इसी साल अगस्त से अपने पहले बैच की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी में हैं. शुरुआत में हर कैंपस में करीब 200 से 250 छात्रों को एंट्री दी जाएगी. अगले पांच सालों में यह संख्या बढ़ाकर हर साल 1,000 से 1,200 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. बताया जा रहा है कि मौजूदा एडमिशन प्रक्रिया में ही 10 हजार से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं.
भारत में कैंपस खोलने वाली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटियों की पूरी लिस्ट
भारत में कैंपस स्थापित करने की तैयारी कर रही प्रमुख इंटरनेशनल यूनिवर्सिटिज में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन (यूके), डीकिन यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया), यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग (ऑस्ट्रेलिया), क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क (यूके),यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन (यूके), इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अमेरिका), वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया), विक्टोरिया यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया), कोवेंट्री यूनिवर्सिटी (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ सरे (यूके), ला ट्रोब यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) और लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी (यूके) शामिल हैं.&amp;nbsp;
किन शहरों में इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस खुलने जा रहे हैं?
भारत में इंटरनेशनल कॉलेजों के नए कैंपस चार प्रमुख शहरों में स्थापित किए जा रहे हैं. जिसमें दिल्ली-एनसीआर (गुरुग्राम) में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी अपने कैंपस शुरू करेंगी. गिफ्ट सिटी में डीकिन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग और क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट अपने कैंपस स्थापित कर रही हैं. वहीं बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल अपना कैंपस खोलेगी. इसके अलावा मुंबई में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस खुलने जा रहे हैं. यहां चार इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस स्थापित किए जा रहे हैं. मुंबई में यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अपने कैंपस शुरू करने की तैयारी में हैं. इन शहरों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योगों से जुड़ाव और बड़े छात्र आधार की वजह से चुना गया है.
एडमिशन के लिए क्या होगी योग्यता?
ज्यादातर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज में एंट्री के लिए छात्रों के पास 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत नंबर होने चाहिए. वहीं पोस्टग्रेजुएट कोर्स के लिए 55 से 70 प्रतिशत नंबर जरूरी हो सकते हैं. यह प्रतिशत कोर्स और यूनिवर्सिटी के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.अगर किसी छात्र के बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी विषय में 70 से 85 प्रतिशत नंबर हैं, तो कई यूनिवर्सिटीज में IELTS स्कोर की जरूरत नहीं होगी.
किन विषयों में होगी पढ़ाई?
शुरुआत में इन यूनिवर्सिटीज का फोकस मुख्य रूप से मॉर्डन और रोजगार आधारित कोर्सों पर रहेगा. इनमें प्रमुख रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर साइंस, STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) जैसे विषय शामिल होंगे. इन यूनिवर्सिटीज का सिलेबस, परीक्षा प्रणाली और ग्रेडिंग उनके मूल इंटरनेशनल कैंपस के अनुसार ही होगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - सिर्फ तीन फीट का कद, लेकिन दुनिया से कहीं ऊंचा हौसला शिक्षक संजीव मजूमदार की प्रेरणादायक कहानी
विदेश में पढ़ाई का भी मिलेगा मौका
इन यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले छात्रों को एक या दो सेमेस्टर विदेश में पढ़ाई करने का अवसर भी मिलेगा. यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क 2+1 मॉडल शुरू करेगी, जिसमें छात्र दो साल मुंबई कैंपस और एक साल यूके में पढ़ सकेंगे.यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के भारत कैंपस के छात्रों को क्लाउड सिस्टम के जरिए यूके में मौजूद यूनिवर्सिटी की AI सुपर कंप्यूटिंग सुविधा का यूज &amp;nbsp;करने का अवसर मिलेगा.
फैकल्टी और स्कॉलरशिप की क्या होगी व्यवस्था?
इन कैंपस में भारतीय टीचर्स के साथ-साथ विदेश से आने वाले प्रोफेसर भी पढ़ाएंगे.स्टूडेंट्स के लिए मेरिट और आर्थिक स्थिति के आधार पर स्कॉलरशिप भी उपलब्ध कराई जाएगी. अगले पांच सालों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये का संयुक्त स्कॉलरशिप फंड तय किया गया है. छात्रों को 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक फीस में छूट मिल सकती है. इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल जैसी संस्थाओं ने भी अलग से स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. भारत में इन कैंपस के खुलने से छात्रों को विदेश जैसी शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय डिग्री, वैश्विक फैकल्टी और रिसर्च सुविधाएं यहीं मिल सकेंगी. साथ ही विदेश जाकर पढ़ाई करने की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत कम खर्च आएगा.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Foreign, University, Campuses, India:, गिफ्ट, सिटी, के, बाद, अब, इन, शहरों, में, खुलने, जा, रहे, हैं, इंटरनेशनल, कॉलेजों, के, कैंपस, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>SSC CGL Exam Admit Card 2026 : 12,000+ पदों पर होने वाली SSC CGL परीक्षा का कब जारी होगा एडमिट कार्ड, यहां जानिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ssc-cgl-exam-admit-card-2026-12000-पदों-पर-होने-वाली-ssc-cgl-परीक्षा-का-कब-जारी-होगा-एडमिट-कार्ड-यहां-जानिए</link>
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        <description><![CDATA[ SSC CGL Exam Admit Card 2026 : सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों की नजर इस समय SSC CGL 2026 परीक्षा पर टिकी हुई है. कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने इस भर्ती के जरिए 12,256 पदों पर भर्तिया निकाली हैं. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी कैंडिडेट्स को सबसे ज्यादा इंतजार एडमिट कार्ड का है. परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट होता है. इसके बिना किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में एंट्री नहीं मिलेगी. ऐसे में आइए जानते हैं कि SSC CGL 2026 का एडमिट कार्ड कब जारी होगा, इसे कैसे डाउनलोड करना है और परीक्षा के दिन किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
कब जारी होगा SSC CGL 2026 एडमिट कार्ड?
कर्मचारी चयन आयोग SSC CGL 2026 टियर-1 परीक्षा का एडमिट कार्ड परीक्षा से 2 से 3 दिन पहले अपनी सभी क्षेत्रीय आधिकारिक वेबसाइटों पर जारी करेगा. वहीं परीक्षा से लगभग एक हफ्ते पहले उम्मीदवारों के लिए एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप भी जारी की जाएगी, जिसमें परीक्षा शहर की जानकारी होगी. उम्मीदवार अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड या जन्मतिथि की मदद से लॉग इन कर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे.&amp;nbsp;
कब होगी SSC CGL 2026 परीक्षा?
SSC CGL टियर-1 परीक्षा अगस्त से सितंबर 2026 के बीच आयोजित की जाएगी. इसके बाद टियर-2 परीक्षा दिसंबर 2026 में कराई जाएगी. SSC ने SSC CGL 2026 भर्ती की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 मई 2026 से शुरू हुई थी और आवेदन की लास्ट डेट 22 जून 2026 तय की गई थी. इस भर्ती के लिए 18 से 32 वर्ष तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते थे.&amp;nbsp;
कैसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड?
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद Admit Card सेक्शन में जाकर SSC CGL Tier-1 Admit Card लिंक पर क्लिक करें. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या रोल नंबर और पासवर्ड या जन्मतिथि दर्ज करें. लॉग इन करते ही एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा. इसे डाउनलोड करके प्रिंट निकाल लें.&amp;nbsp;
एडमिट कार्ड में कौन-कौन सी जानकारी होगी?
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दी गई सभी जानकारी ध्यान से जांच लें. इसमें उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्मतिथि, श्रेणी, फोटो, हस्ताक्षर, परीक्षा की तारीख, परीक्षा का समय, रिपोर्टिंग टाइम, परीक्षा केंद्र का नाम और पूरा पता दर्ज होगा. &amp;nbsp;अगर किसी जानकारी में गलती दिखाई दे तो समय रहते संबंधित SSC रीजन से संपर्क करें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Jobs 2026 : कोडिंग हुई पुरानी! 2026 में नौकरियों की गारंटी देने वाली हैं ये डिग्रियां, करना भी बेहद आसान
परीक्षा केंद्र पर क्या ले जाना जरूरी है?
परीक्षा के दिन उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड की प्रिंट कॉपी के साथ एक ओरिजिनल फोटो पहचान पत्र ले जाना जरूरी होगा. पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस मान्य होंगे. इसके अलावा एक पासपोर्ट साइज फोटो भी साथ रखना होगा. अगर पहचान पत्र पर जन्मतिथि दर्ज नहीं है तो जन्मतिथि का प्रमाण पत्र भी साथ ले जाना होगा. किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए विभाग की वेबसाइट पर जाएं और वहां दी गई जानकारी को ही आधिकारिक मानें.
इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
उम्मीदवार एडमिट कार्ड पर पहले से कोई भी लिखाई न करें और उसे फाड़ें या मोड़ें नहीं, एडमिट कार्ड पर दिए गए बारकोड को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. जिन उम्मीदवारों ने आवेदन के दौरान आधार वेरिफिकेशन नहीं कराया है, उन्हें परीक्षा शुरू होने से कम से कम दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा. परीक्षा खत्म होने के बाद भी उम्मीदवारों को तय एग्जिट वेरिफिकेशन पूरा करना होगा. ऐसा नहीं करने पर उनकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - सरकारी टीचर बनने का प्लान है? पहले जान लें कौन-सा कोर्स दिलाएगा नौकरी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SSC, CGL, Exam, Admit, Card, 2026, 12, 000, पदों, पर, होने, वाली, SSC, CGL, परीक्षा, का, कब, जारी, होगा, एडमिट, कार्ड, यहां, जानिए</media:keywords>
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        <title>National Overseas Scholarship 2026 : &amp;apos;नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप&amp;apos; विदेशों में मास्टर्स और पीएचडी करने का सपना होगा पूरा, सरकार उठाएगी पढ़ाई का पूरा खर्च</title>
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        <description><![CDATA[ National Overseas Scholarship 2026 : विदेशी यूनिवर्सिटीज की हाई ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च और यात्रा पर आने वाला भारी खर्च यहां पढ़ाई करने का सपने देखने वाले लाखों भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है. ऐसे ही छात्रों की मदद के लिए केंद्र सरकार नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (National Overseas Scholarship-NOS) योजना चला रही है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 से शुरू की गई और आवेदन करने की लास्ट डेट 2 जून 2026 तय की गई थी. इस योजना के तहत पात्र छात्रों को विदेश में मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे पैसों की कमी उनकी पढ़ाई के बीच न आए.&amp;nbsp;
क्या है नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना?
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप केंद्र सरकार की एक खास योजना है. इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को विदेश की मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आर्थिक मदद देना है. यह योजना खासतौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), डीएनटी (Denotified Tribes), भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के छात्रों के लिए शुरू की गई है. इसका उद्देश्य इन वर्गों के छात्रों को भी विदेश में अच्छी पढ़ाई का मौका देना है, जिससे छात्र बेहतर शिक्षा हासिल कर अपने करियर को आगे बढ़ा सकें.&amp;nbsp;
सरकार उठाएगी पढ़ाई का पूरा खर्च&amp;nbsp;
इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों की पढ़ाई से जुड़े लगभग सभी जरूरी खर्च सरकार उठाती है. इसमें यूनिवर्सिटी की ट्यूशन फीस, रहने और खाने के लिए वार्षिक मेंटेनेंस अलाउंस, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क और आने-जाने के लिए इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा का खर्च शामिल है. &amp;nbsp;इसके अलावा छात्रों को अन्य जरूरी शैक्षणिक खर्चों के लिए भी सहायता दी जाती है. इस कारण छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और वे पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान दे सकते हैं.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना का फायदा लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की गई हैं. SC, DNT, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर श्रेणी के आवेदकों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. वहीं ST वर्ग के छात्रों के लिए यह सीमा 6 लाख रुपये प्रति वर्ष तय की गई है. इसके अलावा आवेदन करने वाले छात्र की आयु 35 वर्ष से कम होनी चाहिए. उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विदेशी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स या पीएचडी कोर्स में बिना शर्त प्रवेश पत्र होना जरूरी है. आमतौर पर दुनिया के टॉप 500 यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाने वाले छात्रों को मौका दिया जाता है.&amp;nbsp;
कितनी सीटें मिलती हैं?
इस योजना के तहत हर साल 125 सीटें उपलब्ध कराई जाती हैं. इनमें 115 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए, 6 सीटें डीएनटी वर्ग के लिए और 4 सीटें भूमिहीन कृषि मजदूरों तथा पारंपरिक कारीगरों के लिए तय हैं. इसके अलावा कुल सीटों में 30 प्रतिशत आरक्षण महिला उम्मीदवारों के लिए रखा गया है.
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स्कॉलरशिप में क्या-क्या मिलता है?
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को कई तरह की आर्थिक सहायता मिलती है. इसमें पूरी ट्यूशन फीस, लगभग 15,400 अमेरिकी डॉलर का वार्षिक मेंटेनेंस अलाउंस, वीजा शुल्क, स्वास्थ्य बीमा, विदेश आने-जाने का हवाई किराया और अन्य जरूरी शैक्षणिक खर्च शामिल हैं. &amp;nbsp;यह सहायता मास्टर्स कोर्स के लिए अधिकतम तीन वर्ष और पीएचडी के लिए अधिकतम चार वर्ष या कोर्स पूरा होने तक उपलब्ध कराई जाती है.&amp;nbsp;
आवेदन कहां करें?
SC, DNT और भूमिहीन कृषि मजदूर श्रेणी के छात्र सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MSJE) के नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं. &amp;nbsp;वहीं ST वर्ग के छात्रों को जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) के नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा. आवेदन के समय छात्रों को आधार कार्ड, श्रेणी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अंकपत्र, विदेशी यूनिवर्सिटी का बिना शर्त प्रवेश पत्र अपलोड करना होगा. वहीं पीएचडी के उम्मीदवारों को रिसर्च प्रपोजल भी जमा करना होगा. आवेदन केवल नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. मंत्रालय के अनुसार, अधूरे या तय समय के बाद किए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Heavy Rain Alert: मुंबई में सोमवार को स्कूल और कॉलेज रहेंगे बंद, BMC ने जारी किया आदेश</title>
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        <description><![CDATA[ मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश और भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ओर से सोमवार, 6 जुलाई 2026 के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ा फैसला लिया है. छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुंबई के सभी सरकारी, निजी और महानगरपालिका के स्कूलों व कॉलेजों में सोमवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है.
बीएमसी ने किया स्पष्ट
बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला खराब मौसम और संभावित भारी बारिश के मद्देनजर एहतियात के तौर पर लिया गया है, ताकि छात्रों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. हालांकि, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे, लेकिन सरकारी और निजी कार्यालय अपने तय समय के अनुसार खुले रहेंगे और सामान्य रूप से कामकाज जारी रहेगा.
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गंभीरता से लें मौसम विभाग की चेतावनी
बीएमसी प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लें. बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और भारी बारिश, जलभराव तथा तेज हवाओं को देखते हुए प्रशासन की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें. लगातार बदलते मौसम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं.
पालघर में भी लिया गया फैसला
भारतीय मौसम विभाग की ओर से 6 जुलाई को पालघर जिले के कुछ इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है. जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने जिले के सभी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में सोमवार, 6 जुलाई को अवकाश घोषित कर दिया है.
प्रशासन ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में बारिश की स्थिति सामान्य रहेगी या कम प्रभाव रहेगा, वहां के प्रधानाध्यापक स्थानीय परिस्थितियों का आकलन कर अपने स्तर पर उचित निर्णय ले सकेंगे. जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित की जा सकती हैं. जिला प्रशासन ने नागरिकों से मौसम को देखते हुए सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Vocational Courses: सिर्फ 10वीं पास और सीधे 50,000 की नौकरी! जानिए 5 न्यू&amp;एज वोकेशनल कोर्सेज के नाम</title>
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        <description><![CDATA[ Vocational Courses: आज के समय में अच्छी नौकरी पाने के लिए सिर्फ डिग्री होना ही जरूरी नहीं रहा है. बदलते जॉब मार्केट में कंपनी ऐसे युवाओं को भी ज्यादा महत्व दे रही है, जिनके पास प्रैक्टिकल स्किल्स हो. यही वजह है कि 10वीं और 12वीं के बाद वोकेशनल कोर्स करने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है. इन कोर्स की खास बात यह है कि उन्हें कम समय में पूरा किया जा सकता है और इनके जरिए सीधे नौकरी या फ्रीलांसिंग के अवसर भी मिल सकते हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि 10वीं के बाद कौन से वोकेशनल कोर्सेज करने से आपको 50,000 तक की नौकरी मिल सकती है.&amp;nbsp;
क्या होते हैं वोकेशनल कोर्स?&amp;nbsp;
वोकेशनल कोर्स आम पढ़ाई से अलग होते हैं. इनमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ज्यादा जोर दिया जाता है. छात्रों को ऐसी स्किल सिखाई जाती है, जिनकी इंडस्ट्री में सीधी मांग होती है. यही कारण है कि इन कोर्स को पूरा करने के बाद नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
5 न्यू-एज वोकेशनल कोर्सेज&amp;nbsp;
डिजिटल मार्केटिंग कोर्स&amp;nbsp;
डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है. भारत में एसईओ, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ईमेल मार्केटिंग, गूगल एड्स, कंटेंट मार्केटिंग और ऑनलाइन प्रमोशन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाती है. यह कोर्स आमतौर पर 3 से 12 महीने का होता है, इसे करने के बाद डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, एसईओ स्पेशलिस्ट या सोशल मीडिया फ्रीलांसर के रूप में काम किया जा सकता है.&amp;nbsp;
ग्राफिक डिजाइनिंग&amp;nbsp;
अगर किसी का इंटरेस्ट क्रिएटिव काम में है, तो ग्राफिक डिजाइनिंग एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. आज वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया एडवर्टाइजमेंट और ब्रांडिंग के लिए डिजाइनर की मांग लगातार बढ़ रही है. इस कोर्स में फोटोशॉप, इलस्ट्रेटर, &amp;nbsp;केनवा, लोगो डिजाइन और सोशल मीडिया पोस्ट, बैनर और यूआई-यूएक्स की बेसिक जानकारी दी जाती है. यह कोर्स लगभग 6 से 12 महीने का होता है. इसे करने के बाद शुरुआती सैलरी 15,000 से 50,000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है.&amp;nbsp;
हेल्थ केयर असिस्टेंट&amp;nbsp;
हेल्थ सेक्टर में हमेशा प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है. हॉस्पिटल, क्लिनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर लगातार स्किल्ड हेल्थकेयर स्टाफ की भर्ती करते हैं. इस कोर्स में बेसिक नर्सिंग, पेशेंट केयर, फर्स्ट एड, पैथोलॉजी टेस्टिंग और लैब डिवाइस के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाती है. इसकी अवधि 6 महीने से लेकर 2 साल तक हो सकती है. कोर्स पूरा करने के बाद हेल्थ केयर असिस्टेंट या मेडिकल लैब टेक्नीशियन के रूप में नौकरी मिल सकती है. वहीं इसमें शुरुआती सैलरी 12,000 से 30,000 रुपये तक हो सकती है.&amp;nbsp;
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सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नीशियन&amp;nbsp;
देश में ग्रीन एनर्जी और सोलर प्रोजेक्ट का तेजी से विस्तार हो रहा है. ऐसे में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित टेक्नीशियन की मांग भी लगातार बढ़ रही है. इस कोर्स में सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और एनर्जी सिस्टम की बेसिक जानकारी दी जाती है. इसकी अवधि 3 से 9 महीने होती है. कोर्स पूरा करने के बाद सोलर टेक्नीशियन, एनर्जी सिस्टम, असिस्टेंट या प्रोजेक्ट सपोर्ट स्टाफ के रूप में काम किया जा सकता है.&amp;nbsp;
फूड प्रोसेसिंग और बेकरी मैनेजमेंट&amp;nbsp;
फूड इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते बाजार के कारण इस क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. इस कोर्स में फूड सेफ्टी, बेकिंग तकनीक, पैकेजिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है. यह कोर्स 3 से 6 महीने का होता है. कोर्स पूरा करने के बाद बेकरी से फूड प्रोसेसिंग टेक्नीशियन और क्वालिटी एनालिस्ट जैसी प्रोफाइल में काम किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Vocational, Courses:, सिर्फ, 10वीं, पास, और, सीधे, 50, 000, की, नौकरी, जानिए, न्यू-एज, वोकेशनल, कोर्सेज, के, नाम</media:keywords>
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        <title>DU में 1.42 लाख से ज्यादा छात्रों ने कराया रजिस्ट्रेशन, जानें कब आएगी पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी &amp;nbsp;में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के स्नातक &amp;nbsp;दाखिले के लिए छात्रों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है. विश्वविद्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक अब तक 1,42,733 से अधिक उम्मीदवार कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) के पहले चरण में रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण की शुरुआत के बाद 43,547 से ज्यादा छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स का चयन भी कर चुके हैं.
11 जुलाई तक भर सकते हैं कॉलेज और कोर्स की पसंद
CSAS का दूसरा चरण शुरू हो चुका है. इस चरण में उम्मीदवारों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स चुनने का मौका दिया जा रहा है. छात्र 11 जुलाई 2026 की रात 11:59 बजे तक अपनी प्राथमिकताएं दर्ज कर सकते हैं.कॉलेज और कोर्स चुनने से पहले उम्मीदवारों को कक्षा 12 में पढ़े गए विषयों का CUET UG में दिए गए संबंधित विषयों से मिलान (मैपिंग) करना होगा. इसके बाद ही वे अपनी पसंद लॉक कर पाएंगे.
इस साल कितनी सीटों पर होगा एडमिशन?
इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी के 67 कॉलेजों में दाखिले होंगे. विश्वविद्यालय 73 यूजी कोर्स और 100 से ज्यादा बीए प्रोग्राम कॉम्बिनेशन में प्रवेश देगा. कुल मिलाकर 71 हजार से अधिक सीटों पर एडमिशन किया जाएगा. सभी दाखिले CUET UG 2026 के अंकों के आधार पर होंगे.हालांकि हर कोर्स के लिए तय पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी रहेगा.
12 जुलाई को दिखेगी सिम्युलेटेड रैंक
विश्वविद्यालय पहले उम्मीदवारों को उनकी संभावित स्थिति दिखाने के लिए 12 जुलाई 2026 को शाम 5 बजे सिम्युलेटेड रैंक जारी करेगा.इसके बाद छात्रों को 13 जुलाई तक अपनी कॉलेज और कोर्स प्राथमिकताओं में बदलाव करने का मौका मिलेगा. इससे उम्मीदवार अपनी पसंद को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकेंगे.
पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट कब आएगी?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की पहली सीट अलॉटमेंट सूची 16 जुलाई 2026 को जारी की जाएगी. जिन उम्मीदवारों को सीट मिलेगी, उन्हें 18 जुलाई तक उसे स्वीकार करना होगा. इसके बाद संबंधित कॉलेज 20 जुलाई तक दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे.पहले राउंड की एडमिशन फीस जमा करने की अंतिम तारीख 21 जुलाई तय की गई है.
CSAS रेजिस्ट्रेशन फीस
सामान्य, OBC-NCL और EWS के लिए&amp;nbsp; 250 रुपये और SC, ST और PwBD के लिए 100 रुपये रखी गयी है.इन सभी चरणों और तारीखों का ध्यान रखना उम्मीदवारों के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी भी निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन या प्राथमिकताओं में बदलाव का मौका नहीं मिलेगा.
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दूसरे राउंड का पूरा शेड्यूल
दूसरे राउंड की सीट अलॉटमेंट सूची 25 जुलाई 2026 को जारी होगी.इस सूची में सीट पाने वाले उम्मीदवार 26 जुलाई तक सीट स्वीकार कर सकेंगे. कॉलेज 27 जुलाई तक दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और 28 जुलाई तक एडमिशन फीस जमा करनी होगी.
28 जुलाई से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र
दिल्ली यूनिवर्सिटी का नया शैक्षणिक सत्र 28 जुलाई 2026 से शुरू होगा.एडमिशन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए छात्रों को CUET UG 2026 की आवेदन संख्या के जरिए सीएसएएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है.विश्वविद्यालय ने यह भी बताया है कि उम्मीदवारों की मूल जानकारी API Setu के माध्यम से स्वतः प्राप्त की जा रही है, जिससे डेटा एंट्री की गलतियां कम होंगी और पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक सुरक्षित और आसान बनेगी.यह भी पढ़ें - बिहार में 3,687 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती, जानें कैसे और कब तक कर सकते हैं अप्लाई? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Re NEET 2026 OMR Sheet और फाइनल आंसर की जल्द होगी जारी, कब आएगा रिजल्ट और कैसे करें डाउनलोड?</title>
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        <description><![CDATA[ Re NEET UG 2026 देने वाले लाखों उम्मीदवार OMR शीट और फाइनल आंसर की का इंतजार कर रहे हैं. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जल्द ही दोनों दस्तावेज आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर सकती है. उम्मीदवार अपनी OMR शीट लॉगिन करके देख सकेंगे, जबकि फाइनल आंसर की PDF सभी के लिए उपलब्ध होगी. इसी के आधार पर Re NEET 2026 का रिजल्ट जारी किया जाएगा.
Re NEET 2026 OMR शीट जल्द होगी जारीएनटीए ने अभी तक OMR शीट और फाइनल आंसर की जारी करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है.हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार OMR शीट 5 जुलाई 2026 के आसपास जारी हो सकती है. उम्मीदवार अपनी रिस्पॉन्स शीट देखकर यह जांच सकेंगे कि उन्होंने परीक्षा में किन प्रश्नों के क्या उत्तर दिए थे.
फाइनल आंसर की कब आएगी?
री-नीट 2026 की प्रोविजनल आंसर की 25 जून को जारी की गई थी और उम्मीदवारों से आपत्तियां मांगी गई थीं. अब इन आपत्तियों की समीक्षा के बाद एनटीए फाइनल आंसर की जारी करेगा. संभावना है कि यह जुलाई के दूसरे सप्ताह तक जारी हो सकती है. इसी फाइनल आंसर की के आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाएगा.
रिजल्ट कब जारी हो सकता है?
फाइनल आंसर की जारी होने के बाद Re NEET 2026 का रिजल्ट घोषित किया जाएगा. फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि परिणाम 20 जुलाई 2026 तक जारी किया जा सकता है. हालांकि, अंतिम तारीख की पुष्टि एनटीए की ओर से ही की जाएगी.
NEET 2026 की मार्किंग स्कीम
उम्मीदवार OMR शीट और आंसर की की मदद से अपना संभावित स्कोर भी निकाल सकते हैं.सही उत्तर पर 4 अंक मिलेंगे.गलत उत्तर पर 1 अंक काटा जाएगा.बिना उत्तर वाले प्रश्न पर कोई अंक नहीं मिलेगा और न ही कटेगा.
NEET 2026 की मार्किंग स्कीम
अगर आप अपनी OMR शीट और फाइनल आंसर की की मदद से संभावित स्कोर जानना चाहते हैं, तो आपको NEET की मार्किंग स्कीम समझनी होगी. परीक्षा में हर सही उत्तर के लिए 4 अंक दिए जाते हैं, जबकि प्रत्येक गलत उत्तर पर 1 अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है. जिन प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया जाता, उन पर न तो कोई अंक मिलता है और न ही कोई अंक काटा जाता है. इसी नियम के आधार पर उम्मीदवार अपने संभावित अंक का अनुमान लगा सकते हैं.यह भी पढ़ें - 6 Month Certification Course After 12th: सिर्फ 12वीं पास छात्रों के लिए शुरू हुआ 6 महीने का सर्टिफिकेशन कोर्स, 40000 मिलेगी पहली सैलरी
NEET 2026 क्वालिफाइंग परसेंटाइल
NEET परीक्षा पास करने के लिए केवल अंक ही नहीं, बल्कि न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल भी हासिल करना जरूरी होता है. सामान्य (UR) और EWS वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 50वां परसेंटाइल निर्धारित है.वहीं OBC, SC और ST वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 40वां परसेंटाइल आवश्यक है. सामान्य वर्ग के PwD उम्मीदवारों को 45वां परसेंटाइल, जबकि OBC, SC और ST वर्ग के PwD उम्मीदवारों को 40वां परसेंटाइल प्राप्त करना होगा.
OMR शीट कैसे डाउनलोड करें?
स्टेप 1: सबसे पहले NEET की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं.स्टेप 2: होम पेज पर Re NEET 2026 OMR Sheet लिंक पर क्लिक करें.स्टेप 3: अपना Application Number, Password और Captcha Code दर्ज करके लॉगिन करें.स्टेप 4: लॉगिन के बाद आपकी OMR Response Sheet स्क्रीन पर दिखाई देगी.स्टेप 5: इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए PDF सेव कर लें.
Final Answer Key कैसे डाउनलोड करें?
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, OMR, Sheet, और, फाइनल, आंसर, की, जल्द, होगी, जारी, कब, आएगा, रिजल्ट, और, कैसे, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>रटने की बीमारी से मिलेगी मुक्ति, इस तरीके से बच्चों को 4 गुना ज्यादा समय तक याद रहेगा सिलेबस</title>
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        <description><![CDATA[ परीक्षा का समय आते ही ज्यादातर बच्चे किताबों को बार-बार पढ़कर उन्हें याद करने की कोशिश करते हैं. कई छात्र घंटों तक रटाई करते हैं, लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ दिनों बाद ही सब कुछ भूल जाते हैं.शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रटने की आदत लंबे समय तक याद रखने में मदद नहीं करती है. अगर पढ़ाई को सही तरीके से समझकर किया जाए और कुछ आसान तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो वही जानकारी लंबे समय तक दिमाग में बनी रहती है.
आखिर क्या है रटकर पढ़ाई करना?
रटकर पढ़ाई करने का मतलब है किसी जानकारी को उसका मतलब समझे बिना बार-बार दोहराना है.जैसे कई बच्चे गणित के पहाड़े, परिभाषाएं या सामान्य ज्ञान के सवाल सिर्फ याद कर लेते हैं, लेकिन उनका उपयोग कब और कैसे करना है, यह नहीं समझ पाते. इस वजह से परीक्षा के बाद ऐसी जानकारी जल्दी भूल जाती है.समझकर पढ़ना क्यों है ज्यादा असरदार?
जब कोई छात्र किसी विषय को समझकर पढ़ता है, तो उसका दिमाग उस जानकारी को पहले से मौजूद ज्ञान से जोड़ देता है.इससे पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहता है और जरूरत पड़ने पर आसानी से याद भी आ जाता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ केवल रटने की बजाय समझने पर ज्यादा जोर देते हैं.
पढ़ाई लंबे समय तक याद रखने के 5 आसान तरीके

पूरे अध्याय को एक साथ याद करने की बजाय उसे छोटे-छोटे भागों में बांटकर पढ़ें. इससे दिमाग पर कम दबाव पड़ता है और हर विषय को आसानी से याद रखा जा सकता है.
अगर किसी कठिन विषय को किसी कहानी, रोजमर्रा की घटना या अपने अनुभव से जोड़कर पढ़ेंगे, तो उसे याद रखना काफी आसान हो जाएगा.इस तरीके से दिमाग जानकारी को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखता है.
किसी भी विषय को पढ़ने के बाद उसे अपनी भाषा में जोर से बोलकर दोहराएं. ऐसा करने से याददाश्त मजबूत होती है और यह पता भी चल जाता है कि कौन-सा हिस्सा अभी पूरी तरह समझ में नहीं आया है.
जरूरी पॉइंट्स को अलग-अलग रंगों से हाईलाइट करें या चार्ट और माइंड मैप बनाएं. रंग और चित्र दिमाग को जानकारी जल्दी याद रखने में मदद करते हैं और पढ़ाई भी दिलचस्प बन जाती है.
&amp;nbsp;एक बार पढ़कर छोड़ देने की बजाय समय-समय पर उसी विषय को दोहराते रहें. अगर पहले दिन, फिर दो दिन बाद और उसके बाद एक सप्ताह में दोहराव किया जाए, तो जानकारी लंबे समय तक याद रहती है.यह भी पढ़ें - Free Tech Courses: महंगे इंस्टिट्यूट को फीस दिए बिना बच्चा कैसे बनेगा टेक-एक्सपर्ट? देखें फ्री वेबसाइट्स की लिस्ट

सिर्फ याद करना नहीं, समझना भी जरूरी
आज की पढ़ाई में केवल सवाल याद कर लेना काफी नहीं है. प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल के नए पैटर्न में ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें समझ और तर्क की जरूरत होती है. इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही समझकर पढ़ने की आदत डालनी चाहिए.इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे किसी भी सवाल का जवाब आसानी से दे पाते हैं.
माता-पिता और शिक्षकों की भी अहम भूमिका
बच्चों पर सिर्फ ज्यादा पढ़ने का दबाव बनाने की बजाय उन्हें सही तरीके से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. माता-पिता और शिक्षक अगर बच्चों को उदाहरण देकर समझाएं, सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें और नियमित अभ्यास करवाएं, तो पढ़ाई ज्यादा प्रभावी बन सकती है. इससे बच्चों में सीखने की रुचि भी बढ़ती है और उनका प्रदर्शन बेहतर होता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रटने, की, बीमारी, से, मिलेगी, मुक्ति, इस, तरीके, से, बच्चों, को, गुना, ज्यादा, समय, तक, याद, रहेगा, सिलेबस</media:keywords>
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        <title>Jobs 2026 : कोडिंग हुई पुरानी! 2026 में नौकरियों की गारंटी देने वाली हैं ये डिग्रियां, करना भी बेहद आसान</title>
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        <description><![CDATA[ Jobs 2026 : कुछ साल पहले तक लोगों का मानना था कि एक अच्छा करियर बनाना है तो कोडिंग सीखकर सॉफ्टवेयर डेवलपर बनना ही सबसे अच्छा रास्ता है, लेकिन अब टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि सिर्फ एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीख लेने से लंबा करियर सुरक्षित नहीं रह जाता है. आज जो स्किल सबसे ज्यादा डिमांड में है. वो अगले दो-तीन साल में उसकी जगह कोई नई टेक्नोलॉजी ले सकता है. यही वजह है कि अब स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स ऐसी स्पेशलाइजेशन ढूंढ रहे हैं जो आने वाले कई सालों तक नौकरी के अच्छे मौके देती रहें.
अगर सही स्पेशलाइजेशन चुन लिया जाए तो करियर मजबूत बन सकता है, लेकिन अगर बिना सोचे-समझे फैसला लिया जाए तो चार साल की मेहनत के बाद भी अच्छी नौकरी मिलने में मुश्किल आ सकती है. अगर आप भी 2026 में कोडिंग की शुरू करने की सोच रहे हैं या फ्यूचर को लेकर सही फैसला लेना चाहते हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि 2026 में नौकरियों की गारंटी देने वाली डिग्रियां कौन सी हैं.&amp;nbsp;
2026 में नौकरियों की गारंटी देने वाली डिग्रियां कौन सी हैं?
1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) - आज के समय में AI और Machine Learning सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. चैटबॉट, सेल्फ-ड्राइविंग कार और स्मार्ट रोबोट जैसी तकनीकें आज करियर का अच्छा ऑप्शन बन चुकी हैं. इस स्पेशलाइजेशन में छात्रों को यह सिखाया जाता है कि मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और फैसले लेने के लिए कैसे तैयार किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ सालों में लगभग हर छोटी-बड़ी कंपनी अपने कामकाज में AI का इस्तेमाल करेगी. ऐसे में AI Engineer, AI Researcher और Data Modeler जैसे प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बनी रहने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
2. साइबर सिक्योरिटी और एथिकल हैकिंग - जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी और हैकिंग के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. आज किसी भी बैंक, सरकारी विभाग या निजी कंपनी के लिए उसका डेटा सबसे कीमती संपत्ति माना जाता है.साइबर सिक्योरिटी और एथिकल हैकिंग की पढ़ाई करने वाले प्रोफेशनल्स का मुख्य काम इसी डेटा को सुरक्षित रखना होता है. हालांकि AI का इस्तेमाल सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ रहा हो, लेकिन हैकर्स से मुकाबला करने और सही समय पर सही फैसला लेने के लिए इंसानी समझ और एक्सपीरियंस की जरूरत हमेशा बनी रहेगी.&amp;nbsp;
3. डेटा साइंस और बिग डेटा एनालिटिक्स - आज के दौर में डेटा को नई दुनिया का सबसे कीमती संसाधन माना जाता है. इंटरनेट पर आप क्या सर्च करते हैं, क्या खरीदते हैं और कौन-सी वेबसाइट देखते हैं, यह सब डेटा का हिस्सा होता है. कंपनियां इसी जानकारी का विश्लेषण करके अपनी बिजनेस रणनीति तैयार करती हैं. डेटा साइंस और बिग डेटा एनालिटिक्स की पढ़ाई में छात्रों को बड़े-बड़े डेटा को समझना, उनका विश्लेषण करना और उनमें से काम की जानकारी निकालना सिखाया जाता है. जब तक इंटरनेट का इस्तेमाल होता रहेगा, तब तक डेटा बनता रहेगा. इसलिए डेटा साइंटिस्ट और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े प्रोफेशनल्स की जरूरत भी लगातार बनी रहने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
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4. क्लाउड कंप्यूटिंग और DevOps - आज के समय में ज्यादातर डेटा कंप्यूटर या पेन ड्राइव में सेव नहीं किया जाता है. फिल्मों की स्ट्रीमिंग से लेकर ऑफिस के काम तक, ज्यादातर सेवाएं अब क्लाउड सर्वर पर चलती हैं. क्लाउड कंप्यूटिंग और DevOps की पढ़ाई में यह सिखाया जाता है कि सॉफ्टवेयर को बेहतर तरीके से कैसे तैयार किया जाए और उसके पूरे सिस्टम को ऑटोमेटेड तरीके से कैसे चलाया जाए. Amazon AWS, Microsoft Azure और Google Cloud जैसी क्लाउड सेवाओं के विस्तार के कारण इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं.&amp;nbsp;
5. &amp;nbsp;ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी - ज्यादातर लोग ब्लॉकचेन को केवल बिटकॉइन या क्रिप्टोकरेंसी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जो डिजिटल ट्रांजैक्शन को ज्यादा सुरक्षित और साफ बनाती है. आने वाले समय में बैंकिंग, हेल्थकेयर, सप्लाई चेन और वोटिंग सिस्टम जैसे कई क्षेत्रों में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होने की संभावना है. इसी वजह से Blockchain Developer और Blockchain Architect जैसे प्रोफेशनल्स की मांग और सैलरी दोनों बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - भारत के तटीय सफर में बना नया रिकॉर्ड, श्रेयांश मित्तल ने अकेले बाइक से तय की ईस्ट-टू-वेस्ट यात्रा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jobs, 2026, कोडिंग, हुई, पुरानी, 2026, में, नौकरियों, की, गारंटी, देने, वाली, हैं, ये, डिग्रियां, करना, भी, बेहद, आसान</media:keywords>
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        <title>भारत के तटीय सफर में बना नया रिकॉर्ड, श्रेयांश मित्तल ने अकेले बाइक से तय की ईस्ट&amp;टू&amp;वेस्ट यात्रा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-के-तटीय-सफर-में-बना-नया-रिकॉर्ड-श्रेयांश-मित्तल-ने-अकेले-बाइक-से-तय-की-ईस्ट-टू-वेस्ट-यात्रा</link>
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        <description><![CDATA[ देश के युवा बाइक राइडर श्रेयांश मित्तल ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है. श्रेयांश ने भारत के पूर्वी तट (East Coast) से पश्चिमी तट (West Coast) तक अकेले मोटरसाइकिल से सबसे तेज यात्रा पूरी कर नया रिकॉर्ड बनाया है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है.
रिकॉर्ड के अनुसार, श्रेयांश मित्तल ने 30 मार्च 2026 को सुबह 5:45 बजे ओडिशा के दीघा, पुरी, विशाखापट्टनम, चेन्नई, पुडुचेरी, रामेश्वरम, कन्याकुमारी और कोच्चि जैसे प्रमुख तटीय शहरों से गुजरते हुए अपनी यात्रा शुरू की. उन्होंने पूरे सफर के दौरान भारत के समुद्री तट के किनारे स्थित प्रमुख मार्गों पर लगातार मोटरसाइकिल चलाई.
लगातार कई दिनों तक चले इस अभियान के बाद श्रेयांश 5 अप्रैल 2026 को शाम 6:35 बजे गुजरात के कोटेश्वर (पश्चिमी तट) पहुंचे और अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की. इस दौरान उन्होंने कुल 6,616.6 किलोमीटर की दूरी तय की. यह पूरा सफर उन्होंने 6 दिन, 12 घंटे और 50 मिनट में पूरा किया, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है.
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह उपलब्धि भारत के पूर्वी तट से पश्चिमी तट तक अकेले मोटरसाइकिल से सबसे तेज अभियान (Fastest Individual to Complete a Solo Motorcycle Expedition from East Coast to West Coast of India) के रूप में दर्ज की गई है. रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि 14 मई 2026 को की गई, जबकि प्रमाण पत्र 12 जून 2026 को जारी किया गया.
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चुनौतियों का करना पड़ा सामना&amp;nbsp;
श्रेयांश मित्तल का यह अभियान केवल एक रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं था. हजारों किलोमीटर की इस यात्रा में उन्हें अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों, मौसम और सड़क मार्गों की चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने निर्धारित समय के अंदर अपनी मंजिल तक पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की.
एडवेंचर प्रेमियों के बीच चर्चा
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा जारी प्रमाण पत्र में इस उपलब्धि का खास उल्लेख किया गया है और इसे आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया है. इस सम्मान के बाद श्रेयांश मित्तल की उपलब्धि बाइकिंग समुदाय और एडवेंचर प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>भारत, के, तटीय, सफर, में, बना, नया, रिकॉर्ड, श्रेयांश, मित्तल, ने, अकेले, बाइक, से, तय, की, ईस्ट-टू-वेस्ट, यात्रा</media:keywords>
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        <title>राम मंदिर में कैसे मिलती है काउंटिंग कर्मचारी की नौकरी, जानिए कैसे होता है इसमें सेलेक्शन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राम-मंदिर-में-कैसे-मिलती-है-काउंटिंग-कर्मचारी-की-नौकरी-जानिए-कैसे-होता-है-इसमें-सेलेक्शन</link>
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        <description><![CDATA[ अयोध्या में चढ़ावे की चोरी को लेकर फिलहाल मामला काफी तूल पकड़े हुए है. साथ ही राम मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं मंदिर में काउंटिंग कर्मचारी या अन्य स्टाफ की भर्ती कैसे होती है.&amp;nbsp;
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गिनती एक बेहद जिम्मेदारी वाला काम माना जाता है. इस काम में लगे कर्मचारी तय नियमों के तहत दान राशि की गिनती करते हैं, उसका रिकॉर्ड तैयार करते हैं और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करते हैं. सुरक्षा और गोपनीयता को देखते हुए यह काम निगरानी में कराया जाता है और कई स्तरों पर इसकी जांच भी होती है.
रिपोर्ट्स के अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अलग से हर बार काउंटिंग कर्मचारी नाम से भर्ती जारी नहीं करता है. जरूरत के अनुसार प्रशासनिक, अकाउंटेंट, कार्यालय सहायक, सपोर्ट स्टाफ या अन्य संबंधित पदों के लिए भर्ती निकाली जाती है. यदि चढ़ावे की गिनती के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, तो संबंधित विभाग के माध्यम से नियुक्ति की जाती है. इसलिए उम्मीदवारों को केवल ट्रस्ट की आधिकारिक भर्ती सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए.
कैसे होता है चयन?
आवेदन मिलने के बाद सबसे पहले उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की जाती है. इसके बाद जरूरत के अनुसार लिखित परीक्षा, स्किल टेस्ट या इंटरव्यू आयोजित किया जा सकता है. अंतिम चयन से पहले दस्तावेजों की जांच और पुलिस चरित्र सत्यापन भी कराया जाता है. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही नियुक्ति दी जाती है.
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भर्ती की सूचना कहां जारी होती है?
जब भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को किसी पद के लिए कर्मचारियों की जरूरत होती है, तो भर्ती की जानकारी ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट और उसके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी की जाती है. इसलिए उम्मीदवारों को किसी भी अनजान वेबसाइट, एजेंट या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक सूचना का ही इंतजार करना चाहिए.
कौन कर सकता है आवेदन?
पद के अनुसार योग्यता अलग-अलग हो सकती है.यदि काम अकाउंटिंग या रिकॉर्ड से जुड़ा है, तो कॉमर्स, अकाउंट्स या संबंधित विषय में ग्रेजुएशन रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिल सकती है. कंप्यूटर का सामान्य ज्ञान, रिकॉर्ड संभालने की क्षमता और ईमानदारी जैसे गुण भी होने चाहिए. कुछ पदों पर अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को भी प्राथमिकता दी जा सकती है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;पंचायत सचिव बनने के लिए कौन सा एग्जाम देना होता है, कितनी मिलती है इनको सैलरी? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राम, मंदिर, में, कैसे, मिलती, है, काउंटिंग, कर्मचारी, की, नौकरी, जानिए, कैसे, होता, है, इसमें, सेलेक्शन</media:keywords>
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        <title>Free Tech Courses: महंगे इंस्टिट्यूट को फीस दिए बिना बच्चा कैसे बनेगा टेक&amp;एक्सपर्ट? देखें फ्री वेबसाइट्स की लिस्ट</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/free-tech-courses-महंगे-इंस्टिट्यूट-को-फीस-दिए-बिना-बच्चा-कैसे-बनेगा-टेक-एक्सपर्ट-देखें-फ्री-वेबसाइट्स-की-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ Free Tech Courses: आज के दौर में एक अच्छी नौकरी पाने के लिए टेक्नोलॉजी से जुड़ी स्किल्स की मांग लगातार बढ़ रही है. नौकरी के अलावा करियर बदलना हो,खुद को अपग्रेड करना हो, हर सेक्टर में स्किल की अहमियत पहले से बहुत ज्यादा बढ़ गई है. ऐसे में कई छात्र और प्रोफेशनल्स महंगे कोर्स और ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की फीस नहीं भर पाते. हालांकि अब इंटरनेट ने सीखने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. आज कई ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां बिना फीस दिए भी प्रोग्रामिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, वेब डेवलपमेंट और डेटा साइंस जैसे सब्जेक्ट सीखे जा सकते हैं.
वहीं इन प्लेटफॉर्म की खास बात यह होती है कि इनमें कई वेबसाइट पर शुरुआत से लेकर एडवांस लेवल तक के कोर्स उपलब्ध है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि महंगे इंस्टीट्यूट को बिना फीस दिए आपका बच्चा टेक एक्सपर्ट्स कैसे बन सकता है और फ्री की वेबसाइट कौन सी है, जिससे बच्चा नई स्किल सीख सकता है&amp;nbsp;
यह है फ्री टेक कोर्स सीखने के प्लेटफाॅर्म&amp;nbsp;
freeCodeCamp
अगर कोई छात्र कोडिंग सीखना चाहता है तो freeCodeCamp सबसे पॉपुलर प्लेटफार्म में से एक माना जाता है. यहां वेब डेवलपमेंट, बैंक एंड डेवलपमेंट, डेटा विजुअलाइजेशन और एल्गोरिथम जैसे सब्जेक्ट पर हजारों प्रैक्टिकल एक्सरसाइज उपलब्ध है. यहां सीखने के साथ-साथ प्रोजेक्ट बनाने का मौका भी मिलता है और कई कोर्स पूरे करने पर सर्टिफिकेट भी दिए जाते हैं.&amp;nbsp;
Coursera&amp;nbsp;
Coursera &amp;nbsp;दुनिया के कई बड़े यूनिवर्सिटीज और टेक कंपनियों के कोर्स उपलब्ध कराता है. यहां कई कोर्स ऑडिट मोड में मुफ्त देखे जा सकते हैं. वीडियो लेक्चर और स्टडी मैटेरियल फ्री में उपलब्ध रहते हैं, जबकि सर्टिफिकेट के लिए फीस देना पड़ सकता है. इस प्लेटफॉर्म पर एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा साइंस, प्रोग्रामिंग और कई दूसरे सब्जेक्ट के कोर्स मौजूद हैं.&amp;nbsp;
Microsoft learn
माइक्रोसॉफ्ट के अलग-अलग प्रोडक्ट और क्लाउड टेक्नोलॉजी सीखने वालों के लिए Microsoft learn एक उपयोगी प्लेटफार्म है. यहां Azure, AI, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कई दूसरे सब्जेक्ट पर इंटरैक्टिव मॉड्यूल उपलब्ध है. कई कोर्स पूरी तरह सेल्फ पेस्ड है, यानी छात्र अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं.&amp;nbsp;
MIT Open courseWare&amp;nbsp;
MIT Open courseWare के जरिए मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने अपने हजारों कोर्स की स्टडी मैटेरियल मुफ्त उपलब्ध कराई है. इसमें वीडियो लेक्चर, असाइनमेंट, नोट्स और रेफरेंस मैटेरियल शामिल है. यह प्लेटफार्म उन छात्रों के लिए उपयोगी है, जो गहराई से हर विषय को समझना चाहते हैं.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-बिहार बोर्ड की नई पहल! JEE-NEET की फ्री कोचिंग के लिए शिक्षकों की भर्ती शुरू, 10 जुलाई तक करें आवेदन
Udemy
Udemy पर शुरुआत से लेकर एडवांस लेवल तक के हजारों टेक कोर्स उपलब्ध है] हालांकि अधिकांश कोर्स पैड है, लेकिन कई मुफ्त कोर्स भी उपलब्ध है. यहां वेब डेवलपमेंट, प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस और दूसरे टेक्निकल विषयों पर ट्रेनिंग ली जा सकती है.&amp;nbsp;
Udacity
Udacity पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और प्रोडक्ट मैनेजमेंट जैसे विषयों के कोर्स उपलब्ध है. कई शुरूआती कोर्स फ्री है, जबकि सर्टिफिकेट के लिए कुछ स्पेशल प्रोग्राम के लिए फीस देनी पड़ सकती है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Free, Tech, Courses:, महंगे, इंस्टिट्यूट, को, फीस, दिए, बिना, बच्चा, कैसे, बनेगा, टेक-एक्सपर्ट, देखें, फ्री, वेबसाइट्स, की, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>6 Month Certification Course After 12th: सिर्फ 12वीं पास छात्रों के लिए शुरू हुआ 6 महीने का सर्टिफिकेशन कोर्स, 40000 मिलेगी पहली सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ 6 Month Certification Course After 12th: कॉलेज की लंबी पढ़ाई हर छात्र के लिए आसान नहीं होती है. कई छात्र ऐसे होते हैं जो 12वीं के बाद जल्दी नौकरी करना चाहते हैं, जिससे अपने करियर की शुरुआत कर सकें और आर्थिक रूप से भी मजबूत बन सकें. ऐसे छात्रों के लिए अब 6 महीने के सर्टिफिकेशन और डिप्लोमा कोर्स एक अच्छा ऑप्शन बनकर सामने आए हैं. इन कोर्सों में पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री में काम आने वाली प्रैक्टिकल स्किल्स भी सिखाई जाती हैं. यही वजह है कि कई कंपनियां ऐसे छात्रों को नौकरी देने में ज्यादा इंटरेस्ट दिखाती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सिर्फ 12वीं के बाद कौन-से 6 महीने के सर्टिफिकेशन कोर्स किए जा सकते हैं और किस कोर्स के बाद कितनी शुरुआती सैलरी 40000 मिल सकती है.&amp;nbsp;
6 महीने का सर्टिफिकेशन या डिप्लोमा कोर्स क्या होता है?
6 महीने के सर्टिफिकेशन या डिप्लोमा कोर्स ऐसे प्रोफेशनल कोर्स होते हैं, जिनका उद्देश्य किसी एक खास स्किल में ट्रेनिंग देना होता है. इनमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल सीखने पर ज्यादा जोर दिया जाता है. यही कारण है कि कोर्स पूरा करने के बाद छात्र सीधे नौकरी के लिए तैयार माने जाते हैं. कई कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को इसलिए भी प्राथमिकता देती हैं क्योंकि उन्हें अलग से ज्यादा ट्रेनिंग देने की जरूरत नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
सिर्फ 12वीं के बाद कौन-से 6 महीने के सर्टिफिकेशन कोर्स किए जा सकते हैं?
1. डिजिटल मार्केटिंग - डिजिटल मार्केटिंग आज के समय में सबसे ज्यादा डिमांड वाले प्रोफेशनल कोर्स में गिना जाता है. इस 6 महीने के सर्टिफिकेशन कोर्स में छात्रों को SEO, Google Ads, सोशल मीडिया मार्केटिंग, कंटेंट मार्केटिंग और ईमेल मार्केटिंग जैसी जरूरी स्किल्स सिखाई जाती हैं. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र डिजिटल मार्केटर, SEO एक्सपर्ट, सोशल मीडिया मैनेजर या PPC स्पेशलिस्ट जैसी प्रोफाइल पर काम कर सकते हैं. इस फील्ड में शुरुआती सैलरी करीब 20,000 से 40,000 प्रति माह तक हो सकती है.&amp;nbsp;
2. ग्राफिक डिजाइनिंग - अगर किसी छात्र का इंटरेस्ट डिजाइनिंग और क्रिएटिव काम में है, तो ग्राफिक डिजाइनिंग का सर्टिफिकेशन कोर्स अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इस कोर्स में Adobe Photoshop, Illustrator, CorelDRAW, ब्रांडिंग और लेआउट डिजाइन जैसी स्किल्स सिखाई जाती हैं. इसके बाद छात्र ग्राफिक डिजाइनर, UI/UX डिजाइनर, विजुअल डिजाइनर या फ्रीलांसर के रूप में करियर शुरू कर सकते हैं. इस क्षेत्र में शुरुआती सैलरी 20,000 से 35,000 प्रतिमाह तक मिल सकती है. &amp;nbsp;
3. वेब डिजाइनिंग - वेब डिजाइनिंग कोर्स उन छात्रों के लिए उपयोगी है जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं. इसमें HTML, CSS, JavaScript और WordPress जैसे प्लेटफॉर्म पर वेबसाइट बनाना और उसे मैनेज करना सिखाया जाता है. कोर्स पूरा करने के बाद वेब डिजाइनर, फ्रंट-एंड डेवलपर या वर्डप्रेस डेवलपर जैसी नौकरियों के अवसर मिल सकते हैं. इस फील्ड में शुरुआती सैलरी 25,000 से 40,000 प्रति माह तक हो सकती है.&amp;nbsp;
4. ऑफिस मैनेजमेंट और डेटा एंट्री (DCA) - जो छात्र कम समय में किसी ऑफिस या संस्थान में नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए ऑफिस मैनेजमेंट और डेटा एंट्री (DCA) का कोर्स अच्छा ऑप्शन है. इसमें MS Office, Excel, इंटरनेट एप्लिकेशन और डेटा एंट्री से जुड़ी स्किल्स सिखाई जाती हैं. कोर्स पूरा करने के बाद डेटा एंट्री ऑपरेटर, ऑफिस असिस्टेंट और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसी नौकरियों के अवसर मिलते हैं. इस क्षेत्र में शुरुआती सैलरी 15,000 से 25,000 प्रति माह तक हो सकती है.&amp;nbsp;
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5. हॉस्पिटैलिटी और होटल मैनेजमेंट - हॉस्पिटैलिटी और होटल मैनेजमेंट का यह शॉर्ट-टर्म कोर्स होटल और सर्विस इंडस्ट्री में करियर बनाने के छात्रों के लिए परफेक्ट है. इसमें फ्रंट ऑफिस, हाउसकीपिंग, फूड एंड बेवरेज सर्विस और कस्टमर सर्विस से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र होटल फ्रंट ऑफिस, हॉस्पिटैलिटी एग्जीक्यूटिव, एयरलाइंस ग्राउंड स्टाफ या कस्टमर सर्विस जैसी प्रोफाइल पर काम कर सकते है. शुरुआती सैलरी 18,000 से 30,000 प्रति माह तक हो सकती है.&amp;nbsp;
6. योग और फिटनेस इंस्ट्रक्टर - फिटनेस और हेल्थ सेक्टर में इंटरेस्ट रखने वाले छात्रों के लिए योग और फिटनेस इंस्ट्रक्टर का सर्टिफिकेशन कोर्स अच्छा ऑप्शन है. इसमें योगासन, प्राणायाम, डाइट प्लानिंग, एनाटॉमी और मेडिटेशन की ट्रेनिंग दी जाती है. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र योग प्रशिक्षक, जिम ट्रेनर या पर्सनल फिटनेस ट्रेनर के रूप में काम कर सकते हैं. इस क्षेत्र में शुरुआती सैलरी 15,000 से 30,000 प्रति माह तक मिल सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;क्या 6 महीने के कोर्स के बाद 40,000 की नौकरी मिल सकती है?
कुछ कोर्स जैसे डिजिटल मार्केटिंग, वेब डेवलपमेंट और वेब डिजाइनिंग में शुरुआती सैलरी 20,000 से 40,000 प्रति माह तक हो सकती है. हालांकि हर छात्र को शुरुआत में 40,000 की नौकरी मिले, ऐसा जरूरी नहीं है. शुरुआती वेतन संस्थान, स्किल, शहर और कंपनी के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. एक्सपीरियंस बढ़ने और नई स्किल सीखने के बाद सैलरी में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Month, Certification, Course, After, 12th:, सिर्फ, 12वीं, पास, छात्रों, के, लिए, शुरू, हुआ, महीने, का, सर्टिफिकेशन, कोर्स, 40000, मिलेगी, पहली, सैलरी</media:keywords>
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        <title>बिहार में 3,687 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती, जानें कैसे और कब तक कर सकते हैं अप्लाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बिहार-में-3687-असिस्टेंट-प्रोफेसर-पदों-पर-भर्ती-जानें-कैसे-और-कब-तक-कर-सकते-हैं-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है. बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने विभिन्न विश्वविद्यालयों में 3,687 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इच्छुक और पात्र उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आयोग के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तय की गई है.
यह भर्ती राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से की जा रही है. उम्मीदवारों का चयन शैक्षणिक उपलब्धियों और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेरिट सूची जारी की जाएगी और सफल अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालयों में नियुक्ति दी जाएगी.
कुल कितने पद भरे जाएंगे?
इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 3,687 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी. विभिन्न विषयों के अनुसार पदों का वितरण आयोग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है.
आवेदन के लिए पात्रता
शैक्षणिक योग्यता के तहत अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर (Post Graduation) की डिग्री होना अनिवार्य है. इसके अलावा उम्मीदवार को यूजीसी-नेट (UGC NET) या सीएसआईआर-नेट (CSIR NET) परीक्षा उत्तीर्ण होना भी आवश्यक है.&amp;nbsp;
उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 43 वर्ष निर्धारित की गई है.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया
इस भर्ती में किसी लिखित परीक्षा का प्रावधान नहीं रखा गया है. उम्मीदवारों का चयन शैक्षणिक प्रदर्शन और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. दोनों चरणों में प्राप्त अंकों के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार होगी.
इंटरव्यू में शामिल होने के लिए आयोग निर्धारित समय से पहले एडमिट कार्ड जारी करेगा. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट और पोर्टल पर अपडेट देखते रहें.
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आवेदन कैसे करें?
उम्मीदवारों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा. आवेदन केवल समर्थ (Samarth) पोर्टल के जरिए स्वीकार किए जाएंगे. आवेदन पत्र भरने से पहले उम्मीदवारों को सभी आवश्यक दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए. आवेदन जमा करने के बाद उसका प्रिंटआउट रख लें.
ये हैं जरूरी डेट्स
भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन 3 जुलाई 2026 से शुरू हो चुके हैं. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 है. इसके बाद 20 से 27 जुलाई 2026 के बीच वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे. आयोग 29 जुलाई 2026 को मेरिट सूची जारी करेगा. अंतिम आवंटन 1 अगस्त 2026 को किया जाएगा, जबकि चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति 7 अगस्त 2026 से शुरू होगी.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिहार, में, 3, 687, असिस्टेंट, प्रोफेसर, पदों, पर, भर्ती, जानें, कैसे, और, कब, तक, कर, सकते, हैं, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द, 6 लाख से ज्यादा छात्रों को इंतजार  </title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Class 10 Second Board Result 2026: सीबीएसई की 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार CBSE Class 10 Second Board Exam 2026 का रिजल्ट किसी भी समय जारी किया जा सकता है. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोर ऑनलाइन चेक कर सकेंगे और डिजिटल मार्कशीट भी डाउनलोड कर पाएंगे.
इस साल सेकेंड बोर्ड परीक्षा का आयोजन 15 मई से 21 मई 2026 के बीच किया गया था. इस परीक्षा में वे छात्र शामिल हुए थे जो अपने अंक बेहतर करना चाहते थे या फिर कंपार्टमेंट परीक्षा दे रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार 6.68 लाख से अधिक छात्रों ने सेकेंड बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया है. ऐसे में लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की नजरें रिजल्ट पर टिकी हुई हैं.
इन वेबसाइट्स पर मिलेगा रिजल्ट
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे. इसके अलावा डिजिटल मार्कशीट DigiLocker और UMANG ऐप पर भी उपलब्ध कराई जाएगी.
कहां-कहां देख सकेंगे नतीजे?
cbse.gov.incbseresults.nic.inresults.cbse.nic.inDigiLockerUMANG App
रिजल्ट चेक करने के लिए क्या-क्या चाहिए होगा?
रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को कुछ जरूरी जानकारी अपने पास रखनी होगी. इनमें मुख्य रूप से:

रोल नंबर
स्कूल नंबर
एडमिट कार्ड आईडी
जन्मतिथि (जहां आवश्यक हो)

इन विवरणों की मदद से छात्र अपने अंक ऑनलाइन देख सकेंगे.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;अब पढ़ाई के लिए नहीं होगी पैसों की चिंता, बिन गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन, जानें कैसे करें आवेदन?
ऐसे डाउनलोड कर सकेंगे स्कोरकार्ड
रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. वहां होमपेज पर दिखाई देने वाले CBSE Class 10 Second Board Result 2026 लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी भरें. सबमिट करते ही आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा. भविष्य के उपयोग के लिए स्कोरकार्ड डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं.
मार्कशीट में क्या-क्या जानकारी होगी?
ऑनलाइन उपलब्ध होने वाली मार्कशीट में छात्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी. इनमें उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, जन्मतिथि, विषयवार अंक, प्राप्त ग्रेड, कुल अंक और रिजल्ट स्टेटस जैसी जानकारी शामिल रहने की संभावना है.
DigiLocker और UMANG भी बनेंगे सहारा
अगर रिजल्ट के समय वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक के कारण परेशानी आती है, तो छात्र DigiLocker और UMANG जैसे वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर रखी जा सकती है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, 10वीं, सेकेंड, बोर्ड, परीक्षा, 2026, का, रिजल्ट, जल्द, लाख, से, ज्यादा, छात्रों, को, इंतजार</media:keywords>
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    <item>
        <title>पंचायत सचिव बनने के लिए कौन सा एग्जाम देना होता है, कितनी मिलती है इनको सैलरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पंचायत-सचिव-बनने-के-लिए-कौन-सा-एग्जाम-देना-होता-है-कितनी-मिलती-है-इनको-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और गांव में रहकर प्रशासनिक काम करने की इच्छा रखते हैं, तो पंचायत सचिव का पद आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. यह नौकरी राज्य सरकार के अधीन होती है और अलग-अलग राज्यों में इसकी भर्ती संबंधित कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जाती है. इस पद पर चयन होने के बाद अच्छी सैलरी के साथ सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं.
सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि पंचायत सचिव की भर्ती पूरे देश में एक जैसी नहीं होती. हर राज्य अपने नियमों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया तय करता है. जैसे बिहार में भर्ती बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) कराता है. झारखंड में यह जिम्मेदारी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की होती है, जबकि हरियाणा में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ग्राम सचिव के पदों पर भर्ती करता है. मध्य प्रदेश में कुछ भर्तियां परीक्षा के जरिए होती हैं, जबकि कुछ मामलों में मेरिट और अनुभव को भी आधार बनाया जाता है.
कैसी होती है चयन प्रक्रिया?
अधिकांश राज्यों में उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा देनी होती है. कई राज्यों में पहले प्रारंभिक (Prelims) और फिर मुख्य (Mains) परीक्षा आयोजित की जाती है. दोनों चरण सफलतापूर्वक पास करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच (Document Verification) की जाती है. इसके बाद अंतिम मेरिट के आधार पर नियुक्ति दी जाती है.
कौन कर सकता है आवेदन?
पंचायत सचिव बनने के लिए आमतौर पर किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) होना जरूरी है. हालांकि कुछ राज्यों में 12वीं पास उम्मीदवारों को भी आवेदन का मौका दिया जाता है. इसके अलावा कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान भी जरूरी माना जाता है. कई राज्यों में CCC, CPCT या किसी मान्यता प्राप्त कंप्यूटर कोर्स का प्रमाणपत्र मांगा जाता है.
यह भी पढ़ें - अब पढ़ाई के लिए नहीं होगी पैसों की चिंता, बिन गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन, जानें कैसे करें आवेदन?
उम्र की बात करें तो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 38 वर्ष के आसपास होती है. हालांकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलती है.
कितनी मिलती है सैलरी?
अधिकांश राज्यों में इस पद का वेतन लेवल-4 या लेवल-5 पे मैट्रिक्स के तहत मिलता है. शुरुआती बेसिक पे 21,700 रुपये से 25,500 रुपये के बीच हो सकता है. बेसिक वेतन के अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य सरकारी भत्ते भी मिलते हैं. इन्हें जोड़ने के बाद शुरुआती इन-हैंड सैलरी करीब 30,000 से 35,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है. शहर और राज्य के अनुसार HRA और अन्य भत्तों में थोड़ा अंतर हो सकता है.यह भी पढ़ें - CBSE 10th Second Result 2026: CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द, 6 लाख से ज्यादा छात्रों को इंतजार  ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पंचायत, सचिव, बनने, के, लिए, कौन, सा, एग्जाम, देना, होता, है, कितनी, मिलती, है, इनको, सैलरी</media:keywords>
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        <title>दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. योगेश सिंह को फिर मिला मौका, लगातार दूसरी बार संभालेंगे VC की जिम्मेदारी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के इतिहास में पहली बार किसी कुलपति को लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रो. योगेश सिंह को अगले पांच साल के लिए फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है.उनका नया कार्यकाल 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा. माना जा रहा है कि पिछले कार्यकाल में शिक्षा और प्रशासन से जुड़े कई बड़े फैसलों की वजह से उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी दी गई है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में अब तक किसी भी कुलपति को लगातार दूसरी बार नियुक्त नहीं किया गया था.कुछ साल पहले विश्वविद्यालय के नियमों में बदलाव किया गया था, जिसके बाद कुलपति को दूसरा कार्यकाल देने का रास्ता खुला. इसी नियम के तहत प्रो. योगेश सिंह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले कुलपति बन गए हैं. यह फैसला DU के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है.
2021 में संभाली थी कुलपति की जिम्मेदारी
प्रो. योगेश सिंह ने 8 अक्टूबर 2021 को दिल्ली विश्वविद्यालय के 23वें कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था. पिछले पांच वर्षों में उन्होंने विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलावों की शुरुआत की. शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने, छात्रों के लिए नई सुविधाएं शुरू करने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए.
नई शिक्षा नीति को तेजी से किया लागू
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करना शामिल है.इसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) शुरू किया गया. इसके साथ ही छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट जैसी नई सुविधाएं भी मिलने लगीं. इस बदलाव का उद्देश्य पढ़ाई को अधिक लचीला और रोजगार के लिहाज से बेहतर बनाना था.
CUET से आसान और पारदर्शी हुई एडमिशन प्रक्रिया
पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला बोर्ड परीक्षा के अंकों और कटऑफ के आधार पर होता था. लेकिन प्रो. योगेश सिंह के कार्यकाल में प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया और CUET के जरिए एडमिशन शुरू हुआ. इससे देशभर के छात्रों को समान अवसर मिलने लगे और दाखिला प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी बनी.
पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालय ने डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी खास ध्यान दिया. परीक्षा प्रणाली को डिजिटल बनाया गया, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट लागू किया गया और छात्रों के लिए कई ऑनलाइन सुविधाएं शुरू की गईं.इसके साथ ही कैंपस के विकास और नई इमारतों समेत कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर भी तेजी से काम हुआ.
शिक्षकों की भर्ती को मिली रफ्तारदिल्ली विश्वविद्यालय में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की दिशा में भी तेजी से काम किया गया. कई कॉलेजों और विभागों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्तियां शुरू हुईं, जिससे पढ़ाई और शोध कार्य को मजबूती मिली. इसका फायदा छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल के रूप में मिला.
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शिक्षा और प्रशासन दोनों में है लंबा अनुभवप्रो. योगेश सिंह का शिक्षा और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में लंबा अनुभव रहा है. दिल्ली विश्वविद्यालय आने से पहले वे दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के वाइस चांसलर रह चुके हैं.इसके अलावा उन्होंने नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (पूर्व NSIT) के निदेशक और महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के कुलपति के रूप में भी काम किया है. फिलहाल उनके पास AICTE के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी है.
दूसरे कार्यकाल से बढ़ीं उम्मीदेंलगातार दूसरी बार कुलपति बनने के बाद अब छात्रों और शिक्षकों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय रिसर्च, डिजिटल शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक सुविधाओं और रोजगार आधारित शिक्षा पर और ज्यादा ध्यान देगा.साथ ही नई शिक्षा नीति को और प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में भी काम जारी रहेगा.यह भी पढ़ें - पंचायत सचिव बनने के लिए कौन सा एग्जाम देना होता है, कितनी मिलती है इनको सैलरी? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, यूनिवर्सिटी, के, कुलपति, प्रो., योगेश, सिंह, को, फिर, मिला, मौका, लगातार, दूसरी, बार, संभालेंगे, की, जिम्मेदारी</media:keywords>
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        <title>अमेरिका में नौकरी का सपना देख रहे हैं? H&amp;1B वीजा को लेकर आई बड़ी अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका में नौकरी का सपना देख रहे हैं? H-1B वीजा को लेकर आई बड़ी अपडेट ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब पढ़ाई के लिए नहीं होगी पैसों की चिंता, बिन गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन, जानें कैसे करें आवेदन?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप पढ़ाई में अच्छे हैं लेकिन पैसों की कमी के कारण कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने में परेशानी हो रही है, तो आपके लिए राहत की खबर है. केंद्र सरकार की पीएम विद्यालक्ष्मी योजना (PM Vidyalaxmi Scheme) ऐसे ही छात्रों की मदद के लिए शुरू की गई है. इस योजना के तहत योग्य छात्रों को बिना किसी गारंटी (Guarantor) और बिना संपत्ति गिरवी रखे (Collateral) एजुकेशन लोन मिल सकता है.
इस योजना को 6 नवंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मेधावी छात्र की पढ़ाई सिर्फ आर्थिक तंगी की वजह से न रुके. यह योजना नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार की गई है और इसकी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;CBSE Compartment Exam: CBSE ने जारी किया कंपार्टमेंट एग्जाम का शेड्यूल, 8 जुलाई तक करें आवेदन
क्या है पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल?
सरकार ने छात्रों की सुविधा के लिए PM Vidyalaxmi Portal शुरू किया है. यह एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां छात्र एक ही जगह से एजुकेशन लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस पोर्टल के जरिए सरकारी, निजी, क्षेत्रीय ग्रामीण (RRB) और सहकारी बैंकों से भारत और विदेश में उच्च शिक्षा के लिए लोन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है.
छात्रों को पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. इसके बाद कॉमन एजुकेशन लोन एप्लीकेशन फॉर्म भरकर अपनी पसंद के बैंक में आवेदन भेजा जा सकता है. आवेदन की पूरी स्थिति भी पोर्टल पर ऑनलाइन देखी जा सकती है.
योजना की सबसे बड़ी खासियत
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्रों को बिना गारंटी और बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे एजुकेशन लोन मिल सकता है. यह सुविधा उन छात्रों के लिए है जिन्हें देश के चयनित गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) में प्रवेश मिला है. इन संस्थानों का चयन राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) के आधार पर किया गया है.
क्या-क्या मिलेंगे फायदे?
योजना के तहत 7.5 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर भारत सरकार 75 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी देती है. यानी बैंक के लिए जोखिम कम हो जाता है और छात्रों को लोन मिलने में आसानी होती है.
यदि परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये तक है, तो 10 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी मिलेगी. वहीं जिन परिवारों की वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये या उससे कम है, उन्हें लोन पर पूरी ब्याज सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा.
इसके अलावा पूरी आवेदन प्रक्रिया डिजिटल है और लोन की राशि भी डिजिटल रुपया वॉलेट (Digital Rupee Wallet) के जरिए जारी की जाएगी.
हर साल लाखों छात्रों को मिलेगा फायदा
सरकार के अनुसार, पीएम विद्यालक्ष्मी योजना का लाभ हर साल 22 लाख से अधिक छात्रों को मिलने की उम्मीद है. यह योजना पहले से चल रही सेंट्रल सेक्टर इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम (CSIS) और क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन (CGFSEL) जैसी योजनाओं को और मजबूत बनाने का काम करेगी.
ऐसे करें आवेदन
सबसे पहले PM Vidyalaxmi Portal पर रजिस्ट्रेशन करें. इसके बाद Common Education Loan Application Form भरें. फिर अपनी पसंद के बैंक का चयन कर आवेदन सबमिट कर दें.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, पढ़ाई, के, लिए, नहीं, होगी, पैसों, की, चिंता, बिन, गारंटी, मिलेगा, एजुकेशन, लोन, जानें, कैसे, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>Student Visa Rejection Reasons 2026 : इन गलतियों के कारण रिजेक्ट हो जाता है स्टूडेंट वीजा, अप्लाई करने से पहले पढ़ लें जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Student Visa Rejection Reasons 2026 : इन गलतियों के कारण रिजेक्ट हो जाता है स्टूडेंट वीजा, अप्लाई करने से पहले पढ़ लें जरूरी बातें ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ICAI CA Foundation Result 2026: सीए फाउंडेशन का रिजल्ट जारी, ऐसे करें स्कोरकार्ड डाउनलोड; जानें टॉपर्स</title>
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        <description><![CDATA[ इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने CA Foundation May 2026 परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है. परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन चेक और डाउनलोड कर सकते हैं.
इस बार CA Foundation परीक्षा 14, 16, 18 और 20 मई 2026 को आयोजित की गई थी. रिजल्ट देखने के लिए उम्मीदवारों को अपने रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर की जरूरत होगी. दोनों जानकारी दर्ज करने के बाद स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.
इन छात्रों ने किया टॉप
रिजल्ट के साथ ICAI ने देशभर के टॉपर्स की सूची भी जारी की है. इस बार नासिक की साक्षी जैन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की है. वहीं चंद्रपुर के अयान अब्बास अजानी दूसरे स्थान पर रहे, जबकि पुणे की राधा उन्मेष मुलाय ने AIR 3 प्राप्त की है.
CA Foundation May 2026 टॉपर्स

AIR 1: साक्षी जैन (नासिक)
AIR 2: अयान अब्बास अजानी (चंद्रपुर)
AIR 3: राधा उन्मेष मुलाय (पुणे)

पास होने के लिए कितने अंक जरूरी?
CA Foundation परीक्षा पास करने के लिए केवल कुल अंक अच्छे होना ही काफी नहीं है. ICAI ने इसके लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं. उम्मीदवार को हर विषय में कम से कम 40 प्रतिशत अंक लाने होंगे. इसके साथ ही सभी पेपर मिलाकर कुल 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करना भी जरूरी है. यदि इनमें से कोई एक शर्त पूरी नहीं होती है, तो उम्मीदवार परीक्षा में सफल नहीं माना जाएगा.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; Delhi University Admission 2026: नॉर्थ कैंपस के टॉप 5 कॉलेज, जानें कटऑफ, पढ़ाई और प्लेसमेंट की पूरी जानकारी
स्कोरकार्ड में क्या-क्या?
ऑनलाइन जारी किए गए स्कोरकार्ड में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, विषयवार अंक, कुल अंक और पास या फेल का स्टेटस दर्ज होगा. इसलिए स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के बाद सभी जानकारियों को ध्यान से जांच लें.
ऐसे करें रिजल्ट चेक

सबसे पहले ICAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
होमपेज पर CA Foundation May 2026 Result लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें.
सबमिट बटन पर क्लिक करें.
आपका रिजल्ट और स्कोरकार्ड स्क्रीन पर खुल जाएगा.
इसे डाउनलोड करें और आगे के लिए प्रिंटआउट निकालकर रख लेंयह भी पढ़ें - अब पढ़ाई के लिए नहीं होगी पैसों की चिंता, बिन गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन, जानें कैसे करें आवेदन?
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>JPSC प्रीलिम्स का रिजल्ट जारी, मेंस के लिए आवेदन शुरू; जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 का रिजल्ट जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों ने प्रीलिम्स परीक्षा दी थी, वे अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पीडीएफ में अपना रोल नंबर चेक कर सकते हैं.
प्रीलिम्स परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अगला चरण यानी मुख्य परीक्षा (Mains) शुरू होने जा रहा है. आयोग ने मेंस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. पात्र उम्मीदवार 3 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. ऐसे में सफल अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें.
जुलाई में होगी मेंस परीक्षा
जेपीएससी के अनुसार मुख्य लिखित परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा दो शिफ्ट में होगी. पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित होगी. उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड और परीक्षा केंद्र से जुड़ी जानकारी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी.
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ऐसे होगा अंतिम चयन
जेपीएससी सिविल सेवा भर्ती में चयन एक नहीं बल्कि चार चरणों के जरिए किया जाएगा. सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा, उसके बाद मुख्य लिखित परीक्षा, फिर इंटरव्यू (पर्सनैलिटी टेस्ट) और आखिर में दस्तावेजों का सत्यापन होगा. सभी चरण सफलतापूर्वक पास करने वाले अभ्यर्थियों का ही अंतिम चयन किया जाएगा.
जरूरी तारीखें एक नजर में

प्रीलिम्स परीक्षा: 19 अप्रैल 2026
प्रीलिम्स रिजल्ट जारी: 2 जुलाई 2026
मेंस आवेदन शुरू: 3 जुलाई 2026
मेंस आवेदन की अंतिम तिथि: 9 जुलाई 2026
मुख्य परीक्षा: 18, 19 और 20 जुलाई 2026

ऐसे देखें JPSC प्रीलिम्स रिजल्ट
रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले JPSC की आधिकारिक वेबसाइट jpsc.gov.in पर जाएं. इसके बाद होमपेज पर &quot;P.T. Result of the Recruitment of Jharkhand Combined Civil Services Examination (Regular)-2025&quot; लिंक पर क्लिक करें. स्क्रीन पर रिजल्ट की पीडीएफ खुल जाएगी. इसमें अपना रोल नंबर सर्च करें. भविष्य की जरूरत के लिए रिजल्ट डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट भी अपने पास रख सकते हैं. ज्यादा डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक साइट की मदद ले सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE 10th Second Result 2026: CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द, 6 लाख से ज्यादा छात्रों को इंतजार  </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cbse-10th-second-result-2026-cbse-10वीं-सेकेंड-बोर्ड-परीक्षा-2026-का-रिजल्ट-जल्द-6-लाख-से-ज्यादा-छात्रों-को-इंतजार</link>
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        <description><![CDATA[ CBSE Class 10 Second Board Result 2026: सीबीएसई की 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार CBSE Class 10 Second Board Exam 2026 का रिजल्ट किसी भी समय जारी किया जा सकता है. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोर ऑनलाइन चेक कर सकेंगे और डिजिटल मार्कशीट भी डाउनलोड कर पाएंगे.
इस साल सेकेंड बोर्ड परीक्षा का आयोजन 15 मई से 21 मई 2026 के बीच किया गया था. इस परीक्षा में वे छात्र शामिल हुए थे जो अपने अंक बेहतर करना चाहते थे या फिर कंपार्टमेंट परीक्षा दे रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार 6.68 लाख से अधिक छात्रों ने सेकेंड बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया है. ऐसे में लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की नजरें रिजल्ट पर टिकी हुई हैं.
इन वेबसाइट्स पर मिलेगा रिजल्ट
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे. इसके अलावा डिजिटल मार्कशीट DigiLocker और UMANG ऐप पर भी उपलब्ध कराई जाएगी.
कहां-कहां देख सकेंगे नतीजे?
cbse.gov.incbseresults.nic.inresults.cbse.nic.inDigiLockerUMANG App
रिजल्ट चेक करने के लिए क्या-क्या चाहिए होगा?
रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को कुछ जरूरी जानकारी अपने पास रखनी होगी. इनमें मुख्य रूप से:

रोल नंबर
स्कूल नंबर
एडमिट कार्ड आईडी
जन्मतिथि (जहां आवश्यक हो)

इन विवरणों की मदद से छात्र अपने अंक ऑनलाइन देख सकेंगे.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;अब पढ़ाई के लिए नहीं होगी पैसों की चिंता, बिन गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन, जानें कैसे करें आवेदन?
ऐसे डाउनलोड कर सकेंगे स्कोरकार्ड
रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. वहां होमपेज पर दिखाई देने वाले CBSE Class 10 Second Board Result 2026 लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी भरें. सबमिट करते ही आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा. भविष्य के उपयोग के लिए स्कोरकार्ड डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं.
मार्कशीट में क्या-क्या जानकारी होगी?
ऑनलाइन उपलब्ध होने वाली मार्कशीट में छात्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी. इनमें उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, जन्मतिथि, विषयवार अंक, प्राप्त ग्रेड, कुल अंक और रिजल्ट स्टेटस जैसी जानकारी शामिल रहने की संभावना है.
DigiLocker और UMANG भी बनेंगे सहारा
अगर रिजल्ट के समय वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक के कारण परेशानी आती है, तो छात्र DigiLocker और UMANG जैसे वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर रखी जा सकती है.
यह भी पढ़ें - ICAI CA Foundation Result 2026: सीए फाउंडेशन का रिजल्ट जारी, ऐसे करें स्कोरकार्ड डाउनलोड; जानें टॉपर्स ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, 10th, Second, Result, 2026:, CBSE, 10वीं, सेकेंड, बोर्ड, परीक्षा, 2026, का, रिजल्ट, जल्द, लाख, से, ज्यादा, छात्रों, को, इंतजार</media:keywords>
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        <title>IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम को केंद्र की बड़ी जिम्मेदारी, गृह मंत्रालय के साथ CBSE की कमान भी</title>
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        <description><![CDATA[ &amp;nbsp;लोखंडे प्रशांत सीताराम फिलहाल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के चेयरपर्सन हैं और वे इस पद का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे. यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक इस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती या केंद्र सरकार की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं किया जाता.
DoPT ने जारी किया नियुक्ति आदेश
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से 2 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, लोकहांडे प्रशांत सीताराम को गृह मंत्रालय के गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) नियुक्त किया गया है. नियुक्ति के साथ ही उन्हें CBSE चेयरपर्सन का अतिरिक्त प्रभार जारी रखने की जिम्मेदारी भी दी गई है. इस फैसले को केंद्र सरकार की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने मंजूरी दी है.
दो दशक से अधिक का प्रशासनिक अनुभव
लोखंडे प्रशांत सीताराम AGMUT कैडर के वर्ष 2001 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं. प्रशासनिक सेवा में उन्हें दो दशक से अधिक का अनुभव है और उन्होंने शिक्षा, प्रशासन तथा नीति निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं.उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी है.
गृह मंत्रालय में क्या होगी भूमिका?
गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस स्तर के अधिकारी मंत्रालय की नीतियों के क्रियान्वयन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में लोखंडे प्रशांत सीताराम अब गृह मंत्रालय से जुड़े प्रमुख कार्यों की जिम्मेदारी भी संभालेंगे.यह भी पढ़ें - CBSE Compartment Exam: CBSE ने जारी किया कंपार्टमेंट एग्जाम का शेड्यूल, 8 जुलाई तक करें आवेदन
CBSE की जिम्मेदारी भी रहेगी जारी
CBSE चेयरपर्सन के रूप में भी उनकी भूमिका जारी रहेगी.बोर्ड के तहत देश और विदेश के हजारों संबद्ध स्कूल संचालित होते हैं. पाठ्यक्रम, परीक्षा व्यवस्था, मूल्यांकन प्रणाली, परिणाम, स्कूल संबद्धता और शिक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों में चेयरपर्सन की अहम भूमिका होती है. ऐसे में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें यह अतिरिक्त प्रभार जारी रखा गया है.
नियमित नियुक्ति तक लागू रहेगी व्यवस्था
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद लोखंडे प्रशांत सीताराम एक साथ दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगे. एक ओर वे गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करेंगे, वहीं दूसरी ओर CBSE चेयरपर्सन के अतिरिक्त प्रभार के जरिए देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम निर्णयों की निगरानी भी करते रहेंगे.सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक CBSE चेयरपर्सन के पद पर नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती या आगे कोई नया आदेश जारी नहीं किया जाता है.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IAS, लोखंडे, प्रशांत, सीताराम, को, केंद्र, की, बड़ी, जिम्मेदारी, गृह, मंत्रालय, के, साथ, CBSE, की, कमान, भी</media:keywords>
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        <title>कितने पढ़े&amp;लिखे हैं CBSE के चेयरपर्सन लोकांडे प्रशांत सीताराम? जानिए उनकी पढ़ाई</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी लोकांडे प्रशांत सीताराम को CBSE का चेयरपर्सन बनाया है. इंजीनियरिंग से लेकर प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर काफी प्रेरणादायक रहा है. आइए जानते हैं उन्होंने कहां से पढ़ाई की और उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन क्या है.
CBSE के चेयरपर्सन लोकांडे प्रशांत सीताराम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने अपनी तकनीकी समझ को और मजबूत बनाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (NITIE), मुंबई से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया. तकनीकी शिक्षा और प्रबंधन की पढ़ाई ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता दी.यही वजह है कि उन्हें देश के अहम प्रशासनिक पदों पर काम करने का मौका मिला.
2001 बैच के IAS अधिकारी हैं
लोकांडे प्रशांत सीताराम 2001 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी हैं. AGMUT कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होते हैं. दो दशक से ज्यादा समय के प्रशासनिक अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाई हैं.
किन-किन पदों पर कर चुके हैं काम?
CBSE की जिम्मेदारी मिलने से पहले वह गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे.इसके अलावा उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में निदेशक और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में काउंसलर (इकोनॉमिक्स) के रूप में भी सेवाएं दी हैं.उन्होंने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय में भी अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं.
यह भी पढ़ें - CBSE ने जारी किया नया पेरेंटिंग कैलेंडर, जानिए 2026-27 सत्र में क्या-क्या बदलेगा&amp;nbsp;
CBSE चेयरपर्सन क्यों बनाया गया?
सरकार ने लोकांडे प्रशांत सीताराम को ऐसे समय में CBSE का &amp;nbsp;चेयरपर्सन बनाया है, जब बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर विवाद चल रहा था. छात्रों की शिकायतों के बाद सरकार ने जांच के निर्देश दिए और बोर्ड के शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए.
मिल चुके हैं कई सम्मान
अपने लंबे प्रशासनिक करियर में लोकांडे प्रशांत सीताराम को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दो बार स्टेट अवॉर्ड (गोल्ड) फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किया जा चुका है.यह सम्मान बेहतरीन प्रशासनिक कार्य करने वाले अधिकारियों को दिया जाता है.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; IAS लोकहांडे प्रशांत सीताराम को केंद्र की बड़ी जिम्मेदारी, गृह मंत्रालय के साथ CBSE की कमान भी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>TRE&amp;3 शिक्षक भर्ती: 18 महीने का NIOS D.El.Ed करने वालों की छिनेगी जॉब, शिक्षा विभाग का सख्त आदेश</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख चुके और नौकरी पा चुके हजारों अभ्यर्थियों के लिए बुरी खबर सामने आ रही है. राज्य में तीसरे चरण की शिक्षक नियुक्ति (TRE-3) के तहत सरकारी स्कूलों में बहाल हुए उन शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का फैसला किया गया है, जिन्होंने NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) से 18 महीने का डीईएलएड (D.El.Ed) कोर्स किया था. शिक्षा विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEOs) को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिया है. सरकार के इस फैसले से उन शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, जो इस योग्यता के आधार पर स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे थे.
प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिलों को भेजा पत्र
यह कार्रवाई राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी किए गए एक पत्र के बाद शुरू हुई. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजे गए इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि साल 2024 में आयोजित TRE-3 भर्ती के तहत जितने भी शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनके दस्तावेजों की दोबारा जांच की जाए. जांच के दौरान कोई भी ऐसा शिक्षक पाया जाता है, जिसने NIOS से केवल 18 महीने का D.El.Ed कोर्स करके यह नौकरी हासिल की है तो उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाए.
विज्ञापन की शर्तों का दिया गया हवाला
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में भर्ती के नियमों और विज्ञापनों का हवाला दिया है. पत्र में लिखा है कि विज्ञापन संख्या-22/2024 (TRE-3) की कंडिका-2 बी (फोर) में साफ-साफ लिखा था कि शिक्षा विभाग के 7 दिसंबर, 2023 को जारी आदेश के अनुसार, NIOS द्वारा दिया गया 18 महीने का डीईएलएड कोर्स विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए मान्य नहीं माना जाएगा. विज्ञापन में यह शर्त पहले से ही जोड़ी गई थी, इसलिए विभाग अब इन नियमों का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
कैसे समाप्त होगी शिक्षकों की सेवा?&amp;nbsp;
शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को केवल आदेश ही नहीं दिया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है.&amp;nbsp;

शिक्षकों की पहचान: सबसे पहले सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करेंगे और NIOS से 18 महीने का कोर्स करने वालों की लिस्ट बनाएंगे.
निर्धारित कानूनी प्रक्रिया: इन शिक्षकों को सीधे हटाने के बजाय तय नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया जाएगा, ताकि बाद में कोई कानूनी अड़चन न आए.
तुरंत रिपोर्ट भेजने के निर्देश: कार्रवाई पूरी करने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इसकी पूरी रिपोर्ट शिक्षा विभाग के मुख्यालय को सौंपनी होगी.

कितने शिक्षकों पर गिरेगी गाज?
इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिहार में ऐसे कितने शिक्षक हैं, जिनकी नौकरी अब खतरे में है? इसका जवाब शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों से रिपोर्ट मंगवाई जा रही है. जब सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने जिलों की जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप देंगे, उसके बाद ही सटीक डेटा मिल पाएगा. बता दें कि यह आदेश रातों-रात नहीं आया, बल्कि इसकी प्रक्रिया पहले से चल रही थी. तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर के हस्ताक्षर से यह आदेश 22 जून को ही जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जारी कर दिया गया था, जिस पर अब अमल किया जा रहा है.
ये भी पढ़ें: खास दुकान से किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव नहीं डाल पाएंगे स्कूल, शिकायत पर तुरंत होगा एक्शन ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>TRE-3, शिक्षक, भर्ती:, महीने, का, NIOS, D.El.Ed, करने, वालों, की, छिनेगी, जॉब, शिक्षा, विभाग, का, सख्त, आदेश</media:keywords>
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        <title>खास दुकान से किताबें&amp;यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव नहीं डाल पाएंगे स्कूल, शिकायत पर तुरंत होगा एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ हर साल जब भी नया अकैडमिक सेशन शुरू होता है तो अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं. स्कूल की भारी-भरकम फीस के अलावा सबसे बड़ा सिरदर्द होता है किताबें, कॉपियां और स्कूल यूनिफॉर्म खरीदना. अक्सर देखा गया है कि कई स्कूल पैरेंट्स पर दबाव बनाते हैं कि वे स्कूल से संबंधित सामान किसी तय दुकान से ही खरीदें, जबकि उस दुकान पर सामान बाजार से कहीं ज्यादा महंगा मिलता है. अब महाराष्ट्र में पैरेंट्स को इस लूट और मानसिक परेशानी से राहत मिलने वाली है. दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने मनमानी करने वाले ऐसे स्कूलों के खिलाफ एक्शन लेने का मन बना लिया है.
विधान परिषद में उठा अभिभावकों का दर्द
यह मुद्दा हाल ही में महाराष्ट्र विधान परिषद में गूंजा. विधान परिषद के सदस्य सुधाकर अडबाले ने पैरेंट्स की इस परेशानी को सदन के सामने रखा. उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे कई स्कूल हैं, जो शिक्षा के नाम पर कारोबार कर रहे हैं. अडबाले ने बताया कि ये स्कूल अभिभावकों को सीधे तौर पर मजबूर करते हैं कि वे स्कूल की ड्रेस, किताबें, जूते और अन्य जरूरी सामान किसी खास दुकान से ही खरीदें. अगर कोई अभिभावक बाहर से सामान खरीदता है तो स्कूल मैनेजमेंट उसे स्वीकार नहीं करता. इन खास दुकानों पर किताबों और यूनिफॉर्म के दाम आम बाजार से दोगुने या उससे भी ज्यादा होते हैं, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह से बिगड़ जाता है.
सरकार ने अपनाया सख्त रुख
इस गंभीर मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार की तरफ से राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की व्यावसायिक जबरदस्ती को सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने बताया कि यह नियम केवल स्टेट बोर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राइवेट, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा. कोई भी स्कूल पैरेंट्स को किसी खास दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार पहले भी ऐसे मामलों को गंभीरता से ले चुकी है और नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ स्कूलों पर कार्रवाई भी की गई है.
कैसे रुकेगी स्कूलों की यह मनमानी?

नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: राज्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक विभागीय उपनिदेशक कार्यालय के अंतर्गत नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे.
निरंतर निगरानी: ये नोडल अधिकारी सहायक निदेशक के नियंत्रण में काम करेंगे. इनका मुख्य काम स्कूलों में शैक्षणिक सामग्री की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखना होगा.
तत्काल कार्रवाई: अगर निगरानी के दौरान यह पाया जाता है कि कोई स्कूल पैरेंट्स पर किसी खास दुकान से खरीदारी का दबाव बना रहा है तो ये अधिकारी तुरंत उस स्कूल के खिलाफ एक्शन लेंगे.

बनेगी ब्लैकलिस्ट, होगी दंडात्मक कार्रवाई
डॉ. पंकज भोयर ने बताया कि जनप्रतिनिधियों (विधायकों, पार्षदों आदि) के पास स्कूलों के खिलाफ जो भी शिकायतें आती हैं, उनका डेटाबेस तैयार किया जाएगा. जिन स्कूलों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें मिलेंगी, उनकी अलग लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इस लिस्ट के आधार पर शिक्षा विभाग के अधिकारी संबंधित स्कूलों की जांच करेंगे. अगर जांच में स्कूल दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसमें भारी जुर्माना लगाने से लेकर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया शामिल हो सकती है.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>खास, दुकान, से, किताबें-यूनिफॉर्म, खरीदने, का, दबाव, नहीं, डाल, पाएंगे, स्कूल, शिकायत, पर, तुरंत, होगा, एक्शन</media:keywords>
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        <title>UP TET 2026: यूपी टीईटी पहले दिन की परीक्षा संपन्न, AI कैमरों ने पकड़े 15 &amp;apos;मुन्नाभाई&amp;apos;, जानें कितनी रही अटेंडेंस?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/up-tet-2026-यूपी-टीईटी-पहले-दिन-की-परीक्षा-संपन्न-ai-कैमरों-ने-पकड़े-15-मुन्नाभाई-जानें-कितनी-रही-अटेंडेंस</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की चाह रखने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी यूपी टीईटी (UP TET 2026) के पहले दिन की दोनों पालियों की परीक्षा बेहद शांतिपूर्ण तरीके संपन्न हुई. पहले दिन की इस परीक्षा में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम देखने को मिले. मॉडर्न टेक्नोलॉजी और कड़ाई का ही नतीजा था कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से दूसरों के नाम पर परीक्षा देने आए 15 फर्जी परीक्षार्थी रंगे हाथों दबोच लिए गए. यह जानकारी यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने दी.
AI कैमरों की पैनी नजर से नहीं बच पाए &#039;मुन्नाभाई&#039;
इस बार की परीक्षा में नकल रोकने के लिए हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसके आगे नकल माफिया और फर्जी परीक्षार्थियों की एक न चली. परीक्षा के पहले दिन आयोग ने मुस्तैदी दिखाते हुए कुल 15 फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार कराया. ये लोग असली अभ्यर्थियों की जगह बैठकर परीक्षा दे रहे थे.

फर्स्ट शिफ्ट: सुबह की पहली पाली में मुस्तैद सुरक्षा व्यवस्था और एआई कैमरों की मदद से सात फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए.
सेकेंड शिफ्ट: दूसरी पाली में आयोग ने कड़ाई बरतते हुए आठ और जालसाजों को दबोचा.

पकड़े गए इन सभी 15 फर्जी अभ्यर्थियों के खिलाफ आयोग ने सख्त एक्शन लिया. इन सभी को दस्तावेजी सबूतों के साथ स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया. पुलिस अब इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में कौन-कौन शामिल है.
84.76% अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, इस परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में भारी उत्साह देखने को मिला. पहले दिन दोनों पालियों को मिलाकर परीक्षा में बैठने वाले छात्र-छात्राओं का उपस्थिति प्रतिशत शानदार रहा.

कुल पंजीकृत अभ्यर्थी: दोनों पालियों के लिए कुल 8,07,636 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था.
कुल उपस्थित अभ्यर्थी: इनमें से 6,84,614 यानी 84.76 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे और परीक्षा में भाग लिया.
महिलाओं की उपस्थिति: महिला अभ्यर्थियों की कुल उपस्थिति का प्रतिशत 84.69% रहा.
पुरुषों की उपस्थिति: पुरुष अभ्यर्थियों की उपस्थिति का ग्राफ 84.86% दर्ज किया गया.

60 जिलों में बनाए गए थे 955 परीक्षा केंद्र
यह परीक्षा उत्तर प्रदेश के 60 जिलों में आयोजित की जा रही है, जहां कुल 955 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. आयोग ने बताया कि यूपी टीईटी 2026 की यह परीक्षा 2 जुलाई से शुरू हो चुकी है, जो 4 जुलाई तक चलेगी.&amp;nbsp;
AI इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से हुई लाइव मॉनिटरिंग
इस बार परीक्षा में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती गई. आयोग के मुख्यालय में अत्याधुनिक एआई इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल रूम बनाया गया था. इस कंट्रोल रूम के जरिए प्रदेश के सभी 955 परीक्षा केंद्रों पर सीधी नजर रखी जा रही थी. परीक्षा के दौरान खुद आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, आयोग के सभी सदस्य, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और उपसचिव कंट्रोल रूम में मौजूद रहे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TET, 2026:, यूपी, टीईटी, पहले, दिन, की, परीक्षा, संपन्न, कैमरों, ने, पकड़े, मुन्नाभाई, जानें, कितनी, रही, अटेंडेंस</media:keywords>
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        <title>12वीं पास बेटियों से लेकर UPSC अभ्यर्थियों तक, बिहार सरकार दे रही है लाखों रुपये की मदद</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार सरकार छात्रों के लिए कई ऐसी योजनाएं चला रही है, जिनके जरिए स्कूल से लेकर कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक के लिए आर्थिक मदद मिलती है. खास बात यह है कि बेटियों, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाई गई हैं.
सबसे पहले बात बेटियों की करें तो 12वीं पास करने वाली अविवाहित छात्राओं को मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है. इसका उद्देश्य लड़कियों को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है. वहीं, राज्य के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने वाली छात्राओं को मुख्यमंत्री बालिका (ग्रेजुएशन) प्रोत्साहन योजना के तहत 25 हजार से 50 हजार रुपये तक की सहायता मिलती है.
इन स्कीम्स का लें फायदा
अगर आप एससी, एसटी, बीसी या ईबीसी वर्ग से आते हैं और 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई कर रहे हैं, तो पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप (PMS) का लाभ उठा सकते हैं. इस योजना के तहत पढ़ाई से जुड़े खर्च और अन्य भत्ते सीधे छात्रों के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजे जाते हैं. इसके अलावा राज्य के डॉ. आंबेडकर कल्याण छात्रावास में रहने वाले एससी और एसटी छात्रों को हर महीने 2,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता भी दी जाती है.
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना
हायर एजुकेशन के लिए पैसे की चिंता करने वाले छात्रों के लिए बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना भी काफी मददगार है. इस योजना के तहत सरकार 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन उपलब्ध कराती है. सामान्य छात्रों के लिए ब्याज दर 4 प्रतिशत है, जबकि छात्राओं और दिव्यांग छात्रों को सिर्फ 1 प्रतिशत साधारण ब्याज पर यह सुविधा मिलती है.
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इन्हें भी मिल रही मदद
बिहार सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी प्रोत्साहित कर रही है. मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत यूपीएससी, बीपीएससी, एनडीए, सीडीएस और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रारंभिक चरण में सफल होने वाले अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के अभ्यर्थियों को 30 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता दी जाती है.
अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए भी सरकार ने अलग योजनाएं शुरू की हैं. मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास करने वाले अल्पसंख्यक छात्रों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. वहीं, मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को अल्पसंख्यक छात्रावास अनुदान योजना के तहत हर महीने आर्थिक सहायता भी मिलती है.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP Anganwadi Bharti 2026: बिना परीक्षा महिलाओं को मिलेगा नौकरी का मौका, जानें आवेदन प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ UP Anganwadi Bharti 2026: बिना परीक्षा महिलाओं को मिलेगा नौकरी का मौका, जानें आवेदन प्रक्रिया ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Anganwadi, Bharti, 2026:, बिना, परीक्षा, महिलाओं, को, मिलेगा, नौकरी, का, मौका, जानें, आवेदन, प्रक्रिया</media:keywords>
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        <title>सरकारी नौकरी पाने का मौका, आयुष मंत्रालय में निकली इन पदों पर भर्ती; इस डेट तक कर सकते हैं अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी पाने का मौका, आयुष मंत्रालय में निकली इन पदों पर भर्ती; इस डेट तक कर सकते हैं अप्लाई ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET&amp;PG 2026 की डेट तय, 30 अगस्त को होगी परीक्षा; आवेदन आज से शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की तरफ से NEET-PG 2026 की एग्जाम डेट का ऐलान कर दिया गया है. अब यह परीक्षा 30 अगस्त 2026 को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी. काफी समय से उम्मीदवार परीक्षा की तारीख का इंतजार कर रहे थे. परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित होगी.
NEET-PG 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से होने जा रहे हैं. इच्छुक उम्मीदवार 21 जुलाई 2026 रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकेंगे. आखिरी समय में वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक की संभावना रहती है, इसलिए उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है.
11 अगस्त को मिलेगी एग्जाम सिटी की जानकारी
आवेदन के बाद उम्मीदवारों को 11 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी जाएगी कि उनका परीक्षा केंद्र किस शहर में होगा. इससे अभ्यर्थियों को यात्रा और ठहरने की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा.
कब आएगा रिजल्ट?
NBEMS के जारी कार्यक्रम के अनुसार NEET-PG 2026 का रिजल्ट 30 सितंबर 2026 को घोषित किया जाएगा. परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा.
एक नजर में पूरा शेड्यूल
ऑनलाइन आवेदन शुरू: 1 जुलाई 2026 (शाम 5 बजे)आवेदन की अंतिम तारीख: 21 जुलाई 2026 (रात 11:55 बजे)एग्जाम सिटी की जानकारी: 11 अगस्त 2026परीक्षा की तारीख: 30 अगस्त 2026रिजल्ट: 30 सितंबर 2026NEET PG क्या है?
अगर आप एमबीबीएस के बाद एमडी (MD), एमएस (MS) या पीजी डिप्लोमा करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको NEET PG परीक्षा पास करनी होगी. देशभर में इन मेडिकल पोस्टग्रेजुएट कोर्सों में दाखिले के लिए यही एक कॉमन एंट्रेंस एग्जाम है. यानी अलग-अलग राज्यों या निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए अलग परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती.
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NEET PG में वही उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान से MBBS की डिग्री हासिल की हो या प्रोविजनल MBBS पास सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो. इसके साथ ही उम्मीदवार के पास NMC, पूर्व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) या राज्य मेडिकल काउंसिल से जारी स्थायी या अस्थायी रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है.
अलग से कोई परीक्षा नहीं होगी
NEET PG लागू होने के बाद से कोई भी राज्य सरकार, निजी मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय अपने MD, MS या PG डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं कर सकता है.
NEET PG 2026 के लिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
स्टेप 1: कैंडिडेट्स सबसे पहले NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.स्टेप 2: फिर होमपेज पर &quot;NEET PG 2026&quot; या &quot;Application Link&quot; पर क्लिक करें.स्टेप 3: इसके बाद &quot;New Registration&quot; पर क्लिक करके अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य जरूरी जानकारी भरें.स्टेप 4: अब रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद मिले User ID और Password से लॉगिन करें.स्टेप 5: इसके बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई डिटेल्स भरें.स्टेप 6: फिर फीस जमा करें.स्टेप 7: सभी जानकारी एक बार अच्छी तरह देख कर सबमिट बटन पर क्लिक करें.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RRB ग्रुप डी का रिजल्ट जारी, लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म; ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप D भर्ती 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों ने 27 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच आयोजित कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में हिस्सा लिया था, वे अब अपने-अपने क्षेत्रीय RRB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट और स्कोरकार्ड देख सकते हैं.
इस भर्ती के जरिए रेलवे में 32,438 लेवल-1 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. रिजल्ट के साथ उन उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी गई है, जिन्हें अगले चरण यानी फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) के लिए चुना गया है.
अब क्या होगा अगला चरण?
सीबीटी परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को अब फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) देना होगा. इसके बाद दस्तावेज सत्यापन (Document Verification), मेडिकल परीक्षण और अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी. इन सभी चरणों का आयोजन संबंधित रेलवे जोन के रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) करेंगे.
PET की तारीख, एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी जानकारी अलग से संबंधित RRC की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी. इसलिए उम्मीदवारों को नियमित रूप से वेबसाइट चेक करते रहने की सलाह दी गई है.
SMS और ईमेल से भी मिलेगी जानकारी
PET के लिए चुने गए उम्मीदवारों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर भी सूचना भेजी जाएगी. ई-कॉल लेटर जारी होने के बाद उम्मीदवार उसे डाउनलोड कर सकेंगे.
इन उम्मीदवारों को PET नहीं देना होगा
रेलवे भर्ती बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि दिव्यांग (PwBD), पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen) और कोर्स कंप्लीटेड एक्ट अप्रेंटिस (CCAA) श्रेणी के उम्मीदवारों को PET में शामिल होने से छूट दी गई है. इन श्रेणियों के योग्य उम्मीदवारों की अलग सूची संबंधित रेलवे रिक्रूटमेंट सेल द्वारा जारी की जाएगी.यह भी पढ़ें - सरकारी नौकरी पाने का मौका, आयुष मंत्रालय में निकली इन पदों पर भर्ती; इस डेट तक कर सकते हैं अप्लाई
रिजल्ट जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों की नजर अगले चरण पर है. जिन अभ्यर्थियों का चयन PET के लिए हुआ है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपनी शारीरिक तैयारी के साथ-साथ सभी जरूरी दस्तावेज भी पहले से तैयार रखें, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो.
ऐसे डाउनलोड करें अपना स्कोरकार्ड
स्कोरकार्ड देखने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले अपने क्षेत्रीय RRB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. वहां RRB Group D Result 2026 या Scorecard लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि दर्ज कर लॉग इन करें. स्क्रीन पर स्कोरकार्ड दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर लें और आगे के लिए सेव रख सकते हैं.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की दौड़ शुरू, पहले चरण में 65 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स ने किया रजिस्ट्रेशन ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RRB, ग्रुप, डी, का, रिजल्ट, जारी, लाखों, उम्मीदवारों, का, इंतजार, खत्म, ऐसे, चेक, करें, स्कोरकार्ड</media:keywords>
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        <title>NEET UG फीस रिफंड का आखिरी मौका, NTA ने बढ़ाई बैंक डिटेल अपडेट करने की तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 एग्जाम आपने दिया था और फीस रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बैंक अकाउंट की जानकारी अपडेट या सत्यापित करने की अंतिम डेट आगे बढ़ा दी है. अब उम्मीदवार 7 जुलाई 2026 रात 11:50 बजे तक अपनी बैंक डिटेल्स की जांच या सुधार कर सकते हैं.
ये फैसला उन छात्रों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो पहले तय समय तक बैंक की सही जानकारी नहीं दे पाए थे या जिनसे अकाउंट डिटेल भरते समय कोई गलती हो गई थी. NTA का कहना है कि किसी भी पात्र उम्मीदवार का फीस रिफंड सिर्फ तकनीकी या छोटी गलती की वजह से नहीं रुकना चाहिए.
एजेंसी की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, रिफंड पोर्टल 7 जुलाई तक खुला रहेगा. इस दौरान उम्मीदवार अपनी बैंक डिटेल्स देख सकते हैं, उन्हें सही कर सकते हैं या जरूरत पड़ने पर नई जानकारी भी अपडेट कर सकते हैं.
दो-स्तरीय सत्यापन जरूरी
बैंक डिटेल अपडेट करने के लिए उम्मीदवारों को पहले रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर लॉगिन करना होगा और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद ही बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी में बदलाव किया जा सकेगा.
कैंसिल चेक भी कर सकते हैं अपलोड
अगर जरूरत पड़े तो उम्मीदवार अपने बैंक खाते की पुष्टि के लिए कैंसिल चेक भी अपलोड कर सकते हैं. इससे बैंक डिटेल्स की जांच आसान होगी और रिफंड प्रक्रिया में किसी तरह की दिक्कत आने की संभावना कम रहेगी.यह भी पढ़ें - DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की दौड़ शुरू, पहले चरण में 65 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स ने किया रजिस्ट्रेशन
सबमिट करने से पहले जरूर जांच लें जानकारी
NTA ने साफ किया है कि एक बार ऑथेंटिकेशन पूरा करके बैंक डिटेल्स सबमिट करने के बाद वही जानकारी अंतिम मानी जाएगी. इसलिए उम्मीदवार अकाउंट नंबर, IFSC कोड, खातेधारक का नाम और अन्य सभी जानकारी अच्छी तरह जांचने के बाद ही फॉर्म जमा करें. छोटी-सी गलती भी फीस रिफंड मिलने में देरी का कारण बन सकती है.
ऐसे करें बैंक डिटेल अपडेट
सबसे पहले NEET UG की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. वहां &#039;Final Opportunity to Confirm/Update Bank Account Details for NEET (UG) 2026 Fee Refund&#039; लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स की मदद से साइन इन करें. डैशबोर्ड में जाकर &#039;Bank Account Details Confirmation/Updation&#039; विकल्प चुनें. यहां अपनी बैंक जानकारी को ध्यान से जांचें और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव करें. सभी जानकारी सही होने के बाद फॉर्म सबमिट करें और कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करके अपने पास रख लें.
यह भी पढ़ें - सरकारी नौकरी पाने का मौका, आयुष मंत्रालय में निकली इन पदों पर भर्ती; इस डेट तक कर सकते हैं अप्लाई ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, फीस, रिफंड, का, आखिरी, मौका, NTA, ने, बढ़ाई, बैंक, डिटेल, अपडेट, करने, की, तारीख</media:keywords>
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    <item>
        <title>UP Lekhpal Answer Key: यूपी लेखपाल रिवाइज्ड आंसर की जारी, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने लेखपाल मुख्य परीक्षा 2026 की रिवाइज्ड&amp;nbsp;आंसर की जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों ने यह परीक्षा दी थी, वे अब आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आंसर की डाउनलोड कर सकते हैं. आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने उत्तरों का सही मिलान कर सकते हैं और यह अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका संभावित स्कोर कितना बन सकता है.&amp;nbsp;
क्यों जरूरी होती है आंसर की?
यह आंसर की आगे आने वाले रिजल्ट की तैयारी में भी काफी जरूरी मानी जा रही है. इससे उम्मीदवार अपने सही और गलत उत्तरों का आकलन कर सकते हैं और संभावित अंक का अनुमान लगा सकते हैं. पहले आयोग ने प्रोविजनल आंसर की &amp;nbsp;जारी की थी, जिस पर उम्मीदवारों से आपत्तियां मांगी गई थीं. प्राप्त आपत्तियों चेक करने के बाद जिन सवालों में बदलाव जरूरी था, उन्हें &amp;nbsp;सही कर रिवाइज्डआंसर की जारी की गई है. यही आंसर की रिवाइज्डरिजल्ट को तैयार करने में इस्तेमाल की जाएगी.उत्तर कुंजी डाउनलोड करने के बाद अपने प्रश्न पत्र के साथ उसका मिलान करें. जितने प्रश्न सही हैं, उनके अंक जोड़ें और गलत उत्तरों के अनुसार यदि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग लागू थी तो उसे भी ध्यान में रखें. इससे आपको अपने संभावित स्कोर का अच्छा अंदाजा मिल जाएगा.हालांकि अंतिम स्कोर और चयन केवल आयोग द्वारा जारी रिजल्ट के आधार पर ही तय किया जायेगा.
यह भी पढ़ें - NEET UG फीस रिफंड का आखिरी मौका, NTA ने बढ़ाई बैंक डिटेल अपडेट करने की तारीख
अब रिजल्ट कब आ सकता है?
आंसर की जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों की नजर रिजल्ट पर है. आमतौर पर रिवाइज्डआंसर की जारी होने के बाद आयोग अंतिम मूल्यांकन पूरा करता है और फिर रिजल्ट जारी करता है. मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले सालों के ट्रेंड को देखा जाये तो यूपी लेखपाल रिजल्ट भी जल्द जारी किया जा सकता है. हालांकि आयोग ने अभी रिजल्ट की आधिकारिक डेट घोषित नहीं की है.
ऐसे डाउनलोड करें&amp;nbsp;
स्टेप 1: सबसे पहले UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं.
स्टेप 2: होम पेज पर मौजूद नोटिस बोर्ड या आंसर की &amp;nbsp;सेक्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
स्टेप 3: यूपी लेखपाल रिवाइज्ड आंसर की &amp;nbsp;के लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 4: आंसर की पीडीएफ स्क्रीन पर खुल जाएगी.
स्टेप 5: अपनी Question Paper Series (A, B, C या D) के अनुसार उत्तरों का मिलान करें.
स्टेप 6: भविष्य के लिएआंसर की का पीडीएफ डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - RRB ग्रुप डी का रिजल्ट जारी, लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म; ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Lekhpal, Answer, Key:, यूपी, लेखपाल, रिवाइज्ड, आंसर, की, जारी, ऐसे, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>NEET UG री&amp;एग्जाम का रिजल्ट जल्द! कॉपियों की जांच शुरू, 10 हजार से ज्यादा आपत्तियों पर हो रहा मंथन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-ug-री-एग्जाम-का-रिजल्ट-जल्द-कॉपियों-की-जांच-शुरू-10-हजार-से-ज्यादा-आपत्तियों-पर-हो-रहा-मंथन</link>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी री-एग्जाम को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. एग्जाम देने वाले लाखों छात्रों का इंतजार अब बेहद जल्द खत्म हो जाएगा. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने री-एग्जाम की आंसर कॉपी की जांच शुरू कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मूल्यांकन प्रक्रिया तेजी से चल रही है और रिजल्ट जल्द जारी किया जा सकता है.
बताते चलें कि प्रोविजनल आंसर-की पर छात्रों की ओर से 10 हजार से ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. NTA हर आपत्ति की अलग-अलग जांच कर रहा है. एक्सपर्ट्स की राय के बाद ही फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी, जिसके आधार पर रिजल्ट जारी होगा.
दरअसल, &amp;nbsp;21 जून 2026 को देशभर के साथ-साथ विदेश के 14 केंद्रों पर NEET UG री-एग्जाम आयोजित हुआ था. ये दोबारा परीक्षा कथित पेपर लीक मामले के बाद कराई गई थी. इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है और अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.
20 लाख से ज्यादा ने दी परीक्षा
NTA के अनुसार री-एग्जाम में 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए. परीक्षा भारत के 5,440 केंद्रों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई. परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में कराई गई, ताकि अलग-अलग राज्यों के छात्रों को सुविधा मिल सके. एजेंसी ने बताया कि इस बार परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारु तरीके से कराने के लिए कई स्तरों पर विशेष इंतजाम किए गए थे. परीक्षा संचालन में केंद्र और राज्य सरकार की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया.
यह भी पढ़ें - DU PG Admission 2026: DU PG में दाखिले का एक और मौका, जानें कब खुलेगी मिड-एंट्री विंडो
NTA ने क्या कहा?
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई थी. NTA के अनुसार, 10 हजार से अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं. इसके अलावा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे 81 उम्मीदवारों के लिए भी अलग इंतजाम किए गए. इनमें सड़क हादसे से उबर रहा एक छात्र और कीमोथेरेपी करा रहा एक अभ्यर्थी भी शामिल था, ताकि वे बिना किसी परेशानी के परीक्षा दे सकें.
स्कोरकार्ड चेक ऐसे

NEET की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं.
होमपेज पर दिए गए &#039;NEET UG Result 2026&#039; लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना Application Number, Date of Birth और स्क्रीन पर दिख रहा Security Pin दर्ज करें.
इसके बाद Submit बटन पर क्लिक करें.
आपका NEET UG 2026 Scorecard स्क्रीन पर दिखाई देगा.
स्कोरकार्ड डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट भी रख लें.यह भी पढ़ें - BHU में निकली नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए भर्ती, 12वीं पास से लेकर पोस्टग्रेजुएट तक कर सकते है आवेदन
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, री-एग्जाम, का, रिजल्ट, जल्द, कॉपियों, की, जांच, शुरू, हजार, से, ज्यादा, आपत्तियों, पर, हो, रहा, मंथन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IPS Shobha Ohatkar: किस बैच की अधिकारी हैं IPS शोभा ओहटकर, जानें उन्होंने कहां से की है पढ़ाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ips-shobha-ohatkar-किस-बैच-की-अधिकारी-हैं-ips-शोभा-ओहटकर-जानें-उन्होंने-कहां-से-की-है-पढ़ाई</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ips-shobha-ohatkar-किस-बैच-की-अधिकारी-हैं-ips-शोभा-ओहटकर-जानें-उन्होंने-कहां-से-की-है-पढ़ाई</guid>
        <description><![CDATA[ IPS Shobha Ohatkar: बिहार पुलिस की चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रही आईपीएस शोभा ओहटकर मंगलवार 30 जून को अपने लंबे प्रशासनिक करियर के बाद रिटायर्ड हो गईं. वह गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक सह महासमादेष्टा के पद से रिटायर्ड हुई, शोभा ओहटकर को बिहटा स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित समारोह में विदाई दी गई.
करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे पुलिस सेवा के दौरान शोभा ओहटकर ने बिहार के कई जिलों में कानून व्यवस्था संभाली और बाद में फायर सर्विस तथा होमगार्ड के आधुनिकीकरण से जुड़े कई बड़े कामों में भूमिका निभाई. अपने सख्त प्रशासनिक रवैया की वजह से वह लंबे समय तक चर्चा में रही. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि आईपीएस अधिकारी शोभा ओहटकर किस बैच की अधिकारी हैं और उन्हें उन्होंने कहां से पढ़ाई की है.&amp;nbsp;
1990 बैच की अधिकारी है शोभा ओहटकर
शोभा ओहटकर 1990 बैच की भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं. उनका जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था. शुरुआती पढ़ाई यहां से पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया. इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई. उनके पिता बलराम ओहटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर के पद पर रह चुके हैं. शोभा ओहटकर कई मौके पर अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देती रही हैं. उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है.&amp;nbsp;
शोभा ओहटकर 22 साल की उम्र में बनी आईपीएस&amp;nbsp;
महज 22 साल की उम्र में आईपीएस बनने के बाद शोभा ओहटकर की पहली नियुक्ति 1992 में पटना सिटी में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई. उस समय बिहार में अपराध की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी. इसके बाद उन्होंने कई अहम जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली. अपने करियर के दौरान वह पटना, दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली और देवघर समेत 6 जिलों की एसपी रही. 2000 में बिहार के विभाजन से पहले यह सभी पोस्टिंग संयुक्त बिहार के दौरान हुई थी. बाद में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र चली गई और 2020 में बिहार लौटने के बाद उन्हें डीजी स्तर की जिम्मेदारी सौंप गई.&amp;nbsp;
कई जिलों में संभाली कानून व्यवस्था की कमान&amp;nbsp;
शोभा ओहटकर के कार्यकाल में हजारीबाग, देवघर और वैशाली की पोस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रही है. हजारीबाग में उन्होंने कोयला तस्करी के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया, जिसमें बड़ी मात्रा में अवैध कोयला जब्त किया गया, कई तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई. वैशाली जिले में एसपी रहते हुए उन्होंने राघोपुर दियारा क्षेत्र में सक्रिय कई अपराधी गिरोह पर कार्रवाई की. वहीं दरभंगा में अपहरण जैसे गंभीर मामलों की जांच और अपराध नियंत्रण को लेकर भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा.&amp;nbsp;
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सख्त प्रशासनिक शैली के चलते बनी अलग पहचान&amp;nbsp;
शोभा ओहटकर को उनकी कड़क कार्यशैली के लिए जाना जाता है. देवघर में तैनाती के दौरान महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों और अभद्र व्यवहार के मामले में उन्होंने सख्त कार्रवाई की. बैद्यनाथ धाम मंदिर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने कई कदम उठाए. इसके बाद उनकी छवि एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में और मजबूत हुई. उनका मानना था कि किसी भी आईपीएस अधिकारी को फील्ड पोस्टिंग के साथ सीआईडी और स्पेशल ब्रांच जैसे विभागों का अनुभव भी होना चाहिए, ताकि कानून व्यवस्था की चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>1000 से ज्यादा लेक्चरर की भर्ती, कल से शुरू होंगे आवेदन, जानें कौन कर सकता है अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ पंजाब सरकार ने लेक्चरर पदों पर भर्ती का ऐलान कर दिया है. इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 1 जुलाई 2026 से शुरू होंगे, जबकि उम्मीदवार 31 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे. अगर आपके पास संबंधित विषय में मास्टर डिग्री और बीएड है, तो यह सरकारी नौकरी पाने का अच्छा मौका हो सकता है.
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1013 पद भरे जाएंगे. इनमें 829 नए पद हैं, जबकि 184 पद बैकलॉग के तहत भरे जाएंगे. सबसे ज्यादा भर्ती हिस्ट्री (210 पद) में होगी. इसके अलावा इंग्लिश के 141, पॉलिटिकल साइंस के 131, मैथ्स के 105, पंजाबी के 99, कॉमर्स के 98, फिजिक्स के 58, इकोनॉमिक्स के 50, केमिस्ट्री के 41, बायोलॉजी के 37, हिंदी के 29 और जियोग्राफी के 14 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 फीसदी अंकों के साथ मास्टर डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएड (B.Ed.) की डिग्री भी जरूरी है. उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए और 10वीं कक्षा में पंजाबी भाषा अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ी होनी चाहिए.
उम्र कितनी होनी चाहिए?
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 37 वर्ष तय की गई है. हालांकि एससी, एसटी, दिव्यांग और अन्य आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी.
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कैसे होगा चयन?
भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी. पहले चरण में 300 अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी. अच्छी बात यह है कि इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को दूसरे चरण में दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद फाइनल मेरिट लिस्ट के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी.
कितनी मिलेगी सैलरी?
चयनित उम्मीदवारों को शुरुआती तीन साल के प्रोबेशन पीरियड में हर महीने 34,500 रुपये से 35,400 रुपये तक फिक्स वेतन मिलेगा. इस दौरान डीए और एचआरए जैसे भत्ते नहीं दिए जाएंगे. प्रोबेशन पूरा होने के बाद नियमित वेतनमान के साथ अन्य सरकारी भत्तों का लाभ भी मिलेगा.
ऐसे भरें आवेदन
आवेदन शुरू होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर Lecturer Cadre Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें. नया रजिस्ट्रेशन करने के बाद लॉगिन करें और अपनी शैक्षणिक व व्यक्तिगत जानकारी भरें. इसके बाद फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें. आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करें. फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें और अंतिम सबमिशन के बाद उसका प्रिंटआउट अपने पास रख लें.यह भी पढ़ें - DU PG Admission 2026: DU PG में दाखिले का एक और मौका, जानें कब खुलेगी मिड-एंट्री विंडो ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>यूपी TET देने वाले 1.86 लाख शिक्षकों को बड़ी राहत, परीक्षा के लिए मिलेगी विशेष छुट्टी</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) की तैयारी कर रहे सेवारत शिक्षकों के लिए अच्छी खबर आई है. राज्य सरकार ने फैसला लिया है. कि 2 जुलाई से 4 जुलाई 2026 तक होने वाली परीक्षा में शामिल होने वाले करीब 1.86 लाख शिक्षकों को विशेष अवकाश दिया जाएगा. इससे शिक्षक बिना किसी कामकाजी दबाव के परीक्षा की तैयारी कर पाएंगे और समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच पाएंगे.
क्यों लिया गया यह फैसला?
उत्तर प्रदेश के शिक्षक काफी लंबे समय से इस मांग को उठा रहे थे.कि नौकरी के साथ परीक्षा की तैयारी करना और परीक्षा देने जाना बहुत मुश्किल है. इसी को देखते हुए सरकार ने परीक्षा अवधि के दौरान विशेष अवकाश देने का निर्णय लिया है. इससे परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है.
क्यों जरूरी किया गया UPTETसरकारी नियमों के अनुसार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी योग्यता जरूरी है. निर्धारित समय सीमा के अंदर सेवारत शिक्षक की सेवाओं को आगे बढ़ाने के लिए और प्रमोशन के लिए लिहाज से UPTET को को अनिवार्य किया गया है.यह भी पढ़ें - NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट जल्द! कॉपियों की जांच शुरू, 10 हजार से ज्यादा आपत्तियों पर हो रहा मंथनकब होगी परीक्षा?यह परीक्षा 2 जुलाई 3 जुलाई और 4 जुलाई को आयोजित की जाएगी. परीक्षा दो दो शिफ्ट में होगी. पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर को 12:00 तक चलेगी. जिसमें प्राथमिक स्तर के उम्मीदवार शामिल होंगे. इसके बाद दूसरी शिफ्ट 2:30 बजे से 5:00 बजे तक आयोजित की जाएगी. जो की उच्च प्राथमिक स्तर के लिए होगी.
कैसा होगा परीक्षा का पैटर्न?
परीक्षा ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट पर आयोजित की जाएगी. 150 प्रश्न पूछे जाएंगे अभ्यर्थियों को पेपर हल करने के लिए 150 मिनट का समय भी दिया जाएगा इस परीक्षा की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई भी नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी.यूपी TET में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले तैयारी के साथ-साथ सभी जरूरी डॉक्यूमेंट भी तैयार रखने की सलाह दी जाती है. परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचना जरूरी होगा. ताकि परीक्षा केंद्र पर किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. अभ्यर्थी एडमिट कार्ड में दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और उसी के अनुसार परीक्षा में शामिल हो.कैसे करें UPTET 2026 admit card डाउनलोड?इसके लिए उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं. वहां पर होम पेज पर UPTET 2026 एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें. और अपनी परीक्षा से जुड़ी जानकारी को चुनें. उसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद, अभ्यर्थी अपना डिटेल्स भरें. उसके बाद आपको स्क्रीन पर सिक्योरिटी कोड दिखाई देगा, उसको एंटर करने के बाद, आप सबमिट पर क्लिक करें, आपका एडमिट कार्ड वहां पर दिख जाएगा और आप उसे डाउनलोड कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>UKPSC PCS Recruitment: उत्तराखंड में जल्द होगी PCS के 63 पदों पर भर्ती, अक्टूबर में प्री&amp;परीक्षा का प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप उत्तराखंड में रहते हैं और सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं तो आपके लिए गुड न्यूज है. लंबे समय से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए मौका सामने आ रहा है. राज्य में जल्द ही प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस - PCS) के 63 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने वाली है. उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने इस दिशा में अपना काम तेज कर दिया है और जल्द ही इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जाएगा.
क्या है आयोग की तैयारी?
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) के सचिव अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि राज्य सरकार की तरफ से आयोग को 63 खाली पदों पर भर्ती करने का प्रस्ताव मिल चुका है. फिलहाल, आयोग की टीम इस प्रस्ताव की बारीकी से जांच कर रही है. जैसे ही यह कागजी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, वैसे ही भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा. विज्ञापन जारी होने के बाद सभी योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.
अक्टूबर में हो सकती है प्री-परीक्षा
बता दें कि पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) अक्टूबर में कराए जाने की योजना है. आयोग ने युवाओं को सलाह दी है कि वे विज्ञापन का इंतजार करने की जगह अपनी किताबों और सिलेबस पर ध्यान देना शुरू कर दें.&amp;nbsp;
पीसीएस परीक्षा क्यों है इतनी खास?
पीसीएस (PCS) परीक्षा किसी भी राज्य की सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानजनक परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. इस परीक्षा को पास करने के बाद युवाओं को राज्य सरकार के बड़े और अहम प्रशासनिक पदों पर काम करने का मौका मिलता है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा का फॉर्म भरते हैं, इसलिए इसमें कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा होता है. अगर आप कामयाबी पाना चाहते हैं तो आपको अभी से अच्छी स्ट्रैटिजी और टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई शुरू करनी होगी.
हाईकोर्ट एआरओ और अन्य पदों की परीक्षा पर भी बड़ा अपडेट
पीसीएस के अलावा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने एक और महत्वपूर्ण परीक्षा की तारीख का ऐलान कर दिया है. उत्तराखंड हाईकोर्ट में सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO), असिस्टेंट लाइब्रेरियन, अनुवादक (Translator) और टाइपिस्ट के कुल 24 पदों पर भी भर्ती होनी है. आयोग ने तय किया है कि इन 24 पदों के लिए परीक्षा 19 जुलाई को होगी. छात्रों की सुविधा के लिए यह परीक्षा राज्य के तीन प्रमुख शहरों देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में कराई जाएगी.
एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें?
जिन भी उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट के इन 24 पदों के लिए आवेदन किया है, उनके लिए एडमिट कार्ड 4 जुलाई को जारी कर दिए जाएंगे. यह प्रवेश पत्र आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही उपलब्ध होंगे. आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी उम्मीदवार को डाक या पोस्ट ऑफिस के जरिए प्रवेश पत्र नहीं भेजा जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP पुलिस SI PET 2026 दौड़ के दौरान युवती समेत 10 अभ्यर्थी बेहोश, मची अफरा&amp;तफरी</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी के लिए की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के साथ फिजिकल टेस्ट भी उतना ही जरूरी होता है. ऐसे में उत्तर प्रदेश में होने वाली SI भर्ती परीक्षा के लिए फिजिकल टेस्ट के पहले ही गाजियाबाद में एक युवती सहित 10 अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने की घटना ने भर्ती परीक्षा के उम्मीदवारों की आगे के लिए सावधानियां बरतने की सलाह दी.
गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित 47वीं वाहिनी पीएसी परिसर में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा &amp;nbsp;(PET) के दौरान दौड़ पूरी करते समय एक युवती सहित 10 अभ्यर्थी अचानक चक्कर खाकर गिर पड़े.मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने तुरंत सभी को प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचाया गया.
दो उम्मीदवारों को किया रेफर
डॉक्टरों के इलाज के बाद &amp;nbsp;दो उम्मीदवारों की हालत को देखते हुए बेहतर &amp;nbsp;ट्रीटमेंट के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया. वहीं अन्य अभ्यर्थियों की हालत सामान्य मिलने पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. समय रहते चिकित्सा सुविधा मिलने से सभी को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UP में ग्रेजुएशन कर रहीं बेटियों के लिए खुशखबरी! सरकार दे रही स्कॉलरशिप, पढ़ाई का खर्च होगा कम
हजारों पदों पर चल रही भर्ती
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से उपनिरीक्षक (SI) के 4,543 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है. शारीरिक दक्षता परीक्षा प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की जा रही है.गाजियाबाद केंद्र पर पहले दिन कुल 565 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था, जिनमें 164 महिला उम्मीदवार भी शामिल थीं.
अभ्यर्थीयों को दी गयी चेतावनीपुलिस भर्ती हो या सेना में सेवा उम्मीदवार को शारीरिक टेस्ट परीक्षा का सामना करना हो होता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले नियमित दौड़ का अभ्यास करना चाहिए, पर्याप्त पानी पीना चाहिए, संतुलित भोजन करना चाहिए और पर्याप्त नींद लेनी चाहिए. बिना तैयारी के सीधे शारीरिक परीक्षा में शामिल होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>UPTET में इस बार लागू होगा नॉर्मलाइजेशन, जानें रिजल्ट पर क्या होगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ इस बार यूपी TET2026 की परीक्षा देने जा रहें है तो ये खबर आपके लिए जरुरी हो सकती है. पहली बार UPTET के रिजल्ट में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू करने जा रहा है. ऐसे में कई अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ सकते हैं, तो कुछ के नंबर कम भी हो सकते हैं. इसका नियम का मकसद सभी अभ्यर्थियों का बराबर का मौका देना है.
2 जुलाई से 4 जुलाई के बीच होगी परीक्षा&amp;nbsp;
UPTET 2026 का आयोजन 2, 3 और 4 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में किया जाएगा.इस बार उम्मीदवारों की संख्या काफी ज्यादा है. इसी वजह से परीक्षा तीन दिन में और हर दिन दो-दो शिफ्ट में कराई जाएगी. यानी कुल 6 शिफ्ट में परीक्षा होगी.जब कोई परीक्षा कई शिफ्ट में आयोजित होती है, तो हर शिफ्ट का प्रश्नपत्र बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता है. किसी शिफ्ट का पेपर थोड़ा आसान हो सकता है, जबकि किसी का कठिन है. इसी अंतर को खत्म करने के लिए नॉर्मलाइजेशन का इस्तेमाल किया जाता है.
क्या होता है नॉर्मलाइजेशननॉर्मलाइजेशन एक गणितीय प्रक्रिया &amp;nbsp;है. इस प्रक्रिया का इस्तेमाल उन परीक्षाओं में किया जाता है.जो कई शिफ्ट में आयोजित होती हैं. इस बार UPTET में पहली बार नॉर्मलाइजेशन लागू किया जा रहा है.इस प्रक्रिया को लागू करने की बजह &amp;nbsp;परीक्षा का &amp;nbsp;अलग-अलग शिफ्टों में होना है.
UPESSC का मानना है कि जब परीक्षा कई पालियों में आयोजित होगी,और सभी उम्मीदवारों को सामान अवसर मिले. इसी कारण सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और अन्य बड़ी भर्ती परीक्षाओं में अपनाई जा रही व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.
क्या रिजल्ट आने पर नंबर बदल सकते हैं?इस प्रक्रिया में कुछ उम्मीदवारों के नंबर पहले से कम हो सकते हैं. कुछ उम्मीदवारों के नंबर बढ़ भी सकते हैं.अंतिम रिजल्ट नॉर्मलाइजेशन के बाद तैयार किया जाएगा. इसलिए केवल आंसर-की के आधार पर अपनी रैंक या चयन का अनुमान लगाना सही नहीं होगा.
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किन उम्मीदवारों को &amp;nbsp;मिलेगा मौका?
अगर किसी उम्मीदवार का पेपर वाकी शिफ्ट की तुलना में कठिन था तो उनको &amp;nbsp;इस नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का फायदा मिल सकता है. ऐसे उम्मीदवारों के अंक बढ़ सकते हैं ताकि कठिन पेपर का नुकसान उन्हें न उठाना पड़े.
किन उम्मीदवारों के नंबर घट सकते हैं?
अगर किसी शिफ्ट का प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान था और उसमें बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अच्छे अंक हासिल किए हैं, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद ऐसे उम्मीदवारों के अंक कुछ कम हो सकते हैं. हालांकि यह कटौती मनमाने तरीके से नहीं होती. इसके लिए तय नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान कई उम्मीदवारों के अंक पहले जैसे ही रह सकते हैं. वहीं कुछ के नंबर थोड़ा बढ़ या घट सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>DU PG Admission 2026: DU PG में दाखिले का एक और मौका, जानें कब खुलेगी मिड&amp;एंट्री विंडो</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में पीजी (PG) में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अहम अपडेट है. अगर आप पहले आवेदन नहीं कर पाए थे या आवेदन फॉर्म में कोई गलती रह गई है, तो अब आपके पास एक और मौका है. विश्वविद्यालय ने PG Admission 2026-27 के लिए नया शेड्यूल जारी कर दिया है, जिसमें सीट अपग्रेड, मिड-एंट्री, करेक्शन विंडो, तीसरे राउंड की सीट अलॉटमेंट और स्पेशल कोटा से जुड़ी सभी जरूरी तारीखें घोषित कर दी गई हैं.
सबसे पहले बात अपग्रेड विंडो की. जिन छात्रों ने पहले या दूसरे राउंड में सीट स्वीकार कर फीस जमा कर दी है, वे 30 जून सुबह 10 बजे से 1 जुलाई शाम 4:59 बजे तक अपनी सीट को Freeze या Upgrade करने का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि, जिन उम्मीदवारों को पहले ही उनकी पहली पसंद की सीट मिल चुकी है या जिन्होंने पहले से सीट फ्रीज कर दी है, वे अपग्रेड का विकल्प नहीं चुन पाएंगे.
अगर किसी छात्र से आवेदन के दौरान कोई गलती हो गई थी या वह अब तक आवेदन ही नहीं कर पाया, तो उसके लिए भी राहत की खबर है. 2 जुलाई से 4 जुलाई तक विश्वविद्यालय मिड-एंट्री और करेक्शन विंडो खोलेगा. इस दौरान नए उम्मीदवार 1,000 रुपये की नॉन-रिफंडेबल फीस देकर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे. वहीं पहले से रजिस्ट्रेशन करा चुके छात्र अपने आवेदन फॉर्म में जरूरी सुधार कर सकेंगे.
तय समय तक ही करेक्शन का मौका
विश्वविद्यालय ने साफ कहा है कि करेक्शन और मिड-एंट्री का मौका सिर्फ तय समय तक ही मिलेगा. इसके बाद किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी कर लें.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UP में ग्रेजुएशन कर रहीं बेटियों के लिए खुशखबरी! सरकार दे रही स्कॉलरशिप, पढ़ाई का खर्च होगा कम
इसके बाद 6 जुलाई को तीसरे राउंड की CSAS (PG) सीट अलॉटमेंट और परफॉर्मेंस-बेस्ड प्रोग्राम्स के पहले राउंड का रिजल्ट जारी किया जाएगा. जिन छात्रों को सीट मिलेगी, उन्हें 6 जुलाई से 9 जुलाई शाम 4:59 बजे तक अपनी सीट स्वीकार करनी होगी.
ये हैं जरूरी डेट्स
वहीं CW, स्पोर्ट्स और वार्ड सुपरन्यूमरेरी कोटा की सीट अलॉटमेंट 7 जुलाई को जारी होगी. इन श्रेणियों के उम्मीदवार भी 7 जुलाई से 9 जुलाई के बीच अपनी सीट स्वीकार कर सकेंगे. सीट स्वीकार करने के बाद संबंधित विभाग, कॉलेज और केंद्र 9 जुलाई तक ऑनलाइन दस्तावेजों का सत्यापन और मंजूरी देंगे. इसके बाद उम्मीदवारों को 10 जुलाई शाम 4:59 बजे तक प्रवेश शुल्क जमा करना होगा. विश्वविद्यालय ने पूरी प्रवेश प्रक्रिया 11 जुलाई 2026 तक पूरी करने की डेट तय की है.यह भी पढ़ें - UPTET में इस बार लागू होगा नॉर्मलाइजेशन, जानें रिजल्ट पर क्या होगा असर? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BHU में निकली नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए भर्ती, 12वीं पास से लेकर पोस्टग्रेजुएट तक कर सकते है आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भारत कला भवन में ग्रुप बी और ग्रुप सी के कई नॉन टीचिंग पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. इस भर्ती के जरिए कुल 10 पदों को भरा जाएगा.12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट पास उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. इच्छुक उम्मीदवार 8 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
किन पदों पर होगी भर्ती?इस भर्ती में सहायक क्यूरेटर कलाकार सहायक फोटोग्राफर जूनियर ड्राफ्टमैन और गैलरी परिचालक जैसे पर शामिल है कल 10 पदों में सबसे ज्यादा पड़ गैलरी पर परिचालक के हैं इसके अलावा सहायक क्यूरेटर के दो कलाकार का एक सहायक फोटोग्राफर का एक और जूनियर ड्राफ्टमैन के एक पर भर्ती होगी.
क्या चाहिए योग्यता?इस भर्ती में आवेदन करने के लिए योग्यता पदों के अनुसार अलग-अलग तरीके तय की गई है. सहायक क्यूरेटर के लिए संग्रहालय विज्ञान, विरासत प्रबंधन में 55% अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा कलाकार पद के लिए फाइन आर्ट्स में ग्रेजुएट और 5 साल का अनुभव होना चाहिए. असिस्टेंट फोटोग्राफर के लिए फोटोग्राफी में डिग्री डिप्लोमा के साथ 1 साल का एक्सपीरियंस मांगा गया है वहीं जूनियर डॉक्यूमेंट पद के लिए 12वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. गैलरी परिचारक पद के लिए सिर्फ 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.अगर किसी उम्मीदवार के पास संग्रहालय या संबंधित संस्थान में काम करने का अनुभव है तो उसे प्राथमिकता दी जाएगी.
उम्र सीमा&amp;nbsp;इस पर आवेदन करने के लिए उम्र सीमा अलग-अलग तय की गई है इसमें अधिकतम उम्र सीमा 35 वर्ष तय की गई है आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार उम्र सीमा में छूट दी जाएगी.यह भी पढ़ें - UPTET में इस बार लागू होगा नॉर्मलाइजेशन, जानें रिजल्ट पर क्या होगा असर?
कितना लगेगा आवेदन शुल्क?इन पदों पर आवेदन करने के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग और सभी महिला उम्मीदवारों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रियाइन पदों पर चयन के लिए सबसे पहले आवेदन आवेदन पत्र की जांच होगी उसके बाद योग उम्मीदवार को लिखित परीक्षा उसके टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा दोनों चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवार का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होने के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी.
कैसे होगा आवेदन&amp;nbsp;इस पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले बीएचयू के Recruitment &amp;amp; Assessment Cell (RAC) पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें. इसके बाद लॉगिन करके संबंधित पद का आवेदन फॉर्म भरें, जरूरी डॉक्यूमेंट, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें. और आवेदन फॉर्म को सबमिट करें.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - UP पुलिस SI PET 2026 दौड़ के दौरान युवती समेत 10 अभ्यर्थी बेहोश, मची अफरा-तफरी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>DSSSB का बड़ा फैसला, अब 18 साल की उम्र में भी बन सकेंगे शिक्षक</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप दिल्ली में सरकारी शिक्षक बनना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए काम की हो सकती है. DSSSB ने प्राइमरी स्पेशल एजुकेटर टीचर भर्ती 2026 के लिए बड़े नियमों में बड़ा बदलवाव किया गया है. अब इस भर्ती के लिए आवेदन करने की उम्र अब &amp;nbsp;21 साल नहीं, बल्कि 18 साल कर दी गयी है. ऐसे में जो उम्मीदवार कम उम्र की वजह से आवेदन नहीं कर पाते थे उनके लिए ये मौका बड़े काम का हो सकता है.
किन भर्तियों पर लागू होगा नया नियम?
DSSSB ने प्राइमरी स्पेशल एजुकेटर टीचर भर्ती के लिए उम्र सीमा घटा दी है, पहले इस पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 साल होना जरूरी था. जिससे कम उम्र के उम्मीदवार आवेदन नही कर पाते थे. तो दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने अब यह सीमा 18 साल कर दी है. यानी जो उम्मीदवार 18 साल पूरे कर चुके हैं, वे भी इस भर्ती के लिए अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि यह बदलाव सिर्फ पोस्ट कोड 44/26 वाली भर्ती पर ही जारी होगा. इसके अलावा बाकी भर्तियों के नियम पहले जैसे ही रहेंगे.
क्यों लिया गया ये फैसला?
DSSSB के अधिकारिक &amp;nbsp;नोटिस में इस बताया गया कि यह बदलाव दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के अनुरोध पर किया गया है.शिक्षा विभाग ने बोर्ड से उम्र &amp;nbsp;सीमा कम करने की सिफारिश की थी. इसके बाद बोर्ड ने कुछ नियमों को अपडेट कर के नई उम्र सीमा तय कर दी है. इस फैसले के तहत आयोग का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा योग्य उम्मीदवारों को सरकारी शिक्षक बनने का मौका देना है. साथ ही बोर्ड ने साफ कहा की सिर्फ उम्र सीमा में बदलवाव किया गया इसके अलावा भर्ती के सभी नियम पहले जैसे ही रहेंगे. इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दो जाती है की भर्ती से जुडी पूरी जानकारी के लिए एक बार नोटिफिकेशन जरूर चेक कर ले.
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किसको मिलेगा फायदा?
DSSSB के इस फैलसे से सोबे ज्यादा फायदा उन युवाओं को होगा जिन्होंने हाल ही में 18 साल की उम्र पूरी की है. पहले उन्हें 21 साल होने तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.
कितने पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती के तरह कुल 450 प्राइमरी स्पेशल एजुकेटर टीचर पदों को भरा जायेगा.
इस भर्ती के लिए क्या चाहिए योग्यता ?
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है, इसके अलावा उम्मीदवार के पास D.Ed. स्पेशल एजुकेशन या RCI में मान्यता प्राप्त योग्यता भी होनी चाहिए. साथ ही CTET प्राइमरी लेवल पास होना भी जरूरी है. उम्मीदवार के पास RCI रजिस्ट्रेशन भी होना जरूरी है. इन सभी शर्तों को पूरा करने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन के पात्र होंगे.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>CUET नहीं दिया या नंबर आए कम? फिर भी दिल्ली यूनिवर्सिटी में मिल सकता है एडमिशन, जानिए तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ यदि आपने भी CUET UG 2026 की परीक्षा नहीं दी है या फिर आपका स्कोर उम्मीद के मुताबिक कम आया है तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ऐसे स्टूडेंट्स के लिए कुछ ऐसे एडमिशन ऑप्शन उपलब्ध कराए हैं, जिनके जरिए बिना CUET स्कोर के भी कुछ कोर्स में दाखिला मिल सकता है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के नियमित कॉलेजों में ज्यादातर ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन CUET के आधार पर ही होता है. लेकिन स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL), नॉन-कॉलेजिएट विमेंस एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) और कई सर्टिफिकेट कोर्स ऐसे हैं, जहां CUET स्कोर जरूरी नहीं है.
12वीं के अंकों से मिलेगा एडमिशन
SOL में दाखिले के लिए छात्रों का चयन मुख्य रूप से 12वीं के अंकों के आधार पर किया जाता है. यहां बीए, बीकॉम, बीबीए, बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज समेत कई कोर्स उपलब्ध हैं. जो छात्र नियमित कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाए हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प माना जाता है.
सिर्फ छात्राओं के लिए NCWEB
दिल्ली की रहने वाली छात्राएं NCWEB के जरिए भी बिना CUET के एडमिशन ले सकती हैं. यहां बीए और बीकॉम जैसे कोर्स में प्रवेश 12वीं के &#039;बेस्ट फोर&#039; विषयों के अंकों के आधार पर दिया जाता है.
इन सर्टिफिकेट कोर्स में भी नहीं चाहिए CUET
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कॉलेज विदेशी भाषाओं जैसे जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश और चीनी के अलावा डिजिटल मार्केटिंग, डेटा साइंस जैसे प्रोफेशनल सर्टिफिकेट कोर्स भी कराते हैं. इन कोर्स में दाखिले के लिए CUET स्कोर की जरूरत नहीं होती. कुछ कोर्स मेरिट के आधार पर और कुछ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सीटें देते हैं.यह भी पढ़ें&amp;nbsp; - CBSE की पोल खोलने वाले 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने लॉन्च किया पोर्टल, 1.66 करोड़ सरकारी रिकॉर्ड किए सार्वजनिक
आवेदन कैसे करें?
SOL और NCWEB में एडमिशन के लिए छात्रों को अलग-अलग ऑनलाइन आवेदन करना होगा. वहीं सर्टिफिकेट कोर्स के लिए संबंधित कॉलेज में सीधे आवेदन करना होगा. आवेदन के समय 12वीं की मार्कशीट और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार रखें.
कब शुरू होंगे आवेदन?
इन एडमिशन प्रक्रियाओं के लिए आवेदन आमतौर पर जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई में शुरू होते हैं. इसलिए छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर लगातार नजर बनाए रखें, ताकि आवेदन, मेरिट लिस्ट और काउंसलिंग से जुड़ा कोई भी अपडेट न छूटे. ज्यादा डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.यह भी पढ़ें&amp;nbsp; - HSSC Jobs 2026: हरियाणा में सरकारी नौकरी का मौका, आवेदन शुरू; जानें कौन कर सकता है अप्लाई ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>CUET, नहीं, दिया, या, नंबर, आए, कम, फिर, भी, दिल्ली, यूनिवर्सिटी, में, मिल, सकता, है, एडमिशन, जानिए, तरीका</media:keywords>
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        <title>CBSE OSM Controversy: वेदांत मामले में &amp;apos;Blatant Lie&amp;apos; का सच? वायरल सर्कुलर और डेटा प्राइवेसी पर उठे गंभीर सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE की नई On-Screen Marking (OSM) प्रणाली पर सवाल तब खड़े हुए थे, जब कक्षा 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव को फिजिक्स की अपनी answer sheet की जगह किसी दूसरे छात्र की कॉपी दिखाई गई थी. वेदांत ने इस गड़बड़ी को सार्वजनिक किया, जिसके बाद CBSE ने माना कि answer sheet बदल गई थी और बाद में उन्हें उनकी original कॉपी उपलब्ध कराई गई. इसके बाद उनके अंक भी बढ़े. अब इसी मामले में एक नया विवाद सामने आया है.
सोशल मीडिया पर वायरल एक सर्कुलर सामने आया है, जिसमें &amp;ldquo;Blatant Lie&amp;rdquo; (सरासर झूठ) जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरासर झूठा किसे कहा जा रहा है? क्या वेदांत को, जिन्होंने कहा कि री-इवैल्यूएशन में उनके सिर्फ 2 अंक बढ़े? इतना ही नहीं, इस वायरल सर्कुलर की आधिकारिक पुष्टि भी अब तक नहीं हुई है. न CBSE ने इसकी जिम्मेदारी ली है और न ही शिक्षा मंत्रालय के सूत्र इसे अपना दस्तावेज मान रहे हैं. ऐसे में यह पूरा मामला कई सवाल खड़े कर रहा है.
सवाल 1: वेदांत का दावा क्या है?
वेदांत का कहना है कि री-इवैल्यूएशन के बाद उनके सिर्फ दो अंक बढ़े. उनके मुताबिक, गणित में 1 और कंप्यूटर साइंस में 1 अंक बढ़ा है, जबकि फिजिक्स में री-इवैल्यूएशन के बाद एक भी अंक नहीं बढ़ा.&amp;nbsp;
सवाल 2: फिर 11 अंक बढ़ने की बात कहां से आई?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक सर्कुलर में दावा किया गया है कि वेदांत के कुल 11 अंक बढ़े हैं और उनके विषयवार अंक भी उसमें लिखे गए हैं. हालांकि, इस सर्कुलर की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है.
सवाल 3: वेदांत और उनके पिता इस पर क्या कह रहे हैं?
वेदांत और उनके पिता का कहना है कि फिजिक्स में जो 9 अंक बढ़े थे, वह री-इवैल्यूएशन की वजह से नहीं, बल्कि उत्तर पुस्तिका की अदला-बदली की गलती सामने आने के बाद बढ़े थे. उनका कहना है कि जब उन्हें उनकी orional answer sheet मिली, तभी अंक सुधारे गए. इसलिए उनका दावा है कि उन 9 अंकों को री-इवैल्यूएशन में हुई बढ़ोतरी बताना सही नहीं है.
सवाल 4: यह वायरल सर्कुलर जारी किसने किया?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है. अब तक CBSE ने इस वायरल सर्कुलर की जिम्मेदारी नहीं ली है. वहीं, शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने भी इसे जारी करने से इनकार किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर यह सर्कुलर न CBSE ने जारी किया और न ही शिक्षा मंत्रालय ने, तो फिर इसमें वेदांत के विषयवार अंक हू-ब-हू कैसे दर्ज हैं?
सवाल 5: क्या वेदांत ने खुद अपने अंक सार्वजनिक किए थे?
वेदांत का कहना है कि उन्होंने कभी भी अपने विषयवार अंक सार्वजनिक नहीं किए. उनका दावा है कि न उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अंक साझा किए और न ही किसी अन्य माध्यम से.
सवाल 6: क्या अंक सार्वजनिक करने से पहले उन्हें जानकारी दी गई थी?
वेदांत का कहना है कि उन्हें न कोई कॉल आया और न ही कोई ईमेल, जिसमें बताया गया हो कि उनके विषयवार अंक सार्वजनिक किए जाएंगे. उनका कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी सीधे वायरल सर्कुलर के सामने आने के बाद मिली.
सवाल 7: परिवार अब क्या कह रहा है?
वेदांत के पिता संजय का कहना है कि अगर उनके बेटे ने अपने अंक सार्वजनिक नहीं किए तो उसकी व्यक्तिगत जानकारी बाहर कैसे आई? उनका कहना है कि किसी छात्र के विषयवार अंक सार्वजनिक करना गंभीर मामला है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में अब तक CBSE की ओर से उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है और वह कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं.
क्या हैं सबसे बड़े सवाल?

&amp;ldquo;Blatant Lie&amp;rdquo; कहकर आखिर सरासर झूठा किसे बताया जा रहा है?
वायरल सर्कुलर जारी किसने किया?
अगर यह आधिकारिक नहीं है तो इसमें वेदांत के विषयवार अंक हू-ब-हू कैसे दर्ज हैं?
अगर छात्र ने अपने अंक सार्वजनिक नहीं किए तो उसकी व्यक्तिगत जानकारी बाहर कैसे पहुंची?
अगर यह दस्तावेज़ आधिकारिक है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह मामला केवल &amp;ldquo;11 नंबर बनाम 2 नंबर&amp;rdquo; का नहीं, बल्कि कॉपी बदलने, री-इवैल्यूएशन, डेटा प्राइवेसी और वायरल सर्कुलर की प्रामाणिकता से जुड़ा विवाद है.

यह भी पढ़ें: थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर CBSE का बड़ा फैसला, तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी बोर्ड परीक्षा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sharmistha Mukherjee Education: कितनी पढ़ी&amp;लिखी हैं शर्मिष्ठा मुखर्जी, उनके पास कौन&amp;कौन सी डिग्री?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sharmistha-mukherjee-education-कितनी-पढ़ी-लिखी-हैं-शर्मिष्ठा-मुखर्जी-उनके-पास-कौन-कौन-सी-डिग्री</link>
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        <description><![CDATA[ Sharmistha Mukherjee Education: देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी इन दिनों अपने बयानों को लेकर से चर्चा में हैं. उन्होंने कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है. साथ ही राहुल गांधी के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं. इसके अलावा शर्मिष्ठा मुखर्जी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक लेख भी लिखा है.
उनके इन बयानों के बाद लोग शर्मिष्ठा मुखर्जी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में उनके करियर और एजुकेशन से जुड़े भी बहुत से सवाल हैं, जिन्हे लोग सर्च कर रहे हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि शर्मिष्ठा मुखर्जी कितनी पढ़ी-लिखी हैं और उनके पास कौन-कौन सी डिग्री है.&amp;nbsp;
कहां हुआ शर्मिष्ठा मुखर्जी का जन्म?
शर्मिष्ठा मुखर्जी का जन्म 30 अक्टूबर 1965 को पश्चिम बंगाल में हुआ था. हालांकि, उनका बचपन और पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में हुई. वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और सुव्रा मुखर्जी की बेटी हैं.&amp;nbsp;
शर्मिष्ठा मुखर्जी कितनी पढ़ी-लिखी हैं?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के लेडी इरविन स्कूल से की, इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की, जहां उन्होंने समाजशास्त्र (Sociology) में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - CBSE Class 10th Second Board Result 2026 : CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड रिजल्ट कभी भी हो सकता है जारी, ऐसे डाउनलोड करें स्कोरकार्ड
राजनीति में कब रखा कदम?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने जुलाई 2014 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली और राजनीति में कदम रखा. पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने कई रैलियों में हिस्सा लिया और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ काम किया. साल 2015 में उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में ग्रेटर कैलाश सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली.&amp;nbsp;
कथक में भी बनाई अपनी खास पहचान
शर्मिष्ठा मुखर्जी सिर्फ राजनीति तक ही सीमित नहीं रहीं, वह एक जानी-मानी कथक डांसर और कोरियोग्राफर भी हैं. उन्होंने 12 साल की उम्र से कथक सीखना शुरू कर दिया था. उन्हें पंडित दुर्गा लाल, विदुषी उमा शर्मा और राजेंद्र गंगानी जैसे फेमस टिचर्स से कथक की ट्रेनिंग मिली. उनके कथक डांस की कई मंचों पर खूब तारीफ भी की गई.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Sharmistha, Mukherjee, Education:, कितनी, पढ़ी-लिखी, हैं, शर्मिष्ठा, मुखर्जी, उनके, पास, कौन-कौन, सी, डिग्री</media:keywords>
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        <title>महाराष्ट्र सरकार ने जारी किया नया नियम, 1 से 10 तक के सभी स्कूलों में मराठी पढ़ना होगा जरुरी</title>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों के लिए एक नया नियम लागू किया है. जिसमें अब राज्य के सभी स्कूलों में मराठी पढ़ना जरूरी होगा. सरकार का कहना है कि इससे मराठी भाषा को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों को राज्य की संस्कृति और इतिहास के बारे में बेहतर जानकारी मिलेगी. सरकार ने सख्त आदेश दिए की सभी स्कूलों को यह नियम मानना होगा. इस फैसले को न वाले स्कूलों पर सरकार सख्त कार्रवाई कर सकती है.
महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने बताया कि राज्य के हर स्कूल को यह नियम मानना होगा. सरकार ने साफ कहा कि मराठी पढ़ना अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि जरूरी होगा.सरकार अपने फैसले को सिर्फ कागजों पर तक ही सीमित नहीं रहना चाहती है. इसके लिए पूरे राज्य में जांच अभियान चलाया जाएगा. जिसमें अगर कोई भी स्कूल इस नियम का पालन नहीं करता मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
विधानसभा में उठा था मामला
यह मुद्दा विधानसभा के में चर्चा के दौरान सामने आया कुछ नेताओं ने कहा कि कई स्कूल पहले से नियमों का ठीक से पालन नहीं कर रहे थे कार्रवाई बहुत असरदार नहीं दिख रही थी. इन सब के बाद सरकार ने इस नियम का फैसला किया.
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अब बच्चे पढ़ेंगे छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास
सरकार ने बताया कि अब बच्चे छत्रपति शिवाजी महाराज का पूरा इतिहास पढ़ेंगे और अब किताबों में इसको और अधिक विस्तार से समझाया गया ह. &amp;nbsp;जिससे बच्चे छत्रपति शिवाजी महाराज के बलिदानों के बारे में और अच्छे से समझ सके.
मराठी संस्कृति को बढ़ावा देना है उद्देश्ययह फैसला सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है बल्कि इस भाषा के जरिये छात्रों को मराठी संस्कृति का इतिहास जानने का मौका मिलेगा और मराठी संस्कृति में भी काफी मदद करेगा.अभी&amp;nbsp; सीबीएसई भी देशभर में नई भाषा नीति को लेकर धीरे-धीरे नियम लागू की तैयारी कर रहा है.हालांकि अभी पढ़ रहे छात्रों को पूर्ण नियमों के अनुसार राहत दी गई है लेकिन आने वाले समय में सीबीएसई इस पर नए फैसले भी ले सकता है.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Germany Visa Interview:  जर्मनी में पढ़ाई के लिए कैसे मिलता है स्टूडेंट वीजा, इंटरव्यू में पूछे जाते हैं कौन से सवाल?</title>
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        <description><![CDATA[ Germany Visa Interview:&amp;nbsp;विदेश में पढ़ने की बात करें तो जर्मनी आज भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा देशों में से एक बन गया है. बता दें कि साल 2024 में करीब 49,000 से ज्यादा भारतीय छात्र जर्मनी की यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे थे और यह संख्या देखते ही देखते हर साल बढ़ती ही जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि जर्मनी की सरकारी यूनिवर्सिटीज में ट्यूशन फीस लगभग न के बराबर होती है. इसके अलावा पढ़ाई का स्तर बहुत ऊंचा है और पढ़ाई के बाद नौकरी मिलने के भी अच्छे मौके होते हैं. लेकिन जर्मनी में पढ़ने के लिए सबसे पहले आपको स्टूडेंट वीजा लेना जरूरी है, जो कि एक जरूरी कदम है.&amp;nbsp;
वीजा आवेदन कैसे करें पूरा तरीका?
जर्मनी का स्टूडेंट वीजा पाने के लिए आपको कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार करने पढ़ते हैं. सबसे पहले आपके पास जर्मन यूनिवर्सिटी का एडमिशन लेटर होना चाहिए. इसके साथ ही APS सर्टिफिकेट भी जरूरी है, जो आपके भारतीय पढ़ाई के कागजों की जांच करता है यह 2022 से सभी भारतीय आवेदकों के लिए अनिवार्य है. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस, पासपोर्ट, भाषा की परीक्षा जिस्मेल्ट्स , TOEFL या TestDaF का सर्टिफिकेट और एक कवर लेटर भी जरूरी है जिसमें आप अपनी पढ़ाई की योजना लिखते हैं.&amp;nbsp;
जनवरी 2025 से जर्मनी ने वीजा आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है. अब आवेदन Consular Services Portal यानी digital.diplo.de पर करना होता है पहले आप इस पोर्टल पर अपना खाता बनाएं और सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करें. अधिकारी आपके कागज पहले ऑनलाइन जांचते हैं, फिर आपको VFS केंद्र पर अपॉइंटमेंट का लिंक मिलता है. वीजा की फीस करीब 75 यूरो यानी लगभग 7,300 रुपये है. वीजा मिलने में आमतौर पर 6 से 12 हफ्ते का समय लग सकता है, इसलिए कोर्स शुरू होने से कम से कम 3-4 महीने पहले आवेदन करें.
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इंटरव्यू में क्या-क्या पूछा जाता है?
रजिस्ट्रेशन और फीस जमा करने के अलावा इंटरव्यू भी देना जरूरी होता है. वीजा इंटरव्यू जर्मन दूतावास में होता है और यह आमतौर पर 10 से 15 मिनट का होता है. इसमें वीजा अधिकारी यह देखना चाहते हैं कि आप सच में पढ़ने जाना चाहते हैं या नहीं. ऐसे में कई लोगों के दिमाग में ये सवाल आटा है की इस इंटरव्यू में क्या क्या पूछा जाएगा. इंटरव्यू में आमतौर पर ये सवाल पूछे जाते हैं:

जर्मनी ही क्यों चुना पढ़ाई के लिए? यहां आपको जर्मनी की शिक्षा की गुणवत्ता और अपने करियर से जोड़कर जवाब देना होगा.
आपका कोर्स क्या है और आपने यह यूनिवर्सिटी क्यों चुनी?
पढ़ाई का खर्च कहां से आएगा? ब्लॉक्ड अकाउंट और पारिवारिक सहायता के बारे में बताएं.
पढ़ाई के बाद क्या करेंगे भारत लौटेंगे या जर्मनी में रहेंगे?
जर्मनी में कहां रहेंगे? छात्रावास, किराए का घर आदि की जानकारी रखें.
आपकी पुरानी पढ़ाई का आपके इस कोर्स से क्या संबंध है?

ध्यान दें कि इंटरव्यू में हमेशा सच बोलें, आत्मविश्वास रखें और जवाब सीधे व साफ दें. रटे-रटाए जवाब न दें.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Germany, Visa, Interview: , जर्मनी, में, पढ़ाई, के, लिए, कैसे, मिलता, है, स्टूडेंट, वीजा, इंटरव्यू, में, पूछे, जाते, हैं, कौन, से, सवाल</media:keywords>
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        <title>Rashtrapati Bhavan Recruitment Process: राष्ट्रपति भवन में कैसे लगती है नौकरी, क्या डायरेक्ट होती है भर्ती?</title>
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        <description><![CDATA[ Rashtrapati Bhavan Recruitment Process: देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी परिसरों में गिने जाने वाले राष्ट्रपति भवन में नौकरी करने का सपना कई लोग देखते हैं. हालांकि बहुत से लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या राष्ट्रपति भवन में सीधे भर्ती होती है या यहां नौकरी पाने के लिए कोई अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है.
दरअसल, राष्ट्रपति भवन में भर्ती का तरीका पद के अनुसार अलग-अलग होता है. कुछ पदों पर सीधी भर्ती की जाती है, जबकि कई पद डेपुटेशन, कॉन्ट्रैक्ट या प्रमोशन के जरिए भरे जाते हैं. इसलिए किसी भी पद के लिए आवेदन करने से पहले उसकी भर्ती प्रक्रिया को समझना जरूरी है. राष्ट्रपति भवन में &amp;nbsp;नौकरी पाने के लिए काफी कंफ्यूज रहते हैं और कई तरह के सवाल भी सर्च करते रहते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि राष्ट्रपति भवन में कैसे नौकरी लगती है और क्या डायरेक्ट भर्ती होती है.&amp;nbsp;
क्या राष्ट्रपति भवन में डायरेक्ट भर्ती होती है?
राष्ट्रपति भवन में कुछ एंट्री लेवल पदों पर सीधी भर्ती की जाती है. ऐसे पदों के लिए भर्ती केंद्र सरकार की तय चयन प्रक्रिया के तहत होती है. जैसे लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) पदों पर भर्ती स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की Combined Higher Secondary Level (CHSL) परीक्षा के तहत की जाती है.&amp;nbsp;
कॉन्ट्रैक्ट पर भी मिलती हैं नौकरियां
राष्ट्रपति भवन समय-समय पर कुछ विशेष और प्रोफेशनल पदों पर भी भर्ती निकालता है. इनमें कंसल्टेंट, गाइड, मीडिया प्रोफेशनल और मेडिकल स्टाफ जैसे पद शामिल हो सकते हैं. इन पदों पर भर्ती कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर की जाती है. चयन प्रक्रिया राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से तय की जाती है, जिसमें जरूरत के अनुसार लिखित परीक्षा, इंटरव्यू या दोनों शामिल हो सकते हैं.&amp;nbsp;
कई पद डेपुटेशन के जरिए भरे जाते हैं
राष्ट्रपति भवन के कई स्थायी, वरिष्ठ और तकनीकी पदों पर सीधे भर्ती नहीं की जाती है. ऐसे पदों पर दूसरे केंद्रीय सरकारी विभागों में पहले से कार्यरत कर्मचारियों को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) के आधार पर नियुक्त किया जाता है. इसी तरह कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति राष्ट्रपति सचिवालय के सचिव स्तर पर तय की जाती है. राष्ट्रपति भवन में निकलने वाली सभी वैकेंसी और भर्ती से जुड़े नोटिफिकेशन राष्ट्रपति सचिवालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाते हैं.&amp;nbsp;
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राष्ट्रपति भवन में कैसे नौकरी लगती है?
अगर किसी पद पर सीधी भर्ती या कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर आवेदन मांगे जाते हैं, तो उम्मीदवारों को राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार आवेदन करना होता है. आवेदन ऑनलाइन या तय पते पर भेज कर जमा किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
योग्यता और चयन प्रक्रिया
राष्ट्रपति भवन में हर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और एक्सपीरियंस अलग-अलग तय किया जाता है. कुछ पदों के लिए 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएशन की योग्यता मांगी जाती है, जबकि तकनीकी पदों के लिए संबंधित क्षेत्र का एक्सपीरियंस भी जरूरी हो सकता है. चयन प्रक्रिया भी पद के अनुसार अलग होती है. कई ग्रुप सी और तकनीकी पदों के लिए लिखित परीक्षा और स्किल या ट्रेड टेस्ट आयोजित किए जाते हैं, जबकि कुछ प्रोफेशनल पदों पर इंटरव्यू के जरिए भी चयन किया जा सकता है. राष्ट्रपति भवन में किसी भी पद के लिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना चाहिए. इससे पद की योग्यता, एक्सपीरियंस, आवेदन प्रक्रिया और चयन से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी आसानी से मिल जाती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - UPSC में निकलीं बंपर भर्तियां, कई मंत्रालयों में मिलेगी नौकरी; इस तरह कर सकते हैं आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rashtrapati, Bhavan, Recruitment, Process:, राष्ट्रपति, भवन, में, कैसे, लगती, है, नौकरी, क्या, डायरेक्ट, होती, है, भर्ती</media:keywords>
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        <title>DU Admission 2026 : DU में एडमिशन शुरू, CBSE के री&amp;वैल्यूएशन रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र क्या करें?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/du-admission-2026-du-में-एडमिशन-शुरू-cbse-के-री-वैल्यूएशन-रिजल्ट-का-इंतजार-कर-रहे-छात्र-क्या-करें</link>
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        <description><![CDATA[ DU Admission 2026 : दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अंडरग्रेजुएट (UG) एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जिन छात्रों ने CUET (UG) 2026 परीक्षा दी है और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में एडमिशन लेना चाहते हैं, उन्हें कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) 2026 पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा.
इसी बीच CBSE कक्षा 12 के उन छात्रों के लिए भी बड़ी अपडेट सामने आई है, जिन्होंने अपने बोर्ड रिजल्ट के री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन किया था और अभी तक संशोधित रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ऐसे छात्रों को एडमिशन प्रक्रिया को लेकर जरूरी जानकारी दी है. तो आइए जानते हैं कि CBSE के री-वैल्यूएशन रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र क्या करें?
CBSE के री-वैल्यूएशन रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र क्या करें?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा है कि जिन CBSE छात्रों ने कक्षा 12 के रिजल्ट का री-वैल्यूएशन कराया है, लेकिन अभी तक संशोधित रिजल्ट जारी नहीं हुआ है, वे CSAS पोर्टल पर फिलहाल अपने पुराने यानी री-वैल्यूएशन से पहले वाले बोर्ड नंबर दर्ज करें. जब CBSE की ओर से संशोधित रिजल्ट जारी हो जाए, तब छात्र अपने नंबर अपडेट कर सकते हैं.
DU ने छात्रों को दी यह सलाह
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एडमिशन डीन हनीत गांधी ने कहा कि जिन छात्रों का री-वैल्यूएशन रिजल्ट अभी नहीं आया है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि CSAS पोर्टल कई हफ्तों तक खुला रहेगा. ऐसे में छात्र संशोधित रिजल्ट जारी होने के बाद आसानी से अपने नंबर अपडेट कर सकेंगे. इसके साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि अंडरग्रेजुएट एडमिशन में मेन CUET (UG) 2026 का स्कोर होगा. कक्षा 12 के नंबरों का इस्तेमाल केवल यह तय करने के लिए किया जाएगा कि छात्र 12वीं पास है. इसके अलावा अगर दो या ज्यादा छात्रों के CUET नंबर समान होते हैं, तो टाई-ब्रेकर की स्थिति में 12वीं के नंबरों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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CUET स्कोर के आधार पर मिलेगा एडमिशन
यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि सभी अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन CUET (UG) 2026 के स्कोर के आधार पर होगा. इसके साथ ही उम्मीदवारों को जिस कोर्स में एडमिशन लेना है, उसके लिए तय योग्यता शर्तों को भी पूरा करना होगा. इन सभी शर्तों की जानकारी यूनिवर्सिटी के इंफॉर्मेशन बुलेटिन 2026 में दी गई है.
CSAS पोर्टल पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार उम्मीदवार केवल अपने CUET (UG) 2026 एप्लीकेशन नंबर की मदद से CSAS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया 26 जून 2026 से शुरू हो चुकी है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 67 कॉलेजों में 73 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम और 100 से ज्यादा बीए प्रोग्राम में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस बार करीब 71 हजार अंडरग्रेजुएट सीटों पर एडमिशन किया जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Admission, 2026, में, एडमिशन, शुरू, CBSE, के, री-वैल्यूएशन, रिजल्ट, का, इंतजार, कर, रहे, छात्र, क्या, करें</media:keywords>
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        <title>ISRO Recruitment 2026: ISRO में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, कई पदों पर मांगे गए आवेदन; 20 जुलाई तक करें अप्लाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isro-recruitment-2026-isro-में-सरकारी-नौकरी-का-सुनहरा-मौका-कई-पदों-पर-मांगे-गए-आवेदन-20-जुलाई-तक-करें-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ ISRO Recruitment 2026 : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में नौकरी करने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है. ISRO की टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) ने कई पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती के तहत तकनीकी, वैज्ञानिक और अन्य सपोर्ट स्टाफ के पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 20 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति जरूरत के अनुसार देशभर में मौजूद ISRO के &amp;nbsp;अलग-अलग केंद्रों पर की जाएगी.&amp;nbsp;
किन पदों पर होगी भर्ती?
ISRO ISTRAC की इस भर्ती के तहत कई अलग-अलग पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इनमें टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट-A, टेक्नीशियन-B, ड्राफ्ट्समैन-B और कुक-A शामिल हैं. चयनित उम्मीदवारों की पोस्टिंग संगठन की जरूरत के अनुसार देशभर में स्थित ISRO के अलग-अलग केंद्रों पर की जा सकती है.
आवेदन की आखिरी तारीख
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 जून 2026 सुबह 10 बजे से शुरू हो चुके हैं. उम्मीदवार 20 जुलाई 2026 रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे.
आवेदन शुल्क कितना है?
अलग-अलग पदों के लिए आवेदन शुल्क भी अलग तय किया गया है. टेक्निकल असिस्टेंट और साइंटिफिक असिस्टेंट पदों के लिए कुल 750 रुपये शुल्क देना होगा. इसमें आवेदन शुल्क और प्रोसेसिंग फीस दोनों शामिल हैं. टेक्नीशियन-B, ड्राफ्ट्समैन-B और कुक-A पदों के लिए कुल 500 रुपये आवेदन शुल्क तय किया गया है. ISRO ने बताया है कि परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को नियमानुसार प्रोसेसिंग फीस वापस कर दी जाएगी.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु 20 जुलाई 2026 तक 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी. शैक्षणिक योग्यता पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है. इसमें ITI, डिप्लोमा इंजीनियरिंग, B.Sc, लाइब्रेरी साइंस में डिग्री या मास्टर्स तथा कुक पद के लिए संबंधित अनुभव जैसी योग्यताएं शामिल हैं.
यह भी पढ़ें - भीषण गर्मी ने रोकी पढ़ाई: पटना में 30 जून तक बंद रहेंगे 8वीं तक के सभी स्कूल, DM ने जारी किया आदेश
कैसे होगा चयन?
उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा. जिसमें सबसे पहले लिखित परीक्षा या कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की जाएगी. इसके बाद जिन पदों पर जरूरत होगी, वहां स्किल टेस्ट कराया जाएगा. अंतिम चरण में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट के बाद फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
1.उम्मीदवार सबसे पहले ISRO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
2. इसके बाद Careers सेक्शन में जाकर ISTRAC Recruitment 2026 लिंक खोलें.
3.अब अपना रजिस्ट्रेशन करें और लॉग इन करके आवेदन फॉर्म भरें.
4. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें, आवेदन शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट कर दें.
5. आवेदन पूरा होने के बाद आवेदन फॉर्म का प्रिंट या पीडीएफ और रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षित रख लें.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ISRO, Recruitment, 2026:, ISRO, में, सरकारी, नौकरी, का, सुनहरा, मौका, कई, पदों, पर, मांगे, गए, आवेदन, जुलाई, तक, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>CBSE की पोल खोलने वाले  12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने लॉन्च किया पोर्टल, 1.66 करोड़ सरकारी रिकॉर्ड किए सार्वजनिक</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी खरीद से जुड़े डाक्यूमेंट्स आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकें इसी सोच के साथ रांची के जेवीएम श्यामली स्कूल में 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक अनोखी पहल की है. उन्होंने भारत सरकार के केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (CPP) पोर्टल से करीब 1.66 करोड़ सरकारी खरीद रिकॉर्ड जुटाकर एक ऐसा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया है, जहां से कोई भी नागरिक, पत्रकार या शोधकर्ता कुछ ही क्लिक में इन रिकॉर्ड तक पहुंच सकता है.
सार्थक का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड जनता के लिए होते हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में उन्हें ढूंढ़ना और डाउनलोड करना काफी मुश्किल है. इसी परेशानी को देखते हुए उन्होंने अपना पोर्टल तैयार किया, ताकि लोगों को जरूरी जानकारी पाने के लिए जटिल प्रक्रिया से न गुजरना पड़े. उनका मानना है कि जब जानकारी तक पहुंच आसान होगी, तभी पारदर्शिता भी मजबूत होगी.
उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह में सीपीपी पोर्टल से लगभग 1.66 करोड़ खरीद रिकॉर्ड एकत्र किए गए. इसके बाद सभी रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से एक सार्वजनिक डेटाबेस में रखा गया है. अब कोई भी व्यक्ति इन दस्तावेजों को डाउनलोड कर सकता है और सरकारी खरीद से जुड़े फैसलों का स्वतंत्र विश्लेषण कर सकता है.
समय की होगी काफी बचत
इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता है. जहां सरकारी पोर्टल पर रिकॉर्ड खोजने और डाउनलोड करने में काफी समय लगता है, वहीं सार्थक के प्लेटफॉर्म पर यह काम कहीं ज्यादा आसान हो गया है. इससे शोध करने वाले लोगों, मीडिया संस्थानों और आम नागरिकों को सरकारी खरीद प्रक्रिया को समझने में काफी मदद मिलेगी.
यह पहली बार नहीं है जब सार्थक किसी बड़े मुद्दे को लेकर चर्चा में आए हैं. इससे पहले उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन किया था. अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के बाद उन्हें अंकों में अंतर महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को समझने की कोशिश की. उनकी इस पहल ने भी शिक्षा जगत में काफी चर्चा बटोरी थी.
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इस पर रहेगा फोकस
अब उनकी नई पहल का फोकस सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है. उनका कहना है कि जब सरकारी खर्च से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध होंगे, तो ज्यादा लोग उनका अध्ययन कर सकेंगे. इससे न केवल शोध को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सार्वजनिक निगरानी भी मजबूत होगी.
आगे करेंगे ये काम
सार्थक ने बताया कि आने वाले समय में इस परियोजना को और बेहतर बनाने की योजना है. इसके लिए वह इंजीनियरों की एक टीम के साथ काम करेंगे, ताकि पोर्टल में नई सुविधाएं जोड़ी जा सकें और ज्यादा से ज्यादा रिकॉर्ड लोगों तक पहुंचाए जा सकें.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BHU MSc Admission 2026: BHU का बड़ा ऐलान, MSc लाइफ साइंसेज कोर्स में 10 जुलाई तक एडमिशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bhu-msc-admission-2026-bhu-का-बड़ा-ऐलान-msc-लाइफ-साइंसेज-कोर्स-में-10-जुलाई-तक-एडमिशन</link>
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        <description><![CDATA[ BHU MSc Admission 2026: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी BHU ने अपने MSc लाइफ साइंसेज कोर्स में एडमिशन को लेकर बड़ा ऐलान किया है. यह जानकारी BHU ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट से पोस्ट करते हुए दी है, जिसमें लिखा गया है कि एकेडमिक सेशन 2026-27 के लिए MSc बायोटेक्नोलॉजी, MSc मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स, MSc लाइफ साइंसेज और BA BEd कोर्स में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं.&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि GAT-B यानी ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट और CUET-PG के जरिए MSc लाइफ साइंसेज में एडमिशन के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 10 जुलाई 2026 तय की गई है. जो भी छात्र इस कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं, उन्हें इस तारीख से पहले अपना आवेदन पूरा कर लेना चाहिए. यह एडमिशन प्रक्रिया BHU के 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए चलाई जा रही है, इसलिए छात्रों को समय रहते अपनी फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
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एडमिशन के लिए जरूरी नियम&amp;nbsp;और फीस
इस कोर्स में एडमिशन की पूरी प्रक्रिया एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर पर आधारित है. BHU में पीजी कोर्सेज में एडमिशन GAT-B, CUET-PG यानी MSc लाइफ साइंसेज और BA BEd 2026 के स्कोर के आधार पर ही दिया जाएगा, और इसमें BHU की अपनी एलॉटमेंट प्रक्रिया का पालन किया जाता है. जो भी छात्र इसमें आवेदन कर रहे हैं, उन्हें यह जरूर ध्यान रखना होगा कि उन्होंने अपने फॉर्म में BHU को चुना हो और संबंधित टेस्ट में हिस्सा लिया हो.&amp;nbsp;
अगर बात करें कोर्स और फीस की, तो BHU बायोकेमिस्ट्री, बॉटनी, एनवायरमेंटल साइंस और एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी जैसी कई स्पेशलाइजेशन में MSc कोर्स ऑफर करता है. इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए छात्र के पास कम से कम 50% अंकों के साथ BSc की डिग्री होनी जरूरी है. इस तरह छात्रों के पास कई विकल्प मौजूद हैं, जिनमें से वे अपनी पसंद और योग्यता के हिसाब से कोर्स चुन सकते हैं.&amp;nbsp;









ऐसे भरें आवेदन फॉर्म




जो छात्र इस कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं, उन्हें BHU की ऑफिशियल एडमिशन वेबसाइट bhuadm.samarth.edu.in पर जाकर आवेदन करना होगा. आवेदन करते समय छात्रों को अपनी सभी जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट सावधानी से अपलोड करने चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो. चूंकि आवेदन की आखिरी तारीख 10 जुलाई 2026 है, इसलिए सलाह दी जाती है कि छात्र आखिरी समय का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपना फॉर्म भर लें.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BHU, MSc, Admission, 2026:, BHU, का, बड़ा, ऐलान, MSc, लाइफ, साइंसेज, कोर्स, में, जुलाई, तक, एडमिशन</media:keywords>
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        <title>CBSE Re&amp;evaluation 2026: CBSE ने फिर की गड़बड़ी! वेदांत ने जिसके लिए आवेदन नहीं किया उस सब्जेक्ट में बढ़ाए 2 नंबर, पहले बदल दी थी कॉपियां</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Re-evaluation 2026: सीबीएसई कक्षा 12वीं की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया है कि री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट आने के बाद उनके सिर्फ 2 नंबर बढ़ाए गए हैं और हैरानी की बात यह है कि ये नंबर उन विषयों में बढ़े हैं, जिनके लिए उन्होंने री-इवैल्यूएशन का आवेदन ही नहीं किया था.
इससे पहले भी वेदांत ने आरोप लगाया था कि उन्हें री-इवैल्यूएशन के दौरान किसी दूसरे छात्र की फिजिक्स की आंसर शीट दिखाई गई थी. बाद में ऑब्जेक्शन दर्ज कराने पर उन्हें सही आंसर शीट उपलब्ध कराई गई. हालांकि, अब नए रिजल्ट के बाद भी उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. इस पूरे मामले पर CBSE की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. दावा छात्र की तरफ से किया गया है, सीबीएसई ने फिलहाल इस पर कुछ नहीं कहा है.
वीडियो जारी कर छात्र ने क्या कहा?
री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट आने के बाद वेदांत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने 11 प्रश्नों के लिए री-इवैल्यूएशन का आवेदन किया था, लेकिन रिजल्ट आने के बाद उनके कुल 2 नंबर ही बढ़े. उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस आंसर शीट के गलत होने की बात उन्होंने पहले उठाई थी, उसमें उनके एक भी नंबर नहीं बढ़े. उनके अनुसार, बढ़े हुए दोनों नंबर मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में मिले हैं, जबकि जिन प्रश्नों के लिए उन्होंने आवेदन किया था, उनसे इसका संबंध नहीं था.

Just to informGot my re-evaluation result. pic.twitter.com/gXguhDNDud
&amp;mdash; VEDANT (@VEDANTSHRIV17) June 28, 2026



री-इवैल्यूएशन के बाद क्या हुआ?
वेदांत के मुताबिक, उन्होंने 11 सवालों के दोबारा मूल्यांकन की मांग की थी. लेकिन अंतिम परिणाम में सिर्फ 2 नंबर बढ़ाए गए. उनका दावा है कि ये नंबर उन विषयों में मिले, जिनके लिए उन्होंने री-इवैल्यूएशन का आवेदन नहीं किया था. इसी वजह से उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.
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पहले बदली हुई आंसर शीट का लगाया था आरोप
वेदांत का कहना है कि 13 मई को जब बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ था, तब उन्हें फिजिक्स विषय की गलत आंसर शीट दिखाई गई थी. उनके अनुसार वह किसी दूसरे छात्र की कॉपी थी. बाद में उन्होंने इस मामले में ऑब्जेक्शन दर्ज कराया, जिसके बाद बोर्ड की ओर से उन्हें सही आंसर शीट उपलब्ध कराई गई. इसके बाद उनके नंबरों में कुछ बदलाव भी हुआ, लेकिन अब उनका कहना है कि मूल्यांकन से जुड़े कुछ सवाल अभी भी बने हुए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Re-evaluation, 2026:, CBSE, ने, फिर, की, गड़बड़ी, वेदांत, ने, जिसके, लिए, आवेदन, नहीं, किया, उस, सब्जेक्ट, में, बढ़ाए, नंबर, पहले, बदल, दी, थी, कॉपियां</media:keywords>
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        <title>CBSE Class 10th Second Board Result 2026 : CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड रिजल्ट कभी भी हो सकता है जारी, ऐसे डाउनलोड करें स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Class 10th Second Board Result 2026 : सीबीएसई (CBSE) कक्षा 10वीं के सेकेंड बोर्ड एग्जाम 2026 में शामिल हुए छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कभी भी सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर सकता है. बोर्ड ने पहले ही अपने आधिकारिक नोटिफिकेशन में बताया था कि सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जून 2026 में घोषित किया जाएगा.
ऐसे में महीने के आखिरी दिनों में छात्रों का रिजल्ट किसी भी समय जारी होने की उम्मीद है. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपनी मार्कशीट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे. तो आइए जानते हैं कि CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड रिजल्ट कैसे डाउनलोड करें. &amp;nbsp;
कहां जारी होगा रिजल्ट?
CBSE कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in और cbseresults.nic.in पर जारी किया जाएगा. इसके अलावा छात्र DigiLocker, UMANG ऐप, DigiResults ऐप, SMS और IVRS के जरिए भी अपना रिजल्ट देख सकेंगे. हालांकि बोर्ड ने अभी रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की है.
किन छात्रों के लिए हुई थी सेकेंड बोर्ड परीक्षा?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुसार इस साल CBSE ने कक्षा 10 के छात्रों को अपने नंबरों में सुधार करने का मौका दिया है. छात्र अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा देकर अपने नंबर बेहतर कर सकते हैं. इसी व्यवस्था के तहत सेकेंड बोर्ड परीक्षा आयोजित की गई थी.
ऐसे डाउनलोड करें स्कोरकार्ड
1. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र सबसे पहले CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in या cbseresults.nic.in पर जाएं.&amp;nbsp;
2. इसके बाद होम पेज पर CBSE Class 10 Second Board Result 2026 के लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
3. अब अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्मतिथि दर्ज करें.&amp;nbsp;
4. इसके साथ ही सभी जानकारी भरने के बाद सबमिट पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
6. अब स्क्रीन पर आपका रिजल्ट दिखाई देगा.&amp;nbsp;
7. &amp;nbsp;अपने स्कोरकार्ड डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;
DigiLocker से ऐसे देखें मार्कशीट
1. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र DigiLocker के जरिए भी अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए DigiLocker ऐप डाउनलोड करें या वेबसाइट पर जाएं.&amp;nbsp;
2. Education and Learning सेक्शन में जाएं.&amp;nbsp;
3. Central Board of Secondary Education चुनें.&amp;nbsp;
4. Class X Marksheet पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
5. रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी भरें.&amp;nbsp;
6. सबमिट करते ही आपकी डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई दे जाएगी.&amp;nbsp;
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मेरिट लिस्ट और टॉपर लिस्ट जारी नहीं होगी
CBSE ने इस बार भी साफ किया है कि बोर्ड किसी भी छात्र की रैंक या टॉपर लिस्ट जारी नहीं करेगा. बोर्ड का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों पर कॉम्पिटिशन का दबाव कम करना है. हालांकि जिन छात्रों ने अलग-अलग विषयों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया होगा, उन्हें मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा. ये सर्टिफिकेट सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद DigiLocker के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे.सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों को डिजिटल मार्कशीट, पासिंग डॉक्यूमेंट और पात्र छात्रों को मेरिट सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए जाएंगे. बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे रिजल्ट और अन्य अपडेट के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट और DigiLocker पर नजर बनाए रखें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Class, 10th, Second, Board, Result, 2026, CBSE, 10वीं, सेकेंड, बोर्ड, रिजल्ट, कभी, भी, हो, सकता, है, जारी, ऐसे, डाउनलोड, करें, स्कोरकार्ड</media:keywords>
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        <title>UP Home Guard Result 2026: यूपी होमगार्ड भर्ती परीक्षा का रिजल्ट हुआ जारी, ऐसे चेक करें अपना परिणाम </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/up-home-guard-result-2026-यूपी-होमगार्ड-भर्ती-परीक्षा-का-रिजल्ट-हुआ-जारी-ऐसे-चेक-करें-अपना-परिणाम</link>
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        <description><![CDATA[ UP Home Guard Result 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) ने होमगार्ड भर्ती परीक्षा से जुड़ा बड़ा अपडेट जारी कर दिया है. बोर्ड ने 41,424 पदों के लिए 25, 26 और 27 अप्रैल 2026 को लिखित परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें लाखों उम्मीदवार शामिल हुए थे. अब बोर्ड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, साथ ही इस भर्ती की फाइनल Answer key भी अपलोड कर दी गई है. जो उम्मीदवार लंबे समय से अपने नतीजे का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि अब वे अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं.&amp;nbsp;
फाइनल Answer Key और अगला चरण
इस भर्ती के लिए कुल 25 लाख 32 हजार 202 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था और 19 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था. &amp;nbsp;परीक्षा के बाद प्रोविजनल आंसर की 7 मई 2026 को जारी की गई थी और उम्मीदवारों से 10 मई 2026 तक इस पर आपत्तियां मांगी गई थीं, यानी उम्मीदवारों को 10 मई 2026 तक मौका दिया गया था कि अगर उन्हें किसी प्रश्न, उत्तर, रिजल्ट या प्रक्रिया में कोई गलती या समस्या लगती है, तो वे उसके खिलाफ शिकायत या आपत्ति दर्ज कर सकें. बोर्ड ने इन सभी आपत्तियों की जांच पूरी करने के बाद अब फाइनल आंसर की और लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. &amp;nbsp;जो उम्मीदवार इस सूची में शामिल हैं, उन्हें अब दस्तावेजों की जांच यानी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और शारीरिक मानक परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा. यह भर्ती प्रक्रिया का अगला और बेहद अहम चरण है, इसलिए सफल उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए अपने जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने चाहिए.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट
अपना रिजल्ट चेक करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाना होगा. &amp;nbsp;वेबसाइट के होमपेज पर &quot;रिजल्ट्स&quot; सेक्शन में जाकर होमगार्ड भर्ती से जुड़े लिंक पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद उम्मीदवार अपना रोल नंबर, एप्लिकेशन नंबर या जन्म तिथि डालकर अपना नतीजा देख सकते हैं. &amp;nbsp;नतीजा स्क्रीन पर दिखने के बाद उसे डाउनलोड करके सुरक्षित रख लेना चाहिए और भविष्य में इसकी एक प्रिंट कॉपी भी अपने पास जरूर रखनी चाहिए, क्योंकि आगे की प्रक्रिया में इसकी जरूरत पड़ सकती है. जिन उम्मीदवारों का नाम सूची में नहीं आया है, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं, बल्कि वे आगे होने वाली अन्य सरकारी भर्तियों की तैयारी जारी रख सकते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; बड़ी खबर: 9वीं से 12 तक के छात्रों को बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए अपार आईडी अनिवार्य ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>भीषण गर्मी ने रोकी पढ़ाई: पटना में 30 जून तक बंद रहेंगे 8वीं तक के सभी स्कूल, DM ने जारी किया आदेश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भीषण-गर्मी-ने-रोकी-पढ़ाई-पटना-में-30-जून-तक-बंद-रहेंगे-8वीं-तक-के-सभी-स्कूल-dm-ने-जारी-किया-आदेश</link>
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        <description><![CDATA[ पटना में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर एक अहम निर्णय लिया है. पटना के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुसार कक्षा 8 तक के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों 30 जून तक बंद करने का आदेश दिया है. यानी 8वीं तक के स्कूल भीषण गर्मी की वजह से 30 जून तक बंद रहेंगे. यह फैसला खासतौर पर बच्चों को लू, डिहाइड्रेशन और अत्यधिक गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है.
अब 30 जून तक बंद रहेंगे 8वीं तक के स्कूल
जारी आदेश के मुताबिक, पहले ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद स्कूलों के 29 जून से खुलने की संभावना थी, लेकिन मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए इसे आगे बढ़ा दिया गया है. प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध केवल शैक्षणिक गतिविधियों पर लागू रहेगा और सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें.
बच्चों के स्वास्थ्य पर न पड़े बुरा असर इसलिए लिया गया फैसला
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पटना और आसपास के इलाकों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है. दिन के समय गर्म हवाओं की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. इसी वजह से प्रशासन ने यह कदम एहतियातन उठाया है ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य आपात स्थिति से बचा जा सके.
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जारी रहेगी 9 से 12वीं तक की पढ़ाई
जिला प्रशासन ने आदेश में साफ किया है कि सभी स्कूल प्रबंधन को अपनी पढ़ाई की गतिविधियों को नए समय के अनुसार फिर से तय करना होगा. यह नियम 22 जून 2026 से 30 जून 2026 तक लागू रहेगा. इस दौरान प्री-स्कूल भी पूरी तरह बंद रहेंगे. हालांकि, कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई जारी रहेगी, लेकिन इसे केवल सुबह 11 बजे तक ही चलाने की अनुमति दी गई है. स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी सावधानियों का पालन करें और गर्मी से बचाव के पूरे इंतजाम रखें.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बड़ी खबर: 9वीं से 12 तक के छात्रों को बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए अपार आईडी अनिवार्य</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी BSEB ने 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा पंजीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. अब हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए छात्रों के पास अपार (APAAR) आईडी होना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके बिना किसी भी विद्यार्थी का रजिस्ट्रेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा.
सचिव ने बताई लास्ट डेट
समिति के सचिव ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा है कि शिक्षा विभाग, भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी छात्रों की अपार आईडी 30 जून 2026 तक हर हाल में बनाई जानी चाहिए. इसके साथ ही विद्यालयों का यू-डायस यानी UDISE कोड भी अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा.
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सख्ती से लागू करने के दिए निर्देश
राज्य शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से पहले ही यह निर्देश दिया जा चुका था कि 9वीं से 12वीं तक के सभी छात्रों का अपार आईडी निर्माण बोर्ड परीक्षा पंजीकरण से पहले पूरा किया जाए. अब इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी छात्र रजिस्ट्रेशन से वंचित न रह जाए.
प्रशासन ने सभी जिलों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी योग्य विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार हो जाए. सरकार ने इसके लिए अंतिम तिथि 30 जून तय की है और सभी स्कूलों को इस प्रक्रिया को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>IB में कैसे बन सकते हैं ऑफिसर, इसके लिए कैसे करें करियर की शुरुआत?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी में एक ऐसा काम करना चाहते हैं. जिसमें देश सेवा करने का मौका मिले.ऐसे में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB एक अच्छा करियर विकल्प साबित हो सकता है. यह विभाग देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी हिस्सा माना जाता है. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि IB में ऑफिसर कैसे बन सकते हैं, और उसकी तैयारी कहां से शुरू करनी चाहिए तो इसके बारे में आप पूरी डिटेल्स यहां पढ़ सकते हैं.
क्या है इंटेलिजेंस ब्यूरो?
इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB &amp;nbsp;भारत की एक खुफिया एजेंसी है. जिसका काम देश के अंदर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना है, और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी जुटाना होता है. यह विभाग गृह मंत्रालय के तहत काम करता है.
IB में ऑफिसर बनने के लिए क्या पढ़ाई चाहिए?
इंटेलिजेंस ब्यूरो में अलग-अलग पदों के लिए योग्यताएं तय की जाती है. अगर आपका लक्ष्य आईबी मैं ऑफिसर बनने का है तो ज्यादातर मामलों में ग्रेजुएशन करना जरूरी होता है. इसके साथ ही कुछ विशेष पदों के लिए टेक्निकल ज्ञान होना भी जरूरी है.तो सबसे पहले अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करें. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर सकते हैं. सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, अंग्रेजी और रीजनिंग जैसे विषयों पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा.आईबी में ऑफिसर बनने के लिए IB ACIO मानी जाती है. इसमें लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर चयन किया जाता है.
कैसे होती है भर्ती प्रक्रिया?
इंटेलिजेंस ब्यूरो में भर्ती के लिए तीन चरणों में चयन किया जाता है. कुछ पदों के लिए परीक्षा होती है उसके बाद इंटरव्यू लिया जाता है. परीक्षा में सामान्य ज्ञान सोचने और समझने की की क्षमता के बारे में भी सवाल किए जाते हैं.
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इन बातों का रखना होता है विशेष ध्यानइंटेलिजेंस ब्यूरो का पद एक बहुत जिम्मेदारी और अनुशासन बनाए रखने का पद होता है. इसके लिए उम्मीदवार को समझदारी भरे फैसले, अनुशासन, जिम्मेदारी इसके अलावा जानकारी को गोपनीय रखने की क्षमता होनी चाहिए.
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>अब महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक, कल होने वाली परीक्षा रद्द</title>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र में एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था चर्चा में आ गई है. जानकारी के मुताबिक टेट परीक्षा का पेपर लीक होने की आशंका के कारण प्रशासन ने शिक्षक पात्रता परीक्षा जोकि 28 जून 2026 को होनी थी. उसको रद्द कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि ठाणे इलाके से प्रश्न पत्र बाहर आने के की जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंची थी. जिसके बाद प्रशासन ने &amp;nbsp;28 जून को होने वाली परीक्षा को रद्द कर दिया है.
लाखों उम्मीदवारों पर पड़ेगा इसका असर
शिक्षा विभाग के फैसले के बाद राज्य वर्ष के बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को झटका लगा है. कई उम्मीदवार लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और परीक्षा केंद्र जाने की तैयारी पूरी कर चुके थे. अचानक आये इस फैसले से &amp;nbsp;उम्मीदवारों के बीच में निराशा देखने को मिल रही है.अब छात्रों को नई तारीख का इंतजारपेपर लीक होने की जानकारी के बाद प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है. कि पेपर लीक की आशंका कैसे बनी और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं. अब अभ्यर्थियों को नई परीक्षा तारीख की घोषणा का इंतजार है.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;बिना परीक्षा RCFL में नौकरी का मौका, 2.20लाख तक मिलेगा वेतन, ऐसे करें आवेदनइससे पहले भी हुआ था पेपर लीक
कल होने वाली परीक्षा में पूरे राज्य में करीब चार लाख 28 हजार उम्मीदवार शामिल होने वाले थे. राज्य भर के 1028 केंद्रों पर कल यह परीक्षा होने वाली थी. लेकिन पेपर लीक होने की वजह से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में अटक गया है.बता दे इससे पहले भी &amp;nbsp;2025 में भी पेपर लीक हुआ था.तब महाराष्ट्र के कोल्हापुर से पेपर लीक होने की खबर आई थी.लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामले
लगातार आ रहे पेपर लिख के मामलों ने परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. अभी कुछ समय पहले ही NEET परीक्षा को लेकर विवाद और पेपर लीक का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था. और अब महाराष्ट्र TET परीक्षा को लेकर सामने आयी इस घटना ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से उनकी मेहनत और तैयारी प्रभावित होती है.और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है.
परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों में नाराजगी
परीक्षा रद्द होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने नाराजगी और निराशा जताई. अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर सख्त जांच होने की बात आती है तो बालों और कपड़ों की भी जांच की जाती है. लेकिन जब पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं तो तो उसके लिए जिम्मेदारी तय नहीं होती है. कई परीक्षार्थियों ने बताया की स्कूल की जिम्मेदारियां घर के काम और नौकरी के बीच परीक्षा की तैयारी करना बहुत मुश्किल होता है. कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि फॉर्म भरने से लेकर तैयारी तक काफी मेहनत लगी, लेकिन परीक्षा टलने से वे मानसिक रूप से परेशान और निराश महसूस कर रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>DU UG एडमिशन 2026 शुरू, CBSE री इवैल्यूएशन छात्रों को राहत</title>
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        <description><![CDATA[ इस बार भी यूनिवर्सिटी में दाखिला केवल CUET UG 2026 के स्कोर के आधार पर होगा. DU के 67 कॉलेजों में 73 अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम और 100 से ज्यादा बीए प्रोग्राम कॉम्बिनेशन में एडमिशन दिए जाएंगे.
री-इवैल्यूएशन कराने वाले CBSE छात्रों के लिए राहत
दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन हनीत गांधी ने कहा है कि जिन CBSE कक्षा 12 के छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी तक उनके नए &amp;nbsp;नंबर नहीं मिले हैं, वे फिलहाल CSAS पोर्टल पर अपने पुराने यानी री-इवैल्यूएशन से पहले वाले नंबर ही भरें.उन्होंने कहा कि जैसे ही री-इवैल्यूएशन का अपडेटेड नया रिजल्ट आएगा, छात्र अपने अंक पोर्टल पर अपडेट कर सकेंगे. छात्रों को चिंता करने की जरूरत नहीं है.क्योंकि CSAS पोर्टल कई सप्ताह तक खुला रहेगा और उन्हें बदलाव करने के लिए समय मिलेगा.
रजिस्ट्रेशन में क्या नया है?
इस साल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित बनाया गया है. छात्र का नाम, जन्मतिथि, फोटो, हस्ताक्षर, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारी CUET पोर्टल से अपने आप CSAS फॉर्म में आ जाएगी. इन जानकारियों में बदलाव नहीं किया जा सकेगा.रजिस्ट्रेशन के लिए छात्रों को अपना CUET आवेदन नंबर और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी. इसके बाद मोबाइल या ईमेल पर आए OTP से लॉगिन करना होगा.
रजिस्ट्रेशन फीस
UR, OBC-NCL और EWS: 250 रुपयेSC, ST और PwBD: 100 रुपये
दो चरणों में होगी दाखिले की प्रक्रिया

पहले चरण में छात्रों को CSAS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा.
दूसरे चरण में CUET का परिणाम आने के बाद छात्र अपनी पसंद के कोर्स और कॉलेज चुनेंगे.&amp;nbsp;

जितने ज्यादा कोर्स और कॉलेज के विकल्प छात्र भरेंगे, सीट मिलने की संभावना उतनी ज़्यादा &amp;nbsp;रहेगी.
सब्जेक्ट मैपिंग जरूरी
छात्रों को CUET में दिए गए विषयों को कक्षा 12 में पढ़े गए विषयों से मिलाना होगा. गलत सब्जेक्ट मैपिंग होने पर संबंधित कोर्स की पात्रता प्रभावित हो सकती है. जनरल टेस्ट किसी विषय से मैप नहीं होगा.यह भी पढ़ें - IB में कैसे बन सकते हैं ऑफिसर, इसके लिए कैसे करें करियर की शुरुआत?
मार्क्स भरते समय रखें सावधानी
कक्षा 10 और 12 के अंक सावधानी से भरने होंगे. अगर किसी विषय में थ्योरी और प्रैक्टिकल के अलग-अलग अंक हैं तो दोनों अलग-अलग दर्ज करने होंगे. टाई-ब्रेक की स्थिति में यही अंक आधार बनेंगे.दस्तावेज अपलोड करने के नियमछात्रों को सभी जरूरी दस्तावेज साफ और सही फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे. आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों में नाम वही होना चाहिए जो स्कूल रिकॉर्ड और CUET आवेदन में दर्ज है. गलत या फर्जी दस्तावेज मिलने पर दाखिला रद्द किया जा सकता है और फीस वापस नहीं होगी.
एक बार प्रोफाइल लॉक होने के बाद बदलाव नहीं
यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि प्रोफाइल सेक्शन जमा करके लॉक करने के बाद उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा. इसलिए फाइनल सबमिट से पहले सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लेने की सलाह दी गई है.
कॉलेज और कोर्स की पसंद सोच-समझकर भरें
छात्र अपनी पात्रता के अनुसार जितने चाहें उतने कोर्स और कॉलेज चुन सकते हैं. एक बार प्रेफरेंस भरने की समय सीमा खत्म होने के बाद नए विकल्प जोड़ने या हटाने की इजाज़त नहीं होगी. यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सलाह दी है कि वे दाखिले से जुड़ी सभी जानकारी, पात्रता, जरूरी दस्तावेज और आगे की समय-सारिणी के लिए नियमित रूप से CSAS पोर्टल और DU की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;बिना परीक्षा RCFL में नौकरी का मौका, 2.20लाख तक मिलेगा वेतन, ऐसे करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>एडमिशन, 2026, शुरू, CBSE, री, इवैल्यूएशन, छात्रों, को, राहत</media:keywords>
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        <title>सरकारी नौकरी पाने का शानदार मौका, 2600 से ज्यादा पदों पर निकली वैकेंसी; पढ़ें डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने ग्रुप C के 2,619 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 जून 2026 से शुरू हो गई है. पात्र और इच्छुक उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए आवेदन कर सकेंगे. इस भर्ती के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 17 जुलाई 2026 रात 11:59 बजे तक तय की गई है.
इस भर्ती अभियान के तहत कई अहम पदों को भरा जाएगा. इनमें सबसे ज्यादा 1,864 पद क्लर्क-टाइपिस्ट के हैं. इसके अलावा 461 पद सहायक मोटर वाहन निरीक्षक, 282 पद कर सहायक (Tax Assistant), 9 पद उद्योग निरीक्षक (Industry Inspector) और 3 पद तकनीकी सहायक (Technical Assistant) के लिए भर्ती की जाएगी. कुल मिलाकर 2,619 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.
किस पद पर कितनी भर्ती

सहायक मोटर वाहन निरीक्षक - 461 पद
कर सहायक - 282 पद
उद्योग निरीक्षक - 9 पद
क्लर्क-टाइपिस्ट - 1,864 पद
तकनीकी सहायक - 3 पद

एग्जाम पैटर्न कैसे होगा?
भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ आयोग ने परीक्षा पैटर्न में भी बड़ा बदलाव किया है. MPSC ने घोषणा की है कि साल 2027 से महाराष्ट्र सिविल सेवा (गजेटेड ग्रुप A और ग्रुप B) मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय (Optional Subject) के पेपर खत्म कर दिए जाएंगे. यानी अब उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा में दो वैकल्पिक विषयों की तैयारी नहीं करनी होगी.
दरअसल, देश के कई राज्यों ने पहले ही अपनी राज्य सेवा मुख्य परीक्षाओं से वैकल्पिक विषयों को हटा दिया है. इनमें तमिलनाडु, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं. अब महाराष्ट्र भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है. माना जा रहा है कि इस बदलाव से परीक्षा प्रक्रिया अधिक सरल और समान होगी.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;राम मंदिर दान मामले की जांच कर रही SIT कैसे बनी? जानिए किस आधार पर चुने जाते हैं अफसर
किया गया ये बड़ा बदलाव
एक और बड़ा बदलाव यह है कि संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा (Combined Preliminary Examination) इस बार 27 सितंबर 2026 को आयोजित होगी और पहली बार इसे Computer-Based Test (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में कराया जाएगा. इससे पहले यह परीक्षा ऑफलाइन होती थी. ऑनलाइन परीक्षा होने से उम्मीदवारों को आधुनिक परीक्षा प्रणाली का अनुभव मिलेगा और पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होने की उम्मीद है.
आयोग के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल किया जाएगा. इसलिए उम्मीदवारों को अभी से परीक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. साथ ही आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर सही फॉर्मेट में अपलोड करें, ताकि आवेदन निरस्त होने की संभावना न रहे.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;बिना परीक्षा RCFL में नौकरी का मौका, 2.20लाख तक मिलेगा वेतन, ऐसे करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET में नहीं मिली मेडिकल सीट, हार नहीं मानी; रितुपर्णा को Rolls&amp;Royce से 72 लाख सालाना का पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ हर साल लाखों छात्र-छात्राएं डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET परीक्षा देते हैं. लेकिन सभी को मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल पाती. ऐसे में कई छात्र निराश हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि उनका सपना टूट गया. लेकिन कर्नाटक की 20 वर्षीय रितुपर्णा केएस की कहानी कुछ अलग है...
रितुपर्णा का सपना भी डॉक्टर बनने का था. उन्होंने NEET एग्जाम दिया मगर सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट नहीं मिल पाई. शुरुआत में उन्हें भी निराशा हुई, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नया रास्ता चुनने का फैसला किया. उन्होंने मंगलुरु के सह्याद्री कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया.
शुरुआत में यह उनके लिए सिर्फ एक दूसरा ऑप्शन था, मगर आगे चलकर उनकी रुचि और जुनून बन गया. कॉलेज के दौरान उन्होंने सिर्फ पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि नए-नए प्रोजेक्ट्स और रिसर्च पर भी खूब मेहनत की. किसानों की मदद के लिए सुपारी की खेती से जुड़ा एक रोबोटिक्स प्रोजेक्ट तैयार किया. इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली. इसके अलावा उन्होंने कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपने कौशल को लगातार बेहतर बनाया.
Rolls-Royce में मिला मौका
उनकी मेहनत का सबसे बड़ा मौका तब आया, जब उन्हें दुनिया की मशहूर एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग कंपनी Rolls-Royce के जेट इंजन मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन में इंटर्नशिप करने का मौका मिला. बताया जाता है कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें एक कठिन प्रोजेक्ट दिया गया था. रितुपर्णा ने इस काम को तय समय से काफी पहले पूरा कर दिया. जिसे देखते हुए उनकी इंटर्नशिप बढ़ाई गई और बाद में उन्हें प्री-प्लेसमेंट ऑफर दे दिया गया.
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मिला लाखों का पैकेज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रितुपर्णा को अब 72.3 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला है. इतनी कम उम्र में दुनिया की बड़ी कंपनी में नौकरी मिलने के बाद वह देशभर के छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
रितुपर्णा ने क्या कहा?
रितुपर्णा DC Fellowship Programme के लिए चुने गए 15 छात्रों में भी शामिल थीं. यह कार्यक्रम युवाओं को समाज और उद्योग से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तैयार करता है. रितुपर्णा का कहना है कि उनकी पढ़ाई, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यू की तैयारी ने उन्हें यह सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>सीबीएसई तीन भाषा फॉर्मूला पर नया अपडेट, कक्षा 9 के छात्रों को विदेशी भाषा जारी रखने की मिल सकती है अनुमति</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Language Formula/Policy में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है. सूत्रों के मुताबिक, कक्षा 7, 8 और 9 के जो छात्र पहले से फ्रेंच, जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें कक्षा 10 तक वही भाषा पढ़ने की अनुमति दी जा सकती है. यानी इन छात्रों पर नई भाषा नीति फिलहाल लागू नहीं होगी.
CBSE ने पहले क्या फैसला लिया थादरअसल, CBSE ने 2 अप्रैल को नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 6 से तीन-भाषा फॉर्मूला&amp;nbsp;लागू करने का फैसला घोषित किया था. इसके बाद 15 मई को बोर्ड ने साफ किया कि इसी academic session से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भी कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा और इसे 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी थी. इसके बाद कई स्कूलों ने अपनी भाषा व्यवस्था में बदलाव भी शुरू कर दिए. संस्कृत के शिक्षकों को appoint और फ़्रेंच के शिक्षकों को दूसरा सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए तक बोला था.
अब सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड अपने इस फैसले में बदलाव कर सकता है. कक्षा 7, 8 और 9 के पहले से पढ़ रहे छात्रों को पुरानी भाषा व्यवस्था के साथ ही कक्षा 10 तक पढ़ाई पूरी करने की इजाजत दी जाएगी. नई व्यवस्था केवल आगे से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगी.इस मामले से जुड़े CBSE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर पहले से पढ़ रहे छात्रों को पुरानी भाषा व्यवस्था जारी रखने की अनुमति मिलती है तो यह छात्रों के हित में होगा. उनका कहना है कि जो छात्र पिछले चार साल से फ्रेंच, जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उनके लिए बीच सत्र में भाषा बदलना मुश्किल हो रहा था.
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आधिकारिक घोषणा का इंतजारCBSE के अधिकारी ने कहा कि इस फैसले की आधिकारिक जानकारी अभी उन्हें भी नहीं दी गई है, हालांकि उन्हें पहले से अंदाजा था कि भाषा नीति में कुछ बदलाव हो सकता है.साथ ही यह भी कहा कि सत्र शुरू होने के बाद भाषा नीति में बदलाव क्यों किया गया, यह भी एक बड़ा सवाल है. इस मामले में 14 जुलाई को अदालत में जवाब दाखिल किया जाना है और उससे पहले यह फैसला लिया जा सकता है.
छात्रों और स्कूलों पर क्या होगा असररिपोर्ट के अनुसार, CBSE से जुड़े करीब 80 प्रतिशत स्कूलों ने कक्षा 9 के लिए संस्कृत समेत नई भाषा व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली थी.अगर अब फैसला बदलता है तो स्कूलों को अपनी तैयारियों और विषयों की व्यवस्था में फिर से बदलाव करना पड़ सकता है.यह भी पढ़ें - NEET छात्रों के लिए बड़ी खबर! फीस रिफंड का पोर्टल खुला, 30 जून से पहले करें ये जरूरी काम  ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>हिमाचल में TET को लेकर बड़ी अपडेट, हजारों शिक्षकों को मिला 2028 तक का समय</title>
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        <description><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में सभी कार्यरत (In-Service) शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं.शिक्षा सचिव की ओर से जारी पत्र में स्कूल शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि जिन शिक्षकों ने अभी तक TET पास नहीं किया है, उनकी लिस्ट तैयार कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी समय सीमा
विभागीय पत्र के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिए गए फैसले के बाद समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए TET योग्यता हासिल करने की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है. अब पात्र कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना अनिवार्य होगा.
बिना TET शिक्षकों की सूची होगी तैयार
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत उन सभी शिक्षकों की सूची तैयार की जाए जिन्होंने अभी तक TET उत्तीर्ण नहीं किया है. सभी उपनिदेशकों, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित शिक्षक 31 अगस्त 2028 से पहले TET पास करें.हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष TET परीक्षाएं आयोजित करवायीं &amp;nbsp;जाएं.
साल में दो बार होगी परीक्षा&amp;nbsp;
TET परीक्षा का आयोजन कम से कम वर्ष में दो बार करने तथा परीक्षा कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए. मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं.सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए TET एक अनिवार्य योग्यता है और निर्धारित समय-सीमा तक इसे प्राप्त करना आवश्यक होगा. कोर्ट ने यह भी कहा है कि 31 अगस्त 2028 के बाद कोई अतिरिक्त राहत दिए जाने की संभावना नहीं है. इस आदेश से हिमाचल प्रदेश के हजारों ऐसे कार्यरत शिक्षक प्रभावित होंगे जिन्होंने अभी तक TET योग्यता प्राप्त नहीं की है.
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8727 शिक्षक पर भारी पड़ सकता है आदेश
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 8,727 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने टेट (TET) पास नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, इन सभी सेवारत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक यह परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है.वहीं 2010 या उससे पहले नियुक्त शिक्षकों की जिनकी सेवानिवृत्ति की आयु नजदीक है उनके के आदेश भारी पड़ सकते हैं.
टेट पास न करने वाले शिक्षकों की संख्या इस प्रकार है.

जेबीटी (JBT): 5,552
एचटी (HT): 853
सीएचटी (CHT): 459
सीएंडवी (C&amp;amp;V): 377
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी के छात्रों की होगी बल्ले&amp;बल्ले! स्कॉलरशिप से लेकर फ्री टैबलेट तक, जानें 8 बड़ी योजनाएं</title>
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        <description><![CDATA[ यूपी के छात्रों की होगी बल्ले-बल्ले! स्कॉलरशिप से लेकर फ्री टैबलेट तक, जानें 8 बड़ी योजनाएं ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NCERT की 9वीं की किताब में मनुस्मृति की एंट्री! महिलाओं की स्थिति पर क्या लिखा है?</title>
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        <description><![CDATA[ एनसीईआरटी की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. इस किताब में पुराने भारत के समाज में महिलाओं की भूमिका और सामाजिक व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई है. साथ ही, इसमें मनुस्मृति का भी एक संदर्भ जोड़ा गया है. किताब में यह भी बताया गया है कि समय के साथ महिलाओं की स्थिति और समाज, दोनों में क्या-क्या बदलाव हुए हैं.
कक्षा 9 की इस किताब में बताया गया है कि वैदिक समय में महिलाओं को सम्मानित दर्जा दिया जाता था. महिलाएं पढ़ाई करती थीं, धार्मिक कामों में हिस्सा लेती थीं और कई जगहों पर अपनी बात भी रखती थीं. किताब में कुछ ऐसी महिलाओं का भी जिक्र किया गया है, जिनका नाम पुराने ग्रंथों में मिलता है.
इस किताब में मनुस्मृति की एक पंक्ति, &#039;यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता&#039;, यानी जहां महिलाओं का आदर-सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं, श्लोक को शामिल किया गया है. इसमें महिलाओं के सम्मान की बात कही गई है. इसमें यह भी साफ लिखा गया है कि हर समय महिलाओं की स्थिति एक जैसी नहीं रही है. समय के साथ बदलाव हुए. समय बदलने के साथ महिलाओं की भूमिका में आए बदलावों के बारे में भी अध्याय में बताया गया है. बताया गया है कि जैसे-जैसे समाज और राजनीति में बदलाव हुए, वैसे-वैसे महिलाओं की स्थिति में भी बदलाव आए. कुछ समय के लिए उनकी भागीदारी कम हुई, लेकिन उन्होंने घर, खेती, कामकाज और समाज में अपना योगदान देना जारी रखा.यह भी पढ़ें - हिमाचल में TET को लेकर बड़ी अपडेट, हजारों शिक्षकों को मिला 2028 तक का समय
&#039;भारत और विश्व&#039; के नाम का चैप्टर भी जोड़ा गया
कक्षा 9 की इस किताब में &#039;भारत और विश्व&#039; नाम का एक अध्याय है, जिसमें वैदिक काल के बारे में जानकारी दी गई है. इस पाठ में उस दौर में महिलाओं की मजबूत स्थिति के बारे में बताया गया है कि उस समय महिलाओं को शिक्षा का पूरा अधिकार था. समाज के हर जरूरी काम में महिलाएं भागीदार होती थीं और अपनी मर्जी से अपना वर चुन सकती थीं. साथ ही बताया गया है कि समाज में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए गए थे. इससे पहले भी यह किताब काफी चर्चा में रही, जब SIR और चुनाव की तारीफों के पुल बांधे गए थे.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में भी हुआ था विवाद
यह चैप्टर तब लाया गया है, जब हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के लॉ फैकल्टी में मनुस्मृति को पढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर काफी विवाद हुआ था. इस फैसले का काफी विरोध हुआ और फिर डीयू के वाइस चांसलर ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. आखिरकार, मनुस्मृति को कोर्स में शामिल नहीं किया गया. अब NCERT की स्कूल की किताब में इसका जिक्र होने से विवाद बढ़ सकता है.यह भी पढ़ें - यूपी के छात्रों की होगी बल्ले-बल्ले! स्कॉलरशिप से लेकर फ्री टैबलेट तक, जानें 8 बड़ी योजनाएं ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title> AI Engineer Ayush Sing Viral Story: उम्र मात्र 19 साल, एआई का इस्तेमाल कर हर महीने 1 करोड़ रुपये कमा रहा यह भारतीय लड़का</title>
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        <description><![CDATA[ AI Engineer Ayush Sing Viral Story: आज के दौर में एआई केवल नौकरी का जरिया नहीं रह गया, बल्कि कई लोग इसी के दम पर करोड़ों का कारोबार भी खड़ा कर रहे हैं. हाल ही में 19 साल के भारतीय लड़का आयुष सिंह की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है. दावा किया जा रहा है कि आयुष हर महीने करीब एक करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है. खास बात यह है कि आयुष ने ना तो किसी आईआईटी या एमआईटी से पढ़ाई की है और न ही किसी बड़े इंस्टीट्यूट की डिग्री हासिल की है. आयुष की पूरी जर्नी खुद से सीखी गई एआई स्किल और लगातार मेहनत पर आधारित बताई जा रही है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि कौन है यह 19 साल का भारतीय लड़का जो हर महीने एआई का इस्तेमाल कर एक करोड़ रुपये कमा रहा है.&amp;nbsp;
13 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर&amp;nbsp;
एआई से हर महीने एक करोड़ रुपये कमाने वाले आयुष की यह कहानी सबसे पहले टॉपमेट के संस्थापक और सीटीओ दिनेश सिंह ने लिंक्डइन पर शेयर की थी. इसके बाद यह पोस्ट सोशल मीडिया वायरल हो गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. दिनेश सिंह के अनुसार आयुष सिंह की कहानी कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई थी. उस समय उसकी उम्र महज 13 साल थी और परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था.
सीमित संसाधनों के बीच आयुष के पास केवल एक लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन, कुछ ऑनलाइन कोर्स और सीखने की जबरदस्त इच्छा थी. इन्हीं संसाधनों के सहारे उसने खुद से मशीन लर्निंग और एआई सीखना शुरू किया. किसी कोचिंग या इंस्टीट्यूट की मदद के बिना उसने लगातार प्रैक्टिस की और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली.&amp;nbsp;
आयुष को कम उम्र में मिले बड़े मौके&amp;nbsp;
पोस्ट में दावा किया गया कि एआई सीखने के कुछ ही समय बाद आयुष को विदेशी स्टार्टअप के साथ काम करने का मौका मिलने लगा. इसके बाद आयुष ने कई एआई आधारित प्रोजेक्ट पर काम किया. दिनेश सिंह के अनुसार जब आयुष 14 साल का था तब मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने उसके एक कोर्स की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी. हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है. इसके बाद उसने अमेरिका की एक स्टार्टअप कंपनी के लिए नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग सिस्टम पर काम किया. बाद में उसने एमएलओपीएस इंजीनियर और डेटा साइंटिस्ट के तौर पर भी काम किया और एआई से जुड़े कई प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया.
एआई के क्षेत्र में एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ आयुष ने अपना स्टार्टअप एंटर्न शुरू किया है, जिसका उद्देश्य छात्रों की मदद करना है. इसके अलावा उसने सेकंड ब्रेन लैब नाम की एआई कंपनी की भी सह-स्थापना की. कम उम्र में आयुष तकनीकी क्षेत्र में कई अलग-अलग भूमिकाओं में बड़ा काम कर रहा है और धीरे-धीरे खुद को एआई प्रोफेशनल और बिजनेसमैन के रूप में स्थापित कर रहा है.&amp;nbsp;
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हर महीने करीब एक करोड़ रुपये कमाने का दावा&amp;nbsp;
लिंकडइन पोस्ट के अनुसार इसी मॉडल की मदद से आयुष सिंह अब हर महीने करीब एक करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है. बताया गया है कि हजारों छात्र और इंजीनियर उसके एआई प्रोग्राम से जुड़ चुके हैं और कई लोगों को नौकरी हासिल करने में भी मदद मिली है. दिनेश सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कई लोगों के पास ऐसी जानकारी और एक्सपीरियंस होता है, जिसके लिए लोग पैसे देने को तैयार रहते हैं. लेकिन अधिकतर लोग इसे सही तरीके से पेश नहीं कर पाते, उनके अनुसार आयुष की सफलता का बड़ा कारण यही रहा कि उसने अपनी स्किन को एक बिजनेस मॉडल में बदल दिया.
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>UPPSC PCS 2026: यूपी पीसीएस 2026 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, 500 पदों पर आवेदन शुरू, जानें पूरी डिटेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/uppsc-pcs-2026-यूपी-पीसीएस-2026-भर्ती-का-नोटिफिकेशन-जारी-500-पदों-पर-आवेदन-शुरू-जानें-पूरी-डिटेल</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बडी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में पीसीएस 2026 भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इसके साथ ही ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.इस भर्ती के लिए उम्मीदवार 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती के जरिए लगभग 500 पदों को भरा जाएगा. हालांकि आयोग ने आयोग ने संकेत दिया कि आगे इन रिक्त पदों की संख्या और बढ़ाई भी जा सकती है.
इच्छुक व योग्य उम्मीदवार 27 जुलाई 2026 तक अपना ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. वहीं जो उम्मीदवार आवेदन के बाद किसी तरह की गलती सुधारना चाहते हैं या शुल्क से जुड़ी समस्या का समाधान करना चाहते हैं, उनके लिए 3 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया है.
वन टाइम रजिस्ट्रेशन है जरूरी
आवेदन करने से पहले उम्मीदवार को सलाह दी जाती है कि अपना OTR नंबर जरूर ले लें. इस बार आवेदन प्रक्रिया में सबसे जरूरी वन टाइम रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बनाया गया है. आयोग ने स्पष्ट कहा कि बिना OTR नंबर के कोई भी उम्मीदवार आवेदन नहीं कर &amp;nbsp;सकेगा.तो अगर अभी तक किसी उम्मीदवार ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन नहीं किया है तो आवेदक से पहले अभ्यर्थी इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं.आयोग के अनुसार OTR नंबर प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारों को आवेदन से कम से कम 72 घंटे पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा ताकि सिस्टम में उनकी जानकारी अपडेट हो सके.
क्या होता है OTR?
वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उम्मीदवार अपनी बेसिक जानकारी एक बार आयोग के पोर्टल पर भरनी होती है. इसके बाद भविष्य में उम्मीदवार अगर कोई और फार्म भरता है तो उसमें बार-बार अपनी बेसिक डीटेल्स लेने की जरूरत नहीं पड़ती है.OTR की इस प्रक्रिया से फॉर्म भरने की प्रक्रिया आसान &amp;nbsp;होती है और गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है.
परीक्षा पैटर्न&amp;nbsp;UPPSC PCS 2026 की परीक्षा तीन चरणों में होगी. सबसे पहले प्री परीक्षा (Prelims) होगी. इसमें पास होने वाले उम्मीदवार ही अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा (Mains) में शामिल हो पाएंगे. मुख्य परीक्षा लिखित होगी और इसमें अलग-अलग विषयों के पेपर होंगे. इसमें जनरल हिंदी 150 अंक, निबंध 150 अंक और जनरल स्टडीज के 6 पेपर होंगे, जिनमें हर पेपर 200 अंक का होगा.इसके बाद जो उम्मीदवार मुख्य परीक्षा पास करेंगे उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इंटरव्यू 100 अंकों का होगा.
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कितना लगेगा आवेदन शुल्कUPPSC PCS 2026 परीक्षा में शामिल होने के लिए जनरल, EWS और OBC उम्मीदवारों को 125 रुपये, SC, ST और पूर्व सैनिक उम्मीदवारों को 65 रुपये शुल्क देना होगा. वहीं PwD उम्मीदवारों के लिए सिर्फ 25 रुपये रखा गया है.
ऐसे करें UPPSC PCS 2026 के लिए आवेदनस्टेप 1: आवेदन करने के लिए सबसे पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं.स्टेप 2: OTR पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन पूरा करें.स्टेप 3: OTR नंबर मिलने के बाद लॉगिन करें.स्टेप 4: PCS 2026 आवेदन लिंक पर क्लिक करें.स्टेप 5: सभी जरूरी जानकारी भरें और डॉक्युमेंट अपलोड करें.स्टेप 6: अंत मे डीटेल्स चेक करने के बाद फॉर्म सबमिट कर दे और भविष्य के लिए आवेदन की कॉपी डाउनलोड करके सुरक्षित रखें.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>UPPSC, PCS, 2026:, यूपी, पीसीएस, 2026, भर्ती, का, नोटिफिकेशन, जारी, 500, पदों, पर, आवेदन, शुरू, जानें, पूरी, डिटेल</media:keywords>
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        <title>घर की चौखट से ग्लोबल करियर तक, बेटियों के सपनों को नई उड़ान देगा ये सब्जेक्ट  </title>
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        <description><![CDATA[ घर की चौखट से ग्लोबल करियर तक, बेटियों के सपनों को नई उड़ान देगा ये सब्जेक्ट   ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>School Transport Fee: छुट्टियों वाले दिन का भी ट्रांसपोर्ट चार्ज वसूल रहा स्कूल? यहां करें शिकायत</title>
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        <description><![CDATA[ School Transport Fee: पैरेंट्स के लिए बच्चों की फीस को लेकर तो हमेशा शिकायत रहती है, लेकिन इन दिनों एक बात काफी चर्चा में चल रही है. वह है छुट्टियों के दौरान पूरा ट्रांसपोर्ट चार्ज वसूलने की. कई पैरेंट्स का कहना है कि जब स्कूल की छुट्टियां होती हैं या फिर बच्चों को बस से लाने-ले जाने की जरूरत ही नहीं होती, तब भी स्कूल उनसे पूरे महीने की बस फीस ले लेते हैं. &amp;nbsp;
आज के समय में यह मामला सिर्फ एक-दो स्कूलों का नहीं रह गया है, बल्कि कई जगहों से सामने आ रहा है, जिसकी वजह से पैरेंट्स पर आर्थिक बोझ ज्यादा पड़ता है. ऐसे में अगर आप भी इस परेशानी में फंसे हैं और आपको समझ नहीं आ रहा कि कहां शिकायत करें, तो ऐसे में यह जानकारी आपके लिए बेहद खास साबित हो सकती है. आपको जानकर खुशी होगी कि इस पर फी फिक्सेशन एंड रेगुलेशन कमेटी ने इसके लिए सख्त सर्कुलर जारी कर दिया है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
FFRC ने जारी किया सख्त सर्कुलर
जब गर्मी या सर्दी की लंबी छुट्टियां होती हैं, तो स्कूल बसें भी नहीं चलती हैं, इसके बावजूद कुछ स्कूल पैरेंट्स से पूरे महीने का ट्रांसपोर्ट चार्ज वसूल लेते थे, जो सही नहीं माना जाता है. &amp;nbsp;इसी तरह की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एफएफआरसी यानी फी फिक्सेशन एंड रेगुलेशन कमेटी ने एक सख्त सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि स्कूल छुट्टियों के दौरान ट्रांसपोर्ट फीस का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा नहीं वसूल सकते हैं. यह नियम गर्मियों की छुट्टियों और सर्दियों की छुट्टियों दोनों स्थितियों पर लागू होता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा कमेटी ने एडवांस फीस को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है. &amp;nbsp;कई स्कूल पैरेंट्स से एक साथ 3 से 6 महीने की फीस मांगते हैं. &amp;nbsp;इस पर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि ट्यूशन फीस हर महीने ली जानी चाहिए, और अगर कोई पैरेंट अपनी सुविधा के लिए खुद एडवांस में फीस देना चाहता है तो वह दे सकता है, लेकिन स्कूल किसी भी पैरेंट को एडवांस फीस देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत का बड़ा कमाल, अब अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन में 108 देशों के छात्रों के साथ करेंगी काम
कब और कहां कर सकते हैं शिकायत?
अगर अब बात करें इसकी शिकायत की, तो अगर आपके बच्चे का स्कूल भी छुट्टियों के दौरान पूरा ट्रांसपोर्ट चार्ज वसूल रहा है या एडवांस फीस के लिए दबाव बना रहा है, तो इसके लिए सबसे पहले आप अपने जिले की फी फिक्सेशन एंड रेगुलेशन कमेटी &amp;nbsp;या शिक्षा निदेशालय के ऑफिस में लिखित शिकायत दे सकते हैं. &amp;nbsp;साथ ही ज्यादातर राज्यों में शिक्षा विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का ऑप्शन मौजूद रहता है, जहां आप स्कूल का नाम, फीस की रसीद और अपनी शिकायत की पूरी डिटेल्स के साथ कंप्लेंट फॉर्म भर सकते हैं. शिकायत करते समय फीस की रसीद, बैंक स्टेटमेंट और स्कूल के साथ हुई बातचीत के सबूत आपके पास जरूर होने चाहिए, कमेटी इन्हीं सबूतों के आधार पर जांच करती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड के नतीजे जल्द, जानिए कहां और कैसे करें चेक?</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में दसवीं सेकंड बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों का इंतजार जल्दी खत्म होने वाला है. बोर्ड की तरफ से अभी रिजल्ट जारी करने की कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार रिजल्ट जल्दी ही जारी किया जा सकता है. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र ऑनलाइन अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं, और प्रोविजनल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं.
इस बार सीबीएसई की तरफ से अभी तक रिजल्ट को लेकर कोई भी अपडेट नहीं आया है. हालांकि अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से अपडेट सामने आ रहा है कि रिजल्ट जल्दी ही जारी हो सकता है. इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने दसवीं सेकंड बोर्ड परीक्षा दी थी और सभी अपने स्कोर चेक करने का बेसब्री से इंतजार हैं.
CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड रिजल्ट 2026 परीक्षा का उद्देश्य छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने का एक और मौका देना था. बोर्ड फाइनल रिजल्ट तैयार करते समय दोनों प्रयासों में बेहतर अंक को प्राथमिकता दे सकता है.
रिजल्ट जारी होने के बाद कहां कर सकते हैं चेक?

CBSE Official Website - cbse.gov.in
CBSE Result Portal - cbseresults.nic.in
DigiLocker
UMANG App

अगर वेबसाइट पर कोई दिक्कत आए तो क्या करें?
रिजल्ट जारी होने के समय वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने की वजह से साइट धीमी हो सकती है. तो अगर छात्रों को इस तरह की कोई भी समस्या का सामना करना पड़े तो छात्रों को सलाह दी जाती है केवल कुछ समय का इंतजार करें या डिजिलॉकर या उमंग एप्लिकेशन जैसे अन्य माध्यम से भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं.यह भी पढ़ें - सरकार का बड़ा फैसला, SC-OBC छात्रवृत्ति के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट की अब नही होगी जरूरत
रिजल्ट में क्या-क्या जानकारी करें चेक?सीबीएसई 10वीं सेकंड बोर्ड 2026 रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे पहले छात्रों को सभी जानकारी ध्यान से चेक करने की सलाह दी जाती है यदि किसी जानकारी में कुछ गड़बड़ दिखे तो छात्र स्कूल से संपर्क कर सकते हैं.
CBSE 10th Second Board Result 2026 कैसे चेक करें?
स्टेप 1: CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जायें.स्टेप 2: &amp;ldquo;CBSE Class 10 Second Board Result 2026&amp;rdquo; लिंक पर क्लिक करें.स्टेप 3: अपना Roll Number दर्ज करें.स्टेप 4: School Number और Admit Card ID दर्ज करें.स्टेप 5: जन्मतिथि दर्ज करने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें.स्टेप 6: स्क्रीन पर रिजल्ट आपको दिखाई देगा.स्टेप 7: रिजल्ट डाउनलोड करें लें और भविष्य इसका प्रिंटआउट अपने पास सुरक्षित रख ले.
यह भी पढ़ें - UPPSC PCS 2026: यूपी पीसीएस 2026 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, 500 पदों पर आवेदन शुरू, जानें पूरी डिटेल ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कौन थे केतन अग्रवाल? भारत से अमेरिका तक हासिल की थी बिजनेस की पढ़ाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कौन-थे-केतन-अग्रवाल-भारत-से-अमेरिका-तक-हासिल-की-थी-बिजनेस-की-पढ़ाई</link>
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        <description><![CDATA[ इस वक्त पुणे के चर्चित लोहागढ़ हत्या मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. इस मामले में पुलिस ने केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और एक अन्य आरोपी चेतन चौहान को पकड़ा है. पुलिस का कहना है कि जांच में हत्या की साजिश के संकेत मिले हैं, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम सच अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा. ऐसे में आज हम जानते हैं कि बिजनेसमैन केतन अग्रवाल कितने पढ़े-लिखे थे और उन्होंने कहां से पढ़ाई लिखाई की थी.
केतन अग्रवाल पुणे में ही अपने परिवार के साथ रह कर अपना फैमिली बिजनेस संभाल रहे थे,वह सक्सेस ग्रुप में डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) की भूमिका निभा रहे थे. उनकी पहचान सिर्फ बिजनेस फैमिली के सदस्य के तौर पर नहीं थी, बल्कि वह नए प्रोजेक्ट्स और बिजनेस डेवलपमेंट पर भी काम कर रहे थे. रिपोर्ट्स में मिली जानकारी का अनुसार केतन इंडस्ट्रियल और कमर्शियल रियल एस्टेट डेवलपमेंट से जुड़े बिजनेस करते थे. इसमें वह वेयरहाउस, इंडस्ट्रियल पार्क और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे.
भारत से अमेरिका तक की पढ़ाई
केतन अग्रवाल की शिक्षा भी उनकी प्रोफेशनल पहचान का अहम हिस्सा रही. केतन की शुरुआती पढ़ाई जीजी इंटरनेशनल स्कूल से हुई. 12वीं की पढ़ाई के लिए उन्होंने मराठवाड़ा मित्र मंडल कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एमएमसीसी) का रुख किया.
इसके बाद केतन ने पुणे की सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई की. यहां से पढ़ाई करने के बाद वह हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका चले गए. जहां उन्होंने Babson F.W. Olin Graduate School of Business से Entrepreneurship में मास्टर्स की डिग्री ली. बता दें कि बाब्सन बिजनेस स्कूल को उद्यमिता (Entrepreneurship) की पढ़ाई के लिए दुनिया के प्रमुख संस्थानों में गिना जाता है.
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क्या है पूरा मामला?
केतन अग्रवाल की मौत 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले के पास एक गहरी खाई में गिरने से हुई. रिपोर्ट्स के अनुसार वह अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ ट्रेकिंग पर गए थे. इसी दौरान करीब 400 फीट गहरी खाई में गिरने से उनकी मौत हो गई.
घटना के बाद सिया गोयल ने पुलिस को बताया था कि तेज हवाओं के बीच फोटो खिंचवाते समय केतन का संतुलन बिगड़ गया और वह खाई में गिर गए. इसी बयान के आधार पर लोनावला ग्रामीण पुलिस ने शुरुआती मामला दर्ज किया था.
लेकिन जांच के वक्त पुलिस को कई ऐसे सबूत मिले जिनसे हादसे की कहानी पर सवाल खड़े होने लगे. इसके बाद मामले में पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौहान को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का दावा है कि जांच में हत्या की साजिश से जुड़े सबूत मिले हैं और मामला अब कथित हत्या के रूप में जांच के दायरे में है. हालांकि आरोप अभी अदालत में साबित होने बाकी हैं.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत का बड़ा कमाल, अब अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन में 108 देशों के छात्रों के साथ करेंगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महिमा राजपूत ने अपने राज्य के &amp;nbsp;साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया है. 10वीं क्लास की छात्रा महिमा राजपूत का चयन इंटरनेशनल स्पेस मिशन &amp;lsquo;ShakthiSAT&amp;rsquo; के लिए किया गया है. इस मिशन में दुनिया के 108 देशों के छात्र शामिल हो रहे हैं. महिमा की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और स्कूल बल्कि पूरे प्रदेश को एक नई पहचान दी है. इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विज्ञान कार्यक्रम तक पहुंचना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.
स्कूल प्रिंसिपल के माध्यम से जानकारी
महिमा ने बताया कि उन्हें इस मिशन के बारे में उनके स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया था जिसके बाद उनकी गाइडेंस टीचर योगेश्वरी लहिरी ने उनका रजिस्ट्रेशन कराया और रजिस्ट्रेशन के बाद उन्होंने कई तरह की गतिविधियों और ट्रेनिंग कार्यक्रमों में भाग लिया. इस प्रक्रिया का उद्देश्य छात्रों की वैज्ञानिक समझ और उनकी तकनीकी क्षमता को मजबूत करना था. महिमा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े कई डिजिटल मॉड्यूल दिए गए, जिन्हें पूरा करने के बाद उनकी समझ और रुचि दोनों में बढ़ोतरी हुई. इसी मेहनत ने उन्हें इस स्तर तक पहुंचने में मदद की.
मजबूत किए साइंस के बेसिक कॉन्सेप्ट
महिमा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कुल 21 मॉड्यूल और 365 लेशन उपलब्ध कराए गए. इनके जरिए छात्रों को विज्ञान, सैटेलाइट तकनीक और अंतरिक्ष से जुडी बातें समझाई गई. उन्होंने बताया की इसका उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं था बल्कि छात्रों को व्यवहारिक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए तैयार करना भी था. महिमा का कहना है कि इन मॉड्यूल ने उनकी बेसिक साइंस समझ को काफी बेहतर बनाया.
सैटेलाइट बनाने की ट्रेनिंग भी कार्यक्रम का हिस्सा
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि छात्रों को केवल थ्योरी तक सीमित नहीं रखा गया. उन्हें सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई. महिमा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान यह समझाया गया कि एक सैटेलाइट कैसे तैयार होती है, उसका डिजाइन कैसे बनाया जाता है और उसे मिशन के उद्देश्य के अनुसार कैसे विकसित किया जाता है. इस अनुभव ने छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान को किताबों से बाहर समझने का मौका दिया.
108 देशों के छात्रों के साथ काम करेंगी महिमा
महिमा ने जानकारी दी की 23 अगस्त को उनको दिल्ली के लिए रवाना होना है, जहां पर वह 108 छात्रों के साथ मिलकर एक उपग्रह बनायेंगे जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और दूसरा उपग्रह चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>रायपुर, की, छात्रा, महिमा, राजपूत, का, बड़ा, कमाल, अब, अंतरराष्ट्रीय, स्पेस, मिशन, में, 108, देशों, के, छात्रों, के, साथ, करेंगी, काम</media:keywords>
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        <title>UPSC परीक्षा में पहली बार AI का इस्तेमाल, कई उम्मीदवारों के सपनों पर लगा ब्रेक</title>
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        <description><![CDATA[ आप सभी को पूजा खेड़कर का नाम तो याद ही होगा. आपको याद होगा कि किस तरह एक ट्रेनी IAS अफसर पर अपनी पहचान और दस्तावेजों में कथित बदलाव कर UPSC के नियमों को दरकिनार करने के आरोप लगे थे. देशभर में इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं और UPSC की चयन प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े हो गए थे. अब आगे इस तरह की किसी भी स्थिति से बचने के लिए UPSC ने कदम उठाया है. इसके लिए आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया है.
दरअसल, यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 में पहली बार AI का इस्तेमाल किया और बड़ी कार्रवाई की. एग्जाम से पहले ही UPSC ने 569 ऐसे आवेदनों को खारिज कर दिया, जो नियमों के अनुसार अयोग्य पाए गए. इनमें कई ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जिन्होंने तय सीमा से अधिक प्रयास कर लिए थे या एज लिमिट क्रॉस कर चुके थे. वहीं, कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई आवेदन भी किए गए थे.
रिपोर्ट्स के अनुसार ये कदम 2024 के चर्चित पूजा खेडकर मामले के करीब दो साल बाद उठाया गया है. पूजा खेडकर पर आरोप था कि उन्होंने नाम और माता-पिता के नाम में बदलाव कर निर्धारित प्रयासों की सीमा पूरी होने के बावजूद UPSC परीक्षा दी थी. बाद में उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी और सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया था.
पहली बार प्रीलिम्स से पहले हुई जांच
अब तक UPSC इस तरह की जांच इंटरव्यू चरण में करता था, यानी तब जब उम्मीदवार प्रीलिम्स और मेन्स दोनों परीक्षाएं पास कर लेते थे. लेकिन इस बार आयोग ने तकनीक का सहारा लेते हुए आवेदन चरण में ही जांच शुरू कर दी.
UPSC के अनुसार इस साल सिविल सेवा परीक्षा के लिए 8.18 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जबकि करीब 5.49 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. पिछले साल की तुलना में आवेदनों की संख्या में कमी भी दर्ज की गई है.यह भी पढ़ें - कौन थे केतन अग्रवाल? भारत से अमेरिका तक हासिल की थी बिजनेस की पढ़ाई
AI ने 15 साल का रिकॉर्ड खंगाला
रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 94 प्रतिशत उम्मीदवारों ने आधार आधारित सत्यापन का विकल्प चुना था. बाकी करीब 49 हजार आवेदनों की जांच AI की मदद से की गई. AI ने उम्मीदवारों के नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि और फोटो का मिलान कर डुप्लीकेट आवेदनों की पहचान की.
इसके बाद आयोग ने पिछले 15 वर्षों के रिकॉर्ड के आधार पर यह भी जांचा कि कहीं उम्मीदवार अपनी श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम प्रयासों या आयु सीमा को तो पार नहीं कर चुके हैं.
AI से जांच में खुलासा
AI से चेकिंग के समय 43,497 ऐसे उम्मीदवार भी मिले जिन्होंने अपने पिछले प्रयासों की तुलना में इस बार श्रेणी बदली थी. उदाहरण के लिए, कुछ उम्मीदवारों ने पहले सामान्य वर्ग (General) में आवेदन किया था और इस बार EWS या अन्य आरक्षित श्रेणियों में आवेदन किया.
UPSC ने ऐसे सभी उम्मीदवारों को ईमेल भेजकर जानकारी सत्यापित की. जांच के बाद 133 आवेदन केवल इसी कारण रद्द कर दिए गए क्योंकि उम्मीदवार अपनी नई श्रेणी के हिसाब से अनुमत प्रयासों की सीमा पार कर चुके थे.यह भी पढ़ें - रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत का बड़ा कमाल, अब अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन में 108 देशों के छात्रों के साथ करेंगी काम ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>UPSC, परीक्षा, में, पहली, बार, का, इस्तेमाल, कई, उम्मीदवारों, के, सपनों, पर, लगा, ब्रेक</media:keywords>
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        <title>NCERT की चेतावनी! सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फर्जी किताबों से रहें सावधान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ncert-की-चेतावनी-सोशल-मीडिया-पर-वायरल-हो-रही-फर्जी-किताबों-से-रहें-सावधान</link>
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        <description><![CDATA[ यदि आप भी NCERT की नई किताबों का इंतजार कर रहे हैं और सोशल मीडिया या किसी मैसेजिंग ग्रुप से उन्हें डाउनलोड कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं. NCERT की तरफ से चेतावनी जारी की गई है. NCERT ने कहा है कि उसकी कई किताबों की पायरेटेड और अनधिकृत कॉपियां सोशल मीडिया, वेबसाइटों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की जा रही हैं, जिन पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है.
NCERT के अनुसार हाल ही में कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब का एक फर्जी और अनधिकृत संस्करण सोशल मीडिया पर वायरल पाया गया है. कई वेबसाइटें और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इसे असली NCERT बुक बताकर छात्रों तक पहुंचा रहे हैं, जबकि इसका NCERT से कोई संबंध नहीं है.
NCERT ने कहा कि किताबें केवल उसके आधिकारिक माध्यमों से ही प्रकाशित और जारी की जाती हैं. किसी भी किताब को आधिकारिक लॉन्च से पहले सार्वजनिक रूप से साझा करने की अनुमति नहीं होती है. ऐसे में जो सामग्री सोशल मीडिया या अन्य अनधिकृत स्रोतों पर उपलब्ध है, वह गलत, अधूरी, छेड़छाड़ की गई या पूरी तरह से फर्जी हो सकती है.
NCERT ने की अपील
वहीं, NCERT ने छात्रों और शिक्षकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही किताबें प्राप्त करें. डिजिटल किताबें मुफ्त में NCERT की वेबसाइट और ई-पाठशाला (ePathshala) पोर्टल पर उपलब्ध हैं, जबकि मुद्रित प्रतियां अधिकृत विक्रेताओं से खरीदी जा सकती हैं.यह भी पढ़ें - रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत का बड़ा कमाल, अब अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन में 108 देशों के छात्रों के साथ करेंगी काम
पढ़ाई हो सकती है प्रभावित
इस तरह की स्थिति में सोशल मीडिया पेज, ऐप्स, लिंक या ग्रुप्स से दूरी बनाए रखें जो NCERT की किताबें या लॉन्च से पहले का अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री भ्रामक हो सकती है और छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकती है.
ये करना है अपराध
NCERT ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उसकी कॉपीराइट सामग्री की बिना अनुमति छपाई, पुनर्प्रकाशन, वितरण या डिजिटल शेयरिंग कानूनन अपराध है. यह कॉपीराइट एक्ट 1957 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत दंडनीय है.

???????????????????????? ???????? ???????????????? ???????????? ???????????????????????????? ???????????????????? ????????????????????????????????????NCERT has noticed the circulation of unauthorized and pirated copies of its textbooks in print and digital formats. A fake version of the ???????????????????? ???????? ???????????????????????? ???????????????????????????? ???????????????? ????&amp;hellip; pic.twitter.com/Ep3FfOmO8M
&amp;mdash; NCERT (@ncert) June 24, 2026



होगी कानूनी कार्रवाईNCERT ने कहा है कि फर्जी किताबों और पायरेसी में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनधिकृत सामग्री पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों का ही उपयोग करें.
किताब पर छिड़ा नया विवादउधर, NCERT की क्लास 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक &amp;lsquo;कृष्णा&amp;rsquo; को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है. शिक्षा अधिकार संगठन PAFRE ने किताब में धार्मिक संदर्भों और शाकाहार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, जबकि NCERT ने सफाई देते हुए कहा कि किताब का नाम कर्नाटक की कृष्णा नदी पर रखा गया है और इसमें केवल संतुलित आहार की जानकारी दी गई है. किसी विशेष खानपान या धार्मिक विचारधारा का प्रचार नहीं किया गया है.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सरकार का बड़ा फैसला, SC&amp;OBC छात्रवृत्ति के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट की अब नही होगी जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी स्कॉलरशिप का फायदा लेते हैं.तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की हो सकती है. केंद्र सरकार ने एससी और ओबीसी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है.सरकार के इस &amp;nbsp;फैसले से अब कई मामलों में छात्रों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र जमा करने की जरूरत नहीं होगी. इससे आवेदन करने में समय की बचत होगी और छात्र आसानी से स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं.
अब आसान होगी स्कॉलरशिप प्रक्रिया
अब तक छात्रों को कई स्कॉलरशिप योजनाओं में आवेदन करने के लिए निवास पर प्रमाण पत्र देना जरूरी माना जाता था. निवास प्रमाण पत्र &amp;nbsp;में छात्र की स्थायी निवास की पूरी जानकारी होती है,कि छात्र किस राज्य का और किस इलाके का स्थाई निवासी है लेकिन इस डॉक्यूमेंट को बनवाने में कई &amp;nbsp;बार छात्रों को और उनके परिवारों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता था. कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते लगाते इतनी देर हो जाती थी कि आवेदक का समय ही निकल जाता था. जिसकी वजह से सरकार ने अब नियमों में बदलाव का कदम उठाया है
दूर पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा फायदा
देश में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र जो पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर रहते हैं ऐसे छात्र को स्कॉलरशिप के लिए निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वापस घर जाना पड़ता था जिसमें उनका काफी समय और पैसा बर्बाद होता था. अब आवेदन प्रक्रिया आसान होने से ऐसे छात्रों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है.यह भी पढ़ें - UPSC परीक्षा में पहली बार AI का इस्तेमाल, कई उम्मीदवारों के सपनों पर लगा ब्रेक
परिवारों को भी मिलेगी राहत
कई बार सिर्फ छात्र ही नहीं उनके माता-पिता को भी डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी. कई बार अभिभावकों को निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे और &amp;nbsp;कुछ मामलों में काम को जल्दी करने के लिए अधिक खर्च भी करना पड़ता था. पर अब &amp;nbsp;इस नए बदलाव से इस तरह की होने वाली परेशानियों से बचने की काफी संभावना बढ़ गई है.
क्या है सरकार का उद्देश्य?
इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य छात्रवृत्ति प्रक्रिया को आसन बनाना है ताकि छात्रों को निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े. और योग्य छात्रों तक समय पर सहायता पहुंच सके.इस बदलाव से आवेदन प्रक्रिया तेज होने और छात्रों को पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलने की उम्मीद है.यह भी पढ़ें - NCERT की चेतावनी! सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फर्जी किताबों से रहें सावधान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Madrasa Education in India : शेख उल हिंद से फज्ले हक खैराबादी और एपीजे अब्दुल कलाम तक, मदरसे से पढ़ी हैं देश की ये हस्तियां</title>
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        <description><![CDATA[ Madrasa Education in India : भारत में मदरसों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है. बताया जाता है कि देश के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, समाज सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में मदरसों से जुड़े कई लोगों ने जरूरी योगदान दिया है. मदरसों में शिक्षा पाने वालों में शेख उल हिंद से फज्ले हक खैराबादी और एपीजे अब्दुल कलाम तक कई हस्तियों के नाम भी लिए जाते हैं. इसके अलावा कई ऐसे विद्वान और शिक्षाविद रहे, जिन्होंने देश और समाज के लिए बड़े काम किए. ऐसे में आइए उन हस्तियों के बारे में जानते हैं, जिनका नाम मदरसों की शिक्षा और परंपरा से जुड़ा रहा है.&amp;nbsp;
मदरसे से पढ़ी हैं देश की ये हस्तियां
1. अल्लामा फजले हक खैराबादी - अल्लामा फजले हक खैराबादी को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है. उन्होंने इस्लामी धर्मशास्त्र और दर्शन की शिक्षा मदरसों से प्राप्त की थी. खैराबादी केवल एक धार्मिक विद्वान ही नहीं थे, बल्कि दिल्ली के मुख्य न्यायाधीश के पद पर भी रहे. अंग्रेजी शासन के खिलाफ उन्होंने जिहाद का फतवा जारी किया था. इसी कारण उन्हें गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और अंडमान के काला पानी भेज दिया गया. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान आज भी जरूरी माना जाता है.
2. शेख उल हिंद मौलाना &amp;nbsp;- मौलाना महमूद-उल-हसन देवबंद स्थित दारुल उलूम के पहले छात्रों में शामिल थे. उन्होंने लगभग 44 सालों तक दारुल उलूम देवबंद में अध्यापन कार्य किया और हजारों छात्रों को शिक्षा दी.&amp;nbsp; ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन चलाया. अंग्रेजों के खिलाफ उनकी गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार कर माल्टा की जेल में कैद किया गया, जहां उन्होंने करीब तीन साल बिताए. मौलाना महमूद-उल-हसन को बाद में शेख-उल-हिंद की उपाधि से सम्मानित किया गया. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने मुस्लिम समाज में कुरान की शिक्षा के प्रसार और आपसी एकता पर विशेष जोर दिया. उनका मानना था कि मुसलमानों के पिछड़ने के दो प्रमुख कारण कुरान से दूरी और आपसी मतभेद हैं.&amp;nbsp;
3. राजा राम मोहन राय - भारतीय समाज सुधार आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल राजा राम मोहन राय का नाम भी उन लोगों में लिया जाता है जिन्होंने मदरसों में शिक्षा प्राप्त की थी. राजा राम मोहन राय ने भारतीय समाज में फैली कई कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और आधुनिक विचारधारा को बढ़ावा दिया, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है.&amp;nbsp;
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4. मुंशी प्रेमचंद - हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित लेखकों में गिने जाने वाले मुंशी प्रेमचंद का नाम भी मदरसों में शिक्षा प्राप्त करने वाली हस्तियों में शामिल है. प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की, किसानों, मजदूरों और आम लोगों के जीवन को उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों में प्रमुखता से स्थान दिया. उनकी रचनाएं आज भी भारतीय साहित्य की धरोहर मानी जाती हैं.&amp;nbsp;
5. डॉ. राजेंद्र प्रसाद - भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी उन प्रमुख हस्तियों में गिने जाते हैं जिनका नाम मदरसा शिक्षा से जुड़ा रहा है. स्वतंत्र भारत के निर्माण में उनकी जरूरी भूमिका रही. संविधान निर्माण की प्रक्रिया से लेकर राष्ट्रपति पद तक, उन्होंने देश को नई दिशा देने का कार्य किया.&amp;nbsp;
6. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम - भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन आधुनिक भारत की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक माना जाता है. 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे डॉ. कलाम ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-III) के विकास में जरूरी भूमिका निभाई.इसके बाद उन्होंने इसरो और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में कई जरूरी परियोजनाओं का नेतृत्व किया. अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों के विकास से लेकर पोखरण-II परमाणु परीक्षण तक, कई राष्ट्रीय परियोजनाओं में उनका योगदान रहा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Prime Minister Translator Career : प्रधानमंत्री का ट्रांसलेटर बनने के लिए कहां से और कौन&amp;सी करनी होती है पढ़ाई? ये हैं बेस्ट कॉलेज ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Prime Minister Translator Career :&amp;nbsp;आज दुनिया तेजी से ग्लोबलाइजेशन की ओर बढ़ रही है. इसके चलते अलग-अलग देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. ऐसे में भाषाओं को समझने और उन्हें दूसरी भाषा में सही तरीके से प्रजेंट करने वाले प्रोफेशनल्स की मांग भी तेजी से बढ़ी है. यही वजह है कि ट्रांसलेटर और इंटरप्रेटर आज के समय के सबसे जरूरी प्रोफेशन में शामिल हो चुके हैं. अगर आपको नई भाषाएं सीखने का शौक है और आप हिंदी, अंग्रेजी या किसी विदेशी भाषा पर अच्छी पकड़ रखते हैं तो ट्रांसलेशन के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं. यही स्किल्स आगे चलकर आपको देश के बड़े &amp;nbsp;नेताओं, सरकारी संस्थानों, दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ काम करने का अवसर भी दिला सकती हैं. प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में काम करने वाले ट्रांसलेटर्स और इंटरप्रेटर्स भी इसी क्षेत्र के प्रशिक्षित विशेषज्ञ होते हैं. तो आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री का ट्रांसलेटर बनने के लिए कहां से और कौन-सी पढ़ाई करनी होती है और इसके लिए बेस्ट कॉलेज ऑप्शन क्या हैं.&amp;nbsp;
ट्रांसलेटर बनने के लिए क्या है योग्यता?
ट्रांसलेटर बनने के लिए कम से कम दो भाषाओं का अच्छी जानकारी होना जरूरी है. इसके लिए उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना चाहिए. अगर आप फॉरेन लैंग्वेज में आगे पढ़ाई करना चाहते हैं तो 12वीं के बाद सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं. वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन या मास्टर डिग्री करने के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन होना जरूरी है. कई संस्थान प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्जाम भी आयोजित करते हैं.&amp;nbsp;
ट्रांसलेटर बनने के लिए कहां से और कौन-सी पढ़ाई करनी होती है?
ट्रांसलेशन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए भाषा से जुड़े कोर्स सबसे ज्यादा मददगार होते हैं. छात्र बीए इंग्लिश, बीए हिंदी, बीए फ्रेंच, बीए जर्मन, बीए स्पेनिश, बीए जापानी, बीए कोरियन या बीए विदेशी भाषा ऑनर्स में पढ़ाई कर सकते हैं, इसके बाद छात्र मास्टर्स और पीएचडी भी कर सकते हैं. पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर एमए इन लिंग्विस्टिक्स, एमए फ्रेंच, एमए जर्मन. एमए रशियन, एमए इटालियन या एमए ट्रांसलेशन स्टडीज जैसे कोर्स किए जा सकते हैं. इसके अलावा TOEFL और IELTS जैसे लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट भी अच्छे माने जाते हैं.&amp;nbsp;
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इसके लिए बेस्ट कॉलेज ऑप्शन क्या हैं?
ट्रांसलेशन और विदेशी भाषाओं की पढ़ाई के लिए देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान कोर्स संचालित करते हैं. इनमें प्रमुख जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU), हैदराबाद विश्वविद्यालय, &amp;nbsp;इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी (EFLU), &amp;nbsp;इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), पुणे विश्वविद्यालय, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और एम्बेसी ऑफ जापान हैं.&amp;nbsp;
सैलरी और करियर ग्रोथ
ट्रांसलेशन आज तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र माना जा रहा है. विदेशी कंपनियों के भारत में बढ़ते निवेश के कारण भाषा विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है. इस क्षेत्र में शुरुआती स्तर पर सालाना 3 से 5 लाख रुपये तक का पैकेज मिल सकता है. साथ ही एक्सपीरियंस और भाषा विशेषज्ञता बढ़ने के साथ इनकम 8 लाख रुपये सालाना या उससे ज्यादा तक पहुंच सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>CUET स्कोर से होगा डीयू में एडमिशन, जानें VC योगेश सिंह ने क्या कहा? </title>
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        <description><![CDATA[ CUET स्कोर से होगा डीयू में एडमिशन, जानें VC योगेश सिंह ने क्या कहा?  ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>स्टूडेंट्स के लिए जैकपॉट, कनाडा में मुफ्त पढ़ाई; हर महीने 1.5 लाख</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्टूडेंट्स-के-लिए-जैकपॉट-कनाडा-में-मुफ्त-पढ़ाई-हर-महीने-15-लाख</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप विदेश में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं,और फीस और रहने के खर्च को लेकर आप कन्फ्यूज्ड हैं &amp;nbsp;तो यह आपके लिए शानदार काम की खबर हो सकती है. कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी भारतीय छात्रों के लिए McCall MacBa.n Scholarsh.p दे रही है. इस स्कॉलरशिप में छात्रों को कोई भी ट्यूशन फीस नहीं देनी होगी छात्र बिना ट्यूशन फीस के ही मास्टर्स की पढ़ाई कर सकते हैं और हर महीने करीब 1.50 लाख रुपये का स्टाइपेंड भी ले सकते हैं.
क्यों खास है ये स्कॉलरशिप?&amp;nbsp;मैकगिल यूनिवर्सिटी कनाडा की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में गिनी जाती है. यहां दी जाने वाली McCall MacBain Scholarship सिर्फ पढ़ाई का खर्च नहीं उठाती, बल्कि छात्रों को लीडरशिप और करियर ग्रोथ के लिए भी तैयार करती है. यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए है काफी मददगार हो सकती है जो भविष्य में एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाना चाहते हैं.इस स्कॉलरशिप की खास बात है कि इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ की जाती है साथ ही रहने और खाने के खर्च के लिए हर महीने 2300 कनाडाई डॉलर यानी लगभग 1.50 लाख रुपये का स्टाइपेंड दिया जायेगा कनाडा जाने के लिए रिलोकेशन ग्रांट भी मिलेगी साथ ही गर्मियों में रिसर्च या इंटर्नशिप करने के लिए अलग से फंडिंग &amp;nbsp;भी उपलब्ध कराई जाएगी.यह भी पढ़ें - Prime Minister Translator Career : प्रधानमंत्री का ट्रांसलेटर बनने के लिए कहां से और कौन-सी करनी होती है पढ़ाई? ये हैं बेस्ट कॉलेज ऑप्शन
क्या चाहिए योग्यता?इस स्कॉलरशिप के लिए वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिनके पास बैचलर डिग्री है या जो अभी ग्रेजुएशन के लास्ट ईयर में हैं और 2027 तक अपनी डिग्री पूरी कर लेंगे.इस स्कॉलरशिप के लिए वह छात्र भी आवेदन कर सकते है जिन्होंने पिछले 5 सालों के अंदर ग्रेजुएशन पूरा किया हो.&amp;nbsp; इस स्कॉलरशिप के लिए 30 वर्ष तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं,कब तक कर सकते है आवेदन?McCall MacBain Scholarship के लिए आवेदन करने की लास्ट डेट 19 अगस्त 2026 है. हालांकि &amp;nbsp;छात्रों को पहले स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करना होगा और उसके बाद मैकगिल यूनिवर्सिटी के मास्टर्स प्रोग्राम में एडमिशन के लिए आवेदन करना होगा.स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने वाले छात्रों को Statement of Purpose जमा करना होगा. इसमें उन्हें अपनी उपलब्धियों, नेतृत्व क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बताना होगा. इसके अलावा Recommendation Letter भी जरूरी होगा, &amp;nbsp;इसलिए ऐसे प्रोफेसर या मेंटर से सिफारिश पत्र लें जो आपके काम और नेतृत्व क्षमता को अच्छी तरह जानते हों.यह भी पढ़ें - CUET स्कोर से होगा डीयू में एडमिशन, जानें VC योगेश सिंह ने क्या कहा?  ]]></description>
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        <title>मेडिकल कॉलेजों में HOD बदलने के नियम पर अभी फैसला नहीं, NMC ने दी सफाई</title>
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        <description><![CDATA[ देश के मेडिकल कॉलेजों में हर तीन साल में विभागाध्यक्ष (HOD) बदलने के प्रस्ताव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने स्थिति साफ कर दी है. आयोग की तरफ से कहा गया है कि इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और प्रस्ताव पर विचार-विमर्श अभी जारी है.
हाल के दिनों में यह खबर सामने आई थी कि मेडिकल कॉलेजों में विभागाध्यक्षों के कार्यकाल को तीन साल तक सीमित करने और उसके बाद विभाग में रोटेशन के आधार पर नए HOD की नियुक्ति करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. इस खबर के बाद मेडिकल शिक्षा जगत में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. कई शिक्षकों और विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में अपनी राय भी रखी थी.
अभी सिर्फ चर्चा हीअब NMC ने कहा है कि प्रस्तावित संशोधन अभी केवल चर्चा के चरण में है. उन्होंने कहा कि आयोग किसी भी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले देशभर के संबंधित पक्षों से राय लेता है. इसी प्रक्रिया के तहत इस प्रस्ताव को भी सार्वजनिक मंच पर रखा गया था ताकि मेडिकल कॉलेजों, शिक्षकों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों की प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके.
जल्द आ सकता है फैसला
रिपोर्ट्स के अनुसार मिलने वाले सुझावों और आपत्तियों का अध्ययन अभी जारी है. आयोग सभी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है और फिलहाल किसी तरह का अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. स्टेकहोल्डर के साथ बातचीत और परामर्श की प्रक्रिया अभी सक्रिय रूप से चल रही है.

National Medical Commission (NMC) offical says, &quot;No final decision has been taken in the matter of rotation of Heads of Department after every three years in medical colleges. We follow the procedure of nationwide consultation taht was done on public domain and we are still&amp;hellip;
&amp;mdash; ANI (@ANI) June 24, 2026



यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;Prime Minister Translator Career : प्रधानमंत्री का ट्रांसलेटर बनने के लिए कहां से और कौन-सी करनी होती है पढ़ाई? ये हैं बेस्ट कॉलेज ऑप्शन
बंद होंगे PG डिप्लोमा कोर्स
इसके अलावा बताते चलें कि एनएमसी ने फैसला किया है कि आने वाले वर्षों में सभी पोस्ट ग्रेजुएट (PG) डिप्लोमा मेडिकल कोर्स को बंद कर दिया जाएगा. उनकी जगह डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) और मास्टर ऑफ सर्जरी (MS) जैसे डिग्री कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे.
एनएमसी ने इस संबंध में देशभर के मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को पत्र जारी कर दिया है. आयोग के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 PG डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश का आखिरी साल होगा. इसके बाद 2027-28 से नए छात्रों का दाखिला इन पाठ्यक्रमों में नहीं लिया जाएगा और धीरे-धीरे ये कोर्स पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब पैसों की चिंता नहीं! MCA छात्रों को मिल रही ये सरकारी स्कॉलरशिप</title>
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        <description><![CDATA[ हायर एजुकेशन हासिल करने वाले स्टूडेंट्स के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग स्कॉलरशिप स्कीम चलाई जाती हैं. ऐसे में आज जानते हैं मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन्स (MCA) की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के लिए सरकारी स्कॉलरशिप के बारे में. इन योजनाओं का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर, मेधावी और विशेष श्रेणी के छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता प्रदान करना है.
&amp;nbsp;
पीजी छात्रों के लिए खास छात्रवृत्ति
&amp;nbsp;
MCA जैसे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए UGC की &quot;यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर स्कॉलरशिप&quot; काफी लोकप्रिय है. यह छात्रवृत्ति उन छात्रों को दी जाती है जिन्होंने स्नातक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो और आगे की पढ़ाई जारी रखी हो.
&amp;nbsp;
इसके अलावा पीजी इंदिरा गांधी सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप भी उपलब्ध है. यह योजना उन छात्राओं के लिए है जो अपने माता-पिता की एकमात्र संतान हैं और नियमित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में अध्ययन कर रही हैं. इस योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि छात्राएं बिना किसी आर्थिक परेशानी के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.
&amp;nbsp;
आरक्षित एवं विशेष वर्गों को भी लाभ
&amp;nbsp;
अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए विभिन्न राज्य सरकारें पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित करती हैं. उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सामाजिक कल्याण विभाग इन योजनाओं का संचालन करता है. इन स्कॉलरशिप के तहत छात्रों की ट्यूशन फीस, परीक्षा शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्चों में सहायता दी जाती है. पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा से कम होना आवश्यक होता है.

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अल्पसंख्यक छात्रों के लिए मेरिट-कम-मीन्स योजना
&amp;nbsp;
अल्पसंख्यक समुदायों जैसे मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के छात्रों के लिए केंद्र सरकार की मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप योजना मौजूद है. ये स्कीम&amp;nbsp; तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है.
&amp;nbsp;
आवेदन कैसे करें?
&amp;nbsp;
सरकारी छात्रवृत्तियों के लिए छात्रों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर पंजीकरण करना होता है. सबसे पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) नंबर प्राप्त करना आवश्यक है. आवेदन के समय छात्रों को आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), शैक्षणिक अंकपत्र और फीस रसीद जैसे दस्तावेज जमा करने होते हैं. जिन छात्रों को ऑनलाइन आवेदन में परेशानी होती है, वे अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं.
&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Study Abroad Tips: UK पढ़ने जा रहे हैं? उड़ान भरने से पहले इन 5 जरूरी काम करें पूरे</title>
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        <description><![CDATA[ Study Abroad Tips: UK पढ़ने जा रहे हैं? उड़ान भरने से पहले इन 5 जरूरी काम करें पूरे ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSSSC ने जारी किया कृषि प्राविधिक सहायक का रिजल्ट, 3446 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी मिली है. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने मंगलवार (23 जून) को कृषि विभाग में प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी (Technical Assistant Group-C) के पद के लिए रिजल्ट घोषित कर दिया. इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 3446 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिन्हें जल्द ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात किया जाएगा.
जुलाई 2025 में हुई थी लिखित परीक्षा
बता दें कि कृषि विभाग में इन पदों को भरने के लिए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 13 जुलाई 2025 को लिखित परीक्षा का आयोजन किया था. परीक्षा के बाद से ही अभ्यर्थी बेसब्री से अपने नतीजों का इंतजार कर रहे थे. मंगलवार को जैसे ही आयोग ने परिणाम जारी किए, वैसे ही सफल उम्मीदवारों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई. परिणाम घोषित होने के बाद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने सफल अभ्यर्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं.
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किस वर्ग के कितने अभ्यर्थी हुए सफल?
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने चयनित अभ्यर्थियों की पूरी जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई और नियमों के तहत सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिला है. कुल 3446 चयनित अभ्यर्थियों का श्रेणीवार (Category-wise) विवरण इस प्रकार है.

सामान्य वर्ग (General Category): 1813 अभ्यर्थी
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 629 अभ्यर्थी
अनुसूचित जाति (SC): 509 अभ्यर्थी
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 344 अभ्यर्थी
अनुसूचित जनजाति (ST): 151 अभ्यर्थी

क्या होता है कृषि प्राविधिक सहायक का काम?
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन प्राविधिक सहायकों की सीधी भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में होगी. ये सहायक सीधे तौर पर किसानों से जुड़ेंगे और उन्हें खेती की नई व आधुनिक तकनीकों (Modern Farming Techniques) के बारे में जागरूक करेंगे. केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं जैसे- पीएम किसान सम्मान निधि, सॉयल हेल्थ कार्ड (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) और फसल बीमा योजना को हर छोटे-बड़े किसान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इनकी होगी. इसके अलावा किसानों को उन्नत बीजों, जैविक खाद और कीटनाशकों के सही इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ेगी और खेती की लागत कम होगी.
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ICAI CA इंटर रिजल्ट जारी, icai.nic.in पर कर सकते हैं चेक, शार्दुल रहे टॉपर</title>
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        <description><![CDATA[ 
ICAI CA Inter Results Out: द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने CA Intermediate May 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है. नतीजे जारी होने के बाद कैंडिडेट्स उन्हें आधिकारिक साइट पर जाकर चेक कर सकते हैं. आइए जानते हैं आसान स्टेप्स जिससे आप रिजल्ट चेक कर सकते हैं.
ICAI ने बताया है कि परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवार अब अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट caresults.icai.org पर जाकर देख सकते हैं. इसके लिए छात्रों को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और रोल नंबर डालना होगा. जानकारी भरते ही उनका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर आ जाएगा, जिसे कैंडिडेट्स देख सकते हैं.
इस बार पूरे देश में महाराष्ट्र के डोंबिवली निवासी शार्दुल शेखर विचारे ने ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल किया है. शार्दुल ने कुल 600 में से 531 अंक प्राप्त किए हैं, यानी उन्होंने 88.50 फीसदी नंबर प्राप्त किए हैं.
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किसने हासिल किया दूसरा स्थान
जबकि दूसरे स्थान पर अबिनव सतीश रहे, जिन्होंने AIR 2 हासिल किया है. उन्होंने 600 में से 530 अंक प्राप्त किए और उनका स्कोर 88.33 प्रतिशत रहा. वहीं तीसरे स्थान पर तीर्थ जैन ने जगह बनाई है. उन्होंने 519 अंक हासिल किए, जो 86.50 प्रतिशत के बराबर है. टॉप तीन रैंकर्स की इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि मेहनत और लगन से CA जैसी कठिन परीक्षा भी पास की जा सकती है.

Declared. #ICAI #Caresults pic.twitter.com/PanTVTExYA
&amp;mdash; CA. (Dr). ROHIT RUWATIA AGARWAL ???????? (@ruwatiaofficial) June 24, 2026

कब हुआ था एग्जाम?
CA Intermediate परीक्षा 5 मई से 15 मई 2026 के बीच आयोजित की गई थी. Group I की परीक्षाएं 5, 7 और 9 मई को हुई थीं, जबकि Group II की परीक्षाएं 11, 13 और 15 मई को संपन्न हुईं. छात्रों को इस बार भी यह सुविधा दी गई थी कि वे अपनी तैयारी के अनुसार एक ग्रुप या दोनों ग्रुप की परीक्षा में शामिल हो सकें. ज्यादा डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.&amp;nbsp;
नतीजे कैसे देखें?

स्टेप 1: रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले ICAI की आधिकारिक वेबसाइट icai.org या icai.nic.in खोलें.
स्टेप 2: &amp;nbsp;इसके बाद होमपेज पर &amp;ldquo;CA Intermediate Result May 2026&amp;rdquo; वाले लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3: &amp;nbsp;उम्मीदवार अब अपना रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर डालें.
स्टेप 4: &amp;nbsp;इसके बाद उम्मीदवार नीचे दिए गए सबमिट बटन पर क्लिक करें.
स्टेप 5: &amp;nbsp;इसके बाद आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिख जाएगा.
स्टेप 6: &amp;nbsp;अंत में अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड करें और आगे के लिए सेव कर लें.&amp;nbsp;

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 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब स्थगित हुई ये परीक्षा, 5 जुलाई को किया जाएगा आयोजन; जान लें जरूरी डिटेल्स </title>
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        <description><![CDATA[ ओडिशा में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है. बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, ओडिशा &amp;nbsp;ने ओडिशा शिक्षक पात्रता परीक्षा (OTET 2026) को स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है. अब ये एग्जाम पहले घोषित डेट की जगह 5 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा. एग्जाम का आयोजन अब उसी दिन दो अलग-अलग शिफ्टों में होगा.
बोर्ड की तरफ से जारी जानकारी के अनुसार परीक्षा स्थगित करने का मुख्य कारण अन्य बड़ी भर्ती परीक्षा से टकराव है. ओडिशा सब-ऑर्डिनेट स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (OSSSC) की तरफ से कई पदों के लिए भर्ती परीक्षाओं का आयोजन उसी समय के आसपास किया जा रहा था. ऐसे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को दोनों परीक्षाओं में शामिल होने में कठिनाई हो रही थी. लगातार मिल रही शिकायतों और अभ्यर्थियों की मांग को देखते हुए बोर्ड ने यह फैसला लिया.
अधिकारियों के अनुसार यह फैलसा छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित न होना पड़े. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही समय पर दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं के आयोजन से न केवल छात्रों पर दबाव बढ़ता है बल्कि परीक्षा प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है.
क्या है जरूरी योग्यता?
योग्यता की बात की जाए तो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक यानी 90 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा. वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग (PH) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत यानी 82 अंक निर्धारित किए गए हैं.
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एग्जाम पैटर्न कैसा होगा?
परीक्षा पैटर्न की बात करें तो दोनों पेपर में कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाएंगे. प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और पूरा पेपर 150 अंकों का रहेगा. खास बात यह है कि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे अभ्यर्थियों को सभी प्रश्नों को हल करने का अवसर मिलेगा.
5 जुलाई को दो शिफ्ट में एग्जाम&amp;nbsp;
नई अधिसूचना के अनुसार OTET 2026 परीक्षा 5 जुलाई को दो शिफ्टों में आयोजित की जाएगी. पहली शिफ्ट में पेपर-1 होगा, जो सुबह 9:00 बजे से 11:30 बजे तक चलेगा. यह पेपर उन अभ्यर्थियों के लिए होगा जो कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षक बनने के इच्छुक हैं. वहीं दूसरी शिफ्ट में पेपर-2 दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा, जो कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षकों के लिए निर्धारित है.
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>NMC का बड़ा फैसला 2027 से बंद होंगे मेडिकल PG डिप्लोमा कोर्स, जानें छात्रों पर क्या होगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ NMC का बड़ा फैसला 2027 से बंद होंगे मेडिकल PG डिप्लोमा कोर्स, जानें छात्रों पर क्या होगा असर ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>UP में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, 170 पदों पर निकली भर्ती; 69 हजार मिलेगी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने विधान भवन गार्ड और फायर गार्ड के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी थी. इसके लिए आयोग ने 9 जून 2026 को आवेदन लिंक सक्रिय कर दिया था. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. जबकि आवेदन करने की लास्ट डेट 29 जून 2026 तय की गई है.
नोटिफिकेशन के अनुसार इस भर्ती के तहत कुल 170 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इनमें से 120 पद विधान भवन गार्ड के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 50 पद फायर गार्ड के लिए आरक्षित हैं.
जरूरी शैक्षणिक योग्यता
आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास PET 2025 का वैध स्कोर कार्ड होना जरूरी है. इसके अलावा उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं कक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा पास की हो. बिना PET स्कोरकार्ड वाले उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे.
आयु सीमा
भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है. अभ्यर्थियों की आयु की गणना 1 जुलाई 2026 को आधार मानकर की जाएगी. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट भी प्रदान की जाएगी.
सैलरी कितनी मिलेगी?
इस भर्ती के माध्यम से चयनित होने वाले उम्मीदवारों को बढ़िया वेतन दिया जाएगा. चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिमाह 21,700 रुपये से लेकर 69,100 रुपये तक वेतन मिलेगा. इसके साथ ही सरकार द्वारा निर्धारित अन्य भत्तों और सुविधाओं का लाभ भी दिया जाएगा.
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आवेदन शुल्क कितना मिलेगा?
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए सभी वर्गों के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क जमा करना होगा. आयोग ने सभी श्रेणियों के लिए आवेदन शुल्क केवल 25 रुपये निर्धारित किया है. शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है.
आवेदन करने की प्रक्रिया
आवेदन करने के लिए सबसे पहले उम्मीदवारों को UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. इसके बाद भर्ती से संबंधित ऑनलाइन आवेदन लिंक पर क्लिक करना होगा. फिर उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरनी होगी और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे.
सभी जानकारी सही तरह से भरने के बाद आवेदन शुल्क जमा करें और फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट कर दें. आवेदन पूरा होने के बाद आगे की जरूरत के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट अवश्य रखें. ज्यादा डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;Bihar Internship Scheme: ग्रेजुएशन कर रहे स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप का मौका दे रही यह सरकार, हर महीने मिलेंगे 12300 रुपये ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>में, सरकारी, नौकरी, का, सुनहरा, मौका, 170, पदों, पर, निकली, भर्ती, हजार, मिलेगी, सैलरी</media:keywords>
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        <title>IGCAR में जूनियर रिसर्च फेलो के 50 पदों पर भर्ती, 13 जुलाई तक करें आवेदन</title>
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इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कलपक्कम ने जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) के 50 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह भर्ती भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, सामग्री विज्ञान, विकिरण भौतिकी और विभिन्न इंजीनियरिंग विषयों से जुड़े उम्मीदवारों के लिए निकाली गई है.इस भर्ती के लिए केवल भारतीय नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 13 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन IGCAR की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे.कौन कर सकता है आवेदन?इस भर्ती के लिए अलग-अलग विषयों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. भौतिकी, रसायन विज्ञान, सामग्री विज्ञान और विकिरण भौतिकी से संबंधित पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में एमएससी या इंटीग्रेटेड एमएससी की डिग्री होनी चाहिए. कुछ पदों के लिए बीएससी स्तर पर भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों का अध्ययन भी आवश्यक है.इंजीनियरिंग से जुड़े पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित शाखा में बीई, बीटेक, एमई या एमटेक की डिग्री होनी चाहिए. कुछ पदों पर आवेदन करने के लिए वैध GATE स्कोर अनिवार्य है, जबकि कुछ श्रेणियों में GATE कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को सीधे इंटरव्यू के लिए बुलाया जा सकता है.आयु सीमाआवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 28 वर्ष निर्धारित की गई है. हालांकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी.कितना मिलेगा वजीफा?चयनित उम्मीदवारों को होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान (HBNI) के पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश दिया जाएगा. रिसर्च कार्य के दौरान उन्हें हर महीने 25,000 रुपये से 42,000 रुपये तक की फेलोशिप प्रदान की जाएगी. इससे उम्मीदवार उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ आर्थिक सहायता भी प्राप्त कर सकेंगे.
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जरूरी दस्तावेजआवेदन के समय उम्मीदवारों को जन्म तिथि प्रमाण पत्र, 10वीं से लेकर सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र और मार्कशीट, अनुभव प्रमाण पत्र (यदि हो), जाति प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, NOC और GATE, UGC-CSIR NET या JEST स्कोर कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार रखने होंगे. दस्तावेजों की मूल प्रति और स्व-सत्यापित फोटोकॉपी भी आवश्यक होगी.आवेदन कैसे करें?सबसे पहले उम्मीदवार IGCAR की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. वहां JRF Recruitment 2026 के लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद नया रजिस्ट्रेशन करें और आवश्यक जानकारी दर्ज करें. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरें. फिर पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें. सभी जानकारी की जांच करने के बाद आवेदन पत्र को अंतिम रूप से सबमिट कर दें.
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>IGCAR, में, जूनियर, रिसर्च, फेलो, के, पदों, पर, भर्ती, जुलाई, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>CUET UG 2026 की टॉपर देविना ने बताया सफलता का फॉर्मूला, बोलीं&amp; घंटों नहीं, नियमित पढ़ाई जरूरी</title>
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        <description><![CDATA[ कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG) 2026 के नतीजे जारी कर दिए गए हैं. इस परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान देविना गहलोत ने प्राप्त किया है. एग्जाम में सबसे ज्यादा एनटीए स्कोर प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है.&amp;nbsp;
देविना ने कहा कि इस उपलब्धि से उन्हें बहुत खुशी हो रही है. हालांकि उन्हें विश्वास था कि उनका पेपर अच्छा गया है, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह पूरे देश में पहला स्थान हासिल करेंगी. सफलता के पीछे का राज बताते हुए देविना ने कहा कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही सफलता की कुंजी नहीं है.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि रोजाना तय समय पर पढ़ाई करने से विषयों पर अच्छी पकड़ बनती है. साथ ही पढ़ाई के बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना भी जरूरी है, जिससे दिमाग तरोताजा रहता है और पढ़ाई में ध्यान बेहतर तरीके से लग पाता है.

#WATCH | Delhi | On securing AIR 1 in the CUET (Common University Entrance Test) examination 2026, daughter of BJP MLA Kailash Gehlot, Devina Gehlot says, &quot;The exam went very well, but I never thought that I would secure AIR 1...God has been very kind...&quot; pic.twitter.com/RSLSQxSE7u
&amp;mdash; ANI (@ANI) June 23, 2026



पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना&amp;nbsp;
देविना ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी पढ़ाई के दौरान कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. कई बार ऐसा लगता था कि परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होगा. लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने नियमित रूप से पढ़ाई शुरू की, उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया. मेहनत और अनुशासन की मदद से उन्होंने अपनी कमजोरियों को दूर किया और सफलता हासिल की.
उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को दिया. देविना का कहना है कि उनके माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों ने हर कदम पर उनका साथ दिया. उनके सहयोग और प्रेरणा के बिना यह सफलता हासिल करना संभव नहीं था.



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साहित्य में भी है खास काफी
पढ़ाई के अलावा देविना को साहित्य में भी काफी रुचि है. उन्हें किताबें पढ़ना और लेखन करना पसंद है. उन्होंने बताया कि भविष्य में वह अंग्रेजी साहित्य (English Literature) में ऑनर्स करने की योजना बना रही हैं. उनका मानना है कि साहित्य न केवल ज्ञान बढ़ाता है, बल्कि सोचने और समझने की क्षमता को भी विकसित करता है.
देविना की इस उपलब्धि पर उनके पिता और भाजपा विधायक कैलाश गहलोत ने भी गर्व व्यक्त किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपनी बेटी की मेहनत और लगन की सराहना की.
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>IIRF रैंकिंग 2026 आई सामने, देखें भारत के टॉप 10 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ IIRF रैंकिंग 2026 आई सामने, देखें भारत के टॉप 10 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की पूरी लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी शुरू, CUET स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला</title>
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        <description><![CDATA[ DU Admission 2026: अगर आपने 12वीं पास की है और दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. यूनिवर्सिटी की तरफ से बेहद जल्द ही अंडर ग्रेजुएट एडमिशन के लिए अपना कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) पोर्टल खोलने जा रही है. यह प्रक्रिया CUET UG 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद शुरू होगी.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के 91 के सभी कॉलेज मिलाकर करीब 70 हजार सीटों पर दाखिला दिया जाएगा. यूनिवर्सिटी के रेगुलर अंडर ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश पाने के लिए CUET UG 2026 स्कोर अनिवार्य है. बिना CUET स्कोर के किसी भी छात्र को नियमित कोर्स में दाखिला नहीं मिलेगा. पहले की तरह 12वीं के अंकों के आधार पर सीधे एडमिशन की व्यवस्था नहीं है. इस साल CUET UG 2026 परीक्षा 11 मई से 31 मई 2026 के बीच आयोजित की गई थी. देशभर के 306 शहरों में परीक्षा कराई गई, जिसमें करीब 15.6 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था.
CSAS पोर्टल होगा रजिस्ट्रेशन
UG एडमिशन के लिए आवेदन की लास्ट डेट फिलहाल 30 जून 2026 है. इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर लें. एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. सबसे पहले छात्रों को DU के CSAS पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद उन्हें अपनी पसंद के कोर्स और कॉलेजों का चयन करना होगा. छात्रों को अपनी प्राथमिकता के अनुसार कॉलेज और कोर्स की सूची भरनी होगी, क्योंकि सीट आवंटन इसी आधार पर किया जाएगा.
इसके बाद यूनिवर्सिटी अलग-अलग चरणों में सीट आवंटन लिस्ट जारी करेगी. जिस कॉलेज और कोर्स में सीट मिलेगी, छात्र को उसे स्वीकार करना होगा. सीट कन्फर्म होने के बाद संबंधित कॉलेज में जाकर मूल दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा.
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आवेदन शुल्क
इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन करने के लिए आवेदन शुल्क भी तय कर दिया गया है. सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों को 250 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग (PwBD) वर्ग के छात्रों के लिए शुल्क 100 रुपये रखा गया है. ज्यादा डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.&amp;nbsp;
CUET की फाइनल आंसर की जारी&amp;nbsp;
बताते चलें कि CUET UG के नतीजे जल्द ही जारी किए जा सकते हैं. 22 जून को एग्जाम की फाइनल आंसर की जारी की गई है. जिसे स्टूडेंट्स आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Admission, 2026:, दिल्ली, यूनिवर्सिटी, में, एडमिशन, की, तैयारी, शुरू, CUET, स्कोर, के, आधार, पर, मिलेगा, दाखिला</media:keywords>
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        <title>BEML में 362 ऑपरेटर पदों पर निकली भर्ती, जानें कितनी मिलेगी सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ बीईएमएल लिमिटेड (BEML) की तरफ से ऑपरेटर के 362 पदों पर भर्ती निकाली गई है. यह भर्ती टेन्योर बेसिस पर होगी. पात्र और आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार 10 जुलाई 2026 शाम 6 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आइए जानते हैं भर्ती से जुड़ी डिटेल्स...
इस भर्ती अभियान के तहत फिटर, टर्नर, वेल्डर, मशीनिस्ट और इलेक्ट्रिशियन ट्रेड के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. सबसे ज्यादा 127 पद फिटर और 93 पद टर्नर ट्रेड के लिए रखे गए हैं. इसके अलावा वेल्डर के 44, मशीनिस्ट के 40 और इलेक्ट्रिशियन के 58 पद भरे जाएंगे.
आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित ट्रेड में NCVT से जारी नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (NTC) और DGT से जारी नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट (NAC) होना जरूरी है. साथ ही आईटीआई में कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए. हालांकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत अंकों की छूट मिलेगी और वे 55 प्रतिशत अंकों के साथ भी आवेदन कर सकते हैं.
उम्र सीमा&amp;nbsp;आयु सीमा की बात करें तो सामान्य और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 29 वर्ष होनी चाहिए. ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 32 वर्ष और एससी-एसटी वर्ग के लिए 34 वर्ष की सीमा तय की गई है.
ऐसे होगा चयन
चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी. सबसे पहले कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की जाएगी. परीक्षा दो घंटे की होगी और इसमें कुल 100 प्रश्न पूछे जाएंगे. इनमें 20 प्रश्न सामान्य ज्ञान, 20 प्रश्न अंग्रेजी और रीजनिंग तथा 60 प्रश्न संबंधित ट्रेड से होंगे. अच्छी बात यह है कि परीक्षा में किसी तरह की नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी.
लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद मेडिकल परीक्षण होगा. मेडिकल में फिट पाए जाने वाले उम्मीदवारों को अंतिम नियुक्ति दी जाएगी.
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सैलरी कितनी?
वेतन की बात करें तो चयनित उम्मीदवारों को 16,900 रुपये प्रतिमाह बेसिक पे मिलेगा. इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), एचआरए, 1,500 रुपये मासिक मेडिकल भत्ता और अन्य सुविधाएं भी कंपनी के नियमों के अनुसार दी जाएंगी. अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के बेसिक वेतन में हर साल 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की जाएगी.
इतना देना होगा आवेदन शुल्क
आवेदन शुल्क सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 200 रुपये रखा गया है, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों को कोई शुल्क नहीं देना होगा.
कैसे आवेदन करें?
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को बीईएमएल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. आवेदन के समय फोटो, हस्ताक्षर, 10वीं की मार्कशीट, आईटीआई प्रमाणपत्र, एनएसी सर्टिफिकेट, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे.

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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP DGP Salary: यूपी पुलिस के DGP को कितनी सैलरी मिलती है, इस पद तक कैसे पहुंचते हैं IPS?</title>
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        <description><![CDATA[ 


UP DGP Salary: राज्यों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर के पुलिस बल तैनात रहते हैं. लेकिन राज्य की सुरक्षा की कमान जिस अधिकारी के हाथ में होती है, वही राज्य का सबसे वरिष्ठ पुलिस अफसर माना जाता है. कानून व्यवस्था से लेकर अपराध नियंत्रण और पूरे पुलिस बल के संचालन तक की जिम्मेदारी पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी के पास होती है. ऐसे में कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठते हैं कि इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें कौन सी सरकारी सुविधाएं मिलती है.
खासकर जब बात उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की होती है तो यह सवाल और बढ़ जाता है. आपको बता दें कि फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण के हाथों में है. वह डीजीपी के रूप में पुलिस प्रशासन का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि यूपी पुलिस के डीजीपी को कितनी सैलरी मिलती है और इस पद तक आईपीएस कैसे पहुंचते हैं.&amp;nbsp;



पुलिस विभाग का सबसे बड़ा पद होता है डीजीपी
डीजीपी यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस किसी भी राज्य की पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी होता है. हिंदी में इसे पुलिस महानिदेशक कहा जाता है. कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध नियंत्रण, पुलिस बल का संचालन और सरकार को सुरक्षा संबंधी सलाह देना डीजीपी की प्रमुख जिम्मेदारी में शामिल होता है. भारतीय पुलिस सेवा में यह सबसे ऊंचे पदों में गिना जाता है. इसी वजह से डीजीपी का वेतन भी केंद्र और राज्य सरकार के सर्वोच्च वेतनमानों के अनुसार तय किया जाता है.&amp;nbsp;
वर्तमान में कितनी मिलती है सैलरी?
वर्तमान में डीजीपी को सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन दिया जाता है. यह पद एपेक्स स्केल के अंतर्गत आता है, जो सरकारी सेवा के सबसे उच्च वेतनमानों में शामिल है. डीजीपी का मूल वेतन लगभग 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह होता है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है. वर्तमान में महंगाई भत्ते को जोड़ने के बाद मूल वेतन में 1 लाख रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त राशि जुड़ जाती है. वहीं अगर अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो मकान किराया भत्ता भी दिया जाता है. अलग-अलग भत्तों और सुविधाओं को मिलाकर डीजीपी की कुल महीने की आय लगभग 3 लाख से 4 लाख तक पहुंच जाती है.&amp;nbsp;
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डीजीपी बनने का रास्ता क्या है?
डीजीपी बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार को संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होना पड़ता है. आईपीएस अधिकारी बनने के बाद अधिकारी का करियर कई चरणों से होकर गुजरता है. आमतौर पर अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक स्तर से शुरुआत करता है. फिर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और लास्ट में डीजीपी के पद तक पहुंचता है. यह पद लंबे एक्सपीरियंस, अच्छे सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता के आधार पर मिलता है, इसलिए डीजीपी बनने में कई दशक की सेवा लगती है.
ये भी पढ़ें-DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी शुरू, CUET स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Difference Between CRPF and BSF: CRPF और BSF में क्या है अंतर, किसके जवानों को मिलती है ज्यादा सैलरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/difference-between-crpf-and-bsf-crpf-और-bsf-में-क्या-है-अंतर-किसके-जवानों-को-मिलती-है-ज्यादा-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ Difference Between CRPF and BSF: CRPF और BSF में क्या है अंतर, किसके जवानों को मिलती है ज्यादा सैलरी? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Difference, Between, CRPF, and, BSF:, CRPF, और, BSF, में, क्या, है, अंतर, किसके, जवानों, को, मिलती, है, ज्यादा, सैलरी</media:keywords>
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        <title>PG की पढ़ाई के खर्च की चिंता छोड़िए, UGC की यह स्कॉलरशिप करेगी मदद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pg-की-पढ़ाई-के-खर्च-की-चिंता-छोड़िए-ugc-की-यह-स्कॉलरशिप-करेगी-मदद</link>
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>यूपीएससी में बिना परीक्षा के भर्ती मौका, 1.44 लाख तक मिलेगा वेतन, जानें कब तक कर सकते हैं आवेदन?</title>
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        <description><![CDATA[ यूपीएससी में बिना परीक्षा के भर्ती मौका, 1.44 लाख तक मिलेगा वेतन, जानें कब तक कर सकते हैं आवेदन? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कौन हैं व्हाट्सएप के नए बॉस कुणाल शाह? जानिए कहां से की है पढ़ाई, कितनी होगी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ फेसबुक को चलाने वाली बड़ी कंपनी &#039;मेटा&#039;यानी Meta भारत की एक और बड़ी कंपनी &#039;क्रेड&#039; में बहुत सारा पैसा लगाने जा रही है . मेटा कंपनी क्रेड में करीब 8,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. दोनों कंपनियों ने मिलकर 22 जून को इस बात की जानकारी सबको दी है. इस बड़े सौदे के तहत, क्रेड कंपनी को बनाने वाले मालिक कुणाल शाह को एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है. वे अब पूरी दुनिया में व्हाट्सएप WhatsApp के सबसे बड़े बॉस यानी ग्लोबल सीईओ बन जाएंगे. आइए आपको बताते हैं कौन हैं कुणाल शाह, कहां से पढ़ाई की है और कितनी सैलरी ग्लोबल सीईओ बनने के बाद उन्हें मिलेगी. आपको ये भी बता दें कि शाह व्हाट्सएप के वर्तमान प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जो इस पद को छोड़ने जा रहे हैं.
कहां से की है कुणाल शाह ने पढ़ाई?
आपको बता दें कि कुणाल शाह ने मुंबई के विल्सन कॉलेज से बीए की पढ़ाई पूरी की है जहां उनका विषय फिलॉसफी यानी दर्शनशास्त्र था. इसके बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई भी शुरू की लेकिन उसे बीच में ही छोड़ दिया यानी वो कॉलेज ड्रॉपआउट हो गए. अपने दिए गए कई इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि जब वे बहुत छोटे थे तभी से उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ काम करना भी शुरू कर दिया था. बाद में, उन्होंने &#039;एनएमआईएमएस&#039;कॉलेज में पार्ट-टाइम एमबीए की पढ़ाई के लिए नाम लिखवाया, लेकिन इस कोर्स को भी उन्होंने पूरा नहीं किया और बीच में ही छोड़ दिया.
व्हाट्सएप का बॉस बनने के बाद कितनी होगी कुणाल की सैलरी?
कुणाल शाह के सीईओ बनने के बाद उनकी सैलरी कितनी होगी इसकी आधिकारिक जानकारी तो फिलहाल सामने नहीं आई है क्योंकि आज ही मेटा ने उनकी नियुक्ति की घोषणा की है. लेकिन अंदाजन देखा जाए तो मेटा जैसी बड़ी कंपनियों में जो अमेरिकी टेक कंपनियों पर राज करती है में सीईओ का औसत यानी एवरेज पैकेज 2 लाख 22 हजार डॉलर सालाना से 4 लाख 50 हजार डॉलर तक हो सकता है जिसे अगर भारतीय रुपयों में देखा जाए तो ये 2 करोड़ से करीब 4 करोड़ रुपये सालाना बैठता है. हालांकि मेटा या गूगल जैसी MNC में सीईओ कंपनी के कुछ प्रतिशत हिस्से का मालिकाना हक अपने पास रखता है जिससे उसे किसी वेतन की जरूरत होती नहीं है.
मार्क जुकरबर्ग हों या व्हाट्सएप के कॉ-फाउंडर जान कौम इन सभी ने अपनी सैलरी के तौर पर केवल एक डॉलर जैसी छोटी रकम तय की थी. चूंकि कुणाल शाह मेटा की ग्लोबल लीडरशिप टीम में शामिल हो रहे हैं, इसलिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के भत्ते और परफॉरमेंस बेस्ड बोनस मिलेंगे जो उनकी सैलरी से कई ज्यादा होगा.
कितनी है कुणाल शाह की संपत्ति?
कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 15,000 करोड़ रुपये है जो कि लगभग $2 बिलियन डॉलर है. उनकी कमाई का मोटा हिस्सा क्रेड में उनके शेयर से आता है. जी हां, उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा उनके द्वारा स्थापित फिनटेक कंपनी CRED के शेयर्स हैं. हाल ही में मेटा ने जो भारी निवेश किया है उसके बाद क्रेड की मार्केट वैल्यूएशन लगभग 43,239 करोड़ रुपये आंकी गई है.
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क्यों भारत के लिए अहम होगा उनका रोल
यह डील भारत के लिए कई मायनों में बड़ी है. पहला यह दिखाता है कि मेटा जैसी ग्लोबल कंपनी अब भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट में सीधे एंट्री करना चाहती है. अभी इस मार्केट में फोनपे और गूगल पे का दबदबा है जो मिलकर करीब अस्सी प्रतिशत यूपीआई ट्रांजैक्शन हैंडल करते हैं जबकि वॉट्सऐप पे अभी काफी पीछे है. ऐसे में फेसबुक और इंस्टाग्राम से डिस्कवरी, वॉट्सऐप से कॉमर्स और CRED से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर जोड़कर मेटा एक बड़ा डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रही है. दूसरा, यह पहली बार है जब किसी भारतीय फाउंडर को दुनिया की किसी सबसे बड़ी टेक कंपनी के इतने बड़े प्रोडक्ट की सीधी कमान मिली है जिसके तीन अरब से ज्यादा यूजर्स हैं.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE 12वीं में रांची की बेटी का कमाल, री&amp;इवैल्यूएशन के बाद हासिल किए 500 में 500 नंबर</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन झारखंड के रांची की रहने वाली अवनी केजरीवाल के लिए बेहद खास रहा. दरअसल, सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के री-इवैल्यूएशन रिजल्ट में अवनी ने पूरे 500 में 500 नंबर हासिल कर लिए हैं.
जब बोर्ड एग्जाम का पहला रिजल्ट आया तो उन्हें लगा कि अंग्रेजी और बिजनेस स्टडीज में उनके नंबर उम्मीद से कम दिए गए हैं. इंग्लिश में 19 अंक कम मिलने से वह हैरान थीं, क्योंकि यह उनका पसंदीदा और सबसे मजबूत सब्जेक्ट था. इसी वजह से उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया.
अवनी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि नंबर बढ़ सकते हैं, लेकिन पूरे 500 अंक मिल जाएंगे, इसकी कल्पना भी नहीं की थी. री-इवैल्यूएशन के बाद अंग्रेजी में उनके 19 अंक और बिजनेस स्टडीज में 5 नंबर बढ़ गए. इस तरह उनके कुल अंकों में 24 अंकों का इजाफा हुआ और उनका स्कोर 500 में 500 पहुंच गया.
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5 सब्जेक्ट में पूरे नंबर
अवनी ने अपने पांचों मुख्य विषयों में 100-100 अंक हासिल किए हैं. इनमें इंग्लिश कोर, अकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स और एप्लाइड मैथेमेटिक्स शामिल हैं. इसके अलावा अतिरिक्त विषय ग्राफिक्स में भी उन्हें 99 अंक मिले हैं. इतने शानदार प्रदर्शन के बाद अवनी राज्य की टॉप छात्रों में शामिल हो गई हैं.

#WATCH | Ranchi, Jharkhand: Avni Kejriwal scored 500/500 marks in CBSE&#039;s 12th class after re-evaluation.Avni Kejriwal says, &quot;Everyone is very happy right now. We weren&#039;t expecting 500 marks, but everyone is very happy. I had 19 marks deducted in English, which I wasn&#039;t&amp;hellip; pic.twitter.com/CxbUnbgfKC
&amp;mdash; ANI (@ANI) June 22, 2026



यहां की हैं स्टूडेंट्स
अवनी रांची के धुर्वा स्थित डीपीएस सेल टाउनशिप स्कूल की छात्रा हैं. उनके पिता मितेश केजरीवाल एक व्यवसायी हैं, जबकि उनकी मां पूनम केजरीवाल गृहिणी हैं. परिवार का कहना है कि अवनी शुरू से ही पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर और मेहनती रही हैं. उन्होंने हमेशा अनुशासन और लगन के साथ पढ़ाई की, जिसका परिणाम आज सभी के सामने है.
अवनी ने क्या कहा?
अवनी का कहना है कि उन्हें शुरू से ही यकीन था कि उन्होंने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है और उनके नंबर इससे ज्यादा होने चाहिए थे. इसी विश्वास के चलते उन्होंने उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच कराने का फैसला किया. री-इवैल्यूएशन के नतीजे आने के बाद उनका भरोसा सही साबित हुआ और उन्हें पूरे 500 में 500 अंक मिल गए.
अपनी इस शानदार सफलता का श्रेय अवनी ने अपने माता-पिता, शिक्षकों को दिया. जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और हौसला बढ़ाया. भविष्य को लेकर भी अवनी की स्पष्ट योजना है. वह बिजनेस मैनेजमेंट के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, 12वीं, में, रांची, की, बेटी, का, कमाल, री-इवैल्यूएशन, के, बाद, हासिल, किए, 500, में, 500, नंबर</media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026 Re&amp;Exam: 9 पसलियां टूटने के बाद भी NEET री&amp;एग्जाम देने पहुंची सृष्टि, शिक्षा मंत्री ने कराए खास इंतजाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-ug-2026-re-exam-9-पसलियां-टूटने-के-बाद-भी-neet-री-एग्जाम-देने-पहुंची-सृष्टि-शिक्षा-मंत्री-ने-कराए-खास-इंतजाम</link>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 Re-Exam : NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने लाखों छात्रों को प्रेरित करने का काम किया. यह कहानी कोलकाता की छात्रा सृष्टि दुबे की है, जिन्होंने गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद भी अपने डॉक्टर बनने के सपने को टूटने नहीं दिया. हादसे में उनकी नौ पसलियां टूट गई थीं, फेफड़ों में गंभीर चोट आई थी और उन्हें बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा था. इसके बाद भी उन्होंने NEET परीक्षा देने का फैसला किया और आखिरकार विशेष व्यवस्थाओं के बीच परीक्षा में शामिल भी हुईं. सृष्टि का डॉक्टर बनने का सपना और परीक्षा देने का जज्बा देखकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और NTA ने उनके लिए खास इंतजाम करवाए.&amp;nbsp;
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई थीं सृष्टि
सृष्टि दुबे 14 जून को हुए एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गई थीं. इस दुर्घटना में उनकी नौ पसलियां टूट गई थीं और फेफड़ों में भी गंभीर चोट आई थी. उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें बड़े वैस्कुलर ऑपरेशन से गुजरना पड़ा. इलाज के दौरान कुछ समय तक उन्हें वेंटिलेशन पर भी रखा गया था. &amp;nbsp;डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था, लेकिन इन सभी मूश्किल परिस्थितियों के बाद भी सृष्टि ने NEET परीक्षा देने का अपना सपना नहीं छोड़ा.&amp;nbsp;
पिता ने NTA और शिक्षा मंत्री से मांगी मदद
सृष्टि की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनके पिता श्रीराम शिवजी दुबे ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से विशेष व्यवस्था करने का रिक्वेसट की. उन्होंने अपने पत्र में बताया कि उनकी बेटी किसी भी हालत में NEET परीक्षा देना चाहती है. उन्होंने परीक्षा केंद्र पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की, जिससे सृष्टि सुरक्षित तरीके से परीक्षा में शामिल हो सके. सृष्टि के पिता एक टीचर हैं. उन्होंने अधिकारियों को बताया कि अस्पताल प्रशासन भी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ जरूरी मेडिकल सहायता देने के लिए तैयार है. मामले की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुत सृष्टि के परिवार से संपर्क किया और जरूरी सहायता देने के निर्देश दिए. उन्होंने छात्रा के पेरेंट्स से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और यह तय किया कि परीक्षा देने में किसी प्रकार की परेशानी न हो.&amp;nbsp;

Nine broken ribs. Surgery. Recovery on oxygen support. And still, the resolve to appear for NEET (UG) 2026.Sristi Dubey&#039;s parents reached out to Union Education Minister Shri @dpradhanbjp . NTA arranged a separate room, medical support, and an ambulance on standby at her centre.&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) June 21, 2026



NTA ने किए विशेष इंतजाम
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने सृष्टि की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए परीक्षा केंद्र पर विशेष व्यवस्थाएं कीं. उनके लिए अलग परीक्षा कक्ष की व्यवस्था की गई. परीक्षा केंद्र पर मेडिकल टीम और डॉक्टरों को तैनात किया गया. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस भी स्टैंडबाय रखी गई. इसके अलावा छात्रा को ग्राउंड फ्लोर पर बैठने की विशेष सुविधा दी गई, ताकि उन्हें आने-जाने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.&amp;nbsp;
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कोलकाता के परीक्षा केंद्र में दी परीक्षा
सृष्टि दुबे ने कोलकाता के धाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र में NEET-UG 2026 री-एग्जाम दिया.उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं परीक्षा केंद्र पर उपलब्ध कराई गई थीं. इसी विशेष व्यवस्था के तहत वह परीक्षा में शामिल हो सकीं. &amp;nbsp;परीक्षा शुरू होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सृष्टि के पिता को फोन कर उनकी बेटी की स्थिति और परीक्षा की जानकारी ली. इस दौरान सृष्टि के पिता ने मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मदद की वजह से ही उनकी बेटी परीक्षा दे पा रही है.&amp;nbsp;
सृष्टि की मां ने शिक्षा मंत्री का किया धन्यवाद
सृष्टि की मां ने भी शिक्षा मंत्री का धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बेटी परीक्षा दे पाएगी. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने विशेष अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी, जिससे सृष्टि अस्पताल के कपड़ों और जरूरी मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा में शामिल हो सके. धर्मेंद्र प्रधान ने सृष्टि को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि वह अच्छा प्रदर्शन करें. साथ ही डॉक्टर बनकर अपने पेरेंट्स का नाम रोशन करें. उन्होंने यह भी कहा कि जब वह कोलकाता आएंगे तो सृष्टि से मिलने का प्रयास करेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>NEET, 2026, Re-Exam:, पसलियां, टूटने, के, बाद, भी, NEET, री-एग्जाम, देने, पहुंची, सृष्टि, शिक्षा, मंत्री, ने, कराए, खास, इंतजाम</media:keywords>
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        <title>ISRO URSC Internship 2026 : ISRO में इंटर्नशिप का मौका, पहले आओ&amp;पहले पाओ के आधार पर मिलेगी एंट्री; जानें डिटेल्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isro-ursc-internship-2026-isro-में-इंटर्नशिप-का-मौका-पहले-आओ-पहले-पाओ-के-आधार-पर-मिलेगी-एंट्री-जानें-डिटेल्स</link>
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        <description><![CDATA[ ISRO URSC Internship 2026 : अगर आप अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग या रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आपके लिए बेहतरीन मौका लेकर आया है. ISRO के प्रमुख केंद्र यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) ने छात्रों के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम की घोषणा की है. इस इंटर्नशिप के जरिए स्टूडेंट्स को सैटेलाइट डिजाइन, स्पेस सिस्टम और रियल रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा. यह इंटर्नशिप उन छात्रों के लिए खास है जो अपनी पढ़ाई के दौरान एक्सपिरियंस हासिल करना चाहते हैं और अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया को करीब से समझना चाहते हैं. यह इंटर्नशिप में प्रोजेक्ट अलॉटमेंट पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा, इसलिए इच्छुक छात्रों को समय रहते आवेदन की तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
कब शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया?
यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर के अनुसार इंटर्नशिप के लिए अगली आवेदन प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू होगी. आवेदन तय समय के दौरान ही एक्सेप्ट किए जाएंगे. सीटों की संख्या सीमित होने के कारण आवेदन विंडो खुलते ही जल्द आवेदन करना छात्रों के लिए फायदेमंद रहेगा.&amp;nbsp;
क्या है ISRO URSC Internship Program?
ISRO URSC Internship 2026 एक स्ट्रक्चर अकादमिक इंटर्नशिप प्रोग्राम है, जिसे यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर के तहत संचालित किया जाता है. यह केंद्र भारत के अंतरिक्ष मिशनों के लिए सैटेलाइट डिजाइन, ग्रोथ और इंटीग्रेशन का जरूरी काम &amp;nbsp;करता है. इंटर्नशिप के दौरान चयनित छात्रों को सैटेलाइट तकनीक, स्पेस सिस्टम और रिसर्च से जुड़े रियल कामों को समझने और उनमें योगदान देने का अवसर मिलेगा. स्टूडेंट्स को चल रही तकनीकी और रिसर्च एक्टिविटी से जोड़ा जाएगा, जहां विशेषज्ञ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के साथ काम करेंगे.&amp;nbsp;
कैसे मिलेगा प्रोजेक्ट?
इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को उनकी शैक्षणिक योग्यता, कोर्स और उपलब्ध परियोजनाओं के आधार पर अलग-अलग तकनीकी ग्रुप में रखा जाएगा. संस्थान यह तय करेगा कि छात्रों को उनके अध्ययन क्षेत्र और स्किल्स के अनुरूप प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर मिले.काम में डिजाइन सपोर्ट, विश्लेषण, सिमुलेशन, टेस्टिंग सहायता, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, रिसर्च या सैटेलाइट सिस्टम से जुड़े डॉक्यूमेंटेशन जैसे काम शामिल हो सकते हैं.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस इंटर्नशिप के लिए भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं. योग्य उम्मीदवारों में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से UG, PG या PhD कर रहे छात्र, भारत या विदेश के मान्यता प्राप्त संस्थानों के छात्र और ऐसे उम्मीदवार शामिल हैं, जिन्होंने UG या PG पूरा कर लिया है और कोर्स पूरा होने के छह महीने के भीतर इंटर्नशिप करना चाहते हैं. इसके अलावा आवेदक का नियमित ऑन-कैंपस छात्र होना जरूरी है. आवेदन करने वाले छात्र कम से कम पांचवें सेमेस्टर या तीसरे साल में होने चाहिए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;कितना होगा इंटर्नशिप का टाइम?
ISRO URSC Internship आमतौर पर 4 से 6 हफ्ते की होती है. टाइम संबंधित प्रोजेक्ट और शैक्षणिक जरूरत के अनुसार तय किया जाता है. यह पूरी तरह ऑन-साइट इंटर्नशिप होगी, यानी चयनित छात्रों को URSC कैंपस में उपस्थित रहकर काम करना होगा. उन्हें संबंधित डिवीजन के तहत तय समय का पालन करना होगा.&amp;nbsp;
कैसे होगा चयन?
इंटर्नशिप के लिए छात्रों का चयन संस्थान की तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा. इसमें सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन की जांच की जाएगी. इसके बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता और पढ़ाई के विषय का मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे यह देखा जा सके कि उनका बैकग्राउंड उपलब्ध प्रोजेक्ट्स से कितना मेल खाता है फिर संबंधित तकनीकी विभाग उम्मीदवार की उपयुक्तता की समीक्षा करेगा. अंतिम चयन और मंजूरी URSC के अधिकृत विभाग के तहत दी जाएगी. संस्थान ने साफ किया है कि केवल पात्रता पूरी कर लेने से चयन तय नहीं होता है. इंटर्नशिप का मौका प्रोजेक्ट की उपलब्धता और उम्मीदवार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के आधार पर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
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पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा मौका
URSC ने बताया है कि इंटर्नशिप आवंटन फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व यानी पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा. सीटों की संख्या सीमित है और हर साल केवल सीमित संख्या में छात्रों को मौका दिया जाता है. ऐसे में आवेदन शुरू होते ही जल्द आवेदन करना जरूरी होगा.&amp;nbsp;
स्टाइपेंड और रहने की सुविधा नहीं मिलेगी
इस इंटर्नशिप के तहत छात्रों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी. संस्थान की ओर से कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जाएगा. साथ ही रहने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी. इसके अलावा परिवहन सुविधा नहीं मिलेगी. कैंटीन सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी.&amp;nbsp;
आवेदन के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स जरूरी होंगे?
आवेदन करते समय छात्रों को कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे. इनमें बोनाफाइड सर्टिफिकेट या संस्थान की अनुशंसा पत्र, शैक्षणिक मार्कशीट या ट्रांसक्रिप्ट, CV या रिज्यूमे, वैध सरकारी पहचान पत्र शामिल हैं. वहीं केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से जमा किए गए आवेदन ही एक्सेप्ट किए जाएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ISRO, URSC, Internship, 2026, ISRO, में, इंटर्नशिप, का, मौका, पहले, आओ-पहले, पाओ, के, आधार, पर, मिलेगी, एंट्री, जानें, डिटेल्स</media:keywords>
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        <title>CBSE ने जारी किए Revaluation और Re Checking के परिणाम&amp; ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र के लिए अपनी पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं के तहत आयोजित की गई री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग की प्रक्रिया के परिणाम घोषित कर दिए हैं . बोर्ड द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस साल अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए बड़ी संख्या में छात्रों ने आवेदन किया था. इस परिणाम के जारी होने से उन हजारों छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत मिली है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने के लिए अपने संशोधित और अंतिम नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि परिणाम पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था के तहत तैयार किए गए हैं और इन्हें बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है.
सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और री-checking का रिजल्ट चेक करने का तरीका बेहद आसान है . छात्र नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके अपना संशोधित परिणाम देख सकते हैं
स्टेप 1: सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic.in या cbse.gov.in पर जाएं.
स्टेप 2: होमपेज पर &quot;CBSE Revaluation/Rechecking Results 2026&quot; के लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3: अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा, वहां अपना रोल नंबर और जरूरी जानकारी दर्ज करें.
स्टेप 4: डिटेल्स भरने के बाद Submit बटन पर क्लिक करें.
स्टेप 5: आपका संशोधित रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा, इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए एक प्रिंटआउट निकालकर रख लें.
सीबीएसई (CBSE) ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के इन परिणामों को चरणबद्ध तरीके (Phased Manner) से जारी किया जा रहा है, जिसके तहत कुल प्राप्त आवेदनों में से 87% से अधिक आवेदनों के नतीजे आज घोषित कर दिए गए हैं . बोर्ड के मुताबिक, बचे हुए अन्य आवेदनों के परिणाम भी आने वाले दिनों में अलग-अलग चरणों में उपलब्ध करा दिए जाएंगे और उम्मीद जताई जा रही है कि इस पूरी प्रक्रिया को बहुत जल्द ही पूरी तरह संपन्न कर लिया जाएगा.
CBSE ने प्रेस रिलीज में कही जरूरी बात
जिन छात्रों के आवेदन पर &amp;ldquo;No Change&amp;rdquo; दिखाया गया है, उन्हें चाहें तो अपनी Answer Sheets का निरीक्षण करने का अवसर दिया जाएगा. इसके लिए अलग से कार्यक्रम जारी किया जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, ने, जारी, किए, Revaluation, और, Checking, के, परिणाम-, ऐसे, करें, चेक</media:keywords>
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        <title>Indian Navy Recruitment 2026:  इंडियन नेवी में अग्निवीर अपरेंटिस्ट बनने का आखिरी मौका, 29 जून को बंद हो जाएगी विंडो </title>
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        <description><![CDATA[ Indian Navy Recruitment 2026:&amp;nbsp; अगर आप भी भारतीय नौसेना में जाने का सपना देख रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी साबित हो सकती है. इंडियन नेवी ने अग्निवीर अपरेंटिस भर्ती 2026 के आवेदन की प्रक्रिया 05 जून 2026 की सुबह 10 बजे से शुरू कर दी थी. यह भर्ती 01/2027 और 02/2027 बैच के लिए की जा रही है. इस भर्ती के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को टेक्निकल ट्रेनिंग के साथ-साथ नौसेना में भी काम करने का मौका मिलेगा. यह उन अविवाहित युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका है जो सरकारी नौकरी के साथ-साथ देश की सेवा करने का जुनून रखते हैं. आपको बता दें कि इस भर्ती में आवेदन करने की आखिरी तिथि 29 जून 2026 तय की गई है. &amp;nbsp;यानी इसके बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है इस भर्ती के लिए आवेदन?
इस भर्ती में वे लोग आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 10वीं कक्षा पास की हो और इंजीनियरिंग या इलेक्ट्रिकल ट्रेड में 3 साल का डिप्लोमा कोर्स पूरा किया हो. साथ ही उम्मीदवार का 10वीं में कम से कम 50% अंक और डिप्लोमा में भी कम से कम 50% अंक होना जरूरी है, और इसके अलावा यह भी जरूरी है कि उम्मीदवार ने डिप्लोमा किसी AICTE से मान्यता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्थान से किया हो.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः NEET Re-Exam 2026 : 22.79 लाख स्टूडेंट्स, 1.29 लाख MBBS सीटें... 1 सीट पर 18 दावेदार, जानें कितना मुश्किल है डॉक्टर बनना?
आयु सीमा, वेतन और बीमा से जुड़ी जानकारी
अगर आयु सीमा की बात करें तो इसमें दोनों बैच के लिए अलग-अलग नियम रखे गए हैं. &amp;nbsp;बैच 01/2027 के लिए उम्मीदवार का जन्म 1 दिसंबर 2004 से 31 मई 2009 के बीच होना चाहिए. वहीं बैच 02/2027 के लिए जन्म तिथि 1 मई 2005 से 31 अक्टूबर 2009 के बीच निर्धारित की गई है. साथ ही सैलरी की बात करें तो अग्निवीरों को पहले साल से ही 30,000 रुपये मासिक वेतन मिलेगा, जिसमें हर साल तय बढ़ोतरी भी होगी. &amp;nbsp;इसके अलावा सेवा के दौरान सुरक्षा भी पूरी रहती है, क्योंकि पूरे कार्यकाल के लिए 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर दिया जाता है, और सेवा के दौरान मृत्यु होने पर 44 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि भी मिलती है.&amp;nbsp;
ऑनलाइन आवेदन और चयन प्रक्रिया का पूरा तरीका
अब बात करते हैं आवेदन प्रक्रिया की, जो पूरी तरह ऑनलाइन है. उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट joinindiannavy.gov.in पर जाकर पहले रजिस्टर करना होगा, फिर लॉगिन करके AVR (Apprentice) INET 2/26 के तहत आवेदन फॉर्म भरना होगा. &amp;nbsp;फिर आवेदन के लिए 550 रुपये के साथ 18% जीएसटी फीस ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी होगी, और यह फीस जमा होने के बाद ही एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा. चयन प्रक्रिया में पहले INET परीक्षा, फिर फिजिकल फिटनेस टेस्ट, उसके बाद लिखित परीक्षा और मेडिकल जांच शामिल है. &amp;nbsp;जो उम्मीदवार इन सभी चरणों को पास कर लेंगे, उन्हें ओडिशा स्थित ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Indian, Navy, Recruitment, 2026:, इंडियन, नेवी, में, अग्निवीर, अपरेंटिस्ट, बनने, का, आखिरी, मौका, जून, को, बंद, हो, जाएगी, विंडो </media:keywords>
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        <title>CUET UG 2026 रिजल्ट जल्द होगा जारी, DU, JNU और BHU में एडमिशन के लिए जानिए संभावित कट ऑफ </title>
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        <description><![CDATA[ Cuet UG 2026 Result: सीयूईटी यूजी 2026 में शामिल हुए लाखों छात्रों का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट 2026 का रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी अपने स्कोर कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसी के आधार पर देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय में एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इस साल सीयूईटी यूजी परीक्षा 11 मई से 31 मई 2026 तक आयोजित की गई थी. कुछ विषयों की पुनर्परीक्षाएं 6 और 7 जून को कराई गई थी. इसके बाद 9 जून को प्रोविजनल आंसर की जारी की गई और उम्मीदवारों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया. आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 11 जून को समाप्त हो चुकी है और अंतिम आंसर की और रिजल्ट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है.&amp;nbsp;
कब जारी हो सकता है सीयूईटी यूजी 2026 का रिजल्ट?&amp;nbsp;
जानकारी के अनुसार एनटीए जल्द ही मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करवा कर सकता है. माना जा रहा है कि सीईयूटी यूजी 2026 का स्कोर कार्ड 26 जून 2026 तक जारी किया जा सकता है. अगर किसी कारणवश देरी होती है तो रिजल्ट जुलाई के पहले सप्ताह तक जारी होने की संभावना है. रिजल्ट जारी होने के साथ ही फाइनल आंसर की भी उपलब्ध कराई जा सकती है.&amp;nbsp;
परीक्षा से रिजल्ट तक का पूरा शेड्यूल&amp;nbsp;
सीईयूटी यूजी 2026 की परीक्षा का आयोजन 11 से 31 मई के बीच कराया गया था. वहीं परीक्षा में आई दिक्कतों के बाद पुनर्परीक्षाएं 6 और 7 जून 2026 को आयोजित की गई. इसके बाद प्रोविजनल आंसर की 9 जून 2026 को जारी की गई. वहीं आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 11 जून तक थी. अब फाइनल आंसर की और रिजल्ट जून के अंतिम सप्ताह में जारी होने की संभावना है. रिजल्ट जारी होने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से कट ऑफ और काउंसलिंग प्रक्रिया जुलाई के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है.&amp;nbsp;
इस बार रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने दी परीक्षा&amp;nbsp;
Cuet UG 2026 resultसीईयूटी यूजी 2026 में छात्रों ने रिकॉर्ड संख्या में रजिस्ट्रेशन कराया. परीक्षा के लिए कुल 15.68 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा है. 2025 में लगभग 15.54 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इस बार परीक्षा 37 सब्जेक्ट्स में आयोजित की गई, &amp;nbsp;जिनमें भाषा विषय, डोमेन विषय और जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट शामिल रहे. उम्मीदवारों ने औसतन चार से ज्यादा विषयों का चयन किया. राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए. इसके बाद दिल्ली और बिहार का स्थान रहा, वहीं अंग्रेजी सबसे ज्यादा चुना जाने वाला सब्जेक्ट रहा.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET री-एग्जाम को लेकर NTA तैयार, तैनात किए 6700 ऑब्जर्वर, हर सेंटर पर 40 से 50 पुलिसकर्मी&amp;nbsp;
डीयू, जेएनयू और बीएचयू में एडमिशन के लिए संभावित कट ऑफ&amp;nbsp;
सीईयूटी यूजी के लिए एनटीए कोई केंद्रीकृत कटऑफ जारी नहीं करता. रिजल्ट जारी होने के बाद अलग-अलग विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश प्रक्रिया और मेरिट लिस्ट जारी करते हैं. इस बार बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के कारण पॉपुलर कोर्स में कंपटीशन काफी ज्यादा रहने की संभावना है. वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के लोकप्रिय कोर्स जैसे बीकॉम, बीए इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस जैसे प्रोग्राम में जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए 750 से 790 या उससे ज्यादा अंकों तक की कट ऑफ हो सकती है. वहीं जेएनयू में विदेशी भाषा से जुड़े ग्रेजुएशन कोर्स के लिए कट ऑफ 740 से 775 अंकों के बीच मेरिट जा सकती है. बीएचयू में आर्ट, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य और गणित वर्ग के कोर्स के लिए संभावित कट ऑफ 680 से 740 अंकों के बीच रहने का अनुमान है.
ये भी पढ़ें-NEET Re Exam 2026: देशभर में नीट परीक्षा आज, एग्जाम सेंटर पहुंचने से पहले देख लीजिए पूरी चेक लिस्ट&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CUET, 2026, रिजल्ट, जल्द, होगा, जारी, DU, JNU, और, BHU, में, एडमिशन, के, लिए, जानिए, संभावित, कट, ऑफ </media:keywords>
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        <title>राजस्थान की नौकरियों की रीढ़ है RPSC, जानिए इसकी स्थापना की कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए RPSC एक जाना-पहचाना नाम है. राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से लेकर शिक्षक, इंजीनियर और अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती कराने वाला राजस्थान लोक सेवा आयोग आज राज्य की सबसे प्रमुख भर्ती संस्था है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि RPSC की स्थापना कब हुई थी और इसकी शुरुआत कैसे हुई थी? अगर नहीं तो आइए जानते हैं...
दरअसल, राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना 22 दिसंबर 1949 को हुई थी. हालांकि इसकी कहानी राजस्थान के गठन से भी पहले शुरू होती है. साल 1923 में ली कमीशन ने भारत में केंद्रीय लोक सेवा आयोग बनाने की सिफारिश की थी. उस समय प्रांतों में अलग लोक सेवा आयोग बनाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था. इसलिए राज्यों को अपने स्तर पर सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और प्रशासन की व्यवस्था संभालनी पड़ती थी.
जब राजस्थान का गठन हुआ, तब 22 रियासतों को मिलाकर नया राज्य बनाया गया था. उस समय केवल जयपुर, जोधपुर और बीकानेर रियासतों में ही लोक सेवा आयोग जैसी व्यवस्था मौजूद थी. बाकी रियासतों में भर्ती की अलग-अलग प्रणालियां थीं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;क्या फिर लीक हो गया NEET री-एग्जाम का पेपर? जानें बुकलेट पैकेट को लेकर सरकार ने क्या कहा
कब हुई थी स्थापना?
राजस्थान के एकीकरण के बाद पूरे राज्य के लिए एक समान भर्ती प्रणाली की जरूरत महसूस हुई. इसी को ध्यान में रखते हुए 20 अगस्त 1949 को राजस्थान राजपत्र में राजस्थान लोक सेवा आयोग अध्यादेश प्रकाशित किया गया. इसके बाद 22 दिसंबर 1949 को आयोग की स्थापना से जुड़ी अधिसूचना जारी हुई और इसी दिन से राजस्थान लोक सेवा आयोग आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया.
आयोग के गठन के साथ ही विभिन्न रियासतों में चल रही लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं को समाप्त कर दिया गया. नए आयोग को राज्य में सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती, चयन और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई.
शुरुआत में क्या?
शुरुआत में आयोग में केवल एक अध्यक्ष और दो सदस्य थे. राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सर एस. के. घोष को आयोग का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. बाद में देवी शंकर तिवारी और एन. आर. चंदोरकर को सदस्य बनाया गया. इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पूर्व सदस्य एस. सी. त्रिपाठी को भी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राजस्थान, की, नौकरियों, की, रीढ़, है, RPSC, जानिए, इसकी, स्थापना, की, कहानी</media:keywords>
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        <title>NEET री&amp;एग्जाम को लेकर NTA तैयार, तैनात किए 6700 ऑब्जर्वर, हर सेंटर पर 40 से 50 पुलिसकर्मी </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-री-एग्जाम-को-लेकर-nta-तैयार-तैनात-किए-6700-ऑब्जर्वर-हर-सेंटर-पर-40-से-50-पुलिसकर्मी</link>
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        <description><![CDATA[ NEET Re-Exam 2026 Today: नीट यूजी 2026 री एग्जाम आज यानी 21 जून को होने जा रहा है. इसे लेकर एनटीए ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है. पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा होने जा रही परीक्षा को लेकर एजेंसी इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं छोड़ना चाहती है. परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए देशभर में एजेंसी ने कई सुरक्षा इंतजाम किए हैं.
आज होने वाली इस परीक्षा में देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की जाएगी. परीक्षा के लिए 5,440 केंद्र बनाए गए हैं, जहां 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे. एनटीए का कहना है कि परीक्षा के संचालन के लिए तकनीकी सुरक्षा बलों और अतिरिक्त मानव संसाधनों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है.&amp;nbsp;
सीसीटीवी और एआई की मदद से होगी निगरानी&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र और परीक्षा कक्षाओं की निगरानी के लिए बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. कुल 1.38 लाख से ज्यादा सीसीटीवी कैमराें के जरिए राष्ट्रीय, राज्य और मंत्रालय स्तर पर निगरानी की जा रही है. परीक्षा कक्षाओं की लाइव फुटेज पर लगातार नजर रखी जा रही है इसके साथ ही एआई आधारित सिस्टम भी सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करेगा. ताकि किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी की तुरंत पहचान की जा सके. परीक्षा केंद्रों पर करीब 6700 ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं, जबकि 100 से ज्यादा वर्चुअल ऑब्जर्वर केंद्रीय स्तर से लाइव मॉनिटरिंग करेंगे.&amp;nbsp;
जैमर से रोकी जाएगी इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी&amp;nbsp;
नकल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से होने वाली किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए देशभर में 51,000 से ज्यादा जैमर लगाए गए हैं. इनका उद्देश्य परीक्षा केंद्रों के आसपास किसी भी प्रकार की अवैध संचार को रोकना है. एनटीए के अनुसार जैमर की मदद से परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल नेटवर्क और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक एक्टिविटी पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाएगा, जिससे परीक्षा की गोपनीयता बनी रहे.&amp;nbsp;
बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन से होगी पहचान&amp;nbsp;
अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए इस बार बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. लगभग 48,000 से ज्यादा कर्मचारी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में लगाए गए हैं. इसके साथ फेस ऑथेन्टिकेशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. केंद्रों पर प्रवेश से पहले उम्मीदवारों की सघन जांच की जाएगी. इसके लिए करीब 38,000 फ्रिस्किंग स्टाफ की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके. वहीं परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं. राज्य और जिला प्रशासन, पुलिस अर्धसैनिक बल, भारतीय वायु सेना और डाक विभाग समिति एजेंसी इस प्रक्रिया में शामिल है. औसतन हर परीक्षा केंद्र पर 40 से 50 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें- NEET UG री-एग्जाम में बायोमेट्रिक फेल होने पर घबराएं नहीं, ये है NTA का प्लान
ओएमआर शीट और प्रश्न पत्रों की विशेष निगरानी&amp;nbsp;
परीक्षा सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए करीब 1500 कस्टोडियन बैंक शाखाओं में अधिकारियों के तैनाती की गई है. वहीं देशभर के सैकड़ों कलेक्शन सेंटरों से ओएमआर शीट को एकत्रित करने की जिम्मेदारी डाक विभाग संभालेगा. एनटीए परीक्षा से पहले देशव्यापी मॉक ड्रिल भी आयोजित की, जिसमें सीसीटीवी जनरल बायोमेट्रिक सिस्टम, फ्रिस्किंग प्रक्रिया और परीक्षा सामग्री की उपलब्धता की जांच की गई.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, री-एग्जाम, को, लेकर, NTA, तैयार, तैनात, किए, 6700, ऑब्जर्वर, हर, सेंटर, पर, से, पुलिसकर्मी </media:keywords>
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    <item>
        <title>NEET Re Exam 2026: देशभर में नीट परीक्षा आज, एग्जाम सेंटर पहुंचने से पहले देख लीजिए पूरी चेक लिस्ट </title>
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        <description><![CDATA[ NEET Re Exam 2026: नीट यूजी एग्जाम आज 21 जून को देशभर में आयोजित किया जा रहा है. इस परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल होने वाले हैं. परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शुरू होगी, लेकिन उम्मीदवारों को इससे काफी पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा. एनटीए ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया है. ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी अभ्यर्थियों को परेशानी में डाल सकती है. इसलिए घर से निकलने से पहले जरूरी डॉक्यूमेंट, ड्रेस कोड और परीक्षा से जुड़े नियमों को एक बार अच्छी तरह जांच लेना जरूरी है.&amp;nbsp;
समय पर पहुंचना सबसे जरूरी&amp;nbsp;
एनटीए के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश सुबह 11:00 बजे से शुरू हो जाएगा और दोपहर 1:30 बजे तक एंट्री मिलेगी. इसके बाद किसी भी व्यक्ति को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक परीक्षा चलेगी. जबकि दिव्यांग उम्मीदवारों को एक्स्ट्रा समय दिया जाएगा. अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि ट्रैफिक, मौसम और सुरक्षा जांच में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए समय से पहले केंद्र पहुंचे, ताकि अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सके.&amp;nbsp;

???? All the best to every NEET (UG) 2026 candidate!This is the day you&#039;ve prepared for. Stay calm, trust yourself, and give it your best - you&#039;ve earned this moment.⏰ Important timingsEntry begins: 11:00 AMLast entry: 1:30 PM (no entry after this)???? Carry with you✅&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) June 21, 2026



साथ रखें जरूरी डॉक्यूमेंट&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के लिए प्रिंटेड एडमिट कार्ड सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट है. एनटीए ने स्पष्ट किया है कि केवल 21 जून की परीक्षा के लिए जारी नया एडमिट कार्ड ही मान्य होगा. पुराने एडमिट कार्ड के आधार पर प्रवेश नहीं मिलेगा. इसके अलावा उम्मीदवारों को आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस &amp;nbsp;या पैन कार्ड जैसे किसी एक मूल फोटो पहचान पत्र को साथ रखना होगा. पासपोर्ट साइज फोटो भी साथ रखना जरूरी है. पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी के उम्मीदवारों को संबंधित प्रमाण पत्र भी साथ लाना होगा.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र में क्या ले जा सकते हैं और क्या नहीं?&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को केवल पारदर्शी पानी की बोतल, जरूरी डॉक्यूमेंट और पारदर्शी फोल्डर या पाउच ही साथ ले जा सकते हैं. इसके अलावा किसी भी एक्स्ट्रा सामान को परीक्षा केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं होगी. वहीं मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन, कैलकुलेटर, नोट्स, किताब, कागज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, हैंडबैग, पर्स और दूसरे डिजिटल डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित है. किसी भी प्रतिबंधित वस्तु के साथ पकड़े जाने पर परीक्षार्थी को परीक्षा से वंचित किया जा सकता है. ज्वेलरी, धातु वाले आभूषण, भारी हेयर क्लिप और दूसरी धातु की वस्तुएं भी परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने की परमिशन नहीं है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET री-एग्जाम को लेकर NTA तैयार, तैनात किए 6700 ऑब्जर्वर, हर सेंटर पर 40 से 50 पुलिसकर्मी&amp;nbsp;
ड्रेस कोड का रखें ध्यान&amp;nbsp;
एनटीए ने इस बार ड्रेस कोड को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं. उम्मीदवार हल्के और साधारण कपड़े पहन कर आएं. लड़कों के लिए हाफ स्लीव टीशर्ट या शर्ट और नॉर्मल पेंट उपयुक्त मानी गई है. वहीं छात्राएं साधारण कुर्ती, सलवार सूट या हल्के कपड़े पहन सकती है. फुल स्लीव्स वाले कपड़े, भारी कढ़ाई वाले कपड़े, ड्रेस, जैकेट, हूडी और बड़े बटन वाले कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी गई है. फुटवियर में केवल चप्पल या कम हील वाली सैंडल पहनने की परमिशन होगी. बंद जूते और बूट्स बैन है. धार्मिक या ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर आने वाले उम्मीदवारों को एक्स्ट्रा सुरक्षा जांच से गुजरना होगा. ऐसे अभ्यर्थियों को परीक्षा समय से काफी पहले केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है.
ये भी पढ़ें-NEET Re-Exam 2026: 22.79 लाख स्टूडेंट्स कल देंगे नीट परीक्षा, डॉक्यूमेंट्स, ड्रेस कोड और क्या करें-क्या नहीं? यहां सबकुछ जानें ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Exam, 2026:, देशभर, में, नीट, परीक्षा, आज, एग्जाम, सेंटर, पहुंचने, से, पहले, देख, लीजिए, पूरी, चेक, लिस्ट </media:keywords>
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    <item>
        <title>NEET Re&amp;Exam 2026 : 22.79 लाख स्टूडेंट्स, 1.29 लाख MBBS सीटें... 1 सीट पर 18 दावेदार, जानें कितना मुश्किल है डॉक्टर बनना?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Re-Exam 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 का री-एग्जाम आज 21 जून 2026 को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 22.79 लाख से ज्यादा छात्र हिस्सा ले रहे हैं. पेपर लीक विवाद के बाद NTA के लिए परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से कराना बड़ी चुनौती बन गया है. इसी कारण परीक्षा से पहले देशभर में मॉक ड्रिल कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई. पुलिस, प्रशासन और NTA की टीमें यह तय करने में जुटी हैं कि परीक्षा के दौरान नकल, फर्जीवाड़ा या पेपर लीक जैसी कोई घटना न हो.
देशभर में मेडिकल कॉलेजों में MBBS की कुल 1.29 लाख सीटें उपलब्ध हैं, जिसके कारण कॉम्पिटिशन काफी कड़ा है. आंकड़ों के अनुसार एक MBBS सीट के लिए औसतन 18 छात्र दावेदारी कर रहे हैं, जिससे डॉक्टर बनने की राह पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि डॉक्टर बनना कितना मुश्किल है.&amp;nbsp;
565 शहरों में होगी परीक्षा, 22.79 लाख स्टूडेंट्स देंगे एग्जाम
NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए देशभर में कुल 22.79 लाख से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इनमें करीब 13.33 लाख छात्राएं और 9.47 लाख छात्र शामिल हैं. पहली परीक्षा में लगभग 22.05 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे. यह परीक्षा भारत के 551 और विदेश के 14 शहरों समेत कुल 565 शहरों में आयोजित की जा रही है. इतने बड़े स्तर पर होने वाली इस परीक्षा को देश की सबसे बड़ी मेडिकल एडमिशन परीक्षाओं में से एक माना जाता है.
यह भी पढ़ें - NEET री-एग्जाम को लेकर NTA तैयार, तैनात किए 6700 ऑब्जर्वर, हर सेंटर पर 40 से 50 पुलिसकर्मी
डॉक्टर बनना कितना मुश्किल है?
करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट के अनुसार, देश में इस समय कुल 823 मेडिकल कॉलेज हैं, जहां MBBS की 1,29,603 सीटें उपलब्ध हैं. इनमें 450 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 63,160 सीटें हैं, जबकि 373 प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में 66,443 सीटें मौजूद हैं. हालांकि ज्यादातर छात्र कम फीस के कारण सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने की कोशिश करते हैं, जिसके चलते वहां कॉम्पिटिशन काफी ज्यादा रहता है. NEET-UG 2026 में MBBS सीटों के लिए मुकाबला बेहद कड़ा है.
कुल 22.79 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड उम्मीदवारों और 1.29 लाख MBBS सीटों को देखें तो औसतन एक सीट के लिए करीब 18 छात्र कॉम्पिटिशन कर रहे हैं. वहीं सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित होने और फीस कम होने के कारण ज्यादातर छात्रों की पहली पसंद सरकारी कॉलेज ही होते हैं. यही वजह है कि सरकारी MBBS सीटों के लिए कॉम्पिटिशन और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है, जहां एक सीट के लिए औसतन 36 उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rajasthan University Exam Controversy: राजस्थान यूनिवर्सिटी में एग्जाम के दौरान बड़ी गड़बड़ी, पेपर की जगह बांट दी आंसर&amp;की</title>
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        <description><![CDATA[ Rajasthan University Exam Controversy: राजस्थान यूनिवर्सिटी एक बार फिर अपनी परीक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद में आ गई है. एमए समाजशास्त्र सेकंड पेपर की परीक्षा के दौरान ऐसी चूक सामने आई है, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन के कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परीक्षा हॉल में बैठे छात्रों को प्रश्न पत्र की जगह आंसर-की बांट दी गई. मामला सामने आते ही परीक्षा केंद्रों पर अफरा-तफरी मच गई और छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया.
जानकारी के अनुसार, एमए समाजशास्त्र सेकंड पेपर की परीक्षा में करीब 300 छात्र शामिल होने वाले थे. परीक्षा शुरू होने के बाद जब परीक्षार्थियों ने प्रश्न पत्र खोला तो वह हैरान रह गए. उनके हाथ में जो डॉक्यूमेंट था, उसमें प्रश्नों की जगह उत्तर भी मौजूद थे. शुरुआत में कई छात्रों को लगा कि शायद यह कोई मॉडल पेपर है, लेकिन कुछ ही देर में साफ हो गया की परीक्षा की ऑफिशियल आंसर की है.
परीक्षा हॉल में मचा हड़कंप
आंसर की मिलने के बाद परीक्षा केंद्र पर असमंजस की स्थिति बन गई. छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया. कई परीक्षार्थियों ने परीक्षा देने से इनकार कर दिया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. छात्रों का कहना था कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में इस तरह की लापरवाही उनके फ्यूचर के साथ खिलवाड़ है. मामले की जानकारी मिलते ही परीक्षा कक्षा में मौजूद शिक्षकों और पर्यवेक्षकों ने छात्रों से वितरित की गई आंसर की वापस लेना शुरू कर दिया. हालांकि तब तक छात्र पूरे घटनाक्रम को समझ चुके थे और यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली को लेकर सवाल उठाने लगे.
छात्र नेताओं ने की कार्रवाई की मांग
घटना के बाद छात्रों ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन को घेरा. छात्र नेता लक्ष्यराज लुहारिया और दूसरे छात्र प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. उनका कहना था कि ऐसी घटनाएं विश्वविद्यालय की विशेषताओं को नुकसान पहुंचा सकती है और विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर कर सकती है. छात्रों ने यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई. कई विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया की परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की.
कैसे सामने आई इतनी बड़ी गड़बड़ी?
शुरुआती जांच में सामने आया कि प्रश्न पत्र और आंसर की अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में भेजी जाती है. लेकिन प्रिंटिंग और पैकिंग प्रक्रिया के दौरान आंसर की वाले लिफाफे को गलती से प्रश्न पत्र समझ लिया गया. इसके बाद उस सामग्री की छपाई कर सील बंद पैकेट तैयार कर परीक्षा केंद्रों तक भेज दिया गया, क्योंकि परीक्षा शुरू होने तक सील बंद लिफाफे नहीं खोले जाते, इसलिए गलती पहले पकड़ में नहीं आ सकी. परीक्षा शुरू होने के बाद ही छात्रों के माध्यम से पूरे मामले का खुलासा हुआ.
ये भी पढ़ें-राजस्थान की नौकरियों की रीढ़ है RPSC, जानिए इसकी स्थापना की कहानी
परीक्षा रद्द, 27 जून को होगा एग्जाम
घटना की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान यूनिवर्सिटी ने परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि एमए समाजशास्त्र सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा अब 27 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी. परीक्षा नियंत्रक राकेश राव ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर चूक है और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. विश्वविद्यालय ने छात्राओं से सहयोग की अपील करते हुए आश्वासन दिया है कि दोबारा परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से आयोजित की जाएगी.
ये भी पढ़ें-NEET री-एग्जाम को लेकर NTA तैयार, तैनात किए 6700 ऑब्जर्वर, हर सेंटर पर 40 से 50 पुलिसकर्मी&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET Re&amp;Exam: नागपुर के छात्र को अबू धाबी में मिला NEET री&amp;एग्जाम सेंटर, NTA ने बताई पूरी कहानी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-re-exam-नागपुर-के-छात्र-को-अबू-धाबी-में-मिला-neet-री-एग्जाम-सेंटर-nta-ने-बताई-पूरी-कहानी</link>
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        <description><![CDATA[ नागपुर के एक अभ्यर्थी को NEET (UG) 2026 परीक्षा के लिए अबू धाबी में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) सामने आया है. NEET (UG) 2026 परीक्षा को 21 जून तक स्थगित किए जाने के बाद अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए परीक्षा शहर (Exam City) में संशोधन का अवसर दोबारा दिया गया था. एजेंसी ने बताया कि करीब 3.2 लाख अभ्यर्थियों ने इस सुधार विंडो का इस्तेमाल किया और इनमें से 99.5 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा शहर आवंटित किया गया.
क्या था मामला?
दरअसल, नागपुर के अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब ने नीट यूजी एग्जाम में शामिल होने के लिए जब उसने एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसके होश उड़ गए. अबू धाबी में स्थित एक एग्जाम सेंटर शो हो रहा था. जिसके बाद सोशल मीडिया पर NTA पर काफी सवाल उठ रहे थे. जिसके बाद अब NTA ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है.
अबू धाबी केंद्र का चयन उम्मीदवार के लॉगिन से हुआ
NTA के रिकॉर्ड के मुताबिक संबंधित मामले में परीक्षा शहर को अबू धाबी में बदलने की प्रक्रिया उम्मीदवार के अपने रजिस्टर्ड लॉगिन के माध्यम से की गई थी. एजेंसी के अनुसार सिस्टम में दर्ज गतिविधियों से पता चलता है कि यह बदलाव एक ही यूजर की तरफ से किया गया था.
अंतिम समय में नागपुर केंद्र की मांग
हालांकि, 19 जून की शाम को परीक्षा से सिर्फ 48 घंटे पहले NTA को अनौपचारिक रूप से केंद्र को अबू धाबी से नागपुर बदलने का अनुरोध मिला. एजेंसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसी शाम उम्मीदवार के पिता से संपर्क किया और आवश्यक प्रोसेस पूरी कराने में मदद की.

Reference the issue with regard to allotment of a centre in Abu Dhabi to a candidate in Nagpur, NTA would like to state the following:Following the rescheduling of NEET (UG) 2026 to 21 June, the National Testing Agency reopened the examination-city correction window to assist&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) June 20, 2026



तीन बार दिखा अबू धाबी केंद्र
NTA का कहना है कि रिकॉर्ड के अनुसार एक बार उम्मीदवार की आईडी से परीक्षा केंद्र अबू धाबी में बदला गया और दो अन्य मौकों पर भी केंद्र का प्रीव्यू अबू धाबी के रूप में देखा गया था. इसके बावजूद एजेंसी ने छात्र के अनुरोध को स्वीकार करते हुए केंद्र बदलने की प्रक्रिया पूरी की.
यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;NEET Re-Exam 2026: 22.79 लाख स्टूडेंट्स, 551 शहर... डॉक्यूमेंट्स, ड्रेस कोड और क्या करें-क्या नहीं? NEET री-एग्जाम का A To Z
&#039;स्टूडेंट फर्स्ट&#039; नीति पर जोर
NTA ने कहा कि उसकी प्राथमिकता हमेशा छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखना है. एजेंसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने में अनावश्यक परेशानी न हो और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए.
यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;शिक्षा में उत्तराखंड का बड़ा कमाल, &amp;lsquo;पूर्ण साक्षर राज्य&amp;rsquo; बनने से बस एक कदम दूर ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Re&amp;NEET 2026: री&amp;नीट से पहले देशभर में सुरक्षा का रिहर्सल, मॉकड्रिल के जरिए तैयारियों की परख</title>
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        <description><![CDATA[ NEET-UG री-एग्जाम को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में शनिवार को मॉक ड्रिल का आयोजन हुआ. इस दौरान परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा हुई.
नेशनल लेवल पर आयोजित इस मॉक ड्रिल में पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, परीक्षा केंद्रों के अधिकारी, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया. अधिकारियों ने परीक्षा के दिन लागू किए जाने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल का परीक्षण किया और अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का आकलन किया.
देशभर के कई परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश व्यवस्था, पहचान सत्यापन, अभ्यर्थियों की जांच, सीसीटीवी निगरानी, जैमर प्रणाली, कंट्रोल रूम संचालन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की जांच की गई. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया कि परीक्षा के दौरान नकल, पेपर लीक या किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके. री-नीट परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स शामिल होंगे. परीक्षा का आयोजन देश के 551 शहरों में होगा. एग्जाम 2 बजे से लेकर 5:15 तक किया गया था.
यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;NEET Re-Exam 2026: 22.79 लाख स्टूडेंट्स, 551 शहर... डॉक्यूमेंट्स, ड्रेस कोड और क्या करें-क्या नहीं? NEET री-एग्जाम का A To Z
क्या किया जा रहा है प्रयास?
रिपोर्ट्स के मुताबिक एग्जाम सेंटर पर तकनीकी निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा रही है. सीसीटीवी कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग, जैमर की उपलब्धता और विशेष निगरानी टीमों की तैनाती के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है.
क्या-क्या हुआ?
अलग-अलग राज्यों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. कई स्थानों पर परीक्षा केंद्रों के भीतर और बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात प्रबंधन, अभ्यर्थियों के प्रवेश और निकास मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी का अभ्यास किया गया. साथ ही परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी से जुड़े प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की गई.
एयरफोर्स ने पहुंचाए पेपर
री-नीट परीक्षा के सुरक्षित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न पत्रों को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया गया. सुरक्षा के मद्देनजर विशेष व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्रों का परिवहन किया गया ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या देरी की संभावना न रहे.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>33 Percent Passing Marks Rule: किसी भी एग्जाम में 33% ही क्यों होता है पासिंग मार्क्स, इससे ज्यादा या कम क्यों नहीं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/33-percent-passing-marks-rule-किसी-भी-एग्जाम-में-33-ही-क्यों-होता-है-पासिंग-मार्क्स-इससे-ज्यादा-या-कम-क्यों-नहीं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/33-percent-passing-marks-rule-किसी-भी-एग्जाम-में-33-ही-क्यों-होता-है-पासिंग-मार्क्स-इससे-ज्यादा-या-कम-क्यों-नहीं</guid>
        <description><![CDATA[ 33 Percent Passing Marks Rule : एग्जाम में पास होने के लिए कितने मार्क्स जरूरी हैं, यह सवाल लगभग हर छात्र के मन में कभी न कभी जरूर आता है. भारत में स्कूल स्तर की ज्यादातर परीक्षाओं में 33 प्रतिशत मार्क्स मिलने पर छात्र को पास माना जाता है. कई सालों से यह नियम लागू है और आज भी देश के कई शिक्षा बोर्ड इसी व्यवस्था का पालन करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पासिंग मार्क्स 33 प्रतिशत ही क्यों रखे गए. आखिर 40 प्रतिशत, 50 प्रतिशत या कोई दूसरा आंकड़ा क्यों नहीं चुना गया. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि किसी भी एग्जाम में पासिंग मार्क्स 33% ही क्यों होता है.&amp;nbsp;
किसी भी एग्जाम में पासिंग मार्क्स 33% ही क्यों होता है?
किसी भी एग्जाम में पासिंग मार्क्स 33% ही होना भारत के औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा हुआ है. दरअसल 33 प्रतिशत पासिंग मार्क्स की व्यवस्था आज की नहीं बल्कि ब्रिटिश शासन के समय से चली आ रही है. समय के साथ एजुकेशन सिस्टम में कई बदलाव हुए, लेकिन पासिंग मार्क्स का यह नियम काफी हद तक वैसा ही बना रहा.&amp;nbsp;
ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी यह व्यवस्था
इतिहास के अनुसार, अंग्रेजों ने साल 1858 में भारत में पहली बार मैट्रिक एग्जाम आयोजित की थी. उस समय भारत पर ब्रिटिश शासन था और शिक्षा व्यवस्था भी उनके कंट्रोल में थी. उस दौर में ब्रिटेन में किसी एग्जाम को पास करने के लिए कम से कम 65 प्रतिशत मार्क्स लाना जरूरी माना जाता था. हालांकि भारत में अंग्रेज अधिकारियों ने पास होने के लिए केवल 33 प्रतिशत मार्क्स तय किए. माना जाता है कि उस समय ब्रिटिश अधिकारियों का मानना था कि भारतीय छात्रों का शैक्षणिक स्तर ब्रिटेन के छात्रों की तुलना में कम है. इसी सोच के आधार पर यहां पासिंग मार्क्स का स्तर कम रखा गया. बाद में यही व्यवस्था लंबे समय तक जारी रही और आज भी कई बोर्डों में इसका प्रभाव देखा जा सकता है.&amp;nbsp;
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आज भारत में कितने प्रतिशत मार्क्स पर छात्र पास माने जाते हैं?
आज भारत के अलग-अलग शिक्षा बोर्डों में पासिंग मार्क्स का नियम लगभग 33 से 40 प्रतिशत के बीच है. उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में छात्रों को पास होने के लिए कम से कम 33 प्रतिशत मार्क्स हासिल करने होते हैं.वहीं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में भी पास होने के लिए 33 प्रतिशत मार्क्स का नियम लागू है. दूसरी ओर केरल बोर्ड में कक्षा 10वीं और 12वीं की एग्जाम पास करने के लिए छात्रों को न्यूनतम 30 प्रतिशत मार्क्स लाने होते हैं. वहीं देश की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में एडमिशन के लिए बहुत ज्यादा मार्क्स हासिल करने पड़ते हैं. जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई फेमस कॉलेजों में एडमिशन के लिए कटऑफ 95 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक पहुंच जाती है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्या है नियम?
भारत की तरह पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी लंबे समय तक 33 प्रतिशत मार्क्स को पासिंग मार्क्स माना जाता रहा. हालांकि समय के साथ वहां बदलाव किए गए हैं. पाकिस्तान में अब मैट्रिक और इंटरमीडिएट एग्जामओं के लिए पासिंग मार्क्स बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिए गए हैं. वहीं बांग्लादेश में भी एग्जाम सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम किया जा रहा है और वहां भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BPSC 70th Result: जारी हुआ 70वीं बीपीएससी परीक्षा का फाइनल रिजल्ट, जानिए किसने किया टॉप</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आखिरकार तमाम विवादों, विरोध प्रदर्शनों और कानूनी अड़चनों के बाद 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है. इस रिजल्ट के जारी होने के साथ ही पिछले कई महीनों से चल रहा इंतजार और सस्पेंस पूरी तरह खत्म हो गया है. इस साल की परीक्षा में श्रद्धा पांडे ने कुल 593 अंक हासिल कर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है. उनके ठीक पीछे शशांक गौरव और आयुष बिजोय रहे, जिन्होंने 592-592 अंक हासिल कर दूसरा और तीसरा स्थान शेयर किया है. पटना में आयोग के अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार ने नतीजों की आधिकारिक घोषणा की. उन्होंने बताया कि कुल 2,035 रिक्तियों के मुकाबले 2,027 उम्मीदवारों को अंतिम रूप से सफल घोषित किया गया है.
काफी वक्त से था रिजल्ट का इंतजार
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आखिरकार तमाम विवादों, विरोध प्रदर्शनों और कानूनी अड़चनों के बाद 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है . इस रिजल्ट के जारी होने के साथ ही पिछले कई महीनों से चल रहा इंतजार और सस्पेंस पूरी तरह खत्म हो गया है . इस साल की परीक्षा में श्रद्धा पांडे ने कुल 593 अंक हासिल कर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है . उनके ठीक पीछे शशांक गौरव और आयुष बिजोय रहे, जिन्होंने 592-592 अंक हासिल कर दूसरा और तीसरा स्थान शेयर किया है . पटना में आयोग के अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार ने नतीजों की आधिकारिक घोषणा की . उन्होंने बताया कि कुल 2,035 रिक्तियों के मुकाबले 2,027 उम्मीदवारों को अंतिम रूप से सफल घोषित किया गया है.
BPSC 70th Result: इन 6 आसान स्टेप्स में चेक करें अपना रिजल्ट
अगर आप अपना रिजल्ट देखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान तरीके को फॉलो कर सकते हैं-
आधिकारिक वेबसाइट खोलें: सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर बिहार लोक सेवा आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in को ओपन करें .
रिजल्ट सेक्शन में जाएं: वेबसाइट के होमपेज पर ही आपको Result या फिर Important Notice का ऑप्शन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें .
लिंक पर क्लिक करें: यहां आपको &#039;70th Combined Competitive Examination Final Result&#039; का एक्टिव लिंक मिलेगा, इस पर टिक करें .
PDF फाइल डाउनलोड करें: लिंक पर क्लिक करते ही आपके सामने चयनित उम्मीदवारों की एक पीडीएफ मेरिट लिस्ट &amp;nbsp;खुल जाएगी, इसे अपने डिवाइस में डाउनलोड कर लें .
अपना रोल नंबर ढूंढें: इस पीडीएफ फाइल को खोलकर अपने कीबोर्ड पर Ctrl+F दबाएं और अपना रोल नंबर या नाम लिखकर सर्च करें, यदि आपका चयन हुआ है तो आपका नंबर हाईलाइट हो जाएगा .
प्रिंटआउट सुरक्षित रखें: भविष्य के संदर्भ और आगे की कागजी कार्रवाई के लिए इस रिजल्ट पेज का एक प्रिंटआउट निकालकर या स्क्रीनशॉट लेकर अपने पास जरूर रख लें .
विवादों और हंगामे के बीच पूरी हुई प्रक्रिया
इस ऐतिहासिक भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत पिछले साल 4 जनवरी 2025 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के साथ हुई थी . लेकिन शुरुआत से ही यह परीक्षा विवादों में घिर गई जब बापू परीक्षा परिसर में भारी हंगामा और बवाल देखने को मिला. इसके बाद आयोग को प्रारंभिक परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा आयोजित करानी पड़ी थी. इतना ही नहीं, इस भर्ती को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर छात्रों ने करीब तीन महीने तक लंबा विरोध प्रदर्शन भी किया था. हालांकि, तमाम दबावों के बावजूद आयोग ने अपनी चयन प्रक्रिया को जारी रखा और स्पष्ट किया कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया गया है.
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आयोग के इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती
बीपीएससी के अधिकारियों के मुताबिक, यह भर्ती अभियान आयोग के पूरे इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा अभियान रहा है. इस बार कुल 2,035 प्रशासनिक पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई थी, जिसके अंतिम चरण यानी इंटरव्यू में रिकॉर्ड 5,450 उम्मीदवार शामिल हुए थे. आयोग ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेने के कारण ही फाइनल रिजल्ट जारी करने में थोड़ा वक्त लगा. अगर पिछले सालों से तुलना करें तो 68वीं परीक्षा में सिर्फ 324 पद थे और 817 लोगों का इंटरव्यू हुआ था, जबकि 69वीं परीक्षा में 475 पदों के लिए 1,252 उम्मीदवारों ने इंटरव्यू दिया था. उनकी तुलना में इस बार का काम कई गुना बड़ा था.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BPSC, 70th, Result:, जारी, हुआ, 70वीं, बीपीएससी, परीक्षा, का, फाइनल, रिजल्ट, जानिए, किसने, किया, टॉप</media:keywords>
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        <title>45 Minute Class Rule: 40 से 45 मिनट ही क्यों होता है स्कूलों में एक पीरियड, कैसे और कब हुआ था यह तय?</title>
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        <description><![CDATA[ 45 Minute Class Rule: आमतौर पर स्कूलों में क्लास शुरू होते ही बच्चों का पहला सवाल यही होता है कि पीरियड कब खत्म होगा. कभी 45 मिनट का पीरियड पलक झपकते गुजर जाता है, तो कभी वहीं समय काफी लंबा लगने लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादातर स्कूलों में एक पीरियड 40 से 45 मिनट का ही क्यों होता है. आखिर 60 मिनट के घंटे को तोड़कर 45 मिनट की क्लास का नियम कब बना और उसके पीछे क्या वजह थी. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि स्कूलों में एक पीरियड 40 से 45 मिनट ही क्यों होता है और यह कैसे और कब तय हुआ था.&amp;nbsp;
पहले 60 मिनट तक चलती थी एक क्लास&amp;nbsp;
19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत तक स्कूलों में एक पीरियड आमतौर पर 60 मिनट का होता था. उस दौर में पढ़ाई सिर्फ सुबह ही नहीं, बल्कि दोपहर बाद भी होती थी. बच्चों को बीच में लगभग तीन घंटे का ब्रेक मिलता था, जिसमें वह घर जाकर खाना खाते थे और फिर दोबारा स्कूल लौटते थे. हालांकि दोपहर की कक्षाएं छात्रों और शिक्षकों दोनों को पसंद नहीं थी. माना जाता था कि खाना खाने के बाद बच्चों की एकाग्रता कम हो जाती है और गर्मी में पढ़ाई करना भी मुश्किल हो जाता था. इस वजह से एजुकेशन एक्सपर्ट्स ने बच्चों की मानसिक थकान और सीखने की क्षमता पर अध्ययन शुरू किया.&amp;nbsp;
वैज्ञानिकों की रिसर्च के बाद आया बदलाव&amp;nbsp;
20वीं सदी की शुरुआत में मनोवैज्ञानिक और एजुकेशन एक्सपर्ट्स ने कई प्रयोग किए. इन रिचर्स में पाया गया कि लगातार 60 मिनट तक पढ़ाई करना बच्चों के लिए थकावट भरा हो सकता है, इससे सीखने की क्षमता प्रभावित होती है. वहीं एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया था कि बच्चों के लिए 30 मिनट और बड़ों छात्रों के लिए 45 से 50 की कक्षाएं प्रभावी होंगी. उनका मानना था कि कम समय की क्लास में ज्यादा अच्छे से ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और पढ़ाई का असर बेहतर होता है.
1911 में पहली बार लागू हुआ 45 मिनट का नियम&amp;nbsp;
22 अगस्त 1911 को तत्कालीन प्रशिया के संस्कृति मंत्री ऑगस्ट वॉन ट्रॉट जू सोल्ज ने आदेश जारी किया कि हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में एक पीरियड की अवधि 45 मिनट होगी. यह फैसला उस समय एजुकेशन एक्सपर्ट्स की सिफारिश के आधार पर लिया गया था. 45 मिनट के पीरियड लागू होने के बाद साप्ताहिक पढ़ाई का पूरा शेड्यूल सिर्फ सुबह के समय में समेटा जा सका. इससे दोपहर की कक्षाएं में खत्म कर दी गई और छात्रों को दोपहर बाद का समय मिलने लगा. हालांकि इस बदलाव का सभी ने स्वागत नहीं किया. कई शिक्षकों को मानना था कि 45 मिनट का समय पढ़ाई के लिए पर्याप्त नहीं है, उनका कहना था कि इतने कम समय में किसी विषय को विस्तार से समझाना मुश्किल हो जाएगा और पढ़ाई सिर्फ जल्दी-जल्दी पढ़ाई खत्म करने तक सीमित रह जाएगी. कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा कि छोटे पीरियड के कारण पढ़ाई में जल्दबाजी बढ़ेगी और छात्रों की सोचने की क्षमता प्रभावित होगी.&amp;nbsp;
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धीरे-धीरे पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुआ मॉडल&amp;nbsp;
विरोध के बावजूद 45 मिनट वाला मॉडल सफल साबित हुआ और धीरे-धीरे जर्मनी के दूसरे हिस्सों में भी लागू होने लगा. बाद में कई देशों ने इस व्यवस्था को अपनाया. आज भी जर्मनी, इंग्लैंड, ब्रिटेन और पोलैंड जैसे देशों में 45 मिनट के आसपास की कक्षाएं नॉर्मल है. हालांकि कुछ देशों में 50 मिनट या 60 मिनट के पीरियड चलते हैं. वहीं पिछले कुछ समय में कई स्कूलों में 60 और 90 मिनट के लंबे पीरियड वाले मॉडल पर भी प्रयोग शुरू किए गए, ताकि छात्रों को किसी सब्जेक्ट को समझने के लिए ज्यादा समय मिल सके.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Minute, Class, Rule:, से, मिनट, ही, क्यों, होता, है, स्कूलों, में, एक, पीरियड, कैसे, और, कब, हुआ, था, यह, तय</media:keywords>
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        <title>Rahul Gandhi Birthday: कितने पढ़े हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी, उनके पास कौन&amp;कौन सी डिग्रियां?</title>
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        <description><![CDATA[ Rahul Gandhi Birthday: भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल राहुल गांधी आज 19 जून 2026 को अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अक्सर अपने राजनीतिक बयानों, यात्राओं और जनसभाओं को लेकर चर्चा में रहते हैं. देश के अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने वाले राहुल गांधी कई बार छात्रों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों के कार्यक्रमों में भी नजर आते हैं. अक्सर &amp;nbsp;राहुल गांधी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर अपनी राय रखते नजर आते हैं. किसानों के बीच संवाद से लेकर विदेशों की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में भाषण देने तक, राहुल गांधी कई मंचों पर सक्रिय दिखाई देते है. ऐसे में उनके जन्मदिन के मौके पर बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर राहुल गांधी की पढ़ाई-लिखाई कितनी है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी कितने पढ़े हैं और उनके पास कौन-कौन सी डिग्रियां हैं.&amp;nbsp;
कांग्रेस नेता राहुल गांधी कितने पढ़े हैं?
राहुल गांधी का बचपन दिल्ली और देहरादून में बीता है. उनकी शुरुआती शिक्षा नई दिल्ली के सेंट कोलंबा स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने देहरादून के फेमस द दून स्कूल में पढ़ाई की, हालांकि साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उनकी नियमित स्कूली शिक्षा प्रभावित हुई. इसके बाद उन्होंने कई सालों तक घर पर रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखी. &amp;nbsp;स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद राहुल गांधी ने साल 1989 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज में एडमिशन लिया. उन्होंने यहां कुछ समय तक पढ़ाई की, लेकिन अपनी डिग्री पूरी नहीं की,इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए.&amp;nbsp;
उनके पास कौन-कौन सी डिग्रियां हैं?
सेंट स्टीफंस कॉलेज के बाद राहुल गांधी अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे. उन्होंने वहां अपनी पढ़ाई शुरू की, लेकिन साल 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें हार्वर्ड छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षा दूसरे संस्थान में जारी रखी. हार्वर्ड छोड़ने के बाद राहुल गांधी ने अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित रॉलिन्स कॉलेज में एडमिशन लिया. यहां से उन्होंने साल 1994 में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की, रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा कारणों से उस दौरान उन्होंने राउल विंची नाम का भी इस्तेमाल किया था. &amp;nbsp;ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद राहुल गांधी ने ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज में एडमिशन लिया. यहां उन्होंने डेवलपमेंटल स्टडीज विषय में पढ़ाई की और साल 1995 में एम.फिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) की डिग्री हासिल की.
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राजनीति में आने से पहले क्या करते थे राहुल गांधी?
राजनीति में सक्रिय होने से पहले राहुल गांधी लंदन की एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मॉनिटर ग्रुप में काम करते थे. इसके बाद साल 2002 में उन्हें मुंबई स्थित टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग कंपनी बैकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक नियुक्त किया गया था.&amp;nbsp;
कब शुरू हुआ राहुल गांधी का राजनीतिक सफर?
राहुल गांधी ने मार्च 2004 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा. उन्होंने अपने पिता राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा और एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. इसके बाद लगातार कांग्रेस की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे. साल 2017 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSC के EWS कोटे पर उठे सवाल, क्या जरूरतमंदों का हक छिन रहा है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsc-के-ews-कोटे-पर-उठे-सवाल-क्या-जरूरतमंदों-का-हक-छिन-रहा-है</link>
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        <description><![CDATA[ UPSC EWS Quota: अभी तक NTA की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं कि अब UPSC पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि ये सवाल पेपर लीक को लेकर नहीं बल्कि EWS कोटे को लेकर हैं. कई चयनित उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति को लेकर जांच में बड़े खुलासे हुए हैं. &amp;nbsp;
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से हुई सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे जरिए चयनित 104 उम्मीदवारों में से बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की थी, जिन्होंने महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई की है. साथ ही निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल की या फिर जिनके परिवार बिजनेस से जुड़े हुए हैं.
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. EWS कोटे से चयनित उम्मीदवारों में से 67 उम्मीदवार अच्छे कोचिंग संस्थानों में पढ़े हैं. जहां फीस लाखों रुपये तक होती है. जांच में निकल कर आया कि 46 कैंडिडेट्स प्राइवेट स्कूल में पढ़े हैं. जहां महंगी पढ़ाई होती है. इसके अलावा 28 अभ्यर्थी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनके परिवार बिजनेस फैमिली से हैं. वहीं, करीब 10 उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो पहले से कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर चुके थे.
वहीं, अगर हम इनकी एजुकेशन की बात करें तो कई उम्मीदवार देश के टॉप संस्थानों से पढ़ाई कर चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार लगभग 14 उम्मीदवारों ने IIT, NIT, JNU दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से ग्रेजुएशन या फिर पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. वहीं, रिपोर्ट में पता चला है कि कुछ कैंडिडेट्स EWS कोटे में फिट बैठते हैं.
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क्या है EWS?
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटा की शुरुआत वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिए की गई थी. इस व्यवस्था के तहत सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाता है.
EWS आरक्षण उन उम्मीदवारों के लिए है जो SC, ST या OBC जैसी आरक्षित श्रेणियों में शामिल नहीं हैंलेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं. फिलहाल अगर किसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है और वह सरकार द्वारा निर्धारित संपत्ति संबंधी मानदंडों को पूरा करता है, तो वह EWS प्रमाणपत्र बनवाकर इस आरक्षण का लाभ उठा सकता है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Re&amp;NEET: NEET UG री&amp;एग्जाम से पहले देशभर में होगा मॉक ड्रिल, सुरक्षाकर्मी रहेंगे तैनात; जानें डिटेल्स </title>
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        <description><![CDATA[ 21 जून को होने वाली NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले परीक्षा की सुरक्षा और सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;रिपोर्ट्स के अनुसार यह अभ्यास शनिवार को किया जाएगा, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों की तैयारियों और निगरानी तंत्र का परीक्षण किया जाएगा.
जानकारी के मुताबिक, मॉक ड्रिल सुबह 9 बजे शुरू होगी और देर शाम तक चलेगी. इस दौरान देशभर के परीक्षा केंद्रों और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की भी समीक्षा की जाएगी ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की गड़बड़ी या सुरक्षा चूक की संभावना न रहे.
बताते चलें कि 21 जून को होने वाली NEET-UG री-टेस्ट परीक्षा से पहले शनिवार को देशभर में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी. इसका उद्देश्य परीक्षा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना है. यह मॉक ड्रिल सुबह 9 बजे शुरू होगी और देर शाम तक चलेगी. इसमें 2.5 लाख से अधिक सुरक्षा कर्मी हिस्सा लेंगे.
तगड़ी सुरक्षा के बीच होगी परीक्षा &amp;nbsp;
सभी परीक्षा केंद्रों को पहले ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को सौंप दिया गया है. परीक्षा के दिन केंद्रों पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी. अधिकारियों के अनुसार प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी अर्धसैनिक बलों के पास होगी. देशभर के 5,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी रहेगी.
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CCTV पर होगी मोनिटरिंग&amp;nbsp;&amp;nbsp;
NTA को सभी CCTV कैमरों की लाइव फीड उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी केंद्र भी बनाया गया है, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखेगा.&amp;nbsp;परीक्षा को देखते हुए सभी जांच और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है. जिला प्रशासन के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी भी परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे.
22 लाख स्टूडेंट्स होंगे शामिल&amp;nbsp;
21 जून को होने वाली NEET-UG री-टेस्ट के लिए लगभग 22 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया है. इनमें से करीब 18 लाख छात्र अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं. यह मॉक ड्रिल परीक्षा से पहले सुरक्षा व्यवस्था, एजेंसियों के बीच समन्वय और तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित की जा रही है.&amp;nbsp;
बायोमेट्रिक सत्यापन न होने पर भी मिलेगा प्रवेश
NTA ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी उम्मीदवार का बायोमेट्रिक सत्यापन तकनीकी खराबी, कमजोर फिंगरप्रिंट, UIDAI कनेक्टिविटी समस्या या किसी शारीरिक कारण से नहीं हो पाता है, तो उसे परीक्षा से नहीं रोका जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Re-NEET:, NEET, री-एग्जाम, से, पहले, देशभर, में, होगा, मॉक, ड्रिल, सुरक्षाकर्मी, रहेंगे, तैनात, जानें, डिटेल्स </media:keywords>
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        <title>SC&amp;ST नहीं हैं तो भी मिलेगा फायदा, जानिए जनरल छात्रों के लिए सरकारी स्कॉलरशिप</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप जनरल कैटेगरी से आते हैं और पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है तो ये खबर आपके लिए है. दरअसल, अकसर ये माना जाता है कि सरकारी स्कॉलरशिप का लाभ केवल रिजर्व्ड कैटेगरी के छात्रों को मिलता है. मगर ऐसा नहीं है, जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को भी सरकारी स्कॉलरशिप का फायदा मिलता है. आइए पूरी डिटेल्स जानते हैं...
सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं योजनाओं के तहत छात्रों को हर साल 12 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये या उससे अधिक की आर्थिक सहायता मिलती है. अधिकांश स्कालरशिप के लिए आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से किया जाता है.
सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप सबसे लोकप्रिय योजना
जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए सबसे चर्चित योजनाओं में से एक है सेंट्रल सेक्टर स्कीम ऑफ स्कॉलरशिप फॉर कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स. इस योजना का लाभ उन छात्रों को मिलता है जिन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया हो.
इस स्कॉलरशिप के लिए छात्र का 12वीं में टॉप 20 प्रतिशत (80th Percentile) में होना जरूरी है. साथ ही परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. आवेदन करने वाले छात्र की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए. इस योजना के तहत कॉलेज के पहले तीन वर्षों तक 12,000 रुपये प्रतिवर्ष और चौथे तथा पांचवें वर्ष में 20,000 रुपये प्रतिवर्ष की सहायता दी जाती है.
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बेटियों के लिए AICTE प्रगति स्कॉलरशिप
इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं के लिए AICTE की प्रगति स्कॉलरशिप एक बड़ा सहारा है. यह योजना उन छात्राओं के लिए है जो AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थान में डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कर रही हैं.
योजना के तहत छात्राओं को सालाना 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है. इस राशि का उपयोग फीस, किताबें, लैपटॉप और अन्य शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है. इसके लिए परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए.
साइंस छात्रों को मिल सकती है 80,000 की स्कॉलरशिप
साइंस सब्जेक्ट में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए INSPIRE स्कॉलरशिप योजना उपलब्ध है. यह योजना विज्ञान और शोध के क्षेत्र में प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जाती है. 12वीं में शानदार प्रदर्शन करने वाले या JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर रैंक हासिल करने वाले छात्र इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं. चयनित छात्रों को हर साल 80,000 रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है. इसके अलावा उन्हें मेंटरशिप और रिसर्च से जुड़ी सुविधाएं भी मिलती हैं.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SC-ST, नहीं, हैं, तो, भी, मिलेगा, फायदा, जानिए, जनरल, छात्रों, के, लिए, सरकारी, स्कॉलरशिप</media:keywords>
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        <title>MPPSC मुख्य परीक्षा 2025 की तारीखें घोषित, 17 से 22 अगस्त तक होंगे एग्जाम; अभ्यर्थियों को मिली बड़ी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ MPPSC Main Exam 2025 Dates: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से निकलने वाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. जबलपुर हाई कोर्ट की तरफ से परीक्षा पर लगी अंतरिम रोक हटाए जाने के बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा की है. आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक राज्य सेवा मुख्य परीक्षा का आयोजन 17 अगस्त से 22 अगस्त 2025 के बीच होगा.
मेंस एग्जाम की डेट्स की घोषणा होते ही लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है. दरअसल, प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम मार्च 2025 में जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने कटऑफ और आरक्षण संबंधी मुद्दों को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका आरोप था कि आयोग ने कैटेगरी के अनुसार कट ऑफ जारी नहीं की और आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों को अनारक्षित पदों पर चयनित नहीं किया गया. इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य परीक्षा पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी, जिससे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी.
अब जबलपुर हाई कोर्ट ने परीक्षा पर लगी अंतरिम रोक को हटा दिया. इसके बाद आयोग ने बिना देरी किए मेंस एग्जाम का कार्यक्रम जारी कर दिया. अधिकारियों के अनुसार मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 जून से शुरू होगी और 15 जुलाई तक चलेगी.
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किन जिलों में होगी परीक्षा
मुख्य परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 10 अगस्त से आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे. परीक्षा के लिए प्रदेश के 12 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इनमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रतलाम, सतना, सागर, शहडोल, बड़वानी, उज्जैन और बालाघाट शामिल हैं. परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार 17 से 20 अगस्त तक सामान्य अध्ययन के चार पेपर आयोजित होंगे.
आवेदन शुल्क
आवेदन शुल्क की बात की जाए तो मध्य प्रदेश के मूल निवासियों को 400 रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा, जबकि अन्य राज्यों के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 800 रुपये निर्धारित किया गया है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>MPPSC, मुख्य, परीक्षा, 2025, की, तारीखें, घोषित, से, अगस्त, तक, होंगे, एग्जाम, अभ्यर्थियों, को, मिली, बड़ी, राहत</media:keywords>
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        <title>CBSE School Opening Process: कैसे खोला जाता है सीबीएसई स्कूल, कितना आता है खर्च और कैसे मिलती है मान्यता? जान लीजिए</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE School Opening Process: सीबीएसई (CBSE) से जुड़े स्कूलों की मांग लगातार बढ़ रही है. बेहतर शिक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय स्तर का सिलेबस और पूरे देश में मान्यता मिलने की वजह से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों को सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं. यही कारण है कि कई लोग शिक्षा के क्षेत्र में निवेश कर अपना सीबीएसई स्कूल शुरू करने की योजना बनाते हैं. हालांकि सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी मंजूरी, स्टाफ नियुक्ति और सीबीएसई एफिलिएशन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. सीबीएसई ने पिछले कुछ सालों में एफिलिएशन से जुड़े नियमों को आसान बनाया है, लेकिन स्कूल खोलने के लिए तय नियमों को पूरा करना आज भी जरूरी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि सीबीएसई स्कूल कैसे खोला जाता है, कितना खर्च आता है और कैसे मान्यता मिलती है?&amp;nbsp;
सीबीएसई स्कूल कैसे खोला जाता है?
सीबीएसई स्कूल शुरू करने के लिए सबसे पहले एक ट्रस्ट, सोसायटी या कंपनी एक्ट की धारा 8 के तहत संस्था का गठन करना जरूरी होता है. कोई भी व्यक्ति सीधे अपने नाम से सीबीएसई स्कूल नहीं चला सकता है. स्कूल का संचालन किसी रजिस्टर्ड संस्था के माध्यम से ही किया जाता है. इसके बाद स्कूल के लिए जमीन की व्यवस्था करनी होती है और संबंधित स्थानीय नियमों के अनुसार लैंड यूज की मंजूरी लेनी पड़ती है.&amp;nbsp;
स्कूल के लिए कितनी जमीन जरूरी होती है?
सीबीएसई के नियमों के अनुसार, स्कूल के पास तय लैंड होना जरूरी है. सामान्य तौर पर न्यूनतम लैंड जरूरत लगभग 6,000 वर्ग मीटर (करीब 1.5 एकड़) मानी जाती है, हालांकि यह स्थान और क्षेत्र के अनुसार अलग भी हो सकती है. कई मामलों में शहरों और महानगरों के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं. जमीन स्कूल ट्रस्ट या संस्था के नाम पर होनी चाहिए या फिर लंबे समय की लीज पर ली गई होनी चाहिए.&amp;nbsp;
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स्कूल बनाने में कितना खर्च आ सकता है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 1000 छात्रों की क्षमता वाले एक सामान्य सीबीएसई स्कूल को बनाने में खर्च उसकी लोकेशन, जमीन और सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. स्कूल का निर्माण आमतौर पर तीन चरणों में किया जाता है, जिसमें पहले 20,000 से 25,000 वर्ग फुट, फिर 12,000 से 15,000 वर्ग फुट और बाद में 6,000 से 10,000 वर्ग फुट अतिरिक्त निर्माण किया जाता है. वहीं निर्माण और फर्नीचर की लागत लगभग 1,000 से 1,400 रुपये प्रति वर्गफुट तक मानी जाती है. इसके अलावा खेल सुविधाएं, कंप्यूटर और तकनीकी उपकरण, स्कूल बसें, मार्केटिंग, लैंडस्केपिंग और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर भी अलग से खर्च करना पड़ता है. यही वजह है कि विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य सीबीएसई स्कूल शुरू करने के लिए शुरुआती स्तर पर करीब 2 से 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा निवेश की जरूरत पड़ सकती है, जबकि बेहतर सुविधाओं के साथ यह लागत और भी बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
राज्य सरकार से मान्यता क्यों जरूरी है?
स्कूल शुरू करने के लिए सबसे पहले संबंधित राज्य सरकार या शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करनी होती है. स्कूल, स्टाफ और जरूरी सुविधाएं तैयार होने के बाद स्थानीय शिक्षा विभाग के तहत निरीक्षण किया जाता है. सभी शर्तें पूरी होने पर राज्य स्तर पर स्कूल को अनुमति दी जाती है.राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही आगे सीबीएसई एफिलिएशन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.&amp;nbsp;
सीबीएसई स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही
सीबीएसई के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 तक देश और विदेश में 30,786 से ज्यादा स्कूलों को एफिलिएशन दिया जा चुका है. पिछले कुछ सालों में एफिलिएशन नियमों को आसान बनाने के बाद नए सीबीएसई स्कूलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कैसे हुई थी बिहार लोक सेवा आयोग की शुरुआत? कौन थे इसके पहले चेयरमैन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कैसे-हुई-थी-बिहार-लोक-सेवा-आयोग-की-शुरुआत-कौन-थे-इसके-पहले-चेयरमैन</link>
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        <description><![CDATA[ हर स्टेट में युवाओं का सपना सरकारी नौकरी पाने का होता है. ऐसे में सरकारी पदों पर युवाओं के सिलेक्शन के लिए हर राज्य में एक आयोग होता है. जो कि राज्य के संवैधानिक पदों पर भर्ती और उनके आगे की प्रोसेस को देखता है. आज हम ऐसे ही एक आयोग की बात करने जा रहे हैं. आइए जानते हैं बिहार लोक सेवा आयोग के बारे में...
राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले टॉप एग्जाम का आयोजन करने का जिम्मा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के पास है. हर वर्ष लाखों कैंडिडेट्स BPSC के अलग-अलग एग्जाम में शामिल होते हैं. लेकिन क्या आपको इस आयोग के बारे में पता है. अगर नहीं तो हम बताते हैं.
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी नियुक्तियों का विचार पहली बार वर्ष 1853 में सामने आया था. उस समय ब्रिटिश शासन के दौरान सरकारी पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता महसूस की गई. इसके बाद शला 1854 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसने प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को स्वरूप देने का काम किया गया.
इसके बाद के वर्षों में सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई सुधार किए गए. इसी क्रम में भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत संघीय लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों के गठन का प्रावधान किया गया. यही व्यवस्था आगे चलकर स्वतंत्र भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अलग-अलग राज्य लोक सेवा आयोगों का आधार बनी.यह भी पढ़ें - इन आसान तरीकों को अपनाएं, एक साल में मिल जाएगी सरकारी नौकरी- आजमा कर देख लें
कब बना BPSC?
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की स्थापना 1 अप्रैल 1949 को हुई थी. उस समय यह आयोग उड़ीसा और मध्य प्रदेश राज्यों के लिए कार्यरत संयुक्त आयोग से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 261(1) के तहत किया गया था.
हालांकि, BPSC को वास्तविक संवैधानिक दर्जा 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के बाद मिल सका. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था की गई है. इसी प्रावधान के तहत बिहार लोक सेवा आयोग एक कोंस्टीटूशनल बॉडी के रूप में कार्य करता है.
पहले कहां था मुख्यालय
स्थापना के शुरुआती दिनों में BPSC का मुख्यालय रांची में स्थित था, क्योंकि उस समय रांची बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था. इसके बाद में राज्य सरकार ने आयोग का मुख्यालय रांची से पटना स्थानांतरित करने का निर्णय लिया. इसके बाद 1 मार्च 1951 को BPSC का मुख्यालय आधिकारिक रूप से पटना स्थानांतरित कर दिया गया.
कौन थे पहले चेयरमैन?
बिहार लोक सेवा आयोग के पहले चेयरमैन राजंधारी सिन्हा थे. वहीं, आयोग के पहले सचिव राधा कृष्ण चौधरी बने थे. इन दोनों अधिकारियों ने आयोग की प्रारंभिक कार्यप्रणाली को स्थापित करने और इसे एक प्रभावी भर्ती संस्था के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई थी. फिलहाल बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई हैं. उन्होंने 16 मार्च 2024 को पदभार ग्रहण किया था और वर्तमान में आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं.यह भी पढ़ें - दिल्ली में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, DSSSB ने निकाली कई पदों पर भर्ती; ये है लास्ट डेट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cbse 10th Result 2026: जल्द जारी होगा सीबीएसई 10वीं का सेकंड बोर्ड रिजल्ट, इस तरह से कर पाएंगे चेक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cbse-10th-result-2026-जल्द-जारी-होगा-सीबीएसई-10वीं-का-सेकंड-बोर्ड-रिजल्ट-इस-तरह-से-कर-पाएंगे-चेक</link>
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        <description><![CDATA[ Cbse 10th Second Board Result 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की ओर से कक्षा 10वीं सेकंड बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द ही जारी किया जा सकता है. बोर्ड रिजल्ट अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी करेगा. सीबीएसई ने इस साल कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए दो बोर्ड परीक्षाओं की नीति लागू की है, जिसमें एक मुख्य परीक्षा और दूसरी अंक सुधार परीक्षा शामिल है. 25 जून 2025 को जारी ऑफिशियल अधिसूचना में बोर्ड ने कहा था कि सीबीएसई सेकंड बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जून 2026 में घोषित किए जाएंगे, हालांकि बोर्ड ने अभी तक परिणाम घोषित करने की तारीख की पुष्टि नहीं की है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि सीबीएसई 10वीं सेकंड बोर्ड रिजल्ट कब जारी कर सकता है और इस रिजल्ट को स्टूडेंट कैसे चेक कर पाएंगे?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार पर हुए बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिश के बाद 10वीं के छात्रों के लिए दो बोर्ड परीक्षाओं की नीति लागू की है. एनईपी के अनुसार बोर्ड ने सीबीएसई कक्षा 10वीं के छात्रों को अधिकतम तीन विषयों में अपने अंक सुधारने का अवसर प्रदान किया है. अपने दूसरे बोर्ड परीक्षा परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे, छात्र बोर्ड के ऑफिशिल पोर्टल cbse.gov.in और cbseresults.nic.in से अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं. बोर्ड ने 16 अप्रैल को कक्षा 10वीं की मुख्य परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित किया. इस परीक्षा में कुल पास प्रतिशत 93.70 रहा. लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 94.99 पासिंग प्रतिशत दर्ज किया है, जबकि लड़कों का पासिंग प्रतिशत 92.60 रहा.
दूसरे मौके में छात्रों ने दर्ज की अच्छी भागीदारी
सीबीएसई सेकंड बोर्ड की परीक्षा 15 से 21 मई के बीच आयोजित की गई थी. वहीं दूसरे चरण की परीक्षा शुरू होने पर देशभर के छात्रों ने जबरदस्त भागीदारी दिखाई थी. आंकड़ों के अनुसार दूसरे चरण की परीक्षा के लिए लगभग 6.7 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, इनमें से 5.25 लाख से ज्यादा आवेदन उन छात्रों के थे, जो पहले बोर्ड परीक्षा के बाद अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहते थे. वहीं कंपार्टमेंट कैटेगरी के तहत 85,000 से ज्यादा उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया. इसके अलावा सेकंड बोर्ड के दौरान पेश किए गए सभी सब्जेक्ट में से साइंस में सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए. गणित और सामाजिक विज्ञान में भी अच्छी खासी स्टूडेंट्स ने भागीदारी दिखाई. इन सब्जेक्ट में विशेष रूप से उन छात्रों ने अच्छी-खासी भागीदारी दिखाई जो अपने अंकों को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे थे.
कैसे चेक करें अपना रिजल्ट?

सीबीएसई 10वीं सेकंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टूडेंट को सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर जाना होगा.
इसके बाद क्लास 10 सेकंड बोर्ड रिजल्ट 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना रोल नंबर और दूसरी जरूरी जानकारी भरें.
जानकारी सबमिट करते ही स्टूडेंट का रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा.
अब इस रिजल्ट को स्टूडेंट डाउनलोड करके भी फ्यूचर के लिए सुरक्षित रख सकते हैं.

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डिजिलॉकर से भी चेक कर सकते हैं रिजल्ट

स्टूडेंट www.digilocker.gov.in⁠ वेबसाइट या DigiLocker डिजिलॉकर ऐप पर लॉगिन करके भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं.
इसके लिए अगर स्टूडेंट का अकाउंट नहीं है, तो सबसे पहले मोबाइल नंबर और आधार की मदद से डिजिलॉकर ऐप पर रजिस्ट्रेशन करना होगा.
रजिस्ट्रेशन करके लॉगिन करने के बाद एजुकेशन सेक्शन में जाए और सीबीएसई सेलेक्ट करें.
यहां रोल नंबर और दूसरी जरूरी जानकारी भरकर डिजिटल मार्कशीट और सर्टिफिकेट डाउनलोड किया जा सकते हैं.

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        <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Cbse, 10th, Result, 2026:, जल्द, जारी, होगा, सीबीएसई, 10वीं, का, सेकंड, बोर्ड, रिजल्ट, इस, तरह, से, कर, पाएंगे, चेक</media:keywords>
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        <title>​यंग प्रोफेशनल्स के लिए RBI में काम करने का शानदार मौका, महीने के मिलेंगे 1.50 लाख</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक रिजर्व बैंक ने युवाओं के लिए शानदार भर्ती निकाली है. बैंक ने यंग प्रोफेशनल के कुछ खास पदों पर आवेदन मांगे हैं. इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, डाटा एनालिटिक्स और पॉलिसी रिसर्च जैसे आधुनिक पद शामिल हैं. यह भर्ती उन युवाओं के लिए बेहद खास है जो बैंकिंग क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं और जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में जानकारी रखते हैं.
आरबीआई की तरफ से जारी नोटिस के अनुसार यंग के लिए कुछ खास विशेषताओं वाले युवाओं की तलाश की जा रही है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, डाटा एनालिसिस, फाइनेंशियल मार्केट,क्लाइमेट रिस्क और पॉलिसी रिसर्च जैसी योग्यता और अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को मौका दिया जाएगा.
उम्र सीमा क्या तय की गई है?
इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 30 वर्ष तक होनी चाहिए.
कितनी होगी कॉन्ट्रैक्ट की अवधि?
यह एक कांट्रेक्चुअल जॉब होगा जिसकी अवधि 3 वर्ष तय की गई है. हालांकि उम्मीदवार के अच्छे प्रदर्शन के आधार पर यह अवधि आगे भी जा सकती है.
हर महीने कितना मिलेगा स्टाइपेंड?
आरबीआई की तरफ से जारी इस भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 1,50,000 रुपये तक का स्टाइपेंड दिया जाएगा.
कैसे होगा चयन?
आरबीआई की तरफ से जारी इस भर्ती में उम्मीदवारों को कई चरणों का सामना करना पड़ेगा इसके लिए सबसे पहले स्क्रीनिंग कमेटी प्राप्त आवेदन पत्रों को शॉर्टलिस्ट करेगी. उसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाएगा. उसके बाद पर्सनल इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा. इंटरव्यू से जुड़ी जानकारी उम्मीदवारों को रजिस्टर्ड पर &amp;nbsp;भेज दी जाएगी.
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उम्मीदवार कैसे कर सकते हैं आवेदन?
इस भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीदवार आरबीआई की तरफ से निर्धारित Annexure IV भरें. इसके बाद एक पीडीएफ तैयार कर लें. जिसमें उम्मीदवार अपना CV, एजुकेशनल सर्टिफिकेट,स्टेटमेंट ऑफ इंटरेस्ट, रिसर्च सैंपल को पीडीएफ फॉर्मेट में yphrmdco@rbi.org.in पर भेज दें. ध्यान रहे पीडीएफ फाइल का साइज 5 mb से &amp;nbsp;ज्यादा ना हो,इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि अगर आप अलग-अलग पदों के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो हर पद के लिए अलग अलग मेल करें.
कब तक कर सकते हैं अप्लाई?
RBI की तरफ से निकाली गई इस भर्ती के लिए आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार 6 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वह लास्ट डेट निकलने से पहले इस भर्ती के लिए आवेदन कर लें. लास्ट डेट निकल जाने के बाद उम्मीदवारों को आवेदन करने का अवसर नहीं दिया जाएगा. ज्यादा डिटेल्स के लिए आधिकारिक साइट opportunities.rbi.org.in की मदद ली जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>आयुष मंत्रालय में 179 पदों पर भर्ती, 1 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन; 10वीं पास से लेकर ग्रेजुएट तक को मौका</title>
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        <description><![CDATA[ आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले यूनानी चिकित्सा अनुसंधान केंद्रीय परिषद ने ग्रुप-ए, ग्रुप-बी और ग्रुप-सी के कुल 179 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के तहत रिसर्च ऑफिसर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, क्लर्क, ड्राइवर, एमटीएस समेत कई पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
ग्रुप-ए पदों पर भर्ती
CCRUM ने ग्रुप-ए श्रेणी में कुल 19 पदों पर भर्ती निकाली है. इनमें सबसे अधिक 16 पद रिसर्च ऑफिसर (यूनानी) के हैं. इसके अलावा रिसर्च ऑफिसर (पैथोलॉजी) के 2 पद और रिसर्च ऑफिसर (फिजियोलॉजी) का 1 पद शामिल है.
ग्रुप-बी के पद
ग्रुप-बी श्रेणी में कई तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भर्ती की जाएगी. इनमें असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर (फार्माकोलॉजी) का 1 पद, असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर (फार्माकोग्नॉसी/बॉटनी) के 2 पद, स्टाफ नर्स के 7 पद, अकाउंट्स ऑफिसर का 1 पद और रिसर्च असिस्टेंट के विभिन्न पद शामिल हैं.इसके अलावा मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट (एमएलटी) के 12 पद, लाइब्रेरी एवं इंफॉर्मेशन असिस्टेंट के 3 पद, इन्वेस्टिगेटर (सांख्यिकी) के 3 पद तथा प्रूफ रीडर का 1 पद भी भरा जाएगा.
ग्रुप-सी में सबसे ज्यादा अवसर
ग्रुप-सी श्रेणी में सबसे अधिक पदों पर भर्ती की जाएगी. इसमें हिंदी असिस्टेंट के 2 पद, फार्मासिस्ट के 6 पद, सोशल वर्कर के 2 पद, रेडियोग्राफर का 1 पद और कंपाउंडर के 3 पद शामिल हैं. इसके अलावा स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 7 पद, अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) के 31 पद, लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के 26 पद, स्टाफ कार ड्राइवर के 4 पद तथा मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) के 43 पदों पर भर्ती की जाएगी. एमटीएस और क्लर्क के पदों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अवसर मिलने की संभावना है.
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क्या होगी चयन प्रक्रिया?
भर्ती प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के आधार पर किया जाएगा. सभी चरणों में सफल रहने वाले उम्मीदवारों को अंतिम रूप से नियुक्ति प्रदान की जाएगी. हालांकि कुछ पदों के लिए चयन प्रक्रिया में पदानुसार बदलाव भी हो सकता है, जिसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध होगी.
कब तक करें आवेदन?
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार CCRUM की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से शुरू होगी, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है. उम्मीदवार केवल ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन कर सकेंगे. उम्मीदवार आधिकारिक साइट पर जाकर ज्यादा डिटेल्स चेक कर सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आयुष, मंत्रालय, में, 179, पदों, पर, भर्ती, जुलाई, से, शुरू, होंगे, आवेदन, 10वीं, पास, से, लेकर, ग्रेजुएट, तक, को, मौका</media:keywords>
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        <title>यूपी के स्कूलों में बढ़ी गर्मी की छुट्टियां, अब 25 जून से शुरू होगी पढ़ाई</title>
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        <description><![CDATA[ यूपी में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित और मान्यता प्राप्त परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ा दिया है. जिसके चलते अब राज्य में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई 25 जून 2026 से शुरू होगी. इससे पहले स्कूल 16 जून से खुलने रहे थे.
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह फैसला छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं का असर बच्चों पर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार ने स्कूलों को कुछ और दिनों तक बंद रखने का निर्णय लिया है.
क्या है लेटर में?
अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा की तरफ से जारी हुए पत्र में कहा गया है कि साल 2026 से ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि को भी स्थायी रूप से निर्धारित कर दिया गया है. अब प्रत्येक वर्ष 20 मई से 24 जून तक परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा. इसके बाद 25 जून से नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होंगी.
सरकार का मानना है कि मई और जून के दौरान प्रदेश में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसी कारण छुट्टियों की अवधि बढ़ाकर छात्रों को राहत देने का निर्णय लिया गया है.
कस दिन से लगेंगी क्लास
हालांकि विद्यालयों में बच्चों की कक्षाएं 25 जून से शुरू होंगी, लेकिन शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को इससे पहले स्कूल पहुंचना होगा. आदेश के अनुसार 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित होंगे.
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क्या होगा?
इन तीन दिनों के दौरान स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां की जाएंगी. शिक्षकों को लेसन प्लान तैयार करने, छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का कार्य सौंपा गया है.
इसके अलावा मिड-डे मील योजना की तैयारियों की समीक्षा, विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, रसोईघर और शौचालयों की सफाई, पेयजल व्यवस्था की जांच तथा स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब को पूरी तरह क्रियाशील बनाने जैसे कार्य भी इसी अवधि में पूरे किए जाएंगे. विभाग का उद्देश्य है कि जब छात्र स्कूल लौटें तो उन्हें बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
बेसिक शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवकाश की अवधि बढ़ने से शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं होगा. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत विद्यालयों में निर्धारित 220 कार्य दिवसों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा.यह भी पढ़ें - प्राइवेट स्कूल की टीचर्स को कितनी मिलती है चाइल्ड केयर लीव? जान लें क्या कहते हैं नियम ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, के, स्कूलों, में, बढ़ी, गर्मी, की, छुट्टियां, अब, जून, से, शुरू, होगी, पढ़ाई</media:keywords>
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        <title>UP B.Ed प्रवेश परीक्षा में अलीगढ़ का जलवा, नितिन पचौरी ने हासिल की प्रदेश में दूसरी रैंक</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित हो गया है. इस वर्ष परीक्षा में अलीगढ़ के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. खास बात यह रही कि पहली और दूसरी रैंक दोनों ही अलीगढ़ के छात्रों ने हासिल की हैं. जहां वंदना सिंह ने प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया, वहीं नितिन पचौरी ने दूसरी रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है.
नितिन पचौरी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट एंड सिस्टम डिजाइन में एमटेक (M.Tech) की डिग्री प्राप्त की है. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने करीब दो वर्षों तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य किया. हालांकि तकनीकी क्षेत्र में सफल करियर होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा जगत को चुना और छात्रों के भविष्य निर्माण में योगदान देने का निर्णय लिया.
शिक्षण क्षेत्र में कदम रखने के बाद नितिन ने IIT-JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्यापन कार्य किया. उन्होंने देश की प्रमुख एडटेक संस्था फिजिक्स वाला सहित कई संस्थानों में छात्रों को पढ़ाया है. पिछले एक दशक में उन्होंने हजारों छात्रों का मार्गदर्शन किया है, जिनमें से कई आज डॉक्टर और इंजीनियर के रूप में देशभर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
वर्तमान में नितिन पचौरी अलीगढ़ के एम.आर. जयपुरिया स्कूल में बिजनेस एवं अकादमिक मेंटर के रूप में कार्यरत हैं. स्कूल शिक्षा क्षेत्र में अपने योगदान को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से उन्होंने बीएड डिग्री हासिल करने का फैसला किया. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया.
मिसाल की कायम
कड़ी मेहनत और सुनियोजित तैयारी के बल पर नितिन ने पूरे प्रदेश में दूसरी रैंक हासिल कर मिसाल कायम की है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार, मित्रों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है.
यहां से की पढ़ाई
नितिन अपनी सफलता का श्रेय केवल अपनी मेहनत को ही नहीं, बल्कि अपने परिवार और सहयोगियों को भी देते हैं. उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई सचिन पचौरी और विपिन पचौरी का इस सफलता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. दोनों भाई अलीगढ़ में कॉम्प्टी वर्ल्ड कोचिंग का संचालन करते हैं और छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं.
नितिन ने अपनी बीएड प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी इसी कोचिंग संस्थान से की. उनका कहना है कि यहां उन्हें सही मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री और सकारात्मक माहौल मिला, जिसने उनकी तैयारी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नितिन पचौरी की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो करियर के विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव हासिल करने के बाद भी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं. उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि निरंतर सीखने और मेहनत करने की इच्छा व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, DSSSB ने निकाली कई पदों पर भर्ती; ये है लास्ट डेट</title>
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        <description><![CDATA[ यदि आप नौकरी तलाश रहे हैं तो देश की राजधानी से आपके लिए अच्छी खबर सामने आई है. दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) की तरफ से टीचिंग और नॉन-टीचिंग के कई पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. पात्र और इच्छुक कैंडिडेट्स 16 जून 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की अंतिम डेट 15 जुलाई 2026 तय की गई है. &amp;nbsp;उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट dsssbonline.nic.in पर जाना होगा.
दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड इस भर्ती अभियान के तहत ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT), टेक्निकल असिस्टेंट और अन्य कई पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. ऐसे उम्मीदवार जो दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में नौकरी करना चाहते हैं, वे DSSSB की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
उम्मीदवारों को सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण (Registration) करना होगा. इसके बाद लॉगिन करके आवेदन पत्र भरना होगा और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म का प्रिंट आउट रखने की सलाह दी गई है.
कौन कर सकता है आवेदन?
भर्ती के तहत अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी अलग-अलग निर्धारित की गई है. टीजीटी पदों के लिए संबंधित विषय में स्नातक डिग्री और बीएड जैसी योग्यताएं आवश्यक हो सकती हैं, जबकि तकनीकी पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा या डिग्री मांगी जा सकती है.
आयु सीमा क्या है?
DSSSB द्वारा जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार विभिन्न पदों के लिए आयु सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है. कुछ पदों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और कुछ के लिए 20 वर्ष रखी गई है. वहीं अधिकतम आयु सीमा पद के अनुसार 30 वर्ष और 37 वर्ष तक निर्धारित की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी प्रदान की जाएगी.
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आवेदन शुल्क कितना है?
जनरल, ओबीसी और अन्य अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के रूप में 100 रुपये जमा करने होंगे. वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), महिला उम्मीदवारों और दिव्यांग (PwD) अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में पूरी छूट दी गई है.
ऐसे करें आवेदन​

सबसे पहले उम्मीदवार DSSSB की आधिकारिक वेबसाइट dsssbonline.nic.in पर जाएं.
इसके बाद होमपेज पर उपलब्ध रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें.
अब उम्मीदवार मांगी गई सभी व्यक्तिगत और शैक्षिक जानकारी दर्ज करें.
फिर उम्मीदवार आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें.
इसके बाद उम्मीदवार आवेदन शुल्क का भुगतान करें.
आवेदन पत्र जमा करने से पहले सभी विवरणों की जांच करें.
आगे के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट निकालकर रख लें.

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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>इन आसान तरीकों को अपनाएं, एक साल में मिल जाएगी सरकारी नौकरी&amp; आजमा कर देख लें</title>
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        <title>UKMSSB Nursing Officer Recruitment 2026: उत्तराखंड में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर निकली वैकेंसी, जानें कौन कर सकता है अप्लाई? </title>
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        <description><![CDATA[ UKMSSB Nursing Officer Recruitment 2026: अगर आप मेडिकल फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डिपार्टमेंट के अंतर्गत यूकेएमएसएसबी नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 का ऑफिशल नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इसमें ग्रुप सी नर्सिंग ऑफिसर के कुल 196 पदों की घोषणा की गई है. इन पदों पर भर्ती के लिए 12 जून से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं. आवेदन प्रक्रिया 2 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी. वहीं इच्छुक उम्मीदवारों को एलिजिबिलिटी की जांच कर अंतिम तिथि से पहले अपना आवेदन पूरा करने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
कब से शुरू होंगे आवेदन और कब है आखिरी डेट?
उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. नोटिफिकेशन के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 12 जून से शुरू हो चुकी है, जो की 2 जुलाई शाम 5:00 बजे तक चलेगी. उम्मीदवारों को 6 से 7 जुलाई 2026 तक ऑफिशियल पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन पत्रों में संशोधन करने का अवसर भी मिलेगा.&amp;nbsp;
नर्सिंग ऑफिसर के कौन-कौन से पद खाली?&amp;nbsp;
यूकेएमएसएसबी नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 के तहत ग्रुप सी नर्सिंग ऑफिसर पदों के लिए कुल 196 रिक्तियों की घोषणा की गई है. यह रिक्तियां अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि यूआर, एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस में बांटी गई है. इसमें नर्सिंग ऑफिसर महिलाओं के कुल 157 खाली पदों को भरा जाएगा, जिसमें 126 पद डिग्री धारकों और 31 पद डिप्लोमा धारकों के लिए है. वहीं पुरुष नर्सिंग ऑफिसर के लिए कुल 39 खाली पदों को भरा जाएगा, जिसमें 31 डिप्लोमा पदों को और 8 पद डिग्री धारकों के लिए निर्धारित है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है नर्सिंग ऑफिसर के लिए आवेदन?&amp;nbsp;
उत्तराखंड नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को एलिजिबिलिटी शर्तों को पूरा करना होगा. नर्सिंग ऑफिसर के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष है. वहीं आयु की गणना 1 जुलाई 2025 तक की जाएगी. उत्तराखंड के आरक्षित कैटेगरी से संबंधित उम्मीदवारों को सरकारी नियमों में छूट भी दी जाएगी. इसके अलावा उम्मीदवारों के पास भारतीय नर्सिंग परिषद की ओर से मान्यता प्राप्त संस्थान से नर्सिंग की डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए. उन्हें उत्तराखंड नर्सिंग एवं दाई परिषद या भारतीय नर्सिंग एवं दाई परिषद में रजिस्टर्ड होना भी जरूरी है. इसके अलावा पदों के लिए पात्र होने के लिए उम्मीदवारों को हिंदी भाषा का ज्ञान होना चाहिए. वहीं ऐसे अभ्यर्थी जिनके पास प्रांतीय सेवा में कम से कम दो वर्ष की सेवा का सर्टिफिकेट है या एनसीसी का बी या फिर सी सर्टिफिकेट है, उन्हें भी प्राथमिकता दी जाएगी.&amp;nbsp;
क्या है नर्सिंग ऑफिसर के लिए चयन प्रक्रिया?
उत्तराखंड नर्सिंग ऑफिसर चयन प्रक्रिया 2026 बोर्ड की ओर से आयोजित लिखित परीक्षा पर आधारित है. लिखित परीक्षा कुल 200 नंबर की होगी. पेपर वन में नर्सिंग से संबंधित सब्जेक्ट से होंगे और यह 100 नंबर का होगा. वहीं पेपर 2 में सामान्य हिंदी, सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन वाले सब्जेक्ट होंगे और यह भी 100 नंबर का होगा. इसके अलावा हर सही उत्तर के लिए उम्मीदवार को एक अंक मिलेगा, जबकि गलत उत्तर के लिए 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग भी होगी. &amp;nbsp;वहीं परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाएगा और मेडिकल परीक्षण भी कराया जाएगा. इसके बाद चयन प्रक्रिया पूरी होगी.&amp;nbsp;
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उत्तराखंड नर्सिंग ऑफिसर के लिए कैसे कर सकते हैं आवेदन?&amp;nbsp;

नर्सिंग ऑफिसर पदों पर आवेदन करने के लिए सबसे पहले UKMSSB के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद यूकेएमएसएसबी नर्सिंग ऑफिसर परीक्षा 2026 का लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब यहां पर अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी डालकर रजिस्ट्रेशन पूरा करें.&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन के बाद नंबर और पासवर्ड का उपयोग करके पोर्टल में लॉगिन करें.&amp;nbsp;
इसके बाद मांगी गई सारी जानकारी और डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
अब नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से पेमेंट करें.&amp;nbsp;
फीस पेमेंट करने के बाद आपका आवेदन जमा हो जाएगा, फ्यूचर के लिए आवेदन का प्रिंट आउट निकाल कर भी सुरक्षित रख सकते हैं.

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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET री एग्जाम पेपर लीक अफवाहें झूठी, NTA ने Telegram स्कैम पर दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET री-एग्जाम को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही पेपर लीक की अफवाहों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने सख्त बयान जारी किया है.NTA ने साफ किया है कि किसी भी तरह का पेपर लीक नहीं हुआ है और Telegram व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे सभी दावे पूरी तरह फर्जी और धोखाधड़ी पर आधारित हैं. एजेंसी ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान स्रोत या चैनल पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें.
NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने बताया कि NEET री-एग्जाम से जुड़ी कोई भी लीक या प्रश्नपत्र चोरी की घटना सामने नहीं आई है.उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और गलत जानकारी फैलाकर पैसे ऐंठ रहे हैं. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी प्रकार की पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई है. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित स्रोतों पर ही भरोसा करें.
Telegram पर फैल रहा बड़ा स्कैमअधिकारियों के अनुसार, कुछ ठग Telegram पर फर्जी चैनल बनाकर छात्रों को निशाना बना रहे हैं. ये लोग दावा करते हैं कि उनके पास NEET री-एग्जाम का पेपर मौजूद है और इसके बदले 14,000 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक की मांग करते हैं.ये स्कैमर्स फर्जी स्क्रीनशॉट, एडिटेड चैट और पुराने मैसेज दिखाकर छात्रों को भ्रमित करते हैं. असल में Telegram पर मैसेज एडिट करने की सुविधा होती है, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी भी बातचीत को बदलकर असली जैसा दिखा सकता है. पैसे ट्रांसफर करने के बाद वापस मिलना लगभग असंभव होता है.
यह भी पढ़ें - NEET यूजी री एग्जाम एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र इन बातों का रखें विशेष ध्यान, परीक्षा से पहले पढ़ लें जरूरी निर्देश
IIT Madras के विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दीIIT Madras के विशेषज्ञों ने भी इस तरह के साइबर स्कैम को लेकर चेतावनी दी है.उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले &amp;ldquo;प्रूफ&amp;rdquo; कई बार पूरी तरह एडिटेड होते हैं और इन्हें सच मान लेना छात्रों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी कंटेंट को आसानी से बदला जा सकता है, इसलिए बिना जांच के किसी भी दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए.NTA ने सभी NEET अभ्यर्थियों को सख्त चेतावनी दी है कि वे किसी भी अनजान Telegram या WhatsApp ग्रुप से दूर रहें.

पेपर लीक या प्रश्नपत्र बेचने वाले दावों पर विश्वास न करे.
किसी भी व्यक्ति को पैसे न दें
केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें
अपने दोस्तों और अन्य छात्रों को भी जागरूक करें
अगर कोई छात्र इस तरह की ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत शिकायत करें.&amp;nbsp;हेल्पलाइन नंबर- 1930cybercrime.gov.in⁠यह भी पढ़ें - NEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर रोक, जानिए छात्रों का सबसे बड़ा साथी है या खतरा?
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG री&amp;एग्जाम देने वाले छात्रों को मिलेगी मुफ्त बस सेवा; सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 री एग्जाम में शामिल होने वाले छात्रों के लिए काम की खबर है. आंध्र प्रदेश सरकार ने इन छात्रों को बड़ी राहत दी है. स्टेट गवर्नमेंट की तरफ से 21 जून को होने वाली NEET UG री-एग्जाम के दिन सभी अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी जाएगी. इसका मकसद छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में होने वाली परेशानियों को कम करना और उन्हें तनावमुक्त माहौल उपलब्ध कराना है.
राज्य के परिवहन मंत्री एम. रामप्रसाद रेड्डी ने कहा है कि आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में परीक्षा देने जा रहे छात्रों से कोई किराया नहीं लिया जाएगा. यह सुविधा केवल परीक्षा के दिन यानी 21 जून 2026 को उपलब्ध रहेगी. इस सुविधा का फायदा लेने के लिए छात्रों को बस में चढ़ते समय केवल अपना NEET UG 2026 का एडमिट कार्ड दिखाना होगा. इसके अतिरिक्त दस्तावेज या पूर्व पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी. राज्य के किसी भी हिस्से से परीक्षा केंद्र तक जाने वाले छात्र इस सुविधा का फायदा पाएंगे.
एम. रामप्रसाद रेड्डी ने कहा कि नीट जैसी परीक्षा के दौरान छात्रों को यात्रा संबंधी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए APSRTC विशेष इंतजाम कर रहा है. उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई इस सुविधा का पूरा फायदा लें. उन्होंने कहा जहां जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त बस सेवाएं भी चलाई जाएंगी ताकि किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई न हो.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NEET यूजी री एग्जाम एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र इन बातों का रखें विशेष ध्यान, परीक्षा से पहले पढ़ लें जरूरी निर्देश
क्या है NEET UG?
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए NEET UG जरूरी परीक्षा है. ये देश की राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से छात्रों को एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) पाठ्यक्रमों जैसे बीएएमएस (BAMS), बीएचएमएस (BHMS) समेत अन्य मेडिकल कोर्सों में प्रवेश मिलता है.
NEET UG का आयोजन हर वर्ष राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तरफ से किया जाता है. वर्तमान में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक स्तर के मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए यह एकमात्र मान्यता प्राप्त प्रवेश परीक्षा है.
कितने अंकों की होती है परीक्षा?
NEET UG का कुल पूर्णांक 720 अंक होता है. परीक्षा में प्राप्त अंकों और ऑल इंडिया रैंक के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाता है. बेहतर अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट मिलने की संभावना अधिक होती है.यह भी पढ़ें - NEET री एग्जाम पेपर लीक अफवाहें झूठी, NTA ने Telegram स्कैम पर दी चेतावनी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSC प्रिलिम्स 2026 पर बड़ा विवाद, 82 सवालों को लेकर NSUI ने उठाई जांच की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 को लेकर नया विवाद सामने आया है. NSUI ने आरोप लगाया है कि परीक्षा में पूछे गए कई सवाल पहले से उपलब्ध एक कोचिंग संस्थान की स्टडी सामग्री से मिलते-जुलते दिखाई दिए हैं. संगठन ने इस मामले पर UPSC से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है. इस मुद्दे के सामने आने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है.
क्या है पूरा मामला
NSUI के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा में शामिल कुछ प्रश्न एक कोचिंग संस्थान के अध्ययन नोट्स से काफी हद तक मेल खाते दिखाई दिए. संगठन का दावा है कि ऐसे कुल 82 प्रश्नों में समानता देखी गई है. इसी आधार पर संगठन ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि मामले की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए.हालांकि अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आरोप सामने आने के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है सोशल मीडिया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले समूहों में भी इस विषय पर बहस देखने को मिल रही है.
NSUI ने उठाई जांच की मांग
छात्र संगठन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। संगठन का मानना है कि यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना जरूरी है ताकि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे.NSUI ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में समय पर जवाब और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाना जरूरी होता है, जिससे छात्रों के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NEET यूजी री एग्जाम एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र इन बातों का रखें विशेष ध्यान, परीक्षा से पहले पढ़ लें जरूरी निर्देश
अभ्यर्थियों के बीच बढ़ी चर्चादेशभर से लाखों उम्मीदवार हर साल UPSC परीक्षा में शामिल होते हैं और इसे देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है.ऐसे में इस तरह के आरोप सामने आने के बाद अभ्यर्थियों के बीच चर्चा तेज हो गई है. कई उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित कदमों का इंतजार कर रहे हैं.कुछ छात्रों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट जानकारी जल्द जारी की जानी चाहिए ताकि परीक्षा से जुड़ी विश्वसनीयता पर असर न पड़े और अभ्यर्थियों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान हो सके.
परीक्षा की पारदर्शिता पर फिर शुरू हुई बहसप्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है. किसी भी परीक्षा को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर लाखों उम्मीदवारों की तैयारी और भविष्य से जुड़े होते हैं. इसलिए ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर जांच और आधिकारिक जानकारी को अहम माना जाता है.
आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजारफिलहाल इस मामले को लेकर UPSC की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है.आने वाले समय में आयोग की प्रतिक्रिया और संभावित जांच प्रक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है. फिलहाल अभ्यर्थियों और शिक्षा जगत की नजर आगे आने वाले आधिकारिक अपडेट पर बनी हुई है.यह भी पढ़ें - NEET UG री-एग्जाम देने वाले छात्रों को मिलेगी मुफ्त बस सेवा; सरकार का बड़ा फैसला ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPSC, प्रिलिम्स, 2026, पर, बड़ा, विवाद, सवालों, को, लेकर, NSUI, ने, उठाई, जांच, की, मांग</media:keywords>
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        <title>उत्तर प्रदेश बीएड रिजल्ट 2026 जारी, अलीगढ़ की वन्दना सिंह बनीं यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा की टॉपर</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/उत्तर-प्रदेश-बीएड-रिजल्ट-2026-जारी-अलीगढ़-की-वन्दना-सिंह-बनीं-यूपी-बीएड-प्रवेश-परीक्षा-की-टॉपर</guid>
        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. इस परीक्षा में अलीगढ़ की वन्दना सिंह ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी की ओर से आयोजित परीक्षा में चार लाख से अधिक अभ्यर्थियों को रैंक जारी की गई है.उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 का रिजल्ट आज &amp;nbsp;डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में जारी किया गया.इस दौरान टॉप करने वाले अभ्यर्थियों से उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और अधिकारियों ने वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर उन्हें शुभकामनाएं दीं.उच्च शिक्षा मंत्री ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने परीक्षा के सफल आयोजन के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी की टीम को भी बधाई दी.
72 जिलों के 1011 केंद्रों पर हुई परीक्षा
उत्तर प्रदेश शासन ने बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 कराने की जिम्मेदारी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को दी थी. परीक्षा 31 मई 2026 को प्रदेश के 72 जिलों के 1011 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई.परीक्षा दो पालियों में हुई. पहली पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की गई.इस परीक्षा के लिए कुल 4,44,958 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें 2,72,659 महिलाएं, 1,72,297 पुरुष और 2 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी शामिल थे.परीक्षा में 90 प्रतिशत रही उपस्थिति

बीएड प्रवेश परीक्षा में पहली पाली में 4,00,499 और दूसरी पाली में 4,00,756 अभ्यर्थी शामिल हुए. परीक्षा में कुल उपस्थिति लगभग 90 प्रतिशत रही.
कासगंज और पीलीभीत जिलों में सबसे ज्यादा 95 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में 84 प्रतिशत उपस्थिति रही.

AI और बायोमेट्रिक से हुई निगरानी
परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया. सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव निगरानी के लिए हाईटेक कमांड कंट्रोल रूम बनाया गया.परीक्षा केंद्रों पर 22 हजार से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए.इसके अलावा 5651 बायोमेट्रिक मशीनों से अभ्यर्थियों की पहचान की गई. फेस रिकॉग्निशन और फिंगर प्रिंट के जरिए उपस्थिति दर्ज की गई. परीक्षा के दौरान अनुचित साधन का इस्तेमाल करने वाले चार अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द कर दिया गया.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NEET यूजी री एग्जाम एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र इन बातों का रखें विशेष ध्यान, परीक्षा से पहले पढ़ लें जरूरी निर्देश
चार लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों को मिली रैंकओएमआर शीट की डबल स्कैनिंग और इमेज स्कैनिंग के आधार पर रिजल्ट तैयार किया गया. कुल 4,00,107 अभ्यर्थियों को रैंक जारी की गई. इनमें 1,53,612 पुरुष, 2,46,494 महिला और एक ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी शामिल हैं.अलीगढ़ की वन्दना सिंह ने किया टॉपबीएड प्रवेश परीक्षा 2026 में अलीगढ़ की वन्दना सिंह ने विज्ञान वर्ग से प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया.अलीगढ़ के नितिन पचौरी ने दूसरा स्थान और जौनपुर की मिश्रा खुशी अजय ने तीसरा स्थान प्राप्त किया.टॉप 10 में चार पुरुष और छह महिला अभ्यर्थियों ने जगह बनाई.
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने बनाया नया रिकॉर्डपरीक्षा में तकनीक के इस्तेमाल और बेहतर व्यवस्था के कारण बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने पारदर्शी और नकलविहीन परीक्षा संचालन का नया उदाहरण पेश किया है.
यह भी पढ़ें - UPSC प्रिलिम्स 2026 पर बड़ा विवाद, 82 सवालों को लेकर NSUI ने उठाई जांच की मांग ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>उत्तर, प्रदेश, बीएड, रिजल्ट, 2026, जारी, अलीगढ़, की, वन्दना, सिंह, बनीं, यूपी, बीएड, प्रवेश, परीक्षा, की, टॉपर</media:keywords>
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        <title>NCERT की नई किताब में बदली दिखी सिंधु घाटी सभ्यता की ‘डांसिंग गर्ल’, तस्वीर पर छिड़ी बहस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ncert-की-नई-किताब-में-बदली-दिखी-सिंधु-घाटी-सभ्यता-की-डांसिंग-गर्ल-तस्वीर-पर-छिड़ी-बहस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ncert-की-नई-किताब-में-बदली-दिखी-सिंधु-घाटी-सभ्यता-की-डांसिंग-गर्ल-तस्वीर-पर-छिड़ी-बहस</guid>
        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नई कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध &amp;lsquo;डांसिंग गर्ल&amp;rsquo; प्रतिमा की बदली हुई तस्वीर को लेकर इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा शुरू हो गई है. यह प्रतिमा भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्रसिद्ध पुरातात्विक खोजों में से एक मानी जाती है और हजारों वर्षों पुरानी कला विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है.
यह तस्वीर NCERT की नई कला शिक्षा पुस्तक &amp;lsquo;मधुरिमा&amp;rsquo; में प्रकाशित की गई है. पुस्तक के पहले अध्याय &amp;lsquo;कला का इतिहास&amp;rsquo; में शामिल इस चित्र में प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा का स्वरूप मूल प्रतिमा से कुछ अलग दिखाई देता है. विशेष रूप से प्रतिमा के ऊपरी हिस्से में बदलाव देखने को मिला है, जिसने विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है.
क्या है &amp;lsquo;डांसिंग गर्ल&amp;rsquo; प्रतिमा?
दरअसल, सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो से मिली &amp;lsquo;डांसिंग गर्ल&amp;rsquo; प्रतिमा लगभग 4,000 वर्ष पुरानी मानी जाती है. यह कांस्य से निर्मित एक छोटी मूर्ति है, जो अपनी कलात्मकता, आत्मविश्वास से भरी मुद्रा और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. इतिहास और पुरातत्व से जुड़ी पुस्तकों में इसे अक्सर उसी मूल स्वरूप में प्रकाशित किया जाता है, जिसमें यह खोजी गई थी.
हालांकि NCERT की नई पुस्तक में प्रकाशित तस्वीर में प्रतिमा के धड़ (टॉर्सो) वाले हिस्से को छायांकित या ढका हुआ दिखाया गया है. मूल प्रतिमा में दिखाई देने वाले शारीरिक विवरण इस तस्वीर में नजर नहीं आते. इसके कारण प्रतिमा को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो वह कोई परिधान पहने हुए हो.
क्या बोले NCERT के डायरेक्टर?
इस बदलाव के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और शैक्षणिक जगत में इस पर चर्चा शुरू हो गई है. कई इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों को उनके मूल स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों को सही और प्रामाणिक जानकारी मिल सके. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह केवल एक कलात्मक प्रस्तुति हो सकती है और इसे किसी बड़े विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
मामले में NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी का कहना है कि प्रतिमा के धड़ को ढकने के पीछे कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है. उन्होंने कहा कि इस विषय को कला एवं शिक्षा विभाग के पास भेजा गया है, जो इस पुस्तक के निर्माण के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अधिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक विकास टीम से संपर्क किया जा सकता है.
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प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
NCERT की ओर से अभी तक इस बदलाव को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर में किया गया परिवर्तन तकनीकी कारणों से हुआ या फिर यह पुस्तक की डिजाइन प्रक्रिया का हिस्सा था.
&amp;lsquo;डांसिंग गर्ल&amp;rsquo; प्रतिमा भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में गिनी जाती है. 1920 के दशक में मोहनजोदड़ो से मिली यह प्रतिमा सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत कला और धातु शिल्प तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है. आज भी यह प्रतिमा भारत और दक्षिण एशिया की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG 2026 Refund: गलत बैंक डिटेल भरने वाले उम्मीदवारों को मिलेगा सुधार का एक और मौका, NTA ने जारी की नई जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 परीक्षा की प्रक्रिया के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने फीस रिफंड को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है.एजेंसी ने बताया है कि जिन उम्मीदवारों को रिफंड मिलना है, उनकी राशि केवल उसी बैंक खाते में भेजी जाएगी जिसकी जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज और सत्यापित होगी.इसके साथ ही उन छात्रों को राहत दी गई है जिन्होंने बैंक डिटेल भरते समय गलती कर दी थी.ऐसे उम्मीदवारों को परीक्षा के बाद सुधार का एक और अवसर दिया जाएगा.
रिफंड के लिए सही बैंक डिटेल देना क्यों जरूरी है
NTA के अनुसार रिफंड प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और सुरक्षित तरीके से पूरी की जाएगी.ऐसे में उम्मीदवारों के लिए यह जरूरी है कि उनके द्वारा दर्ज किया गया बैंक खाता सक्रिय और सही हो. यदि खाते की जानकारी गलत दर्ज हो जाती है तो रिफंड की प्रक्रिया में देरी हो सकती है या भुगतान अटक सकता है.एजेंसी ने कहा है कि रिफंड केवल उसी खाते में भेजा जाएगा जो उम्मीदवार के नाम से जुड़ा हो और पोर्टल पर सफलतापूर्वक सत्यापित किया गया हो. इसलिए छात्रों को अपनी जानकारी दोबारा जांच लेने की सलाह दी गई है.
उम्मीदवार ऐसे करें बैंक डिटेल की जांचएनटीए ने छात्रों को सुझाव दिया है कि वे आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी जांच लें.इसके लिए आवेदन संख्या और पासवर्ड या जन्म तिथि के जरिए लॉगिन किया जा सकता है.लॉगिन करने के बाद उम्मीदवार बैंक वेरिफिकेशन सेक्शन में जाकर बैंक खाता संख्या, IFSC कोड और खाताधारक के नाम की जांच कर सकते हैं. अगर किसी भी जानकारी में गलती दिखती है तो उसे समय रहते सुधारना जरूरी होगा.
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गलत जानकारी भरने वालों को मिलेगा अतिरिक्त मौका
कई उम्मीदवारों की तरफ से बैंक डिटेल अपडेट और वेरिफिकेशन में दिक्कतों की शिकायत सामने आने के बाद एजेंसी ने नया फैसला लिया है. NTA ने कहा है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद एक अतिरिक्त सुधार विंडो उपलब्ध कराई जाएगी.इस सुविधा के जरिए वे छात्र अपनी जानकारी अपडेट कर सकेंगे जिन्होंने गलती से गलत बैंक अकाउंट दर्ज कर दिया है या जिनकी जानकारी किसी तकनीकी कारण से सत्यापित नहीं हो सकी. इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी छात्र को केवल डेटा एंट्री की गलती की वजह से रिफंड से वंचित न होना पड़े.
छात्रों की चिंताओं के बाद लिया गया फैसला
हाल के दिनों में कई छात्रों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से रिफंड प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे. उम्मीदवारों का कहना था कि अगर बैंक डिटेल गलत हो गई तो क्या रिफंड नहीं मिलेगा. इन सवालों को ध्यान में रखते हुए एजेंसी ने स्पष्ट किया कि पात्र उम्मीदवारों को सुधार का अवसर दिया जाएगा ताकि उनकी राशि सुरक्षित तरीके से सही खाते तक पहुंच सके.
साइबर फ्रॉड से रहें सावधान
रिफंड प्रक्रिया के साथ ही NTA ने साइबर सुरक्षा को लेकर भी चेतावनी जारी की है. एजेंसी ने कहा है कि कुछ लोग रिफंड जल्दी दिलाने या बैंक वेरिफिकेशन कराने के नाम पर उम्मीदवारों को ठगने की कोशिश कर सकते हैं.छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, SMS, ईमेल या सोशल मीडिया लिंक पर भरोसा न करें. आधिकारिक जानकारी केवल संबंधित पोर्टल से ही लें.एजेंसी ने साफ कहा है कि NTA कभी भी उम्मीदवारों से OTP, पासवर्ड, UPI PIN या किसी तरह की भुगतान संबंधी जानकारी नहीं मांगता.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, Refund:, गलत, बैंक, डिटेल, भरने, वाले, उम्मीदवारों, को, मिलेगा, सुधार, का, एक, और, मौका, NTA, ने, जारी, की, नई, जानकारी</media:keywords>
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        <title>Upsc ने जारी किया प्रीलिम्स रिजल्ट, ऐसे करें डायरेक्ट चेक, इतने हुए पास</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsc-ने-जारी-किया-प्रीलिम्स-रिजल्ट-ऐसे-करें-डायरेक्ट-चेक-इतने-हुए-पास</link>
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        <description><![CDATA[ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (CSE Prelims) 2026 का रिजल्ट इस अपनी आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जारी कर दिया है. यह परीक्षा 24 मई 2026 को पूरे देश में आयोजित की गई थी. इस परीक्षा के जरिए करीब 933 पदों पर भर्ती की जानी है, जिसके लिए कुल 8,19,372 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था.
इतने उम्मीदवारों ने कराया था रजिस्ट्रेशन
UPSC CSE 2026 प्रीलिम्स के लिए कुल 8,19,372 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन 24 मई को हुई परीक्षा में करीब 2.70 लाख उम्मीदवार शामिल ही नहीं हुए. यानी लगभग 67% ही उपस्थिति दर्ज हुई, जो पिछले सालों के ट्रेंड के मुताबिक ही है.
दरअसल, UPSC में आवेदन करना काफी सस्ता होता है. जनरल कैटेगरी के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क सिर्फ ₹100 है. इसी वजह से कई लोग बिना पूरी तैयारी के भी फॉर्म भर देते हैं. यही कारण है कि हर साल रजिस्ट्रेशन करने वालों और परीक्षा देने वालों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है.
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सफल अभ्यर्थी अब क्या करें?
रिजल्ट में उन उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए गए हैं, जिन्हें अब UPSC मेन्स परीक्षा 2026 के लिए चुना गया है. UPSC प्रीलिम्स परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित हुई थी. सफल अभ्यर्थियों को अब निर्धारित समय सीमा के अंदर Detailed Application Form (DAF) भरना होगा और मेन्स परीक्षा की तैयारी शुरू करनी होगी.
UPSC CSE Prelims Result 2026 ऑनलाइन ऐसे करें चेक
पहले यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर, UPSC CSE Prelims Result 2026 लिंक पर क्लिक करें.
फिर रजिस्ट्रेशन नंबर और रोल नंबर दर्ज करें.
इसके बाद रिजल्ट पीडीएफ स्क्रीन पर दिखाई देने लगेगा
अब इसे डाउनलोड करें और अपना रोल नंबर Ctrl + F दबाकर खोज लें.
अभ्यर्थी UPSC की वेबसाइट https://www.upsc.gov.in/ &amp;nbsp;पर जाकर &amp;ldquo;Civil Services (Preliminary) Examination, 2026 Result&amp;rdquo; लिंक के माध्यम से रिजल्ट PDF डाउनलोड कर सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Upsc, ने, जारी, किया, प्रीलिम्स, रिजल्ट, ऐसे, करें, डायरेक्ट, चेक, इतने, हुए, पास</media:keywords>
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        <title>NEET यूजी री एग्जाम एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र इन बातों का रखें विशेष ध्यान, परीक्षा से पहले पढ़ लें जरूरी निर्देश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-यूजी-री-एग्जाम-एडमिट-कार्ड-जारी-होने-के-बाद-छात्र-इन-बातों-का-रखें-विशेष-ध्यान-परीक्षा-से-पहले-पढ़-लें-जरूरी-निर्देश</link>
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        <description><![CDATA[ NEET परीक्षा में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए एडमिट कार्ड जारी होने के बाद तैयारी का आखिरी चरण शुरू हो जाता है. इस समय कई छात्र सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देते हैं, लेकिन परीक्षा से जुड़ी छोटी-छोटी तैयारियां भी उतनी ही जरूरी होती हैं. समय पर पहुंचना, एडमिट कार्ड की जानकारी जांचना और जरूरी दस्तावेज तैयार रखना परीक्षा के दिन होने वाली परेशानियों से बचा सकता है.
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद क्या करें
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद सबसे पहले उसमें दी गई जानकारी ध्यान से पढ़ लें. नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य जरूरी विवरण सही हैं या नहीं, इसकी जांच कर लें. अगर कोई जानकारी समझ में नहीं आती या किसी तरह की गलती दिखती है तो आधिकारिक सूचना जरूर देखें. साथ ही एडमिट कार्ड की प्रिंट कॉपी पहले से तैयार रख लें ताकि अंतिम समय में दिक्कत न हो.
परीक्षा के दिन समय का रखें ध्यान
परीक्षा के दिन जल्दबाजी से बचना जरूरी होता है. छात्र पहले से तय कर लें कि परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कितना समय लगेगा. देर होने पर तनाव बढ़ सकता है और तैयारी पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए परीक्षा वाले दिन थोड़ा पहले निकलना बेहतर माना जाता है.
जरूरी चीजें पहले से रखें तैयार
परीक्षा वाले दिन बार-बार सामान ढूंढने से बचने के लिए एक दिन पहले ही जरूरी दस्तावेज और अन्य आवश्यक चीजें तैयार कर लें.इससे परीक्षा के दिन फोकस बना रहता है और अनावश्यक तनाव कम होता है.
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परीक्षा से पहले खुद को रखें शांतआखिरी समय में नए टॉपिक शुरू करने के बजाय पहले पढ़े हुए विषयों को दोहराना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. पर्याप्त नींद लें और अपनी दिनचर्या सामान्य रखें. परीक्षा के दिन शांत दिमाग और आत्मविश्वास के साथ जाना बेहतर प्रदर्शन में मदद कर सकता है.
सोशल मीडिया की हर खबर पर भरोसा न करें.
पिछले समय में परीक्षाओं को लेकर कई तरह की अफवाहें और कथित पेपर लीक जैसी खबरें सोशल मीडिया पर चर्चा में रही हैं. ऐसे में छात्र किसी भी वायरल पोस्ट, मैसेज या अन-ऑफिशियल अपडेट पर तुरंत भरोसा न करें.अगर परीक्षा, एडमिट कार्ड या किसी नए निर्देश को लेकर कोई जानकारी मिलती है तो पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जरूर जांच लें कि ऐसा कोई अपडेट जारी हुआ है या नहीं. सही और भरोसेमंद जानकारी के आधार पर ही अपनी तैयारी जारी रखें.
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, यूजी, री, एग्जाम, एडमिट, कार्ड, जारी, होने, के, बाद, छात्र, इन, बातों, का, रखें, विशेष, ध्यान, परीक्षा, से, पहले, पढ़, लें, जरूरी, निर्देश</media:keywords>
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        <title>कॉलेज डिग्री का निकल रहा दम! 5 लाख की सैलरी तक भी नहीं पहुंच पा रहे 60% ग्रेजुएट्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कॉलेज-डिग्री-का-निकल-रहा-दम-5-लाख-की-सैलरी-तक-भी-नहीं-पहुंच-पा-रहे-60-ग्रेजुएट्स</link>
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        <description><![CDATA[ कॉलेज डिग्री का निकल रहा दम! 5 लाख की सैलरी तक भी नहीं पहुंच पा रहे 60% ग्रेजुएट्स ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कॉलेज, डिग्री, का, निकल, रहा, दम, लाख, की, सैलरी, तक, भी, नहीं, पहुंच, पा, रहे, 60, ग्रेजुएट्स</media:keywords>
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        <title>UP School Reopen 2026: गर्मी की छुट्टियां खत्म,उत्तर प्रदेश के स्कूलों में कल से लौटेगी रौनक</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है. लंबे गर्मी अवकाश के बाद अब राज्य में स्कूलों का संचालन फिर से शुरू होने जा रहा है.कल &amp;nbsp;से छात्र-छात्राएं दोबारा अपनी कक्षाओं में लौटेंगे और नियमित पढ़ाई शुरू होगी. इस बार प्रदेश में तेज गर्मी को देखते हुए छुट्टियों का समय तय किया गया था ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके. अब छुट्टियां समाप्त होने के बाद स्कूलों में नया शैक्षणिक क्रम फिर से गति पकड़ने वाला है.
कल से फिर शुरू होगी स्कूलों की पढ़ाई
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष गर्मी की छुट्टियां मई के दौरान शुरू हुई थीं और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अब स्कूल दोबारा खोले जा रहे हैं. छुट्टियों के दौरान छात्र घर पर रहकर आराम करने के साथ अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में जुड़े रहे.अब नए शैक्षणिक चरण की शुरुआत के साथ बच्चे फिर से नियमित रूप से स्कूल पहुंचेंगे.स्कूल खुलने के बाद कक्षाएं पहले की तरह संचालित होंगी और छात्रों को दैनिक पढ़ाई की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा. शिक्षकों द्वारा भी शैक्षणिक कार्यक्रमों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी की गई है.
स्कूलों में बच्चों की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
स्कूलों को दोबारा शुरू करने से पहले आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है.स्कूल परिसरों में साफ-सफाई, पेयजल की उपलब्धता, बिजली व्यवस्था और छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया गया है.इसके साथ ही बच्चों के बैठने की व्यवस्था, परिसर की स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा भी की गई है ताकि स्कूल खुलने के बाद पढ़ाई बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके.
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भीषण गर्मी के बीच छात्रों को बरतनी होगी सावधानी
हालांकि कई क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;बच्चों को स्कूल जाते समय पानी की बोतल साथ रखने, मौसम के अनुसार हल्के कपड़े पहनने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है.
स्कूल खुलने के बाद फिर लौटेगा पढ़ाई का माहौलगर्मी की छुट्टियों के दौरान स्कूल गतिविधियां सीमित हो जाती हैं लेकिन स्कूल खुलने के साथ ही पढ़ाई फिर सामान्य गति से शुरू होगी. कक्षाएं, शैक्षणिक कार्यक्रम, प्रोजेक्ट कार्य और अन्य स्कूल गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी.स्कूल प्रशासन का उद्देश्य है कि छुट्टियों के बाद छात्रों को दोबारा पढ़ाई के माहौल से जोड़ा जाए और नए सत्र को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जाए.
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET री&amp;एग्जाम से पहले सर्वर पर बढ़ा दबाव, एडमिट कार्ड को लेकर NTA की बड़ी अपडेट</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/neet-री-एग्जाम-से-पहले-सर्वर-पर-बढ़ा-दबाव-एडमिट-कार्ड-को-लेकर-nta-की-बड़ी-अपडेट</guid>
        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी होने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को इसे डाउनलोड करने में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कुछ छात्रों को सर्वर और तकनीकी कारणों से परेशानी हो रही है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है.
एनटीए ने बताया कि 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली NEET UG री एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड 14 जून को जारी किए गए थे. एडमिट कार्ड जारी होने के बाद लाखों छात्र एक साथ आधिकारिक पोर्टल पर पहुंच गए, जिसके कारण वेबसाइट पर अस्थायी दबाव बढ़ गया. इसी वजह से कई उम्मीदवारों को सर्वर एरर, वेबसाइट का धीमा चलना, लॉगिन पेज का न खुलना और सेशन टाइमआउट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
एजेंसी के अनुसार, अब तक 4 लाख से अधिक उम्मीदवार सफलतापूर्वक अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं. हालांकि, कुछ अभ्यर्थियों को अभी भी पोर्टल तक पहुंचने या एडमिट कार्ड प्राप्त करने में दिक्कत आ रही है. NTA ने भरोसा दिलाया है कि सभी पात्र उम्मीदवारों को समय पर एडमिट कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे.
NTA ने की अपीलNTA ने छात्रों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर अपडेट चेक करते रहें. एजेंसी का कहना है कि तकनीकी टीम लगातार सर्वर क्षमता बढ़ाने और पोर्टल को सुचारु बनाने के लिए काम कर रही है.
21 जून को होने वाली NEET UG री-एग्जाम दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएगी. परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड की प्रिंटेड कॉपी और एक वैध फोटो पहचान पत्र साथ लेकर जाना अनिवार्य होगा. बिना एडमिट कार्ड किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा.
एडमिट कार्ड पर क्या होता है?
एडमिट कार्ड में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र का पता, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए होते हैं. इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दर्ज सभी जानकारी ध्यान से जांच लें.
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इस बीच NTA ने बैंक वेरिफिकेशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण नियम की भी जानकारी दी है. एजेंसी के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों को पोर्टल पर बैंक खाते से संबंधित जानकारी अपडेट करनी पड़ सकती है. ऐसे मामलों में सर्वर लोड बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे प्रक्रिया में समय लग सकता है.
ये काम है बेहद जरूरी
NTA ने कहा है कि उम्मीदवार लॉगिन करने से पहले सभी जरूरी बैंक दस्तावेज और जानकारी अपने पास तैयार रखें. इससे वेरिफिकेशन प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सकेगी और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए उम्मीदवारों को बैंक रिकॉर्ड के अनुसार अपना पूरा नाम, बैंक खाता संख्या और कैंसिल चेक की कॉपी तैयार रखनी चाहिए. एजेंसी का कहना है कि सही और सटीक जानकारी देने से आगे की प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी.
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>एक साल में कितने IAS बनाता है UPSC, कब&amp;कब होता है इसका एग्जाम?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी कभी यह सोचते हैं कि आखिर यूपीएससी हर साल कितने आइएएस अधिकारी बनाता है और इसकी परीक्षा कितनी बार होती है, तो यह जानकारी आपके काम की है. देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के जरिए हर साल लाखों उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन आखिर में बहुत कम लोगों को IAS बनने का मौका मिलता है.
एक साल में कितने IAS बनाता है यूपीएससी?
यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग हर साल सिविल सेवा परीक्षा (CSE) आयोजित करता है.इसी परीक्षा के जरिए IAS, IPS, IFS, IRS समेत कई बड़ी सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है.आमतौर पर हर साल करीब 175 से 180 उम्मीदवारों को IAS सेवा के लिए चुना जाता है. हालांकि कुल सिविल सेवा सीटों की संख्या हर साल बदल सकती है, लेकिन IAS की संख्या लंबे समय से लगभग इसी स्तर पर बनी हुई है.इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ 180 लोग ही परीक्षा पास करते हैं. पहले सभी सेवाओं के लिए उम्मीदवार चुने जाते हैं और फिर रैंक, पसंद और उपलब्ध सीटों के हिसाब से सेवाएं बांटी जाती हैं.
IAS बनने के लिए अलग परीक्षा नहीं होती
कई लोग मानते हैं कि IAS बनने के लिए अलग से एग्जाम देना पड़ता है, लेकिन ऐसा नहीं है. IAS बनने के लिए उम्मीदवार को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देना होता है. परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को उनकी रैंक के आधार पर अलग-अलग सेवाएं मिलती हैं. सबसे ऊंची रैंक पाने वाले उम्मीदवारों को अक्सर IAS सेवा मिलने की संभावना ज्यादा रहती है.
यूपीएससी का एग्जाम कब होता है?
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा साल में एक बार आयोजित की जाती है और यह तीन चरणों में पूरी होती है.

पहला चरण &amp;ndash; प्रीलिम्स (Prelims)- यह परीक्षा का शुरुआती चरण होता है। इसमें ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाते हैं. इस चरण को पास करने वाले उम्मीदवार ही अगले चरण में पहुंचते हैं.
दूसरा चरण &amp;ndash; मेंस (Mains)- यह लिखित परीक्षा होती है जिसमें उम्मीदवार की विषय समझ, विश्लेषण क्षमता और लिखने की योग्यता देखी जाती है.
तीसरा चरण &amp;ndash; इंटरव्यू (Personality Test)-&amp;nbsp;अंतिम चरण में उम्मीदवार की सोच, व्यक्तित्व, निर्णय लेने की क्षमता और प्रशासनिक समझ को परखा जाता है.

तीनों चरण पूरे होने के बाद अंतिम मेरिट सूची जारी की जाती है और उसी आधार पर सेवाओं का आवंटन किया जाता है.
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प्रतियोगिता कितनी कठिन होती है?
यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है.हर साल लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं लेकिन अंतिम चयन सीमित सीटों पर ही होता है.यही वजह है कि इस परीक्षा में सफलता के लिए सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि सही रणनीति, नियमित अभ्यास और लंबे समय तक लगातार मेहनत की जरूरत होती है.
तैयारी कब शुरू करनी चाहिए?
अगर आपका लक्ष्य IAS बनना है तो तैयारी जल्दी शुरू करना बेहतर माना जाता है.सबसे पहले परीक्षा का सिलेबस समझें, बेसिक किताबें पढ़ें, करंट अफेयर्स पर ध्यान दें और नियमित उत्तर लेखन का अभ्यास करें.
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>एक, साल, में, कितने, IAS, बनाता, है, UPSC, कब-कब, होता, है, इसका, एग्जाम</media:keywords>
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        <title>DU COL Admission 2026: DU में फॉरेन लैंग्वेज सीखने का सुनहरा मौका, प्रोफेशनल कोर्सेज में शुरू हुए एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ DU COL Admission 2026 : दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग (COL) ने फॉरेन लैंग्वेज और कई प्रोफेशनल कोर्सेज में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इन कोर्सेज में स्टूडेंट्स के साथ-साथ नौकरी करने वाले लोग भी आवेदन कर सकते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई कर सकते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी का यह कदम उन छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो रेगुलर कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाते लेकिन नई लैंग्वेज सीखकर या प्रोफेशनल डिग्री हासिल कर अपने करियर को मजबूत बनाना चाहते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं, आवेदन की आखिरी तारीख क्या है और अप्लाई करने का तरीका क्या होगा.&amp;nbsp;
किन फॉरेन लैंग्वेज के कोर्स में मिल रहा है एडमिशन?
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग (COL) ने एक साले के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्सेज में एडमिशन शुरू किए हैं. इन कोर्सेज के तहत छात्र कई फेमस फॉरेन लैंग्वेज सीख सकेंगे. इनमें शामिल भाषाएं जर्मन (German), फ्रेंच (French), स्पेनिश (Spanish), इटालियन (Italian), पुर्तगाली (Portuguese), चीनी (Chinese), जापानी (Japanese) और कोरियन (Korean) हैं. इन कोर्सेज का संचालन दिल्ली यूनिवर्सिटी के जर्मेनिक एंड रोमांस स्टडीज विभाग और ईस्ट एशियन स्टडीज विभाग के सहयोग से किया जाएगा.&amp;nbsp;
अब ऑनलाइन भी सीख सकेंगे फॉरेन लैंग्वेज
COL की निदेशक प्रोफेसर के अनुसार, ओपन लर्निंग डेवलपमेंट सेंटर (OLDC) जल्द ही इन फॉरेन लैंग्वेज कार्यक्रमों को ऑनलाइन मोड में भी शुरू करेगा. इससे देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले छात्र भी घर बैठे इन कोर्सेज में एडमिशन लेकर पढ़ाई कर सकेंगे. ऑनलाइन सुविधा शुरू होने से उन लोगों को भी फायदा मिलेगा, जो नौकरी के कारण नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते हैं.&amp;nbsp;
रूसी भाषा के कोर्स भी होंगे शुरू
दिल्ली यूनिवर्सिटी अपनी भाषा शिक्षा का दायरा और बढ़ाने जा रही है. यूनिवर्सिटी जल्द ही रूसी भाषा (Russian) में भी एक साल के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू करेगा. इन कार्यक्रमों को यूनिवर्सिटी के स्लावोनिक और फिनो-उग्रियन स्टडीज विभाग के सहयोग से शुरू किया जाएगा. &amp;nbsp;रूसी भाषा के ये कोर्स क्लासरूम और ऑनलाइन, दोनों माध्यमों में उपलब्ध होंगे.&amp;nbsp;
इन प्रोफेशनल कोर्सेज में भी मिलेगा एडमिशन&amp;nbsp;
फॉरेन लैंग्वेज कार्यक्रमों के अलावा कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के तहत कई प्रोफेशनल कोर्सेज में भी एडमिशन शुरू किए जा रहे हैं. इन कोर्सेज के लिए आवेदन प्रक्रिया 17 जून 2026 से शुरू होगी. इनमें शामिल प्रमुख कोर्स मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA), मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (MLISc), बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (BLISc) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एडवरटाइजिंग एंड डिजिटल मीडिया लीडरशिप (PGDADLM) हैं.&amp;nbsp;
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आवेदन कब से शुरू हुए और आखिरी तारीख क्या है?
फॉरेन लैंग्वेज कोर्सेज के लिए आवेदन प्रक्रिया 11 जून 2026 से शुरू हो चुकी है.उम्मीदवार 10 जुलाई 2026 की रात 12 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. ऐसे में छात्रों को सलाह दी जाती है कि लास्ट डेट का इंतजार न करें और समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें.&amp;nbsp;
कैसे करें अप्लाई?
अगर आप इन कोर्सेज में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो इसके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की आधिकारिक एडमिशन वेबसाइट https://cifl.oldcdu.ac.in/ पर जाना होगा. वहां जाकर उम्मीदवार पात्रता, फीस, जरूरी डॉक्यूमेंट, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके बाद ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरकर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Free UPSC Coaching 2026: UPSC की फ्री कोचिंग का सुनहरा मौका, हॉस्टल सुविधा के साथ 19 जून तक बढ़ी लास्ट डेट, ऐसे करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ Free UPSC Coaching 2026: अगर आप UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन महंगी कोचिंग और रहने का खर्च आपके लिए परेशानी बन रहा है तो यह नई अपडेट आपके लिए किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है. हज कमेटी ऑफ इंडिया ने हज हाउस रेजिडेंशियल कोचिंग इंस्टीट्यूट (HHRCI) में फ्री UPSC कोचिंग के लिए आवेदन की लास्ट डेट बढ़ा दी है. अब उम्मीदवार 19 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
खास बात यह है कि चयनित छात्रों को न सिर्फ फ्री कोचिंग मिलेगी, बल्कि हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. यह कोचिंग कार्यक्रम उन अभ्यर्थियों के लिए शुरू किया गया है, जो साल 2027 की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं. ऐसे में अगर आप भी IAS, IPS या अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में जाने का सपना देख रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि UPSC की फ्री कोचिंग के लिए कैसे अप्लाई करें.&amp;nbsp;
19 जून तक कर सकते हैं आवेदन
हज कमेटी ऑफ इंडिया की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 19 जून 2026 कर दी गई है. इससे पहले आवेदन की लास्ट डेट अलग तय की गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे आगे बढ़ाया गया है. उम्मीदवारों को आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. आवेदन के दौरान 100 रुपये का नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग शुल्क भी जमा करना होगा.&amp;nbsp;
किसे मिलेगा फ्री कोचिंग का फायदा?
हज हाउस रेजिडेंशियल कोचिंग इंस्टीट्यूट (HHRCI) का संचालन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अंतर्गत हज कमेटी ऑफ इंडिया के तहत किया जाता है. यह कार्यक्रम मुख्य रूप से UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2027 की तैयारी करने वाले योग्य अभ्यर्थियों के लिए है. इस योजना का फायदा मुस्लिम अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के अलावा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के पात्र उम्मीदवार भी उठा सकते हैं. इसके तहत SC, ST और OBC वर्ग के योग्य अभ्यर्थी भी आवेदन करने के पात्र हैं.&amp;nbsp;
कुल कितनी सीटें हैं?
इस रेजिडेंशियल कोचिंग कार्यक्रम में कुल 100 सीटें उपलब्ध हैं. 80 प्रतिशत सीटें मुस्लिम अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं और 20 प्रतिशत सीटें अन्य अल्पसंख्यक समुदायों साथ ही SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए तय की गई हैं. चयनित सभी उम्मीदवारों के लिए हॉस्टल में रहना जरूरी होगा.&amp;nbsp;
कब होगी प्रवेश परीक्षा?
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, प्रवेश परीक्षा का आयोजन 28 जून 2026 को किया जाएगा. यह परीक्षा देशभर के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी. प्रवेश परीक्षा में तीन पेपर शामिल होंगे. जिसमें जनरल स्टडीज (General Studies), सीसैट (CSAT) और निबंध (Essay) शामिल है.&amp;nbsp;
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कब आएंगे रिजल्ट?
हज कमेटी के जारी संभावित शेड्यूल के अनुसार, लिखित परीक्षा का परिणाम 10 जुलाई 2026 को जारी किया जा सकता है. इसके बाद 20 जुलाई 2026 से पर्सनैलिटी टेस्ट आयोजित किए जाएंगे. लास्ट चयन परिणाम 25 जुलाई 2026 को घोषित होने की संभावना है. हालांकि इन तारीखों में जरूरत पड़ने पर बदलाव भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
देशभर के इन शहरों में होगी परीक्षा
प्रवेश परीक्षा देश के 20 शहरों में आयोजित की जाएगी, जिससे अलग-अलग राज्यों के उम्मीदवार आसानी से इसमें शामिल हो सकें. इसके लिए &amp;nbsp;दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, पटना, जयपुर, लखनऊ, श्रीनगर और भोपाल समेत अन्य शहर में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे.
ऐसे करें आवेदन
अगर आप इस फ्री UPSC कोचिंग कार्यक्रम का फायदा उठाना चाहते हैं, तो हज कमेटी ऑफ इंडिया के आधिकारिक पोर्टल https://www.hajcommittee.gov.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करते समय ऑनलाइन आवेदन फॉर्म सावधानी से भरें. साथ ही जरूरी डॉक्यूमेंट्स पहले से तैयार रखें. 100 रुपये की प्रोसेसिंग फीस जमा करें और आवेदन की लास्ट डेट 19 जून 2026 से पहले प्रक्रिया पूरी कर लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 Re&amp;Exam: NEET री&amp;एग्जाम का पेपर फिर लीक? टेलीग्राम पर वायरल दावे की PIB ने खोली पोल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 Re-Exam : NEET UG 2026 री-एग्जाम से ठीक पहले सोशल मीडिया पर एक बार फिर पेपर लीक की अफवाह ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक क्वेशचन पेपर की फोटो तेजी से वायरल होने लगी, जिसके बाद कई लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि NEET री-टेस्ट का पेपर फिर से लीक हो गया है. देखते ही देखते इंटरनेट पर यह चर्चा का विषय बन गया और स्टू़डेंट्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई.
हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए वायरल दावे को पूरी तरह फर्जी करार दिया है. PIB ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसी फेक जानकारी पर भरोसा न करें और परीक्षा से जुड़ी हर अपडेट सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें.&amp;nbsp;
कैसे शुरू हुआ पेपर लीक का यह दावा?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने टेलीग्राम ग्रुप में वायरल हो रही एक फोटो का स्क्रीनशॉट शेयर किया. फोटो में कथित तौर पर NEET क्वेशचन पेपर की बुकलेट दिखाई दे रही थी, जिसके ऊपर KAVERI लिखा हुआ था. इसके अलावा उसमें Proofs/Price और एक समय का उल्लेख भी दिखाई दे रहा था. बुकलेट पर कोड 23 और अंग्रेजी भाषा का जिक्र होने के कारण कई लोगों ने इसे असली क्वेशचन पेपर बताना शुरू कर दिया. इसके बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई.&amp;nbsp;

Claim: A question paper is being circulated on social media claiming that the NEET paper has been leaked again.⚠️This Claim is #fake.???? Candidates are advised not to trust, share, or rely on any unverified examination-related content.✅ For authentic updates and official&amp;hellip; pic.twitter.com/W1F3yRJUhp
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) June 13, 2026



सोशल मीडिया पर तेजी से फैली अफवाह
टेलीग्राम और X समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह स्क्रीनशॉट तेजी से शेयर किया जाने लगा. कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या NEET परीक्षा का पेपर एक बार फिर लीक हो गया है. बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के इस तरह की पोस्ट वायरल होने लगीं, जिससे री-एग्जाम की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के मन में भ्रम और तनाव पैदा हो गया.&amp;nbsp;
PIB फैक्ट चेक ने क्या कहा?
वायरल दावे पर सफाई देते हुए PIB Fact Check ने साफ कहा कि NEET री-टेस्ट पेपर लीक होने का दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक है. एजेंसी ने बताया कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही क्वेशचन पेपर की फोटो को गलत दावों के साथ पेश किया जा रहा है. PIB ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उम्मीदवार ऐसी किसी भी फेक जानकारी पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे शेयर करें, एजेंसी ने इस दावे को फेक करार देते हुए छात्रों से सतर्क रहने की अपील की.&amp;nbsp;
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छात्रों को क्या सलाह दी गई?
PIB फैक्ट चेक यूनिट ने NEET स्टू़डेंट्स से कहा है कि परीक्षा से संबंधित किसी भी सूचना के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और विश्वसनीय सरकारी स्रोतों का ही इस्तेमाल करें. अगर सोशल मीडिया पर कोई संदिग्ध या भ्रामक पोस्ट दिखाई देती है, तो उसकी सत्यता जांचे बिना उसे शेयर न करें. साथ ही ऐसी भ्रामक सामग्री की शिकायत भी संबंधित अधिकारियों को करने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
21 जून को होगा NEET UG 2026 री-एग्जाम
NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाना है. परीक्षा से पहले अफवाहों और गलत सूचनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है. बताया जा रहा है कि 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. ऐसे में छात्रों के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों से दूर रहें, अपनी तैयारी पर ध्यान दें और केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 री&amp;एग्जाम का एडमिट कार्ड जारी, इस डायरेक्ट लिंक से करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 Re-Exam Admit Card : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर एक बड़ा अपडेट दिया है. &amp;nbsp;NEET UG 2026 री-एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं. ये हॉल टिकट NTA की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर उपलब्ध हैं, जिन्हें छात्र अपने लॉगिन डिटेल्स की मदद से डाउनलोड कर सकते हैं. यह परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. ऐसे में सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि नियमित रूप से वेबसाइट चेक करते रहें और अपना एडमिट कार्ड समय पर डाउनलोड कर लें. &amp;nbsp;ऐसे में आइए जानते हैं कि NEET UG 2026 री-एग्जाम का एडमिट कार्ड किस डायरेक्ट लिंक से डाउनलोड करें.&amp;nbsp;
NEET UG री-एग्जाम एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें?
1. NEET UG री-एग्जाम एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं.&amp;nbsp;
2. अब होमपेज पर NEET UG Re-Exam 2026 Admit Card लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
3. इसके बााद अपना एप्लिकेशन नंबर, जन्मतिथि और सिक्योरिटी पिन दर्ज करें.&amp;nbsp;
4. वहीं लॉगिन करने के बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखेगा.&amp;nbsp;
5. सभी जानकारी ध्यान से चेक करें.&amp;nbsp;
6. लास्ट में एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और उसका प्रिंट आउट निकाल लें.&amp;nbsp;

Admit Card for the Re-Examination (21 June 2026) is now live at https://t.co/vupfOoEkmHBefore downloading the admit card, please verify your Bank Account details for refund. Helpline: 011-40759000 / 011-69227700#NEET2026 #NTA pic.twitter.com/7nuGoOjDCL
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) June 14, 2026



एडमिट कार्ड में क्या जानकारी होगी?
NEET UG एडमिट कार्ड में उम्मीदवार से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी होती है, जैसे कि उसका नाम, रोल नंबर और जन्मतिथि. इसके साथ ही इसमें परीक्षा केंद्र का पूरा पता दिया होता है जिससे छात्र आसानी से वहां पहुंच सकें. एडमिट कार्ड में रिपोर्टिंग समय भी लिखा होता है, जिससे उम्मीदवार समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकें. इसके अलावा परीक्षा से जुड़े जरूरी निर्देश भी दिए होते हैं, जिन्हें ध्यान से पढ़ना और पालन करना जरूरी होता है जिससे परीक्षा के दिन किसी तरह की परेशानी न हो. NTA ने एडमिट कार्ड जारी करने से पहले अपने बैंक अकाउंट को वैरिफाई करने की भी सलाह दी है जिससे रिफंड में कोई दिक्कत न आए.
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NEET UG 2026 परीक्षा का शेड्यूल&amp;nbsp;
NEET UG 2026 परीक्षा के दिन उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखना होगा. परीक्षा केंद्र में प्रवेश सुबह 11:00 बजे से शुरू हो जाएगा, जबकि गेट दोपहर 1:30 बजे बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद किसी भी उम्मीदवार को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी, इसलिए समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है. अंतिम प्रवेश दोपहर 1:40 बजे तक ही होगा, उसके बाद एंट्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी. परीक्षा दोपहर 2.00 बजे से शाम 5.15 बजे तक आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
NTA ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया में किए ये बदलाव&amp;nbsp;
इस बार NTA ने परीक्षा प्रक्रिया में कुछ जरूरी बदलाव भी किए हैं. उम्मीदवारों को अब परीक्षा के लिए पहले की तुलना में ज्यादा समय मिलेगा, क्योंकि परीक्षा की अवधि बढ़ाकर 195 मिनट कर दी गई है. इसके अलावा छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रश्न पत्र में रफ वर्क के लिए चार पेज दिए जाएंगे. इनमें दो पेज शुरुआत में और दो पेज लास्ट में होंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, री-एग्जाम, का, एडमिट, कार्ड, जारी, इस, डायरेक्ट, लिंक, से, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>DRDO में इंटर्नशिप का सुनहरा मौका, 160 सीटों पर आवेदन शुरू, हर महीने मिलेंगे 5000 रुपये</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप इंजीनियरिंग या साइंस के छात्र हैं और पढ़ाई के दौरान किसी बड़े सरकारी रिसर्च संस्थान में काम करने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपने प्रमुख रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद में 6 महीने की पेड इंटर्नशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. आइए जानते हैं इसके लिए कैंडिडेट्स कैसे आवेदन कर सकते हैं और उन्हें कहां फॉर्म भेजना होगा.
इस इंटर्नशिप के जरिए छात्रों को डिफेंस रिसर्च, नई टेक्नोलॉजी और वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा. कुल 160 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं और चयन मेरिट व शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा.
कौन-कौन कर सकता है आवेदन?
इस इंटर्नशिप के लिए अंतिम वर्ष के छात्र आवेदन कर सकते हैं.इसमें बीटेक के 7वें और 8वें सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्र शामिल हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग और साइंस (फिजिक्स या केमिस्ट्री) में पोस्टग्रेजुएशन कर रहे उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं. उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त भारतीय संस्थान से पढ़ाई कर रहा होना चाहिए और उसका अकादमिक रिकॉर्ड अच्छा होना जरूरी है.
इन ब्रांच के छात्रों को आवेदन का मौका मिलेगा

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE)
AI और Machine Learning
साइबर सिक्योरिटी
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन
मैकेनिकल इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
मटेरियल्स / केमिकल इंजीनियरिंग
एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग
सेफ्टी इंजीनियरिंग

कितना मिलेगा स्टाइपेंड?
चयनित छात्रों को इंटर्नशिप के दौरान 5000 रुपये प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाएगा. इसके लिए महीने में कम से कम 15 कार्य दिवस उपस्थित रहना जरूरी होगा. स्टाइपेंड दो चरणों में जारी किया जाएगा पहला भुगतान 3 महीने पूरे होने के बाद और दूसरा 6 महीने की इंटर्नशिप पूरी होने पर मिलेगा. इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी करने वाले छात्रों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा. हालांकि रहने और खाने की व्यवस्था संस्थान की ओर से नहीं दी जाएगी.
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कैसे करें आवेदन?
इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित आवेदन फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑफलाइन आवेदन भेजना होगा. आवेदन के साथ मार्कशीट, पहचान पत्र, रेफरल लेटर और अन्य जरूरी दस्तावेज लगाने होंगे. इसके बाद आवेदन स्पीड पोस्ट के जरिए RCI हैदराबाद के पते पर भेजना होगा. लिफाफे पर &amp;ldquo;Application for Paid Internship&amp;rdquo; और संबंधित ब्रांच कोड लिखना जरूरी है.
आवेदन भेजने का पता
इच्छुक उम्मीदवार अपने आवेदन निर्धारित प्रारूप में तैयार कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ निदेशक, रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), DRDO, विज्ञानकांचा, हैदराबाद - 500069, तेलंगाना के पते पर भेज सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>DRDO, में, इंटर्नशिप, का, सुनहरा, मौका, 160, सीटों, पर, आवेदन, शुरू, हर, महीने, मिलेंगे, 5000, रुपये</media:keywords>
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        <title>SSC CGL 2026 के जरिए NCB में SI बनने का मौका, ग्रेजुएट्स को मिलेगी 1 लाख से ज्यादा सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ SSC CGL 2026 के जरिए NCB में SI बनने का मौका, ग्रेजुएट्स को मिलेगी 1 लाख से ज्यादा सैलरी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SSC, CGL, 2026, के, जरिए, NCB, में, बनने, का, मौका, ग्रेजुएट्स, को, मिलेगी, लाख, से, ज्यादा, सैलरी</media:keywords>
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        <title>BDS Students Scholarship 2026: डेंटल की पढ़ाई का सपना होगा पूरा, इन स्कॉलरशिप योजनाओं से मिलेगी तगड़ी आर्थिक सहायता</title>
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        <description><![CDATA[ Scholarship for BDS Students: अगर आप भी डेंटल के फील्ड में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं तो ये खबर आपके बेहद ही काम आने वाली है. केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से कई स्कीम चलाई जाती हैं, जिनमें स्टूडेंट्स को पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. देश में हर साल लाखों बच्चे इस फील्ड में जाने का सपना देखते हैं लेकिन कुछ ही स्टूडेंट्स का ये सपना साकार हो पाता है. आइए पूरी डिटेल्स जानते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
देश में डेंटल (BDS) की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए कई स्कॉलरशिप योजनाएं उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से वे अपनी पढ़ाई का आर्थिक बोझ कम कर सकते हैं. केंद्र सरकार और राज्य सरकारें छात्रों को फीस, मेंटेनेंस अलाउंस और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही हैं. इन योजनाओं का लाभ मेरिट, पारिवारिक आय और आरक्षित वर्ग की पात्रता के आधार पर दिया जाता है.
सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप स्कीम (CSSS)
शिक्षा मंत्रालय की ओर से चल रही यह योजना उन छात्रों के लिए है जिन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में शीर्ष 80 प्रतिशत छात्रों में स्थान हासिल किया हो. इस योजना के तहत पात्र छात्रों को हर वर्ष 10,000 से 20,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है. इसके लिए परिवार की वार्षिक आय 8 लाख से कम होनी चाहिए.
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SC/ST/OBC पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप
राज्य सरकारों द्वारा संचालित यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए है. इसके तहत ट्यूशन फीस, परीक्षा शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्चों में सहायता प्रदान की जाती है. कई राज्यों में छात्रों को अतिरिक्त मेंटेनेंस भत्ता भी दिया जाता है.
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP)
केंद्र और राज्य सरकारों की कई स्कॉलरशिप योजनाओं के लिए आवेदन NSP के माध्यम से किया जा सकता है. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां छात्र एक ही जगह पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
आवेदन के लिए क्या जरूरी है?

10वीं और 12वीं की मार्कशीट
आधार कार्ड
आय प्रमाण पत्र
कॉलेज प्रवेश पत्र
फीस रसीद
बैंक खाता विवरण
पासपोर्ट साइज फोटो

कैसे करें आवेदन?
सबसे पहले छात्रों को संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा. केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए One Time Registration (OTR) नंबर जरूरी होता है. इसके बाद छात्र अपनी पात्रता के अनुसार योजना चुनकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. राज्य स्तर की स्कॉलरशिपयों के लिए संबंधित राज्य के आधिकारिक स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन करना होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BDS, Students, Scholarship, 2026:, डेंटल, की, पढ़ाई, का, सपना, होगा, पूरा, इन, स्कॉलरशिप, योजनाओं, से, मिलेगी, तगड़ी, आर्थिक, सहायता</media:keywords>
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        <title>ओडिशा में अब KG से PG तक मिलेगी मुफ्त शिक्षा, जानें क्या है अन्य स्टेट का हाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ओडिशा-में-अब-kg-से-pg-तक-मिलेगी-मुफ्त-शिक्षा-जानें-क्या-है-अन्य-स्टेट-का-हाल</link>
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        <description><![CDATA[ शिक्षा को हर बच्चे का अधिकार बनाने की दिशा में ओडिशा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि राज्य में अब किंडरगार्टन (KG) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की पढ़ाई मुफ्त कराई जाएगी. सरकार का दावा है कि इस तरह की व्यापक और पूरी तरह मुफ्त शिक्षा व्यवस्था लागू करने वाला ओडिशा देश का पहला राज्य बनने जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा अपनी सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की. उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की पढ़ाई सिर्फ पैसों की कमी की वजह से नहीं रुकनी चाहिए. हर बच्चे को आगे बढ़ने का बराबर मौका मिलना चाहिए और सरकार इसी दिशा में काम कर रही है.
गरीब परिवारों के छात्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को मिलेगा. कई बार प्रतिभाशाली छात्र सिर्फ फीस और पढ़ाई के खर्च की वजह से उच्च शिक्षा नहीं ले पाते. नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी. सरकार का मानना है कि मुफ्त शिक्षा से राज्य में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा और ज्यादा से ज्यादा युवा कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंच सकेंगे. इससे न केवल शिक्षा का दायरा बढ़ेगा बल्कि भविष्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
दो साल में शुरू की गईं 121 योजनाएं
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने 121 नई विकास और जनकल्याण योजनाएं शुरू की हैं. इनमें शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, गरीब कल्याण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई योजनाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर लोगों तक लाभ पहुंचाना है. मुफ्त शिक्षा योजना भी इसी सोच का हिस्सा है.
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अन्य राज्यों में भी मिल रही है मुफ्त शिक्षा की सुविधा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केरल सरकार ने जनवरी 2026 के बजट सत्र में सरकारी और सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में स्नातक स्तर तक मुफ्त शिक्षा की घोषणा की. इससे पहले राज्य में कक्षा 12 तक की शिक्षा मुफ्त थी. तमिलनाडु में वर्ष 2007-08 से सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों में बीए, बीएससी और बीकॉम पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को मुफ्त शिक्षा की सुविधा दी जा रही है.
इस योजना का लाभ लाखों छात्र उठा चुके हैं. महाराष्ट्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और ओबीसी श्रेणी की महिलाओं के लिए उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में फीस माफ करने की योजना शुरू की है. यह सुविधा उन परिवारों को दी जा रही है जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;MBA की पढ़ाई के लिए सरकार दे रही आर्थिक मदद, जानिए किन स्कॉलरशिप का उठा सकते हैं फायदा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ओडिशा, में, अब, से, तक, मिलेगी, मुफ्त, शिक्षा, जानें, क्या, है, अन्य, स्टेट, का, हाल</media:keywords>
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        <title>केंद्रीय विद्यालयों में लागू होगा नया नियम, संस्कृत के लिए बनेगा अलग सेक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर के केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भाषा शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव किया गया है. केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने तय किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 और कक्षा 9 में संस्कृत विषय चुनने वाले छात्रों के लिए हर स्कूल में कम से कम एक अलग सेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा. आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स...
छात्रों को मिलेगा भाषा चुनने का विकल्प
नई व्यवस्था के तहत छात्रों के पास तीसरी भाषा चुनने का विकल्प रहेगा. छात्र संस्कृत या किसी निर्धारित क्षेत्रीय भाषा का चयन कर सकेंगे. हालांकि यह भाषा उनकी पहली भाषा हिंदी और दूसरी भाषा अंग्रेजी से अलग होनी चाहिए.
ट्रांसफर वाले परिवारों को होगा फायदा
केंद्रीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पढ़ते हैं जिनके माता-पिता का बार-बार अलग-अलग शहरों में ट्रांसफर होता रहता है. ऐसे छात्रों को हर जगह एक जैसी भाषा व्यवस्था मिलने से पढ़ाई जारी रखने में आसानी होगी.&amp;nbsp;
अभिभावकों और छात्रों से ली जाएगी पसंद
स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों और अभिभावकों से तीसरी भाषा के लिए उनकी पसंद की जानकारी लें. इसी आधार पर स्कूलों में सेक्शन तैयार किए जाएंगे और आगे की व्यवस्था तय होगी.
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स्कूलों को डेटा समय पर जमा करना होगा
नई भाषा व्यवस्था लागू करने के लिए सभी केंद्रीय विद्यालयों को तय समय के भीतर संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. इसके आधार पर स्टाफ और शिक्षकों की जरूरत का भी दोबारा आकलन किया जाएगा.
कुछ स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों और संसाधनों की कमी की स्थिति सामने आ सकती है. इसे ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ने पर संविदा शिक्षकों की मदद लेने और चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है.
छात्रों की संख्या के हिसाब से बनेंगे सेक्शन
स्कूलों को छात्रों की संख्या के अनुसार सेक्शन बनाने की छूट दी गई है. कहीं संयुक्त सेक्शन बनाए जा सकते हैं और कहीं अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे.लेकिन हर स्थिति में कक्षा 6 और 9 में संस्कृत के लिए कम से कम एक सेक्शन रखना जरूरी होगा.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;MBA की पढ़ाई के लिए सरकार दे रही आर्थिक मदद, जानिए किन स्कॉलरशिप का उठा सकते हैं फायदा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>केंद्रीय, विद्यालयों, में, लागू, होगा, नया, नियम, संस्कृत, के, लिए, बनेगा, अलग, सेक्शन</media:keywords>
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        <title>यूपी की 12वीं पास महिलाओं के लिए मौका, आंगनबाड़ी में निकलने वाली है बंपर भर्ती </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-की-12वीं-पास-महिलाओं-के-लिए-मौका-आंगनबाड़ी-में-निकलने-वाली-है-बंपर-भर्ती</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हैं और 12वीं पास हैं, तो आने वाले समय में आपके लिए बड़ा मौका बन सकता है.राज्य में आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में खाली पदों को भरने की तैयारी की जा रही है. इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और सहायिका के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है. जिलों को रिक्त पदों की जानकारी अपडेट करने और आगे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
कितने पदों पर हो सकती है भर्ती
जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी के 7,068 पद और सहायिका के 21,540 पदों को भरने की तैयारी की जा रही है.यानी कुल मिलाकर 28 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती की संभावना है.यह भर्ती संविदा आधार पर की जा सकती है और अलग-अलग जिलों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया चलेगी.
कौन कर सकेगा आवेदन
इस भर्ती में मुख्य रूप से महिला उम्मीदवारों को आवेदन का मौका मिलेगा. 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन के लिए पात्र हो सकती हैं, हालांकि अंतिम योग्यता, आयु सीमा और अन्य नियम जिलावार जारी होने वाली आधिकारिक सूचना में तय किए जाएंगे.
भर्ती प्रक्रिया को लेकर विभाग ने बढ़ाई तैयारी
भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों से खाली पदों का नया रिकॉर्ड मांगा गया है. इसके साथ ही हाल में सेवानिवृत्त हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं के खाली हुए पदों को भी भर्ती में शामिल करने की तैयारी की जा रही है.
कुछ जिलों में लंबित भर्ती को भी मिलेगी रफ्तार
राज्य के कुछ जिलों में पहले की भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी. अब विभाग उन लंबित मामलों को भी आगे बढ़ाने और नई नियुक्तियां जल्द शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा पद भरे जा सकें. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन शुरू होने के बाद अपने जिले की आधिकारिक सूचना जरूर पढ़ें. आवेदन की तारीख, दस्तावेज, चयन प्रक्रिया और अन्य शर्तें जिले के अनुसार अलग हो सकती हैं.सही जानकारी के आधार पर ही आवेदन करें.
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नर्सिंग ऑफिसर पदों पर भर्ती
उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 196 नर्सिंग ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 2 जुलाई 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. भर्ती के लिए संभावित लिखित परीक्षा नवंबर-दिसंबर 2026 में आयोजित की जाएगी. आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास GNM, B.Sc Nursing, B.Sc (Hons.) Nursing या Post Basic B.Sc Nursing की मान्यता प्राप्त योग्यता के साथ उत्तराखंड नर्स एवं दाई परिषद, देहरादून का वैध पंजीकरण होना जरूरी है.
उम्मीदवार की आयु 21 से 42 वर्ष के बीच होनी चाहिए. चयनित अभ्यर्थियों को 7वें वेतन आयोग के तहत वेतन स्तर-7 में 44,900 से 1,42,400 प्रति माह तक वेतन और अंशदायी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा. आवेदन प्रक्रिया 12 जून से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन में संशोधन की सुविधा 4 से 7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध रहेगी.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, की, 12वीं, पास, महिलाओं, के, लिए, मौका, आंगनबाड़ी, में, निकलने, वाली, है, बंपर, भर्ती </media:keywords>
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        <title>Lieutenant General Dhiraj Seth: कितने पढ़े&amp;लिखे हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जिन्हें बनाया गया नया आर्मी चीफ? </title>
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        <description><![CDATA[ Lieutenant General Dhiraj Seth: देश को जल्द ही एक नया सेना प्रमुख मिलने वाला है. जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून 2026 को अपना कार्यकाल पूरा कर रिटायर हो रहे हैं और उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारत का अगला आर्मी चीफ नियुक्त किया गया है. फिलहाल वो देश के 49वें उप सेना प्रमुख के पद पर हैं और 30 जून को वो 31वें सेना प्रमुख के रूप में कमान संभालेंगे. खास बात यह है कि उनका यह कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक चलेगा. PVSM, UYSM और AVSM जैसे बड़े सम्मान पाने वाले धीरज सेठ के बारे में आइए थोड़ा और जानते हैं.&amp;nbsp;
पढ़ाई से लेकर फौज तक का सफर
धीरज सेठ की पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो वो देश के कई बड़े और जाने-माने सैन्य संस्थानों से पढ़े हैं. उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी खड़कवासला, इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन, आर्मी वॉर कॉलेज महू और नेशनल डिफेंस कॉलेज नई दिल्ली &amp;nbsp;इन सभी संस्थानों में पढ़ाई की है. 20 दिसंबर 1986 को आर्म्ड कोर में कमीशन लेने के बाद से अब तक उन्होंने भारतीय सेना में करीब चार दशक बिताए हैं. &amp;nbsp;
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डेजर्ट सेक्टर में आर्म्ड रेजिमेंट की कमान हो, जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इन्सर्जेंसी ऑपरेशन हो या अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन में ऑपरेशन ऑफिसर की भूमिका वो हर जगह डटे रहे. साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्होंने 21 स्ट्राइक कोर और दिल्ली एरिया की कमान भी संभाली. इस लंबे सफर में उन्होंने कमांड, स्टाफ और ट्रेनिंग तीनों तरह के अहम पदों पर काम किया है.&amp;nbsp;
पिता भी रह चुके हैं आर्मी अधिकारी
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का फौज से रिश्ता बिल्कुल नया नहीं है यह तो उनके घर की परंपरा है. उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भी भारतीय सेना में रहे और 1997 में एडजुटेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे. साथ ही 2022 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल, 2025 में परम विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में उत्तम युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 22:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG re&amp;exam 2026: NEET UG री&amp;एग्जाम में CRPF और CISF संभालेगी क्वेश्चन पेपर की सुरक्षा, NTA ने मांगी टू&amp;लेयर सिक्योरिटी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG re-exam 2026 : NEET-UG 2026 री-टेस्ट को लेकर सरकार इस बार कोई भी चूक नहीं चाहती है. पेपर लीक विवाद के बाद देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर सवाल खड़े हुए थे. ऐसे में अब 21 जून को होने वाली री-एग्जाम के लिए सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए जा रहे हैं. सरकार ने क्वेश्चन पेपर और OMR आंसर शीट्स की सुरक्षा के लिए टू-लेयर सिक्योरिटी व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह साफ और सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके.&amp;nbsp;
NEET-UG री-टेस्ट में पेपर और आंसर शीट की सुरक्षा बढ़ाने के लिए NTA ने केंद्र सरकार ने टू-लेयर सिक्योरिटी कवर की मांग की है. इसके तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी. ये जवान क्वेश्चन पेपर और OMR आंसर शीट्स के परिवहन से लेकर उनकी सुरक्षित हैंडलिंग तक हर चरण पर तैनात रहेंगे. खासतौर पर एयरपोर्ट, हेलिपैड, हब सेंटर और जरूरी जगहों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी.&amp;nbsp;
हैदराबाद और अहमदाबाद से देशभर में भेजे जाएंगे पेपर
अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा सामग्री को हैदराबाद और अहमदाबाद स्थित मुख्य केंद्रों से देश के करीब 551 हब शहरों तक पहुंचाया जाएगा. इसके लिए हब एंड स्पोक मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें हवाई और सड़क दोनों मार्गों से क्वेश्चन पेपर और OMR शीट्स को अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाया जाएगा.&amp;nbsp;
कब तक रहेगी सुरक्षा व्यवस्था?
जानकारी के अनुसार, क्वेश्चन पेपर की आवाजाही के दौरान सुरक्षा व्यवस्था 11 जून से 19 जून तक लागू रहेगी. वहीं परीक्षा पूरी होने के बाद OMR शीट्स और अन्य सामग्री को वापस लाने के लिए 21 जून की शाम से सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी.&amp;nbsp;
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कोर्डिनेशन के लिए बनाए जाएंगे नोडल अधिकारी
पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए CRPF और CISF मुख्यालयों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं. ये अधिकारी डाक विभाग, NTA और राज्य स्तरीय इकाइयों के साथ कोर्डिनेशन स्थापित करेंगे. केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा है कि इस बार NEET-UG री-टेस्ट बिना किसी गड़बड़ी के आयोजित कराया जाएगा और परिणाम भी समय पर घोषित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि परीक्षा की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की निगरानी सरकार के सर्वोच्च स्तर पर की जा रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>IIT में पढ़ने का सपना होगा आसान! JEE Advanced नहीं, ऐसे होगी एंट्री</title>
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        <description><![CDATA[ साइबर सिक्योरिटी के फील्ड में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी (B Cyber) नाम से एक नया अंडर ग्रेजुएट कोर्स शुरू किया है. ये चार वर्षी का डिग्री कोर्स जुलाई 2026 से शुरू होगा और इसे संस्थान के वाधवानी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटेलिजेंट सिस्टम के तहत संचालित किया जाएगा.
सबसे खास बात यह है कि इस कोर्स में प्रवेश JEE Advanced के माध्यम से नहीं होगा. इसके बजाय उम्मीदवारों का चयन JEE Main स्कोर और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में उनके पूर्व अनुभव या कार्य के आधार पर किया जाएगा. संस्थान ने बताया कि प्रारंभिक शॉर्टलिस्टिंग के बाद उम्मीदवारों को IIT कानपुर परिसर में आयोजित होने वाले विशेष मूल्यांकन (Assessment) में भाग लेना होगा.
इस मूल्यांकन प्रक्रिया में हैकाथॉन (Hackathon) भी शामिल होगा, जिसके जरिए उम्मीदवारों की तकनीकी समझ, समस्या समाधान क्षमता और साइबर सुरक्षा से जुड़ी व्यावहारिक दक्षताओं का आकलन किया जाएगा. इससे संस्थान को ऐसे छात्रों का चयन करने में मदद मिलेगी जिनकी साइबर सुरक्षा में वास्तविक रुचि और क्षमता हो.
चार वर्षीय इस कार्यक्रम को अकादमिक शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण के संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कोर्स के पहले दो वर्षों में छात्र IIT कानपुर परिसर में रहकर साइबर सिक्योरिटी के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेंगे. इस दौरान उन्हें कक्षा आधारित शिक्षा, प्रयोगशाला प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा से जुड़े तकनीकी विषयों की गहन जानकारी दी जाएगी.यह भी पढ़ें - NEET UG 2026 Re- Exam: NEET री-एग्जाम पर NTA का बड़ा फैसला, स्टूडेंट्स को मिलेंगे 15 मिनट ज्यादा, 21 जून को होनी है परीक्षा
किन सब्जेक्ट्स की होगी पढ़ाई?
प्रोग्राम में साइबर हमलों की पहचान, नेटवर्क सुरक्षा, एथिकल हैकिंग, डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा सुरक्षा और अन्य आधुनिक साइबर तकनीकों से जुड़े विषय शामिल किए जाएंगे. छात्रों को नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जाएगा ताकि वे वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें.
अंतिम दो वर्ष पूरी तरह व्यावहारिक प्रशिक्षण को समर्पित होंगे. इस दौरान छात्रों को विभिन्न सरकारी सुरक्षा संगठनों और एजेंसियों के साथ इंटर्नशिप करने का अवसर मिलेगा. इंटर्नशिप के दौरान छात्र वास्तविक साइबर सुरक्षा परियोजनाओं और राष्ट्रीय स्तर की डिजिटल सुरक्षा चुनौतियों पर काम करेंगे.
क्या बोले डायरेक्टर?
IIT कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है. देश की डिजिटल अवसंरचना, सरकारी नेटवर्क और महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित साइबर विशेषज्ञों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह नया कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE छात्रों को नहीं मिली राहत, री इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने से कोर्ट ने किया इनकार</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE कक्षा 12 के रिजल्ट के बाद री-इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने साफ कहा कि अगर किसी छात्र को अपने रिजल्ट या मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायत है तो वह व्यक्तिगत रूप से उचित कानूनी प्रक्रिया अपना सकता है. कोर्ट का मानना है कि पोर्टल दोबारा खोलने से पूरी रिजल्ट प्रक्रिया और आगे की दाखिला प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
क्या था पूरा मामलायह मामला कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के री-इवैल्यूएशन पोर्टल को दोबारा शुरू करने की मांग से जुड़ा था. याचिका में कहा गया था कि कई छात्रों को मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है और उन्हें दोबारा आवेदन का मौका मिलना चाहिए. साथ ही कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की मैनुअल जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन की भी मांग की गई.
हाई कोर्ट ने क्या कहासुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पहले ही तय समय के अनुसार पूरी की जा चुकी है और इसे फिर से शुरू करने से पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी. कोर्ट ने कहा कि यह केवल कुछ दिनों का मामला नहीं है बल्कि इससे पूरे रिजल्ट और आगे की प्रक्रिया में देरी हो सकती है.
CBSE और केंद्र सरकार की दलीलअधिकारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि बड़ी संख्या में छात्रों ने पहले से ही री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए आवेदन किया है. बोर्ड के अनुसार लाखों उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया पहले से चल रही है और समय सीमा बढ़ाने से कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.
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छात्रों ने क्यों उठाए सवालयाचिका में दावा किया गया कि इस साल के परिणामों के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाए. कुछ छात्रों ने तकनीकी दिक्कतों, स्कैनिंग संबंधी समस्याओं और अंकों में अंतर जैसी शिकायतें सामने रखीं.
अब छात्रों के पास क्या विकल्प हैहाई कोर्ट ने फिलहाल पोर्टल दोबारा खोलने का आदेश नहीं दिया है. हालांकि अदालत ने कहा कि जिन छात्रों को व्यक्तिगत स्तर पर शिकायत है वे उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं.मामले की अगली सुनवाई आगे निर्धारित तारीख पर हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>CBSE, छात्रों, को, नहीं, मिली, राहत, री, इवैल्यूएशन, पोर्टल, दोबारा, खोलने, से, कोर्ट, ने, किया, इनकार</media:keywords>
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        <title>12वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका, बस ड्राइवर के 4599 पदों पर भर्ती; मिलेगी तगड़ी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप 12वीं पास हैं और ड्राइविंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो यह मौका आपके लिए खास हो सकता है. गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) ने बस ड्राइवर के हजारों पदों पर भर्ती का ऐलान किया है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 4599 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी.
काफी समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इच्छुक उम्मीदवार निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई 2026 तय की गई है. ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम समय की परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें.
कौन कर सकता है आवेदन?
बस ड्राइवर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है. इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास आवश्यक ड्राइविंग योग्यता और वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए.
आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष और अधिकतम उम्र 35 वर्ष निर्धारित की गई है. हालांकि सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ भी मिलेगा.
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दो चरणों में होगा चयन
पहले चरण में लिखित परीक्षा आयोजित होगी. इस परीक्षा में कुल 100 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे. चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा का वेटेज 40 प्रतिशत रखा गया है. परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए बुलाया जाएगा.दूसरे चरण में ड्राइविंग टेस्ट आयोजित किया जाएगा. यह भर्ती का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है क्योंकि इसका वेटेज 60 प्रतिशत निर्धारित किया गया है. उम्मीदवारों को सुरक्षित और बेहतर ड्राइविंग कौशल का प्रदर्शन करना होगा. ड्राइविंग टेस्ट में सफल होना जरूरी होगा.
इतनी मिलेगी हर महीने सैलरी
चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 26 हजार रुपये तक वेतन दिया जाएगा. इसके अलावा परिवहन निगम के नियमों के अनुसार अन्य सुविधाएं और लाभ भी प्रदान किए जा सकते हैं. यही वजह है कि यह भर्ती युवाओं के बीच काफी चर्चा में है.
आवेदन शुल्क कितना देना होगा?
भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करना होगा. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 300 रुपये रखा गया है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया गया है. आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
सबसे पहले गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद भर्ती से संबंधित लिंक पर क्लिक करें. अब नए उम्मीदवार के रूप में रजिस्ट्रेशन करें और मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें. इसके बाद जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें. आवेदन शुल्क जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें. अंत में भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट रख लें.
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी में होने वाली है शिक्षकों की बंपर भर्ती, UPESSC जल्द जारी करेगा 60000 पदों के लिए नोटिफिकेशन</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) का ई-अधियाचन पोर्टल सक्रिय हो गया है, जिसके साथ ही राज्य के सरकारी स्कूलों में 60 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती का रास्ता लगभग साफ हो गया है.
प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों का पूरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करें. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, भर्ती से जुड़ी आगे की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी. माना जा रहा है कि लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए विभाग तेजी से काम कर रहा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार पूरे प्रदेश में करीब 60 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं. इनमें से 11,508 पद शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में हैं, जबकि लगभग 48 हजार पद ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में खाली पड़े हैं. शहरी क्षेत्रों के रिक्त पदों की जानकारी पहले ही विभाग द्वारा आयोग को भेजी जा चुकी है. अब ग्रामीण क्षेत्रों के पदों का डेटा भी पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है. इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों की भर्ती काफी लंबे समय बाद होने जा रही है.
उम्र सीमा क्या है?
आयु सीमा की बात करें तो भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए. वहीं अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष प्रस्तावित है. उत्तर प्रदेश के मूल निवासी ओबीसी, एससी, एसटी और महिला उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष तक की छूट दी जाएगी. इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर मिलेगा.
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एग्जाम पैटर्न कैसा होगा?
परीक्षा पैटर्न को लेकर भी कुछ अहम जानकारी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार भर्ती परीक्षा में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. परीक्षा वस्तुनिष्ठ यानी एमसीक्यू आधारित हो सकती है. उम्मीदवारों को प्रश्नों के चार विकल्प दिए जाएंगे, जिनमें से सही उत्तर चुनना होगा. परीक्षा की अवधि लगभग दो घंटे रहने की संभावना है. बताया जा रहा है कि परीक्षा सितंबर 2026 तक आयोजित की जा सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि भर्ती अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी.
डिजिटल रिकॉर्ड होगा तैयार
भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ई-अधियाचन पोर्टल के जरिए सभी रिक्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे पदों की सही संख्या और उनकी स्थिति स्पष्ट रहेगी. इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी.
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बिजनेस करने के लिए कैसे जा सकते हैं विदेश, कौन सा वीजा लेना होगा और इंटरव्यू में क्या पूछा जाएगा?</title>
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        <description><![CDATA[ यदि आप भी विदेश में अपना व्यापार बढ़ाने, नए निवेश के अवसर तलाशने या फिर किसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के साथ कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद काम की होने वाली है. विदेश में बिजनेस करने के लिए सबसे पहले आपको सही वीजा की जरूरत होती है. दुनिया के कई देशों में व्यापारिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग तरह के वीजा दिए जाते हैं. ऐसे में यात्रा के उद्देश्य के अनुसार सही वीजा चुनना बेहद जरूरी है.
अगर आप केवल बिजनेस मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, व्यापार मेले या नए बाजार की संभावनाएं तलाशने के लिए विदेश जा रहे हैं, तो बिजनेस विजिटर वीजा सबसे सही माना जाता है. यह आमतौर पर कम अवधि के लिए जारी किया जाता है और इसमें व्यावसायिक बैठकों या कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति होती है.
लेकिन अगर आप किसी देश में निवेश करना, नई कंपनी शुरू करना या लंबे समय तक कारोबार स्थापित करने के मकसद से जा रहे हैं तो आपको इन्वेस्टर या स्टार्ट-अप वीजा के लिए आवेदन करना पड़ सकता है. &amp;nbsp;इसके अलावा, यदि आपकी कंपनी की शाखा भारत और विदेश दोनों जगह मौजूद है और आपको कंपनी के काम से विदेश भेजा जा रहा है, तो अंतर-कंपनी ट्रांसफर वीजा (ICT) की आवश्यकता पड़ सकती है.
आवेदन से पहले तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज
वीजा आवेदन की सफलता काफी हद तक आपके दस्तावेजों पर निर्भर करती है. सबसे पहले आपके पास वैध पासपोर्ट होना चाहिए, जिसकी वैधता कम से कम छह महीने बची हो. यदि किसी विदेशी कंपनी या संस्था ने आपको आमंत्रित किया है, तो उसका आधिकारिक आमंत्रण पत्र भी जरूरी होता है. यह पत्र वीजा अधिकारियों को आपकी यात्रा के उद्देश्य को समझने में मदद करता है.
वित्तीय दस्तावेज भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न (आईटीआर), कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े कागजात आपकी आर्थिक स्थिति को साबित करते हैं. इसके अलावा फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग और यात्रा कार्यक्रम की जानकारी भी आवेदन के साथ जमा करनी पड़ सकती है.
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इंटरव्यू में किन सवालों के लिए रहें तैयार?
कई देशों के वीजा आवेदन में इंटरव्यू भी शामिल होता है. इस दौरान अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि आपकी यात्रा का उद्देश्य वास्तविक है और आप तय समय के बाद अपने देश लौट आएंगे.आपसे पूछा जा सकता है कि आप किस कंपनी या व्यक्ति से मिलने जा रहे हैं. आपकी कंपनी क्या काम करती है, उसका कारोबार कितना बड़ा है और विदेश यात्रा से कंपनी को क्या लाभ होगा, जैसे सवाल भी पूछे जा सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>PhD का सपना होगा आसान! सरकार दे रही है 1 लाख महीने तक की स्कॉलरशिप</title>
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        <description><![CDATA[ देश में हायर एजुकेशन और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न सरकारी संस्थाएं पीएचडी (PhD) करने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप और फेलोशिप योजनाएं उपलब्ध कराती हैं. इन योजनाओं के तहत शोधार्थियों को हर महीने 37,000 से लेकर 1 लाख रुपये या उससे अधिक तक की आर्थिक सहायता दी जाती है. साथ ही कई योजनाओं में रिसर्च ग्रांट और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं.
प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) मुख्य रूप से IIT, IISc, IISER और अन्य शीर्ष संस्थानों में पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए है. इस योजना के तहत शोधार्थियों को पहले दो वर्षों के लिए 70,000 प्रति माह, तीसरे वर्ष 75,000 और चौथे एवं पांचवें वर्ष 80,000 प्रति माह तक की फेलोशिप मिलती है. इसके अलावा पांच वर्षों में कुल 10 लाख तक का रिसर्च ग्रांट भी दिया जाता है.
UGC-NET और CSIR-NET JRF
देश में पीएचडी फंडिंग का सबसे लोकप्रिय माध्यम UGC-NET और CSIR-NET जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) है. यह फेलोशिप विज्ञान, मानविकी, सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों के छात्रों को दी जाती है. NET-JRF क्वालिफाई करने वाले छात्रों को शोध कार्य के दौरान मासिक स्टाइपेंड दिया जाता है. फेलोशिप की अवधि आमतौर पर पांच वर्ष तक होती है, जिसमें प्रारंभिक वर्षों में JRF और बाद में SRF (सीनियर रिसर्च फेलोशिप) का लाभ मिलता है.
DST INSPIRE Fellowship
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तरह से चलाई जा रही INSPIRE Fellowship उन छात्रों के लिए है जिन्होंने विज्ञान विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं.यह फेलोशिप बेसिक और एप्लाइड साइंस के शोधार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है. इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली छात्रों को वैज्ञानिक अनुसंधान की ओर आकर्षित करना है.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;देश की पढ़ाई का आधार बनी NCERT, जानिए 1961 से अब तक का सफर
AICTE Doctoral Fellowship
इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों में पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए AICTE Doctoral Fellowship (ADF) एक जरूरी योजना है. इस योजना के तहत चयनित शोधार्थियों को 37,000 से 42,000 प्रतिमाह तक की फेलोशिप प्रदान की जाती है. यह योजना पूर्णकालिक पीएचडी छात्रों को शोध के दौरान आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराती है ताकि वे बेहतर तरीके से अपना अध्ययन और अनुसंधान पूरा कर सकें.
उद्योग से जुड़ी रिसर्च के लिए प्रधानमंत्री फेलोशिप
अगर कोई शोधार्थी उद्योगों से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना चाहता है, तो प्रधानमंत्री फेलोशिप फॉर डॉक्टोरल रिसर्च उसके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है. यह योजना सरकार और निजी उद्योगों की साझेदारी पर आधारित है. इसके तहत शोधार्थियों को JRF और SRF की तुलना में कहीं अधिक वित्तीय सहायता मिल सकती है. कई मामलों में फेलोशिप राशि 1 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती है.
आरक्षित वर्ग और महिलाओं के लिए विशेष फेलोशिप
सरकार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए भी विशेष राष्ट्रीय फेलोशिप योजनाएं संचालित करती है. इन योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा और शोध के लिए प्रोत्साहित करना है. इसके अलावा UGC पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप फॉर वूमेन जैसी योजनाएं भी उपलब्ध हैं, जिनका लाभ पीएचडी पूरी कर चुकी महिलाएं उठा सकती हैं. यह योजना महिला शोधकर्ताओं को उच्च स्तर के अनुसंधान कार्य जारी रखने में सहायता प्रदान करती है.
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG 2026 Re&amp; Exam: NEET री&amp;एग्जाम पर NTA का बड़ा फैसला, स्टूडेंट्स को मिलेंगे 15 मिनट ज्यादा, 21 जून को होनी है परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी NTA ने NEET UG 2026 परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है. 21 जून 2026 को होने वाली NEET UG परीक्षा में छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. NTA ने परीक्षा की कुल अवधि बढ़ाकर 195 मिनट कर दी है, जिससे उम्मीदवारों को पेपर हल करने के लिए बेहतर समय मिल सकेगा. इसके साथ ही प्रश्न पत्र में रफ वर्क करने के लिए भी ज्यादा जगह उपलब्ध कराई जाएगी. NTA के अनुसार ये बदलाव छात्रों से मिले फीडबैक और परीक्षा प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं.
NEET UG 2026 परीक्षा में समय को लेकर बदलावNTA ने बताया है कि NEET UG 2026 परीक्षा की अवधि अब 195 मिनट कर दी गई है. परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएगी. इसमें अटेंडेंस शीट पर साइन करने और परीक्षा से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं का समय भी शामिल रहेगा.
छात्रों को मिलेगा परीक्षा समय का बेहतर इस्तेमालNTA का कहना है कि यह बदलाव उम्मीदवारों से मिले फीडबैक के आधार पर किया गया है. इसका उद्देश्य यह है कि छात्रों को पेपर हल करने के लिए पर्याप्त समय मिले और प्रशासनिक प्रक्रिया की वजह से उनका परीक्षा समय प्रभावित न हो.
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प्रश्न पत्र में रफ वर्क के लिए ज्यादा जगहNEET UG 2026 के प्रश्न पत्र में रफ वर्क के लिए भी बदलाव किया गया है. अब उम्मीदवारों को रफ काम, कैलकुलेशन और डायग्राम बनाने के लिए पहले से ज्यादा जगह उपलब्ध कराई जाएगी.
रफ वर्क पेज की नई व्यवस्थापहले रफ वर्क के पेज केवल प्रश्न पत्र के अंत में दिए जाते थे. अब प्रश्न पत्र की शुरुआत में भी रफ वर्क के लिए पेज उपलब्ध होंगे. इससे छात्रों को अपनी सुविधा के अनुसार काम करने में मदद मिलेगी.
NTA ने छात्रों को दिए निर्देशNTA ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे एडमिट कार्ड और इंफॉर्मेशन बुलेटिन में दिए गए सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और परीक्षा केंद्र पर नियमों का पालन करें. एजेंसी के अनुसार ये बदलाव परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक और उम्मीदवारों के अनुकूल बनाने के लिए किए गए हैं.यह भी पढ़ें - NEET स्टूडेंट्स के साथ पैरेंट्स भी कर सकेंगे बस में फ्री सफर, री-एग्जाम से पहले पंजाब सरकार ने दी बड़ी राहत ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>देश की पढ़ाई का आधार बनी NCERT, जानिए 1961 से अब तक का सफर</title>
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        <description><![CDATA[ देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की भूमिका बेहद जरूरी मानी जाती है. आज CBSE समेत देश के लाखों छात्र NCERT की किताबों से पढ़ाई करते हैं, जबकि UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी ये पुस्तकें आधार मानी जाती हैं.
NCERT की स्थापना 1 सितंबर 1961 को शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में स्कूली शिक्षा के लिए एक समान और हाई क्वालिटी वाले मानक विकसित करना था. इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा संबंधी नीतिगत सलाह देना और विद्यार्थियों के लिए मॉडल पाठ्यपुस्तकों का निर्माण भी इसकी जिम्मेदारी बनाई गई.
NCERT का गठन सात प्रमुख सरकारी संस्थानों को मिलाकर किया गया था. इनमें सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ टेक्स्टबुक रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक एजुकेशन जैसे संस्थान शामिल थे. इन संस्थाओं के एकीकरण का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम विकास को एक मंच पर लाना था.
कोठारी आयोग की अहम भूमिका
NCERT के विकास में 1964 में गठित कोठारी आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही. आयोग ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की सिफारिश की थी और राष्ट्रीय स्तर पर एक समान पाठ्यक्रम तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का रोडमैप दिया था. इसके बाद NCERT ने देश की बदलती जरूरतों के अनुसार शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया.
वर्ष 1974 में NCERT को साहित्यिक, वैज्ञानिक और परोपकारी संस्था के रूप में आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया गया. इसके बाद संस्था ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework-NCF) तैयार करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए.
1975 में बड़ा बदलाव
1975 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर &quot;टेन-ईयर स्कूल करिकुलम&quot; पेश किया गया. इसका उद्देश्य शिक्षा को भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं से जोड़ना था. इसके बाद 1988 में नई शिक्षा नीति 1986 के अनुरूप पाठ्यचर्या में बदलाव किए गए और बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम करने के साथ छात्र-केंद्रित शिक्षा पर जोर दिया गया.
यह भी पढ़ें - CBSE की कमान किसके हाथ में, क्या काम करता है देश का सबसे बड़ा स्कूल बोर्ड
साल 2000 में पाठ्यक्रम में बहुसांस्कृतिक दृष्टिकोण, पर्यावरण शिक्षा और विषयों के बीच बेहतर समन्वय को शामिल किया गया. वहीं 2005 की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा को NCERT के इतिहास में सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जाता है. इस दौरान रटकर पढ़ाई करने की बजाय समझ आधारित और समग्र शिक्षा पर जोर दिया गया. इसके तहत पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण पद्धति में बड़े बदलाव किए गए.
लगातार हो रहे बदलाव
हाल के वर्षों में भी NCERT लगातार पाठ्यक्रम में संशोधन कर रहा है. नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप वर्ष 2023 में एक नई समिति का गठन किया गया, जिसमें लेखिका सुधा मूर्ति और प्रसिद्ध संगीतकार शंकर महादेवन जैसी हस्तियों को शामिल किया गया. यह समिति कक्षा 3 से 12 तक के लिए नए पाठ्यक्रम और पुस्तकों को अंतिम रूप देने का काम कर रही है.
NCERT की किताबें आज CBSE स्कूलों के लिए मुख्य अध्ययन सामग्री हैं. इसके अलावा कई राज्य शिक्षा बोर्ड भी इन्हीं पुस्तकों को आधार बनाकर अपना पाठ्यक्रम तैयार करते हैं. UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी NCERT की किताबें बुनियादी अध्ययन सामग्री मानी जाती हैं.यह भी पढ़ें - UGC क्या है? कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर कैसे रखता है नजर ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NIA Recruitment 2026: राष्ट्रीय जांच एजेंसी में निकली 30 पदों पर भर्ती, ₹1.77 लाख तक मिलेगी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी की तलाश में हैं और फॉरेंसिक, साइबर सिक्योरिटी या तकनीकी क्षेत्र में अनुभव रखते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने विभिन्न विशेषज्ञ पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती के जरिए कुल 30 पदों को भरा जाएगा. उम्मीदवारों का चयन शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा.
पदों का विवरणNIA द्वारा जारी भर्ती में कुल 30 रिक्त पद शामिल हैं. इनमें साइबर फॉरेंसिक एग्जामिनर के 18 पद, क्राइम सीन असिस्टेंट के 6 पद, टेक्निकल फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट के 3 पद, एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट के 2 पद और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट का 1 पद शामिल है। इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी और जांच संबंधी कार्यों के लिए की जाएगी.
योग्यताइन पदों के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए. साइबर फॉरेंसिक, फॉरेंसिक साइंस, साइकोलॉजी, कंप्यूटर साइंस या अन्य संबंधित क्षेत्रों की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं. साथ ही संबंधित क्षेत्र में कार्य अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी.
उम्र सीमाभर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है. आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट दी जा सकती है.
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चयन प्रक्रियाउम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के बजाय शॉर्टलिस्टिंग, दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. इसके अलावा उम्मीदवार के अनुभव और योग्यता का भी मूल्यांकन किया जाएगा.अंतिम चयन प्रदर्शन और पात्रता के आधार पर होगा.
कितना मिलेगा वेतनचयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतन दिया जाएगा.साइकोलॉजिस्ट जैसे लेवल-10 पदों के लिए 56,100 से 1,77,500 रुपये तक वेतन मिलेगा. वहीं क्राइम सीन असिस्टेंट जैसे लेवल-7 पदों के लिए 44,900 से 1,42,400 रुपये तक सैलरी निर्धारित की गई है. अन्य पदों का वेतन संबंधित पे-लेवल के अनुसार दिया जाएगा.
आवेदन भेजने का पताSP (Admin),National Investigation Agency (NIA) HeadquartersOpposite CGO Complex, Lodhi RoadNew Delhi &amp;ndash; 110003&amp;nbsp;
आवेदन कैसे भेजें?

NIA की वेबसाइट nia.gov.in से नोटिफिकेशन और आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें.
फॉर्म को सही जानकारी के साथ भरें.
सभी जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करें.
आवेदन को अपने विभाग/संस्थान के माध्यम से (यदि डेपुटेशन पर पात्र हैं) भेजें.
भरा हुआ आवेदन ऊपर दिए गए पते पर डाक/स्पीड पोस्ट से भेजें.
आवेदन की अंतिम तिथि 13 जून 2026 है.यह भी पढ़ें - देश की पढ़ाई का आधार बनी NCERT, जानिए 1961 से अब तक का सफर
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>UPSSSC Recruitment 2026: यूपी विधानसभा में 170 पदों पर भर्ती, 12वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका</title>
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        <description><![CDATA[ UPSSSC Recruitment 2026: यूपी विधानसभा में 170 पदों पर भर्ती, 12वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारतीय छात्रों को जापान में फ्री पढ़ाई का मौका, पूरी फीस होगी माफ</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय छात्रों को जापान में फ्री पढ़ाई का मौका, पूरी फीस होगी माफ ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SBI Concurrent Auditor Recruitment 2026: रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए मौका! देश के सबसे बड़े बैंक में निकली 821 पदों पर भर्ती</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Concurrent Auditor Recruitment 2026: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने रिटायर्ड अधिकारियों के लिए बड़ी भर्ती निकाली है. एसबीआई ने Concurrent Auditor के 821 पदों पर आवेदन मांगे हैं. खास बात यह है कि इस भर्ती में किसी तरह की लिखित परीक्षा नहीं होगी और उम्मीदवारों का चयन सीधे इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. हर साल बड़ी संख्या में रिटायर बैंक अधिकारी अपने एक्सपीरियंस के अनुसार नौकरी के नए अवसरों की तलाश करते हैं. ऐसे में एसबीआई की यह भर्ती उनके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है. बैंक की अलग-अलग ब्रांच में ऑडिट से जुड़े कामों के लिए एक्सपीरियंस अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी. उम्मीदवार एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट https://sbi.bank.in के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
821 पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती अभियान के तहत एसबीआई में कुल 821 Concurrent Auditor पदों को भरा जाएगा. चयनित अधिकारियों की तैनाती बैंक की अलग-अलग ब्रांच और ऑडिट से जुड़े कामों के लिए की जाएगी. आवेदन प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की लास्ट डेट 11 जून 2026 तय की गई है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
इस भर्ती के लिए एसबीआई के रिटायर अधिकारी ही आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार का बैंक से नियमित सेवा निवृत्ति (Superannuation) के तहत 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद रिटायर होना जरूरी है. इसके अलावा जिन अधिकारियों के पास क्रेडिट, ऑडिट या फॉरेक्स विभाग में काम करने का एक्सपीरियंस है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि VRS, &amp;nbsp;इस्तीफा देने वाले, निलंबित या किसी डिसिप्लीन कारणों से सेवा छोड़ने वाले अधिकारी सामान्य तौर पर पात्र नहीं होंगे. एसबीआई के नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में VRS लेने वाले अधिकारी 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
आयु सीमा क्या है?
नई नियुक्ति के लिए उम्मीदवार की अधिकतम आयु 63 वर्ष तय की गई है. वहीं चयनित अधिकारी 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक इस पद पर काम कर सकेंगे.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया कैसी होगी?
इस भर्ती में उम्मीदवारों को किसी लिखित परीक्षा से नहीं गुजरना होगा. चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी. इसमें आवेदन पत्रों की शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू शामिल है. बैंक की चयन समिति आवेदन की जांच करेगी और योग्य उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाएगी. इंटरव्यू 100 नंबरों का होगा और मेरिट लिस्ट केवल इंटरव्यू में मिले नंबरों के आधार पर तैयार की जाएगी,. अगर दो उम्मीदवारों के नंबर समान होते हैं, तो ज्यादा उम्र वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी.&amp;nbsp;
कितना मिलेगा वेतन?
इस भर्ती में चयनित रिटायर्ड अधिकारियों को उनके रिटायरमेंट के समय के ग्रेड के अनुसार हर महीने तय वेतन दिया जाएगा. जिसमें MMGS-III ग्रेड के अधिकारियों को 45 हजार रुपये, SMGS-IV को 50 हजार रुपये, SMGS-V को 65 हजार रुपये और TEGS-VI ग्रेड के अधिकारियों को 80 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. इसके अलावा अगर किसी अधिकारी को क्लस्टर ऑडिट, करेंसी चेस्ट की जांच, फॉरेक्स से जुड़े लेनदेन या किसी विशेष ऑडिट का काम दिया जाता है, तो उन्हें हर ब्रांच के दौरे पर 2,000 रुपये अतिरिक्त भी दिए जाएंगे. खास बात यह है कि यह पूरा वेतन उनकी मिलने वाली पेंशन से अलग होगा.&amp;nbsp;
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कौन-कौन से फायदे नहीं मिलेंगे?
इस भर्ती के तहत चयनित अधिकारियों को बैंक की ओर से आवास, फर्नीचर या अन्य भत्ते नहीं दिए जाएंगे. इसके अलावा उन्हें PF, &amp;nbsp;ग्रेच्युटी या अन्य सेवा लाभ का फायदा भी नहीं मिलेगा. आयकर नियमों के अनुसार वेतन पर TDS भी काटा जाएगा. हालांकि चयनित अधिकारियों को HRMS में एक यूनिक आईडी दी जाएगी.&amp;nbsp;
आवेदन कैसे करें?
1. सबसे पहले एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट https://sbi.bank.in पर जाएं.
2. भर्ती से संबंधित लिंक पर क्लिक करें.
3. नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें और पात्रता की जांच करें.
4. ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें और जरूरी जानकारी दर्ज करें.
5. आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरण दोबारा जांच लें.
6. फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UGC क्या है? कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर कैसे रखता है नजर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं या आगे उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो UGC का नाम आपने जरूर सुना होगा. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह संस्था आखिर काम कैसे करती है, इसके पास क्या अधिकार हैं और यह देश के हजारों कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर कैसे नजर रखती है. आज बताते हैं, भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक UGC की पूरी कहानी.
UGC भारत सरकार की एक वैधानिक संस्था है. इसकी शुरुआत 1953 में हुई थी और 1956 में संसद के एक कानून के तहत इसे कानूनी दर्जा मिला. इसका मुख्य काम देश में विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर को बनाए रखना और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए नियम तय करना है. UGC भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था का रेगुलेटर है. जिस तरह स्कूल शिक्षा में अलग-अलग बोर्ड होते हैं, उसी तरह कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा की निगरानी UGC करता है.
UGC कैसे काम करता है?
UGC सीधे कॉलेजों में जाकर पढ़ाई नहीं कराता, बल्कि नियम और मानक तय करता है. यह संस्था यह सुनिश्चित करती है कि विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा, रिसर्च और शिक्षण का स्तर तय मानकों के अनुरूप हो.UGC समय-समय पर नई गाइडलाइन जारी करता है. विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को इन नियमों का पालन करना होता है. यदि कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.
विश्वविद्यालयों को मान्यता कैसे मिलती है?
किसी भी विश्वविद्यालय के लिए UGC की मान्यता बेहद जरूरी होती है. जब कोई नया विश्वविद्यालय शुरू होता है, तो उसे यह साबित करना पड़ता है कि उसके पास योग्य शिक्षक, पर्याप्त संसाधन, लाइब्रेरी, लैब और अन्य जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं. UGC इन सभी पहलुओं की जांच करता है. मान्यता मिलने के बाद भी संस्थानों की निगरानी जारी रहती है. यही वजह है कि छात्रों को हमेशा UGC से मान्यता प्राप्त संस्थानों में ही दाखिला लेने की सलाह दी जाती है.
यह भी पढ़ें - भारत में खुलेंगे तीन और विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस, मुंबई और बेंगलुरु में 2026 से शुरू होगा दाखिला
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कैसे कार्रवाई करता है UGC?
हर साल कुछ संस्थान खुद को विश्वविद्यालय बताकर छात्रों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं.ऐसे मामलों में UGC जांच करता है और फर्जी संस्थानों की सूची जारी करता है. 2026 में भी UGC ने देशभर में कई फर्जी विश्वविद्यालयों की पहचान कर छात्रों और अभिभावकों को सतर्क किया था. ऐसे संस्थानों की डिग्री नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए मान्य नहीं होती.
विश्वविद्यालयों को फंड भी देता है UGCUGC का एक बड़ा काम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को वित्तीय सहायता देना भी है. कई सरकारी विश्वविद्यालयों और शोध परियोजनाओं को अनुदान देने का काम UGC करता है.हालांकि केवल वही संस्थान इस सहायता के पात्र होते हैं जो UGC के निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं.
वर्तमान में UGC का नेतृत्व कौन कर रहा है?वर्तमान में UGC (University Grants Commission) के चेयरपर्सन का अतिरिक्त प्रभार विनीत जोशी के पास है.वे 1992 बैच के IAS अधिकारी हैं और शिक्षा क्षेत्र में लंबे प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं. इससे पहले वे CBSE के चेयरमैन और NTA के महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं. खास बात यह है कि विनीत जोशी एक शिक्षाविद नहीं बल्कि एक वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट हैं. हालांकि UGC के कई पूर्व अध्यक्ष शिक्षा और शोध क्षेत्र से जुड़े एकेडमिशियन रहे हैं, लेकिन वर्तमान में इस महत्वपूर्ण संस्था की जिम्मेदारी एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी संभाल रहे हैं, जो देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न नीतिगत और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी कर रहे हैं.&amp;nbsp;पूर्व चेयरमैन एम जगदीश कुमार उच्च शिक्षा क्षेत्र का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं. वे पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रह चुके हैं.यह भी पढ़ें - NMC में स्टाफ की भारी कमी, पारदर्शिता पर सवाल और भ्रष्टाचार के आरोप; मेडिकल छात्रों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IAS बनना है तो आज ही फॉलो करें दिव्यकीर्ति सर की ये 3 बातें, आपको नहीं रोक पाएगी कोई भी ताकत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ias-बनना-है-तो-आज-ही-फॉलो-करें-दिव्यकीर्ति-सर-की-ये-3-बातें-आपको-नहीं-रोक-पाएगी-कोई-भी-ताकत</link>
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        <description><![CDATA[ IAS बनना है तो आज ही फॉलो करें दिव्यकीर्ति सर की ये 3 बातें, आपको नहीं रोक पाएगी कोई भी ताकत ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में 167 पदों पर भर्ती, 30 जून तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सफाई सेवक (Sweeper) और माली (Gardener) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 167 रिक्त पदों को भरा जाएगा. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार, सफाई सेवक के 75 पदों और माली के 92 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है.
कौन कर सकता है आवेदन?
इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 35 वर्ष तय की गई है. हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी.
माली पद के लिए योग्यता
माली के पद पर भर्ती के लिए ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने बागवानी (हॉर्टिकल्चर) में डिप्लोमा किया हो. इसके अलावा बागवानी क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का कार्य अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता मिलेगी. इससे उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में लाभ मिल सकता है.
सफाई सेवक पद के लिए योग्यता
सफाई सेवक के पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए संबंधित कार्य में अनुभव होना महत्वपूर्ण माना गया है. अधिसूचना के अनुसार, जिन उम्मीदवारों के पास स्वीपर के रूप में कम से कम तीन वर्ष का कार्य अनुभव होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी.
भाषा का ज्ञान जरूरी
दोनों पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को हिंदी और क्षेत्रीय भाषा का सामान्य ज्ञान होना आवश्यक है. &amp;nbsp;
आवेदन शुल्क कितना है?
भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को 700 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं पंजाब और हरियाणा के एससी, एसटी तथा दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 600 रुपये निर्धारित किया गया है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;भारत में खुलेंगे तीन और विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस, मुंबई और बेंगलुरु में 2026 से शुरू होगा दाखिला
कैसे करें आवेदन?

सबसे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
वेबसाइट के होमपेज पर उपलब्ध भर्ती या रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें.
मांगी गई सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें.
आवश्यक दस्तावेजों को निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें.
आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें.
सभी जानकारी जांचने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट कर दें.
आगे की जरूरत के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट रख लें.

यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NMC में स्टाफ की भारी कमी, पारदर्शिता पर सवाल और भ्रष्टाचार के आरोप; मेडिकल छात्रों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पंजाब, और, हरियाणा, हाई, कोर्ट, में, 167, पदों, पर, भर्ती, जून, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>M.Tech करना चाहते हैं? इन सरकारी स्कॉलरशिप्स से मिलेगी हर महीने आर्थिक मदद</title>
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        <description><![CDATA[ देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित कर रही हैं. विशेष रूप से M.Tech (मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी) की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए ऐसी योजनाएं उपलब्ध हैं, जिनके तहत हर महीने हजारों रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है.
उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच ये स्कॉलरशिप योजनाएं छात्रों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही हैं. इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से योग्य छात्रों को तकनीकी शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है.
M.Tech छात्रों के लिए सबसे चर्चित योजनाओं में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) की पीजी स्कॉलरशिप योजना शामिल है. इस योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को 12,400 प्रति माह की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. इसका लाभ उन छात्रों को मिलता है, जिन्होंने GATE, GPAT या CEED जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं उत्तीर्ण की हों और AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थान में पूर्णकालिक पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रम में दाखिला लिया हो.
SC/ST छात्रों के लिए UGC की विशेष योजना
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भी विशेष छात्रवृत्ति योजना संचालित करता है. इस योजना के तहत योग्य विद्यार्थियों को 7,800 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाती है. इसके अलावा हर वर्ष 15,000 की सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, जिसका उपयोग अध्ययन सामग्री, शोध कार्य और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है. इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र का SC या ST वर्ग से होना तथा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में नियमित एवं पूर्णकालिक M.Tech पाठ्यक्रम में पढ़ाई करना जरूरी है.
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NSP पोर्टल से किया जा सकता है आवेदन
UGC की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से ऑनलाइन किया जाता है. आवेदन के दौरान छात्रों को जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेज और संस्थान की जानकारी जमा करनी होती है. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें ताकि किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
राज्य सरकारों की योजनाओं का भी मिल रहा लाभ
केंद्र सरकार के अलावा कई राज्य सरकारें भी तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही हैं. महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक समेत कई राज्यों में मेधावी और जरूरतमंद छात्रों के लिए अलग-अलग स्कॉलरशिप एवं स्टाइपेंड योजनाएं चलाई जा रही हैं. कई राज्यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और शोध कार्य में लगे छात्रों को 15,000 से लेकर 50,000 प्रति माह तक की सहायता दी जाती है. हालांकि राशि और पात्रता की शर्तें राज्यवार अलग हो सकती हैं.
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        <title>UGC NET 2026 की एग्जाम सिटी स्लिप जारी, उम्मीदवार यहां से चेक करें अपना परीक्षा शहर</title>
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        <description><![CDATA[ यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप जारी कर दी है. अब अभ्यर्थी ऑनलाइन अपने परीक्षा शहर की जानकारी देख सकते हैं और समय रहते यात्रा व अन्य जरूरी तैयारियां पूरी कर सकते हैं. हालांकि यह सिटी स्लिप एडमिट कार्ड नहीं है, लेकिन इससे उम्मीदवारों को यह पता चल जाएगा कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित की जाएगी.
जारी हुई एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप
यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का इंतजार अब खत्म हो गया है. एनटीए ने परीक्षा शहर की जानकारी देने वाली सिटी इंटीमेशन स्लिप जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया है, वे अपने लॉगिन विवरण की मदद से इसे डाउनलोड कर सकते हैं. सिटी स्लिप का उद्देश्य उम्मीदवारों को पहले से परीक्षा शहर की जानकारी देना है ताकि उन्हें अंतिम समय में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.
22 जून से शुरू होगी परीक्षा
एनटीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा 22 जून से 30 जून 2026 तक आयोजित की जाएगी. परीक्षा अलग-अलग विषयों के लिए निर्धारित तिथियों पर होगी. परीक्षा का आयोजन कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में किया जाएगा. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विषय की परीक्षा तिथि और शिफ्ट की जानकारी पहले से जांच लें.
दो शिफ्ट में आयोजित होगा एग्जाम
यूजीसी नेट परीक्षा प्रतिदिन दो शिफ्टों में आयोजित की जाएगी.पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगी. परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचना जरूरी होगा ताकि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी की जा सकें.यह भी पढ़ें - डीयू पीजी एडमिशन 2026 के लिए 11 जून तक सुधारें फॉर्म, 15 जून को जारी होगी पहली सीट अलॉटमेंट
एडमिट कार्ड जल्द होंगे जारी
सिटी स्लिप जारी होने के बाद अब उम्मीदवार एडमिट कार्ड का इंतजार कर रहे हैं.एनटीए की ओर से एडमिट कार्ड परीक्षा शुरू होने से लगभग चार दिन पहले जारी किए जा सकते हैं. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें ताकि किसी भी महत्वपूर्ण सूचना को मिस न करें.परीक्षा के दिन उम्मीदवारों को अपना एडमिट कार्ड और एक वैध फोटो पहचान पत्र साथ लेकर जाना होगा. पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है.बिना एडमिट कार्ड और पहचान पत्र के परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी.
ऐसे चेक करें अपना परीक्षा शहरउम्मीदवार सबसे पहले यूजीसी नेट की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.इसके बाद एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप से जुड़े लिंक पर क्लिक करें। अब आवेदन संख्या, जन्मतिथि और सुरक्षा कोड दर्ज करके लॉगिन करें.सभी जानकारी सही भरने के बाद स्क्रीन पर परीक्षा शहर की जानकारी दिखाई देगी. उम्मीदवार चाहें तो इसका प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं या इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं.
यह भी पढ़े&amp;nbsp; - NEET UG 2026 री-एग्जाम के पैटर्न में बदलाव की खबर फर्जी, NTA ने छात्रों को किया सतर्क ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>NEET स्टूडेंट्स के साथ पैरेंट्स भी कर सकेंगे बस में फ्री सफर, री&amp;एग्जाम से पहले पंजाब सरकार ने दी बड़ी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ NEET यूजी री- एग्जाम 2026 देने जा रहे छात्रों के लिए पंजाब सरकार ने राहत भरी घोषणा की है. राज्य सरकार ने फैसला किया है कि परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों और उनके एक अभिभावक या गार्डियन को 20 जून से 22 जून तक पंजाब रोडवेज की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में होने वाली परेशानियों को कम करना है.
छात्रों को मिलेगी मुफ्त यात्रा की सुविधा
पंजाब कैबिनेट के फैसले के अनुसार, 21 जून को आयोजित होने वाले NEET UG री-एग्जाम में शामिल होने वाले सभी छात्र पंजाब रोडवेज की बसों में बिना किसी किराए के यात्रा कर सकेंगे. यह सुविधा परीक्षा से पहले और बाद की यात्रा को ध्यान में रखते हुए तीन दिनों तक उपलब्ध रहेगी.
एक अभिभावक भी कर सकेगा मुफ्त सफर
सरकार ने केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि उनके साथ जाने वाले एक अभिभावक या गार्डियन को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का निर्णय लिया है. इससे खासकर दूर-दराज के इलाकों से परीक्षा देने आने वाले छात्रों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी.
छात्रों की मांग के बाद लिया गया फैसला
परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजित किए जाने के बाद कई छात्रों ने यात्रा खर्च और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में आने वाली दिक्कतों को लेकर चिंता जताई थी. छात्रों की इन्हीं समस्याओं और सुझावों को देखते हुए पंजाब सरकार ने यह विशेष व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UGC NET 2026 की एग्जाम सिटी स्लिप जारी, उम्मीदवार यहां से चेक करें अपना परीक्षा शहर
परीक्षा केंद्र तक पहुंचना होगा आसान
राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी छात्र को केवल यात्रा संबंधी परेशानी की वजह से परीक्षा देने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए.मुफ्त बस सेवा से छात्र समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकेंगे और उनका ध्यान केवल परीक्षा की तैयारी पर रहेगा.
शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले युवाओं को सहयोग देने की दिशा में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा और उन्हें बेहतर माहौल में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा.
पंजाब रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा की यह सुविधा 20 जून, 21 जून और 22 जून 2026 तक लागू रहेगी. NEET UG री-एग्जाम में शामिल होने वाले छात्र और उनके साथ एक अभिभावक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.यह भी पढ़ें - NMC में स्टाफ की भारी कमी, पारदर्शिता पर सवाल और भ्रष्टाचार के आरोप; मेडिकल छात्रों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>NMC में स्टाफ की भारी कमी, पारदर्शिता पर सवाल और भ्रष्टाचार के आरोप; मेडिकल छात्रों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा</title>
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        <description><![CDATA[ देश में मेडिकल शिक्षा को नियंत्रित करने वाली संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) सवालों के घेरे में है. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में NMC में लंबे समय से खाली पड़े पदों, प्रशासनिक देरी, पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितताओं पर गंभीर चिंता जताई है.
सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी देने, सीटों के नवीनीकरण, निरीक्षण, अपीलों के निपटारे और काउंसलिंग प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान मेडिकल छात्रों को उठाना पड़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सालों से सुधार के दावों के बावजूद हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं हो सका है और हर साल प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित समय से काफी आगे खिंच रही है.
रिपोर्ट्स के अनुसार 2025-26 सेशन के लिए पोस्ट ग्रेजुएट (PG) मेडिकल कोर्सों में दाखिले फरवरी 2026 तक चलते रहे, जबकि अंडरग्रेजुएट (UG) दाखिले दिसंबर 2025 तक जारी रहे. कई मामलों में मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी और सीटों के नवीनीकरण की प्रक्रिया अकादमिक सत्र शुरू होने के बाद तक चलती रही. इससे छात्रों और कॉलेजों दोनों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा हुई.
स्टाफ को लेकर बड़ा सवाल
रिपोर्ट में NMC की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल स्टाफ की कमी को लेकर उठाया गया है. NMC अधिनियम 2019 लागू होने के छह साल बाद भी आयोग और उसके स्वायत्त बोर्डों में कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं. आयोग के विभिन्न अध्यक्षों, सदस्यों और सचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं. रिपोर्ट का कहना है कि इन पदों के खाली रहने से नियम बनाने, कॉलेजों के आवेदन निपटाने, निरीक्षण कराने और अपीलों पर फैसला लेने में देरी हो रही है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;डीयू पीजी एडमिशन 2026 के लिए 11 जून तक सुधारें फॉर्म, 15 जून को जारी होगी पहली सीट अलॉटमेंट
इस पर भी जताई चिंता
एमिकस क्यूरी ने पारदर्शिता की कमी पर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण से जुड़ी रिपोर्टें और नियामकीय फैसले पहले की तरह सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं, जबकि कानून में इनके प्रकाशन का प्रावधान है.
मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि निरीक्षण, मान्यता और सीट वृद्धि जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है. हालांकि रिपोर्ट में सीधे तौर पर किसी व्यक्ति या संस्था पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन नियामकीय प्रक्रियाओं में देरी और जानकारी सार्वजनिक न होने से व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट भी कई बार मेडिकल सीटों के खाली रहने और छात्रों के हित प्रभावित होने पर चिंता जता चुका है. हाल के फैसलों में अदालत ने कहा है कि मेडिकल सीटें देश का बहुमूल्य संसाधन हैं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इन्हें खाली नहीं छोड़ा जा सकता.यह भी पढ़ें - UGC NET 2026 की एग्जाम सिटी स्लिप जारी, उम्मीदवार यहां से चेक करें अपना परीक्षा शहर ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>RPSC APO Recruitment 2026: राजस्थान लोक सेवा आयोग में  371 पदों पर भर्ती, ₹1.77 लाख तक मिलेगी सैलरी, आवेदन शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ RPSC APO Recruitment 2026: राजस्थान लोक सेवा आयोग में  371 पदों पर भर्ती, ₹1.77 लाख तक मिलेगी सैलरी, आवेदन शुरू ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में खुलेंगे तीन और विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस, मुंबई और बेंगलुरु में 2026 से शुरू होगा दाखिला</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में हायर एजुकेशन को वर्ल्ड लेवल पर मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने तीन टॉप फॉरेन यूनिवर्सिटी को भारत में अपने कैंपस शुरू करने की मंजूरी दे दी है. इसके तहत ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल मुंबई में अपने कैंपस स्थापित करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW Sydney) बेंगलुरु में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस शुरू करेगी.
UGC की मंजूरी मिलने के बाद ये विश्वविद्यालय अब भारत में छात्रों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे. यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत हायर एजुकेशन के अंतरराष्ट्रीयकरण के लक्ष्य का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय छात्रों को देश में ही विश्व स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराना है. इन विश्वविद्यालयों को औपचारिक स्वीकृति पत्र सौंपे जा चुके हैं.
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क ने बताया कि उसे मुंबई में कैंपस स्थापित करने के लिए UGC से औपचारिक मंजूरी मिल गई है. विश्वविद्यालय 2026 के शैक्षणिक सत्र से छात्रों का दाखिला शुरू करेगा. शुरुआती चरण में यहां बिजनेस, इकोनॉमिक्स और कंप्यूटर साइंस जैसे स्नातक (UG) कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फाइनेंस और मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर (PG) कोर्स भी उपलब्ध होंगे.
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल भी मुंबई में करेगी शुरुआत
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल को भी मुंबई एंटरप्राइज कैंपस के लिए UGC की मंजूरी मिल गई है. विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से मुंबई के पवई स्थित सिग्नस परिसर में अस्थायी कैंपस से क्लास शुरू की जाएंगी. पहले साल में विश्वविद्यालय लगभग 250 छात्रों को प्रवेश देने की योजना बना रहा है. यहां डेटा साइंस, इकोनॉमिक्स, फाइनेंस और इमर्सिव आर्ट्स जैसे विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे.
UNSW Sydney का पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW Sydney) को बेंगलुरु में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस स्थापित करने की अनुमति मिल गई है. विश्वविद्यालय की कक्षाएं अगस्त 2026 से एम्बेसी मन्यता बिजनेस पार्क में शुरू होंगी. शुरुआत में बिजनेस, कंप्यूटर साइंस और डेटा साइंस में स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इसके साथ ही साइबर सिक्योरिटी में स्नातकोत्तर कोर्स भी छात्रों के लिए उपलब्ध होगा.
यह भी पढ़ें- RPSC APO Recruitment 2026: राजस्थान लोक सेवा आयोग में 371 पदों पर भर्ती, ₹1.77 लाख तक मिलेगी सैलरी, आवेदन शुरू
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>MBA की पढ़ाई के लिए सरकार दे रही आर्थिक मदद, जानिए किन स्कॉलरशिप का उठा सकते हैं फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ MBA की पढ़ाई देश के लाखों छात्रों का सपना होती है, लेकिन कई बार ऊंची फीस आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. ऐसे में केंद्र सरकार और विभिन्न संस्थान छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए कई स्कॉलरशिप संचालित करते हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य प्रतिभाशाली और जरूरतमंद छात्रों को हायर एजुकेशन हासिल करने में मदद करना है.
नेशनल स्कॉलरशिप फॉर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज (NSPG) पोस्ट ग्रेजुएट लेवल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए है. इसके तहत चयनित छात्रों को 10 महीने तक हर महीने 15,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है. इसके लिए उम्मीदवार की आयु 30 वर्ष से कम हो. साथ ही पहली बार पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कर रहा हो. इसके अलावा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में नियमित (Full-Time) पाठ्यक्रम में अध्ययनरत हो.
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप फॉर SC/ST स्टूडेंट्स
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए यह एक महत्वपूर्ण योजना है. इसके तहत छात्रों की अनिवार्य शैक्षणिक फीस की प्रतिपूर्ति की जाती है और साथ ही रखरखाव भत्ता (Maintenance Allowance) भी दिया जाता है. इसके लिए पात्रता है कि आवेदक SC या ST वर्ग से संबंधित हो. साथ ही परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम हो.
मेरिट-कम-मींस स्कॉलरशिप फॉर माइनॉरिटी स्टूडेंट्स
अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए यह मेरिट-कम-मींस स्कॉलरशिप फॉर माइनॉरिटी चलाई जाती है. इसके तहत छात्रों को सालाना 30,000 रुपये तक की सहायता या वास्तविक कोर्स फीस (जो भी कम हो) प्रदान की जाती है. इसके अलावा रखरखाव भत्ता भी दिया जाता है. छात्र अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हो. पिछली परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों.परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए.
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प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना
यह योजना सशस्त्र बलों के शहीद, दिवंगत या पूर्व सैनिकों के आश्रितों और विधवाओं के लिए है. MBA सहित विभिन्न पेशेवर और तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले पात्र छात्रों को हर महीने छात्रवृत्ति दी जाती है. इसके तहत 2,250 रुपये से 2,500 रुपये प्रति माह तक की सहायता दी जाती है.
आवेदन कैसे करें?
केंद्र सरकार की अधिकांश छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से किया जाता है. इसके अलावा राज्य सरकारें और कई टॉप बिजनेस स्कूल, विशेषकर भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में भी आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए फीस में छूट और स्कालरशिप प्रदान करते हैं.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>इस सरकारी यूनिवर्सिटी में बिना एग्जाम दिए मिलेगा एडमिशन, जान लें क्या है पूरी प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU), आगरा ने सेशन 2026-27 के लिए ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम्स में प्रवेश के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय में दाखिले के इच्छुक छात्र ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. प्रवेश प्रक्रिया DBRAU समर्थ (Samarth) पोर्टल dbrauadm.samarth.edu.in के जरिए संचालित की जा रही है. आवेदन करने की अंतिम तारीख 30 जून 2026 निर्धारित की गई है.
विश्वविद्यालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) किया जाएगा. इसके बाद जुलाई 2026 में मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी और काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी. मेरिट के आधार पर छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रमों और कॉलेजों में प्रवेश दिया जाएगा.
क्या है योग्यता?
स्नातक पाठ्यक्रमों जैसे बीए, बीएससी और बीकॉम में प्रवेश के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 या समकक्ष परीक्षा पास होना आवश्यक है. विभिन्न विषयों और श्रेणियों के अनुसार न्यूनतम अंकों की पात्रता 33 प्रतिशत से 55 प्रतिशत तक निर्धारित की गई है. वहीं, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों जैसे एमए, एमएससी और एमकॉम में प्रवेश के लिए संबंधित सब्जेक्ट में स्नातक डिग्री होना जरूरी है.
मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेश
विश्वविद्यालय के अधिकांश स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश मेरिट के आधार पर दिया जाएगा. उम्मीदवारों के अर्हता परीक्षा (Qualifying Examination) में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी. हालांकि, कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और बीटेक कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) के अंकों को भी महत्व दिया जाएगा.
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ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
प्रवेश के लिए सबसे पहले छात्रों को DBRAU समर्थ पोर्टल पर जाकर नया पंजीकरण (New User Registration) करना होगा. पंजीकरण के दौरान उम्मीदवारों को अपना सक्रिय मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करनी होगी. सफल पंजीकरण के बाद छात्रों को समर्थ रजिस्ट्रेशन नंबर (SRN) प्राप्त होगा.
इसके बाद उम्मीदवार SRN की मदद से लॉगिन कर अपना प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं. प्रोफाइल बनाते समय छात्रों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरनी होगी और हाईस्कूल, इंटरमीडिएट तथा अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी. प्रोफाइल पूरा होने के बाद छात्र अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों का चयन कर ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा कर सकते हैं. आवेदन शुल्क जमा होने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी.यह भी पढ़ें - MBA की पढ़ाई के लिए सरकार दे रही आर्थिक मदद, जानिए किन स्कॉलरशिप का उठा सकते हैं फायदा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 06:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE की कमान किसके हाथ में, क्या काम करता है देश का सबसे बड़ा स्कूल बोर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ जब भी 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की बात होती है, तो सबसे पहले CBSE का नाम सामने आता है.देश के करोड़ों छात्र और लाखों अभिभावक इस बोर्ड से जुड़े हुए हैं. लेकिन CBSE सिर्फ परीक्षा कराने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने वाले सबसे बड़े बोर्डों में से एक है. हाल के दिनों में CBSE अपने नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम को लेकर भी सुर्खियों में रहा है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर CBSE क्या है, कैसे काम करता है और इसकी कमान किसके हाथ में होती है.
CBSE यानी Central Board of Secondary Education भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाला राष्ट्रीय स्तर का शिक्षा बोर्ड है. इसकी स्थापना वर्ष 1929 में हुई थी. वर्तमान समय में देश और विदेश के हजारों स्कूल CBSE से संबद्ध हैं. यह बोर्ड स्कूलों को मान्यता देने, पाठ्यक्रम तय करने और बोर्ड परीक्षाओं के संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाता है.
देश की स्कूली शिक्षा में क्यों अहम है CBSE?
CBSE को देश का सबसे प्रभावशाली स्कूल बोर्ड माना जाता है. केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और बड़ी संख्या में निजी स्कूल इसी बोर्ड से जुड़े हुए हैं.मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी CBSE का पाठ्यक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यही वजह है कि बोर्ड के किसी भी फैसले का असर सीधे करोड़ों छात्रों पर पड़ता है.
CBSE के प्रमुख काम क्या हैं?
CBSE की जिम्मेदारी केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं है. यह बोर्ड 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आयोजित करता है, स्कूलों को संबद्धता प्रदान करता है, परीक्षा पैटर्न तय करता है, मूल्यांकन प्रणाली तैयार करता है और नई शिक्षा नीतियों को लागू करने का काम भी करता है. इसके अलावा छात्रों के लिए विभिन्न शैक्षणिक सुधार और डिजिटल पहल भी इसी बोर्ड के माध्यम से लागू की जाती हैं.
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CBSE प्रमुख कौन है?
CBSE का सबसे बड़ा अधिकारी चेयरपर्सन होता है. इस पद पर आमतौर पर केंद्र सरकार किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति करती है. जून 2026 में केंद्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है. इससे पहले वे केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.
अकादमिक विशेषज्ञ या ब्यूरोक्रेट, किसके हाथ में होती है कमान?
CBSE की सबसे खास बात यह है कि इसका शीर्ष नेतृत्व अक्सर वरिष्ठ IAS अधिकारियों के पास होता है.यानी संस्था की कमान आमतौर पर ब्यूरोक्रेट्स के हाथ में रहती है.हालांकि पाठ्यक्रम, परीक्षा और शिक्षा से जुड़े फैसलों में शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों और शिक्षा विशेषज्ञों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसलिए CBSE प्रशासनिक और शैक्षणिक विशेषज्ञता का एक मिश्रित मॉडल माना जाता है.
OSM विवाद के कारण चर्चा में आया CBSE
हाल ही में CBSE का नया On-Screen Marking (OSM) सिस्टम विवादों में रहा. यह एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसके जरिए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑनलाइन की जाती है. कुछ छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया, स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए.मामले ने इतना तूल पकड़ा कि केंद्र सरकार ने जांच के आदेश दिए और बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों में बदलाव भी किया गया. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार और CBSE से जवाब मांगा है.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG 2026 री&amp;एग्जाम पर संसद सख्त, NTA और NMC अधिकारियों से कल होगी पूछताछ</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर अब संसद भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है. 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा से पहले संसद की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, NTA और NMC के वरिष्ठ अधिकारियों को बैठक के लिए बुलाया है. इस बैठक में परीक्षा की तैयारियों, सुरक्षा इंतजामों और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी.
कल होगी बैठक
संसदीय समिति की यह बैठक 10 जून को आयोजित होगी.इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सचिवों के साथ NTA और NMC के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. समिति यह समझना चाहती है कि री-एग्जाम को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्या तैयारियां की गई हैं.
पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी सख्ती
दरअसल, 3 मई को हुई NEET UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की शिकायतों के बाद रद्द कर दिया गया था.इसके बाद लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देने की स्थिति का सामना करना पड़ा. इस पूरे मामले ने देशभर में चर्चा छेड़ दी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे.यही वजह है कि अब परीक्षा से जुड़े हर पहलू पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
पहले भी जवाब दे चुके हैं अधिकारी
यह पहली बार नहीं है जब NTA और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी किसी संसदीय समिति के सामने पेश हो रहे हैं.इससे पहले भी वे विभिन्न संसदीय समितियों के सामने परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दे चुके हैं.हालांकि, 21 जून को होने वाले री-एग्जाम को देखते हुए इस बार की बैठक को ज्यादा अहम माना जा रहा है.
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छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है. कई छात्रों का कहना है कि उन्हें दोबारा तैयारी करनी पड़ रही है, जिससे मानसिक दबाव भी बढ़ा है. ऐसे में सभी की नजर अब इस बात पर है कि री-एग्जाम पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो.
परीक्षा सुरक्षा पर रहेगा खास फोकस
बैठक में परीक्षा सुरक्षा और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता को लेकर भी चर्चा होगी.सरकार और NTA इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम कर रहे हैं. परीक्षा केंद्रों से लेकर प्रश्नपत्रों के वितरण तक हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है
21 जून को होगी री-एग्जाम
NTA ने पहले ही साफ कर दिया है कि NEET UG 2026 री-एग्जाम 21 जून को पेन और पेपर मोड में आयोजित की जाएगी. लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं. अब देखना होगा कि संसदीय समिति की समीक्षा और सुझावों के बाद परीक्षा प्रक्रिया को और कितना मजबूत बनाया जाता है.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET Re&amp;Exam 2026 : एनटीए से एयरफोर्स, फिर पोस्टऑफिस से परीक्षा केंद्र, जानें आपको कैसे मिलेगा NEET UG का पेपर?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Re-Exam 2026 : नीट यूजी 2026 री-एग्जाम को लेकर इस बार सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है. पिछले पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया गया है. इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाने के साथ क्वेश्चन पेपर तैयार करने से लेकर उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को हाई सिक्योरिटी सिस्टम के तहत रखा गया है. एनटीए ने 21 जून को होने वाली NEET UG री-एग्जाम के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं.
पहली बार भारतीय वायुसेना, डाक विभाग, केंद्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन मिलकर क्वेश्चन की सुरक्षा तय करेंगे. &amp;nbsp;इतना ही नहीं, पेपर तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी पूरी तरह अलग रखा गया है जिससे किसी तरह की जानकारी बाहर न जा सके. तो आइए जानते हैं कि एनटीए से एयरफोर्स, फिर पोस्ट ऑफिस से परीक्षा केंद्र तक NEET UG का पेपर आपको कैसे मिलेगा.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा?
3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा के बाद पेपर लीक को लेकर देशभर में विवाद हुआ था. इसके बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया. इसी घटना को ध्यान में रखते हुए इस बार एनटीए ने सुरक्षा के कई नए इंतजाम किए हैं जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना खत्म की जा सके.&amp;nbsp;
NEET UG का पेपर आपको कैसे मिलेगा?
इस बार क्वेश्चन पेपर को देशभर के लगभग 18 रीजनल सेंटरों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली जाएगी. वायुसेना के विमान विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ क्वेश्चन पेपर को अलग-अलग राज्यों में स्थित रीजनल सेंटरों तक पहुंचाएंगे. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि वायुसेना के यूज से क्वेश्चन पेपर की सुरक्षा और गोपनीयता दोनों तय की जा सकेगी. यह पहली बार होगा जब NEET जैसी बड़ी परीक्षा में इस स्तर पर भारतीय वायुसेना की मदद ली जा रही है.&amp;nbsp;
रीजनल सेंटर से परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंचेगा पेपर?
जब क्वेशन पेपर 18 रीजनल सेंटरों तक पहुंच जाएंगे, तब वहां से उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डाक विभाग संभालेगा. डाक विभाग &amp;nbsp;क्वेश्चन पेपर को विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाएगा. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान तीन स्तर की सुरक्षा का घेरा रहेगा. इसमें केंद्रीय सुरक्षा बल, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और एनटीए के अधिकारी लगातार निगरानी करेंगे.&amp;nbsp;
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पेपर सेटर्स को रखा जाएगा पूरी तरह अलग
परीक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और पेपर तैयार करने वाले लोगों पर भी इस बार खास नजर रखी जा रही है. उन्हें 21 जून तक विशेष निगरानी में रखा जाएगा और बाहरी दुनिया से संपर्क सीमित रहेगा. इसका उद्देश्य यह तय करना है कि क्वेशन पेपर से जुड़ी कोई भी जानकारी परीक्षा से पहले बाहर न पहुंच सके. सिर्फ क्वेश्चन पेपर की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी नजर रखी जाएगी. एनटीए और अन्य एजेंसियां सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी रखेंगी. अगर कोई फर्जी क्वेश्चन पेपर, गलत सूचना या गलत गतिविधि सामने आती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
कितने शहरों में होगी परीक्षा?
21 जून को होने वाली NEET UG री-एग्जाम देश के लगभग 552 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की जाएगी. परीक्षा दोपहर 2 बजे से 5:15 बजे तक पेन-एंड-पेपर मोड में होगी. एनटीए एक नई तकनीकी व्यवस्था पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह जानकारी नहीं होगी कि किस परीक्षा के लिए क्वेश्चन तैयार कर रहे हैं. इसके तहत अलग-अलग विषयों के हजारों क्वेश्चन का एक बड़ा डिजिटल बैंक तैयार किया जाएगा. बाद में तकनीक की मदद से इन क्वेश्चन में से अंतिम क्वेश्चन पेपर तैयार होगा. इससे पेपर लीक की संभावना और कम हो सकती है.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Re-Exam, 2026, एनटीए, से, एयरफोर्स, फिर, पोस्टऑफिस, से, परीक्षा, केंद्र, जानें, आपको, कैसे, मिलेगा, NEET, का, पेपर</media:keywords>
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        <title>PG छात्रों के लिए काम की खबर, सरकार दे रही हर महीने 15K की स्कॉलरशिप, जानें कैसे करें अप्लाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pg-छात्रों-के-लिए-काम-की-खबर-सरकार-दे-रही-हर-महीने-15k-की-स्कॉलरशिप-जानें-कैसे-करें-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ हायर एजुकेशन हासिल करने की इच्छा रखने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्नातकोत्तर छात्रवृत्ति (NSPG) योजना बड़ी राहत लेकर आई है. इस योजना के तहत योग्य छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई के दौरान हर महीने 15,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
सरकार की इस पहल का उद्देश्य मेधावी छात्रों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. कई बार आर्थिक तंगी के कारण छात्र स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. ऐसे छात्रों के लिए यह योजना काफी लाभदायक साबित हो सकती है.
कितनी मिलेगी छात्रवृत्ति?
राष्ट्रीय स्नातकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत चयनित छात्रों को 15,000 रुपये प्रति माह की दर से छात्रवृत्ति दी जाती है. यह राशि साल में 10 महीने के लिए प्रदान की जाती है. छात्र अपनी पढ़ाई की अवधि के दौरान अधिकतम दो वर्षों तक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. इस प्रकार पात्र छात्रों को दो वर्षों में कुल 3 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है, जिससे उनकी पढ़ाई का खर्च काफी हद तक कम हो जाता है.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस छात्रवृत्ति योजना का लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा जो पहली बार किसी स्नातकोत्तर (Postgraduate) पाठ्यक्रम में प्रवेश ले रहे हैं. उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक (Full-Time) पीजी कोर्स में दाखिला होना जरूरी है. इसके अलावा आवेदक की आयु आवेदन के समय 30 वर्ष से कम होनी चाहिए. सरकार ने योजना का लाभ जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचाने के लिए पारिवारिक आय की सीमा भी निर्धारित की है.
आय सीमा क्या है?
योजना के तहत आवेदन करने वाले छात्र के परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. आय प्रमाण पत्र के आधार पर पात्रता की जांच की जाएगी.यह भी पढ़ें - UP Government Scholarships: 12वीं पास बेटियों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार दे रही स्कॉलरशिप, ऐसे उठाएं लाभ
कैसे होगा चयन?
राष्ट्रीय स्नातकोत्तर छात्रवृत्ति योजना में चयन अखिल भारतीय मेरिट (All India Merit) के आधार पर किया जाएगा. यानी देशभर से आवेदन करने वाले छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी. इसी मेरिट लिस्ट के अनुसार योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. इसलिए बेहतर शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले छात्रों के चयन की संभावना अधिक रहती है.
आवेदन की प्रक्रिया
छात्रों को इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarships Portal) के माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं. आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके साथ ही छात्रों को कक्षा 9वीं से लेकर उच्चतम योग्यता तक की अंकतालिकाएं, प्रवेश पत्र, बैंक खाते की जानकारी और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे.यह भी पढ़ें - UGC Scholarship 2026: सिंगल गर्ल चाइल्ड को मिलेगी 72,400 रुपये की स्कॉलरशिप, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>NCC Maharashtra PM Internship: एनसीसी कैडेट्स के लिए नौकरी का बड़ा मौका, मुंबई&amp;पुणे में लगेंगे प्लेसमेंट कैंप</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल कैडेट कोर (NCC) डायरेक्टरेट महाराष्ट्र ने राज्य के युवाओं के लिए बेहद शानदार और बड़ी पहल शुरू की है. दरअसल, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम (PMIS) के तहत नया प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसका मकसद युवाओं को हुनरमंद बनाना और उन्हें सीधे रोजगार के नए मौकों से जोड़ना है. इस मुहिम का सबसे ज्यादा फायदा NCC कैडेट्स और पूर्व-कैडेट्स (Ex-Cadets) को मिलेगा, जिन्हें देश की बड़ी कंपनियों में काम करने, भविष्य के लिए जरूरी स्किल्स सीखने और बेहतरीन करियर बनाने का रास्ता मिलेगा.
यूनिफॉर्म से प्रोफेशन तक थीम का क्या है विजन?
इस खास प्रोग्राम को यूनिफॉर्म से प्रोफेशन तक थीम के तहत शुरू किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि देश सेवा के लिए NCC में जो अनुशासन, लीडरशिप और संस्कार कैडेट्स सीखते हैं, अब उसी ताकत का इस्तेमाल वे प्राइवेट कंपनियों में अपनी जगह बनाने के लिए करेंगे.
कितना बड़ा है एनसीसी महाराष्ट्र का नेटवर्क?
NCC महाराष्ट्र का नेटवर्क बहुत बड़ा है. अभी यह राज्य के सभी 36 जिलों के 2000 से भी ज्यादा स्कूलों और कॉलेजों में फैला हुआ है, जिससे करीब 1.5 लाख कैडेट्स जुड़े हैं. यह कदम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेशनल विजन और महाराष्ट्र के युवाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रोफेशनल मौके देने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के वादे से सीधे जुड़ा हुआ है.
पुणे और मुंबई में लगेंगे कैंप
इस पहल के पहले फेज के तहत मशहूर होटल चेन लेमन ट्री होटल्स के साथ पार्टनरशिप की गई है. इसके अंतर्गत पुणे और मुंबई में स्पेशल प्लेसमेंट कैंप लगाए जा रहे हैं. इन कैंपों के जरिए कुल 150 युवाओं को कॉर्पोरेट इंटर्नशिप का मौका दिया जाएगा. इसमें NCC के सीनियर डिवीजन, सीनियर विंग के कैडेट्स और ग्रेजुएट हो चुके पूर्व-कैडेट्स हिस्सा ले सकते हैं.
कैंप से जुड़ी जरूरी जानकारी

पुणे कैंप: पहला पायलट प्लेसमेंट कैंप 15 जून 2026 को पुणे के सेंटर में आयोजित होगा, जहां 50 पदों पर युवाओं का चयन होगा.
मुंबई कैंप: दूसरा कैंप 16 जून 2026 को मुंबई में लगेगा, जहां 100 पदों पर युवाओं को चुना जाएगा.

किन क्षेत्रों में काम सीखने को मिलेगा?
यह इंटर्नशिप युवाओं को दफ्तर और होटल्स के काम का असल अनुभव देने के लिए तैयार की गई है. चुने गए युवाओं को इन मुख्य विभागों में काम करने का मौका मिलेगा.

ह्यूमन रिसोर्स
सेल्स और मार्केटिंग
फ्रंट ऑफिस ऑपरेशंस
फाइनेंस और अकाउंट्स
फूड एंड बेवरेज सर्विसेज
परचेज एंड स्टोर्स&amp;nbsp;

इंटर्नशिप से क्या होगा फायदा?
इस इंटर्नशिप का मकसद सिर्फ काम सिखाना नहीं है. प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम के नियमों के मुताबिक, चुने गए सभी कैंडिडेट्स को हर महीने स्टाइपेंड दिया जाएगा. साथ ही, काम शुरू करने के लिए अलग से जॉइनिंग इंसेंटिव, सीनियर अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन और करियर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी.
गर्ल कैडेट्स के लिए विशेष इंतजाम
एनसीसी महाराष्ट्र के एडीजी मेजर जनरल विवेक त्यागी ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से विशेष कदम उठाए गए हैं. बाहर से आने वाली गर्ल कैडेट्स के लिए रहने की सुरक्षित व्यवस्था और अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जाएगी, ताकि वे बिना किसी चिंता के सुरक्षित और मददगार माहौल में काम सीख सकें.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NCC, Maharashtra, Internship:, एनसीसी, कैडेट्स, के, लिए, नौकरी, का, बड़ा, मौका, मुंबई-पुणे, में, लगेंगे, प्लेसमेंट, कैंप</media:keywords>
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        <title>हमदर्द इंस्टीट्यूट को मिली बड़ी राहत, 150 MBBS और 49 PG सीटों पर एडमिशन का रास्ता साफ</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब संस्थान में 150 एमबीबीएस और 49 पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर दाखिले का रास्ता साफ हो गया है.
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जामिया हमदर्द (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) द्वारा HIMSR के पक्ष में &#039;डीम्ड एफिलिएशन&#039; की सहमति दी गई मानी जाएगी. लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह व्यवस्था हमदर्द परिवार की दो शाखाओं के बीच चल रहे विवाद के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद HIMSR के प्रबंधन और उसके प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर सामने आया है. दरअसल, हमदर्द समूह से जुड़े संस्थानों के संचालन को परिवार की अलग-अलग शाखाओं के बीच बांटने के बाद कई प्रशासनिक मतभेद उत्पन्न हो गए थे. इसी दौरान जामिया हमदर्द ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और कुछ अन्य आपत्तियों का हवाला देते हुए HIMSR को दी गई संबद्धता संबंधी सहमति वापस ले ली थी.
इस फैसले का असर मेडिकल कॉलेज की प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ने लगा. संस्थान को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के पोर्टल तक पहुंच और अन्य प्रशासनिक अनुमतियों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
बताते चलें मामला जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सों में दाखिले की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने वाली थी. उस समय अदालत ने छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए NMC को निर्देश दिया था कि HIMSR की 49 पोस्ट ग्रेजुएट सीटों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाए ताकि सीटें खाली न रहें.
यह भी पढ़ें - PG छात्रों के लिए काम की खबर, सरकार दे रही हर महीने 15K की स्कॉलरशिप, जानें कैसे करें अप्लाई?
इसके बाद 11 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 49 पीजी छात्रों के दाखिले को मान्यता देते हुए माना था कि संस्थान के पक्ष में संबद्धता की सहमति मौजूद है. हालांकि यह व्यवस्था भी मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर रखी गई थी.
2026-27 सत्र के लिए भी मिली राहत
वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने इसी व्यवस्था को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए भी लागू कर दिया है. अदालत ने कहा कि HIMSR के पक्ष में संबद्धता की सहमति मानी जाएगी, जिससे संस्थान अपनी 150 एमबीबीएस और 49 पोस्ट ग्रेजुएट सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर सकेगा.
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पहले से दाखिला ले चुके 49 पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को नामांकन संख्या जारी की जाए. साथ ही NMC पोर्टल तक संस्थान की पहुंच बहाल करने और आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेजों को स्वीकार करने के निर्देश भी दिए गए हैं.यह भी पढ़ें - NCC Maharashtra PM Internship: एनसीसी कैडेट्स के लिए नौकरी का बड़ा मौका, मुंबई-पुणे में लगेंगे प्लेसमेंट कैंप ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>राजस्थान में भीषण गर्मी का असर, स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां 28 जून तक बढ़ीं</title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां बढ़ाने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले से लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है. अब राज्य के स्कूल 28 जून 2026 तक बंद रहेंगे.
शिक्षा विभाग, बीकानेर की तरफ से कहा गया है कि पहले गर्मी की छुट्टियां 17 मई से 20 जून तक निर्धारित थीं. हालांकि प्रदेश के कई जिलों में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव की स्थिति को देखते हुए सरकार ने अवकाश अवधि में सात दिन का और इजाफा कर दिया है. इसके साथ ही इस वर्ष गर्मी की छुट्टियां 35 दिनों से बढ़कर कुल 42 दिनों की हो गई हैं.
बढ़ती गर्मी के बीच लिया गया फैसला
राजस्थान इस समय देश के सबसे गर्म राज्यों में शामिल है. कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जैसलमेर में अधिकतम तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बाड़मेर में 46 डिग्री, कोटा में 45.7 डिग्री और चूरू में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया.
लगातार बढ़ती गर्मी और लू के कारण छात्रों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए सरकार ने स्कूलों को फिलहाल बंद रखने का निर्णय लिया है. शिक्षा विभाग का मानना है कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों में बच्चों को स्कूल बुलाना जोखिम भरा हो सकता है.
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प्रिंसिपल को मिली अतिरिक्त छुट्टी मंजूर करने की शक्ति
राज्य सरकार ने स्कूल प्राचार्यों को भी अतिरिक्त अधिकार दिए हैं. नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल प्रधानाचार्य अपने विवेक से दो दिन तक का अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे. इससे पहले उन्हें केवल एक दिन की छुट्टी मंजूर करने का अधिकार था. सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने में सुविधा होगी.
पहले छुट्टियां कम करने की थी योजना
राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पहले गर्मी की छुट्टियां कम करने का प्रस्ताव रखा था. इसका उद्देश्य शैक्षणिक सत्र में शिक्षण दिवसों की संख्या बढ़ाकर 214 दिन करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना था.
इसके अलावा, सरकार की योजना थी कि स्कूलों को 21 जून से पहले खोल दिया जाए ताकि छात्र और शिक्षक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में भाग ले सकें. हालांकि शिक्षक संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था और गर्मी की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए स्कूल खोलने पर आपत्ति जताई थी.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राजस्थान, में, भीषण, गर्मी, का, असर, स्कूलों, की, गर्मी, की, छुट्टियां, जून, तक, बढ़ीं</media:keywords>
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        <title>CBSE रिजल्ट विवाद और OSM सिस्टम पर बड़ा सवाल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को भेजा नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम OSM को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद छात्र संगठन NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस सिस्टम में कई तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ियां हुई हैं, जिनका सीधा असर लाखों छात्रों के रिजल्ट पर पड़ा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
OSM सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
याचिका में कहा गया है कि CBSE ने इस साल पहली बार आंसर शीट की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था. लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद देशभर से छात्रों ने शिकायतें दर्ज कराईं कि उनकी आंसर शीट में कई तरह की गड़बड़ियां हैं.इनमें धुंधली स्कैन कॉपी, कुछ पन्नों का गायब होना, अधूरी अपलोडिंग और उत्तरों के गलत मिलान जैसी समस्याएं शामिल हैं. छात्रों का कहना है कि इन तकनीकी खामियों की वजह से उनके अंक प्रभावित हुए हैं.
NSUI का दावा लाखों छात्रों का भरोसा टूटा
NSUI ने कोर्ट में दलील दी है कि रिजल्ट आने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन की गई आंसर शीट की कॉपी मांगी. संगठन का कहना है कि यह सिर्फ सामान्य शिकायत नहीं है, बल्कि पूरे मूल्यांकन सिस्टम पर छात्रों के भरोसे में बड़ी गिरावट को दर्शाता है. NSUI ने यह भी कहा कि मौजूदा शिकायत निवारण प्रक्रिया कमजोर है और छात्रों को अपनी आंसर शीट की फिजिकल जांच या स्वतंत्र री-चेकिंग का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है.
CBSE की आपत्ति और जवाब
सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से याचिका पर आपत्ति जताई गई.बोर्ड के वकील ने कहा कि NSUI एक राजनीतिक संगठन से जुड़ा छात्र समूह है और इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. CBSE का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को पोर्टल के जरिए हल किया जा रहा है और इसे अनिश्चित समय तक खुला नहीं रखा जा सकता. बोर्ड ने यह भी कहा कि डिजिटल सिस्टम को पारदर्शिता और तेजी के लिए लागू किया गया है.यह भी पढ़ें - IIT पैनल की हरी झंडी के बाद CBSE का नया री-इवैल्यूएशन पोर्टल तैयार, छात्रों को मिलेगा सुरक्षित सिस्टम
NSUI की प्रमुख मांगें
याचिका में NSUI ने कई अहम मांगें रखी हैं, इनमें आंसर शीट सत्यापन पोर्टल को कम से कम एक महीने के लिए दोबारा खोलना शामिल है.साथ ही जिन मामलों में विवाद है, उनमें मैनुअल री-चेकिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन की अनुमति देने की मांग की गई है. संगठन ने केंद्र सरकार की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने और भविष्य में डिजिटल मूल्यांकन के लिए स्पष्ट नियम बनाने की भी अपील की है.
छात्रों के भविष्य पर चिंतायाचिका में यह भी कहा गया है कि परीक्षा परिणामों में देरी या गलतियों का सीधा असर छात्रों के एडमिशन पर पड़ता है. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया समय पर चलती रहती है, और बाद में अंक सुधार होने पर छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए इस पूरे मामले की गंभीर जांच जरूरी है.
हाईकोर्ट में अगली सुनवाईदिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है.अब इस केस की अगली सुनवाई 12 जून को होगी. इस सुनवाई में यह तय हो सकता है कि OSM सिस्टम की स्वतंत्र जांच होगी या नहीं और छात्रों की मांगों पर कोर्ट क्या रुख अपनाता है.
यह भी पढ़ें - NEET से OSM तक, संसद की समिति ने NTA और सीबीएसई पर दागे सवालों के तीर ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, रिजल्ट, विवाद, और, OSM, सिस्टम, पर, बड़ा, सवाल, दिल्ली, हाईकोर्ट, ने, केंद्र, सरकार, और, CBSE, को, भेजा, नोटिस</media:keywords>
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        <title>JoSAA Counselling 2026 से पहले IITs का मास्टरस्ट्रोक, बढ़ीं सीटें और शुरू हुए 18 नए प्रोग्राम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/josaa-counselling-2026-से-पहले-iits-का-मास्टरस्ट्रोक-बढ़ीं-सीटें-और-शुरू-हुए-18-नए-प्रोग्राम</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप IIT में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं तो आपके लिए यह खबर बहुत काम की है. देशभर के IIT संस्थानों में इस साल बड़ा बदलाव किया गया है. सीटों की संख्या बढ़ाई गई है और साथ ही कई नए कोर्स भी शुरू किए गए हैं. इसका सीधा फायदा उन लाखों छात्रों को मिलेगा जो हर साल जेईई एडवांस परीक्षा देकर IIT में एडमिशन पाने की कोशिश करते हैं.
IIT में बढ़ीं 600 से ज्यादा सीटें
इस साल IIT संस्थानों में कुल सीटों में बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल जहां करीब 18,160 सीटें थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 18,826 हो गई है. यानी इस बार 600 से ज्यादा नई सीटें छात्रों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं.
सीटों में यह बढ़ोतरी इसलिए की गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा योग्य छात्रों को देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ने का मौका मिल सके. हर साल लाखों छात्र जेईई एडवांस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सीमित सीटों की वजह से कई छात्रों को निराशा भी हाथ लगती है.
आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मंडी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
सीट बढ़ाने के मामले में IIT Jodhpur सबसे आगे रहा है. यहां 140 नई सीटें जोड़ी गई हैं. इसके बाद IIT Mandi में 120 सीटों का इजाफा किया गया है.इसके अलावा कई अन्य IIT संस्थानों में भी जरूरत के हिसाब से सीटें बढ़ाई गई हैं. इससे अब ज्यादा छात्रों को एडमिशन मिलने की संभावना बढ़ गई है.
18 नए कोर्स भी हुए शुरू
सिर्फ सीटें बढ़ाने तक ही बात सीमित नहीं रही. इस साल IIT में 18 नए कोर्स भी शुरू किए गए हैं. इन कोर्स का मकसद छात्रों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना है.आईआईटी कानपुर ने इंटेलिजेंट सिस्टम नाम से नया कोर्स शुरू किया है.वहीं IIT Mandi ने Quantum Science and Engineering जैसे एडवांस विषय को शामिल किया है. IIT Indore में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और डाटा साइंस जैसे नए और आधुनिक कोर्स शुरू किए गए हैं.यह भी पढ़ें - IIT पैनल की हरी झंडी के बाद CBSE का नया री-इवैल्यूएशन पोर्टल तैयार, छात्रों को मिलेगा सुरक्षित सिस्टम
नई टेक्नोलॉजी और डेटा पर फोकस
आज के समय में टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए IITs ने अपने कोर्स में भी बदलाव किया है।अब कई पुराने विषयों में भी डाटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीक को जोड़ा जा रहा है.इसका मकसद है कि छात्र सिर्फ थ्योरी ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों को भी अच्छे से समझ सकें.
छात्रों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा जेईई एडवांस देने वाले छात्रों को होगा. ज्यादा सीटें होने से अब पहले की तुलना में ज्यादा छात्रों को IIT में एडमिशन मिलने का मौका मिलेगा.साथ ही नए कोर्स छात्रों को अलग-अलग फील्ड में करियर बनाने का विकल्प देंगे. अब सिर्फ पारंपरिक इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम साइंस और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे फील्ड में भी करियर बनाया जा सकेगा.यह भी पढ़ें - CBSE रिजल्ट विवाद और OSM सिस्टम पर बड़ा सवाल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को भेजा नोटिस ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>JEE, NEET और CUET कराने वाली NTA के बारे में कितना जानते हैं आप?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में हर साल करोड़ों छात्र डॉक्टर, इंजीनियर या देश के बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने का सपना देखते हैं. इन सपनों को हकीकत में बदलने का रास्ता JEE, NEET और CUET जैसी परीक्षाओं से होकर गुजरता है. इन सभी बड़ी परीक्षाओं को आयोजित करने की जिम्मेदारी एक संस्था के पास है, जिसका नाम है नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)।पिछले कुछ वर्षों में NTA कई कारणों से चर्चा में रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर यह संस्था क्या है और देश की शिक्षा व्यवस्था में इसकी क्या भूमिका है.
NTA क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की स्थापना साल 2017 में केंद्र सरकार ने की थी. इसका मकसद देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को एक पेशेवर और पारदर्शी व्यवस्था के तहत आयोजित करना था. पहले अलग-अलग संस्थाएं अलग-अलग परीक्षाएं कराती थीं. इससे परीक्षा प्रणाली में एकरूपता की कमी दिखाई देती थी.इसी वजह से एक ऐसी एजेंसी बनाने का फैसला लिया गया जो सिर्फ परीक्षाओं के आयोजन पर ध्यान दे सके.
कौन-कौन सी परीक्षाएं कराती है NTA?
आज NTA देश की कई महत्वपूर्ण प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं का आयोजन करती है.इनमें सबसे प्रमुख हैं:

JEE Main
NEET UG
CUET UG
CUET PG
UGC NET
CMAT
GPAT

सिर्फ परीक्षा नहीं कई और जिम्मेदारियां भी हैं
अक्सर लोग समझते हैं कि NTA का काम केवल परीक्षा कराना है, लेकिन इसकी जिम्मेदारियां इससे कहीं ज्यादा बड़ी हैं. परीक्षा केंद्रों का चयन करना, तकनीकी व्यवस्था संभालना, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करना और परिणाम जारी करना भी इसी संस्था की जिम्मेदारी है. इसके अलावा NTA परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों पर भी लगातार काम करती है.
NTA का नेतृत्व कौन करता है?
फिलहाल NTA के चेयरपर्सन प्रदीप कुमार जोशी हैं.वे संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और शिक्षा तथा परीक्षा प्रशासन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं. वहीं NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह हैं, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS अधिकारी हैं. एजेंसी के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासनिक फैसलों की जिम्मेदारी उनके पास होती है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT पैनल की हरी झंडी के बाद CBSE का नया री-इवैल्यूएशन पोर्टल तैयार, छात्रों को मिलेगा सुरक्षित सिस्टम
अकादमिक और प्रशासन का अनोखा मेल
NTA की एक खास बात यह है कि इसमें शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी दोनों मिलकर काम करते हैं. संस्था की गवर्निंग बॉडी में शिक्षाविद शामिल होते हैं, जबकि प्रशासनिक व्यवस्था वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में रहती है.यही वजह है कि NTA को शिक्षा और प्रशासन के संतुलित मॉडल के रूप में देखा जाता है.
विवादों से भी रहा है नाता
साल 2024 में NEET और UGC NET को लेकर हुए विवादों के बाद NTA राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई थी. परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे थे.इसके बाद परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए.हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद NTA आज भी देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा एजेंसियों में शामिल है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET 2026 परीक्षा सुरक्षा सख्त, एयरफोर्स 18 लोकेशन पर पहुंचाएगी पेपर, जानें कब जारी होगा एडमिट कार्ड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-2026-परीक्षा-सुरक्षा-सख्त-एयरफोर्स-18-लोकेशन-पर-पहुंचाएगी-पेपर-जानें-कब-जारी-होगा-एडमिट-कार्ड</link>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>23 साल की चारु पांडे ने रचा इतिहास, SSC, IBPS, SBI समेत 19 एग्जाम क्रैक कर बनीं अफसर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/23-साल-की-चारु-पांडे-ने-रचा-इतिहास-ssc-ibps-sbi-समेत-19-एग्जाम-क्रैक-कर-बनीं-अफसर</link>
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        <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ की रहने वाली चारु पांडे की कहानी आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा बन गई है जो सरकारी नौकरी पाने का सपना देखता है. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही यह तय कर लिया था कि उन्हें अपना करियर सरकारी क्षेत्र में बनाना है. इसी सोच के साथ उन्होंने पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी.
शुरुआत और संघर्ष
चारु पांडे का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा शुरुआत में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा.कई परीक्षाओं में रिजल्ट उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. हर असफलता के बाद उन्होंने अपनी गलतियों को समझा और अपनी तैयारी को और बेहतर बनाया.यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.
लगातार मेहनत से मिली सफलता
धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और उन्होंने एक के बाद एक कई सरकारी परीक्षाएं पास करनी शुरू कर दीं. उनकी तैयारी का तरीका काफी डिसिप्लिन वाला था. वह हर दिन तय समय पर पढ़ाई करती थीं और हर परीक्षा को एक नए मौके की तरह देखती थीं.
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19 परीक्षाओं में बड़ी सफलता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चारु पांडे ने SSC CGL, SSC CPO, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD, IBPS Clerk, IBPS PO, SBI Clerk और SBI PO जैसी कई बड़ी परीक्षाएं पास की हैं.कुल मिलाकर उन्होंने 19 सरकारी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है. इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी संख्या में परीक्षाएं पास करना अपने आप में बहुत बड़ी बात है.
चारु पांडे की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका फोकस, टाइम मैनेजमेंट और लगातार मेहनत है. उन्होंने एक साथ कई परीक्षाओं की तैयारी की और हर परीक्षा को गंभीरता से लिया. उनका मानना है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता.
फिलहाल चारु पांडे चेन्नई में CAG विभाग में कार्यरत हैं. वह वहां अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और मेहनत से निभा रही हैं. उनकी कार्यशैली और अनुशासन उन्हें एक जिम्मेदार और सफल अधिकारी बनाता है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साल, की, चारु, पांडे, ने, रचा, इतिहास, SSC, IBPS, SBI, समेत, एग्जाम, क्रैक, कर, बनीं, अफसर</media:keywords>
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        <title>UPSC CSE Prelims रिजल्ट पर बड़ा अपडेट, किस दिन होगा जारी और जानें चेक करने का तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ UPSC CSE Prelims Result: यूपीएससी जल्द ही अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर सीएसई प्रीलिम्स परीक्षा 2026 का रिजल्ट्स घोषित करने वाला है. परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार बेसब्री से रिजल्ट्स का इंतजार कर रहे हैं. रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकेंगे. आपको बता दे कि यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 का आयोजन 24 मई 2026 को किया गया था. रिजल्ट पीडीएफ के रूप में जारी किया जाएगा, जिसमें उन उम्मीदवारों के रोल नंबर होंगे जो चयन प्रक्रिया के अगले चरण के लिए जाएंगे. जिन उम्मीदवारों के रोल नंबर परिणाम की पीडीएफ फाइल में दिखाई देंगे, वह यूपीएससी सिविल सेवा मेंस परीक्षा 2026 में बैठने के लिए एलिजिबल होंगे, जो 21 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले हैं.&amp;nbsp;
कब जारी हो सकता है यूपीएससी सीएसई रिजल्ट?&amp;nbsp;
बताया जा रहा है कि यूपीएससी जून के दूसरे वीक में किसी भी समय प्रीलिम्स का रिजल्ट जारी कर सकता है. कुछ रिपोर्ट के अनुसार रिजल्ट 7 से 14 जून के बीच जारी हो सकता है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े देखे तो यूपीएससी आमतौर पर परीक्षा से 20 से 25 दिन के अंदर रिजल्ट घोषित कर देता है. साल 2025 में भी रिजल्ट परीक्षा से 17 दिन बाद घोषित किए थे और वहीं 2024 में रिजल्ट परीक्षा से 14 दिन बाद जारी किए गए थे.&amp;nbsp;
कैसे तैयार किया जाता है यूपीएससी प्रीलिम्स का रिजल्ट?
यूपीएससी सीएसई प्रीलिम्स परीक्षा का परिणाम उम्मीदवारों की ओर से सामान्य अध्ययन के पेपर में किए गए प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया जाता है. सीएसएटी का पेपर योग्यता परीक्षा है और उम्मीदवारों को इसमें कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होते हैं. योग्यता के लिए अंतिम कट ऑफ सामान्य अध्ययन पेपर- 1 के अंको, रिक्तियों की संख्या और उम्मीदवारों ऑल ओवर प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया जाता है.&amp;nbsp;
कैसे चेक कर सकते हैं यूपीएससी प्रीलिम्स का रिजल्ट?

रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर सकते हैं.
इसके लिए सबसे पहले यूजर को ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in या upsconline.nic.in पर जाना होगा.
इसके बाद होम पेज पर एग्जाम्स ऑप्शन पर क्लिक करना होगा.
अब रिटर्न एग्जाम रिजल्ट टैब खोलें.
इसके बाद यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
अब पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर लें
पीडीएफ डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार कंट्रोल एफ का उपयोग करके अपना रोल नंबर दर्ज करें.
अगर रोल नंबर लिस्ट में दिखाई दे तो आप यूपीएससी में मेंस परीक्षा के लिए एलिजिबल हो चुके हैं.&amp;nbsp;

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यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 डीटेल्स&amp;nbsp;
यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट फाइल में योग्य उम्मीदवारों के रोल नंबर, परीक्षा का नाम, ऑफिशियल रिजल्ट अधिसूचना, चयन प्रक्रिया के अगले चरण के लिए निर्देश, यूपीएससी मेंस आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी, जरूरी डेट्स और परीक्षा संबंधी आगे की अपडेट शामिल होती है.&amp;nbsp;
यूपीएससी प्रीलिम्स के रिजल्ट्स के बाद क्या?
प्रीलिम्स में पास होने वाले उम्मीदवारों को यूपीएससी मेंस 2026 के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होगी. सिविल सेवा परीक्षा का दूसरा चरण मेंस है जो 21 अगस्त 2026 से शुरू होने वाली है. उम्मीदवारों को इसके लिए सलाह दी गई है कि वह परिणाम घोषणा, आवेदन पत्र और मेंस के कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए नियमित रूप से यूपीएससी के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाए. हालांकि अभी तक ऑफिशियल तौर पर रिजल्ट की तारीख की पुष्टि नहीं की है. इसलिए उम्मीदवारों को केवल यूपीएससी की वेबसाइट पर प्रकाशित सूचनाओं पर भरोसा करने के निर्देश दिए गए हैं.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPSC, CSE, Prelims, रिजल्ट, पर, बड़ा, अपडेट, किस, दिन, होगा, जारी, और, जानें, चेक, करने, का, तरीका</media:keywords>
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        <title>UP Police Exam: यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा आज से शुरू, जानें जरूरी नियम और कैसे मिलेगी बस&amp;ट्रेन की सुविधा?</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज (8 जून) का दिन बेहद अहम है. पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं देने और खाकी वर्दी पहनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं का असल इम्तिहान आज से शुरू हो रहा है. दरअसल, आज यानी 8 जून से उत्तर प्रदेश पुलिस की सिपाही (कॉन्स्टेबल) भर्ती परीक्षा का आगाज हो रहा है.
इस महापरीक्षा में पूरे राज्य और अन्य जगहों से करीब 29 लाख नौजवान अपनी किस्मत आजमाने वाले हैं. ऐसे में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने अपनी तैयारियां और रणनीतियां चाक-चौबंद कर ली हैं. लगातार तीन दिन यानी 8, 9 और 10 जून को होने वाली इस परीक्षा को दो अलग-अलग पालियों में बांटा गया है.
परीक्षा का समय और जरूरी नियम
परीक्षा देने के लिए घर से निकलने वाले हर एक उम्मीदवार को परीक्षा से जुड़े कुछ तय नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. सबसे अहम बात यह है कि हर छात्र को अपने साथ अपना एक वैध और असली पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड) जरूर लेकर जाना है. साथ ही, एक पेन भी रखना अनिवार्य है. पहचान पत्र और पेन के बिना एंट्री नहीं दी जाएगी.&amp;nbsp;
टाइमिंग का रखें खास ख्याल
पहली पाली (सुबह की शिफ्ट): जिन छात्र-छात्राओं की परीक्षा पहली शिफ्ट में तय है, उन्हें हर हाल में सुबह 8:00 बजे से 9:30 बजे के बीच परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाना है. 9:30 बजे के बाद एंट्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी.
दूसरी पाली (दोपहर की शिफ्ट): दूसरी शिफ्ट की परीक्षा दोपहर तीन बजे से शुरू होगी और शाम पांच बजे तक चलेगी. इस पाली के कैंडिडेट्स को दोपहर एक बजे से 2:30 बजे तक अपने आवंटित परीक्षा केंद्र पर पहुंचना बहुत जरूरी है.
नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम
परीक्षा एकदम साफ-सुथरे तरीके से हो और किसी भी तरह की नकल या गड़बड़ी न हो, इसके लिए पुलिस ने त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है. प्रशासन ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया है.

सीसीटीवी से पैनी नजर: परीक्षा की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए 30 हजार से भी अधिक सीसीटीवी कैमरे चप्पे-चप्पे पर लगाए गए हैं. इन सभी कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ दिया गया है, जहां बैठे अधिकारी पूरी परीक्षा की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
बायोमेट्रिक चेकिंग की सुविधा: किसी और की जगह कोई दूसरा व्यक्ति (फर्जी उम्मीदवार) परीक्षा न दे सके, इसके लिए हर एक केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन की जा रही है. पूरी तरह से सही पाए जाने के बाद ही हॉल में एंट्री मिलेगी.
लगातार गश्त: पूरी सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है. हर केंद्र पर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और सभी बड़े अधिकारी लगातार गश्त करके हालात पर नजर बनाए हुए हैं.

सफर आसान बनाने के लिए चल रहीं स्पेशल ट्रेनें
जब लाखों युवा एक साथ सफर करते हैं तो ट्रेनों और बसों में काफी भीड़ हो जाती है. परीक्षार्थियों के सफर को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने शानदार कदम उठाया है. रेलवे की तरफ से 7 जून से 10 जून तक लखनऊ और गोरखपुर के बीच स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं.

गोरखपुर से चलने वाली ट्रेनें: गाड़ी संख्या 05031 शाम 7:00 बजे गोरखपुर से चलकर रात 12:55 पर लखनऊ पहुंचेगी. दूसरी गाड़ी (05005) दोपहर 1:30 बजे गोरखपुर से चलकर शाम 6:15 बजे लखनऊ पहुंचेगी.
लखनऊ से चलने वाली ट्रेनें: गाड़ी संख्या 05032 शाम 6:15 बजे लखनऊ से चलेगी और रात 11:55 पर गोरखपुर पहुंचेगी. दूसरी गाड़ी (05006) दोपहर 1:30 बजे लखनऊ से चलकर शाम 6:50 पर गोरखपुर पहुंचेगी.

बस किराए में 50% की छूट
सीएम योगी ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत दी है. अक्सर छात्रों को दूर-दराज के जिलों में परीक्षा देने जाना पड़ता है, जिससे उन पर काफी आर्थिक बोझ पड़ता है. इसे कम करने के लिए सीएम ने निर्देश दिया है कि परीक्षा देने जा रहे सभी कैंडिडेट्स को सरकारी बसों के किराए में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. बस में सफर करते समय उम्मीदवार को सिर्फ अपना एडमिट कार्ड दिखाना होगा.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Police, Exam:, यूपी, पुलिस, सिपाही, भर्ती, परीक्षा, आज, से, शुरू, जानें, जरूरी, नियम, और, कैसे, मिलेगी, बस-ट्रेन, की, सुविधा</media:keywords>
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        <title>Loco Pilot In The Railways: रेलवे में कैसे बनते हैं लोको पायलट, जानें 12वीं के बाद  कैसे करें तैयारी?</title>
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        <description><![CDATA[ Loco Pilot In The Railways: भारतीय रेलवे में नौकरी करने का सपना हर साल लाखों युवा देखते हैं. इनमें लोको पायलट की नौकरी सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले पदों में से एक मानी जाती है. ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने और यात्रियों को समय पर उनकी मंजिल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लोको पायलट के कंधों पर होती है. यही वजह है कि रेलवे में यह पद सम्मान और जिम्मेदारी दोनों के लिहाज से बहुत अहम माना जाता है. अगर आप भी 12 वीं के बाद रेलवे में करियर बनाना चाहते हैं और लोको पायलट बनने का सपना देखते हैं तो इसके लिए तय योग्यता, परीक्षा प्रक्रिया और प्रशिक्षण के बारे में जानकारी होना जरूरी है.&amp;nbsp;
कौन होता है लोको पायलट?&amp;nbsp;
लोको पायलट वह कर्मचारी होता है जो ट्रेन का संचालन करता है और यह सुनिश्चित करता है कि ट्रेन सुरक्षित, निर्धारित गति और समय के अनुसार चले. ट्रेन चलाने के अलावा उसे रेलवे के नियमों, सिग्नलों और सुरक्षा मानकों का पालन भी करना होता है. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फैसला लेने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी उसी की होती है. रेलवे में आमतौर पर करियर की शुरुआत असिस्टेंट लोको पायलट के पद से होती है. अनुभव और विभागीय परीक्षाओं के आधार &amp;nbsp;पर कर्मचारी आगे चलकर सीनियर लोको पायलट और अन्य उच्च पदों तक पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
12वीं के बाद कैसे बन सकते हैं लोको पायलट?
लोको पायलट बनने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं या 12वीं पास होना जरूरी है. इसके साथ ही आईटीआई सर्टिफिकेट या इंजीनियरिंग डिप्लोमा होना भी आवश्यक माना जाता है. मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग जैसे विषय इस क्षेत्र के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं जो छात्र 10वीं के बाद आईटीआई करते हैं, वे भी रेलवे भर्ती बोर्ड की असिस्टेंट लोको पायलट भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. वहीं डिप्लोमा या तकनीकी शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को भी आवेदन का अवसर मिलता है.&amp;nbsp;
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रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा पास करना जरूरी&amp;nbsp;
लोको पायलट बनने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से आयोजित असिस्टेंट लोको पायलट परीक्षा पास करनी होती है. चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. पहले चरण में कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसमें गणित, रीजनिंग, सामान्य जागरूकता से प्रश्न पूछे जाते हैं. इसके बाद सीबीटी-2 परीक्षा होती है, जिसमें तकनीकी विषयों और इंजीनियरिंग से जुड़े सवाल शामिल होते हैं. दोनों परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों को कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट के लिए बुलाया जाता है. इसके बाद डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाती है. वहीं लोको पायलट भर्ती के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों की आयु 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए. इसके अलावा रिजर्वेशन कैटेगरी के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी.&amp;nbsp;
सेलेक्शन के बाद होती है स्पेशल ट्रेनिंग&amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों को पहले असिस्टेंट लोको पायलट के रूप में नियुक्त किया जाता है. इसके बाद उन्हें रेलवे के जोनल ट्रेनिंग सेंटरों में तकनीकी और परिचालन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाता है. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे वरिष्ठ लोको पायलट की निगरानी में ट्रेन संचालन का एक्सपीरियंस हासिल करते हैं. वहीं चयन से पहले लोको पायलट की नौकरी में फिजिकल और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होना जरूरी है. चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण किया जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Loco, Pilot, The, Railways:, रेलवे, में, कैसे, बनते, हैं, लोको, पायलट, जानें, 12वीं, के, बाद, कैसे, करें, तैयारी</media:keywords>
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        <title>ये है देश के सबसे ज्यादा पढ़े&amp;लिखे शिक्षा मंत्रियों की लिस्ट, चौंका देंगे ये नाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ये-है-देश-के-सबसे-ज्यादा-पढ़े-लिखे-शिक्षा-मंत्रियों-की-लिस्ट-चौंका-देंगे-ये-नाम</link>
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        <description><![CDATA[ भारत की शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने में शिक्षा मंत्रियों की अहम भूमिका रही है. आजादी के बाद से लेकर अब तक कई बड़े नेता इस जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं. स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद थे. उन्होंने 1947 से 1958 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली. आजाद न केवल स्वतंत्रता सेनानी और महान विचारक थे, बल्कि शिक्षा सुधारों के प्रबल समर्थक भी माने जाते हैं. उनके कार्यकाल में देश में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव रखी गई.
मुरली मनोहर जोशी और कर्ण सिंह ने की डॉक्टरेट&amp;nbsp;
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी देश के सबसे अधिक शिक्षित नेताओं में गिने जाते हैं. उन्होंने मेरठ कॉलेज से बीएससी (B.Sc.) की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से फिजिक्स में एमएससी (M.Sc.) और स्पेक्ट्रोस्कोपी विषय में डी.फिल. (D.Phil.) की उपाधि हासिल की. राजनीति में आने से पहले वह एक शिक्षाविद और वैज्ञानिक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. कर्ण सिंह की भी बेहद प्रभावशाली रही है. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के दून स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय से स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय का रुख किया, जहां से राजनीति विज्ञान में एम.ए. (M.A.) और बाद में पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की.
प्रताप चंद्र चंदर
प्रताप चंद्र चंदर ने 1977 से 1979 के बीच मोरारजी देसाई सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां भी काफी प्रभावशाली थीं. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास में बी.ए. (ऑनर्स), एलएलबी (LL.B.) और कला विषय में डी.फिल. (D.Phil.) की उपाधि प्राप्त की थी. भारतीय शिक्षा व्यवस्था में 10+2+3 प्रणाली लागू करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है.
एम. सी. छागला
एम.सी. छागला 1963 से 1966 तक देश के शिक्षा मंत्री रहे. वे देश के न्यायविदों और विद्वानों में गिने जाते हैं. उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के लिंकन कॉलेज गए. कानून, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है.
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हुमायूं कबीर
हुमायूं कबीर ने वर्ष 1963 में कुछ समय के लिए शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी. वे एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, लेखक और दार्शनिक थे. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक्सेटर कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी. साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है.
धर्मेंद्र प्रधान
वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उच्च शिक्षित नेताओं में शामिल हैं. उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान (Anthropology) में स्नातकोत्तर (Master&#039;s Degree) की डिग्री प्राप्त की है. उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP 2020), डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ये, है, देश, के, सबसे, ज्यादा, पढ़े-लिखे, शिक्षा, मंत्रियों, की, लिस्ट, चौंका, देंगे, ये, नाम</media:keywords>
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        <title>UP Rojgar Mela 2026: यूपी में लगने जा रहा रोजगार मेला, 10वीं&amp;12वीं, ITI और डिप्लोमा वाले रहें तैयार; जानें कैसे करें आवेदन?</title>
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        <description><![CDATA[ UP Rojgar Mela 2026: उत्तर प्रदेश में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ा मौका सामने आया है. उत्तर प्रदेश रोजगार कार्यालय ने रोजगार संगम के जरिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रोजगार मेला 2026 के आयोजन का ऐलान किया है. इस रोजगार मेले में हजारों की संख्या में खाली पदों पर भर्ती की जाएगी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि यूपी में रोजगार मेला के लिए 10वीं, 12वीं, आईआईटी और डिप्लोमा वाले छात्र कैसे आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
कौन ले सकता है रोजगार मेले में भाग?&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश में लगने जा रहे रोजगार मेले में 10वीं, 12वीं इंटरमीडिएट, डिप्लोमा, ग्रेजुएट और हायर एजुकेशन वाले स्टूडेंट्स भाग ले सकते हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग और एमबीए डिग्री वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. वहीं अग्निवीर सेवा देने वाली युवा भी इसमें भाग ले सकते हैं. हालांकि यह भर्ती प्राइवेट कंपनियों और सविंदा के जरिए होगी. बताया जा रहा है कि यूपी रोजगार मेले में 6000 से ज्यादा पदों पर अलग-अलग कंपनियों योग्य कैंडिडेट को जॉब देगी. वहीं यह रोजगार मेला उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगह पर आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;
रोजगार मेले में भाग लेने के लिए आयु सीमा और फीस&amp;nbsp;
रोजगार मेले में भाग लेने वाले उम्मीदवार घर बैठे ही सेवायोजन पोर्टल के जरिए आराम से ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. रोजगार मेला में आवेदन करने वाले किसी भी उम्मीदवार से कोई फीस नहीं ली जाएगी. सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों की फीस फ्री होगी. इस रोजगार मेले में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु कंपनी और पद के अनुसार तय होगी. इसके अलावा रिजर्व कैटेगरी में आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी.&amp;nbsp;
कैसे करें रोजगार मेले के लिए ऑनलाइन आवेदन?

रोजगार मेले के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट &amp;nbsp;rojgaarsangam.up.gov.in &amp;nbsp;पर जाएं.
उसके बाद होम पेज पर यूपी रोजगार मेला 2026 लिंक पर क्लिक करें.
अब आपको अपनी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा.
रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपको एक आईडी और पासवर्ड मिलेगा, इससे आपको पोर्टल पर लॉगिन करना होगा.
लॉगिन करने के बाद आवेदन फार्म में अपनी पर्सनल डिटेल, पढ़ाई-लिखाई की जानकारी और कैटेगरी भरनी होगी.
अब जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे फोटो, सिग्नेचर और मार्कशीट अपलोड करनी होगी.
लास्ट में आपको अपना फॉर्म चेक करके, इसे सबमिट कर देना है.&amp;nbsp;

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कब और कहां लगेगा रोजगार मेला?&amp;nbsp;
रोजगार मेला यूपी के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग दिनों पर आयोजित किया जाएगा. जैसे अयोध्या में रोजगार मेला 12 जून को लगेगा, बहराइच में 11 &amp;nbsp;और 12 जून को रोजगार मेला लगेगा. जरवल और फखरपुर में 9 और 10 जून को मेला लगेगा. बागपत में 11 जून को रोजगार मेला लगेगा. कानपुर देहात में 11 जून को यह मेला लगेगा, मुरादाबाद में 10 जून को, भदोही में 9 जून को, महोबा में 8 जून को&amp;nbsp;रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा. इसके अलावा कई और जिलों में रोजगार मेलों की तारीखों की घोषणा अब की जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rojgar, Mela, 2026:, यूपी, में, लगने, जा, रहा, रोजगार, मेला, 10वीं-12वीं, ITI, और, डिप्लोमा, वाले, रहें, तैयार, जानें, कैसे, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>Sriram Krishnan: व्हाइट हाउस की नौकरी छोड़ेंगे श्रीराम कृष्णन, कहां से की है पढ़ाई और कितनी मिलती है सैलरी? </title>
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        <description><![CDATA[ Sriram Krishnan:&amp;nbsp;ट्रंप प्रशासन में सबसे प्रमुख भारतीय अमेरिकी प्रौद्योगिकी सलाहकारों में से एक श्रीराम कृष्णन ने घोषणा की है कि वह व्हाइट हाउस में वरिष्ठ नीति सलाहकार के पद से इस्तीफा देने वाले हैं. श्रीराम कृष्ण ने बताया कि वह पिछले 18 महीने से अमेरिका के प्रमुख एआई नीतियों को आकार देने में मदद करने के बाद जून के लास्ट में व्हाइट हाउस छोड़ देंगे.
भारतीय-अमेरिकी श्रीराम कृष्णन के इस फैसले के बाद उन्हे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि व्हाइट हाउस की नौकरी छोड़ने वाले श्रीराम कृष्णन ने कहां से पढ़ाई की है और उन्हें कितनी सैलरी मिलती है.&amp;nbsp;
सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी की शेयर&amp;nbsp;
श्रीराम कृष्णन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मैं इस महीने के अंत में व्हाइट हाउस में अपना पद छोड़ रहा हूं. उन्होंने कहा कि एक छोटे से ब्रेक के बाद वह संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने आने वाली प्रमुख एआई संबंधित चुनौतियों पर काम करना जारी रखेंगे. उन्होंने पोस्ट में अपनी सेवाओं को जीवन भर का सौभाग्य बताया और कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधीन काम करना सम्मान की बात थी. उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व के बिना हम एआई की दौड़ में आगे नहीं होते. इसके अलावा उन्होंने व्हाइट हाउस के एआई और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि एआई के क्षेत्र में अमेरिकी की जीत के लिए उनका निरंतर समर्थन महत्वपूर्ण रहा और आगे भी महत्वपूर्ण बना रहेगा. आपको बता दें कि श्रीराम कृष्णन अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की एआई एक्शन प्लान के मुख्य सूत्रधार थे.&amp;nbsp;
श्रीराम कृष्णन भारत के चेन्नई से रखते हैं ताल्लुक&amp;nbsp;
1984 में चेन्नई में जन्मे श्रीराम कृष्णन ने 2005 में एसआरएम यूनिवर्सिटी से सूचना प्रौद्योगिकी में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 2007 में श्रीराम कृष्णन ने माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी के लिए अमेरिका चले गए.&amp;nbsp;
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माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और ट्विटर में कर चुके हैं काम
व्हाइट हाउस में शामिल होने से पहले श्रीराम कृष्णन ने वेंचर कैपिटल फॅर्म आंद्रेसेन होरोविट्ज में जनरल पार्टनर के रूप में काम किया और माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और ट्विटर में अलग-अलग पदों पर रहे. वह एलन मस्क के साथ भी जुड़े रहे थे और उन्होंने 2022 में ट्विटर के अधिग्रहण के दौरान उन्हें सलाह दी थी, जिसे बाद में एक्स के रूप में रीब्रांड किया. वहीं 25 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कृष्णन को अपना सीनियर व्हाइट हाउस पॉलिसी एडवाइजर ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नियुक्त किया.
कितनी है श्री रामकृष्ण की सैलरी?&amp;nbsp;
2026 तक कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीराम कृष्णन की कुल संपत्ति 80 लाख डॉलर से 120 लाख डॉलर के बीच है. उनकी संपत्ति मुख्य रूप से अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों में कार्यकारी नेतृत्व पदों, वेंचर कैपिटल में भागीदारी, एंजेल निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सलाहकार कार्यों से मिलती है.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE issues final reminder: CBSE ने जारी किया फाइनल रिमाइंडर 12वीं के छात्रों के लिए री&amp;इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन का आज आखिरी मौका </title>
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        <description><![CDATA[ CBSE issues final reminder: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई में 12वीं के छात्रों के लिए फाइनल रिमाइंडर जारी कर दिया है. दरअसल सीबीएसई ने उन स्टूडेंट के लिए फाइनल फाइनल रिमाइंडर जारी किया है जो अपने उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं और जो अपने अंकों को लेकर संतुष्ट नहीं है. सीबीएसई ने बताया कि छात्रों को फाइनल रिमाइंडर दिया है कि पोस्ट रिजल्ट सेवाओं के तहत वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख आज है. बोर्ड के अनुसार आवेदन की विंडो आज यानी 7 जून की रात 11:59 बजे तक खुली रहेंगी. इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. &amp;nbsp;सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट घोषित करने के बाद स्टूडेंट्स को मूल्यांकन उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियां देखने का मौका दिया था. इसके बाद जिन छात्रों को अपनी कॉपी में किसी प्रकार की गलती या मार्किंग संबंधित समस्या दिखाई दी उन्हें वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने का ऑप्शन उपलब्ध कराया था.&amp;nbsp;
किन सेवाओं के लिए कर सकते हैं आवेदन?
बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराई गई पोस्ट रिजल्ट सेवाओं में वेरिफिकेशन ऑफ इश्यूज ऑब्जर्व्ड और री-इवैल्युएशन ऑफ आंसर्स शामिल है. वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तहत छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में दिखाई देने वाली किसी विशेष समस्या या गलती की समीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं. वहीं री-इवैल्युएशन के माध्यम से छात्र उन प्रश्नों की जांच करने का अनुरोध कर सकते हैं, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि मूल्यांकन के दौरान अंक नहीं दिए गए. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा प्रक्रिया के बाद अगर अंकों में कोई बदलाव होता है तो वह संशोधित अंक अंतिम माने जाएंगे.&amp;nbsp;
आखिरी समय तक इंतजार न करने की दी सलाह&amp;nbsp;
सीबीएसई ने छात्रों को सलाह दी है कि वह आवेदन प्रक्रिया को अंतिम समय तक न टालें. बोर्ड का कहना है की अंतिम घंटे में पोर्टल पर ज्यादा ट्रैफिक होने के कारण तकनीकी समस्याएं आ सकती है, जिससे आवेदन पूरा करने में परेशानी हो सकती है. छात्रों को आवेदन से पहले एलिजिबिलिटी संबंधी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने और सभी जानकारियां सही भरने की सलाह दी गई है. आवेदन पूरा होने के बाद उसकी कॉपी और पेमेंट रसीद को सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है, ताकि फ्यूचर में जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके.&amp;nbsp;

Reminder Today, 07 June 2026, is the last day to submit applications for Verification of Issues Observed and Re-evaluation of Answers on the post-result services portal for Class XII Examination 2026.Students should complete and submit their applications before this&amp;hellip; pic.twitter.com/3MNugdd1oE
&amp;mdash; CBSE HQ (@cbseindia29) June 7, 2026



सीबीएसई वेरिफिकेशन और री-इवैल्युएशन के लिए कैसे करें आवेदन?&amp;nbsp;

री-इवैल्युएशन और वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करने वाले छात्र सबसे पहले सीबीएसई की पोस्ट रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर जाएं.
इसके बाद वहां अपने रोल नंबर और दूसरी परीक्षा से जुड़ी जानकारी दर्ज करें.
अब इसके बाद जरूरी सेवा का चयन करें.
इसके बाद जहां भी लागू हो उसे सब्जेक्ट और प्रश्न का चयन करें, जिसके लिए आवेदन किया जा रहा है.
अब ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से फीस जमा करें.
आवेदन जमा करने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.&amp;nbsp;

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आज 11:59 बजे बंद हो जाएगी विंडो&amp;nbsp;
सीबीएसई ने रिमाइंडर किया है कि 7 जून यानी आज रात 11:59 पर आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त हो रही है. इसलिए जो छात्र इन सेवाओं में से किसी एक के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें अवसर छूटने से बचने के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, issues, final, reminder:, CBSE, ने, जारी, किया, फाइनल, रिमाइंडर, 12वीं, के, छात्रों, के, लिए, री-इवैल्यूएशन, और, वेरिफिकेशन, का, आज, आखिरी, मौका </media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026: Re&amp;Neet को लेकर आई बड़ी खबर; NTA ने रिलीज की एग्जाम सेंटर लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ जो छात्र डॉक्टर बनने के लिए नीट (NEET UG) 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा देने जा रहे हैं, उनके लिए एक जरूरी जानकारी आई है. परीक्षा कराने वाली सरकारी संस्था &#039;नेशनल टेस्टिंग एजेंसी&#039; ने एक नया नोटिस जारी किया है. जैसा कि सरकारी नोटिस में देखा जा सकता है, यह जानकारी 07 जून 2026 को दी गई है. इसके मुताबिक, अब छात्र वेबसाइट पर जाकर यह देख सकते हैं कि उनकी परीक्षा किस शहर में होने वाली है. इसे &#039;एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप&#039; कहा जाता है.
21 जून को होगी परीक्षा, दोपहर का होगा समय
नोटिस के अनुसार, नीट की यह दोबारा होने वाली परीक्षा 21 जून 2026 रविवार को होगी. परीक्षा का समय दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक रखा गया है. यह परीक्षा कंप्यूटर पर नहीं होगी, बल्कि छात्रों को हमेशा की तरह पेन और पेपर से पेपर देना होगा. इसके लिए भारत और विदेशों को मिलाकर कुल 565 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, ताकि छात्रों को दूर न जाना पड़े.

???? NEET-UG 2026 | City Intimation Slip is now LIVECandidates can now check their allotted examination city for NEET-UG 2026. Log in with your Application Number and password to view and download your slip.???? Visit: https://t.co/lQbedgXNVO⚠️ Please note: This is the City&amp;hellip; pic.twitter.com/xvtpUvJl7A
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) June 7, 2026



जरूरी बात- यह आपका एडमिट कार्ड नहीं है
एजेंसी ने छात्रों को एक बहुत जरूरी बात पर ध्यान देने को कहा है. नोटिस में साफ लिखा है कि यह परीक्षा का एडमिट कार्ड नहीं है. यह पर्ची केवल इसलिए जारी की गई है ताकि छात्रों को पहले से पता चल जाए कि उनका पेपर किस शहर में है और वे वहां जाने की तैयारी समय से कर सकें. परीक्षा केंद्र में एंट्री के लिए जो असली &#039;एडमिट कार्ड&#039; होता है, वह परीक्षा की तारीख से कुछ दिन पहले अलग से जारी किया जाएगा.
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अपना परीक्षा शहर कैसे चेक करें?
छात्र नीचे दिए गए आसान तरीकों से अपने परीक्षा शहर का नाम देख सकते हैं.
सबसे पहले एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in या nta.ac.in पर जाएं.
होमपेज पर दिख रहे &quot;NEET (UG) 2026 Exam City Intimation&quot; वाले लिंक पर क्लिक करें.
इसके बाद अपना एप्लिकेशन नंबर (Application Number) और पासवर्ड (Password) डालकर लॉग इन करें.
अब आपके सामने परीक्षा शहर का नाम आ जाएगा, इसे देख लें और अपने पास सेव कर लें.
अगर किसी छात्र को इसे देखने में कोई परेशानी आती है, तो वे एनटीए के हेल्पलाइन नंबर 011-40759000 या 011-69227700 पर फोन करके मदद मांग सकते हैं. इसके अलावा neetug2026@nta.ac.in पर ईमेल भी भेज सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Australia Study Scholarship: ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए कितना खर्च होता है पैसा, क्या यहां मुफ्त में पढ़ने का मिल सकता है मौका?</title>
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        <description><![CDATA[ Australia Study Scholarship: 12वीं बाद हर भारतीय छात्र का सपना होता है कि वह विदेश जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करें. वो भी खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में, जहां की यूनिवर्सिटीज दुनियाभर में अपनी बेहतरीन शिक्षा और रिसर्च के लिए मशहूर हैं. यही वजह है कि लाखों छात्रों का सपना होता है कि वे ऑस्ट्रेलिया में जाकर पढ़ाई करें. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना सस्ता नहीं माना जाता, क्योंकि यहां पढ़ाई के लिए लाखों रुपये की फीस देनी पड़ सकती है.
ऐसे में विदेशी छात्रों का सपना पूरा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया एक खास ऑफर लेकर आया है. इसके तहत उन्हें फ्री में पढ़ने का चांस मिलने वाला है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि स्टूडेंट के रहने-खाने का इंतजाम भी किया जाएगा और उसे ऑस्ट्रेलिया आने के लिए हवाई टिकट भी मिलेगा.&amp;nbsp;
फीस के साथ रहने का खर्च भी होता है बड़ा
ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान सिर्फ ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि रहने-खाने और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी अच्छा-खासा पैसा खर्च होता है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया ने अपने &#039;ऑस्ट्रेलिया अवार्ड्स स्कॉलरशिप &#039; के 2027 राउंड के लिए आवेदन शुरू कर दिए हैं. इसके तहत विकासशील देशों के छात्रों को फुली-फंडेड स्कॉलरशिप मिलती है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बताया है कि स्कॉलरशिप पाने वाले स्टूडेंट्स को उन सभी यूनिवर्सिटीज में बैचलर्स और मास्टर्स की पढ़ाई का मौका मिलेगा, जो इस अवार्ड का हिस्सा बन रही हैं. साथ ही इस स्कॉलरशिप के लिए फंडिंग ऑस्ट्रेलियाई सरकार खुद कर रही है और इसका मकसद भविष्य के उन लीडर्स को जरूरी स्किल और लीडरशिप क्वालिटी के साथ तैयार करना है, जो अपने देश में जाकर वहां के विकास में योगदान दे सकें.&amp;nbsp;
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स्कॉलरशिप के तहत क्या-क्या मिलेगा?
ऑस्ट्रेलिया अवार्ड्स स्कॉलरशिप को प्रतिस्पर्धी और प्रतिष्ठित माना जाता है, जिसके लिए बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स अप्लाई करते हैं. इसके तहत ट्यूशन फीस माफ होगी, क्योंकि पढ़ाई का पूरा खर्च खुद सरकार उठा रही है. स्टूडेंट को आने-जाने के लिए हवाई टिकट भी मिलेगा. स्कॉलरशिप के तहत स्टूडेंट को रहने, किताबों और पढ़ाई की सामग्री के लिए एकमुश्त पैसा दिया जाएगा. साथ ही पढ़ाई के दौरान छात्र का ओवरसीज स्टूडेंट हेल्थ कवर भी स्कॉलरशिप से पूरा होगा. रोजमर्रा के खर्चे के लिए स्टाइपेंड भी मिलेगा.&amp;nbsp;
स्कॉलरशिप पाने के लिए क्या जरूरी शर्तें?
ये स्कॉलरशिप सिर्फ उन्हीं देशों को मिल रही है, जो अवार्ड के तहत इसका हिस्सा हैं. बता दें, विदेश मंत्रालय और व्यापार विभाग (DFAT) ने इन देशों की लिस्ट जारी कर दी है. स्कॉलरशिप पाने के लिए स्टूडेंट को लीडरशिप क्वालिटी और अपने समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता उजागर करनी होगी. साथ ही उन्हें ये साबित करना होगा कि वे पढ़ाई करने के अपने समुदाय में बड़ा योगदान दे सकेंगे.&amp;nbsp;
उम्मीदवार को नेतृत्व क्षमता, समाज के प्रति जिम्मेदारी और अपने देश के विकास में योगदान देने की इच्छा दिखानी होती है. इसके अलावा चयनित छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद कम से कम दो साल के लिए अपने देश वापस लौटना भी जरूरी होता है. &amp;nbsp;इसका मकसद ये है कि स्टूडेंट ने कोर्स के दौरान जिन स्किल को सीखा है, उसका फायदा उसके देश को भी मिल पाए.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>बड़ी खबर: NTA का बड़ा बयान, Re&amp;NEET UG पेपर लीक का दावा पूरी तरह फर्जी, पैसे ऐंठने के लिए फैलाया जा रहा झूठ</title>
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        <description><![CDATA[ मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET UG 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही &#039;पेपर लीक&#039; की खबरों पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बड़ा एक्शन लिया है. NTA ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर 21 जून को नीट का पेपर लीक होने, पहले से पेपर मिलने या पेपर बेचे जाने के जितने भी दावे किए जा रहे हैं, वे सब पूरी तरह से झूठे, फर्जी और गुमराह करने वाले हैं. एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों को ऐसे किसी भी झांसे में न आने और पैसे न देने की सख्त हिदायत दी है.
छात्रों की मजबूरी का फायदा उठा रहे ठग- NTA
NTA ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि सोशल मीडिया पर जो भी दावे किए जा रहे हैं, वे संगठित नकल माफिया और ठगों का काम हैं. ये गैंग परीक्षा के समय छात्रों और उनके परिवारों के तनाव व घबराहट का फायदा उठाकर फर्जी पेपर बेचने और उनसे मोटी रकम ऐंठने (वसूली) का धंधा चला रहे हैं. इंटरनेट पर चल रहा ऐसा हर एक दावा मनगढ़ंत और बकवास है.

The National Testing Agency (NTA) has noted certain messages circulating on social media and messaging platforms claiming a &quot;leak,&quot; advance access, or &quot;sale&quot; of the NEET (UG) 2026 re-examination question paper.These claims are false, fraudulent, and intended to mislead.Such&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) June 6, 2026



नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने साफ किए ये 4 बड़े पॉइंट
परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित: परीक्षा कराने की पूरी प्रक्रिया एकदम सुरक्षित है और सभी जरूरी कड़े नियम लागू हैं, ताकि सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल मिल सके.
फर्जी अकाउंट्स पर एक्शन: NTA सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने वाले ऐसे सभी चैनलों और अकाउंट्स की पहचान कर रहा है. साइबर क्राइम टीम को इसकी रिपोर्ट भेजी जा रही है ताकि इन अकाउंट्स को तुरंत बंद (Takedown) कराया जा सके.
होगी जेल, दर्ज हो रही FIR
इस तरह के फर्जी कंटेंट बनाने, उसे शेयर करने या आगे फॉरवर्ड करने वालों के खिलाफ NTA पुलिस और साइबर क्राइम सेल में कानूनी शिकायत (FIR) दर्ज करा रहा है. छात्रों को ठगने का प्रयास एक गंभीर और दंडनीय अपराध है, जिसमें शामिल लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी.&amp;nbsp;
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झांसे में न आएं पेरेंट्स
उम्मीदवारों और माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे ऐसे किसी भी मैसेज को न तो आगे फॉरवर्ड करें और न ही इन ठगों को कोई पैसा दें.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बड़ी, खबर:, NTA, का, बड़ा, बयान, Re-NEET, पेपर, लीक, का, दावा, पूरी, तरह, फर्जी, पैसे, ऐंठने, के, लिए, फैलाया, जा, रहा, झूठ</media:keywords>
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        <title>Delhi Anganwadi Recruitment 2026: 12वीं पास से लेकर MA उम्मीदवारों के लिए नौकरी का शानदार मौका, 26 जून तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) ने मिशन वात्सल्य योजना के तहत कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती अभियान के जरिए 12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और एलएलबी योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा. इच्छुक उम्मीदवार 26 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार यह भर्ती एक वर्ष के अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर की जाएगी. भर्ती के तहत प्रोग्राम ऑफिसर, डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर, प्रोटेक्शन ऑफिसर, लीगल कम प्रोबेशन ऑफिसर, काउंसलर, सोशल वर्कर, अकाउंटेंट, डाटा एनालिस्ट, डाटाएंट्री ऑपरेटर और आउटरीच वर्कर समेत कई पदों को भरा जाएगा.
इस भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए अलग योग्यताएं तय की गई हैं. कुछ पदों के लिए सोशल वर्क, साइकोलॉजी, सोशियोलॉजी या संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री आवश्यक है, जबकि कई पदों के लिए ग्रेजुएशन या 12वीं पास योग्यता भी पर्याप्त है.
डेटा एंट्री ऑपरेटर के लिए क्या हैं शर्तें?
डेटा एंट्री ऑपरेटर पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के 12वीं में कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए. इसके साथ ही कंप्यूटर डिप्लोमा, 35 शब्द प्रति मिनट की टाइपिंग स्पीड और कम से कम एक वर्ष का अनुभव भी जरूरी है. यह पद उन युवाओं के लिए बेहतर अवसर माना जा रहा है जिनके पास कंप्यूटर कार्य का अनुभव है.
आउटरीच वर्कर पद के लिए पात्रता
आउटरीच वर्कर पद के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास होना आवश्यक है. इसके अलावा कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, लोगों से संवाद करने की क्षमता और अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
उम्र सीमा
इस भर्ती में शामिल अलग अलग पदों के लिए उम्र सीमा 35 से 40 वर्ष तक तय की गई है. कई पदों पर संबंधित क्षेत्र में कार्य अनुभव भी जरूरी रखा गया है.
कितना दिया जाएगा वेतन?
इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 22,411 रुपये &amp;nbsp;से 44,023 रुपये &amp;nbsp;तक मासिक वेतन दिया जाएगा. उम्मीदवार भर्ती के लिए लास्ट डेट से पहले आवेदन कर लें. ज्यादा डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.
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इस भर्ती के लिए कैसे कर सकते हैं आवेदन?

सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट wcd.delhi.gov.in पर जाएं.
होमपेज पर दिए गए Apply Online लिंक पर क्लिक करें.
अपनी जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन पूरा करें.
जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और फॉर्म को चेक कर कर सबमिट कर दें.
फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट जरूर निकाल लें.

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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Delhi, Anganwadi, Recruitment, 2026:, 12वीं, पास, से, लेकर, उम्मीदवारों, के, लिए, नौकरी, का, शानदार, मौका, जून, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>छात्रों को नहीं होगी परेशानी! NEET री&amp;एग्जाम के लिए CM ने दिए बड़े निर्देश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/छात्रों-को-नहीं-होगी-परेशानी-neet-री-एग्जाम-के-लिए-cm-ने-दिए-बड़े-निर्देश</link>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की पुनर्परीक्षा को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा राज्यभर में पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था के साथ संपन्न कराई जानी चाहिए, ताकि छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
बताते चलें कि 3 मई को आयोजित NEET परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था. इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है, जो 21 जून को होगी. इस परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है.
एक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए और हर स्तर पर निगरानी को मजबूत बनाया जाए.
उन्होंने विशेष रूप से सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए. साथ ही साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी या ऑनलाइन अनियमितता को रोकने के लिए आवश्यक कदम पहले से उठाए जाएं.
सख्ती से लागू की जाए प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया पूरी सख्ती के साथ लागू की जानी चाहिए. इसके अलावा उम्मीदवारों की जांच और प्रवेश प्रक्रिया को भी निर्धारित नियमों के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. उनका कहना था कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी है.
फडणवीस ने अधिकारियों को छात्रों, अभिभावकों और आम जनता के साथ प्रभावी संवाद बनाए रखने की भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों का उपयोग करते हुए परीक्षा से जुड़ी सही जानकारी लगातार साझा की जानी चाहिए. इससे अफवाहों और गलत सूचनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
सूचना प्रबंधन जरूरी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षा से संबंधित किसी भी भ्रामक खबर या अफवाह का तत्काल खंडन किया जाए. उन्होंने कहा कि गलत सूचनाएं छात्रों और उनके परिवारों में अनावश्यक तनाव और भ्रम पैदा कर सकती हैं, इसलिए सूचना प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है.
बैठक में फडणवीस ने पुणे और लातूर के परीक्षा केंद्रों पर विशेष फोकस करने को भी कहा. उन्होंने बताया कि इन दोनों क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र NEET परीक्षा देने पहुंचते हैं. ऐसे में यहां अतिरिक्त व्यवस्थाएं और निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो.
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क्या बोले सीएम
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छात्रों के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और अन्य बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त इंतजाम किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थी बिना किसी परेशानी के परीक्षा दे सकें.
बैठक के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने महाराष्ट्र में परीक्षा की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी. उन्होंने राज्य में बनाए गए परीक्षा केंद्रों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं और परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी साझा की.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>छात्रों, को, नहीं, होगी, परेशानी, NEET, री-एग्जाम, के, लिए, ने, दिए, बड़े, निर्देश</media:keywords>
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        <title>​कितने पढ़े लिखे हैं कॉकरोच जनता पार्टी के तीनों प्रवक्ता? जानिए कहां से ली है शिक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &amp;lsquo;कॉकरोच जनता पार्टी&amp;rsquo; (CJP) इन दिनों चर्चा में है. संगठन की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां और दिल्ली पुलिस सतर्क हो गई हैं. इस बीच लोगों के बीच पार्टी के प्रमुख चेहरों और प्रवक्ताओं को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी के तीनों प्रवक्ता कितने पढ़े-लिखे हैं और उन्होंने कहां से शिक्षा प्राप्त की है.
सौरव दास
कॉकरोच जनता पार्टी ने इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट सौरव दास को अपना मुख्य प्रवक्ता बनाया है. संगठन के अनुसार, सौरव दास ने कई वर्षों तक कानूनी, न्यायिक और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग की है. वे नवंबर 2025 में इंडिया गेट पर आयोजित प्रदूषण विरोधी आंदोलन से भी जुड़े रहे थे.
शिक्षा की बात करें तो सौरव दास ने अमिटी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता और जनसंचार (Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication) में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की है. उन्होंने वर्ष 2016 से 2019 के बीच यह कोर्स पूरा किया.&amp;nbsp;
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विजेता दहिया
कॉकरोच जनता पार्टी के दूसरे प्रवक्ता विजेता दहिया हैं. संगठन उन्हें राजनीतिक शोधकर्ता, लेखक, फिल्ममेकर और कंटेंट क्रिएटर के रूप में प्रस्तुत करता है. जानकारी के अनुसार, उन्होंने &amp;lsquo;Power of Universe&amp;rsquo; और &amp;lsquo;To Hell With That Job&amp;rsquo; नामक पुस्तकें लिखी हैं. इसके अलावा उन्होंने हरियाणवी फिल्मों &amp;lsquo;दरारें&amp;rsquo; और &amp;lsquo;ओपरी पराई&amp;rsquo; का लेखन और निर्देशन भी किया है. विजेता दहिया मूल रूप से हरियाणा से हैं, लेकिन वर्तमान में मुंबई में रहते हैं. उनकी शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से अपनी पढ़ाई पूरी की है. इंजीनियरिंग बैकग्रॉउंड के साथ-साथ वे लेखन, शोध और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं.
आशुतोष रांका&amp;nbsp;
कॉकरोच जनता पार्टी के तीसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका हैं. संगठन के अनुसार, उनके पास परामर्श (Consulting) और जनहित से जुड़े अभियानों में काम करने का अनुभव है. आशुतोष रांका ने देश के टॉप संस्थान IIT कानपुर से इंजीनियरिंग (B.Tech) की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. उन्होंने लंदन में मैकिंजी एंड कंपनी के साथ भी काम किया है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कांग्रेस या भाजपा जैसी पार्टियों का प्रवक्ता बनने के लिए किस डिग्री की होती है जरूरत?</title>
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        <description><![CDATA[ टीवी डिबेट्स, प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया ब्रीफिंग में राजनीतिक दलों का पक्ष रखने वाले प्रवक्ता आज राजनीति का अहम चेहरा बन चुके हैं. कांग्रेस, भाजपा, आम आदमी पार्टी या अन्य बड़े राजनीतिक दलों के प्रवक्ता अक्सर राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का रुख जनता के सामने रखते हैं. ऐसे में कई युवाओं के मन में सवाल उठता है कि आखिर किसी राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता बनने के लिए कौन-सी डिग्री या योग्यता जरूरी होती है?दरअसल, भारत में किसी भी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बनने के लिए संविधान, चुनाव आयोग या किसी सरकारी संस्था द्वारा कोई विशेष शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है. यानी प्रवक्ता बनने के लिए किसी खास डिग्री का होना अनिवार्य नहीं है. हालांकि, कुछ विषयों में शिक्षा और अनुभव इस भूमिका में काफी मददगार साबित होते हैं.कौन-सी डिग्री होती है फायदेमंद?रिपोर्ट्स के अनुसार मास कम्युनिकेशन (Journalism and Mass Communication), राजनीति विज्ञान (Political Science), जनसंपर्क (Public Relations), कानून (Law), पत्रकारिता, लोक प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विषयों की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को इस क्षेत्र में बढ़त मिल सकती है. इन विषयों की पढ़ाई से राजनीतिक व्यवस्था, मीडिया प्रबंधन, जनसंपर्क और नीतिगत मुद्दों की बेहतर समझ विकसित होती है, जो प्रवक्ता की भूमिका निभाने में काफी उपयोगी साबित होती है.
यह भी पढ़ें- ​कितने पढ़े लिखे हैं कॉकरोच जनता पार्टी के तीनों प्रवक्ता? जानिए कहां से ली है शिक्षासिर्फ डिग्री नहीं, ये स्किल्स भी हैं जरूरीराजनीतिक प्रवक्ता बनने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं होती. इस पद पर सफलता के लिए कई महत्वपूर्ण कौशलों की भी आवश्यकता होती है. एक प्रवक्ता का सबसे बड़ा हथियार उसकी बोलने की क्षमता होती है. उसे टीवी चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की बात स्पष्ट, प्रभावी और आत्मविश्वास के साथ रखनी होती है.राजनीतिक और सामाजिक समझदेश-दुनिया की घटनाओं, सरकारी नीतियों, विपक्ष के आरोपों और अपनी पार्टी की विचारधारा की गहरी जानकारी होना बेहद जरूरी है. प्रवक्ता को हर मुद्दे पर तथ्यों के साथ जवाब देने में सक्षम होना चाहिए.डिबेट और तर्क क्षमताटीवी डिबेट में अक्सर तीखे सवाल और बहस का माहौल होता है. ऐसे में प्रवक्ता के पास मजबूत तर्क क्षमता, संयम और तुरंत जवाब देने की योग्यता होनी चाहिए. मीडिया के कामकाज और खबरों की प्रकृति को समझना भी महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि कई पत्रकार, वकील और राजनीतिक विश्लेषक बाद में राजनीतिक दलों के प्रवक्ता बन जाते हैं.कैसे बन सकते हैं राजनीतिक प्रवक्ता?आमतौर पर राजनीतिक दल अपने सक्रिय और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को समय के साथ प्रवक्ता की जिम्मेदारी देते हैं. इसके लिए पार्टी में लंबे समय तक काम करना, संगठनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेना और नेतृत्व का विश्वास हासिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;बेनकाब हो चुके हैं धर्मेंद्र प्रधान, सत्ता में बने रहना...&amp;apos;, CBSE के OSM सिस्टम पर भड़की कांग्रेस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बेनकाब-हो-चुके-हैं-धर्मेंद्र-प्रधान-सत्ता-में-बने-रहना-cbse-के-osm-सिस्टम-पर-भड़की-कांग्रेस</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शनिवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद पर बने रहना सत्ता की उनकी निर्लज्ज लालसा को दर्शता है.&amp;nbsp;
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मंत्री प्रधान एक समझौतावादी मंत्रालय चलाने वाले एक अहंकारी और अक्षम व्यक्ति के रूप में बेनकाब हुए हैं. रमेश ने एक खबर का हवाला देते हुए &#039;एक्स&#039; पर पोस्ट किया, &#039;शिक्षा मंत्रालय के राज तेज़ी से एक के बाद एक सामने आते जा रहे हैं. आज, हमें पता चला कि कोएम्पट (कॉन्ट्रेक्टर) ने निविदा की साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीबीएसई को दो साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए.&#039;&amp;nbsp;

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साइबर सुरक्षा खामियों पर सवाल
अब खबर है कि ये दोनों प्रमाणपत्र दूसरे ग्राहकों से जुड़े हुए थे. उनमें से एक की समय सीमा समाप्त हो गई थी और दूसरे का एक अस्थायी आवेदन के रूप में ऑडिट किया गया था.&amp;nbsp; उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई ने इस धोखे को उजागर करने के बजाय कोएम्पट को बढ़ी हुई दरों पर ठेका दे दिया. उनका कहना है, &amp;lsquo;जैसा कि अब हम जानते हैं, जेन-जी एथिकल हैकर्स ने फरवरी 2025 में ही साइबर सुरक्षा में गंभीर खामियों को उजागर कर दिया था, जिसे सीबीएसई ने तब तक नकारा जब तक कि वह ऐसा करने में असमर्थ नहीं हो गया....&amp;rsquo;&amp;nbsp;
धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला
जयराम रमेश ने कहा, &#039;यदि प्रधान के मंत्रालय ने सीबीएसई परीक्षाओं, ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सही से आगे बढ़ाने में अधिक ईमानदारी दिखाई होती, तो हम इस बुरी स्थिति से बच सकते थे जिसने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को तनाव में डाल दिया है.&#039; उन्होंने कहा, &#039;मंत्री प्रधान का पद पर बने रहना केवल सत्ता के लिए उनकी बेशर्म इच्छा को दर्शाता है. वह पूरी तरह से समझौतावादी मंत्रालय चलाने वाले एक अहंकारी और अक्षम व्यक्ति के रूप में बेनकाब हो गए हैं.&#039;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;CJP Protest: क्या अमेरिका ने अभिजीत दीपके के डिपोर्टेशन के बारे में बताया? दिल्ली में CJP के विरोध-प्रदर्शन से पहले सरकार से सवाल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बेनकाब, हो, चुके, हैं, धर्मेंद्र, प्रधान, सत्ता, में, बने, रहना..., CBSE, के, OSM, सिस्टम, पर, भड़की, कांग्रेस</media:keywords>
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        <title>CBSE की इस चूक ने बढ़ाई छात्र की टेंशन, री&amp;इवैल्यूएशन से पहले सामने आई नई समस्या</title>
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        <description><![CDATA[ सीबीएसई की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर एक और मामला सामने आया है. दिल्ली के कक्षा 12 के छात्र तनिष्क का आरोप है कि पहले उसे बिना अंकों वाली मार्कशीट जारी कर दी गई. इसके बाद जब उसने अपने पेपर दोबारा जांच के लिए आंसर शीट की कॉपी मांगी तो एक विषय की कॉपी ही नहीं मिली. परिवार का कहना है कि इस वजह से री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो रही है.
रिजल्ट आया तो मार्कशीट निकली खाली
तनिष्क ने इस साल सीबीएसई कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. लेकिन जब रिजल्ट घोषित हुआ तो उसे जो मार्कशीट मिली, उसमें किसी भी विषय के अंक नहीं थे. यह देखकर छात्र और उसके परिवार के होश उड़ गए.परिवार के मुताबिक, समस्या सामने आने के बाद उन्होंने स्कूल और सीबीएसई अधिकारियों से संपर्क किया. कई दिनों तक लगातार चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. इससे छात्र की चिंता और बढ़ गई.
एक हफ्ते बाद मिली सही मार्कशीट
काफी प्रयासों के बाद करीब एक सप्ताह बाद छात्र को सही मार्कशीट उपलब्ध कराई गई. हालांकि तब तक परिवार काफी परेशान हो चुका था.सही परिणाम मिलने के बाद तनिष्क ने अपने अंकों की दोबारा जांच कराने का फैसला किया.इसके लिए उसने सभी छह विषयों की स्कैन की गई आंसर शीट की मांग की, ताकि जरूरत पड़ने पर री-इवैल्यूएशन कराया जा सके.
छह की जगह मिली सिर्फ पांच आंसर शीट
परिवार का आरोप है कि छह विषयों की कॉपियां मांगी गई थीं, लेकिन उन्हें केवल पांच विषयों की उत्तर पुस्तिकाएं ही मिलीं. एक विषय की कॉपी नहीं मिलने के कारण छात्र उस विषय में री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन नहीं कर पा रहा है.सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि री-इवैल्यूएशन की अंतिम तारीख भी नजदीक है.ऐसे में समय रहते कॉपी नहीं मिलने पर छात्र का मौका छूट सकता है.यह भी पढ़ें - CBSE के रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से ज्यादा को किया गया ब्लॉकछात्र पर पड़ रहा मानसिक दबावतनिष्क के पिता का कहना है कि लगातार सामने आ रही इन समस्याओं का असर छात्र की मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है.उनका कहना है कि बेटा बार-बार यही पूछता है कि आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है.परिवार लगातार उसे समझाने और हौसला देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है.सीबीएसई से कार्रवाई की मांगपरिवार ने सीबीएसई से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द गायब उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई जाए.उनका कहना है कि हर छात्र को अपने अंकों की दोबारा जांच कराने का अधिकार है और तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से किसी का नुकसान नहीं होना चाहिए.फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि बोर्ड जल्द समाधान निकालेगा ताकि छात्र समय रहते री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया पूरी कर सके.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 01:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी के शिक्षकों को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों को जल्द ही स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी बड़ी राहत मिलने वाली है. मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत शिक्षकों के लिए बनाए जाने वाले कैशलेस मेडिकल कार्ड की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. कार्ड का डिजाइन तैयार हो गया है और ऑनलाइन आवेदन का फॉर्म भी जारी कर दिया गया है.अब विभागीय मंजूरी के बाद योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी.
घर बैठे कर सकेंगे आवेदन
योजना शुरू होने के बाद शिक्षक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन करते समय आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिसके जरिए पहचान की पुष्टि होगी. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करके आवेदन जमा किया जा सकेगा.
मोबाइल पर मिलती रहेगी हर अपडेट
आवेदन जमा होने के बाद उसकी जांच की प्रक्रिया शुरू होगी.सबसे पहले आवेदन खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के पास जाएगा. वहां से मंजूरी मिलने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के पास भेजा जाएगा. आवेदन किस स्तर पर है, इसकी जानकारी शिक्षकों को मोबाइल मैसेज के जरिए मिलती रहेगी.
परिवार के सदस्य भी उठा सकेंगे लाभ
अगर कोई शिक्षक अपने परिवार के पात्र आश्रितों को भी इस योजना में शामिल करना चाहता है तो आवेदन करते समय इसका विकल्प चुन सकता है. इससे परिवार के सदस्यों को भी इलाज की सुविधा का फायदा मिल सकेगा.
ये भी पढ़ें-विदेश में पढ़ाई का सपना होगा पूरा! सरकार दे रही स्कॉलरशिप, जानें कौन और कैसे कर सकता है आवेदन?
कब डाउनलोड कर सकेंगे कार्ड?
ई-केवाईसी, दस्तावेजों की जांच और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कैशलेस मेडिकल कार्ड जारी कर दिया जाएगा. शिक्षक इसे ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल कर पाएंगे.
5 लाख रुपये तक मिलेगा कैशलेस इलाज
इस योजना के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक और उनके पात्र आश्रित 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकेंगे. यानी इलाज के लिए अस्पताल में जेब से पैसे खर्च करने की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी.यह भी पढ़ें - IIT Mumbai: IIT मुंबई में एक साल की कितनी लगती है फीस, Jee एडवांस देकर जाने वालों को क्या होता है फायदा? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>UP Police SI भर्ती में बड़ा अपडेट, DV&amp;PST के एडमिट कार्ड जारी</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड ने उप निरीक्षक (SI) नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण को लेकर जरूरी सूचना जारी की है. बोर्ड ने दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए हैं. उम्मीदवार 5 जून 2026 से अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं.
भर्ती बोर्ड द्वारा जारी नोटिस के अनुसार कुल 4543 पदों पर भर्ती के लिए दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण की प्रक्रिया 15 जून 2026 से शुरू होगी. यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की जाएगी.
15 जून से शुरू होगी DV और PST प्रक्रिया
भर्ती बोर्ड के अनुसार दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण की प्रक्रिया 15 जून से शुरू होगी. उम्मीदवारों को अपने एडमिट कार्ड में दिए गए निर्धारित केंद्र, डेट और समय के अनुसार उपस्थित होना होगा. सभी अभ्यर्थियों को तय समय पर केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य होगा. देर से पहुंचने वाले उम्मीदवारों को प्रवेश से वंचित किया जा सकता है.
कौन-कौन से दस्तावेज साथ ले जाने होंगे?
दस्तावेज सत्यापन के दौरान उम्मीदवारों को अपने सभी मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे. इसके साथ ही प्रत्येक दस्तावेज की फोटोकॉपी भी जमा करनी होगी. अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता से संबंधित प्रमाण पत्र, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्र, आरक्षण से जुड़े दस्तावेज और अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र अपने साथ लेकर जाने होंगे.
यह भी पढ़ें - CBSE की इस चूक ने बढ़ाई छात्र की टेंशन, री-इवैल्यूएशन से पहले सामने आई नई समस्या
भर्ती के अगले चरण की तैयारी
उप निरीक्षक (SI) नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत कुल 4543 रिक्त पदों को भरा जाना है. लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवार अब भर्ती प्रक्रिया के अगले महत्वपूर्ण चरण यानी दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण में शामिल होंगे. इन दोनों चरणों में सफल अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया के आगामी चरणों के लिए पात्र माना जाएगा.
वेबसाइट से डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
बोर्ड ने बताया है कि भर्ती प्रक्रिया के इस चरण में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं. उम्मीदवार अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि की मदद से लॉगिन कर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लें और उसमें दर्ज नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, तिथि और समय सहित सभी जानकारियों को चेक कर लें.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE ने छात्रों को दी राहत, 12वीं के वेरिफिकेशन और री&amp;इवैल्यूएशन आवेदन की अंतिम डेट बढ़ाई</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और सवालों के री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन करने की अंतिम डेट बढ़ा दी है. अब छात्र 7 जून तक आवेदन कर सकते हैं.
बोर्ड ने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए आवेदन प्रक्रिया की समयसीमा एक दिन के लिए बढ़ाने का फैसला किया है. इससे उन छात्रों को ज्यादा समय मिल सकेगा जो किसी कारणवश निर्धारित समय के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे.

In the interest of students, CBSE has decided to extend the last date for submission of applications for Verification and Re-evaluation of Question(s) for the Class XII Board Examinations, thereby providing students additional time and support to complete the process.&amp;bull;&amp;hellip;
&amp;mdash; CBSE HQ (@cbseindia29) June 5, 2026



7 जून तक करें अप्लाई
CBSE की तरफ से जारी सूचना के अनुसार पहले आवेदन जमा करने की अंतिम डेट 6 जून 2026 की मध्यरात्रि तक निर्धारित थी. अब इसे बढ़ाकर 7 जून 2026 की मध्यरात्रि कर दिया गया है.
बोर्ड ने कहा है कि इस अतिरिक्त समय का उद्देश्य छात्रों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में सहायता प्रदान करना और उन्हें किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य परेशानी से बचाना है.
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CBSE बोर्ड ने की अपील
CBSE ने सभी पात्र छात्रों से संशोधित कार्यक्रम का ध्यान रखने और निर्धारित नई समयसीमा के भीतर अपने आवेदन जमा करने की अपील की है. जो छात्र अपने प्राप्त अंकों के सत्यापन या किसी प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट में दर्ज कराई शिकायत
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर हुए साइबर हमलों को लेकर दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.
बोर्ड के अनुसार, हाल के दिनों में उसके पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल को निशाना बनाते हुए कई समन्वित &amp;nbsp;और अत्याधुनिक साइबर हमले किए गए. इन हमलों का उद्देश्य पोर्टल की सेवाओं को प्रभावित करना और ऑनलाइन प्रक्रियाओं में बाधा लाना था.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE पोर्टल हैकिंग केस में IFSO की एंट्री, जानिए क्या है इसकी ताकत</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE के पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर हाल ही में हुए साइबर हमलों के बाद मामला दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट तक पहुंच गया है.बोर्ड ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ दिनों में पोर्टल को लगातार निशाना बनाया गया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की वजह से कोई भी हमला सफल नहीं हो पाया. छात्रों का डेटा सुरक्षित बताया गया है, लेकिन अब हमलों के पीछे मौजूद लोगों की पहचान और उनके मकसद का पता लगाने की जिम्मेदारी IFSO यूनिट को सौंपी गई है.
दरअसल, CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद छात्रों के लिए पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल शुरू किया था. इसी पोर्टल के जरिए छात्र अपने अंकों का सत्यापन, उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी और री-इवैल्यूएशन जैसी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं.बोर्ड के मुताबिक पोर्टल शुरू होने के कुछ ही समय बाद उस पर साइबर हमलों की कोशिशें शुरू हो गईं. CBSE ने दावा किया कि लाखों संदिग्ध रिक्वेस्ट और हजारों अनधिकृत एक्सेस प्रयासों को सुरक्षा सिस्टम ने समय रहते ब्लॉक कर दिया। इसके बावजूद पोर्टल सामान्य रूप से काम करता रहा और छात्रों की सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं.
आखिर क्या है IFSO यूनिट?
IFSO का पूरा नाम Intelligence Fusion and Strategic Operations है.यह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के तहत काम करने वाली एक विशेष साइबर जांच इकाई है. इस यूनिट का गठन ऐसे मामलों की जांच के लिए किया गया था जो तकनीकी रूप से जटिल हों या जिनका असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ सकता हो.साइबर अपराधों की दुनिया तेजी से बदल रही है. ऐसे में सामान्य पुलिस जांच के अलावा विशेषज्ञ तकनीकी टीमों की जरूरत पड़ती है. IFSO इसी तरह के मामलों को संभालने के लिए जानी जाती है.
किन मामलों की जांच करती है IFSO?
IFSO सिर्फ वेबसाइट हैकिंग तक सीमित नहीं है. यह यूनिट डेटा चोरी, ऑनलाइन फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया अपराध, रैनसमवेयर हमले, फर्जी निवेश योजनाएं और बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़े मामलों की भी जांच करती है.जब किसी साइबर अपराध का दायरा बड़ा हो या उसके पीछे संगठित गिरोह होने की आशंका हो, तब ऐसे मामलों को IFSO को सौंपा जाता है. यही वजह है कि CBSE ने भी अपने पोर्टल पर हुए कथित साइबर हमलों की जांच के लिए इसी यूनिट से मदद मांगी है.
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CBSE का पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल लाखों छात्रों से जुड़ा हुआ है. यहां छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद रहते हैं. ऐसे में किसी भी तरह का साइबर हमला केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि डेटा सुरक्षा का भी बड़ा मामला बन जाता है.हालांकि CBSE ने साफ किया है कि किसी भी छात्र का डेटा लीक नहीं हुआ है और सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है. इसके बावजूद बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है ताकि हमलों के पीछे की सच्चाई सामने आ सके.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Top 10 Management Colleges: ये हैं देश के टॉप&amp;10 मैनेजमेंट कॉलेज, एडमिशन लेने से पहले देख लीजिए लिस्ट </title>
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        <description><![CDATA[ Top 10 Management Colleges: इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क 2026 ने देश के फेमस एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की रैंकिंग जारी कर दी है. यह रैंकिंग अलग-अलग कोर्सेज के अनुसार जारी की गई है. इस रैंकिंग में मैनेजमेंट कॉलेज की रैंकिंग भी शामिल है. जिनमें सबसे टॉप पर आईआईएम अहमदाबाद ने अपनी जगह बनाई है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि देश के टॉप-10 मैनेजमेंट कॉलेज कौन से हैं और एडमिशन लेने से पहले आपको यह लिस्ट क्यों देख लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
देश के टॉप-10 मैनेजमेंट कॉलेज&amp;nbsp;
1. आईआईएम अहमदाबाद&amp;nbsp;
आईआईआरएफ इंडिया एमबीए रैंकिंग 2026 में आईआईएम अहमदाबाद में अपनी जगह टॉप वन में बनाई है. आईआईएम अहमदाबाद देश का सबसे फेमस मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट माना जाता है.1961 में स्थापित इस कॉलेज को भारत का हार्वर्ड भी कहा जाता है. यह इंस्टीट्यूट अपनी बेहतरीन मैनेजमेंट एजूकेशन और प्लेसमेंट के लिए दुनियाभर में फेमस है.&amp;nbsp;
2. आईआईएम कोलकाता
देश का पहला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट आईआईएम कोलकाता है. इसकी स्थापना भी 1961 में हुई थी, वहीं इस इंस्टीट्यूट की स्थापना देश को तकनीकी उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए आजादी के बाद की गई थी. इसके अलावा इस इंस्टीट्यूट में आज पढ़ना हर एक बिजनेस और मैनेजमेंट स्टूडेंट्स का सपना माना जाता है.&amp;nbsp;
3. आईआईएम बैंगलोर&amp;nbsp;
आईआईएम बैंगलोर को एशिया का सबसे टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट माना जाता है. वहीं यह इंस्टीट्यूट एकेडमीक उत्कृष्टता और नेतृत्व विकास दोनों पर ध्यान केंद्रित करता है. 1973 में अपनी शुरुआत से लेकर आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने तक इस इंस्टीट्यूट ने एक लंबा सफर तय किया गया है. वहीं हर साल आईआईएम बैंगलोर अपने सक्सेसफुल स्टेटमेंट के लिए भी पूरे देशभर में चर्चा में रहता है.&amp;nbsp;
4. एफएमएस दिल्ली&amp;nbsp;
एफएमएस दिल्ली भी देश के सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में से एक है. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के परिसर में स्थित एफएमएस अपनी एकेडमिक उत्कृष्टता और विश्व स्तरीय प्लेसमेंट रिकॉर्ड के लिए प्रसिद्ध है. 1954 में स्थापित यह इंस्टीट्यूट दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबंधित है. वहीं फिलहाल इस इंस्टीट्यूट को आईआईआरएफ की रैंकिंग में चौथा स्थान मिला है.&amp;nbsp;
5. आईआईएम लखनऊ&amp;nbsp;
आईआईएम लखनऊ देश के सबसे टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में शामिल है. आईआईएम लखनऊ की स्थापना 1984 में हुई थी. आईआईएम लखनऊ में एडमिशन सीएट स्कोर, इंस्टीट्यूशनल रिकॉर्ड और इंटरव्यू के आधार पर होती है. वहीं हर साल यहां एडमिशन के लिए हजारों स्टूडेंट्स आवेदन करते हैं.&amp;nbsp;
6. आईआईएम इंदौर&amp;nbsp;
आईआईएम इंदौर को भी देश के टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में गिना जाता है. वहीं आईआईएम इंदौर पहला ऐसा इंस्टीट्यूट है, जिसमें हिंदी में मैनेजमेंट और लीडरशिप डेवलपमेंट कोर्स शुरू किया था. यहां भी स्टूडेंट्स को सीएट परीक्षा के माध्यम से ही एडमिशन मिलता है.&amp;nbsp;
7. आईआईएम कोझिकोड&amp;nbsp;
आईआईएम कोझिकोड को दक्षिण भारत के टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में से एक माना जाता है. इसकी स्थापना 1996 में भारत सरकार और केरल राज्य सरकार के सहयोग से की गई थी. आईआईएम कोझिकोड में भी एडमिशन के लिए सीएट एग्जाम देना होता है.&amp;nbsp;
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8. जेबीआईएमएस मुंबई&amp;nbsp;
मुंबई स्थित जमनालाल बजाज सेवा ट्रस्ट के सहयोग से ही जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की स्थापना 1965 में की गई थी. पोस्ट ग्रेजुएट एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए इस इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी. यह भी देश के टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में से एक है.&amp;nbsp;
9. आईआईएफटी दिल्ली&amp;nbsp;
आईआईएफटी दिल्ली भारत के टॉप बिजनेस स्कूलों में से एक है. इसकी स्थापना 1963 में की गई थी. यह इंस्टीट्यूट मुख्य रूप से &amp;nbsp;एमबीए इंटरनेशनल बिजनेस के लिए जाना जाता है. इसे भी आईआईआरएफ रैंकिंग में देश के टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में जगह मिली है.&amp;nbsp;
10. आईआईएम मुंबई&amp;nbsp;
आईआईआरएफ की टॉप 10 मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट कॉलेज रैंकिंग में आईआईएम मुंबई को 10वां प्राप्त हुआ है. यह इंस्टीट्यूट भी देश के सबसे टॉप बिजनेस स्कूलों में से एक है. इसे पहले NITIE &amp;nbsp;के नाम से भी जाना जाता था, वहीं इसकी स्थापना भी 1963 में की गई थी. इंस्टीट्यूट में मुख्य रूप से एमबीए और डिजिटल साइंस एंड मैनेजमेंट में बैचलर डिग्री जैसे कोर्स कराए जाते हैं.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP Recruitment 2026: यूपी में निकली एक्साइज कॉन्स्टेबल की बंपर भर्ती, 12वीं पास उम्मीदवार 24 जून तक करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने एक्साइज कॉन्स्टेबल भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस वैकेंसी &amp;nbsp;के लिए इच्छुक और पात्र उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की अंतिम डेट 24 जून तय की गई है. उम्मीदवार इस भर्ती के लिए यहां बताए गए तरीके के जरिए आवेदन कर सकते हैं.
कौन कर सकता है आवेदन?
एक्साइज कॉन्स्टेबल पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास उत्तर प्रदेश प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2025 का वैध स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है. इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसके अलावा उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं क्लास पास होना जरूरी है. केवल वही अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे जो निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को पूरा करते हैं.
आयु सीमा क्या है?
भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय की गई है, जबकि अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित की गई है. सरकारी नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी. आयु की गणना आयोग द्वारा तय कट-ऑफ तिथि के आधार पर की जाएगी.
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कितना देना होगा आवेदन शुल्क?
इस भर्ती के लिए आवेदन शुल्क सभी वर्गों के उम्मीदवारों के लिए समान रखा गया है. सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और अन्य सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों को 25 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा. आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन शुल्क जमा किए बिना आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करते समय शुल्क भुगतान अवश्य करना चाहिए.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
उम्मीदवार घर बैठे आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे. सबसे पहले UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं. इसके बाद होम पेज पर उपलब्ध &quot;Live Advertisement&quot; सेक्शन पर क्लिक करें. अब संबंधित भर्ती विज्ञापन के तहत दिए गए &quot;New Registration&quot; लिंक को खोलें. इसके बाद उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत, शैक्षणिक और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी. सभी डिटेल्स भरने के बाद जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें. इसके बाद कैंडिडेट्स को फॉर्म को सबमिट करना होगा.यह भी पढ़ें - CBSE OSM Controversy: &#039;सिस्टम में दिक्कतें थीं फिर भी लागू किया&#039;, OSM ड्राई रन में शामिल शिक्षकों का बड़ा खुलासा ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Khan Sir Monthly Income: एक महीने में कितना पैसा कमा लेते हैं खान सर? रकम सुनकर उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ Khan Sir Monthly Income: खान सर बिहार समेत देशभर के एक फेमस शिक्षक और यूट्यूबर हैं. जिन्हें बिहार की शान भी कहा जाता है. उनका नाम देश के टॉप टीचर्स में गिना जाता है. इसके साथ ही खान सर ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन कोचिंग क्लासेस देते हैं. हालांकि, वे ऑनलाइन क्लास यूट्यूब और एप के माध्यम से देते हैं, जहां वह बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करवाते हैं. वह अपने पढ़ाने के अनोखे अंदाज के लिए बच्चों के बीच काफी फेमस हैं. वहीं, बात करें उनकी व्यक्तिगत जानकारी के बारे में तो खान सर का जन्म साल 1993 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में हुआ था.
वहीं, उनके नाम को लेकर भी अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं तो आपको बता दें कि खान सर का असली नाम फैजल खान है. इसके साथ ही खान सर की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की डिग्रियां हासिल की हैं और आज देशभर में काफी फेमस हैं. वहीं खान सर के पिता एक ठेकेदार और मां गृहिणी हैं.
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खान सर की मंथली कमाई
वैसे, खान सर ने कभी भी अपनी संपत्ति सार्वजनिक नहीं की. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो &amp;nbsp;उनकी कुल संपत्ति 5 करोड़ से 20 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है. वहीं,कुछ अन्य रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि उनकी कुल संपत्ति लगभग 41 करोड़ रुपये है. साथ ही यह भी बताया जाता है कि वह एक दिन में करीब 70 हजार रुपये तक की कमाई कर लेते हैं. इसका मतलब है कि उनकी महीने की आमदनी 15 से 20 लाख रुपये तक हो सकती है. ये कमाई यूट्यूब, ऑनलाइन कोर्स और कोचिंग फीस से होती है.
वहीं, उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया यूट्यूब प्लेटफॉर्म खान जीएस रिसर्च सेंटर है. इसके 2.5 करोड़ से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं. एड रेवेन्यू, ब्रांड पार्टनरशिप और सुपर चैट्स जैसे व्यूअर कंट्रीब्यूशंस से उनकी महीने की कमाई 10 से 20 लाख रुपये की बीच हो जाती है. साथ ही उनकी कोचिंग में यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों से 70 हजार से 1 लाख रुपये तक फीस ली जाती है. इसके साथ ही वह 11वीं, 12वीं ,जेईकी तैयारी के लिए भी खास बैच चलाते हैं.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Best Institute for Journalism: माखनलाल, IIMC या फिर जामिया, कहां से पढ़ाई कर आप बन सकते हैं अच्छे पत्रकार? यहां जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ Best Institute for Journalism: आज की इस बदलती और तकनीकी से भरी दुनिया में पत्रकारिता भी पूरी तरह बदल चुकी है. अब पत्रकारिता केवल खबरें पढ़ने या छापने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को प्रभावित करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी जगह बनाने और तीखे सवालों के जरिए सच को सामने लाने का सबसे सशक्त माध्यम बन चुकी है. ऐसे में अगर आप भी एक निडर, निष्पक्ष और सफल पत्रकार बनना चाहते हैं, तो आपके मन में भी जो सबसे पहला और बड़ा सवाल यही आता होगा कि आखिर इसकी पढ़ाई कहां से की जाए.&amp;nbsp;वैसे, भारत में जब भी बेहतरीन मीडिया संस्थानों की बात होती है, तो तीन नाम सबसे ऊपर आते हैं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भारतीय जनसंचार संस्थान , और जामिया मिलिया इस्लामिया. ये तीनों ही संस्थान हर साल देश को बेहतरीन एंकर्स, रिपोर्टर्स, एडिटर्स और मीडिया स्कॉलर्स देते हैं. वहीं, आपके करियर के लक्ष्यों, बजट फ्रेंडली और रुचि के हिसाब से इनमें से कौन सा संस्थान आपके लिए सबसे बेस्ट रहेगा, यह समझ लेना बेहद जरूरी है. आइए, जान लेते हैं इन तीनों संस्थानों के बारे में ए टू जेड जानकारी.
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आईआईएमसी
अगर आपका सपना भी देश के बड़े न्यूज चैनलों, बड़े अखबारों या डिजिटल मीडिया हाउसेज में सीधे एंट्री पाने का है, तो भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) आपके लिए सबसे बढ़िया ऑप्शन है. इसे भारत में पत्रकारिता का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान माना जाता है. इस संस्थान में पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल काम और फील्ड रिपोर्टिंग पर जोर दिया जाता है. इसके साथ ही मीडिया इंडस्ट्री के बड़े-बड़े दिग्गज यहां बतौर गेस्ट लेक्चरर आते हैं, जिससे छात्रों को सीधे नेटवर्किंग का मौका मिलता है. साथ ही यहां का प्लेसमेंट रिकॉर्ड बेहद शानदार है और लगभग हर बड़ा मीडिया ग्रुप कैंपस सिलेक्शन के लिए यहां आता है. पहले यहां केवल एक साल के पीजी डिप्लोमा कोर्स ही मिलते थे, लेकिन साल 2024 से तीन मास्टर्स के कोर्स भी शुरू किए गए थे जिससे &amp;nbsp;इस संस्थान को &amp;nbsp;मानद विश्वविद्यालय का दर्ज प्राप्त हुआ है. &amp;nbsp;इसलिए अगर आप कम समय में सीधे मेनस्ट्रीम मीडिया में कदम रखना चाहते हैं, तो आईआईएमसी आपके लिए बढ़िया ऑप्शन बन सकता है.&amp;nbsp;
जामिया मिलिया इस्लामिया
जामिया मिलिया इस्लामिया का एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर मीडिया की दुनिया में एक बहुत बड़ा नामी संस्थान है. अगर आप पत्रकारिता को केवल एक नौकरी की तरह नहीं, बल्कि एक गंभीर कला, रिसर्च और डॉक्यूमेंट्री मेकिंग के रूप में देखना चाहते हैं, तो जामिया से बेहतर कोई &amp;nbsp;और जगह हो ही नहीं सकती है. यहां के मॉडर्न स्टूडियो लैब्स, बेहतरीन कैमरा इक्विपमेंट्स और विशाल मीडिया लाइब्रेरी छात्रों को इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग देती है. जामिया से निकले पत्रकार अक्सर खोजी पत्रकारिता, सिनेमा, डॉक्यूमेंट्री और बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों में उच्च पदों पर काम करते हैं. यहां आपको फुलटाइम मास्टर्स (एमए) की डिग्री मिलती है, जो मीडिया की थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों समझ को बेहद मजबूत बनाती है.&amp;nbsp;
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय
इस सूची में अगला नंबर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का है. यह एशिया के सबसे बड़े और पुराने मीडिया विश्वविद्यालयों में से एक है. इस संस्थान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीनी और क्षेत्रीय पत्रकारिता के लिए सबसे मजबूत बेस तैयार करता है. &amp;nbsp;अगर आप हिंदी पत्रकारिता, क्षेत्रीय मीडिया या सेंट्रल मीडिया के बड़े मीडिया नेटवर्क्स में अपनी धाक जमाना चाहते हैं, तो ये एक बढ़िया ऑप्शन है. यहां फीस अन्य बड़े संस्थानों की तुलना में काफी किफायती है, जिससे हर वर्ग के छात्र का पत्रकार बनने का सपना पूरा हो सकता है. इसके अलावा, यहां 12वीं के बाद सीधे ग्रेजुएशन और ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट-ग्रेजुएशन दोनों के बेहतरीन ऑप्शन &amp;nbsp;उपलब्ध हैं, जो आपको मीडिया की बेसिक समझ से लेकर एक्सपर्ट लेवल तक ले जाते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>विदेश में पढ़ाई का सपना होगा पूरा! सरकार दे रही स्कॉलरशिप, जानें कौन और कैसे कर सकता है आवेदन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/विदेश-में-पढ़ाई-का-सपना-होगा-पूरा-सरकार-दे-रही-स्कॉलरशिप-जानें-कौन-और-कैसे-कर-सकता-है-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ विदेश के टॉप विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करना लाखों भारतीय छात्रों का सपना होता है, लेकिन ज्यादा फीस और रहने का खर्च कई प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे छात्रों की मदद के लिए भारत सरकार राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) योजना संचालित करती है. इस योजना के तहत पात्र छात्रों को विदेश में मास्टर डिग्री और पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है. इस योजना के माध्यम से छात्र दुनिया के टॉप और मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालयों में हायर एजुकेशन हासिल कर सकते हैं.
यह स्कॉलरशिप विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), DNT, भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के छात्रों के लिए उपलब्ध है. सरकार का लक्ष्य इन वर्गों के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा तक पहुंच प्रदान करना और उनके करियर को नई दिशा देना है.
स्कॉलरशिप के तहत छात्रों की पढ़ाई से जुड़ा लगभग पूरा खर्च सरकार वहन करती है. इसमें विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस, रहने और खाने के लिए वार्षिक मेंटेनेंस अलाउंस, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क और आने-जाने के लिए इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा का खर्च शामिल होता है. इस प्रकार छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और वे पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.
क्या है जरूरी पात्रता?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं. अनुसूचित जाति, डीएनटी, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर श्रेणी के आवेदकों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए यह आय सीमा 6 लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है.
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इसके अलावा आवेदक की आयु आवेदन के समय 35 वर्ष से कम होनी चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि छात्र को किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से मास्टर या पीएचडी कार्यक्रम में बिना शर्त प्रवेश प्रस्ताव प्राप्त होना चाहिए. आमतौर पर विश्व स्तर पर अच्छी रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है.
कहां कर सकते हैं अप्लाई?
राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से संचालित की जाती है. अनुसूचित जाति, डीएनटी और भूमिहीन कृषि मजदूर श्रेणी के छात्र सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MSJE) के राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं.
जरूरी जानकारी देखना आवश्यक
वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) के राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाती है. आवेदन से पहले छात्रों को पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की अंतिम डेट से जुड़ी जानकारी अच्छे से देखनी चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cause Of Fire In Buildings: तंग गलियों में ही क्यों ज्यादा होते हैं अग्निकांड? क्या है इसके पीछे की वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Cause Of Fire In Buildings:&amp;nbsp; अक्सर हम खबरों में सुनते हैं कि किसी शहर के बाजार या तंग गली में भीषण आग लग गई है. मगर आपने कभी सोचा है कि चौड़ी सड़कों के मुकाबले इन संकरे गलियों में ही अग्निकांड सबसे ज्यादा क्यों होते हैं? यह कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़ी और खतरनाक वजहें हैं. आइए समझते हैं कि क्या है इन घटनाओं के पीछे की वजह.
नियमों का उल्लंघन करना सबसे बड़ी गलती
शहरों में दुकानों और मकानों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग बिल्डिंग बनाने के सरकारी नियमों का पालन नहीं करते हैं. इसका एक बड़ा उदाहरण बुधवार को देखने को मिला. मालवीय नगर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में जिस होटल में भीषण आग लगी, वह असल में रहने के लिए बनाया गया एक साधारण मकान था. लेकिन नियमों को तोड़कर उस मकान को बहुत बड़ा कर दिया गया और उसे होटल में बदल दिया गया. बिना प्लानिंग के किए गए ऐसे अवैध निर्माण ही आज शहरों में बड़े हादसों का कारण बन रहे हैं.
मकड़ी के जाले जैसे लटकते तार
तंग गलियों वाले इलाकों में बड़ी समस्या बिजली के तारों की होती है. इन गलियों में सिर के ऊपर बिजली के तारों का ऐसा जाल बिछा होता है कि आसमान भी नजर नहीं आता. कई बार इन तारों में ओवरलोडिंग की वजह से शॉर्ट सर्किट हो जाता है. चिंगारी निकलते ही नीचे मौजूद दुकानों या घरों में आग लग जाती है.
एक के बगल एक बनी इमारतें
इन संकरे रास्तों पर घर और दुकानें एक-दूसरे से बिल्कुल जुड़ी होती हैं. हवा आने-जाने का कोई रास्ता नहीं होता. ऐसे में अगर किसी एक दुकान में छोटी सी आग भी लगती है, तो वह गर्मी और घुटन के कारण तुरंत पूरी गली में फैल जाती है. बंद जगहों पर आग को फैलने के लिए ऑक्सीजन तो मिलती है, लेकिन धुआं बाहर नहीं निकल पाता.
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फायर ब्रिगेड की एंट्री ब्लॉक
सबसे डरावनी बात यह है कि आग लगने के बाद वहां मदद समय पर नहीं पहुंच पाती. दमकल की बड़ी गाड़ियां इन संकरी गलियों में अंदर घुस ही नहीं पातीं. जब तक फायर फाइटर पाइप जोड़कर दूर से पानी डालने की व्यवस्था करते हैं, तब तक आग फैल चुकी होती है.
बचाव का रास्ता क्या है?
ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करना बेहद जरूरी है. साथ ही, हर गली में छोटे अग्निशामक यंत्र और पानी की पाइपलाइन होनी चाहिए ताकि दमकल के आने से पहले लोग खुद अपनी सुरक्षा कर सकें. सजगता और नियमों का सख्ती से पालन ही इस खतरे से बचने का इकलौता उपाय है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cause, Fire, Buildings:, तंग, गलियों, में, ही, क्यों, ज्यादा, होते, हैं, अग्निकांड, क्या, है, इसके, पीछे, की, वजह</media:keywords>
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        <title>Country With Best Education System: दुनिया के इन देशों में बेहद मजबूत है शिक्षा व्यवस्था, लगभग 98 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूल में लेते हैं एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ Country With Best Education System: आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चों को सबसे अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं. इसके लिए वे प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस भरने को भी तैयार हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे भी देश हैं, सब अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही भेजते हैं? जी हां, इन देशों की सरकारी शिक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है कि वहां लगभग 98 फीसदी छात्र सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाई करते हैं. आइए जानते हैं इन देशों के बारे में.
इस देश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था है सबसे शानदार
यूरोप का खूबसूरत देश फिनलैंड अपनी शिक्षा व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. यहां की सबसे खास बात है कि यहां प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन तक सब कुछ पूरी तरह से मुफ्त. यहां लगभग 98 फीसदी बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं. यहां बच्चों को कोई होमवर्क नहीं दिया जाता और न ही कोई परीक्षा होती है. यहां खेल-खेल में बच्चों को सिखाया जाता है, जिससे उनका मानसिक विकास तेजी से होता है.
इस देश के सरकारी स्कूल हैं नंबर-1
फिनलैंड के अलावा जापान और कनाडा जैसे देशों में भी सरकारी स्कूल बहुत अच्छे हैं. जापान में शिक्षा का स्तर इतना ऊंचा है कि वहां के सरकारी स्कूलों की सुविधाएं बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूलों से भी बेहतर हैं. जापान में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें अनुशासन, सफाई और नैतिक मूल्य भी सिखाए जाते हैं. वहीं कनाडा में भी सरकार शिक्षा पर बहुत ज्यादा खर्च करती है. वहां के सरकारी स्कूलों में हर बच्चे को नई तकनीक और बेहतरीन माहौल मिलता है.
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भारत के सिस्टम को कैसे बना सकते हैं बेस्ट
इन देशों से दुनिया को यह सीख मिलती है कि अगर सरकार सही तरीके से व्यवस्था करे, तो सरकारी स्कूलों को भी वर्ल्ड क्लास बनाया जा सकता है. जब देश के सभी बच्चों को एक जैसी और बेहतरीन शिक्षा मिलती है, तो समाज में भेदभाव खत्म होता है. इन देशों की तरह यदि हर जगह सरकारी शिक्षा को मजबूत किया जाए, तो किसी भी माता-पिता को अपने बच्चे के भविष्य के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ेगा.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Country, With, Best, Education, System:, दुनिया, के, इन, देशों, में, बेहद, मजबूत, है, शिक्षा, व्यवस्था, लगभग, प्रतिशत, छात्र, सरकारी, स्कूल, में, लेते, हैं, एडमिशन</media:keywords>
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        <title>Germany Visa: जर्मनी में पढ़ाई के लिए कैसे मिलता है वीजा, इंटरव्यू में पूछे जाते हैं कौन&amp;कौन से सवाल?</title>
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        <description><![CDATA[ Germany Visa: हर साल देश के लाखों स्टूडेंट अच्छे फ्यूचर को लेकर विदेश में पढ़ाई का ऑप्शन चुनते हैं. चाहे मेडिकल की पढ़ाई हो या इंजीनियरिंग की स्टूडेंट आजकल विदेशी यूनिवर्सिटी का रुख कर रहे हैं. इन्हीं देशों में जर्मनी भी भारतीय स्टूडेंट्स की पसंदीदा जगह बना हुआ है. लेकिन कई बार स्टूडेंट्स को यह नहीं पता होता है कि विदेश में पढ़ाई के लिए वीजा कैसे मिलता है और इंटरव्यू में कैसे-कैसे सवाल पूछे जाते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि जर्मनी में पढ़ाई के लिए वीजा कैसे मिलता है और इंटरव्यू में कौन-कौन से सवाल पूछे जाते हैं.&amp;nbsp;
कैसे मिलता है जर्मनी में स्टूडेंट वीजा?&amp;nbsp;
जर्मनी में पढ़ाई के लिए वीजा पाने के लिए काउंसल सर्विस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं. वहीं वीजा के लिए सबसे पहले किसी जर्मन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना होता है. इसके बाद जर्मनी का वीजा पाने के लिए आपको वहां जाने की वजह बतानी होती है. वहीं इसमें कई प्रकार के वीजा शामिल होते हैं. अगर स्टूडेंट को पढ़ाई के लिए जर्मनी जाना है तो जर्मन स्टूडेंट विजा के लिए आवेदन करना होता है. यह वीजा जर्मनी में लंबे समय तक यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य माना जाता है. इसमें स्टूडेंट को जर्मनी में फोरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस के नजदीकी रेजीडेंसी का 2 सप्ताह का रेजिडेंसी परमिट भी लेना होता है.&amp;nbsp;
जर्मन वीजा के लिए क्या-क्या जरूरी?
जर्मन वीजा प्राप्त करने के लिए स्टूडेंट्स के पास वैलिड पासपोर्ट होना चाहिए. वीजा के लिए भरा और साइन किया हुआ आवेदन पत्र और घोषणा पत्र होना चाहिए. स्टेटमेंट ऑफ पर्पज, प्रीवियस एजुकेशन का सर्टिफिकेट, फाइनेंशियल रिसोर्सेज का प्रूफ, इंग्लिश लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेट, वीजा एप्लीकेशन पेमेंट का प्रूफ, ट्रैवल-हेल्थ इंश्योरेंस और एकेडमिक सर्टिफिकेट की जरूरत होती है.&amp;nbsp;
जर्मनी स्टूडेंट वीजा इंटरव्यू की कैसे करें तैयारी?&amp;nbsp;
जर्मनी के स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन करना विदेश में पढ़ाई करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है. इसमें शामिल जरूरी स्टेप्स में से एक जर्मन स्टूडेंट वीजा इंटरव्यू है. आप चाहे भारत में हो या विदेश में वीजा आवेदन प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए इसकी तैयारी करना अनिवार्य है. ऐसे में कई एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इंटरव्यू की तैयारी शुरू करने से पहले आपके पास वीजा संबंधी सभी जानकारी और जरूरी डॉक्यूमेंट होने चाहिए.
जर्मनी के स्टूडेंट वीजा की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार के कोर्स के लिए आवेदन करना चाहते हैं और फिर तैयारी भी उसी के अनुसार करनी होती है. वहीं जर्मनी में स्टूडेंट वीजा इंटरव्यू जर्मन काउंसलेट की ओर से आयोजित किया जाता है. इंटरव्यू 10 से 15 मिनट तक चलता है, इस दौरान वीजा अधिकारी स्टूडेंट से एजुकेशनल क्वालीफिकेशन, फाइनेंसियल कंडीशन और जर्मनी में पढ़ाई करने के डिसीजन के बारे में सवाल पूछते हैं.&amp;nbsp;
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इंटरव्यू में पूछे जाते हैं कौन-कौन से सवाल? (इन्हें आखिरी न मानें)

ज्यादातर स्टूडेंट वीजा इंटरव्यू में सबसे पहले सवाल यही होता है कि आपने हायर एजुकेशन के लिए जर्मनी को क्यों चुना.&amp;nbsp;
इसके बाद पूछा जाता है कि जर्मनी से पढ़ाई पूरी करने के बाद आप क्या करेंगे.&amp;nbsp;
वहीं जर्मनी में आप अपना गुजारा कैसे करेंगे.&amp;nbsp;
आपने अपनी पढ़ाई के लिए इसी शहर को क्यों चुना है.&amp;nbsp;
आपने पढ़ाई के लिए इस कोर्स को क्यों चुना और यह आपकी पिछली एजुकेशन से कैसे कनेक्ट है.&amp;nbsp;
आपने यूनिवर्सिटी को कैसे चुना और इसके बारे में आपको कैसे पता चला.&amp;nbsp;
क्या यह कोर्स आपके देश की यूनिवर्सिटी में उपलब्ध है या नहीं.&amp;nbsp;
आपने दूसरी यूनिवर्सिटी में भी एडमिशन के लिए अप्लाई किया है या नहीं.&amp;nbsp;
जर्मनी में पढ़ाई के लिए किसने प्रोत्साहित किया था.
आपने अपनी पढ़ाई के लिए कनाडा या अमेरिका की बजाय जर्मनी को क्यों चुना.&amp;nbsp;
आप अपनी यूनिवर्सिटी के बारे में कुछ जानकारी शेयर कर सकते हैं.

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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Germany, Visa:, जर्मनी, में, पढ़ाई, के, लिए, कैसे, मिलता, है, वीजा, इंटरव्यू, में, पूछे, जाते, हैं, कौन-कौन, से, सवाल</media:keywords>
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        <title>CISF Vacancy 2026:  ASI पैरामेडिकल पदों पर आवेदन 8 जून से शुरू,जानें कौन कर सकता है अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप मेडिकल या पैरामेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार मौका आया है. CISF ने पैरामेडिकल स्टाफ के अलग-अलग पदों पर भर्ती जारी की है. इस भर्ती के तहत फार्मासिस्ट, एक्स रे टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन जैसे पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी.इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 8 जून 2026 से 7 जुलाई 2026 तक तय की गई है.इसलिए जो उम्मीदवार आवेदन करना चाहते हैं. वह आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
किन पदों पर होगी भर्ती?
CISF की इस भर्ती में एएसआई फार्मासिस्ट, एएसआई एक्स रे टेकनीशियन और एएसआई लैब टेकनीशियन जैसे पद शामिल हैं. इन पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में डिप्लोमा या आवश्यक तकनीकी योग्यता होना जरूरी है. भर्ती के जरिए चयनित उम्मीदवारों को CISF की विभिन्न इकाइयों में तैनात किया जाएगा.
योग्यता क्या है?एएसआई फार्मासिस्ट पद के लिए उम्मीदवार के पास फार्मेसी में डिप्लोमा होना चाहिए. एएसआई एक्स रे टेकनीशियन पद के लिए रेडियोग्राफी में दो साल का डिप्लोमा जरूरी है.वहीं एएसआई लैब टेकनीशियन पद के लिए मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी यानी MLT में डिप्लोमा होना आवश्यक है.&amp;nbsp;
उम्र सीमाइस भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु 18 साल से &amp;nbsp;28 साल तक रखी गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार उम्र सीमा में छूट भी मिलेगी.
आवेदन शुल्क कितना देना होगासामान्य वर्ग, ओबीसी और EWS वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा.वहीं एससी, एसटी, महिला उम्मीदवारों और पूर्व सैनिकों को आवेदन शुल्क नहीं देना होगा. शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.यह भी पढ़ें - Germany Visa: जर्मनी में पढ़ाई के लिए कैसे मिलता है वीजा, इंटरव्यू में पूछे जाते हैं कौन-कौन से सवाल?
चयन कैसे होगाउम्मीदवारों का चयन कई चरणों के जरिए किया जाएगा. सबसे पहले लिखित परीक्षा आयोजित होगी. इसके बाद सफल उम्मीदवारों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा.अगले चरण में दस्तावेजों की जांच और बेसिक वोकेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट होगा. सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा. इसके बाद अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी.
कैसे करें आवेदन

सबसे पहले CISF की आधिकारिक वेबसाइट cisfrectt.cisf.gov.in⁠ पर जाएं.
CISF Paramedical Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें.
New Registration पर क्लिक करके अपना रजिस्ट्रेशन करें.
रजिस्ट्रेशन के बाद User ID और Password की मदद से लॉगिन करें.
सभी जरूरी जानकारी सही-सही भरें और सही साइज में डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
फॉर्म भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें.

यह भी पढ़ें - आने वाले दिनों में कैसे स्कूल में पढ़ना महंगा हो जाएगा, स्कूल ने बसों के किराये में इजाफा किया ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CISF, Vacancy, 2026:, ASI, पैरामेडिकल, पदों, पर, आवेदन, जून, से, शुरू, जानें, कौन, कर, सकता, है, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>SBI Apprentice Recruitment 2026: एसबीआई अप्रेंटिस 7150 पदों पर आवेदन की लास्ट डेट बढ़ी, अब 15 जून तक करें अप्लाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sbi-apprentice-recruitment-2026-एसबीआई-अप्रेंटिस-7150-पदों-पर-आवेदन-की-लास्ट-डेट-बढ़ी-अब-15-जून-तक-करें-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ SBI Apprentice Recruitment 2026: एसबीआई अप्रेंटिस 7150 पदों पर आवेदन की लास्ट डेट बढ़ी, अब 15 जून तक करें अप्लाई ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, Apprentice, Recruitment, 2026:, एसबीआई, अप्रेंटिस, 7150, पदों, पर, आवेदन, की, लास्ट, डेट, बढ़ी, अब, जून, तक, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>कनाडा में पढ़ाई के लिए कैसे करें वीजा अप्लाई, जानें इंटरव्यू में कौन से सवाल पूछे जाते हैं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कनाडा-में-पढ़ाई-के-लिए-कैसे-करें-वीजा-अप्लाई-जानें-इंटरव्यू-में-कौन-से-सवाल-पूछे-जाते-हैं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कनाडा-में-पढ़ाई-के-लिए-कैसे-करें-वीजा-अप्लाई-जानें-इंटरव्यू-में-कौन-से-सवाल-पूछे-जाते-हैं</guid>
        <description><![CDATA[ कनाडा में पढ़ाई करना आज भी हजारों भारतीय छात्रों का सपना है. बेहतर शिक्षा, विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटीज और करियर के अच्छे अवसरों की वजह से हर साल बड़ी संख्या में छात्र कनाडा का रुख करते हैं. हालांकि कनाडा में पढ़ाई के लिए एडमिशन मिलने के बाद सबसे अहम कदम स्टडी परमिट (Study Permit) या स्टडी वीजा हासिल करना होता है.
स्टडी वीजा के लिए कैसे करें आवेदन?
कनाडा स्टडी वीजा के लिए आवेदन करने से पहले छात्र को किसी मान्यता प्राप्त कनाडाई कॉलेज या यूनिवर्सिटी से एडमिशन ऑफर लेटर प्राप्त करना जरूरी होता है.इसके बाद छात्र ऑनलाइन माध्यम से स्टडी परमिट के लिए आवेदन कर सकते हैं.आवेदन के दौरान पासपोर्ट, एडमिशन लेटर, फीस की स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं. साथ ही यह भी दिखाना होता है कि छात्र के पास पढ़ाई और रहने का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है.
क्या सभी छात्रों का इंटरव्यू होता है?
कनाडा की इमिग्रेशन एजेंसी IRCC सभी आवेदकों का इंटरव्यू नहीं लेती.यदि किसी आवेदन में अतिरिक्त जानकारी की जरूरत महसूस होती है या किसी बात को लेकर स्पष्टीकरण चाहिए होता है, तो छात्र को इंटरव्यू के लिए बुलाया जा सकता है.
यह भी पढ़ें - 30 दिन में कितना कमा लेती हैं देश की पहली महिला ट्रक ड्राइवर, कब शुरू किया था ये सफर?
इंटरव्यू में पूछे जा सकते हैं ये सवाल
स्टडी वीजा इंटरव्यू में अधिकारी आमतौर पर छात्र की पढ़ाई, करियर और भविष्य की योजनाओं से जुड़े सवाल पूछते हैं.जैसे-&amp;nbsp;

आपने पढ़ाई के लिए कनाडा को ही क्यों चुना?
आपने यह कोर्स क्यों चुना?
यह कोर्स आपके करियर में कैसे मदद करेगा?
अपने देश में यह कोर्स क्यों नहीं कर रहे?
आपकी पढ़ाई और रहने का खर्च कौन उठाएगा?
आपने जिस यूनिवर्सिटी या कॉलेज में एडमिशन लिया है, उसके बारे में क्या जानते हैं?
पढ़ाई पूरी करने के बाद आपकी क्या योजना है?
क्या आपके परिवार के सदस्य कनाडा में रहते हैं?
आपकी पिछली पढ़ाई &amp;nbsp;उपलब्धियां क्या हैं?

इंटरव्यू के दौरान किन गलतियों से बचें?
कई छात्र इंटरव्यू के दौरान घबराहट में गलत जवाब दे देते हैं.आवेदन में दी गई जानकारी और इंटरव्यू के जवाबों में अंतर होने पर वीजा अधिकारी संदेह कर सकते हैं. इसके अलावा यूनिवर्सिटी, कोर्स या वित्तीय व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी न होना भी आवेदन को प्रभावित कर सकता है.
इंटरव्यू में सफलता के लिए अपनाएं ये टिप्स

आवेदन में दी गई सभी जानकारी को अच्छी तरह पढ़ लें.
अपने कोर्स और यूनिवर्सिटी के बारे में पूरी जानकारी रखें.
सभी जरूरी दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से साथ रखें.
सवालों के जवाब स्पष्ट और ईमानदारी से दें.
आत्मविश्वास बनाए रखें और घबराएं नहीं.
समय पर इंटरव्यू के लिए पहुंचें और प्रोफेशनल व्यवहार रखें.ये भी पढ़ें- CBSE री-वैल्यूएशन 2026 के लिए 40 हजार छात्रों ने किया आवेदन, बोर्ड ने जारी किया बड़ा अपडेट
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कनाडा, में, पढ़ाई, के, लिए, कैसे, करें, वीजा, अप्लाई, जानें, इंटरव्यू, में, कौन, से, सवाल, पूछे, जाते, हैं</media:keywords>
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        <title>Explained: 15 हजार करोड़ रुपए का कारोबार और 6 हजार से ज्यादा कोचिंग सेंटर्स! कैसे नया &amp;apos;कोटा&amp;apos; बनता जा रहा बिहार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-15-हजार-करोड़-रुपए-का-कारोबार-और-6-हजार-से-ज्यादा-कोचिंग-सेंटर्स-कैसे-नया-कोटा-बनता-जा-रहा-बिहार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/explained-15-हजार-करोड़-रुपए-का-कारोबार-और-6-हजार-से-ज्यादा-कोचिंग-सेंटर्स-कैसे-नया-कोटा-बनता-जा-रहा-बिहार</guid>
        <description><![CDATA[ 2 जून 2026 की रात को पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इस जगह को बिहार का सबसे बड़ा एजुकेशनल हब कहा जाता है. यहीं पर स्थित है मशहूर एजुकेटर फैजल खान यानी &#039;खान सर&#039; का कोचिंग सेंटर &#039;खान ग्लोबल स्टडीज&#039;. खान सर ने दावा किया कि उनके सेंटर के बाहर फायरिंग हुई, सुरक्षा गार्ड को बुरी तरह पीटा गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उन्होंने यहां तक कहा कि 8-10 राउंड फायरिंग हुई. हालांकि, अगले दिन ही पुलिस ने इस दावे से इनकार कर दिया. पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया. इस घटना ने &#039;कोचिंग माफिया&#039; और संस्थानों के बीच &#039;वर्चस्व की लड़ाई&#039; जैसे मुद्दों को फिर से हवा दे दी है...
अब जानिए, बिहार की कोचिंग मंडी कितनी बड़ी है?
खान सर की कोचिंग पर हुआ यह हमला सिर्फ एक अलग घटना नहीं है. यह उस विशाल कोचिंग उद्योग की सिर्फ एक झलक है, जो बिहार की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ बन चुका है. आइए, नंबरों के जरिए समझते हैं इसकी असली तस्वीर:

स्मार्ट स्क्रैपर्स के अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में कोचिंग सेंटरों की संख्या 6,383 है. यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले 1.64% बढ़ा है.
पटना सबसे बड़ा हब है, जहां 1,256 कोचिंग सेंटर हैं. उसके बाद मुजफ्फरपुर (578) और गया (428) का नंबर आता है.
इनमें से 92.98% यानी 5,935 कोचिंग सेंटर एकल-मालिकाना (single-owner) हैं, जबकि बाकी बड़े ब्रांड्स का हिस्सा हैं.
अकेले भागलपुर और बांका में 496 कोचिंग सेंटर हैं, जहां 58,000 से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो भारत का कोचिंग इंडस्ट्री 7.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 60,000 करोड़ रुपये) का है और 2034 तक इसके 17.8 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

बिहार की कोचिंग मंडी का कितने करोड़ का कारोबार?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में करीब 3,000 प्राइवेट कोचिंग संस्थान हैं और इसका सालाना टर्नओवर 250 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इनसाइडर्स तो मानते हैं कि यह आंकड़ा जल्द ही 1,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा.
बिहार में प्राइवेट कोचिंग का अनुमानित सालाना बाजार करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये का है. यह आंकड़ा राज्य के कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे प्रति छात्र सालाना सवा लाख रुपये के खर्च पर आधारित है.
कितना बड़ा रोजगार पैदा करता है यह उद्योग?
कोचिंग इंडस्ट्री बिहार में लाखों लोगों को रोजगार देती है. बिहार में एक एकेडमिक कोच का औसत वार्षिक वेतन लगभग 4.72 लाख रुपये है, जो कम अनुभव में 2.16 लाख से लेकर अधिक अनुभव में 7.5 लाख रुपये तक हो सकता है. यह अनुमान लगाया गया है कि पूरे देश में कोचिंग उद्योग हजारों शिक्षकों, काउंसलरों और प्रशासनिक कर्मचारियों को रोजगार दे रहा है.
पूरे देश के मामले में बिहार का कितना बड़ा योगदान?
पूर्वी भारत कोचिंग बूम का केंद्र है. त्रिपुरा में लगभग 79%, पश्चिम बंगाल में 75%, ओडिशा में 57% और बिहार में 52.5% स्टूडेंट्स प्राइवेट कोचिंग ले रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 27% है. यही कारण है कि पटना (मुसल्लहपुर हाट) को कोटा के बाद कोचिंग का दूसरा सबसे बड़ा हब माना जाने लगा है. मुसल्लहपुर हाट में प्रति छात्र करीब 1,000 रुपये मासिक फीस वाले कोचिंग सेंटर खूब पनप रहे हैं.
सरकार कैसे लगाम लगाने की कोशिश कर रही है?
बिहार इस मामले में देश का सबसे आगे का राज्य है. बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 को लागू करने वाला यह देश का पहला राज्य है. अब सरकार इसे और सख्त करने जा रही है:

अनिवार्य पंजीकरण: 25 से ज्यादा स्टूडेंट वाले हर कोचिंग सेंटर के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन. इसके लिए 15,000 रुपये फीस देनी होगी और यह रजिस्ट्रेशन 3 साल के लिए वैध होगा.
भारी जुर्माना: बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा. अन्य नियमों के उल्लंघन पर 50,000 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना और रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है.
पुलिस निगरानी: अब सभी कोचिंग सेंटरों का पूरा ब्योरा थाना स्तर पर रखा जाएगा. शिक्षकों और कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा.
स्टूडेंट्स के हित में सख्त नियम: प्रति छात्र कम से कम 2 वर्ग फीट जगह अनिवार्य. शिक्षकों के लिए ग्रेजुएशन डिग्री जरूरी. टॉपर्स की फोटो लगाकर प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध और फीस वापसी नियम स्पष्ट होगा.
खान सर मामले के बाद सरकार और सख्त: इस घटना के बाद बिहार सरकार ने अगले तीन महीने में एक व्यापक कोचिंग पॉलिसी बनाने की घोषणा की है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, हजार, करोड़, रुपए, का, कारोबार, और, हजार, से, ज्यादा, कोचिंग, सेंटर्स, कैसे, नया, कोटा, बनता, जा, रहा, बिहार</media:keywords>
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        <title>जब CBSE नहीं था तब कैसे होते थे बोर्ड एग्जाम, जानें क्या है इसका इतिहास?</title>
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        <description><![CDATA[ इस वक्त अगर कोई बोर्ड सबसे ज्यादा चर्चा में है तो वो है सीबीएसई लेकिन क्या आपको पता है सीबीएसई बनने से पहले देश में बोर्ड परीक्षाएं कैसे आयोजित की जाती थीं. साथ ही छात्रों का मूल्यांकन कौन करता था और शिक्षा व्यवस्था किस तरह काम करती थी? आइए जानते हैं...
दरअसल, CBSE की स्थापना से पहले देश में स्कूली शिक्षा और बोर्ड परीक्षाओं की जिम्मेदारी अलग-अलग प्रांतीय विश्वविद्यालयों और क्षेत्रीय शिक्षा बोर्डों के पास थी. उस समय पूरे देश के लिए कोई एक केंद्रीय शिक्षा बोर्ड नहीं था. हर क्षेत्र अपनी शिक्षा व्यवस्था के अनुसार परीक्षाएं आयोजित करता था.
कब बना पहला बोर्ड?
भारत में सबसे पहला शिक्षा बोर्ड वर्ष 1921 में उत्तर प्रदेश में स्थापित किया गया था. इसका नाम &#039;यूपी बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन&#039; रखा गया. यह देश का पहला ऐसा बोर्ड था, जिसने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की परीक्षाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित करना शुरू किया. उस दौर में यूपी बोर्ड का अधिकार क्षेत्र काफी बड़ा था और यह कई क्षेत्रों के छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करता था.
इसके बाद शिक्षा के बढ़ते दायरे और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए वर्ष 1929 में &#039;बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन, राजपूताना&#039; की स्थापना की गई. यह बोर्ड तत्कालीन राजपूताना, अजमेर-मेरवाड़ा, मध्य भारत और ग्वालियर जैसे क्षेत्रों के छात्रों के लिए बनाया गया था. इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में एक समान परीक्षा प्रणाली विकसित करना था.ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;CBSE री-वैल्यूएशन 2026 के लिए 40 हजार छात्रों ने किया आवेदन, बोर्ड ने जारी किया बड़ा अपडेट
सीबीएसई कब आया?
CBSE के गठन की कहानी भी काफी दिलचस्प है. वर्ष 1929 में बने इस बोर्ड को आजादी के बाद नई शिक्षा नीतियों और राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार विकसित किया गया. आखिरकार वर्ष 1952 में इसका नाम बदलकर &#039;केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड&#039; यानी CBSE कर दिया गया. इसके साथ ही देश में एक ऐसी केंद्रीय संस्था की शुरुआत हुई, जो राष्ट्रीय स्तर पर माध्यमिक शिक्षा को दिशा देने लगी.
हालांकि, CBSE को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान वर्ष 1962 में पुनर्गठन के बाद मिली. उस समय केंद्र सरकार के कर्मचारियों का विभिन्न राज्यों में लगातार स्थानांतरण होता रहता था. ऐसे में उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली की जरूरत महसूस की गई.
अगर बोर्ड परीक्षाओं की बात करें तो शुरुआती दौर में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं सीधे विश्वविद्यालयों या क्षेत्रीय शिक्षा बोर्डों द्वारा आयोजित की जाती थीं. छात्रों को विश्वविद्यालयों के नियमों और पाठ्यक्रम के अनुसार परीक्षा देनी पड़ती थी. उस समय परीक्षा व्यवस्था आज की तुलना में काफी सीमित थी.यह भी पढ़ें - कनाडा में पढ़ाई के लिए कैसे करें वीजा अप्लाई, जानें इंटरव्यू में कौन से सवाल पूछे जाते हैं? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>27 साल की उम्र में पति को खोया, टिफिन बेचकर बेटियों को पढ़ाया, अब बेटी बनी डिप्टी कलेक्टर</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तराखंड के ऋषिकेश से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो हर किसी को संघर्ष और मेहनत का महत्व समझाती है. 27 साल की उम्र में पति को खोने वाली नीलम भाटिया ने कठिन परिस्थितियों में हार नहीं मानी.उन्होंने टिफिन सेवा शुरू कर अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाया और आज उनकी छोटी बेटी मीनाक्षी भाटिया PCS परीक्षा में पांचवां स्थान हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बन गई हैं.
पति की मौत के बाद बदल गई जिंदगी
ऋषिकेश के प्रगति विहार में रहने वाली नीलम भाटिया के पति अजय कुमार भाटिया आईएसबीटी क्षेत्र में परचून की दुकान चलाते थे.परिवार का जीवन सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन अचानक हार्ट अटैक से पति की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया. उस समय नीलम की उम्र केवल 27 साल थी और उनकी दो छोटी बेटियां थीं, जिनकी उम्र डेढ़ साल और छह साल थी.
टिफिन सेवा बन गई परिवार का सहारा
पति के निधन के बाद नीलम के सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी. आर्थिक स्थिति कमजोर थी और परिवार से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला.ऐसे में उन्होंने हार मानने के बजाय टिफिन सेवा शुरू की. वह घर-घर और दफ्तरों में खाना पहुंचाने लगीं.सुबह से देर रात तक मेहनत कर उन्होंने परिवार का खर्च उठाया और बेटियों की पढ़ाई जारी रखी.
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मां के संघर्ष को करीब से देखा बेटियों ने
नीलम भाटिया की बेटियों शालिनी और मीनाक्षी ने बचपन से अपनी मां का संघर्ष देखा. स्कूल की छुट्टी के बाद दोनों मां के साथ टिफिन पहुंचाने में मदद करती थीं और रात में पढ़ाई करती थीं.आर्थिक तंगी के बावजूद नीलम ने कभी बेटियों की शिक्षा से समझौता नहीं किया. उन्होंने हमेशा अपनी बेटियों को सिखाया कि शिक्षा ही जिंदगी बदलने का सबसे मजबूत माध्यम है.
मेहनत लाई रंग, दोनों बेटियां बनीं अधिकारी
सालों की मेहनत, संघर्ष और त्याग आखिरकार रंग लाया. बड़ी बेटी शालिनी भाटिया आज मंडलीय अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी के पद पर पौड़ी में तैनात हैं.वहीं छोटी बेटी मीनाक्षी भाटिया ने PCS परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया है और उनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>UGC Scholarship 2026: मास्टर्स के लिए छात्रों को मिलेगी आर्थिक मदद, जानिए कौन&amp;कौन सी स्कॉलरशिप का उठा सकते हैं लाभ?</title>
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        <description><![CDATA[ हायर एजुकेशन प्राप्त करने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए अच्छी खबर है. कई बार ऐसा होता है कि ग्रेजुएशन के बाद छात्र मास्टर्स की पढ़ाई तो करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक परेशानियां उनके रास्ते में आ जाती हैं. ऐसे छात्रों की मदद के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) कई तरह की स्कॉलरशिप योजनाएं चलाता है. इन योजनाओं का मकसद होनहार और जरूरतमंद छात्रों को आर्थिक सहायता देकर उनकी पढ़ाई को आसान बनाना है.
अगर आपने ग्रेजुएशन पूरी कर ली है और अब पोस्ट ग्रेजुएशन यानी मास्टर्स डिग्री में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो UGC की ये स्कॉलरशिप योजनाएं आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती हैं. इन योजनाओं के तहत छात्रों को हर महीने या सालाना आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे पढ़ाई का खर्च उठाना आसान हो जाता है.
मेधावी छात्रों के लिए खास योजना
UGC की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है नेशनल स्कॉलरशिप फॉर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज (NSPGS). यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए है जिन्होंने अच्छे अंकों के साथ पढ़ाई पूरी की है और अब अपना पहला मास्टर्स कोर्स कर रहे हैं.
इस योजना के तहत चयनित छात्रों को हर महीने 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह सहायता दो साल तक मिलती है. हर साल हजारों छात्रों को इस योजना का लाभ दिया जाता है, जिससे वे बिना आर्थिक चिंता के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.
यूनिवर्सिटी टॉपर्स को भी मिलता है लाभ
जो छात्र अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में टॉप रैंक हासिल करते हैं, उनके लिए भी UGC ने विशेष योजना बनाई है. पोस्ट ग्रेजुएट स्कॉलरशिप फॉर यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर्स (URH) के तहत ग्रेजुएशन में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता दी जाती है.
इस योजना के तहत छात्रों को हर महीने 3,100 रुपये की सहायता राशि मिलती है. यह राशि दो साल तक दी जाती है. इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है.
SC और ST छात्रों के लिए विशेष सहायता
सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ाने के लिए UGC ने अलग योजना शुरू की है. SC/ST छात्रों के लिए प्रोफेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स स्कॉलरशिप के तहत इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और अन्य पेशेवर कोर्स करने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता दी जाती है.
एमई और एमटेक जैसे कोर्स में पढ़ने वाले छात्रों को हर महीने 7,800 रुपये तक की सहायता मिलती है. वहीं अन्य प्रोफेशनल कोर्स के छात्रों को 4,500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं.
सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए खास स्कॉलरशिप
बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए UGC ने इंदिरा गांधी सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप शुरू की है. यह योजना उन छात्राओं के लिए है जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हैं.
इस योजना के तहत छात्राओं को हर साल 36,200 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह सहायता दो साल तक मिलती है. इस स्कॉलरशिप का उद्देश्य लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है.
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कौन कर सकता है आवेदन?
अलग-अलग स्कॉलरशिप योजनाओं की पात्रता अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए. छात्र किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान में नियमित रूप से पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिल होना चाहिए. कुछ योजनाओं में आयु सीमा और न्यूनतम अंक की शर्त भी रखी गई है.
कैसे करें आवेदन?
सबसे पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करना होगा. इसके बाद लॉगिन कर UGC की स्कॉलरशिप योजना चुननी होगी. आवेदन पत्र में मांगी गई जानकारी भरने के साथ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. आवेदन जमा करने के बाद छात्र पोर्टल पर अपनी आवेदन स्थिति भी देख सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>OECD Internship 2026: इस इंटर्नशिप में मिल रहा उतना स्टाइपेंड जितनी लोगों की सैलरी भी नहीं, जाना होगा पेरिस</title>
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        <description><![CDATA[ OECD Internship 2026: विदेश में इंटर्नशिप करने वाले करने का सपना देखने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए शानदार अवसर आया है. फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-कॉरपोरेशन एंड डेवलपमेंट ने अलग-अलग क्षेत्र के छात्रों के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया है. इस इंटर्नशिप के जरिए छात्रों को इंटरनेशनल लेवल के एक्सपर्ट्स के साथ काम करने का मौका मिलेगा. वहीं रहने-खाने के खर्च के लिए स्टाइपेंड भी दिया जाएगा. OECD एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें दुनिया के कई प्रमुख देश शामिल है यह संस्था आर्थिक विकास वैश्विक सहयोग और सामाजिक नीतियों से जुड़े सब्जेक्ट्स पर काम करती है संगठन का मुख्यालय पेरिस में है और यहां इंटर्न के रूप में चयनित छात्रों को इंटरनेशनल एनवायरनमेंट में काम करने का एक्सपीरियंस मिलेगा.&amp;nbsp;
क्या होगा इंटर्न का काम?
इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को रिसर्च और पॉलिसी से जुड़े अलग-अलग कामों में शामिल किया जाएगा. उन्हें रिसर्च रिपोर्ट तैयार करने, डॉक्यूमेंट की समीक्षा करने, डेटा एकत्र करने और उसका एनालिसिस करने का अवसर मिलेगा. इसके अलावा मीटिंग, सेमिनार और दूसरे कार्यक्रम में भी भाग लेने के साथ-साथ एक्सपर्ट्स और अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय का एक्सपीरियंस भी मिलेगा. वहीं इंटर्न को वर्किंग पेपर्स और दूसरे ऑफिशियल डॉक्युमेंट्स के लिए नोट्स तैयार करने तथा अलग-अलग योजनाओं के संचार योजना और मूल्यांकन कार्यों में सहयोग देना होगा.&amp;nbsp;
स्टाइपेंड और दूसरी सुविधा&amp;nbsp;
इस इंटर्नशिप की सबसे खास बात इसका स्टाइपेंड है. चयनित उम्मीदवारों को रहने और खाने के खर्च के लिए हर महीने 1000 यूरो दिए जाएंगे, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1.10 लाख के बराबर है. इसके अलावा दो महीने से ज्यादा अवधि की इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को प्रतिमाह 2.5 दिन की छुट्टी भी मिलेगी. OECD की कार्यनीति के अनुसार जरूरत पड़ने पर कुछ काम ऑफिस के बाहर से करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है.&amp;nbsp;
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इंटर्नशिप के लिए कौन कर सकता है आवेदन?
इस प्रोग्राम के लिए बैचलर्स, मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई कर रहे छात्र आवेदन कर सकते हैं. आवेदक किसी फुल टाइम डिग्री प्रोग्राम से नामांकित होना चाहिए और उसका अध्ययन क्षेत्र OECD के कार्य क्षेत्र से संबंधित होना चाहिए. उम्मीदवार के लिए अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा में अच्छी पकड़ होनी जरूरी है. साथ ही उसके पास रिसर्च डेटा विश्लेषण, आईटी और कम्युनिकेशन से जुड़ी बुनियादी क्षमताएं भी होनी चाहिए. संगठन ऐसे छात्रों को प्राथमिकता देता है जो इंटरनेशनल एनवायरनमेंट में काम करने के लिए तैयार हो.&amp;nbsp;
कितने समय तक चलेगी इंटर्नशिप?&amp;nbsp;
OECD की इंटर्नशिप आमतौर पर 1 से 6 महीने के बीच होती है. जरूरत पड़ने पर इसका समय बढ़कर 12 महीने तक किया जा सकता है. यह मुख्य रूप से फुल टाइम इंटर्नशिप है, जिसमें सप्ताह में 40 घंटे काम करना होता है. हालांकि कुछ स्पेशल कंडीशंस में पार्ट टाइम व्यवस्था भी उपलब्ध हो सकती है. संगठन छात्रों को कम से कम 4 महीने की इंटर्नशिप चुनने की सलाह देता है, ताकि वह ज्यादा व्यवहारिक एक्सपीरियंस हासिल कर सके.
ये भी पढ़ें-CBSE Re-evaluation 2026: CBSE छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया हुई शुरू; पोर्टल लॉन्च ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>30 दिन में कितना कमा लेती हैं देश की पहली महिला ट्रक ड्राइवर, कब शुरू किया था ये सफर?</title>
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        <description><![CDATA[ सड़क पर दौड़ते बड़े-बड़े ट्रकों को देखकर अक्सर लोगों के मन में एक तस्वीर बनती है, जिसमें ड्राइवर की सीट पर कोई पुरुष बैठा नजर आता है. लेकिन भारत में एक महिला ने इस सोच को वर्षों पहले बदल दिया था. यह कहानी है देश की पहली महिला ट्रक ड्राइवर योगिता रघुवंशी की, जिन्होंने न सिर्फ ट्रक चलाकर पहचान बनाई, बल्कि आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं.
एक कार्यक्रम में योगिता रघुवंशी ने बताया था कि ट्रक ड्राइवरों को आज भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कई बार सड़क पर ऐसे हालात बन जाते हैं, जहां ड्राइवरों को बिना वजह रोका जाता है और घंटों इंतजार करना पड़ता है. उनके अनुसार, तकनीक के इस दौर में जब ज्यादातर दस्तावेज और भुगतान ऑनलाइन हो चुके हैं, तब भी कई जगह ड्राइवरों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
2006 में बनीं देश की पहली महिला ट्रक ड्राइवर
योगिता की यात्रा आसान नहीं रही. वर्ष 2006 में उन्होंने भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया और देश की पहली महिला ट्रक ड्राइवर बनने का गौरव प्राप्त किया. &amp;nbsp;योगिता बताती हैं कि उन्होंने यह रास्ता किसी शौक में नहीं चुना था, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया.
3 हजार की नौकरी छोड़ शुरू किया नया सफर
ट्रक चलाने से पहले योगिता एक ऐसी नौकरी करती थीं, जहां उन्हें महीने के करीब 3 हजार रुपये मिलते थे. इतने पैसों में घर चलाना मुश्किल था. इसी दौरान उन्होंने ट्रक ड्राइविंग के बारे में सोचना शुरू किया. जब उन्होंने ट्रक चलाने का काम शुरू किया तो पहले ही सप्ताह में करीब 2 हजार रुपये की कमाई हुई.
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भोपाल से हैदराबाद तक की पहली यात्रा
योगिता का पहला ट्रक सफर भी काफी यादगार रहा. उन्होंने अपने पति के एक परिचित के ट्रक से काम शुरू किया. पहली बार उन्होंने भोपाल से हैदराबाद तक ट्रक चलाया. करीब 1100 किलोमीटर की दूरी उन्होंने तीन दिनों में पूरी की.
वर्षों की मेहनत के बाद आज योगिता अपने ट्रक की मालिक हैं. उनके पास 10 पहियों वाला ट्रक है, जो उन्हें सम्मान स्वरूप एक ऑटोमोबाइल कंपनी की ओर से मिला था. अब वह खुद तय करती हैं कि किस रूट पर जाना है और कौन-सा माल लेकर सफर करना है.
योगिता के अनुसार लंबी दूरी की एक ट्रिप से वह करीब 30 हजार रुपये तक बचा लेती हैं. यदि महीने में कई ट्रिप पूरी हो जाएं तो उनकी कमाई सामान्य नौकरी की तुलना में कई गुना ज्यादा हो जाती है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE री&amp;वैल्यूएशन 2026 के लिए 40 हजार छात्रों ने किया आवेदन, बोर्ड ने जारी किया बड़ा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE बोर्ड की ओर से शुरू की गई री-वैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका वेरिफिकेशन प्रक्रिया में छात्रों की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है. बोर्ड के मुताबिक 3 जून की सुबह तक करीब 40 हजार छात्र बिना किसी बड़ी दिक्कत के ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं. CBSE का कहना है कि पोर्टल सुचारू रूप से काम कर रहा है और छात्रों की सुविधा के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है.
40 हजार छात्रों ने कराया आवेदन
CBSE के अनुसार री-वैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका में संभावित त्रुटियों की जांच के लिए बड़ी संख्या में छात्र आवेदन कर रहे हैं. बोर्ड ने बताया कि अब तक लगभग 40 हजार छात्रों ने आवेदन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. इससे पता चलता है कि छात्रों में अपने परिणामों को लेकर पारदर्शिता की मांग लगातार बढ़ रही है.
भुगतान के लिए कई विकल्प उपलब्ध
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन शुल्क जमा करने के लिए छात्रों को किसी खास बैंक में खाता खोलने की जरूरत नहीं है.भुगतान UPI, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के जरिए किया जा सकता है. अलग-अलग बैंकों के पेमेंट गेटवे छात्रों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं ताकि भुगतान प्रक्रिया आसान बनी रहे.
6 जून तक खुला रहेगा पोर्टल
CBSE ने री-वैल्यूएशन और वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल 2 जून से शुरू किया है. छात्र 6 जून 2026 की रात तक आवेदन कर सकते हैं.बोर्ड ने साफ किया है कि लास्ट डेट के बाद किसी भी तरह का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा और ऑफलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है.
किन समस्याओं की शिकायत कर सकते हैं छात्र
अगर किसी छात्र को अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है तो वह इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है. इसमें पन्ने गायब होना, सप्लीमेंट्री शीट का न होना, ग्राफ या मैप का छूट जाना, धुंधली स्कैन कॉपी या गलत उत्तर पुस्तिका अपलोड होने जैसी समस्याएं शामिल हैं.
कितना लगेगा शुल्क
आंसर शीट में तकनीकी या अन्य गलतियों की जांच के लिए 100 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका शुल्क निर्धारित किया गया है. वहीं किसी प्रश्न के री-वैल्यूएशन के लिए छात्रों को 25 रुपये प्रति प्रश्न के हिसाब से शुल्क देना होगा.
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छात्र इन बातों का रखें विशेष ध्यान
CBSE ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन जमा करने से पहले सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें.एक बार आवेदन फ्रीज करके भुगतान करने के बाद उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा. आवेदन तभी सफल माना जाएगा जब ऑनलाइन भुगतान पूरा हो जाएगा.
आधार वेरीफिकेशन जरूरीसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने आधार आधारित लॉगिन और सत्यापन प्रक्रिया लागू की है. छात्रों को आवेदन करने के लिए आधार नंबर के जरिए पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. बोर्ड का मानना है कि इससे फर्जी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
CBSE ने बताया कि हाल के दिनों में पोर्टल को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तकनीकी टीमों ने स्थिति को संभालते हुए सेवाओं को सामान्य बनाए रखा. साथ ही छात्रों की सुविधा के लिए कई तकनीकी सुधार भी किए गए हैं.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Haryana Court Clerk Recruitment 2026: कोर्ट में नौकरी का बड़ा मौका, 1265 क्लर्क पदों पर आवेदन शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और कोर्ट में नौकरी करना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है.पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तहत सोसायटी फॉर सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट ऑफ स्टाफ इन सबोर्डिनेट कोर्ट्स (SSSC) ने हरियाणा की जिला अदालतों में क्लर्क भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए कुल 1265 पद भरे जाएंगे आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 23 जून 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं.
कितने पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1265 क्लर्क पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.इनमें सामान्य, एससी, बीसी, ईडब्ल्यूएस, पूर्व सैनिक और दिव्यांग वर्ग के लिए अलग-अलग पद आरक्षित किए गए हैं.
कौन कर सकता है आवेदन?आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना जरूरी है. इसके साथ ही उम्मीदवार को कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान होना चाहिए. मैट्रिक या उससे ऊपर की पढ़ाई में हिंदी या संस्कृत विषय का होना भी आवश्यक रखा गया है.
आयु सीमा कितनी है?
भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष निर्धारित की गई है. अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार 5 वर्ष की छूट मिलेगी आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के आधार पर की जाएगी.
आवेदन शुल्क कितना देना होगा?
सामान्य वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों को 1200 रुपये शुल्क जमा करना होगा. सामान्य वर्ग की महिला उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 875 रुपये रखा गया है.वहीं SC, BC, EWS और पूर्व सैनिक वर्ग के अभ्यर्थियों को 710 रुपये फीस देनी होगी हरियाणा के दिव्यांग उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है.
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कैसे होगा चयन?उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी टेस्ट (CPT) और दस्तावेज सत्यापन के जरिए किया जाएगा. हालांकि अंतिम मेरिट सूची केवल लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी. कंप्यूटर टेस्ट केवल क्वालिफाइंग होगा.
परीक्षा में क्या पूछा जाएगा?
लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी विषय से प्रश्न पूछे जाएंगे. परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी।गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किंग भी लागू रहेगी.परीक्षा पास करने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करने होंगे.
कैसे करें आवेदन?

सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट sssc.gov.in पर जाएं.
होमपेज पर दिखाई दे रहे Haryana Court Clerk Recruitment 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें और फिर लॉगिन करके आवेदन फॉर्म खोलें.
फॉर्म में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सही-सही भरें.
पासपोर्ट साइज फोटो और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके ऑनलाइन शुल्क जमा करें.
फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट या PDF अपने पास सुरक्षित रख लें.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कौन हैं IAS राहुल सिंह? OSM विवाद के बीच बदले गए CBSE चेयरमैन की पूरी कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले कई दिनों से सीबीएसई काफी चर्चा में है. इसके पीछे खास वजह नया सिस्टम OSM बनकर आया है. जिसके चलते स्टूडेंट्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसी बीच अब केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव का तबादला कर दिया है. इसके साथ ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े विवादों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है.
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया, टेंडर सिस्टम और कॉपियों की जांच को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. बताते चलें कि पिछले कुछ हफ्तों से CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम चर्चा में है. छात्रों, अभिभावकों और कई संगठनों ने आरोप लगाए कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है.
वहीं, कुछ मामलों में 12वीं कक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर भी विवाद सामने आए. मामला अदालत तक पहुंच गया और विपक्षी दलों ने भी सरकार से जवाब मांगा. ऐसे माहौल में सरकार ने जांच समिति बनाकर पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कराने का फैसला लिया है.
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए परीक्षकों को डिजिटल रूप से उत्तर पुस्तिकाएं जांचने की सुविधा दी जाती है. इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और अधिक व्यवस्थित बनाना था। लेकिन हाल के दिनों में इसी प्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.
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कौन हैं राहुल सिंह?
CBSE चेयरमैन पद से हटाए गए IAS राहुल सिंह एक वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह 1996 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं और करीब तीन दशक से प्रशासनिक सेवा में हैं. राहुल सिंह बिहार के वैशाली जिले से हैं. उनकी एजुकेशन की बात करें तो उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है और इसके बाद पब्लिक पॉलिसी एन्ड मैनेजमेंट में उच्च शिक्षा हासिल की.
आईएएस राहुल सिंह को मार्च 2024 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर CBSE का चेयरमैन बनाया गया था. इससे पहले वे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य कर रहे थे. वहीं, बिहार में शिक्षा, ऊर्जा, वित्त, शहरी विकास और जिला प्रशासन जैसे कई विभागों में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.
उनके प्रशासनिक करियर में भागलपुर, मधुबनी और पश्चिम चंपारण जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में भी कार्य करने का अनुभव शामिल है. शिक्षा क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है. बिहार शिक्षा मिशन और स्कूल शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों में उन्होंने काम किया था.यह भी पढ़ें - CBSE की लापरवाही से लीक हो गया लाखों स्टूडेंट्स का पर्सनल डेटा? सोशल मीडिया पर दावों ने खड़े किए सवाल ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कौन हैं राधा चौहान? जो करेंगी CBSE के OSM विवाद की जांच</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी है.इसके लिए एक सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी जिम्मेदारी पूर्व IAS अधिकारी एस राधा चौहान को दी गई है. शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण सरकार ने उन पर भरोसा जताया है.
कौन हैं एस राधा चौहान?
एस राधा चौहान उत्तर प्रदेश कैडर की 1988 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की थी. करीब 36 साल तक प्रशासनिक सेवाओं में काम करने के दौरान उन्होंने कई बड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाली.फिलहाल वह क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष हैं.
कई अहम विभागों में कर चुकी हैं काम
अपने लंबे करियर में एस राधा चौहान ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, शहरी विकास और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में काम किया है.सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने और प्रशासनिक सुधारों में उनका अच्छा अनुभव माना जाता है.
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने कई सवाल उठाए थे.कुछ लोगों का कहना था कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी की वजह से कई छात्रों के अंक प्रभावित हुए हैं.इसके बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया और जांच की मांग तेज हो गई.
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CBSE के बड़े अधिकारियों का हुआ तबादला
विवाद बढ़ने के बाद CBSE के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया. इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए एस राधा चौहान की अध्यक्षता में समिति बनाने का फैसला लिया.
समिति क्या जांच करेगी?
यह समिति ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की पूरी प्रक्रिया को देखेगी.जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि छात्रों की शिकायतों में कितनी सच्चाई है और कहीं मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई कमी तो नहीं रह गई. साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भी सुझाव दिए जाएंगे.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>UPPSC में खाली के खाली ही रह गए 331 पद, एक भी अभ्यर्थी नहीं कर पाया पास</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की तरफ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. आयोग ने एक जरूरी भर्ती परीक्षा का ऐसा रिजल्ट जारी किया है, जिसने सबको हैरान कर दिया. आमतौर पर किसी भी भर्ती परीक्षा में कुछ न कुछ उम्मीदवार फाइनल राउंड तक पहुंच जाते हैं, लेकिन इस बार कहानी बिल्कुल अलग रही. UPPSC की अपर निजी सचिव (APS) परीक्षा-2023 में ऐसा हुआ कि एक भी अभ्यर्थी अंतिम चरण के लिए सफल घोषित नहीं किया गया. नतीजा यह रहा कि भर्ती के लिए निकाली गईं 331 की 331 सीटें खाली रह गईं.
दरअसल, अपर निजी सचिव भर्ती को लेकर युवाओं में काफी उत्साह था. 331 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था. पहले चरण की परीक्षा 7 जनवरी 2024 को हुई थी. इसके बाद 4 मार्च 2024 को रिजल्ट घोषित किया गया, जिसमें 5,889 अभ्यर्थियों को दूसरे चरण के लिए सफल घोषित किया गया था.
वहीं, दूसरे चरण की परीक्षा 28 जून 2024 से 18 जुलाई 2024 के बीच लखनऊ में आयोजित की गई. इस चरण में कुल 4,240 उम्मीदवार शामिल हुए. सभी को उम्मीद थी कि अब चयन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और जल्द ही अंतिम परिणाम आएगा.
आखिर कहां अटक गए उम्मीदवार?
इस भर्ती का सबसे अहम हिस्सा था हिंदी शॉर्टहैंड और हिंदी टाइपिंग की परीक्षा. दूसरे चरण में इन्हीं कौशलों की जांच की गई थी. नियमों के अनुसार उम्मीदवारों को हिंदी आशुलेखन में कम से कम 80 शब्द प्रति मिनट की गति हासिल करनी थी. सिर्फ गति ही नहीं, बल्कि शुद्धता भी जरूरी थी.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;CBSE के री-वैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक, 1 लाख से ज्यादा बार फाइल एक्सेस की कोशिश
आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी अभ्यर्थी ने निर्धारित मानक के अनुसार यह योग्यता हासिल नहीं की. यही वजह रही कि कोई भी उम्मीदवार तीसरे चरण की परीक्षा के लिए पात्र नहीं माना गया. दूसरे शब्दों में कहें तो भर्ती प्रक्रिया उसी चरण में रुक गई और अंतिम चयन तक कोई नहीं पहुंच सका.
331 पदों पर नहीं होगी नियुक्ति
जब दूसरे चरण से कोई भी उम्मीदवार आगे नहीं बढ़ पाया, तो आयोग के सामने बड़ा सवाल था कि भर्ती प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाया जाए. नियमों के तहत जब कोई योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता, तो पदों को भरा नहीं जा सकता. इसी आधार पर आयोग ने फैसला लिया कि 331 पदों को कैरी फॉरवर्ड किया जाएगा, यानी फिलहाल इन पदों पर नियुक्ति नहीं होगी. आगे इन पदों को नई भर्ती प्रक्रिया के जरिए भरा जा सकता है.यह भी पढ़ें - कौन हैं IAS राहुल सिंह? OSM विवाद के बीच बदले गए CBSE चेयरमैन की पूरी कहानी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE के नए चेयरमैन बने लोखंडे प्रशांत सीताराम, OSM विवाद के बीच मिली बड़ी जिम्मेदारी; जानें सैलरी और प्रोफाइल</title>
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        <description><![CDATA[ देश के लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की नजर इन दिनों CBSE पर टिकी हुई है. बोर्ड में हाल ही में हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव के बाद अब एक नया चेहरा सुर्खियों में है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है. ऐसे समय में जब CBSE मूल्यांकन प्रणाली और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद को लेकर चर्चा में है, तब उनकी नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है.
बताते चलें कि लोखंडे प्रशांत सीताराम 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वे एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर से जुड़े हैं. प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उनकी पहचान एक तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में रही है. उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने मुंबई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (NITIE) से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया. यानी तकनीकी शिक्षा और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों की मजबूत समझ उनके पास है.
25 साल का प्रशासनिक अनुभव
लोखंडे प्रशांत सीताराम को प्रशासनिक सेवा में करीब ढाई दशक का अनुभव है. अपने लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों में काम किया है. कानून-व्यवस्था, प्रशासन, नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के संचालन जैसे क्षेत्रों में उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं. उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में रही है जो जटिल मामलों को व्यवस्थित तरीके से संभालने में सक्षम माने जाते हैं. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने उन्हें कई अहम पदों पर जिम्मेदारी दी.
गृह मंत्रालय में निभाई अहम भूमिका
CBSE का चेयरमैन बनने से पहले लोखंडे प्रशांत सीताराम गृह मंत्रालय (MHA) में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे. गृह मंत्रालय केंद्र सरकार के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में गिना जाता है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और कई बड़े फैसलों पर काम होता है. इस पद पर रहते हुए उन्होंने कई अहम मामलों की निगरानी की. बड़े प्रशासनिक अनुभव और नीति निर्माण की समझ को देखते हुए अब उन्हें शिक्षा क्षेत्र की सबसे जरूरी जिम्मेदारियों में से एक सौंपी गई है.
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CBSE चेयरमैन को कितनी मिलती है सैलरी?
CBSE चेयरमैन को हर महीने करीब 3 से 3.5 लाख रुपये तक वेतन मिलता है. इसमें 2 से 2.25 लाख रुपये बेसिक पे के साथ DA, HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्ते शामिल होते हैं. इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं. उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक वरुण भारद्वाज को भी नई जिम्मेदारी देते हुए सीबीएसई का सचिव (निदेशक स्तर) नियुक्त किया गया है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;कौन हैं IAS राहुल सिंह? OSM विवाद के बीच बदले गए CBSE चेयरमैन की पूरी कहानी
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>SBI Manager Job Preperation:  SBI बैंक में मैनेजर कैसे बनते हैं, इसके लिए 12वीं के बाद कौन सी पढ़ाई करनी होगी?</title>
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        <description><![CDATA[ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बैंक मैनेजर बनना कई छात्रों का सपना होता है. इस पद पर मिलने वाली सैलरी और सुविधाएं युवाओं को अपनी ओर खींचती है. अगर आप भी 12वीं कक्षा पास कर चुके हैं और एसबीआई में मैनेजर बनने की राह खोज रहे हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आएगी.
12वीं पास करते ही शुरू करें यह पढ़ाई
12वीं के तुरंत बाद सीधे बैंक मैनेजर बनने का कोई तरीका नहीं है. इसके लिए सबसे पहले आपको किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करनी होगी. वैसे तो आप किसी भी विषय से ग्रेजुएशन कर सकते हैं, लेकिन अगर आप कॉमर्स, इकोनॉमिक्स या फाइनेंस से जुड़ी पढ़ाई करते हैं, तो आपको आगे बैंकिंग की बारीकियों को समझने में बहुत आसानी होगी.
इस एक परीक्षा को पास करते ही सीधे मिलेगी बैंक में कुर्सी
SBI PO (प्रोबेशनरी ऑफिसर) - ग्रेजुएशन के बाद आप एसबीआई पीओ की परीक्षा दे सकते हैं. इस परीक्षा को पास करने के बाद आपको 2 साल की ट्रेनिंग पर रखा जाता है. इसके बाद आप सीधे असिस्टेंट मैनेजर बन जाते हैं और कुछ सालों के अनुभव के बाद आपका प्रमोशन बैंक मैनेजर के रूप में हो जाता है.
SBI क्लर्क से प्रमोशन - आप ग्रेजुएशन के बाद एसबीआई क्लर्क की परीक्षा भी पास कर सकते हैं. क्लर्क के रूप में कुछ साल काम करने और विभागीय परीक्षाएं पास करने के बाद आप मैनेजर बन सकते हैं.
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यह पढ़ाई करते ही मिलेगी पक्की नौकरी
एसबीआई पीओ की परीक्षा तीन चरणों में होती है. पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा होती है. इसे पास करने के बाद मुख्य परीक्षा और अंत में इंटरव्यू होता है. इस परीक्षा को पास करने के लिए आपको चार विषयों पर मजबूत पकड़ बनानी होगी.
गणित (Quantitative Aptitude), रीजनिंग (Reasoning Ability), अंग्रेजी (English Language), बैंकिंग और सामान्य ज्ञान (General/Banking Awareness)
अगर आप कॉलेज के दिनों से ही इन विषयों की तैयारी शुरू कर देते हैं, तो पहले ही प्रयास में आपका चयन हो सकता है. लगन और सही दिशा में की गई मेहनत से आप एसबीआई बैंक मैनेजर बनने का अपना सपना सच कर सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, Manager, Job, Preperation:, SBI, बैंक, में, मैनेजर, कैसे, बनते, हैं, इसके, लिए, 12वीं, के, बाद, कौन, सी, पढ़ाई, करनी, होगी</media:keywords>
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        <title>60 फीसदी नंबर वालों के लिए खुशखबरी, हर साल मिलेगी हजारों रुपये की स्कॉलरशिप</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम या त्रिपुरा के रहने वाले हैं और आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद की तलाश में हैं, तो नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) मेरिट स्कॉलरशिप आपके लिए सुनहरा मौका साबित हो सकती है. इस योजना के तहत छात्रों को हर साल 20 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई बिना किसी आर्थिक परेशानी के जारी रख सकें.
हायर एजुकेशन की बढ़ती लागत के बीच यह स्कॉलरशिप हजारों छात्रों का सहारा बन रही है. खास बात यह है कि यह योजना केवल स्कूल या कॉलेज स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल और पीएचडी कर रहे छात्रों को भी इसका लाभ मिलता है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में छात्र इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते हैं.
किसे मिलती है कितनी राशि?
NEC मेरिट स्कॉलरशिप के तहत पढ़ाई के स्तर के अनुसार अलग-अलग राशि दी जाती है. डिप्लोमा कोर्स करने वाले छात्रों को सालाना 20,000 रुपये मिलते हैं. ग्रेजुएशन या डिग्री कोर्स में पढ़ रहे छात्रों को 22,000 रुपये प्रति वर्ष दिए जाते हैं. वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों को 25,000 रुपये और एमफिल या पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को 30,000 रुपये प्रति वर्ष की सहायता राशि मिलती है.
यह राशि सीधे छात्रों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों को कम करने में मदद करती है. कई छात्र किताबें, अध्ययन सामग्री, हॉस्टल फीस और अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए इसी सहायता का उपयोग करते हैं.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस स्कॉलरशिप का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं. सबसे पहले आवेदक का पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में से किसी एक का स्थायी निवासी होना जरूरी है. इसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा शामिल हैं.
इसके अलावा छात्र को पिछली योग्यता परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे. यानी यह स्कॉलरशिप उन छात्रों को दी जाती है जिन्होंने पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया हो.
परिवार की आय भी तय सीमा में होनी चाहिए
स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्र के माता-पिता या अभिभावक की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. सरकार का उद्देश्य ऐसे मेधावी छात्रों की मदद करना है जो आर्थिक रूप से कमजोर या मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं और आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं.
मान्यता प्राप्त संस्थान में होना चाहिए दाखिला
आवेदक का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, कॉलेज या संस्थान में दाखिला होना जरूरी है. डिप्लोमा, डिग्री, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल और पीएचडी जैसे कोर्स में पढ़ रहे छात्र इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं. बिना मान्यता वाले संस्थान में पढ़ाई करने वाले छात्रों को इसका लाभ नहीं मिलेगा.यह भी पढ़ें - गरीब बच्चों के लिए बड़ी राहत, सरकार दे रही हर साल 12 हजार की स्कॉलरशिप, जानिए कैसे मिलेगा फायदा
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
NEC मेरिट स्कॉलरशिप के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किया जाता है. इच्छुक छात्रों को भारत सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर जाकर आवेदन करना होगा. सबसे पहले छात्रों को वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करना होगा.
इसके बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. इनमें आधार कार्ड, बोनाफाइड सर्टिफिकेट, आय प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज शामिल हैं. सभी जानकारी सही तरीके से भरने के बाद आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा किया जा सकता है.
हर साल करना होगा आवेदन
इस स्कॉलरशिप की एक खास बात यह है कि केवल नए छात्रों को ही नहीं, बल्कि पहले से लाभ ले रहे छात्रों को भी हर साल नवीनीकरण (Renewal) के लिए आवेदन करना पड़ता है. इसलिए जो छात्र पहले से इस योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें समय रहते अपना रिन्यूअल फॉर्म भरना चाहिए.यह भी पढ़ें - Mukhyamantri Hunar Vikas Yojana 2026: हायर एजुकेशन लेनी है और जेब है खाली तो न हो परेशान, इस योजना में सरकार दे रही बंपर पैसा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फीसदी, नंबर, वालों, के, लिए, खुशखबरी, हर, साल, मिलेगी, हजारों, रुपये, की, स्कॉलरशिप</media:keywords>
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        <title>DU BTech Admission 2026: इंजीनियर बनने का सपना पूरा करने का मौका, डीयू से कर सकते हैं पढ़ाई, शुरू हुए आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ DU BTech Admission 2026: इंजीनियर बनने का सपना पूरा करने का मौका, डीयू से कर सकते हैं पढ़ाई, शुरू हुए आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE Re&amp;evaluation 2026: CBSE छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, वेरिफिकेशन और री&amp;इवैल्यूएशन प्रक्रिया हुई शुरू; पोर्टल लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Re-evaluation 2026: सीबीएसई 2026 के रिजल्ट्स आने के बाद अपने नंबरों को लेकर कन्फ्यूजन में चल रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर आई है. सीबीएसई ने अब वेरिफिकेशन का मार्क्स और री इवैल्यूएशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है. जिन छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त कर ली है, वह अपने अंकों की दोबारा जांच और री इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. बोर्ड की ओर से यह सुविधा सीमित समय के लिए उपलब्ध कराई गई है और आवेदन की अंतिम तिथि 6 जून तय की गई है.&amp;nbsp;
आवेदन के लिए आधार वेरिफिकेशन जरूरी
सीबीएसई ने इस बार वेरिफिकेशन और री इवैल्यूएशन प्रक्रिया में सुरक्षा के लिए आधार वेरिफिकेशन को शामिल किया गया है. बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आवेदन करते समय छात्रों को आधार से जुड़ी जानकारी देनी होगी. हालांकि, जिन छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं है वह अपने माता-पिता या किसी करीबी रिश्तेदार के आधार नंबर का उपयोग कर सकते हैं. ऐसे मामलों में आवेदन के दौरान भरा नाम, बर्थ डेट और जेंडर उसी व्यक्ति के आधार डिटेल के अनुसार होना चाहिए, जिसका आधार नंबर इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा सीबीएसई ने आवेदन करने से पहले बोर्ड की ओर से जारी जरुरी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने की सलाह भी दी है.&amp;nbsp;

IMPORTANT UPDATE FOR STUDENTSThe portal for applying for Verification &amp;amp; Re-evaluation is now LIVEApply here:https://t.co/6E5PrvERrIPlease note that Aadhaar Verification has been included for security reasons. For children who do not have Aadhaar, the parent&#039;s, relative&#039;s&amp;hellip;
&amp;mdash; CBSE HQ (@cbseindia29) June 2, 2026



रिजल्ट आने के बाद बढ़ी थी छात्रों की परेशानी&amp;nbsp;
इस साल सीबीएसई के रिजल्ट घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने प्राप्त अंकों को लेकर सवाल खड़े किए थे. कई छात्रों का कहना था कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले, जबकि कुछ छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई है. ऐसे में री इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार किया जा रहा था जिसे अब बोर्ड ने शुरू कर दिया है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-60 फीसदी नंबर वालों के लिए खुशखबरी, हर साल मिलेगी हजारों रुपये की स्कॉलरशिप
ओएमएस सिस्टम के कारण चर्चा में रहा मूल्यांकन&amp;nbsp;
इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया खास तौर पर चर्चा में रही, क्योंकि बोर्ड ने बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया. इस डिजिटल व्यवस्था में परीक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करते हैं. रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने मूल्यांकन से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई थी. कुछ छात्रों ने स्कैन कॉपी में तकनीकी दिक्कतों और उत्तरों के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल उठाए थे. यही वजह रही है कि इस बार पोस्ट रिजल्ट सेवाओं को लेकर छात्रों की दिलचस्पी काफी ज्यादा देखने को मिली. इसके अलावा बोर्ड ने इस साल की फीस में भी बड़ा बदलाव किया है. पहले जहां उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए छात्रों को 700 रुपये तक देने पड़ते थे, वहीं अब इसके लिए सिर्फ 100 रुपये प्रति विषय फीस देनी होगी. इसी तरह मार्क्स वेरिफिकेशन की फीस भी घटकर 100 रुपये प्रति विषय कर दी गई है. वहीं री इवैल्यूएशन के लिए भी छात्रों को राहत दी गई है. अब किसी प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन के लिए केवल 25 रुपये प्रति प्रश्न फीस देनी होगी, जबकि पहले यह राशि 100 रुपये प्रति प्रश्न थी.&amp;nbsp;
आवेदन से पहले इन बातों की करें जांच&amp;nbsp;
बोर्ड के अनुसार री इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने से पहले छात्रों को अपनी स्कैन कॉपी ध्यान से देखनी चाहिए. उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी उत्तरों का मूल्यांकन किया गया है या नहीं, किसी पेज का मूल्यांकन छूटा तो नहीं है, अंकों के जोड़ में कोई गलती तो नहीं हुई है और किसी उत्तर को गलत तरीके से अनदेखा तो नहीं किया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Re-evaluation, 2026:, CBSE, छात्रों, के, लिए, बड़ा, अपडेट, वेरिफिकेशन, और, री-इवैल्यूएशन, प्रक्रिया, हुई, शुरू, पोर्टल, लॉन्च</media:keywords>
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        <title>UKPSC PCS परीक्षा 2024 का परिणाम घोषित, जस्मीत कौर ने किया टॉप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ukpsc-pcs-परीक्षा-2024-का-परिणाम-घोषित-जस्मीत-कौर-ने-किया-टॉप</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने पीसीएस (प्रांतीय सिविल सेवा) परीक्षा 2024 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है. इस परिणाम का काफी समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी खबर है. परीक्षा में जस्मीत कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
आयोग ने दी यह जानकारी
आयोग की ओर से जारी परिणाम के अनुसार, इस परीक्षा में कई प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की है. टॉपर्स की सूची में शामिल उम्मीदवारों ने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. जस्मीत कौर के अलावा अन्य अभ्यर्थियों ने भी उच्च रैंक प्राप्त कर प्रदेश की प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बनाई है.
किन पदों पर होती है नियुक्ति?
UKPSC PCS परीक्षा राज्य की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिसके माध्यम से डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक (DSP), वित्त अधिकारी, खंड विकास अधिकारी (BDO) समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं. इस परीक्षा में हर साल हजारों अभ्यर्थी भाग लेते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है.
कैसे तैयार की गई मेरिट लिस्ट?
इस बार की परीक्षा प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार शामिल थे. सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार की गई है. आयोग ने पारदर्शिता बनाए रखते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को संपन्न किया है.
जस्मीत ने कही यह बात
टॉपर जस्मीत कौर की सफलता की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है. उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान अनुशासन और निरंतर मेहनत को प्राथमिकता दी, जिसके चलते वह इस कठिन परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने में सफल रहीं. उनके परिवार ने भी इस सफलता पर गर्व जताया है.&amp;nbsp;
आयोग ने दी यह सलाह
सफल अभ्यर्थियों को अब विभिन्न प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया जाएगा, जिससे वे राज्य की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. वहीं, जो अभ्यर्थी इस बार सफल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए यह एक सीख और आगे बेहतर तैयारी का अवसर है. आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम और पूरी चयन सूची देख सकते हैं. परिणाम जारी होने के बाद अब चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UKPSC, PCS, परीक्षा, 2024, का, परिणाम, घोषित, जस्मीत, कौर, ने, किया, टॉप</media:keywords>
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        <title>CBSE Re&amp;evaluation 2026: जल्द खुलेगा री&amp;वैल्यूएशन पोर्टल, अफवाहों पर न दें ध्यान; CBSE ने जारी किया बयान</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Re-evaluation 2026: CBSE कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित होने के बाद लाखों छात्र अपने नंबरों को लेकर परेशान हैं. कई छात्रों का मानना है कि उन्हें उम्मीद के मुताबिक नंबर नहीं मिले हैं, इसलिए वे अपनी आंसर शीट की जांच करवाना चाहते हैं. इसी कारण बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी देखने और नंबरों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया है.
बोर्ड ने 1 जून से री-वैल्यूएशन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन दिनभर CBSE का पोर्टल मेंटेनेंस मोड में दिखाई देता रहा. इससे छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई. इस बीच CBSE ने साफ किया है कि पोर्टल जल्द ही शुरू किया जाएगा और छात्रों को किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए.&amp;nbsp;
CBSE ने क्या कहा?
CBSE की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में बताया गया है कि वेरिफिकेशन और री-वैल्यूएशन पोर्टल जल्द लाइव किया जाएगा. बोर्ड ने कहा है कि आधिकारिक घोषणा भी जल्द जारी की जाएगी. बोर्ड के अनुसार, फिलहाल पोर्टल पर कुछ तकनीकी कार्य और भुगतान प्रणाली से जुड़ी आखिरी तैयारियां की जा रही हैं. इन प्रक्रियाओं के पूरा होते ही छात्रों के लिए आवेदन विंडो खोल दी जाएगी.&amp;nbsp;
क्यों हो रही है देरी?
जानकारी के मुताबिक, CBSE इस बार किसी भी तकनीकी समस्या से बचना चाहता है. पिछले कुछ दिनों में लाखों छात्रों के तहत आंसर शीट से संबंधित सेवाओं का यूज किया गया है, जिसके कारण पोर्टल पर काफी दबाव है. बोर्ड का कहना है कि वह आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह तय करना चाहता है कि वेबसाइट सुचारू रूप से काम करे और छात्रों को भुगतान या आवेदन में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. इसी वजह से आखिरी तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - OnMark पोर्टल पर साइबर अटैक की बात CBSE ने मानी, दिया ये अपडेट
कौन कर सकता है री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन?
जो छात्र अपने नंबरों से खुश नहीं हैं, वे पहले अपनी स्कैन की गई आंसर शीट डाउनलोड कर सकते हैं. इसके बाद वे यह जांच सकते हैं कि सभी आंसर की जांच की गई है या नहीं और नंबरों का सही तरीके से जोड़ किया गया है या नहीं, अगर किसी आंसर की जांच नहीं हुई है या अंक देने में कोई गलती दिखाई देती है, तो छात्र वेरिफिकेशन और री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि CBSE ने साफ किया है कि री-वैल्यूएशन के बाद नंबर बढ़ भी सकते हैं, घट भी सकते हैं या पहले जैसे ही रह सकते हैं.री-वैल्यूएशन के बाद जारी किए गए नंबर आखिरी माने जाएंगे.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;ऐसे करें री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन
1. CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर री-वैल्यूएशन लिंक खोलें.&amp;nbsp;
2. रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें. साथ ही जिस विषय की आंसर शीट देखनी है, उसका चयन करें.
3. अब ऑनलाइन माध्यम से तय फीस जमा करें.
4. इसके बाद स्कैन की गई कॉपी डाउनलोड करके उसे ध्यान से जांचें.&amp;nbsp;
5. अगर कोई गलती दिखाई देती है तो तय समय सीमा के अंदर आवेदन जमा करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Re-evaluation, 2026:, जल्द, खुलेगा, री-वैल्यूएशन, पोर्टल, अफवाहों, पर, न, दें, ध्यान, CBSE, ने, जारी, किया, बयान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नीट यूजी री&amp; एग्जाम के एडमिट कार्ड का इंतजार जल्द होगा खत्म, NTA जारी करेगा जरूरी अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 री-एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट सामने आया है. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जल्द ही परीक्षा शहर की जानकारी देने वाली सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड जारी कर सकती है.अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से जरूरी दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे.
NEET UG 2026 की री-एग्जाम 21 जून को आयोजित की जाएगी.परीक्षा देशभर में एक ही शिफ्ट में दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी.इस परीक्षा में लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. परीक्षा को लेकर सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं.
जल्द मिल सकती है परीक्षा शहर की जानकारी
परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को उनके परीक्षा केंद्र वाले शहर की जानकारी देने के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी की जाएगी.इसके कुछ समय बाद एडमिट कार्ड भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें ताकि किसी भी महत्वपूर्ण सूचना से वंचित न रहें.
पेपर लीक विवाद के बाद लिया गया री-एग्जाम का फैसला
इस वर्ष NEET UG परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के कारण चर्चा में रही. विभिन्न राज्यों से सामने आए आरोपों और जांच के बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठे थे. इसी पृष्ठभूमि में दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिससे सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके.
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सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था मामला
परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. हालांकि अदालत ने तत्काल इस मांग को स्वीकार नहीं किया.सुनवाई के दौरान यह भी माना गया कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा को दोबारा आयोजित करना प्रशासनिक दृष्टि से एक बड़ी चुनौती है.
आगे बदल सकता है परीक्षा का प्रारूप
केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले शैक्षणिक सत्रों में NEET UG परीक्षा को कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं. इससे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
बैंक डिटेल्स जमा करने की समय सीमा बढ़ी
उम्मीदवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए NTA ने बैंक खाते की जानकारी जमा करने की लास्ट डेट भी बढ़ा दी है. इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जो अभी तक आवश्यक जानकारी जमा नहीं कर पाए थे. उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IPS की सबसे पहली पोस्टिंग कौन सी होती है, कितनी मिलती है शुरुआती सैलरी? जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे टॉप सर्विस में शामिल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) युवाओं के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले IPS अधिकारियों को सम्मान के साथ-साथ अच्छी सैलरी और कई सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं.ऐसे में कई अभ्यर्थियों के मन में सवाल होता है कि IPS अधिकारी की पहली पोस्टिंग कहां होती है और उन्हें शुरुआती वेतन कितना मिलता है.
IPS अधिकारी की पहली पोस्टिंग कहां होती है?
UPSC परीक्षा और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद IPS अधिकारियों की पहली नियुक्ति आमतौर पर उप पुलिस अधीक्षक (DSP) के रूप में होती है. इस दौरान अधिकारी को किसी जिले में तैनात किया जाता है, जहां वह वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियां संभालता है.
ट्रेनिंग के दौरान भी मिलती है सैलरी
IPS अधिकारियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान भी वेतन दिया जाता है. प्रशिक्षण मुख्य रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में होता है. ट्रेनिंग के दौरान मिलने वाला मासिक वेतन भी मिलता है.&amp;nbsp;
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कितनी होती है शुरुआती सैलरी?
IPS अधिकारी का शुरुआती बेसिक वेतन 56,100 रुपये प्रति माह निर्धारित है. इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं. इन सभी को जोड़ने पर शुरुआती कुल मासिक वेतन लगभग 75000 रुपये से 80000 रुपये तक पहुंच सकता है.
अनुभव के साथ बढ़ती है कमाई
सेवा में अनुभव और पदोन्नति के साथ IPS अधिकारियों का वेतन लगातार बढ़ता है. पुलिस अधीक्षक (SP), उप महानिरीक्षक (DIG), महानिरीक्षक (IG) और पुलिस महानिदेशक (DGP) जैसे पदों पर पहुंचने के बाद वेतन 1 लाख रुपये से लेकर 2.25 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकता है.
सैलरी के अलावा मिलती हैं कई सुविधाएं
IPS अधिकारियों को सरकारी आवास, वाहन और चालक, चिकित्सा सुविधाएं, सुरक्षा कर्मी, यात्रा भत्ता, पेंशन और अन्य कई सरकारी लाभ भी मिलते हैं.यही कारण है कि IPS सेवा न केवल प्रतिष्ठा बल्कि आर्थिक रूप से भी एक आकर्षक करियर विकल्प मानी जाती है.यह भी पढ़ें - नीट यूजी री- एग्जाम के एडमिट कार्ड का इंतजार जल्द होगा खत्म, NTA जारी करेगा जरूरी अपडेट ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BPCL में बंपर भर्ती! सालाना 55 लाख रुपये तक सैलरी, इन उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका</title>
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        <description><![CDATA[ देश की प्रमुख तेल और गैस कंपनी BPCL ने मिड-सीनियर लेवल भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती की सबसे खास बात इसकी आकर्षक सैलरी है, जो कई पदों पर सालाना 55 लाख रुपये से भी ज्यादा तक पहुंच रही है. ऐसे में सरकारी क्षेत्र में शानदार वेतन और प्रतिष्ठित करियर की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा मौका माना जा रहा है.
BPCL ने 31 मई 2026 को भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. इच्छुक उम्मीदवार 20 जून 2026 की रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन केवल BPCL के करियर पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे. कंपनी ने भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (BPRL), कंपनी सेक्रेटरी, फाइनेंस, पेट्रोकेमिकल्स और वेसाइड एमिनिटीज (WSA) जैसे विभागों में कई पदों पर भर्ती निकाली है.
इस भर्ती अभियान के तहत BPRL में 5 पद, कंपनी सेक्रेटरी विभाग में 4 पद, पेट्रोकेमिकल्स में 2 पद और वेसाइड एमिनिटीज में 5 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. वहीं फाइनेंस विभाग में जरूरत के अनुसार योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.
कौन कर सकता है अप्लाई?
योग्यता की बात करें तो BPRL के पदों के लिए उम्मीदवारों के पास BE, BTech या Geology एवं Geophysics में पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री होना जरूरी है. कंपनी सेक्रेटरी पद के लिए ICSI की योग्यता अनिवार्य रखी गई है. वहीं फाइनेंस विभाग के लिए CA या ICWA की डिग्री जरूरी होगी.
पेट्रोकेमिकल्स और वेसाइड एमिनिटीज विभागों के लिए संबंधित इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट क्षेत्र की डिग्री मांगी गई है. आयु सीमा पद के अनुसार अलग-अलग तय की गई है. अधिकांश पदों के लिए अधिकतम आयु 34 से 50 वर्ष के बीच रखी गई है. कुछ वरिष्ठ पदों पर यह सीमा 55 वर्ष तक भी हो सकती है. &amp;nbsp;
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सैलरी कितनी मिलेगी?
E2 ग्रेड के पदों पर चयनित उम्मीदवारों को 50,000 रुपये से 1,60,000 रुपये तक का वेतनमान मिलेगा. मेट्रो शहरों में इनका अनुमानित सालाना CTC करीब 21.07 लाख रुपये होगा. E3 ग्रेड के कर्मचारियों को 60,000 रुपये से 1,80,000 रुपये तक का वेतनमान दिया जाएगा. इस ग्रेड में अनुमानित सालाना CTC लगभग 24.99 लाख रुपये रहेगा. E4 ग्रेड में चयनित उम्मीदवारों का वेतन 70,000 रुपये से 2,00,000 रुपये प्रतिमाह तक होगा. इस श्रेणी का सालाना CTC लगभग 30.21 लाख रुपये बताया गया है.
E5 ग्रेड के अधिकारियों को 80,000 रुपये से 2,20,000 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा. इनका अनुमानित वार्षिक CTC 34.45 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. E6 ग्रेड में नियुक्त उम्मीदवारों को 90,000 रुपये से 2,40,000 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा. इस स्तर पर सालाना CTC लगभग 39.82 लाख रुपये रहेगा. E7 ग्रेड के अधिकारियों को 1 लाख रुपये से 2.60 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा. इस ग्रेड का अनुमानित वार्षिक CTC 45.38 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. सबसे ऊंचे E8 ग्रेड में चयनित उम्मीदवारों को 1.20 लाख रुपये से 2.80 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा. इस स्तर पर सालाना CTC करीब 55.49 लाख रुपये तक हो सकता है, जो इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है.
आवेदन शुल्क कितना
आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ओबीसी-एनसीएल, ईडब्ल्यूएस और पूर्व सैनिक वर्ग के उम्मीदवारों को 1180 रुपये शुल्क देना होगा. इसमें आवेदन शुल्क के साथ जीएसटी भी शामिल है. वहीं एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह मुफ्त रखा गया है.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IPS की सबसे पहली पोस्टिंग कौन सी होती है, कितनी मिलती है शुरुआती सैलरी? जानिए ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BPCL, में, बंपर, भर्ती, सालाना, लाख, रुपये, तक, सैलरी, इन, उम्मीदवारों, के, लिए, सुनहरा, मौका</media:keywords>
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        <title>CBSE Re&amp;evaluation 2026 Portal : CBSE ने एक बार फिर तोड़ा छात्रों का भरोसा, दिन बीता लेकिन शुरू न हो पाया पोर्टल</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Re-evaluation 2026 Portal : सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद लाखों छात्र अपने नंबरों को लेकर री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे. बोर्ड ने पहले घोषणा की थी कि 1 जून 2026 से री-इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा शुरू कर दिया जाएगा, जिससे छात्र अपनी आंसर शीट की जांच, &amp;nbsp;नंबर वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकें, लेकिन जिस पोर्टल का छात्र कई दिनों से इंतजार कर रहे थे, वह तय समय पर भी पूरी तरह से काम नहीं कर पाया. सुबह से लेकर देर शाम तक हजारों छात्रों ने पोर्टल पर लॉगिन करने की कोशिश की, लेकिन कई लोगों को वेबसाइट खुलने में दिक्कत आई, तो कई छात्रों को एरर मैसेज और अनरिस्पॉन्सिव लिंक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं.&amp;nbsp;
29 मई से बढ़ाकर 1 जून की गई थी तारीख
सीबीएसई ने पहले री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल को 29 मई 2026 से शुरू करने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में बोर्ड ने इसकी तारीख आगे बढ़ाकर 1 जून कर दी. उस समय बोर्ड ने कहा था कि वह छात्रों को अधिक पारदर्शी और तकनीकी खामियों से मुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराना चाहता है. इसी वजह से पोर्टल की शुरुआत कुछ दिनों के लिए टाल दी गई थी. छात्रों को उम्मीद थी कि अतिरिक्त समय मिलने के बाद पोर्टल बिना किसी परेशानी के काम करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.&amp;nbsp;
लॉन्च की घोषणा कब हुई?
सीबीएसई की ओर से 1 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दोपहर करीब 2 बजे जानकारी शेयर की गई कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल जल्द शुरू किया जाएगा. इसके बाद देर तक छात्रों को वेबसाइट पर आवेदन का एक्टिव लिंक दिखाई नहीं दिया. कई छात्रों ने शिकायत की कि लगातार वेबसाइट चेक कर रहे हैं, लेकिन आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है. इससे छात्रों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिर आवेदन कब से स्वीकार किए जाएंगे.&amp;nbsp;
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CBSE ने एक बार फिर तोड़ा छात्रों का भरोसा
इसके पहले सीबीएसई के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल को लेकर तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं. इससे पहले जब स्कैन की गई आंसर शीट प्राप्त करने का पोर्टल खोला गया था, तब भी छात्रों ने कई समस्याओं की शिकायत की थी. उस दौरान कुछ छात्रों को खाली पेज दिखाई दे रहे थे, कई लिंक काम नहीं कर रहे थे और कुछ को कैप्चा से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. अब री-इवैल्यूएशन पोर्टल के साथ भी इसी तरह की समस्याएं देखने को मिल रही हैं.&amp;nbsp;
सीमित समय के कारण बढ़ी चिंता
री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के लिए छात्रों को सीमित समय दिया जाता है. ऐसे में पोर्टल का समय पर काम न करना छात्रों की चिंता बढ़ा रहा है. कई छात्र ऐसे हैं जो अपने नंबरों को लेकर डाउट में हैं और जल्द से जल्द आवेदन करना चाहते हैं, लेकिन पोर्टल तक पहुंच न होने के कारण उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है. अभिभावकों का भी कहना है कि बोर्ड को पहले सभी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त कर लेनी चाहिए थी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>OnMark पोर्टल पर साइबर अटैक की बात CBSE ने मानी, दिया ये अपडेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/onmark-पोर्टल-पर-साइबर-अटैक-की-बात-cbse-ने-मानी-दिया-ये-अपडेट</link>
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        <description><![CDATA[ सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर हाल ही में उठे सवालों के बीच अब बोर्ड ने अपने ऑन मार्क पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है. बोर्ड ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर कहा है कि पोर्टल में सामने आई साइबर सुरक्षा संबंधी कमजोरी को गंभीरता से लिया गया है और उन्हें दूर करने के लिए केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और आईआईटी के एक्सपर्ट्स की टीम लगातार काम कर रही है. सीबीएसई के अनुसार, जिन सुरक्षा खामियों की पहचान की गई है, उन्हें कंट्रोल कर लिया गया है और दूसरी संभावित कमजोरी की भी गहन जांच की जा रही है.
दरअसल, हाल ही में ऑन मार्क पोर्टल की सुरक्षा को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई. इसके बाद सीबीएसई ने मामले की निगरानी तेज करते हुए, साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स की एक विशेष टीम को तैनात किया. बोर्ड का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से एक्सपर्ट्स लगातार सिस्टम की समीक्षा कर रहे हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;ऑन मार्क पोर्टल की हो रही लगातार निगरानी&amp;nbsp;
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह सेवा प्रदाता के ऑन मार्क पोर्टल में सामने आई सुरक्षा कमजोरियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. सार्वजनिक रूप से जिन खामियों की जानकारी सामने आई है, उनका तुरंत संज्ञान लिया गया है और उन्हें दूर करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. बोर्ड के अनुसार ढांचे को और मजबूत करने के लिए पोर्टल को ज्यादा सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था में स्थानांतरित करने का काम भी किया जा रहा है.
कमजोरियों को किया गया कंट्रोल&amp;nbsp;
बोर्ड का कहना है कि जिन सुरक्षा खामियों की पुष्टि हुई है, उन्हें कंट्रोल कर लिया गया है. साथ ही एक्सपर्ट्स की टीम यह भी जांच कर रही है कि कई ऐसी दूसरी तकनीकी कमजोरी हो तो मौजूद नहीं है, जिनका भविष्य में दुरुपयोग किया जा सके. सीबीएसई के अनुसार साइबर सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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आईआईटी और सरकारी एजेंसियों के एक्सपर्ट कर रहे निगरानी&amp;nbsp;
सीबीएसई ने बताया कि इस काम को केवल बोर्ड की तकनीकी टीम ही नहीं, बल्कि सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट और आईआईटी से जुड़े साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स भी शामिल है. इन एक्सपर्ट्स को सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने और संभावित खतरों को रोकने की जिम्मेदारी दी गई है. बोर्ड का दावा है कि सुरक्षा को लेकर सभी जरूरी कदम तेजी से उठाया जा रहे हैं. इसके अलावा सीबीएसई ने एथिकल हैकर्स और उन नागरिकों का धन्यवाद भी किया है, जिन्होंने पोर्टल की खामियों की जानकारी शेयर की है. सीबीएसई के अनुसार कुछ लोगों से सीधे कांटेक्ट कर उनसे तकनीकी इनपुट भी लिए गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिली है. बोर्ड का कहना है की जिम्मेदार तरीके से दी गई ऐसी जानकारी सिस्टम को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
सुझाव और जानकारी के लिए बोर्ड ने जारी की मेल आईडी
&amp;nbsp;इसके अलावा सीबीएसई ने लोगों से अपील की है कि किसी के पास ऑन मार्क पोर्टल की सुरक्षा से जुड़ी कोई जरूरी जानकारी या सुझाव हो तो वह बोर्ड की सुरक्षा टीम से कांटेक्ट कर सकता है. इसके लिए बोर्ड ने ऑफिशियल ईमेल आईडी secy-cbse@nic.in भी उपलब्ध कराई है. सीबीएसई का कहना है कि ऐसे सभी सुझाव और जानकारी की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी, ताकि पोर्टल को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE Class 12 Re&amp;evaluation 2026: 1 जून से खुल रहा CBSE का री&amp;इवैल्यूएशन पोर्टल, कैसे करें अप्लाई? यहां जानें पूरा प्रॉसेस</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Class 12 Re-evaluation 2026: देशभर के लाखों छात्रों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने री-इवैल्यूएशन और नंबर वेरिफिकेशन की सुविधा उपलब्ध कराई है, जिससे वे अपनी कॉपियों की दोबारा जांच करवा सकें. इस बार री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर छात्रों के बीच काफी चर्चा रही है. पहले बोर्ड ने आवेदन प्रक्रिया 29 मई से शुरू होने की जानकारी दी थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते इसकी तारीख बदलकर 1 जून 2026 कर दी गई.
बोर्ड का कहना है कि पोर्टल को ज्यादा आसान और सुरक्षित बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में आने वाले आवेदनों को बिना किसी परेशानी के संभाला जा सके. अगर आप भी अपने नंबरों की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल कब खुलेगा, अप्लाई कैसे करें और आवेदन करने का पूरा प्रॉसेस क्या है.&amp;nbsp;
1 जून से शुरू होगा री-इवैल्यूएशन पोर्टल
CBSE ने साफ किया है कि कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए पोस्ट रिजल्ट एक्टिविटी पोर्टल 1 जून 2026 से शुरू किया जाएगा. इसी पोर्टल के माध्यम से छात्र अपने नंबरो का वेरिफिकेशन, आंसर बुक की जांच और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे. बोर्ड का कहना है कि यह कदम प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाने के लिए उठाया गया है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
री-इवैल्यूएशन के लिए वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने अपनी &amp;nbsp;स्कैन की गई आंसर शीट की कॉपी लेने के लिए आवेदन किया था. ऐसे छात्र अब अपनी कॉपी में किसी गलती की जांच करवाने, नंबरों का वेरिफिकेशन कराने और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
री-इवैल्यूएशन क्यों है चर्चा में?
इस साल CBSE ने आंसर शीट की जांच के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल किया है. रिजल्ट जारी होने के बाद कुछ छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे. वहीं कई छात्रों ने मार्कशीट में दिक्कतों और पोर्टल पर भुगतान संबंधी समस्याओं की भी शिकायत की थी. इसी वजह से री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर छात्रों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई है.&amp;nbsp;
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कैसे करें अप्लाई?
1.री-इवैल्यूएशन के लिए छात्रों को सबसे पहले CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाना होगा.
2. वहां पोस्ट रिजल्ट एक्टिविटी या वेरिफिकेशन एवं री-इवैल्यूएशन सेक्शन खोलना होगा.
3. इसके बाद रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी की मदद से लॉगिन करना होगा.
4. लॉगिन करने के बाद छात्र अपनी जरूरत के अनुसार मार्क्स वेरिफिकेशन, री-इवैल्यूएशन या दोनों ऑप्शन चुन सकते हैं.&amp;nbsp;
5. इसके बाद फिर संबंधित विषय का चयन कर तय फीस का ऑनलाइन भुगतान करना होगा.
6. आवेदन सबमिट करने के बाद उसका प्रिंट आउट या पीडीएफ अपने पास सुरक्षित रखना चाहिए.&amp;nbsp;
छात्रों के लिए हेल्पलाइन सुविधा
अगर किसी छात्र को आवेदन प्रक्रिया के दौरान कोई तकनीकी समस्या आती है, तो वह CBSE की हेल्पलाइन सेवाओं का यूज कर सकता है. बोर्ड ने छात्रों की सहायता के लिए टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन नंबर और ईमेल सपोर्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Class, Re-evaluation, 2026:, जून, से, खुल, रहा, CBSE, का, री-इवैल्यूएशन, पोर्टल, कैसे, करें, अप्लाई, यहां, जानें, पूरा, प्रॉसेस</media:keywords>
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        <title>JEE Advanced Result 2026: जारी होने वाला है JEE Advanced 2026 का रिजल्ट, इस डायरेक्ट लिंक से चेक करें अपना स्कोर</title>
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        <description><![CDATA[ JEE Advanced Result 2026: देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने का सपना देख रहे लाखों छात्रों का इंतजार खत्म होने वाला है. जेईई एडवांस्ड 2026 में शामिल उम्मीदवारों का रिजल्ट 1 जून को जारी किया जाएगा. परीक्षा आयोजित कराने वाले आईआईटी रुड़की की ओर से परिणाम के साथ फाइनल आंसर की और ऑल इंडिया रैंक भी जारी की जाएगी. रिजल्ट घोषित होने के बाद उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट jeeadv.ac.in पर जाकर अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे.&amp;nbsp;
रिजल्ट के साथ जारी होगी फाइनल आंसर की&amp;nbsp;
आईआईटी रुड़की ने इससे पहले प्रोविजनल आंसर की जारी कर छात्रों से आपत्तियां मांगी थी. प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद फाइनल आंसर की तैयार की गई है, जिसे रिजल्ट के साथ सार्वजनिक किया जाएगा. इससे छात्रों को अपने उत्तर और अंतिम मूल्यांकन को समझने का अवसर मिलेगा. रिजल्ट में उम्मीदवारों के विषयवार अंक, कुल स्कोर, ऑल इंडिया रैंक, कैटेगरी रैंक और फाइनल क्वालीफाइंग स्टेटस जैसी जरूरी जानकारियां शामिल होंगी. इसी आधार पर आगे की काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया संचालित की जाएगी.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड कर सकेंगे स्कोरकार्ड&amp;nbsp;

रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले जेईई एडवांस्ड की ऑफिशियल वेबसाइट jeeadv.ac.in पर जाएं.
वहां होम पेज पर उपलब्ध रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.
इसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्मतिथि और दूसरी जरूरी जानकारी दर्ज कर लॉगिन करें.&amp;nbsp;
लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर स्कोर कार्ड दिखाई देगा, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं.&amp;nbsp;

स्कोरकार्ड में जरूर जांच लें यह जानकारी&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को सलाह दी गई है, कि स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दर्ज सभी जानकारियों का सावधानी पूर्वक मिलान करें. नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, विषयवार अंक, कुल अंक, ऑल इंडिया रैंक और क्वालीफाइंग स्टेटस जैसी सूचनाओं में किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर संबंधित अधिकारियों से कांटेक्ट करना चाहिए.&amp;nbsp;
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रिजल्ट के बाद शुरू होगी JoSAA काउंसलिंग&amp;nbsp;
जेईई एडवांस्ड 2026 का रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद JoSAA काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी. इस प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवार अपनी रैंक के आधार पर पसंदीदा स्थान और ब्रांच का चयन कर सकेंगे. सीट आवंटन कई चरणों में किया जाएगा और उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के अंदर अपनी पसंद भरनी होगी. काउंसलिंग के माध्यम से देश के सभी आईआईटी के अलावा एनआईटी, आईआईआईटी और दूसरे भाग लेने वाले तकनीकी संस्थानों में एडमिशन दिया जाएगा. इसलिए छात्रों के रिजल्ट के साथ-साथ काउंसलिंग से जुड़ी हर ऑफिशियल सूचना पर भी नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
पिछले वर्षों में कैसी रही कट ऑफ?&amp;nbsp;
जेईई एडवांस्ड की कट ऑफ हर साल परीक्षा की कठिन स्तर और प्रदर्शन के आधार पर बदलती है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े देखें तो कॉमन रैंक लिस्ट की क्वालीफाइंग कट ऑफ में काफी भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2025 में सीआरएल क्वालीफाइंग कट ऑफ 74 अंक रही थी, जबकि 2024 में यह 109 अंक थी. वहीं 2023 में क्वालीफाइंग कट ऑफ 86 अंक दर्ज की गई थी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कटऑफ में यह बदलाव प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर और छात्रों के प्रदर्शन को दर्शाता है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CS June 2026 Exam: कल से शुरू होंगी CS जून 2026 परीक्षाएं, एग्जाम सेंटर जाने से पहले जरूर रखें ये जरूरी डॉक्यूमेंट्स</title>
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        <description><![CDATA[ CS June 2026 Exam: इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की और से आयोजित कंपनी सेक्रेटरी जून 2026 परीक्षा 1 जून से शुरू होने जा रही है. इस परीक्षा में शामिल होने वाले सीएसईईटी, सीएस एग्जीक्यूटिव और सीएस प्रोफेशनल कार्यक्रमों के अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर जाने से पहले सभी जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखने की सलाह दी गई है. ICSI ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित डॉक्यूमेंट के बिना किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी.&amp;nbsp;
कब तक चलेंगी परीक्षाएं?
जून 2026 की सीएसईईटी परीक्षा पहली बार ऑफलाइन मोड में आयोजित की जा रही है. ऐसे में अभ्यर्थियों को परीक्षा से जुड़ी सभी जरूरी तैयारी पहले से पूरी करने की सलाह दी है. वहीं आईसीएसआई की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार सीएसईईटी जून परीक्षा 1 जून से 4 जून तक आयोजित की जाएगी. वहीं सीएस एग्जीक्यूटिव और सीएस प्रोफेशनल परीक्षा 1 से 7 जून 2026 तक आयोजित की जाएगी. उम्मीदवारों को अपने संबंधित पेपर की डेट और समय की जानकारी एडमिट कार्ड में दिए गए डिटेल के अनुसार जांच लेने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र पर कौन-कौन से डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी?
आईसीएसआई ने कहा है कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले उम्मीदवार के दस्तावेजों की जांच की जाएगी. इसलिए सभी अभ्यर्थियों को अपने साथ जरूरी डॉक्यूमेंट अनिवार्य रूप से लेकर जाना होगा. परीक्षा केंद्र पर सीएसईईटी की एग्जीक्यूटिव या सीएस प्रोफेशनल का संबंध एडमिट कार्ड साथ रखना जरूरी होगा. इसके अलावा स्टूडेंट आईडी कार्ड और एक वैलिड फोटो पहचान पत्र भी साथ ले जाना होगा. पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या कोई दूसरा वैलिड फोटो आईडी स्वीकार की जाएगी.&amp;nbsp;
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एडमिट कार्ड में फोटो या सिग्नेचर न होने पर क्या करें?
आईसीएसआई ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वह परीक्षा से पहले अपने एडमिट कार्ड को अच्छी तरह जांच लें. अगर एडमिट कार्ड पर फोटो या सिग्नेचर नहीं है तो उम्मीदवार का हाल ही का पासपोर्ट साइज फोटो चिपकाना होगा और उसे किसी राजपत्रित अधिकारी, आईसीएसई अधिकारी या सदस्य, मान्यता प्राप्त स्कूल के प्रिंसिपल या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के प्रबंधक से सत्यापित कराना होगा. इसके अलावा संस्थान ने साफ कर दिया है कि वैलिड एडमिट कार्ड के बिना किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा हॉल में एंट्री नहीं दी जाएगी. ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वह परीक्षा से एक दिन पहले ही सारे जरूरी डॉक्यूमेंट की जांच कर ले और उन्हें सुरक्षित रूप से अपने साथ रखें.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>June, 2026, Exam:, कल, से, शुरू, होंगी, जून, 2026, परीक्षाएं, एग्जाम, सेंटर, जाने, से, पहले, जरूर, रखें, ये, जरूरी, डॉक्यूमेंट्स</media:keywords>
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        <title>CBSE OSM Tender Controversy: OSM पॉलिसी लाने के लिए CBSE ने खुद किया था टेंडर में हेरफेर! 12वीं के छात्र के दावों ने खोली पोल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cbse-osm-tender-controversy-osm-पॉलिसी-लाने-के-लिए-cbse-ने-खुद-किया-था-टेंडर-में-हेरफेर-12वीं-के-छात्र-के-दावों-ने-खोली-पोल</link>
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        <description><![CDATA[ CBSE OSM Tender Controversy: देशभर के लाखों छात्रों के बोर्ड परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने वाला CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम इन दिनों गंभीर विवादों में घिरा हुआ है. इस विवाद की शुरुआत किसी राजनीतिक दल या जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि झारखंड के एक 17 वर्षीय छात्र ने की है. सार्थक सिद्धांत नाम के इस छात्र ने दावा किया है कि CBSE ने OSM सिस्टम के लिए टेंडर जारी करते समय कई जरूरी नियमों में बदलाव किए, जिससे एक खास कंपनी को फायदा मिला.
छात्र के आरोपों ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि विपक्ष के नेता, कई राजनीतिक दल और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग भी इस मामले पर सवाल उठाने लगे हैं. अब यह मामला टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लाखों छात्रों के फ्यूचर और परीक्षा सिस्टम की पारदर्शिता पर भी बहस छिड़ गई है. ऐसे में आइए जानते हैं क्या OSM प्रक्रिया के लिए CBSE ने टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया था और इस 17 साल के छात्र ने क्या बड़ा दावा किया.&amp;nbsp;
कौन हैं सार्थक सिद्धांत?
सार्थक सिद्धांत झारखंड के कक्षा 12 के छात्र हैं. उन्होंने खुद को OSM सिस्टम से प्रभावित छात्रों में शामिल बताया है. अपने परीक्षा परिणाम और आंसर शीट को लेकर खुश न होने के बाद उन्होंने केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल (CPPP) पर उपलब्ध CBSE के टेंडर डॉक्यूमेंट्स का अध्ययन शुरू किया. कई दिनों तक अलग-अलग टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना करने के बाद उन्होंने अपने निष्कर्ष एक ब्लॉग के रूप में पोस्ट किए. उनका दावा है कि उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में करीब 15 ऐसी गड़बड़ियां ढूंढी, जो सवाल खड़े करती हैं.&amp;nbsp;
क्या OSM प्रक्रिया के लिए CBSE ने टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया था
अभी तक यह आरोप और दावों का मामला है, जिसकी जांच और समीक्षा की मांग की जा रही है. झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने दावा किया है कि CBSE ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के लिए टेंडर जारी करते समय कुछ नियमों और पात्रता शर्तों में बदलाव किए, जिससे कथित तौर पर एक खास कंपनी को फायदा मिला. छात्र ने अपने ब्लॉग में टर्नओवर, ब्लैकलिस्टिंग, तकनीकी योग्यता और डेटा सेंटर जैसी कई शर्तों में हुए बदलावों की ओर इशारा किया है. हालांकि, CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी खरीद प्रक्रिया निर्धारित सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के तहत की गई. वहीं Indian Institute of Technology Madras और Indian Institute of Technology Kanpur के विशेषज्ञ इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रहे हैं.&amp;nbsp;
इस 17 साल के छात्र ने क्या बड़ा दावा किया
1. पहला आरोप - सार्थक का कहना है कि CBSE ने OSM परियोजना के लिए तीन बार टेंडर जारी किए. उनके मुताबिक, शुरुआती टेंडरों में पात्रता की शर्तें ज्यादा सख्त थीं, लेकिन बाद में उन्हें धीरे-धीरे आसान किया गया. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल कंपनी के टर्नओवर को लेकर उठाया गया है. टेंडर की अंतिम शर्त के अनुसार कंपनी का तीन वर्षों का औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 50 करोड़ रुपये होना चाहिए था. सार्थक के अनुसार, TCS जैसी बड़ी कंपनी इस शर्त को आसानी से पूरा करती थी. Rankguru Technology Solutions का टर्नओवर भी काफी ज्यादा था, जबकि Coempt Edu Tech का औसत टर्नओवर लगभग 50.86 करोड़ रुपये ही था. छात्र का आरोप है कि यह सीमा इस तरह तय की गई जिससे Coempt भी पात्र हो जाए.&amp;nbsp;
2. दूसरा आरोप - सार्थक के ब्लॉग में दूसरा बड़ा आरोप Poor Performance है. उनका कहना है कि शुरुआती टेंडर में ऐसी कंपनियों को बाहर रखने का प्रावधान था जिनका पहले खराब रिकॉर्ड रहा हो या जिन्होंने परियोजनाएं अधूरी छोड़ी हों, लेकिन बाद में इस शर्त को बदल दिया गया. सार्थक का दावा है कि अगर पुरानी शर्तें लागू रहतीं तो Coempt Edu Tech पात्र नहीं होती.&amp;nbsp;
3. तीसरा आरोप - &amp;nbsp;छात्र का कहना है कि Coempt Edu Tech पहले Globarena Technologies के नाम से जानी जाती थी. Globarena का नाम 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद में सामने आया था और उसे कथित तौर पर ब्लैकलिस्ट भी किया गया था. सार्थक का आरोप है कि टेंडर में Previously Blacklisted की जगह Currently Blacklisted शब्द जोड़े गए. इस बदलाव का मतलब यह था कि जो कंपनी पहले कभी ब्लैकलिस्ट हुई हो, लेकिन वर्तमान में ब्लैकलिस्ट न हो, वह टेंडर में भाग ले सकती है. उनके अनुसार यह बदलाव Coempt के लिए फायदेमंद साबित हुआ.&amp;nbsp;
4. चौथा आरोप - सार्थक ने तकनीकी मानकों में बदलाव को भी सवालों के घेरे में रखा है. उन्होंने दावा किया कि CMMI Certification Level-5 की अनिवार्यता को घटा कर Level-3 कर दिया गया. स्कैनिंग क्वालिटी से जुड़े मानकों को भी पहले की तुलना में नरम बनाया गया. डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सेंटर जैसी जरूरी शर्तों में भी बदलाव किया गया. उनका कहना है कि इन परिवर्तनों से बड़ी कंपनियों की तुलना में Coempt को फायदा मिला.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- CBSE मुख्यालय पर NSUI का प्रदर्शन, OSM मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की मांग
CBSE ने क्या जवाब दिया?
CBSE ने इन आरोपों को खारिज किया है. बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पूरी खरीद प्रक्रिया सरकारी नियमों के तहत की गई और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया. CBSE के अनुसार, टेंडर में किए गए बदलाव किसी विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं थे. बदलाव पिछले दौर की कमियों को दूर करने और बेहतर परिणाम प्राप्त करने के उद्देश्य से किए गए. विजेता कंपनी का चयन क्वालिटी और लागत दोनों को ध्यान में रखकर किया गया.&amp;nbsp;
Coempt Edu Tech ने क्या कहा?
कंपनी ने भी किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है. Coempt Edu Tech के अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने नियमों के अनुसार टेंडर में भाग लिया और सभी पात्रता शर्ते पूरी कीं. कंपनी का यह भी कहना है कि तेलंगाना परीक्षा विवाद में अदालतों ने उसे दोषी नहीं माना था.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Exam Controversy 2026:  30 दिन, 4 परीक्षाएं और कई सवाल... NEET, CBSE, SSC और CUET UG तक, किस एग्जाम में क्या हुआ?</title>
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        <description><![CDATA[ Exam Controversy 2026: राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. मई 2026 में देश की चार बड़ी परीक्षाएं नीट यूजी, सीबीएसई 12वीं बोर्ड, एसएससी जीडी और सीयूईटी यूजी अलग-अलग कारणों से विवादों में रही है. कहीं पेपर लीक के आरोप लगे, कहीं मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठे तो कहीं तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था ने लाखों छात्रों और पेरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है.
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, तैयारी और प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट यूजी, सीबीएसई 12वीं बोर्ड, एसएससी जीडी और सीयूईटी यूजी इन चारों परीक्षाओं में कौनसी गड़बड़ियां सामने आई और किसमें क्या हो रहा है.&amp;nbsp;
CUET UG में तकनीकी गड़बड़ी से बढ़ी परेशानी&amp;nbsp;
30 मई को आयोजित सीयूईटी यूजी 2026 परीक्षा की पहली शिफ्ट कई केंद्रों पर तय समय पर शुरू नहीं हो सकी. सुबह 9 बजे होने वाली परीक्षा तकनीकी और सर्वर संबंधी दिक्कतों के कारण करीब 2 घंटे देरी से शुरू हुई. कई परीक्षा केंद्रों पर छात्र भीषण गर्मी में लंबे समय तक इंतजार करते रहे. कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि घंटाें इंतजार करने के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई. एनटीए के अनुसार, परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीसीएस की ओर से तकनीकी समस्या आई थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया. एजेंसी ने कहा कि प्रभावित छात्रों को परीक्षा के लिए पूरा समय दिया गया और किसी भी उम्मीदवार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. गड़बड़ी के कारण दूसरी शिफ्ट का समय भी बदला गया. इस वर्ष सीयूईटी यूजी के लिए 15 लाख से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किया है.&amp;nbsp;
नीट यूजी पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द&amp;nbsp;
मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 इस साल सबसे बड़े विवादों में रही. 3 मई को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया. जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से प्रश्न पत्र से मिलते-जुलते सवाल शेयर किया जा रहे थे. मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप गई और कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. करीब 22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों को अब दोबारा परीक्षा का इंतजार है. नीट यूजी की परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जानी है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-CBSE मुख्यालय पर NSUI का प्रदर्शन, OSM मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की मांग
सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट पर उठे सवाल&amp;nbsp;
इस वर्ष सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पहली बार ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उपयोग किया गया. परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. कुछ विद्यार्थियों का कहना था कि डिजिटल कॉपियां स्पष्ट नहीं थी, जबकि कुछ नए पन्ने गायब होने और सही उत्तरों के बावजूद कम अंक न मिलने की शिकायत की. इसी वजह से बड़ी संख्या में छात्रों में पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिकाओं में दोबारा जांच के लिए आवेदन किया. छात्रों ने बोर्ड ने छात्रों की मांग देखते हुए संबंधित प्रक्रिया के लिए पोर्टल दोबारा खोला, लेकिन इसमें भी तकनीकी गड़बड़ी का मामला सामने आया.&amp;nbsp;
एसएससी जीडी परीक्षा में अव्यवस्था और परीक्षा रद्द
कर्मचारी चयन आयोग की जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा भी विवादों में रही. परीक्षा केंद्रों पर क्षमता से ज्यादा उम्मीदवारों के पहुंचने सर्वर संबंधी दिक्कतों और परीक्षा प्रबंधन में खामियों की शिकायतें सामने आई. कुछ केंद्रों पर अभ्यर्थियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि कई जगह बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. हालत बिगड़ने पर आयोग को कुछ शिफ्ट में परीक्षा रद्द करनी पड़ी. आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Exam, Controversy, 2026:, दिन, परीक्षाएं, और, कई, सवाल..., NEET, CBSE, SSC, और, CUET, तक, किस, एग्जाम, में, क्या, हुआ</media:keywords>
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        <title>Teaching Job Abroad : भारत से किया B.Ed तो विदेश में भी कर टीचिंग जॉब, जानें कितनी मिलती है सैलरी और कैसे करें अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Teaching Job Abroad : भारत में हर साल लाखों छात्र B.Ed की पढ़ाई पूरी करते हैं. इनमें से कई लोग सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में नौकरी पाने का सपना देखते हैं, लेकिन सीमित भर्तियों और बढ़ते कॉम्पिटिशन के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक नौकरी के लिए परेशान रहते हैं. ऐसे में बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि B.Ed की डिग्री से सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि कई विदेशी देशों में भी नौकरी की जा सकती है.
ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, कतर, सऊदी अरब, कजाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में प्रशिक्षित शिक्षकों की लगातार मांग बढ़ रही है. खासतौर पर भारतीय शिक्षकों को उनकी विषय विशेषज्ञता, अच्छी अंग्रेजी और कम लागत में बेहतर प्रदर्शन के कारण प्राथमिकता दी जाती है. ऐसे में अगर आपने भारत से B.Ed किया है और विदेश में पढ़ाने का सपना देखते हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि भारत से किया B.Ed तो विदेश में भी टीचिंग जॉब कैसे कर सकते हैं, सैलरी कितनी मिलती है और अप्लाई कैसे करें.&amp;nbsp;विदेशों में भारतीय शिक्षकों की मांग क्यों बढ़ रही है?
पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में शिक्षकों की भारी कमी देखने को मिली है. विकसित देशों में बड़ी संख्या में शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, जबकि स्कूलों और छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा कई देशों में भारतीय समुदाय तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण भारतीय सिलेबस पढ़ाने वाले स्कूलों की संख्या भी बढ़ी है. यही वजह है कि भारतीय शिक्षकों की मांग पहले की तुलना में कहीं ज्यादा हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में वैश्विक स्तर पर लाखों नए शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में भारत प्रशिक्षित शिक्षकों का बड़ा स्रोत बनकर उभर रहा है.&amp;nbsp;
भारत से किया B.Ed तो विदेश में भी टीचिंग जॉब कैसे कर सकते हैं?
अगर आप भारत से B.Ed करने के बाद विदेश में शिक्षक बनना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर देश भारतीय डिग्री को सीधे एक्सेप्ट नहीं करते हैं, इसलिए आपकी शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण का मूल्यांकन किया जाता है. जैसे ऑस्ट्रेलिया में यह प्रक्रिया AITSL के माध्यम से होती है. इसके अलावा, अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ साबित करने के लिए IELTS, PTE Academic या TOEFL जैसी परीक्षाएं पास करनी पड़ती हैं. वहीं योग्यता मूल्यांकन और भाषा परीक्षा पूरी होने के बाद आपको उस देश या राज्य की शिक्षक नियामक संस्था में रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जहां आप पढ़ाना चाहते है. &amp;nbsp;जैसे ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य में शिक्षक बनने के लिए NESA में &amp;nbsp;रजिस्ट्रेशन जरूरी है. हालांकि, हर देश के नियम अलग-अलग होते हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित देश की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
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सैलरी कितनी मिलती है?
विदेश में शिक्षकों की सैलरी देश, एक्सपीरियंस, विषय और स्कूल के अनुसार अलग-अलग होती है. आमतौर पर ऑस्ट्रेलिया में शिक्षक सालाना लगभग 55 से 70 लाख रुपये तक कमा सकते हैं, जबकि यूएई में मासिक वेतन 3 से 6 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं कजाकिस्तान और कई अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में शिक्षकों को 3,000 से 5,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.5 से 4.3 लाख रुपये) प्रतिमाह तक वेतन मिल सकता है. इसके साथ ही कई विदेशी स्कूल सिर्फ सैलरी ही नहीं देते, बल्कि आवास, स्वास्थ्य बीमा, आने-जाने के हवाई टिकट, वीजा सहायता और बच्चों की पढ़ाई जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं.&amp;nbsp;
अप्लाई कैसे करें?
विदेश में टीचिंग जॉब के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार LinkedIn, स्कूलों की आधिकारिक वेबसाइट, अंतरराष्ट्रीय भर्ती एजेंसियों, सरकारी जॉब पोर्टल और शिक्षक भर्ती मेलों (Job Fairs) का सहारा ले सकते हैं. कई विदेशी स्कूल और शिक्षा संस्थान भारत में भी समय-समय पर भर्ती अभियान चलाते हैं, जहां सीधे इंटरव्यू देकर नौकरी की जा सकती है. अगर आप विदेश के इंटरनेशनल स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, तो PGCE, TEFL और CELTA जैसे अतिरिक्त कोर्स करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. इनसे आपकी योग्यता और बेहतर मानी जाती है, जिससे अच्छे और प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षक की नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>National Teachers Award 2026: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 5 जुलाई तक करें आवेदन, जानें कौन कर सकता है अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ National Teachers Award 2026: शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस प्रतिष्ठित सामान के जरिए देशभर के उन शिक्षकों को पहचान दी जाएगी, जिन्होंने शिक्षण, रिसर्च, नवाचार, छात्र मार्गदर्शन और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक में कार्यरत योग्य शिक्षक इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है.&amp;nbsp;
दो प्रमुख श्रेणियां में दिए जाएंगे पुरस्कार&amp;nbsp;
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को दो प्रमुख श्रेणी में विभाजित किया गया है. पहली श्रेणी उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के लिए है. इसके अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, वास्तुकला, शुद्ध विज्ञान, कला, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, भाषा, विधि, वाणिज्य और प्रबंधन जैसे विशेष शामिल है. मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि उभरते हुए नए ज्ञान क्षेत्र को भी इस श्रेणी में शामिल किया जा सकता है. दूसरी श्रेणी देशभर में पॉलीटेक्निक संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और फैकल्टी सदस्यों के लिए निर्धारित की गई है. इसके तहत तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का किसी कॉलेज, विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थान या पॉलिटेक्निक में नियमित रूप से कार्यरत होना जरूरी है. इसके साथ ही अभ्यर्थी के पास ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर कम से कम 5 वर्ष का पूर्णकालिक शिक्षण अनुभव होना चाहिए. आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार की आयु 55 वर्ष ज्यादा नहीं होनी चाहिए. वहीं वर्तमान में कार्यरत कुलपति, निदेशक और प्राचार्य इस पुरस्कार के लिए पात्र नहीं है. हालांकि जो व्यक्ति पहले इन पदों पर रह चुके हैं और वर्तमान में शिक्षक सेवा में सक्रिय है, वे निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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तीन तरीकों से किया जा सकता है नामांकन&amp;nbsp;
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है. शिक्षक स्वयं आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा किसी संस्थान का प्रमुख भी योग्य शिक्षक का नाम प्रस्तावित कर सकता है. वहीं उसी संस्थान के सहकर्मी भी किसी शिक्षक का नामांकन भेज सकते हैं. मंत्रालय के अनुसार सेल्फ नॉमिनेशन, इंस्टीट्यूशनल नॉमिनेशन और पीयर नॉमिनेशन तीनों माध्यमों से प्राप्त आवेदनों पर विचार किया जाएगा. सभी आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जमा किए जाएंगे.
ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;
इच्छुक शिक्षक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन कर आवेदन पत्र भरना होगा और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे. सभी जानकारियां सही तरीके से भरने के बाद आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करना होगा.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हम कुछ जरूरी कदम उठा रहे... OnMark पोर्टल की सुरक्षा खामियों पर CBSE का बड़ा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर हाल ही में उठे सवालों के बीच अब बोर्ड ने अपने ऑन मार्क पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है. बोर्ड ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर कहा है कि पोर्टल में सामने आई साइबर सुरक्षा संबंधी कमजोरी को गंभीरता से लिया गया है और उन्हें दूर करने के लिए केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और आईआईटी के एक्सपर्ट्स की टीम लगातार काम कर रही है. सीबीएसई के अनुसार, जिन सुरक्षा खामियों की पहचान की गई है, उन्हें कंट्रोल कर लिया गया है और दूसरी संभावित कमजोरी की भी गहन जांच की जा रही है.
दरअसल, हाल ही में ऑन मार्क पोर्टल की सुरक्षा को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई. इसके बाद सीबीएसई ने मामले की निगरानी तेज करते हुए, साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स की एक विशेष टीम को तैनात किया. बोर्ड का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से एक्सपर्ट्स लगातार सिस्टम की समीक्षा कर रहे हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;ऑन मार्क पोर्टल की हो रही लगातार निगरानी&amp;nbsp;
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह सेवा प्रदाता के ऑन मार्क पोर्टल में सामने आई सुरक्षा कमजोरियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. सार्वजनिक रूप से जिन खामियों की जानकारी सामने आई है, उनका तुरंत संज्ञान लिया गया है और उन्हें दूर करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. बोर्ड के अनुसार ढांचे को और मजबूत करने के लिए पोर्टल को ज्यादा सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था में स्थानांतरित करने का काम भी किया जा रहा है.
कमजोरियों को किया गया कंट्रोल&amp;nbsp;
बोर्ड का कहना है कि जिन सुरक्षा खामियों की पुष्टि हुई है, उन्हें कंट्रोल कर लिया गया है. साथ ही एक्सपर्ट्स की टीम यह भी जांच कर रही है कि कई ऐसी दूसरी तकनीकी कमजोरी हो तो मौजूद नहीं है, जिनका भविष्य में दुरुपयोग किया जा सके. सीबीएसई के अनुसार साइबर सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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आईआईटी और सरकारी एजेंसियों के एक्सपर्ट कर रहे निगरानी&amp;nbsp;
सीबीएसई ने बताया कि इस काम को केवल बोर्ड की तकनीकी टीम ही नहीं, बल्कि सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट और आईआईटी से जुड़े साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स भी शामिल है. इन एक्सपर्ट्स को सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने और संभावित खतरों को रोकने की जिम्मेदारी दी गई है. बोर्ड का दावा है कि सुरक्षा को लेकर सभी जरूरी कदम तेजी से उठाया जा रहे हैं. इसके अलावा सीबीएसई ने एथिकल हैकर्स और उन नागरिकों का धन्यवाद भी किया है, जिन्होंने पोर्टल की खामियों की जानकारी शेयर की है. सीबीएसई के अनुसार कुछ लोगों से सीधे कांटेक्ट कर उनसे तकनीकी इनपुट भी लिए गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिली है. बोर्ड का कहना है की जिम्मेदार तरीके से दी गई ऐसी जानकारी सिस्टम को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
सुझाव और जानकारी के लिए बोर्ड ने जारी की मेल आईडी
&amp;nbsp;इसके अलावा सीबीएसई ने लोगों से अपील की है कि किसी के पास ऑन मार्क पोर्टल की सुरक्षा से जुड़ी कोई जरूरी जानकारी या सुझाव हो तो वह बोर्ड की सुरक्षा टीम से कांटेक्ट कर सकता है. इसके लिए बोर्ड ने ऑफिशियल ईमेल आईडी secy-cbse@nic.in भी उपलब्ध कराई है. सीबीएसई का कहना है कि ऐसे सभी सुझाव और जानकारी की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी, ताकि पोर्टल को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE का बड़ा अपडेट, अगले साल से DigiLocker पर मिलेंगी स्कैन की गई आंसर शीट</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने परीक्षा सिस्टम में एक बड़ा बदलाव किया है.बोर्ड ने फैसला लिया है कि अगले साल से छात्रों को उनकी मूल्यांकित यानी चेक की गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी.इसका मकसद है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके.अब तक छात्रों को सिर्फ मार्क्स और रिजल्ट ही मिलते थे, लेकिन कई बार बच्चों को यह समझ नहीं आता था कि उनकी कॉपी में नंबर कैसे दिए गए.इसी परेशानी को देखते हुए CBSE ने यह नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है.
DigiLocker से मिलेगा सीधा एक्सेस
इस पूरी सुविधा को DigiLocker से जोड़ा जाएगा. इसका मतलब यह है कि छात्र अपने अकाउंट में लॉगिन करके सीधे अपनी चेक की गई आंसर शीट देख सकेंगे. इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि छात्रों को अपने प्रदर्शन को समझने में भी आसानी होगी.
OSM सिस्टम को भी किया जा रहा मजबूत
CBSE पहले से ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से होती है. अब इस सिस्टम को और बेहतर और मजबूत बनाने पर काम चल रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती या तकनीकी समस्या कम से कम हो.बोर्ड का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर काम करते समय कभी-कभी छोटी तकनीकी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उन्हें सुधारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है.
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तकनीकी गड़बड़ियों पर CBSE की नजर
CBSE ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं. लगभग 20 उत्तर पुस्तिकाओं में मिलान से जुड़ी समस्याएं पाई गई थीं.हालांकि बोर्ड का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लगभग 9.8 मिलियन कॉपियों की जांच के दौरान ऐसी छोटी समस्याएं संभव हैं.
जून से शुरू होगा कॉपी का पुनः मूल्यांकनCBSE ने यह भी संकेत दिया है कि कॉपियों के पुनः मूल्यांकन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 1 जून से शुरू की जाएगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के नंबर सही तरीके से दिए गए हों और अगर किसी भी तरह की गलती हो तो उसे समय पर ठीक किया जा सके.यह कदम छात्रों को एक और मौका देगा ताकि वे अपने परिणाम को लेकर पूरी तरह संतुष्ट हो सकें.
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CBSE का आगे का प्लान क्या है
CBSE का कहना है कि उसका लक्ष्य पूरा सिस्टम को और ज्यादा स्मूद, तेज और &amp;ldquo;ग्लिच-फ्री&amp;rdquo; बनाना है.आने वाले समय में डिजिटल मूल्यांकन को और मजबूत किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी न हो. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>NEET री&amp;एग्जाम के लिए सेंटर्स पर हो सकती है पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती, NTA ने तैयार किया ब्लूप्रिंट</title>
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        <description><![CDATA[ NEET परीक्षा को लेकर पहले जो विवाद हुआ था उसके बाद अब सरकार बहुत सख्त हो गई है. री एग्जाम को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर तैयारी की जा रही है. अब सेंटर्स पर पैरा मिलिट्री फोर्स लगाने का प्लान सामने आया है
सुरक्षा को लेकर बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार
NEET UG 2026 री एग्जाम को लेकर एक नया सुरक्षा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है. इसमें परीक्षा सेंटर्स की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा गया है. योजना के अनुसार हर सेंटर पर पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती हो सकती है. इसका उद्देश्य परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना है.परीक्षा कराने वाली संस्था NTA ने यह पूरा प्लान तैयार किया है. इसमें हर स्टेप को ध्यान में रखा गया है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके.
सेंटर्स पर होगी कड़ी निगरानी
सरकार का फोकस इस बार सिर्फ पेपर कराने पर नहीं है बल्कि उसे पूरी तरह सुरक्षित रखने पर है. इसी कारण परीक्षा सेंटर्स पर पैरा मिलिट्री फोर्स को लगाया जा सकता है. ये फोर्स एंट्री से लेकर एग्जाम खत्म होने तक निगरानी करेगी.हर सेंटर पर सख्त चेकिंग होगी. किसी भी तरह की बाहरी गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जाएगी. मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी.
पेपर लीक के बाद सख्ती बढ़ी
NEET UG परीक्षा में पहले पेपर लीक का मामला सामने आया था. इसके बाद सरकार ने पूरे सिस्टम को फिर से मजबूत करने का फैसला लिया. जांच एजेंसी CBI इस मामले की जांच कर रही है.अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच अभी भी जारी है. सरकार चाहती है कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न हो.
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कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं काम
इस बार परीक्षा को सफल बनाने के लिए कई विभाग एक साथ काम कर रहे हैं. इसमें गृह मंत्रालय आईटी मंत्रालय डाक विभाग और राज्य प्रशासन शामिल हैं. सभी का मकसद परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है.पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती से सुरक्षा और मजबूत होने की उम्मीद है. इससे परीक्षा सेंटर्स पर किसी भी तरह की बाहरी दखल की संभावना कम हो जाएगी.
छात्रों के लिए सख्त लेकिन सुरक्षित सिस्टम
सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों को परेशान करने के लिए नहीं है. बल्कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए है. हर छात्र को समान अवसर मिले यही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है.परीक्षा सेंटर्स पर सुरक्षा बढ़ाने के साथ साथ पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और मॉनिटरिंग आधारित बनाया जा रहा है.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE मुख्यालय पर NSUI का प्रदर्शन, OSM मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) मूल्यांकन प्रणाली को लेकर छात्रों के बीच बढ़ती नाराजगी अब सड़कों तक पहुंच गई है. शनिवार को दिल्ली स्थित CBSE मुख्यालय के बाहर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने विरोध प्रदर्शन कर मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.संगठन का कहना है कि मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों के कारण कई छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिले हैं, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है.
छात्रों की शिकायतों को लेकर CBSE मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
दिल्ली के पटपड़गंज स्थित CBSE मुख्यालय के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और NSUI कार्यकर्ता शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान OSM मूल्यांकन प्रणाली में कई ऐसी कमियां हैं, जिनके कारण छात्रों को उनके प्रदर्शन के अनुरूप अंक नहीं मिल पा रहे हैं. इस दौरान छात्रों ने बोर्ड से जवाबदेही तय करने और उनकी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की.
परिणामों को लेकर छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि कई परीक्षार्थियों ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन घोषित परिणाम उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे.इससे छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों के बीच भी असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है.छात्रों का मानना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की आवश्यकता है.
निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की मांग
NSUI ने मांग की कि मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए.संगठन का कहना है कि यदि किसी स्तर पर त्रुटियां हुई हैं तो उनकी पहचान कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. साथ ही छात्रों को न्याय दिलाने के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था लागू की जाए.
प्रदर्शनकारियों ने रखीं कई अहम मांगें
प्रदर्शन के दौरान छात्रों और संगठन के प्रतिनिधियों ने OSM प्रणाली की समीक्षा, मूल्यांकन संबंधी त्रुटियों की जवाबदेही तय करने, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने तथा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसी मांगें रखीं.उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का विश्वास बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है.यह भी पढ़ें - CBSE का बड़ा अपडेट, अगले साल से DigiLocker पर मिलेंगी स्कैन की गई आंसर शीट
NSUI ने छात्रों के हितों की लड़ाई जारी रखने का किया दावा
सभा को संबोधित करते हुए NSUI नेतृत्व ने कहा कि प्रत्येक उत्तर पुस्तिका के पीछे छात्रों की वर्षों की मेहनत और परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं.ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती.संगठन ने कहा कि वह प्रभावित छात्रों के साथ खड़ा है और उनकी समस्याओं के समाधान तक अपनी आवाज उठाता रहेगा.
सुधार नहीं हुए तो आंदोलन को मिलेगा राष्ट्रीय स्वरूप
NSUI ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और मूल्यांकन प्रक्रिया में आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो आंदोलन को देशभर में और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा.संगठन का कहना है कि शिक्षा से जुड़े किसी भी मुद्दे पर छात्रों के हितों से समझौता नहीं किया जा सकता और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है.यह भी पढ़ें - NEET री-एग्जाम के लिए सेंटर्स पर हो सकती है पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती, NTA ने तैयार किया ब्लूप्रिंट&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>CBSE, मुख्यालय, पर, NSUI, का, प्रदर्शन, OSM, मूल्यांकन, प्रणाली, में, पारदर्शिता, की, मांग</media:keywords>
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        <title>CUET UG 2026: बायोमेट्रिक के बावजूद परीक्षा न दे पाए छात्रों को राहत, NTA देगा दूसरा मौका; नई डेट का ऐलान जल्द</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर में आयोजित कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG 2026) के दौरान सामने आई तकनीकी गड़बड़ी ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. 30 मई को आयोजित परीक्षा के दूसरे शिफ्ट में कई परीक्षा केंद्रों पर देरी और व्यवधान की खबरें सामने आईं, जिसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने प्रभावित उम्मीदवारों के लिए नए परीक्षा तिथियों की घोषणा करने का फैसला किया है. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को इस तकनीकी समस्या के कारण नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. नई परीक्षा तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी.
तकनीकी गड़बड़ी से प्रभावित हुई परीक्षा प्रक्रिया
रिपोर्ट्स के अनुसार, 30 मई को CUET UG 2026 की परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी. विशेष रूप से दूसरी शिफ्ट के उम्मीदवारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. इस स्थिति ने छात्रों में असमंजस और तनाव पैदा कर दिया. परीक्षा में देरी के चलते कई छात्रों को असुविधा का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मामला तेजी से सामने आया.

We know today&#039;s unfortunate technical disruption caused distress for some CUET (UG) 2026 candidates.Candidates who did their Biometric Registration and were present at their examination centres today (i.e. 30.05.2026 in Shift-I), but couldn&#039;t complete their examination due to&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) May 30, 2026



TCS iON ने मानी गलती, मांगी माफी
परीक्षा संचालन से जुड़ी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनी TCS iON ने इस गड़बड़ी को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है. कंपनी ने बताया कि उनके सिस्टम के एक केंद्रीय हिस्से में तकनीकी समस्या आ गई थी, जिसकी वजह से कुछ केंद्रों पर परीक्षा शुरू होने में देरी हुई. TCS iON ने यह भी कहा कि उनकी तकनीकी टीमों ने तुरंत समस्या को ठीक करने के लिए काम किया और परीक्षा संचालन को सामान्य करने की कोशिश की. साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर व्यवस्था का भरोसा दिया गया है.
NTA का स्पष्टीकरण और राहत के उपाय
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह समस्या सेवा प्रदाता के स्तर पर उत्पन्न हुई थी, जिसे जल्द ही ठीक कर लिया गया. एजेंसी ने आश्वासन दिया कि प्रभावित छात्रों को अतिरिक्त समय (compensatory time) दिया जाएगा ताकि उन्हें किसी प्रकार का नुकसान न हो. इसके अलावा, जिन उम्मीदवारों की परीक्षा प्रभावित हुई है, उनके लिए नई परीक्षा तिथियां जल्द घोषित की जाएंगी.
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छात्रों के हित में उठाए गए कदम
NTA ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है. इसी दिशा में प्रभावित छात्रों के लिए खास व्यवस्था की जा रही है, ताकि सभी को समान अवसर मिल सके. एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि आगे की परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से आयोजित की जाएगी.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>नेवी के 48वें वाइस चीफ बने अजय कोचर, जानें कहां से की है पढ़ाई&amp;लिखाई?</title>
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        <description><![CDATA[ वाइस एडमिरल अजय कोचर का नाम भारतीय नौसेना के अनुभवी अधिकारियों में लिया जाता है. उन्होंने करीब 37 साल तक देश की सेवा की है और इस दौरान कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. उनकी पहचान सिर्फ एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे रणनीतिक नेता के तौर पर भी होती है जिन्होंने मुश्किल हालात में नौसेना को मजबूती से संभाला.
पुणे की नेशनल डिफेंस अकादमी से शुरू हुआ सफरअजय कोचर ने अपनी शुरुआती सैन्य पढ़ाई पुणे की प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) से की. देश की यह अकादमी उन युवाओं को तैयार करती है जो आगे चलकर सेना, वायुसेना और नौसेना में बड़े अधिकारी बनते हैं. NDA में पढ़ाई के दौरान ही उनमें अनुशासन, नेतृत्व और रणनीति की समझ विकसित हुई.
इसके बाद उन्होंने वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज में आगे की सैन्य ट्रेनिंग हासिल की. यहीं से उन्होंने युद्ध संचालन और सुरक्षा रणनीति की गहरी समझ सीखी. अजय कोचर ने मुंबई के नेवल वॉर कॉलेज से भी पढ़ाई की, जहां नौसेना से जुड़े बड़े ऑपरेशन और समुद्री सुरक्षा पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.
सिर्फ भारत ही नहीं, विदेश में भी की पढ़ाईअजय कोचर की पढ़ाई सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के मशहूर रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी शिक्षा हासिल की. यह संस्थान दुनिया के बड़े सैन्य अधिकारियों और रणनीतिक विशेषज्ञों को प्रशिक्षण देने के लिए जाना जाता है. यहां पढ़ाई करने वाले अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और वैश्विक चुनौतियों की गहरी जानकारी दी जाती है.
1988 में बने नौसेना अधिकारी
अजय कोचर जुलाई 1988 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. उन्हें तोप और मिसाइल सिस्टम का विशेषज्ञ माना जाता है. नौसेना में उन्होंने कई युद्धपोतों और बड़े ऑपरेशन की कमान संभाली. धीरे-धीरे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के दम पर वे ऊंचे पदों तक पहुंचे.
2018 में उन्हें फ्लैग रैंक में प्रमोशन मिला. इसके बाद उन्होंने कैरियर प्रोजेक्ट्स और युद्धपोत निर्माण से जुड़े अहम पदों पर काम किया. इस दौरान उनका काम नौसेना की ताकत बढ़ाने और आधुनिक जहाजों की तैयारी से जुड़ा रहा.
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वेस्टर्न फ्लीट की संभाली कमान
साल 2021 में अजय कोचर को वेस्टर्न फ्लीट की कमान सौंपी गई. यह भारतीय नौसेना की सबसे अहम फ्लीट मानी जाती है. यहां उन्होंने समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई बड़े ऑपरेशन संभाले. इसके बाद उन्हें नेशनल डिफेंस अकादमी का कमांडेंट बनाया गया, जहां उन्होंने ट्रेनिंग सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर जोर दिया.
मई 2024 में उन्होंने वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाला. उस समय समुद्री सुरक्षा को लेकर कई चुनौतियां सामने थीं. ऐसे हालात में उन्होंने नौसेना के ऑपरेशन को मजबूती से आगे बढ़ाया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उनकी भूमिका काफी अहम मानी गई.
सम्मान और उपलब्धियां
देश सेवा में शानदार योगदान के लिए अजय कोचर को कई बड़े सम्मान भी मिले हैं. उन्हें साल 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल दिया गया था. इसके बाद 2026 में उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन अधिकारियों को दिए जाते हैं जिन्होंने देश की सुरक्षा और सेवा में बेहतरीन काम किया हो.यह भी पढ़ें - 2027 से बदलेगा NEET-UG का अंदाज, अब कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी डॉक्टर बनने की परीक्षा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>BPSC Recruitment 2026: बिहार में अधिकारी बनने का सुनहरा मौका, 31 मई से पहले करें फॉर्म जमा</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार 31 मई 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती अभियान के माध्यम से बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 1189 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
कुल पदों की संख्या बढ़कर हुई 1189
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1189 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी।. आयोग द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना में निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अंतर्गत लोअर रजिस्ट्रार/जॉइंट लोअर रजिस्ट्रार पदों की संख्या 3 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है. विभिन्न श्रेणियों जैसे सामान्य, ईडब्ल्यूएस, पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग के लिए अलग-अलग पद आरक्षित किए गए हैं
कौन कर सकता है आवेदन?BPSC 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2026 में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक पास होना जरूरी है. आर्ट साइंस और कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं. कुछ विशेष पदों के लिए संबंधित विषयों में डिग्री मांगी गई है, इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर पढ़ना चाहिए.
उम्र सीमा क्या होगी ?
BPSC भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा पद के अनुसार 20 से 22 वर्ष निर्धारित की गई है. सामान्य वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 37 वर्ष रखी गई है. वहीं महिला, पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम 40 वर्ष तक छूट मिलेगी.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष निर्धारित की गई है.
चयन प्रक्रिया कैसे होगी?BPSC भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी. सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होगी जो स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में होगी.इसमें सफल उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे.मुख्य परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. अंतिम मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी.यह भी पढ़ें - UP में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, 2285 पदों पर निकली भर्ती; चेक​ कर लें डिटेल्स
जरूरी डॉक्यूमेंट

पासपोर्ट साइज फोटो
हस्ताक्षर की स्कैन कॉपी
शैक्षणिक प्रमाण पत्र
श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो),
वैध पहचान पत्र
मोबाइल नंबर
ईमेल आईडी&amp;nbsp;ऐसे करें BPSC Prelims 2026 के लिए आवेदन

उम्मीदवार सबसे पहले BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2026 के आवेदन लिंक पर क्लिक करें. अब रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें और आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही तरीके से भरें.आवश्यक डॉक्यूमेंट, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करने के बाद आवेदन शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट कर दें. भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट आउट सुरक्षित रखें.
यह भी पढ़ें - दिल्ली में सरकारी भर्तियों की रफ्तार तेज, जानें अलग-अलग पदों के लिए कब होंगे एग्जाम ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>गरीब बच्चों के लिए बड़ी राहत, सरकार दे रही हर साल 12 हजार की स्कॉलरशिप, जानिए कैसे मिलेगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ देश में आज भी ऐसे लाखों बच्चे हैं जो पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद आर्थिक परेशानी की वजह से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं. खासकर गांव और छोटे शहरों में कई परिवार बच्चों को आठवीं के बाद आगे नहीं पढ़ा पाते. लेकिन अब ऐसे होनहार छात्रों के लिए सरकार की एक खास योजना उम्मीद बनकर सामने आई है. इस योजना का नाम है नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम (NMMSS).
केंद्र सरकार की यह योजना उन छात्रों के लिए शुरू की गई है जो पढ़ाई में तेज हैं लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है. इस स्कॉलरशिप के जरिए सरकार हर साल छात्रों को आर्थिक मदद देती है ताकि वे बिना रुकावट अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.
हर महीने मिलते हैं 1000
NMMSS योजना के तहत चुने गए छात्रों को हर साल 12 हजार की स्कॉलरशिप दी जाती है. यानी हर महीने 1000 की सहायता सीधे छात्र के खाते में पहुंचती है. यह मदद कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक दी जाती है. यानी एक छात्र को अधिकतम चार साल तक इस योजना का फायदा मिल सकता है. सरकार का मकसद साफ है कि पैसों की कमी किसी बच्चे की पढ़ाई का रास्ता न रोके.
किन छात्रों को मिलता है फायदा?
सरकारी स्कूल, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, या स्थानीय निकाय स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हों. वहीं कुछ स्कूलों के छात्र इस योजना के लिए पात्र नहीं माने जाते. इसमें जवाहर नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और निजी रिहायशी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र शामिल हैं.
ये भी पढ़ें- UP Recruitment 2026: 12वीं पास युवाओं के लिए 722 पदों पर भर्ती, जानें योग्यता से लेकर आवेदन तक पूरी डिटेल्स
कितने नंबर जरूरी हैं?
सरकार ने इस योजना के लिए पढ़ाई से जुड़ी कुछ शर्तें भी तय की हैं. छात्र को कक्षा 7वीं में कम से कम 55% अंक लाने जरूरी हैं. SC और ST वर्ग के छात्रों को 5% की छूट दी गई है. इसका मतलब है कि मेहनती और होनहार बच्चों को आगे बढ़ने का मौका दिया जा रहा है.
परिवार की आय कितनी होनी चाहिए?
इस योजना का फायदा उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है. छात्र के माता-पिता की सालाना कुल आय 3.5 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. आय प्रमाण पत्र आवेदन के समय देना जरूरी होता है.
ये हैं जरूरी डाक्यूमेंट्स

मार्कशीट
आय प्रमाण पत्र
आधार कार्ड
बैंक खाता जानकारी
स्कूल प्रमाण पत्र

कैसे होता है चयन?
NMMSS स्कॉलरशिप पाने के लिए छात्रों को एक परीक्षा देनी होती है. यह परीक्षा राज्य स्तर पर आयोजित की जाती है और ज्यादातर नवंबर महीने में होती है. इसमें पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं. जो छात्र इस परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उन्हें स्कॉलरशिप के लिए चुना जाता है.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UP में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, 2285 पदों पर निकली भर्ती; चेक​ कर लें डिटेल्स ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>MPPHSCL Recruitment 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, मैनेजर से लेकर फार्मासिस्ट तक कई पदों पर भर्ती</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mpphscl-recruitment-2026-मध्य-प्रदेश-में-सरकारी-नौकरी-का-बड़ा-मौका-मैनेजर-से-लेकर-फार्मासिस्ट-तक-कई-पदों-पर-भर्ती</link>
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        <description><![CDATA[ MPPHSCL Recruitment 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, मैनेजर से लेकर फार्मासिस्ट तक कई पदों पर भर्ती ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>NEET री&amp;एग्जाम के लिए स्टूडेंट्स को मिलेंगी फ्री DTC बस, दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर इस बार सरकार किसी भी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं दिख रही है. पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे देश में बड़ा विवाद खड़ा कर रखा है. लाखों छात्रों और उनके परिवारों में नाराजगी देखने को मिल रही है. सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठ रही है.
अब 21 जून को होने वाली NEET के री एग्जाम को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही हैं. परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस बीच दिल्ली सरकार ने भी छात्रों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है.
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने NEET परीक्षा देने जा रहे छात्रों के लिए खास सुविधा का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि 21 जून को परीक्षा देने वाले सभी छात्र दिल्ली की DTC बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगे.
छात्रों को बस में सफर करने के लिए सिर्फ अपना वैध एडमिट कार्ड दिखाना होगा. इसके बाद उन्हें टिकट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सरकार का कहना है कि परीक्षा के दिन किसी भी छात्र को आने-जाने में परेशानी नहीं होनी चाहिए.
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रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि छात्रों का भविष्य बेहद अहम है और सरकार चाहती है कि वे बिना किसी तनाव के परीक्षा केंद्र तक पहुंचें. उन्होंने सभी NEET अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि मेहनत और लगन जरूर रंग लाएगी.&amp;nbsp;पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी सख्ती
इस साल NEET परीक्षा को लेकर सामने आए पेपर लीक विवाद ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है. कई राज्यों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की, कई गिरफ्तारियां हुईं और लाखों छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. इसी वजह से इस बार केंद्र सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार प्रश्न पत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद ली जा सकती है.
हाई सिक्योरिटी में होगी परीक्षा

परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी बढ़ाई जाएगी
प्रश्न पत्रों की ट्रैकिंग डिजिटल तरीके से होगी
परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा सकता है
पेपर खोलने और बांटने की प्रक्रिया पर भी सख्त नजर रखी जाएगीयह भी पढ़ें - ED recruitment 2026: ED में करना चाहते हैं नौकरी? निकलने वाली हैं बंपर वैकेंसी, पूरा प्लान तैयार
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>UP में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, 2285 पदों पर निकली भर्ती; चेक​ कर लें डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए अब मौका आ गया है. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC ने सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती के जरिए राज्य के अलग-अलग विभागों में कुल 2285 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
भर्ती की खबर सामने आते ही युवाओं में उत्साह देखने को मिल रहा है. खास बात यह है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, जिससे उम्मीदवार घर बैठे आवेदन कर सकेंगे. आयोग की वेबसाइट पर जाकर इच्छुक अभ्यर्थी अपना फॉर्म भर सकते हैं.
इस भर्ती में वही उम्मीदवार आवेदन कर पाएंगे जिन्होंने PET-2025 परीक्षा पास की है. आयोग ने साफ कर दिया है कि मुख्य परीक्षा के लिए चयन PET के नॉर्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर किया जाएगा.
कई विभागों में मिलेगी नौकरी
इस भर्ती के जरिए कई अहम पदों पर भर्तियां की जाएंगी. इनमें सहायक कोषागार लेखाकार, लेखा परीक्षक, अमीन, अधिशासी अधिकारी, लिपिक, सहायक चकबंदी अधिकारी, सहायक प्रबंधक, केंद्र प्रभारी और मंडी पर्यवेक्षक जैसे पद शामिल हैं.
किन उम्मीदवारों को मिलेगा मौका?
आयोग ने साफ कहा है कि PET-2025 में शामिल उम्मीदवारों में से ही मुख्य परीक्षा के लिए चयन किया जाएगा. जिन उम्मीदवारों के PET में बहुत कम अंक आए हैं या जिनका स्कोर बेहद कमजोर है, उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए मौका नहीं मिलेगा. हालांकि कुछ ऐसे उम्मीदवार जिनके रिजल्ट अभी जांच के अधीन हैं, उन्हें फिलहाल प्रोविजनल आधार पर आवेदन करने की अनुमति दी गई है. अंतिम फैसला आयोग की जांच के बाद ही लिया जाएगा.
सबसे ज्यादा पद किस विभाग में?
अगर पदों की बात करें तो सबसे ज्यादा भर्ती सहायक कोषागार लेखाकार के पद पर निकली है. इस पद के लिए कुल 548 सीटें रखी गई हैं. इसके बाद लेखा परीक्षक के 419 और अमीन/नीलामकर्ता के 323 पदों पर भर्ती होगी. अधिशासी अधिकारी के 238 पद, लिपिक और लेखा लिपिक के 229 पद तथा सहायक चकबंदी अधिकारी के 168 पदों पर भी भर्ती की जाएगी.
आरक्षण का भी रखा गया ध्यान
आयोग ने अलग-अलग वर्गों के लिए सीटों का बंटवारा भी तय किया है. अनारक्षित वर्ग के लिए 1030 सीटें रखी गई हैं. वहीं अनुसूचित जाति के लिए 421, अनुसूचित जनजाति के लिए 49, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 563 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए 222 पद आरक्षित किए गए हैं. इससे अलग-अलग वर्गों के उम्मीदवारों को समान अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
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इतना है आवेदन शुल्क
इस भर्ती की एक बड़ी खासियत यह भी है कि आवेदन शुल्क बेहद कम रखा गया है. सभी वर्गों के उम्मीदवारों के लिए सिर्फ 25 रुपये फीस तय की गई है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी.
18 जून तक भर सकेंगे फॉर्म
आयोग की तरफ से जारी सूचना के अनुसार, आवेदन करने की अंतिम तारीख 18 जून 2026 तय की गई है. वहीं अगर आवेदन फॉर्म में किसी तरह की गलती हो जाती है तो उम्मीदवार 25 जून 2026 तक उसमें सुधार भी कर सकेंगे.
कैसे करें आवेदन?
उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के दौरान PET-2025 का विवरण, शैक्षणिक योग्यता और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे.यह भी पढ़ें - NEET री-एग्जाम को लेकर सरकार अलर्ट, छात्रों को राहत देने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE री&amp;इवैल्यूएशन को लेकर बड़ा अपडेट, 1 जून से एक्टिव होगा पोर्टल</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE बोर्ड के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. रिजल्ट आने के बाद अपनी कॉपियों की दोबारा जांच और नंबरों की समीक्षा कराने का इंतजार कर रहे छात्रों को अब थोड़ा और इंतजार करना होगा. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने साफ किया है कि पोस्ट रिजल्ट गतिविधियों के लिए बनाया गया ऑनलाइन पोर्टल अब 1 जून 2026 से शुरू किया जाएगा.
बोर्ड ने कहा है कि छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और बिना किसी तकनीकी परेशानी के पूरा करने के लिए यह फैसला लिया गया है. CBSE का कहना है कि वह मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी तरह की गलती या जल्दबाजी नहीं चाहता, इसलिए सभी जरूरी तैयारियों और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है.
छात्रों को मिलेगा साफ और सही मूल्यांकन
हर साल रिजल्ट आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र अपने नंबरों को लेकर सवाल उठाते हैं. कई छात्रों को लगता है कि उनकी कॉपी सही तरीके से जांची नहीं गई या मेहनत के मुताबिक अंक नहीं मिले. ऐसे में री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया छात्रों के लिए बेहद अहम मानी जाती है.
CBSE ने कहा है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाया जा रहा है ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. बोर्ड चाहता है कि हर छात्र को सही और निष्पक्ष मूल्यांकन मिले.
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1 जून से खुलेगा पोर्टल
CBSE के मुताबिक पोस्ट रिजल्ट एक्टिविटीज पोर्टल 1 जून 2026 से चालू होगा. इसी पोर्टल के जरिए छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देखने, नंबरों की दोबारा जांच कराने और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे.
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ सालों में रिजल्ट के बाद वेबसाइट स्लो होने, आवेदन फेल होने और तकनीकी गड़बड़ी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं. कई छात्रों को समय पर आवेदन करने में परेशानी हुई थी. इसी को देखते हुए CBSE इस बार पहले से ज्यादा तैयारी के साथ प्रक्रिया शुरू करना चाहता है.
छात्रों की परेशानी दूर करने के लिए हेल्पलाइन जारी
CBSE ने छात्रों और अभिभावकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी की है. अगर किसी छात्र को रिजल्ट, री-चेकिंग या आवेदन प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो वह सीधे बोर्ड से संपर्क कर सकता है. छात्र CBSE टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन नंबर 1800 11 8004 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा बोर्ड ने ईमेल सुविधा भी शुरू की है. छात्र अपनी समस्या resultcbse2026@cbseshiksha.in पर भेज सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली में सरकारी भर्तियों की रफ्तार तेज, जानें अलग&amp;अलग पदों के लिए कब होंगे एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है. अगर आपने दिल्ली हाई कोर्ट, कोर्ट अटेंडेंट, असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, फॉरेस्ट गार्ड, डायरेक्टोरेट ऑफ एजुकेशन या दूसरे विभागों की भर्तियों में आवेदन किया है, तो अब इंतजार खत्म होने वाला है. दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड यानी DSSSB ने जून से लेकर सितंबर 2026 तक होने वाली परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. ऐसे में उम्मीदवार अब अपनी तैयारी को सही दिशा दे सकते हैं.
इस बार बड़ी संख्या में अलग-अलग विभागों की परीक्षाएं आयोजित होंगी. इनमें दिल्ली हाई कोर्ट से लेकर जेल विभाग, वन विभाग, शिक्षा विभाग, जल बोर्ड, ट्रांसपोर्ट और नगर निगम तक की भर्तियां शामिल हैं. आयोग ने परीक्षा की तारीखों के साथ विज्ञापन संख्या, पोस्ट कोड और विभाग की जानकारी भी जारी कर दी है ताकि अभ्यर्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो.
जून से शुरू होगा परीक्षा का दौर
DSSSB की परीक्षाओं का सिलसिला जून महीने से शुरू होगा. 1 जून से 30 जून 2026 तक दिल्ली हाई कोर्ट के कई पदों के लिए परीक्षा होगी. इनमें कोर्ट अटेंडेंट, सिक्योरिटी अटेंडेंट, रूम अटेंडेंट और दूसरे पद शामिल हैं. लंबे समय से इन भर्तियों का इंतजार कर रहे उम्मीदवार अब अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं.
जुलाई में सबसे ज्यादा एग्जाम
जुलाई महीना उम्मीदवारों के लिए सबसे ज्यादा व्यस्त रहने वाला है. इस महीने कई बड़े पदों की परीक्षाएं होंगी. असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, जूनियर इंजीनियर, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर, ट्रांसलेटर और टेक्निकल सुपरवाइजर जैसे पदों के लिए परीक्षा तय की गई है.
दिल्ली जेल विभाग में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट की भर्ती के लिए अलग-अलग दिनों में कई परीक्षाएं आयोजित होंगी. वहीं वन एवं वन्यजीव विभाग में फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा भी जुलाई में होगी. बड़ी संख्या में युवा इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे.
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इसके अलावा सेक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर, प्रोग्रामर और PGT जैसे पदों की परीक्षाएं भी जुलाई में रखी गई हैं. शिक्षा विभाग में नौकरी का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह अहम मौका माना जा रहा है.
MTS भर्ती के लिए लंबा शेड्यूल
मल्टी टास्किंग स्टाफ यानी MTS भर्ती की परीक्षा जुलाई के आखिर से शुरू होकर अगस्त और सितंबर तक चलेगी. यह भर्ती अलग-अलग विभागों में होगी और इसमें सबसे ज्यादा उम्मीदवार शामिल होने की संभावना है. 31 अगस्त और 1 सितंबर को भी MTS की परीक्षाएं होंगी. इसके अलावा सीनियर इनवेस्टिगेटर जैसे पदों के लिए भी एग्जाम तय किए गए हैं.
ऑनलाइन मोड में होंगे सभी एग्जाम
DSSSB ने साफ कर दिया है कि सभी परीक्षाएं ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएंगी. यानी उम्मीदवारों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा देनी होगी. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अब तक ऑनलाइन टेस्ट की प्रैक्टिस नहीं की है, उन्हें समय रहते तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.यह भी पढ़ें - UP में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, 2285 पदों पर निकली भर्ती; चेक​ कर लें डिटेल्स ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>2027 से बदलेगा NEET&amp;UG का अंदाज, अब कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी डॉक्टर बनने की परीक्षा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/2027-से-बदलेगा-neet-ug-का-अंदाज-अब-कंप्यूटर-स्क्रीन-पर-होगी-डॉक्टर-बनने-की-परीक्षा</link>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि वर्ष 2027 से NEET UG परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित करने के लिए तैयार है. इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना बताया जा रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>आज भी अदालत और पुलिस महकमें में क्यों होता है उर्दू शब्दों का इस्तेमाल, कहां से हुई थी इसकी शुरुआत?</title>
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        <description><![CDATA[ देश की अदालतों और पुलिस थानों में आज भी कई ऐसे शब्द सुनाई देते हैं, जो सीधे उर्दू भाषा से जुड़े हुए हैं. अदालत में &amp;ldquo;मुकदमा&amp;rdquo;, &amp;ldquo;जमानत&amp;rdquo;, &amp;ldquo;गवाह&amp;rdquo; और पुलिस थाने में &amp;ldquo;तफ्तीश&amp;rdquo;, &amp;ldquo;मुल्जिम&amp;rdquo;, &amp;ldquo;बरामदगी&amp;rdquo; जैसे शब्द आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर आज के आधुनिक दौर में भी ये शब्द क्यों नहीं बदले? इसकी वजह भारत के इतिहास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है.भारत में उर्दू और फारसी भाषा का असर मुगल शासन के समय से शुरू हुआ. उस दौर में फारसी राजकाज और अदालतों की मुख्य भाषा मानी जाती थी. सरकारी आदेश, अदालत के फैसले और प्रशासनिक कामकाज फारसी में ही होते थे. इसी दौरान सैनिक कैंपों और बाजारों में कई भाषाओं के मेल से उर्दू भाषा का जन्म हुआ. धीरे-धीरे उर्दू आम लोगों और प्रशासन दोनों के बीच लोकप्रिय होती चली गई. अदालतों और सरकारी दफ्तरों में इसका इस्तेमाल बढ़ता गया.अंग्रेजों ने भी नहीं बदली भाषाजब अंग्रेजों ने भारत में शासन संभाला, तब उन्होंने पूरी व्यवस्था को बदलने के बजाय पहले से चल रहे सिस्टम को अपनाया. अदालत और पुलिस विभाग में जो शब्द पहले से इस्तेमाल हो रहे थे, अंग्रेजों ने उन्हें जारी रखा. 1830 के बाद फारसी का इस्तेमाल कम जरूर हुआ, लेकिन उर्दू के कई शब्द कानून और पुलिस व्यवस्था में स्थायी रूप से शामिल हो गए. यही वजह है कि आज भी कई कानूनी दस्तावेज और पुलिस रिकॉर्ड पुराने शब्दों के साथ दिखाई देते हैं.कानूनी व्यवस्था में बनी रही पकड़विशेषज्ञों के मुताबिक अदालत और पुलिस विभाग में उर्दू शब्दों के बने रहने की सबसे बड़ी वजह कानूनी निरंतरता है. भारतीय दंड संहिता, पुलिस नियमावली और पुराने कानूनी दस्तावेज दशकों से इन्हीं शब्दों में लिखे गए हैं. अगर अचानक सभी शब्द बदल दिए जाएं, तो उनके मतलब और कानूनी व्याख्या को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है. यही कारण है कि &amp;ldquo;मुल्जिम&amp;rdquo;, &amp;ldquo;जमानत&amp;rdquo;, &amp;ldquo;तफ्तीश&amp;rdquo; और &amp;ldquo;मुकदमा&amp;rdquo; जैसे शब्द आज भी कामकाज का हिस्सा बने हुए हैं.अधिकारियों की ट्रेनिंग भी बनी वजहपुलिस और न्याय विभाग के अधिकारियों की ट्रेनिंग भी लंबे समय से इन्हीं शब्दों के साथ होती रही है. थानों से लेकर अदालतों तक यही भाषा कामकाज का हिस्सा बन गई. पुरानी पीढ़ी से लेकर नए अधिकारियों तक, सभी इन शब्दों को आसानी से समझते और इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों में इनका चलन आज भी जारी है.
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आम लोगों के लिए मुश्किल बनती भाषाहालांकि अब समय के साथ भाषा को आसान बनाने की मांग भी बढ़ रही है. कई लोगों का कहना है कि अदालत और पुलिस की भाषा इतनी सरल होनी चाहिए कि आम आदमी भी उसे आसानी से समझ सके. कई बार पुलिस रिपोर्ट या कोर्ट के दस्तावेज पढ़कर लोगों को समझ ही नहीं आता कि आखिर लिखा क्या है. कठिन उर्दू शब्दों की वजह से लोग कानूनी प्रक्रिया से खुद को दूर महसूस करते हैं.कई राज्यों ने शुरू किया बदलावइसी समस्या को देखते हुए अब कई राज्य सरकारें भाषा को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही हैं. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पुलिस विभाग ने कठिन उर्दू शब्दों की जगह सरल हिंदी शब्द शामिल करने की पहल शुरू की है.
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        <title>JNU में एडमिशन का इंतजार खत्म! PG और डिप्लोमा कोर्स के लिए शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया, छात्रों में बढ़ी खुशी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/jnu-में-एडमिशन-का-इंतजार-खत्म-pg-और-डिप्लोमा-कोर्स-के-लिए-शुरू-हुई-आवेदन-प्रक्रिया-छात्रों-में-बढ़ी-खुशी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/jnu-में-एडमिशन-का-इंतजार-खत्म-pg-और-डिप्लोमा-कोर्स-के-लिए-शुरू-हुई-आवेदन-प्रक्रिया-छात्रों-में-बढ़ी-खुशी</guid>
        <description><![CDATA[ देश के लाखों छात्रों का सपना होता है कि वे देश की सबसे टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करें. जब बात बेहतरीन शिक्षा, शानदार कैंपस और बड़े अवसरों की आती है, तो जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी JNU का नाम सबसे पहले लिया जाता है. दिल्ली में स्थित यह यूनिवर्सिटी लंबे समय से छात्रों की पहली पसंद बनी हुई है. अब उन छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है जो JNU में दाखिला लेना चाहते हैं.
JNU प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पोस्ट ग्रेजुएट यानी PG और एडवांस डिप्लोमा इन प्रोफिशिएंसी (ADOP) कोर्स में एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. CUET PG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद यूनिवर्सिटी ने अपना ऑनलाइन पोर्टल भी खोल दिया है. अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
25 मई से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया
JNU की तरफ से 25 मई 2026 से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ऐसे छात्र जिन्होंने CUET PG 2026 की परीक्षा दी है, वे यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की आखिरी तारीख 15 जून 2026 तय की गई है.
कौन छात्र कर सकते हैं आवेदन?
JNU में वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA द्वारा आयोजित CUET PG 2026 परीक्षा दी हो. बिना CUET PG स्कोर के आवेदन मान्य नहीं होगा. एक जरूरी नियम यह भी है कि छात्र ने CUET PG में जिस विषय की परीक्षा दी है, वह उसी विषय से जुड़े कोर्स के लिए आवेदन कर सकता है. यानी विषय बदलकर फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
आवेदन के समय छात्रों को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्म तिथि डालकर लॉगिन करना होगा. इसके बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी. हालांकि कुछ खास कोर्स और विदेशी छात्रों के लिए अलग चयन प्रक्रिया रखी गई है. ऐसे मामलों में मेरिट या अलग परीक्षा के आधार पर दाखिला दिया जाएगा.
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इन तारीखों को जरूर रखें याद
JNU में एडमिशन प्रक्रिया 25 मई 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की आखिरी तारीख 15 जून 2026 तय की गई है. इसके बाद यूनिवर्सिटी की पहली मेरिट सूची 23 जून 2026 को जारी होने की संभावना है. पहली सूची में चयनित छात्रों को 23 से 25 जून 2026 के बीच सीट ब्लॉकिंग और फीस जमा करनी होगी.
वहीं दूसरी मेरिट सूची 1 जुलाई 2026 तक जारी की जा सकती है, जिसके बाद दूसरी सूची में शामिल छात्रों को 1 से 3 जुलाई 2026 तक फीस भुगतान और सीट कन्फर्म करनी होगी. दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 6 जुलाई से 14 जुलाई 2026 के बीच पूरी की जाएगी. इसके अलावा खाली बची सीटों के लिए अंतिम एडमिशन प्रक्रिया 20 से 22 जुलाई 2026 तक चलेगी, जबकि यूनिवर्सिटी में दाखिले की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है.
आवेदन कैसे करें?
सबसे पहले छात्रों को JNU की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. वहां एडमिशन लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरना होगा. फॉर्म में मांगी गई जानकारी ध्यान से भरनी होगी. साथ ही जरूरी दस्तावेज तय साइज में अपलोड करने होंगे. इसके बाद आवेदन फीस जमा करके फॉर्म सबमिट करना होगा. अंत में आवेदन पत्र का प्रिंट आउट निकालकर अपने पास रखना जरूरी होगा.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>पढ़ाई में अव्वल छात्रों पर योगी सरकार मेहरबान, टॉपर्स को मिलेगा कैश और टैबलेट</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के मेधावी छात्रों को सम्मानित करने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 जून 2026 को आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में यूपी बोर्ड, CBSE, CISCE और संस्कृत बोर्ड के 10वीं और 12वीं के टॉपर्स को सम्मानित करेंगे. इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से चयनित छात्र और उनके अभिभावक शामिल होंगे.
राज्य सरकार की ओर से कुल 223 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा. इनमें अलग-अलग बोर्डों के टॉपर्स शामिल हैं.यूपी बोर्ड से सबसे अधिक छात्रों का चयन किया गया है.इसके अलावा CBSE, CISCE और संस्कृत बोर्ड के छात्रों को भी इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है. सभी छात्रों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने एक अभिभावक के साथ आने के निर्देश दिए गए हैं.
टॉपर्स को मिलेंगे एक लाख रुपये और टैबलेट
सरकार की ओर से सम्मानित किए जाने वाले छात्रों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि, एक टैबलेट और सम्मान प्रमाण पत्र दिया जाएगा. इसके साथ ही छात्रों को उनके जिलों में भी अलग से सम्मानित किया जाएगा. जिला स्तर पर भी छात्रों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे.
प्रदेश के विभिन्न जिलों में टॉप-10 में आने वाले कुल 1459 छात्रों को भी सम्मानित किया जाएगा.इन छात्रों को 21 हजार रुपये, मेडल और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे. सरकार द्वारा यह राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी. जिला प्रशासन को कार्यक्रम की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं.
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31 मई तक लखनऊ पहुंचेंगे छात्र
राज्य स्तरीय कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित किया जाएगा. माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि चयनित छात्र 31 मई की शाम तक लखनऊ पहुंच जाएं.कार्यक्रम 1 जून को सुबह 11 बजे शुरू होगा. इसके अलावा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सभी जिला मुख्यालयों पर भी किया जाएगा.
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने अधिकारियों को कार्यक्रम को सफल बनाने के निर्देश दिए हैं.सरकार का उद्देश्य मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करना और अन्य विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है.राज्य सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>एक सरकारी वकील बनने के बाद कैसे खुलते हैं सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के रास्ते, क्या होती है प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में जज बनना हर वकील के करियर का सबसे बड़ा सपना माना जाता है. लेकिन यहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होता. सालों की मेहनत, कानून की गहरी समझ और शानदार अनुभव के बाद ही किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलती है. इन दिनों सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की नई सिफारिशों के बाद फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर कोई वकील सुप्रीम कोर्ट का जज कैसे बनता है और इसके लिए क्या प्रक्रिया होती है.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ एडवोकेट के नाम सुप्रीम कोर्ट जज के लिए केंद्र सरकार को भेजे हैं. आमतौर पर हाईकोर्ट के सीनियर जजों को ही सुप्रीम कोर्ट भेजा जाता है, लेकिन कभी-कभी किसी बड़े और अनुभवी वकील को सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनने का मौका भी मिल जाता है. यही वजह है कि यह प्रक्रिया हमेशा लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी रहती है.
संविधान में क्या है नियम?
भारत के संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए सबसे पहले व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना जरूरी है. इसके बाद उम्मीदवार को कुछ तय शर्तें पूरी करनी होती हैं. अगर कोई व्यक्ति लगातार 10 साल तक किसी हाईकोर्ट में वकालत कर चुका है, तो वह सुप्रीम कोर्ट जज बनने के योग्य माना जा सकता है. वहीं अगर कोई व्यक्ति कम से कम 5 साल तक हाईकोर्ट में जज रह चुका है, तो उसके नाम पर भी विचार किया जा सकता है.
संविधान में एक खास प्रावधान और भी है. अगर राष्ट्रपति की नजर में कोई व्यक्ति कानून का बड़ा जानकार यानी &amp;ldquo;डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट&amp;rdquo; माना जाता है, तो उसे भी सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है. हालांकि इस रास्ते का इस्तेमाल बहुत कम बार हुआ है.
कॉलेजियम सिस्टम से होता है चयन
सुप्रीम कोर्ट जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम के जरिए होती है. इस कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं. यही टीम तय करती है कि कौन व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए सबसे उपयुक्त है. कॉलेजियम उम्मीदवार की कानूनी समझ, अनुभव, फैसलों की गुणवत्ता, ईमानदार छवि और वरिष्ठता जैसी बातों को ध्यान में रखता है. अगर कॉलेजियम किसी नाम पर सहमत हो जाता है, तो उसकी सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी जाती है.
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सरकार और राष्ट्रपति की क्या होती है भूमिका?
कॉलेजियम की सिफारिश मिलने के बाद कानून मंत्रालय उस पर प्रक्रिया पूरी करता है. इसके बाद फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाती है. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट जज की नियुक्ति होती है. यानी अंतिम नियुक्ति राष्ट्रपति के नाम से होती है, लेकिन इसमें कॉलेजियम की सिफारिश सबसे अहम मानी जाती है.
सीधे वकील से जज बनना क्यों माना जाता है खास?
देश में अधिकतर सुप्रीम कोर्ट जज पहले हाईकोर्ट में जज रह चुके होते हैं. लेकिन जब किसी वरिष्ठ वकील को सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाता है, तो इसे बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है. ऐसे मौके बहुत कम आते हैं. आजादी के बाद भारत के इतिहास में सिर्फ कुछ ही वकील ऐसे रहे हैं जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज बनने का मौका मिला. कानून के जानकारों का कहना है कि यह सम्मान उन्हीं वकीलों को मिलता है जिनकी कानूनी पकड़ मजबूत हो, जिनकी छवि साफ हो और जिन्होंने लंबे समय तक शानदार काम किया हो.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Why Nalanda Set On Fire: क्यों लगाई गई थी नालंदा विश्वविद्यालय को आग? हैरान कर देगी इसके पीछे की सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Why Nalanda Set On Fire: प्राचीन भारत का नालंदा विश्वविद्यालय सिर्फ एक शिक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि वह पूरी दुनिया के ज्ञान का प्रतीक था. लेकिन एक सनकी आक्रमणकारी की नफरत ने इतिहास के इस सबसे सुनहरे पन्ने को राख में बदल दिया. आइए जानते हैं उस हैरान कर देने वाली सच्चाई को, जिसने दुनिया से ज्ञान का एक अनमोल खजाना हमेशा के लिए छीन लिया.
हकीमों की हार और खिलजी की सनक
यह बात 12वीं सदी के अंत की है. तब के मगध के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक का सेनापति बख्तियार खिलजी बेहद बीमार पड़ गया. उसके हकीमों ने रात-दिन एक कर दिए, लेकिन खिलजी की सेहत बिगड़ती ही गई. जब बचने की कोई उम्मीद नहीं बची, तब किसी ने उसे नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्र से इलाज कराने की सलाह दी.
खिलजी&amp;nbsp; गैर-मुस्लिम से इलाज कराने के सख्त खिलाफ था. लेकिन जान बचाने के लिए उसने आचार्य को बुलवाया. खिलजी ने आचार्य के सामने एक अजीब शर्त रखी कि वह उनकी दी हुई कोई भी भारतीय दवा या जड़ी-बूटी नहीं खाएगा.
कुरान के पन्नों का वह चमत्कार
आचार्य राहुल श्रीभद्र ने खिलजी की शर्त मान ली. वे कुछ दिनों बाद खिलजी के पास एक कुरान लेकर पहुंचे. उन्होंने खिलजी से कहा कि उसे कुछ दिनों तक रोज इस कुरान के कुछ पन्ने पढ़ने होंगे. खिलजी ने ऐसा ही किया और देखते ही देखते वह पूरी तरह ठीक हो गया.
दरअसल, आचार्य ने कुरान के पन्नों के कोनों पर एक लेप लगा दिया था. खिलजी जब थूक लगाकर पन्ने पलटता तो वह दवा उसकी जीभ के रास्ते शरीर में चली जाती थी.
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जलन में धधक उठा सनकी सुल्तान
ठीक होने के बाद खिलजी को खुशी नहीं, बल्कि गहरी जलन हुई. उसे इस बात का सदमा लगा कि जो काम उसके महान हकीम नहीं कर पाए, उसे भारतीय वैद्यों ने इतनी आसानी से कर दिया. वह भारतीय ज्ञान और विज्ञान को बर्दाश्त नहीं कर सका.
इसी जलन और नफ़रत की आग में उसने साल 1193 में नालंदा विश्वविद्यालय पर हमला कर दिया. उसने वहां के हजारों निहत्थे बौद्ध भिक्षुओं और आचार्यों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया.
तीन महीने तक जलता रहा ज्ञान का शिखर
खिलजी नालंदा के ज्ञान को जड़ से मिटाना चाहता था. उसने विश्वविद्यालय के विशाल पुस्तकालय धर्मगंज में आग लगवा दी. इस पुस्तकालय में नौ मंजिला इमारतें थीं, जिनमें गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन शास्त्र की 90 लाख से ज्यादा बेशकीमती पांडुलिपियां &amp;nbsp;मौजूद थीं.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>CSIR UGC&amp;NET 2026 के लिए आवेदन शुरू, रिसर्च और प्रोफेसर बनने का सपना अब होगा पूरा</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. अगर आप रिसर्च करना चाहते हैं, कॉलेज में प्रोफेसर बनने का सपना देखते हैं या पीएचडी में दाखिला लेना चाहते हैं, तो अब आपके लिए मौका आ चुका है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने Joint CSIR UGC-NET June 2026 परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इस परीक्षा का इंतजार हर साल विज्ञान विषयों से पढ़ाई करने वाले हजारों छात्र करते हैं. यही परीक्षा तय करती है कि कौन छात्र रिसर्च के लिए जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी JRF पाएगा, कौन असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के योग्य होगा और किसे देश के बड़े विश्वविद्यालयों में पीएचडी में दाखिला मिलेगा. NTA की ओर से जारी नोटिस के बाद छात्रों में उत्साह बढ़ गया है. कई छात्र अभी से तैयारी में जुट गए हैं ताकि इस परीक्षा के जरिए अपने करियर को नई दिशा दे सकें.
 जुलाई में होगी परीक्षा
NTA ने जानकारी दी है कि यह परीक्षा 17 और 18 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में होगी. दोनों दिन परीक्षा दो-दो शिफ्ट में कराई जाएगी. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन पूरा कर लें ताकि आखिरी समय में वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक की परेशानी से बचा जा सके.
 आवेदन प्रक्रिया शुरू
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 मई 2026 से शुरू हो चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 19 जून 2026 रात 11:50 बजे तक तय की गई है. वहीं आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 20 जून 2026 रखी गई है.
अगर आवेदन फॉर्म भरते समय कोई गलती हो जाती है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. NTA ने छात्रों को सुधार का मौका भी दिया है. आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो 22 जून से 23 जून 2026 तक खुली रहेगी.

Gear up, Researchers. CSIR UGC NET June 2026 Applications are LIVE.Your next major academic milestone starts here. The gateway to JRF and Assistant Professorship is officially open.Lock in your dates.Secure your slot early.???? Official Portal: https://t.co/N1gZIiTqtvYour&amp;hellip; pic.twitter.com/h92yjhJsSl
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) May 28, 2026



 किन छात्रों के लिए अहम है यह परीक्षा?
जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) पा सकते हैंकॉलेज और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के योग्य हो सकते हैंपीएचडी प्रोग्राम में दाखिला ले सकते हैं
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;बिहार पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों को राहत, कॉन्स्टेबल ऑपरेटर परीक्षा की तारीख बदली, जानें कब होगा एग्जाम
 आवेदन कैसे करें?

उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट csirnet.nta.nic.in पर जाना होगा.
होमपेज पर दिए गए &amp;ldquo;Joint CSIR UGC-NET June 2026 Registration&amp;rdquo; लिंक पर क्लिक करें और ईमेल आईडी व मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करें.
इसके बाद अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी सही-सही भरें.
फोटो और सिग्नेचर तय फॉर्मेट में अपलोड करना होगा.
आवेदन शुल्क डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI के जरिए जमा किया जा सकता है.
सभी जानकारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करें और कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.

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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE के नए मार्किंग सिस्टम पर बढ़ा बवाल, शिक्षा मंत्री बोले&amp; छात्रों के हित में है OSM</title>
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        <description><![CDATA[ सीबीएसई के नए ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है. 12वीं के रिजल्ट आने के बाद लाखों छात्र और उनके माता-पिता लगातार सवाल उठा रहे हैं. कोई कम नंबर मिलने की शिकायत कर रहा है तो किसी को किसी और की कॉपी मिलने का दावा किया जा रहा है. कई छात्रों ने तो यहां तक कहा कि उनकी उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने ही गायब थे. बढ़ते विवाद के बीच अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सामने आए हैं और उन्होंने इस डिजिटल सिस्टम का खुलकर समर्थन किया है.
शिक्षा मंत्री ने कहा कि OSM एक आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था है, जिसे दुनिया के कई बड़े संस्थान अपना रहे हैं. उन्होंने माना कि पहली बार लागू होने के कारण कुछ परेशानियां सामने आई हैं, लेकिन किसी भी छात्र की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.
दरअसल इस बार CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया. इसमें छात्रों की कॉपियां स्कैन करके डिजिटल रूप में परीक्षकों को भेजी जाती हैं और वहीं नंबर दिए जाते हैं. रिजल्ट जारी होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें उम्मीद से बहुत कम अंक मिले हैं. इसके बाद जब छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपी डाउनलोड की, तो कई नई समस्याएं सामने आने लगीं.
छात्रों ने क्या कहा?
कॉपियों की स्कैनिंग साफ नहीं थीकई पन्ने कटे हुए दिखाई दिएकिसी और छात्र की कॉपी दिख रही थीसही जवाब होने के बाद भी नंबर नहीं दिए गए

#WATCH | OSM प्रणाली सुरक्षित और मजबूत- CBSE@Chandans_live | https://t.co/smwhXUROiK#CBSE #OSM #DharmendraPradham #Meeting #ABPNews pic.twitter.com/GZvgikYv4v
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) May 28, 2026



4 लाख से ज्यादा छात्रों ने मांगी दोबारा जांच
CBSE के अनुसार इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी. शिक्षा मंत्री ने बताया कि कुल 98 लाख कॉपियों की जांच हुई और हर कॉपी में औसतन 40 पेज थे. यानी लगभग 40 करोड़ पन्नों की स्कैनिंग की गई. सबसे बड़ी बात यह रही कि करीब 4 लाख छात्रों ने अपनी कॉपियों की दोबारा जांच के लिए आवेदन किया है. इन छात्रों की लगभग 11 लाख कॉपियां फिर से देखी जा रही हैं. इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें आने के बाद CBSE और शिक्षा मंत्रालय दोनों पर दबाव बढ़ गया है.
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शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा कि OSM छात्रों के हित में लाया गया है. उनके मुताबिक यह सिस्टम ज्यादा पारदर्शी है और छात्रों को अपनी कॉपी देखने का मौका देता है. उन्होंने कहा पहली बार CBSE ने इतने बड़े स्तर पर OSM लागू किया है. कुछ विसंगतियां सामने आई हैं और इसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं. लेकिन हम हर शिकायत का समाधान करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि देश की कई यूनिवर्सिटी और संस्थान अब इसी तरह की डिजिटल जांच व्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं.
कई एजेंसियां कर रहीं मदद
मामले की गंभीरता को देखते हुए CBSE ने कई तकनीकी एजेंसियों की मदद लेना शुरू कर दिया है. शिक्षा मंत्री के अनुसार भारत सरकार की टेक्नोलॉजी जांच करने वाली एजेंसियां भी इस पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं. मंत्रालय का कहना है कि अगर कहीं कोई तकनीकी गलती या लापरवाही सामने आती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बोर्ड ने शुरू किया ये सिस्टम
CBSE ने छात्रों की मदद के लिए 24 घंटे चलने वाला &amp;lsquo;पोस्ट-रिजल्ट सपोर्ट सिस्टम&amp;rsquo; शुरू किया है. बोर्ड की तरफ से जारी इस सुविधा के जरिए छात्र रिजल्ट, कॉपी जांच, तनाव और दूसरे सवालों को लेकर सहायता ले सकते हैं. इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-8004 पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है. इसके अलावा छात्र तुरंत सहायता पाने के लिए बोर्ड के आधिकारिक ईमेल info.cbse@nic.in और result.cbse2026@cbseshiksha.in पर भी संपर्क कर सकते हैं. CBSE का कहना है कि छात्रों की हर समस्या का जल्द समाधान करने की कोशिश की जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Karnataka New CM: कितने पढ़े लिखे हैं कर्नाटक के होने वाले सीएम डीके शिवकुमार, जानिए प्रमोशन के बाद कितनी मिलेगी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ Karnataka New CM: कर्नाटक में ढाई साल पहले तय हुआ सत्ता का फॉर्मूला अब लागू होता दिख रहा है, जिससे राज्य की सियासत में एक बड़े युग परिवर्तन की शुरुआत होने की संभावना प्रबल है. दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस के आलाकमान &amp;nbsp;के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. इसके बाद वर्तमान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बतौर नए मुख्यमंत्री ताजपोशी हो सकती है.
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डीके शिवकुमार की एजुकेशन
डीके शिवकुमार राजनीति के साथ-साथ शैक्षणिक रूप से भी काफी अच्छा बैकग्राउंड रखते हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा कनकपुरा से पूरी करने के बाद बेंगलुरु के प्रसिद्ध आरसी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद, राजनीति में लगातार सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय, मैसूर से राजनीति विज्ञान में 2006 में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की.
डीके शिवकुमार की आफ्टर प्रमोशन सैलरी&amp;nbsp;
उप मुख्यमंत्री के पद से मुख्यमंत्री के पद पर प्रमोट होने के बाद डीके शिवकुमार के वेतन, भत्तों और मिलने वाली आधिकारिक सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव आएगा. वर्तमान में एक मंत्री या डिप्टी सीएम के रूप में उनका कुल मासिक वेतन और भत्ता लगभग 1.5 लाख से 2 लाख रुपये के बीच है, जो मुख्यमंत्री बनते ही मूल वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और सत्कार भत्ता मिलाकर करीब 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति माह हो जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री के रूप में प्रमोट होते ही उन्हें राज्य का मुख्य आधिकारिक सरकारी बंगला, जेड प्लस श्रेणी की हाई सुरक्षा, विशेष बुलेटप्रूफ गाड़ियों का काफिला और दौरों के लिए राज्य के विशेष विमान का उपयोग करने का विशेषाधिकार भी मिल जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 छात्रों को बड़ी राहत, फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल जमा करने की तारीख बढ़ी</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर के लाखों NEET UG छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने परीक्षा फीस रिफंड से जुड़ी प्रक्रिया के लिए छात्रों को एक और मौका दे दिया है. अब उम्मीदवार अपने बैंक खाते की जानकारी 22 जून 2026 तक जमा कर सकेंगे. पहले इसकी आखिरी तारीख 27 मई तय की गई थी.
NTA के इस फैसले से उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जो किसी कारण समय पर अपनी बैंक डिटेल अपडेट नहीं कर पाए थे. एजेंसी ने साफ कहा है कि अभी भी कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्होंने रिफंड प्रक्रिया पूरी नहीं की है. इसी वजह से अंतिम तारीख को आगे बढ़ाया गया है.
NEET परीक्षा के बाद शुरू हुआ रिफंड मामला
दरअसल, NEET UG 2026 परीक्षा इस साल 3 मई को आयोजित हुई थी. परीक्षा के बाद कई तरह की दिक्कतों और प्रक्रियाओं को लेकर NTA ने फीस रिफंड की सुविधा शुरू की थी. इसी के तहत छात्रों से बैंक खाते की जानकारी मांगी गई ताकि रिफंड की रकम सीधे उनके खाते में भेजी जा सके.&amp;nbsp;NTA ने इससे पहले 12 मई और 22 मई 2026 को भी इस बारे में नोटिस जारी किए थे. इसके बाद 22 मई से 27 मई तक छात्रों के लिए पोर्टल खोला गया था, जहां वे अपनी बैंक डिटेल जमा कर सकते थे.
13 लाख छात्रों ने भरी जानकारी
NTA के मुताबिक अब तक करीब 13 लाख उम्मीदवार अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट कर चुके हैं. लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में छात्र ऐसे हैं जिन्होंने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है.एजेंसी का कहना है कि कई छात्रों को जानकारी देर से मिली, जबकि कुछ तकनीकी परेशानी के कारण फॉर्म पूरा नहीं कर पाए. ऐसे में किसी भी छात्र का नुकसान न हो, इसलिए तारीख को लगभग एक महीने तक बढ़ा दिया गया है.
एक बार जमा की गई जानकारी बदली नहीं जाएगी
NTA ने छात्रों को एक अहम चेतावनी भी दी है. एजेंसी ने साफ कहा है कि बैंक खाते की जानकारी जमा करने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. यानी अगर छात्र गलत अकाउंट नंबर, IFSC कोड या दूसरे बैंक डिटेल भर देते हैं, तो बाद में उसे सुधारने का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे सभी जानकारी ध्यान से जांचने के बाद ही सबमिट करें.

???? NEET (UG)-2026 | Fee Refund UpdateImportant announcement for candidates yet to submit bank details for fee refund!The last date has been extended to 22nd June 2026 (till 11:50 PM) ????️✅ ~13 lakh candidates have already updated their details⏳ If you haven&#039;t yet &amp;mdash; don&#039;t&amp;hellip; pic.twitter.com/Poy22425YK
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) May 27, 2026



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22 जून तक खुला रहेगा पोर्टल
NTA के मुताबिक बैंक खाते की जानकारी जमा करने की सुविधा अब 22 जून 2026 रात 11:50 बजे तक उपलब्ध रहेगी. एजेंसी ने साफ कहा है कि सभी योग्य छात्र समय रहते यह प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि उन्हें उनका रिफंड बिना किसी परेशानी के मिल सके.
कैसे जमा करें बैंक डिटेल?
उम्मीदवारों को NEET UG 2026 के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाकर लॉगिन करना होगा. लॉगिन करने के बाद रिफंड लिंक पर क्लिक करके बैंक खाते की जानकारी भरनी होगी. सही जानकारी देने के लिए छात्र चाहें तो कैंसल चेक भी अपलोड कर सकते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, छात्रों, को, बड़ी, राहत, फीस, रिफंड, के, लिए, बैंक, डिटेल, जमा, करने, की, तारीख, बढ़ी</media:keywords>
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        <title>बिहार पुलिस भर्ती का इंतजार खत्म, 19,838 युवाओं का सपना हुआ पूरा; जानें डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में पुलिस की नौकरी का सपना देख रहे लाखों युवाओं का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) ने बिहार पुलिस और बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में सिपाही के 19,838 पदों पर भर्ती के लिए अंतिम चयन सूची जारी कर दी है. रिजल्ट सामने आते ही कई घरों में खुशी का माहौल देखने को मिला. कहीं मिठाइयां बांटी गईं तो कहीं परिवार के लोग अपने बच्चों की सफलता पर गर्व करते नजर आए.
यह भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन संख्या 01/2025 के तहत शुरू की गई थी. 11 मार्च 2025 को भर्ती का नोटिफिकेशन जारी हुआ था, जिसके बाद लाखों युवाओं ने आवेदन किया. बिहार में सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं में हमेशा बड़ा उत्साह देखने को मिलता है और इस बार भी कुछ ऐसा ही माहौल रहा.
भर्ती बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार लिखित परीक्षा के लिए कुल 16 लाख 73 हजार 586 अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए गए थे. परीक्षा जुलाई और अगस्त 2025 में अलग-अलग तारीखों पर आयोजित हुई थी. परीक्षा खत्म होने के बाद उम्मीदवारों की नजरें रिजल्ट पर टिकी थीं. आखिरकार 26 सितंबर 2025 को लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया गया, जिसमें 99 हजार 690 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया.
कब हुई थी PET
लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी PET के लिए बुलाया गया. यह परीक्षा 15 दिसंबर 2025 से 11 मार्च 2026 तक पटना के गर्दनीबाग हाई स्कूल मैदान में आयोजित की गई. इस दौरान कुल 79 हजार 932 अभ्यर्थी मैदान में उतरे. सबसे ज्यादा चुनौती दौड़ की परीक्षा में देखने को मिली, जहां 29 हजार 282 उम्मीदवार बाहर हो गए. वहीं 50 हजार 650 अभ्यर्थियों ने दौड़ पास कर अगला चरण पार किया.
हालांकि दौड़ पास करना ही अंतिम मंजिल नहीं था. इसके बाद शारीरिक जांच और दस्तावेज सत्यापन में भी कई उम्मीदवार बाहर हो गए. कुल 5 हजार 39 अभ्यर्थी अन्य कारणों से चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए.
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इतने कैंडिडेट्स मिले योग्य
सभी चरण पूरे होने के बाद बोर्ड ने अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की. जांच और आरक्षण नियमों के आधार पर कुल 45 हजार 611 अभ्यर्थियों को योग्य पाया गया. इनमें 16 हजार 245 महिलाएं, 29 हजार 349 पुरुष और 17 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी शामिल रहे. लेकिन रिक्त पदों के अनुसार अंतिम रूप से 19 हजार 838 उम्मीदवारों का चयन किया गया.
आरक्षण के आधार पर सबसे ज्यादा 7 हजार 935 पद अनारक्षित वर्ग के लिए रखे गए हैं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 1 हजार 983 पद, अनुसूचित जाति के लिए 3 हजार 174 पद और अनुसूचित जनजाति के लिए 199 पद तय किए गए हैं. इसके अलावा अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 3 हजार 571 पद, पिछड़ा वर्ग के लिए 2 हजार 381 पद और पिछड़ा वर्ग महिला वर्ग के लिए 595 पद आरक्षित किए गए हैं. खास बात यह रही कि पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 53 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को भी जगह मिली है.
इन्हें भी मिला मौका
भर्ती प्रक्रिया में गृह रक्षकों को भी मौका दिया गया. नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत पद प्रशिक्षित गृह रक्षकों से भरे जाने का प्रावधान है. इसी के तहत 867 गृह रक्षकों को शारीरिक परीक्षा के लिए बुलाया गया था. इनमें से 332 उम्मीदवार सफल पाए गए, जिनमें 17 महिलाएं और 315 पुरुष शामिल हैं.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बिहार, पुलिस, भर्ती, का, इंतजार, खत्म, 19, 838, युवाओं, का, सपना, हुआ, पूरा, जानें, डिटेल्स</media:keywords>
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        <title>विदेश पढ़ाई का सपना क्यों छोड़ रहे भारतीय छात्र? जानिए किस देश की ओर बढ़ रहा युवाओं का रुख</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/विदेश-पढ़ाई-का-सपना-क्यों-छोड़-रहे-भारतीय-छात्र-जानिए-किस-देश-की-ओर-बढ़-रहा-युवाओं-का-रुख</link>
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        <description><![CDATA[ कुछ साल पहले तक विदेश में पढ़ाई करना लाखों भारतीय छात्रों का सबसे बड़ा सपना माना जाता था. परिवार बच्चों को विदेश भेजने के लिए बचत करते थे, एजेंटों के दफ्तरों में भीड़ लगती थी और हर साल हजारों छात्र ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका की उड़ान भरते थे. लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. महंगी फीस, बढ़ता खर्च और मुश्किल वीजा नियमों ने कई छात्रों के कदम रोक दिए हैं.
हाल ही में आई IDP की रिपोर्ट &amp;ldquo;Emerging Futures&amp;rdquo; ने इस बदलती सोच की बड़ी तस्वीर सामने रखी है. रिपोर्ट बताती है कि अब भारतीय छात्र सिर्फ विदेश जाने का सपना नहीं देख रहे, बल्कि बहुत सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं.
43% छात्रों ने फीस के कारण छोड़ा सपना
रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश में पढ़ाई का प्लान छोड़ने वाले 43 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने कहा कि अब फीस उनकी पहुंच से बाहर हो चुकी है. वहीं 32 प्रतिशत छात्रों ने बढ़ते रहने और खाने-पीने के खर्च को बड़ी वजह बताया. इसके अलावा 28 प्रतिशत छात्रों ने माना कि स्टूडेंट वीजा हासिल करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है. सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया भर के छात्रों में भी यही चिंता दिखाई दी. करीब 50 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि ट्यूशन फीस इतनी बढ़ गई है कि विदेश में पढ़ाई अब आसान नहीं रही.
अब सिर्फ डिग्री नहीं, करियर चाहिए
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय छात्रों की सोच पहले से काफी बदल चुकी है. अब वे सिर्फ विदेशी डिग्री के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि यह देख रहे हैं कि पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलेगी या नहीं.
करीब 41 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने कहा कि विदेश पढ़ाई का सबसे बड़ा फायदा अच्छा करियर और नौकरी के मौके हैं. वहीं 31 प्रतिशत छात्रों ने बेहतर पढ़ाई और अच्छी शिक्षा व्यवस्था को जरूरी बताया. 27 प्रतिशत छात्र ऐसे कोर्स चाहते हैं जो सीधे इंडस्ट्री और नौकरी से जुड़े हों.
बिजनेस और इंजीनियरिंग सबसे पसंदीदा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विदेश जाने वाले छात्रों की पहली पसंद अभी भी बिजनेस से जुड़े कोर्स हैं. करीब 24 प्रतिशत छात्रों ने बिजनेस और एडमिनिस्ट्रेशन स्टडीज को चुना. इसके बाद इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी दूसरे नंबर पर रहे, जिन्हें 20 प्रतिशत छात्रों ने पसंद किया. हेल्थ और मेडिसिन को 18 प्रतिशत छात्रों ने चुना, जबकि कंप्यूटर और मैथ्स से जुड़े कोर्स में भी छात्रों की अच्छी रुचि देखने को मिली.
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बड़े और नामी विश्वविद्यालयों पर भरोसा
आज के छात्र किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने के बजाय ब्रांड और रैंकिंग को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. करीब 65 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे दुनिया की रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों में पढ़ना चाहते हैं. कम छात्रों ने पॉलिटेक्निक, कम्युनिटी कॉलेज या छोटे संस्थानों में रुचि दिखाई. इसका मतलब साफ है कि छात्र अब डिग्री के साथ यूनिवर्सिटी की पहचान को भी करियर से जोड़कर देख रहे हैं.
किस देश पर सबसे ज्यादा भरोसा?
विदेश पढ़ाई के लिए ब्रिटेन छात्रों का सबसे भरोसेमंद देश बनकर सामने आया. करीब 85 प्रतिशत छात्रों ने माना कि UK उन्हें बेहतर स्किल और करियर के लिए तैयार कर सकता है. इसके बाद कनाडा और ऑस्ट्रेलिया रहे, जहां छात्रों का भरोसा 84 और 83 प्रतिशत रहा. अमेरिका और न्यूजीलैंड भी छात्रों की पसंद में शामिल रहे. हालांकि कुछ नए देशों पर छात्रों का भरोसा कम दिखा. जर्मनी, चीन और फ्रांस जैसे देशों में छात्रों का विश्वास काफी नीचे रहा. UAE सबसे नीचे रहा, जहां सिर्फ 47 प्रतिशत छात्रों ने भरोसा जताया.
ऑस्ट्रेलिया क्यों बना पहली पसंद?
भारतीय छात्रों में ऑस्ट्रेलिया सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 41 प्रतिशत छात्रों ने ऑस्ट्रेलिया को अपनी पहली पसंद बताया. इसकी सबसे बड़ी वजह वहां की नौकरी के मौके, पढ़ाई का माहौल और इंटरनेशनल एजुकेशन सिस्टम है. वहीं UK को अच्छी पढ़ाई और मजबूत शिक्षा व्यवस्था के लिए पसंद किया गया. कनाडा और अमेरिका को भी छात्र नौकरी और नेटवर्किंग के बेहतर अवसरों के कारण चुन रहे हैं. न्यूजीलैंड को पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और नौकरी के अच्छे विकल्पों के लिए पसंद किया जा रहा है.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>विदेश, पढ़ाई, का, सपना, क्यों, छोड़, रहे, भारतीय, छात्र, जानिए, किस, देश, की, ओर, बढ़, रहा, युवाओं, का, रुख</media:keywords>
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        <title>बिहार के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, 1 जुलाई से 211 नए डिग्री कॉलेजों में होगी पढ़ाई</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बिहार-के-छात्रों-के-लिए-बड़ी-खुशखबरी-1-जुलाई-से-211-नए-डिग्री-कॉलेजों-में-होगी-पढ़ाई</guid>
        <description><![CDATA[ बिहार में हायर एजुकेशन को बढ़ावा देने और दूरदराज के इलाकों तक ज्ञान की रोशनी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों में नए सत्र से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है. 1 जुलाई से सभी नए कॉलेजों में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो जाएगी, जिसके लिए सभी 211 कॉलेजों में प्राचार्यों की तैनाती भी कर दी गई है.&amp;nbsp;
क्यों पड़ी इन नए कॉलेजों की जरूरत?
बता दें कि बिहार में कुल 534 प्रखंड हैं. इनमें कई प्रखंडों में तो पहले से कॉलेज चल रहे थे, लेकिन राज्य में 211 प्रखंड ऐसे भी थे, जहां कोई भी सरकारी या सरकार से मान्यता प्राप्त डिग्री कॉलेज नहीं था. कॉलेज न होने की वजह से इन इलाकों के छात्र-छात्राओं को 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई (बीए, बीएससी आदि) के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता था या फिर मजबूरी में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी. सबसे ज्यादा परेशानी लड़कियों को होती थी, क्योंकि दूरदराज के इलाकों में कॉलेज न होने के कारण सुरक्षा और दूरी की वजह से पैरेंट्स उन्हें बाहर भेजने से कतराते थे. इसके अलावा कई गरीब परिवार शहरों में बच्चों को रखकर पढ़ाने का खर्च भी नहीं उठा पाते थे. इन सभी परेशानियों को दूर करने के लिए ही सरकार ने यह कदम उठाया.
&#039;सात निश्चय-3&#039; योजना के तहत पूरा हो रहा वादा
छात्रों की इसी बड़ी परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बिहार सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी &#039;सात निश्चय-3&#039; (विकास के सात अहम वादे) कार्यक्रम के तहत खास फैसला लिया था. इस कार्यक्रम के चौथे हिस्से का नाम &#039;उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य&#039; रखा गया. इसका सीधा मतलब है कि अगर बच्चों को बेहतर और उन्नत शिक्षा मिलेगी, तभी उनका भविष्य उज्ज्वल होगा. इसके तहत राज्य सरकार ने फैसला लिया था कि बिहार के जिस भी प्रखंड में कोई डिग्री कॉलेज नहीं है, वहां नया डिग्री कॉलेज खोला जाएगा.
1 जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई, प्रिंसिपल्स ने संभाला मोर्चा
राज्य सरकार के सख्त आदेश के बाद हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने इन कॉलेजों को चालू करने की तैयारी शुरू कर दी है. उच्च शिक्षा विभाग ने सबसे पहले इन 211 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की पोस्टिंग कर दी. अब ये सभी प्रिंसिपल अपने-अपने कॉलेजों में 1 जुलाई से शुरू होने वाले नए एकेडमिक सेशन की तैयारियों में जुट गए हैं.
पहले चरण में किन 6 विषयों की होगी पढ़ाई?
उच्च शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार, प्रथम चरण में इन सभी नए डिग्री कॉलेजों में मुख्य रूप से 6 विषयों की पढ़ाई होगी. इनमें कला संकाय के वे विषय शामिल हैं, जिनकी मांग छात्रों में सबसे ज्यादा रहती है. जानकारी के मुताबिक, छात्र शुरुआत में हिंदी, अंग्रेजी, सोशियोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री समेत कुल छह विषयों में दाखिला ले सकेंगे. भविष्य में इन कॉलेजों में साइंस और अन्य विषय भी जोड़े जा सकते हैं.
अधिकारियों ने दी यह जानकारी
उच्च शिक्षा विभाग के डायरेक्टर प्रो. एनके अग्रवाल ने बताया कि राज्य के 211 ब्लॉक में नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया गया है. सभी कॉलेजों में प्राचार्यों की तैनाती की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और पहले चरण में छह विषयों की पढ़ाई शुरू कराने की सभी जरूरी तैयारियां विभाग की तरफ से तेजी से की जा रही हैं.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बिहार, के, छात्रों, के, लिए, बड़ी, खुशखबरी, जुलाई, से, 211, नए, डिग्री, कॉलेजों, में, होगी, पढ़ाई</media:keywords>
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        <title>रिक्शा चालक के बेटे ने पहले प्रयास में पास की UPSC परीक्षा, बने IAS अधिकारी</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के वाराणसी से निकलकर गोविंद जायसवाल ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के सामने गरीबी भी हार मान लेती है.रिक्शा चलाकर परिवार पालने वाले पिता के बेटे ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई कर देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC को पहले ही प्रयास में पास कर लिया.आज उनकी कहानी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है.
गोविंद जायसवाल का जन्म वाराणसी के एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था. उनका परिवार रेलवे स्टेशन के पास एक छोटे से कमरे में रहता था। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार लंबे समय तक बिजली नहीं रहती थी. बचपन में ही मां का निधन हो जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके पिता पर आ गई.
बचपन के अपमान ने बदल दी जिंदगी
गोविंद को कई बार गरीबी की वजह से लोगों के ताने और भेदभाव का सामना करना पड़ा. एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, जब उन्हें एक अमीर दोस्त के घर से केवल गरीब होने की वजह से बाहर निकाल दिया गया.उसी दिन उन्होंने IAS अधिकारी बनने का फैसला कर लिया.
बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने बेच दिए रिक्शे
गोविंद के पिता रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे.बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी जमीन और कई रिक्शे तक बेच दिए ताकि गोविंद दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी कर सकें.पिता का यह त्याग गोविंद की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना.
दिल्ली पहुंचने के बाद गोविंद ने आर्थिक तंगी के बावजूद हार नहीं मानी. उन्होंने बच्चों को गणित पढ़ाकर अपना खर्च निकाला और लाइब्रेरी में घंटों बैठकर पढ़ाई की.उन्होंने हिंदी माध्यम से UPSC की तैयारी जारी रखी और अपने आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया.
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पहले ही प्रयास में पास की UPSC परीक्षा
साल 2006 में केवल 22 साल की उम्र में गोविंद जायसवाल ने UPSC परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास कर ली.उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 48 हासिल की और IAS अधिकारी बने. उनकी सफलता ने यह साबित किया कि सफलता के लिए मजबूत इरादे और मेहनत सबसे ज्यादा जरूरी हैं.
गोविंद जायसवाल का मानना है कि भाषा कभी भी सफलता में रुकावट नहीं बनती. उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और अपने विचारों को सही तरीके से व्यक्त करने की क्षमता ही असली ताकत होती है. हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की.यह भी पढ़ें - UPSC का बड़ा बदलाव, पहली बार रिजल्ट से पहले जारी हुई प्रीलिम्स Answer Key ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>पटना के ज्ञान भवन में नौकरी की बारिश, रोजगार मेले के दूसरे दिन 3659 युवाओं को मिला तोहफा</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार की राजधानी पटना के ज्ञान भवन में चल रहे रोजगार मेले में नौकरियों की बारिश हो रही है. मंगलवार (26 मई) को इस मेले का दूसरा दिन था. उस दौरान युवाओं में नौकरी पाने को लेकर काफी उत्साह दिखा&amp;nbsp;
क्या है यह आयोजन?
पटना के ज्ञान भवन में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय स्वास्थ्य एवं सम्बद्ध क्षेत्र रोजगार मेला 2026 का आयोजन किया गया है. यह मेला पूरी तरह से स्वास्थ्य (मेडिकल) और उससे जुड़े क्षेत्रों पर आधारित है. इस भव्य रोजगार मेले का आयोजन &#039;युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग&#039; के अंतर्गत काम करने वाले &#039;बिहार कौशल विकास मिशन&#039; की ओर से किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य बिहार के उन युवाओं को अच्छा मंच देना है, जो पढ़ाई के बाद अस्पतालों या स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतरीन करियर बनाना चाहते हैं.
दूसरे दिन इतने युवाओं को मिली जॉब
26 मई का दिन हजारों परिवारों के लिए खुशखबरी लेकर आया. मेले के दूसरे दिन कुल 3659 युवाओं का चयन स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न बड़ी कंपनियों और अस्पतालों में हुआ. नौकरी पाने वाले कुल 3659 युवाओं में 3050 पुरुष और 609 महिलाएं शामिल हैं. इस रोजगार मेले में मेदांता, अपोलो, पारस, रुबन, अखण्ड ज्योति और पोर्टिया आदि कंपनियों ने हिस्सा लिया.&amp;nbsp;
747 युवाओं को विदेश जाने का मौका
इस रोजगार मेले से युवाओं को विदेशों में भी नौकरी के मौके मिले. दरअसल, 747 युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के लिए चुना गया.&amp;nbsp;
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QR कोड से रजिस्ट्रेशन की आसान सुविधा
इस बार रोजगार मेले को बेहद आधुनिक और सरल बनाया गया है. नौकरी की तलाश में बिहार के अलग-अलग जिलों और दूर-दराज के गांवों से काफी युवा पटना पहुंच रहे हैं. उन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं पड़ रही है. मेले में क्यूआर (QR) कोड की सुविधा दी गई है. युवा बस अपने मोबाइल से क्यूआर कोड को स्कैन करते हैं और उनका रजिस्ट्रेशन आसानी से हो जाता है.&amp;nbsp;
अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का भी लगा जमावड़ा
विदेशों में रोजगार दिलाने के लिए कई जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी इस मेले में स्टॉल लगाया. इनमें मुख्य रूप से ब्लू सीज टैलेंट एलएलपी, मैजिक बिलियन, 2 कॉम्स जॉब्स एकेडमी, अल्फा मैनपावर, केयर 24 और एम्परसैंड इंटरनेशनल मोबिलिटी जैसी नामी संस्थाएं मौजूद हैं.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE OSM पोर्टल हैकिंग दावा निकला गलत, CBSE ने अफवाहों का किया खंडन</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोशल मीडिया पर फैल रहे उन दावों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि उसके ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल को हैक कर लिया गया है.बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक जानकारी पर आधारित है. इस मामले को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स भी सामने आई थीं, जिसके बाद CBSE ने आधिकारिक बयान जारी किया है.
क्या था पूरा मामला?सोशल मीडिया पर एक यूजर ने दावा किया था कि CBSE का On Screen Marking (OSM) पोर्टल, जिसका URL cbse.onmarks.co.in बताया गया, 26 फरवरी 2026 को हैक कर लिया गया है.इस दावे के बाद कई प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर तेजी से फैल गई, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई.
CBSE का आधिकारिक बयानCBSE ने स्पष्ट किया है कि जिस URL का उल्लेख किया जा रहा है, वह वास्तविक परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली का हिस्सा नहीं है.यह केवल एक टेस्टिंग वेबसाइट है, जिसे आंतरिक परीक्षण और सिस्टम रिव्यू के लिए उपयोग किया जाता है.बोर्ड ने साफ कहा कि इस टेस्टिंग पोर्टल पर किसी भी प्रकार का वास्तविक मूल्यांकन डेटा, छात्र के अंक या कोई भी संवेदनशील जानकारी मौजूद नहीं है.इसलिए इस साइट पर हैकिंग या डेटा चोरी जैसी कोई घटना संभव ही नहीं है.
वास्तविक OSM सिस्टम पूरी तरह सुरक्षितCBSE ने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक OSM सिस्टम, जिसका उपयोग उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए किया जाता है, पूरी तरह सुरक्षित है. इस मुख्य प्रणाली में किसी भी प्रकार की सुरक्षा खामी या साइबर हमले की कोई घटना सामने नहीं आई है.बोर्ड के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसी भी अनधिकृत पहुंच को रोका जा सके.यह भी पढ़ें - सीएम श्री एडमिशन 31 मई तक जारी होगा क्लास 11 का रिजल्ट, ऐसे करें चेक
CBSE ने कहा है कि जिस असली ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का उपयोग उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए किया जाता है, वह पूरी तरह सुरक्षित है. उसमें किसी तरह की कोई सुरक्षा समस्या सामने नहीं आई है.बोर्ड ने बताया कि सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली लागू की गई है, ताकि किसी भी तरह की अनधिकृत पहुंच को रोका जा सके.
CBSE ने यह भी कहा कि यह सिस्टम मूल्यांकन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और तेज बनाने के लिए बनाया गया है.इसमें एक मजबूत शिकायत समाधान प्रणाली भी शामिल है, जिससे छात्रों और शिक्षकों की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जा सके.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिना परीक्षा मिलेंगे 80 हजार सालाना, 12वीं पास स्टूडेंट्स के लिए सुनहरा मौका; जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ देश में हर साल लाखों छात्र 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई का सपना देखते हैं, लेकिन कई बार आर्थिक परेशानी उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन जाती है. खासकर साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए हायर एजुकेशन का खर्च उठाना आसान नहीं होता. ऐसे में अगर आपको बताया जाए कि सरकार हर साल 80,000 की स्कॉलरशिप दे रही है और इसके लिए किसी अलग प्रतियोगी परीक्षा को पास करने की जरूरत भी नहीं है.
साइंस फील्ड के छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की ओर से INSPIRE Scholarship for Higher Education चलाई जाती है. इस योजना का उद्देश्य ऐसे छात्रों को प्रोत्साहित करना है जो भविष्य में साइंटिस्ट बनकर देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं.
क्या है INSPIRE स्कॉलरशिप?
ये केंद्र सरकार की एक खास स्कॉलरशिप योजना है, जिसके तहत योग्य छात्रों को हर साल 80,000 तक की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह सहायता ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) स्तर पर साइंस स्ट्रीम की पढ़ाई कर रहे छात्रों को मिलती है. इस योजना की सबसे खास बात यह है कि छात्रों को इसके लिए कोई अलग परीक्षा नहीं देनी पड़ती.
कितनी मिलती है स्कॉलरशिप?
इस योजना के तहत छात्रों को कुल 80,000 प्रति वर्ष दिए जाते हैं. इसमें से 60,000 सालाना सीधे छात्र के बैंक खाते में भेजे जाते हैं. यह राशि हर महीने 5,000 के हिसाब से मिलती है. इसके अलावा 20,000 सालाना अलग से दिए जाते हैं, जिसका उपयोग छात्र अपने अनिवार्य समर रिसर्च प्रोजेक्ट और वैज्ञानिक गतिविधियों पर कर सकते हैं. यह सहायता अधिकतम 5 वर्षों तक मिल सकती है, यानी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी होने तक.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्र की उम्र 17 से 22 वर्ष के बीच होनी चाहिए. इसके अलावा छात्र को विज्ञान से जुड़े विषयों में पढ़ाई कर रहा होना चाहिए. यदि छात्र के 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंक अपने राज्य या केंद्रीय बोर्ड के टॉप 1 प्रतिशत छात्रों में आते हैं, तो वह आवेदन कर सकता है.
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उधर, JEE Main, JEE Advanced या NEET परीक्षा में टॉप 10,000 रैंक हासिल करने वाले छात्र भी इस योजना के लिए पात्र माने जाते हैं. IISER, NISER, DAE-CBS जैसे प्रमुख संस्थानों में दाखिला लेने वाले छात्र भी आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा KVPY, NTSE, JBNSTS या साइंस ओलंपियाड में उपलब्धि हासिल करने वाले छात्रों को भी इस योजना का लाभ मिल सकता है.
किन विषयों के छात्रों को मिलेगा फायदा?

फिजिक्स
केमिस्ट्री
मैथेमेटिक्स
बायोलॉजी
स्टैटिस्टिक्स
जियोलॉजी
एस्ट्रोफिजिक्स
एस्ट्रोनॉमी

किन छात्रों को नहीं मिलेगा लाभ?
कई छात्र यह मान लेते हैं कि इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को भी यह स्कॉलरशिप मिलती होगी, लेकिन ऐसा नहीं है. इस योजना के तहत इंजीनियरिंग, मेडिसिन, फार्मेसी और अन्य प्रोफेशनल कोर्स शामिल नहीं हैं. इसलिए आवेदन से पहले पात्रता की पूरी जानकारी जरूर जांच लें.
आवेदन की प्रक्रिया क्या है?
सबसे पहले छात्र को INSPIRE के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना प्रोफाइल बनाना होगा. इसके बाद 12वीं की मार्कशीट, रैंक प्रमाण पत्र या प्रवेश परीक्षा से जुड़े जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. छात्र के नाम से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में बचत खाता होना भी जरूरी है, क्योंकि स्कॉलरशिप की राशि सीधे उसी खाते में भेजी जाती है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिना, परीक्षा, मिलेंगे, हजार, सालाना, 12वीं, पास, स्टूडेंट्स, के, लिए, सुनहरा, मौका, जानें, पूरी, डिटेल</media:keywords>
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        <title>जेईई मेन और नीट को मिलाने की तैयारी, सरकार ला सकती है One Nation One Exam सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं जेईई मेन और नीट को लेकर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है.हाल ही में सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक नए मॉडल पर विचार कर रही है. इस प्रस्ताव के तहत इंजीनियरिंग और मेडिकल एडमिशन के लिए एक संयुक्त राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा (Unified Entrance Exam) लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
वन नेशन वन एग्जाम सिस्टम पर विचार
सूत्रों के अनुसार सरकार &amp;ldquo;One Nation One Exam&amp;rdquo; मॉडल पर काम करने पर विचार कर रही है, जिसमें जेईई और नीट दोनों परीक्षाओं को एक कॉमन फ्रेमवर्क में शामिल किया जा सकता है.इस प्रणाली के तहत एक ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी, लेकिन छात्रों की स्ट्रीम के अनुसार अलग-अलग विषय सेक्शन रखे जाएंगे.इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए मैथ्स और मेडिकल उम्मीदवारों के लिए बायोलॉजी अलग सेक्शन में शामिल किए जा सकते हैं, जबकि फिजिक्स और केमिस्ट्री दोनों के लिए कॉमन रहेंगे.
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना बताया जा रहा है.हाल के वर्षों में पेपर लीक और अनियमितताओं की घटनाओं को देखते हुए सरकार परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार करने की दिशा में काम कर रही है.
यह विचार पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमेटी की सिफारिशों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. इस कमेटी का गठन NEET-UG 2024 विवाद के बाद किया गया था, ताकि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुधार के सुझाव दिए जा सकें.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;सीएम श्री एडमिशन 31 मई तक जारी होगा क्लास 11 का रिजल्ट, ऐसे करें चेकNTA की भूमिका और संभावित बदलाव
NTA की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं.अब सरकार परीक्षा संचालन प्रणाली को और मजबूत करने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम करने पर विचार कर रही है.
NEET-UG 2026 विवाद
NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया था. लेकिन परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया. इसके चलते परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.पेपर लीक मामले की जांच CBI द्वारा की जा रही है.जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों में नेटवर्क और परीक्षा से जुड़े मामलों की गहन जांच कर रही हैं. इस घटना ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Girls Dropped Out Rate India: रुपयों की कमी से हर साल इतनी बच्चियां छोड़ रहीं पढ़ाई! जानें किस राज्य में सबसे ज्यादा संख्या?</title>
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        <description><![CDATA[ Girls Dropped Out Rate India : भारत में आज भी लाखों बच्चे ऐसे हैं जो आर्थिक तंगी, घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक समस्याओं की वजह से स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं. इसमें सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लड़कियां स्कूल छोड़ रही हैं. कई मामलों में परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति, घर का काम, छोटी उम्र में जिम्मेदारियां और स्कूल तक पहुंच की परेशानी उनकी पढ़ाई रुकने की वजह बन रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2022-23 से 2023-24 के बीच देशभर में लाखों बच्चों ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ दिया. इनमें लड़कों की संख्या ज्यादा है, लेकिन कई राज्यों में लड़कियों के पढ़ाई छोड़ने की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि रुपयों की कमी से हर साल कितनी बच्चियां पढ़ाई छोड़ रही हैं और किस राज्य में सबसे ज्यादा संख्या है.&amp;nbsp;
किन राज्यों में सबसे ज्यादा बच्चे छोड़ रहे पढ़ाई?
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार देश में सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट वाले राज्यों में सबसे ऊपर है. यहां करीब 27 लाख से ज्यादा बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया. इसके बाद राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों का नाम सामने आया है. वहीं सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट वाले राज्यों में बिहार 27.69 लाख, राजस्थान 8.99 लाख उत्तर प्रदेश 7.41 लाख, मध्य प्रदेश &amp;nbsp;3.37 लाख और असम &amp;nbsp;3.58 लाख शामिल है. इन राज्यों में आर्थिक स्थिति, ग्रामीण इलाकों की समस्याएं और शिक्षा तक सीमित पहुंच को बड़ा कारण माना जा रहा है.&amp;nbsp;
रुपयों की कमी से हर साल कितनी बच्चियां पढ़ाई छोड़ रही हैं?
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के एक सर्वे में सामने आया कि बड़ी संख्या में लड़कियों की पढ़ाई घरेलू कामों की वजह से छूट रही है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 33 प्रतिशत लड़कियां घर के कामकाज के कारण स्कूल छोड़ने को मजबूर हुईं. कई जगहों पर लड़कियों को छोटे भाई-बहनों की देखभाल करनी पड़ती है. वहीं कुछ परिवार आर्थिक मजबूरी में बच्चियों को मजदूरी या घरों में काम करने भेज देते हैं. ग्रामीण इलाकों में जल्दी शादी भी लड़कियों की पढ़ाई रुकने का एक बड़ा कारण माना जाता है.&amp;nbsp;
किस राज्य में सबसे ज्यादा संख्या है?
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का ड्रॉपआउट प्रतिशत लड़कों से ज्यादा दर्ज किया गया. खासकर कक्षा 6 से 8 के बीच बड़ी संख्या में लड़कियां पढ़ाई छोड़ रही हैं. इसके अलावा राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में भी मुस्लिम और आदिवासी समुदाय की बच्चियों में ड्रॉपआउट दर ज्यादा पाई गई.&amp;nbsp;
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किन राज्यों ने बेहतर प्रदर्शन किया?
रिपोर्ट में कुछ राज्यों ने बेहतर स्थिति भी दिखाई. जिसमें केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पढ़ाई छोड़ने के आंकड़े बेहद कम या शून्य बताए गए हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों की दोबारा जांच की जरूरत भी हो सकती है फिर भी इन राज्यों में शिक्षा व्यवस्था, जागरूकता और सरकारी योजनाओं का असर बेहतर माना जा रहा है.&amp;nbsp;
सरकार ने क्या सुझाव दिए हैं?
केंद्र सरकार ने ज्यादा ड्रॉपआउट वाले राज्यों को विशेष कदम उठाने की सलाह दी है. इसके तहत स्कूलों में बच्चों की नियमित निगरानी, गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता, लड़कियों के लिए विशेष योजनाएं, ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्कूल सुविधा और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ना जैसे कदमों पर जोर दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>बिहार पुलिस सब&amp;इंस्पेक्टर (दारोगा) मुख्य परीक्षा आज, 1799 पदों के लिए 36 हजार अभ्यर्थी देंगे एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में सरकारी नौकरी और खाकी वर्दी पहनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन बेहद खास है. बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं की आज (27 मई) मुख्य लिखित परीक्षा (Mains Exam) आयोजित की जा रही है. बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की तरफ से गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस अवर निरीक्षक के कुल 1799 खाली पदों को भरने के लिए यह अहम परीक्षा हो रही है. आज होने वाली इस परीक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है, ताकि पूरी परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के और एकदम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके.
परीक्षा का समय और पालियां (Exam Shifts &amp;amp; Timings)
यह महत्वपूर्ण परीक्षा एक ही दिन में दो अलग-अलग पालियों (शिफ्ट) में आयोजित की जा रही है. परीक्षा का समय इस प्रकार तय किया गया है.

पहली पाली (First Shift): सुबह 10:00 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:00 बजे तक चलेगी.
दूसरी पाली (Second Shift): दोपहर 2:00 बजे से शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चलेगी.

केंद्र पर कब पहुंचना है? (Reporting Time)
आयोग ने साफ तौर पर कड़े निर्देश दिए हैं कि किसी भी हाल में परीक्षा शुरू होने के समय से ठीक डेढ़ घंटा पहले सभी परीक्षार्थियों को अपने-अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाना है. समय को लेकर कोई भी लापरवाही आपको परीक्षा से बाहर कर सकती है. देरी से आने वालों को मुख्य गेट के अंदर जाने की अनुमति बिल्कुल नहीं मिलेगी.

पहली पाली के परीक्षार्थियों के लिए: रिपोर्टिंग का समय सुबह 8:30 बजे रखा गया है.
दूसरी पाली के परीक्षार्थियों के लिए: दोपहर 1:00 बजे तक हर हाल में सेंटर पर पहुंचना अनिवार्य होगा.

परीक्षा केंद्र और अभ्यर्थियों की संख्या
इस परीक्षा के लिए राजधानी पटना समेत राज्य के पांच प्रमुख जिलों में 69 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इस मुख्य परीक्षा में कुल मिलाकर करीब 36000 परीक्षार्थी शामिल होने जा रहे हैं.
क्या साथ लेकर जाना है?

ई-एडमिट कार्ड (E-Admit Card): यह सबसे जरूरी दस्तावेज है. इसका प्रिंट आउट जरूर साथ रखें.
वैध फोटो आईडी प्रूफ (Valid Photo ID): अपनी पहचान साबित करने के लिए आपको असली पहचान पत्र साथ रखना होगा. इसमें आप आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई भी एक ले जा सकते हैं.
पासपोर्ट साइज फोटो: अपने साथ हाल ही में खींची गई दो पासपोर्ट साइज फोटो जरूर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर मिलान किया जा सके.

क्या नहीं लेकर जाना है?

मोबाइल फोन
ब्लूटूथ डिवाइस या ईयरफोन
कैलकुलेटर या स्मार्टवॉच
डिजिटल डायरी, पामटॉप या पीडीए (PDA)
स्लाइड रूल या क्लिपबोर्ड

अगर कोई भी परीक्षार्थी इनमें से किसी भी चीज के साथ परीक्षा हॉल में पकड़ा गया तो उसकी परीक्षा तुरंत रद्द कर दी जाएगी और उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिहार, पुलिस, सब-इंस्पेक्टर, दारोगा, मुख्य, परीक्षा, आज, 1799, पदों, के, लिए, हजार, अभ्यर्थी, देंगे, एग्जाम</media:keywords>
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        <title>SAIL Recruitment 2026: देश के यह महारत्न कंपनी ले आई तगड़ा ऑफर, 1.40 लाख वाली नौकरी का दे रही मौका</title>
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        <description><![CDATA[ SAIL Recruitment 2026: अगर आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है और किसी बड़ी सरकारी कंपनी में शानदार सैलरी वाली नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी अपडेट सामने आई है. देश की मशहूर महारत्न कंपनी Steel Authority of India Limited यानी SAIL ने युवाओं के लिए बंपर भर्ती निकाली है. कंपनी ने यंग प्रोफेशनल के पदों पर भर्ती शुरू की है, जिसमें चयन होने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये तक की सैलरी दी जाएगी.
यह भर्ती खास तौर पर पश्चिम बंगाल में स्थित SAIL के बड़े स्टील प्लांट्स के लिए की जा रही है. सरकारी नौकरी के साथ शानदार सैलरी, बड़े संस्थान में काम करने का मौका और बेहतर करियर ग्रोथ की वजह से यह भर्ती इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए काफी खास मानी जा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस भर्ती में कौन आवेदन कर सकता है, कितनी वैकेंसी हैं, चयन कैसे होगा और आवेदन करने का तरीका क्या है.
किन पदों पर हो रही भर्ती?
SAIL ने यह भर्ती यंग प्रोफेशनल के पदों के लिए निकाली है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 48 पद भरे जाएंगे.ये पद पश्चिम बंगाल में स्थित SAIL के तीन बड़े प्लांट्स के लिए हैं. &amp;nbsp;जिसमें दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP), आईआईएससीओ स्टील प्लांट (IISCO) और अलॉय स्टील प्लांट (ASP) शामिल है.&amp;nbsp;
कितनी मिलेगी सैलरी?
इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत इसकी शानदार सैलरी है. चयनित उम्मीदवारों को हर महीने अधिकतम 1.40 लाख रुपये तक का वेतन दिया जाएगा. इसके अलावा कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को कई अन्य सुविधाएं भी मिल सकती हैं.
कौन कर सकता है आवेदन?
उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से फुल टाइम B.E. या B.Tech की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही ग्रेजुएशन में कम से कम 65 प्रतिशत अंक होना जरूरी है. यह भर्ती मुख्य रूप से इन इंजीनियरिंग ब्रांच के उम्मीदवारों के लिए है. जिसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के छात्र आवेदन कर सकते हैं. वहीं जिन उम्मीदवारों के पास B.E./B.Tech के अलावा M.Tech, M.E. या MBA जैसी अतिरिक्त डिग्री होगी, उन्हें चयन प्रक्रिया में फायदा मिल सकता है.
चयन प्रक्रिया कैसे होगी?
SAIL इस भर्ती के लिए कई चरणों में उम्मीदवारों का चयन करेगी. जिसमें सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन फॉर्म की जांच की जाएगी. इसके बाद जरूरत पड़ने पर कंपनी CBT यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा या एप्टीट्यूड टेस्ट आयोजित कर सकती है.फिर शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इसमें उम्मीदवारों के तकनीकी ज्ञान, व्यवहार और निर्णय क्षमता को परखा जाएगा. लास्ट &amp;nbsp;चयन से पहले उम्मीदवारों की मेडिकल जांच होगी.&amp;nbsp;
आवेदन शुल्क कितना है?
इस भर्ती के लिए सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. फीस का भुगतान ऑनलाइन मोड में करना होगा.बिना शुल्क जमा किए गए आवेदन फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
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आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 जून 2026 तय की गई है. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आखिरी समय का इंतजार न करें, क्योंकि उस दौरान वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ने से तकनीकी दिक्कत आ सकती है.
ऐसे करें आवेदन
1. सबसे पहले SAIL की आधिकारिक वेबसाइट https://www.sail.co.in/en पर जाएं.
2. वेबसाइट के Careers सेक्शन पर क्लिक करें.
3. अगर आप नए यूजर हैं, तो पहले One Time Registration करें.
4. इसके बाद लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें.
5. अपनी फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
6. ऑनलाइन माध्यम से आवेदन शुल्क जमा करें.
7. फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी ध्यान से जांच लें.
8. फाइनल सबमिट के बाद आवेदन फॉर्म की प्रिंट कॉपी सेव करके रख लें.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिहार पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों को राहत, कॉन्स्टेबल ऑपरेटर परीक्षा की तारीख बदली, जानें कब होगा एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. बिहार पुलिस दूरसंचार एवं तकनीकी विभाग में कॉन्स्टेबल ऑपरेटर भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अब नई तारीख के अनुसार परीक्षा देनी होगी. केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) ने परीक्षा की तारीख में बदलाव का फैसला लिया है.
दरअसल, बिहार पुलिस में सिपाही (प्रचालक) के 993 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित होनी थी. लेकिन इसी दिन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा NEET (UG) 2026 की स्थगित परीक्षा भी आयोजित की जा रही है. बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने बिहार पुलिस भर्ती और NEET, दोनों के लिए आवेदन किया हुआ है. ऐसे में दोनों परीक्षाएं एक ही दिन होने से उम्मीदवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता था.
अभ्यर्थियों की इसी समस्या को देखते हुए भर्ती बोर्ड ने समय रहते बड़ा फैसला लिया और परीक्षा को स्थगित कर नई तारीख घोषित कर दी. इस फैसले के बाद हजारों युवाओं ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अब उन्हें किसी एक परीक्षा को छोड़ने की मजबूरी नहीं होगी.
क्यों बदली गई परीक्षा की तारीख?
जब 21 जून को होने वाली दोनों परीक्षाओं का कार्यक्रम सामने आया, तब कई अभ्यर्थियों ने अपनी चिंता जाहिर की थी. उनका कहना था कि वे लंबे समय से दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और यदि दोनों एक ही दिन हुईं तो उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा.
स्थिति को समझते हुए केंद्रीय चयन पर्षद ने अभ्यर्थियों के हित को प्राथमिकता दी और परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला लिया. भर्ती बोर्ड का मानना है कि किसी भी उम्मीदवार को सिर्फ तारीखों के टकराव की वजह से अवसर से वंचित नहीं होना चाहिए.
अब कब होगी परीक्षा?
नई अधिसूचना के अनुसार बिहार पुलिस सिपाही (प्रचालक) भर्ती परीक्षा अब 28 जून 2026, रविवार को आयोजित की जाएगी. परीक्षा एक ही पाली में होगी और इसका समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक निर्धारित किया गया है.
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हालांकि उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचना होगा. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों को सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच परीक्षा केंद्र में प्रवेश करना होगा. निर्धारित समय के बाद पहुंचने वाले उम्मीदवारों को प्रवेश में दिक्कत हो सकती है.
15 जून से देख सकेंगे परीक्षा केंद्र की जानकारी
उम्मीदवारों के लिए एक और महत्वपूर्ण सूचना यह है कि वे 15 जून 2026 से अपनी परीक्षा संबंधी जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे. इसके लिए उम्मीदवारों को परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. वहां वे अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर और जन्म तिथि की मदद से लॉगिन कर सकेंगे. लॉगिन करने के बाद उम्मीदवार यह जान सकेंगे कि उनकी परीक्षा किस जिले में आयोजित की गई है. इससे उन्हें यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी करने में आसानी होगी.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पद्म श्री पुरस्कार क्या है?आखिर किसे और क्यों दिया जाता है देश का यह बड़ा सम्मान, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ देश में हर साल कई लोग अपने काम और प्रतिभा से ऐसी पहचान बनाते हैं जो समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है.ऐसे लोगों को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार पद्म पुरस्कार देती है.इनमें पद्म श्री को देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान माना जाता है. हाल ही में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में फिल्म, खेल, संगीत और समाज सेवा से जुड़े कई बड़े नामों को यह सम्मान दिया गया.
क्या है पद्म श्री पुरस्कार?
पद्म श्री भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है. इसकी शुरुआत साल 1954 में हुई थी.यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने कला, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा या अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो.
भारत में नागरिक सम्मान की श्रेणी इस प्रकार मानी जाती है.

भारत रत्न
पद्म विभूषण
पद्म भूषण
पद्म श्री

क्यों दिया जाता है यह सम्मान?
पद्म श्री पुरस्कार का उद्देश्य उन लोगों को पहचान देना है जिन्होंने अपने काम से समाज और देश को नई दिशा दी हो. कई बार ऐसे लोग भी इस सम्मान तक पहुंचते हैं जो बिना किसी बड़े प्रचार के सालों से अपने क्षेत्र में शानदार काम कर रहे होते हैं.यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने समाज के लिए प्रेरणादायक काम किया हो,साथ ही अपने क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल की हों और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया हो.
पद्म श्री के लिए कोई परीक्षा या सीधी भर्ती प्रक्रिया नहीं होती. व्यक्ति के काम और योगदान के आधार पर उसका चयन किया जाता है.सबसे खास बात यह है कि कोई भी भारतीय नागरिक इस सम्मान के लिए नामित किया जा सकता है.
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पद्म श्री पाने के लिए क्या योग्यता चाहिए?

किसी क्षेत्र में लंबे समय तक उत्कृष्ट काम करना.
समाज या देश के लिए विशेष योगदान.
लोगों के बीच सम्मानजनक पहचान.
अपने काम से दूसरों को प्रेरित करना.
राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना.

कैसे होता है चयन?
पद्म पुरस्कारों के लिए आम लोग भी किसी व्यक्ति का नाम भेज सकते हैं. इसके बाद गृह मंत्रालय की विशेष समिति सभी नामों की समीक्षा करती है.अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति की ओर से दी जाती है. इसके बाद गणतंत्र दिवस के आसपास पुरस्कार विजेताओं के नाम घोषित किए जाते हैं.
हाल ही में किन लोगों को मिला सम्मान?
हाल ही में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में कई चर्चित हस्तियों को सम्मानित किया गया. इनमें फिल्म, खेल और संगीत जगत के बड़े नाम शामिल रहे.

आर माधवन
रोहित शर्मा
हरमनप्रीत कौर
प्रोसेनजीत चटर्जी&amp;nbsp;
सतीश शाह
ममूटी
अलका याग्निक
धर्मेंद्र

क्या मिलता है पद्म श्री विजेताओं को?पद्म पुरस्कार पाने वाले लोगों को राष्ट्रपति द्वारा मेडल और सम्मान पत्र दिया जाता है.हालांकि इसके साथ कोई नकद इनाम नहीं दिया जाता, लेकिन देश में इसकी प्रतिष्ठा बेहद बड़ी मानी जाती है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सीएम श्री एडमिशन 31 मई तक जारी होगा क्लास 11 का रिजल्ट, ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित CM Shri Admission Test 2026 में शामिल हजारों छात्रों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है.कक्षा 11 में प्रवेश के लिए आयोजित इस परीक्षा का रिजल्ट 31 मई 2026 तक जारी किया जा सकता है.परीक्षा देने वाले छात्र लंबे समय से अपने परिणाम का इंतजार कर रहे हैं और अब जल्द ही उनका इंतजार खत्म होने वाला है.रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोरकार्ड और मेरिट लिस्ट ऑनलाइन चेक कर सकेंगे.इसके साथ ही चयनित छात्रों के लिए एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी.
किन कक्षाओं के लिए हुई थी परीक्षा
सीएम श्री एडमिशन टेस्ट 2026 का आयोजन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए किया गया था.यह परीक्षा कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश के लिए आयोजित हुई थी.दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए सीएम श्री स्कूल में छात्रों को आधुनिक शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम, बेहतर लैब और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार सुविधाएं दी जा रही हैं.
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एडमिशन के समय जरूरी होंगे ये दस्तावेज
रिजल्ट घोषित होने के बाद चयनित छात्रों को संबंधित स्कूल में जाकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी.इस दौरान कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होगी.इन दस्तावेजों में जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पिछली कक्षा की मार्कशीट, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हो सकते हैं.मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेशसीएम श्री स्कूल में एडमिशन पूरी तरह मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाएगा. शिक्षा विभाग का कहना है कि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाएगा.
ऐसे चेक करें सीएम श्री क्लास 11 रिजल्ट 2026

सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट edudel.nic.in पर जाएं.
होमपेज पर &amp;ldquo;CM Shri School Admission Test 2026&amp;rdquo; लिंक पर क्लिक करें.
अब रिजल्ट या मेरिट लिस्ट वाले विकल्प को खोलें.
रजिस्ट्रेशन आईडी और रोल नंबर दर्ज करें.
सबमिट बटन पर क्लिक करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा.
स्कोरकार्ड डाउनलोड करके उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>IGNOU Admission 2026: IGNOU जुलाई सेशन के लिए आवेदन शुरू, 15 जुलाई तक करें रजिस्ट्रेशन</title>
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        <description><![CDATA[ IGNOU Admission 2026: IGNOU जुलाई सेशन के लिए आवेदन शुरू, 15 जुलाई तक करें रजिस्ट्रेशन ]]></description>
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        <title>आदिवासी छात्रों ने रचा इतिहास, 48 बच्चों का देश के बड़े पर्यटन संस्थान में चयन</title>
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        <description><![CDATA[ पहाड़ों और जंगलों के बीच बसे छोटे-छोटे गांवों से निकलकर अब आदिवासी छात्र देश के बड़े शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रहे हैं. तमिलनाडु से आई एक प्रेरणादायक खबर ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो कोई भी सपना दूर नहीं होता. इस साल तमिलनाडु के आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों के 48 छात्रों ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है.
इन छात्रों ने भारत के टॉप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (IITTM) की प्रवेश परीक्षा पास कर दाखिला हासिल किया है. खास बात यह है कि इनमें 18 छात्राएं भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र इस संस्थान तक पहुंचने में सफल हुए हैं.
अक्सर यह माना जाता है कि बड़े शहरों के बच्चों को ही बेहतर अवसर मिलते हैं, लेकिन तमिलनाडु के आदिवासी छात्रों ने इस सोच को बदल दिया है. सीमित संसाधनों के बावजूद इन छात्रों ने मेहनत और लगन के दम पर वह कर दिखाया, जिसकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी मुश्किल थी. पिछले साल सिर्फ 11 आदिवासी छात्रों का चयन हुआ था, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर 48 तक पहुंच गई.
क्या है IITTM, जहां मिला दाखिला?
IITTM देश के सबसे प्रमुख पर्यटन और ट्रैवल मैनेजमेंट संस्थानों में से एक माना जाता है. यह संस्थान केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के तहत काम करता है और यहां पर्यटन, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और डेस्टिनेशन मैनेजमेंट जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाती है.
चयनित छात्र उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित कैंपस में तीन साल का बीबीए इन टूरिज्म एंड ट्रैवल कोर्स करेंगे. सबसे राहत की बात यह है कि इन छात्रों की पढ़ाई का पूरा खर्च तमिलनाडु सरकार उठाएगी. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी उच्च शिक्षा का मौका मिलेगा.
माता-पिता की चिंता बनी सबसे बड़ी चुनौती
अधिकारियों के अनुसार, आदिवासी इलाकों से बच्चों को देश के बड़े संस्थानों तक भेजने में सबसे बड़ी चुनौती माता-पिता की चिंता होती है. कई अभिभावक अपने बच्चों को घर और गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर पढ़ने भेजने में झिझक महसूस करते हैं. उन्हें बच्चों की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था और नए माहौल की चिंता रहती है. यही वजह है कि कई प्रतिभाशाली छात्र अवसर मिलने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाते.
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समझाइश और काउंसलिंग ने बदली तस्वीर
इस समस्या को दूर करने के लिए आदिवासी कल्याण विभाग ने खास पहल की. विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों में माता-पिता के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए. इन बैठकों में उन्हें बताया गया कि पर्यटन और ट्रैवल सेक्टर में कितने बड़े करियर अवसर मौजूद हैं.साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान हर तरह की सहायता दी जाएगी. अधिकारियों और शिक्षकों की इस कोशिश का असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को आगे बढ़ने की अनुमति दी.
छात्रों को दी गई खास ट्रेनिंग
सिर्फ परीक्षा पास कराना ही लक्ष्य नहीं था. विभाग ने छात्रों को प्रतियोगिता के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने का भी फैसला किया. इसके लिए कांचीपुरम के कुमिझी स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल हायर सेकेंडरी स्कूल में विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया गया.इस शिविर में छात्रों को अंग्रेजी बोलने, इंटरव्यू देने, ग्रुप डिस्कशन में हिस्सा लेने और आत्मविश्वास बढ़ाने की ट्रेनिंग दी गई. विशेषज्ञों ने उन्हें समझाया कि बड़े संस्थानों में चयन के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास भी जरूरी होता है.यह भी पढ़ें - PM YASASVI Scholarship: 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले छात्रों को मिल सकती है 1.25 लाख तक की मदद, जानें कौन कर सकता है आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों की कमान संभाल रहीं महिला डॉक्टर, जानें कैसे पहुंचीं इस मुकाम तक</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जिन अस्पतालों पर हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए भरोसा करते हैं. उनकी कमान अब महिला डॉक्टरों के हाथ में होगी. पहली बार ऐसा हुआ है जब राजधानी के तीन बड़े केंद्रीय सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी एक साथ तीन महिला डॉक्टरों को सौंपी गई है. स्वास्थ्य क्षेत्र में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में नए नियुक्ति आदेश जारी किए हैं. इसके तहत डॉ. अखिलांडेश्वरी प्रसाद को अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का निदेशक बनाया गया है. वहीं डॉ. हिमानी आहलूवालिया को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और डॉ. कविता रानी शर्मा को सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) की कमान सौंपी गई है.
पहली बार बना ऐसा रिकॉर्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली के सरकारी अस्पताल देश के सबसे बड़े और व्यस्त अस्पतालों में गिने जाते हैं. यहां सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में इन संस्थानों का नेतृत्व करना आसान काम नहीं माना जाता.
अब पहली बार तीन बड़े अस्पतालों की कमान एक साथ महिला डॉक्टरों के हाथ में आई है. स्वास्थ्य मंत्रालय के इस फैसले को चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले समय में और अधिक महिला डॉक्टरों को नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा.
लगभग तीन दशक का अनुभव लेकर आईं डॉ. अखिलांडेश्वरी प्रसाद
नई जिम्मेदारी संभालने वाली डॉ. अखिलांडेश्वरी प्रसाद का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है. उन्होंने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की और गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके बाद उन्होंने राम मनोहर लोहिया अस्पताल से रेडियो डायग्नोसिस में एमडी की डिग्री प्राप्त की.
डॉ. प्रसाद करीब 30 साल से अधिक समय से RML अस्पताल और ABVIMS से जुड़ी रही हैं. इस दौरान उन्होंने डॉक्टर, शिक्षक और प्रशासक के रूप में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. वह रेडियो डायग्नोसिस विभाग की प्रमुख भी रह चुकी हैं.
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उनका कहना है कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. साथ ही जरूरी सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखना और अस्पताल की व्यवस्था को और मजबूत बनाना भी उनके एजेंडे में शामिल है.
मरीजों को मिलेंगी और बेहतर सुविधाएं
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद डॉ. प्रसाद ने कई अहम योजनाओं पर काम करने की बात कही है. उनका लक्ष्य अस्पताल में मरीजों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना है.इसके लिए सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को पूरी तरह शुरू करने, अस्पताल के ढांचे को आधुनिक बनाने और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की तैयारी है. आने वाले समय में कागजों पर निर्भरता कम कर अस्पताल सेवाओं को अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा.
डॉ. हिमानी आहलूवालिया और डॉ. कविता रानी शर्मा को भी बड़ी जिम्मेदारी
जहां डॉ. हिमानी आहलूवालिया फिजियोलॉजी विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर हैं, वहीं डॉ. कविता रानी शर्मा एनेस्थीसिया विभाग की अनुभवी विशेषज्ञ मानी जाती हैं. डॉ. कविता रानी शर्मा को इससे पहले मार्च में सफदरजंग अस्पताल के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था. अब स्थायी नियुक्ति के साथ उन्हें अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है. वहीं डॉ. हिमानी आहलूवालिया 9 जुलाई से लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की नई निदेशक का कार्यभार संभालेंगी.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>JNU Hostel Rules 2026: विवाहित पीएचडी छात्रों को बड़ा झटका,JNU हॉस्टल में रहना हुआ महंगा</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU ने अपने हॉस्टल नियमों में बदलाव करते हुए विवाहित पीएचडी छात्रों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी ड्राफ्ट हॉस्टल मैनुअल के मुताबिक अब विवाहित शोधार्थियों को हॉस्टल में रहने के लिए पहले से ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा. इसके साथ ही हॉस्टल आवंटन और रहने की अवधि को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं.
JNU के महानदी हॉस्टल में विवाहित रिसर्च स्कॉलर्स के लिए अब सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि बढ़ा दी गई है. नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करनी होगी.इसके अलावा कमरे का किराया, बिजली-पानी का खर्च और अन्य सुविधाओं का शुल्क अलग से लिया जाएगा. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बढ़ती सुविधाओं और रखरखाव लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
हर साल बढ़ सकता है किराया
नई हॉस्टल नीति के अनुसार कमरे का किराया और अन्य चार्ज समय-समय पर बढ़ाए जा सकते हैं.बताया गया है कि विश्वविद्यालय हॉस्टल संचालन में आने वाले वास्तविक खर्च के आधार पर फीस तय करेगा. ऐसे में आने वाले वर्षों में छात्रों को और अधिक शुल्क देना पड़ सकता है.चार साल तक ही मिलेगी हॉस्टल सुविधा
जेएनयू प्रशासन ने हॉस्टल में रहने की समय सीमा भी तय कर दी है.नए नियमों के तहत पीएचडी छात्रों को प्रवेश की तारीख से अधिकतम चार साल तक ही हॉस्टल में रहने की अनुमति मिलेगी.इसके बाद छात्रों को हॉस्टल खाली करना होगा. विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे नए छात्रों को भी हॉस्टल सुविधा मिल सकेगी.
गर्भवती और बच्चों वाली महिलाओं को प्राथमिकता
ड्राफ्ट नियमों में गर्भवती शोधार्थियों और छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली महिलाओं को हॉस्टल आवंटन में प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे महिला शोधार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सुविधा मिलेगी.
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विदेशी छात्रों पर भी लागू होंगे नए नियम
JNU ने साफ किया है कि हॉस्टल से जुड़े ये नियम केवल भारतीय छात्रों पर ही नहीं बल्कि विदेशी छात्रों पर भी लागू होंगे. सभी छात्रों को हॉस्टल आवंटन से पहले नियमों का पालन करने से जुड़ा शपथ पत्र भी देना होगा.
सीमित सीटों के कारण सख्त हुए नियमविश्वविद्यालय में हॉस्टल सीटों की संख्या सीमित है जबकि हर साल बड़ी संख्या में छात्र आवेदन करते हैं.इसी वजह से प्रशासन ने हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया को और सख्त बनाया है. JNU के मुताबिक हॉस्टल सुविधा केवल पात्र छात्रों को ही उपलब्ध कराई जाएगी और आवंटन पूरी तरह तय नियमों के आधार पर होगा.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>CM Yogi Summer Vacation Letter 2026: बच्चों को ननिहाल&amp;ददिहाल ले जाएं, सीएम योगी की अभिभावकों से खास अपील</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गर्मी की छुट्टियों को लेकर बच्चों और अभिभावकों के नाम एक खास संदेश जारी किया है.सीएम योगी ने कहा कि समर वेकेशन केवल आराम का समय नहीं बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, परिवार से जुड़ाव और नई चीजें सीखने का बेहतरीन अवसर है.उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर परिवार, संस्कार और प्रकृति के करीब लाएं.
बच्चों को नई चीजें सीखने की सलाह
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि छुट्टियों के दौरान बच्चे अपनी पसंद और रुचियों को पहचान सकते हैं. उन्होंने छात्रों को किताबें पढ़ने, नई भाषा सीखने और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेने की सलाह दी.सीएम योगी ने कहा कि फोटोग्राफी, चित्रकारी, संगीत, बागवानी और पाक कला जैसी गतिविधियां बच्चों के मानसिक और रचनात्मक विकास में मदद करती हैं. इससे बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
ननिहाल-ददिहाल ले जाने की अपील
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से खास तौर पर अपील की कि वे छुट्टियों में बच्चों को उनके ननिहाल और ददिहाल जरूर लेकर जाएं. उन्होंने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी के साथ समय बिताने से बच्चों को पारिवारिक संस्कार, परंपराएं और जीवन के अनुभव सीखने का मौका मिलता है.उन्होंने यह भी कहा कि आज के डिजिटल दौर में बच्चे धीरे-धीरे परिवार और सामाजिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, इसलिए परिवार के साथ समय बिताना बेहद जरूरी है.
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पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ने का संदेश
सीएम योगी ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों से पौधे लगवाएं और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी दें ताकि उनमें प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित हो सके.मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह मजबूत जड़ों वाला पेड़ लंबे समय तक फल देता है, उसी तरह मजबूत संस्कार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव बनते हैं.
मुख्यमंत्री ने छुट्टियों में बच्चों को प्राकृतिक स्थलों की सैर कराने की सलाह भी दी. उन्होंने खास तौर पर दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य जैसे स्थानों के बारे में बताया.उन्होंने कहा कि ऐसी यात्राओं से बच्चों को प्रकृति, वन्यजीव और पर्यावरण के बारे में बेहतर जानकारी मिलती है.
प्लास्टिक मुक्त छुट्टियां मनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने लोगों से प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने की अपील भी की.उन्होंने कहा कि यात्रा या पिकनिक के दौरान कपड़े और जूट के बैग का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैलाएं.उन्होंने विश्वास जताया कि बच्चों की छोटी-छोटी अच्छी आदतें भविष्य में समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं.यह भी पढ़े - JNU Hostel Rules 2026: विवाहित पीएचडी छात्रों को बड़ा झटका,JNU हॉस्टल में रहना हुआ महंगा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>JEE Advanced 2026: जेईई एडवांस की Answer Key जारी, अब घर बैठे जानें कितने नंबर आ सकते हैं</title>
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        <description><![CDATA[ देश के लाखों इंजीनियरिंग छात्रों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. जेईई एडवांस्ड 2026 परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की ने 25 मई को JEE Advanced 2026 की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी है. अब छात्र अपने जवाबों का मिलान कर यह अंदाजा लगा सकते हैं कि परीक्षा में उनके कितने अंक आ सकते हैं और आईआईटी में दाखिले की उम्मीद कितनी मजबूत है.
परीक्षा के बाद से ही छात्र अपने प्रदर्शन को लेकर उत्सुक थे. कई उम्मीदवार सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संभावित कटऑफ और स्कोर को लेकर चर्चा कर रहे थे. ऐसे में आंसर-की जारी होने के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ होने लगी है. अब उम्मीदवार आधिकारिक उत्तरों के आधार पर अपने संभावित स्कोर का अनुमान लगा सकते हैं.
छात्रों को पहले मिली थी रिस्पॉन्स शीट
IIT रुड़की ने इससे पहले 21 मई को उम्मीदवारों की रिस्पॉन्स शीट जारी की थी. इसमें छात्रों द्वारा परीक्षा में दिए गए उत्तर दर्ज थे. अब आंसर-की आने के बाद छात्र अपनी रिस्पॉन्स शीट और आधिकारिक उत्तरों का मिलान कर सकते हैं.विशेषज्ञों का मानना है कि आंसर-की जारी होने के बाद छात्रों को अपने प्रदर्शन का काफी सही अंदाजा मिल जाता है. इससे उन्हें आगे की काउंसलिंग और कॉलेज विकल्पों की तैयारी करने में मदद मिलती है.
आंसर-की में क्या होता है?
JEE Advanced की आंसर-की में परीक्षा के दोनों पेपरों में पूछे गए सभी सवालों के सही जवाब दिए जाते हैं. छात्र अपने चुने गए उत्तरों की तुलना इन जवाबों से कर सकते हैं.
यदि किसी सवाल का जवाब सही मिलता है तो अंक जोड़ सकते हैं और गलत जवाब होने पर नेगेटिव मार्किंग के अनुसार अंक घटा सकते हैं. इस तरह उम्मीदवार अपने संभावित स्कोर का अनुमान लगा सकते हैं.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NEET UG Re-Exam 2026 : पंजाब के बाद अब इस राज्य में भी NEET छात्रों को मिलेगी फ्री बस, एडमिट कार्ड ही बनेगा टिकट
ऐसे डाउनलोड करें आंसर-की
अगर आपने JEE Advanced 2026 की परीक्षा दी है और आंसर-की डाउनलोड करना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया काफी आसान है.

सबसे पहले JEE Advanced की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
होमपेज पर दिखाई दे रहे &quot;JEE Advanced Answer Key 2026&quot; लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्मतिथि और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें.
जानकारी भरने के बाद लॉगिन करें.
स्क्रीन पर आंसर-की PDF दिखाई देगी.
PDF डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें.

अगर जवाब गलत लगे तो क्या करें?
आंसर-की जारी होने के साथ ही IIT रुड़की ने छात्रों को एक और महत्वपूर्ण सुविधा दी है. यदि किसी उम्मीदवार को लगता है कि किसी प्रश्न का उत्तर गलत दिया गया है या उसमें कोई त्रुटि है, तो वह इसके खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकता है.यह सुविधा उन छात्रों के लिए राहत लेकर आई है जो किसी उत्तर को लेकर असमंजस में हैं. कई बार विशेषज्ञों और छात्रों की आपत्तियों के बाद उत्तरों में बदलाव भी किया जाता है, जिससे अंतिम परिणाम प्रभावित हो सकता है.
कब तक दर्ज कर सकते हैं आपत्ति?
IIT रुड़की ने आंसर-की चैलेंज विंडो भी खोल दी है. छात्र 25 मई से 26 मई तक अपनी आपत्ति ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं.ध्यान रखने वाली बात यह है कि निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार की आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी. इसलिए जिन छात्रों को किसी उत्तर पर संदेह है, उन्हें समय रहते आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपनी चुनौती दर्ज करनी चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Physics की आंसर शीट मांगी तो पहला पन्ना छोड़कर मिली दूसरे की कॉपी, CBSE में कॉपी कांड?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/physics-की-आंसर-शीट-मांगी-तो-पहला-पन्ना-छोड़कर-मिली-दूसरे-की-कॉपी-cbse-में-कॉपी-कांड</link>
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        <description><![CDATA[ CBSE बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने छात्रों और अभिभावकों दोनों को हैरान कर दिया है. एक छात्र ने जब री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत अपनी फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगवाई, तो उसे देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. छात्र का दावा है कि जो कॉपी उसे भेजी गई है, वह उसकी है ही नहीं.
यह पूरा मामला अब सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक चर्चा का विषय बन चुका है. छात्र और उसका परिवार इसे गंभीर गड़बड़ी बता रहा है, जबकि CBSE ने शिकायत की जांच का भरोसा दिया है.
आखिर क्या है पूरा मामला?
कक्षा 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद अपने अंकों को लेकर सवाल उठाया. छात्र के अनुसार उसे फिजिक्स में उम्मीद से काफी कम अंक मिले थे. इसके बाद परिवार ने CBSE की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत आंसर कॉपी की स्कैन कॉपी मांगी. कुछ दिन बाद जब कॉपियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं, तब परिवार ने उन्हें ध्यान से देखना शुरू किया. लेकिन फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका देखते ही सभी हैरान रह गए.
परिवार का दावा है कि उत्तर पुस्तिका का पहला पन्ना, जिस पर रोल नंबर और अन्य जानकारी दर्ज है, छात्र का दिखाई देता है. लेकिन उसके बाद के पन्नों की लिखावट पूरी तरह अलग है. छात्र का आरोप है कि बाकी उत्तर किसी और छात्र द्वारा लिखे गए हैं.
परिवार ने दिखाए कई सवाल
ABP News से बातचीत में छात्र, उसके पिता और बड़े भाई ने अपनी चिंता जाहिर की. परिवार का कहना है कि उन्होंने सिर्फ फिजिक्स ही नहीं, बल्कि मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाएं भी मंगवाई थीं.
दिलचस्प बात यह है कि बाकी सभी विषयों की कॉपियों में लिखावट एक जैसी दिखाई देती है, लेकिन फिजिक्स की कॉपी में लिखावट पूरी तरह अलग नजर आती है. इसी वजह से परिवार को संदेह हुआ कि कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी तो नहीं हुई. छात्र के पिता का कहना है कि अगर कॉपी ही उनके बेटे की नहीं है तो सिर्फ री-चेकिंग कराने का कोई फायदा नहीं होगा. उनका आरोप है कि मामला सामान्य गलती से कहीं ज्यादा गंभीर लगता है.
बाकी विषयों में अच्छे नंबर, फिजिक्स में झटका?
केमिस्ट्री - 91 अंककंप्यूटर साइंस - 91 अंकफिजिकल एजुकेशन - 91 अंकइंग्लिश - 86 अंकफिजिक्स - 65 अंक
क्या कहते हैं परिवार के लोग
परिवार का कहना है कि फिजिक्स में मिले अंकों ने छात्र का कुल प्रतिशत प्रभावित किया. छात्र के बड़े भाई का दावा है कि कम प्रतिशत के कारण वेदांत कुछ महत्वपूर्ण अवसरों से भी वंचित रह गया. उनके अनुसार, बेहतर अंक होने पर छात्र JEE और Army Technical Entry Scheme जैसी प्रक्रियाओं में बेहतर स्थिति में हो सकता था.
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
वेदांत श्रीवास्तव ने अपनी परेशानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा की. उन्होंने लिखा कि कम अंक मिलने के बाद उन्होंने उत्तर पुस्तिका की कॉपी मंगवाई थी, लेकिन जो फिजिक्स की कॉपी उन्हें मिली, वह उनकी नहीं निकली. पोस्ट सामने आने के बाद लोगों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. कई छात्रों और अभिभावकों ने भी बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए.
क्या है नया सिस्टम?
CBSE की परीक्षाओं में OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम) एक आधुनिक डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था है. इस प्रक्रिया में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाता है. इसके बाद परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तर पुस्तिकाओं को देखकर जांच करते हैं और सीधे ऑनलाइन सिस्टम में अंक दर्ज करते हैं. इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जाती है.
अब CBSE ने क्या कहा?
मामले के सामने आने के बाद CBSE अधिकारियों ने छात्र को सलाह दी है कि वह री-इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खुलने का इंतजार करे और उसी पोर्टल के माध्यम से औपचारिक शिकायत दर्ज करे. बोर्ड अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि छात्र की शिकायत की पूरी जांच की जाएगी. फिलहाल CBSE की ओर से यह नहीं कहा गया है कि उत्तर पुस्तिका में कोई गलती हुई है, लेकिन शिकायत मिलने के बाद जांच का भरोसा जरूर दिया गया है.यह भी पढ़ें - JEE Advanced 2026: जेईई एडवांस की Answer Key जारी, अब घर बैठे जानें कितने नंबर आ सकते हैं ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Physics, की, आंसर, शीट, मांगी, तो, पहला, पन्ना, छोड़कर, मिली, दूसरे, की, कॉपी, CBSE, में, कॉपी, कांड</media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026 Paper Leak: कहां&amp;कहां पहुंची जांच की आंच? NEET पेपर लीक केस की पूरी टाइमलाइन</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-UG 2026 इस बार विवादों में घिर गई है. परीक्षा खत्म होने के कुछ दिनों बाद पेपर लीक की खबर सामने आई, जिसके बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया.लाखों छात्रों और उनके परिवारों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.पुणे की फिजिक्स टीचर पर बड़ा एक्शनइस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर फिजिक्स टीचर मनीषा संजय हवलदार की गिरफ्तारी को लेकर हो रही है. बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से एक निजी स्कूल में पढ़ा रही थीं और जल्द ही रिटायर होने वाली थीं. जांच एजेंसियों के मुताबिक उन्हें परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के तौर पर शामिल किया गया था.आरोप है कि परीक्षा से पहले कुछ सवाल दूसरे लोगों तक पहुंचाए गए थे.पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और इसके तुरंत बाद स्कूल प्रशासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. स्कूल ने इस पूरे मामले को शिक्षा व्यवस्था के भरोसे के खिलाफ बताया है और अपनी तरफ से भी जांच शुरू कर दी है.
कई शहरों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर लीक का मामला सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है. दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक, लातूर और अहिल्यानगर जैसे शहरों से आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.अब तक कुल 11 लोगों को पकड़ा जा चुका है.जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर पेपर लीक का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. अधिकारियों ने कई आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए हैं.
23 लाख छात्रों पर पड़ा असर
नीट-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी.देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर यह परीक्षा कराई गई थी.करीब 23 लाख छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था. लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों की मेहनत और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई.जैसे ही परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत मिली, मामला केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचाया गया. जांच के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया.इसके बाद दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई.
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NTA ने किए कई बड़े ऐलान
विवाद बढ़ने के बाद NTA ने छात्रों के लिए कई राहत भरे फैसले लिए हैं. एजेंसी ने साफ किया है कि री-एग्जाम के लिए छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा.साथ ही किसी भी छात्र से अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी.NTA ने फीस रिफंड की सुविधा भी शुरू की है. इसके लिए एक विशेष पोर्टल बनाया गया है, जहां छात्र अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट कर सकते हैं.साथ ही नए एडमिट कार्ड भी जल्द जारी किए जाएंगे.
छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी
पेपर लीक मामले के बाद छात्रों और अभिभावकों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है.कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरे साल मेहनत की थी, लेकिन इस विवाद की वजह से उनका मानसिक तनाव बढ़ गया है. सोशल मीडिया पर भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं.माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.यह भी पढ़ें - Physics की आंसर शीट मांगी तो पहला पन्ना छोड़कर मिली दूसरे की कॉपी, CBSE में कॉपी कांड? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Haryana ITI Admission 2026: हरियाणा ITI के लिए 2 जून से शुरू होंगे एडमिशन, 80 से ज्यादा ट्रेड्स के लिए कर सकेंगे अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ Haryana ITI Admission 2026: हरियाणा में आईटीआई से तकनीक और स्किल्ड बेस्ट कोर्स करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर आई है. कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग हरियाणा में शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए हरियाणा आईटीआई एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान कर दिया है. राज्य के सरकारी और प्राइवेट औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 2 जून 2026 से शुरू होगी. इच्छुक उम्मीदवार ऑफिशियल पोर्टल admissions.itiharyana.gov.in &amp;nbsp;पर जाकर आवेदन कर सकेंगे.
विभाग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार छात्र 15 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. इस बार राज्य भर के सैकड़ों सरकारी और प्राइवेट आईटीआई संस्थानों में इंजीनियरिंग और नॉन इंजीनियरिंग ट्रेड्स में दाखिले दिए जाएंगे. खास बात यह है कि 8वीं, 10वीं और 12वीं पास छात्र अलग-अलग ट्रेड्स के लिए आवेदन कर सकेंगे.&amp;nbsp;
80 से ज्यादा ट्रेड्स में मिलेगा एडमिशन&amp;nbsp;
हरियाणा आईटीआई एडमिशन 2026 के तहत राज्य की सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में 80 से ज्यादा ट्रेड्स में एडमिशन दिया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार इस बार लगभग 199 सरकारी और 186 निजी आईटीआई संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया चलेगी. इन ट्रेड्स में तकनीकी और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कोर्स शामिल है, जिनका उद्देश्य छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करना है. इंजीनियरिंग और नॉन इंजीनियरिंग दोनों तरह के ट्रेड्स में सीटें उपलब्ध रहेगी.&amp;nbsp;
करीब 1 लाख सीटों पर होंगे एडमिशन&amp;nbsp;
विभाग की ओर से इस बार करीब 1 लाख सीटों पर एडमिशन की तैयारी की जा रही है. राज्यपाल में आईटीआई संस्थानों में मेरिट के आधार पर छात्रों को सीट आवंटित की जाएगी. वहीं फरीदाबाद जिले के 9 सरकारी आईटीआई संस्थानों में 2026-27 के लिए 2180 सीटों पर एडमिशन की तैयारी पूरी कर ली गई है. डिपार्टमेंट का लक्ष्य इस बार भी सीटों को बढ़ाने का है. वहीं हरियाणा आईटीआई एडमिशन 2026 के लिए वहीं छात्र आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 8वीं, 10वीं या 12वीं बोर्ड की है. अलग-अलग ट्रेड के लिए योग्यता अलग-अलग निर्धारित की है. इसके अलावा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 14 वर्ष होनी चाहिए, कुछ स्पेशल ट्रेड्स में अलग-अलग शर्तें भी लागू हो सकती है.
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ऐसे करना होगा आवेदन&amp;nbsp;
छात्रों की एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से पूरी करनी होगी. आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद आवेदन फॉर्म भरना होगा और और डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे. डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद ट्रेड और इंस्टिट्यूट सेलेक्ट करना होगा. फिर फीस जमा करनी होगी, आवेदन फॉर्म सबमिट करने के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और सीट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी. &amp;nbsp;रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवारों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड मिलेगा, जिसकी मदद से वह आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. आईटीआई में प्रवेश के लिए आवेदन फीस कैटेगरी के अनुसार तय की गई है. जैसे जनरल कैटेगरी के लिए 100 रुपये, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 50 रुपये निर्धारित किए गए हैं और महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन फ्री है.&amp;nbsp;
यह डॉक्यूमेंट होंगे जरूरी&amp;nbsp;
आवेदन के दौरान छात्रों को कई जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे. इनमें आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और हस्ताक्षर शामिल है. इसके अलावा शैक्षणिक दस्तावेज जैसे आठवीं, दसवीं या 12वीं की मार्कशीट, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और चरित्र प्रमाण पत्र भी जरूरी होंगे. आरक्षित वर्ग के छात्रों को जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र भी अपलोड करना होगा. वहीं स्पेशल कैटिगरी के छात्रों के लिए प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ सकती है.
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM YASASVI Scholarship: 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले छात्रों को मिल सकती है 1.25 लाख तक की मदद, जानें कौन कर सकता है आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. कई ऐसे छात्र हैं जो पढ़ाई में तेज होते हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे ही होनहार छात्रों के लिए केंद्र सरकार एक खास योजना चला रही है, जिसका नाम है पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना (PM YASASVI Scholarship Scheme).
यह योजना उन छात्रों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है, जो मेहनत करके आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन आर्थिक परेशानी उनके रास्ते में रुकावट बन जाती है. इस योजना के तहत सरकार छात्रों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता देती है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें.
क्या है पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना?
पीएम यशस्वी केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति योजना है. इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से चलाया जाता है. योजना का मकसद ऐसे मेधावी छात्रों को आगे बढ़ाना है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं.इस स्कॉलरशिप के जरिए छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. इससे हजारों परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम होता है और बच्चों को अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिलता है.
किन छात्रों को मिलता है लाभ?
यह योजना खास तौर पर ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) वर्ग के छात्रों के लिए बनाई गई है. यदि छात्र इन वर्गों से संबंध रखता है और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो वह इस योजना का लाभ ले सकता है. सरकार का मानना है कि देश की तरक्की तभी संभव है जब हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के बराबर अवसर मिलें. इसी सोच के साथ इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है.
9वीं और 10वीं के छात्रों को कितनी मदद?
पीएम यशस्वी योजना के तहत 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अधिकतम 75 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है. यह राशि छात्रों की पढ़ाई से जुड़े जरूरी खर्चों को पूरा करने में मदद करती है. फीस जमा करने से लेकर किताबें खरीदने तक, इस सहायता का बड़ा लाभ मिलता है.
11वीं और 12वीं के छात्रों को मिलेगा ज्यादा लाभ
जैसे-जैसे कक्षाएं बढ़ती हैं, पढ़ाई का खर्च भी बढ़ जाता है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार 11वीं और 12वीं के छात्रों को हर साल 1.25 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराती है. इस रकम से छात्र बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं और उच्च शिक्षा की तैयारी कर सकते हैं.
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कॉलेज छात्रों के लिए भी है खास सुविधा
पीएम यशस्वी योजना सिर्फ स्कूल के छात्रों तक सीमित नहीं है. इसके अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम टॉप क्लास कॉलेज एजुकेशन भी चलाया जाता है. इस योजना के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को हर महीने 3,000 रुपये तक का रहने का खर्च दिया जाता है. इसके अलावा किताबों और स्टेशनरी के लिए 5,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी मिलती है.
आवेदन करने के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं. सबसे पहले छात्र का संबंध ओबीसी, ईबीसी या डीएनटी वर्ग से होना चाहिए. इसके अलावा छात्र के माता-पिता या अभिभावक की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. साथ ही छात्र किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी स्कूल में 9वीं से 12वीं कक्षा में नियमित रूप से पढ़ाई कर रहा हो. इन शर्तों को पूरा करने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन कैसे करें?
पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. छात्र घर बैठे आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) या यशस्वी स्कॉलरशिप योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होता है. आवेदन भरने के बाद छात्र अपनी स्कॉलरशिप की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं.यह भी पढ़ें - NEET UG 2026 Paper Leak: कहां-कहां पहुंची जांच की आंच? NEET पेपर लीक केस की पूरी टाइमलाइन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Best Skills for Students Before College : कॉलेज शुरू होने से पहले ही स्टूडेंट्स को सीख लेनी चाहिए ये स्किल्स, नौकरी में मिलता है डबल पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ Best Skills for Students Before College : आज के समय में सिर्फ अच्छी मार्कशीट या बड़ी डिग्री होना स्कसेस की गारंटी नहीं है. कंपनियां अब ऐसे युवाओं को नौकरी देना पसंद करती हैं, जिनके पास पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल और प्रोफेशनल स्किल्स भी हों. यही वजह है कि कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले ही स्टूडेंट्स को कुछ जरूरी लाइफ स्किल्स और सॉफ्ट स्किल्स सीख लेनी चाहिए.&amp;nbsp;आज कंपनियां ऐसे लोगों को हायर करती हैं जो टीम के साथ काम कर सकें, समस्याओं का समाधान निकाल सकें और बदलते माहौल के अनुसार खुद को ढाल सकें.
ऐसे में अगर कोई छात्र शुरुआत से ही जरूरी स्किल्स पर काम करना शुरू कर दे, तो उसे न सिर्फ कॉलेज लाइफ में फायदा मिलता है बल्कि नौकरी में भी बेहतर सैलरी और तेजी से ग्रोथ के मौके मिलते हैं. तो आइए जानते हैं कि कॉलेज शुरू होने से पहले ही स्टूडेंट्स को कौन सी स्किल्स सीख लेनी चाहिए, जिससे नौकरी में डबल पैकेज मिलता है.&amp;nbsp;
कॉलेज शुरू होने से पहले ही स्टूडेंट्स को सीख लेनी चाहिए ये स्किल्स
1. कम्युनिकेशन स्किल्स: आज हर क्षेत्र में अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग है. सिर्फ अंग्रेजी बोलना ही कम्युनिकेशन नहीं होता है, बल्कि अपनी बात सही तरीके से रखना, दूसरों को ध्यान से सुनना और कॉन्फिडेंस के साथ बातचीत करना भी इसका हिस्सा है. कॉलेज में प्रेजेंटेशन, ग्रुप डिस्कशन, इंटरव्यू और सेमिनार जैसी कई जगहों पर यह स्किल काम आती है. वहीं नौकरी में अच्छे कम्युनिकेशन वाले लोगों को जल्दी प्रमोशन और बेहतर सैलरी मिलने की संभावना ज्यादा होती है.कम्युनिकेशन स्किल्स से इंटरव्यू में अच्छा इंप्रेशन पड़ता है. लोगों के साथ नेटवर्क मजबूत होता है, साथ ही कॉन्फिडेंस बढ़ता है. टीम में काम करना आसान होता है. लीडरशिप क्वालिटी विकसित होती है. इसके लिए रोज अखबार और किताबें पढ़ें. लोगों से खुलकर बातचीत करें. मिरर के सामने बोलने की प्रैक्टिस करें. पब्लिक स्पीकिंग में हिस्सा लें
2. टीमवर्क स्किल्स: आज की कॉर्पोरेट दुनिया पूरी तरह टीमवर्क पर आधारित है. किसी भी कंपनी में अकेले काम नहीं होता है. हर प्रोजेक्ट में अलग-अलग लोगों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है.कॉलेज में ग्रुप प्रोजेक्ट्स और असाइनमेंट्स के जरिए छात्र यह सीख सकते हैं कि टीम के साथ कैसे काम किया जाता है.वहीं एक अच्छे टीम प्लेयर की पहचान दूसरों की बात सुनना, जरूरत पड़ने पर मदद करना और टीम के लक्ष्य को प्राथमिकता देना है. विवाद को शांत तरीके से सुलझाना भी है, जो छात्र कॉलेज में टीमवर्क सीख लेते हैं, उन्हें नौकरी में तेजी से ग्रोथ मिलती है.
3. टाइम मैनेजमेंट: कॉलेज लाइफ में पढ़ाई, दोस्त, सोशल लाइफ और एक्स्ट्रा एक्टिविटीज के बीच बैलेंस बनाना आसान नहीं होता है. ऐसे में टाइम मैनेजमेंट सबसे जरूरी स्किल बन जाती है, जो छात्र समय का सही यूज करना सीख लेते हैं, वे कम तनाव में ज्यादा काम कर पाते हैं. टाइम मैनेजमेंट से काम समय पर पूरा होता है और तनाव कम होता है. इससे पढ़ाई और पर्सनल लाइफ में बैलेंस रहता है. &amp;nbsp;साथ ही लक्ष्य जल्दी हासिल होते हैं. इसके लिए टू-डू लिस्ट बनाएं और जरूरी काम पहले करें. मोबाइल और सोशल मीडिया का समय सीमित करें. हर दिन का प्लान पहले से तैयार करें. यह स्किल नौकरी में भी बहुत काम आती है, क्योंकि कंपनियां समय पर काम पूरा करने वाले कर्मचारियों को ज्यादा महत्व देती हैं.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - CBSE 12th Re-evaluation 2026: CBSE री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन की आज लास्ट डेट, स्कैन कॉपी पाने के लिए फटाफट करें आवेदन
4. &amp;nbsp;प्रॉब्लम सॉल्विंग और क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स: लाइफ में कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं जहां तुरंत सही फैसला लेना पड़ता है.यहीं पर प्रॉब्लम सॉल्विंग और क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स काम आती हैं. यह स्किल कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में मदद मिलती है. दिमाग तेज और एक्टिव बनता है. नौकरी में बेहतर प्रदर्शन होता है. लीडरशिप क्वालिटी बढ़ती है. ऐसे में हर समस्या को अलग नजरिए से समझें. जल्दबाजी में फैसला न लें. नए आइडियाज पर सोचें. लॉजिकल तरीके से समाधान खोजें
5. &amp;nbsp;एडेप्टेबिलिटी: आज टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल रही है. हर दिन नए टूल्स, नई स्किल्स और नए काम सामने आ रहे हैं. ऐसे में वही लोग आगे बढ़ पाते हैं जो बदलाव को जल्दी अपनाना जानते हैं. एडेप्टेबिलिटी से नई चीजें जल्दी सीखने में मदद मिलती है. करियर में ग्रोथ तेज होती है. मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालना आसान होता है. कंपनियां ऐसे लोगों को ज्यादा पसंद करती हैं. खुद को अपडेट करने के लिए नई स्किल्स सीखते रहें. ऑनलाइन कोर्स करें. फीडबैक को पॉजिटिव तरीके से लें. टेक्नोलॉजी से जुड़े रहें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Jobs AI Cannot Replace: AI आने के बाद भी इन जॉब्स को नहीं होगा कोई खतरा, सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं ये नौकरियां ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Best, Skills, for, Students, Before, College, कॉलेज, शुरू, होने, से, पहले, ही, स्टूडेंट्स, को, सीख, लेनी, चाहिए, ये, स्किल्स, नौकरी, में, मिलता, है, डबल, पैकेज</media:keywords>
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        <title>NEET UG Re&amp;Exam 2026 : पंजाब के बाद अब इस राज्य में भी NEET छात्रों को मिलेगी फ्री बस, एडमिट कार्ड ही बनेगा टिकट</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Re-Exam 2026 : NEET री-एग्जाम की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. पंजाब के बाद अब हरियाणा सरकार ने भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए खास सुविधा शुरू करने का ऐलान किया है. Nayab Singh Saini ने घोषणा की है कि NEET री-एग्जाम में शामिल होने वाले छात्रों को 20 और 21 जून को हरियाणा रोडवेज की बसों में फ्री यात्रा की सुविधा दी जाएगी. सरकार का कहना है कि परीक्षा के दौरान छात्रों को यात्रा संबंधी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए यह फैसला लिया गया है. अक्सर परीक्षा वाले दिन बस और ट्रांसपोर्ट की समस्या की वजह से छात्रों का तनाव बढ़ जाता है.
ऐसे में राज्य सरकार चाहती है कि छात्र बिना किसी चिंता के समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकें और पूरी तरह परीक्षा पर फोकस कर सकें. यह फैसला उन छात्रों के लिए काफी मदद वाला माना जा रहा है जो दूर-दराज के इलाकों से परीक्षा केंद्र तक पहुंचते हैं. साथ ही छात्रों को अलग से कोई टिकट खरीदने की जरूरत नहीं होगी. उनका NEET एडमिट कार्ड ही बस में यात्रा करने के लिए टिकट का काम करेगा.
किन छात्रों को मिलेगा फ्री बस सेवा का फायदा?
हरियाणा सरकार के इस फैसले का फायदा उन सभी छात्रों को मिलेगा जो NEET री-एग्जाम देने जा रहे हैं. छात्र 20 जून और 21 जून को राज्य की किसी भी हरियाणा रोडवेज बस में फ्री यात्रा कर सकेंगे. इसके लिए बस में सफर करते समय छात्रों को सिर्फ अपना NEET एडमिट कार्ड दिखाना होगा. एडमिट कार्ड देखते ही उन्हें बिना किराया लिए यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी.
एडमिट कार्ड ही कैसे बनेगा टिकट?
सरकार ने साफ किया है कि छात्रों को किसी अतिरिक्त पास या डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं होगी. NEET परीक्षा का एडमिट कार्ड ही उनकी पहचान और यात्रा पास दोनों का काम करेगा. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी छात्र केवल ट्रांसपोर्ट की दिक्कत की वजह से परीक्षा से पीछे न रह जाए.&amp;nbsp;
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कैसे परीक्षा के तनाव को कम करने की कोशिश करी गई है?
NEET जैसी बड़ी परीक्षा को लेकर छात्रों में पहले से काफी दबाव रहता है. ऐसे में परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चिंता भी कई बार मानसिक तनाव बढ़ा देती है. सरकार का मानना है कि फ्री बस सेवा से छात्रों को काफी राहत मिलेगी और शांत मन से परीक्षा दे पाएंगे. हरियाणा सरकार ने कहा कि वह छात्रों के भविष्य और शिक्षा को लेकर गंभीर है और युवाओं को हर सहायता देने के लिए लगातार काम कर रही है.&amp;nbsp;
पहले CET छात्रों को भी मिली थी सुविधा
मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले CET परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को भी इसी तरह की फ्री यात्रा सुविधा दी गई थी. उस दौरान छात्रों को काफी फायदा मिला था. अब उसी व्यवस्था को NEET उम्मीदवारों के लिए भी लागू किया गया है. सरकार का मानना है कि इस तरह की सुविधाएं छात्रों का कॉन्फिडेंस बढ़ाती हैं और उन्हें बेहतर माहौल में परीक्षा देने में मदद करती हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Re-Exam, 2026, पंजाब, के, बाद, अब, इस, राज्य, में, भी, NEET, छात्रों, को, मिलेगी, फ्री, बस, एडमिट, कार्ड, ही, बनेगा, टिकट</media:keywords>
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        <title>CBSE पोर्टल की गड़बड़ियों पर केंद्र सरकार सख्त, IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञ करेंगे मदद</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने CBSE के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल में सामने आ रही तकनीकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है. छात्रों और अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद उन्होंने Indian Institute of Technology Madras और Indian Institute of Technology Kanpur के प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को CBSE की मदद के लिए तैनात करने के निर्देश दिए हैं.
लगातार सामने आईं तमाम दिक्कतें
हाल के दिनों में कई छात्रों ने री-इवैल्यूएशन और पोस्ट-एग्जाम सेवाओं के दौरान पोर्टल क्रैश, सर्वर डाउन, लॉगिन फेल होने, पेमेंट फेलियर और बाकी kayi तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें की थीं. इन समस्याओं के कारण कई छात्रों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे.
शिक्षा मंत्रालय ने किया हस्तक्षेप
इसे देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए IIT विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया. IIT मद्रास और IIT कानपुर की टीम अब CBSE के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल की पूरी तकनीकी व्यवस्था की जांच करेगी. यह टीम पोर्टल की स्थिरता, सर्वर की क्षमता और तकनीकी ढांचे की मजबूती का परीक्षण करेगी. इसके साथ ही लॉगिन ऑथेंटिकेशन सिस्टम, यूजर एक्सेस और पेमेंट गेटवे में आ रही समस्याओं की भी विस्तृत जांच की जाएगी.
इन चीजों को चेक करेंगे एक्सपर्ट्स
विशेषज्ञों की यह टीम उन सभी तकनीकी गड़बड़ियों का अध्ययन करेगी, जो इस वर्ष पोस्ट-एग्जाम री-इवैल्यूएशन सेवाएं शुरू होने के बाद सामने आई हैं. टीम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि छात्र बिना किसी परेशानी के अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी, वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन जैसी सेवाओं का फायदा उठा सकें.
शिक्षा मंत्री ने कही यह बात
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने CBSE को निर्देश दिए हैं कि सभी जरूरी सुधार प्राथमिकता के आधार पर किए जाएं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुचारू और छात्रों के भले के लिए बन सके.
इस प्रोसेस से क्या होगा फायदा?
मंत्रालय का मानना है कि IIT विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता से पोर्टल की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और भविष्य में छात्रों को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. यह कदम उन लाखों छात्रों के लिए राहत भरा माना जा रहा है जो अपने बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद &amp;nbsp;पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं का इंतजार कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें: छात्रों को वापस मिलेगा अतिरिक्त पैसा, स्कैन कॉपी आवेदन में गड़बड़ी को लेकर CBSE का बड़ा अपडेट ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>SSC GD Constable 2026 Exam Date: SSC ने अचानक बदली GD कांस्टेबल परीक्षा की डेट, अब इस दिन होगा एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ SSC GD Constable 2026 Exam Date Preponed: SSC GD कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है. कर्मचारी चयन आयोग यानी Staff Selection Commission ने GD कांस्टेबल परीक्षा की तारीख में बड़ा बदलाव किया है. आयोग ने आधिकारिक नोटिस जारी कर बताया है कि पहले यह परीक्षा 28 मई 2026 को आयोजित होनी थी, लेकिन अब परीक्षा एक दिन पहले यानी 27 मई 2026 को कराई जाएगी.
इस बदलाव के बाद लाखों उम्मीदवारों को अपनी तैयारी और यात्रा से जुड़े प्लान में बदलाव करना पड़ सकता है. ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि नई परीक्षा डेट्स को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी जारी रखें और SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लगातार नजर बनाए रखें.
क्यों बदली गई परीक्षा की तारीख?
SSC के जारी नोटिस के अनुसार, परीक्षा डेट में बदलाव ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी को लेकर किया गया है. दरअसल, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से छुट्टी की तारीख में सुधार किया गया था. इसी वजह से SSC को भी अपनी परीक्षा का शेड्यूल बदलना पड़ा. आयोग ने साफ कहा है कि पहले घोषित परीक्षा डेट सरकारी छुट्टी से टकरा रही थी, इसलिए अभ्यर्थियों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए परीक्षा को एक दिन पहले कराने का फैसला लिया गया.
अब SSC GD 2026 एग्जाम किस दिन होगा?
SSC की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार, पहले परीक्षा की तारीख 28 मई 2026 थी, लेकिन अब नई परीक्षा तारीख 27 मई 2026 है. उम्मीदवारों को अब इसी नई तारीख के अनुसार परीक्षा में शामिल होना होगा.
कब जारी होंगे एडमिट कार्ड?
SSC ने यह भी जानकारी दी है कि GD कांस्टेबल परीक्षा 2026 के एडमिट कार्ड परीक्षा से लगभग 2 से 3 दिन पहले जारी किए जाएंगे. उम्मीदवार अपने लॉगिन क्रेडेंशियल की मदद से आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे. एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र, परीक्षा समय, रिपोर्टिंग टाइम और जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाएंगे. इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उसमें दी गई सभी जानकारियों को ध्यान से पढ़ लें.
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किन पदों के लिए हो रही है परीक्षा?
यह परीक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), SSF और असम राइफल्स में राइफलमैन (GD) पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की जा रही है. हर साल लाखों युवा इस भर्ती परीक्षा में शामिल होते हैं और देश की सुरक्षा सेवाओं में नौकरी पाने का सपना देखते हैं.
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CUET&amp;UG 2026 परीक्षा टली, 28 मई की दोनों शिफ्ट स्थगित, जल्द होगी नई तारीख की घोषणा</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने CUET-UG 2026 परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है. 28 मई को होने वाली परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी की तारीख में बदलाव के बाद लिया गया है. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा इस दिन तय थी, उन्हें अब नई तारीख का इंतजार करना होगा. NTA ने साफ किया है कि संशोधित शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा.
क्यों टाली गई परीक्षा
NTA के मुताबिक, सरकार की ओर से ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी की तारीख में बदलाव किया गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए 28 मई 2026 को होने वाली CUET-UG परीक्षा की दोनों शिफ्ट्स को स्थगित कर दिया गया है.

CUET (UG) 2026 examination scheduled for 28 May 2026 (both shifts) stands postponed- in view of the change in the date of the Id-ul-Zuha (Bakrid) holiday as per the Government of India notification. Revised exam dates for affected candidates will be announced shortly: National&amp;hellip; pic.twitter.com/MWFA1doGth
&amp;mdash; ANI (@ANI) May 24, 2026



दोनों शिफ्ट्स प्रभावित
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि 28 मई को निर्धारित सुबह और दोपहर दोनों शिफ्ट्स की परीक्षाएं अब नहीं होंगी. इस दिन परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों पर यह फैसला लागू होगा. न्यूज एजेंसी ANI ने भी इस जानकारी अपने एक्स हैंडल से शेयर किया है.
नई तारीख का इंतजार
NTA ने कहा है कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें, ताकि उन्हें ताजा अपडेट मिल सके.
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क्या है CUET-UG परीक्षा
CUET-UG (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) देशभर में आयोजित होने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है. इसके जरिए केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों समेत 280 से ज्यादा संस्थानों में स्नातक कोर्स में दाखिला मिलता है.
आधिकारिक नोटिस भी जारी
NTA ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी किया है, जिसमें 22 मई के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के मेमोरेंडम का हवाला दिया गया है. साथ ही छात्रों को हेल्पलाइन नंबर और ईमेल के जरिए सहायता लेने की सुविधा भी दी गई है.
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE Fake Notice: CBSE ने वायरल नोटिस को बताया फर्जी, 12वीं स्कैन कॉपी और री&amp;चेकिंग प्रक्रिया जारी</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Fake Notice: सीबीएसई 12वीं बोर्ड रिजल्ट जारी होने के बाद अब स्कैन कॉपी रिचेकिंग प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर एक फर्जी नोटिस तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल नोटिस में दावा किया गया है कि 12वीं छात्रों के लिए आंसर शीट की फोटो कॉपी और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया रद्द कर दी है. हालांकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी बताया है. सीबीएसई ने साफ किया है कि स्कैन कॉपी, वेरिफिकेशन ऑफ मार्क्स और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी. बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वह किसी भी अफवाह या वायरल मैसेज पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही जानकारी ले.&amp;nbsp;
सीबीएसई ने जारी किया फेक न्यूज अलर्ट&amp;nbsp;
सीबीएसई ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि एक फर्जी सर्कुलर वायरल किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि स्कैन कॉपी और रिचेकिंग प्रक्रिया बंद कर दी गई है. बोर्ड ने इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है. बोर्ड ने कहा है कि मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सटीकता बनाए रखने के लिए सीबीएसई पूरी तरह प्रतिबद्ध है. छात्रों की हर वास्तविक समस्या की जांच से प्रक्रिया के तहत सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की ओर से की जाएगी.&amp;nbsp;
स्कैन कॉपी आवेदन की तारीख भी बढ़ाई गई&amp;nbsp;
तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए बोर्ड ने स्कैन कॉपी के लिए आवेदन की अंतिम तारीख भी बढ़ा दी है. पहले आवेदन की आखिरी तारीख 22 मई तय की गई थी बाद में इसे 23 मई किया गया और अब छात्रों को 24 मई 2026 तक आवेदन करने का मौका दिया गया है. बोर्ड का कहना है कि पोर्टल पर लगातार तकनीकी समस्याएं सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है, ताकि कोई भी छात्र आवेदन करने से वंचित न रह जाए.&amp;nbsp;
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पोर्टल पर आई कई तकनीकी परेशानियां&amp;nbsp;
20 मई से शुरू हुई प्रक्रिया के दौरान कई छात्रों ने पोर्टल में दिक्कतों की शिकायत की. शुरुआत में वेबसाइट लंबे समय तक बंद रही, इसके बाद कई छात्रों को पेमेंट फेल होने, आवेदन सफल न होने और स्कैन कॉपी डाउनलोड न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा. छात्रों ने यह भी शिकायत की कि पोर्टल पर गलती से प्रति कॉपी 69,000 फीस दिखाई जा रही है. लगातार शिकायतों के बाद बोर्ड ने तकनीकी टीम को समस्याएं ठीक करने के निर्देश दिए.&amp;nbsp;
कैसे होगी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया?
सीबीएसई के नई व्यवस्था के तहत छात्रों को सबसे पहले अपनी मूल्यांकन उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करनी होगी. इसके बाद छात्र चाहे तो अंकों के सत्यापन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. बोर्ड का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य छात्रों को पारदर्शी तरीके से अपनी कॉपी देखने का मौका देना है, ताकि किसी भी तरह की शंका दूर हो सके.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 14:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Fake, Notice:, CBSE, ने, वायरल, नोटिस, को, बताया, फर्जी, 12वीं, स्कैन, कॉपी, और, री-चेकिंग, प्रक्रिया, जारी</media:keywords>
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        <title>माइक्रोसॉफ्ट में कैसे मिलती है नौकरी, इसके लिए कौन&amp;से कोर्स करने बेहद जरूरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/माइक्रोसॉफ्ट-में-कैसे-मिलती-है-नौकरी-इसके-लिए-कौन-से-कोर्स-करने-बेहद-जरूरी</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में अगर किसी टेक कंपनी में नौकरी पाने का सपना सबसे ज्यादा युवा देखते हैं, तो उसमें माइक्रोसॉफ्ट का नाम सबसे ऊपर आता है. दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट में काम करना लाखों छात्रों और प्रोफेशनल्स का सपना होता है. आकर्षक सैलरी, शानदार वर्क कल्चर और नई तकनीकों पर काम करने का मौका युवाओं को इस कंपनी की ओर खींचता है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी कैसे मिलती है और इसके लिए कौन-से कोर्स करना सबसे ज्यादा जरूरी है?अगर आप भी माइक्रोसॉफ्ट में करियर बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कंपनी सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि मजबूत तकनीकी स्किल्स और समस्या सुलझाने की क्षमता को भी काफी महत्व देती है. आइए जानते हैं माइक्रोसॉफ्ट तक पहुंचने का पूरा रास्ता.कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई बन सकती है मजबूत आधारमाइक्रोसॉफ्ट में ज्यादातर तकनीकी पदों के लिए कंप्यूटर साइंस, आईटी या सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़ी पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाती है. B.Tech, B.E., BCA, MCA या कंप्यूटर साइंस में अन्य डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों के लिए मौके ज्यादा होते हैं. हालांकि सिर्फ डिग्री होना काफी नहीं है. कंपनी ऐसे उम्मीदवार चाहती है जिनकी कोडिंग और टेक्नोलॉजी पर मजबूत पकड़ हो.DSA और कोडिंग पर सबसे ज्यादा फोकसएक्सपर्ट्स की मानें तो माइक्रोसॉफ्ट के इंटरव्यू में Data Structures and Algorithms (DSA) सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. उम्मीदवार की सोचने और समस्या हल करने की क्षमता को इसी के जरिए परखा जाता है. Array, Graph, Queue जैसे टॉपिक्स पर मजबूत पकड़ जरूरी मानी जाती है. इसके साथ ही C++, Java, Python, JavaScript जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं का ज्ञान भी जरूरी है, क्योंकि ये कंपनी के तकनीकी कामों में बहुत इस्तेमाल होती हैं.
स्किल्स बढ़ा सकते हैं मौकाआज के समय में क्लाउड कंप्यूटिंग तेजी से बढ़ रहा है और माइक्रोसॉफ्ट का Azure प्लेटफॉर्म इस फील्ड में बड़ा नाम है. अगर उम्मीदवार Azure Cloud से जुड़ा सर्टिफिकेशन या कोर्स करता है, तो उसकी नौकरी पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
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AI और डेटा साइंस की बढ़ती डिमांडमाइक्रोसॉफ्ट अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर बहुत काम कर रही है. ऐसे में AI, ML और Data Science से जुड़े कोर्स करने वालों की मांग तेजी से बढ़ी है. Python और SQL जैसे टूल्स सीखना इस फील्ड में जरूरी माना जाता है.तीन तरीकों से होती है माइक्रोसॉफ्ट में भर्तीमाइक्रोसॉफ्ट में नौकरी पाने के मुख्य तौर पर तीन रास्ते हैं. इनमें कैंपस प्लेसमेंट शामिल हैं. IIT, NIT और बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में माइक्रोसॉफ्ट सीधे कैंपस भर्ती करती है. इंटर्नशिप के जरिए भी आप कंपनी से जुड़ सकते हैं. छात्र Microsoft Internship के जरिए कंपनी से जुड़ सकते हैं और अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें प्री-प्लेसमेंट ऑफर भी मिल सकता है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 14:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>AKTU में एडमिशन प्रक्रिया शुरू, कैसे करें बीटेक&amp;एमटेक से लेकर अलग&amp;अलग कोर्सों के लिए आवेदन?</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की प्रमुख तकनीकी यूनिवर्सिटी AKTU ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और अन्य प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्र अब आवेदन कर सकते हैं. एडमिशन प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में पूरी की जाएगी.
तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में AKTU उत्तर प्रदेश की बड़ी यूनिवर्सिटीज में गिनी जाती है. यहां से हर साल बड़ी संख्या में छात्र इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल कोर्स करके अपने करियर की शुरुआत करते हैं. ऐसे में छात्रों के लिए यह एडमिशन प्रक्रिया एक बड़ा अवसर मानी जा रही है.
बीटेक और एमटेक समेत कई कोर्सों में मिलेगा दाखिला
AKTU के तहत बीटेक, बीआर्क, बीफार्मा, एमटेक, एमबीए, एमसीए और अन्य तकनीकी व प्रोफेशनल कोर्सों में एडमिशन लिए जाएंगे. यूनिवर्सिटी से जुड़े सरकारी और निजी कॉलेजों में हजारों सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.छात्र अपनी योग्यता और प्रवेश परीक्षा के आधार पर आवेदन कर सकेंगे.
जरूरी दस्तावेज रखें तैयार
आवेदन के दौरान छात्रों को 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और संबंधित प्रवेश परीक्षा का स्कोरकार्ड अपलोड करना पड़ सकता है. इसलिए आवेदन से पहले सभी डॉक्यूमेंट तैयार रखना जरूरी है.
मेरिट और काउंसलिंग के आधार पर होगा चयन
बीटेक कोर्सों में दाखिला मुख्य रूप से जेईई मेन स्कोर के आधार पर किया जाएगा, जबकि अन्य कोर्सों में अलग-अलग पात्रता और मेरिट प्रक्रिया लागू होगी. सीट आवंटन ऑनलाइन काउंसलिंग के जरिए किया जाएगा.
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छात्र कैसे कर सकते हैं आवेदन?
आवेदन करने के लिए छात्र सबसे पहले AKTU की आधिकारिक वेबसाइट aktu.ac.in⁠ या काउंसलिंग पोर्टल uptac.admissions.nic.in⁠ पर जायें. वहां &amp;ldquo;New Registration&amp;rdquo; विकल्प पर क्लिक करके अपनी जानकारी भरें. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद लॉगिन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें. इसके बाद छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स चुनकर काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे. आवेदन करते समय सभी जानकारी सही भरना जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी मिलने पर आवेदन रद्द भी किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>UPSC Recruitment 2026: 194 पदों पर निकली बंपर वैकेंसी, 12 जून तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने वर्ष 2026 के लिए एक नई भर्ती अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत ग्रुप &amp;lsquo;A&amp;rsquo; और ग्रुप &amp;lsquo;B&amp;rsquo; के कुल 194 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. यह भर्ती प्रक्रिया विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों जैसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), डाक विभाग, भारतीय मौसम विभाग (IMD), पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI), रक्षा मंत्रालय, MSME मंत्रालय सहित कई विभागों में की जाएगी.
Advertisement No. 05/2026 के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू
UPSC द्वारा जारी Advertisement No. 05/2026 के तहत यह भर्ती &amp;ldquo;Direct Recruitment by Selection&amp;rdquo; के आधार पर की जाएगी. इस भर्ती अभियान में कुल 32 अलग-अलग प्रकार के पद शामिल हैं, जिनमें मैनेजर, असिस्टेंट कंट्रोलर, एयरवर्थनेस ऑफिसर सहित अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल हैं. इच्छुक और पात्र उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. View Pdf 
आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां और प्रक्रिया
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 23 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 12 जून 2026 शाम 6 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन केवल ऑनलाइन मोड के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ लें, जिसमें पदवार योग्यता, अनुभव, आयु सीमा और अन्य जरूरी शर्तें दी गई हैं.
योग्यता और चयन मानदंड
इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है. उम्मीदवारों के पास B.Sc, B.Tech/BE, M.A, M.Sc, M.E/M.Tech, PG Diploma या समकक्ष डिग्री होना आवश्यक है. कुछ पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में अनुभव भी मांगा गया है. चयन प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और अन्य चयन चरण शामिल हो सकते हैं.
आरक्षण और अन्य जानकारी
भर्ती में आरक्षण नीति के तहत UR, EWS, OBC, SC और ST वर्गों के लिए अलग-अलग सीटें निर्धारित की गई हैं. इसके अलावा PwBD (Persons with Benchmark Disabilities) उम्मीदवारों के लिए भी क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) लागू किया गया है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिक्तियों की संख्या सेवा आवश्यकताओं के अनुसार बदली जा सकती है.
UPSC Recruitment 2026: ऑनलाइन आवेदन के दौरान अपलोड करने होंगे ये जरूरी दस्तावेज, पूरी लिस्ट जारी
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा जारी Advertisement No. 05/2026 के तहत विभिन्न ग्रुप &amp;lsquo;A&amp;rsquo; और &amp;lsquo;B&amp;rsquo; पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन (CAF &amp;ndash; Common Application Form) भरते समय कई जरूरी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा. आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी दस्तावेज निर्धारित प्रारूप और गुणवत्ता के अनुसार अपलोड किए जाएं, अन्यथा आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है.
आवेदन के दौरान ये दस्तावेज अनिवार्य
उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान लाइव फोटो (वेबकैम/कैमरा से) कैप्चर करनी होगी, जो अनिवार्य है. इसके अलावा हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो और स्कैन किया हुआ हस्ताक्षर (एक ही पेज पर तीन सिग्नेचर, काले पेन से) अपलोड करना होगा. जन्म तिथि के प्रमाण के लिए 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र या मार्कशीट देना जरूरी है. शैक्षणिक योग्यता के लिए डिग्री या डिप्लोमा सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा, और यदि फाइनल डिग्री उपलब्ध नहीं है तो प्रोविजनल सर्टिफिकेट के साथ सभी वर्ष की मार्कशीट भी मान्य होगी.
अनुभव, आरक्षण और अन्य प्रमाण पत्र भी जरूरी
जिन पदों के लिए अनुभव आवश्यक है, उनके लिए संबंधित संगठन के प्रमुख द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें सेवा अवधि, वेतन और कार्य का विवरण शामिल हो. आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/EWS) के उम्मीदवारों को निर्धारित प्रारूप में जाति/समुदाय प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा. OBC उम्मीदवारों के लिए नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र अनिवार्य है, जबकि EWS श्रेणी के लिए वैध आय प्रमाण पत्र देना होगा. PwBD श्रेणी के उम्मीदवारों को मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा.
अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भी रखें ध्यान
पूर्व सैनिक या सरकारी कर्मचारियों को आयु में छूट का लाभ लेने के लिए संबंधित प्रमाण पत्र देना होगा. यदि किसी उम्मीदवार के पास समकक्ष योग्यता (Equivalent Qualification) है, तो उसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आदेश या पत्र अपलोड करना अनिवार्य होगा. नाम परिवर्तन की स्थिति में विवाह प्रमाण पत्र, तलाक डिक्री या शपथ पत्र देना होगा. इसके अलावा, किसी अन्य दावे जैसे प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन, पब्लिकेशन, GATE/NET आदि के लिए भी दस्तावेजी प्रमाण अपलोड करना जरूरी है.
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आधिकारिक वेबसाइट पर करें आवेदन
उम्मीदवार UPSC के ऑनलाइन भर्ती पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से संबंधित सभी विवरण, नोटिफिकेशन PDF और दिशा-निर्देश वहीं उपलब्ध हैं. उम्मीदवारों को सूचित किया जाता है कि आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई और अपडेट जानकारी ही मान्य होगी. भर्ती से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट को ही फॉलो करें.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Government Jobs After 12th/ग्रेजुएशन में पढ़ते&amp;पढ़ते क्लियर कर सकते हैं ये 5 सरकारी एग्जाम, मिलती है बंपर सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ नौकरी हो वो भी सरकारी और बस 18 साल की उम्र में शायद इससे अच्छा किसी छात्र के लिए क्या ही होगा, भारत में बहुत सारी ऐसी नौकरियां हैं जो ग्रैजुएशन नहीं बस 12th के डिग्री होने पर मिल सकती हैं ,और किसी भी छात्र को आत्मनिर्भर बना सकता है आइए जानते हैं कौन-कौन से है जाब के पोस्ट
नौकरियां जो हटा देंगी बेरोजगारी का तमगा
&amp;nbsp;वैसे तो कई सारी नौकरियां हैं जो ग्रैजुएशन में पढ़ते पढ़ते ही पाई जा सकती हैं, पर उनमें से भी कुछ बहुत अच्छी नौकरियां हैं, जिनको सभी छात्रों को जानना चाहिए,

युवा वर्ग के बहुत सारे बच्चों का सपना होता है आर्मी में जाना और इसमें जाने का रास्ता 12वीं के बाद ही खुल जाता है. NDA का एग्जाम देकर इसमें जा सकते हैं, जिससे सेना में अच्छी पोस्ट पर भर्ती मिलती है और अच्छी सैलरी भी मिलती है.
SSC CHSL भी एक बहुत अच्छा विकल्प होता है 12th के बाद, इसमें भी अच्छे पोस्ट पर भर्ती सेवा चयन आयोग द्वारा करवाया जाता है
रेलवे से जुड़े बहुत सारी नौकरियां इंटरमीडिएट के बाद ही मिल सकती हैं, और इनकी सैलरी भी अच्छी होती है
बैंक की नौकरियां भी 12 पढ़ने के बाद छात्र inko पाने के पात्र हो जाते हैं, बैंक की नौकरियां जैसे RRB क्लर्क, IBPS क्लर्क, SBI क्लर्क आदि एग्जाम्स भी छात्र आराम से ग्रेडेशन में पढ़ते पढ़ते दे सकते हैं, इनकी सैलरी 30000 से ज्यादा ही होती है
सेना का अग्निवीर कार्यक्रम भी युवाओं के लिए सही समय में रोजगार पाने का जरिया बनकर सामने आया है, इसमें मेहनती और शारीरिक रूप से कुशल छात्र आराम से चयनित हो सकते हैं और देश की सेवा के साथ साथ अच्छा पैसा भी कमा सकते हैं

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कम Age में नौकरी होने के फायदे
यदि छात्र या कोई युवा 18 से 20 वर्ष की आयु में ही नौकरी पा जाता है तो वह बहुत कुछ कर सकता है, उसके पास जब कमाई का श्रोत होगा तो वह आराम से अपने मन के काम पर ध्यान भी दे पाएगा और जीवन में भी सुखी रहेगा, परिवार और मानसिक रूप से उसपर ज्यादा बोझ भी नहीं रहेगा.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>योगी सरकार का बड़ा प्लान? शिक्षामित्रों को जल्द मिल सकता है नया तोहफा</title>
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        <description><![CDATA[ योगी सरकार का बड़ा प्लान? शिक्षामित्रों को जल्द मिल सकता है नया तोहफा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>​UPSC Prelims 2026: UPSC प्रीलिम्स ​2026 परीक्षा कल, एग्जाम सेंटर पर भूलकर भी ये गलतियां न करें छात्र</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsc-prelims-2026-upsc-प्रीलिम्स-2026-परीक्षा-कल-एग्जाम-सेंटर-पर-भूलकर-भी-ये-गलतियां-न-करें-छात्र</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/upsc-prelims-2026-upsc-प्रीलिम्स-2026-परीक्षा-कल-एग्जाम-सेंटर-पर-भूलकर-भी-ये-गलतियां-न-करें-छात्र</guid>
        <description><![CDATA[ UPSC Prelims 2026: देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 अब बिल्कुल करीब है. 24 मई को लाखों अभ्यर्थी IAS, IPS, IFS और अन्य बड़ी सरकारी सेवाओं का सपना लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचेंगे. लेकिन हर साल कुछ उम्मीदवार ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी वजह से उन्हें परीक्षा देने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
कोई एडमिट कार्ड भूल जाता है तो कोई समय पर केंद्र नहीं पहुंच पाता. ऐसे में परीक्षा के एक दिन पहले जरूरी है कि सभी उम्मीदवार अपनी तैयारी के साथ-साथ जरूरी दस्तावेज और नियमों की भी जांच कर लें. यहां जानिए परीक्षा केंद्र पर क्या लेकर जाना है, क्या नहीं ले जाना है और किन बातों का विशेष ध्यान रखना होगा.UPSC प्रीलिम्स परीक्षा में प्रवेश पाने के लिए एडमिट कार्ड सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है. इसके बिना परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे एडमिट कार्ड का साफ और स्पष्ट प्रिंटआउट अपने साथ रखें. परीक्षा केंद्र का पता, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा शिफ्ट की जानकारी एडमिट कार्ड पर ही दी गई होती है. इसलिए एक बार सभी विवरण अच्छी तरह जांच लेना जरूरी है. सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त प्रिंट कॉपी भी साथ रख सकते हैं.पहचान पत्र भी होगा जरूरी
उम्मीदवारों को एक मूल फोटो पहचान पत्र भी साथ रखना होगा. आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी पहचान पत्र मान्य होंगे. परीक्षा केंद्र पर डिजिटल कॉपी या फोटो कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी, इसलिए मूल पहचान पत्र साथ रखना जरूरी है. UPSC ने उम्मीदवारों को दो हालिया पासपोर्ट साइज फोटो भी साथ रखने की सलाह दी है. यदि एडमिट कार्ड पर लगी तस्वीर साफ नहीं दिखती है या पुरानी है, तो ये फोटो सत्यापन के दौरान काम आ सकती हैं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NDA ll Recruitment 2026: देशसेवा का सुनहरा मौका, NDA-II भर्ती में करें आवेदन; 394 पोस्ट पर भर्ती शुरू
क्या ले जा सकते हैंपरीक्षा हॉल के अंदर केवल सीमित सामान ले जाने की अनुमति होगी. उम्मीदवार ब्लैक बॉल प्वाइंट पेन, पारदर्शी पानी की बोतल और साधारण एनालॉग घड़ी अपने साथ रख सकते हैं. OMR शीट पर उत्तर भरने के लिए केवल काले बॉल प्वाइंट पेन का उपयोग करना होगा. दूसरी ओर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन, कैलकुलेटर, नोट्स, किताबें, बैग, वॉलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी. यदि किसी उम्मीदवार के पास प्रतिबंधित सामान पाया जाता है, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है.समय से पहुंचेंUPSC ने उम्मीदवारों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की भी सलाह दी है. आमतौर पर परीक्षा शुरू होने से करीब 30 मिनट पहले प्रवेश बंद कर दिया जाता है. इसलिए अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए केंद्र पर पहले पहुंचना बेहतर रहेगा. सुरक्षा जांच और दस्तावेज सत्यापन में भी समय लग सकता है. ऐसे में सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखकर और परीक्षा केंद्र का रास्ता पहले ही देख लेने से अनावश्यक तनाव से बचा जा सकता है. UPSC प्रीलिम्स सिविल सेवा परीक्षा का पहला चरण है और यहीं से देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं तक पहुंचने का रास्ता शुरू होता है. इसलिए उम्मीदवारों को नियमों का पालन करते हुए पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल होना चाहिए.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UP Jobs 2026: युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! यूपी में टेक्निकल असिस्टेंट के 2759 पदों पर निकली भर्ती ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>BCI का बड़ा एक्शन! 9 लॉ कॉलेजों में एडमिशन पर रोक, छात्रों में मचा हड़कंप</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर में लॉ की पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए यह खबर बेहद अहम है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कई लॉ कॉलेजों में नियमों की अनदेखी और खराब शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा एक्शन लिया है. अचानक हुई निरीक्षण प्रक्रिया में कई कॉलेज तय मानकों पर खरे नहीं उतरे. इसके बाद BCI ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए 9 लॉ कॉलेजों में नए एडमिशन पर रोक लगाने का फैसला किया. इस फैसले का असर हजारों छात्रों पर पड़ सकता है, खासकर उन छात्रों पर जो इस साल लॉ कॉलेज में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे हैं.
BCI ने क्यों लिया बड़ा फैसला?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की विशेष टीम ने कई लॉ कॉलेजों का औचक निरीक्षण किया था. जांच के दौरान कॉलेजों में शिक्षकों की कमी, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइब्रेरी की अपर्याप्त व्यवस्था और पढ़ाई के कमजोर स्तर जैसी कई गंभीर खामियां सामने आईं. BCI का कहना है कि कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है.जो संस्थान तय मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
इन 9 लॉ कॉलेजों में एडमिशन पर लगी रोक

सरदार पटेल लॉ कॉलेज
सीबी सिंह लॉ कॉलेज
राजीव गांधी विधि महाविद्यालय
कौटिल्य लॉ कॉलेज
अब्दुल रज्जाक लॉ कॉलेज
वीर कुंवर कॉलेज ऑफ लॉ
एसजीएन खालसा लॉ पीजी कॉलेज
राजेश पांडे कॉलेज ऑफ लॉ
श्री गजेंद्र सिंह स्मृति विधि महाविद्यालय

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छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले के बाद उन छात्रों को बड़ा झटका लगा है जो इन कॉलेजों में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे थे. अब 2026-27 सत्र में इन संस्थानों में नए दाखिले नहीं होंगे. ऐसे में छात्रों को दूसरे मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेजों की तलाश करनी पड़ सकती है. हालांकि, पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों को लेकर अलग दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;अगर आप किसी अन्य यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, तो एडमिशन लेने से पहले कॉलेज की BCI मान्यता जरूर जांच लें. साथ ही फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेसमेंट रिकॉर्ड की जानकारी भी हासिल करें ताकि भविष्य में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>PhD के बाद अब M.Tech एडमिशन में भी गेट स्कोर होगा मान्य, दिल्ली यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने तकनीकी शिक्षा से जुड़े छात्रों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब विश्वविद्यालय के MTech कोर्स में दाखिले के लिए पहली बार GATE स्कोर का इस्तेमाल किया जाएगा. अब तक GATE स्कोर का उपयोग मुख्य रूप से IIT, NIT और दूसरे तकनीकी संस्थानों में प्रवेश के लिए किया जाता था, लेकिन अब दिल्ली यूनिवर्सिटी भी इस सूची में शामिल हो गई है.
खास बात यह है कि जिन छात्रों के पास GATE स्कोर नहीं होगा, उनके लिए भी अवसर खत्म नहीं होंगे. विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि यदि सीटें खाली रह जाती हैं तो CUET-PG स्कोर के आधार पर भी दाखिला दिया जाएगा. ऐसे में यह फैसला हजारों इंजीनियरिंग छात्रों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में दाखिले के लिए GATE स्कोर को प्राथमिकता दी जाएगी. विश्वविद्यालय के एडमिशन डीन हनीत गांधी के अनुसार, पहले GATE स्कोर का उपयोग केवल PhD में प्रवेश के लिए किया जाता था, लेकिन अब MTech कोर्स में भी इसकी मदद ली जाएगी. विश्वविद्यालय सबसे पहले GATE स्कोर वाले उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार करेगा और सीटों का आवंटन करेगा.
AICTE की मंजूरी के बाद लिया गया फैसला
विश्वविद्यालय ने बताया कि MTech कोई नया कोर्स नहीं है. यह कोर्स पहले से चल रहा है, लेकिन हाल ही में इसे AICTE यानी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की मंजूरी मिली है. इसी मंजूरी के बाद एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है और GATE स्कोर को शामिल किया गया है. माना जा रहा है कि इससे कोर्स की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस कोर्स में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास BTech, BE, BSc Engineering, MSc या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए. साथ ही डिग्री संबंधित तकनीकी विषयों में होनी जरूरी है. इनमें Electronics and Communication Engineering, Electrical Engineering, Instrumentation Engineering और Radio Physics and Electronics Engineering जैसे विषय शामिल हैं. किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र आवेदन के पात्र होंगे.
कुल 30 सीटों पर होगा दाखिला
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस MTech कोर्स के लिए कुल 30 सीटें तय की हैं. इनमें 13 सीटें सामान्य वर्ग के लिए, 8 सीटें OBC वर्ग के लिए, 4 सीटें SC वर्ग के लिए, 2 सीटें ST वर्ग के लिए और 3 सीटें EWS वर्ग के लिए आरक्षित हैं. सभी वर्गों में प्रवेश मेरिट के आधार पर किया जाएगा.
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CUET-PG उम्मीदवारों के लिए भी खुला रहेगा रास्ता
विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि CUET-PG पास छात्र भी इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि सीट आवंटन में सबसे पहले GATE स्कोर वाले उम्मीदवारों को मौका मिलेगा. यदि किसी भी श्रेणी में सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन सीटों को CUET-PG 2026-27 के उम्मीदवारों की मेरिट के आधार पर भरा जाएगा. यानी जिन छात्रों ने GATE नहीं दिया है, वे भी इस कोर्स में प्रवेश पाने की उम्मीद रख सकते हैं.
CSAS-PG पोर्टल से नहीं होगा एडमिशन
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस MTech कोर्स में दाखिला सामान्य PG एडमिशन की तरह CSAS-PG पोर्टल के माध्यम से नहीं होगा. इसके लिए विश्वविद्यालय अलग से एक विशेष पोर्टल शुरू करेगा, जहां इच्छुक छात्र आवेदन कर सकेंगे. इससे पूरी प्रक्रिया को तकनीकी कोर्स की जरूरतों के अनुसार संचालित किया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>जॉब मार्केट में नया ट्रेंड, AI से तैयार रिज्यूमे को मिल रहा ग्रीन सिग्नल</title>
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        <description><![CDATA[ जॉब मार्केट में नया ट्रेंड, AI से तैयार रिज्यूमे को मिल रहा ग्रीन सिग्नल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE की नई भाषा नीति पर विवाद, छात्रों के भविष्य को लेकर उठे बड़े सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Three Language Policy: सीबीएसई ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी कर कहा कि 2026-27 सत्र से कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी.बोर्ड के मुताबिक, इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा.
अगर कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या दूसरी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो उसे तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुना जा सकेगा.सीबीएसई का कहना है कि यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के तहत लिया गया है.
रिपोर्ट्स के अनुसार इस फैसले के खिलाफ दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई के अभिभावकों और शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि छात्रों को अचानक नई भाषा पढ़ने के लिए मजबूर करना सही नहीं है. उनका कहना है कि कई छात्र पिछले कई वर्षों से विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं और अब बीच में भाषा बदलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी. साथ ही, कक्षा 9 और 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं, ऐसे में अतिरिक्त विषय छात्रों पर दबाव बढ़ा सकता है.
CBSE पर वादा बदलने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि अप्रैल 2026 में CBSE ने संकेत दिया था कि यह नियम 2029-30 से लागू किया जाएगा. इसी आधार पर स्कूलों और परिवारों ने अपनी तैयारी की थी. लेकिन मई 2026 में जारी नए सर्कुलर में इसे जुलाई 2026 से लागू करने की बात कही गई. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अचानक फैसले में बदलाव से छात्रों, स्कूलों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है.
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शिक्षकों और किताबों की कमी पर उठे सवालयाचिका में यह भी कहा गया है कि कई स्कूलों में नई भाषाओं के लिए पर्याप्त शिक्षक और किताबें उपलब्ध नहीं हैं. कुछ जगहों पर दूसरे विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों से भाषा पढ़ाने की बात कही गई है. अभिभावकों का कहना है कि बिना पूरी तैयारी के नई नीति लागू करने से छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है.
विदेशी भाषा शिक्षकों पर भी पड़ सकता है असरयाचिकाकर्ताओं ने यह भी चिंता जताई है कि नई व्यवस्था से विदेशी भाषाएं पढ़ाने वाले शिक्षकों और संस्थानों पर असर पड़ सकता है. अगर विदेशी भाषाएं मुख्य तीन-भाषा प्रणाली से बाहर हो जाती हैं, तो कई शिक्षकों के रोजगार पर भी प्रभाव पड़ सकता है.
छात्रों पर बढ़ सकती है पढ़ाई का दबावअभिभावकों का कहना है कि कक्षा 9 और 10 पहले से ही छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं. ऐसे समय में नई भाषा जोड़ने से मानसिक और शैक्षणिक दबाव बढ़ सकता है.याचिका में यह भी कहा गया है कि नई शिक्षा नीति में छात्रों को विकल्प और लचीलापन देने की बात कही गई थी, लेकिन मौजूदा फैसला उसी भावना के खिलाफ माना जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>UP BEd Admit Card 2026: यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, एक क्लिक में करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है.बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने &amp;nbsp;यूपी बीएड जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन 2026 का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है.जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था, वे अब आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं.
31 मई 2026 को आयोजित होगी परीक्षा
यूपी बीएड जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन 2026 का आयोजन 31 मई 2026 को किया जाएगा. परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आज से डाउनलोड के लिए उपलब्ध करा दिए गए हैं. उम्मीदवार अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड की मदद से हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं. परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड साथ ले जाना जरूरी होगा.यूपी बीएड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 10 फरवरी 2026 से शुरू हुई थी.आवेदन की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की गई थी.वहीं लेट फीस के साथ उम्मीदवारों को 5 मई 2026 तक आवेदन करने का मौका दिया गया था.आवेदन फॉर्म में सुधार करने की प्रक्रिया 6 मई से 10 मई 2026 तक चली थी.
योग्यता&amp;nbsp;इस प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवार के पास ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी है. इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए थे.
कई विश्वविद्यालयों में मिलेगा प्रवेशयूपी बीएड एंट्रेंस एग्जाम 2026 के जरिए प्रदेश के कई बड़े विश्वविद्यालयों में बीएड कोर्स में दाखिला मिलेगा.इनमें लखनऊ विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, डॉ. भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय समेत कई विश्वविद्यालय शामिल हैं.यह भी पढ़ें - जॉब मार्केट में नया ट्रेंड, AI से तैयार रिज्यूमे को मिल रहा ग्रीन सिग्नल
परीक्षा केंद्र पर ये डॉक्यूमेंट साथ रखेंउम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड के साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र ले जाना होगा. इसके अलावा अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड में दिए गए सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ लें ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो.
यूपी बीएड एडमिट कार्ड ऐसे करें डाउनलोड

सबसे पहले bujhansi.ac.in⁠ पर जाएं.
होम पेज पर &amp;ldquo;UP B.Ed JEE 2026 Admit Card&amp;rdquo; लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना Registration Number और Password / Date of Birth दर्ज करें.
इसके बाद Submit बटन पर क्लिक करें.
स्क्रीन पर आपका Admit Card खुल जाएगा.
एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और उसका प्रिंट आउट निकाल लें.यह भी पढ़ें - CBSE की नई भाषा नीति पर विवाद, छात्रों के भविष्य को लेकर उठे बड़े सवाल
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BPSSC Recruitment 2026: बिहार पुलिस वायरलेस विभाग में निकली नई भर्ती, डिप्लोमा पास करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बिहार पुलिस में भर्ती पाने का शानदार मौका आया है. बीपीएसएससी ने बिहार पुलिस रेडियो वायरलेस विभाग में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर टेक्निकल भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.इस भर्ती अभियान के तहत कुल 22 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. खास बात यह है कि इस भर्ती में टेक्निकल डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.लंबे समय से पुलिस विभाग में टेक्निकल भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है..&amp;nbsp;कौन कर सकता है आवेदन?
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) या विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड में डिप्लोमा होना जरूरी है. टेक्निकल फील्ड से पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों के लिए यह सरकारी नौकरी पाने का अच्छा अवसर माना जा रहा है.
उम्र सीमा की पूरी जानकारी
भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है. पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष रखी गई है, जबकि महिला उम्मीदवार 40 वर्ष तक आवेदन कर सकती हैं. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी.आयु की गणना 1 अगस्त 2025 के आधार पर की जाएगी, इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन से पहले अपनी पात्रता जरूर जांच लेनी चाहिए.
फिजिकल टेस्ट में क्या होगा?
बिहार पुलिस ASI टेक्निकल भर्ती में लिखित परीक्षा के साथ फिजिकल टेस्ट भी लिया जाएगा.पुरुष उम्मीदवारों के लिए सामान्य और पिछड़ा वर्ग में न्यूनतम लंबाई 165 सेंटीमीटर रखी गई है, जबकि SC/ST वर्ग के लिए यह 160 सेंटीमीटर होगी. महिला उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम लंबाई 155 सेंटीमीटर तय की गई है.
इसके अलावा पुरुष उम्मीदवारों के लिए सीने की माप भी निर्धारित की गई है.दौड़ की बात करें तो पुरुष अभ्यर्थियों को 1.6 किलोमीटर की दौड़ 7 मिनट में पूरी करनी होगी, जबकि महिला उम्मीदवारों को 1 किलोमीटर की दौड़ 7 मिनट में पूरी करनी होगी.फिजिकल टेस्ट में सफल उम्मीदवारों को ही आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा.
आवेदन शुल्क
इस भर्ती प्रक्रिया में आवेदन शुल्क सभी वर्गों के लिए 100 रुपये रखा गया है. उम्मीदवार डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI के जरिए ऑनलाइन फीस जमा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
आवेदन कैसे करें?
उम्मीदवार सबसे पहले bpssc.bihar.gov.in पर जाएं और एएसआई टेक्निकल रिक्रूटमेंट 2026 का नोटिफिकेशन पढ़ें. इसके बाद अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें. जरूरी &amp;nbsp;डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद ऑनलाइन फीस जमा करें और फॉर्म सबमिट कर दें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Attempt Limit In NEET UG: NTA की बड़ी तैयारी! NEET UG एग्जाम में Age और Attempt लिमिट रूल हो सकता है लागू</title>
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        <description><![CDATA[ Attempt Limit In NEET UG: नीट यूजी 2026 को लेकर चल रहे विवाद और परीक्षा रद्द होने के बाद अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है. आने वाले समय में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में आयु सीमा और अटेम्प्ट लिमिट लागू की जा सकती है. यानी छात्रों को अब तय उम्र तक और सीमित बार ही नीट यूजी परीक्षा देने का मौका मिल सकता है.
केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसदीय समिति को बताया कि पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार किए जाएंगे. कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति के सामने एनडीए ने अपनी प्रस्तुति में कई दीर्घकालिक सुधारों का रोडमैप रखा है.
नीट में पहली बार लागू हो सकती है अटेम्प्ट लिमिट
फिलहाल नीट यूजी परीक्षा में छात्रों के लिए केवल न्यूनतम आयु सीमा 17 वर्ष तय की गई है, अधिकतम उम्र सीमा नहीं है और छात्र फिलहाल कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं. हालांकि, एनटीए इस व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है. एजेंसी ने संसदीय समिति को बताया कि भविष्य में उम्मीदवारों के प्रयासों की संख्या तय की जा सकती है. इसके साथ ही अधिकतम आयु सीमा लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है. अभी स्पष्ट नहीं किया गया है की छात्राें को कितने अटेम्प्ट मिलेंगे और अधिकतम उम्र कितनी तय की जाएगी.
कंप्यूटर बेस्ड और मल्टी सेशन परीक्षा पर फोकस
एनटीए ने समिति को बताया कि आने वाले समय में नीट यूजी परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी सीबीटी मोड में कराई जा सकती है. इसके अलावा मल्टी सेशन और मल्टी स्टेज परीक्षा प्रणाली पर भी काम किया जा रहा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि अगले साल नीट यूजी को सीबीटी मोड में कराने की तैयारी की जा सकती है. फिलहाल एनटीए एक शिफ्ट में करीब 1.5 लाख छात्रों की कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की क्षमता रखती है जिसे अगले साल बढाकर 10 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
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पेपर लीक विवाद के बाद बढ़े सुधार
नीट यूजी परीक्षा 2026 को लेकर इस बार बड़ा विवाद सामने आया 3 मई को आयोजित परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे. बाद में आरोप लगे थे कि वायरल गेस पेपर के करीब 120 सवाल असली परीक्षा से मेल खा रहे थे. एनटीए के अनुसार, 7 मई को एजेंसी को कथित गड़बड़ियों की जानकारी मिली थी, इसके बाद 8 मई को मामला केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई. अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित होगी, हालांकि संसदीय समिति की बैठक में एनटीए ने इसे सीधे तौर पर पेपर लीक मानने से इनकार किया. एजेंसी का कहना था कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं और कदाचार सामने आए, लेकिन इसे पूरी तरह पेपर लीक कहना सही नहीं होगा. बैठक में भाजपा सांसदों ने भी पेपर लीक शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई. वहीं विपक्ष सांसदों ने सवाल उठाया कि अगर पेपर लीक नहीं हुआ तो परीक्षा रद्द क्यों करनी पड़ी.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Lucknow Summer Vacation: लखनऊ में Heatwave के चलते स्कूल बंद, यहां देखें दिल्ली से लेकर अन्य शहरों का हाल</title>
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        <description><![CDATA[ Lucknow Summer Vacation: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पड़ रही तेज गर्मी और हीटवेव को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. जिला मजिस्ट्रेट ने सभी शिक्षा बोर्डों के स्कूलों में 22 मई 2026 से गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी हैं. यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लगातार बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, खासकर छोटे बच्चों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है.
जिला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि मौसम विभाग लगातार हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी कर रहा है, लेकिन जिले के कुछ स्कूल अब भी खुले हुए हैं, जिससे बच्चों की तबीयत पर बुरा असर पड़ सकता है. प्रशासन ने सभी अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं. साथ ही बच्चों को दिन के समय घर से बाहर न निकलने की सलाह भी दी गई है ताकि तेज गर्म हवाओं से बचा जा सके.&amp;nbsp;
दिल्ली से यूपी तक बदला स्कूलों का टाइम टेबल
गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए कई राज्यों ने स्कूलों की छुट्टियों का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर में 11 मई से 30 जून 2026 तक स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है. हालांकि, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं के लिए सुबह की शिफ्ट में रेमेडियल क्लासेस चल रही हैं. वहीं उत्तर प्रदेश में 20 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां घोषित की गई हैं. हरियाणा में 1 जून से 30 जून, राजस्थान में 17 मई से 20 जून और बिहार में 1 जून से 20 जून तक स्कूल बंद रहेंगे. लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए अभिभावक भी इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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कई राज्यों में पहले ही शुरू हो चुकी हैं छुट्टियां
दक्षिण भारत और पूर्वी राज्यों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 24 अप्रैल से 11 जून तक छुट्टियां घोषित की गई हैं. छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से 15 जून तक स्कूल बंद हैं, जबकि ओडिशा में 27 अप्रैल से ही छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं. पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भीषण गर्मी को देखते हुए छुट्टियां 31 मई तक बढ़ा दी गई हैं. मौसम विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप और लू बच्चों के शरीर पर जल्दी असर डालती है, इसलिए इस समय अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
एल नीनो की वापसी बढ़ा सकती है मुश्किलें
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल एल नीनो की स्थिति दोबारा लौट सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. अगर ऐसा होता है तो देश में तापमान और ज्यादा बढ़ सकता है. इसके साथ ही हीटवेव की घटनाएं बढ़ने और कई इलाकों में मानसून कमजोर रहने की आशंका भी जताई जा रही है. यही वजह है कि सरकारें और प्रशासन पहले से सतर्क नजर आ रहे हैं. बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की छुट्टियों का फैसला लिया गया है ताकि उन्हें झुलसा देने वाली गर्मी और लू से बचाया जा सके.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET Fee Refund Process: Neet Paper Leak के बाद फीस रिफंड का प्रोसेस शुरू, स्टूडेंट्स को करना होगा यह काम</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Fee Refund Process: नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने छात्रों के लिए फीस रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा पेपर लीक और कथित गड़बड़ियों में विवाद के चलते रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद लाखों छात्र फीस वापसी का इंतजार कर रहे थे. अब एजेंसी ने साफ कर दिया है कि एग्जाम के लिए छात्रों से कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं ली जाएगी और पहले जमा की गई आवेदन फीस वापस की जाएगी&amp;zwnj;.
एनटीए ने इसके लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर बैंक अकाउंट अपडेट करने का ऑप्शन उपलब्ध कराने की तैयारी की है. छात्र neet.nta.nic.in पर जाकर अपनी बैंक डिटेल्स अपडेट कर सकेंगे, जिसके बाद फीस सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की जाएगी. एजेंसी के अनुसार बैंक डिटेल सबमिट करने के 24 से 48 घंटे के अंदर रिफंड प्रोसेस पूरा हो सकता है.&amp;nbsp;
ऐसे मिलेगा फीस रिफंड&amp;nbsp;
फीस वापसी के लिए छात्रों को सबसे पहले नीट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा. वहां फी रिफंड या अपडेट बैंक डिटेल्स का लिंक दिखाई देगा. इसके बाद एप्लीकेशन नंबर और लोगों डिटेल की मदद से पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. लॉगिन के बाद छात्रों को अपने बैंक अकाउंट नंबर, आईएफएससी कोड और अकाउंट होल्डर का नाम सावधानी से भरना होगा. जानकारी सबमिट करने के बाद फीस उसी खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी. एनटीए ने छात्रों को सलाह दी है कि बैंक की डिटेल्स भरते समय किसी तरह की गलती न करें, वरना रिफंड में देरी हो सकती है.&amp;nbsp;
साइबर कैफे से फॉर्म भरने वालों के लिए राहत&amp;nbsp;
कई छात्रों ने साइबर कैफे या कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए फॉर्म भरा था. ऐसे में छात्रों को डर था की फीस इस खाते में वापस चली जाएगी, जिससे पेमेंट किया गया था. इसे लेकर भी एनटीए ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार अपनी पसंद का बैंक अकाउंट अपडेट कर सकते हैं. छात्र चाहे तो माता-पिता के खाते की जानकारी भी दे सकते हैं, ताकि रिफंड सही खाते में पहुंचे.&amp;nbsp;
री-एग्जाम के लिए नहीं देनी होगी दोबारा फीस&amp;nbsp;
एनटीए पहले ही साफ कर चुका है कि 21 जून को होने वाले नीट यूजी री एग्जाम के लिए छात्रों को दोबारा आवेदन करने या नहीं फीस जमा करने की जरूरत नहीं होगी. पुराना रजिस्ट्रेशन ही मान्य रहेगा और एडमिट कार्ड सीधे जारी किए जाएंगे. री एग्जाम दोपहर 2:00 बजे शाम से शाम 5:15 बजे तक ऑफलाइन मोड में आयोजित किया जाएगा. एग्जाम में इस बार भी करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों को शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि परीक्षा का माध्यम नहीं बदला जा सकेगा, लेकिन छात्रों को एग्जाम सिटी बदलने का मौका दिया गया था.&amp;nbsp;
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परीक्षा केंद्र बदलने का भी मौका
पेपर लीक विवाद के बाद कई छात्र अपने घर या दूसरे शहरों में लौट चुके हैं. इसी को देखते हुए एनटीए ने परीक्षा शहर बदलने के लिए अलग विंडो खोली थी. छात्र अपनी सुविधा के अनुसार नया शहर चुन सकते हैं. हालांकि अंतिम प्रवेश परीक्षा केंद्र सीट उपलब्धता के आधार पर तय किया जाएगा. वहीं नीट यूजी 2026 के लिए अलग-अलग कैटेगरी के छात्रों से अलग फीस ली गई थी. जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों ने 1700 रुपये ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को 1600 रुपये जबकि एससी-एसटी उम्मीदवारों ने हजार रुपये फीस जमा की थी. विदेशी उम्मीदवारों से 9,500 आवेदन शुल्क लिया गया था, अब यह रकम वापस की जाएगी.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NDA 2 Recruitment 2026: NDA 2 भर्ती 2026 डिफेंस में करियर बनाने का मौका,394 पदों पर भर्ती आवेदन शुरू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/nda-2-recruitment-2026-nda-2-भर्ती-2026-डिफेंस-में-करियर-बनाने-का-मौका394-पदों-पर-भर्ती-आवेदन-शुरू</link>
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        <description><![CDATA[ डिफेंस सेक्टर में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर है. यूपीएससी ने NDA 2 भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.इस भर्ती के जरिए नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन नेवल एकेडमी में उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.इस बार UPSC द्वारा कुल 394 पदों पर भर्ती निकाली गई है.ये वैकेंसी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों विंग के लिए निर्धारित की गई हैं. इस भर्ती का उद्देश्य देश की रक्षा सेवाओं के लिए योग्य और अनुशासित अधिकारियों की नियुक्ति करना है.उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के बाद प्रतिष्ठित डिफेंस अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 394 पदों पर भर्तियां की जाएंगी. इनमें थल सेना के लिए 208, नौसेना के लिए 42, वायु सेना के विभिन्न विभागों के लिए 120 और नौसेना अकादमी के लिए 24 सीटें निर्धारित की गई हैं.कब होगी परीक्षा?इस भर्ती की लिखित परीक्षा 13 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा देशभर के विभिन्न केंद्रों पर होगी.एडमिट कार्ड 6 सितंबर 2026 को जारी किया जाएगा. परीक्षा का रिजल्ट सितंबर 2026 में घोषित होने की संभावना है.क्या होनी चाहिये योग्यता?इस परीक्षा के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास होना चाहिए या उम्मीदवार 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा हो. आर्मी विंग के लिए किसी भी स्ट्रीम से 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. जबकि एयरफोर्स और नेवी के लिए 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स होना जरूरी है.
उम्र सीमा क्या तय की गई है?इस भर्ती के लिए उम्र सीमा 1 जनवरी 2008 से 1 जनवरी 2011 के बीच निर्धारित की गई है. केवल अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं.
चयन कैसे होगा?एनडीए भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है.पहले चरण में लिखित परीक्षा होती है जिसमें गणित और सामान्य योग्यता परीक्षण शामिल होता है.दूसरे चरण में SSB इंटरव्यू लिया जाता है.अंतिम चरण में मेडिकल परीक्षण किया जाता है. सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन किया जाता है.
ये भी पढ़ें-CBSE Answer Sheet Photocopy: छात्रों को मिली धुंधली Answer Sheet, बड़ा सवाल- क्या टीचर्स ने भी चेक कीं ऐसी ही कॉपी?कितना देना होगा आवेदन शुल्क?इस भर्ती के लिए आवेदन फीस 100 रुपये निर्धारित की गयी है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है.&amp;nbsp;
कितना मिलेगा इस स्टाइपेंड?ट्रेनिंग के दौरान उम्मीदवारों को लगभग 56,100 रुपये प्रति माह स्टाइपेंड मिलता है. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद चयनित अधिकारियों को लेवल 10 पे स्केल के अनुसार वेतन और अन्य भत्ते दिए जाते हैं.
कैसे करें आवेदन?सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं.अगर पहले से रजिस्ट्रेशन नहीं है तो वन टाइम रजिस्ट्रेन करें.लॉगिन करने के बाद NDA 2 आवेदन फॉर्म को ध्यान से भरें और सभी जानकारी सही दर्ज करें.जरूरी डॉक्यूमेंट-अपलोड करें, और फॉर्म सबमिट करें.फॉर्म को सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट निकालकर भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - NEET Fee Refund Process: Neet Paper Leak के बाद फीस रिफंड का प्रोसेस शुरू, स्टूडेंट्स को करना होगा यह काम ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब कॉलेज में भी यूनिफॉर्म! यूपी की यूनिवर्सिटीज में लागू होगा नया नियम, छात्राओं के लिए शुरू होंगे ये कोर्स</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का माहौल बदलने जा रहा है. स्कूल खत्म होने के बाद जिस आजादी का इंतजार छात्र करते थे, उसमें अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. राज्यपाल और प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटीज की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं. अब तक कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में यूनिफॉर्म पहनना जरूरी नहीं था, लेकिन नए आदेश के बाद छात्रों को तय ड्रेस में ही संस्थानों में आना पड़ सकता है.
राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया. उनका कहना है कि स्कूलों की तरह कॉलेजों में भी यूनिफॉर्म लागू होने से छात्रों के बीच सामाजिक और आर्थिक भेदभाव कम होगा. कई बार कपड़ों और लाइफस्टाइल की वजह से छात्र खुद को दूसरों से अलग महसूस करते हैं, लेकिन यूनिफॉर्म से सभी छात्रों में समानता का भाव आएगा और पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा.छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बैठक में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सिर्फ यूनिफॉर्म पर ही नहीं, बल्कि छात्रों खासकर छात्राओं को रोजगार के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया. उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को रोजगार आधारित नए कोर्स शुरू करने के निर्देश दिए.
उन्होंने कहा कि छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्यूटीशियन ट्रेनिंग, मेहंदी डिजाइन, GST, अकाउंटेंसी, बिंदी निर्माण और मिलेट्स से खाद्य सामग्री बनाने जैसे कोर्स शुरू किए जाएं. उनका मानना है कि ऐसे कोर्स छात्राओं को पढ़ाई के साथ रोजगार और खुद का काम शुरू करने में मदद करेंगे.
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डिग्री के साथ हुनर भी जरूरी
राज्यपाल ने यह भी कहा कि जिन यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में अच्छे कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं, उन्हें दूसरे संस्थानों में भी लागू किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इसका फायदा मिल सके. उन्होंने साफ कहा कि आज के समय में सिर्फ डिग्री काफी नहीं है. छात्रों के पास हुनर भी होना चाहिए ताकि वे पढ़ाई खत्म होने के बाद नौकरी या स्वरोजगार के लिए तैयार रहें.
छात्राओं की सुरक्षा पर खास ध्यान
महिला छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में खास चर्चा हुई. राज्यपाल ने महिला कॉलेजों और छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि छात्राओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए. इसके लिए सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में ऐसी कमेटियां बनाने को कहा गया है जहां छात्र और छात्राएं अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें और उनका जल्दी समाधान हो सके.
शिक्षकों को भी दिए गए निर्देश
बैठक में शिक्षकों को भी सख्त संदेश दिया गया. राज्यपाल ने कहा कि कोई भी शिक्षक ऐसा काम न करे जिससे शिक्षक पेशे की गरिमा को नुकसान पहुंचे. उन्होंने समय पर क्लास लगाने, छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और पढ़ाई के साथ उनके पूरे विकास पर ध्यान देने के निर्देश दिए.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>SSC CGL recruitment 2026: एसएससी सीजीएल 2026 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, 12 हजार से ज्यादा पदों पर निकली बंपर वैकेंसी</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. स्टाफ सिलेक्शन कमीशन यानी SSC ने CGL 2026 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके तहत केंद्र सरकार के कई विभागों में बंपर पदों पर भर्ती की जाएगी.हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले हैं. SSC CGL परीक्षा को केंद्र सरकार की सबसे लोकप्रिय भर्ती परीक्षाओं में गिना जाता है क्योंकि इसके जरिए उम्मीदवारों को अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में नौकरी पाने का मौका मिलता है.&amp;nbsp;
किन विभागों में मिलेगी नौकरीइस भर्ती के जरिए उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के कई बड़े विभागों में नौकरी मिलेगी. इसमें आयकर विभाग, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, डाक विभाग, ऑडिट विभाग और नारकोटिक्स विभाग जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं.भर्ती के तहत असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, ऑडिटर, अकाउंटेंट, टैक्स असिस्टेंट और सीबीआई सब इंस्पेक्टर जैसे पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
कितनी मिलेगी सैलरीSSC CGL के जरिए मिलने वाली नौकरियों में उम्मीदवारों को शानदार सैलरी दी जाती है. अलग-अलग पदों के अनुसार वेतन तय किया गया है. शुरुआती सैलरी लगभग 25000 रुपये से शुरू होकर 1.5 लाख रुपये तक जा सकती है.इसके अलावा उम्मीदवारों को महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा.
उम्र सीमाभर्ती में अलग-अलग पदों के अनुसार आयु सीमा तय की गई है. कुछ पदों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 27 वर्ष रखी गई है, जबकि कई पदों के लिए अधिकतम आयु 30 से 32 वर्ष तक तय की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी. SC और ST उम्मीदवारों को 5 साल तथा OBC उम्मीदवारों को 3 साल की छूट मिलेगी.
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कौन कर सकता है आवेदनइस भर्ती के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.कुछ विशेष पदों के लिए संबंधित विषय में विशेष योग्यता मांगी गई है. उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले पूरा नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है.
चयन प्रक्रिया कैसे होगीएसएससी सीजीएल भर्ती परीक्षा कई चरणों में आयोजित की जाएगी. सबसे पहले कंप्यूटर आधारित टियर-1 परीक्षा होगी.इसके बाद सफल उम्मीदवारों को टियर-2 परीक्षा देनी होगी.कुछ पदों के लिए फिजिकल टेस्ट और मेडिकल टेस्ट भी लिया जा सकता है.अंतिम चयन मेरिट और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा.
ऐसे करें आवेदन

उम्मीदवार सबसे पहले SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं.
इसके बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें.
फिर SSC CGL 2026 भर्ती लिंक पर क्लिक करके आवेदन फॉर्म भरें.
जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा करने के बाद फॉर्म सबमिट कर दें.
भविष्य के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SSC, CGL, recruitment, 2026:, एसएससी, सीजीएल, 2026, भर्ती, का, नोटिफिकेशन, जारी, हजार, से, ज्यादा, पदों, पर, निकली, बंपर, वैकेंसी</media:keywords>
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        <title>UP Board Exam 2026: यूपी बोर्ड परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, 32 जिलों में एक ही रोल नंबर पर मिली दो&amp;दो कॉपियां</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में बड़ी अनियमितता सामने आई है. प्रदेश के 32 जिलों में एक ही रोल नंबर पर दो-दो आंसर शीट मिलने के बाद शिक्षा विभाग और बोर्ड प्रशासन में हड़कंप मच गया है.मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपी बोर्ड ने जांच शुरू कर दी है और कई छात्रों के परिणाम अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं.
32 जिलों में मिला उत्तर पुस्तिकाओं का मामला
यूपी बोर्ड की शुरुआती जांच में आगरा, प्रयागराज, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, इटावा, हरदोई और मैनपुरी समेत 32 जिलों में गड़बड़ी सामने आई है.जांच के दौरान पाया गया कि दो अलग-अलग छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं पर एक ही रोल नंबर दर्ज है.इस खुलासे के बाद परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं.
94 से अधिक छात्रों की कॉपियां जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार अब तक 94 से ज्यादा परीक्षार्थियों की आंसर शीट संदिग्ध पाई गई हैं. मामले के सामने आने के बाद यूपी बोर्ड ने तुरंत संबंधित छात्रों का रिजल्ट रोक दिया है. साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों से 30 मई तक विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है.
हाईस्कूल और इंटर दोनों परीक्षाओं में गड़बड़ी
हाईस्कूल परीक्षा में प्रयागराज, सीतापुर, महोबा, प्रतापगढ़ और इटावा जिलों में सबसे ज्यादा अनियमितता मिली है.वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रयागराज, प्रतापगढ़, हरदोई और इटावा प्रमुख रूप से प्रभावित बताए जा रहे हैं. इसके अलावा मेरठ, आगरा, एटा, अलीगढ़ और झांसी क्षेत्रों से भी ऐसे मामले सामने आए हैं.यह भी पढ़ें - अब कॉलेज में भी यूनिफॉर्म! यूपी की यूनिवर्सिटीज में लागू होगा नया नियम, छात्राओं के लिए शुरू होंगे ये कोर्स
मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बाद यूपी बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया और परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि मूल्यांकन के दौरान आंसर शीट में हेरफेर हुई हो सकती है या फिर जानबूझकर एक ही रोल नंबर का इस्तेमाल किया गया हो. हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा.यूपी बोर्ड सचिव ने क्या कहा?उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराई जा रही है.उन्होंने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह तकनीकी गलती है या किसी की लापरवाही अथवा साजिश.जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
परीक्षा केंद्रों पर भी गिर सकती है गाजबोर्ड प्रशासन संबंधित परीक्षा केंद्रों को डिबार करने की तैयारी भी कर सकता है. जिन केंद्रों पर ज्यादा गड़बड़ी मिलने की आशंका है, वहां विशेष जांच टीम भेजी जा सकती है.फिलहाल बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Board, Exam, 2026:, यूपी, बोर्ड, परीक्षा, में, बड़ा, फर्जीवाड़ा, जिलों, में, एक, ही, रोल, नंबर, पर, मिली, दो-दो, कॉपियां</media:keywords>
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        <title>यूजीसी नेट जून 2026 छात्रों को बड़ी राहत, अब 23 मई तक कर सकते हैं आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी &amp;nbsp;ने यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है. अब अभ्यर्थी 23 मई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे. पहले आवेदन की अंतिम तिथि 20 मई तय की गई थी, लेकिन छात्रों की मांग और तकनीकी समस्याओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया.
छात्रों ने ली राहत की सांसहर साल लाखों उम्मीदवार UGC NET परीक्षा में शामिल होते हैं. इस बार भी बड़ी संख्या में छात्र आवेदन कर रहे हैं. कई अभ्यर्थियों ने आवेदन के दौरान वेबसाइट स्लो होने और दस्तावेज अपलोड में परेशानी की शिकायत की थी. इसके बाद एनटीए ने आवेदन की तारीख बढ़ाने का फैसला लिया.नई सूचना के अनुसार उम्मीदवार 23 मई 2026 सुबह 10 बजे तक आवेदन फॉर्म भर सकते हैं.वहीं फीस जमा करने की अंतिम समय सीमा 23 मई रात 11:50 बजे तक तय की गई है.
कौन कर सकता है आवेदनयूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लिए वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री पूरी की हो.अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर के छात्र भी आवेदन के पात्र हैं.इसके अलावा 4 वर्षीय बैचलर डिग्री वाले उम्मीदवारों को भी आवेदन की अनुमति दी गई है.JRF के लिए अधिकतम आयु सीमा 31 वर्ष रखी गई है, जबकि NET के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है.आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट दी जाएगी.
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आवेदन शुल्क&amp;nbsp;सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 1150 रुपये रखा गया है.EWS और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि SC, ST और PwD उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 325 रुपये तय किया गया है.फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और ई-चालान के जरिए किया जा सकता है.
परीक्षा कब होगीNTA द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार UGC NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 जून से 30 जून 2026 के बीच किया जाएगा.परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित होगी.परीक्षा खत्म होने के बाद आंसर की जारी की जाएगी और फिर रिजल्ट घोषित किया जाएगा.
कैसे करें आवेदन?

सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक nta.ac.in⁠ वेबसाइट पर जाएं.
इसके बाद UGC NET June 2026 Application लिंक पर क्लिक करें.
अब नया रजिस्ट्रेशन करें और जरूरी जानकारी भरें.
इसके बाद फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.
आवेदन शुल्क जमा करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - कौड़ियों के भाव में अमेरिका से कर सकते हैं पीएचडी, बस अपनाना होगा यह वाला तरीका
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>यूजीसी, नेट, जून, 2026, छात्रों, को, बड़ी, राहत, अब, मई, तक, कर, सकते, हैं, आवेदन</media:keywords>
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        <title>UPSC ने छात्रों को दी बड़ी राहत, 3 नए एग्जाम सेंटर बने उम्मीद की नई राह, 23 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने किया चयन</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिने जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा को लेकर इस बार लाखों युवाओं में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है. कोई गांव से तैयारी कर रहा है तो कोई बड़े शहर में किराए के कमरे में दिन-रात किताबों में डूबा है. इसी बीच संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़ दिए हैं. खास बात यह है कि इन नए सेंटरों को छात्रों ने हाथों हाथ लिया और 23 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने इन्हें अपनी पसंद बनाया.
अब सिविल सेवा परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों की कुल संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है. इस बार भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ को नए परीक्षा केंद्र के रूप में शामिल किया गया है. UPSC का कहना है कि इससे पुराने केंद्रों पर बढ़ती भीड़ कम होगी और छात्रों को यात्रा में भी आसानी मिलेगी.
लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर
UPSC की ओर से जारी बयान के अनुसार, करीब 23 हजार उम्मीदवारों ने इन नए सेंटरों को चुना है. इससे आसपास के शहरों में पड़ने वाले दबाव में काफी कमी आई है. हर साल बड़ी संख्या में छात्र दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देते हैं, जिससे सफर, रहने और खर्च की परेशानी बढ़ जाती है. लेकिन इस कदम के बाद हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है.
UPSC चेयरमैन अजय कुमार ने कहा कि आयोग परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा आसान, सुविधाजनक और छात्र हित में बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. उनका कहना है कि नए सेंटर जोड़ने का मकसद सिर्फ भीड़ कम करना नहीं, बल्कि छात्रों को बेहतर सुविधा देना भी है.
किस सेंटर को कितने छात्रों ने चुना?
नए जोड़े गए तीनों सेंटरों को छात्रों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला. भुवनेश्वर सेंटर को सबसे ज्यादा 10,656 आवेदन मिले. इससे कटक सेंटर पर दबाव कम हुआ. कानपुर सेंटर को 6,938 छात्रों ने चुना, जिससे लखनऊ सेंटर पर भीड़ कम हुई. मेरठ सेंटर को 5,902 उम्मीदवारों ने चुना. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्रों को खास फायदा मिला और उन्हें अब गाजियाबाद पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.यह भी पढ़ें - UP Board Exam 2026: यूपी बोर्ड परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, 32 जिलों में एक ही रोल नंबर पर मिली दो-दो कॉपियां
इस रविवार होगी प्रारंभिक परीक्षा
UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा इस रविवार को आयोजित होने जा रही है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही उम्मीदवारों को मिलती है. इस परीक्षा के जरिए IAS, IPS, IFS समेत कई बड़ी सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है. इस बार UPSC को कुल 8,19,372 आवेदन मिले हैं. यह संख्या दिखाती है कि देश के युवाओं में सिविल सेवा को लेकर कितना आकर्षण है.
दिव्यांग छात्रों के लिए भी खास व्यवस्था
UPSC ने इस बार दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है. आयोग ने कहा कि जिन छात्रों को विशेष सुविधा की जरूरत थी, उन्हें उनकी पसंद के सेंटर देने की कोशिश की गई. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सीटें भी बनाई गईं. दिल्ली क्षेत्र में ही करीब 805 PwBD (दिव्यांग) उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र मिला. इसे UPSC का बड़ा और संवेदनशील कदम माना जा रहा है.यह भी पढ़ें - यूजीसी नेट जून 2026 छात्रों को बड़ी राहत, अब 23 मई तक कर सकते हैं आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPSC, ने, छात्रों, को, दी, बड़ी, राहत, नए, एग्जाम, सेंटर, बने, उम्मीद, की, नई, राह, हजार, से, ज्यादा, अभ्यर्थियों, ने, किया, चयन</media:keywords>
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        <title>UPSC Exam Calendar Out: अगले साल 23 मई को होगी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, तैयारी के लिए मिला पूरा रोडमैप</title>
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        <description><![CDATA[ संघ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2027 की परीक्षाओं का पूरा कैलेंडर जारी कर दिया है. इस कैलेंडर का इंतजार लाखों अभ्यर्थी हर साल करते हैं, क्योंकि इसी से पूरे साल की तैयारी की दिशा तय होती है. इस बार भी आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा से लेकर एनडीए, सीडीएस, आईईएस, आईएसएस, सीएमएस और कई विभागीय परीक्षाओं की तारीखें पहले ही साफ कर दी हैं, ताकि उम्मीदवार समय से अपनी योजना बना सकें.सबसे अहम बात यह है कि सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 23 मई 2027, रविवार को होगी. इसके बाद सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 20 अगस्त 2027, शुक्रवार से शुरू होगी, जो पांच दिनों तक चलेगी. यानी अब अभ्यर्थियों के पास अपनी तैयारी को व्यवस्थित करने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन है.जनवरी से शुरू होगा परीक्षा सत्रपरीक्षा सत्र की शुरुआत 10 जनवरी 2027 से संयुक्त भू-वैज्ञानिक (प्रारंभिक) परीक्षा से होगी. इसके बाद 31 जनवरी को इंजीनियरिंग सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा आयोजित की जाएगी. फरवरी और मार्च में भी कई भर्ती और विभागीय परीक्षाएं रखी गई हैं, जिससे साफ है कि साल की शुरुआत से ही परीक्षा गतिविधियां तेज रहेंगी.मार्च में CISF AC (LDCE) परीक्षाकेंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट (कार्यकारी) की लिमिटेड विभागीय प्रतियोगी परीक्षा 14 मार्च 2027 को होगी. इसके लिए नोटिफिकेशन 25 नवंबर 2026 को आएगा और आवेदन 15 दिसंबर 2026 तक भरे जाएंगे.अप्रैल में NDA-I और CDS-Iरक्षा सेवाओं में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एनडीए और सीडीएस की पहली परीक्षा 11 अप्रैल 2027 को आयोजित होगी. दोनों परीक्षाओं का नोटिफिकेशन 2 दिसंबर 2026 को जारी होगा और 22 दिसंबर तक फॉर्म भरे जा सकेंगे.23 मई: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षासिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 23 मई 2027 को एक ही दिन होगी. वन सेवा की प्रारंभिक परीक्षा भी सिविल सेवा प्रारंभिक के माध्यम से ही होगी. इन परीक्षाओं का नोटिफिकेशन 13 जनवरी 2027 को आएगा और आवेदन की अंतिम तिथि 2 फरवरी 2027 रहेगी.जून&amp;ndash;जुलाई में अहम परीक्षाएं18 जून 2027 से इंजीनियरिंग सेवा (मुख्य) और भारतीय आर्थिक सेवा/भारतीय सांख्यिकी सेवा (IES/ISS) परीक्षा शुरू होंगी. 19 जून को संयुक्त भू-वैज्ञानिक (मुख्य) परीक्षा होगी. 4 जुलाई को CAPF (सहायक कमांडेंट) परीक्षा और 18 जुलाई को संयुक्त चिकित्सा सेवा (CMS) परीक्षा आयोजित की जाएगी.सितंबर में NDA-II और CDS-IIसाल की दूसरी NDA और CDS परीक्षा 19 सितंबर 2027 को होगी. इसके लिए नोटिफिकेशन 12 मई 2027 को जारी किया जाएगा और 1 जून तक आवेदन किए जा सकेंगे.यह भी पढ़ें - International Tea Day 2026: प्रोफेशनल टी-टेस्टर बनने के लिए कौन-सा कोर्स जरूरी, जानें कितनी मिलती है सैलरी?
नवंबर में भारतीय वन सेवा मुख्य परीक्षाभारतीय वन सेवा (मुख्य) परीक्षा 21 नवंबर 2027 से शुरू होगी और यह सात दिनों तक चलेगी. वहीं 18 दिसंबर 2027 को सेक्शन ऑफिसर/स्टेनो (LDCE) परीक्षा आयोजित की जाएगी.तारीखों में बदलाव संभवआयोग ने यह भी साफ किया है कि परिस्थितियों के अनुसार परीक्षा तिथियों में बदलाव किया जा सकता है. इसलिए अभ्यर्थियों को समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है.यह कैलेंडर उन सभी उम्मीदवारों के लिए बेहद अहम है जो 2027 में किसी भी UPSC परीक्षा में बैठने की योजना बना रहे हैं. अब तारीखें सामने हैं, इसलिए तैयारी को सही दिशा देने का यह सबसे अच्छा समय है.यह भी पढ़ें - पूरे करियर में IAS को ज्यादा मिलती है सैलरी या IPS को? समझ लें पूरा हिसाब-किताब ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>MBA के बाद चाहिए मोटी सैलरी? चुनें ये 7 सबसे हाई&amp;पेइंग स्पेशलाइजेशन ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ आज के दौर में एमबीए युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय प्रोफेशनल कोर्स बन चुका है.अच्छी नौकरी, हाई सैलरी और तेजी से करियर ग्रोथ के कारण हर साल लाखों छात्र एमबीए में एडमिशन लेते हैं. लेकिन एमबीए में सही स्पेशलाइजेशन चुनना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यही आपके भविष्य की दिशा तय करता है. कुछ एमबीए ब्रांच ऐसी हैं जिनकी मार्केट में सबसे ज्यादा डिमांड है और इनमें लाखों रुपये तक का पैकेज आसानी से मिल सकता है.आइए जानते हैं एमबीए की उन 7 सबसे ज्यादा कमाई वाली ब्रांच के बारे में.
एमबीए इन फाइनेंस
फाइनेंस एमबीए की सबसे लोकप्रिय और हाई सैलरी देने वाली ब्रांच मानी जाती है. इस कोर्स में बैंकिंग, इन्वेस्टमेंट, टैक्सेशन और फाइनेंशियल प्लानिंग जैसी चीजें सिखाई जाती हैं.बड़ी कंपनियां और बैंक फाइनेंस प्रोफेशनल्स को अच्छे पैकेज पर नौकरी देते हैं.अनुभव बढ़ने के साथ इस फील्ड में कमाई भी तेजी से बढ़ती है.
एमबीए इन मार्केटिंग
आज के डिजिटल दौर में मार्केटिंग की डिमांड पहले से कई गुना बढ़ चुकी है. एमबीए इन मार्केटिंग में ब्रांडिंग, सेल्स, डिजिटल मार्केटिंग और कस्टमर बिहेवियर की पढ़ाई होती है. इस फील्ड में क्रिएटिव सोच और कम्युनिकेशन स्किल वाले छात्रों के लिए शानदार अवसर मौजूद हैं.
एमबीए इन बिजनेस एनालिटिक्स
डेटा और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बिजनेस एनालिस्टिक सबसे तेजी से बढ़ने वाली एमबीए ब्रांच बन चुकी है. इसमें डेटा को समझकर बिजनेस से जुड़े फैसले लेना सिखाया जाता है.बड़ी टेक कंपनियों और कॉर्पोरेट सेक्टर में इस फील्ड के एक्सपर्ट्स की काफी मांग है.
एमबीए इन ऑपरेशन मैनेजमेंट
&amp;nbsp;
ऑपरेशन मैनेजमेंट किसी भी कंपनी के प्रोडक्शन, सप्लाई और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को संभालने का काम करता है.इस कोर्स में बिजनेस प्रोसेस को बेहतर बनाने और कम खर्च में अधिक काम करने की रणनीतियां सिखाई जाती हैं. मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स सेक्टर में इसकी काफी डिमांड रहती है.
एमबीए इन ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट
ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट यानी HRM उन छात्रों के लिए बेहतरीन विकल्प है जिन्हें लोगों के साथ काम करना पसंद है.इस कोर्स में भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारी प्रबंधन, ट्रेनिंग और कंपनी कल्चर से जुड़ी जानकारी दी जाती है.बड़ी कंपनियों में HR प्रोफेशनल्स को शानदार सैलरी और अच्छे प्रमोशन मिलते हैं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;पूरे करियर में IAS को ज्यादा मिलती है सैलरी या IPS को? समझ लें पूरा हिसाब-किताब
एमबीए इन इंटरनेशनल बिजनेस
ग्लोबल कंपनियों के बढ़ते विस्तार के कारण इंटरनेशनल बिजनेस की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. इस कोर्स में विदेशी व्यापार, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और इंटरनेशनल मार्केट की समझ विकसित की जाती है. विदेशों में नौकरी करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए यह कोर्स काफी फायदेमंद माना जाता है.
एमबीए इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज हर इंडस्ट्री का हिस्सा बन चुका है.इसी वजह से एमबीए इन AI की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है. इस कोर्स में मैनेजमेंट के साथ AI टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित बिजनेस मॉडल की जानकारी दी जाती है. इस फील्ड में अनुभव के साथ बेहद शानदार सैलरी मिलने की संभावना रहती है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>MBA, के, बाद, चाहिए, मोटी, सैलरी, चुनें, ये, सबसे, हाई-पेइंग, स्पेशलाइजेशन, ऑप्शन</media:keywords>
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        <title>AMU में MBBS की फीस जानकर चौंक जाएंगे आप, इतने कम खर्च में बन सकते हैं डॉक्टर</title>
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        <description><![CDATA[ AMU में MBBS की फीस जानकर चौंक जाएंगे आप, इतने कम खर्च में बन सकते हैं डॉक्टर ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Pakistan and Bangladesh Paper Leak: क्या पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी लीक होते हैं पेपर, वहां किस पैटर्न पर होते हैं एग्जाम?</title>
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        <description><![CDATA[ Pakistan and Bangladesh Paper Leak: भारत में नीट और दूसरी प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है. इस बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी परीक्षा प्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. पाकिस्तान में कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल की एएस-लेवल मैथ्स परीक्षा का पेपर लीक होने की पुष्टि के बाद वहां हजारों छात्रों के फ्यूचर को लेकर चिंता बढ़ गई. सोशल मीडिया पर पेपर पहले से वायरल होने और परीक्षा में वही सवाल आने के दावों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस तेज कर दी है. इसके बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी पेपर लीक की खबरें तेज हो गई है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि क्या भारत की तरह पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी पेपर लीक होते हैं और वहां किस पैटर्न में एग्जाम कराए जाते हैं.&amp;nbsp;
पाकिस्तान में कैसे होती हैं परीक्षाएं?
पाकिस्तान में बड़ी संख्या में छात्र कैंब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन के तहत ओ-लेवल और ए-लेवल की पढ़ाई करते हैं. ओ-लेवल को वहां कक्षा 10-11 के बराबर माना जाता है, जबकि एएस और ए-लेवल कक्षा 12 की एडवांस पढ़ाई मानी जाती है. इन परीक्षाओं के जरिए छात्र पाकिस्तान के साथ-साथ विदेशों की यूनिवर्सिटी में भी एडमिशन लेते हैं. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड एसेसमेंट का हिस्सा सीआईई दुनिया के 160 से ज्यादा देशों में परीक्षा आयोजित करता है. पाकिस्तान में एग्जाम का पैटर्न लिखित परीक्षा आधारित होता है, जिसमें अलग-अलग विषय के लिए कोडेड पेपर आयोजित किए जाते हैं. परीक्षा से पहले गोपनीयता बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू रहते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में कई बार पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं. इससे पहले 29 अप्रैल को हुई एएस लेवल मैथ्स परीक्षा को लेकर भी ऐसे ही आरोप लगे थे, जांच के बाद बोर्ड ने माना कि लीक के दावों में सच्चाई हो सकती है.&amp;nbsp;
बांग्लादेश में भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले&amp;nbsp;
बांग्लादेश में भी बोर्ड परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं. वहां माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की परीक्षाओं में प्रश्न पत्र सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफार्म पर वायरल होने के आरोप लगते रहे हैं. कई मामलों में सरकार को परीक्षा रद्द करने पड़ी और जांच भी बढ़ानी पड़ी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे लेकर पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों देशों में कानून तो मौजूद है, लेकिन उनको प्रभावित करना बड़ी चुनौती बना हुआ है. इस वजह से बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आती है.
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दूसरे देशों में कितने सख्त हैं कानून?
पेपर लीक को लेकर दुनिया के कई देशों में काफी सख्त कानून लागू है. भारत में हाल ही में पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 लागू किया गया है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. संगठित गिरोह शामिल होने पर संपत्ति जब्त करने की भी व्यवस्था की गई है. वहीं चीन में राष्ट्रीय परीक्षा गाओकाओ में पेपर लीक या नकल करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है. वहां परीक्षा केंद्रों पर एआई कैमरे, फेस रिकग्निशन और ड्रोन तक इस्तेमाल किए जाते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Weather Scientist Course: मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए कितना पढ़ना&amp;लिखना जरूरी, जानें किस कोर्स से होगा फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ Weather Scientist Course: मौसम का हाल जानने के लिए लोग हर दिन टीवी मोबाइल और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखते हैं. भारी बारिश, बाढ़, गर्मी, ठंड, &amp;nbsp;चक्रवात, आंधी जैसे हालात में मौसम वैज्ञानिकों की भूमिका और भी अहम हो जाती है. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता रहता है कि आखिर मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने वाले लोग कौन होते हैं और मौसम वैज्ञानिक के बनने के लिए कितनी पढ़ाई करनी पड़ती है. दरअसल मौसम विज्ञान यानी मीटियोरोलॉजी एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें पृथ्वी के वायुमंडल, जलवायु, तापमान, हवा, बारिश, तूफान और मौसम में होने वाले बदलाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है. यह विषय केवल मौसम बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए प्राकृतिक बदलाव, कृषि विमानन, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी का भी विश्लेषण किया जाता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए कितना पढ़ा-लिखा होना जरूरी है और इसके लिए कौन सा कोर्स फायदेमंद होता है.
क्या होता है मौसम विज्ञान?&amp;nbsp;
वायुमंडल के वैज्ञानिक अध्ययन को मौसम विज्ञान कहा जाता है. इसमें मौसम की प्रक्रियाओं, जलवायु परिवर्तन, वायुमंडलीय संरचना और पृथ्वी की सतह के साथ उसके संबंधों को समझा जाता है. मौसम विज्ञान भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों पर आधारित होता है. मौसम वैज्ञानिक पृथ्वी के वातावरण उसके प्रभाव और भविष्य में होने वाले बदलाव का अध्ययन करते हैं. यही वजह है कि आज के समय में मौसम विभाग, रिसर्च संस्थानों, एयरलाइंस, कृषि क्षेत्र और टीवी चैनलों में मौसम विशेषज्ञ की लगातार मांग बढ़ रही है.&amp;nbsp;
मौसम वैज्ञानिक बनने के लिए क्या पढ़ाई जरूरी?
अगर कोई छात्र मौसम वैज्ञानिक बनना चाहता है तो सबसे पहले उसे 12वीं साइंस स्ट्रीम से पास करनी होती है. इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय जरूरी माने जाते हैं. कई संस्थानों में बायोलॉजी के साथ भी एडमिशन मिल जाता है, लेकिन गणित और विज्ञान में अच्छी पकड़ होना जरूरी होता है. 12वीं के बाद छात्रमीटियोरोलॉजी या एटमॉस्फेरिक साइंस से जुड़े कोर्स कर सकते हैं. इसके लिए बीएससी, बीटेक या डिप्लोमा के कोर्स उपलब्ध है. वहीं रिसर्च और हायर पदों पर पहुंचने के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी भी की जा सकती है.&amp;nbsp;
कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं स्टूडेंट?
मौसम विज्ञान में कई तरह के स्पेशलाइजेशन मौजूद है, इनमें बीएससी इन मीटियोरोलॉजी, बीटेक इन मीटियोरोलॉजी, बीटेक इन एटमॉस्फेरिक साइंस, एमएससी इनमीटियोरोलॉजी, एमटेक इन मीटियोरोलॉजी, पीएचडी इन मीटियोरोलॉजी कोर्स शामिल है. इसके अलावा फिजिकलमीटियोरोलॉजी, क्लाइमेट मीटियोरोलॉजी, एग्रीकल्चर मीटियोरोलॉजी, एविएशनमीटियोरोलॉजी, सैटेलाइटमीटियोरोलॉजी और डायनामिक मीटियोरोलॉजी जैसे विषय में भी पढ़ाई की जा सकती है.&amp;nbsp;
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क्या होता है मौसम वैज्ञानिक का काम?
अक्सर लोगों को लगता है कि मौसम वैज्ञानिक सिर्फ बारिश या गर्मी की जानकारी देते हैं, लेकिन उनका काम इससे कहीं ज्यादा बड़ा होता है. मौसम वैज्ञानिक वायुमंडल, जलवायु परिवर्तन, चक्रवात, वायु दबाव, बारिश, धूंध, समुद्री गतिविधि और पर्यावरणीय बदलाव पर रिसर्च करते हैं. इस क्षेत्र में फिजिकल मीटियोरोलॉजी होती है. इसमें सौर ऊर्जा, वायुमंडलीय संरचना और पृथ्वी की प्रक्रियाओं पर रिसर्च किया जाता है. वहीं क्लाइमेटोलॉजी में किसी क्षेत्र की जलवायु और लंबे समय तक होने वाले मौसम में बदलाव पर रिसर्च किया जाता है. ऐसे ही एग्रीकल्चर मीटियोरोलॉजी में फसलों पर मौसम के प्रभाव और कृषि उत्पादन का विश्लेषण किया जाता है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पीएम मोदी या फिर इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी किसे कितनी मिलती है सैलरी? हैरान कर देंगे आंकड़े</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा के तहत जब इटली पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ. दोनों देशों के बीच काफी अच्छे संबंध हैं. साथ ही वहां की पीएम जॉर्जिया मेलोनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अच्छी दोस्त मानी जाती हैं. लेकिन क्या आपको पता है दोनों देशों में से किस देश के प्राइम मिनिस्टर को ज्यादा सैलरी मिलती है? अगर नहीं तो आज हम आपको बताते हैं...
रिपोर्ट्स के अनुसार इटली में एक सांसद का वेतन काफी ज्यादा माना जाता है. वहां सांसदों को हर महीने 11,703 यूरो मिलते हैं, जो भारतीय रुपये में करीब 10.47 लाख के बराबर है. टैक्स कटने के बाद उनके हाथ में लगभग 5,346.54 यूरो यानी करीब 4.78 लाख रुपये आते हैं. वहां की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को इतने रुपये मिलते हैं. इसके अलावा उन्हें अलग से भत्ते भी मिलते हैं. रोजाना के खर्च के लिए 3,721 यूरो (करीब 3.33 लाख रुपये) का दैनिक भत्ता दिया जाता है. अन्य कामकाज के लिए 3,690 यूरो (करीब 3.30 लाख रुपये) की राशि अलग से मिलती है.
इतना ही नहीं, इटली के सांसदों को फोन और यात्रा खर्च के लिए हर साल 1,200 यूरो दिए जाते हैं. साथ ही हर तीन महीने में 3,323 से 3,995 यूरो तक की राशि परिवहन और अन्य जरूरतों के लिए मिलती है.ये भी पढ़ें-CBSE Result 2026: OSM में क्या बदला और छात्रों को अब क्या करना होगा, कब आएंगे दोबारा जांची गई कॉपियों के नतीजे
भारत में कितनी सैलरी?
अब बात भारत की करें तो प्रधानमंत्री को हर महीने 1.66 लाख रुपये का वेतन मिलता है. इसके साथ कई जरूरी सुविधाएं दी जाती हैं, जो उनके पद की जिम्मेदारियों को देखते हुए तय की गई हैं. प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री को नई दिल्ली के 7, लोक कल्याण मार्ग पर बिना किराया दिए सरकारी आवास मिलता है. यही उनका आधिकारिक निवास होता है, जहां से वे देश के कामकाज को संभालते हैं.
प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के पास होती है. यह देश की सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा मानी जाती है. देश और विदेश के दौरों के लिए प्रधानमंत्री को सरकारी वाहन और विशेष विमान बेड़ा उपलब्ध कराया जाता है. इसमें &amp;lsquo;एयर इंडिया वन&amp;rsquo; जैसे समर्पित विमान शामिल होते हैं, जो आधिकारिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी पांच साल तक उन्हें मुफ्त आवास, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं और एसपीजी सुरक्षा मिलती रहती है.
ये भी पढ़ें-CBSE Three Language Policy: CBSE न्यू 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, बीच सत्र में बदलाव से छात्र और अभिभावक बेहद परेशान ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>ओडिशा बोर्ड ने जारी किए 12वीं के नतीजे, जानें किस तरह चेक कर सकते हैं रिजल्ट</title>
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        <description><![CDATA[ ओडिशा काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन ने 12वीं क्लास का परिणाम जारी कर दिया है. इस साल करीब 3.98 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे और उनमें से लगभग 86 प्रतिशत छात्र सफल रहे. छात्र रिजल्ट को यहां बताए गए स्टेप्स की मदद से चेक कर सकते हैं.
परीक्षा देने वाले छात्र अब अपना रिजल्ट ऑनलाइन देख सकते हैं. दोपहर 3 बजे से परिणाम वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया. छात्र घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से अंक देख सकते हैं. इसके लिए उन्हें किसी साइबर कैफे जाने की जरूरत नहीं है.
इस साल सैद्धांतिक परीक्षाएं 18 फरवरी से 28 मार्च के बीच राज्य के 1,364 केंद्रों पर हुई थीं. वहीं प्रैक्टिकल परीक्षाएं 2 जनवरी से 15 जनवरी तक आयोजित की गई थीं. परीक्षा खत्म होने के बाद से ही छात्र-छात्राएं रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे. अब वह इंतजार खत्म हो गया है.
पिछले वर्ष से बेहतर नतीजे
राज्य के स्कूल और मास एजुकेशन मंत्री नित्यानंद गोंड ने परिणाम की जानकारी देते हुए बताया कि कुल 4.01 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था. इनमें से 3.98 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए. इनमें 3.41 लाख छात्र पास हुए हैं. इस तरह कुल पास प्रतिशत 85.85 रहा, जो पिछले साल के मुकाबले बेहतर है.
पिछले साल का रिजल्ट कैसे था?
अगर पिछले साल की बात करें तो 2025 में पास प्रतिशत 82.45 था. इस बार यह बढ़कर 85.85 हो गया है. यानी इस बार परिणाम में साफ सुधार देखने को मिला है. यह छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों तीनों के लिए खुशी की बात है.
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संकाय के हिसाब से भी परिणाम अच्छा रहा है. कला वर्ग में 84.50 प्रतिशत, विज्ञान में 88.80 प्रतिशत, वाणिज्य में 88.07 प्रतिशत और व्यावसायिक वर्ग में 77.62 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं. विज्ञान और वाणिज्य वर्ग का प्रदर्शन खास तौर पर बेहतर रहा है.
यहां देखें नतीजे
results.odisha.gov.inresults.digilocker.gov.inorissaresults.nic.inchseodisha.nic.in
रिजल्ट चेक करने के आसान स्टेप्स
वेबसाइट पर जाने के बाद &amp;lsquo;वार्षिक CHSE परीक्षा परिणाम 2026&amp;rsquo; वाले लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद रोल नंबर, पंजीकरण संख्या और कैप्चा कोड भरें. सबमिट करते ही आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा. छात्र चाहें तो इसे डाउनलोड कर अपने मोबाइल या कंप्यूटर में सेव कर सकते हैं.
DigiLocker पर देखें नतीजे
DigiLocker पर भी छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट देख सकते हैं. इसके लिए results.digilocker.gov.in पर लॉगिन करें. Education सेक्शन में जाकर CHSE Odisha Marksheet लिंक चुनें. रोल नंबर भरते ही मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी.ये भी पढ़ें-CBSE Result 2026: OSM में क्या बदला और छात्रों को अब क्या करना होगा, कब आएंगे दोबारा जांची गई कॉपियों के नतीजे ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Indian Railways Loco Pilot Medical Test Criteria : लोको पायलट बनने के लिए क्या हैं मेडिकल पैरामीटर? इन कमियों के चलते अधूरा रह सकता है सपना</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Railways Loco Pilot Medical Test Criteria : भारतीय रेलवे में लोको पायलट की नौकरी लाखों युवाओं का सपना होती है. ट्रेन के इंजन को संभालना, हजारों यात्रियों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाना और देश की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बनना हर कोई पसंद करता है, लेकिन इस नौकरी तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होता है. इसके लिए लिखित परीक्षा पास करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती मेडिकल टेस्ट होती है. कई बार बहुत से उम्मीदवार लिखित परीक्षा और ट्रेनिंग में अच्छा कर लेते हैं, लेकिन मेडिकल जांच में छोटी-सी कमी के कारण उनका सपना अधूरा रह जाता है. ऐसे में अगर आप भी लोको पायलट बनना चाहते हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि लोको पायलट बनने के लिए मेडिकल पैरामीटर क्या हैं और किन कमियों के चलते सपना अधूरा रह सकता है.&amp;nbsp;
क्यों जरूरी है मेडिकल टेस्ट?
लोको पायलट का काम सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं होता है. उन्हें हर समय सतर्क रहना पड़ता है. छोटी-सी गलती भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. ट्रेन चलाते समय सिग्नल पहचानना, ट्रैक की स्थिति समझना, अचानक आने वाली समस्या पर तुरंत फैसला लेना और लंबे समय तक ध्यान बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. इसी वजह से रेलवे मेडिकल फिटनेस को सबसे ज्यादा महत्व देता है. उम्मीदवार पूरी तरह हेल्दी होना चाहिए, जिससे वह मुश्किल परिस्थितियों में भी सुरक्षित तरीके से ट्रेन चला सके.&amp;nbsp;
लोको पायलट बनने के लिए मेडिकल पैरामीटर क्या हैं?
1. आंखों की रोशनी (Vision Test) - लोको पायलट के लिए सबसे जरूरी मेडिकल टेस्ट आंखों का होता है. रेलवे में ALP के लिए A1 मेडिकल कैटेगरी लागू होती है, जो सबसे मुश्किल मानी जाती है. इसमें दोनों आंखों की दूर की नजर 6/6 होनी चाहिए. साथ ही चश्मे या लेंस की परमिशन नहीं होती है और रंग पहचानने की क्षमता बिल्कुल सही होनी चाहिए. रात में देखने की क्षमता भी जांची जाती है. इसके अलावा सिग्नल की लाइट्स पहचानने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. रेलवे में सिग्नल पहचानना सबसे जरूरी जिम्मेदारी होती है. अगर उम्मीदवार लाल, हरा या पीला रंग सही से नहीं पहचान पाता, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है.
2. सुनने की क्षमता (Hearing Ability) - लोको पायलट को ट्रेन के इंजन की आवाज, हॉर्न, वायरलेस निर्देश और ट्रैक की आवाजों पर लगातार ध्यान देना होता है. इसलिए सुनने की क्षमता सामान्य होना जरूरी है. मेडिकल जांच में दोनों कानों से साफ सुनाई देना, किसी तरह का इंफेक्शन न होना और तेज या धीमी आवाज पहचानने की क्षमता को देखा जाता है
3. शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) - लोको पायलट को कई-कई घंटे इंजन के अंदर बैठकर काम करना पड़ता है. कई बार खराब मौसम और तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है. इसलिए उम्मीदवार का शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है. फिटनेस में शरीर का संतुलन, हाथ-पैरों की कार्यक्षमता, रीढ़ की हड्डी की स्थित, ब्लड शुगर और सामान्य शारीरिक ताकत की जांच होती है.&amp;nbsp;
4. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) - लोको पायलट का काम मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है. ट्रेन चलाते समय हर सेकंड सतर्क रहना पड़ता है. इसलिए मानसिक स्थिरता बहुत जरूरी मानी जाती है. इसके लिए रेलवे तनाव संभालने की क्षमता, तुरंत निर्णय लेने की योग्यता, घबराहट या डर की स्थिति और ध्यान केंद्रित रखने की क्षमता पर ध्यान देता है
5. हार्ट और सांस संबंधी जांच - रेलवे यह तय करता है कि उम्मीदवार लंबे समय तक काम करने के दौरान हेल्दी बना रहे. ऐसे में हार्ट की कार्यक्षमता, सांस लेने की क्षमता और फेफड़ों की स्थिति की जांच करी जाती है.&amp;nbsp;
किन कमियों के चलते सपना अधूरा रह सकता है?
1. लोको पायलट बनने का सपना कमजोर नजर, चश्मा लगना, कलर ब्लाइंडनेस, रात में कम दिखाई देना, आंखों में तिरछापन या डबल विजन की समस्या के कारण रिजेक्ट हो सकता है.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;मेडिकल जांच में कम सुनाई देना, कान में लगातार आवाज आना, पुराना कान का संक्रमण या Hearing Aid की जरूरत होने से चयन रद्द हो सकता है.&amp;nbsp;
3. हाथ या पैर में कमजोरी, चलने-फिरने में समस्या, गंभीर कमर दर्द, हाई ब्लड प्रेशर या लगातार थकान या कमजोरी जैसी कमियों के चलते सपना अधूरा रह सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;4. लोको पायलट बनने का सपना गंभीर तनाव, मानसिक बीमारी, बार-बार घबराहट होना और ध्यान केंद्रित न कर पाने के कारण सपना टूट सकता है.&amp;nbsp;
5. अस्थमा, हार्ट डिजीज, सांस फूलना और पुरानी फेफड़ों की बीमारी जैसे समस्याओं के कारण भी सपना अधूरा रह सकता है.&amp;nbsp;
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लोको पायलट बनने के बाद कैसी होती है ट्रेनिंग?
मेडिकल टेस्ट पास करने के बाद उम्मीदवारों को सीधे ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी नहीं दी जाती. पहले उन्हें कई चरणों की मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है.जिसमें पहले बेसिक ट्रेनिंग होती है. इसमें रेलवे नियम, इंजन की तकनीक, सुरक्षा नियम और संचालन सिखाया जाता है. इसके बाद प्रैक्टिकल ट्रेनिंग होती है. इसमें सीनियर लोको पायलट के साथ इंजन में बैठकर काम सिखाया जाता है और आखिर में सिम्युलेटर ट्रेनिंग होती है. इसमें कंप्यूटर आधारित मशीनों पर अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रेन संभालने की ट्रेनिंग दी जाती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IAS&amp;PCS की तैयारी अब फ्री, UP के इन छात्रों के लिए सुनहरा मौका; ऐसे करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के उन युवाओं के लिए बड़ी राहत और सुनहरा मौका आया है, जो आईएएस और पीसीएस जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते. समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ ने एक बार फिर ऐसे अभ्यर्थियों के लिए फ्री कोचिंग का दरवाजा खोल दिया है. विभाग द्वारा संचालित परीक्षा पूर्व कोचिंग केंद्रों में IAS/PCS (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 की तैयारी के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
यह योजना खास तौर पर अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए है. जो छात्र पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहते हैं और सिविल सेवा का सपना देखते हैं, उनके लिए यह किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है. अब बिना फीस दिए, सरकारी मदद से आईएएस-पीसीएस की तैयारी करने का मौका मिल रहा है.
कौन भर सकता है फॉर्म?
इस फ्री कोचिंग योजना में वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हों. साथ ही अभ्यर्थी SC, ST या OBC वर्ग से होना चाहिए. उम्मीदवार ने कम से कम ग्रेजुएशन पास किया हो. एक और जरूरी शर्त यह है कि परिवार की सालाना आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. इन शर्तों को पूरा करने वाले छात्र ही इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे.
ये हैं जरूरी डेट्स
ऑनलाइन आवेदन 18 मई से शुरू हो चुके हैं. फॉर्म भरने और सुधार की आखिरी तारीख 18 जून 2026 है. एडमिट कार्ड 25 जून को जारी होंगे. प्रवेश परीक्षा 05 जुलाई 2026 को होगी. रिजल्ट 28 जुलाई को आएगा और कोचिंग सत्र 1 अगस्त 2026 से शुरू होने की संभावना है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; ओडिशा बोर्ड ने जारी किए 12वीं के नतीजे, जानें किस तरह चेक कर सकते हैं रिजल्टबिना फीस के मिलेगा मौका
इस पूरी प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि आवेदन करने के लिए किसी भी तरह की फीस नहीं देनी है. यानी पूरी तरह निशुल्क आवेदन किया जा सकता है. ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए यह योजना बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है.
कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?
आवेदन की प्रक्रिया बहुत आसान रखी गई है ताकि छात्र बिना किसी परेशानी के फॉर्म भर सकें. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट socialwelfareup.upsdc.gov.in पर जाएं. वहां &amp;ldquo;ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें&amp;rdquo; के लिंक पर क्लिक करें. अब मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें. फॉर्म पूरा करने के बाद उसे सबमिट करें और एक प्रिंट आउट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लें. यही प्रिंट आगे काम आ सकता है.यह भी पढ़ें - पीएम मोदी या फिर इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी किसे कितनी मिलती है सैलरी? हैरान कर देंगे आंकड़े ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>International Tea Day 2026: प्रोफेशनल टी&amp;टेस्टर बनने के लिए कौन&amp;सा कोर्स जरूरी, जानें कितनी मिलती है सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की जिंदगी का हिस्सा है.भारत समेत दुनियाभर में 21 मई को इंटरनेशनल टी डे मनाया जा रहा है. इस खास मौके पर चाय उद्योग से जुड़े करियर विकल्प भी चर्चा में हैं. इन्हीं में से एक है प्रोफेशनल टी-टेस्टर का करियर.यह ऐसा प्रोफेशन है जिसमें चाय की क्वालिटी, खुशबू और स्वाद को परखने का काम किया जाता है. अगर आपको चाय की अलग-अलग वैरायटी को समझने में रुचि है तो यह करियर आपके लिए शानदार विकल्प बन सकता है.
क्या होता है प्रोफेशनल टी-टेस्टर का काम?
टी-टेस्टर का काम केवल चाय पीना नहीं होता। उन्हें चाय की पत्तियों की गुणवत्ता, खुशबू, रंग और स्वाद को बारीकी से जांचना पड़ता है. इसके अलावा वे नई चाय ब्लेंड तैयार करने, मार्केट ट्रेंड समझने और ग्राहकों की पसंद के हिसाब से फ्लेवर चुनने का काम भी करते हैं. बड़ी चाय कंपनियों और एक्सपोर्ट इंडस्ट्री में टी-टेस्टर्स की अहम भूमिका होती है.
कौन-सा कोर्स करना होता है जरूरी?
टी-टेस्टर बनने के लिए कोई एक तय डिग्री जरूरी नहीं है, लेकिन फूड साइंस, एग्रीकल्चर, बॉटनी या हॉस्पिटैलिटी से जुड़े कोर्स काफी मददगार माने जाते हैं. भारत में कई संस्थान टी-टेस्टिंग और टी-मैनेजमेंट से जुड़े सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कराते हैं.सिलीगुड़ी स्थित कुछ संस्थानों में 3 महीने के सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं, जहां चाय की पहचान, टेस्टिंग तकनीक और क्वालिटी चेकिंग सिखाई जाती है. इसके अलावा इंटरनेशनल टी मास्टर्स एसोसिएशन और यूके टी अकादमी जैसे विदेशी संस्थान भी ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स ऑफर करते हैं.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;&amp;nbsp;ओडिशा बोर्ड ने जारी किए 12वीं के नतीजे, जानें किस तरह चेक कर सकते हैं रिजल्ट
टी-टेस्टर बनने के लिए कौन-सी स्किल जरूरी?
इस फील्ड में सफल होने के लिए स्वाद और खुशबू पहचानने की क्षमता सबसे जरूरी मानी जाती है. इसके अलावा धैर्य, ऑब्जर्वेशन स्किल, फूड टेस्टिंग की समझ और मार्केट नॉलेज भी जरूरी होती है. कई कंपनियां ऐसे लोगों को प्राथमिकता देती हैं जिन्हें चाय उत्पादन और प्रोसेसिंग की जानकारी हो.
कितनी मिलती है सैलरी?
भारत में शुरुआती स्तर पर एक टी-टेस्टर को लगभग 3 लाख से 5 लाख रुपये सालाना तक सैलरी मिल सकती है. अनुभव बढ़ने के साथ यह पैकेज 8 लाख से 12 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है.बड़ी चाय कंपनियों, एक्सपोर्ट हाउस और इंटरनेशनल ब्रांड्स में काम करने वाले अनुभवी टी-टेस्टर्स को इससे भी ज्यादा सैलरी मिलती है.यह भी पढ़ें - IAS-PCS की तैयारी अब फ्री, UP के इन छात्रों के लिए सुनहरा मौका; ऐसे करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कानून की पढ़ाई में बड़ा बदलाव, अब लॉ कॉलेजों में पढ़ाई जाएगी BNS और फोरेंसिक इन्वेस्टीगेशन</title>
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        <description><![CDATA[ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने देश की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLUs) और निजी लॉ कॉलेजों को एक अहम निर्देश जारी किया है. इस निर्देश में कहा गया है कि सभी लॉ संस्थान अपनी पढ़ाई में भारतीय न्याय संहिता (BNS) को शामिल करें. यानी अब कानून पढ़ने वाले छात्रों को पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) के साथ-साथ नए कानून की गहराई से पढ़ाई करनी होगी.
रिपोर्ट्स के अनुसार यह फैसला अचानक नहीं लिया गया. नवंबर 2025 में हुई DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई थी. इस बैठक में देश के बड़े पुलिस अधिकारी शामिल हुए थे. वहीं से यह सुझाव आया कि लॉ यूनिवर्सिटीज और बड़े कानूनी संस्थान यह समझें कि भारतीय न्याय संहिता ने देश की न्याय व्यवस्था में किस तरह बदलाव किया है और इसे पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाए.
UGC के नोटिस में साफ कहा गया है कि लॉ पढ़ाने वाले संस्थान यह अध्ययन करें कि नए आपराधिक कानूनों ने न्याय देने की प्रक्रिया को कैसे बदला है. खासकर यह देखा जाए कि अब जांच में फोरेंसिक साइंस की भूमिका कितनी बढ़ गई है. पहले जहां गवाह और बयान ज्यादा अहम होते थे, वहीं अब वैज्ञानिक जांच, डिजिटल सबूत और फोरेंसिक रिपोर्ट को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है.
करें केस स्टडी
UGC ने यह भी कहा है कि लॉ कॉलेज इस बदलाव पर केस स्टडी तैयार करें. यानी ऐसे उदाहरण इकट्ठा किए जाएं जिनसे पता चले कि फोरेंसिक तकनीक के उपयोग से जांच और अदालत की प्रक्रिया में क्या फर्क पड़ा. बाद में इन्हीं केस स्टडी को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि छात्र किताबों के साथ-साथ असली मामलों से भी सीख सकें.
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दरअसल, 1 जुलाई 2024 से देश में तीन नए आपराधिक कानून &amp;nbsp;भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू हुए थे. इन कानूनों ने अंग्रेजों के समय के IPC, CrPC और Evidence Act की जगह ली है. इन नए कानूनों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. जांच की प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है, समय सीमा तय की गई है, और फोरेंसिक जांच को जरूरी हिस्सा बनाया गया है.
किताबों तक सीमित न रहें छात्रइसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए UGC चाहता है कि लॉ के छात्र केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि यह समझें कि जमीन पर न्याय कैसे दिया जा रहा है. आने वाले समय में जो छात्र वकील, जज या जांच अधिकारी बनेंगे, उन्हें इन नए नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए.
इस दिशा में एक और बड़ी पहल बिहार की राजधानी पटना में देखने को मिल रही है. वहां नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) की स्थापना की जा रही है. इसका मकसद फोरेंसिक शिक्षा और रिसर्च को बढ़ावा देना है. देश में फोरेंसिक जांच से जुड़े मामलों का बैकलॉग काफी ज्यादा है. ऐसे में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत महसूस की जा रही है. यह यूनिवर्सिटी इस कमी को पूरा करने में मदद करेगी.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>नीट पेपर लीक से मचा बवाल, चीन की परीक्षा सुरक्षा जानकर रह जाएंगे हैरान; AI&amp;Drone और पुलिस एस्कॉर्ट तक कड़ा इंतजाम</title>
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        <description><![CDATA[ देश भर में इस वक्त नीट यूजी के पेपर लीक का मामला गर्माया हुआ है. ये कोई पहली बार नहीं जब देश में किसी एग्जाम का पेपर लीक हुआ हो. पिछले कुछ सालों में ये एक ट्रेंड सा बनता जा रहा है. जब कोई एग्जाम होता है छात्रों और अभिभावकों के मन में एक ही सवाल होता है क्या इस बार परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित होगी? इससे पहले 2024 में सामने आए पेपर लीक के मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे. लेकिन इस बार फिर नीट पेपर लीक के मामलों ने देश भर के युवाओं में आक्रोश पैदा कर दिया. लेकिन क्या आपको पता है चीन में एक ऐसा एग्जाम है जिसकी रखवाली सेना स्तर की होती है?
ऐसे में जब भारत में 22 से 23 लाख कैंडिडेट्स की तरफ से दिए जाने वाला पेपर लीक हो गया तो चीन के एग्जाम की बात करना जरूरी है. वहां के गाओकाओ एग्जाम में हर साल 1 करोड़ से ऊपर स्टूडेंट्स शामिल होते हैं. लेकिन जितनी बड़ी यह परीक्षा है, उससे कहीं ज्यादा मजबूत इसकी सुरक्षा व्यवस्था है. चीन में गाओकाओ केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानी जाती है. परीक्षा के पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा खत्म होने तक हर कदम पर सेना स्तर की सुरक्षा रहती है.
कहां तैयार होते हैं पेपर?
सबसे पहले बात पेपर की सुरक्षा की करते हैं. गाओकाओ के प्रश्न पत्र आम दफ्तरों में नहीं बनते. इन्हें बेहद गुप्त और अलग-थलग जगहों पर तैयार किया जाता है. कई बार इन जगहों में सरकारी सुरक्षित परिसर या जेल जैसी जगहें शामिल होती हैं. वहां काम करने वाले लोग परीक्षा खत्म होने तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहते हैं. उनके फोन, इंटरनेट और किसी भी तरह के संपर्क के साधन बंद कर दिए जाते हैं.
जब प्रश्न पत्र तैयार हो जाते हैं, तो उनकी ढुलाई भी आम तरीके से नहीं होती. पेपर ले जाने वाले वाहनों के साथ हथियारबंद सुरक्षा बल चलते हैं. गाड़ियों में जीपीएस लगा होता है और हर मूवमेंट पर नजर रखी जाती है. लाइव कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से इन गाड़ियों की निगरानी होती रहती है. इसे किसी सरकारी गुप्त दस्तावेज की तरह संभाला जाता है.
मोशन सेंसर और अलार्म से रखवालीपरीक्षा केंद्रों पर भी सुरक्षा कम नहीं होती. प्रश्न पत्रों को स्टील से बने मजबूत कमरों में रखा जाता है. इन कमरों में मोशन सेंसर और अलार्म लगे होते हैं. एक तय टीम इन कमरों के अंदर ही रहती है. वे वहीं खाते-पीते और सोते हैं, ताकि पेपर पर हर पल नजर रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
नकल रोकने के लिए पुख्ता इंतजामअब बात नकल रोकने की. परीक्षा केंद्र के गेट पर ही सख्त जांच शुरू हो जाती है. छात्र विशेष सुरक्षा गेट से होकर गुजरते हैं, जो बहुत छोटे धातु के टुकड़े तक पकड़ लेते हैं. मोबाइल, स्मार्ट वॉच, ईयरपीस या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक चीज अंदर ले जाना लगभग असंभव है.
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ड्रोन की भी ली जाती है मददपरीक्षा के दौरान सिग्नल जैमर लगाए जाते हैं, जिससे किसी भी तरह का फोन या रेडियो सिग्नल काम न कर सके. कुछ जगहों पर ड्रोन तक उड़ाए जाते हैं, जो आसपास किसी संदिग्ध सिग्नल को पकड़ लेते हैं. यानी जमीन से लेकर आसमान तक निगरानी रहती है.
AI कैमरे करते हैं ये कामकमरों के अंदर एआई कैमरे लगे होते हैं. ये कैमरे छात्रों की हर हरकत पर नजर रखते हैं. अगर कोई छात्र बार-बार इधर-उधर देखता है या उसकी बॉडी लैंग्वेज अजीब लगती है, तो तुरंत निगरानी करने वालों को अलर्ट मिल जाता है. इससे नकल की कोशिश तुरंत पकड़ में आ जाती है.
पुलिस करती है स्टूडेंट्स को एस्कॉर्टपरीक्षा के दिनों में शहरों का माहौल भी बदल जाता है. परीक्षा केंद्रों के आसपास ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है. अगर कोई छात्र ट्रैफिक में फंस जाए, तो पुलिस उसे एस्कॉर्ट करके समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाती है. शोर-शराबा रोकने के लिए निर्माण कार्य तक बंद कर दिए जाते हैं.यह भी पढ़ें - कानून की पढ़ाई में बड़ा बदलाव, अब लॉ कॉलेजों में पढ़ाई जाएगी BNS और फोरेंसिक इन्वेस्टीगेशन ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इंडियन क्रिकेट टीम के कप्तान की सैलरी होती है कितनी, प्लेइंग&amp;11 से कितना ज्यादा मिलता है पैसा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इंडियन-क्रिकेट-टीम-के-कप्तान-की-सैलरी-होती-है-कितनी-प्लेइंग-11-से-कितना-ज्यादा-मिलता-है-पैसा</link>
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        <description><![CDATA[ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आज अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले मैचों के लिए टीम इंडिया का ऐलान किया है. शुभमन गिल को वनडे और टेस्ट टीम की कमान दी गई है. टेस्ट में वाईस कैप्टन केएल राहुल को बनाया गया है जबकि ODI में ये जिम्मा श्रेयस उठाएंगे. लेकिन क्या आपको पता है टीम इंडिया के कप्तान को कितनी सैलरी मिलती है, या उसे बाकि टीम से ज्यादा पैसा मिलता है? आइए जानते हैं.
भारतीय क्रिकेट में कप्तान के लिए अलग से कोई फिक्स सैलरी नहीं होती. कप्तान भी उसी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के तहत पैसा पाता है, जिसमें बाकी खिलाड़ी शामिल होते हैं. बीसीसीआई हर साल खिलाड़ियों को अलग-अलग ग्रेड में बांटता है और उसी हिसाब से सालाना रकम देता है.
कैसे हैं ग्रेड?
सबसे ऊपर होता है ग्रेड A+. इस ग्रेड में आने वाले खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़ रुपये मिलते हैं. इसके बाद ग्रेड A में 5 करोड़, ग्रेड B में 3 करोड़ और ग्रेड C में 1 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं. कप्तान अगर A+ ग्रेड में है, तो उसे 7 करोड़ मिलेंगे. अगर वह A ग्रेड में है, तो 5 करोड़. यानी रकम ग्रेड से तय होती है, कप्तानी से नहीं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;कानून की पढ़ाई में बड़ा बदलाव, अब लॉ कॉलेजों में पढ़ाई जाएगी BNS और फोरेंसिक इन्वेस्टीगेशन
मैच फीस के बारे में जानें
अब बात करते हैं मैच फीस की. जब भी कोई खिलाड़ी मैच खेलता है, तो उसे हर फॉर्मेट के हिसाब से फीस मिलती है. टेस्ट मैच के लिए करीब 15 लाख रुपये, वनडे के लिए लगभग 6 से 7 लाख रुपये और टी20 के लिए करीब 3 लाख रुपये प्रति मैच दिए जाते हैं. यह फीस कप्तान और प्लेइंग-11 के बाकी खिलाड़ियों को बराबर मिलती है. अगर कोई खिलाड़ी स्क्वाड में है लेकिन प्लेइंग-11 में नहीं खेल रहा, तो उसे इस फीस का करीब आधा हिस्सा मिलता है. यानी अगर शुभमन गिल कप्तान हैं और कोई अन्य खिलाड़ी उसी मैच में खेल रहा है, तो दोनों को मैच फीस बराबर मिलेगी.
नए चेहरों को मौका
बीसीसीआई ने 14 से 20 जून के बीच अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम घोषित की है. शुभमन गिल को कप्तान बनाया गया है, जबकि श्रेयस अय्यर को उपकप्तान की जिम्मेदारी मिली है. इसके साथ ही एक टेस्ट मैच की सीरीज के लिए भी टीम का ऐलान हुआ, जिसमें केएल राहुल को कप्तान बनाया गया है. जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा को आराम दिया गया है और तीन नए चेहरों गुरनूर ब्रार, हर्ष दुबे और मानव सुथर को मौका मिला है.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इंडियन, क्रिकेट, टीम, के, कप्तान, की, सैलरी, होती, है, कितनी, प्लेइंग-11, से, कितना, ज्यादा, मिलता, है, पैसा</media:keywords>
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        <title>UPSC Prelims 2026: यूपीएससी एग्जाम वाले दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना रुक सकती है एंट्री</title>
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        <description><![CDATA[ यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 परीक्षा में शामिल होने जा रहे उम्मीदवारों के लिए एग्जाम डे गाइडलाइंस का पालन करना बेहद जरूरी है. हर साल कई अभ्यर्थी छोटी-छोटी गलतियों की वजह से परेशानी का सामना करते हैं.ऐसे में परीक्षा वाले दिन समय, दस्तावेज, ड्रेस कोड और परीक्षा हॉल के नियमों को लेकर पूरी तैयारी होना जरूरी है. इस बार UPSC प्रीलिम्स परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित होगी और आयोग ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा.
देर से पहुंचना पड़ सकता है भारी
यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. जनरल स्टडीज पेपर सुबह 9:30 बजे शुरू होगा जबकि CSAT दोपहर 2:30 बजे से होगा. आयोग के अनुसार सुबह 9 बजे और दोपहर 2 बजे के बाद परीक्षा केंद्र का गेट बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद किसी भी उम्मीदवार को एंट्री नहीं दी जाएगी. ऐसे में अभ्यर्थियों को कम से कम 45 मिनट पहले सेंटर पहुंचने की सलाह दी गई है ताकि बायोमेट्रिक जांच और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके.
बिना इन डॉक्यूमेंट के नहीं मिलेगी एंट्री
उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर यूपीएससी एडमिट कार्ड 2026 की प्रिंट कॉपी और ओरिजिनल फोटो आईडी साथ ले जाना अनिवार्य होगा.आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक दस्तावेज मान्य रहेगा. यदि एडमिट कार्ड पर फोटो साफ नहीं है तो दो पासपोर्ट साइज फोटो भी साथ रखना जरूरी होगा. आयोग ने साफ कहा है कि फोटो कॉपी या डिजिटल आईडी स्वीकार नहीं की जाएगी.
मोबाइल और स्मार्टवॉच ले जाना बन सकता है मुसीबत
यूपीएससी परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. मोबाइल फोन स्विच ऑफ होने पर भी अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा किताबें, नोट्स, बैग और कैलकुलेटर भी परीक्षा हॉल में नहीं ले जा सकेंगे. किसी प्रतिबंधित वस्तु के साथ पकड़े जाने पर उम्मीदवार को परीक्षा से बाहर किया जा सकता है.
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OMR शीट भरते समय बिल्कुल न करें ये गलती
यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा में OMR शीट सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट होता है. उम्मीदवारों को केवल ब्लैक बॉलपॉइंट पेन का इस्तेमाल करना होगा. रोल नंबर और बुकलेट सीरीज भरते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि गलत जानकारी भरने पर कॉपी चेक नहीं की जाएगी. व्हाइटनर, पेंसिल या करेक्शन फ्लूइड का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
परीक्षा के दिन सिंपल और आरामदायक कपड़े पहनें
हालांकि यूपीएससी ने कोई आधिकारिक ड्रेस कोड जारी नहीं किया है, लेकिन उम्मीदवारों को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनने की सलाह दी गई है.भारी ज्वेलरी, बड़े पॉकेट वाले कपड़े और मोटे सोल वाले जूते पहनने से बचना चाहिए क्योंकि सिक्योरिटी चेकिंग में ज्यादा समय लग सकता है.साधारण कपड़े पहनने से एंट्री प्रक्रिया आसान रहती है.
क्या-क्या ले जा सकते हैं?

एडमिट कार्ड की 2 प्रिंट कॉपी
ओरिजिनल फोटो आईडी
2 ब्लैक बॉलपॉइंट पेन
2 पासपोर्ट साइज फोटो
ट्रांसपेरेंट पानी की बोतल
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भीषण गर्मी के चलते दिल्ली समेत कई राज्यों में स्कूल बंद, जानें आपके राज्य में कितने दिन की छुट्टियां</title>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में पड़ रही तेज गर्मी ने इस बार रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. दोपहर की धूप ऐसी लग रही है जैसे आग बरस रही हो. सड़कों पर सन्नाटा है, लोग घरों में रहने को मजबूर हैं. सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर बढ़ गई है, क्योंकि स्कूल आने-जाने में उन्हें तेज धूप और गर्म हवा का सामना करना पड़ता है. यही वजह है कि कई राज्य सरकारों ने बच्चों का ध्यान रखते हुए स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां या तो पहले कर दी हैं या फिर बढ़ा दी हैं.
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब जैसे राज्यों ने स्कूलों के लिए छुट्टी शेड्यूल जारी कर दिया है. कई राज्यों के शिक्षा विभागों ने स्कूलों को अलग से निर्देश भी दिए हैं. स्कूलों से कहा गया है कि जब तक छुट्टियां शुरू नहीं होतीं, तब तक आउटडोर एक्टिविटी बंद रखी जाए. सुबह की शिफ्ट में ही क्लास ली जाए.
दिल्ली- यूपी का क्या है हाल?अगर हम देश की राजधानी दिल्ली में स्कूल 11 मई से 1 जुलाई 2026 तक बंद रहेंगे. यहां तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं ने हालात मुश्किल कर दिए हैं. वहीं, यूपी का भी गर्मी को लेकर राजधानी वाला हाल ही है. 20 मई से 15 जून 2026 तक स्कूलों की छुट्टियां रहेंगी. नोएडा और गाजियाबाद जैसे जिलों में तो छुट्टियों से पहले ही स्कूलों का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया गया है.
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बिहार और राजस्थान में इतनी छुट्टियांयूपी से लगे बिहार की बात करें तो राज्य में 1 जून से 20 जून 2026 तक स्कूल बंद रहेंगे. हालांकि गर्मी का प्रकोप यहां भी कम नहीं है. उधर राजस्थान में सरकार ने 17 मई से 20 जून 2026 तक गर्मी की छुट्टियां घोषित की हैं. यहां कई शहरों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है.
हरियाणा और पंजाब में कब से छुट्टियांहरियाणा में 1 जून से 30 जून 2026 तक स्कूलों की छुट्टी रहेगी. सरकार ने स्कूलों को सख्ती से नए शेड्यूल का पालन करने को कहा है. पंजाब में 25 मई से स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होंगी. यहां छुट्टी के बाद 1 जुलाई से दोबारा क्लास शुरू होगी.
अन्य राज्यों का हालआंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 24 अप्रैल से ही स्कूलों की छुट्टियां कर दी गई थीं, जो 11 जून 2026 तक चलेंगी. वहीं, ओडिशा में 27 अप्रैल से ही स्कूलों की छुट्टियां कर दी गई थीं. छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक स्कूल बंद हैं.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;कानून की पढ़ाई में बड़ा बदलाव, अब लॉ कॉलेजों में पढ़ाई जाएगी BNS और फोरेंसिक इन्वेस्टीगेशन
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NTPC लिमिटेड में एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के पदों पर चल रही भर्ती, 29 मई को बंद हो जाएगी रजिस्ट्रेशन विंडो</title>
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        <description><![CDATA[ NTPC Recruitment 2026:&amp;nbsp;नौकरी क तलाश में जुटे युवाओं के लिए सरकारी कंपनी NTPC Limited ने शानदार नौकरी का मौका दिया है. &amp;nbsp;कंपनी ने इंजीनियरिंग एग्जीक्यूटिव ट्रेनी (EET) के पदों पर भर्ती निकाली है. इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 मई से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 29 मई 2026 तक आवेदन कर सकते है. खास बात यह है कि भर्ती GATE-2025 स्कोर के आधार पर की जाएगी. &amp;nbsp;ऐसे में जिन छात्रों ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, वे एनटीपीसी लिमिटेड की ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कर सकते हैं.
कितने पदों पर होगी भर्ती और कौन कर सकता है आवेदन
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 52 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. &amp;nbsp;इनमें माइनिंग इंजीनियरिंग के 25 पद और सिविल/कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग के 27 पद शामिल हैं. &amp;nbsp;आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से कम से कम 65% अंकों के साथ फुल टाइम ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. जैसे B.E. या B.Tech की डिग्री होना जरूरी है. &amp;nbsp;साथ ही उम्मीदवार का गेट-2025 में उपस्थित होना भी अनिवार्य है. &amp;nbsp;बिना GATE स्कोर वाले उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे. भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि देशभर के छात्र आसानी से आवेदन कर सकें.&amp;nbsp;
आवेदकों की अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन के अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी. वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी.
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कैसे होगा चयन और क्या मिलेगा फायदा
एनटीपीसी की इस भर्ती में किसी अलग लिखित परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा. &amp;nbsp;उम्मीदवारों का चयन सीधे GATE-2025 स्कोर, शॉर्टलिस्टिंग, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाएगा के. इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के लिए बुलाया जा सकता है. जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी ई-I ग्रेड के तहत 40,000 से 1,40,000 रुपए के बीच प्रतिमाह होगी. इसी के साथ कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे. साथ ही इसमें सरकारी कंपनी में नौकरी मिलने के साथ उम्मीदवारों को अच्छा वेतन, ट्रेनिंग और करियर ग्रोथ का मौका मिलेगा. &amp;nbsp;यही वजह है कि इंजीनियरिंग छात्रों के बीच इस भर्ती को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है.&amp;nbsp;
ऐसे करें आवेदन, आखिरी तारीख का रखें ध्यान
इच्छुक उम्मीदवार एनटीपीसी की आधिकारिक करियर वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. फिर होमपेज पर जाने के बाद संबंधित पद के लिए दिए गए सक्रिय आवेदन लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करें. &amp;nbsp; आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज, फोटो और GATE स्कोर की जानकारी सही तरीके से भरना जरूरी है. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें, क्योंकि अंतिम दिनों में वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने की वजह से दिक्कत आ सकती है. &amp;nbsp;29 मई 2026 के बाद आवेदन विंडो बंद हो जाएगी. इसलिए जो छात्र सरकारी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, वे इस मौके को हाथ से न जाने दें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NTPC, लिमिटेड, में, एग्जीक्यूटिव, ट्रेनी, के, पदों, पर, चल, रही, भर्ती, मई, को, बंद, हो, जाएगी, रजिस्ट्रेशन, विंडो</media:keywords>
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        <title>CBSE Three Language Policy: CBSE न्यू 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, बीच सत्र में बदलाव से छात्र और अभिभावक बेहद परेशान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cbse-three-language-policy-cbse-न्यू-3-लैंग्वेज-पॉलिसी-पर-बवाल-बीच-सत्र-में-बदलाव-से-छात्र-और-अभिभावक-बेहद-परेशान</link>
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        <description><![CDATA[ CBSE Three Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 और 10 के लिए नई तीन-भाषा नीति लागू करने के फैसले ने देश भर के स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों के बीच खलबली मचा दी है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 के तहत उठाया गया यह कदम अकादमिक सत्र के बीच में लाया गया है. सत्र की शुरुआत और यूनिट टेस्ट होने के बाद अचानक आए इस नीतिगत बदलाव ने बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे बच्चों पर मानसिक और पढ़ाई का दबाव अत्यधिक बढ़ा दिया है. इससे न सिर्फ छात्र बल्कि उनके माता-पिता भी परेशान हैं.&amp;nbsp;
सत्र के बीच में बदलाव से आफत
सीबीएसई ने सत्र 2026-27 से नया भाषाई फॉर्मूला लागू तो कर दिया, लेकिन इसके लागू करने के समय को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. शिक्षाविदों का कहना है कि जब नया अकादमिक सत्र पहले ही शुरू हो चुका है और बच्चे अपना पहला यूनिट टेस्ट दे चुके हैं, तब इस तरह का बड़ा नीतिगत बदलाव करना कहीं से भी तार्किक नहीं है. किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले पूरे साल का कैलेंडर और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी होने चाहिए, न कि बच्चों को असमंजस में छोड़ देना चाहिए.&amp;nbsp;
बीच सत्र में थोप दिया नया नियम
बोर्ड ने इससे पहले मार्च के अपने सर्कुलर में स्पष्ट कहा था कि कक्षा 9 और 10 के वर्तमान छात्रों पर पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी और नई नीति को निचली कक्षाओं से धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा. अब अचानक से वर्तमान सत्र के बीच में ही इसे थोप दिए जाने से स्कूलों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है. बिना किसी पूर्व सूचना के नियमों को पलटने की बोर्ड की इस कार्यशैली से अभिभावकों में भारी आक्रोश है और वे बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
यह भी पढ़ें: CBSE में A1 ग्रेड का रास्ता आसान, साइंस और कॉमर्स के कई विषयों में घटी कट-ऑफ
बोर्ड के छात्रों के लिए चुनौती
जो छात्र कक्षा 9 को एक अलग भाषाई पैटर्न के साथ पास करके कक्षा 10 में आ चुके हैं, उनके लिए यह बदलाव किसी सदमे से कम नहीं है. बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण साल में बिल्कुल नई भाषा सीखना और उसमें पास होना छात्रों के लिए बेहद कठिन होगा. भले ही बोर्ड यह दलील दे कि इस अतिरिक्त भाषा के नंबर मेन एग्जाम के रिजल्ट में नहीं जुड़ेंगे, लेकिन आंतरिक मूल्यांकन और प्रमाणपत्र की जरूरतों के कारण छात्रों का कीमती समय और ऊर्जा इसमें बर्बाद होना तय है.
बारहवीं में भी छठी भाषा का बोझ
अभिभावकों को अब इस बात का डर सताने लगा है कि सीबीएसई कल को एक और नया सर्कुलर जारी कर इस अतिरिक्त भाषा को बोर्ड परीक्षा का मुख्य हिस्सा बना सकती है. कुछ स्कूलों ने तो अभी से कक्षा 12 के छात्रों पर भी छठी भाषा को वैकल्पिक के बजाय अनिवार्य विषय के रूप में चुनने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है. बारहवीं जैसे करियर के निर्णायक मोड़ पर इस तरह अतिरिक्त विषयों को थोपने से छात्रों के मुख्य विषयों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है.
छात्रों की मानसिक सेहत पर सीधा असर
पैरेंट्स का कहना है कि कक्षा 9 के स्तर पर छात्र पहले से ही एडवांस्ड मैथमेटिक्स, साइंस और सोशल साइंस जैसे भारी-भरकम और कठिन विषयों के पाठ्यक्रम को संभाल रहे होते हैं. उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की नींव इसी कक्षा से पड़ती है. ऐसे में एक और अनिवार्य भाषा का बोझ लादने से विषयों की कुल संख्या बढ़ जाएगी. कोचिंग, होमवर्क, प्रोजेक्ट्स और बेहतरीन प्रदर्शन के दबाव से जूझ रहे बच्चों के पास खेलकूद और मानसिक विकास के लिए समय ही नहीं बचेगा.
ट्रांसफर वाली नौकरियों में भारी दिक्कत
शिक्षाविदों का कहना है कि इस नीति को तैयार करते समय देश के उन परिवारों की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया है जो बार-बार एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर होने वाली नौकरियों में हैं. उदाहरण के लिए देखें तो यदि किसी अभिभावक का तबादला तमिलनाडु से असम या कर्नाटक हो जाता है, तो उनके बच्चे के लिए हर बार एक नई क्षेत्रीय भाषा को अपनाना और उसमें पढ़ाई करना नामुमकिन जैसा होगा. इस भाषाई विविधता के कारण बच्चे बीच सत्र में पूरी तरह पिछड़ जाएंगे.&amp;nbsp;
नॉर्थ-ईस्ट में संसाधनों का टोटा
शिक्षाविदों की मानें तो इस नीति के तहत दो स्थानीय या भारतीय भाषाओं का होना अनिवार्य किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में सीबीएसई के पास ऐसा कोई भाषाई ढांचा नहीं है जो इस नीति में आसानी से फिट हो सके. इन राज्यों के अधिकांश स्कूलों में हिंदी या संस्कृत के योग्य शिक्षकों और पर्याप्त अध्ययन सामग्री की भारी कमी है. ऐसी स्थिति में इस नीति को वहां जमीन पर उतारना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखता है.&amp;nbsp;
नौवीं से ही शुरू होती है बोर्ड की दौड़
अभिभावकों का कहना है कि कक्षा 9 कोई सामान्य क्लास नहीं है, बल्कि यह कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा की तैयारी का पहला कदम होती है. ऐसे में उत्तर लिखने का तरीका, मार्किंग स्कीम को समझना और पूरे पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने की दौड़ इसी साल से शुरू हो जाती है. बच्चे पहले दिन से ही बोर्ड परीक्षा के दबाव में रहते हैं. ऐसे संवेदनशील समय पर अचानक किसी नई भाषा को रटने का दबाव बच्चों को उनकी संस्कृति के करीब लाने के बजाय पढ़ाई से दूर कर देगा.
विदेशी भाषा चुनने वालों को बड़ा झटका
अभिभावकों की एक बड़ी चिंता यह भी है कि इस नई नीति में छात्रों को लैंग्वेज चुनने की कोई फ्लेक्सिबिलटी नहीं दी गई है. जो छात्र पिछले कई सालों से फ्रेंच या जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे थे और उनमें रुचि विकसित कर चुके थे, उन्हें अब बीच सफर में उन भाषाओं को छोड़ने या किसी भारतीय भाषा को जबरन अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. सालों की मेहनत और लगन पर इस फैसले से एक झटके में पानी फिर गया है.
विदेश में पढ़ाई की योजनाएं हुईं प्रभावित
कई छात्रों ने अपने भविष्य के करियर और विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की योजनाओं को ध्यान मे ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Three, Language, Policy:, CBSE, न्यू, लैंग्वेज, पॉलिसी, पर, बवाल, बीच, सत्र, में, बदलाव, से, छात्र, और, अभिभावक, बेहद, परेशान</media:keywords>
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        <title>Sikar Coaching Hub: राजस्थान का सीकर बना कोचिंग की नई फैक्ट्री, जानें कोटा को कैसे दी मात?</title>
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        <description><![CDATA[ Sikar Coaching Hub: राजस्थान का सीकर इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. एक तरफ नीट 2024 और नीट 2025 के शानदार रिजल्ट्स ने इस छोटे शहर को देश का नया कोचिंग हब बना दिया है तो वहीं अब नीट 2026 पेपर लीक मामले में सामने आए सीकर कनेक्शन ने नए इस मॉडल पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कभी कोटा को मेडिकल और इंजीनियरिंग एडमिशन परीक्षा की तैयारी का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सीकर ने जिस तेजी से अपनी पहचान बनाई है, उसने पूरे एजुकेशन सेक्टर का ध्यान अपनी और खींच लिया है. आज हम आपको बताते हैं कि आखिर सीकर ने कोटा को कैसे पीछे छोड़ा और कैसे यह शहर कोचिंग की नई फैक्ट्री बन गया है.
कैसे शुरू हुआ सीकर का कोचिंग सफर?
शेखावाटी क्षेत्र का प्रमुख जिला सीकर लंबे समय से शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है. राजस्थान की मेरिट लिस्ट में यहां के छात्रों का दबदबा वर्षों तक बना रहा, लेकिन कोचिंग इंडस्ट्री की असली शुरुआत 1996 में मानी जाती है. जब स्थानीय स्तर पर छोटे बैच से पढ़ाई शुरू हुई. बाद में सीएलसी जैसे संस्थानों ने इसे बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया. स्थानीय लोगों के अनुसार कोटा की सफलता को देखकर सीकर में भी मेडिकल और इंजीनियरिंग एडमिशन एग्जाम की तैयारी का मॉडल तैयार किया गया. धीरे-धीरे यहां के इंस्टीट्यूट के रिजल्ट आने लगे और प्रदेशभर के छात्र सीकर पहुंचने लगे. पिछले 8 से 10 वर्षों में यह बदलाव बहुत तेजी से हुआ.
कोरोना के बाद तेजी से बदला सीकर
कोरोना महामारी के बाद सीकर का कोचिंग मॉडल और तेजी से बढ़ा. पिपराली रोड और नवलगढ़ रोड जैसे इलाके, जहां कुछ साल पहले तक कम आबादी थी, अब बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान हॉस्टल्स और लाइब्रेरी से बढ़ चुके हैं. हॉस्टल संचालकों के मुताबिक शहर में करीब 3000 से ज्यादा हॉस्टल और बड़ी संख्या में पीजी चल रहे हैं. आज स्थिति यह हैं यहां राजस्थान के अलावा हरियाणा, दिल्ली और पंजाब समेत कई राज्यों के छात्र पहुंच रहे हैं. कोचिंग संस्थानों का दावा है कि छोटे बैच से पर्सनल फोकस और कम खर्च के कारण यहां छात्रों को बेहतर माहौल मिलता है.
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नीट के रिजल्ट में दिलाई नई पहचान
सीकर को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली, जब नीट 2024 और नीट 2025 के रिजल्ट में यहां के छात्रों का प्रदर्शन शानदार रहा. आंकड़ों के अनुसार 2024 में 700 से ज्यादा अंक लाने वाले छात्रों की संख्या सीकर में कोटा से दोगुनी रही. वहीं 650 से 600 से ज्यादा अंक पाने वाले छात्रों की संख्या ने भी सभी को चौंका दिया. सीकर के मुकाबले कोटा के आंकड़े काफी पीछे रहे थे, यही वजह है कि देशभर में शिखर को नया कोचिंग किंग कहां जाने लगा. हालांकि कोटा आज भी देश का बड़ा एजुकेशन हब बना हुआ है लेकिन सीकर तेजी से इसे टक्कर देने वाला बन रहा है.
कोटा से क्यों टूट रहा छात्रों का भरोसा?
एक समय ऐसा था, जब मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी का मतलब सिर्फ कोटा माना जाता था. लेकिन अब धीरे-धीरे तस्वीर बदल रही है. एक्सपर्ट के अनुसार कोटा में आत्महत्या की घटनाओं, भारी कंपटीशन और महंगा खर्च पेरेंट्स को दूसरे ऑप्शन तलाशने पर मजबूर कर रहा है. जहां कोटा में एक छात्र पर सालाना 4 से 5 लाख तक खर्च आता है, वहीं सीकर में यही खर्च करीब ढाई से तीन लाख रुपये के बीच माना जाता है. मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह बड़ा कारण बनकर सामने आया है. यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में कोटा छोड़कर शिखर पहुंचे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSSSC Recruitment 2026: यूपी विधानसभा सुरक्षा विभाग में भर्ती का मौका, 170 पदों पर आवेदन जल्द शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. UPSSSC ने फायरमैन और विधानसभा रक्षक भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के तहत कुल 170 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. केवल PET 2025 पास उम्मीदवार ही इसमें आवेदन कर पाएंगे.इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 170 पद भरे जाएंगे.इनमें 120 पद विधानसभा रक्षक और 50 पद फायरमैन के लिए निर्धारित किए गए हैं. आयोग ने अलग-अलग वर्गों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की व्यवस्था भी लागू की है.
कौन कर सकता है आवेदन?इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है. इसके साथ ही अभ्यर्थी के पास UPSSSC PET 2025 का वैध स्कोर कार्ड होना चाहिए.
क्या चाहिए उम्र सीमा?उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी.
शारीरिक योग्यताभर्ती में उम्मीदवारों को फिजिकल टेस्ट भी पास करना होगा. सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और एससी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों की लंबाई 168 सेमी और महिलाओं की 152 सेमी तय की गई है.वहीं एसटी वर्ग के पुरुषों के लिए 160 सेमी और महिलाओं के लिए 147 सेमी लंबाई जरूरी होगी. पुरुष उम्मीदवारों के लिए सीने की माप भी निर्धारित की गई है.इसके अलावा दौड़ और फिटनेस टेस्ट के जरिए उम्मीदवारों की शारीरिक क्षमता जांची जाएगी.
चयन प्रक्रिया कैसे होगी?उम्मीदवारों का चयन चार चरणों में किया जाएगा. सबसे पहले लिखित परीक्षा होगी जिसमें सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर और उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. इसके बाद फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट लिया जाएगा. सफल उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा. सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया जाएगा.
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परीक्षा पैटर्नलिखित परीक्षा में कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे. परीक्षा 100 अंकों की होगी और इसे हल करने के लिए 2 घंटे का समय दिया जाएगा. हर सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा जबकि गलत जवाब देने पर 0.25 अंक काटे जाएंगे. इसलिए उम्मीदवारों को सावधानी के साथ प्रश्न हल करने होंगे.
आवेदन शुल्क कितना है?उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए एप्लीकेशन फीस देनी होगी. इस भर्ती में सभी वर्गों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क केवल 25 रुपये रखा गया है.
ऐसे करें आवेदन

अप्लाई करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले upsssc.gov.in पर जाएं.
इसके बाद भर्ती लिंक पर क्लिक करके PET 2025 रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से लॉगिन करें.
आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें.
जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.
आवेदन शुल्क जमा करके फॉर्म सबमिट कर दें.
भविष्य के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर रख लें.यह भी पढ़ें - CBSE Three Language Policy: CBSE न्यू 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, बीच सत्र में बदलाव से छात्र और अभिभावक बेहद परेशान
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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