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    <title>Attention India Hindi &amp; : एजुकेशन</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : एजुकेशन</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>IAF अग्निवीर वायु सिटी स्लिप 2026 जारी,  22&amp;23 सितंबर को होगी परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय वायुसेना ने अग्निवीर वायु इनटेक 02/2027 और एयरमैन मेडिकल असिस्टेंट इनटेक 02/2027 के लिए एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों ने इस भर्ती के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया था. वह अपने कैंडिडेट लॉगिन के जरिए परीक्षा शहर की जानकारी चेक कर सकते हैं. सिटी स्लिप भारतीय वायु सेना के आधिकारिक भर्ती पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है.
अग्निवीर वायु इनटेक 02/2027 की ऑनलाइन परीक्षा 22 और 23 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. वहीं उम्मीदवारों को यह भी जानना होगा कि सिटी इंटीमेशन स्लिप एडमिट कार्ड नहीं है. परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड अलग से जारी किया जाएगा.&amp;nbsp;
48 से 72 घंटे पहले जारी होगा एडमिट कार्ड&amp;nbsp;
भारतीय वायु सेना ने एडमिट कार्ड जारी करने की कोई अलग तारीख घोषित नहीं की है. ऑफिशियल पोर्टल पर दी गई जानकारी के अनुसार उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड परीक्षा की तारीख से 48 से 72 घंटे पहले कैंडिडेट लॉगिन के जरिए डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध होगा. जिसका मतलब है कि 22 और 23 सितंबर को होने वाली परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को परीक्षा से एक या दो दिन पहले अपने लॉगिन में जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड करना होगा.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड करें IAF अग्निवीर वायु सिटी स्लिप&amp;nbsp;

सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले भारतीय वायुसेना के भर्ती पोर्टल पर जाए.
इसके बाद वेबसाइट पर कैंडिडेट लॉगिन सेक्शन खोलें.
यहां अग्नि वीर वायु इनटेक 02/2027 के एग्जाम डेट और एग्जाम सिटी से संबंधित लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब अपनी यूजर आईडी, पासवर्ड और जरूरत के अनुसार कैप्चा दर्ज करें.
लॉगिन करने के बाद एग्जाम सिटी स्लिप स्क्रीन पर दिखाई देगी, इसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें.

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क्या है परीक्षा पैटर्न?
अग्निवीर वायु भर्ती का पहला चरण ऑनलाइन टेस्ट है. इसमें ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल पूछे जाएंगे. परीक्षा में अंग्रेजी को छोड़कर सवाल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होंगे. उम्मीदवारों को प्रत्येक पेपर में अलग-अलग क्वालीफाई करना होगा और इसके लिए नॉर्मलाइज्ड मार्क्स का इस्तेमाल किया जाएगा. साइंस सब्जेक्ट वाले उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की अवधि 60 मिनट होगी. इसमें फिजिक्स, मैथमेटिक्स और इंग्लिश से प्रश्न होंगे. साइंस कैटेगरी के अलावा परीक्षा 45 मिनट की होगी और इसमें इंग्लिश, रीजनिंग और जनरल अवेयरनेस शामिल होंगे. वहीं साइंस और साइंस के अलावा दोनों विषयों के लिए परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को 85 मिनट मिलेंगे. इसमें फिजिक्स, मैथमेटिक्स, इंग्लिश और रीजनिंग एंड जनरल अवेयरनेस के सवाल पूछे जाएंगे.
भर्ती में आगे क्या होगा?
अग्निवीर वायु भर्ती की चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन सीबीटी के बाद फिजिकल फिटनेस टेस्ट, एडेप्टेबिलिटी टेस्ट, मेडिकल एग्जामिनेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल है. यह अभियान में अग्निवीर इनटेक 02/2027 के तहत चलाया जा रहा है. वहीं उम्मीदवारों को आयोग ने यह भी सलाह दी कि सिटी स्लिप डाउनलोड करने के बाद उसमें दी गई परीक्षा के शहर की जानकारी देखें. जिससे उन्हें परीक्षा के लिए ट्रैवल करने से जुड़ी जरूरी जानकारी देखने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>किस राज्य में कितनी बढ़ीं MBBS की सीटें? जानें टॉप&amp;5 राज्यों के नाम</title>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के बीच मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एमबीबीएस सीटों को लेकर बाद अपडेट सामने आया है. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए देशभर में 13,186 नई मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है. इसके साथ ही देश में कुल स्वीकृत एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है. इससे पहले सीटों की संख्या 1,27,028 थी.
नई सीटों का फायदा देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समान रूप से नहीं मिला है. कुल राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 27 में सीटें बढ़ाई गई है, जबकि 7 जगह पर सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि किस राज्य में कितनी एमबीबीएस सीटें बढ़ाई गई है और इनमें टॉप राज्य कौन से हैं.&amp;nbsp;
कर्नाटक में सबसे ज्यादा सीटों का इजाफा&amp;nbsp;
नई सीटों के मामले में कर्नाटक सबसे आगे हैं. यहां एमबीबीएस की 1,650 सीटें बढ़ाई गई है. इसके बाद राज्य में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 15,745 हो गई. यह सीटें मेडिकल 76 कॉलेजों में है. कर्नाटक के बाद तमिलनाडु का नंबर आता है. राज्य में 1250 नहीं सीटें जोड़ी गई है और कुल सीटों की संख्या बढ़कर 14,299 हो गई. तीसरे स्थान पर बिहार है, जहां एमबीबीएस की 1240 सीटें बढ़ी है. इसके बाद राज्य में कुल 4,660 सीटें हो गई. वहीं उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस की 1200 सीटों का इजाफा हुआ है. नई सीटों के बाद यूपी में एमबीबीएस सीटों की संख्या 14,400 हो गई है.&amp;nbsp;
टॉप 5 में राजस्थान भी शामिल&amp;nbsp;
एमबीबीएस सीटों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले राज्यों की लिस्ट में राजस्थान पांचवें स्थान पर है. यहां 1,100 नई सीट जोड़ी गई है और कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 8,280 हो गई. इन पांच राज्यों को मिलकर ही कुल 6,440 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ी है. वहीं कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश में अकेले 5,340 सीटों की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद तेलंगाना में 1,010, पश्चिम बंगाल में 975, महाराष्ट्र में 550, आंध्र प्रदेश में 525 और झारखंड तथा मध्य प्रदेश में 520-520 सीटें बढ़ाई गई है. हरियाणा में 350 और केरल में 300 सीटों को मंजूरी मिली है.&amp;nbsp;
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इन राज्यों में भी बढ़ी एमबीबीएस सीटें&amp;nbsp;
गुजरात में 250, पुडुचेरी और उत्तराखंड में 20- 200, जम्मू कश्मीर में 175 तथा असम, ओडिशा और सिक्किम में 100-100 सीटें बढ़ाई गई है. चंडीगढ़, गोवा, पंजाब और त्रिपुरा में 50-50 सीटों का इजाफा हुआ. मणिपुर में 25 और हिमाचल प्रदेश में केवल 1 सीट बढ़ाई गई है. वहीं दिल्ली, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार दीप समूह तथा दादरा और नगर हवेली में नई सीटों के बढ़ोतरी नहीं हुई है.
नई सीटों में प्राइवेट कॉलेजों की बड़ी हिस्सेदारी&amp;nbsp;
एनएमसी के अपडेटेड सीट मैट्रिक्स के अनुसार बढ़ाई गई 13,186 सीटों में से 10,400 सीटें प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में जोड़ी गई है, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 2,786 सीटों की बढ़ोतरी हुई है. नई सीटों के बाद कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,40,214 हो गई है. एनएमसी ने काउंसलिंग अथॉरिटीज को यह भी निर्देश दिया है कि एडमिशन केवल स्वीकृत सीट मैट्रिक्स के अनुसार ही किया जाए. अगर सीट मैट्रिक्स में किसी तरह की गड़बड़ी या अंतर दिखता है तो मामला मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के सामने रखा जाएगा &amp;zwnj;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSC में 212 पदों पर सीधी भर्ती, जानें कैसे करें आवेदन?</title>
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        <description><![CDATA[ यूपीएससी ने केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन के तहत अलग-अलग पदों पर सीधी भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए कुल 212 पदों को भरा जाना है. इनमें स्पेशलिस्ट ग्रेड 3, असिस्टेंट प्रोफेसर, असिस्टेंट एडिटर और स्पेशलिस्ट ग्रेड 2 जैसे कई पद शामिल है. इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 12 सितंबर यानी आज से शुरू हो गई है.
उम्मीदवार यूपीएससी के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं. लद्दाख के पद को छोड़कर बाकी सभी पदों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख के 2 अक्टूबर 2026 में शाम 6 बजे तक है. वहीं लद्दाख प्रशासन के तहत आने वाले पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है.
किन पदों के लिए कितनी वैकेंसी?
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 7 अलग-अलग तरह के पदों पर नियुक्ति की जाएगी. स्पेशलिस्ट ग्रेड 3 असिस्टेंट प्रोफेसर के चार पद हैं. यह भर्ती स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत होगी. इस भर्ती इस पद के लिए पे लेवल 11 के तहत एनपीए का प्रावधान है. &amp;nbsp;यूआर-ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 40 वर्ष और एससी उम्मीदवारों के लिए 45 वर्ष है. स्पेशलिस्ट ग्रेड 3 असिस्टेंट प्रोफेसर (जनरल मेडिसिन) के सबसे ज्यादा 60 पद है. इनमें पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी के लिए तीन पद आरक्षित है. वहीं असिस्टेंट एडिटर के 2 पद भारतीय खान ब्यूरो, खान मंत्रालय में है. इसके अलावा एनडीएमसी में स्पेशलिस्ट ग्रेड 2 (जूनियर स्केल) एनेस्थिसियोलॉजी और पेडियाट्रिक्स के एक-एक पद हैं. सबसे ज्यादा 140 पद असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के हैं. यह पर दिल्ली सरकार के गृह विभाग के अभियोजन निदेशालय में है. वहीं लद्दाख प्रशासन के कानून एवं न्याय विभाग में पब्लिक लॉ ऑफिसर के 4 पद है. इस तरह सभी पदों को मिलाकर भर्ती में कुल 212 पद खाली है.
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कैसे करना होगा आवेदन?
आवेदन के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी के ऑनलाइन पोर्टल and.nic.in पर जाना होगा. आवेदन करने से पहले वेबसाइट पर उपलब्ध जनरल इंस्ट्रक्शन, &amp;nbsp;प्रोफाइल-मॉड्यूल वाइस इंस्ट्रक्शन और डॉक्यूमेंट अपलोड करने से जुड़ी गाइडलाइन पढ़नी होगी. इसके बाद उम्मीदवारों को जरूरी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरनी होगी. आवेदन प्रक्रिया में यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन नंबर, कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म और संबंधित पद के लिए पोस्ट-वैकेंसी-स्पेसिफिक मॉड्यूल पूरा करना होगा. उम्मीदवारों को जन्म तिथि, कैटेगरी और शैक्षणिक योग्यता जैसे दावों से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट भी निर्धारित तरीके से जमा करने होंगे.
डॉक्यूमेंट नहीं दिए तो रद्द हो सकती है उम्मीदवारी
यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म के साथ मांगी गई जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित पद के लिए उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है. हर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता, एक्सपीरियंस, आयु सीमा, वेतन और आरक्षण से जुड़ी शर्तें अलग हो सकती है. इसलिए उम्मीदवारों का आवेदन करने से पहले संबंधित विज्ञापन में अपने पद की एलिजिबिलिटी और दूसरी शर्तों को देखना होगा.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 06:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>FMGE 2026: आज से शुरू हुए रजिस्ट्रेशन, 31 अक्टूबर को होगी परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) FMGE अक्टूबर 2026 सेशन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है. इच्छुक उम्मीदवार शाम 5 बजे से ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे. इस परीक्षा के जरिए विदेश से मेडिकल की डिग्री लेने वाले एलिजिबल भारतीय नागरिक और ओवरसीज इंडियन सिटीजन भारत में मेडिकल प्रैक्टिसेेज के लिए जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट दे सकते हैं. एनबीईएमएस की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार आवेदन की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई और 25 सितंबर तक चलेगी. एफएमजीई अक्टूबर सेशन की परीक्षा 31 अक्टूबर 2026 को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्र पर आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
FMGE 2026 के लिए जरूरी तारीखें&amp;nbsp;
एफएमजी अक्टूबर 2026 सेशन का डीटेल्ड इनफॉरमेशन बुलेटिन 11 सितंबर को जारी किया जाएगा. इसी दिन शाम 5 बजे से ऑनलाइन आवेदन भी शुरू होंगे. उम्मीदवारों को 25 सितंबर तक का अपना फॉर्म जमा करना होगा. इसके बाद 31 अक्टूबर को परीक्षा आयोजित की जाएगी. वहीं परीक्षा का रिजल्ट 30 नवंबर 2026 तक जारी किए जाने की संभावना है.&amp;nbsp;
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300 सवालों का होगा कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम&amp;nbsp;
एफएमजीई अक्टूबर 2026 में एक ही पेपर होगा, जिसमें 300 मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन पूछे जाएंगे. परीक्षा कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से होगी और प्रश्न केवल अंग्रेजी भाषा में होंगे. हर सवाल के चार ऑप्शन दिए जाएंगे, जिनमें से उम्मीदवार को सही उत्तर चुनना होगा. उम्मीदवार परीक्षा के दौरान सवालों को रिव्यू के लिए मार्क भी कर सकेंगे, ताकि समय रहते दोबारा उन प्रश्नों पर नजर डाल सके. इसके अलावा एफएमजीई अक्टूबर 2026 के लिए परीक्षा फीस 5,250 है. वहीं 945 जीएसटी देना होगा. इस तरह उम्मीदवार को कुल 6,195 रुपये का पेमेंट करना होगा.&amp;nbsp;
ऐसे करें एफएमजीई के लिए आवेदन&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन लिंक एक्टिव होने के बाद उम्मीदवार एनबीईएमएस की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर एफएमजीई अक्टूबर 2026 का ऑप्शन चुन सकते हैं. इसके बाद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके लॉगिन करना होगा और आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरनी होगी. जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद परीक्षा फीस जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा. लास्ट में कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके सुरक्षित रख सकते हैं. वहीं उम्मीदवार काे ध्यान रखना होगा कि एफएमजीई 2026 के लिए सिर्फ एक आवेदन फॉर्म जमा किया जा सकता है. एक से ज्यादा आवेदन करने पर एनबीईएमएस उच्च एप्लीकेशन नंबर वाले फॉर्म का ही एडमिट कार्ड जारी कर सकता है और दूसरे आवेदन रद्द किए जा सकते हैं. ऐसे मामलों में जमा फीस भी जब्त हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राजस्थान से राष्ट्रपति भवन तक का सफर, मेजर नव्या शेखावत बनी पहली महिला आर्मी ADC</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राजस्थान-से-राष्ट्रपति-भवन-तक-का-सफर-मेजर-नव्या-शेखावत-बनी-पहली-महिला-आर्मी-adc</link>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान से राष्ट्रपति भवन तक का सफर, मेजर नव्या शेखावत बनी पहली महिला आर्मी ADC ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>कौन&amp;सा है दुनिया का सबसे छोटा यूनिवर्सिटी कैंपस, जहां हैं सिर्फ 3 क्लासरूम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कौन-सा-है-दुनिया-का-सबसे-छोटा-यूनिवर्सिटी-कैंपस-जहां-हैं-सिर्फ-3-क्लासरूम</link>
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        <description><![CDATA[ यूनिवर्सिटी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग और बहुत सारे क्लासरूम की तस्वीर आती है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी यूनिवर्सिटी देखी है, जहां सिर्फ 3 क्लासरूम हों? दरअसल, प्रशांत महासागर में मौजूद छोटे से देश तुवालु में यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक का एक कैंपस है, जिसमें सिर्फ 3 क्लासरूम हैं. इस कैंपस को दुनिया का सबसे छोटा यूनिवर्सिटी कैंपस बताया जाता है. खास बात यह है कि जगह छोटी होने के बाद भी यहां सैकड़ों छात्र पढ़ाई से जुड़े हैं.
तुवालु में है यह छोटा कैंपस
यह कैंपस तुवालु की राजधानी फुनाफुटी में है. तुवालु प्रशांत महासागर में मौजूद एक छोटा सा द्वीपीय देश है. यहां का यह कैंपस यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक यानी यूएसपी का हिस्सा है. यूएसपी का मुख्य कैंपस फिजी में है और इसके कई दूसरे कैंपस प्रशांत महासागर के अलग-अलग देशों में हैं. तुवालु के छात्रों को अपने देश में ही पढ़ाई का मौका मिले, इसलिए यहां भी यूनिवर्सिटी का कैंपस बनाया गया है. इससे छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे देश जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
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सिर्फ 3 क्लासरूम में होती है पढ़ाई
इस कैंपस की सबसे खास बात यहां के सिर्फ 3 क्लासरूम हैं. पूरी बिल्डिंग भी बहुत बड़ी नहीं है. इसमें क्लासरूम के अलावा कुछ ऑफिस और एक कॉन्फ्रेंस रूम भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर सेमेस्टर करीब 330 छात्र इस कैंपस की सुविधाओं से जुड़े रहते हैं. इनमें से कुछ छात्र कैंपस में आकर पढ़ते हैं, जबकि दूर रहने वाले छात्रों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी इस्तेमाल की जाती है. यानी जगह भले ही छोटी है, लेकिन छात्रों की संख्या और पढ़ाई का काम काफी बड़ा है.
छात्रों के लिए क्यों जरूरी है यह कैंपस
तुवालु में कई छोटे-छोटे द्वीप हैं और एक जगह से दूसरी जगह जाना आसान नहीं होता. ऐसे में वहां का यह कैंपस छात्रों के लिए काफी काम आता है. उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अपना देश छोड़कर बाहर जाने की जरूरत कम पड़ती है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह कैंपस 1980 के दशक की शुरुआत में एक एक्सटेंशन सेंटर के तौर पर शुरू हुआ था. बाद में यह यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक के कैंपस का हिस्सा बन गया. आज यहां सीमित जगह में छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी सुविधाएं दी जाती हैं.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कौन-सा, है, दुनिया, का, सबसे, छोटा, यूनिवर्सिटी, कैंपस, जहां, हैं, सिर्फ, क्लासरूम</media:keywords>
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        <title>UP लेखपाल भर्ती का रिजल्ट जारी, 28409 उम्मीदवार हुए शॉर्टलिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने लेखपाल मुख्य परीक्षा 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया है. परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर 28409 उम्मीदवारों को अगले चरण यानी एलिजिबिलिटी और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है. उम्मीदवार अपना रिजल्ट आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर देख सकते हैं. इस भर्ती के जरिए राजस्व विभाग में लेखपाल के 7,994 पदों पर नियुक्ति की जानी है. मुख्य परीक्षा 21 मई 2026 को आयोजित हुई थी. आयोग ने रिजल्ट के साथ अलग-अलग वर्गों के लिए कट ऑफ अंक भी जारी किए हैं.
किस कैटेगरी की कितनी रही कट ऑफ?
लिखित परीक्षा के आधार पर सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 58.75 प्रति अंक रही है. वहीं अनुसूचित जाति के लिए 51.25, अनुसूचित जनजाति के लिए 44, ओबीसी के लिए 55.75 और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 55.25 अंक कट ऑफ तय की गई है. क्षैतिज आरक्षण वाली कैटेगरी में भी अलग कटऑफ जारी हुई है. स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के लिए 34.25, महिलाओं के लिए 49.25 और पूर्व सैनिकों के लिए 30.50 अंक कट ऑफ रही. पीडब्ल्यूडी की अलग-अलग कैटेगरी के लिए भी आयोग ने कट ऑफ जारी की है, जबकि कुछ केटेगरी में प्रॉब्लम सीटों की सीमा तक पात्र उम्मीदवारों को शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
28,409 उम्मीदवार अब देंगे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन&amp;nbsp;
रिजल्ट में जगह बनाने वाले 28,409 उम्मीदवारों को अब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया में शामिल होना होगा. आयोग की ओर से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से जुड़ी तारीख, डॉक्यूमेंट अपलोड करने की प्रक्रिया, जगह और दूसरे जरूरी निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आगे की प्रक्रिया के लिए सबसे पहले अपने जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखें.&amp;nbsp;
रिजल्ट में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
यूपीएसएसएससी लेखपाल रिजल्ट में उम्मीदवारों का नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, कैटेगरी और क्वालीफाइंग स्टेटस जैसी जानकारी देखी जा सकेगी. इसके अलावा शॉर्ट लिस्टिंग और आगे होने वाले एलिजिबिलिटी या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से जुड़े निर्देश भी दिए जाएंगे.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक करें यूपी लेखपाल रिजल्ट&amp;nbsp;

उम्मीदवार रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले यूपीएसएसएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in &amp;nbsp;पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज के नोटिस बोर्ड सेक्शन में लेखपाल मुख्य परीक्षा के रिजल्ट से संबंधित लिंक खोलें.&amp;nbsp;
अब मांगी गई जानकारी दर्ज करके सबमिट करें.
इसके बाद स्क्रीन पर अपना क्वालीफाइंग स्टेटस चेक करें और रिजल्ट डाउनलोड कर लें

लेखपाल रिजल्ट अंतिम चयन नहीं
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह रिजल्ट अंतिम चयन लिस्ट नहीं है. 28,409 उम्मीदवारों को केवल एलिजिबिलिटी और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के अगले चरण के लिए योग्य माना गया है. रिजल्ट में नाम आने से किसी उम्मीदवार का लेखपाल पद पर अंतिम चयन का अधिकार तय नहीं होता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लेखपाल, भर्ती, का, रिजल्ट, जारी, 28409, उम्मीदवार, हुए, शॉर्टलिस्ट</media:keywords>
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        <title>हिमाचल के स्कूलों में बदलेगा यूनिफॉर्म का रंग, टीचर्स के लिए भी नया ड्रेस कोड </title>
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        <description><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों के पहनावे के साथ-साथ स्कूलों की बिल्डिंग का रंग भी एक तय पैटर्न के अनुसार होगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के बैठक हुई. जिसमें सीबीएसई स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म, शिक्षकों की ड्रेस कोड और बिल्डिंग की कलर स्कीम को अंतिम रूप देने को लेकर फैसला लिया गया. सरकार का कहना है कि इन बदलाव के लिए जरिए स्कूलों को एक अलग और एक रूप पहचान देने के साथ छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
छात्रों के लिए ग्रीन कलर की यूनिफॉर्म&amp;nbsp;
बैठक में बताया गया कि हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में छात्रों की यूनिफॉर्म ग्रीन कलर स्कीम पर आधारित होगी. यानी राज्य के इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अलग और तय ड्रेस पैटर्न रखा जाएगा. इसके साथ स्कूलों की बिल्डिंग के लिए भी एक समान रंग तय किया गया है. सीबीएसई स्कूलों के भवनों को ओलिव ग्रीन और सैंड बैज रंगों में पेंट किया जाएगा. इससे अलग-अलग स्कूलों के प्रेशर में एक समान रंग संयोजन नजर आएगा.&amp;nbsp;
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महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए भी अलग ड्रेस कोड&amp;nbsp;
छात्रों के साथ शिक्षकों के पहनावे को लेकर भी स्पष्ट ड्रेस कोड तय किया गया है. महिला शिक्षकों के लिए लाइट लिलैक पर्पल रंग की ड्रेस निर्धारित की गई है, &amp;nbsp;जबकि पुरुष शिक्षक लाइट ब्लू ट्राउजर और शर्ट पहनेंगे. सरकार ने शिक्षकों के ड्रेस कोड को साफ-सुथरा, फॉर्मल, शालीन और प्रोफेशनल रखने पर जोर दिया है. शिक्षकों को ड्यूटी के दौरान कम से कम एसेसरीज इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा स्कूल में ड्यूटी के समय शिक्षकों के लिए अपना आईडी कार्ड पहनना भी जरूरी होगा, ताकि उनकी पहचान आसानी से की जा सके.&amp;nbsp;
सीबीएसई स्कूलों के लिए 80 करोड रुपये जारी&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और बच्चों को उनके घर के नजदीक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है. इसी दिशा में सीबीएसई स्कूलों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और छात्रों व शिक्षकों की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार पहले ही 80 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है. इसके अलावा इन स्कूलों के लिए 5 करोड़ रुपये और जारी किए जाएंगे. सरकार के अनुसार इस राशि का इस्तेमाल शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को उनके घर के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में किया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हिमाचल, के, स्कूलों, में, बदलेगा, यूनिफॉर्म, का, रंग, टीचर्स, के, लिए, भी, नया, ड्रेस, कोड </media:keywords>
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        <title>UGC NET जून 2026 री&amp;एग्जाम की प्रोविजनल आंसर की जारी, 13 सितंबर तक दर्ज कराएं आपत्ति</title>
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        <description><![CDATA[ एनटीए ने यूजीसी नेट जून 2026 के री-एग्जाम की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है. यह आंसर की इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के एग्जाम में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए जारी की गई है. उम्मीदवार अपनी आंसर की के साथ रिकॉर्डेड रिस्पांस भी देख सकते हैं. अगर किसी सवाल या उसके उत्तर को लेकर कोई आपत्ति है तो एनटीए की ओर से तय समय के अंदर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है. री-एग्जाम में शामिल उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाकर प्रोविजनल आंसर की और अपनी रिकॉर्डेड रिस्पांस सीट चेक कर सकते हैं.&amp;nbsp;
3 विषयों के लिए आयोजित हुआ था री-एग्जाम
यूजीसी नेट जून 2026 री-एग्जाम इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के लिए 9 और 10 सितंबर 2026 को देश के अलग-अलग परीक्षा केंद्र पर आयोजित की गई थी. एनटीए ने यह परीक्षा प्रश्न पत्रों से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा के बाद कराई थी. एक्सपर्ट समिति की जांच में प्रश्न पत्र को टाइपिंग संबंधी गलतियां, अनुवाद से जुड़ी दिक्कतें, कुछ नामों का छूट जाना, किताबों के नाम में गड़बड़ी और प्रश्नों की भाषा से संबंधित समस्याएं सामने आई थी. इसके बाद तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा करने का निर्णय लिया गया था.&amp;nbsp;
13 सितंबर तक करा सकते हैं आपत्ति दर्ज&amp;nbsp;
अगर किसी उम्मीदवार को प्रोविजनल आंसर की में किसी उत्तर पर संदेह है, तो वह ऑनलाइन चैलेंज कर सकता है. प्रति प्रश्न पर आपत्ति के लिए 200 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी. फीस का पेमेंट ऑनलाइन किया जा सकता है. फीस जमा करने का समय भी 13 सितंबर रात 11:59 बजे तक है. एनटीए ने स्पष्ट किया है कि तय समय के बाद किसी भी तरह की आपत्ति को एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;
कैसे दर्ज कराएं आपत्ति?

उम्मीदवार सबसे पहले यूजीसी नेट की ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद जून 2026 प्रोविजनल आंसर की से जुड़े लिंक पर क्लिक करें.
अब मांगी गई लॉगिन डिटेल्स, एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि या पासवर्ड डालकर लॉगिन करें.&amp;nbsp;
इसके बाद स्क्रीन पर प्रोविजनल आंसर की, प्रश्न पत्र और रिकॉर्डेड रिस्पांस दिखाई देगा.&amp;nbsp;
उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान करने के बाद जिस प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करनी है उसे चुन सकते हैं.&amp;nbsp;
जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रमाण पत्र या डॉक्यूमेंट भी अपलोड किया जा सकते हैं.&amp;nbsp;
इसके बाद 200 रुपये प्रति प्रश्न की फीस जमा करके आपत्ति सबमिट करनी होगी.&amp;nbsp;
वहीं आवेदन पूरा होने के बाद कंफर्मेशन पेज और पेमेंट रसीद को डाउनलोड करके रख लें.&amp;nbsp;

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एक्सपर्ट कमेटी करेगी आपत्तियों की जांच&amp;nbsp;
उम्मीदवारों की ओर से भेजी गई आपत्तियों की जांच एक्सपर्ट कमेटी करेगी. अगर किसी आपत्ती को सही पाया जाता है, तो प्रोविजनल आंसर की में जरूरी बदलाव किया जाएगा और सभी उम्मीदवारों के लिए उस विषय की आंसर की को इस आधार पर संशोधित किया जाएगा. ऐसी स्थिति में इस सवाल पर अलग-अलग उम्मीदवारों को दोबारा आपत्ति कराने की जरूरत नहीं होगी. वहीं एक्सेप्ट की गई आपत्ति के लिए जमा किए गए 200 रुपये की फीस वापस कर दी जाएगी. एनटीए के अनुसार अंतिम आंसर की को ही रिजल्ट तैयार करने का आधार बनाया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, जून, 2026, री-एग्जाम, की, प्रोविजनल, आंसर, की, जारी, सितंबर, तक, दर्ज, कराएं, आपत्ति</media:keywords>
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        <title>NMC ने बढ़ाई MBBS सीटें, अब देशभर में 1.40 लाख से ज्यादा सीटों पर एडमिशन </title>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी 2026 के उम्मीदवारों के लिए मेडिकल एडमिशन से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है. नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) ने 2026-27 एकेडमी ईयर के लिए एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स में बदलाव किया है. नए अपडेट के बाद देशभर में एमबीबीएस की कुल 1,40,214 सीटें हो गई. यह संख्या इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंर्पोटेंस कि सीटों को छोड़कर है.
इससे पहले जुलाई में जारी सीट मैट्रिक्स में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटें थी. कुल 13,186 एमबीबीएस सीटें बढ़ाई गई हैं. सीटों में यह बदलाव नए मेडिकल कॉलेज की मंजूरी और पहले से संचालित कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट बढ़ाने से हुआ है. एनएमसी के अनुसार संशोधित सीट मैट्रिक्स को मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड, एनएमसी की पहली अपील समिति और स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय की दूसरी समिति के फैसलों के आधार पर तैयार किया गया है.&amp;nbsp;
सरकारी और प्राइवेट कॉलेज में कितनी सीटें?
संशोधित आंकड़ों के अनुसार सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 63,971 सीटें हो गई है. ये सीटें 445 सरकारी मेडिकल कॉलेज में है. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 76,243 एमबीबीएस सीटें हैं, जो 391 संस्थानों में उपलब्ध हैं. जुलाई के मुकाबले सरकारी कॉलेज में 2,786 और प्राइवेट कॉलेज में 10,400 सीटों में बढ़ोतरी हुई है. वहीं इस साल देश में मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ी है जिसके बाद कुल कॉलेज की संख्या 836 हो गई है. इस वर्ष 38 में मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गई है.&amp;nbsp;
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इन राज्यों में बढ़ी मेडिकल सीटें
सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में कुल 15,745 एमबीबीएस सीटें हैं. जबकि उत्तर प्रदेश में 14,400 और तमिलनाडु में 14,299 सीटें हैं. महाराष्ट्र में 13,249, तेलंगाना में 10,450 और राजस्थान में 8,280 सीटें हैं. नए सीट मैट्रिक्स के अनुसार बिहार में सरकारी मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़कर 14 हो गई. (दो नए सरकारी कॉलेज मंजूर हुए, श्री राम जानकी मेडिकल कॉलेज समस्तीपुर-50 सीटें और राजकीय मेडिकल कॉलेज छपरा सारण- 50 सीटें) वहीं सरकारी सीटें बिहार में 290 बढ़कर 1520 से 1810 हो गई. आंध्र प्रदेश में 19 सरकारी कॉलेज में 275 सीटें बढ़कर 3,290 से 3,565 हो गई. इसके अलावा असम के 16 सरकारी मेडिकल कॉलेज में 100 सीटें बढ़कर 1,875 से 1,975 हो गई.
क्या है नीट यूजी काउंसलिंग में सीट मैट्रिक्स का महत्व?
एनएमसी का संशोधित सीट मैट्रिक्स नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के लिए जरूरी है. उम्मीदवारों को कॉलेज की चॉइस फिलिंग और सीटों की उपलब्धता देखते समय नई स्वीकृत सीटों की जानकारी देखनी होगी. एमसीसी और संबंधित राज्य काउंसलिंग समितियां को भी केवल एनएमसी से स्वीकृत सीटों के आधार पर ही एडमिशन प्रक्रिया करनी होगी. एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि किसी मेडिकल कॉलेज में स्वीकृत संख्या से ज्यादा छात्रों को एडमिशन नहीं दिया जा सकता. निर्धारित सीटों से ज्यादा एडमिशन होने पर इसे एनएमसी एक्ट 2019 के प्रावधान का उल्लंघन माना जाएगा.
ये भी पढ़ें-CSIR UGC NET 2026 का रिजल्ट जारी, csirnet.nta.nic.in पर ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NMC, ने, बढ़ाई, MBBS, सीटें, अब, देशभर, में, 1.40, लाख, से, ज्यादा, सीटों, पर, एडमिशन </media:keywords>
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        <title>IIT दिल्ली और IIT इंदौर में डायरेक्टर पद पर भर्ती, 2.25 लाख रुपये तक सैलरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iit-दिल्ली-और-iit-इंदौर-में-डायरेक्टर-पद-पर-भर्ती-225-लाख-रुपये-तक-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी दिल्ली और आईआईटी इंदौर में डायरेक्टर पद के लिए आवेदन मांगे हैं. इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से अलग-अलग विज्ञापन जारी किए गए हैं. इसके बाद अब उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं. आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर है. वहीं किसी भी आईआईटी में डायरेक्टर संस्थान के एकेडमिक और प्रशासनिक प्रमुख होते हैं. ऐसे में चयनित उम्मीदवारों को संस्थान के शैक्षणिक कामकाज के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नेतृत्व भी करना होगा. इस पद के लिए मजबूत एकेडमिक रिकॉर्ड के साथ प्रशासन और नेतृत्व का एक्सपीरियंस भी मांगा गया है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;IIT डायरेक्टर के लिए कौन एलिजिबल?&amp;nbsp;
मंत्रालय के अनुसार उम्मीदवार के पास पीएचडी डिग्री होनी चाहिए और पिछली डिग्री में फर्स्ट क्लास या उसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए. इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि अलग योग्यता रखने वाले साइंस, मैथमेटिक्स या मैनेजमेंट क्षेत्र के उम्मीदवारों पर भी विचार किया जा सकता है. आवेदक के पास किसी प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी संस्थान या यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर कम से कम 10 साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए. इसके अलावा पीएचडी छात्रों को गाइड करने का एक्सपीरियंस भी जरूरी है. डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार में संस्थान का नेतृत्व करने की क्षमता और कम से कम 5 साल का प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए. इसके अलावा आवेदन की अंतिम तारीख तक उम्मीदवार की उम्र 60 साल से कम होना जरूरी है.
2.25 लाख रुपये होगी महीने की सैलरी&amp;nbsp;
आईआईटी डायरेक्टर के पद पर चयनित उम्मीदवारों को 2,25,000 रुपये प्रतिमाह सैलरी मिलेगी इसके अलावा सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार दूसरे भत्ते भी दिए जाएंगे. यह पद ऐसे उम्मीदवारों के लिए है, जिनके पास एकेडमिक और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में मजबूत एक्सपीरियंस हो. आवेदन में उम्मीदवारों को अपनी उपलब्धियां और संस्थान के नेतृत्व से जुड़ी क्षमता को स्पष्ट करना होगा.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-CSIR UGC NET 2026 का रिजल्ट जारी, csirnet.nta.nic.in पर ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड
आवेदन के साथ यह जानकारी भी बतानी होगी&amp;nbsp;
इन पदों के लिए आवेदन निर्धारित प्रारूप में जमा करना होगा. इसमें रिसर्च, टीचिंग इंडस्ट्री, अकेडमिक सहयोग और प्रशासनिक एक्सपीरियंस से जुड़ी जरूरी जानकारी देनी होगी. इसके साथ उम्मीदवार को कम से कम दो पेज का जस्टिफिकेशन देना होगा, जिसमें बताना होगा कि वह डायरेक्टर पद के लिए सही क्यों है. वहीं आवेदक को संस्थान को अपने दो पेज का विजन स्टेटमेंट भी देना होगा. इसके अलावा कम से कम दो ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों की कांटेक्ट डिटेल देनी होगी, जो उम्मीदवार की योग्यता और एक्सपीरियंस को जानता हो.&amp;nbsp;
फिलहाल ये है &amp;nbsp;IIT दिल्ली और इंदौर के डायरेक्ट&amp;nbsp;
वर्तमान में आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी है, जबकि सुहास एस जोशी आईआईटी इंदौर के निर्देश के रूप में कार्यरत हैं. वहीं पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले उम्मीदवार 31 अक्टूबर 2026 तक जरूरी डॉक्यूमेंट और जानकारी के साथ अपना आवेदन जमा कर सकते हैं. आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को &amp;nbsp;iits@gmail.com. पर अपना आवेदन भेजना होगा. इसके अलावा आपको बता दें कि यह भर्ती प्रक्रिया मंत्रालय की ओर से आईआईटी मंडी में नए निदेशक की खोज के साथ चल रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IIT, दिल्ली, और, IIT, इंदौर, में, डायरेक्टर, पद, पर, भर्ती, 2.25, लाख, रुपये, तक, सैलरी</media:keywords>
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        <title>स्टूडेंट्स को हर महीने मिलेंगे 7500 रुपये, यहां की सरकार दे रही स्कॉलरशिप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्टूडेंट्स-को-हर-महीने-मिलेंगे-7500-रुपये-यहां-की-सरकार-दे-रही-स्कॉलरशिप</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/स्टूडेंट्स-को-हर-महीने-मिलेंगे-7500-रुपये-यहां-की-सरकार-दे-रही-स्कॉलरशिप</guid>
        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश सरकार राज्य के मजदूरों के मेधावी बच्चों के लिए नई छात्रवृत्ति योजना शुरू करने की तैयारी में है. इस योजना के तहत पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को हर महीने 7,500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी. खास बात यह है कि इस रकम का इस्तेमाल केवल सामान्य पढ़ाई के लिए ही नहीं, बल्कि नीट, जेईई और क्लेट जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी किया जा सकेगा. सरकार ने इस योजना का ड्राफ्ट तैयार कर दिया है. इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजने की तैयारी है. श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के अनुसार सरकार की योजना इसी सत्र से लागू करने की है. शुरुआत में सीमित संख्या में छात्रों को शामिल करके योजना की उपयोगिता देखी जाएगी.&amp;nbsp;
क्या है श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना?&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश में यह योजना भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक श्री मेधावी छात उन्नयन योजना के नाम से लाई जा रही है. इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान हर महीने 7500 दिए जाएंगे. इस राशि का इस्तेमाल ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल, आने-जाने के खर्च और दूसरी शैक्षणिक जरूरतों के लिए किया जा सकेगा. इसके अलावा नीट, जेईई और क्लेट जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले संस्थानों की कोचिंग फीस भी इसी सहायता से दी जा सकेगी.&amp;nbsp;
पहले चरण में 600 बच्चों को मिलेगा लाभ&amp;nbsp;
योजना की शुरुआत में कुल 600 मेधावी विद्यार्थियों को सहायता देने की तैयारी में है. 100 बच्चे श्रमिक कल्याण बोर्ड से लिए जाएंगे. श्रम मंत्री के अनुसार यह शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर की जा रही है. यदि योजना से विद्यार्थियों को बेहतर लाभ मिलता है, तो आगे चलकर लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने और कटऑफ में बदलाव पर विचार किया जाएगा.&amp;nbsp;
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10वीं में 80 फीसदी अंक जरूरी&amp;nbsp;
योजना का लाभ हर निर्माण श्रमिक के बच्चे को नहीं मिलेगा. इसके लिए विद्यार्थियों चयन नियमित छात्र होना जरूरी है. उसे 10वीं कक्षा में कम से कम 80 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे. छात्र मध्य प्रदेश बोर्ड या सीबीएसई से पढ़ाई कर रहा होना चाहिए. इसके साथ ही माता-पिता का संबंधित निर्माण श्रमिक बोर्ड में रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है. रजिस्ट्रेशन निर्धारित अवधि का होना चाहिए और श्रमिक के 90 दिन तक काम करने की शर्त भी पूरी होनी चाहिए. योजना के लिए विद्यार्थी की उम्र 14 से 19 साल के बीच रखी गई है.&amp;nbsp;
मेरिट से होगा चयन छात्राओं के लिए 20% सीटें&amp;nbsp;
पात्र छात्रों में से चयन एमपी बोर्ड और सीबीएसई की संयुक्त मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा. शुरुआती प्रावधान के अनुसार हर साल अधिकतम 500 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा. इनमें 20 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित रहेंगी. वहीं सिर्फ 10वीं में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करना ही अनिवार्य नहीं होगा. योजना में चयन के बाद सहायता जारी रखने के लिए विद्यार्थियों को 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्टूडेंट्स, को, हर, महीने, मिलेंगे, 7500, रुपये, यहां, की, सरकार, दे, रही, स्कॉलरशिप</media:keywords>
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        <title>एमपी पुलिस में खत्म किए जा रहे 63 पद, जानें क्यों लिया गया यह फैसला?</title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश पुलिस अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. पुलिस मुख्यालय की नीति निर्धारण समिति ने ऐसे 122 डीएसपी पदों की पहचान की है, जिनका मौजूदा व्यवस्था में उपयोग नहीं रह रहा है. इनमें से 63 पद खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इन पदों से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल अब साइबर अपराधों से निपटने और जिलों की पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने में किया जाएगा. पुलिस मुख्यालय की ओर से तैयार प्रस्ताव को प्रबंधन शाखा को भेजा गया है. परीक्षण के बाद इसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. इसके बाद ही पद खत्म करने का अंतिम फैसला लिया जाएगा.
15 साल से नहीं हुई एंटी डकैती डीएसपी की तैनाती&amp;nbsp;
पुराने ढांचे में मौजूद कुछ पद बदलती जरूरतों के बीच लगभग अप्रासंगिक हो चुके हैं. मध्य प्रदेश को डकैत मुक्त घोषित हुए 15 साल हो चुके हैं, लेकिन डीएसपी एंटी डकैती का पद अभी तक पुलिस के दस्तावेजों में मौजूद है. इस पद पर करीब डेढ़ दशक से किसी अधिकारी की तैनाती नहीं हुई. इस तरह डीएसपी लाइन और डीएसपी लीव रिजर्व जैसे पद भी मौजूदा जरूरतों के हिसाब से उपयोगी नहीं रह गए हैं. इसके अलावा कई जिलों में महिला अपराध और अजाक के लिए अलग-अलग डीएसपी पद है, जबकि पुलिस के आकलन के अनुसार दोनों जिम्मेदारियां एक अधिकारी को दी जा सकती हैं.&amp;nbsp;
साइबर विंग में बढ़ेंगे 115 पद&amp;nbsp;
63 पद खत्म करने के बाद तैयार होने वाले नए ढांचे में सबसे बड़ा हिस्सा साइबर विंग को देने का प्रस्ताव है. यहां डीएसपी से लेकर सिपाही तक कुल 115 नए पर जोड़ी जाएंगे. इनमें 8 डीएसपी पद शामिल है. साइबर विंग में 15 डीएसपी सेंटर के लिए 20 इंस्पेक्टर और 22 सब इंस्पेक्टर के पद बढ़ाने का प्रस्ताव है. 10 डीएसपी सेंटरों पर 20 हवलदार और 15 सेंटरों पर 45 सिपाही के पद भी जोड़े जाएंगे. इसका उद्देश्य साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच के लिए फील्ड स्तर तक पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध करना है.
जिलों में भी बदलेगा पुलिस का ढांचा&amp;nbsp;
प्रस्ताव में जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 40 नए डीएसपी हेडक्वार्टर पद बनाने की बात है. यह अधिकारी दफ्तर प्रबंधन के साथ ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी भी देखेंगे. इसके अलावा 8 नए पुलिस सब डिवीजन बनाए जाने का प्रस्ताव है. जहां सीएसपी या एसडीओपी की तैनाती होगी. पुलिस मुख्यालय के लिए 4 नए डीएसपी पद और हाई कोर्ट समन्वय के लिए तीन नए डीएसपी पद भी प्रस्तावित है. चार नए जिलों में महिला अपराध और अजाक की जिम्मेदारी के लिए भी डीएसपी पद बनाए जाएंगे.&amp;nbsp;
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साइबर थानों को सीधी मिल सकेंगे जांच अधिकारी&amp;nbsp;
प्रस्ताव लागू होने के बाद 57 दिनों में प्रस्तावित साइबर थानाें को जांच अधिकारियों की उपलब्धता का फायदा मिलने की उम्मीद है. नई भर्ती का इंतजार किए बिना मौजूदा पदों के पुनर्गठन से स्टाफ उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे ऑनलाइन फ्रॉड जैसे मामलों में कार्रवाई तेजी से करने, रकम को समय रहते फ्रीज कराने और रिकवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. वहीं 40 जिलों में डीएसपी हेड क्वार्टर की व्यवस्था होने से संबंधित मामलों और ट्रैफिक की निगरानी भी बेहतर हो सकेगी.&amp;nbsp;
अंतिम मंजूरी के बाद होगा फैसला&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी स्तर के 1009 और एएसपी स्तर के 265 पद हैं. पुराने पदों के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी शासन के पास मंजूरी की प्रक्रिया में जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद ही नए पड़े को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BRICS के चलते दिल्ली के स्कूल बंद, क्या पूरे NCR में भी रहेगी छुट्टी?</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS Summit को लेकर राजधानी में सुरक्षा और ट्रैफिक की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसी बीच दिल्ली के स्कूल के छात्रों को लेकर छुट्टी के लिए अपडेट सामने आया है. सरकार ने फैसला लिया है की 11 सितंबर 2026 यानी शुक्रवार को स्कूल बंद रहेंगे. BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होना है.
विदेशी मेहमानों और बड़े नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के साथ-साथ कई सड़कों पर ट्रैफिक की व्यवस्था भी बदली जाएगी. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे NCR के दूसरे शहरों में भी स्कूल बंद रहेंगे?
दिल्ली के सभी स्कूल 11 सितंबर को रहेंगे बंद
दिल्ली में 11 सितंबर को स्कूलों की छुट्टी रहेगी. शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार इस दिन दिल्ली के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूल बंद रहेंगे. शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत आने वाले कार्यालय भी इस दिन बंद रहेंगे. यानी दिल्ली में पढ़ने वाले छात्रों को शुक्रवार को स्कूल नहीं जाना होगा.
&amp;nbsp;BRICS Summit की वजह से लिया गया फैसला
दिल्ली में होने वाला Brics Summit 12 और 13 सितंबर को होने जा रहा है. इस दौरान कई देशों के बड़े नेता राजधानी में मौजूद रहेंगे. उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और कई रूट पर ट्रैफिक में भी बदलाव किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. ऐसे स्तिथि में दिल्ली के स्कूल को बंद रखने का फैसला भीड़ और ट्रैफिक को कम रखने में मदद कर सकता है.
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&amp;nbsp;क्या पूरे NCR में भी स्कूल बंद रहेंगे?
दिल्ली में छुट्टी के आदेश को पूरे NCR पर लागू नहीं माना जाएगा. NCR में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर अलग-अलग राज्यों और जिला प्रशासन में आते हैं. इसलिए अगर वहां स्कूल बंद रहेंगे तो उसका फैसला वहां की राज्य सरकार या जिला प्रशासन ले सकते हैं.
नोएडा-गाजियाबाद के छात्रों को क्या करना चाहिए?
अगर बच्चा नोएडा या गाजियाबाद में पढ़ता है तो सिर्फ दिल्ली की छुट्टी देखकर स्कूल न जाने का फैसला न करें. अभी तक BRICS के नाम पर पूरे NCR के स्कूलों के लिए दिल्ली जैसा एक समान छुट्टी आदेश सामने नहीं आया है. खासकर नोएडा में 9 सितंबर को स्थानीय कार्यक्रम की वजह से स्कूल बंद थे, लेकिन उसे BRICS की छुट्टी से नहीं जोड़ा जा सकता है. इसलिए अपने स्कूल का नया नोटिस या जिला प्रशासन का आदेश जरूर देखें.
&amp;nbsp;11 से 13 सितंबर तक दिल्ली में ट्रैफिक भी प्रभावित रहेगा
स्कूल की छुट्टी के अलावा दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक ट्रैफिक पर भी असर पड़ सकता है. कई महत्वपूर्ण रास्तों पर सुरक्षा जांच और ट्रैफिक के डायवर्जन की व्यवस्था रहेगी. रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को भी घर से थोड़ा पहले निकले तो उनके लिए सही होगा. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों को सफर की प्लानिंग पहले से बनाने और जरूरत पड़ने पर मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जामिया में अब हर क्लास ग्रुप पर रहेगा एक शिक्षक, प्रशासन का बड़ा फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जामिया-में-अब-हर-क्लास-ग्रुप-पर-रहेगा-एक-शिक्षक-प्रशासन-का-बड़ा-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने छात्रों के बीच एकेडमी जानकारी शेयर करने को लेकर अपनी व्यवस्था को फिर से स्पष्ट किया है. यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सोशल मीडिया पर बनाए गए अनौपचारिक क्लास ग्रुप से दूरी बनाने की सलाह भी दी है. साथ ही हर क्लास या बैच के लिए बनाए गए ऑफिशियल ग्रुप में यूनिवर्सिटी की ओर से नाम में दिए गए शिक्षक को शामिल करना अनिवार्य किया गया है. इन ग्रुप के जरिए ही छात्रों तक कक्षाओं पढ़ाई और दूसरी एकेडमी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जाएगी.
यूनिवर्सिटी की ओर से सोमवार को जारी नोटिस में इस व्यवस्था को दोहराया गया है. पहले यह नीति पहली बार 15 सितंबर 2025 को लागू की गई थी. जामिया के अनुसार छात्रों की ओर से बनाए गए कुछ अनऑफिशियल ग्रुप में एकेडमिक चर्चा के अलावा दूसरी तरह की एक्टिविटी होने की शिकायतें सामने आई थी. कुछ मामलों में आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री शेयर किए जाने के बात भी यूनिवर्सिटी ने कही थी.&amp;nbsp;
अब हर क्लास में बनेगा ऑफिशियल ग्रुप
नई व्यवस्था के तहत हर क्लास के लिए एक ऑफिशियल सोशल मीडिया ग्रुप बनाया जाएगा. इसमें संबंधित क्लास का प्रतिनिधि एडमिन की भूमिका निभाएगा. इसके साथ यूनिवर्सिटी की ओर से नामित एक फैकल्टी मेंबर भी ग्रुप में मौजूद रहेगा. शिक्षकों की जिम्मेदारी ग्रुप में शेयर किए जा रहे कंटेंट पर नजर रखने की होगी. यूनिवर्सिटी चाहता है कि इन ग्रुप का इस्तेमाल मुख्य रूप से पढ़ाई और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी के लिए किया जाए. साथ ही आपत्तिजनक, अश्लील या अनुचित सामग्री के प्रसार को रोका जा सके.&amp;nbsp;
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डीन और विभाग अध्यक्षों को दी गई जिम्मेदारी
जामिया ने भी सभी डीन विभाग अध्यक्षों और सेंटर डायरेक्टर्स से कहा कि वह अपनी अपनी कक्षाओं और बैच के लिए आधिकारिक ग्रुप बनवाना सुनिश्चित करें. इन ग्रुप में यूनिवर्सिटी की ओर से नामित शिक्षकों भी जोड़ा जाएगा. प्रशासन ने भी यह स्पष्ट किया है कि छात्रों को एकेडमी जानकारी ऑफिशियल ग्रुप के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए. यानि पढ़ाई, क्लासरूम और दूसरी यूनिवर्सिटी से जुड़ी शैक्षणिक सूचनाओं के लिए छात्रों को अलग-अलग ऑफिशियल ग्रुप पर निर्भर नहीं रहना होगा.
2025 में भी जारी हुई थी यही नीति
यूनिवर्सिटी ने बताया कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि सितंबर 2025 में जारी किए गए निर्देश को ही दोबारा स्पष्ट किया गया है. उस समय भी छात्रों की ओर से बनाए गए, अनौपचारिक सोशल मीडिया ग्रुप को लेकर आपत्ति जताई गई थी. जामिया का कहना था कि कुछ ग्रुप एकेडमिक बातचीत के बजाय, पर्सनल मुद्दों और दूसरी एक्टिविटी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. ऐसे में अब यूनिवर्सिटी ने ऑफिशियल ग्रुप में एक टीचर को जोड़ने का फैसला किया है.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्रिकेटर्स के रिकॉर्ड का कौन रखता है लेखा&amp;जोखा, इसमें कैसे मिलती है नौकरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रिकेटर्स-के-रिकॉर्ड-का-कौन-रखता-है-लेखा-जोखा-इसमें-कैसे-मिलती-है-नौकरी</link>
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        <description><![CDATA[ क्रिकेट के मैदान पर जब बल्लेबाज रन बनाता है, गेंदबाज जो विकेट लेता है या किसी ओवर में कोई खास घटना होती है, तो इन सभी चीजों का रिकॉर्ड रखा जाता है. टीवी पर मैच देखते समय हमारा ध्यान अक्सर खिलाड़ी और उनकी परफॉर्मेंस पर रहता है, लेकिन मैदान के बाहर और परदे के पीछे ऐसे कई लोग होते हैं, जो हर गेंद और हर रन का हिसाब संभालते हैं. इन्हीं में से एक अहम भूमिका क्रिकेट स्कोरर की होती है. क्रिकेट में बढ़ते डेटा के इस्तेमाल के साथ आज के समय में इन प्रोफेशनल्स की भूमिका भी बहुत जरूरी हो गई है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्रिकेटर्स के रिकॉर्ड का लेखा-जोखा कौन रखता है और इसमें नौकरी कैसे मिलती है.&amp;nbsp;
क्या करता है क्रिकेट स्कोरर?
क्रिकेट स्कोरर का मुख्य काम मैच के दौरान होने वाली हर जरूरी एक्टिविटी को रिकॉर्ड करना होता है. कौन सा बल्लेबाज कितने रन बना रहा है, किस गेंदबाज ने कितने विकेट लिए, ओवर में क्या हुआ और टीम का स्कोर किस स्थिति में है, इन सभी चीजों का हिसाब स्कोरर रखता है. इसके लिए स्कोरर को क्रिकेट के नियमों के साथ-साथ गणित और अंग्रेजी की अच्छी समझ होनी चाहिए. स्ट्राइक रेट, बैटिंग और बॉलिंग औसत, जरूरी रन और नेट रन रेट जैसी गणनाओं को समझना भी इस काम का हिस्सा है.&amp;nbsp;
कैसे बने ऑफिशियल स्कोरर?
क्रिकेट स्कोरिंग को करियर के तौर पर अपनाने के लिए स्थानीय क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ना एक शुरुआती रास्ता माना जाता है. यहां हर साल स्कोरर की परीक्षा आयोजित होती. स्थानीय स्तर की परीक्षा पास करने के बाद राज्य क्रिकेट एसोसिएशन की परीक्षा देनी होती है. राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में 80 फीसदी अंक हासिल करने के बाद ही बीसीसीआई के स्कोरर एग्जाम में बैठने की एलिजिबिलिटी मिलती है. यानी इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए क्रिकेट की समझ के साथ परीक्षा और स्कोरिंग से जुड़ी जानकारी भी जरूरी है. बीसीसीआई के अलावा आईसीसी भी कई ट्रेनिंग प्रोग्राम कराता है. वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से भी कोर्स कर सकते हैं. कई प्राइवेट जगहों से भी कोर्स किया जा सकता है. &amp;nbsp;
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स्कोरर की कितनी होती है कमाई?
स्कोरर को आमतौर पर मासिक वेतन के बजाय मैच या दिन के हिसाब से भी पेमेंट मिलता है. जानकारी के अनुसार बीसीसीआई के स्टेट पैनल स्कोर को एक मैच के लिए 3000 रुपये मिलते हैं. डोमेस्टिक मैच के लिए 15,000 रुपये रोजाना और टेस्ट मैच में भी 15,000 रुपये रोजाना का पेमेंट मिलता है. टेस्ट मैच अगर 5 दिन से पहले खत्म हो जाए, तब भी स्कोरर को 5 दिन के हिसाब से सैलरी दी जाती है. &amp;nbsp;इसके अलावा स्कोरर को डीए भी मिलता है.&amp;nbsp;
क्रिकेट में डेटा एनालिस्ट का भी बढ़ा रोल&amp;nbsp;
आज क्रिकेट सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन का खेल नहीं रह गया है, टीमों के फैसले में डेटा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. आईपीएल जैसी प्रतियोगिता में खिलाड़ी के प्रदर्शन, बल्लेबाजी और गेंदबाजी की क्षमता विपक्षी टीम की कमजोरी और टीम संयोजन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है. डेटा एनालिस्ट खिलाड़ी के प्रदर्शन के समय के साथ आने वाले बदलाव को समझने के साथ उसकी मजबूती और कमजोरी की पहचान करते हैं. खिलाड़ियों के वर्कलोड मूवमेंट और पुराने इंजरी रिकॉर्ड का विश्लेषण करके संभावित चोट के खतरे को समझने में भी डेटा का इस्तेमाल किया जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली पुलिस CAPS में SI की 1871 वैकेंसी, 30 सितंबर तक आवेदन का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) ने दिल्ली पुलिस और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सज (CAPF) में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 1,871 पद भरे जाएंगे. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 10 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है और इच्छुक उम्मीदवार 30 सितंबर तक का आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवारों का आवेदन एसएससी के ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in के जरिए करना होगा. आवेदन में किसी तरह का बदलाव करने के लिए करेक्शन विंडो 8 से 10 अक्टूबर तक खुली रहेंगी.&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस में 317 पद, CAPF में 1320 वैकेंसी&amp;nbsp;
कुल 1,871 रिक्तियों में दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के 317 पद है. इनमें में पुरुष उम्मीदवारों के लिए 205 और महिला उम्मीदवारों के लिए 112 पद निर्धारित है. वहीं सीएपीएफ में सब इंस्पेक्टर के कुल 1,320 पद है. इसमें बीएसएफ में 457, सीआईएसएफ में 250, सीआरपीएफ में 254, आइटीबीपी में 187 और एसएसबी में 172 पद शामिल है. इसके अलावा सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर के लिए पुरुष उम्मीदवारों के 234 पद रखे गए है. &amp;nbsp;इस तरह भर्ती में दिल्ली पुलिस, &amp;nbsp;सीएपीएफ और सीआईएसएफ फायर के पद शामिल है.&amp;nbsp;
किस पद पर कितनी मिलेगी सैलरी?
दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर और सीएपीएफ में एसआई के पद लेवल 6 के है. इनकी सैलरी 35,400 रुपये से 1,12,400 रुपये है. वहीं सीएपीएफ में एसआई का पद ग्रुप बी नॉन गैजेटेड, नॉन मिनिस्ट्रियल कैटेगरी में आता है. सीआईएसएफ में एसआई का पद भी लेवल 6 का है और इसे ग्रुप बी नॉन गैजेटेड, नॉन मिनिस्ट्रियल पद के तौर पर वर्गीकृत किया गया है. दिल्ली पुलिस में एसआई का पद ग्रुप सी के तहत आता है.&amp;nbsp;
ग्रेजुएट उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
एसएससी सीपीओ भर्ती के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. सामान्य एसआई के लिए आयु सीमा 20 से 25 वर्ष है, जबकि सीआईएसएफ में एसआई पद के लिए आयु सीमा 18 से 30 वर्ष निर्धारित है. भर्ती के लिए उम्मीदवारों काे एसएससी की ओर से निर्धारित दूसरी पात्रता और फिजिकल मानकों को भी पूरा करना होगा.&amp;nbsp;
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कई चरणों में होगा चयन&amp;nbsp;
एसएससी सीपीओ भर्ती में उम्मीदवारों का चयन एक से ज्यादा चरणों के जरिए किया जाएगा. पहले पेपर 1 सीबीटी मोड में होगी. इसके बाद फिजिकल दक्षता परीक्षा होगी. इन चरणों में सफल उम्मीदवार पेपर 2 में शामिल होंगे. इसके बाद मेडिकल जांच और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन?

उम्मीदवार को सबसे पहले ssc.gov.in पर जाकर एसएससी पोर्टल पर ओटीआर पूरा करना होगा.&amp;nbsp;
एसएससी वेबसाइट पर किया गया ओटीआर नए पोर्टल पर मान्य नहीं होगा.&amp;nbsp;
ओटीआर के बाद लॉगिन करके एसएससी सीपीओ 2026 आवेदन फॉर्म भरना होगा.&amp;nbsp;
फाॅर्म में व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी के साथ पद और फोर्स की प्राथमिकताएं भरनी होगी&amp;nbsp;
आवेदन प्रक्रिया में आधार आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा भी उपलब्ध है.&amp;nbsp;
लास्ट में आवेदन फीस का पेमेंट करने के बाद सभी जानकारी जांच कर फॉर्म सबमिट करना होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, पुलिस, CAPS, में, की, 1871, वैकेंसी, सितंबर, तक, आवेदन, का, मौका</media:keywords>
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        <title>दिल्ली में EWS एडमिशन का मौका, 20 सितंबर तक भरें फॉर्म</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और फ्रीशिप कैटेगरी के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन का इंतजार कर रहे पेरेंट्स के लिए जरूरी खबर है. दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 2 से आगे की कक्षाओं में खाली ईडब्ल्यूएस और फ्रीशिप सीटों पर एडमिशन की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इच्छुक उम्मीदवार 20 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 8 सितंबर से शुरू हुई है. आवेदन पूरा होने के बाद खाली सीटों पर एडमिशन कंप्यूटरीकृत ड्राॅ ऑफ लॉट्स के जरिए किया जाएगा. डीओई के शेड्यूल के अनुसार ड्रॉ 24 सितंबर को आयोजित किए जाने की संभावना है.&amp;nbsp;
किन स्कूलों में मिलेगा एडमिशन?&amp;nbsp;
यह प्रक्रिया सरकारी और डीडीए की ओर आवंटित जमीन पर संचालित निजी गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 2 और उससे ऊपर की खाली ईडब्ल्यूएस फ्रीशिप सीटों के लिए है. इसमें अल्पसंख्यक संस्थान में शामिल नहीं होंगे. सीटों का आवंटन पेरेंट्स की ओर से चुने गए स्कूलों और उनके आवासीय एड्रेस के आधार पर कंप्यूटर ड्राॅ से होगा. डीओई ने स्पष्ट किया है कि एड्रेस की जानकारी सही होना जरूरी है. पसंद के स्कूल में एडमिशन पाने के लिए गलत लोकेलिटी या एड्रेस दर्ज करने पर नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.&amp;nbsp;
EWS एडमिशन के लिए कौन कर सकते हैं आवेदन?
ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में आवेदन करने वाले परिवार की सभी सोर्स से सालाना आय 5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. इसके लिए दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग से जारी वैध आय प्रमाण पत्र जरूरी होगा. इसके अलावा बीपीएल, एएवाय राशन कार्ड या फूड सिक्योरिटी कार्ड रखने वाले परिवारों के बच्चे भी आवेदन कर सकते हैं. इस एडमिशन प्रक्रिया में आवेदन करने वाले का दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है.&amp;nbsp;
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कक्षा के हिसाब से तय है उम्र&amp;nbsp;
डीओई ने कक्षा 2 से 9 तक एडमिशन के लिए उम्र सीमा भी निर्धारित की है. 31 मार्च 2026 को कक्षा 2 में आवेदन करने वाले बच्चे की उम्र 6 साल उससे ज्यादा लेकिन 7 साल से कम होनी चाहिए. इसके बाद कक्षा तीन में एडमिशन लेने वाले की उम्र 7 साल या उससे ज्यादा लेकिन 8 साल से कम होनी चाहिए. वहीं कक्षा 4 में एडमिशन लेने वाले की उम्र 8 साल या उससे ज्यादा, लेकिन 9 साल से कम होनी चाहिए. ऐसे ही हर कक्षा के लिए उम्र सीमा 1 साल बढ़ती जाएगी.&amp;nbsp;
एक बच्चे के लिए सिर्फ एक आवेदन&amp;nbsp;
अभिभावकों को आवेदन करते समय खास सावधानी की जरूरत है. एक बच्चे के लिए केवल एक ही रजिस्ट्रेशन और आवेदन किया जा सकता है. आवेदन के लिए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा. एक ही बच्चे के लिए एक से ज्यादा आवेदन या एक ही परिवार की ओर से डुप्लीकेट आवेदन मिलने पर रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है. ऑनलाइन फॉर्म भरते समय जन्म प्रमाण पत्र, एड्रेस प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस के लिए आय प्रमाण पत्र, लागू होने पर जाति प्रमाण पत्र, सीडब्ल्यूएसएन कैटेगरी के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र और हाल ही के पासपोर्ट साइज फोटो जैसे डॉक्यूमेंट तैयार होने जरूरी है.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, EWS, एडमिशन, का, मौका, सितंबर, तक, भरें, फॉर्म</media:keywords>
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        <title>बिहार बोर्ड में टॉपर्स पर सरकार मेहरबान, 2 लाख रुपये का मिलेगा इनाम</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार बोर्ड की 10वीं और 12वीं की वार्षिक परीक्षा 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राज्य सरकार ने सम्मानित किया है. पटना के नेक संवाद में आयोजित राज्य स्तरीय मेधावी छात्र सम्मान समारोह में मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा के कुल 168 टॉपर को सम्मान दिया गया. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मेधावी विद्यार्थियों को मेडल और पुरस्कार राशि प्रदान की. समारोह में टॉपर्स के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे. सरकार ने छात्रों की उपलब्धि को सम्मान देने के साथ उन्हें आगे पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद देने का भी ऐलान किया. पुरस्कार पाने वाले सभी 168 विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 51,000 की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाएगी.&amp;nbsp;
पहले स्थान पर आने वाले को 2 लाख रुपये
बिहार बोर्ड मैट्रिक और इंटरमीडिएट टॉपर्स के लिए अलग-अलग रैंक के आधार पर पुरस्कार राशि तय की गई है. राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थी को 2 लाख रुपये दिए गए. दूसरे स्थान पर रहने वाले को 1.5 लाख रुपये और तीसरे स्थान वाले को 1 लाख की पुरस्कार राशि मिली. इंटरमीडिएट परीक्षा में चौथा और पांचवें स्थान पर आने वाले छात्रों को 30-30 हजार रुपये दिए गए. वहीं मैट्रिक में चौथे से 10वें स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों को 20-20 मिले. &amp;nbsp;इन पुरस्कारों के अलावा सभी सम्मानित छात्रों को लैपटॉप के लिए 51 हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे.&amp;nbsp;
इंटर टॉपर्स को हर महीने मिलेगी स्कॉलरशिप&amp;nbsp;
सरकार की ओर से इंटरमीडिएट के मेधावी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप का भी प्रावधान किया गया है. देश रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेधा छात्रवृत्ति के तहत इंटर टॉपर्स को हर महीने 2500 रुपये दिए जाएंगे. नॉर्मल ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को यह छात्रवृत्ति 3 साल, टेक्निकल अंडर ग्रेजुएट डिग्री के लिए 4 साल और 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स के लिए 5 साल तक मिलेगी. टेक्निकल डिप्लोमा करने वाले विद्यार्थियों को कोर्स पूरा होने तक इसका लाभ दिया जाएगा. मैट्रिक परीक्षा में टॉप 10 में जगह बनाने वाले छात्रों को कक्षा 11वीं और 12वीं के दौरान 2 साल तक हर महीने 2000 रुपये की स्कॉलरशिप मिलेगी. टेक्निकल डिप्लोमा में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए यह सहायता कोर्स पूरा होने तक जारी रहेगी.&amp;nbsp;
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इन छात्रों ने किया टॉप&amp;nbsp;
इंटरमीडिएट साइंस में समस्तीपुर के उच्च माध्यमिक विद्यालय पांड़ के आदित्य प्रकाश अमन ने पहला स्थान हासिल किया. सीतामढ़ी की साक्षी कुमारी और नागदा की सपना कुमारी संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रही. आर्ट्स में गया कि यशवंत इंटर विद्यालय, खिजरसराय की निशु कुमारी टॉपर बनी. सीतामढ़ी की सिद्धि शिखा और लखीसराय के चंद्रदीप कुमार ने दूसरा स्थान हासिल किया. पूर्णिया के एमडी लकी अंसारी भी टॉपर में शामिल है. कॉमर्स में पटना के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल की अदिति कुमारी पहले स्थान पर रही. पटना की माही कुमारी दूसरे और निशिका श्री तीसरे स्थान पर रही. वोकेशनल कोर्स में सारण के प्रियांशु राज ने टॉप किया, जबकि अनिका उपाध्याय दूसरे स्थान पर रही. इस साल पहली बार बिहार बोर्ड के सम्मान समारोह में वोकेशनल कोर्स के टॉपर को भी शामिल किया गया. मैट्रिक में जमुई के सिमुलतला आवासीय विद्यालय की पुष्पांजलि कुमारी और वैशाली की सबरीन परवीन ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया. दोनों ने 500 से 492 अंक यानी 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किए. बेगूसराय की नाहिद सुल्तान दूसरे स्थान पर रही.&amp;nbsp;
CM ने कहा नौकरी लेने वाले नहीं देने वाले बनें
सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों को आगे बढ़ाने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने की बात कही. उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का टारगेट रखना चाहिए. सीएम ने यह भी घोषणा की कि अगले साल से बोर्ड टॉपर्स का सम्मान समारोह परीक्षा परिणाम जारी होने की एक महीने के अंदर आयोजित किया जाएगा, ताकि मेधावी विद्यार्थियों को उनकी सफलता के लिए समय पर प्रोत्साहन मिल सके.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSSSC PET 2026 का शेड्यूल जारी, 23 अक्टूबर से होगा एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा 2026 की परीक्षा तारीख घोषित कर दी है. आयोग के शेड्यूल के अनुसार UPSSSC PET 2026 का आयोजन 23, 24 और 25 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा. परीक्षा तीन दिनों तक चलेगी और हर दिन दो शिफ्ट में उम्मीदवार परीक्षा देंगे. जिन उम्मीदवारों ने पीईटी 2026 के लिए आवेदन किया है, उन्हें अब परीक्षा की तैयारी पर जोर देना चाहिए. परीक्षा से जुड़ी तारीख, शिफ्ट और केंद्र की जानकारी एडमिट कार्ड के जरिए उम्मीदवारों को मिलेगी. वहीं आयोग ने अभी एडमिट कार्ड को लेकर तारीख की घोषणा नहीं की है.&amp;nbsp;
दो शिफ्टों में होगी PET 2026 की परीक्षा&amp;nbsp;
UPSSSC PET 2026 की परीक्षा तीन दिनों में आयोजित की जाएगी. पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी. दोनों शिफ्ट में परीक्षा की अवधि 2 घंटे रहेगी. उम्मीदवारों को कौन सी तारीख, शिफ्ट और परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा, इसकी जानकारी उनके हॉल टिकट में दी जाएगी. एडमिट कार्ड में रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा केंद्र से जुड़े जरूरी निर्देश भी दर्ज होंगे.
कब तक जारी होगा एडमिट कार्ड?
UPSSSC ने अभी पीईटी 2026 के लिए एडमिट कार्ड की तारीख जारी नहीं की है. परीक्षा से पहले हॉल टिकट उपलब्ध कराया जाएगा. उम्मीदवारों को आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार वेबसाइट पर जाकर नोटिस बोर्ड सेक्शन में पीईटी एडमिट कार्ड का नोटिफिकेशन देख सकेंगे. लॉगिन डिटेल दर्ज करने के बाद हॉल टिकट डाउनलोड किया जा सकेगा. इसे डाउनलोड करने के बाद उसमें नाम, परीक्षा की तारीख, शिफ्ट और केंद्र की जानकारी जरूर देखनी होगी.&amp;nbsp;
100 सवाल, 100 नंबर का पेपर&amp;nbsp;
UPSSSC PET 2026 में कुल 100 एमसीक्यू प्रश्न पूछे जाएंगे और पेपर 100 अंकों का होगा. परीक्षा में भारतीय इतिहास, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, भूगोल, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय संविधान एवं लोक प्रशासन, सामान्य विज्ञान, प्रारंभिक अंकगणित, सामान्य हिंदी, सामान्य अंग्रेजी, रीजनिंग और सामान्य जागरूकता जैसे विषय शामिल होंगे. परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी होगी. प्रत्येक गलत उत्तर के लिए के लिए उस प्रश्न के निर्धारित अंक का एक चौथाई हिस्सा काटा जाएगा. ऐसे में उम्मीदवारों को सवाल हल करते समय अनुमान से जवाब देने से बचना होगा.&amp;nbsp;
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10वीं पास उम्मीदवार दे सकते हैं परीक्षा&amp;nbsp;
पीईटी 2026 के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 10वीं परीक्षा पास उम्मीदवार पात्र होंगे. इसके अलावा मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से इससे उच्च योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. आयु की बात करें तो 1 जुलाई 2026 को उम्मीदवार की उम्र कम से कम 18 और अधिकतम 40 वर्ष होनी चाहिए. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों काे आयोग के नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
7 सितंबर को खत्म हो चुका है आवेदन&amp;nbsp;
UPSSSC PET 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी. आवेदन करने के अंतिम तारीख 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी. परीक्षा फीस जमा करने की आखिरी तारीख भी 7 सितंबर थी, जबकि आवेदन में सुधार के लिए 8 सितंबर तक का समय दिया गया था. आवेदन फीस सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए 185 रुपये एससी, एसटी के लिए 95 रुपये और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 25 रुपये निर्धारित थी.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>उत्तराखंड में PCS में 67 पदों पर भर्ती, DSP और डिप्टी कलेक्टर बनने का मौका </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/उत्तराखंड-में-pcs-में-67-पदों-पर-भर्ती-dsp-और-डिप्टी-कलेक्टर-बनने-का-मौका</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/उत्तराखंड-में-pcs-में-67-पदों-पर-भर्ती-dsp-और-डिप्टी-कलेक्टर-बनने-का-मौका</guid>
        <description><![CDATA[ उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2026 के लिए भर्ती विज्ञापन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए प्रदेश के अलग-अलग विभागों में ग्रुप बी के कुल 67 पदों को भरा जाएगा. इनमें डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक, जिला कमांडेंट होमगार्ड, वित्त अधिकारी, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर समेत कई दूसरे पद शामिल है. भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन के प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है. योग्य एलिजिबल उम्मीदवार 29 सितंबर 2026 रात 11:59 बजे तक आयोग की वेबसाइट पर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन फीस जमा करने की अंतिम तारीख भी 29 सितंबर ही है.&amp;nbsp;
DSP के हैं सबसे ज्यादा पद&amp;nbsp;
UKPSC की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार कुल 67 रिक्तियों में सबसे ज्यादा 14 पद पुलिस उपाधीक्षक के हैं. डिप्टी कलेक्टर के लिए 10 पद निर्धारित किए गए हैं. इसके अलावा सहायक निदेशक/लेखा परीक्षा अधिकारी के 8, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के 5 और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के 5 पद हैं. वहीं वित्त अधिकारी/कोषाधिकारी के 4, संस्कृत शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक/उपसचिव के 4, जिला कमांडेंट होमगार्ड के 2 और सहायक निदेशक कारखाना/बॉयलर के 2 पद है. सहायक आयुक्त राज्य कर, सहायक नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी कैटेगरी 1, उप शिक्षा अधिकारी/स्टाफ ऑफिसर/विधि अधिकारी, सहायक श्रम आयुक्त और उद्यान विकास अधिकारी कैटेगरी 2 के एक-एक पद रखे गए हैं. राज्य कर अधिकारी के 5 और महिला कल्याण विभाग में केस वर्कर के 3 पद भी भर्ती में शामिल है.&amp;nbsp;
67 पदों का कैटेगरी वाइज ब्यौरा
कुल 67 पदों में 37 पद सामान्य वर्ग के लिए है. अनुसूचित जाति के लिए 13, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 11 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 6 पद निर्धारित है. कुल पदों पर उत्तराखंड की महिलाओं और राज्य आंदोलनकारियों के लिए क्षैतिज आरक्षण भी लागू होगा.&amp;nbsp;
किस पद पर कितनी मिलेगी सैलरी?
भर्ती में शामिल अधिकांश पद लेवल 10 के हैं, जिनका सैलरी 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये तक है. राज्य कर अधिकारी का पद लेवल 7 में है, जिसकी सैलरी 44,900 से 1,42,400 रुपये है. वहीं केस वर्कर के लिए लेवल 6 के तहत 35,400 से 1,12,400 रुपये तक सैलरी निर्धारित है.
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कौन कर सकता है आवेदन?
ज्यादातर पदों के लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन डिग्री जरूरी है. हालांकि कुछ पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता रखी गई है. सहायक निदेशक/लेखा परीक्षा अधिकारी के लिए कॉमर्स में ग्रेजुएशन की योग्यता चाहिए. उप शिक्षा अधिकारी/स्टाफ ऑफिसर/विधि अधिकारी के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन निर्धारित है. सहायक श्रम आयुक्त के लिए अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, कॉमर्स जैसे सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन होना जरूरी है. वहीं संस्कृत शिक्षा विभाग के पद के लिए संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएशन या बीएड की योग्यता दी गई है. सहायक निदेशक कारखाना/बॉयलर के लिए मैकेनिक या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री, जबकि उद्यान विकास अधिकारी के लिए हॉर्टिकल्चर या कृषि से संबंधित डिग्री जरूरी होगी. वही केस वर्कर पद के लिए समाजशास्त्र, एप्लाइड सोशियोलॉजी या सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएशन जरूरी है.&amp;nbsp;
कितने चरणों में होगा चयन?
यूकेपीएससी की भर्ती प्रक्रिया के आवेदन 9 सितंबर से शुरू हो चुके हैं और 29 सितंबर तक आवेदन जारी रहेंगे. आवेदन में सुधार के लिए 7 से 16 अक्टूबर तक विंडो खुलेगी. वहीं उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, मेडिकल जांच और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के चरणों के जरिए किया जाएगा. प्रारंभिक परीक्षा में जनरल स्टडीज और जनरल एप्टीट्यूड के पेपर होंगे, जबकि मुख्य परीक्षा में समान हिंदी निबंध और सामान्य अध्ययन के अलग-अलग पेपर शामिल है.
ये भी पढ़ें-रेलवे में पैरामेडिकल की 560 वैकेंसी, 15 सितंबर से शुरू होगा आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>उत्तराखंड, में, PCS, में, पदों, पर, भर्ती, DSP, और, डिप्टी, कलेक्टर, बनने, का, मौका </media:keywords>
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        <title>पहले से टीईटी वाले शिक्षकों को दोबारा देना होगा स्पेशल TET, क्या बोला शिक्षा विभाग?</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए आयोजित होने वाली स्पेशल टीईटी को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है. विभाग ने बताया कि जिन शिक्षकों ने पहले ही टीईटी या सीटीईटी पास कर रखा है, उन्हें दोबारा स्पेशल टीईटी पास करने की जरूरत नहीं होगी. वहीं ऐसे शिक्षक, जिन्होंने अभी तक &amp;nbsp;टीईटी या सीटीईटी में सफलता हासिल नहीं की है उन्हें स्पेशल टीईटी के लिए आवेदन कर परीक्षा में शामिल होना होगा. बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने संबंध में निर्देश जारी किए हैं. शासन के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पेशल टीईटी 2026 का विज्ञापन भी जारी कर दिया है. परीक्षा 3 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
किन शिक्षकों को मिलेगा स्पेशल TET का मौका?
स्पेशल टीईटी का आयोजन प्राथमिक और प्राथमिक स्तर पर काम कर रहे हैं, शिक्षकों तथा विशेष शिक्षकों के लिए किया जा रहा है. प्राथमिक स्तर पर कक्षा 1 से 5 तक पढ़ने वाले शिक्षक इसके दायरे में होंगे. इनमें बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, स्थानीय निकायों के स्कूल, &amp;nbsp;राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता अथवा संबंधित विद्यालयों और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल है. प्राथमिक स्तर के स्पेशल टीचर भी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे. इस तरह उच्च प्राथमिक स्तर पर कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले एलिजिबल शिक्षक और स्पेशल टीचर को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
TET और CTET में पास शिक्षकों के लिए राहत&amp;nbsp;
शिक्षा विभाग में सबसे जरूरी स्पष्टीकरण उन शिक्षकों को लेकर दिया है जो पहले से टेट या स्टेट उतरन कर चुके हैं ऐसे शिक्षकों के लिए स्पेशल ट दोबारा पास करना अनिवार्य या आवश्यक नहीं है वहीं जिन शिक्षकों ने अब तक या टेट पास नहीं किया उन्हें स्पेशलिटी के निर्धारित विज्ञापन के अनुसार रजिस्ट्रेशन कर आवेदन करना होगा और परीक्षा में शामिल होना होगा.&amp;nbsp;
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5 सितंबर से शुरू हुआ आवेदन&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से स्पेशल टीईटी का विज्ञापन 3 सितंबर 2026 को जारी किया गया था. इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन की प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू हो चुकी है. आवेदन फीस जमा करने की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर है. वहीं आवेदन फॉर्म में सुधार करने का मौका 8 अक्टूबर तक दिया जाएगा. इसके बाद 3 नवंबर 2026 को परीक्षा आयोजित की जाएगी.
सभी एलिजिबल शिक्षकों तक सूचना पहुंचाने के निर्देश&amp;nbsp;
बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित शिक्षकों तक स्पेशल टीईटी से जुड़ी जानकारी पहुंचाएं, ताकि एलिजिबल उम्मीदवार समय सीमा के अंदर रजिस्ट्रेशन और आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकें. इस व्यवस्था के जरिए विभाग ने स्पेशल एजुकेटर और दूसरे कार्यरत शिक्षकों के लिए परीक्षा में शामिल होने की पात्रता और आवेदन से जुड़ी स्थिति को स्पष्ट किया है.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में मिले 500 के नोट, 12 स्कूलों के प्रिंसिपल तलब</title>
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        <description><![CDATA[ यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा 2026 के बाद मुजफ्फरपुर नगर में परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. परीक्षा की कॉपियां जांच के लिए दूसरे जिलों में पहुंचने के बाद कई कॉपियों में 500-500 के नोट बंधे हुए मिले. मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जांच शुरू कर दी है. अब परीक्षा केंद्र प्रभारी और उनके उन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी जवाब देने के लिए तलब किया गया है, जिनके छात्रों की कॉपी में पैसे मिले थे.&amp;nbsp;
100 से ज्यादा बोर्ड कॉपी में मिले 500 के नोट&amp;nbsp;
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज में जुलाई में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट व इंप्रूवमेंट परीक्षा आयोजित की गई थी. इसमें करीब 700 परीक्षार्थी शामिल हुए थे. परीक्षा के बाद जब उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन के लिए दूसरे जिले में भेजी गई, तो जांच के दौरान कॉपियों में नोट मिलने का मामला सामने आया. जानकारी के अनुसार 100 से ज्यादा बोर्ड कॉपी में 500 रुपये के नोट बंधे हुए मिले. यह कॉपियां 12 स्टूडेंट से संबंधित बताई गई. कॉपी में इस तरह धनराशि मिलने के बाद मामले को अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जोड़कर देखा गया और इसकी जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के अधिकारियों तक पहुंचाई गई.&amp;nbsp;
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सामूहिक नकल की भी आशंका&amp;nbsp;
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरनगर के परीक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य को मेरिट स्थित क्षेत्रीय सचिव कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाया गया. मंगलवार को हुई सुनवाई में सभी 12 प्रधानाचार्य के साथ जीआईसी मुजफ्फरनगर के प्रधानाचार्य और परीक्षा केंद्र प्रभारी सुभाष चंद्र का भी पक्ष सुना गया. सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय सचिव ज्योति प्रसाद ने प्रधानाचार्यों को फटकार लगाई. मामले में सामूहिक नकल कराई जाने के आशंका भी जताई गई. सुनवाई पूरी होने के बाद क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई. अब इस मामले में अंतिम निर्णय उच्च स्तर से लिया जाएगा.&amp;nbsp;
इन स्कूलों के प्रधानाचार्य हुए तलब&amp;nbsp;
मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय में जिन विद्यालयों के प्रधानाचार्य को सुनवाई के लिए बुलाया गया, उनमें श्री कुंदकुंद जैन इंटर कॉलेज खतौली, जीआईसी बडसू, आदेश इंटर कॉलेज, श्री प्राणनाथ इंटर कॉलेज रतनपुरी, सर सैयद इंटर कॉलेज बुढ़ाना और एसडीएस इंटर कॉलेज तितावी शामिल है. इसके अलावा किसान मजदूर इंटर कॉलेज जसोई, जीआईसी कन्या इंटर कॉलेज सिसौली, एसडी इंटर कॉलेज, नेशनल इंटर कॉलेज दधेडू और भारत इंटर कॉलेज नंगला मंदौड़ के प्रधानाचार्यों को भी तलब किया गया.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>कौन है अमृत सागर चोपड़ा? जो IIT को हर साल देंगे 1 करोड़?</title>
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        <description><![CDATA[ आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद जब कोई छात्र अपने करियर में बड़ी सफलता हासिल करता है, तो उसके संस्थान के लिए इससे बड़ी खुशी शायद ही कुछ और हो. लेकिन कुछ पूर्व छात्र ऐसे भी होते हैं, जो सफलता के बाद अपने संस्थान को वापस कुछ देने का फैसला करते हैं. आईआईटी-आईएसएम धनबाद के पूर्व छात्र अमृत सागर चोपड़ा का नाम भी इसी कड़ी में चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने तय किया है कि वह अपने जीवन काल में हर साल आईआईटी धनबाद को एक करोड़ रुपये देंगे. इससे पहले भी वह संस्थान को 3 करोड़ रुपये का योगदान दे चुके हैं. चोपड़ा का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आईआईटी धनबाद अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने के मौके पर शताब्दी समारोह मना रहा है. वहीं संस्थान की ओर से 100 वर्ष 100 करोड़ रुपये का अभियान चलाया जा रहा है. जिसमें पूर्व छात्र बढ़-चढ़कर योगदान कर रहे हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अमृत सागर चोपड़ा कौन है, जो आईआईटी धनबाद को हर साल एक करोड़ रुपये देंगे.
कौन है अमृत सागर चोपड़ा?
अमृत सागर चोपड़ा आईआईटी आईएसएम धनबाद के 1961 बैच से हैं. उस समय संस्थान को इंडियन स्कूल ऑफ माइंस यानी आईएसएम धनबाद के नाम से जाना जाता था. उन्होंने यहां माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अपने करियर में कई अलग-अलग क्षेत्र में काम किया. माइनिंग सेक्टर में काम करने के बाद उन्होंने टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी कदम रखा. एंड्रयू युले एंड कंपनी में कुलेरी मैनेजर के तौर पर काम करने के बाद वह आईबीएम, टीसीएस और टाटा एलेक्सी जैसी कंपनियों से जुड़े. इसके बाद 1982 में ओमान जाकर उन्होंने कंप्यूटर एजूकेशन और हेल्थकेयर सिस्टम से जुड़ा अपना संस्थान शुरू किया.&amp;nbsp;
मेडिकॉम सॉफ्टवेयर के मालिक है अमृत सागर चोपड़ा&amp;nbsp;
अमृत सागर चोपड़ा ने आगे चलकर अपनी कंपनी खड़ी की. उनकी कंपनी मेडिकॉम सॉफ्टवेयर का तैयार किया गया हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम दुनिया के 150 से ज्यादा अस्पताल में इस्तेमाल किया जा रहा है. माइन वेंटिलेशन के विषय पर भी वह किताब लिख चुके हैं. &amp;nbsp;इसके अलावा उन्हें फर्स्ट क्लास माइन मैनेजर का सर्टिफिकेट मिला था. इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और फिलांथ्रोपी के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए आईआईटी धनबाद ने उन्हें स्पेशल कंटेनेरी अवाॅर्ड 2026 से भी सम्मानित किया.&amp;nbsp;
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पहले 3 करोड़ रुपये दे चुके हैं चोपड़ा&amp;nbsp;
अपने करियर में मिली सफलता का श्रेय अमृत सागर चोपड़ा अपने संस्थान और वहां के शिक्षकों को भी देते हैं. यही वजह है कि उन्होंने आईआईटी धनबाद के विकास में आर्थिक योगदान देने का फैसला किया. आईआईटी शताब्दी भवन में प्रस्तावित कन्वेंशन हॉल के लिए उन्होंने शताब्दी फंड में पहले ही 3 करोड रुपये दिए थे. अब उन्होंने इससे आगे बढ़ते हुए अपने जीवनकाल तक हर साल एक करोड़ रुपये देने का संकल्प लिया है. उनका यह योगदान संस्थान के विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए होगा.&amp;nbsp;
कई पूर्व छात्र दे रहे हैं योगदान
आईआईटी धनबाद की शताब्दी अभियान में सिर्फ अमृत सागर चोपड़ा ही नहीं, बल्कि कई पूर्व छात्र भी योगदान कर रहे हैं. पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के 1962 बैच के मोहिंदर सिंह गुलाटी ने 10 करोड़ रुपये दिए हैं. वहीं 1988 बैच के संतोष चंद्र ने शताब्दी एंडोमेंट के लिए 65.5 लाख रुपये का योगदान किया है. उन्होंने यह राशि अपने माता-पिता की स्मृति में दी है. इसके अलावा अविनाश आहूजा ने 84 लाख रुपये दिए हैं. इस तरह से कई दूसरे पूर्व छात्र भी आईआईटी के लिए योगदान दे रहे हैं.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>46 लाख की नौकरी ठुकराई, 7 बार एसएसबी में फेल; फिर ऐसे आर्मी ऑफिसर बने शारदेंदु</title>
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        <description><![CDATA[ 46 लाख की नौकरी ठुकराई, 7 बार एसएसबी में फेल; फिर ऐसे आर्मी ऑफिसर बने शारदेंदु ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अगस्त में प्रोफेशनल जॉब्स में भर्ती 14 पर्सेंट बढ़ी... फ्रेशर्स हायरिंग में भी 15 पर्सेंट का इजाफा</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के प्रोफेशनल जॉब मार्केट के लिए अगस्त का महीना राहत भरा रहा है. अलग-अलग सेक्टर में कंपनियों की ओर से भर्ती बढ़ी और नौकरी की तलाश कर रहे फ्रेशर्स के लिए भी अच्छी तस्वीर सामने आई. नौकरी जॉब स्पीक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में देश में व्हाइट कॉलर हायरिंग पिछले साल के अगस्त महीने की तुलना में 14 फीसदी बढ़ी. इस दौरान ऑटो, हेल्थ केयर और रिटेल जैसे सेक्टरों में भर्ती ने रफ्तार पकड़ी. नौकरी जॉब स्पीक्स इंडेक्स अगस्त में 3,028 पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल अगस्त में यह 2,664 था. हालांकि जुलाई के 3,227 के मुकाबले अगस्त का इंडेक्स 6 फरवरी कम रहा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगस्त के आंकड़ों को त्योहारी सीजन के बदलते समय के रूप में देखना जरूरी है. पिछले साल कई त्यौहार अगस्त में पड़ रहे थे, जबकि इस साल इसका ज्यादा असर सितंबर में दिखाई देगा.&amp;nbsp;
फ्रेशर्स के लिए भी बढ़े नौकरी के मौके
अगस्त में सिर्फ एक्सपीरियंस कर्मचारियों की मांग नहीं बढ़ी, बल्कि शुरुआती करियर वाले उम्मीदवारों के लिए भी हायरिंग में इजाफा हुआ. 3 साल तक के एक्सपीरियंस वाले उम्मीदवारों की भर्ती सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़ी. बीमा क्षेत्र में अकेले फ्रेशर हायरिंग 37 प्रतिशत बढ़ी. 4 से 7 साल के एक्सपीरियंस वाले प्रोफेशनल्स की भर्ती में 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं 8 से 12 साल के एक्सपीरियंस वाले उम्मीदवारों की हायरिंग 16 फीसदी और 13 से 16 साल के एक्सपीरियंस वाले प्रोफेशनल की भर्ती 18 फीसदी बढ़ी. 16 साल से ज्यादा एक्सपीरियंस वाले उम्मीदवारों की मांग में भी 13 फीसदी का इजाफा हुआ.&amp;nbsp;
ऑटो, हेल्थकेयर और रिटेल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी&amp;nbsp;
सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो और ऑटो एंसिलरी में हायरिंग 19 फीसदी बढ़ी. हेल्थ केयर में 16 फीसदी और रिटेल में 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई. इंश्योरेंस में 12 फीसदी और आईटी में 11 फीसदी के बढ़ोतरी रही. वहीं बैंकिंग और एफएमसीजी सेक्टर में भर्ती 10-10 फीसदी बढ़ी. बीपीओ-आईटीईएस, ऑयल एंड गैस और रियल एस्टेट में 8-8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं फार्मा और बायोटेक में भर्ती लगभग स्थिर रही. कुछ सेक्टरों में स्थिति इसके उलट &amp;nbsp;रही. हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल में हायरिंग 4 फीसदी घटी,जबकि एजुकेशन, टीचिंग और ट्रेनिंग में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई. मीडिया, डॉट कॉम एंटरटेनमेंट में भी भर्ती 14 फीसदी कम रही.&amp;nbsp;
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AI और मशीन लर्निंग से जुड़े पदों में बढ़ी मांग&amp;nbsp;
टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों में भी अगस्त के दौरान मांग बनी रही. एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े पदों की हायरिंग में 31 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई. आईटी और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में कुल 11 फीसदी बढ़ी. आईटी सेक्टर के अंदर एआई-मशीन लर्निंग भूमिका में 12 फीसदी और आईटी व इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी में 32 फीसदी के वृद्धि दर्ज की गई. वहीं फंक्शन के आधार पर हेल्थ केयर एवं लाइफ साइंस में हायरिंग 34 फीसदी, मीडिया प्रोडक्शन एवं एंटरटेनमेंट में 33 फीसदी, इंजीनियरिंग हार्डवेयर एवं नेटवर्क में 30 फीसदी और बीएफएसआई, इन्वेस्टमेंट एवं ट्रेडिंग में 29 फीसदी बढ़ी. जीसीसीएस में भी भर्ती 10 फीसदी ऊपर रही.&amp;nbsp;
हैदराबाद और कोलकाता में हायरिंग की तेज रफ्तार&amp;nbsp;
बड़े शहरों की बात करें तो हैदराबाद 23 फीसदी की वृद्धि के साथ सबसे आगे रहा. इसके बाद कोलकाता में 22 फीसदी, चेन्नई में 20 फीसदी, बेंगलुरु और पुणे में 14-14 फीसदी, दिल्ली एनसीआर में 10 फीसदी और मुंबई में 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं उभरते शहरों में भुवनेश्वर में हायरिंग 32 फीसदी बढ़ी, जबकि रायपुर में 23 फीसदी की वृद्धि रही. इसके अलावा सूरत और रांची में भी भर्ती के आंकड़ों में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>SSC CHSL भर्ती शुरू, 12वीं पास उम्मीदवारों को 92 हजार तक की सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 12वीं पास युवाओं के लिए कर्मचारी चयन आयोग (SSC में नौकरी का बड़ा मौका सामने आया है. आयोग ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी, लेवल एग्जामिनेशन यानी SSC CHSL 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती के जरिए लोअर डिविजनल क्लर्क, जूनियर सेक्रेटेरिएट अस्सिटेंट और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर करीब 2,536 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. इच्छुक उम्मीदवार 7 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. वहीं आवेदन की प्रक्रिया कल यानी 7 सितंबर से शुरू हो चुकी है.&amp;nbsp;
किन-किन पदों पर हो रही है भर्ती?
SSC CHSL 2026 के तहत LDC-JSA और DEO ग्रेड ए पदों पर भर्ती होगी. आयोग ने फिलहाल करीब 2,536 वैकेंसी बताई है. पद और कैटेगरी के अनुसार अंतिम वैकेंसी का डिटेल बाद में एसएससी की वेबसाइट पर जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
12वीं पास कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
एलडीसी-जेएसए और अधिकांश डीईओ पदों के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं या पास होना जरूरी है. वहीं उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, एससी और संस्कृति मंत्रालय में डीईओ- डीईओ ग्रेड ए पदों के लिए 12वीं में साइंस स्ट्रीम के साथ गणित विषय होना जरूरी है, जो उम्मीदवार 12वीं की परीक्षा दे चुके हैं, वह भी आवेदन कर सकते हैं. लेकिन उनकी आवश्यक योग्यता 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी हो जानी चाहिए.&amp;nbsp;
आयु सीमा और सैलरी&amp;nbsp;
SSC CHSL 2026 के लिए उम्मीदवार की उम्र 18 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए. जिसका मतलब है कि 2 अगस्त 1999 से पहले और 1 अगस्त 2008 के बाद जन्मे उम्मीदवार आवेदन नहीं कर सकते. वहीं आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट भी मिलेगी. इसके अलावा एसएससी सीएचएसएल में चयनित उम्मीदवारों को अलग-अलग पदों के अनुसार 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत सैलरी मिलेगी. एलडीसी-जीएसए पद के लिए पे लेवल-2 में 19,900 से 63,200 रुपये तक सैलरी मिलेगी. डीईओ पद पर पे लेवल-4 में 25,500 से 81,100 रुपये और पे लेवल-5 में 29,200 से 92,300 तक सैलरी दी जाएगी. डीईओ ग्रेड ए के लिए पे लेवल 4 के तहत 25,500 से 81,100 रुपये तक सैलरी मिलेगी.
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दो चरणों में होगी चयन प्रक्रिया
उम्मीदवारों का चयन टियर-1 और टियर-2 कंप्यूटर आधारित परीक्षा के जरिए किया जाएगा. टियर-1 में इंग्लिश, जनरल इंटेलिजेंस, क्वांटेटिव एप्टीट्यूड और जनरल अवेयरनेस से सवाल पूछे जाएंगे. परीक्षा में गलत उत्तर के लिए 0.50 अंक की निगेटिव मार्किंग होगी. टियर-2 में अलग-अलग सेक्शन के साथ कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट और पद के अनुसार स्किल या टाइपिंग टेस्ट शामिल होगा. टियर-2 के दोनों सेशन एक ही दिन आयोजित किए जाएंगे&amp;nbsp;
ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;

इन पदों पर आवेदन करने के लिए सबसे पहले ssc.gov.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन पूरा करके लोगिन करें.
अब SSC CHSL 2026 का ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें.&amp;nbsp;
इसके बाद मांगी गई डिटेल भरकर डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद ऑनलाइन फीस का पेमेंट करें.&amp;nbsp;
फीस पेमेंट करके फॉर्म को दोबारा अच्छे से जांच कर इसे सबमिट कर लें और कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.

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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बॉम्बे हाईकोर्ट को कुक की जरूरत, 10वीं&amp;12वीं पास भी कर सकते हैं अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए मुंबई हाईकोर्ट में नौकरी पाने का मौका है. मुंबई हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने रसोइया के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती के तहत कुल 18 पदों को भर जाना है. वहीं इस भर्ती की खास बात यह है कि इन पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता सिर्फ चौथी कक्षा पास रखी गई है. ऐसे में कक्षा 10वीं और 12वीं पास उम्मीदवार भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. वहीं इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं, बल्कि ऑफलाइन रखी गई है. इन पदों के लिए उम्मीदवारों को फॉर्म भरकर स्पीड पोस्ट के जरिए भेजना होगा.&amp;nbsp;
कितनी है वैकेंसी और क्या है योग्यता?
मुंबई हाई कोर्ट के औरंगाबाद बेंच की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार कुल 18 पदों पर भर्ती की जानी है. इनमें एक पद दिव्यांग उम्मीदवार के लिए आरक्षित है. कुक पद के लिए उम्मीदवार का कम से कम चौथी कक्षा पास होना जरूरी है. जिन उम्मीदवारों ने 10वीं 12वीं या इससे ज्यादा पढ़ाई की है. वह भी आवेदन के योग्य है. अगर किसी उम्मीदवार के पास चौथी कक्षा की मार्कशीट नहीं है, तो आवेदन में चौथी कक्षा के लिए 50 प्रतिशत अंक का अनुमानित स्कोर दर्ज करने का प्रावधान है. इसके अलावा उम्मीदवार को हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं में पढ़ने-लिखने और बोलने के ज्ञान होना चाहिए. वहीं उम्मीदवार को शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का खाना बनाना आना चाहिए.
52 हजार रुपये तक मिलेगी सैलरी&amp;nbsp;
बॉम्बे हाईकोर्ट में कुक के पद पर चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तौर पर मैट्रिक्स लेवल एस 3 में सैलरी दी जाएगी. इन पदों पर सैलरी 16,600 से 52,400 तक मिलेगी. इसके अलावा नियमानुसार दूसरे सरकारी भत्ते भी मिलेंगे. वहीं इन पदों के लिए उम्मीदवारों की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 38 वर्ष होनी चाहिए. पिछड़ा वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 23 वर्ष रखी गई है. वहीं कोर्ट या सरकारी कर्मचारी निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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50 अंकों के आधार पर होगा चयन&amp;nbsp;
उम्मीदवारों का चयन कुल 50 अंकों की प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा. इसमें सबसे ज्यादा जरूरी कुकिंग प्रैक्टिकल टेस्ट का होगा. कुकिंग प्रैक्टिकल टेस्ट 30 अंकों का होगा. इसमें कम से कम 15 अंक हासिल करना जरूरी है. इसके बाद फिजिकल फिटनेस टेस्ट 10 अंकों का और ओरल इंटरव्यू 10 अंकों का होगा, जो उम्मीदवार प्रैक्टिकल कुकिंग टेस्ट में सफल नहीं होंगे वह आगे के प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे. वहीं अंतिम चरण तीनों चरणों में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर मेरिट से किया जाएगा.&amp;nbsp;
ऐसे भेजना होगा आवेदन&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को मुंबई हाई कोर्ट के ऑफिशियल वेबसाइट से निर्धारित आवेदन फॉर्म डाउनलोड करना होगा. फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही तरीके से भरने के बाद फोटो लगानी होगी और जरूरी डॉक्यूमेंट की सेल्फ एसिस्टेड कॉपी जमा करनी होगी. आवेदन वाले लिफाफे पर एप्लीकेशन फॉर पोस्ट ऑफ स्वयंपाकी लिखना होगा. इसके बाद पूरा आवेदन केवल स्पीड पोस्ट के जरिए भेजना होगा. स्पीड पोस्ट पर एड्रेस प्रबंधक प्रशासन, मुंबई हाई कोर्ट, बेंच औरंगाबाद जालना रोड, छत्रपति संभाजी नगर-431009 पर 10 सितंबर शाम 5 बजे तक पहुंच जाना चाहिए. दूसरे किसी माध्यम से भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. वहीं आवेदन जमा करते समय कोई फीस भी नहीं देनी होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बॉम्बे, हाईकोर्ट, को, कुक, की, जरूरत, 10वीं-12वीं, पास, भी, कर, सकते, हैं, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>नीट में 10 हजार से 1 लाख रैंक वालों को कहां मिलेगा एडमिशन? देखें ये 10 MBBS कॉलेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नीट-में-10-हजार-से-1-लाख-रैंक-वालों-को-कहां-मिलेगा-एडमिशन-देखें-ये-10-mbbs-कॉलेज</link>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी 2026 में अच्छी रैंक पाने के बाद ज्यादातर छात्रों की कोशिश सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट हासिल करने की होती है. लेकिन सिर्फ रैंक से यह तय नहीं होता कि किस कॉलेज में एडमिशन मिलेगा. कैंडिडेट की कैटेगरी, ऑल इंडिया कोटा, स्टेट कोटा, उपलब्धि सीटें और पिछले राउंड के क्लोजिंग रैंक जैसे कई फैक्टर सीट अलॉटमेंट में बड़ी भूमिका निभाते हैं. ऐसे में नीट यूजी 2026 के राउंड 1 काउंसलिंग का डेटा सामने आने के बाद अलग-अलग रैंक और कैटेगरी के हिसाब से सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तस्वीर कुछ हद तक साफ हुई है. 10 हजार से 1 लाख तक रैंक वाले उम्मीदवारों के लिए भी सरकारी एमबीबीएस कॉलेज के ऑप्शन मौजूद है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट में 10 हजार से 1 लाख रैंक वालों को कहां एडमिशन मिल सकता है.&amp;nbsp;
10 हजार से 1 लाख रैंक पर कॉलेज के ऑप्शन
सरकारी मेडिकल कॉलेज&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; कोटा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; कैटेगरी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; नीट रैंक&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज और सुपर फैसिलिटी हॉस्पिटल, आजमगढ़ &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;ओबीसी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;10,002&amp;nbsp;पं. रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बारीपदा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;ऑल इंडिया &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;ओपन जनरल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;10,004&amp;nbsp;डॉ. वैशम्पायन मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, सोलापुर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ओपन जनरल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;10,561&amp;nbsp;सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतनाग&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ओपन जनरल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;10,654&amp;nbsp;सरकारी मेडिकल कॉलेज, बारां&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया &amp;nbsp; &amp;nbsp; ओपन जनरल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 12,759&amp;nbsp;स्टेट मेडिकल कॉलेज सोसाइटी, फतेहपुर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ओबीसी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 13,729&amp;nbsp;सरकारी मेडिकल कॉलेज, करौली&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;एससी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 63,909&amp;nbsp;अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अगरतला&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;एससी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 68,983&amp;nbsp;शेख-उल-हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;एसटी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;87,624&amp;nbsp;मालदा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल, मालदा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ऑल इंडिया&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;एससी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 88,094&amp;nbsp;
ओपन जनरल कैटेगरी में 10 हजार के आसपास ऑप्शन&amp;nbsp;
ओपन जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए राउंड 1 डेटा में पं. रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बारीपदा में 10,004 रैंक पर सीट अलॉट हुई. वहीं डॉ. वैशम्पायन मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, सोलापुर में 10,561 और सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतनाग में 10,654 रैंक पर सीट मिली. सरकारी मेडिकल कॉलेज, बारां में भी 12,759 रैंक पर ओपन जनरल कैटेगरी में सीट अलॉटमेंट हुआ है.&amp;nbsp;
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OBC उम्मीदवारों के लिए भी ऑप्शन&amp;nbsp;
ओबीसी कैटेगरी में सरकारी मेडिकल कॉलेज और सुपर फैसिलिटी हॉस्पिटल, आजमगढ़ में 10,002 रैंक पर सीट अलॉट हुई. इसके अलावा स्टेट मेडिकल कॉलेज सोसाइटी, फतेहपुर में 13,729 रैंक पर ओबीसी उम्मीदवार को सीट मिली.&amp;nbsp;
SC और ST कैटेगरी में 1 लाख के आसपास भी मौके&amp;nbsp;
एससी कैटेगरी में रैंक बढ़ने पर भी कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेज ऑप्शन में आते हैं. क्लोजिंग रैंक डेटा के अनुसार ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज लुधियाना में 1,00,011 गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नागौर में 1,00,025 और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बदायूं में 1,00,034 तक रैंक के ऑप्शन दिए गए हैं. इसके अलावा नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पटना में 1,00,279 गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बारां में 1,00,308 हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में 1,00,310 और कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हुबली में 1,00,347 तक की क्लोजिंग रैंक दी गई थी.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>DU के 91 में से 71 कॉलेजों में हॉस्टल नहीं, हजारों छात्रों को होती है परेशानी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हजारों छात्रों के सामने रहने की जगह और सुरक्षा से जुड़ी मुश्किलों को एक बार फिर उजागर कर दिया है. यूनिवर्सिटी के पास सत्य निकेतन पीजी हादसे में सात लोगों की जान चली गई. इस घटना के बाद डीयू के उन छात्रों की भी चिंता सामने आई, जो कॉलेज हॉस्टल में जगह नहीं मिलने के कारण मजबूरी में महंगे और असुरक्षित पीजी या किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं.
दरअसल, हर साल हजारों छात्रों को डीयू में एडमिशन मिलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रहने की जगह की खड़ी हो जाती है. डीयू के ज्यादातर कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं है और जिन कॉलेजों में हॉस्टल है, वहां भी सीटों की संख्या छात्रों की तुलना में बहुत कम है. ऐसे में दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले हजारों छात्रों को पीजी, प्राइवेट हॉस्टल या किराए के मकान का सहारा लेना पड़ता है.&amp;nbsp;
DU के 91 कॉलेज में सिर्फ 20 के पास हॉस्टल&amp;nbsp;
दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुल 91 कॉलेज है, लेकिन इनमें से सिर्फ 20 कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा है. यानी 71 कॉलेज ऐसे हैं, जहां छात्रों के लिए कॉलेज स्तर पर हॉस्टल उपलब्ध नहीं है. यूनिवर्सिटी के नॉर्थ और साउथ कैंपस में भी हॉस्टल की सुविधा मौजूद है, लेकिन कुल मिलाकर करीब 7000 ही हॉस्टल सीटें हैं. यह संख्या डीयू में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले बहुत कम है. यूनिवर्सिटी की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार यहां करीब 2.1 लाख अंडरग्रेजुएट छात्र और 34,520 पोस्ट ग्रेजुएट छात्र है, जिनमें पीएचडी स्कॉलर भी शामिल है. इस तरह डीयू में कुल छात्र संख्या करीब 2.5 लाख पहुंचती है. &amp;zwnj;
2026-27 में करीब 71,600 नए UG छात्र&amp;nbsp;
छात्रों की संख्या और हॉस्टल सीटों के बीच अंतर एडमिशन के साथ ही जरूरी हो जाता है. 2026-27 एडमिशन सेशन में डीयू करीब 71,600 अंडर ग्रेजुएट छात्रों को एडमिशन दे रहा है. कॉलेजों के अनुमान के अनुसार यूनिवर्सिटी के करीब आधे छात्र दिल्ली से बाहर के इलाकों से आते हैं. ऐसे छात्रों के लिए एडमिशन मिलने के बाद रहने की व्यवस्था करना जरूरी हो जाता है. लेकिन सीमित हॉस्टल सीटों के कारण हर छात्र को कैंपस में कमरा मिलना संभव नहीं है.&amp;nbsp;
हॉस्टल वाले कॉलेजों में भी सीटों की भारी कमी&amp;nbsp;
जिन कॉलेजों में हॉस्टल मौजूद है, वहां भी स्थिति बहुत अलग नहीं है. उदाहरण के तौर पर मिरांडा हाउस में करीब 5,375 छात्र हैं, जबकि हॉस्टल में लगभग 370 छात्रों के रहने की क्षमता है. 2026-27 में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए सिर्फ करीब 90 हॉस्टल सीटें उपलब्ध है.
इसी तरह श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में लगभग 4,600 छात्र है, लेकिन हॉस्टल की क्षमता केवल 150 छात्रों की है. इनमें से फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ 50 सीटें उपलब्ध है. वही मिरांडा हाउस, किरोड़ी मल कॉलेज, हिंदू कॉलेज, एसआरसीसी और लेडी श्री राम कॉलेज को देखें तो करीब 24,350 छात्रों के मुकाबले हॉस्टल की कुल क्षमता 1,140 है. यानी इन कॉलेज में उनके हॉस्टल मिलाकर कुल छात्र संख्या के करीब 4.7 फीसदी को ही जगह दे पाते हैं.&amp;nbsp;
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हॉस्टल की कमी कोई नई समस्या नहीं&amp;nbsp;
डीयू में हॉस्टल की कमी कोई नई स्थिति नहीं है. नवंबर 2016 में राज्यसभा में दिए गए एक जवाब में यूनिवर्सिटी के हवाले से बताया गया था कि डीयू में 19 हॉस्टल थे, जिनकी कुल क्षमता 3,580 छात्रों की थी. कॉलेज की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले आवास को शामिल करने पर यह संख्या करीब 6000 सीटों तक पहुंचती थी. उस समय डीयू हर साल कम से कम 60 हजार छात्रों को एडमिशन दे रहा था. वहीं करीब एक दशक बाद भी छात्रों की संख्या और हॉस्टल क्षमता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है.
हॉस्टल नहीं मिलने पर PG और किराए का सहारा&amp;nbsp;
कैंपस में जगह नहीं मिलने के बाद छात्रों का रुख प्राइवेट आवास की और जाता है. नॉर्थ कैंपस के आसपास विजयनगर और मिलका गंज, जबकि साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र पीजी, प्राइवेट हॉस्टल और किराए के फ्लैट तलाशते हैं. हालांकि निजी आवास में भी छात्रों के सामने कई परेशानियां रहती है. ज्यादा किराया, सीमित जगह और कई बार खराब रखरखाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए एडमिशन के बाद रहने की व्यवस्था करना इसलिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हरियाणा में 5 लाख छात्रों को मिलेंगे डेटा सिम, पढ़ाई डिजिटल करने पर जोर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हरियाणा-में-5-लाख-छात्रों-को-मिलेंगे-डेटा-सिम-पढ़ाई-डिजिटल-करने-पर-जोर</link>
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        <description><![CDATA[ हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की डिजिटल पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. राज्य में कक्षा 10वीं से 12वीं तक के छात्रों को दिए जाने वाले टैबलेट में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए 5 लाख डेटा सिम खरीदने को मंजूरी दी है. इन सिम कार्ड की मदद से छात्र टैबलेट के जरिए ऑनलाइन पढ़ाई की सामग्री और दूसरे डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों तक अपनी पहुंच आसान बना सकेंगे. यह फैसला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में लिया गया. सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों को तकनीकी आधारित शिक्षा से जोड़ने और उन्हें मौजूदा जरूरतों के अनुसार जरूरी कौशल विकसित करने में मदद करना है.&amp;nbsp;
5 लाख छात्रों को दिए जाएंगे टैबलेट&amp;nbsp;
हरियाणा सरकार ने कक्षा 10वीं से 12वीं के छात्रों के लिए 5 लाख टैबलेट उपलब्ध कराने की बात कही. इन्हीं टैबलेट के इस्तेमाल के लिए नए डेटा सिम कार्ड खरीदे जाएंगे. इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलने से छात्र और डिवाइस का इस्तेमाल, डिजिटल स्टडी मैटेरियल और शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंचने के लिए कर सकेंगे. यह पूरी पहल हरियाणा के ई-अधिगम कार्यक्रम का हिस्सा है. इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों के छात्रों को टैबलेट आधारित पढ़ाई से जोड़ने और पर्सनलाइज्ड व एडाप्टिव लर्निंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.&amp;nbsp;
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डिजिटल और तकनीकी शिक्षा पर फोकस&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वह वर्तमान समय की जरूरत के अनुसार अपने कौशल को विकसित कर सकें. सरकार की ओर से 5 लाख डेटा सिम कार्ड की खरीद को मंजूरी इसी दिशा में उठाया गया कदम है. टैबलेट के साथ इंटरनेट इस्तेमाल होने की सुविधा मिलने से सरकारी स्कूलों के छात्रों को डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल करने का बेहतर अवसर मिलेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इससे पहले सरकार ने यह ई-अधिगम योजना के तहत कक्षा 10वीं से 12वीं के सरकारी स्कूल छात्रों को 5 लाख मुफ्त टैबलेट उपलब्ध कराए थे. अब नए डेटा सिम कार्ड इन डिवाइस के जरिए डिजिटल पढ़ाई को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे.&amp;nbsp;
हरियाणा में सीएम श्री स्कूल की भी तैयारी&amp;nbsp;
हरियाणा सरकार के डेटा सिम के फैसले के अलावा राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल धांडा ने बताया कि पीएम श्री स्कूल की तर्ज पर हरियाणा में जल्दी ही सीएम श्री स्कूल शुरू किए जाएंगे. उन्होंने विधानसभा के बजट सत्र में एक सदस्य के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सीएम श्री स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न का पालन किया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 16:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UGC NET Re&amp;exam&amp; NTA की एडवाइजरी, इन बातों का रखें ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ एनटीए ने यूजीसी नेट जून 2026 के लिए एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए एडवाइजरी जारी की है. एनटीए ने खासतौर पर दिल्ली में परीक्षा केंद्र वाले उम्मीदवारों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की दोबारा परीक्षा 9 और 10 सितंबर को आयोजित की जाएगी. इसी दौरान दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. ऐसे में उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है.
किस दिन किस विषय का होगा री-एग्जाम
यूजीसी नेट री एग्जाम 3 शिफ्ट में आयोजित किया जाएगा. 9 सितंबर को पहली शिफ्ट में इंग्लिश का पेपर होगा, जो यह पेपर सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा. वहीं दूसरी शिफ्ट में कॉमर्स का पेपर होगा, जो इसी दिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक होगा. इसके अलावा दूसरे दिन 10 सितंबर को एक ही शिफ्ट में पेपर होगा, जिसमें एक ही शिफ्ट में सोशियोलॉजी का पेपर होगा. यह पेपर सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा. उम्मीदवारों को अपने एडमिट कार्ड में दिए गए रिपोर्टिंग टाइम और दूसरे निर्देशों का पालन करना होगा. एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा के लिए उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली गई है.
दिल्ली में एग्जाम देने वालों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी
एनटीए ने दिल्ली में परीक्षा देने जा रहे उम्मीदवारों से कहा है कि वह घर से निकलने से पहले अपना रूट चेक कर लें. संभावित ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन को देखते हुए अतिरिक्त समय लेकर चले और परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग टाइम से बहुत पहले पहुंचने की कोशिश करें. उम्मीदवारों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और संबंधित अधिकारियों की ओर से जारी ट्रैफिक एडवाइजरी भी चेक करने की सलाह दी गई है. एनटीए के अनुसार 9 और 10 सितंबर को सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ रास्तों पर सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है.
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एग्जाम सेंटर पर क्या लेकर जाए और क्या नहीं?
यूजीसी नेट री-एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवार परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्टफोन और ईयरफोन लेकर न जाए. कैलकुलेटर या दूसरे किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को भी परीक्षा हॉल में न ले जाएं. इसके अलावा पर्स, हैंडबैग और बड़े बैग परीक्षा केंद्र पर ले जाने से बचें. वहीं अनावश्यक स्टेशनरी या प्रतिबंधित सामान लेकर परीक्षा के अंदर पर न पहुंचे. उम्मीदवारों के ड्रेस कोड की बात करें तो पुरुष उम्मीदवारों को हल्के रंग की हाफ स्लीव्स वाली शर्ट या टी-शर्ट और सामान्य ट्राउजर पहनने की सलाह दी गई है. वहीं महिलाओं को भी ईयररिंग्स, अंगूठी, चैन, ब्रेसलेट, कंगन, बड़ी एंब्रॉयडरी वाले कपड़े, बड़े बटन या बहुत लेयर वाले आउटफिट पहनने से बचने की सलाह दी गई है.
एडमिट कार्ड भी जरूर करें चेक
परीक्षा के लिए निकलने से पहले उम्मीदवारों को अपना एडमिट कार्ड ध्यान से देखने की भी सलाह दी गई है. इसमें परीक्षा का केंद्र, शहर, समय, रिपोर्टिंग टाइम और दूसरे जरूरी निर्देश दिए गए हैं. परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के दौरान उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड में दिए गए सभी निर्देशों का पालन करना होगा. एनटीए ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि परीक्षा के दिन किसी तरह की जल्दबाजी से बचने के लिए ट्रैवल करने की तैयारी पहले ही कर लें. खासतौर पर दिल्ली में परीक्षा केंद्र वाले उम्मीदवार ट्रैफिक को ध्यान में रखकर निकले.
क्यों हो रहा है यूजीसी नेट का एग्जाम
यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा 22 से 30 जून के बीच 87 विषयों के लिए आयोजित की गई थी. इसके बाद इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्न पत्र में गलतियों को लेकर शिकायतें सामने आई थी. एनटीए की ओर से बनाई गई समिति ने प्रश्न पत्रों की जांच में तथ्यात्मक, टाइपिंग, ट्रांसलेशन, ग्रामर और प्रश्नों से जुड़ी कई तरह की गलतियां सामने आई थी. वहीं समिति ने यह भी पाया था कि कुछ सवाल पहले की परीक्षा में दोहरा गए थे, इसके बाद तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का एनटीए ने फैसला लिया था.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>एमपी टीईटी 2026 का ऑफलाइन मोड पर फंसा पेच, ESB ने खींचे हाथ</title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख से ज्यादा सेवारत शिक्षकों के लिए अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर एक बार फिर पेच फंस गया है. शिक्षकों की मांग पर सरकार ने परीक्षा को ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन मोड में करने का फैसला किया था. लेकिन परीक्षा आयोजित कराने वाले मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने ऑफलाइन परीक्षा कराने में असमर्थता जताई है. ऐसे में अब स्कूल शिक्षा विभाग के सामने परीक्षा के लिए दूसरी एजेंसी तलाशने की समस्या खड़ी हो गई है.&amp;nbsp;
CM ने की थी परीक्षा ऑफलाइन कराने की घोषणा&amp;nbsp;
दरअसल शिक्षक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहनलाल यादव ने शिक्षकों की मांग को स्वीकार करते हुए टीईटी को ऑफलाइन मोड में भी कराने की घोषणा की थी. इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने ईएसबी को ऑफलाइन मोड में भी कराने का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन ईएसबी ने जवाब में कहा कि वह पिछले कई वर्षों से केवल ऑनलाइन परीक्षा आयोजित कर रहा है और ऑफलाइन परीक्षा कराने की व्यवस्था बंद कर दी गई है. इसलिए वह ऑनलाइन के अलावा किसी दूसरे मोड में परीक्षा कराने की स्थिति में नहीं है.&amp;nbsp;
अब नई एजेंसी के जरिए परीक्षा कराने की तैयारी
ईएसबी के इनकार के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग परीक्षा के लिए दूसरे ऑप्शन पर विचार कर रहा है. लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि ईएसबी ने फिलहाल सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा कराने की इच्छा जताई है. ऐसे में अगर ऑफलाइन परीक्षा करानी है, तो दूसरी एजेंसी की व्यवस्था करनी होगी. वहीं नई परीक्षा एजेंसी कौन होगी, इसका फैसला शासन स्तर पर किया जाएगा. विभाग दूसरी एजेंसी के जरिए परीक्षा कराने के साथ ही टीईटी और इससे जुड़ी दूसरी प्रक्रियाओं को लेकर उपलब्ध दूसरे ऑप्शन भी पर भी विचार कर रहा है.&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री के लौटने के बाद होगा फैसला&amp;nbsp;
डॉ. मोहन यादव इस समय दुबई में है और 9 सितंबर को भोपाल लौटेंगे. उनके लौटने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ चर्चा कर परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी को लेकर फैसला लिया जा सकता है. सरकार के सामने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए परीक्षा कराने का ऑप्शन भी है. हालांकि पीएससी ने पहले शिक्षकों की पात्रता या भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की है. वह मुख्य रूप से वरिष्ठ पदों के लिए परीक्षा कराता है. ऐसे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री की चर्चा के बाद होने की संभावना है.&amp;nbsp;
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12 अक्टूबर की परीक्षा पर भी संशय&amp;nbsp;
ईएसबी ने पहले टीईटी की परीक्षा 12 अक्टूबर से कराने की तैयारी की थी. लेकिन अब जब ऑफलाइन परीक्षा कराने के लिए दूसरी एजेंसी की तलाश की जा रही है, तो परीक्षा की तारीखों में बदलाव की संभावना बन गई है. नई एजेंसी तय होने के बाद उसकी परीक्षा व्यवस्था और उपलब्ध तारीख के अनुसार नई परीक्षा तिथि घोषित की जा सकती है. ऐसे में परीक्षा अक्टूबर के बजाय नवंबर या दिसंबर तक खिसक सकती है. हालांकि अभी इसे लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है. वहीं आवेदन की अंतिम तारीख फिलहाल 18 सितंबर तक बढ़ाई गई है. जिन शिक्षकों ने पहले ही आवेदन कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है. अब तक 12,000 से ज्यादा शिक्षकों के आवेदन करने की बात भी सामने आई है.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र बढ़ाने की मांग भी आई सामने&amp;nbsp;
ऑफलाइन परीक्षा को लेकर सिर्फ मोड ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्रों को लेकर भी शिक्षकों की मांग सामने आई. फिलहाल भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, उज्जैन और सीधी में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. सागर तथा चंबल-ग्वालियर क्षेत्र के जिलों को परीक्षा केंद्रों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा केंद्र जिला और ब्लॉक स्तर पर बनाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें परीक्षा देने के लिए दूर के शहरों में न जाना पड़े. नई परीक्षा एजेंसी तय होने के बाद केंद्रों की संख्या बढ़ाने और व्यवस्था में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>PM ने किया रेलवे यूनिवर्सिटी का जिक्र, जानिए यहां कैसे मिलता है एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वड़ोदरा में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान देश की इकलौती रेलवे यूनिवर्सिटी का विशेष रूप से जिक्र किया है. पीएम मोदी ने कहा कि वड़ोदरा अब देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन और आधुनिक विकास का एक बड़ा केंद्र बन चुका है. इस यूनिवर्सिटी को पहले नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट (NRTI) के नाम से जाना जाता था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसका विस्तार करते हुए इसे अब एक केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया है, जिसका नाम गति शक्ति विश्वविद्यालय है.
यह भारत का पहला और इकलौता ऐसा विश्वविद्यालय है जो पूरी तरह से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और रेलवे सेक्टर की पढ़ाई के लिए समर्पित है. पीएम मोदी के भाषण के बाद से ही देश भर के युवाओं और छात्रों के बीच इस यूनिवर्सिटी को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है. हर कोई जानना चाहता है कि इस खास यूनिवर्सिटी में कौन-कौन से कोर्स कराए जाते हैं और यहां एडमिशन पाने की क्या प्रक्रिया है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
कौन-कौन से कोर्स कराए जाते हैं?
गति शक्ति विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट, दोनों क्षेत्रों से जुड़े कोर्स कराए जाते हैं. यहां बीटेक, बीबीए, एमबीए, एमटेक और पीएचडी जैसे कई प्रोग्राम उपलब्ध हैं. बीटेक में सिविल इंजीनियरिंग जैसी शाखाएं पढ़ाई जाती हैं, वहीं एमटेक में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, रेलवे इंजीनियरिंग, ब्रिज एंड टनल इंजीनियरिंग और रोड्स एंड हाईवे इंजीनियरिंग जैसे कोर्स शामिल हैं. एमबीए के अंतर्गत लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन, मेट्रो रेल मैनेजमेंट, एविएशन एंड ऑपरेशंस मैनेजमेंट और डिजिटल मैरीटाइम जैसे विशेष कोर्स भी कराए जाते हैं.
बीटेक में एडमिशन के लिए क्या है योग्यता?
अगर कोई छात्र गति शक्ति विश्वविद्यालय से बीटेक करना चाहता है, तो उसे 12वीं कक्षा फिजिक्स और मैथ्स विषयों के साथ पास करनी होगी, साथ ही केमिस्ट्री, बायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी या टेक्निकल वोकेशनल विषयों में से कोई एक विषय भी होना जरूरी है. सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 12वीं में कम से कम 75 फीसदी अंक या टॉप 20 पर्सेंटाइल जरूरी है, जबकि एससी-एसटी छात्रों के लिए यह सीमा 65 फीसदी रखी गई है. इसके साथ ही छात्रों को JEE Mains परीक्षा भी पास करनी होती है.
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एडमिशन प्रोसेस कैसे होता है?
बीटेक में एडमिशन के लिए सबसे पहले छात्रों को JEE Mains परीक्षा देनी होती है. इस परीक्षा में मिली रैंक के आधार पर छात्रों को JoSAA या CSAB काउंसलिंग में हिस्सा लेना होता है. इसके लिए सबसे पहले JoSAA या CSAB पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है, फिर अपनी पसंद के तौर पर गति शक्ति विश्वविद्यालय को चुनना होता है. इसके बाद रैंक और कैटेगरी के आधार पर सीट अलॉट की जाती है. सीट मिलने के बाद छात्रों को अपने दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होते हैं और एडमिशन व ट्यूशन फीस जमा करनी होती है. इसके बाद छात्रों को फिजिकल वेरिफिकेशन और ओरिएंटेशन के लिए वडोदरा कैंपस में रिपोर्ट करना होता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बड़ी खबर&amp; वाराणसी में कल बंद रहेंगे स्कूल, मौसम के चलते लिया गया फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ वाराणसी में मौसम विभाग के भारी बारिश के अनुमान को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. बुधवार 9 सितंबर को जिले में कक्षा 1 से 5 तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे. वहीं कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई के समय में भी बदलाव किया गया है. इन कक्षाओं की पढ़ाई अब सुबह 9 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक होगी. इस संबंध में बीएसए भूपेंद्र सिंह और डीआईओएस भोलेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त आदेश जारी किया है. लगातार चौथी बार बारिश के चलते स्कूलों में छुट्टी की घोषणा हुई है. हालांकि इस बार छुट्टी कक्षा 1 से 5 तक ही सीमित रखी गई है.
जिले में लगातार तेज बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाया है. मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बारिश की चेतावनी के आधार पर बुधवार (9 सितंबर) को पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी स्कूलों में अवकाश का फरमान जारी किया गया है.
वहीं, बड़ी कक्षाओं के छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसे ध्यान में रखते हुए कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यालयों के संचालन समय में फेरबदल किया गया है. अब ये कक्षाएं सुबह 9:00 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक संचालित की जाएंगी.
संयुक्त आदेश जारी, सभी बोर्डों पर होगा लागू
यह दिशा-निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) भूपेंद्र सिंह और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) भोलेंद्र प्रताप सिंह की ओर से संयुक्त रूप से जारी किए गए हैं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि समय सारणी और अवकाश का यह नियम किसी एक बोर्ड तक सीमित नहीं है. यह आदेश जिले के अंतर्गत आने वाले सभी परिषदीय, सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी (प्राइवेट) स्कूलों के साथ-साथ सीबीएसई (CBSE) और आईसीएससी (ICSE) बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों पर पूरी तरह प्रभावी रहेगा.
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इस सत्र में चौथी बार लिया गया निर्णय
खराब मौसम और मूसलाधार बारिश की आशंका के चलते जिले में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का निर्णय इस सत्र में चौथी बार लेना पड़ा है. हालांकि, इससे पहले जब भी ऐसा फैसला लिया गया था, तब कक्षा 8 तक के बच्चों को राहत दी जाती थी. इस बार प्रशासनिक स्तर पर थोड़ा बदलाव करते हुए अवकाश का दायरा केवल कक्षा 1 से 5 तक ही सीमित रखा गया है.
समय में किया गया यह बदलाव केवल बुधवार के दिन के लिए ही लागू रहेगा. अभिभावकों और विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए ही घर से बाहर निकलें.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>राहत भरी खबर: यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी</title>
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        <description><![CDATA[ प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1,936 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है. आयोग के अनुसार भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है. इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे.
7 अक्टूबर तक जमा करना होगा आवेदन शुल्क
आयोग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है. अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय सभी जरूरी जानकारी सावधानी से भरने की सलाह दी गई है. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों को अपने फॉर्म में संशोधन का मौका भी दिया जाएगा. ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 11 अक्टूबर 2026 तय की गई है.
सह-शिक्षा और महिला महाविद्यालयों में होगी नियुक्ति
यह भर्ती प्रदेश के अशासकीय अनुदानित सह-शिक्षा महाविद्यालयों और महिला महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों को भरने के लिए की जा रही है. भर्ती के लिए निर्धारित योग्यता और पात्रता रखने वाले उम्मीदवार ही आवेदन कर सकेंगे. आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि आवेदन करने से पहले भर्ती का विस्तृत विज्ञापन और उसमें दी गई सभी शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें.
पहले OTR पूरा करना जरूरी
असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को सबसे पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन यानी OTR की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद ही वे भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन कर पाएंगे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापित पदों के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता पूरी करने वाले उम्मीदवार ही आवेदन करें. पात्रता से जुड़ी जानकारी को लेकर किसी तरह की गलती से बचने के लिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक निर्देश पुस्तिका देखने की सलाह दी गई है.
नवंबर में होगी भर्ती परीक्षा
आयोग की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए भर्ती परीक्षा की तारीख भी घोषित कर दी गई है. यह परीक्षा 19 और 20 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा से जुड़ी आगे की जानकारी, केंद्र, प्रवेश पत्र और अन्य जरूरी निर्देश आयोग की वेबसाइट पर समय-समय पर जारी किए जाएंगे.
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आयोग की वेबसाइट पर पूरा विवरण
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने भर्ती को लेकर जानकारी दी है. अभ्यर्थी आवेदन करने से पहले आयोग की वेबसाइट upessc.up.gov.in पर उपलब्ध विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका जरूर देख लें. आवेदन की तारीख, शुल्क, पात्रता और परीक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक सूचना को ही अंतिम आधार मानना चाहिए.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>बड़ी खबर&amp; यूपी टीईटी 2026 के सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण&amp;पत्र जारी</title>
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        <description><![CDATA[ प्राथमिक स्तर के 5,71,435 और उच्च प्राथमिक स्तर के 7,59,513 अभ्यर्थी हुए हैं सफल घोषित. सफल अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपना अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि दर्ज कर प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं.
यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. आयोग ने यूपी टीईटी 2026 में सफल घोषित किए गए अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र जारी कर दिए हैं. प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में सफल अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपना प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए अभ्यर्थियों को अपना अनुक्रमांक और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी. प्रमाण-पत्र जारी होने से सफल अभ्यर्थियों को इसे प्राप्त करने की सुविधा मिल गई है.
प्राथमिक स्तर पर 5,71,435 अभ्यर्थी सफल
UPTET-2026 के परिणाम में प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 01 से 05 तक की परीक्षा में कुल 7,13,648 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे. इनमें से 5,71,435 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है. यह संख्या कुल शामिल अभ्यर्थियों की 80.07 प्रतिशत है. आयोग की ओर से अब सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र भी जारी कर दिए गए हैं, जिन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत डाउनलोड किया जा सकता है.
उच्च प्राथमिक स्तर पर 7,59,513 सफल
इसी तरह उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 06 से 08 तक की परीक्षा में कुल 10,57,021 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे. इनमें से 7,59,513 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं. उच्च प्राथमिक स्तर पर सफल अभ्यर्थियों का प्रतिशत 71.85 रहा है. सफल अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के जरिए अनुक्रमांक और जन्मतिथि दर्ज कर अपना प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं.
पांच पालियों में हुई थी UPTET-2026 परीक्षा
UPTET-2026 की लिखित परीक्षा 02 और 03 जुलाई 2026 को दो-दो पालियों तथा 04 जुलाई 2026 को एक पाली में आयोजित की गई थी. इस तरह परीक्षा कुल पांच पालियों में हुई थी. परीक्षा प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केन्द्रों पर सकुशल सम्पन्न कराई गई थी. इनमें उच्च प्राथमिक स्तर की तीन पालियां और प्राथमिक स्तर की दो पालियां शामिल थीं.
26 अगस्त को घोषित हुआ था परीक्षा परिणाम
UPTET-2026 का परिणाम 26 अगस्त 2026 को घोषित किया गया था. अब सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए हैं. अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से इन्हें डाउनलोड कर सकते हैं. अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रमाण-पत्र जल्द ही डिजिलॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाएगा.
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आयोग अध्यक्ष ने दी सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं
यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने UPTET-2026 में सफल घोषित किए गए सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दी हैं. प्रमाण-पत्र जारी होने के साथ सफल अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया का यह महत्वपूर्ण चरण भी पूरा हो गया है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बड़ी, खबर-, यूपी, टीईटी, 2026, के, सफल, अभ्यर्थियों, के, प्रमाण-पत्र, जारी</media:keywords>
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        <title>ऑस्ट्रेलिया में ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स पर रोक, भारतीय छात्रों पर भी पड़ेगा असर </title>
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        <description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ग्रेजुएट डिप्लोमा ऑफ मैनेजमेंट कोर्स में विदेशी छात्रों के एडमिशन पर रोक लगाने का फैसला किया है. यह फैसला 5 अक्टूबर 2026 से लागू होगा. कोर्स का कोड बीएसबी 80120 है. इसका सीधा असर उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर पड़ेगा जो आगे की पढ़ाई के लिए इस कोर्स में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे हैं. इनमें भारतीय छात्र भी शामिल हो सकते हैं. सरकार ने यह कदम कोर्स के इस्तेमाल को लेकर सामने आई चिंताओं के बाद उठाया है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार कुछ छात्र इसका इस्तेमाल पढ़ाई के बजाय ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए एक कोर्स से दूसरे कोर्स में ट्रांसफर की सुविधा के लिए कर रहे थे. इसके अलावा इस कोर्स से जुड़े विजा रिजेक्शन और कोर्स पूरा नहीं करने की दर भी ज्यादा पाई गई.&amp;nbsp;
5 अक्टूबर से नए छात्रों का एडमिशन बंद&amp;nbsp;
ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट मिनिस्टर फॉर इंटरनेशनल एजुकेशन जूलियन हिल ने 4 सितंबर को इस फैसले की घोषणा की. सरकार के अनुसार यह पहली बार है जब नई कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल किसी एक खास कोर्स के लिए के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन को रोकने के लिए किया गया है. 5 अक्टूबर के बाद वीईटी संस्थान इस कोर्स में नई विदेशी छात्रों को एडमिशन नहीं दे सकेंगे, जिन छात्रों ने उसे तारीख से पहले कोर्स शुरू नहीं किया उनके संबंधित कन्फर्मेशन का एनरोलमेंट को भी रद्द किया जा सकता है.&amp;nbsp;
जो छात्र पहले से पढ़ रहे हैं उन्हें राहत&amp;nbsp;
इस फैसले का असर उन छात्रों पर नहीं पड़ेगा, जिन्होंने 5 अक्टूबर 2026 से पहले कोर्स शुरू कर दिया है. ऐसे छात्र अपने मौजूदा संस्थान में पढ़ाई जारी रख सकेंगे और कोर्स पूरा कर सकेंगे. सरकार के आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में 452 वीईटी प्रोवाइडर्स इस कोर्स अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए उपलब्ध करा रहे हैं. इसके अलावा इस कोर्स से जुड़े 41033 एक्टिव कन्फर्मेशन ऑफ एनरोलमेंट है, जिनमें 15,772 छात्र फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं. इन मौजूदा छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ने और ऑस्ट्रेलिया छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;
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क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार ने बताया कि कोर्स से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र सामने आए हैं, जिनके बारे में माना गया है कि वह पढ़ाई के उद्देश्य से इस कोर्स में एडमिशन नहीं ले रहे थे. इसके साथ ही वीजा आवेदन खारिज होने और कोर्स पूरा नहीं करने के मामले ने भी सरकार की चिंता बढ़ाई. ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ ग्रेजुएट डिप्लोमा ऑफ मैनेजमेंट तक सीमित है. इसका मतलब यह नहीं है कि सभी ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स पर रोक लगाई जा रही है.&amp;nbsp;
भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है असर&amp;nbsp;
ऑस्ट्रेलिया सरकार के इस फैसले का असर भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है. दरअसल हर साल हजारों छात्र भारत से पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते हैं, ऐसे में ऐसे छात्र जो अब इस कोर्स में एडमिशन लेने वाले थे उन पर भी इस फैसले का असर पड़ सकता है .&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ऑस्ट्रेलिया, में, ग्रेजुएट, डिप्लोमा, कोर्स, पर, रोक, भारतीय, छात्रों, पर, भी, पड़ेगा, असर </media:keywords>
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        <title>सिक्किम में JEE&amp;NEET की फ्री कोचिंग, सिर्फ इन छात्रों को ही मिलेगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ सिक्किम में जेईई और नीट की तैयारी करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शिक्षक दिवस के मौके पर सीएम-साथी पहल शुरू करने की घोषणा की है. इस योजना का मकसद ऐसे छात्रों को अच्छी कोचिंग देना है, जो इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं. लेकिन महंगे कॉलेज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है. ऐसे में सिक्किम के सीएम ने जेईई-नीट की फ्री कोचिंग का ऐलान किया है &amp;zwnj;
IIT कानपुर के साथ मिलकर शुरू होगी कोचिंग
सीएम-साथी योजना सिक्किम सरकार ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से शुरू की है. इसके तहत गरीब परिवारों से आने वाले जेईई और नीट उम्मीदवारों को 2 महीने का क्रैश कोर्स कराया जाएगा. योजना के प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ऐसे बहुत से छात्र हैं, जो जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन उचित कोचिंग की फीस उनके लिए बड़ी बाधा बन जाती है. सीएम-साथी के जरिए ऐसे छात्रों को इस समस्या से राहत देने की कोशिश की गई है.&amp;nbsp;
केंद्र की परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी आर्थिक मदद&amp;nbsp;
शिक्षा के अलावा सिक्किम सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए लॉन्च पैड योजना का भी ऐलान किया. इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों, दिव्यांगों और अनाथ युवाओं को केंद्र सरकार और पीएसयू की परीक्षाओं की आर्थिक की तैयारी के लिए एक बार अधिकतम 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इस सहायता का इस्तेमाल स्टडी मैटेरियल, यात्रा और तैयारी से जुड़े दूसरे खर्चों के लिए किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
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शिक्षा पर खर्च को बताया सबसे बड़ा निवेश&amp;nbsp;
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि उनकी सरकार शिक्षा को खर्च नहीं बल्कि सबसे जरूरी निवेश मानती है. 2025-26 में राज्य के कुल खर्च का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर लगाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि सिक्किम को शिक्षा हब बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि सिक्किम को 27 मई 2026 को फुली लिटरेट स्टेट घोषित किया गया था. अब सरकार का फोकस शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने से आगे बढ़कर उसकी गुणवत्ता और उत्कृष्टता पर है.&amp;nbsp;
2035 तक सिक्किम को शिक्षा हब बनाने का टारगेट&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का टारगेट है कि 2035 तक सिक्किम के छात्रों को अच्छे शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत ना पड़े. इसके बजाय देश के दूसरे हिस्सों से छात्र बेहतर, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा हासिल करने के लिए सिक्किम आए. सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों के नियमितीकरण और भर्ती के साथ कई दूसरी योजनाओं पर भी काम कर रही है. राज्य में सिक्किम लाइफ स्किल्स करिकुलम शुरू करने की तैयारी है, जिसमें छात्रों को सीपीआर फर्स्ट एड फायर सेफ्टी और आपदा से निपटने जैसी चीज सिखाई जाएगी.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सिक्किम, में, JEE-NEET, की, फ्री, कोचिंग, सिर्फ, इन, छात्रों, को, ही, मिलेगा, फायदा</media:keywords>
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        <title>SBI में बंपर भर्ती की तैयारी, 2027 में जुड़ेंगे 12000 नए कर्मचारी</title>
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        <description><![CDATA[ देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 12 हजार नए कर्मचारियों की भर्ती करने की तैयारी में है. एसबीआई चेयरमैन सीएस सेट्टी ने बताया कि इस साल बैंक का क्लेरिकल और ऑफिसर कैडर में करीब 11,000 से 12,000 नियुक्तियां कर सकता है. हालांकि इन नियुक्तियों की फाइनल संख्या रिटायरमेंट और बैंक की जरूरतों के आधार पर बदल भी सकती है. सीएस सेट्टी का कहना है कि बैंक को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक करीब 12,000 भर्तियां पूरी हो जाएगी. पिछले वित्त वर्ष में एसबीआई ने बड़े स्तर पर नियुक्तियां की थी, जिसमें करीब 1,500 स्पेशलिस्ट आईटी ऑफिसर्स भी शामिल थे. इस बार आईटी क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में भर्ती की जरूरत नहीं है.
SBI में 2.45 लाख से ज्यादा कर्मचारी&amp;nbsp;
मार्च 2026 तक एसबीआई के कर्मचारियों की संख्या 2.45 लाख से ज्यादा थी. बैंक के फाइनेंशियल ईयर 2026 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में एसबीआई ने कुल 25,633 लोगों की भर्ती की थी. इनमें 4,640 ऑफिसर्स 19,340 एसोसिएट्स और 1,653 कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी थे. इस साल भर्ती का फोकस मुख्य रूप से क्लेरिकल और ऑफिसर कैडर पर रहने की उम्मीद है. हालांकि कितने पद किस कैडर में होंगे, इसकी अंतिम जानकारी बैंक की ओर से शेयर नहीं की गई है.&amp;nbsp;
SBI के नेटवर्क से जुड़ेंगी 250 नई ब्रांच&amp;nbsp;
कर्मचारियों की भर्ती के साथ एसबीआई अपने ब्रांच नेटवर्क का भी विस्तार करेगा. बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 200 से 2500 नई शाखाएं नेट आधार पर जोड़ने की योजना बना रहा है. सीएस सेट्टी के अनुसार एसबीआई का नेटवर्क पहले से काफी बड़ा है, लेकिन अभी भी कहीं इलाकों में बैंक की मौजूदगी बढ़ाने की गुंजाइश है. नई कॉलोनियों के विकसित होने और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने वाले जिलों में बैंक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहता है. इसके साथ ही कुछ शाखों के युक्तिकरण पर भी काम किया जा रहा है.&amp;nbsp;
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NSE IPO में SBI बचेगा करीब 1% हिस्सेदारी&amp;nbsp;
एसबीआई चेयरमैन ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर भी जानकारी दी है. एसबीआई और उसकी सहायक कंपनी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड मिलकर एनएसई में अपनी करीब 1 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इसमें एसबीआई करीब 0.65 प्रतिशत और एसबीआई कैपिटल मार्केट करीब 0.35 प्रतिशत हिस्सेदारी भेज सकती है. हालांकि दूसरे शेयरधारकों के शामिल होने की स्थिति में यह हिस्सेदारी कम भी हो सकती है. फिलहाल एसबीआई के पास एनएसई में 3.23 प्रतिशत और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है. एनएसई को 30,000 करोड़ के प्रस्तावित आईपीओ के लिए नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है. यह आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की संभावना रखता है. इसकी तुलना हुंडई मोटर इंडिया के 27,858.75 करोड़ एलआईसी के 20,557.23 करोड़ पेटीएम के 18,300 करोड़ टाटा कैपिटल के 15,511.87 करोड़ और लोन कॉल इंडिया के 15,200 करोड़ के इश्यू से की गई है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, में, बंपर, भर्ती, की, तैयारी, 2027, में, जुड़ेंगे, 12000, नए, कर्मचारी</media:keywords>
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        <title>जम्मू&amp;कश्मीर बना पूर्ण साक्षर, 98.43 प्रतिशत पहुंची लिटरेसी रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जम्मू-कश्मीर-बना-पूर्ण-साक्षर-9843-प्रतिशत-पहुंची-लिटरेसी-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ जम्मू कश्मीर ने हाल ही में साक्षरता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. केंद्र सरकार के उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जम्मू कश्मीर को अब पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया है. यहां की साक्षरता दर बढ़कर 98.43 प्रतिशत हो गई है. जम्मू कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए इसे पूरे जम्मू कश्मीर के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है.
जम्मू कश्मीर की शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर पोस्ट शेयर करते हुए शिक्षकों, शिक्षा स्वयंसेवकों, अधिकारियों और उन सभी स्टूडेंट को क्रेडिट दिया है, जिन्होंने साक्षरता अभियान को अलग-अलग समुदायों तक पहुंचाने में योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि कश्मीर के पहाड़ी इलाकों से लेकर जम्मू के मैदानी क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं.
घर-घर सर्वे से चिन्हित किए गए लोग
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार 2023 से 2026 के बीच 7.58 लाख गैर साक्षर लोगों की पहचान की गई है. इसके लिए जम्मू कश्मीर में घर-घर सर्वे, सामुदायिक जागरूकता अभियान, लोगों को जोड़ने के प्रयास और दूसरी आउटरीच एक्टिविटी चलाई गई है. इस अभियान का उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचाना था, जो पहले किसी वजह से औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो गए थे और जिन्हें बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता की जरूरत थी.
5.53 लाख शिक्षार्थियों ने पास किया FLNAT
अधिकारियों के अनुसार 2023 से 2026 के बीच 5.84 लाख लोगों ने फाऊंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमैरिक असेसमेंट टेस्ट की तैयारी की. इनमें से 5.53 लाख शिक्षार्थी परीक्षा में सफल रहे. उल्लास के तहत शिक्षार्थियों को सीखने के लिए जरूरी सहायता दी गई और उन्हें FLNAT में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया. 2025-26 में शिक्षा विभाग और शिक्षार्थियों के प्रयासों के चलते FLNAT का आयोजन दो बार किया गया. इस दौरान 3,16,883 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की.
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उल्लास के जरिए वयस्क शिक्षा पर फोकस
जम्मू कश्मीर की इस उपलब्धि में उल्लास यानी अंडरस्टैंडिंग ऑफ लाइफ लोंग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी पहल की बड़ी भूमिका रही है. कार्यक्रम उन वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाने पर केंद्रित है, जो किसी कारण शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके. उल्लास नव भारत कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य हर गैर साक्षर व्यक्ति को बुनियादी साक्षरता हासिल करने का मौका देना है.
शिक्षा मंत्री बोली, यह अंत नहीं शुरुआत है
जम्मू कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि जम्मू कश्मीर का पूर्ण साक्षर होना शिक्षा की यात्रा का अंत नहीं है, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है. उन्होंने शिक्षा को शांति, प्रगति, सम्मान, समानता और समृद्धि से जोड़ते हुए कहा कि आगे भी साक्षरता अभियान से हासिल उपलब्धियां को बनाए रखना जरूरी होगा. उन्होंने इस उपलब्धि को लोगों की सामूहिक जीत बताया है और कहां है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक विरासत और उपहार है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जम्मू-कश्मीर, बना, पूर्ण, साक्षर, 98.43, प्रतिशत, पहुंची, लिटरेसी, रेट</media:keywords>
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        <title>क्या 11 सितंबर को रहेगी स्कूलों की छुट्टी, क्या ऑनलाइन होगी पढ़ाई?</title>
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        <description><![CDATA[ ब्रिक्स सम्मेलन के चलते दिल्ली सरकार ने 11 सितंबर 2026 को स्कूलों में छुट्टी घोषित की है. यह छुट्टी सिर्फ सरकारी स्कूलों में ही नहीं, बल्कि सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों पर भी लागू होगी. शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित स्कूलों और अपने अधीन आने वाले कार्यालय को 11 सितंबर को बंद रखने को कहा है. यह फैसला राजधानी में ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़े सुरक्षा, ट्रैफिक और दूसरे इंतजामों को देखते हुए लिया गया है.&amp;nbsp;
18वें ब्रिक्स समिट के चलते बंद रहेंगे स्कूल&amp;nbsp;
दिल्ली में 18वां ब्रिक्स लीडर्स समिट आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम से जुड़े इंतजामों के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और कई इलाकों में वाहनों की आवाजाही को कंट्रोल किया गया है. &amp;nbsp;इस वजह से 11 सितंबर को दिल्ली सरकार के ऑफिसेज के साथ शिक्षा निदेशालय के अधीन आने वाले स्कूलों में भी छुट्टी घोषित की गई है. शिक्षा निदेशालय के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल 11 सितंबर को बंद रहेंगे.&amp;nbsp;
क्या ऑनलाइन होगी पढ़ाई?&amp;nbsp;
11 सितंबर को स्कूल बंद रखने का आदेश तो जारी हो गया है, लेकिन आधिकारिक आदेशों में ऑनलाइन क्लास संचालित करने को लेकर कोई निर्देश नहीं दिया गया है. इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उस दिन ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाएगी या नहीं. छात्रों और पेरेंट्स को ऑनलाइन क्लास के संबंध में अपने स्कूल की ओर से जारी होने वाले अलग निर्देश का इंतजार करना होगा, जबकि 11 सितंबर को ऑनलाइन रूप से स्कूल बंद रहेंगे.&amp;nbsp;
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ब्रिक्स समिट के चलते ट्रैफिक पर भी असर&amp;nbsp;
दिल्ली सबमिट के दौरान दिल्ली की सड़कों पर भी ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है. ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं और 35 से ज्यादा सड़कों पर आवाजाही को कंट्रोल किया जा सकता है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मोटरकेड की आवाज को देखते हुए रूट डायवर्जेंट की तैयारी की है. प्रमुख चौराहों और सड़कों पर ट्रैफिक की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. इससे अधिकारियों को जाम की स्थिति पहचानने और जरूरत के अनुसार ट्रैफिक व्यवस्था बदलने में मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
12 और 13 सितंबर को भी स्कूल बंद&amp;nbsp;
11 सितंबर के बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार और रविवार पड़ रहा है. इसलिए सामान्य साप्ताहिक अवकाश भी रहेगा. हालांकि ब्रिक्स समिट से जुड़े ट्रैफिक और सुरक्षा प्रतिबंध इस दौरान भी कुछ इलाकों में लागू रह सकते हैं. वहीं 11 सितंबर को स्कूल की छुट्टी को लेकर स्थिति साफ है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>भगत सिंह की मार्कशीट वायरल, देखें किस सब्जेक्ट में कितने नंबर? </title>
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        <description><![CDATA[ महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की कक्षा 10वीं की मार्कशीट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. वायरल हो रही इस मार्कशीट में उनके स्कूल के दिनों के परीक्षा रिजल्ट और अलग-अलग विषय में मिले नंबर दर्ज हैं. 1923 की इस मार्कशीट के अनुसार, भगत सिंह ने मैट्रिकुलेशन एग्जामिनेशन में शानदार प्रदर्शन किया था और 950 में से 903 अंक हासिल कर फर्स्ट डिवीजन पास हुए थे. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि वायरल हो रही भगत सिंह की मार्कशीट में महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह को कौन से सब्जेक्ट में कितने नंबर मिले थे.&amp;nbsp;
सोशल मीडिया पर वायरल हुई भगत सिंह की मार्कशीट&amp;nbsp;
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक दोनों ही जगह भगत सिंह की यह मार्कशीट वायरल हो रही है. भगत सिंह की इस मार्कशीट में गवर्नमेंट हाई स्कूल लाहौर अनडिवाइडेड इंडिया लिखा हुआ है. इस मार्कशीट के अनुसार, यह मैट्रिकुलेशन परीक्षा 1923 की मार्कशीट है. इसमें स्टूडेंट के नाम वाले कॉलम में भगत सिंह का नाम दर्ज है, इसके अलावा उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह, रेजिडेंस लाहौर, एप्लीकेशन नंबर 246 और जन्म तारीख 28 सितंबर 1907 भी दर्ज है. यह मार्कशीट उनकी कक्षा 10वीं की मार्कशीट है.&amp;nbsp;
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किस विषय में कितने नंबर मिले थे?
वायरल मार्कशीट के अनुसार, भगत सिंह ने अलग-अलग विषयों में अच्छे अंक हासिल किए थे. उन्हें अंग्रेजी में 100 में से 83 अंक मिले थे, जबकि उर्दू में 100 में से 88 अंक मिले थे. वहीं पंजाबी में 100 में से 92, हिस्ट्री में 100 में से 95 अंक मिले थे. इसके अलावा ज्योग्राफी में 100 में से 90, मैथमेटिक्स में 100 में से 81 अंक, &amp;nbsp;साइंस में 100 में से 87, ऐसे राइटिंग में से 100 में से 93, फिजिकल ट्रेनिंग में 50 में से 46 और कंडक्ट एग्जाम में 50 में से 48 नंबर हासिल किए थे. &amp;zwnj;
टोटल 950 में से हासिल किए थे 903 अंक&amp;nbsp;
मार्कशीट में सभी सब्जेक्ट के अंक जोड़ने पर भगत सिंह के कुल 903 अंक दर्ज हैं. वहीं परीक्षा कुल 950 नंबर की थी. इस तरह उन्होंने करीब 95 प्रतिशत अंक हासिल करते हुए फर्स्ट डिवीजन से पास हुए थे. वहीं इस मार्कशीट की तारीख के अनुसार यह मार्कशीट 15 अप्रैल 1923 को जारी की गई थी. आपको बता दें कि भगत सिंह के 10वीं कक्षा के यह नंबर सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही मार्कशीट के अनुसार है. एबीपी न्यूज इस मार्कशीट की पुष्टि नहीं करता है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अब हिंदी मीडियम से करें बीटेक, MP में शुरू हुआ इंजीनियरिंग कोर्स</title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है. इंदौर के श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस SGSITS ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू कर दी है. यह मध्य प्रदेश में इस तरह की पहली पहल मानी जा रही है, जिससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो अंग्रेजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने में झिझकते थे.
क्यों लिया गया यह फैसला?
इंजीनियरिंग की पढ़ाई में ज्यादातर तकनीकी शब्द अंग्रेजी में होते हैं. इस वजह से कई छात्रों को शुरुआत में कॉन्सेप्ट समझने में दिक्कत होती है. भाषा की यह परेशानी कई बार पढ़ाई पर भी असर डालती है और कुछ छात्र तो बीच में ही कोर्स छोड़ने का फैसला कर लेते हैं. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू करने का फैसला किया.
छात्रों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति NEP 2020 की सोच के मुताबिक उठाया गया है. NEP में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा देने पर खास जोर दिया गया है, ताकि छात्र अपनी भाषा में पढ़कर विषयों को बेहतर तरीके से समझ सकें. इसी सोच के तहत ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन AICTE ने साल 2021-22 से ही हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा शुरू करने की पहल की थी.
पहले भी हो चुकी है शुरुआत
AICTE के मुताबिक साल 2021-22 में ही करीब 20 संस्थानों ने हिंदी, मराठी, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल जैसी छह भाषाओं में इंजीनियरिंग कोर्स शुरू किए थे, जिनमें उस समय करीब 255 छात्रों ने दाखिला लिया था. इसके अलावा AICTE ने इंजीनियरिंग की किताबों को 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद कराने का भी बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया है, ताकि छात्रों को अपनी भाषा में पढ़ाई की पूरी सामग्री मिल सके.
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अब सिविल इंजीनियरिंग से हुई शुरुआत
फिलहाल SGSITS में यह कोर्स सिविल इंजीनियरिंग शाखा में ही शुरू किया गया है. आने वाले समय में अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस जैसी अन्य शाखाओं में भी लागू किया जा सकता है. इससे मध्य प्रदेश के उन हजारों छात्रों को फायदा मिलेगा जो गांव-कस्बों से आते हैं और हिंदी माध्यम से ही पढ़ाई करते आए हैं.
कितनी सीटें और कितने छात्रों ने लिया दाखिला
इस खास बैच के लिए कॉलेज ने 30 सीटें तय की हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस कोर्स में करीब 20 छात्रों ने दाखिला ले लिया है. यानी हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग पढ़ने के इच्छुक छात्रों की संख्या अच्छी खासी रही, जिससे यह साफ होता है कि यह पहल छात्रों को पसंद आ रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>CTET परीक्षा की नई तारीख पर बड़ा अपडेट, जल्द जारी होगा रिवाइज्ड शेड्यूल</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE के स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए एक जरूरी अपडेट आया है. सीबीएसई जल्द ही केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा CTET सितंबर 2026 की संशोधित परीक्षा तिथि घोषित करने जा रहा है. परीक्षा की नई तारीखें बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जारी की जाएंगी.
संशोधित परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद, बोर्ड उम्मीदवारों के लिए एग्जाम सिटी स्लिप और एडमिट कार्ड भी जारी करेगा. एग्जाम सिटी स्लिप से उम्मीदवारों को यह पता चल सकेगा कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित होने वाली है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोबारा खुली थी Application Window
CTET परीक्षा के शेड्यूल में बदलाव की एक मुख्य वजह आवेदन प्रक्रिया का दोबारा शुरू होना है. सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद, सीबीएसई को CTET सितंबर 2026 की Application Window को फिर से खोलना पड़ा था. उम्मीदवार 25 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक इस परीक्षा के लिए दोबारा आवेदन कर सकते थे. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बोर्ड परीक्षा की 22nd edition के लिए नया शेड्यूल तैयार करने में जुटा है, जिसे बहुत जल्द सार्वजनिक कर दिया जाएगा.
कैसा होगा परीक्षा का पैटर्न?
CTET 2026 परीक्षा ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाएगी. परीक्षा को हल करने के लिए उम्मीदवारों को कुल 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा. CTET के प्रत्येक पेपर में कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जो कुल 150 अंकों के होंगे. &amp;nbsp;साथ ही पेपर 1 में पांच और पेपर 2 में चार अलग-अलग सेक्शन शामिल होंगे. परीक्षा को पास करने के लिए उम्मीदवारों को न्यूनतम 90 अंक हासिल करना अनिवार्य है.
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पेपर 1 और पेपर 2 में क्या अंतर है?
पेपर 1- यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए होती है जो कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के प्राथमिक शिक्षक बनना चाहते हैं.
पेपर 2- यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जाती है जो कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के उच्च प्राथमिक शिक्षक बनना चाहते हैं.&amp;nbsp;
यह परीक्षा उन सभी लोगों के लिए आवश्यक पात्रता परीक्षा Eligibility Test है जो केंद्र सरकार के स्कूलों और विभिन्न राज्यों द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों में शिक्षक की नौकरी पाना चाहते हैं.
सीबीएसई ने साफ किया है कि सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए CTET सर्टिफिकेट की वैधता अब आजीवन रहेगी. यानी एक बार परीक्षा पास करने के बाद यह प्रमाणपत्र हमेशा के लिए मान्य होगा. उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उसे डाउनलोड करके परीक्षा केंद्र पर ले जाना होगा, क्योंकि बिना इसके परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>खुशखबरी: KVS&amp;NVS शिक्षक भर्ती टियर&amp;2 का रिजल्ट जारी, ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने केंद्रीय विद्यालय संगठन KVS और नवोदय विद्यालय समिति NVS में शिक्षक भर्ती को लेकर एक बड़ा अपडेट जारी किया है. CBSE ने पोस्ट ग्रेजुएट टीचर हिंदी और ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर हिंदी के पदों के लिए आयोजित हुई टियर-2 भर्ती परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है. यह परीक्षा परिणाम 5 सितंबर 2026 की शाम को आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया है. जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब बोर्ड के आधिकारिक भर्ती पोर्टल पर जाकर अपना शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस देख सकते हैं.&amp;nbsp;
पोर्टल पर चुन सकेंगे अपनी पसंद
CBSE द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिन पदों के लिए उम्मीदवारों से पोस्ट प्रेफरेंस मांगी गई है, वे इस विकल्प को पोर्टल के माध्यम से सबमिट कर सकते हैं. इसके लिए बोर्ड ने एक निश्चित समयसीमा तय की है, जिसके भीतर ही उम्मीदवारों को अपनी पसंद दर्ज करनी होगी. बोर्ड ने उम्मीदवारों को यह भी सलाह दी है कि वे अपनी प्राथमिकता सबमिट करने से पहले अपने लॉगिन अकाउंट में दिखाए जा रहे निर्देशों को बहुत ध्यान से पढ़ लें ताकि सबमिशन के दौरान कोई गलती न हो.
इसके बाद क्या होगी आगे की प्रक्रिया?
टियर-2 परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद अब आगे की चयन प्रक्रिया अलग-अलग पदों के आधार पर तय की जाएगी.
Interview वाले पदों के लिए- जिन शिक्षण पदों के चयन में Interview शामिल है, उनके लिए यह टियर-2 का रिजल्ट केवल शॉर्टलिस्टिंग का काम करेगा. यानी जिन उम्मीदवारों का नाम इस लिस्ट में आया है, उन्हें अब अगले चरण में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इन उम्मीदवारों की फाइनल मार्कशीट अभी जारी नहीं की जाएगी. Interview की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने और अंतिम परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर उनकी मार्कशीट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी.&amp;nbsp;
बिना Interview वाले पदों के लिए- जिन पदों के लिए चयन प्रक्रिया में कोई Interview नहीं होना है, उनके टियर-2 के Marks उम्मीदवारों के लॉगिन अकाउंट में रिजल्ट के साथ ही तुरंत उपलब्ध करा दिए गए हैं.
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एडमिट कार्ड और Interview शेड्यूल
जिन उम्मीदवारों के पदों के लिए आगे Interview या स्किल टेस्ट आयोजित किया जाना है, वे इससे जुड़ा पूरा शेड्यूल और अपना कॉल लेटर अपने कैंडिडेट लॉगिन के माध्यम से ही एक्सेस कर पाएंगे. बोर्ड जैसे ही Interview की तारीखें फाइनल कर लेगा, वैसे ही कैंडिडेट लॉगिन में कॉल लेटर डाउनलोड करने का लिंक एक्टिव कर दिया जाएगा.
अन्य पदों के परिणाम भी जल्द होंगे जारी
आपको बता दें कि पीजीटी और टीजीटी हिंदी शिक्षकों के इस रिजल्ट से पहले, सीबीएसई ने 3 सितंबर 2026 को केवीएस और एनवीएस में प्रिंसिपल पद के लिए भी टियर-2 का रिजल्ट जारी किया था. बोर्ड का कहना है कि बाकी बचे हुए अन्य पदों के परीक्षा परिणाम भी अंतिम चरण में हैं और उन्हें भी बहुत जल्द अलग-अलग चरणों में घोषित किया जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 06:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>NTA की तर्ज पर राजस्थान में बनेगी STA, कई बड़ी परीक्षाएं कराएगी एजेंसी</title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान में प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. उच्च शिक्षा विभाग में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तर्ज पर स्टेटस टेस्टिंग एजेंसी (STA) बनाने का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. विभाग की टीम ने NTA का दौरा कर परीक्षा संचालन व्यवस्था का अध्ययन किया और संबंधित विभागों से सुझाव लेने के बाद एसटीए का प्रारूप तैयार किया है. प्रस्तावित एजेंसी के जरिए राजस्थान में यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस एग्जाम से लेकर PTET, REET, SET और दूसरी परीक्षा कराने की तैयारी है. यह परीक्षाएं CBT मोड में कराई जाएगी और इसके लिए जिला मुख्यालय पर परीक्षा केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव है.&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी एंट्रेंस से PTET तक होगी परीक्षाएं&amp;nbsp;
STA के ड्राफ्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी के यूजी-पीजी एंट्रेंस टेस्ट, स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट, रीट, पीटीईटी और प्री पीएचडी परीक्षा को इसके तहत कराया जा सकता है. इसके अलावा बीएसटीसी, एग्रीकल्चर जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट, फार्मेसी एंट्रेंस टेस्ट (यूजी), टेक्निकल व पॉलिटेक्निक कॉलेज के एंट्रेंस एग्जाम भी प्रस्तावित एजेंसी के जरिए कराए जाने हैं. राजस्थान में हर साल करीब 18 लाख विद्यार्थी यूनिवर्सिटी और अलग-अलग प्रवेश एवं पात्रता परीक्षाओं में शामिल होते हैं. अभी इनमें से कई परीक्षा अलग-अलग यूनिवर्सिटी और संस्थाओं की ओर से कराई जाती है.&amp;nbsp;
CBT मोड में होगी परीक्षा&amp;nbsp;
नई व्यवस्था के तहत परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित करने की तैयारी है. इसके लिए प्रदेश के जिला मुख्यालय पर परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे. इससे अलग-अलग परीक्षाओं की आयोजन की प्रक्रियाओं को एक समान तरीके से संचालित किया जाए सकेगा. एक एजेंसी के जरिए परीक्षा करने से आयोजन और मूल्यांकन की प्रक्रिया व्यवस्थित होने के साथ परिणाम भी समय पर जारी करने में मदद मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है.&amp;nbsp;
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पेपर लीक पर भी लग सकता है अंकुश&amp;nbsp;
एसटीए के गठन के पीछे परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का उद्देश्य भी बताया जा रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार पीटीईटी और D.EI.Ed जैसी परीक्षाएं जब अलग-अलग यूनिवर्सिटी के बजाय एक एजेंसी कराएगी, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. पूर्व वीसी, वीएमओयू &amp;nbsp;प्रो. कैलाश सोढ़ानी ने कहा कि एजेंसी की ओर से प्रवेश परीक्षाएं कराने से पेपर लीक पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही परीक्षाएं समय पर होगी और जल्द रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे.&amp;nbsp;
अभी मंजूरी का है इंतजार
उच्च शिक्षा विभाग राजस्थान की टीम ने एनटीए की परीक्षा संचालन व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए उसका दौरा किया था. इसके बाद संबंधित विभागों से सुझाव लेकर एसटीए का ड्राफ्ट तैयार किया गया. उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने भी ड्राफ्ट तैयार होने की पुष्टि की है. फिलहाल एसटीए का प्रस्ताव ड्राफ्ट स्तर पर है. सरकार की ओर से अंतिम निर्णय और नियम जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन सी परीक्षाएं आधिकारिक तौर पर एसटीए के तहत कराई जाएगी और यह नई व्यवस्था कब से लागू होगी.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 14:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सेना में जाने का जुनून ऐसा, लाखों का पैकेज छोड़ स्पर्श छेत्री ने चुनी वर्दी</title>
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        <description><![CDATA[ सेना में जाने का जुनून ऐसा, लाखों का पैकेज छोड़ स्पर्श छेत्री ने चुनी वर्दी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 14:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>यूके में पढ़ाई होगी महंगी? स्टूडेंट वीजा के लिए बढ़ी फंड की डिमांड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूके-में-पढ़ाई-होगी-महंगी-स्टूडेंट-वीजा-के-लिए-बढ़ी-फंड-की-डिमांड</link>
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        <description><![CDATA[ यूके जाकर पढ़ाई करने की तैयारी करने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक जरूरी बदलाव से जुड़ा अपडेट आया है. दरअसल 30 नवंबर 2026 से यूके के स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा रकम का इंतजाम दिखाना होगा. यूके होम ऑफिस में 3 सितंबर 2026 को इमीग्रेशन रूल में बदलाव किए हैं, जिसके तहत छात्रों के लिए जरूरी मेंटेनेंस फंड बढ़ाए जाएंगे.
इस बदलाव का असर उन छात्रों पर भी पड़ेगा, जो यूके में पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन करेंगे. हालांकि यह रकम छात्रों को यूके सरकार को जमा नहीं करनी होगी, उन्हें यह साबित करना होगा कि पढ़ाई के दौरान अपने रहने और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसा उपलब्ध है. यह राशि ट्यूशन फीस से अलग होगी.&amp;nbsp;
लंदन में पढ़ाई के लिए कितनी रकम दिखानी होगी?&amp;nbsp;
नए नियम लागू होने के बाद लंदन में पढ़ाई करने वाले छात्रों को हर महीने 1,570 ब्रिटिश पाउंड यानी करीब 2.01 लाख रुपये का मेंटेनेंस फंड दिखाना होगा. अभी यह रकम 1,529 ब्रिटिश पाउंड यानी करीब 1.95 लाख रुपये है. वहीं छात्रों को अधिकतम 9 महीने की रहने का खर्च दिखाना होता है. ऐसे में लंदन के लिए अधिकतम राशि 14,130 ब्रिटिश डॉलर है, जो भारतीय रुपये में 18.06 लाख रुपये के बराबर हो जाएगी. अभी 9 महीने के लिए यह रकम 13,761 ब्रिटिश पाउंड है.
लंदन के बाहर पढ़ाई करने वालों के लिए भी बढ़ी रकम&amp;nbsp;
यूके के लंदन के बाहर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी मेंटेनेंस रिक्वायरमेंट बढ़ाई गई है. अभी हर महीने 1,171 ब्रिटिश पाउंड की राशि दिखानी होती है, जो 30 नवंबर से बढ़कर 1,203 ब्रिटिश पाउंड हो जाएगी. 9 महीने के हिसाब से अधिकतम रकम 10,827 ब्रिटिश पाउंड होगी. मौजूदा नियमों में यह राशि 10,539 ब्रिटिश पाउंड है. यानी 9 महीने के लिए 288 ब्रिटिश पाउंड की बढ़ोतरी होगी.&amp;nbsp;
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ट्यूशन फीस से अलग होगा यह फंड&amp;nbsp;
स्टूडेंट वीजा के तहत मेंटेनेंस फंड का उद्देश्य यह दिखाना है कि छात्र यूके में रहते हुए अपना खर्च उठा सकता है. यह रकम ट्यूशन फीस, वीजा फीस और इमीग्रेशन हेल्थ चार्ट से अलग होगी. छात्रों को आमतौर पर अपने कोर्स की अवधि के हिसाब से रहने का खर्च दिखाना होता है, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 9 महीने है. अगर कोई कोर्स 9 महीने से कम का है, तो संबंधित अवधि के लिए रकम दिखानी होगी. कुछ मामलों में कंफर्मेशन और एक्सेप्टेंस फॉर स्टडीज में बकाया ट्यूशन फीस के लिए भी राशि दिखानी पड़ सकती है.&amp;nbsp;
30 नवंबर की तारीख है जरूरी&amp;nbsp;
नए और पुराने नियमों के बीच तारीख का अंतर जरूरी है. 30 नवंबर 2026 को पहले जमा किए गए आवेदन 29 नवंबर को लागू इमीग्रेशन रूल के तहत देखे जाएंगे. वहीं 30 नवंबर या उसके बाद किए गए आवेदन पर नए मेंटेनेंस रिक्वायरमेंट लागू होगी. यूके होम ऑफिस के अनुसार यह बढ़ोतरी 2026-27 के लिए यूके के घरेलू छात्रों को उपलब्ध मेंटेनेंस लोन के स्तर के अनुरूप की गई है. इस राशि की सालाना समीक्षा डिपार्टमेंट फॉर एजुकेशन करता है. होम ऑफिस ने कहा कि यह वार्षिक बढ़ोतरी पहले ही तय किए गए उन उपायों का हिस्सा थी, जिनका उद्देश्य स्टूडेंट रूट के दुरुपयोग से निपटना है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 14:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>जानिए 125 साल पुराने बिहार के उस स्कूल के बारे में, जहां से पढ़े हैं कई MP&amp;MLAs</title>
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        <description><![CDATA[ जानिए 125 साल पुराने बिहार के उस स्कूल के बारे में, जहां से पढ़े हैं कई MP-MLAs ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 14:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>बिहार में MBBS की 100 सीटें बढ़ीं, इन 2 मेडिकल कॉलेजों को मिली मंजूरी</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में मेडिकल की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. राज्य में MBBS की 100 नई सीटें जुड़ने जा रही हैं. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने बिहार के दो नए मेडिकल कॉलेजों को MBBS कोर्स शुरू करने की मंजूरी दी है. इन दोनों कॉलेजों में फिलहाल 50-50 सीटों पर एडमिशन&amp;nbsp; दिया जाएगा. इससे बिहार में मेडिकल की पढ़ाई के लिए छात्रों के पास पहले के मुकाबले ज्यादा विकल्प होंगे. खासकर छपरा और समस्तीपुर के आसपास के छात्रों को इसका फायदा मिल सकता है.
छपरा और समस्तीपुर में खुलेगा MBBS का रास्ता
NMC ने सरकारी मेडिकल कॉलेज, छपरा और श्री राम जानकी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, समस्तीपुर को MBBS की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी है. दोनों संस्थानों में शुरुआती तौर पर 50-50 सीटें रखी गई हैं. यानी दोनों कॉलेज मिलकर इस सत्र में कुल 100 छात्रों को MBBS में दाखिला दे सकेंगे. नए कॉलेजों के शुरू होने से बिहार में मेडिकल शिक्षा का दायरा और बढ़ेगा.
&amp;nbsp;2026-27 सत्र से मिलेगा दाखिला
इन दोनों कॉलेजों में 2026-27 शैक्षणिक सत्र से MBBS की पढ़ाई शुरू करने की योजना है. मेडिकल में दाखिला लेने वाले छात्रों को इन सीटों का फायदा NEET UG के बाद होने वाली काउंसलिंग में मिलेगा. हालांकि किस कॉलेज में कितनी सीटें उपलब्ध होंगी और काउंसलिंग का पूरा प्रोसेस क्या रहेगा, इसकी जानकारी संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया के दौरान सामने आएगी.
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&amp;nbsp;पहले 100 सीटों की मांगी गई थी अनुमति
दोनों मेडिकल कॉलेजों की ओर से 100-100 MBBS सीटों के लिए अनुमति मांगी गई थी. फिलहाल NMC ने दोनों को 50-50 सीटों के साथ शुरुआत करने की मंजूरी दी है. इसका मतलब है कि आगे कॉलेजों में सुविधाएं और जरूरी मानक पूरे होने पर सीटों की संख्या बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है. अभी छात्रों के लिए सबसे अहम बात यही है कि दोनों जगह MBBS की 50-50 सीटें उपलब्ध होंगी.
छात्रों को क्या फायदा होगा?
मेडिकल की सीट बढ़ने का सीधा फायदा उन छात्रों को मिल सकता है जो NEET UG के जरिए MBBS में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बिहार के छात्रों को अब राज्य में ही मेडिकल कॉलेजों के ज्यादा विकल्प मिलेंगे. इसके अलावा नए कॉलेजों में पढ़ाई और अस्पताल की सुविधाएं विकसित होने से आसपास के क्षेत्रों में इलाज की सुविधा भी बेहतर हो सकती है. इससे मेडिकल शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा.
बिहार में मेडिकल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने से सिर्फ 100 छात्रों को MBBS पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में इन संस्थानों का विस्तार भी हो सकता है. मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र आगे चलकर डॉक्टर बनकर स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनेंगे. ऐसे में बिहार में नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत राज्य की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है. फिलहाल छपरा और समस्तीपुर में 100 नई MBBS सीटों की मंजूरी इस दिशा में एक बड़ा अपडेट है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 14:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple के नए CEO को कितनी मिल रही सैलरी, टॉप&amp;5 सीईओ से कितनी कम?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple में लंबे समय से टिम कुक की जगह लेने की चर्चा चल रही थी, और अब कंपनी ने आधिकारिक तौर पर अपने नए सीईओ का ऐलान कर दिया है. जॉन टर्नस ने टिम कुक की जगह कंपनी की कमान संभाल ली है. टिम कुक अब कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में आ गए हैं. इसके साथ ही एप्पल ने अमेरिकी बाजार नियामक SEC के पास दाखिल फाइलिंग में दोनों के नए वेतन पैकेज की जानकारी भी सार्वजनिक कर दी है.
नए CEO जॉन टर्नस की सैलरी
जॉन टर्नस को कुल मिलाकर करीब 58 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 551 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज दिया गया है. इसमें उनकी बेसिक सैलरी 3 मिलियन डॉलर सालाना रखी गई है. इसके अलावा उन्हें 2026 के बचे हुए महीनों के लिए 2.5 मिलियन डॉलर का स्टॉक अवॉर्ड मिलेगा, क्योंकि वे साल के बीच में सीईओ बने हैं.
वित्त वर्ष 2027 के लिए उनका इक्विटी अवॉर्ड 55 मिलियन डॉलर के लक्ष्य पर तय किया गया है. इस इक्विटी का 75 फीसदी हिस्सा कंपनी के प्रदर्शन से जुड़ा है, यानी यह इस बात पर निर्भर करेगा कि एप्पल के शेयर एस एंड पी 500 की दूसरी बड़ी कंपनियों की तुलना में कैसा प्रदर्शन करते हैं. बाकी 25 फीसदी हिस्सा अगले चार साल में हर छह महीने में बराबर किस्तों में मिलेगा.
पूर्व बॉस टिम कुक की अब कितनी है सैलरी?
वहीं टिम कुक, जो अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बन गए हैं, उन्हें 2 मिलियन डॉलर सालाना सैलरी के साथ 45 मिलियन डॉलर का इक्विटी अवॉर्ड मिलेगा. नई भूमिका में टिम कुक का ज्यादातर समय दुनियाभर की सरकारों और नीति-निर्माताओं के साथ एप्पल के रिश्तों को संभालने में जाएगा. इससे पहले वित्त वर्ष 2025 में सीईओ के तौर पर टिम कुक का कुल वेतन पैकेज करीब 74.3 मिलियन डॉलर था.
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दुनिया के टॉप-5 सीईओ से कितनी कम है टर्नस की सैलरी?
भले ही टर्नस एप्पल जैसी दिग्गज कंपनी को संभाल रहे हैं, लेकिन जब बात दुनिया के सबसे महंगे सीईओ से तुलना की आती है, तो उनका पैकेज काफी पीछे रह जाता है. टेक और ऑटो जगत के टॉप-5 सीईओ के सामने एप्पल के नए बॉस की सैलरी काफी कम दिखती है.
एलोन मस्क (Tesla)- टेस्ला के मालिक और सीईओ एलोन मस्क का पे-पैकेज दुनिया में सबसे बड़ा है. उनका 56 बिलियन डॉलर करीब 4.7 लाख करोड़ रुपये का स्टॉक पैकेज चर्चाओं में रहा है.
सुंदर पिचाई (Google)- गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई का सालाना पैकेज अक्सर 200 मिलियन डॉलर करीब 1,600 से 1,800 करोड़ रुपये के पार चला जाता है. सुंदर पिचाई की तुलना में टर्नस की सैलरी करीब तीन से चार गुना कम है.
सत्या नडेला (Microsoft)- माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला का सालाना पैकेज 50 से 70 मिलियन डॉलर के बीच रहता है, लेकिन कुछ खास वर्षों में बोनस मिलाकर यह टर्नस के मुकाबले काफी ज्यादा हो जाता है.&amp;nbsp;
सफरा कैट्स (Oracle) और निकेश अरोड़ा (Palo Alto Networks)- दुनिया के सबसे अमीर सीईओ की सूची में शामिल इन दिग्गजों का कुल सालाना पैकेज शेयर और इंसेंटिव को मिलाकर आसानी से 100 मिलियन डॉलर करीब 840 करोड़ रुपये से ऊपर निकल जाता है, जो टर्नस के 58 मिलियन डॉलर से लगभग दोगुना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कमर्शियल पायलट या फाइटर पायलट... किसकी सैलरी ज्यादा, जानें कमाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कमर्शियल-पायलट-या-फाइटर-पायलट-किसकी-सैलरी-ज्यादा-जानें-कमाई</link>
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        <description><![CDATA[ 2019 में पाकिस्तान के एफ 16 लड़ाकू विमान को मार गिराने के बाद पूरी दुनिया में चर्चा में आए भारतीय वायु सेना के पूर्व फाइटर पायलट अभिनंदन वर्धमान अब अपने करियर की नई पारी शुरू कर चुके हैं. 22 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवा देने वाले पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र से सम्मानित अभिनंदन ने 31 मार्च 2026 को समय से पहले रिटायरमेंट लिया और अब गोवा की क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 के कमर्शियल पायलट के तौर पर जुड़ गए हैं.
अगस्त 2026 में FLY91 से जुड़ने के बाद अभिनंदन फिलहाल कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं. फाइटर जेट के कॉकपिट से एयरलाइंस के कॉकपिट तक का यह बदलाव उनके करियर का एक बड़ा मोड़ रहा है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कमर्शियल पायलट या फाइटर पायलट किसकी सैलरी ज्यादा होती है.&amp;nbsp;
कैसे तय होती है एयरफोर्स पायलट की सैलरी?
एयरफोर्स पायलट की सैलरी एक्सपीरियंस और जिम्मेदारी के आधार पर तय होती है. इसमें अलग-अलग भत्ते भी शामिल होते हैं. वहीं करियर की शुरुआत में सैलरी इसमें कम होती है, लेकिन एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ इसमें सैलरी में लगातार बढ़ोतरी होती रहती है.&amp;nbsp;
IAF में ग्रुप कैप्टन की कितनी होती है सैलरी?&amp;nbsp;
भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन का एक वरिष्ठ अधिकारी का पद होता है. इस पद पर अधिकारियों को हर महीने करीब 1,30,600 रुपये से 2,15,900 तक सैलरी मिलती है. हालांकि, एयरफोर्स अधिकारी की कमाई केवल बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं होती. पद, एक्सपीरियंस और जिम्मेदारियों के आधार पर अलग-अलग भत्ते भी इसमें मिलते हैं. इनमें महंगाई भत्ता, मकान या HRA ट्रांसपोर्ट और दूसरे भत्ते शामिल हैं. इसके अलावा मेडिकल सुविधा पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े दूसरे लाभ भी इसमें मिलते हैं.&amp;nbsp;
कैसी होती है कमर्शियल पायलट की सैलरी?&amp;nbsp;
वहीं, एयरफोर्स के विपरीत कमर्शियल पायलट की सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस एयरलाइन में काम कर रहा है. इसके अलावा उसने कितने फ्लाइंग ऑवर पूरे कर लिए हैं और उसका पद क्या है. इन चीजों के आधार पर कमर्शियल पायलट की सैलरी अलग-अलग होती है.
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कमर्शियल पायलट की शुरुआती सैलरी&amp;nbsp;
कमर्शियल एविएशन में पायलट की कमाई उसके पद और एक्सपीरियंस के अनुसार बढ़ती जाती है. एयरलाइन में शामिल होने के बाद पायलट को शुरुआत में ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. इस दौरान आमतौर पर 63,000 से 65,000 प्रतिमाह तक सैलरी मिलती है. ट्रेनिंग के बाद जब पायलट जूनियर फर्स्ट ऑफिसर के तौर पर काम शुरू करता है, तो उसकी महीने की सैलरी 1 लाख से डेढ़ लाख रुपये होती है. वहीं यह सैलरी अलग-अलग एयरलाइन के हिसाब से कम या ज्यादा भी हो सकती है. वहीं प्रमोशन के साथ ही कमर्शियल पायलट की सैलरी में भी बढ़ोतरी होती है.&amp;nbsp;
कैप्टन बनने के बाद लाखों में पहुंचती है सैलरी&amp;nbsp;
कमर्शियल पायलट के करियर में कैप्टन का पद महत्वपूर्ण माना जाता है. कैप्टन के पास विमान के साथ यात्रियों और पूरी उड़ान की जिम्मेदारी होती है. भारत में कई कैप्टन की महीने की सैलरी करीब 6 लाख से 12 लाख रुपये से भी ज्यादा होती है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टेक्नोलॉजी के दौर में बिना AI और गैजेट्स के पढ़ाई, University of Chicago ने बदले नियम</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में जब पढ़ाई से लेकर असाइनमेंट और रिसर्च तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो ने इससे अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है. यूनिवर्सिटी के सोशल साइंस के छात्रों के लिए अब क्लासरूम का माहौल बहुत अलग होगा. 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से सोशल साइंस कोर की क्लासेस को बड़े स्तर पर एनालॉग तरीके से चलाया जाएगा.
यानी छात्रों को क्लास के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूसरे पर्सनल गैजेट्स से दूरी रखनी होगी. इस व्यवस्था में पढ़ाई के लिए डिजिटल स्क्रीन की जगह मुख्य रूप से कागज पर उपलब्ध टेक्स्ट और आमने-सामने की बातचीत पर जोर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
सोशल साइंस की कक्षा में नहीं चलेगा एआई&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के सोशल साइंस कॉलेज डिवीजन की ओर से जारी नई गाइडलाइन के अनुसार सोशल साइंस कोर के छात्रों को आमतौर पर क्लास में व्यक्तिगत डिवाइस का इस्तेमाल नहीं करना होगा. इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन और वियरेबल डिवाइस भी शामिल है. बताया जा रहा है कि इन बदलावों से छात्रा कागज पर उपलब्ध टेक्स्ट के साथ पढ़ाई करेंगे और बिना किसी डिवाइस के क्लास रूम के डिस्कशन में हिस्सा लेंगे. वहीं असाइनमेंट पूरा करने में भी छात्रों को एआई की सहायता नहीं लेनी होगी.&amp;nbsp;
पढ़ाई में एनालॉग मॉडल पर जोर&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी की नई व्यवस्था का मकसद टेक्नोलॉजी को क्लास से बाहर करना नहीं है. सोशल साइंस कोर में चर्चा आधारित पढ़ाई होती है और यहां आमने-सामने संवाद को जरूरी माना जाता है. इस वजह से इन कोर्सेज को एआई और गैजेट्स से मुक्त वातावरण में पढ़ाने की दिशा में कदम उठाया गया है. एसएससीसीडी के अनुसार फैकल्टी के बीच इस बात पर मजबूत सहमति बनी है कि सोशल साइंस कोर को एआई के बिना पढ़ाया जाना बेहतर होगा.&amp;nbsp;
शिक्षकों के लिए एआई ग्रेडिंग पर रोक
नई नीति केवल छात्रों तक सीमित नहीं है. शिक्षकों के लिए भी एआई के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इंस्ट्रक्टर को छात्रों की ग्रेडिंग के लिए एआई का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा सोशल साइंस कोर्स के सिलेबस, एक्सपर्ट्स की ओर से तैयार कराए जाएंगे. जिसका मतलब है कि कोर्स में मानवीय एक्सपर्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी. &amp;nbsp;
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टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की कुछ छूट भी मिलेगी&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो ने टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई. कुछ विशेष अकेडमिक की जरूरतों के लिए शिक्षक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की अनुमति मांग सकते हैं. डेटा सेट की जांच कोड में आ रही समस्याओं को दूर करने, टेक्स्ट में बदलाव करने या लाइब्रेरी संसाधनों तक पहुंचने जैसे खास एकेडमी कामों के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की नौकरी की जा सकती है. इस तरह छात्रों को दिव्यांगता से जुड़ी सुविधाओं के तहत डिवाइस की जरूरत है, उन्हें भी इससे छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
क्या है सोशल साइंस कोर?
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो का सोशल साइंस कोर उसके अंडर ग्रेजुएट जनरल एजुकेशन प्रोग्राम का हिस्सा है. छात्रों को अपने कोर रिक्वायरमेंट के तहत आमतौर पर सोशल साइंस की तीन कोर्स की एक सीक्वेंस पूरी करनी होती है. इन कक्षाओं को नए एनालॉग मॉडल के तहत पढ़ाने की दिशा में यूनिवर्सिटी आगे बढ़ रही है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>MCD स्कूलों में शिक्षा और खेल का नया मॉडल: 24 स्कूल बनेंगे ‘निगमश्री’</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए अब स्कूलों के साथ-साथ पैरेंट्स की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. नगर निगम की तरफ से सामने आई जानकारी के अनुसार तीन नई पहल शुरू करने की तैयारी है. &amp;nbsp;इनमें प्री प्राइमरी बच्चों की पढ़ाई में माता-पिता को जोड़ने की योजना, 12 जोन में 24 बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को निगमश्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करना और अंडर 9, अंडर 11 बच्चों के लिए मिनी स्पोर्ट्स लीग आयोजित करना शामिल है. निगम के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य केवल स्कूलों की सुविधाओं में सुधार करना नहीं, बल्कि स्कूल, शिक्षक, पेरेंट्स और समुदाय के बीच बेहतर तालमेल बनाकर बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है.&amp;nbsp;
प्रतिभागिता से घर तक पहुंचेगी पढ़ाई&amp;nbsp;
दरअसल MCD शिक्षा विभाग प्रतिभागिता नाम से पहले शुरू कर रहा है. इसके लिए रॉकेट लर्निंग नाम के एनजीओ के साथ सहयोग किया गया है. इस योजना में तकनीकी के जरिए अभिभावकों तक बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री, जरूरी सूचनाएं और शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ाने वाले मैसेज भेजे जाएंगे. प्राइमरी बच्चों के माता-पिता को घर पर बच्चों के साथ कराई जाने वाली खेल आधारित एक्टिविटी भेजी जाएगी. ऑडियो-वीडियो के जरिए माता-पिता को बताया जाएगा बच्चों की शुरुआती शिक्षा में वह किस तरह मदद कर सकते हैं. वहीं स्कूल की एक्टिविटी और विभागीय योजनाओं की जानकारी भी नियमित रूप से पेरेंट्स तक पहुंचाई जाएगी. इसमें बच्चों से जुड़ी जरूरी सूचनाएं पेरेंट्स को दी जाएगी. MCD की योजनाओं और स्कूल से जुड़े अपडेट शेयर किए जाएंगे. इसके अलावा नियमित संवाद के जरिए स्कूल और परिवार के बीच संबंध मजबूत करने पर भी जोर रहेगा.&amp;nbsp;
12 जोन में बनेंगे 24 निगमश्री स्कूल&amp;nbsp;
MCD &amp;nbsp;के करीब 7 लाख बच्चों वाले शहरी प्राथमिक शिक्षा तंत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए 24 निगमश्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे. एमसीडी के 12 जोन में से प्रत्येक जोन से दो बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूल इसमें चुने जाएंगे. इन स्कूलों को दूसरे स्कूलों के लिए मॉडल के रूप में भी विकसित किया जाएगा. &amp;nbsp;
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चुने गए स्कूलों की यह होगी खासियत
हर एक चुने गए निगमश्री स्कूल को आसपास के 3 से 5 MCD &amp;nbsp;स्कूलों के लिए अकेडमिक सहयोगी केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा. यहां एक्टिविटी आधारित पढ़ाई पर जोर होगा और कक्षा 3 तक बच्चों में पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी क्षमता मजबूत करने का टारगेट रखा गया है. हर निगम श्री स्कूल में कम से कम दो स्मार्ट क्लासरूम, बेहतर लाइब्रेरी और खेल सुविधाएं विकसित की जाएगी. इसके अलावा परिसर को बच्चों के अनुकूल और हरा भरा बनाने के साथ दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा. वहीं प्रिंसिपल और शिक्षकों के लिए नियमित ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी. शिक्षकों को हर साल कम से कम 50 घंटे का प्रोफेशनल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाएगी. पेरेंट्स, पूर्व छात्रों और समुदाय को जोड़ने के लिए विद्यांजलि जैसे प्लेटफार्म का इस्तेमाल भी किया जाएगा.&amp;nbsp;
अंडर 9 और अंडर 11 बच्चों के लिए मिनी स्पोर्ट्स लीग&amp;nbsp;
शिक्षा के साथ खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए MCD मिनी लीग भी शुरू करेगा. शुरुआत में अंडर 9 और अंडर 11 आयु वर्ग के बच्चों पर फोकस रहेगा. इसके लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट डेवलपमेंट सोसाइटी के साथ साझेदारी की जा रही है. लीग में फुटबॉल और क्रिकेट प्रतियोगिता के साथ बच्चों की शारीरिक फिटनेस का आकलन भी किया जाएगा. मैच और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा और बच्चों को डिजिटल प्रमाण पत्र दिए जाएंगे. MCD &amp;nbsp;के शारीरिक शिक्षा शिक्षक और नोडल शिक्षक स्थानीय कोच और तकनीकी सहयोगी के तौर पर जुड़ेंगे.
इसके लिए मौजूदा MCD &amp;nbsp;खेल मैदान का इस्तेमाल किया जाएगा. सीएसआर के जरिए खेल किट, डिवाइस और छात्रवृत्ति जुटाने की योजना भी है. निगम के अनुसार इस पहल के तहत 1400 से ज्यादा MCD &amp;nbsp;छात्रों को दिल्ली एनसीआर की खेल अकादमियों के 4500 से ज्यादा बच्चों के साथ कंपटीशन करने का मौका मिलेगा. वहीं इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन और फिटनेस से जुड़ा डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे फ्यूचर में प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान और उनकी प्रगति पर नजर रखना आसान होगा.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 02:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BHU में वेटनरी कोर्स के लिए आवेदन शुरू, NEET UG स्कोर पर मिलेगा एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस और हसबेंडरी कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस कोर्स में एडमिशन के लिए उम्मीदवारों का चयन नीट यूजी 2026 के स्कोर के आधार पर किया जाएगा. इसका मतलब है कि जिन उम्मीदवारों ने 2026 में नीट यूजी की परीक्षा दी है, वह भी इस कोर्स में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. एलिजिबल उम्मीदवार अब बीएचयू के एडमिशन पोर्टल के जरिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
कब तक कर सकेंगे आवेदन?
बीएचयू ने साफ कर दिया है कि इस कोर्स में दिलचस्पी रखने वाले उम्मीदवारों को 20 सितंबर 2026 रात 11:59 बजे तक अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा. जो उम्मीदवार तय समय सीमा तक रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाए, उन्हें सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा. ऐसे में इच्छुक छात्रों को समय रहते अपना आवेदन पूरा करना होगा.&amp;nbsp;
तीन राउंड में होगा सीट अलॉटमेंट&amp;nbsp;
बीएचयू इस कोर्स के लिए एडमिशन प्रक्रिया कुल तीन सीट अलॉटमेंट राउंड के जरिए पूरी करेगा. रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 20 सितंबर 2026 है. इसके बाद पहली सीट एलॉटमेंट लिस्ट 28 सितंबर 2026 को जारी होगी. दूसरी सीट अलॉटमेंट लिस्ट 1 अक्टूबर 2026 को और तीसरी सीट एलॉटमेंट लिस्ट 5 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी. अगर इन तीनों राउंड के बाद भी कोई सीट खाली रह जाती है, तो उन्हें भरने के लिए माॅप-अप राउंड के तहत 14 अक्टूबर 2026 को खाली सीटों की लिस्ट जारी की जाएगी.
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कैसे करें आवेदन?
बीएचयू वेटरनरी कोर्स में एडमिशन के लिए आवेदन करने के इच्छुक छात्र नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन कर सकते हैं. सबसे पहले बीएचयू के ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल admission.bhu.ac.in पर जाना होगा. इसके बाद बीवीएससी एंड एएच प्रोग्राम के लिए दिए गए रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद अपनी एक्टिव ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके एक नया अकाउंट बनाएं. इसके बाद जरूरी एजुकेशनल और पर्सनल डिटेल भरें और अपना नीट यूजी 2026 रोल नंबर और स्कोर दर्ज करें. इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस का पेमेंट करें और आवेदन सबमिट कर दें. आवेदन पूरा होने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.&amp;nbsp;
फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह आवेदन फॉर्म सबमिट करने से पहले उसमें भरी गई सारी जानकारी को अच्छी तरह जांच लें. खास तौर पर नीट यूजी 2026 का रोल नंबर और स्कोर सही दर्ज करना जरूरी है. जिससे किसी तरह की गलती की गुंजाइश न रहे. इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सभी छात्र आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना पहले ही अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर लें. ताकि अंतिम समय में किसी तकनीकी दिक्कत या जल्दबाजी से बचा जा सके.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BHU, में, वेटनरी, कोर्स, के, लिए, आवेदन, शुरू, NEET, स्कोर, पर, मिलेगा, एडमिशन</media:keywords>
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        <title>UGC&amp;NET June 2026 Re&amp;Exam के एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UGC-NET June 2026 के तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी Re-Exam में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने 9 और 10 सितंबर 2026 को होने वाली परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. आइए जानते हैं कि कैंडिडेट्स कैसे अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं?
किन उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड जारी हुए?
NTA की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, 9 और 10 सितंबर 2026 को UGC-NET June 2026 के तहत इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के री-एग्जाम होने हैं. संबंधित कैंडिडेट्स अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं.
कहां से डाउनलोड करें UGC-NET एडमिट कार्ड?
UGC-NET June 2026 Re-Exam का एडमिट कार्ड एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है. उम्मीदवारों को वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाना होगा. इसके बाद अपने लॉगिन क्रेडेंशियल की मदद से पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. लॉगिन के बाद एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का ऑप्शन दिखाई देगा. उम्मीदवार एडमिट कार्ड को डाउनलोड करने के साथ उसका प्रिंटआउट भी निकालकर रख लें.
एडमिट कार्ड पर दी गई जानकारी जरूर करें चेक
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवारों को उस पर दर्ज सभी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए. खास तौर पर नाम, विषय, परीक्षा की तारीख, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा से जुड़े निर्देश अच्छी तरह जांच लें. अगर एडमिट कार्ड पर किसी तरह की जानकारी गलत है या उसे लेकर कोई समस्या है तो समय रहते NTA से संपर्क करें.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले पढ़ लें निर्देश
NTA ने उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड पर दिए गए सभी निर्देश ध्यान से पढ़ने की सलाह दी है. उम्मीदवारों को परीक्षा के दिन किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए. परीक्षा केंद्र का पता भी पहले ही देख लेना बेहतर रहेगा, ताकि परीक्षा वाले दिन वहां पहुंचने में देरी न हो.
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में परेशानी हो तो क्या करें?
अगर किसी उम्मीदवार को UGC-NET June 2026 Re-Exam का एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में परेशानी हो रही है या वेबसाइट पर लॉगिन से जुड़ी कोई समस्या आ रही है तो वह NTA की हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है. उम्मीदवार 011-40759000 पर कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा अपनी समस्या ugcnet@nta.ac.in पर ईमेल के जरिए भी भेज सकते हैं.&amp;nbsp;
परीक्षा से जुड़ी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर देखें
UGC-NET परीक्षा से जुड़े उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी अपडेट के लिए NTA की आधिकारिक वेबसाइट और UGC-NET पोर्टल पर जारी सूचनाओं को ही देखें. सोशल मीडिया या दूसरे अनधिकृत स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा न करें.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>5 सितंबर का दिन क्यों है शिक्षकों के नाम? जानिए इसका पूरा इतिहास</title>
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        <description><![CDATA[ हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के स्कूल और कॉलेज एक अलग माहौल में नजर आते हैं. कहीं छात्र अपने शिक्षकों के लिए प्रोग्राम आयोजित करते हैं, तो कहीं जगह खास परफॉर्मेंस और गेम्स के जरिए टीचर्स को धन्यवाद दिया जाता है. कई स्कूलों में इस दिन सीनियर छात्र जूनियर कक्षाओं को पढ़ाते हैं और शिक्षक भी अपनी क्लासरूम जिम्मेदारियां से थोड़ी देर के लिए दूर रहते हैं. कुछ जगहों पर छात्र अपने शिक्षकों की नकल भी करते हैं, लेकिन इसे सम्मान के साथ पेश किया जाता हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में टीचर्स डे के लिए 5 सितंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 5 सितंबर का दिन शिक्षकों के नाम क्यों है.&amp;nbsp;
5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है टीचर्स डे?&amp;nbsp;
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था. वह एक प्रसिद्ध दार्शनिक और विद्वान होने के साथ-साथ लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे. जब 1962 में वह भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ छात्रों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई है. राधाकृष्णन ने व्यक्तिगत तौर पर अपना जन्मदिन मनाने के बजाय सुझाव दिया कि इस दिन को टीचर्स डे के रूप में मनाया जाए. उनका विचार था कि यह दिन किसी एक व्यक्ति के सम्मान तक सीमित न रहकर देशभर के टीचर्स और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को समर्पित होना चाहिए. यही से भारत में हर साल 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाने की परंपरा शुरू हुई.&amp;nbsp;
कौन थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन?
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रमुख दार्शनिक और शिक्षकों में गिने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र में बिताया. वह आंध्र यूनिवर्सिटी और बनारस यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रहे. बाद में वह 1952 में भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति का पद संभाला. शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उनका नाम टीचर्स डे से गहराई से जुड़ गया. राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षा केवल जानकारी हासिल करने या परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है. शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति में तर्क, स्वतंत्र सोच और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना भी है.&amp;nbsp;
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1962 से चली आ रही है टीचर्स डे की परंपरा&amp;nbsp;
भारत में टीचर्स डे मनाने की शुरुआत 1962 में हुई. तब से हर साल 5 सितंबर को स्कूलों और कॉलेज में टीचर्स के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस दिन छात्र अपने शिक्षकों के लिए विशेष कार्यक्रम करते हैं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हैं और कई जगह उन्हें गिफ्ट भी देते हैं. कुछ संस्थानों में छात्र खुद शिक्षकों की भूमिका निभाकर क्लास लेते हैं. इस तरह दिनभर का माहौल सामान्य पढ़ाई से अलग और शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाला होता है.&amp;nbsp;
टीचर्स डे 2026 पर 48 शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान&amp;nbsp;
5 सितंबर 2026 को इस बार टीचर्स डे के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली में 48 शिक्षकों को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड भी प्रदान करेगी. इन शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों वाली प्रक्रिया के जरिए किया गया. सम्मान पाने वाले शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और 6 केंद्रीय सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं. आपको बता दें कि नेशनल टीचर्स अवार्ड की शुरुआत 1958 में हुई थी. इसका उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को पहचान देना है, जिन्होंने स्कूल शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान दिया है और अपने छात्रों के जीवन को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>UP Special TET 2026 का नोटिफिकेशन जारी, 5 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने स्पेशल टीईटी एलिजिबिलिटी टेस्ट 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. आयोग ने इसे विज्ञापन संख्या 03/2026 के तहत जारी किया है. परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू होगी और उम्मीदवार 4 अक्टूबर तक फॉर्म भर सकेंगे. यह परीक्षा उत्तर प्रदेश के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षक पदों के लिए पात्रता तय करने के उद्देश्य से आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;यूपी स्पेशल टीईटी 2026 का शेड्यूल&amp;nbsp;
यूपी स्पेशल टीईटी 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू होगी. आवेदन करने की आखिरी तारीख 4 अक्टूबर निर्धारित की गई है. उम्मीदवारों को आवेदन के साथ निर्धारित फीस भी इसी अवधि में जमा करनी होगी. आयोग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार आवेदन में सुधार के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की गई है. वहीं स्पेशल टीईटी परीक्षा 3 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा से पहले 1 नवंबर 2026 को एडमिट कार्ड जारी किए जाने का कार्यक्रम है.&amp;nbsp;
ओटीआर करना होगा जरूरी&amp;nbsp;
यूपी स्पेशल टीईटी के लिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को वन टाइम रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा. बिना ओटीआर की आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी. जिन उम्मीदवारों ने पहले से ओटीआर कर रखा है, उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी. वह पहले से मिले लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए आगे की आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. नए उम्मीदवारों को पहले ओटीआर करना होगा. इसके बाद लोगिन डिटेल में स्पेशल टीईटी 2026 के आवेदन फॉर्म को भरना होगा.&amp;nbsp;
कितनी है आवेदन फीस?
आवेदन फीस उम्मीदवार की कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग रखी गई है. जनरल ईडब्ल्यूएस, ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 1000 रुपये, एससी-एसटी उम्मीदवारों को 500 रुपये और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को 300 रुपये जमा करने होंगे. फीस का पेमेंट ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.&amp;nbsp;
पेपर 1 और पेपर 2 के लिए एलिजिबिलिटी&amp;nbsp;
यूपी स्पेशल टीईटी का पेपर 1 कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले टीचर्स के लिए होगा. इसके लिए उम्मीदवार के पास कम से कम 50 प्रतिशत के साथ सीनियर सेकेंडरी और दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन की योग्यता होनी हो सकती है. इसके अलावा एनसीटीई के नियमों के तहत 45 प्रतिशत अंक के साथ सीनियर सेकेंडरी और दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन की योग्यता भी मान्य है. वहीं बीएड की योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी पेपर 1 के लिए एलिजिबल होंगे. इसके अलावा पेपर 2 कक्षा 6 से 8वीं के लिए होगा. इसके लिए उम्मीदवार के पास कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन और 2 वर्षीय डिप्लोमा की योग्यता हो सकती है. इसमें भी 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन और बीएड मान्य होगी. वहीं सीनियर सेकेंडरी में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों और 4 वर्षीय B.EI.Ed की योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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पास होने के लिए कितने अंक जरूरी?
स्पेशल टीईटी में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए क्वालीफाइंग बेंचमार्क 60 प्रतिशत रखा गया है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार इसमें छूट दी गई है. परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होने की वजह से उम्मीदवारों को गलत उत्तरों के लिए अंक नहीं गंवाने होंगे. वहीं यूपी स्पेशल टीईटी 2026 की परीक्षा में दोनों पेपरों में 150-150 एमसीक्यू सवाल पूछे जाएंगे.
ऐसे करना होगा यूपी स्पेशल टीईटी के लिए आवेदन&amp;nbsp;
स्पेशल टीईटी 2026 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा. इसके बाद ओटीआर की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. जिन उम्मीदवारों का ओटीआर पहले बना हुआ है, वह मौजूदा क्रेडेंशियल से लॉगिन कर सकते हैं. लॉगिन करने के बाद स्पेशल टीईटी 2026 के लिए आवेदन लिंक पर जाकर मांगी गई जानकारी भरनी होगी. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करके अपनी कैटेगरी के अनुसार आवेदन फीस जमा करनी होगी. फॉर्म जमा करने से पहले उम्मीदवारों को सभी जानकारी जांच कर फॉर्म को सबमिट करना होगा.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG Round 2 में 659 नई मेडिकल सीटें जुड़ी, 11302 सीटें पूरी तरह खाली</title>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के दूसरे राउंड में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए सीटों की तस्वीर अब साफ हो गई है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने राउंड 2 सीट का मैट्रिक्स जारी कर दिया है. इसमें एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग की 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा सीटों की जानकारी दी गई है. सीट मैट्रिक्स में कुल 659 नई सीटें जोड़ी गई हैं, जबकि 11302 सीटें क्लियर वैकेंसी के तौर पर उपलब्ध हैं. इसके अलावा 12,283 सीटें वर्चुअल वैकेंसी में रखी गई है.&amp;nbsp;
राउंड 2 में जोड़ी गई 659 नई सीटें&amp;nbsp;
एमसीसी की ओर से जारी सीट मैट्रिक्स में एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग की कुल 659 नई सीटें शामिल की गई है. यह सीटें अलग-अलग मेडिकल और डेंटल कॉलेज के साथ नर्सिंग संस्थानों में जोड़ी गई है. उम्मीदवारों को सीट मैट्रिक्स में यह देखना होगा कि उनके पसंदीदा कॉलेज और कोर्स में कितनी सीटें उपलब्ध हैं. नई सीटों के अलावा बड़ी संख्या में ऐसी सीटें भी है, जो पहले राउंड के बाद खाली रह गई थी. इन सीटों को क्लियर वैकेंसी में शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
11,302 सीटें क्लियर वैकेंसी में&amp;nbsp;
राउंड 2 के सीट मैट्रिक्स के अनुसार 11,302 सीटें क्लियर वैकेंसी के तौर पर उपलब्ध है. क्लियर वैकेंसी का मतलब ऐसी सीटों से है, जो पहले राउंड के बाद पूरी तरह खाली रह गई. यानी इन सीटों पर राउंड 1 में किसी उम्मीदवार का एडमिशन नहीं हुआ. इन खाली सीटों में देश के कुछ प्रमुख मेडिकल संस्थानों की सीटें भी शामिल है. इनमें एम्स पटना, एम्स रायपुर और एम्स गुवाहाटी जैसी संस्थाओं की सीटें बताई गई है.&amp;nbsp;
12,283 सीटें वर्चुअल वैकेंसी में&amp;nbsp;
एमसीसी ने 12,283 सीटों को वर्चुअल वैकेंसी के तौर पर दिखाया है. यह ऐसी सीटें हैं, जो फिलहाल राउंड 1 में किसी उम्मीदवार को आवंटित है, लेकिन उस उम्मीदवार ने अपग्रेड के लिए फ्लोट ऑप्शन चुना है. अगर वह उम्मीदवार राउंड 2 में अपनी पसंद की किसी दूसरी सीट पर चला जाता है, तो उसकी मौजूदा सीट खाली हो सकती है. ऐसी स्थिति में वह सीट अगले उम्मीदवार के लिए उपलब्ध हो सकती है. इसलिए राउंड 2 में चॉइस फिलिंग करते समय वर्चुअल वैकेंसी वाली सीटों को भी उम्मीदवारों को ध्यान में रखना होगा.&amp;nbsp;
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अलग-अलग कैटेगरी में जारी हुआ सीट मैट्रिक्स&amp;nbsp;
एमसीसी ने राउंड 2 के लिए सीट मैट्रिक्स को अलग-अलग कैटेगरी में जारी किया है. इसमें नई जोड़ी गई सीटों के साथ क्लियर और वर्चुअल वैकेंसी की जानकारी दी गई है. एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग में उपलब्ध सीटों को उम्मीदवारों कैटेगरी के अनुसार देख सकते हैं. सीट मैट्रिक्स में यह जानकारी खास तौर पर उपयोगी है कि किस कॉलेज और किस कोर्स में कितनी सीटें उपलब्ध है.
कल से शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के राउंड 2 के लिए रजिस्ट्रेशन 3 सितंबर 2026 से शुरू हुआ. उम्मीदवार 8 सितंबर 2026 तक रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवारों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स भरने होंगे. चॉइस फिलिंग की आखिरी तारीख 9 सितंबर 2026 है. इसके बाद 9 और 10 सितंबर को सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. 11 सितंबर को राउंड 2 सीट एलॉटमेंट रिजल्ट जारी किया जाएगा. राउंड 2 में सीट मिलने वाले उम्मीदवारों को 12 से 18 सितंबर 2026 के बीच कॉलेज में जाकर एडमिशन लेना होगा. इसके बाद 19 सितंबर को एमसीसी और संबंधित राज्य अथॉरिटी की ओर से शामिल हुए उम्मीदवारों के डेटा का वेरिफिकेशन किया जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BPSC 72वीं भर्ती में बदलाव, डीएसपी के पद घटे, अब 1187 पदों पर भर्ती</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए BPSC 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़ा अपडेट आया है. बिहार लोक सेवा आयोग ने भर्ती की रिक्तियां में बदलाव किया है. आयोग की ओर से जारी नए नोटिस के अनुसार बिहार पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पदों की संख्या 22 से घटाकर 20 कर दी गई है. इस बदलाव के साथ 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के तहत होने वाली कुल भर्ती अब 1187 पदों पर होगी.&amp;nbsp;
DSP के पद हुए कम&amp;nbsp;
BPSC की ओर से जारी संशोधित सूचना के अनुसार मूल विज्ञापन में बिहार पुलिस सेवा के अंतर्गत डीएसपी के 22 पद निर्धारित किए गए थे. अब इन रिक्तियों को संशोधित करते हुए 20 पद कर दिया गया है. डीएसपी के पदों के लिए संशोधित डिटेल में जनरल के 10 पद है, जिनमें चार पद महिलाओं के लिए आरक्षित है. ईडब्ल्यूएस के 2, एससी के लिए 1 पद, एसटी के लिए 1 पद और ईबीसी के लिए पांच पद है. ईबीसी के 5 पदों में से दो पद महिलाओं के लिए आरक्षित है, वहीं ओबीसी के लिए 1 पद निर्धारित हैं. इन पदों के लिए न्यूनतम आयु सीमा 22 वर्ष है.&amp;nbsp;
अब 1187 पदों पर होगी भर्ती&amp;nbsp;
DSP की रिक्तियां में बदलाव के बाद 72वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के तहत कुल रिक्तियों की संख्या 1187 हो गई है. यानी मई में जारी मूल विज्ञापन में बताए गए 1230 पदों की तुलना में अब कुल 43 पद काम रह गए हैं. आयोग के संशोधित नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विज्ञापन की बाकी शर्तों और नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.&amp;nbsp;
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BPSC संशोधित रिक्तियां 2026
BPSC के संशोधित वैकेंसी को लेकर आयोग ने इससे पहले 44 गन्ना अधिकारी पदों की भर्ती प्रक्रिया से हटाया था. यह पद गन्ना उद्योग विभाग के तहत बताए गए थे. आयोग के अनुसार बिहार सुगरकेन डेवलपमेंट रूल्स 2025 के तहत गन्ना अधिकारी के पद असिस्टेंट डायरेक्टर, सुगरकेन डेवलपमेंट और इसी तरह के दूसरे पदों के अंतर्गत आते हैं. इन पदों की पात्रता और परीक्षा पैटर्न संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा से अलग है. इस वजह से इन 44 पदों को बीएससी 72वीं सीसीई भर्ती से बाहर कर दिया गया है.&amp;nbsp;
26 जुलाई को हुई थी प्रारंभिक परीक्षा&amp;nbsp;
बीपीएससी ने 72वीं CCE की प्रारंभिक परीक्षा 26 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी. परीक्षा ऑफलाइन मोड में हुई थी. प्रीलिम्स में जनरल स्टडीज से एमसीक्यू वाले सवाल पूछे जाते हैं. परीक्षा कुल 150 अंकों की होती है और इसके लिए 2 घंटे का समय दिया जाता है. गलत उत्तर के लिए एक तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान है. प्रारंभिक परीक्षा स्क्रीनिंग चरण और इसके आधार पर उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए आगे बढ़ाया जाता है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DRDO में 8&amp;9 सितंबर को वॉक&amp;इन इंटरव्यू, ITI पास वालों को मिलेगी नौकरी</title>
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        <description><![CDATA[ आईटीआई पास कर चुके युवाओं के लिए रक्षा क्षेत्र में करियर शुरू करने का एक और शानदार मौका सामने आया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की एक प्रमुख प्रयोगशाला कॉम्बैट आईटी व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने अप्रेंटिसशिप एक्ट 1961 के तहत आईटीआई अप्रेंटिस ट्रेनिंग की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. सबसे खास बात यह है कि इस भर्ती में किसी भी तरह की लिखित परीक्षा नहीं होगी, बल्कि सीधे वॉक इन इंटरव्यू के जरिए ही उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
कुल कितनी वैकेंसी और कब होगा इंटरव्यू?&amp;nbsp;
इस भर्ती के तहत कुल 93 पदों पर अप्रेंटिस ट्रेनिंग की नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए वॉक इन इंटरव्यू 8 और 9 सितंबर 2026 को चेन्नई की आवडी स्थित सीवीआरडीई परिसर में आयोजित किया जाएगा. इंटरव्यू का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है. इच्छुक उम्मीदवारों को अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट के साथ तय समय पर इस जगह पहुंचना होगा.&amp;nbsp;
किन-किन ट्रेड्स में मिलेगा मौका?&amp;nbsp;
यह भर्ती कुल 18 अलग-अलग ट्रेड्स के लिए निकाली गई है. इनमें कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा) के लिए 13 पद, ड्राफ्ट्समैन (मैकेनिकल) के लिए 10 पद, इलेक्ट्रीशियन के लिए 12 पद, फिटर के लिए 10 पद, मैकेनिक (मोटर व्हीकल) के लिए 8 पद और मशीनिस्ट के लिए पांच पद रखे गए हैं. इसके अलावा पेंटर के लिए 1 पद, प्लंबर के लिए 3 पद, टर्नर के लिए 5 पद, वेल्डर के लिए 5 पद और इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक के लिए 6 पद उपलब्ध है. शीट मेटल वर्कर, कंप्यूटर नेटवर्किंग टेक्नीशियन और कंप्यूटर एंड पेरिफेरल्स हार्डवेयर रिपेयर एंड मेंटेनेंस मैकेनिक के लिए एक-एक पद रखा गया है, जबकि फोटोग्राफर के लिए 4 बुक बाइंडर के लिए 2, सीएडी-सीएएम ऑपरेटर कम प्रोग्रामर के लिए 3 और फूड प्रोडक्शन (जनरल ट्रेड) के लिए भी तीन पद निर्धारित हैं.&amp;nbsp;
हर महीने मिलेगा इतना स्टाइपेंड&amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों को ट्रेनिंग के दौरान हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाएगा. ज्यादातर ट्रेड्स के लिए यह स्टाइपेंड करीब 11,040 प्रतिमाह रखा गया है, जबकि कोपा, पेंटर, वेल्डर, कंप्यूटर नेटवर्किंग टेक्नीशियन, कंप्यूटर एंड पेरिफेरल्स हार्डवेयर रिपेयर मैकेनिक और सीएडी-सीएएम ऑपरेटर कम प्रोग्रामर जैसी कुछ ट्रेड्स में यह राशि करीब 10,560 रुपये प्रतिमाह तय की गई है.&amp;nbsp;
किन उम्मीदवारों को मिलेगा मौका, क्या है योग्यता?
इस अप्रेंटिसशिप के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास एनसीवीटी या एसीवीटी से मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में आईटीआई का प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है. ज्यादातर ट्रेड्स के लिए आईटीआई कोर्स की न्यूनतम अवधि 2 साल होनी चाहिए. हालांकि कोपा, पेंटर, प्लंबर, वेल्डर और फूड प्रोडक्शन जैसी कुछ ट्रेड्स को इस शर्त से छूट दी गई है. इसके साथ ही सिर्फ वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने 2023, 2024, 2025 या 2026 में आईटीआई परीक्षा पास की हो. इससे पहले पास होने वाले उम्मीदवार इस अप्रेंटिसशिप के लिए एलिजिबल नहीं माने जाएंगे. इसके अलावा उम्मीदवारों के लिए एनसीवीटी- एसीवीटी एमआईएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना भी अनिवार्य है और आवेदन के समय अपना रजिस्ट्रेशन नंबर देना होगा. जिसे वॉक इन इंटरव्यू के समय जांचा जाएगा.&amp;nbsp;
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कैसे होगा चयन?
चयन प्रक्रिया में सबसे पहले उम्मीदवारों की आईटीआई परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर शॉर्ट लिस्टिंग की जाएगी. इसके बाद शॉर्ट लिस्ट में उम्मीदवारों को वॉ इन इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. जहां उनके डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन किया जाएगा. इन सभी चरणों को पार करने के बाद अंतिम चयन किया जाएगा और चुने गए उम्मीदवारों को सीवीआरडीई, आवडी चेन्नई में उसी दिन मौके पर जॉइनिंग लेटर भी दे दिया जाएगा.&amp;nbsp;
यह डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी&amp;nbsp;
वॉक-इन-इंटरव्यू में शामिल होने वाले उम्मीदवार को अपने साथ 10वीं या 12वीं की मार्कशीट, आईटीआई की मार्कशीट, एनसीवीटी-एसीवीटी सर्टिफिकेट लागू होने पर जाति प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी होगा.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IAF छोड़ कमर्शियल पायलट बने अभिनंदन, जानें उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र से सम्मानित अभिनंदन वर्धमान ने अपने करियर का नया चैप्टर शुरू किया है. करीब 22 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवा देने के बाद उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया और अब कमर्शियल एविएशन में कदम रखा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिनंदन अगस्त 2026 में गोवा की रीजनल एयरलाइन FLY91 से जुड़े और फिलहाल ATR 72-600 विमान की टाइप 2 ट्रेनिंग ले रहे हैं.
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वह कमर्शियल रूट पर विमान उड़ा सकेंगे. आपको बता दें कि अभी तक अभिनंदन की पहचान देश में भले ही फरवरी 2019 की हुई हवाई मुठभेड़ से सबसे ज्यादा बनी हो, लेकिन फाइटर पायलट बनने के पीछे उनकी वर्षों की पढ़ाई और ट्रेनिंग से जुड़ा लंबा सफर रहा है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि विंग कमांडर अभिनंदन की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन बताते हैं.&amp;nbsp;
चेन्नई में हुआ अभिनंदन का जन्म&amp;nbsp;
अभिनंदन वर्धमान का जन्म 21 जून 1983 को चेन्नई में हुआ था. वह तमिल जैन परिवार से आते हैं, जिसकी जड़ें कांचीपुरम के पास स्थित थिरुपनमूर गांव से जुड़ी है. उनके पिता सिंहकुट्टी वर्धमान भी भारतीय वायु सेना में एयर मार्शल के पद से रिटायर्ड हुए, जबकि उनकी मां डॉक्टर थी. ऐसे परिवार में पले-बढ़े अभिनंदन का बचपन भी काफी हद तक सैन्य माहौल में बीता. वायु सेना से उनका जुड़ाव भी उनकी शुरुआती पढ़ाई और पारिवारिक माहौल से बढ़ा था.&amp;nbsp;
सैनिक स्कूल से हुई पढ़ाई की शुरुआत&amp;nbsp;
अभिनंदन ने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल से पूरी की. सैनिक स्कूलों में सामान्य एकेडमिक शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, फिजिकल ट्रेनिंग और नेतृत्व क्षमता पर भी जोर दिया जाता है. इन स्कूलों का उद्देश्य छात्रों को आगे चलकर नेशनल डिफेंस एकेडमी समेत सैन्य करियर के लिए तैयार करना भी है. इसके बाद एनडीए महाराष्ट्र के खड़गवासला में स्थित त्रि-सेवा एकेडमी में अभिनंदन ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की और भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम ज्वाइन की. 19 जून 2004 को उन्हें फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर कमीशन मिला. इसके बाद उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग का सिलसिला आगे बढ़ा. उन्होंने बठिंड और हलवारा स्थित वायुसेना केंद्रों में ट्रेनिंग ली. इसके बाद उन्हें SU 30MKi पर उड़ान का एक्सपीरियंस मिला. फिर वह MIG-21 Bison स्क्वाड्रन में चले गए. 2006 में वह &amp;nbsp;फ्लाइट लेफ्टिनेंट, 2010 में स्क्वाड्रन लीडर और 2017 में विंग कमांडर बने. दिसंबर 2021 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोट किया गया.&amp;nbsp;
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2019 की हवाई मुठभेड़ से आए थे चर्चा में&amp;nbsp;
अभिनंदन वर्धमान का नाम फरवरी 2019 में पूरी दुनिया में चर्चा में आया. 26 फरवरी को बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के अगले दिन पाकिस्तानी लड़ाकू विमान ने जवाबी कार्रवाई की थी. वहीं 27 फरवरी को अभिनंदन को लाइन ऑफ कंट्रोल की ओर बढ़ रहे पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को रोकने के लिए भेजा गया. हवाई मुठभेड़ के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के एफ 16 को मार गिराया. इसके बाद उनके मिग 21 को मिसाइल से नुकसान पहुंचा और उन्हें विमान से इंजेक्ट करना पड़ा. वह पाकिस्तान के क्षेत्र में जा गिरे, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया. अभिनंदन करीब 60 घंटे तक पाकिस्तान की हिरासत में रहे और 1 मार्च 2019 को उन्हें वापस भारत भेजा गया.&amp;nbsp;
वीर चक्र से हुए सम्मानित&amp;nbsp;
2019 कि हवाई मुठभेड़ के बाद अभिनंदन वर्धमान को वीर चक्र से सम्मानित किया गया. यह भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्ध कालीन वीरता पुरस्कार है. पुरस्कार के प्रशस्ति पत्र में हवाई मुठभेड़ के दौरान उनके कर्तव्य और साहस की भी सराहना की गई. वहीं भारतीय वायु सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के बाद अभिनंदन अब कमर्शियल एविएशन में आ गए. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 31 मार्च को वायुसेना छोड़ी और अगस्त में गोवा की रीजनल एयरलाइन FLY91 से जुड़े.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IAF, छोड़, कमर्शियल, पायलट, बने, अभिनंदन, जानें, उनकी, एजुकेशनल, क्वालिफिकेशन</media:keywords>
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        <title>यूपी प्राथमिक शिक्षक भर्ती का सिलेबस जारी, जानें कैसा होगा परीक्षा पैटर्न?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-प्राथमिक-शिक्षक-भर्ती-का-सिलेबस-जारी-जानें-कैसा-होगा-परीक्षा-पैटर्न</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने कक्षा 1 से 5 तक के प्राथमिक सहायक अध्यापक भर्ती के लिए नया सिलेबस और परीक्षा पैटर्न जारी कर दिया है. आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि भर्ती परीक्षा में किस विषय से कितने सवाल आएंगे और प्रश्नों का स्तर किस कक्षा या पाठ्यक्रम तक रखा जाएगा. ऐसे में अब उम्मीदवारों के लिए तैयारी का दायरा और परीक्षा में विषयों का वेटेज पहले से स्पष्ट हो गया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि यूपी प्राथमिक शिक्षक भर्ती का सिलेबस कैसा होगा&amp;nbsp;
120 सवाल, 360 अंक और 2 घंटे का समय&amp;nbsp;
यूपीईएसएससी की ओर से जारी परीक्षा पैटर्न के अनुसार, प्राथमिक सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में कुल 120 प्रश्न पूछे जाएंगे. प्रत्येक प्रश्न तीन अंक का होगा, जिससे पूरा पेपर 360 अंकों का होगा. परीक्षा की अवधि 120 मिनट यानी 2 घंटे निर्धारित की गई है. उम्मीदवारों काे हर सही जवाब पर तीन अंक मिलेंगे और हर गलत उत्तर पर एक अंक की कटौती होगी. परीक्षा में किसी सवाल का जवाब नहीं देने पर उसके लिए अंक नहीं मिलेंगे. वहीं परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होगी.&amp;nbsp;
किस तरह के होंगे परीक्षा में सवाल?&amp;nbsp;
आयोग ने सिलेबस जारी करने के साथ प्रश्नों के स्तर को भी स्पष्ट किया है. प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के सिलेबस को मोटे तौर पर दो स्तरों में रखा गया है. हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी, विज्ञान, गणित तथा पर्यावरण एवं सामाजिक अध्ययन से जुड़े सवालों का स्तर कक्षा 12वीं तक का होगा. वहीं शिक्षण कौशल, बाल मनो वैज्ञानिक, सूचना प्रौद्योगिकी, जीवन कौशल एवं प्रबंधन और अभिवृत्ति से संबंधित प्रश्नों का स्तर डीईएलईडी पाठ्यक्रम के अनुसार रखा गया है, जिसका मतलब है कि उम्मीदवारों को स्कूली विषयों की तैयारी के साथ शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े हिस्सों पर भी पकड़ बनानी होगी.&amp;nbsp;
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भाषा विषयों से सबसे ज्यादा 30 सवाल&amp;nbsp;
प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में सबसे ज्यादा सवाल हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी से पूछे जाएंगे. इस हिस्से से कुल 30 सवाल होंगे. भाषा वाले हिस्से में व्याकरण के साथ अपठित गद्यांश और पद्यांश तथा Grammar और Comprehension से जुड़े सवाल शामिल होंगे. इसलिए उम्मीदवारों को भाषा के नियमों के साथ समझ आधारित प्रश्नों की भी तैयारी करनी होगी.&amp;nbsp;
जनरल नॉलेज और करंट अफेयर के 25 सवाल&amp;nbsp;
भाषा के बाद सबसे ज्यादा वेटेज जनरल नॉलेज और करंट अफेयर्स को दिया गया है. इस सेक्शन से कुल 25 सवाल पूछे जाएंगे. इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, उत्तर प्रदेश से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं, महत्वपूर्ण स्थान, व्यक्तित्व, रचनाएं, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, खेलों तथा भारतीय संस्कृति और कला से संबंधित विषय शामिल किए गए हैं. इसके अलावा परीक्षा में लॉजिकल रीजनिंग से कुल 5 सवाल होंगे. इसके सिलेबस में कई तरह के रीजनिंग टॉपिक भी शामिल हैं. वहीं प्राथमिक शिक्षक भर्ती गणित और विज्ञान दोनों विषयों से मिलाकर 24 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें विज्ञान से 8 और गणित से 16 अंक के सवाल होंगे, जबकि पर्यावरण एवं सामाजिक अध्ययन के 8 अंक के प्रश्न पूछे जाएंगे. प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में टीचिंग स्किल से भी 8 सवाल होंगे. बाल मनोविज्ञान से भी 8 सवाल पूछे जाएंगे. वहीं सूचना एवं प्रौद्योगिकी से भी 4 सवाल और लाइफ और स्किल मैनेजमेंट एंड एटीट्यूड के आठ सवाल होंगे. इस तरह कुल परीक्षा में 120 सवाल पूछे जाएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, प्राथमिक, शिक्षक, भर्ती, का, सिलेबस, जारी, जानें, कैसा, होगा, परीक्षा, पैटर्न</media:keywords>
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        <title>ऑटो चलाकर पिता ने पढ़ाया, दिव्यांग बेटे ने IIT Madras पहुंच रचा इतिहास</title>
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        <description><![CDATA[ हमारे आसपास कई ऐसी कहानियां होती हैं, जिसमें कुछ लोग अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लेते हैं.&amp;nbsp;ऐसी ही एक कहानी जे संतोष की भी है. 90 प्रतिशत स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी और जन्म से सेरेब्रल पाल्सी के साथ जन्मे 17 साल के संतोष ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया. संतोष ने IIT मद्रास के बीएस एप्लीकेशन प्रोग्राम में एडमिशन लेकर इतिहास रच दिया है.
खास बात यह है कि पिछले साल संतोष स्कूल की उस ट्रिप में नहीं जा सके, जहां उनकी पूरी क्लास आईआईटी मद्रास घूमने गई थी. अब एक साल बाद वही आईआईटी मद्रास उनकी मंजिल बन गया है. उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह एक साधारण ऑटो चालक की चालक के बेटे हैं और अपनी कमजोरी को उन्होंने अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया.&amp;nbsp;
पढ़ाई के जज्बे ने बढ़ाया आगे&amp;nbsp;
आईआईटी मद्रास में एडमिशन लेने वाले संतोष ने बताया कि वह ऐसा कोर्स करना चाहते थे, जिसकी पढ़ाई घर से संभव हो. उनके लिए इंजीनियरिंग कोर्स मुश्किल था, क्योंकि उसमें नियमित रूप से कॉलेज में उपस्थित रहना पड़ता है. जबकि कॉरेस्पोंडेंस कोर्स में खर्च ज्यादा आता है. इसी दौरान पिछले साल एनजीओ टीएन वॉलंटियर्स के लोग उनके स्कूल पहुंचे और उन्हें आईआईटी मद्रास के इस बीएस प्रोग्राम के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद संतोष ने इस कोर्स में एडमिशन लेने की तैयारी शुरू की.
पहली कोशिश में नहीं मिली थी सफलता ्र
IIT मद्रास में दाखिले की पहली कोशिश में वह क्वालीफायर पास नहीं कर पाए थे. इसके बाद दूसरी तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने दोबारा प्रयास किया और इस बार क्वालीफायर परीक्षा पास कर ली. संतोष अब डिग्री पूरी करने के बाद आईटी सेक्टर में काम करना चाहते हैं. अब इसी महीने के तीसरे सप्ताह में वह इस 4 साल के कोर्स की पढ़ाई शुरू कर देंगे. खास बात यह है कि संतोष के पिता ऑटो ड्राइवर हैं और उन्होंने ऐसा कोर्स चुना, जिससे वह काफी हद तक घर से रहकर इसे पूरा कर सकते हैं.&amp;nbsp;

Dreams don&amp;rsquo;t always follow an easy path &amp;mdash; but determination can take you where you aspire to be. As reported in The Times of India, 17-year-old J Santhosh, who has 90% spinal muscular disability and cerebral palsy since birth, has secured admission to IIT Madras&amp;rsquo; four-year BS&amp;hellip; pic.twitter.com/y89tCIqJRL
&amp;mdash; IIT Madras (@iitmadras) September 2, 2026



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आईआईटी मद्रास में भी संतोष की उपलब्धि को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए, उसकी मेहनत और दृढ़ता की सराहना की. संस्थान के अनुसार, संतोष ने टीएन वॉलिंटियर्स के जरिए प्रोग्राम के बारे में जाना और अपनी जरूरत के अनुसार ऐसे कोर्स को चुना जिसकी पढ़ाई बड़े स्तर पर घर से की जा सकती है.
क्या है IIT Madras फॉर ऑल पहल?
Anaivarukkum IITM यानी आईआईटी मद्रास फॉर ऑल आईआईटी मद्रास की एक आउटरीच और एजुकेशनल पहल है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों समेत अलग-अलग वर्गों के स्टूडेंट तक हायर एजुकेशन और एसटीईएम लर्निंग की पहुंच बनाना है. इस पहल के तहत संतोष जैसे छात्रों को भी आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम से जोड़ने का अवसर मिल रहा है. उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई के साथ जरूरी जगह पर इन पर्सन एक्टिविटी की व्यवस्था की गई है. वहीं आपको बता दें कि इस कोर्स में संतोष की पहले साल की फीस एनजीओ की ओर से दी जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कब जारी होगा SSC GD रिजल्ट? जानें एक्सपेक्टेड मेरिट लिस्ट और कट ऑफ</title>
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        <description><![CDATA[ SSC GD कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में शामिल हुए लाखों उम्मीदवार अब अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं. कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जीडी कांस्टेबल 2026 का रिजल्ट जल्द जारी किए जाने की उम्मीद है. फिलहाल आयोग ने रिजल्ट जारी करने की कोई तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन अपडेट के अनुसार एसएससी जीडी रिजल्ट 2026 सितंबर के दूसरे सप्ताह तक जारी हो सकता है. रिजल्ट आने के बाद उम्मीदवार इसे एसएससी की ऑफिशल वेबसाइट ssc.gov.in पर चेक कर सकेंगे. इस भर्ती परीक्षा का आयोजन 27 अप्रैल से 30 मई 2026 के बीच ऑनलाइन सीबीटी मोड में किया गया था.&amp;nbsp;
पीडीएफ में जारी होगी SSC GD मेरिट लिस्ट
SSC GD कांस्टेबल 2026 का रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी होने की उम्मीद है. इस पीडीएफ में उन उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए जाएंगे, जो अगले चरण के लिए सफल घोषित किए जाएंगे. उम्मीदवार रिजल्ट पीडीएफ डाउनलोड करने के बाद उसमें अपना रोल नंबर आसानी से खोज सकते हैं. रोल नंबर चेक करने के लिए पीडीएफ खोलने के बाद कंट्रोल एफ का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले सर्च बॉक्स में अपना रोल नंबर दर्ज करके रिजल्ट चेक किया जा सकता है.&amp;nbsp;
रिजल्ट के साथ जारी होगी कट ऑफ&amp;nbsp;
एसएससी जीडी रिजल्ट के साथ कट ऑफ भी जारी की जाएगी. आयोग की ओर से कैटेगरी और फोर्स के अनुसार कट ऑफ अंक जारी किए जाने की उम्मीद है, जो उम्मीदवार निर्धारित कट ऑफ के बराबर या उससे ज्यादा अंक हासिल करेंगे, उन्हें भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के लिए बुलाया जाएगा.
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SSC GD रिजल्ट कैसे चेक करें?

सबसे पहले एसएससी के ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर दिए गए रिजल्ट सेक्शन पर क्लिक करें.
अब कांस्टेबल जीडी रिजल्ट 2026 के ऑप्शन को सेलेक्ट करें.
इसके बाद रिजल्ट की पीडीएफ स्क्रीन पर खुल जाएगी.&amp;nbsp;
पीडीएफ को सेव करने के बाद इसमें कंट्रोल एफ की मदद से अपना रोल नंबर या नाम देखें.

स्कोरकार्ड रिजल्ट के कुछ दिन बाद आएगा
एसएससी जीडी 2026 का स्कोर कार्ड रिजल्ट घोषित होने के कुछ दिन बाद ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी किया जाएगा. उम्मीदवार स्कोरकार्ड के जरिए अपने अंको की जानकारी देख सकेंगे. स्कोर कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को वेबसाइट पर दिए गए संबंधित ऑप्शन में लॉगिन करना होगा. रिजल्ट जारी होने के बाद आयोग की ओर से स्कोर कार्ड से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं एसएससी जीडी सीबीटी में सफल उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होना होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>DU में अब उम्र की बंदिश खत्म, रेगुलर स्टूडेंट्स के साथ चलेगी क्लास</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वालों के लिए अब उम्र आड़े नहीं आएगी. यूनिवर्सिटी ने सीईएस के तहत आवेदन शुरू कर दिए हैं. जिसके जरिए अलग-अलग उम्र और पेशे से जुड़े लोग डीयू के कुछ चुनिंदा कोर्स की पढ़ाई कर सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए किसी पूरी डिग्री में एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी. योग्य उम्मीदवार अपनी पसंद के उपलब्ध पेपर में एडमिशन लेकर रेगुलर छात्र के साथ कई कक्षाओं में पढ़ाई कर सकेंगे. डीयू की इस योजना को एनी कोर्स एनी एज के तौर पर पेश किया गया है. इसका मकसद उन लोगों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ना है, जो किसी वजह से पहले अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे.&amp;nbsp;
अब पूरे साल कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
सीईएस के तहत आवेदन के लिए डीयू ने अलग पोर्टल शुरू किया है. इच्छुक उम्मीदवार ces.du.ac.in पर जाकर उपलब्ध पेपर, एलिजिबिलिटी एडमिशन संबंधी नियम और दूसरी जानकारी देख सकते हैं. यूनिवर्सिटी के अनुसार इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन और एडमिशन की प्रक्रिया पूरे साल जारी रहती है. जिस सेमेस्टर में एडमिशन संबंधित पेपर की कक्षाएं चलेंगी, उसी के एकेडमी कैलेंडर के अनुसार सीईएस छात्रों की पढ़ाई शुरू होगी. सीटें सीमित होने के कारण उम्मीदवारों को उपलब्ध पेपर और सीट की स्थिति देखकर जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
कौन ले सकता है एडमिशन?
सीईएस के तहत वहीं उम्मीदवार किसी पेपर के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो उस पेपर के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता और जरूरी शर्तों को पूरा करते हो. इसका मतलब है कि केवल उम्र की कोई कोई ऊपरी सीमा न होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति किसी भी पेपर में सीधे एडमिशन ले सकता है. हर पेपर के लिए संबंधित योग्यता और एलिजिबिलिटी शर्ते लागू होगी. सीट उपलब्ध होने की स्थिति में उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा. इससे संबंधित योग्यता परीक्षा में प्राप्त अंकों के साथ उम्मीदवारों की उम्र को भी मेरिट के लिए ध्यान में रखा जा सकता है.&amp;nbsp;
एक सेमेस्टर में अधिकतम दो पेपर&amp;nbsp;
सीईएस के तहत उम्मीदवार एक सेमेस्टर में अधिकतम दो पेपर या आठ क्रेडिट जो भी सीमा पहले पूरी हो ले सकते हैं. दोनों पेपर एक ही अनुशासन से होने चाहिए. इस योजना के तहत मिलने वाली सीटें अतिरिक्त सीटें मानी जाएगी. इन सीटों की संख्या किसी भी कक्षा की स्वीकृत क्षमता की अधिकतम 10 फीसदी है. &amp;nbsp;इसलिए हर पेपर में सीईएस के लिए सीट उपलब्ध होना जरूरी नहीं है.
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रेगुलर छात्रों के साथ पढ़ेंगे सीईएस स्टूडेंट&amp;nbsp;
इस योजना की खास बात यह है की सीईएस के तहत चुने गए पेपर की पढ़ाई रेगुलर छात्रों से अलग किसी विशेष कक्षा में नहीं होगी. उम्मीदवार संबंधित पेपर के लिए रेगुलर स्टूडेंट के साथ कक्षाओं में शामिल होंगे. उन्हें इस पेपर के अकेडमिक नियमों के अनुसार पढ़ाई करनी होगी. कक्षाएं जिस माध्यम और तरीके से रेगुलर छात्रों के लिए संचालित होगी, सीईएस स्टूडेंट्स के लिए भी यही व्यवस्था लागू होगी. मूल्यांकन से संबंधित पेपर भी रेगुलर छात्रों के अनुसार ही किया जाएगा. योजना सिर्फ ऐसे लोगों के लिए नहीं है, जो फिलहाल कहीं काम नहीं कर रहे हैं. वर्किंग प्रोफेशनल्स भी सीईएस के तहत आवेदन कर सकते हैं, हालांकि नौकरी करने वाले उम्मीदवारों को अपने एंप्लॉयर से एनओसी देना होगा.&amp;nbsp;
एक पेपर की फीस 6,100 रुपये
सीईएस के मौजूदा फीस ढांचे के अनुसार एक पेपर के लिए 6,100 रुपये फीस निर्धारित है. उम्मीदवार अधिकतम दो पेपर ले सकते हैं, लेकिन आठ क्रेडिट की सीमा भी लागू रहेगी. एडमिशन के बाद उम्मीदवारों को संबंधित पेपर के कक्षा में शामिल होना होगा और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBT मोड में होगी NEET&amp;UG 2027 परीक्षा? नए टेस्टिंग सेंटर की तैयारी तेज</title>
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        <description><![CDATA[ NEET-UG 2027 को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की तैयारी तेज हो गई है. परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने देशभर में नए कंप्यूटर टेस्टिंग सेंटर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए ऐसे सरकारी तकनीकी संस्थानों की पहचान की जा रही है, जहां पहले से कंप्यूटर और दूसरी जरूरी IT सुविधाएं मौजूद हैं. NTA से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने इस दिशा में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है. AICTE ने अपने दायरे में आने वाले सरकारी तकनीकी संस्थानों से वहां उपलब्ध कंप्यूटर, इंटरनेट और दूसरी तकनीकी सुविधाओं की जानकारी मांगी है.
सरकारी कॉलेजों में तलाशे जा रहे टेस्टिंग सेंटर
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं. ऐसे में अगर इसे CBT मोड में कराया जाता है तो बड़ी संख्या में कंप्यूटर टेस्टिंग सेंटर की जरूरत होगी. NTA इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नए सेंटर तैयार करने की संभावनाएं तलाश रहा है. सूत्रों के अनुसार, AICTE से जुड़े सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों और दूसरे तकनीकी संस्थानों में पहले से मौजूद IT इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
AICTE ने संबंधित सरकारी संस्थानों से यह जानकारी भी मांगी है कि उनके पास कितने कंप्यूटर उपलब्ध हैं. इसके साथ ही इंटरनेट कनेक्टिविटी, कंप्यूटर लैब और दूसरी जरूरी तकनीकी सुविधाओं की स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी गई है.
खाली जगह की भी मांगी गई जानकारी
सिर्फ कंप्यूटर और इंटरनेट की जानकारी ही नहीं, बल्कि संस्थानों में उपलब्ध खाली जगह का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है. संस्थानों से पूछा गया है कि उनके पास कितनी ऐसी जगह है, जिसका फिलहाल इस्तेमाल नहीं हो रहा है या जिसे परीक्षा केंद्र के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. माना जा रहा है कि इन सभी जानकारियों के आधार पर ऐसे संस्थानों की पहचान की जाएगी, जिन्हें भविष्य में स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर्स के तौर पर विकसित किया जा सकता है.
छोटे निजी संस्थानों को सेंटर देने की संभावना कम
NTA के एक अधिकारी के अनुसार, CBT परीक्षा के लिए छोटे निजी संस्थानों को परीक्षा केंद्र का काम आउटसोर्स करना आसान विकल्प नहीं होगा. परीक्षा केंद्र तय करने से पहले कई जरूरी मानकों की जांच की जाएगी. इनमें कंप्यूटर की संख्या, इंटरनेट की गुणवत्ता, बिजली की व्यवस्था, परीक्षा के दौरान सिस्टम की क्षमता और संस्थान में उपलब्ध जगह जैसे कई पहलू शामिल होंगे. इसके अलावा परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों को संभालने की क्षमता भी देखी जाएगी. किसी संस्थान में केवल कंप्यूटर मौजूद होना ही उसे NEET-UG का टेस्टिंग सेंटर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. NTA की ओर से संस्थान की तकनीकी क्षमता और दूसरी जरूरी सुविधाओं का मूल्यांकन किया जा सकता है.
अभी अंतिम फैसला बाकी
हालांकि, NEET-UG 2027 के CBT मोड में होने और किन संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है. फिलहाल अलग-अलग सरकारी तकनीकी संस्थानों से उपलब्ध सुविधाओं और खाली जगह की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चल रही है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBT, मोड, में, होगी, NEET-UG, 2027, परीक्षा, नए, टेस्टिंग, सेंटर, की, तैयारी, तेज</media:keywords>
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        <title>बैंक ऑफ बड़ौदा की कंपनी में 2049 पदों पर भर्ती, 30 सितंबर तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक ऑफ बड़ौदा की सब्सिडियरी कंपनी बड़ौदा ग्लोबल शेयर्ड सर्विसेज लिमिटेड (BGSSL) ने अलग-अलग पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती अभियान के तहत देशभर में कुल 2049 पदों को भरा जाएगा. अलग-अलग विभागों में निकली इन भर्तियों में फ्रेशर्स के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र में एक्सपीरियंस रखने वाले उम्मीदवारों के लिए भी अवसर दिए गए हैं. BGSSL की ओर से जारी शॉर्ट नोटिस के अनुसार भर्ती में कलेक्शन्स, डिजिटल बैंकिंग, ग्लोबल ट्रेड सर्विस, रिटेल सेल्स, ह्यूमन रिसोर्सेस, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, फील्ड कलेक्शन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और आधार ऑपरेशंस समेत कई विभाग शामिल है. इन पदों पर आवेदन की प्रक्रिया कल यानी 1 सितंबर से शुरू हो चुकी है.&amp;nbsp;
इन पदों पर होगी भर्ती&amp;nbsp;

अप्रेंटिस (टेली कॉलिंग)- 150 पद&amp;nbsp;
टेली कलेक्शन एजेंट (डेट रिकवरी एजेंट)-100 पद
एग्जीक्यूटिव एटीएम-रिकॉन्सिलिएशन-शिकायत-डेबिट कार्ड-40 पद&amp;nbsp;
एग्जीक्यूटिव ट्रेड फाइनेंस ऑपरेशंस- 25 पद&amp;nbsp;
एग्जीक्यूटिव सीएएसए-एफसीएनआर कॉलिंग-40 पद&amp;nbsp;
प्रोक्योरमेंट मैनेजर- 1 पद&amp;nbsp;
एमआईसी एनालिस्ट- 3 पद
डिप्टी मैनेजर एचआर और एडमिन-1 पद&amp;nbsp;
एग्जीक्यूटिव-सीनियर एग्जीक्यूटिव (मेकर्स)- 20 पद
डेस्कटॉप सपोर्ट एनालिस्ट- 1 पद&amp;nbsp;
फील्ड कलेक्शन ऑफिसर- 1 पद&amp;nbsp;
एम-डीएम लीड्स टेली कलेक्शन- 6 पद
एम-डिप्टी मैनेजर एलएंडडी- 1 पद&amp;nbsp;
एग्जीक्यूटिव डेबिट कार्ड ऑपरेशंस- 10 पद&amp;nbsp;
फील्ड कलेक्शन ऑफिसर्स- 400 पद&amp;nbsp;
डिजिटल ऑनबोर्डिंग स्पेशलिस्ट (पार्ट टाइम)- 400 पद&amp;nbsp;
सेल्स ऑफिसर एएसएम-आरएसएम-350 पद&amp;nbsp;
आधार ऑपरेटर (पार्ट टाइमर)- 400 पद

30 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
BGSSL रिक्रूटमेंट 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू हो गई है. उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक का समय है. भर्ती के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है. उम्मीदवार चाहे तो भर्ती नोटिस में दिए गए निर्देशों के अनुसार अपना अपडेटेड रिज्यूमे recruitment@bgss.in पर ईमेल के माध्यम से भी भेज सकते हैं. वहीं तय समय सीमा के बाद मिले आवेदन को एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;
पदों के अनुसार अलग-अलग होगी योग्यता&amp;nbsp;
इस भर्ती में सभी पदों के लिए एक समान शैक्षणिक की योग्यता निर्धारित नहीं है. उम्मीदवारों की योग्यता संबंधित पद के अनुसार तय होगी. अलग-अलग पदों के लिए ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमबीए, सीए, सीएस या इंजीनियरिंग की डिग्री की जरूरत होगी. वहीं ज्यादातर एग्जीक्यूटिव और मैनेजरियल पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में काम का एक्सपीरियंस मांगा गया है. उम्मीदवारों को जिस पद के लिए आवेदन करना है. उसके लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, एक्सपीरियंस और आयु सीमा की जानकारी ऑफिशियल नोटिस में जांचनी होगी, क्योंकि आयु सीमा भी पद के अनुसार अलग-अलग है.&amp;nbsp;
करियर ब्रेक के बाद वापसी करने वालों को प्राथमिकता&amp;nbsp;
BGSSL ने भर्ती नोटिस में यह भी बताया कि ऐसे उम्मीदवारों जो करियर ब्रेक के लिए बाद दोबारा वर्कफोर्स में लौट रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि इसके लिए उम्मीदवार को संबंधित पद की निर्धारित पात्रता पूरी करनी होगी. इस भर्ती में अलग-अलग एक्सपीरियंस और एक्सपर्टीज वाले उम्मीदवारों के लिए कई तरह के पद उपलब्ध है. इसलिए आवेदन से पहले संबंधित जॉब रोल की जरूरत को अच्छे से देखें.&amp;nbsp;
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चयन प्रक्रिया और सैलरी&amp;nbsp;
BGSSL रिक्रूटमेंट 2026 में चयन प्रक्रिया पद के अनुसार अलग-अलग है. जानकारी के अनुसार उम्मीदवारों के आवेदन और रिज्यूमे की पहले स्क्रीनिंग की जाएगी. इसके बाद पद की आवश्यकताओं और उम्मीदवार की योग्यता के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग होगी. शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. वहीं चयन प्रक्रिया में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी शामिल हो सकता है. नोटिफिकेशन में किसी तरह की लिखित परीक्षा का जिक्र नहीं है. जिसका मतलब है कि ज्यादातर पदों के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग और शॉर्ट लिस्टिंग के बाद इंटरव्यू आधारित चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
ऐसे कर सकते हैं BGSSL भर्ती के लिए आवेदन&amp;nbsp;

आवेदन करने के लिए BGSSL की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.
इसके बाद करियर सेक्शन में जाएं.&amp;nbsp;
यहां भर्ती के लिए पदों की जानकारी और अपनी योग्यता के अनुसार पद सेलेक्ट करें.
इसके बाद पद की एलिजिबिलिटी और जॉब डिस्क्रिप्शन को पढ़ें.&amp;nbsp;
अपडेटेड रिज्यूमे और जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार करके BGSSL की ओर से निर्धारित आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से जमा करें.&amp;nbsp;
भर्ती नोटिस में आप रिज्यूमे recruitment@bgss.in ईमेल से भेजने का ऑप्शन भी दिया गया है.

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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैंक, ऑफ, बड़ौदा, की, कंपनी, में, 2049, पदों, पर, भर्ती, सितंबर, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>जेईई एडवांस्ड में तीन अटेम्प्ट की मांग, मौजूदा नियम बदलने पर उठे सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर के आईआईटी उम्मीदवारों ने जेईई एडवांस में शामिल होने के मौजूदा अटेम्प्ट नियमों में बदलाव की मांग उठाई है. छात्रों का कहना है कि जेईई एडवांस में उम्मीदवारों को 2 के बजाय 3 बार परीक्षा में बैठने का मौका मिलना चाहिए. इस मांग को लेकर 12,000 से ज्यादा उम्मीदवारों ने शिक्षा मंत्रालय, आईटीआई काउंसलिंग और ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड को याचिका भेजी. छात्रों ने या तो अटेम्प्ट की संख्या बढ़ाकर तीन करने या मौजूदा दो अटेम्प्ट को &amp;nbsp;तीन लगातार वर्षों में इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की है.&amp;nbsp;
अभी क्या है जेईई एडवांस्ड की परीक्षा का नियम?
फिलहाल जेईई एडवांस में उम्मीदवार अधिकतम 2 बार और लगातार 2 वर्षों में परीक्षा दे सकते हैं. पहला प्रयास उसी साल करना होता है, जिस साल छात्र 12वीं कक्षा पास करता है. इसके बाद अगले साल लगातार वर्ष में दूसरा प्रयास किया जा सकता है. उम्मीदवारों का तर्क है कि यह नियम कई छात्रों के लिए परेशानी पैदा करता है, जो तैयारी और प्रदर्शन के मामले में एक अतिरिक्त अवसर के बाद अपना बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
जेईई मेन और एडवांस्ड के अटेम्प्ट नियमों में अंतर&amp;nbsp;
उम्मीदवारों ने अपनी याचिका में जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड के टाइम नियमों के बीच अंतर को भी प्रमुखता से उठाया है. जेईई मेन में प्रदर्शन सुधारने के लिए छात्रों को ज्यादा अवसर मिलते हैं, जबकि जेईई एडवांस्ड में दो लगातार प्रयासों की सीमा तय है. जेईई मेन में 3 लगातार वर्षों के दौरान कुल 6 बार परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलता है. वहीं जेईई में प्रदर्शन के आधार पर टॉप 2.5 लाख उम्मीदवार जेईई एडवांस्ड के लिए एलिजिबल होते हैं. छात्रों का कहना है कि जब जेईई मेन पहले ही उम्मीदवारों को छांटकर जेईई एडवांस के लिए मौका देता है, तो जेईई एडवांस में एक और प्रयास देने से परीक्षा की प्रतिस्पर्धा और सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा. उम्मीदवारों के अनुसार तीसरा प्रयास देने से परीक्षा या मूल्यांकन की प्रक्रिया में भी कोई बदलाव नहीं आएगा. &amp;nbsp;
छात्रों का कहना, प्रतिभा को अटेम्प्ट की सीमा में न बांधे
याचिका में छात्रों ने कहा कि जेईई एडवांस्ड केवल जानकारी को रखने वाली परीक्षा नहीं है, बल्कि इसमें गहरी विश्लेषणात्मक क्षमता जरूरत होती है. उनके अनुसार हर छात्र की क्षमता एक जैसी होती है. कई अभ्यर्थियों को अंकों का कॉन्सेप्ट मजबूत कर और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए लगातार तैयारी की जरूरत होती है, जो एक ड्रॉप इयर्स से आगे भी जा सकती है. छात्रों का यह भी कहना है कि जेईई एडवांस्ड एक हाई प्रेशर और 1 दिन में होने वाली परीक्षा है. परीक्षा के दिन हेल्थ संबंधित परेशानियां, टेंशन या छोटी सी गलती भी उम्मीदवार के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है. ऐसे में केवल दो प्रयास किसी छात्र की क्षमता को पूरी तरह सामने लाने के लिए पर्याप्त नहीं है.&amp;nbsp;
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नीट और जेईई मेन के नियमों का उदाहरण&amp;nbsp;
छात्रों ने अपनी मांग में नीट का भी उदाहरण दिया, उन्होंने कहा कि नीट में उम्मीदवारों के लिए प्रयासों की कोई सीमा नहीं है और परीक्षा में शामिल होने के लिए आयु सीमा भी नहीं है. इस तरह जेईई मेन के 6 प्रयासों की व्यवस्था का हवाला देते हुए छात्रों ने सवाल उठाया की एक ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा का हिस्सा होने के बावजूद जेईई एडवांस में केवल दो लगातार प्रयासों की सीमा क्यों रखी गई है. उम्मीदवारों के अनुसार यह अंतर कई सक्षम और मेहनती छात्रों को अपनी क्षमता दिखाने का उचित अवसर नहीं देता है.&amp;nbsp;
कोविड के दौरान अतिरिक्त प्रयास का जिक्र
जेईई एडवांस्ड में तीन प्रयास की मांग नई नहीं है. छात्र कई वर्षों से इस नियम में बदलाव की मांग कर रहे हैं. अब छात्रों ने कोविड-19 महामारी के दौरान जेईई एडवांस में दिए गए अतिरिक्त प्रयास का भी उदाहरण दिया है. उम्मीदवारों का कहना है कि कोविड के दौरान नेतृत्व प्रयास की अनुमति दिए जाने से यह स्पष्ट हुआ की जरूरत पड़ने पर परीक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है. उनके अनुसार अतिरिक्त प्रयास से परीक्षा की क्वालिटी कम नहीं होती, बल्कि ज्यादा योग्य छात्रों को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलता है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>यूपी के युवाओं को सौगात, स्कॉलरशिप से लेकर नौकरी तक कई बड़े ऐलान </title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में युवाओं को शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार और स्टार्टअप से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाओं और कार्यक्रम का ऐलान किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने की बजाय जॉब क्रिएटर और इनोवेटर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया है. सरकार की ओर से युवा उद्यमिता, डिजिटल स्किल, मुफ्त टैबलेट, छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरी और स्वरोजगार से जुड़ी कई योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
सीएम-युवा में लोन पर ब्याज सब्सिडी&amp;nbsp;
युवाओं को रोजगार और माइक्रो एंटरप्राइज शुरू करने के लिए यूथ ब्रिगेड स्कीम का ऐलान 15 अगस्त को किया गया. योजना के पहले चरण में युवाओं को 5 लाख तक के लोन चार साल तक 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने की व्यवस्था है. वहीं योजना के दूसरे चरण में 10 से 20 लाख रुपये तक के लोन पर 3 साल तक 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी. इस योजना के लिए उम्र सीमा 21 से 40 साल रखी गई थी. इसके तहत हर साल एक लाख माइक्रो एंटरप्राइज तैयार करने का टारगेट रखा गया है.
यूपी स्टार्टअप पॉलिसी 2026&amp;nbsp;
युवाओं को स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए यूपी स्टार्टअप पॉलिसी 2026 को भी आगे बढ़ाया गया है. 27 अगस्त को स्टार्टअप मिशन पोर्टल लॉन्च किया गया. इस पहल के तहत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये और 9 इनक्यूबेटरों को 1.79 करोड़ रुपये की मदद बांटी गई है. इसका उद्देश्य युवाओं और नए उद्यमियों को स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ना और उनके लिए अवसर तैयार करना है.&amp;nbsp;
स्किल डेवलपमेंट का बजट बढ़ा&amp;nbsp;
युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी स्किल देने पर भी जोर दिया गया है. कौशल विकास का बजट 9 गुना बढ़ाकर 3,310 करोड़ रुपये किया गया है. इसके साथ ही डिजिटल स्किल और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कौशल दिशा, दर्पण, दृष्टि कॉल सेंटर और चैट बोट्स जैसे पांच नए पोर्टल शुरू की गए हैं. वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 लाख युवाओं को ट्रेनिंग देने का टारगेट रखा गया है.&amp;nbsp;
25 लाख छात्रों को मुफ्त टैबलेट&amp;nbsp;
राज्य में छात्रों और युवाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने मुफ्त टैबलेट योजना को भी मंजूरी दी है. 26 अगस्त को कैबिनेट ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत टेबलेट वितरण को मंजूरी दी है. इस योजना पर 2374.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. 25 लाख युवाओं और छात्रों को इसमें मुफ्त टैबलेट दिए जाएंगे.&amp;nbsp;
युवाओं के लिए नई एकीकृत युवा नीति&amp;nbsp;
सरकार की ओर से जुड़ी नीतियों को एक साथ लाने के लिए नई एकीकृत युवा नीति की भी घोषणा की है. इसका ऐलान 7 अगस्त को किया गया था. यह नीति 16 से 35 वर्ष के युवाओं पर केंद्रित होगी, इसमें शिक्षा, रोजगार, कौशल, विकास, स्टार्टअप, खेल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहेगा.&amp;nbsp;
6 महीने में एक लाख नौकरी का टारगेट&amp;nbsp;
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है. सरकार के अनुसार पिछले 9 साल में 9.30 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है. वहीं 26 अगस्त को मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 6 महीने में 1 लाख और युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे. उन्होंने कहा की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और बिना भेदभाव की पूरी की जा रही है.&amp;nbsp;
यूपी पुलिस में 1 लाख से ज्यादा भर्ती&amp;nbsp;
युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसरों में यूपी पुलिस की भर्ती भी शामिल है. पुलिस में कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर, होमगार्ड और तकनीकी पदों पर मिलकर एक लाख से ज्यादा वैकेंसी की बात कही गई है. भर्ती प्रक्रिया में पेपर लीक जैसी समस्याओं को रोकने के लिए पूरी प्रक्रिया को टेक्नोलॉजी आधारित बनाने पर जोर दिया गया है.&amp;nbsp;
जेन जी रोजगार योजना को मंजूरी&amp;nbsp;
युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए जेन जी रोजगार योजना को भी मंजूरी दी गई है. 25 अगस्त की कैबिनेट बैठक में इस योजना को स्वीकृति मिली. योजना का खास फोकस 18 से 25 वर्ष के प्रथम मतदाता युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर हैं.&amp;nbsp;
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छात्रवृति के जरिए मदद&amp;nbsp;
सरकारी योजनाओं में छात्रवृत्ति को भी जरूरी जगह दी गई है. पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति के आवेदन 11 अगस्त से शुरू किए गए हैं. इस योजना से 36 लाख से ज्यादा छात्र लाभान्वित होने की बात कही गई है. इसके अलावा सामान्य छात्रवृत्ति पोर्टल को 1 सितंबर को दोबारा खोला गया. इसके तहत पहले लाभ से वंचित रह गए 3.16 लाख छात्रों को 2 अक्टूबर तक पेमेंट किए जाने का टारगेट है.&amp;nbsp;
आउटसोर्स कर्मचारी के लिए यूपीसीओएस लॉन्च&amp;nbsp;
युवाओं और बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी से जुड़ी एक और बड़ी पहल के तौर पर आज 2 सितंबर 2026 को आउटसोर्स कर्मचारी निगम लॉन्च किया गया. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसकी शुरुआत की. इसके जरिए राज्य के करीब 20 लाख आउटसोर्स कर्मचारी को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की योजना है. इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है. भर्ती से लेकर वेतन तक की प्रक्रिया को डिजिटल पोर्टल पर मॉनिटर किया जाएगा. योजना के तहत बिचौलियों के शोषण से राहत देने, वेतन से होने वाली कटौती को रोकने और ईपीएफ-ईएसआई समय पर जमा करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है. इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारी के लिए दुर्घटना की स्थिति में 20 से 50 लाख रुपये तक का बीमा, आग लगने की स्थिति में 10 लाख रुपये की सहायता, इलाज के लिए 5 लाख तक और मृत्यु की स्थिति में 50 हजार रुपये तक की सहायता जैसी सुविधाओं का प्रावधान है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>फेल होने के बाद बिना कोचिंग IAS बनी किसान की बेटी, 23वीं रैंक के लिए ऐसे की &amp;apos;तपस्या&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फेल-होने-के-बाद-बिना-कोचिंग-ias-बनी-किसान-की-बेटी-23वीं-रैंक-के-लिए-ऐसे-की-तपस्या</link>
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        <description><![CDATA[ फेल होने के बाद बिना कोचिंग IAS बनी किसान की बेटी, 23वीं रैंक के लिए ऐसे की &#039;तपस्या&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कब होगी BSF ASI कांस्टेबल भर्ती परीक्षा? सामने आ गई नई तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के कानपुर और राजस्थान के जयपुर में परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी दिक्कतों के चलते 2 सितंबर 2026 को होने वाली असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (स्टेनोग्राफर) और हेड कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) भर्ती परीक्षा के कुछ शिफ्ट रद्द कर दिए गए हैं. कानपुर के श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक सेंटर में कंप्यूटर बार-बार बंद होने के बाद तीन परियों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी. वहीं जयपुर के आईडीजेड सीतापुर सेंटर पर भी तकनीकी समस्या के कारण 2 सितंबर की शिफ्ट को रद्द किया गया. प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए अब दोबारा परीक्षा आयोजित कराई जाएगी.&amp;nbsp;
कानपुर में तीन शिफ्टों की परीक्षा रद्दa
कानपुर के चकेरी इलाके के श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक सेंटर में बुधवार 2 सितंबर को बीएसएफ एएसआई स्टेनोग्राफर और हेड कांस्टेबल मिनिस्ट्रियल भर्ती परीक्षा आयोजित हो रही थी. केंद्र का कोड 25916 बताया गया, यहां करीब 500 उम्मीदवारों के तीन पारियों में परीक्षा देने की व्यवस्था थी. सुबह की शिफ्ट के लिए उम्मीदवारों की एंट्री 7:30 बजे होनी थी, लेकिन इसमें देरी हुई और परीक्षा का समय बढ़ाकर 9 बजे कर दिया गया. उम्मीदवार जब परीक्षा देने बैठे तो करीब 15 मिनट बाद कंप्यूटर बंद हो गए. केंद्र के कर्मचारियों ने सिस्टम को ठीक करने की कोशिश की. कुछ समय बाद कंप्यूटर फिर चालू किए गए, लेकिन करीब 15 से 20 मिनट से बाद दोबारा बंद हो गए. लगभग 40 मिनट तक परीक्षा शुरू नहीं हो सकी, इसके बाद उम्मीदवारों को केंद्र से बाहर जाने के लिए कहा गया. बाद में अधिकारियों की ओर से तीन पारियों में होने वाली परीक्षा को रद्द करने की जानकारी दी गई.&amp;nbsp;
परीक्षा रद्द होने के बाद उम्मीदवारों ने किया प्रदर्शन&amp;nbsp;
परीक्षा के बीच कंप्यूटर बंद होने और व्यवस्था को लेकर उम्मीदवारों में नाराजगी देखने को मिली. 500 से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा केंद्र के बाद प्रदर्शन किया और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की. मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस और अधिकारी मौके पर पहुंचे, इसके बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया. कानपुर के एडीसीपी ईस्ट शिव सिंह के अनुसार शुरुआती तौर पर मामला तकनीकी समस्या से जुड़ा लग रहा है और इसकी जांच की जा रही है. इसके बाद अधिकारियों ने उम्मीदवारों को यह भी बताया कि रद्द हुई परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
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18 सितंबर को दोबारा होगी परीक्षा&amp;nbsp;
कानपुर केंद्र पर रद्द हुई परीक्षा के लिए नई तारीख 18 सितंबर तय की गई है. उम्मीदवारों को आगे की जानकारी के लिए बीएसएफ के आधिकारिक पोर्टल पर अपडेट देखते रहने के लिए कहा गया है. यानी जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 2 सितंबर को कानपुर के संबंधित केंद्र पर रद्द हुई है, उन्हें अब 18 सितंबर को दोबारा परीक्षा में शामिल होना होगा.&amp;nbsp;
जयपुर में भी 2 सितंबर की शिफ्ट हुई रद्द
कानपुर के अलावा जयपुर के आईडीजेड सीतापुर परीक्षा केंद्र से भी ऐसी ही जानकारी सामने आई. यहां सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर स्टेनोग्राफर और हेड कांस्टेबल मिनिस्ट्रियल पदों के लिए आयोजित कंप्यूटर बेस्ड रिटन एग्जाम की 2 सितंबर की शिफ्ट तकनीकी समस्या के कारण रद्द कर दी गई. जयपुर केंद्र पर जिन उम्मीदवारों को 2 सितंबर की शिफ्ट 3 परीक्षा रद्द हुई है, उनके लिए भी 18 सितंबर को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी. प्रभावित उम्मीदवारों को नए एडमिट कार्ड के जरिए परीक्षा में शामिल होना होगा. बीएसएफ की ओर से दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए फ्रेश एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा, जिसे उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले और डाउनलोड करना होगा.
ये भी पढ़ें-जेईई एडवांस्ड में तीन अटेम्प्ट की मांग, मौजूदा नियम बदलने पर उठे सवाल ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
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        <title>UGC NET 2026 री&amp;एग्जाम की सिटी स्लिप जारी, 9&amp;10 सितंबर को होगी परीक्षा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ugc-net-2026-री-एग्जाम-की-सिटी-स्लिप-जारी-9-10-सितंबर-को-होगी-परीक्षा</link>
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        <description><![CDATA[ NTA ने UGC NET की दोबारा होने वाली तीन विषयों की परीक्षा के लिए एडवांस एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों को इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की दोबारा परीक्षा देनी है, वह अब अपनी परीक्षा सिटी चेक और डाउनलोड कर सकते हैं. परीक्षा सिटी की जानकारी ऑफिशियल यूजीसी नेट वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर उपलब्ध कराई गई है. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह सिटी इंटिमेशन स्लिप एडमिट कार्ड नहीं है. एडमिट कार्ड अलग से जारी किया जाएगा.&amp;nbsp;
9 और 10 सितंबर को होगा री-एग्जाम&amp;nbsp;
यूजीसी नेट जून 2026 की दोबारा परीक्षा इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के लिए आयोजित की जा रही है. परीक्षा शेड्यूल के अनुसार इंग्लिश और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर को होगी, जबकि सोशियोलॉजी का पेपर 10 सितंबर को आयोजित किया जाएगा. 9 सितंबर को परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक इंग्लिश की परीक्षा और दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कॉमर्स की परीक्षा होगी. जबकि 10 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक सोशियोलॉजी की परीक्षा आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
एडमिट कार्ड अब होगा जारी&amp;nbsp;
एनटीए ने उम्मीदवारों को खासतौर पर स्पष्ट किया है कि एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप को एडमिट कार्ड न समझे. इस स्लिप का उद्देश्य उम्मीदवारों को पहले यह जानकारी देना है कि उनका परीक्षा केंद्र किस शहर में आया है. सिटी स्लिप में परीक्षा केंद्र का पूरा एड्रेस और परीक्षा से जुड़ी जानकारी नहीं दी गई है. परीक्षा केंद्र का पूरा एड्रेस और दूसरे निर्देश एडमिट कार्ड में दिए जाएंगे. एनटीए एडमिट कार्ड बाद में अलग से जारी करेगा, इसलिए उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड का अभी फिलहाल इंतजार करना होगा.&amp;nbsp;
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दोबारा क्यों हो रही परीक्षा?
यूजीसी नेट के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी पेपर को लेकर एनटीए को कई शिकायतें मिली थी. इन शिकायतों की जांच के लिए एजेंसी ने कमेटी का गठन किया था. कमेटी की जांच में इन तीनों पेपर में कई तरह की गलतियां सामने आई. इसके बाद कमेटी ने फिर से इन तीनों परीक्षाओं को दोबारा करने की सिफारिश की. जिसके बाद एनटीए ने इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के लिए री-एग्जाम कराने का फैसला लिया था.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड करें UGC NET सिटी स्लिप&amp;nbsp;

सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.
होम पेज पर यूजीसी नेट जून 2026 सिटी इंटीमेशन स्लिप के लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब अपना एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड समेत मांगी गई लॉगिन डिटेल दर्ज करें.
डिटेल भरने के बाद सबमिट पर क्लिक करें.
अब स्क्रीन पर आपकी यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा सिटी स्लिप दिखाई देगी.&amp;nbsp;
लास्ट में सिटी स्लिप को डाउनलोड करके इसकी कॉपी सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, 2026, री-एग्जाम, की, सिटी, स्लिप, जारी, 9-10, सितंबर, को, होगी, परीक्षा</media:keywords>
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        <title>RIMC में 8वीं कक्षा में एडमिशन का मौका, 6 दिसंबर को 39 शहरों में होगा एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जुलाई 2027 टर्म में एडमिशन के लिए राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज एंट्रेंस एग्जामिनेशन 2026 (RIMCEE) का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है. इच्छुक और एलिजिबल छात्र 30 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. एंट्रेंस एग्जाम 6 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा. वहीं RIMC प्रवेश परीक्षा का आयोजन देशभर के 39 शहरों में किया जाएगा. यह परीक्षा पेन और पेपर मोड में होगी और इसकी अवधि 4 घंटे 30 मिनट निर्धारित की गई है.&amp;nbsp;
30 सितंबर तक आवेदन का मौका&amp;nbsp;
RIMCEE 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 1 सितंबर से हो चुकी है. सामान्य आवेदन प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी. इसी दिन परीक्षा फीस जमा करने की अंतिम तारीख भी निर्धारित की गई है. इसके बाद 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक लेट फीस के साथ आवेदन किया जा सकेगा. लेट आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित परीक्षा फीस के अतिरिक्त 500 रुपये लेट फीस देनी होगी. आवेदन फॉर्म की डिटेल में सुधार के लिए 9 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक करेक्शन विंडो खुलेगी. वहीं परीक्षा की सिटी इंटीमेशन स्लिप परीक्षा से 12 से 15 दिन पहले और एडमिट कार्ड परीक्षा से करीब 5 से 7 दिन पहले जारी किया जाएगा.
6 दिसंबर को होनी है परीक्षा&amp;nbsp;
RIMC एंट्रेंस एग्जाम 2026 का स्टेज 1 एग्जाम 6 दिसंबर 2026 को होगा. परीक्षा ऑफलाइन पेपर मोड में आयोजित की जाएगी. इसमें गणित और अंग्रेजी विषय में छात्रों से डिस्क्रिप्टिव सवाल पूछे जाएंगे, जबकि जीके का पेपर एमसीक्यू आधारित होगा. प्रवेश परीक्षा के दूसरे चरण में वाइवा होगा. यह अप्रैल 2027 आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;
RIMC के लिए एलिजिबिलिटी और आवेदन&amp;nbsp;
RIMC में कक्षा 8 में एडमिशन के लिए उम्मीदवार की उम्र 1 जुलाई 2027 को कम से कम 12 साल 6 महीने और अधिकतम 14 साल होनी चाहिए. यानी निर्धारित कट ऑफ तारीख पर इस आयु सीमा को पूरा करने वाले छात्र ही आवेदन के पात्र होंगे. RIMC एंट्रेंस एग्जाम के लिए जनरल कैटेगरी, डिफेंस पर्सनेल और एक्स सर्विसमैन के वार्ड्स तथा ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 1000 रुपये फीस देनी होगी. वहीं एससी और एसटी कैटेगरी की उम्मीदवारों के लिए 750 रुपये फीस है.
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RIMC में एडमिशन के बाद करियर का रास्ता&amp;nbsp;
RIMC में 5 साल की पढ़ाई पूरी करने और कक्षा 12वीं की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को आगे रक्षा सेवाओं में जाने का अवसर मिलता है. इसके बाद उन्हें यूपीएससी की ओर से आयोजित ऑल इंडिया रिटन परीक्षा और सर्विस सिलेक्शन बोर्ड के इंटरव्यू में सफलता हासिल करनी होती है. इन चरणों को पूरा करने वाले खड़गवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी में 3 साल की डिग्री कोर्स में शामिल हो सकते हैं. इसके बाद आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की संबंधित एकेडमी में प्रोफेशनल ट्रेनिंग होती है. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उम्मीदवारों को भारत के राष्ट्रपति की ओर से सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में कमीशन किया जाता है.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन?

आवेदन करने के लिए सबसे पहले एनटीए की ऑफिशियल वेबसाइट exams.nta.nic.in/RIMCEE पर जाए.&amp;nbsp;
इसके बाद कैंडिडेट एक्टिविटी सेक्शन में RIMC एंट्रेंस एग्जामिनेशन 2026 लिंक पर क्लिक करें.
अब न्यू रजिस्ट्रेशन के जरिए रजिस्ट्रेशन करें.&amp;nbsp;
इसके बाद मांगी गई जानकारी भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद फीस सबमिट कर फॉर्म सबमिट कर दें.&amp;nbsp;
लास्ट में फॉर्म सबमिट होने के बाद कंफर्मेशन पेज भी डाउनलोड कर लें.

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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RIMC, में, 8वीं, कक्षा, में, एडमिशन, का, मौका, दिसंबर, को, शहरों, में, होगा, एग्जाम</media:keywords>
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        <title>यूपी बोर्ड ने बढ़ाई 9वीं&amp;11वीं के रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन, 10 सितंबर तक मौका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-बोर्ड-ने-बढ़ाई-9वीं-11वीं-के-रजिस्ट्रेशन-की-डेडलाइन-10-सितंबर-तक-मौका</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों के एडवांस्ड रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन बढ़ा दी है. नए शेड्यूल के अनुसार एडवांस्ड रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने की डेट और वेरिफिकेशन की प्रक्रियाओं की डेडलाइन अब 10 सितंबर कर दी गई है. बोर्ड के निर्देशों के अनुसार स्कूलों के प्रधानाचार्य को संशोधित शेड्यूल के अनुसार रजिस्ट्रेशन की सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी होगी. इसमें छात्रों से फीस लेना, निर्धारित राशि सरकारी कोष में जमा करना, विद्यार्थियों की शैक्षणिक जानकारी ऑनलाइन दर्ज करना, रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन और जरूरत पड़ने पर पहले से दर्ज जानकारी में सुधार करना जैसी चीजें शामिल है.&amp;nbsp;
अब 10 सितंबर तक होगा रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
नए शेड्यूल के अनुसार कक्षा 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों का एडवांस्ड रजिस्ट्रेशन, फीस लेने और उसे चालान के जरिए सरकारी कोष में जमा करने की अंतिम तारीख 10 सितंबर 2026 कर दी गई है. यह प्रक्रिया 10 सितंबर की मध्य रात्रि तक पूरी की जा सकती है. प्रति छात्र कुल 50 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस निर्धारित की गई है. इसमें 40 रुपये प्रति छात्र सरकारी कोर्स में चालान के माध्यम से जमा किए जाएंगे, जबकि 10 रुपये स्कूल के पास रहेंगे. फीस जमा करने के बाद स्कूलों को पेमेंट से जुड़ी जानकारी और स्टूडेंट की डिटेल बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करनी होगी.&amp;nbsp;
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ऐसे पूरी करनी होगी प्रक्रिया&amp;nbsp;
फीस जमा होने के बाद स्कूलों को स्टूडेंट की रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी. बोर्ड ने छात्रों की रिपोर्ट की जांच के लिए भी अलग-अलग समय निर्धारित किया है. वेरिफिकेशन के दौरान स्कूलों को छात्र का नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि, जेंडर, सब्जेक्ट और फोटो समेत दर्ज की गई दूसरी जानकारी को ध्यान से जांचना होगा. बोर्ड के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 11 से 13 सितंबर 2026 के बीच पुरी की जानी है. इस दौरान स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑनलाइन दर्ज सभी जानकारी सही हो. वेरिफिकेशन का समय पूरा होने के बाद पहले से दर्ज जानकारी में 14 से 20 सितंबर तक सुधार कर सकेंगे.
10वीं-12वीं के छात्रों की फीस के समय सीमा भी बढ़ाई&amp;nbsp;
संशोधित शेड्यूल में 2027 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों से जुड़ी प्रक्रिया के लिए भी समय सीमा बढ़ाई गई है. ऐसे छात्रों के लिए अब परीक्षा फीस जमा करने की अंतिम तारीख 4 सितंबर कर दी गई है वही कक्षा 10वीं और 12वीं के शैक्षणिक छात्र जानकारी और रजिस्ट्रेशन संबंधी डिटेल बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करने की समय सीमा 3 सितंबर तक बढ़ाई गई है. स्कूल प्रधानाध्यापक छात्रों की जानकारी का वेरिफिकेशन 11 सितंबर तक कर सकेंगे. वेरिफिकेशन के बाद सुधार की जरूरत होती है, तो स्कूल 6 से 20 सितंबर के बीच ऑनलाइन बदलाव कर सकते हैं. इस समय में किसी भी तरह के नए छात्रों को रजिस्टर्ड करने की अनुमति नहीं होगी.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, बोर्ड, ने, बढ़ाई, 9वीं-11वीं, के, रजिस्ट्रेशन, की, डेडलाइन, सितंबर, तक, मौका</media:keywords>
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        <title>MP पुलिस में SI&amp;सूबेदार के 504 पदों पर भर्ती, 23 सितंबर तक करें आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mp-पुलिस-में-si-सूबेदार-के-504-पदों-पर-भर्ती-23-सितंबर-तक-करें-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर और सूबेदार के पदों पर भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने सूबेदार और सब इंस्पेक्टर कैडर भर्ती चयन परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए मध्य प्रदेश पुलिस में सूबेदार और सब इंस्पेक्टर के अलग-अलग पदों को भरा जाएगा. भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 से शुरू होगी, जबकि उम्मीदवार 23 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे. वहीं आपको बता दें कि इस भर्ती का आयोजन पुलिस मुख्यालय, गृह (पुलिस) विभाग मध्य प्रदेश की ओर से किया जा रहा है.&amp;nbsp;
इन पदों पर हो रही इतनी भर्ती
एमपीईएसबी की ओर से जारी भर्ती के तहत सूबेदार और सब इंस्पेक्टर के कुल 504 पद भरे जाएंगे. इनमें तकनीकी, गैर तकनीकी दोनों तरह के पद शामिल है. इसमें सूबेदार के 81 पद, सब इंस्पेक्टर (स्पेशल आर्म्ड फोर्स) के 69 पद, सब इंस्पेक्टर (जिला पुलिस फोर्स) के 312 पद, सब इंस्पेक्टर आर्म्स टेक्निकल के 10 पद, सब इंस्पेक्टर फोटो टेक्निकल के 9 पद, सब इंस्पेक्टर क्वेश्चन डॉक्यूमेंट टेक्निकल के चार पद और सब इंस्पेक्टर फिंगरप्रिंट टेक्निकल के 22 पद शामिल है.&amp;nbsp;
23 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 9 सितंबर 2026 से शुरू होंगे. आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 23 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है. उम्मीदवार 28 सितंबर 2026 तक अपने आवेदन फाॅर्म में जरूरी सुधार कर सकेंगे. भर्ती की प्रारंभिक लिखित परीक्षा 28 अक्टूबर 2026 को होगी. परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट तीन बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी. मुख्य परीक्षा की तारीख प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
एमपी पुलिस एसआई और सूबेदार भर्ती के लिए उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना जरूरी है. मध्य प्रदेश के बाहर के उम्मीदवार भी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें केवल ओपन कैटेगरी में आवेदन करने की अनुमति होगी. दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को मध्य प्रदेश में मिलने वाला आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ भी नहीं मिलेगा. वहीं मध्य प्रदेश के स्थाई डोमिसाइल उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार आरक्षण और आयु में छूट दी जाएगी. इसके अलावा नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि ऐसे उम्मीदवार जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं और उनमें से किसी का एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है वह भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे.&amp;nbsp;
अलग-अलग पदों के लिए योग्यता&amp;nbsp;
सूबेदार, सब इंस्पेक्टर, एसएएफ और सब इंस्पेक्टर डीईएफ पदों के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. वहीं तकनीकी पदों के लिए योग्यता अलग रखी गई है. सब इंस्पेक्टर (आर्म्स) पद के लिए टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, सब इंस्पेक्टर (फोटो), क्वेश्चन डॉक्यूमेंट और फिंगरप्रिंट पदों के लिए उम्मीदवार के पास गणित, भौतिक साइंस और रसायन विज्ञान के साथ बैचलर डिग्री होनी चाहिए.&amp;nbsp;
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चार चरणों में होगा चयन&amp;nbsp;
एमपी पुलिस एसआई और सूबेदार रिक्रूटमेंट 2026 में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों के आधार पर किया जाएगा. सबसे पहले प्रारंभिक लिखित परीक्षा होगी. इसमें सफल उम्मीदवार मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल होंगे. इसके बाद उम्मीदवारों को फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट से गुजरना होगा. अंतिम चरण में इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा. प्रारंभिक परीक्षा 28 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है, जबकि मुख्य परीक्षा की तारीख अभी निश्चित नहीं की गई है.&amp;nbsp;
ऐसे करें परीक्षा के लिए आवेदन&amp;nbsp;
योग्य उम्मीदवार एमपीईएसबी के ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होगी और 23 सितंबर तक चलेगी. उम्मीदवारों को आवेदन से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु, डोमिसाइल और संबंधित पद के लिए निर्धारित डॉक्यूमेंट जांचने की सलाह दी गई है. इसके अलावा आवेदन फाॅर्म जमा करने के बाद उम्मीदवार 28 सितंबर 2026 तक उसमें सुधार भी कर सकेंगे.
ये भी पढ़ें-बिहार में लाइब्रेरियन भर्ती का रास्ता साफ, 5 अक्टूबर तक करें आवेदन&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पुलिस, में, SI-सूबेदार, के, 504, पदों, पर, भर्ती, सितंबर, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>राम मंदिर के CEO जितेंद्र मिश्रा कितने पढ़े&amp;लिखे, जानें उनकी एजुकेशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राम-मंदिर-के-ceo-जितेंद्र-मिश्रा-कितने-पढ़े-लिखे-जानें-उनकी-एजुकेशन</link>
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        <description><![CDATA[ भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का सीईओ नियुक्त किया गया. जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त किया गया है. भारतीय वायु सेना में करीब 4 दशक तक सेवा देने वाले जितेंद्र मिश्रा अपने लंबे सेन्य अनुभव और कई जरूरी पदों पर काम करने के लिए जाने जाते हैं. वह पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं और 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेवा से रिटायर्ड हुए थे.
राम मंदिर के सीईओ के तौर पर अब उनके सामने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी. जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति 5,585 आवेदनों में से चुने गए तीन उम्मीदवारों को शार्ट लिस्ट के बाद की गई. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि एयर मार्शल रिटायर्ड जितेंद्र मिश्रा कितने पढ़े लिखे हैं और उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन क्या है.&amp;nbsp;
एनडीए के पूर्व छात्र रहे हैं जितेंद्र मिश्रा
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम से जुड़े अधिकारी हैं. उन्होंने नेशनल डिफेंस अकेडमी पुणे से ट्रेनिंग ली. &amp;nbsp;उनके सर्विस रिकॉर्ड में 69 एनडीए कोर्स का जिक्र है, जिसमें उन्होंने दिसंबर 1985 से कैडेट के तौर पर ट्रेनिंग ली. इसके बाद उन्होंने भारतीय वायु सेना में अलग-अलग विशेषज्ञता वाली ट्रेनिंग और कोर्स भी किए. वह एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, बेंगलुरु से जुड़े रहे और टेस्ट पायलट के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी. इसके अलावा वह एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज यूएसए के पूर्व छात्र भी हैं. उनके प्रोफेशनल बैकग्राउंड में रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडी यूके से जुड़ी ट्रेनिंग भी शामिल है.&amp;nbsp;
1986 में वायु सेना में हुए शामिल
जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में पायलट के तौर पर कमीशन मिला. उनका सर्विस नंबर 18575 एफ (पी) था और वह फाइटर स्ट्रीम से जुड़े थे. वायु सेना में करीब 40 साल के करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली. उनकी पदोन्नति का सफर भी लंबा रहा. वह 6 दिसंबर 1991 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट, 5 मई 2003 को विंग कमांडर, 2 मार्च 2009 को ग्रुप कैप्टन और 17 जून 2013 को एयर कमोडोर बने. इसके बाद 1 जुलाई 2019 को एयर वाइस मार्शल और 1 जनवरी 2023 को मार्शल के पद पर पदोन्नति हुई.&amp;nbsp;
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पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे जितेंद्र मिश्रा&amp;nbsp;
जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को कमांडर-इन-चीफ के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी. इसके बाद वह भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बने. यह वायु सेवा में उनके अंतिम वरिष्ठ पदों में से एक था. वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड का नेतृत्व भी कर रहे थे. इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को रिटायर होने के बाद अब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पहले सीईओ के जिम्मेदारी दी गई.&amp;nbsp;
कितनी मिलेगी सैलरी?&amp;nbsp;
राम मंदिर के सीईओ पद के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान ही यह बताया गया था कि चयनित अधिकारी की सैलरी और अलाउंस आपसी सहमति से तय किए जाएंगे. नियुक्ति 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर होगी और अधिकारी को अयोध्या में रहना होगा. इसके अलावा राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार सीईओ को सरकारी वाहन, आवास, सुरक्षा व्यवस्था और दूसरी सुविधाएं राम मंदिर ट्रस्ट के फंड से दी जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राम, मंदिर, के, CEO, जितेंद्र, मिश्रा, कितने, पढ़े-लिखे, जानें, उनकी, एजुकेशन</media:keywords>
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        <title>इस परिवार में 6 IAS अफसर, पिता&amp;मां से लेकर बेटियां तक बनीं अधिकारी </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-परिवार-में-6-ias-अफसर-पिता-मां-से-लेकर-बेटियां-तक-बनीं-अधिकारी</link>
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        <description><![CDATA[ यूपीएससी की परीक्षा में हर साल लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं, लेकिन कुछ ही उम्मीदवार इसमें सफलता हासिल कर पाते हैं. वहीं अगर किसी के परिवार में से एक एक भी व्यक्ति आईएएस ऑफिसर बन जाए, तो यह उस परिवार, समाज और आसपास के लोगों के लिए बहुत बड़ी बात मानी जाती है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर एक ही परिवार के कई सदस्य यूपीएससी पास कर आईएएस अधिकारी बन जाए तो क्या होगा. जी हां राजस्थान में एक ऐसा परिवार है, जिसमें परिवार के 6 सदस्य आईएएस अधिकारी बने हैं.
राजस्थान के इस परिवार में 6 सदस्य IAS अधिकारी
राजस्थान के गंगापुर जिले के बामनवास से ताल्लुक रखने वाले वाला एक परिवार इसी वजह से चर्चा में रहा है कि इस परिवार की अलग-अलग पीढ़ियों से 6 सदस्य आईएएस अधिकारी बने हैं. इस परिवार की नई पीढ़ी से अर्नब प्रताप सिंह ने यूपीएससी सिविल सेवा एग्जामिनेशन 2022 में सफलता हासिल की है. उन्होंने परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 430 प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बने. अर्नब के परिवार में पहले से ही सिविल सर्विस का मजबूत आधार है. उनके पिता- मां और ताऊ भी आईएएस अधिकारी रह चुके हैं, जबकि दो बहने भी यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनी है.&amp;nbsp;
पिता और मां दोनों IAS अधिकारी&amp;nbsp;
राजस्थान के बामनवास के इस परिवार के नए आईएएस अधिकारी बने अर्नब के पिता बाबूलाल मीणा 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश में सेवाएं दे रहे हैं. उनकी मां वीना मीणा भी आईएएस अधिकारी है. वह 1993 बैच की अधिकारी है और उत्तर प्रदेश कैडर में कार्यरत है. इस तरह अर्नब को परिवार में ही सिविल सर्विस का माहौल मिला. उनके ताऊ डॉ. बत्ती लाल मीणा भी आईएएस अधिकारी रह चुके हैं, फिलहाल वह अब रिटायर्ड हो चुके हैं.&amp;nbsp;
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परिवार की दो बेटियां भी बनीं IAS अधिकारी&amp;nbsp;
अर्नब के परिवार में आईएएस अधिकारियों की संख्या केवल माता-पिता और ताऊ तक सीमित नहीं रही. उनके ताऊ डॉ. बत्ती लाल मीणा की बेटी और उनके एक दूसरे चाचा की बेटी शैफाली ने भी यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की. दोनों ने साल 2016 में यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनीं. दोनों बहने फिलहाल गुजरात कैडर में सेवाएं दे रही है. इस तरह परिवार की अलग-अलग पीढ़ियों में सिविल सेवा से जुड़ने का सिलसिला जारी रहा है.&amp;nbsp;
एक ही परिवार में IAS&amp;nbsp;अधिकारियों की फैक्ट्री&amp;nbsp;
अर्नब प्रताप सिंह की सफलता के बाद इस परिवार में आईएएस अधिकारियों की संख्या 6 हो गई है. पिता बाबूलाल मीणा, मां वीना मीणा, ताऊ डॉ. बत्ती लाल मीणा, परिवार की दो बेटियां और अर्नब प्रताप सिंह सभी ने सिविल सेवा में अपनी पहचान बनाई.एक ही परिवार के इतने सदस्यों का आईएएस अधिकारी बनना यह एक प्रकार की असाधारण उपलब्धि है. इस तरह परिवार के इतने सदस्यों के आईएएस अधिकारी होने से इस परिवार को आईएएस की फैक्ट्री भी कहा जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी PET&amp;2026 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ी</title>
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        <description><![CDATA[ अब 7 सितंबर तक कर सकेंगे PET-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन. UPSSSC ने आवेदन की अंतिम तिथि 1 सितंबर से बढ़ाकर 7 सितंबर की. 7 सितंबर तक शुल्क जमा और ऑनलाइन आवेदन सबमिट करने का मिलेगा मौका.
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने दी बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने प्रारंभिक पात्रता परीक्षा यानी PET-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. आयोग ने आवेदन की अंतिम तारीख को बढ़ा दिया है। अब अभ्यर्थी 7 सितंबर 2026 तक PET-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. इससे उन उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय मिल गया है, जो किसी वजह से अभी तक अपना आवेदन पूरा नहीं कर पाए थे.
आयोग के मुताबिक, पहले आवेदन करने की अंतिम तारीख 1 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी. अब इसे बढ़ाकर 7 सितंबर कर दिया गया है. यानी अभ्यर्थियों के पास आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह दिन का अतिरिक्त समय है. इसी तारीख तक निर्धारित शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन सबमिट करने का मौका भी मिलेगा.
3 अगस्त से शुरू हुई थी आवेदन प्रक्रिया
PET-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी. आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इसमें शामिल हो रहे हैं. अब अंतिम तारीख बढ़ाए जाने से ऐसे उम्मीदवारों को राहत मिलेगी, जो किसी कारण से आवेदन नहीं कर सके थे या अपना फॉर्म पूरा नहीं कर पाए थे.
अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन की प्रक्रिया को अंतिम दिन तक न टालें. वेबसाइट पर तकनीकी समस्या या किसी अन्य परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन पूरा करना बेहतर रहेगा.
8 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन में संशोधन
आयोग ने आवेदन में सुधार की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया है. अभ्यर्थी अपने ऑनलाइन आवेदन में जरूरी संशोधन 8 सितंबर 2026 तक कर सकेंगे। इसलिए फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारियों को अच्छी तरह जांच लेना जरूरी है.
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नियम और शुल्क में कोई बदलाव नहीं
UPSSSC की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने के अलावा आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और अन्य नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. अभ्यर्थियों को पहले से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन करना होगा.
आयोग ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और अपना आवेदन समय रहते पूरा कर लें. साथ ही आवेदन जमा करने के बाद फॉर्म की जानकारी और जरूरी दस्तावेजों को भी सुरक्षित रखना चाहिए.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>UP PET 2026 में आवेदन की तारीख बढ़ी, अब 7 सितंबर तक मौका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/up-pet-2026-में-आवेदन-की-तारीख-बढ़ी-अब-7-सितंबर-तक-मौका</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपी एसएसएससी) ने प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा-2026 (पीईटी-2026) के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. आयोग ने पीईटी-2026 के लिए पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर से बढ़ाकर 7 सितंबर 2026 कर दी है. इस संबंध में आयोग की ओर से सूचना जारी कर दी गई है.
आयोग ने दी यह जानकारी
आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा-2026 (पीईटी-2026) का विज्ञापन 1 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया गया था. इसके तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी. पहले पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी. अब आयोग ने अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर देते हुए इस अंतिम तिथि को 7 सितंबर 2026 तक विस्तारित कर दिया है.
7 सितंबर तक जमा कर सकेंगे शुल्क और आवेदन
नई व्यवस्था के अनुसार पीईटी-2026 में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थी अब 7 सितंबर 2026 तक पंजीकरण कर सकते हैं, निर्धारित आवेदन शुल्क जमा कर सकते हैं और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट कर सकते हैं. इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश निर्धारित समय सीमा में आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं. आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बाद अभ्यर्थियों को अपना आवेदन समय रहते पूरा करने का अतिरिक्त अवसर मिल गया है.
आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 8 सितंबर
आयोग ने स्पष्ट किया है कि शुल्क समायोजन एवं आवेदन पत्र में संशोधन की अंतिम तिथि 8 सितंबर 2026 ही रहेगी. यानी अभ्यर्थियों को आवेदन सबमिट करने के बाद यदि निर्धारित प्रावधानों के तहत किसी प्रकार का संशोधन करना है तो उसके लिए 8 सितंबर तक का समय रहेगा. अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन की नई समय सीमा का ध्यान रखते हुए प्रक्रिया पूरी करें और अंतिम समय का इंतजार न करें.
सिर्फ इन चीजों के लिए बढ़ी तारीख
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट करने की अंतिम तिथि में बदलाव किया गया है. पीईटी-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया, आवेदन शुल्क, चयन का आधार, निर्धारित शर्तें एवं अन्य दिशा-निर्देश वही रहेंगे, जो आयोग द्वारा पूर्व में जारी विज्ञापन में प्रकाशित किए गए हैं. इसलिए अभ्यर्थियों को पीईटी-2026 के मूल विज्ञापन में दिए गए सभी नियमों और निर्देशों के अनुसार ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हार को बनाया ताकत, 15 से ज्यादा बार फेल होने के बाद बिलाल खान ने पास किया CAPF</title>
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        <description><![CDATA[ हार को बनाया ताकत, 15 से ज्यादा बार फेल होने के बाद बिलाल खान ने पास किया CAPF ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>रील्स से गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन परेशान क्यों, 24 घंटे में क्यों बदला फैसला?</title>
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        <description><![CDATA[ दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रों के रील और वीडियो बनाने को लेकर जारी किए गए आदेश ने महज 24 घंटे में ही नया मोड़ ले लिया है. रविवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से ऐसा आदेश जारी किया गया था, जिसमें परिसर में बिना अनुमति रील, वीडियो या दूसरा डिजिटल कंटेंट बनाने और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई थी.
इसके अगले ही दिन सोमवार को यूनिवर्सिटी ने नया आदेश जारी कर इसे स्पष्ट किया और कहा कि विद्यार्थियों की क्रिएटिविटी को रोकना उनका उद्देश्य नहीं है. नए आदेश के बाद अब यूनिवर्सिटी परिसर में रील और वीडियो बनाने पर पूरी तरह रोक नहीं रहेगी, लेकिन डिजिटल कंटेंट बनाते समय भाषा, सब्जेक्ट और शालीनता और मर्यादा का ध्यान रखना होगा.&amp;nbsp;
पहले आदेश में क्या कहा गया था?
रविवार को यूनिवर्सिटी के नियंता की ओर से जारी आदेश में छात्रों को परिसर में रील या वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने से रोक दिया गया था. अगर किसी छात्र को वीडियो बनाना है, तो उसे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन से अनुमति लेने की बात कही गई थी. नियमों का उल्लंघन करने पर मामले की गंभीरता के अनुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी. इस आदेश के बाद यूनिवर्सिटी के अंदर इसे लेकर रिएक्शन सामने आने लगे. बताया गया कि कुछ शिक्षकों ने भी आदेश को लेकर नाराजगी जाहिर की. मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अगले ही दिन नया आदेश जारी करते हुए अपना रुख स्पष्ट किया.&amp;nbsp;
24 घंटे बाद यूनिवर्सिटी ने बदला फैसला&amp;nbsp;
सोमवार को जारी नए आदेश में यूनिवर्सिटी ने कहा कि विद्यार्थियों को रील और वीडियो के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना चाहिए. सरकार की ओर से ऑरेंज इकोनॉमी और क्रिएटिविटी इंडस्ट्री को बढ़ावा दिए जाने का जिक्र करते हुए प्रशासन ने कहा कि छात्रों की क्रिएटिविटी को सामने आने के लिए पॉजिटिव माहौल मिलना जरूरी है. यूनिवर्सिटी के अनुसार उसका उद्देश्य स्टूडेंट्स को रील बनाने से रोकना नहीं था. हालांकि क्रिएटिविटी के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखना भी जरूरी है. किसी भी डिजिटल कंटेंट में नफरत फैलाने वाली बात, आपत्तिजनक भाषा या किसी व्यक्ति, संस्थान अथवा समुदाय को &amp;nbsp;निशाना बनाने वाला कंटेंट नहीं होना चाहिए.&amp;nbsp;
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आखिर रील से परेशान क्यों गोरखपुर यूनिवर्सिटी?
यूनिवर्सिटी के अनुसार परिसर में बड़ी संख्या में छात्र, टीचर, कर्मचारी और दूसरे लोग मौजूद रहते हैं. ऐसे में बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्ड करने से कक्षा में परेशानी होती है. किसी व्यक्ति की बिना सहमति के रिकॉर्डिंग या परिसर की एक्टिविटी से जुड़ी दूसरी समस्या सामने आ सकती है. इस तरह सोशल मीडिया पर डाला गया कोई वीडियो तेजी से यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर भी पहुंच सकता है. यही वजह है कि यूनिवर्सिटी डिजिटल कंटेंट से जुड़ी गतिविधियों को अनुशासनात्मक और जिम्मेदारी के दायरे में रखने का जोर दिया. छात्रों की क्रिएटिविटी पर रोक लगाने की बजाय अब इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि रील या वीडियो किस तरह और किस उद्देश्य से बनाया जा रहा है.&amp;nbsp;
नियमावली में भी डिजिटल कंटेंट शामिल&amp;nbsp;
गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स के लिए लागू अनुशासन नियमावली में भी संशोधन किया है. नियमों में बदलाव के लिए तीन सदस्य कमेटी गठित की गई. कमेटी की ओर से दिए गए सुझाव के आधार पर नियमावली में संशोधन किया गया. संशोधित नियमों में परिषद में फोटो खींचना, वीडियो या रील बनाने और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करने जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया. संशोधित नियमावली तत्काल प्रभाव से लागू की गई. यूनिवर्सिटी के अतिरिक्त नियंता डॉ. वेद प्रकाश राय के अनुसार संशोधित नियमावली की जानकारी हॉस्टल के वार्डन और टीचर्स को दे दी गई है. उनके माध्यम से स्टूडेंट्स को नए नियमों और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में होने वाली कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रील्स, से, गोरखपुर, यूनिवर्सिटी, प्रशासन, परेशान, क्यों, घंटे, में, क्यों, बदला, फैसला</media:keywords>
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        <title>10वीं&amp;ITI पास युवाओं के लिए रेलवे में मौका, 4471 पदों पर भर्ती शुरू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/10वीं-iti-पास-युवाओं-के-लिए-रेलवे-में-मौका-4471-पदों-पर-भर्ती-शुरू</link>
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        <description><![CDATA[ रेलवे में अप्रेंटिसशिप करने का इंतजार कर रहे 10वीं और आईटीआई पास युवाओं के लिए अच्छी खबर है. रेलवे भर्ती सेल, दक्षिण रेलवे ने अलग-अलग ट्रेड में अप्रेंटिस के 4,471 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती में प्रेशर और एक्स आईटीआई दोनों कैटेगरी के उम्मीदवार शामिल है. ऑनलाइन आवेदन 28 अगस्त से शुरू हो चुके हैं और उम्मीदवार 27 सितंबर शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
साउथ रेलवे में हो रही भर्ती&amp;nbsp;
आरआरसी साउदर्न रेलवे की ओर से जारी भर्ती के अनुसार 4,471 खाली पदों को भरा जाएगा. इनमें 177 पद प्रेशर कैटेगरी के लिए और 4,308 पद एक्स आईटीआई कैटेगरी के लिए रखे गए हैं. प्रेशर कैटेगरी में फिटर, पेंटर और बिल्डर जैसे ट्रेड के लिए 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. वहीं मेडिकल लैब टेक्नीशियन से जुड़े पदों के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय के साथ पढ़ाई जरूरी है. एक्स आईटीआई कैटेगरी में फिटर, मशीनिस्ट, मोटर मैकेनिक व्हीकल, टर्नर, डीजल, मैकेनिक, कारपेंटर, पेंटर, वेल्डर, वायरमैन, प्लंबर, ड्राफ्टमैन, मैकेनिक आरएंडएसी, इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, सीओपीए-पीएएसएसए सहित कई ट्रेड शामिल है.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए क्या होनी चाहिए शैक्षणिक योग्यता?
फ्रेशर कैटेगरी के उम्मीदवारों को संबंधित योग्यता के अनुसार 10वीं या 12वीं पास होना जरूरी है. 10वीं आधारित ट्रेड के लिए उम्मीदवारों ने 10+2 सिस्टम के तहत कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं पास की होनी चाहिए. वहीं एक्स आईटीआई उम्मीदवारों के लिए 10वीं में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ संबंधित ट्रेड में मान्यता प्राप्त आईटीआई से ट्रेनिंग और एनसीवीटी-एससीवीटी प्रमाण पत्र जरूरी है. इलेक्ट्रीशियन ट्रेड के लिए 10वीं में साइंस होना जरूरी है. इलेक्ट्रीशियन मैकेनिक के लिए साइंस के साथ फिजिक्स केमिस्ट्री और मैथ्स की शर्ते दी गई है. वहीं सीओपीए-पीएएसएसए के लिए संबंधित ट्रेड का नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट जरूरी है. एससी-एसटी और पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों के लिए 10वीं में 50 प्रतिशत अंक की शर्त लागू नहीं होगी.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए आयु सीमा
रेलवे अप्रेंटिस भर्ती के लिए उम्मीदवार की उम्र 28 अगस्त 2026 के आधार पर देखी जाएगी. न्यूनतम आयु 15 वर्ष रखी गई है. फ्रेशर उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 22 वर्ष है, जबकि कुछ एक्स आईटीआई और एमएलटी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 24 वर्ष तक है. आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी.&amp;nbsp;
परीक्षा नहीं, मेरिट से होगा चयन&amp;nbsp;
इस भर्ती की खास बात यह है कि उम्मीदवारों के चयन के लिए लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा. फ्रेशर उम्मीदवारों की मेरिट 10वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी. वहीं एक्स आईटीआई उम्मीदवारों के लिए 10वीं और आईटीआई में मिले अंकों को सामान वेटेज देकर मेरिट तैयार की जाएगी. इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन किया जाएगा. रेलवे ने स्पष्ट किया है कि अप्रेंटिस के तौर पर चयन होने का मतलब रेलवे में स्थायी नौकरी मिलना नहीं है. यह भर्ती अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के लिए की जा रही है &amp;zwnj;
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कितना मिलेगा स्टाइपेंड?
इस भर्ती में सिलेक्टेेड उम्मीदवारों को ट्रेनिंग के दौरान हर महीने स्टाइपेंड मिलेगा. दसवीं पास फ्रेशर उम्मीदवारों को 8,200 रुपये प्रतिमाह, जबकि 12वीं पास फ्रेशर और एक्स आईटीआई उम्मीदवारों को 9,600 रुपये हर महीने स्टाइपेंड मिलेगा. प्रशिक्षण के अलावा अगले साल स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रावधान भी दिया गया है.&amp;nbsp;
आवेदन फीस
आवेदन के लिए जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये फीस देनी होगी. वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी और सभी महिला उम्मीदवारों को आवेदन फीस से छूट दी गई है. इसके अलावा दक्षिण रेलवे अप्रेंटिस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तारीख 27 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत का सबसे महंगा स्कूल कौन&amp;सा, वहां कितनी है LKG की फीस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-का-सबसे-महंगा-स्कूल-कौन-सा-वहां-कितनी-है-lkg-की-फीस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/भारत-का-सबसे-महंगा-स्कूल-कौन-सा-वहां-कितनी-है-lkg-की-फीस</guid>
        <description><![CDATA[ भारत में कई ऐसे स्कूल है जिनकी फीस लाखों में है जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके माता-पिता को हर साल लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं. खासकर मुंबई जैसे बड़े शहरों में कई इंटरनेशनल स्कूल अपनी पढ़ाई, सुविधाओं और अलग तरह के करिकुलम के लिए जाने जाते हैं. इनमें American School of Bombay&amp;nbsp; का नाम भी आता है. यह मुंबई में स्थित एक इंटरनेशनल स्कूल है, जहां Pre-K से लेकर Grade 12 तक पढ़ाई होती है. स्कूल खुद को एक स्वतंत्र American education day school बताता है. यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले बच्चे भी पढ़ते हैं. आइए जानते हैं यहां LKG की फीस कितनी है और बड़ी कक्षाओं में पढ़ाई का खर्च कितना बढ़ जाता है?
मुंबई में है American School of Bombay
American School of Bombay मुंबई में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के इलाके में स्थित है. इस स्कूल की शुरुआत 1981 में हुई थी और आज यहां अलग-अलग देशों के बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के लिए कई तरह की अलग-अलग गतिविधियां भी होती हैं. यहां का करिकुलम इंटरनेशनल स्तर का है और आगे की कक्षाओं में American High School Diploma के साथ International Baccalaureate Diploma भी कर सकते हैं.
LKG की फीस कितनी है?
यहां एक बात समझना जरूरी है कि ASB में भारतीय स्कूलों की तरह LKG नाम की क्लास नहीं होती. शुरुआती कक्षाओं को Pre-K और Kindergarten के नाम से जाना जाता है. उपलब्ध 2026-27 फीस जानकारी के मुताबिक Kindergarten से Grade 5 तक की सालाना ट्यूशन फीस करीब 34,450 अमेरिकी डॉलर है. भारतीय रुपये में यह रकम डॉलर की मौजूदा कीमत के हिसाब से करीब 30 लाख रुपये से ज्यादा बैठ सकती है.
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सिर्फ ट्यूशन फीस ही नहीं है पूरा खर्च
स्कूल में एडमिशन लेने पर सिर्फ सालाना ट्यूशन फीस ही नहीं देनी होती. उपलब्ध फीस जानकारी के अनुसार आवेदन के समय 250 डॉलर की एप्लीकेशन फीस और एडमिशन के समय 2,500 डॉलर की रजिस्ट्रेशन फीस भी है. Kindergarten से Grade 12 के लिए 30,000 डॉलर की एनरोलमेंट फीस भी बताई गई है. इसलिए पहली बार एडमिशन लेने वाले परिवार का कुल खर्च सिर्फ सालाना फीस से काफी ज्यादा होता है.
बड़ी क्लास में कितनी फीस है?
बच्चा जैसे-जैसे बड़ी क्लास में जाता है, फीस भी बढ़ जाती है. 2026-27 की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक Grades 6 से 10 के लिए सालाना ट्यूशन करीब 36,210 डॉलर है. वहीं Grades 11 और 12 के लिए यह करीब 37,180 डॉलर साल भर की बताई&amp;nbsp; है. यानी 2.73 लाख प्रतिमाहिना के बराबर .इसके अलावा कुछ दूसरी सेवाओं और सुविधाओं का खर्च अलग हो सकता है. इसलिए स्कूल में बच्चे की पूरी पढ़ाई का खर्च सिर्फ ट्यूशन फीस देखकर तय नहीं किया जा सकता.
स्कूल में कैसी पढ़ाई होती है?
American School of Bombay में पढ़ाई का तरीका सामान्य भारतीय स्कूलों से काफी अलग है. स्कूल में बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग गतिविधियों और सीखने के तरीकों पर भी ध्यान दिया जाता है. स्कूल के मुताबिक यहां 50 से ज्यादा देशों के बच्चे पढ़ते हैं. हाई स्कूल में छात्रों को American High School Diploma और International Baccalaureate Diploma की पढ़ाई करने का मौका मिलता है.
क्या इसे भारत का सबसे महंगा स्कूल कह सकते हैं?
American School of Bombay को भारत के सबसे महंगे इंटरनेशनल स्कूलों में से एक है यह कह सकते हैं. हालांकि किसी एक स्कूल को पूरे भारत का &amp;ldquo;सबसे महंगा स्कूल&amp;rdquo; कहना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग स्कूलों की फीस और एडमिशन चार्ज अलग होते हैं और सभी स्कूल अपनी पूरी फीस एक ही तरीके से नहीं बताते हैं.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>GDS के 23757 पदों पर आवेदन शुरू, 10वीं पास ऐसे करें अप्लाई </title>
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        <description><![CDATA[ इंडिया पोस्ट ने ग्रामीण डाक सेवक भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के तहत ब्रांच पोस्टमास्टर, असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर और डाक सेवक के कुल 23,757 पदों पर नियुक्ति की जा रही है. भर्ती के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू हो गई है, जबकि ऑनलाइन आवेदन कल यानी 2 सितंबर से भरे जाएंगे. ऐसे में योग्य उम्मीदवार इंडिया पोस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
10वीं पास के लिए मौका&amp;nbsp;
इंडिया पोस्ट जीडीएस भर्ती के लिए उम्मीदवार का किस मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं कक्षा पास होना जरूरी है. दसवीं में गणित और अंग्रेजी विषय पढ़ना और पास करना अनिवार्य है. इसके अलावा उम्मीदवार ने संबंधित राज्य या पोस्ट के लिए निर्धारित स्थानीय भाषा को भी दसवीं तक पढ़ा होना चाहिए. कुछ राज्यों में स्थानीय भाषा को लेकर अलग प्रावधान है. अरुणाचल प्रदेश, गोवा, सिक्किम और नागालैंड जैसे राज्यों में संबंधित स्थानीय जनजातीय भाषा की जानकारी का प्रमाण भी मांगा जा सकता है.&amp;nbsp;
18 से 40 वर्ष तक आयु सीमा&amp;nbsp;
जीडीएस भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष निर्धारित की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी मिलेगी. एससी और एसटी वर्ग को 5 वर्ष, ओबीसी को 3 वर्ष और पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों को 10 वर्ष तक की छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
मेरिट के माध्यम से होगा चयन&amp;nbsp;
इंडिया पोस्ट जीडीएस भर्ती की खास बात यह है कि इसमें उम्मीदवारों के चयन के लिए लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं लिया जाएगा. उम्मीदवारों की मेरिट 10वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी. मेरिट में चयनित उम्मीदवारों को आगे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. डॉक्यूमेंट सही पाए जाने के बाद भर्ती की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. चयन के बाद उम्मीदवारों को निर्धारित एंगेजमेंट प्रक्रिया और बेसिक ट्रेनिंग से भी गुजरना होगा.&amp;nbsp;
कितनी मिलेगी सैलरी?&amp;nbsp;
ग्रामीण डाक सेवक पदों पर चयनित उम्मीदवारों को टाइम रिलेटेड कंटिन्यूटी अलाउंस के तहत पेमेंट किया जाएगा. ब्रांच पोस्टमास्टर के लिए टीआरसीए 12,000 रुपये से 29,380 रुपये तक है. वहीं असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर और डाक सेवक के लिए यह राशि 10,000 रुपये से 24,470 रुपये तक निर्धारित है. जीडीएस पदों पर सामान्य तौर पर काम के घंटे जिम्मेदारी के अनुसार करीब 4 से 5 घंटे रोजाना होते हैं.&amp;nbsp;
किस कैटेगरी के लिए कितनी है आवेदन फीस?
जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन के लिए 100 फीस देनी होगी. वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, महिला और ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को आवेदन फीस से छूट दी गई है. फीस का पेमेंट ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.
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जीडीएस भर्ती के आवेदन से जुड़ी जरूरी तारीख&amp;nbsp;
इंडिया पोस्ट जीडीएस भर्ती के लिए ओटीआर की प्रक्रिया 31 अगस्त से 19 सितंबर 2026 तक चलेगी. ऑनलाइन आवेदन 2 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक किए जा सकेंगे. आवेदन में सुधार के लिए 23 और 24 सितंबर 2026 को करेक्शन विंडो उपलब्ध रहेगी.&amp;nbsp;
ऐसे करें जीडीएस भर्ती के लिए आवेदन&amp;nbsp;
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले इंडिया पोस्ट के जीडीएस भर्ती पोर्टल पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा. इसके लिए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जरूरत होगी. रजिस्ट्रेशन के बाद प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा. इसके बाद उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, 10वीं कक्षा की शैक्षणिक जानकारी और पसंदीदा पोस्ट पोस्टल डिविजन भरना होगा. निर्धारित प्रारूप में फोटो, सिग्नेचर अपलोड करने होंगे. फोटो जेपीजी-जेपीईजी फॉर्मेट में 30 से 100 केबी और सिग्नेचर 20 से 100 केबी के बीच होना चाहिए. फॉर्म जमा करने से पहले सभी जानकारी को अच्छी तरह जांच लें. जिन उम्मीदवारों पर आवेदन फीस लागू है, उन्हें फीस का पेमेंट करने के बाद ही आवेदन सबमिट करना होगा.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP में 12वीं पास महिलाओं के लिए आंगनवाड़ी में भर्ती, हजारों पदों पर आवेदन का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से अलग-अलग जिलों में आंगनबाड़ी सहायिका के खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है. इस भर्ती के लिए केवल महिला उम्मीदवार आवेदन कर सकती है. यूपी में यह भर्ती आंगनबाड़ी सहायिकाओं के पद पर जिला स्तर पर की जा रही है. इसलिए अलग-अलग जिलों के लिए हजारों पदों पर आवेदन की शुरुआत और अंतिम तारीख भी अलग है. वहीं इस भर्ती की खास बात यह है कि इसके लिए आवेदन करने वाली महिलाओं से किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी.&amp;nbsp;
12वीं पास महिलाएं कर सकती है पर आवेदन&amp;nbsp;
आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है. इससे ज्यादा शैक्षणिक योग्यता रखने वाली महिलाएं भी आवेदन कर सकती है. उम्मीदवार के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि वह जिस गांव, वार्ड, न्याय पंचायत का आवेदन कर रही है, वहीं की निवासी होनी चाहिए. इस भर्ती में केवल महिला उम्मीदवारों काे आवेदन करने का मौका दिया गया है. आवेदन करने वाली महिलाओं की उम्र कम से कम 18 और अधिकतम 35 वर्ष होनी चाहिए. आयु की गणना संबंधित भर्ती के निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी. आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी.&amp;nbsp;
कौन से जिले में कितने पदों पर भर्ती?
ललितपुर- 44 पद- अंतिम तारीख 3 सितंबर 2026&amp;nbsp;
चित्रकूट- 69 पद- अंतिम तारीख 5 सितंबर 2026&amp;nbsp;
कानपुर नगर- 307 पद- अंतिम तारीख 5 सितंबर 2026&amp;nbsp;
कुशीनगर- 214 पद- अंतिम तारीख 11 सितंबर 2026&amp;nbsp;
महाराजगंज- 141 पद- अंतिम तारीख 1 सितंबर 2026&amp;nbsp;
मथुरा- 544 पद- अंतिम तारीख 13 सितंबर 2026&amp;nbsp;
इन जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका के खाली पदों पर जिला स्तर पर भर्ती प्रक्रिया कराई जा रही है. हर जिले के लिए आवेदन की समय सीमा भी अलग-अलग निर्धारित की गई है.&amp;nbsp;
बिना फीस के भरना होगा फॉर्म&amp;nbsp;
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को कोई फीस नहीं देनी होगी. जनरल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एससी और एसटी सभी वर्गों के लिए आवेदन फीस जीरो रखी गई है. महिला उम्मीदवार घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती है. फॉर्म भरने के साथ उम्मीदवारों को अपनी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, फोटो, सिग्नेचर, आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट भी अपलोड करने होंगे.&amp;nbsp;
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मेरिट से होगा चयन&amp;nbsp;
आंगनवाड़ी सहायिका भर्ती में उम्मीदवारों के चयन के लिए किसी लिखित परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा. इस भर्ती के लिए चयन मेरिट के आधार पर किया जाना है. शैक्षणिक योग्यता के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होने के बाद चयनित उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. इसलिए आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपनी एजुकेशनल शैक्षणिक जानकारी ध्यान से भरने की सलाह भी दी गई है.&amp;nbsp;
ऐसे भरे आंगनबाड़ी भर्ती का फॉर्म&amp;nbsp;

ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी के ऑफिशियल वेबसाइट upanganwadibharti.in पर जाना होगा.&amp;nbsp;
इसके बाद नए उम्मीदवार के लिए दिए गए रजिस्ट्रेशन लिंक पर रजिस्ट्रेशन करना होगा.&amp;nbsp;
अब रजिस्ट्रेशन के दौरान नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, ईमेल आईडी और दूसरी जानकारी दर्ज करें.&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद मोबाइल नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरे.&amp;nbsp;
फाॅर्म में नाम, जन्म तिथि, एड्रेस, कैटेगरी, ग्राम सभा या वार्ड से जुड़ी जानकारी भरकर डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
सारी जानकारी भरने और आवेदन जांचने के बाद इसे सबमिट कर दें.
लास्ट में आवेदन फाॅर्म का एक प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बगैर प्रमोशन तहसीलदार से कैसे बनें डीएम? ये तरीका आएगा काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बगैर-प्रमोशन-तहसीलदार-से-कैसे-बनें-डीएम-ये-तरीका-आएगा-काम</link>
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        <description><![CDATA[ सरकारी नौकरी में तहसीलदार बनने के बाद IAS बनने का सपना पूरा करने के लिए सिर्फ प्रमोशन का इंतजार करना ही जरूरी नहीं है. IAS में पहुंचने का एक रास्ता UPSC Civil Services Examination भी है. इस परीक्षा के जरिए हर साल अलग-अलग सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है. अगर कोई तहसीलदार UPSC की परीक्षा देता है और उसकी रैंक व पसंद के अनुसार उसे IAS सेवा मिलती है , और वह IAS में सीधे भर्ती होने वाले अधिकारियों में शामिल होता है.इसके बाद अनुभव के आधार पर उसे आगे चलकर DM की जिम्मेदारी भी मिल सकती है. आइए आसान भाषा में समझते है की तहसीलदार रहते हुए भी UPSC के जरिए IAS कैसे बन सकते हैं.
तहसीलदार को UPSC क्यों देना होगा?
अगर कोई तहसीलदार प्रमोशन के जरिए IAS नहीं बनना चाहता और UPSC के रास्ते से IAS में जाना चाहता है, तो उसे UPSC की सिविल सेवा परीक्षा देनी होगी. तहसीलदार की नौकरी होने से उसे सीधे IAS का पद नहीं मिलता. उसे परीक्षा में आवेदन करना होगा और बाकी उम्मीदवारों की तरह परीक्षा के सारे चरण पूरे करने होते हैं.
UPSC में कौन-कौन से चरण होते हैं?
UPSC Civil Services Examination कई चरणों में होती है. &amp;nbsp;सबसे पहले उम्मीदवार को UPSC देने के लिए आवेदन करना होगा. उसके बाद प्रारंभिक परीक्षा यानी Prelims की परीक्षा होती है. इसमें सफल होने वाले उम्मीदवार मुख्य परीक्षा यानी Mains देते हैं. इसके बाद इंटरव्यू होता है. इन सभी चरणों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद अंतिम परीक्षा के परिणाम तैयार होता है.
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UPSC पास करने के बाद क्या होगा?
UPSC में पास होने के बाद उम्मीदवार को उसकी रैंक और पसंद के हिसाब से सेवा मिलती है. अगर उसे IAS सेवा मिलती है तो वह IAS अधिकारी बन सकता है. इसके बाद उसे IAS की ट्रेनिंग और नौकरी से जुड़ी दूसरी प्रक्रियाओं से गुजरना होता है. यानी UPSC पास करते ही सीधे DM की पोस्ट नहीं मिलती है.
IAS बनने के बाद DM कैसे बनते हैं?
IAS बनने के बाद अधिकारी को अलग-अलग पदों पर काम करने का मौका मिलता है. अधिकारी के अनुभव और सरकार के फैसले के आधार पर उसे अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं. इनमें से एक DM यानी District Magistrate का पद भी है. इसलिए तहसीलदार से UPSC के जरिए IAS बनने के बाद DM बनने का रास्ता भी खुल सकता है, लेकिन DM की पोस्टिंग अपने आप नहीं मिलती.
क्या प्रमोशन के बिना IAS बन सकते हैं?
&amp;nbsp;UPSC Civil Services Examination के जरिए IAS में जाने का रास्ता अलग है. वहीं राज्य सेवा के अधिकारियों के लिए IAS में जाने का प्रमोशन वाला रास्ता अलग होता है. इसलिए अगर कोई तहसीलदार UPSC के जरिए IAS बनना चाहता है तो उसे परीक्षा की पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा. सिर्फ तहसीलदार की नौकरी करने से सीधे IAS और DM का पद नहीं मिलता.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>महाराष्ट्र नीट यूजी काउंसलिंग: राउंड 1 में 10,509 छात्रों को मिला MBBS में एडमिशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महाराष्ट्र-नीट-यूजी-काउंसलिंग-राउंड-1-में-10509-छात्रों-को-मिला-mbbs-में-एडमिशन</link>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र में नीट यूजी काउंसलिंग के पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट जारी कर दिया गया है. स्टेट कोटा के तहत एमबीबीएस और बीडीएस प्रोग्राम में कुल 10,509 छात्रों को सीट आवंटित हुई. महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सेंट्रलाइज्ड एडमिशन प्रोसेस राउंड 1 की लिस्ट जारी की गई है. इस राउंड में एमबीबीएस की 8,065 और बीडीएस की 2,444 सीटों पर छात्रों को एडमिशन का मौका मिला है. कुल मिलाकर एमबीबीएस और बीडीएस की 10,646 सीटें उपलब्ध थी, जिनमें से 10,509 सीटें पहले राउंड में आवंटित की गई है. इनमें &amp;nbsp;एमबीबीएस की 8,129 सीटों में से 8,065 सीटें भर गई है, जबकि 64 सीटें अभी खाली है. ये सीटें दिव्यांग और अनाथ कैटेगरी के लिए आरक्षित है. इसी तरह बीडीएस की 2,517 सीटों में से 2,444 सीटों पर सीट आवंटन हुआ है और 73 सीटें इन कैटेगरी में खाली रह गई है.&amp;nbsp;
31 अगस्त से 4 सितंबर तक करना होगा रिपोर्ट&amp;nbsp;
राउंड 1 में जिन उम्मीदवारों को कॉलेज आवंटित किया गया है, उन्हें एडमिशन कंफर्म करने के लिए संबंधित कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा. कॉलेज में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया 31 अगस्त से 4 सितंबर शाम 5:30 बजे तक पूरी करनी होगी. उम्मीदवारों को रिपोर्टिंग के समय अपने जरूरी डॉक्यूमेंट साथ लेकर जाने होंगे. इसके अलावा फीस के लिए डिमांड ड्राफ्ट भी जमा करना होगा. सीईटी सेल के अनुसार बैंक की छुट्टी वाले दिन फीस के पेमेंट के लिए चेक स्वीकार किया जा सकता है. हालांकि अगले कार्य दिवस पर चेक को डिमांड ड्राफ्ट से बदलना जरूरी होगा. ऐसा नहीं करने पर उम्मीदवार का एडमिशन कैंसिल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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MBBS में इन कैटेगरी का रहा सबसे ज्यादा कट ऑफ&amp;nbsp;
महाराष्ट्र नीट यूजी काउंसलिंग राउंड 1 में सरकारी एमबीबीएस कॉलेज में ओपन कैटेगरी का कट ऑफ सबसे ज्यादा रहा. ओपन कैटेगरी में कट ऑफ 538 अंक रहा है. इसके बाद नोमेडिक ट्राइब डी कट ऑफ 535, स्पेशल बैकवर्ड क्लास का 534 और अन्य पिछड़ा वर्ग का 533 अंक रहा. सरकारी बीडीएस कॉलेज की बात करें तो यहां भी ओपन कैटेगरी का कट ऑफ सबसे ज्यादा 493 अंक रहा. वहीं स्पेशल बैकवर्ड क्लास के लिए कट ऑफ 484 अंक रहा.&amp;nbsp;
ऐसे चेक करें सीट अलॉटमेंट रिजल्ट&amp;nbsp;
जिन उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के लिए आवेदन किया था, वह अपना सीट अलॉटमेंट रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर देख सकते हैं. इसके लिए उम्मीदवार को महाराष्ट्र सीईटी सेल की वेबसाइट पर जाना होगा. इसके बाद यूजी मेडिकल सेक्शन में जाकर एमबीबीएस बीडीएस कोर्स के लिए सीट अलॉटमेंट का लिंक खोलना होगा. यहां से उम्मीदवार सीट अलॉटमेंट की लिस्ट डाउनलोड कर सकते हैं. सीट अलॉटमेंट रिजल्ट देखने के बाद उम्मीदवारों को अपना नाम, एप्लीकेशन नंबर, नीट यूजी रैंक, कैटेगरी और आवंटित कॉलेज में दूसरी जानकारी ध्यान से जांचनी होगी.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नीट पीजी में कैसे मिलेंगे नंबर? जानें 180 सवालों की मार्किंग स्कीम</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने 30 अगस्त 2026 को नीट पीजी परीक्षा आयोजित की थी. परीक्षा खत्म होने के बाद अब उम्मीदवारों को आंसर की का इंतजार है. NBEMS जल्द ही अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर आंसर की जारी कर सकता है. ऑफिशियल आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने परीक्षा में दिए गए जवाबों का मिलान NBEMS की ओर से एक्सेप्ट किए गए उत्तरों से कर सकेंगे. इसी के आधार पर वह अपने संभावित अंकों का आकलन कर पाएंगे. हालांकि अंतिम स्कोर के लिए ऑफिशियल आंसर की को ही आधार माना जाएगा. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि नीट पीजी के लिए नंबर कैसे मिलेंगे, इसमें 180 सवालों की मार्किंग कैसे होगी.&amp;nbsp;
180 सवालों का था पेपर&amp;nbsp;
इस साल नीट पीजी परीक्षा के पैटर्न में सवालों की संख्या कम की गई थी. परीक्षा में कुल 180 मल्टीपल चॉइस के क्वेश्चन पूछे गए थे और पूरे पेपर के लिए अधिकतम 720 अंक निर्धारित थे. इससे पहले परीक्षा में 200 सवाल होते थे. उम्मीदवार अपने संभावित अंक निकालने के लिए सही और गलत उत्तरों की संख्या के आधार पर मार्किंग स्कीम लागू कर सकते हैं.&amp;nbsp;
सही जवाब पर 4 अंक गलत पर कटेगा 1 अंक
नीट पीजी 2026 में हर सही उत्तर के लिए उम्मीदवार को चार अंक मिलेंगे. वहीं गलत उत्तर देने पर एक अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी. जिन सवालों को उम्मीदवार ने छोड़ दिया है, उनके लिए कोई अंक नहीं जोड़ा जाएगा और न ही अंक काटे जाएंगे. इसका मतलब है कि उम्मीदवार सही उत्तर के कुल अंक में से गलत उत्तरों के लिए काटे गए अंक घटाकर अपने स्कोर का अनुमान लगा सकते हैं.&amp;nbsp;
बराबर अंक आने पर ऐसे तय होगी रैंक&amp;nbsp;
अगर दो या उससे ज्यादा उम्मीदवारों के एक समान नंबर रहते हैं, तो उनकी रैंक तय करने के लिए टाई ब्रेकिंग नियम लागू किए जाएंगे. इसके लिए उम्मीदवारों के प्रदर्शन को तय क्रम में देखा जाएगा. सबसे पहले उस उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके गलत उत्तरों की संख्या कम होगी. यहां बराबरी रहती है तो सेक्शन ए में कम गलत जवाब देने वाले उम्मीदवारों की रैंक ऊपर होगी. इसके बाद जरूरत पड़ने पर सेक्शन बी, सी, डी और ई में गलत उत्तरों की संख्या को इसी क्रम में देखा जाएगा. इसके बावजूद टाई रहने पर एमबीबीएस की प्रोफेशनल परीक्षाओं में ज्यादा कुल अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी. अगर इसके बाद भी समानता बनी रहती है, तो ज्यादा उम्र वाले उम्मीदवारों को ऊपर की रैंक दी जाएगी.&amp;nbsp;
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2,63,535 उम्मीदवारों की परीक्षा पूरी हुई&amp;nbsp;
NBEMS की परीक्षा अपडेट के अनुसार नीट पीजी 2026 के लिए 2,65,980 उम्मीदवार निर्धारित है. यह परीक्षा देश भर में 338 शहरों में 1,111 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई. इनमें से 2,63,535 उम्मीदवारों की परीक्षा पूरी हुई थी. हालांकि जयपुर के सीतापुर क्षेत्र में स्थित दो परीक्षा केंद्रों पर बिजली खराबी के कारण परीक्षा पूरी नहीं हो सकी. इससे प्रभावित 2,445 उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
जयपुर में 5 सितंबर को होगा री-एग्जाम&amp;nbsp;
जयपुर में प्रभावित उम्मीदवारों के लिए नीट पीजी की दोबारा परीक्षा 5 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे आयोजित की जाएगी. सीतापुरा स्थित दो परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण इन उम्मीदवारों की परीक्षा में पूरी नहीं हो पाई थी.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026 का आज आखिरी मौका, ऐसे करें अप्लाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अजीम-प्रेमजी-स्कॉलरशिप-2026-का-आज-आखिरी-मौका-ऐसे-करें-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ अजीम प्रेमजी फाउंडेशन स्कॉलरशिप 2026-27 के लिए आवेदन करने का आज आखिरी मौका है. स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 अगस्त 2026 को शुरू हुई थी और 31 अगस्त को समाप्त हो रही है. ऐसे में एलिजिबल छात्रों को आज ही ऑनलाइन आवेदन करना होगा. स्कॉलरशिप के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों को ग्रेजुएशन या डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी करने में आर्थिक सहायता दी जाती है. इस योजना के तहत छात्राओं को ग्रेजुएशन या डिप्लोमा के दौरान हर साल 30,000 स्कॉलरशिप दी जाएगी.&amp;nbsp;
किन छात्रों को मिलेगी स्कॉलरशिप?&amp;nbsp;
अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप खासतौर उन छात्राओं के लिए है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती है और किस मान्यता प्राप्त अंडर ग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के पहले वर्ष में एडमिशन ले रही है. आवेदन के लिए छात्राओं को कुछ निर्धारित पात्रता पूरी करनी होगी. जैसे आवेदन करने वाली छात्रा ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई नियमित छात्रा के तौर पर किसी सरकारी स्कूल से की हो. साथ ही उसे किसी मान्यता प्राप्त ग्रेजुएशन डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के प्रथम वर्ष में एडमिशन मिला हो. इसके अलावा उसके कोर्स की अवधि 2 से 5 साल के बीच होनी चाहिए.
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मेरिट के आधार पर नहीं होगा चयन&amp;nbsp;
अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप मेरिट आधारित छात्रवृत्ति नहीं है. यानी केवल परीक्षा में ज्यादा अंक हासिल करने के आधार पर छात्राओं का चयन नहीं किया जाएगा. इसके लिए फाउंडेशन की ओर से निर्धारित पात्रता मांगों को पूरा करना जरूरी है. वहीं स्कॉलरशिप के तहत चयनित छात्राओं को हर साल 30,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी. यह सहायता उनके अंडरग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा कोर्स की अवधि के दौरान जारी रहेगी. फाउंडेशन ने आवेदन प्रक्रिया के लिए किसी भी तरह की फीस नहीं रखी है. स्कॉलरशिप के रजिस्ट्रेशन के नाम पर कोई फीस नहीं ली जाती है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति आवेदन के बदले पैसे मांगता है, तो छात्राओं को सावधान रहने की सलाह दी गई है.
कैसे करें स्कॉलरशिप के लिए आवेदन?

आवेदन करने के लिए सबसे पहले अजीम प्रेमजी की ऑफिशियल वेबसाइट azimpremjifoundation.org. पर जाना होगा.&amp;nbsp;
इसके बाद Register New Applicants Cohort 2026 के ऑप्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब अपना रजिस्टर मोबाइल नंबर और ओटीपी के जरिए उसे वेरीफाई करें.
इसके बाद यूजर आईडी और पासवर्ड बनाकर लॉगिन करें.
आवेदन में मांगी गई सभी जानकारी भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
इसके बाद बैंक खाते की सही जानकारी दर्ज करें.&amp;nbsp;
वहीं लास्ट में फॉर्म में भरी गई जानकारी को जांचने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कौन हैं मेजर ऋषभ सिंह संब्याल? जिन्होंने राष्ट्रपति के ADC पद से लिया रिटायरमेंट</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ कई आधिकारिक कार्यक्रमों में नजर आने वाले मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अब भारतीय सेना से रिटायरमेंट ले लिया है. करीब 12 साल तक सेना में सेवा देने के बाद, उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लिया है. राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहते हैं. जिसकी वजह से &amp;nbsp;मेजर संब्याल सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरा बन गए. राष्ट्रपति के ADC के तौर पर संब्याल की भूमिका ने उन्हें आम लोगों के बीच पहचान दिलाई, लेकिन इससे पहले भी उनके सैन्य करियर कई अहम जिम्मेदारी से जुड़ा रहा है. उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया. 4 पैरा स्पेशल फोर्सज में सेवा दी और इसके बाद राष्ट्रपति भवन में एडीसी की जिम्मेदारी संभाली.&amp;nbsp;
NDA से शुरू हुआ सेना का सफर&amp;nbsp;
मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने 2013 में एनडीए की परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह 133वें एनडीए कोर्स का हिस्सा बने, जिसकी शुरुआत 2014 में हुई थी. उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी में मिलिट्री स्टडीज और डिफेंस मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की. सेना में शुरुआती करियर के दौरान ही उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में नेतृत्व करने का अवसर मिला. 2021 में कैप्टन ऋषभ संब्याल ने जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया. इसी टुकड़ी को बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट ट्रॉफी भी मिली थी. इसके बाद उन्होंने सेना की 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में सेवा दी, जिस डैगर्स के नाम से भी जाना जाता है. वहीं स्पेशल फोर्सज में सेवा के दौरान उन्हें बलिदान बैज मिला था.&amp;nbsp;
राष्ट्रपति के ADC कैसे बने ऋषभ संब्याल?
सांब्याल के सैन्य करियर में एक अहम पड़ाव तब आया जब उनका चयन राष्ट्रपति के एडीसी के तौर पर हुआ. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मार्च 2023 में राष्ट्रपति के ADC के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी. ADC की जिम्मेदारी केवल राष्ट्रपति के साथ औपचारिक कार्यक्रमों में मौजूद रहने तक सीमित नहीं होती, इस भूमिका में प्रोटोकॉल, कार्यक्रमों में सुरक्षा और राष्ट्रपति के व्यस्त कार्यक्रम से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शामिल होती है. उनके प्रोफेशनल प्रोफाइल में प्रोटोकॉल मैनेजमेंट, एग्जीक्यूटिव सिक्योरिटी और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ काम करने का एक्सपीरियंस दर्ज है. उन्होंने कई देश से जुड़े आधिकारिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में भी काम किया है.&amp;nbsp;
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वायरल फोटो ने बनाया सोशल मीडिया सेंसेशन&amp;nbsp;
राष्ट्रपति के ADC के तौर पर संब्याल लगातार द्रौपदी मुर्मू के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों और विदेशी दौरों में नजर आने लगे. उनकी सैन्य वर्दी, अनुशासनात्मक अंदाज और शांत व्यक्तित्व ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा. राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीर और वीडियो अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर होने लगे. खासकर बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान उनकी मौजूदगी को लेकर यूजर्स ने खूब प्रतिक्रिया दी. इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर नेशनल क्रश भी बुलाया जाने लगा.&amp;nbsp;
करीब 12 साल बाद सेना से लिया रिटायरमेंट&amp;nbsp;
ऋषभ सिंह ने करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद भारतीय सेना से प्रीमेच्योर रिटायरमेंट लिया है. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात भी की. इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए सांब्याल ने राष्ट्रपति से मिले मार्गदर्शन और सीट के लिए आभार भी जताया. हालांकि उनके समय से पहले रिटायरमेंट लेने को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से वजह सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कौन, हैं, मेजर, ऋषभ, सिंह, संब्याल, जिन्होंने, राष्ट्रपति, के, ADC, पद, से, लिया, रिटायरमेंट</media:keywords>
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        <title>जयपुर के दो केंद्रों पर बिजली की समस्या से AIIMS CRE 2026 परीक्षा रद्द, नई तारीख का ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ओर से कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (CRE) 2026 का आयोजन देशभर में किया जा रहा है. इस परीक्षा के माध्यम से AIIMS सहित कई केंद्रीय सरकारी और स्वायत्त स्वास्थ्य संस्थानों में ग्रुप B और ग्रुप C के विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी. AIIMS नई दिल्ली का परीक्षा विभाग वर्ष 2021 से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इस परीक्षा का आयोजन कर रहा है. इस बार परीक्षा में जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, डेटा एंट्री ऑपरेटर, पर्सनल असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर, प्राइवेट सेक्रेटरी, असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर, रिसेप्शनिस्ट, जूनियर मेडिकल रिकॉर्ड्स ऑफिसर, जूनियर वार्डन, हॉस्टल वार्डन, टेलीफोन ऑपरेटर और सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर सहित कई पद शामिल हैं.
जयपुर के दो सेंटर्स पर आई परेशानी
CRE 2026 परीक्षा 31 अगस्त और 1 सितंबर को तीन शिफ्ट में आयोजित की जा रही है. अलग-अलग शिफ्ट रखने का उद्देश्य उन उम्मीदवारों को सुविधा देना है, जिन्होंने एक से अधिक पदों के लिए आवेदन किया है. इस परीक्षा के लिए कुल 30,142 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है. 31 अगस्त की पहली शिफ्ट में 21,098 उम्मीदवार पंजीकृत थे, जिनमें से 16,193 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. देश के अधिकतर केंद्रों पर परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार हुई. हालांकि, राजस्थान के जयपुर स्थित TCS iON Digital Zone, सीतापुरा के दो केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण परीक्षा प्रभावित हुई. ये केंद्र RJ0101 और RJ0102 हैं. दोनों केंद्रों पर कुल 2,000 उम्मीदवार पंजीकृत थे. इनमें RJ0101 से 1,342 और RJ0102 से 436 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए.
बिजली की समस्या से परीक्षा में आई रुकावट
परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू हुई थी। इसी दौरान दोनों केंद्रों की आंतरिक बिजली आपूर्ति में समस्या आ गई. इससे परीक्षा प्रक्रिया बाधित हो गई. उम्मीदवारों के हित और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए AIIMS ने इन केंद्रों की परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया.
7 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा
जयपुर के दोनों केंद्रों पर पंजीकृत उम्मीदवारों की परीक्षा अब 7 सितंबर 2026 को दोबारा कराई जाएगी. इसके लिए नए परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है. उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर परीक्षा एक साथ या अलग-अलग समूहों में आयोजित की जा सकती है.
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TCS से मांगी गई रिपोर्ट
AIIMS ने TCS से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, कंपनी को सिस्टम लॉग, CCTV फुटेज और कंट्रोल रूम की बातचीत से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से परीक्षा में आई रुकावट के कारणों की जांच की जाएगी. AIIMS ने कहा है कि वह भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SBI में ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें कैसे करें अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा मौका सामने आया है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI ने ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर कैटेगरी के तहत निकाली गई इस भर्ती में इंटरनेशनल बैंकिंग ग्रुप यानी IBG में ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर के पद भरे जाएंगे.
कितनी हैं वैकेंसी?
SBI ने इस भर्ती के लिए कुल 35 पदों की जानकारी दी है. इनमें से 14 पद जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-1 यानी JMGS-I के लिए हैं, जबकि 21 पद मिडिल मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-2 यानी MMGS-II के लिए रखे गए हैं. जो उम्मीदवार दोनों ग्रेड की एलिजिबिलिटी पूरी करते हैं, वे दोनों पदों के लिए अलग-अलग आवेदन भी कर सकते हैं.
कब से कब तक कर सकते हैं आवेदन?
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 29 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. SBI ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें, क्योंकि वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक आने से टेक्निकल दिक्कतें आ सकती हैं.
क्या है एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया?
दोनों पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन डिग्री होनी चाहि.। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास भारतीय बैंकिंग एवं वित्त संस्थान यानी IIBF से फॉरेक्स ऑपरेशंस में सर्टिफिकेशन भी होना जरूरी है. यह सर्टिफिकेट 31 जुलाई 2026 या उससे पहले जारी हुआ होना चाहिए.
एज लिमिट JMGS-I पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र 21 से 30 साल के बीच होनी चाहिए. वहीं MMGS-II पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र 23 से 32 साल के बीच रखी गई है. उम्र की गणना 31 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी.
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कैसे होगा सिलेक्शन?
इस भर्ती में किसी तरह की लिखित परीक्षा नहीं होगी. उम्मीदवारों का चयन शॉर्टलिस्टिंग और पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. सबसे पहले उम्मीदवारों की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और वर्क एक्सपीरियंस के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग होगी. इसके बाद शॉर्टलिस्ट हुए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. फाइनल मेरिट लिस्ट इंटरव्यू में मिले नंबरों के आधार पर तैयार की जाएगी.
कैसे करें आवेदन?
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले SBI की आधिकारिक करियर वेबसाइट पर जाना होगा. वहां करंट ओपनिंग्स सेक्शन में जाकर ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा. इसके बाद ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरना होगा. जरूरी डॉक्यूमेंट्स और सर्टिफिकेट अपलोड करने के बाद आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन करना होगा. फॉर्म सबमिट करने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लेना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, में, ट्रेड, फाइनेंस, ऑफिसर, के, लिए, रजिस्ट्रेशन, शुरू, जानें, कैसे, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>2014 से लेकर अब तक, उत्तर भारत में कितने स्कूल हुए बंद?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/2014-से-लेकर-अब-तक-उत्तर-भारत-में-कितने-स्कूल-हुए-बंद</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर नीति आयोग की एक रिपोर्ट ने बड़ी चिंता खड़ी कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 साल में देशभर में लगभग 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, यानी औसतन हर दिन करीब 25 स्कूल बंद हुए हैं. इसी दौरान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भी बड़ी गिरावट देखी गई है. आइए जानते हैं आंकड़े क्या कहते हैं और इसके पीछे की असली वजह क्या हैं?
स्कूलों की संख्या में आई बड़ी गिरावट
नीति आयोग की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों की संख्या करीब 11.07 लाख से घटकर 10.13 लाख रह गई है. यानी एक दशक के दौरान करीब 94 हजार सरकारी स्कूलों पर ताला लग गया है. वहीं इसी दौर में निजी स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है.
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दाखले में भी आई है कमी
स्कूलों की संख्या घटने के साथ साथ बच्चों के दाखले में भी बड़ी गिरावट देखी की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में करीब 2.26 करोड़ की कमी आई है. हालांकि स्कूल बंद होने का यह मतलब हर जगह नहीं है कि शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो गई है. कई इलाकों में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के दूसरे स्कूलों के साथ मिला दिया गया है.
स्कूल बंद होने के पीछे कई वजह
सरकारी स्कूलों की संख्या घटने की सिर्फ एक वजह नहीं है. कई राज्यों में बच्चों की संख्या कम होने पर छोटे स्कूलों का दूसरे स्कूलों में मिला दिया गया है. कुछ इलाकों में जन्म दर में कमी आने से भी स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या पर असर हुई है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों से लोगों का शहरों की तरफ पलायन और निजी स्कूलों की तरफ बढ़ता रुझान भी सरकारी स्कूलों के दाखले को असरअंदाज करने वाले नजह में शामिल हो सकता है.
यह बात ध्यान में रखें
94 हजार स्कूलों का यह आंकड़ा पूरे भारत का है, सिर्फ उत्तर भारत का नहीं. इसलिए बिना आधिकारिक आंकड़ों के यह कहना सही नहीं होगा कि 2014 से अब तक अकेले उत्तर भारत में कितने स्कूल बंद हुए. पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दूसरे राज्यों के अलग अलग सरकारी आंकड़ों को देखना बेहतर होगा.
निजी स्कूलों की तरफ बढ़ता रुझान
जिस दौर में सरकारी स्कूलों की संख्या कम हुई, उसी दौरान निजी स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बड़े बदलाव की तरफ इशारा करता है. हालांकि सरकारी स्कूलों के बंद होने के पीछे कम एडमिसन और जनसंख्या से जुड़े बदलाव जैसे वजह भी&amp;nbsp; जिम्मेदार हो सकते हैं, और अलग अलग राज्यों में इसकी वजह अलग भी हो सकती हैं.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में ड्राइवर की भर्ती, 18 सितंबर तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में भर्ती निकली है. हाई कोर्ट ने ड्राइवर भर्ती 2026 के तहत 25 पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए हैं. एलिजिबल उम्मीदवार 18 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन हाई कोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे. इस भर्ती का नोटिफिकेशन 28 अगस्त को जारी किया गया था. ड्राइवर के कुल 25 पदों में 21 पद जनरल कैटेगरी, 3 पद एससी-एसटी-बीसी और 1 पद पूर्व सैनिक के लिए निर्धारित है. हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जरूरत के अनुसार रिक्त पदों की संख्या में बदलाव भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
12वीं पास उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
ड्राइवर पद के लिए उम्मीदवार कम से कम 12वीं पास होना जरूरी है. इसके साथ मैट्रिक में हिंदी या पंजाबी विषय पढ़ा होना चाहिए. उम्मीदवार के पास वैलिड लाइट मोटर व्हीकल लाइसेंस भी होना चाहिए. इसके अलावा कार चलने का कम से कम 2 वर्ष का एक्सपीरियंस मांगा गया है. नोटिफिकेशन के अनुसार &amp;nbsp;उम्मीदवार को लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया होना चाहिए.&amp;nbsp;
18 से 35 साल तक की उम्र सीमा&amp;nbsp;
ड्राइवर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र 18 सितंबर 2026 को 18 वर्ष से कम और 35 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
प्रेक्टिकल टेस्ट और इंटरव्यू से होगा चयन&amp;nbsp;
ड्राइवर पद के लिए उम्मीदवार का चयन प्रैक्टिकल टेस्ट कम इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा. आवेदन प्राप्त होने के बाद उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद डॉक्यूमेंट की जांच और मेडिकल परीक्षा की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी. इसके अलावा चयनित उम्मीदवारों को शुरुआत में ट्रेनिंग दी जाएगी. इस दौरान उम्मीदवार को सैलरी चंडीगढ़ प्रशासन के निर्धारित दैनिक मजदूरी के आधार पर दी जाएगी.&amp;nbsp;
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1000 तक है आवेदन फीस&amp;nbsp;
इन पदों पर आवेदन के लिए उम्मीदवारा की आवेदन फीस को कैटेगरी के आधार पर अलग-अलग निर्धारित किया गया है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से बाहर के सामान्य और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए फीस 1000 रुपये निर्धारित है. वहीं पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के एससी, एसटी, बीसी वर्ग और पूर्व सैनिकों के लिए आवेदन फीस 800 रुपये निर्धारित है.&amp;nbsp;
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन&amp;nbsp;

आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को सबसे पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट &amp;nbsp;की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा.&amp;nbsp;
अब भर्ती से संबंधित लिंक खोलने के बाद रजिस्ट्रेशन करना होगा.
उसके बाद लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरना होगा.
अब फॉर्म में पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल भरें.
इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और फीस जमा कर दें.

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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा, लंदन की नौकरी छोड़ क्लियर किया था UPSC</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर किए गए लंबे-चौड़े पोस्ट के जरिए दी. सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहने वाली आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है. लाखों रुपये सैलरी वाली विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटना और फिर UPSC जैसी मुश्किल परीक्षा को क्रैक करना, यह सफर आसान नहीं रहा. आइए जानते हैं कौन हैं आईएएस दिव्या मित्तल और कैसा रहा उनका करियर.&amp;nbsp;
हरियाणा से हैं दिव्या मित्तल&amp;nbsp;
दिव्या मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं. पढ़ाई में शुरू से ही होशियार रहीं दिव्या ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए भी किया. इतनी शानदार पढ़ाई के बाद उन्हें विदेश में नौकरी का मौका मिला और वह लंदन चली गईं.
लंदन में जेपी मॉर्गन में की नौकरी
एमबीए पूरा करने के बाद दिव्या मित्तल को लंदन की मशहूर कंपनी जेपी मॉर्गन में लाखों रुपये सैलरी वाली नौकरी मिली. करियर की नजर से यह किसी भी युवा के लिए सपनों जैसा मौका था. लेकिन विदेश में लंबे समय तक रहने के बावजूद दिव्या का मन वहां नहीं लगा. देश सेवा करने की चाहत उनके मन में लगातार बनी रही, जिसके चलते उन्होंने बड़ा फैसला लिया.
नौकरी छोड़कर लौटीं भारत, शुरू की UPSC की तैयारी
दिव्या मित्तल ने लंदन की मोटी सैलरी वाली नौकरी को छोड़कर भारत वापस आने का फैसला किया. भारत लौटने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह UPSC की तैयारी में झोंक दिया. खास बात यह है कि उन्होंने यह तैयारी अकेले नहीं, बल्कि अपने पति गगनदीप सिंह के साथ मिलकर की. गगनदीप सिंह भी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से थे और दोनों ने साथ मिलकर मेहनत की. पति गगनदीप सिंह ने साल 2011 में आईएएस परीक्षा पास की थी.
दिव्या मित्तल ने साल 2012 में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बनने का सम्मान हासिल किया. इसके बाद उन्होंने एक बार फिर हिम्मत नहीं हारी और 2013 में दोबारा परीक्षा दी. इस बार उन्होंने 68वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बन गईं. कम समय में दो बार यूपीएससी क्रैक करना उनकी मेहनत और लगन को दिखाता है.
कई जिलों में संभाल चुकी हैं जिम्मेदारी
आईएएस बनने के बाद दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर में पोस्ट हुईं. उन्होंने संत कबीर नगर, मिर्जापुर और बस्ती जैसे जिलों में जिला मजिस्ट्रेट के तौर पर काम किया है. हर जिले में उनका कार्यकाल प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से सफल माना जाता है. इसके बाद उन्हें देवरिया जिले की डीएम की जिम्मेदारी भी सौंपी गई.
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बाढ़ राहत कार्यों के दौरान चर्चा में आईं
देवरिया की डीएम रहते हुए दिव्या मित्तल एक बार बाढ़ प्रभावित इलाके का निरीक्षण करने पहुंची थीं. इस दौरान सड़क पर पानी भरा होने और काम में देरी को लेकर उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाई थी. तेज धूप के बावजूद वह मैदान में डटी रहीं और अधिकारियों के साथ मिलकर हालात का जायजा लिया. उनकी यह सक्रियता सोशल मीडिया पर काफी पसंद की गई थी.
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आईएएस दिव्या मित्तल की कहानी बताती है कि अच्छी सैलरी और आरामदायक जिंदगी छोड़कर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद विदेश की नौकरी छोड़कर देश सेवा को चुनना आसान फैसला नहीं था. यही वजह है कि आज दिव्या मित्तल की गिनती उन प्रेरणादायक अधिकारियों में होती है, जिनकी कहानी हर यूपीएससी एस्पिरेंट को मोटिवेट करती है.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अब NEET PG एग्जाम में भी गड़बड़ी, जयपुर के सेंटर पर रद्द हुई परीक्षा </title>
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        <description><![CDATA[ देश में आयोजित होने वाली कई बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद अब NEET PG परीक्षा में भी लापरवाही का मामला सामने आया है. जयपुर के सीतापुरा केंद्र पर NEET PG एग्जाम के दौरान सर्वर में अचानक गड़बड़ी आ गई, जिसके बाद अभ्यर्थियों में परीक्षा में दिक्कत का सामना करना पड़ा. जानकारी के मुताबिक, अभ्यर्थियों ने एग्जामिनेशन हॉल से बाहर निकलकर परीक्षा कराने वाली एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. मामला बढ़ता देख नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने परीक्षा को रद्द कर दिया है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
NBEMS की ओर से नोटिस जारी करके परीक्षा की नई तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है. सूचना के मुताबिक, अब इस सेंटर पर 5 सितंबर को दोबारा परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. यह परीक्षा दोपहर 3 बजे से आयोजित की जाएगी. इसके साथ ही NBEMS ने परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को हुई परेशानी पर खेद भी जताया है.&amp;nbsp;
एक घंटे में तीन बार आई सर्वर में दिक्कत&amp;nbsp;
जानकारी के मुताबिक, नीट पीजी की परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को एक घंट में तीन बार सर्वर में दिक्कत का सामना करना पड़ा. बार-बार गड़बड़ी होने के बाद छात्र परीक्षा केंद्र से बाहर आ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. प्रशासन का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्रों के बाहर आने से परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई, क्योंकि कई छात्रों ने इस दौरान सवालों को भी डिस्कस किया, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है. ऐसे में कई छात्रों ने परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराए जाने की मांग की.&amp;nbsp;
अलग से एडमिट कार्ड होंगे जारी&amp;nbsp;
इधर, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज ने परीक्षा रद्द कर नई तारीख का ऐलान कर दिया है. बोर्ड ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर को दोपहर 3 बजे जयपुर में दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है. बोर्ड की ओर से कहा गया है कि दोबारा परीक्षा केंद्र समेत अन्य जानकारी अलग से जारी की जाएगी, साथ ही संशोधित एडमिट कार्ड भी जारी किए जाएंगे.&amp;nbsp;
देशभर में आयोजित हो रही परीक्षा&amp;nbsp;
बता दें, एनबीईएमएस के अनुसार 30 अगस्त को देशभर में 2,73,096 पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए 1111 केंद्रों पर नीट -पीजी 2026 परीक्षा आयोजित की गई. इनमें से 2,65,980 अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित हुए और लगभग 2,63,535 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी हुई. एनबीईएमएस ने कहा है कि जयपुर के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजी सीतापुर के टीसी नंबर 41682 एवं 41683 पर केंद्र में आंतरिक तकनीकी समस्या के कारण सर्वर डाउन होने से परीक्षा पूरी नहीं हो सकी.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>क्या होता है राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार? कैसे मिलता है यह सम्मान</title>
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        <description><![CDATA[ हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर देश के कुछ चुनिंदा शिक्षकों को एक बेहद खास सम्मान से नवाजा जाता है. यह सम्मन है, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार. यह अवॉर्ड सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उन शिक्षकों की मेहनत, समर्पण और छात्रों की जिंदगी बदलने वाले योगदान को पहचान देने का एक जरिया है.
आखिर यह पुरस्कार है क्या?
शिक्षा मंत्रालय हर साल देशभर के उन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार देता है, जिन्होंने अपने स्कूल, कॉलेज या संस्थान में पढ़ाई के तरीके और छात्रों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए खास प्रयास किए हों. इसका मकसद है शिक्षकों के नवाचार, डेडिकेशन और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को सामने लाना, ताकि बाकी शिक्षकों को भी मोटिवेशन मिल सके.
कौन कर सकता है नामांकन?
इसके लिए आवेदन का तरीका काफी आसान रखा गया है. सबसे पहला तरीका है सेल्फ नॉमिनेशन यानी कि शिक्षक खुद अपना फॉर्म भर सकता है. दूसरा तरीका है इंस्टिट्यूशनल नॉमिनेशन, जिसमें कॉलेज या संस्थान का प्रमुख किसी शिक्षक का नाम आगे भेज सकता है. तीसरा तरीका है पीयर नॉमिनेशन जिसमें उसी संस्थान के साथी शिक्षक किसी फैकल्टी मेंबर का नाम नामांकित कर सकते हैं. आवेदन ऑनलाइन आधिकारिक पोर्टल पर किया जाता है और साथ में शिक्षक को अपने काम से जुड़े दस्तावेज, फोटो, वीडियो और उपलब्धियों का पूरा पोर्टफोलियो भी जमा करना होता है.
ऐसे होती है सख्त छंटनी
सेलेक्शन प्रोसेस आसान नहीं होती है. सबसे पहले जिला या क्षेत्रीय स्तर पर आवेदनों की छंटनी होती है, इसके बाद राज्य या संगठन स्तर पर मूल्यांकन होता है और आखिर में एक स्वतंत्र राष्ट्रीय जूरी अंतिम फैसला लेती है. कुल मिलाकर तीन चरणों से गुजरने के बाद ही किसी शिक्षक का नाम फाइनल लिस्ट में शामिल होता है. मूल्यांकन में शिक्षक के काम और प्रदर्शन से जुड़े मानदंडों को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है.
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कितने शिक्षकों को मिलता है यह सम्मान?
हर साल इस पुरस्कार के लिए चुने जाने वाले शिक्षकों की संख्या तय नहीं रहती है, बल्कि यह हर साल थोड़ी बदलती है. हाल के वर्षों में यह आंकड़ा 48 से 50 शिक्षकों के बीच रहा है, जिनमें स्कूल, उच्च शिक्षा और कौशल विकास मंत्रालय से जुड़े शिक्षक भी शामिल होते हैं. चुने गए शिक्षकों में पुरुष और महिला दोनों शामिल होते हैं, और वे अलग-अलग राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का रिप्रेजेंटेशन करते हैं.
सम्मान के साथ क्या मिलता है?&amp;nbsp;
पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों को शिक्षक दिवस के मौके पर एक खास समारोह में सम्मानित किया जाता है, जिसमें प्रमाण पत्र, मेडल और स्मृति चिन्ह दिया जाता है. यह सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय के लिए गर्व करने का लम्हा होता है, जो यह दिखाता है कि मेहनत और लगन से किया गया काम कभी नजरअंदाज नहीं किया जाता है.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी में अब इन छात्रों की भी बनेगी अपार आईडी, ये रहेगी प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ यूपी बोर्ड से जुड़े कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है. योगी सरकार अब इन छात्रों की डिजिटल पहचान को मजबूत बनाने के लिए अपार आईडी पर खास फोकस कर रही है, जिससे वन नेशन-वन स्टूडेंट आईडी की व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सके. इसके तहत, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 9 और 11 के अग्रिम रजिस्ट्रेशन के लिए निर्देश जारी किए हैं, जबकि कक्षा 10 और 12 के परीक्षा आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया भी साथ साथ चल रही है. परिषद ने सभी स्कूलों से अपील की है कि छात्रों की अपार आईडी बनवाकर उसे आवेदन पत्र में दर्ज करें.
परिषद ने साफ किया है कि अपार आईडी देना फिलहाल जरूरी नहीं है. फिर भी छात्रों के फायदे को देखते हुए इसे बनवाने का अनुरोध किया गया है, क्योंकि यह उनके डिजिटल ऐकडमिक भविष्य को सुरक्षित रखने में मददगार होगा. माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह के मुताबिक, सभी स्कूल प्रिंसिपल, शिक्षकों और माता और पिता से गुजारिस किया गया है कि वे अग्रिम रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख से पहले सौ फीसदी छात्रों की अपार आईडी दर्ज करा दें.
कैसे बनती है अपार आईडी?&amp;nbsp;
अपार आईडी का निर्माण एक सरल और सुरक्षित प्रोसेस है, जो पूरी तरह माता-पिता की सहमति से की जाती है. इसके लिए माता-पिता को स्कूल के जरिए सहमति देनी होती है, जिसके बाद छात्र की एक यूनिक डिजिटल आईडी तैयार हो जाती है. यह आईडी छात्र के पूरे ऐकडेमिक करियर से जुड़ी रहती है, चाहे वह किसी भी स्कूल या राज्य में पढ़ाई क्यों न करें.
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छात्रों को क्या होगा फायदा?
सही जानकारी और आंकड़ों के आधार पर तैयार होने वाली यह आईडी छात्रों को स्कॉलरशिप, योजनाओं और बाकी ऐकडेमिक सुविधाओं का लाभ आसानी से दिलाने में मदद करेगी. साथ ही, अगर कोई छात्र स्कूल या राज्य बदलता है तो उसका पूरा ऐकडेमिक रिकॉर्ड इसी आईडी के जरिए आसानी से ट्रैक हो सकेगा, जिससे कागजी झंझट भी कम होगा.
समय रहते प्रक्रिया पूरी करना जरूरी
परिषद ने साफ किया है कि अग्रिम रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख से पहले ही यह प्रोसेस पूरी कर ली जाए. माता-पिता और स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे इसमें देरी न करें, ताकि छात्रों को आगे चलकर किसी भी योजना या सुविधा का लाभ लेने में दिक्कत न हो.
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        <title>10वीं की मार्कशीट पर बार&amp;बार नहीं बदल पाओगे जन्मतिथि, UP Board ने सख्त कर दिए नियम</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र और मार्कशीट में जन्मतिथि संशोधन को लेकर स्कूलों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब स्टूडेंट्स की जन्मतिथि दर्ज करते वक्त स्कूलों को पहली बार एडमिशन के दौरान जमा किए गए वैलिड एज प्रूफ को ही आधार बनाना होगा. इसके बाद जन्मतिथि में किसी भी तरह के बदलाव के लिए पेश किए गए दस्तावेज़ों की भी बारीकी से जांच की जाएगी. आइए जानते हैं परिषद ने यह सख्ती क्यों बढ़ाई है, और नए नियमों के तहत जन्मतिथि दर्ज करने की पूरी प्रोसेस क्या होगी.
गड़बड़ी के मामलों के बाद बढ़ी सख्ती
परिषद ने पाया है कि कई मामलों में प्राथमिक या उच्च प्राथमिक स्तर की ट्रांसफर सर्टिफिकेट को जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर पेश किया जा रहा था, जबकि पुराने रिकॉर्ड में जरूरी जानकारी साफ नहीं होती थी. इन मामलों को देखते हुए स्कूल के प्रिंसिपलों को रिकॉर्ड सही रखने और दस्तावेजों के असली होने की जांच करने को कहा गया है.
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एडमीशन के समय ही तय होगी जन्मतिथि
परिषद ने साफ किया है कि हाईस्कूल प्रमाणपत्र और मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि अब मनमानी तरीके से नहीं बदली जा जाइगी. छात्र के स्कूल में पहले एडमिशन के वक्त वैलिड एज प्रूफ के आधार पर ही जन्मतिथि दर्ज करनी होगी. प्रिंसिपलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रवेश के समय जिस दस्तावेज के आधार पर जन्मतिथि दर्ज हुई थी, उसका रिकॉर्ड स्कूल में सुरक्षित रहे.
सचिव ने बताई असली वजह
परिषद के सचिव भगवती सिंह के मुताबिक क्षेत्रीय कार्यालयों में जन्मतिथि संशोधन के कई मामले सामने आ रहे हैं. जांच के दौरान ऐसे मामले भी मिले हैं जिनमें बाद में जारी हुई ट्रांसफर सरटीफिकट को प्रमाण बनाकर जन्मतिथि बदलने की कोशिश की गई है. कुछ मामलों में तो बच्चे की प्रवेश के समय उम्र भी पूरी नहीं थी, और कई स्कूलों में मूल रिकॉर्ड की जानकारी दर्ज ही नहीं थी.
किन दस्ताजियों की बुनियाद पर होगी जन्मतिथि
राइट तो एजुकेशन के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र छह वर्ष तय है. अगर प्रवेश के समय जन्म प्रमाणपत्र न हो, तो अस्पताल का रिकॉर्ड, रजिस्टर्ड सहायक नर्स एवं मिडवाइफ का रिकॉर्ड, आंगनबाड़ी का रिकार्ड &amp;nbsp;और ग्राम पंचायत की तरफ से जारी जन्म या आयु प्रमाणपत्र के बुनियाद पर भी उम्र तय की जा सकती है. इसके अलावा माता पिता की तरफ से दिए गए शपथपत्र को भी माना जा सकता है. परिषद ने स्कूलों को साफ कहा है कि इन्हीं मान्य दस्तावेजों के आधार पर छात्र की जन्मतिथि दर्ज की जाए.
कागजें के सुधारने के नियम जान लें &amp;nbsp;
अगर मार्कशीट या सर्टिफिकेट में जन्म तारीख गलत है, तो अब उसे सुधारने के लिए बोर्ड द्वारा तय किए गए नियमों का ही पालन करना होगा क्योंकि कोई भी शॉर्टकट मान्य नहीं होगा. इसके लिए छात्र को अपने बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर एक आवेदन पत्र देना होगा, जिसके साथ असली जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे जरूरी सरकारी दस्तावेज जमा करना है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि बिना पक्के और असली कागजों के जन्म तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि कोई भी गलत जानकारी देकर अपनी उम्र का फायदा न उठा सके. इसके अलावा बाद में आने वाले ऐसे सभी आवेदनों और कागजों की बोर्ड द्वारा जांच पड़ताल की जाएगी.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>MP पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को 7.5% आरक्षण, बदला कोटा सिस्टम </title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश में अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता आसान करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है. प्रदेश की यूनिफॉर्म सर्विस की भर्तियों में अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके तहत पुलिस, जेल, वन, आबकारी और परिवहन विभाग की भर्तियों में मध्य प्रदेश के मूल निवासी और 4 साल की सैन्य सेवा पूरी कर चुके अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा.
पुलिस के सामान्य आरक्षक भर्ती में अग्निवीरों के लिए 7.5 प्रतिशत पद आरक्षित करने का प्रस्ताव है. आपको बता दें कि अग्निवीरों के लिए यह आरक्षण अलग से अतिरिक्त पद बढ़ाकर नहीं बल्कि कुछ विभागों में पहले से लागू आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करके दिया जाएगा.&amp;nbsp;
पुलिस आरक्षक भर्ती में ऐसे बदलेगा आरक्षण&amp;nbsp;
पुलिस की सामान्य आरक्षक भर्ती में अभी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत और पूर्व सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण है. प्रस्तावित व्यवस्था में होमगार्ड का कोटा घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि पूर्व सैनिक आरक्षण 7.5 फीसदी रहेगा. इसके साथ अग्नि वीरों के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण तय किया जाएगा. इस तरह सामान्य आरक्षित के पदों पर आरक्षण का नया गणित होमगार्ड 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिक 7.5 प्रतिशत और अग्निवीर 7.5 प्रतिशत होगा.&amp;nbsp;
जेल प्रहरी और वनरक्षक में भी बदलेगा कोटा&amp;nbsp;
जेल विभाग में प्रहरी और वन विभाग में वनरक्षकों के पदों पर फिलहाल होमगार्ड के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण है. प्रस्ताव के अनुसार इस घटाकर 20 प्रतिशत &amp;nbsp;किया जाएगा. बचा हुआ 10 प्रतिशत आरक्षण अग्निवीरों के लिए निर्धारित किया जाएगा. वहीं विशेष सशस्त्र आरक्षक और आबकारी विभाग के आरक्षित पदों पर होमगार्ड और पूर्व सैनिकों के मौजूदा आरक्षण में कटौती नहीं की जाएगी. इन पदों पर अग्निवीरों के लिए अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा गया है.&amp;nbsp;
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जनवरी-फरवरी से शुरू हो सकती है भर्ती&amp;nbsp;
राज्य में अग्निवीरों के पहले बैच ने दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 में भर्ती प्रक्रिया पूरी की थी. इन अग्निवीरों के चार साल की सेवा दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच पूरी होने वाली है. ऐसे में सरकार की योजना जनवरी-फरवरी के दौरान यूनिफॉर्म सर्विस की भर्तियां शुरू करने की है, ताकि 4 साल की सेवा पूरी कर चुके प्रदेश के मूल निवासी अग्निवीर इन भर्तियों में शामिल हो सके. इस अवधि तक प्रदेश में प्रस्तावित पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की भी तैयारी है. यह बोर्ड राज्य की यूनिफॉर्म सर्विस से जुड़ी भर्तियों के प्रक्रिया संभाल सकता है.&amp;nbsp;
प्रस्ताव को मिल चुकी है विभागों की सहमति&amp;nbsp;
अग्निवीरों के आरक्षण से जुड़ा प्रस्ताव गृह विभाग की ओर से तैयार किया गया है. इसे वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा जेल, वन, आबकारी और परिवहन विभाग में भी प्रस्ताव पर सहमति दी है. प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया है. इसे सितंबर में होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाना है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद अग्निवीरों को यूनिफॉर्म सर्विस की भर्ती में प्रस्तावित आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिहार में फेल नहीं होंगे बच्चे, कम नंबर पर भी मिलेगा स्किल ट्रेनिंग का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में फेल रहने वाले छात्रों के लिए सरकार ने एक नई पहल की है. अब ऐसे छात्रों की मार्कशीट पर सीधे फेल नहीं लिखा जाएगा, इसकी जगह एलिजिबल फॉर स्किल डेवलपमेंट यानी कौशल विकास के लिए योग्य लिखा जाएगा. राज्य सरकार का कहना है कि परीक्षा में पास होने जितने अंक हासिल नहीं कर पाने से किसी छात्र की प्रतिभा खत्म नहीं हो जाती. इसी सोच के साथ असफल छात्रों को आगे बढ़ने के लिए दूसरा रास्ता देने की तैयारी की गई है. सरकार के अनुसार, यह बदलाव मौजूद शैक्षणिक सत्र से कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं में लागू किया जाएगा.&amp;nbsp;
फेल की जगह क्या लिखा जाएगा?&amp;nbsp;
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि बोर्ड प्रमाणपत्रों पर फेल शब्द की जगह एलिजिबल फॉर स्किल डेवलपमेंट लिखा जाएगा. इस बदलाव का मकसद उन छात्रों को आगे की पढ़ाई और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना है, जो बोर्ड परीक्षा में पास नहीं हो पाते हैं. ऐसे छात्रों को बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन की ओर से संचालित ट्रेनिंग प्रोग्राम में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा. यानी परीक्षा में फेल होना छात्रों के लिए स्किल सीखने का रास्ता बंद नहीं करेगा.&amp;nbsp;
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1 महीने तक मिलेंगे विशेष सत्र&amp;nbsp;
सरकार ने सिर्फ मार्कशीट में शब्द बदलने तक ही पहल को सीमित नहीं रखा है. कक्षा 10वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए एक महीने के विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे. इन सत्रों का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करना और उनके दोबारा सफल होने की संभावना बढ़ाना है. शिक्षा मंत्री के अनुसार परीक्षा में उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं करने का मतलब यह नहीं है कि छात्रों में प्रतिभा नहीं है. इस वजह से असफल प्रयास के बाद छात्रों को सुधार का मौका देने और उन्हें पीछे छूटने से रोकने पर जोर दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
पढ़ाई के अलावा एक्टिविटी पर भी जोर&amp;nbsp;
बिहार सरकार स्कूलों में छात्रों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय दूसरी एक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में भी कदम उठा रही है. इसी कड़ी में शनिवार को सरकारी स्कूलों में नो बैग डे की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की गई है. 6 अगस्त को घोषित व्यवस्था के अनुसार शनिवार को सरकारी स्कूल सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेंगे. वहीं सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिहार, में, फेल, नहीं, होंगे, बच्चे, कम, नंबर, पर, भी, मिलेगा, स्किल, ट्रेनिंग, का, मौका</media:keywords>
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        <title>CSIR&amp;UGC NET June 2026 का रिजल्ट जारी, फटाफट करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ CSIR-UGC NET June 2026 का रिजल्ट जारी, फटाफट करें चेक.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने CSIR UGC NET June 2026 परीक्षा के स्कोर जारी कर दिए हैं. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी अब आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर अपना स्कोरकार्ड चेक और डाउनलोड कर सकते हैं. CSIR UGC NET जून 2026 की परीक्षा का आयोजन 17 और 18 जुलाई 2026 को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में किया गया था.
NTA के अनुसार, इस परीक्षा के लिए कुल 1,87,739 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 1,50,057 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. परीक्षा का आयोजन देशभर के 224 शहरों में किया गया था.
पांच विषयों में आयोजित हुई थी परीक्षा
CSIR UGC NET June 2026 परीक्षा पांच विषयों के लिए आयोजित की गई थी. इनमें लाइफ साइंसेज, मैथमेटिकल साइंसेज, फिजिकल साइंसेज, केमिकल साइंसेज और अर्थ, एटमॉस्फेरिक, ओशन एंड प्लैनेटरी साइंसेज शामिल हैं. विषयवार अभ्यर्थियों की उपस्थिति की बात करें तो लाइफ साइंसेज में 83,546 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 67,650 परीक्षा में शामिल हुए. मैथमेटिकल साइंसेज में 31,574 रजिस्टर्ड अभ्यर्थियों में से 24,964 ने परीक्षा दी.

Results are now declared for Joint CSIR-UGC NET June 2026 Candidates can visit the official portal to check their scorecards and result details.???? https://t.co/MU0mGVvWRu#NTA #NTAUpdate #NTAExams #CSIRNET #CSIRNETResult #ResultsDeclared pic.twitter.com/BqdA2QzOia
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) August 29, 2026



इसी तरह फिजिकल साइंसेज में 27,791 में से 21,810, केमिकल साइंसेज में 38,740 में से 30,885 और अर्थ, एटमॉस्फेरिक, ओशन एंड प्लैनेटरी साइंसेज में 6,088 में से 4,748 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए.
महिला अभ्यर्थियों की संख्या अधिक
NTA द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों की संख्या पुरुष अभ्यर्थियों से अधिक रही. कुल 1,11,274 महिला अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 90,380 परीक्षा में शामिल हुईं. वहीं, 76,463 पुरुष अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 59,675 ने परीक्षा दी. थर्ड जेंडर श्रेणी में दो अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और दोनों परीक्षा में शामिल हुए.
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ऐसे डाउनलोड करें CSIR UGC NET June 2026 स्कोरकार्ड
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले CSIR UGC NET की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद June 2026 Scorecard/Result से संबंधित लिंक पर क्लिक करें. &amp;nbsp;अब मांगी गई लॉगिन डिटेल जैसे एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करें. लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर CSIR UGC NET June 2026 का स्कोरकार्ड दिखाई देगा. अभ्यर्थी स्कोरकार्ड में दर्ज सभी जानकारियों को ध्यान से जांच लें और भविष्य की जरूरत के लिए इसे डाउनलोड कर प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.
NTA ने यह भी स्पष्ट किया है कि पात्र पाए गए अभ्यर्थियों के एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, सेल्फ-डिक्लेरेशन और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित प्राधिकरण द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिजली गुल होने से रद्द हुई थी परीक्षा, NTA ने री&amp;एग्जाम के जारी किए एडमिट कार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट 2026 में शामिल होने वाले उन अभ्यर्थियों के लिए एक जरूरी अपडेट है, जिनकी परीक्षा बिजली गुल होने के कारण पूरी नहीं हो सकी थी. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने ऐसे उम्मीदवारों के लिए होने वाली दोबारा परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. उम्मीदवार अब अपना हॉल टिकट एनटीए की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं.&amp;nbsp;
1 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा&amp;nbsp;
एनटीए की ओर से जारी जानकारी के अनुसार AIAPGET 2026 का री एग्जाम 1 सितंबर को सुबह 10 बजे आयोजित किया जाएगा. परीक्षा केंद्र राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर वूमेन जयपुर निर्धारित किया गया है. उम्मीदवार को अपने एडमिट कार्ड में दिए गए रिपोर्टिंग समय के अनुसार परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा. परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड की प्रिंटेड कॉपी साथ ले जाना जरूरी होगा. इसके अलावा एडमिट कार्ड में बताए गए दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट और सामान भी उम्मीदवारों को साथ रखना होगा.&amp;nbsp;
लॉगिन डिटेल से डाउनलोड करें एडमिट कार्ड&amp;nbsp;
री एग्जाम के लिए जारी हॉल टिकट एनटीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है. इसे डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपना एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड और सिक्योरिटी पिन दर्ज करना होगा.&amp;nbsp;
ऐसे करें एडमिट कार्ड डाउनलोड&amp;nbsp;

AIAPGET 2026 एग्जाम एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले exam.nta.nic.in/aiapget वेबसाइट पर जाएं.
अब होम पेज पर दिए गए एडमिट कार्ड लिंक को खोलें.
इसके बाद एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड और सिक्योरिटी पिन दर्ज करें.&amp;nbsp;
सबमिट पर क्लिक करते ही अब री-एग्जाम का एडमिट कार्ड दिखाई देगा.&amp;nbsp;
एडमिट कार्ड को डाउनलोड करके रख लें और इसकी प्रिंटेड कॉपी सुरक्षित रखें&amp;nbsp;

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49 उम्मीदवारों का होगा री-एग्जाम&amp;nbsp;
जयपुर के परीक्षा केंद्र पर बिजली की समस्या के चलते 49 उम्मीदवार अपनी परीक्षा पूरी नहीं कर पाए थे. इन्हीं अभ्यर्थियों को ध्यान में रखते हुए एनटीए ने दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया. अब इन उम्मीदवारों के लिए 1 सितंबर को निर्धारित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा होगी. किसी भी जानकारी या समस्या के लिए उम्मीदवार एनटीए के हेल्पलाइन नंबर 011-40759000 और 011-69227700 पर कांटेक्ट कर सकते हैं. इसके अलावा aiapget@nta.ac.in पर ईमेल के जरिए भी अपनी समस्या भेज सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या है AIAPGET 2026 परीक्षा?
AIAPGET 2026 राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिए 2026-27 शैक्षणिक सत्र में पोस्ट ग्रेजुएट एएसयू एंड एच प्रोग्राम में एडमिशन के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है. इसके माध्यम से आयुर्वेद सिद्ध यूनानी और होम्योपैथी में एमडी-एमएस कार्यक्रमों में एडमिशन दिया जाता है.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दो बार UPSC क्रैक कर IAS बनीं दिव्या शक्ति, अब शराबबंदी की कमान</title>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 11:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>कितने पढ़े&amp;लिखे हैं कुशाग्र अद्वैत, जिनकी कविता पर मचा बवाल?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कितने-पढ़े-लिखे-हैं-कुशाग्र-अद्वैत-जिनकी-कविता-पर-मचा-बवाल</link>
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        <description><![CDATA[ हिंदी साहित्य में युवा कवि कुशाग्र अद्वैत की कविता छानकर की कुछ पंक्तियों को लेकर इन दिनों बहस छिड़ी हुई है. रेख्ता फाउंडेशन के हिंदवी ने उनकी कविता की कुछ पंक्तियां सोशल मीडिया पर शेयर की थी, जिसके बाद साहित्य से जुड़े लोगों के बीच इसको लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी. कविता की पंक्तियों को में दो स्तन शब्द के इस्तेमाल को लेकर एक पक्ष ने आपत्ति जताई, जबकि दूसरा पक्ष कवि के साथ खड़ा नजर आया.
सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बीच कुशाग्र अद्वैत ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी. कुशाग्र अद्वैत का कहना है कि कविता में उन्होंने जानबूझकर स्तन शब्द का इस्तेमाल किया और वह इसे किसी दूसरे शब्द से बदलना नहीं चाहते. ऐसे में अब सोशल मीडिया पर कुशाग्र अद्वैत की चर्चाएं होने लगी है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कुशाग्र अद्वैत कितने पढ़े लिखे हैं, जिनकी कविता पर बवाल मच गया है.&amp;nbsp;
बीएचयू से कर रहे हैं पीएचडी&amp;nbsp;
कुशाग्र अद्वैत की उम्र 28 साल है और वह लंबे समय से कविता लिख रहे हैं. उनकी कविताएं समय-समय पर प्रकाशित होती रही है. वह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हैं. उनका रिसर्च सब्जेक्ट भी उपनिवेशीकरण है. कविता को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने बारे में यह जानकारी दी थी.&amp;nbsp;
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स्तन शब्द बदलने का भी आया दबाव&amp;nbsp;
कविता की कुछ पंक्तियां सामने आने के बाद कुशाग्र अद्वैत को सोशल मीडिया पर आलोचना और गलियों का सामना भी करना पड़ा. उन्होंने कहा कि वह फेसबुक पर नहीं है और कविताओं की पंक्तियां पोस्ट होने के बाद उन्हें लगातार गलियां मिलने लगी. उनका कहना था कि वह ऐसी गालियों के आदी नहीं है. उन्होंने बताया कि विवाद के बाद वह हिंदवी के संपादक के पास भी गए.
उनका कहना था कि अगर ये उनकी कविता की पंक्तियां है, तो उनके साथ साहस के साथ खड़ा रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह इस विवाद में सामने नहीं थे, लेकिन अब वह अपनी उन पंक्तियों के साथ मजबूती से खड़े हैं. कुशाग्र ने यह भी कहा कि उन पर स्तन शब्द को आंख शब्द जैसे किसी दूसरे शब्दों से बदलने का दबाव था, लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहते थे .उनके अनुसार वह कविता में स्तन लिखना चाहते हैं थे.&amp;nbsp;
छनकर कविता की इन पंक्तियों पर हुआ विवाद&amp;nbsp;
दरअसल यह विवाद कुशाग्र अद्वैत की कविता छनकर की कुछ पंक्तियों को लेकर शुरू हुआ. हिंदवी की कविता की कुछ पंक्तियां सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई थी, इनमें कवि ने दो दिनों के लिए मिले प्रेम और उसे दौरान के अनुभव का जिक्र किया. कविता में वह लिखते हैं कि दो दिन बहुत कम होते हैं और इतने कम समय में वसंत और आषाढ़ को समेटना संभव नहीं.
इस क्रम में दो स्तन वाली पंक्ति आती है, जिस पर सोशल मीडिया पर फिलहाल बहस छिड़ी हुई है. इसके अलावा कविता की शुरुआत में चाय से छनकर आने, धूप के छनकर कमरे में पहुंचने और खबरों की पहरेदारी के बीच छनकर आने का जिक्र है. इसके बाद कवि प्रेमिका के आने को -छन से जोड़ता है और पायल, बिंदी, पापड़, टिहरी और साथ बिताए जाने वाले दो दिनों के अलग-अलग अनुभवों को कविता में पिरोता है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कितने, पढ़े-लिखे, हैं, कुशाग्र, अद्वैत, जिनकी, कविता, पर, मचा, बवाल</media:keywords>
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        <title>CBSE 12वीं सप्लीमेंट्री का शेड्यूल जारी, 31 अगस्त को मिलेगी आंसर कॉपी</title>
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        <description><![CDATA[ सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा 2026 के रिजल्ट के बाद होने वाली प्रक्रियाओं का शेड्यूल जारी कर दिया है. जिन छात्रों को अपने नंबरों को लेकर आपत्ति है, वह अब अपनी मूल्यांकन आंसर बुक की स्कैन कॉपी मांग सकते हैं. इसके बाद ही नंबरों के वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया जा सकेगा. बोर्ड ने इन सभी प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग तारीख और फीस निर्धारित की है. वही आपको बता दें कि सीबीएसई कक्षा 12वीं सप्लीमेंट्री रिजल्ट 12 अगस्त 2026 को जारी किया गया था. वहीं अब बोर्ड ने पोस्ट रिजल्ट सुविधाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है.&amp;nbsp;
31 अगस्त को मिलेगी आंसर बुक की स्कैन कॉपी&amp;nbsp;
सीबीएसई के शेड्यूल के अनुसार छात्र अपनी मूल्यांकित आंसर बुक की स्कैन कॉपी के लिए 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए प्रति विषय 100 रुपये फीस देनी होगी. आवेदन के बाद स्कैन की गई आंसर बुक एक छात्र के लॉगिन अकाउंट में उपलब्ध कराई जाएगी. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आंसर बुक की स्कैन कॉपी हासिल करने के बाद ही छात्र नंबरों के वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे. यानी री-इवैल्यूएशन के लिए सीधा आवेदन करने का ऑप्शन नहीं होगा.&amp;nbsp;
7 और 8 सितंबर को वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन&amp;nbsp;
स्कैन कॉपी मिलने के बाद छात्रों को अपनी कॉपी देखने और उसमें दिए गए अंकों की जांच करने का मौका मिलेगा. अगर किसी छात्र को लगता है कि मूल्यांकन में कोई गलती हुई है, तो वह इसके बाद नंबरों के वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकता है. इसके लिए आवेदन विंडो 7 और 8 सितंबर 2026 को खुलेगी. नंबरों के वेरिफिकेशन के लिए प्रति आंसर बुक 100 रुपये, जबकि री-इवैल्यूएशन के लिए प्रति प्रश्न 100 रुपये फीस निर्धारित की गई है. छात्र दोनों सुविधाओं के लिए भी आवेदन कर सकेंगे, जिसके लिए फीस देनी होगी.&amp;nbsp;
सिर्फ थ्योरी वाले हिस्से का होगा री-इवैल्यूएशन
सीबीएसई ने बताया कि री-इवैल्यूएशन की सुविधा केवल थ्योरी वाले हिस्से के लिए उपलब्ध होगी. किसी प्रश्न के लिए सिर्फ एक हिस्से की जगह पूरे प्रश्न का री-इवैल्यूएशन किया जाएगा. छात्रों को आवेदन करने से पहले संबंधित विषय की मार्किंग स्कीम और प्रश्न पत्र को देखने की सलाह दी गई है. री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करते समय छात्र को अपने अनुरोध का कारण भी स्पष्ट रूप से बताना होगा.&amp;nbsp;
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नंबर बढ़ और कम भी हो सकते हैं
बोर्ड ने छात्रों को यह भी स्पष्ट किया है कि वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के बाद नंबरों में बदलाव हो सकता है. अंक बढ़ने के साथ कम भी हो सकते हैं. यहां तक कि अगर एक नंबर की कटौती होती है, तो वह भी लागू की जाएगी. री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट सीबीएसई के ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा. बोर्ड का निर्णय ही अंतिम होगा और री-इवैल्यूएशन के रिजल्ट के खिलाफ किसी अपील या दोबारा समीक्षा का प्रावधान नहीं होगा.&amp;nbsp;
ऑनलाइन करना होगा आवेदन&amp;nbsp;
छात्रों को पोस्ट रिजल्ट सुविधा के लिए आवेदन सीबीएसई की वेबसाइट पर दिए गए ऑनलाइन लिंक के माध्यम से करना होगा. आवेदन के साथ निर्धारित फीस का पेमेंट भी ऑनलाइन करना होगा. बोर्ड ने छात्रों को आवेदन करते समय सभी जानकारी ध्यान से पढ़ने की सलाह दी है. सीबीएसई के अनुसार छात्रों की ओर से गलत जानकारी भरने पर उसकी जिम्मेदारी बोर्ड नहीं कि नहीं होगी. इसलिए आवेदन जमा करने से पहले सभी डिटेल की जांच करना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG काउंसलिंग राउंड 2 का शेड्यूल जारी, 3 सितंबर से शुरू होगी प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के राउंड 2 को लेकर मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने शेड्यूल जारी कर दिया है. ऑल इंडिया कोटा, डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी की सीटों के लिए दूसरे राउंड की काउंसलिंग प्रक्रिया 3 सितंबर 2026 से शुरू होगी. इस दिन रजिस्ट्रेशन फीस, पेमेंट और चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. राउंड 2 का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 11 सितंबर को जारी किया जाएगा. राउंड 2 में सीट पाने वाले उम्मीदवारों को तय समय के अंदर संबंधित संस्थान में रिपोर्ट कर एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी.&amp;nbsp;
3 सितंबर से रजिस्ट्रेशन और फीस पेमेंट&amp;nbsp;
एक्यूआई, डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए राउंड 2 का रजिस्ट्रेशन और फीस पेमेंट 3 सितंबर से 8 सितंबर किया जा सकेगा. 8 सितंबर को फीस जमा करने की सुविधा शाम 6:00 बजे तक उपलब्ध रहेगी. वहीं चॉइस फिलिंग का मौका 3 से 9 सितंबर तक मिलेगा. उम्मीदवार 8 सितंबर शाम 4 बजे से 9 सितंबर सुबह 10 बजे तक अपनी पसंद लोग कर सकेंगे. इसके बाद एमसीसी 9 और 10 सितंबर को सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी करेगा. वहीं 11 सितंबर को राउंड 2 का रिजल्ट जारी किया जाएगा.
राउंड 2 का पूरा शेड्यूल एक नजर में

टेंटेटिव सीट मैट्रिक्स- 1 और 2 सितंबर 2026
रजिस्ट्रेशन और फीस पेमेंट- 3 से 8 सितंबर&amp;nbsp;
च्वाइस फिलिंग- 3 से 9 सितंबर&amp;nbsp;
च्वाइस लॉकिंग- 8 सितंबर शाम 4 बजे से 9 सितंबर सुबह 10 बजे तक&amp;nbsp;
सीट अलॉटमेंट प्रोसेस- 9 और 10 सितंबर&amp;nbsp;
राउंड 2 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट- 11 सितंबर&amp;nbsp;
रिपोर्टिंग और ज्वाइनिंग-12 से 18 सितंबर&amp;nbsp;
ज्वॉइन किए उम्मीदवारों का वेरिफिकेशन- 19 सितंबर &amp;nbsp;&amp;nbsp;

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स्टेट काउंसलिंग का भी शेड्यूल जारी&amp;nbsp;
एमसीसी ने एक्यूआई के साथ स्टेट काउंसलिंग राउंड 2 की टाइमलाइन भी जारी की है. राज्य स्तर की काउंसलिंग की प्रक्रिया 7 सितंबर से 11 सितंबर तक चलेगी. इसमें संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी उम्मीदवारों के एडमिशन और दूसरी प्रक्रियाओं को पूरा करेगी. एक्यूआई और स्टेट काउंसलिंग दोनों के तहत अलॉट सीट पर उम्मीदवारों को 18 सितंबर तक ज्वाइन करना होगा. 19 सितंबर को संबंधित अथॉरिटी की ओर से ज्वाइन कर चुके उम्मीदवारों के रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन किया जाएगा. उम्मीदवारों को अपने राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी की ओर से जारी निर्देशों पर भी नजर रखनी होगी.&amp;nbsp;
किन उम्मीदवारों को राउंड 2 में मौका मिलेगा?
जिन उम्मीदवारों को राउंड 1 में कोई सीट नहीं मिली. वे निर्धारित नियमों के अनुसार राउंड 2 में हिस्सा ले सकेंगे. इसके अलावा राउंड 1 में सीट पाने वाले उम्मीदवार राउंड 2 सीट अपग्रेडेशन के लिए शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने फ्लोट का ऑप्शन चुना है. वहीं जिन उम्मीदवारों ने फ्रीज ऑप्शन चुना उनकी राउंड 1 की सीट बरकरार रहेगी लेकिन उन्हें राउंड 2 में सीट अपग्रेडेशन के लिए नहीं माना जाएगा. राउंड 1 में सीट पाने वाले और अपग्रेडेशन के राउंड 2 में जाने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी और जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने होंगे. इस साल की व्यवस्था के तहत फ्लोट उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट और वेरिफिकेशन के लिए अलॉट कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत नहीं होगी, संस्थान ऑनलाइन माध्यम से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की जांच करेगा.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 जारी, ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) भर्ती 2026 के प्रीलिम्स का रिजल्ट जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों ने 1 और 2 अगस्त 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में हिस्सा लिया था, वह अब अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. रिजल्ट एसबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है. प्रीलिम्स में पास में पास उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा. एसबीआई इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1500 प्रोबेशनरी पदों पर नियुक्तियां करेगा. वहीं आपको बता दें कि प्रीलिम्स परीक्षा में उम्मीदवारों से इंग्लिश लैंग्वेज, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और रीजनिंग एबिलिटी से सवाल पूछे गए थे. प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट एसबीआई ने जारी कर दी है.
&amp;nbsp;जारी हुआ, SBI PO प्रीलिम्स रिजल्ट
एसबीआई में पीओ प्रीलिम्स का रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी किया है. उम्मीदवार अपना रोल नंबर रिजल्ट पीडीएफ में चेक कर सकते हैं. जिन उम्मीदवारों का रोल नंबर रिजल्ट लिस्ट में मौजूद है, उन्हें अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है. वहीं यह भर्ती विज्ञापन संख्या CRPD/PO/2026-27/09 के तहत आयोजित की जा रही है. प्रीलिम्स परीक्षा एक और दो अगस्त को अलग-अलग शिफ्टों में अलग-अलग परीक्षा केंद्र आयोजित हुई थी.
अब मेन्स परीक्षा में होंगे शामिल
प्रीलिम्स में सफल उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण यानी मेन्स परीक्षा में शामिल होंगे. जानकारी के अनुसार एसबीआई पीओ मेन्स परीक्षा 12 सितंबर को 2026 को आयोजित की जाएगी. इसकी तारीख फिलहाल टेंटेटिव है. मेन्स परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड और दूसरी जानकारी एसबीआई की ओर से अलग से जारी की जाएगी.
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ऐसे चेक करें एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट

रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले एसबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाए.
इसके बाद करियर सेक्शन पर जाएं.
अब यहां करंट ओपनिंग या रिक्रूटमेंट रिजल्ट सेक्शन में जाएं.
रिक्रूटमेंट ऑफ प्रोबेशनरी ऑफिसर्स (Advt. CRPD/PO/2026-27/09) लिंक पर क्लिक करें.
अब &amp;nbsp;प्रीलिम्स एग्जामिनेशन रिजल्ट के लिंक को खोलें.
उसके बाद पीडीएफ खुल जाएगा, उसमें कंट्रोल एफ के जरिए आप अपना रोल नंबर चेक करें.
अगर आपका रोल नंबर लिस्ट में है, तो आप मेन्स परीक्षा के लिए शाॅर्ट लिस्ट हुए हैं

उम्मीदवार इन बातों का रखें ध्यान
रिजल्ट चेक करते समय उम्मीदवार अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या रोल नंबर और जन्मतिथि-पासवर्ड तैयार रखें. एसबीआई की ओर से प्रीलिम्स रिजल्ट की जानकारी के लिए अलग से ईमेल या एसएमएस नहीं भेजा जाएगा, इसलिए उम्मीदवारों को आधिकारिक पोर्टल पर ही अपना स्टेटस चेक करना होगा. वहीं प्रीलिम्स में सफल उम्मीदवारों को मेन्स परीक्षा के एडमिट कार्ड की जानकारी एसबीआई की ओर से अलग से दी जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एसबीआई, पीओ, प्रीलिम्स, रिजल्ट, 2026, जारी, ऐसे, चेक, करें, स्कोरकार्ड</media:keywords>
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        <title>यूपी में नौकरी की बहार, चुनाव से पहले 1 लाख युवाओं को मिलेगी जॉब </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-में-नौकरी-की-बहार-चुनाव-से-पहले-1-लाख-युवाओं-को-मिलेगी-जॉब</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-में-नौकरी-की-बहार-चुनाव-से-पहले-1-लाख-युवाओं-को-मिलेगी-जॉब</guid>
        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने की तैयारी है. अगले करीब साढ़े तीन महीने में राज्य में एक लाख से ज्यादा युवाओं को अलग-अलग सरकारी विभागों में रोजगार देने का टारगेट रखा गया है. इनमें सबसे बड़ी संख्या पुलिस भर्ती से जुड़ी है. पुलिस भर्ती प्रोन्नति बोर्ड के जरिए 74,103 युवाओं को सेवायोजित किया जाना है. इसके अलावा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और सहकारी संस्थागत सेवा मंडल की भर्तियों के रिजल्ट भी तय समय सीमा में जारी किए जाने की तैयारी है.&amp;nbsp;
मुख्य सचिव की बैठक के बाद मिली जानकारी&amp;nbsp;
हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में अलग-अलग भर्ती संस्थाओं की ओर से चल रही परीक्षाओं और उनके रिजल्ट को लेकर जानकारी दी गई है. पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच होमगार्ड और आरक्षी नागरिक पुलिस समेत दूसरे पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जा चुकी है. अब इन भर्तियों के रिजल्ट जारी किए जाने की तैयारी है.&amp;nbsp;
पुलिस भर्ती में 74,103 युवाओं को मिलेगा मौका&amp;nbsp;
पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से कुल 74,103 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इसमें होमगार्ड के 41,424 पद और आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष के 32,679 पद शामिल है. होमगार्ड भर्ती का रिजल्ट 30 सितंबर तक और कांस्टेबल भर्ती का रिजल्ट 31 अक्टूबर तक जारी किए जाने की संभावना है. परीक्षा पूरी होने के बाद अब बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को रिजल्ट का इंतजार है
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अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से 25,194 युवाओं को नौकरी&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से भी अलग-अलग भर्तियों के रिजल्ट जारी कर युवाओं की नई को नियुक्ति देने की तैयारी है. आयोग के जरिए 15 दिसंबर तक 25,194 युवाओं को नौकरी दिए जाने की संभावना है. आयोग की ओर से जानकारी से अब तक परीक्षाओं के रिजल्ट दिसंबर तक जारी किए जाने की योजना है. कनिष्ठ सहायक के 54 पदों का रिजल्ट 31 अगस्त तक आने की संभावना है. वहीं सम्मिलित कनिष्ठ सहायक और दूसरों पदों के 5,369 पदों पर 10 सितंबर तक रिजल्ट आ सकता है.
इसके अलावा महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 5,272 पद, नक्शानवीस एवं मानचित्र के 283 पद और प्रवर्तन कांस्टेबल के 477 पदों के लिए रिजल्ट 30 सितंबर तक की आने की संभावना है. सहायक स्टोर कीपर और सहायक ग्रेड के 200 पदों का रिजल्ट 7 अक्टूबर तक, जबकि वन रक्षक के एवं वन्य जीव रक्षक के 709 पदों का रिजल्ट 15 अक्टूबर तक जारी किया जा सकता है. इसके अलावा लेखपाल के 7,994 पदों का रिजल्ट 10 नवंबर तक आने की संभावना है. आशुलिपिक के 1,557 पदों का रिजल्ट 30 नवंबर तक और कनिष्ठ सहायक के 3,279 पदों का रिजल्ट 15 दिसंबर तक आने की संभावना है.&amp;nbsp;
सहकारी सेवा मंडल में 2200 पदों पर भर्ती&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल भी भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की तैयारी कर रहा है. सम्मिलित सहकारी बैंकिंग और तकनीकी सेवा के करीब 2,200 पदों के लिए सितंबर-अक्टूबर के दौरान परीक्षा कराई जाने की तैयारी है. &amp;nbsp;इन भर्तियों का अंतिम चयन रिजल्ट 30 नवंबर तक घोषित किए जाने की संभावना है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, में, नौकरी, की, बहार, चुनाव, से, पहले, लाख, युवाओं, को, मिलेगी, जॉब </media:keywords>
    </item>
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        <title>KVS&amp;NVS 2026 टियर 2 रिजल्ट जारी, ऐसे चेक करें अपना परिणाम</title>
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        <description><![CDATA[ KVS-NVS भर्ती परीक्षा 2026 में शामिल उम्मीदवारों के लिए रिजल्ट से जुड़ा जरूरी अपडेट सामने आया है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के अलग-अलग शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों के Tier-II परिणाम जारी कर दिए गए हैं. उम्मीदवार अब अपना रिजल्ट और शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस देख सकते हैं. इसके लिए उम्मीदवारों को आवेदन पोर्टल पर जाकर अपने परिणाम की जांच करनी होगी.&amp;nbsp;
CBSE HQ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आज यानी 28 अगस्त 2026 को अलग-अलग पदों के लिए Tier-II के नतीजे जारी किए जा रहे हैं. इसमें Post Graduate Teachers (PGTs), Trained Graduate Teachers (TGTs) और एक Non-Teaching Post शामिल है. जिन पदों के लिए इंटरव्यू या स्किल टेस्ट होना है, उन के लिए उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए अलग से जानकारी दी जाएगी.&amp;nbsp;
इन PGT पदों का रिजल्ट जारी
Tier-II Recruitment Examination के तहत Post Graduate Teachers यानी PGT के तीन पदों के परिणाम घोषित किए जा रहे हैं. इनमें PGT (Biology), PGT (Commerce) और PGT (Geography) शामिल हैं. इन पदों के लिए Tier-II परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपना रिजल्ट या शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस आवेदन पोर्टल के माध्यम से देख सकते हैं.&amp;nbsp;
KVS-NVS Tier 2 Result 2026 ऐसे करें चेक
1. KVS-NVS Tier 2 रिजल्ट देखने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक एप्लीकेशन पोर्टल पर जाएं.
2. इसके बाद KVS-NVS Tier-II भर्ती रिजल्ट से जुड़े लिंक को खोलें.
3. अब अपनी पोस्ट के अनुसार रिजल्ट लिंक चुनें और मांगी गई लॉगिन डिटेल दर्ज करें.
4. लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर रिजल्ट या स्कोरबोर्ड दिखाई देगा. इसमें शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस और लागू होने पर नंबर देखे जा सकते हैं.
5. उम्मीदवार स्कोरकार्ड डाउनलोड करके फ्यूचर के लिए इसकी कॉपी सुरक्षित रख सकते हैं.
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इन TGT पदों के नतीजे भी घोषित
Trained Graduate Teachers यानी TGT के लिए भी दो पदों के Tier-II परिणाम जारी किए जा रहे हैं. इनमें TGT (Art/Art Education) और TGT (Library)/Librarian शामिल हैं. इन पदों की Tier-II परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी भी आवेदन पोर्टल पर जाकर अपना रिजल्ट और शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस चेक कर सकते हैं.&amp;nbsp;
Assistant Section Officer का भी रिजल्ट
CBSE की ओर से जारी अपडेट में एक Non-Teaching Post का रिजल्ट भी शामिल है. इसमें Assistant Section Officer पद के लिए Tier-II Recruitment Examination का परिणाम घोषित किया जा रहा है. संबंधित उम्मीदवार आवेदन पोर्टल पर अपना रिजल्ट और शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस देख सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NTA में बड़ा बदलाव, 2 नए डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्टर की नियुक्ति</title>
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        <description><![CDATA[ NTA Appointments: केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को मजबूत और पुनर्गठित करने की कोशिश के तहत दो डायरेक्टर और एक जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किए हैं. यह आदेश 27 अगस्त को जारी किया गया था और नियुक्तियों की जानकारी आज सामने आई है. यह कदम एनटीए की लगातार हो रही जांच और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद के बाद एजेंसी में सुधार लाने की सरकार की कोशिश के बीच उठाया गया है.&amp;nbsp;
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में नई नियुक्तियां&amp;nbsp;
आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. इसी के साथ 2016 बैच के आईआरएस अधिकारी अमित सामदारिया&amp;nbsp;को जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है.&amp;nbsp;
तीनों अधिकारियों को आदेश जारी होने के तीन हफ्तों के अंदर अपना पद संभालने का निर्देश दिया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि तय समय में शामिल न होने पर अधिकारियों को सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
नए नियुक्त अधिकारी कौन हैं?
आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह को 5 साल के कार्यकाल के लिए एनटीए का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को भी 5 साल के कार्यकाल के लिए डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. वहीं 2016 बैच के आईआरएस अधिकारी अमित सामदरिया 4 साल के कार्यकाल के लिए जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर काम करेंगे. इन नियुक्तियों को टेस्टिंग एजेंसी के प्रशासनिक ढांचा को मजबूत करने की सरकार की व्यापक कोशिश के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है.

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी सुधारों के तहत और भर्तियां
पुनर्गठन की प्रक्रिया सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों तक ही सीमित नहीं है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 4 जनरल मैनेजर और 16 यंग प्रोफेशनल पदों के लिए भी भर्ती की घोषणा की है. इन पदों के लिए यूपीएससी पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे गए हैं. इस अतिरिक्त भर्ती का मकसद एजेंसी कि संस्थागत और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना है.
इससे पहले 47 अधिकारियों को हटाया गया&amp;nbsp;
यह नई युक्तियां एनटीए अधिकारियों के खिलाफ पहले की गई बड़ी कार्रवाई के बाद हुई हैं. 25 जुलाई को एजेंसी ने नीट पेपर लीक मामले में 47 अधिकारियों को हटा दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक हटाए गए अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे. यह कार्रवाई परीक्षा से जुड़े विवाद और अनियमितताओं के आरोपों पर संस्थागत प्रतिक्रिया का हिस्सा थी.&amp;nbsp;

नीट पेपर लीक मामला क्या है?&amp;nbsp;
यह विवाद 3 मई 2026 को हुई नीट यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक से जुड़ा है. विवाद के बाद सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा आयोजित की.
इस मुद्दे ने छात्रों में भारी आक्रोश को पैदा किया और जवाबदेही के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए. इस विवाद का देश भर के छात्रों पर काफी गंभीर असर पड़ा. इस दौरान आत्महत्या से कई छात्रों की मौत की खबर भी सामने आई.
विरोध प्रदर्शन हफ्तों तक जारी रहे. इसमें दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन भी शामिल थे. कॉकरोच जनता पार्टी ने एक महीने तक विरोध प्रदर्शन किया और सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल की. इस विरोध प्रदर्शन के नतीजे भी सामने आए. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.
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सीबीआई की जांच जारी&amp;nbsp;
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन फिलहाल पेपर लीक की जांच कर रही है. महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली सहित कई राज्यों में जांच की जा रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि जांचकर्ता लीक से जुड़े व्यापक नेटवर्क और परिस्थिति की पड़ताल कर रहे हैं. अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी सीबीआई जल्द ही चार्ज शीट दाखिल कर सकती है.
नेशनल टेस्टिस एजेंसी का पुनर्गठन क्यों जरूरी है?&amp;nbsp;
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कई प्रमुख प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करता है. इस वजह से भारत भर के शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने के इच्छुक लाखों छात्रों के लिए इसका कामकाज काफी जरूरी है.&amp;nbsp;
दो डायरेक्टर और एक जॉइंट डायरेक्ट की हालिया नियुक्ति के साथ-साथ जनरल मैनेजर और युवा पेशेवर की प्रस्तावित भर्ती एजेंसी को प्रशासनिक रूप से काफी ज्यादा मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>NIT राउरकेला में प्लेसमेंट का जलवा, औसत पैकेज 15.33 लाख रुपये का</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) राउरकेला में 2025-26 का प्लेसमेंट सीजन छात्रों के लिए शानदार रहा. संस्थान के छात्रों को प्लेसमेंट के दौरान कुल 1340 प्लेसमेंट ऑफर मिले. वहीं 6 महीने की इंटर्नशिप के लिए 364 ऑफर मिले. प्री फाइनल ईयर के छात्रों ने भी 258 समर इंटर्नशिप हासिल की जो संस्थान के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. बीटेक छात्रों का प्लेसमेंट रेट 95.47 प्रतिशत रहा. इस दौरान बीटेक के एक छात्र को सबसे ज्यादा 1.31 करोड़ सालाना का पैकेज मिला. वहीं बीटेक का औसत सीटीसी 15.33 लाख रुपये सालाना और मीडियन सीटीसी 12.15 लाख रुपये रहा. प्लेसमेंट में 83 से ज्यादा छात्रों को 30 लाख रुपये सालाना से ज्यादा पैकेज मिले.&amp;nbsp;
बीटेक में 1.31 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा पैकेज&amp;nbsp;
बीटेक में सबसे ज्यादा पैकेज कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र को मिला. इसके बाद इसी ब्रांच के दूसरे छात्र को 83.60 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला है. संस्थान के अनुसार बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग, सेरेमिक इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के सभी रजिस्टर छात्रों को प्लेसमेंट मिला. वहीं बायोटेक्नोलॉजी, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल डिजाइन और मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग में प्लेसमेंट रेट 90 प्रतिशत से ज्यादा रहा.&amp;nbsp;
एमटेक में 46.38 लाख रुपये का पैकेज&amp;nbsp;
एमटेक छात्रों के लिए भी प्लेसमेंट के रिजल्ट अच्छे रहे. इस प्रोग्राम में सबसे ज्यादा 46.38 लख रुपये सालाना का पैकेज सीण्सई के छात्रों को मिला. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के छात्रों को 44 लाख रुपये का पैकेज मिला. एमटेक का औसत सीटीसी से 11.90 लाख रुपये और मीडियन सीटीसी 9 लाख रुपये रहा.&amp;nbsp;
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374 कंपनियों ने लिया हिस्सा&amp;nbsp;
एनआईटी राउरकेला के प्लेसमेंट ड्राइव में कुल 374 कंपनियों ने हिस्सा लिया. इनमें करीब आधी कंपनियां ऐसी थी, जो पहली बार संस्थान के कैंपस प्लेसमेंट में शामिल हुई. सबसे ज्यादा भागीदारी सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विसेज क्षेत्र की कंपनियों की रही. इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग, बीएफएसआई इलेक्ट्रॉनिक्स और एजुकेशन सेक्टर की कंपनियां शामिल रही. प्लेसमेंट ऑफर्स में कोर सेक्टर की हिस्सेदारी 41.69 प्रतिशत रही. सॉफ्टवेयर और आईटी से 17.79 प्रतिशत, पावर और हैवी सेक्टर से 13.77 प्रतिशत और बीएफएसआई से 11.52 प्रतिशत ऑफर आए. एनालिटिक्स एंड कंसलटिंग की हिस्सेदारी 9.5 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर और वीएलएसआई की 8.40 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग की 8.09 प्रतिशत, &amp;nbsp;ऑयल एंड गैस की 7.86 प्रतिशत और एजुकेशन सेक्टर की 7.23 फीसदी रही.&amp;nbsp;
इंटर्नशिप में भी छात्रों का शानदार प्रदर्शन&amp;nbsp;
प्लेसमेंट के साथ-साथ इंटर्नशिप के मामले में भी छात्रों को अच्छे अवसर मिले. 6 महीने की इंटर्नशिप के लिए 364 ऑफर मिले. जिनसे सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूरी करने वाले छात्रों को फ्री प्लेसमेंट ऑफर मिलने की संभावना रहेगी. इसके अलावा प्री फाइनल ईयर के छात्रों ने 258 समय इंटर्नशिप हासिल की. इस दौरान सबसे ज्यादा इंटर्नशिप स्टाइपेंड 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह रहा. संस्थान के अनुसार समर इंटर्नशिप भी अगले प्लेसमेंट सीजन में छात्रों के लिए प्री प्लेसमेंट ऑफर का रास्ता खोल सकती है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>GATE 2027 के आवेदन शुरू, 27 सितंबर तक करें रजिस्ट्रेशन </title>
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        <description><![CDATA[ ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट एंड इंजीनियरिंग के लिए आवेदन प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों के लिए जरूरी डेट आया है. आईआईटी मद्रास की ओर से आयोजित होने वाली गेट-2027 परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हो गई है. उम्मीदवार बिना लेट फीस के 27 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकेंगे. इसके अलावा लेट फीस के साथ आवेदन करने का मौका 5 अक्टूबर तक दिया जाएगा. इस बार आवेदन प्रक्रिया में डिजिलॉकर को अनिवार्य किया गया है. वहीं परीक्षा में रोबोटिक एंड ऑटोमेशन को नया पेपर जोड़ा गया है.&amp;nbsp;
27 सितंबर तक करें आवेदन&amp;nbsp;
गेट 2027 के लिए सामान्य आवेदन प्रक्रिया की आखिरी तारीख 27 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है. जो उम्मीदवारी इस तारीख तक आवेदन नहीं कर पाएंगे, उन्हें लेट फीस के साथ 5 अक्टूबर 2026 तक आवेदन करने का मौका मिलेगा. आवेदन में सुधार के लिए विंडो 14 से 21 अक्टूबर 2026 तक खुलेगी. उम्मीदवारों को आवेदन से पहले सभी जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट तैयार रखने की सलाह दी है.&amp;nbsp;
फरवरी में होगी गेट 2027 परीक्षा&amp;nbsp;
गेट 2027 परीक्षा का आयोजन कंप्यूटर आधारित मोड में किया जाएगा. परीक्षा की तारीख 6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी 2027 निर्धारित की गई है. परीक्षा का रिजल्ट 19 मार्च 2027 को जारी किया जाएगा. परीक्षा 3 घंटे की होगी और प्रश्न पत्र में कुल 65 प्रश्न होंगे जो 100 अंकों के होंगे. पेपर में जनरल एप्टीट्यूड के 15 अंक होंगे, जबकि संबंधित विषय से 85 अंक के प्रश्न पूछे जाएंगे.&amp;nbsp;
MCQ, MSQ और NAT तरह के सवाल होंगे
गेट 2027 में प्रश्न तीन तरह के होंगे. इनमें एमसीक्यू, MSQ और NAT शामिल है. गलत उत्तर के लिए नेगेटिव मार्किंग केवल एमसीक्यू प्रश्नों में लागू होगी. 1 नंबर वाले गलत एमसीक्यू उत्तर पर एक तिहाई अंक काटा जाएगा, जबकि दो अंक वाले गलत एमसीक्यू उत्तर पर दो तिहाई की कटौती होगी.&amp;nbsp;
रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन नया पेपर जोड़ा गया&amp;nbsp;
इस बार गेट में रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन को नया टेस्ट पेपर बनाया गया है. इसके जुड़ने के बाद गेट में कुल 30 पेपर हो गए. यह पेपर स्मार्ट सिस्टम, &amp;nbsp;मेकाट्रॉनिक्स और रोबोटिक्स इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित उम्मीदवारों के लिए है. इसके अलावा बायोटेक्नोलॉजी के सिलेबस और विषय के वेटेज में भी बदलाव किया गया है. इंजीनियरिंग साइंस, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस और लाइफ साइंस में भी सिलेबस फॉर्मेट और स्ट्रक्चर से जुड़े बदलाव किए गए हैं. टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के कोड स्ट्रक्चर और कंटेंट फ्रेमवर्क में भी परिवर्तन किया गया.&amp;nbsp;
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आवेदन के लिए डिजिलॉकर जरूरी&amp;nbsp;
गेट 2027 की आवेदन प्रक्रिया में इस बार डिजिलाॅकर को शामिल किया गया है. भारतीय नागरिक उम्मीदवारों के लिए वेरीफाइड डिजिलॉकर अकाउंट होना जरूरी है. रजिस्ट्रेशन के दौरान उम्मीदवार का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल, फोटो, एड्रेस और वेरीफाइड पहचान पत्र संख्या जैसी जानकारी डिजिलॉकर से ली जाएगी.&amp;nbsp;
गेट 2027 के लिए आवेदन फीस&amp;nbsp;
जनरल आवेदन में ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए एक पेपर की फीस 2000 रुपये निश्चित है. वहीं महिला, एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए यह 1000 रुपये है. लेट फीस की अवधि में ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए फीस 2500 और महिला, एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए 1500 हो जाएगी
गेट का स्कोर कहां होगा इस्तेमाल?
गेट स्कोर का इस्तेमाल पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टोरल प्रोग्राम में एडमिशन के लिए किया जा सकता है. इसके अलावा कई सार्वजनिक क्षेत्र के कंपनियां भी भर्ती के लिए गेट स्कोर को ध्यान में रखती है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>डाक विभाग में निकली 25 हजार से ज्यादा नौकरियां, 10वीं पास करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय डाक विभाग ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती 2026 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए देशभर के अलग-अलग डाक सर्कल और डिवीजन में 25,000 से ज्यादा पदों पर नियुक्ति की जाएगी. इनमें ब्रांच पोस्टमास्टर (BPM), असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर (ABPM) और डाक सेवक के पद शामिल है. खास बात यह है कि इन पदों के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी, बल्कि दसवीं के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
दो चरणों में होगी आवेदन प्रक्रिया &amp;nbsp;
डाक विभाग की ओर से जारी GDS Online Engagement Schedule-II, July 2026 के तहत आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी. पहले उम्मीदवार को वन टाइम रजिस्ट्रेशन करना होगा. ओटीआर की प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू होगी, जबकि ऑनलाइन आवेदन और फीस जमा करने की प्रक्रिया 2 सितंबर 2026 शाम 5 बजे से शुरू होगी. वहीं इच्छुक उम्मीदवार 21 सितंबर 2026 शाम 5बजे तक आवेदन कर सकेंगे.&amp;nbsp;
10वीं पास उम्मीदवारों कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
जीडीएस भर्ती के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना जरूरी है. 10वीं में गणित और अंग्रेजी विषय में पासिंग मार्क्स होने चाहिए. इसके अलावा उम्मीदवार को संबंधित सर्कल की निर्धारित स्थानीय भाषा की कम से कम दसवीं तक पढ़ाई की होनी चाहिए. उम्मीदवार के पास कंप्यूटर की जानकारी और साइकिल चलाने का ज्ञान भी होना चाहिए. इसके अलावा भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष निर्धारित है. आयु की गणना आवेदन की अंतिम तारीख के आधार पर की जाएगी. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट मिलेगी.&amp;nbsp;
इन पदों पर होगी नियुक्ति&amp;nbsp;
भर्ती के तहत तीन तरह के पदों पर नियुक्ति की जाएगी. ब्रांच पोस्ट मास्टर को संबंधित ब्रांच पोस्ट ऑफिस की जिम्मेदारी संभालनी होगी. वहीं असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर डाक वितरण, स्टांप और स्टेशनरी की बिक्री समेत अन्य कामों में बीपीएम की सहायता करेंगे. डाक सेवक के तौर पर डाक और पार्सल से जुड़े काम, स्टांप बिक्री और पोस्ट ऑफिस के दूसरे कार्यों में जिम्मेदारी निभानी होगी. इस भर्ती में पदों की सर्कल और डिवीजनवार संख्या उम्मीदवारों को जीडीएस ऑनलाइन एंगेजमेंट पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी. उम्मीदवार आवेदन करते समय पदों के अनुसार अपनी पसंद का डिवीजन और पोस्ट चुन सकेंगे.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-जामिया में एडमिशन पर घमासान, छात्रों को जबरन हटाने का आरोप&amp;nbsp;
10वीं के नंबरों पर बनेगी मेरिट&amp;nbsp;
जीडीएस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. उम्मीदवारों का चयन कक्षा दसवीं में प्राप्त अंकों के आधार पर की गई सिस्टम जेनरेटेड मेरिट लिस्ट से होगा. अंकों की गणना 4 दशमलव तक की जाएगी. मेरिट लिस्ट में शॉर्टलिस्ट होने वाले उम्मीदवारों के मूल डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसके बाद मेडिकल जांच और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी. इसके अलावा इन पदों पर सभी वर्गों के लिए आवेदन फीस 100 रुपये निर्धारित हैं. वहीं महिला एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी और ट्रांस वूमेन उम्मीदवारों को फीस से छूट दी गई.&amp;nbsp;
ऐसे कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को सबसे पहले जीडीएस ऑनलाइन एंगेजमेंट पोर्टल पर जाकर वन टाइम रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड के जरिए लोगिन करके एक्टिव नोटिफिकेशन में आवेदन करना होगा. आवेदन के दौरान व्यक्तिगत जानकारी 10वीं की शैक्षणिक जानकारी, डिवीजन और पोस्ट की पसंद दर्ज करनी होगी. अब उम्मीदवार को निर्धारित प्रारूप में अपनी फोटो और सिग्नेचर अपलोड करने होंगे. जिन उम्मीदवारों पर आवेदन शुल्क लागू है, उन्हें ऑनलाइन फीस जमा करनी होगी. वहीं आवेदन में सुधार के लिए 23 और 24 सितंबर को करेक्शन विंडो खोली जाएगी.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>14 की उम्र में पिता को खोया, 3 बार UPSC में फेल, अब CAPF बने पंकज कंबोज</title>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली की बेटियों के लिए अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप, हर साल मिलेगी 30 हजार की मदद</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली की बेटियों के लिए अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप, हर साल मिलेगी 30 हजार की मदद ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>IIT के किस ट्रेड में मिलती हैं सबसे ज्यादा नौकरी? देखें पूरा रिपोर्ट कार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ IIT में एडमिशन लेने का सपना देश के लाखों छात्रों का होता है. इसकी एक बड़ी वजह यहां मिलने वाली पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे करियर और नौकरी के मौके भी हैं. लेकिन क्या IIT की हर ब्रांच में नौकरी के मौके एक जैसे होते हैं? हाल ही के प्लेसमेंट के &amp;nbsp;आंकड़े इस सवाल का जवाब देते हैं. IIT भुवनेश्वर की 2026 की B.Tech प्लेसमेंट रिपोर्ट में Electrical Engineering ने placement rate के मामले में Computer Science को भी पीछे छोड़ दिया है. इससे पता चलता है कि नौकरी के मामले में सिर्फ CSE ही सबसे आगे नहीं है. आइए जानते है IIT के किस ट्रेड में मिलती हैं सबसे ज्यादा नौकरी.
Electrical Engineering सबसे आगे
IIT भुवनेश्वर की 2026 प्लेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार Electrical Engineering के 68 छात्रों ने प्लेसमेंट के लिए हिस्सा लिया, जिनमें से 62 छात्रों को नौकरी मिली. यानी इस ब्रांच की placement rate 91.1 प्रतिशत रही. इस ब्रांच का औसत सालाना पैकेज 20.4 लाख रुपये रहा, जबकि सबसे ज्यादा पैकेज 74.3 लाख रुपये तक पहुंचा. IIT के ये आंकड़े बताते हैं कि Electrical Engineering की मांग अभी भी काफी बनी हुई है.
CSE में भी नौकरी के अच्छे मौके
Computer Science Engineering को आमतौर पर IIT की सबसे ज्यादा डिमांड वाली ब्रांच माना जाता है. IIT भुवनेश्वर के 2026 के आंकड़ों में CSE के 69 छात्रों ने प्लेसमेंट में हिस्सा लिया और 60 छात्रों को नौकरी मिली. इसकी placement rate 86.9 प्रतिशत रही. हालांकि यह Electrical Engineering से कम है, लेकिन CSE का औसत पैकेज 25.7 लाख रुपये रहा, जो इस रिपोर्ट में Electrical Engineering के औसत पैकेज से ज्यादा है. CSE में सबसे ज्यादा पैकेज 74.3 लाख रुपये रहा.
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Mechanical और दूसरी ब्रांचों का क्या हाल?
प्लेसमेंट के मामले में Mechanical Engineering भी पीछे नहीं रही। इस ब्रांच के 61 छात्रों में से 54 को नौकरी मिली और placement rate 88.5 प्रतिशत रही. Metallurgical and Materials Engineering में 19 में से 17 छात्रों को प्लेसमेंट मिला, यानी 89.4 प्रतिशत छात्र प्लेस हुए. वहीं Electronics and Communication Engineering की placement rate 76.4 प्रतिशत और Civil Engineering की 77.7 प्रतिशत रही। यानी हर ब्रांच में नौकरी के मौके हैं, लेकिन placement rate अलग-अलग रही.
सबसे ज्यादा पैकेज किस ब्रांच में मिला?
अगर बात सबसे ज्यादा पैकेज की करें तो इस रिपोर्ट में Electrical Engineering और Computer Science Engineering दोनों के छात्रों को अधिकतम 74.3 लाख रुपये सालाना तक का ऑफर मिला. ECE में सबसे ज्यादा पैकेज 56 लाख रुपये और Mechanical Engineering में 56 लाख रुपये रहा. Civil Engineering का सबसे ज्यादा पैकेज 29.7 लाख रुपये रहा. इससे साफ है कि सिर्फ placement rate नहीं, बल्कि औसत और अधिकतम पैकेज भी ब्रांच चुनते समय देखना जरूरी है.
IIT में कौन सी ब्रांच चुनें?
इन आंकड़ों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि हर IIT में Electrical Engineering ही सबसे ज्यादा नौकरी देने वाली ब्रांच होगी. अलग-अलग IIT और हर साल के प्लेसमेंट आंकड़े अलग हो सकते हैं. कंपनी की जरूरत, छात्र की स्किल और कॉलेज की स्थिति भी नौकरी पर असर डालती है. इसलिए सिर्फ एक रिपोर्ट देखकर ब्रांच चुनने के बजाय अपने पसंदीदा विषय, करियर लक्ष्य और अलग-अलग IIT के पिछले प्लेसमेंट आंकड़ों को भी देखना चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रोजगार के मोर्चे पर जेन जी की चिंता बढ़ी, 32% ने कहा नौकरियां हैं कम</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती सिर्फ अपनी पसंद की नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है. बल्कि बड़ी संख्या में युवा पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध न होने को ही सबसे बड़ी समस्या मानते हैं. हाल ही में सामने आई अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के सर्वे में 32 फीसदी लोगों ने कहा कि युवाओं के सामने सबसे बड़ी रोजगार समस्या पर्याप्त नौकरियों का नहीं होना है. इसके बाद 18 प्रतिशत लोगों ने कम वेतन को बड़ी परेशानी बताया. सर्वे में 17-17 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नौकरियां उनकी योग्यता के अनुरूप नहीं है और सरकारी भर्ती धीमी है. वहीं 7 प्रतिशत लोगों के अनुसार शिक्षा युवाओं को नियोक्ताओं की जरूरत के अनुसार कौशल स्किल नहीं देती. सिर्फ चार प्रतिशत ने सुरक्षित नौकरी और सुविधाओं की कमी को सबसे बड़ी समस्या माना है.&amp;nbsp;
रोजगार क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी किसकी?
रोजगार और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए. इस सवाल पर भी सर्वे में बताया गया है कि इसकी जिम्मेदारी सरकार को उठानी चाहिए. वहीं 63 प्रतिशत लोगों ने कहा युवाओं कि रोजगार क्षमता सुधारने के मुख्य जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की होनी चाहिए. इसके मुकाबले 14 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी स्कूल और यूनिवर्सिटी की भी हाेनी चाहिए. 9 प्रतिशत ने प्राइवेट कंपनी और 5 प्रतिशत ने व्यक्ति और परिवार को इसकी जिम्मेदारी दी. वहीं 10 प्रतिशत लोग ने सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया.&amp;nbsp;
देश में युवाओं की आबादी बढ़ी, लेकिन नौकरी तक पहुंच नहीं&amp;nbsp;
भारत में 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 36.7 करोड़ लोग हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी है. बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं और उनके बीच बेहतर करियर को लेकर उम्मीद भी बढ़ी है. हालांकि रोजगार के आंकड़े बताते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद स्थिर और अच्छी आय वाली नौकरी तक पहुंचना भी बड़ी समस्या है. अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रेजुएट्स की संख्या जिस गति से बढ़ रही है, उस अनुपात में ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी नहीं बढ़ी. युवा ग्रेजुएट के बीच बेरोजगारी, स्थायी और बेहतर सैलरी वाली नौकरियों की पहुंच समस्या बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 से 2023-24 के बीच जो 8.3 करोड़ नौकरियां जुड़ीं, उनमें करीब 4 करोड़ नौकरियां कृषि क्षेत्र में थी. ऐसे में बेरोजगारी दर में कमी आने के बावजूद रोजगार की गुणवत्ता एक अलग चुनौती बनी हुई है.&amp;nbsp;
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सरकारी आंकड़ों में बेरोजगारी दर घटी&amp;nbsp;
सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रोजगार की स्थिति में सुधार के आंकड़े सामने आए. इसके अनुसार 2017-18 में बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घट कर 3.2 प्रतिशत रह गई. इसी अवधि में महिलाओं की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 23 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हुई. वहीं चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 6 महीने में नेशनल करियर सर्विस के जरिए 2.3 करोड़ से ज्यादा रिक्तियों को भी उपलब्ध कराया गया. हालांकि सर्वे और रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि रोजगार की संख्या के साथ-साथ नौकरी का वेतन स्थायित्व और उम्मीदवार की योग्यता के अनुरूप काम मिलना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
रोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं पर जोर&amp;nbsp;
सरकारी की रोजगार नीति में रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन, स्किलिंग और औपचारिक के रोजगार को बढ़ावा देने पर छोड़ दिया गया है. रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन की योजना अब प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के रूप में लागू है. इस योजना के लिए &amp;nbsp;99,446 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और दो वर्ष में 3.5 करोड़ से ज्यादा रोजगार को समर्थन देने का टारगेट रखा गया है. इसमें करीब 1.92 करोड़ों ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जो पहली बार वर्कफोर्स में एंट्री करेंगे. पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है, जबकि एलिजिबल नियोक्ताओं को अतिरिक्त कर्मचारियों के लिए हर महीने 3000 रुपये तक मिल सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 15:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती का फिजिकल फिर स्थगित, ये हैं नई तारीखें</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2025 के तहत होने वाले फिजिकल सहनशक्ति एवं माप प्रशिक्षण को एक बार फिर स्थगित कर दिया गया है. दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस के अनुसार 27 और 28 अगस्त को आयोजित होने वाला फिजिकल टेस्ट अब स्थगित हो गया है. इन तारीखों के लिए निर्धारित परीक्षाओं को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते आगे बढ़ाया गया है. &amp;nbsp;नई तारीखों की जानकारी बाद में जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
27 और 28 अगस्त का फिजिकल टेस्ट स्थगित&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए पीई एंड एमटी का आयोजन अलग-अलग तारीखों में किया जा रहा है. इस क्रम में 27 और 28 अगस्त को होने वाली शारीरिक परीक्षण को स्थगित कर दिया गया है. दिल्ली पुलिस के नए नोटिस में इन दोनों तारीखों के एग्जाम को आगे बढ़ाने की जानकारी दी है. जिन उम्मीदवारों ने इन दोनों दिनों में पीई एंड एमटी के लिए उपस्थित होना था, उन्हें अब संशोधित परीक्षा तारीख का इंतजार करना होगा. पुलिस की ओर से कहा गया है कि नई तारीख की सूचना समय पर दी जाएगी.&amp;nbsp;
खराब मौसम के कारण लिया फैसला&amp;nbsp;
दिल्ली एनसीआर में लगातार बारिश और मौसम की स्थिति को देखते हुए फिजिकल टेस्ट को स्थगित करने का फैसला लिया गया है. पीई एंड एमटी में उम्मीदवारों को दौड़, लंबी कूद और ऊंची कूद जैसी फिजिकल एक्टिविटी में हिस्सा लेना होता है. ऐसे में मैदान की स्थिति खराब होने पर परीक्षा आयोजित करना मुश्किल हो जाता है. इससे पहले भी बारिश और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण 22, 24 और 25 अगस्त को निर्धारित फिजिकल टेस्ट स्थगित किया जा चुके हैं. इन तारीखों की परीक्षा अब 10, 11 और 12 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
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28 अगस्त वालों की नई परीक्षा कब होगी&amp;nbsp;
जिन उम्मीदवारों का पीई एंड एमटी 27 और 28 अगस्त को निर्धारित था. उन्हें फिलहाल नई तारीख घोषित होने का इंतजार करना होगा. दिल्ली पुलिस ने दोनों दिनों के स्थगित परीक्षण की संशोधित तारीख अभी जारी नहीं की है. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह दिल्ली पुलिस की ऑफिशियल वेबसाइट पर नियमित रूप से नोटिस और अपडेट चेक करते रहे. नई तारीख को लेकर सोशल मीडिया या किसी दूसरे अनधिकृत माध्यम से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर रहने न रहने को भी कहा गया है.
उम्मीदवार कहां देखे नया अपडेट
उम्मीदवार दिल्ली पुलिस की भर्ती से जुड़ा ऑफिशियल नोटिस और पीई एंड एमटी की संशोधित तारीख की जानकारी दिल्ली पुलिस की वेबसाइट delhipolice.gov.in &amp;nbsp;के भर्ती सेक्शन में देख सकते हैं. नई तारीख जारी होने के बाद उम्मीदवार को उसी के अनुसार परीक्षा की तारीख और दूसरी व्यवस्थाएं करनी होगी.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>केनरा बैंक में जॉब्स, बंपर सैलरी के साथ मुंबई&amp;बेंगलुरु में मिलेगी पोस्टिंग</title>
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        <description><![CDATA[ केनरा बैंक सिक्योरिटीज लिमिटेड ने अलग-अलग डिपार्टमेंट में 10 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए है. यह भर्ती मुंबई और बेंगलुरु में की जाएगी. भर्ती में एवीपी ऑपरेशंस, सीएस एवं कंप्लायंस ऑफिसर के अलावा असिस्टेंट मैनेजर, ऑफिसर और जूनियर ऑफिसर के पद शामिल है. इच्छुक उम्मीदवार इस भर्ती के लिए 15 सितंबर 2026 शाम 6 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया ईमेल के माध्यम से पूरी करनी होगी. उम्मीदवारों को निर्धारित आवेदन फॉर्म भरकर जरूरी डॉक्यूमेंट और अपडेटेड रिज्यूमे के साथ केनरा बैंक के ईमेल एड्रेस पर भेजना होगा.&amp;nbsp;
10 पदों पर होनी है भर्ती&amp;nbsp;
सीबीएसएल की ओर से जारी भर्ती के तहत कुल 10 खाली पद है. इनमें एवीपी ऑपरेशंस और सीएस एवं कंप्लायंस ऑफिसर के एक-एक पद शामिल है. इसके अलावा डीपी बैक ऑफिस ऑपरेशन बैंगलोर में दो पद पर भर्ती होगी. रिस्क मैनेजमेंट मुंबई के दो पद, कंप्लायंस &amp;nbsp;मुंबई का एक पद, इंस्टीट्यूशन डीलर मुंबई का एक पद और रिसर्च विभाग मुंबई बेंगलुरु के दो पदों पर भर्ती होगी. इस तरह कुल 10 पदों पर नियुक्ति की जानी है.&amp;nbsp;
ये उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
इन पदों के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 20 और अधिकतम उम्र 30 वर्ष निर्धारित की गई है. एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष, जबकि ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल की छूट दी जाएगी. इसके अलावा कैपिटल मार्केट या फाइनेंशियल सर्विसेज में एक्सपीरियंस रखने वाले उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार एक्सपीरियंस की अवधि के आधार पर अधिकतम 10 साल तक की अतिरिक्त आयु छूट मिल सकती है. इसके लिए संबंधित एक्सपीरियंस का प्रमाण पत्र देना होगा. सभी पदों के लिए कंप्यूटर का नॉलेज जरूरी है. हालांकि अलग-अलग पदों के लिए संबंधित शैक्षणिक योग्यता और काम का एक्सपीरियंस निर्धारित है. वहीं कंपनी उम्मीदवारों की योग्यता और एक्सपीरियंस के आधार पर ही पद ग्रेड तय कर सकती है.&amp;nbsp;
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बिना लिखित परीक्षा होगा चयन&amp;nbsp;
सीबीएसएल की भर्ती में उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में शामिल नहीं होना होगा. सबसे पहले शैक्षणिक रिकॉर्ड, एक्सपीरियंस और पद के लिए उपयुक्तता के आधार पर उम्मीदवार की शॉर्ट लिस्टिंग की जाएगी. शॉर्ट लिस्टिंग किए किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इंटरव्यू की तारीख, समय और स्थान की जानकारी उम्मीदवारों को ईमेल के जरिए दी जाएगी. इंटरव्यू में शामिल होने के लिए आने जाने का खर्च उम्मीदवार को खुद उठाना होगा. वहीं अंतिम चयन इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा . इसके साथ ही चयनित उम्मीदवारों का कंपनी की आवश्यकताओं के अनुसार मेडिकल फिटनेस पूरा करना जरूरी होगा.&amp;nbsp;
15 सितंबर तक भेजना होगा आवेदन&amp;nbsp;
सीबीएसएल भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया ईमेल के जरिए होगी. उम्मीदवारों को कंपनी की वेबसाइट के करियर सेक्शन से निर्धारित आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर उसे भरना होगा. इसके बाद आवेदन फॉर्म के साथ अपडेटेड रिज्यूमे और जरूरी डॉक्यूमेंट की कॉपी लगानी होगी. इन डॉक्यूमेंट में जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं का प्रमाण पत्र, दूसरी मार्कशीट, एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट, लागू होने पर जाति प्रमाण पत्र और दूसरे डॉक्यूमेंट शामिल है. पूरा आवेदन applications@canmoney.in पर ईमेल करना होगा. आवेदन की आखिरी तारीख 26 सितंबर है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>केनरा, बैंक, में, जॉब्स, बंपर, सैलरी, के, साथ, मुंबई-बेंगलुरु, में, मिलेगी, पोस्टिंग</media:keywords>
    </item>
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        <title>राजस्थान में 76 हजार टीचर्स को घंटे के हिसाब से मिलेगी सैलरी, जानें कैसे होगी भर्ती</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राजस्थान-में-76-हजार-टीचर्स-को-घंटे-के-हिसाब-से-मिलेगी-सैलरी-जानें-कैसे-होगी-भर्ती</link>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान में सरकारी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति करने जा रही है. इस योजना के तहत करीब 76,791 पदों पर शिक्षकों को मौका दिया जाएगा. खास बात यह है कि इन शिक्षकों को नियमित सरकारी कर्मचारी की तरह वेतन नहीं मिलेगा, बल्कि पढ़ाए गए घंटों के आधार पर वेतन दिया जाएगा. इससे एक तरफ स्कूलों में खाली पदों को भरने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ योग्य युवाओं को पढ़ाने का अवसर मिलेगा.
76 हजार से ज्यादा पदों पर होगी नियुक्ति
विद्या संबल योजना के तहत राज्य के सरकारी स्कूलों और दूसरे शिक्षण संस्थानों में खाली पदों को जरूरत के हिसाब से भरा जाएगा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुल 76,791 गेस्ट फैकल्टी पदों पर नियुक्ति की तैयारी है. इसमें अलग-अलग कक्षाओं और विषयों के लिए शिक्षक रखे जाएंगे. कक्षा 1 से 8 तक के लिए ग्रेड-3 शिक्षक, कक्षा 9 और 10 के लिए वरिष्ठ अध्यापक और कक्षा 11 व 12 के पद शामिल किए गए हैं. उच्च शिक्षा संस्थानों में भी जरूरत के अनुसार गेस्ट फैकल्टी रखी जा सकती है.
घंटे के हिसाब से मिलेगी सैलरी
इस योजना में शिक्षकों का वेतन उनके पद और पढ़ाने वाली कक्षा के आधार पर तय किया गया है. कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले ग्रेड-3 शिक्षक को 300 रुपये प्रति घंटा मानदेय मिलेग. इनके लिए अधिकतम मासिक मानदेय 21 हजार रुपये तय है. कक्षा 9 और 10 के वरिष्ठ अध्यापक को 350 रुपये प्रति घंटा और अधिकतम 25 हजार रुपये महीने तक मिलेंगे. वहीं कक्षा 11 और 12 के व्याख्याता को 400 रुपये प्रति घंटा और अधिकतम 30 हजार रुपये महीने तक मानदेय दिया जाएगा.
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चयन के लिए नहीं होगी लिखित परीक्षा
इस भर्ती की खास बात यह है कि उम्मीदवारों को इसके लिए अलग से लिखित परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी. चयन शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के आधार पर तैयार मेरिट से किया जाएगा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शैक्षणिक योग्यता के लिए 75 प्रतिशत और प्रशैक्षणिक योग्यता व अनुभव के लिए 25 प्रतिशत अंक रखे जा सकते हैं. इससे संबंधित विषय में अच्छी योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को फायदा मिल सकता है. पात्र सेवानिवृत्त शिक्षक भी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे&amp;rsquo;
कैसे करना होगा आवेदन?
गेस्ट फैकल्टी के लिए आवेदन संबंधित स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्थान की ओर से जारी सूचना के अनुसार किया जाएगा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आवेदन ऑफलाइन माध्यम से लिया जा सकता है और इसके लिए उम्मीदवारों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा. उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र के संबंधित स्कूल या संस्थान की ओर से जारी होने वाली सूचना पर नजर रखनी होगी. आवेदन करते समय शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और दूसरे जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे.
क्या यह स्थायी सरकारी नौकरी होगी?
यहां एक बात समझना जरूरी है कि विद्या संबल योजना के तहत होने वाली नियुक्ति नियमित सरकारी नौकरी नहीं है. गेस्ट फैकल्टी को जरूरत के हिसाब से अस्थायी तौर पर रखा जाएगा. नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने या संबंधित संस्थान में गेस्ट फैकल्टी की जरूरत खत्म होने पर सेवा भी समाप्त हो सकती है. इसलिए उम्मीदवार इसे स्थायी सरकारी नौकरी न समझें. हालांकि जिन युवाओं को शिक्षण क्षेत्र में अनुभव लेना है, उनके लिए यह अच्छा मौका हो सकता है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राजस्थान, में, हजार, टीचर्स, को, घंटे, के, हिसाब, से, मिलेगी, सैलरी, जानें, कैसे, होगी, भर्ती</media:keywords>
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        <title>हिमाचल स्कूलों में एडमिशन फॉर्म से हटेगा जाति कॉलम, सीएम के निर्देश</title>
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        <description><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में अगले शैक्षणिक स्तर से एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं होगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को अधिकारियों को स्कूल में प्रवेश फाॅर्म से जाति का कॉलम हटाने का निर्देश दिया. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही जाति के आधार पर पहचान दिए जाने से रोकना और स्कूलों में समानता व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है.
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए. उन्होंने कहा कि सरकार समाज में जातीय भेदभाव को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है और स्कूल स्तर से ही बच्चों के बीच जाती के आधार पर किसी तरह की हीन भावना पैदा नहीं होनी चाहिए.&amp;nbsp;
सरकारी योजनाओं के लाभ में नहीं होगी परेशानी&amp;nbsp;
जाति का कॉलम हटाए जाने के बावजूद अनुसूचित जाति और दूसरे एलिजिबल वर्गों के विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिलता रहेगा. इसके लिए जरूरत पड़ने पर छात्र अपने माता-पिता या अभिभावकों के माध्यम से जाति से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे. सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है स्कूल एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने का मतलब यह नहीं होगा कि एलिजिबल स्टूडेंट्स को सरकारी योजनाओं से बाहर कर दिया जाएगा. योजनाओं का लाभ देने के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-जामिया में एडमिशन पर घमासान, छात्रों को जबरन हटाने का आरोप&amp;nbsp;
शिक्षा विभाग तैयार करेगा नीति&amp;nbsp;
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि इस फैसले को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग जल्द ही नीति तैयार करेगा. इसमें इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि सरकारी योजनाओं और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए एलिजिबल किसी भी बच्चे को जरूरी सुविधाओं से वंचित न होना पड़े. व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूलों के एडमिशन फॉर्म और संबंधित रिकार्ड में भी बदलाव किए जाएंगे. वहीं जिन मामलों में सरकारी योजनाओं या दूसरे प्रशासनिक जरूरत के लिए जाती से जुड़ी जानकारी जरूरी होगी, उसे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी.&amp;nbsp;
दूसरी योजनाओं का भी जिक्र&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराने के बाद भी कही. सरकार का उद्देश्य आर्थिक परेशानी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई न रुके, इसे सुनिश्चित करना है. इसके अलावा बैठक में मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति समुदाय के कल्याण के लिए चल रही योजनाओं की भी जानकारी दी. वहीं सीएम ने राजीव गांधी स्टार्टअप स्वरोजगार योजना का भी उल्लेख किया. इसके अलावा सीएम ने बताया कि राज्य सरकार बहुत गरीब परिवारों के लिए अपना परिवार सुखी परिवार योजना लागू करने जा रही है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>RRB NTPC UG CBT 2 की तारीख जारी, इस दिन होगी परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने नॉन-टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी (NTPC) अंडर ग्रेजुएट भर्ती के दूसरे चरण की कंप्यूटर आधारित परीक्षा की तारीख जारी कर दी है. आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 2 परीक्षा 17 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए होगी, जिन्हें सीबीटी 1 के रिजल्ट के बाद अगले चरण के लिए शार्ट लिस्ट किया गया है. उम्मीदवार अपने क्षेत्रीय आरआरबी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर परीक्षा से जुड़ी जानकारी और शेड्यूल देख सकते हैं. &amp;nbsp;
17 सितंबर को होगी सीबीटी 2 परीक्षा&amp;nbsp;
आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 2 परीक्षा 17 सितंबर को कंप्यूटर आधारित टेस्ट के रूप में होगी. परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को कुल 90 मिनट का समय दिया जाएगा. प्रश्न पत्र में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, जो तीन विषयों से पूछे जाएंगे. जनरल अवेयरनेस से 50 प्रश्न, जबकि मैथमेटिक्स और जनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग से 35-35 प्रश्न होंगे. इस तरह कुल 120 प्रश्न 120 अंकों के होंगे. परीक्षा में गलत उत्तर देने पर एक तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी.&amp;nbsp;
कब जारी होगी सिटी स्लिप और एडमिट कार्ड?
सीबीटी 2 में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए परीक्षा सिटी इंटीमेशन स्लिप और एससी-एसटी ट्रैवल पास 7 सितंबर से उपलब्ध होगा. वही परीक्षा का एडमिट कार्ड 13 सितंबर 2026 डाउनलोड किया जा सकेगा. इसके अलावा सीबीटी 2 पास करने वालों के लिए टाइपिंग स्किल टेस्ट 4 दिसंबर 2026 काे निर्धारित है.&amp;nbsp;
45,898 उम्मीदवार सीबीटी 2 के लिए शॉर्टलिस्ट&amp;nbsp;
आरआरबी एनटीपीसी यूजी भर्ती के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. अंडर ग्रेजुएट स्तर के पदों के लिए 63,27,474 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें से 45,898 उम्मीदवारों को सीबीटी 2 के लिए शार्ट लिस्ट किया गया. यह संख्या कुल रिक्तियों की तुलना में करीब 15 गुना है. इस भर्ती में कुल 3,058 पद हैं. इनमें सबसे ज्यादा 2,424 पद कमर्शियल कम टिकट क्लर्क के है. इसके अलावा 394 अकाउंट्स क्लर्क कम टाइपिस्ट, 163 जूनियर क्लर्क कम टाइपिस्ट और 77 ट्रेन्स क्लर्क के पद शामिल है.&amp;nbsp;
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सीबीटी 2 में कितना स्कोर जरूरी?&amp;nbsp;
सीबीटी 2 में अलग-अलग कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता अंक निर्धारित है. अनारक्षित और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत, ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर और एससी उम्मीदवारों के लिए 30 प्रतिशत, जबकि एसटी उम्मीदवारों के लिए 25 प्रतिशत अंक निर्धारित है. पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रिक्तियों के मुकाबले पर्याप्त योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में न्यूनतम अंकों में दो अंक तक की छूट दी जा सकती है.
चार चरणों में पूरी होगी भर्ती&amp;nbsp;
आरआरबी एनटीपीसी यूजी भर्ती में चयन कई चरणों के जरिए किया जाएगा. इससे पहले चरण की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT 2), &amp;nbsp;दूसरे चरण की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT 2), संबंधित पदों के लिए कंप्यूटर आधार टाइपिंग स्किल टेस्ट और इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल एग्जामिनेशन शामिल है. वहीं टाइपिंग टेस्ट पद के अनुसार लागू होगा. इसके अलावा सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर मेरिट के अनुसार उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>जामिया में क्यों नहीं होते छात्रसंघ चुनाव? जानें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल है. विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और ऐतिहासिक पहचान जितनी मजबूत है, उतनी ही चर्चा यहां छात्र राजनीति को लेकर भी होती रही है. जामिया का इतिहास भी इसे सामान्य विश्वविद्यालयों से अलग बनाता है. इसकी स्थापना राष्ट्रीय आंदोलन और शिक्षा के उद्देश्य से जुड़ी रही है. इसलिए यहां छात्र राजनीति का सवाल केवल चुनाव कराने या न कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक संरचना, छात्र भागीदारी और कैंपस संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है. हालांकि, दूसरे कई विश्वविद्यालयों की तरह जामिया में नियमित रूप से छात्रसंघ चुनाव नहीं होते. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर यहां छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं कराए जाते हैं?
अनुशासन है बड़ी वजह
जामिया में छात्रसंघ चुनावों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय-समय पर परिसर में चुनाव और छात्र राजनीति को लेकर अलग-अलग निर्णय लिए हैं. चुनाव नहीं होने की एक बड़ी वजह विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परिसर में शैक्षणिक माहौल, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को प्राथमिकता देना रही है.
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छात्र संगठन उठाते हैं छात्रों की आवाज
जामिया में छात्र प्रतिनिधित्व का मुद्दा हालांकि पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग छात्र संगठन और प्रतिनिधि सक्रिय रहे हैं. छात्र संगठन फीस, हॉस्टल, परीक्षा, छात्रवृत्ति, सुविधाओं और अन्य शैक्षणिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं. लेकिन ये गतिविधियां नियमित निर्वाचित छात्रसंघ के समान नहीं हैं. छात्र विभिन्न माध्यमों से अपनी शिकायतें और मांगें विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाते हैं.
क्या कहते हैं समर्थक?
छात्रसंघ चुनाव के समर्थकों का तर्क है कि चुनाव छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देते हैं. इससे छात्र अपनी समस्याओं के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद कर सकते हैं. उनका मानना है कि कैंपस में लोकतांत्रिक भागीदारी छात्रों के नेतृत्व कौशल को भी विकसित करती है. दूसरी ओर, चुनावों के विरोध या उन्हें सीमित रखने के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि राजनीतिक गतिविधियों के कारण पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है. बड़े स्तर पर चुनाव होने पर परिसर में गुटबाजी, प्रदर्शन और विवाद की स्थिति बनने की आशंका भी जताई जाती है. केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रशासन अक्सर शैक्षणिक गतिविधियों और परिसर में अनुशासन बनाए रखने को प्राथमिकत देता है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CTET 2026 के लिए दोबारा आवेदन का मौका, ये है लास्ट डेट</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 22वें संस्करण के लिए आवेदन विंडो दोबारा खोल दी है. योग्य उम्मीदवार 1 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. सीबीएसई ने 25 अगस्त को जारी किए नोटिस में बताया कि यह मौका उन योग्य उम्मीदवारों के लिए दिया गया है, जो पहले आवेदन नहीं कर सके थे. वहीं जो उम्मीदवार पहले से ही सफलतापूर्वक आवेदन जमा कर चुके हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है.&amp;nbsp;
1 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
सीटीईटी 2026 के लिए दोबारा आवेदन की प्रक्रिया 25 अगस्त से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार 1 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. इससे पहले 22वें संस्करण के लिए आवेदन प्रक्रिया 11 मई से 10 जून तक चली थी. जिन योग्य उम्मीदवारों ने उस समय आवेदन नहीं किया था, उन्हें एक और मौका दिया गया है. उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए अब अपना आवेदन जमा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिया फैसला&amp;nbsp;
सीबीएसई ने आवेदन विंडो दोबारा खोलने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिया. बोर्ड के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि योग्य शिक्षकों को निर्धारित शिक्षक पात्रता परीक्षा की योग्यता पूरी करने के लिए उचित अवसर दिया जाना चाहिए. इसी को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने उन सभी योग्य उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला किया है, जो पहले आवेदन नहीं कर पाए थे.&amp;nbsp;
पहले आवेदन कर चुके उम्मीदवारों को क्या करना होगा?
जिन उम्मीदवारों ने पहले ही सीटीईटी 2026 के लिए अपना आवेदन जमा कर दिया है, उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं है. नया आवेदन विंडो केवल उन योग्य उम्मीदवारों के लिए खुला है जो पिछली आवेदन प्रक्रिया में आवेदन नहीं कर सके थे.&amp;nbsp;
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सीटीईटी 2026 की नई परीक्षा तारीख कब?
सीबीएसई ने अभी सीटीईटी के 22 वें संस्करण की नई तारीखें घोषित नहीं की है. बोर्ड के अनुसार आवेदन की दोबारा खोली गई विंडो 1 सितंबर को बंद होने के बाद संशोधित परीक्षा तारीख जारी की जाएगी. इसलिए नई सिरे से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर रखनी होगी. वहीं आपको बता दें कि सीबीएसई अब तक सीटीईटी के 21 संस्करण आयोजित कर चुका है. 21वें सीटीईटी का रिजल्ट 30 मार्च 2026 को जारी किया गया था. वहीं 22वें संस्करण के लिए आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है.&amp;nbsp;
ऐसे करें सीटीईटी 2026 के लिए आवेदन&amp;nbsp;

आवेदन के लिए उम्मीदवार सबसे पहले सीटीईटी की ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाए.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर सीटीईटी सितंबर 2026 से जुड़े लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब नए पेज पर रजिस्ट्रेशन करें.
उसके बाद पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल भरें.
लास्ट में फॉर्म को एक बार फिर चेक करके सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>FMGE रिजल्ट के बाद फिर सड़कों पर अभ्यर्थी, क्या है प्रमुख मांगें?</title>
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        <description><![CDATA[ जून 2026 के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गया है. विदेशी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाले भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स परीक्षा में कम प्रतिशत, पेपर के कठिन स्तर और वीडियो आधारित सवालों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. अब कुछ उम्मीदवार अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. जून 2026 की FMGE &amp;nbsp; परीक्षा में कुल 37,448 उम्मीदवार शामिल हुए थे, लेकिन इनमें से सिर्फ 12.38 फीसदी ही परीक्षा पास कर सके. रिजल्ट 10 जुलाई को जारी होने के बाद से ही अभ्यर्थियों का विरोध शुरू हो गया था. उम्मीदवारों का आरोप है कि इस बार परीक्षा का पेपर सामान्य से ज्यादा कठिन था और वीडियो आधारित सवालों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना शामिल किया गया. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी लेकर शिकायत सामने आई.&amp;nbsp;
3 अगस्त को जंतर मंतर पर हुआ था प्रदर्शन&amp;nbsp;
कम पास प्रतिशत के बाद जुलाई में अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया. यह मामला 3 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर तक पहुंचा था, जहां ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट एसोसिएशन-फॉरेन मेडिकल स्टूडेंट विंग और ऑल FMGE &amp;nbsp;संगठन के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शन के बाद अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए बुलाया गया. इसके बाद NBEMS ने जून FMGE से जुड़ी शिकायतों के लिए तीन सदस्यीय स्वतंत्र समिति का गठन किया. समिति को परीक्षा के आयोजन और उसके नतीजे की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई. बातचीत शुरू होने के बाद उम्मीदवारों ने कुछ समय के लिए अपना आंदोलन रोक दिया. उम्मीदवारों के अनुसार उन्हें उम्मीद थी कि उनकी शिकायतों का समाधान बातचीत के जरिए निकलेगा. उनका कहना है कि परीक्षा की आंसर की, पेपर की कठिनाई, वीडियो आधारित सवाल, परीक्षा फीस और दूसरे समस्याओं पर चर्चा हुई, लेकिन जून परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों को राहत देने की मांग आगे नहीं बढ़ सकी.&amp;nbsp;
जून FMGE &amp;nbsp;के उम्मीदवारों के लिए मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों की सबसे बड़ी मांग जून 2026 की एफएमजी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को मुआवजा या किसी तरह की राहत देने की है. उनका कहना है कि अगर परीक्षा को लेकर भविष्य के लिए बदलाव जरूरी माने गए, तो इस साल जून में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को भी राहत मिलनी चाहिए. उम्मीदवारों को कहना है कि वह बिना किसी प्रक्रिया के पास किए जाने की मांग नहीं कर रहे हैं, उनकी मांग एक बार की रियायत या मुआवजा को लेकर है. प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों का कहना है कि जिन समस्याओं का वे आरोप लगा रहे हैं, उनका असर जून बैच के प्रदर्शन पर पड़ा है &amp;zwnj;
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NBEMS और NMC का क्या कहना?
वीडियो आधारित सवालों को लेकर NBEMS और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का पक्ष अलग-अलग है. एनएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ऐसे सवालों के जरिए क्लीनिकल संकेत और मेडिकल स्थितियों को बेहतर तरीके से रखा जा सकता है, जिन्हें स्थिर तस्वीरों के जरिए हमेशा सही तरीके से नहीं जांचा जा सकता. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो आधारित सवाल मेडिकल ट्रेनिंग के अनुरूप है. एफएमजीई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट न्यूनतम जरूरी दक्षता के मानकों को पूरा करते हो.&amp;nbsp;
NExT को लेकर भी उम्मीदवारों का सुझाव&amp;nbsp;
कम पास प्रतिशत को लेकर उम्मीदवार विदेशी मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी दलीलों से भी सहमत नहीं है. उनका कहना है कि अगर भारतीय और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए समान दक्षता मानक तय करना है, तो दोनों के लिए एक ही बड़ी परीक्षा होनी चाहिए. प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों ने नेशनल एग्जिट टेस्ट को इसके लिए एक ऑप्शन के तौर पर सुझाया हैं. उनका मानना है कि भविष्य में नेक्स्ट के जरिए घरेलू और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए समान परीक्षा व्यवस्था बनाई जा सकती है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>FMGE, रिजल्ट, के, बाद, फिर, सड़कों, पर, अभ्यर्थी, क्या, है, प्रमुख, मांगें</media:keywords>
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        <title>पेपर लीक के आरोपों के बाद MPSC ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती रद्द, दोबारा होगी परीक्षा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पेपर-लीक-के-आरोपों-के-बाद-mpsc-ड्रग-इंस्पेक्टर-की-भर्ती-रद्द-दोबारा-होगी-परीक्षा</link>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप B) पदों पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है. यह भर्ती खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) के लिए की जा रही थी. 22 मार्च को हुई स्क्रीनिंग परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लेकर आरोपी के बाद आयोग ने यह फैसला लिया है. अब इस भर्ती के लिए दोबारा स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;एमपीएससी को 22 से 26 जुलाई के बीच कुछ अभ्यर्थी और जनप्रतिनिधियों की ओर से शिकायतें मिली थी. शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र मिल गए थे. वहीं अब परीक्षा को लेकर जांच के बाद इसे रद्द कर दिया गया है और परीक्षा दोबारा करने का ऐलान किया गया है.
पुलिस से कराई गई थी जांच&amp;nbsp;
शिकायत मिलने के बाद एमपीएससी ने 27 जुलाई को मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. पूरे मामले की जांच का अनुरोध किया था, इसके बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के उपायुक्त की ओर से आयोग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रारंभिक जांच में पहली नजर में यह सामने आया कि एक उम्मीदवार को प्रश्नों का सेट पहले मिल गया था और उसे इसका फायदा हुआ. हालांकि एमपीएससी ने यह नहीं कहा है कि पूरा प्रश्न पत्र लीक हुआ था. आयोग ने कहा की भर्ती प्रक्रिया रद्द करने का फैसला परीक्षाओं की गोपनीयता, निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए किया गया है. साथ ही इससे उम्मीदवारों का आयोग की भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने में मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड
अब दोबारा होगी ड्रग इंस्पेक्टर की परीक्षा&amp;nbsp;
एमपीएससी अब ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप बी पदों के लिए नई स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित करेगा. खास बात यह है कि पहले इस भर्ती के लिए आवेदन कर चुके उम्मीदवारों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. उन्हें नए सिरे से आवेदन फीस भी नहीं देनी होगी. दोबारा होने वाली परीक्षा की तारीख आयोग की ओर से बाद में जारी की जाएगी, यानी फिलहाल उम्मीदवारों को नई तारीख के ऐलान का इंतजार करना होगा.&amp;nbsp;
इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थी भर्ती प्रक्रिया &amp;nbsp;&amp;nbsp;ड्रग इंस्पेक्टर पदों के लिए भर्ती का नोटिफिकेशन 29 जुलाई 2025 को जारी किया गया. इसके बाद 22 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के 6 संभागीय मुख्यालय में ऑफलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गई थी. एमपीएससी ने 12 जून को स्क्रीनिंग परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया था. इसमें 506 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शाॅर्ट लिस्ट किया गया था. इसके बाद 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच इंटरव्यू आयोजित किए गए, जिनमें 488 उम्मीदवार शामिल हुए. इंटरव्यू के बाद आयोग ने 488 उम्मीदवारों की जानकारी वाली प्रोविजनल जनरल मेरीट लिस्ट भी जारी की थी. इसमें 485 उम्मीदवारों को ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए चयनित किया गया, जबकि तीन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया गया.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पेपर, लीक, के, आरोपों, के, बाद, MPSC, ड्रग, इंस्पेक्टर, की, भर्ती, रद्द, दोबारा, होगी, परीक्षा</media:keywords>
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        <title>नीट पीजी 2026 परीक्षा नहीं होगी पोस्टपोन, NBEMS ने दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ नीट पीजी 2026 परीक्षा पोस्टपोन होने को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा चल रही. वहीं परीक्षा पोस्टपोन होने की चर्चाओं के बीच नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन एंड मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने उम्मीदवारों को चेतावनी दी है कि बोर्ड ने सोशल मीडिया पर परीक्षा से जुड़ी झूठी, गलत या भ्रामक पोस्ट शेयर करने की सलाह नहीं दी है और NBEMS ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की जानकारी फैलाने पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.&amp;nbsp;
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद NBEMS की चेतावनी&amp;nbsp;
नीट पीजी परीक्षा स्थगित होने की चर्चा सोशल मीडिया पर अलग-अलग पोस्ट के जरिए सामने आई थी. एक यूजर ने पोस्ट में लिखा क्या नीट पीजी परीक्षा स्थगित होने वाली है, उसने कई लोगों और ग्रुप्स में ऐसी बात सुनी है. यूजर ने यह पोस्ट NBEMS टैग करते हुए किया. इसके जवाब में NBEMS &amp;nbsp;ने सावधानी बरतने की सलाह दी है. इसके बाद NBEMS की ओर से जारी सार्वजनिक चेतावनी दिए जाने के बाद उस यूजर ने अपनी पोस्ट डिलीट कर दी. बोर्ड ने एक दूसरे यूजर पर भी इसी तरह की चेतावनी दी. इसके बाद NBEMS ने उम्मीदवारों को परीक्षा की तारीख को लेकर बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी तरह की जानकारी शेयर करने से बचने की सलाह दी है.&amp;nbsp;
30 अगस्त को होनी है परीक्षा&amp;nbsp;
नीट पीजी 2026 परीक्षा 30 अगस्त को आयोजित की जानी है. परीक्षा सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक होगी. NBEMS की ओर से परीक्षा स्थगित किए जाने की कोई जानकारी नहीं दी गई है और बोर्ड की चेतावनी सोशल मीडिया पर चल रही पोस्ट और अटकलों के बीच आई है. उम्मीदवारों को परीक्षा से संबंधित अपडेट के लिए NBEMS की ऑफिशियल वेबसाइट पर भरोसा करने की सलाह दी गई है. इसके अलावा NBEMS &amp;nbsp;ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा पोस्टपोन नहीं हो रही है, सोशल मीडिया पर चल रही है पोस्टपोन से जुड़ी सभी खबरें फेक है.&amp;nbsp;
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जारी हुआ एडमिट कार्ड&amp;nbsp;
नीट पीजी 2026 का एडमिट कार्ड 26 अगस्त को जारी कर दिया गया है. उम्मीदवारों NBEMS की ऑफिशियल वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. इससे पहले एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख में 1 दिन की देरी हुई थी. असम और मेघालय में मिली कुछ मांगों और अपरिहार्य परिस्थितियों के चलते इसमें बदलाव किया गया था. एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों NBEMS की वेबसाइट पर जाकर इसे डाउनलोड कर सकते हैं.&amp;nbsp;
इस बार का क्या है नीट एग्जाम पैटर्न&amp;nbsp;
नीट पीजी 2026 परीक्षा में कुल 180 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे. प्रत्येक सही उत्तर के लिए चार अंक दिए जाएंगे, जबकि गलत उत्तर के लिए एक अंक काटा जाएगा. जिन सवालों को उम्मीदवार छोड़ देंगे, उनके लिए कोई नंबर नहीं काटे जाएंगे. वहीं फिलहाल परीक्षा 30 अगस्त को सुबह 9 बजे से 12:30 बजे एक शिफ्ट में ही निर्धारित है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इस राज्य के इंटर्न डॉक्टरों की चांदी, इतना बढ़ा स्टाइपेंड </title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा संस्थानों में इंटर्नशिप कर रहे एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के लिए राहत की खबर है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इंटर्न डॉक्टर के मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों, इंस्टीट्यूट और मेडिकल यूनिवर्सिटीज में अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को हर महीने 12,000 की जगह 25,000 रुपये स्टाइपेंड मिलेगा. जिसका मतलब है कि इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 13 हजार की बढ़ोतरी की गई है. स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया है. यह योगी सरकार के कार्यकाल में इंटर्नशिप स्टाइपेंड में दूसरी बढ़ोतरी है. इससे पहले साल 2021 में इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 7,500 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये किया गया था.&amp;nbsp;
किन छात्रों को मिलेगा बढ़ा हुआ स्टाइपेंड?
नया स्टाइपेंड उन एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने अपनी परीक्षा पास कर ली है और राज्य के सरकारी मेडिकल संस्थानों में अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप कर रहे हैं. यह बढ़ी हुई राशि राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों, &amp;nbsp;चिकित्सा संस्थान और मेडिकल यूनिवर्सिटीज में लागू होगी.&amp;nbsp;
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इंटर्नशिप के दौरान ये जिम्मेदारियां संभालते छात्र&amp;nbsp;
एमबीबीएस और बीडीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप मेडिकल छात्रों के लिए प्रशिक्षण का जरूरी हिस्सा होती है. इस दौरान छात्र सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ काम करते हैं. वह मरीज की देखभाल और सहयोग करने के साथ वार्ड, ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. इंटर्न डॉक्टरों की नाइट ड्यूटी भी लगाई जाती है. वहीं सरकार के अनुसार स्टाइपेंड बढ़ाने से इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को आर्थिक राहत मिलेगी. इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और इमरजेंसी सेवाओं में उनकी भूमिका को भी प्रोत्साहन मिलेगा.&amp;nbsp;
स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर हुआ था, प्रदर्शन&amp;nbsp;
इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे थे. इसी मांग को लेकर 22 अगस्त को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस इंटर्न ने प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन में केजीएमयू के अलावा राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ, बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर और लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ समेत दूसरे इंस्टीट्यूट के इंटर्न शामिल हुए थे. इसके बाद अब कैबिनेट की मंजूरी के बात उत्तर प्रदेश में सरकारी मेडिकल संस्थानों में इंटर्नशिप कर रहे हैं, एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों को हर महीने 25,000 रुपये का स्टाइपेंड मिलेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UGC&amp;NET जून 2026: इस हफ्ते जारी होंगे रिजल्ट और फाइनल आंसर की</title>
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        <description><![CDATA[ UGC-NET को लेकर एनटीए की ओर से अपडेट आया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बताया है कि यूजीसी नेट के 84 विषयों की फाइनल आंसर की और रिजल्ट इसी हफ्ते जारी किए जाएंगे. उम्मीदवार रिजल्ट और फाइनल आंसर की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए चेक कर सकेंगे. एनटीए ने यूजीसी नेट के साथ CSIR नेट और ICAR AIEEA (PG) व AICE (PhD) 2026 की फाइनल आंसर की और रिजल्ट भी इसी हफ्ते जारी करने की जानकारी दी है. एजेंसी ने उम्मीदवारों को रिजल्ट और आंसर की से जुड़ी जानकारी के लिए केवल ऑफिशियल अपडेट पर भरोसा करने की सलाह दी है.&amp;nbsp;
84 विषयों का जारी होगा रिजल्ट&amp;nbsp;
यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा 22 जून से 30 जून 2026 के बीच देशभर के 87 विषयों के लिए आयोजित की गई थी. यह परीक्षा जूनियर रिसर्च फैलोशिप, असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्रता और PhD में एडमिशन के लिए आयोजित की जाती है. एनटीए ने 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर की 16 अगस्त को जारी की थी. उम्मीदवारों को 16 से 18 अगस्त तक आंसर की पर आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया गया था. अब उम्मीदवारों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों की समीक्षा के बाद फाइनल आंसर की जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
तीन विषयों का रिजल्ट बाद में आएगा&amp;nbsp;
NTA फिलहाल सभी 87 विषयों का रिजल्ट एक साथ जारी नहीं करेगा. अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर दोबारा आयोजित किए जाएंगे. इन तीन विषयों की परीक्षा में प्रश्न पत्र से जुड़ी तथ्यात्मक, टाइपिंग, ट्रांसलेशन और दूसरी गलतियां सामने आने के बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था. अंग्रेजी और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर को होगी, जबकि समाजशास्त्र का पेपर 10 सितंबर को आयोजित किया जाएगा. इन परीक्षाओं की फाइनल आंसर की और रिजल्ट बाद में जारी किए जाएंगे.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक कर सकते हैं UGC NET रिजल्ट&amp;nbsp;

&amp;nbsp;रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले यूजीसी नेट की ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर यूजीसी से नेट जून 2026 रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब मांगी गई लॉगिन डिटेल भरें.
डिटेल सबमिट करने के बाद रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा.
अब रिजल्ट चेक करके उसने डाउनलोड कर लें.&amp;nbsp;
लास्ट में रिजल्ट का प्रिंट आउट भी रख लें.

किस काम आती है UGC NET परीक्षा?&amp;nbsp;
यूजीसी नेट परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फैलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पात्रता और पीएचडी में एडमिशन से जुड़ी पात्रता निर्धारित की जाती है. जून 2026 की परीक्षा में 87 विषय शामिल थे, जिनमें 84 विषयों की फाइनल आंसर की और रिजल्ट अब जारी किया जाना है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली के इन स्कूलों में 3 साल से केमिस्ट्री टीचर नहीं, 200 छात्र परेशान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-के-इन-स्कूलों-में-3-साल-से-केमिस्ट्री-टीचर-नहीं-200-छात्र-परेशान</link>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के इन स्कूलों में 3 साल से केमिस्ट्री टीचर नहीं, 200 छात्र परेशान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आरआरबी एनटीपीसी सीबीटी 1 का रिजल्ट जारी, यहां देखें स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ रेलवे भर्ती बोर्ड ने एनटीपीसी अंडर ग्रेजुएट सीबीटी 1 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपने संबंधित रेलवे जोन की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. सीबीटी 1 में सफल उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण यानी सीबीटी 2 परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा. उम्मीदवारों के लिए रिजल्ट जोन के अनुसार जारी किया जा रहा है.
कब हुई थी RRB NTPC CBT 1 परीक्षा?
आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 1 परीक्षा का आयोजन 7 मई से 20 जून 2026 के बीच किया गया था. इसके बाद 27 जून को प्रोविजनल आंसर की और उम्मीदवारों के रिस्पांस शीट जारी की गई थी. अब 24 अगस्त 2026 को सीबीटी 1 का रिजल्ट और शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट जारी की गई है.&amp;nbsp;
3058 पदों के लिए हुई भर्ती&amp;nbsp;
आरआरबी एनटीपीसी यूजी भर्ती सीईएन 07/2025 के तहत आयोजित की जा रही है. इस भर्ती के जरिए यूजी स्तर के कुल 3058 पदों को भरा जाना है. इनमें कमर्शियल कम टिकट क्लर्क, जूनियर क्लर्क कम टाइपिस्ट, अकाउंट्स क्लर्क कम टाइपिस्ट और ट्रेन्स क्लर्क जैसे पद शामिल है. वहीं सीबीटी 1 में पास होने वाले उम्मीदवारों के रोल नंबर, मेरिट लिस्ट में शामिल किए जाएंगे. उम्मीदवार अपने संबंधित आरआरबी जोन की वेबसाइट के जरिए रिजल्ट पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं. पीडीएफ में अपना रोल नंबर सर्च करके यह पता लगा सकते हैं कि वह अगले चरण के लिए शाॅर्ट लिस्ट हुए हैं या नहीं.&amp;nbsp;
इन जोन का रिजल्ट हुआ जारी&amp;nbsp;
आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 1 का रिजल्ट जोन वाइज ऑनलाइन जारी किया गया है. नोटिफिकेशन के अनुसार अहमदाबाद, बिलासपुर, गोरखपुर, तिरुवंतपुरम, मुजफ्फरपुर, चंडीगढ़ और सिलीगुड़ी समेत कुछ रेलवे जोन के मेरिट लिस्ट जारी की जा चुकी है. दूसरे जोन के रिजल्ट भी संबंधित क्षेत्रीय आरआरबी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे. रिजल्ट के साथ संबंधित जोन के लिए कैटिगरी वाइज कट ऑफ की जानकारी भी जारी की गई है. इसलिए उम्मीदवारों को केवल मेरिट लिस्ट ही नहीं, बल्कि अपने जोन की कट ऑफ चेक करने की सलाह दी गई.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक करें RRB NTPC CBT 1 रिजल्ट&amp;nbsp;

आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 1 रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले संबंधित रेलवे जोन की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाए.&amp;nbsp;
इसके बाद वेबसाइट के रिजल्ट या लेटेस्ट नोटिफिकेशन सेक्शन में जाए.&amp;nbsp;
अब आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 1 रिजल्ट 2026 से संबंधित लिंक पर क्लिक करें.
रिजल्ट या शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की पीडीएफ खोलें.&amp;nbsp;
पीडीएफ में सर्च ऑप्शन की मदद से अपना रोल नंबर दर्ज करें.
अगर रोल नंबर लिस्ट में मौजूद है तो उम्मीदवार सीबीटी 1 &amp;nbsp;के लिए शाॅर्ट लिस्ट माना जाएगा.
वहीं उम्मीदवार रिजल्ट का पीडीएफ डाउनलोड करके भी रख सकते हैं.&amp;nbsp;

17 सितंबर को होगी सीबीटी 2 परीक्षा&amp;nbsp;
सीबीटी 1 में सफल उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया का अगला चरण सीबीटी 2 है. आरआरबी एनटीपीसी यूजी सीबीटी 2 परीक्षा 17 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. ऐसे में सीबीटी 1 में क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवारों को अब अगले चरण की तैयारी पर ध्यान देना होगा.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिहार बोर्ड 10वीं&amp;12वीं के परीक्षा फॉर्म आज से शुरू, 16 सितंबर तक मौका</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार विद्यालय समिति ने मैट्रिक (BSEB) और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 को लेकर जरूरी तारीख की जारी कर दी है. बोर्ड की ओर से 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया आज यानी 25 अगस्त से शुरू कर दी गई है. विद्यार्थियों के पास आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 16 सितंबर 2026 तक का समय रहेगा. इस दौरान परीक्षा फीस भी जमा करनी होगी. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थी अपने स्तर से ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरेंगे. आवेदन की प्रक्रिया संबंधित स्कूल प्रधान के माध्यम से पूरे की जाएगी. ऐसे में परीक्षा 2027 में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को तय समय के अंदर अपने स्कूल से कांटेक्ट करना होगा.&amp;nbsp;
स्कूलों के माध्यम से भरा जाएगा फॉर्म&amp;nbsp;
बिहार बोर्ड के अनुसार मैट्रिक और इंटरमीडिएट दोनों परीक्षाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया स्कूलों के प्रधान की जिम्मेदारी होगी. इंटरमीडिएट के परीक्षा फाॅर्म के लिए intermediate.biharboardonline.com और मैट्रिक के लिए exam.biharboardonline.org का इस्तेमाल किया जाएगा. स्कूलों के हेड वेबसाइट से परीक्षा फॉर्म डाउनलोड करके विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएंगे. विद्यार्थी फॉर्म की दो प्रतियां भरेंगे. एक प्रति संस्थान में जमा करनी होगी, जबकि दूसरी प्रति पर प्रधान के हस्ताक्षर, मुहर और तारीख दर्ज करके विद्यार्थी को वापस दिया जाएगा.&amp;nbsp;
फॉर्म जमा करने से पहले ये जानकारी देखें&amp;nbsp;
परीक्षा फॉर्म भरते समय विद्यार्थियों को लिस्ट में अपने प्रमाण पत्र में दर्ज जानकारी से सभी डिटेल का मिलान करना होगा. नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि, लिंग, जाति और चुने गए विषय जैसी जानकारी में किसी तरह की गलती होने पर उसे आवेदन अवधि के दौरान स्कूल के हेड के जरिए ठीक कराया जा सकता है. बोर्ड ने विद्यार्थियों के लिए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करना भी अनिवार्य किया है. एक विद्यार्थी के लिए एक मोबाइल नंबर और एक ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया जाएगा.&amp;nbsp;
फोटो और सिग्नेचर के लिए तय है साइज&amp;nbsp;
परीक्षा फाॅर्म के साथ अपलोड होने वाली फोटो और सिग्नेचर को लेकर भी बोर्ड ने मानक निर्धारित किए हैं. स्टूडेंट के रंगीन फोटो 35 एमएम * 30 एमएम आकार की होनी चाहिए. फोटो की फाइल जेपीजी-जेपीईजी फॉर्मेट में और उसका साइज 50 से 100 केबी के बीच होना चाहिए. फोटो का बैकग्राउंड सफेद या हल्का हरा रखा गया है. फोटो में चेहरे का हिस्सा खरीद 70 से 80 प्रतिशत होना चाहिए. फोटो में टोपी, चश्मा, स्कार्फ या काला चश्मा नहीं होना चाहिए. फोटो का रेजोल्यूशन 300 डीपीआई निर्धारित किया गया है. वहीं सिग्नेचर की फाइल 10 से 20 केबी की होने चाहिए. इसका निर्धारित आकार 3.5 सीएम* 1 सीएम है और सिग्नेचर सफेद कागज पर काली या &amp;nbsp;नीली स्याही के लिए किया हुआ होना चाहिए.&amp;nbsp;
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कितनी फीस जमा करनी होगी?
बोर्ड ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2027 के लिए विद्यार्थियों की अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से फीस तय की है. नियमित आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स कैटेगरी के स्टूडेंट्स को 1430 रुपये परीक्षा फीस देनी होगी, वहीं स्वतंत्र परीक्षार्थियों को 1770 रुपये देनी होगी. फीस क्वालीफाइंग करने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस 2110 रुपये रखा गया है. व्यावसायिक प्रोग्राम में नियमित विद्यार्थियों के लिए 1830 रुपये, जबकि स्वतंत्र स्टूडेंट के लिए 2170 रुपये फीस निर्धारित है.&amp;nbsp;
16 सितंबर आवेदन के आखिरी तारीख&amp;nbsp;
बिहार बोर्ड में मैट्रिक और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 आवेदन के लिए 25 अगस्त &amp;nbsp;से 16 सितंबर 2026 तक की समय सीमा तय की है. विद्यार्थियों को इसी अवधि में स्कूल के माध्यम से परीक्षा फॉर्म भरवाने के साथ फीस जमा करनी होगी. परीक्षा फॉर्म भरते समय अगर किसी तरह की गलती दिखाई देती है, तो विद्यार्थी को उसकी तुरंत जानकारी स्कूल के प्रधान को देनी होगी, जिससे गलती में जल्दी से जल्दी सुधार कराया जा सके.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बिहार, बोर्ड, 10वीं-12वीं, के, परीक्षा, फॉर्म, आज, से, शुरू, सितंबर, तक, मौका</media:keywords>
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        <title>हिमाचल बोर्ड का नया नियम, 9वीं&amp;11वीं में भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य</title>
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        <description><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने छात्रों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. अब बोर्ड से संबंध सरकारी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन 10वीं और 12वीं में नहीं बल्कि 9वीं और 11वीं में किया जाएगा. बोर्ड ने यह बदलाव परीक्षा के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों को कम करने के उद्देश्य से किया है. नए नियमों के तहत 9वीं कराया गया रजिस्ट्रेशन 10वीं की मैट्रिक परीक्षा पास करने तक और 11वीं का रजिस्ट्रेशन 12वीं की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा पास करने तक मान्य रहेगा &amp;zwnj;
9वीं और 11वीं में होगा रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
एचपीबीओएसई के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने परीक्षा अधिनियम 1994 के चैप्टर 18 के नियम 18.1 में संशोधन की जानकारी दी है. यह व्यवस्था बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों और संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगी. अब 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन बोर्ड में कराया जाएगा, जबकि 11वीं के विद्यार्थियों का भी इसी स्तर पर रजिस्ट्रेशन होगा. नए नियमों के अनुसार 9वीं में कराया गया, रजिस्ट्रेशन छात्र के 10वीं की मैट्रिक परीक्षा पास करने तक प्रभावी रहेगा. इस तरह 11वीं में किया गया रजिस्ट्रेशन छात्र के 12वीं की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा पास करने तक मान्य रहेगा.&amp;nbsp;
दूसरे बोर्ड से आने वाले छात्रों के लिए नियम&amp;nbsp;
अगर कोई छात्र किसी दूसरे बोर्ड या बोर्ड से पढ़ाई करने के बाद सीधे 10वीं या 12वीं कक्षा में एडमिशन लेता है, तो उसे एचपीबीओएसई में नए उम्मीदवारों के तौर पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. ऐसे विद्यार्थियों को बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अलग से रजिस्ट्रेशन करना होगा.&amp;nbsp;
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200 रुपये होगी रजिस्ट्रेशन फीस&amp;nbsp;
एचपीबीओएसई ने रजिस्ट्रेशन के लिए 200 रुपये प्रति व्यक्ति छात्र फीस निर्धारित की है. बोर्ड से संबंधित स्कूलों को बिना लेट फीस के स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा करना होगा. इसके बाद भी रजिस्ट्रेशन करने का मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए 500 रुपये लेट फीस देनी होगी. लेट फीस के साथ रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 15 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है. वहीं इस समय के बाद बोर्ड अध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;
स्कूलों के प्रमुख को दिए गए निर्देश
बोर्ड ने संबद्ध स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वह एलिजिबल स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन संशोधन नियमों के अनुसार तय समय में पूरा करें. रजिस्ट्रेशन से जुड़ा शेड्यूल बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर किया जारी किया जाएगा. स्कूलों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए एचपीबीओएसई के ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा. इसके लिए स्कूल लॉगिन के जरिए संबंधित कक्षा के विद्यार्थियों की डिटेल दर्ज की जाएगी. इसमें स्टूडेंट्स की पर्सनल एजुकेशनल और सब्जेक्ट से जुड़ी जानकारी शामिल होगी.&amp;nbsp;
क्यों बदल गया रजिस्ट्रेशन का नियम?
हिमाचल बोर्ड के अनुसार 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के समय होने वाली तकनीकी और प्रशासनिक परेशानियों को कम करने के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था में बदलाव किया गया है. अब विद्यार्थियों का रिकॉर्ड बोर्ड के पास पहले से दर्ज रहेगा, जिससे आगे की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हिमाचल, बोर्ड, का, नया, नियम, 9वीं-11वीं, में, भी, रजिस्ट्रेशन, अनिवार्य</media:keywords>
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        <title>लद्दाख में 2000 इंटर्नशिप का मौका, हर महीने ही मिलेगा 5000 स्टाइपेंड</title>
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        <description><![CDATA[ लद्दाख में छात्रों और युवाओं के लिए इंटर्नशिप का एक अच्छा अवसर सामने आया है. लद्दाख प्रशासन ने 2000 पेड इंटर्नशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह इंटर्नशिप 25 सरकारी विभागों में कराई जाएगी, जिसमें चयनित उम्मीदवारों को 3 महीने तक हर महीने 5000 का स्टाइपेंड दिया जाएगा. इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं को सरकारी विभागों में कामकाज और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को करीब से समझने का मौका मिलेगा. इंटर्नशिप के लिए रजिस्ट्रेशन पर प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार 5 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
25 विभागों में मिलेगा काम करने का मौका&amp;nbsp;
यह प्रोग्राम एलजी युवा इंटर्नशिप प्रोग्राम के तहत शुरू किया गया है. जब Zhabstoke Ladakh यूथ इंटर्नशिप पोर्टल को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लॉन्च किया है. इसके तहत चयनित युवाओं को लद्दाख प्रशासन के अलग-अलग सरकारी विभागों में इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा. उम्मीदवारों को उनकी स्किल और रुचि के आधार पर विभाग आमंत्रित किए जाएंगे. इंटर्नशिप के दौरान उन्हें सरकारी कार्यालय के कामकाज को समझने और नीतियों व प्रस्तावों को जमीन पर योजना और परियोजनाओं में बदलने की प्रक्रिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा.&amp;nbsp;
3 महीने तक मिलेगा 5000 रुपये महीना
लद्दाख यूथ इंटर्नशिप की शुरुआत 3 महीने की होगी. इस दौरान चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 5000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा. इंटर्नशिप की शुरुआत 17 सितंबर 2026 से प्रस्तावित है. वहीं अच्छा प्रदर्शन करने वाले इंटर्न को आगे 3 महीने का एक्स्ट्रा एक्सटेंशन भी दिया जा सकता है. यह विस्तार शुरुआती इंटर्नशिप के दौरान उनके प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा. कार्यक्रम पूरा करने वाले प्रतिभागियों को इंटर्नशिप का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा.&amp;nbsp;
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कब तक कर सकते हैं आवेदन?
इच्छुक उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 22 अगस्त से शुरू हो चुकी है. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 सितंबर है. इसके बाद उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 6 से 14 सितंबर के बीच किया जाएगा. वहीं इंटर्नशिप की शुरुआत 17 सितंबर से होगी.&amp;nbsp;
कैसे करें यूथ इंटर्नशिप के लिए आवेदन?

उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए सबसे पहले internship.ladakh.gov.in पोर्टल पर जाना होगा.&amp;nbsp;
अब अप्लाई फॉर इंटर्नशिप लिंक पर क्लिक करना होगा.&amp;nbsp;
यहां रजिस्ट्रेशन के लिए उम्मीदवार को अपना नाम, ईमेल, पासवर्ड और सिक्योरिटी पिन दर्ज करना होगा.&amp;nbsp;
इसके बाद उम्मीदवार अपनी स्किल और इंटरेस्ट के अनुसार डिपार्टमेंट सेलेक्ट करें.
अब सभी जरूरी जानकारी पढ़ने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लद्दाख, में, 2000, इंटर्नशिप, का, मौका, हर, महीने, ही, मिलेगा, 5000, स्टाइपेंड</media:keywords>
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        <title>अब NEET PG पेपर भी हो गया लीक? NBEMS ने जारी किया बयान</title>
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        <description><![CDATA[ NEET PG 2026 परीक्षा से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने के दावे सामने आने लगे. टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफाॅर्म पर कुछ अकाउंट्स और चैनल पर नीट पीजी का पेपर उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं. इन दावों के बीच नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने उम्मीदवारों के लिए अलर्ट जारी किया है. बोर्ड ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर चल रहे पेपर लीक के दावे फर्जी है और उम्मीदवारों को ऐसे मैसेज या पोस्ट पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
नीट पीजी परीक्षा से पहले पेपर लीक के दावे&amp;nbsp;
नीट पीजी 2026 का आयोजन 30 अगस्त 2026 को होना है. परीक्षा में अब कुछ ही दिन बाकी है, ऐसे में सोशल मीडिया पर सामने आ रहे पेपर लीक के दावों ने उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है. NBEMS ने उम्मीदवारों से कहा है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल ऑफिशियल वेबसाइट पर ही भरोसा करें. वहीं 30 अगस्त को होने वाली यह परीक्षा देशभर में एक ही शिफ्ट में होगी. इसके लिए 340 शहरों में 1300 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इसके अलावा नीट पीजी परीक्षा देशभर के मेडिकल संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है. इसके जरिए एमएस, एमडी और दूसरे पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल प्रोग्राम में एडमिशन मिलता है.
टेलीग्राम, इंस्टा और व्हाट्सएप पर किए जा रहे दावे&amp;nbsp;
NBEMS के अनुसार सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ऐसे पोस्ट और मैसेज वायरल हो रहे हैं, जिनमें नीट पीजी 2026 का प्रश्न पत्र लीक और पहले से पेपर उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है. कुछ जगहों पर पेपर या परीक्षा से जुड़ी दूसरी सामग्री देने की बात भी कही है. बोर्ड ने इन दावों को फर्जी और भ्रामक बताया है. उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वह किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट, चैनल या विज्ञापन पर भरोसा न करें, जो नीट पीजी के पेपर लीक का दावा कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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पैसे या पर्सनल जानकारी न करें शेयर&amp;nbsp;
परीक्षा पास आने के साथ उम्मीदवारों को सोशल मीडिया पर ऐसे ऑफर भी मिलने का अंदाजा लगाया जा रहा है, जिनमें कथित पेपर या परीक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने के बदले पैसे मांगे जाए. NBEMS ने उम्मीदवारों को कहा है कि उम्मीदवारों को बिना किसी पुष्टि के किसी पोस्ट को आगे शेयर करने, अपनी प्राइवेट जानकारी देने या किसी तरह का पेमेंट करने से बचने के लिए कहा है. परीक्षा से जुड़ी जानकारी NBEMS की ओर से ही जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अगस्त के आखिरी हफ्ते में स्कूलों में कितनी छुट्टियां? यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अगस्त-के-आखिरी-हफ्ते-में-स्कूलों-में-कितनी-छुट्टियां-यहां-देखें-पूरी-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अगस्त-के-आखिरी-हफ्ते-में-स्कूलों-में-कितनी-छुट्टियां-यहां-देखें-पूरी-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ अगस्त का यह आखिरी सप्ताह स्टूडेंट के लिए छुट्टियां के हिसाब से सबसे जरूरी माना जा रहा है. आज यानी 24 से 30 अगस्त के बीच अलग-अलग राज्यों में त्योहारों के चलते स्कूलों में छुट्टियां रहेगी. इस दौरान ईद-द-मिलाद, ओणम और रक्षाबंधन जैसे त्योहार पड़ रहे हैं, जबकि 30 अगस्त को रविवार है. हालांकि सभी राज्यों और स्कूलों में छुट्टियों की तारीख के एक जैसी नहीं होगी. स्कूलों की छुट्टियां राज्य सरकार के आदेश, शिक्षा बोर्ड और संबंधित स्कूल के कैलेंडर के आधार पर होती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगस्त के इस आखिरी सप्ताह में कितनी छुट्टियां रहने वाली है.&amp;nbsp;
26 अगस्त बुधवार- इस सप्ताह 26 अगस्त को पैगंबर मुहम्मद के जन्म पर मिलाद-उल-नबी का त्यौहार मनाया जाएगा. वहीं इसे 2026 में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में राजपत्रित किया गया है. ईद-ए-मिलाद के लिए स्कूलों में छुट्टी होगी या नहीं इसका निर्णय राज्य और संबंधित स्कूल स्तर पर जारी अधिसूचना के आधार पर लिया जाएगा.&amp;nbsp;
28 अगस्त शुक्रवार- इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार पड़ रहा है. &amp;nbsp;रक्षाबंधन पर भाई-बहन राखी बांधकर इस त्योहार को सेलिब्रेट करते हैं. वहीं इस दिन देश के लगभग हर राज्य में दिन स्कूल बंद रहेंगे.&amp;nbsp;
30 अगस्त रविवार- 30 अगस्त को इस सप्ताह रविवार होने के चलते भी देशभर के स्कूलों में साप्ताहिक अवकाश रहेगा.&amp;nbsp;
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ओणम की छुट्टियां&amp;nbsp;
केरल में ओणम का मुख्य दिन 26 अगस्त को मनाया जाएगा. इसके अलावा फर्स्ट ओणम 25 अगस्त, तीसरा ओणम 27 अगस्त और चौथा ओणम 28 अगस्त को होगा. ऐसे में इन तारीख को पर केरल में स्कूल बंद रह सकते हैं. हालांकि इसे लेकर छुट्टियों का आदेश संबंधित राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश पर निर्भर करेगा. वहीं केरल के अलावा देश के दूसरे राज्यों में भी 26 अगस्त को स्कूलों की छुट्टियां हो सकती है.&amp;nbsp;
सितंबर में भी छुट्टियों की भरमार&amp;nbsp;
अगस्त के बाद सितंबर में भी स्कूलों में छात्रों को त्योहारों के कारण छुट्टियां मिल सकती है. कैलेंडर के अनुसार 4 सितंबर को जन्माष्टमी और 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है. खासतौर पर गणेश चतुर्थी के मौके पर महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में छुट्टियां रहती है .
सभी स्कूलों में एक जैसी नहीं होगी छुट्टियां
अगस्त के सप्ताह में छुट्टियां को लेकर काफी कंफ्यूजन बना हुआ है. ऐसे में छात्रों और पेरेंट्स को ध्यान रखना होगा कि त्योहारों की छुट्टी पूरे देश में एक समान नहीं होती. राज्य सरकार की अधिसूचना शिक्षा बोर्ड और स्कूल के अपने एकेडमिक कैलेंडर के आधार पर छुट्टियों में अंतर होते हैं. कुछ स्कूल त्योहार पर अवकाश के बदले वर्किंग डे भी रख सकते हैं या अपना टाइम टेबल में भी बदल सकते हैं. इसलिए पेरेंट्स को स्कूलों की छुट्टियों को लेकर राज्य सरकार का ऑफिशियल नोटिफिकेशन या स्कूल की ओर से दी गई सूचना देखनी होगी.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET PG 2026 एडमिट कार्ड आज नहीं होगा जारी, NBEMS ने बदली डेट</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन कॉलेज साइंसेज (NBEMS) की ओर से आज 24 अगस्त 2026 को नीट पीजी 2026 का एडमिड कार्ड जारी किया जाना था. लेकिन अब यह एडमिट कार्ड कल यानी 25 अगस्त को जारी किया जाएगा. NBEMS की ओर से जारी नोटिस के अनुसार कुछ अपरिहार्य कारणों से यह बदलाव किया गया है. ऐसे में अब कल 25 अगस्त को&amp;nbsp; एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार इसे एनबीईएमएस की ऑफिशियल वेबसाइट से अपने लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे. नीट पीजी 2026 परीक्षा का आयोजन 30 अगस्त को किया जाना है. इससे पहले परीक्षा के लिए एग्जाम सिटी की जानकारी 12 अगस्त को जारी की जा चुकी है, ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड तैयार रखें और एडमिट कार्ड जारी होते ही उसे डाउनलोड कर लें.&amp;nbsp;
क्यों बदली नीट पीजी एडमिट कार्ड की तारीख?
नीट पीजी एडमिट कार्ड को लेकर एनबीईएमएस की ओर से ऑफिशियल नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में बताया गया है कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों और असम और मेघालय राज्यों की ओर से आए विशेष अनुरोध को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं. इसी के चलते नीट पीजी 2026 परीक्षा के एडमिट कार्ड की तारीख को एक दिन आगे बढ़ा दिया गया है.&amp;nbsp;
बाकी तारीखों में नहीं हुआ कोई बदलाव&amp;nbsp;
एनबीईएमएस की ओर से जारी नोटिस के अनुसार सिर्फ नीट पीजी 2026 के एडमिट कार्ड की डेट को लेकर ही बदलाव किया गया है. इसके अलावा परीक्षा के समय और दूसरी चीजों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. नीट पीजी 2026 परीक्षा एक शिफ्ट में 30 अगस्त को सुबह 9:00 से दोपहर 12:30 बजे तक देशभर के अलग अलग परीक्षा केंद्रों पर ही आयोजित की जाएगी.
ऐसे डाउनलोड होगा नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड

नीट पीजी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले एनबीईएमएस की ऑफिशियल वेबसाइट natboard.edu.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर नीट पीजी सेक्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड से संबंधित लिंक खोलें.&amp;nbsp;
इसके बाद अपना यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज करें.&amp;nbsp;
लॉगिन करने के बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा.&amp;nbsp;
अब हॉल टिकट डाउनलोड करके फ्यूचर के लिए इसे सेव करके रख लें.&amp;nbsp;

एडमिट कार्ड में यह डिटेल्स जरूर चेक करें&amp;nbsp;
नीट पीजी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवारों को उसे पर दर्ज सभी जानकारी ध्यान से देखनी होगी. हॉल टिकट में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, एप्लीकेशन आईडी, जन्मतिथि, कैटेगरी, परीक्षा केंद्र का कोड, केंद्र का नाम और पता, परीक्षा की तारीख का समय और रिपोर्टिंग टाइम जैसी जानकारी दी जाएगी. उम्मीदवारों को अपने एडमिट कार्ड में दर्ज जानकारी को आवेदन फाॅर्म की डिटेल्स से मिलाकर देखना होगा. किसी भी तरह की गलती होने पर छात्र को एनबीईएमएस से ऑनलाइन कांटेक्ट करना होगा.&amp;nbsp;
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30 अगस्त को होगी नीट पीजी की परीक्षा&amp;nbsp;
नीट पीजी 2026 परीक्षा 30 अगस्त 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा के लिए एग्जाम सिटी इंटीमेशन 12 अगस्त को जारी की जा चुकी है. अब एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग टाइम और दूसरे जरूरी निर्देश की जानकारी देखनी होगी.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र पर कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी&amp;nbsp;
परीक्षा में समय शामिल होने वाले उम्मीदवारों को कुछ डॉक्यूमेंट अपने साथ ले जाने होंगे. इनमें नीट पीजी एडमिट कार्ड, हाल की पासपोर्ट साइज फोटो और और वेलिड ओरिजिनल फोटो आईडी शामिल है. इसके अलावा उम्मीदवारों को स्थायी प्रोविजनल एसएमसी, एमसीआई, या एनएमसी रजिस्ट्रेशन की फोटो कॉपी भी साथ रखने के निर्देश दिए गए हैं. वैलिड फोटो आईडी के तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे डॉक्यूमेंट निर्धारित निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>DU में UG की 13 हजार से ज्यादा सीटें खाली, इन विषयों में सबसे ज्यादा वैकेंसी </title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए कई राउंड की एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी बड़ी संख्या में यूजी सीटें खाली है. यूनिवर्सिटी की ओर से जारी ताजा वैकेंसी डेटा के अनुसार इस बार कुल 13,433 यूजी सीटों पर अभी एडमिशन होना बाकी है. इन सीटों को भरने के लिए डीयू ने स्पॉट राउंड के जरिए छात्रों को एक और मौका दिया है. यह सीटें अलग-अलग कॉलेज, कोर्स और कैटेगरी में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
किस कैटेगरी की सबसे ज्यादा सीटें खाली?&amp;nbsp;
डीयू में यूजी एडमिशन के लिए 2022 से सीयूईटी यूजी स्कोर का इस्तेमाल हाे रहा है. इस बार करीब 71 हजार यूजी सीटों में से 13,433 सीटें खाली रह गई है. वैकेंसी की संख्या में अलग-अलग आरक्षित और अनारक्षित कैटेगरी की सीटें शामिल है. इनमें ओबीसी की 4,133, एसटी की 2,476, जनरल की 2,113, एससी की 2,038 और ईडब्ल्यूएस की 1,791 सीटें खाली है. इसके अलावा सिख माइनॉरिटी की 566 और क्रिश्चियन माइनॉरिटी की 316 सीटें भी खाली है.&amp;nbsp;
किन विषयों में सबसे ज्यादा सीटें खाली?
डीयू के वैकेंसी डेटा में कुछ विषयों में सीटों की संख्या काफी ज्यादा है. बीए ऑनर्स में सबसे ज्यादा 1,455 सीटें खाली है. इसके बाद बीकॉम में 937 और बीए (ऑनर्स) संस्कृत में 911 सीटें खाली है. वहीं साइंस स्ट्रीम के कुछ कोर्स में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली है. जैसे बीएससी फिजिकल साइंस विद केमिस्ट्री में 728, बीएससी (ऑनर्स) मैथमेटिक्स में 560 और बीएससी (ऑनर्स) फिजिक्स में 406 सीटें उपलब्ध है. इसके अलावा बीकॉम (ऑनर्स) में 369 और बीए प्रोग्राम में हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस के कांबिनेशन में 348 सीटें खाली है. दूसरे कोर्स की बात करें तो बीए (ऑनर्स) हिस्ट्री में 342, बीए (ऑनर्स) इकोनॉमिक्स में 324, बीए (ऑनर्स) इंग्लिश में 319 और बीएससी ऑनर्स केमिस्ट्री में 299 सीटें खाली है.&amp;nbsp;
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इन बड़े कॉलेज में भी खाली है सीटें&amp;nbsp;
खाली सीटों का असर सिर्फ कम डिमांड वाले कॉलेज तक सीमित नहीं है. डीयू के कई चर्चित कॉलेज में भी अलग-अलग कोर्स और कैटेगरी की सीटें खाली है. हंसराज कॉलेज में 84, किरोड़ी मल कॉलेज में 68, मिरांडा हाउस में 49, एसटी स्टीफंस कॉलेज में 44 खाली सीटें बताई गई है. इसके अलावा गार्गी कॉलेज में 108, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में 99 और रामजस कॉलेज में 90 सीटें उपलब्ध है. इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वूमेन में भी 151 सीटें खाली है. वही हिंदू कॉलेज में 28 और लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वूमेन में 25 सीटें खाली है. श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में भी कुछ सीटें उपलब्ध है, हालांकि यहां वैकेंसी की संख्या काफी कम है.&amp;nbsp;
स्पॉट राउंड में मिलेगा एडमिशन का मौका&amp;nbsp;
डीयू की ओर से खाली सीटों के लिए स्पॉट राउंड आयोजित किया जा रहा है. हालांकि यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि वैकेंसी के यह आंकड़े अंतिम नहीं माने जा सकते हैं. दरअसल 23 अगस्त की दोपहर 1 बजे तक उपलब्ध डेटा के आधार पर यह खाली सीटें बताई गई है. एग्जिट, कैंसिलेशन, शिकायतों के निपटारे और सीटों के मिलान की प्रक्रिया के &amp;nbsp;कारण खाली सीटों की संख्या में बदलाव भी हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 02:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे सारांश जैन, जानिए उन्होंने कहां से की है पढ़ाई</title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन इन दिनों सुर्खियों में हैं. श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार चुने गए सारांश ने कोलंबो में अपना टेस्ट डेब्यू भी कर लिया है. 33 साल की उम्र में मिली यह उपलब्धि उनके सालों के संघर्ष का नतीजा है. आइए जानते हैं सारांश जैन के बचपन और उनके क्रिकेट करियर की पूरी कहानी.&amp;nbsp;
कौन हैं सारांश जैन
सारांश सुबोध जैन का जन्म 31 मार्च 1993 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था. उनके पिता सुबोध जैन खुद मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके क्रिकेटर रहे हैं, तो क्रिकेट सारांश को विरासत में मिला. बचपन से ही उन्होंने इंदौर के प्रतिष्ठित विजय क्लब में ट्रेनिंग ली, जहां वे मध्यप्रदेश और भारत के मौजूदा बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी खेले.&amp;nbsp;
कहां से की है पढ़ाई?
भारतीय ऑलराउंडर क्रिकेटर सारांश जैन की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा मुख्य रूप से उनके गृहनगर इंदौर, मध्य प्रदेश में हुई है. उन्होंने इंदौर के स्थानीय संस्थानों से अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की, हालांकि उनके विशिष्ट स्कूल या कॉलेज का नाम सार्वजनिक तौर पर मीडिया प्रोफाइल्स में शेयर नहीं किया गया है. उनकी क्रिकेट की वास्तविक शिक्षा और ट्रेनिंग इंदौर में ही उनके घर की छत पर उनके पिता सुबोध जैन की देखरेख में हुई और बाद में उन्होंने इंदौर के प्रसिद्ध विजय क्लब से जुड़कर अपने पेशेवर क्रिकेट कौशल को निखारा.
घरेलू क्रिकेट में लंबा और शानदार सफर
सारांश ने दिसंबर 2014 में मध्य प्रदेश के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था. इसके बाद फरवरी 2017 में उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में भी कदम रखा. एक दशक से ज्यादा समय तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद उन्होंने अपनी जगह पक्की की. अब तक उन्होंने 54 फर्स्ट क्लास मैचों की 97 पारियों में 27.30 की औसत और 3.01 की इकॉनमी रेट से 188 विकेट झटके हैं, जबकि बेटिंग में भी 2,223 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 31.75 का रहा है. इसके अलावा उन्होंने 47 लिस्ट ए और 21 टी20 मैच भी खेले हैं.
2021-22 के रणजी खिताब में अहम भूमिका
सारांश मध्य प्रदेश की 2021-22 सीजन की ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत के अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे. निचले क्रम में बल्लेबाजी के साथ-साथ अहम मौकों पर विकेट निकालने की उनकी काबिलियत ने टीम को कई बार हारने से बचाया. यही वजह है कि उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडरों में गिना जाने लगा.
दलीप ट्रॉफी और इंडिया ए दौरे से टीम इंडिया तक
2025 के दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के लिए खेलते हुए सारांश ने सिर्फ दो मैचों में 16 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब जीता. सेंट्रल जोन इस टूर्नामेंट का चैंपियन भी बना. इसके बाद इंडिया ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने अपनी दावेदारी और मजबूत की. जून-जुलाई में खेले गए अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में से एक में उन्होंने छह विकेट लेने के साथ नाबाद 70 रन की पारी भी खेली, जिसने चयनकर्ताओं का पूरा भरोसा जीत लिया.
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टीम इंडिया में मिली एंट्री
आखिरकार जुलाई 2026 में सारांश को श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार शामिल किया गया. चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह उन्हें टीम में लिया गया था. कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टेस्ट में उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिला. इस मैच में उन्होंने प्लेइंग इलेवन में संक्रमण से जूझ रहे स्पिनर कुलदीप यादव की जगह ली.
आर अश्विन हैं उनके रोल मॉडल
सारांश ने पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि वे अक्सर दिग्गज ऑफ स्पिनर आर अश्विन को देखकर प्रेरणा लेते हैं और उनकी तरह ही समर्पण के साथ अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं. उनकी यह सोच और मेहनत आखिरकार 33 साल की उम्र में रंग लाई, और वे भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों में शामिल हो गए.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 14:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Indian Army Terrier Cyber Quest 2026 आवेदन की लास्ट डेट नजदीक, जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल जागरूकता से जुड़े लोगों के लिए एक खास मौका सामने आया है. इंडियन आर्मी ने Terrier Cyber Quest (TCQ) 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया है. यह एक राष्ट्रीय स्तर की कॉम्पीटिशन है, जिसमें साइबर सुरक्षा के साथ-साथ AI और डिजिटल अवेयरनेस से जुड़े अलग-अलग चैलेंज शामिल किए गए हैं. इस कॉम्पिटिशन का आयोजन Territorial Army और CyberPeace के सहयोग से किया जा रहा है.&amp;nbsp;
इसमें छात्र, साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स, AI रिसर्चर्स, एथिकल हैकर्स, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी में इंटरेस्ट रखने वाले लोग हिस्सा ले सकते हैं. पार्टिसिपेंट्स आधिकारिक TCQ पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है.&amp;nbsp;
Terrier Cyber Quest 2026 जरूरी तारीखें
TCQ 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुके हैं. इसके बाद ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग राउंड 1 से 10 सितंबर 2026 तक होगा.शॉर्टलिस्ट किए गए पार्टिसिपेंट्स ग्रैंड फिनाले में पहुंचेंगे, जो 6 से 8 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा. इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को अवॉर्ड सेरेमनी होगी.&amp;nbsp;
Terrier Cyber Quest 2026 में तीन ट्रैक
कॉम्पिटिशन को तीन अलग-अलग ट्रैक में बांटा गया है. इनमें Bug Hunting, AI Kavach और National Creators Challenge शामिल हैं.&amp;nbsp;
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ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
पार्टिसिपेंट्स आधिकारिक Terrier Cyber Quest पोर्टल पर जाकर अपनी पसंद का ट्रैक चुनकर प्रोफाइल बना सकते हैं. इसके बाद जरूरी जानकारी भरकर संबंधित ट्रैक के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन जमा करना होगा. AI Kavach के पार्टिसिपेंट्स को अपनी प्रपोजल प्रेजेंटेशन अपलोड करनी होगी, जबकि National Creators Challenge में ओरिजिनल अवेयरनेस कंटेंट जमा करना होगा.&amp;nbsp;
फाइनलिस्ट को क्या मिलेगा?
आयोजकों के अनुसार, फाइनलिस्ट को Territorial Army की ओर से सर्टिफिकेट और मेडलियन, कैश प्राइज और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. पार्टिसिपेंट्स को वरिष्ठ सरकारी और रक्षा अधिकारियों से बातचीत का अवसर भी मिल सकता है. विनर्स को डिफेंस प्रतिष्ठानों का दौरा करने और Territorial Army के साथ फ्यूचर की साइबर सिक्योरिटी पहलों में योगदान देने का मौका भी मिल सकता है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिहार के आदर्श ने जीती 3.5 करोड़ की स्कॉलरशिप, 14 साल की उम्र में घर छोड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ कभी जेब में सिर्फ 1,000 रुपये और एक पुराना लैपटॉप लेकर घर से निकलने वाला 14 साल का लड़का आज करोड़ों की स्कॉलरशिप के साथ विदेश में पढ़ाई करने की तैयारी कर रहा है. यह कहानी बिहार के चंपारण के आदर्श कुमार की है, जिन्होंने मुश्किल हालात के बाद भी अपनी पढ़ाई और फ्यूचर की राह खुद बनाने की कोशिश की. 19 साल की उम्र में आदर्श को Georgetown University in Qatar में करीब 3.5 करोड़ रुपये की फुल-राइड स्कॉलरशिप मिली है. आदर्श को इससे पहले Global Student Prize 2025 भी मिल चुका है. उनकी बनाई Skillzo पहल करीब 20,000 छात्रों तक पहुंच चुकी है. हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्हें विदेश की 22 यूनिवर्सिटीज से रिजेक्शन का सामना भी करना पड़ा.&amp;nbsp;
कैसे और कहां से शुरू हुआ सफर?
आदर्श का बचपन आर्थिक परेशानियों के बीच बीता. वह बिहार में अपनी सिंगल मदर के साथ बड़े हुए. 14 साल की उम्र में वह बेहतर फ्यूचर की उम्मीद लेकर कोटा चले गए थे, लेकिन वहां कोचिंग की फीस पूरी करना उनके लिए संभव नहीं था. ऐसे में उन्होंने स्टार्टअप्स और ग्रासरूट प्रोजेक्ट्स पर काम किया और बाद में Skillzo नाम का प्लेटफॉर्म बनाया. इसका मकसद छात्रों को स्किल्स, मेंटरशिप और अलग-अलग अवसरों तक पहुंच दिलाना था. यह पहल अब करीब 20,000 छात्रों तक पहुंच चुकी है. इसी दौरान आदर्श ने खुद भी कई अवसर हासिल किए. उन्हें स्कॉलरशिप मिली, वह Google Youth Advisor बने और इंटरनेशनल एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम्स में हिस्सा लिया.&amp;nbsp;
11 हजार नॉमिनेशन में जीता Global Student Prize
साल 2025 में आदर्श ने Global Student Prize जीता. उन्हें 148 देशों से आए करीब 11,000 नॉमिनेशन में से चुना गया. इस उपलब्धि के बाद उनकी पहचान बिहार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. अब उनकी पढ़ाई का अगला पड़ाव Georgetown University in Qatar है. उन्हें यहां करीब 3.5 करोड़ रुपये की फुल-राइड स्कॉलरशिप मिली है. इसमें ट्यूशन फीस, रहने की सुविधा, खाना, फ्लाइट, वीजा, हेल्थ इंश्योरेंस और अन्य शैक्षणिक खर्च शामिल हैं. वह दोहा के Education City में 70 से ज्यादा देशों के छात्रों के साथ पढ़ेंगे.&amp;nbsp;
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22 यूनिवर्सिटी से मिला रिजेक्शन
Georgetown में दाखिले से पहले आदर्श को 22 यूनिवर्सिटीज से रिजेक्शन मिल चुका था. उनकी नियमित एडमिशन प्रक्रिया के ऑप्शन लगभग खत्म हो गए थे. इसी दौरान Second Chance के जरिए Georgetown University in Qatar तक उनकी प्रोफाइल पहुंची और यूनिवर्सिटी ने उनके आवेदन पर विचार करने का फैसला किया.&amp;nbsp;
ऐसे मिला स्कॉलरशिप का ईमेल
Georgetown से एडमिशन और फुल स्कॉलरशिप का ईमेल मिलने का पल आदर्श के लिए बेहद खास था, वह उस समय अपनी मां के साथ बैठे थे. उन्होंने सबसे पहले यही खबर अपनी मां को बताई, जो उनकी पूरी यात्रा में उनके साथ रही हैं. आदर्श अब मुख्य रूप से Political Science, Economics और International Relations पढ़ना चाहते हैं. बिहार में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं तक पहुंच को करीब से देखने के कारण उनकी रुचि पॉलिसी और गवर्नेंस में बढ़ी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET PG 2026: एग्जाम सेंटर पर टेक्निकल ग्लिच हो तो क्या करें? NBEMS ने दी सलाह</title>
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        <description><![CDATA[ NEET PG 2026 की परीक्षा में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. परीक्षा की तैयारी के साथ उम्मीदवारों के मन में एग्जाम सेंटर से जुड़ी कई बातें भी रहती हैं. खासकर कंप्यूटर आधारित परीक्षा में अगर अचानक पावर कट हो जाए, सिस्टम लॉक हो जाए या स्क्रीन और माउस में कोई दिक्कत आने लगे, तो क्या करना होगा. इसे लेकर National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) ने उम्मीदवारों के लिए जरूरी जानकारी शेयर की है.
NBEMS के मुताबिक, परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी समस्या को लेकर उम्मीदवारों को घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जरूरी व्यवस्था की गई है और तकनीकी गड़बड़ी के कारण उम्मीदवार के तय परीक्षा समय का नुकसान नहीं होगा.&amp;nbsp;
30 अगस्त को होगी NEET PG 2026 परीक्षा
NBEMS 30 अगस्त 2026 को NEET PG 2026 आयोजित करेगा. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परीक्षा के लिए कुल 2,73,183 उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन किया है. यह संख्या पिछले साल की तुलना में 12.5 फीसदी से ज्यादा है. परीक्षा करीब 340 शहरों और 1,300 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
पावर कट होने पर क्या करना होगा?
अगर उम्मीदवार परीक्षा में लॉग इन कर चुका है और इसी दौरान पावर फेलियर हो जाता है, तो उसे अपनी तरफ से कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं होगी. NBEMS के अनुसार, पावर कट होते ही परीक्षा का टाइमर रुक जाएगा. बिजली की समस्या ठीक होने के बाद टाइमर वहीं से दोबारा शुरू होगा, जहां वह रुका था. यानी तकनीकी समस्या के कारण उम्मीदवार के परीक्षा समय में कोई कटौती नहीं होगी.&amp;nbsp;
कंप्यूटर लॉक होने पर क्या होगा?
अगर परीक्षा के दौरान मुख्य सर्वर से कनेक्टिविटी खत्म होने के कारण उम्मीदवार की मशीन लॉक हो जाती है, तो परीक्षा केंद्र के हर एग्जाम रूम में मौजूद IT मैनेजर उम्मीदवार के अकाउंट को वेरीफाई करके उसे अनलॉक करेगा. इसके बाद परीक्षा का टाइमर उसी समय से शुरू होगा, जहां उम्मीदवार ने परीक्षा छोड़ी थी.&amp;nbsp;
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स्क्रीन या माउस में दिक्कत हो तो तुरंत बताएं
अगर उम्मीदवार के सिस्टम में कोई खास समस्या आ रही है, जैसे स्क्रीन फ्लिकर करना, माउस में परेशानी, सिस्टम बार-बार लॉक या हैंग होना, तो इसकी जानकारी तुरंत इनविजिलेटर को देनी होगी. NBEMS के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद IT मैनेजर या इनविजिलेटर उम्मीदवार की मशीन को वेरीफाई करके लॉक करेगा. जरूरत पड़ने पर उम्मीदवार को उसी लैब या किसी दूसरी लैब में मौजूद बफर सीट पर शिफ्ट किया जा सकता है.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के इंतजाम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, NEET PG 2026 के लिए परीक्षा केंद्रों की पहले से सीलिंग और वेरिफिकेशन, CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, उम्मीदवारों की फ्रिस्किंग और सिग्नल जैमर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं. इसके अलावा डायनेमिक कंप्यूटर, सेंट्रल और रीजनल कमांड सेंटर के जरिए लाइव मॉनिटरिंग और स्वतंत्र ऑब्जर्वर्स साथ ही अप्रेजर्स की रियल-टाइम निगरानी भी परीक्षा व्यवस्था का हिस्सा होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026:, एग्जाम, सेंटर, पर, टेक्निकल, ग्लिच, हो, तो, क्या, करें, NBEMS, ने, दी, सलाह</media:keywords>
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        <title>NEET PG 2026 एडमिट कार्ड कभी भी हो सकता है जारी, ऐसे करें डाउनलोड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-pg-2026-एडमिट-कार्ड-कभी-भी-हो-सकता-है-जारी-ऐसे-करें-डाउनलोड</link>
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        <description><![CDATA[ नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन कॉलेज साइंसेज (NBEMS) की ओर से आज 24 अगस्त 2026 को नीट पीजी 2026 का एडमिड कार्ड जारी किया जा सकता है. एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार इसे एनबीईएमएस की ऑफिशियल वेबसाइट से अपने लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे. नीट पीजी 2026 परीक्षा का आयोजन 30 अगस्त को किया जाना है. इससे पहले परीक्षा के लिए एग्जाम सिटी की जानकारी 12 अगस्त को जारी की जा चुकी है, ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड तैयार रखें और एडमिट कार्ड जारी होते ही उसे डाउनलोड कर लें.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड होगा नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड

नीट पीजी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले एनबीईएमएस की ऑफिशियल वेबसाइट natboard.edu.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर नीट पीजी सेक्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड से संबंधित लिंक खोलें.&amp;nbsp;
इसके बाद अपना यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज करें.&amp;nbsp;
लॉगिन करने के बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा.&amp;nbsp;
अब हॉल टिकट डाउनलोड करके फ्यूचर के लिए इसे सेव करके रख लें.&amp;nbsp;

एडमिट कार्ड में यह डिटेल्स जरूर चेक करें&amp;nbsp;
नीट पीजी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवारों को उसे पर दर्ज सभी जानकारी ध्यान से देखनी होगी. हॉल टिकट में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, एप्लीकेशन आईडी, जन्मतिथि, कैटेगरी, परीक्षा केंद्र का कोड, केंद्र का नाम और पता, परीक्षा की तारीख का समय और रिपोर्टिंग टाइम जैसी जानकारी दी जाएगी. उम्मीदवारों को अपने एडमिट कार्ड में दर्ज जानकारी को आवेदन फाॅर्म की डिटेल्स से मिलाकर देखना होगा. किसी भी तरह की गलती होने पर छात्र को एनबीईएमएस से ऑनलाइन कांटेक्ट करना होगा.&amp;nbsp;
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30 अगस्त को होगी नीट पीजी की परीक्षा&amp;nbsp;
नीट पीजी 2026 परीक्षा 30 अगस्त 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा के लिए एग्जाम सिटी इंटीमेशन 12 अगस्त को जारी की जा चुकी है. अब एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग टाइम और दूसरे जरूरी निर्देश की जानकारी देखनी होगी.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र पर कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी&amp;nbsp;
परीक्षा में समय शामिल होने वाले उम्मीदवारों को कुछ डॉक्यूमेंट अपने साथ ले जाने होंगे. इनमें नीट पीजी एडमिट कार्ड, हाल की पासपोर्ट साइज फोटो और और वेलिड ओरिजिनल फोटो आईडी शामिल है. इसके अलावा उम्मीदवारों को स्थायी प्रोविजनल एसएमसी, एमसीआई, या एनएमसी रजिस्ट्रेशन की फोटो कॉपी भी साथ रखने के निर्देश दिए गए हैं. वैलिड फोटो आईडी के तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे डॉक्यूमेंट निर्धारित निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, एडमिट, कार्ड, कभी, भी, हो, सकता, है, जारी, ऐसे, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>8वें वेतन आयोग के बाद कितनी बढ़ेगी बैंक क्लर्क की सैलरी, देखें हिसाब&amp;किताब</title>
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        <description><![CDATA[ बैंकिंग सेक्टर में नौकरी को लेकर युवाओं के बीच हमेशा चर्चा रहती है. इसकी बड़ी वजह अच्छी सैलरी, नौकरी की सुरक्षा और समय के साथ मिलने वाली करियर ग्रोथ है. बैंक क्लर्क की नौकरी भी इसी वजह से काफी पसंद की जाती है. क्लर्क को बेसिक पे के साथ महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं.
अब 8वें वेतन आयोग को लेकर संभावित बदलावों की चर्चा के बीच बैंक क्लर्क की सैलरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वेतन में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है. अनुमान के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बैंक क्लर्क की बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 8वें वेतन आयोग के बाद बैंक क्लर्क की सैलरी कितनी बढ़ेगी.&amp;nbsp;
बैंक क्लर्क की सैलरी कितनी होती है?
आईबीपीएस क्लर्क के लिए शुरुआती बेसिक पे 19,900 है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, एचआरए, स्पेशल अलाउंस और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्ते भी सैलरी में शामिल होते हैं. आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर इन-हैंड सैलरी लगभग 28,000 से 30,000 तक हो सकती है, जबकि पोस्टिंग और मिलने वाले भत्तों के आधार पर इसमें बदलाव होता है. वहीं एसबीआई क्लर्क की बेसिक सैलरी 17,900 प्रति माह है. इसमें DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरी सुविधाएं जुड़ने के बाद ग्रॉस सैलरी लगभग 46,000 तक पहुंच सकती है. कटौती के बाद इन-हैंड सैलरी करीब 42,327 है.&amp;nbsp;
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8वें वेतन आयोग के बाद बैंक क्लर्क की सैलरी कितनी बढ़ेगी?
8वें वेतन आयोग को लेकर 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की चर्चा है. अगर इस तरह का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव हो सकता है. अनुमान के मुताबिक, आईबीपीएस क्लर्क की मौजूदा 19,900 बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 51,400 तक पहुंच सकती है. वहीं 1.83 के फिटमेंट फैक्टर के अनुमान के आधार पर यह बेसिक पे लगभग 36,600 हो सकती है.&amp;nbsp;
75 हजार तक पहुंच सकती है सैलरी
फिटमेंट फैक्टर के साथ संशोधित DA और HRA को जोड़ने पर बैंक क्लर्क की कुल सैलरी में भी बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है. अनुमान के अनुसार, मेट्रो शहरों में नए क्लर्क की मासिक सैलरी करीब 75,000 तक पहुंच सकती है. हालांकि यह आंकड़ा अनुमानित है और सही वेतन फिटमेंट फैक्टर, संशोधित भत्तों, पोस्टिंग लोकेशन और लागू वेतन व्यवस्था पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CGHS की सफाई, 27 से 31 अगस्त तक बंद नहीं होंगे वेलनेस सेंटर</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना यानी CGHS ने एक फर्जी नोटिस को लेकर बड़ी सफाई दी है. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर एक नोटिस वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि 27 से 31 अगस्त 2026 तक CGHS वेलनेस सेंटर बंद रहेंगे. अब CGHS के डायरेक्टोरेट ने साफ कर दिया है कि यह नोटिस पूरी तरह फर्जी और अनधिकृत है और सभी वेलनेस सेंटर तय समय के हिसाब से खुले ही रहेंगे.
क्या था वायरल नोटिस में दावा
वायरल हो रहे इस फर्जी नोटिस में CGHS का नाम और लोगो इस्तेमाल करते हुए यह दावा किया गया था कि NEET-PG 2026 परीक्षा में मेडिकल ऑफिसर्स की ड्यूटी लगने की वजह से 27 से 31 अगस्त के बीच वेलनेस सेंटर बंद रहेंगे. यह नोटिस इतनी तेजी से फैला कि लाखों लाभार्थियों के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति बन गई, क्योंकि यह नोटिस देखने में बिल्कुल असली सरकारी सर्कुलर जैसा लग रहा था.&amp;nbsp;
CGHS डायरेक्टोरेट ने दी सफाई
22 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर में CGHS डायरेक्टोरेट ने साफ शब्दों में कहा कि यह नोटिस न तो उनके द्वारा जारी किया गया है और न ही इसे किसी तरह की मंजूरी मिली है. सर्कुलर में यह भी कहा गया कि नोटिस में दी गई जानकारी पूरी तरह गलत है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए इस बात की पुष्टि की कि सभी CGHS वेलनेस सेंटर अपने तय समय-सारिणी के अनुसार ही काम करते रहेंगे.
फर्जी नोटिस पर सख्ती
CGHS ने अपने सभी दफ्तरों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस फर्जी नोटिस को कहीं भी प्रदर्शित या आगे शेयर न करें. साथ ही, डायरेक्टोरेट ने CGHS के नाम और लोगो के गलत इस्तेमाल को गंभीरता से लिया है और अधिकारियों से कहा है कि अगर उन्हें इस नोटिस के स्रोत या इसे फैलाने वालों के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो उसकी रिपोर्ट की जाए.
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क्यों जरूरी है यह जानकारी
देशभर में लाखों केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स अपने और अपने परिवार के इलाज के लिए CGHS वेलनेस सेंटर पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर बीच में कोई फर्जी सूचना फैलती है, तो जरूरतमंद लोगों को समय पर इलाज मिलने में दिक्कत आ सकती है. यही वजह है कि सरकार ने समय रहते इस भ्रम को दूर करने के लिए तुरंत सफाई जारी की, ताकि किसी भी लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NTA को खत्म करना नहीं, मजबूत करना जरूरी, पूर्व UGC चीफ ने बताया पूरा प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA पिछले कुछ समय से लगातार सवालों के घेरे में रही है. पिछले कुछ दिनों में UGC NEET पेपर लीक के मामले में बच्चों ने बड़ी मात्रा में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों का प्रदर्शन किया था, जिसके बाद देश के शिक्षा मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा था. इन सारे मामलों की आग अभी तक ठंडी हुई ही नहीं थी कि अब इसके बाद UGC NET परीक्षा में भी गड़बड़ियां सामने आईं. इन घटनाओं के बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या NTA को पूरी तरह बदल दिया जाना चाहिए. इसी सवाल पर पूर्व UGC चेयरमैन मामिडाला जगदीश कुमार ने अपनी राय रखी है. वे फिलहाल NEP 2020 की रिव्यू कमेटी के चेयरमैन भी हैं. उन्होंने PTI से बातचीत में कहा कि NTA को खत्म करके नई एजेंसी बनाना सही रास्ता नहीं है, बल्कि इसे अंदर से मजबूत करने की जरूरत है. उनके मुताबिक हर साल एक करोड़ से ज्यादा छात्र NTA की परीक्षाओं में बैठते हैं, इसलिए यह मुद्दा सिर्फ एक एजेंसी बदलने का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम को सुरक्षित बनाने का है.
एक ही एजेंसी क्यों जरूरी है
कुमार ने कहा कि परीक्षाओं को अलग-अलग एजेंसियों में बांटना कोई समाधान नहीं है. उनका कहना था कि सिर्फ काम का बोझ कम दिखाने के लिए परीक्षाओं को कई एजेंसियों में बांटना ठीक नहीं होगा. उन्होंने समझाया कि एक ही राष्ट्रीय टेस्टिंग बॉडी होने से सुरक्षा के नियम, टेक्नोलॉजी, छात्रों को दी जाने वाली सुविधाएं और रिजल्ट बनाने का तरीका एक जैसा रहता है. अगर कई नई एजेंसियां बना दी जाएं तो खर्चा भी दोगुना हो जाएगा और हर जगह सुरक्षा का स्तर अलग-अलग हो जाएगा. साथ ही उन्होंने रामकृष्णन कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि जो मंत्रालय या संस्था परीक्षा कराना चाहती है, उसे सिलेबस, विषय विशेषज्ञ और सवालों की क्वालिटी की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए. वहीं NTA को सुरक्षित प्लेटफॉर्म, परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क, छात्रों की पहचान जांच और रिजल्ट तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए. सरकार ने जुलाई में बताया था कि कमेटी के 46 में से 35 बड़े सुझावों पर पहले ही काम हो चुका है, जैसे करीब 600 विशेषज्ञों को बदलना और सवालों की चार स्तर पर जांच शुरू करना चाहिए.
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आगे क्या करना जरूरी है
कुमार ने तीन बड़े सुधारों को सबसे जरूरी बताया.

पहला, पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना यानी सवाल बनाने से लेकर छपाई, स्टोरेज और सेंटर तक हर कदम पर पूरा रिकॉर्ड रखा जाए.
दूसरा, टेस्ट डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी, भाषा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थायी विशेषज्ञ टीम बनाना ताकि हर बार नए लोग न रखने पड़ें.
तीसरा, परीक्षा केंद्रों और छात्रों की सुविधाओं को पूरी तरह भरोसेमंद बनाना, जिसमें CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक जांच, बिजली और इंटरनेट की सुविधा तथा ट्रेंड स्टाफ शामिल हो.

कुमार के अनुसार NTA के पास पहले से ही अनुभव, टेक्नोलॉजी और परीक्षा केंद्रों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है, इसलिए इसे खत्म करने के बजाय इसे और मजबूत बनाना ज्यादा सही रास्ता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>UPSC CDS 2 Admit Card 2026 जल्द होगा जारी, यहां चेक करें अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ UPSC CDS 2 परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए अब एडमिट कार्ड का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है. Union Public Service Commission (UPSC) जल्द ही Combined Defence Services Examination (II), 2026 का एडमिट कार्ड जारी करने की उम्मीद है. जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है, उन्हें सलाह दी गई है कि UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लगातार नजर बनाए रखें. एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार इसे upsc.gov.in से अपने लॉगिन डिटेल्स की मदद से डाउनलोड कर सकेंगे, हालांकि आयोग ने अभी एडमिट कार्ड जारी होने की मेन तारीख की घोषणा नहीं की है.&amp;nbsp;
CDS 2 परीक्षा कब होगी?
UPSC CDS 2 2026 परीक्षा का आयोजन 13 सितंबर 2026 को किया जाना है. यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए आयोजित होगी, जो Indian Military Academy, Indian Naval Academy, Air Force Academy और Officers Training Academy के अलग-अलग कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं. एडमिट कार्ड उम्मीदवारों के लिए एक जरूरी डॉक्यूमेंट होगा. इसमें कैंडिडेट का नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा के दिन से जुड़े जरूरी निर्देश दिए होंगे.&amp;nbsp;
कैसे डाउनलोड करें CDS 2 Admit Card?
1. एडमिट कार्ड का लिंक एक्टिव होने के बाद उम्मीदवार &amp;nbsp;सबसे पहले UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं.&amp;nbsp;
2. इसके बाद वेबसाइट पर Examinations सेक्शन में जाएं.&amp;nbsp;
3. यहां CDS 2 Admit Card 2026 के लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
4. अब मांगी गई लॉगिन डिटेल्स दर्ज करें.&amp;nbsp;
5. इसके साथ ही डिटेल्स सबमिट करने के बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा.&amp;nbsp;
6. अब एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और परीक्षा के लिए उसका प्रिंट निकाल लें.&amp;nbsp;
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एडमिट कार्ड डाउनलोड करने से पहले रखें ये डिटेल्स तैयार
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या रोल नंबर और अन्य जरूरी लॉगिन डिटेल्स पहले से तैयार रखें. इससे एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उसे डाउनलोड करने में परेशानी नहीं होगी. &amp;nbsp;एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दी गई सभी जानकारियों को ध्यान से चेक करना भी जरूरी है. उम्मीदवार को यह देखना चाहिए कि नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग टाइम और अन्य जानकारी सही दर्ज है.&amp;nbsp;
एग्जाम सेंटर पर क्या लेकर जाएं?
उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड की प्रिंटेड कॉपी लेकर जाना होगा. इसके साथ एक वैध फोटो आईडी कार्ड भी रखना होगा. UPSC ने अभी CDS 2 Admit Card 2026 जारी होने की तारीख घोषित नहीं की है. ऐसे में उम्मीदवारों को लेटेस्ट अपडेट के लिए UPSC की आधिकारिक वेबसाइट नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए. एडमिट कार्ड जारी होते ही उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स के जरिए इसे डाउनलोड कर सकेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हापुड़ के परिषदीय स्कूलों में यू&amp;ट्यूबर्स की एंट्री बैन, BSA का बड़ा आदेश</title>
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        <description><![CDATA[ स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने और छात्रों की सुरक्षा को लेकर हापुड़ में बड़ा निर्देश जारी किया गया है. अब परिषदीय स्कूलों में बाहरी लोगों, यू-ट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की एंट्री बिना परमिशन नहीं हो सकेगी. स्कूल परिसर में फोटो या वीडियो बनाने के लिए भी अधिकारी की परमिशन जरूरी होगी. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) दीपा भाटी ने सभी संबंधित प्रिंसिपल को इन निर्देशों का पालन करने को कहा है. इसके साथ ही स्कूलों के गेट को स्कूल संचालन के दौरान और उसके बाद भी बंद रखने का आदेश दिया गया है. अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल परिसर में किसी तरह की अनऑथराइज्ड एक्टिविटी न हो.&amp;nbsp;
बिना परमिशन बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक
जारी आदेश में कहा गया है कि कुछ बाहरी व्यक्ति और यू-ट्यूबर्स बिना परमिशन परिषदीय स्कूलों में प्रवेश कर स्कूल और स्टाफ के फोटो-वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. इससे स्कूल में चल रही पढ़ाई प्रभावित होती है. साथ ही टीचर पद की गरिमा और विभाग की छवि पर भी असर पड़ता है. &amp;nbsp;इसी को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा और उनके हित को ध्यान में रखकर स्कूलों में ऐसे बाहरी लोगों का प्रवेश तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं.&amp;nbsp;
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फोटो-वीडियोग्राफी के लिए भी परमिशन जरूरी
आदेश के मुताबिक, कोई भी बाहरी व्यक्ति, यू-ट्यूबर या सोशल मीडिया से जुड़ा व्यक्ति अधिकारी की परमिशन के बिना स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा. इसके अलावा स्कूल में फोटो या वीडियो बनाने की भी परमिशन नहीं होगी. &amp;nbsp;आदेश में यह भी बताया गया है कि स्कूलों के निरीक्षण के लिए शासन और प्रशासन की ओर से पहले से ही जनपद और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है. ये अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण और मॉनिटरिंग करते हैं.&amp;nbsp;
स्कूलों के गेट बंद रखने के निर्देश
BSA ने प्रभारी प्रिंसिपल को स्कूल का गेट बंद रखने के भी निर्देश दिए हैं. आदेश में कहा गया है कि स्कूल संचालन के समय या उसके बाद भी गेट खुला रहना सही नहीं है. इसलिए स्कूल का गेट बंद रखना जरूरी किया गया है, जिससे छात्रों के हित पर कोई असर न पड़े. इसके साथ ही स्कूल परिसर में होने वाली अनऑथराइज्ड एक्टिविटी पर नजर रखने और जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 22:30:03 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>हापुड़, के, परिषदीय, स्कूलों, में, यू-ट्यूबर्स, की, एंट्री, बैन, BSA, का, बड़ा, आदेश</media:keywords>
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        <title>बारिश के चलते टली दिल्ली पुलिस कांस्टेबल PE&amp;amp;MT परीक्षा, नई तारीख जारी </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बारिश-के-चलते-टली-दिल्ली-पुलिस-कांस्टेबल-pemt-परीक्षा-नई-तारीख-जारी</link>
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        <description><![CDATA[ बारिश और खराब मौसम के चलते आज होने वाली दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2025 &amp;nbsp;का फिजिकल एंड्योरेंस एंड मेजरमेंट टेस्ट स्थगित कर दिया गया है. अब इस दिन परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों का PE&amp;amp;MT 10 सितंबर 2026&amp;nbsp; को आयोजित किया जाएगा. पुलिस की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि आज 22 अगस्त को निर्धारित परीक्षा को मौसम की स्थिति को देखते हुए टाला गया है और परीक्षा को सुचारू रूप से ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है.&amp;nbsp;
10 सितंबर को होगा PE&amp;amp;MT
22 अगस्त 2026 को होने वाली कांस्टेबल एग्जीक्यूटिव PE&amp;amp;MT अब 10 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा. उम्मीदवारों को अपने पुराने एडमिट कार्ड में दिए गए उस परीक्षा केंद्र और रिपोर्टिंग टाइम पर पहुंचना होगा. दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 22 अगस्त के लिए जारी किया गया एडमिट कार्ड-ई एडमिशन सर्टिफिकेट 10 सितंबर को भी मान्य रहेगा यानी अब उम्मीदवारों को नया एडमिट कार्ड जारी करने नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र और रिपोर्टिंग टाइम में &amp;nbsp;कोई बदलाव नहीं&amp;nbsp;
जिन उम्मीदवारों की परीक्षा स्थगित हुई है, उनके लिए परीक्षा केंद्र और रिपोर्टिंग समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है. अभ्यर्थियों को अपने मौजूदा एडमिट कार्ड में दिए गए डिटेल के अनुसार ही परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह परीक्षा केंद्र पर पर्याप्त समय से पहले पहुंचे और PE&amp;amp;MT के लिए जरूरी सभी डॉक्यूमेंट अपने साथ लेकर जाए.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-कभी भी जारी हो सकता है UPTET 2026 रिजल्ट, 2 लाख अभ्यर्थियों को इंतजार&amp;nbsp;
बाकी तारीखों में बदलाव नहीं&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस के नोटिस के अनुसार 22 अगस्त के लिए जारी किया गया यह एडमिट कार्ड ही 10 सितंबर की परीक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. उम्मीदवार अपने पुराने एडमिट कार्ड को सुरक्षित रखें और उसी के आधार पर परीक्षा केंद्र पर उपस्थित हो. इसके अलावा PE&amp;amp;MT का बाकी शेड्यूल पहले की तरह जारी रहेगा. आगे किसी तारीख में बदलाव किया जाता है, तो इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर दी जाएगी.
उम्मीदवारों को रखना होगा इन बातों का ध्यान&amp;nbsp;

22 अगस्त की परीक्षा अब 10 सितंबर को होगी.&amp;nbsp;
नया एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है.&amp;nbsp;
22 अगस्त को जारी किया एडमिट कार्ड ही 10 सितंबर को मान्य रहेगा&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र और रिपोर्टिंग टाइम वही रहेगा.&amp;nbsp;
एडमिट कार्ड में दिए गए निर्देशों के अनुसार जरूरी डॉक्यूमेंट साथ लेकर जाने होंगे.
परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचना होगा.

ये भी पढ़ें-NTA की एक और परीक्षा में गड़बड़ी, रद्द हुई AIAPGET 2026 परीक्षा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बारिश, के, चलते, टली, दिल्ली, पुलिस, कांस्टेबल, PE&amp;MT, परीक्षा, नई, तारीख, जारी </media:keywords>
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        <title>NTA की बड़ी कार्रवाई&amp; जयपुर केंद्र पर अव्यवस्था के बाद एजेंसी Eduquity को किया सस्पेंड</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (AIAPGET) के दौरान जयपुर स्थित एक परीक्षा केंद्र पर हुई गंभीर खामियों के बाद शनिवार को कड़ी कार्रवाई की है. NTA ने परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी M/s Eduquity Career Technologies Pvt. Ltd. को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही कारण बताओ नोटिस के समाधान होने तक Eduquity के NTA के साथ पैनल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
बिजली गुल होने के कारण 49 अभ्यर्थी नहीं दे पाए थे पूरी परीक्षा
यह पूरा मामला जयपुर स्थित श्री सत्य साईं पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र का है, जहां AIAPGET परीक्षा के दौरान तकनीकी कुप्रबंधन देखने को मिला था. NTA ने जो जानकारी शेयर की उसके मुताबिक, केंद्र पर बिजली गुल होने की वजह से कुल 49 अभ्यर्थी अपनी परीक्षा पूरी नहीं कर सके थे. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इस बिजली कटौती और अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर परीक्षा का संचालन कर रही एजेंसी Eduquity Career Technologies को जिम्मेदार ठहराया है.

NTA has issued a show-cause notice to M/s Eduquity Career Technologies Pvt. Ltd. for lapses in the conduct of the AIAPGET examination at a center in Jaipur. Pending resolution of the notice, the empanelment of M/s Eduquity with NTA stands suspended with immediate effect.
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) August 22, 2026



अप्रभावित पारदर्शिता और एजेंसी की जिम्मेदारी
NTA ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही या अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हालांकि, एजेंसी द्वारा जारी नवीनतम अपडेट में उन विशिष्ट खामियों का विवरण नहीं दिया गया है जिनके आधार पर यह कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, लेकिन जब तक इस नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और जांच पूरी नहीं होती, तब तक Eduquity का निलंबन प्रभावी रहेगा. NTA के इस सख्त कदम का उद्देश्य भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में इस प्रकार की तकनीकी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों को रोकना है.
यह भी पढ़ें: बारिश के चलते टली दिल्ली पुलिस कांस्टेबल PE&amp;amp;MT परीक्षा, नई तारीख जारी&amp;nbsp;
49 प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 1 सितंबर को पुनः परीक्षा
परीक्षा से वंचित रहे अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, NTA ने पहले ही पुनर्मांकन और री-एग्जाम की घोषणा कर दी थी. जयपुर केंद्र के जिन 49 अभ्यर्थियों की परीक्षा प्रभावित हुई थी, उनके लिए 1 सितंबर को दोबारा परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. यह पुनः परीक्षा जयपुर स्थित &#039;राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन&#039; केंद्र पर आयोजित की जाएगी. एजेंसी का कहना है कि प्रभावित छात्रों को किसी भी तरह का नुकसान न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSC EPFO में एपीएफसी के 80 पदों पर भर्ती, आज से शुरू हो रहे आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsc-epfo-में-एपीएफसी-के-80-पदों-पर-भर्ती-आज-से-शुरू-हो-रहे-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ यूपीएससी ने ईपीएफओ में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती योजना के तहत कुल 80 पदों को भरा जाएगा. इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज यानी 22 अगस्त से शुरू हो गई है. योग्य उम्मीदवार यूपीएससी के ऑनलाइन आवेदन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की आखिरी तारीख 11 सितंबर शाम 6 बजे तक निर्धारित है. वहीं यूपीएससी की जानकारी के अनुसार APFC पदों के लिए भर्ती परीक्षा 20 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी.
ईपीएफओ के 80 पदों पर होगी भर्ती&amp;nbsp;
यूपीएससी ईपीएफओ APFC भर्ती 2026 के तहत कुल 80 खाली पदों को भरा जाना है. इनमें 29 पद जनरल कैटेगरी के, 8 पद ईडब्ल्यूएस, 18 पद ओबीसी, 15 पद एससी और 10 पद एसटी उम्मीदवारों के लिए है. कुल पदों में से तीन पद PwBD कैटेगरी के लिए आरक्षित है. इस पद पर चयनित उम्मीदवार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में कार्य करेंगे. APFC पद सातवें वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स के लेवल 10 के अंदर आता है. &amp;zwnj;
आवेदन से जुड़ी जरूरी तारीख के देख लें&amp;nbsp;
APFC भर्ती के लिए शॉर्ट नोटिफिकेशन 19 अगस्त को जारी किया गया था, जबकि 21 अगस्त को विस्तृत नोटिफिकेशन जारी हुआ. इसके बाद आज 22 अगस्त से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. उम्मीदवार 11 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं. वहीं भर्ती 20 दिसंबर 2026 को होगी. इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन रिक्रूटमेंट टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा.&amp;nbsp;
इन पदों के लिए कौन है एलिजिबल?
APFC पद के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से डिग्री होनी चाहिए. नोटिफिकेशन में कंपनी लॉ, लेबर लॉ या पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डिप्लोमा को वांछनीय योग्यता के तौर पर बताया गया है. जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष है. वहीं ओबीसी के लिए अधिकतम आयु 38 वर्ष और एससी, एसटी के लिए 40 वर्ष है. आयु की गणना आवेदन की आखिरी तारीख के आधार पर की जाएगी. इसके अलावा आरक्षित वर्गों को आयु में छूट भी मिलेगी. वहीं अगर फीस की बात करें तो जिन उम्मीदवारों पर फीस लागू होगी, उन्हें 25 रुपये फीस देनी होगी. वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी और महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन में छूट दी है.
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APFC भर्ती परीक्षा में आएगा, बदला हुआ सिलेबस&amp;nbsp;
&amp;nbsp;इस बार APFC भर्ती परीक्षा के सिलेबस में भी बदलाव किया गया है. नोटिफिकेशन में लेबर लॉ की जगह लेबर कोड्स को शामिल किया गया है. इसके अलावा परीक्षा में जनरल इंग्लिश, भारतीय संस्कृति विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन, विकास से जुड़े मुद्दे, भारतीय अर्थव्यवस्था के मौजूदा रुझान, शासन और भारतीय संविधान से जुड़े विषय शामिल है. सिलेबस में जनरल साइंस और बेसिक कंप्यूटर एप्लीकेशन, एलिमेंट्री मैथमेटिक्स, स्टैटिसटिक्स और जनरल मेंटल एबिलिटी के साथ इंडस्ट्रियल रिलेशन, लेबर कोड्स और भारत में सोशल सिक्योरिटी जैसे विषय भी शामिल है. इसके अलावा प्रिंसिपल्स ऑफ अकाउंटेंसी, ऑडिटिंग एंड इंश्योरेंस और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे.&amp;nbsp;
ऐसे करें UPSC EPFO ईपीएफओ के लिए आवेदन&amp;nbsp;

उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए सबसे पहले यूपीएससी के एप्लीकेशन पोर्टल upsconline.nic.in पर जाना होगा.
अब यहां अकाउंट बनाकर यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करके पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स भरनी होगी.
उसके बाद डॉक्यूमेंट अपलोड करके फीस जमा करनी होगी.&amp;nbsp;
वहीं फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले सारी जानकारी अच्छी तरह जांच लें
लास्ट में फॉर्म सबमिट करने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके रख लें.

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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPSC, EPFO, में, एपीएफसी, के, पदों, पर, भर्ती, आज, से, शुरू, हो, रहे, आवेदन</media:keywords>
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        <title>CAT के बाद कैसे मिलता है IIM में एडमिशन? जानिए पूरा प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ CAT के बाद कैसे मिलता है IIM में एडमिशन? जानिए पूरा प्रोसेस ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 10:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हरियाणा TET का रिजल्ट जारी, 16.57% अभ्यर्थी हुए पास</title>
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        <description><![CDATA[ हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) 2025 में शामिल अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म हो गया है. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) भिवानी ने रिजल्ट जारी कर दिया है, जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था वह अपना स्कोर कार्ड ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. रिजल्ट बोर्ड के ऑफिशियल एचटीईटी पोर्टल पर उपलब्ध जारी किया गया है. इस बार टेट परीक्षा में कुल 1,92,220 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. वहीं परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की संख्या 31,847 रही. जिसका मतलब है कि क1ल 16.57 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा में पास हुए हैं.&amp;nbsp;
HTET 2025 में किस लेवल पर कितने अभ्यर्थी शामिल हुए?
बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार HTET 2025 में तीनों लेवल के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी. &amp;nbsp;पीआरटी लेवल 1 में 31,402, टीजीटी लेवल 2 में 99,896 और पीजीटी लेवल 3 में 60,922 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे. तीनों लेवल को मिलाकर परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या 1,92,220 रही. परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों में ज्यादातर की बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है. बोर्ड के अनुसार कुल सफल उम्मीदवारों में से 30,883 अभ्यर्थी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा चुके हैं, जबकि 964 उम्मीदवार इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाए हैं.
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बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का एक और मौका&amp;nbsp;
जिन सफल उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किसी कारण से नहीं हो पाया, उन्हें भी प्रक्रिया पूरी करने का एक और अवसर दिया जाएगा. ऐसे उम्मीदवारों के लिए भिवानी स्थित बोर्ड मुख्यालय में अलग से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराया जाएगा. इसका शेड्यूल बोर्ड की ओर से जल्दी जारी किया जा सकता है.
ऐसे डाउनलोड करें HTET रिजल्ट&amp;nbsp;

हरियाणा टेट का रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले बोर्ड के ऑफिशियल वेबसाइट htet.eapplynow.com पर जाए.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर दिए गए HTET रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब रिजल्ट पेज पर मांगी गई जानकारी जैसे रोल नंबर और पासवर्ड दर्ज करें.
जानकारी सबमिट करने के बाद आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा.&amp;nbsp;
यहां उम्मीदवार अपने प्राप्त अंकों और क्वालीफाइंग स्टेटस को देख सकते हैं.&amp;nbsp;
रिजल्ट चेक करने के बाद स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें और इसका प्रिंटआउट निकाल लें.

स्कोर कार्ड में मिलेगी यह जानकारी
HTET स्कोरकार्ड में उम्मीदवारों से जुड़ी और परीक्षा में प्रदर्शन से संबंधित कई जानकारी दी जाएगी. इसमें उम्मीदवार का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्मतिथि, जेंडर, पिता का नाम और कैटेगरी शामिल होगी. इसके अलावा स्कोर कार्ड में क्वालीफाइंग मार्क्स, कुल प्राप्त नंबर और विषय वार नंबर भी दर्ज होंगे. उम्मीदवारों को रिजल्ट डाउनलोड करने के बाद इन सभी डिटेल को अच्छी तरह जांचने की सलाह दी गई है.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कभी भी जारी हो सकता है UPTET 2026 रिजल्ट, 2 लाख अभ्यर्थियों को इंतजार </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कभी-भी-जारी-हो-सकता-है-uptet-2026-रिजल्ट-2-लाख-अभ्यर्थियों-को-इंतजार</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 में शामिल हुए उम्मीदवारों का इंतजार जल्दी खत्म हो सकता है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग जल्दी ही परीक्षा का रिजल्ट जारी कर सकता है. रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपना स्कोर कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.govt.in पर जाकर चेक कर सकेंगे. इसके लिए उम्मीदवारों को अपना रोल नंबर और पासवर्ड दर्ज करना होगा.&amp;nbsp;
कब हुई थी UPTET की परीक्षा?&amp;nbsp;
UPTET 2026 परीक्षा 2,3 और 4 जुलाई को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बनाए गए अलग-अलग परीक्षा केंद्र पर आयोजित की गई थी. परीक्षा के लिए कुल 2,27,481 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले करीब 2 लाख उम्मीदवार भी शामिल थे. परीक्षा में पेपर 1 और पेपर 2 के उम्मीदवार शामिल हुए थे. UPTET 2026 परीक्षा से पहले 22 जून को एग्जाम सिटी डिटेल्स जारी की गई. इसके बाद 30 जून को एडमिट कार्ड उपलब्ध कराया गया. परीक्षा 2 से 4 जुलाई तक आयोजित होने के बाद आयोग ने 8 जुलाई को आंसर-की जारी की थी. अब उम्मीदवार फाइनल रिजल्ट इंतजार कर रहे हैं. रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपने स्कोर कार्ड की जांच करनी होगी.&amp;nbsp;
UPTET 2026 में कितने अंक जरूरी?
UPTET 2026 परीक्षा में सफल होने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करना जरूरी है. अलग-अलग कैटेगरी के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स तय किए गए हैं. जैसे जनरल कैटेगरी के लिए 60 प्रतिशत अंक और आरक्षित वर्गों के लिए 75 प्रतिशत अंक. वहीं जो उम्मीदवार परीक्षा में निर्धारित अंक हासिल कर सफल होंगे, उन्हें UPTET प्रमाण पत्र दिया जाएगा. इस प्रमाण पत्र की वैधता आजीवन रहेगी.&amp;nbsp;
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स्कोर कार्ड में जरूरी डिटेल चेक करें
UPTET 2026 के स्कोरकार्ड में उम्मीदवार और उसके परीक्षा प्रदर्शन से जुड़ी गई जानकारियां दी जाएगी. इसमें उम्मीदवार का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, बर्थ डेट, जेंडर, पिता का नाम और कैटेगरी शामिल होगी. इसके अलावा स्कोर कार्ड में क्वालीफाइंग मार्क्स, उम्मीदवार के कुल अंक और विषयवार प्राप्त अंकों की जानकारी भी दी जाएगी. उम्मीदवारों को रिजल्ट डाउनलोड करने के बाद इन सभी डिटेल को ध्यान से जांचने की सलाह दी गई है.
ऐसे चेक कर सकेंगे UPTET रिजल्ट 2026&amp;nbsp;

रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.govt.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर दिए गए UPTET 2026 रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें.
अब मांगी गई जानकारी में अपना रोल नंबर और पासवर्ड भरें.&amp;nbsp;
अब इसे सबमिट करते ही स्क्रीन पर UPTET 2026 का रिजल्ट दिखाई देगा.
उम्मीदवार अपने अंकों और दूसरी जानकारी को चेक करने के बाद इसे डाउनलोड कर सकते हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>NTA की एक और परीक्षा में गड़बड़ी, रद्द हुई AIAPGET 2026 परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ NTA द्वारा आयोजित एक और परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. जयपुर में ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट टेस्ट (AIAPGET) के दौरान परीक्षा केंद्र की व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. ट्रांसपोर्ट नगर स्थित श्री सत्य साईं कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा के दौरान अचानक बिजली चली गई. इसके बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए और परीक्षा प्रभावित हो गई. नाराज अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र के बाद बाहर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी. बाद में परीक्षा केंद्र के ऑब्जर्वर की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने की जानकारी दी गई.
उम्मीदवारों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के करीब 15 से 30 मिनट बाद ही बिजली चली गई. ऑनलाइन परीक्षा होने के कारण बिजली कटते ही परीक्षा सिस्टम ठप हो गए. छात्रों का कहना है कि केंद्र पर पर्याप्त पावर बैकअप या जनरेटर की व्यवस्था नहीं थी, जिसकी वजह से उन्हें काफी देर तक परीक्षा शुरू होने का इंतजार करना पड़ा.
जयपुर में परीक्षा के बीच बंद हुए कंप्यूटर
AIAPGET 2026 के आयोजन के दौरान बिजली बिल गुल होने के बाद उम्मीदवारों ने हंगामा कर दिया. उम्मीदवारों के अनुसार, बिजली जाने के बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए और परीक्षा आगे नहीं बढ़ सकी. कुछ समय तक उम्मीदवार परीक्षा हॉल में ही बैठे रहे, लेकिन सिस्टम शुरू नहीं होने पर उन्हें बाहर निकाल कर ग्राउंड में एकत्रित किया गया. परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होनी थी. बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद बचे हुए समय की भरपाई नहीं की गई और उन्हें परीक्षा केंद्र से बाहर कर दिया. इसी को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा बढ़ा और उन्होंने केंद्र के बाहर हंगामा शुरू कर दिया.
पावर बैकअप नहीं होने से भी उठे सवाल
बिजली जाने के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र की व्यवस्था पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा के लिए केंद्र पर पर्याप्त बिजली और पावर बैकअप की व्यवस्था होनी चाहिए थी. छात्रों के अनुसार, अगर पावर बैकअप होता तो बिजली जाने के बाद पर इस तरह परीक्षा प्रभावित नहीं होती. बताया जा रहा है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे पावर सप्लायर में खराबी की बात सामने आई. वहीं कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया की परीक्षा के दौरान ही पावर सप्लाई की सर्विसिंग का काम किया जा रहा था.
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परीक्षा रद्द, अभ्यर्थी लिखित आदेश अड़े
हंगामे के परीक्षा केंद्र के ऑब्जर्वर ने परीक्षा रद्द करने की जानकारी दी. हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें परीक्षा रद्द होने की जानकारी लिखित में दी जाए. छात्रों ने सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग की. अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान नकल का आरोप भी लगाया. उनका कहना है कि बिजली जाने के बाद जब सभी उम्मीदवारों को एक साथ बाहर किया गया, उस दौरान परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई. कुछ छात्रों का दावा है कि बिजली कटने के दौरान अभ्यर्थी आपस में प्रश्नों को लेकर चर्चा करने लगे. इसी आधार पर वह पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं.
आयुष डॉक्टरों के पीजी एडमिशन के लिए होती है परीक्षा
AIAPGET आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी से जुड़े पीजी में एडमिशन के लिए आयोजित की जाती है. इस परीक्षा का आयोजन एनटीए करता है. यह परीक्षा साल में एक बार सीबीटी के रूप में आयोजित होती है. परीक्षा में 120 मल्टीपल चॉइस सवाल होते हैं और कुल 480 अंक निर्धारित है. प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 अंक मिलते हैं, जबकि गलत उत्तर पर 1 अंक के नेगेटिव मार्किंग होती है. परीक्षा का समय 2 घंटे का होता है.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 06:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रांची यूनिवर्सिटी में सीधे PhD एडमिशन, ग्रेजुएशन में चाहिए 75% नंबर</title>
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        <description><![CDATA[ Ranchi University PhD Admission Rule: रांची यूनिवर्सिटी ने पीएचडी में एडमिशन को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं. नई शिक्षा नीति 2020 और यूजीसी रेगुलेशन 2022 के प्रावधानों के तहत यूनिवर्सिटी ने करीब डेढ़ दशक बाद पीएचडी एडमिशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के अनुसार चार वर्षीय ग्रेजुएशन में 75 फीसदी अंक हासिल करने वाले छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट किए बिना सीधे पीएचडी के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा. यूनिवर्सिटी के कुलपति सरोज शर्मा ने पीएचडी की डिग्री देने के लिए न्यूनतम मानकों और प्रक्रियाओं से जुड़े नियमों को अधिसूचना जारी की है.&amp;nbsp;
4 साल की ग्रेजुएशन के बाद सीधे मिलेगा PhD का मौका&amp;nbsp;
रांची यूनिवर्सिटी के नए नियमों के तहत 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स में कम से कम 75 फीसदी अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार पीएचडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. ऐसे छात्रों के लिए पीएचडी में एडमिशन के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री अनिवार्य नहीं होगी. वहीं दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में कम से कम 55 फीसदी अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार भी पीएचडी के लिए एलिजिबल होंगे. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम पात्रता अंकों में पांच फीसदी छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
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एंट्रेंस एग्जाम और इंटरव्यू में होगा एडमिशन&amp;nbsp;
नए नियमों के तहत पीएचडी में एडमिशन प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए होगा. प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की मेरिट परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयारी की जाएगी. दोनों का वेटेज 70:30 रखा गया है. पीएचडी एंट्रेंस टेस्ट में आधे सवाल रिसर्च मेथाडोलॉजी और आधे संबंधित विषय से पूछे जाएंगे. वहीं नेट जेआरएफ क्वालिफाइड उम्मीदवारों को एडमिशन परीक्षा से छूट दी गई है. इन उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा
न्यूनतम 3 और अधिकतम 6 साल में पूरी करनी होगी PhD&amp;nbsp;
पीएचडी में एडमिशन मिलने के बाद रिसर्चर को 12 क्रेडिट का स्कोर वर्क पूरा करना होगा. इसके बाद ही वे अपनी रिसर्च प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेंगे. नए नियमों में पीएचडी की अवधि को लेकर भी प्रावधान तय किए गए हैं. नए नियमों के अनुसार पीएचडी पूरी करने का न्यूनतम समय 3 साल होगा, वहीं अधिकतम अवधि 6 साल निर्धारित की गई है. इसके बाद रिसर्चर्स 2 साल के लिए दोबारा रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. हालांकि इसके बाद किसी और विस्तार का प्रावधान नहीं है. वहीं महिला रिसर्चर और 40 फीसदी से ज्यादा दिव्यांगता वाले रिसर्चर को अतिरिक्त 2 साल की छूट दी जाएगी. इसके अलावा महिला रिसर्चर्स को 240 दिन तक मैटरनिटी या चाइल्ड केयर लीव देने का भी प्रावधान नए नियमों में किया गया है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>10वीं में 54%, फिर JEE Advanced पास कर IIT Bombay पहुंचा युवक</title>
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        <description><![CDATA[ जिंदगी में कई बार हमें लगता है कि एक बुरा रिजल्ट हमारा पूरा भविष्य तय कर देता है, लेकिन असल में यह सिर्फ एक पड़ाव होता है, मंजिल नहीं. कुछ ऐसी ही कहानी है जैनेंद्रजीत की, जिन्होंने दसवीं कक्षा में मिले कमजोर नंबरों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि बदलाव की शुरुआत बनाया. उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यही रिजल्ट आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा. आइए जानते हैं कैसे एक साधारण से लड़के ने हार को हिम्मत में बदला और देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज तक का सफर तय किया.&amp;nbsp;
शुरुआत एक छोटी सी हार से हुई
यह कहानी है जैनेंद्रजीत की, जिन्होंने दसवीं कक्षा में सिर्फ 54% अंक हासिल किए थे. मैथ्स में तो उनके सिर्फ 41 नंबर आए थे और साइंस में 48. वृंदावन के जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई करने वाले जैनेंद्रजीत को खुद भी अपने रिजल्ट पर यकीन नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वेबसाइट खोलकर अपना स्कोर देखा, तो वह वहीं जम गए और उन्हें लगा कि यह उनका रिजल्ट हो ही नहीं सकता. उनकी परेशानी और बढ़ गई जब उन्होंने देखा कि उनके कई साथियों के 90% से ज्यादा नंबर आए थे. लेकिन तीन साल बाद यही लड़का JEE Advanced पास करके देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज IIT Bombay पहुंच गया. यह कहानी बताती है कि एक बुरा रिजल्ट किसी की पूरी जिंदगी तय नहीं करता.
जैनेंद्रजीत के दसवीं के खराब नतीजों के पीछे एक बड़ी वजह उनकी सेहत भी थी. बोर्ड परीक्षाओं से पहले वह करीब 40 से 50 दिनों तक बेड रेस्ट पर थे, जिसकी वजह से वह ठीक से तैयारी नहीं कर पाए थे. रिजल्ट आने के बाद उन्हें लोगों की आलोचना और ताने भी झेलने पड़े, कई लोगों ने उनके कम नंबरों को लेकर मजाक भी बनाया. लेकिन जैनेंद्रजीत ने इस नतीजे को अपनी काबिलियत का सबूत नहीं माना. उन्होंने इसे एक संकेत की तरह लिया कि उन्हें अपनी पढ़ाई का तरीका बदलने की जरूरत है. यहीं से उनकी असली मेहनत की शुरुआत हुई और उन्होंने ठान लिया कि वह अपने आगे के सफर में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे.
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पढ़ाई का तरीका बदला, नतीजा भी बदल गया
दसवीं के बाद जैनेंद्रजीत ने सिर्फ पढ़ाई के घंटे नहीं बढ़ाए, बल्कि पढ़ने का तरीका ही पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने एक फिक्स टाइम-टेबल बनाया, सोशल मीडिया और बाकी चीजों से ध्यान हटाया और धीरे-धीरे रोजाना करीब 10 घंटे पढ़ाई करने लगे. क्लास में जाने से पहले वह उस टॉपिक से जुड़े एजुकेशनल वीडियो देख लेते थे, ताकि क्लास में समझने में आसानी हो. उन्होंने बड़े सिलेबस को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटा और हर दिन का टारगेट तय करके उसे पूरा करने की कोशिश की. पिछले सालों के पेपर हल करना भी उनकी तैयारी का अहम हिस्सा बन गया. इसी मेहनत का नतीजा रहा कि JEE Main 2023 में उन्हें 99.98 पर्सेंटाइल मिला और JEE Advanced में उन्होंने AIR 349 हासिल की.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>14 बार असफलता फिर भी नहीं मानी हार, CDS&amp;SSB पास कर 24 साल के किशु बने सेना में लेफ्टिनेंट</title>
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        <description><![CDATA[ 14 बार असफलता फिर भी नहीं मानी हार, CDS-SSB पास कर 24 साल के किशु बने सेना में लेफ्टिनेंट ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CPCB में निकली कई पदों पर भर्ती, 24 अगस्त से भर सकते हैं फॉर्म</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने अलग-अलग पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 51 पदों को भरा जाएगा. भर्ती स्ट्रेंथनिंग ऑफ एनवायरनमेंटल रेगुलेटर्स (एसईआर)- फेज-3 प्रोजेक्ट ओन रिवर गंगा के तहत संविदा आधार पर की जाएगी. यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित है. &amp;nbsp;
इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से शुरू होगी. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 7 सितंबर 2026 रात 11:59 बजे तक आवेदन कर सकेंगे. उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले संबंधित पद की शैक्षणिक योग्यता, एक्सपीरियंस और आयु सीमा की शर्तों को ध्यान से जांचना होगा.&amp;nbsp;
51 पदों पर होगी भर्ती
सीपीसीबी की भर्ती में साइंटिस्ट डी, साइंटिस्ट सी, साइंटिस्ट बी, साइंटिफिक असिस्टेंट मैनेजर (फाइनेंस), एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, टैक्सनॉमिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर और फील्ड असिस्टेंट के पद शामिल है. अगर पदों के अनुसार देखे तो साइंटिस्ट डी का 1 पद, साइंटिस्ट सी के 8 पद, साइंटिस्ट बी के 12 पद, साइंटिफिक असिस्टेंट के 13 पद, असिस्टेंट मैनेजर (फाइनेंस) के 3 पद, एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट का 1 पद, टैक्सनॉमिस्ट का 1 पद, डेटा एंट्री ऑपरेटर के 4 पद और फील्ड असिस्टेंट के 8 पद शामिल है.&amp;nbsp;
अलग-अलग पदों के लिए योग्यता अलग&amp;nbsp;
सीपीसीबी भर्ती में शैक्षणिक योग्यता पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है. साइंटिस्ट डी, साइंटिस्ट सी और साइंटिस्ट बी जैसे पदों के लिए पर्यावरण विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान या संबंधित इंजीनियरिंग-टेक्नोलॉजी में निर्धारित योग्यता मांगी गई है. कुछ वैज्ञानिक पदों के लिए गेट या नेट जेआरएफ जैसी योग्यता और संबंधित एक्सपीरियंस भी जरूरी है. डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद के लिए साइंस में फर्स्ट क्लास बैचलर डिग्री या बीएससी मांगी गई है. इसके साथ कंप्यूटर और टाइपिंग से जुड़ी दक्षता भी जरूरी है. वही फील्ड असिस्टेंट पद के लिए साइंस विषय में 12वीं पास होना जरूरी है और न्यूनतम 55 फीसदी अंक मांगे गए हैं. इसके अलावा असिस्टेंट मैनेजर (फाइनेंस) के लिए कॉमर्स में मास्टर डिग्री, सीए या एमबीए जैसी योग्यता निर्धारित है. एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट के लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री और कंप्यूटर की जानकारी जरूरी है. टैक्सनॉमिस्ट पद के लिए फर्स्ट क्लास एमएससी मांगी गई है.&amp;nbsp;
पद के हिसाब से उम्र सीमा&amp;nbsp;
इन पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा भी अलग-अलग रखी गई है. साइंटिस्ट डी के लिए अधिकतम 50 साल, साइंटिस्ट सी के लिए 45 साल और साइंटिस्ट बी के लिए 35 साल आयु सीमा है. असिस्टेंट मैनेजर, एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट और टैक्सनॉमिस्ट के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 साल रखी गई है, जबकि डेटा एंट्री ऑपरेटर के लिए अधिकतम आयु 32 साल और फील्ड असिस्टेंट के लिए 27 साल निर्धारित हैं. इसके अलावा आरक्षित वर्ग के अनुसार उम्मीदवारों को आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
लाखों तक मिलेगी हर महीने सैलरी&amp;nbsp;
भर्ती में चयनित उम्मीदवारों के पद के अनुसार हर महीने निर्धारित सैलरी दी जाएगी है. साइंटिस्ट डी पद के लिए 1,71,597 रुपये, साइंटिस्ट सी के लिए &amp;nbsp;1,48,997 रुपये और साइंटिस्ट बी के लिए 1,25,380 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. &amp;nbsp;वहीं असिस्टेंट मैनेजर को 1,19,272 रुपये, एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट और साइंटिफिक असिस्टेंट को 77,654 रुपये, टैक्सनॉमिस्ट को 65,031 रुपये, डेटा एंट्री ऑपरेटर को 57,498 रुपये और फील्ड असिस्टेंट को 38,741 रुपये प्रतिमाह तक सैलरी मिलेगी.&amp;nbsp;
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24 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन&amp;nbsp;
सीपीसीबी रिक्रूटमेंट 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन 24 अगस्त सुबह 10 बजे से शुरू होंगे. आवेदन की आखिरी तारीख 7 सितंबर रात 11:59 बजे है. उम्मीदवार सीपीसीबी की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. वहीं इस भर्ती में पहले प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग की जाएगी. योग्यता और एक्सपीरियंस के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाएगा और अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी
ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;

सबसे पहले आप सीपीसीबी के ऑफिशियल वेबसाइट https://www.cpcb.gov.in/ पर जाएं.
अब यहां पर जॉब्स टैब सेक्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
इसके बाद सीपीसीबी भर्ती 2026 नोटिफिकेशन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब ऑनलाइन आवेदन के लिए रजिस्ट्रेशन करें.
रजिस्ट्रेशन करने के बाद लॉगिन करके अपनी पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल भरे.
इसके बाद जरूरी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
लास्ट में सभी जानकारी को जांच कर फॉर्म सबमिट कर दें और कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.

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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 14:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>NITI Aayog की रिपोर्ट में खुलासा, सिर्फ 8.25% ग्रेजुएट्स को ही पढ़ाई से जुड़ी नौकरी</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन अब उनकी डिग्री और नौकरी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. दरअसल नीति आयोग की और से जारी Reimagining Skilling For Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सिर्फ 8.25 प्रतिशत साड़ी ग्रेजुएट्स ही अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार समस्या सिर्फ बेरोजगारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्किल और रोजगार के बीच तालमेल की कमी भी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है.&amp;nbsp;
पढ़ाई और नौकरी के बीच बड़ा गैप&amp;nbsp;
नीति आयोग ने देश की हायर और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा और रोजगार बाजार के बीच एक बुनियादी अंतर की ओर इशारा किया है. रिपोर्ट के अनुसार कई संस्थानों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम बदलती इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार अपडेट नहीं है. ऐसे में डिग्री डिप्लोमा और सर्टिफिकेट हासिल करने के बावजूद युवाओं के लिए नौकरी हासिल करना आसान नहीं होता है. देश में बड़ी संख्या में छात्र सामान्य ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन लेते हैं. करीब 3.4 करोड़ छात्र अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में पढ़ रहे हैं, जिनमें लगभग 1.3 करोड़ छात्र बीए कर रहे हैं. बीए, बीएससी और बीकॉम में पढ़ने वाले छात्रों की संयुक्त संख्या 2 करोड़ से ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार इन सामान्य डिग्री कोर्स का रोजगार से सीधा जुड़ाव कमजोर है और कई छात्र इन्हें सरकारी नौकरी के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के उद्देश्य से भी करते हैं.&amp;nbsp;
80% छात्रों को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस की कमी&amp;nbsp;
रिपोर्ट में छात्रों की ओर से बताई गई कमियों को भी सामने रखा गया है. करीब 80 फीसदी लर्नर्स ने प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी को अपनी पढ़ाई में बड़ी समस्या बताया है. वहीं 34 फीसदी छात्रों ने स्किल्स की कमी और 18 फीसदी ने इंटरव्यू की तैयारी की कमी को प्रमुख परेशानी बताया. रिपोर्ट में डिजिटल और कम्युनिकेशन स्किल्स की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. यानी कई छात्र डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी व्यावहारिक क्षमता और ऑफिस से जुड़ी स्किल उनके लिए पर्याप्त नहीं होती.&amp;nbsp;
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BA, BCom और BSC के बाद नहीं मिलता करियर का रास्ता&amp;nbsp;
नीति आयोग के अनुसार बीए, बीकॉम और बीएससी जैसी सामान्य डिग्री अपने आप में बेकार नहीं है, लेकिन कई बार यह डिग्रियां यह स्पष्ट नहीं करती कि छात्र के पास नौकरी के लिए कौन सी व्यावहारिक क्षमता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन डिग्रियों से सीधे रोजगार हासिल करना मुश्किल हो सकता है और एंट्री लेवल की नौकरियों के लिए भी टेली या ऑफिस एप्लीकेशन जैसी अतिरिक्त वर्कप्लेस स्किल की जरूरत पड़ सकती है. यही वजह है की डिग्री पूरी करने के बाद भी कई युवाओं को अतिरिक्त ट्रेनिंग, स्किल्स डेवलपमेंट या एक्सपीरियंस हासिल करना पड़ता है.&amp;nbsp;
सरकारी नौकरी की तरफ बढ़ता युवाओं का रुझान
रिपोर्ट में सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं के बीच बढ़ते कंपटीशन का भी जिक्र किया गया है. नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच करीब 55,000 पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए. यह आंकड़ा सरकारी नौकरी की मांग और उपलब्ध पदों के बीच बड़ा अंतर दिखता है. रिपोर्ट के अनुसार इसका समाधान केवल सरकारी नौकरियों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था को युवाओं को रोजगार, उद्यमिता, स्वरोजगार और पारिवारिक कारोबार अलग-अलग करियर ऑप्शन के लिए भी तैयार करना होगा.
ये भी पढ़ें-दिल्ली में 9वीं की तीसरी भाषा का नियम वापस, R3 में फेल होने पर भी दे सकेंगे 10वीं बोर्ड ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिविल जज बनने का बदला नियम, 3 साल की जगह अब 1 साल वकालत जरूरी</title>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 22:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>IIM Bangalore में नया UG School शुरू, Tata Trusts ने साइन किया एमओयू</title>
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        <description><![CDATA[ IIM बेंगलुरु और Tata Trusts ने नए अंडरग्रेजुएट स्कूल के लिए एमओयू साइन किया है. इस स्कूल का नाम IIMB&amp;ndash;Dorabji Tata School of Undergraduate Studies रखा गया है. पहले बैच में 80 स्टूडेंट्स को एडमिशन मिला, जिसके लिए करीब 12 हजार एप्लिकेशन आई थीं.
31 अगस्त से शुरू होगी पढ़ाई&amp;nbsp;आईआईएम बेंगलुरु के नए अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम का पहला बैच 31 अगस्त 2026 से शुरू होगा, जिसमें कुल 80 स्टूडेंट्स होंगे. इनमें 40 छात्र स्टूडेंट्स बीएससी (ऑनर्स) इन डेटा साइंसेज की पढ़ाई करेंगे. वहीं, बाकी 40 स्टूडेंट्स बीएससी (ऑनर्स) इन इकोनॉमिक्स में होंगे. दोनों प्रोग्राम चार साल के फुल टाइम और रेजिडेंशियल कोर्स होंगे. डेटा साइंसेज के स्टूडेंट्स को इकोनॉमिक्स के बेसिक और इकोनॉमिक्स के स्टूडेंट्स को डेटा साइंसेज के बेसिक सीखने का मौका मिलेगा. इसका मतलब है कि सभी स्टूडेंट्स को दोनों फील्ड में पढ़ाई का मौका मिलेगा.
क्या है इस समझौते का मकसद?
आईआईएम बेंगलुरु और टाटा ट्रस्ट्स के बीच हुए एमओयू के तहत टाटा ट्रस्ट्स नए अंडरग्रेजुएट स्कूल के शुरुआती डिवेलपमेंट में मदद करेगा. इसके तहत इन चीजों पर फोकस किया जाएगा.&amp;nbsp;

मॉडर्न अकैडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना
रिसर्च फैसिलिटीज को मजबूत करना
स्कूल का स्ट्रैटिजीकल डायरेक्शन तय करने में सहयोग
पॉलिसी और गवर्नेंस से जुड़े काम में योगदान
नई फैकल्टी और रिसर्च क्षमता को डिवेलप करने में मदद

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और आईआईएम बेंगलुरु के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की चेयरपर्सन डॉ. देवी शेट्टी ने एमओयू पर साइन किए.&amp;nbsp;
एआई और डेटा साइंसेज पर रहेगा खास फोकस
आईआईएम बेंगलुरु के नए यूजी स्कूल का फोकस सिर्फ पारंपरिक मैनेजमेंट एजुकेशन पर नहीं रहेगा. संस्थान एआई, डेटा साइंसेज और दूसरी नई टेक्नोलॉजी को पढ़ाई और रिसर्च का अहम हिस्सा बनाना चाहता है. स्कूल में ऐसे रिसर्च एरिया पर भी काम होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डेटा साइंसेज, एल्गोरिदम डिजाइन, इंडियन नॉलेज सिस्टम और बिजनेस एक-दूसरे से कनेक्ट होते हैं.
IIMB के मुताबिक, आज के दौर में AI बिजनेस, सरकार और समाज के काम करने के तरीके को तेजी से बदल रहा है. ऐसे में छात्रों को तकनीकी जानकारी के साथ अलग-अलग विषयों को जोड़कर सोचने की क्षमता भी डिवेलप करनी होगी.
23 किलोमीटर दूर बनेगा नया कैंपस
नए अंडरग्रेजुएट स्कूल का कैंपस आईआईएम बेंगलुरु के बन्नेरघट्टा रोड स्थित मौजूदा कैंपस से करीब 23 किलोमीटर दूर है. यह कैंपस जिगनी अनेकल एरिया में डिवेलप किया जा रहा है, जिसे यूजी स्टूडेंट्स के लिए खासतौर पर रेजिडेंशियल अकैडमिक कैंपस के रूप में तैयार किया जा रहा है. यहां छात्रों के लिए आधुनिक क्लासरूम, रिसर्च और रहने की सुविधाएं डिवेलप की जा रही हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BPSC LDC भर्ती परीक्षा रद्द, टंकण टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी निरस्त</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी ने विज्ञापन संख्या 43/2025 के तहत निम्नवर्गीय लिपिक यानी एलडीसी भर्ती से जुड़ी टंकण एवं कंप्यूटर जांच परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन को रद्द कर दिया है. आयोग ने इसके पीछे की वजह तकनीकी कारण बताया है. हालांकि, नोटिस में तकनीकी समस्या की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है. नई परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन की तारीख जल्द जारी की जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
निम्नवर्गीय लिपिक यानी एलडीसी के पद पर सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को तगड़ा झटका लगा है. बीपीएससी ने विज्ञापन संख्या 43/2025 के तहत चल रही भर्ती प्रक्रिया में टंकण एवं कंप्यूटर जांच परीक्षा को निरस्त कर दिया है. वहीं, इस परीक्षा के आधार पर जिन अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था, उनका सत्यापन भी अब मान्य नहीं रहेगा. आयोग ने अपने नोटिस में परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन रद्द करने की वजह तकनीकी कारण बताई है. हालांकि, तकनीकी समस्या की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
17 और 18 जनवरी को हुई थी परीक्षा
बीपीएससी की ओर से एलडीसी भर्ती के तहत टंकण एवं कंप्यूटर जांच परीक्षा का आयोजन 17 और 18 जनवरी 2026 को अलग-अलग पालियों में किया गया था. इस परीक्षा में अभ्यर्थियों के टाइपिंग और कंप्यूटर संबंधी कौशल की जांच की गई थी. इसके परिणाम के आधार पर आगे की प्रक्रिया के लिए अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था. अब आयोग ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इस परीक्षा को ही रद्द कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि इस परीक्षा के आधार पर तैयार किया गया परिणाम भी अब प्रभावी नहीं रहेगा.
25 फरवरी का दस्तावेज सत्यापन भी रद्द
टंकण एवं कंप्यूटर जांच परीक्षा के परिणाम के आधार पर जिन उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था, उन्हें भी तगड़ा झटका लगा है. इन अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन 25 फरवरी 2026 को कराया गया था. बीपीएससी ने अब इस दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया है. आयोग की ओर से नई तारीख और आगे की प्रक्रिया की जानकारी बाद में दी जाएगी.
क्या फिर देना होगा टाइपिंग टेस्ट?
बीपीएससी के मौजूदा फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन उम्मीदवारों ने जनवरी में टंकण एवं कंप्यूटर जांच परीक्षा दी थी, उन्हें क्या दोबारा परीक्षा देनी होगी? बता दें कि आयोग ने परीक्षा की नई तारीख अभी घोषित नहीं की है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि सभी पात्र अभ्यर्थियों को दोबारा टंकण-कंप्यूटर परीक्षा देनी होगी या आयोग किसी दूसरी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेगा. अभ्यर्थियों को इस संबंध में बीपीएससी के अगले आधिकारिक नोटिस का इंतजार करना होगा.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSSSC कनिष्ठ सहायक भर्ती रिजल्ट जारी, 50 अभ्यर्थियों का चयन</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने औद्योगिक विकास विभाग में कनिष्ठ सहायक के पदों पर भर्ती का चयन परिणाम जारी कर दिया है. शुक्रवार को कनिष्ठ सहायक मुख्य परीक्षा के आधार पर घोषित परिणाम में 50 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है. भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों, मेरिट और आरक्षण प्रावधानों का पालन किया गया है. इससे प्रदेश में योगी सरकार की पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती व्यवस्था को एक और मजबूती मिली है.
आयोग के अनुसार, प्रारंभ में कनिष्ठ सहायक के 62 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे. विभाग से प्राप्त संशोधित अधियाचन के बाद पदों की संख्या घटाकर 54 कर दी गई. संशोधित पदों के आधार पर आयोग ने चयन प्रक्रिया पूरी करते हुए 50 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया है.
आरक्षण नियमों के अनुरूप हुआ चयन
अंतिम चयनित 50 अभ्यर्थियों में 34 अनारक्षित, 3 अनुसूचित जाति, 1 अनुसूचित जनजाति, 7 अन्य पिछड़ा वर्ग और 5 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थी शामिल हैं. आयोग ने स्पष्ट किया कि क्षैतिज आरक्षण के तहत उपलब्ध अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी में समायोजित किया गया है. महिला, दिव्यांगजन सहित अन्य क्षैतिज आरक्षण श्रेणियों में भी नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई. कुछ श्रेणियों में निर्धारित पदों के सापेक्ष पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर नियमों के अनुसार पदों को आगे बढ़ाते हुए अन्य पात्र अभ्यर्थियों का चयन किया गया.
कटऑफ जारी, चयन का आधार स्पष्ट
आयोग ने अंतिम परिणाम के साथ श्रेणीवार कटऑफ भी जारी की है. अनारक्षित वर्ग में चयनित अभ्यर्थी की कटऑफ 65 अंक रही. अनुसूचित जाति की कटऑफ 26.75, अनुसूचित जनजाति की 50, ओबीसी की 62.50 और ईडब्ल्यूएस की कटऑफ 63.75 अंक रही. क्षैतिज आरक्षण में दिव्यांगजन की एएसडी/एचएच/डीई/ओएच श्रेणी की कटऑफ 54.75 और दिव्यांगजन की अन्य श्रेणी की कटऑफ 44.25 अंक रही. महिला अभ्यर्थियों की कटऑफ 42 अंक दर्ज की गई.
योगी सरकार में पारदर्शिता से बढ़ा अभ्यर्थियों का भरोसा
योगी सरकार में सरकारी भर्तियों को पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है. कनिष्ठ सहायक भर्ती का अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है. लिखित परीक्षा, अभिलेख परीक्षण और आरक्षण संबंधी प्रावधानों के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम चयन परिणाम उच्च न्यायालय में लंबित संबंधित याचिकाओं में पारित होने वाले आदेशों के अधीन रहेगा. इसके अलावा 5 अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से शामिल किया गया है, जिनका अंतिम चयन आयोग के निर्णय के अधीन होगा. चयनित अभ्यर्थियों के नाम और श्रेणीवार कटऑफ आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 22:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या NET के पेपर बनाने में हुआ AI का इस्तेमाल, किन गड़बड़ियों के कारण उठे सवाल?</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET Controversy: यूजीसी नेट की तीन परीक्षाओं को दोबारा कराने के फैसले के बाद एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. सब्जेक्ट एक्सपर्ट और एनटीए से जुड़े कई पूर्व विशेषज्ञों ने दावा किया है कि प्रश्न पत्र तैयार करने और उनके अनुवाद में एआई का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, एनटीए इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल नहीं किया गया.
विवादों के बीच अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के यूजीसी नेट पेपर दोबारा कराने का फैसला लिया गया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन प्रश्नपत्रों में ऐसी गलतियां सामने आई है, जिससे पेपर तैयार करने के बाद की गई मानवीय जांच और निगरानी पर भी सवाल उठे.&amp;nbsp;
क्या प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का हुआ इस्तेमाल?
एनटीए पेपर को लेकर एक सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि यूजीसी नेट के प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था. एनटीए से जुड़े रहे कुछ पूर्व सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने भी यह कहा कि परीक्षा सामग्री के अनुवाद में तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि सिर्फ तकनीक के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि प्रश्न पत्रों में हुई गलतियों की वजह एआई ही था. विवाद का मुख्य सवाल यह है कि प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उनकी पर्याप्त मानवीय और सब्जेक्ट एक्सपर्ट से जांच कराई गई थी या नहीं. एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने एआई के जरिए विवादित प्रश्न पत्र तैयार किए जाने से इनकार किया है. उनके अनुसार प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उनका ह्यूमन रिव्यू किया गया था. इसके बावजूद कई गलतियां सामने आने से इस समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं.&amp;nbsp;
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6 हफ्ते तक क्यों नहीं रद्द हुए पेपर?&amp;nbsp;
विवाद सिर्फ प्रश्न पत्रों से मिली गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है. परीक्षा में खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठे. रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और एनटीए से जुड़े सूत्रों के बीच पेपर रद्द कर जुलाई के अंत या अगस्त के पहले सप्ताह तक दोबारा परीक्षा कराने को लेकर चर्चा हुई थी और लेकिन एनटीए ने तत्काल परीक्षा रद्द नहीं की. करीब 6 सप्ताह के बाद 87 में से 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर की जारी करते समय तीन विषयों की परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की घोषणा की गई.&amp;nbsp;
एनटीए की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनटीए के दो वरिष्ठ अधिकारियों से हुई बातचीत में प्रश्न पत्र को तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं मिल पाई थी. सूत्रों ने दावा किया है कि प्रश्नपत्रों में एडहॉक तरीके से तैयार किए जाने के बाद कही गई थी और इसी वजह से आंसर की तैयार करने में भी परेशानी आई. कुछ और रिपोर्ट्स में सामने आया कि अगर प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए चार-पांच विषय एक्सपर्ट्स का पैनल मौजूद था तो पुराने प्रश्न पत्रों के इतने सवाल दोबारा कैसे आ गए और प्रश्न तैयार करने वाले एक्सपर्ट के पास ही उन सवालों के उत्तर क्यों स्पष्ट नहीं थे. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही नहीं है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी का इस्तेमाल हुआ है या नहीं. बल्कि यह है कि तकनीक के इस्तेमाल के बाद पर्याप्त मानवीय और अकादमिक जांच हुई या नहीं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>झारखंड में 22 परीक्षाएं रद्द करने पर हाईकोर्ट की रोक, जानें अब आगे क्या होगा? </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/झारखंड-में-22-परीक्षाएं-रद्द-करने-पर-हाईकोर्ट-की-रोक-जानें-अब-आगे-क्या-होगा</link>
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        <description><![CDATA[ Jharkhand Exam Controversy: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है. झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से 22 भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर इन परीक्षाओं को रद्द करने के साथ ही 6 परीक्षाओं की जांच पूरी होने तक रोकने और 17 पुरानी भर्तियों को सीआईडी जांच के दायरे में रखने का फैसला किया था.
इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों के सामने भी नौकरी को लेकर संकट खड़ा हो गया था, जो इन परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी सेवा में नियुक्त हो चुके थे. इसके बाद अब हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. हालांकि मामले की आगे की सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, झारखंड सरकार ने परीक्षाओं में गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच के बीच JPSC-JSSC और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की कई भर्ती परीक्षाओं पर कार्रवाई की थी. इसमें 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया, 6 पर जांच लंबित रहने तक रोक लगा दी और 17 पुरानी जेपीएससी भर्तियों पर सीआईडी जांच के आदेश दिए गए. सरकार के इस फैसले से सबसे बड़ा सवाल उन उम्मीदवारों को लेकर उठा था, जिन्हें परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति मिल चुकी थी. वहीं, चार रद्द की गई भर्तियां ऐसी थी जो नियुक्ति के चरण तक पहुंच चुकी थी. इनमें 11वीं-13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से 342 पदों पर नियुक्तियां, JSSC-CGL से 1932 नियुक्तियां, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के 64 पद और फूड सेफ्टी ऑफिसर के 56 पद शामिल थे.
चयनित अभ्यर्थियों के सामने आया था संकट&amp;nbsp;
परीक्षा रद्द होने के बाद पहले से सरकारी सेवा में काम कर रहे उम्मीदवारों को अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी. कई अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति हासिल की और इसके बाद सरकारी सेवा में योगदान दिया. ऐसे में बिना उनकी व्यक्तिगत भूमिका की जांच किए नियुक्ति पर सवाल उठाना उनके लिए बड़ी समस्या हो सकती है&amp;zwnj;. इनमें से कुछ चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से यह जानकारी नहीं मिली कि अब उनकी नियुक्ति का क्या होगा. इसके बाद इन चयनित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख करने का फैसला लिया था.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NTA में बड़ा बदलाव, 3 महीने में खत्म होगी एडहॉक व्यवस्था
अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में क्या दलील दी?
याचिकार्ताओं का कहना है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया. उनके अनुसार अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, तो जांच के आधार पर दोषी उम्मीदवार या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. अभ्यर्थियों का सवाल है कि बिना व्यक्तिगत जांच के और किसी उम्मीदवार के खिलाफ बिना सबूत के पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करके उन लोगों को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है, जिन्होंने सामान्य प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास दी और नियुक्ति पाई. अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि उनके मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया. उनके वकील के अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि किस आधार पर पूरी परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को रद्द किया गया है.&amp;nbsp;
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रद्द की गई परीक्षाओं और उनसे हुई नियुक्तियों का अंतिम भविष्य क्या होगा. वहीं हाईकोर्ट की रोक से उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी नौकरी या चयन प्रक्रिया सरकार के फैसले से प्रभावित हो रही थी. माना जा रहा है कि आगे की स्थिति अदालत के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगी. सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए कई कदमों का ऐलान किया है. JPSC और JSSC से जुड़ी अनियमत्ताओं के मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक कोड बनाने का अनुरोध किया जाएगा. दोनों आयोग में आंतरिक मॉनिटरिंग या विजिलेंस सेल बनाने के बात भी कही गई है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>झारखंड, में, परीक्षाएं, रद्द, करने, पर, हाईकोर्ट, की, रोक, जानें, अब, आगे, क्या, होगा </media:keywords>
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        <title>JNU में डिप्रिवेशन पॉइंट्स पर विवाद, CUET स्कोर पर कितना असर और किसे फायदा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/jnu-में-डिप्रिवेशन-पॉइंट्स-पर-विवाद-cuet-स्कोर-पर-कितना-असर-और-किसे-फायदा</link>
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        <description><![CDATA[ JNU Deprivation Points Controversy:&amp;nbsp;जेएनयू की एडमिशन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले डिप्रिवेशन पॉइंट्स को लेकर विवाद दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. इस व्यवस्था के तहत पिछड़े जिलों से आने वाले छात्रों को सीयूईटी में मिले अंकों के अलावा आंतरिक अंक दिए जाते हैं. इससे उम्मीदवारों की मेरिट बदल सकती है. एक अभ्यर्थी ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए सवाल उठाया है कि सामान सीयूईटी स्कोर होने के बावजूद सिर्फ जिले के आधार पर किसी उम्मीदवार को अतिरिक्त अंक क्यों दिए जाएं. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जेएनयू को फिलहाल डिप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर एडमिशन जारी रखने की अनुमति दे दी है. हालांकि ऐसे सभी एडमिशन इस मामले में आने वाले अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे.
क्या होते हैं डिप्रिवेशन पॉइंट्स?&amp;nbsp;
जेएनयू की डिप्रिवेशन पॉइंट्स व्यवस्था के तहत देश के कुछ पिछड़े जिलों से आने वाले छात्रों को अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं. इसका उद्देश्य उन छात्रों को एडमिशन प्रक्रिया में कुछ राहत देना है, जिन्हें सामाजिक, शैक्षिणक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण दूसरे छात्रों की तुलना में कम अवसर मिलते हैं. जेएनयू ने इसके लिए &amp;nbsp;जिलों को दो कैटेगरी में बांटा है. इन्हें Quartile 1 और Quartile 1 कहा जाता है. Q1 सबसे ज्यादा वंचित जिले शामिल है और यहां से आने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा डिप्रिवेशन पॉइंट्स मिलते हैं. वहीं Q2 के जिले को भी अतिरिक्त अंक मिलते हैं, लेकिन Q1 की तुलना में कम. जो जिले इन दोनों कैटेगरी में शामिल नहीं है, वहां के छात्रों को डिप्रिवेशन पॉइंट्स नहीं मिलते हैं..
किन आधार पर तय होते हैं यह पॉइंट्स?&amp;nbsp;&amp;nbsp;
जेएनयू ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर कुल 313 जिलों को डिप्रिवेशन पॉइंट्स की लिस्ट में शामिल किया है. इनमें 160 जिले Q1 और 153 जिले Q2 में है. जानकारी के अनुसार इस लिस्ट में 2011 के बाद अपडेट नहीं किया गया है. जिलों को इस लिस्ट में शामिल करने के लिए चार प्रमुख संकेतकों को आधार बनाया गया था. इनमें जिले में महिला निरक्षरता प्रतिशत, कृषि कार्य करने वाली आबादी का प्रतिशत, ग्रामीण आबादी का प्रतिशत और ऐसे घरों का प्रतिशत जहां परिसर में शौचालय नहीं है, वह शामिल है.&amp;nbsp;
सीयूईटी स्कोर पर कितना पड़ता है असर?
डिप्रिवेशन पॉइंट्स के तहत किसी छात्र को अधिकतम 12 अतिरिक्त अंक मिल सकते हैं, लेकिन सीयूईटी के संदर्भ में इनका असर इससे ज्यादा हो सकता है. जेएनयू की व्यवस्था में यह 12 अंक सीयूईटी स्कोर में 36 अतिरिक्त अंकों के बराबर हो सकते हैं. यानी किसी छात्र के सीयूईटी में हासिल अंक को डिप्रिवेशन पॉइंट्स को जोड़ने के बाद उसकी मेरिट पोजिशन बदल सकती है. यही वजह है कि व्यवस्था को लेकर एडमिशन प्रक्रिया में विवाद खड़ा हुआ है.&amp;nbsp;
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किस राज्य के छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा?&amp;nbsp;
डिप्रिवेशन पॉइंट्स के लिए लिस्टेड 313 जिलों में सबसे ज्यादा जिले उत्तर प्रदेश के हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश और बिहार का स्थान आता है. उत्तर प्रदेश के 52 जिले, मध्य प्रदेश के 43 जिले और बिहार के 36 जिले इसमें शामिल है. यह व्यवस्था जेएनयू के यूजी और पीजी के अलावा &amp;nbsp;सर्टिफिकेट ऑफ प्रोफिशिएंसी और एडवांस्ड डिप्लोमा ऑफ प्रोफिशिएंसी जैसे प्रोग्राम भी लागू है.
क्यों देता है जेएनयू डिप्रिवेशन पॉइंट्स?
इस व्यवस्था के पीछे जेएनयू का तर्क है कि सभी छात्र एक जैसी परिस्थितियों में से पढ़ाई और प्रतियोगिता की शुरुआत नहीं करते. कुछ क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण, आबादी और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कमजोर होने के कारण वहां के छात्रों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में डिप्रिवेशन पॉइंट्स का उद्देश्य एवं छात्रों को एडमिशन में अतिरिक्त अवसर देना है. यह व्यवस्था जेएनयू में 1970 के दशक से चली आ रही है और समय-समय पर इसमें बदलाव किए गए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>JNU, में, डिप्रिवेशन, पॉइंट्स, पर, विवाद, CUET, स्कोर, पर, कितना, असर, और, किसे, फायदा</media:keywords>
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        <title>UPSSSC 5369 पदों का रिजल्ट 10 सितंबर को संभव, चयन की तैयारी पूरी</title>
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        <description><![CDATA[ UPSSSC Junior Assistant Result: उत्तर प्रदेश में जूनियर असिस्टेंट जूनियर लिक्विड और सहायक स्तर-3 के 5369 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है. सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 10 सितंबर तक अंतिम परिणाम जारी करने को कहा है. इससे उन हजारों उम्मीदवारों की उम्मीद जगी है, जो लिखित परीक्षा, टाइपिंग टेस्ट और अभिलेख परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे.
3 साल से चल रही भर्ती, अब रिजल्ट का इंतजार
जूनियर असिस्टेंट भर्ती पीईटी-2022 के आधार पर शुरू हुई थी. भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने के साथ बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इसके अलग-अलग चरणों में शामिल हुए. उम्मीदवारों का कहना है कि भर्ती शुरू हुए 3 साल से ज्यादा समय बीत चुका है और अब तक रिजल्ट जारी नहीं किया गया है. इस वजह से समय-समय पर उम्मीदवार लखनऊ स्थित यूपीएसएससी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे. उम्मीदवारों की मांग रही है कि भर्ती के सभी चरण पूरे होने के बाद अब अंतिम रिजल्ट जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए.
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2.43 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने दी थी लिखित परीक्षा
जूनियर असिस्टेंट जूनियर लिपिक और सहायक स्तर-3 के पदों के लिए लिखित परीक्षा 29 जून को आयोजित की गई थी. इसमें कुल 2,43,981 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया. परीक्षा के बाद आयोग ने 3 जुलाई को प्रोविजनल आंसर की जारी की और अभ्यर्थियों से पत्तियां मांगी थी. प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के लिए सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट 21 जुलाई को आयोग को मिली. इसके बाद अंतिम आंसर की 30 अगस्त को जारी की गई. लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर 90,336 अभ्यर्थियों को टाइपिंग परीक्षा के लिए योग्य घोषित किया गया था. टाइपिंग परीक्षा 23 नवंबर से 17 दिसंबर तक आयोजित हुई थी.
टाइपिंग के बाद अभिलेख परीक्षण भी पूरा
टाइपिंग परीक्षा के बाद चयन प्रक्रिया में आगे बड़े अभ्यर्थियों के डॉक्यूमेंट की जांच की गई. इसके लिए 26,570 अभ्यर्थियों के अभिलेख आयोग को प्राप्त हुए. अभिलेख परीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अब भर्ती के लगभग सभी प्रमुख चरण पूरे हो चुके हैं और अंतिम परिणाम जारी किया जाना बाकी है. इस वजह से अभ्यर्थियों की नजर आयोग की ओर से रिजल्ट की घोषणा पर टिकी हुई है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>UGC NET Answer Key पर NTA की सफाई, कहा&amp; सही चुनौती पर ₹200 हाेंगे वापस</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET 2026 की Answer Key को लेकर उम्मीदवारों के बीच उठ रहे सवालों पर National Testing Agency (NTA) ने सफाई दी है.&amp;nbsp;Answer Key पर सवाल उठाने के लिए ₹200 प्रति सवाल फीस को लेकर कुछ उम्मीदवार इसे महंगा बता रहे थे.&amp;nbsp;NTA ने कहा है कि यह व्यवस्था किसी एक उम्मीदवार के फायदे के लिए नहीं बल्कि सभी उम्मीदवारों के हित में बनाई गई है.
एक सवाल पर सही आपत्ति - सभी को फायदा
NTA के मुताबिक अगर कोई एक उम्मीदवार किसी सवाल की Answer Key को चुनौती देता है और विषय विशेषज्ञ उसकी आपत्ति को सही मानते हैं &amp;nbsp;तो बदली हुई Answer Key का फायदा सिर्फ उस उम्मीदवार को नहीं बल्कि परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों को मिलता है.&amp;nbsp;यानी किसी एक उम्मीदवार की सही चुनौती से हजारों-लाखों उम्मीदवारों के परिणाम पर असर पड़ सकता है.
&amp;nbsp;

On the concern being raised that answer key challenges are &quot;too expensive&quot;: a quick clarification for candidates.The answer key challenge system is designed to be fair to every student, not just the one who challenges.1. One challenge, everyone benefits. If even a single&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) August 20, 2026



&amp;nbsp;
सही चुनौती पर ₹200 वापस
NTA ने स्पष्ट किया कि Answer Key को चुनौती देने के लिए ₹200 प्रति सवाल शुल्क लिया जाता है. हालांकि अगर उम्मीदवार की चुनौती सही पाई जाती है तो उसकी फीस वापस कर दी जाती है.&amp;nbsp;NTA का कहना है कि यह फीस गलत या बिना आधार वाली चुनौतियों को हतोत्साहित करने के लिए है &amp;nbsp;न कि इससे कमाई करने के लिए.
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NTA ने उम्मीदवारों से क्या कहा?
NTA ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार को Answer Key में वास्तविक गलती दिखाई देती है और उसके पास इसका ठोस आधार है तो उसे चुनौती जरूर देनी चाहिए.&amp;nbsp;अगर आपत्ति सही साबित होती है तो फीस वापस होने के साथ-साथ उस एक सही चुनौती से सभी उम्मीदवारों के रिकॉर्ड में सुधार हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, Answer, Key, पर, NTA, की, सफाई, कहा-, सही, चुनौती, पर, ₹200, हाेंगे, वापस</media:keywords>
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        <title>NCERT पॉलिटिकल साइंस किताबें होंगी अपडेट, नई टीम की गठित</title>
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        <description><![CDATA[ NCERT New Texbooks 2026: नेशनल काउंसलिंग ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की नई किताबें तैयार करने के लिए 20 सदस्यीय टीम का पुनर्गठन किया है. नई टीम को एनईपी 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन के अनुरूप सिलेबस अंतिम रूप देने और नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई.
इस नई टीम की अगुवाई निट्टे डीम्ड यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट (बेंगलुरु) और अकादमिक एवं राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संदीप शास्त्री करेंगे. डॉ. वंथांगपुई खोबुंग और डॉ. सुभाष सिंह को सदस्य समन्वयक बनाया गया है. यह दोनों टीम के साथ औपचारिक संवाद और NCERT से जुड़ी बैठकों व प्रकाशक संबंधी नियमों की जानकारी देने का काम करेंगे.&amp;nbsp;
4 सदस्यों के RSS और ABVP से जुड़े होने का दावा&amp;nbsp;
नई 20 सदस्य टीम में कम से कम चार ऐसे सदस्य हैं, जिनके RSS, उसके छात्र संगठन अखिल ABVP या उससे जुड़े संगठनों से संबंध बताए गए हैं. इनमें शिक्षा मंत्रालय के नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल कमेटी से जुड़े वरिष्ठ सलाहकार यदुनाथ देशपांडे शामिल है. ABVP के रिकॉर्ड के अनुसार, वह महाराष्ट्र में संगठन के संयुक्त राज्य संगठन सचिव और मुंबई-कोंकण क्षेत्र में संगठन सचिव रह चुके हैं. टीम में पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी के टीचर एजुकेशन सेंटर एंड रिसर्च प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. प्रशांत दिवेकर भी शामिल है. ज्ञान प्रबोधिनी की स्थापना 1962 में RSS प्रचारक विनायक विश्वनाथ ने की थी. जेएनयू की प्रोफेसर वंदना मिश्रा भी टीम का हिस्सा है. वह ABVP की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रह चुकी है. वहीं जेएनयू के एसोसिएट प्रो. डॉ रवि रमेश चंद्र शुक्ला का संबंध आरएसएस से रह चुका है.&amp;nbsp;
कक्षा 11वीं की किताबें पहले होगी तैयार&amp;nbsp;
NCERT ने नई किताबों के लिए समय सीमा भी तय करती है. कक्षा 11वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताब को 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया है. इसके बाद कक्षा 12वीं की किताबें 30 जुलाई 2027 तक तैयार की जानी है. नई किताबों को NEP 2020 और NCF-SE 2023 के तहत किए जा रहे पाठ्यक्रम बदलाव के रूप तैयार किया जाएगा. टीम में यूनिवर्सिटी, लॉ इंस्टीट्यूट, ओपन लर्निंग इंस्टीट्यूट और दूसरे शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट्स और टीचर शामिल हैं.&amp;nbsp;
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किताबों में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर रहेगा जोर&amp;nbsp;
नई पॉलिटिकल साइंस की किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम और सांस्कृतिक जुड़ाव के प्रमुख क्रॉस कटिंग थीम के तौर पर शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही समानता और समावेशन उम्र के अनुरूप शिक्षण पद्धति, मूल्य शिक्षा, पर्यावरण शिक्षा और सूचना एवं संचार तकनीकी जैसे विषयों को भी ध्यान में रखा जाएगा. टीम को NCERT के इंडियन नॉलेज सिस्टम, सोशल साइंस, भाषाओं, पर्यावरण शिक्षा और इनोवेटिव पेडागॉजी से जुड़े समूह के साथ सलाह मशविरा करना होगा. किताब के प्रत्येक चैप्टर में इन विषयों को किस तरह शामिल किया गया है, इसकी समीक्षा भी की जाएगी.&amp;nbsp;
कई चरणों में होगी किताबों की समीक्षा&amp;nbsp;
नई किताब अभी सीधे प्रकाशित नहीं की जाएगी. टीम के सभी 20 सदस्य किताबों की लेखन प्रक्रियाओं, चरित्र समीक्षा, भाषा संपादन और अलग-अलग विषयों के बीच संबंध तैयार करने में योगदान देंगे. प्रत्येक सदस्य कोड सामग्री तैयार करने से पहले संबंधित साहित्य की समीक्षा भी करनी होगी. तैयार किए गए चैप्टर पहले पूरी टीम के बीच साझा किए जाएंगे. इसके बाद टेक्स्ट बुक कोर ग्रुप समय-समय पर इन चैप्टर की समीक्षा करेगा और जरूरी सुझाव देगा. NCERT के संबंध समिति अभी किताबों की समीक्षा करेगी. अंतिम मंजूरी के बाद ही किताबों को प्रकाशित और छात्रों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. वहीं जरूरत पड़ने पर NCERT किसी खास चैप्टर के लिए बाहरी एक्सपर्ट टीचर इलस्ट्रेटर या डिजाइनरों को भी शामिल कर सकता है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मुंबई यूनिवर्सिटी ने बदले परीक्षा नियम, हॉल टिकट के लिए APAAR ID होगी अनिवार्य</title>
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        <description><![CDATA[ Mumbai University Exam Rules:&amp;nbsp;मुंबई यूनिवर्सिटी में 2026-27 सत्र की परीक्षाओं को लेकर छात्रों के लिए निर्देश जारी किए हैं. यूनिवर्सिटी ने आगामी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों के लिए APAAR ID को अनिवार्य कर दिया है. अब छात्रों को हॉल टिकट डाउनलोड करने के लिए निर्धारित लॉगिन विंडो में अपनी अपार आईडी की जानकारी दर्ज करनी होगी.
ऐसे में जिन छात्रों ने अभी तक अपनी अपार आईडी की जानकारी अपडेट नहीं की है, उन्हें हॉल टिकट डाउनलोड करने में परेशानी हो सकती है. यूनिवर्सिटी की ओर से जारी नए परीक्षा निर्देशों में यह भी कहा गया है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र की परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले अपने निर्धारित परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा.&amp;nbsp;
हॉल टिकट के लिए देनी होगी APAAR ID
मुंबई यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रक्रिया में अपार आईडी को हॉल टिकट डाउनलोड करने से जोड़ दिया गया है. छात्रों को निर्धारित ऑनलाइन लॉगिन विंडो में अपनी अपार आईडी की जानकारी भरनी होगी. उसके बाद ही वह आगामी सेमेस्टर परीक्षा का हॉल टिकट डाउनलोड कर सकेंगे. यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सलाह दी है कि वह परीक्षा की तारीख नजदीक आने का इंतजार न करें और पहले से ही यह जांच कर लें कि उनकी अपार आईडी बनी हुई है या नहीं. साथ ही आईडी से जुड़ी जानकारी भी सही होनी चाहिए.&amp;nbsp;
क्या है APAAR ID?
APAAR ID का पूरा नाम ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमी अकाउंट रजिस्ट्री है. यह छात्रों के लिए 12 अंकों एक यूनिक डिजिटल पहचान संख्या है. इसके जरिए छात्र के शैक्षणिक रिकाॅर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ा और व्यवस्थित किया जा सकता है. APAAR ID के जरिए शैक्षणिक योग्यता, अंक, एकेडमी क्रेडिट और दूसरी उपलब्धियां से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकता है. यह सिस्टम एकेडमििक बैंक ऑफ क्रेडिट से भी जुड़ा है, जिसके जरिए एकेडमी क्रेडिट को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड और ट्रांसफर करने की सुविधा मिलती है.&amp;nbsp;
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छात्रों के लिए लगाया गया आधार सुधार केंद्र&amp;nbsp;
APAAR ID बनाने या उसे लिंक करने में छात्रों को परेशानी न हो, इसके लिए मुंबई यूनिवर्सिटी में आधार सुधार केंद्र भी आयोजित किया है. यूनिवर्सिटी की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार यह कैंप डायरेक्टर बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन एंड इवैल्यूएशन के संबंध से लगाया जाए. यह सुविधा ADMIFMS यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई में 19 और 20 अगस्त को उपलब्ध रहेगी. छात्र यहां सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक अपार आईडी बनाने, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट आईडी लिंक करने और आधार से जुड़ी दूसरे समस्याओं के समाधान के लिए मदद ले सकते हैं.&amp;nbsp;
कैंप में आधार और जरूरी डॉक्यूमेंट लेकर जाएं&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ने अपने सभी संबद्ध कॉलेज और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से छात्रों को इस सुविधा के बारे में जानकारी देने और अपार आईडी से जुड़ी समस्याओं वाले छात्रों को कैंप का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है. कैंप में जाने वाले छात्रों को अपना आधार कार्ड और दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट और जानकारी साथ लेकर जाने की सलाह दी गई है, ताकि पहचान से जुड़ी जानकारी की जांच कर समस्याओं का समाधान किया जा सके.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मुंबई, यूनिवर्सिटी, ने, बदले, परीक्षा, नियम, हॉल, टिकट, के, लिए, APAAR, होगी, अनिवार्य</media:keywords>
    </item>
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        <title>UPSSSC VDO में 1468 कैंडिडेट सेलेक्ट, कब शुरू होगी ड्यूटी और कितनी मिलेगी सैलरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsssc-vdo-में-1468-कैंडिडेट-सेलेक्ट-कब-शुरू-होगी-ड्यूटी-और-कितनी-मिलेगी-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ UPSSSC VDO Result 2026: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने ग्राम पंचायत अधिकारी (VDO) भर्ती 2020 का रिजल्ट फाइनल रिजल्ट कर दिया है. पंचायती राज विभाग में ग्राम पंचायत अधिकारी के कुल 14,68 पदों पर भर्ती किया गया. परीक्षा प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर फाइनल रिजल्ट और मेरिट लिस्ट चेक कर सकते हैं. लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए गए हैं. इसमें भर्ती रिजल्ट की पीडीएफ डाउनलोड कर, उसमें अपना रोल नंबर सर्च कर सकते हैं.&amp;nbsp;
1468 ग्राम पंचायत अधिकारी पदों पर हुआ चयन&amp;nbsp;
UPSSSC की इस भर्ती के तहत ग्राम पंचायत अधिकारी की 1468 रिक्त पदों को भरा जाना है. इसमें आरक्षित वर्ग के लिए 849 पद, एएसी के लिए 356 पद, एसटी के लिए 7, ओबीसी के लिए 139 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 117 पद निर्धारित है. इसी आरक्षण व्यवस्था और मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की गई है.&amp;nbsp;
महिला और अन्य क्षैतिज आरक्षण में भी हुआ चयन&amp;nbsp;
अंतिम चयन सूची में महिलाओं के लिए निर्धारित 270 पदों पर 270 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है. रिटायर्ड सैन्य कैटेगरी के लिए 47 पदों पर 47 उम्मीदवार चयनित हुए हैं. वहीं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रितों के लिए निर्धारित 2 पदों पर 2 उम्मीदवारों का चयन किया गया है. दिव्यांग कैटेगरी में एलवी श्रेणी के 28 पदों और एचएच उपश्रेणी के 2 पदों पर भी निर्धारित संख्या में उम्मीदवारों का चयन किया गया है. स्पोर्ट्स कोटा के लिए निर्धारित पदों के लिए योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आयोग ने नियमों के अनुसार मेरिट के आधार पर पदों को भरने की प्रक्रिया अपनाई है.&amp;nbsp;
कब हुई थी UPSSSC VDO भर्ती की मुख्य परीक्षा?
ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 23 मई 2023 से शुरू हुई. उम्मीदवारों को 23 जून 2023 तक आवेदन करने का मौका दिया गया, इसके बाद पात्रता से संबंधित रिजल्ट 27 सितंबर 2023 को की जारी किया गया. मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए फीस जमा करने की प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू हुई. इसके बाद ग्राम पंचायत अधिकारी की मुख्य परीक्षा 27 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई. परीक्षा के अगले दिन 28 अप्रैल 2025 को आयोग ने आंसर की जारी की. इसके बाद मुख्य परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए शार्ट लिस्ट किया गया. इसके बाद चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों से डॉक्यूमेंट अपलोड करवाए गए और इसी प्रक्रिया के बाद अब 17 अगस्त 2026 को 1468 उम्मीदवारों की अंतिम चयन सूची जारी की गई.&amp;nbsp;
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UPSSSC VDO फाइनल रिजल्ट कैसे चेक करें?

UPSSSC VDO फाइनल रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले UPSSSC की वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाए.
होमपेज पर दिए गए नोटिस बोर्ड या रिजल्ट सेक्शन में जाए.
ग्राम पंचायत अधिकारी मुख्य परीक्षा से संबंधित अंतिम चयन परिणाम के लिंक पर क्लिक करें.
लिंक खुलने के बाद चयनित उम्मीदवारों की पीडीएफ स्क्रीन पर दिखाई देगी.
पीडीएफ को डाउनलोड कर उसमें आप अपना रोल नंबर या नाम खोज सकते हैं.&amp;nbsp;

कब शुरू होगी ड्यूटी?
17 अगस्त को ग्राम विकास अधिकारी का रिजल्ट जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि उनकी ड्यूटी कब से शुरू होगी. दरअसल अंतिम परिणाम के बाद अब जिलों का आवंटन और नियुक्ति पत्र वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. विभाग की ओर से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के अंदर जिले के विकासखंड में जाकर ड्यूटी जॉइन कर सकेंगे.
UPSSSC VDO को कितनी मिलेगी सैलरी?
यूपीएसएसएससी ग्राम विकास अधिकारी की 2023 की भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित उम्मीदवारों की सैलरी करीब 25,000 से लेकर 83,100 प्रतिमाह होगी. चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल-3 के आधार पर सैलरी दी जाएगी. सैलरी के अलावा उम्मीदवारों को पद के अनुसार भत्ते भी मिल सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NTA में बड़ा बदलाव, 3 महीने में खत्म होगी एडहॉक व्यवस्था</title>
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        <description><![CDATA[ 


NTA Reform 2026: एनटीए पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक बार फिर एनटीए अपनी परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है. एजेंसी ने परीक्षा संचालन को बेहतर बनाने के लिए नई भर्तियां शुरू की हैं. अधिकारियों के अनुसार, अगले 3 महीने में एनटीए में एडहॉक व्यवस्था को खत्म करने का टारगेट रखा गया है. इसके लिए 20 से ज्यादा स्थायी पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है. इसके अलावा परीक्षा प्रबंधन से जुड़े कई अहम क्षेत्र में एक्सपर्ट्स की नियुक्ति भी की जा रही है.&amp;nbsp;



20 से ज्यादा स्थायी पदों पर भर्तियां
एनटीए के अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी स्थायी स्टाफिंग व्यवस्था की ओर बढ़ रही है. 20 से ज्यादा स्थायी पदों के लिए एडवर्टाइजमेंट जारी किए जा चुके हैं. इसके साथ ही चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, चीफ फाइनेंस ऑफिसर, चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर समेत टेस्ट सिक्योरिटी, आर एंड डी और साइकोमेट्रिक से जुड़े जनरल मैनेजर स्तर के पदों पर भी नियुक्तियां की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि अगले दो से तीन सप्ताह में 20 से 25 अधिकारी एनटीए में शामिल किए जाने की उम्मीद है. एजेंसी का उद्देश्य परीक्षा संचालन से जुड़े अलग-अलग कामों के लिए एक्सपर्ट और स्थायी टीम तैयार करना है.&amp;nbsp;
600 एक्सपर्ट्स को परीक्षा टीम से भी हटाया गया&amp;nbsp;
परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के तहत करीब 600 एक्सपर्ट्स को मौजूदा परीक्षा टीम से हटाया गया. अब इनकी जगह औपचारिक भर्ती प्रक्रिया के जरिए नए एक्सपर्ट्स को शामिल किया जा रहा है. एनटीए साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक और प्रश्न पत्र तैयार करने जैसे क्षेत्रों में प्राइवेट क्षेत्र के एक्सपर्ट्स को भी अपने साथ जोड़ रहा है. अधिकारियों के अनुसार एजेंसी का बड़ा प्रश्न बैंक तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि परीक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी किसी व्यक्ति तक सीमित न रहे.&amp;nbsp;
प्रश्न पत्रों की जांच के लिए चार स्तर की व्यवस्था&amp;nbsp;
परीक्षा में प्रश्न पत्रों से जुड़ी गलतियों को कम करने के लिए चार स्तर पर जांच की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके तहत प्रश्न पत्रों की समीक्षा कई चरणों में की जाएगी, ताकि तथ्यात्मक, टाइपिंग, भाषा और अनुवाद से जुड़ी गलतियों को परीक्षा से पहले पकड़ा जा सके. शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए को सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का विस्तृत ऑडिट करने और उसमें किए गए सुधारों की रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए हैं. मंत्रालय के अनुसार परीक्षा टीम में बदलाव किया जा चुका है और 50 से ज्यादा कर्मचारियों को एजेंसी से हटाया गया है.&amp;nbsp;
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सरकारी परिसर में होंगे एनटीए के कार्यालय&amp;nbsp;
एनटीए के कार्यालय को सरकारी परिसर में स्थानांतरित करने की भी तैयारी है. जिससे एजेंसी कार्यालयों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी की जगह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती की जाएगी. नई व्यवस्था में बायोमेट्रिक एक्सेस, सीसीटीवी निगरानी, बेहतर डिजिटल सिस्टम और मजबूत साइबर सिक्योरिटी को शामिल किया जाएगा. एजेंसी में साइबर एक्सपर्ट्स को भी जोड़ा जा रहा है.&amp;nbsp;
कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशन व्यवस्था में भी बदलाव&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्री ने एनटीए को परीक्षा से जुड़े तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने और कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशन की व्यवस्था में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत परीक्षा से संबंधित संवेदनशील कामों के लिए अलग कमरे, एयर गैप्ड सिस्टम और डिवाइस जमा करने जैसी व्यवस्था शामिल होगी. एनटीए की परीक्षा व्यवस्था में यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है, जब एजेंसी को अलग-अलग परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रश्न पत्रों से जुड़ी शिकायतों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>UPPSC ने जारी किया नोटिफिकेशन, प्रोफेसर&amp;असिस्टेंट प्रोफेसर के 1156 पदों पर भर्ती</title>
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        <description><![CDATA[ UPPSC Jobs: यूपीपीएससी ने मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए कुल 1156 पदों को भरा जाएगा इनमें 1112 पद असिस्टेंट प्रोफेसर और 44 प्रोफेसर के हैं. इन पदों के लिए आवेदन पत्र 18 अगस्त से शुरू हो चुके हैं. योग्य उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट के जरिए 1 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. भर्ती के लिए जारी विज्ञापन संख्या D-1/E-1/2026 से उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले पद की शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और दूसरी पात्रता शर्तों को ध्यान से देखना होगा.
1156 पदों पर होगी भर्ती
यूपीएससी की इस भर्ती में मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के तहत प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के पद शामिल है. इन पदों में 44 प्रोफेसर के पद, 1112 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद शामिल है. उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और संबंधित मेडिकल स्पेशलिटी के अनुसार निर्धारित की गई है. जानकारी के अनुसार मेडिकल स्पेशलिटी में एमडी-एमएस-डीएनबी जैसी योग्यता मांगी गई है. अलग-अलग पदों के लिए एक्सपीरियंस की शर्तें भी निर्धारित हैं.
आवेदन की जरूरी तारीख
यूपीपीएससी प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 18 अगस्त से शुरू हो चुके हैं. उम्मीदवार 1 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन फीस जमा करने और आवेदन में संशोधन की अंतिम तारीख 8 सितंबर है. ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवारों को अपनी शैक्षणिक और दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट की कॉपी ऑनलाइन फॉर्म के प्रिंटआउट के साथ आयोग को भेजने होंगे. यह डॉक्यूमेंट 15 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक जमा किए जा सकते हैं.
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कितनी है आवेदन फीस?
भर्ती के लिए आवेदन फीस उम्मीदवार की कैटेगरी के अनुसार तय की गई है. जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 105 रुपये, जबकि एससी-एसटी उम्मीदवारों के लिए 65 रुपये फीस है. वहीं दिव्यांग कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 25 रुपये निश्चित है. पूर्व सैनिकों के लिए फीस 65 रुपये, महिलाओं स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों और स्पोर्ट्स कोटा के लिए फीस उनके संबंधित कैटेगरी के अनुसार लागू होगी. इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 26 वर्ष और अधिकतम उम्र 40 वर्ष है. वहीं प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष और अधिकतम आयु 55 वर्ष है. आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी.
ऐसे करें आवेदन

उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीपीएससी के ऑफिशियल वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाना होगा.
इसके बाद कैंडिडेट डैशबोर्ड में लॉगिन करना होगा.
अब संबंधित भर्ती का आवेदन फॉर्म भरकर जरूरी जानकारी दर्ज करें.
आवेदन फीस जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट करना होगा.
लास्ट में फॉर्म सबमिट करके प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>UPPSC, ने, जारी, किया, नोटिफिकेशन, प्रोफेसर-असिस्टेंट, प्रोफेसर, के, 1156, पदों, पर, भर्ती</media:keywords>
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        <title>उत्तराखंड बोर्ड 10वीं&amp;12वीं इंप्रूवमेंट रिजल्ट 2026 जारी, ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ UK Board Improvement Result 2026:&amp;nbsp;उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन में 10वीं और 12वीं की इंप्रूवमेंट परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. बोर्ड ने आज 19 अगस्त को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट इम्प्रूवमेंट एग्जाम में शामिल हुए छात्रों के स्कोर कार्ड ऑनलाइन जारी कर दिए हैं. छात्र अपना रिजल्ट बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट ubse.uk.gov.in पर जाकर देख सकते हैं. इस रिजल्ट में 2026 की फर्स्ट इंप्रूवमेंट एग्जामिनेशन और 2025 की थर्ड इंप्रूवमेंट एग्जामिनेशन में शामिल उम्मीदवारों के अंक शामिल है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>उत्तराखंड, बोर्ड, 10वीं-12वीं, इंप्रूवमेंट, रिजल्ट, 2026, जारी, ऐसे, चेक, करें, स्कोरकार्ड</media:keywords>
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        <title>झारखंड में अब तक 44 एग्जाम रद्द, जानिए कितनों की गई नौकरी और अब आगे क्या?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/झारखंड-में-अब-तक-44-एग्जाम-रद्द-जानिए-कितनों-की-गई-नौकरी-और-अब-आगे-क्या</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/झारखंड-में-अब-तक-44-एग्जाम-रद्द-जानिए-कितनों-की-गई-नौकरी-और-अब-आगे-क्या</guid>
        <description><![CDATA[ Jharkhand Exam Controversy: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करते हुए परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इनमें JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं के अलावा आउटसोर्स एजेंसी TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाएं भी शामिल हैं. सरकार की ओर से नोटिफिकेशन में परीक्षाओं को रद्द करने, कुछ को अगले आदेश तक स्थगित करने और पुरानी परीक्षाओं की जांच कराने का अलग-अलग फैसला लिया है.&amp;nbsp;
44 भर्ती परीक्षाओं की लिस्ट जारी&amp;nbsp;
झारखंड सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर रद्द की गई भर्ती परीक्षाओं की लिस्ट सामने रखी है. इन परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज,अतिरिक्त लोक अभियोजन और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे पदों की भर्ती से जुड़ी परीक्षा शामिल है. इसके अलावा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट फूड सेफ्टी ऑफिसर, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर समेत कई प्रशासनिक और तकनीकी पदों की भर्ती परीक्षाओं पर भी कार्रवाई की गई है. सरकार के फैसले में 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया है, जबकि 6 परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया गया है. वहीं 17 पुरानी भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच सीआईडी को सौंपी गई है.
JSSC-CGL भी रद्द, 1900 से ज्यादा अभ्यर्थियों पर असर&amp;nbsp;
झारखंड सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर जेएसएससी कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों पर पड़ा. इस परीक्षा के जरिए करीब 1932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी. अलग-अलग विभागों में चयनित कई अभ्यर्थी नौकरी ज्वाइन कर चुके थे. सरकार की ओर से प्रक्रिया रद्द किए जाने के बाद चयनित अभ्यर्थी ने विरोध शुरू कर दिया. इन बच्चों में रांची में राज्य सचिवालय में बिरसा चौक तक मार्च किया.&amp;nbsp;
2628 सिलेक्टेड उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रभावित&amp;nbsp;
झारखंड सरकार के फैसले से कुल 2628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रभावित हुई है. इनमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से नियुक्त 342 अधिकारी, 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, 63 एसडीपीओ, 237 महिला पर्यवेक्षिका और एसएससी सीजीएल से नियुक्त 1932 कर्मचारी शामिल है.&amp;nbsp;
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क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पारदर्शिता को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे. JPSC, JSSC और परीक्षा संचालन से जुड़ी TDPL की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे. छात्रों की मांग थी कि जिन परीक्षाओं में शिकायत मिली है, उनकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. इसी आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल की थी. सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद उन्होंने अपनी हड़ताल खत्म कर दी .
सरकार अब आगे क्या करेगी?
भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों पर कार्रवाई के साथ सरकार JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई फैसले लिए हैं. सरकार झारखंड हाई कोर्ट से JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं के मामले में जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करेगी. इसके अलावा दोनों आयोग में इंटरनल मॉनिटरिंग सेल बनाया जाएगा, जो परीक्षा प्रक्रिया और कामकाज की निगरानी करेगा. परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जो परीक्षा प्रणाली का अध्ययन करेगी और 2 महीने के अंदर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>झारखंड, में, अब, तक, एग्जाम, रद्द, जानिए, कितनों, की, गई, नौकरी, और, अब, आगे, क्या</media:keywords>
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        <title>Connor Hill Wins 2.39 Crore: 17 साल के छात्र ने कंप्यूटर से हल की मैथ्स की पहेली, जीते 2.39 करोड़</title>
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        <description><![CDATA[ Connor Hill Wins 2.39 Crore: 17 साल के एक अमेरिकी छात्र ने कंप्यूटर प्रोग्राम की मदद से गणित की एक बेहद जटिल और पुरानी पहेली को सुलझाकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. इस अद्भुत कामयाबी के लिए छात्र को पुरस्कार के रूप में 2.5 लाख डॉलर यानी भारत के करीब 2.39 करोड़ रुपये का बंपर इनाम मिला है. हाई स्कूल में पढ़ने वाले इस छात्र ने अपनी लगन और स्मार्ट सोच से यह बड़ा मुकाम हासिल किया है.&amp;nbsp;
यह ऐतिहासिक कारनामा अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के रहने वाले कॉनर हिल ने किया है. कॉनर ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान प्रतियोगिताओं में से एक, रीजेनरोन साइंस टैलेंट सर्च 2026 में पहला स्थान हासिल कर यह पुरस्कार अपने नाम किया है.&amp;nbsp;
क्या थी गणित की वह पहेली?
कॉनर हिल ने ज्योमेट्री की एक बेहद जटिल समस्या पर अपना रिसर्च किया था. उन्होंने नोबल पॉलीहेड्रा से जुड़ी एक पुरानी गणित की पहेली पर काम किया. पॉलीहेड्रा ऐसी 3D आकृतियों या आकारों को कहा जाता है जिनकी सतह पूरी तरह से सपाट होती है जैसे पिरामिड या पासा. गणित के जानकारों के बीच लंबे समय से यह एक खुला सवाल था कि इस विशेष श्रेणी में कुल कितनी आकृतियां संभव हैं.
इसी बीच कॉनर ने इस मुश्किल सवाल को इंसानी दिमाग के साथ-साथ कंप्यूटर कोडिंग के जरिए हल करने की ठानी. इसके लिए उन्होंने खुद एक विशेष कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किया. इस प्रोग्राम की मदद से उन्होंने गणितीय गणनाएं कीं और अंततः 146 अलग-अलग और विशिष्ट नोबल पॉलीहेड्रा की पहचान कर डाली. कॉनर के इस ठोस प्रमाण ने उस रहस्य को पूरी तरह सुलझा दिया, जो दुनिया भर के विशेषज्ञों के लिए सिरदर्द बना हुआ था.&amp;nbsp;
कैसे मिला 2.39 करोड़ का इनाम?
रीजेनरोन साइंस टैलेंट सर्च को अमेरिका की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित हाई स्कूल विज्ञान और गणित प्रतियोगिता माना जाता है. इसमें देश भर के हजारों प्रतिभाशाली छात्र अपने इनोवेटिव आइडियाज और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के साथ शामिल होते हैं. अंतिम राउंड में पहुंचे कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए कॉनर हिल के ज्योमेट्री प्रोजेक्ट को जूरी ने सबसे अच्छा माना. इसके बाद उन्हें विजेता घोषित करते हुए 2.5 लाख डॉलर भारतीय मुद्रा में करीब 2.39 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी गई.&amp;nbsp;
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कॉनर की यह सफलता दिखाती है कि अगर सही तरीके से कंप्यूटर और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो विज्ञान के क्षेत्र में असंभव दिखने वाले काम भी पूरे किए जा सकते हैं. कॉनर की इस कामयाबी की चर्चा आज पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और गणितज्ञों के बीच हो रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Engineering Jobs: कौन&amp;सी कंपनी बनाती है दिल्ली मेट्रो के कोच, इसमें कैसे मिलेगी नौकरी?</title>
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        <description><![CDATA[ Engineering Jobs: दिल्ली मेट्रो देश की सबसे आधुनिक और व्यस्त मेट्रो रेल सेवाओं में से एक है. हर दिन लाखों यात्री दिल्ली-एनसीआर में सफर करने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिल्ली मेट्रो में चलने वाले कोच आखिर कौन बनाता है? दिल्ली मेट्रो के कोच बनाने के क्षेत्र में BEML और Alstom जैसी बड़ी कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगर आप रेलवे, मेट्रो या इंजीनियरिंग सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं तो इन कंपनियों में नौकरी करना आपके लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है.
BEML बनाती है मेट्रो कोच
BEML भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है. कंपनी रक्षा उपकरणों के साथ-साथ रेल और मेट्रो कोच के निर्माण में भी काम करती है. BEML ने दिल्ली मेट्रो सहित देश की कई मेट्रो परियोजनाओं के लिए कोच तैयार किए हैं.
BEML के मेट्रो कोच बनाने वाले प्लांट में डिजाइन, फैब्रिकेशन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, टेस्टिंग और क्वालिटी कंट्रोल और ऐसेंबली जैसे कई स्तरों पर काम होता है. इसलिए यहां केवल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि ITI, डिप्लोमा और अन्य तकनीकी योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए भी अलग-अलग प्रकार के अवसर मिल सकते हैं.
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Alstom भी बना रही है दिल्ली मेट्रो के नए कोच
दूसरी बड़ी कंपनी Alstom है. Alstom एक वैश्विक कंपनी है जो रेलवे और मेट्रो के लिए ट्रेन, सिग्नलिंग और अन्य परिवहन समाधान उपलब्ध कराती है. दिल्ली मेट्रो के Phase-IV प्रोजेक्ट के लिए Alstom को नए ट्रेनसेट बनाने का बड़ा ऑर्डर मिला है. कंपनी ने इन मेट्रो ट्रेनसेट को भारत में अपनी श्री सिटी, आंध्र प्रदेश स्थित मैन्युफैक्चरिंग फेसेलिटी में तैयार किया है. इन नए ट्रेनसेट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और इन्हें दिल्ली मेट्रो के नए विस्तार वाले कॉरिडोर में उपयोग किया जा रहा है.
नौकरी करने के लिए योग्यता
अगर आप मेट्रो कोच बनाने वाली कंपनी में नौकरी करना चाहते हैं तो ITI, डिपलोमा या B.Tech एक अच्छा रास्ता हो सकता है. ITI करने वाले उम्मीदवार फिटर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, मशीनिस्ट जैसे ट्रेड से तकनीकी क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं. डिपलोमा करने वाले उम्मीदवार मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या संबंधित शाखाओं से टेकनिशियन और जूनियर लेवल टेकनिशियन रॉल्स के लिए तैयारी कर सकते हैं. ध्यान रहें कि नौकरी की तैयारी करते समय केवल क्वालिफिकेशन पर निर्भर न रहें. टेक्निकल नॉलेज &amp;nbsp;के साथ कम्युनिकेशन स्किल्स, कम्प्यूटर नॉलेज और इंडस्ट्री स्पेसिफिक &amp;nbsp;स्किल्स भी विकसित करना बेहतर होता है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नीट यूजी काउंसलिंग: राउंड&amp;1 रिजल्ट की तारीख बदली, अब 21 अगस्त को जारी होगा रिजल्ट</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के राउंड-1 रिजल्ट का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट आई है. MCC ने राउंड 1 काउंसलिंग का संशोधित शेड्यूल जारी किया है. इसके अनुसार अब सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 21 अगस्त को जारी किया जाएगा. इससे पहले राउंड-1 का रिजल्ट आज यानी 19 अगस्त को जारी होने वाला था. नए शेड्यूल को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) की ओर से जारी किया गया है. नोटिस के अनुसार राउंड-1 सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया 19 और 20 अगस्त को पूरी की जाएगी, जिसके पास बाद 21 अगस्त को सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी होगा.&amp;nbsp;
किन सीटों के लिए हो रही है काउंसलिंग?
MCC की ओर से आयोजित इस काउंसलिंग में 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के तहत सीटें शामिल है. इसके अलावा डीम्ड यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, एम्स, JIPMER और AFMC से जुड़ी सीटों के लिए भी काउंसलिंग की जा रही है. इसमें MBBS, BDS और BSc नर्सिंग प्रोग्राम की सीटें शामिल है.&amp;nbsp;
22 अगस्त से शुरू होगी रिपोर्टिंग&amp;nbsp;
राउंड वन में जिन उम्मीदवारों को सीट आवंटित की जाएगी, उन्हें 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 के बीच संबंधित इंस्टीट्यूट में रिपोर्ट कर एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद 1 सितंबर को इंस्टीट्यूट ज्वाइन कर चुके उम्मीदवारों के डेटा का वेरिफिकेशन करेंगे. राज्य काउंसलिंग से जुड़े उम्मीदवारों के लिए भी संशोधित शेड्यूल जारी किया गया है. राज्य काउंसलिंग जुड़े उम्मीदवारों के डेटा का वेरिफिकेशन 13 से 27 अगस्त के बीच राज्य DME और स्टेट काउंसलिंग अथॉरिटी के ओर से किया जाएगा.
कब शुरू हुई काउंसलिंग की प्रक्रिया?
MCC राउंड-1 के लिए सीट मैट्रिक्स का वेरिफिकेशन संबंधित संस्थानों की ओर से 4 अगस्त को पूरा किया गया था. इसके बाद रजिस्ट्रेशन और फीस पेमेंट की प्रक्रिया 5 से 15 अगस्त तक चली. उम्मीदवारों के लिए चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया 6 अगस्त से शुरू हुई थी, जिसकी अंतिम तारीख 18 अगस्त थी. चॉइस लॉक करने की सुविधा 17 अगस्त शाम 5:30 बजे से 18 अगस्त रात 11:59 बजे तक उपलब्ध रही. अब 19 और 20 अगस्त को सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होगी और 21 अगस्त को राउंड-1 का रिजल्ट जारी किया जाएगा.&amp;nbsp;
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छुट्टियों में भी जारी रहेगा काम&amp;nbsp;
MCC के संशोधित नोटिस में काउंसलिंग के तय समय सीमा को पूरा करने के लिए सभी संबंधित संस्थानों और कॉलेजों को शनिवार, रविवार और राजपत्रित छुट्टियों के दिन भी काम करने का निर्देश दिया गया है. काउंसलिंग की प्रक्रिया निर्धारित समय के अंदर पूरी करने के लिए इन दिनों को भी कार्य दिवस माना जाएगा.&amp;nbsp;
कैसे चेक कर सकेंगे नीट यूजी राउंड-1 रिजल्ट?

राउंड 1 का रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का एमसीसी के ऑफिसियल वेबसाइट mcc.nic.in पर जाए.&amp;nbsp;
अब होम पेज पर नीट यूजी काउंसलिंग से संबंधित रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
इसके बाद मांगी गई लॉगिन दर्ज करें.
अब सबमिट करने के बाद सीट अलॉटमेंट रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा.&amp;nbsp;
रिजल्ट चेक करने के बाद उसे डाउनलोड करें और फ्यूचर के लिए हार्ड कॉपी सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Teacher Shortage in Delhi Government Schools: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में टीचर्स की भारी कमी, पढ़ाई पर पड़ रहा असर</title>
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        <description><![CDATA[ Teacher Shortage in Delhi Government Schools: चाहे शिक्षा का मामला हो या इंफ्रास्ट्रक्चर का देश की राजधानी दिल्ली का नाम हर क्षेत्र में सबसे ऊपर आता है. इतना ही नहीं दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था देश भर में एक मॉडल के तौर पर पेश किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं दिल्ली में जहां पर प्राइवेट स्कूलों की मिसाल खड़ी की जाती हैं वहीं सरकारी स्कूलों में इसका कुछ दूसरा ही चेहरा है. जी हां, हकीकत में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में टीचर्स की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है.
बता दें कि दिल्ली में कुल 1070 सरकारी स्कूल हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 34 हजार टीचर्स ही पढ़ा रहे हैं. इतने सारे स्कूलों के लिए यह संख्या बहुत ही कम है यही वजह है कि जब एक स्कूल में जरूरत से कम टीचर्स होते हैं, तो एक-एक टीचर को कई-कई क्लास संभालनी पड़ती हैं. इससे टीचर पर काम का बोझ भी बढ़ता है और स्कूल का मेंटेनेंस भी खराब होता है. जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके रिजल्ट पर पड़ता है. विशेषज्ञों और खुद शिक्षा निदेशालय के परिपत्र के मुताबिक इनमें करीब 10,000 टीचर्स के पद अभी भी खाली पड़े हैं. आइए जानते हैं इन आंकड़ों के बारे में पूरी जानकारी.
30 हजार से ज्यादा पद खाली, भर्ती की रफ्तार धीमी
दिल्ली में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों को मिलाकर करीब 2,681 स्कूल हैं, जिनमें 44.9 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. UDISE+ 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार इन स्कूलों में कुल 1,61,958 टीचर्स तैनात हैं, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात 28:1 बैठता है. सबसे चिंता की बात यह है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 30 हजार से ज्यादा टीचर्स के पद खाली पड़े हैं. यानी जितने टीचर्स होने चाहिए, उससे कहीं कम टीचर्स असल में मौजूद हैं. इतनी बड़ी संख्या में पद खाली रहने से स्कूलों का पूरा सिस्टम प्रभावित हो रहा है. इसकी वजह है कि जब भर्ती समय पर नहीं होती, तो पुराने टीचर्स पर ही सारा दबाव आ जाता है. कई बार तो टीचर्स को अपने विषय के अलावा कई और विषय भी पढ़ाने पड़ते हैं, जिससे बच्चों के लिए पढ़ाई की क्वालिटी कमजोर होती है.
हालांकि एक शिक्षक के पास इतनी जानकारी तो होती है कि वे बच्चों को एक विषय के अलावा दूसरे भी विषय पढ़ा सकते हैं लेकिन इस पूरी समस्या का सबसे ज्यादा असर साइंस और मैथ जैसे जरूरी विषयों पर पड़ता है. क्योंकि ये दोनों ही विषय बेहद जरूरी और मुश्किल होते हैं इसलिए इसको कई शिक्षक इसको पढ़ाने से पीछे हटते हैं. यही वजह है कि कई सरकारी स्कूलों में साइंस और मैथ पढ़ाने वाले टीचर्स ही नहीं हैं. जब स्कूल में इन विषयों के टीचर्स ही नहीं होंगे, तो बच्चे अच्छी तरह पढ़ नहीं पाएंगे और पीछे रह जाएंगे. ऐसे में बच्चे स्कूल को छोड़कर ट्यूशन और कोचिंग पर ज्यादा भरोसा करने लगते हैं जिससे उनके परिवारों पर ट्यूशन फीस का अलग खर्च होता है.
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समाधान की दिशा में सरकार के कदम
अब सवाल आता है कि इस परेशानी को दूर करने के लिए सरकार कौन से कदम उठा रही है, तो ऐसे में आपको बता दें कि टीचर्स की कमी दूर करने के लिए दिल्ली सरकार कई स्तर पर कोशिश कर रही है. इस परेशानी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने हाल ही में कक्षा 6 से 10 तक के लिए 5,346 नए ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स (TGT) की भर्ती की घोषणा भी की है, ताकि इन खाली पदों को भरा जा सके और इस परेशानी का समाधान हो सके.
इसके अलावा खाली पदों को भरने के लिए DSSSB के जरिए भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है, और साथ ही गेस्ट टीचर्स को भी नए सत्र 2026-27 में दोबारा नियुक्ति देने का सर्कुलर जारी किया गया है. साथ ही सरकार ने 2026-27 में करीब 50 नए स्कूल भवन और 8,000 अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का लक्ष्य भी रखा है. ताकि बढ़ती छात्रों और शिक्षकों की संख्या से आगे चलकर परेशानी न हो. ताकि बढ़ती छात्रों और शिक्षकों की संख्या से आगे चलकर परेशानी न हो.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कर्नाटक सरकार का ऐलान, मेडिकल&amp;इंजीनियरिंग में ग्रामीण छात्रों को 7.5% आरक्षण</title>
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        <description><![CDATA[ Karnataka Education Scheme: कर्नाटक सरकार ने ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रोफेशनल, हायर एजुकेशन में 7.5 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की थी यह आरक्षण मेडिकल और इंजीनियरिंग समेत प्रोफेशनल कोर्सेज में लागू किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर को बढ़ाना है.&amp;nbsp;
ग्रामीण छात्रों के लिए सहाय-हस्ता, होसा-हस्ता योजना&amp;nbsp;
7.5 प्रतिशत आरक्षण के साथ कर्नाटक सरकार ग्रामीण छात्रों के लिए सहाय-हस्ता, होसा-हस्ता योजना भी लागू करेगी. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को हायर एजुकेशन हासिल करने में सहायता देना है. सरकार के अनुसार आरक्षण और इस योजना के जरिए ग्रामीण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रोफेशनल और हायर एजुकेशन के अवसरों को मजबूत किया जाएगा.&amp;nbsp;
इंजीनियरिंग की पढ़ाई में मिलेगा फायदा&amp;nbsp;
आरक्षण का दायर &amp;nbsp;प्रोफेशनल हायर एजुकेशन तक रखा गया है. इसमें मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स शामिल होंगे. ग्रामीण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए इन कोर्स में प्रवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में से जरूरी घोषणा माना जा रहा है.
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छठी कक्षा से एआई और कोडिंग की पढ़ाई&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक से जुड़ी कई अन्य घोषणाएं भी की. सरकार एआई अक्षरा अभियान और कोडिंग गुरुकुल कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके तहत स्कूलों में कक्षा 6 से एआई की पढ़ाई शुरू किए जाने की योजना है. इस पहल के जरिए छात्रों को एआई और कोडिंग जैसे नई तकनीक से परिचित कराने पर जोर दिया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक एक नई तकनीकी दौर में प्रवेश कर रहा है और छात्रों को भविष्य की जरूरत के अनुसार तैयार करना जरूरी है. वहीं कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु में भारत की पहली राज्य सरकार के स्वामित्व वाली एआई यूनिवर्सिटी स्थापित करने की योजना भी बताई है. यह पहल शिक्षा, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की सरकार की योजना का हिस्सा है.
परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव की तैयारी&amp;nbsp;
राज्य की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए भी सरकार ने यह कदम उठाया है. मौजूदा परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और उसमें जरूरी बदलाव के सुझाव देने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है. मुख्यमंत्री के अनुसार यह समिति करीब 2 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है. रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा प्रणाली में जरूरी बदलाव किए जाएंगे.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>नौकरी देने में यूपी का दबदबा, महाराष्ट्र और कर्नाटक भी टॉप&amp;3 में</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-देने-में-यूपी-का-दबदबा-महाराष्ट्र-और-कर्नाटक-भी-टॉप-3-में</link>
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        <description><![CDATA[ India Skills Report 2026: भारत में युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार देखने को मिला है. इंडिया स्किल रिपोर्ट 2026 के अनुसार देश की कुल रोजगार बढ़ाकर 56.35 फीसदी हो गई, जो 2025 में 54.81 फीसदी थी. रिपोर्ट में राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा. इसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक को जगह मिली. इस रिपोर्ट में देश के अलग-अलग राज्यों में युवाओं की जॉब रेडीनेस और बदलती रोजगार जरूरत की जानकारी दी गई है.&amp;nbsp;
सबसे ज्यादा एम्पलाॅयबल राज्य में यूपी नंबर वन&amp;nbsp;
इंडिया स्किल रिपोर्ट 2026 की रिपोर्ट के अनुसार राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश ने पहला स्थान हासिल किया है. बड़ी आबादी, हायर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यक्रमों की बढ़ती पहुंच के बीच राज्य से बड़ी संख्या में जॉब रेडी युवा सामने आ रहे हैं. इसके बाद महाराष्ट्र दूसरे और कर्नाटक तीसरे स्थान पर है. महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे जैसे बड़े रोजगार केंद्र है, जहां फाइनेंस, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी समेत कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मौजूद हैं. वहीं कर्नाटक को टेक्नोलॉजी सेक्टर में मजबूत स्थिति का फायदा मिला है. बेंगलुरु में इंजीनियरिंग संस्थानों, स्टार्टअप और ग्लोबल टेक कंपनियों का बड़ा नेटवर्क है, जिससे राज्य में तकनीक और प्रोफेशनल स्किल वाले युवाओं के लिए अवसर बढ़े हैं.&amp;nbsp;
यह देश के टॉप 10 एम्पलाॅय बल राज्य&amp;nbsp;

उत्तर प्रदेश
महाराष्ट्र&amp;nbsp;
कर्नाटक&amp;nbsp;
केरल&amp;nbsp;
पंजाब&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश&amp;nbsp;
पश्चिम बंगाल&amp;nbsp;
राजस्थान&amp;nbsp;
अरुणाचल प्रदेश&amp;nbsp;
जम्मू कश्मीर&amp;nbsp;

देश की रोजगार दर भी बढ़ी&amp;nbsp;
रिपोर्ट के अनुसार भारत की ओवरऑल रोजगार दर 2025 के 54.81 फीसदी बढ़कर 2026 में 56.35 फीसदी हो गई है. यानी आबादी से ज्यादा युवा नौकरी के लिए जरूरी कौशल के लिहाज एम्पलाॅय बल माने जा रहे हैं. रिपोर्ट में रोजगार दर का आकलन, तकनीकी कौशल, कम्युनिकेशन, स्किल कॉग्निटिव एबिलिटी और संबंधित क्षेत्र की जानकारी जैसे कई पहलुओं के आधार पर किया गया है.&amp;nbsp;
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छोटे शहर बन रहे नए टैलेंट हब&amp;nbsp;
रिपोर्ट में टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है. इन शहरों में से देश के वर्कफोर्स में योगदान बढ़ रहा है. इससे रोजगार और टैलेंट के लिए केवल बड़े महानगरों पर निर्भरता कम होने के संकेत भी मिल रहे हैं. वहीं रोजगार के बदलते स्वरूप में टेक्नोलॉजी और एआई से जुड़ी स्किल की मांग भी लगातार बढ़ रही है. कंपनी अब केवल डिग्री और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों का चयन नहीं कर रही, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल, डिजिटल नॉलेज, समस्या हल करने की क्षमता, कम्युनिकेशन, एडेप्टेबिलिटी और नई चीज सीखने की क्षमता को भी महत्व दिया जा रहा है. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास दुनिया के करीब 16 फीसदी एआई टैलेंट है और देश में 6 लाख से ज्यादा एआई प्रोफेशनल्स है.
इन सेक्टर में रोजगार के ज्यादा अवसर&amp;nbsp;
रिपोर्ट में टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस मैन्युफैक्चरिंग रिन्यूएबल एनर्जी और हेल्थकेयर को प्रमुख हायरिंग सेक्टर के तौर पर बताया गया है. इन क्षेत्र में बदलती तकनीक और इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से स्किल्ड उम्मीदवारों की मांग बनी हुई है.&amp;nbsp;
2030 तक 2.35 करोड़ हो सकती है गिग वर्कफोर्स&amp;nbsp;
रिपोर्ट में भारत की गिग इकोनॉमी को लेकर भी अनुमान दिया गया है. इसके अनुसार देश की गिग वर्कफोर्स 2030 तक 2.35 करोड़ तक पहुंच सकती है. इससे रोजगार के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ फ्लेक्सिबल और गैर-पारंपरिक काम के ऑप्शन की भूमिका भी बढ़ने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>फर्स्ट अटेम्प्ट में फेल, दूसरे में चोट के बाद नहीं मानी हार, प्राची ने ऐसे रचा इतिहास</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फर्स्ट-अटेम्प्ट-में-फेल-दूसरे-में-चोट-के-बाद-नहीं-मानी-हार-प्राची-ने-ऐसे-रचा-इतिहास</link>
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        <description><![CDATA[ फर्स्ट अटेम्प्ट में फेल, दूसरे में चोट के बाद नहीं मानी हार, प्राची ने ऐसे रचा इतिहास ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>देश के 67.4% स्कूलों में इंटरनेट, करीब एक&amp;तिहाई अब भी है वंचित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-के-674-स्कूलों-में-इंटरनेट-करीब-एक-तिहाई-अब-भी-है-वंचित</link>
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        <description><![CDATA[ UDISE+ 2025-26 Report: हमारे देश के स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में स्कूल इंटरनेट से जुड़े नहीं पाए हैं. शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार देश के 67.4 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है. पिछले शैक्षणिक वर्ष में यह लगा यह आंकड़ा 63.5 प्रतिशत था, यानी एक साल में इंटरनेट के पहुंच में 3.9 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ है. इसके बावजूद देश के करीब एक तिहाई यानी 32.6 प्रतिशत स्कूल अभी भी इंटरनेट सुविधा से वंचित है.&amp;nbsp;
3 साल में इंटरनेट कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार&amp;nbsp;
UDISE+ के डेटा से सामने आया है कि पिछले कुछ सालों में स्कूलों में इंटरनेट की पहुंच लगातार बढ़ रही है. 2023-24 में देश के 53.9 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा थी. 2024-25 में यह बढ़कर 63.5 प्रतिशत और 2025-26 में 67.4 प्रतिशत हो गई. इस तरह 3 साल के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले स्कूलों की हिस्सेदारी में 13.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है, हालांकि अभी भी 32.6 प्रतिशत स्कूलों को इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है.&amp;nbsp;
स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा भी बढ़ी&amp;nbsp;
स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्धता के मामले में भी लगातार सुधार देखा गया है. &amp;nbsp;2024-25 में 64.7 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा थी, जो 2025-26 में बढ़कर 69.9 प्रतिशत हो गई. यानी एक साल में करीब 5.2 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है. हालांकि करीब 30.1 प्रतिशत स्कूलों को अभी भी कंप्यूटर सुविधा नहीं मिल पाई है. आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 57.2 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर थे, जो 2024-25 में 64.7 प्रतिशत और 2025-26 में 69.9 प्रतिशत हो गए. इंटरनेट और कंप्यूटर की उपलब्धता में यह अंतर बताता है कि स्कूलों में कंप्यूटर पहुंचने के बाद भी उन्हें इंटरनेट से जोड़ना अभी एक बड़ी समस्या बनी हुई है.&amp;nbsp;
स्कूलों में बिजली और दूसरी सुविधाओं की स्थिति&amp;nbsp;
UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में भी बेहतर स्थिति सामने आई है. देश के 95 प्रतिशत स्कूलों में बिजली 98.5 प्रतिशत में लड़कियों के लिए टॉयलेट और 97.2 प्रतिशत में लड़कों के लिए टॉयलेट उपलब्ध है. वहीं 99.5 प्रतिशत स्कूलों में सुरक्षित पेयजल की सुविधा पहुंच चुकी है. हाथ धोने की सुविधा भी 96.9 प्रतिशत स्कूलों में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या में भी कमी&amp;nbsp;
रिपोर्ट में स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी आंकड़े सामने आए. एक ही शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या 2024-25 में 1,04,125 थी, जो 2025-26 में घटकर 1,00,843 रह गई. यानी एक साल में ऐसे स्कूलों की संख्या में 3,282 की कमी आई. हालांकि राज्यों के बीच स्थित एक जैसी नहीं है. कुछ राज्यों में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई, जबकि कई राज्यों में ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ी है.&amp;nbsp;
देश में है 14.67 लाख से ज्यादा स्कूल&amp;nbsp;
UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में करीब 14.67 लाख स्कूल, 1.3 करोड़ शिक्षक और 24.72 करोड़ से ज्यादा छात्र शामिल है. औसतन एक स्कूल में 7 शिक्षकों और 169 छात्र हैं. देश का कुल प्यूपिल टीचर रेशियो 24:1 है] यानी औसतन 24 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है. रिपोर्ट के अनुसार यह अनुपात और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के 30:1 के सुझाए गए मानक के अंदर है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 16:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देश, के, 67.4, स्कूलों, में, इंटरनेट, करीब, एक-तिहाई, अब, भी, है, वंचित</media:keywords>
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        <title>UPSSSC VDO Result 2026: यूपी में ग्राम पंचायत अधिकारी के 1468 पदों पर चयन, कटऑफ भी जारी</title>
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        <description><![CDATA[ योगी सरकार में सरकारी भर्तियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने ग्राम पंचायत अधिकारी मुख्य परीक्षा-2023 के तहत 1,468 पदों का अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया है. सोमवार को आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में चयनित अभ्यर्थियों की श्रेणीवार सूची और अंतिम कटऑफ भी घोषित की गई है. इससे भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है.
आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप जारी हुआ परिणाम
अंतिम चयन में सभी प्रमुख आरक्षित श्रेणियों को निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया गया है. कुल पदों में 849 पद अनारक्षित, 356 अनुसूचित जाति, 7 अनुसूचित जनजाति, 139 अन्य पिछड़ा वर्ग और 117 पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए थे. जिसे क्षैतिज आरक्षण के तहत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित, दिव्यांगजन और भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है. इसमें खास बात यह है कि 270 महिला अभ्यर्थी हैं.&amp;nbsp;
अनारक्षित व ओबीसी की कटऑफ 68.25 अंक
आयोग द्वारा जारी कटऑफ के अनुसार, अनारक्षित वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी के 68.25 अंक रहे. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कटऑफ 65.75 अंक रही. अनुसूचित जाति के लिए यह 57.75 और अनुसूचित जनजाति के लिए 54.50 अंक निर्धारित हुई. क्षैतिज आरक्षण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित की कटऑफ 60, दिव्यांगजन एलवी की 57, एचएच की 48, महिला की 60.25 और भूतपूर्व सैनिक की 55.50 अंक रही.
योगी सरकार का भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
योगी सरकार के कार्यकाल में चयन आयोगों के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने पर लगातार जोर दिया गया है. ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती का अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. परीक्षा, अभिलेख परीक्षण और अंतिम चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
दरअसल, पंचायतीराज विभाग में ग्राम पंचायत अधिकारी के 1,468 रिक्त पदों पर चयन के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे. लिखित परीक्षा के बाद पात्र अभ्यर्थियों का अभिलेख परीक्षण कराया गया और उसके आधार पर अंतिम चयन परिणाम तैयार किया गया. आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों की अनुक्रमांकवार सूची अपनी वेबसाइट पर जारी कर दी है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DUSU Election Rules: DUSU चुनाव, इन 5 गलतियों पर रद्द हो सकता है नामांकन</title>
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        <description><![CDATA[ DUSU Election Rules: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ DUSU चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. हर साल की तरह इस साल भी कैंपस में चुनावी माहौल दिखने लगा है. डूसू चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उम्मीदवार दिन-रात मेहनत करते हैं. हालांकि, चुनाव जीतने से पहले सबसे जरूरी कदम नामांकन प्रक्रिया को सही तरीके से पार करना है. डीयू प्रशासन और लिंगदोह कमेटी के सख्त नियमों के कारण उम्मीदवारों की एक छोटी सी चूक उनका नामांकन रद्द करवा सकती है. जानें उन गलतियों के बारें में जो उम्मीदवार को चुनाव में खड़ा ही न होने देगी.&amp;nbsp;
परिसर या गाड़ियों में नशीले पदार्थ का सेवन
चुनाव प्रचार के दौरान गाड़ियों के काफिले और हुड़दंग पर पूरी तरह रोक है. उम्मीदवारों को केवल उन्हीं गाड़ियों का इस्तेमाल करने की अनुमति है, जिन पर प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा जारी किया गया अधिकृत स्टीकर लगा हो. बिना स्टीकर वाली गाड़ियां लाने, उन्हें फुटपाथ पर पार्क करने या ट्रैफिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने पर उम्मीदवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और पर्चा खारिज हो सकता है.&amp;nbsp;
पैम्फलेट का इस्तेमाल
लिंगदोह कमेटी के नियमों के मुताबिक, डूसू चुनाव में छपे हुए पोस्टरों, बैनरों और पैम्फलेट पर पूरी तरह से पाबंदी है. उम्मीदवार प्रचार के लिए केवल हस्तनिर्मित पोस्टरों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. यदि कोई उम्मीदवार दीवारों पर प्रिंटेड पोस्टर चिपकाता है या सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करता है,तो उसका नामांकन रद्द होने के साथ-साथ उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
तय बजट से ज्यादा खर्च करना
डूसू चुनाव में पैसों के पानी की तरह बहाने पर पूरी तरह रोक है. नियमों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार चुनाव प्रचार में अधिकतम 5,000 रुपये ही खर्च कर सकता है. नामांकन के समय और चुनाव के बाद उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा हिसाब देना होता है. यदि जांच में यह पाया गया कि उम्मीदवार ने तय सीमा से एक रुपया भी ज्यादा खर्च किया है, तो उसकी उम्मीदवारी को निरस्त कर दिया जाएगा.
75 प्रतिशत से कम अटेंडेंस
एक छात्र नेता होने से पहले आपका एक अनुशासित छात्र होना जरूरी है. कोर्ट और लिंगदोह कमेटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार की कॉलेज में न्यूनतम उपस्थिति 75% होनी अनिवार्य है. यदि किसी छात्र की उपस्थिति इस आंकड़े से कम पाई जाती है, तो वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाएगा.&amp;nbsp;
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बाहरी लोगों का दखल
डूसू चुनाव केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमित छात्रों के लिए है. चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति, पूर्व छात्र या राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को कैंपस में हुड़दंग करने की इजाजत नहीं है. यदि किसी उम्मीदवार के प्रचार में बाहरी लोग हिंसा, हथियारों का प्रदर्शन या डराने-धमकाने का काम करते हैं, तो डीयू प्रशासन उस उम्मीदवार का नामांकन तुरंत निरस्त कर देगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>झारखंड में CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द, जानिए अब री&amp;एग्जाम और नौकरी का क्या होगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/झारखंड-में-cgl-समेत-कई-परीक्षाएं-रद्द-जानिए-अब-री-एग्जाम-और-नौकरी-का-क्या-होगा</link>
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        <description><![CDATA[ झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TDPL के जरिए 2014 से कराई गई परीक्षाओं को भी रद्द करने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि इन परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की जांच सीआईडी करेगी. इस फैसले के बाद JSSC और JPSC की कई भर्ती परीक्षा और उनसे जुड़ी चयन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है.
किन परीक्षाओं पर पड़ा है असर?
झारखंड सरकार का फैसला सिर्फ JSSC-CGL तक सीमित नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि TDPL के जरिए 2014 से आयोजित सभी परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणाम को रद्द किया जाएगा. साथ ही इन परीक्षाओं की जांच सीआईडी से कराने की बात कही गई है. इस फैसले के दायरे में JSSC-CGL &amp;nbsp; के अलावा JPSC की कुछ जरूरी परीक्षाएं भी आ सकती है. इनमें 14 वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, 14वीं सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023 और बैकलॉग परीक्षा-2025 का नाम सामने आया है. 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की मुख्य परीक्षा भी 25 जुलाई 2026 को आयोजित हो चुकी है. इसके अलावा TDPL की भूमिका वाली अन्य भर्ती परीक्षाओं पर भी सरकार के फैसले का असर पड़ सकता है. हालांकि अभी सरकार की ओर से सभी प्रभावित परीक्षाओं की अंतिम लिस्ट जारी नहीं की गई है.&amp;nbsp;
किन परीक्षाओं का होगा री-एग्जाम?
झारखंड सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला तो घोषित कर दिया है, लेकिन किस-किस परीक्षा का री-एग्जाम कब होगा, आवेदन दोबारा होंगे या पुराने अभ्यर्थियों को सीधे मौका मिलेगा इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है. वहीं बताया जा रहा है कि अगर किसी परीक्षा की पूरी चयन प्रक्रिया रद्द की जाती है, तो सरकार और संबंधित आयोग के सामने नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का ऑप्शन रहेगा. इस स्थिति में दोबारा परीक्षा आयोजित की जा सकती है लेकिन पुराने अभ्यर्थियों को नई प्रक्रिया में किस तरह शामिल किया जाएगा, यह नई अधिसूचना में तय होगा.&amp;nbsp;
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JSSC-CGL रद्द होने से कितनी नौकरियों पर असर?
JSSC-CGL भर्ती के जरिए अलग-अलग सरकारी विभागों में करीब 1975 पदों पर नियुक्तियां हुई थी. इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्लानिंग असिस्टेंट, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और अंचल निरीक्षक सह कानूनगो जैसे पद शामिल है. सरकार की ओर से परीक्षा और उससे जुड़े परिणाम रद्द किए जाने के बाद इन नियुक्तियों का भविष्य भी सवालों के घेरे में आ गया.&amp;nbsp;
क्या चयनित उम्मीदवारों की नौकरी जाएगी?
JSSC-CGL परीक्षा और उससे जुड़े रिजल्ट को रद्द करने की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का क्या होगा. इसे लेकर कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कहना सही नहीं होगा कि चयनित उम्मीदवारों की नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएगी. चयनित उम्मीदवारों की स्थिति नियुक्ति आदेश, संबंधित सरकारी नियमों और सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले आगे के निर्देश पर निर्भर करेगी. अब आगे क्या होगा &amp;nbsp;वहीं फिलहाल झारखंड परीक्षाओं को लेकर इस पूरे मामले में अगला चरण सरकार और संबंधित भर्ती आयोग की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना मानी जा रही है. इसमें स्पष्ट किया जाएगा कि रद्द की गई परीक्षाओं के आगे की प्रक्रिया क्या होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>झारखंड, में, CGL, समेत, कई, परीक्षाएं, रद्द, जानिए, अब, री-एग्जाम, और, नौकरी, का, क्या, होगा</media:keywords>
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        <title>IPS Prahlad Meena Success Story : रेलवे का गैंगमैन बना IPS, पढ़ें राजस्थान के प्रहलाद मीणा की कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ IPS Prahlad Meena Success Story : राजस्थान के दौसा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर रेलवे में गैंगमैन की नौकरी करने वाले प्रहलाद मीणा ने UPSC परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बनने तक का सफर तय किया. कभी रेल की पटरियों की मरम्मत करना उनकी डेली लाइफ का हिस्सा था, तो कभी नौकरी के बीच पढ़ाई के लिए वक्त निकालना सबसे बड़ी चुनौती भी थी, लेकिन प्रहलाद मीणा ने सीमित संसाधन, आर्थिक परेशानी, नौकरी का दबाव और लगातार मिली असफलताओं के बाद भी अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और आज उनकी कहानी हर किसी को प्रेरित करती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि राजस्थान के प्रहलाद मीणा की कहानी क्या है.&amp;nbsp;
प्रहलाद मीणा का सफर कहां से शुरू हुआ?
प्रहलाद मीणा का बचपन आर्थिक परेशानियों के बीच बीता. उनके परिवार के पास करीब 2 बीघा जमीन थी, जिससे घर का गुजारा करना आसान नहीं था. बचपन में उन्हें मवेशी चराने का काम भी करना पड़ता था. इन जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी. उनके लिए शिक्षा बेहतर भविष्य की उम्मीद थी और इसी सोच ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.&amp;nbsp;
रेलवे में बने गैंगमैन
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रहलाद ने रेलवे में गैंगमैन यानी ग्रुप डी कर्मचारी के तौर पर नौकरी शुरू की, ओडिशा के भुवनेश्वर में उनकी ड्यूटी थी, जहां उनका काम रेलवे ट्रैक की देखभाल और मरम्मत करना था. नौकरी मिलने से उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली, लेकिन उनके सपने यहीं खत्म नहीं हुए. वह सरकारी सेवा में आगे बढ़ना चाहते थे. बाद में उन्होंने दिल्ली में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के पद पर भी काम किया.&amp;nbsp;
कैसे करते थें UPSC की तैयारी?
नौकरी के साथ UPSC की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. इसके बाद भी उन्होंने समय का बेहतर इस्तेमाल किया. प्रहलाद रोज सुबह करीब 4 बजे उठकर पढ़ाई करते थे. ऑफिस के लंच ब्रेक में भी किताबें पढ़ते थे. मेट्रो से सफर के दौरान अखबार पढ़ना उनकी तैयारी का हिस्सा था. खास बात यह थी कि उन्होंने महंगी कोचिंग के बिना अपनी तैयारी जारी रखी.&amp;nbsp;
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UPSC की तैयारी में इतनी बार मिली असफलता
UPSC की तैयारी के दौरान प्रहलाद को कई बार असफलता मिली. उन्होंने 2013 और 2014 में मेंस परीक्षा दी, जबकि 2015 में प्रीलिम्स में भी सफलता नहीं मिली. लगातार तीन असफलताओं के बाद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी. उन्होंने अपनी गलतियों और कमजोरियों को समझा और उन पर काम किया. खास तौर पर निबंध लेखन और ऑप्शनल सब्जेक्ट हिंदी साहित्य को मजबूत किया.&amp;nbsp;
2017 में पूरा हुआ IPS बनने का सपना
लगातार मेहनत के बाद आखिरकार साल 2017 में प्रहलाद मीणा ने UPSC परीक्षा पास की और 951 वीं रैंक हासिल की. इसके साथ ही उनका IPS बनने का सपना पूरा हुआ. जिस ओडिशा में उन्होंने कभी रेलवे गैंगमैन के तौर पर काम किया था, बाद में उन्हें उसी राज्य का IPS कैडर मिला.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CSBC सिपाही भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, ऐसे करें चेक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/csbc-सिपाही-भर्ती-परीक्षा-का-रिजल्ट-जारी-ऐसे-करें-चेक</link>
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        <description><![CDATA[ 


Bihar Police Constable Result: केंद्रीय चयन पर्षद (CSBC) ने 18 अगस्त 2026 को सिपाही भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. यह रिजल्ट विज्ञापन संख्या 01/2026 (स्पेशल ब्रांच कांस्टेबल) और विज्ञापन संख्या 02/2026 (कांस्टेबल ऑपरेटर) के लिए आया है. दोनों ही भर्तियों की लिखित परीक्षा जून 2026 में आयोजित की गई थी. लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को अब चयन प्रक्रिया के अगले चरण के लिए बुलाया जाएगा. ऑपरेटर पद की लिखित परीक्षा में सफल 5,966 उम्मीदवारों को अब फिजिकल दक्षता परीक्षा (PET) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है. वहीं जनरल ड्यूटी बंद कैडर के 254 उम्मीदवारों को PST के लिए चुना गया है.&amp;nbsp;



ऑपरेटर पदों के लिए 5,966 उम्मीदवार चयनित&amp;nbsp;
बिहार पुलिस कांस्टेबल ऑपरेटर भर्ती के तहत कुल 3,18,518 आवेदन प्राप्त हुए थे. आवेदन की जांच के बाद 2,82,823 उम्मीदवारों को वैध पाया गया. इसकी लिखित परीक्षा 28 जून 2026 को राज्य के 38 जिलों में बनाए गए 544 केंद्रों पर आयोजित की गई थी. वहीं परीक्षा में कुल 1,28,482 उम्मीदवार शामिल हुए, जबकि अनुचित साधनों के कारण 28 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया गया. इसके बाद एक लाख 1,28,454 उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया. वहीं परीक्षा में उम्मीदवारों को न्यूनतम 30 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी था. कटऑफ पर समान अंक आने के कारण टाई ब्रेक की स्थिति बनी और कुल 5,966 उम्मीदवारों को PET के लिए चयनित किया गया.
जीडी भर्ती में 254 उम्मीदवार PST के लिए चयनित&amp;nbsp;
विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी बंद कैडर) के 83 पदों पर भर्ती की जा रही है. इस भर्ती के लिए कुल 2,33,479 आवेदन मिले थे. जांच के बाद 2,24,429 आवेदन वैध पाए गए. इस भर्ती की लिखित परीक्षा 24 जून 2026 को 38 जिलों के 431 केंद्रों पर हुई थी. पेपर-1 में 64,410 और पेपर-2 में 64,409 उम्मीदवार उपस्थित हुए. अनुचित साधनों के कारण 3 उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए गए और 64,408 उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया. वहीं उम्मीदवारों के लिए हर एक पेपर और कुल मिलाकर कम से कम 30 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी था. कटऑफ पर समान अंक आने के कारण टाई ब्रेक हुआ और कुल 254 उम्मीदवारों को PST के लिए चुना गया.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET-JEE फ्री कोचिंग का प्लान, &amp;nbsp;2 अक्टूबर से शुरू हो सकती है योजना &amp;nbsp;&amp;nbsp;
ऐसे चेक करें CSBC &amp;nbsp;सिपाही भर्ती का रिजल्ट&amp;nbsp;

CSBC &amp;nbsp;का रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट csbc.bihar.gov.in पर जाए.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर रिजल्ट सेक्शन पर क्लिक करें.
अब अपनी भर्ती के अनुसार कांस्टेबल जीडी या कांस्टेबल ऑपरेटर रिजल्ट लिंक सेलेक्ट करें.
इसके बाद रिजल्ट की पीडीएफ स्क्रीन पर खुल जाएगी.
अब पीडीएफ डिवाइस में सेव करके और Ctrl+ F करके अपना रोल नंबर चेक करें. &amp;nbsp;

PST-PET के दिन होगा डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन&amp;nbsp;
फिजिकल एग्जाम के दिन ही उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन भी किया जाएगा. उम्मीदवार को अपने सभी मूल डॉक्यूमेंट के साथ उनकी एक सेट फोटोकॉपी लेकर जाना होगा. इनमें वैध फोटो पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, नॉन क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र और दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट से शामिल है. ऑपरेटर पद के लिए आवेदन करने वाले ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को निर्धारित ट्रांसजेंडर पहचान पत्र भी साथ ले जाना होगा.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CSBC, सिपाही, भर्ती, परीक्षा, का, रिजल्ट, जारी, ऐसे, करें, चेक</media:keywords>
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    <item>
        <title>NTA से 50 अधिकारियों की छुट्टी, UGC&amp;NET विवाद के बीच हुआ बड़ा बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET Controversy: UGC-NET जून 2026 परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, NTA के महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर परीक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों की समीक्षा की.&amp;nbsp;
सामने आया है कि विवादों में घिरी NTA से अब तक 50 अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है.&amp;nbsp;24 जुलाई 2026 को NTA के 47 अधिकारियों को निकाला था, इस 50 की संख्या में वो भी शामिल हैं. यानि आज 3 अन्य अधिकारियों को निकाला गया है.&amp;nbsp;
10 नए प्रोफेशनल्स की भर्ती
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, NTA से अब तक 50 से ज्यादा कर्मचारियों को हटाया जा चुका है. इसके साथ ही एजेंसी में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए 10 नए प्रोफेशनल नेतृत्व पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं. इनमें Chief Technology Officer, Chief Finance Officer, Chief Information Security Officer, General Manager-Test Security और General Manager-R&amp;amp;D and Psychometrics जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं.
NTA अब साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स, प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा से जुड़े अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों के लिए निजी क्षेत्र के डोमेन एक्सपर्ट्स को भी अपने साथ जोड़ रहा है. इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और विषय विशेषज्ञता को मजबूत करना है.
यह भी पढ़ें: UGC NET की गड़बड़ियों पर&amp;nbsp;NTA सख्त, पेपर से प्रिंटिंग तक होगी समीक्षा&amp;nbsp;
तीन विषयों में पाई गई थी गड़बड़ी&amp;nbsp;
यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है जब UGC-NET जून 2026 परीक्षा के दौरान कई विषयों में बार-बार पूछे गए सवालों के साथ-साथ तथ्यात्मक, व्याकरण संबंधी और अनुवाद की गलतियां सामने आई थीं. इन गड़बड़ियों के बाद NTA ने Englिish, Commerce और Sociology विषयों की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है. ये री-एग्जाम 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित होंगे. परीक्षा दोबारा कराने के लिए उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और इन विषयों में क्वालिफाइंग उम्मीदवारों की संख्या या विषयवार आवंटन को कम नहीं किया जाएगा.
मंत्रालय की ओर से पहले यह भी बताया गया था कि NTA प्रश्नपत्र तैयार करने, मॉडरेशन, अनुवाद और कंपोजिंग की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करेगा, ताकि इस तरह की गलतियां स्रोत स्तर पर ही रोकी जा सकें और लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जा सके.
शिक्षा मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
सोमवार की बैठक में शिक्षा मंत्री ने NTA को परीक्षा से जुड़े सभी स्थापित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही Confidential Operations (CONOPS) की पूरी व्यवस्था में बदलाव करने को कहा गया है. इसके तहत सुरक्षित और अलग कमरे, air-gapped computer systems यानी बाहरी नेटवर्क से अलग सिस्टम और परीक्षा से जुड़े उपकरणों को जमा कराने के लिए सख्त device-deposit protocols लागू किए जाएंगे.
मंत्री ने इन बदलावों को युद्धस्तर पर लागू करने के निर्देश दिए हैं. NTA को परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण का विस्तृत ऑडिट कराने और उसमें सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए corrective actions की रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय को सौंपने को कहा गया है. मंत्रालय का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, ताकि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित करने तक किसी भी स्तर पर होने वाली चूक को रोका जा सके.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NTA, से, अधिकारियों, की, छुट्टी, UGC-NET, विवाद, के, बीच, हुआ, बड़ा, बदलाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>KVS&amp;NVS टियर&amp;2 भर्ती परीक्षा का रिजल्ट और फाइनल की जारी</title>
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        <description><![CDATA[ KVS NVS Tier 2 Result:&amp;nbsp; केवीएस और एनवीएस में अलग-अलग टीचिंग और नॉन टीचिंग पदों पर भर्ती के लिए आयोजित टियर-2 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. सीबीएसई ने आज पहले चरण के पदों के लिए केवीएस और एनवीएस टियर 2 फाइनल रिजल्ट जारी किया है. परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपना रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉगिन डिटेल्स के जरिए चेक कर सकते हैं. 
फिलहाल टियर 2 रिजल्ट पीजीटी (कंंप्यूटर साइंस), टीजीटी (कंंप्यूटर साइंस), फाइनेंस ऑफिसर और स्टेनोग्राफर ग्रेड 1 पदों के लिए जारी किया गया है. सीबीएसई के अनुसार दूसरे पदों का रिजल्ट भी जल्द ही जारी किया जाएगाा.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-UGC NET की गड़बड़ियों पर&amp;nbsp;NTA सख्त, पेपर से प्रिंटिंग तक होगी समीक्षा&amp;nbsp;
इन पदों का जारी हुआ रिजल्ट&amp;nbsp;
सीबीएसई की ओर जारी रिजल्ट में पीजीटी, टीजीटी, फाइनेंस ऑफिसर और स्टेनोग्राफर ग्रेड 1 के पद शामिल है. वहीं रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपना रिजल्ट सीबीएसई के ऑफिशियल वेबसाइट के अलावा केवीएस और एनवीएस के पोर्टल पर भी देख सकते हैं. जिन पदों के लिए केवीएस और एनवीएस के बीच संगठन या क्षेत्र की वरीयता लागू है, उन उम्मीदवारों को भर्ती नोटिफिकेशन के अनुसार आवेदन पोर्टल पर अपनी पसंद दर्ज करनी होगी. इसके अलावा उम्मीदवार सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट पर रिजल्ट के साथ फाइनल आंसर की भी देख सकते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
इंटरव्यू और स्किल टेस्ट की तारीख बाद में&amp;nbsp;
पीजीटी (कंंप्यूटर साइंस), टीजीटी (कंंप्यूटर साइंस) और फाइनेंस ऑफिसर के पदों के लिए शाॅर्ट लिस्ट किए गए उम्मीदवारों के इंटरव्यू कॉल लेटर इंटरव्यू शेड्यूल तय होने के बाद उनके संबंधित आवेदन लॉगिन में उपलब्ध कराए जाएंगे. वहीं स्टेनोग्राफर ग्रेड 1 के लिए चयनित उम्मीदवारों के स्किल टेस्ट कॉल लेटर भी स्किल टेस्ट का शेड्यूल तैयार होने के बाद आवेदन पोर्टल पर जारी किए जाएंगे.&amp;nbsp;
ऐसे चेक करें केवीएस-एनवीएस टियर-2 रिजल्ट&amp;nbsp;

उम्मीदवार रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई के ऑफिशियल cbse.gov.in वेबसाइट पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर केवीएस-एनवीएस टियर 2 रिजल्ट 2026 से संबंधित लिंक पर क्लिक करें.
नए पेज पर मांगी गई, लॉगिन डिटेल दर्ज करके सबमिट करें.
इसके बाद स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा.&amp;nbsp;
उम्मीदवार रिजल्ट डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट भी सुरक्षित रख सकते हैं.&amp;nbsp;

बाकी के पदों का रिजल्ट भी होगा जारी&amp;nbsp;
सीबीएसई ने बताया कि बाकी पदों के रिजल्ट को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है और इन्हें आने वाले दिनों में अलग-अलग चरणों में जारी किया जाएगा. टियर 2 में सफल उम्मीदवार संबंधित पद के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होंगे. इसमें इंटरव्यू, स्किल टेस्ट या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल होगा.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>KVS-NVS, टियर-2, भर्ती, परीक्षा, का, रिजल्ट, और, फाइनल, की, जारी</media:keywords>
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        <title>Bhawana Kanth: IAF की भावना कंठ बनीं पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर, कितनी मिलेगी सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ Bhawana Kanth: भारतीय वायुसेना IAF की जांबाज अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. बिहार की बेटी भावना कंठ देश की पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर बन गई हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रतिष्ठित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट TACDE से इस बेहद कठिन और प्रतिष्ठित कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया है. इस बड़ी कामयाबी के बाद से ही हर तरफ उनकी चर्चा हो रही है और लोग यह जानने के लिए उतावले हैं कि इस नए और बड़े पद पर उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी.&amp;nbsp;
भावना कंठ के बारे में जानिए
स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ मुख्य रूप से बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली हैं. उनका जन्म बरौनी में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी बरौनी रिफाइनरी के डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई. स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद वह इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा चली गईं. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री ली. पढ़ाई पूरी करने के बाद भावना ने टीसीएस कंपनी में नौकरी शुरू की. बाद में उनका सेलेक्शन भारतीय वायु सेना में हो गया, जहां से उन्होंने एक फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया.&amp;nbsp;
कितनी मिलेगी सैलरी
भावना कंठ को 7वें वेतन आयोग नियमों के अनुसार, फाइटर कॉम्बैट लीडर रैंक पर हर महीने लगभग 1.55 लाख से 1.90 लाख रुपये की इन-हैंड सैलरी मिलेगी. इसमें 69,400 रुपये मूल वेतन के साथ मिलिट्री सर्विस पे, फ्लाइंग अलाउंस और महंगाई भत्ता जैसे कई विशेष भत्ते शामिल हैं. इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास और मुफ्त मेडिकल जैसी बेहतरीन सुविधाएं भी मिलती हैं.&amp;nbsp;
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क्या होता है फाइटर कॉम्बैट लीडर?
वायुसेना का फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स बहुत ही मुश्किल माना जाता है. इसकी तुलना दुनिया की सबसे कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग में से एक, अमेरिका के मशहूर &amp;nbsp;टॉप गन प्रोग्राम से की जाती है. इस कोर्स के लिए भारतीय वायुसेना के सिर्फ टॉप 1% सबसे अनुभवी फाइटर पायलट्स को ही शॉर्टलिस्ट किया जाता है, और कड़ी परीक्षा के कारण इनमें से भी कई लोग इसे पूरा नहीं कर पाते. भावना कंठ ने 20 हफ्तों की इस बेहद कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह बड़ी कामयाबी हासिल की है.&amp;nbsp;
इस कोर्स को पास करने के बाद भावना कंठ अब सिर्फ एक सामान्य पायलट नहीं रही हैं, बल्कि वे युद्ध के मैदान में एक मास्टरमाइंड और लीडर का रोल निभाएंगी. इसका मतलब यह है कि जंग के समय वे हवा में लड़ाकू विमानों के पूरे ग्रुप को लीड करेंगी. मिशन की पूरी प्लानिंग करना और यह तय करना कि किस हथियार का इस्तेमाल कब, कहां और कैसे करना है. ये सभी अहम जिम्मेदारियां अब उन्हीं के हाथों में होंगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bhawana, Kanth:, IAF, की, भावना, कंठ, बनीं, पहली, महिला, फाइटर, कॉम्बैट, लीडर, कितनी, मिलेगी, सैलरी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>महाराष्ट्र 12वीं बोर्ड परीक्षा 2027 के लिए आवेदन शुरू, 31 अक्टूबर तक आवेदन का मौका </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महाराष्ट्र-12वीं-बोर्ड-परीक्षा-2027-के-लिए-आवेदन-शुरू-31-अक्टूबर-तक-आवेदन-का-मौका</link>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन (MSBSHSE) ने HSC फरवरी-मार्च 2027 बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. नियमित कक्षा 12वीं के छात्र SARAL सिस्टम के माध्यम से परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं. इसके लिए पिछले शैक्षणिक वर्ष में जनरेट किए गए पीएफएन-आईडी का इस्तेमाल करना होगा.&amp;nbsp;
किन छात्रों के लिए आवेदन की सुविधा?&amp;nbsp;
महाराष्ट्र एचएससी 2027 की आवेदन प्रक्रिया में नियमित छात्रों के साथ-साथ अन्य एलिजिबल छात्र भी शामिल है. इसके तहत नियमित कक्षा 12वीं के छात्रों के अलावा रिपीटर स्टूडेंट, एनरोलमेंट सर्टिफिकेट रखने वाली प्राइवेट उम्मीदवार, एलिजिबल वोकेशनल छात्र और दूसरे निर्धारित कैटेगरी की उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. नियमित छात्रों की जानकारी परीक्षा फॉर्म भरते समय बोर्ड की ओर से FYJC ऑनलाइन सिस्टम से ली जाएगी. वहीं MCVC और आईटीआई स्ट्रीम के ऐसे छात्रों की जानकारी एफवाईजेसी सिस्टम पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें संबंधित डिविजनल बोर्ड को अपनी जानकारी देनी होगी. जिन छात्रों के पास अपार आईडी है, उन्हें आवेदन फॉर्म भरते समय इसे भी दर्ज करने के लिए कहा गया है.&amp;nbsp;
31 अक्टूबर के बाद भी आवेदन का मौका&amp;nbsp;
महाराष्ट्र बोर्ड ने आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त से शुरू की है और 31 अक्टूबर तक बिना लेट फीस के आवेदन कर सकते हैं. वहीं बोर्ड की ओर जारी समय सीमा के बाद आवेदन करने वाले छात्रों के लिए भी मौका दिया गया है, लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी होगी. छात्र 1 नवंबर से 15 नवंबर 2026 तक लेट फीस के साथ आवेदन कर सकेंगे. इसके बाद भी आवेदन नहीं करने वाले छात्रों को 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक अतिरिक्त लेट फीस के साथ फॉर्म जमा करने का एक और अवसर मिलेगा.&amp;nbsp;
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फोटो अपलोड करते समय इन बातों का रखें ध्यान
एचएससी 2027 के आवेदन फाॅर्म में छात्रों को हाल की रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी होगी. बोर्ड ने फोटो के लिए कुछ जरूरी शर्तें निर्धारित की है, जैसे फोटो जेपीजी फॉर्मेट में होने चाहिए. फोटो का साइज 25 केबी से 40 केबी के बीच होना चाहिए, फोटो पिछले 6 महीने के अंदर खींची हुई होनी चाहिए, फोटो में छात्र का चेहरा साफ दिखाई देना चाहिए, दोनों आंखें और कान स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए, बोर्ड ने छात्रों से कहा है कि फोटो निर्धारित बैकग्राउंड अपीरियंस और इमेज क्वालिटी से जुड़ी शर्तों के अनुसार ही अपलोड करें.&amp;nbsp;
छात्रों के लिए जरूरी सलाह&amp;nbsp;
माध्यमिक कक्षा 12वीं के छात्रों को SARAL सिस्टम पर आवेदन करते समय पिछले शैक्षणिक वर्ष में जारी पीएफएन-आईडी का इस्तेमाल करना होगा. आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद छात्रों को फॉर्म में दर्ज जानकारी की जांच कर उसे यह सबमिट करना होगा.
ये भी पढ़ें-स्कूल में खाने को लेकर FSSAI का प्रस्ताव, नमक-चीनी की मात्रा होगी तय&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>महाराष्ट्र, 12वीं, बोर्ड, परीक्षा, 2027, के, लिए, आवेदन, शुरू, अक्टूबर, तक, आवेदन, का, मौका </media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>UGC NET री&amp;एग्जाम पर पूरी जानकारी, जानें परीक्षा जुड़े हर सवाल का जवाब </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ugc-net-री-एग्जाम-पर-पूरी-जानकारी-जानें-परीक्षा-जुड़े-हर-सवाल-का-जवाब</link>
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        <description><![CDATA[ UGC NET Re Exam F&amp;amp;Q: यूजीसी नेट जून 2026 की आंसर की जारी होने के बाद इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपर में गड़बड़ियां सामने आई. इसके बाद अब एनटीए ने यूजीसी नेट जून 2026 के तीनों विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की परीक्षा दोबारा करने का फैसला लिया है. इन विषयों के प्रश्न पत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधित गलतियां मिलने के बाद जांच के लिए समिति बनाई गई थी. समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनटीए ने तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा करने का निर्णय लिया.
एनटीए की ओर से री-एग्जाम सितंबर में होगा और प्रभावित उम्मीदवार से इसके लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी. ऐसे में उम्मीदवारों के मन में एग्जाम की तारीख, फीस, एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और रिजल्ट को लेकर कई सवाल हैं, तो चलिए आज हम आपको यूजीसी नेट एग्जाम से जुड़े हर सवाल का जवाब बताते हैं.
कब होगी UGC NET की दोबारा परीक्षा?
यूजीसी नेट के तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी. इंग्लिश की परीक्षा 9 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगी. वहीं कॉमर्स का पेपर 9 सितंबर को दूसरी शिफ्ट में दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगा. सोशियोलॉजी की परीक्षा अगले दिन 10 सितंबर को पहली शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी.&amp;nbsp;
किन उम्मीदवारों को फिर से परीक्षा देनी होगी?
एनटीए की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, री-एग्जाम सिर्फ इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के उम्मीदवारों के लिए होगा. इन तीनों विषयों के प्रश्न पत्र में कई तरह की खामियां पाए जाने के बाद एनटीए ने परीक्षा दोबारा करने का फैसला लिया.&amp;nbsp;
आखिर परीक्षा दोबारा कराने की जरूरत क्यों पड़ी?
एनटीए को इन तीनों विषयों के प्रश्न पत्र को लेकर कई शिकायत मिली थी. इसके बाद एजेंसी ने एक समिति गठित कर शिकायतों की जांच कराई. समिति ने पाया कि प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी गलतियां थी. इसके अलावा प्रमुख विद्वानों के नाम की गलत स्पेलिंग, किताबों के अस्पष्ट नाम, सवालों की भाषा में गलतियां, व्याकरण, लिंग-वचन और विराम चिह्न से जुड़ी गलतियां सामने आईं. समिति ने यह भी पाया कि पहले पूछे जा चुके कई सवाल दोबारा पूछे गए थे. ऐसे में समिति ने निष्पक्ष और त्रुटि रहित परीक्षा के लिए इन तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा करने की सिफारिश की. वहीं परीक्षा को लेकर एनटीए ने कहा कि प्रश्नपत्रों की कमियों को केवल कुछ सवाल हटाकर ठीक करना संभव नहीं था, इसलिए दोबारा परीक्षा करने का फैसला लिया गया.
क्या उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा के लिए फीस देनी होगी?
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों से कोई फीस नहीं ली जाएगी. इन तीनों विषयों के प्रभावित उम्मीदवार बिना किसी अतिरिक्त फीस के परीक्षा में शामिल हो सकेंगे.&amp;nbsp;
क्या री-एग्जाम के लिए नया फॉर्म भरना होगा?
यूजीसी नेट री-एग्जाम के लिए कोई नया आवेदन फॉर्म नहीं भरना होगा. यह दोबारा परीक्षाओं केवल उन्होंने पुराने रजिस्टर्ड उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जा रही है, जिन्होंने पहले से इसके लिए आवेदन किया था.&amp;nbsp;
एडमिट कार्ड कब मिलेगा?
यूजीसी नेट के तीनों विषयों के एग्जाम को लेकर एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख अभी एनटीए ने घोषित नहीं की है, लेकिन उम्मीद लगाई जा रही है कि एडमिट कार्ड परीक्षा से 3 से 4 दिन पहले यूजीसी नेट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी किया जाएगा.&amp;nbsp;
क्या पुराना एडमिट कार्ड चलेगा?
एनटीए के अनुसार एग्जाम के लिए परीक्षा शहर, केंद्र और एडमिट कार्ड की जानकारी बाद में दी जाएगी. इसके अनुसार री-एग्जाम के लिए पूराना एडमिट कार्ड &amp;nbsp;नहीं चलेगा. कैंडिडेट्स को सलाह दी गई है कि वह यूजीसी नेट की ऑफिशियल वेबसाइट चेक करते रहे. क्योंकि वेबसाइट पर एडमिट कार्ड जारी होने के बाद कैंडिडेट्स को इसमें परीक्षा की तारीख, समय और केंद्र की जानकारी जान सकेंगे.&amp;nbsp;
इस बार एग्जाम सेंटर कैसे तय होगा?
यूजीसी नेट परीक्षा केंद्र और शहर की जानकारी एनटीए की ओर से कैंडिडेट्स के फॉर्म में भरी गई पसंद, उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर दी जाती है. वहीं री-एग्जाम को लेकर सेंटर कैसे तय होगा, इसकी अभी तक एनटीए ने कोई जानकारी नहीं दी है.&amp;nbsp;
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क्या पुराना परीक्षा केंद्र ही मिलेगा?
पुराने परीक्षा केंद्र मिलने को लेकर भी एनटीए की तरफ से अभी तक साफ-साफ जानकारी नहीं दी गई है. एनटीए ने केवल इतना बताया है कि टेस्ट सिटी और एग्जाम सेंटर से जुड़ी आगे की जानकारी अलग से जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
क्या बाकी विषयों का रिजल्ट प्रभावित होगा?
नहीं बाकी 84 विषयों की परीक्षा प्रक्रिया जारी रहेगी और उनका रिजल्ट तय कार्यक्रम के अनुसार घोषित किया जाएगा. एनटीए ने कहा है कि इन तीन विषयों की दोबारा परीक्षा के कारण 84 दूसरे विषयों के रिजल्ट में देरी नहीं होगी. इन विषयों के लिए जेआरएफ सीटों का आवंटन और असिस्टेंट प्रोफेसर तथा पीएचडी के लिए पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी.&amp;nbsp;
क्या परीक्षा की शिफ्ट भी बदलेगी&amp;nbsp;
एनटीए के अनुसार री-एग्जाम को लेकर अंग्रेजी की परीक्षा 9 सितंबर को शिफ्ट 1 में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी. वहीं कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर को शिफ्ट 2 में दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक होगी. इसके अलावा सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर को शिफ्ट 1 में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित की जाएगी.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, री-एग्जाम, पर, पूरी, जानकारी, जानें, परीक्षा, जुड़े, हर, सवाल, का, जवाब </media:keywords>
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        <title>NSP Scholarship 2026: स्कॉलरशिप के लिए NSP पर आवेदन शुरू, 31 अक्टूबर तक करें अप्लाई  </title>
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        <description><![CDATA[ NSP Scholarship 2026: नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल &amp;nbsp;के जरिए 2026-27 के लिए अलग-अलग छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैं. एलिजिबल छात्र अपनी योग्यता के अनुसार नई स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं. साथ ही पुराने छात्र पहले से मिल रही छात्रवृत्ति को रिन्यू करा सकते हैं. ज्यादातर पोस्ट, मैट्रिक और हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप के लिए आवेदन के अंतिम तारीख 31 अक्टूबर है. एनएसपी के जरिए प्री-मैट्रिक से लेकर पोस्ट-मैट्रिक, ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रैजुएट, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स और पीएचडी तक के पात्र छात्रों के लिए अलग-अलग योजना उपलब्ध है.&amp;nbsp;
पहले करना होगा वन टाइम रजिस्ट्रेशन
एनएसपी पर स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले छात्रों को वन टाइम रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा. इसके लिए आधार और चालू मोबाइल नंबर की जरूरत होगी. आधार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आधार एनरोलमेंट आईडी के जरिए भी ओटीआर किया जा सकता है. ओटीआर के लिए किसी तरह की फीस नहीं देनी होगी. ओटीआर पूरा होने के बाद छात्र पोर्टल पर लॉगिन कर अपनी पर्सनल, एजुकेशनल और बैंक से जुड़ी जानकारी भर सकते हैं. इसके बाद संबंधित स्कॉलरशिप योजना का चयन करके जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे और आवेदन सबमिट करना होगा.&amp;nbsp;
इन कक्षाओं और कोर्स के लिए कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
एनएसपी पर स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन के तक के छात्रों के लिए अलग-अलग स्कॉलरशिप की योजना है. 10वीं तक पढ़ने वाले छात्र प्री मैट्रिक और 11वीं-12वीं की पढ़ाई करने वाले छात्र पोस्ट-मैट्रिक के लिए पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं. ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन के अलग-अलग कोर्स के छात्रों के लिए भी योजना उपलब्ध है. इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड, बीटेक, बीएससी, एलएलबी, बीबीए के साथ एमए, एमएससी, एमबीए, एमकोम, एमबीए, एमसीए, एमटेक, एलएलएम और एमएड जैसे कोर्स शामिल है. डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और पीएचडी कर रहे एलिजिबल स्टूडेंट भी संबंधित योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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आवेदन के लिए से डॉक्यूमेंट जरूरी&amp;nbsp;
फॉर्म भरने से पहले छात्रों को अपनी मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और आधार कार्ड समेत जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखने होंगे. पहली बार आवेदन करने वाले छात्रों से बोनाफाइड सर्टिफिकेट भी मांगा जा सकता है. स्कॉलरशिप की राशि बैंक खाते में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर की जाती है. इसके लिए छात्र का बैंक अकाउंट आधार से लिंक और एनपीसीआई में मैप होना चाहिए&amp;nbsp;
31 अक्टूबर तक आवेदन का मौका&amp;nbsp;
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एनएसपी पोर्टल 1 जून 2026 को खोला गया था. ज्यादातर पोस्ट मैट्रिक और हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर है. प्री-मैट्रिक्स स्कॉलरशिप के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 निश्चित है. आवेदन के बाद संस्थान स्तर पर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक और जिला-राज्य स्तर पर सत्यापन 30 नवंबर 2026 तक किया जाना है.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्कूल में खाने को लेकर FSSAI का प्रस्ताव, नमक&amp;चीनी की मात्रा होगी तय </title>
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        <description><![CDATA[ 


School Mid Day Meal: स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाने को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत स्कूलों में मिड-डे-मील में एडेड फैट, एडेड शुगर और नमक की मात्रा तय करने के लिए निश्चित सीमा निर्धारित की जाएगी. FSSAI ने इसके लिए खाद्य पदार्थों को उनकी पोषण सामग्री के आधार पर वर्गीकृत करने का प्रस्ताव दिया है. 
FSSAI ने इसे लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशन 2020 के संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है. नए प्रावधान के जरिए यह तय किया जाएगा कि किस खाद्य पदार्थ को एडेड फैट, एडेड शुगर या सोडियम की ज्यादा मात्रा वाला आ जाएगा.&amp;nbsp;



ICMR की गाइडलाइन के आधार पर सीमा&amp;nbsp;
प्रस्तावित संशोधन में खाद्य पदार्थ के लिए तय की जाने वाली सीमा इंडियन काउंसलिंग ऑफ मेडिकल रिसर्च की डाइटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियन्स 2024 को आधार बनाकर निर्धारित की गई है. इसके तहत ठोस और तरल पदार्थ के लिए अलग मानक रखे गए हैं.&amp;nbsp;
खाने में फैट की मात्रा की सीमा&amp;nbsp;
प्रस्ताव के अनुसार, अगर किसी ठोस खाद्य पद्धति में 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से ज्यादा एडेड फैट है, तो उस हाई एडेड फैट वाला खाद्य पदार्थ माना जाएगा. वहीं तरल पदार्थों के लिए यह सीमा 100 मिलीलीटर में 1.5 ग्राम से ज्यादा एडेड फैट रखी गई है.&amp;nbsp;
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चीनी और नमक की मात्रा भी होगी तय&amp;nbsp;
एडेड शुगर को लेकर भी अलग सीमा प्रस्तावित की गई है. ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम में 3 ग्राम से ज्यादा एडेड शुगर होने पर उसे हाई एडेड शुगर वाली कैटेगरी में रखा जाएगा. वहीं तरल उत्पादों के लिए यह सीमा 100 मिलीलीटर में 2 ग्राम से ज्यादा होगी. प्रस्ताव में नमक की मात्रा को लेकर भी मानक तय किया गया है. ठोस खाद्य पदार्थों में 100 ग्राम में 0.625 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर उसे हाई सोडियम वाले खाद्य पदार्थ की कैटेगरी में रखा जाएगा. तरल खाद्य पदार्थों के लिए सीमा 100 मिलीलीटर में 0.175 ग्राम से ज्यादा नमक प्रस्तावित की गई है.&amp;nbsp;
स्कूलों में लागू होंगे नए मानक&amp;nbsp;
FSSAI के प्रस्ताव में इन मांगों को स्कूल में बच्चों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले मिड डे मील से जुड़े नियमों में शामिल करने की बात कही है. इसके लिए मौजूदा नियमों में एक नया प्रावधान जोड़ा जाएगा. यह प्रावधान स्कूलों में मॉनिटरिंग और सर्विलांस से संबंधित मौजूदा नियम के बाद जोड़े जाने का प्रस्ताव है.&amp;nbsp;
लोगों से मांगे गए सुझाव&amp;nbsp;
मिड डे मिल प्रस्तावित संशोधन को आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे है. नोटिफिकेशन जारी किए जाने की तारीख से 60 दिनों के अंदर सुझाव और आपत्तियां भेजे जा सकते हैं. प्राधिकरण ने कहा है कि तय समय के अंदर प्राप्त सुझाव और आपत्ति पर विचार करने के बाद ही नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्कूल, में, खाने, को, लेकर, FSSAI, का, प्रस्ताव, नमक-चीनी, की, मात्रा, होगी, तय </media:keywords>
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        <title>एमपी हाईकोर्ट में सरकारी नौकरी का मौका, 1174 पदों पर होगी सीधी भर्ती</title>
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        <description><![CDATA[ MP High Court Vacancy: मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट में नौकरी करने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी खबर आई है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायालय में असिस्टेंट ग्रेड-3 के 1174 पदों पर सीधी भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दी है. इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू होगी. योग्य उम्मीदवार हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 शाम 5:00 बजे तक निर्धारित की गई है. इस भर्ती के लिए चयन ऑनलाइन प्रारंभिक परीक्षा और हिंदी टाइपिंग स्किल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा.
एमपी हाई कोर्ट में इन पदों पर भर्ती
एमपी हाई कोर्ट की ओर से असिस्टेंट ग्रेड-3 के कुल 1174 पद घोषित किए गए हैं. इसमें 314 पद जनरल कैटेगरी के, 181 पद एससी के, 236 पद एसटी के, 325 पर ओबीसी और 118 पद ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए है. यह भर्ती मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिला एवं सत्र न्यायालय के प्रतिष्ठानों में की जाएगी.&amp;nbsp;
आवेदन से जुड़ी जरूरी तारीख&amp;nbsp;
असिस्टेंट ग्रेड-3 भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 17 अगस्त यानी आज दोपहर 12 बजे से शुरू हो रहे हैं. उम्मीदवार 15 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन में सुधार के लिए विंडो 19 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक खुली रहेगी. ऑनलाइन प्रारंभिक परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है.&amp;nbsp;
आवेदन के लिए जरूरी योग्यताएं&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ कंप्यूटर संबंधी योग्यता पर अनिवार्य है. उम्मीदवार के पास एमएपी-आईटी मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त एजेंसी का वैध सीपीसीटी स्कोर कार्ड होना चाहिए. इसके अलावा एक वर्षीय कंप्यूटर एप्लीकेशन डिप्लोमा, सरकारी आईटीआई से सीओपीए या मान्य कंप्यूटर संबंधी उच्च योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी एलिजिबल हो सकते हैं. बीसीए, एमसीए, बीई-बीटेक, एमएससी, एमई-एमटेक और और संबंधित कंप्यूटर डिप्लोमा जैसी योग्यता भी एक्सेप्ट की गई है.&amp;nbsp;
आयु सीमा और आवेदन&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु की गणना &amp;nbsp;1 जनवरी 2026 के आधार पर की जाएगी. न्यूनतम उम्र 18 वर्ष की गई है. सामान्य वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों और मध्य प्रदेश से बाहर के रहने वाले वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 40 वर्ष है. एलिजिबल आरक्षित वर्ग, महिला, दिव्यांग उम्मीदवारों और कुछ निर्धारित सरकारी कर्मचारियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष तक की गई है. इसके अलावा अनारक्षित वर्ग और मध्य प्रदेश के बाहर के उम्मीदवारों को परीक्षा शुल्क 200 के साथ 743.40 रुपये अन्य शुल्क के रूप में देने होंगे, यानी इन उम्मीदवारों के लिए कुल फीस 943.40 रुपये हैं. वहीं मध्य प्रदेश के मूल निवासी ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों तथा सभी दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए परीक्षा फीस शून्य है. इन उम्मीदवारों को केवल 743.40 रुपये अन्य शुल्क के रूप में देने होंगे.&amp;nbsp;
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क्या होगी चयन प्रक्रिया?
असिस्टेंट ग्रेड-3 पदों पर उम्मीदवारों का चयन 2 चरणों में होगा. सबसे पहले ऑनलाइन प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी. इसमें सफल उम्मीदवार को हिंदी टाइपिंग स्किल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन और दूसरी औपचारिकताएं पूरी की जाएगी. आपको बता दें कि प्रारंभिक परीक्षा में कुल 100 बहुविकल्पी प्रश्न होंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा. परीक्षा के लिए दो घंटे का समय दिया जाएगा. इसमें सामान्य ज्ञान, सामान्य अध्ययन, गणित एवं तार्किक तर्क, सामान्य हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर ज्ञान से भी प्रश्न पूछे जाएंगे. उम्मीदवारों को हिंदी टाइपिंग स्किल टेस्ट देना होगा. टाइपिंग टेस्ट 50 अंकों का होगा, इसमें लगभग 350 शब्द टाइप करने होंगे और इसके लिए 10 मिनट का समय दिया जाएगा.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन?

उम्मीदवारों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से अधिकारिक वेबसाइट mphc.gov.inपर जाना होगा.&amp;nbsp;
यहां रिक्रूटमेंट-रिजल्ट सेक्शन में असिस्टेंट ग्रेड 3 भर्ती का लिंक चुने.&amp;nbsp;
इसके बाद रजिस्ट्रेशन कर आवेदन फॉर्म में जरूरी जानकारी दर्ज करें.&amp;nbsp;
अब आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करें और निर्धारित फीस का पेमेंट करके फॉर्म सबमिट कर दें.&amp;nbsp;
आवेदन पूरा होने के बाद फॉर्म और फीस रशीद को डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें-NIOT Recruitment 2026 : 10वीं पास और ITI वालों को मिल रही नौकरी, NIOT में निकली ग्रेड-ए की भर्ती ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>UGC NET की गड़बड़ियों पर NTA सख्त, पेपर से प्रिंटिंग तक होगी समीक्षा </title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET 2026: यूजीसी नेट के तीन विषयों के पेपर रद्द होने के बाद अब एनटीए ने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी है. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने पेपर तैयार करने से लेकर मॉडरेशन, अनुवाद और प्रिंटिंग से जुड़ी अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि आगे गलतियां न हो. साथ ही जिन स्तराें पर लापरवाही हुई है, उनकी जिम्मेदारी भी तय करने की बात कही गई है.
आपको बता दें कि यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा 22 से 30 जून के बीच 87 विषयों में आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्न पत्रों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से कई शिकायत के सामने आई. जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने तीनों पेपर में कई तरह की खामियां पाई, जिसके बाद एनटीए ने तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा करने का फैसला किया है.&amp;nbsp;
पेपर तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग तक समीक्षा&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, एनटीए प्रश्न पत्र तैयार करने और उसकी मॉडरेशन प्रक्रिया, अनुवाद और प्रिंटिंग से जुड़े पूरे सिस्टम के समीक्षा कर रहा है. इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा निष्पक्ष बनाना है. सूत्रों के अनुसार, जिन स्तरों पर लापरवाही सामने आई है, वहां जिम्मेदारी तय करने के लिए भी कार्रवाई की जाएगी. यानी सिर्फ परीक्षा दोबारा कराने तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेपर तैयार होने की पूरी प्रक्रिया में कहां कमी रह गई, इसकी भी समीक्षा की जा रही है.&amp;nbsp;
एनटीए अधिकारी ने कहा सफाई बहुत जरूरी
यूजीसी नेट के तीन पेपर रद्द किए जाने के बाद जब यह सवाल उठा की एनटीए में बार-बार इस तरह की गड़बड़ियां क्यों सामने आ रही है. इसे लेकर एनटीए के एक अधिकारी ने कहा कि एनटीए में इस समय सफाई बहुत जरूरी है. एनडीए अधिकारी के अनुसार जिस तरह दिवाली की सफाई की जाती है, उसी तरह एनटीए में भी सफाई की जारी है. एनटीए के अधिकारियों के अनुसार, यूजीसी नेट के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपर में कई गलती और गड़बड़ियों की शिकायत मिली थी. इन शिकायतों की जांच के लिए NTA ने एक कमेटी बनाई. कमेटी ने तीनों विषयों के पेपर में गड़बड़ियां पाई. जांच में कमेटी ने यह भी पाया कि पिछले एग्जाम में पूछे जा चुके कई सवाल दोबारा प्रश्न पत्र में शामिल किए गए. इन सभी कमियों को देखते हुए कमेटी ने परीक्षा के तीनों विषयों का पेपर दोबारा कराने की सिफारिश की.&amp;nbsp;
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परीक्षा में पूछे गए 24,700 से ज्यादा सवाल&amp;nbsp;
एनटीए ने UGC NET, CSIR NET और ICAR से जुड़ी परीक्षा कुल 184 विषयों में आयोजित की थी. इन परीक्षाओं में करीब 24,700 अलग-अलग सवाल पूछे गए. उनके लिए 10 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि 8 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे. वहीं यूजीसी नेट की बात करें तो यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा 22 से 30 जून के बीच 87 विषयों में आयोजित हुई थी. इनमें से 84 विषयों की आंसर की जारी की जा चुकी है. अब तीन विषयों के री-एग्जाम &amp;nbsp;साथ एनटीए का फोकस प्रक्रिया में सामने आई कमियों को दूर करने पर हैं. इसके अलावा &amp;nbsp;एनटीए के अनुसार यूजीसी नेट के 84 विषयों, &amp;nbsp;CSIR NET के सभी पांच विषयों और ICAR के 92 विषयों के पेपर में कोई बड़ी समस्या नहीं मिली. जिसके बाद उनकी आंसर की भी जारी कर दी गई है.&amp;nbsp;
रि-एग्जाम से नहीं होगी सीटों की संख्या कम&amp;nbsp;
तीनों प्रभावित विषयों के उम्मीदवारों के लिए भी एनटीए ने स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के कारण क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवारों की संख्या या इन विषयों में सीटों के आवंटन में कमी नहीं की जाएगी. JRF असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी.
ये भी पढ़ें-NSP Scholarship 2026: स्कॉलरशिप के लिए NSP पर आवेदन शुरू, 31 अक्टूबर तक करें अप्लाई &amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>UGC NET Answer Key 2026 : CSIR UGC NET की आंसर की जारी, फटाफट करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET Answer Key 2026 : UGC NET जून 2026 परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जरूरी अपडेट सामने आ गया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है. अब परीक्षा दे चुके उम्मीदवार अपने जवाबों का मिलान आंसर की से कर सकते हैं और संभावित स्कोर का अंदाजा लगा सकते हैं.
NTA ने जून सत्र के लिए 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर की जारी की है. इसके साथ ही उम्मीदवारों को आंसर की पर ऑब्जेक्शन फाइल कराने का मौका भी दिया गया है. ऐसे में अगर आपको किसी आंसर में गलती लगती है, तो तय समय के अंदर ऑब्जेक्शन दर्ज कराया जा सकता है.&amp;nbsp;
UGC NET Answer Key 2026 हुई जारी
NTA ने अपनी आधिकारिक UGC NET वेबसाइट पर जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की उपलब्ध करा दी है. जून सत्र में परीक्षा देने वाले उम्मीदवार वेबसाइट पर जाकर अपनी आंसर की देख सकते हैं. इससे उम्मीदवार अपने दिए गए आंसर को आधिकारिक आंसर से मिलाकर संभावित नंबरों की गणना कर सकेंगे. इस साल UGC NET परीक्षा में कुल 87 विषय शामिल हैं. वहीं उपलब्ध जानकारी के अनुसार 84 विषयों के लिए प्रोविजनल आंसर की जारी की गई है.
कब तक दर्ज करा सकते हैं ऑबजेक्शन?
NTA ने प्रोविजनल आंसर की पर ऑब्जेक्शन फाइल कराने के लिए 16 अगस्त से 18 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक का समय दिया है. अगर किसी उम्मीदवार को किसी आंंसर पर ऑब्जेक्शन है, तो वह ऑनलाइन माध्यम से उसे चुनौती दे सकता है. हर प्रश्न पर ऑबजेक्शन दर्ज कराने के लिए 200 रुपये शुल्क देना होगा. यह शुल्क नॉन-रिफंडेबल है. हालांकि विषय विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद अगर उम्मीदवार का ऑब्जेक्शन सही पाया जाता है, तो संबंधित प्रश्न के लिए जमा किया गया शुल्क वापस कर दिया जाएगा.
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UGC NET Answer Key ऐसे करें डाउनलोड
1. आंसर की डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले UGC NET की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic पर जाना होगा.
2. इसके बाद होमपेज पर दिए गए UGC NET Answer Key 2026 डाउनलोड लिंक पर क्लिक करना होगा.
3. नया पेज खुलने पर उम्मीदवार को अपना एप्लीकेशन नंबर, जन्म तिथि और सिक्योरिटी कोड दर्ज करना होगा.
4. जानकारी सबमिट करने के बाद स्क्रीन पर प्रोविजनल आंसर की दिखाई देगी. उम्मीदवार इसे डाउनलोड कर सकते हैं और आगे के लिए इसका प्रिंटआउट भी रख सकते हैं.
ऐसे कैलकुलेट करें अपना संभावित स्कोर
उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की की मदद से अपने संभावित नंबर भी निकाल सकते हैं. UGC NET में हर सही आंसर के लिए 2 नंबर दिए जाते हैं और परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं है. हालांकि उम्मीदवारों की ओर से दर्ज कराई गई ऑबजेक्शन की समीक्षा के बाद लास्ट आंसर की में बदलाव हो सकता है. रिजल्ट लास्ट आंसर की के आधार पर तैयार किया जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, Answer, Key, 2026, CSIR, UGC, NET, की, आंसर, की, जारी, फटाफट, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>BPSC Exam Calendar 2026 : BPSC ने जारी किया नया एग्जाम कैलेंडर, 25 अक्टूबर को 72वीं CCE परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ BPSC Exam Calendar 2026 : बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा की तारीखों को लेकर तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अपडेटेड एग्जाम कैलेंडर जारी किया है. लंबे समय से 72 वीं BPSC परीक्षा की नई तारीख का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को अब राहत मिली है.
नए कैलेंडर के मुताबिक 72वीं BPSC CCE की प्रारंभिक परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी. इससे पहले यह परीक्षा 26 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया था. आयोग ने कैलेंडर में कई अन्य भर्ती परीक्षाओं के रिजल्ट, परीक्षा और इंटरव्यू से जुड़ी तारीखें भी दी हैं.&amp;nbsp;
72वीं BPSC CCE की नई तारीख तय
72वीं BPSC Combined Competitive Examination यानी CCE के लिए कुल 1189 पद हैं. आयोग के नए कैलेंडर में इसकी प्रारंभिक परीक्षा की तारीख 25 अक्टूबर 2026 तय की गई है. पहले यह परीक्षा 26 जुलाई को होने वाली थी, लेकिन परीक्षा स्थगित होने के बाद स्टूडेंट्स नई तारीख का इंतजार कर रहे थे. अब नई तारीख सामने आने के बाद उम्मीदवार अपनी तैयारी को नए शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ा सकते हैं.
71वीं BPSC को लेकर भी अपडेट
नए कैलेंडर में 71वीं BPSC CCE से जुड़ी जानकारी भी दी गई है. इसके तहत 71वीं CCE की मुख्य परीक्षा अगस्त-सितंबर 2026 में प्रस्तावित है. इस भर्ती के जरिए कुल 1,298 पदों पर नियुक्ति होनी है. वहीं District Statistical Officer और Assistant Director भर्ती का इंटरव्यू सितंबर 2026 में प्रस्तावित है. Auditor, Panchayati Raj Department के 102 पदों और Research Officer, Revenue Department के 3 पदों की प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट अगस्त 2026 में आने की संभावना है. Prosecution Officer के 300 पदों का प्रारंभिक परीक्षा परिणाम सितंबर 2026 में प्रस्तावित है.
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4 अक्टूबर को होगी Project Manager परीक्षा
72वीं CCE के अलावा Industry Department में Project Manager के 9 पदों के लिए भी परीक्षा की तारीख घोषित की गई है. इस भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी. इसके अलावा कैलेंडर में 33वीं Bihar Judicial Services के 173 पदों की प्रारंभिक परीक्षा 30 मई 2026 और Lower Division Clerk के 26 पदों का टाइपिंग टेस्ट जनवरी 2026 में होने की जानकारी दी गई है.
सभी तारीखें हैं संभावित
BPSC ने साफ किया है कि जारी किए गए कैलेंडर में दी गई तारीखें संभावित हैं. जरूरत पड़ने पर किसी परीक्षा, रिजल्ट या इंटरव्यू की तारीख में बदलाव किया जा सकता है. इसलिए उम्मीदवारों को BPSC की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. नए कैलेंडर से 72वीं BPSC CCE की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए अपनी रणनीति और टाइम टेबल तय करने में मदद मिलेगी. वहीं दूसरी परीक्षाओं में शामिल स्टूडेंट्स को रिजल्ट और आगे की प्रक्रिया को लेकर भी अपडेट मिल गया है.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BPSC, Exam, Calendar, 2026, BPSC, ने, जारी, किया, नया, एग्जाम, कैलेंडर, अक्टूबर, को, 72वीं, CCE, परीक्षा</media:keywords>
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        <title>BTech Demand 2026 : क्या वापस आने वाला है बीटेक का क्रेज? मार्केट में बढ़ रही डिमांड</title>
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        <description><![CDATA[ BTech Demand 2026 : क्या वापस आने वाला है बीटेक का क्रेज? मार्केट में बढ़ रही डिमांड ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI in India: भारत में बढ़ा AI का इस्तेमाल, लेकिन सीखने में कंफ्यूज हैं लोग</title>
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        <description><![CDATA[ AI in India: आज के समय में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. लोग पढ़ाई, नौकरी और रोज के कई कामों में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत से लोग AI सीखना तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि इसकी शुरुआत कहां से करें.
upGrad की एक रिपोर्ट में भारत के करीब 2,100 लोगों से बात की गई. इसमें अलग-अलग शहरों और अलग-अलग काम करने वाले लोगों को शामिल किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, 56 प्रतिशत लोगों ने कहा कि AI सीखने में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उन्हें पता ही नहीं होता कि शुरुआत कहां से करें. वहीं, 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि AI सीखने के लिए बहुत सारे कोर्स मौजूद हैं और यह समझना मुश्किल होता है कि कौन सा कोर्स सही है.
भारत में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में AI का इस्तेमाल अब आम होता जा रहा है. करीब 94 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे किसी न किसी तरह AI का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, 53 प्रतिशत लोग रोज AI का इस्तेमाल करते हैं. खास बात यह है कि AI का इस्तेमाल सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
लोग AI सीखने में भी रुचि दिखा रहे हैं. करीब 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे AI का कोई कोर्स कर रहे हैं या इसे सीखने की तैयारी कर रहे हैं. नौकरी करने वाले अनुभवी लोग भी AI सीखने पर ध्यान दे रहे हैं. आठ साल से ज्यादा काम का अनुभव रखने वाले 62 प्रतिशत लोग रोज AI का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, कम अनुभव वाले लोगों में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत है.
रिपोर्ट से यह भी पता चला कि अनुभवी लोग AI सीखने के लिए ज्यादा समय दे रहे हैं. आठ साल से ज्यादा अनुभव वाले करीब 31 प्रतिशत लोग हर हफ्ते कम से कम तीन घंटे AI सीखने में लगाते हैं.
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AI से लोगों को काम में मिल रहा फायदा
AI का इस्तेमाल करने से लोगों को अपने काम में फायदा भी मिल रहा है. रिपोर्ट में करीब 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि AI की वजह से उन्हें काम में कोई न कोई फायदा हुआ है. इसमें काम को लेकर भरोसा बढ़ना, नई नौकरी मिलना, नई जिम्मेदारी मिलना, प्रमोशन या फ्रीलांस काम मिलना शामिल है. करीब 49 प्रतिशत लोगों ने कहा कि AI की मदद से वे ऐसे काम भी कर पा रहे हैं, जो पहले उनके लिए मुश्किल थे.
हालांकि, अभी ज्यादातर लोग AI का इस्तेमाल केवल आसान कामों के लिए कर रहे हैं. सिर्फ 26 प्रतिशत लोगों ने AI को दूसरे टूल से जोड़कर इस्तेमाल किया है. वहीं, केवल 20 प्रतिशत लोगों ने AI की मदद से कोई ऐसा टूल या सिस्टम बनाया है, जो अपने आप काम कर सके.
AI सीखने में सबसे बड़ी परेशानी क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, AI सीखने की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोगों को शुरुआत का सही तरीका नहीं पता. इसके अलावा, AI में रोज नए बदलाव होते रहते हैं. करीब 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि AI में होने वाले लगातार बदलावों के साथ चलना भी उनके लिए मुश्किल है.
रिपोर्ट से साफ है कि भारत में लोग AI का इस्तेमाल तो तेजी से कर रहे हैं और इसे सीखना भी चाहते हैं. लेकिन उन्हें सही दिशा और आसान तरीके की जरूरत है. आने वाले समय में उन लोगों के लिए ज्यादा मौके हो सकते हैं, जो अपने काम की जानकारी के साथ AI का सही इस्तेमाल करना भी सीख लेते हैं.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>MP NEET UG Merit List 2026 : MP NEET UG मेरिट लिस्ट 2026 जारी, ऐसे चेक करें स्टेट रैंक</title>
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        <description><![CDATA[ MP NEET UG Merit List 2026 : मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने MP NEET UG Merit List 2026 जारी कर दी है. इस मेरिट लिस्ट के आधार पर राज्य कोटे की MBBS और BDS सीटों पर एडमिशन के लिए उम्मीदवार आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे. राज्य कोटे की 85 फीसदी MBBS और BDS सीटों के लिए जारी इस लिस्ट में कुल 17,093 NEET क्वालीफाई उम्मीदवारों को जगह मिली है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों का नाम मेरिट लिस्ट में है, उनके लिए अब काउंसलिंग प्रक्रिया बेहद जरूरी हो गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि MP NEET UG Merit List 2026 में कौन टॉप पर है और कैसे स्टेट रैंक चेक करें.&amp;nbsp;
MP NEET UG Merit List 2026 में कौन टॉप पर?
मेरिट लिस्ट में जबलपुर के आर्यमान सिंह सोलंकी ने स्टेट रैंक 1 हासिल की है. उन्होंने 696 अंक प्राप्त किए और उनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) 46 रही. उनका NEET UG परसेंटाइल 99.9977 है. वहीं सार्थक साहू ने स्टेट रैंक 2 हासिल की है. उन्होंने 680 अंक प्राप्त किए और उनकी AIR 301 रही. उनका परसेंटाइल 99.984199 दर्ज किया गया है. टॉप 10 में सिर्फ एक महिला उम्मीदवार शामिल हैं. हिलोर अजमेरा ने स्टेट रैंक 7 हासिल की है. उनके 655 अंक हैं.
मेरिट लिस्ट में कितने उम्मीदवार शामिल?
MP NEET UG 2026 की राज्य मेरिट लिस्ट में कुल 17,093 NEET क्वालीफाई उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें से 10 उम्मीदवारों ने 648 से ज्यादा अंक हासिल किए हैं, जबकि 34 उम्मीदवारों के अंक 629 से अधिक हैं. वहीं 168 उम्मीदवारों ने 599 से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं. मेरिट लिस्ट में उम्मीदवार का स्टेट रैंक, ऑल इंडिया रैंक, नाम, जेंडर, NEET UG स्कोर और परसेंटाइल जैसी जानकारी दी गई है.
कब तक कर सकेंगे काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन?
संशोधित काउंसलिंग शेड्यूल के अनुसार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 15 अगस्त तक जारी रहेगी. उम्मीदवार 17 अगस्त तक अपनी चॉइस फिलिंग कर सकते हैं. वहीं चॉइस लॉक करने की सुविधा 17 अगस्त को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेगी. राउंड 1 का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 19 अगस्त को जारी किया जाएगा. इसके बाद उम्मीदवारों को 20 अगस्त से 25 अगस्त के बीच रिपोर्टिंग और जॉइनिंग करनी होगी.
NEET UG 2026 की क्वालीफाइंग कटऑफ
2026-27 सत्र के लिए UR/EWS उम्मीदवारों की क्वालीफाइंग कटऑफ 50वें परसेंटाइल पर है, जिसमें 213 से 715 अंक शामिल हैं. OBC/SC/ST के लिए 40वां परसेंटाइल और 177 से 212 अंक हैं. UR/EWS-PwD के लिए 45वां परसेंटाइल और 194 से 212 अंक हैं. OBC-PwD और SC-PwD उम्मीदवारों के लिए 177 से 193 अंक, जबकि ST-PwD के लिए 177 से 191 अंक तय हैं. मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों को तय शेड्यूल के अनुसार काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे राज्य कोटे की MBBS और BDS सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके.
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MP NEET UG Merit List 2026 में कैसे स्टेट रैंक चेक करें
1. MP NEET UG Merit List 2026 में स्टेट रैंक चेक करने के लिए सबसे पहले मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की जारी की गई मेरिट लिस्ट खोलें.
2. इसके बाद लिस्ट में अपना नाम, NEET UG रोल नंबर या अन्य उपलब्ध जानकारी देखें.
3. मेरिट लिस्ट में उम्मीदवार का नाम, स्टेट रैंक, ऑल इंडिया रैंक, जेंडर, NEET UG स्कोर और परसेंटाइल जैसी जानकारी दी गई है.
4. अपने नाम के सामने दी गई State Rank देखकर आप अपनी रैंक आसानी से चेक कर सकते हैं.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - NALSAR Controversy: NALSAR में कैसे मिलता है एडमिशन, यहां कौन-कौन से कोर्स? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IGNOU 1 Year Master&amp;apos;s Degree: 1 साल में MA की डिग्री देगा IGNOU, इन कोर्स में मिल रहा एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ IGNOU 1 Year Master&#039;s Degree: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी यानी IGNOU ने छात्रों के लिए एक बड़ी और खास सुविधा शुरू की है. यूनिवर्सिटी ने अब सिर्फ 1 साल में पूरी होने वाली मास्टर डिग्री के लिए 9 नए कोर्सेज शुरू किए हैं. यह पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी NEP 2020 के तहत लाई गई है, जिसका मकसद छात्रों को पढ़ाई में ज्यादा लचीलापन और तेज रास्ता देना है. खास बात यह है कि यह सुविधा हर किसी के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ उन छात्रों के लिए है जिन्होंने 4 साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम यानी FYUP पूरा किया हो.&amp;nbsp; जिन छात्रों ने सामान्य तरीके से सिर्फ 3 साल की ग्रेजुएशन डिग्री ली है, वे इस 1 साल वाले कोर्स के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे और उन्हें IGNOU के पुराने वाले 2 साल के मास्टर डिग्री कोर्स में ही एडमिशन लेना होगा.&amp;nbsp;
किन-किन कोर्स में मिल रहा है एडमिशन
IGNOU ने जो 9 नए 1 साल के मास्टर डिग्री कोर्स शुरू किए हैं, उनमें MA इकोनॉमिक्स, MA सोशियोलॉजी, MA हिस्ट्री, MCom, MA जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, MA इंग्लिश, MA हिंदी, MA संस्कृत और MA उर्दू शामिल हैं. इन कोर्स में एडमिशन लेने के लिए छात्रों को सबसे पहले अपना आधार कार्ड तैयार रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन के दौरान आधार डिटेल्स की जरूरत पड़ेगी. इन नए कोर्सेज के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 16 अगस्त 2026 रखी गई है, यानी जो भी छात्र इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें जल्द से जल्द आवेदन करना होगा.&amp;nbsp;
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कैसे करें आवेदन
इन कोर्स में एडमिशन लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. सबसे पहले छात्रों को IGNOU के ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल ignouadmission.samarth.edu.in पर जाना होगा. इसके बाद &quot;New Registration&quot; के ऑप्शन पर क्लिक करके अपनी वैलिड ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर डालना होगा. रजिस्ट्रेशन होने के बाद उसी लॉगिन डिटेल्स से साइन इन करके अपनी पसंद का कोर्स और स्टडी सेंटर चुनना होगा. इसके बाद जरूरी पर्सनल, एकेडमिक और कम्युनिकेशन डिटेल्स भरनी होंगी और जरूरी दस्तावेज तय फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे. सारी डिटेल्स भरने के बाद आवेदन फीस जमा करके फॉर्म सबमिट कर दिया जाता है.&amp;nbsp; यह नई सुविधा उन छात्रों के लिए बड़ा फायदा है, जिन्होंने 4 साल की ग्रेजुएशन पूरी की है, क्योंकि अब उन्हें मास्टर डिग्री के लिए 2 साल की जगह सिर्फ 1 साल ही लगेगा, जिससे उनकी पढ़ाई का समय काफी कम हो जाएगा और वे जल्दी नौकरी या आगे की पढ़ाई की तरफ बढ़ सकेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IOCL Executive Recruitment 2026: IOCL में Executive पदों पर बंपर भर्ती, सैलरी 1.60 लाख तक, जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ IOCL Executive Recruitment 2026: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने अपने यहां कई एक्जीक्यूटिव पदों पर भर्ती निकाली है. यह भर्ती नोटिफिकेशन 14 अगस्त 2026 को जारी किया गया है, जिसमें ग्रेजुएट इंजीनियर, ऑफिसर (मार्केटिंग), लॉ ऑफिसर, असिस्टेंट क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर और डिप्लोमा इंजीनियर जैसे अलग-अलग पदों पर भर्ती की जाएगी. इन सभी पदों के लिए सिलेक्शन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) के जरिए किया जाएगा. जो उम्मीदवार सरकारी नौकरी की तलाश में हैं और इंजीनियरिंग, लॉ या क्वालिटी कंट्रोल के फील्ड से जुड़े हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका है. आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार IOCL की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
जरूरी तारीखें, फीस और योग्यता से जुड़ी शर्तें
इस भर्ती के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 3 सितंबर 2026 है, जो शाम 5 बजे तक ही खुली रहेगी. साथ ही एडमिट कार्ड 15 सितंबर को जारी किया जाएगा, जबकि कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट 24 सितंबर को होने की संभावना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया है कि ये सभी तारीखें फिलहाल तय नहीं हैं और उम्मीदवारों को समय-समय पर ऑफिशियल वेबसाइट चेक करते रहना चाहिए.&amp;nbsp; आवेदन फीस की बात करें तो SC, ST और दिव्यांग (PwBD) कैटेगरी के उम्मीदवारों को कोई फीस नहीं देनी होगी, जबकि बाकी सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 1000 रुपये प्लस GST की फीस देनी होगी. आवेदन सिर्फ ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे, हार्डकॉपी या मैनुअल आवेदन बिल्कुल मान्य नहीं होंगे.
उम्र सीमा की बात करें तो 1 जुलाई 2026 तक ग्रेजुएट इंजीनियर और डिप्लोमा इंजीनियर पद के लिए अधिकतम उम्र 26 साल, ऑफिसर मार्केटिंग के लिए 28 साल, जबकि लॉ ऑफिसर और असिस्टेंट क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर पद के लिए 30 साल रखी गई है.&amp;nbsp; आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमानुसार उम्र में छूट भी दी जाएगी. लॉ ऑफिसर पद के लिए उम्मीदवार के पास 30 जून 2026 तक कम से कम दो साल का कानूनी क्षेत्र का अनुभव होना जरूरी है, वहीं असिस्टेंट क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर पद के लिए पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, पॉलिमर या फर्टिलाइजर लैब में कम से कम दो साल का अनुभव मांगा गया है.&amp;nbsp;
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सिलेक्शन प्रोसेस और मिलने वाली सैलरी
चयन प्रक्रिया की बात करें तो सबसे पहले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट होगा, इसके बाद ग्रुप डिस्कशन और ग्रुप टास्क होगा, और आखिर में पर्सनल इंटरव्यू लिया जाएगा. CBT में कुल 100 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें सेक्शन ए में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, लॉजिकल रीजनिंग और इंग्लिश वर्बल एबिलिटी जैसे सामान्य सवाल होंगे, जबकि सेक्शन बी में उम्मीदवार के फील्ड से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. हर सही जवाब पर एक अंक मिलेगा, जबकि हर गलत जवाब पर 0.25 अंक काटे जाएंगे.
फाइनल मेरिट लिस्ट में CBT का 85 फीसदी वेटेज, ग्रुप डिस्कशन और ग्रुप टास्क का 5 फीसदी, और पर्सनल इंटरव्यू का 10 फीसदी वेटेज रहेगा. जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को हर सेक्शन में कम से कम 40 फीसदी और ओवरऑल 45 फीसदी अंक लाने होंगे, वहीं SC-ST उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 35 और 40 फीसदी है.
अब बात करते हैं सैलरी की, जो इस भर्ती की सबसे आकर्षक बात है. Grade A में शुरुआती बेसिक सैलरी 50,000 रुपये प्रति महीना होगी, जिसका पे स्केल 50,000 से 1,60,000 रुपये तक जाता है और सालाना CCT करीब 18.4 लाख रुपये बनता है.&amp;nbsp; Grade A0 में शुरुआती बेसिक सैलरी 40,000 रुपये और सालाना CTC करीब 14.8 लाख रुपये होगा, जबकि Grade E0 में शुरुआती बेसिक सैलरी 30,000 रुपये और सालाना CTC करीब 11.1 लाख रुपये है.
इसके अलावा उम्मीदवारों को महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस या सब्सिडाइज्ड घर, मेडिकल सुविधा, प्रोविडेंट फंड, एक्सीडेंट इंश्योरेंस और परफॉर्मेंस के आधार पर अतिरिक्त सैलरी जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IOCL, Executive, Recruitment, 2026:, IOCL, में, Executive, पदों, पर, बंपर, भर्ती, सैलरी, 1.60, लाख, तक, जानें, पूरी, डिटेल</media:keywords>
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        <title>IAS Tukaram Mundhe: कौन हैं IAS तुकाराम? 21 साल में 25 बार हुआ ट्रांसफर</title>
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        <description><![CDATA[ IAS Tukaram Mundhe : महाराष्ट्र के चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम हरिभाऊ मुंढे एक बार फिर अपने सख्त वर्किंग स्टाइल को लेकर चर्चा में हैं. महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर का पद संभालने के बाद उन्होंने मिलावटखोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की. उनकी कार्रवाई से जहां खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल है, वहीं उनका लंबा ट्रांसफर रिकॉर्ड भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
2005 बैच के इस अधिकारी का करीब 21 साल की सेवा में 25वीं बार ट्रांसफर हुआ है. इसी वजह से उनकी तुलना हरियाणा कैडर के पूर्व आईएएस अशोक खेमका से की जा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर IAS तुकाराम कौन हैं, जिनका 21 साल में 25 बार ट्रांसफर हुआ.&amp;nbsp;
IAS तुकाराम कौन हैं?
तुकाराम मुंढे ने 25 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA कमिश्नर का पद संभाला था. इसके बाद उन्होंने मिलावट और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सख्ती शुरू की. करीब दो महीनों में महाराष्ट्र भर में 1100 से ज्यादा निरीक्षण किए गए. इस दौरान करीब 50 करोड़ रुपये का खाद्य भंडार जब्त किया गया, जिसमें कथित तौर पर मिलावटी 1.6 लाख लीटर दूध भी शामिल था. 56 रेस्तरां के लाइसेंस निलंबित किए गए. संगठित गुटखा नेटवर्क के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) भी लागू किया गया. उन्होंने पेप्सिको, रेड बुल और स्टिंग जैसी कंपनियों को अपने पेय पदार्थों पर एनर्जी ड्रिंक लिखने को लेकर चेतावनी दी थी. इसके बाद कंपनियों ने आदेश मानने की बात कही.
तुकाराम मुंढे का IAS बनने का सफर
तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में एक किसान परिवार में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने औरंगाबाद से उच्च शिक्षा हासिल की. उन्होंने इतिहास से बीए और पॉलिटिकल साइंस से एमए किया. मुंढे ने 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और अखिल भारतीय रैंक 20 हासिल की. इसके बाद वह 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी बने.
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21 साल में 25 बार ट्रांसफर
आईएएस तुकाराम मुंढे के करियर में तबादलों का सिलसिला लगातार चर्चा में रहा है. अगस्त 2005 में सोलापुर में प्रशिक्षु उप-कलेक्टर के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग हुई. इसके बाद उन्होंने डिप्टी कलेक्टर, जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त, सचिव और कई अन्य जरूरी पदों पर काम किया. उनकी पोस्टिंग सोलापुर, नांदेड़, वाशिम, जालना, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे समेत कई जगहों पर रही. वर्ष 2018 और 2023 में उनका तीन-तीन बार ट्रांसफर हुआ, जबकि 2009, 2020 और अगस्त 2026 तक एक ही साल में दो-दो ट्रांसफर हुए.
क्यों चर्चा में रहते हैं मुंढे?
तुकाराम मुंढे अपनी सख्त और नियमों के पालन वाले वर्किंग स्टाइल के लिए जाने जाते हैं. रेत माफिया और मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी वह चर्चा में रहे हैं. उन्हें मैन ऑफ ए मिशन कहा गया है और वह बेस्ट कलेक्टर का अवॉर्ड भी हासिल कर चुके हैं.FDA कमिश्नर बनने के बाद उन्होंने साफ कहा था कि जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के प्रति प्रशासन की ओर से नरमी नहीं बरती जाएगी. उनका कार्यालय आम लोगों के लिए भी खुला रहता है और हर कार्यदिवस शाम 4 से 5 बजे तक लोग उनसे मिल सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Free Online Coaching: किन स्टूडेंट्स को मिलेगी फ्री ऑनलाइन कोचिंग, क्या योग्यता होनी जरूरी?</title>
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        <description><![CDATA[ Free Online Coaching for Students: महंगी कोचिंग फीस आज कई छात्रों और उनके परिवारों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ एक बड़ी चिंता बन चुकी है. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को कई बार बेहतर पढ़ाई और गाइडेंस के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है. ऐसे में 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान किया.
पीएम मोदी ने कहा कि कोचिंग का बढ़ता खर्च गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर बड़ा बोझ बन गया है. सरकार का लक्ष्य देश के युवाओं तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाना है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किन स्टूडेंट्स को फ्री ऑनलाइन कोचिंग मिलेगी और क्या योग्यता जरूरी होनी चाहिए.&amp;nbsp;किन स्टूडेंट्स को फ्री ऑनलाइन कोचिंग मिलेगी?
पीएम मोदी के ऐलान के मुताबिक, देश के युवाओं को अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी. इसमें UPSC, NEET, JEE, SSC और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को फायदा मिलने की बात कही गई है. खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए यह पहल जरूरी बताई गई है, कोचिंग की फीस उनके परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालती है.
क्या योग्यता होनी जरूरी है?
अभी सरकार की ओर से फ्री ऑनलाइन कोचिंग के लिए कोई पात्रता नियम, आवेदन प्रक्रिया, उम्र सीमा या चयन प्रक्रिया जारी नहीं की गई है. यह साफ नहीं है कि छात्रों को किन डॉक्यूमेंट्स या शर्तों के आधार पर इस सुविधा का फायदा मिलेगा. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मुख्य रूप से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं तक अच्छी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा पहुंचाने की बात कही है.
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देशभर में बनेगा फ्री कोचिंग नेटवर्क
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बड़ी संख्या में शिक्षक और एजुकेटर मौजूद हैं. इन संसाधनों को जोड़कर देशभर में मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने की बात कही गई है. इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अच्छी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देना है.
कोचिंग फीस के बोझ से मिलेगी राहत
पीएम मोदी ने कहा कि कोचिंग की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कई मध्यम वर्गीय परिवारों को लगता है कि अगर वे बच्चों को कोचिंग नहीं भेजेंगे तो वे पीछे रह जाएंगे. सरकार का कहना है कि मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग के जरिए परिवारों पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम किया जा सकेगा. साथ ही छात्रों को पढ़ाई के लिए परिवार से दूर बड़े शहरों में जाने की जरूरत भी कम हो सकती है.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UGC&amp;NET 2026 Answer key: UGC NET 2026 की आंसर&amp;की कल जारी करेगा NTA, ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ UGC-NET 2026 Answer key : UGC-NET, CSIR-NET और ICAR AIEEA (PG) साथ ही &amp;nbsp;AICE (PhD) 2026 की परीक्षा में शामिल लाखों उम्मीदवारों के लिए इंतजार अब खत्म होने वाला है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने प्रोविजनल आंसर-की जारी करने की तारीख साफ कर दी है. एजेंसी के मुताबिक, इन परीक्षाओं की प्रोविजनल आंसर-की 16 अगस्त 2026 को NTA की वेबसाइट पर जारी की जाएगी. ऐसे में उम्मीदवार अब अपनी आंसर-की का इंतजार खत्म होने की उम्मीद कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि UGC-NET, CSIR-NET और ICAR-NET 2026 आंसर की कैसे चेक करें.&amp;nbsp;
16 अगस्त को जारी होगी प्रोविजनल Answer Key
NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी शेयर करते हुए बताया कि UGC-NET, CSIR-NET और ICAR AIEEA (PG) साथ ही AICE (PhD) 2026 की प्रोविजनल आंसर-की 16 अगस्त को जारी की जाएगी. एजेंसी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि परीक्षा और आंसर-की से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल NTA की आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें. UGC-NET 2026 की परीक्षाएं 22, 23, 24, 25, 29 और 30 जून को आयोजित की गई थीं. इसके बाद 5 जुलाई को इसका रीटेस्ट भी कराया गया था. वहीं, Joint CSIR-UGC NET June 2026 परीक्षा 17 और 18 जुलाई को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में हुई थी.&amp;nbsp;
87 विषयों में हुई थी UGC-NET परीक्षा
UGC-NET परीक्षा कंप्यूटर आधारित मोड में 87 विषयों के लिए आयोजित की गई थी. इस परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों की जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF), असिस्टेंट प्रोफेसर के पद और देशभर के विश्वविद्यालयों में PhD प्रोग्राम में दाखिले के लिए पात्रता तय की जाती है. UGC-NET परीक्षा में दो पेपर होते हैं.पेपर 1 में 50 सवाल होते हैं, जिनमें टीचिंग एप्टीट्यूड, रीजनिंग एबिलिटी और जनरल अवेयरनेस जैसे विषय शामिल होते हैं. वहीं पेपर 2 में संबंधित विषय से जुड़े 100 मल्टीपल चॉइस सवाल पूछे जाते हैं.&amp;nbsp;
Answer Key के साथ क्या मिलेगा?
प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने सवालों के जवाबों का मिलान कर सकेंगे. इसके साथ उम्मीदवारों के लिए रिस्पॉन्स शीट और क्वेश्चन पेपर भी जारी किए जाने की उम्मीद है. इसके बाद उम्मीदवारों को आंसर-की में दिए गए जवाबों पर ऑब्जेक्शन फाइल कराने का मौका मिलेगा. &amp;nbsp;उम्मीदवारों से मिली ऑब्जेक्शन फाइल की समीक्षा करने के बाद NTA फाइनल आंसर-की जारी करेगा. इसी फाइनल आंसर-की के आधार पर आगे रिजल्ट तैयार किया जाएगा.&amp;nbsp;
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कहां चेक कर सकेंगे Answer Key?
UGC-NET और CSIR-NET की आंसर-की जारी होने के बाद उम्मीदवार इसे संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकेंगे. UGC-NET की आंसर-की ugcnet.nta.nic.in &amp;nbsp;पर जाकर &amp;nbsp;और CSIR-NET की आंसर-की csirnet.nta.nic.in पर जाकर चेक कर सकते हैं. आंसर-की देखने के लिए उम्मीदवारों को अपने एप्लिकेशन नंबर और पासवर्ड या डेट ऑफ बर्थ (DOB) की जरूरत होगी.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड करें UGC-NET, CSIR-NET Answer Key
1. UGC-NET, CSIR-NET Answer Key डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
2. इसके बाद UGC-NET या CSIR-NET Answer Key 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
3. अब मांगी गई जानकारी, जैसे एप्लिकेशन नंबर और पासवर्ड, दर्ज करके लॉगिन करें.
4. लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर आंसर-की और रिस्पॉन्स शीट दिखाई देगी. इसे डाउनलोड कर लें और इसकी कॉपी सुरक्षित रख लें.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NALSAR Controversy: NALSAR में कैसे मिलता है एडमिशन, यहां कौन&amp;कौन से कोर्स?</title>
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        <description><![CDATA[ NALSAR Controversy : हैदराबाद की NALSAR University of Law इन दिनों अपने दीक्षांत समारोह और उससे जुड़े विवाद को लेकर चर्चा में है. यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने का विरोध किया था. इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 2026 बैच के NALSAR लॉ ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का निर्देश दिया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह फैसला वापस ले लिया गया.
इस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर NALSAR लोगों की नजरों में है. हालांकि, NALSAR सिर्फ लॉ की पढ़ाई के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां मैनेजमेंट, रिसर्च और कई स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम भी कराए जाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं NALSAR में एडमिशन कैसे मिलता है और यहां कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं.
12वीं के बाद कर सकते हैं 5 साल का लॉ कोर्स
NALSAR का प्रमुख कोर्स B.A. LL.B. (Hons.) है. यह 5 साल का इंटीग्रेटेड लॉ प्रोग्राम है, जिसमें कानून के साथ मानविकी और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई भी कराई जाती है. इसमें एडमिशन के लिए CLAT स्कोर जरूरी है. सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 12वीं में कम से कम 45 प्रतिशत और SC/ST उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत अंक की पात्रता है.&amp;nbsp;
NALSAR में एडमिशन कैसे मिलता है?
NALSAR में एडमिशन कोर्स के हिसाब से अलग-अलग एडमिशन परीक्षा और चयन प्रक्रिया के जरिए मिलता है. 5 साल के B.A. LL.B. (Hons.) में एडमिशन के लिए CLAT स्कोर जरूरी होता है, जबकि LL.M. में भी CLAT के जरिए एडमिशन होता है. वहीं मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए 5 साल के BBA-MBA (IPM) में IPMAT/JIPMAT जैसे स्कोर स्वीकार किए जाते हैं और 2 साल के MBA में CAT या NALSAR के N-MET PG जैसे ऑप्शन हैं. इसके अलावा Ph.D. और स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम के लिए अलग पात्रता और चयन प्रक्रिया होती है.
यहां कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं?
NALSAR में सिर्फ लॉ की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मैनेजमेंट और रिसर्च से जुड़े कई कोर्स उपलब्ध हैं. यहां 12वीं के बाद 5 साल का B.A. LL.B. (Hons.) और 5 साल का Integrated BBA+MBA (IPM) किया जा सकता है. ग्रेजुएशन के बाद छात्रों के लिए LL.M. और 2 साल का MBA का ऑप्शन है. इसके अलावा Insolvency and Bankruptcy Laws में LL.M., साथ ही Law, Social Sciences, Humanities और Management जैसे क्षेत्रों में Ph.D. की सुविधा भी है. यूनिवर्सिटी साइबर लॉ, पेटेंट लॉ, साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन, मीडिया लॉ और इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स लॉ जैसे क्षेत्रों में डिप्लोमा प्रोग्राम भी उपलब्ध कराती है.&amp;nbsp;
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Ph.D. में रिसर्च का भी ऑप्शन
जो छात्र रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उनके लिए NALSAR में Ph.D. के ऑप्शन भी हैं. यहां कानून के साथ सोशल साइंसेज, ह्यूमैनिटीज और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में रिसर्च की जा सकती है. संबंधित विषय में मास्टर डिग्री और निर्धारित अंकों की पात्रता के आधार पर इसमें एडमिशन दिया जाता है.&amp;nbsp;
फीस और प्लेसमेंट कितना है?
कोर्स के अनुसार NALSAR की फीस अलग-अलग है. जानकारी के मुताबिक B.A. LL.B. की कुल अनुमानित फीस करीब 7.95 लाख रुपये है, जबकि MBA की फीस लगभग 4.2 लाख से 10.8 लाख रुपये तक हो सकती है. NALSAR के लॉ प्रोग्राम का प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी मजबूत रहा है. आंकड़ों में छात्रों को 63 लाख रुपये तक का पैकेज मिलने की जानकारी दी गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>NALSAR, Controversy:, NALSAR, में, कैसे, मिलता, है, एडमिशन, यहां, कौन-कौन, से, कोर्स</media:keywords>
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        <title>UPSC CSE Mains 2026 Admit Card : UPSC CSE Mains 2026 Admit Card जारी, ऐसे करें डाउनलोड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsc-cse-mains-2026-admit-card-upsc-cse-mains-2026-admit-card-जारी-ऐसे-करें-डाउनलोड</link>
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        <description><![CDATA[ UPSC CSE Mains 2026 Admit Card : UPSC Civil Services Mains 2026 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 14 अगस्त 2026 को सिविल सर्विसेज मेन्स परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों को इस परीक्षा में शामिल होना है, वे UPSC के ऑनलाइन पोर्टल upsconline.nic.in पर जाकर अपना ई-एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं.
इसके लिए रजिस्ट्रेशन आईडी या रोल नंबर और जन्मतिथि की जरूरत होगी. UPSC CSE Mains परीक्षा 21 अगस्त से 30 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी. ऐसे में उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले अपना हॉल टिकट डाउनलोड करके उसमें दी गई सभी जरूरी जानकारियां ध्यान से चेक कर लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
UPSC CSE Mains 2026 एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें?
1. उम्मीदवार सबसे पहले UPSC के ऑनलाइन पोर्टल upsconline.nic.in पर जाएं.
2. इसके बाद होमपेज पर दिए गए एडमिट कार्ड सेक्शन को खोलें और Civil Services Examination 2026 से जुड़े लिंक पर क्लिक करें.
3. अब रजिस्ट्रेशन आईडी या रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें. जरूरी जानकारी सबमिट करने के बाद स्क्रीन पर आपका UPSC Mains एडमिट कार्ड दिखाई देगा.
4. इसे डाउनलोड करें और एडमिट कार्ड में दी गई सभी जानकारी चेक करने के बाद इसका प्रिंट आउट निकालकर अपने पास रखें.
एडमिट कार्ड में क्या-क्या चेक करें?
हॉल टिकट डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार को अपना नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, फोटो, हस्ताक्षर और जन्मतिथि जरूर चेक करनी चाहिए. इसके अलावा परीक्षा की तारीख, रिपोर्टिंग टाइम, परीक्षा का समय, परीक्षा केंद्र का नाम और पता समेत जरूरी निर्देश भी एडमिट कार्ड में दिए होंगे. अगर किसी जानकारी में गलती दिखाई देती है तो उम्मीदवारों को बिना देरी किए UPSC से संपर्क करना चाहिए.
एडमिट कार्ड में गलती हो तो क्या करें?
अगर एडमिट कार्ड में किसी तरह की गलती मिलती है तो उम्मीदवारों को तुरंत UPSC से संपर्क करना चाहिए. आयोग का सुविधा काउंटर सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध है. उम्मीदवार 011-23381125, 011-23385271, 011-23098543 और 011-23098591 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा web-upsc@nic.in पर ईमेल भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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दो शिफ्ट में होगी UPSC Mains परीक्षा
UPSC Civil Services Mains परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. फोरनून सेशन की परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी, जबकि आफ्टरनून सेशन की परीक्षा दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित होगी. उम्मीदवारों को अपने एडमिट कार्ड पर दिए गए रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा केंद्र से जुड़े निर्देश जरूर देखने चाहिए.
परीक्षा केंद्र पर ये डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी
परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड की प्रिंटेड कॉपी साथ ले जानी होगी. इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक ओरिजिनल वैध फोटो पहचान पत्र भी लेकर जाना होगा. पहचान पत्र की एक फोटो कॉपी भी तैयार रखने को कहा गया है. जिन उम्मीदवारों के पास कैटेगरी या PwBD से जुड़े डॉक्यूमेंट लागू हैं, उन्हें संबंधित प्रमाणपत्र भी साथ रखना चाहिए. नाम कानूनी रूप से बदला गया है तो तय गजट नोटिफिकेशन या अन्य वैध प्रमाण भी जरूरी हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI Impact on Jobs: नौकरी नहीं छीन रहा AI, बना रहा मौके, Experienced Talent की डिमांड बढ़ी</title>
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        <description><![CDATA[ AI Impact on Jobs: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसका असर अब नौकरियों पर भी दिखाई देने लगा है. कई लोगों को डर है कि AI की वजह से नौकरियां कम हो जाएंगी, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने एकदम अलग तस्वीर पेश की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, AI की वजह से कुछ खास तरह की नौकरियों की मांग बढ़ भी रही है. कंपनियां अब ऐसे लोगों को ज्यादा पसंद कर रही हैं, जिन्हें अपने काम की अच्छी जानकारी हो और साथ ही AI का इस्तेमाल करना भी आता हो.
अनुभवी लोगों की मांग बढ़ी
Toptal की Q2 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच अनुभवी टेक और दूसरे कामों से जुड़े लोगों की मांग बढ़ी है. इस दौरान इन लोगों की मांग पिछले तीन महीनों के मुकाबले 7.1 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 12.6 प्रतिशत बढ़ी. वहीं, घर से या हाइब्रिड तरीके से काम करने वाले अनुभवी टेक लोगों की मांग भी बढ़ी है. इनकी मांग 5.4 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 8.9 प्रतिशत बढ़ी. इसके उलट, अमेरिका और दूसरे बड़े देशों में सभी तरह की नौकरियों के लिए नौकरी के विज्ञापन 3.6 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 9 प्रतिशत कम हुए. यानी आम नौकरियों में कमी देखने को मिली, लेकिन अनुभवी लोगों की मांग बढ़ी.
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फाइनेंस और डेटा से जुड़े लोगों की मांग&amp;nbsp;
रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंस से जुड़े लोगों की मांग में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई. घर से या हाइब्रिड तरीके से काम करने वाले अनुभवी फाइनेंस लोगों की मांग पिछले तीन महीनों के मुकाबले 27 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 42 प्रतिशत बढ़ी. इसकी एक बड़ी वजह फाइनेंस में AI का बढ़ता इस्तेमाल है.
अब सिर्फ AI चलाना काफी नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनियों को अब सिर्फ ऐसे लोग नहीं चाहिए, जिन्हें AI टूल चलाना आता हो. वह ऐसे लोगों को ज्यादा पसंद कर रही हैं, जिन्होंने AI के साथ असली काम किया हो. खासकर डेवलपर्स से उम्मीद की जा रही है कि उन्हें AI सिस्टम बनाने और उसे काम में लगाने का अनुभव हो. डेटा से जुड़े कामों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. AI अब कई आसान काम खुद कर सकता है. इसलिए कंपनियां ऐसे लोगों को चाहती हैं, जो AI से मिले नतीजों को समझ सकें और उसके आधार पर सही सलाह दे सकें.
टेक कंपनियों में छंटनी अभी भी जारी




AI से जुड़ी नौकरियों की मांग बढ़ रही है, लेकिन टेक कंपनियों में लोगों को नौकरी से निकालने का सिलसिला अभी भी जारी है. अप्रैल से जून 2026 के बीच टेक कंपनियों में छंटनी पिछले तीन महीनों के मुकाबले 47 प्रतिशत कम हुई. हालांकि, पिछले साल अप्रैल से जून के मुकाबले इस बार छंटनी 5 प्रतिशत ज्यादा रही. रिपोर्ट से पता चलता है कि कंपनियां पूरी तरह से नौकरियां खत्म नहीं कर रही हैं. कुछ कामों में लोगों की संख्या कम कर रही हैं और दूसरी तरफ ऐसे अनुभवी लोगों को नौकरी दे रही हैं, जिनके पास अपने काम की अच्छी जानकारी और AI की समझ है.




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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSC से PMO तक पहुंची निधी तिवारी, जानिए PM की प्राइवेट सेक्रेटरी का सफर</title>
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        <description><![CDATA[ UPSC से PMO तक पहुंची निधी तिवारी, जानिए PM की प्राइवेट सेक्रेटरी का सफर ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नोएडा के स्कूलों में स्क्रीन टाइम पर लिमिट, प्राइमरी के लिए 30 मिनट की सीमा</title>
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        <description><![CDATA[ Noida School Screen Time:&amp;nbsp;नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल स्क्रीन के इस्तेमाल को लेकर जिला प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी की है. गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने सभी सरकारी सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों के छात्रों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित और संतुलित रखने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत प्राइमरी कक्षाओं के छात्रों के लिए स्क्रीन टाइम अधिकतम 30 मिनट और अपर प्राइमरी के छात्रों के लिए 60 मिनट प्रतिदिन किया गया है. जिला प्रशासन का यह निर्देश अभिभावकों की शिकायतों के बाद आया. अभिभावक संघ की ओर से बताया गया कि कुछ स्कूलों में स्मार्ट और डिजिटल बोर्ड का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है. इनमें किताबें और सीधे स्मार्ट बोर्ड पर दिखाने के साथ, क्लास वर्क, सवाल-जवाब और होमवर्क के लिए भी डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल किया जा रहा था.&amp;nbsp;
स्मार्ट बोर्ड को पढ़ाई का एकमात्र माध्यम न बनाए&amp;nbsp;
जिला प्रशासन ने कहा है कि स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल मुख्य रूप से कठिन विषयों और अवधारणाओं को समझने, तस्वीर-वीडियो और जरूरी शिक्षण सामग्री दिखाने के लिए किया जाना चाहिए. इसे हर विषय या हर कक्षा की एक्टिविटी के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए. स्कूलों को ब्लैक बोर्ड, ग्रीन बोर्ड और व्हाइट बोर्ड का नियमित इस्तेमाल करने के लिए भी कहा गया है. इनका प्रयोग लिखने, अभ्यास करने, सवाल-जवाब और छात्रों की भागीदारी वाली एक्टिविटी के लिए किया जा सकता है.&amp;nbsp;
20, 20, 20 नियम का पालन करने के निर्देश&amp;nbsp;
स्क्रीन के लगातार इस्तेमाल से बचने के लिए स्कूलों को 20, 20, 20 नियम अपनाने के लिए कहा गया है. इसके तहत करीब 20 मिनट की स्क्रीन एक्सपोजर के बाद छात्रों को ब्रेक दिया जाना चाहिए और कुछ समय के लिए करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. जिला प्रशासन ने डिजिटल बोर्ड की स्क्रीन, ब्राइटनेस और कक्षा में रोशनी को भी उचित स्तर पर रखने की निर्देश दिए हैं. जब स्मार्टफोन बोर्ड का इस्तेमाल केवल लिखने के लिए किया जा रहा हो तो बैकलाइट से बचने को कहा गया है.&amp;nbsp;
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आंखों और स्वास्थ्य पर भी चिंता&amp;nbsp;
प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ और एनआईएमएचएएनएस की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन, सिर दर्द, आंखों में सूखापन और कम उम्र में मायोपिया जैसी समस्या हो सकती है. लंबे स्क्रीन एक्सपोजर का छात्रों के व्यवहार एकाग्रता और बौद्धिक विकास पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है. ऐसे में स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि अगर किसी छात्र में आंखों में जलन, सिर दर्द, धुंधला दिखाई देना या स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी समस्याओं के लक्षण नजर आते हैं तो पेरेंट्स को तुरंत जानकारी दी जाए.&amp;nbsp;
पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी एक्टिविटी पर भी जोर&amp;nbsp;
प्रशासन ने स्कूलों के छात्रों के लिए एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग, स्ट्रेचिंग आउटडोर गेम्स और भारत को बढ़ावा देने को कहा है. इसके अलावा पढ़ने-लिखने, कहानी सुनने और सामूहिक गतिविधियों जैसी स्क्रीन से अलग गतिविधियों को महत्व देने के निर्देश दिए हैं.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>उत्तराखंड के छात्रों को मिलेगी फ्री ऑनलाइन कोचिंग, सरकार ला रही नई योजना</title>
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        <description><![CDATA[ Uttarakhand Free Online Coaching: उत्तराखंड में हायर एजुकेशन की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक नई योजना शुरू करने जा रही है. मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना 2026 के तहत यूनिवर्सिटी, सरकारी कॉलेज और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना को मंजूरी दे दी है और जल्द ही इसका औपचारिक शुभारंभ होने की उम्मीद है.
सरकार का कहना है कि इस योजना का खास फायदा राज्य के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले छात्रों को मिलेगा. ऐसे छात्र जिन्हें अपने आसपास कोचिंग की सुविधा नहीं मिल पाती है, जो महंगी प्राइवेट कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते हैं, वे अब ऑनलाइन माध्यम से घर से ही तैयारी कर सकेंगे.&amp;nbsp;
किन परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे छात्र?
मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना 2026 के तहत छात्रों को कई तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन कोचिंग और पढ़ाई से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षाएं, सीडीएस बैंकिंग, रेलवे और एससी जैसी परीक्षा शामिल है. इसके अलावा योजना के दायरे में कई प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं भी रखी गई है. इनमें से टीएटी, एमएटी, गेट, नेट और सीएसआईआर-नेट शामिल है. इस तरह छात्र सरकारी नौकरी की प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ उच्च शिक्षा और दूसरी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकेंगे.&amp;nbsp;
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यूनिवर्सिटी और सरकारी कॉलेजों के छात्रों को भी फायदा&amp;nbsp;
यह योजना उत्तराखंड के यूनिवर्सिटी के साथ-साथ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भी होंगी. इसमें ऑनलाइन माध्यम से कोचिंग और स्टडी सपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि छात्रों को तैयारी के लिए अलग से कोचिंग संस्थान जाने की जरूरत ना पड़े.&amp;nbsp;
पहाड़ी और दूरदराज के छात्रों पर फोकस&amp;nbsp;
उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में रहने वाले छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अक्सर कोचिंग सेंटर की सुविधा आसानी से नहीं मिल पाती है. वहीं प्राइवेट कोचिंग की फीस भी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में सरकार ने इस समस्या को ध्यान में रखते हुए इस योजना में मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की है. इसके जरिए छात्रों को घर से ही पढ़ाई और परीक्षा से जुड़ी तैयारी की सहायता मिल सकेगी. वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद अभी योजना के औपचारिक लॉन्च की तैयारी है, हालांकि योजना की लाॅन्चिंग की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है. योजना लॉन्च होने के बाद सरकार छात्रों के लिए ऑनलाइन कोचिंग शुरू करेगी.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU हिस्ट्री के सिलेबस में बड़ा बदलाव, दिल्ली सल्तनत समेत कई पेपर हटाए गए</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट हिस्ट्री सिलेबस में बड़ा बदलाव किया गया है. यूनिवर्सिटी की ओर से जारी किए गए नए सिलेबस में दिल्ली सल्तनत पर आधारित पेपर हटाया गया है. यह पेपर तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता था. वहीं नए सिलेबस में केवल दिल्ली सल्तनत से जुड़ा पेपर ही नहीं हटाया गया, बल्कि प्राचीन मध्यकालीन और आधुनिक भारत से जुड़े कई दूसरे पेपर को भी हटाया गया है. यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने कुल 38 डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव पेपर प्रस्तावित किए थे, लेकिन तीसरे सेमेस्टर के लिए जारी सिलेबस में इनमें से सिर्फ 16 पेपर को शामिल किया गया है.
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दिल्ली सल्तनत पर PG में क्या पढ़ाया जाता था
पोस्ट ग्रेजुएशन के इतिहास सिलेबस में &amp;nbsp;दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया (13वीं-14वीं सदी) पेपर में 13वीं और 14वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में बनी राजनीतिक व्यवस्था को पढ़ाया जाता था. इनमें मध्यकालीन राज्य के गठन शासकों की सत्ता और प्रशासनिक ढांचे के साथ-साथ राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में आए बदलाव को समझाया जाता था.&amp;nbsp;
कई और पुराने पेपर भी सिलेबस से बाहर&amp;nbsp;
तीसरी सेमेस्टर के नए सिलेबस में दिल्ली सल्तनत के साथ कुछ दूसरे पेपर को भी हटाया गया है. इनमें हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया, सी. 1400-1550, जेंडर एंड वीमेन इन अर्ली इंडिया 1500 बीसीई टू 1000 सीई, पॉलीटिकल प्रोसेसज एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटिज इन एंशिएंट इंडिया, रिलिजन एंड सोसाइटी इन एंशिएंट इंडिया लिटरेचर जैसे पेपर शामिल है. यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के अनुसार इनमें से कुछ पाठ्यक्रम सिलेबस को मंजूरी देने की प्रक्रिया की अलग-अलग चरण में पास भी किए गए थे, लेकिन 7 अगस्त को जारी अंतिम अधिसूचना में इनको शामिल नहीं किया. गया कुछ दूसरे प्रस्तावित पेपर अभी भी यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में अंडर डिस्कशन या अनडिसकस्ड के तौर पर मार्क है &amp;zwnj;
DU ने सिलेबस में बदलाव को लेकर क्या कहा&amp;nbsp;
दिल्ली यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स के रत्नाबली ने कहा कि किसी भी पेपर को जानबूझकर रोककर नहीं रखा गया था. उनके अनुसार सभी प्रस्तावित पाठ्यक्रम एकेडमिक काउंसिल के सामने रखे गए थे. इसके बाद वाइस चांसलर को उन पाठ्यक्रमों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की अनुमति दी गई. उन्होंने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी से कुछ पेपर मंजूर होने के बाद विभाग की ओर से कुछ स्वीकृत सिलेबस में बदलाव किए गए थे. इनमें कुछ पेपर जोड़ना या हटाना, यूनिट में बदलाव और रीडिंग को हटाना या बदलना शामिल था. इसी वजह से कुछ सिलेबस की दोबारा समीक्षा की गई. एक्सपर्ट कमेटी ने संशोधित सिलेबस की जांच के बाद उन पाठ्यक्रमों को नोटिफिकेशन के लिए मंजूरी दी, जिन्हें समीक्षा के बाद उचित पाया गया. यूनिवर्सिटी के अनुसार कुछ और पेपर को भी समिति की समीक्षा पूरी होने के बाद नोटिफाई किया जा सकता है.&amp;nbsp;
NEP 2020 के बाद सिलेबस में बदलाव&amp;nbsp;
दिल्ली यूनिवर्सिटी में सिलेबस में बदलाव की प्रक्रिया एनईपी 2020 के तहत प्रोग्राम में किया जा रहे पुनर्गठन के बाद से जारी है. पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर हुआ यह बदलाव उससे पहले किए गए अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम के बदलाव के बाद आया है. डीयू यूजी प्रोग्राम में एनईपी 2020 के अनुरूप बदलाव 2022-23 से शुरू हुए थे. दिल्ली सल्तनत से जुड़े एक पेपर को अंडर ग्रेजुएट स्तर पर भी पढ़ाया जाता है, लेकिन दोनों पाठ्यक्रम को अलग बताया गया है. कुछ रिपोर्ट के अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट स्तर का पेपर कई दशकों से मध्यकालीन भारत का एक महत्वपूर्ण कोर पेपर था, जबकि यूजी में इससे संबंधित पाठ्यक्रम भारतीय इतिहास का व्यापक सर्वेक्षण करता है. इसी तरह हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया, सी. 1400-1550 पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर एक विशेष विषय और ऐतिहासिक अध्ययन के तौर पर पढ़ाया जाता था, जबकि अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रम का स्वरूप व्यापक है.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हिस्ट्री, के, सिलेबस, में, बड़ा, बदलाव, दिल्ली, सल्तनत, समेत, कई, पेपर, हटाए, गए</media:keywords>
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        <title>MP Board 2027: 10वीं&amp;12वीं बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल जारी, फरवरी से शुरू होंगे एग्जाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mp-board-2027-10वीं-12वीं-बोर्ड-परीक्षा-का-टाइम-टेबल-जारी-फरवरी-से-शुरू-होंगे-एग्जाम-57710</link>
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        <description><![CDATA[ MP Board 2027 Time Table Released: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 10वीं और 12वीं की मुख्य परीक्षा 2027 का टाइम टेबल जारी कर दिया है. मंडल की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी 2027 से शुरू होगी, जबकि 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं 24 फरवरी 2027 से शुरू होगी. दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं मुख्य सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी. परीक्षा कार्यक्रम नियमित और स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए जारी किया गया है.
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10वीं MP बोर्ड की परीक्षाएं 24 फरवरी से&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश की दसवीं बोर्ड की मुख्य परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होकर 18 मार्च 2027 तक चलेगी. पहले दिन भाषा विषयों के साथ चित्रकला, गायन-वादन, तबला-पखावज और कंप्यूटर से जुड़े पेपर होंगे. इसके बाद 25 फरवरी से एनएसक्यूएफ के सभी विषयों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की परीक्षाएं होगी. 27 फरवरी को उर्दू, 2 मार्च को हिंदी, 5 मार्च को गणित, 9 मार्च को अंग्रेजी, 12 मार्च को संस्कृत, 15 मार्च को विज्ञान और 18 मार्च को सामाजिक विज्ञान का पेपर होगा. दसवीं में गणित के स्टैंडर्ड और बेसिक दोनों ऑप्शन के लिए अलग-अलग प्रश्न पत्र निर्धारित किए गए हैं. दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी टाइम टेबल में निर्धारित विषयों का उल्लेख किया गया है.&amp;nbsp;
12वीं MP बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी से&amp;nbsp;
एमपी बोर्ड 12वीं की मुख्य परीक्षाएं 17 फरवरी 2027 से 19 मार्च 2027 तक चलेगी. पहले दिन बायोटेक्नोलॉजी, गायन-वादन और तबला-पखावज के पेपर होंगे. इसके बाद 18 फरवरी को उर्दू और मराठी, 20 फरवरी को संस्कृत और 22 फरवरी को एनएसक्यूएफ शारीरिक शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की परीक्षा होगी. 23 फरवरी को हिंदी और 26 फरवरी को अंग्रेजी का पेपर होगा. वहीं 1 मार्च को इनफॉर्मेटिक प्रैक्टिसेस, 3 मार्च को समाजशास्त्र, 4 मार्च को भौतिक शास्त्र-अर्थशास्त्र सहित अन्य विषय, 8 मार्च को जीव विज्ञान और 11 मार्च को राजनीति शास्त्र की परीक्षा होगी. इसके बाद 13 मार्च को रसायन शास्त्र, इतिहास, व्यवसाय अध्ययन सहित दूसरी विषयों और 16 मार्च को गणित की परीक्षा होगी. 17 और 19 मार्च को अलग-अलग व्यावसायिक और वैकल्पिक विषयों की परीक्षाएं होगी.&amp;nbsp;
प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल भी जारी&amp;nbsp;
दसवीं की प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है. &amp;nbsp;कार्यक्रम के अनुसार प्रैक्टिकल परीक्षाएं 11 से 30 जून 2027 के बीच आयोजित की जाएगी. वहीं 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षाएं 1 फरवरी से 19 मार्च 2027 तक होगी. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल परीक्षाएं छुट्टी वाले दिन भी आयोजित की जा सकती है.&amp;nbsp;
दूसरी परीक्षाएं होगी जून में&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश मंडल ने 10वीं और 12वीं की दूसरी परीक्षाओं का कार्यक्रम भी जारी किया है. 12वीं की दूसरी परीक्षा 11 से 30 जून 2027 तक चलेगी. इसमें 11 जून को इनफॉर्मेटिक प्रैक्टिस, 15 जून को समाजशास्त्र, 16 जून को रसायन शास्त्र, इतिहास, व्यवसाय अध्ययन सहित दूसरे विषय और 19 जून को अंग्रेजी की परीक्षा होगी. वहीं 10वीं की दूसरी परीक्षा 15 से 30 जून 2027 तक चलेगी. 15 जून को अंग्रेजी, 18 जून को गणित, 19 जून को उर्दू, 21 जून को भाषा एवं दूसरे &amp;nbsp;विषय, 23 जून को एनएसक्यूएफ और एआई, 24 जून को संस्कृत, 26 जून को विज्ञान, 28 जून को हिंदी और 30 जून को सामाजिक विज्ञान की परीक्षा होगी.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Board, 2027:, 10वीं-12वीं, बोर्ड, परीक्षा, का, टाइम, टेबल, जारी, फरवरी, से, शुरू, होंगे, एग्जाम</media:keywords>
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        <title>CG बोर्ड 10वीं 12वीं सप्लीमेंट्री परीक्षा का रिजल्ट जारी, ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ CGBSE Supplementary Result 2026: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर (CGBSE) ने 10वीं और 12वीं की दूसरी मुख्य/अवसर परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. बोर्ड ने दोनों कक्षाओं के सप्लीमेंट्री परीक्षा के नतीजे ऑनलाइन जारी किए हैं. जिन छात्रों ने जुलाई में आयोजित परीक्षा में हिस्सा लिया था, वह अब अपना स्कोर कार्ड सीजीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cgbse.nic.in पर जाकर देख सकते हैं. रिजल्ट चेक करने के लिए छात्रों को रोल नंबर और कैप्चा भरना होगा. ऑनलाइन जारी स्कोर कार्ड में छात्रों के विषयवार अंक और उनके पास या फेल की स्थिति की जानकारी दी गई है.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>73% छात्र 12वीं से पहले ही छोड़ रहे पढ़ाई, संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/73-छात्र-12वीं-से-पहले-ही-छोड़-रहे-पढ़ाई-संसदीय-समिति-की-रिपोर्ट-में-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ School Dropout Report: देश में शिक्षा के बढ़ते स्तर के साथ स्कूल और छात्रों की संख्या में लगातार बड़ी गिरावट सामने आ रही है. संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 73 प्रतिशत छात्र 12वीं की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्राथमिक स्तर की तुलना में माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्तर पर स्कूलों की संख्या काफी कम है.
समिति ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या बढ़ाने और मौजूदा स्कूलों को अपग्रेड करने की जरूरत बताई है. स्कूल ड्रॉप आउट को लेकर यह जानकारी कमेटी ऑन एस्टिमेट्स 2026-27 की 18वीं लोकसभा की दसवीं रिपोर्ट में सामने आई है.&amp;nbsp;
ड्रॉपआउट को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?
संसदीय समिति की रिपोर्ट छात्र नामांकन में बड़ा अंतर सामने आया है. UDISE 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक कक्षाओं में 6,18,45,033 छात्र नामांकित हैं. वहीं कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों की संख्या 4,08,93,978 है. माध्यमिक स्तर पर यह संख्या घटकर 2,36,68,220 रह जाती है और हायर सेकेंडरी स्तर पर सिर्फ 1,64,17,949 छात्र रह जाते हैं. इन आंकड़ों के आधार पर समिति ने कहा है कि करीब 73 प्रतिशत छात्र हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं.&amp;nbsp;
प्राथमिक के बाद स्कूलों की संख्या में भी कमी&amp;nbsp;
समिति ने UDISE 2024-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में कुल 10,92,671 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल है. इनमें 9,11,032 &amp;nbsp;स्कूल प्राथमिक स्तर के हैं. वहीं से कक्षा 6 से 8वीं तक के अपर प्राइमरी स्तर पर 4,12,805 स्कूल है. माध्यमिक स्तर पर यह संख्या घटकर 1,61,808 रह जाती है, जबकि हायर सेकेंडरी स्तर पर देश में सिर्फ 90,866 स्कूल है. यानी जैसे-जैसे शिक्षा का स्तर आगे बढ़ता है, स्कूलों की संख्या में बड़ा अंतर दिखाई देता है. समिति ने कहा कि शिक्षा के स्तर के बढ़ने के साथ स्कूलों की संख्या में इस तरह की भारी गिरावट चिंता का विषय है. समिति के अनुसार एक करोड़ से ज्यादा सरकारी स्कूलों के बीच बड़ी संख्या केवल प्राथमिक स्तर के स्कूलों की है.&amp;nbsp;
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माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूल बढ़ाने की सिफारिश&amp;nbsp;
संसदीय समिति ने शिक्षा मंत्रालय से माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्तर पर स्कूलों की संख्या बढ़ाने को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है. समिति का कहना है कि मौजूदा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को पूरी तरह हायर सेकेंडरी स्कूलों में अपग्रेड करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए. इससे अलग-अलग क्षेत्र और समुदायों के छात्रों को आसपास ही उच्च कक्षाओं का तक पढ़ाई हासिल करने की सुविधा मिलेगी और पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी आ सकती है. समिति ने यह भी कहा कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है और अधिकांश स्कूल राज्य सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है. इसलिए शिक्षा मंत्रालय को राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए.
दिव्यांग छात्रों के लिए भी सुविधाओं की कमी&amp;nbsp;
रिपोर्ट में दिव्यांग छात्रों के लिए स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है. समिति ने कहा है कि देश के आधे से ज्यादा स्कूलों में दिव्यांग छात्रों के अनुकूल जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. UDISE 2024-25 के अनुसार, देश में कुल 14,71,437 स्कूलों में से सिर्फ 5,33,143 स्कूलों में सीडब्ल्यूएसएन टॉयलेट है. वहीं केवल 8,08,466 स्कूलों में रैंप के साथ हेंडरेल उपलब्ध है. समिति ने कहा है कि आंकड़ों से पता चलता है कि देश के आधे से ज्यादा स्कूल अभी भी दिव्यांग छात्रों के लिए अनुकूल बुनियादी ढांचे से वंचित हैं.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>73, छात्र, 12वीं, से, पहले, ही, छोड़, रहे, पढ़ाई, संसदीय, समिति, की, रिपोर्ट, में, खुलासा </media:keywords>
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        <title>NCERT में 1596 और CBSE 933 पद खाली, संसदीय समिति ने उठाए सवाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ncert-में-1596-और-cbse-933-पद-खाली-संसदीय-समिति-ने-उठाए-सवाल</link>
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        <description><![CDATA[ एनसीईआरटी और सीबीएसई में बड़ी संख्या में पद खाली होने पर संसदीय समिति ने चिंता जताई है. संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार एनसीईआरटी में स्वीकृत पदों के आधे से ज्यादा खाली है. जबकि सीबीएसई में करीब 44 फीसदी पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है. समिति ने पदों को जल्द भरने के लिए शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई को भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की सिफारिश की है. यह जानकारी लोकसभा में पेश की गई संसदीय समिति 2026-27 की दसवीं रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट में देश में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े बजट और नीतिगत पहलुओं के साथ सीबीएसई के कार्य प्रणाली की भी समीक्षा की गई है.
NCERT में 1596 पद खाली
समिति के अनुसार अक्टूबर 2025 तक एनसीईआरटी में कुल 2,844 पद स्वीकृत थे. इनमें से सिर्फ 1248 पद भरे हुए थे, जबकि 1,596 पद खाली पड़े थे. यानी एनसीईआरटी की स्वीकृत कर्मचारी क्षमता के आधे से ज्यादा पदों पर नियुक्ति नहीं हुई थी. रिक्त पदों में 145 एकेडमी पद, 131 स्कूल शिक्षक पद, 916 मंत्रालय पद और 404 अन्य सहायक पद शामिल है. समिति ने एनसीईआरटी में इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने पर शिक्षा मंत्रालय से तत्काल ध्यान देने को कहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीईआरटी देश में शिक्षा को नए तरीके से विकसित करने और राष्ट्रीय स्तर पर पाठ्यक्रम को आकार देने वाली प्रमुख संस्था है, इसलिए यहां कर्मचारियों की कमी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
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एनईपी 2020 के लिए सबसे अहम NCERT
एनसीईआरटी की भूमिका एनईपी 2020 को लागू करने से भी जुड़ी हुई है. शिक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि एनसीईआरटी ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर फाऊंडेशन स्टेज और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन तैयार किया है. इन फ्रेमवर्क के आधार पर पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करने का काम भी शुरू किया गया है. ऐसे में समिति ने एनसीईआरटी में खाली पदों को भरने के लिए ठोस प्रयास करने की जरूरत बताई है.
CBSE में 933 पद खाली
संसदीय समिति ने सीबीएसई में कर्मचारियों की कमी को लेकर भी चिंता जाता है. रिपोर्ट के अनुसार सीबीएसई में कुल 2,117 पद स्वीकृत है, जिनमें से 933 पद खाली है. यह कुल स्वीकृत पदों का करीब 44 फीसदी भी है. सीबीएसई में सबसे ज्यादा कमी ग्रुप सी सपोर्ट स्टाफ के स्तर पर है. इस कैटेगरी में 595 पद खाली है.
CBSE से जुड़े स्कूल और छात्रों की संख्या भी बढ़ी
रिपोर्ट में सीबीएसई के बढ़ते दायरे का भी उल्लेख किया गया है. 1992-93 में सीबीएसई से 3,787 स्कूल संबद्ध थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 31,234 हो गई. बढ़ते स्कूल नेटवर्क को संभालने के लिए सीबीएसई के पास अब 25 क्षेत्रीय कार्यालय और पांच उप क्षेत्रीय कार्यालय है. छात्रों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है. 2025 में सीबीएसई से जुड़े कक्षा 12 के 17 लाख से ज्यादा और कक्षा 10 के 23.8 लाख से ज्यादा छात्र थे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>सरकार ने किया स्कॉलरशिप योजनाओं का विस्तार, 2025&amp;26 में दी गई 1.09 करोड़ स्कॉलरशिप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सरकार-ने-किया-स्कॉलरशिप-योजनाओं-का-विस्तार-2025-26-में-दी-गई-109-करोड़-स्कॉलरशिप</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा और रिसर्च करने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता देने के लिए स्कॉलरशिप और फेलोशिप योजना का दायरा बढ़ाया है. शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में सरकार की ओर दी जा रही छात्रवृत्ति और फेलोशिप से जुड़ी जानकारी बताई है. वित्त वर्ष 2025-26 में पोस्ट मैट्रिक और उच्च शिक्षा के लिए करीब 1.09 करोड़ छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही है. इनमें OBC, EBC, DTC और ST वर्ग के छात्रों के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्तियां भी शामिल है.&amp;nbsp;
OBC, EBC और DT छात्रों के लिए 36 लाख की स्कॉलरशिप&amp;nbsp;
सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार से वित्त वर्ष 2025-26 में अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और विमुक्त-घुमंतू जनजातियों के छात्रों के लिए करीब 36 लाख छात्रवृत्तियां दी गई. इन योजनाओं का उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है.&amp;nbsp;
SC छात्रों को करीब 48 लाख छात्रवृत्तियां&amp;nbsp;
अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों के लिए भी 48 लाख छात्रवृत्तियां प्रदान की गई है. यह सहायता पोस्ट मैट्रिक और उच्च शिक्षा से जुड़ी पढ़ाई के लिए दी जा रही है. वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों के लिए करीब 24 लाख का छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराई गई है. OBC, EBC, DT, SC और ST छात्रों के लिए दी गई छात्रवृत्तियों को मिलाकर वित्त वर्ष 2025-26 में पोस्ट मैट्रिक और उच्च शिक्षा के लिए करीब 1.09 करोड़ स्कॉलरशिप का आंकड़ा सामने आया है.&amp;nbsp;
UGC ने शुरू की नेशनल स्कॉलरशिप फॉर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज&amp;nbsp;
उच्च शिक्षा के छात्रों के लिए UGC ने 2023-24 में नेशनल स्कॉलरशिप फॉर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडी शुरू की थी. इस योजना के तहत पहले से चल रही चार अलग-अलग स्कॉलरशिप योजना को मिलाकर एक योजना बनाई गई. इसमें सिंगल गर्ल चाइल्ड, पीजी यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर्स, प्रोफेशनल कोर्स करने वाले एसटी और एससी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप तथा और गेट या जीपेट के आधार पर दी जाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट स्कॉलरशिप को शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
हर महीने मिलती है 15,000 की स्कॉलरशिप&amp;nbsp;
NSPGS के तहत पात्र छात्रों को शैक्षणिक वर्ष में 10 महीने तक हर महीने 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. &amp;nbsp;इस तरह पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे हैं, एलिजिबल छात्रों को अपनी शिक्षा से जुड़े खर्चों में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
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सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए भी फेलोशिप&amp;nbsp;
UGC की ओर से रिसर्च और हायर एजुकेशन की पढ़ाई करने वाली सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए भी फेलोशिप की व्यवस्था की गई है. सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले पोस्ट ग्रेजुएट फैलोशिप फॉर सिंगल गर्ल चाइल्ड सितंबर 2022 में शुरू की गई थी. इससे पहले चल रही स्वामी विवेकानंद सिंगल गर्ल चाइल्ड फेलोशिप की जगह ली थी. यह फेलोशिप पात्र सिंगल गर्ल चाइल्ड को देश में रहकर उच्च शिक्षा और रिसर्च जारी रखने में आर्थिक सहायता देती है. इसके तहत 2 साल तक फेलोशिप सहायता मिलती है.&amp;nbsp;
DBT के जरिए सीधे बैंक खातों में पहुंच रही राशि&amp;nbsp;
सरकार के अनुसार स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे भेजी जा रही है. इससे छात्रवृत्ति और फैलोशिप की रकम सीधे छात्रों तक पहुंचती है. सरकार ने यह भी बताया की राशि के समय पर वितरण और उसके इस्तेमाल की निगरानी के लिए एसएनए-स्पर्श प्लेटफाॅर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह प्लेटफार्म फंड की रियल टाइम और उपयोग आधारित ट्रैकिंग में मदद करता है.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सरकार, ने, किया, स्कॉलरशिप, योजनाओं, का, विस्तार, 2025-26, में, दी, गई, 1.09, करोड़, स्कॉलरशिप</media:keywords>
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        <title>MP Board 2027: 10वीं&amp; 12वीं बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल जारी, फरवरी से शुरू होंगे एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ MP Board 2027 Time Table Released: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं की मुख्य परीक्षा 2027 का टाइम टेबल जारी कर दिया है. मंडल की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी 2027 से शुरू होगी, जबकि 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं 24 फरवरी 2027 से शुरू होगी. दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं मुख्य सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी. परीक्षा कार्यक्रम नियमित और स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए जारी किया गया है.
ये भी पढ़ें-सरकार ने किया स्कॉलरशिप योजनाओं का विस्तार, 2025-26 में दी गई 1.09 करोड़ स्कॉलरशिप ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>2026 में रिटायर हो रहे पहले अग्निवीर, 4 साल की सेवा के बाद कौन सी सरकारी नौकरी के मिलेंगे मौके</title>
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        <description><![CDATA[ Government Jobs Ex Agniveer: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर इस साल 4 साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद रिटायर्ड होंगे. कार्यकाल पूरा होने के बाद सेना के बाहर निकलने वाले इन अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार अलग-अलग सरकारी विभागों में रोजगार के ऑप्शन तैयार कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार पूर्व अग्निवीरों को आगे नौकरी के लिए अपनी पसंद का विभाग या स्थान चुनने का ऑप्शन मिल सकता है. इस संबंध में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ गृह मंत्रालय की ओर से बैठक भी की जा चुकी है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि 2026 में रिटायर हो रहे पहले अग्निवीर 4 साल की सेवा के बाद कौन सी सरकारी नौकरी कर सकेंगे.
रेलवे में पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण&amp;nbsp;
पूर्व अग्निवीरों के लिए भारतीय रेलवे और भारतीय सेना के बीच सहयोग का ढांचा तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य अग्निवीरों और सेना से नागरिक जीवन में आने वाले कर्मियों के लिए रिटायरमेंट के बाद रोजगार का अवसर बढ़ाना है. इसके तहत पूर्व अग्निवीरों के लिए रेलवे में लेवल 2 और उससे ऊपर के पदों पर पांच फीसदी, जबकि लेवल 1 के पदों पर 10 फीसदी &amp;nbsp;आरक्षण का प्रावधान किया गया है. वहीं पूर्व सैनिकों के लिए लेवल 2 और उससे ऊपर के पदों पर 10 फीसदी तथा लेवल 1 के पदों पर 20 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है.&amp;nbsp;
CAPF और असम राइफल्स में भी 50% आरक्षण&amp;nbsp;
पूर्व अग्निवीरों के लिए सबसे बड़ा ऑप्शन केंद्रीय सशस्त्र बल पुलिस बलों और असम राइफल्स में भी है. गृह मंत्रालय पहले ही ऐलान कर चुका है कि इन बलों में कांस्टेबल जनरल ड्यूटी और राइफलमैन जैसे पदों की भर्ती में 50 फीसदी पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित होंगे. इन पदों पर भर्ती के लिए पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा में छूट देने की जानकारी भी गृह मंत्रालय ने संसद में दी है. इसके अलावा उन्हें फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट से भी छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
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राज्यों में भी सरकारी नौकरी के मौके&amp;nbsp;
केंद्र के अलावा कुछ राज्यों में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया है. ऐसे पदों पर आरक्षण की सीमा अलग-अलग राज्यों में 10 से 20 फीसदी तक बताई गई है. चंडीगढ़ में पूर्व अग्निवीरों के लिए कई &amp;nbsp;विभागों में आरक्षण को मंजूरी दी गई है. चंडीगढ़ के जेल विभाग में ग्रुप-सी जेल वार्डर के सीधी भर्ती वाले पदों पर 20 फीसदी आरक्षण दिया गया. इसके अलावा चंडीगढ़ फायर सर्विस और वन विभाग में पात्र पदों पर भी पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है.&amp;nbsp;
4 साल के बाद क्या होगा?
केंद्र सरकार की ओर से पूर्व अग्निवीरों को सेना से बाहर आने के बाद अलग-अलग सरकारी संगठनों में रोजगार के ऑप्शन देने की तैयारी की जा रही है. इसमें केंद्रीय बल, रेलवे और राज्य स्तरीय पुलिस तथा अन्य सरकारी विभाग शामिल है. इसके साथ ही जुलाई की कुछ रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केंद्र सरकार सशस्त्र बलों में अग्निवीरों की एक बड़ी संख्या को 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद नियमित सेवा में बनाए रखने पर विचार कर रही है.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>2026, में, रिटायर, हो, रहे, पहले, अग्निवीर, साल, की, सेवा, के, बाद, कौन, सी, सरकारी, नौकरी, के, मिलेंगे, मौके</media:keywords>
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        <title>UPSSSC Result 2026: सहायक लेखाकार&amp;लेखा परीक्षक का रिजल्ट घोषित, 1828 पदों पर 1643 कैंडिडेट्स सेलेक्ट</title>
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        <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने विज्ञापन संख्या-03-परीक्षा/2024 के तहत आयोजित सहायक लेखाकार एवं लेखा परीक्षक मुख्य परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है. कुल 1828 विज्ञापित पदों के सापेक्ष 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया गया है. आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों के अनुक्रमांकों की सूची तथा विभिन्न श्रेणियों की कटऑफ लिस्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी हैं.
668 सामान्य चयन पदों पर 570 अभ्यर्थी चयनित
आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत सहायक लेखाकार के 668 सामान्य चयन पदों के सापेक्ष 570 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है. इनमें अनारक्षित वर्ग के 387, अन्य पिछड़ा वर्ग के 117 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 66 अभ्यर्थी शामिल हैं. अनुसूचित जाति के 88 और अनुसूचित जनजाति के 10 पदों के सापेक्ष संबंधित श्रेणी के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण इन पदों को नियमानुसार अग्रनीत किया गया है.
950 विशेष चयन पदों में 866 अभ्यर्थियों को मिली सफलता
सहायक लेखाकार के 950 विशेष चयन पदों के सापेक्ष 866 अभ्यर्थी अंतिम रूप से चयनित हुए हैं. इनमें अनुसूचित जाति के 341, अनुसूचित जनजाति के 12 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 513 अभ्यर्थी शामिल हैं. महिला क्षैतिज आरक्षण के तहत विज्ञापित 190 पदों के सापेक्ष सभी 190 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ है.
लेखा परीक्षक के 209 पदों पर 206 चयनित
आयोग ने लेखा परीक्षक के 209 सामान्य चयन पदों के सापेक्ष 206 अभ्यर्थियों का चयन किया है. इनमें अनारक्षित वर्ग के 96, अनुसूचित जाति के 28, अनुसूचित जनजाति के 4, अन्य पिछड़ा वर्ग के 58 और ईडब्ल्यूएस वर्ग के 20 अभ्यर्थी शामिल हैं.महिला क्षैतिज आरक्षण के तहत 41 पदों के सापेक्ष सभी 41 महिला अभ्यर्थियों का चयन किया गया है.
विधिक सेवा प्राधिकरण के पद पर भी चयन
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नियंत्रणाधीन सहायक लेखाकार के एक पद पर भी एक अभ्यर्थी का चयन हुआ है. यह पद अनारक्षित श्रेणी का था.
68 अभ्यर्थियों का चयन औपबंधिक
आयोग ने 68 अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से अंतिम चयन परिणाम में शामिल किया है. इनका अंतिम चयन प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण पत्रों एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के बाद आयोग और संबंधित अधियाचनकर्ता विभाग के निर्णय पर निर्भर होगा.आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम चयन परिणाम संबंधित उच्च न्यायालय में विचाराधीन रिट याचिकाओं/विशेष अपीलों तथा भविष्य में दायर होने वाले संबंधित मामलों में पारित होने वाले आदेशों के अधीन रहेगा.
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का जोर
योगी सरकार लगातार प्रदेश में सरकारी भर्तियों को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाने पर जोर दे रही है. विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ चयन आयोगों के माध्यम से परिणाम जारी किए जा रहे हैं. सहायक लेखाकार और लेखा परीक्षक के इन पदों पर चयन से बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिलेगा.&amp;nbsp;
वेबसाइट पर चयन सूची और कटऑफ उपलब्ध
यूपीएसएसएससी ने चयनित अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक की सूची और श्रेणीवार कटऑफ आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी है. अभ्यर्थी अपने परिणाम एवं चयन से संबंधित विवरण आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>झारखंड छात्र आंदोलन के बीच 2 और JPSC परीक्षाएं रद्द, जानें अब तक कितने एग्जाम रद्द?</title>
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        <description><![CDATA[ Jharkhand Students Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब सरकार के एक बड़े फैसले के बाद फिर चर्चा में है. &amp;nbsp;छात्रों के लगातार विरोध और सरकार के साथ हुई बातचीत के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के साथ 2023 और 2025 की दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में इन परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया. इसके अलावा कुछ अन्य परीक्षाओं की जांच करने और भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए एक्सपर्ट समिति बनाने के बात भी सामने आई है. हालांकि छात्रों के सबसे बड़ी मांगों में शामिल JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच करने पर अभी सहमति नहीं बनी है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि झारखंड छात्र आंदोलन में अब तक कौन-कौन सी परीक्षाएं रद्द हुई है और पास हुए स्टूडेंट्स का अब क्या होगा? क्या दोबारा एग्जाम होंगे?&amp;nbsp;
अब तक कौन-कौन सी परीक्षाएं हुई रद्द?
छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और 2023 व 2025 की JPSC बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया. ऐसे में इस आंदोलन के दौरान फिलहाल तीन जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी है. इन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से सवाल उठा रहे थे. प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;पास कैंडिडेट्स का क्या होगा और दोबारा परीक्षा कब?
14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा रद्द होने के बाद इस परीक्षा के आधार पर जारी रिजल्ट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. क्योंकि परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है. वहीं नई परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है. सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है, लेकिन दोबारा परीक्षा कब आयोजित की जाएगी इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
झारखंड में परीक्षाएं क्यों आई विवाद में?
14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद कटऑफ और रिजल्ट प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए. &amp;nbsp;जिसके बाद छात्रों ने परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच करने और परीक्षा रद्द करने की मांग की थी. लगातार विरोध के बाद सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत हुई. इस बातचीत में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने पर सहमति बनी.
हालांकि, आंदोलन में JSSC-CGL परीक्षा अब भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है. छात्र इस परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार ने अभी इस मांग को स्वीकार नहीं किया है. सरकार का कहना है कि JSSC-CGL &amp;nbsp; परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोजित हुई थी और इसकी प्रक्रिया अदालत की निगरानी में है. परीक्षा का परिणाम भी जारी हो चुका है और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी हैं. ऐसे में सरकार का कहना है कि वह इसे एकतरफा रद्द नहीं कर सकती.&amp;nbsp;
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आंदोलन को लेकर क्या है छात्रों की प्रमुख मांगे?
छात्रों की ओर से विवादित परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच, भर्ती प्रक्रिया में सुधार, परीक्षा और रिजल्ट में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है. सरकार का दावा है कि उन्होंने छात्रों के करीब 98 फीसदी मांगे मान ली है. वहीं छात्र नेताओं का कहना है कि उनकी कई अहम मांगे अभी पूरी नहीं हुई है. खास तौर पर जेएसएससी-सीजीएल को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग पर अभी कायम है.&amp;nbsp;
कब से चल रहा है यह छात्र आंदोलन?
जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ झारखंड के छात्रों का आंदोलन 24 जुलाई से शुरू हुआ था और उसके बाद रांची में लगातार प्रदर्शन हुए. आंदोलन के दौरान छात्रों ने धरना दिया और विधानसभा घेराव का प्रयास भी किया. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया. इसके विरोध में भाजपा ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया, रांची समेत कई जगह पर प्रदर्शन, सड़क जाम और हिरासत की कार्रवाई भी हुई.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>झारखंड, छात्र, आंदोलन, के, बीच, और, JPSC, परीक्षाएं, रद्द, जानें, अब, तक, कितने, एग्जाम, रद्द</media:keywords>
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        <title>MPSC भर्ती पर छात्र आंदोलन का असर, जानें कौन&amp;सी परीक्षाएं हुईं स्थगित?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mpsc-भर्ती-पर-छात्र-आंदोलन-का-असर-जानें-कौन-सी-परीक्षाएं-हुईं-स्थगित</link>
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        <description><![CDATA[ MPSC Exam Controversy: मिजोरम लोक सेवा आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का असर अब भर्ती प्रक्रिया पर भी दिखाई देने लगा है. मिजो जिरलाई पावल के सदस्यों की ओर से आयोग के कार्यालय के बाहर किए जा रहे प्रदर्शन के चलते कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं. इसके बाद आयोग ने कई भर्ती गतिविधियों और पहले से तय परीक्षाओं व इंटरव्यू को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है. आयोग ने कहा है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी&amp;nbsp;
11 से 14 अगस्त तक होने वाली परीक्षाएं स्थगित&amp;nbsp;
MPSC की ओर से जारी सूचना के अनुसार 11 से 14 अगस्त के बीच निर्धारित सभी लिखित परीक्षाएं और इंटरव्यू स्थगित कर दिए गए हैं. इन परीक्षाओं और इंटरव्यू के लिए नई तारीखे मौजूदा स्थिति की समीक्षा के बाद घोषित की जाएगी. आयोग ने यह भी बताया कि अलग-अलग विभाग में ग्रुप सी पदों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाएं भी प्रभावित हो सकती है. दरअसल MPSC की ओर से तैयार किए जाने वाले गए प्रश्न पत्र मौजूदा परिस्थितियों के चलते संबंधित विभागों तक नहीं पहुंच पाए जा सके. ऐसे में संबंधित विभागों को प्रश्न पत्रों के विवरण को लेकर आयोग के अगले आदेश का इंतजार करने को कहा गया है.&amp;nbsp;
इन पदों के इंटरव्यू भी टले&amp;nbsp;
MPSC ने कुछ पदों के लिए निर्धारित इंटरव्यू भी स्थगित कर दिए हैं. इनमें वित्त विभाग के तहत अस्सिटेंट ऑडिट एंड अकाउंट्स ऑफिसर, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर और असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर (वर्क) के पद शामिल है. इसके अलावा सोशल वेलफेयर, विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के फील्ड फैसिलिटेटर के पद के लिए होने वाले इंटरव्यू भी टाल दिए गए हैं. इन पर इंटरव्यू की नई तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है.&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्रों को लेकर भी विभागों को निर्देश&amp;nbsp;
आयोग ने विभागों को भी वैकल्पिक व्यवस्था करने की सलाह दी है, जिन्होंने अपने भर्ती परीक्षाओं के लिए MPSC के परीक्षा हॉल इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी. यानी मौजूदा स्थिति का असर सिर्फ MPSC की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आयोग के परीक्षा केंद्रों का इस्तेमाल करने वाले विभागों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा सरकारी विभागों में कर्मचारियों की पदोन्नति, नियमितीकरण और सेवा की पुष्टि से जुड़े डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी की बैठक भी फिलहाल स्थगित कर दी गई है.&amp;nbsp;
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क्यों हो रहा है MPSC के खिलाफ प्रदर्शन?
MPSC कार्यालय के बाहर मिजो जिरलाई पावल का प्रदर्शन सोमवार से चल रहा है. छात्र संगठन आयोग की भर्ती व्यवस्था में बदलाव और उसे मजबूत करने की मांग कर रहा है. &amp;nbsp;मिजो जिरलाई पावल ने आयोग में संरचनात्मक सुधार और अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग उठाई है. मिजो जिरलाई पावल का आरोप है कि हाल ही की कुछ प्रक्रियाओं में प्रशासनिक कमियों के कारण उम्मीदवारों का आयोग की व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हुआ है. छात्र संगठन की प्रमुख मांगों में MPSC का मौजूदा वन टाइम रजिस्ट्रेशन सिस्टम खत्म करना भी शामिल है. इसके स्थान पर छात्र संगठन हर पद के लिए जरूरत के अनुसार अलग आवेदन फाॅर्म की व्यवस्था चाहता है.&amp;nbsp;
MPSC ने मांगों को क्यों किया खारिज?&amp;nbsp;
आयोग ने ओटीआर व्यवस्था खत्म करने की मांग को स्वीकार नहीं किया है. MPSC का कहना है कि ओटीआर सिस्टम भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और सरकारी नौकरी में निष्पक्षता व सामान्य बनाए रखने के लिए लागू किया गया है. आयोग के अनुसार इसे खत्म करने से भर्ती प्रक्रिया में कई समस्याएं आ सकती है. डॉक्यूमेंट की कमी वाले उम्मीदवारों के लिए अलग से मौके देने की मांग पर भी आयोग ने आपत्ति जताई है. MPSC का तर्क है कि अगर संघ समय में पूरे डॉक्यूमेंट जमा करने वाले उम्मीदवारों के बाद किसी दूसरे उम्मीदवार को दस्तावेज पूरे करने की अनुमति दी जाती है, तो यह समान व्यवहार के सिद्धांत के खिलाफ होगा. इसके अलावा आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन अधूरा होने पर उम्मीदवार को किसी भी चरण में अयोग्य घोषित किया जा सकता है, भले ही उसने लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन ही क्यों ना किया हो.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>MPSC, भर्ती, पर, छात्र, आंदोलन, का, असर, जानें, कौन-सी, परीक्षाएं, हुईं, स्थगित</media:keywords>
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        <title>नक्सल प्रभावित इलाके में ड्यूटी, फिर भी नहीं छोड़ा UPSC का सपना, अफसर ने रचा इतिहास</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नक्सल-प्रभावित-इलाके-में-ड्यूटी-फिर-भी-नहीं-छोड़ा-upsc-का-सपना-अफसर-ने-रचा-इतिहास</link>
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        <description><![CDATA[ नक्सल प्रभावित इलाके में ड्यूटी, फिर भी नहीं छोड़ा UPSC का सपना, अफसर ने रचा इतिहास ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नक्सल, प्रभावित, इलाके, में, ड्यूटी, फिर, भी, नहीं, छोड़ा, UPSC, का, सपना, अफसर, ने, रचा, इतिहास</media:keywords>
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        <title>आखिरी दिन तक नहीं कर पाए रजिस्ट्रेशन तो क्या ऑप्शन, कैसे करें मेडिकल की पढ़ाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आखिरी-दिन-तक-नहीं-कर-पाए-रजिस्ट्रेशन-तो-क्या-ऑप्शन-कैसे-करें-मेडिकल-की-पढ़ाई</link>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी काउंसलिंग 2026 में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों के लिए आज यानी 12 अगस्त का दिन बहुत अहम है. मेडिकल सीट के लिए होने वाली MCC राउंड 1 काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आज खत्म हो रही है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, उनके लिए आज अंतिम मौका है. तय समय तक प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर उम्मीदवार इस राउंड में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मेडिकल में एडमिशन का पूरा रास्ता बंद हो गया है. आगे के राउंड में भी मौका मिल सकता है, लेकिन इसके लिए संबंधित काउंसलिंग अथॉरिटी के नियम और पात्रता देखना जरूरी है.&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन नहीं किया तो क्या होगा?
अगर आप MCC की किसी काउंसलिंग राउंड की रजिस्ट्रेशन या चॉइस फिलिंग की आखिरी तारीख तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं, तो उस राउंड में सीट अलॉटमेंट के लिए आपका नाम शामिल नहीं होगा. यानी उस राउंड की सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया में आप हिस्सा नहीं ले पाएंगे. हालांकि एक राउंड मिस होने का मतलब यह नहीं है कि नीट यूजी के जरिए मेडिकल सीट पाने की आपकी पूरी संभावना खत्म हो गई है. एमसीसी काउंसलिंग में आगे भी राउंड होते हैं, इसलिए सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित साल के नियमों के अनुसार आप अगले राउंड में कैसे शामिल हो सकते हैं.&amp;nbsp;
अगला राउंड आने पर दोबारा मौका&amp;nbsp;
अगर आपने पहला राउंड मिस कर दिया है, तो आगे के राउंड की आधिकारिक सूचना पर नजर रखें. नियमों के अनुसार कई काउंसलिंग प्रक्रिया में उम्मीदवार अगले राउंड के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. एमसीसी काउंसलिंग में राउंड 1 और राउंड 2 के बाद मॉप अप राउंड और स्ट्रे वेकेंसी राउंड भी होते हैं. इन राउंड का उद्देश्य पहले के चरणों के बाद बची हुई सीटों को भरना होता है. इसलिए पहले राउंड में हिस्सा नहीं ले पाने वाले उम्मीदवारों के लिए आगे के चरण जरूरी होते हैं.&amp;nbsp;
MCC काउंसलिंग के अलावा स्टेट काउंसलिंग का ऑप्शन&amp;nbsp;
अगर एमसीसी काउंसलिंग का कोई राउंड मिस हो गया है, तो उम्मीदवार को स्टेट नीट यूजी काउंसलिंग का ऑप्शन भी देखना चाहिए. राज्य कोटे की सीटों के लिए संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी अलग से प्रक्रिया आयोजित करती है. स्टेट काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन, चॉइस फिलिंग, सीट अलॉटमेंट और कॉलेज में रिपोर्टिंग की अपनी तारीखें होती है. इसलिए एमसीसी का राउंड मिस होने पर अपने राज्य की काउंसलिंग का शेड्यूल भी तुरंत चेक करना चाहिए. हालांकि यह भी ध्यान रखें कि राज्य काउंसलिंग में सीट और पात्रता से जुड़े नियम अलग होते हैं. इसलिए उम्मीदवार को अपने राज्य के अधिकारिक काउंसलिंग अथॉरिटी की शर्तों के अनुसार ही आवेदन करना होगा.&amp;nbsp;
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सिर्फ एक राउंड के भरोसे न रहे&amp;nbsp;
नीट यूजी के बाद मेडिकल सीट के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया में अलग-अलग चरण होते हैं. एक राउंड में मौका नहीं मिलने या उसमें हिस्सा नहीं ले पाए तो आगे की प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी है. बाद के राउंड में पहले से खाली रह गई या किसी उम्मीदवार के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई सीटें उपलब्ध हो सकती है. मॉपअप और स्ट्रे वेकेंसी राउंड इस तरह बची हुई सीटों को भरने के लिए आयोजित किए जाते हैं. हालांकि बाद के राउंड तक सीटों के ऑप्शन सीमित हो जाते हैं, इसलिए सिर्फ अंतिम राउंड का इंतजार करने के बजाय उपलब्ध हर एलिजिबल काउंसलिंग ऑप्शन पर नजर रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
अगर इस साल सीट नहीं मिली तो क्या करें?&amp;nbsp;
अगर सभी काउंसलिंग राउंड के बाद भी एमबीबीएस या बीडीएस की सीट नहीं मिलती है, तो उम्मीदवार के पास अगले साल नीट यूजी दोबारा देकर मेडिकल सीट हासिल करने का ऑप्शन रहता है. इसके अलावा उम्मीदवार प्राइवेट यूनिवर्सिटी के ऑप्शन भी देख सकते हैं. &amp;nbsp;इन संस्थानों की फीस और एडमिशन प्रक्रिया अलग होती है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित संस्थान और काउंसलिंग अथॉरिटी के नियमों की जानकारी लेना जरूरी है. इसके अलावा काउंसलिंग मिस होने पर उम्मीदवार एमबीबीएस के लिए विदेश के ऑप्शन भी देख सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आखिरी, दिन, तक, नहीं, कर, पाए, रजिस्ट्रेशन, तो, क्या, ऑप्शन, कैसे, करें, मेडिकल, की, पढ़ाई</media:keywords>
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        <title>Independence Day Speech: स्कूल स्पीच जीतनी है? ऐसे तैयार करें दमदार भाषण</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day Speech: स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस जैसे बड़े मौकों पर हर स्कूलों में भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं. हर छात्र का सपना होता है कि वह मंच पर जाकर ऐसा भाषण दे कि वहां बैठे लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे हॉल गूंज उठे. लेकिन एक दमदार और पुरस्कार जीतने वाला भाषण तैयार करना सिर्फ रट्टा मारने का खेल नहीं है. इसके लिए सही टाइम मैनेजमेंट, मजबूत शुरुआत, दमदार बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास की जरूरत होती है. अगर आप भी इस बार स्कूल की स्पीच प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल करना चाहते हैं, तो इन तरीकों से अपनी स्पीच तैयार कर सकते हैं.&amp;nbsp;
समय का रखें ध्यान
प्रतियोगिता में समय सीमा का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है. आपको बोलने के लिए जितने मिनट दिए गए हैं, उसी के हिसाब से अपना भाषण तैयार करें. यदि समय सिर्फ दो मिनट का है तो सीधे मुद्दे की बात करते हुए बीच के 1 मिनट में मुख्य संदेश दें और आखिरी 20 सेकंड में धन्यवाद के साथ समापन करें. अगर समय 5 मिनट तक का है तो इसमें आप विषय को थोड़ा विस्तार से बोल सकते हैं. बीच के 3 मिनट में विषय से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य, उदाहरण या कोई छोटी कहानी शामिल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
वहीं अगर 10 मिनट का समय मिलता है तो इन लंबे भाषण में दर्शकों को बांधे रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इसके लिए अपने भाषण को तीन भागों में बांटें- शुरुआत के 2 मिनट, मेन बॉडी 6 मिनट और समापन 2 मिनट. इसमें आप कविताएं और महान नेताओं के विचारों को गहराई से जोड़ सकते हैं.&amp;nbsp;
शुरुआत और समापन के लिए दमदार कोट्स
भाषण की पहली और आखिरी लाइन ही तय करती है कि आपको कितने नंबर मिलेंगे. इसलिए भाषण की शुरुआत किसी शायरी या दिलचस्प कहानी से करें. ताकि शुरुआत से ही दर्शकों का ध्यान आपकी ओर ही खींचा रहे. इसके अलावा भाषण का समापन हमेशा एक मजबूत के साथ करें. भाषण का समापन ऐसा होना चाहिए जो लोगों के दिलों को छू जाए.&amp;nbsp;
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मंच पर आत्मविश्वास
आप कितना ही अच्छा भाषण तैयार कर लें, लेकिन मंच का डर अच्छे-भले भाषण को खराब कर सकता है. इससे बचने और जजों को प्रभावित करने के लिए भाषण देते समय सिर्फ जमीन, छत या जजों की तरफ न देखें. अपनी नजरें पूरे हॉल में घुमाएं. इससे दर्शकों को लगेगा कि आप सीधे उनसे बात कर रहे हैं. साथ ही पूरे भाषण को एक ही टोन पढ़ने की गलती न करें. जहां देशभक्ति और वीरता की बात आए, वहां आवाज में जोश लाएं और जहां शहीदों की बात हो, वहां आवाज को थोड़ा गंभीर रखें. भाषण देते समय मंच पर सीधे खड़े रहें, और माइक को कसकर पकड़ने के बजाय अपने हाथों के सामान्य इशारों से अपनी बात को समझाएं. इससे दर्शक ज्यादा देर तक आपका भाषण सुन पाएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Independence, Day, Speech:, स्कूल, स्पीच, जीतनी, है, ऐसे, तैयार, करें, दमदार, भाषण</media:keywords>
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        <title>CBSE 12वीं कंपार्टमेंट रिजल्ट 2026 जारी, ऐसे चेक करें मार्कशीट</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE 12th Compartment Result 2026 Released&amp;nbsp;:&amp;nbsp; केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. जिन छात्रों ने कंपार्टमेंट परीक्षा में भाग लिया था, वह अपना संशोधित रिजल्ट और मार्कशीट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. रिजल्ट सीबीएसई के ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in. पर जारी किया गया है. छात्र अपने रोल नंबर, एडमिट कार्ड नंबर, स्कूल कोड और जरूरी डिटेल की मदद से मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं. वही 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा 28 जुलाई को आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद अब बोर्ड ने इसका रिजल्ट जारी किया है. ऑफिशियल वेबसाइट के अलावा छात्र अपना रिजल्ट डिजिलॉकर और उमंग एप के जरिए भी देख सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, 12वीं, कंपार्टमेंट, रिजल्ट, 2026, जारी, ऐसे, चेक, करें, मार्कशीट</media:keywords>
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        <title>नीट यूजी काउंसलिंग दिल्ली की 85% कोटा सीटों के लिए फिर खुला मौका, ऐसे करें आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नीट-यूजी-काउंसलिंग-दिल्ली-की-85-कोटा-सीटों-के-लिए-फिर-खुला-मौका-ऐसे-करें-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Delhi Quota Seats: नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के बीच दिल्ली की 85 प्रतिशत कोटा सीटों को लेकर उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है. जिन उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन के समय दिल्ली 85 प्रतिशत कोटा का ऑप्शन नहीं चुना था, उन्हें मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने एक और मौका दिया है. ऐसे उम्मीदवार अपने रजिस्ट्रेशन फॉर्म को अनलॉक करके दिल्ली कोटा के तहत मेडिकल और डेंटल सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं. एमसीसी ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन अनलॉक करने की सुविधा शुरू की है.
दिल्ली 85% कोटा के लिए क्या करना होगा?

जिन उम्मीदवारों ने शुरुआत में दिल्ली कोटा का ऑप्शन नहीं चुना था, वे सबसे पहले MCC यूजी काउंसलिंग 2026 पोर्टल पर जाएं.
इसके बाद अपने रजिस्ट्रेशन में लॉगिन करें.
अब रजिस्ट्रेशन अनलॉक करने का ऑप्शन इस्तेमाल करना होगा.
फॉर्म अनलॉक होने के बाद उम्मीदवारों को क्वालिफिकेशन सेक्शन खोलना होगा.
इसके बाद अप्लाई फॉर सेक्शन ऑप्शन सेलेक्ट करें.
फिर दिल्ली की जिन सीटों के लिए आवेदन करना है, उनसे संबंधित ऑप्शन का चयन करें.
इसके बाद जरूरी ऑप्शन चुनने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें.
लास्ट में काउंसलिंग शेड्यूल के अनुसार चॉइस फिलिंग पूरी करें.

इन सीटों के लिए कर सकते हैं आवेदन
MCC की ओर से दिए गए ऑप्शन में दिल्ली की अलग-अलग सीटों के लिए आवेदन का ऑप्शन उपलब्ध है. इनमें डीयू-आईपी, एमबीबीएस और बीडीएस तथा बीएससी नर्सिंग दिल्ली सीट कोटा शामिल है. उम्मीदवार को अपने पात्रता के अनुसार संबंधित ऑप्शन का चयन करना होगा और फिर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
CW कैटेगरी के लिए भी जारी हुई अतिरिक्त सूची
एमसीसी ने दिल्ली 85 प्रतिशत कोटा के तहत चिल्ड्रन एंड विंडो कैटेगरी के लिए एलिजिबल उम्मीदवारों की अतिरिक्त सूची भी जारी की है. यह सूची MBBS-BDS के साथ BAMS, BUMS और BHMS जैसे अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए है. इस लिस्ट में उम्मीदवारों से संबंधित कई जानकारियां दी गई है. इसमें उम्मीदवार का नाम, नीट रोल नंबर, ऑल इंडिया रैंक, सीडब्ल्यू कैटेगरी और प्राथमिकता और सर्विस केटेगरी से जुड़ी जानकारियां शामिल है. सीडब्ल्यू कैटेगरी के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को जारी की गई सूची को ध्यान से चेक करने और MCC की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है.
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CW पोर्टल भी दोबारा खोलने का नोटिस
एमसीसी ने सीडब्ल्यू कैटेगरी से संबंधित पोर्टल को दोबारा खोलने को लेकर भी नोटिस जारी किया है. ऐसे उम्मीदवारों को पात्रता सूची और संबंधित निर्देशों की जांच करने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
चॉइस फिलिंग की तारीख का रखें ध्यान
दिल्ली 85 प्रतिशत कोटा के लिए रजिस्ट्रेशन अनलॉक करने के बाद उम्मीदवारों को काउंसलिंग शेड्यूल के अनुसार अपनी सीटों की चॉइस फिलिंग पूरी करनी होगी. एमसीसी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वह आवेदन में बदलाव करते समय सभी जानकारी ध्यान से भरे और तय समय सीमा के अंदर अपनी चॉइस सबमिट करें.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नीट, यूजी, काउंसलिंग, दिल्ली, की, 85, कोटा, सीटों, के, लिए, फिर, खुला, मौका, ऐसे, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब मिड&amp;डे मील में मिलेगा इडली&amp;सांभर, लागू हुआ नया मेन्यू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-के-सरकारी-स्कूलों-में-अब-मिड-डे-मील-में-मिलेगा-इडली-सांभर-लागू-हुआ-नया-मेन्यू</link>
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        <description><![CDATA[ Delhi School Mid day Meal: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के मिड-डे-मील के मेन्यू में बदलाव किया गया है. अब बच्चों को सप्ताह में एक दिन इडली-सांभर भी परोसा जाएगा. शिक्षा निदेशालय ने पीएम पोषण योजना के तहत मिलने वाले भोजन का नया मेन्यू जारी कर दिया है. इसके साथ ही कुछ पुराने डिशेस को भी बदल गया है. नए मेन्यू को दिल्ली के उन सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाएगा जो पीएम पोषण योजना के दायरे में आते हैं.&amp;nbsp;
6 दिन का होगा नया मिड-डे-मील मेनू&amp;nbsp;
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार पीएम पोषण के तहत अब छात्रों को 6 दिन के चक्र में अलग-अलग भोजन दिया जाएगा. नए मेनू में पूरी-चना, चावल- दाल और कढ़ी के साथ इडली सांभर भी शामिल किया जाएगा. शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों और भोजन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी को नए मेन्यू के अनुसार जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं. इडली-सांभर शुरू करने के लिए 24 अगस्त तक का समय दिया गया है, जबकि बाकी बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने हैं.&amp;nbsp;
नया 6 दिवसीय मेन्यू इस तरह होगा&amp;nbsp;

पहला दिन- पूरी, काले चने की ग्रेवी और मैश की हुई सब्जियां&amp;nbsp;
दूसरा दिन- इडली और सांभर&amp;nbsp;
तीसरा दिन- चावल, छोले और मैश की हुई सब्जियां&amp;nbsp;
चौथा दिन- पूरी, छोले और मैश की हुई सब्जियां&amp;nbsp;
पांचवा दिन- चावल और दाल&amp;nbsp;
छठा दिन- चावल और कढ़ी&amp;nbsp;
इसके अलावा पुराने मेन्यू में शामिल रागी हलवे की जगह गेहूं का आटा और चना मसाला तथा वेजिटेबल दलिया की जगह ज्वार और बाजार को शामिल करने की सिफारिश की गई है.&amp;nbsp;

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इडली सांभर के लिए दो हफ्ते का समय&amp;nbsp;
शिक्षा निदेशालय ने नए मेन्यू के पहले दिन और तीसरे से छठे दिन तक के खाने को तुरंत लागू करने की निर्देश दिए हैं. वहीं इडली सांभर शुरू करने के लिए स्कूलों और संबंधित एजेंसियों को अधिकतम दो सप्ताह का समय दिया गया है. विभाग के अनुसार इडली सांभर तैयार करने के लिए विशेष उपकरण, अलग तरह की सामग्री, जरूरी बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होगी. इसी वजह से इसे शुरू करने के लिए अलग से समय दिया गया है. इम्पैनल्ड एनजीओ और सेंट्रलाइज्ड किचन एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि 24 अगस्त तक स्कूलों में इडली-सांभर परोसा जानना शुरू हो जाए. इसके बाद आमतौर पर कोई भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा.&amp;nbsp;
हर स्कूल में एक ही खाना देना जरूरी नहीं&amp;nbsp;
शिक्षा निदेशालय ने यह स्पष्ट किया है कि किसी एनजीओ सेंट्रलाइज्ड किचन एजेंसी के लिए एक ही दिन सभी स्कूलों में एक जैसा भोजन देना जरूरी नहीं होगा. सामग्री की उपलब्धता, लॉजिस्टिक समस्याओं और दूसरी जरूरत की आधार पर अलग-अलग स्कूलों में स्वीकृत मेन्यू के अलग-अलग व्यंजन दिए जा सकते हैं. हालांकि हर स्कूल को 6 दिनों के पूरे संशोधित मेन्यू का पालन करना होगा. यानी किसी स्कूल में किसी दिन मेन्यू में शामिल एक डिश उपलब्ध कराया जा सकता है, लेकिन 6 दिन के पूरे भोजन चक्र में तय सभी ऑप्शन को शामिल करना जरूरी रहेगा.
ये भी पढ़ें-आखिरी दिन तक नहीं कर पाए रजिस्ट्रेशन तो क्या ऑप्शन, कैसे करें मेडिकल की पढ़ाई? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, के, सरकारी, स्कूलों, में, अब, मिड-डे, मील, में, मिलेगा, इडली-सांभर, लागू, हुआ, नया, मेन्यू</media:keywords>
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        <title>10th Pass Government Jobs: 10वीं पास करने के बाद किन सरकारी नौकरियों का खुल जाता है दरवाजा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/10th-pass-government-jobs-10वीं-पास-करने-के-बाद-किन-सरकारी-नौकरियों-का-खुल-जाता-है-दरवाजा</link>
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        <description><![CDATA[ 10th Pass Government Jobs:&amp;nbsp;बहुत से छात्र 10वीं की पढ़ाई पूरी करते ही सरकारी नौकरी की तलाश शुरू कर देते हैं. खुशी की बात यह है कि सिर्फ 10वीं पास करने के बाद भी सरकार के कई विभागों में अच्छी नौकरियां मिल सकती हैं. इन नौकरियों में न सिर्फ ठीक-ठाक सैलरी मिलती है, बल्कि नौकरी की सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं. आइए जानते हैं कि 10वीं पास करने के बाद कौन-कौन सी सरकारी नौकरियां हासिल की जा सकती हैं.&amp;nbsp;
किन विभागों में मिलता है मौका
सबसे ज्यादा मौके रेलवे विभाग में मिलते हैं, जहां रेलवे ग्रुप डी और असिस्टेंट लोको पायलट जैसे पदों के लिए 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा SSC यानी स्टाफ सिलेक्शन कमीशन भी मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) और GD कांस्टेबल जैसे पदों पर हर साल भर्ती निकालता है. जो उम्मीदवार देश की सेवा करना चाहते हैं, उनके लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में अग्निवीर योजना के तहत भी 10वीं पास के आधार पर भर्ती होती है. इसके अलावा राज्य पुलिस विभागों में कांस्टेबल पद के लिए भी बड़ी संख्या में वैकेंसी आती रहती है. डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक यानी GDS के पद पर भी 10वीं पास उम्मीदवारों की भर्ती होती है, जिसमें परीक्षा के बजाय सीधे मार्कशीट के नंबरों के आधार पर चयन होता है. इसके अलावा वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड, बीएसएफ, सीआरपीएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों में भी कांस्टेबल स्तर के पदों पर मौका मिलता है.&amp;nbsp;
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आवेदन कैसे करें और क्या रखें ध्यान
इन ज्यादातर सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन ऑनलाइन ही किया जाता है. इसके लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भर्ती से जुड़ी नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ना जरूरी है, क्योंकि हर पद के लिए उम्र सीमा, शारीरिक योग्यता और अन्य शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं. ज्यादातर भर्तियों में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और दस्तावेज जांच जैसे चरण होते हैं, इसलिए समय रहते तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.
सेना और पुलिस जैसी नौकरियों में शारीरिक फिटनेस पर खास ध्यान दिया जाता है, इसलिए दौड़ और अन्य शारीरिक परीक्षणों की प्रैक्टिस भी जरूरी है. आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज जैसे 10वीं की मार्कशीट, आधार कार्ड और फोटो पहले से तैयार रखने चाहिए, ताकि आखिरी समय में कोई परेशानी न हो. सही जानकारी और सही तैयारी के साथ 10वीं पास उम्मीदवार भी एक अच्छी और स्थायी सरकारी नौकरी हासिल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>10th, Pass, Government, Jobs:, 10वीं, पास, करने, के, बाद, किन, सरकारी, नौकरियों, का, खुल, जाता, है, दरवाजा</media:keywords>
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        <title>राजस्थान में 600 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती को मंजूरी, जल्द जारी होगा विज्ञापन </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राजस्थान-में-600-चिकित्सा-अधिकारियों-की-भर्ती-को-मंजूरी-जल्द-जारी-होगा-विज्ञापन</link>
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        <description><![CDATA[ Rajasthan Medical Officer recruitment 2026: राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में 600 चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर भर्ती की जाएगी. राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन पदों पर भर्ती की विज्ञप्ति जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जिसके बाद अब भर्ती प्रस्ताव जल्द जारी किया जाएगा. इस भर्ती को लेकर पहले यह प्रस्ताव चिकित्सा मंत्री के पास भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिली है. वहीं भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद एलिजिबल उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे.&amp;nbsp;
अब तक 39,288 पदों पर भर्ती और नियुक्तियां&amp;nbsp;
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के अनुसार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग संवर्गों में अब तक 39,288 पदों पर भर्ती और नियुक्ति की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है. इनमें 208 चिकित्सा अधिकारी (दंत), 1,699 चिकित्सा अधिकारी और 19,240 अराजपत्रित संवर्ग के पद शामिल हैं. वहीं चिकित्सा विभाग में 14 सहायक आचार्य पदों पर नियुक्ति की गई है. इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 18,126 पदों पर भी नियुक्तियां की जा चुकी है.&amp;nbsp;
सरकारी अस्पतालों में बढ़ेंगे डॉक्टर&amp;nbsp;
चिकित्सा मंत्री के अनुसार 600 चिकित्सा अधिकारियों की नई भर्ती सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है. इस भर्ती के बाद सरकारी अस्पतालों और दूसरे चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, इससे मरीजों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. वहीं भर्ती को लेकर विभाग का जोर खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्र के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ उपलब्ध कराने पर है. सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
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निरामय राजस्थान पर होगा सरकार का फोकस
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार निरामय राजस्थान के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और मानव संसाधन को मजबूत करने पर भी लगातार काम कर रही है. सरकार का लक्ष्य प्रदेश के लोगों को उनके नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ही बेहतर और समय पर उपचार उपलब्ध कराना है.
आरयूएचएस के जरिए होगी भर्ती&amp;nbsp;
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. &amp;nbsp;भर्ती से संबंधित विज्ञापन जारी होने के बाद उम्मीदवारों को आवेदन और पात्रता से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी. भर्ती प्रक्रिया राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के माध्यम से कराए जाने की जानकारी भी दी गई है.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राजस्थान, में, 600, चिकित्सा, अधिकारियों, की, भर्ती, को, मंजूरी, जल्द, जारी, होगा, विज्ञापन </media:keywords>
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        <title>ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत की मौजूदगी, QS में शामिल  हुए 52 संस्थान</title>
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        <description><![CDATA[ QS world university ranking 2027: भारत की हायर एजुकेशनल व्यवस्था में वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है. QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के 52 हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को जगह मिली है, जबकि 2015 में यह संख्या महज 11 थी. केंद्र सरकार के अनुसार पिछले एक दशक में उच्च शिक्षा के विस्तार और संस्थानों में किए गए अलग-अलग सुधारो का असर विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति पर दिखाई दे रहा है. वहीं QS रैंकिंग में शामिल भारतीय संस्थानों की संख्या बढ़ने के साथ कई संस्थानों की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है. 52 भारतीय संस्थानों में से 26 की रैंकिंग बेहतर हुई, 9 संस्थान अपनी पिछली स्थिति पर कायम रहे और 15 की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई. वहीं 2 संस्थाओं ने पहली बार इस रैंकिंग में जगह बनाई.&amp;nbsp;
IIT दिल्ली रहा सबसे आगे&amp;nbsp;
QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में आईआईटी दिल्ली भारत का सबसे बेहतर रैंक वाला संस्थान रहा. आईआईटी दिल्ली ने 5 पायदान की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 118वीं रैंक हासिल की है. इसके बाद आईआईटी बॉम्बे 134वें, आईआईटी मद्रास 170वें, आईआईटी खड़गपुर 205वें और आईआईएससी बैंगलुरु 221वें स्थान पर रहा. आईआईटी बॉम्बे की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले 5 स्थान नीचे आई है. वहीं आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर की स्थिति में सुधार हुआ है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-दिल्ली के स्कूलों में रोजाना 30 मिनट अनिवार्य रीडिंग, लंच ब्रेक में भी खुली रहेगी लाइब्रेरी&amp;nbsp;
IIT के अलावा इन संस्थाओं ने भी किया बेहतर प्रदर्शन&amp;nbsp;
इस बार वैश्विक रैंकिंग में भारत की बेहतर स्थिति केवल IIT और IISc तक सीमित नहीं रही. कई नॉन आईआईटी संस्थानों ने भी रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई है. जैसे बिट्स पिलानी 93 स्थान ऊपर चढ़कर 575वें स्थान पर पहुंचा, जबकि VIT ने 94 पायदान की छलांग लगाकर 597वीं रैंक हासिल की. शूलिनी यूनिवर्सिटी ने भी 51 स्थान ऊपर उठकर 452वें स्थान पर पहुंची है. &amp;nbsp;इसके अलावा आईआईटी हैदराबाद की रैंकिंग में 76 स्थान का सुधार हुआ. वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया ने भी 75 से ज्यादा स्थान ऊपर पहुंचकर 686वीं रैंक हासिल की. रैंकिंग में शामिल मिल 52 भारतीय संस्थानों में से 18 ने अपना अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया जिनमें 13 नॉन आईआईटी इंस्टीट्यूट शामिल है.&amp;nbsp;
सरकार ने NIRF और NEP को दिया श्रेय&amp;nbsp;
केंद्र सरकार ने भारत की वैश्विक रैंकिंग की बढ़ती मौजूदगी को NIRF और उच्च शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों से भी जोड़ा है. एनआईआरएफ की शुरुआत 2015 में हुई. इसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन शिक्षण एवं संसाधन, रिसर्च और प्रोफेशनल प्रैक्टिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीच एवं इंक्लूसिविटी और पीयर परसेप्शन जैसे मानकों पर किया जाता है. इसके अलावा सरकार ने वैश्विक रैंकिंग में भारतीय संस्थानों के बेहतर प्रदर्शन के पीछे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) समेत कई पहलों को भी जरूरी बताया.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Government School Closure Report : देश में एक साल में बंद हुए करीब 10 हजार स्कूल, ये राज्य सबसे आगे</title>
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        <description><![CDATA[ Government School Closure Report : देश में सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर लोकसभा में पेश किए गए आंकड़े सामने आए हैं. UDISE+ के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 से 2025-26 के बीच देशभर में सरकारी प्राथमिक स्तर के स्कूलों की संख्या में करीब 10 हजार की कमी दर्ज की गई. एक साल में यह संख्या 8,89,806 से घटकर 8,79,940 रह गई, यानी कुल 9,866 स्कूल कम हुए. हालांकि, शिक्षा मंत्रालय ने यह साफ नहीं किया है कि इनमें से कितने स्कूल छात्रों की कम संख्या के कारण सच में बंद हुए हैं.ऐसे में आइए जानते हैं कि देश में एक साल में सरकारी स्कूलों की संख्या कम होने में सबसे आगे कौन सा राज्य है.&amp;nbsp;
एक साल में 9,866 स्कूल कम हुए
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में देश में सरकारी प्राथमिक स्तर के 8,89,806 स्कूल थे. 2025-26 में इनकी संख्या घटकर 8,79,940 हो गई. एक साल में 9,866 स्कूलों की कमी आई, जो करीब 1.1 फीसदी है. यह आंकड़ा DMK सांसद टीआर बालू के सवाल के जवाब में सामने आया. उन्होंने पूछा था कि क्या छात्रों की कम संख्या के कारण बड़ी संख्या में प्राथमिक स्कूल बंद किए गए हैं और ड्रॉपआउट रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है. जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने दोनों शैक्षणिक वर्षों में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या बताई, लेकिन छात्रों की कमी के कारण बंद हुए स्कूलों की अलग संख्या नहीं दी.&amp;nbsp;
स्कूलों की संख्या कम होने में सबसे आगे कौन सा राज्य है?
मेघालय में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या में सबसे बड़ी कमी दर्ज हुई. यहां 2024-25 में 7,633 स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 5,459 रह गए. एक साल में 2,174 स्कूल कम हुए. इसके बाद तेलंगाना का नंबर रहा, जहां सरकारी स्कूलों की संख्या 22,983 से घटकर 21,022 हो गई. इस तरह यहां 1,961 स्कूल कम हुए. आंध्र प्रदेश में भी 1,446 स्कूलों की कमी दर्ज की गई. यहां संख्या 37,449 से घटकर 36,003 रह गई.&amp;nbsp;
इन राज्यों में भी घटी स्कूलों की संख्या
मध्य प्रदेश में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या 1,043 कम हुई. कर्नाटक में 615, पश्चिम बंगाल में 587, राजस्थान में 473 और महाराष्ट्र में 357 स्कूल कम हुए. हिमाचल प्रदेश में 259 और असम में 209 स्कूलों की कमी दर्ज की गई. उत्तर प्रदेश में भी सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या थोड़ी घटी है. देश में सबसे बड़ा सरकारी प्राथमिक स्कूल नेटवर्क रखने वाले उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या 1,34,115 से घटकर 1,33,948 रह गई.&amp;nbsp;
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बिहार और छत्तीसगढ़ में बढ़ी संख्या
सभी राज्यों में सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट नहीं हुई. बिहार में 2024-25 के 66,803 स्कूलों की संख्या बढ़कर 2025-26 में 66,915 हो गई. यहां 112 स्कूल बढ़े. छत्तीसगढ़ में भी सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या 43,836 से बढ़कर 43,853 हो गई. वहीं जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्कूलों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Deepak Dhar Dirac Medal 2026 : भारतीय भौतिक विज्ञानी दीपक धर को मिला डिराक मेडल, जानें उनका योगदान</title>
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        <description><![CDATA[ Deepak Dhar Dirac Medal 2026 : भारत के एक छोटे से शहर से शुरू हुआ विज्ञान का सफर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बना चुका है. भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी दीपक धर को साल 2026 का प्रतिष्ठित डिराक मेडल मिला है. इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) की ओर से दिए जाने वाले इस सम्मान के लिए उन्हें सांख्यिकीय यांत्रिकी और जटिल भौतिक सिस्टम को समझने में उनके जरूरी योगदान के लिए चुना गया है, इस साल धर के अलावा तीन अन्य वैज्ञानिकों को भी इस सम्मान से नवाजा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि भारतीय भौतिक विज्ञानी दीपक धर का योगदान क्या रहा है.&amp;nbsp;
भारतीय भौतिक विज्ञानी दीपक धर का योगदान
दीपक धर लंबे समय से सांख्यिकीय भौतिकी और मूश्किल सिस्टम से जुड़े विषयों पर शोध कर रहे हैं. सांख्यिकीय यांत्रिकी के जरिए यह समझने की कोशिश की जाती है कि बड़ी संख्या में मौजूद कण या किसी सिस्टम के अलग-अलग हिस्से मिलकर किस तरह सामूहिक व्यवहार करते हैं. धर के शोध ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि किसी सिस्टम के छोटे-छोटे हिस्सों के बीच होने वाली नॉर्मल सी एक्टिविटी समय के साथ बड़े और मुश्किल बदलाव कैसे पैदा कर सकती हैं. उनके काम का इस्तेमाल सैंडपाइल मॉडल जैसी &amp;nbsp;मुश्किल सिस्टम को समझने में किया गया है.&amp;nbsp;
सैंडपाइल मॉडल और धर बर्निंग एल्गोरिदम
दीपक धर के सबसे चर्चित वैज्ञानिक योगदानों में सैंडपाइल मॉडल पर उनका काम शामिल है. इस मॉडल में रेत के ढेर में लगातार रेत के कण जोड़े जाते हैं. ज्यादातर बार इससे कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, लेकिन कभी-कभी एक छोटा सा बदलाव अचानक बहुत बड़ी घटना को जन्म दे सकता है. &amp;nbsp;इसी शोध से जुड़ा धर बर्निंग एल्गोरिदम भी उनके प्रमुख योगदानों में शामिल है. यह सेल्फ-ऑर्गनाइज्ड क्रिटीकेलिटी और मुश्किल सिस्ट के अध्ययन में जरूरी माना जाता है. ऐसे सिद्धांतों का इस्तेमाल भूकंप, ट्रैफिक जाम और वित्तीय बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव जैसी जटिल घटनाओं को समझने में भी किया जाता है.&amp;nbsp;
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दीपक धर का जन्म और उनके करियर का सफर
दीपक धर का जन्म 1951 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था. बचपन में उनके पिता विज्ञान से जुड़ी पत्रिकाएं घर लाते थे. अंडरस्टैंडिंग साइंस पत्रिका ने उन्हें काफी प्रभावित किया और विज्ञान के प्रति उनकी रुचि मजबूत हुई. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और इसके बाद IIT कानपुर से MSc की, आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) पहुंचे, जहां उन्हें रिचर्ड फेनमैन फेलोशिप मिली. उन्होंने प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमैन के साथ काम किया और उनके टीचिंग असिस्टेंट भी रहे. साल 1978 में उन्होंने PhD पूरी की.&amp;nbsp;
विदेश में मौका मिला, फिर भारत लौटे
PhD के बाद धर ने अमेरिका में करियर बनाने के बजाय भारत लौटने का फैसला किया. वह मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) से जुड़े. इसके बाद उन्होंने IISER पुणे में भी करीब आठ साल तक प्रोफेसर के रूप में काम किया. &amp;nbsp;डिराक मेडल से पहले भी दीपक धर को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं. साल 2022 में वह बोल्ट्जमैन मेडल पाने वाले पहले भारतीय बने. इसके बाद 2023 में उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>10 साल बच्चों को पढ़ाया, रात में की तैयारी अब DSP बने अंकित कुमार</title>
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        <description><![CDATA[ 10 साल बच्चों को पढ़ाया, रात में की तैयारी अब DSP बने अंकित कुमार ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UGC NET की आंसर&amp;की को लेकर NTA ने दिया अपडेट, इसी सप्ताह होगी जारी</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET जून 2026 की आंसर-की का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए एनटीए ने जानकारी दी है. NTA के अनुसार यूजीसी नेट जून 2026 की प्रोविजनल आंसर-की इसी सप्ताह जारी की जाएगी. लंबे समय से आंसर-की का इंतजार कर रहे हैं उम्मीदवारों के लिए यह अपडेट जरूरी है, क्योंकि आंसर-की जारी होने के बाद वह अपने रिस्पांस शीट और प्रश्न पत्र के साथ अपने संभावित स्कोर का अनुमान लगा सकेंगे. इसके अलावा किसी उत्तर पर आपत्ति होने पर उम्मीदवारों को उसे चुनौती देने का मौका भी मिलेगा.
वहीं, यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 जून से 30 जून के बीच गया था. इसके अलावा कुछ उम्मीदवारों के लिए 5 जुलाई को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद से ही उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की और रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं.
इसी सप्ताह जारी होगी UGC NET आंसर-की
एनटीए के अपडेट के अनुसार यूजीसी नेट जून 2026 के प्रोविजनल आंसर की इसी सप्ताह जारी की जाएगी. आंसर-की के साथ उम्मीदवारों की रिस्पांस शीट और अटेंप्ट किया गया प्रश्न पत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा. उम्मीदवार इन्हें एनटीए की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर देख सकेंगे. आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने रिकॉर्ड किए गए जवाबों को ऑफिशियल उत्तरों से मिला सकेंगे और इससे उन्हें परीक्षा में संभावित अंक का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी.
गलत जवाब पर आपत्ति का भी मिलेगा मौका
प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद &amp;nbsp;NTA उम्मीदवारों को किसी उत्तर में गलती मिलने पर आपत्ति दर्ज करने का मौका देगा. इसके अलावा उम्मीदवारों को अपने दावे के समर्थन में उचित कारण और प्रमाण देना होगा. प्रत्येक उत्तर को चुनौती देने के लिए 200 रुपये की नॉन रिफंडेबल फीस देनी होगी. केवल तय समय के अंदर और निर्धारित माध्यम से जमा की गई आपत्तियों पर ही विचार किया जाएगा, बिना उचित कारण या सबूत के भेजी गई आपत्ति तथा समय सीमा के बाद दर्ज किए गए चैलेंज स्वीकार नहीं किए जाएंगे. वहीं उम्मीदवारों की ओर से प्राप्त आपत्तियों की विषय एक्सपर्ट्स की ओर से जांच की जाएगी. इसके बाद जरूरी बदलाव किए जाने के बाद फाइनल आंसर-की तैयार की जाएगी.
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लंबे इंतजार के बाद आया अपडेट
यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा जून के अंत में पूरी हो गई थी, लेकिन इसके बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी नहीं होने से उम्मीदवारों का इंतजार बढ़ता गया. कई उम्मीदवार NTA से लगातार अपडेट मांग रहे थे. आंसर-की में देरी का असर उन उम्मीदवारों की आगे की पढ़ाई और अकेडमिक योजनाओं पर भी पढ़ रहा है, जो यूजीसी नेट के स्कोर के आधार पर जेआरएफ, असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता या पीएचडी में एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं. पिछले कुछ यूजीसी नेट सत्रों में की तुलना में इस बार आंसर-की जारी होने में ज्यादा समय लगा, जिसकी वजह से उम्मीदवारों की ओर से एनटीए की हेल्पडेस्क और अन्य माध्यम से भी जानकारी लेने की कोशिश की गई. लेकिन उन्हें आंसर-की की तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी.
क्यों जरूरी होता है UGC NET का स्कोर?
यूजीसी नेट परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों की जूनियर रिसर्च फैलोशिप, असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्रता और पीएचडी में एडमिशन से जुड़ी योग्यता तय की जाती है. ऐसे में आंसर-की के बाद आने वाला रिजल्ट उम्मीदवारों के आगे के अकेडमिक और करियर प्लान के लिए जरूरी होता है. जेआरएफ के लिए उम्मीदवार के पार्ट 1 और पार्ट 2 में प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाता है. वही असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी एडमिशन वाली कैटेगरी में क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवार इन अवसरों के लिए पात्र होते हैं, लेकिन उन्हें जेआरएफ नहीं मिलता.
ये भी पढ़ें-दिल्ली के स्कूलों में रोजाना 30 मिनट अनिवार्य रीडिंग, लंच ब्रेक में भी खुली रहेगी लाइब्रेरी&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NTPC में नौकरी का मौका, डिप्टी मैनेजर पदों के लिए 12 अगस्त से आवेदन शुरू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ntpc-में-नौकरी-का-मौका-डिप्टी-मैनेजर-पदों-के-लिए-12-अगस्त-से-आवेदन-शुरू</link>
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        <description><![CDATA[ इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर सरकारी सेक्टर में नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए एनटीपीसी लिमिटेड ने भर्ती का मौका दिया है. कंपनी ने डिप्टी मैनेजर के पदों पर भर्ती के लिए शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती के जरिए इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन विभागों में कुल 135 पद भरे जाएंगे. आवेदन प्रक्रिया 12 अगस्त से शुरू होगी, जबकि उम्मीदवार 26 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.&amp;nbsp;
135 पदों पर होगी भर्ती&amp;nbsp;
एनटीपीसी की इस भर्ती में डिप्टी मैनेजर (मैकेनिकल) के 55 पद, डिप्टी मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) के 40 पद और डिप्टी मैनेजर (कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंट) के 40 पद शामिल है. यानी कुल 135 रिएक्शन पर नियुक्तियां की जाएगी. इन पदों के लिए आवेदन करने की वाले उम्मीदवारों को संबंधित इंजीनियरिंग ब्रांच में फुलटाइम बीई या बीटेक की डिग्री होनी चाहिए. उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में जरूरी काम का एक्सपीरियंस भी होना चाहिए.&amp;nbsp;
किस ब्रांच के उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
डिप्टी मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) पद के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग या इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीई-बीटेक करने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. वहीं डिप्टी मैनेजर (मैकेनिक) के लिए मैकेनिकल, प्रोडक्शन, थर्मल इंजीनियरिंग या संबंधित विषय में डिग्री जरूरी है. इसके अलावा सी एंड आई पद के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन, कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन, &amp;nbsp;इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन या इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीई-बीटेक होने चाहिए.&amp;nbsp;
2 लाख तक मिलेगी सैलरी&amp;nbsp;
एनटीपीसी में डिप्टी मैनेजर का पद ई4 ग्रेड में है. चयनित उम्मीदवारों को 70,000 से 2 लाख रुपये तक का आईडीए पे स्केल मिलेगा. इसके अलावा कंपनी के नियमों के अनुसार डीए, अलग-अलग भत्ते, मेडिकल सुविधाएं और दूसरे लाभ भी दिए जाएंगे.&amp;nbsp;
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एक्सपीरियंस उम्मीदवारों के लिए भर्ती&amp;nbsp;
यह भर्ती खासतौर पर संबंधित क्षेत्र में काम का एक्सपीरियंस रखने वाले इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए है. उम्मीदवारों के पास डिग्री पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्र का निर्धारित एक्सपीरियंस होना चाहिए. उम्र सीमा और अनुभव से जुड़ी जरूरी शर्तों की जानकारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन में दी गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार उम्र में छूट मिलेगी&amp;nbsp;
इंटरव्यू के आधार पर होगा चयन&amp;nbsp;
एनटीपीसी की ओर से उम्मीदवारों की ओर से जमा किए गए आवेदन और उनकी योग्यता व अनुभव की जांच की जाएगी. शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू &amp;nbsp;के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होगी और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा.
ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;

आवेदन करने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार एनटीपीसी के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं
इसके बाद करियर ऑप्शन खोले और एनटीपीसी डिप्टी मैनेजर भर्ती 2026 लिंक पर क्लिक करें
अब रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें और लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाएं
आवेदन पत्र में व्यक्तिगत डिटेल, शैक्षणिक योग्यता और काम का एक्सपीरियंस भरें.
फोटो सिग्नेचर और प्रमाण पत्र सहित जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
अब ऑनलाइन फीस का पेमेंट करें और फॉर्म को सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कौन है दीप्ति गौड़ मुखर्जी, जो बनीं उच्च शिक्षा विभाग की नई सचिव?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कौन-है-दीप्ति-गौड़-मुखर्जी-जो-बनीं-उच्च-शिक्षा-विभाग-की-नई-सचिव</link>
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        <description><![CDATA[ Deepti Gaur Mukherjee Higher Education Secretary: उच्च शिक्षा विभाग में एक बार फिर बाद प्रशासनिक बदलाव किया गया है. केंद्र सरकार ने 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश की परीक्षा व्यवस्था और खास तौर पर एनटीए को लेकर सवाल उठ चुके हैं.
दीप्ति गौड़ मुखर्जी अब उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर यूनिवर्सिटी, तकनीकी शिक्षा संस्थानों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगी. केंद्र ने सोमवार देर रात जारी आदेश में पहले किए गए नियुक्ति आदेश में आंशिक बदलाव किया है. इसके तहत मुखर्जी को उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है. वह नरेश पाल गंगवार की जगह लेंगी, जिन्हें करीब तीन सप्ताह पहले ही इस पद पर नियुक्त किया गया था.&amp;nbsp;
1993 बैच की आईएएस अधिकारी है, दीप्ति गौड़ मुखर्जी&amp;nbsp;
दीप्ति गौड़ मुखर्जी मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली है. उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर्स दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से की. &amp;nbsp;दीप्ति गौड़ मुखर्जी 1993 बैच की आईएएस अधिकारी है और मध्य प्रदेश कैडर से आती है. उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलने से पहले वह कॉरपोरेट अफेयर्स सचिव पद के पद पर कार्यरत थी. अब उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है, इस विभाग के तहत देश में उच्च शिक्षा से जुड़े नीतिगत फैसले, यूनिवर्सिटी और तकनीकी शिक्षा संस्थानों से जुड़े कामकाज तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन जैसे अहम विषय आते हैं.&amp;nbsp;
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नरेश पाल गंगवार की जगह मिली जिम्मेदारी&amp;nbsp;
दीप्ति गौड़ मुखर्जी की नियुक्ति से पहले नरेश पाल गंगवार को 23 जुलाई को उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया था. गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी है और उसे समय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव थे. हालांकि के उनकी नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल उठने लगे. रिपोर्ट में गंगवार के परिवार के सदस्यों को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की एक योजना के तहत मिली सरकारी सब्सिडी का मुद्दा उठाया गया. बताया गया कि उनकी मां, पत्नी और बेटे को व्यावसायिक खीरे की खेती के लिए योजना के तहत एक करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली थी. इस मामले को लेकर कई सवाल उठाए गए इसके बाद केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव के पद पर नियुक्ति में बदलाव करते हुए दीप्ति गौड़ मुखर्जी को यह जिम्मेदारी दी है.&amp;nbsp;
एनटीए विवादों के बीच मिली उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी&amp;nbsp;
दीप्ति गौड़ मुखर्जी को ऐसे समय उच्च शिक्षा विभाग की कमान मिली है, जब देश की परीक्षा व्यवस्था लगातार चर्चा में है. उच्च शिक्षा विभाग के अधीन एनटीए आती है, जो नीट यूजी समेत कई बड़ी प्रवेश और पात्रता परीक्षा आयोजित करती है. नीट यूजी को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही को लेकर सरकार पर दबाव रहा है. इस पूरे मामले के बाद परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन भी किया. ऐसे में उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर दीप्ति गौड़ मुखर्जी के सामने उच्च शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों की जिम्मेदारी होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नीट यूजी काउंसलिंग में चॉइस फिलिंग शुरू, जानिए राज्यों में क्या है? काउंसलिंग का स्टेटस</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Counselling: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए नीट यूजी 2026 के राउंड-1 की चॉइस फिलिंग शुरू कर दी है. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 5 अगस्त से ही शुरू हो गई थी, जबकि उम्मीदवार 7 अगस्त से अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और कोर्स चुनकर उन्हें प्राथमिकता के क्रम में भर सकते हैं. इस बीच एमसीसी ने रजिस्ट्रेशन में गलती सुधारने के लिए रिसेट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू की है. वहीं अलग-अलग राज्यों में नीट यूजी की काउंसलिंग अलग-अलग चरणों में चल रही है. कहीं आवेदन प्रक्रिया जारी है, तो कहीं कुछ राज्यों में मेरिट और अगले चरण की तैयारी भी चल रही है.&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन में गलती सुधारने का भी मौका&amp;nbsp;
एमसीसी ने राउंड 1 के लिए रिसेट रजिस्ट्रेशन का ऑप्शन भी उपलब्ध कराया है. अगर किसी उम्मीदवार ने रजिस्ट्रेशन के दौरान गलती से गलत जानकारी भरी है या कोई गलत ऑप्शन चुन लिया है, तो वह इस सुविधा के जरिए अपनी जानकारी में सुधार कर सकता है. यह सुविधा 12 अगस्त 2026 को सुबह 11:00 तक उपलब्ध रहेगी. उम्मीदवारों को तय अवधि के अंदर अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल्स जांच कर जरूरी सुधार करने होंगे.&amp;nbsp;
राज्यों में अलग-अलग चरण में चल रही काउंसलिंग&amp;nbsp;
ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग के साथ राज्य स्तर पर होने वाली नीट यूजी काउंसलिंग अलग प्रक्रिया है. राज्यों की अपनी रजिस्ट्रेशन, मेरिट लिस्ट, चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट की तारीखें हैं. फिलहाल केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और पंजाब में प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चल रही है.&amp;nbsp;
केरल में नीट स्कोर जमा करने की प्रक्रिया
केरल में कमिश्नर फॉर एंट्रेंस एग्जामिनेशन की ओर से केईएएम 2026 के तहत मेडिकल और मेडिकल-अलाइड कोर्स के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों से नीट यूजी 2026 के रिजल्ट की जानकारी मांगी जा रही है. राज्य में अभी एमबीबीएस और बीडीएस राउंड-1 की चॉइस फिलिंग या सीट अलॉटमेंट का चरण शुरू नहीं हुआ है. नीट स्कोर जमा होने और आवेदन की जांच पूरी होने के बाद राज्य मेरिट और अलॉटमेंट प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.&amp;nbsp;
आंध्र प्रदेश में 12 अगस्त तक आवेदन&amp;nbsp;
आंध्र प्रदेश में डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने 2026-27 के एमबीबीएस और बीडीएस एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए है. यह प्रक्रिया कम्पीटेंट अथॉरिटी कोटा के तहत हो रही है. आवेदन की आखिरी तारीख 12 अगस्त रात 9:00 बजे हैं. वहीं प्रमाण पत्र और उम्मीदवारों की ओर से दर्ज आपत्तियों की जांच के बाद नीट यूजी 2026 रैंक और एलिजिबिलिटी के आधार पर राज्य मेरिट तैयार की जाएगी. फिलहाल चॉइस फिलिंग और राउंड-1 सीट अलॉटमेंट की तारीख जारी नहीं की गई है.&amp;nbsp;
तेलंगाना में भी 12 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
तेलंगाना में कालोजी नारायण राव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने एमबीबीएस और बीडीएस एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है. यूनिवर्सिटी ने नीट यूजी 2026 के राज्य स्तर पर योग्य उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी की है. रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 12 अगस्त शाम 6 बजे हैं. &amp;nbsp;इसके बाद राज्य मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी और फिर वेब ऑप्शन तथा सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया यूनिवर्सिटी के नोटिफिकेशन के अनुसार आगे बढ़ेगी.&amp;nbsp;
कर्नाटक में काउंसलिंग आगे बढ़ी&amp;nbsp;
कर्नाटक में कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी पहले ही यूजी नीट 2026 काउंसलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ा चुका है. राज्य में मेडिकल और डेंटल एग्जामिनेशन एडमिशन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है. उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, चॉइस एंट्री और आगे होने वाली सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया के लिए केईए &amp;nbsp;के यूजी नीट 2026 शेड्यूल को देखना होगा. यानी इन राज्यों की तुलना में कर्नाटक काउंसलिंग के अगले चरण में पहुंच चुका है.&amp;nbsp;
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तमिलनाडु में भी आवेदन प्रक्रिया पूरी&amp;nbsp;
तमिलनाडु में एमबीबीएस और बीडीएस एडमिशन के लिए आवेदन का चरण पूरा हो चुका है. फिलहाल मेडिकल सेलेक्शन कमेटी पात्रता और उम्मीदवारों की ओर से दर्ज शिकायतों से जुड़े मामलों को देख रही है. ऑफिशियल पोर्टल पर सरकारी और मैनेजमेंट कोटा के तहत अयोग्य पाए गए उम्मीदवारों के लिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई है. इसके अलावा पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए प्रमाण पत्र अपलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है. राज्य में राउंड-1 की चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट का शेड्यूल अभी जारी नहीं हुआ है.&amp;nbsp;
पंजाब में एडमिशन पोर्टल एक्टिव&amp;nbsp;
पंजाब में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने नीट यूजी 2026 के एमबीबीएस और बीडीएस एडमिशन के लिए पोर्टल एक्टिव कर दिया है. राज्य में प्रक्रिया फिलहाल आवेदन चरण में है. वहीं राउंड-1 की चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट की पूरी तारीखें अभी सामने नहीं आई है.
ये भी पढ़ें-तमिलनाडु के प्रणव इलांगो ने रचा इतिहास, मिली 3.55 करोड़ की स्कॉलरशिप&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नीट, यूजी, काउंसलिंग, में, चॉइस, फिलिंग, शुरू, जानिए, राज्यों, में, क्या, है, काउंसलिंग, का, स्टेटस</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कल जारी हो सकती है नीट पीजी 2026 एग्जाम सिटी स्लिप, 30 अगस्त को होगी परीक्षा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कल-जारी-हो-सकती-है-नीट-पीजी-2026-एग्जाम-सिटी-स्लिप-30-अगस्त-को-होगी-परीक्षा</link>
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        <description><![CDATA[ NEET PG 2026: नीट पीजी 2026 परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ा अपडेट है. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन एंड मेडिकल साइंसेज कल यानी 11 अगस्त 2026 को नीट पीजी 2026 की एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर सकता है. जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन किया है वे सिटी स्लिप जारी होने के बाद इसे NBEMS की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपने लॉगिन डिटेल्स की मदद से डाउनलोड कर सकेंगे. नीट पीजी 2026 की परीक्षा 30 अगस्त 2026 को आयोजित होनी है, जबकि एडमिट कार्ड 27 अगस्त को जारी किया जाएगा.&amp;nbsp;
सिटी स्लिप से मिलेगी परीक्षा शहर की जानकारी&amp;nbsp;
नीट पीजी की सिटी इंटिमेशन स्लिप में उम्मीदवार को उस शहर की जानकारी दी जाएगी. जहां उसका परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया है. यह स्लिप खासतौर पर उन अभ्यर्थियों के लिए जरूरी होगी, जिन्हें परीक्षा देने के लिए दूसरे शहर की यात्रा करनी है. इससे वह परीक्षा से पहले यात्रा और रहने की व्यवस्था कर सकेंगे. हालांकि उम्मीदवारों को ध्यान रखना होगा कि सिटी स्लिप एडमिट कार्ड नहीं है. इसमें परीक्षा शहर की जानकारी मिलेगी, जबकि परीक्षा केंद्र का पूरा पता रिपोर्टिंग और एडमिशन से जुड़ी जरूरी जानकारी एडमिट कार्ड में दी जाएगी.&amp;nbsp;
30 अगस्त को होगी नीट पीजी की परीक्षा&amp;nbsp;
NBEMS की तरह शेड्यूल के अनुसार नीट पीजी 2026 का आयोजन 30 अगस्त 2026 को किया जाएगा. परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 27 अगस्त को जारी होने की उम्मीद है. उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड के साथ वैलिड पहचान पत्र भी लेकर जाना होगा. नीट पीजी, एमडी, एम, एस और पीजी डिप्लोमा जैसे पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित की जाने वाली पात्रता और रैंकिंग परीक्षा है. इसके अलावा पोस्ट एमबीबीएस डीएनबी, पोस्ट एमबीबीएस, डायरेक्टर 6 ईयर डीआरएनबी और NBEMS &amp;nbsp;के दो वर्षीय पोस्ट एमबीबीएस डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन भी नीट यूजी के जरिए किया जाता है.
ये भी पढ़ें-तमिलनाडु के प्रणव इलांगो ने रचा इतिहास, मिली 3.55 करोड़ की स्कॉलरशिप&amp;nbsp;
इसे डाउनलोड करें नीट पीजी सिटी स्लिप&amp;nbsp;

नीट पीजी सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले NBEMS की ऑफिशियल वेबसाइट nbe.edu.in. पर जाए.
इसके बाद नीट पीजी 2026 सिटी इंटिमेशन स्लिप के लिंक पर क्लिक करें.
अब मांगी गई लोगों डिटेल्स भरें.
इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें.
अब सिटी स्लिप स्क्रीन पर दिखाई देगी, इसे डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;

सिटी स्लिप में क्या-क्या जानकारी होगी?
नीट पीजी 2026 के सिटी स्लिप में उम्मीदवारों से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी दी जाएगी. इसमें मुख्य रूप से उम्मीदवार का नाम, एप्लीकेशन नंबर, रोल नंबर, आवंटित परीक्षा शहर, परीक्षा की तारीख और जरूरी निर्देश शामिल हो सकते हैं. उम्मीदवारों को यह भी बताया गया है कि परीक्षा केंद्र का विस्तृत पता एडमिट कार्ड में दिया जाएगा, इसलिए सिटी स्लिप जारी होने के बाद भी उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड का इंतजार करना होगा.
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कल, जारी, हो, सकती, है, नीट, पीजी, 2026, एग्जाम, सिटी, स्लिप, अगस्त, को, होगी, परीक्षा</media:keywords>
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        <title>ICSE&amp;ISC 2028 बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानिए आवेदन की आखिरी तारीख</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/icse-isc-2028-बोर्ड-परीक्षा-के-लिए-रजिस्ट्रेशन-शुरू-जानिए-आवेदन-की-आखिरी-तारीख</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/icse-isc-2028-बोर्ड-परीक्षा-के-लिए-रजिस्ट्रेशन-शुरू-जानिए-आवेदन-की-आखिरी-तारीख</guid>
        <description><![CDATA[ ICSE-ISC 2028 Registration:&amp;nbsp; काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ने आईसीएसई कक्षा 10वीं और &amp;nbsp;कक्षा 12वीं परीक्षा &amp;nbsp;2028 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. छात्र सीधे अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकेंगे. संबंधित CISCE से संबद्ध स्कूलों के माध्यम से उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन CISCE CAREERS &amp;nbsp;पोर्टल पर किया जाएगा. बोर्ड ने ICSE और ISC दोनों के लिए अलग-अलग समय सीमा जारी की है. इसके साथ ही CISCE &amp;nbsp;ने 2027 की ICSE और ISC बोर्ड परीक्षाओं के लिए पहले से रजिस्टर्ड छात्रों के एंट्री कंफर्मेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. स्कूल पोर्टल पर लॉगिन करके छात्रों की जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे और जरूरी होने पर निर्धारित डॉक्यूमेंट्स के साथ डिटेल में बदलाव के लिए भी अनुरोध कर सकेंगे. &amp;nbsp;
ICSE 2028 रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख&amp;nbsp;
आईसीएसई कक्षा 10वीं परीक्षा 2028 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 5 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है. बिना लेट फीस के रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 है. इसके बाद लेट फीस के साथ 1 नवंबर से 15 नवंबर 2026 तक रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा.
आईएससी 2028 के लिए भी शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
आईएससी कक्षा 12वीं परीक्षा 2028 के लिए भी रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है. आईएससी उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन विंडो 15 नवंबर 2026 तक खुली रहेगी. जिसका मतलब है कि बिना लेट फीस रजिस्ट्रेशन के आखिरी तारीख 15 नवंबर है.&amp;nbsp;
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छात्र खुद नहीं कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
आईसीएसई और आईएससी 2028 परीक्षा के लिए छात्रों को सीधे सीआईएससीई पोर्टल पर जाकर आवेदन करने की सुविधा नहीं है. रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया संबंधित सीआईएससीई से संबद्ध स्कूलों के माध्यम से पूरी होगी. स्कूल उम्मीदवारों की जरूरी जानकारी सीआईएससीई करियर पोर्टल पर दर्ज करेंगे. छात्रों को अपने स्कूल के साथ व्यक्तिगत जानकारी, सब्जेक्ट और जरूरी डॉक्यूमेंट से जुड़ी जानकारी शेयर करनी होगी. रजिस्ट्रेशन जमा होने से पहले छात्रों को अपनी जानकारी अच्छी तरह जांच लेने की भी सलाह दी गई है.
2027 बोर्ड परीक्षा की एंट्री भी करनी होगी कंफर्म&amp;nbsp;
सीआईएससीई ने 2028 के रजिस्ट्रेशन के साथ 2027 आईसीएसई और आईएससी बोर्ड परीक्षाओं के लिए एंट्री कंफर्मेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. स्कूल पहले से रजिस्टर्ड उम्मीदवारों की जानकारी पोर्टल पर जाकर जांच और कंफर्म कर सकते हैं. 2027 परीक्षा के लिए एंट्री कंफर्मेशन की प्रक्रिया 5 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक बिना लेट फीस के पुरी की जा सकती है. इसके बाद 16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक लेट फीस के साथ कंफर्मेशन किया जा सकेगा.
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ICSE-ISC, 2028, बोर्ड, परीक्षा, के, लिए, रजिस्ट्रेशन, शुरू, जानिए, आवेदन, की, आखिरी, तारीख</media:keywords>
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        <title>UPSC Mains Admit Card 2026: UPSC मेन्स 2026 एडमिट कार्ड जल्द, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UPSC Mains Admit Card 2026:&amp;nbsp; UPSC मेन्स की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए ये खबर खास साबित हो सकता है. बता दें कि सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 की तारीखों का ऐलान कर दिया है. यह परीक्षा 21 अगस्त से 30 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, UPSC मुख्य परीक्षा का एडमिट कार्ड अगस्त महीने के दूसरे हफ्ते में जारी किया जा सकता है, यानी परीक्षा शुरू होने से करीब एक से दो हफ्ते पहले.&amp;nbsp; जो उम्मीदवार प्रीलिम्स में पास हो चुके हैं, वही मुख्य परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड कर पाएंगे. इसलिए सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें ताकि एडमिट कार्ड जारी होते ही उसे समय पर डाउनलोड कर सकें.&amp;nbsp;
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का तरीका
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का तरीका बहुत आसान है. सबसे पहले उम्मीदवारों को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in या upsconline.nic.in पर जाना होगा.&amp;nbsp; वेबसाइट के होमपेज पर &amp;ldquo;ई-एडमिट कार्ड&amp;rdquo; या &amp;ldquo;एडमिट कार्ड&amp;rdquo; सेक्शन पर क्लिक करना होगा.&amp;nbsp; इसके बाद वहां दिए गए विकल्पों में से Civil Services (Main) Examination 2026 को चुनना होगा. अगले पेज पर उम्मीदवारों को अपनी रजिस्ट्रेशन आईडी या रोल नंबर और जन्म तिथि डालनी होगी. इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाला कैप्चा कोड भरकर सबमिट बटन दबाना होगा.&amp;nbsp; सबमिट करते ही स्क्रीन पर एडमिट कार्ड दिखाई देने लगेगा.&amp;nbsp; इसमें उम्मीदवार का नाम, फोटो, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र और परीक्षा से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी दी गई होगी.
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डाउनलोड करने के बाद ध्यान रखें
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद सबसे पहला काम यह है कि उसमें दी गई सभी जानकारी को ध्यान से जांच लें, जैसे नाम, फोटो, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र और परीक्षा की तारीख. अगर किसी भी तरह की गलती नजर आए, तो तुरंत आयोग से संपर्क करना चाहिए ताकि परीक्षा से पहले उसे ठीक किया जा सके. परीक्षा वाले दिन उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड की प्रिंट कॉपी के साथ-साथ एक वैध ओरिजिनल फोटो पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट भी साथ ले जाना जरूरी है.&amp;nbsp; बिना एडमिट कार्ड और पहचान पत्र के परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. यह भी सलाह दी जाती है कि उम्मीदवार परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग टाइम से कम से कम एक घंटा पहले पहुंच जाएं, ताकि किसी भी आखिरी समय की परेशानी से बचा जा सके.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रिसर्च में महिलाओं की हिस्सेदारी 29% बढ़ी, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में अब भी है सबसे पीछे</title>
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        <description><![CDATA[ Women Researchers in India: भारत में रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में महिलाओं के भागीदारी पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन सेक्टर के हिसाब से तस्वीर अभी भी एक जैसी नहीं है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की Research and Development Statistics at a Glance 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 2020-21 के 18.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में करीब 29 प्रतिशत हो गई है. हालांकि प्राइवेट इंडस्ट्री के आर एंड डी सेक्टर में महिला रिसर्चर की भागीदारी सिर्फ 17.8 प्रतिशत है, जो बाकी प्रमुख क्षेत्र के मुकाबले सबसे कम है.
देश में रिसर्चर्स में महिलाओं की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2024 तक भारत में 5 लाख से ज्यादा फुल टाइम इक्विवेलेंट रिसर्चर्स थे. इनमें करीब 1.5 लाख महिला रिसर्चर्स शामिल थी. इस तरह कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत तक पहुंच गई है. महिला रिसर्चर्स की हिस्सेदारी में यह बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों में हुई है. 2020-21 में रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी 18.6 प्रतिशत थी, जो 2023-24 तक बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई. यानी इस अवधि में महिला रिसर्चर की हिस्सेदारी में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है.
किस सेक्टर में कितनी महिला रिसर्चर्स
अलग-अलग क्षेत्रों में महिला रिसर्चर्स की भागीदारी देखें तो उच्च शिक्षा क्षेत्र में 36 प्रतिशत के साथ महिलाएं सबसे आगे हैं. वहीं इसके बाद राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य स्तर की आर एंड डी प्रयोगशालाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है. केंद्र सरकार की आर एंड डी लैब में महिला रिसर्चर्स की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र की इंडस्ट्री में 21.2 प्रतिशत है. प्राइवेट इंडस्ट्री में यह आंकड़ा सबसे कम 17.8 प्रतिशत है. इस तरह कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद प्राइवेट आर एंड डी में उनकी मौजूदगी अभी भी दूसरे प्रमुख सेक्टर से पीछे बनी हुई है.
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रिसर्च प्रोजेक्ट की कमान संभाल रही महिलाएं
महिलाओं के भागीदारी सिर्फ रिसर्च टीम का हिस्सा बनने तक सीमित नहीं रही है. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि रिसर्च प्रोजेक्ट के नेतृत्व में भी उनकी मौजूदगी बढ़ी है. केंद्र सरकार के फंड से मिलने वाली एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च परियोजना में महिला प्रोजेक्ट हेड की हिस्सेदारी 2000-01 में 13 प्रतिशत थी. 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया. &amp;nbsp;पिछले 2 वर्षों में भी करीब 30 प्रतिशत प्रोजेक्ट लीडर महिलाएं रही है. इससे रिसर्च क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका में आए बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है, जहां वे अब परियोजनाओं के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाल रही है.
रिसर्च पर सरकार ने दिए 3,356 करोड़ रुपये
रिपोर्ट में देश में रिसर्च फंडिंग से जुड़े आंकड़े भी दिए गए हैं. साल 2023-24 में सरकार की ओर से समर्थित एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च के तहत 6094 परियोजनाओं के लिए 3,356 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई. इसका करीब तीन-चौथाई हिस्सा शैक्षणिक संस्थाओं को मिला. इस फंडिंग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का योगदान आधे से ज्यादा रहा. वहीं देश के कुल आर एंड डी खर्चे में सरकार और प्राइवेट उद्योग की हिस्सेदारी भी काफी करीब है. हर 100 &amp;nbsp;रुपये के आर एंड डी खर्चे में सरकार का योगदान करीब 48 रुपये और प्राइवेट इंडस्ट्री का करीब 45 रुपये है.
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>रिसर्च, में, महिलाओं, की, हिस्सेदारी, 29, बढ़ी, लेकिन, प्राइवेट, सेक्टर, में, अब, भी, है, सबसे, पीछे</media:keywords>
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        <title>ISRO में साइंटिस्ट इंजीनियर के 93 पदों पर भर्ती, GATE स्कोर से होगा चयन</title>
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        <description><![CDATA[ ISRO Recruitment 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में साइंटिस्ट और इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं. इंजीनियरिंग युवाओं के लिए भर्ती का मौका आया है. इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड ने साइंटिस्ट-इंजीनियर एससी के 93 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिया है. यह भर्ती इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस समेत इंजीनियरिंग विषयों में की जाएगी. योग्य उम्मीदवार 17 अगस्त 2026 तक इसरो के ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती में उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए GATE 2025 या GATE 2026 के वैध स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
इन ब्रांच में भरे जाएंगे पद&amp;nbsp;
इसरो की इस भर्ती में अलग-अलग इंजीनियरिंग डिसिप्लिन के लिए कुल 93 पद रखे गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 35 पद इलेक्ट्रॉनिक्स के हैं. इसके बाद मैकेनिकल में 26 पद और कंप्यूटर साइंस में 13 पद है. इसके अलावा सिविल में 10 पद, इलेक्ट्रिकल में 4 पद, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग में 2 पद, आर्किटेक्चर के 2 पद, सिविल पीआरएल ऑटोनॉमस बॉडी का एक पद शामिल है.
&amp;nbsp;किन इसरो केंद्र में होगी पोस्टिंग?&amp;nbsp; &amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति इसरो के अलग-अलग केंद्रों में की जा सकती है. इनमें बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, तिरुवंतपुरम, श्री हरिकोटा, महेंद्र गिरी, हासन और वलियामाला शामिल है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्या है भर्ती के लिए योग्यता?
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित इंजीनियरिंग डिसिप्लिन में निर्धारित बीई या बीटेक की डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में GATE 2025 या GATE 2026 का वैलिड स्कोर होना चाहिए. जिससे डिसिप्लिन के पद के लिए आवेदन किया जा रहा है. उसी से संबंधित GATE का स्कोर को मान्य माना जाएगा. इस भर्ती के लिए नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर रजिस्टर्ड और एलिजिबल उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. &amp;nbsp; &amp;nbsp;
GATE स्कोर के आधार पर इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्टिंग &amp;nbsp;
इस भर्ती में उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए GATE स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. इसरो ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए GATE स्कोर को आधार बनाया जाएगा, केवल GATE मार्क्स या रैंक को नहीं. इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों का चयन 1-7 के अनुपात में किया जाएगा. इंटरव्यू में उम्मीदवारों के तकनीकी ज्ञान संबंधित विषय की समझ, प्रेजेंटेशन और कम्युनिकेशन स्किल समझने की क्षमता और शैक्षणिक उपलब्धियां का आकलन किया जाएगा. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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GATE और इंटरव्यू से बनेगी फाइनल मेरिट
&amp;nbsp;फाइनल चयन में GATE स्कोर और इंटरव्यू दोनों को 50-50 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा. अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए कुल मिलाकर न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक की योग्यता रखी गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए नियमों के अनुसार पात्रता मानदंड में छूट लागू होगी. इसरो आवेदन में दिए गए GATE स्कोर का वेरीफिकेशन करेगा. नोटिस के अनुसार आवेदन में गलत जानकारी देने पर संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
17 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन &amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. उम्मीदवारों को इसरो की ऑफिशियल वेबसाइट isro.gov.in के भर्ती पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा. आवेदन के दौरान व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और GATE स्कोर से संबंधित जानकारी बनी होगी. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उम्मीदवार को एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा, जिसे आगे की प्रक्रिया के लिए सुरक्षित रखना होगा. आवेदन में वैध ईमेल आईडी देना जरूरी है, क्योंकि भर्ती से जुड़ी जानकारी इसी के जरिए भेजी जाएगी. वहीं ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 17 अगस्त है.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ISRO, में, साइंटिस्ट, इंजीनियर, के, पदों, पर, भर्ती, GATE, स्कोर, से, होगा, चयन</media:keywords>
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    <item>
        <title>TRAI में बिना एक्सपीरियंस नौकरी का मौका, 80 हजार तक सैलरी </title>
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        <description><![CDATA[ TRAI Recruitment 2026: नौकरी की तलाश कर रहे इंजीनियरिंग पास युवाओं के लिए भारतीय दूरसंचार प्राधिकरण ने भर्ती का मौका दिया है. खास बात यह है कि इस भर्ती में &amp;nbsp;किसी तरह का एक्सपीरियंस होना जरूरी नहीं है. यानी फ्रेशर्स भी आवेदन कर सकते हैं. ट्राई के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में एसोसिएट कंसलटेंट के पदों पर भर्ती की जा रही है. इच्छुक उम्मीदवार 27 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं.
दो पदों पर होगी भर्ती &amp;nbsp;
ट्राई की ओर से जारी भर्ती के तहत एसोसिएट कंसलटेंट के दो पद भरे जाएंगे. आवेदन प्रक्रिया 6 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों को 27 अगस्त तक अपना आवेदन जमा करना होगा. आवेदन केवल ट्राई के ऑफिशल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
BTech और BE उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;
इस पद के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्युनिकेशन, टेलीकम्युनिकेशन या इनसे संबंधित विषय में बीई या बीटेक डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा एमई, एमटेक, एमबीए या पीएचडी जैसी योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा उम्मीदवार की उम्र 6 अगस्त 2026 को 30 वर्ष से कम होनी चाहिए. इस भर्ती की खास बात यह है कि आवेदन के लिए एक्सपीरियंस की अनिवार्यता नहीं रखी गई है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
हर महीने 80,000 सैलरी और ट्रांसपोर्ट अलाउंस अलग
चयनित उम्मीदवारों को 80,000 प्रतिमाह का निश्चित वेतन दिया जाएगा. इसके अलावा 8000 प्रतिमाह ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी मिलेगा. इस तरह उम्मीदवार को हर महीने कुल 88,000 तक मिलेंगे. यह नियुक्ति शुरुआत में 1 साल के लिए होगी, उम्मीदवार के प्रदर्शन और ट्राई की जरूरत के आधार पर इस अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है. &amp;nbsp;
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इंटरव्यू के आधार पर होगा चयन
उम्मीदवार का चयन ट्राई की सिलेक्शन कमेटी करेगी. चयन के दौरान शैक्षणिक योग्यता, कम्युनिकेशन स्किल्स और इंटरव्यू में प्रदर्शन समेत अन्य जरूरी मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा. वहीं इस भर्ती में एक्सपीरियंस नहीं मांगा गया है, इसलिए संबंधित विषय से पढ़ाई पूरी कर चुके फ्रेशर्स भी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. चयन के बाद उम्मीदवारों की नियुक्ति ट्राई के नई दिल्ली स्थित ऑफिस में होगी.
ऐसे कर सकते हैं आवेदन
इस भर्ती के लिए ट्राई के ऑफिशल पोर्टल पर जाकर अप्लाई ऑनलाइन के जरिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपनी जरूरी जानकारी के साथ पढ़ाई से जुड़े डॉक्यूमेंट भी अपलोड करने होंगे. डाक, ईमेल या किसी दूसरे माध्यम से भेजे गए, आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TRAI, में, बिना, एक्सपीरियंस, नौकरी, का, मौका, हजार, तक, सैलरी </media:keywords>
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        <title>DU UG की तीसरी मेरिट लिस्ट जारी, सीट अलॉटमेंट के बाद इन तारीखों का रखें ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में अंडर ग्रेजुएट कोर्स को लेकर कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम के तहत तीसरी मेरिट लिस्ट जारी कर दी है. जिन छात्रों को इस राउंड में कॉलेज या कोर्स की सीट आवंटित हुई है, उन्हें तय समय के अंदर सीट स्वीकार करने के साथ आगे की एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. सीट एक्सेप्ट करने की तारीख 11 अगस्त 2026 है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
11 अगस्त तक स्वीकार करनी होगी सीट
तीसरे राउंड में सीट मिलने वाले उम्मीदवार 8 से 11 अगस्त के बीच अपनी आवंटित सीट को एक्सेप्ट कर सकते हैं. इसके बाद संबंधित कॉलेज छात्रों के आवेदन और डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन करेगा. कॉलेज में 12 अगस्त तक आवेदन को वेरीफाई और अप्रूव करना होगा. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को 13 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करनी होगी, तय समय में जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर आवंटित सीट गंवाने का खतरा रहेगा.. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
CUET स्कोर और पसंद के आधार पर हुआ सीट आवंटन &amp;nbsp; &amp;nbsp;
डीयू की तीसरी सीट एलोकेशन प्रक्रिया में उम्मीदवारों के प्रोग्राम के अनुसार सीयूईटी मेरिट, कैटेगरी, उपलब्ध सीटों और सीएसएएस के दौरान भरी गई प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है. उम्मीदवार डीयू के पोर्टल पर लॉगिन करके देख सकते हैं कि उन्हें कौन सा कॉलेज और कौन सा प्रोग्राम आवंटित हुआ है. अगर दो या उससे ज्यादा उम्मीदवारों के सीयूईटी स्कोर समान होते हैं, तो टाई की स्थिति में पहले कक्षा 12वीं के अंको को देखा जाएगा. इसके बाद भी स्थिति समान रहने पर उम्र को आधार बनाया जाएगा. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
ऐसे चेक करें डीयू यूजी तीसरी मेरिट लिस्ट

उम्मीदवार तीसरे राउंड का सीट लोकेशन रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले ugadmission.uod.ac.in पर जाए.
इसके बाद CSAS UG 2026 एडमिशन पोर्टल पर लॉगिन करें.
अब राउंड 3 एलोकेशन सेक्शन खोलें.&amp;nbsp;
आवंटित कॉलेज और प्रोग्राम की जानकारी देखें.&amp;nbsp;
सभी डिटेल ध्यान से चेक करें और सीट एलोकेशन की जानकारी डाउनलोड करें. &amp;nbsp;&amp;nbsp;

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डीयू यूजी राउंड 3 का पूरा शेड्यूल
डीयू यूजी राउंड 3 सीट एलोकेशन लिस्ट 8 अगस्त को जारी हुई. इसके बाद अब आवंटित सीट एक्सेप्ट 8 से 11 अगस्त तक कर सकते हैं. ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करने की आखिरी तारीख 13 अगस्त है. वहीं आपको बता दें कि इस राउंड में सीट मिलने वाले छात्रों को पहले सीट एक्सेप्ट करनी होगी. इसके बाद कॉलेज की ओर से आवेदन और डॉक्यूमेंट की जांच की जाएगी. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद उम्मीदवार को तय समय सीमा के अंदर फीस जमा करनी होगी. &amp;nbsp;
&amp;nbsp;2.18 लाख से ज्यादा छात्रों ने कराया था रजिस्ट्रेशन
इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजी एडमिशन के लिए 2,18,284 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया. &amp;nbsp;इनमें से 2,08,043 उम्मीदवारों ने दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी की. वहीं अब तक यूनिवर्सिटी की ओर से 93,033 छात्रों को सीट आवंटित की जा चुकी है. इनमें 42,019 पुरुष और 51,014 महिला उम्मीदवार शामिल है. कुल सीट एलोकेशन दर 86.1 प्रतिशत बताई गई है.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>की, तीसरी, मेरिट, लिस्ट, जारी, सीट, अलॉटमेंट, के, बाद, इन, तारीखों, का, रखें, ध्यान</media:keywords>
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        <title>दिल्ली में ड्रोन नीति की तैयारी, 1000 से ज्यादा नई नौकरियों की राह खुलेगी </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-में-ड्रोन-नीति-की-तैयारी-1000-से-ज्यादा-नई-नौकरियों-की-राह-खुलेगी</link>
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        <description><![CDATA[ Delhi Govt Jobs: दिल्ली में ड्रोन से जुड़े क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा करने की तैयारी है. दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ड्रोन नीति का मसौदा तैयार हो चुका है और इसे अगले एक महीने के अंदर कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है. सरकार का टारगेट इस नीति के जरिए 1000 से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है. नीति में ड्रोन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के साथ रिसर्च, ट्रेंनिंग, टेस्टिंग और ड्रोन के इस्तेमाल से जुड़े ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा.
कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार &amp;nbsp;&amp;nbsp;
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि प्रस्तावित ड्रोन नीति तैयार है. फिलहाल यह अलग-अलग विभागों के बीच विचार विमर्श की प्रक्रिया में है. अधिकारियों के अनुसार मंत्री की मंजूरी के बाद नीति को कानूनी वित्त और दूसरे संबंधित विभागों के पास भेजा जाएगा. सरकार इसे एक महीने के अंदर कैबिनेट के सामने रख सकती है. यह प्रस्तावित नीति 5 साल के लिए होगी और इसके लिए 85 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इसके तहत ड्रोन क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप और कारोबारी को सहायता देने की योजना है. ड्रोन और इससे जुड़ी तकनीक पर रिसर्च करने वाले शैक्षणिक संस्थाओं को भी समर्थन दिया जा सकता है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
रिसर्च और टेस्टिंग पर जोर
नीति के तहत ड्रोन रिसर्च क्लस्टर, विशेष फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाएं और सेंटर ऑफ एक्सी ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की योजना है. सरकार ड्रोन से जुड़े कारोबार और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और राज्य जीएसटी प्रतिपूर्ति जैसे प्रावधानों पर भी विचार कर रही है. ड्रोन के निर्माण, उड़ान और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत को देखते हुए स्किल ट्रेनिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए आईटीआई के जरिए प्रशिक्षण देने की योजना पर विचार किया जा रहा है. स्कूलों में ड्रोन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और रिमोट पायलट ट्रेनिंग से जुड़े कार्यक्रम भी नीति का हिस्सा हो सकते हैं. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
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सरकारी कामों में बढ़ेगा इस्तेमाल&amp;nbsp;
प्रस्तावित नीति में ड्रोन के सरकारी और नागरिक इस्तेमाल के नए क्षेत्रों में की पहचान पर जोर दिया जाएगा इनमें पुलिसिंग, निगरानी, ट्रैफिक मैनेजमेंट, आपदा प्रबंधन, जमीन का सर्वे, अतिक्रमण की पहचान और 3D मैपिंग जैसे काम शामिल है. यमुना क्षेत्र में भी ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाएं देखी जा रही है. इसके अलावा रियल एस्टेट, टेलीकॉम और मीडिया क्षेत्र में ड्रोन के व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा रहा है. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
सुरक्षा और नियमों का भी ध्यान &amp;nbsp; &amp;nbsp;
सरकार ड्रोन के सुरक्षित और नियंत्रित इस्तेमाल के लिए मौजूदा नियमों के तहत व्यवस्था विकसित करेगी. नीति में ड्रोन के दुरुपयोग को रोकने, निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत करने के साथ डीजीसीए के डिजिटल स्काई प्लेटफार्म के साथ बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, ड्रोन, नीति, की, तैयारी, 1000, से, ज्यादा, नई, नौकरियों, की, राह, खुलेगी </media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नवोदय विद्यालय क्लास 6 में एडमिशन का आखिरी मौका, फार्म भरने की आखिरी तारीख आज</title>
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        <description><![CDATA[ JNVST 2027 Registration: अगर आप भी अपने बच्चे का जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 6 में एडमिशन कराना चाहते हैं, तो आपके लिए यह खबर जरूरी हो सकती है. दरअसल, जवाहर नवोदय समिति ने जेएनवीएसटी क्लास 6 एडमिशन 2027-28 के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ा दी थी. अब जिन छात्रों ने अभी तक जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के लिए आवेदन नहीं किया है, वे 10 अगस्त यानी आज ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं.
आवेदन प्रक्रिया जेएनवीएस की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए पूरी की जा सकती है. कक्षा 6 में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए छात्रों को तय समय सीमा के अंदर आवेदन करना होगा. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को अपने आवेदन में सुधार करने का मौका भी दिया जाएगा.&amp;nbsp;
11 और 12 अगस्त को कर सकेंगे सुधार&amp;nbsp;
आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एनवीएस की ओर से 11 और 12 अगस्त को एप्लीकेशन करेक्शन विंडो खोली जाएगी. इस दौरान उम्मीदवार अपने आवेदन फार्म में दर्ज जरूरी जानकारी को जान सकते हैं और उपलब्ध सुविधा सुधार के तहत बदलाव कर सकते हैं. छात्रों को सलाह दी गई है कि फॉर्म जमा करने से पहले सभी जानकारी ध्यान से जांच लें और आवेदन सबमिट करने के बाद उसकी एक कॉपी आगे के लिए सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;
28 नवंबर को होगी चयन परीक्षा&amp;nbsp;
जेएनवीएसटी क्लास 6 एडमिशन 2027-28 के लिए चयन प्रक्रिया 28 नवंबर 2026 का आयोजित की जाएगी. यह परीक्षा समर बाउंड और विंटर बाउंड नवोदय विद्यालय में कक्षा 6 में एडमिशन के लिए होगी. परीक्षा के बाद मार्च-अप्रैल 2026 में रिजल्ट जारी होने की उम्मीद है. उम्मीदवार अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड ऑफिशियल वेबसाइट पर रोल नंबर के माध्यम से देख सकेंगे.&amp;nbsp;
जेएनवीएसटी क्लास 6 एडमिशन 2027 की जरूरी तारीखें

रजिस्ट्रेशन शुरू- 6 जुलाई 2026&amp;nbsp;
आवेदन के आखिरी तारीख-10 अगस्त 2026&amp;nbsp;
आवेदन में सुधार-11 और 12 अगस्त 2026&amp;nbsp;
जेएनवीएसटी क्लास 6 चयन परीक्षा- 28 नवंबर 2026&amp;nbsp;
रिजल्ट-मार्च-अप्रैल 2027 में संभावित

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कैसे कर सकते हैं आवेदन?&amp;nbsp;

कक्षा 6 में एडमिशन के लिए आवेदन के लिए सबसे पहले navodaya.gov.in. पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर अप्लाई फॉर कक्षा 6 जेएनवीएसटी 2027 पर क्लिक करें.
अब क्लिक हियर फॉर रजिस्ट्रेशन फॉर क्लास 6 जेएनवीएसटी 2027-28 ऑप्शन चुनें.
इसके बाद मांगी गई जरूरी जानकारी भरें और डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
लास्ट में फॉर्म सबमिट करके कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें.&amp;nbsp;

आवेदन के लिए ये डॉक्यूमेंट है जरूरी

पासपोर्ट साइज फोटो
छात्र के हस्ताक्षर
पेरेंट्स के हस्ताक्षर
प्रधानाचार्य की ओर से सत्यापित प्रमाण पत्र
आधार कार्ड
कास्ट सर्टिफिकेट

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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नवोदय, विद्यालय, क्लास, में, एडमिशन, का, आखिरी, मौका, फार्म, भरने, की, आखिरी, तारीख, आज</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>शादी के 13 साल बाद मिली वर्दी, 2 बच्चों की मां बनीं पुलिस ऑफिसर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शादी-के-13-साल-बाद-मिली-वर्दी-2-बच्चों-की-मां-बनीं-पुलिस-ऑफिसर</link>
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        <description><![CDATA[ Women Success Story: आपने ऐसी कई कहानियां सुनी होगी, जहां जिम्मेदारियां के बीच भी लोग अपने सपनों के लिए रास्ता निकाल ही लेते हैं. इस बार भी ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली मधु शर्मा ने कर दिखाया है. 36 साल की उम्र और दो बच्चों की मां मधु ने मध्य प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में महिला कैटेगरी में 25वीं रैंक हासिल की है. खास बात यह है कि इस मुकाम तक पहुंचने से पहले वह तीन बार परीक्षा में असफल भी हो चुकी थीं.
मधु ने 2016, 2017, और 2018 में एसआई भर्ती परीक्षा दी थी, तीनों प्रयास में वह शुरुआती और लिखित परीक्षा पार कर गई, लेकिन फिजिकल टेस्ट में आगे नहीं बढ़ सकीं. इसके बाद भी उन्होंने पुलिस में जाने की अपनी इच्छा खत्म नहीं होने दी. शादी के बाद परिवार बढ़ा, दो बच्चों की जिम्मेदारी आई और दूसरी तरफ नौकरी भी जारी रही, लेकिन मधु ने सही समय का इंतजार करने के बजाय दोबारा परीक्षा तैयारी शुरू कर दी.&amp;nbsp;
2013 में शादी के बाद आईं दिल्ली&amp;nbsp;
मधु शर्मा की शादी 2013 में अभय शर्मा से हुई, इसके बाद में वह दिल्ली आ गई. उन्होंने गुरुग्राम स्थित विप्रो में क्वालिटी मैनेजर के तौर पर काम शुरू किया, उनके पति अब एक्सिस बैंक में मैनेजर थे. नौकरी के लिए मधु को रोज दिल्ली से गुरुग्राम जाना पड़ता था, इसी बीच में वह दो बच्चों की मां बनी. बच्चों की परवरिश घर और नौकरी के बीच प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन पुलिस में जाने की इच्छा बनी रही. मधु ने तीन बार मध्य प्रदेश पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा में किस्मत आजमाई, लेकिन फिजिकल परीक्षा में सफलता नहीं मिल सकी. बाद में उनके बेटे कार्तिक और बेटी कास्वी का जन्म हुआ, दोनों बच्चों का जन्म सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ. दो बच्चों की जिम्मेदारी के साथ भी मधु ने अपने पुराने लक्ष्य को पूरी तरह नहीं छोड़ा.&amp;nbsp;
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अगली बार फिजिकल टेस्ट को बनाया सबसे बड़ा लक्ष्य&amp;nbsp;
2026 में मधु ने फिर से एसआई भर्ती परीक्षा दी तो प्री और लिखित परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने पूरा ध्यान फिजिकल परीक्षा पर लगाया. इसके लिए उन्होंने ग्वालियर की एक फिजिकल एकेडमी में ट्रेनिंग शुरू की. 36 साल की उम्र में मधु ने नियमित प्रैक्टिस की और करीब 10 किलो वजन कम किया. इस बार उनकी तैयारी पहले से अलग थी, लगातार ट्रेनिंग के बाद उन्होंने फिजिकल टेस्ट भी पास किया और आगे मेडिकल परीक्षा में भी सफल रही. इसके बाद महिला वर्ग में 25वीं रैंक के साथ उनका चयन मध्य प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर हो गया.&amp;nbsp;
पति ने संभाली बच्चों की जिम्मेदारी&amp;nbsp;
मधु की सफलता में उनके पति अभय शर्मा का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा. जब मधु पढ़ाई और ट्रेनिंग में व्यस्त रहती थी, तब अभय बच्चों को संभालते थे. कई बार उन्होंने घर और रसोई के काम में भी हाथ बंटाया ताकि मधु को परीक्षा की तैयारी के लिए समय मिल सके. मधु का चयन होने के बाद उन्होंने जुलाई 2026 में विप्रो की नौकरी छोड़ दी, अब वह मध्य प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर ट्रेनिंग के लिए जाएंगी.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शादी, के, साल, बाद, मिली, वर्दी, बच्चों, की, मां, बनीं, पुलिस, ऑफिसर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>SBI ने क्लर्क भर्ती के लिए जारी किया नोटिफिकेशन, आवेदन शुरू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sbi-ने-क्लर्क-भर्ती-के-लिए-जारी-किया-नोटिफिकेशन-आवेदन-शुरू</link>
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        <description><![CDATA[ SBI Clerk Recruitment: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने क्लर्क 2026 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के जरिए जूनियर एसोसिएट के 1538 पदों को भरा जाएगा. यह भर्ती विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के बैकलॉग रिक्तियों के लिए निकाली गई है. योग्य उम्मीदवार 7 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन एसबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ही एक्सेप्ट किए जाएंगे. इस भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन के तहत हैं उम्मीदवार इस भर्ती में केवल एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकेंगे.
1538 पदों पर होगी भर्ती
एसबीआई की इस विशेष भर्ती में कुल 1538 रिक्त पद है. इनमें 207 पद एससी. 1219 पद एसटी और 112 पद ओबीसी वर्ग के लिए है. जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं. वहीं राज्यवार देखें तो सबसे ज्यादा गुजरात में 289 पद है, इसके बाद महाराष्ट्र में 165, मध्य प्रदेश में 134, झारखंड में 133, कर्नाटक में 120, ओडिशा में 111 और राजस्थान में 106 पद हैं. आंध्र प्रदेश में 88, तमिलनाडु में 65, पश्चिम बंगाल में 55, जम्मू कश्मीर में 42 और असम में 39 पद है.
कैसे कर सकते हैं आवेदन?

इस भर्ती में आवेदन के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एसबीआई की वेबसाइट पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद करंट ओपनिंग सेक्शन में संबंधित भर्ती को चुनें.&amp;nbsp;
अब रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करें.&amp;nbsp;
इसके बाद शैक्षणिक और पर्सनल जानकारी भरकर डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
लास्ट में निर्धारित फीस जमा कर फॉर्म सबमिट कर दें. &amp;nbsp;

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ग्रेजुएशन जरूरी, उम्र 20 से 28 साल&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. अंतिम वर्ष में पढ़ रहे उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें 31 दिसंबर 2026 तक ग्रेजुएशन पूरी होने का प्रमाण देना होगा. वहीं उम्र की गणना 1 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी. उम्मीदवार की उम्र कम से कम 20 साल और अधिकतम 28 साल होने चाहिए, यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अप्रैल 1998 से 1 अप्रैल 2006 के बीच हुआ होना चाहिए. आरक्षित वर्गों को एसबीआई के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी. &amp;nbsp; &amp;nbsp;
प्रीलिम्स, मेन्स और भाषा परीक्षा से होगा चयन
एसबीआई क्लर्क भर्ती में चयन के लिए तीन चरण होंगे. सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा, इसके बाद मुख्य परीक्षा और जरूरत पड़ने पर लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट होगा. प्रारंभिक परीक्षा सितंबर 2026 में होने की संभावना है, जबकि मुख्य परीक्षा अक्टूबर या नवंबर 2026 में आयोजित की जा सकती है. प्रीलिम्स में कुल 100 अंकों के ऑब्जेक्टिव प्रश्न होंगे और परीक्षा की अवधि 1 घंटे होगी. गलत उत्तर देने पर प्रश्न के निर्धारित अंकों का एक चौथाई हिस्सा काटा जाएगा. एसबीआई ने प्रीलिम्स में अलग-अलग सेक्शन के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक निर्धारित नहीं किए है. प्रीलिम्स के अंक केवल मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने में इस्तेमाल होंगे.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, ने, क्लर्क, भर्ती, के, लिए, जारी, किया, नोटिफिकेशन, आवेदन, शुरू</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>डीयू के प्लेसमेंट ड्राइव में 500+ छात्र शामिल, 75 से ज्यादा कंपनियों ने लिया हिस्सा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/डीयू-के-प्लेसमेंट-ड्राइव-में-500-छात्र-शामिल-75-से-ज्यादा-कंपनियों-ने-लिया-हिस्सा</link>
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        <description><![CDATA[ Delhi University Placement Drive 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने और उन्हें इंडस्ट्री की जरूरत से परिचित कराने के लिए प्लेसमेंट ड्राइव 2026 का आयोजन किया है. शनिवार को आयोजित इस ड्राइव में 75 से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया, जबकि 500 से ज्यादा छात्र इसमें शामिल हुए. कार्यक्रम के दौरान छात्रों को सीधे रिक्रूटर्स से बातचीत करने, अलग-अलग क्षेत्र में करियर के ऑप्शन समझने और इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों से संवाद करने का मौका मिला. यह प्लेसमेंट ड्राइव दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ कंटीन्यूइंग एजुकेशन एंड एक्सटेंशन की ओर सेंटर फोर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन के सहयोग से आयोजित किया गया. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
इन छात्रों को मिला शामिल होने का मौका
&amp;nbsp;प्लेसमेंट ड्राइव में एमए टूरिज्म मैनेजमेंट और एमए लाइफलॉन्ग लर्निंग एंड एक्सटेंशन के छात्रों के अलावा सामाजिक विज्ञान विभागों के छात्र दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र में नामांकित छात्र भी इसमें भाग लेने के पात्र थे. कार्यक्रम में छात्रों ने अलग-अलग रिक्रूटर्स के साथ सीधे बातचीत की. इसके अलावा उन्हें इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स के साथ-साथ नेटवर्किंग करने और करियर से जुड़े मार्गदर्शन सत्रों में हिस्सा लेने का अवसर मिला. इन सत्रों के जरिए छात्रों को उपलब्ध करियर ऑप्शंस और रोजगार के क्षेत्र में जरूरी अपेक्षाओं को समझने का मौका दिया गया.
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कई कंपनियां पहुंची प्लेसमेंट ड्राइव में &amp;nbsp; &amp;nbsp;
प्लेसमेंट ड्राइव में अलग-अलग क्षेत्रों से 75 से ज्यादा कंपनियां शामिल हुई. इनमें शिक्षा, सामाजिक विकास, हेल्थ केयर, रिसर्च, मानवाधिकार, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी से जुड़ी कंपनियां शामिल थी. भाग लेने वाली कंपनियों में जनहित सोसायटी फॉर सोशल वेलफेयर, अभिव्यक्ति फाउंडेशन, सरस्वती एजुकेशनल सोसाइटी, चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया, बाल विकास धारा, समन्वित शिक्षा संस्थान, आकांशी समिति, इंडियन सोसायटी फॉर एप्लाइड रिसर्च, ईएफआरएएच, समर्थ, मित्र ट्रस्ट, आधार और एमआरवाईडीओ शामिल थे. टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से भी कई कंपनियों में प्लेसमेंट ड्राइव में हिस्सा लिया.&amp;nbsp;
छात्रों और रिक्रूटर्स के बीस सीधे बातचीत पर जोर&amp;nbsp;
प्लेसमेंट ड्राइव के दौरान छात्रों को संभावित नियोक्ताओं से सीधे मिलने और बातचीत करने का अवसर दिया गया. यूनिवर्सिटी के अनुसार इस तरह के कार्यक्रम से छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करने और उन्हें अलग-अलग क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देने में मदद मिलती है. वहीं इस कार्यक्रम का आयोजन डीयू कुलपति योगेश सिंह के संरक्षण में किया गया. केंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक पायल मागो और डिपार्टमेंट ऑफ कंटीन्यूइंग एजुकेशन एंड एक्सटेंशन के प्रमुख कुमार आशुतोष कार्यक्रम के संरक्षक रहे. वहीं सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन के निदेशक अजय जायसवाल सह-संरक्षक रहे.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>डीयू, के, प्लेसमेंट, ड्राइव, में, 500, छात्र, शामिल, से, ज्यादा, कंपनियों, ने, लिया, हिस्सा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नीट यूजी में 7 साल में 42% बढ़ें उम्मीदवार, 2026 में करीब 20 लाख ने दी परीक्षा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नीट-यूजी-में-7-साल-में-42-बढ़ें-उम्मीदवार-2026-में-करीब-20-लाख-ने-दी-परीक्षा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नीट-यूजी-में-7-साल-में-42-बढ़ें-उम्मीदवार-2026-में-करीब-20-लाख-ने-दी-परीक्षा</guid>
        <description><![CDATA[ देश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए बढ़ते कंपटीशन का असर नीट यूजी में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या पर भी दिख रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार नीट यूजी में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या पिछले 7 साल में करीब 42.5 फीसदी बढ़ी है. साल 2019 में जहां 14.10 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी. वहीं 2026 में यह संख्या 19,99,895 हो गई यानी 7 साल में करीब 5.99 लाख उम्मीदवार बढ़े हैं. यह जानकारी लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दी है.
नीट यूजी 2024 में सबसे ज्यादा उम्मीदवार
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार नीट यूजी में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली. 2019 में 14.10 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी. 2021 में यह आंकड़ा 15.44 लाख और 2022 में 17.65 लाख हो गया. &amp;nbsp;2023 में पहली बार नीट यूजी में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या 20 लाख के पार पहुंची. इस साल 20.39 लाख छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया. इसके बाद 2024 में यह संख्या बढ़कर 23.33 लाख हो गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा. हालांकि 2024 के बाद उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट आई. 2025 में 22.09 लाख और 2026 में 19,99,895 उम्मीदवारों ने नीट यूजी परीक्षा दी. इसके बावजूद 2026 का आंकड़ा 2019 की तुलना में करीब 42.5 प्रतिशत ज्यादा है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-देश में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या घटी, एक साल में 3282 स्कूल हुए कम&amp;nbsp;
एक दशक में मेडिकल कॉलेज भी बढ़े
नीट यूजी में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने के साथ देश में मेडिकल शिक्षा की क्षमता में भी विस्तार हुआ. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 2014 में देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या 2026 में बढ़कर 846 हो गई. इस अवधि में एमबीबीएस सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है. 2014 में देश में 51,348 एमबीबीएस सीटें थी, जबकि 30 जुलाई 2026 तक यह संख्या 1,39,864 हो गई. इनमें 464 सरकारी मेडिकल कॉलेज में 66,221 एमबीबीएस सीटें हैं, जबकि 382 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 73,643 सीटें उपलब्ध है. &amp;nbsp;
&amp;nbsp;उम्मीदवार करीब 20 लाख और सीटें करीब 1.40 लाख
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मेडिकल शिक्षा में एडमिशन की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों की संख्या में पिछले एक दशक में विस्तार हुआ है, लेकिन नीट यूजी में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या की तुलना में उपलब्ध सीटें अब भी सीमित मानी जा रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2026 में करीब 20 लाख उम्मीदवारों ने नीट यूजी परीक्षा दी, जबकि देश में एमबीबीएस की कुल सीटों की संख्या करीब 1.40 लाख है.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में प्राइवेट स्कूल फीस पर नया नियम, हर स्कूल में बनेगी फीस रेगुलेशन कमेटी</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi Private School Fees 2026-27: दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था की समय सीमा तय कर दी है. दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली स्कूल एजुकेशन ऑर्डर 2026 विधानसभा में पेश किया. इसके तहत सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस निर्धारण की प्रक्रिया के लिए स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी गठित करनी होगी. सरकार ने साफ किया है कि नई 3 साल की फीस व्यवस्था लागू होने तक स्कूल 1 अप्रैल 2025 को लागू फीस से ज्यादा रकम नहीं वसूल सकेंगे. सरकार ने यह कदम फीस नियमन कानून को लागू करने में सामने आई व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए उठाया है. नई व्यवस्था के तहत 2026-27 से शुरू होने वाले तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए फीस तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
10 दिन में बनानी होगी फीस कमेटी &amp;nbsp;&amp;nbsp;
नए आदेश के अनुसार दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूलों को दिल्ली गजट में आदेश प्रकाशित होने के 10 दिनों के अंदर एसएलएफआरसी का गठन करना होगा. हालांकि जिन स्कूलों ने 24 दिसंबर 2025 के पुराने आदेश के तहत पहले ही यह कमेटी बना ली है, उन्हें दोबारा समिति गठित करने की जरूरत नहीं होगी. उनकी मौजूदा कमेटी को नया आदेश के तहत वैध माना जाएगा. कमेटी बनाने के बाद स्कूल प्रबंधन को 14 दिनों के अंदर अगले तीन शैक्षणिक वर्षों यानी 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए प्रस्तावित फीस का पूरा विवरण कमेटी के सामने रखना होगा. इसके बाद कमेटी प्रस्ताव की जांच कर कानून के तहत फीस तय करेगी. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
नई किस्त होने तक बढ़ोतरी पर रोक
सरकार ने फीस को लेकर सबसे अहम प्रावधान संक्रमण अवधि के लिए किया है. जब तक 2026-27 से शुरू होने वाले नए 3 साल के लिए फीस तय नहीं हो जाती, तब तक प्राइवेट स्कूल 1 अप्रैल 2025 को जो फीस ले रहे थे, उससे ज्यादा फीस नहीं ले सकेंगे. अगर इस अवधि में किसी स्कूल ने तय सीमा से ज्यादा फीस वसूली है तो नई फीस संरचना तय होने के बाद उस अतिरिक्त राशि को अंतिम रूप से स्वीकृत फीस में समायोजित करना होगा. &amp;nbsp;
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2025-26 की ज्यादा फीस वसूली पर भी नजर
फीस से जुड़े विवादों और अपील के लिए दिल्ली के प्रत्येक जिले में District Fee Appellate Committee बनाई जाएगी. आदेश के बाद 30 दिनों के अंदर शिक्षा निदेशक को सभी &amp;nbsp;जिलों में इन समितियां का गठन करना होगा. फीस निर्धारण से जुड़े किसी फैसले पर आपत्ति होने की स्थिति में संबंधित पक्ष इन समितियों के सामने अपील कर सकेंगे. इसके अलावा सरकार ने 2025-26 शैक्षणिक क्षेत्र के दौरान प्राइवेट स्कूलों की ओर से वसूली गई, ज्यादा फीस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है. आदेश के अनुसार इस अवधि में ली गई अत्यधिक फीस के मामले को कानून के तहत देखा जाएगा. हालांकि फीस नियमन कानून और उससे जुड़े नियमों की संवैधानिक वैधता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के अंतिम फैसले का भी इन मामलों पर असर रहेगा
क्यों बदली गई समय सीमा? &amp;zwnj;
दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 2025 को 10 दिसंबर 2025 को अधिसूचित किया गया था. इस कानून में स्कूलों को शैक्षणिक वर्ष के 15 जुलाई तक फीस नियमन समितियां गठित करने का प्रावधान था. &amp;nbsp;लेकिन कानून लागू होने की तारीख और तय समय सीमा के बीच कम समय होने के कारण 2025-26 सत्र में इस प्रक्रिया को लागू करना संभव नहीं हो पाया.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए नया कानून, 25% सीटें छात्रों के लिए होंगी आरक्षित </title>
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        <description><![CDATA[ Delhi Private University Bill: दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन के लिए अलग-अलग कानूनी व्यवस्था बनने का रास्ता साफ हो गया है. दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित कानून में दिल्ली के छात्रों के लिए हर कोर्स में 25 फीसदी सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है.
इसके साथ ही दिल्ली के छात्रों को मेरिट-कम-मीन्स के आधार पर फीस में छूट देने का भी प्रस्ताव है. सरकार के अनुसार इस बिल का उद्देश्य दिल्ली में उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ाना और छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाने की जरूरत कम करना है. हालांकि बिल को लागू होने से पहले विधानसभा को विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा.
हर कोर्स में 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित&amp;nbsp;
प्रस्तावित कानून के तहत प्राइवेट यूनिवर्सिटी के हर कोर्स की 25 फीसदी सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित होंगी. इन सीटों पर एडमिशन दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार किया जाएगा. इस प्रावधान के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दिल्ली में खुलने वाली प्राइवेट यूनिवर्सिटी से स्थानीय छात्रों को भी उच्च शिक्षा के अवसर मिले.&amp;nbsp;
फीस में भी मिलेगी छूट
बिल में दिल्ली के छात्रों के लिए मेरिट-कम मीन्स स्कॉलरशिप का प्रावधान भी प्रस्तावित है. इसके तहत दिल्ली के छात्रों के एक हिस्से को फीस में अलग-अलग स्तर पर राहत मिलेगी. प्रस्ताव के अनुसार 5 प्रतिशत दिल्ली के छात्रों को पूरी फीस छूट मिलेगी, 10 प्रतिशत छात्रों को 50 प्रतिशत फीस माफ करने का प्रावधान है और 10 प्रतिशत छात्रों को 25 प्रतिशत फीस में छूट दी जाएगी.&amp;nbsp;
सरकार की निगरानी में काम करेगी प्राइवेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
प्रस्तावित बिल के तहत दिल्ली सरकार को नोटिफिकेशन के जरिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने की शक्ति मिलेगी. हालांकि इस संस्थानों को यूजीसी और संबंधित वैधानिक नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करना होगा. इन यूनिवर्सिटी के लिए यूनिटरी मॉडल प्रस्तावित किया गया है. इसका मतलब है कि यूनिवर्सिटी अपने कैंपस के जरिए काम करेगी और उससे संबद्ध कॉलेज चलाने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि दिल्ली के अंदर अतिरिक्त कैंपस, रीजनल सेंटर और स्टडी सेंटर स्थापित किए जा सकेंगे. फैकल्टी और एकेडमिक स्टाफ की नियुक्ति भी यूजीसी के निर्धारित मानकों के अनुसार करनी होगी.&amp;nbsp;
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यूनिवर्सिटी बनाने के लिए 30 साल की जमीन की शर्त&amp;nbsp;
बिल में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज स्थापित करने वाली संस्था के अनुसार कुछ कड़े नियम भी प्रस्तावित है. स्पॉन्सरिंग बॉडी के पास जरूरी जमीन का कम से कम 30 साल का स्वामित्व या लीज का अधिकार होना चाहिए. इसके अलावा संस्था को पर्याप्त शैक्षणिक ढांचा उपलब्ध कराना होगा. इसमें क्लासरूम, लैबोरेट्री, लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं शामिल है.&amp;nbsp;
उच्च शिक्षा मंत्री होंगे यूनिवर्सिटी के विजिटर&amp;nbsp;
इस प्रस्तावित व्यवस्था में दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री को हर प्राइवेट यूनिवर्सिटी का विजिटर बनाए जाने का प्रावधान है. विजिटर को यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगने, निरीक्षण करने और कानूनी संबंधित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर निर्देश जारी करने का अधिकार होगा. जरूरत पड़ने पर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक, अकादमिक और वित्तीय मामलों की जांच भी कराई जा सकेगी. यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक व्यवस्था में चांसलर, वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन जैसे पद होंगे. अकादमी और प्रशासनिक फैसलों के लिए अकादमी काउंसिल और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाएं काम करेंगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>यूपी के छात्रों से हर महीने संवाद करेंगे IAS&amp;IPS अधिकारी, देंगे टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ यूपी सरकार ने इंटरमीडिएट स्तर के छात्रों को करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बेहतर मार्गदर्शन देने के लिए पहल शुरू की है. इसके तहत जिलों में तैनात युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी हर महीने कम से कम एक इंटरमीडिएट स्तर के स्कूल का दौरा करेंगे और विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे. इस दौरान अधिकारी अपने एक्सपीरियंस शेयर करने के साथ छात्रों के सवालों के जवाब देंगे और उन्हें भविष्य की पढ़ाई, करियर तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर टिप्स भी देंगे.&amp;nbsp;
IAS-IPS और IFS अधिकारी हर महीने जाएंगे स्कूल&amp;nbsp;
यूपी जिलाधिकारियों को जारी निर्देश के अनुसार प्रत्येक जिले में तैनात युवा IAS-IPS और IFS अधिकारियों को हर महीने कम से कम एक इंटरमीडिएट स्तर के स्कूल का भ्रमण करना होगा. स्कूल सरकारी या प्राइवेट दोनों में से कोई हो सकता है. विद्यालय प्रबंधन के साथ समन्वय कर अधिकारियों के संवाद और प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसमें विद्यार्थियों को अधिकारियों से सीधे अपने करियर, पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवाल पूछने का अवसर मिलेगा. वहीं कार्यक्रम में विद्यार्थियों को UPSC, UPPSC, UPSSSC, NDA, JEE, NEET और CUET समेत विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के बारे में जानकारी दी जाएगी. राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षाओं और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों का मार्गदर्शन किया जाएगा. अधिकारी अपने अनुभव, कार्यशैली और जीवन संघर्ष के बारे में भी विद्यार्थियों से बात करेंगे.
रोजगार और स्टार्टअप के अवसर भी बताए जाएंगे&amp;nbsp;
सरकार की इस पहल का दायरा सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा गया है. संवाद कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के विकल्पों के साथ रोजगार, उद्यमिता और स्टार्टअप से जुड़े अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी. इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की युवाओं से संबंधित प्रमुख योजनाओं के बारे में भी छात्रों को बताया जाएगा. कार्यक्रम में वित्तीय, कौशल, संचार कौशल और व्यापार प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति, तनाव प्रबंधन और आत्मविश्वास जैसे विषयों को भी शामिल किया जाए.&amp;nbsp;
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हर महीने तैयार होगा अधिकारियों का रोस्टर&amp;nbsp;
इस पहल को लागू करने की जिम्मेदारी जिला स्तर पर जिलाधिकारियों को दी गई है. डीएम हर महीने अधिकारियों को विद्यालय भ्रमण का कैलेंडर तैयार करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिले में तैनात युवा अधिकारी इसमें भाग लें. &amp;nbsp;रोस्टर में यह जानकारी होगी कि कौन सा आधिकारिक किस स्कूल में और कब विद्यार्थियों से संवाद करेगा. जिलाधिकारी कार्यक्रमों के गुणवत्ता की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा भी करेंगे और जरूरत के अनुसार अपने स्तर पर नए तरीके से कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे.&amp;nbsp;
मंडलायुक्त करेंगे समीक्षा&amp;nbsp;
कार्यक्रम की निगरानी के लिए मंडलायुक्तों को समय-समय पर इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं. वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक यानी डीआईओएस स्कूलों को कार्यक्रम की जानकारी देने और संबंधित अधिकारियों तथा विद्यालय प्रबंधन के बीच संबंध स्थापित करने का काम करेंगे. इसके अलावा प्रत्येक जिले को हर महीने आयोजित किए गए कार्यक्रमों की रिपोर्ट शासन के माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजनी होगी. रिपोर्ट हर महीने की 5 तारीख तक उपलब्ध करानी होगी.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>देशभर में बढ़ेंगी 5000 नई पीजी मेडिकल सीटें, केंद्र ने दी मंजूरी </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देशभर-में-बढ़ेंगी-5000-नई-पीजी-मेडिकल-सीटें-केंद्र-ने-दी-मंजूरी</link>
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        <description><![CDATA[ PG Medical Seat Increased: देश में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन की सीटें बढ़ाने की तैयारी है. केंद्र सरकार ने अगले 4 वर्षों में 5000 अतिरिक्त पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की मंजूरी दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी है. फिलहाल देश में 86,360 पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटें उपलब्ध है. नई सीटें मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों, पोस्ट ग्रेजुएट संस्थानों और सरकारी अस्पताल को मजबूत करने वाली योजना के तहत जोड़ी जाएंगी. सरकार के अनुसार 2025-26 से 2028-29 के बीच इन 5000 सीटों को बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही एक पीजी सीट के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता की अधिकतम सीमा भी बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है. इस विस्तार का उद्देश्य एक्सपर्ट डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए सीटों की उपलब्धता बढ़ाना है.&amp;nbsp;
किन राज्यों में सबसे ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें?
2026-27 के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में सबसे ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें है. राज्य में कुल 10,092 सीटें हैं, जिनमें 2,805 सरकारी और 7,287 में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में है. इसके बाद महाराष्ट्र में 9,216 पीजी सीटें हैं. इनमें 4,277 सरकारी और 4,939 प्राइवेट सीटें हैं. तमिलनाडु में कुल 8,023 सीटें हैं, जिनमें 3,030 सरकारी और 4,993 प्राइवेट सीटें हैं. उत्तर प्रदेश में कुल 7,437 पीजी मेडिकल सीटें हैं. इनमें 3,568 सीटें सरकारी और 3,869 सीटें प्राइवेट संस्थानों में है. वहीं तेलंगाना में 5,248 और आंध्र प्रदेश में 4,782 पीजी मेडिकल सीटें हैं. आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि देश में पीजी मेडिकल शिक्षा की बड़ी संख्या अभी ऐसे राज्यों में है, जहां प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की संख्या ज्यादा है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए नया कानून, 25% सीटें छात्रों के लिए होंगी आरक्षित&amp;nbsp;
नई सीटों के लिए पूरे करने होंगे मानक&amp;nbsp;
पीजी मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी नेशनल मेडिकल कमीशन के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 और पोस्ट ग्रेजुएट मिनिमम स्टैंडर्ड रिक्वायरमेंट 2024 के तहत की जाएगी. नए पीजी कोर्स या अतिरिक्त सीटों के लिए आवेदन करने वाले मेडिकल कॉलेजों को फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल की सुविधाओं और क्लीनिकल सामग्री से जुड़े निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा. इन मानकों के आधार पर ही सीटों और नए कोर्स को मंजूरी दी जाएगी. वहीं नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज की ओर से भी पीजी शिक्षा के विस्तार के लिए नए कोर्स शुरू करने और Joint Accreditation Scheme लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
पीजी सीटों की मंजूरी में भी हुआ इजाफा&amp;nbsp;
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पीजी मेडिकल सीटों की मंजूरी में हुई बढ़ोतरी का आंकड़ा भी जारी किया है. 2014-15 में एनएमसी ने 415 पीजी सीटों को मंजूरी दी, जबकि एनबीईएमएस की ओर से 612 सीटें स्वीकृत की गई. वहीं 2025-26 में एनएमसी की ओर से मंजूर पीजी सीटों की संख्या बढ़कर 9,084 हो गई. इसी अवधि में एनबीईएमएस ने 2009 सीटों को मंजूरी दी. इससे पहले 2024-25 में एनएमसी ने 4188 और एनबीईएमएस ने 1667 सीटों को मंजूरी दी थी.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देशभर, में, बढ़ेंगी, 5000, नई, पीजी, मेडिकल, सीटें, केंद्र, ने, दी, मंजूरी </media:keywords>
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        <title>NEET Counselling: रजिस्ट्रेशन में गलती सुधारने का मौका, एक्टिव हुआ Reset Option</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी 2026 काउंसलिंग राउंड-1 में रजिस्ट्रेशन के दौरान गलत जानकारी भरने वाले उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने रजिस्ट्रेशन रिसेट का ऑप्शन एक्टिव कर दिया है. इसके जरिए उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन के समय दर्ज की गई गलत जानकारी को सुधार सकते हैं.
एमसीसी के 7 अगस्त के नोटिस के अनुसार यह सुविधा 12 अगस्त 2026 सुबह 11:00 बजे तक उपलब्ध रहेगी. एमसीसी ने इसके साथ ही नीट काउंसलिंग 2026 के राउंड-1 का सीट मैट्रिक्स भी जारी कर दिया है. इसमें एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग को लेकर 31,728 सीटों का विवरण दिया गया है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन में गलती की है, उन्हें तय समय सीमा के अंदर रिसेट ऑप्शन का इस्तेमाल कर जानकारी ठीक करने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
किन उम्मीदवारों के लिए है रिसेट ऑप्शन?
एमसीसी का यह ऑप्शन उन उम्मीदवारों के लिए है, जिन्होंने राउंड 1 &amp;nbsp;के रजिस्ट्रेशन के दौरान कोई जानकारी गलत दर्ज कर दी है या गलती से कोई गलत ऑप्शन चुन लिया है. इसके जरिए उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन में दर्ज गलत जानकारी को अनलॉक कर सकते हैं. गलत भरी गई डिटेल को सुधार सकते हैं, गलती से चुने गए ऑप्शन को बदल सकते हैं, जानकारी को दोबारा जांच सकते हैं और उम्मीदवार सुधार करने के बाद संशोधित जानकारी एमसीसी की पोर्टल पर जमा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
राउंड 1 में 31,728 का सीटों का सीट मैट्रिक्स जारी&amp;nbsp;
एमसीसी ने नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के राउंड 1 के लिए एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग की सीट मैट्रिक्स जारी की है. तीनों कोर्स को मिलाकर कुल 31,728 सीटें शामिल है. इनमें एमबीबीएस की 27,292 सीटें, बीडीएस की 4068, बीएससी नर्सिंग की 328 सीटें शामिल है.
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सीट मैट्रिक्स में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?&amp;nbsp;
एमसीसी की सीट मैट्रिक्स में उम्मीदवारों को अलग-अलग कॉलेज और कोर्स के हिसाब से सीटों की जानकारी दी गई है. इसमें राज्य, संस्थान, कोर्स और अलग-अलग कोटा के आधार पर सीटों का विवरण शामिल है. मैट्रिक्स में ऑल इंडिया, ओपन सीट कोटा, एनआरआई, सेल्फ फाइनेंस मेरिट सीट और ईएसआई सहित लागू दूसरे कोटे दिए गए हैं. इसके अलावा अलग-अलग कैटेगरी और पीडब्ल्यूडी-पीडब्ल्यूबीडी सीटों की जानकारी भी दी गई है. उम्मीदवार इसमें अपनी पसंदीदा राज्य या कॉलेज को देखकर यह जांच सकते हैं कि वहां एमबीबीएस, बीडीएस या बीएससी नर्सिंग में कितनी सीटें उपलब्ध है और उनकी कैटेगरी के लिए कौन सी सीटें हैं.&amp;nbsp;
चॉइस फिलिंग से पहले सीट मैट्रिक्स देखना जरूरी&amp;nbsp;
राउंड 1 की चॉइस फिलिंग करते समय उम्मीदवारों के लिए सीट मैट्रिक्स काफी जरूरी है. कॉलेज और कोर्स की पसंद भरने से पहले उम्मीदवार यह देख सकते हैं कि संबंधित संस्थान में उनकी कैटेगरी और लागू कोटे के तहत कितनी सीटें उपलब्ध है. इसके लिए उम्मीदवार पहले अपनी पसंद के राज्य या संस्थान को सीट मैट्रिक्स में सर्च कर सकते हैं. इसके बाद संबंधित कोर्स, कोटा और कैटेगरी के अनुसार सीटों की संख्या देखी जा सकती है. पीडब्ल्यूडी-पीडब्ल्यूबीडी या दूसरे कैटेगरी में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को अपनी लागू सीटों की जानकारी भी देखनी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>MP ESB Recruitment 2026: 5 महीने में 12 बड़े एग्जाम कराएगा MP ESB, 19000 पदों पर होगी भर्ती</title>
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        <description><![CDATA[ MP ESB Recruitment 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए आने वाले कुछ महीने काफी जरूरी रहने वाले हैं. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MP ESB) ने साल 2026 में होने वाली भर्तियों का संशोधित कैलेंडर जारी कर दिया है. इस कैलेंडर के मुताबिक सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच प्रदेश में 12 बड़ी भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं. इन परीक्षाओं के जरिए अलग-अलग विभागों में 19 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती की जाएगी.&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया में पुलिस, पंचायत, कृषि, इंजीनियरिंग और दूसरे विभागों के पद शामिल हैं. इसके अलावा शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) भी सितंबर-अक्टूबर में प्रस्तावित है. ऐसे में सरकारी नौकरी और शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह अपडेट काफी जरूरी है.&amp;nbsp;
सितंबर में होंगी दो बड़ी भर्ती परीक्षाएं
MP ESB के संशोधित भर्ती कैलेंडर के अनुसार सितंबर 2026 में ग्रुप-2 &amp;nbsp;सब ग्रुप-1 के तहत कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा-2026 आयोजित की जाएगी. इसके जरिए कुल 2,784 पदों पर भर्ती की जानी है. इसी महीने ग्रुप-2 &amp;nbsp;सब ग्रुप--4 के तहत खंड पंचायत अधिकारी, पंचायत समन्वय अधिकारी, सहायक संपरीक्षक और समकक्ष पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा भी आयोजित होगी. इस भर्ती के तहत कुल 2,299 पद भरे जाने हैं.&amp;nbsp;
सितंबर-अक्टूबर में SI और उपयंत्री की परीक्षा
सितंबर से अक्टूबर 2026 के दौरान ग्रुप-3 उपयंत्री, मानचित्रकार और प्रयोगशाला तकनीशियन परीक्षा आयोजित की जानी है. इस भर्ती के जरिए कुल 700 पदों पर उम्मीदवारों का चयन होगा. इसी अवधि में सूबेदार और उपनिरीक्षक (SI) संवर्ग भर्ती परीक्षा भी प्रस्तावित है. इसमें कुल 507 पदों पर भर्ती की जाएगी. &amp;nbsp;इसके साथ ही सेवात्तर शिक्षकों के लिए प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 भी सितंबर-अक्टूबर में आयोजित होने का प्रस्ताव है.&amp;nbsp;
अक्टूबर-नवंबर में पुलिस भर्ती पर रहेगा फोकस
अक्टूबर से नवंबर 2026 के बीच भी कई जरूरी परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं. इस दौरान सूबेदार शीघ्रलेखक एवं सहायक उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा प्रस्तावित है, जिसमें कुल 566 पद भरे जाएंगे. &amp;nbsp;इसके अलावा पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा भी इसी अवधि में होगी. इस भर्ती में सबसे ज्यादा 7,500 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाना है.
नवंबर में 1000 पुलिस आरक्षक चालक पद
नवंबर 2026 में पुलिस आरक्षक चालक भर्ती परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव है. इसके जरिए कुल 1,000 पदों पर भर्ती की जाएगी.&amp;nbsp;
नवंबर-दिसंबर में पंचायत से जुड़ी भर्तियां
नवंबर से दिसंबर 2026 के बीच नायब तहसीलदार विभागीय भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी. इसके तहत कुल 73 पद भरे जाने हैं. &amp;nbsp;इसी अवधि में पंचायत सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक भर्ती परीक्षा भी प्रस्तावित है. इस भर्ती के जरिए कुल 2,900 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
दिसंबर में ग्रुप-6 की भर्ती परीक्षा
दिसंबर 2026 में ग्रुप-6 स बग्रुप-1 भर्ती परीक्षा आयोजित की जानी है. इसके तहत कुल 700 पदों पर भर्ती होगी. इसके अलावा दिसंबर में संस्कृति संचालनालय के तहत संचालित शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालयों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए भी परीक्षा आयोजित की जाएगी. इसमें कुल 33 पद भरे जाने हैं.&amp;nbsp;
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करीब 1.50 लाख शिक्षकों से जुड़ा TET अपडेट
MP ESB के संशोधित भर्ती कैलेंडर के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुल 19,062 पदों पर भर्ती होगी, जिसमें सबसे ज्यादा 7,500 पद पुलिस आरक्षक के हैं. इसके अलावा पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, कृषि विस्तार अधिकारी, उपयंत्री और SI समेत कई पद शामिल हैं. वहीं करीब 1.50 लाख शिक्षकों के लिए TET परीक्षा सितंबर-अक्टूबर 2026 में आयोजित की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसकी जिम्मेदारी MP ESB को दी गई है और जल्द ही ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है.&amp;nbsp;
किन शिक्षकों को देना होगा TET?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET जरूरी है. आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त हुए कुछ शिक्षक यह परीक्षा नहीं दे पाए थे. अब उन्हें अपनी योग्यता साबित करने के लिए TET देना होगा. यह परीक्षा उन शिक्षकों को देनी होगी, जिनकी रिटायरमेंट में अभी 5 साल से ज्यादा का समय बाकी है और जो प्राथमिक साथ ही माध्यमिक स्कूलों में काम कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NMMSS Scholarship 2026&amp;27 : NMMSS स्कॉलरशिप के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, 31 अगस्त तक करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ NMMSS Scholarship 2026-27 : शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम (NMMSS) के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है. इस योजना के तहत कक्षा 9 में पढ़ रहे पात्र छात्र पहली बार स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं. वहीं कक्षा 10 से 12 तक पढ़ने वाले छात्र अपनी पहले से मिल रही स्कॉलरशिप के नवीनीकरण यानी रिन्यूअल के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है और इसके लिए छात्रों को नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) का इस्तेमाल करना होगा.&amp;nbsp;
आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए है NMMSS योजना
नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक मदद देना है. यह योजना खास तौर पर कक्षा 8 के बाद छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करती है. केंद्र सरकार की इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य स्कूल छोड़ने यानी ड्रॉपआउट की समस्या को कम करना भी है. आर्थिक परेशानी के कारण जिन छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है, उन्हें इस स्कॉलरशिप के जरिए आगे की शिक्षा जारी रखने में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है NMMSS के लिए आवेदन?
NMMSS के लिए सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय के स्कूलों में कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा कक्षा 10, 11 और 12 में पढ़ने वाले छात्र अपनी स्कॉलरशिप को जारी रखने के लिए रिन्यूअल आवेदन कर सकते हैं. हालांकि रिन्यूअल के लिए छात्रों को स्कॉलरशिप से जुड़ी तय शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा. इसके साथ ही छात्र NMMSS जैसी मेरिट आधारित स्कॉलरशिप के अलावा एक या उससे ज्यादा स्कॉलरशिप योजनाओं के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, अगर वे संबंधित योजना की पात्रता पूरी करते हैं.&amp;nbsp;
31 अगस्त तक करना होगा आवेदन
NMMSS 2026-27 के लिए नए और रिन्यूअल दोनों तरह के आवेदन की लास्ट तारीख 31 अगस्त 2026 है. ऐसे में पात्र छात्रों को तय समय सीमा के भीतर अपना आवेदन पूरा करना होगा. आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और छात्रों को इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर जाना होगा.&amp;nbsp;
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NMMSS Scholarship 2026-27 के लिए ऐसे करें आवेदन
1. स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल की वेबसाइट पर जाएं
2. पहली बार आवेदन करने वाले छात्रों को पहले New Registration की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.&amp;nbsp;
3. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद मिले लॉगिन क्रेडेंशियल्स की मदद से पोर्टल पर लॉगिन करें.
4. इसके बाद उपलब्ध स्कॉलरशिप योजनाओं में National Means-cum-Merit Scholarship Scheme (NMMSS) का चयन करें.&amp;nbsp;
5. अब आवेदन फॉर्म में मांगी गई जरूरी जानकारी भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
6.सभी जानकारी भरने के बाद एक बार फॉर्म को अच्छी तरह जांच लें और फिर आवेदन सबमिट कर दें.
7. आवेदन जमा करने के बाद फ्यूचर के लिए कन्फर्मेशन पेज को डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें.
आवेदन के बाद दो चरणों में होगा वेरिफिकेशन
NMMSS के लिए आवेदन जमा करने के बाद प्रक्रिया खत्म नहीं होगी. छात्रों के आवेदन फॉर्म का वेरिफिकेशन भी किया जाएगा. यह वेरिफिकेशन दो चरणों में पूरा होगा. जिसमें पहले चरण में इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (INO) छात्रों के आवेदन का वेरिफिकेशन करेंगे. यह प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक पूरी की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर (DNO) आवेदन का &amp;nbsp;वेरिफिकेशन करेंगे, जिसे 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना है.
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NMMSS, Scholarship, 2026-27, NMMSS, स्कॉलरशिप, के, लिए, रजिस्ट्रेशन, शुरू, अगस्त, तक, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>IIT Delhi Convocation में PM ने किया PMRF का जिक्र, जानिए क्या है ये फेलोशिप </title>
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        <description><![CDATA[ IIT Delhi Convocation: आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए. पीएम मोदी ने संस्थान से डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को संबोधित किया. समारोह में 587 पीएचडी स्कॉलर समेत 3000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां दी गई. इस दौरान शानदार एकेडमी प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल जैसे सम्मान भी दिए गए. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने छात्रों की बदलती दुनिया, तकनीकी और नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने की भी सलाह दी. इसी दौरान पीएम ने रिसर्च के क्षेत्र में युवाओं के लिए मौजूदा अवसरों का जिक्र करते हुए प्राइम मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप की बात कही. &amp;nbsp;उन्होंने कहा कि पीएमआरएफ देश के प्रतिभावान युवाओं को शोध के नए अवसर दे रही है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं किPMRF फेलोशिप क्या है, इसमें कौन आवेदन कर सकता है और इससे कितना पैसा मिलता है.&amp;nbsp;
क्या है PMRF फेलोशिप?
प्राइम मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप केंद्र सरकार की एक रिसर्च फेलोशिप योजना है. जिसे देश के प्रतिभावान छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले रिसर्च के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था. यह योजना 2018-19 में शुरू हुई थी और इसके लिए कुल 1,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया था. PMRF का उद्देश्य देश के बेहतरीन छात्रों को प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में उच्च स्तरीय का शोध करने के लिए आकर्षित करना है. इसके तहत फेलोशिप और रिसर्च ग्रांट के जरिए रिसर्चर को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वह अपनी रिसर्च पर बेहतर तरीके से काम कर सके. सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अब तक 3,668 स्कॉलर PMRF &amp;nbsp;योजना के तहत दाखिल हो चुके हैं.&amp;nbsp;
PMRF में कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
PMRF के तहत मुख्य रूप से ऐसी प्रतिभाशाली छात्रों को रिसर्च के लिए चुना जाता है, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यक्रम में आगे बढ़ना चाहते हैं. उम्मीदवारों का चयन उनकी शैक्षणिक क्षमता, रिसर्च की योग्यता और संबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है. PMRF में आवेदन और चयन पात्रता संबंधित संस्थान की ओर से निर्धारित योजना के नियमों के अनुसार होता है. यह फेलोशिप खासतौर पर उन छात्रों के लिए है, जो उच्च स्तर पर रिसर्च कर पीएचडी जैसी उन्नत रिसर्च डिग्री की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं.&amp;nbsp;
PMRF में कितना मिलता है पैसा?
PMRF के तहत चयनित स्कॉलर को हर महीने 70,000 रुपये तक की फेलोशिप मिलती है. फेलोशिप के राशि पीएचडी के अलग-अलग वर्षों के हिसाब से तय होती है. जैसे पहले साल में 70,000 प्रति महीना, दूसरे साल में भी 70,000 प्रतिमाह, तीसरे साल में 75,000 प्रतिमाह, चौथे साल में 80 हजार रुपये प्रतिमाह और पांचवे साल में 80,000 प्रतिमाह मिलते हैं. इसके अलावा स्कॉलर को हर साल 2 लाख का रिसर्च ग्रांट भी मिलता है. 5 साल की अवधि में यह रिसर्च ग्रांट 10 लाख रुपये तक हो सकता है.&amp;nbsp;
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लैटरल एंट्री से भी मिल सकता है PMRF मौका&amp;nbsp;
PMRF में लेटरल एंट्री का प्रावधान भी है. इसके लिए उम्मीदवार को PMRF फैलोशिप देने वाले संस्थानों में से किसी एक में पीएचडी करना जरूरी है. अगर उम्मीदवार ने मास्टर डिग्री के बाद पीएचडी ज्वाइन की है, तो आवेदन के समय पीएचडी प्रोग्राम में अधिकतम 12 महीने पूरे हुए होने चाहिए, वहीं अगर उम्मीदवार ने बैचलर डिग्री के बाद पीएचडी में एडमिशन लिया है ,तो पीएचडी प्रोग्राम में अधिकतम 24 महीने पूरे होने चाहिए.&amp;nbsp;
कैसे मिलता है PMRF का लाभ?
PMRF के लिए चयन सीधे सभी छात्रों को नहीं दिया जाता है. उम्मीदवारों को निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है. छात्र संबंधित प्रमुख संस्थान में रिसर्च प्रोग्राम में एडमिशन लेने के बाद PMRF के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार की एकेडमिक उपलब्धियां, रिसर्च क्षमता और रिसर्च के क्षेत्र में प्रदर्शन को चयन प्रक्रिया में महत्व दिया जाता है.
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>जल्द जारी हो सकता है UPTET रिजल्ट, लाखों उम्मीदवार कर रहे इंतजार</title>
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        <description><![CDATA[ UPTET Result 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 के रिजल्ट का इंतजार कर रहे लाखों व्यक्तियों के लिए बड़ी अपडेट आई है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अभी तक रिजल्ट जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार रिजल्ट किसी भी समय जारी किया जा सकता है. परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है और अब उम्मीदवारों को स्कोर कार्ड जारी होने का इंतजार है. रिजल्ट जारी होने के बाद अभ्यर्थी यूपीईएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in. पर जाकर चेक कर सकेंगे.&amp;nbsp;
2 से 4 जुलाई तक हुई थी UPTET परीक्षा&amp;nbsp;
इस बार UPTET की परीक्षा में 17.7 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे. इसलिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की रिजल्ट पर नजर बनी हुई है. वहीं UPTET 2026 का आयोजन 2 जुलाई से 4 जुलाई 2026 तक किया गया था. परीक्षा ऑफलाइन मोड में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आयोजित हुई थी. इसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने की पात्रता हासिल करने के लिए उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था. पेपर 1 कक्षा 1 से 5 तक पढ़ने के पात्रता के लिए और पेपर 2 कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने की पात्रता के लिए होता है. उम्मीदवारों अपने प्रदर्शन के आधार पर एक या दोनों पेपर में क्वालीफाई कर सकते हैं. वहीं परीक्षा के बाद आयोग ने 8 जुलाई को प्रोविजनल आंसर की जारी की थी. उम्मीदवारों को आंसर की पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 14 जुलाई तक का समय दिया गया था. इन आपत्ति की समीक्षा के बाद फाइनल आंसर की के आधार पर रिजल्ट तैयार किया गया जा रहा है.&amp;nbsp;
UPTET रिजल्ट में क्या मिलेगी जानकारी?&amp;nbsp;
रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने स्कोर कार्ड में अपना नाम, रोल नंबर, प्राप्त अंक, क्वालीफाइंग स्टेटस, किस पेपर में परीक्षा दी है और परीक्षा से जुड़ी दूसरी जानकारी देख सकेंगे. स्कोर कार्ड डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी और प्राप्त अंकों को ध्यान से जांच लेना चाहिए. किसी तरह की गलती होने पर आयोग की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसकी जानकारी दी जा सकती है.
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UPTET पास करने के बाद क्या होगा?&amp;nbsp;
UPTET क्वालीफाई करना उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती के लिए निर्धारित न्यूनतम पात्रता में से एक है. हालांकि सिर्फ यूपीटीईटी पास करने से किसी उम्मीदवार की शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं होती. परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को पात्रता प्रमाण पत्र दिया जाएगा. यह प्रमाण पत्र एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार जीवन भर वैलिड रहता है. उम्मीदवार फ्यूचर में उत्तर प्रदेश में निकलने वाली सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों की शिक्षक भर्तियों में अपनी पात्रता के अनुसार इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. वहीं शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती प्रक्रिया, रिक्तियों और चयन प्रक्रिया में अलग से शामिल होना होगा.&amp;nbsp;
कैसे डाउनलोड कर सकेंगे स्कोर कार्ड?&amp;nbsp;

जारी होने के बाद रिजल्ट डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले upessc.up.gov.in. की वेबसाइट पर जाए.
इसके बाद UPTET 2026 रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें.
अब मांगी गई रजिस्ट्रेशन डिटेल्स और पासवर्ड या दूसरी लोगिन जानकारी भरें.&amp;nbsp;
इसके बाद जानकारी सबमिट करने पर आपको रिजल्ट और स्कोर कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा.
स्कोर कार्ड डाउनलोड करने के बाद आप इसका प्रिंट आउट लेकर भी रख सकते हैं.

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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>DGCA पोर्टल फेल! पायलट भर्ती की आखिरी तारीख बढ़ी</title>
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        <description><![CDATA[ पायलट बनने की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के लिए इस बार सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा नहीं बल्कि DGCA का परीक्षा पोर्टल बन गया. आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक आते ही वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कतें आने लगीं. कई छात्र समय रहते फॉर्म ही जमा नहीं कर पाए. मामला बढ़ा तो नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु को खुद दखल देना पड़ा. केंद्रीय मंत्री ने फ्लाइट क्रू उम्मीदवारों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 10 अगस्त 2026 कर दी है और DGCA को पोर्टल की तकनीकी कमियां तुरंत दूर करने का निर्देश दिया है.
पूरा मामला क्या है?
DGCA पायलट, एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर -AME बनने वाले उम्मीदवारों के लिए लाइसेंस संबंधी थ्योरी परीक्षाएं कराता है. &amp;nbsp;इनमें सबसे अहम होती है OLODE -Online On-Demand Examination, इसका फायदा यह है कि अगर किसी छात्र का सिर्फ एक पेपर बचा हो तो उसे अगले रेगुलर एग्जाम सेशन का तीन महीने इंतजार नहीं करना पड़ता. OLODE Session 06 of 2026 की परीक्षा 19 से 21 अगस्त के बीच होनी है. इसके लिए आवेदन DGCA के Pariksha Portal पर लिए जा रहे थे. हालांकि, लेकिन आवेदन विंडो खुलते ही बड़ी संख्या में छात्रों ने शिकायत की कि वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही थी. किसी का लॉगिन नहीं हो रहा था किसी का पेज बार-बार हैंग हो रहा था और कई छात्रों का आरोप है कि पेमेंट होने के बाद भी आवेदन दर्ज नहीं हुआ. नतीजा यह हुआ कि कई उम्मीदवार तय समय तक फॉर्म नहीं भर सके.
मंत्री को करना पड़ा दखल
मामला सोशल मीडिया तक पहुंचा तो नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने संज्ञान लिया. उन्होंने कहा कि फ्लाइट क्रू उम्मीदवारों की परेशानियों की जानकारी मिली है. तकनीकी गड़बड़ी की वजह से कई छात्र आवेदन नहीं कर पाए इसलिए फ्लाइट क्रू उम्मीदवारों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 10 अगस्त 2026 तक बढ़ाई जा रही है. मंत्री ने DGCA को यह भी निर्देश दिया है कि परीक्षा पोर्टल को जल्द से जल्द रिवैंप किया जाए और उसकी बैकएंड क्षमता बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी दोबारा न हो.
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अब किसके लिए कब तक आवेदन?
पोर्टल पर जारी नई व्यवस्था के मुताबिक दोनों श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग आवेदन विंडो रखी गई है. AME उम्मीदवार - आवेदन 7 अगस्त तक और फ्लाइट क्रू उम्मीदवार - 8 अगस्त से 10 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं. माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि एक साथ भारी ट्रैफिक आने से सर्वर पर दबाव कम रहे.
यह पहली बार नहीं हुआ
DGCA का परीक्षा पोर्टल पहले भी कई बार सवालों के घेरे में रहा है. फ्लाइंग स्कूलों और उम्मीदवारों का कहना है कि जैसे ही आवेदन शुरू होते हैं या एडमिट कार्ड जारी होते हैं वेबसाइट धीमी पड़ जाती है या कई बार पूरी तरह बंद हो जाती है. कई छात्रों को सलाह दी जाती रही है कि वे देर रात या सुबह जल्दी लॉगिन करें क्योंकि उस समय सर्वर पर कम लोड रहता है.
पेमेंट कट गया... लेकिन फॉर्म नहीं भरा
छात्रों की एक और बड़ी शिकायत पेमेंट को लेकर रहती है. OLODE परीक्षा की फीस भारतकोष के जरिए जमा होती है और प्रति पेपर करीब 5,000 रुपये शुल्क देना पड़ता है. कई मामलों में उम्मीदवारों का पैसा कट गया लेकिन पोर्टल पर आवेदन पूरा नहीं दिखा. ऐसे मामलों के लिए DGCA ने Failed Transaction Refund का विकल्प तो दिया है, लेकिन छात्रों का कहना है कि रिफंड आने में कई बार महीनों लग जाते हैं.
एक पेपर छूटा तो करियर भी पीछे खिसक सकता है
DGCA की परीक्षा में हर विषय में 70 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होता है. अगर कोई छात्र फेल हो जाए तो उसी विषय की परीक्षा दोबारा देने के लिए 42 दिन का कूलिंग पीरियड होता है. ऐसे में जिन छात्रों का सिर्फ एक पेपर बचा होता है उनके लिए आवेदन ही नहीं कर पाना बड़ा झटका बन जाता है. इसका असर सिर्फ परीक्षा पर नहीं बल्कि CPL पूरा होने, टाइप रेटिंग शुरू होने और एयरलाइन में नौकरी मिलने की पूरी टाइमलाइन पर पड़ सकता है. फिलहाल आवेदन की तारीख बढ़ा दी गई है लेकिन कई सवाल अभी भी बाकी हैं. फिलहाल राहत की बात सिर्फ इतनी है कि फ्लाइट क्रू उम्मीदवारों को 10 अगस्त तक एक और मौका मिल गया है लेकिन यह पूरा मामला एक बार फिर सरकारी डिजिटल सिस्टम की तैयारी और क्षमता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती के नतीजों पर विवाद, News और Spacerani नाम के कैंडिडेट भी पास</title>
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        <description><![CDATA[ पहले दिल्ली फिर झारखंड और अब छत्तीसगढ़ से भी भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की सूबेदार, एसआई और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा के प्रीलिम्स रिजल्ट में सामने आए कुछ अजीब नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. चयनित लिस्ट में NEWS, SPACE RANI, MANBAS, HE RAM और BHAKT PRAHLAD जैसे नाम दिखाई देने के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, CGPSC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि रिजल्ट में दिखाई दे रहे नाम अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन के दौरान खुद दर्ज किए थे. आयोग ने कहा कि परिणाम में वही जानकारी प्रदर्शित हुई, जो आवेदन फाॅर्म में भारी गई थी.&amp;nbsp;
4 अगस्त को जारी हुआ था रिजल्ट&amp;nbsp;
सीजीपीएससी ने सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर के 341 पदों पर भर्ती के लिए 12 जुलाई 2026 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी. परीक्षा राज्य के सभी 33 जिलों में बनाए गए 183 केंद्रों पर हुई थी. आयोग ने 4 अगस्त को इसका रिजल्ट जारी किया, जिसमें 7301 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया. इसी चयन सूची में कुछ असामान्य नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रिजल्ट के स्क्रीनशॉट वायरल होने लगे.&amp;nbsp;
रिजल्ट में न्यूज और स्पेस रानी नाम से मचा हंगामा&amp;nbsp;
रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल चयन लिस्ट में कुछ ऐसे नाम दिखाई दिए, जिन्हें देखकर अभ्यर्थियों और लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. इनमें न्यूज, स्पेस रानी और मानबास के अलावा हे राम, भक्त प्रहलाद और तू फेल जैसे नाम भी शामिल हैं. वायरल लिस्ट में न्यूज नाम का उम्मीदवार एसआई प्रारंभिक परीक्षा में सफल बताया गया. इस तरह स्पेस रानी और मानबास नाम भी सफल अभ्यर्थियों की लिस्ट में दर्ज है. कुछ जगहों पर मनमाने अक्षरों और अधूरी जानकारी वाली कॉपियों को लेकर भी सवाल उठें. सोशल मीडिया पर चयन लिस्ट के स्क्रीनशॉट समझने के बाद इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया और कांग्रेस ने पूरी तरह भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग की.&amp;nbsp;
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विपक्ष ने उठाए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल&amp;nbsp;
विपक्ष भर्ती परीक्षा के रिजल्ट में इस तरह के नाम को लेकर CGPSC की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए. विपक्ष का कहना है कि चयन सूची में इस तरह की प्रविष्टियां सामने आने से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर संदेह पैदा होता है. विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है. साथ ही भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण से पहले आवेदन में दर्ज उम्मीदवारों की जानकारी की जांच और प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा. उन्होंने न्यूज और स्पेस रानी नाम का जिक्र करते हुए दोनों को व्यंग्यात्मक अंदाज में बधाई दी और से राज्य की भाजपा सरकार से जोड़कर टिप्पणी की.&amp;nbsp;
CGPSC की सफाई, उम्मीदवारों ने खुद भरे थे नाम&amp;nbsp;
विवाद बढ़ने के बाद CGPSC ने गुरुवार को आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले पर सफाई दी. आयोग ने कहा कि सोशल मीडिया पर इन नाम को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी प्रसारित की जा रही है. आयोग के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों को अपना नाम, जन्मतिथि और दूसरी व्यक्तिगत जानकारी खुद दर्ज करनी होती है. रिजल्ट तैयार करते समय इस रिकॉर्ड को इस्तेमाल किया जाता है और नाम में आयोग की ओर से मैन्युअल बदलाव नहीं किया जाता. CGPSC ने स्पष्ट किया है की न्यूज, स्पेस रानी, है राम, भक्त प्रहलाद और तू फेल जैसे नाम भी आवेदन फॉर्म में अभ्यर्थियों की ओर से दर्ज किए गए थे. इन्हीं विवरणों के आधार पर उनके एडमिट कार्ड जारी हुए और उन्हें भर्ती प्रक्रिया के लिए अलग-अलग चरणों में हिस्सा दिया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>यूपी के स्कूलों में सोमवार को 12:15 बजे हो जाएगी छुट्टी, हाफ&amp;डे का आदेश</title>
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        <description><![CDATA[ 


UP Govt Orders Half Day in Schools on Monday: उत्तर प्रदेश में चल रही कावड़ यात्रा और राज्य भर में कावड़ यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए हैं. राज्य में सोमवार को स्कूलों में 12:15 बजे यानी आधे दिन में ही छुट्टी कर दी जाएगी. वहीं कावड़ यात्रा को देखते हुए पहले से जारी आदेश के तहत कई जिलों में 4 से 12 अगस्त तक को स्कूल कॉलेज बंद रखने का फैसला भी लागू है. प्रशासन का यह फैसला कावड़ यात्रा के दौरान सड़कों पर बढ़ने वाली भीड़ और भक्तों की आवाजाही को देखते हुए लिया गया है.



12:15 बजे होगी स्कूलों में छुट्टी
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश के अनुसार सोमवार को स्कूलों में नियमित कक्षाओं के बजाय दोपहर 12:15 बजे छुट्टी कर दी जाएगी. इसका उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ने वाली आवाजाही के बीच विद्यार्थियों और उनके परिवारों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है. कांवड़ यात्रा के चलते प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में भक्त और कावड़िये यात्रा कर रहे हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन की ओर से स्कूलों के संचालन को लेकर भी जरूरी बदलाव किए गए हैं.
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4 से 12 अगस्त तक बंद रहेंगे, कई स्कूल और कॉलेज
पहले से जारी आदेश के तहत 4 से 12 अगस्त तक स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज, यूनिवर्सिटी और तकनीकी संस्थानों में भी कक्षाएं बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं. यह आदेश सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट पर लागू है. स्कूलों में नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए छुट्टी रहेगी. इसके अलावा बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई, आईसीएसई और मदरसा बोर्ड से जुड़े स्कूल भी इस आदेश के दायरे में हैं. इसके अलावा कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संचालित सरकारी और प्राइवेट कॉलेज, यूनिवर्सिटी और तकनीकी संस्थानों में भी नियमित कक्षाएं बंद रहेगी. हालांकि आदेश में पहले से निर्धारित परीक्षाओं को लेकर अलग प्रावधान किया गया है. जिन संस्थानों में परीक्षा पहले से तय है, वहां संबंधित परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराई जा सकती है. यानी छुट्टी की कारण पहले से तय परीक्षा का कार्यक्रम प्रभावित नहीं होगा.
इन जिलों में पहले से लागू है आदेश
कांवड़ यात्रा को देखते हुए मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और मेरठ समेत कई जिलों में शैक्षणिक संस्थाओं को बंद रखने के आदेश पहले से ही जारी किए जा चुके हैं. सरकार के अनुसार प्रशासन यात्रा के दौरान स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत के अनुसार आगे भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं. वहीं श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हुई और 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि है, इस दौरान का कांवड़ियों की आवाजाही &amp;nbsp;बढ़ने के कारण प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>72वीं BPSC परीक्षा को लेकर वायरल नोटिस निकला फेक, आयोग ने जारी की चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ BPSC Fake Notice: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक नोटिस ने अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है. आयोग ने वायरल नोटिस को फर्जी, भ्रामक और गलत बताते हुए अभ्यर्थियों को सावधान किया है. बीपीएससी ने स्पष्ट किया है कि 72वीं सीसीई और 2026 में प्रस्तावित अन्य परीक्षाओं को लेकर वायरल हो रहा है, यह नोटिस आयोग की ओर से जारी नहीं किया है. बीपीएससी ने अपने पोस्ट में बताया कि आयोग ने अभ्यर्थियों और आम लोगों से अपील की है कि वह सोशल मीडिया पर किसी अनधिकृत माध्यम से मिलने वाली परीक्षा संबंधी जानकारी पर भरोसा ना करें और ऐसे फर्जी नोटिस को आगे शेयर या प्रसारित करने से बचें.&amp;nbsp;
72वीं BPSC परीक्षा का फर्जी नोटिस वायरल&amp;nbsp;
आयोग के अनुसार सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर BPSC के नाम से एक इंपोर्टेंट नोटिस प्रसारित किया जा रहा है. इसमें 2026 में होने वाली 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा समेत अन्य प्रस्तावित परीक्षाओं से संबंधित जानकारी दी गई थी. BPSC ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नोटिस आयोग की ओर से जारी नहीं किया गया है. आयोग में कहा गया है कि वायरल जानकारी पूरी तरह फेक, भ्रामक और असत्य है. अभ्यर्थियों से कहा गया है कि वह किसी भी अनधिकृत सोर्स से मिली परीक्षा की तारीख, नोटिफिकेशन या दूसरी जानकारी को सही न मानें.&amp;nbsp;
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26 जुलाई को होनी थी 72वीं CCE प्रीलिम्स&amp;nbsp;
दरअसल BPSC की 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा 2026 पहले 26 जुलाई को आयोजित होनी थी. आयोग ने परीक्षा से कुछ दिन पहले 18 जुलाई को जारी नोटिस के जरिए इसे स्थगित कर दिया था. बीपीएससी ने परीक्षा स्थगित करने के पीछे अपरिहार्य कारणों का हवाला दिया. आयोग ने उस समय कहा था कि परीक्षा की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी, फिलहाल स्थगित परीक्षा की संशोधित तारीख को लेकर आयोग की ओर से कोई नया शेड्यूल जारी नहीं किया गया है. इस वजह से परीक्षा की नई तारीख का इंतजार कर रहे हैं, अभ्यर्थी आयोग से लगातार अपडेट भी मांग रहे हैं.&amp;nbsp;
72वीं BPSC भर्ती में 1230 पद&amp;nbsp;
बीपीएससी ने 12वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन 6 मई 2026 को जारी किया था. इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1230 पदों पर नियुक्ति की जानी है. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 मई से 31 मई तक चली थी. इस भर्ती प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा. सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा होगी, इसमें सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा. वहीं मुख्य परीक्षा के बाद सफल उम्मीदवारों का अंतिम इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अगस्त में जारी होगा KVS, NVS और EMRS टियर&amp;2 रिजल्ट, CBSE ने दिया अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE KVS NVS EMRS Tier 2 Result: केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आधिकारिक सूचना जारी की है. सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टियर-2 परीक्षा के नतीजों को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों और अटकलों पर विराम लगाने के मकसद से बोर्ड की सीटीईटी (CTET) यूनिट ने यह आधिकारिक प्रेस नोट रिलीज किया है और बताया है कि रिजल्ट आखिर कब घोषित हो रहा है.&amp;nbsp;
रिजल्ट प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची
सीबीएसई बोर्ड ने प्रेस नोट के जरिए जानकारी दी है कि टियर-2 की डिस्क्रिप्टिव आंसर बुक्स का फिजिकल इवैल्यूएशन (कॉपियों की जांच) काफी तेजी से चल रही है. मूल्यांकन का यह कार्य अब बेहद एडवांस स्टेज यानी अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है. बोर्ड का कहना है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अंतिम प्रक्रियाओं में पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे परिणाम घोषित करने में थोड़ा समय लग रहा है.
अगस्त 2026 से जारी होंगे नतीजे
लाखों परीक्षार्थियों को बड़ी राहत देते हुए सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि केवीएस (KVS), एनवीएस (NVS) और ईएमआरएस (EMRS) टियर-2 का रिजल्ट अगस्त 2026 के मध्य से जारी होना शुरू हो जाएगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी पदों और संस्थानों के परिणाम एक साथ नहीं आएंगे, बल्कि इन्हें फेज वाइज तरीके से अलग-अलग तारीखों पर घोषित किया जाएगा.
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अफवाहों से बचें और आधिकारिक जानकारी देखें
बोर्ड ने अभ्यर्थियों को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही अनवेरिफाइड खबरों और अफवाहों से सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी है. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई सूचनाओं पर ही विश्वास करें. रिजल्ट की तारीखों की ताजा जानकारी के लिए परीक्षार्थी लगातार ctet.nic.in पोर्टल को चेक करते रहें.

Important UpdateThe KVS, NVS &amp;amp; EMRS Recruitment Tier-II Results will be declared in phases, commencing mid-August 2026.Candidates are advised to rely only on official information and ignore rumours/ unverified reports.For more details, please see the Press Release pic.twitter.com/BcRNLqwjHP
&amp;mdash; CBSE HQ (@cbseindia29) August 7, 2026

&amp;nbsp;
जारी किया हेल्पलाइन नंबर&amp;nbsp;
किसी भी तरह के भ्रम या सवाल की स्थिति में सीबीएसई ने उम्मीदवारों की सुविधा के लिए आधिकारिक संपर्क नंबर भी जारी किया है. इसके लिए अभ्यर्थी सीधे बोर्ड के हेल्पलाइन नंबर +91-11-24050477 पर कॉल करके सही जानकारी हासिल कर सकते हैं.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>IIM Ahmedabad Business Finance Program: IIM अहमदाबाद में बिजनेस फाइनेंस प्रोग्राम में एडमिशन शुरू, जानें डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ IIM Ahmedabad Business Finance Program: भारतीय प्रबंधन संस्थान IIM अहमदाबाद ने Jaro Education के साथ मिलकर अपने एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम इन बिजनेस फाइनेंस EPBF के 8वें बैच के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह कोर्स विशेष रूप से उन कामकाजी पेशेवरों के लिए डिजाइन किया गया है जो कॉरपोरेट फाइनेंस को गहराई से समझना चाहते हैं और अपनी लीडरशिप स्किल्स को मजबूत करना चाहते हैं. इस शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 6 सितंबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
कब से करें आवेदन और क्या है योग्यता?
इस प्रोग्राम में एडमिशन लेने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए 6 सितंबर 2026 आवेदन करने की अंतिम तारिख हैं. क्योंकि 21 सितंबर 2026 से बैच की पढ़ाई शुरू होने जा रही है और 24 अप्रैल 2027 तक पढ़ाई पूरी हो जाएगी. आईआईएम अहमदाबाद के इस विशेष फाइनेंस प्रोग्राम में प्रवेश पाने के लिए उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उम्मीदवार के पास कम से कम 3 वर्ष का पूर्णकालिक कार्य अनुभव होना अनिवार्य है. क्योंकि यह कोर्स मुख्य रूप से मिड-लेवल और सीनियर लेवल के उन अधिकारियों के लिए है जो भविष्य में बिजनेस लीडरशिप या प्रॉफिट एंड लॉस की जिम्मेदारियां संभालने वाले हैं और जिनका फाइनेंस बैकग्राउंड नहीं है.&amp;nbsp;
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कितनी है कोर्स की फीस?
इस प्रीमियम एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए 3,43,000 फिस रखी गई है. इसके अलावा 18% लागू जीएसटी अलग से देनी होगी. साथ ही फॉर्म जमा करते समय उम्मीदवारों को 2,000 और जीएसटी का गैर-वापसी योग्य आवेदन शुल्क भी देना होगा. ध्यान दें कि इस फीस में कैंपस मॉड्यूल के दौरान होने वाले व्यक्तिगत यात्रा और रहने का खर्च शामिल नहीं है.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया
इस प्रोग्राम में उम्मीदवारों का चयन किसी लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं बल्कि प्रोफाइल के मूल्यांकन के आधार पर होगा. सबसे पहले उम्मीदवारों के ग्रेजुएशन के अंक और उनके कार्य अनुभव की जांच की जाएगी. फिर आवेदकों को एक स्टेटमेंट ऑफ पर्पस जमा करना होगा, जिसमें उन्हें बताना होगा कि वे यह कोर्स क्यों करना चाहते हैं. कोर्स के अंत में परीक्षाओं और असेसमेंट को सफलतापूर्वक पूरा करने और न्यूनतम 80% अटेंडेंस बनाए रखने वाले छात्रों को आईआईएम अहमदाबाद की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ कंप्लीशन दिया जाएगा. और आपका यह कोर्स पूरा हो जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IIM, Ahmedabad, Business, Finance, Program:, IIM, अहमदाबाद, में, बिजनेस, फाइनेंस, प्रोग्राम, में, एडमिशन, शुरू, जानें, डिटेल्स</media:keywords>
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        <title>स्कूल शिक्षा में सुधार, 12 साल में छात्रों और शिक्षकों का अनुपात हुआ बेहतर </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्कूल-शिक्षा-में-सुधार-12-साल-में-छात्रों-और-शिक्षकों-का-अनुपात-हुआ-बेहतर</link>
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        <description><![CDATA[ Pupil-Teacher Ratio: 12 सालों में देश की स्कूली व्यवस्था में काफी सुधार देखने को मिला है. दरअसल शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी गए किए गए प्यूपिल टीचर रेशियो के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक प्रति शिक्षक छात्रों की संख्या पहले के मुकाबले कम हुई है. मंत्रालय का कहना है कि इससे शिक्षकों को प्रत्येक छात्र पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा और पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.&amp;nbsp;
चारों स्तरों पर घटा छात्र-शिक्षा अनुपात&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 2013-14 की तुलना में 2025-26 में सभी स्कूल स्तरों पर शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार हुआ है. 2013-14 में प्राइमरी स्तर के स्कूलों में 31 स्टूडेंट पर एक टीचर था, वहीं 2025-26 में 19 स्टूडेंट पर एक टीचर हो गया है. इसके अलावा उच्च प्राथमिक स्तर पर 2013-14 में प्रति शिक्षक छात्रों की संख्या 25 थी, जो 2025-26 में घटकर 17 रह गई है. माध्यमिक स्तर पर 2013-14 में प्रति शिक्षक छात्रों की संख्या 25 थी जो घटकर 2025-26 में 15 रह गई है. वहीं उच्च माध्यमिक स्तर पर 2013-14 में यह आंकड़ा 40 था, जो अब 2025-26 में घटकर 23 छात्र प्रति शिक्षक पहुंच गया है.&amp;nbsp;
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शिक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार पिछले 12 सालों में छात्र-शिक्षक अनुपात में हुए सुधार से स्कूलों में प्रत्येक विद्यार्थी को ज्यादा व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल रहा है, इससे शिक्षण प्रक्रिया को मजबूत बनाने और कक्षा में बेहतर सीखने का माहौल तैयार करने में मदद मिली है.&amp;nbsp;
राज्यों में भी दिख रहा सुधार&amp;nbsp;
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अलावा छात्र-शिक्षक अनुपात की दिशा में कई राज्यों ने भी सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सुधारने के लिए कदम उठाए हैं. उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश में सरकारी स्कूलों में पिछले एक दशक के दौरान प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और हाई स्कूल स्तर पर शिक्षक छात्र अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है. राज्य के अनुसार स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं, ताकि सभी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षक शैक्षणिक माहौल मिल सके. आंध्र प्रदेश सरकार की और से जारी लेटेस्ट सोशियो-इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 एकेडमिक ईयर के दौरान प्राइमरी स्कूलों टीचर-स्टूडेंट रेशियो 1:26 था जो 2024-25 एकेडमिक ईयर में सुधरकर 1:20 हो गया है यानी हर 20 स्टूडेंट्स पर एक टीचर.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्कूल, शिक्षा, में, सुधार, साल, में, छात्रों, और, शिक्षकों, का, अनुपात, हुआ, बेहतर </media:keywords>
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        <title>Jamia Millia Islamia Spot Registration 2026: जामिया में एडमिशन का एक और मौका, खाली सीटों पर करें रजिस्ट्रेशन</title>
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        <description><![CDATA[ Jamia Millia Islamia Spot Registration 2026:&amp;nbsp;अगर आपने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एडमिशन के लिए अप्लाई नहीं किया था या पिछले राउंड में आपकी सीट नहीं बन पाई, तो अब आपके लिए एक और मौका आया है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुछ कोर्सों में दाखिले का मौका अभी भी खुला हुआ है. यूनिवर्सिटी ने खाली सीटों को भरने के लिए स्पॉट रजिस्ट्रेशन का ऐलान किया है. यह उन छात्रों के लिए बहुत अच्छी खबर है, जो दिल्ली की इस मशहूर यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहते हैं लेकिन किसी वजह से पहले मौका चूक गए थे.&amp;nbsp; आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी कि कब, कैसे और किन कोर्सों में यह रजिस्ट्रेशन होगा.
स्पॉट रजिस्ट्रेशन कब और कैसे होगा?
जामिया ने खाली सीटों को भरने के लिए ऑफलाइन स्पॉट पंजीकरण की सूचना जारी की है. यह रजिस्ट्रेशन 8 अगस्त को कराया जाएगा. इसका मतलब है कि जिन छात्रों की सीट अभी तक पक्की नहीं हुई है, वे इस दिन सीधे यूनिवर्सिटी जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. यह रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन नहीं बल्कि ऑफलाइन तरीके से होगा, यानी छात्रों को खुद मौजूद रहना जरूरी है. ऐसे में छात्रों को रजिस्ट्रेशन के समय अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए, जैसे मार्कशीट, पहचान पत्र और फोटो. जो छात्र इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें तय तारीख से पहले यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर सारी जानकारी अच्छे से पढ़ लेनी चाहिए, जिससे वे सही समय पर सही जगह पहुंच सकें और कोई मौका न छूटे.&amp;nbsp;
इस स्पॉट रजिस्ट्रेशन में UG, PG और PG डिप्लोमा के कोर्स शामिल हैं. यानी अलग-अलग स्तर के छात्रों के पास मौका है, चाहे वे बारहवीं के बाद बैचलर कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हों या ग्रेजुएशन के बाद मास्टर डिग्री करना चाहते हों. इसके अलावा जो छात्र किसी खास क्षेत्र में डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं, उनके लिए भी पीजी डिप्लोमा में सीटें उपलब्ध हैं. यह छात्रों के लिए एक बड़ा मौका है, क्योंकि आमतौर पर मुख्य एडमिशन प्रक्रिया खत्म होने के बाद ऐसे मौके कम ही मिलते हैं. खाली सीटों को भरने के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से यह पहल इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे उन छात्रों को भी दाखिला मिल सकता है, जो किसी वजह से पहले आवेदन नहीं कर पाए थे या कटऑफ में पीछे रह गए थे.&amp;nbsp;
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छात्रों को क्या करना चाहिए?
जामिया में एडमिशन लेने के लिए छात्रों को यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट admission.jmi.ac.in पर जाकर पूरी जानकारी जरूर देखनी चाहिए, ताकि किसी भी कोर्स की सीट, शर्तों और समय को लेकर कोई गलतफहमी न रहे. वेबसाइट पर सूचना के साथ-साथ कैंपस में भी नोटिस बोर्ड चेक करना अच्छा रहेगा. जो छात्र समय पर सही जानकारी लेकर पहुंचेंगे और अपने दस्तावेज पूरे रखेंगे, उनके लिए यह मौका काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jamia, Millia, Islamia, Spot, Registration, 2026:, जामिया, में, एडमिशन, का, एक, और, मौका, खाली, सीटों, पर, करें, रजिस्ट्रेशन</media:keywords>
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        <title>UGC ने जारी की 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट, स्टूडेंट्स को किया अलर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ugc-ने-जारी-की-32-फर्जी-यूनिवर्सिटी-की-लिस्ट-स्टूडेंट्स-को-किया-अलर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ UGC Fake Universities List: देश में फर्जी यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई तेज करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश भर के 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान की है. शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि यह संस्थान यूजीसी अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है और इन्हें डिग्री प्रदान करने का अधिकार भी नहीं है. ऐसे में छात्रों और पेरेंट्स को किसी भी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने से पहले उनकी मान्यता जरूर जांचने की सलाह दी गई है.
शिक्षा मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार के अनुसार, यूजीसी ने यह लिस्ट फरवरी 2026 में जारी की थी. आयोग को जब किसी ऐसे संस्थान की शिकायत मिलती है, जो बिना अनुमति डिग्री कार्यक्रम चला रहा हो, तो पहले उसे नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाता है. अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता तो जांच के बाद उस संस्थान का नाम फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट में शामिल कर दिया जाता है.&amp;nbsp;
सबसे ज्यादा फर्जी यूनिवर्सिटी दिल्ली में&amp;nbsp;
यूजीसी के अनुसार सबसे ज्यादा 12 फर्जी यूनिवर्सिटी दिल्ली में संचालित हो रही है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में चार, जबकि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में दो-दो फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान की गई है. वहीं अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा और झारखंड में एक-एक फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान की गई है. आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन संस्थानों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं.&amp;nbsp;
एडटेक कंपनियों को भी दी चेतावनी
राज्यसभा में सरकार ने यह भी बताया कि यूजीसी ने कुछ एडटेक कंपनियों की ओर से ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड में आयोजित में यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों के प्रचार पर भी आपत्ति जताई है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के फ्रेंचाइजी मॉडल की अनुमति नहीं है और ऐसे माध्यम से चलाए जा रहे कार्यक्रमों को यूजीसी की मान्यता प्राप्त नहीं होगी. नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को एयरटेल कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
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ऐसे करें फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान &amp;nbsp;
यूजीसी ने छात्रों और पेरेंट्स को कहा है कि किसी भी कोर्स में एडमिशन लेने से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी और प्रोग्राम की मान्यता की जांच जरूर कर लें. इसके अलावा इसके लिए आयोग की डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो वेबसाइट पर जाकर संबंधित कोर्स की मान्यता &amp;nbsp;और पात्रता की स्थिति देखी जा सकती है. केवल विज्ञापन, सोशल मीडिया एडवर्टाइजमेंट या कम फीस के आधार पर किसी भी इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेने से बचने की सलाह भी दी गई है.&amp;nbsp;
फर्जी संस्थानों पर ऐसी होती है कार्रवाई&amp;nbsp;
फर्जी यूनिवर्सिटी और बिना मान्यता वाले इंस्टीट्यूट पर निगरानी रखने के लिए यूजीसी ने 30 में 1966 को एंटी माल-प्रेक्टिस सेल का गठन किया था. यह सेल यूजीसी अधिनियम 1956 का उल्लंघन कर डिग्री देने या कार्यक्रम चलाने वाले संस्थानों से जुड़ी शिकायत की जांच करता है. आयोग समय-समय पर कारण बताओं नोटिस और चेतावनी जारी करता है. फर्जी यूनिवर्सिटी की &amp;nbsp;राज्यवार लिस्ट प्रकाशित करता है और राज्य सरकारों से ऐसे इंस्टीट्यूट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध भी करता है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, ने, जारी, की, फर्जी, यूनिवर्सिटी, की, लिस्ट, स्टूडेंट्स, को, किया, अलर्ट</media:keywords>
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        <title>क्या है JPSC&amp;JSSC विवाद, क्यों फूट पड़ा छात्रों का गुस्सा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-है-jpsc-jssc-विवाद-क्यों-फूट-पड़ा-छात्रों-का-गुस्सा</link>
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        <description><![CDATA[ Jharkhand Student Protest: झारखंड में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा ( JPSC) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है. कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद राज्यभर के प्रतियोगी छात्र राज्य रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, इसलिए अब केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की जरूरत है.&amp;nbsp;
आखिर कैसे शुरू हुआ यह विवाद?
झारखंड में इस विवाद की शुरुआत 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद हुई. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने कैटेगरी वाइज कट ऑफ जारी नहीं की और चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए. सोशल मीडिया पर कुछ ओएमआर शीट्स भी वायरल हुई, जिसके बाद परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप और तेज हो गए. इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच शुरू कराई. जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. इसी बीच जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया, जबकि आयोग ने मुख्य परीक्षा समेत कई भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया.&amp;nbsp;
छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?&amp;nbsp;
छात्रों का कहना है कि यह मामला केवल 14वीं जेपीएससी परीक्षा का नहीं है. उनका आरोप है कि 2019 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षा विवादों में रही. कहीं पेपर लीक के आरोप लगे, कहीं उत्तर कुंजी पर सवाल उठे तो कहीं रिजल्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई. इसी वजह से अब छात्र पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या है छात्रों की प्रमुख मांगे?

14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए.&amp;nbsp;
पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए.&amp;nbsp;
2019 से अब तक सभी विवादित जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच हो.&amp;nbsp;
जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो उन्हें दोबारा कराई जाए.
भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए.
दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें-Jamia Millia Islamia Spot Registration 2026: जामिया में एडमिशन का एक और मौका, खाली सीटों पर करें रजिस्ट्रेशन
सरकार ने क्या उठाए कदम?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा में अनियमितताओं को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि सरकार मामले पर नजर बनाए हुए है. छात्रों से बातचीत के लिए चार सदस्य मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया गया. हालांकि छात्रों की मुख्य मांग चौधरी जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच करने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ. इस मामले की जांच राज्य की सीआईडी कर रही है लेकिन छात्रों ने इस जांच को अधूरा बताते हुए खारिज कर दिया.&amp;nbsp;
हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला&amp;nbsp;
14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं ने मॉडल और आंसर की, कट ऑफ और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. आयोग ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और मुख्य परीक्षा फिलहाल स्थगित कर दी गई है. हाई कोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को निर्धारित की है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITBP Medical Officer Notification: ITBP में मेडिकल ऑफिसर के 282 पदों पर भर्ती, 10 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/itbp-medical-officer-notification-itbp-में-मेडिकल-ऑफिसर-के-282-पदों-पर-भर्ती-10-अगस्त-से-शुरू-होंगे-आवेदन</guid>
        <description><![CDATA[ ITBP Medical Officer Notification: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल ITBP ने मेडिकल ऑफिसर Group A के 282 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत देश के प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों जैसे BSF, CRPF, ITBP, SSB और असम राइफल्स में डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी. सरकारी नौकरी और देश सेवा की इच्छा रखने वाले मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए यह एक बहुत ही शानदार अवसर है. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 10 अगस्त 2026 से शुरू हो रही है.&amp;nbsp;
ITBP में मेडिकल ऑफिसर vacancy details
इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए 10 अगस्त 2026 से आवेदन शुरू हो जाएगें, जो &amp;nbsp;08 सितंबर 2026 तक चलेगें. इस बीच आप कभी भी आवेदन कर सकते हैं. लेकिन उम्मीदवार आखिरी तारीख से पहले समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें, ताकि अंतिम समय में वेबसाइट पर होने वाले भारी ट्रैफिक या तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके. इन 282 पदों को अलग-अलग श्रेणियों आधार पर विभाजित किया गया है. जैसे सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर के 5 पद रखें गए है, तो वही स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर के 162 पद खाली है, मेडिकल ऑफिसर के 115 रिक्त है.&amp;nbsp;
शैक्षणिक योग्यता
मेडिकल ऑफिसर पद के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से MBBS की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही, उम्मीदवार की अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप पूरी होनी चाहिए. वही स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर पद के उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में MBBS के साथ-साथ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए. सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर पद के लिए उम्मीदवार के पास MBBS, संबंधित विषय में PG डिग्री के साथ सुपर स्पेशलिटी डिग्री जैसे DM या M.Ch. होना अनिवार्य है. साथ ही सभी उम्मीदवारों का नेशनल मेडिकल कमीशन NMC या किसी राज्य के मेडिकल काउंसिल में वैध रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है. फाइनल ईयर के छात्र इस भर्ती के लिए पात्र नहीं हैं.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें- नवोदय स्कूल में एडमिशन का एक और मौका, आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ी&amp;nbsp;
आयु सीमा और चयन प्रक्रिया
इस भर्ती में पदों के अनुसार आयु सीमा का निर्धारण किया गया है. मेडिकल ऑफिसर पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष तय की गई है. वही स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष रखी गई है. ITBP मेडिकल ऑफिसर भर्ती 2026 के लिए सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. उम्मीदवारों के सबसे पहले शैक्षणिक और व्यावसायिक दस्तावेजों की जांच की जाएगी. इसके बाद योग्य उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, इस चरण में उम्मीदवारों की लंबाई, सीना और वजन का माप लिया जाएगा. अंत में उम्मीदवारों को सेना के कड़े मेडिकल मानकों को पूरा करना होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ITBP, Medical, Officer, Notification:, ITBP, में, मेडिकल, ऑफिसर, के, 282, पदों, पर, भर्ती, अगस्त, से, शुरू, होंगे, आवेदन</media:keywords>
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        <title>Higher Education Budget: IIT को मिला ज्यादा फंड, IIM&amp;IISER का बजट घटा</title>
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        <description><![CDATA[ देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की पहुंच बढ़ाने और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है. शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि IIT, IIM, IISER और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों का नामांकन बढ़ा है. हालांकि, फंडिंग के आंकड़ों में अलग-अलग संस्थानों के लिए अलग तस्वीर सामने आई है.
सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में कितने स्टूडेंट्स?
लोकसभा में एक लिखित जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि AISHE 2023-24 के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालयों में करीब 7.95 लाख छात्र नामांकित हैं. इनमें लगभग 4.11 लाख पुरुष और 3.84 लाख महिला छात्र हैं. IITs में करीब 1.49 लाख, IIMs में लगभग 23 हजार और IISERs में करीब 11,600 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.
किस वर्ग के स्टूडेंट्स बढ़े?
मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक दशक में SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की भागीदारी भी बढ़ी है. वर्ष 2014-15 में इन संस्थानों में SC छात्रों की हिस्सेदारी 11% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 13% हो गई. ST छात्रों की हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 5% और OBC छात्रों की हिस्सेदारी 14% से बढ़कर 20% हो गई है.&amp;nbsp;सरकार ने बताया कि NEP 2020 का उद्देश्य सभी वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में समान अवसर देना है. इसी दिशा में 2014 के बाद 16 नए IIIT, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 IIM, 7 IIT, 2 IISER, 1 NIT और 12 AIIMS स्थापित किए गए हैं.
आईआईटी को फंड बढ़ा
सरकार ने यह भी कहा कि Budget 2025-26 के तहत पांच नए IIT में Research Park और Academic Infrastructure के विस्तार के लिए 11,828.79 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. इससे करीब 6,500 अतिरिक्त छात्रों के लिए सीटें उपलब्ध होंगी. वहीं Budget 2026-27 में पांच University Townships और हर जिले में STEM शिक्षा के लिए छात्राओं का एक Girls Hostel बनाने की घोषणा की गई है. सरकार लड़कियों को Science, Technology, Engineering और Mathematics (STEM) से जुड़े कोर्सों में पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है
इस हिसाब से बढ़ती गई फंडिंग
फंडिंग के आंकड़ों पर नजर डालें तो IITs को मिलने वाली राशि लगातार बढ़ी है और 2025-26 में यह 11,381.21 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए भी आवंटन बढ़कर करीब 16,730 करोड़ रुपये हो गया. वहीं दूसरी ओर IIMs की फंडिंग 2024-25 के 319.40 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 278.65 करोड़ रुपये रह गई, यानी करीब 40.75 करोड़ रुपये की कमी आई. IISERs को मिलने वाला आवंटन भी 1,459.30 करोड़ रुपये से घटकर 1,328.54 करोड़ रुपये हो गया, यानी करीब 130.76 करोड़ रुपये कम मिला. IIMs और IISERs के लिए बजटीय आवंटन में दर्ज कमी के बारे में लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में बताया गया है लेकिन इस कमी का कोई कारण नहीं दिया गया है.
मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में SC, ST और OBC के लिए क्रमशः 15%, 7.5% और 27% आरक्षण लागू है. इसके अलावा छात्रवृत्ति, फीस में राहत और दूसरी सहायता योजनाओं के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE ने बदला पोस्ट रिजल्ट प्रोसेस, अब कक्षा 10 के छात्रों को पहले मिलेगी स्कैन कॉपी</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 10 की मुख्य बोर्ड परीक्षा और सेकंड बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए के छात्रों के लिए पोस्ट रिजल्ट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब जो छात्र अपने रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है, उन्हें सबसे पहले अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करनी होगी. इसके बाद ही वे अंकों के वेरिफिकेशन या उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे.
बोर्ड ने 5 अगस्त को जारी नोटिस में बताया कि पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी. आपको बता दें कि मुख्य बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल 2026 को घोषित किया था, जबकि सेकंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट 18 जुलाई 2026 को जारी हुआ था. पोस्ट रिजल्ट सुविधाओं के लिए सभी आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे.&amp;nbsp;
तीन चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया&amp;nbsp;
सीबीएसई ने इस बार भी पोस्ट रिजल्ट प्रक्रिया को तीन चरणों में रखा है. सबसे पहले छात्र अपने मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करेंगे. इसके बाद अगर उन्हें किसी प्रकार की गलती दिखाई देती है, तो वह अंकों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन कर सकेंगे. वेरिफिकेशन के बाद भी अगर किसी उत्तर के मूल्यांकन को लेकर आपत्ति रहती है तो संबंधित प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया जा सकेगा. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कैन कॉपी लिए बिना छात्र सीधे वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं.&amp;nbsp;
5 अगस्त से शुरू हुई स्कैन कॉपी की आवेदन प्रक्रिया&amp;nbsp;
छात्र 5 अगस्त से 9 अगस्त 2026 तक अपने मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए प्रति विषय 300 रुपये फीस निर्धारित की गई है. सीबीएसई ने छात्रों को सलाह दी है कि स्कैन कॉपी प्राप्त करने के बाद उसे ध्यान से देखें और उसके बाद ही यह तय करें कि उन्हें वेरिफिकेशन या री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन करना है या नहीं.&amp;nbsp;
16 अगस्त से शुरू होंगे वेरिफिकेशन और री-इवैल्युएशन आवेदन&amp;nbsp;
उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के बाद छात्र 16 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक वेरिफिकेशन ऑफ मार्क्स और री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे. वेरिफिकेशन ऑफ मार्क्स के लिए 300 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका और री-इवैल्युएशन के लिए 100 रुपये प्रति प्रश्न जमा करना होगा. अगर कोई छात्र दोनों सुविधाओं का लाभ लेना चाहता है, तो उसे दोनों प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग फीस देनी होगी.&amp;nbsp;
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वेरिफिकेशन में क्या-क्या जांचा जाएगा?&amp;nbsp;
सीबीएसई के अनुसार वेरिफिकेशन के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं किसी उत्तर का मूल्यांकन छूट तो नहीं गया, अंकों का कुल जोड़ सही किया गया है या नहीं और उत्तर पुस्तिका से अंतिम अंक दर्ज करते समय कोई गलती तो नहीं हुई है. अगर वेरिफिकेशन के बाद भी छात्र संतुष्ट नहीं होता तो वह केवल उन्हीं प्रश्नों के मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकेगा, जिन्हें उसने चुना होगा. इसके अलावा बोर्ड ने साफ किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद अगर अंक बढ़ते हैं, घटते हैं या पहले जैसे ही रहते हैं, तो वहीं अंतिम माने जाएंगे. अगर री-इवैल्युएशन के बाद अंकों में बदलाव होता है, तो छात्र को पहले जारी की गई मार्कशीट और सर्टिफिकेट वापस जमा करने होंगे. इसके बाद सीबीएसई नई मार्कशीट और प्रमाण पत्र जारी करेगा.&amp;nbsp;
ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;

पोस्ट रिजल्ट सुविधा का लाभ लेने के लिए छात्रों को सबसे पहले सीबीएसई की वेबसाइट पर जाएं.&amp;nbsp;
यहां पोस्ट रिजल्ट या वेरीफिकेशन लिंक पर क्लिक कर लॉगिन करें.
अब संबंधित प्रक्रिया का चयन का आवेदन फॉर्म भरें.&amp;nbsp;
इसके बाद ऑनलाइन फीस जमा करें.&amp;nbsp;
लास्ट में फॉर्म सबमिट करके कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके रख लें.

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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मध्य प्रदेश में पटवारी के 200 पदों पर भर्ती, जानें कैसे करें आवेदन </title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2026 के तहत पटवारी के 200 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. यह भर्ती विशेष रूप से दिव्यांग कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए निकाली गई है. इच्छुक और एलिजिबल अभ्यर्थी 4 अगस्त 2026 से 18 अगस्त 2026 तक MPESB की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
यह भर्ती मध्य प्रदेश के भूमि अभिलेख प्रबंधन विभाग (राजस्व विभाग) ग्वालियर के अंतर्गत की जाएगी. चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति राज्य के विभिन्न जिलों में होगी. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी.
200 पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 200 पटवारी पद भरे जाएंगे. सभी पद केवल दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है. इनमें श्रवण बाधित, चलने-फिरने में दिव्यांग और मल्टीपल डिसेबिलिटी, ऑटिज्म, बौद्धिक, दिव्यांगता और मानसिक बीमारी जैसी कैटेगरी के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार दृष्टिबाधित उम्मीदवार इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे. भर्ती मध्य प्रदेश के 44 जिलों में की जाएगी और आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को अपनी जिला वरीयता भी भरनी होगी.&amp;nbsp;
भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी जरूरी तारीखें

ऑनलाइन आवेदन शुरू- 4 अगस्त&amp;nbsp;
आवेदन की अंतिम तिथि-18 अगस्त&amp;nbsp;
आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि- 23 अगस्त&amp;nbsp;
कंप्यूटर आधारित परीक्षा- 22 सितंबर&amp;nbsp;
परीक्षा दो सिफ्टों में आयोजित होगी&amp;nbsp;

भर्ती के लिए एलिजिबिलिटी&amp;nbsp;
भर्ती के लिए उम्मीदवार को भारतीय नागरिक और मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है. अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही उम्मीदवार के पास सीपीसीटी स्कोर कार्ड होना चाहिए, जिन उम्मीदवारों ने अभी सीपीसीटी पास नहीं किया है, उन्हें नियुक्ति के बाद निर्धारित अवधि के अंदर इस उर्त्तीण करना होगा. नहीं तो उनकी नियुक्ति निरस्त की जा सकती है. इसके अलावा सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा मध्य प्रदेश राज्य रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन भी आवश्यक होगा. &amp;nbsp;
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आयु सीमा और आवेदन की फीस&amp;nbsp;
1 जनवरी 2026 को आधार मानते हुए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष निर्धारित की गई है. आरक्षण नियमों के अनुसार पात्र उम्मीदवारों को आयु सीमा में नियमानुसार छूट भी मिलेगी. वहीं सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन फीस 500 रुपये निर्धारित की गई है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को 250 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. इसके अतिरिक्त आवेदन जमा करने के तरीके के अनुसार एमपी ऑनलाइन पोर्टल फीस भी अलग से देना होगा. बैकलॉग पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों से परीक्षा फीस नहीं ली जाएगी.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया और सैलरी&amp;nbsp;
उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और जिला आवंटन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा. परीक्षा कुल 200 अंकों की होगी. &amp;nbsp;प्रश्न पत्र में विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामान्य ज्ञान एवं अभिरुचि, सामान्य कंप्यूटर ज्ञा, &amp;nbsp;सामान्य र्तकशक्ति तथा सामान्य प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. वहीं चयनित उम्मीदवारों को 5200 से 20,200 के वेतनमान के साथ 2,100 ग्रेड पे मिलेगा. परिवीक्षा अवधि के दौरान पहले वर्ष न्यूनतम वेतन का 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष 90 प्रतिशत मानदेय दिया जाएगा.
ऐसे कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;

सबसे पहले MPESB के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.
वहां ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 पटवारी रिक्रूटमेंट 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
आवेदन फार्म में व्यक्तिगत, शैक्षणिक और श्रेणी से जुड़ी जानकारी भरें.
इसके बाद जिला वरीयता का चयन करें.
अब जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और निर्धारित फीस का पेमेंट करें.
लास्ट में फॉर्म सबमिट करके प्रिंट आउट रख लें.

ये भी पढ़ें-क्या है PM Vidyalaxmi Scheme? जिसमें बिना गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 3 से 8 तक पढ़ाई जाएगी AI और Computational Thinking</title>
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        <description><![CDATA[ सीबीएसई ने स्कूली शिक्षा में एआई और नई तकनीक को शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. बोर्ड ने कक्षा 3 से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई का नया करिकुलम फ्रेमवर्क जारी किया है. इसका उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं से ही छात्रों में तार्किक सोच, समस्या समाधान और डिजिटल तकनीक की समझ विकसित करना है. सीबीएसई का कहना है कि नया फ्रेमवर्क स्कूलों को आयु के अनुसार उपयुक्त गतिविधियों के माध्यम से कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई की अवधारणाओं को पढ़ाने का एक व्यवस्थित तरीका उपलब्ध कराएगा.&amp;nbsp;
क्या है नया करिकुलम फ्रेमवर्क?
नए फ्रेमवर्क की तहत छात्रों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की सोच और कार्य प्रणाली को भी समझाया जाएगा. इसमें तार्किक सोच, पैटर्न पहचान, एल्गोरिथमिक सोच, क्रिएटिविटी और व्यवस्थित तरीके से समस्याओं का समाधान जैसे कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके साथ ही छात्रों को एआई की मूल अवधारणाओं और रोजाना की जिंदगी में इसके उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, ताकि वह तकनीक के &amp;nbsp;जिम्मेदारी से उपयोगकर्ता और निर्माता बन सके. &amp;nbsp;
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IIT गांधीनगर के साथ शुरू होगी, नई ऑनलाइन सीरीज&amp;nbsp;
सीबीएसई ने सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से 3030 एकलव्य कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑनलाइन सीरीज भी शुरू की है. इस ऑनलाइन सीरीज के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों की एक्टिविटी आधारित अध्ययन सामग्री, इंटरएक्टिव सेशन और एसटीईएम शिक्षा से जुड़े इनोवेशन को समझने का अवसर मिलेगा. इसका उद्देश्य कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई की अवधारणा को आसान और व्यावहारिक तरीके से सीखने में मदद करना है.&amp;nbsp;
15 अगस्त से शुरू होंगे लाइव सेशन&amp;nbsp;
इस कार्यक्रम के लिए इच्छुक छात्र और शिक्षक eklavya.iit gandhinagar.ac.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. लाइव सेशन 15 अगस्त से शुरू होगा. कुल आठ ऑनलाइन सेशन आयोजित किए जाएंगे, जो हर रविवार शाम 4:00 बजे होंगे. सीबीएसई से संबंधित स्कूलों के शिक्षकों के लिए प्रत्येक एपिसोड को स्कूल आधारित प्रशिक्षण के तहत 3सीपीडी हावर्स के रूप में भी मान्यता दी जाएगी. इसके लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा. इस ऑनलाइन सीरीज में भाग लेने के लिए छात्रों और शिक्षकों को 8 एपिसोड के लिए 200 रुपये की फीस देनी होगी. वहीं सीबीएस ने यह भी बताया है कि एनसीईआरटी और सीबीएसई मिलकर ऐसा पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं, जिससे छात्रा अपनी मातृभाषा में भी आसानी से पढ़ सके और समझ सके.
ये भी पढ़ें-Higher Education Budget: IIT को मिला ज्यादा फंड, IIM-IISER का बजट घटा ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>विजय सरकार के पहले बजट में शिक्षा पर फोकस, स्कूलों के लिए 44,527 करोड़ रुपये का ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/विजय-सरकार-के-पहले-बजट-में-शिक्षा-पर-फोकस-स्कूलों-के-लिए-44527-करोड़-रुपये-का-ऐलान</link>
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        <description><![CDATA[ Tamil Nadu Budget 2026-27: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का अपना पहला पूर्ण बजट पेश कर दिया है. वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए शिक्षा को सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल किया. बजट में कुल शिक्षा, उच्च शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, ग्रामीण छात्रों के लिए आवासीय स्कूल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ट्रेंनिंग और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं. इसके अलावा महिलाओं, नवजात बच्चों, खेल और अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए भी अलग-अलग बजट का प्रावधान किया गया है.&amp;nbsp;
स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए बड़ा बजट&amp;nbsp;
सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 44,527 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा विभाग के लिए 8,393 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. सरकार का कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने, छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जाएगा.
3734 सरकारी स्कूल होंगे आधुनिक&amp;nbsp;
बजट में पल्ली निरैवु थिट्टम के तहत 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना के जरिए राज्य के 3,734 सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सके. इसके अलावा सरकार ने स्कूलों में साफ-सफाई, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सुपर क्लीन, सुपर कैंपस योजना शुरू करने का ऐलान किया है. शुरुआती चरण में यह योजना 10 हजार सरकारी स्कूलों में लागू होगी. इसके लिए लगभग 129 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके तहत स्कूलों में शौचालय, पानी की व्यवस्था और कैंपस की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाएगी&amp;nbsp;
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ग्रामीण छात्रों के लिए भी बनेंगे रेजिडेंशियल स्कूल&amp;nbsp;
विजय सरकार ने पेरुंथलाइवर कामराज मॉडल स्कूल योजना के तहत ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए आधुनिक आवासीय स्कूल खोलने की घोषणा की है. इन स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को मुक्त शिक्षा, हॉस्टल, भोजन, यूनिफॉर्म, किताबें और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी. इस योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है.&amp;nbsp;
कॉलेज छात्रों को मिलेंगे लैपटॉप&amp;nbsp;
उच्च शिक्षा को डिजिटल बनाने के लिए सरकार ने वेट्री मदिकानिन थिट्टम के तहत 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इस योजना के तहत कॉलेज छात्रों को लैपटॉप दिए जाएंगे, जिससे उनकी डिजिटल लर्निंग और पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा बजट में घोषणा की गई है कि 2031 तक इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई के 50 हजार छात्रों को एआई की ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके अलावा मदुरै में एक स्पेशल लॉ कॉलेज और राज्य में पांच नए आईटीआई स्थापित किए जाएंगे. इन संस्थानों पर करीब 90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>विजय, सरकार, के, पहले, बजट, में, शिक्षा, पर, फोकस, स्कूलों, के, लिए, 44, 527, करोड़, रुपये, का, ऐलान</media:keywords>
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        <title>नीट यूजी में टू&amp;स्टेज फॉर्मूले से रुकेगा पेपर लीक? केंद्र कर रहा बड़े बदलाव पर विचार</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Exam Pattern Change: नीट यूजी को लेकर केंद्र सरकार बड़े बदलावों पर विचार कर रही है. नीट यूजी परीक्षा को आगे चलकर जईई की तर्ज पर दो चरणों में आयोजित किया जा सकता है. इसके साथ ही मौजूद पेन एंड पेपर मोड की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षा करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है. केंद्र ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हालफनामे में दी है. यह हलफनामा उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दाखिल किया गया, जिनमें नीट पेपर लीक के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में केंद्र से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने को कहा था.&amp;nbsp;
अभी अंतिम फैसला नहीं, टास्क फोर्स देगी रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अभी नीट यूजी के परीक्षा पैटर्न या मोड में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया है. सभी बदलाव नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिश के बाद ही लागू किए जाएंगे. इस टास्क फोर्स में तकनीक, अंतरिक्ष, खुफिया एजेंसियों, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े एक्सपर्ट शामिल है. समिति परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी, व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, छात्रों की पहुंच, समान अवसर और अकेडमिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी.&amp;nbsp;
क्यों हो रहा है Two-Stage परीक्षा पर विचार?
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा सुधार को लेकर सवाल उठे हैं. ऐसे में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. जेईई मेन्स और जेईई एडवांस की तरह दो चरणों वाली परीक्षा लागू करने और कंप्यूटर आधारित टेस्ट अपनाने से परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने की संभावना पर चर्चा चल रही है.&amp;nbsp;
NTA की लगभग सभी बड़ी परीक्षाएं पहले से CBT मोड में&amp;nbsp;
हलफनामे के अनुसार एनटीए की आठ प्रमुख परीक्षाओं में से 7 परीक्षाएं पहले से ही कंप्यूटर आधारित मोड में कराई जा रही है. इनमें जेईई मेन्स, सीयूईटी यूजी, सीयूईटी पीजी, यूजीसी नेट और सीएसआईआर नेट जैसी परीक्षा शामिल है. इनमें नीट यूजी फिलहाल एनटीए की एक मात्रा बड़ी परीक्षा है, जो अब भी पेन एंड पेपर मोड में आयोजित होती है. यही वजह है कि इसे सीबीटी मोड में लाने पर विचार किया जा रहा है.&amp;nbsp;
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क्या Two-Stage परीक्षा से पेपर लीक रुकेगा?
केंद्र सरकार ने कोर्ट में बताया कि नीट यूजी अन्य परीक्षाओं से काफी अलग है. हर साल 22 लाख से ज्यादा छात्र इसमें शामिल होते हैं. &amp;nbsp;जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों और छात्राओं की होती है. वहीं केंद्र सरकार का यह मानना है कि जेईई की तरह नीट यूजी की परीक्षा भी दो चरणों में कराने और कंप्यूटर आधारित टेस्ट अपनाने से परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है. इससे एक ही दिन और एक ही पेपर पर निर्भरता कम होगी, जिससे पेपर लीक जैसे घटनाओं की आशंका घट सकती है. &amp;nbsp;इसके अलावा सरकार का कहना है कि नीट के जरिए सिर्फ एमबीबीएस ही नहीं बल्कि बीडीएस, आयुष, वेटरनरी और नर्सिंग जैसे कई मेडिकल कोर्स में भी एडमिशन मिलता है. इसलिए परीक्षा के स्वरूप में कोई भी बदलाव करने से पहले सभी पहलुओं का विस्तार से मूल्यांकन किया जाएगा.
NMC और स्वास्थ्य मंत्रालय से भी होगी चर्चा&amp;nbsp;
सरकार ने कहा है कि नीट यूजी का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से किया जाता है. यह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियमों के तहत संचालित होता है, इसलिए परीक्षा के पैटर्न या मोड में किसी भी बदलाव से पहले एनएमसी और स्वास्थ्य मंत्रालय से भी विस्तृत चर्चा की जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 काउंसलिंग का आगाज, रजिस्ट्रेशन के वक्त इन बातों का रखें ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG counselling 2026: एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग समेत दूसरे मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने वाले उम्मीदवारों के लिए 5 अगस्त से नीट यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी 5 अगस्त को दोपहर 1:00 बजे से राउंड-1 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होने लगे हैं. योग्य उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे.
एमसीसी की यह काउंसलिंग 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा, एम्स, जेआईपीएमईआर, ईएसआईसी, केंद्रीय विद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी और दूसरे भाग लेने वाले इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए आयोजित की जाती है. वहीं 85 प्रतिशत राज्य कोटा की सीटों के लिए उम्मीदवारों को संबंधित राज्य की काउंसलिंग वेबसाइट पर अलग से रजिस्ट्रेशन करना होगा.&amp;nbsp;
यह रहेगा राउंड-1 का शेड्यूल&amp;nbsp;
राउंड- 1 के लिए रजिस्ट्रेशन आज यानी 5 अगस्त से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा. फीस जमा करने की अंतिम समय सीमा 12 अगस्त शाम 6 बजे निर्धारित की गई है. &amp;nbsp;इसके बाद 6 अगस्त से 13 अगस्त तक चॉइस फिलिंग होगी, जबकि 12 अगस्त को शाम 4 बजे से 13 अगस्त को सुबह 11 बजे के बीच उम्मीदवार अपनी पसंद लॉक कर सकेंगे. सीट आवंटन की प्रक्रिया 13 और 16 अगस्त तक चलेगी और 17 अगस्त को राउंड-1 का रिजल्ट जारी किया जाएगा सीट मिलने वाले उम्मीदवारों को 16 और 22 अगस्त के बीच संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा.&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन का तरीका&amp;nbsp;

काउंसलिंग में शामिल होने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एमसीसी के ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in &amp;nbsp;पर जाए.
उसके बाद नीट काउंसलिंग 2026 रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करें.
नीट यूजी 2026 से जुड़ी जरूरी जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन करें.
निर्धारित काउंसलिंग फीस और सिक्योरिटी डिपॉजिट का ऑनलाइन पेमेंट करें.
अब लॉगिन कर अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स चुनें.
तय समय के अंदर अपनी चॉइस लॉक करें
अब सीट आवंटन रिजल्ट जारी होने के बाद आवंटित कॉलेज में निर्धारित तारीख पर रिपोर्ट करें.

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रजिस्ट्रेशन से पहले यह डॉक्यूमेंट रखें तैयार&amp;nbsp;

नीट यूजी स्कोरकार्ड
नीट यूजी एडमिट कार्ड
10वीं की मार्कशीट और जन्मतिथि प्रमाणपत्र
12वीं की मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट
वैध फोटो आईडी
पासपोर्ट साइज फोटो
एससी, एसटी, ओबीसी, एनसीएल, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)
पीडब्ल्यूबीडी प्रमाण पत्र &amp;nbsp;(अगर लागू हो)
डोमिसाइल प्रमाण पत्र
एनआरआई कोटा के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट &amp;nbsp;(अगर लागू हो)&amp;nbsp;

इस साल काउंसलिंग में क्या बदला?
नीट यूजी 2026 काउंसलिंग में इस बार कई नई सुविधा जोड़ी गई. उम्मीदवारों को फ्रिज और फ्लोट का ऑप्शन दिया गया है, जो उम्मीदवार अपनी आवंटित सीट स्वीकार करना चाहते हैं, वह फ्रिज का ऑप्शन चुन सकते हैं. वही बेहतर सीट मिलने की उम्मीद रखने वाले उम्मीदवार फ्लोट ऑप्शन चुनकर अगले राउंड में हिस्सा ले सकते हैं. ऐसे उम्मीदवारों के लिए डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन ऑनलाइन किया जाएगा और हर राउंड में कॉलेज जाकर रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा सीट छोड़ने की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है. एनआरआई कोटे के डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन भी डिजिटल माध्यम से होगा. एमसीसी ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, साइबर सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था को भी पहले से ज्यादा मजबूत बनाया है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>JNU Fee Last Date: जेएनयू की पहली मेरिट लिस्ट जारी, जानें कब तक जमा होगी फीस?</title>
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        <description><![CDATA[ JNU Fee Last Date: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने एकेडमिक सेशन 2026 27 के यूजी और सर्टिफिकेट ऑफ प्रोफिशिएंसी प्रोग्राम में एडमिशन के लिए पहली मेरिट लिस्ट जारी कर दी है. मेरिट लिस्ट में जगह बनाने वाले उम्मीदवारों को अब तय समय के भीतर प्री एनरोलमेंट और फीस जमा करने की प्रोसेस पूरी करनी होगी. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के भीतर फीस जमा नहीं करने पर सीट अगले काबिल उम्मीदवार को अलाटमेंट कर दी जाएगी.&amp;nbsp;
कब जमा करनी होगी फीस?
पहली मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवार 3 अगस्त से 6 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन प्री एनरोलमेंट पूरा कर फीस जमा कर सकते हैं. फीस जमा होने के बाद ही सीट सुरक्षित मानी जाएगी. इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह आखिरी तारीख का इंतजार न करें और समय रहते सभी फारमेलिटी पूरी कर लें.&amp;nbsp;
दूसरी मेरिट लिस्ट कब आएगी?
विश्वविद्यालय के शेड्यूल के अनुसार दूसरी मेरिट लिस्ट 12 अगस्त को जारी की जाएगी. इसी दिन सुपरन्यूमेरेरी सीटों की सूची भी पब्लिश होगी. दूसरी सूची में चुने हुए उम्मीदवार 12 से 14 अगस्त के बीच प्री एनरोलमेंट और फीस जमा कर सकेंगे.&amp;nbsp;
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दस्तावेजों का वैरिफिकेशन रहेगा जरूरी
मेरिट लिस्ट में चुने उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट का फिजिकल वेरिफिकेशन 17 से 20 अगस्त के बीच किया जाएगा. इस दौरान सभी मूल प्रमाणपत्र, इनकम सर्टिफिकेट, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज साथ लेकर पहुंचना होगा. दस्तावेज अधूरे होने या तय तारीख पर हाजिर न होने की स्थिति में एडमिशन प्रभावित हो सकता है.&amp;nbsp;
खाली सीटों के लिए मिलेगा आखिरी मौका
यदि दूसरी मेरिट लिस्ट के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो विश्वविद्यालय 26 से 28 अगस्त तक आवेदकों को खाली सीटों के लिए अपनी इच्छा दर्ज करने का आखिरी मौका देगा. इसके बाद बची हुई सीटों के लिए आखिरी मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
15 सितंबर तक पूरी होगी प्रवेश प्रोसेस&amp;nbsp;
विश्वविद्यालय 3 सितंबर को आखिरी मेरिट लिस्ट जारी करेगा. अंतिम सूची में चुने उम्मीदवारों को 3 से 5 सितंबर के बीच फीस जमा करनी होगी, जबकि 9 और 10 सितंबर को दस्तावेजों का वैरिफिकेशन किया जाएगा. जेएनयू के अनुसार यूजी और सीओपी प्रोग्राम में एडमिशन की पूरी प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी. उम्मीदवारों को नियमित रूप से एडमिशन पोर्टल पर अपडेट देखते रहने की सलाह दी गई है.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>JNU, Fee, Last, Date:, जेएनयू, की, पहली, मेरिट, लिस्ट, जारी, जानें, कब, तक, जमा, होगी, फीस</media:keywords>
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        <title>राजस्थान बिजली विभाग में 2005 पदों पर भर्ती, 5 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राजस्थान-बिजली-विभाग-में-2005-पदों-पर-भर्ती-5-अगस्त-से-शुरू-होंगे-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ RVUNL Vacancy: राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है. दरअसल राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) ने राज्य की पांचों बिजली कंपनियों में जूनियर इंजीनियर, जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट-कमर्शियल असिस्टेंट-II के कुल 2005 पदों पर संयुक्त भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 5 अगस्त 2026 से शुरू होगी. इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी 25 अगस्त 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट के जारी आवेदन कर सकेंगे.&amp;nbsp;
किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 2005 रिक्तियां भरी जाएंगी. इनमें सबसे ज्यादा 765 पद जूनियर असिस्टेंट-कमर्शियल असिस्टेंट-II के लिए है. इसके अलावा जूनियर इंजीनियर-I (इलेक्ट्रिकल) के 727, जूनियर इंजीनियर-I (मैकेनिकल) के 110, जूनियर इंजीनियर-I (सिविल) के 32 और जूनियर अकाउंटेंट के 371 पद शामिल है&amp;nbsp;
किन बिजली कंपनियों में मिलेगी नियुक्ति?&amp;nbsp;
यह भर्ती राजस्थान की पांच बिजली कंपनियों के लिए की जाएगी. इनमें राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड जयपुर, विद्युत वितरण निगम लिमिटेड अजमेर, विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड शामिल है.
आवेदन की जरूरी तारीखें और योग्यता
इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन आज यानी 5 अगस्त से शुरू होंगे. आवेदन करने और फीस जमा करने की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है. परीक्षा की तारीख बाद में घोषित की जाएगी, जबकि एडमिट कार्ड परीक्षा से पहले जारी किए जाएंगे. जूनियर इंजीनियर पद के लिए संबंधित शाखा में बई-बीटेक की डिग्री होना जरूरी है. जूनियर अकाउंटेंट पद के लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बीकॉम या समकक्ष डिग्री मांगी गई है. वहीं जूनियर असिस्टेंट, कमर्शियल असिस्टेंट-II के लिए 12वीं या समकक्ष परीक्षा पास होने के साथ मान्यता प्राप्त कंप्यूटर योग्यता प्रमाण पत्र होना आवश्यक है.
आयु सीमा और आवेदन फीस&amp;nbsp;
भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष तय की गई है. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को राजस्थान सरकार के नियमों अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी. इसके अलावा जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन फीस 1000 रखी गई है. वहीं एससी, एसटी, ओबीसी, एमबीसी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
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कितना मिलेगा वेतन?
चयनित जूनियर इंजीनियर और जूनियर अकाउंटेंट को पे मैट्रिक्स लेवल-10 के तहत न्यूनतम 33,800 मूल वेतन मिलेगा. प्रोबेशन अवधि में 27,700 प्रतिमाह निश्चित मानदेय दिया जाएगा. वहीं जूनियर असिस्टेंट, &amp;nbsp;कमर्शियल असिस्टेंट-II को लेवल-5 के तहत 20,800 रुपये मूल वेतन और प्रोबेशन के दौरान 14,600 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा.
ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;

उम्मीदवार &amp;nbsp;राजस्थान ऊर्जा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट energy.rajasthan.gov.in पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर न्यू रिक्रूटमेंट पर क्&amp;zwj;ल&amp;zwj;िक करें.&amp;nbsp;
अब अपने नंबर से रजिस्ट्रेशन करें.&amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन करने के बाद लॉगिन कर एप्लीकेशन फॉर्म भरें.
अब शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, फोटो सिग्नेचर और दूसरे जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे.&amp;nbsp;
लास्ट में फीस जमा करने के बाद फॉर्म सबमिट करके उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राजस्थान, बिजली, विभाग, में, 2005, पदों, पर, भर्ती, अगस्त, से, शुरू, होंगे, आवेदन</media:keywords>
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        <title>केवल चाय चखकर कमा सकते हैं लाखों, टी&amp;टेस्टर बनने के लिए किस कोर्स में लें एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ Tea Taster Course: अगर आपको चाय पसंद है और आप इसे सिर्फ पीने तक सीमित नहीं रखना चाहते हैं, तो अब इसे करियर बनाने का भी आपको मौका मिल सकता है. भारतीय चाय बोर्ड ने युवाओं को प्रोफेशनल टी-टेस्टर और टी-समेलियर बनाने के लिए देश के पहले एनसीवीईटी अप्रूव्ड सर्टिफाइड टी-टेस्टिंग कोर्स शुरू किए हैं. इन कोर्सों का उद्देश्य चाय की क्वालिटी परखने, ब्लेंडिंग और क्वालिटी असेसमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स तैयार करना है, ताकि भारतीय चाय की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान को और मजबूत किया जा सके.&amp;nbsp;
पश्चिम बंगाल से हुई शुरुआत&amp;nbsp;
टी बोर्ड ने इस विशेष कोर्सों की शुरुआत पश्चिम बंगाल के कर्सियांग स्थित अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में की है. पहला बैच दार्जिलिंग टी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में शुरू हो चुका है, जहां प्रतिभागियों को प्रोफेशनल टी टेस्टिंग, ब्लेंडिंग तकनीक और चाय उद्योग के नए ट्रेंड्स की ट्रेनिंग दी जा रही है.&amp;nbsp;
दो तरह के सर्टिफिकेट कोर्स&amp;nbsp;
इस पहल के तहत दो सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किए गए हैं. पहला 60 घंटे का सर्टिफिकेशन कोर्स और दूसरा 210 घंटे का एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स. पहले बैच की शुरुआत 60 घंटे वाले कार्यक्रम से की गई है. इसमें चाय की वैज्ञानिक तरीके से जांच, स्वाद, खुशबू की पहचान, ब्लेंडिंग तकनीक और उद्योग में हो रहे बदलावों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा.&amp;nbsp;
कोर्स में क्या सिखाया जाएगा?
इन कोर्स का पाठ्यक्रम सिर्फ चाय का स्वाद पहचानने तक सीमित नहीं है. इसमें प्रतिभागियों को चाय की क्वालिटी का वैज्ञानिक मूल्यांकन, फ्लेवर, अरोमा और माउथ फील की पहचान करना सिखाया जाएगा. इसके अलावा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में टी सर्विस, फूड पेयरिंग, लग्जरी टी प्रेजेंटेशन, सर्विंग एटीकेटी, नई टी ब्लेंड ब्लाइंड तैयार करना, बदलती उपभोक्ता पसंद और टिकाऊ टी प्रोडक्शन जैसी चीजों की भी ट्रेनिंग दी जाएगी&amp;nbsp;
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एनईपी 2020 और एनसीवीईटी से मंजूरी&amp;nbsp;
इन कोर्सों को नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग की मंजूरी मिली है. पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क के अनुरूप तैयार किया गया है. कोर्स का सिलेबस सरकारी अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों और चाय क्षेत्र के पेशेवरों ने मिलकर तैयार किया है, ताकि प्रशिक्षण उद्योग की जरूरतों के अनुरूप हो.
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
टी बोर्ड के अनुसार इन कोर्स में वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जो निर्धारित योग्यता पूरी करते हो. आवेदन के लिए अभ्यर्थियों के पास 12वीं पास होना चाहिए. टी टेस्टिंग में 1.5 साल का एक्सपीरियंस और एनएसक्यूएफ लेवल 3.5 सर्टिफिकेशन या टी टेस्टिंग में 3 साल का एक्सपीरियंस और एनएसक्यूएफ लेवल 3 सर्टिफिकेशन होना चाहिए. यह कोर्स नए उम्मीदवारों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी है, जो पहले से चाय उद्योग में काम कर रहे हैं और अपनी स्किल्स को बेहतर बनाना चाहते हैं.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>केवल, चाय, चखकर, कमा, सकते, हैं, लाखों, टी-टेस्टर, बनने, के, लिए, किस, कोर्स, में, लें, एडमिशन</media:keywords>
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        <title>आंसर&amp;की चैलेंज करने के लिए NTA क्यों लेता है फीस, IIT&amp;UPSC में क्यों नहीं होता ऐसा?</title>
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        <description><![CDATA[ NTA Answer Key Challenge Fee: इस साल एनडीए की ओर से कराई गई कई परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आई. जिसके बाद एनटीए को लेकर कई बार सवाल भी उठे और देशभर में पेपर लीक के खिलाफ प्रोटेस्ट भी हुआ. अभी भी एनटीए की ओर से कराई गई, नीट यूजी परीक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. एनटीए को लेकर एक सवाल यह भी उठा है कि एनटीए आंसर-की चैलेंज करने के लिए स्टूडेंट से फीस क्यों लेता है, जबकि आईआईटी- यूपीएससी में ऐसा नहीं होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एनटीए आंसर-की चैलेंज करने की फीस क्यों लेता है?
&amp;nbsp;आंसर की चैलेंज करने पर NTA को देनी पड़ती है फीस&amp;nbsp;
नीट यूजी जैसी परीक्षा आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी उम्मीदवारों को प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद उस पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका देती है. इसके लिए प्रत्येक प्रश्न पर 200 रुपये का शुल्क लिया जाता है. री-नीट 2026 के बाद एनटीए ने उम्मीदवारों को स्कैन की गई ओएमआर शीट और मशीन से रिकॉर्ड किए गए उत्तरों का मिलान करने की सुविधा भी दी है. अगर किसी छात्र को ओएमआर रिकॉर्डिंग में गड़बड़ी लगती है, तो वह उस पर भी आपत्ति दर्ज कर सकता है, लेकिन इसके लिए भी प्रति आपत्ति 200 रुपये का पेमेंट करना पड़ता है. यही व्यवस्था कई छात्रों के बीच सवाल खड़ा करती है कि अगर गलती परीक्षा एजेंसी की प्रक्रिया में हुई है, तो उसे पहचानने के लिए उम्मीदवारों से फीस क्यों ली जाए.&amp;nbsp;
IIT में बिना फीस दर्ज होती है आपत्ति&amp;nbsp;
आईआईटी की ओर से आयोजित JEE Advanced, GATE और JAM जैसी परीक्षाओं में भी प्रोविजनल आंसर-की जारी की जाती है उम्मीदवारों को उसे पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलता है. लेकिन इसके लिए कोई फीस नहीं ली जाती. उम्मीदवारों को अपने दावे के समर्थन में प्रमाणित शैक्षणिक सोर्स देने होते हैं. इसके बाद विषय एक्सपर्ट सभी आपत्तियों की समीक्षा करते हैं और अगर कोई गलती पाई जाती है, तो अंतिम आंसर-की में सुधार कर दिया जाता है. इसका लाभ सभी उम्मीदवारों को समान रूप से मिलता है.&amp;nbsp;
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UPSC ने भी अपनाया पारदर्शी मॉडल&amp;nbsp;
संघ लोक सेवा आयोग ने भी 2026 से सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए पहली बार प्रोविजनल आंसर की जारी करने और उस पर आपत्ति दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की. यूपीएससी इस प्रक्रिया के लिए भी उम्मीदवारों से कोई फीस नहीं लेता, हालांकि उम्मीदवारों को हर आपत्ति के साथ कम से कम तीन प्रमाणित और विश्वसनीय शैक्षणिक संदर्भ देना अनिवार्य होता है. इसके बाद एक्सपर्ट की समिति आपत्तियों की जांच करती है और आवश्यक होने पर अंतिम आंसर की में बदलाव किया जाता है&amp;nbsp;
NTA आंसर की चैलेंज के लिए क्यों लेता है फीस?
एनटीए उम्मीदवारों से आंसर-की या ओएमआर पर आपत्ति दर्ज करने के लिए प्रति प्रश्न 200 रुपये फीस लेता है. एजेंसी का मानना है कि इससे केवल गंभीर और तथ्यों के आधार पर की गई आपत्तियां ही सामने आएगी और बेवजह या बड़ी संख्या में आने वाले फर्जी दावों को रोका जा सकेगा. उम्मीदवारों को अपने आपत्ति के समर्थन में शैक्षणिक प्रमाण भी देने होते हैं. हालांकि इस व्यवस्था पर कई बार सवाल उठे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आंसर की या ओएमआर में गलती परीक्षा एजेंसी की प्रक्रिया से हुई है, तो उसे पहचानने और सुधारने के लिए उम्मीदवार से फीस लेना उचित नहीं माना जा सकता, क्योंकि किसी एक प्रश्न की गलती का असर केवल एक छात्र पर नहीं, बल्कि उस प्रश्न को हल करने वाले सभी अभ्यर्थियों पर पड़ता है.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जम्मू&amp;कश्मीर में 518 सरकारी नौकरियां, जाने आवेदन की तारीख और योग्यता</title>
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        <description><![CDATA[ JKSSB Recruitment: जम्मू कश्मीर सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (JKSSB) ने कृषि उत्पादन, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा और श्रम एवं रोजगार विभाग में 518 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 10 सितंबर 2026 से शुरू होगी और इच्छुक उम्मीदवार 9 अक्टूबर 2026 तक ऑफिशियल वेबसाइट jkssb.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे. भर्ती प्रक्रिया लिखित परीक्षा और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर पूरी की जाएगी. जेकेएसएसबी की ओर से जारी विज्ञापन संख्या 08/2026 के तहत यह भर्ती यूटी, डिविजनल और जिला कैडर के विभिन्न पदों के लिए निकाली गई है. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने तक रिक्तियों की संख्या में जरूरत के अनुसार बदलाव भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
किस विभाग में कितने पद?
इस भर्ती अभियान के तहत सबसे ज्यादा 421 पद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में भरे जाएंगे. इसके अलावा कृषि उत्पादन विभाग में 46 पद, उच्च शिक्षा विभाग 48 पद और श्रम एवं रोजगार विभाग में तीन पद शामिल है. स्वास्थ्य विभाग में जूनियर स्टाफ नर्स, जूनियर लैब टेक्नीशियन, जूनियर फार्मासिस्ट, हेल्थ एजुकेटर, सैनिटरी इंस्पेक्टर, पैरा मेडिकल असिस्टेंट, जूनियर थिएटर टेक्नीशियन, जूनियर ऑप्थैमिल्क टेक्नीशियन, एफएमपीएचडब्ल्यू और एमएमपीएचडब्ल्यू जैसे पदों पर भर्ती होगी. वहीं कृषि उत्पादन विभाग में हॉर्टिकल्चर टेक्नीशियन ग्रेड-4 और सीनियर कैनिंग अटेंडेंट, उच्च शिक्षा विभाग में जूनियर लेबोरेटरी असिस्टेंट तथा श्रम एवं रोजगार विभाग में सुपरवाइजर में पद शामिल है.&amp;nbsp;
एलिजिबिलिटी और फीस&amp;nbsp;
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का डोमिसाइल प्रमाण पत्र होना जरूरी है. इसके अलावा संबंधित पद के अनुसार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा पूरी करनी होगी. वहीं सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपये आवेदन फीस देनी होगी. इसके अलावा एससी, एसटी-1, एसटी-2, ईडब्ल्यूएस और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन फीस 500 रुपये निर्धारित की गई है. आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे.
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क्या होगी चयन प्रक्रिया?
उम्मीदवारों का चयन ओएमआर आधारित वस्तुनिष्ठ लिखित परीक्षा के जरिए किया जाएगा. लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होगी. इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाएगा. बोर्ड ने यह भी बताया कि परीक्षा में हर गलत उत्तर पर एक चौथाई अंक की नेगेटिव मार्किंग लागू होगी.&amp;nbsp;
आवेदन के लिए यह डॉक्यूमेंट रखे तैयार&amp;nbsp;
आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जन्म तिथि का प्रमाण पत्र, वैध फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, आरक्षण से जुड़े प्रमाण पत्र, बोनाफाइड प्रमाण पत्र और संबंधित पद के लिए मांगे गए दूसरे डॉक्यूमेंट तैयार रखना होंगे.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 20:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>3 साल में बंद हुए 342 AICTE मान्यता प्राप्त कॉलेज, महाराष्ट्र सबसे आगे</title>
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        <description><![CDATA[ 


देशभर में पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों के दौरान अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त 342 तकनीकी संस्थान बंद हो गए. यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी. आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा संस्थान महाराष्ट्र में बंद हुए, जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु भी इस लिस्ट में प्रमुख राज्य में शामिल हैं. राज्य शिक्षा मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि एआईसीटीई अपने अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक के तहत संस्थाओं की ओर से किए गए बंद करने की आवेदनों का निर्णय लेता है. एक्ट देश में डिप्लोमा, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के तकनीकी संस्थानों को मान्यता देने वाली संवैधानिक संस्था है.&amp;nbsp;



किस साल कितने कॉलेज हुए बंद?&amp;nbsp;
लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 83 संस्थान, 2025-26 में 124 संस्थान और 2026-27 में 135 संस्थाओं को बंद करने की मंजूरी दी गई. इस तरह 3 वर्षों में कुल 345 तकनीकी संस्थान बंद हुए हैं.&amp;nbsp;
किन राज्यों में सबसे ज्यादा संस्थान बंद हुए?&amp;nbsp;
3 वर्षों के कुल आंकड़ों में महाराष्ट्र सबसे ऊपर रहा, जहां 57 संस्थान बंद हुए. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 54, मध्य प्रदेश में 53 और तमिलनाडु में 45 संस्थान ने संचालन बंद किया. इसके अलावा गुजरात में 22, पंजाब में 19, राजस्थान में 17, आंध्र प्रदेश में 15, तेलंगाना में 12, हरियाणा 11, कर्नाटक में 10, केरल में 8 छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में 5-5, ओडिशा में 4,पश्चिम बंगाल में 3 और बिहार में 2 संस्थान बंद हुए.&amp;nbsp;
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हर साल बदलता रहा ट्रेंड&amp;nbsp;
2024-25 में सबसे ज्यादा संस्थान मध्य प्रदेश में बंद हुए, इसके बाद तमिलनाडु में 15 और उत्तर प्रदेश में 13 संस्थानों ने संचालन बंद किया. 2025-26 में सबसे ज्यादा 27 संस्थान उत्तर प्रदेश में बंद हुए. महाराष्ट्र में 19 और तमिलनाडु में 16 संस्थाओं को बंद करने की अनुमति मिली. वहीं 2026-27 में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जहां 35 संस्थान बंद हुए. इसके बाद मध्य प्रदेश में 19 और उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु में 14-14 संस्थान बंद हुए. गुजरात और पंजाब में भी इस दौरान 10-10 तकनीकी संस्थान बंद हुए.&amp;nbsp;
बंद हो रहे कॉलेज के बीच बढ़ा एडमिशन&amp;nbsp;
सरकार ने कहा कि संस्थानों के बंद होने के बावजूद एआईसीटीई &amp;nbsp;से मान्यता प्राप्त तकनीकी कॉलेजों में एडमिशन लगातार बढ़ रहे हैं. वर्ष 2023-24 में इन संस्थानों में 22,11,504 छात्रों ने एडमिशन लिया था, यह संख्या 2024-25 में बढ़कर 27,25,980 और 2025-26 में 29,58,870 तक पहुंच गई.&amp;nbsp;
गुणवत्ता सुधार के लिए उठाए जा रहे कदम&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थाओं की स्थिरता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. इसके तहत कॉलेज को कम मांग वाले पाठ्यक्रम बंद करने या सीटें घटाने की अनुमति दी जा रही है. वहीं उद्योग की जरूरतों के अनुसार नए उभरते क्षेत्रों के कोर्स शुरू करने की छूट भी दी गई है.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली सरकार का बड़ा तोहफा, JEE NEET की तैयारी होगी पूर तरह फ्री</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi Government Schools: दिल्ली सरकार ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में पढ़ने वाले 12वीं साइंस के छात्रों के लिए बड़ी पहल की है. अब ऐसे मेधावी छात्र जो जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं उन्हें 1 साल की पूरी तरह मुफ्त रेजिडेंशियल कोचिंग मिलेगी. यह सुविधा पुणे और नॉन प्रॉफिटेबल संस्था दक्षणा फाउंडेशन की छात्रवृत्ति के तहत उपलब्ध कराई जाएगी. इस संबंध में दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों को सर्कुलर जारी कर योग्य छात्रों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की निर्देश दिए हैं. इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को महंगी कोचिंग की चिंता से मुक्त कर गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर देना है. ताकि वे देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में एडमिशन पाने का सपना पूरा कर सकें.&amp;nbsp;
JSDT 2027 के जरिए होगा चयन&amp;nbsp;
इस छात्रवृत्ति के जरिए छात्रों का चयन जॉइंट दक्षणा सिलेक्शन टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा. यह परीक्षा दिसंबर 2026 में आयोजित होगी. परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को महाराष्ट्र के पुणे जिले के कडूस गांव स्थित दक्षणा वैली कैंपस में एक वर्ष की रेजिडेंशियल कोचिंग दी जाएगी.&amp;nbsp;
पूरी तरह मुफ्त होगी कोचिंग&amp;nbsp;
चयनित छात्रों से कोचिंग के लिए किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाएगी. पूरे 1 साल तक कोचिंग, हॉस्टल और भोजन की व्यवस्था छात्रवृत्ति के तहत मुक्त रहेगी. इससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो आर्थिक कारणों से महंगी कोचिंग नहीं कर पाते हैं.&amp;nbsp;
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कौन कर सकता है इसके लिए आवेदन?&amp;nbsp;
छात्रवृत्ति के लिए केवल वहीं छात्र आवेदन कर सकते हैं, जो मौजूदा शैक्षणिक सत्र में दिल्ली के सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 12वीं में पढ़ रहे हो. इसके अलावा उम्मीदवारों का मेधावी होना जरूरी है. जानकारी के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होने चाहिए और स्कूल की वार्षिक फीस 36,000 से कम होनी चाहिए. वहीं दसवीं में गणित और विज्ञान विषयों में निर्धारित न्यूनतम अंक भी होने चाहिए.&amp;nbsp;
कैसे होगा रजिस्ट्रेशन?&amp;nbsp;
योग्य छात्रों को सबसे पहले अपने स्कूल के प्रिंसिपल या साइंस डिपार्टमेंट के समन्वयक से कांटेक्ट करना होगा. दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों के पात्र छात्रों का रजिस्ट्रेशन करने और उन्हें इस योजना की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. जेएसडीटी परीक्षा के लिए आवेदन लिंक दक्षणा फाउंडेशन के आधिकारिक पोर्टल पर जारी किया जाएगा. आवेदन वेरीफाई होने के बाद छात्र अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और दिसंबर 2026 में होने वाली चयन परीक्षा में शामिल होंगे.
ये भी पढ़ें-UPSSSC ने जारी किया एग्जाम कैलेंडर 2026, PET से Mains तक की तारीखें घोषित ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>पढ़ाई का दबाव नहीं बनेगा जानलेवा! छात्रों की मेंटल हेल्थ पर सरकार का फोकस</title>
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        <description><![CDATA[ छात्रों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) से जुड़ी चुनौतियों और आत्महत्या के मामलों को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि छात्रों को मानसिक और भावनात्मक सहयोग देने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए गए हैं. मंत्रालय का कहना है कि स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है.
लोकसभा में दिया जवाब
लोकसभा में एक लिखित जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि छात्रों की आत्महत्या से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) अपनी सालाना Accidental Deaths and Suicides in India (ADSI) रिपोर्ट में जारी करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों की आत्महत्या के पीछे पारिवारिक समस्याएं, प्रेम संबंध, बीमारी और परीक्षा में असफलता जैसे कारण प्रमुख हैं.
नई शिक्षा नीति का दिया हवाला
मंत्रालय ने बताया कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में छात्रों के Overall Development पर जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस, भावनात्मक संतुलन और नैतिक मूल्यों को भी मजबूत करना है, ताकि पढ़ाई का दबाव कम किया जा सके.
मनोदर्पण पहल की भी दी जानकारी
शिक्षा मंत्रालय की &amp;lsquo;मनोदर्पण&amp;rsquo; पहल के तहत छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन, प्रशिक्षित काउंसलरों की सुविधा, ऑनलाइन काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. &amp;lsquo;सहयोग&amp;rsquo; और &amp;lsquo;परिचर्चा&amp;rsquo; जैसे Interactive sessions भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं.
यूजीसी ने दिए हैं ये निर्देश
उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यूजीसी (UGC) ने 2023 में Mental Health और Suicide Prevention से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे. इनमें संस्थानों से काउंसलिंग सेवाएं बढ़ाने, छात्रों पर अकादमिक दबाव कम करने, खेल और दूसरी गतिविधियों को बढ़ावा देने और जरूरतमंद छात्रों की समय रहते पहचान कर उन्हें मदद देने को कहा गया है.
उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए फ्रेमवर्क जारी
शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2023 में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक Framework भी जारी किया, जिसमें Crisis Management, Suicide Prevention SOP, Student Support Network और मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया. वहीं, जनवरी 2024 में कोचिंग सेंटरों के लिए जारी Guidelines में काउंसलिंग की सुविधा, पारदर्शी फीस व्यवस्था और छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालने वाली प्रथाओं पर रोक लगाने जैसे प्रावधान शामिल किए गए.
टीचर्स को भी दी जा रही ट्रेनिंग
मंत्रालय ने बताया कि शिक्षकों को भी छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समय रहते पहचानने और उनकी मदद करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है. मई 2024 से अब तक 4000 से ज्यादा शिक्षक अलग-अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप में हिस्सा ले चुके हैं.&amp;nbsp;
सरकार के मुताबिक, सभी IIT, IIM, NIT और IIIT में अब समर्पित Mental Health या Counselling Centre मौजूद हैं, जहां छात्र जरूरत पड़ने पर Professional Counsellors और Clinical Psychologists की मदद ले सकते हैं. इसके साथ ही छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए Skill Development, Internship और Apprenticeship जैसे कार्यक्रमों का भी विस्तार किया जा रहा है.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पढ़ाई, का, दबाव, नहीं, बनेगा, जानलेवा, छात्रों, की, मेंटल, हेल्थ, पर, सरकार, का, फोकस</media:keywords>
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        <title>क्या है मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम योजना, इसके लिए कैसे अप्लाई कर सकते हैं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-है-मुख्यमंत्री-वर्क-फ्रॉम-होम-योजना-इसके-लिए-कैसे-अप्लाई-कर-सकते-हैं</link>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम जॉब वर्क योजना के तहत महिलाओं को घर बैठे रोजगार का मौका दिया जा रहा है. फिलहाल योजना के पोर्टल पर 8910 वर्क फ्रॉम होम अवसर उपलब्ध है, जिनके लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं. अलग-अलग संस्थाओं और कंपनियों की ओर से विभिन्न तरह के कार्यों के लिए भर्ती की जा रही है. इच्छुक महिलाएं अपनी योग्यता और एक्सपीरियंस के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकती है.
क्या है वर्क फ्रॉम होम योजना?
मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम जॉब वर्क योजना राजस्थान सरकार की ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराना है. इस योजना के जरिए ऐसी महिलाओं को रोजगार के अवसर दिए जाते हैं जो किसी कारण घर से बाहर जाकर काम नहीं कर पाती. महिलाएं एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित इस योजना में महिलाओं को उनकी योग्यता और कौशल के आधार पर अलग-अलग तरह के कार्य उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे घर से काम करते हुए अपनी आय बढ़ा सके.&amp;nbsp;
किन विभागों और कामों में मिलेगा मौका?
इस योजना के तहत कई विभागों और संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को काम दिया जा रहा है. इसमें स्कूल एवं हायर एजुकेशन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, वित्त विभाग, महिला सशक्तिकरण विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग शामिल है. महिलाओं को डेटा एंट्री, टाइपिंग, डॉक्यूमेंटेशन, सिलाई, डिजिटल और ऑनलाइन कार्य, सॉफ्टवेयर डिजाइन, वेब डिजाइन, डेटा एनालिसिस, अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, काउंसलिंग, ऑनलाइन कंसल्टेशन, ट्रांसक्रिप्शन और दूसरे स्किल्स आधारित कार्यों पर अवसर मिलेगा. अलग-अलग अवसरों के लिए आवश्यक योग्यता भी निर्धारित की गई है.&amp;nbsp;
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कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना का लाभ केवल राजस्थान की महिला अभ्यर्थियों को ही मिलेगा. आवेदक का राज्य का मूल निवासी होना जरूरी है. अलग-अलग अवसरों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता भी अलग रखी गई है. कई कार्यो के लिए 8वीं, 10वीं या 12वीं पास योग्यता पर्याप्त है, जबकि कुछ अवसरों पर ग्रेजुएशन, तकनीकी योग्यता या एक्सपीरियंस भी मांगा गया है. कुछ केटेगरी में विधवा, तलाकशुदा, दिव्यांग, हिंसा से प्रभावित और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्राथमिकता भी दी जा सकती है.&amp;nbsp;
आवेदन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट&amp;nbsp;
ऑनलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को जन आधार कार्ड, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, एक्सपीरियंस प्रमाण पत्र और दूसरी जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे. स्पेशल कैटेगरी की महिलाओं को संबंधित प्रमाण पत्र भी देना होगा.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन?

सबसे पहले मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम योजना के आधिकारिक पोर्टल mahilawfh.rajasthan.gov.in पर जाएं.
अगर पहले से रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो पहले अपना रजिस्ट्रेशन करें.
इसके बाद लॉगिन करके अपॉर्चुनिटी लिस्ट में उपलब्ध अवसरों को देखें.&amp;nbsp;
अपनी योग्यता के अनुसार संबंधित अवसर का चयन करें और अप्लाई नाउ पर क्लिक करें.
इसके बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें.
अब जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्कूल ड्रॉपआउट रेट में आई कमी, शिक्षा मंत्रालय का बड़ा दावा</title>
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        <description><![CDATA[ देश में छात्रों के स्कूल छोड़ने (Dropout) की समस्या को कम करने और शिक्षा तक सभी बच्चों की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है. शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि पिछले एक साल में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रेट में कमी दर्ज की गई है. साथ ही, स्कूलों के बुनियादी ढांचे, डिजिटल शिक्षा और शिक्षक उपलब्धता को मजबूत करने के लिए राज्यों को लगातार आर्थिक सहायता दी जा रही है.
इतना घट गया ड्रॉपआउट रेट
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने एक लिखित जवाब में बताया कि UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 के मुकाबले 2025-26 में प्राथमिक (कक्षा 3 से 5) स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 2.3% से घटकर 1.8% हो गया है. माध्यमिक (कक्षा 9 से 12) स्तर पर यह 8.2% से घटकर 7% पहुंच गया. हालांकि, मिडिल (कक्षा 6 से 8) स्तर पर यह 3.5% से बढ़कर 3.6% दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि मिडिल (कक्षा 6 से 8) स्तर पर ड्रॉपआउट रेट में बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह 2024-25 के 3.5% से बढ़कर 2025-26 में 3.6% हो गया. यानी 0.1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है.
इन योजनाओं से मिली मदद
मंत्रालय ने बताया कि समग्र शिक्षा, PM SHRI और STARS जैसी योजनाओं के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए फंड दिया जा रहा है. इसके तहत अतिरिक्त क्लासरूम, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय, पीने का पानी, बिजली, लाइब्रेरी, डिजिटल क्लासरूम और ICT सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. साथ ही, PM POSHAN योजना के तहत प्राइमरी से कक्षा 8 तक पढ़ने वाले बच्चों को Mid-Day Meal भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
ये कदम भी दे रहे राहत
सरकार ने कहा कि ड्रॉपआउट कम करने के लिए राज्यों को नए स्कूल खोलने, स्कूलों को अपग्रेड करने, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, जनजातीय क्षेत्रों में आवासीय स्कूल और छात्रावास, Transport Allowance, मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म, Skill Education और ICT सुविधाओं जैसी गतिविधियों के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाती है.&amp;nbsp;
पीएमश्री योजना से विकसित हो रहे स्कूल
मंत्रालय के अनुसार, PM SHRI Scheme के तहत देशभर में 14,500 से zyada स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि वे आसपास के दूसरे स्कूलों के लिए उदाहरण बन सकें और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के सभी प्रमुख प्रावधानों को लागू कर सकें.&amp;nbsp;
शिक्षकों की कमी के सवाल पर मंत्रालय ने कहा कि शिक्षा Concurrent List का विषय है, इसलिए शिक्षकों की भर्ती राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है. हालांकि, केंद्र सरकार समग्र शिक्षा योजना के जरिए राज्यों को Fianancial support देती है, ताकि स्कूलों में Pupil-Teacher Ratio (PTR) तय मानकों के अनुसार बनाए रखा जा सके.
डिजिटल शिक्षा को भी दिया जा रहा बढ़ावा
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए PM eVidya और DIKSHA प्लेटफॉर्म का भी विस्तार किया गया है. PM eVidya के तहत 200 DTH टीवी चैनल और 400 रेडियो चैनलों के जरिए कई भारतीय भाषाओं में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है. वहीं, DIKSHA पर 3.7 लाख से zyada डिजिटल कंटेंट उपलब्ध हैं. इसके अलावा 450 से ज्यादा Virtual Labs और 100 से अधिक Virtual Skill Labs भी छात्रों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं. मंत्रालय का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य शिक्षा को आसान , गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित बनाना है.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET PG 2026 में रिकॉर्ड 2.73 लाख रजिस्ट्रेशन, अफवाहों से सावधान रहने की सलाह</title>
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        <description><![CDATA[ NEET PG Exam 2026: नीट पीजी 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई है. इस बार परीक्षा के लिए रिकॉर्ड 2,73,183 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5 प्रतिशत से ज्यादा है. यह परीक्षा 30 अगस्त को देशभर के करीब 340 शहरों और 1,300 से ज्यादा परीक्षा केंद्र पर एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड ने इस बार परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और अभ्यर्थी के अनुकूल बनाने के लिए कई बड़े बदलाव भी किए हैं.&amp;nbsp;
30 अगस्त को एक ही शिफ्ट में होगी परीक्षा&amp;nbsp;
इस साल नीट पीजी परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी, ताकि सभी अभ्यर्थियों के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया सामान रहे. परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और इसके लिए देशभर में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवारों को अपने नजदीकी शहर में परीक्षा देने का अवसर मिल सके.&amp;nbsp;
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अफवाह और पेपर लीक के दावों से सावधान रहने की अपील&amp;nbsp;
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 1 अगस्त को परीक्षा तैयारी की समीक्षा बैठक की. इस दौरान परीक्षा व्यवस्था, सुरक्षा, तकनीकी सिस्टम और अभ्यर्थियों की सुविधा से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की गई. अधिकारियों को परीक्षा निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी आधारित तरीके से कराने की निर्देश दिए गए. स्वास्थ्य मंत्री ने अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की अफवाह या पेपर लीक से जुड़े फर्जी दस्तावेज पर भरोसा नहीं करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले अत्यधिक सुरक्षित, एंक्रिप्टेड और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है. ऐसे में किसी के पास पहले से प्रश्न पत्र होने का दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है. अभ्यर्थियों को केवल एनबीईएमएस और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ऑफिशियल जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है. किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी या अनियमितता की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने के लिए भी कहा गया है.&amp;nbsp;
इस बार लागू किए गए छात्र रहित के बदलाव&amp;nbsp;
परीक्षा को ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए इस साल कई प्रावधान लागू किए गए हैं. आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के लिए तीन राज्यों का ऑप्शन दिया गया है. परीक्षा शहर की जानकारी 1 अगस्त को जारी की जाएगी, वहीं 27 अगस्त से एडमिट कार्ड डाउनलोड किए जा सकेंगे. इसके अलावा इस बार प्रश्न पत्र में 180 प्रश्न होंगे जिन्हें हल करने के लिए 210 मिनट का समय मिलेगा. आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा के दौरान आधार आधारित वेरिफिकेशन की व्यवस्था की गई है. जरूरत पड़ने पर आइरिस बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी किया जाएगा. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर मल्टी लेयर फ्रिस्किंग, बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, रियल टाइम मॉनिटरिंग और तकनीकी ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कब आएगी UGC NET जून 2026 की आंसर&amp;की? लाखों उम्मीदवार कर रहे इंतजार</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET Answer Key 2026: जून 2026 यूजीसी नेट परीक्षा में शामिल हुए लाखों परीक्षार्थी प्रोविजनल आंसर-की का इंतजार कर रहे हैं. परीक्षा खत्म हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन एनटीए ने अभी तक आंसर की जारी करने की घोषणा नहीं की है. ऐसे में अभ्यर्थियों के बीच रिजल्ट संभावित स्कोर और पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स का करना है कि परीक्षा परिणाम जल्द जारी किए जाएंगे.&amp;nbsp;
जून में कई चरणों में आयोजित हुई थी परीक्षा&amp;nbsp;
एनटीए यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22, 23, 24, 25, 29 और 30 जून को किया था. कुछ अभ्यर्थियों के लिए 5 जुलाई को दोबारा परीक्षा भी आयोजित की गई थी. यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित मोड में 87 विषयों के लिए आयोजित हुई थी. यूजीसी नेट परीक्षा के जरिए जूनियर रिसर्च फैलोशिप, असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता और देशभर के यूनिवर्सिटी में पीएचडी एडमिशन के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है.&amp;nbsp;
आंसर-की के साथ मिलेगी रिस्पांस शीट&amp;nbsp;
प्रोविजनल आंसर की जारी होने पर एनटीए उम्मीदवारों की रिस्पांस शीट और प्रश्न पत्र भी उपलब्ध कराएगा. इससे व्यक्ति अपने उत्तरों का मिलान कर संभावित स्कोर का अनुमान लगा सकते हैं. अगर किसी प्रश्न या उत्तर पर आपत्ति होती है, तो उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के अंदर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे. वहीं आंसर की पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रत्येक प्रश्न पर 200 रुपये का नॉन रिफंडेबल शुल्क देना होगा. उम्मीदवारों को अपने दावे के समर्थन में उचित प्रमाण पत्र और तर्क भी देना होगा. केवल निर्धारित समय के अंदर ऑफिशियल पोर्टल पर दर्ज की गई आपत्तियों पर ही विचार किया जाएगा. सब्जेक्ट एक्सपर्ट सभी आपत्तियों की समीक्षा करेंगे और उसके बाद अंतिम आंसर की जारी की जाएगी. यूजीसी नेट जून 2026 का रिजल्ट इसी अंतिम आंसर की के आधार पर तैयार होगा.&amp;nbsp;
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रिजल्ट में देरी से बढ़ी अभ्यर्थियों की चिंता&amp;nbsp;
आंसर- की ओर रिजल्ट में हो रही देरी को लेकर कई उम्मीदवार लगातार सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. परीक्षार्थियों का कहना है कि कई यूनिवर्सिटी ने पीएचडी एडमिशन के नोटिफिकेशन जारी कर दिए हैं, लेकिन यूजीसी नेट का रिजल्ट नहीं आने से उन्हें आवेदन प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. छात्र संगठनों ने भी एनटीए से जल्दी आंसर-की जारी करने और रिजल्ट की स्पष्ट समय सीमा घोषित करने की मांग की है.&amp;nbsp;
क्या है आंसर की में देरी की वजह
जानकारी के अनुसार इस बार यूजीसी नेट में 87 विषयों की परीक्षा आयोजित की गई. जिसके मूल्यांकन की प्रक्रिया काफी बड़ी है. वहीं हाल के महीनाें में दूसरी नेशनल लेवल की परीक्षाओं के आयोजन और उनसे जुड़े कार्यों के चलते भी यूजीसी नेट की प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि एनटीए की ओर से अभी तक आंसर की जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>MBBS करने में कितना खर्च आता है? पूरा गणित समझिए</title>
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        <description><![CDATA[ MBBS Fees in India: देश भर में लाखों छात्र हर साल नीट यूजी परीक्षा पास कर एमबीबीएस में एडमिशन लेने का सपना देखते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल फीस का होता है. भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि छात्र को सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिली है या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में. दोनों के बीच फीस का अंतर लाखों रुपये से लेकर 1 करोड रुपये से ज्यादा हो सकता है. ऐसे में एडमिशन से पहले पूरे फीस स्ट्रक्चर को समझना बहुत जरूरी होता है, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एमबीबीएस करने में कितना खर्च आता है?
सरकारी और प्राइवेट कॉलेज की फीस में कितना अंतर?&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई सरकार की सब्सिडी के कारण बहुत कम खर्चे में पूरी हो जाती है. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटी में फीस कई गुना ज्यादा होती है. अगर किसी छात्र को सरकारी सीट मिलती है, तो पूरे एमबीबीएस कोर्स की फीस कुछ लाख रुपये के अंदर पूरी हो सकती है, जबकि प्राइवेट कॉलेज में यही खर्च 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच जाता है.&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज में कितनी होती है फीस?&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सालाना ट्यूशन फीस आमतौर पर 10 हजार से लेकर ढाई लाख रुपये तक के बीच होती है. पूरे 5.5 साल के कोर्स का कुल ट्यूशन खर्च लगभग 50 हजार से 10 लाख रुपये तक हो सकता है. वहीं कई राज्यों में यह फीस इससे भी बहुत कम होती है. देश के प्रमुख सरकारी संस्थानों में और सबसे कम फीस वाले मेडिकल कॉलेज में शामिल है. कई एम्स में संस्थानों में पूरे एमबीबीएस कोर्स की फीस कुछ हजार रुपये से लेकर करीब 30 से 35 रुपये तक रहती है. वहीं जेआईपीएमईआर, एमएएमसी, बीएचयू और दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी फीस प्राइवेट कॉलेज की तुलना में बहुत कम है.&amp;nbsp;
प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में कितना आता है खर्च?
प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फीस कॉलेज, राज्य और सीट के प्रकार पर निर्भर करती है. सरकारी कोटा सीट पर फीस कम रहती है, जबकि मैनेजमेंट और एनआरआई कोटा की सीटों पर फीस काफी ज्यादा होती है. प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सालाना फीस 2 लाख से 25 लाख रुपये या इससे भी ज्यादा होती है. पूरे एमबीबीएस कोर्स का कुल खर्च भी लगभग 10 लाख रुपये से 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. कई डीम्ड यूनिवर्सिटी में फीस इससे भी ज्यादा हो सकती है, खासकर एनआरआई कोटा के तहत.&amp;nbsp;
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एमबीबीएस कोर्स की अवधि और योग्यता&amp;nbsp;
भारत में एमबीबीएस कोर्स की कुल अवधि 5.5 साल होती है. इसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप शामिल होती है. एमबीबीएस में एडमिशन के लिए उम्मीदवार का 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी सब्जेक्ट के साथ निर्धारित अंकों के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है. इसके अलावा नीट यूजी परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है. सरकारी, प्राइवेट और डिम्ड सभी मेडिकल कॉलेज में नीट स्कोर के आधार पर ही एडमिशन दिया जाता है.&amp;nbsp;
सरकारी और मेडिकल कॉलेज में क्या है बड़ा अंतर?&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज में फीस कम होने के साथ-साथ सरकारी अस्पताल में बेहतर क्लीनिकल एक्सपोजर मिलता है. हालांकि यहां सीटें सीमित होती है और एडमिशन के लिए हाई नीट स्कोर जरूरी होता है. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या ज्यादा होती है, लेकिन इसके साथ ही फीस भी काफी ज्यादा होती है. कई इंस्टीट्यूट में मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे के जरिए भी एडमिशन मिलता है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कांवड़ यात्रा के चलते यूपी के स्कूल&amp;कॉलेजों में छुट्टी, देखें कब&amp;कहां रहेंगे बंद?</title>
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        <description><![CDATA[ कांवड़ यात्रा के चलते यूपी के स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी, देखें कब-कहां रहेंगे बंद? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>राजस्थान स्वास्थ्य विभाग में 2 हजार पदों पर भर्ती, जानें आवेदन से सैलरी तक सबकुछ</title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग और पैरामेडिकल संवर्ग के 2000 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है. विभाग की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार, नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, असिस्टेंट रेडियोग्राफर, डेंटल टेक्निशियन, नर्सिंग ट्यूटर, ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट और ईसीजी टेक्नीशियन सहित कई पदों पर नियुक्ति की जाएगी. हालांकि, फिलहाल यह भर्ती प्रस्ताव के स्तर पर है और भर्ती एजेंसी तय होने के साथ राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलना अभी बाकी है. वहीं इन पद पर भर्ती का ऑफिशल नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी.
इन पदों पर होगी भर्ती
प्रस्ताव के अनुसार, सबसे ज्यादा 700 पद नर्सिंग ऑफिसर और 650 पद एएनएम के प्रस्तावित हैं. इसके अलावा 400 पद लैब टेक्नीशियन, 75 पद असिस्टेंट रेडियोग्राफर, 50-50 पद डेंटल टेक्नीशियन, नर्सिंग ट्यूटर और ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट और 25 पद ईसीजी टेक्नीशियन के शामिल हैं. विभाग का कहना है कि अंतिम मंजूरी के बाद पदों की संख्या में बदलाव भी हो सकता है
कब से शुरू होंगे आवेदन?
फिलहाल इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. विभाग ने अभी केवल प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार किया है, भर्ती एजेंसी तय होने और राज्य सरकार से नियमों को मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. इसके बाद आवेदन की तारीख, परीक्षा कार्यक्रम और दूसरी जरूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.
क्या होगी योग्यता और आयु सीमा?
भर्ती की पात्रता और आयु सीमा की जानकारी भी जारी नहीं की गई है. पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता तय होगी, जिसमें नर्सिंग, पैरामेडिकल और संबंधित ट्रेड से जुड़े डिप्लोमा एवं या डिग्री धारकों को मौका मिलने की संभावना है. आयु सीमा, आरक्षण और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही सामने आएगी.
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कैसे होगा आवेदन?
भर्ती अधिसूचना जारी होने के बाद उम्मीदवारों को निर्धारित भर्ती एजेंसी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन के दौरान अभ्यर्थी को रजिस्ट्रेशन, आवेदन पत्र भरने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने और निर्धारित फीस जमा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. आवेदन का तरीका नोटिफिकेशन में बताया जाएगा.
राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी के तहत भी होगी भर्ती
राजस्थान में मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी के तहत 21 मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग पैरामेडिकल और सपोर्ट स्टाफ के 3652 पदों को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दी गई है. इनमें 3410 संविदा पद और 242 आउटसोर्स पर शामिल है. सबसे ज्यादा 2861 पद नर्स, 84 फार्मासिस्ट, 84 लैब टेक्नीशियन, 42 ओटी टेक्नीशियन, 39 असिस्टेंट रेडियोग्राफर समेत अन्य पदों पर भर्ती की जाएगी. वहीं फिलहाल इन भर्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. भर्ती एजेंसी तय होने और विस्तृत अधिसूचना जारी होने के बाद उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राजस्थान, स्वास्थ्य, विभाग, में, हजार, पदों, पर, भर्ती, जानें, आवेदन, से, सैलरी, तक, सबकुछ</media:keywords>
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        <title>CAT 2026 आवेदन शुरू, जानिए कब होगी परीक्षा और कौन कर सकता है अप्लाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cat-2026-आवेदन-शुरू-जानिए-कब-होगी-परीक्षा-और-कौन-कर-सकता-है-अप्लाई</link>
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        <description><![CDATA[ CAT 2026 Registration: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंदौर ने कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT 2026) के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. एलिजिबल उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 शाम 5:00 बजे तय की गई है. ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वह अंतिम समय का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें.&amp;nbsp;
CAT 2026 के लिए कौन कर सकता है आवेदन?
CAT 2026 में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री होना जरूरी है. जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक या समान ग्रेड होना चाहिए. वहीं एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं. इसके अलावा ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्रों या फिर रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र भी आवेदन कर सकते हैं. साथ ही सीए, सीएस, सीएमए या आईसीडब्ल्यूएआई जैसी प्रोफेशनल डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी एलिजिबल है.
आवेदन फीस और परीक्षा डेट?
इस साल आवेदन फीस में बढ़ोतरी की गई है. जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 2700 रुपये आवेदन फीस जमा करनी होगी. वहीं एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए फीस 1350 रुपये रखी गई है. यह फीस केवल एक बार देनी होगी, चाहे उम्मीदवार कितने भी आईआईएम प्रोग्राम का चयन करें. वहीं CAT 2026 का आयोजन 29 नवंबर 2026 को कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में किया जाएगा. परीक्षा देश के लगभग 170 शहरों में तीन शिफ्टों में आयोजित होगी. आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी पसंद के पांच परीक्षा शहर चुनने होंगे. अगर चयनित सभी शहरों में सीट उपलब्ध नहीं होती है तो आयोग की ओर से नजदीकी शहर आवंटित किया जाएगा.&amp;nbsp;
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एडमिट कार्ड और रिजल्ट&amp;nbsp;
CAT 2026 के एडमिट कार्ड 4 नवंबर 2026 से डाउनलोड किया जा सकेंगे. रिजल्ट जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में जारी किए जाने की संभावना है. CAT 2026 का स्कोर 31 दिसंबर 2027 तक मान्य रहेगा और इसी के आधार पर आईआईएम समेत कई प्रमुख मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में एडमिशन मिलेगा.&amp;nbsp;
ऐसे कर सकते हैं आवेदन&amp;nbsp;

CAT 2026 के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट iimcat.ac.in. पर जाएं.&amp;nbsp;
अब न्यू कैंडिडेट रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करें.
इसके बाद नाम, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन करें.&amp;nbsp;
ओटीपी से वेरिफिकेशन के बाद प्राप्त यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करें.&amp;nbsp;
अब पर्सनल डिटेल और शैक्षणिक जानकारी और अन्य जरूरी जानकारी भरें.&amp;nbsp;
इसके बाद निर्धारित डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
पसंद के आईआईएम प्रोग्राम और पांच परीक्षा शहरों का चयन करें.&amp;nbsp;
लास्ट में आवेदन पत्र का प्रीव्यू देखकर घोषणा स्वीकार करें और ऑनलाइन फीस जमा करके फॉर्म सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CAT, 2026, आवेदन, शुरू, जानिए, कब, होगी, परीक्षा, और, कौन, कर, सकता, है, अप्लाई</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>SSC JE 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी, 1731 अभ्यर्थियों का हुआ चयन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ssc-je-2025-का-फाइनल-रिजल्ट-जारी-1731-अभ्यर्थियों-का-हुआ-चयन</link>
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        <description><![CDATA[ SSC JE result 2025: स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने जूनियर इंजीनियर परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. परीक्षा प्रक्रिया में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं. चयनित उम्मीदवारों की लिस्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी की गई है, जिसमें उम्मीदवार अपना रोल नंबर या नाम सर्च करके चेक कर सकते हैं. आयोग ने कुल 1731 उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए प्रोविजनली शॉर्ट लिस्ट किया है.&amp;nbsp;
आइडेंटिटी वेरिफिकेशन के पास जारी हुआ रिजल्ट&amp;nbsp;
एसएससी की ओर से 9 जुलाई 2026 को जूनियर इंजीनियर परीक्षा के लिए फर्स्ट राउंड ऑफ टेंटेटिव एलोकेशन जारी किया गया था. इसके बाद सभी शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के लिए स्लाइडिंग आइडेंटिटी वेरीफिकेशन प्रक्रिया में शामिल होना अनिवार्य था. यह प्रक्रिया 20 और 21 जुलाई 2026 को संबंधित एसएससी क्षेत्रीय कार्यालयों में आयोजित की गई इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद फाइनल रिजल्ट घोषित किया गया है.&amp;nbsp;
1731 उम्मीदवारों को मिली प्रोविजनल सिफारिश&amp;nbsp;
आयोग के अनुसार पोस्ट आवंटन उम्मीदवारों की ओर से ऑनलाइन दिए गए पोस्ट प्रेफरेंस, मेरिट और स्लाइडिंग प्रक्रिया के दौरान चुने गए FIX और FLOAT ऑप्शन के आधार पर किया गया है. अंतिम रिजल्ट में कुल 1731 उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए प्रोविजनल शॉर्टलिस्ट किया गया है.&amp;nbsp;
कितने उम्मीदवारों ने चुना FIX और FLOAT ऑप्शन?&amp;nbsp;
एसएससी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार स्लाइडिंग प्रक्रिया के दौरान 585 उम्मीदवारों ने FIX ऑप्शन चुना, जबकि 1028 उम्मीदवारों ने FLOAT ऑप्शन का चयन किया. इसके अलावा स्लाइडिंग और आईडेंटिटी वेरीफिकेशन प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों के अनुपस्थित रहने से खाली हुई सीटों पर 118 नए आवंटन भी किए गए हैं.&amp;nbsp;
कैटेगरी के अनुसार चयनित उम्मीदवार&amp;nbsp;
फाइनल रिजल्ट में कुल 1731 उम्मीदवारों को प्रोविजनली चयनित किया गया है. इनमें जनरल (यूआर) वर्ग के 780, ओबीसी के 432, एएसी के 270, ईडब्ल्यूएस के 127 और एसटी के 122 उम्मीदवार शामिल है. आयोग के अनुसार रिपोर्ट की गई &amp;nbsp;सभी रिक्तियों के लिए प्रोविजनल सिफारिशें जारी कर दी गई है.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक करें SSC JE 2026 फाइनल रिजल्ट&amp;nbsp;

एसएससी जेई चेक करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर जूनियर इंजीनियर एग्जामिनेशन 2025 रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.
अब रिजल्ट की पीडीएफ डाउनलोड करें.
पीडीएफ में कंट्रोल एफ की मदद से अपना रोल नंबर या नाम सर्च करें.
अगर लिस्ट में आपका नाम है, तो आप अगले चरण के लिए चयनित माने जाएंगे.

अब आगे क्या होगा?&amp;nbsp;
फाइनल रिजल्ट जारी होने के बाद अब चयनित उम्मीदवारों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और नियुक्ति प्रक्रिया संबंधित विभागों की ओर से पूरी की जाएगी. उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी संबंधित यूजर डिपार्टमेंट की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SSC, 2025, का, फाइनल, रिजल्ट, जारी, 1731, अभ्यर्थियों, का, हुआ, चयन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CLAT 2027 के लिए आवेदन शुरू, 31 अक्टूबर तक भर सकते हैं फॉर्म</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/clat-2027-के-लिए-आवेदन-शुरू-31-अक्टूबर-तक-भर-सकते-हैं-फॉर्म</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/clat-2027-के-लिए-आवेदन-शुरू-31-अक्टूबर-तक-भर-सकते-हैं-फॉर्म</guid>
        <description><![CDATA[ CLAT 2027 Registration: कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है. क्लैट 2027 के स्कोर के आधार पर देश की 24 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी समेत 60 से ज्यादा को कॉलेज में एडमिशन दिया जाएगा.&amp;nbsp;
कब होगी CLAT 2027 परीक्षा?&amp;nbsp;
CLAT 2027 परीक्षा का आयोजन 6 दिसंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक एक ही शिफ्ट में किया जाएगा. परीक्षा देश भर के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी. कंसोर्टियम ने स्पष्ट किया है कि इस बार परीक्षा के सिलेबस और पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया गया है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है CLAT 2027 के लिए आवेदन?&amp;nbsp;
अंडर ग्रेजुएट लॉ प्रोग्राम में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है. जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक निर्धारित है, जबकि एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक जरूरी है. वहीं पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए. जनरल, ओबीसी और एनआरआई कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक और एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के लिए 45 प्रतिशत अंक जरूरी है. अंतिम वर्ष के छात्र भी क्लैट 2027 के लिए आवेदन के पात्र है.&amp;nbsp;
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आवेदन फीस और जरूरी डॉक्यूमेंट&amp;nbsp;
क्लैट 2027 के लिए जनरल, ओबीसी, &amp;nbsp;पीडब्ल्यूडी, एनआरआई और ओसीआई कैटेगरी के उम्मीदवारों को 4000 आवेदन फीस देनी होगी. वहीं एससी, एसटी और बीपीएल कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन फीस 3500 रुपये निर्धारित की गई है. इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन भरने से पहले उम्मीदवारों को कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखना होंगे. इनमें डॉक्यूमेंट में पासपोर्ट साइज फोटो, स्कैन किया हुआ सिग्नेचर और जाति प्रमाण पत्र शामिल है. आवेदन के दौरान सभी डॉक्यूमेंट निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे.&amp;nbsp;
कैसे करें CLAT 2027 के लिए आवेदन?

CLAT 2027 के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की मदद से रजिस्ट्रेशन करें.
अब रजिस्टर्ड आईडी से लॉगिन करने के बाद आवेदन फार्म में एजुकेशनल जानकारी भरें.&amp;nbsp;
अपनी पसंद के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का क्रमवार चयन करें.
इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने करके फीस जमा करें.
फॉर्म सबमिट करने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके रख लें.

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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 00:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CLAT, 2027, के, लिए, आवेदन, शुरू, अक्टूबर, तक, भर, सकते, हैं, फॉर्म</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>DU UG Admission 2026: तीसरे राउंड का शेड्यूल जारी, 3 अगस्त से खुलेगी मिड&amp;एंट्री विंडो, जानें किसे मिलेगा मौका</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/du-ug-admission-2026-तीसरे-राउंड-का-शेड्यूल-जारी-3-अगस्त-से-खुलेगी-मिड-एंट्री-विंडो-जानें-किसे-मिलेगा-मौका</guid>
        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय ने कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS 2026 के तहत ग्रेजुएशन में दाखिले के लिए तीसरे राउंड का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. इसके साथ ही यूनिवर्सिटी ने उन छात्रों को एक और मौका दिया है, जो किसी कारण से पहले रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए थे या अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके थे. ऐसे उम्मीदवार 3 अगस्त से 5 अगस्त 2026 तक &#039;मिड-एंट्री&#039; विकल्प के जरिए आवेदन कर सकेंगे.
यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 71 हजार से ज्यादा छात्र अपनी सीट कन्फर्म कर चुके हैं. बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी मौजूदा सीट फ्रीज कर ली है, वहीं कई छात्रों ने बेहतर कॉलेज या मनपसंद कोर्स पाने के लिए अपग्रेड का विकल्प चुना है.
क्या है मिड-एंट्री सुविधा?
मिड-एंट्री सुविधा उन उम्मीदवारों के लिए है जो CSAS के पहले चरण में रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाए थे या समय पर आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके, ऐसे छात्र 3 अगस्त से 5 अगस्त रात 11:59 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए छात्रों को 1,000 रुपये की नॉन-रिफंडेबल अतिरिक्त फीस देनी होगी. जो छात्र पहले या दूसरे राउंड की काउंसलिंग में शामिल होने से चूक गए थे, वे भी इस माध्यम से एडमिशन प्रोसेस में हिस्सा ले सकते हैं.
कैसे काम करेगी अपग्रेड विंडो?
DU की अपग्रेड विंडो उन छात्रों के लिए है जिन्होंने पहले से आवंटित कॉलेज और कोर्स में सीट स्वीकार कर ली है, लेकिन वे अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर बेहतर विकल्प चाहते हैं. यदि अपग्रेड प्रक्रिया के दौरान छात्र को नई सीट मिलती है, तो उसे उस नई सीट पर एडमिशन लेना अनिवार्य होगा. यदि नई सीट की फीस पुरानी सीट से अलग होती है, तो अंतर की राशि जमा करनी होगी. फीस जमा होने के बाद ही नई सीट पर दाखिला फाइनल माना जाएगा.
इन छात्रों को नहीं मिलेगा मिड-एंट्री का फायदा
यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि मिड-एंट्री का लाभ सभी श्रेणियों और पाठ्यक्रमों के लिए नहीं होगा. नीचे दिए गए कोटों और प्रैक्टिकल-आधारित कोर्स में आवेदन करने वाले छात्र मिड-एंट्री का उपयोग नहीं कर पाएंगे...
एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज (ECA)
स्पोर्ट्स कोटा
चिल्ड्रेन/विडोज ऑफ आर्म्ड फोर्सेज (CW) कोटा
वार्ड सुपरन्यूमेरी कोटा
परफॉर्मेंस आधारित कोर्स जैसे- BA (Hons) Music और BSc (PE, HE &amp;amp; Sports)
प्रैक्टिकल आधारित Bachelor of Fine Arts (BFA)
कंपार्टमेंट परीक्षा वाले छात्रों के लिए जरूरी जानकारी
जिन छात्रों ने कक्षा 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा दी है, उन्हें मिड-एंट्री के दौरान ही CSAS के पहले चरण का रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सलाह दी गई है. हालांकि, ये छात्र अपने दूसरे चरण की प्रक्रिया अपना फाइनल रिजल्ट घोषित होने के बाद ही पूरी कर सकेंगे.
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ये है तीसरे राउंड का पूरा शेड्यूल&amp;nbsp;
सीट अलॉटमेंट लिस्ट- 8 अगस्त 2026
सीट एक्सेप्ट करने की तारीख- 8 अगस्त से 11 अगस्त (रात 11:59 बजे तक)
कॉलेज द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन- 12 अगस्त तक
ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करने की आखिरी तारीख- 13 अगस्त (रात 11:59 बजे तक)
अब तक के एडमिशन के आंकड़े
यूनिवर्सिटी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 29 जुलाई की शाम तक कुल 71,342 छात्रों ने अपनी सीट पक्की कर ली थी. इनमें से 25,088 छात्रों ने अपग्रेड का विकल्प चुना, जबकि 32,233 छात्रों ने अपनी सीट को फ्रीज कर दिया. यूनिवर्सिटी ने सभी अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे एडमिशन से जुड़े हर अपडेट के लिए नियमित रूप से आधिकारिक CSAS पोर्टल को चेक करते रहें.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Admission, 2026:, तीसरे, राउंड, का, शेड्यूल, जारी, अगस्त, से, खुलेगी, मिड-एंट्री, विंडो, जानें, किसे, मिलेगा, मौका</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>NEET Counselling 2026 : 5 अगस्त से शुरू हो रही NEET Counselling, कौन&amp;कौन से दस्तावेज जरूरी?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Counselling 2026 : NEET UG 2026 का रिजल्ट आने के बाद अब मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की सबसे जरूरी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG 2026 काउंसलिंग का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. इसके पहले राउंड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू होंगे. ऐसे में जो छात्र MBBS, BDS या B.Sc Nursing जैसे कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं, उन्हें समय रहते रजिस्ट्रेशन करने के साथ सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी तैयार रखने होंगे. ऐसे में आइए जानते हैं कि 5 अगस्त से शुरू हो रही NEET UG 2026 काउंसलिंग के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं.&amp;nbsp;
5 अगस्त से शुरू होगी NEET UG काउंसलिंग
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के अनुसार NEET UG 2026 काउंसलिंग के पहले राउंड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू होंगे. आवेदन करने की अंतिम तारीख 12 अगस्त 2026 तय की गई है. यह काउंसलिंग 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) की सीटों और MCC के अधिकार क्षेत्र में आने वाली MBBS, BDS और B.Sc Nursing सीटों पर एडमिशन के लिए आयोजित की जाएगी. उम्मीदवार MCC की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे.&amp;nbsp;
NEET UG 2026 काउंसलिंग के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को कई दस्तावेज जरूरी हैं. इनमें NEET UG 2026 का स्कोर कार्ड, NEET UG 2026 का एडमिट कार्ड, कक्षा 10 की मार्कशीट, कक्षा 12 की मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या अन्य वैध फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, आरक्षण प्रमाण पत्र, PwBD प्रमाण पत्र , डोमिसाइल प्रमाण पत्र , MCC या संबंधित संस्थान द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज शामिल हैं. साथ ही एडमिशन के समय सभी ऑरिजन्ल दस्तावेज साथ ले जाने जरूरी होंगे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - SSC Recruitment 2026: SSC और UPSC में हुआ बड़ा बदलाव, अब नहीं लटकेगी सरकारी नौकरी
NEET काउंसलिंग में किन दूसरे दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?
कुछ दस्तावेज ऐसे भी हैं, जिन्हें काउंसलिंग और रिपोर्टिंग के दौरान मांगा जा सकता है. इनमें MCC या राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण के तहत जारी सीट अलॉटमेंट लेटर, स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC), स्व-सत्यापित दस्तावेजों की फोटोकॉपी और सफेद बैकग्राउंड वाली पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं. उम्मीदवारों को इन सभी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी और ऑरिजन्ल कॉपी पहले से तैयार रखनी चाहिए.&amp;nbsp;
ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
काउंसलिंग में भाग लेने के लिए सबसे पहले MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. वहां NEET UG Counselling 2026 के रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद NEET आवेदन से जुड़ी जानकारी की मदद से लॉगिन करें और काउंसलिंग फीस जमा करें फिर अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और अपनी पसंद के कॉलेज साथ ही कोर्स प्राथमिकता के अनुसार चुनें. सभी ऑप्शन ध्यान से भरने के बाद लास्ट डेट से पहले उन्हें लॉक करके आवेदन जमा करना होगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - PMO Eligibility: PMO में नौकरी कैसे मिलती है, यहां कितनी मिलती है सैलरी? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>MD and MS Difference: MD और MS में क्या है अंतर? दोनों में से कौन सही और सस्ता</title>
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        <description><![CDATA[ MD and MS Difference:&amp;nbsp;MBBS पूरी करने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स के मन में एक बड़ा सवाल आता है. आगे MD करें या MS? दोनों ही पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स हैं और MBBS के बाद NEET PG एग्जाम पास करके ही इनमें एडमिशन मिलता है, लेकिन दोनों की पढ़ाई, फीस और करियर का रास्ता काफी अलग होता है. अगर आप भी कंफ्यूज हैं कि इनमें से कौन सा कोर्स आपके लिए सही रहेगा, तो चलिए आसान भाषा में दोनों के बीच का फर्क समझते है.&amp;nbsp;
MD और MS में मुख्य अंतर क्या है
MD का पूरा नाम है Doctor of Medicine, जबकि MS का मतलब है Master of Surgery. जो स्टूडेंट्स बीमारियों के इलाज में दवाइयों और नॉन-सर्जिकल तरीके अपनाने में दिलचस्पी रखते हैं, वे MD चुनते हैं, वहीं जिनका झुकाव ऑपरेशन और सर्जरी की तरफ होता है, वे MS का रास्ता चुनते हैं. यानी सीधी भाषा में कहें तो MD मेडिसिन आधारित इलाज पर फोकस करता है, जैसे जनरल मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी वगैरह.
वहीं MS सर्जरी से जुड़ी ब्रांच होती है, जैसे जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, ENT और गायनेकोलॉजी. दोनों ही कोर्स की अवधि आमतौर पर 3 साल की होती है और दोनों में एडमिशन के लिए NEET PG पास करना जरूरी है. पढ़ाई का तरीका भी अलग होता है - MD में ज्यादा जोर थ्योरी, डायग्नोसिस और मरीज को दवा से ठीक करने पर होता है, जबकि MS में हाथों-हाथ सर्जरी की ट्रेनिंग, ऑपरेशन थिएटर में प्रैक्टिस और सर्जिकल स्किल्स सिखाई जाती हैं.&amp;nbsp;
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फीस में कितना है फर्क, कौन सा है सस्ता
अगर बात फीस की करें, तो सरकारी कॉलेजों में MD और MS दोनों की फीस लगभग बराबर और काफी कम होती है, कुछ हजार रुपये से लेकर कुछ लाख रुपये सालाना तक. लेकिन प्राइवेट कॉलेजों में यह तस्वीर बदल जाती है. MS कोर्स की फीस आमतौर पर 8 लाख से 20 लाख रुपये सालाना तक होती है, जबकि MD की फीस कॉलेज के हिसाब से 4 लाख से 20 लाख रुपये सालाना तक जा सकती है.
यानी शुरुआती स्तर पर MD की फीस थोड़ी कम भी हो सकती है, लेकिन टॉप प्राइवेट या डीम्ड यूनिवर्सिटी में दोनों कोर्स की फीस लगभग बराबर हो जाती है. कुल मिलाकर तीन साल के कोर्स के लिए प्राइवेट कॉलेजों में औसत फीस 15 लाख से 80 लाख रुपये तक पहुंच सकती है, जो कॉलेज की रेप्युटेशन, स्पेशलाइजेशन और मैनेजमेंट कोटा जैसी चीजों पर निर्भर करती है.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत में कब और कहां देखें WWE लाइव स्ट्रीमिंग, जानें पूरा शेड्यूल</title>
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        <description><![CDATA[ WWE SummerSlam 2026: WWE का सबसे बड़ा प्रीमियम लाइव इवेंट्स में से एक समरस्लैम 2026 इस बार दो दिनों तक आयोजित किया जाएगा. अमेरिका के मिनियापोलिस स्थित यू.एस. बैंक स्टेडियम में होने वाले इस मेगा इवेंट में रोमन रेंस, सीएम पंक, कोडी रोड्स, सेथ रॉलिन्स और ब्रॉक लेसनर जैसे बड़े सुपरस्टार्स एक्शन में नजर आएंगे. भारत में इसे देखने के लिए फैंस को देर रात तक जागना पड़ेगा.
दो दिन चलेगा समरस्लैम 2026
इस बार समरस्लैम का आयोजन 1 और 2 अगस्त को अमेरिका में हो रहा है. भारतीय समयानुसार नाइट-1 की शुरुआत 2 अगस्त को सुबह 3:30 बजे होगी. वहीं नाइट-2 का लाइव प्रसारण 3 अगस्त को सुबह 3:30 बजे से शुरू होगा. दोनों दिन किकऑफ शो मुख्य इवेंट से दो घंटे पहले शुरू होगा.
भारत में कहां देखें लाइव स्ट्रीमिंग?
भारत में WWE समरस्लैम 2026 की लाइव स्ट्रीमिंग सिर्फ नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध होगी. इस इवेंट का टीवी प्रसारण नहीं किया जाएगा. ऐसे में भारतीय फैंस मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी या अन्य डिवाइस पर नेटफ्लिक्स के जरिए मुकाबलों का आनंद ले सकते हैं.
नाइट-1 का मैच कार्ड
द बेला ट्विन्स और पेज vs फेटल इन्फ्लुएंस.एलए नाइट, सोलो सिकोआ और रॉयस कीज vs द ब्लडलाइन.गुंथर vs निक एल्डिस.हेल इन ए सेल, ब्रॉक लेसनर vs ओबा फेमी.विमेंस वर्ल्ड चैंपियनशिप, लिव मॉर्गन vs इयो स्काई.अनडिस्प्यूटेड WWE चैंपियनशिप, सीएम पंक vs कोडी रोड्स. (मेन इवेंट)
नाइट-2 का मैच कार्ड
डोमिनिक मिस्टीरियो vs डैनहॉसन.सैमी जेन vs फिन बैलर.यूनाइटेड स्टेट्स चैंपियनशिप, ट्रिक विलियम्स vs बैरन कॉर्बिन.इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप, पेंटा vs चैड गेबल.इंटैरिम WWE विमेंस चैंपियनशिप लैडर मैच, टिफनी स्ट्रैटन vs जेड कारगिल vs शार्लेट फ्लेयर vs चेल्सी ग्रीन vs लैश लेजेंड.वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप, रोमन रेंस vs सेथ रॉलिन्स. (मेन इवेंट)
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दो बड़े टाइटल मुकाबलों पर रहेंगी नजरें
समरस्लैम 2026 के सबसे बड़े आकर्षण दो वर्ल्ड टाइटल मुकाबले होंगे. पहले दिन सीएम पंक अपनी अनडिस्प्यूटेड WWE चैंपियनशिप को कोडी रोड्स के खिलाफ डिफेंड करेंगे. वहीं दूसरे दिन रोमन रेंस वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप को सेथ रॉलिन्स के खिलाफ दांव पर लगाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Career Options Without JEE NEET: बिना JEE&amp; NEET भी बन सकता है करियर, ये कोर्स दिलाएंगे तगड़ा पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ Career Options Without JEE NEET : हर साल 12वीं के बाद लाखों छात्र अपने करियर को लेकर सबसे बड़ी कंफ्यूजन में रहते हैं. ज्यादातर छात्रों को लगता है कि अगर JEE या NEET में सफलता नहीं मिली तो अच्छे करियर का सपना भी खत्म हो जाएगा. लेकिन अब समय बदल चुका है. आज के दौर में ऐसे कई प्रोफेशन और डिग्री कोर्स मौजूद हैं, जिनमें एडमिशन लेने के लिए JEE या NEET की जरूरत नहीं होती और इनसे शानदार करियर के साथ अच्छा सैलरी पैकेज भी मिल सकता है. टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, डिजिटल मीडिया, डिजाइन और बिजनेस जैसे कई क्षेत्रों में स्किल्स रखने वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बिना JEE- NEET भी कौन से कोर्स करियर बना सकते हैं और तगड़ा पैकेजदिला सकते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;बिना JEE- NEET साइंस के छात्रों के लिए बेहतरीन करियर ऑप्शन
1.बीएससी (B.Sc.) - बीएससी आज भी सबसे फेमस कोर्स में से एक है. इसमें कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और नर्सिंग जैसी कई स्पेशलाइजेशन उपलब्ध हैं.पढ़ाई पूरी करने के बाद एमएससी, एमबीए या सीधे नौकरी के ऑप्शन भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
2. बीसीए (BCA) - कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग में इंटरेस्ट रखने वाले छात्रों के लिए BCA अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इस कोर्स के बाद सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ऐप डेवलपमेंट और आईटी सेक्टर में नौकरी के अवसर मिलते हैं. आगे चलकर MCA या MBA भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
3. डिजाइन कोर्स - क्रिएटिव छात्रों के लिए डिजाइन सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. B.Des, BFA, ग्राफिक डिजाइन, UX/UI डिजाइन और एनीमेशन जैसे कोर्स करके बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स में करियर बनाया जा सकता है.&amp;nbsp;
4. फार्मेसी (B.Pharm) - कई राज्यों में B.Pharm में एडमिशन के लिए NEET जरूरी नहीं होती है. इस कोर्स के बाद फार्मासिस्ट, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, क्वालिटी कंट्रोल और फार्मास्यूटिकल कंपनियों में नौकरी के अवसर मिलते हैं.
5. एविएशन और पायलट ट्रेनिंग - अगर आपका इंटरेस्ट एविएशन सेक्टर में है तो 12वीं के बाद कमर्शियल पायलट बनने का रास्ता भी खुला है. इसके लिए JEE या NEET की जरूरत नहीं होती है.&amp;nbsp;
6. पैरामेडिकल कोर्स - BPT, BMLT, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, रेडियोलॉजी और स्पीच एंड ऑडियोलॉजी जैसे पैरामेडिकल कोर्स भी बिना NEET किए जा सकते हैं और हेल्थ सेक्टर में अच्छी नौकरी मिल सकती है.&amp;nbsp;
कॉमर्स के छात्रों के लिए शानदार ऑप्शन&amp;nbsp;
1. चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) - CA देश के सबसे सम्मानित प्रोफेशन में गिना जाता है. 12वीं के बाद CA फाउंडेशन के जरिए इस क्षेत्र में करियर शुरू किया जा सकता है.&amp;nbsp;
2. बीबीए (BBA) - कॉरपोरेट सेक्टर में करियर बनाने के लिए BBA अच्छा ऑप्शन है. इसके बाद MBA करके बेहतर अवसर हासिल किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
3. कंपनी सेक्रेटरी (CS) - कंपनी लॉ और कॉरपोरेट गवर्नेंस में इंटरेस्ट रखने वाले छात्रों के लिए CS भी लोकप्रिय प्रोफेशनल कोर्स है.&amp;nbsp;
4. बीकॉम (B.Com) - अकाउंटिंग, फाइनेंस और बिजनेस से जुड़े क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए B.Com आज भी सबसे पसंदीदा कोर्स में शामिल है.&amp;nbsp;
5.डिजिटल मार्केटिंग - आज लगभग हर कंपनी डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट की तलाश में रहती है. सोशल मीडिया, SEO, कंटेंट मार्केटिंग और ऑनलाइन विज्ञापन जैसे क्षेत्रों में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं..&amp;nbsp;
6. स्टॉक मार्केट और फाइनेंशियल प्लानिंग - स्टॉक ब्रोकर, फाइनेंशियल एनालिस्ट, म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर और CFP जैसे प्रोफेशन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.&amp;nbsp;
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आर्ट्स के छात्रों के लिए &amp;nbsp;बेहतरीन करियर ऑप्शन
1. लॉ (BA LLB) - कानून की पढ़ाई करके कॉरपोरेट लॉ, क्रिमिनल लॉ और न्यायिक सेवाओं में करियर बनाया जा सकता है.&amp;nbsp;
2. सिविल सर्विसेज - किसी भी विषय से ग्रेजुएशन करने के बाद UPSC की तैयारी की जा सकती है.
3. जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन - डिजिटल मीडिया और न्यूज इंडस्ट्री के बढ़ते विस्तार के कारण इस क्षेत्र में लगातार नए अवसर मिल रहे हैं.&amp;nbsp;
4.साइकोलॉजी - मेंटल हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर की मांग लगातार बढ़ रही है.&amp;nbsp;
5. होटल मैनेजमेंट - हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में होटल, एयरलाइंस और क्रूज सेक्टर में करियर बनाने के लिए यह अच्छा ऑप्शन है.
6. फैशन डिजाइन - क्रिएटिव छात्रों के लिए फैशन डिजाइन भी तेजी से आगे बढ़ता हुआ क्षेत्र है.&amp;nbsp;
बिना JEE- NEET भी कौन से कोर्स तगड़ा पैकेज दिला सकते हैं?
आज कई ऐसे करियर हैं जहां अच्छी स्किल्स होने पर शानदार पैकेज मिल सकता है. इनमें डिजिटल मार्केटिंग स्पेशलिस्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कमर्शियल पायलट, सॉफ्टवेयर डेवलपर, कॉरपोरेट लॉयर, UX डिजाइनर, डेटा साइंटिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, जर्नलिस्ट और होटल मैनेजमेंट प्रोफेशनल शामिल हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - PMO Eligibility: PMO में नौकरी कैसे मिलती है, यहां कितनी मिलती है सैलरी? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PMO Eligibility: PMO में नौकरी कैसे मिलती है, यहां कितनी मिलती है सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ PMO Eligibility: देश के सबसे अहम और प्रभावशाली कार्यालयों में से एक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में नौकरी पाना कई युवाओं का सपना होता है. यहां काम करने वाले अधिकारी सीधे तौर पर देश की नीतियों और फैसलों से जुड़े होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर PMO में नौकरी कैसे मिलती है और यहां सैलरी कितनी होती है? आइए जानते हैं इससे संबंधित जानकारी.
यूपीएससी से मिलेगा रास्ता
सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि PMO में सीधे तौर पर भर्ती बहुत कम होती है. यहां ज्यादातर अधिकारी अन्य सरकारी सेवाओं से चुने जाते हैं. PMO में जाने का सबसे प्रमुख रास्ता संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा होती है. इस परीक्षा को पास करके उम्मीदवार IAS, IPS या IFS अधिकारी बनते हैं, जिसके बाद अनुभव और कार्यक्षमता के आधार पर उन्हें PMO में नियुक्ति या प्रतिनियुक्ति मिल सकती है.
अनुभव आ सकता है काम
यही नहीं केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत अधिकारी भी अपने अच्छे प्रदर्शन के आधार पर PMO में भेजे जाते हैं. इसमें सेक्शन ऑफिसर, अंडर सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी जैसे पद शामिल होते हैं. कुछ मामलों में विशेषज्ञों जैसे आर्थिक सलाहकार, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक की भी नियुक्ति की जाती है. इन पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में उच्च शिक्षा और अनुभव होना जरूरी होता है. वहीं PMO में काम करने के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स और प्रशासनिक समझ भी अहम भूमिका निभाते हैं.
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कितनी मिलती है सैलरी?
PMO में सैलरी पद और अनुभव के अनुसार तय होती है. IAS अधिकारियों की शुरुआती सैलरी लगभग 56,100 रुपये प्रति माह होती है, जो अनुभव के साथ बढ़ती जाती है. वरिष्ठ पदों पर यह सैलरी 1 लाख से लेकर 2.5 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है. विशेषज्ञों और सलाहकारों की सैलरी उनके अनुभव के आधार पर 80,000 रुपये से 2 लाख रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है. वहीं, अन्य पदों जैसे सेक्शन ऑफिसर या असिस्टेंट की सैलरी 44,900 रुपये से शुरू होकर 1,42,400 रुपये तक जा सकती है.
सैलरी के साथ अन्य लाभ
सैलरी के अलावा, PMO में काम करने वाले अधिकारियों को कई सरकारी सुविधाएं जैसे सरकारी आवास, मेडिकल सुविधा, यात्रा भत्ता और सुरक्षा भी मिलती हैं. हालांकि, PMO में काम करना जितना प्रतिष्ठित माना जाता है, यह उतना ही जिम्मेदारी भरा भी होता है. यहां काम करने के लिए उच्च स्तर की गोपनीयता, अनुशासन और समर्पण जरूरी होता है.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Shehzad Poonawalla Education: कितने पढ़े&amp;लिखे हैं शहजाद पूनावाला, उनके पास कौन&amp;कौन सी डिग्री?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/shehzad-poonawalla-education-कितने-पढ़े-लिखे-हैं-शहजाद-पूनावाला-उनके-पास-कौन-कौन-सी-डिग्री</link>
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        <description><![CDATA[ Shehzad Poonawalla Education : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला इन दिनों अपने इस्तीफे को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए पार्टी छोड़ने का फैसला लिया है. उनके इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके राजनीतिक सफर के साथ-साथ उनकी पढ़ाई और प्रोफेशन के बारे में भी जानना चाहते हैं.
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर शहजाद पूनावाला ने कितनी पढ़ाई की है और राजनीति में आने से पहले वह क्या करते थे. ऐसे में आइए जानते हैं कि शहजाद पूनावाला कितने पढ़े-लिखे हैं शहजाद पूनावाला और उनके पास कौन-कौन सी डिग्री है.&amp;nbsp;
कौन हैं शहजाद पूनावाला?
शहजाद पूनावाला का जन्म साल 1987 में महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई भी पुणे में ही हुई. वह लंबे समय तक राजनीति और टीवी डिबेट में सक्रिय चेहरों में रहे. हाल ही में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए बीजेपी से इस्तीफा देने का फैसला लिया.&amp;nbsp;
शहजाद पूनावाला ने कहां तक पढ़ाई की है?
शहजाद पूनावाला ने अपनी स्कूली शिक्षा पुणे के सेंट विंसेंट हाई स्कूल से पूरी की, इसके बाद उन्होंने नेस वाडिया कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया. आगे चलकर उन्होंने कानून की पढ़ाई की और लॉ की डिग्री हासिल की. इसके अलावा उन्होंने एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, पुणे से राजनीति, प्रशासन और गवर्नमेंट से जुड़ा एक विशेष कोर्स भी किया. पढ़ाई के दौरान ही उनका इंटरेस्ट सार्वजनिक मुद्दों, डिबेट और छात्र राजनीति में बढ़ने लगा था.
राजनीति से पहले क्या करते थे?
राजनीति में सक्रिय होने से पहले शहजाद पूनावाला ने वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय के साथ भी काम किया. इस दौरान वह नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर भी सक्रिय रहे.&amp;nbsp;
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बीजेपी में कब हुए शामिल?
करीब चार साल तक कांग्रेस से अलग रहने के बाद नवंबर 2021 में शहजाद पूनावाला आधिकारिक रूप से बीजेपी में शामिल हुए. पार्टी में आने के कुछ समय बाद ही उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया. इसके बाद वह टीवी डिबेट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर बीजेपी का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए. दिसंबर 2021 में उन्हें बीजेपी की दिल्ली इकाई का आईटी और सोशल मीडिया प्रभारी भी बनाया गया था.&amp;nbsp;
शहजाद पूनावाला के पास कौन-कौन सी डिग्री है?
शहजाद पूनावाला ने बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की डिग्री हासिल करने के बाद बैचलर ऑफ लॉ (LLB) किया. इसके अलावा उन्होंने पुणे के एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से राजनीति, प्रशासन और गवर्नमेंट से जुड़ा एक विशेष कोर्स भी किया.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>SSC Recruitment 2026: SSC और UPSC में हुआ बड़ा बदलाव, अब नहीं लटकेगी सरकारी नौकरी</title>
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        <description><![CDATA[ SSC Recruitment 2026:&amp;nbsp;सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है. साल 2026 में SSC और UPSC दोनों की भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए हैं. इन बदलावों मकसद चयन प्रक्रिया को ज्यादा साफ-सुथरी, पारदर्शी और तेज बनाना है, जिससे भर्ती में लगने वाला समय काफी घटे और अभ्यर्थियों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े.
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि विभिन्न सुधार उपायों के चलते कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं का भर्ती चक्र अब 15-18 महीने से घटकर 6-10 महीने रह गया है. इसके पीछे मुख्य वजह&amp;nbsp; पेन-पेपर आधारित परीक्षाओं से पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में बदलाव, परीक्षा के चरणों की संख्या घटाना और परीक्षा नोटिस अवधि को करीब 45 दिन से घटाकर लगभग 21 दिन करना है.
गड़बड़ी रोकने के लिए ई-डोजियर सिस्टम
इसके अलावा, उम्मीदवारों के दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और उनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए एक ऑनलाइन केंद्रीकृत ई-डोजियर सिस्टम शुरू किया गया है. यानी अब उम्मीदवारों के सभी जरूरी दस्तावेज एक ही ऑनलाइन डिजिटल फाइल में सुरक्षित रखे जाएंगे, जिससे दस्तावेजों की जांच आसान होगी और भर्ती प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज व पारदर्शी बनेगी. इसे CGL, CHSL और JE जैसी कई बड़ी परीक्षाओं में पहले ही लागू किया जा चुका है. भर्ती प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए अब डिस्क्रिप्टिव (लिखित) परीक्षा नहीं होगी. उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच संबंधित मंत्रालय और विभाग करेंगे. साथ ही, इंटरव्यू की प्रक्रिया भी खत्म कर दी गई है, ताकि भर्ती जल्द पूरी हो सके. यह मुद्दा हाल ही में संसद के मौजूदा सत्र में पेपर लीक पर हुई बहस के दौरान भी उठा, जहां मंत्री ने बताया कि केंद्र के अधीन चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां UPSC, SSC, RRB और IBPS पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार सुधार कर रही हैं.&amp;nbsp;
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SSC CGL में नया पेपर और वेरिफिकेशन
इसके अलावा SSC CGL 2026 की भर्ती में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. इस बार असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर और असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर पदों के लिए टियर-टू परीक्षा में एक नया पेपर-3 जोड़ा गया है, जिसमें फाइनेंस और इकोनॉमिक्स से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. इसके अलावा इस साल की भर्ती में कुल लगभग 12,256 पद रखे गए हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या करीब 14,582 थी, यानी इस बार सीटों की संख्या में कुछ कमी देखी गई है. परीक्षा में नकल और फर्जी उम्मीदवारों को रोकने के लिए लाइव फोटो वेरिफिकेशन जैसी डिजिटल जांच भी शुरू की गई है, ताकि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो सके.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET Counselling: चॉइस लॉक करते समय इन बातों का रखें ध्यान, गंवा सकते हैं MBBS सीट</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Counselling 2026 : NEET UG 2026 का रिजल्ट आने के बाद अब लाखों छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने अब NEET UG 2026 काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया है. पहले राउंड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू होंगे, जबकि आवेदन की अंतिम तारीख 12 अगस्त तय की गई है.
इस प्रक्रिया के जरिए देशभर के सरकारी, प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और B.Sc Nursing जैसी सीटों पर एडमिशन मिलेगा. हालांकि, काउंसलिंग के दौरान की गई एक छोटी-सी गलती भी अच्छी रैंक वाले उम्मीदवार की MBBS सीट छीन सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि चॉइस लॉक करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.&amp;nbsp;
NEET UG काउंसलिंग क्या है?
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए उम्मीदवारों को MCC या संबंधित राज्य की काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना जरूरी होता है. सुप्रीम कोर्ट और NMC के नियमों के अनुसार कोई भी मेडिकल कॉलेज सीधे किसी छात्र को एडमिशन नहीं दे सकता है. काउंसलिंग के दौरान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फीस जमा करना, चॉइस फिलिंग, चॉइस लॉकिंग, सीट अलॉटमेंट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, कॉलेज में रिपोर्टिंग और जरूरत पड़ने पर अगले राउंड में अपग्रेडेशन जैसी पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. इसके साथ ही 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में जरूरी न्यूनतम अंक भी देखे जाते हैं. सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत और SC, ST तथा OBC वर्ग के लिए 40 प्रतिशत अंक जरूरी हैं.
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चॉइस लॉक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
1. सिर्फ बड़े मेडिकल कॉलेज ही न चुनें - कई छात्र &amp;nbsp;सिर्फ बड़े और फेमस मेडिकल कॉलेजों की चॉइस भरते हैं. ऐसा करने से सीट मिलने की संभावना कम हो सकती है. इसलिए अपनी रैंक के अनुसार ऐसे कॉलेज भी शामिल करें जहां एडमिशन मिलने की संभावना ज्यादा हो.&amp;nbsp;
2. समय रहते चॉइस लॉक करें - चॉइस भरने के बाद उसे तय समय के अंदर लॉक करना बेहद जरूरी है. आखिरी समय तक इंतजार करने पर सर्वर की समस्या या तकनीकी दिक्कत आ सकती है. इसलिए समय रहते अपनी चॉइस लॉक कर दें.&amp;nbsp;
3. कॉलेज की फीस और बॉन्ड की जानकारी जरूर देखें - &amp;nbsp;कॉलेज चुनने से पहले उसकी सालाना फीस, हॉस्टल फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बॉन्ड की अवधि, बॉन्ड पेनल्टी और स्टाइपेंड जैसी सभी जानकारी जरूर देख लें. बाद में इन नियमों की वजह से परेशानी हो सकती है.&amp;nbsp;
4. कैटेगरी से जुड़ी जानकारी सही भरें - अगर आप EWS, SC, ST, OBC या PwD कैटेगरी का फायदा लेना चाहते हैं तो आपके पास वैध प्रमाण पत्र होना जरूरी है. गलत जानकारी या अमान्य प्रमाण पत्र मिलने पर आपका दावा रद्द हो सकता है.&amp;nbsp;
5. सभी डॉक्यूमेंट्स की जानकारी मिलाएं - NEET स्कोरकार्ड, आधार कार्ड, 10वीं-12वीं की मार्कशीट और बाकी डॉक्यूमेंट्स में नाम, जन्मतिथि, जेंडर और कैटेगरी जैसी जानकारी एक जैसी होनी चाहिए. कोई भी फॉर्म भरने से पहले सभी विवरण ध्यान से जांच लें.&amp;nbsp;
6. रिपोर्टिंग में देरी न करें - सीट मिलने के बाद तय समय के अंदर कॉलेज में रिपोर्ट करना जरूरी है. अगर उम्मीदवार समय पर रिपोर्ट नहीं करता तो उसकी सीट रद्द हो सकती है और आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
7. सीट छोड़ने से पहले नियम जरूर समझें - अगर किसी उम्मीदवार को सीट मिल जाती है लेकिन वह बाद में उसे छोड़ देता है, तो कई राज्यों में सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त होने, जुर्माना लगने या अगले राउंड में रोक जैसी कार्रवाई हो सकती है. इसलिए सीट छोड़ने से पहले MCC और संबंधित राज्य के नियम जरूर पढ़ लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>NEET PG 2026 : NEET PG 2026: एग्जाम टाइमिंग और पैटर्न दोनों बदले, जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET PG 2026 : NEET-PG 2026 की तैयारी कर रहे लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए इस बार कई बड़े बदलाव किए गए हैं. परीक्षा से ठीक पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे नए नियम लागू किए हैं, जिनका मकसद परीक्षा प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और उम्मीदवारों के लिए सुविधाजनक बनाना है. अब छात्रों को परीक्षा केंद्र के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा, परीक्षा शहर की जानकारी पहले से मिल जाएगी और हर सवाल को हल करने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा समय भी मिलेगा. इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया गया है. तो आइए जानते हैं कि NEET-PG 2026 में इस बार क्या-क्या बदलाव किए गए हैं.&amp;nbsp;
परीक्षा से पहले सरकार ने किए बड़े बदलाव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 30 अगस्त 2026 को होने वाली NEET-PG परीक्षा से पहले नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है. इन बदलावों का उद्देश्य परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाना है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने NEET-PG 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के निर्देश दिए. उन्होंने NBEMS, तकनीकी टीम और अन्य एजेंसियों के साथ तैयारियों की समीक्षा भी की. इस साल NEET-PG 2026 के लिए कुल 2,73,183 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5 प्रतिशत से ज्यादा है.&amp;nbsp;
अब घर के पास मिलेगा परीक्षा केंद्र
इस बार परीक्षा केंद्र आवंटन की प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है. पहले परीक्षा केंद्र पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए जाते थे. इससे देर से आवेदन करने वाले कई उम्मीदवारों को दूसरे राज्यों में जाकर परीक्षा देनी पड़ती थी. अब नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवार परीक्षा केंद्र के लिए तीन पसंदीदा राज्यों का चयन कर सकेंगे. इसमें अपने राज्य को पहली प्राथमिकता देना जरूरी होगा. मंत्रालय का कहना है कि इससे उम्मीदवारों को उनके घर के नजदीक परीक्षा केंद्र मिलने की संभावना बढ़ेगी और बिना जरूरत के यात्रा से राहत मिलेगी.&amp;nbsp;
परीक्षा शहर की जानकारी पहले मिलेगी
एक और बड़ा बदलाव परीक्षा शहर की जानकारी को लेकर किया गया है. अब उम्मीदवारों को परीक्षा से लगभग तीन हफ्ते पहले ही यह बता दिया जाएगा कि उनका परीक्षा शहर कौन-सा होगा. पहले यह जानकारी परीक्षा से कुछ दिन पहले मिलती थी, जिससे यात्रा और रहने की व्यवस्था करने में परेशानी होती थी. नई व्यवस्था से उम्मीदवार समय रहते अपनी पूरी योजना बना सकेंगे.&amp;nbsp;
बदला परीक्षा पैटर्न
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने परीक्षा पैटर्न में भी बदलाव किया है. अब परीक्षा में 180 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिन्हें हल करने के लिए 210 मिनट का समय मिलेगा. &amp;nbsp;पहले परीक्षा में 200 प्रश्न होते थे और कुल अंक 800 तय थे. हालांकि परीक्षा की कुल अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अब प्रश्नों की संख्या कम होने से उम्मीदवारों को हर सवाल हल करने के लिए पहले से ज्यादा समय मिलेगा.
इस बार एक ही शिफ्ट में होगी परीक्षा
पिछले कुछ सालों में अलग-अलग परिस्थितियों के कारण NEET-PG परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित की गई थी, लेकिन इस बार परीक्षा सिर्फ एक शिफ्ट में कराई जाएगी. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, एक ही शिफ्ट में परीक्षा होने से सभी उम्मीदवारों को समान मुश्किल स्तर का प्रश्नपत्र मिलेगा.&amp;nbsp;
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सुरक्षा व्यवस्था को बनाया गया और मजबूत
सरकार ने इस बार परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से ज्यादा मजबूत किया है आवेदन प्रक्रिया से लेकर परीक्षा के दिन तक आधार आधारित वेरिफिकेशन किया जाएगा. अगर किसी उम्मीदवार की पहचान फिंगरप्रिंट से नहीं हो पाती है तो आइरिस बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए पहचान की जाएगी.&amp;nbsp;
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए कई स्तर की एन्क्रिप्शन तकनीक, सुरक्षित ऑफलाइन तैयारी और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले नियंत्रित डिजिटल डिस्क्रिप्शन की व्यवस्था की गई है. मंत्रालय ने साफ किया है कि प्रश्नपत्र पहले से लीक होने का कोई भी दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है.&amp;nbsp;
नकल और फर्जीवाड़े पर रहेगी कड़ी नजर
NBEMS ने नकल, फर्जी उम्मीदवार या किसी भी तरह की अनियमित गतिविधि की शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग ईमेल सुविधा भी शुरू की है. इसके साथ ही उम्मीदवारों को लगातार जागरूक करने के लिए एडवाइजरी जारी की जा रही है. NEET-PG 2026 परीक्षा देश के करीब 340 शहरों में स्थित 1,300 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी. परीक्षा संचालन के लिए 60 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी. परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, उम्मीदवारों की जांच, सिग्नल जैमर, सुरक्षित कंप्यूटर आवंटन और लाइव मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>DU के वन ईयर PG कोर्स में एडिट विंडो खुली, आज रात तक करें बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के वन ईयर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को अपने फाॅर्म में सुधार का मौका दिया है. यूनिवर्सिटी ने एप्लीकेशन करेक्शन विंडो खोल दी है, जिसके जरिए पहले से रजिस्ट्रेशन कर चुके उम्मीदवार अपने आवेदन पत्र में निर्धारित डिटेल में बदलाव कर सकते हैं. यह सुविधा केवल 1 अगस्त 2026 को रात 11:59 बजे तक उपलब्ध रहेगी.
इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय समय के बाद किसी भी प्रकार के संशोधन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. ऐसे में उम्मीदवारों को लास्ट मिनट का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन &amp;nbsp;की जांच कर सभी जरूरी बदलाव कर लें. &amp;nbsp;
किन उम्मीदवारों को मिलेगी एडिट की सुविधा?
यह करेक्शन विंडो केवल उन अभ्यार्थियों के लिए उपलब्ध है, जिन्होंने फेज-1 और फेज-2 की आवेदन प्रक्रिया समय सीमा के अंदर पूरी कर ली थी. जिन उम्मीदवारों ने 31 जुलाई तक सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन किया, वही अपने आवेदन में संशोधन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
किन जानकारियों में कर सकेंगे बदलाव?
यूनिवर्सिटी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार उम्मीदवार अपने आवेदन पत्र में केवल उन्हीं विवरण में बदलाव कर सकेंगे, जिनकी एडिट की अनुमति दी गई है. इसमें मुख्य रूप से पर्सनल जानकारी और एकेडमिक जानकारी शामिल है. आवेदन जमा करने से पहले सभी जानकारी एक बार अच्छी तरह जान लेने की सलाह दी गई है, क्योंकि इसके बाद संशोधन का कोई और अवसर मिलने की संभावना नहीं है.&amp;nbsp;
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संशोधित सीट मैट्रिक्स भी जारी
करेक्शन विंडो के साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 1 ईयर पीजी प्रोग्राम्स के लिए संशोधित सीट मैट्रिक्स भी जारी कर दी है. &amp;nbsp;इसमें अलग-अलग पाठ्यक्रम के लिए कैटेगरी वाइज सीटों की अध्ययन जानकारी उपलब्ध कराई गई है. यूनिवर्सिटी के अनुसार एमए इंग्लिश, एमए पॉलिटिकल साइंस, &amp;nbsp;एमकॉम, एमएससी कंप्यूटर साइंस और एमएससी मैथमेटिक्स जैसे प्रमुख पाठ्यक्रमों में अनारक्षित वर्ग के लिए 49-49 सीटें उपलब्ध है. इसके अलावा आरक्षण नीति के अनुसार ओबीसी एनसीएल, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी के लिए भी सीटें निर्धारित की गई है.&amp;nbsp;
ऐसे करें आवेदन में सुधार&amp;nbsp;

आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए सबसे पहले डीयू की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं&amp;nbsp;
इसके बाद पोर्टल पर 1 ईयर पीजी एडमिशन 2026-27 लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
इसके बाद पीजी 1 ईयर ऑप्शन चुनकर अपनी आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें.&amp;nbsp;
लॉगिन करने के बाद डैश बोर्ड में उपलब्ध एडिट एप्लीकेशन फॉर्म ऑप्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
जिन डिटेल में संशोधन की अनुमति है, उनमें आवश्यक बदलाव करें.
सभी जानकारी दोबारा चेक करने के बाद आवेदन सबमिट करें और कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>के, वन, ईयर, कोर्स, में, एडिट, विंडो, खुली, आज, रात, तक, करें, बदलाव</media:keywords>
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        <title>Delhi Vidya Vahini Scheme: दिल्ली की छात्राओं को कैसे मिलेगी फ्री साइकिल, कहां करना होगा अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi Vidya Vahini Scheme: दिल्ली में रहने वाली सरकारी स्कूल की छात्राओं के लिए एक बहुत अच्छी खबर है. दिल्ली सरकार ने बेटियों की पढ़ाई को आसान बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक शानदार कदम उठाया है. दिल्ली सरकार ने विद्या वाहिनी योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों की करीब 1.40 लाख छात्राओं को मुफ्त साइकिलें दी जा रही हैं.
इस योजना के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें अब तक 3,000 छात्राओं को साइकिल बांटी जा चुकी है. बाकी बची छात्राओं को भी जल्द ही इसका लाभ मिलेगा. इस योजना की घोषणा के बाद से ही छात्राओं और उनके माता-पिता के मन में कई सवाल हैं, जैसे कि इसके लिए योग्यता क्या है और आवेदन कहां करना होगा. तो आइए जानते हैं कि इस पूरी योजना की प्रक्रिया के बारे में.&amp;nbsp;
किन छात्राओं को मिलेगा इस योजना का लाभ?
इस योजना का फायदा उठाने के लिए दिल्ली सरकार ने कुछ आसान नियम और शर्तें तय की हैं. यह मुफ्त साइकिल योजना मुख्य रूप से 9वीं कक्षा में पढ़ रही छात्राओं के लिए है. साथ ही छात्रा दिल्ली के किसी भी सरकारी स्कूल या सरकार से मदद प्राप्त स्कूल की नियमित छात्रा होनी चाहिए. हालांकि, प्राइवेट स्कूल की लड़कियां इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगी. इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्रा दिल्ली की स्थायी निवासी होनी चाहिए.&amp;nbsp;
आवेदन कैसे करें?
अक्सर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं या ऑनलाइन फॉर्म भरने पड़ते है. लेकिन इस योजना में ऐसा कुछ नहीं करना पड़ेगा. छात्राओं या उनके अभिभावकों को साइकिल के लिए किसी भी बाहरी वेबसाइट या दफ्तर में जाकर आवेदन करने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि स्कूल का प्रशासन और प्रिंसिपल खुद अपने स्कूल की 9वीं कक्षा में पढ़ रही सभी पात्र छात्राओं की एक लिस्ट तैयार करेगें. फिर यह लिस्ट स्कूल की तरफ से सीधे दिल्ली के शिक्षा निदेशालय को भेज दी जाएगी, जहां से साइकिलों के वितरण को मंजूरी मिलती है.&amp;nbsp;
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वेरिफिकेशन के लिए जरुरी दस्तावेज
भले ही आपको कोई नया फॉर्म नहीं भरना है, लेकिन जब स्कूल में साइकिल बांटी जाएगी तब पहचान और वेरिफिकेशन के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरुरत पड़ेगी. जैसे कि छात्रा का स्कूल आईडी कार्ड, छात्रा का आधार कार्ड या दिल्ली का कोई निवास प्रमाण पत्र और 9वीं कक्षा में एडमिशन का सबूत. दिल्ली सरकार ने बजट में इस योजना के लिए 90 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पास किया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन बेटियों की मदद करना है जिन्हें घर से स्कूल दूर होने की वजह से आने-जाने में परेशानी होती थी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Delhi, Vidya, Vahini, Scheme:, दिल्ली, की, छात्राओं, को, कैसे, मिलेगी, फ्री, साइकिल, कहां, करना, होगा, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>NEET UG Counselling 2026 शेड्यूल जारी, 5 अगस्त से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन</title>
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        <description><![CDATA[ 
NEET UG Counselling Schedule Released: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने नीट यूजी 2026 काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया है. &amp;nbsp;एमसीसी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार पहले राउंड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू होंगे, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 अगस्त निर्धारित की गई है. यह काउंसलिंग 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा और एमसीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाली दूसरी सीटों पर एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित की जाएगी. उम्मीदवार 5 अगस्त से एमसीसी की ऑफिशियल काउंसलिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे. एमसीसी के अनुसार काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी.
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नीट यूजी काउंसलिंग के पहले राउंड का पूरा शेड्यूल&amp;nbsp;
काउंसलिंग राउंड &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;रजिस्ट्रेशन शुरू &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; सीट अलॉटमेंट रिजल्ट&amp;nbsp;&amp;nbsp;राउंड-1 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 5 अगस्त 2026 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 12 अगस्त 2026&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 17 अगस्त 2026&amp;nbsp;राउंड-2 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;25 अगस्त 2026 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;29 अगस्त 2026 (दोपहर 03:00 बजे तक)&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 02 सितंबर 2026&amp;nbsp;राउंड-3 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;11 सितंबर 2026 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 15 सितंबर 2026 (दोपहर 03:00 बजे तक)&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;18 सितंबर 2026
ऑनलाइन स्ट्रे वैकेंसी राउंड &amp;nbsp; 28 सितंबर 2026 &amp;nbsp; &amp;nbsp; 30 &amp;nbsp;सितंबर 2026 &amp;nbsp;(दोपहर 03:00 बजे तक)&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
कौन-कौन ले सकता है काउंसलिंग में हिस्सा?&amp;nbsp;
काउंसलिंग में वहीं उम्मीदवार शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने नीट यूजी 2026 परीक्षा उत्तीर्ण की हो और एमबीबीएस, बीडीएस या बीएससी नर्सिंग में एडमिशन के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हो. इसके अलावा संबंधित पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित क्वालीफाइंग परसेंटाइल, दूसरे एडमिशन मानदंडों और समय सीमा के अंदर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना भी आवश्यक होगा. एमसीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो उम्मीदवार राज्य कोटा की सीटों पर एडमिशन लेना चाहते हैं, उन्हें संबंधित राज्य की काउंसलिंग प्राधिकरण के पोर्टल पर अलग आवेदन करना होगा.
ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;

उम्मीदवार सबसे पहले एमसीसी के ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in पर जाए.
इसके बाद नीट यूजी काउंसलिंग 2026 रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें.
अब नीट यूजी आवेदन डिटेल की मदद से लॉगिन करें और काउंसलिंग फीस की पेमेंट करें.
इसके बाद पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल भरें.
अब डॉक्यूमेंट अपलोड करें और अपनी पसंद के कॉलेज व कोर्स प्राथमिक क्रम में चुने.
सभी ऑप्शन सावधानी पूर्वक भरने के बाद अंतिम तिथि से पहले उन्हें लॉक कर आवेदन सबमिट करना होगा.

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काउंसलिंग के दौरान किन डॉक्यूमेंट की होगी जरूरत&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया के दौरान नीट यूजी 2026 का स्कोर कार्ड और एडमिट कार्ड, कक्षा 10 की &amp;nbsp;मार्कशीट, कक्षा 12 की मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट, वैलिड फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, आरक्षण प्रमाण पत्र, पीडब्ल्यूबीडी प्रमाण पत्र, डोमिसाइल प्रमाण पत्र और एमसीसी या संबंधित संस्थान की ओर मांगे गए दूसरे डॉक्यूमेंट तैयार रखने होंगे. प्रवेश के समय सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा.
सीट अलॉटमेंट से पहले क्या होगा?
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को कॉलेज और कोर्स के ऑप्शन भरने तथा उन्हें लॉक करने का मौका दिया जाएगा. ऑप्शन का क्रम सीट आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इन्हें सोच समझकर भरना होगा. चॉइस फिलिंग पूरी होने के बाद एमसीसी उम्मीदवारों की नीट रैंक कैटेगरी, आरक्षण नियम, सीटों की उपलब्धता और भरे गए ऑप्शन के आधार पर सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी करेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>August 2026 School Holiday List : अगस्त में कितने दिन रहेगी स्कूलों की छुट्टी, यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ August 2026 School Holiday List : अगस्त का महीना शुरू होते ही स्टूडेंट्स और पेरेंट्स की नजर सबसे पहले स्कूलों की छुट्टियों पर रहती है. इस महीने राष्ट्रीय पर्व, धार्मिक त्योहार और साप्ताहिक छुट्टी मिलाकर कई दिनों तक स्कूल बंद रह सकते हैं. हालांकि हर राज्य में छुट्टियों का कैलेंडर अलग हो सकता है. कई जगह स्थानीय त्योहारों और राज्य सरकार की अधिसूचनाओं के आधार पर अतिरिक्त &amp;nbsp;छुट्टी भी घोषित की जाती हैं. अगर आप पहले से पढ़ाई, यात्रा या किसी जरूरी काम की योजना बनाना चाहते हैं, तो अगस्त 2026 की छुट्टियों की लिस्ट जान लेना आपके लिए सही रहेगा. तो आइए जानते हैं कि अगस्त में कितने दिन स्कूलों की छुट्टी रहेगी.&amp;nbsp;
15 अगस्त को रहेगी स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी
अगस्त की सबसे बड़ी छुट्टी 15 अगस्त 2026 (शनिवार) को होगी. इस दिन पूरा देश 80 वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. स्कूलों में ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए जाएंगे. सरकारी और निजी संस्थानों में भी छुट्टी रहने की संभावना है. अंतिम निर्णय संबंधित राज्य और स्कूल प्रशासन की अधिसूचना के अनुसार होगा.
26 अगस्त को मिलाद-उन-नबी पर बंद रह सकते हैं स्कूल
26 अगस्त 2026 (बुधवार) को मिलाद-उन-नबी मनाया जाएगा. यह दिन पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर कई राज्यों में सरकारी कार्यालयों, बैंकों और स्कूलों में छुट्टी घोषित की जा सकती है. हालांकि सभी राज्यों में यह छुट्टी समान रूप से लागू हो, यह जरूरी नहीं है.&amp;nbsp;
28 अगस्त को रक्षाबंधन की छुट्टी
28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. कई राज्यों में इस अवसर पर स्कूलों में छुट्टी घोषित की जा सकती है.&amp;nbsp;
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अगस्त 2026 में साप्ताहिक छुट्टी कब-कब रहेगा?
त्योहारों के अलावा अगस्त में नियमित साप्ताहिक छुट्टियां भी रहेंगी. इस महीने 2, 9, 16, 23 और 30 अगस्त को रविवार होने के कारण स्कूल बंद रहेंगे. इसके अलावा कई स्कूलों में दूसरे और चौथे शनिवार को भी छुट्टी रहती है. इसलिए कुल छुट्टियों की संख्या संबंधित स्कूल के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
अगस्त में कितने दिन स्कूलों की छुट्टी पूरी लिस्ट

2 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक छुट्टी
9 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक छुट्टी
15 अगस्त (शनिवार) - स्वतंत्रता दिवस
16 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक छुट्टी
23 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक छुट्टी
26 अगस्त (बुधवार) - मिलाद-उन-नबी
28 अगस्त (शुक्रवार) - रक्षाबंधन
30 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक छुट्टी

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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>August, 2026, School, Holiday, List, अगस्त, में, कितने, दिन, रहेगी, स्कूलों, की, छुट्टी, यहां, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>तेलंगाना पुलिस में 7437 पदों पर भर्ती, कॉन्स्टेबल से लेकर SI तक निकली वैकेंसी</title>
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        <description><![CDATA[ Telangana Police Vacancy: तेलंगाना स्टेट लेवल पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड (TSLPRB) ने 2026 की बड़ी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 7,437 पदों पर नियुक्ति की जाएगी. भर्ती में सब इंस्पेक्टर, पुलिस कांस्टेबल, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, स्टेशन फायर ऑफिसर, डिप्टी जेलर, वार्डर, ड्राइवर और मैकेनिक सहित कई पद शामिल है. हालांकि बोर्ड ने अभी ऑनलाइन आवेदन की तारीखों की घोषणा नहीं की है. आवेदन नोटिफिकेशन अलग से जारी किया जाएगा. &amp;nbsp;बोर्ड ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि आवेदन शुरू होने से पहले ऑफिशियल नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें और पात्रता, आयु सीमा व दूसरी शर्तों की जांच कर लें. आवेदन केवल टीएसएलपीआरबी की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे.&amp;nbsp;
किन-किन पदों पर होगी?
सब इंस्पेक्टर (SI) के पद

SCT सब इंस्पेक्टर (सिविल)- 148
रिजर्व सब-इंस्पेक्टर (AR) - 14 पद&amp;nbsp;
रिजर्व सब इंस्पेक्टर (SAR CPL) -3 पद&amp;nbsp;
रिजर्व सब इंस्पेक्टर (TGSP)-12
तेलंगाना स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स (SI)- 44 पद
स्टेशन फायर ऑफिसर- 39 पद&amp;nbsp;
डिप्टी जेलर (पुरुष)-14 पद
डिप्टी जेलर (महिला)- 1 पद&amp;nbsp;
कुल पद- 275

कॉन्स्टेबल के लिए सबसे ज्यादा वैकेंसी&amp;nbsp;

पुलिस कॉन्स्टेबल (सिविल)- 3,697 पद
पुलिस कॉन्स्टेबल (AR)- 1052 पद
पुलिस कॉन्स्टेबल (SAR CPL)- 24 पद&amp;nbsp;
तेलंगाना स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स कॉन्स्टेबल - 1,380
फायर फाइटर-751 पद&amp;nbsp;
वार्डर (पुरुष)- 196 पद
वार्डर (महिला)- 12 पद&amp;nbsp;
कुल पद-7,112&amp;nbsp;

ASI ड्राइवरी और मैकेनिक के पद भी शामिल&amp;nbsp;
इस भर्ती में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (फिंगरप्रिंट ब्यूरो) के 23 पद भी शामिल है. इसके अलावा पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) के 20 पद और कॉन्स्टेबल (मैकेनिक) के 7 पद यानी इन दोनों कैटेगरी में कुल 27 रिक्तियां भरी जाएंगी.&amp;nbsp;
कितना मिलेगा वेतन?&amp;nbsp;
सब इंस्पेक्टर पदों के लिए 43,300 से 1,15,270 रुपये तक का वेतनमान निर्धारित किया गया है. स्टेशन फायर ऑफिसर और डिप्टी जेलर के पदों पर 38,000 से 1,12,510 तक वेतन मिलेगा. वहीं पुलिस काॅन्स्टेबल फायर फाइटर, वार्डर, ड्राइवर और मैकेनिक के पदों का वेतनमान 24,280 रुपये से 72,850 रुपये तक तय किया गया है. असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के लिए 33,750 से 99,310 रुपये तक का वेतन मिलेगा.&amp;nbsp;
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आवेदन प्रक्रिया कैसे होगी?
ऑनलाइन आवेदन की तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी. आवेदन शुरू होने पर उम्मीदवारों को सबसे पहले अपने मोबाइल नंबर के जरिए टीएसएलपीआरबी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा कर पार्ट-1 आवेदन पत्र भरना होगा. सब इंस्पेक्टर पदों के लिए प्रारंभिक लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को पार्ट-2 आवेदन जमा करना होगा. वहीं ड्राइवर, मैकेनिक और एएसआई पदों के लिए प्रारंभिक लिखित परीक्षा नहीं होगी. इन पदों के अभ्यर्थी फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट से पहले पार्ट-2 आवेदन जमा करेंगे.&amp;nbsp;
आवेदन से पहले मेडिकल जांच की सलाह&amp;nbsp;
भर्ती बोर्ड में उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले किसी सिविल सर्जन से मेडिकल जांच कराने की सलाह दी है, ताकि वह निर्धारित फिजिकल और चिकित्सीय मानकों को पूरा करते हो, इससे भर्ती के अगले चरण में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकेगा.&amp;nbsp;
ये जरूरी डॉक्यूमेंट रखें तैयार&amp;nbsp;
ऑनलाइन आवेदन के दौरान और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय उम्मीदवारों को आवश्यक प्रमाण पत्र अपलोड और प्रस्तुत करने होंगे. इनमें जाति प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र, स्थानीय उम्मीदवार से जुड़े दस्तावेज और अन्य विशेष श्रेणी के प्रमाण पत्र शामिल है.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>देश के 344 केंद्रीय विद्यालयों में स्थायी प्रिंसिपल नहीं, कैसे होगी पढ़ाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-के-344-केंद्रीय-विद्यालयों-में-स्थायी-प्रिंसिपल-नहीं-कैसे-होगी-पढ़ाई</link>
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        <description><![CDATA[ देश के 344 केंद्रीय विद्यालयों में स्थायी प्रिंसिपल नहीं, कैसे होगी पढ़ाई? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देश, के, 344, केंद्रीय, विद्यालयों, में, स्थायी, प्रिंसिपल, नहीं, कैसे, होगी, पढ़ाई</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>UPSSSC एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट परीक्षा की एग्जाम सिटी स्लिप जारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upsssc-एग्रीकल्चर-टेक्निकल-असिस्टेंट-परीक्षा-की-एग्जाम-सिटी-स्लिप-जारी</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट ग्रुप सी भर्ती 2026 के लिए परीक्षा शहर जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों में इस भर्ती के लिए आवेदन किया है, वह आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाकर अपनी एग्जाम सिटी स्लिप डाउनलोड कर सकते हैं. यह परीक्षा 9 अगस्त 2026 को ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाएगी. आयोग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जारी की गई सिटी स्लिप में केवल परीक्षा शहर की जानकारी दी गई है. परीक्षा केंद्र का पूरा पता और दूसरी जरूरी डिटेल एडमिट कार्ड में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे परीक्षा से कुछ दिन पहले जारी किया जाएगा.&amp;nbsp;
2,759 पदों पर हो रही है भर्ती&amp;nbsp;
यह भर्ती अभियान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग में एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट ग्रुप के 2,759 रिक्त पदों को भरने के लिए चलाए जा रहा है. परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह समय रहते अपनी एग्जाम सिटी की जानकारी देख ले ताकि यात्रा और दूसरी व्यवस्था पहले से चेक कर सकें. &amp;nbsp;
सिटी स्लिप में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?&amp;nbsp;
यूपीएसएसएससी एजीटीए एग्जाम सिटी स्लिप में उम्मीदवारों को परीक्षा शहर से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई. इसमें अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम, आवेदन संख्या, जन्म तिथि, जेंडर कैटेगरी पीडब्ल्यूडी स्टेटस, परीक्षा की तारीख, परीक्षा शहर और शिफ्ट की जानकारी दर्ज होगी. हालांकि इसमें परीक्षा केंद्र का पूरा पता नहीं दिया गया है, यह जानकारी केवल एडमिट कार्ड में उपलब्ध होगी.&amp;nbsp;
कब जारी होगा एडमिट कार्ड?&amp;nbsp;
आयोग के नोटिस के अनुसार यूपीएसएसएससी एजीटीए एडमिट कार्ड परीक्षा से कुछ दिन पहले जारी किए जाने की संभावना है. &amp;nbsp;बताया जा रहा है कि एडमिट कार्ड 5 या 6 अगस्त तक उपलब्ध करा दिया जाएगा. उम्मीदवार अपने लोगिन क्रैडेंशियल्स की मदद से इसे डाउनलोड कर सकेंगे. एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र का पूरा पता, रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा दिन से जुड़े जरूरी निर्देश दिए जाएंगे. यूपीएसएसएससी एजीटीए मुख्य लिखित परीक्षा 9 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश &amp;nbsp;के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी. परीक्षा एक ही शिफ्ट में होगी. उम्मीदवारों को यह भी सलाह दी गई है कि वे एडमिट कार्ड जारी होने तक आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट पर नियमित रूप से नजर बनाए रखें.&amp;nbsp;
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कैसे डाउनलोड करें एग्जाम सिटी स्लिप?

सबसे पहले यूपीएसएसएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं.&amp;nbsp;
होमपेज पर यूपीएसएसएससी एजीटीए ग्रुप सी सिटी स्लिप के लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, पासवर्ड और सिक्योरिटी पिन दर्ज करें.&amp;nbsp;
सबमिट करते ही स्क्रीन पर एग्जाम सिटी स्लिप दिखाई देगी.&amp;nbsp;
इसे डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए प्रिंट निकालकर सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 15:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPSSSC, एग्रीकल्चर, टेक्निकल, असिस्टेंट, परीक्षा, की, एग्जाम, सिटी, स्लिप, जारी</media:keywords>
    </item>
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        <title>बाहर से दिल्ली आकर पढ़ना कितना महंगा, लोकल स्टूडेंट्स के मुकाबले कितना बढ़ रहा खर्च?</title>
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        <description><![CDATA[ Cost of Studying in Delhi: देश की राजधानी दिल्ली के डीयू जैसे बड़े कॉलेज में एडमिशन मिलना लाखों छात्रों का सपना होता है. हर साल बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए दूसरे राज्य और शहरों से दिल्ली आते हैं, लेकिन राजधानी में पढ़ाई का खर्च सिर्फ कॉलेज फीस तक सीमित नहीं रहता. हॉस्टल या पीजी का किराया, खाने पीने का खर्च, लोकल ट्रांसपोर्ट, ग्रोसरी, किताबें और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतें मिलकर सालाना बजट को काफी बढ़ा देती है. यही वजह है कि दिल्ली के बाहर से आने वाले छात्रों का कुल खर्च परिवार के साथ रहने वाले स्थानीय छात्रों की तुलना में कई गुना ज्यादा हो जाता है. रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले छात्र का सालाना खर्च करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि परिवार के साथ रहने वाले छात्र का खर्च करीब 70 हजार रुपये रहता है. यानी बाहर से आने वाले छात्र को स्थानीय छात्र की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा खर्च करना पड़ता है.&amp;nbsp;
बाहर वाले छात्रों का खर्च कहां होता है सबसे ज्यादा?&amp;nbsp;
रिपोर्ट के अनुसार बाहर से आने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ा खर्च रहने की व्यवस्था है. पीजी या किराए के कमरे में पर करीब 1.2 लाख रुपये सालाना खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट पर लगभग 18,000 रुपये, खाने पीने और दैनिक जरूरत पर 50 से 60 रुपये, &amp;nbsp;रोजमर्रा के अन्य खर्च पर करीब 24 हजार रुपये, &amp;nbsp;कॉलेज फीस पर लगभग 60 हजार रुपये, &amp;nbsp;किताबें और स्टेशनरी पर करीब 4 हजार रुपये तक खर्च आता है. यानी पढ़ाई की फीस के अलावा रहने और रोजाना की जरूरत का खर्च कुल बजट का बड़ा हिस्सा होता है.&amp;nbsp;
लोकल छात्रों का खर्च काफी कम&amp;nbsp;
वहीं दूसरी ओर जो छात्र अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं, उनके लिए खर्च का स्वरूप अलग होता है. परिवार के साथ रहने वाले छात्रों को पीजी या किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता. उनका मुख्य खर्च कॉलेज फीस, आने जाने का किराया, किताबें और स्टेशनरी तक सीमित रहता है. एक अनुमान के अनुसार परिवार के साथ रहने वाले छात्र का कुल सालाना खर्च करें 70 हजार रुपये रहता है, जो बाहर से आने वाले छात्रों के मुकाबले बहुत कम है.
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रहने का खर्च सबसे बड़ा करण&amp;nbsp;
राजधानी दिल्ली में कॉलेज फीस बाहर से आने वाले छात्रों और यहां के लोकल छात्रों के लिए लगभग समान होती है. लेकिन बाहर से आने वाले छात्रों के लिए आवास, भोजन और रोजमर्रा के खर्च कुल बजट को काफी बढ़ा देते हैं. यह वजह है कि दिल्ली में पढ़ाई का वास्तविक खर्च केवल कॉलेज फीस से तय नहीं होता, बल्कि रहने की व्यवस्था और लाइफस्टाइल भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है.&amp;nbsp;
किन चीजों पर सबसे ज्यादा होता है खर्च?
दिल्ली से बाहर के छात्रों के लिए कुल खर्च का बड़ा हिस्सा पीजी या किराए का मकान, खाना और ग्रोसरी, लोकल ट्रांसपोर्ट, बिजली, इंटरनेट और दूसरे रोजाना के खर्चे, कॉलेज फीस, किताबें और स्टेशनरी पर होता है. वहीं परिवार के साथ रहने वाले छात्रों का खर्च मुख्य रूप से कॉलेज की फीस लोकल ट्रांसपोर्ट और किताबों तक सीमित रहता है.
वास्तविक खर्च इससे भी ज्यादा&amp;nbsp;
यह हनुमान केवल नियमित शैक्षणिक और रहने के खर्चे पर आधारित है. इसमें कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, &amp;nbsp;लैपटॉप खरीदना, सिक्योरिटी डिपॉजिट, ट्रांसफर, मेडिकल खर्च, दूसरे एकमुश्त खर्च शामिल नहीं है. ऐसे में कई छात्रों का वास्तविक सालाना बजट इससे भी ज्यादा हो सकता है. इसके अलावा कॉलेज, कोर्स, इलाके, रहने की जगह और हर किसी के खर्च करने के तरीके के आधार पर भी यह खर्च अलग-अलग हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 15:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रेलवे ग्रुप D परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, 3 अगस्त से शुरू होगी CBT</title>
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        <description><![CDATA[ Railway Jobs: रेलवे भर्ती बोर्ड ने ग्रुप डी भर्ती 2026 के तहत लेवल 1 कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के लिए एडमिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 3 अगस्त 2026 को परीक्षा देने वाले उम्मीदवार अपना हॉल टिकट अधिकारिक उम्मीदवार लॉगिन पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं. परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड की प्रिंटेड कॉपी और एक वैलिड फोटो पहचान पत्र साथ ले जाना अनिवार्य होगा. इस भर्ती अभियान के तहत भारतीय रेलवे 32,438 लेवल-1 पदों पर भर्ती की जाएगी. इनमें पॉइंट्समैन, ट्रैक मेंटेनर, असिस्टेंट, असिस्टेंट लोको शेड, असिस्टेंट ऑपरेशंस और असिस्टेंट टीएल और एसी जैसे पद शामिल है. इस भर्ती के लिए देशभर से करीब 58 लाखो उम्मीदवारों के परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
3 अगस्त से शुरू होगी परीक्षा&amp;nbsp;
आरआरबी ग्रुप डी लेवल-1 सीबीटी का आयोजन 3 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक देश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा. परीक्षा कई चरणों में और तीन शिफ्टों में आयोजित होगी. यह परीक्षा 3, 4, 5, 6, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 17, 18, 19, 20, 21 और 25 अगस्त को आयोजित होगी. पहली शिफ्ट की परीक्षा सुबह 8:30 से 10:30 बजे तक, दूसरी शिफ्ट की परीक्षा 11:30 से दोपहर 1:00 बजे तक और तीसरी शिफ्ट की परीक्षा दोपहर 2:30 से 4:00 बजे तक आयोजित होगी. वहीं आरआरबी पहले ही पहले चरण के उम्मीदवारों के लिए एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर चुका है.&amp;nbsp;
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एडमिट कार्ड में क्या-क्या होगा?
उम्मीदवार अपना एडमिट कार्ड आरआरबी के आधिकारिक उम्मीदवार लॉगिन पोर्टल या संबंधित क्षेत्रीय आरआरबी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि या पासवर्ड की आवश्यकता होगी. एडमिट कार्ड में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, परीक्षा की तारीख, शिफ्ट, रिपोर्टिंग टाइम, परीक्षा केंद्र का एड्रेस और परीक्षा दिन से जुड़े जरूरी निर्देश दिए जाएंगे. एडमिट कार्ड केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, इसे डाक या ईमेल के माध्यम से नहीं भेजा जाएगा. इसके अलावा उम्मीदवारों को यह भी सलाह दी गई है कि डाउनलोड करने के बाद एडमिट कार्ड में दर्ज सभी जानकारी की अच्छी तरह जांच कर लें. अगर किसी प्रकार की गलती दिखाई दें, तो परीक्षा से पहले संबंधित क्षेत्रीय आरआरबी से कांटेक्ट करें.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड&amp;nbsp;

सबसे पहले आरआरबी की ऑफिशियल या संबंधित क्षेत्रीय वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाए.
अब आरआरबी ग्रुप डी एडमिट कार्ड 2026 लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
उसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि या पासवर्ड दर्ज करें.&amp;nbsp;
अगर कैप्चा मांगा जाए तो उसे भरकर सबमिट करें.
अब स्क्रीन पर एडमिट कार्ड दिखाई देगा, उसे डाउनलोड करके प्रिंट निकाल लें.

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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रेलवे, ग्रुप, परीक्षा, के, एडमिट, कार्ड, जारी, अगस्त, से, शुरू, होगी, CBT</media:keywords>
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    <item>
        <title>यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती का रिजल्ट जारी, 74184 अभ्यर्थी पास; देखें कटऑफ</title>
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        <description><![CDATA[ UP Police Constable Result:&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2026 की लिखित परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी ऑफिशिल वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट और मेरिट लिस्ट देख सकते हैं. इस भर्ती के तहत 32,679 कांस्टेबल पदों पर नियुक्तियां की जानी है. भर्ती बोर्ड ने इस बार कुल 74,184 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया है. यह संख्या कुल व्यक्तियों के मुकाबले करीब 2.33 गुना बताई जा रही है.
बोर्ड ने कैटिगरी वाइज कट ऑफ भी जारी कर दी है, जिसके आधार पर उम्मीदवारों का चयन अगले चरण के लिए किया जाएगा. लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को अब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण यानी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, शारीरिक मानक परीक्षण और इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होना होगा.&amp;nbsp;
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8 से 10 जून तक हुई थी परीक्षा&amp;nbsp;
यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून 2026 को छह पारियों में ऑफलाइन ओएमआर मोड में आयोजित की गई. परीक्षा में 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे गए, जो कुल 300 अंकों के थे. प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.5 अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू थी. परीक्षा के बाद बोर्ड ने प्रोविजनल आंसर की जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्ति मांगी थी. एक्सपर्ट्स की ओर से आपत्तियां की समीक्षा करने के बाद अंतिम आंसर की तैयार की गई और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिजल्ट घोषित किया गया.
यूपी पुलिस कांस्टेबल की कैटेगरी वाइज कट ऑफ&amp;nbsp;
कैटेगरी &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;सामान्य कट ऑफ &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; महिला कट ऑफ
अनारक्षित (UR) &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 258.03661&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 255.84346ईडब्ल्यूएस&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 247.9334 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 247.35926ओबीसी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 251.63020&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;249.27083एसी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;239.34407&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;236.31995एसटी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;220.10639&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;211.47988
रिजल्ट में क्या होगा और DV, PST और &amp;nbsp;PET कब होगी?
रिजल्ट देखने के बाद अभ्यर्थियों को अपने स्टेटस में डीवी-पीएसटी के लिए चयनित कट ऑफ से कम अंक होने के कारण चयनित नहीं, न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक प्राप्त नहीं किए और लिखित परीक्षा में अनुपस्थित जैसे स्टेटस दिखाई देगा. &amp;nbsp;वहीं भर्ती बोर्ड के अनुसार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और शारीरिक मानक परीक्षण की प्रक्रिया 17 अगस्त 2026 से प्रस्तावित है. परीक्षा केंद्र, तिथि और समय से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी की जाएगी. इसके बाद &amp;nbsp;DV और PST में सफल उम्मीदवारों के लिए फिजिकल दक्षता परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है. इसकी अलग से विस्तृत समय सारणी जारी की जाएगी.
फिजिकल टेस्ट के लिए जरूरी मानक&amp;nbsp;

फिजिकल टेस्ट के दौरान पुलिस और महिला अभ्यर्थियों को निर्धारित फिजिकल मानकों को पूरा करना होगा. सामान्य ओबीसी और एससी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम लंबाई 168 सेंटीमीटर, जबकि एसटी वर्ग के लिए 160 सेमी निर्धारित है.
सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम लंबाई 152 सेमी और एसटी वर्ग के लिए 147 सेंटीमीटर तय की गई है.
पुरुष अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 5 सेंटीमीटर छाती का फैलाव अनिवार्य होगा, जबकि महिला अभ्यर्थियों का न्यूनतम वजन 40 किलोग्राम होना चाहिए.
पीईटी में पुरुष अभ्यर्थियों को 25 मिनट में 4.8 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों को 14 मिनट में 2.4 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी.

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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, पुलिस, कांस्टेबल, भर्ती, का, रिजल्ट, जारी, 74184, अभ्यर्थी, पास, देखें, कटऑफ</media:keywords>
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        <title>SBI PO परीक्षा 1 अगस्त से, एग्जाम सेंटर जाने से पहले पढ़ लें ये जरूरी गाइडलाइंस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sbi-po-परीक्षा-1-अगस्त-से-एग्जाम-सेंटर-जाने-से-पहले-पढ़-लें-ये-जरूरी-गाइडलाइंस</link>
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        <description><![CDATA[ SBI PO Exam 2026: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से प्रोबेशनरी ऑफिसर प्रीलिम्स परीक्षा 2026 का आयोजन 1 और 2 अगस्त को देशभर के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा. इस भर्ती अभियान के तहत 1500 प्रोबेशनरी ऑफिसर पदों पर नियुक्ति की जाएगी. परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह एग्जाम सेंटर जाने से पहले अपने एडमिट कार्ड में दर्ज सभी जानकारी को ध्यान से जांच लें. खासतौर पर रिपोर्टिंग टाइम, परीक्षा की शिफ्ट, परीक्षा केंद्र का पता, और दूसरी जरूरी निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा.&amp;nbsp;
SBI PO प्रीलिम्स 2026 चार शिफ्टों में होगी परीक्षा&amp;nbsp;
SBI PO प्रीलिम्स परीक्षा 4 शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. उम्मीदवारों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा, क्योंकि तय समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा.&amp;nbsp;
शिफ्ट- 1&amp;nbsp;
रिपोर्टिंग टाइम- सुबह 8:00 बजे&amp;nbsp;परीक्षा का समय- सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक&amp;nbsp;
शिफ्ट-2&amp;nbsp;
रिपोर्टिंग टाइम- सुबह 10:30 बजे&amp;nbsp;परीक्षा का समय- सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक&amp;nbsp;
शिफ्ट-3&amp;nbsp;
रिपोर्टिंग टाइम- दोपहर 1:00 बजेपरीक्षा का समय- दोपहर 2:00 से 3:00 बजे तक&amp;nbsp;
शिफ्ट-4&amp;nbsp;
रिपोर्टिंग टाइम- शाम 3:30 बजे&amp;nbsp;परीक्षा का समय- शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र पर कौन से डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी?&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए उम्मीदवार के पास एसबीआई पीओ प्रीलिम्स 2026 का प्रिंटेड एडमिट कार्ड, मूल फोटो पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस में कोई एक) और हाल की पासपोर्ट साइज फोटो जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी है. इन डॉक्यूमेंट के बिना उम्मीदवार को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
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एग्जाम सेंटर पर इन नियमों का रखें ध्यान&amp;nbsp;
एसबीआई ने परीक्षा के दिन उम्मीदवारों के लिए कुछ जरूरी दिशा निर्देश भी जारी किए हैं. सभी अभ्यर्थियों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा और केवल जरूरी डॉक्यूमेंट ही साथ लेकर जाने होंगे. परीक्षा के दौरान उम्मीदवार को केवल अपनी आवंटित सीट पर ही बैठना होगा और परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षक के सभी निर्देशों का पालन करना होगा&amp;nbsp;
ये सामान ले जाने की अनुमति नहीं&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्र के अंदर किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की परमिशन नहीं है. उम्मीदवार अपने साथ मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ डिवाइस और दूसरे अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं ले जा सकेंगे. इसके अलावा किताबें, नोटिस या किसी भी प्रकार की अध्ययन सामग्री भी परीक्षा केंद्र में प्रतिबंधित रहेगी.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, परीक्षा, अगस्त, से, एग्जाम, सेंटर, जाने, से, पहले, पढ़, लें, ये, जरूरी, गाइडलाइंस</media:keywords>
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        <title>ISRO में 410 अप्रेंटिस पदों पर आवेदन शुरू, 29 अगस्त तक करें आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isro-में-410-अप्रेंटिस-पदों-पर-आवेदन-शुरू-29-अगस्त-तक-करें-आवेदन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/isro-में-410-अप्रेंटिस-पदों-पर-आवेदन-शुरू-29-अगस्त-तक-करें-आवेदन</guid>
        <description><![CDATA[ ISRO Apprentice Recruitment 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2026 के लिए अप्रेंटिस भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के तहत बेंगलुरू स्थित यू. आर. राव सैटलाइट सेंटर में कुल 410 अप्रेंटिस पदों पर नियुक्ति की जाएगी. इच्छुक और एलिजिबल उम्मीदवार नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 29 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकेंगे. यह भर्ती ग्रेजुएट, टेक्नीशियन और कमर्शियल अप्रेंटिस के पदों के लिए निकली गई है. चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के दौरान हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाएगा.
410 पदों पर भर्ती और स्टाइपेंड&amp;nbsp;
इसरो की इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 410 पद भरे जाएंगे. ये रिक्तियां तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटी गई है. इनमें सबसे ज्यादा पद ग्रेजुएट अप्रेंटिस के लिए है. ग्रेजुएट अप्रेंटिस के लिए 220 पद निश्चित है. वहीं टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए 120 पद और कमर्शियल अप्रेंटिस के लिए 70 पद निश्चित है. अप्रेंटिसशिप के दौरान चयनित उम्मीदवारों को हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाएगा. ग्रेजुएट अप्रेंटिस को 12, 300 रुपये प्रतिमाह, टेक्नीशियन अप्रेंटिस को 10,900 रुपये प्रति महीना और कमर्शियल अप्रेंटिस को 10, 900 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाएगा&amp;nbsp;
मेरिट के आधार पर होगा चयन&amp;nbsp;
इसरो ने स्पष्ट किया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा नहीं होगी. उम्मीदवारों का चयन उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किया जाएगा. सबसे पहले डिग्री या डिप्लोमा में प्राप्त अंकों के आधार पर उम्मीदवारों की शाॅर्ट लिस्ट तैयार की जाएगी. शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. वहीं डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद अंतिम मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी. संगठन ने यह भी बताया है कि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए आने वाले उम्मीदवारों को किसी प्रकार का यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा.&amp;nbsp;
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आवेदन के लिए जरूरी तारीखें और जानकारी&amp;nbsp;
ISRO में अप्रेंटिस के पदों पर ऑनलाइन आवेदन 29 जुलाई से शुरू हो चुके हैं. यह आवेदन प्रक्रिया 29 अगस्त तक चलेगी. वहीं उम्मीदवारों को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है. इसके अलावा उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती नोटिफिकेशन में दी गई शैक्षणिक योग्यता, पात्रता, पदवार रिक्तियां और दूसरे नियमों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
ISRO में अप्रेंटिस के लिए ऐसे करें आवेदन&amp;nbsp;

इसरो अप्रेंटिस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले NATS पोर्टल पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद सबसे पहले यहां रजिस्ट्रेशन करें.
अब अप्रेंटिसशिप की लिस्ट में U. R Rao Satellite Centre (URSC), ISRO ऑप्शन चुनें.&amp;nbsp;
संबंधित अप्रेंटिस पदों का चयन कर आवेदन फॉर्म भरें.&amp;nbsp;
इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें.&amp;nbsp;
लास्ट में सभी जानकारी की जांच कर फॉर्म सबमिट कर दें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ISRO, में, 410, अप्रेंटिस, पदों, पर, आवेदन, शुरू, अगस्त, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>जर्मनी से करनी है पत्रकारिता? इन कॉर्सेज में लेना होगा एडमिशन, मिलेगी स्कॉलरशिप</title>
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        <description><![CDATA[ Journalism Study in Germany: हर साल लाखों भारतीय विदेश में पढ़ाई का सपना देखते हैं. इन्हीं स्टूडेंट में कई का सपना विदेश में जाकर पत्रकारिता की पढ़ाई करना भी होता है. वहीं विदेश में पत्रकारिता की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए जर्मनी भी अच्छा ऑप्शन बनकर सामने आया है. वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी, कम पढ़ाई का खर्च, स्कॉलरशिप और मजबूत मीडिया इंडस्ट्री के कारण हर साल बड़ी संख्या में छात्र जर्मनी का रुख कर रहे हैं.
खास बात यह है कि कई सरकारी यूनिवर्सिटीज में बैचलर स्तर के जर्नलिज्म और मीडिया कोर्स के लिए ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है. हालांकि छात्रों को रहने, खाने और दूसरे खर्चों का इंतजाम खुद करना होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर जर्मनी से पत्रकारिता करनी है, तो किन कोर्सेज में एडमिशन लेना होगा और स्कॉलरशिप कैसे मिलेगी.&amp;nbsp;
कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं&amp;nbsp;
जर्मनी में पत्रकारिता और मीडिया से जुड़े कई बैचलर प्रोग्राम उपलब्ध है. इनमें सबसे प्रमुख रूप से बैचलर इन जर्नलिज्म और बैचलर इन मीडिया शामिल है. इन कोर्स के दौरान छात्रों को जर्मनी में रिपोर्टिंग, न्यूज राइटिंग, जर्नलिज्म एथिक्स, मीडिया थ्योरी, एडिटिंग और अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है. वहीं मीडिया कोर्स में एडवर्टाइजमेंट, मार्केटिंग, डिजिटल मीडिया, वीडियो प्रोडक्शन और कम्युनिकेशन जैसे विषयों पर भी फोकस किया जाता है. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र रिपोर्टर, एडिटर, प्रोड्यूसर, न्यूज एंकर, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और मीडिया मैनेजर जैसी भूमिका में करियर बना सकते हैं. इसके अलावा जर्मनी में बैचलर इन जर्नलिज्म और मीडिया कोर्स की अवधि आमतौर पर 3 से 5 साल की होती है. ज्यादातर सरकारी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जर्मन भाषा में कराई जाती है, जबकि कुछ प्राइवेट इंस्टीट्यूट में अंग्रेजी मीडियम के कोर्स भी उपलब्ध है.&amp;nbsp;
एडमिशन के लिए कौन सी योग्यताएं जरूरी?
जर्मनी में बैचलर कोर्स में एडमिशन के लिए छात्रों का दसवीं, बारहवीं पास होना जरूरी है. कई यूनिवर्सिटी 12 से 13 साल की स्कूली शिक्षा या तैयारी कार्यक्रम को भी मान्यता देती है. ज्यादातर इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी माने जाते हैं, जबकि प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में अच्छे एकेडमिक रिकॉर्ड की आवश्यकता हो सकती है. इसके अलावा स्टूडेंट को स्टेटमेंट ऑफ परपज, पासपोर्ट, स्टूडेंट विजा, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और जरूरत पड़ने पर कैरक्टर सर्टिफिकेट या लेटर ऑफ रिकमेंडेशन भी जमा करना होता है.
एडमिशन के लिए कौन-कौन से एग्जाम देने होते हैं?
अगर कोर्स अंग्रेजी भाषा में है, तो IELTS या TOEFL स्कोर देना होता है. वहीं जर्मनी भाषा में पढ़ाई वाले कोर्स के लिए TestDaF या DSH परीक्षा पास करनी होती है. कुछ यूनिवर्सिटी अंडरग्रेजुएट ऐडमिशन के लिए टेस्ट TestAS मांगती है. इसके अलावा कुछ स्पेशल कोर्स के लिए GRE, GMAT, dMAT &amp;nbsp;की जरूरत पड़ सकती है. टेक्निकल बैचलर प्रोग्राम के लिए कुछ यूनिवर्सिटी भारतीय छात्रों को JEE Advanced स्कोर के आधार पर भी एडमिशन का मौका देती है.&amp;nbsp;
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जर्मनी में कितना आता है पढ़ाई का खर्च?
जर्मनी की ज्यादातर पब्लिक यूनिवर्सिटीज में पत्रकारिता की पढ़ाई पर ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है, जबकि कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी फीस लेती है. वहीं यहां &amp;nbsp;रहने का खर्च औसतन 700 से 1000 यूरो प्रति माह तक हो सकता है. कुछ इंस्टीट्यूट में सेमेस्टर योगदान या दूसरे शुल्क अलग से देने पड़ सकते हैं. इसके अलावा प्राइवेट यूनिवर्सिटी में फीस लगभग 6500 यूरो प्रति सेमेस्टर तक हो सकती है.
स्कॉलरशिप का भी मिलता है लाभ&amp;nbsp;
जर्मनी में पढ़ाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए कई स्कॉलरशिप योजनाएं उपलब्ध है. इनमें DAAD Scholarship, Heinrich Boll Scholarship, Friedrich Ebert Scholarship, Erasmus Scholarship और Deutschland Stipendium National Scholarship जैसी योजनाएं प्रमुख है. इन स्कॉलरशिप के जरिए छात्रों को ट्यूशन फीस, मासिक स्टाइपेंड और दूसरी आर्थिक सहायता भी दी जाती है.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में नौकरी का मौका, 5,000 लोगों को मिलेगा रोजगार</title>
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        <description><![CDATA[ 5000 Jobs News: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसकी वजह से कई लोग यह सोचकर परेशान हैं कि आने वाले समय में नौकरियां कम हो जाएंगी. लेकिन इसी बीच नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. Plantd नाम की कंपनी अब इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी के इस कदम से करीब 5,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.
क्या है Plantd कंपनी?
Plantd एक ऐसी कंपनी है जो पहले इंजीनियर्ड वुड यानी लकड़ी से बने ज्यादातर प्रोडक्ट तैयार करती थी. अब कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी काम शुरू करने जा रही है. इसके जरिए मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ड्रोन और मेडिकल डिवाइस में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बनाए जाएंगे. कंपनी अपना पहला प्लांट मुंबई में लगाएगी. इससे इलाके में नौकरी के लिए नए मौके भी बढ़ सकते हैं.
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कैसे मिलेगी नौकरी?
फिलहाल कंपनी ने भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की है. लेकिन जब वैकेंसी निकलेगी, तब उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या नौकरी से जुड़े पोर्टल पर जाकर अप्लाई कर सकेंगे. भर्ती कब शुरू होगी, कितने पोस्ट होंगे और कौन-कौन आवेदन कर सकेगा, इसकी जानकारी कंपनी बाद में जारी करेगी.
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
नौकरी के लिए आवेदन करते समय इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है.

आधार कार्ड
पैन कार्ड
10वीं और 12वीं की मार्कशीट
आईटीआई, डिप्लोमा या ग्रेजुएशन की डिग्री (अगर आपकी पोस्ट के लिए जरूरी हो)
पासपोर्ट साइज फोटो
अपडेटेड रिज्यूमे
अनुभव प्रमाण पत्र (अगर हो)

किन लोगों को मिल सकता है मौका?
इस भर्ती में इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उम्मीदवारों को ज्यादा मौका मिल सकता है. इसके अलावा मशीन ऑपरेटर, टेक्नीशियन और इंजीनियर जैसे पोस्ट पर भी भर्ती होने की संभावना है. अगर आप इस क्षेत्र में पढ़ाई कर चुके हैं या काम का अनुभव रखते हैं, तो यह आपएबीपी के लिए अच्छा अवसर साबित हो सकता है. इसलिए कंपनी की भर्ती से जुड़ी अपडेट पर नजर बनाए रखें.
अपडेट पर नजर बनाए रखें
इस भर्ती से जुड़ी जानकारी के लिए उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और नौकरी से जुड़े पोर्टल समय-समय पर चेक करते रहें. भर्ती शुरू होने पर वहीं आवेदन की तारीख, पदों की जानकारी और जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Jobs and Salaries Report 2026&amp;27: अब छोटे शहरों में मिल रही बड़ी सैलरी, रिपोर्ट में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Jobs and Salaries Report 2026-27 : अच्छी नौकरी और ज्यादा सैलरी के लिए अब सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों का रुख करना जरूरी नहीं रह गया है. देश के कई छोटे शहर अब नौकरी और सैलरी के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. नई रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-2 शहरों में कंपनियों का निवेश बढ़ने, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विस्तार और नए औद्योगिक कॉरिडोर बनने से यहां नौकरी के बेहतर अवसर मिल रहे हैं. यही वजह है कि अब इन शहरों में सैलरी बढ़ने की स्पीड कई बड़े महानगरों से भी ज्यादा देखने को मिल रही है.&amp;nbsp;
छोटे शहरों में तेजी से बढ़ रही सैलरी
टीमलीज की जॉब्स एंड सैलरीज प्राइमर 2026-27 रिपोर्ट के अनुसार, अब ज्यादा सैलरी मिलना केवल आईटी सेक्टर या मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. अहमदाबाद, नागपुर, इंदौर, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 शहर सैलरी बढ़ोतरी के मामले में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि इन शहरों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विस्तार, औद्योगिक कॉरिडोर और कंपनियों के बढ़ते निवेश का सीधा असर नौकरी और सैलरी पर दिखाई दे रहा है.
किस शहर में कितनी सैलरी बढ़ सकती है?
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कई टियर-2 शहर सैलरी बढ़ने के मामले में बड़े महानगरों से आगे निकलते नजर आ रहे हैं. अहमदाबाद में सबसे ज्यादा 9.7 प्रतिशत सैलरी बढ़ने का अनुमान है, जबकि नागपुर, विशाखापत्तनम और इंदौर में 9.5 प्रतिशत साथ ही जयपुर में 9.3 प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं मेट्रो शहरों में बेंगलुरु में 9.4 प्रतिशत, दिल्ली में 9.2 प्रतिशत और मुंबई में 9.0 प्रतिशत सैलरी बढ़ने का अनुमान है. रिपोर्ट बताती है कि अब छोटे शहर भी नौकरी और बेहतर सैलरी के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और कई बड़े शहरों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही है छोटे शहरों की सैलरी?
रिपोर्ट के अनुसार, पहले सैलरी बढ़ने का सबसे बड़ा आधार आईटी सेक्टर माना जाता था, लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है. देश के कई छोटे शहरों में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं. इसके साथ ही औद्योगिक कॉरिडोर विकसित हो रहे हैं और कंपनियां लगातार निवेश बढ़ा रही हैं. इसी कारण इन शहरों में अलग-अलग सेक्टरों में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं और कर्मचारियों को बेहतर सैलरी मिल रही है.&amp;nbsp;
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आईटी सेक्टर में अब भी बेंगलुरु सबसे आगे
आईटी सेक्टर की बात करें तो बेंगलुरु अभी भी सबसे आगे बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में कुल औसत सैलरी बढ़ोतरी 9.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि केवल आईटी सेक्टर में यह बढ़ोतरी 12.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. इसके अलावा हैदराबाद में 11.7 प्रतिशत और पुणे में 11.5 प्रतिशत तक सैलरी बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है.&amp;nbsp;
कर्मचारियों के वेतन का अंतर भी घटा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब पक्की नौकरी करने वाले और कॉन्ट्रैक्ट या कुछ समय के लिए काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में पहले की तुलना में कम होता जा रहा है. वहीं मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, हॉस्पिटैलिटी, फिनटेक और पावर जैसे कई सेक्टरों में भी अच्छी सैलरी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jobs, and, Salaries, Report, 2026-27:, अब, छोटे, शहरों, में, मिल, रही, बड़ी, सैलरी, रिपोर्ट, में, खुलासा</media:keywords>
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        <title>Madhya Pradesh BUMS Hindi Textbooks: अब हिंदी में भी होगी BUMS की पढ़ाई, MP बनेगा पहला राज्य</title>
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        <description><![CDATA[ Madhya Pradesh BUMS Hindi Textbooks: अब हिंदी में भी होगी BUMS की पढ़ाई, MP बनेगा पहला राज्य ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>फिजिक्स, कैमेस्ट्री या बायो, किस सब्जेक्ट से क्रैक होता है NEET?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Study Tips: 16 जुलाई को नीट का रिजल्ट जारी होने के बाद अब देश के लाखों छात्र काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं. काउंसलिंग शुरू होने के साथ ही नीट क्वालीफाई करने वाले छात्रों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए अपनी पसंद का कॉलेज चुनने का मौका मिलेगा. ऐसे ही हर साल नीट की परीक्षा के तहत लाखों छात्र एमबीबीएस, बीडीएस और दूसरे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए शामिल होते हैं.&amp;zwnj; नीट क्लियर करने के लिए स्टूडेंट पढ़ाई में दिन-रात एक कर देते हैं.
नीट में सफलता किसी एक विषय पर निर्भर नहीं करती, बल्कि फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों में मिले कुछ अंकों के आधार पर रैंक तय होती है. हालांकि इन तीनों ही सब्जेक्ट में भी अलग-अलग मेहनत की जरूरत होती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की फिजिक्स, केमिस्ट्री या बायोलॉजी किस सब्जेक्ट में ज्यादा मेहनत करने से नीट में अच्छी रैंक मिलती है.&amp;nbsp;
बायोलॉजी का सबसे ज्यादा वेटेज&amp;nbsp;
नीट परीक्षा कुल 720 अंकों की होती है. इसमें फिजिक्स और केमिस्ट्री के 45-45 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें कुल 180-180 अंक होते हैं. वहीं बॉटनी और जूलॉजी को मिलाकर बायोलॉजी में 90 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनके लिए 360 अंक निर्धारित है. यानी पूरे पेपर का आधा हिस्सा केवल बायोलॉजी का होता है. यही वजह है कि इस विषय में अच्छा स्कोर उम्मीदवारों की रैंक पर बड़ा असर डालता है.&amp;nbsp;
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क्या सिर्फ एक विषय तय करता है रैंक?&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार, नीट की रैंक किसी एक विषय से तय नहीं होती. अंतिम रैंक तीनों विषयों में मिले कुल अंकों के आधार पर तैयार की जाती है. हालांकि, अगर दो उम्मीदवार के कुल अंक समान हों तो टाइ ब्रेकिंग में सबसे पहले बायोलॉजी के अंक देखे जाते हैं. इसके बाद केमिस्ट्री और फिजिक्स के अंक को प्राथमिकता दी जाती है. अगर इसके बाद भी बराबरी बनी रहती है, तो कम गलत उत्तर देने वाले उम्मीदवार को वरीयता मिलती है.&amp;nbsp;
फिजिक्स भी बन सकता है गेम चेंजर&amp;nbsp;
हालांकि, बायोलॉजी का वेटेज सबसे ज्यादा है, लेकिन फिजिक्स को परीक्षा का सबसे कठिन स्तर माना जाता है. इस विषय में कॉन्सेप्ट, न्यूमेरिकल और समय प्रबंधन की अच्छी समझ जरूरी होती है. कई छात्रों के लिए यही सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा साबित होता है. ऐसे में जो व्यक्ति फिजिक्स में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हें रैंकिंग में बड़ा फायदा मिल सकता है. कई पूर्व नीट टॉपर्स का भी कहना है कि उनकी सफलता में फिजिक्स की सबसे बड़ी भूमिका रही. उनके अनुसार आने वाले वर्षों में अगर प्रश्न पत्र का स्तर कठिन रहता है, तो फिजिक्स पर मजबूत पकड़ छात्रों को बेहतर रैंक और पसंदीदा मेडिकल कॉलेज दिलाने में मदद कर सकती है.&amp;nbsp;
केमिस्ट्री भी मजबूत स्कोर का आधार&amp;nbsp;
केमिस्ट्री को नीट का संतुलित और अपेक्षाकृत स्कोरिंग विषय माना जाता है. इसमें फिजिकल, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमेस्ट्री से पूछे जाते हैं. नियमित अभ्यास और अवधारणाओं की अच्छी समझ रखने वाले छात्र इस विषय में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि केमिस्ट्री पूरे स्कोर को स्थिर बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>फिजिक्स, कैमेस्ट्री, या, बायो, किस, सब्जेक्ट, से, क्रैक, होता, है, NEET</media:keywords>
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        <title>IIT Kanpur Website Hacked: IIT कानपुर में नहीं मिला एडमिशन, छात्र ने वेबसाइट ही कर ली हैक</title>
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        <description><![CDATA[ IIT Kanpur Website Hacked by Student News: हर साल देशभर के लाखों छात्र IIT जैसे बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन लेने का सपना देखते हैं और इसके लिए कड़ी मेहनत भी करते हैं. इसी बीच IIT कानपुर से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें एडमिशन नहीं मिलने से नाराज एक छात्र ने अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल्स दिखाने के लिए संस्थान की वेबसाइट ही हैक कर दी. मामला सामने आने के बाद संस्थान ने कानूनी कार्रवाई करने की जगह छात्र की तकनीकी क्षमता को परखने का फैसला किया.
IIT कानपुर में एडमिशन नहीं मिला तो वेबसाइट कर दी हैक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक छात्र ने IIT कानपुर के नए बीटेक साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम में एडमिशन के लिए आवेदन किया था. छात्र का दावा है कि उसने आवेदन प्रक्रिया पूरी की, तय फीस जमा की, सभी जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड किए और अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल्स से जुड़े प्रमाण भी दिए. इसके बाद भी उसका चयन नहीं हुआ. इसके बाद उसने IIT कानपुर की वेबसाइट हैक कर उस पर Site is Hacked, All I Need is Just a Fair Chance का मैसेज छोड़ दिया. इतना ही नहीं, उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और Reddit पर इसके स्क्रीनशॉट भी शेयर किए और कहा कि उसका उद्देश्य किसी तरह का नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी तकनीकी क्षमता साबित करना था.&amp;nbsp;
हैकथॉन में खुद को साबित नहीं कर पाया छात्र
IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल के अनुसार, इस एडमिशन प्रक्रिया में छात्रों को हैकथॉन के जरिए अपना टैलेंट दिखाने का अवसर दिया गया था, लेकिन संबंधित छात्र उस चरण में खुद को साबित नहीं कर पाया .इसके बाद उसने वेबसाइट में सेंध लगाकर अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल्स दिखाने की कोशिश की.&amp;nbsp;
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पहले FIR की तैयारी, फिर बदला संस्थान का फैसला
शुरुआत में संस्थान की ओर से छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कराने पर विचार किया गया था. हालांकि, बाद में फैसला लिया गया कि पहले उसके दावों और तकनीकी क्षमता की जांच की जाए. इसी वजह से तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के जगह उसकी स्किल्स को परखने का फैसला लिया गया.&amp;nbsp;
C3iHub में इंटर्नशिप का मिल सकता है मौका
प्रो. मनिंद्र अग्रवाल ने बताया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र की एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए छात्र को इस साल प्रवेश देना संभव नहीं है. हालांकि संस्थान उसे IIT कानपुर बुलाकर उसकी तकनीकी क्षमता का सही तरीके से परीक्षण करेगा. अगर वह अपनी योग्यता साबित करता है तो उसे C3iHub में इंटर्नशिप के लिए विचार किया जाएगा. साथ ही वह अगले एडमिशन साइकिल में दोबारा आवेदन कर सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>7 अगस्त से शुरू हो सकती है NEET काउंसलिंग, MCC जल्द जारी करेगा शेड्यूल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG counselling 2026:&amp;nbsp; नीट यूजी 2026 क्वालीफाई कर चुके लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म हो सकता है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी जल्द ही नीट यूजी 2026 काउंसलिंग का विस्तृत शेड्यूल जारी कर सकती है. फिलहाल एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर &#039;Will Update Soon&#039; का मैसेज दिखाई दे रहा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि काउंसलिंग का पूरा कार्यक्रम जल्द अपलोड किया जाएगा.
जानकारी के अनुसार, नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग 7 अगस्त 2026 से शुरू होने की संभावना है. विस्तृत काउंसलिंग शेड्यूल 31 जुलाई या अगस्त के पहले सप्ताह में ही जारी किया जा सकता है. इसके बाद उम्मीदवार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, कॉलेज और कोर्स चॉइस फिलिंग तथा चॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे.&amp;nbsp;
स्वास्थ्य मंत्री ने की तैयारी की समीक्षा&amp;nbsp;
काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 29 जुलाई को उच्च स्तरीय बैठ कर तैयारी की समीक्षा की. बैठक में काउंसलिंग शेड्यूल, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था, उम्मीदवारों के लिए सहायता प्रणाली और मेडिकल संस्थानों के साथ समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित हो. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों को काउंसलिंग के दौरान किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े.&amp;nbsp;
कब आएगा सीट अलॉटमेंट रिजल्ट?
संभावित कार्यक्रम के अनुसार, पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट अगस्त के मध्य तक जारी किया जा सकता है. जिन उम्मीदवारों को सीट आवंटित होगी, उन्हें 31 अगस्त 2026 तक संबंधित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट कर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और प्रवेश की दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी. वहीं आपको बता दें कि एमसीसी की ओर से 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा की मेडिकल और डेंटल सीटों के साथ-साथ उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाली अन्य सीटों की काउंसलिंग कराई जाएगी. वहीं 85 प्रतिशत राज्य कोटा की सीटों पर प्रवेश संबंधित राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण अपने-अपने स्तर पर कराएंगे&amp;nbsp;
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ऐसी होगी पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया&amp;nbsp;
काउंसलिंग शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को सबसे पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद में अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और कोर्स का चयन कर चॉइस फिलिंग करेंगे. सीटों का आवंटन नीट यूजी रैंक, उम्मीदवारों की प्राथमिकता और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाएगा. जिन छात्रों को आवंटित सीट स्वीकार होगी, उन्हें संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट कर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करनी होगी. वहीं बेहतर कॉलेज की उम्मीद रखने वाले उम्मीदवार फ्लोट ऑप्शन चुन सकते हैं. इससे उन्हें वर्तमान सीट सुरक्षित रखते हुए अगले राउंड में अपग्रेडेशन का मौका मिलेगा.&amp;nbsp;
काउंसलिंग के लिए तैयार रखें ये जरूरी डॉक्यूमेंट&amp;nbsp;

नीट यूजी 2026 एडमिट कार्ड&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 स्कोरकार्ड रैंक-लेटर&amp;nbsp;
कक्षा 10 और 12वीं की मार्कशीट व प्रमाण पत्र&amp;nbsp;
आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक पहचान पत्र
पासपोर्ट साइज फोटो&amp;nbsp;
प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट लेटर&amp;nbsp;
आरक्षण का प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)
पीडब्ल्यूबीडी प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)

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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG काउंसिलिंग में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ एक विजिट में होगा एडमिशन </title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG counselling 2026: नीट यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है. मेडिकल काउंसिलिंग कमेटी (MCC) ने छात्रों के लिए एडमिशन प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान बनाने के उद्देश्य से कई नए नियम लागू किए हैं. अब सीट अपग्रेडेशन चाहने वाले छात्रों को बार-बार मेडिकल कॉलेज के चक्कर नहीं लगाने होंगे. पहली बार रिपोर्टिंग के बाद आगे की अधिकांश औपचारिकताएं ऑनलाइन की जा सकेंगी.
केंद्र सरकार के नए फैसले के तहत उम्मीदवारों को केवल एक बार ही संबंधित मेडिकल कॉलेज में फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी. इसके बाद अगर छात्र अगले राउंड में बेहतर सीट के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो उन्हें दोबारा कॉलेज जाकर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी. ऑनलाइन डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन के जरिए वह अपनी मौजूदा सीट सुरक्षित रखते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल रह सकेंगे.
एक बार ही करनी होगी फिजिकल रिपोर्टिंग&amp;nbsp;
नई व्यवस्था के अनुसार, पहले या दूसरे राउंड में सीट मिलने के बाद अगर कोई उम्मीदवार फ्लोट ऑप्शन चुनता है, तो वह ऑनलाइन डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन पूरा कर अपनी सीट सुरक्षित रख सकता है. अगले राउंड में बेहतर सीट मिल जाती है, तो पुरानी सीट स्वत ही खाली हो जाएगी और दूसरे उम्मीदवारों को आवंटित कर दी जाएगी. अगर बेहतर सीट नहीं मिलती है तो पहले से आवंटित सीट बरकरार रहेगी. हालांकि जो उम्मीदवार तीसरे राउंड के बाद सीट फ्रीज करेंगे, उन्हें अंतिम एडमिशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए संस्थान में एक बार फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी. इस दौरान मूल डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन और फीस जमा करने जैसी औपचारिकताएं पूरी की जाएगी.&amp;nbsp;
ऑनलाइन होगा विड्रॉल और NRI डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन&amp;nbsp;
एमसीसी ने काउंसलिंग प्रक्रिया में ऑनलाइन रिजर्वेशन की सुविधा भी शुरू की है. अब उम्मीदवार अपनी आवंटित सीट छोड़ने के लिए संबंधित संस्थान जाने के बजाय एमसीसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. इसके अलावा NRI कैटेगरी के उम्मीदवारों को भी राहत मिली है. पहले अतिरिक्त पात्रता संबंधी दस्तावेज ईमेल के माध्यम से भेजे जाते थे, इससे कई बार देरी और तकनीकी समस्या आती थी. लेकिन अब इन डॉक्यूमेंट को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे वेरिफिकेशन प्रक्रिया तेज और आसान होगी.
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काउंसलिंग प्रक्रिया भी होगी ज्यादा पारदर्शी&amp;nbsp;
सरकार ने इस बार काउंसलिंग प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार भी किया. इसमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से प्राप्त उम्मीदवारों के प्री-पॉपुलेटेड डेटा, नेशनल चिकित्सा आयोग (NMC) की ओर से सत्यापित सीट मैट्रिक्स, ऑनलाइन डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से तैयार साइबर सुरक्षा व्यवस्था को शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
24*7 हेल्पलाइन और शिकायत के लिए ईमेल भी जारी&amp;nbsp;
काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों की सहायता के लिए 24 घंटे टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-102-7637 उपलब्ध कराई गई है. वहीं किसी भी शिकायत या समस्या के समाधान के लिए उम्मीदवार mcc2026@government.in पर ईमेल भी भेज सकते हैं&amp;nbsp;
PwBD उम्मीदवारों के लिए बढ़ाई सुविधा&amp;nbsp;
पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. देशभर में उनके मूल्यांकन केंद्रों की संख्या 16 से बढ़कर 61 कर दी गई है. इसके साथ ही संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत अपीलीय दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड की व्यवस्था भी लागू की गई, ताकि पात्रों उम्मीदवारों को समय पर सहायता मिल सके.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पहली से 5वीं कक्षा के बीच पता लग जाता है बच्चे भविष्य, ऐसे होती है पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ Child Development: अक्सर माना जाता है कि बच्चे का भविष्य बोर्ड परीक्षा या करियर चुनने के समय तय होता है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों के जीवन की सबसे मजबूत नींव शुरुआती वर्षों में ही तैयार हो जाती है. पहली से पांचवीं कक्षा तक का समय केवल पढ़ने-लिखने और सीखने का नहीं होता, बल्कि इसी दौरान बच्चों की सोच, व्यवहार, सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और समस्या को समझने का तरीका विकसित होता है. यह वजह है कि शुरुआती शिक्षा को बच्चों के पूरे भविष्य की बुनियाद माना जाता है. चलिए अब आपको बताते हैं कि पहली से पांचवीं कक्षा के बीच ही बच्चे का भविष्य कैसे पता लग जाता है और इसकी पहचान कैसे होती है.&amp;nbsp;
पहले से पांचवीं तक क्या सीखता है बच्चा?
बच्चों की शुरुआती शिक्षा में उन पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाता. इस दौरान उन्हें खेल, कहानी, ड्राइंग, म्यूजिक और अलग-अलग एक्टिविटी के माध्यम से सीखने पर जोर दिया जाता है. इस प्रक्रिया में बच्चा भाषा समझना, अपनी बात कहना, गिनती करना, अक्षरों की पहचान करना, ड्राइंग बनाना, ग्रुप में काम करना और अनुशासन जैसे बुनियादी बातें सिखाता है. इस समय बच्चों में पेंसिल पकड़ने, ध्यान लगाकर बैठने, सवाल पूछने और अपने विचार व्यक्त करने जैसी आदतें भी विकसित होती हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यही कौशल आगे चलकर पढ़ाई की गति और समझ को मजबूत बनाते हैं.&amp;nbsp;
यहीं से बनती है सोचने और समझने की क्षमता&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार शुरुआती शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती. इस दौरान बच्चों में समस्या का समाधान निकालने, नई चीजों को समझने, याद रखना और तर्क करने की क्षमता तेजी से विकसित होती है. पहेलियां, कहानी सुनना, चित्र बनाना और ग्रुप एक्टिविटी बच्चों की सोचने की क्षमता को मजबूत करती है. यही समय भाषा विकास का भी सबसे जरूरी दौर माना जाता है, जिन बच्चों को शुरुआती वर्षों में बातचीत, कहानी और पढ़ने का अच्छा माहौल मिलता है उनकी शब्दावली और संवाद क्षमता बेहतर होती है. आगे चलकर यही कौशल पढ़ाई और करियर दोनों में मददगार साबित होते हैं.&amp;nbsp;
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सामाजिक और इमोशनल विकास भी होता है मजबूत&amp;nbsp;
पहली से पांचवीं कक्षा के दौरान बच्चा केवल पढ़ाई नहीं सिखाता, बल्कि दूसरों के साथ रहना भी सीखता है. इस दौरान वह दोस्तों के साथ मिलकर काम करना, अपनी बारी का इंतजार करना, भावनाओं को समझना और शेयर करना जैसी सामाजिक आदतें विकसित करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है की इस उम्र में कॉन्फिडेंस और इंडिपेंडेंस की शुरुआत होती है. अगर बच्चे को प्रोत्साहन और सकारात्मक माहौल मिले तो वह नई समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार होता है और धीरे-धीरे डिसीजन लेने की क्षमता भी विकसित करता है.&amp;nbsp;
आगे की पढ़ाई और करियर पर भी पड़ता है असर
रिसर्च यह भी बताती है कि जिन बच्चों को शुरुआती वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है, वे आगे की पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. वे शुरुआत में जिन चीजों में रुचि लेते हैं आगे चलकर वह वैसा ही करियर भी चुनते हैं. इसके अलावा बचपन में ही बच्चों में पढ़ने-लिखने और गणित की समझ मजबूत होती है. साथ ही वह स्कूल के माहौल में जल्दी ढल जाते हैं और नई परिस्थितियों के साथ आसानी से तालमेल बिठा लेते हैं. एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करती है. यही आदत आगे चलकर उन्हें नहीं चीज सीखने, चुनौतियों का सामना करने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में भी मदद करती है.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राजस्थान की परीक्षा एजेंसियां बेहाल, RPSC से RBSE तक अध्यक्ष और सदस्यों के कई पद खाली </title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान में भर्ती परीक्षाएं कराने वाली प्रमुख संस्थानों की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है. राज्य की तीन बड़ी परीक्षा एजेंसियां राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पद की समस्या से जूझ रही है. जिसके चलते राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, समयबध्दता और प्रशासनिक क्षमता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन संस्थानों में नियुक्तियों के लिए स्पष्ट नियम और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है.&amp;nbsp;
RPSC में अध्यक्ष सहित कई पद खाली&amp;nbsp;
राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष सहित कुल 11 पदों का प्रावधान है. फिलहाल आयोग में अध्यक्ष का पद खाली है और कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली जा रही है. इसके अलावा चार सदस्य पद भी रिक्त हैं. वहीं जल्द ही एक अन्य सदस्य के रिटायर्ड होने के बाद रिक्तियों की संख्या और बढ़ जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया या योग्यता संबंधी नियम निर्धारित नहीं है. कई अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोग में कार्य संचालन के लिए अलग-अलग नियम लागू हैं, लेकिन राजस्थान में ऐसी व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी.
नए RPSC अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी नजर&amp;nbsp;
आरपीएससी अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार नए अध्यक्ष नियुक्ति की तैयारी में जुटी है. फिलहाल कार्यवाहक व्यवस्था लागू है, लेकिन आगामी आरएएस, आरपीएस और दूसरी बड़ी भर्ती परीक्षाओं को देखते हुए स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति को अहम माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट के अनुसार इस पद के लिए कुछ वरिष्ठ और रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स के नाम पर चर्चा चल रही है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार की ओर से ही लिया जाएगा. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री की सिफारिश पर की जाती है.&amp;nbsp;
RSSB में भी पूरी नहीं हो सकी नियुक्तियां&amp;nbsp;
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. बोर्ड में एक अध्यक्ष और चार सदस्यों का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में केवल अध्यक्ष और दो सदस्य ही कार्यरत है. बाकी पद अभी भी खाली है. यह बोर्ड राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में बड़ी संख्या में होने वाली भर्तियों का जिम्मा संभालता है. इसके बावजूद बोर्ड के संचालन के लिए भी कार्य संचालन संबंधी स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए हैं.&amp;nbsp;
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RBSE में भी लंबे समय तक खाली रहा अध्यक्ष पद&amp;nbsp;
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थिति भी लंबे समय तक चर्चा का विषय रही. बोर्ड में अध्यक्ष सहित कई प्रकार के सदस्यों की व्यवस्था है, लेकिन अध्यक्ष का पद काफी समय तक खाली रहा. हाल ही में राज्य सरकार ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति की है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार बोर्ड की वर्तमान संरचना में बदलाव कर इसे ज्यादा स्थायी और व्यवस्थित बनाया जाना चाहिए. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि आरबीएसई का पुनर्गठन कर अध्यक्ष और स्थायी सदस्यों की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बोर्ड का संचालन ज्यादा प्रभावित तरीके से हो सके.&amp;nbsp;
नियुक्तियों के लिए स्पष्ट नियम नहीं होने पर उठ रहे सवाल&amp;nbsp;
राज्य की तीन संस्थाओं को लेकर एक समान चिंता यह है कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए कोई निश्चित पात्रता या चयन प्रक्रिया तय नहीं है. ऐसे में नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक प्रभाव और पारदर्शिता पर भी सवाल उठते रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो कानून बनाकर या आवश्यक संशोधन के माध्यम से नियुक्तियां के लिए स्पष्ट मानदंड तय किया जा सकते हैं. इससे संस्थाओं की कार्यप्रणाली ज्यादा जवाबदेही और पारदर्शी बन सकती है.&amp;nbsp;
शिक्षा विभाग में रिक्त पदों का मुद्दा भी गरमाया&amp;nbsp;
इस बीच प्रदेश में शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया है कि शिक्षा विभाग में करीब डेढ़ लाख पद रिक्त हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को दो या तीन विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जिससे विशेष रूप से विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>भारत सरकार में नौकरी करने का बड़ा मौका, अगले कुछ महीनों में निकलेंगी वैकेंसी, ऐसे करें आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-सरकार-में-नौकरी-करने-का-बड़ा-मौका-अगले-कुछ-महीनों-में-निकलेंगी-वैकेंसी-ऐसे-करें-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ Government Jobs 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आने वाले कुछ महीने बहुत जरूरी रहने वाले हैं. अगस्त से कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय विभाग में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. रेलवे, बैंकिंग, इसरो, एम्स और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में हजारों रिक्त पदों पर आवेदन मांगे जाएंगे. इसके अलावा कई ऐसी भर्तियां भी है, जिनके लिए आवेदन प्रक्रिया पहले से जारी है और अंतिम तारीख अगस्त में पड़ रही है. ऐसे में उम्मीदवारों के पास एक साथ कई अवसर होंगे. चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत सरकार में नौकरी करने के कौन से बड़े मौके आ रहे हैं और अगले कुछ महीनों में कौन सी वैकेंसी निकलने वाली है.&amp;nbsp;
अगस्त से शुरू होंगी, कई बड़ी भर्तियां
अगस्त 2026 में रेलवे, बैंकिंग और राज्य सरकारों की कई प्रमुख भर्तियों के लिए आवेदन शुरू होंगे. इनमें सबसे बड़ी भर्ती रेलवे भर्ती बोर्ड की जूनियर इंजीनियर भर्ती है. इसके तहत 4,098 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त से शुरू होकर 13 सितंबर तक चलेगी. चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तहत पे लेवल-6 का वेतनमान मिलेगा. जिसमें शुरुआती मूल वेतन 35,000 रुपये &amp;nbsp;प्रतिमाह निर्धारित किया गया है. इसी महीने आईबीपीएस क्लर्क भर्ती के लिए भी आवेदन शुरू होंगे. ऑनलाइन आवेदन 1 अगस्त से 21 अगस्त तक किए जा सकेंगे.
इसरो में क्लर्क, असिस्टेंट और स्टेनोग्राफर की भर्ती&amp;nbsp;
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने असिस्टेंट, अपर डिवीजन क्लर्क, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट और स्टेनोग्राफर सहित अलग-अलग पदों पर भर्ती निकाली है. इन पदों के लिए ग्रेजुएट और 12वीं पास अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं. आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जा रहे हैं. वहीं आवेदन की अंतिम तिथि 16 अगस्त है.&amp;nbsp;
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आने वाले महीनों में इन भर्तियों पर भी रहेगी नजर&amp;nbsp;
सरकारी भर्ती कैलेंडर के अनुसार जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच बैंकिंग, रेलवे, रक्षा, कर्मचारी चयन आयोग और दूसरे केंद्रीय विभागों में बड़ी संख्या में भर्तियां आने की संभावना है. इनमें एसबीआई क्लर्क, IBPS PO, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD कांस्टेबल, रेलवे ग्रुप-डी, FCI, दिल्ली पुलिस कांस्टेबल, IB ACIO, EPFO, DRDO, DDA, DSSSB, NABARD ग्रेड-A, LIC AAO और CBSE &amp;nbsp;जूनियर असिस्टेंट जैसी प्रमुख भर्तियां शामिल है. इन भर्तियों के जरिए 10वीं और 12वीं, ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के उम्मीदवारों &amp;nbsp;को अलग-अलग विभागों में आवेदन का अवसर मिलेगा. अलग-अलग पदों के लिए के चयन प्रक्रिया और कंप्यूटर आधारित परीक्षा, स्किल टेस्ट, फिजिकल टेस्ट, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल होंगे.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन और किन बातों का रखें ध्यान &amp;nbsp;
सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए भर्ती से जुड़े ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. वहीं आवेदन से पहले उम्मीदवार को संबंधित भर्ती की ऑफिशियल वेबसाइट पर अधिसूचना ध्यान से पढ़ें. इसके अलावा पहले यह सुनिश्चित करें कि आप आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता शर्तें पूरा करते हैं या नहीं. अधिकांश भर्तियों में आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होते हैं, इसलिए फोटो, सिग्नेचर, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पहचान पत्र पहले से स्कैन करके तैयार रखें. इसके अलावा आवेदन शुल्क जमा करने, आवेदन पत्र की अंतिम प्रिंट कॉपी सुरक्षित रखने और समय-समय पर परीक्षा तिथि तथा एडमिट कार्ड से जुड़े अपडेट पर नजर बनाए रखना रखना भी जरूरी है.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, सरकार, में, नौकरी, करने, का, बड़ा, मौका, अगले, कुछ, महीनों, में, निकलेंगी, वैकेंसी, ऐसे, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>भारत में हर चौथा कमर्शियल पायलट महिला, जानें पायलट बनने की योग्यता, ट्रेनिंग और सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ Commercial Pilot: भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और उसके साथ ही कमर्शियल पायलट बनने का सपना देखने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि देश में महिला कमर्शियल पायलटों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. 30 जून 2026 तक जारी हर चार कमर्शियल पायलट लाइसेंस में लगभग एक लाइसेंस महिला उम्मीदवार को मिला. ऐसे में कई और स्टूडेंट्स भी कमर्शियल पायलट बनना चाहते हैं, लेकिन उनमें इससे जुड़ी पढ़ाई को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन देखने को मिलता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कमर्शियल पायलट बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए, इसकी ट्रेनिंग कैसे होती है और शुरुआती सैलरी कितनी मिलती है.&amp;nbsp;
भारत में हर चौथा कमर्शियल पायलट महिला&amp;nbsp;
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार 30 जून 2026 तक कुल 1331 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए गए. इनमें 348 लाइसेंस महिलाओं को मिले, यानी कुल हिस्सेदारी 26.14 फीसदी रही. वहीं 2021 में 862 CPL जारी हुए थे, जिनमें 166 महिलाओं को लाइसेंस मिला था. महिला पायलटों की हिस्सेदारी के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देश में शामिल है.&amp;nbsp;
भारत और विदेश से ट्रेनिंग लेने वाले उम्मीदवार&amp;nbsp;
सरकार ने बताया कि इस साल जारी लाइसेंस में 791 उम्मीदवारों ने भारत के फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन से प्रशिक्षण लिया, जबकि 540 उम्मीदवारों ने विदेश में ट्रेनिंग पूरी की. यानी करीब 41 फीसदी लाइसेंस धारी पायलटों ने विदेशी संस्थानों से ट्रेनिंग प्राप्त की. देश में फिलहाल DGCA से मान्यता प्राप्त 41 फ्लाइंग ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट 63 परीक्षण केंद्रों पर संचालित हो रहे हैं. इन संस्थाओं के पास 400 से ज्यादा ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट उपलब्ध है.&amp;nbsp;
कमर्शियल पायलट बनने के लिए योग्यता&amp;nbsp;
कमर्शियल पायलट बनने के लिए उम्मीदवार का 12वीं फिजिक्स और मैथ्स विषय के साथ पास होना जरूरी है. इसके बाद DGCA से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूल में एडमिशन लेकर ट्रेनिंग पूरी करनी होती है. अगर किसी छात्र ने 12वीं में फिजिक्स या मैथ्स नहीं पढ़ा है, तो वह मान्यता प्राप्त ओपन स्कूलिंग माध्यम से इन विषयों की परीक्षा पास करके भी पात्रता हासिल कर सकता है. इसके अलावा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए, जबकि कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 18 वर्ष की आयु पूरी होना आवश्यक है. ट्रेनिंग शुरू करने से पहले DGCA का मेडिकल फिटनेस टेस्ट भी पास करना होता है.&amp;nbsp;
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कैसे मिलता है Commercial Pilot License?
कमर्शियल पायलट बनने के लिए सबसे पहले DGCA के कंप्यूटर नंबर के लिए आवेदन करना होता है. इसके बाद ग्राउंड ट्रेनिंग के दौरान एयर रेगुलेशन, एयर &amp;nbsp;नेविगेशन, &amp;nbsp;एविएशन मौसम विज्ञान और दूसरे विषयों की पढ़ाई की जाती है. DGCA की लिखित परीक्षा में निर्धारित अंक हासिल करने के बाद फ्लाइट ट्रेनिंग पूरी करनी होती है. CPL के लिए न्यूनतम 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग अनिवार्य होती है. इसमें सोलो फ्लाइंग, क्रॉस कंट्री फ्लाइंग, नाइट फ्लाइंग, इंस्ट्रूमेंट फ्लाइंग और मल्टी इंजन विमान की ट्रेनिंग शामिल रहती है. सभी चरण पूरे होने और स्किल टेस्ट पास करने के बाद डीजीसीए कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी करता है.&amp;nbsp;
कितनी मिलती है सैलरी?
लाइसेंस मिलने के बाद शुरुआत में उम्मीदवार को ट्रेनिंग पायलट या फर्स्ट ऑफिसर के रूप में नियुक्ति मिलती है. इस दौरान सालाना 12 लाख से 25 लाख रुपये तक का पैकेज मिलता है. अनुभव बढ़ने के साथ यह सैलरी 25 से 50 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है. वहीं कैप्टन बनने के बाद कई एयरलाइंस में सालाना पैकेज एक करोड रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में काम करने वाले सीनियर पायलटों की कमाई इससे भी ज्यादा होती है.&amp;nbsp;
सैलरी के अलावा मिलते हैं यह फायदे&amp;nbsp;
कमर्शियल पायलट को सैलरी के अलावा ट्रैवल अलाउंस, होटल में ठहरने की सुविधा, विदेश लेओवर, मुफ्त एयर टिकट और दूसरे भत्ते भी मिलते हैं. हालांकि पायलट ट्रेनिंग की लागत भी काफी ज्यादा होती है. भारत में सीपीएल ट्रेनिंग में आमतौर पर 40 से 80 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जबकि विदेश से ट्रेनिंग लेने पर यह खर्च 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 03:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP प्रोटेस्ट से वायरल इरफान, कितने पढ़े&amp;लिखे हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ Viral Mohammad Irfan: दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए सीजेपी विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक सब आवाज सबसे अलग नजर आ रही है. दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले पेशे से पेरीवाले मोहम्मद इरफान अपने इंटरव्यू के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. दिल्ली के सावदा जेजे कॉलोनी के रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान की संविधान, लोकतंत्र, मजदूरों के अधिकार और सामाजिक मुद्दों पर गहरी समझ के चलते वह खूब वायरल हो रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सीजेपी प्रोटेस्ट से वायरल इरफान कितने पढ़े लिखे हैं.&amp;nbsp;
स्कूल नहीं गए, गूगल वॉइस से की पढ़ाई&amp;nbsp;
मोहम्मद इरफान के अनुसार उन्होंने कभी स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की और न ही वह पढ़-लिख सकते हैं. जानकारी हासिल करने के लिए वह स्मार्टफोन में गूगल वॉइस सर्च का इस्तेमाल करते हैं. इतिहास, राजनीति साहित्य और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों पर वह इंटरनेट के जरिए जानकारी सुनते हैं और किसी भी विषय पर राय बनाने से पहले कई अलग-अलग सोर्स से उसे समझने की कोशिश करते हैं. इरफान ने बताया कि भगत सिंह के विचारों और दुष्यंत कुमार व अदम गोंडवी की कविताओं ने भी उनके सोचने के तरीके को प्रभावित किया.&amp;nbsp;
मजदूरों की समस्याओं को उठाने पहुंचे थे प्रदर्शन में&amp;nbsp;
इरफान का कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल या छात्र संगठन से जुड़े नहीं है. वह जंतर-मंतर केवल मजदूर और गरीब तबके की समस्याओं को सामने रखने के लिए पहुंचे थे. उनके अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये बताया जाता है, लेकिन कई मजदूरों को 10 से 11 घंटे काम करने के बाद भी 13 से 14 हजार रुपये ही मिलते हैं. उनका दावा है कि बेरोजगारी की वजह से लोग कम वेतन पर भी काम करने को मजबूर है और विरोध करने पर नौकरी जाने का डर बना रहता है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को मजदूरों के लिए उचित वेतन सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए.&amp;nbsp;
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आर्थिक परेशानियों का भी किया जिक्र&amp;nbsp;
इरफान ने बताया कि पिछले दो वर्षों से आर्थिक तंगी और भविष्य की चिंताओं के कारण वह मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रहे थे. उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई लोगों के पास कार्ड होने के बावजूद इलाज के दौरान लंबी कागजी प्रक्रिया और मंजूरी की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इरफान ने कहा कि वह महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत में विश्वास करते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के पक्षधर है. उनका कहना है कि वे राजनीति में आने की इच्छा नहीं रखते, बल्कि चाहते हैं कि सरकारी मजदूर झुग्गी- बस्तियों में रहने वाले लोगों और ग्रामीण समुदायों की समस्या पर ज्यादा ध्यान दें.&amp;nbsp;
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था इंटरव्यू&amp;nbsp;
जंतर मंतर पर दिए उनके इंटरव्यू को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और शेयर किया. कई लोगों ने उनकी बातों की सराहना की. बताया गया कि इंटरव्यू वायरल होने के बाद कई लोग उनके घर भी पहुंचे और उनकी कहानी जानने की कोशिश की. सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा के बाद लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मोहम्मद इरफान से मिलने उनके घर पहुंचे. मुलाकात के दौरान उन्होंने इरफान से बातचीत की और उन्हें परिवार सहित संसद का आने का निमंत्रण भी दिया.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Nurse recruitment 2026: नर्स के 312 पदों पर भर्ती, ऐसे करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ Nurse recruitment 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही महिला नर्सिंग अभ्यर्थियों के लिए HPRCA में बड़ा मौका निकला है. हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग हमीरपुर में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में असिस्टेंट स्टाफ नर्स के 312 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. भर्ती 5 वर्ष के एंगेजमेंट आधार पर की जाएगी. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 30 जुलाई 2026 सुबह 10:00 बजे से शुरू होगी और इच्छुक अभ्यर्थी 29 अगस्त 11:59 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए केवल महिला अभ्यर्थी आवेदन कर सकती है. उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी नर्सिंग या जीएनएम होना चाहिए. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश नर्स रजिस्ट्रेशन काउंसलिंग (HPNRC) शिमला में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. आयोग के अनुसार उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश की बोनाफाइड निवासी होनी चाहिए. अगर कोई अभ्यर्थी बोनाफाइड नहीं है तो उसके लिए हिमाचल प्रदेश के किसी संस्थान से 10वीं और 12वीं पास होना आवश्यक है.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए आयु सीमा और चयन प्रक्रिया&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के आधार पर की जाएगी. आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष निर्धारित की गई है. राज्य सरकार के नियमों के अनुसार एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और दूसरे एलिजिबल आरक्षित वर्गों को अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी. वहीं भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले सीबीटी या ओएमआर आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया जाएगा. परीक्षा में 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनके लिए 90 मिनट का समय मिलेगा, प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा. लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा, इसके बाद अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी.&amp;nbsp;
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सैलरी और आवेदन फीस&amp;nbsp;
चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति 5 वर्ष के एंगेजमेंट आधार पर की जाएगी. चयन होने पर उम्मीदवार को 25,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय दिया जाएगा. इस भर्ती के लिए सभी कैटेगरी अभ्यर्थियों को 800 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. इसमें 100 रुपये परीक्षा शुल्क और 700 रुपये प्रोसेसिंग फीस शामिल है. आवेदन में संशोधन करने के लिए करेक्शन विंडो के दौरान 100 रुपये अतिरिक्त फीस देना देनी होगी.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;भर्ती के लिए ऐसे करें आवेदन

इच्छुक अभ्यर्थी सबसे पहले एचपीआरसीए के ऑफिशियल पोर्टल hprca.hp.gov.in पर जाए.
इसके बाद वहां जाकर वन टाइम रजिस्ट्रेशन पूरा करें.
लॉगिन कर असिस्टेंट स्टाफ नर्सिंग भर्ती के आवेदन फॉर्म में पर्सनल और एजुकेशनल जानकारी भरें.
अब जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और फीस जमा करें.
फीस जमा करने के बाद आवेदक को फॉर्म एक बार फिर से पढ़कर सबमिट कर उसका प्रिंट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राजस्थान में 24 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारी भर्ती, बिना परीक्षा मिलेगा मौका </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राजस्थान-में-24-हजार-से-ज्यादा-सफाई-कर्मचारी-भर्ती-बिना-परीक्षा-मिलेगा-मौका</link>
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        <description><![CDATA[ स्वायत्त शासन विभाग ( Department of Local Self Government) ने राजस्थान सफाई कर्मचारी भर्ती 2026 का ऑफिशियल नोटिस जारी कर दिया है. इस भर्ती अभियान के तहत राज्य के 183 नगरीय निकायों में 24,000 से ज्यादा संविदा सफाई कर्मचारी पदों पर भर्ती की जाएगी. खास बात यह है कि भर्ती के लिए किसी भी शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं रखी गई है. यानी जिन अभ्यर्थियों ने कभी स्कूल की पढ़ाई नहीं कि वह भी निर्धारित अनुभव की शर्तें पूरी होने पर आवेदन कर सकेंगे. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 अगस्त 2026 से शुरू हो रही है.&amp;nbsp;
नहीं होगी लिखित परीक्षा या इंटरव्यू&amp;nbsp;
इस भर्ती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चयन के लिए न तो लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी और न ही इंटरव्यू लिया जाएगा. अभ्यर्थियों का चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा. प्रत्येक नगरीय निकाय के लिए अलग-अलग लॉटरी निकाली जाएगी. विभाग के अनुसार संबंधित नगरीय निकाय में कम से कम एक साल तक सफाई कार्य का एक्सपीरियंस रखने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी. अगर किसी निकाय में पर्याप्त एलिजिबल उम्मीदवार नहीं मिलते हैं तो राजस्थान के दूसरे नगरीय निकायों में कार्य अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को भी लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का राजस्थान का स्थायी निवासी होना जरूरी है. इसके लिए किसी भी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन अभ्यर्थी का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी होगा. इसके अलावा उम्मीदवार के पास कम से कम 1 वर्ष का सफाई कार्य का अनुभव होना चाहिए. यह अनुभव लगातार या अलग-अलग अवधि का भी हो सकता है. अनुभव प्रमाण पत्र नोटिस में निर्धारित सक्षम प्राधिकारी की और से जारी किया गया होना चाहिए. प्रत्येक अभ्यर्थी केवल 183 नगरीय निकायों में से किसी एक के लिए ही आवेदन कर सकेगा.&amp;nbsp;
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आयु सीमा और आवेदन फीस
भर्ती के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष निर्धारित की गई है. आयु की गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर होगी. सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्गों को आयु सीमा में छूट भी मिलेगी. वहीं भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा, आरक्षित वर्ग और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 400 रुपये निर्धारित किया गया है.
कब और कैसे करें आवेदन&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 अगस्त से शुरू होगी. इच्छुक और पात्र उम्मीदवार भर्ती पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन पत्र भरने के बाद निर्धारित कैटेगरी के अनुसार फीस जमा कर ऑनलाइन पेमेंट करना होगा.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राजस्थान, में, हजार, से, ज्यादा, सफाई, कर्मचारी, भर्ती, बिना, परीक्षा, मिलेगा, मौका </media:keywords>
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        <title>ऑस्ट्रेलिया में पढ़ना है? यहां मिल रही स्कॉलरशिप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ऑस्ट्रेलिया-में-पढ़ना-है-यहां-मिल-रही-स्कॉलरशिप</link>
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        <description><![CDATA[ Australia Scholarship: अगर आप ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं और विदेश में पढ़ाई का खर्च आपकी सबसे बड़ी चिंता है, तो यह खबर आपके काम की हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी (Griffith University) ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए Vice Chancellor&#039;s International Scholarship की घोषणा की है. इस स्कॉलरशिप के तहत पात्र सभी भारतीयों को अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री की पूरी अवधि के दौरान 50 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस में छूट दी जाएगी. यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए उपलब्ध है, जो 2026 या 2027 में यूनिवर्सिटी में फुल टाइम पढ़ाई शुरू करेंगे और तय एलिजिबिलिटी को पूरा करेंगे. यह स्कॉलरशिप खासतौर पर मेधावी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए शुरू की गई है, ताकि स्टूडेंट्स का आर्थिक बोझ कम हो और वह ऑस्ट्रेलिया में हायर एजुकेशन हासिल कर सके.
किन छात्रों को मिलेगा लाभ?
यह स्कॉलरशिप ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी में फुल टाइम अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स वर्क में एडमिशन लेने वाले नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए है. चयनित छात्रों को पूरी डिग्री के दौरान ट्यूशन फीस में 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी, लेकिन शर्त यह रहेगी कि वे स्कॉलरशिप की सभी शर्तों का पालन करें.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्र को भारत का नागरिक होना चाहिए. इसके अलावा व्यक्ति के पास ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के किसी एलिजिबल अंडर ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स का ऑफर लेटर होना चाहिए. आवेदक का पिछला शैक्षणिक रिकॉर्ड भी बेहतर होना चाहिए. इसके लिए लिए न्यूनतम 6.0 जीपीए या उसके समान अंक जरूरी है. साथ ही छात्र को जिस कोर्स में एडमिशन लेना है, उसके लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अंग्रेजी भाषा की सभी शर्तें पूरी करनी होगी.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं आवेदन?
इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले इच्छुक छात्र को ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी में अपने पसंदीदा अंडरग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए आवेदन करना होगा. ऑफर लेटर मिलने के बाद तय सीमा के अंदर स्कॉलरशिप के लिए अलग से आवेदन करना होगा. आवेदन के साथ छात्रों को अपने एजुकेशनल डॉक्यूमेंट और पर्सनल स्टेटमेंट भी जमा करना होगा. &amp;nbsp;इसके बाद यूनिवर्सिटी की चयन समिति सभी आवेदन की समीक्षा करेंगे और एलिजिबल उम्मीदवारों का चयन करेगी.&amp;nbsp;
स्कॉलरशिप के लिए जरूरी तारीखें&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी अलग-अलग ट्राइमेस्टर के अनुसार आवेदन स्वीकार कर रही है. ट्राइमेस्टर-3 (नवंबर 2026 इनटेक) आवेदन की अंतिम तिथि 15 अगस्त 2026 है, जबकि रिजल्ट 28 अगस्त 2026 तक जारी किए जाएंगे. इसके अलावा ट्राइमेस्टर-1 (मार्च 2027 इनटेक) आवेदन की अंतिम तिथि 28 नवंबर निर्धारित की गई है. ऐसे में जो छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की योजना बना रहे हैं, वह ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. &amp;nbsp;इसके बाद ऑफर लेटर मिलने के बाद निर्धारित समय के अंदर छात्र स्कॉलरशिप के लिए भी आवेदन कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ऑस्ट्रेलिया, में, पढ़ना, है, यहां, मिल, रही, स्कॉलरशिप</media:keywords>
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        <title>नौकरी चाहिए तो अभी सीख लें ये 4 AI स्किल्स</title>
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        <description><![CDATA[ नौकरी चाहिए तो अभी सीख लें ये 4 AI स्किल्स ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्यों भारतीय युवा सरकारी नौकरियों के पीछे इतने पागल हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ Government Job Craze:&amp;nbsp;एक समय था, जब बड़े शहर की कॉर्पोरेट नौकरी युवाओं का सबसे बड़ा सपना मानी जाती थी. अच्छी सैलरी, &amp;nbsp;ग्लास ऑफिस, मल्टीनेशनल कंपनी और तेज करियर ग्रोथ को सफलता की पहचान समझा जाता था. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. आज बड़ी का संख्या में युवा कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर यूपीएससी, एसएससी, बैंक, रेलवे और राज्य लोक सेवा आयोग जैसी सरकारी नौकरियों की तैयारी में लगे हैं. इस लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि जॉब सिक्योरिटी, स्थिर करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा भी है. हाल के वर्षों में प्राइवेट कंपनियों में लगातार ले-ऑफ, आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते काम के दबाव ने युवाओं को सरकारी नौकरी की ओर फिर से आकर्षित किया है.
एक नौकरी के लिए सैकड़ों दावेदार
सरकार के संसद में दिए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए 22 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए. जबकि इनमें से केवल 7.22 लाख उम्मीदवारों को नौकरी मिल सकी. यानी औसतन एक सरकारी नौकरी के लिए 300 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में थे. यह आंकड़ा &amp;nbsp;बताता है कि सरकारी नौकरी पाने की होड़ लगातार बढ़ रही है. यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, &amp;nbsp;बैंकिंग और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा में हर साल लाखों अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं, जबकि रिक्त पदों की संख्या सीमित रहती है. कई राज्यों में चपरासी जैसी नौकरियों के लिए भी लाखों आवेदन आने के उदाहरण सामने आए हैं.&amp;nbsp;
आखिर यूथ में सरकारी नौकरी की इतनी चाहत क्यों&amp;nbsp;
भारत में सरकारी नौकरी को आज भी स्थायी रोजगार का सबसे सुरक्षित ऑप्शन माना जाता है. इसमें समय पर वेतन, भत्ते, नौकरी जाने का कम खतरा, पेंशन जैसी सुविधा और सामाजिक प्रतिष्ठा जुड़ी होती है. यही वजह है कि कई परिवार आज भी अपने बच्चों को सरकारी नौकरी के लिए प्रेरित करते हैं. इसके विपरीत प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा में लेकर लगातार चिंता बनी रहती है. खासकर आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी पैमाने पर हुई छंटनी ने युवाओं का भरोसा कमजोर कर दिया है.&amp;nbsp;
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कॉर्पोरेट नौकरी में बढ़ता काम का दबाव&amp;nbsp;
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के आंकड़ों के अनुसार भारत में कर्मचारी औसतन 45.8 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं. वहीं विकसित देशों में यह आंकड़ा काफी कम है. अमेरिका में औसतन 38 घंटे प्रति सप्ताह काम होता है, यूनाइटेड किंगडम में यह लगभग 35.9 घंटे है और जापान में कर्मचारी औसतन 36.6 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 51 प्रतिशत कर्मचारी हर सप्ताह 49 घंटे से ज्यादा काम करते हैं. जिसे अंतरराष्ट्रीय मांगों के अनुसार अत्यधिक कार्य अवधि माना जाता है. ऐसे में वर्क लाइफ बैलेंस भी युवाओं के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरी है.
क्या सिर्फ सरकारी नौकरी ही समाधान है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकारी नौकरियों का आकर्षण अपनी जगह सही है, लेकिन सभी युवाओं के लिए सरकारी नौकरी संभव नहीं है. हर साल लाखों नए युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं, जबकि सरकारी रिक्तियां सीमित रहती है. ऐसे में निजी क्षेत्र, स्टार्टअप, उद्यमिता और कौशल आधारित रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करना जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>देश में स्कूलों की संख्या एक लाख से ज्यादा कम हुई, कॉलेज और यूनिवर्सिटी बढ़े या घटे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-में-स्कूलों-की-संख्या-एक-लाख-से-ज्यादा-कम-हुई-कॉलेज-और-यूनिवर्सिटी-बढ़े-या-घटे</link>
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        <description><![CDATA[ संसद के मॉनसून सत्र में देश में सरकारी स्कूलों के बंद होने का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहा है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर एक लाख से ज्यादा स्कूल बंद करने का आरोप लगाया. &amp;nbsp;इसके जवाब में केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूलों को खोलने, मर्जर करने या बंद करने का फैसला राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसी दौरान सरकार की ओर से जारी किए गए UDISE+ आंकड़ों से यह भी सामने आया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में सरकारी स्कूलों की संख्या घटी है. वहीं दूसरी ओर यूनिवर्सिटी और कॉलेज की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
सरकारी स्कूलों की संख्या में आई गिरावट&amp;nbsp;
शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि केंद्र अलग से स्कूल बंद होने या उनके विलय का रिकॉर्ड नहीं रखता. लेकिन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से UDISE+ पोर्टल पर अपलोड किए गए आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घटी है. 2021-22 में देश में कुल 10,22,386 सरकारी स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 10,05,245 रह गई. यानी 4 वर्षों में करीब 17,000 स्कूल कम हो गए. वहीं पिछले दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी स्कूलों की संख्या में लगभग 1 लाख की कमी दर्ज की गई है. अकेले उत्तर प्रदेश में 2025-26 के दौरान सबसे ज्यादा 1,77,103 सरकारी स्कूल दर्ज किए गए. हालांकि इससे पहले के वर्षों में यहां स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूलों के विलय और पुनर्गठन की प्रक्रिया सबसे ज्यादा चर्चा में रही.
ये भी पढ़ें-भारत में ग्रेजुएट बेरोजगारी 22.7%, डिग्री बढ़ी लेकिन नौकरी नहीं&amp;nbsp;
केंद्र सरकार ने क्या कहा?&amp;nbsp;
सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 स्कूलों के एकीकरण की अनुमति देता है, लेकिन यह तभी किया जा सकता है जब इससे छात्रों की शिक्षा तक पहुंच प्रभावित न हो. मंत्रालय का कहना है कि स्कूलों के विलय के दौरान यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. सरकार ने यह भी बताया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को कुल स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना, नामांकन बढ़ाने और विद्यार्थियों को स्कूल में बनाए रखने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है. वहीं शिक्षकों की भर्ती और तैनाती की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है.
दूसरी और तेजी से बढ़ी यूनिवर्सिटियों की संख्या&amp;nbsp;
जहां एक और देश में स्कूलों की संख्या घटी है, वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तार तेजी से हुआ. AISHE 2023-24 के अनुसार वर्ष 2013-14 में देश में 723 विश्वविद्यालय थे, जो 2023-24 तक बढ़कर 1,289 हो गए. यानी 10 वर्षों में विश्वविद्यालय की संख्या में करीब 77 फीसदी की वृद्धि हुई. इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ी भूमिका प्राइवेट यूनिवर्सिटी की रही. 2013-14 में देश में 219 प्राइवेट यूनिवर्सिटी थे, जिनकी संख्या बढ़कर 540 हो गई. यानी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में लगभग 149 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई. वहीं सरकारी यूनिवर्सिटी की संख्या 504 से बढ़कर 733 हुई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद, जानें वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल आरक्षण में अंतर</title>
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        <description><![CDATA[ UP Teacher Recruitment: आज उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती से संबंधित एक जरूरी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होनी है. उत्तर प्रदेश सरकार और याचिकार्ताओं की ओर से पांच-पांच वकील अपने-अपने पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रस्तुत करेंगे. उत्तर प्रदेश में आरक्षण प्रक्रिया से बाहर किए गए 67 हजार से ज्यादा शिक्षकों और लगभग 9,000 उम्मीदवारों का भविष्य इसी फैसले पर निर्भर करता है. वहीं सोमवार को दोनों पक्षों ने अदालत में हालफनामे दाखिल किए और अपने जवाब प्रस्तुत किए. हलफनामे में यूपी सरकार ने स्पष्ट किया कि 2020 में चयनित हुए 69,867 चयनित शिक्षकों में से किसी को हटाने के पक्ष में नहीं है.
यूपी सरकार के अनुसार आपत्ति करने वाले छात्रों में से जो योग्य होंगे, उन्हें आने वाली भर्तियों में प्राथमिकता दी जाएगी. वहीं उत्तर प्रदेश में इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल आरक्षण को लेकर हैं. यही दो शब्द इस भर्ती विवाद की जड़ माने जा रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको समझाते हैं कि वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों आरक्षण प्रणालियों में क्या अंतर है और 69 हजार शिक्षक भर्ती में विवाद कैसे पैदा हुआ.&amp;nbsp;
कैसे शुरू हुआ 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद?&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2018 में बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालय में 69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती निकाली थी. जनवरी 2019 में परीक्षा हुई और उसके बाद सामान्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत कट ऑफ तय किया गया. भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदस्य 67,867 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई. हालांकि चयन सूची जारी होने के बाद आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया की भर्ती में आरक्षण के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. उनका कहना था की मेरिट में आने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में समायोजित करने के बजाय उनके आरक्षित कोटे में ही गिना गया. जिससे इस वर्ग के दूसरे उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल सका. यही विवाद बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया.&amp;nbsp;
क्या होता है? वर्टिकल आरक्षण?
वर्टिकल आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए दिया जाता है. इसके तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग &amp;nbsp;(EWS) के लिए अलग-अलग आरक्षण तय होता है. इस व्यवस्था का सबसे जरूरी नियम यह है कि अगर किसी आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अपनी मेरिट के आधार पर जनरल सीट हासिल कर लेता है, तो उसे उसके आरक्षित कोटे में नहीं गिना जाता. यानी उसकी आरक्षित सीट खाली रहती है, जिस पर इस वर्ग के किसी अन्य पात्र उम्मीदवार को नियुक्ति मिल सकती है. इसे मेरिट आधारित माइग्रेशन कहा जाता है. 69 हजार शिक्षक भर्ती में विवाद का मुख्य कारण भी यही बताया गया कि मेरिट में चयनित कई आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य सीटों पर समायोजित नहीं किया गया.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-NEET रिजल्ट में NTA पर फिर सवाल, छात्रा बोली- 668 की जगह मिले 11 अंक
हॉरिजॉन्टल आरक्षण क्या है?
हॉरिजॉन्टल आरक्षण विशेष वर्गों को अतिरिक्त अवसर देने की व्यवस्था है. इसमें महिला, पीडब्ल्यूडी कैटेगरी, एक्स सर्विसमैन जैसी कैटेगरी शामिल होती है. यह आरक्षण अलग से नहीं चलता, बल्कि हर वर्टिकल श्रेणी के अंदर लागू होता है. उदाहरण के लिए अगर किसी वर्ग में महिलाओं के लिए आरक्षण तय है, तो पहले उस वर्ग की पूरी मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है. इसके बाद देखा जाता है कि उसमें कितनी महिलाएं चयनित हुई है. अगर निर्धारित संख्या पूरी नहीं होती तभी सूची में आवश्यक बदलाव कर महिला अभ्यर्थियों को शामिल किया जाता है. यानी हॉरिजॉन्टल &amp;nbsp;आरक्षण किसी वर्ग का अलग कोटा नहीं बढ़ाता, बल्कि इस कैटेगरी के अंदर समायोजित किया जाता है.&amp;nbsp;
दोनों आरक्षण में सबसे बड़ा अंतर&amp;nbsp;
वर्टिकल आरक्षण सामाजिक वर्गों के लिए होता है, जबकि हॉरिजॉन्टल आरक्षण विशेष कैटेगरी के लिए लागू किया जाता है. वर्टिकल आरक्षण में अगर कोई एससी, एसटी, ओबीसी या ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार सामान्य मेरिट से चयनित होता है, तो उसकी सीट आरक्षित कोटे से कम नहीं होती. दूसरी और हॉरिजॉन्टल आरक्षण में मेरिट से चयनित महिला या दिव्यांग उम्मीदवार इस हॉरिजॉन्टल कोटे का हिस्सा मानी जाती है और उसके लिए अतिरिक्त सीट नहीं जोड़ी जाती. इसी कारण दोनों आरक्षण की गणना और लागू करने का तरीका पूरी तरह अलग होता है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>एंटी पेपर लीक बिल पर संसद में बहस, पुराने कानून और नए बिल में कितना अंतर? </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एंटी-पेपर-लीक-बिल-पर-संसद-में-बहस-पुराने-कानून-और-नए-बिल-में-कितना-अंतर</link>
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        <description><![CDATA[ Anti Paper Leak Bill: देशभर में नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवाल अब संसद तक पहुंच चुके हैं. आज लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (Prevention of Unfair Means Act) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा होने की संभावना है. पिछले एक सप्ताह से मानसून सत्र में जारी राजनीतिक गतिरोध के बाद यह पहली बड़ी विधायी बहस मानी जा रही है. सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एंटी पेपर लीक के पुराने कानून और नए बिल में कितना अंतर है.&amp;nbsp;
एंटी पेपर लीक पर संसद में बहस&amp;nbsp;
नीट यूजी विवाद के बाद देशभर में छात्रों के प्रदर्शन हुए. दिल्ली के जंतर मंतर समेत कई जगहों पर आंदोलन हुए और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठी. इसी बीच केंद्र सरकार ने 2024 में लागू कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक तैयार किया है. सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे लोकसभा में पेश किया, हालांकि सोमवार को &amp;nbsp;विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सदन में हंगामा किया, जिससे बहस नहीं हो सकी. अब सभी दलों के बीच चर्चा पर सहमति बनने के बाद आज इस बिल पर बहस होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
2024 के कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?&amp;nbsp;
केंद्र सरकार ने 2024 में सार्वजनिक परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए कानून बनाया था. यह कानून यूपीएससी, एसएससी, एनटीए, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस और केंद्र सरकार की अन्य अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू किया गया था. इसके बावजूद पिछले दो वर्षों में कई परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए. सरकार का कहना है कि केवल सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं था, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध और प्रभावी बनाना जरूरी हो गया, इसी वजह से संशोधन लाया गया है.
पुराने कानून और नए बिल में अंतर&amp;nbsp;
सबसे बड़ा बदलाव सजा और जुर्माने को लेकर किया गया है. 2024 के कानून में सामान्य मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की जेल का प्रावधान था, जबकि संशोधन के बाद गंभीर मामलों में सजा बढ़ाकर अधिकतम 10 वर्ष तक जा सकती है. जुर्माने की राशि भी कई गुना बढ़ाई गई है. पहले जहां अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था, वहीं अब संगठित अपराध और बड़े मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. परीक्षा एजेंसी और सर्विस प्रोवाइडर संस्थान पर भी पहले से कई ज्यादा आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है.
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आसान शब्दों में समझे पुराने बिल और नए बिल में अंतर&amp;nbsp;
प्रावधान&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 2024 का पुराना बिल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; नया संशोधन &amp;nbsp;2026 &amp;nbsp;&amp;nbsp;सामान्य मामलों में सजा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 3 से 5 साल &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;10 साल तक सजा&amp;nbsp;अधिकतम जुर्माना&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;10 लाख रुपये &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;कई मामलों में करोड़ों रुपये तकसंगठित गिरोह पर कार्रवाई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;अधिकतम 1 करोड़ रुपये &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;अब 10 करोड़ रुपये तक जुर्मानाजांच की समय सीमा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;तय नहीं&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;60 दिनों में जांच पूरी&amp;nbsp;ट्रायल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; सामान्य अदालत&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; फास्ट ट्रैक कोर्ट &amp;nbsp;में रोजाना सुनवाई&amp;nbsp;फैसला&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; कोई तय समय नहीं&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;90 दिन के अंदर ट्रायल पूरा करने का टारगेटजांच एजेंसी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; सामान्य व्यवस्था &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; विशेष एसटीएफ का गठन&amp;nbsp;
सरकार ने और क्या उठाए कदम?&amp;nbsp;
सरकार ने नई परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई प्रशासनिक फैसले भी लिए हैं. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में संस्थागत बदलाव शुरू किए गए हैं. परीक्षा संचालन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और टेस्ट सेंटर प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है. साथ ही फ्यूचर में ज्यादा परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाने और तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी छात्रों को संबोधित करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा  ]]></description>
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        <media:keywords>एंटी, पेपर, लीक, बिल, पर, संसद, में, बहस, पुराने, कानून, और, नए, बिल, में, कितना, अंतर </media:keywords>
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        <title>Government Jobs 2026 :  इस साल इन 3 राज्यों में आ रही है बंपर वैकेंसी, आज से ही शुरू कर दें तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ Government Jobs 2026 : अगर आपका सपना सरकारी नौकरी पाने का है, तो आने वाले महीनों में आपके पास कई बड़े मौके आने वाले हैं. केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अलग-अलग विभागों में हजारों पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है और कई नई भर्तियों का भी इंतजार है. ऐसे में जो उम्मीदवार अभी से तैयारी शुरू करेंगे, उनके लिए प्रतियोगिता में आगे निकलने का बेहतर मौका होगा. खासतौर पर 3 राज्यों में बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है. तो आइए जानते हैं कि इस साल किन 3 राज्यों में बंपर वैकेंसी आ रही है.&amp;nbsp;
इस साल किन 3 राज्यों में बंपर वैकेंसी आ रही है?
1. उत्तर प्रदेश - उत्तर प्रदेश में साल 2026 के दौरान पुलिस, शिक्षा और राजस्व विभागों में बड़े स्तर पर भर्ती अभियान प्रस्तावित हैं, जिनके तहत करीब 1.5 लाख सरकारी पदों पर नियुक्तियां की जा सकती हैं. इनमें यूपीपीएससी पीसीएस 2026 की 500 रिक्तियां भी शामिल हैं, जिसके लिए आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 3 अगस्त 2026 कर दी गई है. इसके अलावा राजस्व विभाग में लेखपाल समेत लगभग 20,000 पदों पर भर्ती प्रस्तावित है. इन बड़े भर्ती अभियानों के चलते 2026 सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए जरूरी साल माना जा रहा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;2. राजस्थान - राजस्थान में भी इस साल बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां आने वाली हैं. राज्य में कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) के माध्यम से कई विभागों में भर्ती की जाएगी. इसके साथ ही राजस्थान एलडीसी (LDC) जूनियर असिस्टेंट के 10,644 पदों पर भी भर्ती प्रस्तावित है. इन भर्तियों के जरिए अलग-अलग विभागों में योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. इसलिए जो अभ्यर्थी राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह जरूरी अवसर माना जा रहा है.&amp;nbsp;
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3. कर्नाटक - कर्नाटक में भी इस साल सरकारी नौकरियों के कई अवसर सामने आए हैं. राज्य में पुलिस कांस्टेबल के 2,314 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है. इसके अलावा शिक्षा विभाग में भी अलग-अलग &amp;nbsp;शिक्षक पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है. जो उम्मीदवार पुलिस सेवा या शिक्षा विभाग में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छी खबर हो सकती है.&amp;nbsp;
आवेदन करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पात्रता, आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी जरूर देखनी चाहिए. आवेदन करते समय जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें, तय फीस करें और लास्ट डेट से पहले फॉर्म सबमिट करें. आवेदन के बाद परीक्षा और एडमिट कार्ड से जुड़े अपडेट भी समय-समय पर देखते रहें.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 01:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या छात्रों को भरोसा लौटा पाएगा नया Anti&amp;Paper Leak Bill?</title>
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        <description><![CDATA[ Anti Paper Leak Bill: देश में पेपर लीक अब सिर्फ एक परीक्षा की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि हर साल लाखों छात्रों के भविष्य और सरकार की साख से जुड़ा सवाल बन चुका है. इसी को लेकर केंद्र सरकार लोकसभा में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स अमेंडमेंट बिल 2026 लेकर आई है. यह बिल 2024 के उस कानून में बदलाव करता है जिसे एंटी पेपर लीक कानून कहा जाता है. इस एक्सप्लेनर में हम पेपर लीक बिल की पूरी तकनीकी जानकारी और इसके पीछे की वजह, साथ ही इसके इर्द गिर्द चल रहे माहौल को आसान भाषा में समझेंगे.
सबसे पहले यह बिल है क्या ?&amp;nbsp;
यह कोई बिल्कुल नया कानून नहीं है, बल्कि पुराने कानून का संशोधन यानी अमेंडमेंट है. मूल कानून है पब्लिक एग्ज़ामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024. यह देश का पहला ऐसा राष्ट्रीय कानून था जो सीधे पेपर लीक और परीक्षा में संगठित गड़बड़ी पर बना.&amp;nbsp;2026 का बिल इसी कानून की सज़ा और प्रक्रिया दोनों को और सख्त बनाता है. सरकार के मुताबिक इस बिल में मुख्य रूप से सात बड़े बदलाव किए गए हैं.
पुराना कानून यानी 2024 के एक्ट में क्या था?
2024 का कानून फरवरी 2024 में संसद से पास हुआ और 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू हुआ. यह कानून केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों की परीक्षाओं पर लागू होता है. इनमें यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए और बैंकिंग भर्ती जैसी परीक्षाएं आती हैं. इस कानून में एक बात बहुत साफ है कि इसका निशाना छात्र नहीं हैं यानी परीक्षा देने वाला अभ्यर्थी इसके दायरे में नहीं आता. इसका निशाना वो गिरोह सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां और वो अधिकारी हैं जो मिलीभगत करके पेपर लीक कराते हैं या गड़बड़ी करते हैं.&amp;nbsp;
नए बिल में सज़ा को लेकर क्या बदला?
यही इस संशोधन का सबसे बड़ा हिस्सा है. हर श्रेणी में सज़ा और जुर्माना बढ़ाया गया है.

पहली श्रेणी आम अनफेयर मीन्स की है. बिल के मुताबिक अब तक इसमें तीन से पांच साल की जेल और दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था. नए बिल में इसे बढ़ाकर पांच से दस साल की जेल और पचास लाख रुपये तक जुर्माना कर दिया गया है.
दूसरी श्रेणी परीक्षा कराने वाली सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की है. पहले इस पर एक करोड़ रुपये तक जुर्माना लगता था और उसे चार साल तक परीक्षा से जुड़े काम से बाहर रखा जा सकता था. अब जुर्माना बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये और बैन की अवधि आठ साल कर दी गई है.
तीसरी श्रेणी उन डायरेक्टरों या मैनेजमेंट की है जिनकी मिलीभगत से लीक होता है. पहले इसमें कम से कम तीन साल की जेल और एक करोड़ जुर्माना था. अब कम से कम सज़ा पांच साल और जुर्माना पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है.
सबसे कड़ा प्रावधान संगठित अपराध यानी ऑर्गनाइज़्ड क्राइम पर है. पहले इसमें कम से कम पांच साल और ज़्यादा से ज़्यादा दस साल की जेल थी और जुर्माना कम से कम एक करोड़ था. नए बिल में कम से कम सज़ा सात साल कर दी गई है और जुर्माना कम से कम दस करोड़ रुपये कर दिया गया है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;

जांच और मुकदमे की व्यवस्था में क्या नया है?
सिर्फ सज़ा बढ़ाना ही काफी नहीं माना गया इसलिए बिल में जांच और सुनवाई की रफ्तार पर भी बड़ा बदलाव किया गया है. इसके लिए कानून में दो नई धाराएं 12ए और 12बी जोड़ी गई हैं. बिल के मुताबिक अब हर मामले की जांच दो महीने के अंदर पूरी करनी होगी. केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर वो जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बना सके और अगर टास्क फोर्स बनती है तो जांच सिर्फ वही करेगी.&amp;nbsp;
सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का इंतज़ाम है. हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सलाह करके एक सेशन कोर्ट को ऐसी फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर तय करना होगा. इस अदालत में मुकदमा रोज़ चलेगा और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा करना होगा. जो पुराने मामले पहले से लंबित हैं वो भी इसी अदालत में भेजे जाएंगे और उन्हें भी मिलने के तीन महीने के अंदर निपटाना होगा. इसके अलावा हर फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए अलग से स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर यानी सरकारी वकील नियुक्त किए जाएंगे.
अपील का नया रास्ता
बिल में अपील को लेकर भी साफ व्यवस्था दी गई है, जो पहले नहीं थी. नई धारा 12बी के मुताबिक फास्ट ट्रैक कोर्ट के किसी फैसले या सज़ा के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी. इस अपील को हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच सुनेगी और तीन महीने के अंदर निपटाने की कोशिश करेगी. अपील तीस दिन के अंदर करनी होगी और उचित कारण होने पर हाईकोर्ट इसे नब्बे दिन तक बढ़ा सकता है लेकिन इसके बाद अपील नहीं सुनी जाएगी. जमानत देने या न देने के आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील का रास्ता रखा गया है.
ये सब लाना क्यों पड़ा?
अब असली सवाल है कि जब 2024 का कानून पहले से मौजूद था तो नए बिल की जरूरत क्यों पड़ी?&amp;nbsp; इसका जवाब पिछले दो साल के हालात में है. कड़ा कानून होने के बावजूद बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ी और लीक की खबरें आती रहीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित नीट यूजी 2026 पेपर लीक से बाईस लाख से ज़्यादा अभ्यर्थी प्रभावित हुए और आखिरकार परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इसके साथ ही सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर भी सवाल उठे. इन घटनाओं ने पूरे देश में छात्रों का बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया.
सरकार ने बिल के उद्देश्यों में खुद माना है कि मौजूदा व्यवस्था में मुकदमे सालों तक खिंचते रहे और तेज़ सुनवाई के लिए कोई अलग अदालत नहीं थी. यही वजह है कि नए बिल में समयबद्ध जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट और अपील की व्यवस्था लाई गई है. सरकार का तर्क है कि कड़ी सज़ा के साथ अगर सुनवाई भी तेज़ हो तो अपराधियों में असली डर पैदा होगा.
आस-पास की तस्वीर यानी मामला कितना बड़ा है?
पेपर लीक कोई नई या अकेली समस्या नहीं है. सिर्फ केंद्र ही नहीं कई राज्य भी अपने स्तर पर सख्त कानून ला चुके हैं. उदा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, छात्रों, को, भरोसा, लौटा, पाएगा, नया, Anti-Paper, Leak, Bill</media:keywords>
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        <title>गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में BAMS पेपर लीक का आरोप, 12 में से 11 सवाल वायरल </title>
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        <description><![CDATA[ Gujarat Ayurved University Paper Leak: नीट पेपर लीक को लेकर मामले अभी थमे भी नहीं थे कि गुजरात के जामनगर से पेपर लीक का एक और विवादित मामला सामने आ गया है. जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है. यूनिवर्सिटी के अंतर्गत BAMS थर्ड ईयर के शल्य तंत्र-1 सब्जेक्ट की परीक्षा में पेपर लीक होने के आरोप सामने आए हैं. दावा किया जा रहा है की परीक्षा से पहले व्हाट्सएप पर वायरल हुए 12 जरूरी सवालों में से 11 परीक्षा में पूछे गए. इसके बाद छात्रों और अलग-अलग छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है.&amp;nbsp;
परीक्षा से पहले ही सवाल वायरल होने का आरोप&amp;nbsp;
20 जुलाई को आयोजित BAMS थर्ड ईयर की शल्य तंत्र-1 की परीक्षा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर कुछ जरूरी प्रश्न वायरल होने की बात सामने आई. परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों ने दावा किया कि की वायरल हुए 12 सवालों में से 11 प्रश्न परीक्षा प्रश्न पत्र में शामिल थे. इस दावे के बाद पेपर लीक की आशंका बढ़ गई.&amp;nbsp;
परीक्षा के बाद सामने आया मामला&amp;nbsp;
बताया जा रहा है कि परीक्षा देने वाले कई छात्रों को परीक्षा समाप्त होने के बाद इस पूरे मामले की जानकारी मिली. इसके बाद यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे. छात्रों का कहना है कि अगर वायरल सामग्री और प्रश्न पत्र में इतनी समानता है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.&amp;nbsp;
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जांच के लिए बनाई गई विशेष समिति&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक परीक्षा निदेशक एच. पी. झाला के अनुसार परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुई थी. बाद में यह सूचना मिली कि परीक्षा से पहले व्हाट्सएप पर कुछ सवाल वायरल हुए, इसके बाद कुलपति से चर्चा कर मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने का फैसला लिया गया. &amp;nbsp;यूनिवर्सिटी का कहना है कि समिति वायरल सामग्री, मूल प्रश्न पत्र और दूसरे संबंधित तथ्यों की जांच करेगी. अगर जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
छात्र संगठन ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग&amp;nbsp;
युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग की है. संगठनों का कहना है कि अगर पेपर लीक की पुष्टि हुई है, तो समझदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लिया जाए. संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा. इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल उससे संबंध 20 से 25 कॉलेज के दूसरे विषयों की परीक्षा पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गुजरात, आयुर्वेद, यूनिवर्सिटी, में, BAMS, पेपर, लीक, का, आरोप, में, से, सवाल, वायरल </media:keywords>
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        <title>UP Police Constable Result 2026: इस हफ्ते जारी हो सकता है यूपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/up-police-constable-result-2026-इस-हफ्ते-जारी-हो-सकता-है-यूपी-पुलिस-कांस्टेबल-रिजल्ट</link>
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        <description><![CDATA[ UP Police Constable Result 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए एक बेहद काम की खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित की गई सिपाही भर्ती परीक्षा का रिजल्ट इसी हफ्ते यानी जुलाई के आखिरी दिनों में आधिकारिक तौर पर घोषित किए जाने की पूरी संभावना है. जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे.
बता दें कि इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 32,679 खाली पदों को भरा जाना है. साथ ही इस परीक्षा के लिए राज्यभर से लगभग 21 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और परीक्षा में हिस्सा लिया था. परीक्षा संपन्न होने और प्रोविजनल आंसर की पर आपत्तियां दर्ज कराने के बाद से ही स्टूडेंट्स बेसब्री से फाइनल रिजल्ट और कट-ऑफ मार्क्स का इंतजार कर रहे हैं.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड करें मेरिट लिस्ट और अपना रिजल्ट
रिजल्ट घोषित होने के बाद उम्मीदवार इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना स्कोरकार्ड और मेरिट लिस्ट डाउनलोड कर सकते हैं.

step 1 - सबसे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाएं.
step 2 - &amp;nbsp;वेबसाइट के होमपेज पर दिए गए UP Police Constable Result 2026 या मेरिट लिस्ट से संबंधित एक्टिव लिंक पर क्लिक करें.
step 3 - अब अपना रोल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि जैसी जरूरी डिटेल्स दर्ज करें.
step 4 - जानकारी सबमिट करते ही आपका रिजल्ट और स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई (फ्लैश) देने लगेगा.
step 5 - भविष्य की जरूरत के लिए रिजल्ट की पीडीएफ फाइल को डाउनलोड कर लें या उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;

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आगे की प्रक्रिया&amp;nbsp;
लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण के लिए बुलाया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लिखित परीक्षा का परिणाम आने के बाद अगस्त के दूसरे पखवाड़े से फिजिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. वहीं, उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे ताजा अपडेट के लिए लगातार ऑफिशियल वेबसाइट का अवलोकन करते रहें.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Police, Constable, Result, 2026:, इस, हफ्ते, जारी, हो, सकता, है, यूपी, पुलिस, कांस्टेबल, रिजल्ट</media:keywords>
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        <title>Success Story: मां&amp;बेटे का कमाल, ठेकुआ बेचकर खड़ा किया 15 करोड़ का बिजनेस</title>
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        <description><![CDATA[ Success Story: बिहार की पारंपरिक मिठाई ठेकुआ को देशभर पर तक पहुंचाने वाली एक मां-बेटे की कहानी आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. कभी घर की रसोई तक सीमित रहने वाला ठेकुआ अब एक बड़े ब्रांड का हिस्सा बन चुका है. बिहार की एक पूर्व शिक्षिका वीणा देवी ने बेटे समीर के साथ मिलकर घर से छोटा काम शुरू किया था, जो आज करोड़ों रुपये के कारोबार में बदल चुका है. उनकी कंपनी अब हर दिन हजारों ग्राहकों तक पारंपरिक स्नैक्स पहुंच रही है. चलिए अब आपको बताते हैं कि मां बेटे ने कैसे कमाल कर दिखाया और ठेकुआ बेचकर 15 करोड़ का बिजनेस कैसे खड़ा कर दिया.&amp;nbsp;
घर से शुरू हुआ अपना किचन&amp;nbsp;
वीणा देवी 15 साल तक स्कूल में पढ़ाने के बाद अपने बेटे समीर के साथ बेंगलुरु आ गई. नई जगह आने के बाद उन्हें खाली बैठना मुश्किल लगने लगा, इसी दौरान उन्होंने अपनी हाउसिंग सोसाइटी में कई महिलाओं को घर से फूड बिजनेस चलाते देखा. इससे प्रेरित होकर उन्होंने भी अपने होम किचन की शुरुआत करने का फैसला लिया. वीणा देवी ने अपना किचन नाम से काम शुरू किया और सबसे पहले नमकीन ठेकुआ, मीठा ठेकुआ और दाल भूजा जैसे पारंपरिक डिश बनाने लगी.
शुरुआत में उन्हें सीमित आर्डर मिलते थे, लेकिन कारोबार में असली बदलाव तब आया जब उनके बेटे समीर ने छठ पूजा में बनने वाले गुड़ के ठेकुआ तैयार करने का सुझाव दिया. गुड़ से बने ठेकुआ लोगों को इतने पसंद आए कि पहले जहां रोजाना 10 से 50 आर्डर मिलते थे, वहीं कुछ समय बाद यह संख्या 100 के पार पहुंच गई. बढ़ती मांग के साथ उनका कारोबार लगातार आगे बढ़ते गया.&amp;nbsp;
आज हर दिन पूरे होते हैं 1000 से ज्यादा ऑर्डर&amp;nbsp;
समय के साथ वीणा देवी का यह छोटा के होम किचन मोम्स मेड नाम के स्नैक्स ब्रांड में बदल गया. अब कंपनी हर दिन 100 से ज्यादा ऑर्डर पूरे करती है और इसकी सालाना आय लगभग 15 करोड़ रुपये बताई जाती है. यह ब्रांड सिर्फ ठेकुआ ही नहीं बल्कि नीमकी और चना दाल जैसे पारंपरिक स्नेक्स भी ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं. इन उत्पादों के जरिए अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक स्वाद को देशभर के लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.&amp;nbsp;
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50 महिलाओं को भी मिला रोजगार&amp;nbsp;
इस कारोबार के बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. फिलहाल कंपनी में करीब 50 महिलाएं काम कर रही है, जो स्नैक्स बनाने और उनकी पैकेजिंग का काम संभालती है. इस तरह यह कारोबार केवल एक परिवार की सफलता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई महिलाओं की आजीविका का माध्यम भी बन गया.&amp;nbsp;
परिवार की रेसिपी बनी सफलता की नींव&amp;nbsp;
बढ़ती मांग के साथ सबसे बड़ी समस्या हर बैच में एक जैसा स्वाद और क्वालिटी बनाए रखना था. पहले वीणा देवी अनुभव के आधार पर सामग्री मिलाती थी, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद उन्होंने आटे, गुड़ और घी की मात्रा को तय प्रक्रिया में बदला, ताकि हर बार ठेकुआ का स्वाद, रंग और कुरकुरा पन एक जैसा रहे.
इस पूरी प्रक्रिया की नींव उनकी मां से मिली पारंपरिक रेसिपी और वर्षों पुराने घरेलू एक्सपीरियंस पर आधारित रही. हर बैच को तैयार करने के बाद उनकी गुणवत्ता की जांच की जाती है. तभी उसे ग्राहकों तक भेजा जाता है. इस स्टार्टअप की कहानी हाल ही में टेक निवेश आदित्य सिंह ने शेयर की है, उन्होंने बताया कि उनकी फर्म ने कंपनी में 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया. इसके बाद एक साल में भी कम समय में कंपनी का कारोबार कई गुना बढ़ गया.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Success, Story:, मां-बेटे, का, कमाल, ठेकुआ, बेचकर, खड़ा, किया, करोड़, का, बिजनेस</media:keywords>
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        <title>CG Assistant Teacher Recruitment 2026 : छत्तीसगढ़ में 2292 असिस्टेंट टीचर्स की भर्ती, आवेदन शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ CG Assistant Teacher Recruitment 2026 : सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी अपडेट सामने आई है. छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन बोर्ड (CGSSB) ने सहायक शिक्षक के 2,292 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इच्छुक और पात्र उम्मीदवार तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट cgssb.cgstate.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. &amp;nbsp;इस भर्ती में ई-कैडर और टी-कैडर दोनों के पद शामिल किए गए हैं. आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़े सभी नियमों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है.
कुल कितने पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में कुल 2,292 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इनमें 795 पद सहायक शिक्षक (ई-कैडर) और 1,497 पद सहायक शिक्षक (टी-कैडर) के लिए तय किए गए हैं. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 21 अगस्त 2026 आवेदन कर सकते हैं. आवेदन में गलती होने पर 22 से 24 अगस्त 2026 तक सुधार का मौका मिलेगा.&amp;nbsp;
आवेदन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले अपने प्रोफाइल रजिस्ट्रेशन में दर्ज सभी जानकारियां अच्छी तरह जांच लेनी चाहिए. आवेदन के दौरान उसी प्रोफाइल का डेटा यूज किया जाएगा भर्ती परीक्षा का परिणाम भी ऑनलाइन आवेदन में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया जाएगा, इसलिए किसी भी गलती को समय रहते सुधार लेना जरूरी है. ऑनलाइन आवेदन भरने की पूरी प्रक्रिया और दिशा-निर्देश आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध Instructions to Fill the Form लिंक में दिए गए हैं.&amp;nbsp;
आवेदन शुल्क कितना है?
इस भर्ती के लिए आवेदन शुल्क उम्मीदवारों की श्रेणी के अनुसार तय किया गया है. सामान्य (General) वर्ग के उम्मीदवारों को 350, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को 250, जबकि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwD) वर्ग के उम्मीदवारों को 200 आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा. आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के दौरान करना होगा.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को विभाग की तय पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी. उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से तय शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए. शिक्षक भर्ती के लिए जरूरी प्रशिक्षण योग्यता, जैसे D.El.Ed/B.Ed, होना जरूरी हो सकता है. साथ ही आयु सीमा विभाग के तय नियमों के अनुसार होगी. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी. वहीं उम्मीदवार को भर्ती से संबंधित सभी नियम और पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी और आवेदन के समय सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध होने चाहिए.&amp;nbsp;
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ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
1. सहायक शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा. आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट cgssb.cgstate.gov.in पर जाएं.
2.इसके बाद CG Assistant Teacher Recruitment 2026 Online Apply लिंक पर क्लिक करें. नए उम्मीदवार पहले अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें और फिर यूजर आईडी, पासवर्ड की मदद से लॉग-इन करें.&amp;nbsp;
3. लॉग-इन करने के बाद आवेदन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी विवरण सही-सही भरें. साथ ही फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.&amp;nbsp;
4. अब अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करने के बाद सभी जानकारियों की दोबारा जांच करें और फॉर्म सबमिट कर दें.&amp;nbsp;
5. आवेदन पूरा होने के बाद आवेदन पत्र और शुल्क रसीद का प्रिंटआउट अपने पास सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SAIL राउरकेला में 1100 पदों पर भर्ती, बिना एग्जाम सेलेक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ SAIL Rourkela vacancy 2026: राउरकेला स्टील प्लांट SAIL ने 2026-27 के लिए अप्रेंटिस भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1100 पदों को पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. खास बात यह है कि इन पदों पर भर्ती के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी. चयन पूरी तरह शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तैयार मेरिट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए किया जाएगा.&amp;nbsp;
किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1110 पद भरे जाएंगे. इनमें ट्रेड अप्रेंटिस के 421 पद, डिप्लोमा (टेक्नीशियन) अप्रेंटिस के 414 पद और ग्रेजुएट अप्रेंटिस के 275 पद शामिल है. इन पदों पर 1 वर्ष की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को संबंधित ट्रेंड में आईटीआई, इंजीनियरिंग, डिप्लोमा या किसी डिग्री मान्यता प्राप्त संस्थान से नियमित रूप से पास होना चाहिए. केवल वे उम्मीदवार पात्र होंगे, जिन्होंने 2022, 2023, 2024, 2025 या 2026 में अपनी योग्यता पूरी की हो. ट्रेड अप्रेंटिस के लिए संबंधित ट्रेड में आईटीआई, डिप्लोमा अप्रेंटिस के लिए संबंधित इंजीनियरिंग शाखा में डिप्लोमा और ग्रेजुएट अप्रेंटिस के लिए संबंधित इंजीनियरिंग या नॉन-इंजीनियरिंग सब्जेक्ट में ग्रेजुएट डिग्री होना जरूरी है. इसके अलावा जिन उम्मीदवारों ने पहले किसी संस्थान में अप्रेंटिसशिप पूरी कर ली है या वर्तमान में अप्रेंटिशिप कर रहे हैं, वह आवेदन नहीं कर सकेंगे. 1 वर्ष या उससे ज्यादा का एक्सपीरियंस रखने वाले उम्मीदवार भी उम्मीदवार भी इस भर्ती के लिए एलिजिबल नहीं होंगे.&amp;nbsp;
आवेदन की लास्ट डेट और आयु सीमा&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 17 जुलाई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 26 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. ट्रेड अप्रेंटिस के लिए आवेदन NAPS पोर्टल, जबकि ग्रेजुएट और डिप्लोमा अप्रेंटिस के लिए NATS पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे. वहीं आयु सीमा की बात करें तो 31 अगस्त 2026 को आधार मानते हुए उम्मीदवार की न्यूनितम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 28 वर्ष होनी चाहिए. आरक्षित वर्ग को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट भी मिलेगी.&amp;nbsp;
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भर्ती के लिए बिना परीक्षा कैसे होगा चयन?
इस भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. उम्मीदवारों का चयन उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां के आधार पर किया जाएगा. मेरिट तैयार करते समय के कक्षा 10 के अंकों को 30 प्रतिशत और संबंधित आईटीआई, डिप्लोमा या डिग्री परीक्षा के अंकों को 70 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा. मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों को राउकेला बुलाकर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का सत्यापन किया जाएगा. अंतिम चयन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर होगा.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन?

इस भर्ती में आवेदन के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एनएपीएस और एनएटीएस पोर्टल पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद कैटेगरी के अनुसार एनएपीएस और एनएटीएस पर रजिस्ट्रेशन करें.
अब ऑनलाइन आवेदन पूरा करने के दौरान सभी जरूरी जानकारी सही-सही भरें.&amp;nbsp;
जानकारी भरने के बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
आवेदन जमा करने से पहले सभी जानकारी की जांच कर लें और आवेदन पत्र सबमिट कर दें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Delhi School News: दिल्ली के 774 स्कूल सेफ्टी जांच में फेल, प्राइवेट सबसे आगे</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi School News: दिल्ली के स्कूलों में बच्चों के सुरक्षा व्यवस्था को लेकर की गई बड़े स्तर की जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं. राजधानी में चलाए जा रहे चाइल्ड प्रोटेक्शन मंथ अभियान के तहत अब तक 1677 स्कूलों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 774 स्कूल सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे. सबसे ज्यादा कमियां प्राइवेट स्कूलों में पाई गईं. जिन स्कूलों में खामियां मिलीं, उन्हें सुधार के निर्देश दिए गए हैं और अब उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी.
यह निरीक्षण अभियान 13 से 24 जुलाई के बीच चलाया गया, अधिकारियों ने बताया कि जांच नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स, &amp;nbsp;दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स और पोक्सो कानून के दिशा निर्देशों केस आधार पर तैयार किए गए स्टूडेंट सेफ्टी चेक लिस्ट के अनुसार की गई है.
1677 स्कूलों की जांच में 774 कमियां मिलीं
निरीक्षण के दौरान सरकारी सहायता प्राप्त एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड और प्राइवेट स्कूलों में शामिल किया गया. अब तक जिन 1677 स्कूलों की जांच हुई, इनमें 790 सरकारी, 812 प्राइवेट और 75 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल है. जांच में 270 सरकारी स्कूल, 463 प्राइवेट स्कूलों और 41 सहायता प्राप्त स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियां पाई गई. अधिकारियों के अनुसार जांच किए गए स्कूलों की संख्या के मुकाबले प्राइवेट स्कूलों में सबसे ज्यादा सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आई.
एलजी और सीएम के निर्देश पर शुरू हुआ अभियान
यह अभियान 6 जुलाई को हुई समीक्षा बैठक के बाद शुरू किया गया था. बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि राजधानी के सभी स्कूलों में चाइल्ड प्रोटेक्शन मंथ के तहत सुरक्षा मानकों की समय के अंदर जांच सुनिश्चित की जाए.
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सुधार के बाद दोबारा होगी जांच
जिन स्कूलों में सुरक्षा संबंधी कमियां मिली है, उन्हें आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं. सुधार कार्य पूरा होने के बाद संबंधित स्कूलों का निरीक्षण दोबारा किया जाएगा, ताकि सुनिश्चित किया जा सके की कमियों को दूर किया गया है या नहीं. अधिकारियों का कहना है कि अभियान को केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि सुधार की पुष्टि भी की जाएगी. वहीं निरीक्षण टीमों में अभिभावकों के प्रतिनिधि, शिक्षा निदेशालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली पुलिस और संबंधित स्कूलों के प्रमुख शामिल है. यह टीमें तय सुरक्षा मानकों के आधार पर स्कूलों का मूल्यांकन कर रहे हैं और जहां भी कमी मिले, वहां तत्काल सुधार की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
सभी 5633 स्कूलों की होगी जांच
अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों का निरीक्षण पूरा नहीं हो जाता. इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनना और सभी शैक्षणिक संस्थानों में जवाबदेही, सुरक्षा और तैयारी की संस्कृति विकसित करना है.
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG काउंसलिंग शेड्यूल जल्द होगा जारी, यहां से करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 Counselling:&amp;nbsp;नीट यूजी 2026 में क्वालीफाई हुए लाखों उम्मीदवार मेडिकल काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं. मेडिकल काउंसलिंग कमिटी ने अभी तक काउंसलिंग को लेकर ऑफिशियल शेड्यूल जारी नहीं किया है. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि काउंसलिंग का पूरा कार्यक्रम जुलाई के अंतिम सप्ताह यानी इसी सप्ताह या अगस्त के शुरुआत में जारी कर किया जा सकता है. आपको बता दें कि MCC की काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए ही देशभर के सरकारी, प्राइवेट डिम्ड मेडिकल कॉलेज और केंद्रीय संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस समेत दूसरे मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन दिया जाएगा.&amp;nbsp;
अगस्त में शुरू हो सकती है राउंड-1 काउंसलिंग&amp;nbsp;
MCC ने अभी आधिकारिक कैलेंडर जारी नहीं किया है, लेकिन MCC के संभावित कार्यक्रम के अनुसार राउंड-1 के लिए रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग अगस्त के पहले सप्ताह में शुरू हो सकती है. इसके बाद मिड अगस्त में सीट आवंटन का रिजल्ट जारी होने की संभावना है. जिन उम्मीदवारों को सीट मिलेगी, उन्हें अगस्त के मध्य से अंतिम सप्ताह के बीच संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा. इसके बाद राउंड-2 की काउंसलिंग अगस्त के अंतिम सप्ताह से सितंबर के मिड तक जबकि राउंड तीन यानी मॉप अप राउंड सितंबर के मध्य से अंतिम सप्ताह के बीच आयोजित हो सकता है. खाली बची सीटों के लिए स्ट्रे वेकेंसी राउंड अक्टूबर 2026 में होने की संभावना है.&amp;nbsp;
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इन MBBS कॉलेजों में एडमिशन का मौका ज्यादा
इस बार मेडिकल सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. एनएमसी ने मौजूदा सत्र के लिए 9,911 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी है. इसके बाद देशभर में सीटों की कुल संख्या बढ़कर 1,36,939 हो गई है. यह सीटें 823 मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होंगी, जिनमें इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंर्पोटेंस शामिल नहीं है. वही इन सीटों में 63,296 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में है, जबकि 73,643 सीटें प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है. इस एडमिशन चक्र में 25 नए मेडिकल कॉलेज भी शामिल किए गए हैं.&amp;nbsp;
किस राज्य में इस बार सबसे ज्यादा सीटें?&amp;nbsp;
आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक देश में सबसे ज्यादा 15995 एमबीबीएस सीटों वाला राज्य है. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की सीटों के मामले में भी कर्नाटक सबसे आगे हैं, जहां 10,995 सीटें उपलब्ध है. इसके अलावा सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीटों के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जहां 6000 सरकारी एमबीबीएस सीटें हैं.&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 में कितने छात्रों ने किया क्वालीफाई?&amp;nbsp;
इस वर्ष नीट यूजी 2026 के लिए 22,79,155 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. री-एग्जाम में करीब 19.99 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें 11,21,170 उम्मीदवारों ने परीक्षा क्वालीफाई की है. इस बार राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्रतिशत 56.08 प्रतिशत रहा. परीक्षा में टॉप स्कोर 715 रहा, जिसे पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से हासिल किया है.
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>DU UG Admission राउंड 2 सीट एक्सेप्टेंस की आज आखिरी तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ DU UG Admission 2026:&amp;nbsp;दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजी एडमिशन की प्रक्रिया के तहत कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम 2026 (CSAS)के दूसरे राउंड में सीट पाने वाले छात्रों के लिए आज 27 जुलाई बहुत अहम दिन है. यूनिवर्सिटी की ओर से जारी संशोधित शेड्यूल के अनुसार जिन उम्मीदवारों को राउंड-2 में सीट आवंटित हुई वह आज रात 11:59 बजे तक अपनी सीट स्वीकार कर सकते हैं. तय समय के अंदर सीट एक्सेप्ट नहीं करने वाले उम्मीदवारों का आवंटन कैंसिल हो सकता है.
यूनिवर्सिटी ने 26 जुलाई को संशोधित शेड्यूल जारी करते हुए सीट स्वीकार करने की अंतिम तिथि 27 जुलाई तक बढ़ा दी थी. यह फैसला उन छात्रों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्हें &amp;nbsp;किसी वजह से समय पर प्रक्रिया पूरी करने में दिक्कत आ रही थी .
CSAS पोर्टल पर लॉगिन कर पूरी करनी होगी प्रक्रिया&amp;nbsp;
राउंड-2 में सीट पाने वाले उम्मीदवारों को दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधिकारिक CSAS पोर्टल पर अपने आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा. इसके बाद उन्हें आवंटित कॉलेज और कोर्स को स्वीकार करना होगा. सीट स्वीकार करने के बाद संबंधित कॉलेज ऑनलाइन डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन करेगा. यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि केवल सीट आवंटित होना पर्याप्त नहीं है. उम्मीदवारों को निर्धारित समय के अंदर सीट एक्सेप्ट करना और आगे की सभी औपचारिकताएं पूरी करना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
28 जुलाई तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का मौका&amp;nbsp;
बदले हुए शेड्यूल के अनुसार संबंधित कॉलेज 28 जुलाई रात 11:59 बजे तक छात्रों के डॉक्यूमेंट का ऑनलाइन वेरिफिकेशन और आवेदन की मंजूरी देंगे. इसके बाद जिन छात्रों का आवेदन स्वीकृत होगा, उन्हें 29 जुलाई रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करनी होगी. फीस जमा होने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी. इस बीच यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत 28 जुलाई से होगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-Nandan M Nilekani Networth: IIT बॉम्बे से इंफोसिस तक, अब परीक्षा सुधारों की कमान संभालेंगे नंदन नीलेकणी, जानिए उनकी सैलरी
समय पर सीट स्वीकार नहीं करने पर क्या होगा&amp;nbsp;
दिल्ली यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार अगर किसी छात्र को दूसरे राउंड में सीट आवंटित हुई है और वह निर्धारित समय तक उसे स्वीकार नहीं करता है, तो उसका आवंटन कैंसिल किया जा सकता है. ऐसे में छात्र आगे की प्रवेश प्रक्रिया से भी बाहर हो सकता है, इसलिए उम्मीदवारों को लगातार सलाह दी जा रही है कि वह अंतिम समय का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपनी सीट एक्सेप्ट कर लें.&amp;nbsp;
दूसरे राउंड में हजारों छात्रों को मिला फायदा&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी के अनुसार CSAS UG यूजी 2026 के दूसरे राउंड में 24,814 छात्रों को पहली बार सीट आवंटित की गई है. वहीं 30,682 उम्मीदवारों को अपग्रेड के जरिए उनकी पसंद के बेहतर कॉलेज या कोर्स में सीट मिली है. पहले राउंड में 63,756 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी हुई थी, जिनमें 15,265 छात्रों ने अपनी सीट फ्रिज की थी, जबकि 48,153 उम्मीदवारों ने अपग्रेड का ऑप्शन चुना था.
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 17:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>New Education Minister Prahlad Joshi : नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के पास कौन&amp;सी डिग्री है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/new-education-minister-prahlad-joshi-नए-शिक्षा-मंत्री-प्रह्लाद-जोशी-के-पास-कौन-सी-डिग्री-है</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/new-education-minister-prahlad-joshi-नए-शिक्षा-मंत्री-प्रह्लाद-जोशी-के-पास-कौन-सी-डिग्री-है</guid>
        <description><![CDATA[ New Education Minister Prahlad Joshi : देश के शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथों में होगी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. अब प्रह्लाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी निभाएंगे.
प्रह्लाद जोशी इससे पहले नवीकरणीय ऊर्जा, संसदीय कार्य और सरकार के कई जरूरी मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. &amp;nbsp;ऐसे में प्रह्लाद जोशी को लेकर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि देश के नए शिक्षा मंत्री की पढ़ाई-लिखाई क्या है और अब तक उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है. तो आइए जानते हैं कि नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के पास कौन-सी डिग्री है
देश के नए शिक्षा मंत्री का जन्म कहां हुआ था
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे और उनकी माता का नाम मालतीबाई था. बचपन से ही उनका जीवन एक साधारण परिवार में बीता, छात्र जीवन के दौरान उनका इंटरेस्ट सामाजिक कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों में रहा. आगे चलकर उन्होंने सामाजिक गतिविधियों के साथ एक छोटे उद्योग की स्थापना भी की. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई.&amp;nbsp;
नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के पास कौन-सी डिग्री है?
प्रह्लाद जोशी की शुरुआती शिक्षा रेलवे स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की, उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, हुबली में एडमिशन लिया. यहां से उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की, आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने साल 1983 में बीए की पढ़ाई पूरी की. कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1949 में हुई थी और इसे उत्तरी कर्नाटक के प्रमुख विश्वविद्यालयों में गिना जाता है. इस विश्वविद्यालय से कई राजनेता, सरकारी अधिकारी और अन्य प्रसिद्ध लोग भी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं.&amp;nbsp;
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राजनीतिक सफर कैसे शुरू हुआ?
प्रह्लाद जोशी साल 2004 में पहली बार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद उन्होंने लगातार हर लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की, इसी वजह से वे कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाले नेताओं में शामिल हैं. राजनीति में आने से पहले वे व्यापार और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे.
केंद्र सरकार में कई जरूरी मंत्रालय संभाल चुके हैं
30 मई 2019 को प्रह्लाद जोशी ने पहली बार केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली. उस समय उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके बाद केंद्र सरकार में उन्हें समय-समय पर कई जरूरी मंत्रालयों का दायित्व मिला. वे नवीकरणीय ऊर्जा यानी सौर और पवन ऊर्जा से जुड़े कार्यों को भी संभाल चुके हैं. साथ ही संसदीय मामलों जैसे जरूरी विभागों में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>DU UG Admission 2026 : DU में यूजी एडमिशन के लिए दूसरी लिस्ट जारी, आज करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन का इंतजार कर रहे हजारों छात्रों के लिए बड़ी अपडेट आ गई है. यूनिवर्सिटी ने कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS-UG) के तहत UG एडमिशन के दूसरे राउंड की सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी कर दी है. जिन उम्मीदवारों ने दूसरे चरण में हिस्सा लिया था, वे अब अपने लॉग-इन के जरिए यह देख सकते हैं कि उन्हें कौन-सा कॉलेज और कौन-सा कोर्स मिला है.
उम्मीदवारों को आज यानी 26 जुलाई 2026 तक अपनी अलॉट हुई सीट स्वीकार करनी होगी, जबकि एडमिशन पक्का करने के लिए 28 जुलाई 2026 तक फीस जमा करना जरूरी है.&amp;nbsp;दिल्ली विश्वविद्यालय का नया शैक्षणिक सत्र 28 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है.अब उम्मीदवारों के लिए सबसे जरूरी काम तय समय के अंदर अपनी सीट स्वीकार करना है. इसके बाद कॉलेज डॉक्यूमेंट्स की जांच करेंगे और लास्ट में तय तारीख तक फीस जमा करने पर एडमिशन पक्का होगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि DU में यूजी एडमिशन के लिए आज ही कौन सा काम करें.&amp;nbsp;
दूसरे राउंड में कितने छात्रों को मिली सीट?
दिल्ली विश्वविद्यालय के मुताबिक, यूजी एडमिशन के दूसरे चरण में कुल 88,584 उम्मीदवार शामिल हुए. इस राउंड में 24,814 उम्मीदवारों को नई सीट आवंटित की गई. 30,682 छात्रों को उनकी पसंद के अनुसार बेहतर कॉलेज या कोर्स में अपग्रेड मिला.वहीं पहले राउंड में 15,265 छात्रों ने अपनी सीट फ्रीज कर दी थी, इसलिए उनका पहले वाला आवंटन ही बरकरार रखा गया.&amp;nbsp;
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सीट मिलने के बाद आज करें ये काम?
1.अगर दूसरे राउंड में आपका नाम आया है, तो सबसे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के CSAS एडमिशन पोर्टल पर अपने अकाउंट में लॉग-इन करें.
2. वहां आपको अलॉट किए गए कॉलेज और कोर्स की जानकारी दिखाई देगी.&amp;nbsp;
3. इसके बाद तय समय-सीमा के अंदर अपनी सीट स्वीकार करें.
4.सीट स्वीकार करने के बाद संबंधित कॉलेज आपके आवेदन और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन करेगा.
5. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आपको 28 जुलाई 2026 से पहले ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करनी होगी.
6. फीस जमा होने के बाद ही आपका एडमिशन पूरी तरह से कन्फर्म माना जाएगा.&amp;nbsp;
7. फ्यूचर में जरूरत पड़ने पर यूज के लिए एडमिशन कन्फर्मेशन और फीस जमा करने की रसीद अपने पास सुरक्षित रखें.&amp;nbsp;
अगस्त में खुलेगी मिड-एंट्री विंडो
दिल्ली विश्वविद्यालय ने जानकारी दी है कि यूजी एडमिशन प्रक्रिया के दौरान बची हुई सीटों को भरने के लिए अगस्त में मिड-एंट्री विंडो भी खोली जाएगी. इस सुविधा के तहत वे योग्य छात्र भी बाद के एडमिशन राउंड में हिस्सा ले सकेंगे, जिन्होंने पहले रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था और खाली बची सीटों पर प्रवेश लेना चाहते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>महंगी शिक्षा पर बवाल, CTI ने PM मोदी को चिट्ठी लिख रखी ये मांग</title>
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        <description><![CDATA[ देश में महंगी होती उच्च शिक्षा को लेकर व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्र सरकार को आगाह किया है. संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर निजी शिक्षण संस्थानों की बेकाबू फीस पर नकेल कसने, ब्याज मुक्त एजुकेशन लोन देने और सरकारी कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की मांग उठाई है. CTI का स्पष्ट तौर पर कहना है कि मेडिकल, इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे पाठ्यक्रमों का बढ़ता खर्च आम व मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रहा है, जिससे न केवल प्रतिभाशाली युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.&amp;nbsp;
महंगी शिक्षा से आम और मध्यम वर्ग पर बढ़ा आर्थिक दबाव
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि, वर्तमान में मेडिकल, इंजीनियरिंग, MBA और अन्य प्रोफेशनल कोर्स की फीस लाखों रुपये तक पहुंच चुकी है. ऐसे में आम और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सिर्फ सपना बनकर रह जा रहा है. अपने बच्चों के भविष्य के लिए कई पैरेंट्स भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेने के लिए मजबूर हैं. इस कर्ज की किश्तें चुकाने में परिवार सालों-साल खप जाते हैं, जिससे उनका पूरा बजट पटरी से उतर जाता है.
प्राइवेट कॉलेजों की फीस 10 से 20 लाख तक पहुंची फीस
संगठन द्वारा बाजार और अभिभावकों से जुटाए गए फीडबैक के आधार पर दावा किया गया है कि निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की सालाना फीस 10 लाख से 20 लाख रुपये तक पहुंच गई है. सीमित आय वाले परिवारों के लिए इतना बड़ा खर्च उठाना पूरी तरह से सामर्थ्य के बाहर हो चुका है, जिससे वे उच्च शिक्षा की दौड़ में पिछड़ते जा रहे हैं.
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एजुकेशन लोन का बढ़ता बोझ घुटती प्रतिभाएं
CTI की मानें तो बढ़ती फीस के इस अनियंत्रित ढांचे की वजह से पैरेंट्स भारी ब्याज पर एजुकेशन लोन लेने के लिए मजबूर हैं, जिसकी किस्तें कई मामलों में करीब 10 साल तक चुकानी पड़ती हैं. संगठन का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते कई प्रतिभाशाली छात्र भी अपनी पसंद के प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं, जिससे देश की प्रतिभा प्रभावित हो रही है.
MSME सेक्टर और बाजार पर असर
महंगी शिक्षा का दुष्परिणाम केवल परिवारों की जेब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. समुचित और सस्ती स्किल ट्रेनिंग न मिल पाने के कारण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) सेक्टर को स्किल्ड मैनपावर नहीं मिल पा रहा है. दूसरी ओर, आम परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई में चले जाने से बाजार में खरीदारी और उपभोक्ता मांग में भी गिरावट आ रही है.&amp;nbsp;
व्यापार बनती शिक्षा विकसित भारत के लक्ष्य में बाधा
बृजेश गोयल ने चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी होती है, लेकिन मौजूदा समय में यह व्यापार का रूप ले चुकी है. आम व्यक्ति या MSME से जुड़े व्यापारी के लिए अपने बच्चे को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना बेहद मुश्किल हो गया है. उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि अगर समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो साल 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.
CTI ने सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए CTI ने पत्र के माध्यम से सरकार से तुरंत चार ठोस कदम उठाने की अपील की है:
स्वतंत्र फीस रेगुलेशन अथॉरिटी: निजी विश्वविद्यालयों और प्रोफेशनल कॉलेजों की मनमानी रोकने के लिए एक स्वतंत्र फीस रेगुलेशन अथॉरिटी बनाने की मांग की है. संगठन चाहता है कि सालाना फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत तय की जाए.
ब्याज मुक्त एजुकेशन लोन: 10 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन को ब्याज मुक्त किया जाए और इसकी अदायगी नौकरी मिलने के बाद ही शुरू की जाए.
सरकारी संस्थानों का विस्तार: देश में सरकारी मेडिकल, इंजीनियरिंग और स्किल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि छात्रों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.&amp;nbsp;
MSME स्किल फंड की स्थापना: MSME कर्मचारियों और उनके बच्चों के लिए टेक्निकल और स्किल कोर्स में केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी देने के लिए सब्सिडी आधारित फंड बनाए.
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>UP Board 2027: 10वीं&amp;12वीं प्राइवेट छात्रों का शेड्यूल जारी,  जानें आवेदन से लेकर करेक्शन तक की पूरी डेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/up-board-2027-10वीं-12वीं-प्राइवेट-छात्रों-का-शेड्यूल-जारी-जानें-आवेदन-से-लेकर-करेक्शन-तक-की-पूरी-डेट</link>
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        <description><![CDATA[ UP Board Exam 2027 : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 2027 की हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) बोर्ड परीक्षा में प्राइवेट अभ्यर्थियों के रूप में शामिल होने वाले छात्रों के लिए आवेदन कार्यक्रम जारी कर दिया है. अब ऐसे छात्र तय समय-सीमा के अनुसार परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे और परीक्षा शुल्क जमा कर सकेंगे. बोर्ड ने आवेदन से लेकर फीस जमा करने, डॉक्यूमेंट अपलोड करने, अभ्यर्थियों के वेरिफिकेशन और आवेदन में सुधार तक का पूरा शेड्यूल भी जारी किया है. ऐसे में जो छात्र प्राइवेट उम्मीदवार के रूप में परीक्षा देना चाहते हैं, उनके लिए सभी जरूरी तारीखों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
कब तक भर सकेंगे आवेदन फॉर्म?
यूपी बोर्ड के अनुसार, प्राइवेट अभ्यर्थी 5 अगस्त 2026 तक परीक्षा शुल्क के साथ अपना आवेदन फॉर्म तय फ्रोवाडिट केंद्रों के माध्यम से जमा कर सकते हैं, जो उम्मीदवार तय समय तक आवेदन नहीं कर पाएंगे, उन्हें 100 रुपये लेट फीस के साथ आवेदन करना होगा.&amp;nbsp;
आवेदन से लेकर करेक्शन तक का पूरा शेड्यूल
1. बोर्ड ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी सभी जरूरी तारीखें जारी कर दी हैं. आवेदन फॉर्म और परीक्षा शुल्क जमा करने की लास्ट डेट 5 अगस्त 2026 है.
2. वहीं कोषागार (Treasury) में परीक्षा शुल्क जमा करने की लास्ट डेट 10 अगस्त 2026 है.
3.शुल्क जमा करने और शैक्षणिक योग्यता का विवरण अपलोड करने की लास्ट डेट 16 अगस्त 2026 है. 100 रुपये लेट फीस के साथ आवेदन करने की लास्ट डेट भी 16 अगस्त 2026 है.
4. इसके अलावा लेट फीस के साथ आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का विवरण अपलोड करने की लास्ट डेट 20 अगस्त 2026 है और अभ्यर्थियों के विवरण का वेरिफिकेशन 21 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक होगा.
5. वहीं आवेदन में सुधार (Correction) और अपडेट की अवधि 1 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक है. अभ्यर्थियों की फोटो सूची और निधि पत्र जमा करने की लास्ट डेट 30 सितंबर 2026 है.&amp;nbsp;
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10वीं और 12वीं के छात्रों को कितनी फीस देनी होगी?
यूपी बोर्ड ने कक्षा 10 और 12 के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा शुल्क भी तय कर दिया है. &amp;nbsp;कक्षा 10 के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा शुल्क 706.50 रुपये रखा गया है. वहीं, क्रेडिट सिस्टम के तहत आवेदन करने वाले छात्रों को 306.50 रुपये जमा करने होंगे. अगर कोई छात्र अतिरिक्त विषय के लिए आवेदन करता है, तो उसे प्रति विषय 206.50 रुपये शुल्क देना होगा. वहीं कक्षा 12 के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा शुल्क 806.50 रुपये तय किया गया है. इंटरमीडिएट में अतिरिक्त विषय लेने पर प्रति विषय 206.50 रुपये का शुल्क देना होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Nandan M Nilekani Networth: IIT बॉम्बे से इंफोसिस तक, अब परीक्षा सुधारों की कमान संभालेंगे नंदन नीलेकणी, जानिए उनकी सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की है. यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए सुझाव देगी. हाल के वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विवादों के बीच इस फैसले को अहम माना जा रहा है.
कौन हैं नंदन नीलेकणी?
नंदन मोहनराव नीलेकणी का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था. उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक के सिरसी का रहने वाला है. उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने भारतीय आईटी उद्योग को नई पहचान दिलाने वाली कंपनी इंफोसिस की सह-स्थापना की और लंबे समय तक कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
आधार परियोजना को दिलाई नई पहचान
नीलेकणी को देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना आधार (Aadhaar) को सफलतापूर्वक लागू कराने का श्रेय भी दिया जाता है. वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अध्यक्ष रह चुके हैं. उनके नेतृत्व में आधार प्रणाली का विस्तार हुआ और करोड़ों भारतीयों को बायोमेट्रिक पहचान से जोड़ा गया. इसके अलावा वे एकस्टेप फाउंडेशन (EkStep Foundation) के सह-अध्यक्ष भी हैं, जो शिक्षा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करता है.
कितनी है नीलेकणी की सैलरी? जानिए संपत्ति से लेकर सबकुछ
आपको बता दें कि फोर्ब्स (Forbes) की रियल-टाइम ट्रैकिंग के अनुसार, नंदन नीलेकणी की कुल संपत्ति लगभग $2.4 बिलियन करीब 23,176 करोड़ रुपये है. वह भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों और तकनीकी दिग्गजों की सूची में शामिल हैं.
नंदन नीलेकणी की वर्तमान सैलरी शून्य रुपये है. साल 2017 में जब उन्होंने इन्फोसिस (Infosys) के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में वापसी की थी, तब उन्होंने स्वयं यह निर्णय लिया था कि वे अपनी इस सेवा के लिए कंपनी से कोई भी वेतन, भत्ता या पारिश्रमिक नहीं लेंगे. वे वर्तमान में पूरी तरह से स्वैच्छिक और मानद आधार पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं. उनकी आय का मुख्य जरिया कंपनी से मिलने वाली सैलरी नहीं, बल्कि इन्फोसिस में उनके पास मौजूद शेयर और उन पर मिलने वाला सालाना डिविडेंड है. इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा परीक्षा सुधार के लिए गठित हाई-लेवल टास्क फोर्स के प्रमुख के रूप में उनकी सैलरी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 05:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPSC CMS 2026 एडमिट कार्ड जारी, 2 अगस्त से होगी परीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ UPSC CMS Admit Card 2026: यूपीएससी ने कंबाइंड मेडिकल सर्विस एग्जामिनेशन 2026 के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है वह ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाकर अपना ई-एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. आयोग ने साफ किया है कि किसी भी उम्मीदवार को डाक के माध्यम से एडमिट कार्ड नहीं भेजा जाएगा. केवल ऑनलाइन जारी किया गया, एडमिट कार्ड ही मान्य होगा.
कब होगी UPSC CMS 2026 की परीक्षा?&amp;nbsp;
UPSC CMS 2026 परीक्षा का आयोजन 2 अगस्त 2026 रविवार को देशभर के मेडिकल परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा. परीक्षा दो शिफ्ट में होगी. पहला पेपर सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरा पेपर दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वह परीक्षा समाप्त होने और अंतिम रिजल्ट घोषित होने तक अपने ई-एडमिट कार्ड की कॉपी सुरक्षित रखें.&amp;nbsp;
ऐसे डाउनलोड करें UPSC CMS 2026 एडमिट कार्ड&amp;nbsp;

UPSC CMS 2026 एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले स्टूडेंट ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in&amp;nbsp;पर जाए.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर Combined Medical Services Examination 2026 e-Admit card लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब अपना रजिस्ट्रेशन आईडी या रोल नंबर और डेट ऑफ बर्थ दर्ज करें.&amp;nbsp;
जानकारी सबमिट करते ही एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा.&amp;nbsp;
इसे डाउनलोड करें और आगे के लिए आप इसका प्रिंट आउट निकाल सकते हैं.

परीक्षा केंद्र पर क्या-क्या लेकर जाना होगा?
UPSC के निर्देशों के अनुसार उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट, वैलिड मूल फोटो पहचान पत्र, काला बॉल प्वाइंट पेन और पेंसिल और पारदर्शी पानी की बोतल ले जाना होगा. अगर एडमिट कार्ड पर उम्मीदवार की फोटो स्पष्ट नहीं है, तो उन्हें एक फोटो पहचान पत्र के साथ दो पासपोर्ट साइज फोटो भी ले जानी होगी. परीक्षा केंद्र पर प्रत्येक सत्र के लिए निर्धारित परीक्षा घोषणा पत्र पर इन तस्वीरों को चिपकाने होगा.&amp;nbsp;
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किन चीजों पर रहेगा प्रतिबंध?&amp;nbsp;

मोबाइल फोन
स्मार्ट वॉच और डिजिटल घड़ियां
किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक या आईटी गैजेट&amp;nbsp;
कैलकुलेटर&amp;nbsp;
किताबें और नोट्स&amp;nbsp;
बैग और दूसरे कीमती सामान&amp;nbsp;

रिपोर्टिंग टाइम का रखें विशेष ध्यान&amp;nbsp;
उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम डेढ घंटे पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है. इस दौरान फेस ऑथेंटिकेशन, पहचान सत्यापन और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. आयोग के अनुसार सुबह की शिफ्ट के लिए प्रवेश 9:00 बजे बंद हो जाएगा. दोपहर की शिफ्ट के लिए प्रवेश दोपहर 1:30बजे बंद कर दिया जाएगा. इन समय के बाद उम्मीदवारों को केंद्र के अंदर प्रवेश के अनुमति नहीं दी जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPSC, CMS, 2026, एडमिट, कार्ड, जारी, अगस्त, से, होगी, परीक्षा</media:keywords>
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        <title>NEET PG 2026: खुल गई करेक्शन विंडो, 28 जुलाई तक सुधार का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ NEET PG 2026 : NEET PG 2026 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने आवेदन फॉर्म में सुधार करने के लिए करेक्शन विंडो खोल दी है. जिन अभ्यर्थियों से आवेदन भरते समय कोई गलती हो गई थी, उन्हें अब उसे ठीक करने का मौका मिलेगा. इसके अलावा बोर्ड ने सिटी इंटिमेशन स्लिप, एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़ी जरूरी तारीखों की जानकारी भी जारी कर दी है. ऐसे में उम्मीदवारों को तय समय के अंदर जरूरी बदलाव कर लेने चाहिए. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि सिटी स्लिप और एडमिट कार्ड कब आएगी.&amp;nbsp;
NEET PG 2026 की करेक्शन विंडो खुली
NBEMS ने NEET PG 2026 के लिए आवेदन फॉर्म में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है. जिन उम्मीदवारों को अपने आवेदन में बदलाव करना है, वे आधिकारिक वेबसाइट natboard.edu.in पर जाकर 28 जुलाई तक करेक्शन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
किन-किन जानकारियों में कर सकते हैं बदलाव?
उम्मीदवार करेक्शन विंडो के दौरान आवेदन फॉर्म में कुछ तय जानकारियों में बदलाव कर सकते हैं. इनमें &amp;nbsp;जन्म तिथि , जेंडर,&amp;nbsp; कैटेगरी, PwD स्टेटस, EWS स्टेटस, शैक्षणिक योग्यता शामिल हैं. हालांकि कुछ जानकारियों में बदलाव की अनुमति नहीं होगी. इनमें नाम, कैटेगरी, ईमेल आईडी, राष्ट्रीयता, परीक्षा शहर और मोबाइल नंबर शामिल है.&amp;nbsp;
फोटो, सिग्नेचर और थंब इंप्रेशन भी कर सकेंगे ठीक
NBEMS के आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, जिन उम्मीदवारों की फोटो, सिग्नेचर या अंगूठे के निशान में कोई कमी या गलती होगी, वे 31 जुलाई से 8 अगस्त तक Image Scrutiny टैब के जरिए इन्हें सुधार सकेंगे.&amp;nbsp;
आवेदन फॉर्म में ऐसे करें सुधार
1. अगर आप अपने आवेदन फॉर्म में बदलाव करना चाहते हैं, तो &amp;nbsp;सबसे पहले NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट natboard.edu.in पर जाएं.&amp;nbsp;
2. Examinations सेक्शन में जाकर NEET PG चुनें.&amp;nbsp;
3. Applicant Login पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
4. अपनी लॉगिन डिटेल्स दर्ज करके साइन इन करें.&amp;nbsp;
5. जिन जानकारियों में बदलाव की अनुमति है, उनमें सुधार करें.&amp;nbsp;
6. Save &amp;amp; Next पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
7.आवेदन फॉर्म की दोबारा जांच करें और सबमिट कर दें.&amp;nbsp;
8. कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें.&amp;nbsp;
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सिटी स्लिप और एडमिट कार्ड कब आएंगे?
NEET PG 2026 के लिए आवेदन में सुधार करने की आखिरी तारीख 28 जुलाई 2026 है. इसके बाद उम्मीदवार 31 जुलाई से 8 अगस्त 2026 तक फोटो, सिग्नेचर और थंब इंप्रेशन जैसी इमेज से जुड़ी गलतियों को ठीक कर सकेंगे. सिटी इंटिमेशन स्लिप 11 अगस्त 2026 को जारी की जाएगी, जबकि एडमिट कार्ड 27 अगस्त 2026 को उपलब्ध कराया जाएगा. NEET PG 2026 की परीक्षा 30 अगस्त 2026 को आयोजित होगी और रिजल्ट &amp;nbsp;साथ ही कट-ऑफ 30 सितंबर 2026 तक जारी हो सकते हैं.&amp;nbsp;
NEET PG 2026 का एग्जाम पैटर्न
NEET PG 2026 की परीक्षा में कुल 180 MCQs पूछे जाएंगे, जो 720 नंबरों के होंगे. परीक्षा पूरी करने के लिए उम्मीदवारों को 3 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा. &amp;nbsp;NBEMS की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, &amp;nbsp;हर सही उत्तर पर 4 नंबर दिए जाएंगे. हर गलत उत्तर पर 1 नंबर काटा जाएगा. जिन प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया जाएगा, उन पर न तो नंबर मिलेंगे और न ही कोई नंबर काटा जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU में MBA से BCom (Hons) तक ऑनलाइन पढ़ाई का प्लान, घर बैठे मिलेगी डिग्री  </title>
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        <description><![CDATA[ DU Online Degree: दिल्ली यूनिवर्सिटी फिलहाल यूजी प्रोग्राम के लिए एडमिशन प्रक्रिया जारी है. वर्तमान में यूनिवर्सिटी में अलग-अलग प्रोग्राम के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है. इसी बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी &amp;nbsp;में होने वाली पढ़ाई में भी बड़ा बदलाव होने की खबर सामने आई है. दरअसल दिल्ली यूनिवर्सिटी आने वाले वर्षों में हायर एजुकेशन के स्वरूप में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. अब दिल्ली यूनिवर्सिटी पारंपरिक कक्षाओं के साथ ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग के जरिए भी कई नए डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की योजना बना रहा है. प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो शैक्षणिक स्तर 2027-28 से छात्र घर बैठे भी एमबीए, एमकॉम समेत कई डिग्री कोर्स कर सकेंगे.&amp;nbsp;
एग्जीक्यूटिव काउंसिल में होगा अंतिम निर्णय&amp;nbsp;
ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग के इस प्रस्ताव पर 30 जुलाई को होने वाली एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में सैद्धांतिक सहमति दी जाएगी. यूनिवर्सिटी का मानना है कि यह पहल उन छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी, जो नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कारणों से नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाए. बैठक में 29 अप्रैल को हुई एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक के मिनट्स को भी अंतिम मंजूरी दी जाएगी. यूनिवर्सिटी के अनुसार निर्धारित समय तक किसी सदस्य की ओर से कोई आपत्ति या संशोधन नहीं मिला, इसलिए इन्हें पूर्ण पुष्टि के लिए परिषद के सामने रखा गया है.
ऑनलाइन और ODL मोड में शुरू होंगे नए कोर्स&amp;nbsp;
बैठक का सबसे अहम एजेंडा स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग, डिपार्टमेंट ऑफ डिस्टेंस एंड कंटीन्यूइंग एजुकेशन और कैंपस का ओपन लर्निंग के माध्यम से नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करना है. इस प्रस्ताव के अनुसार ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड में दो नए कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिनमें एमए (अंग्रेजी) और बीए (ऑनर्स) मल्टीमीडिया एंड मैस कम्युनिकेशन शामिल है.
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ऑनलाइन मोड में यह कार्यक्रम होंगे शुरू&amp;nbsp;
वहीं ऑनलाइन मोड में छात्रों के लिए चार नए कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है. इनमें बीकॉम (ऑनर्स), बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी, एमबीए औश्र बीएससी (ऑनर्स) कंप्यूटर साइंस जैसे पाठ्यक्रमों की शुरुआत 2027-28 से किए जाने का प्रस्ताव है.&amp;nbsp;
जेनेटिक्स कार्यक्रम में भी होगा संशोधन
दिल्ली यूनिवर्सिटी की बैठक में पोस्ट ग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत जेनेटिक्स पाठ्यक्रम में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया है. इसके तहत माइनर मॉडिफिकेशन शब्द हटाकर केवल मॉडिफिकेशन करेक्शन किया जाएगा. ताकि एमए और एमएससी जेनेटिक्स के तीसरे और चौथे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में आवश्यकता के अनुसार व्यापक शैक्षणिक बदलाव किया जाए जा सके.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>में, MBA, से, BCom, Hons, तक, ऑनलाइन, पढ़ाई, का, प्लान, घर, बैठे, मिलेगी, डिग्री</media:keywords>
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        <title>CLAT परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, जानें स्टूडेंट्स पर क्या होगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ CLAT परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, जानें स्टूडेंट्स पर क्या होगा असर? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>School Tuition Fees Hike 2026: स्कूल फीस ने बिगाड़ा बजट, ट्यूशन चार्ज में सबसे ज्यादा उछाल</title>
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        <description><![CDATA[ School Tuition Fees Hike 2026 : NEET पेपर लीक को लेकर चल रहे विरोध के बीच शिक्षा से जुड़ी एक और चिंता सामने आई है. बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका असर अब सीधे पेरेंट्स की जेब पर दिखाई देने लगा है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ समय में स्कूल स्तर पर ट्यूशन फीस में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
उच्च शिक्षा की तुलना में प्राथमिक और हायर सेकेंडरी स्कूलों की फीस ज्यादा तेजी से बढ़ी है. वहीं, कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों की फीस को लेकर आम लोगों की सोच से अलग आंकड़े सामने आए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि शिक्षा की बढ़ती लागत को लेकर क्या आकड़े सामने आए हैं और पढ़ाई का खर्च कितना बढ़ा है.&amp;nbsp;
स्कूल स्तर पर सबसे ज्यादा बढ़ी ट्यूशन फीस
आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की पहली छमाही में शिक्षा सेवाओं से जुड़ी खुदरा महंगाई (Retail Inflation) 4 प्रतिशत से कम रही. हालांकि अलग-अलग शिक्षा स्तरों पर फीस बढ़ने की रफ्तार एक जैसी नहीं रही. इस दौरान उच्च शिक्षा की ट्यूशन फीस में लगभग 3.5 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह बढ़ोतरी मिडिल स्कूल स्तर की फीस महंगाई के लगभग बराबर रही, जबकि प्राथमिक स्कूल स्तर की फीस वृद्धि इससे कम रही.&amp;nbsp;
लंबी अवधि में स्कूल फीस में ज्यादा बढ़ोतरी
अगर 2024 से तुलना की जाए, तो स्कूल स्तर पर फीस में ज्यादा इजाफा देखने को मिला. आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में प्राथमिक और हायर सेकेंडरी स्कूलों की ट्यूशन फीस में 6 से 9 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, इसी अवधि में उच्च शिक्षा की ट्यूशन फीस में 4 से 6 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ. ऐसे मेंं पिछले दो सालों में स्कूल स्तर पर फीस बढ़ने की रफ्तार कॉलेज और यूनिवर्सिटी की तुलना में ज्यादा रही है.&amp;nbsp;
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कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों को लेकर सामने आई अलग तस्वीर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों की फीस को लेकर बनी आम धारणा पूरी तरह सही नहीं है. आंकड़ों के अनुसार, 2024 के आधार साल की तुलना में कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों की फीस में केवल 3 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस अवधि में इनकी फीस में स्कूलों की तुलना में कम वृद्धि हुई.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 13:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET विवाद के बाद NTA में बड़ा फेरबदल, जानें सरकार इसमें कैसे दे सकती है दखल और कया है कानूनी स्थिति?</title>
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        <description><![CDATA[ नीट यूजी परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है. लगातार उठे सवालों के बीच के केंद्र सरकार ने एजेंसी में बड़े स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है. नए पदों पर नियुक्ति से लेकर सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, जांच व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे तक कई बदलाव किए जा रहे हैं. साथ ही एनटीए से जुड़े 47 अधिकारियों को हटाने और कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है.
इस इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठने लगा है कि जब एनटीए एक स्वायत्त संस्था है, तो सरकार इसमें कैसे दखल दे सकती हैं, क्या केंद्र सरकार सीधे बदलाव कर सकती है और इसकी कानूनी स्थिति क्या है?&amp;nbsp;&amp;nbsp;
आखिर एनटीए में बदलाव की क्यों पड़ी जरूरत&amp;nbsp;
पिछले दो सालों में एनटीए की विश्वसनीयता पर कई सवाल उठे. नीट यूजी 2024 पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस और बाद में सीबीआई की जांच शुरू हुई. वहीं यूजीसी नेट परीक्षा संभावित पेपर लीक की आशंका के चलते रद्द करनी पड़ी. इससे पहले सीयूईटी यूजी के शुरुआती संस्करण में भी तकनीकी और संचालन संबंधी गड़बड़ियां सामने आई. वहीं हाल ही में नीट यूजी पेपर 2026 लीक होने के बाद भी लगातार सवाल उठ रहे हैं और पेपर लीक को लेकर देशभर में प्रदर्शन जारी है. इन घटनाओं के बाद परीक्षा सुरक्षा, प्रश्न पत्रों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और एजेंसी की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी के बाद केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व प्रमुख प्रो. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी बनाई है, जिसने एनटीए में संस्थागत सुधारों की सिफारिश की. अब उन्हीं सिफारिश को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.
एनटीए में क्या-क्या किए जा रहे हैं बदलाव&amp;nbsp;
एनटीए ने पहली बार चार वरिष्ठ स्तर के जनरल मैनेजर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. इन अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल परीक्षा आयोजित करना ही नहीं होगी, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और वैज्ञानिक भी बनाना होगी. रिपोर्ट के अनुसार एनटीए ने 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर की है. इनमें कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और अपराधी कार्रवाई भी की जा सकती है. सरकार का कहना है कि कदम एजेंसी में जवाबदेही तय करने और व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है. आने वाले समय में प्रशासनिक राज्य और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में भी बदलाव किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
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एनटीए में कैसे दखल दे सकती है सरकार&amp;nbsp;
एनटीए को एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन इसका संचालन पूरी तरह सरकार से अलग नहीं है. एजेंसी शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है और इसके प्रशासनिक व नीतिगत फैसलों में केंद्र सरकार की बड़ी भूमिका रहती है. एनटीए का गठन 2017 में शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया था. यह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड हैं और सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आती है. वहीं एनटीए की गवर्निंग बॉडी का नेतृत्व उच्च शिक्षा विभाग के सचिव करते हैं, यही निकाय एजेंसी की नीतियां, प्रशासनिक दिशा और बड़े फैसलों को मंजूरी देता है. इसलिए आवश्यकता पड़ने पर शिक्षा मंत्रालय एनटीए में सुधारों को लागू कर सकता है. एनटीए में स्थायी पदों की संख्या भी सीमित है, कई अधिकारी डेपुटेशन के जरिए विभिन्न सरकारी विभाग और संस्थाओं से आते हैं. ऐसे में वरिष्ठ स्तर की नियुक्तियों और प्रशासनिक बदलाव में केंद्र सरकार की बड़ी भूमिका बनी रहती है. हालिया विवादों के बाद भी केंद्र सरकार एजेंसी के पूरे ढांचे की समीक्षा कर रही है. विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था, परीक्षा संचालन और कई बदलाव किए जा रहे हैं.
एनटीए की कानूनी हैसियत&amp;nbsp;
एनटीए कोई संवैधानिक संस्था नहीं है, एनटीए को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बनाया गया है. वहीं इसका गठन शिक्षा मंत्रालय के तहत किया गया है और यह एक रजिस्टर्ड सोसाइटी के रूप में काम करती है. इसलिए एजेंसी को संचालन में स्वायत्तता जरूर प्राप्त है, लेकिन नीतिगत और प्रशासनिक संस्थागत स्तर पर केंद्र सरकार की इसमें भूमिका बनी रहती है. इसलिए जरूरत पड़ने पर सरकार इसमें सुधार, पुनर्गठन और प्रशासनिक बदलाव कर सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, विवाद, के, बाद, NTA, में, बड़ा, फेरबदल, जानें, सरकार, इसमें, कैसे, दे, सकती, है, दखल, और, कया, है, कानूनी, स्थिति</media:keywords>
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        <title>कैसे काम करता है NTA का सिस्टम, UGC&amp;CBSE और UPSC से कितनी अलग है व्यवस्था?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कैसे-काम-करता-है-nta-का-सिस्टम-ugc-cbse-और-upsc-से-कितनी-अलग-है-व्यवस्था</link>
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        <description><![CDATA[ पेपर लीक को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार एनटीए को लेकर एक्शन मोड में नजर आ रही है. सरकार एनटीए में बड़े बदलाव के साथ ही अगले एक महीने के अंदर इसके पूरे ढांचे को फिर से तैयार करने की योजना बना रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह बदलाव हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश के आधार पर किए जा रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली को पहले से ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके. इन बदलाव के साथ ही अब एनटीए में साइबर सिक्योरिटी जांच और साइकोमेट्रिक्स जैसे अहम क्षेत्र के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी.
पेपर लीक और इन सभी मामलों के बीच अब एनटीए से यूजीसी-सीबीएसई और यूपीएससी परीक्षा एजेंसियों को लेकर भी से तुलना की जाने लगी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एनटीए का पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और यूजीसी-सीबीएसई और यूपीएससी से इसकी व्यवस्था कितनी अलग है.&amp;nbsp;
क्या है एनटीए और क्यों बनाई गई है यह एजेंसी?&amp;nbsp;
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए की स्थापना 2017 में केंद्र ने शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में की थी. इसे सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड किया गया है और यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में भी आती है. वहीं एनटीए बनाने का उद्देश्य देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को एक पेशेवर, पारदर्शी और तकनीकी आधारित प्रणाली के जरिए आयोजित करना था. इससे पहले अलग-अलग संस्थाएं अपनी-अपनी परीक्षाएं करती थी, जिससे परीक्षा प्रणाली में एकरूपता की कमी मानी जाती थी.&amp;nbsp;
एनटीए किन-किन परीक्षाओं का करता है आयोजन?&amp;nbsp;
वर्तमान में एनटीए देश की कई प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करता है, जिसमें जेईई मेन, नीट यूजी, सीयूईटी यूजी, सीयूईटी पीजी, यूजीसी नेट, सीएसआईआर यूजीसी नेट, सीएमएटी, जीपीएटी और होटल मैनेजमेंट और दूसरी प्रवेश परीक्षाएं शामिल है. इन्हीं परीक्षाओं के जरिए हर साल लाखों छात्र देशभर के अलग-अलग यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेते हैं.&amp;nbsp;
एनटीए का सिस्टम कैसे करता है काम?&amp;nbsp;
अक्सर माना जाता है कि एनटीए का काम सिर्फ परीक्षा आयोजित करना है, लेकिन एजेंसी की जिम्मेदारी इससे कहीं ज्यादा व्यापक है. परीक्षा केंद्रों का चयन, प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था, परीक्षा संचालन, डेटा प्रबंधन, रिजल्ट जारी करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नई तकनीक का उपयोग भी एनटीए की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा होता है. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों का चयन पहले से स्वीकृत सरकारी स्कूलों, सीबीएसई से जुड़े इंस्टीट्यूट और जरूरत पड़ने पर एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेज की लिस्ट से किया जाता है. हर साल परीक्षा केंद्रों की सहमति और मानकों की दोबारा समीक्षा भी की जाती है.&amp;nbsp;
सीबीएसई और यूजीसी नेट से कैसे अलग है एनटीए?
एनटीए बनने से पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी नेशनल एडमिशन परीक्षाएं मुख्य रूप से सीबीएसई आयोजित करता था. वहीं यूजीसी, यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं से जुड़े नियम और पात्रता तय करता था. एनटीए बनने के बाद जिम्मेदारी अलग कर दी गई, अब यूजीसी केवल उच्च शिक्षा से जुड़े नियम और पात्रता तय करता है, जबकि परीक्षा करने की पूरी तकनीक और प्रशासनिक जिम्मेदारी एनटीए के पास है. इसी तरह सीबीएसई अब मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा और बोर्ड परीक्षाओं पर केंद्रित है. वहीं एनटीए बनने के बाद कई परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाया गया. इसके अलावा आवेदन, एडमिट कार्ड और रिजल्ट जैसी ज्यादातर प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई. एनटीए बनने के पहले इस तरह की कई प्रक्रियाएं ज्यादातर ऑफलाइन होती थी.&amp;nbsp;
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एनटीए और यूपीएससी में क्या है अंतर?&amp;nbsp;
पेपर लीक विवादों के बाद एनटीए की तुलना यूपीएससी से भी की जा रही है, क्योंकि दोनों राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करते हैं. हालांकि दोनों संस्थाओं की संरचना और कार्य प्रणाली में बहुत अंतर है. यूपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित एक संवैधानिक संस्था है, जबकि एनटीए सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत बनी एक स्वायत्त संस्था है. वहीं यूपीएससी के पास अपना स्थायी प्रशासनिक ढांचा और लंबे समय से विकसित गोपनीय परीक्षा प्रणाली है, जबकि एनटीए में बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रतिनिधि नियुक्ति, संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से काम करते हैं. इसके अलावा यूपीएससी की मुख्य परीक्षा सब्जेक्टिव होती है, जबकि एनटीए की ज्यादातर परीक्षाएं ऑब्जेक्टिव और ओएमआर या कंप्यूटर आधारित होती है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NTA Vacancy: 4 जीएम और 16 यंग प्रोफेशनल्स की भर्ती करेगा एनटीए, भर्ती प्रोसेस क्या होगा?</title>
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        <description><![CDATA[ NTA Vacancy: नीट पेपर लीक और कई दूसरी परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर लंबे समय से आलोचनाओं का सामना कर रही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए अपने ढांचे में बदलाव करने जा रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इस संस्था ने एक बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 4 वरिष्ठ जनरल मैनेजर पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है और साथ ही यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल के लिए भी आवेदन मांगे गए हैं. यह कदम प्रो. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेष समिति की सिफारिश को लागू करने की दिशा में पहला ठोस प्रयास माना जा रहा है.&amp;nbsp;
जनरल मैनेजर (असेसमेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एंड साइकोमेट्रिक्स)
चारों जनरल मैनेजर पदों पर नियुक्ति शुरुआत में 3 साल के अनुबंध के आधार पर की जाएगी. इनमें पहला पद जनरल मैनेजर का हैं जो एनटीए के एकेडमिक और मूल्यांकन रिसर्च कार्यों का नेतृत्व करेगा. इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को प्रश्न बैंक विकास, परीक्षा नॉर्मलाइजेशन पद्धति, इक्वेटिंग और कैलिब्रेशन प्रक्रिया के साथ-साथ कंप्यूटर अडैप्टिव टेस्टिंग और एआई आधारित मूल्यांकन से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट्स की निगरानी भी करनी होगी. इस पद के लिए आवेदक के पास साइको मैट्रिक्स, एजुकेशनल मेजरमेंट, सांख्यिकी या संबंधित विषय में डॉक्टरेट की डिग्री और कम से कम 12 साल का पोस्ट डॉक्टोरल एक्सपीरियंस होना जरूरी है, जिसमें से 5 साल किसी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग संस्था में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका में बिताए हो.&amp;nbsp;
जनरल मैनेजर (टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशंस)
दूसरा पद जनरल (टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशंस) का है जो देश भर के 500 से ज्यादा शहरों और कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में फैले परीक्षा ढांचे की देखरेख करेगा. इस भूमिका में टेस्ट सेंटर के चयन, क्षमता योजना, गुणवत्ता आश्वासन, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए सुविधा, परीक्षा के दिन का संचालन और राज्य व जिला प्रशासन के साथ तालमेल जैसी जिम्मेदारियां शामिल है. इसके लिए आवेदक के पास कम से कम 200 स्थानों के नेटवर्क का प्रबंधन करने का वरिष्ठ परिचालन एक्सपीरियंस होना जरूरी है.&amp;nbsp;
जनरल मैनेजर (इंर्फोमेशन सिक्योरिटी)&amp;nbsp;
तीसरा पद जनरल मैनेजर (इंर्फोमेशन सिक्&amp;zwj;योरिटी) &amp;nbsp;का है जो एजेंसी के चीफ इंर्फोमेशन सिक्योरिटी ऑफिसर की भूमिका भी निभाएगा. यह पद एनटीए के साइबर सुरक्षा कामकाज का नेतृत्व करेगा, जिसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट 2023, आईटी एक्ट 2000 और सीआरटी-इन के दिशा निर्देशों के पालन के साथ 24*7 सिक्योरिटी ऑपरेशन केंद्र की निगरानी भी शामिल है. इसके लिए आवेदक के पास 12 साल का इंर्फोमेशन सिक्&amp;zwj;योरिटी का एक्सपीरियंस होना चाहिए.&amp;nbsp;
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जनरल मैनेजर (विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन एंड फोरेंसिक्स) &amp;nbsp;
चौथा पद जनरल मैनेजर विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन एंड फोरेंसिक्स का है, जो एनटीए की आंतरिक सतर्कता और डिजिटल फॉरेंसिक कामकाज का नेतृत्व करेगा. इस भूमिका में परीक्षा में हुई किसी भी संदिग्ध गड़बड़ी की जांच करना, इन-हाउस डिजिटल फॉरेंसिक क्षमता विकसित करना और पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत आने वाले मामलों में सीबीआई, आईबी, ईडी, राज्य पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट जैसी एजेंसी के साथ तालमेल बिठाना शामिल है.&amp;nbsp;
पहली बार प्रतिभा सेतु पोर्टल से होगी भर्ती&amp;nbsp;
इसके अलावा एनटीए ने यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह पहला मौका है जब एजेंसी ने भर्ती के लिए इस पोर्टल का इस्तेमाल किया है. यह अवसर उन उम्मीदवारों के लिए खुला है, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी थी और जिनका नाम प्रतिभा सेतु पोर्टल पर लिस्टेड है. इन 16 पदों में से 12 पद एकेडमिक रिसर्च के लिए, 2 पद विधिक रिसर्च के लिए और 2 पद वित्त एवं लेखा विभाग के लिए है. चुने गए उम्मीदवारों को एनटीए के एकेडमिक विधिक और वित्त एवं लेखा विभागों में 24 महीने के लिए तैनात किया जाएगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाया जा सकता है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय संभालने के लिए अलग से मिलेगी सैलरी? यहां जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ देश के केंद्रीय राजनीतिक गलियारे से एक बड़ी खबर सामने आई है. परीक्षा धांधली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi को देश के शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. हालांकि, इतने बड़े मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने के बाद भी Pralhad Joshi की सैलरी में एक रुपये का भी इजाफा नहीं होगा.
कैबिनेट मंत्री को कितनी मिलती है सैलरी?
भारत में किसी भी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का वेतन और भत्ते &#039;संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम&#039; के तहत तय किए जाते हैं. एक केंद्रीय मंत्री को प्रति माह 1,00,000 रुपये का मूल वेतन मिलता है. इसके अलावा, अपने संसदीय क्षेत्र की देखरेख के लिए 70,000 रुपये प्रतिमाह का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय के खर्चों के लिए 60,000 रुपये प्रतिमाह का कार्यालय भत्ता दिया जाता है. संसद सत्र या बैठकों में शामिल होने पर प्रतिदिन 2,000 रुपये का दैनिक भत्ता भी मिलता है. इन सभी भत्तों को मिलाकर एक केंद्रीय मंत्री की कुल अनुमानित मासिक सैलरी लगभग 2.30 लाख रुपये से 2.50 लाख रुपये के बीच होती है. वेतन के अलावा उन्हें लुटियंस दिल्ली में सरकारी बंगला, गाड़ी, ड्राइवर, मुफ्त यात्रा टिकट और मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं.
नया मंत्रालय मिलने पर भी क्यों नहीं बढ़ेगी सैलरी?
भारतीय संविधान और संसदीय नियमों के तहत &#039;लाभ के पद&#039; के सिद्धांत का सख्ती से पालन किया जाता है. इसके अनुसार, कोई भी सांसद या मंत्री केवल एक ही पद के वेतन का हकदार होता है. चाहे किसी मंत्री के पास केवल एक विभाग की जिम्मेदारी हो या चार विभागों की, उन्हें मिलने वाला वेतन कैबिनेट मंत्री के एक ही पद का रहेगा. किसी भी अतिरिक्त मंत्रालय का प्रभार &#039;अतिरिक्त प्रभार&#039; माना जाता है, जिसके लिए अलग से कोई अतिरिक्त वेतन, भत्ता या बोनस देने का प्रावधान नहीं है.
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तीन बड़े मंत्रालयों की कमान संभालेंगे Pralhad Joshi
कर्नाटक के बीजापुर से आने वाले Pralhad Joshi को केंद्र सरकार के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है. वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार (2004 से 2024 तक) चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं. पूर्व में संसदीय कार्य मंत्री रह चुके Pralhad Joshi वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के अध्यक्ष भी हैं. शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब उनके पास कुल तीन महत्वपूर्ण मंत्रालय हो गए हैं. &amp;nbsp;शिक्षा मंत्रालय (नया अतिरिक्त प्रभार). उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>देश में MBBS सीटें 1.36 लाख के पार, 778 लोगों पर एक डॉक्टर&amp;लोकसभा में जेपी नड्डा ने जारी किए आंकड़े </title>
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        <description><![CDATA[ MBBS: देश में मेडिकल शिक्षा और डॉक्टरों की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि पिछले दो शैक्षणिक वर्षों में एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन की मेडिकल सीटों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही देश का डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात भी बेहतर होकर 1:778 तक पहुंच गया है जो डब्ल्यूएचओ के एक डॉक्टर प्रति 1000 आबादी के मानक से बेहतर माना जाता है.
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सार्वजनिक किए आंकड़े&amp;nbsp;
लोकसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि शैक्षणिक स्तर 2023-24 में एमबीबीएस की 1,09,115 सीटें थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,28, 976 हो गई. इसी अवधि में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,360 तक पहुंच गई है. यह आंकड़े नेशनल मेडिकल कमीशन के रिकॉर्ड पर आधारित है. सरकार के अनुसार मेडिकल शिक्षा के विस्तार का उद्देश्य देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है. खास तौर पर दूर दराज और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नए मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ने से भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होगी.&amp;nbsp;
778 लोगों पर एक डॉक्टर&amp;nbsp;
सरकार ने लोकसभा में यह भी बताया कि भारत का डॉक्टर जनसंख्या अनुपात अब 1:778 हो गया है. भारतीय चिकित्सा रजिस्टर के अनुसार देश में &amp;nbsp;15,35,155 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर है. इसके अलावा आयुष प्रणाली के तहत 7,51,768 रजिस्टर्ड चिकित्सक भी मौजूद हैं. दोनों प्रणालियों के कुल 22,86,923 रजिस्टर्ड डॉक्टर में से अगर 80 प्रतिशत को एक्टिव सेवा में उपलब्ध माना जाए तो देश का डॉक्टर जनसंख्या अनुपात 1:778 बैठता है. सरकार का कहना है कि यह अनुपात विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से बेहतर है.&amp;nbsp;
2026-27 में फिर बढ़ी एमबीबीएस सीटें&amp;nbsp;
इसी बीच नेशनल मेडिकल काउंसिल ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए राज्यवार एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स भी जारी किया था. नए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 9,911 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी गई, जिन्हें पहले से नवीनीकृत 1,27,028 सीटों के साथ जोड़ने पर कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,36,939 हो गई है.यह सीटें देश भर के 823 मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होगी. हालांकि इस लिस्ट में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान शामिल नहीं है. वहीं सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और सीटों में लगातार वृद्धि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. नए मेडिकल कॉलेज के जरिए विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-5 साल में दोगुनी हुई NTA की इनकम, एग्जाम से कमाए 1100 करोड़ से ज्यादा&amp;nbsp;
2014 के बाद तेजी से बढ़ा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर&amp;nbsp;
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी लोकसभा में बताया कि 2014 से अब तक देश में मेडिकल कॉलेज की संख्या अच्छा इजाफा हुआ है. अवधि में एमबीबीएस सीटें लगभग 51 हजार से बढ़कर 1 लाख 39 हजार से ज्यादा यूजी मेडिकल सीटें और पीजी मेडिकल सीटें 31 से बढ़कर 86 हजार के पार तक पहुंच गई है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम को भी शामिल किया गया है. इसके तहत मेडिकल कॉलेज गांव को अपनाते हैं और एमबीबीएस छात्र उन गांव के परिवारों के साथ जुड़कर सामुदायिक चिकित्सा का अनुभव प्राप्त करते हैं.
ये भी पढ़ें-NEET विवाद के बाद NTA में बड़ा फेरबदल, जानें सरकार इसमें कैसे दे सकती है दखल और कया है कानूनी स्थिति? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Naresh Pal Gangwar: कौन हैं उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव नरेश पाल गंगवार? पढ़ाई से लेकर सैलरी तक जानिए सबकुछ </title>
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        <description><![CDATA[ Naresh Pal Gangwar: देश भर में नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) का नया सचिव नियुक्त किया है. वह विनीत जोशी की जगह लेंगे, जिन्हें सचिव स्तर के बड़े प्रशासनिक पर बदलाव के तहत पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है. इस नियुक्ति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. चलिए तो अब आपको बताते हैं कि उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव नरेश पाल गंगवार कौन है और कहां से पढ़ाई की और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी.&amp;nbsp;
कौन है नरेश पाल गंगवार?&amp;nbsp;
नरेश पाल गंगवार राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, उन्होंने 1993 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की थी. नियुक्ति से पहले वह मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे. अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की कमान सौंपी गई है. करीब 3 दशक के लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने अपने राज्य और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई. राजस्थान सरकार में भी वह कई विभागों के प्रमुख सचिव रहे हैं. वहीं केंद्र सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के रूप में काम कर चुके हैं.&amp;nbsp;
कहां से की है नरेश पाल गंगवार ने पढ़ाई?
नरेश पाल गंगवार की एजुकेशनल क्वालीफिकेशन काफी मजबूत मानी जाती है. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक के बाद आईआईटी दिल्ली से कम्युनिकेशन एंड रडार इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की. तकनीकी शिक्षा के बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए भी किया.&amp;nbsp;
राजस्थान के कई जिलों में रहे कलेक्टर&amp;nbsp;
राजस्थान सरकार में सेवा के दौरान नरेश पाल गंगवार कई जिलों के जिला कलेक्टर भी रहे. 2001 में उन्हें टोंक का कलेक्टर बनाया गया, इसके बाद उन्हें सवाई माधोपुर, झालावाड़, जोधपुर और भरतपुर जैसे जिलों में भी कलेक्टर की जिम्मेदारी निभाई. 2014 में उन्हें राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया, जहां उन्होंने लंबे समय तक काम किया.&amp;nbsp;
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अब क्या होगी उनकी जिम्मेदारियां?
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में नरेश पाल गंगवार देश की उच्च शिक्षा से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे. उनके कार्य क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी, यूजीसी, तकनीकी शिक्षण संस्थान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े कई बड़े फैसले होंगे. इसके अलावा मौजूदा समय में शिक्षा मंत्रालय के सामने परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है.&amp;nbsp;
आईएएस सचिव की कितनी होती है सैलरी?&amp;nbsp;
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में नरेश पाल गंगवार को भारत सरकार के सचिव स्तर का वेतन मिलेगा. सातवें वेतन आयोग के अनुसार भारत सरकार के सचिव का मूल वेतन 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह तक होता है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता, सरकारी आवास, आधिकारिक वाहन, ड्राइवर, स्टाफ और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है.
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        <title>आंदोलन से झुकी सरकार? NTA में सुधारों को लेकर रात 8 बजे बड़ा एलान संभव</title>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और Gen-Z के उत्पात के बाद केंद्र सरकार अलर्ट मोड में है. मोदी कैबिनेट ने परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए बिल को मंजूरी दे दी है, जिसे संसद में जल्द ही पेश किया जा सकता है. इसी कड़ी में खबर आ रही है कि शिक्षा मंत्रालय आज रात यानी 24 जुलाई को बड़ा ऐलान कर सकता है, जिसके तहत एनटीए में बड़े बदलाव की घोषणा हो सकती है.&amp;nbsp;
क्या है सरकार का प्लान?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, NTA में सुधारों को लेकर शिक्षा मंत्रालय आज रात 8 बजे बड़ा ऐलान कर सकता है. माना जा रहा है कि इस ऐलान में एनटीए में सुधार को लेकर कई बड़ी घोषणाएं की जाएंगी. सूत्रों की मानें तो मंत्रालय को उम्मीद है कि इन रिफॉर्म्स से दिल्ली में जारी छात्रों के प्रदर्शन पर सकारात्मक असर पड़ेगा.
कड़ी सजा वाले बिल को मंजूरी
गौरतलब है कि नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक बुलाई थी, जिसमें पेपर लीक को लेकर सख्त सजा वाले बिल को मंजूरी दी गई. इसमें पेपर लीक करने वालों को 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है. माना जा रहा है कि यह बिल इसी सप्ताह संसद में पेश कर दिया जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि नीट परीक्षा का पेपर लीक होने की खबरों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने इसके विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसे मशहूर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का समर्थन मिला. इस दौरान सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू कर दिया और उनका साथ देने के लिए देशभर के Gen-Z सड़क पर उतर आए. इसके बाद सरकार ने सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों पर सहमति जताई. ऐसे में सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन खत्म किया.&amp;nbsp;
शिक्षा विभाग में हुआ बड़ा बदलाव
इस बिल को मंजूरी देने से पहले भी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिसके तहत शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया. ऐसे में सरकार ने 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त कर दिया. इससे पहले विनीत जोशी यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
यह भी पढ़ें: कौन हैं उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव नरेश पाल गंगवार? पढ़ाई से लेकर सैलरी तक जानिए सबकुछ ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET Paper Leak: NTA की पेपर लीक पर बड़ी कार्रवाई, बर्खास्त किए गए 47 अधिकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी परीक्षा संचालन संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए पर पिछले कुछ वक्त से पेपर लीक के गंभीर आरोप लग रहे थे. लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के दावे के बीच अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है. भर्ती और परीक्षा व्यवस्था की साख वापस लौटाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर सफाई अभियान शुरू कर दिया है. इस पूरी कवायद के तहत एजेंसी के अंदर मौजूद ढिलाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सख्त फैसले लिए जा रहे हैं. इसी क्रम में नीट पेपर लीक मामले में एनटीए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 47 अफसरों को बर्खास्त कर दिया है. चलिए इस बारे में विस्तार से जानें.
एनटीए के 47 अधिकारियों की सेवा समाप्त
नीट समेत कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने वाले संस्थान एनटीए ने गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है. एजेंसी ने अपने 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. सिर्फ इतना ही नहीं, पेपर लीक और घपले में शामिल कुछ अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के अलावा आपराधिक मुकदमे और कानूनी शिकंजा कसने की भी पूरी तैयारी की जा रही है. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का साफ कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से समझौता करने वाले दोषी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे.
अगले एक महीने में एनटीए का पूरा ढांचा बदलने का प्लान
शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो बर्खास्तगी की यह बड़ी कार्रवाई एनटीए ने पूरे प्रशासनिक और कार्यपालक ढांचे को फिर से नए सिरे से तैयार करने का हिस्सा है. पिछले काफी समय से विवादों के घेरे में रहने के बाद अब एजेंसी के पुनर्गठन की समयसीमा तय कर दी गई है. सरकार अगले एक महीने के अंदर एनटीए की पूरी कार्यप्रणाली, अधिकारियों की जिम्मेदारी और अंदरूनी प्रबंधन को पूरी तरीके से बदल देगी. इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश की प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है.
विशेषज्ञों की सिफारिश पर आउटसोर्सिंग नियमों में बदलाव
परीक्षाओं में गड़बड़ी का एक मुख्य कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आउटसोर्सिंग को माना जा रहा था. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी यानी विशेषज्ञों की एक विशेष समिति की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत अब एनटीए द्वारा बाहरी एजेंसियों को काम सौंपने के पूरे ढर्रे को बदल दिया जाएगा. निजी एजेंसियों और वेंडरों के चयन के लिए नए और कड़े नियम बनाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में कभी भी पेपर लीक न हो सके.&amp;nbsp;
भविष्य के लिए तैयार की जा रही लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली
एनटीए ने संपूर्ण पुनर्गठन का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षा तंत्र खड़ा करना है जिसे कोई भेद न सके. इसके लिए लीक प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है, जिससे तकनीक और मानव संसाधन दोनों का कड़ा पहरा होगा. केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छात्रों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं होगी और आने वाले दिनों में सुधार के कई और बड़े कड़े कदम उठाए जाएंगे.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>RRB Group D Exam: रेलवे ने जारी की RRB ग्रुप D परीक्षा की सिटी स्लिप, 3 अगस्त को होना है एग्जाम</title>
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        <description><![CDATA[ RRB Group D Exam: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने रेलवे ग्रुप D परीक्षा के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप 2026 जारी कर दी है. 3 अगस्त, 2026 को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के लिए जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा फॉर्म भरें हैं, वे अपने नामित सिटी सेंटर, परीक्षा की तारीख और शिफ्ट देख सकते हैं. आधिकारिक परीक्षा कार्यक्रम के मुताबिक, रेलवे ग्रुप D CBT 2026 देश भर में कई परीक्षा केंद्रों पर 3 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा.
&amp;nbsp;ऐसे डाउनलोड करें RRB ग्रुप D सिटी स्लिप
RRB ग्रुप D सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले अपने संबंधित RRB की आधिकारिक वेबसाइट RRB www.rrbcdg.gov.in पर जाएं, इसके बाद CEN 09/2025 Group D City Intimation Slip लिंक पर क्लिक करें. वहां पर रेलवे RRB ग्रुप D सिटी स्लिप खोज कर उस पर क्लिक करें. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड या जन्मतिथि दर्ज करके लॉगिन करें. अगला ऑपशन सिक्योरीटी कैपचा को पूरा करें. फिर अपना आवंटित सिटी सेंटर, तारीख और सिटिंग जांचे. इसे लॉगिन करते ही आपकी सिटी स्लिप स्क्रीन पर दिखाई देगी, जिसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं. अगर स्लिप डाउनलोड करने में समस्या आए तो कुछ समय बाद दोबारा प्रयास करें या अपने क्षेत्रीय RRB हेल्पडेस्क से संपर्क करें.
यह भी पढ़ें: NEET UG 2026: जब NEET LEAK पर हो रहे थे प्रदर्शन, तब इस लड़के ने कर दिखाया कमाल
रेलवे ग्रुप D सिटी इंटिमेशन स्लिप पर दी गई जानकारी चेक करें&amp;nbsp;
RRB की ओर से जारी सिटी इंटिमेशन स्लिप में उम्मीदवार का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, परीक्षा की तारीख, सिटी सेंटर, शिफ्ट और जरूरी निर्देश दिए जाते हैं. परीक्षा केंद्र की पूरी जानकारी केवल एडमिट कार्ड में उपलब्ध होगी, जिन उम्मीदवारों का का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर, परीक्षा की तारीख, शिफ्ट का समय, रिपोर्टिंग का समय और उम्मीदवार की श्रेणी होगी. अगर आपके सूची पर्ची में किसी तरह की गलती दिखे तो तुरंत RRB से संपर्क करें.
महत्वपूर्ण निर्देश पालन करें&amp;nbsp;
तय किए गए शहर के आधार पर यात्रा की प्लान बनाएं. अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अपनी रजिस्ट्रेशन की जानकारी सुरक्षित रखें. परीक्षा केंद्र पर एक वैध फोटो आईडी और अपना एडमिट कार्ड साथ लाएं. रिपोर्टिंग के समय से काफी पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं. RRB ग्रुप D की कंप्यूटर आधारित परीक्षा &amp;nbsp;3 अगस्त से शुरू होकर 21 अगस्त तक विभिन्न चरणों में आयोजित की जाएगी. जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 3 अगस्त को है, उनके लिए सिटी स्लिप जारी हो चुकी है, जबकि एडमिट कार्ड परीक्षा से चार दिन पहले उपलब्ध कराया जाएगा. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही अपडेट प्राप्त करें और परीक्षा से पहले अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें. &amp;nbsp;शहर की जानकारी वाली पर्ची पर दी गई सभी जानकारी देख लें.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>MBBS in Russia: रूस से करना चाहते हैं MBBS, जानें कितनी लगती है फीस और कितना है रहने&amp;खाने का खर्च?</title>
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        <description><![CDATA[ MBBS in Russia: विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के बीच रूस लंबे समय से सबसे पसंदीदा देशों में शामिल रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यहां का कम खर्च, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त मेडिकल यूनिवर्सिटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है. भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में जहां एमबीबीएस की पढ़ाई पर 60 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का खर्च आता है, वहीं रूस में यही कोर्स यूनिवर्सिटी और शहर के अनुसार बहुत कम खर्चे में पूरा किया जा सकता है.
हालांकि कई बार स्टूडेंट केवल कम फीस देखकर यूनिवर्सिटी का चयन कर लेते हैं, जो सही नहीं माना जाता है. छात्रों को यह भी तय करना चाहिए कि संबंधित यूनिवर्सिटी एनएमसी के नियमों और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग से जुड़े मानकों को पूरा करती हो. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आप भी रूस से एमबीबीएस करना चाहते हैं, तो इसकी फीस कितनी लगती है और वहां रहने खाने का खर्च कितना आता है.&amp;nbsp;
कितनी आती है एमबीबीएस की कुल फीस?
रूस में एमबीबीएस की फीस अलग-अलग यूनिवर्सिटी में अलग-अलग है. कई सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी कम फीस पर पढ़ाई का मौका देती है, ज्यादातर इंस्टीट्यूट में सालाना ट्यूशन फीस करीब 2.5 लाख रुपये से 6.5 लाख रुपये के बीच है. वहीं 6 साल के पूरे कोर्स की ट्यूशन और हॉस्टल फीस मिलाकर कुल खर्च करीब 18 से 45 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. कुछ बड़े इंस्टीट्यूट में यह खर्च और ज्यादा भी हो सकता है.&amp;nbsp;
टॉप यूनिवर्सिटीज की मेडिकल फीस&amp;nbsp;
रूस के कई मेडिकल यूनिवर्सिटी भारतीय छात्रों के बीच पॉपुलर है. इनमें Astrakhan State Medical University, Bashkir State Medical University, Belgorod State University, Chuvash State University, Dagestan State Medical University और Sechenov First Moscow State Medical University शामिल है. इन यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस लगभग 2.5 लाख रुपये से शुरू होकर 9.6 लाख रुपये तक जाती है. वहीं हॉस्टल फीस आमतौर पर 14 हजार से 90 हजार प्रति वर्ष के बीच रहती है.&amp;nbsp;
रहने खाने पर कितना आता है खर्च&amp;nbsp;
ट्यूशन फीस के अलावा छात्रों को रहने और रोजमर्रा के खर्च का भी ध्यान रखना होता है. रूस के छोटे और मीडियम वर्ग के शहरों में रहने वाले छात्रों का महीने का खर्च कम होता है. एक छात्रा के लिए हर महीने लगभग 11,000 से 17,000 रुपये का खर्चा आरामदायक लाइफस्टाइल के लिए सही माना जाता है. इसमें खाना, स्थानीय परिवहन, मोबाइल, इंटरनेट, स्टेशनरी, रोजाना की जरूरत का सामान और दूसरे छोटे-मोटे खर्च शामिल है.&amp;nbsp;
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रूस में पढ़ाई के लिए कौन से शहर है किफायती?
रूस में पढ़ाई का कुल खर्च इस बात पर भी निर्भर करता है कि छात्र किस शहर में पढ़ाई कर रहा है. माॅस्को जैसे बड़े शहरों में रहने, खाने और परिवहन का खर्च ज्यादा होता है. वहीं टवर, इवानोवो, ग्रोज्नी, कालिनिनग्राद और दूसरे शहर कम सस्ते माने जाते हैं. ऐसे शहरों में हॉस्टल, खाने और रोजाना की जरूरत पर कम खर्च आता है, जिससे 6 साल के दौरान अच्छी खासी बचत हो जाती है.
लोन और स्कॉलरशिप से भी खर्च हो सकता है कम&amp;nbsp;
रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए भारत के कई राष्ट्रीयकृत बैंक और वित्तीय संस्थान एजुकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं. इसके लिए नीट, यूजी स्कोर, मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में एडमिशन और आवश्यक डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं. कई मामलों में ट्यूशन फीस, हॉस्टल बीमा और हवाई यात्रा का खर्च भी लोन के दायरे में शामिल किया जाता है. इसके अलावा रूस सरकार भी सीमित संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप उपलब्ध कराती है. इन छात्रवृत्तियों के तहत ट्यूशन फीस का पूरा खर्च वहन किया जाता है, हालांकि रहने, खाने और यात्रा का खर्च छात्रों को खुद उठना होता है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE Practical Exam Guidlines: 29 जुलाई से होंगी CBSE 12वीं सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल परीक्षाएं, बोर्ड ने जारी की नई गाइडलाइन</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Practical Exam Guidlines:&amp;nbsp;केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले छात्रों के लिए प्रैक्टिकल परीक्षाओं से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है. बोर्ड के अनुसार सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल परीक्षा 29 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी. यह परीक्षा केवल उन छात्रों के लिए होंगी, जिन्हें कंपार्टमेंट कैटेगरी में Repeat Practical या Repeat Theory and Practical Both &amp;nbsp;के तहत रखा गया है. इसी के साथ बोर्ड ने स्कूलों, परीक्षा केंद्रों और क्षेत्रीय कार्यालयों को परीक्षा आयोजन, परीक्षकों की नियुक्ति और प्रैक्टिकल अंकों के अपलोड से जुड़े जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं. छात्रों को सलाह दी गई है कि वह समय रहते अपने स्कूल या परीक्षा केंद्र से कांटेक्ट कर परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त कर लें.
किन छात्रों को देना होगा प्रैक्टिकल एग्जाम?
सीबीएसई की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल परीक्षा दो कैटेगरी के छात्रों के लिए अनिवार्य होगी. पहली कैटेगरी Repeat Practical की है. &amp;nbsp;इस श्रेणी में आने वाले छात्रों को केवल प्रैक्टिकल परीक्षा देनी होगी, उनके मुख्य परीक्षा में प्राप्त थ्योरी अंक यथावत मान्य रहेंगे और उन्हें दोबारा थ्योरी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी. दूसरी कैटेगरी Repeat Theory and Practical Both की है. इस कैटेगरी के छात्रों को सप्लीमेंट्री परीक्षा के दौरान थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों परीक्षाओं में शामिल होना होगा.
कहां होंगे प्रैक्टिकल एग्जाम?
नियमित छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं उनके संबंधित स्कूलों में आयोजित की जाएगी. वहीं प्राइवेट उम्मीदवारों को उनके आवंटित थ्योरी परीक्षा केंद्रों पर प्रैक्टिकल परीक्षाएं देनी होगी. अगर किसी परीक्षा केंद्र पर किसी विशेष विषय के प्रेक्टिकल की आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय छात्रों के लिए किसी नजदीकी स्कूल या परीक्षा केंद्र पर प्रैक्टिकल परीक्षा आयोजित करेगा.
स्कूल खुद नियुक्त नहीं कर सकेंगे एक्सटर्नल एग्जामिनर
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कूल अपने स्तर पर बाहरी एक्सटर्नल एग्जामिनर नियुक्त नहीं करेंगे. सभी एक्सटर्नल एग्जामिनर की नियुक्ति संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय करेगा, हालांकि इंटरनल एग्जामिनर की नियुक्ति स्कूल या परीक्षा केंद्र की अधीक्षक अपने संस्थान के शिक्षकों में से करेंगे. वहीं सीबीएसई ने सभी स्कूलों और परीक्षा केंद्रों को निर्देश दिया है कि जिस दिन प्रैक्टिकल परीक्षा आयोजित हो, उसी दिन छात्रों के अंक बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाए. बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि एक बार अंक पोर्टल पर अपलोड होने के बाद उन्हें अंतिम माना जाएगा. इसके बाद किसी भी प्रकार के संशोधन का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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छात्रों के लिए बोर्ड की सलाह
बोर्ड ने छात्रों से कहा है कि वह 27 जुलाई तक अपने स्कूल या परीक्षा केंद्र से कांटेक्ट करें. इस दौरान वह अपनी मार्कशीट या रिजल्ट की कॉपी और एडमिट कार्ड साथ लेकर आए, ताकि प्रैक्टिकल परीक्षा की डेट, समय और स्थान की पुष्टि की जा सके. इसके बाद छात्रों को निर्धारित तिथि और समय पर अपने स्कूल या परीक्षा केंद्र में उपस्थित होना होगा.
स्कूलों और क्षेत्रीय कार्यालय को भी निर्देश मिले
सीबीएसई ने स्कूलों को पात्र छात्रों की विषयवार लिस्ट तैयार करने, क्षेत्रीय कार्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर एक्सटर्नल एग्जामिनर की नियुक्ति सुनिश्चित करने और समय रहते छात्रों को परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. वहीं क्षेत्रीय कार्यालय को प्रैक्टिकल परीक्षाओं का समय पर आयोजन, परीक्षकों की नियुक्ति, प्रैक्टिकल अंकों का समय पर अपलोड और उत्तर पुस्तिकाओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, Practical, Exam, Guidlines: 29, जुलाई, से, होंगी, CBSE, 12वीं, सप्लीमेंट्री, प्रैक्टिकल, परीक्षाएं, बोर्ड, ने, जारी, की, नई, गाइडलाइन</media:keywords>
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        <title>IGNOU स्टूडेंट्स और एलुमनाई के लिए बड़ा मौका, शुरू होने वाली है प्लेसमेंट ड्राइव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ignou-स्टूडेंट्स-और-एलुमनाई-के-लिए-बड़ा-मौका-शुरू-होने-वाली-है-प्लेसमेंट-ड्राइव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ignou-स्टूडेंट्स-और-एलुमनाई-के-लिए-बड़ा-मौका-शुरू-होने-वाली-है-प्लेसमेंट-ड्राइव</guid>
        <description><![CDATA[ 


IGNOU Placement Drive 2026: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने अपने छात्रों और एलुमनाई के लिए नई कई केंपस प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करने की घोषणा की है. इन प्लेसमेंट ड्राइव के जरिए उम्मीदवारों को आईटी, मार्केटिंग, एचआर, डेटा एनालिटिक्स, एविएशन और कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्र में नौकरी के अवसर मिलेंगे. विश्वविद्यालय के कैंपस प्लेसमेंट सेल के अनुसार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 27 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलेगी.
इस बार इग्नू ने एआई, ब्लॉकचेन और स्किल बेस्ड हायरिंग पर काम करने वाले स्टार्टअप प्रूफ ऑफ स्किल के साथ साझेदारी की है. इस भर्ती अभियान के तहत फुल टाइम रिमोट जॉब्स के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा, जहां सालाना 12 लाख रुपये तक सीटीसी दिया जा सकता है.



इन पदों पर होगी भर्ती

UI/UX Designer
Business Development Executive
Marketing Executive
Copywriter
Customer Success Executive
Data Analyst
HR Executive


Campus Placement Cell, IGNOU, is organizing a Campus Placement Drive for IGNOU learners and alumni.Details of the Placement Drive :Date: 27 &amp;amp; 28th July, 2026 (Mon-Tue)Time: 10:00 AM onwardsVenue: Dr. B.R. Ambedkar Convention Centre, IGNOU Headquarters pic.twitter.com/WGAHt0iNs3
&amp;mdash; IGNOU (@OfficialIGNOU) July 22, 2026



कैसे होगा चयन और कौन कर सकता है आवेदन?
रिमोट जॉब्स के लिए उम्मीदवारों को तीन चरणों की चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा. सबसे पहले एआई आधारित इंटरव्यू होगा, इसके बाद असाइनमेंट राउंड आयोजित किया जाएगा. अंतिम चरण में उम्मीदवारों का इंटरव्यू कंपनी के फाउंडर या डिपार्टमेंट हेड के साथ ऑनलाइन होगा. सभी इंटरव्यू गूगल मीट या जूम के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे. इस भर्ती अभियान में किसी भी विषय से ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमबीए, बीसीए और एमसीए डिग्री धारक आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवारों के पास अच्छी अंग्रेजी संचार क्षमता, टाइम मैनेजमेंट, मल्टी टास्किंग की क्वालिटी और तेज गति में काम वाले एनवायरमेंट में काम करने की इच्छा होना जरूरी है.&amp;nbsp;
28 जुलाई को होगी एविएशन प्लेसमेंट ड्राइव
इग्नू ने बर्ड फ्लाइट सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से एविएशन और एयरपोर्ट ऑपरेशन क्षेत्र के लिए भी अलग से केंपस ड्राइव प्लेसमेंट आयोजित करने की घोषणा की है. यह भर्ती 28 जुलाई 2026 को सुबह 10:00 से इग्नू मुख्यालय मैदान गढ़ी स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा. इस भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति दिल्ली एयरपोर्ट ऑपरेशन में की जाएगी. इसमें कस्टमर सर्विस एजेंट और कस्टमर सर्विस होस्ट जैसे पदों पर मौका मिलेगा.&amp;nbsp;
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एविएशन ड्राइव के लिए एलिजिबिलिटी&amp;nbsp;
इन पदों के लिए फ्रेशर्स और एक्सपीरियंस दोनों उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार के पास ग्रेजुएशन की डिग्री या लास्ट सेमेस्टर में अध्ययनरत होने की योग्यता होनी चाहिए. इसके अलावा अच्छी अंग्रेजी बोलने की क्षमता, कस्टमर सर्विस का दृष्टिकोण, पॉजिटिव बिहेव और 24*7 शिफ्ट व रोटेशनल ड्यूटी में काम करने की इच्छा भी आवश्यक है.&amp;nbsp;
इंटरव्यू में साथ ले जाने होंगे ये डॉक्यूमेंट
यूनिवर्सिटी ने उम्मीदवारों को इंटरव्यू के समय अपना अपडेटेड रिज्यूमे, सरकारी फोटो पहचान पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जिसमें 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन की मार्कशीट शामिल हो सकती है. पासपोर्ट साइज फोटो और इग्नू आईडी कार्ड साथ लाने के निर्देश दिए हैं.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>ISRO दे रहा स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप का मौका, जानें कौन कर सकता है अप्लाई? </title>
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        <description><![CDATA[ ISRO Internship: अगर आप अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग या नई तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो ISRO इंटर्नशिप आपके लिए बड़ा अवसर लेकर आया है. इसरो ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े छात्रों के लिए इंटर्नशिप और स्टूडेंट ट्रेनी प्रोग्राम की जानकारी जारी की है. इसके तहत चयनित छात्रों को इसरो के वैज्ञानिकों के साथ काम करने, रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ा व्यावहारिक एक्सपीरियंस हासिल करने का मौका मिलेगा. इच्छुक छात्र अपनी पसंद की इसरो यूनिट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
ISRO की इंटर्नशिप के लिए कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
इसरो की इंटर्नशिप के लिए केवल भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने वाले छात्र विज्ञान व प्रौद्योगिकी से जुड़े किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन या रिसर्च कर रहा हो या हाल ही में डिग्री पूरी की हो. वहीं एलिजिबिलिटी के लिए अभ्यर्थी के पास कम से कम 60 प्रतिशत अंक या 10 प्वाइंट स्केल पर 6.32 सीजीपीए होना जरूरी है. अलग-अलग इसरो केंद्र में आवेदन के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक शर्तें भी लागू हो सकती है.&amp;nbsp;
VSSC इंटर्नशिप के लिए क्या है शर्तें?&amp;nbsp;
विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर की इंटर्नशिप के लिए बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, बीएससी, एमएससी, बीएस-एमएस, इंटीग्रेटेड एमएससी, इंटीग्रेटेड एमटेक और पीएचडी के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं. ग्रेजुएट्स स्टूडेंट का निर्धारित सेमेस्टर पूरा होना जरूरी है, जबकि एमई, एमटेक और एमएससी छात्रों का पहला सेमेस्टर तथा पीएचडी विद्यार्थियों का कोर्सवर्क पूरा होना चाहिए. आवेदन के लिए नियमित कोर्स करने वाले छात्रों या 14 फरवरी 2025 के बाद अपना पूरा कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों से स्वीकार किए जाएंगे.&amp;nbsp;
कितने समय की होगी इंटर्नशिप?
इस इंटर्नशिप की अवधि न्यूनतम 21 दिन और अधिकतम 45 दिन तय की गई है. इस दौरान छात्रों को इसरो की प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स के मार्गदर्शन में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा. हालांकि यह पूरी तरह प्रशिक्षण आधारित कार्यक्रम है. चयनित उम्मीदवारों को किसी प्रकार का स्टाइपेंड, मानदेय, रहने या खाने की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी. वहीं इंटर्नशिप के लिए चयनित छात्रों की शैक्षणिक योग्यता उपलब्ध सीटों और संबंधित इसरो केंद्र में प्रयोगशाला वह संसाधनों की उपलब्धता के आधारित पर किया जाएगा. चयनित उम्मीदवारों को ईमेल के माध्यम से सूचना भेजी जाएगी. इसरो ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को अपनी एक डिग्री के दौरान केवल एक ही बार इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा.&amp;nbsp;
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कब से शुरू होंगे आवेदन?
बीएससी इंटर्नशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त 2026 को सुबह 10:00 बजे से शुरू होगी और 14 सितंबर 2026 की रात 11:59 बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे. इंटर्नशिप का आयोजन 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 के बीच किया जाएगा. आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को अपनी मार्कशीट, तकनीकी कौशल, प्रोजेक्ट वर्क, काम का एक्सपीरियंस और कॉलेज के परमिशन लेटर सहित जरूरी डॉक्यूमेंट से एक पीडीएफ फाइल में अपलोड करने होंगे.&amp;nbsp;
किन-किन इसरो केंद्रों में कर सकते हैं आवेदन?
उम्मीदवार अपनी रुचि के अनुसार इसरो की अलग-अलग यूनिट में आवेदन कर सकते हैं. इनमें यू. आर. राव. सैटलाइट सेंटर (बेंगलुरु), स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (अहमदाबाद), विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (तिरुअनंतपुरम), सतीश धवन स्पेस सेंटर (श्रीहरिकोटा), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (देहरादून), मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी, आईएसटीआरएसी फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी और दूसरे केंद्र शामिल है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Delhi School: दिल्ली में लॉन्च हुई नेशनल स्कूल सेफ्टी टूलकिट, साइबर सुरक्षा से लेकर डिजास्टर तैयारी पर होगा फोकस </title>
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        <description><![CDATA[ Delhi School: दिल्ली में स्कूलों को ज्यादा सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने गुरुवार को नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट लॉन्च की. उन्होंने कहा कि आज के दौर में स्कूल सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हो गया है. अब यह केवल स्कूल भवन, आग से सुरक्षा या इमरजेंसी एग्जिट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा परिवहन और आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी शामिल है.
नई दिल्ली के पीएचडी हाउस में आयोजित नेशनल सबमिट ऑन सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026 को संबोधित करते हुए लोग ने कहा कि यह टूल किट स्कूलों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य स्कूलों को केवल सुरक्षित बनाना नहीं, बल्कि उन्हें हर तरह की समस्या से निपटने के लिए तैयार करना भी है.&amp;nbsp;
स्कूल सुरक्षा की बदली परिभाषा&amp;nbsp;
एलजी संधू ने कहा है कि समय के साथ स्कूल सुरक्षा की अवधारणा में बड़ा बदलाव आया है. पहले जहां ध्यान मुख्य रूप से भवनाें की सुरक्षा, फायर फाइटिंग व्यवस्था और इमरजेंसी रिस्पाॅन्स पर रहता था, वहीं अब डिजिटल दुनिया से जुड़े खतरों को भी गंभीरता से लेना जरूरी हो गया. उन्होंने कहा कि छात्रों की साइबर सुरक्षा, मेंटल हेल्थ, सुरक्षित परिवहन और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी आधुनिक स्कूल सुरक्षा का अहम हिस्सा है.&amp;nbsp;
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दिल्ली की जिम्मेदारी ज्यादा क्यों?&amp;nbsp;
कार्यक्रम में इस टूलकिट को लेकर एलजी ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण दिल्ली की जिम्मेदारी दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा है. घनी आबादी और विविध सामाजिक परिवेश वाले शहरों में स्कूलों को ऐसा सुरक्षित, समावेशी और मजबूत एनवायरमेंट विकसित करना चाहिए, जो देश के अन्य हिस्सों के लिए भी उदाहरण बन सके. उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षण वातावरण तैयार करना केवल प्रशासन ही कि नहीं, बल्कि सभी शिक्षण संस्थानों की भी जिम्मेदारी है. तरणजीत संधू ने स्कूल प्रमुखों और प्रबंधन से सुरक्षा को लेकर नियमों का पालन तक सीमित न रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इसे संस्थागत नेतृत्व का हिस्सा बनाया जाना चाहिए. उन्होंने सभी स्कूलों में नियमित सेफ्टी ऑडिट, आपातकालीन तैयारी की स्पष्ट योजना, समय-समय मॉक ड्रिल, प्रशिक्षित स्टाफ और सरकारी एजेंसियों तथा स्थानीय समुदाय के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया है.&amp;nbsp;
चाइल्ड सेफ्टी मंथ के बीच लॉन्च हुई टूलकिट&amp;nbsp;
उपराज्यपाल कार्यालय से जारी एक नोट के अनुसार एलजी ने इस बात पर जोर दिया है कि जुलाई महीने में दिल्ली में चाइल्ड सेफ्टी मंथ मनाया जा रहा है. इसलिए ऐसे समय में नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूल किट का लॉन्च बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम पहल है. उन्होंने कहा कि यह टूलकिट स्कूलों में रोकथाम, तैयारी और जोखिम प्रबंधन की संस्कृति विकसित करने में मदद करेगी, ताकि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026: जब NEET LEAK पर हो रहे थे प्रदर्शन, तब इस लड़के ने कर दिखाया कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026: देशभर में नीट यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है. हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इस बीच नीट यूजी 2026 री एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करने वाले हरियाणा के पंशुल बंसल का बयान चर्चा में है. पंशुल का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन में जाने के बजाय अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और उसी का रिजल्ट उन्हें बेहतर स्कोर के रूप में मिला.&amp;nbsp;
परीक्षा रद्द होने पर पहले हुई निराशा, फिर बदला नजरिया
पंशुल बंसल ने बताया कि 3 मई को हुई मूल नीट यूजी परीक्षा रद्द होने की खबर सुनकर उन्हें भी शुरुआत में निराशा और दुख हुआ था. उन्हें लगा कि उनका पेपर अच्छा गया और सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलने लायक अंक आ सकते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिया से देखा और इसे खुद को बेहतर करने का मौका मान लिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने तय किया था कि नकारात्मक सोच में समय बिताने के बजाय दोबारा परीक्षा की तैयारी पर पूरे फोकस करेंगे.&amp;nbsp;
प्रोटेस्ट में क्यों जाऊं, घर पर पढ़ाई करना बेहतर है&amp;nbsp;
एक मीडिया हाउस से बातचीत में पंशुल बंसल ने कहा कि जब परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में प्रदर्शन हो रहे थे, तब उन्होंने अलग रास्ता चुना. उन्होंने कहा मैंने सोचा कि मुझे विरोध प्रदर्शन में क्यों जाना चाहिए, इसके बजाय मैं घर पर रहकर पढ़ाई कर सकता हूं. अपनी क्षमताओं को बेहतर बना सकता हूं और अपना स्कोर बढ़ा सकता हूं. उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह की नकारात्मकता से दूरी बनाकर केवल अपने टारगेट पर ध्यान दिया. पंशुल का मानना था कि परीक्षा खत्म होने के बाद तनाव और चिंता भी खत्म हो जाएगी, इसलिए उन्होंने अपना पूरा समय तैयारी में लगाया.&amp;nbsp;
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मूल परीक्षा के 706 अंक से पहुंचे 715 अंक तक&amp;nbsp;
पंशुल ने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने की उम्मीद थी. वहीं री एग्जाम में उन्होंने 715 अंक हासिल किए और 99.9999 परसेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की. उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त समय में उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं किया, बल्कि पहले की तरह नियमित पढ़ाई जारी रखी है. उनके अनुसार पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने पूरी मेहनत की और बाकी भगवान पर छोड़ दिया. पंशुल का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए नियमित पढ़ाई, अनुशासन और लगातार प्रेक्टिस सबसे जरूरी है. पंशुल ने छात्रों को सलाह दी कि वह दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान दे और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Exclusive: NEET UG पेपर लीक रोकने का ब्लूप्रिंट तैयार था, फिर क्यों फेल हुआ सिस्टम? जानिए अंदर की खबर</title>
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        <description><![CDATA[ 3 मई 2026 को NEET UG की परीक्षा हुई. करीब 22.7 लाख छात्र बैठे. इस दौरान परीक्षा से पहले से व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हो रहा &#039;गेस पेपर&#039; सामने आया. इसके 720 में से करीब 600 अंकों के सवाल असली पेपर से मैच कर गए. 12 मई को NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी. 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा हुई, लेकिन लाखों छात्रों का भरोसा टूट चुका था. सियासत अपनी जगह है, लेकिन असल बात फैक्ट्स की होनी चाहिए. यानी पेपर लीक रोकने का पूरा ब्लूप्रिंट सरकार के पास करीब दो साल पहले से मौजूद था. शिक्षा मंत्रालय की हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी ने खुद यह रिपोर्ट तैयार की थी. अब सबसे बड़ी पहेली यही है कि वह ब्लूप्रिंट समय पर लागू क्यों नहीं हुआ...
दो साल पहले ही मिल गए थे चेतावनी और समाधान
NEET 2024 के बड़े विवाद के बाद 22 जून 2024 को शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय हाई लेवल कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी ने 23 बैठकों के बाद 21 अक्टूबर 2024 को अपनी 184 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी.
इसमें सिर्फ कमजोरियां ही नहीं गिनाई गई थीं, बल्कि उन्हें दूर करने के लिए पूरी 101 सिफारिशें भी दी गई थीं. इनमें से बड़ी संख्या ऐसी थी जिन्हें 2025 से ही लागू करने की बात कही गई थी. कमेटी ने 37 हजार से ज्यादा छात्रों, अभिभावकों और एक्सपर्ट्स से सुझाव लेने के साथ ही IIT, AIIMS, राज्यों और जांच एजेंसियों के एक्सपीरियंस की भी स्टडी की थी. रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि इन सुधारों को &#039;मिशन मोड&#039; में लागू किया जाना चाहिए.
पेपर लीक की सबसे बड़ी वजह और इलाज मिला
कमेटी ने बड़ी सफाई से समझाया कि पेन-पेपर परीक्षा में सबसे बड़ा खतरा उस समय पैदा होता है जब प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से निकलकर गोदामों, ट्रांसपोर्ट और फिर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचता है. सीधी बात है- जितने ज्यादा हाथों से पेपर गुजरेगा, उतनी ज्यादा लीक की संभावना होगी. यानी छपाई, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन ही सबसे कमजोर कड़ी थी. इसका समाधान भी तैयार था- &#039;कंप्यूटर असिस्टेड सिक्योर पेपर बेस्ड टेस्टिंग.&#039;
इस मॉडल में प्रश्नपत्र पहले से छपकर देशभर में नहीं भेजे जाने थे. एन्क्रिप्टेड पेपर सीधे परीक्षा केंद्र के सुरक्षित सर्वर तक पहुंचते और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उसी केंद्र के अंदर हाई-स्पीड प्रिंटर से प्रिंट करके छात्रों को दिए जाते. कमेटी का मानना था कि इससे प्रिंटिंग, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान पेपर लीक होने की आशंका काफी हद तक खत्म हो जाएगी. कमेटी ने एक और अहम बात लिखी थी कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले इसका पायलट टेस्ट किया जाए. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समाधान 2024 में तैयार था, तो उसका पायलट आज तक क्यों नहीं हुआ?
रिपोर्ट की 10 बड़ी सस्पेंस वाली सिफारिशें कौन सी थीं?
राधाकृष्णन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जो 101 सिफारिशें दी थीं, उनमें से दस ऐसी हैं जो सीधे पेपर लीक की जड़ पर वार करती थीं...

पेपर पहले से छपकर देश भर में न घूमे, सवाल कोड में बदलकर सीधे परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर तक जाएं और परीक्षा वाले दिन वहीं छपें. कमेटी ने यह भी कहा था कि पहले एक जगह आजमाकर देखो, लेकिन आजमाया ही नहीं गया.
छपाई वाली जगह पर किसी के पास मोबाइल या कैमरा न हो, हर कर्मचारी की आते-जाते तलाशी हो, कैमरे की रिकॉर्डिंग एक साल तक रखी जाए और हर पेपर पर उसका अलग नंबर हो.
पेपर कहां से चला और किस-किस के हाथ से गुजरा यह पहले से लिखा हो, पेटी सील हो, गाड़ी पर लोकेशन ट्रैकर लगे और हर केंद्र पर NTA का एक जिम्मेदार अफसर बैठा हो, जैसे चुनाव में होता है.
हर जिले में DM की अगुवाई में एक टीम हो जिसमें SP भी हों, जिस स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाना है उसके मालिक की पूरी जांच हो और केंद्र पुलिस के सामने बंद हों और उन्हीं के सामने खुलें.
केंद्र इंसान नहीं कंप्यूटर चुने और जिन केंद्रों पर पहले गड़बड़ी हो चुकी है वे बाहर रहें.
छात्र को अपने ही जिले में केंद्र मिले और अगर बहुत सारे बच्चे अचानक किसी एक दूर के केंद्र को चुन रहे हैं तो यह परीक्षा से पहले पकड़ा जाए, बाद में नहीं.
जब दो लाख से ज्यादा बच्चे बैठ रहे हों तो परीक्षा एक ही दिन में नहीं, बल्कि कई दिन में हो.
एक नहीं तीन से ज्यादा पेपर तैयार रखे जाएं, सेट के नाम A, B, C और D जैसे आसान न हों और हर सेट में सवालों का क्रम बदला हो.
पूरी परीक्षा का ठेका किसी एक कंपनी को न दिया जाए.
इन सब पर अमल हो रहा है या नहीं, यह देखने वाली एक कमेटी हर महीने शिक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट भेजे.

हालांकि, इनमें से कौन सी बात कितनी लागू हुई, इसकी सूची सरकार ने अब तक सामने नहीं रखी है.
NEET 2026 रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को &#039;बहुत दर्दनाक&#039; बताया. सुप्रीम कोर्ट ने NTA पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उसने &#039;कोई सबक नहीं सीखा&#039; और जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होती, समस्या नहीं रुकेगी.&amp;nbsp;
अब सरकार का पक्ष और जमीनी हकीकत
सरकार की तरफ से बार-बार यह कहा गया है कि कमेटी की कई सिफारिशों को लागू किया जा चुका है और कुछ पर काम जारी है. DM और SP की अगुवाई वाली राज्य और जिला स्तरीय समन्वय समितियां बनाई गईं. 2025 और 2026 की परीक्षाओं में एक्टिव रहीं. हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी भी 14 नवंबर 2024 को गठित कर दी गई, जिसे हर महीने शिक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट भेजनी थी. लेकिन हकीकत यह है कि सबसे अहम &#039;कंप्यूटर असिस्टेड सिक्योर पेपर बेस्ड टेस्टिंग&#039; का पायलट ही नहीं हो पाया, जिसे कमेटी ने सबसे पहले आजमाने की सलाह दी थी.
सरकार ने अब तक यह नहीं बताया कि रिपोर्ट की 101 सिफारिशों में से कौन सी या कितनी लागू हुई और कौन सी अटकी हुई है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान है कि सिफारिशों का पालन किया गया, लेकिन &#039;कमांड चेन में ब्रेक&#039; आ गया. एक संसदीय समिति ने भी माना कि सुधारों की शुरुआत तो हुई है, लेकिन एक रोडमैप आज तक जनता के सामने नहीं रखा गया.
मल् ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>JSSC भर्ती परीक्षा में 75% अभ्यर्थी नहीं हुए शामिल, परीक्षा केंद्रों की दूरी और लेट एडमिट कार्ड पर उठे सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ JSSC Exam Controversy: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की अनुपस्थिति ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आयोग की ओर से 510 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में रजिस्टर्ड उम्मीदवारों में से करीब 75 प्रतिशत परीक्षा देने ही नहीं पहुंचे. कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें परीक्षा केंद्र घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मिला, जबकि कुछ का कहना है कि एडमिट कार्ड जारी होने की सूचना वाला ईमेल परीक्षा के बाद मिला या समय पर मिला ही नहीं. हालांकि, आयोग का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी पहले से जेएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध थी.&amp;nbsp;
3.22 लाख में से सिर्फ 86 हजार परीक्षा देने पहुंचे&amp;nbsp;
जेएसएससी ने 2024 में फील्ड वर्कर के 510 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था. करीब 2 साल बाद 19 जुलाई 2026 को परीक्षा आयोजित की गई. भर्ती के लिए कुल 3,22,867 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा में केवल 86,444 उम्मीदवार शामिल हुए, यानी लगभग 26 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी जबकि करीब 74 से 75 प्रतिशत उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हुए.&amp;nbsp;
दूर के परीक्षा केंद्र होने से छोड़ी परीक्षा&amp;nbsp;
कई उम्मीदवारों का कहना है कि उन्हें ऐसे जिलों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जहां कम समय में पहुंचना संभव नहीं था. पूर्वी सिंहभूमि जिले के बहरागोड़ा की रहने वाली एक अभ्यर्थी को हजारीबाग में परीक्षा केंद्र मिला था, जो उनके घर से 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर था. उनका कहना है कि परीक्षा से कुछ दिन पहले ही केंद्र की जानकारी मिली. इतने कम समय में यात्रा, ठहरने की व्यवस्था और खर्च जुटाना संभव नहीं था, इसलिए परीक्षा छोड़नी पड़ी. इसी तरह साहिबगंज के अभ्यर्थी को लगभग 550 किलोमीटर दूर गुमला में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया. उनका दावा है कि एडमिट कार्ड संबंधी ईमेल परीक्षा वाले दिन दोपहर में मिला, जब परीक्षा शुरू हो चुकी थी. वहीं हजारीबाग के एक अभ्यर्थी ने बताया कि उनका केंद्र देवघर में था. आर्थिक स्थिति और कम समय के कारण वह यात्रा नहीं कर सके. इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि एडमिट कार्ड से जुड़ी कोई ईमेल उसे नहीं मिला और वेबसाइट देखने पर ही परीक्षा केंद्र की जानकारी मिली.&amp;nbsp;
बिहार के अभ्यर्थियों ने भी लगाए यही आरोप&amp;nbsp;
परीक्षा में शामिल होने वाले कुछ अभ्यर्थी बिहार से भी थे, उनका कहना है कि उन्हें एडमिट कार्ड जारी होने की सूचना समय पर नहीं मिली. कई उम्मीदवारों का आरोप है कि ईमेल परीक्षा समाप्त होने के बाद मिला, जिसके कारण वह परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके.&amp;nbsp;
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कोचिंग संचालक बोले 2 साल पुरानी भर्ती&amp;nbsp;
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले एक ऑनलाइन कोचिंग संचालक ने कहा कि यह भर्ती 5 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसे बाद में 19 जुलाई तक टाल दिया गया. उनके अनुसार उम्मीदवारों को आयोग की वेबसाइट देखते रहना चाहिए, लेकिन करीब 2 साल पुरानी भर्ती के लिए हर अभ्यर्थी लगातार वेबसाइट पर नजर रखें यह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि सारे उम्मीदवारों के पास स्मार्टफोन की सुविधा भी नहीं होती है. उनके अनुसार करीब 75 प्रतिशत अभ्यर्थियों का परीक्षा में शामिल न होना भर्ती प्रणाली में खामियों की ओर इशारा करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UTU Paper Leak: दिल्ली में प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक, दो एग्जाम रद्द</title>
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        <description><![CDATA[ UTU Paper Leak: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक को लेकर लगातार चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच अब उत्तराखंड में एक और पेपर लीक की खबर सामने आई है. उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी देहरादून ने इंजीनियरिंग के दो पेपर लीक होने के बाद दो सेमेस्टर परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. यूनिवर्सिटी की शुरुआती जांच में प्रश्न पत्र की गोपनीयता में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है. इस मामले में एक सहायक प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है, जबकि पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है.
दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच आई पेपर लीक की खबर
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी से पेपर लीक की यह खबर उस समय सामने आई है, जब राजधानी दिल्ली समेत देशभर में पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है. देशभर में छात्र लगातार पेपर लीक घटनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं छात्रों का यह मामला शांत नहीं हुआ था इस बीच अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से यह पेपर लीक की खबर सामने आई है, जिससे यह मामला और बड़ा हो गया.
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शिकायत के बाद गठित हुई जांच समिति
मामले की शुरुआत मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स की परीक्षा को लेकर मिली शिकायत से हुई. शिकायत मिलने के बाद कुलपति के निर्देश पर यूनिवर्सिटी ने उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया. साथ ही शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग देहरादून ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच कराई. जांच में सामने आया कि प्रश्न पत्र तैयार करने वाले बाहरी एक्सपर्ट और शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता ने परीक्षा से पहले कथित तौर पर वही प्रश्न कॉलेज के इंटरनल पोर्टल और एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया था.
90 प्रतिशत प्रश्नों के मेल खाने का दावा
यूनिवर्सिटी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स की परीक्षा में पूछे गए करीब 90 प्रतिशत प्रश्न उन सवालों से मिलते थे जो परीक्षा से पहले छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किए गए थे. जांच समिति ने इसे परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर उल्लंघन माना. इसी दौरान जांच में यह भी पता चला कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी के प्रश्न पत्र में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आने की आशंका है. दोनों प्रश्न पत्र एक ही शिक्षक ने तैयार किए थे, इसके बाद यूनिवर्सिटी ने दोनों परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है.
प्रोफेसर पर एफआईआर और 7 साल का बैन
यूनिवर्सिटी ने आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से अगले 7 वर्षों तक विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी निभाने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. यूनिवर्सिटी में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि संस्थान अपने स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में परीक्षा की गोपनीयता से कोई समझौता न हो.
कुलपति ने क्या कहा?
यूनिवर्सिटी की कुलपति त्रिप्ता ठाकुर ने कहा है कि जैसे ही पेपर लेकर सूचना मिली, यूनिवर्सिटी ने तत्काल जांच शुरू कर दी. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है. जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया गया, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. यूनिवर्सिटी ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वह परीक्षा रद्द होने और पुनर्परीक्षा से जुड़ी जानकारियां तुरंत छात्रों तक पहुंचाएं, ताकि उन्हें तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके साथ ही सभी संस्थाओं से आदेश को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने को कहा गया है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>DU में हिंदी को प्राथमिकता, अब दो भाषाओं में तैयार होंगे जरूरी डॉक्यूमेंट्स; जानिए इसके फायदे और नुकसान </title>
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        <description><![CDATA[ DU Hindi Policy: डीयू ने यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. यूनिवर्सिटी के कुलसचिव की ओर से सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, कॉलेज प्राचार्य, निदेशकों और अधिकारियों को विस्तृत सर्कुलर जारी किया गया है. इसमें भारत सरकार के राजभाषा अधिनियम 1963 और राजभाषा नियम 1976 के प्रभावी पालन के निर्देश दिए गए हैं. नए निर्देशों के तहत यूनिवर्सिटी के सभी प्रमुख डॉक्यूमेंट अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किए जाएंगे, जिनमें हिंदी को प्राथमिक स्थान दिया जाएगा. इसके साथ ही कार्यालय कामकाज, वेबसाइट और पत्राचार में भी हिंदी के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है.&amp;nbsp;
डॉक्यूमेंट में होगा बदलाव
सर्कुलर के अनुसार यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े सभी संस्थानों में नोटिस बोर्ड सूचना बुलेटिन, फाइल कवर, रबर स्टैंप, पहचान पत्र, प्रोस्पेक्टस, लाइब्रेरी कार्ड, बैनर, होर्डिंग, निमंत्रण पत्र और लिफाफे पर लिखे एड्रेस सभी प्रमुख दस्तावेज हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किए जाएंगे. इनमें हिंदी पहले और अंग्रेजी बाद में समान फॉन्ट साइज में लिखी जाएगी. इसके अलावा राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के तहत जारी होने वाले आदेश, अधिसूचनाएं, ज्ञापन, नियम, निविदाएं, अनुबंध, प्रशासनिक रिपोर्ट और प्रेस विज्ञप्तियां भी दोनों भाषाओं में जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
हिंदी में ही होगा ज्यादा कार्यालयी काम&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ने निर्देश दिए हैं कि हिंदी में प्राप्त होने वाले पत्रों का उत्तर अनिवार्य रूप से हिंदी में दिया जाएगा. क और ख क्षेत्र से आने वाले पत्रों के साथ-साथ केंद्र सरकार के कार्यालय से अंग्रेजी में प्राप्त पत्रों के उत्तर भी हिंदी में देने पर जोर दिया गया है. कार्यालय में यूनिकोड के माध्यम से हिंदी टंकण को बढ़ावा देने, सेवा पुस्तिकाओं और अभिलेखों में हिंदी में प्रविष्टियां करने और सभी रजिस्टरों के शीर्षक दोनों भाषाओं में रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा सर्कुलर के अनुसार डीयू की वेबसाइट डिफॉल्ट रूप से हिंदी में खुलेगी, हालांकि अन्य भाषाओं का भी ऑप्शन रहेगा. वहीं जर्नल और मानक संदर्भ पुस्तकों को छोड़कर पुस्तकालय अनुदान का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा हिंदी पुस्तकों, अनुवाद संबंधी साहित्य की खरीद और हिंदी डिजिटल सामग्री पर खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं.
नियमों के पालन नहीं करने पर देनी होगी जवाबदेही&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है की राजभाषा से जुड़े निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी. अगर इन नियमों की अनदेखी की होती है तो संबंधित अधिकारी स्वयं इसके लिए जवाबदेह होंगे. वहीं अरविंदो कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हंसराज सुमन ने इस पहल का स्वागत किया है. उनका कहना है कि हर कॉलेज में हिंदी सप्ताह और हिंदी पखवाड़ा आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़े. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हिंदी पत्रकारिता, रंगमंच, फिल्म, रेडियो जॉकी, ब्लॉग लेखन, सोशल मीडिया और हिंदी शिक्षण जैसे विषयों पर इंटर कॉलेज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए, जिससे हिंदी को रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जा सके.&amp;nbsp;
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डीयू में हिंदी को प्राथमिकता के फायदें&amp;nbsp;

एक्सपर्ट्स के अनुसार डीयू में हिंदी को प्राथमिकता देने से छात्रों और कर्मचारियों को हिंदी में डॉक्यूमेंट उपलब्ध होंगे.
हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं ज्यादा आसान हो सकती है.
सरकारी राजभाषा नीति का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा.
कार्यालय में हिंदी के प्रयोग और डिजिटल हिंदी को बढ़ावा मिलेगा.
हिंदी को बढ़ावा मिलने से छात्रों की दूसरे हिंदी आधारित क्षेत्रों में रुचि बढ़ेगी.&amp;nbsp;

क्या हो सकते हैं इसके नुकसान

डीयू में हिंदी को बढ़ावा देने से सभी डॉक्यूमेंट्स को दो भाषाओं में तैयार करने से प्रशासन का काम बढ़ सकता है.
डॉक्यूमेंट के नियमित अपडेट में ज्यादा समय और संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है.
अगर अनुवाद की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो दोनों भाषाओं के संस्करण में अंतर हो सकता है.&amp;nbsp;
वेबसाइट, रिकॉर्ड और दूसरी डिजिटल सामग्री को दोनों भाषा में रखने से भी प्रशासनिक काम बढ़ेंगे.

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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>में, हिंदी, को, प्राथमिकता, अब, दो, भाषाओं, में, तैयार, होंगे, जरूरी, डॉक्यूमेंट्स, जानिए, इसके, फायदे, और, नुकसान </media:keywords>
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        <title>जंतर&amp;मंतर पर गए तो होगी सख्त कार्रवाई, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों&amp;शिक्षकों के लिए जारी की एडवाइजरी</title>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और 20 जुलाई के हिंसक घटनाक्रम के बाद तनाव का माहौल बना हुआ है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट विवाद को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है. इस माहौल को देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) प्रशासन ने एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. विश्वविद्यालय ने अपने सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें जंतर-मंतर पर होने वाले किसी भी धरना-प्रदर्शन या विरोध सभा में शामिल होने पर सख्त मनाही की गई है.
जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूर रहने की इजाजत
दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर सूचना जारी कर अपने सभी छात्रों और अध्यापकों से अपील की है कि वे जंतर-मंतर पर चल रहे किसी भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा न बनें. विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अपनी निजी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है. जंतर-मंतर पर हाल ही में हुई पुलिस झड़पों और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन नहीं चाहता कि परिसर के छात्र किसी भी तरह के जोखिम या शारीरिक चोट का शिकार बनें. इसलिए छात्रों को विवादित स्थलों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है.
पढ़ाई और करियर पर पड़ सकता है बुरा असर
विश्वविद्यालय का कहना है कि किसी भी तरह के उग्र या अवैध धरना-प्रदर्शनों में भाग लेने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा पहुंचती है. इस तरह के आंदोलनों में लगातार शामिल रहने से न केवल पढ़ाई का नुकसान होता है, बल्कि छात्रों के भविष्य और पेशेवर अवसरों पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. विश्वविद्यालय ने कहा है कि अनुशासनात्मक या कानूनी मामलों में फंसने से छात्र-छात्राओं के करियर रिकॉर्ड पर दाग लग सकता है, जो आगे चलकर देश-विदेश में मिलने वाली नौकरियों या उच्च शिक्षा के अवसरों को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है.
गैरकानूनी प्रदर्शन में शामिल होने पर कड़ी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए बिल्कुल साफ कर दिया है कि अगर किसी ने नियम तोड़ा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. यदि दिल्ली यूनिवर्सिटी का कोई भी छात्र या शिक्षक जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले किसी भी गैरकानूनी प्रदर्शन या अनधिकृत सभा में शामिल पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी व अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे. विश्वविद्यालय के नियमों और देश के कानूनों का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ-साथ संस्थान से निष्कासन जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 05:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Bank Job:  बैंक में नौकरी का सुनहरा मौका, IBPS PO और SO भर्ती के लिए बढ़ी आवेदन की तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Job:&amp;nbsp;अगर आप बैंक में नौकरी करने की तैयारी कर रहे हैं और अभी तक आईबीपीएस पीओ या एसओ भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं तो आपके लिए राहत की खबर आई है. दरअसल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन ने प्रोबेशनरी ऑफिसर और स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती परीक्षा 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है. अब इच्छुक उम्मीदवार 26 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया आईबीपीएस की आधिकारिक वेबसाइट ibps.in पर जारी है.&amp;nbsp;
IBPS भर्ती प्रक्रिया के तहत कितने भरे जाएंगे पद
इस भर्ती अभियान के जरिए देश के विभिन्न भागीदारी वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कुल 7,460 पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. इनमें 6,715 पद प्रोबेशनरी ऑफिसर और 745 पद स्पेशलिस्ट ऑफिसर के लिए निर्धारित है. ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने अब तक आवेदन नहीं किया वह तय समय सीमा के अंदर अपना फॉर्म भर सकते हैं.&amp;nbsp;
पीओ पद के लिए क्या है योग्यता?
प्रोबेशनरी ऑफिसर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए या केंद्र सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त समकक्ष योग्यता होनी चाहिए. इसके अलावा आवेदन के समय उम्मीदवार के पास डिग्री या मार्कशीट उपलब्ध होना जरूरी है. ऑनलाइन फॉर्म भरते समय ग्रेजुएशन के अंक भी दर्ज करने होंगे.
एसओ पद के लिए अलग-अलग पात्रता नियम&amp;nbsp;
स्पेशलिस्ट ऑफिसर के विभिन्न पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है. इसलिए उम्मीदवार को आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में संबंधित पद की पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं आवेदन?

आईबीपीएस पीओ और एसओ पद पर आवेदन करने के लिए सबसे पहले ibps.in वेबसाइट पर जाएं.
इसके बाद आईबीपीएस पीओ या एसओ रिक्रूटमेंट 2026 के आवेदन लिंक पर क्लिक करें.
अब पहले रजिस्ट्रेशन करें और फिर लॉगिन करके आवेदन पत्र भरें.
जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद आवेदन फीस का पेमेंट करें.
लास्ट में फॉर्म सबमिट कर फॉर्म की कन्फर्मेशन कॉपी डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें&amp;nbsp;

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कितना देनी होगी आवेदन फीस?&amp;nbsp;
इस भर्ती के लिए जनरल कैटेगरी और दूसरे एलिजिबल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन फीस 850 रुपये निर्धारित की गई है. वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बेंचमार्क दिव्यांग पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 175 रुपये आवेदन फीस देनी होगी. फीस का भुगतान डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से किया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Job: , बैंक, में, नौकरी, का, सुनहरा, मौका, IBPS, और, भर्ती, के, लिए, बढ़ी, आवेदन, की, तारीख</media:keywords>
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        <title>Ex Agniveer Reservation: एक्स&amp;अग्निवीरों को नई भर्ती में 50% आरक्षण, भर्ती से लेकर उम्र, सैलरी और नौकरी तक जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Ex Agniveer Reservation:&amp;nbsp;अग्निपथ योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और असम राइफल्स में कांस्टेबल और राइफल मैन के पदों पर भर्ती में एक्स- अग्निवीरों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. इसके साथ ही उन्हें भर्ती प्रक्रिया में कई अहम रियायतें भी दी जाएगी. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए इसकी जानकारी दी. सरकार का कहना है की अग्नि वीरों के लिए भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से एक्स अग्निवीर नाम से नई कैटेगरी बनाई गई है. इसके तहत आरक्षण, आयु सीमा में छूट और भर्ती प्रक्रिया में विशेष रियायतें दी जाएगी.&amp;nbsp;
किन पदों पर मिलेगा 50 प्रतिशत आरक्षण?&amp;nbsp;
गृह मंत्रालय के अनुसार यह आरक्षण सीएपीएफ में कांस्टेबल और असम राइफल्स में राइफलमैन के पदों पर भर्ती के दौरान लागू होगा. हर भर्ती वर्ष में इन पदों की 50 प्रतिशत रिक्तियां एक्स-अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेंगी. इससे पहले मार्च 2023 में सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था. अब इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है. बीएसएफ और सीआईएसएफ जैसी कई केंद्रीय और सुरक्षा बलों ने भी पहले अपने भर्ती नियमों में संशोधन कर आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव लागू किया था.&amp;nbsp;
भर्ती प्रक्रिया में क्या मिलेगी छूट?
गृह मंत्रालय ने एक्स-अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में कई जरूरी छूट देने का फैसला किया है. इसके तहत उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा से छूट, फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट से छूट और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट से छूट दी जाएगी. सरकार का मानना है कि 4 साल की सैन्य सेवा के दौरान अग्नि वीरों को आवश्यक फिजिकल और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिल चुका होता है, इसलिए उन्हें इन चरणों में छूट दी जा रही है. &amp;nbsp;
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आयु सीमा में भी मिलेगी राहत&amp;nbsp;
सरकार ने एक्स-अग्निवीरों के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी छूट देने का फैसला किया है. सभी एलिजिबल &amp;nbsp;एक्स-अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की छूट मिलेगी. अग्निपथ योजना के पहले बैच के उम्मीदवारों को अतिरिक्त 5 साल की आयु छूट भी दी जाएगी. वहीं गृह मंत्रालय ने भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट से छूट की घोषणा कर दी है, लेकिन मेरिट कैसे तैयार की जाएगी इसे लेकर अभी कोई अलग निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. सरकार ने कहा है कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी.&amp;nbsp;
पहला बैच कब होगा एलिजिबल?
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहला बैच अभी अपनी 4 वर्ष की सेवा पूरी नहीं कर पाया है. नौसेना में नवंबर 2022 में शामिल हुए पहले बैच के करीब 2,600 अग्निवीर इस साल सेवा पूरी करेंगे. इसके बाद वे सीएपीएफ और असम राइफल्स में नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>OMR में 305 नंबर, रिजल्ट में सिर्फ 64! NEET रिजल्ट की कहां करें शिकायत, क्या दोबारा होगी जांच?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET OMR Sheet Controversy:&amp;nbsp; री-नीट 2026 का रिजल्ट का 16 जुलाई को जारी होने के बाद से ही रिजल्ट को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही है. वहीं अब तक भी यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. रिजल्ट को लेकर मध्य प्रदेश के छात्र ने अपने अंको पर सवाल उठाते हुए संबंधित हाई कोर्ट का रुख किया है. छात्र का दावा है कि आधिकारिक ओएमआर शीट और फाइनल आंसर की के आधार पर उसके अंक कहीं ज्यादा बनते हैं, लेकिन एनटीए की ओर से जारी रिजल्ट में काफी कम अंक दिए गए हैं. इस बीच कई अभ्यर्थियों के मन में कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर रिजल्ट या ओएमआर शीट में किसी तरह की गड़बड़ी नजर आए तो शिकायत कहां करें और क्या दोबारा जांच कराई जा सकती है.&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश के छात्र ने लगाया 241 अंकों के अंतर का आरोप&amp;nbsp;
मध्य प्रदेश के झाबुआ निवासी छात्र लोकेंद्र सिंह खड़िया ने इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. छात्र का दावा है कि एनटीए की ऑफिशियल ओएमआर शीट और फाइनल आंसर की के अनुसार उसे फिजिक्स में 104, केमिस्ट्री में 125 और बायोलॉजी में 76 अंक मिलने चाहिए थे. इसी हिसाब से उसके कुल अंक 305 बनते हैं, लेकिन 16 जुलाई को घोषित परिणाम में उसे सिर्फ 64 अंक दिए गए हैं, यानी उसके अनुसार 241 अंको का अंतर है. याचिका में कहा गया है कि 14 जुलाई को जब एनटीए ने ओएमआर शीट पोर्टल पर अपलोड की तो पहली बार लॉगिन करने पर फिजिक्स और केमिस्ट्री सेक्शन के जवाब खाली दिखाई दिए. कुछ देर बाद दोबारा लॉगिन करने पर दूसरी ओएमआर शीट दिखाई दी, जिसमें सभी उत्तर दर्ज थे. छात्र ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए और ओएमआर डेटा प्रोसेसिंग मूल्यांकन या रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि का आरोप लगाया है.&amp;nbsp;
हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब&amp;nbsp;
मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. अब इस मामले में अगले सुनवाई 28 जुलाई को होगी. इस याचिका में केवल अंकों की कथित गड़बड़ी का मुद्दा ही नहीं उठाया गया, बल्कि एनटीए की कानूनी और संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि एनटीए संसद की ओर से बनाई गई वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत रजिस्टर्ड एक समिति है, इसलिए उसकी कानूनी स्थिति की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए. &amp;nbsp;
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गड़बड़ी होने पर कहां कर सकते हैं शिकायत?&amp;nbsp;
अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि उसके ओएमआर शीट और रिजल्ट में अंतर है, तो सबसे पहले उसे एनटीए की ऑफिशियल ओएमआर शीट और फाइनल आंसर की के आधार पर अपने अंक दोबारा मिलाने चाहिए. अगर इसके बाद भी अंतर दिखाई दे तो संबंधित डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखना जरूरी है. वहीं एनटीए उम्मीदवारों की शिकायत अपने आधिकारिक शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से स्वीकार करता है.
अभ्यर्थी एनटीए की वेबसाइट पर उपलब्ध ग्रीवेंस पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा एनटीए की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भी पूरी जानकारी और जरूरी डॉक्यूमेंट भेजे जा सकते हैं. अगर इससे शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो उम्मीदवार केंद्रीय लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. नीट, जेईई और यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं के लिए एनटीए हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध रहती है. जहां आवेदन संख्या के साथ समस्या दर्ज कराई जा सकती है.&amp;nbsp;
क्या दोबारा हो सकती है जांच?&amp;nbsp;
अगर उम्मीदवार के पास ओएमआर शीट, फाइनल आंसर की और स्कोर कार्ड के बीच अंतर का डॉक्यूमेंट प्रमाण हो तो वह एनटीए से स्वतंत्र सत्यापन की मांग कर सकता है. ऐसे मामलों में उम्मीदवार मूल्यांकन प्रक्रिया, ओएमआर डेटा और अंक गणना की जांच का अनुरोध कर सकते हैं. अगर एनटीए से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और मामला एडमिशन को प्रभावित करता है, तो अभ्यर्थी कोर्ट का भी रुख कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sonia Sehrawat: कॉकरोच पर इंस्टा स्टोरी लगाने वाली सोनिया सहरावत की सैलरी कितनी, RAF में कैसे मिलती है जॉब?</title>
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        <description><![CDATA[ Sonia Sehrawat: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए बीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत अचानक चर्चा में आ गई. प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की. वहीं दो दिन बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर की गई एक स्टोरी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उनके विरोध में भी उत्तर आए. आपको बता दें कि सोनिया सहरावत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की रैपिड एक्शन फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट है. वह हरियाणा के रहने वाली है और यूपीएससी की सीएपीएफ परीक्षा पास करके सीआरपीएफ में शामिल हुए. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इंस्टा पर कॉकरोच की स्टोरी लगाने वाली सोनिया सहरावत की सैलरी कितनी है और आरएएफ में कैसे जॉब मिलती है.
जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद आई चर्चा में सोनिया
20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान आरएएफ की तैनाती की गई. इसी दौरान हुई झड़प में सोनिया सहरावत घायल हो गई. बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी तरफ से पूरी घटना का विवरण दिया. इसके दो दिन बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक स्टोरी वायरल हुई, जिसमें एक मरे हुए कॉकरोच की तस्वीर के साथ लिखा था &amp;nbsp;CAN&#039;T FIX THEMSELVES AND THEY WANNA FIX THE COUNTRY. इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई. बाद में यह स्टोरी डिलीट कर दी गई, हालांकि इसके स्क्रीनशॉट पहले ही वायरल हो चुके थे. इसके बाद सोनिया शेरावत को खूब ट्रोल किया जा रहा है.
क्या है आरएएफ?
रैपिड एक्शन फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की विशेष यूनिट है. जिसे दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाया गया है. &amp;nbsp;इसका गठन 1992 में किया गया था. यह ऐसी विशेष फोर्स है, जिसे किसी भी संवेदनशील स्थिति में कम समय में तैनात किया जा सकता है. आरएएफ की टीमों को नॉन लैथल हथियारों के इस्तेमाल, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों के लिए प्रत्येक कंपनी में महिला जवानों की अलग टीम भी शामिल होती है.
कैसे बनते हैं आरएएफ में असिस्टेंट कमांडेंट?
आरएएफ में असिस्टेंट कमांडेंट की सीधी भर्ती अलग से नहीं होती, इसके लिए उम्मीदवारों को संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा पास करनी होती है. चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति सीआरपीएफ सहित अलग-अलग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में की जाती हैं. यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है, जिसमें लिखित परीक्षा, फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट और मेडिकल टेस्ट, इंटरव्यू और पर्सनैलिटी टेस्ट भी होता है. वहीं इसके बाद मेरिट के आधार पर चयनित होने के बाद उम्मीदवारों को संबंधित बल में नियुक्ति दी जाती है.
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आरएएफ बनने की योग्यता?
सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में आवेदन के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना जरूरी है. इसके अलावा वह भारतीय नागरिक होना चाहिए और आयु 20 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए. आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट मिलती है और उम्मीदवारों को निर्धारित फिजिकल और मेडिकल मानकों को भी पूरा करना होता है.
कितनी मिलती है सैलरी?
सातवें वेतन आयोग के अनुसार सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट का पद ग्रुप ए का अधिकारी होता है. इसे पे लेवल 10 के आधार पर सैलरी दी जाती है, जो सैलरी 67,700 से 2,08,700 प्रतिमाह तक हो सकती है. बेसिक सैलरी के अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Boss Warning Signs: बॉस देने लगे ये इशारे तो समझो डूब गई नैया, भूलकर भी अपने सीनियर से न बोलें ये बात</title>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Bullet Train Driver: बुलेट ट्रेन चलाने का है सपना, भारत में कैसे बन सकेंगे इसके ड्राइवर, क्या होनी चाहिए योग्यता?</title>
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        <description><![CDATA[ Bullet Train Driver: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर 15 अगस्त 2027 तक बुलेट ट्रेन शुरू करने का टारगेट रखा गया है. ऐसे में कई युवाओं के मन में यह सवाल है कि आखिर भारत में बुलेट ट्रेन के ड्राइवर कैसे बनेंगे, इसके लिए क्या योग्यता होगी और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी. इसी बीच नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने परियोजना से जुड़े तकनीकी और संचालन पदों पर भर्ती भी निकाली है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सामने आए हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर आपका भी बुलेट ट्रेन चलाने का सपना है तो भारत में आप बुलेट ट्रेन के ड्राइवर कैसे बन सकते हैं और इसके लिए क्या-क्या योग्यता होनी चाहिए.
तेजी से चल रहा भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम
मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है. करीब 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर मुंबई से अहमदाबाद सहित कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं. रेलवे मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना का संचालित 15 अगस्त 2027 तक शुरू होने का टारगेट रखा गया है. बुलेट ट्रेन का संचालन अत्याधुनिक ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जाएगा. हालांकि ट्रेन में मौजूद पायलट की जिम्मेदारी कंट्रोल सेंटर के निर्देशों का पालन करना, सिस्टम की निगरानी करना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लेना होगा.
भारत में कैसे बन सकेंगे बुलेट ट्रेन के ड्राइवर?
भारत में अभी बुलेट ट्रेन सेवा शुरू नहीं हुई है, इसलिए इसके लिए अलग से ड्राइवर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है. हालांकि हाई स्पीड रेल परियोजना से जुड़े तकनीकी और संचालन स्टाफ की भर्ती एनएचएसआरसीएल के माध्यम से की जा रही है. भविष्य में बुलेट ट्रेन के संचालन के लिए रेलवे, मेट्रो या हाई स्पीड रेल सिस्टम में अनुभवी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर पायलट बनाया जा सकता है. इसके लिए पहले से रेलवे संचालन का एक्सपीरियंस रखने वाले कर्मचारियों को जापान में स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी, क्योंकि भारत की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना जापान की तकनीक पर आधारित है. हालांकि फिलहाल बुलेट ट्रेन परियोजना में काम करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एनएचएसआरसीएल ने विभिन्न तकनीकी और ऑपरेशन से जुड़े पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है.
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एनएचएसआरसीएल में निकली 224 पदों पर भर्ती
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कुल 224 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. इनमें 209 नॉन-एग्जीक्यूटिव और 15 एग्जीक्यूटिव पद शामिल है. भर्ती के तहत जूनियर इंजीनियर, स्टेशन-ट्रेन मैनेजर, डिपो एवं ऑपरेशन कंट्रोलर, सूचना प्रौद्योगिकी और सिक्योरिटी से जुड़े पदों पर नियुक्ति की जाएगी. जूनियर इंजीनियर के पद सिविल, ट्रैक, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग एवं टेलीकॉम, रोलिंग स्टॉक और ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन जैसे डिपार्टमेंट में उपलब्ध है.
इन पदों के लिए कौन कर सकता है आवेदन?
भर्ती अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की अधिकतम आयु 31 में 2026 तक 45 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अभ्यर्थियों के पास संबंधित पद के अनुसार 3 साल का डिप्लोमा या बीई-बीटेक की डिग्री होनी जरूरी है. इसके अलावा रेलवे, मेट्रो या रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस क्षेत्र में कम से कम 3 साल का एक्सपीरियंस भी रखा गया है. वहीं चयनित उम्मीदवारों का चयन डीबीटी परीक्षा के आधार पर और फिर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षा से होगा.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Karnataka Teacher Recruitment 2026: इस राज्य में होने जा रही 15000 पदों पर शिक्षक भर्ती, कैबिनेट ने दी मंजूरी&amp; जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Karnataka Teacher Recruitment 2026: सरकारी शिक्षकों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर कई तरह की भर्ती प्रक्रियाएं शुरू की जाती है. वहीं इस बार सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर आई है. दरअसल कर्नाटक सरकार ने राज्य के सरकारी, प्राथमिक और हाई स्कूल में 15,000 शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दे दी है. राज्य कैबिनेट ने कर्नाटक एजुकेशन सर्विसेज स्पेशल रूल्स फॉर रिक्रूटमेंट टू सर्टेन टीचिंग पोस्ट्स 2026 को मंजूरी देकर भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया है.
अब स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग जल्द ही भर्ती का विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करेगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राज्य सरकार के अनुसार यह भर्ती लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के लिए की जा रही है. शिक्षा विभाग को निर्धारित भर्ती नियमों के तहत पूरी चयन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि नियमित भर्ती होने तक स्कूलों में गेस्ट टीचर के जरिए व्यवस्था चलाई जा रही थी, लेकिन अब स्थायी नियुक्तियां की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.&amp;nbsp;
किन क्षेत्रों में कितने पदों पर होगी भर्ती?&amp;nbsp;
सरकार की ओर से जारी स्वीकृत पदों के अनुसार 15,000 पदों को दो क्षेत्र में बांटा गया है. इनमें 6,967 पद कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए और 8,033 पद गैर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए स्वीकृत किए गए हैं. कर्नाटक कल्याण क्षेत्र के पदों में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर के 3,328 पद, असिस्टेंट मास्टर के 2,214 पद, प्राइमरी स्कूल टीचर के 800 पद, फिजिकल एजुकेशन टीचर के 425 पद और कंप्यूटर साइंस टीचर के 300 पद शामिल है. वहीं गैर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के पदों में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर के 5,272 पद, असिस्टेंट मास्टर के 2,286 पद प्राइमरी स्कूल टीचर के 100 पद, फिजिकल एजुकेशन टीचर के 175 पद, कंप्यूटर साइंस टीचर के 200 पद शामिल है.&amp;nbsp;
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जल्दी जारी होगा नोटिफिकेशन&amp;nbsp;
स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने बताया कि कर्नाटक ने पहले शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर काम किया है, जिसके कारण नियमित भर्ती में कुछ समय लगा. अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अंतिम भर्ती की सूचना जल्द जारी की जाएगी और पात्र अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी. उन्होंने कहा कि विभाग को निर्धारित भर्ती नियमों के अनुसार सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नियुक्तियां जल्द से जल्द की जा सके.&amp;nbsp;
अब तक गेस्ट टीचर से चल रही थी व्यवस्था&amp;nbsp;
सरकार के अनुसार राज्य के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए अस्थायी तौर पर गेस्ट टीचर की नियुक्ति की गई थी. हालांकि यह केवल अंतरिम व्यवस्था थी. अब नियमित शिक्षकों की भर्ती के जरिए रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>AISHE Report: देश में पहली बार घटे अंडरग्रेजुएट एडमिशन, आखिर क्यों कम हो रहे दाखिले और क्या हैं इसके मायने?</title>
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        <description><![CDATA[ AISHE Report: देश में हायर एजुकेशन को लेकर पहली बार एक नया ट्रेंड सामने आया है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार पहली बार देशभर के हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में अंडर ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. वहीं दूसरी और पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि हायर एजुकेशन के प्रति छात्रों की बदलती सोच, व्यावसायिक शिक्षा पर बढ़ता जोर और जनसंख्या के बदलते स्वरूप का भी संकट की ओर भी संकेत करता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि देश में पहली बार यूजी एडमिशन में कमी क्यों आ रही है और इसके मायने क्या है.
AISHE की Report में क्या आया है सामने?
AISHE की 2022-23 और 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में यूजी पाठ्यक्रमों एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या पिछले साल की तुलना में करीब 1 लाख कम हो गई. हालांकि कुल उच्च शिक्षा नामांकन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2022-23 में जहां कुल नामांकन 4.46 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया. इस अवधि में छात्राओं की संख्या भी 2.18 करोड़ से बढ़कर 2.24 करोड़ पहुंच गई. वहीं 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो भी 29.5 से बढ़कर 30 हो गया.
पहली बार क्यों घटे यूजी एडमिशन?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे कई कारण है. पूर्व यूजीसी अध्यक्ष प्रोफेसर सुखदेव थोराट के अनुसार नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है. अब कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में छात्र पारंपरिक डिग्री कोर्स के बजाय स्किल आधारित ऑप्शन चुन रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 4 वर्षीय ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम मल्टीपल एग्जिट सिस्टम और कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट जैसे बदलाव का भी एडमिशन पर असर पड़ा है. मल्टीपल एग्जिट व्यवस्था के कारण कई छात्र डिग्री पूरी करने से पहले ही सर्टिफिकेट या डिप्लोमा लेकर पढ़ाई छोड़ रहे हैं.
कॉलेज फीस और स्कॉलरशिप भी बनी वजह
रिपोर्ट के अनुसार एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई स्कॉलरशिप योजनाएं बंद होने और सरकारी फंडिंग कम होने का असर भी छात्रों पर पड़ा है. सार्वजनिक संस्थानों में वित्तीय दबाव बढ़ने से फीस में वृद्धि हुई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना पहले की तुलना में कठिन हो गया है. प्रोफेसर थोराट के अनुसार राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा, सेकेंडरी एजुकेशन के लिए लड़कियों की प्रोत्साहन योजना, बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति और मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप जैसी कई योजनाएं बंद होने से भी छात्रों को नुकसान हुआ है. उनका मानना है कि इन बदलावों का असर विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है.
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युवाओं की बदलती सोच भी बड़ी वजह
अंडर ग्रेजुएट में एडमिशन की कमी को लेकर AISHE की रिपोर्ट पर हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर फुरकान कमर का कहना है कि अब केवल नीतिगत बदलाव ही नहीं, बल्कि युवाओं की सोच भी बदल रही है. उनके अनुसार स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या पहले से कम हो रही है क्योंकि युवा आबादी में गिरावट आ रही है. वहीं दूसरी ओर कई छात्र और उनके परिवार यह महसूस कर रहे हैं कि हायर एजुकेशन के बाद रोजगार की गारंटी नहीं है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट प्राइवेट क्षेत्र में है, जहां फीस काफी ज्यादा है. ऐसे में कई परिवार अपने बच्चों को महंगी शिक्षा दिलाने में सक्षम नहीं है और छात्र वैकल्पिक करियर या स्किल डेवलपमेंट कोर्स की ओर रुख कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>QS Ranking 2027: पढ़ाई के लिए सियोल दुनिया का बेस्ट शहर, मुंबई भारत में नंबर&amp;1 और दिल्ली सबसे किफायती स्टूडेंट सिटी</title>
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        <description><![CDATA[ QS Ranking 2027: पढ़ाई के लिए सियोल दुनिया का बेस्ट शहर, मुंबई भारत में नंबर-1 और दिल्ली सबसे किफायती स्टूडेंट सिटी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NEET 2026 Success Story: पेंटिंग कर परिवार चलाया, अब NEET में 583 अंक लाकर बूंदी के बेटे ने MBBS की सीट की पक्की</title>
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        <description><![CDATA[ NEET 2026 Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले सूरज सैनी ने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती है. परिवार की मदद के लिए गांव-गांव जाकर घरों की पेंटिंग करने वाले सूरज ने इस साल नीट यूजी 2026 में 583 अंक हासिल किए. इस स्कोर के साथ उन्हें मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि 12वीं कक्षा तक उन्हें नीट परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. धीरे-धीरे जानकारी मिली, तैयारी शुरू की और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज तक का सफर तय कर लिया.&amp;nbsp;
12वीं तक नहीं पता था नीट क्या होता है?
सूरज बूंदी जिले के कापरेन स्थित एक हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल के छात्र रहे हैं. उन्होंने दसवीं में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. &amp;nbsp;सूरज बताते हैं कि स्कूल के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर था. उन्हें नीट परीक्षा के बारे में पहली बार उनकी बुआ से पता चला, इसके बाद उन्होंने फरवरी 2024 में आवेदन किया और पहली बार परीक्षा दी. सूरज के अनुसार पहले प्रयास में उनकी तैयारी बहुत सीमित थी, परीक्षा देने के बाद उन्हें लगा कि प्रश्न पत्र अपेक्षा से ज्यादा आसान था. &amp;nbsp;उन्हें एहसास हुआ की समस्या पेपर नहीं, बल्कि उनकी तैयारी में थी. इस वजह से उन्होंने दोबारा पूरी गंभीरता के साथ पूरी तैयारी शुरू की.&amp;nbsp;
घर पर पढ़ाई से कोटा तक का सफर&amp;nbsp;
पहले प्रयास के बाद सूरज ने घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखी. बाद में उन्हें कोटा स्थित कोचिंग के कार्यक्रम के तहत फ्री कोचिंग और रहने की सुविधा मिली. कोटा पहुंचने के बाद उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की सही रणनीति समझ आई. शुरुआत में उन्हें लगा कि दूसरे छात्र उनसे काफी आगे हैं, क्योंकि वह कई वर्षों से तैयारी कर रहे थे. लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें धीरे-धीरे अपनी तैयारी भी मजबूत कर ली. सूरज का कहना है कि नीट की तैयारी के लिए केवल कोचिंग ही जरूरी नहीं होती, बल्कि सही दिशा मिलना ज्यादा जरूरी होता है. उनके अनुसार शिक्षक यह समझाने में मदद करते हैं कि क्या पढ़ना है, कितना पढ़ना है और किस तरह तैयारी को आगे बढ़ाना है.&amp;nbsp;
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पढ़ाई के साथ-साथ करते थे घरों की पेंटिंग&amp;nbsp;
कोटा जाने से पहले सूरज छुट्टियों और खाली समय में आसपास के गांव में घरों की पेंटिंग का काम करते थे. इससे होने वाली कमाई से वह परिवार की आर्थिक मदद करते थे. सूरज ने बताया कि यह काम उसने किसी से सीखा नहीं था, बल्कि लोगों को काम करते देखकर खुद सीख लिया. धीरे-धीरे यही काम परिवार की एक्स्ट्रा आय का साधन बन गया. वहीं सूरज की मां घीसी बाई खेतों में मजदूरी करती है, आर्थिक तंगी की वजह से उसकी छोटी बहन गरिमा को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने पढ़ी और वह अपनी मां के साथ खेतों में काम करने लगी. सूरज अब सूरज चाहते हैं कि उनकी बहन दोबारा स्कूल जाए.
अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तैयारी&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 में 583 अंक हासिल करने के बाद सूरज का अगला टारगेट मेडिकल काउंसलिंग है. उन्हें भरोसा है कि इस स्कोर के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिल जाएगी. वहीं अपने अनुभव के आधार पर सूरज का कहना है कि जो छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, उन्हें 11वीं से ही नीट की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. उनका मानना है कि समय रहते तैयारी शुरू करने के बाद में अतिरिक्त दबाव नहीं बनता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>High Paying Career: विदेश जाकर करनी है मोटी कमाई? इन कॉर्स में आज ही ले लें एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ High Paying Career: आज के समय में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र 12वीं के बाद ऐसे कोर्स की तलाश करते हैं, जिनकी मदद से वे विदेश में मोटी कमाई कर सके और उन्हें विदेश में ग्लोबल एक्सपोजर और लग्जरी लाइफस्टाइल भी दे सके. आजकल ऑलमोस्ट हर स्टूडेंट और उनके पेरेंट्स का एक ही सपना होता है, कि मेरे बच्चे की विदेश में जॉब, स्ट्रांग पैकेज और सिक्योर फ्यूचर हो. लेकिन प्रॉब्लम यहां पर आती है कि 12th के बाद आपके पास ऑप्शन बहुत ज्यादा होते हैं. &amp;nbsp;और जो गाइडेंस होती है, वो बहुत ही कम होती है. हालांकि, सिर्फ विदेश जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही कोर्स और सही स्किल का चुनाव सबसे अहम होता है. दुनिया भर में कुछ ऐसे प्रोफेशन हैं जिनकी लगातार मांग बनी हुई है और इनमें करियर बनाने वाले उम्मीदवारों को मोटी कमाई का चांस ज्यादा मिल सकता है.
मेडिकल, इंजीनियरिंग और AI जैसे सेक्टर में सबसे ज्यादा डिमांड
अगर आपकी रुचि मेडिकल फील्ड में है तो MBBS के बाद संबंधित देश की मेडिकल लाइसेंस परीक्षा (जैसे USMLE, PLAB, AMC आदि) पास करने पर अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों में डॉक्टर के रूप में काम करने का मौका मिल सकता है. अनुभव और स्पेशलाइजेशन के साथ मोटी कमाई में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.
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वहीं टेक्नोलॉजी सेक्टर में Computer Science Engineering, Artificial Intelligence (AI), Cyber Security, Data Science और Software Engineering सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में शामिल हैं. इन क्षेत्रों में अनुभवी प्रोफेशनल्स की दुनिया भर में मांग बनी हुई है. इसके अलावा Chemical Engineering, Aerospace Engineering और Robotics जैसे कोर्स भी कई देशों में अच्छा मौका देते हैं.
हेल्थकेयर और स्पेशलाइज्ड स्किल्स भी बन सकती हैं करियर की मजबूत नींव
अगर MBBS नहीं करना चाहते, तो Physiotherapy, Nursing, Occupational Therapy, Medical Laboratory Science और अन्य हेल्थकेयर कोर्स भी विदेशों में मोटी कमाई का जरिया बन सकते हैं. क्योंकि दुनिया भर के अस्पताल, क्लीनिक और चिकित्सा संस्थान में मांग लगातार बढ़ रही है.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी भी कोर्स से मोटी कमाई की गारंटी नहीं होती. कमाई कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे आपका अनुभव, स्किल, यूनिवर्सिटी, देश, नौकरी का पद और संबंधित देश की लाइसेंसिंग प्रक्रिया. इसलिए सिर्फ मोटी कमाई के लालच में कोर्स चुनने के बजाय अपनी पसंद, क्षमता और लंबे समय के करियर मकसद &amp;nbsp;को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए. सही फैसला, मजबूत स्किल्स और अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड के मुताबिक तैयारी आपको विदेश में मोटी कमाई में मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG counselling 2026: कब शुरू हो सकती है काउंसिलिंग? जानिए रजिस्ट्रेशन से लेकर डॉक्यूमेंट्स तक पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Counselling 2026:&amp;nbsp; नीट यूजी 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों की नजर मेडिकल काउंसिल कमेटी एमसीसी की ओर से जारी होने वाले काउंसलिंग शेड्यूल पर टिकी है. एमबीबीएस, बीडीएस, बीएससी नर्सिंग समेत अलग-अलग मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है. शेड्यूल जारी होते ही अभ्यर्थियों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा, जिसके बाद सीट आवंटन और एडमिशन के प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
बता दें कि इस साल नेशनल मेडिकल कमिशन के सीट मैट्रिक्स के अनुसार देश भर में एमबीबीएस की कुल 1,36,939 सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. इनमें 11.21 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी नीट यूजी 2026 परीक्षा में सफल हुए हैं. ऐसे में सीमित सीटों के कारण मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए बड़ा कंपटीशन देखने को मिल सकता है.
कब शुरू हो सकती है काउंसलिंग?&amp;nbsp;
रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल काउंसिल कमेटी कभी भी नीट यूजी काउंसलिंग शुरू करवा सकती है. हालांकि इसे लेकर एमसीसी ने अभी तक कोई ऑफिशियल घोषणा नहीं की है. लेकिन उम्मीद लगाई जा रही है कि 16 जुलाई को नीट यूजी का रिजल्ट जारी होने के बाद अब एमसीसी कभी भी काउंसलिंग की घोषणा कर सकता है. वहीं एमसीसी की काउंसलिंग के माध्यम से 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा की एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के अलावा एम्स, जेआईपीएमईआर, केंद्रीय विद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों, एएफएमएस इंस्टीट्यूट और बीएससी नर्सिंग की सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. वहीं 85 प्रतिशत राज्य कोटा की सीटों पर संबंधित राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी प्रवेश प्रक्रिया पूरी करेगी.&amp;nbsp;
काउंसलिंग के लिए ऐसे होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp;
काउंसलिंग शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को एमसीसी के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नया रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद नीट आवेदन से जुड़ी जानकारी भरकर लॉगिन करना होगा. निर्धारित रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट किया जा सकेगा. अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वह आवेदन पूरा होने के बाद कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर फ्यूचर के लिए से सुरक्षित भी रख सकते हैं.&amp;nbsp;
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काउंसलिंग में हो सकते हैं चार राउंड&amp;nbsp;
पिछले वर्षों के पैटर्न को देखते हुए इस बार भी काउंसलिंग चार चरणों में आयोजित की जा सकती है. इसमें राउंड-1, राउंड-2, मॉप अप राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड शामिल रहेंगे. हर एक चरण में सीट आवंटन के बाद उम्मीदवार को निर्धारित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा.&amp;nbsp;
ये जरूरी डॉक्यूमेंट पहले से रखें तैयार&amp;nbsp;
काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों को कई जरूरी डॉक्यूमेंट देने होंगे. इनमें नीट यूजी 2026 का एडमिट कार्ड, स्कोर कार्ड, 10वीं और 12वीं की मार्कशीट एवं प्रमाण पत्र, वैलिड फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, दिव्यांग प्रमाण पत्र और सीट आवंटन के बाद मिलने वाला प्रोविजनल अलॉटमेंट लेटर शामिल है. डॉक्यूमेंट में किसी प्रकार की कमी होने पर एडमिशन प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>बिहार के नए सरकारी डिग्री कॉलेजों का रियलिटी चेक, कई जगह न शिक्षक, न लाइब्रेरी और न स्थायी भवन</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार सरकार ने राज्य के 211 प्रखंडों में नए सरकारी डिग्री काॅलेज खोलने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए &amp;nbsp;दूर न जाना पड़े. 15 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राज चौधरी ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन कॉलेजों का उद्घाटन भी किया. सरकार के दावा है कि इस &amp;nbsp;पहल से छात्रों को अपने जिले और आसपास ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा. हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति अभी सरकार के दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. कई नए कॉलेजों में न तो स्थायी भवन है, न पर्याप्त शिक्षक और न ही पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध है.&amp;nbsp;
कई कॉलेज अभी अस्थायी भवन से संचालित&amp;nbsp;
जमीनी पड़ताल से सामने आया है कि राज्य के कई सरकारी डिग्री कॉलेज फिलहाल पहले स्थायी परिसर में नहीं चल रहे हैं. कई जगह कॉलेजों को इंटर कॉलेज, स्कूल या अन्य सरकारी भवनों में अस्थायी रूप से शुरू किया गया है. स्थायी भवनों का निर्माण अभी बाकी है. कई संस्थानों में लाइब्रेरी के लिए कमरे तो बनाए गए हैं, लेकिन वहां किताबें उपलब्ध नहीं है. वहीं फर्नीचर, लैब और दूसरे शैक्षणिक संसाधनों का काम भी कई जगह अधूरा है. सरकार का कहना है कि सभी सुविधाएं चरणबाद तरीके से विकसित की जाएगी&amp;nbsp;
एडमिशन शुरू लेकिन शिक्षकों की भारी कमी&amp;nbsp;
कॉलेज में इतिहास, हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में प्रवेश परीक्षा शुरू हो चुकी है. इसके बावजूद अधिकांश कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी. फिलहाल कई संस्थाओं का संचालन प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए प्राचार्यों, बर्सर और शिक्षकों के भरोसे किया जा रहा है. कई विषय ऐसे हैं, जिनमें छात्र तो एडमिशन ले चुके हैं, लेकिन पढ़ने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं है.
पूर्णिया में लाइब्रेरी है, लेकिन किताबें नहीं&amp;nbsp;
पूर्णिया जिले में केनगर, &amp;nbsp;श्रीनगर, जलालगढ़, रुपौली और बायसी समेत 6 नए सरकारी डिग्री कॉलेज खोले गए हैं. केनगर सरकारी डिग्री कॉलेज में करीब 120 छात्रों ने एडमिशन लिया है. यहां कक्षाएं संचालित करने के लिए कमरे, टेबल और बेंच उपलब्ध है, लेकिन लाइब्रेरी में किताबें नहीं है. कॉलेज में 6 विषयों में पढ़ाई की योजना है, लेकिन फिलहाल केवल दो शिक्षक ही कार्यरत है. एक शिक्षक प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि दूसरे शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर तैनात है. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के बाद सभी विषयों की कक्षाएं शुरू कर दी जाएगी.&amp;nbsp;
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मुजफ्फरपुर में इतिहास के छात्र ज्यादा, शिक्षक नहीं&amp;nbsp;
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड स्थित सरफुद्दीनपुर सरकारी डिग्री कॉलेज में अब तक 21 छात्र ने एडमिशन लिया है. इनमें सबसे ज्यादा 13 छात्रों ने इतिहास &amp;nbsp;विषय चुना है. लेकिन कॉलेज में इतिहास का कोई टीचर मौजूद ही नहीं है. &amp;nbsp;यह कॉलेज फिलहाल एक मध्य विद्यालय परिसर से संचालित हो रहा है, जहां स्कूल के 10 कमरों को डिग्री कॉलेज के लिए उपलब्ध कराया गया है. कॉलेज में अभी केवल प्रभारी प्राचार्य, बर्सर और एक नाइट गार्ड कार्यरत हैं. प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद सभी विषयों की नियमित पढ़ाई शुरू होगी.
उच्च शिक्षा मंत्री ने भी मानीं कमियां&amp;nbsp;
बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने स्वीकार किया है कि कई नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में अभी न तो स्थायी भवन तैयार है और न ही पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति हो सकी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले कॉलेजों की शुरुआत करने का फैसला लिया है, जबकि भवन निर्माण, शिक्षकों की भर्ती और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. मंत्री के अनुसार विभाग लगातार काम कर रहा है और आने वाले समय में इन सभी कॉलेजों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधा मिल सकें.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU No Tolerance Policy: डीयू में रैगिंग पर नो टॉलरेंस पॉलिसी! बदसलूकी पर एडमिशन&amp;डिग्री रद्द, क्रिमिनल केस भी होगा दर्ज</title>
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        <description><![CDATA[ DU No Tolerance Policy: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले कैंपस में रैगिंग, छेड़छाड़ और अनुशासनहीनता पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं. विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेज, डिपार्टमेंट, हॉस्टल्स और संबंधित इंस्टीट्यूट को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और एंटी रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन ने साफ किया है कि रैगिंग के मामलों में अब नो टोलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ निलंबन, निष्कासन, प्रवेश रद्द करने, डिग्री निरस्त करने से लेकर आपराधिक मामला दर्ज करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.
डीयू के कैंपस में भी बढ़ेगी निगरानी&amp;nbsp;
विश्वविद्यालय ने निर्देश दिए हैं कि हॉस्टल, कैंटीन, कॉमन रूम, पार्किंग और दूसरी स्टूडेंट एक्टिविटी वाली जगह पर नियमित निगरानी रखी जाएगी. विजिलेंस स्क्वाड में जरूरत के अनुसार एनसीसी और एनएसएस के स्वयंसेवकों की मदद भी ली जाएगी. इसके अलावा कॉलेज को परिसर में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एंटी रैगिंग पोस्टर और हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है. छात्रों की शिकायतों के बाद सील बंद शिकायत पेटियां लगाने और हेल्पलाइन ईमेल तथा कंट्रोल रूम की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्र बिना किसी डर की शिकायत दर्ज करा सके.&amp;nbsp;
नॉर्थ और साउथ कैंपस में बनेंगे कंट्रोल रूम&amp;nbsp;
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 28 जुलाई से 7 अगस्त तक नॉर्थ कैंपस और साउथ कैंपस में संयुक्त कंट्रोल रूम संचालित करने का फैसला किया है. इन कंट्रोल रूम में यूनिवर्सिटी प्रशासन और दिल्ली पुलिस के अधिकारी मौजूद रहेंगे, ताकि रैगिंग या किसी भी अनुशासनहीनता की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. इसके अलावा डीयू ने प्रत्येक कॉलेज और विभाग को एक डिसिप्लिनरी रिसोर्स पर्सन नियुक्त करने का निर्देश दिए हैं. इनकी जानकारी यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर कार्यालय को भेजनी होगी, ताकि अनुशासन से जुड़े मामलों में बेहतर तरीके से समन्वय बनाया जा सके. इंस्टीट्यूट को अपने स्तर पर भी विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप पर अतिरिक्त अनुशासनात्मक प्रावधान लागू करने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
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आईडी कार्ड साथ रखना होगा जरूरी&amp;nbsp;
विश्वविद्यालय ने छात्रों को हर समय अपना पहचान पत्र साथ रखने की निर्देश दिए हैं. कैंपस में प्रवेश पहचान पत्र के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही कॉलेज को समय-समय पर हॉस्टल, कैफेटेरिया और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर औचक निरीक्षण करने के लिए कहा गया है. नए छात्रों की मदद के लिए फैकल्टी मेंटर सिस्टम लागू करने की भी सिफारिश दी गई है, ताकि वह यूनिवर्सिटी के माहौल में आसानी से खुद को ढाल सकें और किसी भी समस्या की स्थिति में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें.&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस भी रहेगी अलर्ट&amp;nbsp;
बैठक में दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है. कॉलेज और हॉस्टल के बाहर पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी. जरूरत पड़ने पर पुलिस पिकेट भी तैनात किए जाएंगे, जबकि छात्राओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की जाएगी. यूनिवर्सिटी ने बाहरी लोगों के कैंपस में प्रवेश पर भी सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IBPS PO की रिवाइज्ड वैकेंसी में पदों की संख्या बढ़ी, आवेदन का आज आखिरी मौका</title>
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        <description><![CDATA[ IBPS PO recruitment 2026: बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है. इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन में प्रोबेशनरी ऑफिसर और स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती 2026 की वैकेंसी में बड़ा इजाफा किया है. संशोधित नोटिफिकेशन के अनुसार दोनों भर्तियों में कुल 8,400 पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. वहीं इन भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का आज यानी 21 जुलाई को आखिरी मौका है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वह बिना देरी किए आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
रिवाइज्ड वैकेंसी में बढ़ी पदों की संख्या&amp;nbsp;
आईबीपीएस की ओर से 20 जुलाई को जारी संशोधित वैकेंसी लिस्ट के अनुसार पीओ भर्ती में पदों की संख्या 6,715 से बढ़कर 7,365 कर दी गई है, यानी कुल 650 नए पद जोड़े गए हैं. वहीं स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती में 745 से बढ़ाकर 1035 पद कर दिए गए हैं. इस तरह दोनों भर्तियों में कुल 940 नई वैकेंसी बढ़ाई गई है.&amp;nbsp;
पीओ भर्ती में किस बैंक में कितनी वैकेंसी?&amp;nbsp;
संशोधित लिस्ट के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा में सबसे ज्यादा 1900 पद है. इसके बाद केनरा बैंक में 1500 पद, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 1100 पद, इंडियन बैंक में 650 पद, इंडियन ओवरसीज बैंक में 550 पद, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 500-500 पद, पंजाब नेशनल बैंक में 504 और पंजाब एंड सिंध बैंक में 161 पद हैं. यूके बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अभी तक अपनी रिक्तियां रिपोर्ट नहीं की है, इसलिए आगे भी वैकेंसी बढ़ने की संभावना बनी हुई है. इसके अलावा अगर कैटेगरी के आधार पर देखें तो आईबीपीएस पीओ भर्ती में सामान्य वर्ग के लिए 2936, ओबीसी के लिए 2,015, एससी के लिए 1,131, एसटी के लिए 562 और ईडब्ल्यूएस के लिए 721 पद निर्धारित किए गए हैं. पीडब्ल्यूबीडी कैटेगरी का आरक्षण इन्हीं व्यक्तियों में शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
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कौन कर सकता है आवेदन?
आईबीपीएस पीओ भर्ती के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी जरूरी है. 1 जुलाई 2026 के अनुसार उम्मीदवार की आयु 20 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया और अंतिम तिथि&amp;nbsp;
उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, पर्सनैलिटी टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा प्रारंभिक परीक्षा 22 और 23 अगस्त को आयोजित होगी, जबकि मुख्य परीक्षा 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है. आईबीपीएस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि आज यानी 21 जुलाई है. आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उम्मीदवार को ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे और आवेदन फीस भरनी होगी. &amp;nbsp;वहीं अंतिम समय में तकनीकी परेशानी से बचने के लिए अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Union Bank Recruitment 2026:  यूनियन बैंक में स्पेशलिस्ट ऑफिसर के 395 पदों पर भर्ती, मिलेगा 47 लाख तक का पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ Union Bank Recruitment 2026:&amp;nbsp; बैंकिंग सेक्टर में अधिकारी बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भर्ती निकाली है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भर्ती परियोजना 2026-27 के तहत स्पेशलिस्ट ऑफिसर, जनरल बैंकिंग ऑफिसर और डोमेन एक्सपर्ट ऑफिसर के कुल 395 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 जुलाई से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 10 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं. यह भर्ती नियमित आधार पर की जाएगी और चयनित उम्मीदवारों की पोस्टिंग बैंक की आवश्यकता के अनुसार देश भर में की जाएगी.&amp;nbsp;
किन पदों पर कितनी भर्ती होगी भर्ती&amp;nbsp;
इस भर्ती अभियान के तहत मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और डिप्टी जनरल मैनेजर स्तर के पद भरे जाएंगे. सबसे ज्यादा 163 पद मैनेजर के लिए, 153 पद सीनियर मैनेजर के लिए, 52 पद चीफ मैनेजर के लिए, 20 पद असिस्टेंट जनरल मैनेजर के लिए और 7 पद डिप्टी जनरल मैनेजर के लिए निर्धारित किए गए हैं.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए आवेदन, फीस और आयु सीमा&amp;nbsp;
एससी, एसटी और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 177 रुपये रखा गया है, जबकि दूसरी सभी कैटेगरी के अभ्यर्थियों को 1180 रुपये फीस देनी होगी. आयु सीमा भी पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है. अधिकांश पदों के लिए न्यूनतम आयु 22 वर्ष है, जबकि अधिकतम आयु 30 से 50 वर्ष तक रखी गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट भी मिलेगी.
सभी पदों पर क्या होगी चयन प्रक्रिया&amp;nbsp;
एमएमजीएस-2 और एमएमजीएस-3 स्तर के पदों पर उम्मीदवारों का चयन आवश्यकता पड़ने पर ऑनलाइन परीक्षा, इसके बाद ग्रुप डिस्कशन, पर्सनल इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाएगा. वहीं एसएमजीएस-4 से टीईजीएस-6 तक के वरिष्ठ पदों पर ग्रुप डिस्कशन, दूसरे मूल्यांकन और इंटरव्यू आयोजित किए जा सकते हैं. स्पेशलिस्ट ऑफिसर पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा में मुख्य रूप से संबंधित विषय का प्रोफेशन नॉलेज पूछा जाएगा, जबकि जनरल बैंकिंग ऑफिसर पदों के लिए रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टिट्यूड, इंग्लिश लैंग्वेज और प्रोफेशनल नॉलेज से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे. गलत उत्तर पर 0.25 अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी.&amp;nbsp;
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47 लाख रुपये तक का मिलेगा सालाना पैकेज&amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतन मिलेगा. मैनेजर स्तर पर शुरुआती वेतनमान 64,820 रुपये से शुरू होगा, जबकि डिप्टी जनरल मैनेजर पद तक वेतनमान 1,56,500 तक जाएगा. बैंक के अनुसार अलग-अलग पदों पर अनुमानित वार्षिक सीटीसी करीब 21 लाख रुपये से लेकर 47 लाख रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, मेडिकल सुविधा, लीव फेयर कंसेशन और दूसरे भत्तों का लाभ भी मिलेगा.&amp;nbsp;
प्रोबेशन और सर्विस बॉन्ड
चयनित &amp;nbsp;उम्मीदवारों को 2 वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूरी करनी होगी. साथ ही नियुक्ति के बाद 3 वर्ष का सर्विस बॉन्ड भी लागू रहेगा. अगर कोई उम्मीदवार तय अवधि पूरी होने से पहले नौकरी छोड़ता है, तो उस पद के अनुसार निर्धारित बॉन्ड राशि और लागू करों का पेमेंट करना होगा.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Union, Bank, Recruitment, 2026: , यूनियन, बैंक, में, स्पेशलिस्ट, ऑफिसर, के, 395, पदों, पर, भर्ती, मिलेगा, लाख, तक, का, पैकेज</media:keywords>
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        <title>वकालत करने के लिए बेस्ट हैं देश के ये 5 लॉ कॉलेज, एडमिशन ले लिया तो करियर की हो जाएगी बल्ले बल्ले</title>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>UP Police Recruitment 2026: यूपी पुलिस में 81 हजार से ज्यादा पदों पर होगी भर्ती, कॉन्स्टेबल से लेकर एसआई तक मिलेंगे मौके</title>
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        <description><![CDATA[ UP Police Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में 81,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती आवेदन का ऐलान किया है. यह भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी. अलग-अलग पदों के लिए नोटिफिकेशन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे, जिनमें पदवार रिक्तियां, योग्यता, आयु सीमा, आवेदन तिथि और दूसरी जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी. उनका कहना है कि इस भर्ती अभियान से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा. आपको बता दें कि इस भर्ती प्रक्रिया के लिए अप्रैल महीने में भी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से ऐलान किया गया था.&amp;nbsp;
यूपी पुलिस भर्ती और पदों के लिए योग्यता&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पुलिस डिपार्टमेंट के कई पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. जिसमें कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर, जेल वार्डर, &amp;nbsp;रेडियो कैडर, कंप्यूटर ऑपरेटर क्लर्क के साथ अलग-अलग तकनीकी और मिनिस्ट्रियल पद शामिल है. वहीं इस भर्ती में शामिल पदों के अनुसार शिक्षण की योग्यता भी अलग-अलग तय की जाएगी कांस्टेबल पदों के लिए 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे जबकि सब इंस्पेक्टर पदों के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य होगा कुछ तकनीक और कंप्यूटर आधारित पदों के लिए 12वीं के साथ-साथ कंप्यूटर से संबंधित प्रमाण पत्र या स्पेशल योग्यता भी मांगी जा सकती है उम्मीदवारों को आवेदन सलाह दी गई है क्या आवेदन करने से पहले संबंधित पद का आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर देखें.&amp;nbsp;
क्या रहेगी चयन प्रक्रिया?
यूपी पुलिस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत कंप्यूटर आधारित परीक्षा से होगी. परीक्षा में जनरल नॉलेज, जनरल हिंदी, रीजनिंग, मानसिक योग्यता, संख्यात्मक क्षमता और करंट अफेयर से जुड़े प्रश्न पूछेंगे. सब इंस्पेक्टर के पदों के लिए भर्ती को कानून और संविधान से जुड़े प्रश्नों का भी सामना करना होगा. वहीं लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा, जिनमें लंबाई, सीना और दूसरे फिजिकल मानकों की जांच की जाएगी. इसके बाद अभ्यर्थी को फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट देना होगा, जिसमें दौड़ सहित निर्धारित फिजिकल दक्षता का परीक्षण किया जाएगा. अंतिम चरण में दस्तावेज डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण के बाद योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
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ऑनलाइन होगी आवेदन प्रक्रिया
इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. आवेदन शुरू होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले यूपीपीआरपीबी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर संबंधित भर्ती का नोटिफिकेशन पढ़ सकेंगे. इसके बाद मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करना होगा. कई भर्तियों में वन टाइम रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी. रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवारों को आवेदन फाॅर्म में व्यक्तिगत, शैक्षिक और दूसरी जरूरी जानकारी भरनी होगी. निर्धारित प्रारूप में फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद कैटेगरी के अनुसार आवेदन फीस जमा करनी होगी. लास्ट में फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी डिटेल की जांच करके प्रिंट निकाल सकते हैं.&amp;nbsp;
उम्मीदवारों के लिए जरूरी सलाह&amp;nbsp;
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड सभी पदों के लिए अलग-अलग चरणों में नोटिफिकेशन जारी करेगा. इसलिए उम्मीदवारों को नियमित रूप से बोर्ड के ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. भर्ती से जुड़ी रिक्तियों का पदवार विवरण, आवेदन की डेट, परीक्षा कार्यक्रम और जरूरी निर्देश आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद उपलब्ध कराए जाएंगे.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Police, Recruitment, 2026:, यूपी, पुलिस, में, हजार, से, ज्यादा, पदों, पर, होगी, भर्ती, कॉन्स्टेबल, से, लेकर, एसआई, तक, मिलेंगे, मौके</media:keywords>
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        <title>NEET UG Result 2026 Controversy: सवालों के घेरे में NEET UG का रिजल्ट, कहीं OMR शीट बदली तो कहीं आंसर&amp;की से मैच नहीं कर रहा स्कोर!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-ug-result-2026-controversy-सवालों-के-घेरे-में-neet-ug-का-रिजल्ट-कहीं-omr-शीट-बदली-तो-कहीं-आंसर-की-से-मैच-नहीं-कर-रहा-स्कोर</link>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026 Controversy: NEET UG 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट जारी होने के बाद एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) विवादों में घिर गई है. सोशल मीडिया पर कई छात्र दावा कर रहे हैं कि उनके ऑफिशियल स्कोरकार्ड में दिख रहे नंबर उनकी OMR शीट और फाइनल आंसर-की से मैच नहीं हो रही हैं. किसी ने OMR शीट बदलने का आरोप लगाया है तो किसी का कहना है कि कुछ ही घंटों में उसके स्कोर बदल गए. इन आरोपों के बीच NTA ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिन मामलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनकी जांच की जा चुकी है और एजेंसी के रिकॉर्ड में मौजूद मूल OMR शीट सही है.
NTA के अनुसार, संबंधित उम्मीदवारों को OMR रिस्पॉन्स-की चैलेंज विंडो के दौरान उनकी असली OMR शीट रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजी जा चुकी थी. एजेंसी का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ OMR शीट्स डिजिटल रूप से बदली गईं या AI की मदद से तैयार की गई हैं. NTA ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में घोषित परिणाम सही हैं और फर्जी OMR शीट बनाना, उसमें छेड़छाड़ करना या उसे सोशल मीडिया पर साझा करना Public Examinations Act, 2024 के तहत दंडनीय अपराध है
OMR शीट बदलने का आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र के वाडवणी की छात्रा ज्ञानेश्वरी पवार ने आरोप लगाया है कि NTA की वेबसाइट पर अपलोड की गई OMR शीट उनकी नहीं है. उनके पिता अनिल कुमार पवार का कहना है कि उनके पास परीक्षा के दौरान इस्तेमाल किया गया मूल प्रश्नपत्र मौजूद है, जिससे उन्हें लगता है कि वेबसाइट पर अपलोड की गई OMR शीट अलग है. परिवार का दावा है कि उन्होंने NTA की आधिकारिक आंसर-की से अपने उत्तर मिलाए थे, जिसके आधार पर करीब 720 में से 702 अंक बनने चाहिए थे, लेकिन ऑफिशियल स्कोरकार्ड में केवल 87 अंक दिखाई दिए.&amp;nbsp;
कानपुर की छात्रा का दावा, दो घंटे में बदल गए नंबर
कानपुर की छात्रा आर्या सिंह ने भी रिजल्ट में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पहले OMR शीट में प्रश्नों का क्रम गलत था, जिसकी शिकायत उन्होंने NTA से की थी. बाद में NTA ने संशोधित OMR उपलब्ध कराई, लेकिन स्कोर वही रहा. आर्या के अनुसार 16 जुलाई की रात करीब 12 बजे जब उन्होंने रिजल्ट देखा तो 540 अंक दिखाई दे रहे थे, लेकिन करीब दो घंटे बाद दोबारा वेबसाइट खोलने पर स्कोर घटकर केवल 167 अंक रह गया फिलहाल वेबसाइट पर 167 अंक ही दिखाई दे रहे हैं. आर्या ने इस संबंध में सभी डॉक्यूमेंट्स के साथ NTA और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ईमेल भेजकर जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सही कार्रवाई नहीं हुई तो वह राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक अपनी शिकायत पहुंचाएंगी.
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NTA ने आरोपों पर दिया जवाब
सोशल मीडिया पर OMR शीट और स्कोर को लेकर उठ रहे दावों के बीच NTA ने भी अपना पक्ष रखा है. एजेंसी का कहना है कि जिन उम्मीदवारों के मामले सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, उनके रिकॉर्ड की जांच की गई है और NTA के पास मौजूद मूल OMR शीट पूरी तरह सही है. एजेंसी के अनुसार, OMR रिस्पॉन्स-की चैलेंज विंडो के दौरान सभी संबंधित उम्मीदवारों को उनकी असली OMR शीट रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजी जा चुकी थी. NTA ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कुछ OMR शीट्स में डिजिटल छेड़छाड़ की गई है.

Regarding claims by Ms. Arya Singh (App No. 260410434102) about her NEET (UG) 2026 OMR answer sheet:NTA has verified the record.The genuine OMR of the candidate is with NTA. It was also emailed to her at the registered e-mail address during the OMR Response Key challenge&amp;hellip;
&amp;mdash; National Testing Agency (@NTA_Exams) July 20, 2026



NTA ने क्या कहा?
एजेंसी के मुताबिक, आर्या सिंह की वायरल OMR शीट में इनविजिलेटर के हस्ताक्षर का समय बदला गया था, जबकि लक्ष्य सिंह के मामले में डिजिटल तरीके से अतिरिक्त उत्तर भरे गए थे. वहीं अभय यादव के दावों को भी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने वाला बताया गया. NTA ने साफ किया कि आर्या सिंह के 167, लक्ष्य सिंह के 116 और अभय यादव के 164 अंक सही हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इनमें कोई गड़बड़ी नहीं है. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि फर्जी OMR शीट बनाना, उसमें छेड़छाड़ करना या उसे सोशल मीडिया पर फैलाना Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत दंडनीय अपराध है और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Result, 2026, Controversy:, सवालों, के, घेरे, में, NEET, का, रिजल्ट, कहीं, OMR, शीट, बदली, तो, कहीं, आंसर-की, से, मैच, नहीं, कर, रहा, स्कोर</media:keywords>
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        <title>UGC NET June 2026 Answer Key: NTA कभी भी जारी कर सकता है UGC NET जून परीक्षा की आंसर&amp;की, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET June 2026 Answer Key: UGC NET जून 2026 परीक्षा दिए हुए उम्मीदवारों का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है. परीक्षा खत्म हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अभी तक प्रोविजनल आंसर-की और रिस्पॉन्स शीट जारी नहीं की है. हर साल परीक्षा के कुछ दिनों के अंदर आंसर-की जारी कर दी जाती है, लेकिन इस बार देरी होने से अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है.
उम्मीदवार लगातार आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देख रहे हैं और जल्द आंसर-की जारी होने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि NTA ने अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक NTA कभी भी UGC NET जून परीक्षा की आंसर-की जारी कर सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसे कैसे डाउनलोड करें.
क्यों हो रही है UGC NET जून 2026 की आंसर-की में देरी?
UGC NET जून 2026 परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की अब तक जारी नहीं हुई है. आमतौर पर परीक्षा खत्म होने के 7 से 10 दिन के भीतर आंसर-की जारी कर दी जाती है, लेकिन इस बार 15 दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इसे जारी नहीं किया गया. कुछ दिन पहले हरियाणा के रोहतक के छात्र नेता दीपक धनखड़ और अंकित सिंह फोगाट ने दावा किया था कि UGC NET के सोशियोलॉजी विषय का पेपर परीक्षा से पहले उनके पास पहुंच गया था और बाद में वह सर्कुलेट भी हुआ. इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे. हालांकि NTA ने इन पेपर लीक के दावों को खारिज कर दिया था.
रिपोर्ट्स में जांच की बात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेपर लीक के दावे के बाद सोशियोलॉजी विषय के प्रश्नपत्र को लेकर कई उम्मीदवारों ने स्पेलिंग मिस्टेक, गलत अनुवाद और कुछ प्रश्नों में गलतियों की शिकायत की है. शिक्षा मंत्रालय ने इस पूरे मामले की जांच करने के लिए NTA से कहा है. माना जा रहा है कि इसी वजह से प्रोविजनल आंसर-की जारी होने में देरी हो रही है. हालांकि NTA की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
87 विषयों के लिए हुई थी परीक्षा
UGC NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 जून से 30 जून 2026 के बीच देशभर में 87 विषयों के लिए दो शिफ्ट में किया गया था. पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित हुई. वहीं पंजाब के जालंधर के एक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा रद्द होने के कारण वहां के उम्मीदवारों के लिए 5 जुलाई 2026 को दोबारा परीक्षा कराई गई थी.
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आंसर-की जारी होने के बाद क्या होगा?
प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान कर सकेंगे और यह अनुमान लगा पाएंगे कि परीक्षा में उनका प्रदर्शन कैसा रहा. अगर किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपत्ति होती है, तो उम्मीदवार तय समय सीमा के अंदर प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे. विषय विशेषज्ञों की जांच के बाद फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी और उसी के आधार पर रिजल्ट तैयार होगा.
UGC NET जून 2026 Answer Key ऐसे करें डाउनलोड
1. आंसर-की जारी होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले NTA की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.&amp;nbsp;
2. होमपेज पर UGC NET June 2026 Answer Key/Challenge Link पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
3. अब अपना एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड या जन्म तिथि और सिक्योरिटी पिन दर्ज करके लॉगिन करें.&amp;nbsp;
4. लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर आपकी रिस्पॉन्स शीट और प्रोविजनल आंसर-की दिखाई देगी.&amp;nbsp;
5.आंसर-की डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UGC, NET, June, 2026, Answer, Key:, NTA, कभी, भी, जारी, कर, सकता, है, UGC, NET, जून, परीक्षा, की, आंसर-की, ऐसे, करें, डाउनलोड</media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026: रिक्शा चालक के पोते ने रचा इतिहास, बिहार के छोटे से गांव में पहली बार किसी ने NEET UG किया क्रैक</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 : अक्सर कहा जाता है कि मेहनत और लगन के सामने परिस्थितियां कभी बड़ी नहीं होती. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक छोटे से गांव के छात्र ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. जिस परिवार की पहचान कभी रिक्शा चलाकर घर चलाने से होती थी, आज उसी परिवार का बेटा अपनी मेहनत के दम पर पूरे गांव का नाम रोशन कर रहा है.
मुजफ्फरपुर के रत्नौली गांव के रहने वाले आदित्य ने NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 946 और कैटेगरी रैंक 295 हासिल की है और वह अपने गांव से NEET UG क्वालिफाई करने वाले पहले छात्र बन गए हैं.&amp;nbsp;
रिक्शा चालक के पोते ने रचा इतिहास&amp;nbsp;
आदित्य बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड स्थित रत्नौली गांव के रहने वाले हैं. उनके दादा सौखी साहनी पहले रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे. वहीं उनके पिता हरेंद्र साहनी एक निजी नौकरी करके परिवार का खर्च उठाते हैं. सीमित संसाधनों के बाद भी आदित्य ने पढ़ाई नहीं छोड़ी और अपनी मेहनत के दम पर देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET UG में सफलता हासिल की.&amp;nbsp;
आदित्य ने अपनी पढ़ाई कहां से &amp;nbsp;शुरू की
आदित्य ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की, उन्होंने बिहार बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा पास की और इसके बाद RDS कॉलेज से इंटरमीडिएट में 87 प्रतिशत नंबर हासिल किए. इसके बाद उन्होंने NEET UG की तैयारी की और पहले ही प्रयास में AIR 946 और कैटेगरी रैंक 295 प्राप्त कर अपने गांव का नाम राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया. आदित्य की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही. उनके गांव रत्नौली के लोगों के लिए भी यह गर्व का विषय बन गया है. गांव से पहली बार किसी छात्र ने NEET UG जैसी प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की है.
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मुजफ्फरपुर के कई छात्रों ने भी किया शानदार प्रदर्शन
आदित्य के अलावा मुजफ्फरपुर जिले के कई अन्य छात्रों ने भी NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है. वीरपुर (कांटी) के सुमित सर्राफ ने AIR 6013 हासिल की, जबकि धरफरी गांव (पारू) की तन्नू ने 587 अंक प्राप्त किए. &amp;nbsp;चंपकड़ी (सरैया) के आकाश कुमार ने 608 अंक, AIR 7637 और EWS रैंक 821 हासिल की. वहीं बिसुनपुर पट्टी (साहेबगंज) के दिव्य चेतन ने 633 अंक, AIR 3135 और EWS रैंक 284 प्राप्त किए. बैरिया के आर्य प्रकाश ने 646 अंक, AIR 1701 और कैटेगरी रैंक 934 हासिल की, जबकि मीनापुर के कौस्तुभ ने AIR 11014 के साथ परीक्षा पास कर जिले का नाम रोशन किया.&amp;nbsp;
राष्ट्रीय मेरिट लिस्ट में भी बिहार का दमदार प्रदर्शन
NEET UG 2026 में केवल मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया. रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय मेरिट लिस्ट के टॉप-100 में बिहार के चार छात्रों ने जगह बनाई. &amp;nbsp;नवादा के आयुष भलोतिया ने AIR 4, रिया रंजन ने AIR 6, रवि कांत दिवाकर ने AIR 55 और बेगूसराय के आदित्य कुमार ने AIR 73 हासिल की.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>H&amp;1B Visa Fee Hike : H&amp;1B वीजा की फीस कई गुना बढ़ी, भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/h-1b-visa-fee-hike-h-1b-वीजा-की-फीस-कई-गुना-बढ़ी-भारतीय-प्रोफेशनल्स-के-लिए-अमेरिका-जाना-कितना-मुश्किल-हुआ</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/h-1b-visa-fee-hike-h-1b-वीजा-की-फीस-कई-गुना-बढ़ी-भारतीय-प्रोफेशनल्स-के-लिए-अमेरिका-जाना-कितना-मुश्किल-हुआ</guid>
        <description><![CDATA[ H-1B Visa Fee Hike : अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए हालात पहले की तुलना में काफी मुश्किल होते दिखाई दे रहे हैं. H-1B वीजा से जुड़े नियमों में हुए बड़े बदलावों का असर अब साफ नजर आने लगा है. वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी, आवेदन प्रक्रिया में बदलाव और रिन्यूअल से जुड़ी मुश्किलों ने कई लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
इसका सबसे बड़ा संकेत H-1B वीजा के लिए आने वाले आवेदनों में आई बड़ी गिरावट है. कई भारतीय प्रोफेशनल्स को वीजा इंटरव्यू के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोगों का वीजा रिन्यू नहीं होने की वजह से नौकरी भी चली गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि H-1B वीजा की फीस बढ़ने से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ.&amp;nbsp;
H-1B वीजा की फीस कई गुना बढ़ी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. सबसे बड़ा बदलाव वीजा फीस में किया गया है. पहले H-1B वीजा की फीस 1,000 डॉलर (करीब 85 हजार रुपये) थी, जिसे बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) कर दिया गया है. ऐसे में फीस में लगभग 100 गुना बढ़ोतरी की गई है.
फीस बढ़ने के बाद 1.32 लाख कम हुए आवेदन
वीजा फीस बढ़ने का असर सीधे H-1B आवेदन संख्या पर देखने को मिला है. साल 2027 के लिए H-1B वीजा लॉटरी में केवल 2,11,600 भारतीय प्रोफेशनल्स ने आवेदन किया है. जबकि 2026 के लिए यह संख्या 343981 थी, इस बार करीब 1.32 लाख आवेदन कम आए हैं.&amp;nbsp;
H-1B वीजा लॉटरी के नियम भी बदले
अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने 15 जुलाई को बताया कि अब H-1B वीजा लॉटरी के लिए नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसके साथ ही इस साल से लॉटरी प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. पहले H-1B वीजा के लिए साल में दो बार लॉटरी निकाली जाती थी, लेकिन अब केवल एक बार ही लॉटरी होगी.&amp;nbsp;
जुलाई में होता है H-1B वीजा का रिन्यूअल
अमेरिका में H-1B वीजा का रिन्यूअल जुलाई महीने में होता है. इस बार कई भारतीय प्रोफेशनल्स अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. वीजा रिन्यूअल में आ रही दिक्कतों की वजह से कई लोगों की नौकरी और करियर पर असर पड़ रहा है.&amp;nbsp;
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ?
H-1B वीजा नियमों में हुए बदलावों के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाकर काम करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. सबसे बड़ी वजह H-1B वीजा फीस का 1,000 डॉलर (करीब 85 हजार रुपये) से बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) किया जाना है. इसका असर आवेदन संख्या पर भी दिखा है. इसके अलावा अब H-1B वीजा के लिए साल में सिर्फ एक बार लॉटरी होगी, जबकि पहले दो बार मौका मिलता था. कई भारतीय प्रोफेशनल्स को वीजा इंटरव्यू के लिए 10 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं कुछ लोगों का वीजा रिन्यू नहीं होने से उनकी नौकरी भी चली गई है. ऐसे में बढ़ी हुई लागत, सख्त नियम और लंबी प्रक्रिया ने भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी हासिल करना और वहां टिके रहना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है.&amp;nbsp;
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H-1B वीजा पाने वालों में सबसे ज्यादा भारतीय
पिछले पांच सालों के आंकड़ों के अनुसार, H-1B वीजा हासिल करने वालों में हर 10 में से करीब 7 लोग भारतीय रहे हैं. साल 2021 में भारतीयों की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत थी, जो 2022 और 2023 में 73 प्रतिशत रही. इसके बाद 2024 में यह घटकर 71 प्रतिशत और 2025 में 70 प्रतिशत हो गई. हालांकि प्रतिशत में हल्की गिरावट आई है, लेकिन H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय अब भी सबसे बड़ा समूह बने हुए हैं.&amp;nbsp;
किन कंपनियों ने सबसे ज्यादा H-1B वीजा हासिल किए
आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा हासिल करने के मामले में बड़ी टेक कंपनियां सबसे आगे हैं. सबसे ज्यादा 14,532 H-1B वीजा अमेजन के हिस्से आए. इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को 5,293, माइक्रोसॉफ्ट को 4,863, मेटा को 4,740, एपल को 4,610 और गूगल को 4,509 H-1B वीजा मिले. &amp;nbsp;अमेरिकी और वैश्विक टेक कंपनियां कुशल विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय आईटी और टेक टैलेंट, को नियुक्त करने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>H-1B, Visa, Fee, Hike, H-1B, वीजा, की, फीस, कई, गुना, बढ़ी, भारतीय, प्रोफेशनल्स, के, लिए, अमेरिका, जाना, कितना, मुश्किल, हुआ</media:keywords>
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        <title>NEET OMR विवाद&amp; NTA जांच में AI से बनाई गई फर्जी शीट का खुलासा, छेड़छाड़ के दावे खारिज</title>
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        <description><![CDATA[ NEET OMR Sheet Controversy: री नीट यूजी 2026 के रिजल्ट के बाद सामने आए ओएमआर शीट विवाद की एनटीए ने जांच पूरी कर दी है. एजेंसी का कहना है कि जिन मामलों में उम्मीदवारों में ओएमआर शीट में गड़बड़ी और अंकों में बड़े अंतर का आरोप लगाया था. जांच में उनमें से एक ओएमआर सीट एआई की मदद से तैयार की गई फर्जी शीट निकली, जबकि दूसरे मामले में दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने की पुष्टि हुई है. इसके बाद एनटीए ने साफ किया की परीक्षा प्रक्रिया को बदनाम करने के लिए फर्जी या एआई से तैयार दस्तावेज जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?&amp;nbsp;
रिजल्ट जारी होने के बाद महाराष्ट्र के पुणे में एक छात्र ने दावा किया कि उसे दो अलग-अलग ओएमआर शीट मिली है. छात्र के अनुसार एक ओएमआर शीट उसने 13 जुलाई की रात एनटीए की वेबसाइट से डाउनलोड की थी, जबकि दूसरी 15 जुलाई को ईमेल के माध्यम से मिली. दोनों शीट पर उसका नाम था, लेकिन दोनों में दर्ज उत्तर अलग-अलग थे. छात्र के पिता का दावा था कि पहले ओएमआर शीट को आधिकारिक आंसर-की से मिलाने पर उनके बेटे के 707 अंक बन रहे थे, जबकि घोषित परिणाम में उसे केवल 217 अंक मिले. इस तरह महाराष्ट्र के बीड जिले के एक दूसरे छात्र ने आरोप लगाया कि उसे आधिकारिक स्कोरकार्ड में 95 अंक दिए गए, जबकि अंतिम आंसर-की के आधार पर उसके 522 अंक बनने चाहिए थे.&amp;nbsp;
जांच में क्या आया सामने?
एनटीए ने दोनों मामलों की जांच के बाद कहा कि पुणे की छात्र की ओर से &amp;zwnj; प्रस्तुत ओएमआर शीट पूरी तरह एआई की मदद से तैयार की गई थी. वहीं बीड के छात्र के मामले में एजेंसी ने पाया कि प्रस्तुत डॉक्यूमेंट के साथ छेड़छाड़ की गई थी. एजेंसी के अनुसार जांच में सामने आया कि डॉक्यूमेंट मूल ओएमआर शीट से मेल नहीं खाते थे.&amp;nbsp;
एनटीए ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी&amp;nbsp;
जांच पूरी होने के बाद एनटीए ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि एजेंसी सभी शिकायतों की लगातार निगरानी और जांच कर रही है. एनटीए ने छात्रों और पेरेंट्स से केवल मूल ओएमआर शीट ही जांच के लिए प्रस्तुत करने की अपील की है. एजेंसी ने कहा कि अगर कोई शिकायत फर्जी या एआई से तैयार ओएमआर शीट के आधार पर की जाती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती हैं. &amp;nbsp;इस बात के बीच कांग्रेस ने भी एक उम्मीदवार की मार्कशीट में गठित गड़बड़ी का आरोप लगाया है. पार्टी ने दावा किया है कि एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट किसी दूसरे उम्मीदवार की शीट से बदल दी गई और इस मामले को लेकर केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाए थे.&amp;nbsp;
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कई राज्यों से सामने आए थे शिकायतों के मामले&amp;nbsp;
ओएमआर विवाद केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, कर्नाटक सहित कुछ दूसरे राज्यों से भी उम्मीदवारों ने आरोप लगाए कि उनके अंतिम परिणाम में दिए गए अंक अंतिम आंसर की के आधार पर निकाले गए अंकों से मेल नहीं खाते हैं. कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उनके अंक कम होने से उनकी ऑल इंडिया रैंक में भी बड़ा बदलाव आया. प्रभावित छात्रों ने एनटीए से स्पष्टीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>NMC का बड़ा फैसला, मेडिकल कॉलेज अब खुद करेंगे फैकल्टी की नियुक्ति और प्रमोशन</title>
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        <description><![CDATA[ NMC New Rules: देशभर के मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की नियुक्ति और प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर एनएमसी ने बड़ा बदलाव किया है. अब मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और दूसरे नियुक्ति प्राधिकरण अपने यहां फैकल्टी की नियुक्ति, पदोन्नति और पदनाम से जुड़े फैसले खुद करेंगे. एनएमसी अब सामान्य मामलों में पात्रता प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा और न ही ऐसे मामलों में नियमित रूप से हस्तक्षेप करेगा. एनएमसी के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और फैकल्टी सदस्यों और एनबीईएमएस से मान्यता प्राप्त अस्पताल की ओर से पात्रता से जुड़े ऐसे मामले भेजे जा रहे थे, जिनका समाधान पहले से लागू नियमों के तहत संस्थान खुद कर सकते थे.&amp;nbsp;
मेडिकल कॉलेज को सौंपी गई ज्यादा जिम्मेदारी&amp;nbsp;
एनएमसी ने स्पष्ट किया कि मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स क्वालिफिकेशन ऑफ फैकल्टी रेगुलेशन 2025 में फैकल्टी पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, शिक्षण अनुभव, रिसर्च पब्लिकेशन और प्रशिक्षण से जुड़े सभी मानदंड पहले से तय है. ऐसे में किसी उम्मीदवार की नियुक्ति प्रमोशन या पदनाम के लिए पात्रता करने की जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और नियुक्ति प्राधिकरण की होगी. इसी वजह से अब पीजीएमईबी उन मामलों पर विचार नहीं करेगी, जिनका निर्णय सीधे इन नियमों के आधार पर किया जा सकता है.
किन मामलों में एनएमसी करेगा हस्तक्षेप?&amp;nbsp;
एनएमसी के अनुसार अब केवल ऐसे मामलों पर विचार किया जाएगा, जहां नियमों की व्याख्या को लेकर अस्पष्टता हो, योग्यता की समानता का प्रश्न हो, ट्रांजिशन से जुड़े प्रावधान हो या किसी दूसरे नियामकीय नियम साथ समन्वय की जरूरत हो. ऐसे मामलों को संबंधित संस्थान के डीन, डायरेक्टर, प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार के माध्यम से ही भेजा जा सकेगा. आवेदन के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि एमआई क्यूएफआर-2025 के किस प्रावधान को लेकर भ्रम है और उसके साथ उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी देने होंगे.&amp;nbsp;
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25,000 फीस के साथ भेजना होगा मामला&amp;nbsp;
ऐसे विशेष मामलों में एनएमसी को भेजे जाने वाले प्रत्येक आवेदन के साथ 25,000 प्रोसेसिंग फीस और उस पर लागू 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करना होगा. यह राशि वापस नहीं की जाएगी. &amp;nbsp;एनएमसी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति सीधे आयोग को आवेदन भेजता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही उसे पर कोई कार्रवाई होगी. वहीं अगर कोई मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी किसी वास्तविक मामले को आवेदन मिलने के 60 दिन बाद भी एनएमसी को नहीं भेजता है, तो संबंधित उम्मीदवार सीधे पीजीएमआईबी के पास आवेदन कर सकता है. इसके लिए उम्मीदवार को एक हस्ताक्षरित घोषणा, संस्थान की ओर से निर्धारित समय में कार्रवाई न करने के प्रमाण, सभी जरूरी डॉक्यूमेंट और 25,000 के साथ जीएसटी जमा करना होगा. ऐसी स्थिति में अगर संस्थान ने पहले फीस ली थी, तो उसे उम्मीदवार को वापस करनी होगी.&amp;nbsp;
कब से लागू होंगे नियम?&amp;nbsp;
एनएमसी ने बताया कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. हालांकि 16 जुलाई से पहले प्राप्त आवेदन पुराने नियमों के तहत निपटाए जाएंगे, जबकि उसके बाद प्राप्त सभी आवेदन नई प्रक्रिया के अनुसार ही देखे जाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Rising Education Cost in India: स्कूल फीस ही नहीं, कोचिंग से कॉलेज तक... पढ़ाई पर बढ़ता खर्च बन रहा परिवारों के लिए आर्थिक बोझ</title>
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        <description><![CDATA[ Rising Education Cost in India: भारत में लंबे समय से माना जाता रहा है कि बच्चों की शिक्षा पर किया गया खर्च सबसे अहम निवेश होता है. परिवार अपनी दूसरी जरूरतों में कटौती कर सकते हैं, लेकिन बच्चों पढ़ाई पर समझौता नहीं करना चाहते हैं. हालांकि अब स्थिति यह है कि केवल स्कूल फीस भरना ही पर्याप्त नहीं रह गया, ट्यूशन, कोचिंग, ट्रांसपोर्ट, यूनिफॉर्म, किताबें, डिजिटल डिवाइस, एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज और आगे चलकर कॉलेज फीस जैसी कई जरूरतों ने बच्चों की शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ा दिया है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते वित्तीय योजनाओं नहीं बनाने वाले परिवारों पर भविष्य में बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है.&amp;nbsp;
सरकारी और प्राइवेट स्कूल के खर्चे में बड़ा अंतर&amp;nbsp;
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के Comprehensive Modular Survey on Education 2025 के अनुसार सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र परिवार का औसत वार्षिक खर्च करीब 2,863 रुपये है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में यही खर्च बढ़कर 25,002 तक पहुंच जाता है. रिपोर्ट के अनुसार स्कूल फीस के अलावा किताबें, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म और परिवहन पर भी परिवारों का बड़ा खर्च होता है. शहरी क्षेत्र में रहने वाले परिवार ग्रामीण इलाकों की तुलना में शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं.&amp;nbsp;
कोचिंग का बढ़ता ट्रेंड बढ़ा रहा खर्च&amp;nbsp;
आज के समय में स्कूल की पढ़ाई के साथ निजी कोचिंग भी बड़ी जरूर बनती जा रही है. सर्वे के अनुसार चार में से एक से ज्यादा छात्र स्कूल के अलावा अलग से कोचिंग ले रहे हैं. हायर सेकेंडरी स्तर पर शहरी परिवार एक छात्र की कोचिंग पर औसतन 9,950 रुपये सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह खर्च करीब 4,548 रुपये है. चूंकी अधिकांश छात्र अपनी पढ़ाई के लिए परिवार पर ही निर्भर रहते हैं, इसलिए शिक्षा का बढ़ता खर्च अब सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर रहा है.&amp;nbsp;
सिर्फ फीस नहीं कई और खर्च भी जोड़ते हैं बोझ&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स का कहना है कि शिक्षा की वास्तविक लागत केवल स्कूल फीस तक सीमित नहीं है. स्कूलों में समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों, डेवलपमेंट फीस, स्पोर्ट्स और दूसरे कार्यक्रमों के नाम पर एक्स्ट्रा शुल्क भी देना पड़ता है. इसके अलावा कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए लैपटॉप, टैबलेट, इंटरनेट, ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म, प्रोफेशनल कोर्स, स्किल डेवलपमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी लगातार खर्च कर रहे हैं. बदलती तकनीक और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए इन खर्चों को वैकल्पिक नहीं, बल्कि जरूरी माना जा रहा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;ये भी पढ़ें-IIT Transfer Rules: क्या मेडिकल आधार पर IIT बदल सकते हैं छात्र? सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला, AIIMS करेगा जांच
शिक्षा की महंगाई सामान्य महंगाई से अलग&amp;nbsp;
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि कई अभिभावक यह मानकर चलते हैं कि शिक्षा का खर्चा सामान्य महंगाई की दर से ही बढ़ेगा, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है. उनके अनुसार ट्यूशन फीस के अलावा कोचिंग, हॉस्टल, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल उपकरण और प्रोफेशनल कोर्स जैसे खर्च तेजी से बढ़ते हैं. ऐसे में केवल सामान्य महंगाई को आधार पर बनाकर भविष्य की योजना बनाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता. उदाहरण के तौर पर अगर किसी प्रोफेशनल कोर्स की वर्तमान लातग 20 लाख रुपये है, तो आने वाले वर्षों में शिक्षा लागत बढ़ने के साथ यही कोर्स से कई गुना महंगा हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स अलग-अलग संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वित्तीय योजना बनाने की सलाह देते हैं.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक के स्कूल का क्या नाम है, यहां कैसे मिलता है एडमिशन?</title>
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        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk Hunger Strike: देशभर में इन दिनों सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक चर्चा में हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में वह बीते 22 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं. एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था. सोनम वांगचुक की इस भूख हड़ताल के बीच लोग उनके शिक्षा मॉडल और उस स्कूल के बारे में भी जानना चाहते हैं, जिसे उन्होंने लद्दाख में शुरू करने में जरूरी भूमिका निभाई थी. ऐसे में आइए जानते हैं कि सोनम वांगचुक के स्कूल का क्या नाम है और यहां एडमिशन कैसे मिलता है.&amp;nbsp;
सोनम वांगचुक के स्कूल का क्या नाम है ?
सोनम वांगचुक के शिक्षा संस्थान का नाम SECMOL (Students Educational and Cultural Movement of Ladakh) है. यह लद्दाख के फेय (Phey) गांव में स्थित है. इसकी शुरुआत 1988 में लद्दाख के कुछ कॉलेज छात्रों ने मिलकर की थी, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल थे. यह संस्थान पारंपरिक स्कूलों से बिल्कुल अलग तरीके से शिक्षा देता है और व्यावहारिक सीखने पर ज्यादा जोर देता है.
यहां क्या पढ़ाया जाता है?
SECMOL में सामान्य स्कूलों की तरह केवल किताबों पर आधारित पढ़ाई नहीं होती है. यहां छात्रों को प्रैक्टिकल साइंस, सामाजिक मुद्दों की समझ, पब्लिक स्पीकिंग, बागवानी, पशुओं और पेड़ों की देखभाल, लद्दाखी संस्कृति, लोकगीत और पारंपरिक एक्टिविटी से जुड़ी कई चीजें सिखाई जाती हैं. यहां का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि छात्रों में लाइफ से जुड़ी स्किल्स और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना है.&amp;nbsp;
स्कूल की खासियत क्या है?
इस संस्थान का कैंपस करीब 20 एकड़ में फैला हुआ है और पूरा परिसर सोलर एनर्जी से संचालित होता है. यहां कैंपस की कई जिम्मेदारियां खुद छात्र संभालते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें रोजाना अलग-अलग काम दिए जाते हैं.&amp;nbsp;
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यहां एडमिशन कैसे मिलता है?
स्कूल की वेबसाइट के अनुसार, यहां 10वीं में फेल, ड्रॉपआउट या 10वीं पास करने के बाद पढ़ाई में कुछ साल का गैप रखने वाले छात्र एडमिशन ले सकते हैं. हालांकि आवेदन करने वाले छात्र को लद्दाखी भाषा आनी जरूरी होती है. दिव्यांग छात्र, अनाथ बच्चे और अकेली मां की संतान जैसे आवेदकों को विशेष प्राथमिकता भी दी जाती है. जरूरतमंद छात्रों के लिए स्पॉन्सरशिप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.&amp;nbsp;
पढ़ाई का खर्च कितना है?
SECMOL में पढ़ाई के लिए कोई ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है. छात्रों से सिर्फ खाने के लिए हर महीने 2,000 रुपये लिए जाते हैं. इसके अलावा रहने, पढ़ाई और अन्य सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं. बदले में छात्रों को कैंपस के रोजमर्रा के कामों और जिम्मेदारियों में एक्टिव भागीदारी निभानी होती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET result 2026: नीट के बाद कितने नंबर पर मिलेगा कौन सा कॉलेज, 700+, 650+, 600+ स्कोर वाले स्टूडेंट्स यहां देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/neet-result-2026-नीट-के-बाद-कितने-नंबर-पर-मिलेगा-कौन-सा-कॉलेज-700-650-600-स्कोर-वाले-स्टूडेंट्स-यहां-देखें</link>
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        <description><![CDATA[ NEET result 2026: री-नीट 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों के मन में बड़ा सवाल यही है कि उनके स्कोर पर सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की कितनी संभावना है. हर साल की तरह इस बार भी एमबीबीएस सीटों के लिए बड़ा कंपटीशन देखने को मिल रहा है. ऐसे में 550, 600, 650 से 700 अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि उनके लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की कितनी संभावना बनती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट पास करने के बाद कितने नंबर पर कौन सा कॉलेज मिलेगा.
&amp;nbsp;700+ अंक वालों के लिए क्या संभावना
नीट यूजी में 700 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में माने जाते हैं. इस स्कोर में प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज और टॉप इंस्टीट्यूट में एडमिशन की संभावना ज्यादा रहती है. ऐसे उम्मीदवारों को एम्स नई दिल्ली, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, वीएमएमसी, जेआईपीएमईआर पुडुचेरी और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट में एडमिशन का मौका मिल सकता है.&amp;nbsp;
650+ अंक वालों के लिए मेडिकल कॉलेज&amp;nbsp;
650 से 699 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार काफी मजबूत स्थिति में माने जाते हैं. इस स्कोर पर कई प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ कुछ नए एम्स कैंपस में भी एडमिशन मिलने की संभावना रहती है. ऑल इंडिया कोटा के तहत भी ऐसे उम्मीदवारों के पास अच्छी संभावना रहती है.&amp;nbsp;
600+ अंक वालों के लिए कॉलेज&amp;nbsp;
600+ अंक के आसपास स्कोर करने वाले छात्रों के लिए भी सरकारी एमबीबीएस कॉलेज के दरवाजे खुले रहते हैं. राज्य कोटा के तहत कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिलने की संभावना रहती है. हालांकि टॉप एम्स या सबसे ज्यादा कंपटीशन वाले कॉलेजों में एडमिशन मुश्किल हो सकता है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए स्कोर पर अवसर और बेहतर हो सकते हैं&amp;nbsp;
550+ अंक वालों के लिए कॉलेज
550+ अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज की संभावना है. पूरी तरह राज्य कैटेगरी और काउंसलिंग पर निर्भर करती है. कम कट ऑफ वाले राज्यों में राज्य कोटा के जरिए सीट मिलने के अवसर बन सकते हैं, जबकि ज्यादा कंपटीशन वाले राज्यों में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह स्कोर बहुत कम माना जाता है.&amp;nbsp;
किन बातों से तय होती है, मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ?&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 में सरकारी मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ कई चीजों पर निर्भर करती है. इनमें परीक्षा का कठिन स्तर, कुल अभ्यर्थियों की संख्या, एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी, कैटेगरी बार आरक्षण, ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या और ऑल इंडिया व राज्य कोटा की काउंसलिंग शामिल है.&amp;nbsp;
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काउंसलिंग के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि उम्मीदवारों को काउंसलिंग के हर राउंड पर नजर बनाए रखनी चाहिए. सीट प्रत्येक राउंड में बदलती रहती है, क्योंकि कई उम्मीदवार अपनी सीट छोड़ देते हैं या अपग्रेडेशन का ऑप्शन चुनते हैं. काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों को कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकताएं सोच-समझकर भरनी चाहिए. सभी जरूरी डॉक्यूमेंट पहले से तैयार रखने चाहिए, एमसीसी और राज्य काउंसलिंग के अधिकारी वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन नियमित रूप से देखते रहना चाहिए और प्रत्येक काउंसलिंग राउंड में भाग लेने का अवसर नहीं छोड़ना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG Result 2026: नीट टॉपर आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल दोनों को मिले 715 नंबर, फिर क्यों मिली AIR&amp;1 और AIR&amp;2?</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Re Exam 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल को लेकर हो रही है. दोनों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में 720 में से 715 हासिल किए हैं, जो इस साल का हाईएस्ट स्कोर रहा. इसके बावजूद दोनों की रैंक अलग-अलग है. एनटीए की मेरिट लिस्ट में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिला.
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि जब दोनों के अंक समान हैं तो रैंक अलग-अलग कैसे हो गई? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट टॉपर आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के 715-715 अंक आए फिर दोनों रैंक-1 और रंक-2 कैसे मिली और इसे लेकर एनटीए के ट्राई ब्रेकिंग नियम क्या बने हैं.&amp;nbsp;
क्या है एनटीए का ट्राई ब्रेकिंग नियम?
अगर दो छात्रों के कुल अंक बराबर होते तो सबसे पहले बायोलॉजी यानी बॉटनी और जूलॉजी के अंक देखे जाते हैं. जिन उम्मीदवारों के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है. मेडिकल प्रवेश परीक्षा होने के कारण इस विषय को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है. अगर बायोलॉजी के अंक भी समान हो तो अगला चरण केमिस्ट्री के अंकों का होता है, इसमें भी बराबरी रहने पर फिजिक्स के अंक देखे जाते हैं. अगर तीनों विषयों में भी अंक समान निकले तो फिर यह देखा जाता है कि दोनों उम्मीदवारों ने सही और गलत उत्तरों का अनुपात कैसा रखा है, जिस उम्मीदवार ने कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात कम होता है, उसे ऊपर की रैंक मिलती है. अगर इन सभी चरणों के बाद भी बराबरी बनी रहती है, तो एक स्वतंत्र एक्सपर्ट समिति की निगरानी में रैंडम प्रक्रिया के जरिए अंतिम रैंक तय की जाती है.
आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में क्या हुआ?&amp;nbsp;
दोनों उम्मीदवारों ने कुल 715 अंक प्राप्त किए, लेकिन उनकी विषयवार परफॉर्मेंस पूरी तरह सामान नहीं थी. एनटीए के टाई ब्रेकिंग नियम के अनुसार जिस उम्मीदवार का प्रदर्शन पहले तुलना वाले चरण में बेहतर पाया गया, उसे मेरिट लिस्ट में ऊपर स्थान मिला. इस प्रक्रिया के तहत आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 दिया गया. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में दोनों को संयुक्त टॉपर बताया गया था, क्योंकि दोनों के अंक समान थे लेकिन आधिकारिक मेरिट लिस्ट में रैंक एनटीए के तय नियमों के अनुसार जारी की गई.&amp;nbsp;
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काउंसलिंग में क्यों अहम है एक रैंक का अंतर?
नीट में टॉप रैंक पर एक या दो स्थान का अंतर भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. एम्स दिल्ली, एमएएमसी और दूसरे प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में सीटें सीमित होती है. ऐसे में काउंसलिंग के दौरान केवल अंक नहीं, बल्कि ऑल इंडिया रैंक के आधार पर सीटें आवंटित की जाती है. इसलिए समान अंक होने के बावजूद बेहतर रैंक वाले उम्मीदवार को पहले सीट चुनने का अवसर मिलता है.&amp;nbsp;
पहले उम्र से टूटता था टाई, अब नियम बदल चुके हैं&amp;nbsp;
पहले नीट में टाई की स्थिति बनने पर ज्यादा उम्र वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी. बाद में इस नियम को लेकर विवाद हुआ और इसे हटा दिया गया. इसके बाद आवेदन संख्या जैसे मानदंड भी समाप्त कर दिए गए, अब एनटीए केवल विषयवार अंकों और सही गलत उत्तरों के अनुपात के आधार पर ही टाई का समाधान करता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Bank of india में 779 पदों पर भर्ती, आवेदन की आखिरी तारीख 20 जुलाई </title>
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        <description><![CDATA[ Bank of India Recruitment 2026: अगर आप बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर आई है. बैंक ऑफ इंडिया ने क्रेडिट ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 779 रिक्त पदों को भरा जाएगा, इच्छुक और पात्रों उम्मीदवार बैंक ऑफ इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 तय की गई है. ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वह समय रहते अपना फॉर्म भर सकते हैं.&amp;nbsp;
इतने पदों पर होगी भर्ती&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग मैनेजमेंट ग्रेड में नियुक्तियां की जाएगी. जैसे एमएमजीएस-II के 667 पदों पर भर्ती होगी. एमएमजीएस-III के 61 पदों पर भर्ती होगी और एसएमजीएस-IV के 41 पदों पर भर्ती होगी. कुल मिलाकर 779 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.&amp;nbsp;
क्या होगी शैक्षणिक योग्यताएं?&amp;nbsp;
इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन के डिग्री होनी चाहिए. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम में 60 प्रतिशत अंक या फिर ग्रेड अनिवार्य है, जबकि एससी, एसटी, ओबीसी और पीडब्ल्यू बीडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 55 प्रतिशत अंक पर्याप्त है. इसके अलावा सीए, सीएमए, सीएस या एएफए जैसी प्रोफेशनल योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन करने के पात्र हैं. इस भर्ती के लिए अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग आयु सीमा भी निर्धारित की गई है. जैसे एमएमजीएस-II पद के लिए 25 से 32 वर्ष, एमएमजीएस-III पदों के लिए 28 से 38 वर्ष और एसएमजीएस-IV पदों के लिए 32 से 45 वर्ष उम्मीदवार की आयु होनी चाहिए.&amp;nbsp;
भर्ती के लिए क्या होगी चयन प्रक्रिया?
उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा या पर्सनल इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा. यह प्रक्रिया आवेदन करने वाले योग्य उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर तय होगी. ऑनलाइन परीक्षा में कुल 125 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनके लिए 125 अंक निर्धारित होंगे. इनमें 25 प्रश्न अंग्रेजी भाषा और 100 प्रश्न संबंधित पद के प्रोफेशनल नॉलेज से होंगे. परीक्षा की कुल अवधि 120 मिनट होगी. अंग्रेजी भाषा को छोड़कर अन्य सभी प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होंगे. अंग्रेजी भाषा का पेपर केवल क्वालीफाइंग होगा और उसके लिए अंक अंतिम मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं किए जाएंगे. सामान्य और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को अंग्रेजी भाषा तथा प्रोफेशनल नॉलेज दोनों टेस्ट में न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा. अंतिम मेरिट लिस्ट केवल प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में प्राप्त अंकों के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी के लिए तैयार की जाएगी.&amp;nbsp;
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कैसे करें आवेदन?&amp;nbsp;

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को बैंक ऑफ इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा.
इसके बाद होम पेज पर दिए गए रिक्रूटमेंट सेक्शन में जाए.&amp;nbsp;
अब क्रेडिट ऑफिसर रिक्रूटमेंट लिंक पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
इसके बाद नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें.&amp;nbsp;
फिर लॉगिन कर आवेदन पत्र में मांगी के सभी जानकारियां भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड कर आवेदन शुल्क जमा करें .&amp;nbsp;
सभी जानकारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट कर दें
लास्ट में फ्यूचर के लिए कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके उसका प्रिंट सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>मैथ्स में मिले थे सिर्फ 51 नंबर, लेकिन हौसला था बड़ा, पवन चंदाना ने बना दिया भारत का पहला प्राइवेट स्पेस रॉकेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मैथ्स-में-मिले-थे-सिर्फ-51-नंबर-लेकिन-हौसला-था-बड़ा-पवन-चंदाना-ने-बना-दिया-भारत-का-पहला-प्राइवेट-स्पेस-रॉकेट</link>
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        <description><![CDATA[ Pawan Chandana Success Story: स्कूल की परीक्षा में गणित में सिर्फ 51 अंक आने के बाद शायद ही किसी ने सोचा होगा यही छात्र आगे चलकर भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर का बड़ा चेहरा बनेगा. लेकिन पवन कुमार चंदाना ने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल अंकों से तय नहीं होती. आज उनकी कंपनी स्काई रूट एयरोस्पेस का विकसित विक्रम-1 रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट बन गया है. यह उपलब्धि न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है.&amp;nbsp;
गणित में थे कमजोर, लेकिन मशीनों में खास दिलचस्प&amp;nbsp;
हैदराबाद में पले-बढ़े पवन चंदाना एक साधारण मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. बचपन से ही उनकी रुचि मशीन और तकनीक को समझने में थी. हालांकि पढ़ाई के दौरान गणित उनका मजबूत विषय नहीं था और एक परीक्षा में उन्हें सिर्फ 51 अंक मिले थे. इसके बावजूद उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा. खासकर उनके पिता ने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया, जिससे उनका अपना विश्वास बना रहा. वहीं समय के साथ गणित और विज्ञान जो कभी उन्हें चुनौती लगते थे वहीं उनके करियर की सबसे मजबूत नींव बन गए.&amp;nbsp;
पहली कोशिश में आईआईटी, फिर मिला इसरो में मौका&amp;nbsp;
करीब दो दशक पहले पवन चंदाना ने पहली ही कोशिश में आईआईटी में एडमिशन परीक्षा पास की और आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन लिया. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें केंपस प्लेसमेंट के जरिए इसरो में काम करने का अवसर मिला. प्राइवेट कंपनियों की तुलना में इसरो की नौकरी में वेतन भले कम था, लेकिन चंदाना के लिए सबसे बड़ी बात तो देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा बनना था.&amp;nbsp;
जीएसएलवी एमके-3 प्रोजेक्ट पर किया काम&amp;nbsp;
इसरो में अपने 6 साल के कार्यकाल के दौरान पवन चंदाना ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर तिरुवनंतपुरम में भारत के सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल जीएसएलवी एमके-3 के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया. उनके योगदान के लिए उन्हें संस्थान के अंदर इनोवेशन अवार्ड भी मिला. इसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि भारत में प्राइवेट सेक्टर भी रॉकेट निर्माण के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.&amp;nbsp;
इसरो छोड़कर शुरू की Skyroot Aerospace
जून 2018 में पवन चंदाना ने अपने साथी और पूर्व इसरो वैज्ञानिक नागा भरत डाका के साथ हैदराबाद में स्काई रूट एयरोस्पेस की स्थापना की. उस समय भारत में प्राइवेट स्पेस से स्टार्टअप की शुरुआत करना आसान नहीं था. निवेशक भी इस क्षेत्र को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे. शुरुआती दौर में फ्लिपकार्ट के को-ऑनर और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र बिन्नी बंसल ने कंपनी में 15 लाख डॉलर का निवेश किया. कोविड-19 महामारी के दौरान फंडिंग की रफ्तार धीमी पड़ गई, लेकिन बाद में ग्रीनको ने आर्थिक सहयोग देकर कंपनी की आगे की यात्रा को गति दी.&amp;nbsp;
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लगातार मिली बड़ी सफलताएं &amp;nbsp;
जुलाई 2020 में स्क्वायर रूट भारत की पहली प्राइवेट कंपनी बनी, जिसने सफलतापूर्वक रॉकेट इंजन का परीक्षण किया. इस इंजन का नाम नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन के सम्मान में रमन-1 रखा गया. इसके बाद भारत सरकार की ओर से प्राइवेट क्षेत्र के लिए स्पेस सेक्टर खोलने के बाद स्काई रूट, इसरो के साथ समझौता करने वाली पहली प्राइवेट कंपनी बनी. कंपनी ने बाद में 51 बिलियन डॉलर की बड़ी फंडिंग भी हासिल की, जिसे उस समय भारत के डीप सेक्टर के सबसे बड़े निवेशों में गिना गया.&amp;nbsp;
विक्रम-एस लेकर विक्रम-1 तक का सफर&amp;nbsp;
18 नवंबर 2022 को स्काई रूट में विक्रम एस लॉन्च किया, जो भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित सब ऑर्बिटल रॉकेट था. इस लॉन्च ने देश के प्राइवेट सेक्टर उद्योग के लिए नई शुरुआत की. इसके बाद कंपनी लगातार अपने लॉन्च व्हीकल और तकनीक पर काम करती रही. हाल ही में विक्रम-1 ने अंतरिक्ष पर पहुंचकर भारत में पहले प्राइवेट रूप से विकसित स्पेस रॉकेट के रूप में इतिहास रच दिया. इसे भारतीय प्राइवेट अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>NCTE Investigation: मध्य प्रदेश के 4 B.Ed कॉलेजों में अनियमितताओं की जांच, NCTE ने बनाई 5 सदस्यीय जांच समिति</title>
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        <description><![CDATA[ NCTE Investigation: मध्य प्रदेश के 4 B.Ed कॉलेज में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन ने 5 सदस्यीय स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग और वेरिफिकेशन कमेटी का गठन किया है. इन संस्थानों पर तय पते से संचालित नहीं होने और मानकों के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न होने के आरोप लगे हैं. एनसीटीई ने समिति को मौके पर जांच कर पांच कार्य दिवस के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. 15 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार समिति अपनी रिपोर्ट के साथ डॉक्यूमेंट साक्ष्य, फोटो और वीडियो रिकॉर्ड भी जमा करेगी. एनसीटीई का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.&amp;nbsp;
मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जांच&amp;nbsp;
यह जांच बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी से संबंध तीन बीएड कॉलेजों में अनियमितताओं नेताओं से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद शुरू की गई. शुरुआती वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारियों को पता चला कि उसी परिसर से एक और बीएड कॉलेज संचालित हो रहा है. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाकर कुल चार संस्थानों तक कर दिया गया. एनसीटीई के अनुसार समिति 17 जुलाई को मध्य प्रदेश पहुंचे और सभी चार कॉलेजों का भौतिक निरीक्षण शुरू कर दिया.&amp;nbsp;
समिति में कौन-कौन शामिल?&amp;nbsp;
जांच समिति की अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के पूर्व कुलपति एच.सी.एस राठौर कर रहे हैं. समिति में यूजीसी के संयुक्त सचिव आशिमा मंगला, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल और जे.पी. सिंह, मध्य प्रदेश सरकार के एक नामित प्रतिनिधि तथा एनसीटीई की वेस्टर्न रीजनल कमेटी के क्षेत्रीय निदेशक विंग कमांडर विजय राणा भी शामिल है. &amp;nbsp;मिले.&amp;nbsp;
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किन पहलुओं की होगी जांच?
समिति को कॉलेजों का ऑन साइट निरीक्षण करने के लिए कहा गया है. जांच के दौरान जियोटैग्ड फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि संस्थान अपने स्वीकृत पते से ही संचालित हो रहे हैं या नहीं. इसके अलावा समिति कॉलेजों की ओर से जमा किए गए मान्यता संबंधी दस्तावेज, परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड को भी मिलान करेगी. निरीक्षण के दौरान यह देखा देखा जाएगा कि संबंधित संस्थान एनसीटीई एक्ट 1993 और एनसीटीई रेगुलेशन और मान्यता के लिए मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं. इसमें भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, भूमि, शिक्षण संसाधन, फैकल्टी की उपलब्धता और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी जांच की जाएगी.&amp;nbsp;
नियमों के उल्लंघन पर होगी करवाई&amp;nbsp;
एनसीटीई ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि जांच में किसी संस्थान की ओर से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. परिषद के अनुसार सभी तत्वों की 360 डिग्री व्यापक समीक्षा के बाद दोषी पाए जाने वाले संस्थानों पर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Air Force Pilot vs Commercial Pilot Salary : एयरफोर्स पायलट या कमर्शियल पायलट... कौन कमाता है ज्यादा? पहली सैलरी से रिटायरमेंट तक का जानें गणित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/air-force-pilot-vs-commercial-pilot-salary-एयरफोर्स-पायलट-या-कमर्शियल-पायलट-कौन-कमाता-है-ज्यादा-पहली-सैलरी-से-रिटायरमेंट-तक-का-जानें-गणित</link>
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        <description><![CDATA[ Air Force Pilot vs Commercial Pilot Salary : आसमान में उड़ान भरना कई युवाओं का सपना होता है, लेकिन जब बात करियर चुनने की आती है तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि एयरफोर्स पायलट बनें या कमर्शियल पायलट, दोनों ही प्रोफेशन जिम्मेदारी वाले होते हैं, लेकिन सैलरी, करियर ग्रोथ और कमाई का तरीका काफी अलग होता है. एक तरफ भारतीय वायुसेना के पायलट देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कमर्शियल पायलट यात्रियों और कार्गो विमानों का संचालन करते हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि एयरफोर्स पायलट या कमर्शियल पायलट कौन ज्यादा कमाता है.&amp;nbsp;
एयरफोर्स पायलट को शुरुआत में कितनी मिलती है सैलरी?
एयरलाइन में शामिल होने के बाद पायलट पहले ट्रेनिंग से गुजरते हैं. इस दौरान उन्हें आमतौर पर 63 हजार से 65 हजार रुपये प्रति माह तक मिलते हैं. इसके बाद जब जूनियर फर्स्ट ऑफिसर बनते हैं तो उनकी मासिक सैलरी लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
कितनी बढ़ती है कमाई?
लाइन ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पायलट फर्स्ट ऑफिसर बन जाते हैं. इस स्तर पर उनकी कमाई आमतौर पर 2 लाख से 3 लाख रुपये प्रति माह या उससे ज्यादा हो सकती है. वहीं करीब 1000 फ्लाइंग ऑवर पूरे करने के बाद कई एयरलाइंस सैलरी में बढ़ोतरी करती हैं. इस समय एक्सपीरियंस फर्स्ट ऑफिसर की कमाई 2.5 लाख से 4 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है. इसके बाद सीनियर फर्स्ट ऑफिसर बनने पर सैलरी लगभग 4 लाख से 6 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकती है.
एयरफोर्स पायलट की सैलरी कैसे तय होती है?
भारतीय वायुसेना में पायलट की कमाई केवल बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं होती है. उन्हें पद, एक्सपीरियंस और जिम्मेदारियों के आधार पर अलग-अलग भत्ते भी मिलते हैं. करियर की शुरुआत में सैलरी कम होती है, लेकिन एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ इसमें लगातार बढ़ोतरी होती रहती है. इसके अलावा कई सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं.
कमर्शियल पायलट को शुरुआत में कितनी मिलती है सैलरी?
कमर्शियल पायलट के करियर का सबसे बड़ा कैप्टन बनना माना जाता है. कैप्टन विमान, यात्रियों और पूरी उड़ान की जिम्मेदारी संभालते हैं. भारत में कई कैप्टन की सैलरी 6 लाख से 12 लाख रुपये प्रति माह या इससे भी ज्यादा हो सकती है. यह सैलरी एयरलाइन, विमान के प्रकार और एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है. कुछ एयरलाइंस में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भरने वाले एक्सपीरियंस कैप्टन 8 लाख से 15 लाख रुपये प्रति माह या उससे ज्यादा भी कमा सकते हैं.&amp;nbsp;कमर्शियल पायलट की सैलरी कैसे तय होती है?
कमर्शियल पायलट की कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस एयरलाइन में काम कर रहा है, कितने फ्लाइंग ऑवर पूरे कर चुका है, कौन-सा विमान उड़ा रहा है और उसका पद क्या है. नए पायलट और एक्सपीरियंस कैप्टन की सैलरी में काफी बड़ा अंतर होता है.
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कमर्शियल पायलट बनने के बाद कौन-कौन से फायदे मिलते हैं?
सैलरी के अलावा कई एयरलाइंस पायलटों को अतिरिक्त सुविधाएं भी देती हैं. इनमें मुफ्त या रियायती हवाई यात्रा, होटल और लेओवर भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, यात्रा भत्ता और परिवार के लिए ट्रैवल बेनिफिट्स शामिल हो सकते हैं. कई एक्सपीरियंस पायलट आगे चलकर इंस्ट्रक्टर या एग्जामिनर जैसे पदों पर भी पहुंचते हैं.&amp;nbsp;
एयरफोर्स पायलट या कमर्शियल पायलट कौन ज्यादा कमाता है?
एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ कमर्शियल पायलट, खासकर एयरलाइन कैप्टन, आमतौर पर एयरफोर्स पायलटों की तुलना में ज्यादा सैलरी कमा सकते हैं. हालांकि एयरफोर्स पायलटों को सरकारी नौकरी की स्थिरता, भत्ते, मेडिकल सुविधा और कई अन्य फायदे &amp;nbsp;मिलते हैं. वहीं कमर्शियल पायलट की कमाई एयरलाइन, उड़ान के घंटे और एक्सपीरियंस के साथ तेजी से बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>NMC draft 2026: अब For&amp;Profit कंपनियां भी खोल सकेंगी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, क्या इससे और महंगी होगी मेडिकल की पढ़ाई? </title>
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        <description><![CDATA[ NMC draft 2026: देश में मेडिकल एजुकेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है. नेशनल मेडिकल कमीशन ने नए मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़े नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है. अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तब केवल नॉन प्रॉफिट इंस्टीट्यूट तक ही मेडिकल कॉलेज खोलने का अधिकार सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी एक्ट 2013 के तहत रजिस्टर लाभ कमाने वाली For-Profit कंपनियां भी मेडिकल कॉलेज स्थापित कर सकेंगी. इस मसौदे पर 30 दिनों के अंदर आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं.&amp;nbsp;
क्या है एनएमसी का नया प्रस्ताव?&amp;nbsp;
फिलहाल लागू नियमों के तहत केवल सेक्शन 8 कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति है. ये ऐसी नॉन प्रॉफिट कंपनियां होती है, जिनकी अतिरिक्त आय को केवल संस्थान के विकास या सामाजिक कार्यों में ही खर्च किया जा सकता है. लेकिन प्रस्तावित संशोधन के बाद कंपनी एक्ट 2013 के तहत रजिस्टर्ड किसी भी कंपनी को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति मिल सकेगी.&amp;nbsp;
2017 में भी किया गया था, ऐसा बदलाव?
यह पहला मौका नहीं है, जब कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति देने की बात सामने आई है. 2017 में तत्कालीन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी नियमों में संशोधन कर कंपनीज एक्ट 1956 के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की इजाजत दी थी. उसी समय ट्रस्ट और सोसायटी को कंपनी में बदलने का ऑप्शन भी दिया गया था. हालांकि 2019 में एनएमसी बनने के बाद नए नियम लागू हुए और फिर से केवल सेक्शन 8 कंपनियों तक ही अनुमति सीमित कर दी गई.&amp;nbsp;
सरकार ने क्यों जरूरी बताया यह बदलाव?&amp;nbsp;
सरकार का तर्क रहा है कि नॉन प्रॉफिट की शर्त के कारण बड़ी कंपनियां मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में निवेश करने से बचती है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कई संस्थानों में लाभ कमाने का काम पहले से हो रहा है, लेकिन वह पारदर्शी तरीके से सामने नहीं आता. ऐसे में कानूनी रूप से कंपनियों को अनुमति मिलने की व्यवस्था और ज्यादा स्पष्ट होगी और सरकार को टैक्स के रूप में भी राजस्व मिलेगा.&amp;nbsp;
फीस को लेकर भी उठते रहे सवाल&amp;nbsp;
देश के कई डीम्ड यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज ट्रस्ट और सोसायटी के तहत संचालित होते हैं, लेकिन उनकी फीस काफी ज्यादा होती है. इन संस्थानों की फीस पर राज्यों का सीधा नियंत्रण नहीं होता है और इनमें कम फीस वाले सरकारी कोटे की सीटें भी उपलब्ध नहीं होती है. ऐसे में नए प्रस्ताव के बाद मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 1993 और 2001 के अपने फैसलों में कहा था कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता है और संस्थानों को मुनाफाखोरी की अनुमति नहीं है. हालांकि संस्थानों को अपने विस्तार और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए उचित अधिवेशन रखने की छूट दी गई थी. वर्ष 2009 तक सरकार का भी यही रुख रहा कि शिक्षा लाभ कमाने का माध्यम नहीं हो सकती है. वहीं 2010 में केंद्र सरकार ने कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति दी, लेकिन यह स्पष्ट किया था कि अगर संस्थान शिक्षा का व्यवसायीकरण करेंगे, तो उनकी अनुमति वापस ली जा सकती है.&amp;nbsp;
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क्या मेडिकल की पढ़ाई होगी और महंगी?
एनएमसी के इस प्रस्ताव के बाद माना जा रहा है कि प्राइवेट क्षेत्र से मेडिकल शिक्षा में निवेश बढ़ सकता है और नए मेडिकल कॉलेज खुल सकते हैं. हालांकि इसके साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि लाभ कमाने वाली कंपनियों के आने से क्या मेडिकल की फीस और बढ़ जाएगी. फिलहाल यह केवल मसौदा है और अंतिम फैसला सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियों पर विचार की करने के बाद दिया जाएगा, लेकिन फीस को लेकर बहस भी हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE 10वीं सेकेंड बोर्ड का रिजल्ट घोषित, DigiLocker पर ऐसे देखें अपना स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा (Second Board Exam 2026) का परिणाम घोषित कर दिया है. परीक्षा में शामिल हुए 6.8 लाख से अधिक छात्रों का इंतजार अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है. बोर्ड ने नतीजों की घोषणा के साथ ही स्कोरकार्ड डाउनलोड करने का लिंक भी एक्टिवेट कर दिया है. छात्र अब आधिकारिक रूप से अपने परिणाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं.
नई शिक्षा नीति के तहत आयोजित कराई गई थी दो परीक्षाएं
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शनिवार, 18 जुलाई 2026 को कक्षा 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा &amp;nbsp;का परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिया है. नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इस साल पहली बार छात्रों को एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने का ऐतिहासिक अवसर दिया गया था. बोर्ड की नीति के अनुसार, छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए दोनों परीक्षाओं (मुख्य और दूसरी परीक्षा) में से उनके बेहतर प्रदर्शन यानी &#039;बेस्ट स्कोर&#039; को आधार माना गया है. परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र अब डिजीलॉकर के आधिकारिक रिजल्ट पोर्टल पर जाकर अपने नतीजे ऑनलाइन चेक कर सकते हैं.
इम्प्रूवमेंट परीक्षा में 59.95% छात्रों ने सुधारे अपने अंक
सीबीएसई ने जो आंकड़े जारी किए हैं उनके अनुसार, इस साल दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 6,64,027 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 6,63,777 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 5,13,955 छात्र ऐसे थे जिन्होंने मुख्य परीक्षा में कम अंक आने के बाद अपना स्कोर सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा दी थी. बोर्ड के लिए यह प्रयोग काफी सफल रहा, क्योंकि 3,08,095 छात्रों ने मुख्य परीक्षा की तुलना में इस बार अपने अंकों में बेहतरीन सुधार दर्ज किया है.
कंपार्टमेंट श्रेणी के पास प्रतिशत में भी हुआ सुधार
दूसरी बोर्ड परीक्षा के साथ आयोजित हुई कंपार्टमेंट परीक्षा में इस बार कुल 1,49,822 छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 78,503 छात्रों ने सफलता हासिल की है. इस साल कंपार्टमेंट श्रेणी का कुल पास प्रतिशत 52.40 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 48.68 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर है. मुख्य परीक्षा और इस दूसरी बोर्ड परीक्षा दोनों के आंकड़ों को मिलाकर, साल 2026 के लिए कक्षा 10वीं का अंतिम और कुल पास प्रतिशत शानदार 96.78 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
डिजीलॉकर और स्कूलों से ऐसे मिलेंगे डिजिटल दस्तावेज
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि सभी संबद्ध स्कूलों को उनके Registered ईमेल आईडी पर छात्रों के परिणाम और डिजिटल शैक्षणिक दस्तावेज भेज दिए जाएंगे. विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों के छात्र भी डिजीलॉकर के माध्यम से अपना रिजल्ट और सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं.
रेगुलर स्टूडेंट्स: नियमित रूप से स्कूल जाने वाले छात्रों की मूल मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट उनके संबंधित स्कूलों से ही वितरित किए जाएंगे.
प्राइवेट स्टूडेंट्स: निजी परीक्षार्थियों यानी Private Candidates को उनके डिजिटल दस्तावेज सीधे डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराए जाएंगे.
दिल्ली के छात्र: दिल्ली पूर्व और दिल्ली पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले निजी छात्र डिजीलॉकर के अलावा अपने अलॉटेड परीक्षा केंद्र से भी जाकर डॉक्यूमेंट्स कलेक्ट कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Medical Courses Besides MBBS:  MBBS नहीं मिला तो न हों निराश, NEET के बाद ये 10 शानदार मेडिकल कोर्स भी हैं बेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Medical Courses Besides MBBS:  MBBS नहीं मिला तो न हों निराश, NEET के बाद ये 10 शानदार मेडिकल कोर्स भी हैं बेस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 AIR 2 Panshul Bansal: एग्जाम रद्द होने पर 2 घंटे तक रोते रहे पंशुल बंसल, फिर की ऐसी वापसी कि बन गए AIR&amp;2</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के पंशुल बंसल ने अपनी मेहनत और हौसले से लाखों छात्रों के लिए मिसाल पेश की है. बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले पंशुल ने इस साल अपने पहले ही प्रयास में देशभर में दूसरी रैंक हासिल की. एबीपी न्यूज से खास बातचीत में उन्होंने अपनी तैयारी, परीक्षा के दौरान आई मुश्किलों और सफलता के पीछे की कहानी साझा की.
बचपन से ही देखा था यह सपना
पंशुल ने बताया कि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने बचपन में ही देख लिया था. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पढ़ाई की शुरुआत मजबूत आधार बनाने से की. उनका कहना है कि किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए बुनियादी तैयारी सबसे ज्यादा मायने रखती है.
8वीं से ही शुरू कर दी थी तैयारी
उन्होंने बताया कि गणित और विज्ञान की मजबूत नींव रखने के लिए उन्होंने 8वीं कक्षा से ही नियमित और गंभीर पढ़ाई शुरू कर दी थी. इसके बाद 10वीं कक्षा से उन्होंने पूरी तरह NEET की तैयारी पर फोकस कर दिया. इसी साल उन्होंने 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी दी और उसके साथ-साथ NEET की तैयारी जारी रखी.
जब दो घंटे तक रोते रहे थे पंशुल
हालांकि, इस सफर में एक ऐसा पल भी आया, जिसने उन्हें पूरी तरह झकझोर दिया. पंशुल ने बताया कि जब NEET UG 2026 की पहली परीक्षा रद्द होने की खबर मिली तो वह खुद को संभाल नहीं पाए. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा था और वह करीब दो घंटे तक लगातार रोते रहे. उन्हें लग रहा था कि उनकी कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने खुद को संभाला. उन्होंने तय किया कि निराश होकर बैठने से कुछ नहीं होगा. इसके बाद उन्होंने पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ दोबारा तैयारी शुरू की. अगर उस समय वह हार मान लेते तो शायद आज यह सफलता नहीं मिलती. उन्होंने दोबारा पूरे मन से पढ़ाई की और अपनी कमजोरियों पर काम किया.
परिवार को दिया पूरा श्रेय
पंशुल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार, खासकर अपने पिता को दिया. उन्होंने कहा कि उनके पिता हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. जब भी पढ़ाई के दौरान तनाव महसूस होता था या आत्मविश्वास कम होता था, तब परिवार ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.&amp;nbsp;
कैसे रहे थे एग्जाम?
परीक्षा के बारे में पंशुल ने बताया कि इस बार फिजिक्स का पेपर काफी लंबा था. कई छात्रों को समय की कमी महसूस हुई, लेकिन उन्होंने नियमित अभ्यास और बेहतर टाइम मैनेजमेंट की वजह से पूरे पेपर को समय पर पूरा कर लिया. उनका मानना है कि केवल पढ़ाई करना ही काफी नहीं होता, बल्कि परीक्षा के दौरान समय का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है. तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना नियमित पढ़ाई की और किसी भी विषय को लंबे समय तक अधूरा नहीं छोड़ा. जहां भी कमजोरी महसूस हुई, वहां अतिरिक्त समय देकर उसे बेहतर बनाया.&amp;nbsp;
दूसरे स्टूडेंट्स को दी यह सीख
पंशुल ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य, मेहनत और सकारात्मक सोच सबसे जरूरी होती है. अगर कभी असफलता मिले या परिस्थितियां आपके खिलाफ हो जाएं, तब भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कई बार मुश्किलें हमें और बेहतर बनने का मौका देती हैं. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG Result 2026: इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची नीट की कटऑफ, जनरल में 69 और आरक्षित वर्ग में 64 अंकों का उछाल</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026: एनटीए की ओर से नीट यूजी परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब जल्द ही एमबीबीएस कॉलेज में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इस बार रिजल्ट नीट के रिजल्ट ने कई नए रिकॉर्ड भी बनाएं. हालांकि, सबसे दिलचस्प तस्वीर यह देखने को मिली है कि एक ओर परीक्षा क्वालीफाइंग कट ऑफ अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, वहीं दूसरी और पिछले साल की तुलना में करीब 1.15 लाख कम उम्मीदवार परीक्षा में क्वालीफाई कर सके.
इसे लेकर एनटीए का कहना है कि री एग्जाम के कारण उम्मीदवारों को तैयारी के लिए एक्स्ट्रा समय मिला और परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिसकी वजह से कट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
जनरल में 69 तो आरक्षित वर्ग में 64 अंकों की बढ़ोतरी&amp;nbsp;
इस साल जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए क्वालीफाइंग कट ऑफ 144 अंकों से बढ़कर 213 अंक हो गई. यानी सिर्फ एक साल के अंदर 69 अंकों का उछाल आया है. वहीं ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए कट ऑफ 113 से बढ़कर 177 अंक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 64 अंक ज्यादा है. यह नीट यूजी के इतिहास की सबसे बड़ी क्वालीफाइंग कट ऑफ मानी जा रही है.&amp;nbsp;
3 साल में कैसे बदली क्वालीफाइंग कट ऑफ?&amp;nbsp;
अगर पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कट ऑफ में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2024 में जनरल और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग स्कोर 162 अंक था. 2025 में यह घटकर 144 रह गया, लेकिन 2026 में सीधे 213 अंक तक पहुंच गया. इस तरह ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग में न्यूनतम स्कोर 2024 में 127, 2025 में 113 और इस साल यानी 2026 में 177 हो गया.
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कम छात्र पहुंचे थे परीक्षा देने, इसलिए आया बड़ा अंतर&amp;nbsp;
इस बार के नीट एग्जाम में रजिस्ट्रेशन की संख्या लगभग पिछले साल के बराबर रही. इस बार करीब 22.80 लाख छात्रों ने आवेदन किया, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 22.76 लाख था, लेकिन परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या इस बार घट गई. पिछले साल जहां 22.09 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे वहीं इस बार केवल 19.99 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए. इसके कारण उपस्थित प्रतिशत 97.1 से घटकर 87.7 प्रतिशत रह गया. इसके अलावा इस साल कुल 11.21 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा क्वालीफाई की, जबकि पिछले साल यह संख्या 12.37 लाख थी. यानी इस बार करीब 1.15 लाख कम छात्र सफल हुए. हालांकि परीक्षा देने वाले छात्रों के हिसाब से सफलता दर लगभग 56 प्रतिशत बनी रही. इससे संकेत मिलता है कि क्वालीफाई करने वालों की संख्या इसलिए घटी क्योंकि इस बार बड़ी संख्या में रजिस्टर्ड उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हुए.
किस कैटेगरी का प्रदर्शन रहा सबसे बेहतर?&amp;nbsp;
इस बार ईडब्ल्यूएस वर्ग का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा है. इस कैटेगरी के 61.8 प्रतिशत उम्मीदवार क्वालीफाई करने में सफल रहे, इसके बाद ओबीसी वर्ग का सफलता प्रतिशत 60.7 रहा. एसी वर्ग में 52.4 प्रतिशत जनरल वर्ग में 51.2 प्रतिशत और एसटी वर्ग में 49 प्रतिशत उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की. पहली बार ईडब्ल्यूएस और ओबीसी दोनों वर्ग में परीक्षा देने वाले 60 प्रतिशत से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए हैं. वहीं आंकड़ों की बात करें तो एनटीए के अनुसार सबसे ज्यादा 5.2 लाख ओबीसी उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की, इसके बाद जनरल वर्ग के 2.91 लाख, एसी के 1.59 लाख, ईडब्ल्यूएस के 95,026 और एसटी वर्ग के 63,716 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए हैं. वहीं पीडब्ल्यू बीडी कैटेगरी में 8,912 में से 3,666 सफल रहे.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Result, 2026:, इस, बार, रिकॉर्ड, स्तर, पर, पहुंची, नीट, की, कटऑफ, जनरल, में, और, आरक्षित, वर्ग, में, अंकों, का, उछाल</media:keywords>
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        <title>NEET UG Result 2026: नीट में पिछले साल से 1.15 लाख कम हुए सफल अभ्यर्थी, सिर्फ 11.21 लाख ने परीक्षा की क्वालिफाई</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026: एनटीए ने नीट यूजी 2026 री एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है. पेपर लीक के आरोपी के बाद दोबारा आयोजित की गई इस परीक्षा के नतीजों के साथ अब मेडिकल, डेंटल, आयुष और दूसरे अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इस बार भी देशभर से लाखों छात्रों ने परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए जो पिछले वर्षों से अलग तस्वीर दिखाते हैं. खास बात यह है कि महिला अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पुरुषों से बेहतर रहा और टॉप स्कोरर भी दो छात्रों ने संयुक्त रूप से हासिल किया.
इन दो छात्रों ने टॉप की नीट परीक्षा
इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया. पूरे देश में केवल 19 उम्मीदवार ही 700 से ज्यादा अंक हासिल कर सके, जबकि 138 छात्रों ने 690 से ज्यादा स्कोर किया. इन टॉप 138 उम्मीदवारों में 93 प्रतिशत पहली बार नीट देने वाले थे और 99 प्रतिशत की उम्र 17 से 19 वर्ष के बीच रही.
पिछले साल से 1.15 लाख छात्र कम हुए सफल
एनटीए के अनुसार इस बार कुल 11.21 लाख छात्रों ने परीक्षा क्वालीफाई की है, पिछले साल यह संख्या 12.37 लाख थी. यानी इस बार करीब 1.15 लाख कम उम्मीदवार सफल हुए, हालांकि सफलता दर लगभग 56 प्रतिशत रही, जिससे साफ है कि सफल उम्मीदवारों की संख्या घटने की बड़ी वजह कम अटेंडेंस रही. करीब 22.80 लाख छात्रों ने आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा में लगभग 20 लाख उम्मीदवार ही शामिल हुए थे. वहीं नीट री एग्जाम 21 जून को देश के 551 शहर और विदेश के 14 शहरों में बनाए गए 5,440 केंद्रों पर आयोजित किया गया.
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किस कैटेगरी में कितने सफल उम्मीदवार?
एनटीए की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी से रहे. इसके बाद जनरल, ईडब्ल्यूएस और एसटी कैटेगरी के उम्मीदवारों का स्थान रहा. ओबीसी एनसीएल कैटेगरी के 5.12 लाख उम्मीदवार सफल रहे, जनरल कैटेगरी के 2.91 लाख उम्मीदवार सफल रहे, एससी के 1.59 लाख, ईडब्ल्यूएस के 95,026 उम्मीदवार सफल रहे. इनके अलावा एसटी के 63,716, पीडब्ल्यूबीडी 3,666 और पीडब्ल्यूडी के 303 उम्मीदवार सफल रहे.
कितने छात्रों ने कितने अंक हासिल किए?
इस बार परीक्षा में हाई स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या भी सामने आई है. 700 या 700 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले 19 उम्मीदवार थे, वहीं 650 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 1,492 उम्मीदवार थे. इसके अलावा 600 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 10,160 उम्मीदवार थे, वहीं 500 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 90,780 उम्मीदवार थे.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक वर्षीय PG कोर्स में सीटें बढ़ाने की मांग पर ABVP का प्रदर्शन, प्रशासन पर छात्र हितों की अनदेखी का आरोप</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय में एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में सीमित सीटों को लेकर छात्र असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है. इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की दिल्ली इकाई ने कला संकाय के बाहर प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठायी. प्रदर्शन के बाद परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने डीयू रजिस्ट्रार प्रो. विकास गुप्ता को ज्ञापन सौंपते हुए एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में तत्काल सीटें बढ़ाने की मांग की. प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए.
चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के बाद सीटों की कमी बना बड़ा मुद्दा
ABVP का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुरूप एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीटें नहीं बढ़ाई गई हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में योग्य और पात्र छात्र केवल सीटों की कमी के कारण प्रवेश से वंचित हो रहे हैं. परिषद ने मांग की कि सभी एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में पर्याप्त सीट वृद्धि की जाए ताकि किसी भी योग्य विद्यार्थी को उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े.
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन के सामने रखीं मांगें
कला संकाय के बाहर आयोजित प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उच्च शिक्षा तक समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रवेश क्षमता बढ़ाना जरूरी है. छात्रों ने एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शीघ्र सीट वृद्धि की मांग करते हुए प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया.
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ABVP बोली- सीटों की कमी छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय
अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय देशभर के लाखों विद्यार्थियों की पहली पसंद है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में सीटों की कमी छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय कर रही है. उनका कहना था कि चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के बाद एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सीटों में पर्याप्त वृद्धि करनी चाहिए.
आंदोलन के बाद बनी समिति, 10 दिन में निर्णय का दावा
अभाविप के अनुसार प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिष्ठाता (नामांकन) के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है. यह समिति एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीट वृद्धि से जुड़े मुद्दे पर अध्ययन कर 10 दिनों के भीतर छात्रों के हित में निर्णय लेने का प्रयास करेगी. विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो छात्रों के हित में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में कैंपस खोलेगी ऑस्ट्रेलिया की Victoria University, गुरुग्राम में अगस्त से शुरू होगी पढ़ाई</title>
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        <description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी (Victoria University) को भारत में अपना कैंपस खोलने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. यह कैंपस दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में खोला जाएगा. इस मंजूरी के बाद यूनिवर्सिटी भारत में अपने शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू कर सकेगी. इस घोषणा को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा सहयोग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
पीएम मोदी के दौरे के वक्त मिली मंजूरी
इस मंजूरी की जानकारी उस समय सामने आई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे. मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस फैसले का स्वागत किया. इस मौके पर भारत के ऑस्ट्रेलिया में उच्चायुक्त नागेश सिंह ने विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को मंजूरी पत्र सौंपा.
कौन-कौन से कोर्स में होगी पढ़ाई?
गुरुग्राम स्थित इस कैंपस में छात्रों के लिए कई लोकप्रिय और रोजगार से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे. इनमें बिजनेस, डेटा साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, ग्लोबल एमबीए और मास्टर ऑफ एप्लाइड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम होंगे. इन कोर्स को पूरा करने वाले छात्रों को ऑस्ट्रेलिया की मान्यता प्राप्त डिग्री मिलेगी.
यूनिवर्सिटी ने दी यह जानकारी
यूनिवर्सिटी का कहना है कि यहां पढ़ने वाले छात्रों को वही शैक्षणिक अनुभव देने की कोशिश होगी, जो ऑस्ट्रेलिया के कैंपस में मिलता है. इसके लिए यूनिवर्सिटी अपने विशेष ब्लॉक मॉडल के तहत पढ़ाई कराएगी. इस मॉडल में छात्र एक समय में केवल एक विषय पर ध्यान देंगे. छोटे बैच, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक सीखने की व्यवस्था के जरिए छात्रों की समझ और प्रदर्शन बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा.
स्टूडेंट्स को क्या होगा फायदा?
यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया है कि भारत में पढ़ने वाले छात्रों को आगे चलकर मेलबर्न स्थित कैंपस में सेमेस्टर एक्सचेंज, ट्रांसफर और उच्च शिक्षा के अवसर भी मिल सकेंगे. इसके अलावा योग्य छात्रों को मेरिट के आधार पर हर साल तीन लाख रुपये तक की स्कालरशिप भी दी जाएगी. विक्टोरिया यूनिवर्सिटी की भारत ब्रांच की प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर कैरेन डॉड ने कहा कि मंजूरी मिलने के बाद अब यूनिवर्सिटी अपने पहले बैच का स्वागत करने के लिए तैयार है. उनका कहना है कि संस्थान का उद्देश्य छात्रों को ऐसा माहौल देना है, जहां वे नई तकनीक, उद्योग की जरूरतों और काम से जुड़े जरूरी हुनर के साथ बेहतर करियर बना सकें.
वहीं, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी इंडिया के Chief Operating Officer - (COO) अभिषेक शर्मा ने कहा कि पिछले कई महीनों से कैंपस की तैयारी की जा रही थी. यहां आधुनिक कक्षाएं, छात्र सहायता सेवाएं, उद्योग से जुड़ाव और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्रों को भारत में ही ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय जैसा अनुभव मिल सके. करीब 110 साल पुराने इतिहास वाली विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में दुनिया भर के लगभग 52 हजार छात्र पढ़ते हैं. भारत में कैंपस शुरू होने से दोनों देशों के बीच शिक्षा, शोध और अकादमिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य को भी आगे बढ़ाता है, जिसके तहत भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>NEET Result Rank Controversy: 585 नंबर, लेकिन रैंक 2500 से 15000 पार... NEET 2026 रिजल्ट पर छात्रों ने उठाए सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ 


NEET Result Rank Controversy: एनटीए ने नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का परिणाम घोषित कर दिया है. इसके साथ ही लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म हो गया है, लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर रैंकिंग को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. कई अभ्यर्थियों का दावा है कि इस बार परीक्षा कठिन होने के बावजूद अपेक्षा से ज्यादा छात्रों ने ऊंचे अंक हासिल किए हैं. इस वजह से सामान अंकों पर रैंक में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिस पर छात्र सवाल उठा रहे हैं.



नीट रिजल्ट को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहे पोस्ट में दावा किया गया है कि 2025 में 585 अंकों पर जहां करीब 2500 रैंक मिली थी, वहीं 2026 में इतने ही अंकों पर रैंक लगभग 15,500 तक पहुंच गई. कुछ छात्रों ने इसे लेकर परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि कठिन पेपर के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में इतने ऊचें अंक कैसे आए? वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं क&amp;zwj;ि अच्छे अंक के बाद उनकी भी रैंक में कमी आई. हालांकि, एनटीए की ओर से पेपर लीक या रिजल्ट में किसी तरह की गड़बड़ी को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है.

2025 :585 marks : ~2.5k rank2026 :585 marks : ~15.5k rankPaper this year was actually difficult. Was it leaked again ???#neet2026 #reneet #reneet2026 https://t.co/pg6bErMZZ1
&amp;mdash; Vedant (@VedxntR) July 16, 2026&amp;nbsp;



ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 Topper: पेपर रद्द होने पर रो पड़े थे आर्यन गुप्ता, फिर 16 घंटे की पढ़ाई से बने ऑल इंडिया टॉपर
दो छात्रों ने किया टॉप
री नीट 2026 में पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पंशुल बंसल संयुक्त रूप से देश के टॉपर बने हैं. दोनों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए हैं. एनटीए ने रिजल्ट के साथ मेरिट लिस्ट और कैटेगरी वाइज कट ऑफ भी जारी कर दी है, जिसके आधार पर अब 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
नीट यूजी की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी, लेकिन कथित पेपर लीक मामले के आरोपों के बाद इसे रद्द कर दिया गया था. इसके बाद 21 जून 2026 को देशभर के 5,440 केंद्रों पर और विदेश के 14 केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई, जिसमें 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG 2026 में किस राज्य के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी, यहां देखें स्टेट वाइज पूरी लिस्ट </title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG 2026 Result: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए ने नीट यूजी 2026 री एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस बार करीब 20 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने मेडिकल, डेंटल, आयुष और दूसरे अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालीफाई किया है. रिजल्ट जारी होने के बाद अब मेडिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. वहीं आपको बता दे कि इस साल परीक्षा का आयोजन 21 जून को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में बने 543 परीक्षा केंद्र पर 13 भाषाओं में किया गया था. एनटीए के अनुसार रिजल्ट समय पर जारी किए गए, ताकि काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया निर्धारित शेड्यूल में पूरी की जा सके. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि एनटीए यूजी 2026 रिजल्ट में किस राज्य के सबसे ज्यादा छात्रों ने बाजी मारी है और स्टेट वाइज क्वालीफाइंग उम्मीदवारों का पूरा आंकड़ा क्या है.&amp;nbsp;
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा उम्मीदवार हुए सफल&amp;nbsp;
एनटीए के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 1.70 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने नीट यूजी 2026 में सफलता हासिल की. वहीं लक्षद्वीप से सबसे कम 43 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए हैं. एजेंसी ने बताया कि देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है.&amp;nbsp;
इन टॉप 10 राज्यों के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी
एनटीए की ओर से जारी राज्यवार आंकड़ों के अनुसार नीट यूजी 2026 में उत्तर प्रदेश के बाद इन राज्यों में सबसे ज्यादा क्वालीफाई उम्मीदवार थे. वहीं एनटीए की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश न केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की संख्या में बल्कि कुल भागीदारी के मामले में भी सबसे आगे रहा.

उत्तर प्रदेश: 1,70,770 क्वालिफाइड उम्मीदवार
राजस्थान: 1,33,140 क्वालिफाइड उम्मीदवार
महाराष्ट्र: 1,07,304 क्वालिफाइड उम्मीदवार
बिहार: 68,968 क्वालिफाइड उम्मीदवार
कर्नाटक: 65,901 क्वालिफाइड उम्मीदवार
तमिलनाडु: 61,306 क्वालिफाइड उम्मीदवार
पश्चिम बंगाल: 52,746 क्वालिफाइड उम्मीदवार
केरल: 51,782 क्वालिफाइड उम्मीदवार
गुजरात: 38,146 क्वालिफाइड उम्मीदवार
तेलंगाना: 38,026 क्वालिफाइड उम्मीदवार&amp;nbsp;

कुल 11.21 लाख उम्मीदवारों ने किया क्वालीफाई&amp;nbsp;
इस बार कुल 11.21 लाख उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए हैं, इनमें 58 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं शामिल है. महिलाओं का क्वालिफिकेशन प्रतिशत पुरुषों की तुलना में थोड़ा ज्यादा रहा. वहीं परीक्षा में कुल 138 उम्मीदवारों ने 690 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 19 उम्मीदवारों ने 700 से ज्यादा अंक हासिल किए. एनटीए के अनुसार 1,492 उम्मीदवारों ने 650 से उससे ज्यादा, 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे ज्यादा और 90,780 उम्मीदवारों ने 500 या उससे ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं.&amp;nbsp;
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ओबीसी वर्ग से सबसे ज्यादा क्वालीफाइंग उम्मीदवार&amp;nbsp;
कैटेगरी वाइज रिजल्ट की बात करें तो सबसे ज्यादा 5.12 लाख उम्मीदवार ओबीसी एनसीएल वर्ग से क्वालीफाई हुए हैं. इसके अलावा जनरल कैटेगरी से 2.91 लाख, एससी से 1.59 लाख, जनरल ईडब्ल्यूएस से 95,026, एसटी से 63,716, पीडब्ल्यूडी बीडी से 3,666 और पीडब्ल्यूडी से 303 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए हैं.&amp;nbsp;
13 भाषाओं में हुई थी परीक्षा&amp;nbsp;
नीट यूजी 2026 का आयोजन हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 13 भाषाओं में किया गया था. परीक्षा में करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे. एनटीए ने रिजल्ट जारी करने से पहले अंतिम आंसर की भी जारी की थी और बताया था कि मूल्यांकन प्रक्रिया को इस बार ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए अलग-अलग चरणों को समांतर तरीके से पूरा किया गया है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, 2026, में, किस, राज्य, के, ज्यादा, बच्चों, ने, मारी, बाजी, यहां, देखें, स्टेट, वाइज, पूरी, लिस्ट </media:keywords>
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        <title>NEET UG 2026 Result: किस रैंक पर कौन&amp;सा मेडिकल कॉलेज मिलेगा? सरकारी या प्राइवेट; यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी परीक्षा का रिजल्ट 16 जुलाई को जारी कर दिया है. वहीं इस बार परीक्षा में 11.21 लाख से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए हैं. अब रिजल्ट आने के बाद बड़ा सवाल यही आ रहा है कि ऑल इंडिया रैंक के आधार पर स्टूडेंट्स को कौन सा मेडिकल कॉलेज मिल सकता है और सरकारी एमबीबीएस सीट मिलने की संभावना कितनी है. हालांकि अंतिम सीट आवंटन केवल रैंक से तय नहीं होता, बल्कि इसमें कैटेगरी, राज्य कोटा, सीटों की उपलब्धता, काउंसलिंग राउंड और उम्मीदवारों की कॉलेज प्राथमिकताएं भी बड़ी भूमिका निभाती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सरकारी या प्राइवेट किस रैंक पर कौन सा मेडिकल कॉलेज मिल सकता है.
नीट में केवल अंक नहीं ऑल इंडिया रैंक तय करती है कॉलेज&amp;nbsp;
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन केवल अंकों के आधार पर नहीं होते, बल्कि ऑल इंडिया रैंक और दूसरे मानक भी इसमें मायने रखते हैं. काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवार की कैटेगरी, राज्य का डोमिसाइल, आरक्षण नियम, सीट मैट्रिक्स और पसंदीदा कॉलेज की लिस्ट को भी ध्यान में रखा जाता है. यही वजह है कि समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग राज्य और कैटेगरी के उम्मीदवारों को अलग-अलग कॉलेज मिल सकते हैं.&amp;nbsp;
किस रैंक पर कौन सा कॉलेज मिलने की उम्मीद&amp;nbsp;

पिछले वर्षों के काउंसलिंग ट्रेंड के आधार पर उम्मीदवार अपने संभावित कॉलेज का अनुमान लगा सकते हैं, जैसे ऑल इंडिया रैंक 1 से 100 &amp;nbsp;वाले छात्रों को एम्स दिल्ली सहित देश के टॉप एम्स और प्रीमियम सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की बड़ी संभावना है.
वहीं ऑल इंडिया रैंक 101 से 1000 में एम्स, जेआईपीएमईआर और देश के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलने की अच्छी खासी संभावना रहती है.
इसके बाद ऑल इंडिया रैंक 1000 से 5000 देश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी एमबीबीएस प्रवे की संभावना रहती है.
ऑल इंडिया रैंक 5000 से 10,000 में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों &amp;nbsp;में एडमिशन का अवसर मिल सकता है.
वहीं ऑल इंडिया रैंक 10,000 से 20,000 में ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोट के माध्यम से सरकारी एमबीबीएस कॉलेज मिलने की संभावना रहती है.
ऑल इंडिया रैंक 20,000 से 50,000 &amp;nbsp;में भी राज्य कोट के जरिए सरकारी या प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीएस सीट मिल सकती है.
ऑल इंडिया रैंक 50,000 &amp;nbsp;से 1 लाख &amp;nbsp;आने पर प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीएस सीट मिलने के बेहतर अवसर रहते हैं.
ऑल इंडिया रैंक 1 लाख से 1 लाख 50 हजार पर प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस सीट मिल सकती है.
ऑल इंडिया रैंक 1 लाख 50 हजार से 2 लाख 50 हजार प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस या बीडीएस के ऑप्शन उपलब्ध हो सकते हैं.
ऑल इंडिया रैंक &amp;nbsp;2 लाख 50 हजार से &amp;nbsp;ऊपर से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के अलावा बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस और दूसरे आयुष कोर्स में एडमिशन की संभावना ज्यादा रहती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 में किस राज्य के ज्यादा बच्चों ने मारी बाजी, यहां देखें स्टेट वाइज पूरी लिस्ट&amp;nbsp;
एमबीबीएस की कुल कितनी सीटों पर मिलेगा एडमिशन&amp;nbsp;
नेशनल मेडिकल काउंसिल के अनुसार 2026 के लिए देश भर में 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध है. इनमें 63,296 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में जबकि 73,643 सीटें प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में है. इस वर्ष एडमिशन पिछले साल की तुलना में कुल 9,911 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई है, जिनमें सरकारी और मेडिकल दोनों इंस्टीट्यूट की सीटें शामिल है. वहीं एमसीसी के माध्यम से 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के अलावा एम्स जेआईपीएमईआर, बीएचयू, एएमयू, ईएसआईसी, केंद्रीय विद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी और कुछ बीएससी नर्सिंग इंस्टीट्यूट की सीटों पर भी काउंसलिंग कराई जाएगी. वहीं विशेष सरकारी मेडिकल कॉलेज की 85 प्रतिशत सीटों के लिए अलग राज्यों की काउंसलिंग एजेंसियां प्रक्रिया पूरी करेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET Rank vs Course 2026: किस रैंक पर मिलेगा MBBS, BDS, BAMS? यहां देखें Category&amp;wise लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Rank vs Course 2026: एनटीए ने नीट यूजी 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है, जिसमें इस साल करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे. एनटीए के रिजल्ट के अनुसार परीक्षा में 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है. अब रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह आ रहा है कि किस रैंक पर एमबीबीएस, बीडीएस, &amp;nbsp;बीएएमएस या फिर अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन मिलने की संभावना है.
आपको बता दें कि एनटीए ने किसी भी कोर्स के लिए अलग-अलग कट ऑफ जारी नहीं की है. एजेंसी केवल क्वालीफाइंग कट ऑफ घोषित करती है, जबकि एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी और अन्य कोर्स में एडमिशन काउंसलिंग के दौरान ऑल इंडिया रैंक, कैटेगरी, सीटों की उपलब्धता और कॉलेज के क्लोजिंग रैंक के आधार पर तय होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि किस रैंक पर एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस मिलेगा.&amp;nbsp;
MBBS, BDS और BAMS के लिए कट ऑफ&amp;nbsp;
कई छात्रों को लगता है कि एनटीए हर मेडिकल कोर्स के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी करता है, लेकिन ऐसा नहीं है. नीट में क्वालीफाई करने के लिए उम्मीदवार अलग-अलग मेडिकल और AYUSH कोर्स की काउंसलिंग में भाग लेने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं. इसके बाद सीट आवंटन उम्मीदवार की रैंक, &amp;nbsp;कैटेगरी, राज्य कोटा, ऑल इंडिया कोटा और संबंधित कॉलेज के क्लोजिंग रैंक पर निर्भर करता है. वहीं नीट स्कोर के आधार पर एमबीबीएस, बीडीएस बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी और बीएससी नर्सिंग कोर्स में भाग लेने वाले इंस्टीट्यूट में एडमिशन मिलता है.&amp;nbsp;
किस रैंक पर किस कोर्स में मिल सकता है एडमिशन?&amp;nbsp;
स्टूडेंट की रैंक के आधार पर कॉलेज और कोर्स बदलते रहते हैं. पिछले वर्षों के काउंसलिंग ट्रेंड के अनुसार ऑल इंडिया रैंक 1 से 100 पाने वाले उम्मीदवारों के पास देश के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट जैसे एम्स और दूसरे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पाने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है. ऑल इंडिया रैंक 100 से 5000 के बीच के बीच रैंक आने वाले छात्रों को केंद्रीय संस्थानों और प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की अच्छी संभावना रहती है.
राज्य कोटा के तहत भी कई बार अच्छे ऑप्शन उपलब्ध रहते हैं. वहीं 5000 से 20,000 के बीच रैंक पाने वाले उम्मीदवारों को भी कई राज्यों में एमबीबीएस कॉलेज मिल सकते हैं, हालांकि अंतिम सीट आवंटन कैटेगरी, राज्य और काउंसलिंग राउंड पर निर्भर करता है. वह इसके अलावा 20,000 के बाद की रैंक पर कई उम्मीदवार को सरकारी &amp;nbsp;बीडीएस बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी एंड एएच या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के ऑप्शन मिल सकते हैं. सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग राउंड के अनुसार संभावनाएं भी बदलती रहती है.&amp;nbsp;
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किस कोर्स के लिए कितना रहता है कंपटीशन?&amp;nbsp;
पिछले वर्षों के ट्रेंड के अनुसार एमबीबीएस में सबसे ज्यादा कंपटीशन देखने को मिलता है. इसके बाद बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीवीएससी एंड एएच और दूसरे आयुष कोर्स आते हैं. वहीं इनमें प्राइवेट कॉलेज और राज्य के अनुसार स्थिति अलग-अलग भी होती है.&amp;nbsp;
किस आधार पर मिलता है कोर्स में एडमिशन?
नीट क्वालीफाई करने के बाद केवल स्कोर ही पर्याप्त नहीं होता. एडमिशन के दौरान कई दूसरे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है. जैसे ऑल इंडिया रैंक, उम्मीदवार की कैटेगरी, ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा, उपलब्ध सीटों की संख्या, कॉलेज का क्लोजिंग रैंक, काउंसलिंग का राउंड और उम्मीदवार की ओर से भरे गए कॉलेज और कोर्स ऑप्शन के आधार पर एडमिशन मिलता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Engineering Biology UG Course: देश में पहली बार शुरू होगा इंजीनियरिंग बायोलॉजी यूजी कोर्स, बायोटेक में करियर के खुलेंगे नए रास्ते</title>
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        <description><![CDATA[ Engineering Biology UG Course: भारत में हायर एजुकेशन और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने देश में पहली बार इंजीनियरिंग, बायोलॉजी में ग्रेजुएशन स्तर का कोर्स शुरू करने की घोषणा की है. इसके साथ ही सरकार ने 2035 तक भारत को वैश्विक बायो इकोनामी हब बनाने के लिए राष्ट्रीय रोडमैप भी लॉन्च किया है. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि नया कोर्स इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान, चिकित्सा और नई तकनीक के बीच की दूरी को कम करेगा और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करेगा. मंत्री ने कहा कि जिस तरह कंप्यूटर साइंस में डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाया है, उसी तरह इंजीनियरिंग बायोलॉजी आने वाले समय में भारत की बायोटेक्नोलॉजी ग्रोथ की आधारशिला बनेगी. उन्होंने कहा कि देश को अपने अपना मजबूत और आत्मनिर्भर बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार करना होगा, ताकि विज्ञान, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सके.
क्या है इंजीनियरिंग बायोलॉजी?
इंजीनियरिंग बायोलॉजी एक ऐसा विषय है,जो इंजीनियरिंग, बायोलॉजी, मेडिकल साइंस और आधुनिक तकनीकों को एक साथ जोड़ता है. क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स बायोलॉजिकल सिस्टम, मेडिकल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग के संयोजन से नई तकनीकों और समाधान विकसित करेंगे. सरकार का मानना है कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस मेडिकल रिसर्च में ऐसे विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ेगी.
मेडिकल और इंजीनियरिंग के बीच बनेगा नया सेतु
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब मेडिकल और इंजीनियरिंग अलग-अलग क्षेत्र नहीं रहे गए हैं. आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में कई तकनीकें ऐसी हैं, जहां डॉक्टरों और इंजीनियरों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों में भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने बताया कि आईटीआई समेत कई प्रमुख संस्थानों ने मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम शुरू करने की प्रस्ताव भी भेजे हैं, जिससे इंजीनियरिंग और मेडिकल एजुकेशन के बीच सहयोग बढ़ेगा.
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भारत के बायो इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने बिल्डिंग इंडिया एस ए लीडिंग बायो इकोनॉमी पावर हाउस बाय 2035 नाम से राष्ट्रीय रोडमैप भी जारी किया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी लगभग 10 अरब डॉलर की थी, जो अब बढ़कर 95 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है. सरकार का टारगेट इसे 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर और आगे चलकर 2035 तक वैश्विक स्तर पर अग्रणी बायो इकोनॉमी में बदलना है. उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में 11,000 से ज्यादा बायोटेक स्टार्टअप कम कर रहे हैं, जो क्षेत्र में तेजी से बढ़ते नवाचार और निवेश का संकेत है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>MBBS Seats in India: देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा MBBS सीटें, यहां देख लें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ MBBS Seats in India: देश में मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए एमबीबीएस सीटों की संख्या सबसे अहम होती है. हर साल नीट यूजी के जरिए सरकारी और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिया जाता है. ऐसे में कई छात्रों के मन में सवाल रहता है कि आखिर किस राज्य में सबसे ज्यादा सीटें उपलब्ध हैं और किन राज्यों में मेडिकल कॉलेज की संख्या अधिक है. &amp;nbsp;
हाल ही में नेशनल मेडिकल कमिशन ने शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए देशभर की एमबीबीएस सीटों की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी की है और इस बार सीटों की संख्या में अच्छा खासा इजाफा भी देखने को मिला है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं.&amp;nbsp;
एनएमसी ने कुल कितनी बढ़ाई सीटें?&amp;nbsp;
नेशनल मेडिकल कमीशन के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के अनुसार, इस साल देश भर में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. इनमें 1,27,028 सीटें पहले से मंजूर थीं, जबकि इस साल 9,911 नई सीटों को स्वीकृति दी गई है. इसके अलावा 25 नए मेडिकल कॉलेज को भी मंजूरी दी गई है, जिनमें करीब 2400 सीटें भी इसी बढ़ोतरी का हिस्सा है. अब देशभर के कुल 823 मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाएगी.&amp;nbsp;
किस राज्य में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें?&amp;nbsp;
एनएमसी के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटों के मामले में कर्नाटक पहले स्थान पर है. यहां सरकारी और मेडिकल कॉलेज को मिलाकर सबसे ज्यादा सीटें उपलब्ध हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना का नंबर आता है. इन राज्यों में बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज होने के कारण छात्रों के लिए सीटों के अवसर भी ज्यादा है. वहीं इन राज्यों में कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1300 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई है, जिससे यहां कुल सीटों की संख्या बढ़कर 15,395 हो गई. इसी के साथ कर्नाटक एक बार फिर देश का सबसे बड़ा मेडिकल एजुकेशन हब और सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटों वाला राज्य बन गया.&amp;nbsp;
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दूसरे राज्यों में इतनी बढ़ी सीटें
कर्नाटक के बाद तमिलनाडु का नंबर आता है, जहां करीब 950 नई सीटें जुड़ने के बाद कुल सीटों की संख्या 13,999 हो गई है. इसके अलावा राजस्थान में करीब 900 सीटें जुड़ी है, जिससे कुल सीटों की संख्या 8,080 पर पहुंच गई है. पश्चिम बंगाल में करीब 825 नई सीटें जुड़ने से कुल संख्या 7,200 हो गई है, जबकि तेलंगाना में करीब 810 नई सीटों के साथ कल सिम 10,250 तक पहुंच गई है. उत्तर प्रदेश में भी करीब 800 नई सीटें जोड़ी गई है, जिससे राज्य में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 14,000 हो गई है. इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी सीटों में अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेज में बढ़ी सीटें&amp;nbsp;
इस बार सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है. देश के 441 मेडिकल सरकारी मेडिकल कॉलेज में अब कुल 63,996 सीटें उपलब्ध होंगी, जिनमें इस साल 2,111 नई सीटें जोड़ी गई है. वहीं 382 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में कुल 73,643 सीटें होंगी. इनमें इस साल सबसे ज्यादा यानी 7,800 सीटों की बढ़ोतरी की गई है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>IIT Hyderabad Placement: दो डिपार्टमेंट में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट, छात्रों को 90 लाख तक का पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ IIT Hyderabad Placement: आईआईटी हैदराबाद ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 के प्लेसमेंट आंकड़े जारी कर दिए हैं. इस बार प्लेसमेंट सीजन में छात्रों को देश-विदेश की प्रमुख कंपनियों से शानदार ऑफर मिले. सबसे बड़ा पैकेज 90 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा, जबकि औसत सालाना पैकेज 22.5 लाख रुपये दर्ज किया गया. खास बात यह है कि दो विशेष कार्यक्रमों में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हासिल हुआ और पीएचडी छात्रों को भी 81 लाख रुपये तक का पैकेज मिला.
आईआईटी हैदराबाद के अनुसार, प्लेसमेंट प्रक्रिया 1 दिसंबर 2024 से शुरू हुई थी और इसे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया गया. इस दौरान 320 कंपनियों ने कैंपस भर्ती में हिस्सा लिया और इंजीनियरिंग, साइंस, डिजाइन और मैनेजमेंट समेत अलग-अलग क्षेत्र के छात्रों को नौकरी के अवसर दिए गए. संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, कुल 493 छात्रों का चयन हुआ और उन्हें 521 जॉब ऑफर मिले. इनमें 87 प्री प्लेसमेंट ऑफर और 43 अंतर्राष्ट्रीय ऑफर शामिल रहे. अंडर ग्रेजुएट स्तर पर प्लेसमेंट दर 70.99 प्रतिशत, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर 69.74% दर्ज की.&amp;nbsp;
कंप्यूटर साइंस में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट&amp;nbsp;
डिपार्टमेंटवार आंकड़ों में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे आगे रहा. इस डिपार्टमेंट के 111 में से 96 छात्रों को नौकरी मिली. इसके बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 97 में से 81 छात्रों का चयन हुआ. इसके अलावा मैकेनिकल एंड एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के 94 में से 65 सिविल इंजीनियरिंग के 73 में से 36 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 45 में से 36 और केमिकल इंजीनियरिंग के 56 में से 32 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. वहीं मटेरियल साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग साइंस और मैथमेटिक्स एंड मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग जैसे डिपार्टमेंट के छात्रों को भी अच्छी संख्या में ऑफर मिले.&amp;nbsp;
दो डिपार्टमेंट में 100% प्लेसमेंट&amp;nbsp;
संस्थान के अनुसार, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम में सभी 8 छात्रों को नौकरी मिली और इस विभाग ने 100 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज किया. वहीं पीएचडी कार्यक्रम में भी सभी योग्य छात्रों का चयन हुआ और यहां भी 100 प्रतिशत प्लेसमेंट रिकॉर्ड किया गया. पीएचडी छात्रों को अधिकतम 81 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला.&amp;nbsp;
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प्रोग्रामवार कैसा रहा प्रदर्शन?&amp;nbsp;
बीटेक छात्रों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा. मीटिंग में 74.56 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज किया गया और अधिकतम पैकेज 90 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा. वहीं एमटेक छात्रों के लिए सबसे बड़ा पैकेज 58 लाख रुपये रहा और प्लेसमेंट दर 66.28 प्रतिशत रही. इसके अलावा बीडिजाइन का अधिकतम पैकेज 14 लाख रुपये, एमडिजाइन का 29.32 लाख रुपये और एमएससी छात्रों का अधिकतम पैकेज 58 लाख रुपये दर्ज किया गया.&amp;nbsp;
700 छात्रों को मिले जॉब ऑफर&amp;nbsp;
संस्थान में 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के विस्तृत प्लेसमेंट आंकड़े भी जारी किए हैं. इसके अनुसार 1,146 ग्रेजुएट होने वाले छात्रों में से 943 छात्रों ने प्लेसमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया. जिनमें से 700 छात्रों को नौकरी के ऑफर मिले. इस चरण में सबसे बड़ा पैकेज 66.13 लाख रुपये और औसत पैकेज 20.26 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा साथ ही 53 अंतरराष्ट्रीय ऑफर भी छात्रों को मिले.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>MBBS Seats Matrix 2026: सरकारी कॉलेज ज्यादा, फिर भी MBBS सीटें प्राइवेट में अधिक... NMC के आंकड़ों से समझिए पूरा गणित </title>
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        <description><![CDATA[ MBBS Seats Matrix 2026: देश में नेशनल मेडिकल कमिशन ने शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीटों का मैट्रिक्स जारी कर दिया है, जिसमें 9911 नई सीटों को मंजूरी दे दी गई है. इसके साथ ही देश में एमबीबीएस सीटों की कुल संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 1,36,939 हो गई है. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि देश में सरकारी मेडिकल कॉलेज की संख्या प्राइवेट कॉलेज से ज्यादा होने के बावजूद एमबीबीएस सीटें प्राइवेट इंस्टीट्यूट से ज्यादा है. &amp;nbsp;
एनएमसी की ओर से जारी सीट मैट्रिक्स के अनुसार, इस साल कुल 1,27,028 एमबीबीएस सीटों का नवीनीकरण किया गया है, जबकि 9,911 नई सीटें जोड़ी गई है. यह सीटें नए मेडिकल कॉलेज और पहले से संचालित कॉलेज में सीट बढ़ाने के जरिए उपलब्ध हुई है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब हर साल 22 लाख से ज्यादा छात्र नीट यूजी परीक्षा देते हैं, लेकिन एमबीबीएस सीटों की संख्या उनकी तुलना में काफी कम लगती है.
सरकारी कॉलेज ज्यादा, फिर भी प्राइवेट में सीटें अधिक क्यों&amp;nbsp;
एनएमसी के आंकड़ों के अनुसार देश में इस समय 823 मेडिकल कॉलेज है. इनमें 441 सरकारी और 382 प्राइवेट कॉलेज शामिल है, यानी कॉलेज की संख्या के मामले में सरकारी संस्थान आगे हैं. इसके बावजूद सीटों की बात करें तो सरकारी कॉलेज में कुल 63,996 एमबीबीएस सीटें हैं, जबकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 73,643 सीटें उपलब्ध हैं, यानी प्राइवेट कॉलेज में सरकारी संस्थाओं की तुलना में 10 हजार से ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं. यही वजह है कि सरकारी कॉलेजों की संख्या अधिक होने के बावजूद कुल एमबीबीएस सीटों में प्राइवेट कॉलेजों की हिस्सेदारी ज्यादा दिखाई देती है. इस साल बढ़ाई गई 9,911 सीटों में से 7,800 सीट प्राइवेट कॉलेज को मिली है, जबकि सरकारी कॉलेज में केवल 2,111 सीटें बढ़ाई गई है यानी इस बार मंजूर हुई अतिरिक्त सीटों में करीब 79 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की रही.&amp;nbsp;
सीटों में इतनी तेजी से कैसे हुई बढ़ोतरी?&amp;nbsp;
एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के रेजिडेंट सदस्य एम के रमेश के अनुसार यह बढ़ोतरी ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 में किए गए बदलाव की वजह से संभव हुई है. पहले कोई मेडिकल कॉलेज अपनी पहली बैच की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकता था. नए नियम लागू होने के बाद अब कॉलेज निर्धारित मानकों को पूरा करने पर दूसरे वर्ष से ही सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इससे सीट विस्तार की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो गई.&amp;nbsp;
कितनी सीटें नए कॉलेज और कितनी पुराने कॉलेजों में बढ़ी?
एनएमसी के अनुसार इस साल मंजूर हुई 9,911 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों में से 2400 सीटें 25 नए मेडिकल कॉलेज से जुड़ी है. इनमें 7 सरकारी और 18 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज शामिल है. वहीं बाकी 7,511 सीटें पहले से चल रहे मेडिकल कॉलेज में सीट बढ़ाने के जरिए जोड़ी गई है. इसके अलावा राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 88 मेडिकल कॉलेज हैं, इनमें 49 सरकारी कॉलेज है, जो देश में सबसे ज्यादा है. राज्य में कुल 14,000 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध है. वहीं कर्नाटक में कुल 75 मेडिकल कॉलेज है, लेकिन यहां 15,395 एमबीबीएस सीटों के साथ देश में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं. राज्य में 51 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा महाराष्ट्र में 86 मेडिकल कॉलेज है और 13,099 सीटें जबकि तमिलनाडु में 78 मेडिकल कॉलेज और 13,999 एमबीबीएस सीटें हैं. राजस्थान में 51 मेडिकल कॉलेज है, जहां कुल 80 मेडिकल सीटें उपलब्ध हैं.&amp;nbsp;
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कॉलेज को एनएमसी की सख्त चेतावनी&amp;nbsp;
एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज को तय क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश नहीं देने की चेतावनी भी दी है. आयोग ने कहा कि स्वीकृत सीटों से ज्यादा एडमिशन देने पर एनएमसी एक्ट 2019 के तहत नियामकीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. साथ ही सभी बड़े मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग शुरू होने से पहले अपनी स्वीकृत सीटों का वेरिफिकेशन करने और किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड को जानकारी देने के लिए कहा गया है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET UG 2026 Topper: पेपर रद्द होने पर रो पड़े थे आर्यन गुप्ता, फिर 16 घंटे की पढ़ाई से बने ऑल इंडिया टॉपर</title>
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        <description><![CDATA[ डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए गुरुवार (16 जुलाई) का दिन बहुत बड़ी खबर लेकर आया. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के नतीजे घोषित किए. इस एग्जाम में लुधियाना के रहने वाले आर्यन गुप्ता ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया. उनके साथ हरियाणा के पंशुल बंसल भी संयुक्त रूप से पहले नंबर पर रहे. दोनों ही छात्रों ने 720 में से 715 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया.
लुधियाना में जश्न का माहौल
एनटीए ने जैसे ही नीट एग्जाम के नतीजे घोषित किए, आर्यन गुप्ता के घर और लुधियाना में खुशी की लहर दौड़ गई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आर्यन के घरवाले और जानकार जश्न मनाते नजर आ रहे हैं. आर्यन की इस शानदार कामयाबी पर सिर्फ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा शहर गर्व महसूस कर रहा है.
आर्यन के लिए आसान नहीं था यह सफर
आर्यन को यह सफलता रातों-रात नहीं मिली. इसके पीछे बेहद कड़ी मेहनत और संघर्ष है. बता दें कि इस साल नीट की परीक्षा कई विवादों में थी. पहले यह परीक्षा 12 मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के शक और अन्य विवादों की वजह से उसे रद्द कर दिया गया.
आर्यन बताते हैं कि जब परीक्षा रद्द होने की खबर आई तो वह टूट गए थे और खूब रोए थे. उन्हें लगा था कि उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. एमबीबीएस कर रहे उनके बड़े भाई आदित्य ने उन्हें हिम्मत दी. इसके बाद आर्यन ने दोबारा किताबें उठाईं और 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (Re-test) के लिए दोगुनी मेहनत से पढ़ाई शुरू कर दी.
रोजाना 16 से 17 घंटे करते थे पढ़ाई
अपनी कामयाबी पर आर्यन ने बताया कि वह रोजाना करीब 16 से 17 घंटे पढ़ाई करते थे. हालांकि, उन्होंने खुद को किताबों तक ही सीमित नहीं रखा. जब भी वह लगातार पढ़कर थक जाते थे तो ब्रेक जरूर लेते थे. अपना दिमाग शांत करने के लिए आर्यन सोशल मीडिया इस्तेमाल करते थे. टीवी पर फिल्में देखते थे और परिवार के साथ समय बिताते थे.
कैसी रही आर्यन की पढ़ाई-लिखाई?
आर्यन की स्कूलिंग लुधियाना के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से हुई. वह सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि गेम्स में भी काफी आगे रहे. वह स्टेट लेवल के टेबल टेनिस प्लेयर भी रह चुके हैं. उन्होंने 12वीं कक्षा में भी 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे.
डॉक्टरों के परिवार से आते हैं आर्यन
आर्यन के खून में ही डॉक्टरी है. उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थेटिस्ट हैं और उनकी मां डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं. उनके बड़े भाई ने पिछले साल नीट की परीक्षा में ऑल इंडिया 54वीं रैंक हासिल की थी. आर्यन ऑन्कोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. दरअसल, जब वह सिर्फ तीन साल के थे, तब कैंसर के कारण उनकी दादी का निधन हो गया था. इस वजह से वह कैंसर के डॉक्टर बनना चाहते हैं.
NEET-UG 2026 के खास आंकड़े

इस साल करीब 20 लाख छात्रों ने नीट की परीक्षा दी
इनमें से कुल 11.21 लाख स्टूडेंट्स पास हुए
पास होने वालों में 58 प्रतिशत से अधिक लड़कियां
आर्यन और पंशुल के अलावा 19 छात्रों ने 700 से ज्यादा अंक हासिल किए
राजस्थान के उपलक्ष्य गोयल को देश में तीसरी रैंक मिली
बिहार के आयुष भालोटिया चौथे स्थान पर रहे
महाराष्ट्र की श्रावणी कृष्णा कुडाले ने पांचवीं रैंक हासिल की

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG 2026 AIR 4 Ayush Bhalotia: बिहार के लाल ने कर दिखाया कमाल! NEET में AIR&amp;4, अब AIIMS Delhi में होगा दाखिला</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार के नवादा जिले के छोटे से कस्बे वारिसलीगंज में जश्न का माहौल है. वजह है यहां के एक होनहार छात्र की शानदार कामयाबी. दरअसल, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने गुरुवार (16 जुलाई) को नीट-यूजी के नतीजे घोषित किए. इसमें वारिसलीगंज के रहने वाले छात्र आयुष भलोटिया ने पूरे भारत में चौथा स्थान हासिल किया.&amp;nbsp;
वारिसलीगंज में जश्न का माहौल
जैसे ही यह खुशखबरी आयुष के गांव और आस-पड़ोस के लोगों तक पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. परिजनों और शुभचिंतकों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा करवा रहे हैं, मिठाइयां बांट रहे हैं और जमकर पटाखे फोड़ रहे हैं. हर किसी का यही कहना है कि एक छोटे से शहर से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा में चौथा स्थान हासिल करना कोई मामूली बात नहीं है.
AIIMS दिल्ली में पढ़ने का सपना साकार
मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हर छात्र का सबसे बड़ा सपना होता है कि उसे दिल्ली के एम्स में दाखिला मिले. एम्स दिल्ली को देश का सबसे बेहतरीन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल माना जाता है. आयुष ने अपनी मेहनत से इस सपने को हकीकत में बदल दिया.&amp;nbsp;
अपनी शानदार रैंक की वजह से अब आयुष का दिल्ली के एम्स में पढ़ना पूरी तरह तय हो चुका है. उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा से मरीजों की सेवा करने और अच्छा डॉक्टर बनने का सपना देखा था, जो अब पूरा होने जा रहा है.
ये भी पढ़ें: पेपर रद्द होने पर रो पड़े थे आर्यन गुप्ता, फिर 16 घंटे की पढ़ाई से बने ऑल इंडिया टॉपर
आयुष की सफलता से जुड़ी खास बातें

रैंक: पूरे भारत में चौथा स्थान
लक्ष्य: एम्स नई दिल्ली में पढ़ाई
प्रेरणा: सीमित संसाधनों के बाद भी हार न मानना
मूल मंत्र: कड़ी मेहनत, अनुशासन और माता-पिता का आशीर्वाद

सीमित संसाधनों में पाई असीमित सफलता
आयुष की यह कामयाबी उन सभी छात्रों के लिए सबक है, जिन्हें लगता है कि अच्छी पढ़ाई सिर्फ बड़े शहरों में ही हो सकती है. वारिसलीगंज जैसे इलाके में महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं और बड़े-बड़े कोचिंग सेंटर आसानी से नहीं मिलते. इसके बावजूद आयुष ने साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का दृढ़ संकल्प हो तो इंसान किसी भी ऊंचे मुकाम पर पहुंच सकता है.
आयुष रोजाना पूरे अनुशासन के साथ कई घंटे पढ़ाई करते थे. उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपनी किताबों पर लगाया. इस सफलता के लिए उन्होंने कई चीजों का त्याग किया और अपनी मंजिल से ध्यान नहीं भटकने दिया.&amp;nbsp;
माता-पिता और शिक्षकों को दिया श्रेय
आयुष ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और अपने शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. जब भी वह पढ़ाई करते-करते थक जाते या निराश महसूस करते तो उनके परिवार ने उन्हें हिम्मत दी. वहीं, टीचर्स ने उन्हें हमेशा सही रास्ता दिखाया और उन्हें परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार किया.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>कितने पढ़े&amp;लिखे हैं जंतर&amp;मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक, कहां से ली है उन्होंने डिग्री?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कितने-पढ़े-लिखे-हैं-जंतर-मंतर-पर-अनशन-कर-रहे-सोनम-वांगचुक-कहां-से-ली-है-उन्होंने-डिग्री</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कितने-पढ़े-लिखे-हैं-जंतर-मंतर-पर-अनशन-कर-रहे-सोनम-वांगचुक-कहां-से-ली-है-उन्होंने-डिग्री</guid>
        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk Education:&amp;nbsp;सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से अनशन पर बैठे हैं. उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है और वजन में भी काफी कमी आई है. आज सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का 18वां दिन है. तबीयत बिगड़ने के बावजूद भी वह अपने फैसले पर अडिग हैं.
कई जानी-मानी हस्तियां वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील कर रही हैं, लेकिन सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार की तरफ से जवाबदेही तय नहीं की जाती है, वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि सोनम वांगचुक कितने पढ़े लिखे हैं और उन्होंने कहां से डिग्री ली है?&amp;nbsp;
साधारण गांव से शुरू हुआ वांगचुक का सफर&amp;nbsp;
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के छोटे से गांव और उलेटोकपो में हुआ था. उनके पिता का नाम सोनम वांग्याल और मां का नाम शेरिंग बताया जाता है. उनका बचपन बहुत साधारण परिवार और चुनौतियों से भरा रहा. उस दौर में उनके गांव में आधुनिक शिक्षा जिसे कोई सुविधा मौजूद नहीं थी, यही वजह है कि वह 9 साल की उम्र तक स्कूल जाकर औपचारिक पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए. बाद में उन्हें पढ़ाई के लिए श्रीनगर भेजा गया, लेकिन वहां भी उनके लिए राह आसान नहीं थी क्योंकि उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं को समझने और सीखने में शुरुआत में काफी दिक्कतें आई. इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और हार नहीं मानी.&amp;nbsp;
एनआईटी श्रीनगर से की इंजीनियरिंग&amp;nbsp;
अपनी शुरुआती मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए सोनम वांगचुक ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाया, इसके लिए वह दूसरे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे. यह उनके संघर्षशील स्वभाव और आत्मनिर्भरता की शुरुआत की झलक थी, जो आगे चलकर उनके पूरे करियर की पहचान बन गई.&amp;nbsp;
शिक्षा सुधार की दिशा में रखा पहला कदम&amp;nbsp;
इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर पूरी करने के बाद सोनम वांगचुक अपनी ऊर्जा लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में लगा दी. 1988 में उन्होंने स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी सेकमॉल की स्थापना की. इस संस्था का मकसद स्थानीय बच्चों को उनकी अपनी भाषा और संस्कृति के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना था. उन्होंने पारंपरिक रटंत प्रणाली को चुनौती देते हुए बच्चों को हाथों से काम करके सीखने का एक नया और व्यावहारिक तरीका अपनाया. बाद में उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख की भी स्थापना की जिसे आज वैकल्पिक शिक्षा और रिसर्च का बड़ा केंद्र माना जाता है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-Delhi University Placement 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए सुनहरा मौका, इंटर्नशिप के साथ 6 लाख तक की नौकरी&amp;nbsp;
आइस स्तूपा तकनीक ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान&amp;nbsp;
सोनम वांगचुक सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने लद्दाख की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक ही यानी पानी की किल्लत को सुलझाने के लिए भी नवाचार किया. उन्होंने आइस स्तूपा तकनीक विकसित की जो बर्फ से बनाए गए कृत्रिम ग्लेशियर की तरह काम करती है और गर्मियों में पिघलाकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है. इस तकनीक की मदद से लिए क्षेत्र में सैकड़ों हेक्टेयर बंजर जमीन की सिंचाई संभव हो पाई और वहां हजारों पेड़ पौधे और बगीचे लगाए जा सके. इस इनोवेशन ने उन्हें भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कितने, पढ़े-लिखे, हैं, जंतर-मंतर, पर, अनशन, कर, रहे, सोनम, वांगचुक, कहां, से, ली, है, उन्होंने, डिग्री</media:keywords>
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        <title>DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजी एडमिशन के लिए आज जारी होगी पहली लिस्ट, 18 जुलाई तक करनी होगी सीट एक्सेप्ट</title>
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        <description><![CDATA[ DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए आज बड़ा दिन है. यूनिवर्सिटी आज 16 जुलाई शाम 5 बजे कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम के तहत पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी करेगा. जिन उम्मीदवारों ने सीएसएएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और कॉलेज कोर्स की प्रेफरेंस लॉक की है. वह ऑफिशियल पोर्टल पर लॉगिन करके अपना अलॉटेड कॉलेज और कोर्स देख सकेंगे.
पहली लिस्ट जारी होने के साथ ही एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. इस साल डीयू में 69 कॉलेज और डिपार्टमेंट में 73 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की कुल 71,624 सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. यूनिवर्सिटी के अनुसार इस बार 2,08,043 उम्मीदवारों ने अपनी अंतिम प्रेफरेंस से लॉक की है. ऐसे में हर सीट के लिए लगभग तीन छात्रों के बीच मुकाबला है.&amp;nbsp;
आज शाम 5:00 बजे जारी होगी पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट&amp;nbsp;
पहले सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी होने के बाद जिन छात्रों को सीट मिलेगी, उन्हें 16 जुलाई से 18 जुलाई रात 11:59 बजे तक अपनी सीट स्वीकार करनी होगी. तय समय में सीट एक्सेप्ट नहीं करने वाले उम्मीदवार सीएसएएस काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे. इसके साथ ही संबंधित कॉलेज 16 जुलाई से 20 जुलाई शाम 4:59 बजे तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करेंगे. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को 21 जुलाई रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन एडमिशन फीस जमा करनी होगी. फीस जमा होने के बाद ही प्रोविजनल एडमिशन कंफर्म माना जाएगा. वहीं दूसरी सीट अलॉटमेंट लिस्ट 25 जुलाई को जारी की जाएगी.
ऐसे चेक करें अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस&amp;nbsp;

अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस जानने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले डीयू यूजी एडमिशन पोर्टल की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा.
इसके बाद Candidate Login के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपना सीयूईटी यूजी 2026 एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड डालें.
इसके बाद सिक्योरिटी कैप्चा भरकर लॉगिन करें.
लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड पर मौजूद First Round Allotment Status वाले लिंक पर क्लिक करें, जहां आपको अलॉट किए गए कॉलेज और कोर्स की पूरी जानकारी मिल जाएगी.&amp;nbsp;
फ्यूचर में इस्तेमाल के लिए इस अलॉटमेंट डिटेल को डाउनलोड करके सुरक्षित भी रख सकते हैं.&amp;nbsp;

सीट मिलने के बाद क्या करना होगा?
सीट अलॉट होने के बाद उम्मीदवारों को सबसे पहले एक्सेप्ट अलॉटेड सीट ऑप्शन चुनना होगा. इसके बाद संबंधित कॉलेज अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट की जांच करेगा. अगर कॉलेज किसी अतिरिक्त जानकारी या डॉक्यूमेंट की मांग करता है तो उम्मीदवारों को अपने डैशबोर्ड पर नियमित रूप से अपडेट देखते रहना होगा. डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के बाद ऑनलाइन फीस जमा करनी होगी, तभी एडमिशन प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी.&amp;nbsp;
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इस बार टूटा रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड&amp;nbsp;
इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन को लेकर छात्रों में गजब का उत्साह देखने को मिला. 2022 में सीएसएएस पोर्टल शुरू होने के बाद से इस बार सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं. कुल 2,73,751 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें 2,18,284 ने फेज 1 की प्रक्रिया पूरी की और 2,80,043 उम्मीदवारों ने अपनी कॉलेज और कोर्स प्राथमिकताएं लॉगिन कर दी. इस बार यूनिवर्सिटी में कुल 71,624 ग्रेजुएशन सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा. इसके अलावा रजिस्ट्रेशन आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार भी लड़कियों की भागीदारी लड़कों के मुकाबले ज्यादा रही. कुल 2,18,284 उम्मीदवारों में से 1,20,509 यानी करीब 55.5 प्रतिशत आवेदक महिलाएं हैं, जबकि 44.8 प्रतिशत आवेदक पुरुष है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ISRO Scientist Job: ISRO में कैसे मिलती है जॉब, कितनी होती है सैलरी और शिफ्ट टाइमिंग; यहां इस्तीफा देने का क्या है नियम?</title>
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        <description><![CDATA[ ISRO Scientist Job: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक बनना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है. चंद्रयान से लेकर गगनयान तक इसरो ने जिस तरह से दुनिया में भारत का डंका बजाया है, उसके पीछे यहां काम करने वाले वैज्ञानिक और इंजीनियर की मेहनत छिपी है. लेकिन हाल ही में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. दरअसल] सामने आए आंकड़े के अनुसार हर साल इसरो से करीब 120 वैज्ञानिक इस्तीफा दे रहे हैं.
इस वजह को देखते हुए अब सरकार ने इसरो के एग्जिट यानी इस्तीफे से जुड़े नियमों को पहले से ज्यादा सख्त बना दिया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इसरो में नौकरी कैसे मिलती है, यहां सैलरी और शिफ्ट टाइमिंग कैसी होती है. अगर कोई वैज्ञानिक इस्तीफा देना चाहे, तो उसके लिए क्या नियम तय किए गए हैं.&amp;nbsp;
हर साल इसरो से इस्तीफा दे रहे 120 वैज्ञानिक&amp;nbsp;
रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिकों ने इसरो छोड़ा है. इनमें यूआर राव सैटलाइट सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के कई एक्सपीरियंस वैज्ञानिक शामिल है. कुछ अधिकारी गगनयान, चंद्रयान-3 और दूसरे प्रमुख मिशनों से भी जुड़े हैं. स्थिति को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया आंतरिक निर्देश जारी किया है. अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर काम कर रहे ग्रुप ए वैज्ञानिकों के इस्तीफे या वीआरएस को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी. ऐसे सभी मामलों में अंतिम फैसला केंद्र स्तर पर लिया जाएगा. वहीं माना जा रहा है कि भारत में तेजी से बढ़ रहे प्राइवेट स्पेस सेक्टर के कारण एक्सपीरियंस वैज्ञानिकों की मांग बढ़ी है. &amp;nbsp;वहीं कहीं प्राइवेट कंपनियां बेहतर सैलरी और नेतृत्व की भूमिका दे रही है, जिसके चलते वैज्ञानिक प्राइवेट सेक्टर का रुख कर रहे हैं.
कैसे मिलती है इसरो में नौकरी&amp;nbsp;
अगर आपका भी इसरो में वैज्ञानिक या इंजीनियर बनने का सपना है, तो सबसे पहले आपके पास 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स सब्जेक्ट होने चाहिए. इसके बाद उम्मीदवार इलेक्ट्रॉनिक, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, सिविल, एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग या फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट में बीई बीटेक या संबंधित डिग्री कर सकते हैं. वैज्ञानिक और इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित करता है. ज्यादातर पदों के लिए कम से कम 65 प्रतिशत या निर्धारित सीजीपीए जरूरी होता है. इसरो में चयन लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर किया जाता है. इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नॉलोजी से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी इसरो में अवसर मिलने की संभावना ज्यादा रहती है.&amp;nbsp;
कितनी होती है इसरो वैज्ञानिकों की सैलरी&amp;nbsp;
इसरो में साइंटिस्ट पद का शुरुआती वेतन सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे लेवल 10 पर मिलता है. बेसिक सैलरी 56,100 रुपये प्रतिमाह होती है. इसके साथ महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, प्रोफेशनल अपडेट अलाउंस, एनपीएस योगदान समेत दूसरी सुविधाएं भी मिलती है. ऐसे में कुल महीने का वेतन पोस्टिंग के स्थान और बच्चों के आधार पर करीब 95,000 से लेकर 1 लाख रुपये से अधिक पहुंच सकता है. वहीं वैज्ञानिकों के प्रमोशन के साथ सैलरी में भी बढ़ोतरी की जाती है.&amp;nbsp;
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इसरो में कैसा होता है काम का माहौल और शिफ्ट टाइमिंग
इसरो में सामान्य तौर पर काम का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होता है. जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक परियोजनाओं के अनुसार अतिरिक्त समय भी काम करते हैं. यहां सप्ताह में 5 दिन काम करना होता है और 2 दिन का अवकाश रहता है. ऑफिस परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर भी बैन रहता है, संस्थान में वैज्ञानिकों को रिसर्च आधारित माहौल, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन और दूसरे कर्मचारी लाभ भी दिए जाते हैं.&amp;nbsp;
इसरो में इस्तीफा देने के नियम&amp;nbsp;
पहले इसरो के विभिन्न केंद्रों के निदेशक कुछ स्तर तक वैज्ञानिकों की स्थिति और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति को मंजूरी दे सकते थे, लेकिन नए निर्देशों के बाद गगनयान और दूसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की स्थिति पर सीधे मंजूर नहीं होंगे. संबंधित केंद्र के निदेशक अपनी सिफारिश के साथ आवेदन अंतरिक्ष विभाग को भेजेंगे, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ISRO, Scientist, Job:, ISRO, में, कैसे, मिलती, है, जॉब, कितनी, होती, है, सैलरी, और, शिफ्ट, टाइमिंग, यहां, इस्तीफा, देने, का, क्या, है, नियम</media:keywords>
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        <title>NEET UG Result 2026: 20 जुलाई तक जारी हो सकता है रिजल्ट, neet.nta.nic.in वेबसाइट पर ऐसे चेक कर पाएंगे अपना स्कोरकार्ड</title>
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        <description><![CDATA[ NEET UG Result 2026:&amp;nbsp;एनटीए जल्द ही री-नीट यूजी 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार 20 जुलाई तक नीट यूजी 2026 का रिजल्ट घोषित होने की संभावना है. रिजल्ट जारी होने के बाद 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए उम्मीदवारों को अपनी आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा.
आपको बता दें कि री-नीट परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की गई थी. इससे पहले 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा को पेपर लीक की आरोपी के बाद रद्द कर दिया गया था. दोबारा आयोजित परीक्षा देश भर के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई थी. परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था. यह परीक्षा अंग्रेजी और हिंदी समेत कुल 13 भाषाओं में आयोजित हुई थी.&amp;nbsp;
फाइनल आंसर की के आधार पर जारी होगा रिजल्ट&amp;nbsp;
एनटीए ने 13 जुलाई को प्रोविजनल आंसर की जारी की थी. उम्मीदवारों को 15 जुलाई तक आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया था. प्रत्येक प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 200 प्रति प्रश्न की प्रोसेसिंग फीस निर्धारित की गई थी, जिसका पेमेंट डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग के माध्यम से किया गया. वहीं सभी आपत्तियों की जांच विषय एक्सपर्ट्स की समिति करेगी. अगर किसी उम्मीदवार की आपत्ति सही पाई जाती है, तो संबंधित उत्तर में संशोधन किया जाएगा और संशोधित उत्तर सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होगा. इसके बाद तैयार की गई फाइनल आंसर की के बाद ही नीट यूजी 2026 का रिजल्ट अब घोषित किया जाएगा&amp;nbsp;
रि-चेकिंग या रि-इवैल्युएशन की सुविधा नहीं&amp;nbsp;
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि नीट यूजी की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच या पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है. एजेंसी के अनुसार ओएमआर शीट का मूल्यांकन पूरी तरह मशीन आधारित सॉफ्टवेयर से किया जाता है, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष रहती है. उम्मीदवारों को पहले ही ओएमआर और आंसर की पर आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया जा चुका है. इसके अलावा रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों की स्कैन की गई ओएमआर शीट और स्कोरकार्ड डिजिलॉकर पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे परीक्षार्थी भविष्य में जरूरत पड़ने पर आसानी से अपने डॉक्यूमेंट से डाउनलोड कर सकेंगे.&amp;nbsp;
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ऐसे चेक कर सकेंगे नीट यूजी 2026 का रिजल्ट&amp;nbsp;

नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टूडेंट्स को सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाना होगा.&amp;nbsp;
इसके बाद होम पेज पर नीट यूजी 2026 रिजल्ट लिंक पर क्लिक करना होगा.
अब आवेदन संख्या, पासवर्ड और दूसरी मांगी गई डिटेल भरनी होगी.
इस डिटेल को सबमिट करते ही स्क्रीन पर स्कोर कार्ड दिखाई देगा.
स्टूडेंट्स अपने स्कोर कार्ड को फ्यूचर के लिए डाउनलोड करके भी रख सकते हैं.

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, Result, 2026:, जुलाई, तक, जारी, हो, सकता, है, रिजल्ट, neet.nta.nic.in, वेबसाइट, पर, ऐसे, चेक, कर, पाएंगे, अपना, स्कोरकार्ड</media:keywords>
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        <title>Science of Happiness Course: DU में &amp;apos;साइंस ऑफ हैप्पीनेस&amp;apos; का बढ़ा क्रेज, जानें आखिर क्यों बढ़ रही है इस कोर्स की लोकप्रियता?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/science-of-happiness-course-du-में-साइंस-ऑफ-हैप्पीनेस-का-बढ़ा-क्रेज-जानें-आखिर-क्यों-बढ़-रही-है-इस-कोर्स-की-लोकप्रियता</link>
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        <description><![CDATA[ Science of Happiness Course : आज के समय में युवाओं के बीच पढ़ाई के साथ-साथ मेंटल हेल्थ, इमोशनल सपोर्ट और बेहतर लाइफस्टाइल को लेकर भी छात्रों की सोच तेजी से बदल रही है. यही वजह है कि अब ऐसे कोर्स भी लोकप्रिय हो रहे हैं, जो सिर्फ किताबों की जानकारी नहीं बल्कि लाइफ को बेहतर तरीके से जीने का नजरिया भी सिखाते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी का साइंस ऑफ हैप्पीनेस ऐसा ही एक कोर्स है, जिसे शुरू हुए अभी दो साल ही हुए हैं, लेकिन इस दौरान 2,000 से ज्यादा छात्र इसमें एडमिशन ले चुके हैं. यह बढ़ती संख्या बताती है कि छात्रों के बीच मेंटल वेलबिंग और पॉजिटिव साइकोलॉजी से जुड़े विषयों में इंटरेस्ट लगातार बढ़ रहा है. तो आइए जानते हैं कि यह कोर्स क्या है और आखिर इसकी लोकप्रियता इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है.
दो साल में 2,000 से ज्यादा छात्रों ने लिया एडमिशन
दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक, साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स शुरू होने के बाद से अब तक 2,000 से ज्यादा छात्र इसमें एडमिशन ले चुके हैं. हाल ही में कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस कोर्स के प्रोग्रेस पर चर्चा की गई. बैठक में उन कॉलेजों के प्रिंसिपल और प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जहां यह कोर्स पढ़ाया जा रहा है. सभी ने अपने एक्सपीरियंस शेयर किए और बताया कि छात्रों के बीच इस कोर्स को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.
कैसे शुरू हुआ साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने मार्च 2024 में रेखी फाउंडेशन फॉर हैप्पीनेस के साथ एक समझौता (MoU) किया था. इसके तहत रेखी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पीनेस की स्थापना की गई. इसके बाद यूनिवर्सिटी ने अंडर ग्रेजुएट (UG) छात्रों के लिए एक सेमेस्टर का यह वैल्यू एडेड कोर्स शुरू किया.
अभी किन छात्रों के लिए उपलब्ध है यह कोर्स?
यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर के. रत्नाबली के अनुसार, फिलहाल यह कोर्स अंडर ग्रेजुएट के पहले चार सेमेस्टर के छात्रों के लिए उपलब्ध है. उन्होंने यह भी बताया कि इसे पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड पेपर के रूप में शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है.
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आखिर क्यों बढ़ रही है इस कोर्स की लोकप्रियता?
समीक्षा बैठक के दौरान कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि खुश रहना लाइफ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और इसे पॉजिटिव सोच साथ ही अच्छे कामों के जरिए हासिल किया जा सकता है. उनका कहना था कि दुनिया एक बेहतर जगह है और अगर व्यक्ति अच्छे काम करता है तो उसे अच्छे रिजल्ट भी मिलते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पहले खुशी और इमोशनल हेल्थ जैसे विषयों पर आधारित कोर्स बहुत कम देखने को मिलते थे, लेकिन बदलते सामाजिक माहौल और युवाओं की जरूरतों को देखते हुए अब ऐसे कोर्स पहले से ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं. यही वजह है कि छात्रों का इंटरेस्ट भी तेजी से इस दिशा में बढ़ रहा है.
कहां पढ़ाया जा रहा है यह कोर्स?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार, फिलहाल यह कोर्स यूनिवर्सिटी के 17 कॉलेजों और डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलॉजी में पढ़ाया जा रहा है. जिन प्रमुख कॉलेजों में यह कोर्स उपलब्ध है, उनमें मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन, हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), गार्गी कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज और आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज शामिल हैं.
माइंड लैब &amp;nbsp;पर भी दिया जा रहा है जोर
इस कोर्स को और प्रभावी बनाने के लिए कई कॉलेज अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित कर रहे हैं. मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज ने यूनिवर्सिटी को जानकारी दी कि उन्होंने इस कोर्स से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए माइंड लैब स्थापित की है. वहीं अन्य कॉलेज भी इसी तरह की सुविधाएं शुरू करने की योजना बना रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>MSME सेक्टर में करियर का सुनहरा अवसर, ICAI के Corporate Mitra प्रोग्राम के लिए आवेदन शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ Corporate Mitra Scheme 2026: अगर आप ग्रेजुएट हैं और अकाउंटिंग, टैक्सेशन या फाइनेंस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो आपके लिए बड़ी खबर आई है. दरअसल, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट (ICAI) ने कॉर्पोरेट मित्र प्रोग्राम के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 जुलाई से शुरू कर दी है. इच्छुक उम्मीदवार 31 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित पैरा-प्रोफेशनल तैयार करना है, जो देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अकाउंटिंग, टैक्सेशन, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कार्यों में सहयोग दे सकें.
यह कार्यक्रम केंद्रीय बजट में घोषित किया गया था. इसके तहत सरकार ने आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई को मिलकर एमएसएमई सेक्टर के लिए प्रोफेशनल्स तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी. इस पहल के तहत आईसीएआई ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से इस कोर्स को SWAYAM Plus प्लेटफार्म पर शुरू किया है.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?&amp;nbsp;
इस कार्यक्रम में भारत का कोई भी नागरिक आवेदन कर सकता है, जिसने किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया हो. ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्र भी आवेदन के पात्र हैं, लेकिन उन्हें प्रमाण पत्र तभी मिलेगा जब वह अपनी डिग्री सफलतापूर्वक पूरी कर लेंगे. आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 20 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए. वहीं कॉर्पोरेट मित्र कोर्स SWAYAM Plus प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया गया है. इसके लिए 3000 फीस निर्धारित किया गया है, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना होगा.&amp;nbsp;
150 घंटे की पढ़ाई और 6 महीने की ट्रेनिंग&amp;nbsp;
यह कार्यक्रम IITM Pravartak के माध्यम से संचालित किया जाएगा. इसमें कुल 150 घंटे की पढ़ाई होगी और इससे एनसीआरएफ लेवल 5.5 के तहत क्रेडिट योग्य बनाया गया है. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को 6 महीने की ऑन द जॉब ट्रेनिंग भी करनी होगी. इसके बाद ही अंतिम मूल्यांकन और प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी होगी.&amp;nbsp;
प्रोग्राम में क्या-क्या सिखाया जाएगा?&amp;nbsp;
इस कोर्स को 6 प्रमुख मॉडलों में विभाजित किया गया है. इसमें अकाउंटिंग, टैक्सेशन, बैंकिंग, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, लीगल एंड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग जैसे सब्जेक्ट शामिल है. अकाउंटिंग मॉड्यूल में जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, बैंक रिकॉन्सिलिएशन, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट तैयार करना सिखाया जाएगा. साथ ही एमएस एक्सेल और टेली जैसे डिजिटल टूल्स का भी उपयोग कराया जाएगा. टैक्सेशन मॉड्यूल में इनकम टैक्स, टैक्स रिटर्न फाइलिंग, टीडीएस, टीसीएस, एडवांस टैक्स और जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी.
वहीं बैंकिंग मॉड्यूल में एमएसएमई के लिए बैंकिंग सिस्टम, क्रेडिट आवश्यकताओं, डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी पर फोकस रहेगा. फाइनेंशियल मैनेजमेंट में फाइनेंशियल स्टेटमेंट का विश्लेषण, वर्किंग कैपिटल और जरूरी डॉक्यूमेंट की जानकारी दी जाएगी. लीगल एंड सेक्रेटेरियल मॉड्यूल में कंपनी कानून, एमएसएमई रजिस्ट्रेशन, लेबर कोड, बोर्ड मीटिंग, एजीएम, सेबी नियम और एमएसएमई ऑनलाइन डिस्प्यूट रेजोल्यूशन पोर्टल से जुड़ी जानकारी शामिल होगी. वहीं कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग में कास्टिंग, बजटरी कंट्रोल और स्टैंडर्ड कॉस्टिंग जैसे सब्जेक्ट पढ़ाए जाएंगे.
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ऐसे होगा मूल्यांकन&amp;nbsp;
कोर्स पूरा करने और 6 महीने की ऑन द जॉब ट्रेनिंग के बाद उम्मीदवारों का सेंटर आधारित एमसीक्यू परीक्षा के जरिए मूल्यांकन किया जाएगा. परीक्षा का आयोजन आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई संयुक्त रूप से करेंगे. परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को SWAYAM Plus का वेरीफाएबल सर्टिफिकेट दिया जाएगा. जो व्यक्ति परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें दोबारा पूरे कार्यक्रम के लिए नया रजिस्ट्रेशन कर फीस जमा करनी होगी, क्योंकि एक ही मूल्यांकन में दोबारा परीक्षा देने की सुविधा नहीं होगी.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Cheap Engineering Colleges in USA: USA से करनी है इंजीनियरिंग? ये हैं 5 सबसे सस्ते और अच्छे बीटेक कॉलेज</title>
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        <description><![CDATA[ Cheap Engineering Colleges in USA:&amp;nbsp;विदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका सबसे पसंदीदा देश में गिना जाता है. यहां की यूनिवर्सिटीज आधुनिक रिसर्च, लैब, इंडस्ट्री से जुड़ी पढ़ाई और बेहतर प्लेसमेंट के लिए दुनिया भर में पहचान रखती है. हालांकि अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई महंगी मानी जाती है, लेकिन कई ऐसी यूनिवर्सिटी भी है, जहां अपेक्षाकृत कम फीस में अच्छी शिक्षा हासिल की जा सकती है. ऐसे में अगर आप भी अमेरिका से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो चलिए आज हम आपको 5 सबसे सस्ते और अच्छे बीटेक कॉलेज बताते हैं.&amp;nbsp;
अमेरिका में इंजीनियरिंग पढ़ने के फायदे&amp;nbsp;
अमेरिका में भारत की तरह बीटेक नाम की डिग्री नहीं दी जाती. इसकी जगह छात्रों को बैचलर ऑफ साइंस इन इंजीनियरिंग या इंजीनियरिंग साइंस की डिग्री मिलती है. यह 4 साल का अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम होता है. जिसमें बीटेक की तरह ही कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे कई ऑप्शन उपलब्ध होते हैं. वहीं अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में छात्रों को आधुनिक लैब्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलता है. कई संस्थाओं के बड़े टेक कंपनियों के साथ मजबूत संबंध होते हैं, जिससे पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप के बाद में नौकरी के अवसर बढ़ जाते हैं. यहां का फ्लेक्सिबल कोर्स स्ट्रक्चर छात्रों को इंजीनियरिंग के साथ बिजनेस या डेटा साइंस जैसे विषय भी पढ़ने की सुविधा देता है.&amp;nbsp;
अमेरिका के पांच सस्ते और अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज&amp;nbsp;
1. मिनट स्टेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
नॉर्थ डकोटा के मिनोट शहर में स्थित यह यूनिवर्सिटी कम फीस वाले ऑप्शंस में शामिल है. यहां चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की औसत फीस करीब 19,788 डॉलर है. यूनिवर्सिटी में हजारों छात्र पढ़ाई करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र भी शामिल है.&amp;nbsp;
2. फेयेटविले स्टेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
नॉर्थ कैरोलिना स्थिति यह यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग और अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए किफायती मानी जाती है. यहां औसत वार्षिक फीस लगभग 19,857 डॉलर है. इसके अलावा शहर में रहने का खर्च भी अमेरिका के कई अन्य शहरों की तुलना में कम माना जाता है.&amp;nbsp;
3. डेल्टा स्टेट यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
मिसिसिपी के क्लीवलैंड शहर में स्थित इस यूनिवर्सिटी में कई इंजीनियरिंग संबंधित प्रोग्राम उपलब्ध है. यहां 1 वर्ष की औसत फीस करीब 20,336 डॉलर है. छोटा कैंपस और सुरक्षित माहौल इसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आकर्षक बनाता है.&amp;nbsp;
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4. ला रोश यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में स्थित यूनिवर्सिटी की सालाना फीस लगभग 21,818 डॉलर है. यहां विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई का अच्छा माहौल उपलब्ध है और शहर भी शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है.&amp;nbsp;
5. वेस्टर्न कैरोलिना यूनिवर्सिटी&amp;nbsp;
नॉर्थ कैरोलिना के कुल्लोही शहर में स्थित इस यूनिवर्सिटी में लगभग 10 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं. यहां 1 साल की औसत फीस लगभग 22,042 डॉलर है. प्राकृतिक वातावरण और शांत कैंपस के कारण यह छात्रों के बीच लोकप्रिय ऑप्शन माना जाता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CBSE 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जल्द, 18 जुलाई से पहले जारी होने की उम्मीद</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा का परिणाम जल्द जारी कर सकता है. संभावना है कि रिजल्ट 18 जुलाई से पहले घोषित कर दिया जाए. हालांकि, बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में छात्रों को सलाह है कि वे रिजल्ट से जुड़ी जानकारी के लिए केवल बोर्ड के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर ही नजर रखें.
कैसे देख सकेंगे अपना रिजल्ट?
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र ऑनलाइन अपना परिणाम देख सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्म तिथि जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी. इसके अलावा छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट भी डाउनलोड कर सकेंगे.
बोर्ड ने क्यों दो हिस्सों में कराई परीक्षा?
इस साल सीबीएसई ने पहली बार 10वीं की बोर्ड परीक्षा दो चरणों में आयोजित की है. पहली परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य थी, जबकि दूसरी परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई, जिन्होंने अपने अंकों में सुधार करने के लिए दोबारा परीक्षा देने का विकल्प चुना था. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को एक और मौका देना है, ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें.
दो परीक्षा दीं तो क्या होगा?
बोर्ड के नियमों के अनुसार, अगर &amp;nbsp;किसी छात्र ने दोनों परीक्षाएं दी हैं तो अंतिम परिणाम में उसी विषय के अधिक अंक मान्य होंगे, जिसमें छात्र का प्रदर्शन बेहतर रहा है. इससे विद्यार्थियों को बिना किसी अतिरिक्त नुकसान और प्रेशर के अपने मार्क्स सुधारने का मौका मिलता है.
कैसे मिलेगी ओरिजिनल मार्कशीट?
रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्र अपनी ऑनलाइन मार्कशीट देख और डाउनलोड कर सकेंगे. बाद में संबंधित स्कूलों के माध्यम से Original Marksheet और &amp;nbsp;जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जाएंगे. अगर &amp;nbsp;किसी छात्र को अपने मार्क्स &amp;nbsp;को लेकर कोई परेशानी होती है तो बोर्ड द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार वह आगे की कार्रवाई के लिए आवेदन कर सकेगा.
कहां देख सकते हैं रिजल्ट?

सीबीएसई (CBSE)की आधिकारिक वेबसाइट पर
डिजिलॉकर
उमंग ऐप

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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU SOL Admission 2026: DU के SOL में यूजी&amp;पीजी दाखिले शुरू, इस बार दो नए कोर्स भी; WhatsApp पर मिलेगा एडमिशन अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) ने academic session 2026-27 के लिए ग्रेजुएशन (यूजी) और पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) कोर्स में एडमिशन शुरू कर दिए हैं. अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन एप्लीकेशन भर सकते हैं. SOL उन छात्रों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है, जो नियमित कॉलेज नहीं जा सकते, नौकरी के साथ पढ़ाई करना चाहते हैं या किसी और कारण से ओपन और डिस्टेंस मोड में पढ़ाई करना चाहते हैं. दाखिले डिपार्टमेंट ऑफ डिस्टेंस एंड कंटीन्यूइंग एजुकेशन (DDCE) के तहत लिए जा रहे हैं.
शुरू हो रहे दो नए केस
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग (COL) की निदेशक प्रो. पायल मागो ने Abp news को बताया कि इस बार SOL दो नए कोर्स शुरू कर रहा है. इनमें एमबीए (हेल्थकेयर) और बीएससी कंप्यूटर साइंस शामिल हैं. इन नए पाठ्यक्रमों के शुरू होने से छात्रों को स्वास्थ्य प्रबंधन और कंप्यूटर साइंस जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में पढ़ाई का नया अवसर मिलेगा. इन दोनों कोर्स को लेकर पहले से तैयारी की जा रही थी और अब इन्हें नए सत्र में शुरू किया जा रहा है.
एडमिशन प्रोसेस में जोड़ी नई सुविधा
इस साल एडमिशन प्रक्रिया में एक नई सुविधा भी जोड़ी गई है. अब आवेदन करने वाले छात्रों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए ओटीपी और एडमिशन से जुड़े जरूरी अपडेट भी मिलेंगे. इससे छात्रों को बार-बार वेबसाइट देखने की जरूरत कम होगी और आवेदन प्रक्रिया पहले से आसान हो जाएगी. SOL के कुछ पाठ्यक्रमों में दाखिले पहले से चल रहे हैं. इनमें एमबीए, एम.लिब. साइंस, बी.लिब. साइंस और पीजीडीएडीएलएम जैसे कोर्स शामिल हैं. इन कार्यक्रमों के लिए आवेदन 17 जून से ही लिए जा रहे हैं.
विदेशी भाषा सीखने के भी ऑप्शंस
इसके अलावा कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के ओपन लर्निंग डेवलपमेंट सेंटर (OLDC) में जो छात्र विदेशी भाषा सीखना चाहते हैं, उनके लिए भू एप्लीकेशन खुली हैं. यहां एक साल के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कराए जा रहे हैं. छात्र जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, इटैलियन, पुर्तगाली, चीनी, जापानी और कोरियाई जैसी आठ विदेशी भाषाएं सीख सकते हैं. इन कोर्सों का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के संबंधित भाषा विभागों के सहयोग से किया जा रहा है.
ऑनलाइन पढ़ाई कराने की भी तैयारी
प्रो. पायल मागो ने बताया कि आने वाले समय में इन विदेशी भाषा पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन मोड में भी शुरू करने की तैयारी है. इससे दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों के छात्र भी आसानी से इन कोर्सों का लाभ उठा सकेंगे. कुल मिलाकर इस बार SOL ने नए कोर्स, डिजिटल सुविधाओं और भाषा से संबंधित कोर्स के जरिए छात्रों के लिए पढ़ाई के ज़्यादा ऑप्शंस दिए हैं.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SOL, Admission, 2026:, के, SOL, में, यूजी-पीजी, दाखिले, शुरू, इस, बार, दो, नए, कोर्स, भी, WhatsApp, पर, मिलेगा, एडमिशन, अपडेट</media:keywords>
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        <title>Telangana UPSC Free Coaching:  तेलंगाना में फ्री UPSC कोचिंग, हर महीने मिलेगा 5000 रुपये स्टाइपेंड; जानें कैसे करें अप्लाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Telangana UPSC Free Coaching:&amp;nbsp;अगर आप भी UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं लेकिन महंगी कोचिंग फीस की वजह से पीछे हट जाते हैं, तो तेलंगाना सरकार की तरफ से एक बेहतरीन मौका सामने आया है. आपको बता दें की तेलंगाना बैकवर्ड क्लासेज वेलफेयर डिपार्टमेंट ने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा 2027 के लिए एक फ्री लॉन्ग टर्म कोचिंग प्रोग्राम शुरू किया है. यह कोचिंग हैदराबाद के साईबाबाद इलाके में स्थित TG BC स्टडी सर्कल में TGBCESDTC यानी तेलंगाना BC Employability Skill Development and Training Center के जरिए कराई जाएगी.&amp;nbsp; उम्मीदवार इसके लिए ऑफिशियल वेबसाइट tgbcstudycircle.cgg.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
आवेदन की तारीखें और चयन प्रक्रिया

15 जुलाई 2026 &amp;ndash; कोचिंग प्रोग्राम का नोटिफिकेशन जारी
17 जुलाई 2026 &amp;ndash; ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू
7 अगस्त 2026 &amp;ndash; ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख
13 अगस्त 2026 &amp;ndash; हॉल टिकट डाउनलोड करना शुरू
16 अगस्त 2026 &amp;ndash; स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित होगा
19 अगस्त 2026 &amp;ndash; रिजल्ट घोषित किया जाएगा
21 अगस्त 2026 &amp;ndash; सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू
24 अगस्त 2026 &amp;ndash; क्लासेज शुरू होंगी, जो मई 2027 तक चलेंगी

चयन प्रक्रिया:

कुल 150 उम्मीदवारों को दाखिला मिलेगा
100 उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए होगा
50 उम्मीदवार जो पहले से UPSC प्रीलिम्स पास कर चुके हैं, उन्हें बिना टेस्ट के सीधे दाखिला मिलेगा (योग्यता शर्तें पूरी करने पर)

यह भी पढ़ेंः DU SOL Admission 2026: DU के SOL में यूजी-पीजी दाखिले शुरू, इस बार दो नए कोर्स भी; WhatsApp पर मिलेगा एडमिशन अपडेट
स्टाइपेंड, सुविधाएं और योग्यता शर्तें
इस कोचिंग प्रोग्राम की सबसे खास बात है कि इसमें चुने गए उम्मीदवारों को हर महीने 5000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए अटेंडेंस की शर्तें पूरी करनी होंगी. इसके अलावा एक बार के लिए 5000 रुपये का बुक ग्रांट भी मिलेगा, साथ ही स्टडी सर्कल की लाइब्रेरी इस्तेमाल करने की सुविधा और अनुभवी फैकल्टी से पढ़ाई कराई जाएगी.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;इस कोचिंग के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए, साथ ही उसे UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा 2027 की सभी योग्यता शर्तें भी पूरी करनी होंगी. इसके साथ ही परिवार की सालाना आय ग्रामीण क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए 1.5 लाख रुपये और शहरी क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>School Sex Education:  स्कूलों में जल्द अनिवार्य हो सकती है सेक्स एजुकेशन, सुप्रीम कोर्ट की चिंता पर सरकार का अपडेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/school-sex-education-स्कूलों-में-जल्द-अनिवार्य-हो-सकती-है-सेक्स-एजुकेशन-सुप्रीम-कोर्ट-की-चिंता-पर-सरकार-का-अपडेट</link>
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        <description><![CDATA[ देश के स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ी पहल होती दिख रही है. सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि इस विषय पर 26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है. अब अदालत की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है. इस पहल का उद्देश्य किशोरों को सही जानकारी देना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और पॉक्सो कानून के संभावित दुरुपयोग को कम करना है.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सरकार ने दी अहम जानकारी
यह मामला किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा था कि स्कूलों में यौन शिक्षा को लेकर क्या तैयारी की गई है. इसके जवाब में सरकार ने बताया कि विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा.
15 से 18 वर्ष के किशोरों से जुड़े मामलों पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों पर चिंता जताई. कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों को हर परिस्थिति में गंभीर आपराधिक अपराध की श्रेणी में रखना उचित नहीं हो सकता. इसी वजह से किशोरों के अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने तैयार किया रोडमैप
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. समिति में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के विशेषज्ञ, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. समिति को ऐसा व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे किशोरों को उनके अधिकारों, यौन सुरक्षा और पॉक्सो कानून के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके.
&#039;सेक्स एजुकेशन समय की जरूरत&#039;, पैरेंट्स एसोसिएशन ने किया समर्थन
इस मामले पर एबीपी लाइव से बातचीत में पैरेंट्स एसोसिएशन के डायरेक्टर अशोक अग्रवाल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में लंबे समय से व्यापक सेक्स एजुकेशन की आवश्यकता महसूस की जा रही है. उनके अनुसार आज के बच्चे पहले की तुलना में अधिक जागरूक और जिज्ञासु हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार भ्रमित हो जाते हैं. यदि स्कूलों में वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से इस विषय की पढ़ाई कराई जाएगी तो किशोर बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होंगे और अनावश्यक भ्रम से बच सकेंगे.
परिवारों में संवाद की कमी से बढ़ती हैं गलतफहमियां
अशोक अग्रवाल का कहना है कि अधिकांश परिवारों में आज भी यौन शिक्षा जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत नहीं होती. ऐसे में बच्चों को सही जानकारी नहीं मिल पाती और वे अधूरी या भ्रामक सूचनाओं के आधार पर फैसले लेने लगते हैं. उनका मानना है कि स्कूलों में व्यवस्थित शिक्षा मिलने से किशोर रिश्तों, सीमाओं और जिम्मेदारियों को अधिक परिपक्वता के साथ समझ सकेंगे.
&#039;बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता दोनों बढ़ेंगी&#039;
सोशल वर्कर योगिता भयाना ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि किशोरों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यौन शिक्षा को अनिवार्य बनाने का सुझाव महत्वपूर्ण है. उनके मुताबिक इससे पॉक्सो कानून के संभावित दुरुपयोग में कमी आने के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि इस तरह की शिक्षा केवल कानूनी जानकारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों को सुरक्षित व्यवहार, व्यक्तिगत अधिकार और जिम्मेदार फैसले लेने की समझ भी विकसित करेगी.
अदालत की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
फिलहाल विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास है. अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद स्कूलों के पाठ्यक्रम में व्यापक यौन शिक्षा को शामिल करने की दिशा में औपचारिक कदम उठाए जा सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP Police Constable Result 2026: इस दिन जारी हो सकता है यूपी कांस्टेबल भर्ती का रिजल्ट, एक क्लिक में दूर हो जाएंगे सारे शक</title>
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        <description><![CDATA[ UP Police Constable Result 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में शामिल लाखों परीक्षार्थियों का इंतजार अब जल्दी खत्म होने वाला है. बोर्ड की ओर से जल्द ही कांस्टेबल भर्ती का रिजल्ट जारी किया जा सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, परिणाम जुलाई 2026 के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना जताई जा रही है. रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर कार्ड और मेरिट लिस्ट देख सकेंगे. हालांकि, बोर्ड की ओर से अभी तक रिजल्ट की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है.
आपको बता दें कि यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का आयोजन 8, 9 और 10 जून 2026 को ऑफलाइन मोड में किया गया था. परीक्षा के कुछ दिन बाद बोर्ड ने प्रोविजनल आंसर की भी जारी कर दी थी. अब अभ्यर्थियों की नजरें सिर्फ रिजल्ट पर टिकी हैं. इस भर्ती अभियान के जरिए 32,679 कांस्टेबल पदों पर नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए करीब 29 लाखों में उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिससे यह प्रदेश की सबसे बड़े पुलिस भर्तियों में शामिल हो गई.&amp;nbsp;
रिजल्ट के साथ जारी होगी मेरिट लिस्ट&amp;nbsp;
यूपीपीआरपीबी रिजल्ट के साथ मेरिट लिस्ट भी जारी करेगा. मेरिट लिस्ट पीडीएफ में चयनित परीक्षार्थियों के रोल नंबर शामिल होंगे. उम्मीदवार पीडीएफ डाउनलोड करने के बाद कंट्रोल एफ की मदद से अपना रोल नंबर आसानी से खोल सकेंगे. जिन उम्मीदवारों का नाम मेरिट लिस्ट में होगा, उन्हें भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों के लिए बुलाया जाएगा.&amp;nbsp;
ऐसे चेक कर सकेंगे रिजल्ट&amp;nbsp;

रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले यूपीपीआरपीबी के आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाएं.
इसके बाद होम पेज पर यूपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर या बर्थ डेट दर्ज करें.
सबमिट करते ही स्क्रीन पर रिजल्ट और स्कोर कार्ड दिखाई देगा.
फ्यूचर के लिए आप रिजल्ट डाउनलोड करके इसका प्रिंट आउट ले सकते हैं.&amp;nbsp;

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स्कोरकार्ड में क्या-क्या होगा?
रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों के स्कोर कार्ड में कोई जरूरी जानकारियां दर्ज होंगी. इनमें उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, कैटेगरी, अंक, क्वालीफाइंग स्टेटस और अगले चरण से जुड़े दिशा-निर्देश शामिल होंगे. अगर बोर्ड कट ऑफ जारी करता है तो उसकी जानकारी भी रिजल्ट के साथ-साथ उपलब्ध कराई जाएगी.
रिजल्ट के बाद क्या होगा?
वहीं लिखित परीक्षा पास करना अंतिम चरण नहीं माना गया है. सफल उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होना होगा. इसके तहत सबसे पहले फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट, फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट, इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल एग्जामिनेशन कराया जाएगा. इन सभी चरणों में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का नाम अंतिम मेरिट लिस्ट में शामिल किया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>US Army Recruitment Rules: क्या किसी भारतीय को मिल सकती है अमेरिकन स्पेशल फोर्स में नौकरी, जानिए क्या है नियम?</title>
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        <description><![CDATA[ US Army Recruitment Rules: अमेरिका में नौकरी और नागरिकता पाने का सपना देखने वाले कई भारतीयों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या वे सीधे अमेरिका या स्पेशल फोर्स में शामिल हो सकते हैं? हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी चर्चा हुई है. बता दें, अमेरिकी सेना भर्ती और इमीग्रेशन नियम इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट हैं. किसी विदेशी नागरिक के लिए अमेरिकी सेना में भर्ती होना संभव तो है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या किसी भारतीय को अमेरिकी स्पेशल फोर्स में नौकरी मिल सकती है और इसे लेकर अमेरिका नियम क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या भारतीय ज्वाइन कर सकते हैं, अमेरिकन स्पेशल फोर्स?&amp;nbsp;
किसी भारतीय नागरिक के लिए भारत से सीधे अमेरिकी स्पेशल फोर्स या सेना में भर्ती होने का नियम नहीं है. अमेरिकी सेना में भर्ती होने के लिए केवल अमेरिका पहुंचना ही पर्याप्त नहीं है, सबसे पहले उस नागरिक को अमेरिका में वैध स्थायी निवासी यानी ग्रीन कार्ड का दर्जा हासिल करना होगा. इसके बाद ही वह अमेरिकी सेना में भर्ती के लिए आवेदन कर सकता है. स्पेशल फोर्स में चयन भी सामान्य भर्ती के बाद तय प्रक्रिया और पात्रता के आधार पर होता है. मौजूदा नियमों के अनुसार ऐसे लोग जो स्टूडेंट विजा, वर्क वीजा, टूरिस्ट वीजा या किसी अन्य स्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं, वह सेना में भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकते.&amp;nbsp;&amp;nbsp;सेना में शामिल होने के लिए पहले था एक विशेष कार्यक्रम&amp;nbsp;
अमेरिका में पहले मिलिट्री एक्सेसन्स वाइटल टू द नेशन इंटरेस्ट नाम का एक कार्यक्रम चलाया जाता था. इसके तहत कुछ स्पेशल कौशल जैसे चिकित्सा सेवाओं, चुनिंदा विदेशी भाषाओं का ज्ञान रखने वाले गैर अमेरिकी नागरिकों को बिना ग्रीन कार्ड की भी सेना में शामिल होने का मौका मिल सकता था. हालांकि यह कार्यक्रम फिलहाल बंद है और नए आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या सेना में सेवा से जल्दी मिल सकती है नागरिकता?&amp;nbsp;
अमेरिकी कानून के तहत सेना में सम्मान जनक सेवा देने वाले ग्रीन कार्ड धारकों को सामान्य आवेदन की तुलना में नागरिकता के लिए कुछ विशेष छूट मिल सकती है. अमेरिकी इमीग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 328 और 329 के तहत योग्य सैन्यकर्मी तय शर्तें पूरी करने पर जल्दी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. शांति काल में कम से कम 1 वर्ष की सम्मान जनक सेवा देने वाले स्थायी निवासी नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र हो सकते हैं. वहीं अमेरिका की ओर से घोषित विशेष सैन्य परिस्थितियों के दौरान सेवा देने वाले कुछ सैनिकों को सामान्य निवास संबंधी शर्तों से भी राहत मिल सकती है, हालांकि केवल सेना में भर्ती होना नागरिकता के गारंटी नहीं है. आवेदक के अच्छे आचरण, अंग्रेजी भाषा की जानकारी और नागरिक शास्त्र से जुड़े नियमों सहित दूसरे कानूनी मानकों को भी पूरा करना होता है.
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क्या विदेश से किया जा सकता है आवेदन?
अमेरिकी सेना नियमों के अनुसार, कोई भी विदेशी नागरिक अपने देश में रहते हुए अमेरिकी सेना में भर्ती नहीं हो सकता. भर्ती के लिए उम्मीदवार को अमेरिका में मौजूद होना और उसके पास वैलिड ग्रीन कार्ड होना अनिवार्य है. यानी भारत में रहकर सीधे अमेरिकी सेना या स्पेशल फोर्स में शामिल होने का ऑप्शन उपलब्ध नहीं है.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>MBBS Seats Increased in India 2026: मेडिकल छात्रों के लिए खुशखबरी! NMC ने बढ़ाईं 9911 MBBS सीटें, 25 नए मेडिकल कॉलेजों की मिली मंजूरी </title>
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        <description><![CDATA[ MBBS Seats Increased in India 2026:&amp;nbsp;नीट यूजी 2026 के जरिए एमबीबीएस में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए खुशखबरी है. नेशनल मेडिकल काउंसिल ने शैक्षणिक स्तर 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीटों की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है. इस बार देशभर में एमबीबीएस सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा किया गया है.
नई सीटों से जुड़ने के बाद अब 823 मेडिकल कॉलेज में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन होगा. इसके साथ ही 25 नए मेडिकल कॉलेज को भी मंजूरी दी गई है, जिससे मेडिकल एजुकेशन का दायरा और बढ़ेगा. यह सीट मैट्रिक्स नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के दौरान एडमिशन का आधार बनेगा.&amp;nbsp;
9911 नई सीटें बढ़ीं, कुल सीटें 1.36 लाख के पार&amp;nbsp;
एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए देशभर में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी. इनमें 1,27,028 पहले से स्वीकृत सीटें हैं, जबकि इस वर्ष 9,911 नई सीटों को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा 25 नए मेडिकल कॉलेजों में 2,400 नई सीटें भी जोड़ी गई है.&amp;nbsp;
सरकारी और निजी दोनों कॉलेजों में बढ़ीं सीटें&amp;nbsp;
इस बार सरकारी और प्राइवेट दोनों मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या में बढ़ाई गई है. देश में 441 सरकारी मेडिकल कॉलेज में अब कल 63,296 सीटें उपलब्ध होंगी. इनमें 2,111 नई सीटें जोड़ी गई है. वहीं 382 प्राइवेट कॉलेज में कुल 73,643 सीटें होंगी, जहां इस वर्ष 7,800 सीटों का इजाफा किया गया है.
25 नए मेडिकल कॉलेजों को भी मिली मंजूरी&amp;nbsp;
एनएमसी ने इस शैक्षणिक सत्र के लिए 25 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है. इनमें 7 सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल है, जहां कुल 400 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी. वहीं 18 नए प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 2,000 सीटों पर एडमिशन मिलेगा. बाकी नई सीटें पहले से संचालित मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश क्षमता बढ़ाकर जोड़ी गई है. इसके अलावा नेशनल मेडिकल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि सभी मेडिकल कॉलेज को केवल उन्हीं सीटों पर एडमिशन देना होगा, जिन्हें आधिकारिक मंजूरी मिली है. किसी भी कॉलेज को स्वीकृत क्षमता से ज्यादा छात्रों का एडमिशन देने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी संस्थान की सीटों में आगे बदलाव होता है, तो एमएआरबी संशोधित आदेश जारी करेगा और नई सीट मैट्रिक्स आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी.&amp;nbsp;
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प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के लिए 7 दिन की समय सीमा&amp;nbsp;
जिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को इस वर्ष नया संस्थान शुरू करने या सीटें बढ़ाने की मंजूरी मिली है, उन्हें 7 दिनों के अंदर इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी जमा करनी होगी. सभी औपचारिकताएं पूरी होने और डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के बाद मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड संबंधित संस्थाओं को लेटर ऑफ परमिशन जारी करेगा.&amp;nbsp;
इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ीं एमबीबीएस सीटें&amp;nbsp;
नई सीटों के वितरण में देश के कई राज्यों को बड़ा फायदा मिला है. सबसे ज्यादा 1300 सीटें कर्नाटक में बढ़ाई गई है, इसके बाद तमिलनाडु में 950, राजस्थान में 900, पश्चिम बंगाल में 825, तेलंगाना में 810 और उत्तर प्रदेश में 800 नई सीटों को मंजूरी मिली है. बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भी सीटों में अच्छी बढ़ोतरी की गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>MCD Edulife 2.0 Portal Launched: MCD स्कूल होंगे हाईटेक, EduLife 2.0 से छात्रों की पढ़ाई, रिकॉर्ड और स्कूल प्रबंधन अब पूरी तरह डिजिटल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mcd-edulife-20-portal-launched-mcd-स्कूल-होंगे-हाईटेक-edulife-20-से-छात्रों-की-पढ़ाई-रिकॉर्ड-और-स्कूल-प्रबंधन-अब-पूरी-तरह-डिजिटल</link>
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        <description><![CDATA[ MCD Edulife 2.0 Portal Launched:&amp;nbsp; दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मंगलवार को लॉन्च किए गए EduLife 2.0 पोर्टल के माध्यम से 1500 से अधिक एमसीडी स्कूलों के छात्र रिकॉर्ड, शैक्षणिक योजना, स्कूल प्रशासन और अभिभावकों से जुड़ी व्यवस्थाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा. इसका उद्देश्य स्कूलों की कार्यप्रणाली को ज्यादा व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है.
स्कूलों का पूरा रिकॉर्ड अब एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा
EduLife 2.0 के जरिए सभी स्कूलों की आवश्यक जानकारी केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध रहेगी. इससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आरटीआई, हाउस और संसदीय प्रश्नों के साथ-साथ नीति निर्माण से जुड़ी सूचनाओं के लिए बार-बार स्कूलों से अलग-अलग रिपोर्ट मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पोर्टल पर जानकारी नियमित रूप से अपडेट होती रहेगी, जिससे अधिकारियों को हर समय नया डेटा मिलेगा. इसके साथ ही शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर डेटा संकलन का अतिरिक्त बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा.
टीचर्स को मिलेगा डिजिटल सपोर्ट, कागजी काम होगा कम
पोर्टल में शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप लेसन प्लान, वर्कशीट, मूल्यांकन उपकरण, डिजिटल प्लानर और अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है. शिक्षक छात्रों के मूल्यांकन संबंधी विवरण ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, उनकी शैक्षणिक प्रगति पर नजर रख सकेंगे और डिजिटल कंटेंट का उपयोग भी कर पाएंगे. इससे कागजी कार्यवाही घटेगी और शिक्षक विद्यार्थियों के साथ ज्यादा समय बिता सकेंगे.
पेरेंट्स घर बैठे देख सकेंगे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल एक्टिविटी
इस पोर्टल के जरिए अभिभावक अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, अटेंडेंस, मिड-डे मील से जुड़ी जानकारी और स्कूल की गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी कर सकेंगे. स्कूल पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) की रिपोर्ट और अभिभावकों से मिले सुझाव भी डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे. इससे स्कूल और अभिभावकों के बीच संवाद को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
मेधावी छात्रों को मिलेगी पहचान, पूर्व छात्रों से भी जुड़ेगा स्कूल
EduLife 2.0 में Alumni Corner और Success Story जैसे विशेष सेक्शन भी जोड़े गए हैं. इनके माध्यम से पूर्व छात्र अपने स्कूलों से जुड़े रह सकेंगे, जबकि प्रतिभाशाली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा. शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि मेधावी छात्रों के नाम पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, ताकि खेल अकादमियों और अन्य संस्थानों को ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिल सके.
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शिक्षा व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि EduLife 2.0 शैक्षणिक योजना, छात्रों की प्रगति की निगरानी, डिजिटल शिक्षण संसाधनों और स्कूल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल है. उनका कहना था कि इससे अभिभावकों की भागीदारी भी मजबूत होगी और आधुनिक तकनीक के जरिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जा सकेगा.
नई व्यवस्था से शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ
सदन के नेता जय भगवान यादव ने कहा कि नई तकनीक को अपनाने में शुरुआती स्तर पर कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन समय के साथ यही व्यवस्था शिक्षकों को छात्रों की प्रगति का बेहतरीन विश्लेषण करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगी.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>CBSE Three Language Policy: थर्ड लैंग्वेज में हुए फेल तो नहीं मिलेगा 10th का सर्टिफिकेट, Cbse ने लागू किया नियम</title>
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        <description><![CDATA[ CBSE Three Language Policy:&amp;nbsp;केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10वीं के लिए थर्ड लैंग्वेज को लेकर बड़ा बदलाव किया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के तहत लागू किए गए नए नियमों के अनुसार अब केवल बोर्ड परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा. अगर छात्र स्कूल स्तर पर होने वाले थर्ड लैंग्वेज के स्कूल बेस्ड असेसमेंट में सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें कक्षा 10 का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा. हालांकि इस विषय की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन इंटरनल असेसमेंट पास करना अनिवार्य हो होगा. यह नियम उन छात्रों पर लागू होगा जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में प्रवेश लेंगे और 2027-28 में कक्षा 10 की परीक्षा देंगे. वर्तमान स्तर में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे छात्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.&amp;nbsp;
थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं, लेकिन पास होना जरूरी&amp;nbsp;
सीबीएसई के 10 जुलाई को जारी गाइडलाइन के अनुसार कक्षा 10 में थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. इसके बावजूद छात्रों को स्कूल की ओर से कराए जाने वाले इंटरनल असेसमेंट में सफल होना अनिवार्य होगा. इसी के आधार पर उन्हें सेकेंडरी स्कूल एग्जामिनेशन पास सर्टिफिकेट मिलेगा. अगर कोई छात्र कक्षा 10 में इस इंटरनल असेसमेंट में असफल हो जाता है, तो संबंधित स्कूल को बोर्ड रिजल्ट घोषित होने से पहले उसका दोबारा री-असेसमेंट करना होगा.&amp;nbsp;
कक्षा 9 में फेल होने पर भी मिलेगा प्रमोशन&amp;nbsp;
सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई छात्र कक्षा 9 में थर्ड लैंग्वेज के स्कूल आधारित मूल्यांकन में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा. हालांकि उसे कक्षा 10 के दौरान ही कक्षा 9 की लंबित थर्ड लैंग्वेज परीक्षा भी पास करनी होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों का एक साल खराब होने से बचाना है, लेकिन पास सर्टिफिकेट के लिए भाषा संबंधी शर्तें पूरी करना जरूरी होगा.&amp;nbsp;
एनईपी 2020 के तहत लागू होगा तीन भाषा फार्मूला&amp;nbsp;
नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू की जा रही है. इसके अनुसार 2026-27 से कक्षा 9 के सभी छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य हैं. जिन छात्रों ने पहले से अंग्रेजी के साथ फ्रेंच, जर्मन या किसी अन्य विदेशी भाषा का चयन किया हुआ है, उन्हें एक बार की राहत दी गई है. ऐसे छात्र अपनी विदेशी भाषा जारी रख सकेंगे, लेकिन इसके साथ उन्हें एक भारतीय भाषा भी तीसरी भाषा के रूप में पढ़नी होगी. वहीं 2026-27 से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए भविष्य में यही तीसरी भाषा कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा का भी हिस्सा बनेगी, क्योंकि उनके लिए नया पाठ्यक्रम और किताबें चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है.&amp;nbsp;
स्कूलों को भी दिए गए निर्देश&amp;nbsp;
सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि थर्ड लैंग्वेज का मूल्यांकन निर्धारित स्कूल आधारित प्रणाली के तहत किया जाए. इसके लिए मूल्यांकन ढांचा पहले ही जारी किया जा चुका है. वहीं भाषा सीखने से जुड़े संसाधन एनसीईआरटी की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि स्कूलों को नई व्यवस्था लागू करने में सुविधा हो.&amp;nbsp;
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला&amp;nbsp;
तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नई व्यवस्था को सत्र शुरू होने के बाद लागू किया गया, जबकि कई स्कूलों में अभी पर्याप्त शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं है. साथ ही छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ बढ़ाने की भी चिंता जताई गई है. इस याचिका के जवाब में सीबीएसई और केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि बोर्ड से संबंधित लगभग आधे स्कूल पहले से ही कक्षा 9 में दो या दो से अधिक भारतीय भाषाएं पढ़ा रहे हैं. वहीं 99 प्रतिशत से ज्यादा स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा का शिक्षक उपलब्ध है. बोर्ड ने यह भी कहा है कि उसके 29 और 30 जुलाई को जारी सर्कुलर में याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए कई आरोप का समाधान किया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैन के बाद खुला राज! 2022 से जम्मू यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में मौजूद थी विवादित किताब</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में कथित तौर पर विवादित सामग्री वाली किताबें मिलने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. मामले में तीन प्रकाशकों की गिरफ्तारी के साथ-साथ अब विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में मौजूद किताबों की भी जांच शुरू कर दी गई है. प्रशासन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी किसी भी सामग्री की जगह नहीं हो सकती, जो आतंकवाद, अलगाववाद या देश विरोधी विचारों को बढ़ावा देती हो.
जांच के दौरान सामने आया कि &#039;Personalities and Legends of J&amp;amp;K&#039; नाम की किताब पिछले कुछ वर्षों से जम्मू विश्वविद्यालय की केंद्रीय लाइब्रेरी में भी मौजूद थी. यह किताब राजनीतिक विज्ञान विभाग की मांग पर पुस्तकालय के लिए खरीदी गई थी. विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इसे लाइब्रेरी से हटाकर सील कर दिया है. विभाग की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.
क्यों उठे किताब पर सवाल?
इस किताब पर आरोप है कि इसमें कुछ अलगाववादी नेताओं और उग्रवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है. पुलिस ने इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रकाशकों को गिरफ्तार किया. अधिकारियों का कहना है कि किताब की सामग्री की विस्तृत जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इसे स्कूलों और पुस्तकालयों तक किस प्रक्रिया के तहत पहुंचाया गया.
कैसे पहुंची पुस्तक विश्वविद्यालय तक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह किताब पहली बार वर्ष 2017 में प्रकाशित हुई थी. बाद में छात्रों और शोधार्थियों की मांग के आधार पर इसे विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के लिए खरीदा गया. विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि किताबों की खरीद निर्धारित नियमों के तहत होती है. विभाग पहले मांग भेजते हैं, फिर अधिकृत विक्रेताओं से पुस्तकें खरीदी जाती हैं. अधिकारियों ने यह भी बताया कि संबंधित किताब को बहुत कम छात्रों ने इश्यू कराया था.
अब पूरे अकादमिक सिस्टम की होगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सभी सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में मौजूद शैक्षणिक सामग्री का व्यापक ऑडिट शुरू कर दिया है. इस जांच में किताबों के अलावा शोध पत्र, जर्नल, थीसिस, डिसर्टेशन और डिजिटल सामग्री भी शामिल होगी. उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संस्थान में ऐसी सामग्री मौजूद न हो, जो आतंकवाद, उग्रवाद, कट्टरपंथ या अलगाववाद को बढ़ावा देती हो.यह भी पढ़ें - स्कूलों में जल्द शुरू हो सकती है कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन, जानिए क्या है CSE और बच्चों को क्या पढ़ाया जाएगा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पुस्तक खरीदने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सभी किताबें अधिकृत विक्रेताओं से खरीदी जाती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हजारों पुस्तकों की सामग्री को खरीद से पहले पूरी तरह पढ़ पाना संभव नहीं होता. आमतौर पर प्रकाशकों की कैटलॉग और छात्रों या शोधार्थियों की मांग के आधार पर किताबों का चयन किया जाता है.
स्कूलों तक कैसे पहुंचीं विवादित किताबें?
जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय में मौजूद संस्करण और सरकारी स्कूलों में पहुंचा संस्करण अलग-अलग प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित किया गया था. स्कूलों में भेजी गई प्रतियां केंद्र सरकार की समग्र शिक्षा योजना के तहत वितरित की गई थीं. इन्हीं प्रतियों को लेकर विवाद सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की.
250 से ज्यादा प्रतियां पहुंचीं सरकारी स्कूलों
अधिकारियों के अनुसार दोनों विवादित पुस्तकों की 250 से अधिक प्रतियां जम्मू, उधमपुर, रामबन और बारामूला समेत कई जिलों के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची थीं. इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी.यह भी पढ़ें - देश के किस राज्य में जूनियर डॉक्टर को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी? देखें सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की पूरी डिटेल ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली हाई कोर्ट HJS भर्ती  कल है आवेदन की लास्ट डेट, 1.94 लाख तक मिलेगी महीने की सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली हाई कोर्ट HJS भर्ती  कल है आवेदन की लास्ट डेट, 1.94 लाख तक मिलेगी महीने की सैलरी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Open AI Career Tips : ओपन एआई से करियर को लेकर ऐसे मांगे मदद, बेहतरीन टिप्स के लिए जरूर पूछें ये 5 सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Open AI Career Tips : आज के समय में नौकरी या इंटर्नशिप ढूंढना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. हर एक जॉब के लिए हजारों एप्लिकेशन आते हैं और कंपनियां अब इन &amp;nbsp;एप्लिकेशन को तेजी से जांचने के लिए AI का भी इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में सिर्फ अच्छा रिज्यूमे होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपका प्रोफाइल बाकी उम्मीदवारों से अलग और प्रभावशाली भी दिखना चाहिए. यही वजह है कि अब ChatGPT, Microsoft Copilot और Google Gemini जैसे AI टूल्स छात्रों और नौकरी ढूंढ रहे युवाओं के लिए बड़े मददगार बन रहे हैं. तो आइए जानते हैं कि करियर से जुड़ी बेहतर सलाह पाने के लिए ओपन AI से कौन से 5 सवाल जरूर पूछने चाहिए.
नौकरी की तलाश में AI क्यों बन रहा है मददगार?
आज बड़ी कंपनियों को हर दिन हजारों जॉब एप्लिकेशन मिलते हैं. लिंक्डइन के अनुसार पिछले एक साल में नौकरी के लिए भेजे गए एप्लिकेशन की संख्या 45 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है और हर मिनट करीब 11 हजार आवेदन भेजे जा रहे हैं. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक लगभग 10 में से 9 नियोक्ता अब AI की मदद से उम्मीदवारों के आवेदन पहले ही स्कैन और रैंक करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आपका रिज्यूमे और प्रोफाइल अलग नजर आए और सही तरीके से तैयार हो.&amp;nbsp;
AI को अपना करियर कोच कैसे बनाएं?
OpenAI का ChatGPT सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह करियर प्लानिंग, रिज्यूमे सुधारने, इंटरव्यू की तैयारी, नई स्किल्स पहचानने और करियर से जुड़े फैसले लेने में भी मदद कर सकता है. इसके लिए सबसे पहले AI को अपनी शिक्षा, स्किल्स, एक्सपीरियंस और करियर गोल साफ-साफ बताएं, जिससे वह उसी आधार पर बेहतर सुझाव दे सके.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - CBSE Three Language Policy: थर्ड लैंग्वेज में हुए फेल तो नहीं मिलेगा 10th का सर्टिफिकेट, Cbse ने लागू किया नियम
बेहतरीन टिप्स के लिए जरूर पूछें ये 5 सवाल
1. AI से पूछें &amp;nbsp;मेरे लिए सबसे अच्छे करियर ऑप्शन कौन से हैं - &amp;nbsp;अगर आप करियर को लेकर कंफ्यूजन में हैं, तो AI को अपनी पढ़ाई, स्किल्स और इंटरेस्ट के बारे में बताएं. इसके बाद उससे पूछें कि आपकी प्रोफाइल के हिसाब से कौन-कौन से करियर ऑप्शन सबसे बेहतर हो सकते हैं. AI आपको मौजूदा जॉब मार्केट और उभरते हुए करियर ऑप्शनों की जानकारी भी दे सकता है.&amp;nbsp;
2. अपने गोल तक पहुंचने के लिए कौन-सी नई स्किल्स सीखनी चाहिए - अगर आपने पहले से कोई जॉब रोल तय कर लिया है, तो AI से पूछें कि उस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए किन तकनीकी और सॉफ्ट स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग है. इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि किन स्किल्स पर काम करना जरूरी है और आगे की तैयारी कैसे करनी चाहिए.&amp;nbsp;
3. रिज्यूमे को जॉब के अनुसार कैसे बेहतर बनाएं - हर नौकरी के लिए एक जैसा रिज्यूमे भेजना सही तरीका नहीं माना जाता है. AI को अपना मौजूदा रिज्यूमे और जिस नौकरी के लिए आवेदन करना है उसका Job Description दें. इसके बाद उससे ATS-Friendly रिज्यूमे तैयार करने, बेहतर कीवर्ड जोड़ने और उपलब्धियों को प्रभावशाली तरीके से लिखने के लिए कहें. हालांकि AI के तैयार किए गए ड्राफ्ट को बिना जांचे इस्तेमाल न करें और उसमें अपनी जानकारी जरूर जांच लें.&amp;nbsp;
4. इंटरव्यू में कौन-कौन से सवाल पूछे जा सकते हैं - इंटरव्यू की तैयारी के लिए AI काफी मददगार साबित हो सकता है. कंपनी का नाम और जॉब रोल बता कर AI से संभावित तकनीकी और व्यवहारिक इंटरव्यू सवाल तैयार करने के लिए कहें. इसके बाद उन सवालों के जवाब खुद तैयार करें और प्रैक्टिस करें. AI से मिले जवाबों को सीधे याद करने की जगह उन्हें अपने एक्सपीरियंस और शब्दों में चेंज करना बेहतर रहता है.&amp;nbsp;
5. करियर में आ रही परेशानी का समाधान कैसे निकालें - अगर आपको प्रमोशन नहीं मिल रहा, करियर बदलना चाहते हैं या वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो AI से अपनी स्थिति विस्तार से बताकर समाधान और एक साफ एक्शन प्लान मांग सकते हैं. AI आपकी समस्या के आधार पर अलग-अलग विकल्प और आगे बढ़ने के सुझाव दे सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Open, Career, Tips, ओपन, एआई, से, करियर, को, लेकर, ऐसे, मांगे, मदद, बेहतरीन, टिप्स, के, लिए, जरूर, पूछें, ये, सवाल</media:keywords>
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        <title>यूपी पुलिस सब&amp;इन्स्पेक्टर भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी, ऐसे करें फटाफट चेक</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड UPPRPB ने यूपी पुलिस सब-इन्स्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है. जो भी उम्मीदवार इस भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में शामिल हुए थे, वे अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं और फाइनल सिलेक्शन लिस्ट की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं.
4,543 पदों पर हुई है फाइनल भर्ती
भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन संख्या PRPB-B Sub-Inspector Cadre -03/2025 के तहत कुल 4,543 खाली पदों को भरने के लिए यह फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की है. इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए निम्नलिखित पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया है.
सब-इन्स्पेक्टर (सिविल पुलिस)
प्लाटून कमांडर पीएसी (PAC)
एसआई आर्म्ड पुलिस
स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF)
लेडी सब-इन्स्पेक्टर
इस फाइनल लिस्ट में जिन उम्मीदवारों का रोल नंबर शामिल है, उन्हें अब नियुक्ति से पहले अगले चरण यानी मेडिकल एग्जामिनेशन और कैरेक्टर वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा.
कितने उम्मीदवारों की जारी की गई लिस्ट?
14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित की गई लिखित परीक्षा के बाद, अगले चरणों में सफल रहे अभ्यर्थियों की मेरिट और आरक्षण नियमों के आधार पर कुल 4,543 उम्मीदवारों की अंतिम चयन सूची बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है. सफल घोषित किए गए सभी उम्मीदवारों को भर्ती बोर्ड ने हार्दिक बधाई दी है. उम्मीदवार अपना रिजल्ट बोर्ड की वेबसाइट के अलावा सीधे इस आधिकारिक लिंक siupexam25.com/sifinalresults पर जाकर भी चेक कर सकते हैं.
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22 जुलाई से देख सकेंगे अपने नॉर्मलाइज्ड मार्क्स&amp;nbsp;
इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए एक और जरूरी जानकारी है. लिखित परीक्षा में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रसामान्यीकृत अंक यानी Normalised Score यानी उनका फाइनल स्कोर कार्ड जल्द ही जारी किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा उम्मीदवारों के मार्क्स देखने के लिए 22 जुलाई 2026 से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर एक नया लिंक एक्टिव कर दिया जाएगा, जिसके माध्यम से सभी अभ्यर्थी परीक्षा में मिले अपने अंकों को आसानी से चेक कर सकेंगे.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी, पुलिस, सब-इन्स्पेक्टर, भर्ती, का, फाइनल, रिजल्ट, जारी, ऐसे, करें, फटाफट, चेक</media:keywords>
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        <title>CCI Recruitment 2026: कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 148 पदों पर भर्ती, 9 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है.कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अलग-अलग पदों पर भर्ती का ऐलान किया है. इस भर्ती के तहत कुल 148 खाली पद भरे जाएंगे.आवेदन की प्रक्रिया &amp;nbsp;उम्मीदवार 24 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.
किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान के तहत कई अलग-अलग पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.इनमें सहायक प्रबंधक (राजभाषा) का 1 पद, सहायक प्रबंधक (आईटी) का 1 पद, प्रबंधन प्रशिक्षु (मार्केटिंग) के 8 पद, प्रबंधन प्रशिक्षु (अकाउंट्स) के 8 पद, जूनियर कॉमर्शियल एग्जीक्यूटिव के 50 पद, जूनियर असिस्टेंट (अकाउंट्स) के 50 पद और जूनियर असिस्टेंट (जनरल) के 30 पद शामिल हैं.कुल मिलाकर 148 पदों पर भर्ती की जाएगी.
योग्यता
हर पद के लिए योग्यता अलग-अलग तय की गई है.उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में बीई, बीटेक, बीएससी, बीकॉम, एमसीए, एमबीए, सीए, सीएम या अन्य निर्धारित डिग्री होनी चाहिए. आवेदन करने से पहले उम्मीदवार को अपने पद के अनुसार योग्यता जरूर जांच लेनी चाहिए.
उम्र सीमा&amp;nbsp;इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है.अधिकतम आयु पद के अनुसार 30 वर्ष या 32 वर्ष तक निर्धारित की गई है.आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT BHU Recruitment 2026: आईआईटी बीएचयू में गैर-शिक्षण पदों पर निकली भर्ती, 10 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन
आवेदन शुल्क
इस भर्ती के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 1500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग और पूर्व सैनिक उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये रखा गया है. शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम जैसे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से किया जा सकेगा.
चयन प्रक्रिया
भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी. परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा. इसके बाद मेडिकल जांच होगी. सभी चरण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को अंतिम नियुक्ति दी जाएगी.
आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की आधिकारिक वेबसाइट www.cotcorp.org.in पर जाएं.
वेबसाइट के होमपेज पर CCI Recruitment 2026 या Careers सेक्शन में जाएं.
संबंधित भर्ती के लिंक पर क्लिक करके नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें.
इसके बाद Apply Online पर क्लिक करें और अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें.
रजिस्ट्रेशन के बाद लॉग इन करके आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें.
जरूरी डाक्यूमेंट्स अपलोड करें.
अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें.
सभी जानकारी एक बार जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करें.
अंत में आवेदन पत्र का प्रिंटआउट या पीडीएफ अपने पास सुरक्षित रख लें.

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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CCI, Recruitment, 2026:, कॉटन, कॉरपोरेशन, ऑफ, इंडिया, में, 148, पदों, पर, भर्ती, जुलाई, से, शुरू, होंगे, आवेदन</media:keywords>
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        <title>कर्नाटक में 4,723 सरकारी पदों पर भर्ती शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कर्नाटक-में-4723-सरकारी-पदों-पर-भर्ती-शुरू-जानें-कौन-कर-सकता-है-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक में 4,723 सरकारी पदों पर भर्ती शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कर्नाटक, में, 4, 723, सरकारी, पदों, पर, भर्ती, शुरू, जानें, कौन, कर, सकता, है, आवेदन</media:keywords>
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        <title>Medical Courses Without Neet: NEET क्लियर नहीं हुआ तो मत लो टेंशन ! बिना डॉक्टर बने कमाएं लाखों, इन कोर्स के लिए करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ Medical Courses Without Neet: हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट यूजी परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन समिति सीटों और कंपटीशन के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार सफलता हासिल नहीं कर पाते. समय के साथ कई छात्र यह मान लेते हैं कि अब यह मेडिकल फील्ड में करियर बनाना मुश्किल है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. मेडिकल सेक्टर सिर्फ एमबीबीएस या बीडीएस तक सीमित नहीं है. आज हेल्थ केयर इंडस्ट्री में ऐसे कई प्रोफेशनल कोर्स मौजूद है, जहां बिना नीट के भी शानदार करियर बनाया जा सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि हेल्थ केयर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें डॉक्टर के साथ-साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की भी मांग लगातार बढ़ रही है. अगर किसी छात्र का नीट क्लियर नहीं हुआ, तो उसके पास कई ऑप्शन है, जहां अच्छी सैलरी के साथ-साथ बेहतर करियर बनाया जा सकता है.&amp;nbsp;
नीट क्लियर नहीं हुआ तो यह है ऑप्शन&amp;nbsp;
बीएससी नर्सिंग&amp;nbsp;
अगर आपकी रुचि मरीजों की देखभाल और हेल्थ केयर सेवाओं में है तो बीएससी नर्सिंग बेहतर ऑप्शन हो सकता है. यह 4 साल का कोर्स है, जिसमें मरीजों की देखभाल कम्युनिटी हेल्थ, आईसीयू मैनेजमेंट और अस्पताल संचालक से जुड़ी पढ़ाई कराई जाती है. कोर्स पूरा करने के बाद अस्पताल क्लीनिक हेल्थ सेंटर और विदेशों तक नौकरी में अवसर मिल सकते हैं. शुरुआती स्तर पर लगभग 3 से 6 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है.&amp;nbsp;
बैचलर ऑफ फार्मेसी&amp;nbsp;
दवाइयां के निर्माण उनके प्रभाव और दवा प्रबंधन में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए बी फार्मा अच्छा ऑप्शन है. यह 4 साल का कोर्स है, इसके बाद फार्मासिस्ट, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, ड्रग इंस्पेक्टर, क्लिनिकल रिसर्च या फार्मा कंपनी में नौकरी के अवसर मिलते हैं. इच्छुक छात्र अपना मेडिकल स्टोर भी शुरू कर सकते हैं, शुरुआती सैलरी करीब 3.5 से 6 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है.&amp;nbsp;
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बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी&amp;nbsp;
फिजियोथैरेपी का क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह 4.5 साल का कोर्स है. इसमें मरीज को एक्सरसाइज और थेरेपी के जरिए ठीक करने की ट्रेनिंग दी जाती है. स्पोर्ट्स इंजरी, एक्सीडेंट, लकवा और रिहैबिलिटेशन जैसी स्थिति में फिजियोथेरेपिस्ट की अहम भूमिका होती है. क्षेत्र में शुरुआती सैलरी 3 से 7 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है.&amp;nbsp;
बीएससी बायोटेक्नोलॉजी&amp;nbsp;
बायोटेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए बीएससी बायोटेक्नोलॉजी बेहतर ऑप्शन माना जाता है. यह 3 साल का कोर्स है, जिसमें नई रिसर्च, नई दवाईयों के विकास और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं. कोर्स के बाद रिसर्च लैब, बायोटेक कंपनियों और फार्मा इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर मिलते हैं. इस क्षेत्र में 5 से 12 लाख रुपये तक का सालाना पैकेज मिलता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Medical, Courses, Without, Neet:, NEET, क्लियर, नहीं, हुआ, तो, मत, लो, टेंशन, बिना, डॉक्टर, बने, कमाएं, लाखों, इन, कोर्स, के, लिए, करें, अप्लाई</media:keywords>
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        <title>NEET UG की OMR शीट जारी, अब अपने जवाबों का करें मिलान; गलती मिलने पर ऐसे दर्ज करें आपत्ति</title>
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        <description><![CDATA[ NTA ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में शामिल हुए लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स जारी कर दिए हैं. अब उम्मीदवार अपने द्वारा दिए गए उत्तरों का मिलान कर सकते हैं. अगर उन्हें रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स में किसी तरह की गड़बड़ी या अंतर दिखाई देता है, तो वे तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं.
NTA ने यह सुविधा अपनी आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर उपलब्ध कराई है. इसके साथ ही उम्मीदवारों की स्कैन की गई OMR शीट उनके रजिस्टर्ड ई-मेल आईडी पर भी भेजी गई है, ताकि उन्हें रिकॉर्ड देखने में किसी तरह की परेशानी न हो. एजेंसी ने इस बार सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए OTP आधारित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी लागू किया है. यानी लॉगिन करने के बाद उम्मीदवारों को मोबाइल या ई-मेल पर प्राप्त OTP के जरिए अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी.
इस प्रक्रिया के जरिए अभ्यर्थी यह जांच सकते हैं कि परीक्षा के दौरान उन्होंने OMR शीट पर जो उत्तर भरे थे, वही सिस्टम में सही तरीके से दर्ज हुए हैं या नहीं. यदि किसी प्रश्न के रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स में अंतर दिखाई देता है, तो उसके खिलाफ ऑनलाइन चुनौती दर्ज कराई जा सकती है.
15 जुलाई तक आपत्ति
NTA के अनुसार, रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स चैलेंज की प्रक्रिया 13 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 15 जुलाई 2026 तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. प्रत्येक प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 200 रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा. यह शुल्क ऑनलाइन डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से जमा किया जा सकता है. निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद या बिना शुल्क जमा किए किसी भी चुनौती पर विचार नहीं किया जाएगा.
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हालांकि, एजेंसी ने साफ किया है कि यह सुविधा केवल OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स में संभावित त्रुटियों के लिए उपलब्ध है. उत्तर कुंजी (Answer Key) पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. इसलिए अब उत्तर कुंजी से जुड़ी कोई नई चुनौती स्वीकार नहीं की जाएगी.
बता दें कि NEET UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी. इसके बाद 6 मई को अनंतिम उत्तर कुंजी जारी की गई, लेकिन बाद में परीक्षा रद्द कर दी गई. इसके बाद NTA ने 21 जून 2026 को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पुनर्परीक्षा आयोजित की. इस परीक्षा में देशभर से 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे. अब OMR शीट जारी होने के बाद उम्मीदवार अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहे हैं.
ऐसे करें OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स चेक
OMR शीट देखने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें. लॉगिन के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ई-मेल पर आए OTP को दर्ज कर वेरिफिकेशन पूरा करें. इसके बाद &quot;View/Challenge OMR Sheet &amp;amp; Recorded Responses&quot; लिंक पर क्लिक करें. यहां उम्मीदवार अपनी स्कैन की गई OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स देख सकते हैं.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, की, OMR, शीट, जारी, अब, अपने, जवाबों, का, करें, मिलान, गलती, मिलने, पर, ऐसे, दर्ज, करें, आपत्ति</media:keywords>
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        <title>AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप बायोइन्फॉर्मेटिक्स, कंप्यूटर साइंस, कृषि या प्राकृतिक विज्ञान की पढ़ाई कर चुके हैं और रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध हंसराज कॉलेज ने एक महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजना के लिए जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) और प्रोजेक्ट एसोसिएट-I के पद पर आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह परियोजना अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के वित्तीय सहयोग से संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य खेती को नुकसान पहुंचाने वाले वायरस से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक विकसित करना है.
इस भर्ती के तहत कुल एक पद भरा जाएगा. इच्छुक उम्मीदवार 5 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. कॉलेज की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, परियोजना की कुल अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति शुरुआती तौर पर दो वर्ष के लिए होगी. परियोजना के प्रदर्शन और नियमों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.
AI की मदद से होगा फसलों की सुरक्षा पर शोध
यह शोध परियोजना कृषि क्षेत्र की एक गंभीर चुनौती पर आधारित है. टमाटर और खीरा जैसी फसलों को प्रभावित करने वाले टमाटर लीफ कर्ल पालमपुर वायरस और ककड़ी मोज़ेक वायरस के खिलाफ नई तकनीक विकसित करने पर काम किया जाएगा. इसके लिए शोधकर्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर ऐसे एंटीवायरल पेप्टाइड्स तैयार करेंगे, जो इन वायरसों को रोकने में प्रभावी साबित हो सकें. यदि यह शोध सफल होता है, तो भविष्य में किसानों को वायरल बीमारियों से होने वाले नुकसान को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है.
JRF पद के लिए क्या होनी चाहिए योग्यता?
जूनियर रिसर्च फेलो पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास बायोइन्फॉर्मेटिक्स या कंप्यूटर साइंस में पोस्टग्रेजुएट डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा, प्रोफेशनल कोर्स में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री के साथ CSIR-UGC NET या GATE का वैध स्कोर होना अनिवार्य है. चयनित अभ्यर्थी को 37,000 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप के साथ नियमानुसार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी मिलेगा.यह भी पढ़ें -बिहार में निकली फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की भर्ती, इस डेट से कर सकेंगे अप्लाई; पढ़ें डिटेल्स
प्रोजेक्ट एसोसिएट-I के लिए ये अभ्यर्थी कर सकते हैं आवेदन
प्रोजेक्ट एसोसिएट-I पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास प्राकृतिक विज्ञान, कृषि, कंप्यूटर साइंस, गणितीय विज्ञान या भौतिक विज्ञान में चार वर्षीय स्नातक डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा प्राकृतिक विज्ञान, कृषि विज्ञान, बीवीएससी, फार्मेसी, इंजीनियरिंग या चिकित्सा विषय में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं. इस पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष तय की गई है.
इन उम्मीदवारों को मिलेगी प्राथमिकता
कॉलेज ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) तथा Linux प्लेटफॉर्म पर Python या R प्रोग्रामिंग का अनुभव होगा, उन्हें चयन प्रक्रिया में वरीयता दी जाएगी. ऐसे कौशल रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह अवसर करियर को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है.
योग्यता के अनुसार मिलेगा वेतन
चयनित उम्मीदवारों को उनकी पात्रता और पद के अनुसार 37,000 रुपये + HRA या 30,000 रुपये + HRA प्रतिमाह दिया जाएगा. यह परियोजना उन युवाओं के लिए बेहतर अवसर मानी जा रही है, जो कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और AI के मेल पर काम करना चाहते हैं.
ऐसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना से आवेदन पत्र डाउनलोड कर उसे पूरी तरह भरना होगा. इसके साथ सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्र, मार्कशीट, अनुभव प्रमाणपत्र और यदि कोई शोध प्रकाशन संलग्न करनी होगी. सभी दस्तावेजों को एक PDF फाइल में तैयार कर pooja@hrc.du.ac.in पर ईमेल भेजना होगा. ईमेल के विषय (Subject) में &quot;Application for position in ANRF Project&quot; लिखना है. आवेदन भेजने की अंतिम डेट 5 अगस्त 2026 है.यह भी पढ़ें - Government Medical Colleges: AIIMS ही नहीं, इन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी मिलता है शानदार करियर का मौका ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>से, फसलों, को, बचाने, वाली, रिसर्च, का, बनें, हिस्सा, हंसराज, कॉलेज, में, JRF, और, प्रोजेक्ट, एसोसिएट, की, भर्ती, अगस्त, तक, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>देश में बढ़ा पढ़ाई का क्रेज, 173 देशों के 58 हजार से ज्यादा विदेशी स्टूडेंट्स ले रहे एजुकेशन; ये देश सबसे आगे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-में-बढ़ा-पढ़ाई-का-क्रेज-173-देशों-के-58-हजार-से-ज्यादा-विदेशी-स्टूडेंट्स-ले-रहे-एजुकेशन-ये-देश-सबसे-आगे</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/देश-में-बढ़ा-पढ़ाई-का-क्रेज-173-देशों-के-58-हजार-से-ज्यादा-विदेशी-स्टूडेंट्स-ले-रहे-एजुकेशन-ये-देश-सबसे-आगे</guid>
        <description><![CDATA[ अब भारत सिर्फ अपने छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के विद्यार्थियों के लिए भी उच्च शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है. पिछले दस वर्षों में देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान भारत में पढ़ने आने वाले छात्रों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा देशों के विद्यार्थी भी भारतीय संस्थानों का रुख कर रहे हैं.
शिक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2023-24 में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 173 देशों के 58,134 विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे थे. अगर एक दशक पहले यानी 2013-14 के आंकड़ों से तुलना करें तो उस समय भारत में 158 देशों के 39,517 विदेशी छात्र नामांकित थे. यानी दस साल में विदेशी छात्रों की संख्या में करीब 18,600 से अधिक का इजाफा हुआ है, जो लगभग 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है. वहीं भारत में पढ़ने आने वाले देशों की संख्या भी 158 से बढ़कर 173 हो गई है.
विदेशी छात्रों की बात करें तो नेपाल लगातार भारत के लिए सबसे बड़ा स्रोत देश बना हुआ है. वर्ष 2023-24 में भारत में पढ़ रहे कुल विदेशी छात्रों में 24.1 प्रतिशत छात्र नेपाल से थे. एक दशक पहले भी नेपाल पहले स्थान पर था, लेकिन तब उसकी हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत थी. इससे साफ है कि भारतीय शिक्षा संस्थानों में नेपाली छात्रों का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है.
यहां से सबसे ज्यादा छात्र
हालांकि, दूसरे देशों की तस्वीर पिछले दस साल में काफी बदल गई है. वर्ष 2013-14 में नेपाल के बाद अफगानिस्तान, भूटान, मलेशिया, सूडान और इराक से सबसे ज्यादा छात्र भारत आते थे. लेकिन अब यह सूची पूरी तरह बदल चुकी है. मौजूदा समय में नेपाल के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दूसरे स्थान पर है. इसके बाद अमेरिका और बांग्लादेश का स्थान है, जबकि नाइजीरिया और जिम्बाब्वे भी भारत में पढ़ाई के लिए छात्रों को भेजने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गए हैं.यह भी पढ़ें - बिहार में निकली फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की भर्ती, इस डेट से कर सकेंगे अप्लाई; पढ़ें डिटेल्स
नई रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत की पहुंच अब पहले से कहीं ज्यादा देशों तक हो चुकी है. अब लेबनान, बुर्किना फासो, मंगोलिया, मैक्सिको, कजाकिस्तान, बेलारूस और चिली जैसे देशों के छात्र भी भारतीय संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय उच्च शिक्षा की पहचान अब केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी इसका आकर्षण बढ़ा है.
हालांकि विदेशी छात्रों के स्रोत देशों में बदलाव आया है, लेकिन टॉप 10 देशों का दबदबा अब भी कायम है. वर्ष 2013-14 में कुल विदेशी छात्रों में से लगभग 65 प्रतिशत छात्र सिर्फ शीर्ष 10 देशों से आते थे. वर्ष 2023-24 में भी यह आंकड़ा 63.8 प्रतिशत रहा, यानी अधिकांश विदेशी छात्र अब भी कुछ चुनिंदा देशों से ही भारत पहुंच रहे हैं.
यहां पढ़ रहे सबसे ज्यादा विदेशीरिपोर्ट के मुताबिक, भारत आने वाले अधिकांश विदेशी छात्र यूजी कोर्स को प्राथमिकता देते हैं. कुल विदेशी छात्रों में करीब 73.6 प्रतिशत छात्र ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई कर रहे हैं. वहीं राज्यों की बात करें तो कर्नाटक विदेशी छात्रों की पहली पसंद बनकर उभरा है. यहां सबसे अधिक 7,914 विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. इसके बाद पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान है.यह भी पढ़ें - AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>IIT BHU Recruitment 2026: आईआईटी बीएचयू में गैर&amp;शिक्षण पदों पर निकली भर्ती, 10 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप किसी बड़े सरकारी संस्थान में नौकरी करना चाहते हैं तो यह आपके लिए अच्छा मौका है. आईआईटी बीएचयू, वाराणसी ने गैर-शिक्षण (Non-Teaching) पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं.इस भर्ती के जरिए प्रशासनिक, तकनीकी, लाइब्रेरी, सिस्टम, राजभाषा और खेल विभाग सहित कई कैडर में कुल 16 पद भरे जाएंगे.आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
किन पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती में अलग-अलग विभागों के लिए नियुक्तियां की जाएंगी. इनमें सहायक रजिस्ट्रार, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, लाइब्रेरी से जुड़े पद, सिस्टम विश्लेषक, कार्यकारी अभियंता, सहायक कार्यकारी अभियंता, हिंदी अधिकारी, मुख्य खेल अधिकारी और खेल अधिकारी जैसे पद शामिल हैं.अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और अनुभव भी अलग निर्धारित किया गया है, इसलिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ लेना चाहिए.
क्या है योग्यता
अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी अलग रखी गई है.किसी पद के लिए मास्टर डिग्री मांगी गई है तो किसी के लिए बीई, बीटेक, एमटेक, एमसीए या पीएचडी की जरूरत होगी. कई पदों पर 3 से 10 साल तक का अनुभव भी मांगा गया है. वहीं लाइब्रेरी, हिंदी और खेल विभाग के पदों के लिए संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन और अनुभव जरूरी होगा.इसलिए उम्मीदवार अपने पद के अनुसार पात्रता जरूर जांच लें.यह भी पढ़ें - AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन
आवेदन शुल्क कितना देना होगा
इस पद पर आवेदन के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा.वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग और सभी महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में पूरी छूट दी गई है.
चयन कैसे होगाउम्मीदवारों का चयन पद के अनुसार स्क्रीनिंग टेस्ट, लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन, प्रेजेंटेशन और इंटरव्यू के जरिए किया जा सकता है. संस्थान ने यह भी साफ किया है कि सिर्फ न्यूनतम योग्यता पूरी कर लेने से चयन प्रक्रिया में शामिल होने की गारंटी नहीं मिलेगी. जरूरत पड़ने पर बेहतर योग्यता और अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदनआवेदन करने के लिए सबसे पहले आईआईटी बीएचयू के SAMARTH भर्ती पोर्टल पर जाएं. वहां नया रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करने के बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें.इसके बाद सभी जरूरी &amp;nbsp;डॉक्यूमेंट अपलोड करें. आखिर में पूरी जानकारी जांचकर फॉर्म सबमिट कर दें और उसका प्रिंट अपने पास सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें - देश में बढ़ा पढ़ाई का क्रेज, 173 देशों के 58 हजार से ज्यादा विदेशी स्टूडेंट्स ले रहे एजुकेशन; ये देश सबसे आगे ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IIT, BHU, Recruitment, 2026:, आईआईटी, बीएचयू, में, गैर-शिक्षण, पदों, पर, निकली, भर्ती, अगस्त, तक, करें, ऑनलाइन, आवेदन</media:keywords>
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        <title>इन पांच तरीकों को पढ़ाई में कर लें शामिल, कभी स्टडी से नहीं भटकेगा फोकस</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती किताबें नहीं, बल्कि ध्यान भटकना बन गई है. कई छात्र पूरी एनर्जी के साथ पढ़ने बैठते हैं, लेकिन कुछ ही मिनट बाद उनका ध्यान मोबाइल, सोशल मीडिया, नोटिफिकेशन या दूसरे कामों की ओर चला जाता है. घंटों तक किताब के सामने बैठे रहने का मतलब यह नहीं की पढ़ाई भी उतनी ही प्रभावित हो रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छी पढ़ाई सिर्फ लंबे समय तक बैठने से नहीं, बल्कि सही तरीके से पढ़ने से होती है. अगर पढ़ाई के दौरान फोकस बना रहे और सीखी हुई बातें लंबे समय तक याद रहे तो कम समय में भी सही रिजल्ट मिल सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप कौन से 5 तरीकों को पढ़ाई में शामिल कर सकते हैं, जिनसे आपका स्टडी से फोकस कभी नहीं भटकेगा.&amp;nbsp;
पढ़ाई के लिए छोटे-छोटे स्टडीज सेशन बनाएं&amp;nbsp;
लगातार कई घंटे तक पढ़ाई करने के बजाय 25 से 30 मिनट तक पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करें और फिर 5 मिनट का छोटा ब्रेक लें. इस दौरान आप थोड़ा टहल सकते हैं, पानी पी सकते हैं या आंखों को आराम दे सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि नियमित छोटे ब्रेक लेने से दिमाग तरोताजा रहता है और दोबारा पढ़ाई पर ध्यान लगाना आसान हो जाता है. लंबे समय तक बिना रुके पढ़ने से मानसिक थकान बढ़ती है और याद रखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
मोबाइल और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से दूरी बनाएं&amp;nbsp;
आज पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन मोबाइल फोन और सोशल मीडिया को माना जाता है. हर कुछ मिनट में आने वाले नोटिफिकेशन दिमाग पर फोकस तोड़ देते हैं. पढ़ाई शुरू करने से पहले फोन को साइलेंट या डू नॉट डिस्टर्ब मोड पर रखें. अगर संभव हो तो मोबाइल को दूसरे कमरे में रख दें. ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे ,हैं तो केवल जरूरी ऐप्स का ही इस्तेमाल करें और बाकी सभी नोटिफिकेशन बंद कर दें. जितना कम डिजिटल डिस्टर्ब होगा, उतनी बेहतर एकाग्रता बनी रहेगी.&amp;nbsp;
एक समय में केवल एक ही सब्जेक्ट पर फोकस करें&amp;nbsp;
कई छात्र पढ़ाई के दौरान एक साथ कई काम करने लगते हैं, जैसे गाने सुनना, चैट करना या बार-बार सब्जेक्ट बदलना. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मल्टीटास्किंग से दिमाग पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है और जानकारी को सही तरीके से याद रखना मुश्किल हो जाता है. इसलिए पढ़ाई के दौरान एक समय में सिर्फ एक सब्जेक्ट पर ध्यान दें और पहले उसे पूरा करने की कोशिश करें. छोटे-छोटे टारगेट तय करने से पढ़ाई आसान और प्रभावी बनती है.&amp;nbsp;
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अच्छी नींद और संतुलित खाना खाएं&amp;nbsp;
फोकस और याददाश्त बनाए रखने के लिए पर्याप्त नींद बहुत जरूरी होती है. अगर नींद पूरी नहीं होगी तो दिमाग नई जानकारी को लंबे समय तक याद नहीं रख पाएगा. रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने की सलाह दी जाती है. इसके साथ ही फल, हरी सब्जियां, मेवे, बीज और प्रोटीन से भरपूर खाना लेना चाहिए. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में कम पानी की कमी होने पर भी एकाग्रता प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
मेडिटेशन और रिवीजन को बनाए स्टडी का जरूरी हिस्सा&amp;nbsp;
रोजाना कुछ मिनिट मेडिटेशन या गहरी सांस लेने का अभ्यास करने से तनाव कम होता है और दिमाग शांत रहता है. इससे पढ़ाई के दौरान फोकस फोकस बेहतर होता है. अगर मेडिटेशन करना मुश्किल लगे तो कुछ मिनट तक केवल अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें. इसके अलावा पढ़े हुए विषय का नियमित रिवीजन भी जरूरी है. बार-बार एक साथ पढ़ने की बजाय समय पर दोहराने से जानकारी लंबे समय तक याद रहती है और परीक्षा के समय तैयारी बेहतर होती है.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>1200 से ज्यादा सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका, ITI से लेकर इंजीनियरिंग और CA तक कर सकते हैं आवेदन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/1200-से-ज्यादा-सरकारी-नौकरियों-का-सुनहरा-मौका-iti-से-लेकर-इंजीनियरिंग-और-ca-तक-कर-सकते-हैं-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने वर्ष 2026 के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1213 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. खास बात यह है कि इस भर्ती में आईटीआई पास युवाओं से लेकर इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), मानव संसाधन, मार्केटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवरों तक के लिए अवसर मौजूद हैं.
भर्ती के तहत सबसे ज्यादा 1005 पद जूनियर टेक्नीशियन के लिए निकाले गए हैं. इसके अलावा 208 पद जूनियर मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, वरिष्ठ प्रबंधक, सलाहकार और अतिरिक्त महाप्रबंधक जैसी कार्यकारी श्रेणी के पदों के लिए हैं. इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 11 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
सबसे ज्यादा भर्ती इन ट्रेडों में
तकनीकी पदों की बात करें तो फिटर (जनरल) के लिए सबसे अधिक 400 पद उपलब्ध हैं. इसके बाद मशीनिस्ट के 216 पद, इलेक्ट्रीशियन के 84 पद, इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक के 69 पद, रॉ मटेरियल मैनेजमेंट (OMHE) के 66 पद और वेल्डर के 55 पद भरे जाएंगे. इसके अलावा फाउंड्रीमैन, क्वालिटी एश्योरेंस, पेंटर, इलेक्ट्रोप्लेटर, मैकेनिक मशीन टूल मेंटेनेंस और अन्य ट्रेडों में भी भर्ती होगी.
कार्यकारी श्रेणी में सबसे अधिक 92 पद जूनियर मैनेजर (मैकेनिकल) के हैं. वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मानव संसाधन, मेटलर्जी, राजभाषा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्त, सूचना प्रौद्योगिकी, मार्केटिंग, कंपनी सेक्रेटरी, जनसंपर्क, साइबर सुरक्षा और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों में भी नियुक्तियां की जाएंगी.
देशभर की यूनिटों में मिलेगी पोस्टिंग
चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति AVNL की विभिन्न इकाइयों में होगी. इनमें चेन्नई के अवाडी स्थित HVF, जबलपुर की OFMK, मेडक की MTPF, अंबरनाथ की EFA समेत देश के अन्य केंद्र शामिल हैं. सभी नियुक्तियां फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (Fixed Term Employment) के आधार पर की जाएंगी.
किस पद के लिए क्या योग्यता चाहिए?
जूनियर टेक्नीशियन पदों के लिए संबंधित ट्रेड में आईटीआई (NTC/NAC) प्रमाणपत्र अनिवार्य है. वहीं जूनियर मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर और डिप्टी मैनेजर जैसे पदों के लिए संबंधित विषय में BE/BTech या अन्य निर्धारित स्नातकोत्तर डिग्री मांगी गई है.
मानव संसाधन, वित्त, मार्केटिंग, राजभाषा, कंपनी सेक्रेटरी और जनसंपर्क जैसे पदों के लिए संबंधित विषय में डिग्री या पोस्ट ग्रेजुएशन जरूरी है. वहीं सलाहकार (वित्त एवं ऑडिट) पद के लिए उम्मीदवार का चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) होना और कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए. बिजनेस डेवलपमेंट के अतिरिक्त महाप्रबंधक पद के लिए सेवानिवृत्त सेना अधिकारी (कम से कम कर्नल रैंक) और 15 वर्ष का अनुभव आवश्यक है.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;AI से फसलों को बचाने वाली रिसर्च का बनें हिस्सा, हंसराज कॉलेज में JRF और प्रोजेक्ट एसोसिएट की भर्ती, 5 अगस्त तक करें आवेदन
आयु सीमा और आवेदन शुल्क
जूनियर टेक्नीशियन से लेकर डिप्टी मैनेजर तक के पदों के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है. हालांकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी. वरिष्ठ प्रबंधक, उप महाप्रबंधक, अतिरिक्त महाप्रबंधक और सलाहकार पदों के लिए अधिकतम आयु 65 वर्ष तय की गई है.
आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 300 रुपये शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और महिला उम्मीदवारों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को AVNL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर करियर &amp;nbsp;सेक्शन में रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद मोबाइल और ईमेल पर प्राप्त OTP से सत्यापन कर लॉगिन करना होगा. आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरने के बाद फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. अंतिम चरण में आवेदन शुल्क (यदि लागू हो) का ऑनलाइन भुगतान कर फॉर्म जमा करना होगा.यह भी पढ़ें - IIT BHU Recruitment 2026: आईआईटी बीएचयू में गैर-शिक्षण पदों पर निकली भर्ती, 10 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Delhi University PG Admission 2026:  DU ने बदला पीजी एडमिशन का शेड्यूल, अब 15 जुलाई तक करनी होगी फीस जमा</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi University PG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 2026-27 सेशन के लिए PG एडमिशन के तीसरे राउंड के टाइम-टेबल में बदलाव किया है. यूनिवर्सिटी ने शनिवार, 12 जुलाई को अपने एडमिशन पोर्टल पर नया कैलेंडर जारी किया, जिसमें सीट Accept करने, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करने की नई तारीखें बताई गई हैं.&amp;nbsp; यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि CW, स्पोर्ट्स और वार्ड कोटे के तहत आने वाले सुपरन्यूमेररी सीटों के एलोकेशन का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया था. इसलिए नई समय-सारणी के अनुसार, जिन कैंडिडेट्स को तीसरे राउंड में सीट अलॉट हुई है, उन्हें 13 जुलाई 2026 की रात 11:59 बजे तक एडमिशन पोर्टल के जरिए अपनी सीट Accept करनी होगी.
सीट Accept करने के बाद संबंधित डिपार्टमेंट, सेंटर और कॉलेज उन आवेदनों की जांच और मंजूरी देंगे, यह प्रक्रिया 14 जुलाई की रात 11:59 बजे तक चलेगी. जिन कैंडिडेट्स के एडमिशन को मंजूरी मिल जाएगी, उन्हें आखिर में 15 जुलाई की रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन फीस जमा करके अपना एडमिशन कन्फर्म करना होगा.&amp;nbsp; यूनिवर्सिटी ने सभी चुने गए कैंडिडेट्स से कहा है कि वो इन नई तारीखों का ध्यान से पालन करें, ताकि उनका एडमिशन प्रोसेस बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके.&amp;nbsp;
आगे और भी राउंड होने की संभावना
यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ किया है कि तीसरे राउंड के पूरा होने के बाद अगर कुछ सीटें अब भी खाली रह जाती हैं, तो पोस्टग्रेजुएट सीट एलोकेशन के लिए आगे और राउंड भी शुरू किए जा सकते हैं. यह पूरा बदलाव इसलिए किया गया है ताकि सभी कैटेगरी के तहत एडमिशन प्रोसेस आपस में तालमेल बनाकर चले और किसी भी योग्य कैंडिडेट को इससे कोई नुकसान न हो. इसीलिए यूनिवर्सिटी ने सभी कैंडिडेट्स को सलाह दी है कि वो नियमित रूप से DU के ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल को चेक करते रहें, ताकि उन्हें खाली सीटों, आगे होने वाले एलोकेशन राउंड और काउंसलिंग से जुड़ी हर जानकारी समय पर मिलती रहे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः 10वीं के बाद बनें आयुर्वेद डॉक्टर! केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया NEET-PA कोर्स
अंडरग्रेजुएट एडमिशन का काम भी जारी
PG एडमिशन के साथ-साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट एडमिशन का काम भी कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS के जरिए चल रहा है, जो 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए किया जा रहा है. यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1.90 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, जबकि इनमें से 1,64,098 कैंडिडेट्स अपनी प्रोग्राम और कॉलेज प्रेफरेंस भरकर फेज-2 का काम पूरा कर चुके हैं.
यह भी पढ़ेंः Delhi University Admission 2026: DU में एडमिशन का बजा बिगुल! 1.9 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, 16 जुलाई को आएगी पहली सीट लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>JMI University Exam Update: जामिया मिलिया इस्लामिया का बड़ा फैसला, अब कंपार्टमेंट एग्जाम से क्लियर होगा बैकलॉग</title>
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        <description><![CDATA[ JMI University Exam Update:&amp;nbsp; जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने अपने परीक्षा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को काफी राहत मिलने वाली है.&amp;nbsp; अक्सर देखा जाता है कि किसी स्टूडेंट का सिर्फ एक बैकलॉग पेपर बाकी रहने की वजह से भी उसकी पूरी डिग्री कई महीनों के लिए लटक जाती है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए यूनिवर्सिटी ने अपने परीक्षा नियमों में बदलाव किया है.&amp;nbsp;
यह फैसला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने ऑर्डिनेंस-15 में संशोधन करके मंजूर किया है. नए नियम के तहत, जो स्टूडेंट्स एनुअल सिस्टम के तहत फाइनल सेमेस्टर या फाइनल ईयर में पढ़ रहे हैं और उनके पास किसी भी पिछले सेमेस्टर या साल का बैकलॉग पेपर बाकी है, वो अब अपनी फाइनल सेमेस्टर या फाइनल एनुअल परीक्षा के बाद सीधे कंपार्टमेंट परीक्षा दे सकेंगे.
इसका मतलब है कि उन्हें अगले पूरे रेगुलर एग्जाम साइकिल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनकी डिग्री समय पर पूरी हो सकेगी. हालांकि यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ किया है कि यह नया नियम सिर्फ रेगुलर कोर्स में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स पर ही लागू होगा. जो स्टूडेंट्स डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए कोई कोर्स कर रहे हैं, उन्हें इस बदलाव का फायदा नहीं मिलेगा.&amp;nbsp; कंपार्टमेंट परीक्षाओं का शेड्यूल कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन का ऑफिस अलग से जारी करेगा.&amp;nbsp;
री-इवैल्यूएशन के नियम में भी हुआ संशोधन
परीक्षा नियमों में एक और अहम बदलाव किया गया है, जो री-इवैल्यूएशन यानी उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन से जुड़ा है. ऑर्डिनेंस-15 के क्लॉज 24.4 में हुए संशोधन के मुताबिक, जो कोर्स कैरी-ओवर सिस्टम का पालन करते हैं, उनमें आमतौर पर कंपार्टमेंट परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी. लेकिन फाइनल ईयर या फाइनल सेमेस्टर के स्टूडेंट्स के लिए इसमें एक खास छूट दी गई है, ताकि वो अपने बैकलॉग पेपर कंपार्टमेंट परीक्षा के जरिए ही क्लियर कर सकें.
इसके साथ ही क्लॉज 23.1 में भी संशोधन किया गया है, जिसके तहत अब फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स अपनी उत्तर पुस्तिका के री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की बजाय सीधे कंपार्टमेंट परीक्षा में बैठने का विकल्प चुन सकते हैं. वहीं दूसरे साल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी, यानी वो रिजल्ट आने के 15 दिनों के अंदर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, जैसा कि पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Rajasthan Senior Teacher Recruitment Exam: राजस्थान में कड़े इंतजामों के बीच शुरू हुई वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा, 9651 पदों पर होनी है भर्ती&amp;nbsp;
स्टूडेंट्स को कैसे मिलेगा इसका फायदा
यूनिवर्सिटी के इस फैसले को स्टूडेंट्स के लिए काफी राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई और आगे की योजनाओं में देरी नहीं होगी. पहले जिन स्टूडेंट्स का बैकलॉग पेपर बाकी रह जाता था, उन्हें अगली रेगुलर परीक्षा तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनकी डिग्री, आगे की पढ़ाई या नौकरी के मौके भी पीछे छूट जाते थे. लेकिन अब कंपार्टमेंट परीक्षा का सीधा विकल्प मिलने से स्टूडेंट्स कम समय में अपना बैकलॉग क्लियर कर पाएंगे और समय पर ग्रेजुएशन पूरी कर सकेंगे. यह पूरा फैसला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने मंजूर किया है और इसे ऑर्डिनेंस-15 में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः 10वीं के बाद बनें आयुर्वेद डॉक्टर! केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया NEET-PA कोर्स ]]></description>
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        <title>Study Abroad Trends: स्टडी अब्रॉड का नया ट्रेंड! विदेश पढ़ने गए भारतीय क्यों लौट रहे जल्दी? एक्सपर्ट ने बताई वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Study Abroad Trends : विदेश में पढ़ाई करना लंबे समय से भारतीय छात्रों का बड़ा सपना रहा है. बेहतर शिक्षा, अच्छी नौकरी और अंतरराष्ट्रीय एक्सपीरियंस के लिए हर साल लाखों छात्र दूसरे देशों का रुख करते हैं. हालांकि अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है. हाल के सालों में न सिर्फ विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है, बल्कि कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले की तुलना में जल्दी भारत लौट रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह बढ़ता खर्च, सख्त इमिग्रेशन नियम, बदलता जॉब मार्केट और भारत में बढ़ते करियर के अवसर जैसे कई कारण हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर भारतीय छात्र अब पहले से जल्दी भारत क्यों लौट रहे हैं.
विदेश पढ़ने का नजरिया क्यों बदल रहा है?
MSM Unify के संस्थापक और निदेशक संजय लॉल के अनुसार, विदेश में पढ़ाई को लेकर छात्रों की सोच पहले जैसी नहीं रही है. पहले अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को स्थायी रूप से विदेश में बसने का रास्ता माना जाता था, लेकिन अब छात्र ज्यादा व्यावहारिक तरीके से फैसले ले रहे हैं. उनका कहना है कि आज के छात्र अपने करियर और फ्यूचर को ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं. अगर उन्हें भारत में बेहतर अवसर दिखाई देते हैं, तो वे जल्दी वापस लौटने का फैसला कर रहे हैं.
विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में आई गिरावट
शिक्षा मंत्रालय की ओर से संसद में पेश ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले कुछ सालों में कम हुई है. साल 2023 में 9.08 लाख से ज्यादा छात्र विदेश पढ़ने गए थे. यह संख्या 2024 में घटकर 7.7 लाख रह गई. वहीं 2025 में यह और घटकर 6.26 लाख पहुंच गई. दो साल के अंदर विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में करीब 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.
विदेश पढ़ने गए भारतीय छात्र क्यों लौट रहे जल्दी?
संजय लॉल के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इमिग्रेशन नियम पहले से ज्यादा सख्त हो गए हैं. वीजा मिलने में ज्यादा समय लग रहा है और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने की स्थिति भी पहले जैसी आसान नहीं रही. खासकर एआई आधारित बदलावों के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद करियर को लेकर कंफ्यूजन बढ़ा है.&amp;nbsp;
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एक्सपर्ट ने बताई ये बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में पढ़ाई की फीस लगातार बढ़ रही है. इसके साथ रहने का खर्च भी पहले से ज्यादा हो गया है. वहीं रुपये की कीमत में गिरावट के कारण विदेश में पढ़ाई और महंगी पड़ रही है. कई देशों में पढ़ाई शुरू करने से पहले फंड का प्रमाण दिखाने की राशि भी काफी बढ़ा दी गई है. ऐसे में खासकर मिडिल क्लास परिवार अब विदेश में पढ़ाई पर होने वाले खर्च और उसके बदले मिलने वाले फायदा का पहले से ज्यादा सावधानी से आकलन कर रहे हैं.
भारत में बढ़ रहे हैं बेहतर करियर के अवसर&amp;nbsp;
संजय लॉल के अनुसार, भारत का जॉब मार्केट भी तेजी से बदल रहा है. देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNC), एआई आधारित कंपनियां और स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए अच्छी सैलरी वाली नौकरियों के अवसर बढ़े हैं. यही वजह है कि कई छात्र विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए जल्दी भारत लौटना पसंद कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की अहमियत कम होने का संकेत नहीं है. बल्कि छात्रों की सोच बदल रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Government School Report : 10 साल में देश में बंद हुए 94000 सरकारी स्कूल, हर दिन 25 स्कूलों पर लग रहा ताला</title>
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        <description><![CDATA[ Government School Report : सरकारी स्कूलों को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने देशभर का ध्यान खींचा है. पिछले 10 सालों में भारत में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं. इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, दो या उससे ज्यादा स्कूलों को मिलाकर एक स्कूल बना देना, घटता जन्म दर और बड़ी कक्षाओं तक छात्रों को स्कूल में बनाए रखने की चुनौतियां इस बदलाव की प्रमुख वजहें हैं. रिपोर्ट में सरकारी और निजी स्कूलों की संख्या, छात्रों के नामांकन और ड्रॉपआउट से जुड़े कई अहम आंकड़े भी सामने आए हैं.
10 साल में बंद हुए 94 हजार सरकारी स्कूल
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में देशभर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं. इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014-15 में देश में 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गए. इसी दौरान सरकारी सहायता प्राप्त (Government Aided) स्कूलों की संख्या 83 हजार से घट कर 79 हजार हो गई. &amp;nbsp;वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख पहुंच गई.
छात्रों के नामांकन में भी आई बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दशक में स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या भी कम हुई है. 2014-15 में कुल नामांकन 26.95 करोड़ था, जो 2024-25 में घटकर 24.69 करोड़ रह गया. इस दौरान करीब 2.26 करोड़ छात्रों का नामांकन कम हुआ है.
बड़ी कक्षाओं में बढ़ रहा ड्रॉपआउट
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर काफी कम है. पहली से पांचवीं कक्षा तक ड्रॉपआउट रेट केवल 0.3 प्रतिशत है. लेकिन छठी से आठवीं में यह बढ़कर 3.5 प्रतिशत और नौवीं-दसवीं तक 11.5 प्रतिशत हो जाता है. वहीं आठवीं से नौवीं कक्षा में जाने वाले छात्रों की दर 2014-15 के 91.58 प्रतिशत से घट कर 2024-25 में 86.6 प्रतिशत रह गई. रिपोर्ट के अनुसार, पुडुचेरी और केरल में यह दर 99.6 प्रतिशत है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह काफी कम दर्ज की गई है.
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नीति आयोग की रिपोर्ट School Education System in India: Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement के अनुसार, इस गिरावट की कई वजहें हैं. इनमें घटती प्रजनन दर, स्कूल जाने की उम्र वाले बच्चों की कम होती आबादी, कम छात्रों वाले पास-पास के स्कूलों को बंद करके सभी बच्चों को एक ही स्कूल में पढ़ाना &amp;nbsp;और ऊंची कक्षाओं तक छात्रों को स्कूल में बनाए रखने की चुनौती शामिल है.
स्कूलों के मर्ज होने पर क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक, कम छात्र संख्या वाले आसपास के सरकारी स्कूलों को आपस में मिलाकर संसाधनों का बेहतर यूज करने की नीति अपनाई गई. हालांकि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे कई इलाकों में बच्चों का स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो गया. खासकर लड़कियों के लिए स्कूल की दूरी बढ़ने के कारण कई मामलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और नामांकन भी घटा.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Indian Army Agniveer result 2026 : भारतीय सेना अग्निवीर रिजल्ट घोषित, ऐसे करें अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Army Agniveer result 2026 : भारतीय सेना में अग्निवीर बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. इंडियन आर्मी ने अग्निवीर कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड चेक कर सकते हैं.
रिजल्ट अलग-अलग आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO) और जोन के अनुसार पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया गया है. इसमें अगले चरण के लिए चुने गए उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर शामिल हैं. अगर आपने भी यह परीक्षा दी थी, तो अब अपना रिजल्ट देखकर आगे की चयन प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि अपना अग्निवीर रिजल्ट और स्कोरकार्ड डाउनलोड कैसे करें.&amp;nbsp;
किन पदों के लिए जारी हुआ रिजल्ट?
भारतीय सेना ने अग्निवीर भर्ती के कई पदों के लिए CEE परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है. इसमें Agniveer General Duty (GD), Agniveer Technical, Agniveer Tradesman (8वीं और 10वीं पास), Office Assistant/Clerk, Women Military Police, Sepoy Pharma और Soldier Technical Nursing Assistant जैसी श्रेणियां शामिल हैं. लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को अब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल होने का मौका मिलेगा.
कैसे डाउनलोड करें अग्निवीर रिजल्ट और स्कोरकार्ड?
1. सबसे पहले भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाएं.
2. होमपेज पर Agniveer CEE Result 2026 के लिंक पर क्लिक करें.
3. अब अपना संबंधित Army Recruitment Office (ARO) या जोन चुनें.
4. स्क्रीन पर मेरिट लिस्ट की पीडीएफ खुल जाएगी.
5. इसके बाद अपना रोल नंबर या नाम सर्च करें.
6. आखिर में रिजल्ट पीडीएफ डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें.
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लिखित परीक्षा पास करने के बाद क्या होगा?
कॉमन एंट्रेंस एग्जाम पास कर लेना लास्ट चयन नहीं माना जाएगा. भारतीय सेना में भर्ती के लिए उम्मीदवारों को सभी तय चरण पूरे करने होंगे. इसके बाद ही लास्ट मेरिट तैयार की जाएगी. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी आगे की सभी अपडेट, अगले चरण की तारीख और जरूरी निर्देशों के लिए समय-समय पर भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर नजर बनाए रखें.&amp;nbsp;
चयन प्रक्रिया के अगले चरण
1. फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT) - इसमें 1.6 किलोमीटर दौड़ के साथ पुल-अप्स, पुश-अप्स और सिट-अप्स जैसे शारीरिक परीक्षण होंगे.
2. फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट (PMT) - इस चरण में उम्मीदवार की लंबाई, वजन और सीने का माप तय मानकों के अनुसार जांचा जाएगा.
3. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन - शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाएगी.
4. मेडिकल टेस्ट - उम्मीदवार की सैन्य सेवा के लिए शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी फिटनेस की जांच होगी.
5. एडेप्टेबिलिटी टेस्ट - भर्ती नियमों के अनुसार जरूरत होने पर यह टेस्ट भी आयोजित किया जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली में खुली 35 हजार किताबों और 1 करोड़ ई&amp;बुक्स वाली लाइब्रेरी, फ्री Wifi का भी मिलेगा मजा</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और किताबें पढ़ने के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, दिल्ली में एनडीएमसी ने उद्यान मार्ग पर अत्याधुनिक जयप्रकाश नारायण पब्लिक लाइब्रेरी शुरू की है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया.&amp;nbsp;
लाइब्रेरी में क्या-क्या मिलेगा?
यह लाइब्रेरी करीब 2265 वर्गमीटर में बनी है और यहां एक साथ करीब 200 लोग बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं. यहां 35 हजार से ज्यादा किताबें, शोध पत्रिकाएं और संदर्भ पुस्तकें मौजूद हैं. इसके अलावा ई-लाइब्रेरी के जरिए 1 करोड़ से ज्यादा ई-बुक्स पढ़ने की सुविधा भी इस लाइब्रेरी में मिलेगी.
लाइब्रेरी में आधुनिक रीडिंग एरिया, रिसर्च सेंटर, बच्चों के लिए अलग किड्स जोन, मल्टीपर्पज ऑडिटोरियम, फ्री वाई-फाई और आरएफआईडी आधारित बुक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं हैं. इसे नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से भी जोड़ा जाएगा.
गृहमंत्री ने कही यह बात
अमित शाह ने कहा कि किसी देश का भविष्य खेती, बाजार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में पढ़ने आने वाले युवाओं से तय होता है. उन्होंने कहा कि किताबें पढ़ने से सोचने और समझने की क्षमता बढ़ती है, &amp;nbsp;इसलिए हर युवा को किसी न किसी पुस्तकालय से जरूर जुड़ना चाहिए.
उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके शहर की लाइब्रेरी ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला. बचपन में कहानी की किताबें पढ़ते-पढ़ते उनकी रुचि वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गई. उन्होंने कहा कि बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए, क्योंकि सही सोच किताबों से ही आती है.
उन्होंने दिल्ली सरकार से अपील की कि राजधानी के सभी सार्वजनिक पुस्तकालयों को आपस में जोड़ा जाए और उन्हें स्कूलों से भी कनेक्ट किया जाए. उन्होंने जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी के कर्मचारियों से कहा कि वे आसपास के स्कूलों के छात्रों को लाइब्रेरी आने के लिए प्रेरित करें, ताकि युवाओं में पढ़ने की आदत बढ़े.
छात्रों के लिए बड़ी सुविधा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह लाइब्रेरी दिल्ली के युवाओं और छात्रों के लिए बड़ी सौगात है. खासकर यूपीएससी और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को यहां बेहतर माहौल और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह लाइब्रेरी युवाओं को अपने सपने पूरे करने में मदद करेगी.
एनडीएमसी के अध्यक्ष केशव चंद्र ने बताया कि यह लाइब्रेरी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की याद में बनाई गई है. वहीं, एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि यह लाइब्रेरी आने वाले समय में युवाओं के लिए पढ़ाई, रिसर्च और नई सोच का बड़ा केंद्र बनेगी.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, खुली, हजार, किताबों, और, करोड़, ई-बुक्स, वाली, लाइब्रेरी, फ्री, Wifi, का, भी, मिलेगा, मजा</media:keywords>
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        <title>Rajasthan Senior Teacher Recruitment Exam: राजस्थान में कड़े इंतजामों के बीच शुरू हुई वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा, 9651 पदों पर होनी है भर्ती </title>
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        <description><![CDATA[ Rajasthan Senior Teacher Recruitment Exam: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की वरिष्ठ अध्यापक (सेकेंड ग्रेड) भर्ती परीक्षा आज से शुरू हो गई है. यह परीक्षा 18 जुलाई तक प्रदेशभर में आयोजित की जाएगी. भर्ती के जरिए 9,651 वरिष्ठ अध्यापक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. परीक्षा 41 जिलों के 1,917 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में सुबह 10 बजे से 12.30 बजे तक और दोपहर की पाली में 3 बजे से 5.30 बजे तक आयोजित की जा रही है.&amp;nbsp;
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए 12 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. अभ्यर्थियों को सघन तलाशी के बाद ही एंट्री दी जा रही है.महिला अभ्यर्थियों की भी कड़ी तलाशी हो रही है.
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इन विषयों के लिए आयोजित की जा रही परीक्षा&amp;nbsp;
यह भर्ती परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, उर्दू, पंजाबी और सिंधी सहित विभिन्न विषयों के लिए आयोजित की जा रही है. सभी केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की सघन तलाशी ली गई. पहचान पत्र और प्रवेश पत्र का मिलान करने के बाद ही परीक्षा कक्ष में भेजा गया.&amp;nbsp;नकल और पेपर लीक रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. परीक्षा केंद्रों की पूरी वीडियोग्राफी कराई जा रही है. संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है, जबकि उड़नदस्ते और निगरानी दल लगातार निरीक्षण कर रहे हैं.
एग्जाम सेंटर के आसपास धारा 163 लागू&amp;nbsp;
परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 163 लागू कर अनावश्यक भीड़ पर रोक लगाई गई है. प्रशासन ने अभ्यर्थियों से समय से पहले केंद्र पहुंचने और सभी नियमों का पालन करने की अपील की है.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>10वीं के बाद बनें आयुर्वेद डॉक्टर! केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया NEET&amp;PA कोर्स</title>
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        <description><![CDATA[ आयुर्वेद के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-प्री आयुर्वेद (NEET-PA) की अधिसूचना जारी कर दी है. इस नई व्यवस्था के तहत अब संस्कृत के साथ-साथ किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास छात्र-छात्राएं प्री-आयुर्वेद कार्यक्रम में प्रवेश लेकर आगे बीएएमएस की पढ़ाई कर सकेंगे और आयुर्वेद चिकित्सक बनने का रास्ता तय कर सकेंगे.
देशभर के आयुर्वेद गुरुकुलों में मिलेगा प्रवेश का अवसर
विश्वविद्यालय की ओर से शुरू किया गया यह कार्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) से अनुमोदित है. इसे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध देशभर के विभिन्न आयुर्वेद गुरुकुलों में संचालित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य संस्कृत शिक्षा और आयुर्वेद को एक साथ जोड़ते हुए पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित है पाठ्यक्रम
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और भारतीय ज्ञान परंपरा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उनके अनुसार संस्कृत का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद के मूल ग्रंथों, संहिताओं और शास्त्रीय अवधारणाओं को समझना अपेक्षाकृत आसान होता है. गुरुकुल आधारित शिक्षण मॉडल आयुर्वेद की पारंपरिक प्रामाणिकता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी मदद करेगा.
जुलाई के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. पवन कुमार के मुताबिक, नीट-पीए के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जुलाई के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी. प्रवेश परीक्षा अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाने की योजना है. परीक्षा देशभर में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी.
साढ़े सात साल में पूरा होगा पूरा शैक्षणिक कार्यक्रम
यह समेकित पाठ्यक्रम कुल साढ़े सात वर्ष का होगा. इसमें पहले दो वर्ष प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम कार्यक्रम के लिए निर्धारित हैं. इसके बाद साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस पाठ्यक्रम कराया जाएगा. अंत में एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होगी, जिसके बाद विद्यार्थी आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे.
जानिए कौन कर सकता है आवेदन?
इस कार्यक्रम के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे.
आयु सीमा में किसी भी वर्ग को नहीं मिलेगी छूट
प्रवेश के लिए 31 दिसंबर तक अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि आयु सीमा में किसी भी श्रेणी के अभ्यर्थियों को छूट देने का प्रावधान नहीं रखा गया है.
ऐसे होगी नीट-पीए प्रवेश परीक्षा
नीट-पीए परीक्षा ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट पर आयोजित की जाएगी. अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 150 मिनट यानी ढाई घंटे का समय मिलेगा. परीक्षा में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा. इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. प्रश्नपत्र संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विभिन्न पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को सुविधा मिल सके.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>10वीं, के, बाद, बनें, आयुर्वेद, डॉक्टर, केंद्रीय, संस्कृत, विश्वविद्यालय, ने, लॉन्च, किया, NEET-PA, कोर्स</media:keywords>
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        <title>Delhi University Admission 2026: DU में एडमिशन का बजा बिगुल! 1.9 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, 16 जुलाई को आएगी पहली सीट लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi University Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस साल यानी 2026-27 सेशन के लिए UG&amp;nbsp; में एडमिशन को लेकर स्टूडेंट्स का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS के जरिए अब तक कुल 1,90,645 यानी करीब 1.9 लाख कैंडिडेट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया है.&amp;nbsp; इनमें से 1,64,098 यानी 1.64 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने फेज-2 का प्रोसेस भी पूरा कर लिया है, जिसमें सब्जेक्ट मैपिंग के साथ-साथ कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकताएं भरने का काम शामिल था.&amp;nbsp;
इस साल यूनिवर्सिटी में कुल 73 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में एडमिशन दिया जाएगा, जो 69 कॉलेजों और डिपार्टमेंट्स में उपलब्ध हैं.&amp;nbsp; इन सभी कोर्सेज को मिलाकर कुल 71,624 सीटें भरी जाएंगी। खास बात यह है कि यूनिवर्सिटी इस बार लगभग 150 अलग-अलग बीए प्रोग्राम कॉम्बिनेशन भी ऑफर कर रही है, और पूरा सीट मैट्रिक्स पहले ही डीयू की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है.&amp;nbsp;
16 जुलाई को आएगी पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट
अब सभी स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स की नजरें 16 जुलाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन CSAS की पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी की जाएगी. जिन स्टूडेंट्स को सीट अलॉट होगी, उन्हें सीट स्वीकार करके एडमिशन फीस जमा करनी होगी. इसके बाद स्टूडेंट्स के पास दो ऑप्शन होंगे, या तो वो अपना एडमिशन फ्रीज कर सकते हैं, यानी उसी कॉलेज और कोर्स में बने रह सकते हैं, या फिर अगले राउंड में अपग्रेड का ऑप्शन चुन सकते हैं.&amp;nbsp;
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फीस पेमेंट होगी अब पहले से आसान
एडमिशन प्रोसेस को और आसान बनाने के लिए इस बार यूनिवर्सिटी ने एक नया वर्चुअल वॉलेट सिस्टम शुरू किया है. इस सिस्टम की खास बात यह है कि अगर किसी स्टूडेंट ने पहले राउंड में फीस जमा कर दी है, और बाद में उसे किसी दूसरे कॉलेज या कोर्स में अपग्रेड कर दिया जाता है, तो उसकी पहले जमा की गई राशि खुद-ब-खुद एडजस्ट हो जाएगी. इससे स्टूडेंट्स को बार-बार फीस भरने की झंझट से राहत मिलेगी और समय की भी बचत होगी.&amp;nbsp; यूनिवर्सिटी की योजना है कि नया एकेडमिक सेशन शुरू होने से पहले, यानी 28 जुलाई तक, एडमिशन के दो राउंड पूरे कर लिए जाएं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>कभी भी जारी हो सकती है UGC NET की आंसर की, ऐसे करें डाउनलोड</title>
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        <description><![CDATA[ UGC NET जून 2026 परीक्षा में शामिल हुए लाखों उम्मीदवार अब प्रोविजनल आंसर की का इंतजार कर रहे हैं.नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर आंसर की रिस्पांस शीट का क्वेश्चन पेपर जारी कर सकती है. आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान कर सकेंगे और यदि किसी उत्तर पर आपत्ति हो तो निर्धारित शुल्क के साथ ऑनलाइन चुनौती भी दर्ज कर सकेंगे.
जल्द जारी हो सकती है UGC NET 2026 की प्रोविजनल आंसर की
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने UGC NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 जून से 30 जून 2026 के बीच देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर कराया था. परीक्षा खत्म होने के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर प्रोविजनल आंसर की पर है.उम्मीद की जा रही है कि NTA किसी भी समय आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर Answer Key जारी कर सकती है. इसके साथ ही उम्मीदवारों की रिस्पांस सीट और क्वेश्चन पेपर भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
पिछले वर्षों का ट्रेंड क्या बताता है
अगर पिछले वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो NTA आमतौर पर परीक्षा समाप्त होने के एक से दो सप्ताह के भीतर प्रोविजनल आंसर की जारी करती है. वर्ष 2025 में परीक्षा 25 से 29 जून तक हुई थी और 6 जुलाई को आंसर की जारी कर दी गई थी.वहीं 2024 और 2023 में भी परीक्षा खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद प्रोविजनल आंसर की जारी की गई थी. इसी ट्रेंड को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार भी उम्मीदवारों का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है.
UGC NET Answer Key में क्या-क्या मिलेगा
प्रोविजनल आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने प्रश्न पत्र, रिस्पॉन्स शीट और आधिकारिक उत्तरों का मिलान कर सकेंगे. इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में उनके कितने उत्तर सही हैं और संभावित स्कोर कितना बन सकता है.यदि किसी उत्तर पर संदेह होता है तो उम्मीदवार उसे चुनौती देने का विकल्प भी चुन सकते हैं.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशनAnswer Key पर ऐसे दर्ज करें आपत्ति
अगर आपको प्रोविजनल आंसर की में किसी सवाल के जवाब पर आपत्ति है, तो NTA की ओर से तय समय के भीतर ऑनलाइन चुनौती दर्ज कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले ugcnet.nta.nic.in वेबसाइट पर जाएं और Challenge Answer Key लिंक पर क्लिक करें.इसके बाद अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि या पासवर्ड डालकर लॉगिन करें. अब जिस सवाल के उत्तर पर आपत्ति दर्ज करनी है, उसे चुनें और उसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.इसके बाद प्रति प्रश्न निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करके अपनी आपत्ति सबमिट कर दें. आवेदन जमा होने के बाद उसकी रसीद डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें.
UGC NET 2026 Answer Key ऐसे करें डाउनलोड
स्टेप 1: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.
स्टेप 2: होम पेज पर दिखाई देने वाले UGC NET June 2026 Provisional Answer Key लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3: अब अपना Application Number और Date of Birth या Password दर्ज करके लॉगिन करें.
स्टेप 4: लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर आपकी प्रोविजनल आंसर की और रिस्पॉन्स शीट दिखाई देगी.
स्टेप 5: सभी उत्तरों का ध्यान से मिलान करें और भविष्य के लिए Answer Key का PDF डाउनलोड करके उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;देशभर में हर दिन बंद हुए 13 स्कूल, सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में, UDISE रिपोर्ट ने चौंकाए आंकड़े ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>CUET और बोर्ड एग्जाम देने वाले छात्रों का डेटा लीक! कई वेबसाइट पर बेची जा रही निजी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ CUET 2026 और विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में शामिल छात्रों के डेटा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ वेबसाइटें छात्रों की निजी जानकारी बेच रही हैं. इस खबर के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपने सिस्टम को पूरी तरह सुरक्षित बताया है.
डेटा बेचने का दावा करने वाली वेबसाइटें चर्चा में
रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट पर कुछ वेबसाइटें दावा कर रही हैं कि उनके पास CUET 2026 और अन्य बोर्ड परीक्षाओं में शामिल छात्रों का डेटाबेस उपलब्ध है.इन वेबसाइटों के बारे में कहा गया है कि वे निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और एडमिशन से जुड़े संस्थानों को छात्रों का डेटा उपलब्ध कराती हैं. बताया जा रहा है कि डेटाबेस की कीमत उसके आकार और जानकारी के आधार पर करीब 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक रखी गई है.
छात्रों की कौन-कौन सी जानकारी होने का दावा
बताया गया है कि कथित डेटाबेस में छात्रों का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आवेदन संख्या, जन्मतिथि, माता-पिता के नाम, जेंडर और कैटेगरी जैसी कई निजी जानकारियां शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ वेबसाइटों ने संभावित खरीदारों को भरोसा दिलाने के लिए सीमित संख्या में रिकॉर्ड सैंपल के रूप में भी दिखाए हैं.हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है.यह भी पढ़ें - देशभर में हर दिन बंद हुए 13 स्कूल, सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में, UDISE रिपोर्ट ने चौंकाए आंकड़े
अगर किसी छात्र की निजी जानकारी बिना अनुमति के किसी के पास पहुंचती है या बेची जाती है, तो उसका गलत इस्तेमाल होने का खतरा बढ़ जाता है.ऐसे डेटा का उपयोग फर्जी एडमिशन कॉल, स्पैम मैसेज, साइबर ठगी या पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है. यही वजह है कि डेटा सुरक्षा से जुड़े मामलों को बेहद गंभीर माना जाता है.
NTA ने क्या कहा
पूरे मामले पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कहा है कि उम्मीदवारों की जानकारी की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. एजेंसी के अनुसार परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ा डेटा केवल सुरक्षित सरकारी प्लेटफॉर्म और सहमति आधारित प्रक्रिया के माध्यम से साझा किया जाता है.NTA का कहना है कि उसके आधिकारिक सिस्टम सुरक्षित हैं और उम्मीदवारों की जानकारी की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय अपनाए जाते हैं.यह भी पढ़ें - IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सरकारी MBBS कॉलेज में एडमिशन के लिए कितने नंबर हो सकते हैं जरूरी, जानें संभावित कटऑफ</title>
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        <description><![CDATA[ Re NEET UG 2026 परीक्षा पूरी होने के बाद अब लाखों उम्मीदवार रिजल्ट और कटऑफ का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी MBBS कॉलेज में दाखिले के लिए कितने अंक सुरक्षित माने जाएंगे. पिछले वर्षों के ट्रेंड और काउंसलिंग के आधार पर संभावित सेफ स्कोर का अनुमान लगाया गया है.
सरकारी MBBS कॉलेज में एडमिशन के लिए कितना स्कोर चाहिए?Re NEET UG 2026 के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए मुकाबला पहले की तरह कड़ा रहने की उम्मीद है. अनुमान के मुताबिक सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 610 या उससे अधिक अंक सुरक्षित माने जा सकते हैं.वहीं EWS के लिए 600+, OBC के लिए 590+, SC के लिए 520+ और ST के लिए 490+ अंक अच्छे माने जा रहे हैं. हालांकि अंतिम कटऑफ रिजल्ट और काउंसलिंग के बाद ही तय होगी.
अगर किसी उम्मीदवार के 680 या उससे ज्यादा अंक आते हैं तो उसे AIIMS और देश के बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की मजबूत संभावना हो सकती है.650 से 679 अंक वाले छात्रों के लिए भी बेहतरीन सरकारी कॉलेज मिलने के अच्छे अवसर रहेंगे. 620 से 649 अंक लाने वाले उम्मीदवारों के पास AIQ और स्टेट कोटा दोनों में अच्छी संभावना हो सकती है.600 से 619 अंक वाले छात्रों को कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट मिलने की उम्मीद रहेगी, जबकि 550 से 599 अंक वालों का एडमिशन राज्य, कैटेगरी और काउंसलिंग पर निर्भर करेगा.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;कभी भी जारी हो सकती है UGC NET की आंसर की, ऐसे करें डाउनलोड
15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा में कितनी रह सकती है कटऑफ
15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत हर साल पूरे देश के छात्र एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं, इसलिए यहां कटऑफ आमतौर पर ज्यादा रहती है.अनुमान है कि सामान्य वर्ग के लिए 615 से 630+, EWS के लिए 610 से 625+, OBC के लिए 590 से 610+, SC के लिए 520 से 550+ और ST के लिए 500 से 540+ अंक तक कटऑफ जा सकती है.
किन वजहों से बदल सकती है कटऑफइस साल की कटऑफ कई बातों पर निर्भर करेगी.अगर परीक्षा आसान रही और ज्यादा छात्रों ने अच्छे अंक हासिल किए तो कटऑफ बढ़ सकती है.वहीं पेपर कठिन होने पर कटऑफ में थोड़ी कमी आ सकती है.इसके अलावा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या, उपलब्ध MBBS सीटें, आरक्षण नीति और काउंसलिंग का ट्रेंड भी अंतिम कटऑफ तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
रिजल्ट के बाद क्या करें उम्मीदवाररिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपने स्कोर और रैंक के अनुसार AIQ और स्टेट कोटा काउंसलिंग की तैयारी शुरू करें.पसंदीदा मेडिकल कॉलेजों की सूची पहले से तैयार रखें और जरूरी दस्तावेज समय रहते व्यवस्थित कर लें.इससे काउंसलिंग के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>BPSC 72वीं प्रारंभिक परीक्षा की तारीख तय, 26 जुलाई को दो घंटे की होगी परीक्षा; जल्द जारी होंगे एडमिट कार्ड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bpsc-72वीं-प्रारंभिक-परीक्षा-की-तारीख-तय-26-जुलाई-को-दो-घंटे-की-होगी-परीक्षा-जल्द-जारी-होंगे-एडमिट-कार्ड</link>
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        <description><![CDATA[ बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है. आयोग ने 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (Combined Preliminary Examination) की परीक्षा तिथि घोषित कर दी है. आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह परीक्षा 26 जुलाई 2026 को राज्य के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी. परीक्षा का समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक निर्धारित किया गया है.
परीक्षा की तारीख सामने आने के बाद अब उम्मीदवारों का पूरा ध्यान एडमिट कार्ड और परीक्षा केंद्र की जानकारी पर है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश पत्र, परीक्षा केंद्र और अन्य जरूरी निर्देश जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे. ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर आयोग की वेबसाइट और आधिकारिक सूचना पर नजर बनाए रखें.
BPSC की संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा बिहार की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल है. हर साल लाखों युवा प्रशासनिक और अन्य राज्य सेवाओं में नौकरी पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं. इस बार भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के आवेदन करने की उम्मीद है, इसलिए परीक्षा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं.
आयोग की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित होगी. राज्य के अलग-अलग जिलों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवार निर्धारित समय के अनुसार परीक्षा देंगे. अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी गई है, ताकि दस्तावेजों की जांच और प्रवेश प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सके.
परीक्षा डेट की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में BPSC ने अपनी 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी किया था. इस परीक्षा में आयोग ने रिकॉर्ड 2,027 उम्मीदवारों का चयन किया, जो आजादी के बाद राज्य सेवा परीक्षाओं में सबसे अधिक चयन माना जा रहा है. इस उपलब्धि ने BPSC परीक्षाओं को लेकर युवाओं का उत्साह और बढ़ा दिया है.
70वीं परीक्षा के नतीजों में उत्तर प्रदेश की श्रद्धा पांडेय ने पहला स्थान हासिल किया था. टॉप-10 में चार महिला उम्मीदवारों ने जगह बनाई, जबकि टॉप-100 में 45 महिलाओं का चयन हुआ. आयोग के अनुसार, यह परिणाम राज्य सेवा परीक्षाओं के इतिहास में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले परिणामों में शामिल रहा.
पिछली भर्ती का हाल
पिछली भर्ती प्रक्रिया में कुल 2,027 पदों पर नियुक्ति की गई थी. इनमें अधिकांश पद बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के लिए थे. इसके अलावा बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) और वित्तीय प्रशासनिक अधिकारी जैसे पद भी शामिल थे. 70वीं परीक्षा के लिए करीब 4.83 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि लाखों उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए थे.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;कभी भी जारी हो सकती है UGC NET की आंसर की, ऐसे करें डाउनलोड
क्या करें कैंडिडेट्स?
अब 72वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी उम्मीदवारों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है. अभ्यर्थियों को नए विषय शुरू करने के बजाय रिवीजन, मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. इससे परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन और आत्मविश्वास दोनों बेहतर होंगे.
क्या करें?आयोग की ओर से एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवारों को उसमें दर्ज नाम, फोटो, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए. किसी भी तरह की गलती मिलने पर तुरंत आयोग से संपर्क करना जरूरी होगा.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;सरकारी MBBS कॉलेज में एडमिशन के लिए कितने नंबर हो सकते हैं जरूरी, जानें संभावित कटऑफ -&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कॉलेज का पहला साल आसान बनाना है, तो पहले दिन से अपनाएं ये 5 आदतें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कॉलेज-का-पहला-साल-आसान-बनाना-है-तो-पहले-दिन-से-अपनाएं-ये-5-आदतें</link>
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        <description><![CDATA[ कॉलेज की शुरुआत हर छात्र के लिए एक नया सफर होती है. यहां नई पढ़ाई, नए दोस्त, नए शिक्षक और बिल्कुल अलग माहौल मिलता है। ऐसे में कई छात्र शुरुआत में घबरा जाते हैं. लेकिन अगर आप पहले दिन से सही आदतें अपना लें, तो कॉलेज का पहला साल न सिर्फ आसान बल्कि आपके पूरे करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है.
पहले दिन से एक्टिव रहें, खुद को पीछे न रखें
कॉलेज में दाखिला लेने के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि खुद को अकेला महसूस न करें. क्लास में हिस्सा लें, कॉलेज की गतिविधियों में शामिल हों और नए लोगों से मिलने की कोशिश करें. जितना जल्दी आप नए माहौल में घुल-मिल जाएंगे, उतनी ही आसानी से कॉलेज लाइफ का आनंद ले पाएंगे.
शिक्षकों से खुलकर बात करें
अगर किसी विषय में परेशानी हो या करियर को लेकर कोई सवाल हो, तो अपने प्रोफेसर से बात करने में बिल्कुल संकोच न करें. शिक्षक सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं होते, बल्कि सही दिशा दिखाने में भी मदद करते हैं.उनसे अच्छा तालमेल भविष्य में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और नौकरी के अवसरों में भी काम आ सकता है.
अच्छे दोस्तों का साथ बनाएगा सफर आसान
कॉलेज में बने दोस्त सिर्फ क्लास तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई बार जिंदगीभर साथ निभाते हैं. इसलिए सहपाठियों से बातचीत करें, ग्रुप स्टडी करें और एक-दूसरे की मदद करें। इससे पढ़ाई आसान होगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा और परीक्षा का तनाव भी कम महसूस होगा.
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सिर्फ किताबों तक खुद को सीमित न रखें
कॉलेज जीवन का असली फायदा तब मिलता है, जब आप पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं. इंटर्नशिप, वर्कशॉप, सेमिनार, रिसर्च प्रोजेक्ट, क्लब और कैंपस इवेंट्स में भाग लेने से नए अनुभव मिलते हैं. यही अनुभव आगे चलकर आपके रिज्यूमे और करियर को मजबूत बनाते हैं.
खुद पर भरोसा रखें और सीखते रहें
कई बार नए छात्रों को लगता है कि वे दूसरों जितने अच्छे नहीं हैं. ऐसी सोच सामान्य है, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी न होने दें. याद रखें कि आपने अपनी मेहनत के दम पर कॉलेज में जगह बनाई है.अगर कोई कठिनाई आए तो मदद लें, सवाल पूछें और लगातार सीखते रहें. यही आदत आपको आगे बढ़ने में सबसे ज्यादा मदद करेगी.
कॉलेज का पहला साल तय कर सकता है आपका भविष्य
कॉलेज का शुरुआती समय सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का भी मौका होता है.अगर आप सीखने की इच्छा बनाए रखें, नए लोगों से जुड़ें, हर अवसर का फायदा उठाएं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो यही पहला साल आपके बेहतर करियर और सफल भविष्य की मजबूत शुरुआत बन सकता है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM YASASVI Scholarship 2026: पढ़ाई के लिए मिलेगी 75 हजार से 1.25 लाख रुपये तक की मदद, जानें कौन कर सकता है आवेदन</title>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>देशभर में हर दिन बंद हुए 13 स्कूल, सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में, UDISE रिपोर्ट ने चौंकाए आंकड़े</title>
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        <description><![CDATA[ देश में स्कूलों की स्थिति को लेकर शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक पूरे साल में औसतन हर दिन 13 स्कूल बंद हुए. सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश में बंद हुए हैं. वहीं कई राज्यों में छात्रों की संख्या भी कम हुई है, जबकि कुछ राज्यों में नए स्कूल भी खोले गए हैं.
देशभर में 4,791 स्कूल हुए बंद
रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 के दौरान पूरे भारत में कुल 4,791 स्कूल बंद हुए. इसका मतलब है कि हर दिन औसतन 13 स्कूल बंद हुए.देश में कुल स्कूलों की संख्या 14,71,473 से घटकर 14,66,682 रह गई. सबसे ज्यादा 2,426 स्कूल मध्य प्रदेश में बंद हुए.इसके बाद तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश का स्थान रहा.
कुछ राज्यों में खुले नए स्कूल
जहां कई राज्यों में स्कूलों की संख्या घटी, वहीं बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में नए स्कूल शुरू किए गए. बिहार में 946, छत्तीसगढ़ में 234 और दिल्ली में 87 नए स्कूल जुड़े. हालांकि इन राज्यों में छात्रों के नामांकन में कमी दर्ज की गई.
छात्रों की संख्या में भी आई गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में सबसे ज्यादा 4.37 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कम हुआ.इसके अलावा छत्तीसगढ़ और दिल्ली में भी पिछले साल की तुलना में छात्रों की संख्या घटी.इससे साफ है कि कई राज्यों में स्कूल तो बढ़े, लेकिन उनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम रही.
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बिना छात्रों वाले स्कूल पहली बार हुए कम
रिपोर्ट में एक राहत की बात भी सामने आई. पहली बार ऐसे स्कूलों की संख्या घटी है, जिनमें एक भी छात्र पढ़ाई नहीं कर रहा था. 2024-25 में ऐसे स्कूल 7,993 थे, जो अब घटकर 5,663 रह गए हैं.हालांकि इन स्कूलों में अब भी 20,667 शिक्षक कार्यरत हैं.
उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले
पश्चिम बंगाल में बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 4,133 हो गई है, जहां हजारों शिक्षक तैनात हैं. वहीं उत्तर प्रदेश में ऐसे स्कूलों की संख्या 81 से बढ़कर 313 हो गई. इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है. छत्तीसगढ़ में भी पहली बार 149 ऐसे स्कूल दर्ज किए गए, जहां कोई छात्र नामांकित नहीं है.
UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट बताती है कि देश में कई जगह स्कूलों की संख्या और छात्र नामांकन दोनों में बदलाव हो रहा है. कुछ राज्यों में नए स्कूल खुल रहे हैं, जबकि कई राज्यों में स्कूल बंद हो रहे हैं. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और छात्रों को स्कूलों से जोड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत मानी जा रही है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ IIT और IIIT में क्या है सबसे बड़ा अंतर जानिए, किस कॉलेज में मिलेगा बेहतर करियर और कैसे होगा एडमिशन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Pregnancy Glow: क्या होता है प्रेग्नेंसी ग्लो, क्या सच में निखर जाती है स्किन?</title>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>India First Bullet Train Recruitment 2026: भारत की पहली बुलेट ट्रेन चलाने के लिए निकली भर्ती! फटाफट करें अप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ NHSRCL Recruitment 2026: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में नौकरी करने का मौका सामने आया है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने टेक्नीशियन के 237 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार NHSRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
NHSRCL भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम कर रही सरकारी कंपनी है. इसके तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच देश का पहला हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जा रहा है. यह देश के सबसे बड़े रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड भारत सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की संयुक्त कंपनी है, जिसे देश में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने के लिए बनाया गया है.
कितने पदों पर निकली भर्ती और कब तक करें आवेदन?
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने कुल 237 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार 5 अगस्त 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट nhsrcl.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति NHSRCL या मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट में कहीं भी की जा सकती है.
किन-किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती के तहत कई तकनीकी ट्रेड में टेक्नीशियन नियुक्त किए जाएंगे. इनमें इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन (77 पद), सिग्नलिंग और टेलीकॉम टेक्नीशियन (63 पद), सिविल/ट्रैक फिटर (18 पद), सिविल/ट्रैक मैकेनिक (16 पद), रोलिंग स्टॉक इलेक्ट्रीशियन (13 पद) और रोलिंग स्टॉक फिटर (10 पद) शामिल हैं. इसके अलावा नोटिफिकेशन में ड्राफ्ट्समैन, सर्वेयर, वेल्डर, प्लंबर, पेंटर और अन्य तकनीकी ट्रेड के पद भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
कौन कर सकता है आवेदन?
उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक/एसएसएलसी पास किया होना चाहिए. इसके साथ संबंधित ट्रेड में आईटीआई, अप्रेंटिसशिप या तीन साल का इंजीनियरिंग डिप्लोमा होना जरूरी है. इसके अलावा उम्मीदवार के पास भारतीय रेलवे, सरकार के स्वामित्व वाली रेलवे, मेट्रो रेलवे या आरआरटीएस के ऑपरेशन मेंटेनेंस विभाग में कम से कम दो साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए. आवेदन के समय एक्सपीरियंस या कंपीटेंसी सर्टिफिकेट भी देना होगा. आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम उम्र 35 वर्ष तय की गई है.
चयन प्रक्रिया कैसे होगी?
इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा. जिसमें सबसे पहले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) आयोजित होगा. इसके बाद सफल उम्मीदवारों के डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन किया जाएगा. लास्ट में मेडिकल एग्जामिनेशन होगा. परीक्षा की तारीख और शेड्यूल बाद में NHSRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा. सभी चरण कलियर करने वाले उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.
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सैलरी, प्रोबेशन और आवेदन फीस&amp;nbsp;
चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति NE-2 पे लेवल के तहत Absorption Basis पर की जाएगी. उन्हें 35,000 रुपये से 1,10,000 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलेगा. नियुक्ति के बाद उम्मीदवारों को एक साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा करना होगा. इसके साथ ही जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 400 रुपये शुल्क देना होगा. वहीं एससी, एसटी और महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है.
आवेदन कैसे करें?
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले NHSRCL की आधिकारिक वेबसाइट nhsrcl.in पर जाएं. वहां भर्ती से संबंधित लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें. आवेदन के दौरान सभी जरूरी जानकारी सही-सही दर्ज करें और मांगे गए डॉक्यूमेंट अपलोड करें. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंट अपने पास सुरक्षित रख लें. आवेदन करने की लास्ट डेट 5 अगस्त 2026 है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - NEET UG 2026 Fee Refund : नीट रिफंड के लिए 14 जुलाई तक अपडेट कर सकते हैं बैंक डिटेल्स, जान लें पूरा तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DTU में एडमिशन का मौका, BTech, BBA और MBA के लिए आवेदन जारी, जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छा मौका है. यूनिवर्सिटी ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कई अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्सों में दाखिले शुरू कर दिए हैं. अलग-अलग कोर्सों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख, योग्यता और प्रवेश प्रक्रिया भी तय कर दी गई है. ऐसे में समय रहते आवेदन करना जरूरी है.
इन कोर्सों में मिल रहा है एडमिशन
DTU इस साल BTech, BBA, BA (Hons) Economics, BDes, MTech, MBA, Executive MBA, MSc, MDes और PhD जैसे कई कोर्सों में दाखिला दे रहा है. हर कोर्स के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा और पात्रता निर्धारित की गई है.इसलिए आवेदन करने से पहले अपने कोर्स की शर्तें जरूर देख लें.
BTech एडमिशन के लिए JAC Delhi की चौथे राउंड की सीट अलॉटमेंट 14 जुलाई 2026 को जारी होगी, जबकि अपग्रेडेशन राउंड 21 जुलाई को होगा. Executive MBA के लिए आवेदन की लास्ट डेट 12 जुलाई है. BBA के लिए आवेदन 14 जुलाई तक किए जा सकते हैं.MBA में अंतिम एडमिशन 7 अगस्त और BBA में 18 अगस्त 2026 तक पूरे किए जाएंगे.
किस कोर्स के लिए कौन-सी परीक्षा जरूरी है
BTech में एडमिशन JEE Main के आधार पर मिलेगा. BBA और BA (Hons) Economics के लिए CUET UG स्कोर जरूरी है.MBA में CAT या MAT स्कोर के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा.वहीं MTech के लिए GATE, MSc के लिए CUET PG और BDes के लिए UCEED स्कोर मान्य होंगे.
योग्यता क्या होनी चाहिए
BTech में आवेदन करने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए. BBA और BA (Hons) Economics के लिए 12वीं में 50 प्रतिशत अंक और अंग्रेजी विषय जरूरी है. MBA के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन होना चाहिए. अलग-अलग आरक्षित वर्गों के लिए नियमानुसार अंकों में छूट भी दी गई है.
कितनी है फीस
BTech की कुल फीस करीब 11.85 लाख रुपये है. BBA और BA (Hons) Economics की फीस लगभग 5.32 लाख रुपये रखी गई है. MBA की कुल फीस करीब 6.20 लाख रुपये और MTech की फीस लगभग 2.58 लाख रुपये है. अलग-अलग कोर्सों के हिसाब से फीस में अंतर हो सकता है.
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एडमिशन के समय ये दस्तावेज रखें तैयार
उम्मीदवारों के पास 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, प्रवेश परीक्षा का स्कोरकार्ड, ग्रेजुएशन की मार्कशीट (PG कोर्स के लिए), आधार कार्ड या अन्य फोटो आईडी, पासपोर्ट साइज फोटो, ट्रांसफर या माइग्रेशन सर्टिफिकेट और आरक्षण प्रमाणपत्र (अगर लागू हो) होना चाहिए.
आरक्षण का मिलेगा लाभयूनिवर्सिटी में SC, ST, OBC-NCL, EWS, PwD और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार सीटों में आरक्षण दिया जाएगा. इसलिए आवेदन करते समय सही श्रेणी से जुड़े सभी जरूरी प्रमाणपत्र साथ रखें.
स्कॉलरशिप का भी मिलेगा फायदाDTU में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को कई सरकारी और यूनिवर्सिटी स्तर की स्कॉलरशिप का लाभ भी मिलता है. इनमें SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक और मेधावी छात्रों के लिए अलग-अलग योजनाएं शामिल हैं. पात्र छात्र आवेदन के बाद इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं.
ऐसे होगा आवेदन
BTech के उम्मीदवारों को पहले JEE Main में शामिल होना होगा और उसके बाद JAC Delhi पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. BBA और MBA के लिए CMAC पोर्टल पर आवेदन करना होगा. MTech के अभ्यर्थी DTU की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.आवेदन के दौरान जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और निर्धारित फीस जमा करनी होगी.इसके बाद मेरिट लिस्ट, काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के जरिए एडमिशन पूरा होगा.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UPSC टॉपर भी हो सकते हैं फेल! LBSNAA के नियम जानकर रह जाएंगे हैरान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>रेलवे में 29,200 रुपये तक की सरकारी नौकरी का मौका, 29 जुलाई है आवेदन की आखिरी तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन ग्रेड-I और टेक्नीशियन ग्रेड-III के कुल 6,557 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. आवेदन की शुरुआत 30 जून से हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 29 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऐसे में उम्मीदवारों के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है.
इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत इसकी आकर्षक सैलरी है. चयनित अभ्यर्थियों को पद के अनुसार अच्छा शुरुआती वेतन मिलेगा. टेक्नीशियन ग्रेड-I पर चयन होने वाले उम्मीदवारों को 29,200 रुपये प्रति माह का शुरुआती वेतन मिलेगा, जबकि टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए चुने गए उम्मीदवारों को 19,900 रुपये प्रति माह की शुरुआती सैलरी दी जाएगी. इसके अलावा रेलवे के अन्य भत्तों का लाभ भी मिलेगा.
भर्ती अभियान के तहत कुल 6,557 रिक्तियां भरी जाएंगी. इनमें 323 पद टेक्नीशियन ग्रेड-I और 6,234 पद टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए निर्धारित किए गए हैं. रेलवे में स्थायी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह साल की बड़ी भर्तियों में से एक मानी जा रही है.
कौन अप्लाई कर सकता है?
योग्यता की बात करें तो टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना जरूरी है. वहीं संबंधित पदों के अनुसार निर्धारित तकनीकी योग्यता या इंजीनियरिंग से जुड़ी शैक्षणिक पात्रता भी मांगी गई है. आयु सीमा ग्रेड-I के लिए 18 से 33 वर्ष और ग्रेड-III के लिए 18 से 30 वर्ष तय की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट भी मिलेगी. एससी और एसटी वर्ग को पांच वर्ष तथा ओबीसी वर्ग को तीन वर्ष की छूट दी जाएगी.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;UPSC टॉपर भी हो सकते हैं फेल! LBSNAA के नियम जानकर रह जाएंगे हैरान
कैसे होगा चयन
उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) के जरिए होगा. परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें सामान्य जागरूकता, गणित, रीजनिंग, जनरल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर से जुड़े सवाल शामिल होंगे. परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी और प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू रहेगी.
ये हैं जरूरी डेट्स
जो उम्मीदवार आवेदन करने जा रहे हैं, उनके लिए जरूरी तारीखों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. ऑनलाइन आवेदन की अंतिम डेट 29 जुलाई 2026 है. आवेदन शुल्क 31 जुलाई तक जमा किया जा सकेगा. यदि आवेदन पत्र में किसी प्रकार की गलती रह जाती है, तो 1 अगस्त से 10 अगस्त 2026 तक उसमें सुधार करने का मौका भी दिया जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>रेलवे, में, 29, 200, रुपये, तक, की, सरकारी, नौकरी, का, मौका, जुलाई, है, आवेदन, की, आखिरी, तारीख</media:keywords>
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        <title>BAMS Admission 2026: अब संस्कृत के छात्र भी बन सकेंगे आयुर्वेदिक डॉक्टर, 10वीं के बाद मिलेगी सीधे BAMS की राह</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने 10वीं तक संस्कृत की पढ़ाई की है और डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, तो अब आपके लिए भी मौका है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्री-आयुर्वेद (NEET-PA) प्रवेश परीक्षा की घोषणा कर दी है. इस परीक्षा के जरिए छात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की पढ़ाई शुरू कर सकेंगे.
10वीं के बाद मिलेगा BAMS में प्रवेश का मौका
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए नया इंटीग्रेटेड प्री-आयुर्वेद कार्यक्रम शुरू किया है. इस कोर्स में प्रवेश लेने के लिए छात्रों को NEET-PA नाम की प्रवेश परीक्षा देनी होगी.परीक्षा में सफल होने के बाद छात्र आयुर्वेद गुरुकुल में पढ़ाई करेंगे और आगे चलकर BAMS की डिग्री हासिल कर सकेंगे.
साढ़े 7 साल में पूरा होगा कोर्स
पूरा कोर्स कुल 7.5 साल का होगा. इसमें पहले 2 साल प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम की पढ़ाई होगी। इसके बाद 4.5 साल का BAMS कोर्स कराया जाएगा. आखिर में 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी. इसके बाद छात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में अपना करियर शुरू कर सकेंगे.किसे मिलेगा आवेदन का मौका
इस प्रवेश परीक्षा के लिए वही छात्र आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड, राज्य संस्कृत बोर्ड या उसके समकक्ष बोर्ड से 10वीं पास की हो.सामान्य वर्ग के छात्रों के कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए. वहीं SC, ST, OBC और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं.
आयु सीमा क्या होगी
आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र 31 दिसंबर 2026 तक कम से कम 15 वर्ष और अधिकतम 25 वर्ष होनी चाहिए.विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि किसी भी वर्ग के उम्मीदवार को आयु सीमा में छूट नहीं मिलेगी.
कब शुरू होंगे आवेदन
विश्वविद्यालय के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जुलाई 2026 के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी.प्रवेश परीक्षा अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में देशभर के तय परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी.
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कैसे होगी प्रवेश परीक्षा
NEET-PA परीक्षा ऑफलाइन OMR शीट पर होगी.परीक्षा का समय ढाई घंटे यानी 150 मिनट रहेगा. इसमें कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे.हर सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा और किसी भी गलत उत्तर पर नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. परीक्षा संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी तीन भाषाओं में आयोजित की जाएगी.
सिलेबस में क्या-क्या शामिल है
विश्वविद्यालय ने परीक्षा का सिलेबस भी जारी कर दिया है. इसमें संस्कृत साहित्य, व्याकरण, दर्शन, पुराण, इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) से जुड़े विषय शामिल किए गए हैं.इन विषयों के आधार पर ही प्रश्न पूछे जाएंगे.
NCISM से मिली मंजूरी
यह पूरा कार्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) से मान्यता प्राप्त है. इसी साल केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और NCISM ने आयुर्वेद गुरुकुलों को जोड़ने के लिए एक विशेष पोर्टल भी शुरू किया था. अब प्रवेश परीक्षा की घोषणा के साथ इस नई व्यवस्था को लागू किया जा रहा है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - कॉन्स्टेबल के बंपर पदों पर भर्ती शुरू, 64 हजार मिलेगी सैलरी; तुरंत करें अप्लाई ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BAMS, Admission, 2026:, अब, संस्कृत, के, छात्र, भी, बन, सकेंगे, आयुर्वेदिक, डॉक्टर, 10वीं, के, बाद, मिलेगी, सीधे, BAMS, की, राह</media:keywords>
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        <title>NCERT की किताबों के कागज पर विवाद, शिक्षा मंत्रालय ने मांगी पूरी रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों के लिए कागज सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का मामला अब शिक्षा मंत्रालय तक पहुंच गया है. इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जांच के आदेश दिए हैं. मंत्रालय यह पता लगाएगा कि कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई सही प्रक्रिया के तहत हुई या नहीं और अदालत में एनसीईआरटी की तरफ से हुई लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है.अब इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्रालय और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों की नजर बनी हुई है.एनसीईआरटी ने आरोप लगाया कि कागज सप्लाई करने वाली कंपनी तय समय पर पेपर नहीं दे सकी.इसी वजह से 22 जून को कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. इसके बाद कंपनी को एनसीईआरटी के नए टेंडर और खरीद प्रक्रिया में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया.
कंपनी ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी.सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से कोई अधिकारी मौजूद नहीं था. इसके बाद कोर्ट ने फिलहाल कंपनी को राहत देते हुए एनसीईआरटी को उसकी 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक गारंटी भुनाने से रोक दिया.
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शिक्षा मंत्रालय ने जांच क्यों बैठाई?
शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि अदालत में एनसीईआरटी अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पाया.इसी वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.साथ ही यह भी कहा है कि अगर किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
कंपनी ने क्या सफाई दी?
कंपनी का कहना है कि सप्लाई में देरी उसकी वजह से नहीं हुई. उसका दावा है कि ईरान में युद्ध के कारण कागज बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी रसायन समय पर नहीं मिल पाया. इसी वजह से पेपर तैयार करने और सप्लाई करने में देरी हुई.अब इस मामले में दो स्तर पर कार्रवाई होगी. एक तरफ दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर शिक्षा मंत्रालय अपनी जांच करेगा.जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि एनसीईआरटी की कार्रवाई पूरी तरह नियमों के मुताबिक थी या नहीं. साथ ही अदालत में सही तरीके से पक्ष नहीं रखने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बारिश या ट्रैफिक जाम की वजह से छूटा एग्जाम तो कौन होगा इसका जिम्मेदार, कहां कर सकते हैं शिकायत?</title>
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        <description><![CDATA[ Exam Missed Due To Rain: कंपटीशन एग्जाम और यूनिवर्सिटी एग्जाम के दौरान समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना हर छात्र के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. हालांकि, कई बार बारिश के मौसम में बारिश, ट्रैफिक जाम या दूसरी वजह से कई छात्र चाहकर भी परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाते. ऐसे मामले में कई बार सवाल उठाते हैं कि अगर बड़ी संख्या में छात्रों का एग्जाम छूट जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और क्या छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिल सकता है.
हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां भारी बारिश और सड़क धंसने की घटना के कारण 300 से ज्यादा छात्र अपने यूनिवर्सिटी परीक्षा देने समय पर नहीं पहुंच सके. इसके बाद छात्रों ने परीक्षा दोबारा आयोजित करने की मांग उठाई. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बारिश या ट्रैफिक जाम की वजह से एग्जाम छूट गया तो कौन जिम्मेदार होगा और क्या इसके लिए दूसरा मौका मिल सकता है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
महाराष्ट्र के नासिक में बारिश ने बिगाड़ा छात्रों का परीक्षा शेड्यूल
महाराष्ट्र के नासिक में लगातार हो रही बारिश और एक निर्माणाधीन स्थल पर जमीन धंसने के कारण नासिक त्र्यंबकेश्वर रोड पर कई घंटे तक लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है. इसी रास्ते में संदीप फाऊंडेशन कॉलेज, ब्रह्मा वैली कॉलेज, सपकाल कॉलेज, समेत कई इंस्टिट्यूट के छात्र सुबह 10 बजे होने वाली परीक्षा देने जा रहे थे. बताया गया कि कई छात्र सुबह 8 बजे से ही जाम में फंस गए और समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके. इसका सबसे ज्यादा असर इंजीनियरिंग के फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर और फार्मेसी के सेकंड ईयर और थर्ड ईयर के छात्रों पर पड़ा. करीब 300 से ज्यादा छात्रों की परीक्षा छूट गई. इसके बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि बुधवार को हुई परीक्षाओं को रद्द कर उनके लिए नई तारीख घोषित की जाए. छात्रों का कहना है की स्थिति पूरी तरह प्राकृतिक कारणों से बनी थी और इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्या ऐसे मामलों में दोबारा होती है परीक्षा?
अगर किसी प्राकृतिक आपदा, भारी बारिश, बाढ़, सड़क बंद होने या दूसरी असाधारण परिस्थितियों की वजह से बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा से वंचित रह जाते हैं, तो कई बार परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी अलग व्यवस्था कर सकती है. हालांकि इसका कोई एक नियम नहीं है और अंतिम फैसला संबंधित परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या कॉलेज ही लेता है. जरूरत पड़ने पर एजेंसी प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा, नई परीक्षा तिथि या दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती हैं, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह स्थिति और संबंधित परीक्षा प्राधिकरण पर निर्भर करता है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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गुजरात सरकार ने दिया था दूसरा मौका
ऐसा पहले भी देखने को मिला है गुजरात में बारिश और जल बराबर के कारण कई छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा नहीं दे सके थे. इसके बाद राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि जिन छात्रों की परीक्षा बारिश की वजह से छूट गई, उनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित की जाएगी. शिक्षा विभाग ने छात्रों से कहा था कि वह अपनी तैयारी जारी रखें क्योंकि मौजूदा सप्लीमेंट्री परीक्षा समाप्त होने के बाद उनके लिए नई परीक्षा आयोजित की जाएगी. &amp;nbsp;
कहां कर सकते हैं शिकायत?
अगर किसी छात्र का एग्जाम प्राकृतिक आपदा, प्रशासनिक व्यवस्था या बड़े स्तर पर ट्रैफिक जाम होने की वजह से छूट जाता है, तो सबसे पहले संबंधित विश्वविद्यालय, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या बोर्ड से कांटेक्ट किया जा सकता है. अगर बड़ी संख्या में परीक्षार्थी प्रभावित हुए हैं, तो परीक्षा प्राधिकरण परिस्थितियों की समीक्षा कर दोबारा परीक्षा या वैकल्पिक व्यवस्था का फैसला ले सकता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बारिश, या, ट्रैफिक, जाम, की, वजह, से, छूटा, एग्जाम, तो, कौन, होगा, इसका, जिम्मेदार, कहां, कर, सकते, हैं, शिकायत</media:keywords>
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        <title>AI से लेकर Python तक... CBSE छात्रों को देगा भविष्य की टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग; शुरू किए फ्री के कोर्स</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ai-से-लेकर-python-तक-cbse-छात्रों-को-देगा-भविष्य-की-टेक्नोलॉजी-की-ट्रेनिंग-शुरू-किए-फ्री-के-कोर्स</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप सीबीएसई से पढ़ाई कर रहे हैं और नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पाइथन प्रोग्रामिंग या साइबर सिक्योरिटी सीखना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए 19 फ्री ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध कराए हैं. इन कोर्स की मदद से छात्र स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल दुनिया की नई स्किल्स भी सीख सकेंगे.
ये सभी कोर्स एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. सबसे खास बात यह है कि इन कोर्स के लिए छात्रों को कोई फीस नहीं देनी होगी. विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं.
8वीं से 12वीं तक के छात्र उठा सकते हैं फायदा
इन ऑनलाइन कोर्स का लाभ कक्षा 8वीं से 12वीं तक के छात्र ले सकते हैं. बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराना है. इससे उन्हें स्कूल स्तर पर ही उन विषयों की शुरुआती समझ मिल जाएगी, जिनकी आने वाले समय में सबसे ज्यादा मांग रहने वाली है.
AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे विषय शामिल
इन 19 कोर्स में कई ऐसे विषय शामिल किए गए हैं, जो आज की डिजिटल दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनरेटिव AI, पाइथन प्रोग्रामिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, VLSI डिजाइन, 3D प्रिंटिंग और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की जानकारी हासिल कर सकेंगे.
इसके अलावा AWS DevSecOps के बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस स्तर के कोर्स, कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स, चिपक्राफ्ट, डीपक्राफ्ट स्टूडियो, RTL, IP Integration और SoC Signoff जैसे विशेष पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए गए हैं.यह भी पढ़ें - बेटियां लिख रही हैं हायर एजुकेशन की नई कहानी, लगातार सातवें साल लड़कों से आगे; STEM में भी बढ़ी मजबूत भागीदारी
भविष्य के करियर की तैयारी में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे. ऐसे में अगर छात्र स्कूल के दौरान ही इन तकनीकों की बुनियादी जानकारी हासिल कर लेते हैं, तो उन्हें उच्च शिक्षा और करियर में काफी फायदा मिलेगा. यही वजह है कि सीबीएसई छात्रों में डिजिटल स्किल्स और प्रोग्रामिंग की समझ विकसित करने पर जोर दे रहा है.
डेढ़ घंटे से लेकर 20 घंटे तक के कोर्स
इन ऑनलाइन कोर्स की अवधि एक जैसी नहीं है. कुछ कोर्स ऐसे हैं जिन्हें करीब डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकता है, जबकि कुछ एडवांस कोर्स 20 घंटे या उससे अधिक समय के हैं. छात्र अपनी रुचि और उपलब्ध समय के अनुसार किसी भी कोर्स का चयन कर सकते हैं.
ऐसे करें आवेदन
इन कोर्स में दाखिला लेने के लिए इच्छुक छात्रों को NIELIT Digital University (NDU) के ऑनलाइन पोर्टल पर जाना होगा. वहां अपनी पसंद का कोर्स चुनकर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>AI के दौर में संस्कृत की बढ़ी वैल्यू, इन यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लेकर बना सकते हैं करियर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप ग्रेजुएशन के बाद ऐसा कोर्स करना चाहते हैं, जिसमें भविष्य में अच्छे करियर की संभावना हो, तो संस्कृत आपके लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है. डिजिटल टेक्नोलॉजी और नई शिक्षा नीति के बाद इस भाषा की मांग पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है.यही वजह है कि देश के कई बड़े विश्वविद्यालय संस्कृत के आधुनिक और रोजगार से जुड़े कोर्स चला रहे हैं.
AI और भाषा तकनीक में बढ़ रही है संस्कृत की जरूरत
आज दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारतीय भाषाओं पर तेजी से काम हो रहा है. भाषा आधारित तकनीकों को बेहतर बनाने के लिए संस्कृत की व्याकरणिक संरचना को उपयोगी माना जाता है. इसी कारण भाषा तकनीक, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में संस्कृत जानने वाले युवाओं की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है. आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अवसर बढ़ने की उम्मीद है.
पढ़ाई के बाद मिल सकते हैं कई करियर विकल्प
संस्कृत की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए अब सिर्फ शिक्षक बनने का ही रास्ता नहीं है.इस विषय के जरिए छात्र रिसर्च, कंटेंट राइटिंग, ट्रांसलेशन, डिजिटल एजुकेशन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषा तकनीक और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे कई क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं. कई छात्र यूपीएससी और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान भी संस्कृत को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं.
इन यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के अवसर
देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय संस्कृत में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और अन्य विशेष कोर्स कराते हैं. सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा में एमए संस्कृत के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है. इसके अलावा सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी (नई दिल्ली), श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) और नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी (तिरुपति) भी संस्कृत के कई आधुनिक और पारंपरिक कोर्स उपलब्ध कराते हैं.
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पारंपरिक ज्ञान के साथ मिलती हैं आधुनिक स्किल्स
इन संस्थानों में छात्रों को केवल संस्कृत साहित्य ही नहीं पढ़ाया जाता, बल्कि कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन, भाषा विज्ञान, डिजिटल मैन्युस्क्रिप्ट, रिसर्च और अन्य आधुनिक विषयों की भी जानकारी दी जाती है. इससे छात्र बदलती तकनीक और नौकरी की जरूरतों के अनुसार खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं पर बढ़ते फोकस के कारण आने वाले वर्षों में संस्कृत की उपयोगिता और बढ़ेगी. अगर आप ऐसा विषय चुनना चाहते हैं जिसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक करियर की भी संभावना हो, तो संस्कृत एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. सही विश्वविद्यालय और सही कोर्स का चयन आपके करियर को नई दिशा दे सकता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र बदला, 2027&amp;28 से 1 अप्रैल से शुरू होगा नया अकादमिक सत्र, सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने का फैसला लिया है. स्कूल शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से पूरे राज्य में शिक्षा सत्र का संचालन 1 अप्रैल से 31 मार्च तक करने का निर्णय लिया है. इस बदलाव का उद्देश्य राज्य की शिक्षा व्यवस्था को देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों के अनुरूप बनाना और विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से शैक्षणिक गतिविधियां अधिक व्यवस्थित होंगी और विद्यार्थियों को समय पर अध्ययन सामग्री मिलने से पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी.
वर्तमान शिक्षा सत्र में होगा बदलाव
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र 16 जून से 30 अप्रैल तक संचालित होता है. अब इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक सत्र प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक चलेगा. इससे राज्य का शिक्षा कैलेंडर देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों और मंडलों के समान हो जाएगा. सरकार का मानना है कि एक समान शैक्षणिक सत्र होने से प्रशासनिक कार्यों, परीक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में भी बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा.
ग्रीष्मकालीन अवकाश में नहीं होगा कोई बदलाव
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा सत्र में बदलाव का असर विद्यार्थियों की गर्मी की छुट्टियों पर नहीं पड़ेगा. पहले की तरह ही 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा. यानी छात्रों और शिक्षकों को मिलने वाली छुट्टियों की अवधि में कोई कटौती नहीं की गई है. केवल शैक्षणिक सत्र की समय-सीमा में बदलाव किया गया है ताकि पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां समयबद्ध तरीके से संचालित हो सकें.
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सत्र के पहले दिन से मिलेंगी सभी सुविधाएं
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं. अब प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को नए सत्र की शुरुआत के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव आयोजित किया जाएगा. इसी दिन से विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण, सरस्वती सायकल योजना के तहत सायकलों का वितरण, स्कूली गणवेश उपलब्ध कराना तथा अन्य छात्रहितैषी योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा. इससे विद्यार्थियों को सत्र शुरू होने के बाद लंबे समय तक किताबों, यूनिफॉर्म या अन्य सुविधाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
शिक्षण व्यवस्था होगी अधिक प्रभावी
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से विद्यालयों में शिक्षण कार्य पहले दिन से ही नियमित रूप से शुरू हो सकेगा. विद्यार्थियों को सभी आवश्यक संसाधन समय पर मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शिक्षकों को भी पूरे सत्र की शैक्षणिक योजना तय समय पर लागू करने में सुविधा मिलेगी. इसके अलावा शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षाओं और विभिन्न छात्र कल्याण योजनाओं का संचालन भी अधिक सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा. शिक्षा विभाग का मानना है कि यह निर्णय राज्य की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>छत्तीसगढ़, में, शिक्षा, सत्र, बदला, 2027-28, से, अप्रैल, से, शुरू, होगा, नया, अकादमिक, सत्र, सरकार, का, बड़ा, फैसला</media:keywords>
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        <title>UGC&amp;NET Paper Leak: NEET के बाद UGC NET भी लीक! दावा&amp; 2.5 लाख में बिका पेपर, 90 सवाल सेम टू सेम </title>
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        <description><![CDATA[ UGC-NET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसियों में शुमार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. नीट यूजी पेपर लीक विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब यूजीसी नेट परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगने लगे हैं. दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 को हुई यूजीसी नेट की सोशियोलॉजी परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें मौजूद लगभग 90 सवाल असली पेपर से मिलते-जुलते पाए गए. इस खुलासे के बाद अभ्यर्थियों में गुस्सा और एनटीए की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं.
100 पन्नों की पीडीएफ पर उठे सवाल &amp;nbsp;
अभ्यर्थियों का कहना है की परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर 100 पन्नों की पीडीएफ शेयर की जा रही थी. दावा किया गया कि यह कोई सामान्य नोट्स नहीं बल्कि प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़ा डॉक्यूमेंट था. परीक्षा होने के बाद छात्रों ने आरोप लगाया कि इस पीडीएफ में दिए गए लगभग 90 प्रश्न और उनके विकल्प परीक्षा में पूछे गए सवालों में काफी हद तक मेल खाते हैं. बताया जा रहा है कि पीडीएफ का मेटाडेटा परीक्षा देने वाले सुबह दिन सुबह का था, जबकि परीक्षा दोपहर में आयोजित हुई थी. इससे छात्रों ने पेपर लीक की &amp;nbsp;आशंका जताई है.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
2.25 लाख रुपये में पेपर बेचने का दावा &amp;nbsp;&amp;nbsp;
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब आरोप लगे कि यह कथित प्रश्न पत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में लगभग 2.25 लाख रुपये में बेचा जा रहा था. कुछ छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि इस नेटवर्क ने आने वाले सीएसआईआर-नेट, एचटीईटी और एडीए जैसी परीक्षाओं के पेपर उपलब्ध कराने का दावा भी किया था. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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राहुल गांधी ने सरकार और एनटीए पर उठाए सवाल&amp;nbsp;
इन प्रश्न पत्र को लेकर उठ रहे सवालों के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार और एनटीए पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पहले से प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़ा दस्तावेज सामने आना बहुत गंभीर मामला है. उनका दावा है कि वायरल पीडीएफ के कई प्रश्न असली सोशियोलॉजी पेपर से मेल खाते हैं. राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि कथित प्रश्न पत्र कई राज्यों में लाखों रुपये बेचा जा रहा था. उन्होंने कहा कि लगातार परीक्षा संबंधी विवादों के बावजूद छात्रों को जवाबदेही और न्याय नहीं मिल पा रहा. इसके अलावा राहुल गांधी ने कहा की बार-बार हुई गड़बड़ियों के बावजूद सरकार आंखें मूंदे बैठी है, क्योंकि छात्रों की मेहनत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती. वहीं कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एनटीए से पूरे मामले की जांच करने और तथ्यों का पता लगाने को कहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Affordable MBBS Colleges: नीट में कम नंबरों पर भी मिलेगा मेडिकल कॉलेज, ये हैं देश के सबसे कम फीस वाले MBBS संस्थान</title>
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        <description><![CDATA[ Affordable MBBS Colleges India: देशभर में लाखों छात्र हर साल डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट परीक्षा देते हैं. हालांकि, सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीमित सीटों और कंपटीशन के चलते हर उम्मीदवार को मनचाहा कॉलेज नहीं मिल पाता. ऐसे में कई छात्रों और पेरेंट्स की सबसे बड़ी चिंता एमबीबीएस फीस की होती है, क्योंकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में पूरे कोर्स का खर्चा लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है.
अगर सही जानकारी और समझदारी से कॉलेज का चयन किया जाए तो कम फीस में भी एमबीबीएस की पढ़ाई संभव है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट में कम नंबरों पर भी मेडिकल कॉलेज एडमिशन कैसे मिलेगा और देश के सबसे कम फीस वाले एमबीबीएस इंस्टीट्यूट कौन से हैं.
सरकारी और प्राइवेट कॉलेज की फीस में बड़ा अंतर
भारत में एमबीबीएस की फीस कॉलेज के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है. सरकारी मेडिकल कॉलेज में पूरे कोर्स की फीस कुछ हजार रुपये से लेकर लगभग 6 लाख रुपये तक हो सकती है. वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में यह खर्च 40 लाख रुपये से लेकर 2 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा भी पहुंच सकता है. सबसे कम फीस वाले इंस्टीट्यूट में एम्स का नाम सबसे ऊपर आता है. यहां पूरे साढ़े पांच साल के एमबीबीएस कोर्स की कुल फीस को हजारों रुपये के आसपास रहती है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में छात्र एम्स में एडमिशन पाने का टारगेट रखते हैं .
देश के सबसे कम फीस वाले एमबीबीएस कॉलेज &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर
अगर आपका नीट का स्कोर टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट की कट ऑफ तक नहीं पहुंचा है, तब भी कई मेडिकल सरकारी मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं, जहां पिछले सालों के ट्रेंड के अनुसार कम रैंक पर एडमिशन मिलता है. इन कॉलेज में सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर भी शामिल है, पिछले कुछ वर्षों के ट्रेंड में करीब 19,000 तक की क्लोजिंग रैंक पर यहां एडमिशन मिला है. यहां एमबीबीएस की फीस भी सरकारी कॉलेज के हिसाब से काफी किफायती है. &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज, लातूर
महाराष्ट्र में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज लातूर में लगभग 20,000 के आसपास की क्लोजिंग रैंक तक सीटें मिली है. यहां फीस भी दूसरे इंस्टीट्यूट की तुलना में बहुत कम रहती है. &amp;nbsp;
शाहिद हसन खान मेवाती सरकारी मेडिकल कॉलेज, हरियाणा
हरियाणा के इस मेडिकल कॉलेज में भी अंतिम राउंड तक कम रैंक वाले छात्रों को एडमिशन मिले हैं. इसके अलावा इस कॉलेज की फीस भी महंगे एमबीबीएस वाले कॉलेज से बहुत कम बताई जाती है.
लेट बालीराम कश्यप मेमोरियल सरकारी मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में स्थित यह कॉलेज कम फीस और सरकारी सीटों के कारण छात्रों के पसंदीदा कॉलेज में शामिल रहता है. नीट में कम नंबर आने पर यहां भी आसानी से एडमिशन मिल जाता है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
सरकारी मेडिकल कॉलेज फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश
&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी कम फीस के साथ स्टूडेंट्स एमबीबीएस कर सकते हैं. यहां की क्लोजिंग रैंक लगभग 26,148 बताई जाती है.&amp;nbsp;
अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज
त्रिपुरा के अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी अंतिम राउंड तक कम रैंक वाले छात्रों को सीट मिलने का ट्रेंड देखा गया है.
कम फीस वाले प्राइवेट कॉलेज
सरकारी कॉलेज में सीटें नहीं मिलने पर कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी ऐसे हैं, जहां दूसरे प्राइवेट इंस्टीट्यूट की तुलना में फीस कम है. इन कॉलेज में शादान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, गंगा रेड्डी भी शामिल है. यहां एमबीबीएस की फीस कम मानी जाती है. &amp;nbsp;इसके अलावा सिमएसआरसी बेंगलुरु भी लिस्ट में शामिल है, जिसे कम फीस वाले प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में गिना जाता है. वहीं डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नई दिल्ली भी इस लिस्ट में शामिल है. यहां एमबीबीएस की कुल फीस कई प्राइवेट कॉलेज की तुलना में बहुत कम है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Affordable, MBBS, Colleges:, नीट, में, कम, नंबरों, पर, भी, मिलेगा, मेडिकल, कॉलेज, ये, हैं, देश, के, सबसे, कम, फीस, वाले, MBBS, संस्थान</media:keywords>
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        <title>MNC Companies Cost Cutting : मुनाफे में होने के बाद भी क्यों Cost Cutting कर रहीं बड़ी MNC कंपनियां? ये है असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ MNC Companies Cost Cutting&amp;nbsp;: अब कॉर्पोरेट की दुनिया तेजी से बदल रही है. आज दुनिया की कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां शानदार मुनाफा कमाने के बाद भी कॉस्ट कटिंग कर रही हैं और कर्मचारियों की संख्या भी घटा रही हैं. कंपनियों की रणनीति अब पहले जैसी नहीं रही, अब केवल कमाई बढ़ाना ही गोल नहीं है, बल्कि खर्च को कंट्रोल करना, कामकाज को ज्यादा आसान बनाना और फ्यूचर की तकनीकों में निवेश बढ़ाना भी उतना ही जरूरी हो गया है.
यही वजह है कि कई कंपनियां पुराने और ज्यादा कर्मचारियों वाले विभागों में खर्च कम कर रही हैं, जबकि उसी पैसे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑटोमेशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि मुनाफे में होने के बाद भी बड़ी MNC कंपनियां क्यों कॉस्ट कटिंग कर रही हैं.&amp;nbsp;
मुनाफा होने के बाद भी क्यों हो रही है कॉस्ट कटिंग?
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अब पूरे कारोबार में कटौती नहीं कर रहीं, बल्कि अपने खर्च करने के तरीके बदल रही हैं. कई कंपनियां उन विभागों से पैसा और कर्मचारियों को हटा रही हैं जिनकी फ्यूचर में जरूरत कम मानी जा रही है और उसी संसाधन को उन क्षेत्रों में लगा रही हैं जहां आने वाले सालों में ज्यादा ग्रोथ हो सकती है. ऐसे में कोई कंपनी एक तरफ बिक्री और मुनाफा बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ टीमों, विभागों या कार्यालयों को बंद भी कर सकती है. इसका मतलब यह माना जाता है कि कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल को बदल रही हैं.&amp;nbsp;
2026 में कंपनियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?
अमेरिका में 2026 के लिए कंपनियों की रणनीति को लेकर किए गए सर्वे बताते हैं कि अब नियोक्ताओं का सबसे बड़ा फोकस लागत को कंट्रोल करना है. सर्वे के अनुसार, 2026 में कंपनियों की दो सबसे बड़ी प्राथमिकताएं बिजनेस के लिए बेनिफिट्स की लागत कम करना और कर्मचारियों पर बेनिफिट्स का वित्तीय बोझ घटाना है. पहले कंपनियां कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए ज्यादा सुविधाएं, लचीली वर्क पॉलिसी और बेहतर वेतन पर जोर दे रही थीं, लेकिन अब उनका ध्यान खर्च कम करने और वित्तीय अनुशासन पर ज्यादा है.&amp;nbsp;
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कंपनियां खर्च कम करने पर इतना जोर क्यों दे रही हैं?
कई आर्थिक कारण इस बदलाव के पीछे जिम्मेदार हैं. जिसमें सबसे बड़ा कारण हेल्थकेयर और कर्मचारी फायदों की बढ़ती लागत है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 में कर्मचारियों के हेल्थ बेनिफिट्स पर कंपनियों का खर्च लगभग 6.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. अगर कंपनियां लागत कम करने के कदम नहीं उठातीं तो यह बढ़ोतरी करीब 9 प्रतिशत तक पहुंच सकती थी. &amp;nbsp;इसके अलावा महंगाई, ऊंची ब्याज दरें, कंपनी के लिए निवेश या फंड जुटाना मुश्किल होना और दुनियाभर में आर्थिक हालात को लेकर चिंता ने भी कंपनियों को खर्च पर कंट्रोल रखने के लिए मजबूर किया है.&amp;nbsp;
कॉस्ट कटिंग का कर्मचारियों पर क्या असर पड़ रहा है?
जब कंपनियां अपने खर्च घटाती हैं तो सबसे पहले इसका असर कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर दिखाई देता है. कई कंपनियां नई भर्तियां रोक रही हैं, बोनस कम कर रही हैं, बेनिफिट्स सीमित कर रही हैं और कर्मचारियों को फिर से ऑफिस बुलाने की नीति अपना रही हैं. &amp;nbsp;ऐसे बदलावों का असर खासकर उन कर्मचारियों पर ज्यादा पड़ता है जो बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ को प्राथमिकता देते हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम संसाधनों में ज्यादा काम करने का दबाव कर्मचारियों में तनाव और बर्नआउट भी बढ़ा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>CMA फाउंडेशन का रिजल्ट जारी, मेरिट लिस्ट में दक्षिण भारत का दबदबा; ये रहे टॉपर</title>
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        <description><![CDATA[ इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI) ने CMA Foundation जून 2026 परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं. परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख सकते हैं. इसके लिए अभ्यर्थियों को अपना रजिस्ट्रेशन या आइडेंटिफिकेशन नंबर दर्ज करना होगा.
इस बार जारी हुई मेरिट लिस्ट में दक्षिण भारत के छात्रों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला. चेन्नई के विग्नेश एस ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि गुंटूर के टिप्पुलुरी जगन मोहन रेड्डी दूसरे स्थान पर रहे. तीसरी रैंक आगरा की गौरांगी शुक्ला ने हासिल की. वहीं जयपुर की सोनक्षिका शारदा भी टॉप-10 में जगह बनाने में सफल रहीं. मेरिट सूची में गुंटूर, हैदराबाद, चेन्नई और विशाखापत्तनम जैसे शहरों के छात्रों की मजबूत मौजूदगी रही.
ICMAI ने रिजल्ट के साथ उम्मीदवारों के विषयवार अंक भी जारी कर दिए हैं. ऐसे छात्र जिन्होंने परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है, वे अब CMA कोर्स के अगले स्तर में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं और आगे की पढ़ाई की तैयारी शुरू कर सकते हैं.
14 जून को हुई थी परीक्षा
CMA Foundation जून 2026 परीक्षा का आयोजन 14 जून को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर किया गया था. प्रश्नपत्र में 50 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न शामिल थे, जिनके लिए कुल 100 अंक निर्धारित थे. प्रत्येक सही उत्तर के लिए दो अंक दिए गए, जबकि इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई थी. इससे उम्मीदवारों को सभी प्रश्नों का प्रयास करने का अवसर मिला.
पास होने के लिए क्या है नियम?
CMA Foundation परीक्षा में सफल घोषित होने के लिए सिर्फ अच्छे कुल अंक लाना ही पर्याप्त नहीं है. उम्मीदवार को हर विषय में कम से कम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है. इसके अलावा सभी विषयों को मिलाकर कुल 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करना भी जरूरी है. दोनों शर्तें पूरी होने पर ही अभ्यर्थी को परीक्षा में सफल माना जाता है.
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यदि कोई उम्मीदवार किसी एक विषय में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाता या कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं करता, तो उसे परीक्षा दोबारा देनी होगी. इसलिए परिणाम देखते समय छात्रों को विषयवार अंक भी ध्यान से जांचने की सलाह दी गई है.
टॉप-10 में इन छात्रों ने बनाई जगह
मेरिट सूची में पहले स्थान पर विग्नेश एस (चेन्नई), दूसरे स्थान पर टिप्पुलुरी जगन मोहन रेड्डी (गुंटूर) और तीसरे स्थान पर गौरांगी शुक्ला (आगरा) रहीं. इसके अलावा गुंटूर, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, मदुरै, जयपुर, राउरकेला, अहमदाबाद और कटक के छात्रों ने भी टॉप-10 में अपनी जगह बनाई.
ऐसे डाउनलोड करें स्कोरकार्ड
रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले ICMAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद CMA Foundation June 2026 Result/Scorecard लिंक पर क्लिक करें. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या आइडेंटिफिकेशन नंबर दर्ज कर सबमिट करें. स्क्रीन पर आपका स्कोरकार्ड दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.
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        <title>जामिया में एमएससी बायोटेक्नोलॉजी से लेकर डिजिटल स्किल कोर्स तक दाखिले शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ हायर एजुकेशन के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल हासिल करने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय ने एक ओर एमएससी बायोटेक्नोलॉजी में दाखिले का कार्यक्रम जारी किया है, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए डिजिटल और उद्यमिता से जुड़े शॉर्ट टर्म स्किल कोर्स में भी आवेदन मांगे हैं.
एमएससी बायोटेक्नोलॉजी में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन 10 जुलाई से शुरू होंगे. इच्छुक अभ्यर्थी 20 जुलाई तक विश्वविद्यालय के एडमिशन पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे. यह दो वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के सहयोग से संचालित किया जाता है. प्रवेश पूरी तरह GAT-B (Graduate Aptitude Test-Biotechnology) के स्कोर के आधार पर होगा और विश्वविद्यालय की आरक्षण नीति लागू रहेगी.
इस कोर्स में कुल 10 सीटें उपलब्ध हैं. आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास बी.फार्मा, बीएससी बायोटेक्नोलॉजी, बायोलॉजिकल साइंसेज, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, जेनेटिक्स या आधुनिक जीवविज्ञान से संबंधित किसी विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए.
इन कोर्स के लिए भी कर सकते हैं अप्लाई
वहीं, बदलती तकनीक और डिजिटल दुनिया की जरूरतों को देखते हुए विश्वविद्यालय ने युवाओं के लिए कई शॉर्ट टर्म स्किल कोर्स भी शुरू किए हैं. इन पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 12 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ये कोर्स सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप और स्मार्ट अकादमी फॉर डिजिटल टेक्नोलॉजी एंड डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप के तहत संचालित किए जाएंगे. इनका उद्देश्य युवाओं को सिर्फ सर्टिफिकेट देना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल से लैस करना है.
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स्किल कोर्स में डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप, एडवांस डिजिटल मार्केटिंग, एआई ड्रिवन डेटा एनालिसिस और यूआई/यूएक्स डिजाइन जैसे आधुनिक विषय शामिल किए गए हैं. सभी कक्षाएं ऑफलाइन मोड में होंगी, जहां छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिलेगा. विश्वविद्यालय का कहना है कि इन कार्यक्रमों को स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय पहलों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इनका मकसद युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ना, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें स्टार्टअप व डिजिटल बिजनेस के लिए तैयार करना है. ज्यादा डिटेल्स के लिए छात्र-छात्राएं आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.यह भी पढ़ें - CMA फाउंडेशन का रिजल्ट जारी, मेरिट लिस्ट में दक्षिण भारत का दबदबा; ये रहे टॉपर ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मेडिकल कॉलेजों के लिए NMC की सख्ती, 70 संस्थानों को नोटिस; तुरंत लगानी होगी CCTV व्यवस्था</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपका मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो अब मुश्किल बढ़ सकती है. आयोग ने ऐसे 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों की पहचान की है, जिन्होंने अब तक अनिवार्य CCTV कैमरे और निगरानी प्रणाली से जुड़े नियम पूरे नहीं किए हैं. एनएमसी ने इन सभी संस्थानों को तुरंत नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है.
एनएमसी की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस में साफ कहा गया है कि उसके दायरे में आने वाले सभी मेडिकल कॉलेजों को तय मानकों के मुताबिक परिसर में 25 सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे. इसके साथ ही नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (NVR) लगाना और कम से कम 30 दिनों तक कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना भी जरूरी है. इतना ही नहीं, कॉलेजों को अपने एनवीआर की फीड आयोग के साथ भी साझा करनी होगी.
आयोग ने बताया कि यह कोई नया नियम नहीं है. इन निर्देशों को पहले भी अलग-अलग नियमों और अधिसूचनाओं के जरिए जारी किया जा चुका है. इनमें यूजी मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशंस (UGMSR-2023), पीजी मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशंस (PGMSR-2023 संशोधन) और एमएआरबी रेगुलेशंस-2023 शामिल हैं. इसके बावजूद कई मेडिकल कॉलेज अब तक इनका पालन नहीं कर पाए हैं.
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NMC ने क्या कहा?
एनएमसी के मुताबिक, जिन संस्थानों ने अभी तक अपने सीसीटीवी सिस्टम और एनवीआर को आयोग से नहीं जोड़ा है, उनसे लगातार संपर्क किया गया. कई बार याद दिलाने के बाद भी कुछ कॉलेजों ने आवश्यक व्यवस्था नहीं की. इसी वजह से अब आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संस्थानों को तुरंत नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं.
आयोग का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इससे संस्थानों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है और नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है.
नोटिस में उन 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों का जिक्र किया गया है, जो अभी तक निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं. आयोग ने इन संस्थानों से बिना देरी किए सीसीटीवी कैमरे लगाने, एनवीआर स्थापित करने और उसकी फीड साझा करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>NEET UG छात्रों के लिए राहत, फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल अपडेट करने की डेडलाइन बढ़ी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने NEET UG 2026 की 3 मई को हुई परीक्षा दी थी और अब तक फीस रिफंड के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट नहीं की है, तो आपके पास एक और मौका है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने छात्रों की सुविधा को देखते हुए बैंक डिटेल अपडेट करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई से बढ़ाकर 14 जुलाई 2026 कर दी है. एजेंसी का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र अभी भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं.
दरअसल, 3 मई को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के बाद रद्द कर दी गई थी. इसके बाद एनटीए ने सभी पंजीकृत अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क वापस करने का फैसला लिया. इसके लिए छात्रों से उनके बैंक खाते की जानकारी मांगी जा रही है, ताकि रिफंड की राशि सीधे उनके खाते में भेजी जा सके.
हालांकि, रिफंड प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अब तक अपेक्षा के अनुरूप छात्रों ने बैंक डिटेल अपडेट नहीं की है. एनटीए के मुताबिक, 10,28,223 अभ्यर्थियों ने अपने बैंक खाते की जानकारी सफलतापूर्वक अपडेट कर दी है और उनके रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. लेकिन परीक्षा में शामिल हुए 22 लाख से अधिक छात्रों की तुलना में यह संख्या आधी से भी कम है. यानी करीब 12 लाख छात्र अब भी इस जरूरी प्रक्रिया से दूर हैं.
इसी वजह से एजेंसी ने अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि कोई भी छात्र फीस रिफंड से वंचित न रह जाए. एनटीए ने सभी अभ्यर्थियों से जल्द से जल्द अपनी बैंक जानकारी सत्यापित करने की अपील की है.
कब आ सकता है पैसा?
एनटीए के अनुसार, जिन छात्रों की बैंक जानकारी सही पाई जाएगी, उनके खाते में बैंक डिटेल अपडेट होने के लगभग 7 से 15 दिनों के भीतर रिफंड की राशि भेज दी जाएगी. इसलिए आवेदन करते समय बैंक खाता नंबर और अन्य जानकारी बिल्कुल सही भरना जरूरी है. गलत जानकारी होने पर रिफंड में देरी हो सकती है.
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एनटीए ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक बैंक डिटेल अपडेट नहीं की है, वे 14 जुलाई 2026 से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर लें. तय समय के भीतर जानकारी अपडेट करने पर ही फीस रिफंड की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सकेगी.
ऐसे करें बैंक डिटेल अपडेट
फीस रिफंड के लिए छात्रों को सबसे पहले NEET UG 2026 के आधिकारिक रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाना होगा. इसके बाद अपने आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन पूरा करने के बाद &quot;Bank Account Details Confirmation/Updation&quot; लिंक पर क्लिक करें. यहां अपना बैंक खाता नंबर, IFSC कोड और अन्य जरूरी जानकारी सावधानी से भरें. चाहें तो कैंसिल चेक की कॉपी भी अपलोड कर सकते हैं. सभी विवरण जांचने के बाद फॉर्म सबमिट कर दें.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Government School Report : देश के इन राज्यों में सबसे खस्ता है सरकारी स्कूलों का हाल, वहां जाकर पढ़ना ही नहीं चाहते बच्चे</title>
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        <description><![CDATA[ Government School Report : सरकारी स्कूल पहले लाखों परिवारों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों की जगह प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं. पिछले दो सालों में सरकारी स्कूलों से लाखों बच्चों का नाम कट गया, जबकि प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है. यह बदलाव सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े राज्यों में देखने को मिला है. तो आइए जानते हैं कि देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है.&amp;nbsp;
क्या है शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट?
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस शिक्षा मंत्रालय का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस है. इसके जरिए देशभर के स्कूलों में छात्रों के एडमिशन, शिक्षकों की संख्या, स्कूलों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025-26 में देशभर के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के स्कूलों में कुल 24.72 करोड़ छात्रों का एडमिशन दर्ज किया गया. वहीं, 2023-24 में यह संख्या करीब 24.80 करोड़ थी. कुल एडमिशन में ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला.
सरकारी स्कूलों में 86 लाख छात्रों की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 12.75 करोड़ छात्र पढ़ रहे थे. साल 2025-26 में यह संख्या घटकर 11.89 करोड़ रह गई. &amp;nbsp;दो साल में करीब 86 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई. इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या 9 करोड़ से बढ़कर 9.89 करोड़ हो गई. लगभग 88 लाख नए छात्रों ने प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लिया.
देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है
1. बिहार में सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, लेकिन यहां भी एडमिशन में गिरावट दर्ज की गई. साल 2023-24 में यहां 1.71 करोड़ छात्र थे, जो 2025-26 में घटकर 1.66 करोड़ रह गए.&amp;nbsp;
2. उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 1.48 करोड़ से घटकर 1.41 करोड़ हो गई. यहां दो साल में 7.07 लाख छात्र कम हुए.
3. मध्य प्रदेश में छात्रों की संख्या 81.28 लाख से घटकर 79.70 लाख रह गई.&amp;nbsp;
4. राजस्थान में सरकारी स्कूलों में एडमिशन 77.82 लाख से घटकर 74.49 लाख हो गया. यहां करीब 3.32 लाख छात्र कम हुए.
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5.महाराष्ट्र में भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन में गिरावट आई. यहां छात्रों की संख्या 51.08 लाख से घटकर करीब 49.79 लाख रह गई.&amp;nbsp;
6. पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य रहा, जहां सरकारी स्कूलों में एडमिशन बढ़े. यहां छात्रों की संख्या 1.49 करोड़ से बढ़कर 1.54 करोड़ हो गई. यहां करीब 4.61 लाख नए छात्र सरकारी स्कूलों में जुड़े.
सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की संख्या में क्या बदलाव आया?
साल 2025-26 में देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या घटकर 10,05,245 रह गई, जबकि 2023-24 में यह 10,13,322 थी. वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है. साल 2023-24 में देश में करीब 3.39 लाख प्राइवेट स्कूल थे, जो 2025-26 में बढ़कर 3.40 लाख से ज्यादा हो गए. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इनमें कुछ कमी दर्ज की गई.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इंजीनियरों के लिए 153 पदों पर निकली भर्ती, 71 हजार तक मिलेगी सैलरी; इस डेट तक करें आवेदन</title>
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        <description><![CDATA[ प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL) ने देशभर में अपने विभिन्न कार्यालयों और प्रोजेक्ट साइट्स के लिए 153 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. इस भर्ती के तहत ग्रेजुएट इंजीनियर और डिप्लोमा इंजीनियर के अलग-अलग पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इच्छुक उम्मीदवार 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
यह भर्ती पूरी तरह कॉन्ट्रैक्ट आधार पर होगी. शुरुआती नियुक्ति एक साल के लिए की जाएगी, जिसे उम्मीदवार के प्रदर्शन और कंपनी की जरूरत के अनुसार बढ़ाकर अधिकतम तीन साल तक किया जा सकता है. चयनित उम्मीदवारों की पोस्टिंग देश में कहीं भी कंपनी के कार्यालय या प्रोजेक्ट साइट पर हो सकती है.
किन पदों पर होगी भर्ती?
इस भर्ती अभियान में ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-1 से स्केल-4 और डिप्लोमा इंजीनियर स्केल-1 से स्केल-3 तक के पद शामिल हैं. सबसे ज्यादा 70 रिक्तियां ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-2 के लिए हैं. इसके अलावा ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-1 के 29, स्केल-3 के 24 और स्केल-4 के 7 पद भरे जाएंगे. वहीं डिप्लोमा इंजीनियर स्केल-1 के 13, स्केल-2 के 8 और स्केल-3 के 2 पदों पर भर्ती होगी.
सैलरी कितनी मिलेगी?
पद के अनुसार उम्मीदवारों को आकर्षक मासिक वेतन मिलेगा. ग्रेजुएट इंजीनियर स्केल-4 के लिए 71,000 रुपये, स्केल-3 के लिए 63,000 रुपये, स्केल-2 के लिए 56,000 रुपये और स्केल-1 के लिए 47,000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे. वहीं डिप्लोमा इंजीनियरों को स्केल के अनुसार 31,000 रुपये से 40,000 रुपये तक मासिक वेतन मिलेगा.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस भर्ती में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन, प्रोसेस, कंप्यूटर साइंस, फायर एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी, ह्यूमन रिसोर्स, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, मटेरियल मैनेजमेंट और केमिस्ट्री जैसे विषयों के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.
उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है. सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक, जबकि एससी और एसटी वर्ग के लिए 55 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं.
आयु सीमा भी पद के अनुसार
भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष से 43 वर्ष तक तय की गई है. आयु और अनुभव की गणना 30 जून 2026 के आधार पर की जाएगी.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;NCERT 8वीं की नई सोशल साइंस किताब जारी, न्यायपालिका चैप्टर में हुए बड़े बदलाव
ऐसे होगा चयन
भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी. सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन की स्क्रीनिंग की जाएगी. इसके बाद पात्र उम्मीदवारों को व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इंटरव्यू की सूचना ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी. इंटरव्यू पीडीआईएल भवन, ए-14, सेक्टर-1, नोएडा में आयोजित होगा. पात्र उम्मीदवारों को कंपनी के नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता (TA) भी दिया जाएगा.
आवेदन शुल्क
सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 800 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा, जबकि एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए शुल्क 400 रुपये निर्धारित किया गया है.
ऐसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को पीडीआईएल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Career सेक्शन में जाएं. आधार नंबर से रजिस्ट्रेशन करने के बाद आवेदन फॉर्म भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें, ऑनलाइन शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंट अपने पास रख लें.यह भी पढ़ें - NEET UG छात्रों के लिए राहत, फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल अपडेट करने की डेडलाइन बढ़ी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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