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    <title>Attention India Hindi &amp; : बिज़नेस</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : बिज़नेस</description>
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        <title>Dhanteras 2026: देशभर में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार का अनुमान</title>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस के मौके पर देशभर के बाजारों में खरीदारी का उत्साह देखने को मिल रहा है. सोने-चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद ग्राहक त्योहार पर खरीदारी करने से पीछे नहीं हट रहे हैं.
व्यापारियों को उम्मीद है कि इस बार धनतेरस पर देश का कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, इस कारोबार में सोने और चांदी की बिक्री की बड़ी हिस्सेदारी रहने की संभावना है.
महंगे सोने के बीच हल्के गहनों की बढ़ी मांग
इस साल सोने की कीमतों में तेजी का असर ग्राहकों की खरीदारी के तरीके पर भी दिखाई दे रहा है. लोग अपने बजट को ध्यान में रखते हुए कम वजन वाले गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं. खासतौर पर 14 कैरेट और 18 कैरेट के हल्के सोने के आभूषणों की मांग बढ़ी है.
इसके अलावा चांदी के सिक्के और सजावट से जुड़ी चीजें भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं. बाजार में मछली, कछुए और हाथी की आकृति वाली शुभ वस्तुओं की खरीदारी भी बढ़ी है. इन वस्तुओं को लोग घर और व्यापार में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में खरीदते हैं.
सोने-चांदी की बिक्री 60 हजार करोड़ के पार रहने का अनुमान
शुक्रवार को धनतेरस के अवसर पर देशभर में कुल कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है. इसमें अकेले सोने और चांदी की बिक्री 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है. त्योहार के दौरान लोग परंपरा के अनुसार गहने, चांदी के सिक्के और दूसरी शुभ वस्तुएं खरीद रहे हैं. ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का कहना है कि कीमती धातुओं के दाम बढ़ने के बाद भी बाजार में ग्राहकों की दिलचस्पी बनी हुई है.
शाम तक सामने आएंगे बिक्री के विस्तृत आंकड़े&amp;nbsp;AIJGF की ओर से बताया गया है कि देशभर के बाजारों में खरीदारी के रुझान और ग्राहकों की प्रतिक्रिया का आकलन करने के बाद शाम तक विस्तृत जानकारी जारी की जाएगी. इससे पता चलेगा कि धनतेरस पर वास्तव में कितने रुपये का कारोबार हुआ और सोने-चांदी के अलावा दूसरी वस्तुओं की बिक्री कैसी रही. इस बार के अनुमान बताते हैं कि महंगाई के बावजूद त्योहारों पर भारतीय ग्राहकों का खरीदारी का उत्साह बना हुआ है.
पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत महंगा हुआ सोना
रिपोर्ट के समय 24 कैरेट सोने की कीमत 1,41,840 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई. पिछले एक सप्ताह में सोने के भाव में थोड़ी नरमी जरूर आई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में इसकी कीमत करीब 20 फीसदी अधिक है. इसी वजह से ग्राहक पहले के मुकाबले कम वजन के गहने खरीदकर त्योहार की परंपरा निभा रहे हैं.
यह भी पढ़ें- धनतेरस पर सोना कैसे लें, ज्वेलरी-सिक्का या ETF, कहां करें निवेश?
यह भी देखें-
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>10 साल में सोना 360% चढ़ा, 30 हजार के गोल्ड ने बनाए 1.41 लाख</title>
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        <description><![CDATA[ शादी और दीवाली के दौरान सोने की मांग काफी बढ़ जाती है. आज धनतेरस है और आज के दिन लोग सोना खरीदना शुभ मानते हैं और अब नवंबर के महीने से शदियों के सीजन की शुरुआत हो जाती है तो इस दौरान भी सोने के गहनों की मांग बढ़ जाती है. लेकिन एक तरफ कई लोग सोने को निवेश के तौर पर खरीदते हैं और सोने के रेट में आए दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. आज से 5 साल पहले सोना जितने में मिलता था तो आज की डेट में सोने के दाम कई गुना बढ़ गए हैं. ऐसे में ये जानते हैं कि आज से 10 साल पहले सोने के क्या दाम थे?
2016 में कितने में मिल रहा था सोना?
ये तो सभी जानते हैं कि सोना निवेश के तौर पर कई लोग खरीदते हैं. ऐसे में ये जानते हैं कि आज से 10 साल पहले यानी 2016 में सोना कितने रुपये में मिल रहा था. आकंड़ों के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2016 को MCX पर सोने के रेट लगभग 29,989 रुपये प्रति 10 ग्राम था. लेकिन आज 2026 में सोने के दाम आसमान छू रहे हैं.&amp;nbsp;
2026 में कितनी चल रही है सोने की कीमत?
अगर आज 6 नवंबर 2026 के सोने के रेट की बात करें तो आज इसका भाव बढ़कर 1,41,444 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है. यानी दस साल के अंदर में सोने के दाम कई गुना बढ़ गए हैं. इस तरह 10 साल में सोने की कीमत में लगभग 362 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.&amp;nbsp;
10 साल पहले खरीदा सोना होता फायदेमंद
यानी अगर आपने 10 साल पहले 10 ग्राम सोना लगभग 30 हजार में खरीदा होता तो आज 2026 में उसकी कीमत 1.41 लाख रुपये तक होती. मतलब साफ है कि सोने के दाम हर साल लगातार बढ़ रहे हैं और ये निवेश के तौर पर सोना खरीदना फायदेमंद साबित हो सकता है. हां, लेकिन सोने में निवेश से पहले कुछ खास बातों का ध्यान देना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
इन बातों का खास ध्यान रखें

24 कैरेट सबसे शुद्ध होता है. हालांकि, गहने आमतौर पर 22 कैरेट के होते हैं.
खरीदने से पहले IBJA पर रेट जरूर चेक करें.
साथ ही मेकिंग और वेस्टेज चार्ज की जानकारी जरूर लें.
इसके अलावा गहने, सिक्के और आप डिजिटल गोल्ड में भी इन्वेस्ट कर सकते हैं.
साथ ही सोना बेचने पर मुनाफे के मुताबिक टैक्स लग सकता है.

2026 में खरीदे हुए सोने की 2030 में कितनी हो जाएगी कीमत?10 ग्राम होगा इतना महंगा
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>धनतेरस पर Gen Z ने बदला खरीदारी का रिवाज, जानें कहां कर रहे निवेश?</title>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस को हमेशा से सोना-चांदी खरीदने और घर में सुख-समृद्धि लाने के त्योहार के रूप में देखा जाता है. इस दिन लोग अपनी क्षमता के अनुसार कीमती धातुओं और दूसरी संपत्तियों में पैसा लगाते हैं.
अब नई पीढ़ी के बीच इस परंपरा का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है. मिलेलियनल और Gen Z केवल सोने के गहने या सिक्के खरीदने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल निवेश के विकल्पों की तरफ भी कदम बढ़ा रहे हैं. अब उनके लिए धनतेरस पर निवेश का मतलब सिर्फ कोई कीमती चीज खरीदना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संपत्ति तैयार करना भी है.
SIP और शेयर बाजार में भी बढ़ रही दिलचस्पी
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं के लिए निवेश करना पहले के मुकाबले आसान बना दिया है. अब छोटी रकम से भी म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और दूसरे वित्तीय विकल्पों में निवेश शुरू किया जा सकता है.
युवा निवेशक एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय हर महीने SIP के जरिए नियमित निवेश करना पसंद कर रहे हैं. उनका ध्यान केवल एक संपत्ति खरीदने के बजाय अलग-अलग निवेश विकल्पों में पैसा बांटने पर है. इससे लंबे समय में निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है.
सोने की खरीदारी के साथ Gold ETF की ओर बढ़ा रुझान
पहले धनतेरस पर लोग ज्वैलर्स की दुकान से सोने के सिक्के, बिस्कुट या गहने खरीदते थे. इसके बाद उन्हें घर की तिजोरी या बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा जाता था. हालांकि, फिजिकल गोल्ड खरीदने पर मेकिंग चार्ज, सुरक्षा और स्टोरेज जैसी परेशानियां भी होती हैं.
नई पीढ़ी इन मुश्किलों से बचने के लिए Gold ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प अपना रही है. इनके जरिए निवेशक बिना सोना घर में रखे उसकी कीमतों में होने वाले बदलाव से जुड़ सकते हैं. इससे गहनों के मेकिंग चार्ज और सोने की शुद्धता को लेकर होने वाली चिंता भी नहीं रहती.
निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी
डिजिटल निवेश के बढ़ते विकल्पों के बीच सावधानी रखना भी जरूरी है. निवेशकों को केवल भरोसेमंद और KYC वेरिफाइड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही अपनी आर्थिक क्षमता और जोखिम उठाने की सीमा को ध्यान में रखकर ही पैसा लगाना चाहिए.
कुल मिलाकर, मिलेलियनल और Gen Z के लिए धनतेरस की परंपरा खत्म नहीं हो रही, बल्कि उसका तरीका बदल रहा है. अब लोग सोने के साथ-साथ डिजिटल निवेश और लंबे समय में संपत्ति बनाने पर भी ध्यान दे रहे हैं.
Bitcoin और डिजिटल एसेट्स में भी रुचि
नई पीढ़ी के निवेश विकल्पों में Bitcoin और दूसरे डिजिटल एसेट्स भी शामिल हो रहे हैं. Bitcoin को कई लोग डिजिटल गोल्ड कहते हैं, क्योंकि इसकी कुल सप्लाई सीमित है. हालांकि, सोने और Bitcoin में बड़ा अंतर है. सोने की तुलना में Bitcoin की कीमतों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
इसके अलावा अब टोकनाइजेशन की अवधारणा भी चर्चा में है. इसमें सोना, सरकारी बॉन्ड या अन्य वास्तविक संपत्तियों को ब्लॉकचेन पर डिजिटल टोकन के रूप में दिखाया जाता है. इससे भविष्य में कम रकम के साथ भी किसी संपत्ति में हिस्सेदारी लेना आसान हो सकता है.
यह भी पढे़ं- अमेजन ने की टिकटॉक की कॉपी, तो अब कंपनी ने बना दिया नया शॉपिंग ऐप, जानें मामला
यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कर्नाटक में पेट्रोल में 31.2% एथेनॉल मिला, जबकि लिमिट 20% है</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं, तो ईंधन की गुणवत्ता से जुड़ी यह खबर आपके काम की है. कर्नाटक में पेट्रोल के कुछ सैंपल की जांच में एथेनॉल की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा पाई गई है. एक सैंपल में 31.2% एथेनॉल पाया गया, जबकि E20 पेट्रोल में इसकी मात्रा 20% होनी चाहिए. इस मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तेल कंपनियों के खिलाफ सख्त कारवाई और वाहन मालिकों को मुआवजा देने की मांग की है.
दरअसल, राज्य सरकार का आरोप है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के नाम पर ज्यादा एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल बेचा जा रहा है. इससे गाड़ियों की माइलेज और उनके कुछ जरूरी पार्ट्स पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.
क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक सरकार ने राज्य ने सात जिलों से पेट्रोल के 14 सैंपल इकट्ठा किए थे. इनमें बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुर शामिल हैं. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद के निर्देश पर इनकी जांच कराई गई. सैंपल की जांच बेंगलुरु के NABL से मान्यता प्राप्त और ISO प्रमाणित श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, 14 में से 11 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा मिली.
किस कंपनी के पेट्रोल में कितना मिला एथेनॉल?
जांच में सबसे ज्यादा एथेनॉल इंडियन ऑयल (IOCL) के एक सैंपल में 31.2% पाया गया. वहीं, अलग-अलग कंपनियों के सैंपल में एथेनॉल की मात्रा अलग-अलग पाई गई.
तेल कंपनी&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; एथेनॉल की मात्रा
इंडियन ऑयल &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;31.2%हिंदुस्तान पेट्रोलियम &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 30.5%HPCL &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 27%भारत पेट्रोलियम &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 26.5%नायरा एनर्जी &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;26.1%शेल &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 25.5%BPCL&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 24.2%BPCL &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;22.6%HPCL &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 22.4%IOCL &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;20.8%नायरा एनर्जी &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;20.6%
वहीं, तीन सैंपल में इसकी मात्रा 20% से कम थी. इनमें BPCL का 19.9%, MRPL का 19.2% और शेल का 13.5% वाला सैंपल शामिल है.
गाड़ियों को क्यों हो सकता है नुकसान?
राज्य सरकार ने आशंका जताई है कि E20 से ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ियों की माइलेज घाट सकती है. इसके अलावा फ्यूल पंप, इंजेक्टर, फिल्टर, होज और सील जैसे हिस्सों को भी नुकसान पहुंच सकता है.
Demonetisation: नोटबंदी के 10 साल बाद भी कैश दोगुना, UPI 13600 गुना बढ़ा
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अमेरिका से लेकर जापान&amp;कोरिया में हाहाकार! रविवार को मुहूर्त ट्रेडिंग से पहले हिला मार्केट</title>
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        <description><![CDATA[ वैश्विक शेयर बाजारों में आज &#039;ब्लैक फ्राइडे&#039; जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. वॉल स्ट्रीट पर हुए बड़े नुकसान का असर आज सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला. हाल ही में हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections 2026) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगा गया.
आज एशियाई बाजारों में इसी का तगड़ा असर देखने को मिल रहा है. एक तरफ जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6% तक लुढ़क चुका है. टॉपिक्स में भी 5.2% की गिरावट आई है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) भी लगभग 9% लुढ़क गया, जिसके कारण सर्किट ब्रेकर लग गए और 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा. वहीं, ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 0.7% और न्यूजीलैंड का NZX 50 इंडेक्स लगभग 0.5% नीचे आ गया.
भारतीय बाजार में तेजी का माहौल
एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बाद भी भारतीय शेयर बाजार में आज शुक्रवार, 6 नवंबर को तेजी के साथ कारोबार शुरू हुआ. सुबह BSE सेंसेक्स 271.68 अंक (0.34%) की बढ़त के साथ 79,581.69 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, NSE निफ्टी में भी शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली.
गुरुवार को विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और सकारात्मक घरेलू संकेतों के चलते बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी. हालांकि, अमेरिकी टेक शेयरों में गिरावट और एशियाई बाजारों में कमजोरी के कारण निवेशक सतर्क हैं. बाजार की आगे की दिशा वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी.
टेक कंपनियों को किस बात का डर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी रिपब्लिकन एआई और टेक कंपनियों पर कम से कम नियम लगाने के पक्ष में रहे हैं ताकि चीन के साथ एआई (AI) की रेस में अमेरिकी पीछे न रह जाए. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर अमेरिका ने Nvidia, Google, Microsoft, OpenAI जैसी अपनी एआई और टेक कंपनियों पर कड़े नियम या प्रतिबंध लगाए, तो अमेरिका इस तकनीकी दौड़ में चीन से पिछड़ जाएगा. इसके उलट, डेमोक्रेटिक पार्टी डेटा गोपनीयता, एआई सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त नियम बनाने की वकालत करती आई है.
डेमोक्रेटिक पार्टी यूरोपीय संघ के GDPR (General Data Protection Regulation) की तर्ज पर अमेरिका में भी एक सख्त केंद्रीय डेटा गोपनीयता कानून लाने के पक्ष में है. डेमोक्रेट्स एआई सुरक्षा और एथिक्स को लेकर भी कड़े हैं. डेमोक्रेट्स का मानना है कि किसी भी बड़े एआई मॉडल को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले उसका कड़ा सरकारी सेफ्टी टेस्ट और रिस्क असेसमेंट होना अनिवार्य होना चाहिए. वर्मोंट के सीनियर सेनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे नेताओं द्वारा एआई के अत्यधिक बिजली और पानी की खपत को देखते हुए देशव्यापी नए डेटा सेंटर्स के निर्माण पर रोक लगाने की मांग उठाई जा रही है.
सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और सीनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेता लंबे समय से गूगल, अमेजन जैसी बिग टेक कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ने की वकालत करते आए हैं. अब संसद के दोनों सदनों में बहुमत होने के कारण डेमोक्रेट्स टेक कंपनियों द्वारा छोटी कंपनियों को खरीदने या बड़े विलय करने के प्रस्तावों को आसानी से ब्लॉक कर सकेंगे, जिससे इन कंपनियों का मार्केट कंसॉलिडेशन रुक जाएगा.
चांदी? | Paisa Live&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/b_9uwmlFQI8&quot; width=&quot;838&quot; height=&quot;471&quot; frameborder=&quot;0&quot; allowfullscreen=&quot;allowfullscreen&quot;&gt;
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पटाखे फोड़ते वक्त घर में लगी आग, तो कौन भरेगा नुकसान? 10 रुपये में मिल रहा सुरक्षा कवच  ]]></description>
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        <title>धनतेरस पर सोना कैसे लें, ज्वेलरी&amp;सिक्का या ETF, कहां करें निवेश?</title>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस के मौके पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा रही है. इस दिन कई लोग सोने के गहने, सिक्के या बार खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि, बदलते समय के साथ सोने में निवेश करने के तरीके भी बदल गए हैं.
अब बाजार में फिजिकल गोल्ड के अलावा गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प भी मौजूद हैं. ऐसे में अगर आप 6 नवंबर को धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि कौन सा विकल्प आपकी जरूरत और बजट के हिसाब से सही रहेगा.
सोने के सिक्के खरीदने के क्या फायदे हैं?
अगर आप सोना अपने पास रखना चाहते हैं, लेकिन ज्वेलरी पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते, तो गोल्ड कॉइन एक विकल्प हो सकता है. सिक्कों पर आमतौर पर गहनों की तुलना में कम अतिरिक्त प्रीमियम लगता है. हालांकि, इन्हें खरीदते समय शुद्धता, प्रमाणपत्र और दुकानदार की बायबैक पॉलिसी जरूर जांचनी चाहिए. बेचते समय भी कुछ कटौती हो सकती है.
गहने खरीदना निवेश के लिहाज से कितना सही?
धनतेरस पर ज्यादातर लोग सोने की ज्वेलरी खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि, अगर आपका उद्देश्य सिर्फ निवेश करना है, तो गहने खरीदना ज्यादा फायदेमंद विकल्प नहीं माना जाता. इसकी वजह है मेकिंग चार्ज और GST. गहने बनवाते समय इन अतिरिक्त खर्चों का भुगतान करना पड़ता है.
बाद में जब आप इन्हें बेचते हैं, तो मेकिंग चार्ज और GST की रकम वापस नहीं मिलती. इसके अलावा सोने की शुद्धता जांचने और अन्य कटौती के कारण मिलने वाली कीमत भी कम हो सकती है. इसलिए ज्वेलरी उन लोगों के लिए बेहतर है, जो इसे पहनने या किसी को उपहार देने के उद्देश्य से खरीद रहे हैं.
क्या अब भी SGB में निवेश का विकल्प मौजूद है?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB पहले निवेशकों के बीच लोकप्रिय विकल्प था. इसमें सोने की कीमत से जुड़े रिटर्न के साथ निश्चित ब्याज भी मिलता था. लेकिन फरवरी 2024 के बाद सरकार ने कोई नई SGB सीरीज जारी नहीं की है.
ऐसे में निवेशक इन्हें सीधे नई सरकारी पेशकश के जरिए नहीं खरीद सकते. फिलहाल पुराने बॉन्ड शेयर बाजार के सेकेंडरी मार्केट में उपलब्ध हो सकते हैं. इन्हें खरीदने से पहले उनकी कीमत, लिक्विडिटी और मैच्योरिटी की जांच करना जरूरी है.
एक साथ पूरा पैसा लगाने से बचें
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को एक बार में पूरी रकम लगाने से बचना चाहिए. इसके बजाय अलग-अलग समय पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करना बेहतर तरीका हो सकता है.
Enrich Money के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, निवेश का फैसला लेते समय कीमत, लिक्विडिटी और अपने पूरे पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना चाहिए. कुल मिलाकर, ज्वेलरी निजी इस्तेमाल, सिक्के फिजिकल गोल्ड रखने और ETF सोने की कीमतों में निवेश के लिए उपयोगी विकल्प हो सकते हैं. सही चुनाव आपकी जरूरत और निवेश के उद्देश्य पर निर्भर करता है.
गोल्ड ETF में निवेश करना कितना आसान?
गोल्ड ETF उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प है, जो बिना असली सोना खरीदे उसकी कीमत में होने वाले बदलाव से फायदा उठाना चाहते हैं. इन्हें शेयर बाजार में डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए खरीदा और बेचा जा सकता है.
इसमें सोने को घर पर रखने या उसकी सुरक्षा की चिंता नहीं होती. मेकिंग चार्ज भी नहीं देना पड़ता. हालांकि, निवेशकों को फंड का एक्सपेंस रेशियो, ब्रोकरेज और ट्रांजैक्शन चार्ज समझना चाहिए. गोल्ड ETF की कीमत और वास्तविक सोने की कीमत में थोड़ा अंतर भी हो सकता है.
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>धनतेरस के दिन सोना 1.48 लाख के पार, चांदी भी महंगी, पिछले साल से कितना बढ़ गया भाव?</title>
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        <description><![CDATA[ आज धनतेरस का शुभ दिन है और आज ज्यादातर लोग सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं. अगर आप भी सोना या चांदी खरीदने वाले हैं तो इस बार आपकी जेब पर थोड़ा ज्यादा बोझ पड़ सकता है. त्योहार के दिन ही सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है. दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना लगातार दूसरे दिन महंगा हुआ और 2,200 रुपए की छलांग लगाकर 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया. चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
कीमतों में इस तेजी के पीछे धनतेरस से पहले ज्वेलर्स और खुदरा कारोबारियों की बढ़ी हुई खरीदारी को बड़ी वजह माना जा रहा है. इसके अलावा निवेशकों की मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उछाल ने भी भाव को सहारा दिया है. यहां से जानें सोना और चांदी का ताजा भाव.&amp;nbsp;
आज कितना है सोने और चांदी का भाव?अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, आज 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 2,200 रुपए बढ़कर 1,48,800 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है. इससे पहले गुरुवार को सोना 1,46,600 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था.
वहीं, चांदी भी 1,500 रुपए महंगी होकर 1,94,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव 1,93,000 रुपए प्रति किलो था.



सोना/ चांदी
5 नवंबर का रेट
6 नवंबर का ताजा रेट
कितना बदला भाव?


सोना (10 ग्राम)
1,46,600
1,48,800
2,200


चांदी (1 किलोग्राम)
1,93,000
1,94,500
1,500 रुपए



पिछले साल धनतेरस पर कितना सस्ता था सोना?इस बार सोने की कीमतों में तेजी को समझने के लिए पिछले साल के भाव पर नजर डालना भी जरूरी है. पिछले साल 18 अक्टूबर को धनतेरस के मौके पर सोना 1,32,400 रुपए प्रति 10 ग्राम था. वहीं, चांदी की कीमत 1.70 लाख रुपए प्रति किलो थी.
इस हिसाब से देखें तो पिछले साल के धनतेरस के मुकाबले इस बार सोना करीब 16,400 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा है. यानी एक साल में सोने की कीमत में करीब 12.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. चांदी भी पिछले साल के मुकाबले महंगी हो चुकी है. Monarch PMS के सहायक कोष प्रबंधक ध्रुव जोगलेकर के मुताबिक, पिछले साल धनतेरस के बाद से सोने की कीमतों में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रहे हैं सोने के दाम?धनतेरस और दिवाली पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है. इसी वजह से इन त्योहारों के आसपास ज्वेलर्स, थोक कारोबारियों और आम ग्राहकों की तरफ से खरीदारी बढ़ जाती है. इस बार भी बाजार में मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है.
इसके अलावा निवेशक भी सोने को सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. जब शेयर बाजार या वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है तो कई निवेशक सोने में पैसा लगाना पसंद करते हैं. इससे भी इसकी मांग और कीमतों पर असर पड़ता है.
धनतेरस पर सोना खरीदते समय ऐसे बचाएं हजारों रुपए, समझें मेकिंग चार्जेज का हिसाब- किताब
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वीडियोकॉन प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित, सिर पर है 12668 करोड़ का कर्ज</title>
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        <description><![CDATA[ कभी देश के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत को बड़ा झटका लगा है. NCLT ने उन्हें दिवालिया घोषित कर दिया है. ये फैसला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की याचिका पर सुनाया गया है.
बैंक के मुताबिक, धूत पर ब्याज और जुर्माने समेत करीब 12,668 करोड़ रुपए बकाया हैं. अब उनकी संपत्तियों के प्रबंधन और कर्जदाताओं को पेमेंट का प्रोसेस शुरू होगा. यहां से जानें कि आखिर NCLT ने धूत को दिवालिया क्यों घोषित किया और अब उनकी संपत्ति का क्या होगा.&amp;nbsp;
NCLT ने क्यों घोषित किया दिवालिया?NCLT की मुंबई पीठ ने 5 नवंबर को वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित करने का आदेश दिया है. दरअसल, धूत ने वीडियोकॉन समूह की कंपनियों की ओर से लिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी. इसका मतलब है कि अगर कंपनी कर्ज नहीं चुका पाती है तो गारंटर के तौर पर धूत की जिम्मेदारी भी बनती है.
वीडियोकॉन समूह की कंपनियां जब कर्ज चुकाने में नाकाम रहीं तो SBI समेत कर्जदाताओं ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को लागू किया. इसके बाद धूत के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हुई. बैंक के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और जुर्माने सहित टोटल बकाया रकम 12,668.06 करोड़ रुपए पहुंच गई थी.
क्या दिया था प्रस्ताव?&amp;nbsp;
दिवालिया घोषित होने से पहले धूत ने कर्ज चुकाने के लिए एक प्रस्ताव भी दिया था. इसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित करके 36 महीने में 600 करोड़ रुपए चुकाने की बात कही थी. हालांकि, कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. इसकी एक बड़ी वजह ये थी कि पेमेंट भविष्य में प्रोजेक्ट के विकास, जरूरी मंजूरियों और उससे होने वाली कमाई पर निर्भर था. इसमें तुरंत कोई रकम चुकाने की बात भी नहीं थी.
धूत की संपत्ति का क्या होगा?NCLT ने इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आशीष नारायण को दिवालियापन ट्रस्टी नियुक्त किया है. अब धूत की संपत्ति का प्रबंधन ट्रस्टी के हाथ में रहेगा. इन संपत्तियों का इस्तेमाल कानून के मुताबिक कर्जदाताओं को पेमेंट करने के लिए किया जाएगा.
ट्रिब्यूनल ने धूत को 7 दिनों के भीतर अपनी पूरी वित्तीय स्थिति का ब्योरा ट्रस्टी को सौंपने का निर्देश दिया है. वहीं, ट्रस्टी को कर्जदाताओं को सूचना देने, सार्वजनिक नोटिस जारी कर दावे मंगाने और दिवालियापन प्रक्रिया शुरू होने के 90 दिनों के भीतर शुरुआती रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है.
धनतेरस के दिन सोना 1.48 लाख के पार, चांदी भी महंगी, पिछले साल से कितना बढ़ गया भाव?
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या भारत में ट्रंप टावर्स के मालिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-भारत-में-ट्रंप-टावर्स-के-मालिक-अमेरिकी-राष्ट्रपति-डोनाल्ड-ट्रंप-हैं</link>
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        <description><![CDATA[ मिड-टर्म चुनावों में अपनी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अमेरिकी राजनीति में चर्चाओं से घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिजनेस साम्राज्य की चर्चा हो रही है. मुंबई, गुरुग्राम, बेंगलुरु और पुणे जैसे भारत के बड़े शहरों में आपने ट्रंप टावर्स देखे होंगे. लेकिन क्या यह टावर्स सच में डोनाल्ड ट्रंप के हैं? जानिए इसकी सच्चाई क्या है.
भारत में ट्रंप टावर्स प्रोजेक्ट्स ब्रांड लाइसेंसिंग मॉडल पर आधारित है. ऐसे में भारत में स्थित &#039;ट्रंप टावर्स&#039; के मालिक डोनाल्ड ट्रंप या उनकी कंपनी नहीं हैं. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप की कंपनी भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर्स को अपने नाम और लोगो का उपयोग करने का कानूनी अधिकार देती है. जमीन खरीदने, निर्माण करने, प्रोजेक्ट को फंड करने और फ्लैट बेचने का पूरा काम स्थानीय भारतीय डेवलपर्स करते हैं. ट्रंप की कंपनी मुख्य रूप से डिजाइन स्टैंडर्ड्स, लक्जरी गाइडलाइंस और ब्रांडिंग की निगरानी करती है, जिसके बदले उन्हें मोटी लाइसेंसिंग फीस और रॉयल्टी मिलती है.
ट्रंप टावर्स खड़े करने वाले भारत में प्रमुख डेवलपर्स&amp;nbsp;

ट्राइबेका डेवलपर्स- भारत में ट्रंप ब्रांड के आधिकारिक और प्राथमिक प्रतिनिधि हैं.
लोढ़ा ग्रुप- मुंबई &amp;nbsp;में वर्ली स्थित ट्रंप टावर का निर्माण इन्होंने किया है.
M3M इंडिया- गुरुग्राम स्थित ट्रंप टावर के सह-डेवलपर हैं.
पंचशील रियल्टी- पुणे स्थित ट्रंप टावर्स के डेवलपर हैं.
उनिमार्ग और रीमाउंट- कोलकाता प्रोजेक्ट से जुड़े हैं.

क्यों करते हैं ट्रंप के नाम का इस्तेमाल?
संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर भारत में सबसे ज्यादा ट्रंप-ब्रांडेड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स मौजूद हैं, लेकिन कानूनी और वित्तीय रूप से इन इमारतों के मालिक स्थानीय डेवलपर्स और उनमें घर खरीदने वाले खरीदार ही हैं. लोकल डेवलपर्स के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के साथ पार्टनरशिप करने का मुख्य उद्देश्य मार्केट में बढ़त बनाना, प्रीमियम कीमत वसूलना और प्रोजेक्ट को तेजी से बेचना होता है.
बिजनेस पर पड़ता है बड़ा फर्क!
ग्लोबल लक्जरी टैग जुड़ते ही डेवलपर्स उसी इलाके के अन्य प्रोजेक्ट्स के मुकाबले 25% से 40% तक ज्यादा कीमत वसूल पाते हैं. खरीदार केवल फ्लैट के लिए नहीं, बल्कि उस &#039;स्टेटस सिंबल&#039; के लिए प्रीमियम चुकाने को तैयार रहते हैं.
हाई-एंड अल्ट्रा-लक्जरी प्रॉपर्टीज को बिकने में आमतौर पर काफी समय लगता है. हालांकि, जाने-माने इंटरनेशनल ब्रांड का नाम होने से प्रोजेक्ट लॉन्च होते ही तेजी से बिकता है. डेवलपर को शुरुआती चरण में ही पर्याप्त फंड (कैश फ्लो) मिल जाता है, जिससे बाहरी लोन पर निर्भरता और ब्याज का बोझ कम होता है.
लोकल डेवलपर्स के नाम को शायद विदेशों में रहने वाले अमीर भारतीय या विदेशी निवेशक न पहचानते हों, लेकिन &#039;ट्रंप&#039; जैसे नाम पर उनका भरोसा तुरंत बन जाता है. इससे डेवलपर को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिल जाता है.
मुंबई, गुरुग्राम या पुणे जैसे शहरों में सैकड़ों लक्जरी प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं. ट्रंप ब्रांड डेवलपर को भीड़ से बिल्कुल अलग खड़ा कर देता है, जिससे मार्केटिंग और विज्ञापनों का असर कई गुना बढ़ जाता है. एक बार जब कोई लोकल डेवलपर ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स पर प्रोजेक्ट पूरा कर लेता है, तो मार्केट में उसकी विश्वसनीयता और साख काफी बढ़ जाती है. इसका फायदा उन्हें अपने भविष्य के दूसरे प्रोजेक्ट्स में भी मिलता है.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>60 दिन रोज 9 घंटे सोकर लड़की ने जीते 9 लाख, Wakefit कंपनी का कमाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/60-दिन-रोज-9-घंटे-सोकर-लड़की-ने-जीते-9-लाख-wakefit-कंपनी-का-कमाल</link>
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        <description><![CDATA[ क्या आपने कभी सुना है कि किसी को सोने के बदले में लाखों रुपये मिल रहे हैं? नहीं सुना होगा ना! लेकिन ऐसा हाल ही में हुआ है. दरअसल मुंबई की एक महिला हर रोज 9 घंटे सोकर करीब 10 लाख रुपये जीते हैं. आप भी ये खबर सुनकर हैरान रह गए हैं ना? आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला.
दरअसल इस महिला ने एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, ये प्रतियोगिता घर और नींद से जुड़े प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी वेकफिट (Wakefit) ने आयोजित की थी. कंपनी का मकसद लोगों को अच्छी और पूरी नींद के महत्व के बारे में जागरूक करना है.
किसने जीता इनाम?वेकफिट के द्वारा आयोजित की गई इस प्रतियोगिता में मुंबई की जिनिया चटर्जी (Jiniya Chatterjee) विजेता बनीं. उन्हें 9.6 लाख रुपये का इनाम और कंपनी की ओर से छुट्टियां बिताने का मौका मिला. इस कॉम्पिटीशन को जीतने के लिए जिनिया ने 60 दिनों तक हर रोज 9 घंटे की नींद ली और 10 लाख रुपये जीत.
इस कॉम्पिटीशन में जिनिया के साथ और भी प्रतिभागी थे. फाइनल में उन्हें दूसरे प्रतिभागियों के साथ कई तरह के टास्क पूरे करने पड़े. इन टास्क के जरिए उनकी याददाश्त, ध्यान देने की क्षमता और अच्छी नींद के लिए सही माहौल तैयार करने की कला को परखा गया. फाइनल में शामिल दूसरे प्रतिभागियों में रत्नागिरी के मणिकंदन, मेहक खोट और हैदराबाद के करीम खान शामिल थे.
क्या है वेकफिट की स्लीप इंटर्नशिप?वेकफिट ने लोगों को अच्छी नींद के प्रति जागरूक करने के लिए &#039;स्लीप इंटर्नशिप&#039; शुरू की है. इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले लोगों को करीब 60 दिनों तक अपनी नींद का ध्यान रखना होता है. इसमें सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि अपनी नींद की आदतों को सुधारना और कुछ मजेदार गतिविधियों में हिस्सा लेना भी शामिल है.
इस प्रतियोगिता के पांचवें सीजन में देशभर से 2 लाख से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था. इनमें से कई चरणों की जांच और इंटरव्यू के बाद 10 लोगों को चुना गया. इनमें से चार प्रतिभागी फाइनल तक पहुंचे.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>MTNL की 1100 करोड़ की संपत्ति बेचेगी सरकार, कर्ज घटाने का प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) पर काफी कर्ज है. इस कर्ज को कम करने के लिए सरकार कंपनी की कुछ जमीन और इमारतें बेचने की तैयारी कर रही है. सरकार की एक समिति ने MTNL की करीब 1,100 करोड़ रुपये की संपत्तियों को बेचने का प्रपोजल रखा है. अब इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सरकार की एक और समिति के सामने रखा जाएगा.
अगर कंपनी के इस प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिल जाती है, तो इन संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
कितने कर्ज में है MTNL?MTNL की आर्थिक स्थिति पिछले कुछ समय से खराब चल रही है. कंपनी पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है और उसे कर्ज की किस्तें चुकाने में भी परेशानी हो रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में MTNL की कुल देनदारियां करीब 40,000 करोड़ रुपये थीं. कंपनी को पिछले वित्त वर्ष में करीब 3,102 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस दौरान कंपनी की कुल आय 1,469 करोड़ रुपये रही. MTNL ने SBI, PNB और बैंक ऑफ इंडिया समेत कई सरकारी बैंकों का कर्ज समय पर नहीं चुकाया है, जिसके कारण इतने कर्ज में है.
कौन-सी संपत्तियां बेची जाएंगी?सरकार की योजना MTNL की ऐसी जमीन और इमारतें बेचने की है, जिनका कंपनी के रोजमर्रा के काम में ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो रहा है. इन्हें कंपनी की गैर-जरूरी संपत्तियां कहा जाता है. सरकार का मानना है कि इन संपत्तियों को बेचकर पैसा जुटाया जा सकता है. इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी की देनदारियां कम करने में किया जाएगा.
NLMC बेचेगी संपत्तियांइन संपत्तियों को बेचने की जिम्मेदारी नेशनल लैंड मॉनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) को दी जाएगी. ये वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी संस्था है. इसका काम सरकारी कंपनियों की अतिरिक्त जमीन और इमारतों को बेचकर उनसे पैसा जुटाना है. संपत्तियों की बिक्री की प्रक्रिया सरकार की संबंधित समिति के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद शुरू हो जाएगी. मंजूरी मिलने के बाद NLMC संभावित खरीदारों की तलाश करेगा. अगर कोई सरकारी विभाग संपत्ति खरीदना चाहता है, तो उसे सीधे बेचने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है. अगर सरकारी विभागों की ओर से खरीदने में रुचि नहीं दिखाई जाती, तो निजी कंपनियों और अन्य खरीदारों के लिए नीलामी की जा सकती है.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>सोने में 2.5% और चांदी में 4% से ज्यादा उछाल, शादी के सीजन में खूब ढीली होगी आपकी जेब</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका की राजनीति में हुए बड़े बदलाव का असर अब हजारों किलोमीटर दूर भारत के सर्राफा बाजार में भी दिखाई देने लगा है. अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को मिली हार के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है. इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है. सोने-चांदी के बढ़ते भाव ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके घरों में शादी-ब्याह की तैयारियां चल रही हैं. खासकर महिलाओं के लिए पसंदीदा आभूषण खरीदना अब जेब पर भारी पड़ सकता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के चलते सोने-चांदी की चमक बढ़ी है. 4 नवंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में करीब 2.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव 4 प्रतिशत से अधिक उछल गए. 5 नवंबर को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी का रुख बना रहा.
महिलाओं की जेब पर पड़ेगा असर
भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, भावनाओं और पारिवारिक बचत का अहम हिस्सा है. शादी में बेटी के लिए गहने खरीदने हों या दीपावली जैसे त्योहारों पर सोने-चांदी की खरीदारी करनी हो, कीमतों में बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करती है. ऐसे में अचानक आई तेजी ने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है.
अमेरिका की राजनीति से भारतीय बाजार तक हलचल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का असर भारत के सर्राफा बाजार पर भी पड़ता है. डॉलर की चाल, ब्याज दरों की संभावनाएं और निवेशकों का रुख सोने-चांदी के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
अब खरीदारों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतें और बढ़ेंगी या बाजार में राहत मिलेगी. फिलहाल तेजी ने त्योहारों और शादी के सीजन में गहने खरीदने की योजना बना रहे परिवारों का बजट जरूर बिगाड़ने की आशंका पैदा कर दी है.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिवाली से पहले राज्य सरकार का तोहफा, कर्मचारियों का 3% बढ़ाया महंगाई भत्ता</title>
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        <description><![CDATA[ दीपावली से पहले कई राज्यों की सरकार ने अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता बढञाकर तोहफा दिया है. इसी कड़ी में अब गुजरात का नाम भी जुड़ गया है. गुजरात सरकार ने आज यानी 4 नवंबर को कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA) में 3% का इजाफा कर दिया है. इस फैसले से करीब 9.69 लाख लोगों को फायदा मिलेगा. जुलाई से अक्टूबर तक का एरियर नवंबर की सैलरी और पेंशन के साथ मिलेगा.
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसला किया गया है. इस फैसले से राज्य के 4.62 लाख कार्यरत कर्मचारियों और 5.07 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा. यानी कुल 9.69 लाख से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिलेगा. सरकार ने ये फैसला केंद्र सरकार की ओर से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के बाद लिया है.
कब से लागू होगी बढ़ोतरी?गुजरात सरकार की ओर से महंगाई भत्ते में की गई ये बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से लागू होगी. इसका मतलब है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई से बढ़ा हुआ DA मिलेगा. हालांकि, जुलाई से अक्टूबर तक की बकाया राशि यानी एरियर का भुगतान नवंबर में किया जाएगा. सरकार के अनुसार, चार महीने का एरियर नवंबर की सैलरी और पेंशन के साथ एक ही किस्त में दिया जाएगा.
इन कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा फायदासरकार के इस फैसले का लाभ गुजरात सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी, पंचायत सेवा के कर्मचारी, राज्य सरकार के अन्य संगठनों के कर्मचारी, छठवें वेतन आयोग के तहत आने वाले पेंशनर्स, सातवें वेतन आयोग के तहत आने वाले पेंशनर्स को मिलेगा.
कितना खर्च करेगी सरकार?महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से गुजरात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा. अब सरकार को हर साल करीब 1,569 करोड़ रुपये एक्स्ट्रा खर्च करना पड़ेंगे. बता दें कि गुजरात सरकार ने ये फैसला केंद्र सरकार की ओर से महंगाई भत्ते में 3% बढ़ोतरी के ऐलान के बाद लिया गया है. इससे पहले मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों े भी अपने कर्मचारियों को ये सौगात दी है.
ये भी पढ़ें: OpenAI के CEO सैम ने बदला अपना नाम, रखा &#039;RAM&#039; ऑल्टमैन ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिवाली, से, पहले, राज्य, सरकार, का, तोहफा, कर्मचारियों, का, बढ़ाया, महंगाई, भत्ता</media:keywords>
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        <title>OpenAI के CEO सैम ने बदला अपना नाम, रखा &amp;apos;RAM&amp;apos; ऑल्टमैन</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों से &#039;राम&#039; नाम पर काफी बवाल चल रहा है. इसी बीच OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने इस विवाद को और ज्यादा हाईलाइट कर दिया है. वो ऐसे कि उन्होंने अपना सोशल मीडिया पर डिस्प्ले नेम Sam Altman से बदलकर Ram Altman कर दिया है. अब ये नाम &#039;राम&#039; ऑल्टमैन कहलाएगा या कुछ और ये तो आने वाला वक्त बताएगा.
लेकिन फिलहाल इस नाम पर सैम काफी चर्चा में आ गए हैं. दरअसल सैम में सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म X पर अपना नाम बदलकर &#039;Ram Altman&#039; रख लिया है. हालांकि ये नाम उन्होंने कंप्यूटर की RAM को लेकर दिए गए बयान के बाद रखा है.

क्या है पूरा मामला?दरअसल सैम ऑल्टमैन हाल ही में &#039;Cheeky Pint&#039; नाम के पॉडकास्ट में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने कंप्यूटर की RAM को लेकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि दुनिया में RAM की उपलब्धता सीमित है. ऐसे में लोगों के निजी कंप्यूटरों में बड़ी मात्रा में RAM का होना, जिसका इस्तेमाल बहुत कम समय के लिए होता है, संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं है.
ऑल्टमैन के मुताबिक कंप्यूटर की RAM का इस्तेमाल क्लाउड डेटा सेंटर में ज्यादा बेहतर तरीके से किया जा सकता है. उनका कहना था कि जब लोगों के कंप्यूटर में लगी RAM का इस्तेमाल केवल करीब 5 प्रतिशत समय होता है, तो दुनिया के सीमित संसाधनों का इस तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है.
यूजर्स ने दी थी नाम बदलने की सलाहऑल्टमैन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें नाम बदलने का सुझाव दिया, जिसे उन्होंने मान लिया. उनके बयान के बाद लोगों का कहना था कि अगर किसी ने अपने पैसे से कंप्यूटर खरीदा है, तो उसे अपनी जरूरत के हिसाब से RAM लगाने का पूरा अधिकार है.&amp;nbsp;
कई लोगों ने ये भी कहा कि बड़ी टेक कंपनियां AI के लिए भारी मात्रा में कंप्यूटर चिप और RAM खरीद रही हैं. इससे बाजार में RAM की कमी हो रही है और आम लोगों के लिए कंप्यूटर खरीदना महंगा हो सकता है. ऐसे में लोगों को ये बात पसंद नहीं आई कि निजी कंप्यूटर में ज्यादा RAM रखने को गैर-जरूरी बताया जा रहा है.

People should always be in control of the future. OpenAI is against the notion that it would be acceptable for people to be relegated to a role of doing things that &amp;ldquo;AI systems think makes sense to reward in humans&amp;rdquo;. People should not cede control of the future to superintelligence, and that requirement should ultimately constrain AI progress.
&amp;mdash; Ram Altman (@sama) November 4, 2026



सैम ऑल्टमैन ने दी सफाईनाम बदलने के बाद ऑल्टमैन ने अपने बयान पर सफाई भी दी. उन्होंने कहा कि उनकी बात को गलत समझा गया. उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि दुनिया में RAM का उत्पादन बढ़े, ताकि लोग अपने कंप्यूटर में जरूरत के हिसाब से जितनी चाहें RAM लगा सकें. उन्होंने ये भी कहा कि वह लंबे समय से दुनिया में RAM का उत्पादन बढ़ाने की बात कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें: चीनी 4 रुपए किलो महंगी, दिवाली से पहले 70 तक पहुंचे दाम ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>OpenAI, के, CEO, सैम, ने, बदला, अपना, नाम, रखा, RAM, ऑल्टमैन</media:keywords>
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        <title>आपको सोन पापड़ी मिली? दिल्ली की कंपनी ने कर्मचारियों को बांटे लाखों के iPhone</title>
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        <description><![CDATA[ दिवाली के मौके पर कंपनियां अपने कर्मचारियों को गिफ्ट देती हैं. आमतौर पर इन गिफ्ट में मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट वाउचर या दूसरे घरेलू सामान शामिल होते हैं. लेकिन दिल्ली की एक कंपनी ने इस बार अपने कर्मचारियों को ऐसा तोहफा दिया, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है.
कंपनी ने अपने कर्मचारियों को दिवाली के मौके पर iPhone 16 गिफ्ट किया है. हर फोन की कीमत करीब 70 हजार रुपये बताई जा रही है.
कर्मचारियों को मिला सरप्राइजदरअसल सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. ये वीडियो दिल्ली के रोहिणी में स्थित एक कंपनी का है. जिसे कंपनी ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. वीडियो में कर्मचारियों की टेबल पर रिबन से सजाए गए iPhone 16 के बॉक्स रखे दिखाई दे रहे हैं. फोन अलग-अलग कलर का है. इनमें सफेद, हरा, नीला और काला रंग शामिल हैं.



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इस वीडियो के आखिर में कुछ महिला कर्मचारी हैं जो अपने हाथों में नए फोन लेकर खुशी जाहिर करती नजर आ रही हैं. कंपनी ने वीडियो के साथ फनी कैप्शन में लिखा, &#039;No competition. आपको क्या मिला?&#039;
वायरल हो रहा वीडियोकंपनी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लाखों लोगों ने इसे देखा और कई यूजर्स ने कंपनी के इस कदम की तारीफ की. कुछ लोगों ने मजाक में कंपनी से पूछा कि क्या वहां नौकरी के लिए कोई जगह खाली है. कोई कह रहा है कि इस कंपनी में नौकरी दिलवा दो, तो वहीं कोई कह रहा है कि यहां वेकेंसी खाली है क्या. तो वहीं कई लोगों का तो ये भी कहना है कि उनकी कंपनी तो केवल मिठाई देकर खुश हो जाती है.
हालांकि कई लोगों को इस वीडियो पर भरोसा भी नहीं हो रहा है. कई लोग कह रहे हैं कि ये फेक वीडियो है. तो वहीं कई लोग कह रहे हैं कि वायरल होने की स्ट्रैटेजी है. असलियत क्या है ये तो कोई नहीं जानता. लेकिन फिर भी कंपनी की ये पहल कर्मचारियों के लिए वाकई काबिल-ए-तारीफ है.
ये भी पढ़ें: धनतेरस-दीवाली पर खरीद रहे हैं सोना? जानें घर में कितना गोल्ड रख सकते हैं ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आपको, सोन, पापड़ी, मिली, दिल्ली, की, कंपनी, ने, कर्मचारियों, को, बांटे, लाखों, के, iPhone</media:keywords>
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        <title>धनतेरस&amp;दिवाली पर खरीद रहे हैं सोना? जानें घर में कितना गोल्ड रख सकते हैं</title>
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        <description><![CDATA[ दिवाली और धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसे में लोग इस खास मौके पर सोने के गहने, कॉइन, बार या कोई बर्तन या कुछ और खरीदते हैं. जब हर साल सोना खरीदा जाता है और उसे रखा जाता है, तब कई बार लोगों के मन में ये सवाल आता है कि घर में कितना सोना रखना कानूनी है? क्या ज्यादा सोना रखने पर आयकर विभाग उसे जब्त कर सकता है?
नहीं जानते होंगे ना? तो आइये आपको बताते हैं कि घर में आप कितना सोना रख सकते हैं. इसके लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग- अलग नियम हैं या नहीं? या फिर घर पर सोना रखने की कोई लिमिट ही नहीं है.
क्या कहते हैं आयकर के नियम?आयकर नियमों के मुताबिक, घर में सोना रखने की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है. यानी कोई व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार कितना भी सोना रख सकता है. हालांकि, इसके लिए ये बताना जरूरी है कि सोना कहां से आया है और उसे किस पैसे से खरीदा गया है. इसका मतलब है कि आपने सोना जहां से भी खरीदा हो उसकी रसीद या पावती आपके पास होना चाहिए.
महिला पुरुषों के लिए हैं अलग नियम?केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नियमों के अनुसार, आयकर विभाग की तलाशी के दौरान सोने के गहनों की एक तय मात्रा सामान्य तौर पर जब्त नहीं की जाती है. जिसमें यदि शादीशुदा महिला है तो उसके पास 500 ग्राम तक का सोना हो सकता है. तो वहीं यदि अविवाहित महिला है तो उसके पास 250 ग्राम तक हो सकता है. तो वहीं पुरुषों के लिए ये लिमिट थोड़ी और कम है. पुरुष अपने पास 100 ग्राम तक सोना रख सकते हैं.
ये सीमाएं सोने के मालिकाना हक की नहीं हैं. इनका संबंध आयकर विभाग की तलाशी के दौरान गहनों को जब्त करने से है. इसका मतलब ये है कि शादीशुदा महिला के पास 500 ग्राम से ज्यादा सोना होने पर भी वो गैरकानूनी नहीं है. अगर वो सोने का सही स्रोत बता सकती है, तो ज्यादा सोना रखने पर भी उसे परेशानी नहीं होनी चाहिए.
ज्यादा सोना होने पर क्या करें?अगर किसी शादीशुदा महिला के पास 700 ग्राम सोना है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि आयकर विभाग उसके 200 ग्राम सोने को जब्त कर लेगा. ऐसी स्थिति में विभाग ये जानना चाहेगा कि सोना कहां से आया है. तो ऐसे में आपको वैध तरह से खरीदे गए सोने का बिल दिखाना होगा. इसके अलावा शादी में, परिवार से, तोहफे में या फिर विरासत में मिले हुए गहने हों तो अच्छी तरह से इस बात को समझा दें.
सिक्के- बिस्किट पर भी लगेगा यही नियम?नहीं! आयकर विभाग के ये दिशानिर्देश मुख्य रूप से सोने के गहनों और आभूषणों के लिए हैं. सोने के सिक्के, बिस्किट और गोल्ड बार के मामले में यही छूट अपने आप लागू नहीं होती. अगर किसी व्यक्ति के पास बड़ी मात्रा में सोने के सिक्के या बिस्किट हैं, तो उसे उनके खरीदने का स्रोत बताना पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: दिवाली से पहले राज्य सरकार का तोहफा, कर्मचारियों का 3% बढ़ाया महंगाई भत्ता ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>धनतेरस-दिवाली, पर, खरीद, रहे, हैं, सोना, जानें, घर, में, कितना, गोल्ड, रख, सकते, हैं</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>घर का सिलेंडर हुआ महंगा? जानें 14 और 19 किलो वाले गैस सिलेंडर का क्या है रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-का-सिलेंडर-हुआ-महंगा-जानें-14-और-19-किलो-वाले-गैस-सिलेंडर-का-क्या-है-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/घर-का-सिलेंडर-हुआ-महंगा-जानें-14-और-19-किलो-वाले-गैस-सिलेंडर-का-क्या-है-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ नवंबर की शुरुआत के साथ ही रसोई गैस की कीमतों को लेकर नई अपडेट सामने आई है. अगर आप घर में इस्तेमाल होने वाला LPG सिलेंडर बुक करने वाले हैं तो राहत की बात है कि 5 नवंबर को घरेलू गैस की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में इस्तेमाल होने वाला कमर्शियल सिलेंडर महंगा हो गया है.
तेल कंपनियों ने 1 नवंबर से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 10 रुपए की बढ़ोतरी की थी. यहां से आप आज के घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर का ताजा भाव चेक कर सकते हैं.&amp;nbsp;
14 किलो वाले गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
939.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


नोएडा
939.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


कोलकाता
968.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


पटना
1,031.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


बेंगलुरु
944.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


रांची
1,010.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


जोधपुर
949.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


देहरादून
952.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम



19 किलो वाले गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;



शहर&amp;nbsp;
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
2,820.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


नोएडा
2,757.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
2,774.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता
2,964.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


पटना
3,110.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बेंगलुरु
2,774.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


रांची
2,995.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


जोधपुर
2,862.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


देहरादून
2,865.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम



लगातार तीसरे महीने बदले सिलेंडर के दाम?
कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में नवंबर में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले 1 सितंबर को कीमत 9.50 रुपए और 1 अक्टूबर को 62.50 रुपए बढ़ाई गई थी. नवंबर में 10 रुपए की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 19 किलो सिलेंडर का भाव 2,820 रुपए हो गया है.
इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ता है, जो रोजाना बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल करते हैं. होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के लिए खाना बनाने की लागत बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर के दाम क्यों नहीं बदले?
घरेलू LPG की कीमतें आमतौर पर हर महीने की शुरुआत में समीक्षा की जाती हैं. कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और कच्चे तेल के भाव, रुपए-डॉलर की विनिमय दर और दूसरे खर्चों का असर पड़ता है.
लेकिन, घरेलू सिलेंडर की कीमत हर महीने बदलना जरूरी नहीं है. इस बार 14.2 किलो वाले सिलेंडर का भाव 942 रुपए पर स्थिर है. वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया गया है.
आपको सोन पापड़ी मिली? दिल्ली की कंपनी ने कर्मचारियों को बांटे लाखों के iPhone
 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>घर, का, सिलेंडर, हुआ, महंगा, जानें, और, किलो, वाले, गैस, सिलेंडर, का, क्या, है, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Dhanteras 2026: नया सोना महंगा, क्या पुराने गहने बदलकर नया लेना शुभ है? जानें Gold Exchange का नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/dhanteras-2026-नया-सोना-महंगा-क्या-पुराने-गहने-बदलकर-नया-लेना-शुभ-है-जानें-gold-exchange-का-नियम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/dhanteras-2026-नया-सोना-महंगा-क्या-पुराने-गहने-बदलकर-नया-लेना-शुभ-है-जानें-gold-exchange-का-नियम</guid>
        <description><![CDATA[ Dhanteras 2026: क्या धनतेरस के दिन पुराने गहने देकर नया सोना लेना शुभ है, या इससे घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती हैं? इस बार सोने की ऊंची कीमतों के कारण यह सवाल ज्यादा लोगों के सामने है. पुराने गहने exchange कर नई jewellery लेने का चलन भी तेजी से बढ़ा है.
World Gold Council से जुड़े एक सर्वे के अनुसार 76% लोगों ने नए गहने खरीदने के लिए अपने पुराने गहनों को exchange करने में रुचि दिखाई. यानी सवाल सिर्फ धार्मिक नहीं, बजट का भी है.
क्या पुराना सोना देना अशुभ है?

प्राचीन धार्मिक ग्रंथ आज के retail-style Gold Exchange की प्रक्रिया पर कोई सीधा नियम नहीं बताते. इसलिए यह कहना कि धनतेरस पर पुराना सोना देने से &#039;लक्ष्मी घर से चली जाती हैं&#039;, शास्त्रीय रूप से साबित नियम नहीं है.
धनतेरस की परंपरा का जोर समृद्धि बढ़ाने और शुभ वस्तु घर लाने पर है. इस दृष्टि से यदि अनुपयोगी या पुराने गहने देकर उसके बदले नया सोना लिया जा रहा है तो धन खत्म नहीं हो रहा, उसका रूप बदल रहा है.
हां, धार्मिक भाव रखने वाले परिवार इसे ऐसे कर सकते हैं कि पुराने गहने की जांच और exchange की प्रक्रिया पहले पूरी कर लें और नई jewellery या सिक्का शुभ समय में घर लेकर आएं. इससे परंपरा और सुविधा दोनों बनी रहती हैं.
2026 में कौन-सा समय शुभ है?
धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है. दिल्ली में त्रयोदशी तिथि सुबह 10:30 बजे शुरू होगी. लक्ष्मी-कुबेर पूजा और स्थिर वृषभ काल शाम 6:02 से 7:57 बजे तक रहेगा.
सोना खरीदने के लिए त्रयोदशी शुरू होने के बाद कई शुभ चौघड़िया उपलब्ध हैं.
इस बार एक ज्योतिषीय बात भी ध्यान देने वाली है. वक्री शुक्र 6 नवंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. शुक्र का संबंध धन, आभूषण और विलासिता से माना जाता है.
इसका व्यावहारिक संदेश ज्यादा अहम है, दिखावे में जरूरत से ज्यादा खर्च न करें. जो गहना उपयोगी हो, जिसका मूल्य स्पष्ट हो और जो बजट में आए, वही लेना बेहतर है.
Exchange करते समय क्या जरूर देखें?
पुराने सोने की purity, melting deduction, वजन, exchange rate, नई jewellery की making charge और final bill अलग-अलग जांचें. ऊंचे भाव के कारण इस festive season में lightweight jewellery और old-gold exchange दोनों बढ़े हैं. कई बड़े jewellers के यहां exchange अब बिक्री का बड़ा हिस्सा बन चुका है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सोने की बढ़ेगी खरीदारी, धनतेरस से पहले 25% तक हुआ सस्ता</title>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. हर साल इस मौके पर लोग अपनी हैसियत के हिसाब से सोने के सिक्के, गहने वगैरह खरीदते हैं. लेकिन इस बार त्योहार से ठीक पहले सोने की कीमतों में आई गिरावट ने लोगों के मन में एक नई उम्मीद जगा दी है. सोना अपने जनवरी के भाव से 25 फीसदी तक नीचे आ चुका है. ऐसे में सवाल है कि क्या इस धनतेरस बाजार में सोने की खरीदारी बढ़ने वाली है?
बाजार के हालात देखकर ऐसा लगता है कि इस बार सोने की मांग में तेजी आ सकती है. ज्वेलर्स को भी उम्मीद है कि धनतेरस पर सोने की बिक्री की मात्रा पिछले साल के मुकाबले 10 से 12 फीसदी तक बढ़ सकती है. मतलब जिन ग्राहकों ने महंगे भाव को देखकर सोना खरीदने का प्लान कैंसिल कर दिया था, वो अब इस गिरावट का फायदा उठाना चाह सकते हैं.&amp;nbsp;
जनवरी से कितना सस्ता हुआ सोना?साल 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों में तेज उछाल आया था. जनवरी में सोना 1.80 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया था. इसके बाद कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हुआ. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने का भाव जनवरी के ऊंचे स्तर से करीब 25 फीसदी नीचे आ गया है.
इस गिरावट के बाद सोना अब 1.41 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वैसे जनवरी के भाव के हिसाब से सोना सस्ता हुआ है, लेकिन पिछले साल की धनतेरस के मुकाबले इसकी कीमत अब भी करीब 10 फीसदी ज्यादा बताई जा रही है. इसलिए इसे पिछले साल के मुकाबले तो सस्ता सोना नहीं हुआ है.&amp;nbsp;
धनतेरस पर कितनी बढ़ेगी खरीदारी?मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोने के दाम में हाल के दिनों में आई गिरावट से लोगों की खरीदारी में दिलचस्पी फिर बढ़ी है. ज्वेलर्स के शोरूम में लोगों की आवाजाही बढ़ने और शादी के लिए एडवांस बुकिंग में तेजी आने लगी है.
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, इस धनतेरस सोने की बिक्री की मात्रा पिछले साल के मुकाबले 10-12 फीसदी बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
वजन से ज्यादा बजट देख रहे लोगसोने के दाम में गिरावट के बावजूद कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर हैं. ऐसे में हर ग्राहक ज्यादा वजन के गहने खरीदने की स्थिति में नहीं है. ज्वेलर्स के मुताबिक, कई ग्राहक हल्के गहने, कम वजन वाले डिजाइन देख रहे हैं तो कई सारे 18 कैरेट सोने की ज्वेलरी भी मांग रहे हैं.
लोग अब वजन छोड़कर अपने बजट के हिसाब से छोटे सिक्के या गहने खरीद रहे हैं. वहीं, शादी के लिए खरीदारी करने वाले परिवारों की ओर से एडवांस ऑर्डर भी दिए जा रहे हैं.&amp;nbsp;
पाकिस्तान में भारत से 20 हजार सस्ता है सोना, 22 और 24 कैरेट के भाव में कितना अंतर?
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Gold Rate: सोने की मांग 6 साल में सबसे कम, त्योहारों में खरीदारी 29% तक घटी</title>
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        <description><![CDATA[ इस साल सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है, जिसका असर भारतीय बाजार में खरीदारी पर भी पड़ा है. त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार महंगे दामों ने ग्राहकों को खरीदारी से दूर रखा है.
जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान देश में सोने की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले छह वर्षों में इस अवधि का सबसे कमजोर प्रदर्शन है.
आभूषणों की खरीदारी में 20 प्रतिशत की कमी
सोने की कुल मांग में गिरावट का सबसे ज्यादा असर आभूषणों के बाजार पर दिखाई दिया. जुलाई से सितंबर के बीच ज्वेलरी की मांग 20 प्रतिशत घटकर 99.9 टन रह गई. पिछले साल इसी तिमाही में यह 125 टन थी.
हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आभूषणों पर खर्च 16 प्रतिशत बढ़कर 1,48,700 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल की तुलना में खरीदारी की मात्रा कम रही, लेकिन ग्राहकों का बजट ज्यादा खर्च हुआ.
छह साल के निचले स्तर पर पहुंची सोने की मांग
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 29 प्रतिशत घटकर 162.5 टन रह गई. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 229.8 टन था. सोने की कीमतों में तेजी के कारण ग्राहकों ने खरीदारी कम कर दी है. हालांकि, मांग में गिरावट के बावजूद इस साल सोने पर होने वाला कुल खर्च बढ़ा है.
2026 की तीसरी तिमाही में सोने की खरीद पर भारतीय उपभोक्ताओं ने करीब 2,41,900 करोड़ रुपये खर्च किए. पिछले साल इसी अवधि में यह राशि लगभग 2,35,090 करोड़ रुपये थी. इससे पता चलता है कि कम मात्रा में खरीदारी होने के बाद भी ग्राहकों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
निवेश के लिए सोने की खरीदारी बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, सोने के सिक्कों और छड़ों की मांग में भी 40 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 55 टन रह गई. वहीं, गोल्ड ईटीएफ की मांग 50 प्रतिशत घटकर 5.3 टन दर्ज की गई. इसके बावजूद कीमतों में तेजी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने को सुरक्षित निवेश मानने वाले लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है.
आगे भी मांग पर रह सकता है दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची कीमतें, घरेलू खर्च और वैश्विक परिस्थितियां सोने की खरीदारी को प्रभावित कर रही हैं. रिपोर्ट में पूरे 2026 के दौरान भारत में सोने की कुल मांग करीब 650 टन रहने का अनुमान लगाया गया है. अगर कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन में भी ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो सकती है.
ग्रामीण बाजारों पर भी पड़ा असर
भारत में सोने की कुल खपत का लगभग आधा हिस्सा ग्रामीण इलाकों से आता है. इस बार कमजोर मानसून और रोजमर्रा के खर्च में बढ़ोतरी ने ग्रामीण परिवारों की खरीदने की क्षमता को प्रभावित किया. इसके चलते गांवों में भी सोने की मांग कमजोर रही.
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>रात में 3 और दिन में 5 रुपए हो EV चार्जिंग यूनिट, गडकरी ने दिया नया प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक नया सुझाव दिया है.
बिजली की कीमत कम होने से इलेक्ट्रिक वाहन चलाना लोगों के लिए ज्यादा किफायती हो सकता है. इस प्रस्ताव के तहत रात और दिन में ईवी चार्जिंग के लिए अलग-अलग दरें रखने की बात कही गई है.
1 हजार KM चलाने पर कितना आएगा खर्च?
गडकरी के प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई इलेक्ट्रिक कार एक यूनिट बिजली में 5 किलोमीटर चलती है, तो 1,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए उसे 200 यूनिट बिजली की जरूरत होगी. रात में 3 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से इसका कुल खर्च सिर्फ 600 रुपये होगा.
वहीं, 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देने वाली पेट्रोल कार से इतनी दूरी तय करने पर मुंबई के अनुमानित पेट्रोल रेट के अनुसार करीब 7,414 रुपये खर्च होंगे. डीजल कार के लिए यही खर्च लगभग 6,522 रुपये होगा. इस तुलना में इलेक्ट्रिक कार से पेट्रोल के मुकाबले करीब 6,814 रुपये और डीजल के मुकाबले 5,922 रुपये की बचत हो सकती है. हालांकि, ये आंकड़े अनुमानित माइलेज और ईंधन की कीमतों पर आधारित हैं.
रात में 3 रुपये और दिन में 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली का प्रस्ताव
नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए रात में 3 रुपये और दिन में 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली की दर तय की जाए. उन्होंने KPMG ENRich 2026 कार्यक्रम में यह बात कही. उनके अनुसार, दिन के समय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करके और रात में कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराकर ईवी का उपयोग बढ़ाया जा सकता है.
गडकरी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने वालों के बारे में भी पूछा. उनके मुताबिक, वहां मौजूद करीब 20-25 प्रतिशत लोगों ने ईवी होने की बात कही. उन्होंने अनुमान जताया कि अगले साल तक यह आंकड़ा बढ़कर 35-40 प्रतिशत हो सकता है.
इथेनॉल और हाइड्रोजन वाहनों को भी बढ़ावा
उन्होंने 100 प्रतिशत बायोइथेनॉल से चलने वाली टोयोटा इनोवा का भी जिक्र किया. गडकरी के अनुसार, इस गाड़ी का इस्तेमाल करने का खर्च पेट्रोल के 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर पड़ता है. उन्होंने बताया कि कई वाहन कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल कारों और दोपहिया वाहनों पर काम कर रही हैं.
इसके अलावा, तीन हाइड्रोजन से चलने वाले टाटा ट्रक तैयार किए जा रहे हैं. सरकार 10 हाइड्रोजन कॉरिडोर और उनसे जुड़े फिलिंग स्टेशन विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है.
कृषि कचरे से ईंधन बनाने पर जोर
गडकरी ने पराली और दूसरे कृषि कचरे से बायो-CNG बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की. उन्होंने बताया कि गोबरधन योजना के तहत करीब 3 हजार प्लांट पंजीकृत हुए हैं, जिनमें से 280 शुरू हो चुके हैं. उनका कहना है कि कृषि कचरे का इस्तेमाल ईंधन बनाने में करने से पराली जलाने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है.
इलेक्ट्रिक बसों और बैटरी पर भी कही बात
गडकरी ने बताया कि लिथियम-आयन बैटरी की कीमत पहले करीब 150 डॉलर प्रति किलोवाट घंटा थी, जो अब घटकर लगभग 50 डॉलर रह गई है. हालांकि, बाजार में इनकी मांग अभी भी उपलब्धता से ज्यादा है. भारत में हर साल करीब 6 हजार इलेक्ट्रिक बसें बनाई जा रही हैं और अगले दो सालों में 10 हजार बसों की जरूरत होगी.
यह भी पढ़ें- धनतेरस पर सस्ता हुआ सोना -चांदी, जानें दिल्ली समेत बड़े शहरों में आज का भाव
यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Google Buyout: अब गूगल ने दिया कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, भारत शामिल?</title>
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        <description><![CDATA[ माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब गूगल ने भी अपने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर दे दिया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में गूगल अपने कर्मचारियों के लिए &#039;बायआउट ऑफर&#039; लेकर आया है. जिसके जरिए कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए ऑफर किया जा रहा है. ये ऑफर कई अन्य देशों तक बढ़ाने का फैसला भी किया गया है.&amp;nbsp;
कंपनी ने ये फैसला अन्य खर्चों की कटौती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी निवेश के मद्देनजर किया है.
इन देशों को दिया ऑफरगूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने रॉयटर्स से बातचीत कर इस खबर की पुष्टि की है. कंपनी ने बताया है कि उसने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में काम करने वाले अपने कर्मचारियों को वॉलंटरी एग्जिट पैकेज देना शुरू कर दिया है.
क्या बोली कंपनी?रॉयटर्स से बात करते हुए गूगल के स्पोक्सपर्सन ने बयान में कहा कि, &#039;साल 2025 में, हमारी कुछ टीमों ने सेवरेंस (नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली राशि) के साथ एक वॉलंटरी एग्जिट प्रोग्राम शुरू किया है. इस साल गर्मियों में, जून के महीने में, हमने भविष्य के अपने महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग के लिए इस कार्यक्रम को ग्लोबल लेवल पर कुछ देशों में एक्सपैंड किया है.&#039;
भारत में भी पड़ेगा असर?हालांकि फिलहाल जिन देशों का नाम आया है, उनमें भारत के कर्मचारियों का जिक्र नहीं है. भारतीय कर्मचारियों को फिलहाल ऐसा कोई ऑफर नहीं दिया गया है, कि उन्हें नौकरी छोड़ने के बदले में कुछ पैकेज दिया जा रहा है. लेकिन हो सकता है कि आने वाले समय में कंपनी इसका विस्तार करें और भारतीय कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़े.
कंपनी ने ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब गूगल और अन्य बड़ी टेक कंपनियां AI पर भारी खर्च कर रही हैं. इस वजह से वॉल स्ट्रीट चिंतित हो गया है और अल्फाबेट के शेयरों की कीमत में गिरावट आई है.&amp;nbsp;
माइक्रोसॉफ्ट ने भी दिया ऑफरबता दें कि पिछले हफ्ते ही एक और बड़ी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले में अच्छा खासा पैकेज ऑफर किया है. कंपनी ने करीब 60,000 कर्मचारियों को &#039;बायआउट कॉन्ट्रैक्ट&#039; दिए थे. जिसमें भारत के कर्मचारियों का नाम भी शामिल था. माइक्रोसॉफ्ट ने भी AI के विस्तार के लिए ये ऑफर कर्मचारियों को दिया है.
ये भी पढ़ें: रात में 3 और दिन में 5 रुपए हो EV चार्जिंग यूनिट, गडकरी ने दिया नया प्लान ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>पाकिस्तान को अब आई भारत की याद, 3780000000000 रुपये का मिला झटका</title>
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        <description><![CDATA[ ये तो सभी जानते हैं कि जब दो देशों के बीच व्यापार बंद होता है तो इसका असर केवल सरकारों तक ही नहीं, बल्कि वहां के आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक को उठाना पड़ता है. वहीं सामान महंगा होने और दूसरे देशों से आयात करने तक का खर्च बढ़ जाता है. अब ऐसा ही कुछ भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ हुआ है.&amp;nbsp;
दरअसल, भारत के साथ व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान का भारी आर्थिक नुकसान होने का दावा सामने आया है. बड़ी बात ये है कि अब पाकिस्तान के कारोबारी भारत के साथ फिर से व्यापार शुरू करने की मांग कर रहे हैं.
पाकिस्तान का कितना हुआ नुकसान?
बता दें कि भारत के साथ व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान को लगभग 40 अरब डॉलर यानी 3.78 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर पाकिस्तान का भारत के साथ व्यापार क्यों बंद हुआ और कब से दोनों देशों के बीच व्यापार बंद है और अब वहां के व्यापारी फिर से दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू करने की मांग क्यों कर रहे हैं आखिर इसके पीछे क्या कारण है?
कब से भारत के साथ बंद है व्यापार?
सबसे पहले तो ये जानते हैं कि आखिर दोनों देशों के बीच कब से व्यापार बंद है और क्यों बंद किया गया है तो PIBC अध्यक्ष मोहम्मद कसूरी का कहना है कि साल 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत के साथ व्यापार बंद होने से पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.&amp;nbsp;
दूसरे देशों से सामान मंगाना पड़ा महंगा
इसके बाद जब भारत से सामान नहीं मिलने पर पाकिस्तान को दूसरे कदम उठाने पड़े. पाकिस्तान को दूसरे देशों से चीजें मंगानी पड़ी, अब जब चीजें दूसरे देशों से मंगवाई गई तो इसकी वजह से ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ गया. इतना ही नहीं, बल्कि डिलीवरी में भी काफी समय लगने लगा.
कपड़ा उद्योग में बढ़ा बोझ
बड़ी बात तो ये है कि पाकिस्तान को सबसे ज्यादा मार तो उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ी है. यानी मतलब साफ है कि इन्हीं सब कारणों की वजह से वहां के कारोबारी दोनों देश के बीच व्यापार फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं.&amp;nbsp;
कच्चा माल खरीदने पर हो सकती थी बचत
मोहम्मद कसूरी ने कहना है कि अगर भारत से पाकिस्तान कच्चा माल खरीदता तो इसकी वजह से वहां की दवा कंपनियों को काफी बचत हो सकती थी. इतना ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान को भारत से कई अन्य चीजें खरीदने पर भी काफी फायदा हो सकता था.मोहम्मद कसूरी का कहना है कि पाकिस्तान अगर सीमेंट, चीनी जैसी चीजें भारत से खरीदेगा तो उसे सस्ता पड़ सकता है.
Axis Bank ने बदले नियम, 1 दिसंबर से कैश जमा और निकालने पर लगाई लिमिट
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>सोने पर हॉलमार्क फीस 67% बढ़ी, धनतेरस पर महंगी हुई ज्वेलरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोने-पर-हॉलमार्क-फीस-67-बढ़ी-धनतेरस-पर-महंगी-हुई-ज्वेलरी</link>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस का त्यौहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है. यानी इस साल ये त्यौहार 6 नवंबर को मनाया जाने वाला है. इस खास मौके पर सोना- चांदी खरीदना काफी शुभ माना जाता है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोग सोना और चांदी खरीदते हैं. लेकिन हाल ही में धनतेरस से महज तीन दिन पहले ही सोने के गहनों के दाम बढ़ गए हैं.
ऐसा इसलिए क्योंकि सोना खरीदने के वक्त बिल में जुड़ने वाले एक मुख्य चार्ज को हाल ही में 67% बढ़ा दिया गया है. ये मुख्य चार्ज है सोने का हॉलमार्किंग चार्ज, जिसे 67% तक बढ़ा दिया गया है.
कौन-कौन सी श्रेणियां हैं शामिल?सोा खरीदते समय हॉलमार्किंग का तो सबसे ज्यादा ख्याल रखा जाता है. ऐसे में हॉलमार्किंग शुल्क बढ़ने से सोने के गहनों की कीमत भी अचानक से बढ़ गई है. इस हॉलमार्किंग योजना में सोने की ज्वेलरी और कलाकृतियों के लिए सोने की सात कैरट श्रेणियां शामिल हैं, जिसमें 9 कैरेट, 14 कैरेट, 18 कैरेट, 20 कैरेट, 22 कैरेट, 23 कैरेट और 24 कैरेट है.
कितनी बढ़ेगी गोल्ड ज्वेलरी की कीमत?इस नई बढ़ोतरी के बाद अब ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त परख एवं हॉलमार्किंग केंद्र को हर सोने की चीज पर 75 रुपये का भुगतान करना होगा. पहले ये फीस 45 रुपये थी, यानी कीमत में लगभग 67% की वृद्धि हुई है. ध्यान दें कि आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रति खेप मिनिमम 200 रुपये का शुल्क लागू होगा.
जरूरी है सोने की हॉलमार्किंगसितंबर 2026 में, त्यौहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने और चांदी के सामानों पर लागू होने वाले हॉलमार्किंग शुल्क में संशोधन किया था. सोने के आभूषणों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए जून 2021 में सोने की हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया गया था.
हालांकि आपको हमेशा हॉलमार्क वाले सोने के गहने ही खरीदने चाहिए, लेकिन ध्यान रखें कि हाल ही में कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण, इस धनतेरस पर आपको हॉलमार्किंग के लिए ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है. सोने की हॉलमार्किंग फीस में बदलाव की जानकारी &#039;BIS (हॉलमार्किंग) संशोधन नियम, 2026&#039; के जरिए दी गई थी, और ये नियम 14 सितंबर, 2026 से लागू हो गए हैं.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RSS की मजदूर यूनियन की बैठक, सरकार से 7500 पेंशन और 30 हजार EPF की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ देश के कर्मचारियों और मजदूरों के लिए कई अहम मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) 27 और 28 नवंबर को गुजरात के वडोदरा में बैठक करने जा रहा है. इस बैठक में कर्मचारियों की पेंशन, भविष्य निधि (EPF), महंगाई भत्ता, बोनस और बीमा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
BMS का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को जल्द पूरा करना चाहिए. बैठक में गिग वर्कर्स यानी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले लोगों की समस्याओं पर भी चर्चा होगी.
क्या हैं BMS की मांग?भारतीय मजदूर संघ इस बैठक में कई मांगे रखने वाला है. लेकिन सबसे बड़ी मांग संघ की ये है कि कर्मचारियों की मिनिमम पेंशन बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह कर देना चाहिए और EPF में शामिल होने के लिए वेतन की सीमा 30,000 रुपये होना चाहिए.
ये भी रखी जाएंगी मांगेइस बैठक में भारतीय मजदूर संघ प्रमुख रूप से ये छह मांगे रखने वाला है. जो इस प्रकार हैं:

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत मिलने वाली मिनिमम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह किया जाए.
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में अनिवार्य रूप से शामिल होने की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह की जाए.
कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) के तहत वेतन सीमा को 21,000 रुपये से बढ़ाकर 42,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की गई है.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम कर रहे गिग वर्कर्स जैसे डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को बीमा और सुविधाएं दी जाएं.

बोनस और ग्रेच्युइटी में भी हो बदलावइतना ही नहीं बल्कि BMS चाहता है कि कर्मचारियों के बोनस और ग्रेच्युटी में भी बदलाव होना चाहिए. संघ की मांग है कि बोनस की गणना कर्मचारियों के पूरे वेतन के आधार पर की जाना चाहिए. गणना के लिए मौजूदा 7,000 रुपये की सीमा बढ़ाई जाना चाहिए.
तो वहीं ग्रेच्युटी की गणना 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन के वेतन के आधार पर की जाना चाहिए और इस पर लगाई गई अधिकतम सीमा हटाई जाए. इन बदलावों से कर्मचारियों को नौकरी के दौरान और रिटायरमेंट के समय ज्यादा आर्थिक लाभ मिल सकता है.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>महंगी ही रहेगी चीनी, जल्दी पेराई के बावजूद उत्पादन में भारी गिरावट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महंगी-ही-रहेगी-चीनी-जल्दी-पेराई-के-बावजूद-उत्पादन-में-भारी-गिरावट</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में त्यौहारों के सीजन की शुरुआत के साथ ही चीनी के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली. सरकार ने तमाम कोशिशें कीं जिससे चीनी के दामों को कंट्रोल किया जाए. इसके लिए गन्ने की पेराई भी जल्दी शुरू कर दी गई. अक्टूबर के आखिर तक देश की 152 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी थी. इन मिलों ने अक्टूबर महीने में करीब 8.5 लाख टन चीनी का उत्पादन किया.
हालांकि, इस बार गन्ने से चीनी बनने की औसत दर में गिरावट दर्ज की गई है. इससे आने वाले महीनों में चीनी के कुल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ सकती है.
पिछले साल से कम बनी चीनीराष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ (NFCSF) के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में गन्ने से चीनी बनने की औसत दर 8.01% रही है. पिछले साल इसी समय ये दर 8.44% थी. सरकार ने त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए चीनी मिलों से जल्दी पेराई शुरू करने को कहा था.&amp;nbsp;
वैसे तो महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई 15 नवंबर के आसपास शुरू होती है, लेकिन इस बार वहां अक्टूबर में ही बड़ी संख्या में मिलों ने काम शुरू कर दिया. इसका मकसद नई फसल से बनी चीनी को जल्द बाजार में पहुंचाना है, ताकि त्योहारों के दौरान चीनी की कमी न हो.&amp;nbsp;
पिछले साल कितना हुआ था चीनी का उत्पादन?भारत में 2025-26 के पूरे चीनी सीजन में करीब 2.8 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था. इस बार अक्टूबर में पेराई जल्दी शुरू होने से बाजार में नई चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी. हालांकि, शुरुआती रिकवरी रेट में गिरावट के कारण पूरे सीजन के उत्पादन पर नजर रखना जरूरी होगा.
गन्ने से चीनी बनना है जरूरबता दें कि गन्ने से चीनी बनने की दर को रिकवरी रेट कहा जाता है. पिछले सीजन में औसत रिकवरी रेट 8.44% थी. इस सीजन में ये घटकर 8.01% रह गई है. यानी इस बार 100 किलो गन्ने से औसतन करीब 8 किलो चीनी निकल रही है. रिकवरी रेट में गिरावट का मतलब है कि उतनी ही मात्रा में गन्ने से पहले के मुकाबले कम चीनी बन रही है. अगर ये गिरावट आगे भी जारी रहती है, तो देश के कुल चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>धनतेरस से 3 दिन पहले महंगा हुआ सोना, चांदी 2 लाख के नीचे, जानें आज का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धनतेरस-से-3-दिन-पहले-महंगा-हुआ-सोना-चांदी-2-लाख-के-नीचे-जानें-आज-का-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ दिवाली से पहले अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो आज के भाव जानना आपके लिए जरूरी है. अक्टूबर में बड़ी गिरावट देखने के बाद सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी आई है. आज यानी मंगलवार, 3 नवंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 500 रुपए बढ़ गया है. वहीं, 22 कैरेट सोना भी 460 रुपए महंगा हो गया है. दूसरी ओर चांदी की कीमत में मामूली नरमी देखने को मिली है.
त्योहारों के मौसम में सोने-चांदी की खरीदारी बढ़ने से बाजार में इनकी कीमतों पर असर पड़ रहा है. हालांकि, अक्टूबर में आई बड़ी गिरावट के बाद अभी भी सोने और चांदी भाव में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. यहां से आप सोना और चांदी का आज का ताजा भाव जान सकते हैं.&amp;nbsp;
आज सोने का भाव कितना है?दिल्ली में मंगलवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 500 रुपए बढ़कर 1,39,520 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. एक दिन पहले यानी सोमवार को इसका भाव 1,39,020 रुपए था.
इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत में 460 रुपए की बढ़ोतरी हुई है. अब इसका भाव 1,27,900 रुपए प्रति 10 ग्राम है. बता दें कि 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध होता है जबकि 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल गहने बनाने में किया जाता है.&amp;nbsp;
आज चांदी कितनी महंगी या सस्ती हुई?सोने के उलट चांदी की कीमत में मंगलवार को हल्की गिरावट आई है. आज चांदी का भाव 100 रुपए घटकर 1,99,900 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया है. सोमवार को एक किलो चांदी की कीमत 2 लाख रुपए थी.



चांदी का वजन
चांदी का रेट


1 ग्राम
199.90 रुपए


10 ग्राम
1999 रुपए


100 ग्राम&amp;nbsp;
19990 रुपए


1 किलोग्राम
1,99,900 रुपए



अक्टूबर में क्या था रेट?&amp;nbsp;अक्टूबर का महीना सोने और चांदी के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. आखिरी दिनों में तो सोना- चांदी, दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली थी. 24 कैरेट सोना 30 अक्टूबर को 1,44,090 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो फिर 2 नवंबर को घटकर 1,39,020 रुपए पर आ गया. इसके बाद 3 नवंबर को इसमें 500 रुपए की तेजी आई है.
चांदी भी अक्टूबर के आखिरी दिनों में लगातार गिरता रहा. 28 अक्टूबर को दिल्ली में चांदी का भाव करीब 2.20 लाख रुपए प्रति किलो था, जो 2 नवंबर तक घटकर 2 लाख रुपए पर आ गया. आज, मंगलवार को इसमें 100 रुपए की और कमी आई.
कीमत में क्यों हो रहा है उतार-चढ़ाव?सोने और चांदी की कीमतें सिर्फ भारत में होने वाली खरीदारी से तय नहीं होतीं है.&amp;nbsp;अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, कच्चे तेल के भाव और निवेशकों की खरीद-बिक्री का भी असर पड़ता है.
फिर दिवाली और धनतेरस जैसे त्योहारों पर गहने की खरीदारी बढ़ जाती है. इससे घरेलू बाजार में सोने की मांग बढ़ी जाती है. वहीं, रुपए में कमजोरी आने पर विदेश से सोना खरीदना महंगा पड़ता है, जिसका असर भारतीय बाजार की कीमतों पर भी दिख सकता है.
इंश्योरेंस सेक्टर में हलचल, IRDAI ने फीस को लेकर बदले सभी नियम ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दीवाली से पहले जा सकती है नौकरी, इस कंपनी ने बना लिया छंटनी का प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ मीडिया इंडस्ट्री की बड़ी कंपनी वॉल्ट डिज्नी (Walt Disney Co.) एक और बड़े दौर की छंटनी की तैयारी में जुटी है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि कंपनी ने अपने मैनेजर्स को सालाना खर्च में 20% कटौती करने का टारगेट दिया है.
ऐसे में ऑपरेटिंग कॉस्ट में बचत करने के लिए कई तरीके अपनाएं जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में नौकरियों में कटौती भी शामिल रहेगी. ब्लूमबर्ग ने बताया है कि इस कटौती का असर डिज्नी के अलग-अलग कारोबारों पर पड़ेगा, &amp;nbsp;जिनमें थीम पार्क, टेलीविजन नेटवर्क और फिल्म स्टूडियो शामिल होंगे.
कंपनी की तगड़ी है प्लानिंग
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी सीईओ जोश डी&#039;अमारो (Josh D&#039;Amaro) का लक्ष्य इस 20% की बचत से मिलने वाले फंड को फिल्म, टेलीविजन प्रोग्रामिंग, मुख्य टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर, थीम पार्क व क्रूज शिप डिवीजन में निवेश करना है ताकि उपभोक्ताओं के अनुभव को और बेहतर बनाया जा सके. दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में Netflix जैसे दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से बढ़ते मुकाबले के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डिज्नी के थीम पार्क में विजिटर्स की संख्या में कमी आई है.&amp;nbsp;
पहले भी हुई है छंटनी
हाल के वर्षों में, कंपनी ने अपने खर्चों में अरबों डॉलर की कटौती की है और ABC, पिक्सर (Pixar), ESPN, अपने फिल्म स्टूडियो और &#039;एक्सपीरियंस यूनिट&#039; सहित कई प्रमुख विभागों में हजारों पदों को खत्म कर दिया है.&amp;nbsp;पिछले कारोबारी साल के अंत तक डिज्नी के पास दुनिया भर में लगभग 2,31,000 कर्मचारी थे.
इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की संख्या के साथ डिज्नी दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है. यही वजह है कि कंपनी अपने खर्चों में 20% की कटौती करने का सोच रही है. सीईओ बॉब आइगर और एक्सपीरियंस डिवीजन के प्रमुख जोश डी&#039;अमारो का कहना है कि इससे जो भी पैसा बचेगा, उसका इस्तेमाल कंपनी भविष्य की तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने में करेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Diwali 2026: दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में कहां मिलते हैं सबसे सस्ते पटाखे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/diwali-2026-दिल्ली-नोएडा-और-गाजियाबाद-में-कहां-मिलते-हैं-सबसे-सस्ते-पटाखे</link>
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        <description><![CDATA[ दीवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है. घरों की सजावट से लेकर मिठाइयों और पटाखों की खरीदारी तक, लोग त्योहार की तैयारियों में जुट गए हैं. खासतौर पर पटाखे खरीदने वाले लोग ऐसे बाजारों की तलाश कर रहे हैं, जहां कम बजट में अच्छी वैरायटी मिल सके.
इस बार दिल्ली-NCR में पटाखों की खरीदारी करते समय सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय पर केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है.
गाजियाबाद में यहां लगेंगे पटाखों के बाजार
गाजियाबाद में इस साल ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए अस्थायी बाजार निर्धारित किए गए हैं. यहां 5 से 7 नवंबर तक लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर खरीदारी की जा सकेगी. प्रमुख स्थानों में घंटाघर रामलीला मैदान, कविनगर, विजय नगर सेक्टर-9 और इंदिरापुरम का अटल चौक शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांस हिंडन और ग्रामीण क्षेत्रों में भी निर्धारित स्थानों पर दुकानें लगाई जाएंगी. ऐसे में गाजियाबाद के लोगों को अलग-अलग दुकानों पर जाकर कीमतों और पैकेट में मिलने वाली मात्रा की तुलना करने का मौका मिलेगा.
दिल्ली में सस्ते पटाखों के लिए इन बाजारों की चर्चा
दिल्ली में पटाखों की खरीदारी के लिए सदर बाजार, जामा मस्जिद, चांदनी चौक और शक्ति नगर जैसे बाजारों की पहचान रही है. खासतौर पर सदर बाजार में अलग-अलग बजट के विकल्प मिलते हैं. सदर बाजार में 10 रॉकेट का बॉक्स करीब 350 रुपये, चार पैक स्पिनर्स 800 रुपये और दो पैक फाउंटेन बम 450 रुपये में खरीदे गए. वहीं, 15 बॉक्स का एक साथ खरीदा गया सामान करीब 3 हजार रुपये का था. हालांकि, ये बाजार में दर्ज कीमतें हैं, इन्हें अधिकृत ग्रीन पटाखों की तय दर नहीं माना जा सकता.
नोएडा में कहां कर सकते हैं पटाखों की तलाश?
नोएडा में सेक्टर-110 का श्रमिक कुंज और शरमिक कुंज के आसपास का इलाका पटाखों की दुकानों के लिए जाना जाता है. यहां कई स्थानीय विक्रेता और सप्लायर मौजूद हैं. हालांकि, 1 नवंबर की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा प्रशासन ने उस समय तक ग्रीन पटाखों की अस्थायी दुकानों के स्थानों को अंतिम रूप नहीं दिया था. इसलिए यहां किसी दुकान को अधिकृत बिक्री केंद्र मानने से पहले पुलिस या जिला प्रशासन से पुष्टि करना जरूरी है.
खरीदारी से पहले कीमत और नियम दोनों जांचें
पटाखों की कीमत उनके प्रकार, पैकिंग और संख्या के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. खरीदार पैकेट पर लिखी कीमत और मात्रा की तुलना करें. साथ ही CSIR-NEERI की प्रमाणिकता, जरूरी QR कोड और PESO से जुड़ी जानकारी जरूर जांचें. सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के अनुसार, दिल्ली-NCR में केवल निर्धारित स्थानों पर 4 से 6 नवंबर तक अधिकृत विक्रेता ग्रीन पटाखे बेच सकेंगे. 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही इन्हें जलाने की अनुमति है. 9 नवंबर से प्रतिबंध फिर लागू होगा. दिल्ली के बाजारों में दिखाई देने वाला सस्ता पटाखा जरूरी नहीं कि प्रमाणित ग्रीन पटाखा भी हो. इसलिए कम कीमत के चक्कर में अवैध या बिना प्रमाणित सामान खरीदने से बचें.
यह भी पढ़ें- 10, 20 और 50 रुपए के नोट नहीं मिलेंगे, हुई किल्लत? RBI ने क्या बताया
यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दमदार है ये शेयर, एक्सपर्ट्स का भरोसा&amp; 1800 के ऊपर जाएगा भाव</title>
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        <description><![CDATA[ रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयर आने वाले समय में कमाल करने वाले हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि कई बड़े दिग्गजों को इस बात पर भरोसा है. सितंबर तिमाही में कंपनी को अपने ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस से हुई तगड़ी कमाई और रिलायंस जियो (Jio) के मौजूदा व निरंतर ग्रोथ को देखते हुए &amp;nbsp;रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों को कई एक्सपर्ट्स से &#039;बुलिश&#039; रेटिंग मिली है.&amp;nbsp;
कंपनी के शेयरों को गोल्डमैन सैक्स ने प्रति शेयर 1,840 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो शुक्रवार को इसके क्लोजिंग प्राइस से 58% अधिक है. वहीं, नोमुरा ने प्रति शेयर 1,560 रुपये का टारगेट दिया है. इसी तरह से जेफरीज ने भी इस पर अपनी &#039;Buy&#039; रेटिंग को दोहराते हुए 1,625 रुपये का टारगेट दिया है. Emkay Global ने भी हालिया वित्तीय नतीजों के बाद शेयरों के लिए 1,550 रुपये का टारगेट प्राइस सेट किया है.&amp;nbsp;
तिमाही नतीजे ने निवेशकों को किया खुश
कारोबारी साल 2026-27 की दूसरी तिमाही में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने और रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत होने से रिलायंस के तेल कारोबार का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 68% उछलकर 25,203 करोड़ रुपये हो गया है. इस तिमाही में हुए ग्रोथ का 85% योगदान कंपनी के इस ऑयल सेक्टर को जाता है. मतलब यह है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस तिमाही में जितना भी मुनाफा कमाया है उसका 85% हिस्सा अकेले उसके तेल और केमिकल (O2C) वाले कारोबार से आया है.
दूसरी तरफ कंपनी ने हाल ही में मोबइल टैरिफ दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट प्रॉफिट भी 13.7% बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये हो गया है. बहरहाल, इस दौरान रिलायंस का रिटेल बिजनेस कुछ दबाव में रहा. दरअसल, महंगाई और क्विक-कॉमर्स में भारी निवेश के चलते (EBITDA) में लगभग 3% से 11% की गिरावट देखी गई है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
गोल्डमैन ने क्यों दिया 1840 का टारगेट?
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, रिलायंस का Q2 EBITDA उनके अनुमानों से 9 प्रतिशत अधिक रहा, जिसका मुख्य कारण O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स) सेगमेंट का मजबूत प्रदर्शन था। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का मानना ​​है कि तीसरी तिमाही में रिफाइनिंग मार्जिन में कुछ कमी आ सकती है, क्योंकि बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) के माल ढुलाई खर्च (फ्रेट कॉस्ट) बढ़ गए हैं। हालांकि, रियायती दरों पर मिलने वाले &#039;हैवी क्रूड&#039; की प्रोसेसिंग से इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है.
ब्रोकरेज ने बताया कि रिलायंस रिटेल का EBITDA साल-दर-साल 11% गिरा है. वहीं, रेवेन्यू ग्रोथ पिछले तिमाही के 11% से घटकर 6.4% रह गई है, जिसका कारण त्योहारी मांग का समय और जियोमार्ट (JioMart) में किया गया निवेश है. रिटेल EBITDA मार्जिन में साल-दर-साल 140 बेसिस पॉइंट्स की कमी आई है. हालांकि, गोल्डमैन को कंपनी के नए एनर्जी बिजनेस पर पूरा भरोसा है. इसी क्रम में कच्छ-जामनगर रिन्यूएबल एनर्जी पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को 2027 की पहली तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, वित्त वर्ष 2028 (FY28) से रिन्यूएबल एनर्जी और चौबीसों घंटे चलने वाले पावर ऑपरेशंस से कमाई मिलने की उम्मीद है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>संसदीय पैनल ने पूछा&amp; फ्लाइट टिकट महंगे क्यों? एयरलाइंस बोलीं&amp; पाकिस्तान जिम्मेदार</title>
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        <description><![CDATA[ संसदीय समिति ने बीते सोमवार को इंडिगो और एयर इंडिया के सीनियर ऑफिसर्स के साथ बैठक की और इस दौरान हवाई किराए में बेतहाशा हो रही बढ़ोतरी पर चिंता भी जताई.
भाजपा सदस्य बैजयंत पांडा की अध्यक्षता में संसद की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति ने एयरलाइन के इस बढ़ते किराए को लेकर कंपनियों से जवाब तलब किया है. इससे एक दिन पहले समिति ने ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी&#039; (BCAS) और &#039;एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो&#039; (AAIB) के अधिकारियों के साथ भी बैठक की थी.&amp;nbsp;
बढ़ते हवाई किराए पर कंपनियों ने क्या दिया तर्क?
एयरलाइंस ने समिति को बताया कि हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान में तनाव और होर्मुज (Strait of Hormuz) से एनर्जी सप्लाई में आ रही रुकावटों को देखते हुए ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं. इसका सीधा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी पड़ा है. चूंकि, किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% से 45% हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है इसलिए ईंधन महंगा होने से उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई और चारा नहीं है.
पाकिस्तान भी है जिम्मेदार
हवाई किराए में बढ़ते इजाफे लिए पाकिस्तान को भी जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसने अपना एयरस्पेस भारत के लिए बंद कर रखा है. अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया. इसके चलते पाकिस्तान ने 23 अप्रैल 2025 को भारतीय एयरलाइंस और भारत में पंजीकृत सभी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया था. जवाब में भारत ने भी 30 अप्रैल 2025 को पाकिस्तानी विमानों पर अपने हवाई क्षेत्र में रोक लगा दी थी.
अभी हाल ही में पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) ने एक नया नोटम (NOTAM) जारी करके भारतीय विमानों पर लगे इस हवाई प्रतिबंध को 24 नवंबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है. यह रोक पिछले डेढ़ साल से हर महीने लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. पाकिस्तान के उठाए गए इस कदम के कारण भारत से यूरोप, खाड़ी देशों और पश्चिम की ओर जाने वाली सभी उड़ानों को अब पहले के मुकाबले लंबा सफर तय करना पड़ रहा है. रूट बदलने की वजह से फ्लाइट की टाइमिंग भी 1 से 2 घंटे के बीच बढ़ गई है. इससे विमानों में ईंधन की खपत बहुत ज्यादा बढ़ गई है. साथ ही एयरलाइंस को क्रू और दूसरी सुविधाओं पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, जिसका सीधा बोझ यात्रियों की जेब पर डाला जा रहा है.

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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>पहली बार UPI से बुक होगा दुबई में बुर्ज खलीफा का टिकट, यहां जानें तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप आने वाले समय में विदेश घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं? अगर आप दुबई या सिंगापुर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल अब दुबई और सिंगापुर में भी भारतीय पेमेंट मोड UPI के जरिए आप पेमेंट कर सकते हैं. यदि आप दुबई जा रहे हैं तो यहां पर आप UPI की मदद बुर्ज खलीफा का टिकट बुक कर सकते हैं. तो वहीं सिंगापुर के यूनिवर्सल स्टूडियो का टिकट भी बुक किया जा सकता है.
खास बात ये है कि यहां जाने के बाद अब भारतीयों को विदेशी कार्ड या दूसरे अंतरराष्ट्रीय पेमेंट ऑप्शंस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को इस नई सुविधा की जानकारी दी है. इसका उद्देश्य विदेश यात्रा के दौरान भारतीय पर्यटकों के लिए टिकट बुक करना और भुगतान करना आसान बनाना है.
किन जगहों पर चलेगा UPI?इस नई सुविधा के तहत फिलहाल दुबई और सिंगापुर के मुख्य पर्यटन वाली जगहों पर UPI से ऑनलाइन पेमेंट किया जा सकेगा. इस लिस्ट में दुबई का बुर्ज खलीफा, सिंगापुर का यूनिवर्सल स्टूडियो और ओशनेरियम और एडवेंचर कोव वॉटरपार्क का नाम शामिल है. यदि आप इनमें से किसी भी जगह जाते हैं तो आप पेमेंट के लिए भारतीय यूपीआई का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कैसे बुक करें बुर्ज खलीफा का टिकट बुक?अगर आप दुबई घूमने जा रहे हैं तो इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके टिकट बुक कर सकते हैं.

सबसे पहले बुर्ज खलीफा की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.
यहां पर अपनी पसंद का टिकट पैकेज सिल्वर, गोल्ड या प्लेटिनम को चुनें.
इसके बाद &#039;बुक नाओ&#039; पर क्लिक करेंगे तो घूमने की तारीख और समय चुनने का ऑप्शन मिलेगा.
इसमें सारी जानकारी भरें और &#039;एड टू कार्ट&#039; पर क्लिक करें.
इसके बाद चेकआउट करने पर पेमेंट का ऑप्शन आ जाएगा, इसमें UPI को चुनकर भुगतान करें.

भारतीय पर्यटकों को क्या होगा फायदा?बता दें कि इस नई सुविधा से विदेश जाने वाले भारतीयों को काफी सहूलियत मिलेगी. अब उन्हें टिकट खरीदने के लिए हर बार अंतरराष्ट्रीय डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं होगी. वो अपने नॉर्मल UPI एप से ही भुगतान कर सकेंगे. इससे टिकट बुकिंग की प्रक्रिया आसान होगी और विदेशी पर्यटन स्थलों पर भारतीय डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी बढ़ेगा.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>तमिलनाडु के हाथ से फिसला 1614 करोड़ का निवेश, जानें किस राज्य की लगी लॉटरी</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में निवेश को लेकर विदेशों में कई राज्यों को लेकर चर्चा बनी रहती है. हाल फिलहाल में साउथ में निवेश को लेकर दो राज्य काफी चर्चा में है. पहला है आंध्र प्रदेश और दूसरा है तमिलनाडु, इन दोनों राज्यों के बीच तगड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. इस मुकाबले में आंध्र प्रदेश ने बड़ी सफलता हासिल की है और तमिलनाडु को पछाड़ दिया है. दक्षिण कोरिया की तीन कंपनियों ने तमिलनाडु के बजाय आंध्र प्रदेश में 1,614 करोड़ रुपये का निवेश करने का फैसला किया है.
ये तीनों कंपनियां दुनिया की प्रमुख कार निर्माता कंपनियों हुंडई और किया को गाड़ियों के पुर्जे सप्लाई करती हैं. इन कंपनियों ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ डील की है. जिसके तहत राज्य के अनंतपुर जिले में नई मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्रियां लगाई जाएंगी.
ये कंपनियां करेंगी निवेशइन तीनों कंपनियों ने अलग-अलग रकम निवेश करने का वादा किया है. यहां देखें इन कंपनियों की लिस्ट और ये कितना करेंगी निवेश:



कंपनी का नाम
निवेश
संभावित रोजगार


Hwashin
850 करोड़ रुपये
100


Seoyon
514 करोड़ रुपये
918


Iwamet
250 करोड़ रुपये
400


कुल
1,614 करोड़ रुपये
1,418



इन तीनों कंपनियों के निवेश से अनंतपुर में ऑटोमोबाइल के पुर्जे बनाने वाली नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी.
आंध्र प्रदेश को क्यों चुना?तमिलनाडु पहले से ही ऑटोमोबाइल कंपनियों का बड़ा केंद्र है. वहां हुंडई समेत कई बड़ी कंपनियों के प्लांट मौजूद हैं. तमिलनाडु सरकार भी इन तीनों दक्षिण कोरियाई कंपनियों को अपने यहां निवेश के लिए बुला रही थी. इन कंपनियों की तमिलनाडु में कारोबार बढ़ाने को लेकर बातचीत भी हुई थी. लेकिन आंध्र प्रदेश सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए.
आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने जुलाई 2026 में दक्षिण कोरिया का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने हुंडई और किया से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और उन्हें आंध्र प्रदेश में फैक्ट्री लगाने के लिए आमंत्रित किया. इसके बाद राज्य के इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड ने कंपनियों के साथ लगातार बातचीत की. आखिरकार तीनों कंपनियों ने आंध्र प्रदेश में निवेश करने का फैसला किया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>फ्लाइट के महंगे किराए पर सरकार का कंट्रोल नहीं, लेकिन 1 जनवरी से देना होगा पूरा हिसाब</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप फ्लाइट से सफर करते हैं तो 1 जनवरी 2027 से टिकट बुक करने का तरीका थोड़ा बदलने वाला है. अब एयरलाइंस को टिकट की कीमत का पूरा ब्योरा यात्रियों के सामने रखना होगा. यानी टिकट का बेस फेयर कितना है टैक्स कितना है और दूसरी फीस कितनी लग रही है, यह सब साफ-साफ दिखाई देगा.
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है. क्या इससे हवाई टिकट सस्ते हो जाएंगे? इसका जवाब है- जरूरी नहीं. क्योंकि नए नियमों में सरकार ने हवाई किराए की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है यानी एयरलाइंस पहले की तरह अपनी मर्जी से किराया तय कर सकेंगी.
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नए नियम क्या हैं और इनका यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा.
1. अब टिकट की कीमत का पूरा हिसाब मिलेगाअक्सर फ्लाइट टिकट बुक करते समय शुरुआत में किराया कुछ और दिखाई देता है लेकिन पेमेंट करने तक उसमें कई तरह के चार्ज जुड़ जाते हैं ! नए नियमों &amp;nbsp;के तहत एयरलाइंस को टिकट की कीमत का पूरा ब्रेकअप देना होगा.
इसमें शामिल होंगे:

बेस फेयर यानी टिकट का मूल किराया
सरकारी टैक्स और दूसरे शुल्क
एयरलाइन की तरफ से लगाए गए चार्ज
टिकट कैंसिल कराने पर लगने वाला शुल्क
रिफंड मिलने की शर्तें.

इसका मतलब है कि यात्री को टिकट बुक करने से पहले ही पता चल सकेगा कि वह किस चीज के लिए कितना पैसा दे रहा है.
2. क्या अब हवाई टिकट महंगे नहीं होंगे?यहां सबसे जरूरी बात समझने वाली है.सरकार ने टिकट की कीमत दिखाने के नियम तो सख्त किए हैं, लेकिन किराए पर कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की है यानी एयरलाइंस को यह आजादी बनी रहेगी कि वे अपनी मांग, उपलब्ध सीटों और दूसरे कारोबारी पहलुओं के हिसाब से किराया तय करें.
उदाहरण के लिए अगर किसी त्योहार या छुट्टी के दौरान दिल्ली से मुंबई जाने वाली फ्लाइट की मांग अचानक बढ़ जाती है, तो एयरलाइन टिकट का किराया बढ़ा सकती है. इसलिए नए नियमों से पारदर्शिता तो बढ़ेगी लेकिन टिकट सस्ते होने की गारंटी नहीं मिलेगी.
3. DGCA की भूमिका में क्या बदलाव होगा?DGCA यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन देश में विमानन क्षेत्र का नियामक है ! नए नियमों में एयरलाइंस को अपने किराए की जानकारी DGCA को देनी होगी. साथ ही किराए की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक भी करनी होगी लेकिन यहां एक अहम बदलाव है. नए नियमों में DGCA के पास अत्यधिक या मनमाने किराए पर सीधे कार्रवाई करने का स्पष्ट प्रावधान हटा दिया गया है यानी किराए पर निगरानी तो होगी लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि DGCA हर बार बढ़े हुए किराए को रोक सकेगा.
4. क्या सरकार कभी किराए पर रोक लगा सकती है?हां विशेष परिस्थितियों में सरकार के पास हस्तक्षेप करने का अधिकार रहेगा.अगर कोई असाधारण स्थिति पैदा होती है और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी होता है तो केंद्र सरकार एयरलाइंस को जरूरी निर्देश दे सकती है.
इसकी अहमियत दिसंबर 2025 में इंडिगो के बड़े ऑपरेशनल संकट के दौरान देखने को मिली थी. उस समय बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने के बाद सरकार ने कुछ रूट पर हवाई किराए की सीमा तय की थी. नए नियमों में भी असाधारण परिस्थितियों में सरकार के हस्तक्षेप का रास्ता खुला रखा गया है.
5. आखिर यात्रियों को क्या फायदा होगा?नए नियमों से यात्रियों को तीन बड़े फायदे हो सकते हैं.

पहला: टिकट बुक करते समय हर चार्ज की जानकारी मिलेगी.
दूसरा: कैंसिलेशन और रिफंड की शर्तें पहले से स्पष्ट होंगी.
तीसरा: अलग-अलग एयरलाइंस के टिकटों की कीमत की तुलना करना आसान होगा लेकिन दूसरी तरफ, त्योहारों, छुट्टियों और ज्यादा मांग वाले दिनों में टिकट महंगे होने की समस्या बनी रह सकती है यानी नए नियमों का मकसद हवाई टिकट सस्ता करना नहीं बल्कि टिकट की कीमत में पारदर्शिता लाना है.

यात्री को अब यह तो पता चलेगा कि उससे कितना और किस बात का पैसा लिया जा रहा है लेकिन यह जरूरी नहीं कि उसे पहले से सस्ती टिकट भी मिले.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली के व्यापारियों की सरकार से नई मांग, धरना प्रदर्शनों की जगह पर बड़ा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के बीचों-बीच लगातार हो रहे धरने-प्रदर्शनों और रैलियों से व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही है. इसकी वजह से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम होने का दावा भी व्यापारी कर रहे हैं और दुकानदार कारोबार प्रभावित होने की बात भी कह रहें हैं.
इस समस्या को देखते हुए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार से नई मांग की है. व्यापारियों ने कहा है कि दिल्ली में धरने-प्रदर्शनों के लिए अलग से जगह तय की जाए. ये जगहें दिल्ली के बाहरी इलाकों में होनी चाहिए, ताकि विरोध-प्रदर्शन भी हो सकें और बाजारों का कामकाज भी प्रभावित न हो.
आज से ऑनलाइन याचिका शुरू
इस मांग को लेकर दिल्ली के कई व्यापारिक संगठनों ने आज से ऑनलाइन याचिका शुरू की है. इसके अलावा कैट ने 26 अक्टूबर को दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की ऑनलाइन बैठक बुलाई है. इस बैठक में अलग-अलग बाजारों के व्यापारी नेता शामिल होंगे और समस्या के समाधान के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
कैट के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विपिन आहूजा समेत संगठन से जुड़े अन्य व्यापारियों ने एबीपी न्यूज़ को जानकारी दी है कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों से बाजारों में ग्राहकों का आना-जाना, सामान की ढुलाई और यातायात प्रभावित होता है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और रोजाना मजदूरी करने वाले लोगों को होता है. इन लोगों की कमाई रोज के काम पर निर्भर करती है. बाजार बंद रहने या रास्ते प्रभावित होने से उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ता है.
कारोबार से जुड़े हैं लाखों लोग- कैट
व्यापारी नेताओं का कहना है कि दिल्ली देश के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक है. यहां थोक और खुदरा बाजारों के साथ सामान की ढुलाई, ट्रांसपोर्ट और दूसरे कारोबार से लाखों लोग जुड़े हैं. दिल्ली का व्यापार केवल यहां तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी सामान की सप्लाई दिल्ली के बाजारों से होती है. ऐसे में केंद्रीय दिल्ली में बार-बार होने वाले प्रदर्शनों का असर दूसरे कारोबारों पर भी पड़ सकता है.
व्यापारियों ने साफ कहा कि उन्हें शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन से कोई परेशानी नहीं है. हर व्यक्ति को लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है. लेकिन इसके साथ ही दूसरे लोगों के कामकाज और रोजगार का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. विरोध के कारण किसी की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
प्रदर्शन के लिए स्थायी जगह बनाई जाए- कैट
कैट ने सरकार से मांग की है कि दिल्ली के बाहरी इलाकों में प्रदर्शन के लिए स्थायी जगह बनाई जाए. इन जगहों पर आने-जाने के लिए अच्छी परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं. इससे प्रदर्शन करने वाले लोग आसानी से अपनी बात रख सकेंगे और दिल्ली के मुख्य बाजारों में कारोबार भी सामान्य रूप से चलता रहेगा.
व्यापारी नेताओं के मुताबिक, ऑनलाइन बैठक में सभी व्यापारिक संगठनों के सुझाव लिए जाएंगे. इसके बाद सरकार के सामने इस मांग को मिलकर उठाया जाएगा. कैट का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार जरूरी है, लेकिन इसके साथ व्यापार, रोजगार और आम लोगों की रोजी-रोटी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Excel Sheet पर 12 कर्मचारियों के नाम, मैनेजर को आदेश&amp; 15 मिनट में सबको निकालो</title>
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        <description><![CDATA[ IT कंपनियों में लेऑफ का दौर लगातार जारी है. जो अब कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को काफी परेशान कर रहा है. हाल ही में चेन्नई की एक IT कंपनी में काम करने वाले डिलीवरी मैनेजर की एक पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. इस पोस्ट में बताया गया है कि कंपनी के सीनियर अधिकारियों ने मैनेजर को 12 कर्मचारियों की लिस्ट एक्सेल शीट में दी और शुक्रवार तक सभी को नौकरी से निकालने का आदेश दिया.
खास बात ये थी कि ये सभी कर्मचारी पिछले कई सालों से उसके साथ काम कर रहे थे. इस एक आदेश ने कंपनी के मैनेजर को भी झकझोरकर रख दिया. जिसके बाद मैनेजर खुद पार्किंग में जाकर खूब रोया.
सोशल मीडिया पोस्टमद्रास टेकीज नाम के पेज ने Reddit पर एक पोस्ट शेयर किया है. जिसके मुताबिक, मैनेजर को सीनियर अधिकारियों ने एक बंद कमरे में बुलाया और 12 कर्मचारियों की लिस्ट सौंप दी. उसे साफ निर्देश दिया गया कि शुक्रवार तक सभी कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया जाए. इस दौरान किसी तरह की बातचीत, चेतावनी या दूसरा मौका देने की इजाजत नहीं थी.
मैनेजर ने बताया कि वो इन कर्मचारियों के साथ साल 2016 से काम कर रहा था. सभी ने कई मुश्किल प्रोजेक्ट्स में एक-दूसरे का साथ दिया था. रात 3 बजे तक ऑफिस में रुककर काम करना, प्रोडक्शन से जुड़ी समस्याएं सुलझाना और ऑफिस के बाहर चाय पीना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था. वो एक-दूसरे की शादियों में भी गए हैं. मैनेजर के मुताबिक, कुछ कर्मचारी उसे &#039;अन्ना&#039; कहकर पुकारते थे, जिसका मतलब तमिल भाषा में बड़ा भाई होता है.
कर्मचारियों की स्थिति का भी किया जिक्रमैनेजर के लिए सबसे मुश्किल बात ये थी कि जिन कर्मचारियों को वो नौकरी से निकालने वाला था, उनमें से कई की जिंदगी इस नौकरी पर निर्भर थी. उसने पोस्ट में तीन कर्मचारियों की स्थिति का जिक्र किया. एक सीनियर डेवलपर ने चार महीने पहले ही घर खरीदने के लिए बड़ा लोन लिया था. दूसरे कर्मचारी की मां का कैंसर का इलाज चल रहा था. परिवार इलाज के लिए कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर था. तो वहीं तीसरे कर्मचारी की पत्नी अगले महीने बच्चे को जन्म देने वाली थी.
मैनेजर ने ये भी लिखा कि उसके लिए इन लोगों के सामने बैठकर ये कहना बहुत मुश्किल था कि उनकी नौकरी चली गई है, उनका ऑफिस एक्सेस बंद कर दिया गया है और वो अपना सामान लेकर चले जाएं.
पोस्ट पर छिड़ी बहसइस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सरकारी और प्राइवेट नौकरी को लेकर जंग छिड़ गई. एक यूजर ने कहा कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए लोगों को केंद्र सरकार की नौकरी के लिए मेहनत करना चाहिए. सरकारी नौकरी में इस तरह अचानक नौकरी जाने का डर कम रहता है.
तो वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग पहले से ही नौकरी जाने के जोखिम को समझते हैं. वो ज्यादा सैलरी और बेहतर कमाई के अवसरों के लिए यह जोखिम उठाते हैं.
इतन ही नहीं कई लोगों ने इंसानियत पर भी सवाल उठाए. हालांकि, पोस्ट में कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की वजह नहीं बताई गई. ये भी साफ नहीं है कि कंपनी ने ये फैसला किन परिस्थितियों में लिया था.
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        <pubDate>Mon, 02 Nov 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PNB Scam: 6 अफसरों की ID चुराकर फ्रॉड, कुर्सी खाली देखते ही बैठ जाती थी</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक ब्रांच में करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. बैंक की सेक्टर पाई-1 ब्रांच में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी पर आरोप है कि उसने 6 बैंक अधिकारियों की लॉगिन ID का इस्तेमाल करके ग्राहकों के खातों से पैसे ट्रांसफर किए.
इस मामले में हाल ही में CCTV फुटेज भी सामने आया है. इसमें महिला कर्मचारी दूसरे अधिकारियों की खाली कुर्सियों पर बैठकर उनके कंप्यूटर चलाती दिखाई दी. मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है.
10 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ीन्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक बैंक की शुरुआती जांच में ग्राहकों के खातों से करीब 10.24 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन का पता चला है. हालांकि, कुछ ग्राहकों का दावा है कि उनके सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से करीब 35 करोड़ रुपये गायब हैं. बताया जा रहा है कि इनमें कई किसान भी शामिल हैं. इन किसानों ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जमीन के बदले मिले मुआवजे की रकम बैंक में जमा की थी.
सीसीटीवी फुटेज में क्या आया सामने?बैंक की शिकायत के मुताबिक, महिला कर्मचारी दीपांशी शर्मा ने 6 अधिकारियों की लॉगिन ID का गलत इस्तेमाल किया. इनमें ब्रांच मैनेजर निशा तिर्की, सीनियर कस्टमर सर्विस एसोसिएट संदीप प्रकाश शर्मा और अन्य कर्मचारी शामिल हैं. बैंक ने करीब एक महीने की CCTV फुटेज की जांच की. इसमें कथित तौर पर देखा गया कि जब कोई अधिकारी अपनी सीट से उठकर जाता था, तो दीपांशी उसकी कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर चलाने लगती थी. वो कुछ ही सेकंड में कंप्यूटर पर काम करके वहां से चली जाती थी. बैंक को शक है कि इसी तरीके से ग्राहकों के खातों की जानकारी बदली गई और बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर किए गए.
FD में भी छोड़छाड़मामला सिर्फ सेविंग अकाउंट से पैसे निकालने तक सीमित नहीं था. बैंक की शिकायत के अनुसार, कई ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी बदलाव किए गए. आरोप है कि कुछ FD में अशुतोष पाठक और अन्य लोगों को जॉइंट होल्डर बनाया गया. इसके अलावा FD से पैसा मिलने वाले बैंक खातों की जानकारी बदली गई और कुछ FD को समय से पहले ही बंद कर दिया गया. पैसों के ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों को भी कथित तौर पर नष्ट कर दिया गया, ताकि गड़बड़ी का पता न चल सके.
कैसे सामने आया पूरा मामला?इस मामले का खुलासा 16 सितंबर को हुआ. बैंक की एक ग्राहक संगीता अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने पहुंची थीं. पासबुक में एंट्री कराने के दौरान उन्हें तीन ऐसे ट्रांजैक्शन दिखाई दिए, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी. उन्होंने बैंक से इस बारे में शिकायत की.
आरोप है कि बैंक की महिला कर्मचारी दीपांशी शर्मा ने पहले इन ट्रांजैक्शन को सही बताया. उसने कहा कि संगीता ने अपने पति से फोन पर बात करके प्रॉपर्टी में निवेश के लिए अशुतोष पाठक नाम के व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर किए थे. लेकिन जब बैंक अधिकारियों ने इन ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज मांगे, तो उनके वाउचर नहीं मिले. इसके बाद बैंक ने मामले की गहराई से जांच शुरू की.
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        <pubDate>Mon, 02 Nov 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>100 एकड़ में बनेगा &amp;apos;नीता अंबानी अनंत आश्रय&amp;apos;, बेटी ईशा संग नीता ने किया भूमि पूजन</title>
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        <description><![CDATA[ रिलायंस फाउंडेशन ने एक अच्छी पहल की घोषणा की है. जिसके तहत मुंबई में एक आश्रय बनाया जाएगा, जिसमें जरूरतमंदों को रहने के लिए जगह मिलेगी और साथ ही इलाज की सुविधा भी मिलेगी. इस पहल का नाम रखा गया है &#039;नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय&#039;, जिसका भूमिपूजल 1 नवंबर 2026 को नीता अंबानी और उनकी बेटी आशा अंबानी ने किया है.
ये आश्रय मुंबई के पास महाराष्ट्र के करजत में 100 एकड़ जमीन पर एक खास टाउनशिप के रूप में बनाया जाने वाला है. इस टाउनशिप में 5,000 से ज्यादा ऐसे लोगों को जिंदगीभर रहने, इलाज और देखभाल की सुविधा मिलेगी, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.
क्या है प्रोजेक्ट का उद्देश्य?इस प्रोजेक्ट के तहत अनाथ बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांग लोग इस टाउनशिप में रह सकेंगे. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ऐसे लोगों को सुरक्षित घर देना है, जहां उन्हें परिवार जैसा माहौल और बेहतर जिंदगी जीने का मौका मिल सके. रविवार को नीता अंबानी ने इस प्रोजेक्ट का भूमि पूजन और निर्माण कार्य की शुरुआत की गई. इसे कई चरणों में तैयार किया जाएगा. हालांकि, इसका निर्माण जरूरी सरकारी मंजूरियां मिलने पर निर्भर करेगा.
15 हजार लोगों के लिए तैयार होगी टाउनशिपइस टाउनशिप में रहने वाले लोगों के अलावा डॉक्टर, नर्स, देखभाल करने वाले कर्मचारी और अन्य स्टाफ भी रहेंगे. इस तरह यहां करीब 15 हजार लोगों के रहने की व्यवस्था की जाएगी. यहां सिर्फ रहने की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि अस्पताल, शिक्षा, ट्रेनिंग, रोजगार और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी.
क्या बोलीं नीता अंबानी?इस प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए नीता अंबानी कहा कि, &#039;इस प्रोजेक्ट का मकसद दिव्यांग लोगों, अनाथ बच्चों और बुजुर्गों को ऐसा घर देना है, जहां उन्हें प्यार, सम्मान और देखभाल मिल सके&#039;. उन्होंने ये भी कहा कि कई माता-पिता को हमेशा ये चिंता रहती है कि उनके बाद उनके दिव्यांग बच्चों की देखभाल कौन करेगा. इस पहल के जरिए ऐसे परिवारों को भरोसा दिलाने की कोशिश की जा रही है कि उनके बच्चों के पास हमेशा एक सुरक्षित घर और अपना परिवार होगा.
बांटी जाएगी टाउनशिपइस पूरे परिसर को 8 रिहायशी गांवों में बांटा जाएगा. इन सभी गांवों के नाम भारत की नदियों के नाम पर रखे जाएंगे. हर गांव की अपनी अलग पहचान होगी. इसके लिए अलग-अलग रंग, प्रतीक और खास तरह के बगीचे बनाए जाएंगे, ताकि वहां रहने वाले लोगों को अपनी जगह पहचानने में आसानी हो. यहां रहने वाले लोगों को परिवार जैसा माहौल दिया जाएगा. हर घर में उनकी देखभाल के लिए विशेष कर्मचारी और अभिभावक मौजूद रहेंगे.
हर व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से अलग देखभाल योजना तैयार होगी. इसमें इलाज, पढ़ाई, हुनर सीखने, नौकरी और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाएगा. इन योजनाओं की हर 6 महीने में समीक्षा भी होगी.
क्या- क्या सुविधाएं मिलेंगी?इस टाउनशिप में अस्पताल से लेकर स्कूल- कॉलेज तक की सुविधा लोगों को मिलेगी. जैसे:

अस्पताल की सुविधा विशेष जरूरत वाले लोगों के लिए होगी. जिसमें इलाज के लिए आधुनिक सुविधाएं भी होंगी.
शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी की सुविधा मिलेगी.
दिव्यांग बच्चों के लिए खास शिक्षा और ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी.
कर्मचारियों के बच्चों के लिए सामान्य स्कूल भी बनाया जाएगा.
खेल के मैदान, बगीचे और मनोरंजन के लिए अलग जगह होगी.
परिसर में मंदिर भी बनाया जाएगा.
खेती के लिए जगह, कैफे और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
इसके अलावा स्पीच थेरेपी, हाइड्रोथेरेपी, मिर्गी का इलाज, विशेष डेंटल केयर और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए पैलिएटिव केयर की सुविधा भी होगी.

रोजगार के अवसर भी मिलेंगेइस टाउनशिप में बेकरी, कैफे और हस्तशिल्प से जुड़े स्टूडियो भी बनाए जाएंगे. यहां रहने वाले लोगों को अलग-अलग काम सिखाए जाएंगे, ताकि वो अपनी क्षमता के अनुसार काम कर सकें और रोजगार हासिल कर सकें. इसका उद्देश्य दिव्यांग लोगों को सिर्फ देखभाल देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका देना भी है.
इसके अलावा परिवारों को कुछ समय के लिए राहत देने के लिए विशेष रिहायशी सुविधा, मोबाइल मेडिकल क्लीनिक और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए हॉस्पिस की व्यवस्था भी होगी. दिव्यांग लोगों की देखभाल करने वाले डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों को ट्रेनिंग देने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की अकादमी भी बनाई जाएगी.
रिलायंस फाउंडेशन के बारे मेंबता दें कि रिलायंस फाउंडेशन रिलायंस इंडस्ट्रीज की सामाजिक सेवा से जुड़ी संस्था है. ये स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, खेल, आपदा राहत और कला-संस्कृति जैसे क्षेत्रों में काम करती है. फाउंडेशन के मुताबिक, उसके कार्यक्रमों का लाभ देश के 98 हजार से ज्यादा गांवों और शहरी इलाकों में 10 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है.
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        <pubDate>Mon, 02 Nov 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>जोशीमठ क्रैश: हेलिकॉप्टर में अब 2 पायलट जरूरी, हर उड़ान से पहले लेना होगा परमिट</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सफर को सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं. अब चारधाम रूट पर उड़ान भरने वाले हर हेलिकॉप्टरों में दो पायलट यानी एक मुख्य पायलट और एक को-पायलट होना जरूरी होगा. इसके अलावा, पायलटों को अब हर उड़ान से पहले उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) से अलग-अलग इजाजत लेनी होगी.&amp;nbsp;
दरअसल, हेलिकॉप्टर को पहले एक ही परमिट में आने-जाने के पूरे रूट की मंजूरी मिल जाती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल दी गई है. नए नियमों के तहत हर उड़ान के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी.
अब हर रूट के लिए अलग परमिट जरूरी
UCADA के CEO प्रतीक जैन ने PTI को बताया कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के निर्देश के बाद यह बदलाव किया गया है. अब एक जगह से दूसरी जगह जाने वाली हर उड़ान के लिए अलग से इजाजत लेनी होगी. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी हेलिकॉप्टर को सहस्त्रधारा से बद्रीनाथ जाने की मंजूरी मिली है और वहां से उसे केदारनाथ जाना है, तो इसके लिए उसे दोबारा UCADA से परमिट लेना होगा.
जोशीमठ में कैसे हुआ था हादसा?
दरअसल, यह हादसा शुक्रवार को चमोली जिले के जोशीमठ में चाई गांव के पास हुआ था. एक निजी कंपनी का हेलिकॉप्टर बद्रीनाथ मंदिर से देहरादून लौट रहा था, तभी पहाड़ी इलाके में प्लेन क्रैश हो गया. इस हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों के मुताबिक, हादसे से करीब 15 मिनट पहले भी तीन हेलिकॉप्टरों ने उड़ान भरी थी.&amp;nbsp;
खराब मौसम की भूमिका की भी जांच
UCADA के आधिकारियों के मुताबिक, पायलट फ्लाइट के दौरान रेडियो के जरिए एक-दूसरे से मौसम की जानकारी शेयर करते हैं. अगर किसी इलाके में बारिश या खराब मौसम होता है, तो दूसरे पायलटों को इसके बारे में अलर्ट किया जाता है. बद्रीनाथ में मौसम पर नजर रखने के लिए एक स्टेशन बनाया गया है, लेकिन जोशीमठ के पास घाटी में ऐसी व्यवस्था नहीं है. इसलिए जांच की जा रही है कि हादसे के समय मौसम कैसा था और क्या किसी दूसरे पायलट ने खराब मौसम की जानकारी शेयर की थी.
10 ग्राम सोने के बराबर पहुंचेगी 1 किलो चांदी की कीमत! 57% तक टूटी
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        <pubDate>Mon, 02 Nov 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>500 रुपए से 5 करोड़ तक, नमक&amp;रोटी खाने वाली महिला कैसे बनी &amp;apos;अचार क्वीन&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ कहते हैं कि अगर इंसान के अंदर कुछ करने का जुनून हो, तो मुश्किल से मुश्किल हालात में भी सफलता हासिल की जा सकती है. दिल्ली की रहने वाली कृष्णा यादव इसकी एक मिसाल हैं. कभी उनके परिवार के पास खाने के लिए सब्जियां खरीदने तक के पैसे नहीं थे. हालात इतने खराब हो गए थे कि परिवार को नमक और रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था.
लेकिन आज वही कृष्णा यादव अपने अचार के कारोबार से हर साल 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर रही हैं. उनकी ये कहानी बताती है कि छोटी शुरुआत भी बड़े बिजनेस में बदल सकती है.
नमक-रोटी खाकर किया गुजाराइकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक कृष्णा यादव उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव दौलतपुर में पली-बढ़ीं. उन्हें कभी औपचारिक शिक्षा लेने का मौका नहीं मिला था. शादी के बाद वो बुलंदशहर में रहने लगीं. उनके पति ट्रैफिक पुलिस में काम करते थे, लेकिन बाद में उनकी नौकरी चली गई. इसके बाद उन्होंने गाड़ियों की खरीद-बिक्री का कारोबार शुरू किया, लेकिन इसमें भी नुकसान हुआ.
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपने दो मकान बेचने पड़े. घर में सब्जियां खरीदने तक के पैसे नहीं बचते थे. ऐसे में कृष्णा और उनका परिवार नमक और रोटी खाकर दिन गुजारने को मजबूर हो गया.
500 रुपये से की शुरुआतजब परिवार के सामने आर्थिक संकट बढ़ गया, तो कृष्णा ने दिल्ली जाने का फैसला किया. वो अपने पति और तीन बच्चों के साथ सिर्फ 500 रुपये लेकर दिल्ली पहुंचीं और अपने पिता के घर रहने लगीं. उन्होंने नौकरी ढूंढने की कोशिश की, लेकिन पढ़ाई नहीं होने के कारण उन्हें काम नहीं मिला. उनके पति को भी नौकरी नहीं मिल रही थी. इसके बाद दोनों ने खेती-बाड़ी का काम शुरू किया. इसी दौरान कृष्णा की जिंदगी में एक ऐसा मौका आया, जिसने उनकी किस्मत बदल दी.
एक ट्रेनिंग ने बदली जिंदगीकृष्णा ने बताया कि एक दिन उन्होंने टीवी पर किसानों के लिए चलाए जा रहे एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में देखा. इस कार्यक्रम में फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उनसे अलग-अलग उत्पाद बनाने की जानकारी दी जाती थी. इसके बाद कृष्णा ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में ट्रेनिंग ली. यहां उन्होंने अचार और मुरब्बा बनाने का तरीका सीखा.
हालांकि, उन्होंने बचपन में अपनी मां को अचार बनाते देखा था, लेकिन इस ट्रेनिंग से उन्हें अचार का स्वाद बेहतर बनाने और उसे लंबे समय तक खराब होने से बचाने की तकनीक समझ आई.
छोटी सी टेबल पर शुरू किया बिजनेससाल 2002 में कृष्णा ने अपने परिवार के साथ अचार बेचने का काम शुरू किया. शुरुआत में उनके पास कोई बड़ी दुकान या फैक्ट्री नहीं थी. वो सड़क किनारे एक छोटी सी टेबल लगाकर अचार बेचती थीं. ग्राहकों को अपनी दुकान तक लाने के लिए उन्होंने एक अलग तरीका अपनाया. वो सड़क पर आने-जाने वाले लोगों के लिए मिट्टी के दो बड़े घड़ों में फ्री पानी रखती थीं. जो लोग पानी पीने के लिए रुकते, उन्हें वो अपने अचार का स्वाद भी चखाती थीं.
250 से ज्यादा तरह के अचार बनाती हैंशुरुआत में कृष्णा सिर्फ करौंदे का अचार बेचती थीं. बाद में उन्होंने आम, मिर्च और नींबू सहित कई तरह के अचार बनाने शुरू किए. धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ा और उन्होंने &#039;श्री कृष्णा पिकल्स&#039; नाम से अपना ब्रांड शुरू किया. आज उनके ब्रांड के तहत 250 से ज्यादा तरह के अचार, चटनी, मुरब्बे और सिरप बनाए जाते हैं.&amp;nbsp;
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कारोबार हर साल 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करता है. इतना ही नहीं बल्कि कृष्णा को उनके संघर्ष और बिजनेस में योगदान के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं. जिसमें साल 2014 में एनजी रंगा पुरस्कार, साल 2016 में प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
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        <pubDate>Mon, 02 Nov 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>धनतेरस पर डबल मुनाफा, 100000 के निवेश पर मिलेगा 25% ज्यादा सोना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धनतेरस-पर-डबल-मुनाफा-100000-के-निवेश-पर-मिलेगा-25-ज्यादा-सोना</link>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस आने वाला है. इस मौके पर सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है. अगर आप भी इस बार धनतेरस वाले दिन सोना खरीदने का सोच रहे हैं, तो आपको सोने की मौजूदा कीमतें राहत देने वाली हैं. दरअसल, सोना जनवरी 2026 में दर्ज किए गए अपने हाई लेवल से काफी नीचे आ चुका है. ऐसे में आप 100000 रुपये के निवेश पर जनवरी के मुकाबले अभी 25% ज्यादा सोना खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
जनवरी के आखिर में 24 कैरेट सोने पर 1 लाख रुपये खर्च करने पर लगभग 5.7 ग्राम सोना मिलता. आज उसी रकम में लगभग 7.1 ग्राम सोना मिल सकता है. शुक्रवार को &#039;इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन&#039; के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम अभी 1,40,054 रुपये है. वहीं, 29 जनवरी को 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,75,340 रुपये थी. यानी कि सोना अभी जनवरी में अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से 20% नीचे हैं. MCX पर गिरावट और भी ज्यादा है. MCX के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो जनवरी के 1,80,779 रुपये के उच्च स्तर से लगभग 23% कम है.
पिछले साल इससे भी कम थी कीमत
बेशक सोना जनवरी के मुकाबले सस्ता हुआ है और आपका यह सोचना भी सही है कि अभी धनतेरस पर सोना खरीदकर आप मुनाफा कमाएंगे. लेकिन आपके उत्साहित होने से पहले एक और पहलू यह भी बता दें कि पिछले धनतेरस पर त्योहार से ठीक पहले के आखिरी कामकाजी दिन (17 अक्टूबर, 2025) को IBJA के अनुसार 24 कैरेट सोने का भाव 1,29,584 रुपये प्रति 10 ग्राम था. उस कीमत पर, 1 लाख रुपये में 7.7 ग्राम सोना मिलता था. आज सोना उसके मुकाबले लगभग 8% महंगा है इसलिए उतने ही पैसों में अब लगभग 7.5% कम सोना मिलेगा.
जिन निवेशकों ने पिछले धनतेरस पर सोना खरीदा था, वे अभी भी कुछ फायदे में हैं. वहीं, जिन्होंने जनवरी में सोने की सबसे ऊंची कीमत (पीक) पर खरीदारी की थी, उन्हें लगभग 20% का नुकसान हो रहा है क्योंकि उस समय निवेश किए गए 1 लाख रुपये की कीमत अब लगभग 79,900 रुपये रह गई है. इन बेंचमार्क दरों में 3% GST और गहने बनाने का खर्च (मेकिंग चार्ज) शामिल नहीं है.
अभी निवेश करें या रूकें?
कई विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में आई यह गिरावट (करेक्शन) लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक मौका है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे एक ही बार में सारा पैसा लगा दें.
शुक्रवार को &#039;द डेली जागरण&#039; में इक्विट्रस्ट सॉल्यूशंस के संस्थापक शिवा ग्रोवर के हवाले से NDTV Profit की रिपोर्ट में कहा गया कि नया निवेश एक बार में करने के बजाय, किश्तों में करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई सालों के नजरिए से निवेश करने वालों के लिए यह गिरावट कुछ अच्छे मौके लेकर आई है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब तक फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) का रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं.
कुल मिलाकर अभी भले ही सोना जनवरी के 1,75,340 रुपये के मुकाबले 1,40,054 रुपये पर आकर्षक लग रहा हो, लेकिन कोई भी यह सटीक अनुमान नहीं लगा सकता कि बाजार यहां से और नीचे जाएगा या यहीं से वापस ऊपर की ओर भागेगा. अगर आप अपना पूरा 1,00,000 &amp;nbsp;सोने पर लगा देते हैं और कीमतें आगे चलकर 5% और गिर जाती हैं, तो आपको नुकसान होगा. वहीं, अगर आप इस रकम को 4 या 5 महीनों की SIP में बांटते हैं, तो कीमतें गिरने पर आपको अगले महीने उसी पैसे में और अधिक ग्राम सोना मिलेगा. इसे वित्तीय भाषा में &#039;रुपी कॉस्ट एवरेजिंग&#039; (Rupee Cost Averaging) कहते हैं.
चांदी ₹10,000 और सोना ₹4,200 सस्ता, अब खरीदें या रुकें? #gold |Paisa Live&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/JXbwz-q5uVo&quot; width=&quot;836&quot; height=&quot;470&quot; frameborder=&quot;0&quot; allowfullscreen=&quot;allowfullscreen&quot;&gt;
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>महंगा पेट्रोल जेब पर भारी, लेकिन ट्रंप बोले&amp; तेल कंपनियां बहुत कमा रहीं</title>
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        <description><![CDATA[ ईरान युद्ध के बीच जहां आम लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, वहीं दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों की कमाई में भारी उछाल देखने को मिला है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेल और गैस कंपनियों में निवेश को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सदस्यों के एक विश्लेषण के मुताबिक, ट्रंप के तेल और गैस से जुड़े निवेश की कीमत बढ़कर 81.6 मिलियन डॉलर यानी करीब 7,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है. बड़ी बात यह है कि इनमें एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन जैसी दो बड़ी कंपनियों के शेयर भी शामिल हैं.
ट्रंप के निवेश में कितना हुआ इजाफा?
कांग्रेस की जॉइंट इकोनॉमिक कमेटी के डेमोक्रेट्स के मुताबिक, 2025 के आखिर में ट्रंप के तेल और गैस निवेश की अनुमानित कीमत 12.6 मिलियन से 46 मिलियन डॉलर के बीच थी. अब यह बढ़कर 22.5 मिलियन से 81.6 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च से अगस्त के बीच उनके निवेश खातों से तेल और गैस कंपनियों के 4.7 मिलियन से 17.5 मिलियन डॉलर तक के शेयर खरीदे गए, जबकि कुछ शेयर बेचे भी गए.
इनमें शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल में उनका सबसे ज्यादा निवेश बताया गया है. शेवरॉन के शेयरों की अनुमानित कीमत 23.1 मिलियन डॉलर और एक्सॉनमोबिल की 18.4 मिलियन डॉलर तक हो सकती है. हालांकि, व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप के निवेश का प्रबंधन स्वतंत्र वित्तीय संस्थान करते हैं और राष्ट्रपति या उनका परिवार शेयर खरीदने-बेचने के फैसलों में दखल नहीं देता.
आम लोगों की जेब पर भी पड़ा असर
अमेरिका में युद्ध के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई. डेमोक्रेटिक कमेटी के अनुमान के मुताबिक, अमेरिकी परिवारों ने पेट्रोल पर करीब 101 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च किए. महंगे ईंधन का असर सिर्फ गाड़ी चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे ट्रांसपोर्ट, खेती और सामान की ढुलाई की लागत भी बढ़ाता है. ऐसे में भारत में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है.
धनतेरस पर डबल मुनाफा, 100000 के निवेश पर मिलेगा 25% ज्यादा सोना
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>68% हो सकता है DA, जनवरी में फिर बढ़ेगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी</title>
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        <description><![CDATA[ लेबर ब्यूरो ने अभी हाल ही में सितंबर 2026 के लिए खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं, जिसे &#039;ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स - इंडस्ट्रियल वर्कर्स&#039; (AICPI-IW) के जरिए ट्रैक किया जाता है. औद्योगिक श्रमिकों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) सितंबर में अगस्त के मुकाबले 1.1 अंक बढ़कर 155.5 अंक पर पहुंच चुका है. इस उछाल के चलते मौजूदा DA (महंगाई भत्ता) &amp;nbsp;65.81% तक पहुंच गया है. अब जनवरी 2027 के लिए DA में बढ़ोतरी की अगली घोषणा जनवरी से दिसंबर 2026 तक की औसत महंगाई दर पर निर्भर करेगी.
किस पर निर्भर करेगा अगली बढ़ोतरी?
7वें वेतन आयोग (7th CPC) के फॉर्मूले के आधार पर जनवरी 2027 में इसके 68% तक पहुंचने की उम्मीद है. चूंकि जनवरी 2027 का अंतिम डीए अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के महंगाई आंकड़ों पर निर्भर करेगा.
ऐसे में अगर अगले तीन महीनों में खुदरा महंगाई मौजूदा रफ्तार से बढ़ती है और सूचकांक अक्टूबर में 156.8, नवंबर में 158.1 और दिसंबर में 159.1 तक जाता है, तो 12 महीनों का औसत बढ़कर 151.3 (2001 बेस पर परिवर्तित) हो जाएगा. इस स्थिति में जनवरी 2027 का सटीक डीए 68.56% यानी राउंड फिगर में पूरे 68% तक पहुंच जाएगा.
यदि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में रिटेल महंगाई बढ़ती नहीं है और सितंबर के समान 155.5 पर ही स्थिर रहती है, तो 12 महीने का औसत 152.375 होगा. इसके तहत डीए 67.78% यानी प्रभावी रूप से 67% तय होगा.
अगर महंगाई में गिरावट आए तो...?
वैसे तो ग्लोबल लेवल पर ईंधन की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण इसकी संभावना कम ही है, लेकिन अगर फिर भी इसमें गिरावट आती है और सूचकांक गिरकर दोबारा जून-अगस्त के औसत स्तर (151.9&amp;ndash;154.5) पर आ जाता है, तो भी जनवरी 2027 का डीए 67.23% यानी न्यूनतम 67% पर ही टिकेगा.&amp;nbsp;
अभी केंद्रीय कर्मचारियों को 63% डीए मिल रहा है. इस 151.3 के औसत के कारण जनवरी 2027 से यह सीधा 68% हो जाएगा, यानी कुल 5% की शुद्ध बढ़ोतरी होगी. चूंकि केंद्रीय कैबिनेट आमतौर पर जनवरी के डीए की आधिकारिक मंजूरी मार्च या अप्रैल में देती है. ऐसे में जब यह मंजूरी मिलेगी, तब कर्मचारियों को जनवरी से लेकर उस महीने तक का पूरा 3 से 4 महीने का एरियर एकमुश्त मिलेगा.ँ

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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रोज 500 किलो LPG और 2500 लीटर डीजल की बचत, IGL के साथ रेलवे की डील</title>
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        <description><![CDATA[ सरकार PNG यानी पाइप्ड नैचुरल गैस को बढ़ावा देने के लिए तमाम जरूरी कदम लगातार उठा रही है. इसी कड़ी में हाल ही में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन के बीच एक बड़ी डील हुई है. जिसके तहत दिल्ली-NCR के 22 रेलवे ठिकानों पर अब LPG और डीजल की जगह पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस (PNG) का इस्तेमाल किया जाएगा.
इस योजना के तहत शुरुआत में रोजाना करीब 3000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCMD) गैस की सप्लाई की जाएगी. इससे हर रोज लगभग 500 किलो LPG और 2500 लीटर डीजल की खपत कम होगी.
किन स्टेशनों पर होगा इस्तेमाल?इस योजना के तहत दिल्ली सराय रोहिल्ला, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार टर्मिनल, हजरत निजामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की पांच बड़ी लॉन्ड्री में बॉयलर चलाने के लिए PNG गैस का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा रेलवे की रसोई, अधिकारियों के विश्राम गृह, कर्मचारियों के रहने की जगह, रनिंग रूम और अन्य सुविधाओं को भी PNG से जोड़ा जाएगा. ये सुविधा दिल्ली, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के रेलवे ठिकानों में शुरू होगी.
बढ़ेगी गैस की सप्लाईइस डील से IGL को उम्मीद है कि आने वाले सालों में इन रेलवे प्रतिष्ठानों में गैस की मांग बढ़कर रोजाना 8000 से 10000 SCMD तक पहुंच सकती है. इसके लिए गैस पाइपलाइन का नेटवर्क और कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी.
IGL के चेयरमैन शुभंकर सेन ने कहा कि इस समझौते से रेलवे में LPG की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ेगा. इससे दूसरे देशों से आयात किए जाने वाले ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही सरकार पर मिलने वाली सब्सिडी का बोझ भी घट सकता है.
तो वहीं दिल्ली डिवीजन के रेलवे मैनेजर पुष्पेश रमन त्रिपाठी ने कहा कि PNG के इस्तेमाल से रेलवे का ऊर्जा खर्च कम करने में मदद मिलेगी. भविष्य में रेलवे अस्पतालों और कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनियों को भी PNG कनेक्शन देने की योजना है.
क्यों हुई ये डील?बता दें कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि देश में ज्यादा से ज्यादा PNG कनेक्शन का इस्तेमाल हो. जिससे कि भारत की एलपीजी की अन्य देशों पर निर्भरता कम हो सके. इससे देश को बाहर से एलजीपी आयात नहीं करना होगी, बल्कि नेचुरल गैस से ही आपूर्ति पूरी हो जाएगी. जिससे कि आने वाले समय में यदि किसी भी तरह के विपरीत हालात बनते हैं तो देश में गैस की किल्लत ना हो और दाम भी कंट्रोल में रहें.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>55 लाख की संपत्ति, जीरो कर्ज, फिर से शादी रचाने वाले उमर अब्दुल्ला की नेटवर्थ कितनी?</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक और राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार वजह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी है. सीएम उमर अब्दु्ल्ला ने आज पत्रकार निधि राजदान से शादी की है. यह उनकी दूसरी शादी है. उमर अब्दुल्ला की उम्र 56 साल है. जानिए इनके पास कितनी संपत्ति है.&amp;nbsp;
साल 2024 में गांदरबल विधानसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के तौर पर चुनाव लड़ने वाले उमर अब्दुल्ला ने अपने हलफनामे में जो जानकारी दी है, वो कई बड़े नेताओं से बिल्कुल अलग है. हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 55.2 लाख रुपए है. हलफनामे में उमर ने अपनी सालाना आय 14.5 लाख रुपए बताई है. सीएम उमर के खिलाफ कोई आपराधिक केस भी नहीं है.&amp;nbsp;
उमर अब्दुल्ला के सिर पर नहीं है कोई कर्ज
दरअसल आम तौर पर देखा जाता है कि इतने बड़े नेता के पास करोड़ों की संपत्ति होती है, लेकिन उमर अब्दुल्ला की संपत्ति काफी साधारण मानी जा रही है और सबसे बड़ी बात यह है कि उन पर कोई कर्ज भी नहीं है.&amp;nbsp;
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनकी दूसरी सगाई और शादी को लेकर चर्चा काफी तेज थी. &amp;nbsp;हालांकि उमर ने खुद इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा था, लेकिन समर्थकों का कहना था कि एक सुलझे हुए और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के तौर पर अब वो अपनी निजी जिंदगी में भी नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं.
पिता फारूक अब्दुल्ला के पास कितनी संपत्ति?
उमर अब्दुल्ला के पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की कुल संपत्ति 2019 के लोकसभा चुनाव में दाखिल उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार लगभग 12.19 करोड़ रुपए है. उनके नाम कोई भी बैंक कर्ज या देनदारी दर्ज नहीं है. उनकी कुल कमाई में से 1.59 करोड़ रुपए की चल संपत्ति है, जिसमें जेएंडके बैंक, एचडीएफसी और एसबीआई जैसे बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट, रिलायंस जैसी कंपनियों के शेयर, दो गाड़ियां (मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा और महिंद्रा स्कॉर्पियो) और लगभग 10 लाख रुपये की नकदी शामिल है.
वहीं, उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा 10.60 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति का है. इसमें श्रीनगर के सौरा में कृषि और गैर-कृषि भूमि, श्रीनगर की व्यावसायिक संपत्तियों में एक-तिहाई हिस्सा, साथ ही श्रीनगर के गुपकार रोड और जम्मू के भटिंडी स्थित उनके आवासीय मकान और जमीनें शामिल हैं.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>जोशीमठ हेलिकॉप्टर क्रैश: 35 साल पुरानी कंपनी, 58 करोड़ रेवेन्यू, Trans Bharat Aviation को जानिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जोशीमठ-हेलिकॉप्टर-क्रैश-35-साल-पुरानी-कंपनी-58-करोड़-रेवेन्यू-trans-bharat-aviation-को-जानिए</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश ने एक बार फिर हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. शुक्रवार को बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा एक हेलीकॉप्टर चाई गांव के पास जंगल में क्रैश हो गया. इस हादसे में पायलट समेत छह लोगों की जान चली गई. इस हादसे के बाद हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी ट्रांस भारत एविएशन भी चर्चा में आ गई है.&amp;nbsp;
यह कंपनी करीब 35 साल पुरानी है और देशभर में हेलीकॉप्टर चार्टर, VIP ट्रैवल और तीर्थ यात्रा जैसी सेवाएं देती है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 58 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया था. हादसे की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) कर रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ट्रांस भारत एविएशन के बारे में.&amp;nbsp;
क्या है Trans Bharat Aviation?
ट्रांस भारत एविएशन की स्थापना साल 1991 में हुई थी. दिल्ली मुख्यालय दिल्ली वाली यह कंपनी अपनी LinkedIn प्रोफाइल पर खुद को भारत के पुराने नॉन-शेड्यूल हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों में से एक बताती है. इसका मतलब है कि यह सामान्य एयरलाइंस की तरह तय रूट और समय पर उड़ानें नहीं चलाती, बल्कि जरूरत के मुताबिक चार्टर सेवाएं उपलब्ध कराती है.
दरअसल, कंपनी की सेवाओं में चार धाम यात्रा, केदारनाथ यात्रा, चुनावी उड़ानें, VIP चार्टर, जॉय राइड, हवाई सर्वे और हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस शामिल हैं. कंपनी की LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, इसमें 11 से 50 कर्मचारी काम करते हैं.
कंपनी के पास कितने हेलीकॉप्टर हैं?
कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, उसके बेड़े में तीन बेल 407 हेलीकॉप्टर हैं. इन तीनों की कुल यात्री क्षमता 18 बताई गई है. कंपनी का कहना है कि उसके हेलीकॉप्टर आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम और क्रैश-रेसिस्टेंट फ्यूल सिस्टम से लैस हैं. इनका इंजन रोल्स-रॉयस का है.
कैसे हुआ जोशीमठ में हेलीकॉप्टर हादसा?
क्रैश हेलीकॉप्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर VT-HCX था और इसकी पहचान AS350B3 के रूप में हुई. इसने शुक्रवार दोपहर 1:14 बजे बद्रीनाथ हेलीपैड से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ान भरी थी. इसमें पायलट के अलावा पांच यात्री सवार थे. उड़ान के दौरान यह जोशीमठ के चाई गांव के पास जंगल में क्रैश हो गया. हादसे में सभी छह लोगों की जान चली गई.
बैंक अकाउंट से कट जाएं पैसे, तो घबराएं नहीं! फटाफट कर डालें ये काम
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>यूनियन बैंक के लॉकर से गायब हुए गहने, अब कौन भरेगा नुकसान?</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक के लॉकर को अक्सर लोग अपने कीमती गहने और जरूरी सामान सुरक्षित रखने की जगह मानते हैं. उन्हें यकीन होता है कि बैंक की निगरानी में उनका सामान महफूज रहेगा. लेकिन जरा सोचिए, अगर आप सालों बाद बैंक जाएं और पता चले कि लॉकर से गहने ही गायब हैं, तो परेशानी कितनी बढ़ सकती है. ऐसा ही एक मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से सामने आया है, जिसमें करीब आठ साल की कानूनी लड़ाई के बाद एक महिला को राहत मिली.&amp;nbsp;
दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने बैंक को महिला के गूम हुए 47 लाख रुपए के गहनों का पेमेंट करने का आदेश दिया है. इसके अलावा कमीशन ने बैंक को गहनों की कीमत के साथ ब्याज और मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है. इस तरह बैंक को कुल मिलाकर करीब 50.5 लाख रुपये चुकाने होंगे.
क्या है पूरा मामला?
मोनिका कुमारी मारवाह ने साल 1998 में अपने ससुर के साथ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में जॉइंट लॉकर खुलवाया था. 29 अगस्त 2010 को उनके ससुर की मौत हो गई. इसके बाद भी बैंक लॉकर का किराया काटता रहा. बैंक के रिकॉर्ड में 25 सितंबर 2018 को भी किराया कटने की जानकारी मिली.
मोनिका के मुताबिक, जब उन्होंने 1 सितंबर 2018 को बैंक की ब्रांच से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि लॉकर 22 जनवरी 2015 को ही सरेंडर किया जा चुका है. महिला ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी लॉकर बंद नहीं कराया था. उनके मुताबिक, लॉकर में करीब 47 लाख रुपये के गहने रखे थे, जिनका कोई पता नहीं था.
बैंक ने 2005 में लॉकर सरेंडर होने का किया दावा
यूनियन बैंक ने महिला के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि लॉकर 21 मई 2005 को ही सरेंडर कर दिया गया था. बैंक ने बाद में किराया कटने को एक गलती बताया और रकम लौटाने की बात कही. हालांकि, बैंक न तो लॉकर सरेंडर करने की रसीद दिखा सका और न ही गहने वापस करने से जुड़ा कोई पुख्ता सबूत पेश कर पाया. इसके बाद कमीशन ने बैंक की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और माना कि महिला ने लॉकर सरेंडर नहीं किया था.&amp;nbsp;
बैंक को 47 लाख रुपये के साथ ब्याज और मुआवजा देना होगा
कमीशन ने यूनियन बैंक को गहनों की कीमत के रूप में 47 लाख रुपये देने का आदेश दिया है. इस रकम पर 1 सितंबर 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक सालाना 6% की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा. इसके अलावा बैंक को मानसिक परेशानी के लिए 3 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 50 हजार रुपये भी चुकाने होंगे. इस तरह महिला को कुल रकम के तौर पर 50.5 लाख रुपए मिलेंगे.
शराब हुई महंगी, 1 नवंबर से हर बोतल पर देने होंगे 10 रुपए ज्यादा
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>यूनियन, बैंक, के, लॉकर, से, गायब, हुए, गहने, अब, कौन, भरेगा, नुकसान</media:keywords>
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        <title>बेंगलुरु से प्रयागराज का फ्लाइट किराया 27 हजार, पेरिस का सिर्फ 24 हजार</title>
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        <description><![CDATA[ दिवाली और छठ पर अपने घर और परिवार के साथ त्योहार मनाने की ख्वाहिश हर किसी की होती है, लेकिन दूसरे शहरों में नौकरी करने वाले लोगों के लिए घर लौटना अब जेब पर भारी पड़ सकता है. खासकर फ्लाइट से सफर करने वालों को त्योहारों के समय बढ़े हुए किराए का सामना करना पड़ता है. अब जरा सोचिए, अगर अपने ही देश में घर जाने के लिए विदेश जाने से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ें तो हैरानी होना लाजमी है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां बेंगलुरु से प्रयागराज जाने का हवाई टिकट पेरिस जाने वाली फ्लाइट से भी महंगा दिखाई दिया है. &amp;nbsp;
दरअसल, &amp;nbsp;सोशल मीडिया पर एक फ्लाइट किराए का स्क्रीनशॉर्ट वायरल हो रहा है. अमित राजपूत नाम के एक यूजर ने 5 नवंबर के फ्लाइट किराए के स्क्रीनशॉट शेयर किए. इसमें बेंगलुरु से प्रयागराज का टिकट करीब 27 हजार रुपए, जबकि बेंगलुरु से पेरिस का टिकट करीब 24 हजार रुपए का दिखाया गया. इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि दीवाली पर या तो घर जा सकते हैं या फिर पेरिस घूमने.
प्रयागराज जाने से सस्ता पड़ा पेरिस का टिकट
स्क्रीनशॉट के मुताबिक, बेंगलुरु से प्रयागराज के लिए इंडिगो की वन-वे फ्लाइट का किराया 27,817 रुपए था. इस सफर में हैदराबाद में एक स्टॉप भी शामिल था और यात्रा में करीब 4 घंटे 50 मिनट लगने थे. डिस्काउंट और कैशबैक के बाद इसकी कीमत 27,006 रुपए दिखाई गई.
वहीं, बेंगलुरु से पेरिस जाने के लिए एतिहाद एयरवेज का टिकट 25,838 रुपए का था. यह फ्लाइट अबू धाबी के रास्ते जाती है और इसमें करीब 19 घंटे का समय लगता है. छूट के बाद टिकट की कीमत 24,037 रुपये रह गई. यानी स्क्रीनशॉट में पेरिस का टिकट प्रयागराज के मुकाबले करीब 3 हजार रुपए सस्ता दिखा.



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त्योहारों में क्यों बढ़ जाते हैं फ्लाइट के दाम?
दिवाली और छठ जैसे त्योहारों पर बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौटते हैं. ऐसे में बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों से छोटे शहरों के लिए फ्लाइट की मांग बढ़ जाती है. मांग ज्यादा होने और सीमित फ्लाइट ऑप्शनों के कारण किराया भी तेजी से बढ़ सकता है.
यूनियन बैंक के लॉकर से गायब हुए गहने, अब कौन भरेगा नुकसान?
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>1 अप्रैल से आएंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट, 1&amp;1 अरब नोट छापेगा RBI</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2027 से 10 और 20 रुपये के नए पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों का पायलट प्रोजेक्ट (फील्ड ट्रायल) शुरू करने की तैयारी में है. इनके आकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, नोटों का आकार न बदलने के फैसले से बैंकों को फायदा होगा क्योंकि इससे उन्हें अपने ATM को फिर से &amp;nbsp;कॉन्फिगर (reconfigure) करने पर अलग से पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.&amp;nbsp;
मनीकंट्रोल से बात करते हुए एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नोटों का साइज न बदलने से &amp;nbsp;बैंकों को ATM को फिर से कॉन्फिगर करने पर होने वाले शुरुआती खर्च से बचने में मदद मिलेगी. चूंकि इस पायलट प्रोजेक्ट को छोटे मूल्य के नोटों के साथ शुरू किया जा रहा है इसलिए इससे काफी बचत होगी. बता दें कि यह केवल एक फील्ड ट्रायल है इसलिए नए प्लास्टिक नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही चलन &amp;nbsp;में रहेंगे. यानी कि पुराने कागज के नोट पूरी तरह से वैध रहेंगे. इस प्रोजेक्ट के तहत 10 रुपये के 100 करोड़ (1 बिलियन) और 20 रुपये के 100 करोड़ (1 बिलियन) पॉलीमर नोट बाजार में ट्रायल के लिए जारी किए जाएंगे.
पॉलीमर नोट लाने की क्या है वजह?
10 और 20 रुपये के नोटों का देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है.सब्जी मंडी से लेकर बस-ऑटो के किराये, और छोटी दुकानों पर ये एक हाथ से दूसरे हाथ में घूमते हैं. ज्यादा इस्तेमाल होने की वजह से &amp;nbsp;ये कागजी नोट बहुत जल्दी फट जाते हैं, गल जाते हैं या गंदे हो जाते हैं. इसके चलते RBI को हर साल करोड़ों पुराने नोटों को नष्ट करके नए नोट छापने पड़ते हैं.&amp;nbsp;
अगस्त में, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने पॉलिमर करेंसी नोटों की लंबी उम्र के बारे में बताया था. उन्हों​​ने कहा था कि कुछ जगहों पर पॉलिमर करेंसी नोट 30 साल से भी ज्यादा समय तक चले हैं. ये नोट, खास तौर पर कम मूल्य वाले उन नोटों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे जिनका इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है.
चूंकि प्लास्टिक या पॉलीमर नोट पूरी तरह से वॉटरप्रूफ होते हैं और सॉइल-रेसिस्टेंट होते हैं इसलिए ये आसानी से नहीं फटते हैं. इनकी लाइफ सामान्य नोटों से 3-4 गुना ज्यादा होती है. इसके मुकाबले एक कागजी नोट की उम्र महज 1 से 2 साल होती है. पॉलिमर नोट ज्यादा समय तक टिके रहेंगे, तो RBI को अगले कई सालों तक दोबारा नोट छापने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे छपाई पर अरबों रुपया बचेगा.
1000 के नए नोट का दावा फर्जी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसी तस्वीरें और पोस्ट वायरल हुए हैं, जिनमें यह दावा किया गया था कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 1,000 रुपये के नए पॉलीमर नोट जारी कर दिए हैं. भारत सरकार की आधिकारिक एजेंसी PIB फैक्टचेक ने इसे गलत पाया. RBI ने साफ कह दिया है कि फिलहाल, बड़े मूल्यवर्ग (डिनोमिनेशन) के पॉलीमर नोट लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आरबीआई (RBI) कभी भी किसी नए नोट या मौद्रिक नीति में बदलाव की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए नहीं देती है. इसके बजाय अपनी आधिकारिक वेबसाइट (rbi.org.in) या आधिकारिक प्रेस रिलीज के जरिए जानकारी देती है इसलिए ऐसी किसी भी वायरल पोस्ट या मैसेज पर न तो भरोसा करें और न ही इसे आगे शेयर करें.

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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अप्रैल, से, आएंगे, और, रुपये, के, प्लास्टिक, नोट, 1-1, अरब, नोट, छापेगा, RBI</media:keywords>
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        <title>PNB बोला&amp; FD&amp;SB में गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस, दोषियों पर सख्त कार्रवाई</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक में सालों की मेहनत की कमाई जमा करने के बाद अगर अचानक पता चले कि खाते से पैसे गायब हैं तो किसी के लिए भी बड़ा झटका होगा. ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा में कुछ ग्राहकों के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है. ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उनके सेविंग अकाउंट और FD से बिना अनुमति के पैसे निकाल लिए गए हैं.
मामले को लेकर अब PNB ने अपना बयान जारी किया है. बैंक ने कहा है कि वो इन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है. साथ ही बैंक ने साफ किया है कि वित्तीय गड़बड़ी और धोखाधड़ी के मामले में उसकी जीरो टॉलरेंस की नीति है. तो जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
बैंक ने कितने रुपए लौटाए?PNB के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा शाखा में ग्राहकों के FD और सेविंग बैंक खातों से जुड़ी शिकायतों के बाद अब तक तीन दावों का निपटारा किया जा चुका है. इन तीन दावों की के टोटल पैसे 43 लाख रुपए है.
क्या है पूरा मामला?ग्रेटर नोएडा की PNB शाखा के कुछ ग्राहकों ने आरोप लगाया है कि उनके सेविंग अकाउंट और FD से बिना परमिशन के पैसे निकाल लिए गए है. वहीं, कुछ ने आरोप लगाया कि बिना बताए पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए हैं. कई ग्राहकों का दावा है कि उन्हें इन ट्रांजैक्शन की जानकारी भी समय पर नहीं मिली है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में करीब 28 खाताधारकों ने शिकायत की है. पुलिस शिकायत में 21 लोगों के कथित नुकसान का आंकड़ा 11.24 करोड़ रुपए से ज्यादा है. वहीं, कुछ खाताधारकों ने टोटल गड़बड़ी का अनुमान 35 करोड़ रुपए का लगाया है. हालांकि, कितने पैसे हैं, इसकी आधिकारिक तौर पर बैंक की ओर से पुष्टि नहीं की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, खाताधारकों में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें जेवर एयरपोर्ट परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा मिला था.&amp;nbsp;
बैंक ने क्या कहा?PNB ने अपने बयान में साफ कहा है कि बैंक धोखाधड़ी, वित्तीय अनियमितताओं और किसी भी तरह के गलत काम को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है. जांच में जो भी व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाएगा उसके खिलाफ लागू नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी. बैंक ने ये भी कहा कि वो अधिकारियों को जांच में पूरा सहयोग दे रहा है. साथ ही, मामले की सच्चाई सामने लाने और ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
बैंक ने ग्राहकों को क्या दिया भरोसा?इस मामले में PNB ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया कि उनके वास्तविक और वैध दावों का भुगतान किया जाएगा. बैंक ने ये भी कहा है कि आगे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए जांच, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है.
अगर आपका भी PNB में सेविंग अकाउंट या FD है, तो समय-समय पर बैंक स्टेटमेंट और FD की रसीद जरूर चेक करते रहें. खाते में कोई ऐसा ट्रांजैक्शन दिखे जिसे आपने नहीं किया है, तो तुरंत बैंक को इसकी शिकायत करें और शिकायत की रसीद संभालकर रखें.
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गाजियाबाद की सोसायटी में गिरेंगे 2 टावर, फ्लैट मालिकों को कितना मिलेगा मुआवजा?</title>
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        <description><![CDATA[ घर खरीदने के लिए लोग अपनी जिंदगी की बड़ी कमाई लगा देते हैं. कई बार इसके लिए सालों तक होम लोन की EMI भी चुकानी पड़ती है. लेकिन अगर जिस सोसायटी में फ्लैट खरीदा है, वहां निर्माण ही गैरकानूनी निकले तो खरीदारों की मुश्किल बढ़ जाती है. गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी का मामला भी कुछ ऐसा ही है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोसायटी में अवैध निर्माण को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने दो टावर पूरी तरह गिराने और चार अन्य टावरों की एक्स्ट्रा मंजिलें तोड़ने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही बिल्डर को 25 लाख मुआवजा देने को कहा है. GDA को भी कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 11 लोगों को 50000- 50000 रुपए देने होंगे.&amp;nbsp;
कौन सा विवाद चल रहा था?मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद, मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसायटी का है. सोसायटी में निर्माण और नक्शे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. निवासियों का आरोप था कि बिल्डर ने स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण किया और कुछ कॉमन एरिया को भी बेच दिया.
सोसायटी की RWA और कुछ फ्लैट मालिकों ने इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था. उनका कहना था कि बिल्डर ने GDA से निर्माण में बदलाव की मंजूरी लेते समय फ्लैट मालिकों की सहमति नहीं ली. इसके अलावा, तय नक्शे से अलग एक्स्ट्रा मंजिल और टावर बनाए गए.&amp;nbsp;
कौन- कौन से टावर गिरेंगे?कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद GDA की ओर से 18 दिसंबर 2024 को दिए गए तीसरे कंपाउंडिंग आदेश को गैरकानूनी ठहराते हुए रद्द कर दिया. हाई कोर्ट ने GDA को दो टावर पूरी तरह गिराने का आदेश दिया है. इसके अलावा चार टावरों की दो-दो मंजिलें भी हटाई जाएंगी. आदेश के अनुसार टावर 27 और 28 को पूरी तरह गिराया जाएगा. वहीं, टावर 16, 17, 18 और 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल हटाई जाएगी.
रिपोर्ट के मुताबिक, टावर 27 और 28 में 80 फ्लैट हैं. वहीं, बाकि के चार टावरों में गिरने वाली मंजिलों पर 32 फ्लैट निर्माणाधीन हैं. कोर्ट ने GDA को दो महीने के भीतर ही कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है. पुलिस और जिला प्रशासन को भी कार्रवाई के दौरान GDA की मदद और सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है.&amp;nbsp;
कितना मिलेगा मुआवजा?
हाई कोर्ट ने GDA को निर्देश दिया है कि कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 11 लोगों को 50,000 रुपए प्रति व्यक्ति दिए जाए. यानी इस आदेश के तहत GDA की ओर से टोटल 5.5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा. इसके अलावा कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपए की लागत लगाई है. ये रकम बिल्डर, सारे फ्लैट मालिकों को नहीं देकर गुलमोहर ग्रीन्स की RWA के खाते में जमा करेंगे. आदेश के मुताबिक, बिल्डर को एक महीने के भीतर ये भुगतान करना है.
अब सोसायटी के कॉमन एरिया की बिक्री भी हुई है तो&amp;nbsp;कोर्ट के मुताबिक, बिल्डर ने सोसायटी के कॉमन एरिया के हिस्से 85 लोगों को बेचे थे. अब बिल्डर को इन खरीदारों से लिए गए बिक्री के पूरे पैसे वापस करने हैं. इसके साथ ही निर्माण पर हुआ खर्च भी लौटाना होगा और अगर पेमेंट देने में देरी होती है तो 10% ब्याज भी देना होगा.
किसपर हुई कार्रवाई?हाई कोर्ट ने बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने और उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट, 2010 के उल्लंघन के आरोपों में FIR दर्ज करने का निर्देश भी दिया है. पुलिस को दो सप्ताह के भीतर FIR दर्ज करने को कहा गया है.&amp;nbsp;
कोर्ट ने GDA के पूर्व उपाध्यक्ष के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है. आरोप है कि उन्होंने नियमों के उल्लंघन के बावजूद तीसरे कंपाउंडिंग आदेश को मंजूरी दी थी. राज्य सरकार को एक महीने के भीतर जांच शुरू करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा, ध्वस्तीकरण का खर्च भी बिल्डर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूला जाएगा.
1 अप्रैल से आएंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट, 1-1 अरब नोट छापेगा RBI
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दुबई से iPhone 18 Pro लाया शख्स, कस्टम ने मांगे 30 हजार, अब कोर्ट जाएगा मामला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दुबई-से-iphone-18-pro-लाया-शख्स-कस्टम-ने-मांगे-30-हजार-अब-कोर्ट-जाएगा-मामला</link>
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        <description><![CDATA[ विदेश में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट खरीदना कई लोगों के लिए सस्ता विकल्प होता है, लेकिन भारत लौटते समय यही खरीदारी कभी-कभी मुश्किल खड़ी कर सकती है. केरल के कोच्चि एयरपोर्ट पर एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां दुबई से लौट रहे एक NRI यात्री को अपने नए आईफोन के कारण कस्टम अधिकारियों के सवालों का सामना करना पड़ा.
मामला केवल टैक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यात्री और अधिकारियों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा. इस घटना ने विदेश से निजी इस्तेमाल के लिए सामान लाने वाले यात्रियों के अधिकारों और कस्टम नियमों पर नई चर्चा शुरू कर दी है.
कस्टम ड्यूटी देने से यात्री ने क्यों किया इनकार?
खलीज टाइम्स के मुताबिक, एनआरआई का नाम अज़ास है, कोझिकोड के रहने वाले हैं. उनका मानना था कि नया फोन उनके निजी इस्तेमाल के लिए है और इसे बेचने या किसी व्यावसायिक गतिविधि के मकसद से नहीं खरीदा गया है. इसी आधार पर उन्होंने अधिकारियों की ओर से बताई गई रकम जमा करने से मना कर दिया.
दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर असहमति बढ़ती गई. यात्री ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठने का फैसला किया. वह अपना फोन वापस मिलने तक वहां से जाने को तैयार नहीं थे.
दुबई से कौन-सा आईफोन लेकर आया था यात्री?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में दुबई से भारत पहुंचने पर उनके सामान में नया iPhone 18 Pro मिला. इस डिवाइस को उन्होंने 5,950 UAE दिरहम में खरीदा था. उनके पास एक पुराना iPhone 14 भी था, जिसका इस्तेमाल वह पहले से कर रहे थे.
कोच्चि एयरपोर्ट के नेदुम्बस्सेरी टर्मिनल पर कस्टम विभाग ने नए फोन की खरीद को लेकर उनसे जानकारी मांगी. अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर फोन को भारत लाने के लिए लगभग 20 हजार से 30 हजार रुपये तक का शुल्क जमा करने को कहा गया.
विदेश से सामान लाने पर कितनी मिलती है छूट?
भारत में 2 फरवरी 2026 से लागू बेगेज रुल्स, 2026 के अनुसार, पात्र भारतीय निवासी और भारतीय मूल के पर्यटक हवाई या समुद्री रास्ते से आने पर 75 हजार रुपये तक की सामान्य ड्यूटी-फ्री सीमा का लाभ ले सकते हैं.
हालांकि, इस छूट का फायदा हर तरह की खरीदारी पर अपने आप नहीं मिलता. पहले से इस्तेमाल किए जा रहे निजी सामान और विदेश में खरीदे गए नए उत्पादों के लिए नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ भारत आने से पहले यात्रियों को लागू कस्टम शर्तों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. कोच्चि एयरपोर्ट की यह घटना बताती है कि विदेश से नया फोन खरीदना ही नहीं, उसे भारत लाते समय लागू नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है.
एयरपोर्ट पर हंगामे के बाद पुलिस तक पहुंचा मामला
स्थिति को संभालने के लिए CISF के जवानों को बीच में आना पड़ा. उन्होंने यात्री को कस्टम क्षेत्र से बाहर पहुंचाया. इसके बाद कस्टम अधिकारियों की शिकायत पर नेदुम्बस्सेरी पुलिस ने अज़ास के खिलाफ मामला दर्ज किया.
शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने अधिकारियों के आधिकारिक काम में बाधा पहुंचाई. दूसरी तरफ, यात्री ने अपना नया आईफोन कस्टम विभाग के पास ही छोड़ दिया और मामले में कानूनी विकल्प अपनाने की बात कही.
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Air India ने मां और 3 साल के बच्चे को बोर्डिंग से रोका, लगा 70 हजार का जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ अक्सर जब लंबी दूरी के सफर के लिए लोग फ्लाइट से सफर करना पसंद करते हैं. ऐसे में सोचिए, अगर आपने अपनी फ्लाइट की टिकट बुक की हो और आपकी टिकट कन्फर्म, लेकिन उसके बाद भी एयरलाइन आपको फ्लाइट में बैठने से मना कर दें तो ऐसी स्थिति में कोई भी यात्री परेशान हो सकता है.
कुछ ऐसा ही एक मामला केरल से सामने आया है, यहां पर एक महिला और उसके बच्चे को फ्लाइट में चढ़ने से मना कर दिया. मामला इतना बढ़ गया कि उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया और उपभोक्ता आयोग ने एयर इंडिया एक्सप्रेस पर जुर्माना लगाया गया है.
कितना जुर्माना दिया?

आयोग ने एयरलाइन को महिला को 20,287 रुपये टिकट का रिफंड करने के लिए कहा.
50 हजार रुपये मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए देने को कहा.&amp;nbsp;
साथ ही फरवरी 2021 से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देने को कहा.

उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा मामला
सबसे पहले तो महिला ने एयरलाइन को एक कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन जब कोई ठीक जवाब नहीं आया तो महिला ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया. एयरलाइन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. हालांकि, सबसे पहले ये जानते हैं कि मामले की शुरुआत कहां से हुई थी.&amp;nbsp;
20 हजार से ज्यादा की थी टिकट
बता दें कि महिला ने अपने और अपने 3 साल के बेटे के लिए 20,287 की टिकट बुक की थी. यानी महिला ने दोनों टिकट के लिए इतने पैसे चुकाए थे. महिला की रात 9 बजे की फ्लाइट थी.
महिला ने क्या कहा?
महिला के मुताबिक, उसके पास यात्रा के लिए सारे जरूरी दस्तावेज थे, जैसे वीजा, पासपोर्ट. लेकिन इसके बाद भी महिला को फ्लाइट में चढ़ने से मना कर दिया गया. ये मामला फरवरी 2021 का है.
कहां जा रही थी महिला?
महिला अपने बेटे के साथ केरल के कोच्चि से अबू धाबी की जा रही थी. इसके लिए ही महिला ने एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-1419 में दो टिकट बुक की थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि एयरलाइन ने आखिर महिला को फ्लाइट में सफर करने की परमिशन क्यों नहीं दी, जब महिला की टिकट कन्फर्म थी और उसके पास सारे जरूरी दस्तावेज भी थे.&amp;nbsp;
एयरलाइन ने क्या कहा?
एयरलाइन ने महिला और उसके बेटे को दूसरी फ्लाइट से सफर करने के लिए कहा, जो फ्लाइट कोच्चि से शाहजाह जा रही थी, उससे एयरलाइन ने महिला को सफर करने के लिए कहा.&amp;nbsp;
दूसरी फ्लाइट की खरीदी टिकट
एयरलाइन ने जब महिला को फ्लाइट में सफर करने की परमिशन नहीं दी तो महिला को मजबूरी में कोच्चि से शारजाह जाने वाली दूसरी फ्लाइट का टिकट खरीदना पड़ा. महिला ने इसके लिए 29,510 रुपये से ज्यादा चुकाएं. हैरानी की बात तो ये है कि महिला को सिर्फ दूसरी फ्लाइट से सफर ही नहीं करना पड़ा, बल्कि आगे का सफर भी मुश्किल भरा रहा.
सड़क के रास्ते से अबू धाबी गई महिला
दरअसल, जब महिला शारजार पहुंची तो उसके बाद उसे सड़क के रास्ते से अबू धाबी जाना पड़ा. इतने छोटे बच्चे के साथ ऐसे सफर करना महिला के लिए काफी परेशानी भरा रहा.&amp;nbsp;
महिला ने एयरलाइन पर लगाया आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने उनकी पहली टिकट का पैसा वापस नहीं किया और साथ ही उन्हें इस बदलाव की वजह से अपने बच्चे के साथ बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी.&amp;nbsp;
आयोग ने क्या कहा?
आयोग के मुताबिक, एयरलाइन ने इस बारे में नहीं बताया कि आखिर किस वजह से उन्होंने महिला को फ्लाइट में सफर करने से मना किया. जिसके बाद आयोग ने एयरलाइन की सेवा में कमी पाई और जुर्माना देना का आदेश दिया.&amp;nbsp;
भारत में पेट्रोल दुनिया से 41 रुपए सस्ता, ताकतवर अमेरिका और चीन भी पीछे
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>PNB क्रेडिट कार्ड वालों को झटका, 1 नवंबर से इन 6 सर्विस पर लगेगा भारी चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ दीवाली से पहले पंजाब नेशनल बैंक यानी PNB ने अपने वीजा और रुपे क्रेडिट कार्ड के नियमों और चार्जिस में बड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड से एटीएम से कैश निकालना, लेट पेमेंट फीस और रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम करना महंगा हो गया है. यह बदलाव एक नवंबर से लागू होने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
अब अगर कोई ग्राहक एक बिलिंग साइकिल में 50 हजार रुपए से ज्यादा के यूटिलिटी यानी बिजली, पानी, वाई फाई और एलपीजी जैसे घरेलू बिल भरता है तो उस पर 1% का नया शुल्क वसूला जाएगा. इन बदलावों के बाद अब ग्राहकों को अपने क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने से पहले नए चार्जिस की पूरी लिस्ट ध्यान से देखनी होगी.
कार्ड से किस सर्विस पर कितना लगेगा चार्ज?

रिवॉर्ड रिडिम्प्शन- पहले फ्री था, अब हर बार 99 रुपए देने होंगे.
बिल पेमेंट्स- एक बिलिंग साइकल में 50 हजार रुपए से ज्यादा के बिल क्रेडिट कार्ड से भरोगे तो 1% फीस लगेगी. एक ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 2000 रुपए तक ही खर्च किए जा सकेंगे.
एटीएम से कैश निकालना- पीएनबी के एटीएम पर 2.5% या 400 रुपए जो ज्यादा हो. वहीं, दूसरे बैंक के एटीएम और विदेश में 2.5% या 500 रुपए जो ज्यादा हो. पहले 2% और मिनिमम 100-200 रुपए था.
लेट पेमेंट फीस- अब बकाया पर स्लैब बढ़ा दिया गया है. 501 से 1000 पर 500 रुपए, 1001 से 10 हजार पर 750 रुपए और 10001 से ऊपर पर 1000 रुपए चार्ज वसूला जाएगा. यह पहले 1000 तक Nil था.

बता दें कि इसके अलावा चेक, ऑटो डेबिट रिटर्न, डुपलिकेट स्टेटमेंट के चार्जेज भी बदले हैं. GST अलग से लगेगा और चार्ज कार्ड वेरिएंट के हिसाब से अलग हो सकता है.&amp;nbsp;
वीजा और रुपे क्रेडिट कार्डों के लिए क्रेडिट कार्ड के बकाया भुगतान के लिए जारी किए गए चेक के वापस आने या इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ECS) या ऑटो-डेबिट निर्देश के फेल होने पर भुगतान राशि का 2% (न्यूनतम शुल्क 400 रुपए) का नया चार्ज लागू होगाय
फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े क्रेडिट कार्डों के लिए हर इंस्ट्रूमेंट 100 रुपए का चार्ज लगेगा. फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले जारी किए गए लक्सुरा क्रेडिट कार्ड पर लागू सभी सेवा शुल्क सामान्य लक्सुरा क्रेडिट कार्ड पर लागू होने वाले चार्जिस के समान होंगे.
यह भी पढ़ें- 5 रुपए के Lays में निकले 4 ग्राम चिप्स, अब ग्राहक को 8000 देगी कंपनी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>सोना खरीदने का मौका? 20% गिरावट के बाद एक्सपर्ट ने बताया क्या करें</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा कीमतें आपके लिए अहम हो सकती हैं. पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में अच्छी-खासी उतार-चढ़ाव देखने को मिली है.जनवरी 2026 में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सोना करीब 20% तक सस्ता हो चुका है. 23 अक्टूबर को सोने का भाव घटकर 1,41,031 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया, जो जनवरी के रिकॉर्ड हाई से करीब 19.42% कम था. ऐसे में जिन लोगों ने ऊंचे भाव पर सोना खरीदा था, उन्हें फिलहाल नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, नए निवेशकों के लिए कम कीमत पर सोना खरीदने का मौका बन सकता है.
हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि सोने की कीमतों को फिर से पुराने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने में एक साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है. ऐसे में सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या फिर निवेश के लिए कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत 1,75,231 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. इसके बाद कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अक्टूबर में सोने का भाव 27 अक्टूबर को गिरकर 1,40,664 रुपए प्रति 10 ग्राम तक आ गया. इस तरह जनवरी के रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले सोने की कीमत में करीब 20% की गिरावट दर्ज की गई.
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वजहें हैं. इनमें अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी, अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड यील्ड में उछाल, केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी में कमी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शामिल हैं.
क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
एक्सपर्ट का मानना है कि सोने की कीमतें जल्द ही अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेंगी, इसकी उम्मीद कम है. इसके लिए निवेशकों को एक साल या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, नए निवेशक मौजूदा गिरावट का काफी फायदा उठा सकते हैं.&amp;nbsp;

एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदें.
अपनी निवेश राशि को 4 से 6 हिस्सों में बांटकर अगले 3 से 6 महीने में निवेश करें.
गोल्ड ETF के जरिए भी निवेश का विकल्प चुन सकते हैं.
फिजिकल गोल्ड खरीदने से पहले अपनी जरूरत और निवेश का उद्देश्य समझें.

सोने की कीमतों में कितना उतार-चढ़ाव आया?
MCX पर जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच सोने की कीमतों में काफी बदलाव देखने को मिला है. अलग-अलग महीनों में सोने का भाव कभी बढ़ा तो कभी नीचे आया.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;महीना &amp;nbsp; &amp;nbsp; सबसे ज्यादा भाव (₹/10 ग्राम) &amp;nbsp; सबसे कम भाव (₹/10 ग्राम)&amp;nbsp;
&amp;nbsp;जनवरी &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,76,306 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,32,614&amp;nbsp;फरवरी &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,59,383 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,43,926&amp;nbsp;मार्च &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,67,090 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,33,513&amp;nbsp;अप्रैल &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,52,647 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,46,006&amp;nbsp;मई &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,60,651 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,47,018&amp;nbsp;जून &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,56,132 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,39,714&amp;nbsp;जुलाई &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,45,789 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,39,076&amp;nbsp;अगस्त &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,61,945 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,42,121&amp;nbsp;सितंबर &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,54,494 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,46,566&amp;nbsp;अक्टूबर &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,49,170 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,40,664&amp;nbsp;
PNB क्रेडिट कार्ड वालों को झटका, 1 नवंबर से इन 6 सर्विस पर लगेगा भारी चार्ज
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>FD पर 8.6% तक का ब्याज, इन बड़े बैंकों से मिलेगा बंपर रिटर्न</title>
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        <description><![CDATA[ रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी बनाए रखना बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी वित्तीय जरूरतों में से एक होता है. ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है, क्योंकि इसमें पहले से तय ब्याज मिलता है.
अक्टूबर 2026 में कुछ बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 8.6 फीसदी तक ब्याज देने की पेशकश कर रहे हैं. हालांकि, ज्यादा ब्याज के साथ बैंक की सुरक्षा, निवेश की अवधि और पैसे निकालने की शर्तों को समझना भी जरूरी है.
प्राइवेट बैंकों में किसका ऑफर सबसे बेहतर?
प्राइवेट सेक्टर बैंकों की बात करें तो DCB बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 60 से 61 महीने की एफडी पर 8 फीसदी तक ब्याज दे रहा है. बंधन बैंक में 2 साल से 3 साल से कम अवधि की जमा पर 7.95 फीसदी ब्याज मिल रहा है. वहीं SBM बैंक इंडिया अधिकतम 7.8 फीसदी ब्याज दे रहा है. इंडसइंड बैंक और YES बैंक में भी चुनिंदा अवधियों पर 7.75 फीसदी तक ब्याज उपलब्ध है.
छोटे फाइनेंस बैंक दे रहे हैं सबसे ज्यादा ब्याज
28 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे ज्यादा एफडी ब्याज देने वाले बैंकों में स्मॉल फाइनेंस बैंक आगे हैं. इस सूची में उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक पहले स्थान पर है, जहां 3 साल 1 दिन से लेकर 3 साल 6 महीने की अवधि वाली एफडी पर अधिकतम 8.6 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है.
इसके अलावा इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक और ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक अधिकतम 8.5 फीसदी ब्याज दे रहे हैं. इक्विटास में यह दर 3 साल 1 दिन की अवधि पर, जबकि ESAF में 26 महीने 8 दिन की अवधि पर उपलब्ध है. सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक भी 5 साल की एफडी पर 8.5 फीसदी ब्याज दे रहा है. वहीं जना स्मॉल फाइनेंस बैंक में 3 साल की जमा पर अधिकतम 8.3 फीसदी ब्याज मिल रहा है.
FD कराने से पहले समझ लें सुरक्षा का नियम
ज्यादा ब्याज मिलने का मतलब यह नहीं है कि बिना जांच किए किसी भी बैंक में अपनी पूरी जमा पूंजी निवेश कर दी जाए. डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के नियमों के मुताबिक, बैंक में जमा कुल पात्र राशि पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है. इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं. एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में जमा रकम को जोड़कर यह सीमा तय की जाती है. अलग-अलग बैंकों में जमा राशि के लिए बीमा कवर अलग-अलग लागू होता है.
निवेश से पहले इन बातों पर दें ध्यान
वरिष्ठ नागरिकों को एफडी चुनते समय केवल ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि पैसा कितने समय के लिए जमा करना होगा और जरूरत पड़ने पर समय से पहले निकालने पर कितना जुर्माना लगेगा. इसके अलावा मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर ब्याज लेने के विकल्पों की भी तुलना करनी चाहिए.
खासकर रिटायरमेंट के बाद जिन लोगों का खर्च एफडी से मिलने वाले ब्याज पर निर्भर है, उनके लिए सही अवधि और नियमित भुगतान का विकल्प चुनना महत्वपूर्ण है. बैंक समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव भी कर सकते हैं. इसलिए निवेश करने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर नई दरों और शर्तों की पुष्टि जरूर करें.
सरकारी बैंकों में कितना मिल रहा है ब्याज?
सरकारी बैंकों में भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी के अच्छे विकल्प मौजूद हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे आगे है और वरिष्ठ नागरिकों को चुनिंदा अवधि की एफडी पर अधिकतम 7.45 फीसदी सालाना ब्याज दे रहा है. हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंकों की तुलना में यह दर कम है.
यह भी पढ़ें- Swiggy Zomato और Uber वालों को भी मिलेगा PF-इंश्योरेंस, सरकार ने बनाया बोर्ड
यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <title>8th Pay Commission: फिर उठी DA की 3 पुरानी मांगें, यूनियनों का नया दांव</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार केंद्रीय कर्मचारी बड़ी ही बेसब्री से कर रहे हैं. इसकी रिपोर्ट आने में अभी समय है, ऐसे में कर्मचारी संगठन अपनी मांगे आयोग के सामने रख रहे हैं. हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स संगठनों ने महंगाई भत्ते (DA) को लेकर 3 पुरानी मांगों को दोबारा से सामने रखा है.
कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि DA में हर 3 महीने में बदलाव किया जाए, 25% से ज्यादा होने पर इसे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए और महंगाई भत्ते को इनकम टैक्स से छूट दी जाए. इन मांगों को 8वें वेतन आयोग के सामने रखा गया है. हालांकि अभी तक सरकार ने इनमें से किसी भी मांग को मंजूरी नहीं दी है.
क्या है कर्मचारी संगठनों की मुख्य तीन मांगे8वें वेतन आयोग की बैठकों का दौर जारी है, अलग- अलग राज्यों में कई बैठकें हो रही हैं. पिछले कुछ महीनों में आयोग ने दिल्ली, पश्चिम बंगाल, लद्दाख और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें की हैं. इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ते से जुड़ी तीन पुरानी मांगें फिर उठाया हैं. आइये जानते हैं क्या हैं ये तीन मांगें:
हर 6 महीने की जगह 3 महीने में बढ़े DAफिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में साल में दो बार बदलाव किया जाता है. ये बदलाव आमतौर पर 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होते हैं. महंगाई के आंकड़ों के आधार पर DA बढ़ाने का फैसला लिया जाता है. लेकिन कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि महंगाई भत्ते में हर तीन महीने में बदलाव किया जाए.
DA 25% होने पर बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांगकर्मचारी संगठनों की दूसरी मांग है कि जब महंगाई भत्ता 25% से ज्यादा हो जाए, तो उसे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने 8वें वेतन आयोग को दिए अपने ज्ञापन में ये मांग रखी है. संगठन चाहता है कि DA को बेसिक सैलरी में और पेंशनर्स के DR को बेसिक पेंशन में जोड़ा जाए, जब इसकी दर 25% से ऊपर पहुंच जाए.
महंगाई भत्ते को इनकम टैक्स से छूट देने की मांगकर्मचारी संगठनों की तीसरी मांग है कि महंगाई भत्ते को आयकर यानी इनकम टैक्स से छूट दी जाए. FNPO का कहना है कि DA कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए दिया जाता है. इसलिए इस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए. संगठन ने महंगाई भत्ते के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को भी टैक्स से छूट देने की मांग की है.
कब आएगी रिपोर्ट?बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग का गठन किया था. इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. ये तीन सदस्यों वाला अस्थायी आयोग है. आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के अंदर अपनी आखिरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है. रिपोर्ट तैयार करने से पहले आयोग केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों की मांगों और सुझावों पर विचार करेगा.
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>CBI करेगी PNB घोटाले की जांच, बैंक बोला&amp; 35 नहीं, 10 करोड़ से कम है रकम</title>
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        <description><![CDATA[ नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों रुपये के घोटाले खबर सामने आने के बाद से ही ग्राहक परेशान हैं. इस बैंक में ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति के पैसे ट्रांसफर कर लिए गए हैं. इस मामले में कई बैंक कर्मचारियों को निकाले जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं. तो वहीं अब इस मामले की जांच भी केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI को सौंपी जाएगी.
मामले की शुरुआती जांच के मुताबिक बैंक के एक वरिष्ठ कर्मचारी की साठगांठ से ये सबकुछ हुआ है. बाहरी लोगों की मदद से ब्रांच मैनेजर के पासवर्ड का इस्तेमाल करके कई ग्राहकों के खातों से पैसे ट्रांसफर किए. बैंक का कहना है कि इस धोखाधड़ी में नुकसान की रकम 10 करोड़ रुपये से भी कम है.
12 कर्मचारियों को किया गया सस्पेंडPNB ने इस मामले में कुल 12 कर्मचारियों को सस्पेंड किया है. इनमें वो ब्रांच मैनेजर भी शामिल है, जिसका पासवर्ड कथित तौर पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. बैंक के मुताबिक, इन सभी कर्मचारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया है. फिलहाल बैंक ये पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस मामले में कौन-कौन शामिल था, कितने ग्राहकों के खातों से पैसे निकाले गए और कुल कितनी रकम का नुकसान हुआ.
कितने रुपये का हुआ है फ्रॉड?इस मामले में सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि 35 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है. लेकिन बैंक ने ऐसे किसी भी दावे तो खारिज कर दिया है. बैंक के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, अब तक सामने आए नुकसान की रकम 10 करोड़ रुपये से कम है. हालांकि, जांच अभी चल रही है. इसलिए नुकसान की रकम कितनी है, ये जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा.
कैसे हुआ बैंक में फ्रॉड?बता दें कि PNB के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बैंक की इस शाखा में ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर किए गए. आरोप है कि शाखा में काम करने वाले एक वरिष्ठ कर्मचारी ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर ब्रांच मैनेजर के पासवर्ड का इस्तेमाल किया. इसके जरिए अलग-अलग ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर किए गए.
मामले में एक महिला कर्मचारी की भूमिका भी सामने आने की बात कही जा रही है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, वो कथित तौर पर बाहरी लोगों के साथ मिलकर इन लेन-देन में शामिल थी. हालांकि, इस मामले में सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. बैंक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. साथ ही, पूरे मामले की जांच के लिए CBI में शिकायत दर्ज कराई गई है.
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Uber के 20 लाख ड्राइवरों की मौज, कंपनी ने खोले कमाई के नए रास्ते</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन कैब सर्विस कंपनी Uber अपने ग्राहकों के साथ ही ड्राइवरों का भी ध्यान रखती है. इसी कड़ी में हाल ही में कंपनी ने कैब और बाइक ड्राइवरों के लिए कई नए फीचर्स भी पेश किए हैं. इन फीचर्स की मदद से ड्राइवरों के लिए कमाई करना आसान बहोगा, सुरक्षा बढ़ेगी और कमाई के नए मौके भी बनेंगे. इस बारे में हाल ही में हुए कंपनी के एक कार्यक्रम के दौरान बताया गया है.
दरअसल हाल ही में कंपनी ने Uber प्रगति कार्यक्रम के तीसरे संस्करण का आयोजन किया है. जिसमें कई सुविधाओं की घोषणा की गई है. इनमें व्हॉट्सएप के जरिए ऊबर से जुड़ने, जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस सहायता पाने और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए यात्रा के दौरान हुई घटनाओं के सबूत सुरक्षित रखने जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
Uber ड्राइवरों की मौजUber ने ड्राइवरों से मिले सुझावों के आधार पर कई नए फीचर्स पेश जोड़े हैं. इनका उद्देश्य ड्राइवरों के लिए काम आसान बनाना, सुरक्षा बढ़ाना और कमाई के नए अवसर देना है. आइये जानें क्या नए फीचर्स शामिल किए गए हैं:
काम करने की सुविधानए फीचर्स में ड्राइवरों को काम करने की सुविधा मिलेगी. जिसमें फ्लेक्सिबल ड्राइव पास की सुविधा दी जाएगी, जिसके तहत ड्राइवर अपनी जरूरत के अनुसार 6 घंटे से लेकर 180 दिनों तक का पास चुन सकेंगे. वहीं व्हॉट्सएप क्वकस्टार्ट की मदद से वे व्हॉट्सएप के जरिए ऊबर से जुड़ने की प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे. अर्न फर्स्ट, पे लेटर फीचर के तहत पात्र ड्राइवर बैलेंस खत्म होने के बाद भी तय क्रेडिट लिमिट में कैश राइड स्वीकार कर सकेंगे. इसके अलावा, अब ड्राइवर एप की चैट में यात्रियों को वॉइस नोट भेज पाएंगे. एप में कमाई, ट्रिप की जानकारी और जरूरी अपडेट देखना भी आसान बनाया गया है.
सुरक्षा के लिए नए फीचर्सऊबर ने ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई नए फीचर्स पेश किए हैं. एम्बुलेंस असिस्टेंस के जरिए आपात स्थिति में 24 घंटे उपलब्ध सेफ्टी लाइन से एंबुलेंस सहायता मांगी जा सकेगी. वहीं, रिकॉर्ड माई राइड फीचर यात्रा के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की सुविधा देगा, जो किसी विवाद की स्थिति में मददगार हो सकता है. सेफ्टी कंटेंट फ्लैग आपत्तिजनक मैसेज भेजने से पहले यात्रियों को अलर्ट करेगा.
कुछ मामलों में ड्राइवर ऐसे मैसेज मिलने पर अपनी कैंसिलेशन रेटिंग प्रभावित हुए बिना ट्रिप कैंसिल कर सकेंगे. इसके अलावा, ड्राइवर सेफ्टी हब में ऑडियो रिकॉर्डिंग और ट्रिप शेयरिंग जैसे सुरक्षा टूल एक ही जगह उपलब्ध होंगे.
कमाई बढ़ाने के नए विकल्पइसके अलावा ऊबर ड्राइवरों के लिए कमाई बढ़ाने के लिए भी नए विकल्प दिए जाएंगे जिनमें बाइक से दूसरे शहरों के बीच यात्रियों को ले जाना, कारोबारियों के सामान की डिलीवरी करना, शहर में पार्सल पहुंचाना, पालतू जानवरों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को सेवा देना और नए ड्राइवरों को जोड़ने पर इनाम पाना जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
क्या बोली कंपनी?ऊबर इंडिया और साउथ एशिया में सप्लाई ऑपरेशंस के डायरेक्टर आदित्य कपूर के मुताबिक, कंपनी ड्राइवरों को अपनी सुविधा के अनुसार काम करने, सुरक्षा के बेहतर ऑप्शंस पाने और कमाई के नए अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रही है.
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में शराब की कितनी बोतलें कर सकते हैं ऑनलाइन बुक? जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में रहने वाले लोग अब शराब की बुकिंग ऑनलाइन भी कर सकते हैं. इसके लिए एक एप भी लॉन्च की गई है, जिसके जरिए घर बैठे शराब और बीयर बुक कर सकते हैं. इस एप का नाम दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) ने &#039;दिल्ली लिकर बुकिंग एप&#039; रखा है. लेकिन क्या आपको पता है किइस एप के जरिए एक व्यक्ति कितनी शराब बुक कर सकता है?
नहीं जानते होंगे ना! तो आइये हम आपको बताते हैं कि इस ऑनलाइन बुकिंग एप के जरिए एक व्यक्ति कितनी शारब बुक कर सकता है.
कितनी हो सकती है एक बार में बुकिंग?इस एप के जरिए यदि आप भी शराब की बुकिंग करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक व्यक्ति अधिकतम 9 लीटर व्हिस्की और 18 लीटर बीयर की बुकिंग कर सकता है. इससे ज्यादा की बुकिंग ऑनलाइन नहीं हो पाएगी. इसका मकसद शराब को कंट्रोल्ड &amp;nbsp;क्वांटिटी के हिसाब से इस्तेमाल करना है. ग्राहकों को इन सीमाओं का ध्यान रखकर ही ऑर्डर करना होगा.
तो वहीं दिल्ली के नियमों के अनुसार, 25 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. एप के जरिए ग्राहक अपनी पसंद का ब्रांड चुन सकते हैं, बोतल का साइज और संख्या तय कर सकते हैं और ऑनलाइन भुगतान भी कर सकते हैं.
कैसे होगी बुकिंग?ऑनलाइन शराब बुक करने के लिए सबसे पहले अपने एंड्रॉयड फोन में Delhi Liquor Booking एप डाउनलोड करें. इसके बाद एप खोलकर जरूरी चेतावनी स्वीकार करें और अपने मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उपलब्ध शराब के ब्रांड देखें और अपनी पसंद की शराब चुनें. इसके बाद बोतल का साइज और संख्या तय करें.
इसके बाद DSIIDC की ओर से संचालित उपलब्ध दुकानों में से किसी एक को चुनें. ऑर्डर की जानकारी जांचने के बाद ऑनलाइन भुगतान करें. भुगतान पूरा होने पर एप में बुकिंग कन्फर्मेशन और QR कोड मिलेगा. इसे संभालकर रखें, क्योंकि दुकान से शराब लेते समय इसकी जरूरत होगी.
क्यों शुरू की गई यह सुविधा?बता दें कि इस सुविधा का उद्देश्य शराब की दुकानों पर लगने वाली लंबी लाइनों और भुगतान काउंटरों पर भीड़ को कम करना है. ग्राहक दुकान जाने से पहले उपलब्ध ब्रांड भी देख सकेंगे, जिससे उनका समय बच सकता है.
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>94 लाख थे, बचे सिर्फ 16 हजार, नोएडा PNB घोटाले में सबसे ज्यादा किसान बेहाल</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा की पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी बैंक शाखा से 35 करोड़ रुपए गायब होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. कई खाताधारकों ने अपनी जमा रकम में कथित गड़बड़ी की शिकायत की है, जिनमें सबसे ज्यादा पीड़ित किसान हैं. आरोप है कि लोगों की सालों की बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बड़ी रकम उनकी अनुमति के बिना दूसरे खातों में भेज दी गई.
ग्राहकों का कहना है कि उन्हें न तो ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली और न ही समय रहते कोई अलर्ट आया. मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है.
किसी के खाते में 39 लाख, तो किसी की जमा रकम हुई कम
मामले में एक खाताधारक हनीफ खान ने दावा किया कि उनके खाते में करीब 39 लाख रुपये थे, लेकिन बाद में यह रकम खाते में दिखाई नहीं दी. उनका कहना है कि उन्होंने पैसे ट्रांसफर करने के लिए न तो किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और न ही उन्हें बैंक से कोई मैसेज मिला.
वहीं, किसान विजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके खाते में पहले करीब 87 से 88 लाख रुपये थे, लेकिन अब केवल एक लाख रुपये बचे हैं. यह रकम उन्हें जमीन के मुआवजे के रूप में मिली थी. एक अन्य किसान ने दावा किया है कि उनके बैंक अकाउंट में 94 लाख रुपए थे, लेकिन अब सिर्फ 16 हजार रुपए ही बचे हैं.&amp;nbsp;
एक अन्य शिकायत में विनीत भाटी नाम के किसान ने आरोप लगाया कि 25 लाख रुपये उनके खाते में भेजने के बजाय किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए. उन्होंने पुलिस के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई है.
किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
यह मामला ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर गांव स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा से जुड़ा है. कम से कम 16 खाताधारकों ने आरोप लगाया है कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत खातों से करीब 35 करोड़ रुपये की रकम कथित तौर पर निकाल ली गई या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई. शिकायत करने वालों में ज्यादातर किसान शामिल हैं.
खाताधारकों के मुताबिक, किसी की जमा रकम लाखों में थी, तो किसी ने एक करोड़ रुपये से अधिक बैंक में रखे थे. कुछ ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी FD समय से पहले बंद कर दी गई और पासबुक में दर्ज जानकारी में भी गड़बड़ी मिली. हालांकि, पूरे मामले में कितनी रकम प्रभावित हुई है, इसकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
पैसे वापस मिलने का इंतजार
मंगलवार से शाखा बंद रहने के कारण परेशान खाताधारक बैंक के बाहर जुटे और अपनी रकम लौटाने की मांग की. जिन लोगों की जमा पूंजी जमीन अधिग्रहण के मुआवजे से आई थी, उनके लिए यह मामला और गंभीर है. भारतीय किसान यूनियन ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है और आशंका जताई है कि कथित गड़बड़ी की रकम 130 से 150 करोड़ रुपये तक हो सकती है. हालांकि, इस बड़े आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल पुलिस बैंक रिकॉर्ड और शिकायतों की जांच कर रही है. यह स्पष्ट होना बाकी है कि रकम किस तरह ट्रांसफर हुई और कितने खाते प्रभावित हुए.
बैंक के पांच कर्मचारी निलंबित, FIR दर्ज
शिकायतें सामने आने के बाद PNB ने शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है. बैंक ने अपने स्तर पर भी जांच शुरू की है. पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी है. शिकायतों में कथित तौर पर विश्वासघात और बिना अनुमति पैसों के लेनदेन का आरोप लगाया गया है.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>बिना जुर्माने केस खत्म करने का मौका, सरकार ने बढ़ाई ESIC अमनेस्टी स्कीम</title>
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        <description><![CDATA[ कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने कर्मचारियों के हित के लिए एक नया फैसला किया है. जिसके तहत ESIC की नई एमनेस्टी योजना 2025 की तारीख क तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है. इस बारे में श्रम मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी कर जानकारी दी गई है. जिसमें बताया गया है कि इस यजना की तारीख को तीन महीने तक के लिए आगे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है.
सरकार के इस फैसले से नियोक्ताओं और बीमा करवाने वाले व्यक्तियों को लंबित मामलों को सुलझाने के लिए और ज्यादा अधिक समय मिल जाएगा. इसके साथ ही जुर्माने के ही केस खत्म करने का मौका मिल पाएगा.
क्यों लिया गया फैसला?इसे लेकर कई हितधारकों ने मंत्रालय को सुझाव दिया था, जिसकी समीक्षा के बाद कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने &#039;नई एमनेस्टी योजना, 2025&#039; की अवधि को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है. ये योजना पहले 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक लागू थी, और अब इसे 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
क्या है नई एमनेस्टी योजना?श्रम मंत्रालय के द्वारा शुरू की गई ये कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की &#039;नई एमनेस्टी स्कीम 2025&#039; विवादों के समाधान की एक पहल है. जिसका उद्देश्य है कि अदालत में सालों से लंबित मामलों को कम किया जाए. इसी के साथ पुराने ESI अधिनियम के तहत नियमों का पालन भी सुनिश्चित करना इस योजना का काम है.
इस योजना के तहत नियोक्ताओं को ESIC के साथ कानूनी विवादों को अदालत के बाहर सुलझाने के लिए एक व्यवस्थित मैकेनिज्म देता है. ये योजना वास्तविक योगदान और ब्याज का भुगतान करके एड-हॉक आकलनों को निपटाने में मदद करती है, जिसमें कोई हर्जाना नहीं लगाया जाएगा.
इसी के साथ, जिन मामलों में नियोक्ता पहले ही बकाया राशि का भुगतान कर चुके हैं, वो केस को वापस ले सकते हैं. हालांकि इसके लिए शर्त ये है कि विवादित को हर्जाने की 10% राशि का भुगतान कर दिया जाए.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Video: मुकेश अंबानी नहीं टाल पाए पोते की फरमाइश, खट्ट से निकालकर दिया फोन</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय के बच्चे मोबाइल फोन चलाने के बड़े शौकीन होते हैं. ऐसे में जब बच्चे किसी चीज के लिए जिद करते हैं तो अब लोग उन्हें चुप करवाने के लिए फोन पकड़ा देते हैं. बच्चों की हर जिद के सामने बड़े-बड़े लोग हार जाते हैं. फिर चाहे कोई आम इंसान हो या फिर देश के सबसे अमीर लोगों में शामिल मुकेश अंबानी.
दरअसल, इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी और उनके पोते पृथ्वी अंबानी का एक मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें मुकेश अंबानी अपने पोते पृथ्वी अंबानी को फोन पकड़ाते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और जमकर मजेदार प्रक्रियाएं भी वीडियो पर देखने को मिल रही है.&amp;nbsp;



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कहां का वीडियो है?
बता दें कि ये वीडियो मुंबई में आयोजित जियो प्लेटफॉर्म्स के मेगा IPO लिस्टिंग समारोह का बताया जा रहा है. वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मुकेश अंबानी अपने पोते पृथ्वी अंबानी को अपनी जेब से फोन निकालकर दे रहे हैं. इसी खूबसूरत से पल ने बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. अब लोग इस वीडियो की चर्चा कर रहे हैं और साथ ही मुकेश अंबानी ने अपने पोते के हाथ में कौनसा फोन पकड़वाया है, उसकी भी लगातार चर्चा की जा रही है.&amp;nbsp;
कौनसा मोबाइल है?
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों के बीच इस बात की चर्चा की जा रही है कि आखिर मुकेश अंबानी कौनसा फोन इस्तेमाल करते हैं. वीडियो में देखा गया है कि उनके हाथ में एक सफेद रंग का पतला और आकर्षक फोन है. सोशल मीडिया पर कई सारे यूजर्स इस फोन को iPhone Air बता रहे हैं. वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि ये iPhone का दूसरा मॉडल हो सकता है. हां, लेकिन वीडियो में कौनसा फोन है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो पर लोगों के मजेदार कमेंट्स सामने आ रहे हैं. कई यूजर्स ने कहा कि दादा पोते की हर बात मान ही लेते हैं. वहीं कुछ यूजर्स ने कहा की दादा-पोते के बीच ऐसा ही प्यार होता है. वहीं कुछ यूजर्स का कहना था कि एक दादा ही अपने पोते ही हर जिद पूरी कर सकते हैं. इस ही तरह के कई सारे मजेदार कमेंट्स वीडियो पर देखने को मिल रहे हैं. लोग इस वीडियो को दादा-पोते का प्यार बता रहे हैं.
94 लाख थे, बचे सिर्फ 16 हजार, नोएडा PNB घोटाले में सबसे ज्यादा किसान बेहाल
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Video:, मुकेश, अंबानी, नहीं, टाल, पाए, पोते, की, फरमाइश, खट्ट, से, निकालकर, दिया, फोन</media:keywords>
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        <title>लोन के साथ जबरन बीमा नहीं बेच पाएंगे बैंक, कमीशन भी घटेगा</title>
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        <description><![CDATA[ बीमा पॉलिसी बेचने से होने वाली कमाई बैंकों के लिए आमदनी का एक अहम जरिया है, लेकिन अब इस कारोबार में बदलाव की संभावना बढ़ रही है. बीमा नियामक IRDAI के नए प्रस्ताव से बैंकों को मिलने वाले कमीशन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में बैंक म्यूचुअल फंड, विदेशी मुद्रा कारोबार और दूसरी वित्तीय सेवाओं के जरिए अपनी कमाई को बनाए रखने की रणनीति बना रहे हैं.
बंधन बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ पार्थ प्रतिम सेनगुप्ता के मुताबिक, प्रस्ताव लागू होने पर बैंक की सालाना थर्ड पार्टी प्रोडक्ट से होने वाली आय में करीब 200 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है. बैंक अब म्यूचुअल फंड वितरण, होलसेल बैंकिंग, ट्रेड फाइनेंस और विदेशी मुद्रा सेवाओं से कमाई बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है. छोटे शहरों में बीमा वितरण बढ़ाने की योजना भी है.
क्या है IRDAI का नया प्रस्ताव?
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया है. इसमें अलग-अलग बीमा उत्पादों और उन्हें बेचने वाले माध्यमों के हिसाब से कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव है. बीमा कंपनियों के प्रबंधन और वितरण खर्च की सीमा में बदलाव की भी बात कही गई है. इसका असर उन बैंकों पर पड़ सकता है, जो ग्राहकों को जीवन, स्वास्थ्य और सामान्य बीमा पॉलिसियां बेचकर कमीशन कमाते हैं.
AU और IDFC FIRST बैंक की रणनीति
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक विदेशी मुद्रा कारोबार, क्रेडिट कार्ड और ट्रेड फाइनेंस से आय बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. वहीं, IDFC FIRST बैंक विदेशी मुद्रा जमा पर फंडिंग लागत में बचत, ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और प्रोडक्ट एजेंसी कारोबार के विस्तार से नुकसान को सीमित करना चाहता है.
एक्सिस बैंक को बिक्री बढ़ने की उम्मीद
एक्सिस बैंक कमीशन में संभावित गिरावट की भरपाई के लिए बीमा पॉलिसियों की बिक्री बढ़ाने और उत्पादों के मिश्रण में बदलाव करने पर विचार कर रहा है. बैंक का मानना है कि यदि बीमा की कीमतें कम होती हैं, तो अधिक ग्राहक पॉलिसियां खरीद सकते हैं. इससे बिक्री की संख्या बढ़ने पर कमीशन में कटौती का कुछ असर कम हो सकता है.
HDFC बैंक कर रहा है आकलन
HDFC बैंक भी प्रस्ताव के प्रभाव का आकलन कर रहा है. बैंक का मानना है कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती काफी बड़ी है. हालांकि, बीमा की लागत कम होने से ग्राहकों की संख्या बढ़ने और पॉलिसियों के लंबे समय तक जारी रहने की संभावना भी देखी जा रही है. फिलहाल ये बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर हैं. अंतिम नियम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बैंकों की कमाई पर कितना असर पड़ेगा.
सरकारी बैंकों पर भी पड़ सकता है असर
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रस्ताव लागू होने पर उसकी बीमा वितरण से होने वाली फीस लगभग 33 प्रतिशत घट सकती है. वहीं, केनरा बैंक ने जीवन बीमा वितरण आय पर सालाना 120 से 145 करोड़ रुपये के संभावित असर का अनुमान लगाया है. बैंक के अनुसार, सभी वितरण कारोबारों को मिलाकर प्रभाव 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं रहने की उम्मीद है.
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>RBI Plastic Currency: भारत खुद बनाएगा अपने पॉलिमर नोट, घटेगा छपाई का खर्च</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जब से प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोटों के पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा है. तभी से लोगों के दिमाग में ये सवाल चल रहे हैं कि ये नोट कैसे बनाए जाएंगे. किस तरह के होंगे और कैसे इनकी छपाई होगी. तो वहीं अब सरकार की मंजूरी के बाद भी सवाल जस के तस है. हालांकि ये बात साफ है कि ये नोट भारत में ही छापे जाएंगे.
अब इसके बाद असल सवाल ये है कि क्या भारत के पास इतने बड़े पैमाने पर पूरी तरह से देसी पॉलिमर करेंसी इकोसिस्टम बनाने और उसे बनाए रखने के लिए जरूरी औद्योगिक क्षमता मौजूद है या नहीं? आइये समझते हैं.
कहां छपेंगे प्लास्टिक के नोट?RBI ने सरकार के सामने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों के लिए मंजूरी ली है. इन नोटों की छपाई भारत में ही की जाने वाली है. RBI ने कुल एक अरब पॉलिमर नोटों की छपाई के लिए सरकार की मंजूरी ली है.
नोट की छपाई में आएंगी चुनौतियांहालांकि इसकी छपाई में कुछ चुनौतियों का सामना भी भारत को करना पड़ सकता है. क्योंकि भारत को इन्हें बनाने की तकनीक और क्षमता भी अपने देश में विकसित करनी चाहिए. पॉलिमर नोट बनाना सामान्य प्लास्टिक छापने जैसा काम नहीं है. इसके लिए कई तरह की विशेषज्ञता चाहिए जैसे:

हाई क्वालिटी वाली प्लास्टिक फिल्म बनाना.
खास रसायनों और परतों का इस्तेमाल करना.
सुरक्षा स्याही और नकली नोट रोकने वाली तकनीक विकसित करना.
नोटों की छपाई और गुणवत्ता की कड़ी जांच करना.

भारत में रसायन, प्लास्टिक पैकेजिंग और सुरक्षा से जुड़े उत्पाद बनाने वाले उद्योग पहले से मौजूद हैं. इनकी क्षमताओं को मिलाकर देश में नोट बनाने की पूरी व्यवस्था तैयार की जा सकती है.
RBI का उद्देश्यइन नोटों के पायलट प्रोजेक्ट के पीछे RBI का उद्देश्य है कि ये नोट भारत की गर्मी, बारिश, नमी और रोजमर्रा के इस्तेमाल में कितने कारगर साबित होते हैं. छोटे मूल्य के नोट बाजार में बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास जाते हैं. इसलिए उनके जल्दी खराब होने की समस्या को कम करना जरूरी है.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चांदी सोने से 3 गुना तेजी से लुढ़की, खरीदने से पहले 3 कारण जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ धनतेरस के मौके पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है. इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी. लेकिन त्यौहार के आने से एक हफ्ता पहले ही सोना और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. खास बात ये है कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमत में ज्यादा गिरावट आई है.
जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद इंटरनेशनल मार्केट में चांदी की कीमत आधे से भी ज्यादा गिर चुकी है. वहीं, भारत में चांदी का भाव पिछले हफ्ते 2 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे आ गया.
कितनी आई चांदी की कीमतों में गिरावट?इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 26 अक्टूबर को चांदी की कीमत 1,94,479 रुपये प्रति किलो रही. जबकि 30 सितंबर को इसका भाव 2,20,435 रुपये प्रति किलो था. यानी इस दौरान चांदी की कीमत में करीब 11.8% की गिरावट आई.
सोने की कीमत में आई कितनी गिरावट?तो वहीं सोने की कीमत में गिरावट चांदी की अपेक्षा कम रही. 30 सितंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,888 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 26 अक्टूबर को घटकर 1,41,710 रुपये रह गया. इस तरह सोने की कीमत में करीब 4.2% की कमी आई.
क्यों आ रही चांदी की कीमतों में गिरावट?चांदी की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजहें मुख्य रूप से तीन हैं. जिनके कारण महज एक महीने के अंदर ही चांदी की कीमत में तेजी से गिरावट आई है. आइये जानें क्या हैं ये तीन मुख्य वजहें:

चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में नहीं होता. इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई दूसरे उद्योगों में भी किया जाता है. इसलिए जब उद्योगों की मांग घटती है, तो चांदी की कीमत पर ज्यादा असर पड़ता है.
सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां लागत घटाने के लिए अब हर पैनल में पहले के मुकाबले कम चांदी इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं. इससे चांदी की औद्योगिक मांग पर दबाव पड़ रहा है.
चांदी का बाजार सोने के मुकाबले छोटा है. इसलिए इसमें कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं. जनवरी में चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमत 121 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन अब ये करीब 54 डॉलर पर कारोबार कर रही है. यानी अपने रिकॉर्ड स्तर से इसमें लगभग 56% की गिरावट आ चुकी है.

धनतेरस पर सोना खरीदें या चांदी?धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है. लेकिन त्यौहार से पहले कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत की बात हो सकती है. चांदी सस्ती होने से एक तय बजट में पहले के मुकाबले ज्यादा चांदी खरीदी जा सकती है. हालांकि इसकी कीमतों में अभी भी बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
तो वहीं सोने की कीमत में भी गिरावट आई है, लेकिन ये चांदी के मुकाबले कम रही है. आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और महंगाई के आंकड़ों का दोनों धातुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: RBI Plastic Currency: भारत खुद बनाएगा अपने पॉलिमर नोट, घटेगा छपाई का खर्च ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>चांदी, सोने, से, गुना, तेजी, से, लुढ़की, खरीदने, से, पहले, कारण, जान, लें</media:keywords>
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        <title>दिल्ली में ऑनलाइन बुकिंग के बाद 48 घंटे में लेनी होगी शराब की बोतल, वरना कैंसिल</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में शराब के शौकीनों के लिए एक नई सुविधा शुरू की गई है. अब यहां लोग घर बैठे मोबाइल एप के जरिए शराब की बुकिंग कर सकते हैं. हाल ही में दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने दीवाली से पहले अक्टूबर 2026 में दिल्ली लिकर बुकिंग एप को लॉन्च किया है. इस ऐप की मदद से ग्राहक शराब के उपलब्ध ब्रांड देख सकते हैं और अपनी पसंद की बोतल चुनकर उसे ऑनलाइन बुक कर सकते हैं.
हालांकि, इस सुविधा का मतलब ये नहीं है कि शराब की होम डिलीवरी होगी. ऑनलाइन बुकिंग करने के बाद ग्राहकों को खुद शराब की दुकान पर जाकर अपना ऑर्डर लेना होगा.
ऑनलाइन मिलेगी शराबफिलहाल इस ऐप के जरिए DSIIDC के जरिए चलाई जाने वाली 208 शराब की दुकानों से बुकिंग की जा सकती है. ग्राहक एप पर उपलब्ध शराब के ब्रांड, बोतल का साइज और उसकी संख्या चुन सकते हैं. इसके बाद उन्हें अपनी पसंद की दुकान चुनकर ऑनलाइन पेमेंट करना होगा. बोतल को बुक करने के बाद ग्राहक को खुद दुकान पर जाकर डिलीवरी लना होगी.
48 घंटे में कैंसिल होगी बुकिंगग्राहकों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि उन्हें बुकिंग के 48 घंटे के भीतर ही दुकान पर जाकर बोतल लेना होगी. बुकिंग पूरी होने के बाद एप पर एक QR कोड मिलेगा. ग्राहक को शराब लेते समय ये कोड दुकान के कर्मचारियों को दिखाना होगा. कर्मचारी कोड स्कैन करने के बाद ऑर्डर ग्राहक को सौंप देंगे.
लेकिन अगर आप बुकिंग के 48 घंटे के बाद दुकान पर पहुंचते हैं तो आपकी बुकिंग कैंसिल हो जाएगी. ये बुकिंग केवल 48 घंटे के लिए ही है, उसके बाद यदि कोई अपना ऑर्डर रिसीव करने जाता है तो उसे शराब हीं मिलेगी.
ग्राहक खुद कर सकते हैं ऑर्डर कैंसिल?इस एप के जरिए शराब की घर पर डिलीवरी नहीं की जाएगी. ग्राहकों को उसी दुकान से शराब लेनी होगी, जिसे उन्होंने बुकिंग के समय चुना है. दिल्ली की सभी शराब की दुकानों पर ये सुविधा उपलब्ध नहीं है. एप केकैंसिलेशन नियमों के मुताबिक, ग्राहक शराब लेने से पहले अपना ऑर्डर कैंसिल कर सकते हैं. हालांकि, शराब खरीदने और उसे लेने के बाद उसे वापस नहीं किया जा सकता.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>पायलटों की बढ़ेगी सैलरी, छुट्टियां भी मिलेंगी ज्यादा, इस एयरलाइन ने किया ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पायलटों-की-बढ़ेगी-सैलरी-छुट्टियां-भी-मिलेंगी-ज्यादा-इस-एयरलाइन-ने-किया-ऐलान</link>
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        <description><![CDATA[ देश की बड़ी लो-कॉस्ट एयरलाइंस ने दीवाली से पहले अपने पायलटों के लिए एक बड़ा राहत भरा ऐलान किया है. कंपनी ने पायलटों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है. ये एयरलाइन कोई और नहीं बल्कि अकासा एयरलाइन हैं, जो पायलटों की सैलरी में 20% तक बढ़ोतरी करने वाली है. इसके अलावा, हर महीने उड़ान भरने के मिनिमम गारंटीड घंटों और सालाना छुट्टियों की संख्या में भी इजाफा किया जाने वाला है.
इन बदलावों का फायदा कंपनी में काम करने वाले 800 से ज्यादा पायलटों को मिल सकता है. जानकारी के मुताबिक, सैलरी और छुट्टियों से जुड़े नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. कंपनी ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जब वो अपने विमानों और उड़ानों की संख्या बढ़ा रही है.
20% बढ़ेगी पायलटों की सैलरीदरअसल अकासा एयर पायलटों की सैलरी के दो हिस्सों में बदलाव करेगी. इसमें उनकी तय मासिक सैलरी और उड़ान के घंटों के हिसाब से मिलने वाला भुगतान भी शामिल है. इन दोनों में बदलाव के बाद पायलटों की कुल सैलरी में अधिकतम 20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, हर पायलट की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, ये उसके सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा.
छुट्टियां भी बढ़ेंगीकेवल सैलरी ही नहीं बल्कि कंपनी ने पायलटों की सालाना छुट्टियां भी बढ़ाने का फैसला किया है. नए नियमों के तहत पायलटों को साल में कम से कम 42 दिन की छुट्टी मिलेगी. पायलट अपनी पसंद से वर्क शेड्यूल का ऑप्शन चुन सकते हैं. उनके चुने गए ऑप्शंस के आधार पर छुट्टियों की संख्या 42 दिनों से ज्यादा भी हो सकती है.
हर महीने गारंटीड उड़ानइसके अलावा कंपनी ने पायलटों के लिए हर महीने उड़ान के मिनिमम गारंटीड घंटों को बढ़ाकर 50 करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि तय कार्य व्यवस्था के तहत पायलटों को महीने में 50 घंटे के लिए गारंटीड भुगतान मिलेगा. अगर किसी महीने पायलट की वास्तविक उड़ान के घंटे कम रहते हैं, तब भी निर्धारित शर्तों के अनुसार उसे इन मिनिमम घंटों का भुगतान मिल सकता है. इससे पायलटों की मासिक कमाई को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोना&amp;चांदी खरीदने वालों को झटका या राहत? MCX पर आज दोनों के दाम गिरे, जानें ताजा भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोना-चांदी-खरीदने-वालों-को-झटका-या-राहत-mcx-पर-आज-दोनों-के-दाम-गिरे-जानें-ताजा-भाव</link>
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        <description><![CDATA[ दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी करने की तैयारी कर रहे हैं तो आज के ताजा भाव जरूर जान लीजिए. आज का दिन खरीदारी करने वालों के लिए अच्छा है. क्योंकि आज, बुधवार, 28 अक्टूबर को बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. MCX पर सोना 38 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया तो वहीं, चांदी की कीमत में 206 रुपए की कमी आ गई है.
त्योहारों के मौसम में सोने-चांदी की कीमतों पर खरीदारों की खूब नजर बनी हुई है. ऐसे में सवाल है कि क्या आज की गिरावट से खरीदारी का मौका मिला है? आइए जानते हैं आज सोने-चांदी का ताजा भाव कितना है और गहने खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.&amp;nbsp;
आज सोने का भाव कितना है?MCX पर सोने और चांदी के वायदा भाव में आज मामूली गिरावट देखने को मिल रही है. पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,44,138 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. लेकिन आज इसमें 38 रुपए की कमी आई है और इसी से साथ इसका भाव 1,44,100 रुपए हो गया है.&amp;nbsp;



नाम
पुराना रेट
नया रेट
कितना सस्ता हुआ?


सोना (10 ग्राम)
1,44,138 रुपए
1,44,100 रुपए
38 रुपए


चांदी (1 किलो)
1,96,717 रुपए
1,96,511 रुपए
206 रुपए



चांदी की कीमत में भी आई कमीसोने के साथ चांदी का भाव भी आज नीचे आया है. MCX पर चांदी आज 206 रुपए सस्ती होकर 1,96,511 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है. दिवाली पर चांदी के सिक्के, बर्तन और दूसरी चीजें खरीदने वाले लोगों के लिए कीमतों में ये बदलाव देखने लायक है.
खरीदारी के समय इन बातों का रखें ध्यानअगर आप दिवाली या धनतेरस पर गहने खरीदने जा रहे हैं तो सबसे पहले तो हॉलमार्क जरूर देखें. सोने की शुद्धता की पुष्टि के लिए BIS हॉलमार्क और HUID की जांच करें और दुकानदार से हमेशा मेकिंग चार्ज पूछें. असल में एक ही वजन के गहनों पर अलग-अलग दुकानों में मेकिंग चार्ज अलग हो सकता है. हमेशा पक्का बिल लें और MCX और ज्वेलर के रेट में अंतर समझें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोना-चांदी, खरीदने, वालों, को, झटका, या, राहत, MCX, पर, आज, दोनों, के, दाम, गिरे, जानें, ताजा, भाव</media:keywords>
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        <title>Gold Rate Today: अब सोना नहीं खरीद रहे सुनार, ग्राहकों के साथ ज्वेलर्स भी कंफ्यूज</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कीमतों में गिरावट के बावजूद बड़े ज्वैलर्स खरीदारी को लेकर सतर्क हैं. कारोबारियों को उम्मीद है कि सोने के दाम में अभी और कमी आ सकती है. इस संभावना के चलते कई बड़ी ज्वैलरी कंपनियां फिलहाल भारी मात्रा में सोना खरीदने से बच रही हैं. इससे त्योहारों के दौरान बाजार की मांग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
कीमती धातुओं को रिफाइन करने वाली कंपनी MMTC-PAMP के प्रमुख समीत गुहा के अनुसार, बड़ी ज्वैलरी कंपनियां अभी पूरी तरह खरीदारी के लिए बाजार में नहीं लौटी हैं. इसके विपरीत, छोटे और मध्यम स्तर के ज्वैलर्स अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. कुछ कारोबारियों ने दोबारा ऑर्डर भी दिए हैं.
ज्वैलरी कारोबार में कीमतों की दिशा का काफी महत्व होता है. जब सोने के दाम बढ़ने लगते हैं, तो कंपनियां भविष्य में महंगी खरीदारी से बचने के लिए पहले ही स्टॉक जमा कर सकती हैं. लेकिन अगर उन्हें लगता है कि भाव आगे और गिरेंगे, तो वे मौजूदा स्टॉक का इस्तेमाल करते हुए नई खरीदारी टाल सकती हैं.
रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आया सोने का भाव
जनवरी 2026 में सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का दौर शुरू हुआ. 28 अक्टूबर 2026 को रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगभग 24 फीसदी तक गिर चुकी थी. पिछले सप्ताह इसका भाव 4 हजार डॉलर प्रति औंस से भी नीचे चला गया, जो जुलाई के बाद का निचला स्तर था. कीमतों में इस बदलाव के बावजूद बड़े ज्वैलर्स जल्दबाजी में स्टॉक बढ़ाने के बजाय बाजार की अगली चाल का इंतजार कर रहे हैं.
त्योहारों से पहले बाजार की नजर कीमतों पर
अक्टूबर से दिसंबर का समय भारत में सोने की खरीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह के कारण इस अवधि में मांग बढ़ती है. हालांकि, इस बार कीमतों में उतार-चढ़ाव और आगे और गिरावट की आशंका खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रही है.
MMTC-PAMP के मुताबिक, कंपनी की सोने की बिक्री पिछले साल के स्तर से नीचे चल रही है. सितंबर में बिक्री लगभग पिछले साल जितनी रही, जबकि अक्टूबर में थोड़ी तेजी दिखाई दी.
कुल मिलाकर, सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद बड़े ज्वैलर्स फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं. अगर भाव दोबारा बढ़ने लगते हैं, तो खरीदारी तेज हो सकती है. वहीं, कीमतें और नीचे जाने की स्थिति में कारोबारी कुछ समय तक इंतजार करना पसंद कर सकते हैं. ऐसे में आने वाले सप्ताह सोने की मांग और ज्वैलरी कारोबार की दिशा तय करने में अहम होंगे.
आयात शुल्क और कमजोर मांग का भी असर
भारत में सोने की मांग पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों परिस्थितियों का प्रभाव पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने से खरीदारी प्रभावित हुई है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से मंगाता है, इसलिए आयात पर लगने वाला शुल्क घरेलू बाजार की लागत को भी प्रभावित करता है.
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में मांग कमजोर रहने और आयात से जुड़े नियमों के सख्त होने से भी कारोबार पर दबाव पड़ सकता है. ऐसे माहौल में ज्वैलर्स अपनी जरूरत और संभावित कीमतों को ध्यान में रखकर खरीदारी की योजना बना रहे हैं.
यह भी पढ़ें- क्या आज होने वाला है DA का ऐलान? केंद्रीय कर्मचारियों को दिवाली से पहले मिल सकती है खुशखबरी
यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Microsoft में नौकरी छोड़ने के लिए मिल रहे हैं 11 लाख रुपए, क्या है VEO?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/microsoft-में-नौकरी-छोड़ने-के-लिए-मिल-रहे-हैं-11-लाख-रुपए-क्या-है-veo</link>
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        <description><![CDATA[ माइक्रोसॉफ्ट ने 26 अक्टूबर को वॉलंटरी एग्जिट ऑफर यानी VEO की घोषणा की थी. इस स्कीम में कंपनी के कुछ चुनिंदा विभागों में कर्मचारियों को कुछ महीनों की बेसिक सैलरी के साथ 1 दिसंबर तक नौकरी छोड़ने का ऑप्शन दिया गया है. ऑफर चुनने वाले मिडिल-लेवल कर्मचारियों को 39 सप्ताह की बेसिक सैलरी और सीनियर-लेवल कर्मचारियों को 12 महीने की बेसिक सैलरी दी जा रही है
ये ऑफर भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में भी लागू है. लेकिन क्या आपको वॉलंटरी एग्जिट ऑफर के बारे में पता है? यहां से समझिए कि VEO क्या है और इस ऑफर के मिलने के बाद इंजीनियर ने सोशल मीडिया पर लोगों से क्या राय मांगी है. साथ ही समझेंगे कि VEO फायदे का सौदा है या फिर इसमें नुकसान है.&amp;nbsp;
क्या है वॉलंटरी एग्जिट ऑफर?
वॉलंटरी एग्जिट ऑफर एक कॉर्पोरेट प्लान है, जिसमें कंपनी छंटनी करने की बजाय अपने कर्मचारियों को अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का ऑप्शन देती है. माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत और 4 दूसरे देशों में अपने 60000 कर्मचारियों के लिए इस तरह के वॉलंटरी एग्जिट ऑफर दिए हैं.
इंजीनियर ने क्या पूछा?सोशल मीडिया हैंडल Reddit पर हैदराबाद के एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर ने बताया कि उन्हें माइक्रोसॉफ्ट छोड़ने के बदले 11 लाख रुपए का ऑफर मिला है. फिर उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उन्हें ये पैसे लेकर कंपनी छोड़ देनी चाहिए. 11 लाख रुपए उनकी तीन महीने की सैलरी के बराबर है. लेकिन मुश्किल ये भी है कि नौकरी छोड़ने के बाद अगली नौकरी कब मिलेगी, ये फिक्स नहीं है. अगर उन्हें तुरंत दूसरी नौकरी नहीं मिलती तो 11 लाख रुपए से कितने समय तक खर्च चल पाएगा, ये भी परेशानी वाली बात है.&amp;nbsp;
Reddit पर लोगों ने क्या दी राय?इस पोस्ट पर लोगों की अलग- अलग दी है. कुछ लोगों का मानना है कि जब तक दूसरी नौकरी पक्की न हो तब तक नौकरी छोड़ना सही नहीं होगा. वैसे भी आईटी सेक्टर में नई नौकरी ढूंढने में समय लग सकता है. वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी के पास बचत है और वो पहले से नौकरी बदलने या ब्रेक लेने की सोच रहा है तो ये ऑफर उसके लिए बेस्ट है.&amp;nbsp;
ऑफर ठुकराने पर भी जाएगी नौकरी?कई कर्मचारियों के मन में ये सवाल भी है कि क्या ऑफर नहीं लेने पर नौकरी जाने का खतरा बना हुआ है. लेकिन माइक्रोसॉफ्ट ने अपने ऑफिशियल बयान में ये नहीं कहा है कि जो कर्मचारी VEO स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा. कंपनी ने इसे पूरी तरह स्वैच्छिक बताया और कहा है कि ये केवल चुनिंदा विभागों में लागू है.
चांदी 50% सस्ती, जनवरी से आधी रह गई कीमत, खरीदें या और इंतजार करें?
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Microsoft, में, नौकरी, छोड़ने, के, लिए, मिल, रहे, हैं, लाख, रुपए, क्या, है, VEO</media:keywords>
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        <title>Jio लिस्टिंग पर मुकेश अंबानी की आंखों में आए आंसू, बेटी ईशा ने सुनाया 1977 का किस्सा</title>
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        <description><![CDATA[ सालों की कड़ी मेहनत के बाद परिवार के सपने सच होते हैं तो आंखों में खुशी के आंसू आ ही जाते हैं. कुछ ऐसा ही बुधवार को जियो प्लेटफॉमर्स की IPO लिस्टिंग के दौरान देखने को मिला है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपनी बेटी ईशा अंबानी की बातें सुनकर भावुक हो गए. ईशा अंबानी ने इस दौरान साल 1977 से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया.
बता दें कि इस खास मौके पर बेटी ईशा अंबानी और बेटे अनंत अंबानी ने जियो के सफर और कंपनी की सफलता के बारे में बात की. ईशा अंबानी ने अपने पिता के पुराने दिनों को याद करते हुए 1977 का एक किस्सा सुनाया. उस समय मुकेश अंबानी केवल 20 साल के थे. वह रिलायंस के पहले IPO पर काम कर रहे थे. जब ईशा अंबानी ने उनसे जुड़े किस्से की बात की तो मुकेश अंबानी भावुक होते नजर आए.&amp;nbsp;

VIDEO | Mumbai: Dalal Street welcomes Jio Platforms as it makes market debut after a blockbuster IPO. Reliance Industries Executive Director Anant Ambani says, &amp;ldquo;Once-barren land of Jamnagar turned into the site of the world&#039;s largest refinery. He showed the world that when India builds, the world takes notice. Then came the New India, the young India, and a new dream: internet in every hand and the world within reach of every village. The name of that dream was Jio. The seed of this dream was planted by Isha Didi, and Akash Bhai made that seed his own dream. Jio was then taken to every corner of the country.&amp;rdquo; (Source: Jio YT) (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) October 28, 2026



शेयर बाजार में लिस्ट हुआ Jio&amp;nbsp;
Jio प्लेटफॉर्म्स ने बुधवार को शेयर बाजार में एंट्री की है. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ बीएसई और एनएसई पर 21 फीसदी से कुछ ज्यादा प्रीमियम के साथ 1358 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ.
इस मौके पर ईशा ने ये भी बताया कि जियो ने लगभग 10 साल में बड़ी सफलता हासिल की है. उनके मुताबिक, इस साल कंपनी का रेवेन्यू लगभग 15.5 अरब डॉलर और वास्तविक कमाई करीब 8 अरब डॉलर रही.&amp;nbsp;
1977 के दिनों को किया याद
ईशा अंबानी ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले फैमिली डिनर के दौरान उनके पिता 1977 के दिनों को याद कर रहे थे. उन्होंने ये बताया कि अभी कुछ दिन पहले उनके पिता 1977 के अपने दिनों को याद कर रहे थे. ईशा ने बताया कि उनके दादा धीरूभाई अंबानी चाहते थे कि आम लोग भी कंपनी की तरक्की में हिस्सेदार बनें. इसी सोच के साथ ही रिलायंस को आम निवेशकों से जोड़ने का फैसला लिया गया था.&amp;nbsp;
आकाश अंबानी की तारीफ की
ईशा ने कहा कि जियो की लिस्टिंग सफर का अंत नहीं है, बल्कि ये एक नई शुरुआत है. कंपनी आगे भी अपने निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने की कोशिश करेंगी. इसके साथ ही ईशा ने अपने भाई आकाश अंबानी की मेहनत की तारीफ भी की और कहां कि जियो के साथ 13 साल के इस सफर में उनके भाई ने काफी मेहनत की है. इस दौरान अनंत अंबानी ने भी जियो पर भरोसा करने वाले ग्राहकों का धन्यवाद किया.
Gold Rate Today: अब सोना नहीं खरीद रहे सुनार, ग्राहकों के साथ ज्वेलर्स भी कंफ्यूज
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Finanza Personnel App: सिर्फ 199 रुपए में पाएं अपनी वित्तीय सेहत का रिपोर्ट कार्ड, दूर होगी हर उलझन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/finanza-personnel-app-सिर्फ-199-रुपए-में-पाएं-अपनी-वित्तीय-सेहत-का-रिपोर्ट-कार्ड-दूर-होगी-हर-उलझन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/finanza-personnel-app-सिर्फ-199-रुपए-में-पाएं-अपनी-वित्तीय-सेहत-का-रिपोर्ट-कार्ड-दूर-होगी-हर-उलझन</guid>
        <description><![CDATA[ आज के दौर में अच्छी सैलरी पाना ही काफी नहीं है, बल्कि उस पैसे का सही प्रबंधन करना उससे भी ज्यादा जरूरी हो गया है. इसी समस्या का समाधान लेकर Finanza Personnel नामक एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म सामने आया है, जो खासतौर पर 30 से 55 साल की उम्र के वेतनभोगी पेशेवरों के लिए डिजाइन किया गया है. यह ऐप यह समझने में मदद करता है कि कोई व्यक्ति वित्तीय सलाह लेने से पहले अपनी असल आर्थिक स्थिति में कहां खड़ा है.
यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को 100 में से एक &#039;फाइनेंशियल हेल्थ स्कोर&#039; देता है. यह स्कोर कुल 7 प्रमुख वित्तीय क्षेत्रों के आधार पर तय किया जाता है, जिनमें शामिल हैं...

इमरजेंसी फंड
निवेश
लोन और कर्ज
बीमा
टैक्सेशन
महंगाई का असर
उत्तराधिकार या भविष्य की योजना

इसके जरिए उपयोगकर्ता अपनी वित्तीय स्थिति की कमियों को पहचान सकते हैं और उन्हें सुधारने के उपाय जान सकते हैं.
कैसे काम करता है यह प्लेटफॉर्म?
रजिस्ट्रेशन और भुगतान- यूजर का नाम, ईमेल और मोबाइल नंबर साझा करके केवल 199 रुपए के शुरुआती शुल्क के साथ इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं. इसमें 7 दिन की रिफंड पॉलिसी का वादा भी दिया गया है.

क्विज- लगभग 2 से 10 मिनट की एक छोटी सी क्विज भरनी होती है, जिसके आधार पर वित्तीय स्थिति का आकलन किया जाता है.
रिपोर्ट और एक्शन प्लान- मूल्यांकन के बाद यूजर को उनकी कमियों की सूची और अगले 30 दिनों में सुधार के लिए एक ठोस &#039;30-Day Action Plan&#039; मिलता है. इस प्लेटफॉर्म के संस्थापक वित्तीय बाजार के जाने-माने विशेषज्ञ हैं.

के. शंकर- सह-संस्थापक और सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र हैं, जिन्हें वित्तीय अनुसंधान में लगभग 22 सालों का अनुभव है. वह बिना किसी कमिशन या थर्ड-पार्टी प्रॉडक्ट्स के केवल फिक्स फीस पर परिवारों को सलाह देते हैं.
अमिताभ तिवारी- सह-संस्थापक हैं, जिनके पास BFSI और मार्केट रिसर्च का दो दशकों का अनुभव है. उनकी पैनी नजर अर्थव्यवस्था, नीतियों और घरेलू वित्त पर रहती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर अपनी वित्तीय सेहत की जांच करने से भविष्य के बड़े आर्थिक संकटों से बचा जा सकता है और Finanza Personnel जैसी पहल आम लोगों के लिए वित्तीय साक्षरता को बेहद आसान और सुलभ बना रही है.
यह भी पढ़ें- Microsoft में नौकरी छोड़ने के लिए मिल रहे हैं 11 लाख रुपए, क्या है VEO? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission: सभी फिटमेंट फैक्टर पर वेतन का गणित समझिए</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी इस समय 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बड़ी ही बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे हैं. इस समय जो सबसे ज्यादा बड़ा चर्चा का विषय है वो है फिटमेंट फैक्टर. क्योंकि इसी से कर्मचारियों की सैलरी तय होती है. ऐसे में आइये समझते हैं फिटमेंट फैक्टर का गणित क्या कहता है.
हालांकि फिलहाल 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है. चर्चा के मुताबिक 1.83, 2.00, 2.57, 3.83 और 4.00 जैसे आंकड़ों को लेकर चर्चा चल रही है. तो आइये जानते हैं कि कितने फिटमेंट फैक्टर पर कितनी सैलरी बढ़ेगी.
अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर में कितनी होगी बेसिक सैलरी?अलग- अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर अलग- अलग सैलरी बढ़ती है. तो आइये समझते हैं इसका गणित और जानते हैं कि 7वें वेतन आयोग की मौजूदा बेसिक सैलरी के आधार पर 8वें वेतन आयोग की बेसिक सैलरी में संभावित किकितनी बढ़ोतरी हो सकती है.



पे लेवल
अभी की बेसिक सैलरी
फैक्टर 1.83
फैक्टर 2.00
फैक्टर 2.57
फैक्टर 3.83
फैक्टर 4.00


लेवल 1
18,000 रुपये
32,940 रुपये
36,000 रुपये
46,260 रुपये
68,940 रुपये
72,000 रुपये


लेवल 2
19,900 रुपये
36,417 रुपये
39,800 रुपये
51,143 रुपये
76,217 रुपये
79,600 रुपये&amp;nbsp;


लेवल 3
21,700 रुपये
39,711 रुपये
43,400 रुपये
55,769 रुपये
83,111 रुपये
86,800 रुपये


लेवल 4
25,500 रुपये
46,665 रुपये
51,000 रुपये
65,535 रुपये
97,665 रुपये
1,02,000 रुपये&amp;nbsp;


लेवल 5
29,200 रुपये
53,436 रुपये
58,400 रुपये
75,044 रुपये
1,11,836 रुपये
1,16,800 रुपये&amp;nbsp;


लेवल 6
35,400 रुपये
64,782 रुपये
70,800 रुपये
90,978 रुपये
1,35,582 रुपये
1,41,600 रुपये


लेवल 7&amp;nbsp;
44,900 रुपये
82,167 रुपये
89,800 रुपये
1,15,393 रुपये
1,71,967 रुपये
1,79,600 रुपये



कौन सा फिटमेंट फैक्टर मिलने की है संभावना?वैसे तो किसी भी बैठक में फिलहाल फिटमेंट फैक्टर तय नहीं किया गया है. लेकिन अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने इसकी अलग- अलग मांग की है. तो वहीं कई विशेषज्ञों का अनुमान भी अलग अलग है. कई कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की ओर से 3.83 से 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है.
कब आएगी रिपोर्ट?बता दें कि 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए नवंबर 2025 में गठन के बाद 18 महीने का समय दिया गया है. इसके अनुसार रिपोर्ट की समय-सीमा मई 2027 तक है. रिपोर्ट आने के बाद भी सिफारिशों को लागू करने में समय लग सकता है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें: Swiggy का बड़ा तोहफा, 25 लाख डिलीवरी बॉय को देगी 10 लाख का बीमा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, सभी, फिटमेंट, फैक्टर, पर, वेतन, का, गणित, समझिए</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>2027 तक आसमान छुएंगे सोने के दाम, 2 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंचेगा भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/2027-तक-आसमान-छुएंगे-सोने-के-दाम-2-लाख-प्रति-10-ग्राम-पहुंचेगा-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/2027-तक-आसमान-छुएंगे-सोने-के-दाम-2-लाख-प्रति-10-ग्राम-पहुंचेगा-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ आजकल सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. कभी भाव तेजी से बढ़ते हैं, तो कभी गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है. ऐसे में अगर आप भी सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले समय में इसकी कीमतों पर नजर रखना जरूरी है. सोने के भाव में उतार-चढ़ाव के बीच बाजार के जानकारों का अनुमान है कि साल 2027 तक इसकी कीमत 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच सकती है.
दरअसल, सोने की कीमत पर अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया में चल रहे तनाव का असर पड़ता है. इसके अलावा, चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी भी इसकी मांग को प्रभावित करती है.
2027 तक कितना हो सकता है सोने का भाव?
जेपी मॉर्गन की जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, सोने का भाव 2026 के आखिर तक 6,000 डॉलर (करीब 5.5 लाख रुपए) और 2027 के अंत तक 6,300 डॉलर (करीब 5.8 लाख रुपए) प्रति औंस तक पहुंच सकता है. रुपए और डॉलर की विनिमय दर को ध्यान में रखते हुए, यह अनुमान भारतीय बाजार में सोने की कीमत करीब 2.13 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की उम्मीद है.
सोने की कीमतों में तेजी की क्या है वजह?
सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की अहम भूमिका होती है. जब डॉलर कमजोर होता है या बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न कम होता है, तो निवेशकों के लिए सोना आकर्षक ऑप्शन बन सकता है. वहीं, डॉलर मजबूत होने और ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है.
क्या सोना 2 लाख रुपए के पार जा सकता है?
सोने की कीमत को 2 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचने के लिए कई परिस्थितियों का साथ देना जरूरी होगा. एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर वैश्विक परिस्थितियां सोने के पक्ष में रहती हैं, तो इसकी कीमत 2027 तक 1.70 लाख से 2 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है. वहीं, चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी भी इसकी मांग को समर्थन दे सकती है.&amp;nbsp;
क्या बिकने वाला है बंधन बैंक? ग्राहक-निवेशक जान लें बड़ा अपडेट
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैंक अकाउंट में सालों से नहीं हुआ कोई ट्रांजैक्शन, क्या डूब जाएगा आपका पैसा?</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार लोग पुराने बैंक खाते को इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं और उसमें जमा रकम की तरफ ध्यान छोड़ देते हैं. खासतौर पर नौकरी बदलने, दूसरे शहर शिफ्ट होने या नया बैंक खाता खुलवाने के बाद ऐसा अक्सर देखने को मिलता है. वहीं, खाते में जमा रकम भी सालों तक पड़ी रह जाती है. ऐसे में अक्सर लोगों कि मन में यह सवाल आता है कि क्या लंबे समय तक लेनदेन नहीं करने पर आपका पैसा डूब सकता है?
बड़ी बात है कि लंबे समय तक ट्रांजेक्शन नहीं होने से आपका पैसा खत्म नहीं होता, लेकिन बैंक खाते पर कुछ पाबंदियां लगा सकता है. अगर आपका बैंक अकाउंट भी लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो यह खबर आपके काम की है.
ट्रांजैक्शन नहीं होने पर कब बंद होता है खाता?
12 महीने तक लेनदेन नहीं होने पर बैंक खाते को इनएक्टिव मान सकता है. हालांकि, खाते की स्थिति बैंक के नियमों पर निर्भर करती है. वहीं, अगर खाते में लगातार 24 महीने यानी 2 साल तक ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन नहीं होता है, तो उसे इनऑपरेटिव या डॉर्मेंट अकाउंट किया जा सकता है. खाता इनऑपरेटिव होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें जमा रकम खत्म हो जाती है, बल्कि बचत खाते में लागू नियमों के मुताबिक ब्याज मिलता रहता है.
10 साल तक खाते में पैसा पड़ा रहे तो क्या होगा?
अगर किसी बैंक खाते में लगातार 10 साल तक कोई ट्रांजैक्शन नहीं होता है या जमा रकम पर दावा नहीं किया जाता है, तो बैंक उस रकम को भारतीय रिजर्व बैंक के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर कर देता है. हालांकि, इसका मतलब यह हरगिज नहीं है कि आपका पैसा सरकार का हो गया या आप उसे वापस नहीं ले सकते. ऐसे में आप या आपका कानूनी वारिस जरूरी डॉक्युमेंट जमा करके बैंक से रकम वापस लेने का दावा कर सकता है.
पुराना बैंक अकाउंट दोबारा कैसे चालू कराएं?
जिस बैंक में आपका पुराना खाता है, उसकी संबंधित शाखा से संपर्क करें और खाते को दोबारा चालू करने के लिए आवेदन करें. इसके बाद बैंक की जरूरत के मुताबिक जरूरी KYC अपडेट कराएं. खाते को दोबारा ऐक्टिव करने के लिए बैंक का निर्धारित फॉर्म या आवेदन जमा करें. जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक खाते को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया पूरी करेगा.
2027 तक आसमान छुएंगे सोने के दाम, 2 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंचेगा भाव
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>6.5 करोड़ का Lamborghini वाला घर, 3 महीने में अमीरों ने सब खरीद लिए</title>
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        <description><![CDATA[ गुरुग्राम में लग्जरी घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसका एक उदाहरण सिग्नेचर ग्लोबल का टोनिनो लैम्बोर्गिनी रेसिडेंस प्रोजेक्ट है. कंपनी ने मंगलवार को बताया कि इस प्रोजेक्ट का पहला फेज तीन महीने से भी कम समय में पूरी तरह बिक गया है. अब कंपनी दूसरे फेज को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है.
ये प्रोजेक्ट इटली के मशहूर लग्जरी लाइफस्टाइल ब्रांड टोनिनो लैम्बोर्गिनी के साथ मिलकर बनाया जा रहा है. ये भारत में इस ब्रांड से जुड़ा पहला रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट है.
कितनी होगी घरों की कीमत?ये प्रोजेक्ट गुरुग्राम के सेक्टर-71 में साउथर्न पेरिफेरल रोड (SPR) पर स्थित है. इसमें 3, 4 और 4.5 BHK &amp;nbsp;लग्जरी घर बनाए जाएंगे. प्रॉपर्टी पोर्टल्स के अनुसार, यहां घरों की अनुमानित कीमत 4.5 करोड़ रुपये से 6.5 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है. हालांकि, कंपनी ने दूसरे फेज के लिए अभी कीमतों के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है.
स्क्वायर यार्ड्स के मुताबिक, यहां 3 BHK का एक घर लगभग 4.71 करोड़ रुपये में मिल सकता है. इसका आकार करीब 2,050 वर्ग फुट है. वहीं, 2,700 वर्ग फुट के 4 BHK घर की अनुमानित कीमत 6.21 करोड़ रुपये है.
इटैलियन डिजाइन वाले टावरये प्रोजेक्ट करीब 12.40 एकड़ में फैला होगा. इसमें कुल पांच टावर बनाए जाएंगे, जिनमें हर टावर में ग्राउंड फ्लोर के अलावा 41 मंजिलें होंगी. इस प्रोजेक्ट में कम घरों के साथ ज्यादा खुली जगह और बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान दिया गया है. हर फ्लोर के एक हिस्से में चार घर होंगे.
कौन कर रहा प्रोजेक्ट डिजाइन?प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग में अमेरिका की हैंडल आर्किटेक्ट्स, बोस ब्रदर्स आर्किटेक्ट्स और इंटीरियर डिजाइनर कार्लोस रोजी शामिल हैं. इसकी डिजाइनिंग टोनिनो लैम्बोर्गिनी की क्रिएटिव डायरेक्टर एंजेला क्रीगर तय कर रही हैं.
बेहतर कनेक्टिविटी का मिलेगा फायदाये प्रोजेक्ट साउथर्न पेरिफेरल रोड पर स्थित है. यहां से द्वारका एक्सप्रेसवे, NH-48, गोल्फ कोर्स रोड और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचना आसान होगा. सिग्नेचर ग्लोबल के बड़े SG SPR एस्टेट प्रोजेक्ट में 25 एकड़ का कमर्शियल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट भी शामिल है. इसे RMZ कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है.
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मस्क का नया कमाल, &amp;apos;Like&amp;apos; बटन दबाकर किसी को भी भेज सकेंगे 1 डॉलर</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) का इस्तेमाल आप क्यों करते हैं? पोस्ट शेयर करने, मीम्स शेयर करने, इन्फॉर्मेशन के लिए, बस इतना ही ना? लेकिन क्या हो जब इस प्लेटफॉर्म के जरिए आप किसी को पैसे भी भेज सकें? ये कोई ख्याली पुलाव या मजाक नहीं है, बल्कि ऐसा भविष्य में होने वाला है. इसका एलान खुद एलन मस्क ने क्या है.
दरअसल सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले एलन मस्क ने हाल ही में एक X पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, &#039;हम लाइक बटन को देर तक दबाकर रखने पर X मनी के जरिए किसी को 1 डॉलर भेजने का फीचर जोड़ रहे हैं&#039;.

We&amp;rsquo;re adding long press on like to send someone $1 via ???? Money
&amp;mdash; Elon Musk (@elonmusk) October 25, 2026



क्या है पोस्ट का मतलब?एलन मस्क ने ये पोस्ट 25 अक्टूबर को शेयर किया है. इस फीचर के जरिए जैसे हम यूपीआई के जरिएकिसी को पैसे भेजते हैं, वैसे ही X के जरिए लाइक बटन को लॉन्ग प्रेस कर भी भेज पाएंगे. इसमें यूजर्स किसी दूसरे व्यक्ति को एक डॉलर भेज सकेंगे.
कैसे काम करेगा नया फीचर?हालांकि ये यूपीआई की तरह नहीं है बल्कि क्रिएटर्स के लिए फायदेमंद होगा. इस फीचर का मकसद यूजर्स को बिना एप से बाहर निकले पैसे भेजने की सुविधा देना है. जैसे कि मान लीजिए अगर किसी यूजर को किसी क्रिएटर की पोस्ट पसंद आती है, तो वो लाइक बटन को देर तक दबाकर उसे 1 डॉलर भेज सकेगा. इस तरह क्रिएटर्स को उनके कंटेंट के लिए आर्थिक मदद मिल सकेगी.
किसका होगा फायदा?इस फीचर से कंटेंट बनाने वाले लोगों को फायदा हो सकता है. उन्हें अपने फॉलोअर्स से सीधे पैसे पाने का एक और तरीका मिलेगा. हालांकि कंपनी ने अभी ये साफ नहीं किया है कि यूजर्स केवल 1 डॉलर ही भेज पाएंगे या अपनी पसंद के अनुसार रकम भी चुन सकेंगे. फीचर की लॉन्च डेट की भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
मस्क का मास्टर प्लानबता दें कि एलन मस्क का लक्ष्य X को केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित रखना ही नहीं है, बल्कि उसे एक ऐसा एप बनाना है, जहां चैटिंग, सोशल नेटवर्किंग और पैसों के लेन-देन जैसी सुविधाएं एक ही जगह मिलें.
क्या भारत में भी शुरू होगी सुविधा?बता दें कि फिलहाल X मनी भारत में शुरू होगी या नहीं, इस बारे में कुछ भी कह पाना मुमकिन नहीं है. कंपनी ने भारत में इस सेवा या नए 1 डॉलर वाले फीचर को शुरू करने की तारीख घोषित नहीं की है. ऐसे में भारतीय यूजर्स को इस सुविधा के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हरियाणा में बिजली पर घमासान, निजी कंपनी को दे दिया 25 साल का लाइसेंस</title>
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        <description><![CDATA[ हरियाणा में बिजली वितरण को लेकर राज्य सरकार और बिजली नियामक आयोग आमने-सामने आ गए हैं. हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) ने निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल तक बिजली वितरण करने का लाइसेंस दिया है. इस फैसले के बाद बिजली कर्मचारियों ने विरोध करते हुए हड़ताल कर दी. इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने आयोग को राज्य में नए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस शुरू नहीं करने का निर्देश दिया.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निजी कंपनी को बिजली बांटने की अनुमति मिलने से सरकारी बिजली कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा? सरकार को डर है कि इससे सरकारी बिजली कंपनियों की कमाई और कर्मचारियों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
क्या है हरियाणा में बिजली वितरण का पूरा मामला?
HERC ने 19 अक्टूबर को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया. इसके तहत कंपनी गुरुग्राम और नूंह में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) के साथ बिजली सप्लाई कर सकेगी. हालांकि, कंपनी ने अगले पांच साल में 4,717 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव दिया है.
जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद कंपनी के 2027-28 में बिजली सप्लाई शुरू करने की उम्मीद है. इस व्यवस्था के तहत संबंधित क्षेत्रों में निजी कंपनी का नेटवर्क पहुंचने के बाद उपभोक्ताओं को बिजली सप्लायर चुनने का ऑप्शन मिल सकता है.
सरकार इस फैसले का विरोध क्यों कर रही है?
सरकार और बिजली कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता सरकारी बिजली वितरण निगम की कमाई और मौजूदा व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर है. गुरुग्राम और नूंह दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के लिए आर्थिक रूप से अहम हैं. इसके बावजूद सरकारी कंपनी को बिजली के बुनियादी ढांचे और पहले से किए गए बिजली खरीद समझौतों का खर्च उठाना पड़ेगा.
क्या बढ़ जाएगा बिजली बिल?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगा, क्योंकि निजी कंपनी को लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ताओं का बिजली बिल तुरंत बढ़ जाएगा. हालांकि सरकारी निगम की कमाई घटने पर भविष्य में बिजली दरों और सब्सिडी को लेकर दबाव बढ़ सकता है.
क्या रेस्टोरेंट में वेटर को टिप देना है जरूरी? सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>रिटायरमेंट पर 3 करोड़ रुपए काफी हैं? फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने बताई सही बात</title>
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        <description><![CDATA[ नौकरी में रहते हुए की बार लोग रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं. लोग सोचते हैं कि रिटायरमेंट के बाद कितना पैसा हारे लिए काफी होगा. लेकिन क्या कोई भी सही आंकड़ा बता पाता है? नहीं! क्योंकि उन्हें भी नहीं पता होता है कि आखिर रिटायरमेंट के बाद कितनी रकम के साथ वो पहले की तरह ही अपनी जिंदगी को जी सकते हैं. लेकिन हाल ही में इस बारे में एक फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने बताया है कि 3 करोड़ की रकम पर्याप्त है या नहीं?
दरअसल बिजनेस स्टैंडर्ड के इनसाइट समिट BFSI 2026 में स्मार्ट इन्वेस्टर एरीना में कंटेंट क्रिएटर और फाइनेंशियल एजुकेटर नेहा नागर शामिल होने पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर खुलकर बात की है.
रिटायरमेंट के लिए 3 करोड़ रुपये हैं काफी?इस समिट के दौरान जब नेहा से पूछा गया कि रिटायरमेंट के लिए 3 करोड़ रुपये काफी हैं, तब नेहा ने इसका जवाब देते हुए बाया कि, रिटायरमेंट के लिए 3 करोड़ रुपये होना एक शुरुआती अनुमान है लेकिन ये हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है.
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर रिटायर होने के लिए एक तरीका ये है कि अपने सालाना खर्च का 25 गुना पैसा जमा करने का लक्ष्य रखा जाए. उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति का सालाना खर्च 12 लाख रुपये है, तो उसे लगभग 3 करोड़ रुपये के फंड की जरूरत हो सकती है.
किस पर निर्भर करता है रिटायरमेंट का पैसा?नेहा ने ये भी कहा कि समय के साथ महंगाई बढ़ने से चीजें महंगी होती हैं और जीवन की जरूरतों के अनुसार खर्च भी बदलते रहते हैं. इसलिए रिटायरमेंट के लिए कितने पैसों की जरूरत होगी, ये हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और खर्च पर निर्भर करता है. इसी वजह से लोगों को अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग का हर साल रिव्यू करनी चाहिए और जरूरत के अनुसार उसमें बदलाव करना चाहिए.
ये भी पढ़ें: 10 करोड़ यात्रियों को इस फ्लाइट में मिलेगा Starlink का हाई-स्पीड इंटरनेट, डील डन ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>10 करोड़ यात्रियों को इस फ्लाइट में मिलेगा Starlink का हाई&amp;स्पीड इंटरनेट, डील डन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/10-करोड़-यात्रियों-को-इस-फ्लाइट-में-मिलेगा-starlink-का-हाई-स्पीड-इंटरनेट-डील-डन</link>
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        <description><![CDATA[ फ्लाइट में सफर करते वक्त सबसे बड़ी दिक्कत इंटरनेट की होती है. लोग इन दिनों इंटरनेट के इस्तेमाल के आदि हो चुके हैं, लेकिन फ्लाइट में सफर करते समय लोगों को ये सुविधा नहीं मिल पाती है. लेकिन ऐसा अब और नहीं, क्योंकि साल 2027 से लोगों को ये सुविधा भी मिलने लग जाएगी.&amp;nbsp;
दरअसल ब्रिटेन की बजट एयरलाइन EasyJet ने अपने विमानों में हाई-स्पीड इंटरनेट देने के लिए एलन मस्क की कंपनी SpaceX के Starlink के साथ एक डील की है. जिसके तहत कंपनी साल 2027 से इस सुविधा को शुरू करने की है.
क्या बोली कंपनी?अपनी डील के बारे में बात करते हुए ईजीजेट ने बताया कि, विमानों में इंटरनेट लगाने का काम 2027 की पहली छमाही में शुरू होगा. जिसका लक्ष्य 2028 की शुरुआत तक अपने संबंधित एयरबस विमानों में ये सुविधा उपलब्ध कराना है. इसमें A320, A320neo और A321neo प्लेन शामिल हैं.
विमानों में Wi-Fi देना चुनौती भराईजीजेट के सीईओ केंटन जार्विस ने ये भी बताया कि, विमानों में Wi-Fi देना महंगा है, ऐसे में ये एक बड़ी चुनौती की तरह है. वहीं प्रतिद्वंद्वी एयरलाइन विज एयर ने भी जून में स्टारलिंक के साथ साझेदारी की थी. Ryanair के मुताबिक, स्टारलिंक इंटरनेट पर सालाना 25 करोड़ डॉलर तक खर्च हो सकता है.
यात्रियों को क्या- क्या मिलेगी सुविधा?स्टारलिंक इंटरनेट की मदद से यात्री उड़ान के दौरान अपने मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप पर इंटरनेट चला सकेंगे. वो वेबसाइट ब्राउज करने, वीडियो देखने, ऑनलाइन गेम खेलने और साथ ही साथ अपने दोस्तों और परिवार से भी जुड़े रहेंगे.
इसके अलावा यात्री अपनी फ्लाइट से जुड़ी जानकारी देख सकेंगे. वो जिस शहर में जा रहे हैं, वहां के मौसम, परिवहन और पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. भविष्य में सीट पर बैठे-बैठे विमान के मेन्यू से खाना ऑर्डर करने की सुविधा भी मिल सकती है.
क्या यात्रियों को इसके अलग से पैसे देना होंगे?हालांकि ईजीजेट ने अभी ये सा फ नहीं किया है, कि यात्रियों को इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए अलग से पैसे देने होंगे या ये सुविधा मुफ्त मिलेगी. कंपनी ने स्टारलिंक के साथ हुई इ डील की वित्तीय शर्तों का भी खुलासा नहीं किया है.
बता दें कि अमेरिकन एयरलाइंस, यूनाइटेड एयरलाइंस और ब्रिटिश एयरवेज समेत कई एयरलाइंस पहले से ही यात्रियों को स्टारलिंक इंटरनेट दे रही हैं.
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Microsoft देगी 60000 कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, AI पर खर्च बढ़ाने की तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ जहां एक तरफ आईटी कंपनियों में दोबारा से कर्मचारियों को नौकरियां दी जा रही हैं. तो वहीं दूसरी ओर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट अपने कर्मचारियों की छंटनी का प्लान बना रही है. कंपनी ने करीब अपने 60,000 कर्मचारियों को खुद अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ने का ऑफर दिया है.
इसके बदले में कंपनी उन्हें आर्थिक पैकेज देने का प्रस्ताव देगी. इस फैसले का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में कंपनी के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की टीमों में बदलाव करना है.
कंपनी का बयानइस बारे में बात करते हुए कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि, अमेरिका, कनाडा, भारत और ब्रिटेन में कुछ चुनिंदा टीमों के वाइस प्रेसिडेंट लेवल और उससे नीचे के कर्मचारी इस योजना के लिए ठीक होंगे. हालांकि, डाटा सेंटर, सेल्स और मार्केटिंग से जुड़ी कुछ टीमों के कर्मचारी इसमें शामिल नहीं होंगे.
माइक्रोसॉफ्ट की चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे मैसेज में कहा है कि जो कर्मचारी कंपनी छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं, उन्हें इस योजना के जरिए आर्थिक मदद के साथ नौकरी छोड़ने का ऑप्शन मिलेगा. उन्हें सामान्य तौर पर नौकरी खत्म होने पर मिलने वाले मुआवजे जैसा पैकेज दिया जाएगा.
क्यों किया गया ये फैसला?कंपनी इन कर्मचारियों को हटाकर अपनी कॉस्टिंग बचाना चाहती है. जिससे कि वो आगे चलकर AI में अपना पैसा लगा सके. टेक कंपनियां अब AI तकनीक विकसित करने और उसे चलाने के लिए जरूरी डाटा सेंटर पर भारी निवेश कर रही हैं. ऐसे में कंपनियां अपने खर्च और कर्मचारियों की जरूरतों का दोबारा आकलन कर रही हैं.
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि वो ऐसे कर्मचारियों पर ध्यान देना चाहती है जो कंपनी की अहम तकनीकी चुनौतियों को हल करने में योगदान दे सकें. कुछ मामलों में कंपनी नौकरी छोड़ने का प्रस्ताव स्वीकार करने वाले कर्मचारियों को भी रोकने की कोशिश कर सकती है, अगर उनमें कोई टैलेंट हो. कंपनी के इस कदम से साफ है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ टेक सेक्टर में न केवल नई तकनीक, बल्कि कर्मचारियों की भूमिकाओं और भर्ती की रणनीति में भी बदलाव हो रहा है.
बता दें कि माइक्रोसॉफ्ट अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो AI पर ज्यादा खर्च करने के लिए अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही है. इससे पहले गूगल ने भी पिछले साल कुछ विभागों में कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का पैकेज दिया था. वहीं मेटा में 2022 के आखिर में कर्मचारियों की संख्या अपने हायर लेवल से 20,000 से ज्यादा घट चुकी है.
ये भी पढ़ें: रिटायरमेंट पर 3 करोड़ रुपए काफी हैं? फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने बताई सही बात ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Microsoft, देगी, 60000, कर्मचारियों, को, नौकरी, छोड़ने, का, ऑफर, पर, खर्च, बढ़ाने, की, तैयारी</media:keywords>
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        <title>अरहर, मसूर जैसी दाल होगी और महंगी? 67% बढ़ा विदेशी दालों का आयात</title>
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        <description><![CDATA[ हर घर के किचन में अरहर, मसूर, चना और दूसरी दालों की खास जगह होती &amp;nbsp;है. लोगों की नजर भी दालों की कीमत पर रहती है. अगर इसके दाम में इजाफा होता है तो जाहिर सी बात है कि इससे लोगों के किचन का बजट बिगड़ सकता है. ऐसे में अब भारत में दालों का विदेशी आयात भी तेजी से बढ़ा है.&amp;nbsp;
बता दें कि (फाइनेंशियल ईयर 2026- 27) के अप्रैल से अगस्त के बीच दालों का आयात पिछले साल की तुलना में इसी अवधि के मुकाबले 67 प्रतिशत बढ़कर 2.06 मिलियन टन हो गया है. अब सबसे अहम सवाल ये है कि क्या कुछ समय बाद दालें महंगी हो सकती हैं?
पिछले साल से महंगी हुई दाल&amp;nbsp;
जानने वाली बात तो ये है कि कई दालें पिछले साल के मुकाबले में काफी महंगी हुई है जैसे...

अरहर - 132.75 रुपये प्रति किलो है, पिछले साल से 15 प्रतिशत महंगी है.
वहीं उड़द दाल 125.46 रुपये प्रति किलो है, पिछले साल से 10 प्रतिशत महंगी है.
इसके अलावा चना दाल- 93.48 रुपये प्रति किलो है, पिछले साल से 7.5 प्रतिशत महंगी है.

दालें महंगी क्यों हो रही हैं?

रूस यूक्रेन संघर्ष की वजह से रूस से आपूर्ति पर असर पड़ा. इससे कनाडा से जो मसूर दाल और पीली मटर आती है, उसकी कीमतों पर असर पड़ा है.
साथ ही चना, पीली मटर और मसूल दाल पर आयात शुल्क लगता है. इससे इन्हें &amp;nbsp;विदेश से खरीदने की लागत भी बढ़ सकती है.
वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में कम बारिश से दालों की फसल पर असर को लेकर चिंता बनी हुई है.&amp;nbsp;

दालें मंगाने पर बढ़ा खर्च
भारत में दालों के आयात की मात्रा तो बढ़ी ही है. इसके साथ ही इन्हें खरीदने पर जो खर्च हुआ है वो भी बढा है. फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के अप्रैल से अगस्त के बीच आयात पर 1.18 अरब डॉलर खर्च किए गए. बड़ी बात तो ये है कि ये पिछले साल की समान अवधि से 38 प्रतिशत ज्यादा है.&amp;nbsp;
क्या आगे बढ़ेंगे दालों के दाम?
अब सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में दालों की कीमतों में इजाफा हो सकता है? दालों के दाम में कोई बढ़ोतरी होगी या नहीं, ये बात फसर, विदेशी आपूर्ति और मौसम पर निर्भर करता है. वहीं सरकार के पास लगभग 4.5 मिलियन टन दालों का भंडार है. ऐसे में कीमत बढ़ेंगी या नहीं ये तय नहीं है. . हां, लेकिन अगर किसी कारणवश दालों का दाम में &amp;nbsp;बढ़ोतरी होती है तो जाहिर सी बात है कि इसका असर आम लोगों के किचन के बजट को बिगड़ सकता है.
किस लड़की ने पहनी 440 करोड़ की ब्रा और तोड़ दिए दो वर्ल्ड रिकॉर्ड
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>फीचर्स एक से बढ़कर एक, फिर भी नहीं चला बिजनेस, रिटायर हुआ दुनिया का सबसे लंबा विमान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फीचर्स-एक-से-बढ़कर-एक-फिर-भी-नहीं-चला-बिजनेस-रिटायर-हुआ-दुनिया-का-सबसे-लंबा-विमान</link>
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        <description><![CDATA[ हवाई यात्रा की दुनिया में कुछ विमान अपनी तकनीक के कारण इतिहास बनाते हैं, जबकि कुछ अपनी अनोखी बनावट के लिए याद किए जाते है. एयरबस A340-600 ऐसा ही एक विमान है, जिसने अपने विशाल आकार और चार इंजनों से अलग पहचान बनाई.
आधुनिक विमानन उद्योग में अब इसकी उपयोगिता लगातार कम होती जा रही है. जर्मन एयरलाइन लुफ्थांसा की आखिरी नियमित यात्री उड़ान के साथ इस विमान के एक लंबे अध्याय का अंत हो गया है.
75.3 मीटर लंबाई ने बनाया खास
एयरबस A340-600 की लंबाई करीब 75.3 मीटर थी. साल 2002 में व्यावसायिक उड़ानें शुरू करने के समय यह दुनिया का सबसे लंबा यात्री विमान बना था. बाद में बोइंग 747-8 ने इसका रिकॉर्ड तोड़ दिया.
चार रोल्स-रॉयस इंजनों से चलने वाले इस विमान को लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए तैयार किया गया था. इसकी विशाल बनावट के कारण एयरपोर्ट पर इसे मोड़ने और खड़ा करने के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ती थी.
23 साल बाद लुफ्थांसा ने कहा अलविदा
लुफ्थांसा ने 18 अक्टूबर 2026 को एयरबस A340-600 के साथ अपनी नियमित यात्री सेवाएं समाप्त कर दीं. वॉशिंगटन से फ्रैंकफर्ट पहुंचने वाली फ्लाइट LH419 इस विमान की एयरलाइन के साथ आखिरी निर्धारित व्यावसायिक उड़ान बनी. करीब आठ घंटे पांच मिनट की यात्रा के बाद विमान अपने गंतव्य पर पहुंचा.
लुफ्थांसा ने 23 सालों के दौरान इस मॉडल के 24 विमानों का इस्तेमाल किया. कंपनी के अनुसार, इन विमानों ने चार करोड़ से ज्यादा यात्रियों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया.
चार इंजन बने परेशानी की वजह
विमान की लोकप्रियता के बावजूद इसका संचालन महंगा पड़ता था. चार इंजनों के कारण ईंधन की खपत और रखरखाव का खर्च ज्यादा था. इसी दौरान बोइंग 777 जैसे दो इंजन वाले विमानों ने लंबी दूरी की उड़ानों में किफायती विकल्प उपलब्ध कराए.
अब नए विमानों पर दांव
लुफ्थांसा पुराने विमानों की जगह एयरबस A350-1000 और बोइंग 777-9 जैसे आधुनिक विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है. बोइंग 787 भी कंपनी के बेड़े के आधुनीकरण में अहम भूमिका निभा रहा है. नए विमानों से ईंधन की बचत, कम परिचालन खर्च और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है.
हालांकि, A340-600 दुनिया भर में पूरी तरह गायब नहीं हुआ है. कुछ अन्य एयरलाइनें अब भी इस मॉडल का संचालन करती हैं. इसके बावजूद, लुफ्थांसा से इसकी विदाई चार इंजन वाले पुराने यात्री विमानों से आधुनिक और किफायती विमानों की ओर बढ़ते उद्योग का संकेत है.
केबिन के नीचे था टॉयलेट
इस विमान की एक और अनोखी विशेषता इसका इंटीरियर था, लुफ्थांसा के कुछ A340-600 विमानों में टॉयलेट मुख्य यात्री केबिन के नीचे बनाए गए थे. सीढ़ियों के जरिए वहां पहुंचा जा सकता था. इस डिजाइन से मुख्य केबिन में यात्रियों के बैठने के लिए अतिरिक्त जगह मिलती थी.
यह भी पढ़ें- जनधन खातों में औसत बैलेंस रिकॉर्ड 5438 रुपए पहुंचा, जमा हुए 3.24 लाख करोड़
यह भी देखें- 
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>भारत पेट्रोलियम का बड़ा फैसला, रूस से कच्चे तेल की खरीदारी कम करेगी कंपनी</title>
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        <description><![CDATA[ भारत कुछ समय पहले तक लगभग पूरी तरह से ही खाड़ी देशों पर कच्चे तेल के लिए निर्भर था. लेकिन फरवरी से शुरू हुए ईरान और यूएस के बीच के युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई. जिसके बाद भारत ने रशिया से कच्चे तेल की ज्यादा खेप मंगाना शुरू कर दिया. लेकिन अब लगता है कि भारत जल्दी ही रशिया से भी कच्चे तेल की निर्भरता खत्म करने जा रहा है.
BPCL का अनुमान है कि भारत में नवंबर के महीने में रशिया ने कम मात्रा में कच्चा तेल आयात होगा. इसका कारण है ज्यादा कॉस्टिंग! भारत पेट्रोलियम के कंपनी एग्जीक्यूटव ने हाल ही में इस बारे में बात की है.
BPCL की तरफ से आया बयानदरअसल Reuters के मुताबिक सोमवार को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के वित्त प्रमुख वेट्सा रामकृष्ण गुप्ता ने इस बारे में बात की है. उन्होंने कंपनी की तिमाही अर्निंग के बाद एनालिस्ट्स को बताया कि, नवंबर में रूस से आने वाले कच्चे तेल की मात्रा कम रहेगी, क्योंकि रूसी ग्रेड की तुलना में पश्चिमी एशियाई ग्रेड व्यावसायिक रूप से ज्यादा किफायती है.
क्यों होगा कम आयात?गुप्ता ने बताया कि, इसकी सबसे बड़ी वजह माल ढुलाई की ज्यादा लागत है. दरअसल रूस से आना वाला कच्चा तेल कंपनियों को काफी महंगा पड़ रहा है, जिसके कारण BPCL ने भी नवंबर के लिए रूस से आने वाले माल की मात्रा में कमी के बारे में बात की है. जबकि जुलाई से सितंबर की तिमाही में, BPCL के कच्चे तेल की खरीद में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 37% थी.
पश्चिम एशिया से बढ़ी आपूर्तितो वहीं BPCL ने ये भी बताया कि पहली तिमाही की तुलना में पश्चिम एशिया से आपूर्ति बढ़ गई है, और उसे अक्टूबर- नवंबर में इस क्षेत्र से और ज्यादा मात्रा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले डाटा से पता चलता है कि सितंबर में भारत का पश्चिमी एशियाई कच्चे तेल का आयात बढ़कर युद्ध शुरू होने से पहले वाले के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि चीन के साथ तगड़े कॉम्पिटीशन के बाद भी भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कटौती कर दी है.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली के 5 स्टार होटल पर 1 लाख का जुर्माना, बिल में जोड़ दिया सर्विस चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में लोग परिवार या दोस्तों के साथ किसी रेस्टोरेंट या लग्जरी होटल में खाना खाने जाते हैं, तो वहां खाने की कीमत और टैक्स के अलावा आपके बिल में अपने आप सर्विस चार्ज भी जुड़ सकते हैं. लेकिन अगर रेस्टोरेंट बिना ग्राहक की इजाजत के सर्विस चार्ज वसूलता है, तो यह उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली के लग्जरी रेस्टोरेंट से सामने आया है, जहां ग्राहकों के बिल में अपने आप सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में CCPA ने 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने इसे गलत कारोबारी तरीका और उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन माना है. CCPA ने रेस्टोरेंट को आगे से अपने आप सर्विस चार्ज लगाने पर रोक लगाने का निर्देश भी दिया है.
क्या है पूरा मामला?
CCPA के सामने दो ग्राहकों ने शिकायत की थी कि दिल्ली के एक लग्जरी रेस्टोरेंट ने उनके खाने के बिल में अपने आप 10% सर्विस चार्ज जोड़ दिया था. ये शिकायतें 30 मई 2025 और 10 जून 2025 को किए गए पेमेंट से जुड़ी थीं. शुरुआती जांच में पाया गया कि बिलिंग के दौरान ग्राहकों के बिल में सर्विस चार्ज लगाया गया था.
इसके बाद CCPA ने रेस्टोरेंट से जवाब मांगा और इस मामले की विस्तृत जांच के लिए निर्देश दिए. जांच में सामने आया कि बिलिंग सिस्टम में सर्विस चार्ज पहले से शामिल होने के कारण ग्राहकों को ऐसा लग सकता था कि यह पेमेंट करना जरूरी है.
सर्विस चार्ज को लेकर CCPA ने क्या कहा?
CCPA के मुताबिक, रेस्टोरेंट के मेन्यू में खाने-पीने की चीजों की कीमत पहले से लिखी होती है. ग्राहक उसी कीमत और लागू टैक्स के आधार पर पेमेंट करने के लिए सहमत होता है. इसलिए सर्विस चार्ज या टिप ग्राहक की ख्वाहिश पर डिपेंड होना चाहिए. ऐसे में सर्विस चार्ज बिल में अपने आप जोड़कर जरूरी पेमेंट की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए. यही वजह है कि CCPA ने इसे गलत कारोबारी तरीका और ग्राहकों को गुमराह करने वाला कदम माना.
फीचर्स एक से बढ़कर एक, फिर भी नहीं चला बिजनेस, रिटायर हुआ दुनिया का सबसे लंबा विमान
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कर्ज के दलदल में दुनिया! जानें भारत से लेकर फ्रांस तक किस पर कितना बोझ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कर्ज-के-दलदल-में-दुनिया-जानें-भारत-से-लेकर-फ्रांस-तक-किस-पर-कितना-बोझ</link>
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        <description><![CDATA[ दुनिया के कई देश इस समय बढ़ते सरकारी कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज के बोझ से जूझ रहे हैं. अमेरिका, चीन और जापान जैसे बड़े देशों पर खरबों डॉलर का कर्ज है, वहीं फ्रांस में भी उधारी महंगी होने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. जब सरकारों को कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है, तो इसका असर आम लोगों से जुड़ी योजनाओं और जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
दरअसल, सरकारें सड़क, रेलवे, अस्पताल, शिक्षा और रक्षा जैसे कामों के लिए कई बार उधार लेती हैं. इसके लिए सरकारी बॉन्ड जारी किए जाते हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां और दूसरे निवेशक खरीदते हैं. लेकिन जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सरकारों के लिए कर्ज चुकाना और नया कर्ज लेना महंगा हो जाता है.&amp;nbsp;
सरकारें आखिर कर्ज क्यों लेती हैं?
सरकारों को टैक्स और दूसरे स्रोतों से कमाई होती है, लेकिन कई बार खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाता है. इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकारें सरकारी बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं. हालांकि, कई बार सरकारें पुराने कर्ज की अदायगी के लिए भी नया कर्ज लेती हैं.
उदाहरण के तौर पर, अगर सरकार 100 रुपए का बॉन्ड जारी करती है और कोई निवेशक इसे खरीदता है, तो वह सरकार को 100 रुपए उधार देता है. वहीं अगर बॉन्ड पर सालाना ब्याज दर 2.5% है, तो सरकार को हर साल 2.50 रुपए ब्याज देना होगा. 10 साल के बॉन्ड पर इस दर से कुल 25 रुपये ब्याज देने के बाद सरकार तय शर्तों के अनुसार निवेशक को 100 रुपये की मूल रकम भी लौटाती है.&amp;nbsp;
दुनिया के किस देश पर कितना सरकारी कर्ज है?
आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी कर्ज के मामले में अमेरिका सबसे आगे है. इसके बाद चीन और जापान का नंबर आता है. प्रमुख देशों पर कर्ज की स्थिति इस प्रकार है.

अमेरिका: 3,933 लाख करोड़ रुपए
चीन: 2,137.5 लाख करोड़ रुपए
जापान: 826.5 लाख करोड़ रुपए
ब्रिटेन: 418 लाख करोड़ रुपए
फ्रांस: 399 लाख करोड़ रुपए
इटली: 351.5 लाख करोड़ रुपए&amp;nbsp;
जर्मनी: 332.5 लाख करोड़ रुपए
भारत: 323 लाख करोड़ रुपए&amp;nbsp;
कनाडा: 275.5 लाख करोड़ रुपए

भारत पर कितना है कर्ज का बोझ?
&amp;nbsp;IMF अनुमान के मुताबिक, भारत के केंद्र और राज्य सरकारों का कुल कर्ज GDP का 83.4% है. यानी भारत पर करीब 323 लाख करोड़ रुपए का सरकारी कर्ज है. हालांकि, किसी देश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए सिर्फ कर्ज की कुल रकम देखना ही काफी नहीं है. इसके लिए यह भी देखना पड़ता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है और सरकार अपनी कमाई के मुकाबले कितना कर्ज उठा रही है.
अगले 5 दिनों में कमाई कराने आ रहे 9 IPO, दांव लगाने से पहले जानें प्राइस बैंड और GMP
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अगले 5 दिनों में कमाई कराने आ रहे 9 IPO, दांव लगाने से पहले जानें प्राइस बैंड और GMP</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अगले-5-दिनों-में-कमाई-कराने-आ-रहे-9-ipo-दांव-लगाने-से-पहले-जानें-प्राइस-बैंड-और-gmp</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अगले-5-दिनों-में-कमाई-कराने-आ-रहे-9-ipo-दांव-लगाने-से-पहले-जानें-प्राइस-बैंड-और-gmp</guid>
        <description><![CDATA[ कल यानी कि 26 अक्टूबर से शुरू हो रहे सप्ताह में 9 कंपनियां अपना आईपीओ लेकर आ रही हैं. इनमें से 5 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं. वहीं, 4 एसएमई (SME) सेगमेंट के आईपीओ शामिल हैं. मेनबोर्ड सेगमेंट में EAAA इंडिया अल्टरनेटिव्स, SFC एनवायर्नमेंटल टेक्नोलॉजीज और MK संस फाइन ज्वेल्स समेत पांच कंपनियां अगले हफ्ते अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने जा रही हैं. इन कंपनियों का लक्ष्य प्राइमरी मार्केट से लगभग 2,600 करोड़ रुपये जुटाना है.
EAAA India Alternatives IPO
कंपनी 26 अक्टूबर 2026 यानी कि सोमवार को अपना आईपीओ लेकर आ रही है. निवेशक 28 अक्टूबर, बुधवार तक बोली लगा सकेंगे. इसमें प्रति शेयर प्राइस बैंड 1,585 से 1,665 रुपये रखा गया है. अभी इसका लेटेस्ट GMP 45 रुपये प्रति शेयर है.&amp;nbsp;
SFC Environmental Technologies IPO
Waste Management से जुड़ी यह कंपनी 27 अक्टूबर, मंगलवार को अपना आईपीओ लेकर आ रही है. यह 29 अक्टूबर, गुरुवार तक खुला रहेगा. प्राइस बैंड कंपनी ने 13 रुपये से 330 रुपये प्रति शेयर रखा है. इसका जीएमपी 32 रुपये प्रति शेयर चल रहा है.&amp;nbsp;
BLS Polymers IPO
पॉलिमर और प्लास्टिक कंपोनेंट्स की इस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का आईपीओ भी 27 अक्टूबर, मंगलवार को खुल रहा है. इसके लिए 29 अक्टूबर, गुरुवार तक बोली लगाई जा सकेगी. आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 142 से 150 रुपये प्रति शेयर है.
M.K. Sons Fine Jewels IPO
ज्वेलरी रिटेल सेक्टर की यह कंपनी 28 अक्टूबर, बुधवार को अपना आईपीओ लॉन्च कर रही है, जो 30 अक्टूबर, शुक्रवार तक खुला रहेगा. आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 153 से 162 रुपये प्रति शेयर है और लेटेस्ट जीएमपी 7 रुपये प्रति शेयर है.&amp;nbsp;
Bombay Coated &amp;amp; Special Steels IPO
स्टील सेक्टर की यह कंपनी 29 अक्टूबर, गुरुवार को अपना आईपीओ ला रही है. इसके बंद होने की तारीख 2 नवंबर, सोमवार है. प्राइस बैंड 78 से 82 रुपये प्रति शेयर है. लेटेस्ट जीएमपी 8 रुपये प्रति शेयर है.
SME सेगमेंट के आईपीओ
26 से 30 अक्टूबर 2026 के दौरान एसएमई (SME/MSE) सेगमेंट के भी 4 आईपीओ आ रहे हैं:-&amp;nbsp;विस्कॉन इंडस्ट्रीज आईपीओ (Wiscon Industries IPO)अजवा प्रोजेक्ट्स आईपीओ (Ajwa Projects IPO)कार्वर रोबोवेल्ड आईपीओ (Carver Roboweld IPO)अंतला इंडस्ट्रीज आईपीओ (Antala Industries IPO)
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सरकारी कर्मचारियों को 1 करोड़ का बीमा, बेटी की शादी, बड़े बैंक ने किए ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू और कश्मीर बैंक ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ हुए पांच साल के एग्रीमेंट के तहत परमानेंट सरकारी कर्मचारियों का ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया है. इसके अलावा, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बीमा के साथ पढ़ाई, बेटी की शादी और लोन से जुड़ी कई सुविधाएं भी शामिल हैं.
इस एग्रीमेंट का खास मकसद कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना और जरूरत के समय उनके परिवार को वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है. आइए जानते हैं कि इस एग्रीमेंट के तहत कर्मचारियों को कौन-कौन से फायदे मिलेंगे.
सरकारी कर्मचारियों के बीमा कवर में क्या-क्या मिलेगा?

1 करोड़ रुपये का बीमा: कर्मचारियों का ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया गया है.
हवाई दुर्घटना बीमा: एयर एक्सीडेंट कवर के तहत 1.35 करोड़ रुपये की सुविधा दी जाएगी.
दिव्यांगता पर मदद: स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर 75 लाख रुपये का कवर मिलेगा.
आंशिक दिव्यांगता पर: स्थायी आंशिक दिव्यांगता के लिए 55 लाख रुपये का कवर निर्धारित किया गया है.
बच्चों की पढ़ाई: कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार को बेटे के उच्च शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये और बेटी की पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपए तक की मदद मिलेगी.
बेटी की शादी: पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है.
एयर एम्बुलेंस: निर्धारित शर्तों के तहत 10 लाख रुपये तक का एयर एम्बुलेंस कवर भी शामिल है.

लोन और बैंकिंग सुविधाओं में भी मिलेगी राहत&amp;nbsp;
बीमा के अलावा कर्मचारियों को बैंकिंग सेवाओं और लोन में भी कई तरह की सुविधाएं भी मिलेंगी.&amp;nbsp;

जीरो बैलेंस अकाउंट और मुफ्त इंटरनेशनल डेबिट कार्ड की सुविधा.
लाइफटाइम फ्री RuPay क्रेडिट कार्ड और जीवनसाथी के लिए ऐड-ऑन कार्ड.
पर्सनल लोन की लागू ब्याज दरों में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट की छूट.
कार, दोपहिया वाहन, हाउसिंग और एजुकेशन लोन पर प्रोसेसिंग फीस और चार्ज में छूट.
छह महीने की सैलरी या 6 लाख रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा.
बच्चों की पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला एजुकेशन लोन.
पात्रता और शर्तों के मुताबिक घर की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन.

HDFC लाया नया EV लोन, कार की बॉडी और बैटरी के लिए मिलेगा अलग-अलग कर्ज
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>HDFC लाया नया EV लोन, कार की बॉडी और बैटरी के लिए मिलेगा अलग&amp;अलग कर्ज</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप इलेक्ट्रिक कार (EV) खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन उसकी ज्यादा कीमत और हर महीने की EMI आपके बजट पर असर डाल रही है, तो आपके लिए HDFC बैंक की नई स्कीम काम की हो सकती है. HDFC बैंक ने &amp;lsquo;फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन&amp;rsquo; लॉन्च किया है. बड़ी बात यह है कि इस लोन के तहत इलेक्ट्रिक कार (EV) की बॉडी और बैटरी के लिए अलग-अलग तरीके से फाइनेंसिंग की सुविधा मिलेगी. यानी इससे ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से EMI का बोझ तय कर सकेंगे.&amp;nbsp;
दरअसल, EV की कुल कीमत में बैटरी का बड़ा हिस्सा होता है. यही वजह है कि लोगों को कई बार पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए ज्यादा रकम की जरूरत पड़ती है. HDFC बैंक की नई योजना में बैटरी की लागत को अलग करके लोन चुकाने की सुविधा दी जाएगी.&amp;nbsp;
क्या है HDFC बैंक का नया EV लोन?
HDFC बैंक ने EV खरीदने वालों के लिए &amp;lsquo;फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन&amp;rsquo; की शुरुआत की है. इस योजना में कार की बॉडी और बैटरी की कीमत के लिए अलग-अलग अनुपात में कार्ड दिया जाएगा. इसमें बैटरी के हिस्से के लोन को लंबे समय में चुकाने का ऑप्शन मिलेगा. वहीं बैंक के मुताबिक, ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से हर महीने की EMI को व्यवस्थित कर सकेंगे.
बैटरी और कार की बॉडी के लिए अलग लोन का क्या फायदा?
इलेक्ट्रिक कार (EV) की बैटरी उसकी सबसे महंगी चीजों में से एक होती है. इसकी वजह से गाड़ी की शुरुआती कीमत बढ़ जाती है. बैंक का कहना है कि नई लोन व्यवस्था के तहत बैटरी की लागत को अलग रखने से ग्राहकों को EMI का बोझ व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है.
HDFC बैंक की कितनी ब्रांच में मिलेगी सुविधा?
HDFC बैंक के मुताबिक, फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन की सुविधा देशभर में उसकी 9,700 से ज्यादा शाखाओं में उपलब्ध है. यह योजना EV खरीदने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है.
कर्ज के दलदल में दुनिया! जानें भारत से लेकर फ्रांस तक किस पर कितना बोझ
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>8th Pay Commission: 300 की जगह 450 दिन हो सकती है लीव इनकैशमेंट, होगा लाखों का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त छुट्टियों के बदले लीव इनकैशमेंट के तौर पर नकद भुगतान किया जाता है, तो उनके लिए एक बड़ा वित्तीय सहारा होता है. 8वें वेतन आयोग में इसे लेकर भी एक अहम प्रस्ताव सामने आया है.
8वां वेतन आयोग इस वक्त केंद्र सरकार के कर्मचारियों, विभिन्न संगठनों और हितधारकों के साथ परामर्श दौर में है. अब उनके सामने लाए गए प्रस्ताव में &#039;लीव एनकैशमेंट&#039; (छुट्टियों के बदले नकद भुगतान) की अधिकतम सीमा को मौजूदा 300 दिनों से बढ़ाकर 450 दिन करने का सुझाव दिया गया है ताकि रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाली एकमुश्त राशि में काफी बढ़ोतरी हो सके.&amp;nbsp; अगर&amp;nbsp;
क्या होता है &#039;लीव इनकैशमेंट&#039;?
&#039;लीव इनकैशमेंट&#039; या छुट्टियों के बदले नकद भुगतान एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है, जिसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारी अपनी उन जमा छुट्टियों के बदले पैसे पा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल उन्होंने रिटायरमेंट के समय तक नहीं किया है.
मौजूदा नियमों के अनुसार, एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल में अधिकतम 300 दिनों की अर्जित छुट्टी (Earned Leave / LAP) ही जमा कर सकता है. रिटायरमेंट के समय इन्हीं 300 दिनों के बदले नकद भुगतान किया जाता है.
इसी लिमिट को बढ़ाकर 450 दिन करने का प्रस्ताव है, जिससे कर्मचारी 150 अतिरिक्त दिनों की छुट्टियों को नकद में बदल सकेंगे. इस राशि को कैलकुलेट रिटायरमेंट वाले महीने की लास्ट बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) को जोड़कर किया जाता है. यह रकम पूरी तरह से टैक्स फ्री है.&amp;nbsp;
कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
कई कर्मचारी अपने सेवाकाल में छुट्टियों को इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें बचाकर रखते हैं ताकि रिटायरमेंट के वक्त उन्हें इनके बदले एकमुश्त रकम मिले, जिसका इस्तेमाल वे अपने भविष्य के निवेश, बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या होम लोन चुकाने जैसे बड़े कामों के लिए करते हैं.
अगर नए वेतन आयोग में इस सीमा को 300 दिन से बढ़ाकर 450 दिन कर दिया जाता है, तो ग्रेच्युटी और प्रोविडेंट फंड (PF) के साथ-साथ उन्हें मिलने वाले इस फंड में भी सीधे 50% का इजाफा होगा. इस बदलाव की मांग कई कर्मचारी यूनियनों और संगठनों द्वारा की जा रही है, जिनमें &#039;ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस&#039; (AITUC) प्रमुख है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>खाना&amp;पीना, कैश सब कर लें स्टोर... जानें किस देश के PM ने नागरिकों से की ये अपील</title>
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        <description><![CDATA[ क्या ब्रिटेन में आपातकाल जैसी स्थिति है? क्या वहां सरकार इमरजेंसी लगाने जा रही है? अगर ऐसा नहीं है तो फिर क्यों पीएम एंडी बर्नहम ने अपने नागरिकों से 3 दिन का भोजन, पानी और कैश जमा रखने की अपील की है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे का सच्चाई क्या है? 
दरअसल यूके सरकार ने &#039;Be ready&#039; कैम्पेन शुरू किया है. इसके चलते सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने घरों में तीन दिनों तक के लिए भोजन, पानी, कैश और अन्य जरूरी सामान का स्टॉक करके रखें. इसका मतलब यह नहीं है कि वहां कोई आपातकाल है या संकट आने वाला है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की अगुवाई वाली सरकार ने यह सलाह भविष्य की अनपेक्षित आपदाओं से निपटने के लिए दी है. इसी क्रम में देश भर में सार्वजनिक जागरूकता अभियान शुरू किया गया है.&amp;nbsp;
क्या है सरकार का &#039;Be ready&#039; कैम्पेन?
यूके सरकार ने देश भर में &#039;Be Ready&#039;के नाम से एक 3-वर्षीय राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है. इसका मकसद लोगों को डराना नहीं है, बल्कि उन्हें भीषण तूफान, बाढ़ या जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं और संभावित साइबर हमलों के प्रति पहले से आत्मनिर्भर बनाना है ताकि अगर कभी ऐसी स्थिति आए और डिजिटल पेमेंट या इंटरनेट ठप हो जाए या फिर देश में राशन की कमी आ जाए, तो लोग उनसे बेहतर तरीके से निपट सके. 
&amp;nbsp;
फ्रांस, नीदरलैंड और आयरलैंड जैसे कई अन्य यूरोपीय देशों में भी ऐसी गाइडलाइंस पहले से लागू हैं. यहां की सरकार ने लोगों से घबराकर पैनिक बाइंग न करने और इसके बजाय सावधानी बरतने की अपील की. बीबीसी के अनुसार, बर्नहम ने कहा, &quot;अब ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं आम होती जा रही हैं.&quot;

नागरिकों से क्या की गई अपील?
लिवरपूल में आयोजित एक समिट के दौरान सरकार ने घरों में एक &#039;इमरजेंसी किट&#039; तैयार रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट के शुरुआती 3 दिनों (72 घंटों) में बुनियादी जरूरतें पूरी की जा सकें.
सरकार ने लोगों से 3 दिनों के लिए प्रति व्यक्ति 9 लीटर बोतलबंद पानी और डिब्बाबंद/सूखा भोजन रखने की सलाह दी है. घर पर कुछ कैश रखने की भी सलाह दी गई है ताकि अगर साइबर अटैक के चलते एटीएम या ऑनलाइन/डिजिटल पेमेंट सिस्टम ठप हो जाएं तो भी जरूरी सामान खरीदा जा सके.
इनके अलावा, फर्स्ट एड किट, टॉर्च, बैटरी और एक FM रेडियो रखने की भी सलाह दी गई है ताकि बिजली और इंटरनेट न होने पर भी सरकारी घोषणाएं लोगों तक पहुंच सके.

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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>कल सोमवार होने के बावजूद नहीं खुलेंगे बैंक, जानें RBI ने क्यों दे दी छुट्टी</title>
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        <description><![CDATA[ कल यानी कि सोमवार, 26 अक्टूबर से एक नया हफ्ता शुरू हो रहा है. ऐसे में अगर आप ये सोच रहे हैं कि कल बैंक खुलने के साथ ही अपना कोई जरूरी काम निपटा लेंगे, तो ठहर जाइए. दरअसल, कल सोमवार को बैंक बंद रहने वाले हैं. बैंक जाने से पहले यह देख लें कि आपके शहर या राज्य में कल बैंक खुला है या नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ज्यादातर राज्यों में बैंकों के लिए छुट्टी का ऐलान किया है. इससे साफ है कि कल देश भर में बैंक बंद नहीं रहने वाले हैं. हालांकि, कुछ चुनिंदा राज्यों में बैंकों की छुट्टी रहेगी.&amp;nbsp;
26 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 के बीच बैंक में छुट्टियां
बता दें कि 26 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच बैंक चार दिनों तक बंद रहेंगे. कल यानी कि सोमवार को कई राज्यों में&amp;nbsp;सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा, एचडीएफसी, एक्सिस, आईसीआईसीआई बंद रहेंगे.
सोमवार को कहां-कहां बैंक बंद रहेंगे?
सोमवार को जम्मू-कश्मीर में बैंक विलय दिवस (Accession Day) के मौके पर बंद रहेंगे. जम्मू और कश्मीर में इस दिन सरकारी अवकाश होता है. 26 अक्टूबर 1947 को वहां के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी याद में यह दिवस मनाया जाता है. इसके अलावा, त्रिपुरा में लक्ष्मी पूजा के मौके पर बैंक बंद रहेंगे. महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में बैंकों की छुट्टी रहेगी. वहीं, कल उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में कल सोमवार को बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे.
अक्टूबर में छुट्टियों की पूरी लिस्ट
29 अक्टूबर (गुरुवार)- करवा चौथ के मौके पर हिमाचल प्रदेश में बैंकों का अवकाश रहेगा.&amp;nbsp;
31 अक्टूबर (शनिवार)- सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के कारण गुजरात में बैंक बंद रहेंगे.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITR फाइलिंग की बढ़ी तारीख, लास्ट डेट चूक गए तो लगेगा 5000 रुपये का जुर्माना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/itr-फाइलिंग-की-बढ़ी-तारीख-लास्ट-डेट-चूक-गए-तो-लगेगा-5000-रुपये-का-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने उन करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर, 2026 कर दी है. यह उनके लिए है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य है. यह तारीख इन टैक्सपेयर्स के लिए बेहद अहम है क्योंकि अगर इन्होंने इस तारीख के बाद रिटर्न फाइल किया तो फिर भारी लेट फीस के साथ पेनाल्टी का सामना करना पड़ेगा.
पहले इन टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 थी, जिसे CBDT ने त्योहारी सीजन और काम के भारी दबाव को ध्यान में रखते हुए 21 दिन आगे बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दिया था.
किन्हें 21 नवंबर को भरना होगा ITR?
ऐसे करदाता जिनकी आय व्यापार या पेशेवर सेवाओं से होती है और जिन्हें ऑडिट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है, उन्हें जुर्माने और टैक्स नोटिस से बचने के लिए 21 नवंबर तक अपना रिटर्न दाखिल करना होगा. इनमें घरेलू और विदेशी कंपनियां, ऐसे बड़े कारोबारी जिनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), वकील, आर्किटेक्ट और इंजीनियर्स जैसे पेशेवर, जिनकी सालाना ग्रॉस रिसीट्स 50 लाख रुपये से अधिक या चुनिंदा मामलों में 75 लाख रुपये है.
किन्हें इस तारीख को नहीं भरना होगा ITR?
नौकरीपेशा लोगों और आम व्यक्तिगत करदाताओं, जिन्हें ऑडिट की जरूरत नहीं होती, उनके के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 को ही समाप्त हो चुकी है. इसके अलावा, छोटे कारोबारी, जो धारा 44AD या 44ADA के तहत अनुमानित कर (Presumptive Tax) योजना का लाभ उठाते हैं और ऑडिट नहीं कराते, उनके लिए भी यह डेडलाइन लागू नहीं है.
अगर डेडलाइन से चूक गए तो क्या होगा?
अगर आप 21 नवंबर की समय-सीमा चूक जाते हैं, तो भी आपके पास आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत &#039;बिलेटेड रिटर्न&#039; दाखिल करने का विकल्प रहता है. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आयकर विभाग का कहना है कि बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर, 2026 तक या असेसमेंट पूरा होने से पहले- जो भी पहले हो- दाखिल किया जा सकता है.
हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत, 21 नवंबर के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको अनिवार्य लेट फीस देनी होगी. अगर आपकी कुल सालाना कर योग्य आय 5 लाख से अधिक है, तो 5,000 रुपये की लेट फीस होगी. अगर सालाना आय 5 लाख या उससे कम है, तो 1,000 रुपये की लेट फीस लगेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ITR, फाइलिंग, की, बढ़ी, तारीख, लास्ट, डेट, चूक, गए, तो, लगेगा, 5000, रुपये, का, जुर्माना</media:keywords>
    </item>
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        <title>LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स को राहत! डीलरशिप कमीशन बढ़ाने की सिफारिश पर राजी OMCs</title>
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        <description><![CDATA[ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त रूप से सिफारिश करने पर सहमति जताई है. ऑल इंडिया एचपी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (AIHPGDA) ने इसकी जानकारी दी है. हालांकि, कमीशन में संशोधन का यह प्रस्ताव अभी भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) की मंजूरी के अधीन है.
बीते 21 अक्टूबर को मुंबई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के हेड ऑफिस में सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) और ऑल इंडिया हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (AIHPGDA) के बीच एक बैठक हुई, जिसके बाद 22 अक्टूबर को AIHPGDA के चेयरमैन राजेंद्र बी ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि तेल कंपनियां एलपीजी वितरकों के कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी (Interim Hike) करने पर सहमत हो गई हैं.&amp;nbsp;
एसोसिएशन ने कहा, &quot;मैनेजमेंट ने हमें बताया कि संशोधन के प्रस्ताव पहले ही MoPNG को सौंपे जा चुके हैं. डायरेक्टरों ने एक निश्चित समय-सीमा के भीतर कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त रूप से सिफारिश करने पर भी सहमति जताई है। अब मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है.&quot;
डीलरशिप कमीशन क्या होता है?
डीलरशिप कमीशन उस अमाउंट को कहते हैं, जिसका भुगतान तेल मार्केटिंग कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) अपने गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स या एजेंसियों को सिलेंडर बेचने और उनकी सुरक्षित डिलीवरी कराने के बदले करती हैं. इसमें गोदाम से लेकर सिलेंडर की डिलीवरी कराने तक के सारे खर्च शामिल होते हैं.&amp;nbsp;

https://t.co/eEJStqEeRL
&amp;mdash; ???????????????????????????? घर रहें, सुरक्षित रहें (@HPGasIndia) October 24, 2026



अभी कितना मिलता है कमीशन?
वर्तमान नियमों के अनुसार, भारत में 14.2 किलोग्राम वाले एक घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर वितरकों को लगभग &amp;nbsp;73 रुपये का कमीशन मिलता है. इसमें से करीब 30 से 35 रुपये केवल डिलीवरी चार्जेस के तौर पर निर्धारित होते हैं. गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स इसे बढ़ाने की काफी लंबे समय से मांग कर रहे थे.
चेयरमैन राजेंद्र बी के अनुसार, पिछले कुछ सालों में डिलीवरी बॉय की सैलरी से लेकर पेट्रोल-डीजल का कॉस्ट बढ़ा है. गोदाम के किराए में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अभी जितना कमीशन मिल रहा है, उसमें काम करना वितरकों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था.
मुंबई बैठक में बनी इस सहमति के बाद अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही नया बढ़ा हुआ कमीशन लागू कर दिया जाएगा.

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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मजदूरों के PAN&amp;आधार से खोले 37 खाते, बैंक मैनेजर्स ने की 7.3 करोड़ की ठगी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने बैंक खुलवाया होगा या फिर लोन लिया है तो आप इस बारे में जानते होंगे कि इसके लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड. ऐसे में सोचिए, अगर आपने लोन लेने के लिए किसी को अपने दस्तावेज दिए, लेकिन इसी का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने लगे तो जाहिर सी बात है कि ये परेशानी का कारण बन सकता है.
ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया है, यहां पर दिहाड़ी मजूदरों को लोन दिलाने की बात कहकर उनके दस्तावेजों को लेने और बैंक अकाउंट खोलने का मामला सामने आया है. हैरानी की बात तो ये है कि इन अकाउंट से जुड़े साइबर अपराध के मामलों में लगभग 7.3 करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच पुलिस कर रही है.&amp;nbsp;
जांच के दौरान क्या मिला?
बता दें कि जब पुलिस ने जांच की तो जांच के दौरान ही पुलिस को बड़ी संख्या में कई दस्तावेज मिलें. इनमें शामिल है...

पैन कार्ड - 60
आधार कार्ड- 63
11 सिम कार्ड
7 डेबिट कार्ड
7 चेक बुक
पासपोर्ट साइज फोटो- 55

लोन के बहाने शुरू हुआ खेल
बता दें कि पुलिस ने एक निजी बैंक त्रि नगर शाखा से जुड़े अकाउंट की जांच की थी. पुलिस की जांच में मयंक कूपर का नाम सामने आया है. आरोप ये है कि व्यक्ति दिहाड़ी मजदूरों को लोन दिलाने का झांसा देता था और इसके जरिए उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों और तस्वीरों को इकट्ठा करता था.&amp;nbsp;
कई और चीजें भी मिली?
बड़ी बात तो ये है कि पुलिस को जांच के दौरान केवल दस्तावेज ही नहीं मिले, बल्कि सात मोबाइल फोन, 60 हजार रुपये नकद, 150 ग्राम सोना और एक लैपटॉप भी मिला है.&amp;nbsp;
पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ?
जांच के दौरान मिले इन सामानों की मदद से अब पुलिस ये पता करने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध बैंक अकाउंटों को किस तरह से इस्तेमाल किया गया है और वहीं पैसों का लेन-देन भी किन लोगों के बीच हुआ है. जांच के दौरान ही पुलिस को लगभग 37 ऐसे बैंक अकाउंट मिले, जिनका कनेक्शन देशभर में दर्ज 99 साइबर अपराध की शिकायतों से बताया जा रहा है. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर ये मामला किससे जुड़ा है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
दस्तावेजों से क्या करता था व्यक्ति?
मजदूरों के दस्तावेजों से उनकी जानकारी के बिना ही बैंक अकाउंट खुलवाए जाते थे. हालांकि, अभी इस बात की जानकारी सामने नहीं आई है कि व्यक्ति के जरिए जुटाए गए दस्तावेज कितने अकाउंट में इस्तेमाल किए गए हैं.
कैसे किया गिरफ्तार?
दरअसल, पुलिस ने मयंक को बाबा हरिदास नगर स गिरफ्तार किया. पुलिस ने फोन नंबर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़े सुरागों से व्यक्ति को गिरफ्तार किया. अहम बात ये है कि पुलिस को जांच के दौरान पता चला है कि कुछ खाताधारक बैंक की शाखा में आए ही नहीं थे. वहीं उनके एड्रेस की जानकारी भी सही नहीं मिली. इसके बाद पुलिस को 17 और संदिग्ध अकाउंट मिले.
पुलिस ने गिरफ्तार किया
पुलिस ने मामले में छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इमने मयंक कूपर और शोभित अग्रवाल भी है. अभी पुलिस त्रि नगर शाखा के मैनेजर की तलाश कर रही है.&amp;nbsp;
बैंक अकाउंट किसने खुलावाएं
अहम सवाल ही यही है कि आखिर बैंक अकाउंट खुलवाने में किसने मदद की? पुलिस के मुताबिक, सरस्वती विहार शाखा के मैनेजर शोभित अग्रवाल पर खाताधारकों की गैरमौजूदगी में अकाउंट खुलवाने और फ्रजी साइन करने का &amp;nbsp;आरोप है. इतना ही नहीं, बल्कि उन पर मयंक कपूर को त्रि नगर शाखा के मैनेजर से मिलवाने का भी आरोप है.
पैसों का क्या हुआ?
बता दें कि मामले में पुलिस को ये शक है कि लेन-देन से मिलने वाले पैसे बैंक अधिकारियों को दिए गए. वहीं बाकी की रकम को Trust Wallet के जरिए USDT में बदल दिया गया. इस मामले की जांच अभी भी जारी है.&amp;nbsp;
लोन के नाम पर दस्तावेज देने से पहले करें ये काम

सबसे पहले तो ये चेक करें कि जिसको आप लोन के नाम पर दस्तावेज दे रहे हैं वो कंपनी या व्यक्ति फर्जी तो नहीं.
साथ ही आपसे आधार कार्ड और पैन कार्ड या दूसरे दस्तावेज किस काम के लिए लिए जा रहे हैं ये जांच लें.
आप दस्तावेज और लोन के आवेदन के लिए और तारीख भी लिख सकते हैं, ताकि उसका इस्तेमाल दूसरे काम के लिए न किया जाएं.
किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी शेयर न करें.

अगस्त के पीक से चांदी 56000, सोना 23000 टूटा, क्यों मची है उथल-पुथल?
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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    <item>
        <title>E20 पेट्रोल का नया संकट, क्या ईंधन के चक्कर में महंगी हो जाएगी आपकी थाली?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/e20-पेट्रोल-का-नया-संकट-क्या-ईंधन-के-चक्कर-में-महंगी-हो-जाएगी-आपकी-थाली</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में अब E20 पेट्रोल की जरूरत पूरी करने के लिए इथेनॉल खरीदने की नई नीति का असर खेती, पशुओं के चारे और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. क्योंकि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का असर सिर्फ गाड़ियों के माइलेज या ईंधन की कीमत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध खेती और रोजमर्रा के चीजों के दाम से भी है. खासकर मक्का का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ने से चिकन और अंडे जैसी चीजों के महंगे होने का खतरा पैदा हो सकता है.
यही वजह है कि सरकार के नए इथेनॉल खरीद नियमों को ऊर्जा जरूरतों और खाद्य महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस फैसले का आपकी जेब और खाने की थाली पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या है सरकार की नई इथेनॉल पॉलिसी?
तेल कंपनियों ने 2026-27 के सप्लाई वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं. हालांकि, नए टेंडर में गन्ने का रस, सिरप और B-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है. इस फैसले का खास मकसद चीनी के इस्तेमाल को इथेनॉल बनाने की तरफ मोड़ने से रोकना और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है.
मक्का से इथेनॉल बनाना क्यों पड़ सकता है महंगा?
गन्ने से बनने वाले इथेनॉल के कुछ ऑप्शनों पर रोक लगने से तेल कंपनियों की खरीद लागत बढ़ने की आशंका है. ऐसे में तेल कंपनियों को इथेनॉल की जरूरत पूरी करने के लिए मक्का और C-हैवी मोलासेस जैसे दूसरे ऑप्शनों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है.
आंकड़ों के मुताबिक, मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 68.86 रुपए प्रति लीटर है, जबकि B-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल की कीमत 60.73 रुपए प्रति लीटर बताई गई है. यानी मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत B-हैवी मोलासेस वाले इथेनॉल से करीब 13.4% महंगा है. इससे तेल कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
क्या महंगे हो सकते हैं अंडे और चिकन?
इथेनॉल बनाने में मक्का का इस्तेमाल बढ़ने से पोल्ट्री उद्योग की लागत पर असर देखने को मिल सकता है. इसकी वजह यह है कि मक्का मुर्गियों के चारे का एक अहम हिस्सा है. देश में पैदा होने वाले घरेलू मक्के का करीब 55-60% हिस्सा पोल्ट्री उद्योग इस्तेमाल करता है.
ऐसे में अगर मक्के की ज्यादा मात्र इथेनॉल बनाने में जाने लगी, तो पशु-पक्षियों के चारे की लागत बढ़ सकती हैं. इसका असर अंडे और चिकन की कीमतों पर पड़ने की आशंका है. हालांकि, कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह मक्के की उपलब्धता और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.
अगस्त के पीक से चांदी 56000, सोना 23000 टूटा, क्यों मची है उथल-पुथल?
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;सोना खरीदो और जंगल में छोड़ आओ&amp;apos;, क्या है नॉर्वे का नया गोल्ड&amp;ड्रॉप स्कैम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोना-खरीदो-और-जंगल-में-छोड़-आओ-क्या-है-नॉर्वे-का-नया-गोल्ड-ड्रॉप-स्कैम</link>
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        <description><![CDATA[ सोने को अक्सर मुश्किल समय के लिए सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ठग इसी भरोसे का फायदा उठा रहे हैं. नॉर्वे में धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें लोगों को पहले सोना खरीदने और फिर उसे जंगल में छोड़ने के लिए कहा जा रहा है.
ठग लोगों को भरोसा दिलाते हैं कि उनका सोना सुरक्षित रहेगा और उसकी कीमत बढ़ने पर उन्हें फायदा मिलेगा. लेकिन हकीकत में लोगों की कीमती धातु गायब हो जाती है और उनकी बचत डूब जाती है.
ओस्लो और बर्गेन में भी सामने आए मामले
फिनेंस नोर्ज में धोखाधड़ी रोकने के काम की निदेशक ग्राई नेरगार्ड के अनुसार, इस तरह के शुरुआती मामले वसंत ऋतु में सामने आए थे. इसके बाद राजधानी ओस्लो, उसके आसपास के इलाकों और पश्चिमी तट के शहर बर्गेन में भी ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं. संस्था ने अभी यह नहीं बताया है कि इस धोखाधड़ी में कुल कितने मूल्य का सोना चोरी हुआ है. हालांकि, इस मामले ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है.
कैसे लोगों को जाल में फंसा रहे हैं ठग?
नॉर्वे की वित्तीय सेवा संस्था फिनेंस नोर्ज के मुताबिक, कई बैंक ग्राहकों को इस तरह की धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा है. ठग लोगों को सोने में निवेश करने के लिए मनाते हैं और दावा करते हैं कि इससे उन्हें अच्छा फायदा होगा.
इसके बाद पीड़ितों से सोना खरीदवाते हैं, फिर उन्हें बताया जाता है कि सोने को सुरक्षित रखने के लिए जंगल या किसी सुनसान जगह पर छोड़ना होगा. लोगों को भरोसा दिलाया जाता है कि कोई व्यक्ति वहां से सोना लेकर सुरक्षित रखेगा. लेकिन सोना छोड़ने के बाद वह गायब हो जाता है और पीड़ितों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
लोगों को सावधान कर रहे हैं बैंक
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए &amp;nbsp;फिनेंस नोर्ज और नॉर्वे के बैंकों ने जागरूकता अभियान शुरू किया है. लोगों को सलाह दी जा रही है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर सोना न खरीदें और न ही अपनी कीमती चीजें किसी सुनसान जगह पर छोड़ें.
सोने में निवेश करने से पहले कंपनी और योजना की पूरी जानकारी जांच कर लें. याद रखें, सोना खरीदना अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है. अगर कोई निवेश के नाम पर अजीब निर्देश दे या बड़े फायदे का लालच दिखाए, तो सतर्क रहें.
पिछले साल धोखाधड़ी में करोड़ों का नुकसान
फिनेंस नोर्ज के अनुसार, पिछले साल नॉर्वे के बैंकों और उनके ग्राहकों को वित्तीय धोखाधड़ी के कारण कुल 96.2 करोड़ नॉर्वेजियन क्रोनर का नुकसान हुआ. यह रकम लगभग 10 करोड़ डॉलर के बराबर है. वहीं, बैंकों ने 3.5 अरब क्रोनर से अधिक की संभावित धोखाधड़ी को रोकने में सफलता पाई.
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में दिवाली के लिए खास बाजार तैयार, हस्तशिल्प, गहने और देसी जायकों की मिलेगी भरमार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-में-दिवाली-के-लिए-खास-बाजार-तैयार-हस्तशिल्प-गहने-और-देसी-जायकों-की-मिलेगी-भरमार</link>
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        <description><![CDATA[ दिवाली पर खरीदारी के साथ देशभर के हस्तशिल्प, पारंपरिक गहनों और अलग-अलग राज्यों के पकवानों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो दिल्ली के नेचर बाजार में लगे &amp;lsquo;फेस्टिवल ऑफ लाइट्स 2026&amp;rsquo; जा सकते हैं. अंधेरिया मोड़ स्थित नेचर बाजार में 22 अक्टूबर से 3 नवंबर तक इस मेले का आयोजन किया जा रहा है. यहां 180 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं, जहां कपड़ों, गहनों और घर की सजावट के सामान से लेकर पेंटिंग, उपहार और प्राकृतिक उत्पादों तक कई चीजें मिलेंगी. मेले में खरीदारी के साथ संगीत, नृत्य और बच्चों के लिए भी खास कार्यक्रम रखे गए हैं.
&amp;nbsp;
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) और दस्तकार की ओर से आयोजित इस मेले का मकसद देश की पारंपरिक कला और कारीगरों के काम को बढ़ावा देना है. इस बार मेले में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को खास कार्यक्रमों के साथ बाजार रात 10 बजे तक खुला रहेगा. बाकी दिनों में बाजार सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा.
&amp;nbsp;
दिल्ली में रात के पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
&amp;nbsp;
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम राजधानी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने पर्यटन स्थलों और दूसरी परियोजनाओं के जरिए रात के समय भी लोगों को घूमने-फिरने के मौके देना चाहता है. इसी पहल के तहत दिल्ली हाट (आईएनए) की तर्ज पर नेचर बाजार में नाइट टूरिज्म बाजार को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए DTTDC की नेचर बाजार वाली जगह पर दस्तकार की ओर से यह आयोजन किया जा रहा है.
&amp;nbsp;
इस बार दस्तकार ने पहली बार अपने त्योहार से जुड़े कार्यक्रमों को शुक्रवार, शनिवार और रविवार की शाम तक बढ़ाया है. इन दिनों बाजार रात 10 बजे तक खुला रहेगा. यहां लोग हस्तशिल्प की खरीदारी के साथ लाइव प्रस्तुतियां, क्षेत्रीय व्यंजन, बच्चों के कार्यक्रम और कला से जुड़ी कार्यशालाओं का आनंद ले सकेंगे.
&amp;nbsp;
इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में रात के समय भी कला और संस्कृति को लोगों के घूमने-फिरने का हिस्सा बनाना है. साथ ही, कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका देना भी इसका अहम हिस्सा है.
&amp;nbsp;
कपड़ों से लेकर गहनों तक, देशभर के हस्तशिल्प की झलक
&amp;nbsp;
मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों के कारीगर अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं. कपड़ों में चिकनकारी, कश्मीरी कढ़ाई, कांथा, चंबा कढ़ाई, गोटा पट्टी और पैचवर्क के काम वाले कपड़े शामिल हैं. इसके अलावा कलमकारी, अज्रख, सांगानेरी और बाग प्रिंट के कपड़े भी मिलेंगे. बांधनी, शिबोरी और इकत के साथ चंदेरी, महेश्वरी और पैठणी की बुनाई वाले उत्पाद भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं.
&amp;nbsp;
गहनों में चांदी की बारीक कारीगरी वाले आभूषण, डोकरा, मोतियों और धागों से बने गहने, मीनाकारी के आभूषण और लाख व कांच की पारंपरिक चूड़ियां शामिल हैं. घर सजाने के लिए टेराकोटा, सिरेमिक, ब्लू पॉटरी, पेपर माशे, बिदरी धातु कला, पत्थर से बने सामान और लकड़ी की नक्काशी वाले उत्पाद भी मिलेंगे.
&amp;nbsp;
पेंटिंग और लोक कला में दिलचस्पी रखने वालों के लिए मधुबनी, गोंड, पट्टचित्र, पिछवाई, लिप्पन और कालीघाट पेंटिंग भी मेले का हिस्सा हैं. इसके अलावा प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के साथ खाने-पीने की चीजों के स्टॉल भी लगाए गए हैं.
&amp;nbsp;
बिहार से राजस्थान तक के पकवानों का स्वाद
&amp;nbsp;
मेले में खरीदारी के साथ खाने-पीने का भी इंतजाम है. यहां 12 से ज्यादा फूड स्टॉल होंगे, जहां बिहार, मणिपुर, हरियाणा और राजस्थान के क्षेत्रीय व्यंजनों के साथ दिल्ली के मशहूर स्ट्रीट फूड का स्वाद लिया जा सकता है.
&amp;nbsp;
बच्चों के लिए कठपुतली शो, बायोस्कोप और जादू के कार्यक्रम रखे गए हैं. कठपुतली शो 23 अक्टूबर को शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक होगा. वहीं, 24 और 25 अक्टूबर को शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक बायोस्कोप और मैजिक शो आयोजित किए जाएंगे.
&amp;nbsp;
वीकेंड पर होंगे संगीत और नृत्य के कार्यक्रम
&amp;nbsp;
मेले में 24 अक्टूबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक युसरा नकवी कबीर के गीत पेश करेंगी. यह कार्यक्रम आर्ट ट्री के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक डांडिया और गरबा होगा.
&amp;nbsp;
30 अक्टूबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक कुतबी ब्रदर्स कव्वाली पेश करेंगे. यह कार्यक्रम भी आर्ट ट्री के सहयोग से होगा. 31 अक्टूबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक ध्री कुचिपुड़ी कलेक्टिव की अयाना मुखर्जी कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति देंगी. वहीं, 1 नवंबर को शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक पंजाबी गिद्धा का आयोजन होगा.
&amp;nbsp;
वारली और लिप्पन कला को करीब से समझने का मौका
&amp;nbsp;
मेले में 24, 25 और 31 अक्टूबर तथा 1 नवंबर को हस्तशिल्प कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी. इनका समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे और फिर 3 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा.
&amp;nbsp;
इन कार्यशालाओं में महाराष्ट्र के दिलीप रामा बहोटा वारली कला और गुजरात की हरिजन पूजा रायमल लिप्पन कला के बारे में बताएंगी. वारली कला में ज्यामितीय आकृतियों के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी और प्रकृति को दर्शाया जाता है. वहीं, लिप्पन कला में मिट्टी और शीशे की मदद से सजावटी डिजाइन बनाए जाते हैं. इन कार्यशालाओं के जरिए लोग पारंपरिक भारतीय कला को करीब से समझ सकेंगे.
&amp;nbsp;
मेले में जाने से पहले जान लें जरूरी बातें

जगह: नेचर बाजार, अंधेरिया मोड़, अनुव्रत मार्ग, नई दिल्ली-110074
तारीख: 22 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026
समय: सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक
शुक्रवार से रविवार: सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक
प्रवेश शुल्क: 50 रुपये
पार्किंग: उपलब्ध

दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम और दस्तकार की यह पहल राजधानी में रात के समय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पारंपरिक कला और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है. मेले में खरीदारी, खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कारीगरों को अपने काम को सीधे ग्राहकों के सामने रखने का अवसर भी मिल रहा है.
&amp;nbsp;
E20 पेट्रोल का नया सं ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, दिवाली, के, लिए, खास, बाजार, तैयार, हस्तशिल्प, गहने, और, देसी, जायकों, की, मिलेगी, भरमार</media:keywords>
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        <title>2030 तक भारत में मिलेंगी 35 करोड़ नई नौकरियां, खत्म होगी बेरोजगारी&amp; रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा है, लेकिन अब लगता है कि आने वाले समय में ये समस्या भी जल्दी ही खत्म होने वाली है. क्योंकि भारत में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में साल 2030 तक बेरोजगारी लगभग खत्म होने की कगार पर रहेगी. रिपोर्ट्स की मानें तो 2030 तक 35 करोड़ से भी ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा होने वाले हैं.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग सेक्टर की स्किल काउंसिल और उद्योग संगठनों ने ये अनुमान लगाया है. हालांकि इन नौकरियों का फायदा उठाने के लिए युवाओं को सही ट्रेनिंग, तकनीकी शिक्षा और काम से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी देना जरूरी होगा.
किस सेक्टर में कितीन नौकरियां?इंडिया डिडाक्टिक्स एसोसिएशन (IDA) ने भी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक कई प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. तो आइये बताते हैं किन सेक्टरों में कितनी नौकरियां मिलने की उम्मीद है:



सेक्टर
नौकरियों का आंकड़ा


ऑटोमोबाइल सेक्टर
20 से 25 लाख नई सीधी नौकरियां


लॉजिस्टिक्स सेक्टर
करीब 47 लाख प्रशिक्षित कर्मचारियों की


टेलीकॉम सेक्टर
लगभग 10 लाख नए रोजगार


क्लीन एनर्जी सेक्टर
44 लाख से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियां


टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर
करीब 2 करोड़ नई नौकरियां



युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देना जरूरीIDA के मुताबिक, देश में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ युवाओं को जरूरी कौशल सिखाना भी बेहद जरूरी होगा. कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत है, जिन्हें अपने काम की व्यावहारिक जानकारी हो और जो नई तकनीकों का इस्तेमाल कर सकें.
सितंबर 2026 में कितनी रही बेरोजगारी दर?सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में 5% रही. ये अगस्त 2026 के बराबर थी. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की स्थिति इस प्रकार रही:

ग्रामीण बेरोजगारी दर अगस्त के 4.1% से बढ़कर सितंबर में 4.2% हो गई.
शहरी बेरोजगारी दर अगस्त के 6.8% से बढ़कर सितंबर में 6.9% हो गई.

हालांकि, पिछले साल की तुलना में कुल बेरोजगारी दर में सुधार हुआ है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, सितंबर 2025 में बेरोजगारी दर 5.2% थी, जो सितंबर 2026 में घटकर 5% रह गई.
इसी अवधि में ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.6% से घटकर 4.2% हो गई. ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर भी कम हुई और 2026 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. वहीं, शहरी बेरोजगारी दर में पिछले साल के मुकाबले मामूली बदलाव हुआ और यह लगभग स्थिर रही.
ये भी पढ़ें: बड़े बैंकों ने FD पर बढ़ाया ब्याज, RBI रेट हाइक के बाद फैसला ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>2030, तक, भारत, में, मिलेंगी, करोड़, नई, नौकरियां, खत्म, होगी, बेरोजगारी-, रिपोर्ट</media:keywords>
    </item>
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        <title>बड़े बैंकों ने FD पर बढ़ाया ब्याज, RBI रेट हाइक के बाद फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बड़े-बैंकों-ने-fd-पर-बढ़ाया-ब्याज-rbi-रेट-हाइक-के-बाद-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही करीब चार साल बाद रेपो रेट में बढ़तरी की है. जिसके बाद अब अन्य बैंकों ने भी अपनी FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. हाल ही में इंडियन बैंक ने अपनी दो खास FD स्कीम की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है. तो वहीं अन्य बैंकों ने भी अपनी ब्याज दरों में बदलाव किया है.
इंडियन बैंक की नई दरें 23 अक्टूबर से लागू हो गई हैं. बैंक ने 555 दिन और 777 दिन की FD पर ब्याज दर 0.15% अंक बढ़ाई है. ये फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 7 अक्टूबर को लिए गए फैसले के बाद आया है.
इंडियन बैंक ने FD पर कितना मिलेगा ब्याज?इंडियन बंक ने अपनी दो एफडी स्कीम की ब्याज दरें बढ़ाई हैं. जिसमें से पहली स्कीम है 555 दिन की Ind Grow FD, जिसकी ब्याज दर 6.65% से बढ़ाकर 6.80% सालाना कर दी गई है.
तो वहीं दूसरी एफडी है 777 दिन की Ind Prosper FD, जिसकी ब्याज दर 6.60% से बढ़ाकर 6.75% सालाना कर दी गई है. इसका मतलब है कि इन दोनों FD स्कीम में अब ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलेगा.
अन्य बैंकों की ब्याज दरें भी देखेंअक्टूबर में केवल इंडियन बैंक ने ही नहीं बल्कि कई दूसरे बैंकों ने भी FD पर ब्याज दरें बढ़ाई है. इसमें कई बड़े बैंक शामिल हैं, जिसकी FD पर आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं. अलग-अलग अवधि की जमा पर ब्याज अलग हो सकता है. यहां देखें अन्य बैंकों की ब्याज दरें:



बैंक
FD की अवधि
सालाना ब्याज (प्रतिशत में)


HDFC बैंक
3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने
6.50%&amp;nbsp;


स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
2 साल से लेकर 3 साल
6.45%&amp;nbsp;


एक्सिस बैंक
18 महीने से लेकर 10 साल
6.50%


ICICI बैंक
3 साल 1 दिन से 10 साल तक
6.60%


पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
FD की अवधि के अनुसार
3% से 6.50%


कोटक महिंद्रा बैंक
FD की अवधि के अनुसार
2.75% से 6.65%



रिपोर्ट के मुताबिक RBI के रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद HDFC बैंक और SBI ने अपनी FD की ब्याज दरों में अभी बदलाव नहीं किया था.&amp;nbsp;
बता दें कि RBI ने 7 अक्टूबर को ही रेपो रेट में 0.25% अंक की बढ़ोतरी की थी. जिसके बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया था. इसके बाद बैंकों की FD पर ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी. जो कि अब धीरे- धीरे कर बढ़ाई जा रही है.
ये भी पढ़ें: गोवा का हवाई सफर सस्ता, सरकार ने ATF पर वैट 15% से घटाकर 7% किया ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बड़े, बैंकों, ने, पर, बढ़ाया, ब्याज, RBI, रेट, हाइक, के, बाद, फैसला</media:keywords>
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    <item>
        <title>पंजाब में मजदूर की पत्नी ने जीती 1 करोड़ की लॉटरी, 7 रुपए में खरीदा था टिकट</title>
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        <description><![CDATA[ पंजाब के एक साधारण परिवार की किस्मत उस समय चमक गई, जब महज 7 रुपये का लॉटरी टिकट खरीदने वाली महिला ने 1 करोड़ रुपये का इनाम जीत लिया. महिला के पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और परिवार को घर चलाने के लिए काफी मेहनत करना पड़ती है. ये महिला पंजाब के फरीदकोट जिले के कोटकपूरा की रहने वाली हैं.&amp;nbsp;
पंजाब के लोकल न्यूज पंजाब न्यूजलाइन और एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक बिमला देवी अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदने बाजार गई थीं. इसी दौरान उन्होंने 7 रुपये का लॉटरी टिकट खरीद लिया. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि ये छोटा-सा टिकट उनके परिवार के लिए इतनी बड़ी खुशखबरी लेकर आएगा.
एक दिन देरी से मिली खबरबिमला देवी ने सिक्किम सरकार की लॉटरी का टिकट रेलवे रोड पर रेलवे स्टेशन के पास स्थित स्टार लॉटरी स्टॉल से खरीदा था. उन्होंने ये टिकट लॉटरी का रिजल्ट आने से एक दिन पहले लिया था. अगले दिन जब लॉटरी का परिणाम आया, तो टिकट बेचने वाले दुकानदार ने उन्हें फोन करके बताया कि उन्होंने 1 करोड़ रुपय का इनाम जीता है. ये खबर सुनकर बिमला देवी और उनका परिवार खुशी से झूम उठा. परिवार के सदस्यों ने मिठाई बांटकर और भांगड़ा करके अपनी खुशी जाहिर की.
बच्चों का संवरेगा भविष्यबिमला देवी के पति दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते हैं. ऐसे में 1 करोड़ रुपये की ये रकम उनके परिवार के लिए बड़ी आर्थिक राहत बन सकती है. बिमला देवी ने बताया कि इस पैसे से परिवार की आर्थिक परेशानियां कम करने और बच्चों को बेहतर भविष्य देने में मदद मिलेगी. फिलहाल परिवार ने ये तय नहीं किया है कि रकम का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा. हालांकि परिवार बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए कोई छोटा कारोबार शुरू करने पर विचार कर रहा है.
अपनी इस जीत से बिमला देवी और उनका पूरा परिवार बहुत खुश है.
ये भी पढ़ें: 15 घंटे की उड़ान और खाने को कुछ नहीं, अब ग्राहक को 50000 देगी ये एयरलाइन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पंजाब, में, मजदूर, की, पत्नी, ने, जीती, करोड़, की, लॉटरी, रुपए, में, खरीदा, था, टिकट</media:keywords>
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    <item>
        <title>15 घंटे की उड़ान और खाने को कुछ नहीं, अब ग्राहक को 50000 देगी ये एयरलाइन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/15-घंटे-की-उड़ान-और-खाने-को-कुछ-नहीं-अब-ग्राहक-को-50000-देगी-ये-एयरलाइन</link>
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        <description><![CDATA[ जब भी कोई यात्री लंबी दूरी का सफर तय करता है, तो उसे मील (भोजन) की जरूरत तो होती ही है. लेकिन क्या हो जब 15 घंटे की फ्लाइट में यात्री और उसके परिवार को भूखा रखा जाए? ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है. जिसमें सिंगापुर एयरलाइंस ने दिल्ली की मेलबर्न तक करीब 15 घंटे की उड़ान के दौरान यात्री और उसके परिवार को पर्याप्त खाना नहीं दिया.
जिसकी शिकायत यात्री ने पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में की, तो आयोग ने मामले में एयरलाइंस की सेवा में लापरवाही का दोषी माना. जिसके बाद एयरलाइंस पर मानसिक परेशानी और शिकायत के लिए हुए खर्च के बदले 50,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया.
क्या है पूरा मामला?दरअसल जसप्रीत सिंह की पत्नी, सास और 11 महीने की बेटी के साथ 4 मार्च 2020 को सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट से दिल्ली से मेलबर्न गए थे. जसप्रीत सिंह का आरोप था कि 15 घंटे की यात्रा के दौरान एयरलाइन के कर्मचारियों ने उनके परिवार को पर्याप्त खाना नहीं दिया. उनकी छोटी बच्ची के लिए दूध भी उपलब्ध नहीं कराया गया.
इसके बाद जसप्रीत ने एयरलाइन को ईमेल करके शिकायत की. शुरुआत में एयरलाइन ने मामले की जांच करने की बात कही, लेकिन बाद में जवाब दिया कि परिवार की ओर से शाकाहारी या विशेष भोजन की मांग नहीं की गई थी. एयरलाइन ने उन्हें अपने ट्रैवल एजेंट से संपर्क करने की सलाह दी.
जिला आयोग में आया मामलापहले मामले की शिकायत एयरलाइंस से की गई, जब वहां से संतोषजनक समाधान नहीं मिला, तब जसप्रीत सिंह ने रूपनगर के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने टिकट के 1.25 लाख रुपये वापस करने और 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की. जनवरी 2023 में जिला आयोग ने एयरलाइन और ट्रैवल एजेंट को टिकट का पैसा 7% सालाना ब्याज के साथ लौटाने, 25,000 रुपये मुआवजा देने और 11,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में चुकाने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ सिंगापुर एयरलाइंस ने राज्य आयोग में अपील की.
एयरलाइन ने पेश की सफाईसिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि यात्रियों ने पहले से किसी विशेष भोजन की मांग नहीं की थी और उन्हें एयरलाइन के नियमित मेन्यू के अनुसार खाना दिया गया था. हालांकि राज्य आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने कहा कि विशेष भोजन की मांग नहीं किए जाने का मतलब ये नहीं है कि एयरलाइन लंबी उड़ान के दौरान यात्रियों को सामान्य खाना देने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है. आयोग ने ये भी कहा कि एयरलाइन पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे ये साबित हो सके कि परिवार को पर्याप्त भोजन दिया गया था.
बदली गई मुआवजे की रकमएयरलाइन की पाई के बाद राज्य आयोग ने माना कि परिवार को हुई परेशानी, खासकर 11 महीने की बच्ची के साथ यात्रा करने की स्थिति, मुआवजे की हकदार थी. लेकिन आयोग ने ये भी ध्यान दिया कि परिवार अपनी यात्रा पूरी कर चुका था. ऐसे में पूरे टिकट का पैसा वापस करने का आदेश देना जरूरत से ज्यादा सख्त होगा.
इसलिए आयोग ने पहले दिए गए राहत संबंधी आदेश में बदलाव करते हुए मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए कुल 50,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया. इसके अलावा कानूनी खर्च भी देना होगा.
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>घंटे, की, उड़ान, और, खाने, को, कुछ, नहीं, अब, ग्राहक, को, 50000, देगी, ये, एयरलाइन</media:keywords>
    </item>
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        <title>आज शनिवार को बैंक खुले हैं या बंद? फटाफट चेक करें RBI की हॉलिडे लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ आज यानी कि 24 अक्टूबर, शनिवार को अगर आप बैंक से जुड़े किसी काम को निपटाने का सोच रहे हैं, तो एक बार यह जरूर पता कर लें कि आपके शहर में बैंक खुला है या नहीं. बिना किसी जानकारी के ब्रांच जाने में कहीं समय की बर्बादी न हो. जैसा कि हम जानते हैं कि आज महीने का चौथा शनिवार है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार हर महीने के चौथे शनिवार को सभी सरकारी, प्राइवेट और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) बंद रहते हैं.&amp;nbsp;
आरबीआई के मुताबिक, महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को देश के सभी बैंक पूरी तरह बंद रहते हैं, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. याइस हिसाब से आज देशभर में सभी बैंक बंद रहने वाले हैं. वहीं, कल यानी कि 25 अक्टूबर को रविवार होने की वजह से साप्ताहिक छुट्टी रहेगी.
अगले हफ्ते बैंक में छुट्टियां
26 अक्टूबर (सोमवार)- लक्ष्मी पूजा, एसेशन डे (विलय दिवस) और महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर अगरतला, बेंगलुरु, चंडीगढ़, जम्मू, शिमला और श्रीनगर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी.
29 अक्टूबर (गुरुवार)- करवा चौथ के कारण शिमला में बैंक बंद रहेंगे.
31 अक्टूबर (शनिवार)- सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर अहमदाबाद में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी.
1 नवंबर (रविवार)- रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण पूरे भारत में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी.&amp;nbsp;
बैंक बंद होने पर ऐसे निपटाएं काम
आपको यह सोचकर बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है कि अगले हफ्ते पूरे चार दिन बैंक बंद रहेंगे. बैंक ब्रांच बंद होने का मतलब यह नहीं है कि डिजिटल बैंकिंग भी बंद हो जाएगी. UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी सर्विसेज &amp;nbsp;24x7 चालू रहेंगी. ऐसे में आप घर बैठे-बैठे पैसों का लेनदेन कर सकते हैं, बिल पेमेंट कर सकते हैं और रिचार्ज वगैरह करा सकते हैं. जरूरत होने पर एटीएम से कैश भी निकाल सकते हैं. हालांकि, चेक क्लियरेंस, केवाईसी अपडेट, लॉकर ऑपरेट करने और हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए आपको बैंक खुलने का इंतजार करना होगा.

ये भी पढ़ें:
छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी राहत, 1 नवंबर से आसान होगा GST रजिस्ट्रेशन&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, शनिवार, को, बैंक, खुले, हैं, या, बंद, फटाफट, चेक, करें, RBI, की, हॉलिडे, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
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        <title>घर से बेकरी या गिफ्ट पैकिंग का काम शुरू करने में कितना खर्च आता है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-से-बेकरी-या-गिफ्ट-पैकिंग-का-काम-शुरू-करने-में-कितना-खर्च-आता-है</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में अपना काम शुरू करने के लिए बड़ी दुकान या ऑफिस होना जरूरी नहीं है. कई ऐसे छोटे बिजनेस हैं, जिन्हें घर के एक कमरे से भी शुरू किया जा सकता है. खास बात यह है कि इन कामों में शुरुआत में ज्यादा पैसे लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
अगर आप भी घर बैठे कमाई करना चाहते हैं और अपने बजट के हिसाब से कोई काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो बेकरी और गिफ्ट पैकिंग जैसे विकल्प आपके लिए अच्छे हो सकते हैं. हालांकि, बिजनेस शुरू करने से पहले खर्च, सामान और ग्राहकों की जरूरत को समझना जरूरी है.
&amp;nbsp;घर से बेकरी का काम शुरू करने में कितना खर्च आएगा?
अगर आपको केक, कुकीज, कपकेक या बिस्कुट बनाना पसंद है, तो घर से बेकरी का काम शुरू कर सकते हैं. शुरुआत में आप अपने घर की रसोई से ही ऑर्डर लेना शुरू कर सकते हैं. इसके लिए आपको बहुत बड़े सेटअप की जरूरत नहीं होगी. अगर आपके पास पहले से ओवन और रसोई का जरूरी सामान है, तो खर्च कम हो सकता है. वहीं, नया सामान खरीदने पर बजट बढ़ सकता है.
बेकरी बिजनेस में अनुमानित शुरुआती खर्च:

ओवन या बेकिंग उपकरण: 5 हजार से 15,000 रुपये
कच्चा माल, जैसे मैदा, चीनी, क्रीम और चॉकलेट: 2 हजार से 4 हजार रुपये
केक मोल्ड, बीटर और दूसरे उपकरण: 2 हजार से 5 हजार रुपये
पैकिंग बॉक्स और सजावट का सामान: 1 हजार से 2 हजार रुपये

इस तरह छोटे स्तर पर बेकरी का काम शुरू करने के लिए लगभग 10 हजार से 25 हजार रुपये या उससे ज्यादा की जरूरत पड़ सकती है. वास्तविक खर्च आपके पास मौजूद सामान और काम के स्तर पर निर्भर करेगा.
घर से गिफ्ट पैकिंग का काम कैसे शुरू करें?
अगर आपको सजावट करना और चीजों को खूबसूरती से पैक करना पसंद है, तो गिफ्ट पैकिंग का काम भी शुरू कर सकते हैं. इसमें जन्मदिन, शादी, त्योहार और सालगिरह के लिए गिफ्ट पैक तैयार किए जा सकते हैं. इस काम की खास बात यह है कि इसमें महंगी मशीनों की जरूरत नहीं होती. शुरुआत में आप छोटे ऑर्डर लेकर अपना काम बढ़ा सकते हैं.
गिफ्ट पैकिंग बिजनेस में अनुमानित खर्च:

गिफ्ट पेपर और रिबन: 1 &amp;nbsp;हजार से 2 हजार रुपये
गिफ्ट बॉक्स और सजावटी सामान: 2 हजार से 3 हजार रुपये
कैंची, टेप, गोंद और दूसरे उपकरण: 500 से 1 हजार रुपये
सैंपल पैक और डिजाइन तैयार करना: 500 से 1 हजार रुपये

इस तरह लगभग 4 हजार से 7 हजार रुपये में छोटे स्तर पर गिफ्ट पैकिंग का काम शुरू किया जा सकता है.
ग्राहकों तक कैसे पहुंचें?
शुरुआत में अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को अपने काम के बारे में बता सकते हैं. इसके अलावा WhatsApp और Instagram पर अपने बनाए प्रोडक्ट की तस्वीरें डालकर ऑर्डर लेने की कोशिश कर सकते हैं.
बेकरी के लिए स्वाद, साफ-सफाई और समय पर डिलीवरी जरूरी है. वहीं, गिफ्ट पैकिंग में अच्छी डिजाइन और आकर्षक पैकिंग ग्राहकों को पसंद आ सकती है. स्थानीय दुकानों और इवेंट प्लानर्स से संपर्क करना भी फायदेमंद हो सकता है.
किस बिजनेस में होगा ज्यादा फायदा?
कम बजट में शुरुआत करने के लिहाज से गिफ्ट पैकिंग आसान विकल्प हो सकता है. वहीं, बेकरी में नियमित ग्राहक बनने पर बार-बार ऑर्डर मिलने की संभावना रहती है, लेकिन दोनों कामों में कमाई तय नहीं होती. यह ऑर्डर की संख्या, सामान की लागत, आपकी मेहनत और ग्राहकों की मांग पर निर्भर करेगी.
अगर आप घर से अपना छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो पहले कम सामान और छोटे ऑर्डर से शुरुआत करें. इससे आपको बाजार की मांग समझने और बिना ज्यादा जोखिम के अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>2 दिन में 17000 सस्ती हुई चांदी, जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से 55% टूटी</title>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारी सीजन में जहां एक तरफ सोने और चांदी की कीमतों के बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी. वहीं दूसरी ओर चांदी की कीमतों में दीवाली से पहले गिरावट दर्ज की गई है. MCX यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमतें 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गईं है. क्योंकि दो दिनों में आई 17,000 रुपये की भारी गिरावट ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया है.&amp;nbsp;
शुक्रवार को, MCX दिसंबर चांदी वायदा (फ्यूचर्स) 3.5% यानी 7,000 रुपये गिरकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है. इस साल की शुरुआत में 4.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से, चांदी करीब 55% गिर गई है, जो करीब 2.34 लाख रुपये की कुल गिरावट है.
दीवाली से पहले खरीद लें चांदीहालांकि अभी दीपावली का त्यौहार सिर पर है, इस समय में सोने और चांदी की कीमतों में काफी तेजी से बढ़ोतरी होती है. तो हो सकता है कि त्यौहार के आस पा कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की जाए. ऐसे में जिन ग्राहकों को अपनी जरूरत के लिए कुछ चांदी खरीदना हो, उनके लिए ये समय अच्छा है. वो इस समय में चांदी खरीद सकते हैं.
सरकार ने बढ़ाया आयातभारत चांदी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है. देश में जरूरत की करीब 80% चांदी का आयात किया जाता है. ऐसे में बीते दिन ही सरकार ने चांदी के आयात को मंजूरी दी है. इससे त्यौहारी सीजन में चांदी की कमी लोगों को देखने नहीं मिलेगी. इसके अलावा हो सकता है कि उपलब्धता के कारण इसका असर कीमतों पर भी पड़ सकता है.
निवेश के लिए खरीदना सही है या नहीं?बता दें कि यदि आप निवेश के हिसाब से चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको थोड़ा रुकना चाहिए. क्योंकि चांदी की कीमतों में जिस हिसाब से गिरावट दर्ज की जा रही है, उसे देख लगता है कि आने वाले समय में और भी ज्यादा गिरावट देखने को मिल सकती है. तो ऐसे में निवेश के लिए चांदी खरीदना बिलकुल भी सही फैसला साबित नहीं होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>गुजरात में 8 घंटे बिजली कटौती, उद्योगों को हर हफ्ते 300 करोड़ का नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ गुजरात में दीवाली की तैयारियों के बीच औद्योगिक क्षेत्र के सामने बिजली संकट बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. त्योहार के दौरान बाजारों में कपड़ों और अन्य सामान की मांग बढ़ जाती है, जिससे फैक्ट्रियों में उत्पादन तेज करना जरूरी होता है.
बिजली आपूर्ति में कटौती के कारण उद्योगों की काम करने की रफ्तार प्रभावित हो रही है. इसका असर कारोबार, समय पर ऑर्डर की डिलीवरी और हजारों कर्मचारियों की कमाई पर पड़ने की आशंका है.
कपड़ा उद्योग को हर सप्ताह 300 करोड़ की चोट
बिजली संकट का सबसे गंभीर असर गुजरात के कपड़ा कारोबार पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र को हर सप्ताह लगभग 300 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. उत्पादन रुकने या धीमा होने से कंपनियों के लिए निर्धारित समय पर माल तैयार करना मुश्किल हो सकता है.
दीवाली से पहले कपड़ों की मांग बढ़ने के कारण कारोबारियों को समय पर ऑर्डर भेजना जरूरी होता है. ऐसे में बिजली की अनुपलब्धता से उत्पादन, पैकिंग और माल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. यदि सामान की डिलीवरी में देरी होती है, तो कारोबारियों को भुगतान मिलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
गुजरात में क्यों की जा रही है बिजली कटौती?
रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में उद्योगों को हर सप्ताह आठ घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दीवाली से पहले कंपनियों पर ऑर्डर पूरे करने का दबाव है. राज्य में बिजली की मांग बढ़ने के कारण आपूर्ति को संभालने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है.
16 अक्टूबर को गुजरात में बिजली की मांग बढ़कर 29,822 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. नवरात्रि के दौरान बढ़ी खपत, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और दीवाली से पहले की तैयारियों को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया है. गुजरात को पारंपरिक रूप से बिजली की अधिक उपलब्धता वाले राज्यों में माना जाता रहा है, इसलिए मौजूदा संकट उद्योगों के लिए विशेष चिंता का विषय बन गया है.
बिजली संकट दूर करना सरकार के लिए चुनौती
बिजली की बढ़ती मांग और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों के बीच सरकार के सामने उद्योगों के साथ घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है. अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने और बंद पड़ी बिजली उत्पादन इकाइयों को दोबारा चालू करने जैसे उपायों पर भी काम किया जा रहा है.
हालांकि, उद्योगों को राहत कब तक मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं है. दीवाली नजदीक होने के कारण आने वाले दिन कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं. यदि बिजली आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती, तो गुजरात के औद्योगिक उत्पादन और त्योहार से जुड़े कारोबार पर इसका असर और बढ़ सकता है.
25 लाख कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर चिंता
दक्षिण गुजरात के औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 25 लाख कर्मचारियों की आजीविका को लेकर चिंता जताई गई है. उद्योग संगठनों का कहना है कि बिजली की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर रोजगार और कर्मचारियों के वेतन पर भी पड़ सकता है.
उद्योग जगत ने बिजली कटौती के समय में बदलाव करने और आपूर्ति की स्थिति सुधारने की मांग उठाई है. कारोबारियों की चिंता है कि त्योहार के अहम समय में उत्पादन प्रभावित होने से कंपनियों को आर्थिक नुकसान के साथ ग्राहकों के भरोसे पर भी असर झेलना पड़ सकता है.
इंजीनियरिंग और सिरेमिक उद्योग भी प्रभावित
बिजली की कमी का असर केवल कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं है. इंजीनियरिंग और सिरेमिक क्षेत्र की इकाइयां भी उत्पादन संबंधी मुश्किलों का सामना कर रही हैं. लगातार बिजली पर निर्भर रहने वाली फैक्ट्रियों के लिए काम रोकना और दोबारा शुरू करना खर्च बढ़ा सकता है.
खासतौर पर छोटी और मझोली कंपनियों के सामने चुनौती अधिक है, क्योंकि उनके लिए उत्पादन में आई रुकावट की भरपाई करना आसान नहीं होता. मशीनों के संचालन, कर्मचारियों की शिफ्ट और तैयार माल की आपूर्ति का पूरा कार्यक्रम दोबारा बनाना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Jio IPO ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 1 करोड़ लोगों ने लगाई अपनी कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर शेयर बाजार में काफी खलबली देखने को मिल रही है. कंपनी के शेयर खरीदने के लिए निवेशकों में ऐसी होड़ मची है कि आवेदन की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ दुनिया का पहला ऐसा सार्वजनिक इश्यू बन है, जिसमें 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए हैं.
जिया का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला था और 23 अक्टूबर को बोली लगाने का आखिरी दिन था. इश्यू के पहले ही दिन इसे शानदार रिस्पॉन्स मिला और अब आखिरी दिन निवेशकों की दिलचस्पी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है. यहां से डिटेल में जानिए कि जियो आईपीओ को कितना सब्सक्रिप्शन मिला, किस कैटेगरी में लोग सबसे ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग कब हो सकती है.
कितना बड़ा है जियो का आईपीओ?जियो प्लेटफॉर्म्स का ये आईपीओ करीब 30,213 करोड़ रुपये का है. इसके लिए शेयर का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर रखा गया है.&amp;nbsp;
कंपनी का आईपीओ भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक इश्यू में शामिल है. ये रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से करीब दो दशक बाद आने वाला पहला आईपीओ भी है. इस वजह से बाजार में पहले से ही इसे लेकर काफी चर्चा थी.&amp;nbsp;
कितनी बार सब्सक्राइब हुआ आईपीओ?23 अक्टूबर को दोपहर तक के आंकड़े बताते हैं कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को करीब 7.5 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था. मतलब जितने शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे, उनके मुकाबले करीब साढ़े सात गुना शेयरों के लिए बोलियां आईं.
किसका टूटा रिकॉर्ड?एक सार्वजनिक इश्यू में इतने ज्यादा आवेदन आना निवेशकों की बड़ी भागीदारी को दिखाता है. इससे पहले Waaree Energies के आईपीओ में करीब 97 लाख आवेदन का रिकॉर्ड मिला था. जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस आंकड़े को भी पार कर दिया है.&amp;nbsp;
कब होगी शेयरों की लिस्टिंग?जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को होने की उम्मीद है. लिस्टिंग के दिन शेयर बाजार में इसकी ट्रेडिंग शुरू होगी और तब पता चलेगा कि शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले किस भाव पर कारोबार करना शुरू करता है.&amp;nbsp;
2 दिन में 17000 सस्ती हुई चांदी, जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से 55% टूटी
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>फेसबुक स्कैम में बुजुर्ग को 16 लाख की चपत, जानें कैसे मिला झांसा</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया के जरिए आजकल बहुत से फ्रॉड के केस सामने आते रहते हैं. खासतौर से इसके जरिए लोग बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं. ऐसा ही एक मामल हाल ही में सिंगापुर से सामने आया है. जहां 71 साल के एक बुजुर्ग के साथ ऑनलाइन लॉटरी के नाम पर धोखाधड़ी हो गई है. ठगों ने उनसे 21,688 सिंगापुर डॉलर (करीब 16 लाख रुपये) ठग लिए.
इस धोखाधड़ी के बाद बुजुर्ग के पास रोजमर्रा का खर्च चलाने के लिए भी पैसे नहीं बचे. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट Mothership के मुताबिक, बुजुर्ग की पहचान सिर्फ मिस्टर यांग के नाम से हुई है.
फेसबुक से ऐसे हुई ठगीरिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के आखिरी हफ्ते में मिस्टर यांग ने फेसबुक पर एक एड देखा. जिसमें लॉटरी में पक्की जीत दिलाने का दावा किया गया था. विज्ञापन में दिए गए फोन नंबर पर उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन शुरू में बात नहीं हो सकी. कुछ दिनों बाद सितंबर की शुरुआत में ठगों ने खुद उन्हें फोन किया.
फोन करने वालों ने दावा किया कि सिंगापुर की लॉटरी कंपनी Singapore Pools में उनके जान-पहचान के लोग हैं. वो लॉटरी के नतीजे घोषित होने से पहले ही जीतने वाले नंबर बता सकते हैं.
जीत का लालच देकर मांगे पैसेठगों ने यांग से पहले ही पैसे जमा करने को कहा. जब उन्होंने बताया कि उनके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, तो ठगों ने फीस कम कर दी. उन्होंने खाता खोलने के लिए 500 सिंगापुर डॉलर और लॉटरी के पांच सेट नंबर देने के लिए 500 सिंगापुर डॉलर और मांगे. ठगों ने भरोसा दिलाया कि इन नंबरों के जरिए उन्हें 3 लाख सिंगापुर डॉलर (करीब 2.2 करोड़ रुपये) का जैकपॉट मिल सकता है. लेकिन 5 सितंबर को लॉटरी के नतीजे आए तो उनके किसी भी नंबर पर इनाम नहीं निकला.
फर्जी चेक दिखाकर दोबारा ठगीजब बुजुर्ग ने ठगों से इस बारे में सवाल किया, तो उन्होंने एक नई कहानी बना दी. ठगों ने कहा कि नंबरों में गड़बड़ी हुई है और असल में यांग ने पहला इनाम जीत लिया है. अपने दावे को सच दिखाने के लिए उन्होंने 3 लाख सिंगापुर डॉलर का एक चेक भी भेजा. इसके बाद ठगों ने इनाम की रकम देने के नाम पर उनसे एक्स्ट्रा शुल्क और टैक्स मांगा. बुजुर्ग उनकी बातों से फंस गए और उन्होंने 7,840 सिंगापुर डॉलर का भुगतान कर दिया.
सारी जमापूंजी हो गई खत्मबुजुर्ग ने इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई. जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई. उधर यांग फिलहाल बेरोजगार हैं. ठगी में अपनी जमापूंजी गंवाने के बाद अब उनके पास रोजमर्रा का खर्च चलाने के लिए भी रुपये नहीं बचे हैं. उन्होंने बताया कि अब वो गुजारा करने के लिए सिर्फ इंस्टेंट नूडल्स और ब्रेड जैसी जरूरी चीजें ही खरीद पा रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दुबई में अब भारत से भी महंगा बिक रहा है पेट्रोल, यहीं निकलता है कच्चा तेल</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में पेट्रोल- डीजल के दाम कुछ समय पहले ही बढ़े थे, जिससे आम जनता ने काफी चीजों में भी महंगाई देखी थी. लेकिन अगर आप दुबई में पेट्रोल के दाम देखेंगे तो हैरान रह जाएंगे. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अक्टूबर 2026 में पेट्रोल- डीजल के दाम इतनी तेजी से बढ़े हैं कि अब भारत के दाम देखने पर सस्ते लगेंगे.
आमतौर पर माना जाता है कि तेल पैदा करने वाले देशों में पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है. UAE में पेट्रोल- डीजल बनाया जाता है, ऐसे में यहां पर महंगा ईंधन मिलना काफी बड़ी बात है.
कितनी है UAE में पेट्रोल-डीजल की कीमतUAE में हर महीने पेट्रोल और डीजल की कीमतों का रिव्यू किया जाता है. अक्टूबर में वहां पेट्रोल की अलग-अलग श्रेणियों के दाम करीब 16% तक बढ़ाए गए हैं. डीजल की कीमत में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है. यहां देखें कितने हैं इस समय पेट्रोल- डीजल के दाम:



ईंधन का प्रकार
सितंबर की कीमत (प्रति लीटर)
अक्टूबर की कीमत (प्रति लीटर)


सुपर 98 पेट्रोल
3.80 दिरहम
4.40 दिरहम


स्पेशल 95 पेट्रोल
3.69 दिरहम
4.28 दिरहम


E-Plus 91 पेट्रोल
3.61 दिरहम
4.21 दिरहम


डीजल
4.30 दिरहम
4.80 दिरहम



दिल्ली में कितने हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?22 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर थी.
UAE की नई कीमतों के बाद भारत से तुलना करने पर पेट्रोल और डीजल दुबई से भी सस्ता पड़ रहा हैं. हालांकि ये अंतर ईंधन की श्रेणी, करेंसी एक्सचेंज रेट और शहर के हिसाब से बदल सकता है. क्योंकि भारत में हर राज्य में पेट्रोल-डीजल की कीमत एक जैसी नहीं होती. हर राज्य में अगर वैट होता है, इसी के आधार पर ईंधन की कीमत तय की जाती है.
क्यों बढ़ रहे पेट्रोल- डीजल के दाम?बता दें कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है. इलाके में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ रहा है. इसी के कारण सबसे ज्यादा ईंधन के दाम बढ़ रहे हैं. जब ईंधन महंगा होता है, तो इसका असर आम लोगों के बजट पर पड़ता है. साथ ही, ट्रक, बस और दूसरे वाहनों से सामान पहुंचाने वाली कंपनियों का खर्च भी बढ़ सकता है. इससे आगे चलकर महंगाई लगातार बढ़ती है.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>चांदी पर बड़ा फैसला, भारत ने दी 6500 टन सिल्वर इम्पोर्ट की मंजूरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चांदी-पर-बड़ा-फैसला-भारत-ने-दी-6500-टन-सिल्वर-इम्पोर्ट-की-मंजूरी</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में त्यौहारी सीजन चल रहा है, जिसमें सोना और चांदी की डिमांड देश में बढ़ जाती है. इसी को देखते हुए भारत सरकार ने एक फैसला किया है, जिसके तहत देश में अगले छह महीनों में करीब चांदी के आयात को मंजूदी दे दी गई है. इस समयावधि में 6,500 मीट्रिक टन चांदी का आयात किया जाएगा.
इस फैसले के पीछे मकसद ये है कि त्यौहारों के सीजन में चांदी की डिमांड को पूरा किया जाए. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जिन चार बुलियन कारोबारियों को आयात की अनुमति मिली है, उन्होंने इसकी जानकारी दी है.
भारत में कितनी चांदी होती है इम्पोर्ट?भारत दुनिया में चांदी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है. देश अपनी जरूरत की 80% से ज्यादा चांदी विदेशों से आयात करता है. ऐसे में आयात बढ़ने से देश में चांदी की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
कम है चांदी की मांगबाजार के जानकारों के मुताबिक, अगले छह महीनों के लिए चांदी के आयात की इतनी बड़ी मंजूरी मिलने से कारोबारियों को हैरानी हुई है. क्योंकि चांदी की कीमतों में हाल में गिरावट आई है, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग बाजारों में कम है. कारोबारियों का भी यही मानना है कि कीमतों में गिरावट होने के कारण चांदी की डिमांड कम हो गई है. कम कीमतों के चलते लोग चांदी में निवेश करने से बच रहे हैं.
चांदी के आयात पर लगी थी पाबंदियांबता दें कि सरकार ने मई के बीच में चांदी के लगभग सभी रूपों के आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद जून में चांदी के दाने और पाउडर को भी प्रतिबंधित कर दिया था. इनके आयात के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी कर दिया गया था. सरकार पिछले कुछ महीनों से सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है. इसका उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और रुपये को सहारा देना है.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>GSTN में बड़ा बदलाव, रिवर्स चार्ज खरीद के लिए जोड़े गए दो नए ई&amp;इनवॉइस विकल्प</title>
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        <description><![CDATA[ सरकार ने GST के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. जिसके बाद कारोबारियों का इससे काफी मुनफा होगा. दरअसल हाल ही में GST नेटवर्क (GSTN) ने ई-इनवॉइस सिस्टम में दो नई कैटेगिरीज जोड़ने की तैयारी की है. इसके तहत कुछ खास तरह की खरीदारी और विदेश से ली जाने वाली सेवाओं के लिए भी कंपनियों को खुद ई-इनवॉइस बनाना होगा. ये नियम रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के तहत आने वाले चुनिंदा लेनदेन पर लागू होगा.
इस बदलाव का मकसद GST के दायरे में आने वाले लेनदेन की सही जानकारी जुटाना और टैक्स चोरी की संभावना को कम करना है. GST काउंसिल की 57वीं बैठक में इस व्यवस्था की सिफारिश की गई थी.
क्या हैं ई-इनवॉइस की दो नई कैटेगिरीज?GSTN की 16 अक्टूबर की एडवाइजरी के मुताबिक, ई-इनवॉइस सिस्टम में दो नई कैटेगिरीज जोड़ी जाएंगी. पहली कैटेगिरी होगी RCM-DOM यानी देश में ऐसे अपंजीकृत सप्लायर से की गई तय खरीदारी, जिन पर रिवर्स चार्ज के तहत GST लागू होता है. तो वहीं दूसरी कैटेगिरी होगी RCM-IMP यानी विदेश से ली जाने वाली सेवाएं, जिन पर रिवर्स चार्ज के तहत GST देना होता है.
इन कैटेगिरीज के जरिए पात्र कारोबारी अधिकृत इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर अपनी सेल्फ-इनवॉइस जमा कर सकेंगे और इनवॉइस रेफरेंस नंबर (IRN) हासिल कर पाएंगे.
क्या होता है RCM?किसी सामान या सुविधा को बेचने वाला सप्लायर GST वसूलता है और सरकार को जमा करता है. लेकिन कुछ खास लेनदेन में ये जिम्मेदारी खरीदार या सुविधा लेने वाले की होती है. इसी व्यवस्था को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म यानी RCM कहा जाता है.
उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी विदेश से ऐसी सेवा लेती है जिस पर RCM लागू होता है, तो उस सेवा पर GST चुकाने की जिम्मेदारी कंपनी की हो सकती है. ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार, कारोबारी को सेल्फ-इनवॉइस भी जारी करना पड़ सकता है.
किस पर पड़ेगा असर?ये सुविधा उन पंजीकृत कारोबारियों के लिए है, जिनका कुल सालाना टर्नओवर 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है. हालांकि, इसका वास्तविक दायरा संबंधित कानून और सरकारी अधिसूचनाओं में तय शर्तों पर निर्भर करेगा. GSTN ने अभी इस नई व्यवस्था को लागू करने की आखिरी तारीख घोषित नहीं की है. फिलहाल कारोबारी अधिकृत ई-इनवॉइस पोर्टल पर इसकी टेस्टिंग कर सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>eBay में फिर छंटनी, अब 1000 कर्मचारियों की नौकरी से निकालेगी कंपनी</title>
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        <description><![CDATA[ एक तरफ कंपनियां अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए नई- नई तरह की प्लानिंग कर रही हैं, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों की नौकरियों पर भी खतरा बना हुआ है. अब ऑनलाइन शॉपिंग और रीसेलिंग प्लेटफॉर्म eBay ने करीब 1000 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है. कंपनी के टोटल कर्मचारियों में ये करीब 9% की कटौती है. ये पहली बार नहीं है जब ईबे में छंटनी हो रही है. ये इस साल का दूसरा ले ऑफ है.&amp;nbsp;
सवाल सिर्फ 1000 लोगों की नौकरी जाने का नहीं है. कंपनी का कहना है कि वो अपने कामकाज को आसान बनाना चाहती है और उन सेक्टर्स पर ज्यादा ध्यान देगी जहां आगे बढ़ने की ज्यादा संभावना है. आइये जानते हैं कि इससे पहले कंपनी ने कितने लोगों को नौकरी से निकाला था.
अब तक कितनी नौकरियां गईं?eBay ने फरवरी के महीने में ही करीब 800 कर्मचारियों की छंटनी की थी. अब अक्टूबर में करीब 1,000 और नौकरियों में कटौती की तैयारी है. दोनों दौर को मिलाकर कंपनी ने इस साल करीब 1,800 पदों में कटौती की है. दिसंबर 2025 के आखिर तक eBay में दुनियाभर में करीब 12,300 कर्मचारी थे. अब ये नई छंटनी कंपनी के कर्मचारियों की संख्या का लगभग 9% हिस्सा है.&amp;nbsp;
छंटनी की क्या है वजह?eBay के CEO Jamie Iannone ने कर्मचारियों को जो मैसेज भेजा है उसमें कहा गया है कि कंपनी हर विभाग में पहले की तरह खर्च करने के बजाय उन क्षेत्रों पर ज्यादा निवेश करना चाहती है, जिनसे कारोबार को बेहतर ग्रोथ मिल सकती है. इसी के लिए कंपनी अपने कामकाज को आसान बनाने और टीमों को नए हिसाब से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है.&amp;nbsp;
eBay क्या करना चाहता है?eBay अब सिर्फ आम ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रहना चाहता है. कंपनी महंगे और स्पेशल सामान, कलेक्टिबल्स रखने वाली चीजों, पुराने लेकिन अच्छी हालत वाले सामान और रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स पर भी फोकस कर रही है.
इस साल कंपनी ने सेकेंड हैंड फैशन प्लेटफॉर्म Depop को खरीदने का सौदा भी पूरा किया है. इस प्लेटफॉर्म पर लोग पहले इस्तेमाल किए जा चुके कपड़े और फैशन से जुड़ी चीजें खरीद-बेच सकते हैं.&amp;nbsp;
भारत में भी होगी छंटनी?अभी ये नहीं पता चल पाया है कि छंटनी का भारत में काम करने वाले eBay कर्मचारियों पर कितना असर पड़ने वाला है. कंपनी ने टीम और देशों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी के दाम घटेंगे? सरकार ने 31 दिसंबर तक बढ़ाया ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, बुधवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के इम्पोर्ट फ्री ड्यूटी की समय-सीमा को दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दिया है. इससे पहले की समय-सीमा 31 अक्टूबर थी.
उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, घरेलू बाजार में सप्लाई की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी थी, लेकिन अब तक केवल 3 लाख टन चीनी का ही आयात किया गया है. आयात कम होने का मुख्य कारण घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम रहे हैं, जिससे कारोबारियों में आयात करने का प्रोत्साहन कम हो गया.
चीनी का क्यों कम हुआ आयात?
घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए, जिससे कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिली. हालांकि, इनसे आयातकों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार से चीनी मंगाकर उसे बाजार में बेचने पर कोई बड़ा मुनाफा या मार्जिन नहीं मिल रहा है. इसी के चलते मिलें तय कोटे का पूरा इस्तेमाल करने में हिचकिचा रही हैं. ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट की समयसीमा को 31 दिसंबर तक बढ़ाने से उन रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर नजर है. सरकार को उम्मीद है डेडलाइन बढ़ाने से बाकी बचे 7 लाख टन चीनी का आयात पूरा हो सकेगा. इससे देश में चीनी का स्टॉक बढ़ेगा.&amp;nbsp;
क्या होता है ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट?
आमतौर पर जब कोई देश किसी दूसरे देश से सामान मंगाता है, तो सरकार &amp;nbsp;घरेलू उद्योगों की रक्षा करने और रेवेन्यू कमाने के मकसद से उस पर टैक्स लगाती है. ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट में इसी टैक्स को जीरो कर दिया जाता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>बैंक का डेटा लीक हो जाए तो क्या बदल देना चाहिए ATM PIN, UPI PIN और पासवर्ड?</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक में खाता है तो उससे जुड़ी जानकारी सुरक्षित रहना भी जरूरी है. लेकिन अगर कभी बैंक का डेटा लीक होने की खबर आए तो ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या अब एटीएम पिन, यूपीआई पिन और नेट बैंकिंग का पासवर्ड बदल देना चाहिए? कहीं खाते से पैसे तो नहीं निकल जाएंगे?
हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर सामने आने का मामला आया है. बैंक की शुरुआती जांच में करीब 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड में निजी जानकारी की पहचान हुई है. इसमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और घर का पता जैसी जानकारियां शामिल बताई गईं. बैंक ने कहा कि मामले की जांच हो रही है और इससे काम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है. ऐसे में सवाल ये भी है कि डेटा लीक होने पर ग्राहक को क्या करना चाहिए? क्या सिर्फ पिन बदलने से खतरा टल जाएगा?
डेटा लीक होने पर पासवर्ड बदलना जरूरी है?
नहीं, अगर डेटा लीक में सिर्फ आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल वगैरह लीक हुआ है तो जरूरी नहीं है कि किसी के पास आपके एटीएम या यूपीआई पिन की जानकारी भी पहुंच गई हो. लेकिन ऐसी जानकारी का इस्तेमाल करके साइबर ठग आपको बैंक अधिकारी बनकर फोन कर सकते हैं. वो खाते में गड़बड़ी, केवाईसी अपडेट या कार्ड ब्लॉक होने का डर दिखाकर आपसे ओटीपी, पिन या पासवर्ड पूछने की कोशिश कर सकते हैं.
अगर बैंक ने आपको बताया है कि आपके बैंकिंग क्रेडेंशियल्स लीक हुआ है या आपको खाते में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो तुरंत बैंक से संपर्क करें और जरूरत के हिसाब से पिन और पासवर्ड बदल दें.&amp;nbsp;
यूपीआई को लेकर क्या करें?अगर आपको शक है कि आपका यूपीआई पिन किसी को पता चल गया है तो उसे तुरंत बदल दें. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर यूपीआई ऐप में जाकर कुछ न करें.&amp;nbsp;NPCI भी ग्राहकों को अपना यूपीआई पिन किसी के साथ शेयर नहीं करने के लिए बोलता है.
एटीएम और नेट बैंकिंग का क्या करें?
अगर कार्ड खो गया है, किसी ने पिन देख लिया है या कार्ड से कोई अनजान लेनदेन हुआ है तो कार्ड को तुरंत ब्लॉक कराएं और पिन बदल दें. अगर केवल नाम और मोबाइल नंबर लीक हुए हैं तो एटीएम पिन बदलना जरूरी नहीं है. नेट बैंकिंग पासवर्ड की बात करें तो अगर पासवर्ड कमजोर है, दूसरे अकाउंट में भी वही पासवर्ड हैं या उसके लीक होने का शक है तो उसे बदल दें.&amp;nbsp;
खाते से पैसे निकल जाएं तो क्या करें?
अगर डेटा लीक की खबर के बीच आपके खाते से बिना अनुमति पैसे कट जाते हैं तो सबसे पहले बैंक को सूचना दें और शिकायत दर्ज कराएं. शिकायत नंबर और ट्रांजैक्शन की जानकारी संभालकर रखें. साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.&amp;nbsp;
चीनी के दाम घटेंगे? सरकार ने 31 दिसंबर तक बढ़ाया ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>SBI डेटा लीक: क्या आपके नाम पर भी कोई ले सकता है क्रेडिट कार्ड?</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक का इस्तेमाल लोग केवल लेन-देन के लिए ही नहीं करते हैं, बल्कि इसका इस्तेमाल लोग लोन लेने या फिर एफडी करवाने और दूसरी सुविधाओं के लिए भी करते हैं. इस बीच देश के सबसे बडे़ और भरोसेमंद बैंक भारतीय स्टेट बैंक ( SBI) के कुछ ग्राहकों की पर्सनल जानकारी डार्क वेब पर लीक होने की बात सामने आई है, जिसमें ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, एड्रेस और यहां तक की लोन से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी शामिल है.&amp;nbsp;
हालांकि, शुरुआत में बैंक के 3.75 लाख ग्राहकों का डेटा लीक होने का दावा सामने आया था, लेकिन बाद में बैंक की शुरुआती जांच में सामने आया कि 3897 ग्राहकों का डेटा लीक हुआ है. ऐसे में ग्राहकों के मन में कई सारे सवाल है कि इस जानकारी का फायदा उठाकर कोई उनके नाम पर क्रेडिट कार्ड तो नहीं बनवा सकता है?
क्या क्रेडिट कार्ड बना सकता है?
जरूरी बात ये है कि केवल आपके नाम, मोबाइल नंबर और घर के एड्रेस की जानकारी होने से किसी के लिए भी आपके नाम पर क्रेडिट कार्ड जारी करवाना आसान नहीं होता है. क्योंकि जब क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया जाएगा तो बैंक आमतौर पर इस दौरान पहचान,KYC और दूसरी जरूरी जानकारियों की जांच करते हैं. &amp;nbsp;इसलिए ये मान लेना कि डेटा लीक होने से कोई भी आपके नाम पर क्रेडिट कार्ड बनवा सकता है तो ऐसा नहीं है.
बैंक अधिकारी बनकर लगा सकते हैं चूना
अहम बात ये है कि अगर किसी ठग के पास आपकी निजी जानकारी है तो वे इसका इस्तेमाल करके आपको फोन या मैसेज कर सकता है. इसमें वे अपने आपको SBI बैंक से जुड़ा व्यक्ति बताएगा और आपकी सारी जानकारी सही बताकर आपका भरोसा जीत लेगा. इसके बाद वे बैंक से जुड़े किसी काम के बहाने से आपसे OTP या ATM PIN, CVV या नेटबैंकिंग से जुड़ा पासवर्ड मांग सकता है.
इसका इस्तेमाल आपके अकाउंट से पैसे निकलने के लिए किया जा सकता है. इसलिए इस दौरान आपको काफी सर्तक रहने की जरूरत है. ध्यान रखें OTP, ATM PIN या अपनी पर्सनल जानकारी किसी के साथ सांझा न करें. कोई लिंक आता है आपके मोबाइल पर तो उस पर बिना सोचे-समझें क्लिक न करें. हर समय अपने बैंक से होने वाली लेन-देन पर नजर बनाएं रखें.&amp;nbsp;
धोखाधड़ी होते ही करें ये काम
अगर आपके साथ धोखाधड़ी हो जाती है तो बिना देरी किए जल्दी से अपने बैंक से बात करें और राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. वहीं अगर आपके नाम पर कोई अनजान लोन या क्रेडिट कार्ड मिलता है तो सीधे अपने बैंक से इसकी शिकायत करें.&amp;nbsp;
चीनी के दाम घटेंगे? सरकार ने 31 दिसंबर तक बढ़ाया ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>दीवाली की रंगत पड़ेगी फीकी! रेस्टोरेंट्स में 15% तक महंगा होगा खाना</title>
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        <description><![CDATA[ दीवाली आने वाली है. इसकी जमकर तैयारी भी की जा रही है. हालांकि, इस बार दीवाली की पार्टी की रंगत कुछ फीकी पड़ सकती है. फेस्टिव सीजन में आप जरूर अपने परिवार या दोस्तों के साथ बाहर जाकर रेस्टोरेंट्स में खाने का प्लानिंग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको अपनी जेब पहले के मुकाबले थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है.
दरअसल, अगले 8-10 दिनों में पूरे महाराष्ट्र में बाहर खाना-पीना महंगा हो सकता है क्योंकि रेस्तरां अपने मेन्यू की कीमतों में 10-15% की बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.&amp;nbsp;
क्यों महंगा होगा बाहर खाना?
रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) ने बताया है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत, कमर्शियल LPG, किराया, डेयरी उत्पादों की कीमतों और साफ-सफाई से जुड़े खर्चों के कारण यह बढ़ोतरी की जा रही है. उम्मीद है कि दीवाली से पहले ही कीमतों में यह बदलाव लागू हो जाएगा, जिसका असर सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर में लंच की थाली और रात में डिनर की प्लेट पर दिख सकता है.
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस दौरान रेस्टोरेंट में फूड मेन्यू से लेकर डिलीवरी ऑर्डर तक महंगा हो सकता है. इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, 10-15% तक की बढ़ोतरी के बाद पेपर डोसा की कीमत भी लगभग 99-104 रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, हर जगह रेट समान दर से नहीं बढ़ेंगे. यह रेस्टोरेंट्स के ऑपरेटिंग कॉस्ट, लोकेशन और बिजनेस मॉडल के आधार पर तय होगा.&amp;nbsp;
दाम बढ़ाने के अलावा नहीं कोई चारा
एक तरफ सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं. प्याज की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी हैं. अगस्त और सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI Inflation) के आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने के कई जरूरी सामान महंगे हुए हैं. इनमें चीनी से लेकर चावल और दालें शामिल हैं.
अक्टूबर की शुरुआत में ही 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी बढ़ोतरी की गई है. मुंबई में अब इसका रेट बढ़कर 1,692.50 हो गया है. अगस्त में महाराष्ट्र में दूध की कीमतें भी 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुकी है.
सरकार ने मौजूदा आबकारी नीति के तहत होटल, क्लब और रेस्तराओं के लिए शराब लाइसेंसों के रिन्यूअल के साथ ही लाइसेंस फीस में 10% तक की बढ़ोतरी का फरमान सुनाया है. ऐसे में जाहिर है कि इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर डाला जाएगा.
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, AHAR के प्रेसिडेंट विजय के. शेट्टी ने कहा कि कीमतों में यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है ताकि खाने की बेहतर क्वॉलिटी और सर्विस को बनाए रखते हुए बढ़े हुए खर्चों के एक हिस्से की भरपाई की जा सके.

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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>SpaceX और Tesla के विलय में जुटे एलन मस्क, होगा इतिहास का सबसे बड़ा मर्जर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/spacex-और-tesla-के-विलय-में-जुटे-एलन-मस्क-होगा-इतिहास-का-सबसे-बड़ा-मर्जर</link>
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        <description><![CDATA[ दुनिया के सबसे अमीर बिजनैसमेन एलन मस्क एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं. मस्क अपनी दो बड़ी कंपनियों को एक साथ करने की दिशा में कदम उठाने वाले हैं. जी हां, मस्क SpaceX और Tesla को साथ करने पर विचार कर रहे हैं. इन दोनों कंपनियों के विलय को लेकर अब चर्चाएं तेज हो गई है.&amp;nbsp;
एलन मस्क ने अपनी दोनों कंपनियों को एक साथ करने के विचार को अच्छा बताया है. अहम बात ये है कि दोनों कंपनियों के विलय पर विचार करने को लेकर समितियां भी बनाई गई हैं.&amp;nbsp;
एलन मस्क ने क्या कहां?
बता दें कि SpaceX की तिमाही कमाई को लेकर एक बैठक हुई. इस बैठक में एलन मस्क ने बताया कि दोनों कंपनियों ने विलय पर विचार करने के लिए समितियां बनाई हैं. मस्क का कहना है कि अगर दोनों कंपनियों का विलय होता है तो इससे फायदा हो सकता है. सबसे अहम बात ये है कि दोनों कंपनियों के विलय की चर्चा के बीच दोनों ही कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है.&amp;nbsp;
इतिहास का सबसे बड़ा मर्जर &amp;nbsp;
बड़ी बात ये है कि अगर दोनों कंपनियां आगे चलकर एक हो जाती हैं तो उनकी वैल्यू लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर होगी. अगर ये सौदा हो जाता है तो ये इतिहास के सबसे बड़े विलय में शामिल हो सकता है. Tesla बैटरी, रोबोट और इलेक्ट्रिक कार बनाती है. कंपनी का फोकस नई तकनीक और ऑटोमेशन को बढ़ावा देने पर है.&amp;nbsp;
SpaceX क्या बनाती है?
अगर बात करें एलन मस्क की SpaceX की तो ये कंपनी सैटेलाइट, रॉकेट और Starlink इंटरनेट सेवा का काम करती है. यानी अगर दोनों कंपनियां एक हो जाती है तो इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट और AI जैसी तकनीकों पर साथ काम किया जा सकता है.&amp;nbsp;
एक होने जा रही हैं स्पेसएक्स और टेस्ला?
सबसे अहम सवाल अब यही है कि क्या एलन मस्क की दोनों बड़ी कंपनियां SpaceX और Tesla एक होने वाली है? तो इसका जवाब है नहीं. फिलहाल अभी ये तय नहीं किया गया है कि दोनों कंपनियों को एक कर दिया जाएगा. अभी इस बात पर विचार किया जा रहा है. इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
HDFC की गोपनीय जानकारी लीक, बैंक ने शुरू की जांच, क्या है मामला?
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SpaceX, और, Tesla, के, विलय, में, जुटे, एलन, मस्क, होगा, इतिहास, का, सबसे, बड़ा, मर्जर</media:keywords>
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        <title>सोने में बड़ी गिरावट से खरीदारों की मौज, एक महीने में 5% लुढके दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोने-में-बड़ी-गिरावट-से-खरीदारों-की-मौज-एक-महीने-में-5-लुढके-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ सोने की कीमतो में पिछले कुछ सालों में काफी तेजी से इजाफा हुआ है. ऐसे में सोना खरीदने वाले ग्राहक काफी निराश हैं. लेकिन यदि आप इस वेडिंग सीजन के लिए गोल्ड खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये काफी अच्छा समय है. क्योंकि इस समय सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसा अभी से नहीं बल्कि पिछले एक महीने में करीब 5% तक सोने के दाम गिर चुके हैं.
बुलियन वेबसाइट के मुताबिक, 21 सितंबर 2026 को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,53,780 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 21 अक्टूबर को 1,46,270 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. ये एक महीने में 5.13% की गिरावट दिखाती है.
कितनी है सोने की कीमत?दरअसल एमसीएक्स पर आज यानी 21 अक्टूबर को 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 1,46,270 रुपये प्रति 10 ग्राम है. तो वहीं 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1,34,081 रुपये प्रति 10 ग्राम है. ऐसे में पिछले महीने के मुताबिक सोने की कीमत तेजी से गिरी हैं, ऐसे में भारतीय ग्राहकों के लिए ये एक अच्छी खबर है. क्योंकि वेडिंग सीजन में सबसे ज्यादा मात्रा में सोना खरीदा जाता है. तो वहीं दिवाली का त्यौहार भी आने ही वाला है, ऐसे में ये दोनों ही बड़े मौके हैं जब सबसे ज्यादा भारत में सोना खरीदा जाता है.
ग्राहकों के खरीदना चाहिए सोना?ऐसे में जब सोने की कीमतों में पिछले एक महीने में 5% तक की गिरावट दर्ज की गई है. तो इस समय ग्राहकों के लिए सोना खरीदने का सही समय है. जो भी ग्राहक वेडिंग सीजन के लिए या निवेश के लिए भी सोना खरीदना चाहता है, वो इस समय सोना खरीद सकता है.
धनतेरस से पहले खरीद लें सोनावेडिंग सीजन से पहले ही दिवाली आने वाली है, जिसके दो दिन पहले धनतेरस मनाई जाती है. धनतेरस के मौके पर सोना खरीदन शुभ माना जाता है. ऐसे में लोग ज्यादा से ज्यादा मात्रा में गोल्ड खरीदते हैं. इस समय सोने की कीमतों में भी इजाफा होने लगता है, इसलिए ये सबस सही और सटीक समय है जब कोई भी ग्राहक सोना खरीद सकता है.
ये भी पढ़ें: अब इंडियन ऑयल के पंप पर नहीं मिलेगा खाड़ी देशों का पेट्रोल-डीजल? आयात घटाएगी कंपनी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>अब इंडियन ऑयल के पंप पर नहीं मिलेगा खाड़ी देशों का पेट्रोल&amp;डीजल? आयात घटाएगी कंपनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-इंडियन-ऑयल-के-पंप-पर-नहीं-मिलेगा-खाड़ी-देशों-का-पेट्रोल-डीजल-आयात-घटाएगी-कंपनी</link>
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        <description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में फरवरी के महीने से जंग छिड़ी हुई है, जिसके बाद से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक था और कच्चे तेल की आवाजाही में परेशानी हो रही थी. जिसकी वजह से भारत समेत तमाम देशों में भी कच्चे तेल की किल्लत देखने को मिल रही थी. जिसके बाद अब भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक बड़ा फैसला किया है. जिसके बाद अब IOCL के किसी भी पेट्रोल पंप पर खाड़ी देशों का तेल नहीं मिलेगा.
दरअसल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने फैसला किया है कि वो मिडिल ईस्ट से अब तेल नहीं खरीदेगा. जिससे कि भारत की तेल के लिए निर्भरता खाड़ी देशों पर ही ना बनी रहे.
सालाना डील में होगी कटौतीई-टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी से जुड़े एक करीबी सूत्र से जानकारी मिली है, कि इंडियन ऑयल कॉर्प (IOC) 2027/28 में मिडिल-ईस्ट से होने वाली अपनी सालाना तेल खरीदी की डील में कटौती करने वाला है. इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि ईरान में चल रहे युद्ध के कारण इस इलाके से होने वाली सप्लाई प्रभावित हो रही है. जिसके कारण तेल के लिए पूरी तरह से मिडिल ईस्ट पर निर्भर होना ठीक नहीं है.
कहां से तेल खरीदेगी कंपनी?लेकिन सवाल ये भी है कि तेल कंपनी मिडिल ईस्ट से तेल नहीं खरीदेगी तो कहां से खरीदेगी? तो इसका जवाब भी सूत्र द्वारा मिला है, जिसने बताया है कि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्तय वर्ष के लिए, मिडिल ईस्ट के प्रोडक्ट्स के साथ सालाना समझौतों के तहत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 47% हिस्सा &#039;फ्री-ऑन-बोर्ड&#039; (FOB) आधार पर मंगाने का प्लान बनाया है.
सूत्र ने बताया कि सरकारी रिफाइनरी कंपनी अगले साल खाड़ी देशों के उत्पादकों के साथ होने वाले सालाना समझौतों के तहत खरीदे जाने वाले कच्चे तेल की मात्रा में थोड़ी कमी करेगी.
मिडिल- ईस्ट पर निर्भर भारतबता दें कि भारतीय रिफाइनरियां पारंपरिक रूप से अपनी सालाना कच्चे तेल की आपूर्ति के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर रहे हैं, खासकर भारी और हाई सल्फर वाले ग्रेड के लिए, क्योंकि ये क्षेत्र काफी करीब है.
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सितंबर में 7.9% बढ़ी भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ, उद्योगों के बेहतर प्रदर्शन ने बढ़ाई विकास दर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सितंबर-में-79-बढ़ी-भारत-के-कोर-सेक्टर-की-ग्रोथ-उद्योगों-के-बेहतर-प्रदर्शन-ने-बढ़ाई-विकास-दर</link>
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        <description><![CDATA[ भारत की आर्थिक विकास दर ने इस साल तेजी दिखाई है. इस वित्त वर्ष में भारत ने अच्छी खासी ग्रोथ की है. इसके लिए देश का कोर सेक्टर भी बराबरी से भागीदार है. तो वहीं वृद्धि दर रुकी नहीं है बल्कि तेजी से आगे भी बढ़ रही है. इसी कड़ी में भारत के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर सेक्टर) की विकास दर में सितंबर के महीने में भी इजाफा देखा गया है. इस महीने में ये विकास दर बढ़कर 7.9% हो गई है.
अगस्त में ये दर 5.9% थी, सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, कोयला उत्पादन में सुधार और बिजली, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों और लौह अयस्क के बेहतर प्रदर्शन से विकास दर में तेजी आई.
2024 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ी विकास दरये आंकड़ा अप्रैल 2024 के बाद का सबसे अधिक वृद्धि वाला आंकड़ा है. इन आठ प्रमुख उद्योगों का देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में करीब 40% योगदान है. इसलिए इनकी ग्रोथ से देश की औद्योगिक गतिविधियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है.
किन क्षेत्रों में हुई कितनी बढ़ोतरी?



उद्योग क्षेत्र
सितंबर विकास दर
अगस्त विकास दर


बिजली उत्पादन
11.4%
13.1%


पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन
10.3%
5.6%


कोयला उत्पादन
10.7%
3.8%


लौह अयस्क
18.4%
5.5%


सीमेंट
9.8%
11.7%


स्टील
4.9%
3.5%



इन उद्योगों के प्रदर्शन में आई गिरावटऐसा नहीं है कि कोर सेक्टर में आने वाले हर एक उद्योग ने अच्छा ही प्रदर्शन किया है. कई ऐसे उद्योग भी हैं जिनका प्रदर्शन खासा कमजोर नजर आया. यहां देखें उन उद्योगों की लिस्ट:

कच्चे तेल के उत्पादन में 1.4% की गिरावट आई, अगस्त में ये गिरावट 3.6% थी.
प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.6% घटा, जबकि अगस्त में 4.9% की गिरावट दर्ज की गई थी.
खाद (फर्टिलाइजर) के उत्पादन में 11.7% की गिरावट आई, अगस्त में ये 12.4% घटा था.

कोर सेक्टर की ग्रोथ है जरूरीबता दें कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर तक, आठ प्रमुख उद्योगों का कुल उत्पादन 5.1% बढ़ा. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ये वृद्धि केवल 2.5% थी. कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं. ये उद्योग बिजली उत्पादन, निर्माण, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इनकी विकास दर के बढ़ने से देश की आर्थिक विकास दर पर भी असर दिखाई देता है.
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सितंबर, में, 7.9, बढ़ी, भारत, के, कोर, सेक्टर, की, ग्रोथ, उद्योगों, के, बेहतर, प्रदर्शन, ने, बढ़ाई, विकास, दर</media:keywords>
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        <title>चीनी 30% हो गई महंगी, 21 राज्यों में दाम आसमान पर, अब कितना है रेट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-30-हो-गई-महंगी-21-राज्यों-में-दाम-आसमान-पर-अब-कितना-है-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारी सीजन में देश में चीनी की कीमतों में तेजी से इजाफा हो रहा है. जिसके चलते आम जनता भी काफी परेशान है. सितंबर के महीने में भी कई राज्यों में चीनी की कीमतों ने आसमान छू लिया. सितंबर 2026 में देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 में चीनी की महंगाई दर 30% से ज्यादा रही. यानी पिछले साल सितंबर के मुकाबले इस साल सितंबर में इन राज्यों में चीनी के खुदरा दाम काफी ज्यादा रहे.
देशभर में चीनी की खुदरा महंगाई दर अगस्त के 24.27% से बढ़कर सितंबर में 29.80% हो गई. ये नई CPI सीरीज में जनवरी 2026 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है.
इस राज्य में सबसे ज्यादा चीनी की कीमतदरअसल हाल ही में ताजा सीपीआई आंकड़े सामने आए हैं, जिनके मुताबिक, ओडिशा ऐसा राज्य है जहां पर चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है. इस राज्य में सालाना बढ़ोतरी 37.48% दर्ज की गई है.
इसके अलावा रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां सितंबर में चीनी की महंगाई दर में मामूली कमी आई. यहां ये अगस्त के 25.65% से घटकर 25.15% रह गई.
कुछ महीनों में बढ़े चीनी के दामचीनी की महंगाई दर में पिछले कुछ महीनों में तेजी आई है. अप्रैल 2026 में चीनी की खुदरा महंगाई दर सिर्फ 1.44% थी. अगस्त 2026 में ये बढ़कर 24.27% हो गई. तो वहीं सितंबर 2026 में ये और बढ़कर 29.80% पर पहुंच गई है. इसका मतलब है कि पिछले साल के मुकाबले चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी काफी तेज हुई है.
क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम?चीनी की कीमतों में लगातार इजाफा होने का सबसे बड़ा कारण ये है कि गन्ने का प्रोडक्शन कम हुआ है और साथ ही बारिश भी इस साल कम हुई है. महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में जहां सबसे ज्यादा गन्ने की खेती होती है, वहां कम बारिश के कारण चीनी की भी कमी देखने को मिल रही है. अगर उत्पादन या बाजार में उपलब्धता प्रभावित होती है, तो कीमतें बढ़ सकती हैं.
थोक बाजार का क्या है हाल?इसके अलावा खुदरा बाजार के मुकाबले थोक बाजार में चीनी की महंगाई दर सितंबर में कम हुई. WPI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में थोक चीनी महंगाई दर 16.29% थी. सितंबर 2026 में ये घटकर 12.72% रह गई. हालांकि थोक बाजार में महंगाई दर घटी है, लेकिन ये अभी भी पिछले साल के मुकाबले काफी तेज है.
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चीनी, 30, हो, गई, महंगी, राज्यों, में, दाम, आसमान, पर, अब, कितना, है, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Jio IPO: 21 अक्टूबर को खुल रहा भारत का सबसे बड़ा IPO, जानें इसके बारे में सबकुछ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/jio-ipo-21-अक्टूबर-को-खुल-रहा-भारत-का-सबसे-बड़ा-ipo-जानें-इसके-बारे-में-सबकुछ</link>
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        <description><![CDATA[ कल यानी 21 अक्टूबर से Jio Platforms का IPO खुल रहा है. करीब 30,213 करोड़ रुपये का यह इश्यू भारत के शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा IPO है. मुकेश अंबानी का रिलायंस ग्रुप करीब 20 साल बाद कोई बड़ा IPO लेकर आया है.&amp;nbsp;
इसमें कितना पैसा लगेगा ?&amp;nbsp;
कंपनी कितना कमाती है और IPO में क्या फायदा - नुकसान होता हैं! यहां आसान भाषा में समझिए.
IPO होता क्या है
IPO का मतलब है Initial Public Offering. जब कोई कंपनी पहली बार आम लोगों को अपने शेयर बेचती है तो उसे IPO कहते हैं. आप शेयर खरीदते हैं तो उस कंपनी में आपकी छोटी सी हिस्सेदारी हो जाती है. IPO के बाद कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होती है और फिर उसके शेयर रोज खरीदे और बेचे जा सकते हैं.
Jio IPO कब खुलेगा और कब बंद होगा
IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को होगा. 28 अक्टूबर को शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है.
एक शेयर कितने का है और कम से कम कितना पैसा लगेगा
कंपनी ने प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर रखा है. एक लॉट में 12 शेयर हैं इसलिए ऊपरी प्राइस के हिसाब से कम से कम 13,428 रुपये लगाने होंगे. आम निवेशक 2 लाख रुपये तक यानी ज्यादा से ज्यादा 14 लॉट के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
यह IPO कितना बड़ा है
ऊपरी प्राइस बैंड पर इस IPO का कुल साइज 30,213 करोड़ रुपये है. इससे पहले का सबसे बड़ा IPO Hyundai Motor India का था जिसने 2024 में करीब 27,870 करोड़ रुपये जुटाए थे.&amp;nbsp;
उससे पहले 2022 में LIC ने करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे यानी रुपये के हिसाब से Jio का IPO इन दोनों से बड़ा है. हालांकि डॉलर में देखें तो Hyundai का 3.3 अरब डॉलर का IPO अब भी थोड़ा आगे है. ऊपरी प्राइस पर Jio की पूरी कंपनी की वैल्यू करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठती है.
20 साल बाद Reliance का IPO क्यों खास है
Mukesh Ambani के Reliance ग्रुप ने किसी बड़े बिजनेस का पिछला IPO 2006 में Reliance Petroleum के रूप में निकाला था. इस ग्रुप की शेयर बाजार वाली कहानी 1977 से शुरू होती है जब Dhirubhai Ambani ने Reliance Textile Industries को पब्लिक किया था. एक्सपर्ट का मानना है कि. Jio की लिस्टिंग के बाद Reliance ग्रुप अपनी लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू के हिसाब से देश का सबसे बड़ा ग्रुप बन जाएगा.
IPO का पैसा कहां जाएगा
इस IPO में सिर्फ नए शेयर जारी हो रहे हैं. Reliance, Meta और Google जैसे पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेच रहे इसलिए पूरा पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा. इसमें से करीब 27,500 करोड़ रुपये से Reliance Jio Infocomm का कर्ज समय से पहले चुकाया जाएगा. बाकी पैसा कंपनी के सामान्य कामकाज में खर्च होगा.
Jio कितना कमाती है
FY26 में Jio Platforms का रेवेन्यू करीब 1,46,885 करोड़ रुपये रहा. दो साल पहले यानी FY24 में, यह करीब 1,09,558 करोड़ रुपये था. इसी दौरान कंपनी का मुनाफा 21,423 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 30,049 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी हर ग्राहक से हर महीने औसतन 214 रुपये कमाती है. FY24 में यह आंकड़ा 181.7 रुपये था.
कितने ग्राहक हैं
मार्च 2026 तक Jio के 52.44 करोड़ ग्राहक थे. इनमें से करीब 26.85 करोड़ ग्राहक 5G इस्तेमाल करते हैं. अब कंपनी के ग्राहक 53 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं. देश के कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक का करीब 60 फीसदी हिस्सा Jio के नेटवर्क पर चलता है.
कंपनी में किसकी कितनी हिस्सेदारी है
IPO से पहले Jio Platforms में सबसे बड़ा हिस्सा Reliance Industries का है जिसके पास 66.43 फीसदी शेयर हैं. Meta के पास करीब 9.98 फीसदी और Google के पास 7.73 फीसदी हिस्सा है. बाकी हिस्सा KKR, Silver Lake, सऊदी अरब के PIF और अबू धाबी के फंड जैसे निवेशकों के पास है जिन्होंने 2020 में कंपनी में पैसा लगाया था. IPO के बाद भी Reliance ही सबसे बड़ी शेयरहोल्डर रहेगी.
बड़े निवेशकों ने कितना पैसा लगाया
IPO खुलने से पहले 212 एंकर निवेशकों ने करीब 8,110 करोड़ रुपये लगाए. उन्हें शेयर 1,119 रुपये के ऊपरी प्राइस पर मिले. इनमें सबसे ज्यादा पैसा LIC ने लगाया, जिसने करीब 500 करोड़ रुपये के शेयर लिए. सिंगापुर, नॉर्वे, अबू धाबी और कतर के सरकारी फंड भी एंकर निवेशकों में शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक एंकर हिस्से के लिए 30 गुना से ज्यादा मांग आई.
क्या Reliance के शेयर रखने वालों को मुफ्त शेयर मिलेंगे
नहीं! Reliance के शेयरहोल्डर्स को Jio के शेयर अपने आप नहीं मिलेंगे. उनके लिए 2,500 करोड़ रुपये का अलग कोटा रखा गया है लेकिन इसमें भी आवेदन करना होगा और पैसे देने होंगे. इस कोटे में अप्लाई करने के लिए 14 अक्टूबर तक Reliance का कम से कम एक शेयर होना जरूरी था. जो लोग इसके हकदार हैं वे शेयरहोल्डर कोटा और आम निवेशक कोटा, दोनों में अप्लाई कर सकते हैं.
कर्मचारियों के लिए क्या है
कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर अलग रखे हैं. इस कोटे में अप्लाई करने वाले कर्मचारियों को हर शेयर पर 54 रुपये की छूट मिलेगी.
Jio ने भारत में क्या बदला
Jio सितंबर 2016 में लॉन्च हुआ था. उससे पहले 1GB डेटा औसतन करीब 150 रुपये का पड़ता था. Jio आने के बाद यही कीमत गिरकर करीब 10 रुपये पर आ गई. लॉन्च के छह महीने के अंदर भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने वाला देश बन गया. जिस कंपनी के सस्ते डेटा से करोड़ों लोग इंटरनेट से जुड़े अब उसी में आम लोग हिस्सेदार बन सकते हैं. कुछ वेबसाइट्स Jio का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP बता रही हैं. यह कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है और रोज बदलता रहता है.&amp;nbsp;
निवेश से पहले क्या करें
निवेश से पहले कंपनी का RHP यानी Red Herring Prospectus जरूर पढ़ें. अपनी जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता देखकर ही फैसला करें. जरूरत हो तो किसी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jio, IPO:, अक्टूबर, को, खुल, रहा, भारत, का, सबसे, बड़ा, IPO, जानें, इसके, बारे, में, सबकुछ</media:keywords>
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        <title>ब्रिटेन में Apple को झटका, iPhone में सिर्फ Apple Pay नहीं, दूसरे UPI एप्स भी चलेंगे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ब्रिटेन-में-apple-को-झटका-iphone-में-सिर्फ-apple-pay-नहीं-दूसरे-upi-एप्स-भी-चलेंगे</link>
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        <description><![CDATA[ एप्पल आईफोन का इस्तेमाल करने वाले लोग एप्पल पे के बारे में तो जानते ही हैं. खासतौर से वो लोग जो ब्रिटेन में रहते हैं, वो केल इसी का इस्तेमाल कर पाते हैं. लेकिन ऐसे लोगों के लिए अब एक खुशखबरी है. क्योंकि ब्रिटेन में iPhone से पेमेंट करने वाले यूजर्स को आने वाले समय में नए ऑप्शंस भी मिलेंगे. ब्रिटेन की कॉम्पिटीशन एंड मार्केट अथॉरिटी (CMA) ने एप्पल की कॉन्टैक्टलेस पेमेंट तकनीक पर उसकी पकड़ कम करने के लिए नए प्रस्ताव रखे हैं.
इस प्रस्ताव के बाद ब्रिटेन में एप्पल आईफोन में लोग अन्य एप्स भी चला पाएंगे. इन प्रस्तावों का मकसद दूसरी पेमेंट कंपनियों के लिए एप्पल की तकनीक का इस्तेमाल आसान बनाना और उनसे ली जाने वाली फीस कम करना है.
क्या है प्रस्ताव में?रयटर्स के मुताबिक ब्रिटेन की CMA का कहना है कि एप्पल की हाई फीस, सख्त शर्तों और तकनीकी पाबंदियों के कारण दूसरी कंपनियों को अपनी पेमेंट सर्विस शुरू करने और बढ़ाने में परेशानी होती है. इसलिए ही तीन तरह के बदलाव करने का प्रस्ताव दिया गया है. जैसे:

दूसरी कंपनियों को एप्पल की पेमेंट तकनीक इस्तेमाल करने के लिए पहले से कम फीस देना पड़े.
दूसरी पेमेंट कंपनियों के लिए आईफोन की कॉन्टैक्टलेस तकनीक तक पहुंच आसान हो.
डिजिटल बैंक और फिनटेक कंपनियां एप्पल पे के ऑप्शंस के रूप में अपनी सेवाएं पेश कर सकें.

हालांकि ये अभी प्रस्ताव है, आखिरी फैसला नहीं. CMA ने इन प्रस्तावों पर 17 नवंबर तक लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे हैं.
कंपनी ने क्या कहा?इस बदलाव के प्रस्ताव के बारे में एप्पल कंपनी ने कहा कि, उसने डेवलपर्स के लिए NFC तकनीक और अपने सिक्योर एलिमेंट तक पहुंच के जरिए कॉन्टैक्टलेस पेमेंट से जुड़ी सुविधाएं विकसित करना संभव बनाया है. सिक्योर एलिमेंट आईफोन का एक सुरक्षित हिस्सा है, जहां कार्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और डिजिटल सिक्योरिटी कीज रखी जा सकती हैं. एप्पल के मुताबिक, इन सुविधाओं से कंपनियां इन-स्टोर पेमेंट, ट्रैवल पास और इवेंट टिकट जैसी सेवाएं बना सकती हैं.
ग्राहकों को होगा फायदा?अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो आईफोन यूजर्स को भविष्य में कुछ फायदे मिल सकते हैं, जैसे एप्पल पे के अलावा दूसरे पेमेंट एप इस्तेमाल करने के ज्यादा ऑप्शंस मिलेंगे, डिजिटल बैंक और फिनटेक कंपनियों के बीच कॉम्पिटीशन बढेगा, नई पेमेंट सुविधाओं और सेवाओं का विकास होगा. इसके अलावा कंपनियों के बीच कॉम्पिटीशन बढ़ने से बेहतर ऑफर मिलने की संभावना.
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Google रिव्यू स्कैम से सावधान! 20 से ज्यादा लोगों ने एक महीने में गवां दिए 1 करोड़</title>
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        <description><![CDATA[ इन दिनों ठगी के मामले काफी सामने आ रहे हैं. ऑनलाइन घर बैठे कमाने का लालच देकर लोगों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है. इस घर बैठे पैसे कमाने के लालच में लोगों को करोड़ों का चूना लग रहा है. साइबर ठग अब Google पर रिव्यू लिखने और रेटिंग देने के बदले पैसे कमाने का ऑफर देकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं. शुरुआत में थोड़े पैसे देकर भरोसा जीता जाता है, फिर ज्यादा कमाई का लालच देकर बड़ी रकम जमा कराई जाती है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक महीने में 20 से ज्यादा लोग इस तरह के फ्रॉड का शिकार हुए हैं. जिनसे करीब 1 करोड़ तक की ठगी हुई है.
कैसे काम करता है स्कैम?इस धोखाधड़ी में ठग लोगों को टेलीग्राम या व्हॉट्सएप पर मैसेज भेजकर घर बैठे कमाई का ऑफर देते हैं. जिसके बाद लोगों को गूगल पर किसी दुकान, होटल या बिजनेस का रिव्यू लिखने के बदले 100 से 200 रुपये तक देने का ऑफर देते हैं. शुरुआत में काम पूरा करने पर सचमुच थोड़े पैसे भेजे जाते हैं, ताकि लोगों को भरोसा हो जाए.
इसके बाद ज्यादा कमाई के लिए पैसे जमा करने या निवेश करने को कहा जाता है. ठग बड़ी रकम जमा करवाकर ज्यादा मुनाफे का लालच देते हैं. जिसमें फंसकर जब व्यक्ति अपने पैसे वापस निकालने की कोशिश करता है, तो उसका अकाउंट फ्रीज होने या तकनीकी गड़बड़ी का बहाना बनाया जाता है. आखिर में पैसे निकालने के लिए और रकम मांगी जाती है, लेकिन पैसा वापस नहीं मिलता.
ताजा मामला भी आया सामनेदरअस ऐसे ही स्कैम से जुड़ा एक मामला सामने भी आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने इस स्कैम में फंसकर 10 लाख रुपये गंवा दिए हैं. दरअसल विशाखापट्टनम के रहने वाले 38 वर्षीय व्यक्ति को टेलीग्राम पर ऑनलाइन काम का ऑफर मिला. उसे हर टास्क पूरा करने पर 100 से 200 रुपये तक देने की बात कही गई. शुरुआत में उसे 120 रुपये का भुगतान भी किया गया. इसके बाद उसने 500 रुपये जमा किए और बदले में 630 रुपये मिले. फिर उसने 3,000 रुपये लगाए और उसे 4,300 रुपये वापस मिले.
शुरुआत में मुनाफा मिलने से उसका भरोसा बढ़ गया. बाद में उसे एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ले जाया गया, जहां ज्यादा पैसा निवेश करने पर ज्यादा मुनाफा देने का वादा किया गया. लेकिन जब उसने पैसे निकालने चाहे, तो उसे बताया गया कि ट्रेडिंग में गड़बड़ी के कारण उसका अकाउंट फ्रीज हो गया है. इसके बाद अकाउंट चालू करने और पैसे निकालने के नाम पर उससे और रकम मांगी गई. क्रेडिट स्कोर बढ़ाने का बहाना भी बनाया गया. व्यक्ति ने करीब 10 लाख रुपये ऐसे ही गंवा दिए.
ऐसे पहचानें फ्रॉडयदि आप ऐसे किसी भी स्कैम या फ्रॉड से बचना चाहते हैं तो आपको सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है. यदि कोई ऑनलाइन आपसे काम के नाम पर पैसे मांगे तो समझ लें कि ये कोई ठग हो सकता है. यदि कोई कम समय में ज्यादा मुनाफे का वादा करता है तो ये भी स्कैम हो सकता है. टेलीग्राम या व्हॉट्सएप पर अनजान लोगों के ऑफर से सावधान रहें.
फ्रॉड होने पर क्या करें?अगर आपके साथ ऐसा कोई फ्रॉड हो जाए तो, आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आपको तत्काल प्रभाव से कुछ जरूरी कदम उठाना होंगे, जैसे:

सबसे पहले जिस खाते या UPI से पैसे भेजे हैं, उसके बैंक से संपर्क करके शिकायत दर्ज करें.
भारत की राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर जल्द से जल्द शिकायत करें.
सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.
टेलीग्राम और व्हॉट्सएप चैट, फोन नंबर, वेबसाइट लिंक, बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन की रसीदें संभालकर रखें.
अगर ठग पैसा वापस दिलाने या अकाउंट अनफ्रीज करने के नाम पर कोई भी रकम मांगें, तो भुगतान न करें.

बता दें कि आप जितना जल्दी शिकायत करेंगे उतनी ही जल्दी आपको पैसे वापस मिलने की उम्मीद होगी. हालांकि पूरे पैसे वापस मिलेंगे या नहीं इसकी गारंटी नहीं होती.
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>आज इन 6 राज्यों में नहीं खुलेंगे बैंक,  देखें 21 अक्टूबर की छुट्टियों की पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ आज बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को जिन भी लोगों का बैंक जाने का प्लान है, उन्हें घर से निकलने से पहले छुट्टियों की लिस्ट देख लेनी चाहिए. अक्टूबर में बैंक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, विजयदशमी और दुर्गा पूजा के अवसर पर असम, कर्नाटक, केरल, सिक्किम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी. इन राज्यों में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के सभी बैंक ब्रांच बंद रहेंगे. इनमें &amp;nbsp;स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं.&amp;nbsp;
21 अक्टूबर को क्यों बंद हैं बैंक?
विजयादशमी, जिसे दशहरा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं का एक बड़ा त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. रामायण के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था. यही वजह है कि इस दिन भारत के कई हिस्सों में रावण के पुतले जलाए जाते हैं. वहीं, दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है.
देवी दुर्गा को समर्पित इस त्योहार में जगह-जगह भव्य पंडाल सजाए जाते हैं, सड़कों पर लाइटें लगाई जाती हैं और लोग सभी रीति-रिवाजों के साथ मां की आराधना करते हैं. चूंकि त्योहारों की तारीखें और सरकारी बैंक की छुट्टियां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती हैं इसलिए 21 अक्टूबर को होने वाली छुट्टी पूरे देश में एक समान रूप से लागू नहीं होगी.&amp;nbsp;
आज कहां-कहां बैंक खुले रहेंगे?
आज उत्तर प्रदेश, दिल्ली और एनसीआर (NCR), महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बैंक खुले रहेंगे. चूंकि इन राज्यों में दशहरा और नवमी की छुट्टियां 19 और 20 अक्टूबर को ही पूरी हो चुकी हैं इसलिए यहां बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.&amp;nbsp;
क्या छुट्टियों के दौरान ऑनलाइन बैंकिंग काम करेगी?
ग्राहकों के लिए राहत की बात भले ही बैंक की शाखाएं बंद हों, लेकिन डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रहेंगी. ग्राहक जरूरी लेन-देन के लिए इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI का इस्तेमाल कर सकते हैं. कैश निकालने के लिए ATM भी चालू रहेंगे. हालांकि, अगर आपको लॉकर खुलवाना हो या लोन के लिए डॉक्यूमेंट्स जमा कराने हो या फिर अकाउंट कैटेगरी बदलना हो, इनके लिए आपको बैंक खुलने का इंतजार करना होगा. कल यानी कि 22 अक्टूबर (गुरुवार) को बैंक इन 6 राज्यों में सामान्य रूप से खुल जाएंगे.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्टारलिंक की लॉन्चिंग के बाद क्या भारत के बच्चों को भी शेयर बांटेंगे एलन मस्क?</title>
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        <description><![CDATA[ एलन मस्क एक बार फिर अपने बड़े ऐलान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं. स्पेसएक्स के मालिक ने अब कहा है कि वो अगले साल यानी 2027 में अमेरिका के हर बच्चे को अपनी कंपनी का एक शेयर देंगे. इस खबर के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के बच्चों को भी इसमें से शेयर मिलने वाला है? ये सवाल लोगों के मन में इसलिए भी ज्यादा आ रहा है क्योंकि भारत में मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक को लेकर खूब चर्चा हो रही है.
आइये जानते हैं कि स्पेसएक्स के शेयर को लेकर मस्क का क्या कहना है और ये शेयर भारतीय बच्चों को मिलेगा या नहीं. साथ ही साथ समझते हैं कि एक शेयर की कीमत कितनी है और ये कब से मिलने वाला है.&amp;nbsp;
हर बच्चे को मिलेगा एक शेयर?एलन मस्क ने 19 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके कहा कि वो अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को अपनी कंपनी SpaceX का एक शेयर देने वाले हैं. उन्होंने इसे कई प्लान्स में से पहली पहल बताया है.
अमेरिका में 18 साल से कम उम्र के करीब 7.3 करोड़ बच्चे हैं. ऐसे में अगर हर बच्चे को एक शेयर दिया जाता है, तो ये काफी बड़ा निवेश होगा. हालांकि, मस्क ने अभी ये साफ नहीं किया है कि किन बच्चों को इस प्लान में शामिल किया जाएगा और शेयर देने का प्रोसेस क्या होगा.
एक शेयर की कीमत कितनी है?बाजार भाव के मुताबिक, 16 अक्टूबर को SpaceX के एक शेयर की कीमत 146.03 डॉलर थी. इस हिसाब से हर बच्चे को मिलने वाले एक शेयर की कीमत करीब 146 डॉलर बैठती है. वहीं, करीब 7.3 करोड़ बच्चों को शेयर देने पर के हिसाब से ये रकम 10.66 अरब डॉलर हो सकती है.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हर बच्चे को सीधे इतने रुपये नकद मिलेंगे. शेयर मिलने का मतलब कंपनी में हिस्सेदारी मिलना है. शेयर की कीमत आगे बढ़ भी सकती है और घट भी सकती है. इसलिए 146 डॉलर उसकी मौजूदा बाजार कीमत है.&amp;nbsp;
भारत के बच्चों को भी मिलेंगे शेयर?अब इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि भारत के बच्चों को शेयर देने की कोई घोषणा नहीं हुई है. मस्क ने अपने ऐलान में अभी सिर्फ अमेरिका के बच्चों का ही जिक्र किया है. भारत में स्टारलिंक की सर्विस शुरू होने या इस शेयर योजना से कोई सीधा संबंध घोषित नहीं किया गया है.
बच्चों को शेयर कब और कैसे मिलेंगे?मस्क ने साल 2027 में बच्चों को शेयर देने वाले हैं, लेकिन अभी तक कोई फिक्स तारीख सामने नहीं आई है. ये भी साफ- साफ नहीं बताया गया है कि बच्चों की पहचान कैसे की जाएगी, शेयर उनके नाम पर कैसे ट्रांसफर होंगे और नाबालिग बच्चों के निवेश की देखरेख कौन करेगा.&amp;nbsp;
मुंबई में खुलेगी जापान के दूसरे सबसे बड़े बैंक की ब्रांच, 189 करोड़ में लीज पर लिया ऑफिस
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्टारलिंक, की, लॉन्चिंग, के, बाद, क्या, भारत, के, बच्चों, को, भी, शेयर, बांटेंगे, एलन, मस्क</media:keywords>
    </item>
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        <title>दशहरे के बाद बढ़ेगा महंगाई भत्ता? केंद्रीय कर्मचारियों को अब इस तारीख से है उम्मीद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दशहरे-के-बाद-बढ़ेगा-महंगाई-भत्ता-केंद्रीय-कर्मचारियों-को-अब-इस-तारीख-से-है-उम्मीद</link>
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        <description><![CDATA[ दशहरा बीतने के बाद भी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार है. उम्मीद थी कि त्योहारों के इस सीजन में सरकार महंगाई भत्ते को लेकर खुशखबरी दे सकती है, लेकिन 14 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है. अब कर्मचारियों की नजर कल यानी 21 अक्टूबर को होने वाली अगली कैबिनेट बैठक पर है.
क्या कल की मीटिंग में डीए पर फैसला आने वाला है? इस सवाल का सही- सही जवाब यहां मौजूद है. इतना ही नहीं, आपको यहां से ये भी समझ आएगा कि डीए बढ़ता है तो आपकी सैलरी पर क्या असर होगा.&amp;nbsp;
अभी कितना मिल रहा है डीए?फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी का 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है. अप्रैल 2026 में सरकार ने डीए में 2 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, जिसके बाद यह 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया था. पेंशनर्स के लिए भी DR इसी दर से बढ़ाई गई थी.
अब जुलाई 2026 से लागू होने वाली अगली किस्त का इंतजार है. आमतौर पर केंद्र सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई से डीए में बदलाव करती है. इसका मकसद महंगाई बढ़ने के कारण कर्मचारियों की जेब पर पड़ने वाले असर को कम करना है.
कितना बढ़ सकता है डीए?इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो डीए&amp;nbsp;60 फीसदी से बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगी. हालांकि, ये अभी अनुमान है. सरकार की मंजूरी के बाद ही नई दर की पुष्टि होगी.
कर्मचारी संगठनों की ओर से भी डीए की किस्त जल्द जारी करने की मांग की जा रही है. उनका कहना है कि जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों के कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स के घरेलू खर्च पर दबाव बढ़ रहा है.
डीए बढ़ा तो कितनी बढ़ेगी सैलरी?



बेसिक सैलरी
अभी 60% डीए
63% डीए होने पर
हर महीने कितना बढ़ेगा


18000 रुपए
10800 रुपए
11340 रुपए
540 रुपए


25000 रुपए
15000 रुपए
15750 रुपए
750 रुपए


30000 रुपए
18000 रुपए
18900 रुपए
900 रुपए


56100 रुपए
33600 रुपए
35343 रुपए
1683 रुपए


100000 रुपए
60000 रुपए
63000 रुपए

3000 रुपए




अब 21 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक पर नजर14 अक्टूबर की बैठक में डीए पर फैसला नहीं होने के बाद अब 21 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं. कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में घोषणा होने की संभावना जताई है. लेकिन सरकार की ओर से इसका आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है.
स्टारलिंक की लॉन्चिंग के बाद क्या भारत के बच्चों को भी शेयर बांटेंगे एलन मस्क?
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SIP या STP? अमीरों के निवेश का नया तरीका, हर महीने 50 हजार से शुरू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sip-या-stp-अमीरों-के-निवेश-का-नया-तरीका-हर-महीने-50-हजार-से-शुरू</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में हर कोई अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बचाकर ऐसी जगह पर निवेश करना चाहते है, जहां भविष्य के लिए अच्छी रकम तैयार हो सके. नौकरीपेशी लोग आमतौर पर हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत करके निवेश करते हैं, जबकि बड़ी रकम रखने वाले निवेशक अपने पैसे को अलग-अलग तरीकों से बढ़ाने की कोशिश करते हैं.&amp;nbsp;
दरअसल, अब अमीरों के निवेश का नया तरीका बदला है. ऐसे में SIP और STP निवेश के दो ऑप्शन है, जिनका इस्तेमाल अब बड़े निवेशक भी अपना रहे हैं. बड़ी बात यह है कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) में हर महीने 50,000 रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक निवेश करने वाले ग्राहक भी मौजूद हैं. ऐसे में अगर आप हर महीने 50,000 रुपये निवेश करना चाहते हैं, तो SIP और STP के बारे में जानना जरूरी है.
क्या है SIP और STP?
SIP (Systematic Investment Plan) में निवेशक हर महीने अपनी कमाई से एक तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है. इसकी शुरुआत आमतौर पर 500 रुपए महीने से भी की जा सकती है. यह ऑप्शन उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो नियमित बचत के जरिए लंबे समय में पैसा जोड़ना चाहते हैं.&amp;nbsp;
वहीं, STP (Systematic Transfer Plan) में पहले से जमा बड़ी रकम को एक निवेश ऑप्शन से दूसरे में धीरे-धीरे ट्रांसफर किया जाता है. इसमें आप अपनी पूरी रकम एक साथ शेयर बाजार में लगाने के बजाय किस्तों में निवेश कर सकता है. उदाहरण के तौर पर आप अपना पैसा लिक्विड फंड में रखकर हर महीने कुछ रकम इक्विटी फंड में भेज सकते हैं.
PMS में हर महीने 50 हजार रुपए से निवेश
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) में निवेशक का पैसा पेशेवर पोर्टफोलियो मैनेजर संभालते हैं. वे निवेश की रणनीति के मुताबिक शेयरों और दूसरी संपत्तियों में पैसा लगाते हैं. हालांकि, PMS में निवेश की न्यूनतम सीमा आमतौर पर 50 लाख रुपये होती है. इसलिए सिर्फ 50,000 रुपए से इसमें निवेश शुरू नहीं किया जा सकता. हर महीने 50,000 रुपए का निवेश करने के लिए भी पहले जरूरी शुरुआती शर्तें पूरी करनी होती हैं.
कहां लगाएं अपनी कमाई?
अगर आप हर महीने अपनी सैलरी से 5,000 या 50,000 रुपए निवेश करना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड SIP एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. वहीं, अगर आपके पास पहले से बड़ी रकम जमा है, तो STP के बारे में सोच सकते है. लेकिन ध्यान रखें कि निवेश का फैसला आपकी अपनी आर्थिक स्थिति, लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर हो.
नया लेबर कानून: Amazon ने दी 5000 लोगों को नौकरी से निकालने की धमकी, गोदाम बंद
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SIP, या, STP, अमीरों, के, निवेश, का, नया, तरीका, हर, महीने, हजार, से, शुरू</media:keywords>
    </item>
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        <title>पाकिस्तान में भयंकर आर्थिक सुस्ती, ग्रोथ घटकर हुआ सिर्फ 3.65%</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पाकिस्तान-में-भयंकर-आर्थिक-सुस्ती-ग्रोथ-घटकर-हुआ-सिर्फ-365</link>
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        <description><![CDATA[ दुनियाभर में इस समय महंगाई की मार तेजी से लोगों पर पड़ रही है. इस साल की शुरुआत में ही ईरान- यूएस का युद्ध शुरू हो गया, जिसके कारण कच्चे तेल की दुनियाभर में किल्लत देशने को मिली. जिससे हर जगह महंगाई का डंका बचा. हालांकि जब वित्त वर्ष 2025-26 की GDP ग्रोत की बात आई तो, भारत की आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर सामने आई. अब हाल ही में भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की भी GDP के आंकड़े सामने आ गए हैं.
पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान घटाकर 3.65% कर दिया है. पहले सरकार ने इसके 3.70% रहने का अनुमान लगाया था. इससे पहले विकास दर का लक्ष्य 4% रखा गया था.
क्यों पड़ी पाकिस्तान की रफ्तार धीमी?Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग और सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण ये बदलाव किया गया है. देश के तीनों प्रमुख क्षेत्रों कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र की विकास दर में संशोधन किया गया है. जिसमें कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.89% से बढ़कर 3.50% हो गई. उद्योग क्षेत्र की विकास दर पहले के 3.51% से घटकर 3.34% रह गई. तो वहीं सेवा क्षेत्र की विकास दर 4.09% से घटकर 3.81% हो गई है.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि पाकिस्तान में कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र की धीमी रफ्तार ने कुल आर्थिक विकास को प्रभावित किया.
आवाम पर क्या होगा असर?इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति आय में कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन महंगाई के कारण आम लोगों की लाइफ स्टाइल में खास सुधार नहीं हुआ है. महंगाई बढ़ने से लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च हो रहा है. ऐसे में उनके पास बचत करने, निवेश करने और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए कम पैसा बचता है.
भारत से GDP ग्रोथ में कितना पीछे पाकिस्तान?वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ी है. भारत की GDP ग्रोथ 7.7% रही, जबकि पाकिस्तान की विकास दर घटकर 3.65% रह गई. इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के मुकाबले लगभग दोगुनी से ज्यादा तेज रफ्तार से आगे बढ़ी है. जो पाकिस्तान से 4.05% अंक ज्यादा रही.
ये भी पढ़ें: दशहरे के बाद बढ़ेगा महंगाई भत्ता? केंद्रीय कर्मचारियों को अब इस तारीख से है उम्मीद ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पाकिस्तान, में, भयंकर, आर्थिक, सुस्ती, ग्रोथ, घटकर, हुआ, सिर्फ, 3.65</media:keywords>
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        <title>आपके घर भी तो नहीं पहुंच रहा एक्सपायर्ड सामान? Zepto को FSSAI का नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण - FSSAI ने खाने-पीने के सामान और हेल्थ सप्लीमेंट्स से जुड़े मामलों में चार कंपनियों को नोटिस जारी किया है. इनमें क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto, बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, हेल्दीहे फूड्स LLP और BMS लाइफसाइंस शामिल हैं.&amp;nbsp;
किसी मामले में एक्सपायर्ड बेसन की डिलीवरी की शिकायत है तो कहीं प्रोडक्ट के नाम, पैकेजिंग और सेहत से जुड़े दावों पर सवाल उठाए गए हैं. FSSAI के मुताबिक कंपनियों से इन मामलों में जवाब मांगा गया है. फिलहाल ये नोटिस हैं अंतिम कार्रवाई या दोष साबित होने का फैसला नहीं.
Zepto पर एक्सपायर्ड बेसन की डिलीवरी का आरोप
Zepto के खिलाफ मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ग्राहक की शिकायत से जुड़ा है. ग्राहक ने आरोप लगाया कि उसे बेसन के दो पैकेट ऐसे मिले जिनकी इस्तेमाल करने की तारीख निकल चुकी थी. FSSAI के नोटिस के मुताबिक दोनों पैकेट पर &amp;lsquo;USE BY: 12092026&amp;rsquo; लिखा था यानी 12 सितंबर 2026. शिकायत सही पाए जाने पर इसका मतलब होगा कि ग्राहक को इस्तेमाल की तय तारीख बीतने के बाद बेसन डिलीवर किया गया.
FSSAI ने कंपनी को शिकायत की जांच करने और ऑर्डर, डिलीवरी, वेयरहाउस, विक्रेता और प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी देने का निर्देश दिया है. कंपनी को यह भी बताना होगा कि ऐसी स्थिति कैसे बनी और प्रभावित स्टॉक को हटाने, ग्राहकों को सूचना देने, रिफंड देने और दोबारा ऐसी गलती रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. Zepto को इस मामले में लिखित जवाब देना होगा. नियमों का पालन नहीं करने पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे कार्रवाई हो सकती है.
क्रीम रोल के नाम पर क्रीम को लेकर सवाल
दूसरा मामला &amp;lsquo;मालपानी बेक-लाइट पुनेरी क्रीम रोल (Malpani&amp;rsquo;s Bake-Lite Puneri Cream Roll)&amp;rsquo; से जुड़ा है जिसे बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड बनाती है. FSSAI के मुताबिक, यह प्रोडक्ट Blinkit और Zepto जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध था.
प्राधिकरण ने प्रोडक्ट के नाम और उसकी पैकेजिंग पर सवाल उठाए हैं. पैकेट पर इसे &amp;lsquo;क्रीम रोल (Cream Roll)&amp;rsquo; और &amp;lsquo;कुरकुरा और मलाईदार (Crispy &amp;amp; Creamy)&amp;rsquo; बताया गया था जबकि घोषित सामग्री में मैदा, हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल फैट, मार्जरीन और चीनी शामिल हैं. &amp;nbsp;लेबल पर दूध, मिल्क फैट या क्रीम जैसी डेयरी सामग्री का उल्लेख नहीं था.
FSSAI का कहना है कि क्रीम एक निर्धारित मानक वाला डेयरी उत्पाद है. ऐसे में वेजिटेबल फैट, मार्जरीन और चीनी से बनी फिलिंग को क्रीम के रूप में पेश करना ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है. प्रोडक्ट के नाम, पैकेजिंग और विज्ञापन को लेकर कंपनी से जवाब मांगा गया है.
क्रैनबेरी कैप्सूल के दावों पर भी सवाल
HealthyHey Foods LLP को उसके &amp;lsquo;हेल्दीहे न्यूट्रिशन नेचुरल क्रैनबेरी एक्सट्रैक्ट 25% कैप्सूल&amp;rsquo; को लेकर नोटिस जारी किया गया है. FSSAI के अनुसार, Flipkart और कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोडक्ट के लेबल में फूड कलर की जानकारी में अंतर पाया गया.
इसके अलावा, &amp;lsquo;Supports Urinary Tract Health&amp;rsquo; यानी यूरिनरी ट्रैक्ट की सेहत में मदद करने जैसे दावों पर भी सवाल उठाए गए. FSSAI ने इन्हें ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावों की श्रेणी में माना है जिनके लिए लागू नियमों के तहत पूर्व मंजूरी जरूरी हो सकती है.
प्राधिकरण ने पैकेट पर जरूरी जानकारी देने से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बात भी कही है. विज्ञापनों में FSSAI के लोगो के साथ &amp;lsquo;FSSAI Certified&amp;rsquo; और &amp;lsquo;High Level of Certification&amp;rsquo; जैसे शब्दों के इस्तेमाल को भ्रामक बताया गया. प्रोडक्ट के नाम में &amp;lsquo;नेचुरल&amp;rsquo; और &amp;lsquo;100% नेचुरल&amp;rsquo; जैसे दावों पर भी आपत्ति जताई गई है.
एक्सपायर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर बिक रहे थे क्रैनबेरी कैप्सूल?
BMS लाइफसाइंस को &amp;lsquo;हाओग्स क्रैनबेरी यूरिनरी ट्रैक्ट हेल्थ कैप्सूल&amp;rsquo; के मामले में नोटिस मिला है. FSSAI के मुताबिक प्रोडक्ट की बिक्री और वितरण एक्सपायर हो चुके FSSAI रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के तहत किया जा रहा था. प्रोडक्ट और उसके विज्ञापनों में &amp;lsquo;Kidney Health&amp;rsquo;, यूरिन इन्फेक्शन से बचाव और उससे राहत जैसे दावे किए गए थे. इसके अलावा, स्किन, वजन घटाने, दांतों, दिल, किडनी और शरीर से टॉक्सिन निकालने जैसे फायदों से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं.
FSSAI का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को प्रोडक्ट के चिकित्सकीय या उपचार संबंधी फायदे होने का गलत संकेत दे सकते हैं. प्राधिकरण ने FSSAI के लोगो के इस्तेमाल और लेबल पर &amp;lsquo;स्वास्थ्य विशेषज्ञ के निर्देशानुसार इस्तेमाल करें (As directed by healthcare practitioner)&amp;rsquo; लिखने पर भी आपत्ति जताई है. कंपनी को तय समय के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया है.
अब कंपनियों को क्या करना होगा?
FSSAI ने चारों कंपनियों से संबंधित मामलों में जवाब और जरूरी जानकारी मांगी है. Zepto को डिलीवरी से जुड़े पूरे मामले की जांच करनी होगी जबकि बाकी कंपनियों को प्रोडक्ट की लेबलिंग, विज्ञापन और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर अपना पक्ष रखना होगा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा कानूनों और नियमों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है.
यहां ध्यान देने वाली बात है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी पर अंतिम रूप से दोष साबित हो गया है. अभी कंपनियों का पक्ष और प्राधिकरण की आगे की कार्रवाई सामने आना बाकी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आपके, घर, भी, तो, नहीं, पहुंच, रहा, एक्सपायर्ड, सामान, Zepto, को, FSSAI, का, नोटिस</media:keywords>
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        <title>सस्ता फ्लाइट टिकट चाहिए? सरकार मदद करेगी, लेकिन एक शर्त पर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप फ्लाइट से सफर करते हैं, तो आपने भी कई बार टिकटों की कीमतों में बड़ा अंतर देखा होगा. खासतौर पर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान फ्लाइट टिकट के दाम अचानक बढ़ जाते हैं. कई बार एक ही रूट पर कुछ दिनों के अंतर से टिकट की कीमत में हजारों रुपए का फरक देखने को मिलता है. ऐसे में आम यात्रियों के लिए फ्लाइट का खर्च उठाना उनकी जेब पर भारी पड़ जाता है.
इसी परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार फ्लाइट किरायों पर नजर रखने के लिए नए नियम बनाने की तैयारी कर रही है. इसका मकसद टिकट की कीमतों में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी पर रोक लगाने के साथ एयरलाइंस को किराया तय करने की छूट देना भी है. हालांकि, सरकार हर समय टिकटों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं लगाएगी. इसके लिए कुछ खास परिस्थितियां तय की जा सकती हैं.
क्या है सरकार की नई योजना?
सरकार भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत ऐसे नियम तैयार कर रही है, जिनसे जरूरत पड़ने पर फ्लाइट किरायों में बढ़ोतरी पर रोक लगाई जा सके. सरकार का फिलहाल सामान्य दिनों में फ्लाइट टिकटों की कीमतों पर सीधी सीमा लगाने का इरादा नहीं है.
हालांकि, प्राकृतिक आपदा या किसी बड़ी आपात स्थिति में जरूरत पड़ने पर किराये की अधिकतम सीमा तय की जा सकती है. इसका मकसद बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के साथ यात्रियों को असामान्य किराया बढ़ोतरी से राहत देना है.
एयरलाइंस को देने होंगे किराये से जुड़े विवरण
प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस को अपनी किराया संरचना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को एक महीने पहले देनी होगी. उन्हें यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी दिखानी होगी. बड़ी बात यह कि इससे किराये में पारदर्शिता बढ़ाने और तय अधिकतम सीमा से ज्यादा पैसे वसूलने की घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिल सकती है.
त्योहारों में क्यों बढ़ जाते हैं फ्लाइट टिकट के दाम?
त्योहारों और छुट्टियों के दौरान लोग ज्यादा सफर करते हैं, जिससे फ्लाइट टिकट के दाम महंगे हो जाते हैं लेकिन सीटें सीमित रहती हैं. इसके अलावा यह विमानन ईंधन (ATF) की कीमत, विमानों की उपलब्धता और परिचालन खर्च भी टिकट के दाम को भी प्रभावित करते हैं. ऐसे में सिर्फ किराये पर सीमा लगाने से सीटों की कमी दूर नहीं होगी.
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8वें वेतन आयोग की मुंबई में मीटिंग, लेवल 1 की सैलरी 18000 से 69000 होगी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8वें-वेतन-आयोग-की-मुंबई-में-मीटिंग-लेवल-1-की-सैलरी-18000-से-69000-होगी</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं या पेंशन लेते हैं, तो 8वें वेतन आयोग से जुड़ी यह जानकारी आपके काम आ सकती है. 8वें वेतन आयोग की अगली परामर्श बैठकें 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में होने वाली हैं. बड़ी बात यह कि इन बैठकों में कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और भत्तों में बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ सकती है.
दरअसल, कई कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन सरकार से 3.833 या इससे अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग कर रहे हैं. अगर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है, तो सातवें वेतन आयोग के तहत 18,000 रुपये मूल वेतन पाने वाले लेवल-1 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 69,000 रुपये हो सकती है. हालांकि, यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है. सरकार की ओर से आखिरी फैसला आने तक इसे पक्की सैलरी नहीं माना जा सकता.
8वें वेतन आयोग में कितने फिटमेंट फैक्टर की मांग?
8वें वेतन आयोग को लेकर अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अपनी मांगें रख रहे हैं. कुछ संगठन न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है.

NC-JCM: नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव दिया है.
AIDEF: ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है.
FNPO: फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस ने 69,000 रुपये न्यूनतम वेतन का सुझाव दिया है.
भारत पेंशनर्स समाज (BPS): इस संगठन ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये न्यूनतम वेतन की मांग की है.
IRTSA: इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने कर्मचारियों के अलग-अलग स्तरों के लिए 2.92, 3.50, 3.80, 4.09 और 4.38 फिटमेंट फैक्टर के ऑप्शन सुझाए हैं.
दिल्ली सरकार के स्कूल शिक्षक: इनके प्रस्ताव में 2.62 फिटमेंट फैक्टर और 47,210 रुपये न्यूनतम वेतन का उल्लेख है.
चेन्नई GPO के पेंशनर्स: इन्होंने 3.77 फिटमेंट फैक्टर और 68,000 रुपये न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव दिया है.

यहां सबसे अहम बात बात यह है कि ये सभी आंकड़े अलग-अलग संगठनों की मांगें हैं. इनमें से किसी भी प्रस्ताव को 8वें वेतन आयोग की आखिरी सिफारिश या सरकार का मंजूर किया हुआ फैसला नहीं समझना है.
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?
फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा गुणांक है, जिसकी मदद से कर्मचारियों के पुराने मूल वेतन के आधार पर नए वेतन की गणना की जाती है. आसान लफ्जों में समझें तो फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, मौजूदा बेसिक सैलरी को एक तय संख्या से गुणा करने पर मिलने वाली रकम उतनी ई ज्यादा होगी. उदाहरण के तौर पर 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 के कर्मचारी का मूल वेतन 18,000 रुपये है. अगर 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो गणना इस तरह की जा सकती है.&amp;nbsp;
18,000 &amp;times; 3.833 = 68,994 रुपए
यानी इस गणना के आधार पर कर्मचारी का नया मूल वेतन लगभग 69,000 रुपए के आसपास हो सकता है. हालांकि, वास्तविक वेतन कितना होगा, यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के आखिरी फैसले पर डिपेंड करेगा.
अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो सकती है सैलरी?
सातवें वेतन आयोग में लेवल-1 से लेवल-5 तक के कर्मचारियों का मूल वेतन अलग-अलग है. प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर उनकी संभावित बेसिक सैलरी की गणना इस प्रकार की जा सकती है.
अगर 2.62 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ

लेवल-1: 18,000 रुपये से बढ़कर 47,160 रुपये
लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर 52,138 रुपये
लेवल-3: 21,700 रुपये से बढ़कर 56,854 रुपये
लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर 66,810 रुपये
लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर 76,504 रुपये

अगर 3 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ

लेवल-1: 18,000 रुपये से बढ़कर 54,000 रुपये
लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर 59,700 रुपये
लेवल-3: 21,700 रुपये से बढ़कर 65,100 रुपये
लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर 76,500 रुपये
लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर 87,600 रुपये

अगर 3.50 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ

लेवल-1: 18,000 रुपये से बढ़कर 63,000 रुपये
लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर 69,650 रुपये
लेवल-3: 21,700 रुपये से बढ़कर 75,950 रुपये
लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर 89,250 रुपये
लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर 1,02,200 रुपये

अगर 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ

लेवल-1: 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 68,994 रुपये
लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर लगभग 76,277 रुपये
लेवल-3: 21,700 रुपये से बढ़कर लगभग 83,176 रुपये
लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर लगभग 97,742 रुपये
लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर लगभग 1,11,924 रुपये

अगर 4 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ

लेवल-1: 18,000 रुपये से बढ़कर 72,000 रुपये
लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर 79,600 रुपये
लेवल-3: 21,700 रुपये से बढ़कर 86,800 रुपये
लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर 1,02,000 रुपये
लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर 1,16,800 रुपये

ये सभी आंकड़े मौजूदा मूल वेतन को प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके निकाले गए अनुमान हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों की सैलरी निश्चित रूप से इतनी ही होगी. इनमें महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और दूसरे भत्ते शामिल नहीं हैं.&amp;nbsp;
सस्ता फ्लाइट टिकट चाहिए? सरकार मदद करेगी, लेकिन एक शर्त पर
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8वें, वेतन, आयोग, की, मुंबई, में, मीटिंग, लेवल, की, सैलरी, 18000, से, 69000, होगी</media:keywords>
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        <title>अशनीर ग्रोवर ने दिखाया 100 करोड़ का घर, DLF Camellias में क्या&amp;क्या है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अशनीर-ग्रोवर-ने-दिखाया-100-करोड़-का-घर-dlf-camellias-में-क्या-क्या-है</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अशनीर-ग्रोवर-ने-दिखाया-100-करोड़-का-घर-dlf-camellias-में-क्या-क्या-है</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आपसे कहा जाए कि एक ऐसी सोसाइटी में घर है, जहां लग्जरी होटल जैसी सुविधाओं के साथ स्विमिंग पूल, प्राइवेट थिएटर और बर्फ वाला कमरा भी मौजूद है, तो शायद आपको यकीन न हो. लेकिन गुरुग्राम की DLF कैमेलियास सोसाइटी में ऐसी कई खास सुविधाएं हैं. शार्क टैंक इंडिया के पूर्व जज और बिजनेसमैन अशनीर ग्रोवर ने अपने यूट्यूब व्लॉग में इस आलीशान सोसाइटी की झलक दिखाई है. उनके मुताबिक, यहां की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए प्रॉपर्टी की कीमत 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है.
अशनीर ने अपने वीडियो में सोसाइटी के क्लब हाउस से लेकर स्विमिंग पूल, हरियाली और खेलकूद की सुविधाओं तक के बारे में बताया. उनका कहना है कि यहां का माहौल देखकर ऐसा लगता है, जैसे एक अलग ही शहर बसा दिया गया हो. चलिए जानते हैं कि आखिर DLF कैमेलियास में ऐसी कौन-कौन सी सुविधाएं हैं, जो इसे देश की सबसे आलीशान रिहायशी सोसाइटी में शामिल करती हैं.
DLF कैमेलियास में क्या-क्या सुविधाएं हैं?
अशनीर ग्रोवर के मुताबिक, इस सोसाइटी की सबसे बड़ी खासियत इसकी हरियाली, साफ-सफाई और खूबसूरत लैंडस्केप है. यहां टहलने के लिए एक किलोमीटर से लंबा ट्रैक, खुले पार्क और पास में गोल्फ कोर्स मौजूद है. इसके अलावा, सोसाइटी का क्लब हाउस भी बेहद आलीशान है.&amp;nbsp;
इस सोसाइटी की क्लब हाउस में रेस्टोरेंट, कॉफी शॉप, बार और मीटिंग रूम हैं. करीब 500 लोगों की क्षमता वाला बैंक्वेट हॉल भी मौजूद है. इसके अलावा यहां इनडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल, जकूजी और सौना बाथ जैसी सुविधाएं हैं. खासकर मनोरंजन के लिए बॉलिंग एली, कराओके लाउंज, प्राइवेट थिएटर और गेमिंग जोन बनाया गया है. साथ ही खेलों के शौकीनों के लिए टेनिस और स्क्वैश कोर्ट भी हैं.



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क्लब हाउस में लिखी थी &#039;दोगलापन&#039; किताब&amp;nbsp;
अशनीर ने बताया कि उन्होंने अपनी चर्चित किताब &#039;दोगलापन&#039; भी इसी क्लब हाउस के एक कोने में बैठकर लिखी थी. उनके लिए यह जगह सिर्फ मनोरंजन का ठिकाना नहीं, बल्कि काम करने के लिहाज से भी खास रही है.
100 करोड़ के घर पर लोगों की क्या राय है?
अशनीर ने इस प्रॉपर्टी की तारीफ करते हुए कहा कि यहां मिलने वाली प्राइवेसी, हरियाली और सुविधाएं इसे खास बनाती हैं. हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.
कुछ लोगों ने सुविधाओं को शानदार बताया, तो कुछ ने सवाल उठाया कि एक फ्लैट के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करना कितना सही है. अशनीर ने यह भी बताया कि फिलहाल DLF इससे भी ज्यादा आलीशान प्रोजेक्ट DLF डाहलियास पर काम कर रहा है.
8वें वेतन आयोग की मुंबई में मीटिंग, लेवल 1 की सैलरी 18000 से 69000 होगी?
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अशनीर, ग्रोवर, ने, दिखाया, 100, करोड़, का, घर, DLF, Camellias, में, क्या-क्या, है</media:keywords>
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        <title>आज बैंक खुले हैं या बंद? घर से निकलने से पहले चेक करें अपने शहर का हाल</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आज के दिन बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले बैंक की छुट्टी जरूर चेक कर लें. सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि और दुर्गा पूजा के कारण देश के कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे. लेकिन छुट्टियों को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है.
यहां से आप जान सकते हैं कि किन- किन शहरों में आज बैंक की छुट्टी रहने वाली है और साथ ही साथ जानेंगे कि कल के लिए क्या अपडेट है.
आज किन राज्यों में बैंक बंद रहेंगे?19 अक्टूबर को महानवमी, दुर्गा पूजा, आयुध पूजा फेस्टिवल के लिए बैंक में छुट्टी रहने वाली है. हालांकि, ये छुट्टी देशभर में हो, ये जरूरी नहीं है. छुट्टियां खासतौर से असम, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश में है.&amp;nbsp;
अगर आप दिल्ली या किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो अपने बैंक की स्थानीय छुट्टी लिस्ट जरूर देख लें. त्योहारों की छुट्टियां हर राज्य में एक जैसी नहीं होती है.
बैंक बंद होने पर कौन से काम होंगे?बैंक शाखा बंद होने पर भी कई जरूरी काम ऑनलाइन किए जा सकते हैं. ग्राहक मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम की मदद से पैसे ट्रांसफर करने, बिल भरने और कैश निकालने जैसे काम कर सकते हैं.
हालांकि, चेक क्लियरेंस, बैंक शाखा में केवाईसी अपडेट, लॉकर इस्तेमाल करने या डिमांड ड्राफ्ट बनवाने जैसे कामों के लिए शाखा जाना पड़ सकता है. ऐसे काम छुट्टी वाले दिन अटक सकते हैं या अगले वर्किंग डे तक टल सकते हैं.
कल भी बंद रहेंगे बैंक?20 अक्टूबर को दशहरा और विजयादशमी के अवसर पर भी देश के ज्यादातर बैंक में छुट्टी रहेगी. हालांकि, कुछ केंद्रों पर अलग व्यवस्था हो सकती है. इसलिए लगातार दो दिन बैंक का काम करने का प्लान बना रहे हैं तो अपने शहर के बैंक में जाकर छुट्टियों के बारे में जरूर जान लें.&amp;nbsp;
बैंक जाने से पहले RBI की राज्यवार बैंक हॉलिडे लिस्ट या अपनी बैंक शाखा से जानकारी लेना सबसे सही रहता है. इससे आपका समय बचेगा और जरूरी काम के लिए दोबारा बैंक नहीं जाना पड़ेगा.
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत के निर्यात को मिली नई रफ्तार, अफ्रीका में 47% और आसियान देशों में 56% की बढ़ोतरी</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के कारोबार के लिए अच्छी खबर है. दुनिया के कई देशों में भारतीय सामान की मांग बढ़ रही है. अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान अफ्रीका में भारत का निर्यात 47% बढ़कर 26.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 17.83 अरब डॉलर था. वहीं, आसियान देशों में भी भारतीय सामान की मांग बढ़ी है और यहां निर्यात में 56% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
निर्यात बढ़ने का मतलब है कि भारत से दूसरे देशों में ज्यादा सामान बिक रहा है. इससे देश के कारोबार, कंपनियों और रोजगार को भी फायदा मिल सकता है.
अफ्रीका में कितनी बढ़ी मांग?अफ्रीका के बाजारों में भारत का कारोबार तेजी से बढ़ा है. अप्रैल से अगस्त के बीच अफ्रीका को होने वाला निर्यात कुल भारतीय निर्यात में 12.2% हिस्सेदारी तक पहुंच गया. पिछले साल इसी समय में ये हिस्सेदारी 9.7% थी.
पूर्वी अफ्रीका में भारत का निर्यात 94% बढ़कर 8.95 अरब डॉलर हो गया. वहीं, दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ के देशों में निर्यात 53% बढ़कर 5.09 अरब डॉलर पहुंच गया. उत्तरी अफ्रीका में निर्यात 33% बढ़कर 4.03 अरब डॉलर हो गया है. पश्चिमी अफ्रीका में भी 7% की बढ़ोतरी हुई और ये 5.57 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
आसियान देशों में कितना बढ़ा कारोबार?अफ्रीका के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी भारतीय सामान की मांग बढ़ी है. अप्रैल से अगस्त के दौरान आसियान देशों को भारत का निर्यात 56% बढ़कर 23.08 अरब डॉलर हो गया है.
पूर्वोत्तर एशिया में निर्यात 37% बढ़कर 21.03 अरब डॉलर पहुंच गया. वहीं, दक्षिण एशिया और यूरोप के कुछ अन्य बाजारों में भी निर्यात में 24% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत सिर्फ कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग बाजारों में अपना कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
पश्चिम एशिया में कैसे सुधरा निर्यात?पश्चिम एशिया में भारत के निर्यात पर भी नजर रखना जरूरी है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बाद इस क्षेत्र में कारोबार प्रभावित हुआ था. हालांकि, अब निर्यात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 4.2 अरब डॉलर था, जो अगस्त में बढ़कर 5.01 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, जनवरी में ये 6.48 अरब डॉलर था.
ट्रक के निर्यात में भी आई तेजीभारत से कमर्शियल वाहनों का निर्यात भी बढ़ा है. अप्रैल से अगस्त के दौरान लाइट कमर्शियल ट्रकों के निर्यात में 71% की बढ़ोतरी हुई, जबकि मीडियम ट्रकों का निर्यात 67% बढ़ा है. वाहनों के निर्यात में ये तेजी भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए अच्छी खबर है.&amp;nbsp;
आज बैंक खुले हैं या बंद? घर से निकलने से पहले चेक करें अपने शहर का हाल
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Nestle की कॉफी सेफ है या नहीं? कंपनी ने दी सफाई, लेबल पर बढ़ा झगड़ा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/nestle-की-कॉफी-सेफ-है-या-नहीं-कंपनी-ने-दी-सफाई-लेबल-पर-बढ़ा-झगड़ा</link>
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        <description><![CDATA[ कॉफी पीने वालों के लिए नेस्कैफे से जुड़ी एक खबर सामने आई है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी के तीन कॉफी ड्रिंक्स के पैकेट पर दी गई जानकारी को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं, नेस्ले इंडिया का कहना है कि उसके ये प्रोडक्ट्स पीने के लिए सुरक्षित हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रोडक्ट्स के पैकेट पर सामने की तरफ इन्हें फ्लेवर वाला दूध बताया गया है, जबकि पीछे की तरफ इन्हें डेयरी आधारित पेय के रूप में लिखा गया है.
ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर भी इनके बारे में दी गई जानकारी में अंतर पाया गया है. FSSAI का कहना है कि इन प्रोडक्ट्स को नियमों के अनुसार &amp;lsquo;फलेवर्ड मिल्क&amp;rsquo; की श्रेणी में रखा जाना चाहिए. इसी वजह से इनके वर्गीकरण और पैकेट पर दी गई जानकारी को लेकर सवाल उठे हैं.
नेस्ले इंडिया ने क्या कहा?
नेस्ले इंडिया ने कहा है कि नियामक की आपत्ति प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग और वर्गीकरण से जुड़ी है, न कि उनकी सुरक्षा से जुड़ी है. कंपनी के मुताबिक, ये कॉफी ड्रिंक्स खाने-पीने की सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों का पालन करते हैं. कंपनी ने यह भी कहा है कि वह FSSAI को इस मामले में अपना जवाब देगी और जरूरी प्रक्रिया में सहयोग करेगी.
किन कॉफी ड्रिंक्स पर उठे सवाल?
FSSAI ने नेस्कैफे के तीन प्रोडक्ट्स की जानकारी और उनके वर्गीकरण पर आपत्ति जताई है. इनमें नेसकेफे इंटेंस कैफे केपिचिनो, नेसकेफे चोको मोका और नेसकेफे चिल्लड लाते शामिल हैं. ये ऐसे कॉफी ड्रिंक्स हैं, जिन्हें सीधे पैकेट या बोतल से पीया जा सकता है. इन्हें बनाने के लिए अलग से कॉफी तैयार करने की जरूरत नहीं होती.
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में कंपनी के जवाब और नियामक की समीक्षा पर नजर रहेगी. इसके बाद आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सकता है. फिलहाल, यह मामला मुख्य रूप से पैकेट पर दी गई जानकारी और प्रोडक्ट्स की श्रेणी से जुड़ा है. नेस्ले ने अपने ड्रिंक्स को सुरक्षित बताया है, जबकि FSSAI की आपत्तियों पर अंतिम स्थिति आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी.
यह भी पढ़ें- मसालों से मेवों तक के बढ़े दाम, धनतेरस की खरीदारी भी पड़ेगी जेब पर भारी
यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>60% से 63% होगा DA, 18000 बेसिक वालों को 540 महीना ज्यादा मिलेगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/60-से-63-होगा-da-18000-बेसिक-वालों-को-540-महीना-ज्यादा-मिलेगा</link>
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        <description><![CDATA[ दिवाली से पहले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को DA में बढ़ोतरी की खुशखबरी मिल सकती है. फिलहाल कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 60% DA मिल रहा है. अगर सरकार इसे बढ़ाकर 63% करती है, तो हर महीने मिलने वाली सैलरी में काफी इजाफा होगा.
मान लिजिए, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18,000 रुपए है, उन्हें हर महीने 540 रुपए ज्यादा मिल सकते हैं. हालांकि, अभी सरकार की तरफ से इस बढ़ोतरी का ऑफिशियल ऐलान नहीं हुआ है. आइये यहां से इसका सारा हिसाब- किताब समझते हैं.&amp;nbsp;
63% हुआ तो कितनी बढ़ेगी सैलरी?महंगाई भत्ता की कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होती है. केंद्र सरकार आमतौर पर साल में दो बार DA में बदलाव करती है. इस साल जनवरी 2026 से लागू बढ़ोतरी के बाद DA की दर 60% है.
अब जुलाई 2026 से लागू होने वाली अगली किस्त का इंतजार किया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. अगर ऐसा होता है, तो DA 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा.&amp;nbsp;
हर महीने कितना बढ़ेगा पैसा?अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18000 रुपए है, तो अभी के 60% DA के हिसाब से उसे हर महीने 10800 रुपए महंगाई भत्ता मिलता है. DA की दर 63% होने पर ये पैसे बढ़कर 11,340 रुपए हो जाएंगे. यानी हर महीने 540 रुपए ज्यादा मिलेंगे. यहां से दूसरे बेसिक सैलरी के हिसाब से समझिए-&amp;nbsp;



बेसिक सैलरी
अभी 60% डीए
63% डीए होने पर
हर महीने कितना बढ़ेगा


18000 रुपए
10800 रुपए
11340 रुपए
540 रुपए


25000 रुपए
15000 रुपए
15750 रुपए
750 रुपए


30000 रुपए
18000 रुपए
18900 रुपए
900 रुपए


56100 रुपए
33600 रुपए
35343 रुपए
1683 रुपए


100000 रुपए
60000 रुपए
63000 रुपए

3000 रुपए




जुलाई से लागू हुआ तो मिलेगा एरियर?केंद्रीय कर्मचारियों को एरियर का इंतजार है. अगर सरकार DA में बढ़ोतरी को 1 जुलाई 2026 से लागू करती है, तो कर्मचारियों को जुलाई से बढ़े हुए DA का बकाया भी मिल सकता है. जैसे, 18000 रुपए बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी को 3% बढ़ोतरी के हिसाब से हर महीने 540 रुपए एक्स्ट्रा मिलेंगे. अब अगर 3 महीने का एरियर बनता है, तो 1620 रुपए होंगे.&amp;nbsp;
आज बैंक खुले हैं या बंद? घर से निकलने से पहले चेक करें अपने शहर का हाल
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>डीजल में 5% तक मिलावट शुरू, सस्ते के लिए बायोडीजल मिला रही तेल कंपनियां</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/डीजल-में-5-तक-मिलावट-शुरू-सस्ते-के-लिए-बायोडीजल-मिला-रही-तेल-कंपनियां</link>
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        <description><![CDATA[ डीजल से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अब तेल कंपनियों ने पेट्रोल में एथेनॉल की तरह डीजल में भी मिलावट शुरू कर दी है. कंपनियां डीजल में 5% तक बायोडीजल की मिलावट कर रही हैं. वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो रहा है, लेकिन आम ग्राहकों के लिए डीजल के दाम नहीं बढ़े, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
IOCL, BPCL और HPCL जैसी देश की बड़ी तेल कंपनियां अब डीजल में 5% तक बायोडीजल मिलाने लगी हैं. दिल्ली में डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर है, जबकि बायोडीजल मिलाने से इसकी लागत 88 रुपए पड़ रही है तो इसे बेचना कंपनियों को सस्ता पड़ रहा है. अभी मिलावट वाला डीजल गुजरात, राजस्थान और दिल्ली-NCR के चुनिंदा पंपों पर मिल रहा है.
प्राइवेट कंपनियों ने महंगा किया डीजल-पेट्रोल
बता दें कि Nayara और Jio-bp जैसी प्राइवेट कंपनियों ने पिछले दिनों पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 3 रुपए बढ़ा दिए थे, जबकि सरकारी कंपनियों ने दाम फ्रीज रखे हैं. सरकारी तेल कंपनियों का दावा है कि हमें पेट्रोल पर 8 रुपए और डीजल पर 9 रुपए लीटर का घाटा हो रहा है.
गौरतलब है कि बायोडीजल सोयाबीन, पाम ऑयल, यूज्ड कुकिंग ऑयल से बनता है. सरकार ने साल 2030 तक डीजल में 5% ब्लेंडिंग का टारगेट रखा है. हालांकि डीजल में अभी भी मिलावट होती है, लेकिन अभी मिलावट 0.5% ही होती है. BIS के IS 1460 नियम के तहत डीजल में 5% बायोडीजल तक मिलाने पर बताना जरूरी नहीं है. ये एडिटिव जैसा है और धुआं 85% कम करता है.
क्यों बढ़े कच्चे तेल के दाम?
दरअसल कच्चा तेल फरवरी में 69 डॉलर था, लेकिन मार्च में ईरान पर अमेरिका के हमलों के बाद पैदा हुए वेस्ट एशिया संकट से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित रही. जो कच्चा तेल पहले 69 डॉलर प्रति बैरल मिल रहा था, अक्टूबर में वह सप्लाई में रुकावट और शिपिंग चार्ज बढ़ने से अब 122 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.&amp;nbsp;
पिछले दिनों पेट्रोल में एथेनॉल विवाद के बाद भारत सरकार ने डीजल में एथेनॉल मिलाने की संभावना को खारिज कर दिया था, लेकिन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिया था कि डीजल में मिलाने के लिए एक वैकल्पिक घटक के तौर पर बायो-आइसोब्यूटेनॉल का इस्तेमाल किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें- 60% से 63% होगा DA, 18000 बेसिक वालों को 540 महीना ज्यादा मिलेगा ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>डीजल, में, तक, मिलावट, शुरू, सस्ते, के, लिए, बायोडीजल, मिला, रही, तेल, कंपनियां</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मसालों से मेवों तक के बढ़े दाम, धनतेरस की खरीदारी भी पड़ेगी जेब पर भारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मसालों-से-मेवों-तक-के-बढ़े-दाम-धनतेरस-की-खरीदारी-भी-पड़ेगी-जेब-पर-भारी</link>
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        <description><![CDATA[ त्योहारी सीजन में खरीदारी करना इस बार लोगों की जेबों पर भारी पड़ रहा है. पूजा-पाठ से लेकर खाने-पीने तक के समानों समेत हर चीज के लिए लोगों को इस बार पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले, दाल-चावल और चीनी से लेकर काजू-बादाम जैसे मेवे तक महंगे हो गए हैं. धनतेरस पर बर्तन खरीदने और घर के लिए टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन लेने की योजना बना रहे लोगों के बजट पर भी कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ रहा है.
कई खाद्य उत्पादों के दाम कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़े हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने त्योहारी ऑफर आने से पहले ही अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा कर दिया है. ऐसे में छूट और आकर्षक ऑफर के बावजूद ग्राहकों को खरीदारी के लिए ज्यादा पैसे खर्चने पड़ &amp;nbsp;सकते हैं.
चीनी से जीरे तक महंगाई ने बिगड़ा रसोई का बजट
किराना बाजार में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों की परेशानी बढ़ा दी है. करीब 20 दिन पहले 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची चीनी की कीमत घटकर 50 रुपये तक आ गई थी. लेकिन महज तीन दिनों के भीतर इसमें आठ रुपये प्रति किलोग्राम तक का इजाफा हो गया है और इसका भाव फिर से चढ़कर 58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. मसालों की कीमतों में भी राहत नहीं है. कमजोर मॉनसून के चलते पैदावार प्रभावित होने से जीरा, धनिया और हल्दी के दाम महज 15 दिनों में 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं.
किराना मंडी के थोक कारोबारी विशेश्वर राजदान के मुताबिक, मेथी दाना करीब 10 फीसदी महंगा हो गया है. छोले और काले चने की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले दो महीनों में चावल के दाम 25 फीसदी तक की उछाल आई है. महंगाई का असर केवल महंगे मसालों तक सीमित नहीं है बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल कई चीजों के लिए अब अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
एक महीने में मेवों के दाम में बड़ा उछाल
त्योहारों में मिठाइयों और सूखे मेवों के पैकेट उपहार में देने की परंपरा है. लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट गिरी और किशमिश गिरी के भाव में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है. इनकी कीमतें बढ़ने से इन उपहारों को तैयार करने की लागत भी बढ़ रही है. जिससे इस बार सूखे मेवे और मिठाइयों को उपहार में देना लोगों की जेबों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है.&amp;nbsp;
किराना मंडियों में एक महीने के इतनी बढ़ी कीमतें
सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में बादाम 900 से बढ़कर 1,200 रुपये प्रति किलो, काजू 1,000 से 1,100 रुपये, पिस्ता 1,200 से बढ़कर 1,800&amp;ndash;1,900 रुपये और अखरोट की गिरी 1,350 से बढ़कर 1,500 रुपये प्रति किलो हो गई। इसी तरह जीरा 250 से बढ़कर 300&amp;ndash;350 रुपये, धनिया 230 से 280 रुपये, हल्दी 190 से 250 रुपये और चीनी 52 से 58 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। चावल के दाम 40&amp;ndash;100 रुपये से बढ़कर 60&amp;ndash;120 रुपये प्रति किलो हो गए, जबकि अरहर दाल 130 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो बिक रही है.
इन कीमतों में सबसे तेज उछाल पिस्ता में दिखाई देता है. सितंबर में 1,200 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला पिस्ता अब 1800 से 1900 रुपये तक पहुंच गया है. बादाम के लिए भी ग्राहकों को अब 300 रुपये प्रति किलोग्राम अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं. काजू की कीमत 1000 से बढ़कर 1100 रुपये और अखरोट की गिरी का भाव 1350 से बढ़कर 1500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. जीरा, धनिया और हल्दी की बढ़ती कीमतें भी किराना खरीदारी का कुल बिल बढ़ा रही हैं.
ड्राई फ्रूट्स महंगे होने से गिफ्ट पैक पर भी असर
खारी बावली के थोक कारोबारी जितेंद्र मेहता के अनुसार, ड्राई फ्रूट्स की घरेलू उपलब्धता काफी हद तक अफगानिस्तान, ईरान और अमेरिका से होने वाले आयात पर निर्भर करती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति, फसल की स्थिति, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और आयात एवं ढुलाई की लागत का सीधा असर यहां की कीमतों पर पड़ता है. रुपये की कमजोरी और आयात में कमी से भी बाजार में दबाव बढ़ा है. ऐसे में त्योहारों के दौरान मेवों की मांग बढ़ने पर कीमतों में तेजी का असर उपहारों के बजट में साफ नजर आ रहा है.
कीमतें बढ़ने के पीछे क्या हैं वजहें?
खाद्य पदार्थों की महंगाई के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. प्याज की बढ़ती कीमतें, खाद्य तेल की महंगाई और चावल के महंगे होने से खाने-पीने की दूसरी चीजों की लागत पर भी दबाव पड़ रहा है. कम उत्पादन और आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ने की आशंका के बीच किसानों तथा बड़े कारोबारियों की ओर से स्टॉक रोककर रखने को भी महंगाई की एक वजह बताया जा रहा है.
इससे बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. ड्राई फ्रूट्स के मामले में आयात पर निर्भरता, रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति अहम कारण हैं. वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा और ऊर्जा संकट को वजह बताया जा रहा है. ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं का असर भी लागत पर पड़ने की बात कही गई है.
टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन खरीदना भी महंगा
त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां आमतौर पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छूट और विशेष ऑफर देती हैं. इस बार हालांकि खरीदारी से पहले ही उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं. लाजपत नगर में इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम चलाने वाले मित्तल इलेट्रॉनीक के ऑनर राजेंद्र के मुताबिक, कंपनियों ने त्योहारी सीजन से पहले फ्रिज, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के दाम 8 से 10 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं.
बाजार में इन उत्पादों की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब 10 फीसदी तक अधिक हैं. जिस कारण ऑफर मिलने के बावजूद ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक रकम चुकानी पड़ सकती है. खासकर वे परिवार जो त्योहार के मौके पर नया टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने बजट में बदलाव करना पड़ सकता है.
धनतेरस पर बर्तन खरीदने के लिए भी बढ़ाना होगा बजट
धनतेरस पर  ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>मसालों, से, मेवों, तक, के, बढ़े, दाम, धनतेरस, की, खरीदारी, भी, पड़ेगी, जेब, पर, भारी</media:keywords>
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        <title>UPI PIN से 5 मिनट में 11 बार निकले 72000 रुपए, अब ग्राहक को हर्जाना देगा बैंक</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके बैंक खाते से बिना आपकी अनुमति के पैसे निकल जाएं, तो आपको क्या करना चाहिए? आज के दौर में डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर फ्रॉड के मामले भी लगातार सामने आते हैं. ऐसा ही एक मामला पंजाब के बठिंडा से सामने आया, जहां एक व्यक्ति के बैंक खाते से कई बार में 72,495 रुपए निकाल लिए गए.
इस मामले में बैंक ने दावा किया था कि लेनदेन ग्राहक के मोबाइल पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (MPIN) के जरिए प्रमाणित हुए थे. हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ग्राहक की रकम ब्याज सहित लौटाने और हर्जाना देने का निर्देश दिया है.
क्या है पूरा मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जून 2019 को विजय कुमार के बैंक खाते से कुछ ही मिनटों में लगातार पैसे निकाले गए. उन्हें मोबाइल पर लेनदेन के अलर्ट मिले, जिनसे पता चला कि खाते में रकम निकाली जा रही है. दोपहर 1:06 बजे से 1:11 बजे के बीच कई बार लेनदेन हुए. शुरुआती निकासी में 4,999 रुपए और 10,000 रुपए जैसी रकम शामिल थी.
शिकायत के मुताबिक, बैंक अधिकारियों से संपर्क करने और खाता ब्लॉक कराने की कोशिश के दौरान भी लेनदेन जारी रहे. आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 4 और 5 जून 2019 को डिजिटल पेमेंट ऐप के जरिए कुल 11 अनधिकृत लेनदेन हुए, जिनमें 72,495 रुपए निकाल लिए गए. घटना के दिन ही विजय कुमार ने बैंक और पुलिस से शिकायत की. इसके अलावा उन्होंने बैंक के दूसरे कार्यालयों से भी इस मामले में संपर्क किया.
बैंक ने क्या दलील दी?
बैंक ने अपनी सफाई में कहा कि सभी लेनदेन मोबाइल पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (MPIN) के जरिए प्रमाणित हुए थे. बैंक के मुताबिक, ग्राहक ने आखिरी बार 9 अप्रैल 2019 को MPIN बनाया था और उसके बाद इसे रीसेट नहीं किया गया था. इस आधार पर बैंक ने आशंका जताई कि ग्राहक की पिन लीक होने या शेयर की गई है.&amp;nbsp;
हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने बैंक के इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना. आयोग के मुताबिक, सिर्फ MPIN के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि ग्राहक ने खुद लेनदेन की अनुमति दी थी या उसकी लापरवाही के कारण पैसे निकाले गए.
उपभोक्ता आयोग ने बैंक को क्या आदेश दिया?
पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा. आयोह ने माना कि बैंक ग्राहक की लापरवाही का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका. आयोग ने अपने फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6 जुलाई 2017 के उस परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि RBI के नियमों के तहत, निर्धारित परिस्थितियों में समय पर शिकायत करने वाले ग्राहक की अनधिकृत लेनदेन के लिए जिम्मेदारी शून्य हो सकती है.
आयोग ने बैंक को विजय कुमार के खाते से निकाले गए 72,495 रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है. इसके अलावा बैंक को 5,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च भी देना होगा.
दिल्ली में अब सिर्फ 2.5 लाख ई-रिक्शा चलेंगे, सरकार ने लगाया ब्रेक
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>IDBI बैंक के कर्मचारियों ने किया भूख हड़ताल का ऐलान, बेचने पर हो रहा बवाल</title>
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        <description><![CDATA[ IDBI बैंक को कनाडा की Fairfax कंपनी को बेचने के प्रस्ताव के खिलाफ बैंक कर्मचारियों ने भूख हड़ताल का ऐलान किया है. ऑल इंडिया IDBI ऑफिसर्स एसोसिएशन और एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने मिलकर 2 और 3 नवंबर को देशभर की ब्रांचों में दो दिन की हड़ताल का नोटिस दिया है.
एसोसिएशन के मुताबिक, यह हड़ताल देश भर में बैंक की सभी शाखाओं और कार्यालयों में होगी और इस दौरान बैंक का कामकाज पूरी तरह से ठप रहने की संभावना है. एसोसिएशन ने बैंक कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों, ग्राहकों, जमाकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों से भूख हड़ताल का समर्थन करने की अपील की है.
सरकार और बैंक मैनेजमेंट के साथ बातचीत के लिए तैयार
फोरम ने प्रस्तावित बिक्री का इस आधार पर विरोध किया है कि वित्तीय स्थिति में सुधार के बावजूद इससे बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के स्वरूप पर असर पड़ेगा. एसोसिएशन ने कहा कि हम सरकार और बैंक मैनेजमेंट के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अगर मांगे नहीं मानी गई तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है.
बैंक कर्मचारियों की मांग है कि सरकार बैंक को प्राइवेट न करे और LIC से या बाजार से 6% शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी 51% पर बनाए रखे, जैसा कि 2003 में संसद में वादा किया गया था. कर्मचारियों को डर है कि प्राइवेट होने पर नौकरी की शर्तें, पेंशन, रिजर्वेशन और वेतन बढ़ोतरी खत्म हो जाएगी.
सरकारी बैंकों में ट्रांसफर का ऑप्शन मिले- कर्मचारी
कर्मचारियों ने मांग की है कि अगर बिक्री होती भी है तो उन्हें सरकारी बैंकों में ट्रांसफर का ऑप्शन मिले और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी रखा जाए. उन्होंने कहा IDBI ने किसानों, छोटे कर्जदारों और सरकारी योजनाओं में बड़ी भूमिका निभाई है, इसे प्राइवेट करने से जनता को नुकसान होगा. अगर मांग नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल भी हो सकती है.
यूनियन ने आईडीबीआई बैंक में कार्यरत आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को भी स्थायी नौकरी देने की मांग की है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- कंडोम पर कितना Tax वसूलती है सरकार? हर साल नवरात्रों में बढ़ जाती है सेल ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>कंडोम पर कितना Tax वसूलती है सरकार? हर साल नवरात्रों में बढ़ जाती है सेल</title>
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        <description><![CDATA[ नवरात्रि में गरबा के दौरान कंडोम हर साल चर्चा में आ जाता है. हर साल नवरात्रि आते ही खबरें आने लगती हैं कि गुजरात में गरबा के दौरान कंडोम की बिक्री बढ़ गई. गरबा पंडालों से निकलकर ये खबर पूरे देश में वायरल हो जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरकार कंडोम पर कितना जीएसटी वसूलती है? अगर नहीं तो आप कंडोम को लेकर अपनी जानकारी बढ़ा लीजिए.&amp;nbsp;
भारत में कंडोम पर 0% GST लगता है, यानी कंडोम खरीदना पूरी तरह से टैक्स-फ्री है. &amp;nbsp;सरकार ने स्वास्थ्य और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए कंडोम को अब 0% स्लैब में रखा हुआ है. कंडोम HSN कोड 40141010 के अंतर्गत आते हैं.
पहले से ही 0% स्लैब में थे कंडोम
2025 में 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद कई सामानों की जीएसटी दर में बदलाव किया गया था, लेकिन कंडोम की दर में कोई बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि ये पहले से ही 0% स्लैब में थे. हालांकि कुछ पुराने या गलत स्रोतों में कंडोम पर 12% या 18% जीएसटी का जिक्र मिल सकता है, लेकिन वर्तमान में आधिकारिक रूप से इस पर जीएसटी शून्य है.
हर साल नवरात्रों में बढ़ जाती है सेल
हर साल नवरात्र और गरबा के दौरान रिपोर्ट्स जारी की जाती हैं कि नवरात्रों में कंडोम की सेल बढ़ जाती है, हालांकि यह दावा किसी सरकारी डेटा पर आधारित नहीं होता, &amp;nbsp;बल्कि दवा दुकानदारों के अनुमान और पुरानी रिपोर्ट्स पर आधारित होता है.&amp;nbsp;
गुजरात &amp;nbsp;में एक केमिस्ट &amp;nbsp;एसोसिएशन का दावा था कि हर साल नवरात्रि के दौरान कंडोम और गर्भनिरोधक दवाओं की बिक्री में करीब 35% तक बढ़ोतरी होती है. कई रिपोर्ट्स में तो दावा है कि 9 दिनों में युवाओं की भीड़, गरबा नाइट्स और कंपनियों की मार्केटिंग की वजह से मांग में 25% से 50% तक बढ़ोतरी हो जाती है.
स्थानीय दुकानदारों का क्या कहना है?
कंडोम कि बिक्री पर दावों की सच्चाई का पता लगाने के लिए जब गुजरात के कई शहरों में फार्मेसियों और दवा विक्रेताओं से एक बारे में पूछा गया तो लगभग सभी ने पुष्टि की कि इस दौरान कंडोम और गर्भनिरोधक दवाओं की बिक्री वास्तव में बढ़ जाती है.
यह भी पढ़ें- मसालों से मेवों तक के बढ़े दाम, धनतेरस की खरीदारी भी पड़ेगी जेब पर भारी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Jio IPO को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह, 2.5 लाख करोड़ की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी आईपीओ (IPO) को लेकर निवेशकों के बीच काफी दिलचस्पी देखने को मिल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, IPO में निवेश के लिए घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए की मांग सामने आई है.
इससे शेयर बाजार में जियो की लिस्टिंग से पहले ही निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस IPO में भारत की बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों और बीमा कंपनियों के साथ कई विदेशी निवेश फंड भी पैसा लगाने के इच्छुक हैं.
Jio IPO में किन बड़े निवेशकों की दिलचस्पी?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में कई बड़े निवेशकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है. इनमें भारतीय और विदेशी संस्थागत निवेशक दोनों शामिल हैं.

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC).
SBI म्यूचुअल फंड और HDFC म्यूचुअल फंड.
फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, कैपिटल ग्रुप और ब्लैकरॉक जैसी अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनियां.
सिंगापुर का सरकारी निवेश फंड GIC.
नॉर्वे का Norges Bank Investment Management.
अबू धाबी का Abu Dhabi Investment Authority.
कतर का Qatar Investment Authority.

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 10 बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों और पांच प्रमुख बीमा कंपनियों की ओर से भी इस आईपीओ में दिलचस्पी दिखाई गई है.
मोबाइल कंपनी से डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म तक जियो का सफर
Jio प्लेटफॉर्म्स ने टेलीकॉम कंपनी के रूप में शुरुआत की थी, लेकिन अब इसका कारोबार कई डिजिटल सेवाओं तक फैल चुका है. कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाओं, मनोरंजन और कारोबारी डिजिटल सेवाओं में भी काम करती है. जानकारों के मुताबिक, कारोबार के इन अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूदगी जियो को फ्यूचर में कमाई बढ़ाने के बड़े अवसर देती है.
इस IPO के जरिए निवेशकों को जियो प्लेटफॉर्म्स में सीधे हिस्सेदारी खरीदने का मौका मिलेगा. फिलहाल, Jio प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी है. शेयर बाजार में अलग से लिस्टिंग होने के बाद कंपनी के कारोबार का स्वतंत्र बाजार मूल्य तय हो सकेगा.
Jio IPO से जुड़ी 8 अहम बातें
1. IPO खुलने से पहले ही 2.5 लाख करोड़ की मांग
Jio के IPO बड़े निवेशकों ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की दिलचस्पी दिखाई है. इससे IPO खुलने से पहले ही कंपनी को लेकर निवेशकों के उत्साह का पता चलता है.
2. कई देशों के सरकारी निवेश फंड भी इच्छुक
सिंगापुर, नॉर्वे, अबू धाबी और कतर के सरकारी निवेश फंडों ने भी Jio के IPO में निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई है. इससे Jio के IPO को लेकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की दिलचस्पी का संकेत मिलता है.
3. भारत के बड़े निवेशक भी शामिल
LIC, SBI म्यूचुअल फंड और HDFC म्यूचुअल फंड जैसे बड़े घरेलू निवेशक के नाम भी सामने आए हैं. इसके अलावा, देश की 10 प्रमुख म्यूचुअल फंड कंपनियों और पांच बड़ी बीमा कंपनियों की ओर से भी मांग की जानकारी सामने आई है.
4. दुनिया की बड़ी निवेश कंपनियों की नजर
ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स और कैपिटल ग्रुप जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनियां भी जियो के आईपीओ में निवेश करना चाहती हैं.
5. सिर्फ मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं है जियो
जियो का कारोबार मोबाइल सेवाओं के अलावा ब्रॉडबैंड, क्लाउड, मनोरंजन और कारोबारी डिजिटल सेवाओं तक फैला हुआ है. ऐसे में निवेशकों को कंपनी के व्यापक डिजिटल कारोबार में हिस्सेदारी लेने का अवसर मिल सकता है.
6. Jio प्लेटफॉर्म्स में सीधे निवेश का मौका
अभी तक जियो के कारोबार में हिस्सेदारी पाने के लिए निवेशक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर खरीद सकते थे. IPO और अलग लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर सीधे खरीदने का अवसर मिलेगा.
7. IPO का प्राइस बैंड 1,065 से 1,119
दरअसल, Jio के IPO का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर है. हालांकि, निवेश से पहले आधिकारिक IPO दस्तावेजों में कीमत और अन्य शर्तों की पुष्टि करना जरूरी है.
8. IPO 21 से 23 अक्टूबर तक खुलने की जानकारी
दी गई जानकारी के नुताबिक, Jio के IPO 21 अक्टूबर को खुलने और 23 अक्टूबर को बंद होने वाला है. हालांकि, निवेश करने से पहले कंपनी की आधिकारिक घोषणा और IPO की आखिरी तारीखों की पुष्टि जरूर करें.
इंडोनेशिया के शेयर बाजार में हाहाकार, 28 साल की सबसे बड़ी गिरावट
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        <pubDate>Sun, 18 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मनरेगा योजना में बड़ा बदलाव, अब साल में 100 की जगह मिलेगा 150 दिन का रोजगार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मनरेगा-योजना-में-बड़ा-बदलाव-अब-साल-में-100-की-जगह-मिलेगा-150-दिन-का-रोजगार</link>
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        <description><![CDATA[ ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाएं आजीविका का एक बड़ा सहारा हैं. पहले मनरेगा के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती थी. लेकिन अब केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह नया ग्रामीण रोजगार कानून लागू किया है, जिसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है. हालांकि, वन क्षेत्रों में रहने वाले कुछ पात्र आदिवासी परिवारों को मिलने वाले अतिरिक्त 50 दिनों के रोजगार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
दरअसल, जनवरी 2014 में केंद्र सरकार ने वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत जमीन का अधिकार पाने वाले कुछ पात्र अनुसूचित जनजाति परिवारों को मनरेगा के 100 दिनों के अलावा 50 दिन का अतिरिक्त रोजगार दिया जाता था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन परिवारों को अब भी साल में 150 दिन रोजगार मिल सकेगा.
क्या है नए रोजगार कानून में बदलाव?
केंद्र सरकार ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को 1 जुलाई 2026 से लागू किया है. इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है. पहले मनरेगा के तहत यह सीमा 100 दिन थी. यानी नए कानून में रोजगार की गारंटी 25 दिन बढ़ा दी गई है.&amp;nbsp;
वन अधिकार धारकों को क्या होगा फायदा?
जनवरी 2014 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वन क्षेत्रों में रहने वाले कुछ पात्र अनुसूचित जनजाति परिवारों को मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के अलावा 50 दिन का अतिरिक्त मजदूरी रोजगार देने का निर्देश दिया था. यह सुविधा उन परिवारों के लिए थी, जिनके पास वन अधिकार अधिनियम के तहत मिली जमीन के अलावा दूसरी निजी जमीन नहीं थी.&amp;nbsp;
क्या अब भी मिलेंगे 50 दिन के अतिरिक्त रोजगार?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नया कानून लागू होने के बाद भी पात्र वन अधिकार धारकों को अतिरिक्त 50 दिन का रोजगार पाने का अधिकार है. नए कानून की धारा 5 के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है. हालांकि, नए रोजगार कानून में अतिरिक्त 50 दिनों के रोजगार का साफ तौर पर जिक्र नहीं किया गया है.
रूस से तेल आयात पर भारत का बड़ा फैसला, ट्रंप की छूट के बाद भी नहीं बदलेगी रणनीति
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        <pubDate>Sun, 18 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मनरेगा, योजना, में, बड़ा, बदलाव, अब, साल, में, 100, की, जगह, मिलेगा, 150, दिन, का, रोजगार</media:keywords>
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        <title>रूस से तेल आयात पर भारत का बड़ा फैसला, ट्रंप की छूट के बाद भी नहीं बदलेगी रणनीति</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रूस-से-तेल-आयात-पर-भारत-का-बड़ा-फैसला-ट्रंप-की-छूट-के-बाद-भी-नहीं-बदलेगी-रणनीति</link>
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        <description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दिए जाने के बाद भी भारत अपनी मौजूदा रणनीति में बड़ा बदलाव करने के मूड में नहीं है. यानी ट्रम्प की छूट के बावजूद भारत रूस से पहले की तरह बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात मौजूदा स्तर के आसपास कायम रख सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह रूसी तेल पर मिलने वाली छूट और इसकी उपलब्धता है.
दरअसल, ट्रंप ने शुक्रवार देर रात एक कार्यकारी आदेश जारी करके रूस और ईरान से जुड़े नए अमेरिकी कानून के तहत प्रस्तावित कुछ प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों में छूट दी. यह फैसला कानून में तय 30 दिन की समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले आया. इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से आने वाले सामान पर 100% तक शुल्क लगाने का प्रावधान था. हालांकि, दी गई यह छूट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चीन जैसे दूसरे देशों को भी फायदा मिल सकता है.
रूस से कितना तेल खरीद रहा है भारत?
भारत समुद्री रास्ते से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है. जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत ने रूस से प्रतिदिन करीब 18.2 लाख बैरल तेल खरीदा, जबकि चीन का आयात करीब 14.9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. अक्टूबर में भारत का आयात 18 से 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है.
हालांकि, रूसी तेल की खरीद में जून और जुलाई के मुकाबले कुछ कमी आई है. जून में भारत का आयात बढ़कर लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन और जुलाई में करीब 25.7 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था.&amp;nbsp;
भारत के लिए क्यों फायदेमंद है रूसी कच्चा तेल?
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिम देशों ने रूसी तेल पर कई प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद रूस ने एशियाई देशों को कम कीमत पर तेल बेचना शुरू कर दिया. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी.
रूस से तेल खरीदने के कारण भारत को पश्चिम एशिया और दूसरे तेल उत्पादक देशों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता. इसके अलावा सस्ते तेल से भारतीय रिफाइनरियों को लागत कम रखने में मदद मिली.
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        <pubDate>Sun, 18 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रूस, से, तेल, आयात, पर, भारत, का, बड़ा, फैसला, ट्रंप, की, छूट, के, बाद, भी, नहीं, बदलेगी, रणनीति</media:keywords>
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        <title>बेबी प्रोडक्ट्स में चीनी के इस्तेमाल पर लगेगी रोक, चाय पर भी बड़ा फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बेबी-प्रोडक्ट्स-में-चीनी-के-इस्तेमाल-पर-लगेगी-रोक-चाय-पर-भी-बड़ा-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप छोटे बच्चों के लिए बाजार से बेबी फूड खरीदते हैं या रोजाना चाय पीते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही चाय में इस्तेमाल होने वाले दो कीटनाशकों की मात्रा की सीमा तय करने की भी तैयारी की है.
इस प्रस्ताव का खास मकसद छोटे बच्चों को कम उम्र में अतिरिक्त चीनी से बचाना और खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित बनाना है. हालांकि, फिलहाल ये बदलाव प्रस्तावित हैं और इन्हें अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. आइए जानते हैं इन प्रस्तावों के बारे में विस्तार से...
बेबी फूड में चीनी को लेकर क्या है प्रस्ताव?
FSSAI ने साल 2020 के बच्चों के पोषण से जुड़े खाद्य नियमों में बदलाव का मसौदा जारी किया है. इसमें छह महीने तक के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक लगाने की बात कही गई है.
सुक्रोज और फ्रक्टोज चीनी के ऐसे रूप हैं, जिनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को मीठा बनाने के लिए किया जाता है. पहले छह महीने बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं. ऐसे में उनके खाने में अतिरिक्त चीनी से बचना जरूरी है, ताकि इससे आगे चलकर बच्चों में मोटापे और खानपान से जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य परेशानियों को खतरा कम करने में मदद मिल सकती है.
चाय में कीटनाशकों की मात्रा पर भी नजर
बेबी फूड के अलावा FSSAI ने चाय में दो कीटनाशकों के अवशेषों की अधिकतम सीमा तय करने का भी प्रस्ताव दिया है. इसका मकसद चाय में इन पदार्थों की मौजूदगी को लेकर स्पष्ट नियम बनाना और खाद्य सुरक्षा की निगरानी को बेहतर करना है.

एसिटामिप्रिड (Acetamiprid): चाय में इसकी अधिकतम सीमा 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 20 पीपीएम रखने का प्रस्ताव है.
इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid): इसके लिए अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 50 पीपीएम की सीमा प्रस्तावित की गई है.

कब लागू होंगे नए नियम?
FSSAI ने इन बदलावों को लेकर मसौदा अधिसूचना जारी की है और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. इसके लिए अधिसूचना जारी होने के बाद 60 दिन का समय दिया गया है. इस दौरान मिलने वाले सुझावों पर विचार किया जाएगा. इसके बाद ही नियमों में बदलाव को अंतिम मंजूरी दी जाएगी.
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        <pubDate>Sun, 18 Oct 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बेबी, प्रोडक्ट्स, में, चीनी, के, इस्तेमाल, पर, लगेगी, रोक, चाय, पर, भी, बड़ा, फैसला</media:keywords>
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        <title>दिल्ली के कारोबार को 3000 करोड़ का नुकसान, दिवाली तक 10 हजार करोड़ पार होने का डर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-के-कारोबार-को-3000-करोड़-का-नुकसान-दिवाली-तक-10-हजार-करोड़-पार-होने-का-डर</link>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में अक्टूबर महीने के दौरान लगातार हो रहे धरने-प्रदर्शनों का असर अब कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है. व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का दावा है कि अक्टूबर में अब तक दिल्ली के व्यापार को करीब 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर दिवाली तक धरने-प्रदर्शन नहीं रुके, तो कारोबार का नुकसान 10,000 करोड़ रुपए के पार पहुंच सकता है.
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से कारोबार को करीब 2,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. वहीं, 13 से 16 अक्टूबर के बीच सेंट्रल दिल्ली में नाकाबंदी, मेट्रो सेवाएं बंद होने और सेंट्रल पार्क बंद रहने के कारण करीब 1,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान हुआ. संगठन का कहना है कि इसका असर बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही से लेकर सामान की सप्लाई तक पर पड़ा है.
दिल्ली के 700 से ज्यादा बाजार प्रभावितCTI के अनुसार, लगातार प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली के 700 से ज्यादा बाजारों का कारोबार प्रभावित हुआ है. इनमें सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, भागीरथ प्लेस, गांधी नगर, खारी बावली, करोल बाग, लाजपत राय मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं.
अक्टूबर का महीना कारोबारियों के लिए काफी अहम होता है, क्योंकि नवरात्रि से लेकर दिवाली तक खरीदारी तेज रहती है. इस दौरान कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामान, गिफ्ट और दूसरे त्योहार से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ जाती है. लेकिन CTI का कहना है कि प्रदर्शनों और रास्तों पर पाबंदियों के कारण ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. इससे त्योहारों के सीजन में होने वाली बिक्री पर असर पड़ा है.
किस सेक्टर को कितना नुकसान हुआ?CTI की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, नुकसान का सबसे बड़ा हिस्सा रिटेल कारोबार को हुआ है. इसके अलावा थोक व्यापार, होटल-रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और दिहाड़ी मजदूरों पर भी इसका असर पड़ा है.



सेक्टर
CTI के मुताबिक नुकसान


रिटेल व्यापार
1,800 करोड़


थोक व्यापार और बाहरी खरीदार
600 करोड़


हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर
300 करोड़


ट्रांसपोर्ट, ऑटो-टैक्सी और टूरिज्म
180 करोड़ &amp;nbsp;


अनौपचारिक सेक्टर और दिहाड़ी मजदूर&amp;nbsp;&amp;nbsp;
120 करोड़


टोटल
3000 करोड़



संगठन के मुताबिक, थोक बाजारों में भी कारोबार प्रभावित हुआ है. सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और राजस्थान जैसे इलाकों से आने वाले खरीदारों की संख्या घटने का दावा किया गया है. वहीं, रास्तों पर जाम और आवाजाही में रुकावट के कारण माल की सप्लाई भी प्रभावित हुई है.
होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट पर भी असरCTI का कहना है कि प्रदर्शनों और आवाजाही से जुड़ी पाबंदियों के कारण होटल, रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल, सैलून, जिम और क्लब जैसे कारोबार भी प्रभावित हुए हैं. संगठन ने कई जगह बुकिंग रद्द होने और शाम के समय ग्राहकों की कमी का दावा किया है.
वहीं, मेट्रो स्टेशन बंद होने, बसों के रूट बदलने और लंबा जाम लगने से ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा चालकों की कमाई पर भी असर पड़ा है. ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के ट्रक और टेंपो फंसने से सामान की आवाजाही में देरी हुई. इसके अलावा लोडिंग-अनलोडिंग करने वाले मजदूरों, कारीगरों, सेल्समैन और रेहड़ी-पटरी वालों की रोजाना की कमाई भी प्रभावित हुई है.
दिवाली तक कितना होगा नुकसान?CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि नवरात्रि, रामलीला और दिवाली का समय व्यापारियों के लिए साल के सबसे अहम कारोबारी दौर में से एक है. ऐसे में अगर लगातार प्रदर्शन और रास्तों पर पाबंदियां जारी रहती हैं, तो कारोबार को और बड़ा नुकसान हो सकता है.
संगठन ने आशंका जताई है कि मौजूदा हालात जारी रहने पर दिवाली तक टोटल नुकसान 10,000 करोड़ रुपए के पार जा सकता है.&amp;nbsp;
सरकार से की राहत की मांगCTI ने सरकार से मांग की है कि दिवाली तक सेंट्रल दिल्ली, नई दिल्ली और लुटियंस जोन में धरने-प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए. संगठन ने बुराड़ी, रोहिणी और द्वारका जैसे इलाकों में प्रदर्शन के लिए स्थायी जगह तय करने का सुझाव भी दिया है. इसके अलावा व्यापारियों को राहत पैकेज देने, बिजली-पानी के बिलों और GST में छूट देने की मांग की गई है. CTI ने पुलिस प्रशासन से ये भी अपील की है कि दुकानदारों पर दुकानें बंद करने का दबाव डालने के बजाय बाजारों में सुरक्षा और नॉर्मल कारोबार किया जाए.
सोना-चांदी खरीदने का प्लान है? जानें आज 10 ग्राम गोल्ड और 1 किलो सिल्वर का भाव
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, के, कारोबार, को, 3000, करोड़, का, नुकसान, दिवाली, तक, हजार, करोड़, पार, होने, का, डर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>त्योहारों से पहले महंगा हुआ चावल&amp;दाल, रसोई का बजट बिगाड़ेंगी बढ़ती कीमतें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/त्योहारों-से-पहले-महंगा-हुआ-चावल-दाल-रसोई-का-बजट-बिगाड़ेंगी-बढ़ती-कीमतें</link>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का सीजन आते ही घरों में पकवान और मिठाइयां बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है. लेकिन इस बार त्योहारों की खरीदारी के साथ रसोई का बजट भी बिगड़ सकता है. चावल, दाल, रागी, गुड़ और दूसरे जरूरी अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. ऐसे में दशहरा और दिवाली से पहले आम परिवारों को राशन खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में कमजोर मानसून और जलाशयों में पानी का स्तर घटने से अनाज की खेती प्रभावित हुई है. इसका असर बाजार में चावल और दूसरे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन महीनों में चावल की कई किस्में 25 से 30 फीसदी तक महंगी हुई हैं. वहीं, पिछले एक साल के मुकाबले किराना सामान की कीमतों में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी का दावा किया गया है.&amp;nbsp;
चावल से रागी तक, कितने बढ़े दाम?चावल भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत है. ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर सीधे हर महीने के घरेलू खर्च पर पड़ता है. कर्नाटक के बाजारों में चावल की अलग-अलग किस्मों के दाम में तेजी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जो चावल पहले 50 से 60 रुपए प्रति किलो मिल रहा था, उसकी कीमत अब 70 से 90 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है.
रागी की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल 35 से 40 रुपए प्रति किलो बिकने वाली रागी अब 55 से 60 रुपए प्रति किलो में मिल रही है. वहीं, गुड़ के दाम भी करीब 50 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 80 से 85 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.&amp;nbsp;
बाजार में कितना का है चावल और दाल?कर्नाटक के थोक बाजार में चावल और दाल की अलग-अलग किस्मों के भाव में अंतर देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट में दिए गए एपीएमसी बाजार के भाव इस प्रकार हैं-&amp;nbsp;



अनाज का नाम
कीमत प्रति किलो


सोना स्टीम चावल
72- 75 रुपए


सोना मसूरी चावल
80 रुपए


कोलम चावल
90- 95 रुपए


इडली चावल&amp;nbsp;
46 रुपए


डोसा चावल
35- 40 रुपए


तूर दाल
130- 160 रुपए


बंगाल ग्राम दाल
95- 100 रुपए


बंगाल ग्राम
90- 95 रुपए


हरी मूंग
110- 120 रुपए


उड़द दाल
100-165 रुपए



क्यों बढ़ रहे हैं अनाज के दाम?अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कमजोर बारिश और पानी की कमी को बड़ी वजह बताया जा रहा है. मानसून के दौरान बारिश नहीं होने और जलाशयों का स्तर घटने से धान, रागी, ज्वार और दूसरी फसलों की खेती प्रभावित हुई है.
जब फसल का उत्पादन प्रभावित होता है, तो बाजार में अनाज की सप्लाई कम होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में मांग के मुकाबले सामान कम होने पर कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. त्योहारों के दौरान खाने-पीने के सामान की मांग भी बढ़ जाती है, जिससे परिवारों के लिए बढ़ती कीमतों का असर और ज्यादा महसूस हो सकता है.
बिस्कुट में चोकर, दूध में मिला डिटर्जेंट? FSSAI ने 3 कंपनियों पर कसा शिकंजा
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>त्योहारों, से, पहले, महंगा, हुआ, चावल-दाल, रसोई, का, बजट, बिगाड़ेंगी, बढ़ती, कीमतें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बिस्कुट में चोकर, दूध में मिला डिटर्जेंट? FSSAI ने 3 कंपनियों पर कसा शिकंजा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बिस्कुट-में-चोकर-दूध-में-मिला-डिटर्जेंट-fssai-ने-3-कंपनियों-पर-कसा-शिकंजा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बिस्कुट-में-चोकर-दूध-में-मिला-डिटर्जेंट-fssai-ने-3-कंपनियों-पर-कसा-शिकंजा</guid>
        <description><![CDATA[ रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठे हैं. खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच में दूध, बिस्कुट और किशमिश से जुड़े कई मामले सामने आए हैं.
इन मामलों में डोडला डेरी, प्रियागोल्ड बिस्कुट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड &amp;amp; आग्रो और Ueir औरगेनिक फूडस का नाम शामिल है. जांच में मिली कमियों के बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. कुछ अन्य खाद्य कारोबारियों को भी नियमों का पालन करने के लिए नोटिस भेजे गए हैं.
प्रियागोल्ड बिस्कुट की फैक्ट्री में मिली ये कमियां
प्रियागोल्ड बिस्कुट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड &amp;amp; आग्रो के यहां निरीक्षण के दौरान इस्तेमाल की जा रही सामग्री पर सवाल उठे. अधिकारियों के मुताबिक, बिस्कुट बनाने में ऐसा चोकर इस्तेमाल किया जा रहा था, जिस पर पशुओं के चारे के लिए होने की जानकारी दी गई थी.
जांच के दौरान फैक्ट्री में सफाई, कीड़ों से बचाव, कच्चे माल को सही तरीके से रखने और कर्मचारियों की स्वच्छता से जुड़ी कमियां भी मिलीं. इसके बाद कंपनी का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया गया. मामले में कानूनी कार्रवाई को भी मंजूरी दी गई.
Dodla Dairy के दूध की जांच में क्या सामने आया?
Dodla Dairy के फुल क्रीम दूध के नमूने की जांच में उसकी गुणवत्ता पर &amp;nbsp;काफी सवाल उठे. पहली जांच में दूध के अंदर फैट की मात्रा तय मानक से कम मिली. इसके बाद नमूने को आगे की जांच के लिए भेजा गया. दूसरी जांच में दूध को सुरक्षित खाने-पीने के मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, दूध में डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा की मौजूदगी भी सामने आई. इस मामले में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है.
तीन अन्य कारोबारियों को भी भेजे गए नोटिस
खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने नारपधम फूडस, सन रिजिस हेल्थ करियरस और शाह कंटिलाल जयंतीलाल को भी नोटिस जारी किए हैं. इन कारोबारियों के यहां साफ-सफाई, सामान रखने के तरीके, कीड़ों से बचाव और जरूरी रिकॉर्ड से जुड़ी कमियां सामने आईं है.&amp;nbsp;
अधिकारियों ने संबंधित कारोबारियों से इन कमियों पर जवाब देने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है. इस तरह की जांच का मकसद बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर नजर रखना और लोगों तक सुरक्षित सामान पहुंचाना है.
ऑर्गेनिक किशमिश की गुणवत्ता भी जांच के घेरे में
Ueir ऑर्गेनिक फूडस की ऑर्गेनिक पीली किशमिश के नमूने में तय सीमा से अधिक कीट नाशकों के अवशेष मिले. आगे की जांच में भी कुछ रसायनों की मात्रा निर्धारित मानकों से ज्यादा पाई गई. इसके बाद इस मामले में भी कानूनी कार्रवाई की मंजूरी दी गई.
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिस्कुट, में, चोकर, दूध, में, मिला, डिटर्जेंट, FSSAI, ने, कंपनियों, पर, कसा, शिकंजा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>इंडोनेशिया के शेयर बाजार में हाहाकार, 28 साल की सबसे बड़ी गिरावट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इंडोनेशिया-के-शेयर-बाजार-में-हाहाकार-28-साल-की-सबसे-बड़ी-गिरावट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/इंडोनेशिया-के-शेयर-बाजार-में-हाहाकार-28-साल-की-सबसे-बड़ी-गिरावट</guid>
        <description><![CDATA[ इंडोनेशिया के शेयर बाजार में इन दिनों हाहाकार मचा हुआ है. बाजार में एक ही दिन में ऐसी गिरावट आई कि पिछले 28 साल का रिकॉर्ड टूट गया. शुक्रवार को जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 11.57% तक गिर गया है. यह जनवरी 1998 के बाद बाजार की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है. इस भारी बिकवाली से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ और बाजार में कारोबार भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा.
दरअसल, इस गिरावट के पीछे वैश्विक इंडेक्स प्रदाता MSCI की चेतावनी को बड़ी वजह माना जा रहा है. MSCI ने इंडोनेशिया के बाजार को मौजूदा उभरते बाजार की कैटेगरी से हटाकर &#039;स्टैंडअलोन मार्केट&#039; का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है. अगर ऐसा होता है, तो विदेशी निवेशकों की ओर से बड़े पैमाने पर बिकावली हो सकती है.
28 साल बाद बाजार में इतनी बड़ी गिरावट
शुक्रवार को इंडोनेशिया बाजार करीब 8% की गिरावट के साथ खुला, जिसके बाद बिकावली इतनी तेज हुई कि कारोबार को 30 मिनट के लिए रोकना पड़ा. देश के बड़े बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. बैंक सेंट्रल एशिया, बैंक राक्यत इंडोनेशिया और बैंक मंदिरी के शेयर करीब 15% तक टूट गए.
इसके अलावा इंडोनेशियाई की करेंसी भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गई और 18,070 के स्तर तक पहुंच गया. इस साल अब तक इंडोनेशियाई शेयर बाजार में करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है.
MSCI की चेतावनी से क्यों बढ़ी चिंता?
MSCI ने इंडोनेशिया के बाजार में पारदर्शिता, कंपनियों के शेयरों के मालिकाना हक और ट्रेडिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं. आसान लफ्जों में कहें तो कंपनी को चिंता है कि बाजार में शेयरों के मालिक कौन हैं और उनकी खरीद-बिक्री कैसे हो रही है, इसकी जानकारी कितनी साफ और भरोसेमंद है.
ऐसे में अगर MSCI इंडोनेशिया के बाजार का दर्जा घटाता है, तो वहां निवेश करने वाले कई विदेशी फंड अपना पैसा निकाल सकते हैं. इससे बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है.
बिस्कुट में चोकर, दूध में मिला डिटर्जेंट? FSSAI ने 3 कंपनियों पर कसा शिकंजा
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इंडोनेशिया, के, शेयर, बाजार, में, हाहाकार, साल, की, सबसे, बड़ी, गिरावट</media:keywords>
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        <title>त्योहारी सीजन में होगी धनवर्षा, 7 लाख करोड़ के पार पहुंचेगा देश का कारोबार</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है और इस वक्त राजधानी दिल्ली समेत देश भर में इस वक़्त नवरात्रा की पूजा चल रही है और फिर इसके बाद धनतरेस, दिवाली, छठ और तुलसी विवाह समेत कई त्यौहार मनाया जाएगा. इस त्योहारी उत्सव के दौरान खरीदारी भी खूब होगी, जिससे कारोबार को बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. बीते साल भी नवरात्रा से दिवाली के दौरान &amp;nbsp;जम कर खरीदारी की गई थी. जिसे देखते हुए इस बार उससे भी ज्यादा के कारोबार की उम्मीद जताई जा रही है.
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के शुरुआती आंकलन के मुताबिक, इस वर्ष देश में नवरात्रि से दीपावली तक त्योहारी खरीदारी के दम पर कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच सकता है. कैट के मुताबिक, यह पिछले साल के रिकॉर्ड कारोबार से करीब 15 से 18 प्रतिशत अधिक होगा. इस तेजी का असर खुदरा बाजारों के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, रेस्तरां, ई-कॉमर्स और आयोजन से जुड़ी सेवाओं पर भी पड़ने की उम्मीद है.
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने यह अनुमान देशभर के व्यापारिक संगठनों और प्रमुख बाजारों से मिले फीडबैक के आधार पर जताया है. उपभोक्ताओं की खरीदारी में बढ़ती दिलचस्पी, ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों की सक्रियता तथा स्थानीय उत्पादों की मांग को भी इस आंकलन में शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
पिछले साल 6.05 लाख करोड़ रुपए का हुआ था कारोबारपिछले साल दीपावली के दौरान देश में लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड व्यापार हुआ था. इसमें करीब 5.40 लाख करोड़ रुपए का वस्तुओं का कारोबार और 65,000 करोड़ रुपए का सेवा क्षेत्र का कारोबार शामिल था. इस बार त्योहारों के दौरान आर्थिक गतिविधियां और व्यापक होने की संभावना है. नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बाद दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और तुलसी विवाह जैसे पर्व खरीदारी तथा व्यावसायिक गतिविधियों को गति देंगे. कैट का मानना है कि त्योहारों की लंबी अवधि और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती मांग कारोबार को 7 लाख करोड़ रुपए से ऊपर ले जा सकती है.
किराना से लेकर आभूषण तक, इन क्षेत्रों में रहेगी बड़ी हिस्सेदारीत्योहारी खरीदारी में रोजमर्रा के सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, सोना-चांदी और घर की सजावट से जुड़ी वस्तुओं तक कई श्रेणियों की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है. कैट के अनुमान के मुताबिक, त्योहारी सीजन में किराना एवं एफएमसीजी कारोबार की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वहीं, सोना, चांदी और आभूषणों से जुड़े कारोबार की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत रह सकती है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स क्षेत्र के लिए 8 प्रतिशत हिस्सेदारी का अनुमान है. रेडीमेड गारमेंट्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल वस्तुओं और गिफ्ट आइटम्स की हिस्सेदारी 7-7 प्रतिशत रहने की संभावना है.
इसके अलावा होम डेकोर, फर्नीचर एवं फर्निशिंग तथा मिठाई और नमकीन के कारोबार में प्रत्येक की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स क्षेत्र की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पूजा सामग्री, फल एवं ड्राई फ्रूट्स तथा बेकरी एवं कन्फेक्शनरी से जुड़े कारोबार की हिस्सेदारी 3-3 प्रतिशत रहने की संभावना है. फुटवियर क्षेत्र के लिए 2 प्रतिशत हिस्सेदारी का अनुमान लगाया गया है. इन प्रमुख श्रेणियों के अलावा अन्य वस्तुओं और उनसे जुड़े कारोबार की हिस्सेदारी सबसे अधिक, करीब 19 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
सेवा क्षेत्र का कारोबार 1 लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीदइस साल त्योहारी अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भूमिका भी अहम रहने वाली है। कैट के अनुसार, परिवहन, माल ढुलाई, ई-कॉमर्स डिलीवरी, पैकेजिंग और वेयरहाउसिंग से लेकर होटल, रेस्तरां, पर्यटन और कैटरिंग तक कई क्षेत्रों में मांग बढ़ सकती है. इसके अलावा टेंट, सजावट, लाइटिंग, इवेंट मैनेजमेंट, कैब और स्थानीय परिवहन सेवाओं को भी त्योहारों के दौरान अतिरिक्त काम मिलने की उम्मीद है.
पिछले साल सेवा क्षेत्र का कारोबार लगभग 65,000 करोड़ रुपए रहा था. कैट ने इस बार इसमें 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि का शुरुआती अनुमान लगाया है. इसके आधार पर नवरात्रि से दीपावली तक सेवा क्षेत्र का कारोबार करीब 80,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपए के बीच पहुंच सकता है. यह बढ़ोतरी केवल दुकानों पर होने वाली खरीदारी तक सीमित नहीं रहेगी। त्योहारों के दौरान होने वाले आयोजनों से भी कई कारोबारों को सीधे लाभ मिलने की संभावना है.
रामलीला, गरबा और दुर्गा पूजा से भी बाजारों को मिलेगा सहारात्योहारी सीजन में देशभर में धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और व्यावसायिक कार्यक्रमों की बड़ी श्रृंखला आयोजित होती है. इनमें रामलीला, दुर्गा पूजा पंडाल, गरबा और डांडिया कार्यक्रम, बाजार उत्सव, दिवाली मिलन समारोह, मेले और प्रदर्शनियां शामिल हैं. इसके साथ स्थानीय बाजारों के कार्यक्रम, आवासीय सोसायटियों के आयोजन, सामुदायिक समारोह, कॉर्पोरेट कार्यक्रम और पारिवारिक समारोह भी बड़ी संख्या में होते हैं.
इन आयोजनों से फूलों, सजावटी सामान, लाइटिंग, कपड़ों, मिठाइयों और भोजन की मांग बढ़ती है. कैटरिंग, परिवहन, होटल, पर्यटन, फोटोग्राफी, सुरक्षा, पैकेजिंग और डिलीवरी से जुड़े कारोबारों को भी काम मिलता है. यानी त्योहारी मांग का दायरा खुदरा दुकानों से कहीं बड़ा है. इसका असर सामान बनाने वालों, उसे बाजार तक पहुंचाने वालों और आयोजन संबंधी सेवाएं देने वाले कारोबारियों तक पहुंचता है.
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>आपको गुमराह कर रही ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, Big Basket और Flipkart को नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ FSSAI पिछले काफी समय से देशभर की ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स के ऊपर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है. FSSAI खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर अपनी पैनी नजर जमाए हुए है. इसी के चलते हाल ही में विभाग की तरफ से तीन बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है. ये नोटिस इन कंपनियों के द्वारा किए जा रहे झूठे दावों को लेकर किया जा रहा है.
FSSAI ने जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया, बिग बास्केट और फ्लिपकार्ट इंडिया को ये नोटिस जारी किया है. ये नोटिस &#039;फ्रीडम कुकिंग राइस ब्रान ऑइल&#039; के प्रचार में किए गए हेल्थ से जुड़े दावों को लेकर भेजा गया है.
क्यों किया नोटिस जारी?FSSAI के मुताबिक, इस कुकिंग ऑइल का प्रचार ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर किया गया था. इसमें दावा किया गया कि ये तेल शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने या बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा तेल में 10,000 PPM से ज्यादा प्राकृतिक ओरिजेनॉल होने की बात भी कही गई थी. ओरिजेनॉल चावल की भूसी के तेल में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक तत्व है.
इसे लेकर FSSAI का कहना है कि तेल के प्रचार में किए गए कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत से जुड़े दावे खाद्य तेलों के लिए लागू नियमों के तहत अनुमत नहीं पाए गए. इसी वजह से नियामक ने कंपनियों से जवाब मांगा है.
कंपनियों को दिया पक्ष रखने का मौकाFSSAI ने तीनों कंपनियों से पूछा है कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए? ये नोटिस कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए भेजा गया है. इसका मतलब ये नहीं है कि उनके खिलाफ आरोप साबित हो चुका है.
इसके अलावा FSSAI ने जेमिनी एडिबल्स की अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर फूड प्रोडक्ट्स बेचने की गतिविधि को लेकर भी सवाल उठाए हैं. नियामक के अनुसार, कंपनी के पास इस गतिविधि के लिए जरूरी वैध केंद्रीय लाइसेंस होने की पुष्टि नहीं हुई.
ग्राहक रहे सावधानइस कार्रवाई से साफ है कि खाद्य उत्पादों के विज्ञापन में स्वास्थ्य से जुड़े दावे करते समय कंपनियों को नियमों का पालन करना जरूरी है. ग्राहकों को भी तेल या किसी दूसरे खाद्य पदार्थ को खरीदते समय उसके लेबल और दावों की जांच करनी चाहिए. कोई भी सामान केवल विज्ञापन देखकर ही नहीं खरीदना चाहिए.
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>3500 रुपये महीना कमाने वाले पर लगा 1.46 करोड़ टैक्स, ITAT ने कैसे दी राहत?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप केवल महीने का 4000 या 5000 रुपये कमाते हैं, लेकिन सोचिए एक दिन अचानक आपके नाम का करोड़ों रुपये का टैक्स निकल आए तो जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में कोई भी परेशान हो जाएगा. ऐसा ही कुछ मामला मुंबई से सामने आया है. एक व्यक्ति जो महीने के केवल 3500 रुपये कमाता था, हैरानी की बात ये है कि उस पर इनकम टैक्स विभाग ने 1.46 करोड़ का टैक्स असेसमेंट कर दिया. ऐसे में पहले जानते हैं कि आखिर मामला क्या है और व्यक्ति को आखिर में कैसे राहत मिली?
बैंक अकाउंट में मिले करोड़ों रुपये
दरअसल, इनकम टैक्स विभाग को एक बिजनेस में गड़बड़ी का शक हुआ. जब जांच की गई तो जांच में एक फर्म से जुड़े बैंक अकाउंट में 1.27 करोड़ के पैसे निकलने की जानकारी मिली. इतना ही नहीं, बल्कि 18.25 लाख जमा होने की भी सूचना मिली.&amp;nbsp;
शख्स ने क्या बोला?
जरूरी बात ये है कि इस मामले में शख्स का कहना था कि उसका इन लेन-देन से कोई संबंध ही नहीं है. शख्स ने कहा कि वह एक ऑफिस बॉय के तौर पर काम करता है और उसे हर महीने 3500 रुपये वेतन मिलता है.&amp;nbsp;
आगे क्या हुआ?
बता दें कि ये मामला ट्रिब्यूनल पहुंचा. इस मामले पर शख्स का आरोप था कि नौकरी के दौरान ही उसके साइन और केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल बिना उनकी जानकारी के किया गया है. शख्स ने कहा कि उसका संबंधित पैन और बैंक अकाउंट के लेने-देन से कोई मतलब नहीं है.&amp;nbsp;
इनकम टैक्स विभाग ने क्या किया?
बड़ी बात ये है कि इनकम टैक्स विभाग ने इस फर्म को शख्स का बिजनेस माना. फिर विभाग ने 1.27 करोड़ के खर्च और 18.85 लाख की जमा राशि को हिसाब सही नहीं माना. इस तरह उसके नाम पर कुल 1,46,57,500 का टैक्स असेसमेंट किया गया.
दरवाजे पर चिपकाया नोटिस
आगे इनकम टैक्स विभाग ने शख्स को नोटिस भेजा था. इस नोटिस को पहले बांद्रा के एड्रेस पर भेजा गया था, लेकिन नोटिस नहीं पहुंचा. जिसके बाद भिवंडी के किसी अपार्टमेंट में एक बंद कमरे के दरवाजे पर नोटिस को चिपकाया गया. बड़ी बात ये है कि विभाग ये साबित ही नहीं कर पाया कि उस एड्रेस से शख्स का कोई कनेक्शन था.
रद्द क्यों हुआ असेसमेंट?
अहम बात ये है कि ITAT मुंबई ने अपने फैसले में कुछ जरूरी बात कहीं. उन्होंने कहा कि केवल नोटिस जारी करना काफी नहीं होता है. उस नोटिस को संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है. विभाग ये साबित ही नहीं कर पाया कि नोटिस शख्स को सही से दिया गया. यही कारण है कि ट्रिब्यूनल ने करोड़ों का टैक्स असेसमेंट रद्द कर दिया. लेकिन ट्रिब्यूनल ने ये फैसला नहीं दिया कि जो लेन-देन किया गया था वो फेक था या फिर बैंक और पैन का उपयोग गलत किया गया था.&amp;nbsp;
इनकम टैक्स नोटिस आने पर क्या करें?
अगर कभी आपको इनकम टैक्स विभाग की तरफ से कोई नोटिस भेजा जाता है तो उसे नजरअंदाज करने की गलती न करें. सबसे पहले तो आप उस नोटिस को पढ़े और उसमें दी गई जानकारी और जवाब देने की आखिरी तारीख देखें. अगर उसमें किसी ऐसे बैंक ट्रांजैक्शन के बारे में है, जिसके बारे में आपको कुछ जानकारी नहीं है तो आप अपने बैंक स्टेटमेंट और दूसरे जरूरी दस्तावेज की जांच करें.
अब अगर आपको ये लग रहा है कि किसी ने आपके पैन या दस्तावेज का गलत उपयोग किया है, जिसकी जानकारी आपको नहीं है तो सबसे पहले इससे जुड़े सबूत इकठ्ठा करें. वहीं ध्यान रखें कि इनकम टैक्स विभाग को समय पर जवाब देना न भूलें. वहीं जरूरत पड़ने पर किसी टैक्स एक्सपर्ट की सहायता लें.&amp;nbsp;
त्योहारी सीजन में होगी धनवर्षा, 7 लाख करोड़ के पार पहुंचेगा देश का कारोबार
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>2027 में जापान को पछाड़ देगा भारत, बनेगा चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था&amp; IMF</title>
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        <description><![CDATA[ इन दिनों महंगाई का आलम और हालात देखते हुए लग रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है. क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है. इसी बीच अब इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने बड़ा बयान दिया है. IMF की तरफ से अनुमान लगाया जा रहा है कि, भारत साल 2027 में जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
इसके साथ ही IMF ने साल 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है. इस अनुमान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति कैसी भी हो, भारत की विकास द लगातार बढ़ रही है.
अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूतअमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसके बाद चीन और जर्मनी का नंबर आता है. IMF के अनुमान के मुताबिक भारत साल 2027 में जापान से आगे निकल सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार हो रही बढ़ोतरी इस बदलाव की एक बड़ी वजह है. तो वहीं जापान की अर्थव्यवस्था धीमी गति से आगे बढ़ रही है. बढ़ती उम्र की आबादी, महंगी ऊर्जा और आयात की बढ़ती लागत वहां की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल रही है.
क्यों पिछड़ जाएगा जापान?IMF के मुताबिक, जापान की अर्थव्यवस्था साल 2026 में केवल 0.7% की दर से बढ़ सकती है. जापान में लंबे समय तक महंगाई कम रहने के बाद साल 2022 से कंज्यूमर कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल समेत ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है उसने भी दबाव बनाया है. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन कमजोर होने से विदेशों से सामान खरीदना महंगा हुआ है.
हालांकि IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन के अनुसार, जापान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े निवेश में बढ़ोतरी हो रही है. लेकिन इसका फायदा कुछ दूसरे एशियाई देशों की तुलना में कम दिखाई दे रहा है.
भारत की नई GDP को IMF की मंजूरीIMF ने भारत में GDP की गणना करने के तरीके में किए गए बदलावों को भी मंजूर कर दिया है. संस्था के मुताबिक ये नया तरीका अंतरराष्ट्रीय मानकों और उसके सांख्यिकी विभाग की सलाह के हिसाब से है. भारत के MoSPI ने GDP की गणना में बदलावों की जानकारी देते हुए एक नोट भी जारी किया है. IMF ने इस कदम की सराहना की, हालांकि उसने कहा कि आंकड़ों को और बेहतर बनाने की गुंजाइश अभी भी है.
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>देश में महिलाओं की बेरोजगारी दर बढ़ी, शहरी इलाकों में 9.2% पर पहुंची दर</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में रोजगार की स्थिति को लेकर सितंबर के आंकड़ों में कुछ चिंताजनक संकेत सामने आए हैं. खासतौर पर महिलाओं के लिए नौकरी पाने की चुनौती बढ़ती दिखाई दी है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के मुताबिक, सितंबर में देश की कुल बेरोजगारी दर 5 फीसदी पर स्थिर रही, लेकिन महिलाओं और शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी का दबाव बढ़ा है.
सितंबर साल 2026 में महिलाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 5.1 फीसदी थी. हालांकि, ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला बेरोजगारी दर 3.9 फीसदी पर बनी रही है. इसके विपरीत, शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर अगस्त के 8.9 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 9.2 फीसदी पहुंच गई. ये आंकड़े बताते हैं कि शहरों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों तक पहुंच अब भी एक बड़ी चुनौती है.
रोजगार में भागीदारी के आंकड़ों में क्या बदलाव आया?
देश में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) सितंबर में 55.5 फीसदी रही, जबकि अगस्त में यह 55.6 फीसदी थी. यह दर बताती है कि 15 साल या उससे अधिक उम्र की आबादी में कितने लोग काम कर रहे हैं या रोजगार की तलाश में हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 50.4 फीसदी से बढ़कर 50.7 फीसदी हुआ, जबकि शहरी क्षेत्रों में 58.2 फीसदी से घटकर 58 फीसदी पर आ गया.
काम करने वाले लोगों के अनुपात में भी गिरावट
कामगार जनसंख्या अनुपात (WPR) अगस्त के 52.8 फीसदी से थोड़ा घटकर सितंबर में 52.7 फीसदी रह गया. यह अनुपात आबादी में काम करने वाले लोगों की हिस्सेदारी को दर्शाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह 55.8 फीसदी से गिरकर 55.5 फीसदी हुआ, जबकि शहरी क्षेत्रों में 47 फीसदी से बढ़कर 47.2 फीसदी दर्ज किया गया.
शहरों में पुरुषों की स्थिति में मामूली सुधार
बेरोजगारी के आंकड़ों में पुरुषों की स्थिति महिलाओं से कुछ अलग नजर आई है. सितंबर में पुरुषों की कुल बेरोजगारी दर 4.9 फीसदी पर स्थिर रही. शहरी पुरुषों में यह दर अगस्त के 6.1 फीसदी से घटकर 6 फीसदी हो गई. वहीं, ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर 4.3 फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी दर्ज की गई. इससे स्पष्ट है कि रोजगार की स्थिति में बदलाव सभी वर्गों और क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है.
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
सितंबर के रोजगार आंकड़े बताते हैं कि देश में बेरोजगारी की कुल दर स्थिर रहने के बावजूद महिलाओं, विशेषकर शहरी महिलाओं के सामने रोजगार से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं. नौकरी के अवसर, कौशल और कामकाजी महिलाओं की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाना जरूरी है. आने वाले महीनों में रोजगार के आंकड़ों पर नजर रहेगी, ताकि यह समझा जा सके कि श्रम बाजार में सुधार की रफ्तार कैसी रहती है.
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यह भी देखें-
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देश, में, महिलाओं, की, बेरोजगारी, दर, बढ़ी, शहरी, इलाकों, में, 9.2, पर, पहुंची, दर</media:keywords>
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        <title>मस्क के तंज पर अंबानी की रिलायंस का पहला बयान, कंपनी बोली&amp; &amp;apos;स्टारलिंक का...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ एलन मस्क पिछनले कुछ दिनों से यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि भारत में कुछ उद्याेगपति उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस की एंट्री को रोक रहे हैं. बीते 8 अक्टूबर को मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कहा, &quot;स्टारलिंक को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और कंपनी भारत सरकार की हर जरूरत को पूरा करने में पांच साल से काम कर रही है. फिर भी भारत में उसे फाइनल कमर्शियल लाइसेंस क्यों नहीं मिल रही है. क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?&quot; मस्क ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि भारत के कुछ मशहूर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी मोनोपॉली बनाए रखने के लिए भारत में स्टारलिंक के रास्ते अडंगा लगा रहे हैं.

Starlink is licensed in over 165 countries and has spent five years complying with every single law and requirement of the government of India, so why still no license? Is Ambani the real boss of India?
&amp;mdash; Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026



मस्क ने अपने एक पोस्ट में यह भी कहा था कि भारत के कई गांवों और दूर-दराज के इलाकों में आज भी इंटरनेट की पहुंच सीमित है. कंपनी ऐसे ही इलाकों में, जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क का पहुंचना मुश्किल है, अपनी सैटेलाइट तकनीक के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का दावा करती है. कंपनी ने इसके लिए &amp;nbsp;भारत में 20 गेटवे साइट भी तैयार कर ली हैं. कंपनी भारत में अपनी सेवा शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. बावजूद इसके उसे न तो स्पेक्ट्रम अलॉट किए गए हैं और न ही बाकी मंजूरियां मिली हैं. &amp;nbsp;
मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कहा कि कंपनी भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, जिसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भी शामिल है. हालांकि, कंपनी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जियो सहित सभी ऑपरेटरों को भारतीय कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा.&amp;nbsp;

Statement from Reliance Industries In light of recent remarks about Reliance and the Indian market, we wish to place the facts on record. Like every Indian enterprise, Reliance has grown in an India that welcomes investment and innovation, homegrown or international, that improve the lives of the people. That openness rests on the rule of law. As the Government of India has stated, it applies the same process to every applicant, Indian or foreign. Jio&#039;s own satellite services await clearances. At Reliance, we have never feared competition. We see it as the truest test of who serves the customer best. Jio itself entered India&#039;s crowded telecom market in 2016 as the newest player, with not a single customer. In just ten years, Jio has earned the trust of over 530 million customers and given Indians some of the best digital infrastructure and most affordable data in the world. We welcome competition in satellite communications, including Starlink. Every player, Jio included, must serve the people of India and abide by the laws and policies of the land.
&amp;mdash; Reliance Industries Limited (@RIL_Updates) October 16, 2026



खुद लाइन में खड़ा जियो
रिलायंस ने यह भी कहा कि भारत में निवेश के रास्ते खुले हैं, लेकिन इसके लिए कानूनों का पालन करना भी जरूरी है, जो अपने देश की कंपनियों के साथ-साथ विदेशी कंपनियों पर भी समान रूप से लागू होता है. कंपनी ने इससे पहले भारत सरकार के दिए गए जवाब का हवाला देते हुए ह भी कहा, &#039;&#039;जैसा कि भारत सरकार ने बताया है, चाहे वह भारतीय हो या विदेशी- हर एक आवेदक के लिए प्रक्रियाएं एक समान हैं. जियो को खुद अपनी सैटेलाइट सर्विसेज को मंजूरी मिलने का इंतजार है.&#039;&#039;

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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>सोने के फंड में पैसा लगाने पर रोक, आपकी SIP पर क्या होगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बड़ा कदम उठाया है. आज से HDFC म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल और टाटा म्यूचुअल फंड जैसे देश के 17 से अधिक बड़े फंड हाउसों ने सभी गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स (FoFs) में नया निवेश लेना बंद कर है. त्योहारी सीजन से पहले डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए उठाया गया कदम किसी झटके से कम नहीं है. बता दें कि म्यूचुअल फंड कंपनियों ने मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के निर्देशों के बाद यह फैसला लिया है.
सेबी ने क्यों किया ऐसा?
धनतेरस, दीवाली जैसे फेस्टिव सीजन के दौरान लोग सोने पर जमकर दांव लगाते हैं, जिससे इसकी मांग अचानक से बढ़ जाती है. त्योहारी सीजन में इस भारी इनफ्लो से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है. साथ ही सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव भी इस फैसले के पीछे की एक वजह है. हाल के दिनों में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई. भारत में पिछले दिनों सोने की कीमतें टूटकर 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है.
म्यूचुअल फंड्स के लिए नियम है कि वे जितना पैसा डिजिटल गोल्ड में लेंगे, उतने का ही 100% फिजिकल गोल्ड उन्हें अपने पास सुरक्षित रखना होगा. इस क्रम में अगर फेस्टिव सीजन में डिमांड काफी ज्यादा बढ़ जाए, तो म्यूचुअल फंड्स के लिए बाजार से बड़े पैमाने पर सोना खरीदना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में कंपनी और ग्राहक दोनों को नुकसान होगा. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इन पाबंदियों का मकसद त्योहारी सीजन की मांग के बीच आयात में होने वाली संभावित भारी बढ़ोतरी को रोकना और रुपये को सहारा देना है. इसे एक तरह से जोखिम प्रबंधन के तौर पर देख सकते हैं.

सोने के फंड में पैसा लगाने पर रोक ! आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा की बचत के सोना नहीं ख़रीदने की अपील की थी. फिर सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाई गई ताकि देश में सोना महंगा हो और खपत घटें. इसका परिणाम यह हुआ कि अप्रैल में करीब $6 बिलियन का सोना देश में आया था लेकिन सितंबर में घटकर $2 बिलियन के आसपास आ गया. अब त्योहारों में सोने की माँग घटाने के लिए गोल्ड फंड ऑफ फंड में निवेश पर रोक लगाई गई है. यह फ़ैसला कई बड़े म्यूचुअल फंड हाउस ने कल देर रात किया है लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किसके कहने पर यह रोक लगाई गई है.SEBI के &amp;lsquo;मौखिक आदेश&amp;rsquo; पर फ़ैसला लेने की ख़बर है. गोल्ड फंड ऑफ फंड ( FOF) निवेशकों से पैसे लेते हैं और गोल्ड ETF यानी Exchange Traded Funds में लगाते हैं. इसका फ़ायदा ये होता है कि निवेशक बिना सोना ख़रीदें सोने में निवेश कर लेता है. भाव में उतार-चढ़ाव का फ़ायदा या नुक़सान उठाता है. फंड को फिर भी सोना ख़रीदना पड़ता है. इससे सोने की माँग बढ़ सकती है, इसलिए यह रोक लगाईं गई है. हालाँकि इस तरह के फंड में जिसकी SIP पहले से चल रही है वो चलती रहेगी. गोल्ड ETF भी एक्सचेंज पर ख़रीदा बेचा जा सकेगा. इस कदम का कारण डॉलर के मुक़ाबले रुपया बचाना है. इस साल की शुरुआत से डॉलर ₹90 से गिरकर ₹95 तक पहुंच गया है. जब सोना ख़रीदते हैं तो डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. डॉलर की माँग बढ़ती है तो वो महंगा होता रहता है. यह दुश्चक्र तोड़ने की कोशिश हो रही है.
&amp;mdash; Milind Khandekar (@milindkhandekar) October 16, 2026



ग्राहकों के लिए राहत की बात
नए लगाए गए प्रतिबंधों के तहत 16 अक्टूबर से गोल्ड ईटीएफ FoF में नए और अतिरिक्त एकमुश्त निवेश, स्विच-इन, टॉप-अप और नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तथा सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रूप से रोक रहेगी.
हालांकि, 16 अक्टूबर से पहले से रजिस्टर्ड SIP या STP की मासिक किस्तें बिना किसी रुकावट के कटती रहेंगी, जो बाजार में चल रहे मौजूदा नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर प्रोसेस होंगी. साथ ही &amp;nbsp;रिडेम्पशन और स्विच-आउट की सुविधा भी जारी रहेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोने, के, फंड, में, पैसा, लगाने, पर, रोक, आपकी, SIP, पर, क्या, होगा, असर</media:keywords>
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        <title>IRDAI ने मांगे बीमा सुधारों पर सुझाव, कहा&amp; एजेंटों की नौकरी पर नहीं आएगी आंच</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) बीमा क्षेत्र में कुछ बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत कमीशन और बीमा वितरण से जुड़े नियमों में बदलाव करने का प्रस्ताव है. हालांकि, नियामक का कहना है कि इन सुधारों का मकसद एजेंटों की रोजी-रोटी या मौजूदा कारोबार को नुकसान पहुंचाना नहीं है. ऐसे में अगर आप बीमा एजेंट के तौर पर काम करते हैं या बीमा पॉलिसी खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है.&amp;nbsp;
दरअसल, IRDAI के अध्यक्ष अजय सेठ ने कहा कि नियामक इन प्रस्तावों को आखिरी रूप देने से पहले बीमा कंपनियों, एजेंटों और दूसरे संबंधित पक्षों से सुझाव मांग रहा है. यह नए नियम कब लागू होंगे और कमीशन पर क्या असर पड़ेगा, यह उद्योग से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के आधार पर तय किया जाएगा.&amp;nbsp;
क्या है IRDAI का प्रस्ताव?
IRDAI ने 23 सितंबर को बीमा पॉलिसियों की बिक्री और वितरण से जुड़े नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहा है. इस प्रस्ताव में 30 से ज्यादा बीमा उत्पादों और वितरण माध्यमों के लिए कमीशन की सीमा तय करने की बात कही गई है. इसके अलावा, बीमा कंपनियों के कुल खर्च की सीमा में भी करीब एक तिहाई कटौती करने पर भी विचार किया जा रहा है.&amp;nbsp;
कब लागू हो सकते हैं नए नियम?
IRDAI के अध्यक्ष अजय सेठ के मुताबिक, इन बदलावों को लागू करने के लिए 1 जनवरी या 1 अप्रैल की तारीख पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, अंतिम तारीख उद्योग से मिलने वाले सुझावों के आधार पर तय की जाएगी. नियामक कमीशन से जुड़े बदलावों को एक साथ लागू करने के बजाय चरणों में लागू करने के सुझावों पर भी विचार करने को तैयार है.
क्या बीमा एजेंटों की नौकरी पर पड़ेगा असर?
इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IBAI) ने प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता जताई है. एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की और मौजूदा नियमों को 2028 में प्रस्तावित समीक्षा जारी रखने का आग्रह किया. साथ ही, हितधारकों से सुझाव देने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर से पहले नियामक के साथ बैठक करने का अनुरोध किया था.
IRDAI के अध्यक्ष अजय सेठ ने साफ किया है कि नियामक का इरादा बीमा एजेंटों की रोजी-रोटी या मौजूदा कारोबारी व्यवस्था को नुकसान करना नहीं है. बल्कि नियामक छोटे बीमा कारोबारियों, वितरकों और कम लागत वाली पॉलिसियों से जुड़े लोगों की चिंताओं को भी ध्यान में रख रहा है.
सरकार का बड़ा फैसला, देर रात एकाएक पेट्रोल पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, डीजल में की कटौती
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दीवाली से पहले सरकार ने बोनस का किया ऐलान, जानें कौन होंगे हकदार?</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने कारोबारी साल 2025-26 के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को 30 दिनों का &#039;नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड&#039; (एड-हॉक) बोनस देने की मंजूरी दी है. इसका कैलकुलेशन 7,000 की मासिक वेतन सीमा (सीलिंग) के आधार पर किया जाता है. इसका मतलब यह है कि यदि किसी कर्मचारी का औसत मासिक वेतन इस सीमा के बराबर या उससे अधिक है, तो उसे 30 दिनों के लिए अधिकतम 6,908 का बोनस मिलेगा. वहीं, जिन कर्मचारियों का औसत मासिक वेतन इस सीमा से कम है, उन्हें मिलने वाली बोनस राशि भी कम होगी.
वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले &#039;व्यय विभाग&#039; (Department of Expenditure) ने 15 अक्टूबर 2026 को जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में इस बोनस के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की जानकारी दी. यह मंजूरी &#039;ग्रुप C&#039; के कर्मचारियों और &#039;ग्रुप B&#039; के उन नॉन-गजेटेड कर्मचारियों पर लागू होती है, जो किसी &#039;प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस&#039; योजना के दायरे में नहीं आते हैं.
किन्हें मिलेगा फायदा?
सबसे पहले तो बता दें कि सरकार ने अपने कर्मचारियों को अलग-अलग रैंक के हिसाब से ग्रुप A, B, C, D में बांटा है. ग्रुप C में आमतौर पर क्लर्क, हेड क्लर्क, टाइपिस्ट, असिस्टेंट और मल्टी-टास्किंग स्टाफ आते हैं, जिन्हें यह बोनस 100% मिलेगा.&amp;nbsp;
वहीं, ग्रुप B में कर्मचारियों को दो हिस्सों में बांटा गया है. एक Gazetted, जिनके पास सर्टिफाइड या साइन करने का पावर होता है और दूसरे जिनके पास यह पावर नहीं है. सरकार ने जिस बोनस का ऐलान किया है वह केवल नॉन-गजेटेड कर्मचारियों को मिलेगा, जिनमें सीनियर असिस्टेंट या सुपरवाइजर आएंगे. ग्रुप A और ग्रुप B के बड़े गजेटेड अधिकारियों को यह बोनस नहीं मिलेगा.
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और सशस्त्र बलों के पात्र कर्मी भी इसमें शामिल हैं. यह आदेश केंद्र शासित प्रदेशों के उन कर्मचारियों पर भी लागू होता है, जो केंद्र सरकार के वेतन ढांचे के तहत आते हैं और किसी अन्य बोनस या अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) योजना के दायरे में नहीं आते हैं.
बोनस के लिए पात्रता की क्या है शर्तें?

कर्मचारी को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कम से कम 6 महीने तक की सर्विस लगातार पूरी करनी होगी.&amp;nbsp;
कर्मचारी का 31 मार्च 2026 को यानी कि अकाउंटिंग ईयर 2025-26 के आखिरी दिन में बने रहना जरूरी है.&amp;nbsp;
6 महीने से 1 साल के बीच सर्विस करने वालों को pro-rata के आधार पर &amp;nbsp;बोनस मिलेगा. यानी कि तय कारोबारी साल के दौरान जिन कर्मचारियों की सेवा की अवधि 6 महीने से अधिक लेकिन 1 साल से कम है, उन्हें पूरे 6,908 के बजाय जितने महीने की सर्विस पूरी हुई, उसके अनुपात में बोनस दिया जाएगा.


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सोने के फंड में पैसा लगाने पर रोक, आपकी SIP पर क्या होगा असर?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रिलायंस पावर के शेयरों में भारी गिरावट, 5% गिरे, निवेशकों में मचा हड़कंप</title>
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        <description><![CDATA[ आज यानी 15 अक्टूबर को कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कारवाई के बाद शेयर 5% से ज्यादा टूट गए. ED ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले समूह की कंपनी रिलायंस पावर के शेयर से जुड़ी 2,032.81 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की है. इस कार्रवाई के बाद निवेशकों की नजर अब कंपनी के शेयरों पर बनी हुई है.
ED की यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत चल रही जांच का हिस्सा है. एजेंसी ने बताया कि जब्त की गई संपत्तियों में रिलायंस पावर के बैंक खाते और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है.
रिलायंस पावर के खिलाफ ED ने क्या कार्रवाई की?
एजेंसी ने 12 अक्टूबर को FEMA की धारा 37A के तहत जब्ती का आदेश जारी किया था. कंपनी ने नियामकीय फाइलिंग में आरोपों का खंडन किया और कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है. साथ ही कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने और शेयरधारकों के हितों की हिफाजत के लिए जरूरी कानूनी कदम उठाएगी.
क्या है ED की जांच का पूरा मामला?
ED की जांच रिलायंस पावर के खातों में दर्ज 2,101.46 करोड़ रुपये के बट्टे खाते में डाले गए निवेश और प्रावधानों से जुड़ी है. ये निवेश ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और अग्रिम रकम से संबंधित बताए गए हैं. एजेंसी के मुताबिक, मामले की शुरुआत साल 2006 में हुई, जब रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड के जरिए 300 मिलियन डॉलर जुटाए थे.
इसमें से 275 मिलियन डॉलर सिंगापुर की सहायक कंपनी में निवेश किए गए थे. इसके बाद इस सहायक कंपनी ने जिनेवा स्थित ड्यूश बैंक (सुइस) एसए में रकम जमा की. ED का आरोप है कि इस जमा रकम का इस्तेमाल विदेशी कंपनियों को दिए गए कर्ज के लिए गारंटी के तौर पर किया गया और लेन-देन से जुड़े डॉक्युमेंट्स में भी कथित तौर पर हेरफेर की गई है.&amp;nbsp;
आज रिलायंस पावर के शेयर का क्या रहा हाल?
15 अक्टूबर को बीएसई पर रिलायंस पावर का शेयर 19.68 रुपए पर खुला. कारोबार के दौरान इसने 19.84 रुपए का उच्चतम और 18.80 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ. शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, 19 रुपये और 18.50 रुपये के स्तर पर शेयर को सहारा मिल सकता है. वहीं, 21.50 रुपये का स्तर इसके लिए रुकावट बन सकता है. हालांकि, आगे शेयर की कीमत किस दिशा में जाएगी, यह बाजार की चाल और कंपनी से जुड़ी खबरों पर निर्भर करेगा.
देश में 9.1% बढ़ेगा कर्मचारियों का वेतन, नई रिपोर्ट से मिली खुशखबरी
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>रिलायंस, पावर, के, शेयरों, में भारी, गिरावट, गिरे, निवेशकों, में, मचा, हड़कंप</media:keywords>
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        <title>IDBI बैंक बिका, अब खातों में जमा ग्राहकों के पैसे का क्या होगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/idbi-बैंक-बिका-अब-खातों-में-जमा-ग्राहकों-के-पैसे-का-क्या-होगा</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद बैंक के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव होने वाला है. लेकिन इससे बैंक में खाता रखने वाले ग्राहकों का क्या होगा? क्या उन्हें खाता बंद करना होगा या फिर सारे पैसे निकाल लेना चाहिए?
हालांकि, फिलहाल बैंक की तरफ से ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि ग्राहकों के खातों का क्या होगा. लेकिन बैंक का मालिकाना हक बदलने की वजह से ग्राहकों को थोड़ी परेशानी तो हो रही है. इसी बीच आइये जानते हैं कि अब ग्राहकों को क्या करना चाहिए और उनके पैसों का क्या होगा.
सेविंग अकाउंट और FD का क्या होगा?IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिकने से ग्राहकों के सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अपने आप बंद नहीं होंगे. ग्राहकों को केवल बैंक का मालिक बदलने के कारण अपना पैसा निकालने की जरूरत नहीं है.&amp;nbsp;
बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने बताया कि, इस बदलाव के बाद भी जमाकर्ताओं और लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है. IDBI बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत काम करने वाला बैंक बना रहेगा.
ग्राहक रखें इन बातों का ध्यानइस समय IDBI बैंक के सभी ग्राहकों को थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत हैं. उन्हें बैंक की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाकर रखना चाहिए और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज से सावधान रहना चाहिए. इसके अलावा लोन लेने वाले ग्राहक मौजूदा शर्तों के अनुसार EMI समय पर जमा करते रहें. तो वहीं सेविंग अकाउंट वाले ग्राहकों को फिलहाल अपना खाता बंद करने या जमा रकम निकालने की जरूरत नहीं है.
बता दें कि 14 अक्टूबर को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. ये हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स से जुड़ी एक इकाई को बेची जानी है. इसमें केंद्र सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है.
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पैसा लगाना है? पहले जान लें Jio IPO को लेकर ये 10 बड़ी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार Jio प्लेटफॉर्म्स का IPO (आईपीओ) 21 अक्टूबर 2026 को खुलने वाला है. कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं. ये भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है. इसके एक लॉट में 12 शेयर होंगे और ऊपरी कीमत के हिसाब से एक लॉट के लिए 13,428 रुपये चाहिए होंगे.
अगर आप भी Jio के शेयर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, इससे पहले जान लें इसके बारे में 10 जरूरी बातें, जिसमें शेयर की कीमत, निवेश की रकम और कंपनी की कमाई से जुड़ी जरूरी बातें होंगी.
कब खुलेगा Jio का IPO?Jio Platforms का IPO 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक खुला रहेगा. बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए आवेदन की प्रक्रिया 19 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी. IPO खुलने की तारीख 21 अक्टूबर 2026 है, तो वहीं आखिरी तारीख 23 अक्टूबर 2026 होगी. इसके शेयर अलॉटमेंट की तारीख 26 अक्तूबर बताई जा रही है. तो वहीं शेयर बाजार में लिस्टिंग की 28 अक्तूबर तक होगी.
कितने करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी?कंपनी इस IPO के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा सकती है. ऊपरी कीमत पर कुल इश्यू का साइज करीब 30,213 करोड़ रुपये होगा. इसके साथ Jio प्लेटफॉर्म्स का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये हो सकता है.
कितनी होगी शेयर की कीमत?कंपनी ने एक शेयर की कीमत 1,065 रुपये से 1,119 रुपये के बीच तय की है. इसे प्राइस बैंड कहा जाता है. निवेशकों को इसी दायरे में शेयर के लिए बोली लगानी होगी.
एक लॉट कितने का होगा?इस IPO में एक लॉट में 12 शेयर होंगे. अगर आप सबसे ऊंची कीमत यानी 1,119 रुपये प्रति शेयर पर आवेदन करते हैं, तो एक लॉट के लिए 13,428 रुपये लगाने होंगे.
ये है भारत का बसे बड़ा IPO?जी हां! अगर इश्यू अपने अनुमानित आकार पर आता है, तो ये भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है. इससे पहले अक्टूबर 2024 में ह्युंडई मोटर इंडिया का करीब 27,856 करोड़ रुपये का IPO सबसे बड़ा था.
IPO से मिले पैसों का क्या करेगी Jio?कंपनी की योजना जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा अपनी टेलीकॉम इकाई रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को चुकाने या कम करने में इस्तेमाल करने की है. इसके अलावा, कुछ रकम बाकी कारोबारी जरूरतों और भविष्य के विकास पर खर्च की जाएगी.
शेयरधारकों को मिलेगा फायदा?जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रमुख मालिक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है. इसके अलावा गूगल और मेटा जैसी बड़ी कंपनियों की भी जियो में हिस्सेदारी है. इस IPO में मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच नहीं रहे हैं. कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी. इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाली रकम कंपनी को मिलेगी.
रिलायंस के शेयर होल्डर्स और कर्मचारियों के लिए क्या है खास?IPO में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों और जियो के पात्र कर्मचारियों के लिए अलग से शेयर बचाकर रखे गए हैं. रिलायंस के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर हैं. पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर बचाकर रखे गए हैं. हालांकि इसके लिए संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा.
Jio की कमाई कितनी बढ़ी?वित्त वर्ष 2025-26 में जियो प्लेटफॉर्म्स की कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी का परिचालन राजस्व 14.6% बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये हो गया. EBITDA यानी ब्याज, टैक्स और अन्य निर्धारित खर्चों से पहले की कमाई 18.8% बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये रही. कंपनी का शुद्ध मुनाफा 15.1% बढ़कर 30,049 करोड़ रुपये हो गया. ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की कमाई और मुनाफे में वृद्धि हुई है.
IPO में निवेश करना फायदेमंद होगा?जियो के IPO को लेकर निवेशकों में काफी दिलचस्पी है. हालांकि, किसी बड़े IPO में निवेश करना अपने आप में मुनाफे की गारंटी नहीं होता. निवेश करने से पहले आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कंपनी की कमाई, कर्ज और भविष्य की योजनाओं को समझें. शेयर की कीमत के मुकाबले कंपनी का मूल्यांकन देखें. अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से फैसला लें.
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>13.38 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डायरेक्ट टैक्स: पैसा कहां से आया, कहां गया और आम आदमी को क्या मिला?</title>
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        <description><![CDATA[ 13.38 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डायरेक्ट टैक्स: पैसा कहां से आया, कहां गया और आम आदमी को क्या मिला? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>पंजाब के ट्रक ड्राइवर ने दुबई में जीती 1.3 करोड़ की लॉटरी, दोस्तों को बांटेगा पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ अगर किस्मत साथ दे, तो छोटी-सी कोशिश भी बड़ी खुशखबरी में बदल सकती है. ऐसा ही कुछ पंजाब के रहने वाले 53 साल के ट्रक ड्राइवर कुलवंत सिंह के साथ हुआ है. दुबई में पिछले 18 साल से रह रहे कुलवंत ने अबू धाबी बिग टिकट के सीरीज 291 ड्रॉ में 5 लाख दिरहम यानी करीब 1.3 करोड़ रुपए का इनाम जीता है. बड़ी बात यह है कि वह इस रकम को अकेले रखने के बजाय अपने पांच दोस्तों के बांटेंगे, जिनके साथ मिलकर वह पिछले करीब दो साल से हर महीने लॉटरी का टिकट खरीद रहे थे.
गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कुलवंत सिंह &amp;nbsp;को कई साल पहले ऑनलाइन वीडियो के जरिए बिग टिकट के बारे में पता चला था. इसके बाद उन्होंने करीब दो साल पहले अपने दोस्तों के साथ मिलकर टिकट खरीदना शुरू किया. धीरे-धीरे यह उनके समूह की हर महीने की आदत बन गई. इस बार कुलवंत ने बिना किसी खास योजना के एक टिकट नंबर चुना था. लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनका यह नंबर इतनी बड़ी खुशखबरी लेकर आएगा.
दोस्तों के साथ मिलकर खरीदा था टिकट
कुलवंत सिंह दुबई के जेबल अली इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं.&amp;nbsp;कुलवंत सिंह और उनके पांच दोस्तों ने करीब दो साल पहले हर महीने टिकट खरीदने की शुरुआत की थी. लेकिन इस बार उनके समूह ने अबू धाबी बिग टिकट की सीरीज 291 के ड्रॉ में हिस्सा लिया. जीत की खबर मिलने पर कुलवंत सिंह काफी खुश हुए, क्योंकि उनके सभी दोस्त काफी लंबे समय से इनाम जीतने की उम्मीद कर रहे थे.
1.3 करोड़ की लॉटरी
5 लाख दिरहम यानी करीब 1.3 करोड़ रुपए की यह इनाम समूह के सदस्यों के बीच बांटी जाएगी. हालांकि, कुलवंत सिंह अपने हिस्से के पैसों से परिवार का खर्च संभालने और घर बनाने में योगदान देने की योजना बना रहे हैं.
ऑनलाइन घोटालों पर चौंकाने वाली रिपोर्ट, 67% लोगों को वापस नहीं मिलता एक भी रुपया
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>रेलवे कर्मचारियों को बोनस के रूप में अधिकतम कितने रुपए मिलेंगे?</title>
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        <description><![CDATA[ दीपावली का त्यौहार आने से पहले ही रेलवे कर्मचारियों के लिए सौगात लेकर आया है. हाल ही में केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में रेलवे कर्मचारियों के दिवाली बोनस को मंजूरी मिल गई है. जिससे इन कर्मचारियों के बीच खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. सरकार ने करीब 11.40 लाख से भी ज्यादा नॉन गैजेटेड रेल कर्मचारियों को PLB के आधार पर ये बोनस देने की मंजूरी दी है.
अब इस मंजूरी के बाद किस कर्मचारी को कितने रुपये बोनस के रूप में मिलेंगे, इस पर भी नजर बनी हुई है. वैसे बोनस की गणना तय नियमों और निर्धारित वेतन सीमा के आधार पर की जाती है. जिसके चलते सभी कर्मचारियों को एक जैसा बोनस नहीं मिलता. आइये जानते हैं कितना बोनस इन कर्मचारियों को मिलेगा.
कितना मिलेगा कर्मचारियों को बोनस?रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए एक निर्धारित फॉर्मूला अपनाया जाता है. जिसके तहत पात्र कर्मचारियों के बोनस की अधिकतम सीमा 17,951 रुपये तय है. यानी इस फॉर्मूले के अनुसार किसी पात्र कर्मचारी को इससे ज्यादा बोनस नहीं दिया जा सकता. कर्मचारी की पात्रता और बोनस की गणना के नियमों के आधार पर मिलने वाली रकम कम भी हो सकती है.
क्या है सरकार का फैसला?कैबिनेट की बैठक में मिली मंजूरी के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले के बारे में बताया है. उन्होंने बताया कि सरकार ने तीन बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. जिसमें से एक फैसला ये है कि रेलवे के करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस दिया जाएगा.
ये बोनस दिन-रात मेहनत करने वाले रेलवे कर्मचारियों के लिए दिवाली का तोहफा होगा. जो त्यौहारों के दौरान भी अपने परिवारों से दूर पटरियों, ट्रेनों और वर्कशॉप में लगातार काम करते हैं. इस बोनस के लिए सरकार कुल करीब 2009 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
किस आधार पर मिलेगा बोनस?रेलवे में पात्र कर्मचारियों को उनके काम और रेलवे के प्रदर्शन से जुड़े प्रावधानों के तहत प्रोडक्टिविटी के आधार पर बोनस दिया जाता है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना और बेहतर काम के प्रदर्शन को बढ़ावा देना है. इस बोनस का लाभ रेलवे के सभी कर्मचारियों को अपने आप नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है.
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>20 रुपए में दूध, अंबानी की डेयरी बिजनेस में एंट्री, अमूल को मिलेगी टक्कर!</title>
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        <description><![CDATA[ तेल से लेकर रिटेल, डिजिटल सर्विसेज, एंटरटेनमेंट जैसे कई बिजनेस में अपना हाथ आजमा चुक रिलायंस इंडस्ट्रीज अब मिल्क का बिजनेस भी शुरू कर रही है. अंबानीज के तमाम बिजनेसेज में से एक अब फ्लेवर्ड मिल्क का बिजनेस भी होगा. क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज की FMCG कंपनी रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) ने रेडी-टू-ड्रिंक डेयरी बाजार में भी कदम रख दिया है.
कंपनी ने तमिलनाडु में Joyland नाम से अपना ब्रांड लॉन्च किया है, जिसमें फ्लेवर्ड मिल्क लोगों के लिए उपलब्ध रहेगा. इसकी कीमत भी महज 20 रुपये रखी गई है.
दो फ्लेवर्स में मिलेगा दूधफिलहाल जॉयलैंड के दो फ्लेवर्स लॉन्च किए गए हैं. एक स्ट्रॉबैरी और दूसरा वनीला, ये दोनों ही फ्लेवर 20 रुपये में रेडी टू ड्रिंक उपलब्ध रहेंगे. इसे लेकर कंपनी का कहना है कि जॉयलैंड तमिलनाडु में बिक्री के लिए उपलब्ध हो गया है, अन्य राज्यों और शहरों में भी इसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. फिलहाल कंपनी का टारगेट कम कीमत पर कस्टमर्स को अच्छी क्वालिटी वाले प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना है.
क्या बोली कंपनी?रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) के डायरेक्टर टी. कृष्णकुमार ने इस प्रोडक्ट के बारे में बात करते हुए कहा है कि, &#039;रेडी-टू-ड्रिंक डेयरी बाजार में उतरना कंपनी के कारोबार को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे ग्राहकों को ड्रिंक के और भी ज्यादा ऑप्शंस मिलेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि जॉयलैंड के जरिए कंपनी अच्छी क्वालिटी और किफायती कीमत वाले डेयरी प्रोडक्ट्स ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाना चाहती है.&#039;
उन्होंने आगे कहा कि, तमिलनाडु से इसकी शुरुआत की गई है और आगे इसे पूरे देश में फैलाने का प्लान भी तैयार है. कंपनी आने वाले समय में जॉयलैंड के और भी फ्लेवर्स लॉन्च करेगी. इसके अलावा, डेयरी ड्रिंक्स की अन्य कैटेगरी में भी उतरने की तैयारी कर रही है.
बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज देश के सबसे बड़े कारोबारी परिवार अंबानी फैमिली की है. इसके तहत कई सारे बिजनेस शुरू किए गए हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज लोगों के बीच जाना माना और भरोसेमंद कारोबार है. इस कंपनी का नाम ही किसी प्रोडक्ट के साथ जुड़ना उसकी गुणवत्ता और भरोसे का पैमाना है.
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>जियो ने फाइल किया RHP, 21 अक्टूबर से खुलेगा IPO, जारी होंगे 27 करोड़ शेयर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जियो-ने-फाइल-किया-rhp-21-अक्टूबर-से-खुलेगा-ipo-जारी-होंगे-27-करोड़-शेयर</link>
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        <description><![CDATA[ रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्मस लिमिटेड ने आज अपना रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस यानी RHP फाइल कर दिया है. कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को आएगा. जियो नए शेयर बेचकर बाजार से पैसा जुटाएगी. कंपनी ने 27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करने का ऐलान किया है.&amp;nbsp;
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के इतिहास से जुड़ी बड़ी खबर है. जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने गुजरात के अहमदाबाद स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दस्तावेज जमा किया है. इससे पहले जून 2026 में कंपनी ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस फाइल किया था और अगस्त 2026 में सेबी से ऑब्जर्वेशन लेटर मिल चुका था. अब RHP फाइल होने के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है.
हर शेयर की फेस वैल्यू है 10 रुपए
बता दें कि कंपनी कुल 27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करेगी और हर शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपए है. बड़ी बात यह है कि आईपीओ में दो खास आरक्षण रखे गए हैं. कंपनी के योग्य कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपए तक के शेयर मिलेंगे. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा पब्लिक शेयरधारकों के लिए 2500 करोड़ रुपए तक के शेयर रखे गए हैं.
21 अक्टूबर को खुलेगा पब्लिक सब्सक्रिप्शन
कंपनी ने बताया है कि एंकर इन्वेस्टर बिडिंग की तारीख सोमवार 19 अक्टूबर है, जबकि पब्लिक सब्सक्रिप्शन बुधवार 21 अक्टूबर को खुलेगा और पब्लिक सब्सक्रिप्शन शुक्रवार 23 अक्टूबर को बंद होगा. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी है. इस आईपीओ को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है.
गौरतलब है कि बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर काफी उत्सुकता है. यह रिलायंस समूह की एक बड़ी लिस्टिंग साबित हो सकती है. इस मेगा आईपीओ पर निवेशकों, विश्लेषकों और पूरे शेयर बाजार की पैनी नजर टिकी हुई है. जियो के आईपीओ को &#039;मदर ऑफ ऑल आईपीओ&#039; कहा जा रहा है.
यह भी पढ़ें- 1977 में रिलायंस ले आया IPO... कैसे धीरूभाई अंबानी ने बदली थी आम जनता की किस्मत ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Netflix करेगी इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी, 6% कर्मचारियों को निकालेगी </title>
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        <description><![CDATA[ IT कंपनीज में छंटनियों का दौर पिछले कुछ समय से देखने को मिल रहा है. इस छटंनी वाली लिस्ट में अब &amp;nbsp;दुनिया के सबसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स का नाम भी जुड़ गया है. जी हां! नेटफ्लिक्स ने कर्मचारियों की छंटनी का बड़ा फैसला लिया है. कंपनी अपने कुल कर्मचारियों में से करीब 6% की कटौती करने जा रही है. इससे लगभग एक हजार कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है. ये साल 2022 के बाद कंपनी में छंटनी का सबसे बड़ा दौर है.
कंपनी के मुताबिक, छंटनी का सबसे ज्यादा असर प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी, कानूनी मामलों और HR डिपार्टमेंट पर पड़ेगा. नेटफ्लिक्स कंपनी में पिछले साल के आखिर तक करीब 16 हजार कर्मचारी थे.
कर्मचारियों को दी गई सूचनाVariety के मुताबिक, नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस और ग्रेग पीटर्स ने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए छंटनी का फैसला लेना आसान नहीं है. कंपनी नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को इस बदलाव के दौरान सपोर्ट करेगी.
कंपनी के दोनों अधिकारियों ने ये भी बताया कि नेटफ्लिक्स का कारोबार मजबूत है और कंपनी इस साल के लिए फिक्स टारगेट हासिल करने की दिशा में आगे काम कर रही है. कंपनी उन सेक्टर्स में भी निवेश जारी रखेगी, जहां से कारोबार बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
क्यों किया गया छंटनी का फैसला?नेटफ्लिक्स को यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म से कड़ी टक्कर मिल रही है. इन प्लेटफॉर्म पर काफी कंटेंट मुफ्त में मिल जाता है, जिससे दर्शकों का समय बंट रहा है. इससे नेटफ्लिक्स के लिए दर्शकों को अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना चुनौती बन गया है. कंपनी अब सिर्फ सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर निर्भर नहीं रहना चाहती. इसके लिए वो एड, लाइव प्रोग्रामिंग और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
पहले भी हो चुकी है छंटनीबता दें कि नेटफ्लिक्स ने इससे पहले साल 2022 में भी करीब 450 कर्मचारियों की छंटनी की थी. इस बार की कटौती उस समय के बाद की सबसे बड़ी छंटनी है. कंपनी के इस फैसले से ग्लोबल टेक और एंटरटेनमेंट सेक्टर में नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ सकती है.
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Netflix, करेगी, इतिहास, की, सबसे, बड़ी, छंटनी, कर्मचारियों, को, निकालेगी </media:keywords>
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        <title>ठंड में बिस्तर रहेगा गर्म, बिजली बिल भी आएगा कम, जानें इलेक्ट्रिक कंबल की कीमत और फायदे</title>
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        <description><![CDATA[ गर्मी के दौरान जैसे एसी, कूलर के बिना सोना मुश्किल हो जाता है, वैसे ही सर्दियों के दौरान बिस्तर ठंडे होने की वजह से सोने में काफी दिक्कतें आती है और अब कुछ ही समय में सर्दियों की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में अगर आप ठंडे बिस्तर से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इलेक्ट्रिक कंबल आपके काम आ सकता है. अगर आपको इलेक्ट्रिक कंबल खरीदना है तो सबसे पहले इसके बारे में कुछ जरूरी जानकारी हासिल करनी महत्वपूर्ण है.
कैसे करते हैं इस्तेमाल?
इलेक्ट्रिक कंबल को आप सोने से 15-20 मिनट पहले ऑन कर दें, इससे आपका बिस्तर गर्म हो जाएगा. वहीं जब सोने जाएं तो इसको बंद कर दें. ध्यान रखें, आप जिस कंपनी का इलेक्ट्रिक कंबल खरीद रहे हैं तो उसपर लिखें निर्देशों को पढ़े और उसके मुताबिक ही इस्तेमाल करें.&amp;nbsp;
कितनी है कीमत?
अगर बात करें इलेक्ट्रिक कंबल के कीमत की तो इसकी कीमत इसके साइज और ब्रांड के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. अगर आपको ऑनलाइन खरीदना है तो इसकी ऑनलाइन कीमत लगभग 730 से लेकर 3000 रुपये के बीच है. हां, लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि कंबल की कीमत साइज, ब्रांड और उपलब्ध ऑफर के हिसाब से अलग हो सकती है.आप ऑफलाइन भी जाकर इसे खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
पूरी रात इस्तेमाल करने पर बिल कितना आएगा?
जानकारी के मुताबिक, इलेक्ट्रिक कंबल की बिजली खपत लगभग 30 से 150 वॉट तक हो सकती है. हां, लेकिन कितना बिजली का बिल आएगा ये बार आपके इस्तेमाल और हीट सेंटिग पर निर्भर करती है.&amp;nbsp;
क्या फायदे हैं?
जानते हैं कि आखिर इलेक्ट्रिक कंबल इस्तेमाल करने के फायदे क्या-क्या हैं?

सर्दी के दौरान बिस्तर ठंडा रहता है तो आप सोने से पहले बिस्तर गर्म कर सकते हैं.
वहीं इसके इस्तेमाल करने पर ज्यादा बिजली भी नहीं खर्च होती है.
इसके अलावा कई इलेक्ट्रिक कंबल के मॉडल में कंट्रोलर भी दिया जाता है, जिससे हीट सेटिंग बदला जा सकता है.&amp;nbsp;

कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें
अगर आप इलेक्ट्रिक कंबल इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो निर्माता के निर्देशों के मुताबिक ही इसका उपयोग करें. क्योंकि हर मॉडल एक जैसे इस्तेमाल करने के लिए नहीं होते हैं, इसलिए इस्तेमाल करने से पहले जानना बेहद जरूरी है कि इसे रखना कहां है और कैसे रखना है. इसके अलावा भी कुछ खास सावधानियों का बरतना चाहिए जैसे...

कभी भी इलेक्ट्रिक कंबल को गीले बिस्तर पर इस्तेमाल न करें.
वहीं जब ये ऑन है तो इसे मोड़कर न रखें.
अगर सोने से पहले बिस्तर को गर्म करने के लिए उपयोग करना है तो निर्माता के निर्देशों का पालन करें.
वहीं बुजुर्गों और छोटे बच्चों को इससे सावधानी रखनी चाहिए.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ठंड, में, बिस्तर, रहेगा, गर्म, बिजली, बिल, भी, आएगा, कम, जानें, इलेक्ट्रिक, कंबल, की, कीमत, और, फायदे</media:keywords>
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        <title>कम होगा कानूनी दबाव, बढ़ेगा व्यापार, CAIT ने GST काउंसिल के फैसलों को बताया ऐतिहासिक</title>
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        <description><![CDATA[ 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों का कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने स्वागत किया है. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इन निर्णयों से छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि, सरकार के इन कदमों से कारोबार में अनावश्यक कानूनी दबाव घटेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &amp;lsquo;ईज ऑफ डूइंग बिजनेस&amp;rsquo; के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी.&amp;nbsp;
जीएसटी के कानूनी प्रावधानों में बदलाव से व्यापारियों को राहतखंडेलवाल ने जीएसटी से जुड़े गिरफ्तारी प्रावधानों को हटाने, अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और सामान्य दंड को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने के फैसलों को अहम बताया. उन्होंने कहा कि इन बदलावों से छोटे व्यापारियों के मन में लंबे समय से बनी कानूनी कार्रवाई की आशंका कम होगी. उनका मानना है कि कर व्यवस्था में भरोसा बढ़ने से ईमानदारी से कारोबार करने वालों को राहत मिलेगी. साथ ही, अनावश्यक कानूनी उलझनों में समय और संसाधन खर्च करने के बजाय व्यापारी अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान दे सकेंगे.&amp;nbsp;
सालाना रिटर्न और तिमाही भुगतान से घटेगा अनुपालन का बोझपांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए प्रस्तावित वार्षिक रिटर्न और तिमाही कर भुगतान व्यवस्था का भी खंडेलवाल ने स्वागत किया. उन्होंने इसे जीएसटी लागू होने के बाद छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण सुधारों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि, बार-बार रिटर्न दाखिल करने और जटिल प्रक्रियाओं को पूरा करने में छोटे कारोबारियों का काफी समय खर्च होता है. नई व्यवस्था से यह बोझ कम होने की उम्मीद है. इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा कारोबारियों को अपने व्यापार के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा.
ई-कॉमर्स के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंचेगा छोटे दुकानदारों का कारोबारजीएसटी परिषद के फैसलों में छोटे विक्रेताओं को विभिन्न राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारोबार करने की सुविधा भी शामिल है. खंडेलवाल के अनुसार, इससे छोटे दुकानदारों के साथ घरेलू उद्योगों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण कारोबारियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं. अब छोटे विक्रेताओं के लिए अपने स्थानीय बाजार से बाहर निकलकर देशभर के ग्राहकों तक पहुंच बनाने के अवसर बढ़ेंगे. इससे उनकी बिक्री, आय और कारोबारी पहुंच का विस्तार हो सकता है.
छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए रिफंड प्रक्रिया में तेजी को भी अहम माना जा रहा है. खंडेलवाल ने 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों का तीन कार्य दिवसों के भीतर स्वतः निपटान करने और रिफंड आवेदन की स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने के फैसले का स्वागत किया. रिफंड में देरी होने पर व्यापारियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक अटकी रहती है, जिससे रोजमर्रा के खर्च और कारोबार चलाने में परेशानी हो सकती है.
माल परिवहन में अनावश्यक जांच पर लगेगी रोकवहीं, वाहनों की जांच को विशिष्ट खुफिया सूचना और पूर्व अनुमति तक सीमित करने के फैसले को भी उन्होंने व्यापार के लिहाज से सकारात्मक बताया. उनके अनुसार, इससे माल ढुलाई के दौरान होने वाली अनावश्यक रुकावटें कम होंगी. परिवहन में लगने वाला अतिरिक्त समय घटने से व्यापारियों को लॉजिस्टिक्स के स्तर पर राहत मिल सकती है. माल की आवाजाही अधिक सुचारु होने से कारोबारी गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
बीमा, टेलीकॉम और मशीनरी से जुड़े फैसले भी अहमखंडेलवाल ने कर्मचारी स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर, पाइपलाइन तथा प्लांट और मशीनरी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और रिफंड से संबंधित निर्णयों को भी उद्योग एवं व्यापार जगत के लिए सकारात्मक बताया. उनके अनुसार, इन कदमों से निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जीएसटी परिषद के सभी सदस्यों को फैसलों के लिए बधाई दी. खंडेलवाल ने कहा कि 57वीं जीएसटी परिषद के निर्णय छोटे व्यापारियों को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. उनके मुताबिक, इन बदलावों से देश में कारोबार करना अधिक सरल, पारदर्शी और व्यापारी-अनुकूल बनाने की कोशिश को बल मिलेगा.
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: लेवल 10 कर्मचारियों को 10 साल में मिलेंगे 34 लाख एक्स्ट्रा</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने नवंबर में 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी. जिसके बाद से ही लगातार इस आयोग की बैठकें चल रही हैं. जिसमें कर्मचारियों की वेतन आयोग और सरकार से अपेक्षाओं को लेकर बातें चल रही हैं. इसके अलावा इन बैठकों में सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर सुझाव भी दिए जा रहे हैं. इसी बीच कर्मचारी संगठनों न मांग की है कि हर साल मिलने वाले इंक्रीमेंट की दर 3% से बढ़ाकर 5% से 7% तक की जाए.
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सालाना सैलरी में 7% की दर से बढ़ोतरी होती है, तो कुछ लेवल पर काम करने वाले कर्मचारियों को 10 साल में मौजूदा 3% वृद्धि की तुलना में लाखों रुपये ज्यादा बेसिक सैलरी मिल सकती है.
10 साल में मिलेंगे 34 लाखदरअसल अनुमान लगाएं तो इतनी वेतन वृद्धि के बाद, लेवल-10 के कर्मचारियों को 10 साल में करीब 34 लाख की एक्स्ट्रा बेसिक सैलरी मिल सकती है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हर साल मिलने वाली 3% सैलरी हाइक महंगाई और बढ़ते खर्चों के मुकाबले कम है. इसलिए वो इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.
रिपोर्ट में 2.15 फिटमेंट फैक्टर को मानकर ये अनुमान लगाया गया है कि अगर सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 5% या 7% किया जाए, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितना अंतर आ सकता है.
मांगों के आदार पर कितनी बढ़ेगी सैलरी



पे लेवल
5% इंक्रीमेंट
7% इंक्रीमेंट 


लेवल-8
13.68 लाख रुपये
28.89 लाख रुपये


लेवल-9
15.26 लाख रुपये
32.23 लाख रुपये


लेवल-10
16.12 लाख रुपये
34.05 लाख रुपये



कर्मचारी संगठनों की है अलग- अलग मांगइस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने के सुझाव दिए हैं. जिसमें नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने 6% का बढ़ाने का सुझाव दिया है. तो वहीं ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 7% सालाना इंक्रीमेंट की मांग की है.
हालांकि फिलहाल 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है. अंदाज लगाया जा रहा है कि जून 2027 तक ये रिपोर्ट आ सकती है. जिसके बाद कर्मचारियों की वेतनवृद्धि होगी. फिलहाल आयोग ने फिटमेंट फैक्टर और अन्य भत्तों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी है.
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>तेल तो सस्ता मिल रहा, लेकिन भारत कैसे आए? टैंकर के महंगे किराए ने बिगाड़ा खेल</title>
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        <description><![CDATA[ ईरान और यूएस के बीच शुरू हुए तनाव के बाद से ही भारत में जो कच्चे तेल की परेशानी आई है, वो अब तक भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. ना केवल भारत बल्कि इस समय दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर परेशानी बढ़ रही है. वहीं, उत्तर और दक्षिण अमेरिका में भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध है, बावजूद इसके इसे अन्य देशों तक पहुंचाने में परेशानी आ रही है.
ये परेशानी है खर्च का बढ़ना. दरअसल रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है. ऐसे में भारत को अमेरिका से सस्ता तेल खरीदने का मौका मिल सकता है. लेकिन महंगी ढुलाई और रिफाइनरियों की लिमिटेड क्षमता इस फायदे को कम कर सकती है.
अमेरिका में क्यों जमा हो रहा सस्ता तेल?भारी कच्चा तेल हल्के तेल की तुलना में ज्यादा गाढ़ा होता है और आमतौर पर कम कीमत पर मिलता है. लेकिन अमेरिका से एशिया तक तेल पहुंचाने का खर्च बहुत बढ़ गया है. रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले हफ्ते अमेरिका से एशिया तक एक बड़े टैंकर से तेल भेजने का खर्च 8 करोड़ डॉलर यानी करीब 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. साल की शुरुआत में ये खर्च 1 से 1.5 करोड़ डॉलर था.
तो वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला से तेल का निर्यात बढ़ा है, कनाडा में उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है और अमेरिका ने अपने आपातकालीन भंडार से 13 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल जारी किया है. इससे अमेरिका में तेल का स्टॉक बढ़ा है.
भारत खरीद रहा वेनेजुएला से तेलरूस से तेल महंगा होने और अमेरिकी टैरिफ का खतरा बढ़ने के कारण भारत दूसरे देशों से तेल खरीदने के ऑप्शंस तलाश रहा है. Kpler के मुताबिक भारत को वेनेजुएला से अक्टूबर में रोजाना करीब 4.65 लाख बैरल तेल मिला है. सितंबर में ये मात्रा करीब 1.96 लाख बैरल प्रतिदिन थी. हालांकि कुछ जहाजों के देर से पहुंचने के कारण वास्तविक औसत सप्लाई कम रह सकती है.
फिर होर्मुज से तेल खरीद रहा भारतभारतीय रिफाइनरियां अब फारस की खाड़ी से तेल लाने के लिए अपने टैंकर किराए पर ले रही हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल कर रही हैं. इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO ने अक्टूबर में तेल की सप्लाई पर क्षेत्रीय मानक कीमत से 37 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट देने की पेशकश की है.
भारत को होगा कितना फायदा?भारत को वेनेजुएला, इराक और UAE से सस्ता तेल खरीदने का मौका मिल सकता है. लेकिन महंगा टैंकर किराया, इंश्योरेंस का खर्च, समुद्री रास्तों पर जोखिम और भारी तेल प्रोसेस करने की सीमित क्षमता इस फायदे को कम कर सकती है.
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>5841 टन चीनी निर्यात को सरकार की मंजूरी, अब किस की किस्मत चमकेगी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/5841-टन-चीनी-निर्यात-को-सरकार-की-मंजूरी-अब-किस-की-किस्मत-चमकेगी</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के चीनी कारोबार से जुड़े निर्यातकों के लिए एक अहम खबर है. केंद्र सरकार ने साल 2026-27 के दौरान यूरोपीय संघ (EU) को 5,841 मीट्रिक टन चीनी भेजने की अनुमति दी है. इस निर्यात के लिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके तहत तय मात्रा में चीनी के व्यापार पर शुल्क संबंधी विशेष रियायत मिल सकती है.
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से 9 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, यह कोटा अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक लागू रहेगा. इसका मतलब है कि इस अवधि में निर्धारित मात्रा के भीतर ही संबंधित व्यवस्था के तहत चीनी का निर्यात किया जा सकेगा. निर्यात करने वाली कंपनियों को तय नियमों और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
क्या होती है TRQ व्यवस्था?
टैरिफ रेट कोटा ऐसी व्यापार व्यवस्था है, जिसमें किसी उत्पाद की एक निश्चित मात्रा के लिए अलग शुल्क नियम या रियायत लागू हो सकती है. भारत से यूरोपीय संघ को चीनी भेजने के मामले में भी इसी व्यवस्था के तहत कोटा निर्धारित किया गया है.
इस प्रक्रिया में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की भूमिका रहेगी. जरूरत के अनुसार निर्यात से जुड़े प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी. इसके लिए संबंधित अधिकारियों की मंजूरी और आवश्यक सिफारिशों का पालन करना होगा.
अन्य उत्पादों के व्यापार नियमों में भी बदलाव
चीनी निर्यात के अलावा सरकार ने कुछ अन्य उत्पादों से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है. ग्लूफोसिनेट के आयात पर लागू न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) की व्यवस्था को 12 अप्रैल 2027 तक बढ़ा दिया गया है. न्यूनतम आयात मूल्य वह सीमा होती है, जिसके आधार पर किसी उत्पाद के आयात पर नियम लागू किए जाते हैं.
इसके साथ ही तैयार कल्चर मीडिया के निर्यात से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है. जरूरत के मुताबिक इसके लिए शिपमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट और हेल्थ सर्टिफिकेट जारी किए जा सकेंगे. इनका इस्तेमाल संबंधित देश की आवश्यकताओं के अनुसार किया जाता है.
भारतीय निर्यातकों के लिए क्या मायने हैं?
यूरोपीय संघ को चीनी भेजने के लिए कोटा तय होने से निर्यातकों को व्यापार की निर्धारित सीमा और लागू नियमों की जानकारी मिलती है. हालांकि, इस फैसले से कुल निर्यात या कमाई में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह मांग, कीमतों और वास्तविक निर्यात पर निर्भर करेगा.
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यह भी देखें-
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ट्रंप की डीजल नीति पर उठीं उंगलियां, रूस से तेल खरीदने पर इतना बवाल क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ट्रंप-की-डीजल-नीति-पर-उठीं-उंगलियां-रूस-से-तेल-खरीदने-पर-इतना-बवाल-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने का ऐलान कर दुनिया को हैरान कर दिया है. बात सिर्फ इतनी है कि जब अब तक अमेरिका पूरी दुनिया को रूस पर प्रतिबंध लगाने की नसीहत देते आया है, तो वह अब खुद क्यों पीछे हट रहा है. रूस से डीजल खरीदने का अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
ट्रंप के फैसले से हड़कंप
बात इतनी आगे बढ़ गई है कि अब ट्रंप की ही पार्टी रिपब्लिकन के कुछ सीनियर सीनेटरों का मानना है कि रूस से सीधे डीजल खरीदना पार्टी के मूल सिद्धांतों और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ है. इसी वजह से वे डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर संसद में इस डील को रोकने के लिए कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं.&amp;nbsp;
यूरोपीय यूनियन संग भी बिगड़ी बात
यूक्रेन में रूस के हमले के बाद यूरोपीय देशों ने भी रूसी गैस और तेल से किनारा करते हुए महंगे विकल्पों का सहारा लिया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा. अब जब अमेरिका खुद अपने फायदे के लिए रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दे रहा है, तो यूरोपीय यूनियन को यह बात खटक रही है.
कहीं न कहीं उनके मन में भी यह बात उठ रही होगी कि अमेरिका अपने आर्थिक हितों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. ट्रंप के इस फैसले से यूक्रेन में भी नाराजगी है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और वहां के शीर्ष अधिकारियों का ऐसा मानना है कि इस डील से रूस को अरबों डॉलर मिलेंगे, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन में ताबड़तोड़ हमलों में करेगा.&amp;nbsp;
ट्रंप ने क्यों लिया यू टर्न?
अमेरिका में इस वक्त डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे लेकर लोगों में- खासकर अमेरिकी किसान, ट्रक ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों में गुस्सा है. यही लोग ट्रंप के सपोटर्स का मजबूत बेस भी है. ध्यान में रखने वाली बात है कि अमेरिका में नवंबर को मिड टर्म चुनाव होने हैं इसलिए ट्रंप इन्हें लंबे समय तक नाराज नहीं रख सकता. चुनाव से ठीक पहले जनता को राहत देने के लिए डीजल की कीमतों में कमी ट्रंप की राजनीतिक मजबूरी है.&amp;nbsp;
भारत पर असर
अमेरिका अब तक भारत पर रूस से तेल व गैस के आयात को रोकने के लिए दबाव डाल रहा था. जबकि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए मुनाफे का सौदा था क्योंकि रूस से सस्ते में क्रूड खरीदकर भारतीय रिफाइनरियां उसे डीजल में बदलकर वापस से अमेरिका और यूरोप को ऊंचे दामों पर बेचता है. लेकिन अब जब अमेरिका खुद रूस से तेल खरीदेगा, तो भारत भी खुलकर अपनी ऊर्जा नीतियों और जरूरतों पर अपना पक्ष रख सकेगा.&amp;nbsp;
क्या भारत में कम होंगे डीजल के दाम?
अमेरिका और रूस के बीच इस ऐतिहासिक डील के तुरंत बाद भारत में डीजल की कीमतें कम होने की उम्मीद नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे अमेरिका में डीजल संकट को तुरंत दूर करने में भले ही मदद मिल सकती है, लेकिन वैश्विक संकट पर कुछ खास असर नहीं होगा. डीजल की कीमतें तभी कम होंगी, जब ग्लोबल मार्केट में क्रूड लंबे समय तक 80-85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहेगा.
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अमेरिका का दोहरा रवैया, भारत पर पाबंदी लगाकर खुद रूस से खरीद रहा तेल&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ट्रंप, की, डीजल, नीति, पर, उठीं, उंगलियां, रूस, से, तेल, खरीदने, पर, इतना, बवाल, क्यों</media:keywords>
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        <title>Zoho कर्मचारियों को झटका, इस साल नहीं होगा अप्रैजल, श्रीधर वेम्बू का बड़ा ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ टेक सेक्टर में नौकरी और सैलरी को लेकर बढ़ती चिंता के बीच Zoho के कर्मचारियों के लिए भी बुरी खबर आई है. कंपनी ने इस साल कर्मचारियों के सालाना अप्रैजल और सैलरी बढ़ोतरी को रोकने का फैसला किया है. Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने खुद इस फैसले की जानकारी दी और कर्मचारियों से माफी भी मांगी है.
उन्होंने कहा कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने के लिए पूरी कोशिश करेगी, लेकिन सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में आने वाले समय में नौकरियों की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है.&amp;nbsp;
क्यों नहीं मिलेगा अप्रैजल?श्रीधर वेम्बू ने कहा कि AI पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है. कंपनी को अपने कारोबार को चलाने और नई तकनीक पर काम करने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि कंपनी ने मार्केटिंग का बजट भी कम किया है. इसके बावजूद खर्च को नियंत्रित करना आसान नहीं हो रहा है. ऐसे में इस साल कर्मचारियों का अप्रेजल नहीं हो पाएगा. उन्होंने कर्मचारियों से माफी मांगते हुए कहा कि वो इस फैसले को टाल नहीं पाए. उनके मुताबिक, कंपनी इस समय खुद को नए हालात के हिसाब से तैयार करने में जुटी है.&amp;nbsp;
AI ने बढ़ाई परेशानीZoho के सामने सबसे बड़ी चुनौती AI पर बढ़ता खर्च है. कंपनी को डेटा सेंटर चलाने के लिए जिन सर्वर की जरूरत होती है, उनकी कीमतों में चार गुना तक बढ़ोतरी होने की बात श्रीधर वेम्बू ने कही है. इसके अलावा AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कंपनी के खर्च में भी इजाफा हो रहा है.
छंटनी से बचने की होगी कोशिशकर्मचारियों को फिलहाल तो सबसे बड़ी चिंता नौकरी को लेकर है. श्रीधर वेम्बू ने कहा है कि Zoho बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने के लिए मेहनत करेगी.&amp;nbsp;उन्होंने बताया कि कंपनी ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई है. कंपनी का कहना है कि वो कर्मचारियों की नौकरियां बचाने की कोशिश कर रही है.&amp;nbsp;
कारोबार की रफ्तार हुई धीमीरिपोर्ट के मुताबिक, Zoho का कारोबार अब भी बढ़ रहा है और कंपनी की ग्रोथ करीब 12% बताई गई है. लेकिन सितंबर में नए रेवेन्यू और नए ग्राहकों को जोड़ने की रफ्तार उम्मीद से ज्यादा धीमी रही है. इससे कंपनी को अपने बिजनेस मॉडल पर दोबारा काम करने की जरूरत है.&amp;nbsp;
इसके अलावा AI से तैयार होने वाले सॉफ्टवेयर भी परेशानी का कारण हैं. अब कुछ ग्राहक वाइब कोडिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें AI की मदद से कोड तैयार किया जा सकता है. अगर ग्राहक इसका इस्तेमाल करता है तो पुराने सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट की मांग बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. इसलिए Zoho को अपनी तकनीक और कारोबारी रणनीति में बदलाव करना पड़ रहा है.
ट्रंप की डीजल नीति पर उठीं उंगलियां, रूस से तेल खरीदने पर इतना बवाल क्यों?
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Old Monk की बिक्री पर रोक, महाराष्ट्र सरकार को लगा 350 करोड़ का चूना</title>
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        <description><![CDATA[ मशहूर रम ब्रांड ओल्ड मौंक की बिक्री पर लगी रोक का असर अब कंपनी के साथ महाराष्ट्र सरकार के राजस्व पर भी पड़ रहा है. कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा है कि बिक्री पर रोक के कारण उसे 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. वहीं, महाराष्ट्र सरकार के आबकारी विभाग को करीब 350 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की बात कही गई है.
यह विवाद ओल्ड मौंक की रम में इस्तेमाल किए जाने वाले फ्लेवर और उसकी बोतल पर लिखी जानकारी से जुड़ा है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ शराब उत्पादों की बिक्री पर आपत्ति जताई थी. नियामक के मुताबिक, अगर किसी शराब में बाहर से रम का फ्लेवर मिलाया जाता है, तो उसके लेबल पर उत्पाद की सही जानकारी देना जरूरी है. FSSAI का कहना है कि सामान्य रम के नाम से ऐसे उत्पाद बेचना ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है. इसी वजह से कंपनी की महाराष्ट्र स्थित इकाई से होने वाली बिक्री पर रोक लगाई गई.
कंपनी ने कोर्ट में क्या कहा?
कंपनी की ओर से अदालत में बताया गया कि महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित उत्पादन इकाई से बिक्री रुकने के कारण उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. कंपनी ने यह भी कहा कि राज्य की दूसरी इकाइयों में इसी तरह के फॉर्मूले वाली रम की बिक्री जारी है, जबकि संबंधित इकाई पर पाबंदी लगी हुई है.
कंपनी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत से राहत मांगी है. उसका कहना है कि उत्पाद बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और प्रक्रिया को लेकर नियमों के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए.
बिक्री दोबारा शुरू करने के लिए क्या है शर्त?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि अगर कंपनी अपने उत्पाद के लेबल पर &amp;lsquo;रम&amp;rsquo; के बजाय &amp;lsquo;रम जैसा उत्पाद&#039;लिखने पर सहमत होती है, तो बिक्री की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है. कंपनी पहले भी लेबल में बदलाव का प्रस्ताव दे चुकी है, लेकिन संशोधित लेबल को मंजूरी नहीं मिल पाई. इस वजह से विवाद का समाधान नहीं निकल सका है.
23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिलहाल कंपनी को तत्काल अंतरिम राहत नहीं दी है. मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होनी है. अब सभी की नजर अदालत की आगे की कार्यवाही और लेबल से जुड़े विवाद के समाधान पर है, अंतिम फैसला आने तक मामला लंबित है.
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यह भी देखें-
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 15:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>त्योहारों पर घर और फ्लैट खरीदने पर भारी छूट, क्या सच में होगी लाखों की बचत?</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों के मौसम में हर एक चीज पर अच्छा खासा डिस्काउंट होता है. चाहे ऑनलाइन शॉपिंग करना हो, ऑफलाइन शॉपिंग करना हो या फिर कोई घर या प्रॉपर्टी ही क्यों ना खरीदना हो. इस दौरान रियल एस्टेट कंपनियां भी ग्राहकों को घर खरीदने के लिए कई तरह के ऑफर देती रहती है. इसी कड़ी में इस साल भी कई रिल एस्टेट कंपनियां अच्छी डील्स लेकर आई हैं.
कहीं फ्लैट की कीमत में छूट दी जा रही है, तो कहीं रजिस्ट्री का खर्च माफ किया जा रहा है. कहीं मॉड्यूलर किचन बनाए जा रहे हैं, तो कहीं सोने के सिक्के और आसान किस्तों जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं. लेकिन क्या पता ये ये ऑफर वाकई में बचत वाले हैं या कोई झांसा?
त्योहारों पर मिलने वाली छूट कितनी फायदेमंद?त्योहारों के समय बिल्डर बिक्री बढ़ाने और खाली पड़े फ्लैट बेचने के लिए ज्यादा सुविधाएं दे सकते हैं. ऐसे में खरीदारों को आसान भुगतान की सुविधा, रुपयो में छूट या दूसरी सुविधाएं मिल सकती हैं. NDTV के साथ बातचीत में रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन ने इस बारे में खुलकर बात की है.
उन्होंने बताया कि त्योहारों के समय घर खरीदने वालों को आकर्षक कीमतों, आसान भुगतान योजनाओं और थोड़ी ज्यादा सुविधाओं का फायदा मिल सकता है. इस समय लोग शुभ अवसरों पर प्रॉपर्टी खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं, इसलिए बिल्डर भी ग्राहकों को जल्दी फैसला लेने के लिए ऐसे ऑफर्स देते हैं. हालांकि हर ऑफर में मिलने वाला फायदा अलग-अलग हो सकता है. इसलिए केवल एड देखकर ये तय नहीं करना चाहिए कि घर सस्ता मिल रहा है.
घर खरीदने से पहले सोचें समझेंहबटाउन लिमिटेड के ब्रांड और मार्केटिंग कम्युनिकेशन प्रमुख रूपम डे कहते हैं कि, किसी भी ऑफर का फायदा समझने के लिए फ्लैट की असल कीमत, बाजार में चल रही कीमत, पेमेंट मोड, जीएसटी और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्चों को ध्यान में रखना चाहिए. आजकल बिल्डर सीधे कीमत घटाने के बजाय कई तरह के फ्री गिफ्ट, शुल्क में छूट और आसान पेमेंट योजनाएं दे रहे हैं. ऐसे में खरीदारों को ये भी देखना चाहिए कि जिस फ्लैट पर आज ऑफर मिल रहा है, उसकी कीमत कुछ हफ्ते पहले कितनी थी.
फायदे के सौदे के चक्कर ना करें नुकसानवैसे तो त्योहारों पर घर खरीदना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन हर छूट को असल बचत मानना सही नहीं है. बिल्डर के ऑफर के साथ फ्लैट की मूल कीमत, एक हफ्ते पुरानी कीमत, सारे एक्स्ट्रा खर्चों और बाजार में मौजूद दूसरे ऑप्शंस से तुलना करना जरूरी है. ऐसे में जब भी घर खरीदने का कोई फैसला करें तो उससे पहले अच्छी तरह से जांच पड़ताल करें.
ये भी पढ़ें: सितंबर में 5.54% बढ़ी खुदरा महंगाई, खाने-पीने की चीजों के भी बढ़े दाम ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कभी एलन मस्क से ज्यादा अमीर थे मुकेश अंबानी, फिर कैसे पलट गई बाजी?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग को लेकर विवाद गहरा गया है. स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क इसको लेकर पिछले कई दिनों से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुंकेश अंबानी पर हमलावर हैं. यह मामला देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा में प्रतिस्पर्धा को लेकर गरमाया हुआ है. एलन मस्क फिलहाल दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं. फोर्ब्स की ग्लोबल रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट में मुकेश अंबानी अरबपतियों में 25वें स्थान पर हैं. यानी एलन मस्क और अंबानी के बीच 24 स्थानों का बड़ा अंतर है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी मुकेश अंबानी, एलन मस्क से भी ज्यादा अमीर थे.
आंकड़ों की बात करें तो साल 2020 के जुलाई महीने में, यानी आज से करीब 6 साल पहले बहुत ही कम समय के लिए ऐसा मौका आया था, जब मुकेश अंबानी की संपत्ति एलन मस्क से ज्यादा हो गई थी. उस वक्त रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भारी तेजी और जियो में बड़े निवेशकों के आने की वजह से मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति बढ़कर लगभग 75.9 अरब डॉलर हो गई थी.
इस दौरान उन्होंने बर्नार्ड अर्नाल्ट, वॉरेन बफेट और एलन मस्क जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के पांचवें सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया था. उस समय एलन मस्क की संपत्ति उनसे कुछ पीछे थी. हालांकि कुछ वक्त के लिए ही ऐसा हुआ था. &amp;nbsp;
नवंबर 2020 के बाद पलट गई बाजी
ब्लूमबर्ग के आंकड़े बताते हैं कि नवंबर 2020 में एलन मस्क की टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में ऐतिहासिक उछाल आने की वजह से एलन मस्क की संपत्ति में भारी बढ़ोतरी हुई और वह तेजी से दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति की रेस में सबसे आगे निकल गए. नवंबर में टेस्ला के S&amp;amp;P 500 में शामिल होने की घोषणा के बाद एलन मस्क की नेटवर्थ तेजी से बढ़कर 170 बिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच गई थी, जबकी इसी वक्त अंबानी की संपत्ति करीब 90 बिलियन डॉलर के आस पास थी.
अब अंबानी-अडानी दोनों को मिलाकर भी आगे हैं एलन मस्क
फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के मुताबिक, एलन मस्क की कुल संपत्ति, भारत के दो सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की कुल संपत्ति को मिलाकर भी ज्यादा है. इस वक्त एलन मस्क की संपत्ति एक ट्रिलियन डॉलर है. जबकि मुकेश अंबानी की संपत्ति सिर्फ 78.9 बिलियन डॉलर है, वहीं अडानी की संपत्ति 76 बिलियन डॉलर है. यानी अंबानी और अडानी की संपत्ति को मिला दिया जाए (154.9 बिलियन डॉलर) तो भी दोनों की संपत्ति एलन मस्क से 845.1 बिलियन डॉलर कम है.
गौरतलब है कि वर्तमान में एलन मस्क टेस्ला और स्पेसएक्स के अलावा एक्स (पहले ट्विटर), बोरिंग कंपनी, xAI के मालिक और संस्थापक, न्यूरलार्क और ओपनएआई के सह-संस्थापक हैं.बता दें कि फोर्ब्स की रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट में मुकेश अंबानी वर्तमान में 25वें और गौतम अडानी 28वें नबंर पर हैं. लेकिन याद रहे कि संपत्ति शेयर कीमतों के साथ रोजाना बदलती रहती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;मस्क का अंबानी पर तीखा हमला, Starlink महंगा है तो फिर डर किस बात का? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कभी, एलन, मस्क, से, ज्यादा, अमीर, थे, मुकेश, अंबानी, फिर, कैसे, पलट, गई, बाजी</media:keywords>
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        <title>अपनी आंखें खोलें! 1.5 लाख का iPhone या परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस, क्या जरूरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अपनी-आंखें-खोलें-15-लाख-का-iphone-या-परिवार-का-हेल्थ-इंश्योरेंस-क्या-जरूरी</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में iPhone खरीदना कई लोगों का शौक बन चुका है. बेहतरीन कैमरा, शानदार फीचर्स और प्रीमियम लुक के लिए लोग लाखों रुपए खर्च करने को तैयार रहते हैं. ऐसे में अगर आपके पास भी 1.5 लाख रुपये हैं और आप नया iPhone खरदने का सोच रहे हैं, तो अपनी आंखें खोलें और एक बार परिवार की आर्थिक सुरक्षा के बारे में सोचें. महंगा फोन खरीदना आपका शौक हो सकता है, लेकिन परिवार के पास हेल्थ इंश्योरेंस न होना फ्यूचर में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है.
दरअसल, अचानक किसी की तबीयत बिगड़ने या हादसा होने पर अस्पताल का खर्च एक झटके में आपकी सालों की बचत को खत्म कर सकता है. इसलिए अपनी कमाई को शौक पूरे करने के लिए खर्च करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन-सी चीज आपकी जरूरत की है और कौन-सी सिर्फ शौक. हालांकि, अगर आपके पास काफी बचत और बीमा कवर है, तो महंगा फोन खरीदने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन अगर परिवार के पास हेल्थ इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड नहीं है, तो पहले इनका इंतजाम करना जरूरी है.
परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस क्यों है जरूरी?

मेडिकल खर्चों से सुरक्षा: अचानक बीमारी या हादसा होने पर अस्पताल का बिल लाखों रुपए तक पहुंच सकता है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पर बोझ पड़ सकता है. ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस इलाज के खर्च का बोझ कम करने में मदद कर सकती है.
बचत की सुरक्षा: बीमा न होने पर इलाज के खर्चों के लिए आपको अपनी जमा-पूंजी यानी FD तोड़नी पड़ सकती है, निवेश बेचना पड़ सकता है या कर्ज लेना पड़ सकता है.
इलाज के लिए बेहतर तैयारी: हेल्थ इंश्योरेंस होने से अचानक मेडिकल इमरजेंसी आने पर आर्थिक चिंता कुछ कम हो सकती है.
टैक्स में राहत: पात्रता और लागू नियमों के मुताबिक हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80D के तहत छूट मिल सकती है.&amp;nbsp;

1.5 लाख रुपए का सही इस्तेमाल कैसे करें?
अगर आपके पास 1.5 लाख रुपए से ज्यादा हैं, तो उन्हें खर्च करने से पहले अपनी कुछ वित्तीय जरूरतों को अहमियत दें.&amp;nbsp;

हेल्थ इंश्योरेंस: परिवार के सदस्यों की जरूरत, उम्र और मेडिकल स्थिति के हिसाब से पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लें.&amp;nbsp;
इमरजेंसी फंड: नौकरी जाने, अचानक बीमारी या किसी दूसरी जरूरत के समय काम आने के लिए बचत रखें. कोशिश करें कि आपके पास कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड तैयार हो.
म्यूचुअल फंड: जरूरी बचत और बीमा की व्यवस्था होने के बाद लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए अपनी जरूरत के मुताबिक SIP या अन्य निवेश के ऑप्शन में निवेश कर सकते हैं.&amp;nbsp;
बच्चों के भविष्य: अगर आपके बच्चे हैं, तो उनकी पढ़ाई और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए भी समय रहते बचत करना फायदेमंद हो सकता है.

सितंबर में 5.54% बढ़ी खुदरा महंगाई, खाने-पीने की चीजों के भी बढ़े दाम
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>धरावी के लिए नया सवेरा, प्रणव अडानी ने किया भूमि पूजन, मिलेंगे 350 sq ft के मकान</title>
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        <description><![CDATA[ देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में धारावी के निवासियों के सुंदर और सुरक्षित घर का सपना अब पूरा होने जा रहा है. धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत पुनर्वास निर्माण का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है. आज अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के निदेशक प्रणव अडानी ने 22 एकड़ की माटुंगा रेलवे साइट पर भूमि पूजन किया. समारोह में महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे.
यह परियोजना 22 एकड़ जमीन पर बनाई जा रही है. इसमें कुल 10 टावर बनेंगे. इनमें 10,432 पुनर्वास अपार्टमेंट और 1,379 व्यावसायिक और औद्योगिक यूनिट होंगे. हर पात्र परिवार को 350 वर्ग फुट का घर मिलेगा. यह घर इन-सीटू पुनर्वास योजना के तहत दिए जाएंगे. अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (ANDPL) इस परियोजना को संभाल रही है.
बेहतर जीवन जी सकेंगे लोग- प्रणव अडानी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रणव अडानी ने कहा, &amp;ldquo;हर परिवार को ऐसा घर चाहिए, जहां वह सुरक्षित महसूस करे और अपने बच्चों के भविष्य की योजना बना सके. हम धरावी के परिवारों की भावनाओं को समझते हैं. माटुंगा में हम 10 टावर बना रहे हैं. इनमें 10 हजार 432 घर और 1379 व्यावसायिक यूनिट होंगे. यहां परिवार बेहतर जीवन जी सकेंगे.&amp;rdquo;
इस दौरान झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण के सीईओ डॉ. महेंद्र काल्याणकर ने कहा, &amp;ldquo;यह धरावी के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. हमारा ध्यान सुरक्षित और आधुनिक घर देने पर है. साथ ही अच्छी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी.&amp;rdquo;
तीन चरणों में सौंपे जाएंगे 10 टावर
बता दें कि पहले सेक्टर 6 और सेक्टर 1 के पात्र निवासियों को माटुंगा में घर दिए जाएंगे. इसके बाद लगभग 4,500 अन्य पात्र परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर घर मिलेंगे. 10 टावर तीन चरणों में सौंपे जाएंगे. पहले पांच टावर मार्च 2029 तक तैयार हो जाएंगे. अगले दो टावर अगस्त 2029 तक और बाकी तीन टावर अगस्त 2030 तक सौंप दिए जाएंगे.
हर टावर 37 से 39 मंजिला होगा. इसमें 10 से 12 पैसेंजर लिफ्ट और दो फायर लिफ्ट होंगी. व्यावसायिक यूनिट के लिए अलग से दो लिफ्ट भी होंगी. सुविधाओं में किंडरगार्टन, सामुदायिक हॉल, पोडियम गार्डन, बैठने की जगह, सोसाइटी ऑफिस और पूजा स्थल शामिल हैं. हर पुनर्वास इमारत में 10 प्रतिशत व्यावसायिक जगह ऐसी रखी जाएगी, जिससे आम सुविधाओं के रखरखाव का खर्च निकले. अडानी नवभारत डेवलपर्स इमारतों और साझा सुविधाओं का 10 साल तक रखरखाव करेगी.
22,500 वर्ग फुट में फैला है सेंटर
इस भूमि पूजन से पहले गांधी जयंती पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धरावी एक्सपीरियंस सेंटर का उद्घाटन किया था. वहां लोग नए घरों का मॉडल, 3डी वॉकथ्रू और अन्य सुविधाएं देख सकते हैं. सेंटर 22,500 वर्ग फुट में फैला है. ANDPL के सीईओ अनिल सरदाना ने कहा, &amp;ldquo;एक्सपीरियंस सेंटर में लोगों ने नए घरों को करीब से देखा. अब निर्माण शुरू हो गया है. हमारा ध्यान समय पर घर सौंपने और लंबे समय तक रखरखाव पर है.&amp;rdquo;
पूरे प्रोजेक्ट में दुकानें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पार्क, पूजा स्थल और अच्छी परिवहन व्यवस्था भी होगी. जरूरी सुविधाएं 15 मिनट की पैदल दूरी में उपलब्ध रहेंगी. यह परियोजना धरावी के लोगों को सुरक्षित घर, बेहतर सुविधाएं और अच्छा भविष्य देने के लिए शुरू की गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जुलाई 2027 तक का अल्टीमेटम, पूरी तरह से बंद होंगी पेट्रोल वाली बाइक टैक्सी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी से सफर करते हैं या इस सेवा के जरिए अपनी कमाई करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है. राज्य में बाइक टैक्सी चलाने वाले ऑपरेटरों को पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक बाइक अपनाने के लिए जुलाई 2027 तक का समय दिया गया है. इस बदलाव का खास मकसद शहरों में बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है.
दरअसल, पेट्रोल वाली बाइक से इलेक्ट्रिक वाहन पर जाना ऑपरेटरों के लिए इतना आसान नहीं होगा. ऐसे में इन नियम लागू करने के लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पद सकता है. इसके लिए नई बाइक खरीदने का खर्च, चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता, बैटरी बदलने की सुविधा और समय पर मरम्मत जैसी व्यवस्थाएं जरूरी होंगी.&amp;nbsp;
क्या है पेट्रोल बाइक टैक्सी को लेकर नया बदलाव?
महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी ऑपरेटरों को पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट होने के लिए जुलाई 2027 तक यानी नौ महीने की समय सीमा दी गई है. इसके तहत अब कंपनियों को अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को पहले मुकाबले ज्यादा बढ़ाने की तैयारी करनी होगी.
इसके अलावा वाहन संचालकों को नई इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने और उन्हें चलाने के खर्च की प्लानिंग पहले से बनानी होगी. साथ ही, वाहन चालकों को नियमों, लाइसेंस और इलेक्ट्रिक वाहनों की पात्रता को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलना भी जरूरी होगा, ताकि ऑपरेटर समय रहते निवेश कर सकें और उनकी कमाई पर ज्यादा असर न पड़े.&amp;nbsp;
इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी अपनाने में क्या होंगी चुनौतियां?

नई बाइक खरीदने का खर्च: अब पेट्रोल बाइक की जगह इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने के लिए चालकों और कंपनियों को शुरुआती निवेश करना होगा. इसके लिए उन्हें आसान फाइनेंसिंग या कर्ज की जरूरत पड़ सकती है.
चार्जिंग की सुविधा: अकसर बाइक टैक्सी चलाने वाले चालक लंबे समय तक सड़क पर रहते हैं. ऐसे में उन्हें आसानी से चार्जिंग स्टेशन मिलने चाहिए, ताकि चार्जिंग के कारण उनकी कमाई में किसी भी तरह की रुकावट न आए.
बैटरी बदलने की सुविधा: जहां बैटरी स्वैपिंग की व्यवस्था मौजूद होगी, वहां जरूरत पड़ने पर खाली बैटरी की जगह चार्ज बैटरी लगाकर काम जल्दी शुरू किया जा सकेगा.
मरम्मत और सर्विस: इलेक्ट्रिक बाइक खराब होने के कारण चालकों की कमाई प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रशिक्षित तकनीशियनों की मदद और समय पर मरम्मत मिलना जरूरी होगा.

क्या सस्ता होगा डीजल? रूस के नए फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>महिला ने 20 करोड़ में खरीदी 196 पार्किंग, फिर मनमाना किराया वसूला, कोर्ट पहुंचा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपको भी लगता है कि रियल एस्टेट में सिर्फ मकान और जमीन खरीदकर ही ज्यादा पैसे कमाए जा सकते हैं, तो चीन का यह मामला आपको हैरान कर सकता है. चीन में एक महिला ने 2 मिलियन डॉलर यानी करीब 20 करोड़ रुपए खर्च करके 196 पार्किंग स्पेस खरीद लिए. इसके बाद जब इलाके में विकास हुआ और पार्किंग की मांग बढ़ने लगी, तो महिला ने इन जगहों को किराए पर देना और ऊंची कीमतों में बेचना शुरू कर दिया. इससे सथानीय निवासी नाराज हो गए और यह मामला अदालत तक पहुंच गया.&amp;nbsp;
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला चीन के हुनान प्रांत के चांग्शा शहर का है. महिला ने उस समय इस पार्किंग स्पेस की खरीदारी की थी, जब वहां की आवासीय परियोजना को लेकर लोगों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी. हालांकि, इलाके का विकास होने और पार्किंग की मांग बढ़ने के बाद उनकी संपत्ति की कीमत भी बढ़ गई.
कैसे महिला ने 20 करोड़ रुपये में खरीदे 196 पार्किंग?
दरअसल, इस मामले की शुरुआत साल 2018 में हुई थी. उस समय इस इलाके में स्कूल, दुकानें और परिवहन जैसी जरूरी सुविधाओं की काफी कमी थी, जिसके कारण फ्लैट और पार्किंग खरीदने में लोग ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे.
इसी दौरान वू नाम की महिला ने स्थानीय विकास योजनाओं का आकलन किया और फ्यूचर में इलाके की मांग बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए निवेश करने का फैसला किया. उन्होंने आर्थिक परेशानी से जूझ रहे डेवलपर से एक ही सौदे में 196 पार्किंग स्पेस खरीद लिए. इसके लिए उन्होंने करीब 14 मिलियन युआन यानी करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए. ये पार्किंग स्पेस उस आवासीय परिसर की कुल पार्किंग जगहों का करीब 40% थे.
मांग बढ़ते ही किराए और कीमतों में उछाल
वक्त के साथ-साथ इलाके का विकास हुआ और आवासीय फ्लैटों की बिक्री तेजी से बढ़ने लगी. इसके साथ ही पार्किंग की मांग भी बढ़ गई. बाद में महिला ने अपने खरीदे गए पार्किंग स्पेस पर ताले लगवा दिए, ताकि कोई उनका अनधिकृत इस्तेमाल न कर सके.
इसके बाद उन्होंने एक पार्किंग स्पेस का मासिक किराया करीब 7,258 रुपये रखना शुरू किया. वहीं, कुछ पार्किंग स्पेस को करीब 14.52 लाख रुपये प्रति स्थान की कीमत पर बिक्री के लिए भी रखा. इससे स्थानीय निवासी नाराज हो गए, क्योंकि उन्हें पहले से ही पार्किंग की कमी का सामना करना पड़ रहा था.
कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
पार्किंग की कमी और बढ़ते किराये से परेशान निवासियों ने वू से किराया घटाने और पार्किंग स्पेस को पुरानी कीमतों पर बेचने की मांग की, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. सरकारी अधिकारियों की मध्यस्थता भी सफल नहीं हुई, जिसके बाद निवासियों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया.&amp;nbsp;
अदालत ने महिला के पक्ष में सुनाया फैसला
फरवरी 2024 में चांग्शा की स्थानीय अदालत ने वू के पक्ष में फैसला दिया. अदालत ने कहा कि जब डेवलपर ने पार्किंग स्पेस बिक्री के लिए उपलब्ध कराए थे, तब सभी निवासियों के पास उन्हें खरीदने का अच्छा मौका था. वू ने अपने पैसे लगाए और निवेश का जोखिम भी उठाया था. इसलिए महिला की थोक खरीदारी को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता.
जुलाई 2027 तक का अल्टीमेटम, पूरी तरह से बंद होंगी पेट्रोल वाली बाइक टैक्सी
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>UPI MDR फ्रेमवर्क में संशोधन जरूरी, रिपोर्ट में IIT बॉम्बे</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी UPI के जरिए दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पेमेंट करते हैं, तो इससे जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है. IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नियमों में बदलाव करने की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए ऐसा चार्ज तय करना जरूरी है, जिससे कारोबारियों पर ज्यादा बोझ न पड़े और लोगों का UPI पर भरोसा भी बना रहे.
दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कुछ UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले इसमें सुधार किया जाना चाहिए. इस रिपोर्ट में खासतौर पर बड़े कारोबारियों से शुल्क लेने, जरूरी सेवाओं और लोन की EMI के पेमेंट को राहत देने की सुझाव दी गई है.
किन कारोबारियों से MDR वसूलने का सुझाव?
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सालाना 50 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा कारोबार करने वाले व्यापारियों पर MDR लगाने पर विचार किया जाए. खासतौर पर इससे छोटे कारोबारियों को एक्स्ट्रा चार्ज के बोझ से बचाने में मदद मिल सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरीके से NPCI के प्रस्तावित MDR से मिलने वाली करीब 90% रकम हासिल की जा सकती है.
हालांकि, ई-कॉमर्स कंपनियों से भी UPI पेमेंट पर उचित शुल्क लेने का सुझाव दिया गया है, क्योंकि ऑनलाइन खरीदारी में नकद पेमेंट की सुविधा लिमिट में होती है और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है.
किन UPI भुगतानों पर शुल्क से राहत देने की सिफारिश?
रिपोर्ट में UPI के जरिए लोन की EMI चुकाने और कर्ज की वसूली से जुड़े भुगतानों को MDR से बाहर रखने की सिफारिश की गई है, ताकि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े. डिजिटल माध्यम से कर्ज चुकाना नकद या चेक के मुकाबले ज्यादा आसान और कम खर्चीला हो सकता है.
&amp;nbsp;UPI शुल्क पर फैसला कौन करेगा?
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि UPI पर MDR से जुड़े फैसले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के तहत लेने चाहिए. इसका मकसद शुल्क व्यवस्था को साफ और संतुलित बनाना है, ताकि आम लोगों और व्यापारियों के बीच UPI की लोकप्रियता बनी रहे.&amp;nbsp;
महिला ने 20 करोड़ में खरीदी 196 पार्किंग, फिर मनमाना किराया वसूला, कोर्ट पहुंचा मामला
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>5 रुपया महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल का दाम भी उछला; जानें किसने अचानक बढ़ाई कीमत?</title>
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        <description><![CDATA[ घर से निकलने से पहले यह जरूर देख लें कि आज पेट्रोल-डीजल का क्या भाव चल रहा है क्योंकि आज एक और प्राइवेट फ्यूल कंपनी ने ईंधन के रेट में इजाफा किया है. बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की सपोर्ट वाली Jio-bp ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें कल से यानी कि रविवार, 11 अक्टूबर को ही सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं. कीमतें बदलने के बाद हरियाणा में Jio-bp के आउटलेट्स पर पेट्रोल लगभग 109.80 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.75 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है.&amp;nbsp;
पंजाब और राजस्थान में क्या है रेट?
पंजाब में जियो-बीपी के आउटलेट्स पर पेट्रोल लगभग 108.54 रुपये और डीजल 99.19 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है. वहीं, राजस्थान में इस कंपनी के पेट्रोल पंप पर पेट्रोल 113.91 से 117.65 रुपये (स्थानीय टैक्स के आधार पर) और डीजल 97.15 से 100.78 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा है.
नायरा ने भी बढाई कीमत
जियो-बीपी से पहले 3 अक्टूबर को एक और निजी तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमत में इतनी ही बढ़ोतरी की थी. दरअसल, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ने से मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ा है इसलिए कंपनियों को दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं. देश भर में नायरा के 7,000 से ज्यादा आउटलेट्स हैं.&amp;nbsp;
इस बीच, सरकारी कंपनियों- इंडियन ऑयल, BPCL और HPCLने रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे प्राइवेट रिटेलर्स के मुकाबले कीमतों में अंतर बढ़ गया है.
आज कितनी है पेट्रोल-डीजल की कीमत?
आज 12 अक्टूबर को देश भर में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. हालांकि, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. सरकारी तेल कंपनियों के कीमतों को स्थिर रखने से इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच ग्राहकों को कुछ राहत मिली है.
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटरहै. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है. इससे पता चलता है कि दूसरे मेट्रो शहरों के मुकाबले देश की राजधानी में ईंधन की कीमतें कम हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोमवार, 12 अक्टूबर को बंद रहेंगे बैंक? RBI की छुट्टी का अपडेट जानें</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को बैंक में कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें. बैंक बंद होने पर कैश जमा करने, चेक से जुड़े काम और दूसरी बैंकिंग सेवाओं के लिए ब्रांच नहीं जा पाएंगे. वैसे, अच्छी बात ये है कि 12 अक्टूबर को देशभर में बैंकों की छुट्टी नहीं है. RBI के अक्टूबर बैंक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, इस दिन ज्यादातर राज्यों में बैंक खुले रहेंगे.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर साल बैंक छुट्टियों की सूची जारी करता है. ये छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं. कुछ छुट्टियां राष्ट्रीय स्तर पर लागू होती हैं, जबकि कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहारों और खास मौकों के कारण बैंक बंद रहते हैं.
12 अक्टूबर को बैंक बंद हैं या खुले?12 अक्टूबर 2026 को सोमवार है. इस दिन RBI के बैंक हॉलिडे कैलेंडर में देशभर के लिए कोई सामान्य बैंक छुट्टी दर्ज नहीं है. ऐसे में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और ज्यादातर अन्य राज्यों में बैंक खुले रहने की उम्मीद है.
हालांकि, किसी शहर या राज्य में स्थानीय स्तर पर अलग छुट्टी घोषित होने की स्थिति में बैंक की शाखा बंद हो सकती है. इसलिए बैंक जाने से पहले अपने शहर में बैंक की छुट्टियों की सूची चेक कर लेना आपके लिए सही रहेगा.&amp;nbsp;
अक्टूबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

12 अक्टूबर, सोमवार- बैंक खुले हैं&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
17 अक्टूबर, शनिवार- अगरतला में महा सप्तमी की छुट्टी है&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
18 अक्टूबर, रविवार- साप्ताहिक अवकाश है&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
19 अक्टूबर, सोमवार- कई राज्यों में दुर्गा पूजा/महानवमी की छुट्टी है&amp;nbsp;
20 अक्टूबर, मंगलवार- कई शहरों में दशहरा/विजयादशमी की छुट्टी है&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
21 अक्टूबर, बुधवार- कुछ राज्यों में विजयादशमी/दुर्गा पूजा की छुट्टी है&amp;nbsp;
24 अक्टूबर, शनिवार- महीने का चौथा शनिवार है&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
25 अक्टूबर, रविवार- साप्ताहिक अवकाश है&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;

बैंक जाने से पहले क्या करें?
अगर आपको सोमवार को बैंक में जरूरी काम है, तो अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या RBI की छुट्टियों की सूची में संबंधित शहर का नाम जरूर देखें. इससे बेवजह बैंक जाने से बच सकते हैं और अपना काम समय पर पूरा कर सकते हैं. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
5 रुपया महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल का दाम भी उछला; जानें किसने अचानक बढ़ाई कीमत?
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोमवार, अक्टूबर, को, बंद, रहेंगे, बैंक, RBI, की, छुट्टी, का, अपडेट, जानें</media:keywords>
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        <title>ध्रुव राठी के पास कैसे आए 58 करोड़? जर्मनी या भारत, कहां से ज्यादा कमाते हैं यूट्यूबर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ध्रुव-राठी-के-पास-कैसे-आए-58-करोड़-जर्मनी-या-भारत-कहां-से-ज्यादा-कमाते-हैं-यूट्यूबर</link>
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        <description><![CDATA[ यूट्यूबर ध्रुव राठी इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं. राजनीति और देश-दुनिया के मुद्दों पर वीडियो बनाने वाले ध्रुव राठी की कमाई और नेटवर्थ को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है. मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी कुल संपत्ति करीब 58 करोड़ रुपए बताई जा रही है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर ध्रुव राठी इतने पैसे कैसे कमाते हैं? क्या उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया यूट्यूब है या फिर उनके दूसरे बिजनेस भी हैं?
ध्रुव राठी ने कभी भी सार्वजनिक रूप से अपनी पूरी संपत्ति, कमाई ब्योरा नहीं दिया है. 58 करोड़ उनकी अनुमानित नेट वर्थ है. साथ ही उनके पास Tesla, Range Rover, BMW और Mercedes-Benz जैसी गाड़ियों भी हैं. लेकिन अभी कमाई के आंकड़े से भी बड़ा सवाल ये है कि जर्मनी में रहने वाले ध्रुव राठी भारत से ज्यादा कमाते हैं या जर्मनी से?
ध्रुव राठी की कमाई कैसे होती है?ध्रुव राठी की कमाई का सबसे ज्यादा यूट्यूब से होती है. उनके वीडियो राजनीति, अर्थव्यवस्था, इतिहास, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर होते हैं. इन वीडियो को काफी ज्यादा लोग देखते हैं और यूट्यूब इन्हें इसके लिए पे करता है. इसके अलावा जब किसी वीडियो पर एड दिखाए जाते हैं, तो उससे क्रिएटर की कमाई होती है.
यूट्यूब से होने वाली कमाई सिर्फ सब्सक्राइबर्स पर निर्भर नहीं है. वीडियो कितने लोगों ने देखा, दर्शक किस देश से हैं, वीडियो कितनी देर देखा गया और विज्ञापन देने वाली कंपनियां कितना खर्च कर रही हैं, इन सभी बातों का असर कमाई पर पड़ता है. ध्रुव राठी के चैनल के अलावा एक व्लॉग और शॉर्ट्स कंटेंट चैनल भी हैं. इससे वह अलग-अलग तरह के दर्शकों तक पहुंचते हैं. लेकिन, उनके हर महीने यूट्यूब से होने वाली कमाई का कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है.&amp;nbsp;
ब्रांड डील से होती है कमाई?बड़े डिजिटल क्रिएटर्स की कमाई सिर्फ एड तक लिमिट नहीं रहती है. कंपनियां अपने प्रोडक्ट और सर्विस का प्रचार करने के लिए क्रिएटर्स के साथ पार्टनरशिप करती हैं. इसके बदले उन्हें पेमेंट किया जाता है. ध्रुव राठी जैसे बड़े क्रिएटर के लिए ब्रांड पार्टनरशिप और स्पॉन्सरशिप भी कमाई का जरिया है.
ऑनलाइन कोर्स से कितना पैसा आता है?ध्रुव राठी के दूसरे व्यावसायिक काम भी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कमाई ऑनलाइन कोर्स, मर्चेंडाइज और AI Fiesta नाम का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से भी होती है. हालांकि, इन सभी बिजनेस से ध्रुव राठी को कितनी आमदनी होती है, इसका भी ब्योरा उन्होंने कभी सार्वजनिक नहीं किया.&amp;nbsp;
क्या हर महीने कमाते हैं 60 लाख रुपए?कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ध्रुव राठी की हर महीने की कमाई करीब 60 लाख रुपए है. लेकिन इस रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
वैसे डिजिटल क्रिएटर की आमदनी हर महीने एक जैसी नहीं होती है. किसी महीने वीडियो पर ज्यादा व्यूज आ सकते हैं, तो किसी महीने कम. विज्ञापन, स्पॉन्सरशिप, बिजनेस की बिक्री और दूसरे सोर्स से होने वाली आय भी बदल सकती है. इसके अलावा, कुल कमाई और व्यक्तिगत मुनाफे में अंतर होता है. कंटेंट बनाने, टीम रखने, कारोबार चलाने, टैक्स और दूसरे खर्चों के बाद हाथ में बचने वाले पैसे अलग हो सकते हैं.&amp;nbsp;
जर्मनी या भारत, कहां से होती है ज्यादा कमाई?ध्रुव राठी जर्मनी में रहते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनकी सारी कमाई जर्मनी से ही होती है. वो भारतीय दर्शकों के लिए हिंदी में वीडियो बनाते हैं और उनके कंटेंट को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में देखा जा सकता है.
यूट्यूब की कमाई में दर्शकों की लोकेशन अहम होती है. अलग-अलग देशों में एड की रेट अलग होती हैं. इसलिए ऐसा हो सकता है कि किसी वीडियो को भारत में ज्यादा व्यूज मिलें, लेकिन दूसरे देश के दर्शकों से प्रति व्यू कमाई अलग हो. फिर भी सिर्फ इस आधार पर ये तय नहीं किया जा सकता कि ध्रुव राठी भारत से ज्यादा कमाते हैं या जर्मनी से. उनकी भारत और जर्मनी से होने वाली कमाई का अलग-अलग आंकड़ों का पब्लिक ऐलान नहीं है.&amp;nbsp;
8th Pay Commission: रेलवे सुपरवाइजर्स की मांग, वार्षिक वेतन वृद्धि 5% की जाए
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI का बड़ा एक्शन, क्या डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा रुपया?</title>
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        <description><![CDATA[ डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार आ रही कमजोरी को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग कम करने और रुपये पर दबाव घटाने के लिए कई नए नियम लागू करने का फैसला किया है. खास बात यह है कि RBI इन कदमों के जरिए रुपये को संभालना चाहता है, लेकिन ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करके अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा नहीं करना चाहता.
रुपये की कमजोरी के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से पैसा निकालने जैसे कारण हैं. ऐसे में RBI के इन कदमों का कितना फायदा होगा, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगा.
RBI ने क्या कदम उठाए?RBI ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है. इसके तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत सीधे RBI से पूरी कर सकेंगी. यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी. आमतौर पर तेल कंपनियों को विदेश से कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर की जरूरत होती है. इसके लिए वे बाजार से डॉलर खरीदती हैं. जब बड़ी कंपनियां एक साथ ज्यादा डॉलर खरीदती हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ता है. अब इन कंपनियों को सीधे RBI से डॉलर मिलने पर बाजार में डॉलर की मांग कम करने में मदद मिल सकती है.
इसके अलावा, RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए हैं. जिन सौदों के पीछे वास्तविक लेनदेन या जरूरत नहीं है, उनमें डॉलर से जुड़ी पोजिशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है. साथ ही, रुपये से जुड़े कुछ रद्द किए गए फॉरेक्स कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर भी रोक लगाई गई है.
20% रिजर्व का नियम क्या है?RBI ने विदेशी मुद्रा जोखिम से बचने के लिए किए जाने वाले कुछ बड़े सौदों पर भी नया नियम लागू किया है. इसके तहत पात्र विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के लिए बैंकों को सौदे की कुल निर्धारित रकम का 20% विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व के तौर पर रखना होगा. ये नियम उन पात्र सौदों पर लागू होगा, जिनमें कंपनियां रुपये में भुगतान करके विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए अपने करेंट अकाउंट से जुड़े जोखिम को कम करना चाहती हैं. 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा के पात्र हेजिंग सौदों पर इसका असर पड़ सकता है.
इसका मकसद कंपनियों और कारोबारियों को जरूरत से ज्यादा हेजिंग करने से रोकना है. हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू भी है. जिन कंपनियों को सच में आयात के लिए डॉलर चाहिए, उनके लिए रुपये में जोखिम से बचाव करना महंगा हो सकता है. स्टील, ऑटो, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की कंपनियों पर इसका असर पड़ने की आशंका है.
क्या अब डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा रुपया?RBI के इन कदमों से रुपये को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. बाजार से डॉलर की एक्स्ट्रा मांग कम होने पर रुपये पर पड़ने वाला दबाव घट सकता है. कुछ बैंकर्स को उम्मीद है कि रुपया डॉलर के मुकाबले 95 से 95.50 के स्तर तक पहुंच सकता है. हालांकि, यह बाजार के अनुमान हैं, कोई गारंटी नहीं.
रुपये की चाल सिर्फ RBI के फैसलों से तय नहीं होगी. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है और इसके भुगतान के लिए डॉलर चाहिए. ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये को कमजोर कर सकती है.
इसके अलावा, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने या वहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं. अगर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों और बॉन्ड में पैसा लगाते हैं, तो डॉलर की आवक बढ़ सकती है. इससे रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद रहती है.
RBI ब्याज दरें बढ़ाने से क्यों बचना चाहता है?रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी करना एक ऑप्शन हो सकता है. लेकिन इससे होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो सकते हैं. कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और लोगों के खर्च करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है.
RBI की कोशिश है कि रुपये में स्थिरता आए, लेकिन आर्थिक विकास की रफ्तार पर बहुत ज्यादा असर न पड़े. इसलिए फिलहाल केंद्रीय बैंक ने डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने पर जोर दिया है. हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, डॉलर मजबूत बना रहता है और विदेशी निवेशकों का पैसा बाहर जाता रहता है, तो RBI पर आगे और सख्त कदम उठाने का दबाव बन सकता है.
ध्रुव राठी के पास कैसे आए 58 करोड़? जर्मनी या भारत, कहां से ज्यादा कमाते हैं यूट्यूबर
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>सोने&amp; चांदी के भाव में कितना बदलाव, जानें दिल्ली से पटना तक 24K, 22K और 18K के रेट</title>
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        <description><![CDATA[ रविवार को सोना खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले आज का ताजा भाव जान लीजिए. सोने की कीमतों पर हर दिन लोगों की नजर रहती है, खासकर उन लोगों की जो शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं या सोने में निवेश करना चाहते हैं. 11 अक्टूबर 2026 को 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव में क्या बदलाव हुआ है, ये जानना जरूरी है.
सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल और घरेलू मांग जैसे कई कारणों से प्रभावित होती हैं. अलग-अलग शहरों में भी सोने के भाव में अंतर देखने को मिल सकता है. ऐसे में गहने खरीदने से पहले अपने शहर का रेट जरूर चेक कर लें.
आज कितना है सोने का भाव?&amp;nbsp;24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है. वहीं, गहने बनाने के लिए आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है. 18 कैरेट सोने में दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे यह अलग-अलग तरह के डिजाइन वाले गहने बनाने के काम आता है.
11 अक्टूबर के बाजार आंकड़ों के मुताबिक, सोने के भाव अलग-अलग सोर्स पर अलग-अलग दिख रहे हैं. एक रेट ट्रैकर के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट की करीब 1.37 लाख रुपए और 18 कैरेट की करीब 1.12 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम है.&amp;nbsp;
कितना है चांदी का भाव?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंजपर आज चांदी 2,25,820 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा है. पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,2,575 रुपए प्रति किलो पर बंद हुई थी. बुलियंस के मुताबिक चांदी की कीमत 2,26,100 रुपए किलो हो गई है.&amp;nbsp;
24 कैरेट और 22 कैरेट सोने में क्या अंतर है?24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध माना जाता है, लेकिन यह अपेक्षाकृत नरम होता है. इसी वजह से इससे आमतौर पर रोजमर्रा में पहने जाने वाले मजबूत गहने नहीं बनाए जाते हैं. निवेश के लिए सोने के सिक्के और बार में 24 कैरेट सोना इस्तेमाल किया जाता है.
दूसरी ओर, 22 कैरेट सोने में थोड़ी मात्रा में दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं. इससे गहने ज्यादा मजबूत बनते हैं. इसी कारण शादी-ब्याह और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले ज्यादातर पारंपरिक गहने 22 कैरेट सोने से बनाए जाते हैं.
सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यानअगर आप आज सोने के गहने खरीदने जा रहे हैं, तो सिर्फ प्रति 10 ग्राम का भाव देखकर फैसला न करें. ज्वेलर से सोने की शुद्धता, हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और अंतिम बिल की जानकारी जरूर लें. अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज में भी अंतर हो सकता है. इसके अलावा, सोने की कीमत दिन के दौरान भी बदल सकती है. इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा रेट पता कर लें.&amp;nbsp;
ध्रुव राठी के पास कैसे आए 58 करोड़? जर्मनी या भारत, कहां से ज्यादा कमाते हैं यूट्यूबर
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोने-, चांदी, के, भाव, में, कितना, बदलाव, जानें, दिल्ली, से, पटना, तक, 24K, 22K, और, 18K, के, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>पुराने 5 के नोट के बदले 17 लाख का लालच, गुजरात के किसान से 1 लाख की ठगी</title>
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        <description><![CDATA[ आज के डिजिटल जमाने में साइबर ठग सोशल मीडिया के जरिए नए-नए पैंतरे अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अगर आपके पास भी कोई पुराना नोट या सिक्का है और आप उन्हें बेचकर लाखों रुपए कमाने का सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। गुजरात में एक किसान को पुराने 5 रुपये के नोट के बदले 17 लाख रुपये देने का लालच दिया गया।
ज्यादा पैसे कमाने की उम्मीद में किसान ने तीन दिनों तक पैसे भेजे, लेकिन उसे लाखों रुपए मिलने के बजाय 1,06,400 रुपए का नुकसान हो गया। आइए जानते हैं कि किसान ऑनलाइन ठगी के जाल में कैसे फंसे और उन्हें किन तरीकों से पैसे देने के लिए मजबूर किया गया.
कैसे शुरू हुआ पुराने नोट के नाम पर ठगी का खेल?
यह मामला वडोदरा के जुनी सायेर गांव के रहने वाले एक 42 वर्षीय किसान महेंद्रभाई का है। घटना से करीब 15 दिन पहले किसान मोबाइल पर रील देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें फेसबुक एक स्किप दिखाई दिया, जिसमें पुराने 5 रुपये के नोट के बदले 17 लाख रुपये देने का दावा किया गया था. किसान के पास भी ऐसे दो नोट मौजूद थे। उन्होंने विज्ञापन में दिए गए नंबर से संपर्क किया और WhatsApp के जरिए दोनों नोटों की तस्वीरें भेज दीं.
6 अक्टूबर को किसान के पास एक व्यक्ति का फोन आया। उसने बताया कि दो नोट लेने के लिए आपके पास एक व्यक्ति आएगा और बदले में 34 लाख रुपए वाला पार्सल दिया जाएगा। इसके बाद पार्सल की डिलीवरी के नाम पर किसान से 750 रुपये मांगे गए. फोन पर मिले क्यूआर कोड के जरिए उन्होंने यह रकम ट्रांसफर कर दी.
तीन दिनों में गंवा दिए 1.06 लाख रुपये
इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को ठगों ने फोन करके बताया गया कि पार्सल लेकर जाने वाले व्यक्ति को पकड़ लिया गया है. उसे छुड़ाने के नाम पर 25,500 रुपये की मांग की गई. लाखों रुपये मिलने की उम्मीद में किसान ने यह रकम भी भेज दी. लेकिन 8 अक्टूबर को ठगों ने एक बार फिर फोन किया और अपने कुछ लोगों को पकड़े जाने का बहाना बनाकर 53,000 रुपए मांगे।
&amp;nbsp;पैसे मिलने के उम्मीद में किसान ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते रहे और इस तरह 6 से 8 अक्टूबर के बीच उन्होंने कुल 1,06,400 रुपए गंवा दिए। बाद में किसान को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।&amp;nbsp;
पुराने नोट बेचने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

सोशल मीडिया पर पुराने नोट या सिक्के के बदले लाखों रुपये देने वाले विज्ञापनों पर आंख बंद करके भरोसा न करें.
नोट खरीदने या पार्सल भेजने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को एडवांस पैसे न दें.
किसी अनजान व्यक्ति के भेजे क्यूआर कोड को स्कैन करने या उसके कहने पर पेमेंट करने से पहले पूरी जांच करें.

सोने- चांदी के भाव में कितना बदलाव, जानें दिल्ली से पटना तक 24K, 22K और 18K के रेट
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 19:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>इमरजेंसी के लिए 5 लाख कहां रखें, FD, सेविंग्स या लिक्विड फंड?</title>
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        <description><![CDATA[ अचानक नौकरी छूट जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या घर में कोई बड़ा खर्च सामने खड़ा हो जाए, तो ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा जरूरत उस पैसे की होती है जिसे बिना किसी परेशानी के तुरंत निकाला जा सके। इसी वजह से इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी माना जाता है.लेकिन अगर आपके पास 5 लाख रुपये की बचत है, तो इसे कहां रखना बेहतर होगा? बैंक के सेविंग अकाउंट में, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में या लिक्विड म्यूचुअल फंड में? सही विकल्प चुनने से पहले इनके फायदे और सीमाएं समझना जरूरी है.
इमरजेंसी फंड का एक हिस्सा सेविंग अकाउंट में रखना उपयोगी साबित हो सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से निकाला जा सकता है. अचानक अस्पताल का बिल भरना हो या कोई जरूरी भुगतान करना हो, तो निवेश भुनाने का इंतजार नहीं करना पड़ता. हालांकि, सामान्य बचत खातों पर ब्याज अपेक्षाकृत कम मिल सकता है. इसलिए पूरी रकम इसी खाते में रखने से बेहतर रिटर्न पाने के अवसर सीमित हो सकते हैं.
FD पर निश्चित ब्याज का विकल्प
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपनी रकम पर पहले से तय ब्याज पाना चाहते हैं. इसकी ब्याज दर बैंक और जमा की अवधि के अनुसार अलग-अलग होती है. लेकिन FD में पैसा जमा करने से पहले समय से पहले निकासी की शर्तें जरूर जांचनी चाहिए. जरूरत के समय मैच्योरिटी से पहले रकम निकालने पर पेनल्टी लग सकती है या ब्याज कम मिल सकता है. इसलिए पूरी इमरजेंसी बचत को लंबी अवधि की FD में रखना सुविधाजनक नहीं होता.
लिक्विड म्यूचुअल फंड
लिक्विड म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से छोटी अवधि के डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं. इनमें पैसा अपेक्षाकृत जल्दी निकाला जा सकता है, लेकिन रकम बैंक खाते में आने में समय लग सकता है. इनका रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती. इसलिए इन्हें पूरी तरह जोखिम-मुक्त विकल्प नहीं समझना चाहिए.
5 लाख रुपये को कैसे बांट सकते हैं?
बैंक बाजार के CEO अधिल शेट्टी के सुझाव के मुताबिक, उदाहरण के तौर पर 5 लाख के इमरजेंसी फंड को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है:
1 लाख- सेविंग अकाउंट में, ताकि तुरंत जरूरत पूरी हो सके.2 लाख- FD में, जिससे तय शर्तों के अनुसार ब्याज मिल सके.2 लाख- लिक्विड म्यूचुअल फंड में, जहां से जरूरत के मुताबिक रकम निकालने का विकल्प हो.
यह केवल एक उदाहरण है, हर व्यक्ति के लिए यही बंटवारा जरूरी नहीं है. सही अनुपात आपकी मासिक जरूरतों, नौकरी की स्थिरता और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करेगा.
सबसे ज्यादा रिटर्न नहीं, सुरक्षा है प्राथमिकता
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य अधिकतम मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में आर्थिक सहारा देना है. इसलिए निवेश का विकल्प चुनते समय पैसे की उपलब्धता, मूल रकम की सुरक्षा और निकासी की शर्तों को प्राथमिकता दें. जरूरत के हिसाब से सेविंग अकाउंट, FD और लिक्विड फंड का संतुलित इस्तेमाल किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें- सौरव जोशी की यूट्यूब कमाई का सच जानिए, करोड़ों व्यूज से कितना पैसा मिला?
यह भी देखें-
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इमरजेंसी, के, लिए, लाख, कहां, रखें, FD, सेविंग्स, या, लिक्विड, फंड</media:keywords>
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        <title>सस्ता होम लोन चाहिए? इन 12 सरकारी बैंकों में 7% से शुरू हो रहीं ब्याज दरें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ता-होम-लोन-चाहिए-इन-12-सरकारी-बैंकों-में-7-से-शुरू-हो-रहीं-ब्याज-दरें</link>
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        <description><![CDATA[ अपना घर खरीदने के लिए होम लोन लेने जा रहे हैं, तो सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत और डाउन पेमेंट का हिसाब लगाना काफी नहीं है. आपको यह भी देखना होगा कि आने वाले कई सालों तक हर महीने कितनी EMI चुकानी पड़ेगी.
बैंक की ब्याज दर में मामूली अंतर भी लंबे समय में आपकी जेब पर असर डाल सकता है. अक्टूबर 2026 में सरकारी बैंकों के होम लोन ऑफर इसी वजह से चर्चा में हैं.
दो सरकारी बैंकों में 7 प्रतिशत से शुरू हो रही दरें
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में होम लोन की शुरुआती ब्याज दर 7 प्रतिशत है. वहीं, दूसरे सरकारी बैंकों की दरें भी अलग-अलग स्तर पर हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में शुरुआती दर 7.25 प्रतिशत, जबकि बैंक ऑफ इंडिया में 7.10 प्रतिशत से शुरू होती है.
केनरा बैंक में लोन की राशि के अनुसार शुरुआती दर अलग हो सकती है. पंजाब नेशनल बैंक में भी अलग-अलग लोन श्रेणियों के लिए शुरुआती ब्याज दर में अंतर दर्ज किया गया है. इसलिए किसी एक बैंक की दर देखकर फैसला करना सही नहीं होगा.
12 बैंकों के ऑफर में क्या है खास?
सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कनेरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, SBI, यूको बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं. इनमें कुछ बैंक तय सीमा तक की ब्याज दरें बताते हैं, जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक की दर 7.20 प्रतिशत से शुरू होती है. वास्तविक दर ग्राहक और लोन की शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है.
आवेदन से पहले इन खर्चों का भी रखें ध्यान
होम लोन चुनने से पहले बैंक की प्रोसेसिंग फीस, भुगतान की अवधि और समय से पहले या देर से भुगतान करने से जुड़ी शर्तों की जानकारी लें. साथ ही यह भी समझें कि आपकी मासिक आय के हिसाब से EMI कितनी आराम से चुकाई जा सकती है.
क्रेडिट स्कोर भी निभाता है अहम भूमिका
बैंक आम तौर पर ग्राहक की आय, रोजगार, क्रेडिट स्कोर और पुराने कर्ज चुकाने के रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हैं. इस कारण विज्ञापन में दिखाई गई सबसे कम ब्याज दर हर आवेदक को मिलना जरूरी नहीं है.इसलिए अंतिम निर्णय लेने से पहले अलग-अलग बैंकों से अपने लोन की लागू दर और सभी शुल्कों की जानकारी लें. इससे घर खरीदने का बजट बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>फर्जी KYC लिंक ने उड़ाई कपल की नींद, अब SBI ग्राहक को देगा 1.35 लाख </title>
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        <description><![CDATA[ केवाईसी अपडेट करने के नाम पर आने वाला एक मैसेज आपकी जमा-पूंजी पर भारी पड़ सकता है. केरल में एक दंपति के साथ ऐसा ही मामला सामने आया, जिसमें फर्जी लिंक के जरिए बैंक खाते से लाखों रुपये निकलने का आरोप लगा. अब उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक को शेष रकम लौटाने और मुआवजा देने का निर्देश दिया है.
यह मामला साल 2023 का है, केरल के एक दंपति का भारतीय स्टेट बैंक में बचत खाता था. पति ने बैंक में तीन महीने के लिए 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी कराई थी. 7 जनवरी 2023 को जब उन्होंने बैंक के ऐप के माध्यम से अपने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने की कोशिश की, तो भुगतान नहीं हो सका.
इसके बाद उन्हें खाता ब्लॉक होने और केवाईसी अपडेट करने से जुड़ा संदेश मिला. पति के मुताबिक, उन्होंने संदेश में दिए गए लिंक के जरिए अपनी जानकारी भरने की कोशिश की. इसी दौरान उनकी एफडी से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन में करीब 3.28 लाख रुपये निकल गए.
बैंक ने लौटाए पैसे, लेकिन रकम रह गई बाकी
दंपति का कहना था कि उन्होंने अनधिकृत निकासी की जानकारी तुरंत बैंक को दे दी थी. मामले में बैंक के आंतरिक बैंकिंग लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद लगभग 2.24 लाख रुपये वापस कर दिए गए, लेकिन 99,874 रुपये की शेष राशि नहीं लौटाई गई. इसके बाद दंपति ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, पथनमथिट्टा में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक की निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती, तो इस तरह की अनधिकृत निकासी को रोका जा सकता था.
बैंक ने ग्राहक पर लगाया लापरवाही का आरोप
सुनवाई के दौरान SBI की ओर से कहा गया कि बैंक ग्राहकों को ऐप के जरिए केवाईसी अपडेट करने के लिए नहीं कहता. बैंक का तर्क था कि ग्राहक ने कथित तौर पर फर्जी लिंक पर अपनी जानकारी और OTP साझा किया, जिससे धोखाधड़ी करने वालों को लेनदेन करने का मौका मिला. हालांकि, आयोग ने पाया कि बैंक अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया. आयोग के अनुसार, केवल ग्राहक पर जानकारी साझा करने का आरोप लगाकर बैंक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता.
SBI को 45 दिनों में देना होगा मुआवजा
जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को 99,874 रुपये की शेष राशि लौटाने का आदेश जारी किया. इसके अतिरिक्त दंपति को मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये देने को कहा गया. इस तरह बैंक को कुल करीब 1.35 लाख रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा.
ग्राहकों के लिए क्या है जरूरी सबक?
यह मामला बताता है कि केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले अनजान लिंक पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है. ग्राहकों को बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही जानकारी सत्यापित करनी चाहिए. OTP, पिन और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें. किसी संदिग्ध लेनदेन की स्थिति में तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं.
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>UPI MDR: क्या अब गूगल पे, फोन पे और Paytm जैसी पेमेंट Apps भी वसूलेंगी चार्ज?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी रोजाना सब्जी खरीदने, शॉपिंग करने या ऑनलाइन पेमेंट के लिए Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो UPI से जुड़ी नई व्यवस्था को समझना बेहद जरूरी है. 15 अक्टूबर से कुछ बड़े UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की बात कही गई है. ऐसे में लोगों कि मन में सवाल है कि क्या अब डिजिटल पेमेंट करना महंगा हो जाएगा.
दरअसल, MDR वह चार्ज है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों से लिया जाता है. हालांकि, इस चार्ज का मतलब यह नहीं है कि हर UPI पेमेंट पर ग्राहकों को अतिरिक्त पैसे देने होंगे. आइए जानते हैं Google Pay, PhonePe व Paytm इस्तेमाल करने वालों के लिए इसका क्या असर पड़ है.
क्या UPI ऐप्स पेमेंट करने पर वसूलेंगी चार्ज?
Google Pay, PhonePe और Paytm जैसी ऐप्स के जरिए UPI पेमेंट करने पर ग्राहकों से सीधे प्लेटफॉर्म चार्ज लेने की बात इस नई व्यवस्था में शामिल नहीं है. जानकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होने की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है. इस चार्ज का पेमेंट व्यापारी को करना होगा. इसके तहत ग्राहकों से अतिरिक्त चार्ज के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं होगी.
UPI ट्रांजैक्शन में क्यों आई गिरावट?
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में UPI के जरिए कुल 2,407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जबकि अगस्त में यह संख्या 2,450 करोड़ थी. यानी इसमें करीब 1.8% की गिरावट दर्ज की गई.
वहीं, अगस्त में UPI ट्रांजैक्शन का कुल मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपये था. लेकिन सितंबर में यह घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रह गया. यानी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में करीब 1.5% की गिरावट आई. हालांकि, उद्योग से जुड़े जानकारों ने इसकी एक वजह अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होना बताया. उनके मुताबिक, रोजाना के औसत लेनदेन में गिरावट नहीं आई थी.
RBI गवर्नर ने UPI ट्रांजैक्शन को लेकर क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, MDR के रूप में मामूली शुल्क लागू होने से UPI ट्रांजैक्शन की संख्या पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा कि फिलहाल लेनदेन की मात्रा में किसी बड़ी गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं.
सस्ता होम लोन चाहिए? इन 12 सरकारी बैंकों में 7% से शुरू हो रहीं ब्याज दरें
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में आज बैंक और शराब की दुकानें बंद, जानें और कौन&amp; कौन सी सेवाएं हैं ठप</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में आज यानी 10 अक्टूबर को घर से बाहर निकलने से पहले ये जान लेना जरूरी है कि किन सेवाओं पर असर पड़ने वाला है. CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. इसका असर कई सेवाओं पर असर पड़ रहा है. जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. इसके चलते मेट्रो के कई स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद है, कई ट्रेनों को रद्द किया गया है और शराब की दुकानें भी बंद रखी गई हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा कुछ स्कूल-कॉलेजों ने ऑनलाइन क्लास या परीक्षा रोकने का फैसला लिया है. अगर आप आज बैंक जाने, ट्रेन पकड़ने, मेट्रो से सफर करने या किसी जरूरी काम से बाहर निकलने वाले हैं, तो पहले जान लें कि कहां क्या स्थिति है.&amp;nbsp;
दिल्ली में आज बैंक क्यों बंद हैं?&amp;nbsp;दिल्ली में आज बैंक बंद हैं, लेकिन इसकी वजह सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं है. 10 अक्टूबर महीने का दूसरा शनिवार है, इसलिए RBI के नियमों के मुताबिक सरकारी और निजी बैंक बंद रहेंगे. आमतौर पर बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा हर रविवार को बंद रहते हैं. लेकिन, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और UPI जैसी डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी.&amp;nbsp;
शराब की दुकानें रहेंगी बंद?दिल्ली में 9 और 10 अक्टूबर को सभी रिटेल शराब की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया गया है. इसमें भारतीय, विदेशी और देशी शराब बेचने वाली दुकानें शामिल हैं. कुछ मॉल में मौजूद शराब की दुकानों पर भी यह पाबंदी लागू है.
हालांकि, लाइसेंस प्राप्त रेस्टोरेंट, बार और क्लब में शराब परोसने की अनुमति जारी रहने की जानकारी सामने आई है. यानी शराब की खुदरा दुकानों पर बिक्री बंद रहेगी, लेकिन हर जगह शराब की बिक्री और सर्विस पर एक जैसी पाबंदी नहीं है.&amp;nbsp;
दिल्ली मेट्रो बंद है?विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद DMRC ने प्रभावित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी है.
इन स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद रहने का समय 9 अक्टूबर रात 9 बजे से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर को शाम 6 बजे तक लागू रहने की जानकारी दी गई है. प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा चालू रहेगी, लेकिन नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर ये सुविधा भी बंद रहेगी. इसका मतलब ये नहीं है कि पूरी दिल्ली मेट्रो बंद है.&amp;nbsp;
रेलवे स्टेशन का क्या हाल है?रेलवे ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए कुछ सेवाओं में बदलाव किया है. नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक ट्रेन सेवाओं पर रोक की घोषणा की गई थी. इस दौरान इन स्टेशनों पर आने वाली कुछ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशन से ही रद्द किया गया है.&amp;nbsp;
स्कूल-कॉलेजों में भी बदलावप्रदर्शन के कारण ट्रैफिक और सुरक्षा को देखते हुए कुछ स्कूलों और कॉलेजों ने अपने कार्यक्रम बदले हैं. जैसे सरदार पटेल विद्यालय ने क्लास 6 से 12 तक की पढ़ाई ऑनलाइन करने की जानकारी सामने आई है. और रघुबीर सिंह जूनियर मॉडर्न स्कूल ने शनिवार को होने वाली PTM को रोक दिया है.
कुछ कॉलेज ने 10 अक्टूबर को होने वाली परीक्षाएं टाल दी गई हैं. बता दें कि दिल्ली के सारे स्कूल और कॉलेज बंद नहीं हैं.&amp;nbsp;
कनॉट प्लेस में दुकान और ऑफिस बंद?&amp;nbsp;दिल्ली के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर इलाके में कारोबारियों को सुरक्षा और आवाजाही की स्थिति को देखते हुए दुकानें, दफ्तर और रेस्टोरेंट बंद रखने की सलाह दी गई है. इसका असर इस इलाके में खरीदारी और कामकाज के लिए आने वाले लोगों पर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
मस्क का मुकेश अंबानी पर बड़ा हमला, अब &#039;प्रधानमंत्री अंबानी&#039; कहकर साधा निशाना
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>दिल्ली, में, आज, बैंक, और, शराब, की, दुकानें, बंद, जानें, और, कौन-, कौन, सी, सेवाएं, हैं, ठप</media:keywords>
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        <title>अंबानी पर मस्क का नया हमला, रिलायंस के BJP चंदे से जुड़ी रिपोर्ट्स की शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच भारत में सैटेलाइट इंटरनेट कारोबार को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है. स्पेस एक्स और टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने अब रिलायंस से जुड़ी कंपनियों की ओर से BJP को दिए गए चंदे से जुड़ी खबरों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए हैं. ये उन्होंने मुकेश अंबानी को &amp;lsquo;प्रधानमंत्री अंबानी&amp;rsquo; कहकर निशाना साधने के कुछ ही घंटे बाद ही शेयर किया है.&amp;nbsp;
मस्क इससे पहले भी ये आरोप लगा चुके हैं कि भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की एंट्री में रुकावटें डाली जा रही हैं, ताकि कुछ बड़ी कंपनियों का दबदबा बना रहे. हालांकि, मस्क ने अपनी पोस्ट में रिलायंस पर लगाए गए आरोपों को लेकर कोई नया सबूत पेश नहीं किया है.
मस्क ने क्या पोस्ट किया है?मस्क ने शुक्रवार शाम रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के BJP को चंदा देने से जुड़ी खबरों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं. इससे पहले उन्होंने मुकेश अंबानी पर ट्वीट करते हुए तंज कसा था और आरोप लगाया था कि वो भारत में एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं.
मस्क ने अपनी पोस्ट में अंबानी से सवाल किया था कि क्या वो Starlink को भारत में कॉम्पिटिशन करने की अनुमति देना चाहेंगे. उनका कहना है कि देश के कई ऐसे इलाके हैं, जहां अभी भी इंटरनेट की बेहतर सुविधा नहीं है. स्टारलिंक के जरिए इन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है.

https://t.co/DJYynAyO0W
&amp;mdash; Elon Musk (@elonmusk) October 10, 2026



BJP को चंदे का मुद्दा क्या है?रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के राजनीतिक चंदे का मुद्दा नया नहीं है. मार्च 2024 में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद रिपोर्ट्स में बताया गया था कि रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों और व्यक्तियों ने BJP को चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा दिया था.
हालांकि, मस्क की ओर से इन खबरों को शेयर करने का मतलब ये नहीं है कि चंदे को लेकर लगाए गए उनके किसी आरोप साबित हो गए हैं. राजनीतिक दलों को कंपनियों से मिलने वाला चंदा और Starlink को भारत में कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलना दो अलग-अलग मुद्दे हैं. मस्क ने इन खबरों को शेयर करके दोनों मुद्दों को बस अपने विवाद के बीच उठाया है.
स्टारलिंक की एंट्री को लेकर क्यों है विवाद?स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. ये मोबाइल नेटवर्क या जमीन पर बिछाई जाने वाली फाइबर केबल के बजाय सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट कराती है.&amp;nbsp;
भारत में इस क्षेत्र में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से जुड़ी कंपनियां भी मौजूद हैं. ऐसे में स्टारलिंक की एंट्री से सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में कॉम्पिटिशन बढ़ सकती है. मस्क का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह अपने बाजार पर दबदबे को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की राह में रुकावट डाल रहे हैं. हालांकि, उन्होंने अपने हालिया आरोपों में किसी के खिलाफ कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया है.&amp;nbsp;
दिल्ली में आज बैंक और शराब की दुकानें बंद, जानें और कौन- कौनसी सेवाएं हैं ठप
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>देश में आई 547000 टन गैस, UAE बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के LPG आयात को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है. सितंबर 2026 में UAE भारत को सबसे ज्यादा LPG सप्लाई करने वाला देश बन गया है. UAE से भारत में 5.47 लाख टन LPG आई है. वहीं, अमेरिका से होने वाली सप्लाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
बता दें कि इससे पहले लगातार 6 महीने तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना हुआ था. समुद्री कारोबार से जुड़े आंकड़े जुटाने वाली कंपनी Kpler के डेटा के मुताबिक, ये बदलाव पश्चिम एशिया में तनाव और गैस की सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बीच देखने को मिला है.
UAE से कितना बढ़ा आयात?&amp;nbsp;सितंबर में UAE से भारत को 5.47 लाख टन LPG मिली है. अगस्त में ये आंकड़ा करीब 1.93 लाख टन था. यानी 1 महीने में UAE से LPG की सप्लाई में 182% की बढ़ोतरी हुई. भारत के कुल LPG आयात में UAE की हिस्सेदारी भी अगस्त के 13% से बढ़कर सितंबर में 39% हो गई है.
इस तरह UAE ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया. भारत के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है, क्योंकि LPG का इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के लिए होने के साथ-साथ कई व्यावसायिक कामों में भी होता है. देश अपनी जरूरत की काफी LPG विदेशों से खरीदता है, इसलिए दूसरे देशों से होने वाली सप्लाई में बदलाव का महत्व बढ़ जाता है.
अमेरिका से कितनी घटी LPG सप्लाई?जहां UAE से गैस का आयात बढ़ा, वहीं अमेरिका से होने वाली सप्लाई में तेज गिरावट आई. सितंबर में अमेरिका से भारत को करीब 3.23 लाख टन LPG मिली, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 7.64 लाख टन था. यानी एक महीने में अमेरिकी सप्लाई 58% घट गई.
भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी भी 53% से गिरकर 23% रह गई. इसके साथ ही अमेरिका दूसरे स्थान पर आ गया है. अमेरिका फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में सप्लाई से जुड़ी परेशानियां बढ़ने के बाद भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना था. उस समय खाड़ी देशों से आने वाली गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी. अब UAE और दूसरे खाड़ी देशों से सप्लाई में सुधार होने के साथ भारत के आयात का रुख फिर बदल रहा है.
LPG आयात में आई गिरावट?
UAE से सप्लाई बढ़ने के बावजूद भारत का कुल LPG आयात सितंबर में बढ़ने के बजाय घट गया. सितंबर में भारत ने कुल 13.9 लाख टन LPG आयात की, जो अगस्त के मुकाबले करीब 4% कम है.
कुवैत और कतर से भी बढ़ी सप्लाई?सितंबर में भारत को दूसरे खाड़ी देशों से भी ज्यादा LPG मिली. कुवैत से आयात करीब 1.33 लाख टन रहा, जो अगस्त के मुकाबले 15.6% अधिक है. वहीं, कतर से LPG की सप्लाई बढ़कर करीब 1.15 लाख टन हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 76% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ईरान से भारत को करीब 89,000 टन LPG मिली है. वहीं, ओमान और कांगो से लगभग 23,000-23,000 टन गैस आई है.&amp;nbsp;
अंबानी पर मस्क का नया हमला, रिलायंस के BJP चंदे से जुड़ी रिपोर्ट्स की शेयर
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>सौरव जोशी की यूट्यूब कमाई का सच जानिए, करोड़ों व्यूज से कितना पैसा मिला?</title>
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        <description><![CDATA[ कभी कैमरे के सामने रोजमर्रा की जिंदगी दिखाकर लोगों का मनोरंजन करने वाले YouTuber सौरव जोशी आज करोड़ों की लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए चर्चा में हैं. पत्नी को करीब 1.60 करोड़ रुपये की रेंज रोवर डिफेडंर गिफ्ट करने की खबर ने एक बार फिर उनकी कमाई और डिजिटल दुनिया में बढ़ते अवसरों पर लोगों का ध्यान खींचा है.
सवाल यह है कि आखिर YouTube पर वीडियो बनाकर इतनी महंगी कार खरीदने तक का सफर कैसे तय होता है?
करोड़ों में बताई जा रही है कमाई
सौरव जोशी देश के लोकप्रिय व्लॉगर्स में शामिल हैं. उनके चैनल पर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं और वीडियो को बड़े पैमाने पर देखा जाता है. उनकी लोकप्रियता के कारण विज्ञापनों से होने वाली संभावित कमाई भी काफी अधिक मानी जाती है.रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न थर्ड-पार्टी अनुमानों में उनकी मासिक YouTube विज्ञापन आय लगभग 78 लाख रुपये से 2.08 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है, हालांकि, यह केवल अनुमान है. सौरव की वास्तविक AdSense कमाई सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.
एक ही घटना से कमाई के कई मौके
कंटेंट क्रिएटर्स के लिए किसी बड़ी खरीदारी को दिखाना सिर्फ अपनी खुशी साझा करना नहीं होता, बल्कि इससे कई वीडियो बनाने का अवसर भी मिल सकता है. कार की डिलीवरी, उससे जुड़ी तैयारियां और परिवार की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग वीडियो का हिस्सा बन सकती हैं.
ऐसे वीडियो पर मिलने वाले व्यूज से विज्ञापन आय होने की संभावना रहती है. हालांकि, हर वीडियो की कमाई उसके व्यूज, विज्ञापन दर और दर्शकों की संख्या जैसे कारकों पर निर्भर करती है.
ब्रांड डील भी कमाई का बड़ा जरिया
बड़े YouTubers की आय केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहती. कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार के लिए लोकप्रिय क्रिएटर्स के साथ साझेदारी भी करती हैं. सौरव जैसे बड़े क्रिएटर के लिए ब्रांड प्रमोशन आय का एक महत्वपूर्ण संभावित स्रोत हो सकता है. रिपोर्ट में एक थर्ड-पार्टी अनुमान के आधार पर प्रति स्पॉन्सर्ड वीडियो 7.7 लाख से 30.8 लाख रुपये तक की संभावित ब्रांड डील का जिक्र है. हालांकि, वास्तविक अनुबंधों की रकम सार्वजनिक नहीं है.
क्या सात वीडियो से निकल सकती है कार की कीमत?
डिफेंडर से जुड़े सात वीडियो के जरिए कार की आधी कीमत वसूल होने का सवाल भी चर्चा में है. लेकिन इसे साबित करने वाला कोई सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. वीडियो की कमाई और स्पॉन्सरशिप का वास्तविक विवरण सामने आए बिना ऐसा दावा करना सही नहीं होगा. सौरव जोशी का उदाहरण बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी ऑडियंस बनाने के बाद कंटेंट क्रिएशन एक कमाई वाला करियर बन सकता है. हालांकि, इसकी सफलता के पीछे लगातार मेहनत, दर्शकों की रुचि और कमाई के अलग-अलग स्रोतों की भूमिका होती है.
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 15:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>न Indane और न HP, कोई नहीं दे रहा नया गैस कनेक्शन, अब क्या बच रहा ऑप्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए साल 2026 की पहली तिमाही में ही तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने बड़ा फैसला लेते हुए LPG गैस सिलेंडर के नए कनेक्शन पर रोक लगा दी. दोनों देशों में जंग शुरू हुए &amp;nbsp;लगभग 7 महीने बीत चुके हैं, लेकिन होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता अभी बरकरार है.
आलम यह है कि देश में बड़ी संख्या में लोग अब 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के लिए अप्लाई नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे मेंअब सवाल यह आता है कि नए LPG कनेक्शन के लिए फिर से कब अप्लाई किया जा सकेगा? इस बीच खाना पकाने के लिए किचन में और कौन-कौन से ऑप्शन बच रहे हैं.
देश में बढ़ रहा LPG का प्रोडक्शन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे कई राज्यों में मार्च 2026 से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के लिए नए LPG कनेक्शन लेने पर रोक लगा दी गई है. फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में शुरू हुई जंग के चलते तेल और गैस की ग्लोबल सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ा है. दुनिया का 20% एनर्जी ट्रांसपोर्टेशन इसी शिपिंग रूट के जरिए होता है.
हालांकि, इस बीच राहत की बात यह है कि देश में एलपीजी के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. पिछले महीने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिफाइनर LPG का प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं. यह प्रोडक्शन औसतन 44,000 टन रोजाना तक पहुंच गया है, जो अगस्त के औसत प्रोडक्शन से लगभग 20% ज्यादा है.
अब से शुरू होगा नया कनेक्शन?&amp;nbsp;
बहरहाल, लोग फिलहाल नए LPG कनेक्शन के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हालांकि, इसे लेकर अभी तक सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन आपके पास अभी भी कुछ ऐसे विकल्प बचे हैं, जिनसे आप बड़े ही आराम से खाना पका सकते हैं. इनमें 5 Kg और 10 Kg के LPG सिलेंडर और PNG शामिल हैं.
5 किलो का छोटू सिलेंडर
5 किलो वाला&#039;छोटू&#039; कुकिंग गैस सिलेंडर बाजार में आपको आसानी से मिल जाएंगे. इंडेन छोटू, भारत गैस मिनी या HP गैस अप्पू के नाम से आप इसे किसी भी LPG डिस्ट्रीब्यूटर से खरीद सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, डिपॉजिट जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती. न ही एड्रेस प्रूफ या लंबे एप्लीकेशन प्रॉसेस को पूरा करने का कोई झंझट है. सबसे बड़ बात है कि 5 किलो वाले फ्री-ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर को साल में जितनी बार चाहें रिफिल करवाया जा सकता है और रिफिल करवाने में 10 मिनट से भी कम समय लग सकता है.&amp;nbsp;
10 किलो वाला सिलेंडर
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक-सर्विस प्लेटफॉर्म के जरिए 10 किलो वाले गैस सिलेंडर को भी बढ़ावा दिया है. इंडियन ऑयल ने &#039;Indane XTRALITE&#039;को लॉन्च किया है, जो पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों के मुकाबले 50% तक हल्का है. इसकी बॉडी ट्रांसपरेंट होती है क्योंकि ये फाइबरग्लास कंपोजिट मटेरियल (HDPE) से बने होते हैं. &amp;nbsp;IndianOil के इस 10 किलो कंपोजिट सिलेंडर के नए कनेक्शन की शुरुआती कीमत 4,853 रुपये है और रीफिलिंग में 1,667 रुपये का खर्च आएगा.&amp;nbsp;
PNG
किचन में खाना पकाने का एक और बढ़िया ऑप्शन पाइप वाली नेचुरल गैस (PNG) है, जिसे आजकल सरकार की तरफ से खूब बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए अप्लाई करना भी आसान है. आप Indian Oil, HPCL और BPCL की वेबसाइट पर जाकर नए PNG कनेक्शन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. आप LPG से PNG पर भी बड़े आसानी से स्विच कर सकते हैं. इसके लिए बस आपको अपने डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करना होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>रातों रात &amp;apos;मल्टी&amp;बिलियनेयर&amp;apos; बन बैठा शख्स, अकाउंट में आए 3500 करोड़</title>
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        <description><![CDATA[ केरल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक साधारण सा आदमी रातोंरात दुनिया की रईसों की लिस्ट में आ गया. हालांकि, उसकी ये खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिकी. स्थिति बाद में ज्यों की त्यों रह गई. आइए जानते हैं कि मामला क्या है?
मलयाला मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, कोच्चि के पास त्रिपुनिथुरा में &#039;दर्शन सुपरमार्केट&#039; चेन के मालिक सुमेष कुमार के लिए आज का दिन काफी खास रहा. सुबह उठते ही उन्होंने देखा कि उनके बैंक अकाउंट में 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बैलेंस है. इतना देखते ही उनके दिल की धड़कनें तेज हो गईं.
इतना बड़ा अमाउंट कैसे आया?
अगर किसी के हाथ अचानक इतनी दौलत लग जाए, तो उस इंसान की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहेगा. लेकिन सुमेष ने जश्न मनाने के बजाय सूझबूझ से काम लिया. उन्होंने तुरंत अपने बैंक में कॉल लगाया ताकि यह पता लग सके कि आखिर इतने पैसे अकाउंट में कैसे आए. बाद में उन्हें एक मैसेज मिला, जिसे देखकर उन्हें और भी ज्यादा हैरानी हुई.
सुमेष को पता चला कि उनके सुपरमार्केट में कार्ड-स्वाइपिंग ट्रांजैक्शन के जरिए अकाउंट में दो बार 3.5 करोड़ रुपये जमा हुए थे. यानी कि टोटल 7 करोड़ रुपये रुपये जमा हुए. हालांकि, ट्रांजैक्शन अलर्ट से यह पता नहीं चला कि उनके अकाउंट में 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा है. उन्होंने बैंक को पूरी बात बताई.&amp;nbsp;
तुंरत हुआ एक्शन
सुमेष से खबर मिलते ही बैंक एक्शन मोड में आ गया और शाम तक पूरा मामला सुलझा लिया गया. यह एक तकनीकि गड़बड़ी थी, जिसे बैंक की टेक्नीकल टीम ने ठीक कर दिया. फिर सारे रुपये फिर से वापस ले लिए गए और सोमेष का अकाउंट बैलेंस पहले जितना था, उतने पर आ गया. खैर, मामला चाहे कुछ भी हो, लेकिन सुमेष के साथ हुई इस घटना ने उसे इस बात का एहसास कराया कि अरबपति होने पर कैसा लगता होगा.

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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>50 हजार की नौकरी छोड़ लड़की ने कमाए 2.28 लाख, बताया कमाई का &amp;apos;सुपर सीक्रेट&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं होता, खासकर तब जब हर महीने एक तय रकम खाते में आती हो. लेकिन कुछ लोग अपनी कमाई के नए रास्ते बनाने के लिए नौकरी से अलग राह चुनते हैं.
ऐसी ही एक महिला की कहानी चर्चा में है, जिसने Zomato की पूरे 50 हजार महीने की नौकरी छोड़ने के बाद सितंबर में 2.28 लाख रुपये कमाने का दावा किया. उनकी कमाई का खास पहलू यह है कि इसके लिए उन्होंने चार अलग-अलग स्रोतों का सहारा लिया.
50 हजार रुपये की नौकरी छोड़ने का फैसला
नौकरी में नियमित सैलरी मिलने से आर्थिक सुरक्षा बनी रहती है. हालांकि, कुछ लोग अपनी कमाई बढ़ाने और अपने काम पर अधिक नियंत्रण पाने के लिए दूसरे विकल्पों की तलाश करते हैं. इस महिला ने भी नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग रास्तों पर ध्यान देने का फैसला किया.
नौकरी छोड़ने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी आय को बनाए रखना और उसे बढ़ाना रही होगी. नियमित सैलरी के बजाय कई स्रोतों से कमाई करने के लिए लगातार काम करना, नए अवसर तलाशना और अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू करना जरूरी होता है.
सितंबर में 2.28 लाख रुपये की कमाई
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने सितंबर में चार अलग-अलग आय स्रोतों के जरिए कुल 2.28 लाख रुपये कमाए. यह रकम उनकी पहले की 50 हजार की मासिक सैलरी से काफी ज्यादा है. एक से ज्यादा स्रोतों से कमाई करने का फायदा यह हो सकता है कि किसी एक काम से आमदनी कम होने पर दूसरे स्रोत मदद कर सकते हैं. हालांकि, ऐसी कमाई हर महीने एक जैसी रहे, इसकी कोई गारंटी नहीं होती. काम की उपलब्धता, ग्राहकों की जरूरत और बाजार की स्थिति के अनुसार आय में बदलाव हो सकता है.
एक से ज्यादा कमाई के रास्ते क्यों हैं जरूरी?
आज के समय में केवल एक सैलरी पर निर्भर रहने के बजाय लोग अतिरिक्त कमाई के विकल्प भी तलाश रहे हैं. फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन सेवाएं, डिजिटल कंटेंट और दूसरे छोटे कारोबार ऐसे विकल्प हो सकते हैं, जिनसे लोग अपनी मुख्य आय के अलावा पैसा कमा सकते हैं. हालांकि, नौकरी छोड़कर पूरी तरह दूसरे कामों पर निर्भर होने से पहले बचत, नियमित खर्च और कमाई की स्थिरता का आकलन करना जरूरी है.
नौकरी छोड़ने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
इस तरह की कहानियां नए अवसरों की ओर ध्यान खींचती हैं, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति की कमाई देखकर तुरंत नौकरी छोड़ना सही नहीं है. पहले अपनी बचत तैयार करना, नए काम से नियमित आय की संभावना समझना और आपातकालीन खर्चों के लिए पैसा रखना जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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    <item>
        <title>क्रेडिट कार्ड पर 500, लोन पर 5000 जुर्माना देगा बैंक, समझ लें RBI के ये नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रेडिट-कार्ड-पर-500-लोन-पर-5000-जुर्माना-देगा-बैंक-समझ-लें-rbi-के-ये-नियम</link>
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        <description><![CDATA[ बैंक से जुड़ा कोई काम समय पर पूरा न हो तो ग्राहकों को अकसर कई चक्कर लगाने ही पड़ते हैं. कभी क्रेडिट कार्ड बंद कराने में देरी होती है, तो कभी लोन चुकाने के बाद भी प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज नहीं मिलते. ऐसे मामलों में अब ग्राहकों के पास केवल शिकायत करने का ही नहीं, बल्कि नियमानुसार मुआवजा पाने का विकल्प भी है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अलग-अलग बैंकिंग सेवाओं के लिए समयसीमा तय की है. नियमों का पालन नहीं होने पर कुछ परिस्थितियों में बैंक को रोजाना के हिसाब से भुगतान करना पड़ सकता है.
1. क्रेडिट कार्ड बंद करने में देरी पर 500 रुपये प्रतिदिन
अगर ग्राहक ने क्रेडिट कार्ड बंद करने का अनुरोध दिया है और सभी बकाया चुका दिए हैं, तो बैंक को सात कार्य दिवस के भीतर कार्ड बंद करना होता है. ऐसा नहीं होने पर, लागू नियमों के तहत बैंक को देरी के प्रत्येक कैलेंडर दिन के लिए 500 रुपये का मुआवजा देना पड़ सकता है, यह राशि कार्ड बंद होने तक देय हो सकती है.
2. प्रॉपर्टी के कागजात लौटाने में देरी पर 5 हजार रोजाना
होम लोन या अन्य पात्र व्यक्तिगत लोन का पूरा भुगतान करने के बाद बैंक को 30 दिनों के भीतर मूल संपत्ति दस्तावेज लौटाने होते हैं. यदि देरी बैंक की वजह से होती है, तो RBI के नियमों के अनुसार ग्राहक को हर दिन 5 हजार मुआवजा मिल सकता है. दस्तावेज खोने या खराब होने पर बैंक को उनकी डुप्लीकेट या प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने में मदद और संबंधित खर्च भी उठाना होता है.
3. क्रेडिट रिपोर्ट की गलती सुधारने पर 100 रुपये प्रतिदिन
अगर क्रेडिट रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज है और उसे ठीक कराने की शिकायत तय समय में हल नहीं होती, तो ग्राहक को मुआवजा मिल सकता है. लागू नियमों के अनुसार, निर्धारित 30 दिनों की समयसीमा से आगे की देरी पर हर कैलेंडर दिन के लिए 100 रुपये दिए जा सकते हैं.
4. फेल डिजिटल ट्रांजैक्शन पर भी राहत
UPI, ATM या कार्ड से भुगतान विफल होने के बावजूद खाते से पैसा कट जाए, तो संबंधित नियमों के तहत बैंक को तय समय में रकम वापस करनी होती है. कुछ मामलों में देरी होने पर 100 रुपये प्रतिदिन मुआवजे का प्रावधान है. इसकी पात्रता और समयसीमा ट्रांजैक्शन के प्रकार पर निर्भर करती है.
5. बैंक लॉकर में सामान का नुकसान
बैंक लॉकर में रखी वस्तुओं को निर्धारित परिस्थितियों में नुकसान पहुंचने या उनके चोरी होने पर भी बैंक की जिम्मेदारी बन सकती है. लागू RBI दिशानिर्देशों के तहत बैंक की देनदारी सालाना लॉकर किराये की 100 गुना तक सीमित है.
मुआवजा पाने के लिए क्या करें?
ग्राहकों को बैंक में की गई शिकायत की तारीख, ईमेल, रसीद और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए. शिकायत का समाधान नहीं होने पर बैंक के शिकायत निवारण तंत्र और पात्र मामलों में RBI के शिकायत पोर्टल का सहारा लिया जा सकता है. हालांकि, मुआवजा हर मामले में नहीं मिलता; यह संबंधित नियमों, समयसीमा और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा बोनस और 41149 रुपए? सरकार ने क्या कहा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रेलवे-कर्मचारियों-को-मिलेगा-बोनस-और-41149-रुपए-सरकार-ने-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप रेलवे में नौकरी करते हैं और 2025-26 के लिए मिलने वाले प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) का इंतजार कर रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट को लेकर सावधानी बरतनी जरूरी है. इस पोस्ट के तहत दावा किया जा रहा है कि पात्र नान-गजेटेड रेल कर्मचारियों को 78 दिनों की सैलरी के बराबर बोनस देने और 41,149 रुपये पेमेंट की जाएगी. हालांकि, इस पत्र को लेकर रेलवे बोर्ड ने बड़ा अपडेट दिया है.&amp;nbsp;
दरअसल, रेलवे बोर्ड के नाम से जारी बताए जा रहे इस पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी तेजी से शेयर किया जा रहा था. लेकिन रेलवे बोर्ड ने अब साफ कर दिया है कि यह कोई आधिकारिक आदेश नहीं है. ऐसे में रेलवे कर्मचारियों को इस वायरल पत्र के आधार पर किसी भी तरह की बोनस मिलने की उम्मीद या कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.
वायरल पत्र में क्या किया गया था दावा?
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे फर्जी पत्र में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पात्र गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस देने की बात कही गई थी. साथ ही पत्र में 41,149 रुपये की रकम का भी जिक्र किया गया था. साथ ही इस फर्जी डॉक्युमेंट पर RBE No. 101/2026 और 6 अक्टूबर 2026 की तारीख लिखी गई थी, जिसे रेलवे बोर्ड ने फर्जी और मनगढ़ंत बताया है.&amp;nbsp;

FAKE DOCUMENT ALERT A purported Railway Board letter regarding payment of Productivity Linked Bonus (PLB) to eligible non-gazetted Railway employees for FY 2025-26 is being circulated on social media and messaging platforms. #PIBFactCheck ❌ The letter is FAKE. ✅ Railway Board has clarified that the purported letter bearing RBE No. 101/2026, dated 06.10.2026, is fake/fabricated and has not been issued by the Railway Board. ???? Read the official clarification: https://t.co/3aGzVqEAZg ⚠️ Do not share or rely on unverified documents. ???? Report suspicious content related to the Central Government to @PIBFactCheck ???? WhatsApp: +91 8799711259 ???? factcheck@pib.gov.in
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) October 8, 2026


क्या रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस मिलेगा?
फिलहाल वायरल हो रहे पत्र के आधार पर 78 दिनों के वेतन के बराबर बोनस या 41,149 रुपये के पेमेंट की पुष्टि नहीं होती है. क्योंकि रेलवे बोर्ड के जिस पत्र को वायरल किया जा रहा है, वह फर्जी है. इसलिए कर्मचारियों को आधिकारिक ऐलान का इंतजार करना चाहिए और सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी फर्जी दावों से बचना चाहिए.
1 नवंबर से महंगा होगा बिजली कनेक्शन, BPL कार्डधारकों का चार्ज 100 से बढ़कर 150 हुआ
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रेलवे, कर्मचारियों, को, मिलेगा, बोनस, और, 41149, रुपए, सरकार, ने, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>क्या अंबानी हैं भारत के असली बॉस? Starlink विवाद पर एलन मस्क</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में स्टारलिंक की एंट्री होने में हो रही देरी अब विवाद का कारण बनती जा रही है. बुधवार को मस्क ने कुछ भारतीय कारोबारियों पर आरोप लगाया था कि उनके कारण भारत में स्टारलिंक को आने से रोका जा रहा है. जिसके बाद भारत सरकार ने उनकी बात का जवाब देते हुए इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. जिसके बाद गुरुवार को मस्क ने सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार से एक नया सवाल पूछ लिया है.
मस्क ने भारत सरकार से सोशल नेटवर्किंग साइट X के जरिए पोस्ट शेयर कर पूछा है कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? अब उनकी ये प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और ये विवाद और भी ज्यादा गहराता हुआ नजर आ रहा है.
क्या लिखा मस्क ने?दरअसल X पर एक शख्स के पोस्ट को एलन मस्क ने रिट्वीट किया है, जिसमें लिखा है, &#039;सरकार नागरिकों के हितों की तुलना में अपने करीबी पूंजीपतियों के हितों की रक्षा करने में ज्यादा दिलचस्पी रखती है.&#039;

Starlink is licensed in over 165 countries and has spent five years complying with every single law and requirement of the government of India, so why still no license? Is Ambani the real boss of India?
&amp;mdash; Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026



अब शख्स के इस पोस्ट को रिट्वीट करते हुए मस्क ने लिखा, &#039;स्टारलिंक को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में पांच साल बिताए हैं, तो फिर अभी तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी भारत के असली बॉस है?&#039;
वायरल हो रही पोस्टमस्क का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. अब लोग इस पोस्ट पर तरह- तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई लोग वाकई में अंबानी को बॉस बता रहे हैं. तो वहीं कई लोग मस्क के इस पोस्ट पर मजेदार टिप्पणियां भी कर रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?बता दें कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक पिछले कई सालों से कोशिश कर रही है कि वो भारत में अपने पैर जमाए. लेकिन किसी ना किसी वजह से उनका IPO भारत में लॉन्च होने में मुश्किलें आ रही हैं. जिसके कारण ये पूरा विवाद शुरू हुआ है. अपनी कंपनी के भारत में ना आ पाने के कारण बौखलाए मस्क ने भारत के कई अरबपतियों पर निशाना साधा.
जिसके बाद भारत सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए एक जैसे और पारदर्शी नियम हैं. भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं. इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी भारती एयरटेल और तीसरी स्टारलिंक है.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अमेरिका में भारतीय IT प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका, TCS, इंफोसिस और विप्रो PERM से सस्पेंड</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिकी सरकार ने भारत के आईटी प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका दिया है. दरअसल US के श्रम विभाग ने इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और HCL जैसी IT कंपनियों को परमनेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) कुछ समय के लिए सस्पेंड कर दिया है. इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में PERM सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया है.
इस कार्रवाई से अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय IT कर्मचारियों को रोजगार देने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ जाने वाला है. खासकर वो कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं, जो अभी अस्थायी वर्क वीजा पर हैं और ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में हैं.
जांच चल रही है....इस कार्रवाई के बारे में बात करते हुए अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कॉग्निजेंट, &#039;इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और एडॉब को भी PERM प्रोग्राम से निलंबित किया गया है. विभाग का कहना है कि इन कंपनियों के खिलाफ कई संघीय जांच चल रही हैं.&#039; उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी ने इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा गलत इस्तेमाल किया है.
उपराष्ट्रपति ने भी लगाया आरोपतो वहीं कार्रवाई के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, लेकिन उसी दौरान कंपनी ने कहा कि उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं और 6,000 से ज्यादा H-1B वीजा के लिए मंजूरी मिली. कंपनी ने 3,682 PERM आवेदन भी किए. उनके मुताबिक, इनमें करीब 1,000 आवेदन उन्हीं पदों के लिए थे, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था.
क्या H-1B वीजा हो गए रद्द?इसका मतलब ये नहीं है कि इन कंपनियों के H-1B वीजा रद्द हो गए हैं. कंपनियां अभी भी H-1B कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकती हैं. लेकिन निलंबन के दौरान वो नई PERM आवेदन नहीं कर पाएंगी और पहले से चल रहे आवेदन भी रोक दिए जाएंगे. इससे कंपनियों का कानूनी और प्रशासनिक खर्च भी बढ़ सकता है.
PERM क्या है?बता दें कि PERM यानी परमनेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एक तरह से अमेरिका के श्रम विभाग की मंजूरी है. इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने और उनके लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>प्रोटीन के नाम पर धोखा, FSSAI ने Dr. Reddy&amp;apos;s, Nestle और Amazon Flipkart को भेजा नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय खाद्य विभाग और मानक प्राधिकरण (FSSAI) पिछले कुछ दिनों से एक्शन मोड में है. विभाग की तरफ से लगातार गलत दावों को लेकर कार्रवाई की जा रही है. अब FSSAI ने गुरुवार को डॉक्टर रेड्डी, नेसले हेल्थ साइंस, तिरुपति वेलनेस, अमेजन, फ्लिपकार्ट और नेटमेड्स को नोटिस जारी किया है. इन कंपनियों पर आरोप है कि वो ऐसे प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं, जिनमें प्रोटीन को लेकर गलत दावे किए जा रहे हैं.
दरअसल इन कंपनियों पर ऐसे प्रोडक्ट्स उत्पादों के बारे में भ्रामक स्वास्थ्य दावे किए जा रहे हैं, जिन्हें प्रोटीन बढ़ाने और शरीर में मांसपेशियों को बनाए रखने में मददगार बताया जा रहा था.
FSSAI ने कंपनियों पूछी दावों की सच्चाईफसाई की कार्रवाई लगातार कई महीनों से जारी है, जिसमें कई बड़ी- छोटी कंपनियों और रेस्टोरेंट्स पर निशाना साधा जा रहा है. इन कंपनियों के ऊपर गलत दावे और झूठी जानकारी को लेकर कई दावे कए जा रहे हैं. वहीं ताजा कार्रवाई के जरिए FSSAI ने कंपनियों से पूछा है कि उनके प्रोडक्ट्स पर किए गए प्रोटीन और मसल्स से जुड़े दावों का आधार क्या है? साथ ही ये भी पूछा है कि क्या ये दावे खाद्य सुरक्षा के नियमों के मुताबिक सही हैं.
तेजी से जांच बढ़ा रहा FSSAIये कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब फसाई खाने-पीने के प्रोडक्ट्स पर किए जाने वाले &#039;हेल्दी&#039;, &#039;प्रोटीन से भरपूर&#039;, &#039;नो शुगर&#039; और &#039;100% नेचुरल&#039; जैसे दावों की जांच बढ़ा रहा है. हाल के महीनों में कई कंपनियों को ऐसे दावों और लेबलिंग को लेकर नोटिस दिए गए हैं. बीते दिनों ही विभाग ने इसी तरह की कार्रवाई डाबर पर भी की थी. इसी के साथ कई और कंपनियों पर भी ये कार्रवाई होने के बाद कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग में बजलाव भी किया है.
बता दें कि FSSAI की इस कार्रवाई का मतलब ये है कि विभाग ये सुनिश्चित करना चाहता है कि कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए किसी भी तरह के भ्रामक स्वास्थ्य लाभों का दावा न करें. जो सही तरीके से साबित न किए गए हों. इसका मकसद ग्राहकों को गलत जानकारी के आधार पर उत्पाद खरीदने से बचाना है.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Amazon कर्मचारियों पर गिरी गाज, क्या पड़ेगा भारतीय कर्मचारियों पर प्रभाव?</title>
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        <description><![CDATA[ एक तरफ जहां महंगाई का दौर चल रहा है, इसी बीच कई कंपनियों में छंटनी का दौर भी चल रहा है. इसी कड़ी में अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने एक बार फिर से अपने कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है. खबरों की मानें तो इस बार दुनियाभर में करीब 1000 से कम ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं. कंपनी ने बुधवार को छंटनी की पुष्टि की है.
इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर Amazon के स्टोर्स बिजनेस पर पड़ा है. यही विभाग कंपनी के मुख्य ऑनलाइन शॉपिंग कारोबार को संभालता है. अमेरिका, भारत और ब्रिटेन में कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं.
भारत में भी कर्मचारी होंगे प्रभावित?अमेजन की इस छंटनी में भारत के कर्मचारी भी शामिल हैं. हालांकि, कंपनी ने भारत में कितने कर्मचारियों की नौकरी गई है, इसका आंकड़ा अभी जारी नहीं किया है. इसलिए भारत में कुल कितनी छंटनी हुई, ये अभी साफ नहीं है.
रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी के इंटरनल मैसेजेस से पता चला है कि कस्टमर सर्विस और सेलिंग पार्टनर सर्विसेज जैसे विभाग भी प्रभावित हुए हैं. कुछ रिपोर्ट्स में रिटेल बिजनेस से जुड़े इंजीनियरिंग और मार्केटप्लेस सपोर्ट के कर्मचारियों के प्रभावित होने की भी बात कही गई है.
क्यों की जा रही है छंटनी?अमेजन का कहना है कि उसने अपने स्टोर्स बिजनेस के कुछ हिस्सों में बदलाव किया है. कंपनी के मुताबिक, नए ढांचे से वो अपनी प्राथमिकताओं पर ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकेगी. कंपनी के CEO एंडी जैसी अमेजन के संगठन को छोटा और सरल बनाने, काम करने के तरीके में मौजूद अनावश्यक स्तरों को कम करने और जरूरी क्षेत्रों में ज्यादा संसाधन लगाने पर जोर दे रहे हैं.
पहले भी हो चुकी है बड़ी छंटनीबता दें कि अमेज पिछले कुछ समय में कई बार बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी कर चुका है. इससे पहले अक्टूबर 2025 में कंपनी ने करीब 14,000 कॉरपोरेट कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की थी. जिसके बाद जनवरी 2026 में भी करीब 16,000 और कॉरपोरेट नौकरियां खत्म करने का ऐलान किया था.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>1 लाख लोगों की जाएगी नौकरी, जानें अब किस बड़ी कंपनी ने लिया छंटनी का फैसला?</title>
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        <description><![CDATA[ जर्मनी की जानी-मानी कार कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) ने 2030 तक दुनिया भर में 50,000 और नौकरियां खत्म करने का फैसला किया है. पहले चरण के तहत कंपनी ने यूनियन के साथ हुए समझौतों और मार्च 2026 तक की योजनाओं के तहत करीब 50,000 पदों को धीरे-धीरे खत्म करने पर सहमति जताई थी. इसके तहत कई कर्मचारियों के साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और अर्ली रिटायरमेंट के समझौते पहले ही साइन हो चुके हैं.
अब दूसरे चरण के तहत सितंबर 2026 में कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने 50,000 और अतिरिक्त नौकरियों की कटौती को मंजूरी दी है. यानी कि कंपनी से कुल मिलाकर लगभग 1,00,000 लोग निकाले जाएंगे. हालांकि, ऐसा नहीं है कि एक लाख कर्मचारी काम से एकाएक निकाल दिए जाएंगे, बल्कि यह कंपनी की &#039;फ्यूचर प्लान 2030&#039; का हिस्सा है. यानी कि कंपनी आगे चार सालों में धीरे-धीरे अपने वर्कफोर्स में कटौती करेगी. इससे पता चलता है कि कंपनी अपने 90 साल के इतिहास में पहली बार संकट और रीकंस्ट्रक्चरिंग के ऐसे दौर से गुजर रही है.
कंपनी के सामने कम नहीं चुनौतियां
फॉक्सवैगन के इस फैसले का असर दुनिया भर में उसके कुल कर्मचारियों में से लगभग 15% पर पड़ सकता है. कंपनी यह कदम इसलिए उठा रही है क्योंकि उसे इलेक्ट्रिक कारों की कम मांग, ज्यादा लागत, अमेरिकी टैरिफ और चीनी कार मेकर्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. खबरों के मुताबिक, फॉक्सवैगन मौजूदा बाजार की स्थिति के हिसाब से अपने कर्मचारियों की संख्या और प्रोडक्शन कैपेसिटी को कम करना चाहती है. इस कदम के साथ, कंपनी अपने इतिहास के सबसे बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्रयासों में से एक की ओर बढ़ रही है.
कंपनी क्यों कर रही छंटनी?
फॉक्सवैगन पर इस वक्त कई तरफ से दबाव है. एक तरफ यूरोप में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ी है, इस सेगमेंट में चीनी कंपनियां मजबूत कॉम्पिटिटर बनकर उभर रही हैं. दूसरी तरफ, जर्मनी में प्रोडक्शन कॉस्ट ज्यादा है और अमेरिकी टैरिफ का भी अलग से प्रेशर है.&amp;nbsp;
अमेरिका ने यूरोपीय संघ (EU) से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर पहले के 25% की जगह टैरिफ को बढ़ाकर 30% कर दिया है. फॉक्सवैगन के सीईओ ओलिवर ब्लूम का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ के नियमों के चलते कंपनी के सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट को लगभग 5.9 अरब डॉलर (करीब 5 अरब यूरो) का सीधा नुकसान हो रहा है. फॉक्सवैगन के मुकाबले उसके लग्जरी ब्रांड पोर्शे को टैरिफ से ज्यादा नुकसान हो रहा है. इन सारी परेशानियों के बीच फॉक्सवैगन लागत कम करने के साथ-साथ अपने कामकाज को ज्यादा कुशल बनाना चाहती है. नौकरियों में कटौती इसी बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान का हिस्सा है.

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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>विधवा बहू की पेंशन में सास का नहीं हिस्सा, कोर्ट ने दिया 83 साल की बुजुर्ग महिला को झटका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/विधवा-बहू-की-पेंशन-में-सास-का-नहीं-हिस्सा-कोर्ट-ने-दिया-83-साल-की-बुजुर्ग-महिला-को-झटका</link>
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        <description><![CDATA[ 83 साल की एक बुजुर्ग महिला को अपने दिवंगत बेटे की पत्नी यानी कि अपनी विधवा बहू से पेंशन का हिस्सा मांगना भारी पड़ गया. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बहू को मिल रही फैमिली पेंशन में सास अपना हिस्सा नहीं मांग सकती है.
क्या है मामला?&amp;nbsp;
यह मामला केरल का है. यहां रहने वाली 83 साल की बुजुर्ग महिला एस. थैंकम्मा खुद केरल सरकार के फिशरीज डिपार्टमेंट से रिटायर्ड हैं. उन्हें हर महीने पेंशन भी मिलती है. उनके पति भी इसी विभाग में सीनियर अधिकारी रह चुके हैं और उनकी भी उन्हें पेंशन मिलती है. &amp;nbsp;थैंकम्मा के बेटे टी. राज कुमार केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) में सीनियर सुप्रीटेंडेंट के पोस्ट पर कार्यरत थे. हालांकि, नौकरी के दौरान ही उनकी मौत हो गई. बेटे की मौत के बाद उनकी विधवा पत्नी को अब फैमिली पेंशन मिलती है, जिसमें से कुछ हिस्सा थैंकम्मा भी अपनी बहू से मांगने लगी.
पोती से भी मांगे 15000
थैंकम्मा ने सिर्फ अपनी बहू से, बल्कि कॉलेज में पढ़ रही अपनी पोती से भी हर महीने 15,000 रुपये के गुजारे भत्ते की मांग की थी. पैसे मिले नहीं, तो उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, इस उम्मीद के साथ कि कोर्ट उनके हक में फैसला सुनाते हुए फैमिली पेंशन में उनका हिस्सा तय कर दें. जबकि हुआ इसका उल्टा.&amp;nbsp;
कोर्ट ने लगाई फटकार
कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया कि सीनियर सिटीजन एक्ट (Senior Citizens Act) में ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके तहत सास को अपने बेटे की विधवा बहू को मिलने वाली फैमिली पेंशन का हिस्सा मिल सके. कोर्ट को यह भी पता चला कि उनकी पोती ने कॉलेज में अपनी पढ़ाई के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से एजुकेशन लोन ले रखा है. ऐसे में उससे गुजारा भत्ता लेकर उस पर आर्थिक बोझ डालना सही नहीं है.&amp;nbsp;
पहले ही मिल चुके हैं 12.28 लाख
सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी पता चला कि थैंकम्मा को बेटे की मौत के बाद सर्विस बेनिफिट्स में से 12.28 लाख रुपये पहले ही मिल चुके हैं, बाकी बची रकम उसकी पत्नी को मिली थी. कोर्ट ने बताया कि महज इसलिए कि आपकी उम्र ज्यादा, आपको बहू या पोती से पैसे मांगने का अधिकार नहीं मिलता है. इसके लिए देखना पड़ता है कि किसकी आर्थिक स्थिति कैसी है और कानून क्या कहता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Explained: 4F क्राइसिस क्या है और आपको डरने की जरूरत है या नहीं? एक्सपर्ट्स से जानें सच</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-4f-क्राइसिस-क्या-है-और-आपको-डरने-की-जरूरत-है-या-नहीं-एक्सपर्ट्स-से-जानें-सच</link>
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        <description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान &#039;4F क्राइसिस&#039; की चेतावनी दी थी. 4F यानी फूड (भोजन), फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फाइनेंस (वित्त). यह कोई नई बीमारी नहीं, बल्कि ऐसी चेन है जिसमें एक चीज महंगी होती है तो दूसरी भी महंगी हो जाती है. आखिर में आम आदमी की जेब पर असर पड़ता है. इससे डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है. भारत पूरी तरह संकट में नहीं है, लेकिन हवा का रुख गंभीर है. तो 4F के बारे में जानते हैं और यह कैसे आपको कंगाल कर सकती है...
4F की चेन कैसे काम करती है?
कहीं भी युद्ध या तनाव होता है, तो तेल और गैस की सप्लाई बाधित होती है. तेल-गैस महंगी होती है. उर्वरक बनाने में गैस लगती है, इसलिए उर्वरक भी महंगा होता है. उर्वरक महंगा होने से खेती की लागत बढ़ती है. खेती महंगी होने से अनाज महंगा होता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित जगहों पर पैसा भेजते हैं. इससे विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है. यानी एक ही चिंगारी चार जगह आग लगा देती है.
भारत की हालत क्या है?

खाना (Food): भारत में अगस्त 2026 तक खाद्य महंगाई 5.95% पर थी. प्याज अगस्त में 43% महंगा हो गया. टमाटर जुलाई में 31.92% तक उछला था. मानसून ने इस साल 10% कम बारिश दी है और अल नीनो की स्थिति बन रही है. सरकार ने 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373 मिलियन टन कर दिया है, जो पिछले साल से 2.63 मिलियन टन कम है. राहत की बात है कि सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 28 मई 2026 तक 513 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 1 जुलाई के लिए जरूरी बफर स्टॉक सिर्फ 275.80 लाख मीट्रिक टन है. यानी भंडार जरूरत से लगभग दोगुना है.
ईंधन (Fuel): भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल और 50% गैस आयात करता है. अप्रैल 2026 में ईंधन और बिजली की कीमतें सालाना आधार पर 24.71% बढ़ गई थीं. भारत का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व सिर्फ 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जो लगभग 8 दिन की खपत के बराबर है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी 90 दिन का स्टॉक रखने की सलाह देती है. सरकार अब ओडिशा के चंडीखोल में 4 मिलियन टन और कर्नाटक के पडूर में 2.5 मिलियन टन का नया भंडार बना रही है.
उर्वरक (Fertilizer): भारत अपनी DAP जरूरत का 60% आयात करता है और पोटाश पूरी तरह आयात पर निर्भर है. मार्च 2026 में उर्वरक उत्पादन 24.6% गिर गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच उर्वरक की कीमतें 66% बढ़ीं. सरकार ने तैयारी भी कर ली है. खरीफ 2026 से पहले देश में 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक है, जो मौसमी मांग का 51% से ज्यादा है, जबकि सामान्य बफर स्टॉक 33% का होता है. 2026-27 के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं.
पैसा (Finance): यहां भारत सबसे मजबूत दिख रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त 2026 के अंत में 740.80 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. यह 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए काफी है. RBI की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय बैंकों की हालत मजबूत है, NPA कम है और तनाव परीक्षण में बैंक विपरीत हालात झेलने में सक्षम पाए गए. RBI गवर्नर ने खुद कहा है कि भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक बुनियाद कई दूसरे देशों से बेहतर है.

तो डरना चाहिए या नहीं?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डरने की जरूरत नहीं, लेकिन लापरवाही की भी जरूरत नहीं है. जयशंकर की चेतावनी सिर्फ भारत के लिए नहीं थी, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए थी. भारत के पास अनाज का भंडार है, उर्वरक का स्टॉक है और विदेशी मुद्रा का पहाड़ है.
दिक्कत यह है कि ये सारी चीजें बाहरी झटकों पर निर्भर हैं. अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, ब्लैक सी से अनाज की आवाजाही रुकी या अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमतें और उछलीं, तो भारत में मंहगाई बढ़ सकती है.
असली चिंता की बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है और स्ट्रैटेजिक रिजर्व सिर्फ 8 दिन का है. अगर सप्लाई लाइन में कोई बड़ी रुकावट आई, तो देश के पास बहुत कम समय होगा. सरकार ने मई 2026 में नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील भी की थी. इसका मतलब है कि चिंता का स्तर हल्का से मध्यम है.
इससे निपटने के लिए भारत को अपनी निर्भरता कम करनी होगी. ज्यादा घरेलू उत्पादन, ज्यादा भंडारण और दूसरे देशों के साथ मजबूत सप्लाई चेन बनानी होगी. जयशंकर ने भी यही कहा है कि 4F संकट को अपने आप हल होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता, इसके लिए वैश्विक स्तर पर नियम और सुरक्षा कवच बनाने होंगे. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, क्राइसिस, क्या, है, और, आपको, डरने, की, जरूरत, है, या, नहीं, एक्सपर्ट्स, से, जानें, सच</media:keywords>
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        <title>एक ही दिन में निवेशकों के 10 लाख करोड़ स्वाहा, शेयर बाजार में भारी क्रैश</title>
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        <description><![CDATA[ 8 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है. गुरुवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क काफी दबाव में रहे, जिसके बाद निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. दलाल स्ट्रीट पर उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते और सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के बीच इनमें गिरावट जारी रही.
BSE सेंसेक्स 1.69% या 1,231.91 अंक गिरकर 71,406.79 के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गया. जबकि निफ्टी 50 में 1.82% या 413.05 अंकों की गिरावट आई जिसके बाद ये लगभग 22,190 पर आ गया है. आइये जानते हैं शेयर बाजार में इतनी तेजी से गिरावट क्यों आई है.
10 लाख करोड़ हुए स्वाहाइस बिकवाली की वजह से निवेशकों को भारी नुकसान उठना पड़ रहा है, उनकी सम्पत्ति में भी भारी कमी देखने को मिल रही है. अब तक निवेशकों को 10,51,614.06 करोड़ रुपये (10.52 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है.
BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन बुधवार को बाजार बंद होने के समय 4,72,35,273.39 करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 4,61,83,659.33 करोड़ रुपये हो गया है.
स्टॉक मार्केट का पूरा हफ्ता रहा वीकभारतीय इक्विटी बेंचमार्क इस पूरे हफ्तेभर अपने निचले स्तर पर ही रहा है. सोमवार को जहां बाजार खुलते ही शेयर बाजार में तेजी नजर आई थी, तो वहीं मंगलवार को भी हाल ठीक- ठाक ही था. लेकिन बुधवार आते- आते बाजार का हाल बेहाल हो गया. गुरुवार को तो सेंसेक्स, निफ्टी एक्सटेंड सभी का हाल बुरा नजर आया.
क्यों गिरा शेयर बाजार?दरअसल गुरुवार को शेयर बाजार की हालत खस्ता होने का कारण RBI का रेपो रेट बढ़ना भी रहा. बुधवार को RBI ने तीन दिवसीय बैठक को खत्म किया और बताया कि उन्होंने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की है. जिसका असर शेयर बाजार की गिरावट पर देखने को मिला है.
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होना, भारतीय रुपये का लगातार कमजोर बना रहना, रुपये पर दबाव के कारण भी शेयर बाजार तेजी से गिरा है. तो वहीं विदेशी निवेशक इस समय भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा भी तेजी से निकाल रहे हैं, ये भी एक बड़ी वजह है, जिसके कारण शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी की कीमतों को लेकर हालात गंभीर, पिछले साल से 20% हुई महंगी</title>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारों के मौसम में चीनी की कमतों में लोगों को रुला दिया है. ये कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. केवल भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चीनी की कीमतों में लगातार इजाफा ही हो रहा है. वैश्विक स्तर पर जहां चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं तो वहीं घरेलू बाजार में भी 19 महीने के अब तक सबसे ऊंचे स्तर पर दाम पहुंच चुके हैं. जिसके कारण आम जनता की जेब पर आने वाले समय में और भी ज्यादा बोझ बढ़ने वाला है.
चीनी कंपनियों के शेयरों में भी उछाल देखने को मिला है. पिछले साल की अपेक्षा चीनी की दाम इस साल 20% तक बढ़ गए हैं. चीनी के दामों में इतनी तेजी कम उत्पादन के कारण देखने को मिल रही है.
इन कंपनी के शेयरों में उछालकई भारतीय चीनी कंपनियों के शेयर में तगड़ उछाल देखने को मिल रहा है. जिसके कारण आने वाले समय में भी चीनी के दामों में तेजी देखने को मिल सकती है. कई शुगर कंपनियों के शेयरों में 4 से 9 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल रहा है. आइये बताते हैं किस कंपनी के शेयर में कितना उछाल आया है.




कंपनी

तेजी (प्रतिशत में)
मौजूदा भाव


बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड
6.92%
21.33 रुपये


श्री रेणुका शुगर लिमिटेड
4.50%
22.75 रुपये


अवध शुगर्स एंड एनर्जी
3.59%
873.90 रुपये


डालमिया भारत शुगर
5.93%
453.80 रुपये


धामपुर शुगर मिल्स
6.82%
188.85 रुपये


आंध्रा शुगर्स लिमिटेड
2.98%
94.60 रुपये


उत्तम शुगर मिल्स
2.27%
301.45 रुपये



क्यों बढ़ रहे तेजी से दाम?चीनी की कीमतों में इतना उछाल उत्पादन कम होने के कारण आया है. देश के प्रमुख राज्य जैसे आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जहां सबसे ज्यादा गन्ने का उत्पादन होता है, वहां इस बार उत्पादन में कमी आई है. इन राज्यों में इस साल चीनी की उत्पादन घटकर करीब 280 से 290 लाख टन रहा है. ये उत्पादन देश की खपत के बराबर ही है.
चीनी डायवर्जन पर लग सकता है बैनइतना ही नहीं चीनी की ज्यादा खपत को रोकने के लिए सरकार प्लान बना रही है कि एथेनॉल के प्रोडक्शन के लिए चीनी के डायवर्जन को बैन किया जाए. जिससे कि चीनी की खपत थोड़ी कम हो और साथ ही साथ कीमतों के बढ़ने पर भी रोक लगाई जा सके.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब सर्फ&amp;साबुन भी महंगे, HUL ने Surf Excel, Rin और Wheel के बढ़ाए दाम</title>
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        <description><![CDATA[ देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, खाने- पीने के सामानों के साथ ही रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है. हाल ही में हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने पॉपुलर डिटरजेंट ब्रांड व्हील, सर्फ एक्सेल और रिन के कई पैकेट के दाम अक्टूबर में फिर से बढ़ा दिए हैं.
कंपनी ने अलग-अलग प्रोडक्ट की कीमत में 2.2% से 7.1% तक की बढ़ोतरी कर दी है. खास बात ये है कि इनमें से कई प्रोडक्ट्स के दाम इस साल दूसरी, तीसरी या चौथी बार बढ़ाए गए हैं.
कितने बढ़े डिटरजेंट पाउडर के दाम?कंपनी ने व्हील पाउडर की 1 किलो पैकेट की कीमत 90 रुपये से बढ़ाकर 93 रुपये कर दी है. वहीं 500 ग्राम का पैकेट 46 रुपये से बढ़कर 47 रुपये का कर दिया है.&amp;nbsp;
तो वहीं सर्फ एक्सेल ईजी वॉश का 1 किलो पैकेट अब 172 रुपये का हो गया है, जो पहले 167 रुपये का था. इसके साथ ही 500 ग्राम पैकेट की कीमत 85 रुपये से बढ़ाकर 87 रुपये कर दी गई है.
इसके अलावा रिन आला के 500ml के पैक की कीमत 90 रुपये से बढ़ाकर 95 रुपये कर दी है. रिन पाउडर का 1 किलो का पैकेट अब 123 रुपये का हो गया है. जो पहले 120 रुपये का था. वहीं 500 ग्राम पैकेट की कीमत 61 रुपये से बढ़ाकर 63 रुपये कर दी गई है.
कई बार बढ़ी हैं इस साल कीमतेंहालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब HUL ने अपने डिटरजेंट प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा किया है. इससे पहले कंपनी व्हील पाउडर की कीमत को 10 रुपये तक बढ़ा चुकी है. तो वहीं सर्फ एक्सेल की कीमतों में भी इस साल करीब 11 रुपये का इजाफा हुआ है. रिन की कीमतों में भी इस साल तेजी से इजाफा हुआ है.
जनता पर पड़ेगा असरव्हील, रिन और सर्फ एक्सेल रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट हैं. इसलिए इनकी कीमत बढ़ने का सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ सकता है. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर होगा जो नियमित रूप से बड़े पैक खरीदते हैं. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में कपड़े धोने के सामान पर घर का खर्च थोड़ा और बढ़ सकता है.
क्यों बढ़ रहे बार-बार दाम?बता दें कि डिटर्जेंट की कीमत बढ़ने की बड़ी वजह कच्चे माल और पैकेजिंग की बढ़ती लागत बताई जा रही है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, पाम ऑयल की कीमत करीब 20-30% तक बढ़ी है. इसके अलावा पैकेजिंग की लागत में भी करीब 50% तक बढ़ोतरी हुई है. कच्चे तेल की ऊंची कीमत और मिडिल ईस्ट में तनाव का भी लागत पर असर पड़ा है.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पटना का टिकट 25 हजार के पार, बड़े शहरों में 227% तक बढ़े फ्लाइट के दाम</title>
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        <description><![CDATA[ दीपावली और छठ देश में दोनों ही पर्व की जमकर धूम रहती है. जिसके लिए बाहर रहने वाले लोग अपने- अपने घर जाते हैं. ऐसे में ट्रेन, फ्लाइट और बस समेत तमाम ट्रांसपोर्ट के रास्ते व्यस्त रहते हैं. इसी व्यस्तता के बीच अब एयर फेयर भी तेजी से बढ़ गया है. जिसके कारण अब तक जिन लोगों ने टिकट बुक नहीं की है उनको किराया काफी महंगा पड़ सकता है.
कुछ प्रमुख रूट्स जहां पर दीपावली और छठ की ज्यादा धूम रहती है, उन रूट्स का किराया 25 हजार रुपये के पार पहुंच गया है. बड़े शहरों में 227% तक फ्लाइट के दाम बढ़ गए हैं.
इन रूट्स का बढ़ा सबसे ज्यादा किरायादिल्ली से बिहार या मुंबई से बिहार जाने वाले रास्तों पर सबसे ज्यादा रश है. रश के साथ ही इन शहरों से हवाई किराया भी बहुत ज्यादा है. सितंबर के किराये से मुकाबला करें तो नवंबर में फ्लाइट्स की किराया सीधे दोगुना हो गया है. जो यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी वाली बात है. किराया बढ़ाने के कारण एयरलाइंस को इस फेस्टिव सीजन काफी मुनाफा होने वाला है.
पटना-बिहार के रूट्स हैं सबसे व्यस्तसबसे ज्यादा व्यस्त रूट्स पटना और बिहर के हैं और इन्हीं पर सबसे ज्यादा किराया बढ़ा भी है. देखते हैं इन रूट्स पर 6 सितंबर को कितना किराया था और 7 नवंबर को कितना किराया होगा.



हवाई मार्ग
6 सितंबर
7 नवंबर


मुंबई-पटना
7,694 रुपये
25,154 रुपये


बेंगलुरू-पटना
13,190 रुपये
23,795 रुपये


दिल्ली-पटना
6314 रुपये
17,477 रुपये


अहमदाबाद-पटना
8,294 रुपये
22,617 रुपये


हैदराबाद-पटना
8,177 रुपये
18,134 रुपये


चेन्नई-पटना
11,377 रुपये
20,303 रुपये



क्यों बढ़ रहा किराया?एयर फेयर में तेजी से उछाल ऐसे समय में आया है, जब सरकार पूरी तरह से इस पर निगरानी रख रही है. इस समय देशभर में महंगाई बढ़ रही है, तेजी से ईंधन की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है. इसी वजह से किराया भी तेजी से बढ़ रहा है. इतना ही नहीं फिलहाल यात्रियों की संख्या बढ़ने और फेस्टिव सीजन का फायदा कंपनियां भी उठा रही है. जहां एक तरफ सरकार ने कीमतों के नियंत्रित रखने की हिदायत दी थी, तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से किराया नियंत्रण के नियमों पर काम करने को कहा है. इसके बावजूद त्यौहारी सीजन में मांग बढ़ने के साथ प्रमुख मार्गों पर टिकट महंगे हो गए हैं.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चीनी पर सरकार का बड़ा फैसला, 1000 क्विंटल से ज्यादा नहीं रख सकेंगे स्टॉक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-पर-सरकार-का-बड़ा-फैसला-1000-क्विंटल-से-ज्यादा-नहीं-रख-सकेंगे-स्टॉक</link>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारों से पहले चीनी के बढ़ते दामों से जनता परेशान है. ऐसे में अब सरकार ने जनता की परेशानियों को थोड़ा कम करने की कोशिश की है. सरकार ने चीनी के स्टॉक पर एक बार फिर से लगाम लगा दी है. सरकार ने चीनी की कीमतों और सप्लाई पर नजर रखने के लिए चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 1000 क्विंटल कर दी है.
ये नया नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा. सरकार ने चीनी रखने की समय सीमा भी घटाकर 15 दिन कर दी है. जिसके बाद व्यापारियों को चीनी मिलने के बाद उसे 15 दिन से ज्यादा समय तक रखने की अनुमति नहीं होगी.
पहले कितनी थी सीमा?सरकार ने अगस्त में व्यापारियों को अधिकतम 4000 क्विंटल चीनी रखने की अनुमति दी थी. साथ ही चीनी मिलने की तारीख से 30 दिन तक स्टॉक रखने की इजाजत थी. इसके बाद 15 सितंबर से स्टॉक सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई. अब इसे और घटाकर 1000 क्विंटल कर दिया गया है.
क्यों लिया फैसला?सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद चीनी की जमाखोरी रोकना और बाजार में इसकी सप्लाई बनाए रखना है. सरकार चाहती है कि चीनी मिलों से निकलने के बाद चीनी व्यापारियों के पास लंबे समय तक जमा न रहे, बल्कि जल्दी से बाजार में पहुंचे और आम लोगों को आसानी से मिल सके. इससे चीनी की कमी पैदा करने और सट्टेबाजी को रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
कम हुए चीनी के दामखाद्य मंत्रालय के मुताबिक, चीनी की औसत खुदरा कीमतें अगस्त के सबसे ऊंचे स्तर से करीब 15% कम हो चुकी हैं. मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में कीमतों में और कमी आ सकती है. वहीं, चीनी मिलों के स्तर पर कीमतों में करीब 28% की गिरावट आई है. पिछले तीन हफ्तों से मिल स्तर पर चीनी की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं.
इन राज्यों को मिली राहतबता दें कि इस फैसले से सरकार ने दो राज्यों को मुक्त रखा है. कलकत्ता और उसके आसपास के विस्तारित महानगरीय क्षेत्र और असम पर ये नियम लागू नहीं होंगे. क्योंकि यहां हले से ही चीनी की खपत लिमिटेड है. ऐसे में इन राज्यों को इसकी जरूरत नहीं है.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Swiggy&amp;Zomato से खाना मंगाना होगा सस्ता, GST 18% से घटाकर 5% करेगी सरकार!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/swiggy-zomato-से-खाना-मंगाना-होगा-सस्ता-gst-18-से-घटाकर-5-करेगी-सरकार</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप अक्सर Swiggy या Zomato से खाना मंगाते हैं तो 8 अक्टूबर की तारीख आपके लिए खास हो सकती है. वजह है GST काउंसिल की बैठक, जिसमें ऑनलाइन फूड डिलीवरी की लागत से जुड़ा ऐसा फैसला सामने आ सकता है, जिसका सीधा असर ग्राहकों के बिल पर पड़ सकता है.
डिलीवरी चार्ज पर लगने वाला GST 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव विचाराधीन है. हालांकि, अंतिम फैसला बैठक में ही होगा.
डिलीवरी चार्ज पर 18 प्रतिशत GST से मिल सकती है राहत
फिलहाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खाना ऑर्डर करने पर खाने की कीमत पर 5 प्रतिशत GST लगता है, लेकिन डिलीवरी फीस को अलग सेवा मानते हुए उस पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है. अब GST काउंसिल इस अंतर को खत्म करने पर विचार कर रही है.
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म पर लगने वाली डिलीवरी फीस पर भी 5 प्रतिशत GST लागू हो सकता है. इससे बिलिंग व्यवस्था आसान होने के साथ ग्राहकों को भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
होटल और रेस्टोरेंट को ITC का फायदा?
बैठक में होटल, रेस्टोरेंट और फिटनेस सेंटर जैसे कारोबारों के लिए ITC से जुड़ा प्रस्ताव भी चर्चा में है. 5 प्रतिशत GST देने वाले इन सर्विस प्रोवाइडर्स को कुछ इनपुट खर्चों पर टैक्स क्रेडिट देने की संभावना पर विचार किया जा रहा है. इससे कारोबारियों की लागत कम करने में मदद मिल सकती है.
हेल्थकेयर सेक्टर में भी मिल सकती है बड़ी राहत
GST काउंसिल दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर भी अहम फैसला कर सकती है. सात और दुर्लभ बीमारियों को GST छूट वाली सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है. इससे महंगी और जीवनरक्षक दवाओं पर मरीजों का आर्थिक बोझ कम हो सकता है.
डिफेंस और एग्रीकल्चर से जुड़े प्रस्ताव भी एजेंडे में
डिफेंस सेक्टर में मिसाइल के पुर्जों, स्पेयर पार्ट्स और विशेष टेस्टिंग उपकरणों को IGST छूट देने पर विचार हो सकता है. वहीं, कृषि बीजों की स्टोरेज और वेयरहाउसिंग सेवाओं को GST से मुक्त करने का प्रस्ताव भी सामने है.
इसके अलावा विदेशी शिपिंग कंपनियों को दी जाने वाली कुछ सेवाओं और सिमिनस प्रोविडेंट फंड ओरगंनाइजेशन की सेवाओं को भी टैक्स राहत देने पर चर्चा हो सकती है.
8 अक्टूबर को होगा फैसला
GST काउंसिल की 57वीं बैठक 8 अक्टूबर को होगी, फिलहाल ये सभी प्रस्ताव विचाराधीन हैं. अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही इन पर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.
यह भी पढ़ें- RBI MPC Meeting 2026 LIVE: क्या महंगे होंगे होम और कार लोन? रेपो रेट पर आज फैसला
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>घरेलू LPG सिलेंडर के ताजा रेट:  कहां सबसे सस्ता, कहां सबसे महंगा?</title>
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        <description><![CDATA[ घरेलू LPG सिलेंडर के ताजा रेट:  कहां सबसे सस्ता, कहां सबसे महंगा? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>RBI ने दिया बड़ा झटका, 4 साल बाद रेपो रेट में हुई बढ़ोतरी, कितनी बढ़ेगी EMI?</title>
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        <description><![CDATA[ अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की है. 5 अक्टूबर से शुरू होकर 7 अक्टूबर 2026 तक चली इस बैठक में पश्चिम एशिया में तनाव से महंगाई के जोखिम, कच्चे तेल और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक दबाव जैसे फैक्टर्स पर फोकस किए गए.
पिछली बार कब बढ़ा था रेपो रेट?
RBI ने इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट में बढ़ाेतरी की थी. इस दौरान रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) बढ़ाकर 6.50% के स्तर पर ला दिया था. इसके बाद से दिसंबर 2024 तक रेपो रेट को इसी उच्चतम स्तर पर स्थिर रखा गया था. फिर साल 2025 में हालात थोड़े सुधरे में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कुल चार बार 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की, जिससे यह घटकर 5.25% पर आ गया. दिसंबर 2025 के बाद से अब तक यानी कि लगभग 10 महीनों तक रेपो रेट को इसी स्तर पर रखने के बाद अब रिजर्व बैंक ने इसमें फिर से बढ़ाेतरी की है.&amp;nbsp;
2025 में कब-कब बढ़े रेपो रेट?
फरवरी 2025 में 25 बेसिस पॉइंट्स की पहली कटौती की गई, जिससे रेपो रेट 5 साल के लंबे अंतराल के बाद आरबीआई ने पहली बार रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स कम करके इसे 6.50% से 6.25% पर ले आए.
अप्रैल 2025 में 25 बेसिस पॉइंट्स की दूसरी कटौती की गई, जिससे यह कम होकर 6.00% पर आ गया.&amp;nbsp;
जून 2025 में 50 बेसिस पॉइंट्स की तीसरी और बड़ी कटौती की गई, जिससे दरें 5.50% पर आ गईं.
दिसंबर 2025 में चौथी कटौती की गई. इस दौरान रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर इसे मौजूदा स्तर यानी 5.25% पर लाया गया.&amp;nbsp;
रेपो रेट बढ़ने का असर
रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन महंगे हो जाते हैं क्योंकि रेपो रेट वह रेट होता है, जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को कर्ज देता है. अब बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेना महंगा होगा, तो उनके लिए फंड की लागत बढ़ जाएगी. इसके चलते बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बढ़ा देंगे. ब्याज दरें बढ़ेंगी, तो EMI पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च होगा.
अगर आपने &#039;फ्लोटिंग रेट&#039; पर लोन लिया हुआ है, तो बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के साथ-साथ आपके लोन की मासिक किस्त (EMI) बढ़ जाएगी. कुछ मामलों में बैंक EMI को स्थिर रखकर लोन के भुगतान की कुल समयावधि को बढ़ा देते हैं. हालांकि, जिन ग्राहकों ने लोन लेते वक्त &amp;bull; &#039;फिक्स्ड रेट&#039; (Fixed Rate) का विकल्प चुना था, उन पर आरबीआई के इस फैसले का कोई असर नहीं होगा.
FD पर होगा फायदा
भले ही रेपो रेट बढ़ने से आपकी हर महीने जाने वाली ईएमआई महंगी हो जाएगी, लेकिन इसके कुछ फायदे भी हैं. दरअसल, रेपो रेट बढ़ने से बैंकों में Fixed Deposit (FD) कराने वाले ग्राहकों को फायदा होगा. इससे जमाकर्ताओं को अपनी बचत पर ब्याज दरें पहले के मुकाबले बढ़कर मिलेंगी.
कितनी बढ़ जाएगी EMI?
रेपो रेट में आरबीआई की 0.25% (25 बेसिस पॉइंट्स) की इस बढ़ोतरी से आपके बैंक लोन पर ब्याज दरें भी 0.25% बढ़ जाएगी. मिसाल के तौर पर, 50 लाख के होम लोन पर आपकी मासिक EMI में लगभग 780 से 817 रुपये तक का इजाफा हो सकता है.
अगर हम मौजूदा ब्याज दर को 7.50% मानकर चले, तो रेपो रेट 0.25% बढ़ने के बाद यह भी इतना ही बढ़ना 7.75% बढ़ जाएगी. ऐसे में 20 साल के लिए गए 50 लाख रुपये तक के होम लोन पर मौजूदा रेपो रेट के हिसाब से ईएमआई 777 रुपये बढ़ जाएगी. जहां पहले 7.50% ब्याज दर पर महीने की 40,280 रुपये किश्त जाती थी. वहीं, अब यह बढ़कर 41,057 रुपये हो जाएगी.&amp;nbsp;
इसी तरह से अगर आपने 50 लाख का लोन लिया है और टेन्योर 25 साल है, तो 7.50% ब्याज दर पर महीने की किश्त 37,766 रुपये जाएगी, जो पहले 7.50% ब्याज दर पर 36,950 रुपये कटती थी.&amp;nbsp;
क्या रियल एस्टेट में घटेगी मांग?
गंगा रियल्टी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विकास गर्ग ने कहा, &#039;&#039;RBI की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किया जाना ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है और रियल एस्टेट सेक्टर त्योहारी सीजन में प्रवेश कर रहा है. रेपो रेट में इस बदलाव से होम लोन की लागत पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन हमारा मानना है कि देश में घरों की मांग और रियल एस्टेट सेक्टर की बुनियाद मजबूत बनी हुई है.&#039;&#039;
उन्होंने आगे कहा, &#039;&#039;आज घर खरीदने वाले लोग इसे केवल जरूरत नहीं, बल्कि लंबे समय के निवेश के तौर पर भी देखते हैं. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ती आय और बेहतर जीवनशैली की चाहत से हाउसिंग की मांग को लगातार मजबूती मिल रही है. त्योहारी सीजन में आमतौर पर घर खरीदने की गतिविधियां बढ़ती हैं और हमें उम्मीद है कि इस बार भी यह रफ्तार बनी रहेगी. खासकर गुरुग्राम जैसे मजबूत बाजारों में मांग सकारात्मक रहने की उम्मीद है. हम आने वाले महीनों को लेकर पूरी तरह आशावादी हैं.&#039;&#039;
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>जब कैब बुक करते हैं तो कौनसे हिडन चार्जेस से बढ़ जाता है बिल?</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन बुकिंग में दिख रहा किराया देखकर अगर आप भी तुरंत रेंटल कार बुक कर लेते हैं, तो थोड़ा रुकना जरूरी है, क्योंकि स्क्रीन पर दिखाई देने वाली कीमत और आखिर में चुकाई जाने वाली रकम एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं.
कार वापस करने के बाद डेमेज, ट्राफिक चालान और फयूल जैसे खर्च आपका पूरा बजट बिगाड़ सकते हैं.
सिर्फ किराया देखकर न करें बुकिंग
सेल्फ ड्राइव कार बुक करते समय ग्राहक अकसर डेली रेंटल प्राइज पर ध्यान देते हैं. लेकिन बुकिंग की शर्तों में कई ऐसे चार्जिस होते हैं, जो किसी खास परिस्थिति में लागू हो सकते हैं. इसलिए कार लेने से पहले ट्रमस एंड कंडिशन को ध्यान से पढ़ना जरूरी है.
Revv के फाउंडर और CEO अनुपम अग्रवाल के मुताबिक, ग्राहक को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि कार का इंश्योरेंस और रेंटर की जिम्मेदारी अलग-अलग चीजें हैं. बुकिंग के समय मिलने वाला डेमेज वेयवर यह तय करता है कि नुकसान होने पर ग्राहक को कितनी रकम देनी पड़ सकती है.
डेमेज हुआ तो कितना देना पड़ेगा?
कार पर खरोंच या किसी तरह का नुकसान होने की स्थिति में रकम डेमेज वेयवर और लाइबिलिटी केप पर निर्भर करती है. इसलिए बुकिंग से पहले यह जरूर देखें कि आपकी अधिकतम लाइबिलिटी कितनी है और किन परिस्थितियों में वेयवर काम नहीं करेगा.
उदाहरण के तौर पर नशे में गाड़ी चलाने जैसी स्थिति में डेमेज प्रोटेक्शन का लाभ नहीं मिल सकता. वहीं Revv के अनुसार छोटे-मोटे सक्रेचिस पर आमतौर पर शुल्क नहीं लगाया जाता.
कार लौटाने के बाद भी आ सकता है चालान
रेंटल खत्म होने के बाद जिम्मेदारी पूरी तरह खत्म हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है. यात्रा के दौरान हुआ ओटोमिटेड ई-चालान बाद में ग्राहक तक पहुंच सकता है. इसके अलावा कुछ कंपनियां चालान ट्रांसफर करने के लिए एडमिनिसट्रेडिट फीस भी ले सकती हैं.
फयूस का खर्च भी बढ़ा सकता है बिल
अगर कार वापस करते समय टैंक में तय मात्रा में फयूल &amp;nbsp;नहीं है, तो कंपनी खुद फयूल भरकर उसका खर्च ग्राहक से वसूल सकती है. कुछ रेंटल प्लानस में फयूल की कीमत के साथ अतिरिक्त रिफ्यूलिंग सर्विस चार्ज भी जुड़ सकता है.
बुकिंग से पहले ये बातें जरूर जांचें
रेंटल कार लेने से पहले डेमेज वेयवर,लाइबिलिटी लिमिट, एक्सकलयुजंस, केंसिलेशन चार्जिस,फयूल पोलिसी और ट्रेफिक फाइन रुल्स जरूर पढ़ें. अगर बुक किया हुआ मोडल उपलब्ध नहीं है, तो कंपनी की रिपल्सेमेंट पोलिसी भी समझ लें. कुछ मामलों में समान सेगमेंट की दूसरी कार या अपग्रेड दिया जा सकता है.
यानी रेंटल कार की असली कीमत सिर्फ ओनलाइंन दिखाई देने वाला किराया नहीं है. बुकिंग कंफर्म करने से पहले छोटे अक्षरों में लिखी शर्तें पढ़ना ही आपको बाद के बड़े बिल से बचा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Repo Rate: FD कराने वालों के लिए अच्छी खबर, बैंक बढ़ाएंगे ब्याज दरें</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप एफडी करवाने की सोच रहे हैं तो आपके लिए जरूरी अपडेट है. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है. इसका असर कार लोन, होम लोन और पर्सनल लोन लेने&amp;nbsp;वाले ग्राहकों पर पड़ेगा, क्योंकि अब उनको पहले के मुकाबले EMI पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
इसके साथ ही आरबीआई के इस फैसले से बैंक की ब्याज दरों पर भी असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि आने वाले समय में बैंक FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज में भी बढ़ोतरी कर सकता है, जिसका फायदा एफडी करवाने वाले लोगों को मिल सकता है.
क्या FD कराने वालों को मिलेगा ज्यादा रिटर्न?
अगर बैंक अपनी एफडी दरों में बढ़ोतरी करते हैं तो नए निवेशकों को पहले की तुलना में ब्याज ज्यादा मिल सकता है. यानी मतलब साफ है कि अब जो लोग एफडी करवाने वाले हैं तो अब उन्हें एफडी के बढ़े हुए ब्याज दरों का फायदा मिलने की उम्मीद की जा रही है.&amp;nbsp;
कब बढ़ेगी FD की ब्याज दरें?
सबसे अहम सवाल यही है कि अब जब रेपो रेट में बढ़ोतरी की गई है तो बैंक अपनी एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कब करेंगे? जानकारी के मुताबिक, बैंक अगले कुछ दिन से लेकर कुछ हफ्तों में एफडी की ब्याज दरों में इजाफा करना शुरू कर सकते हैं. वहीं अब अक्टूबर-नवंबर के महीने में कई बड़े त्योहार हैं तो बैंक त्योहारों के सीजन में स्पेशल एफडी स्कीम लॉन्च करके बढ़ी हुई ब्याज दरों की घोषणा कर सकते हैं. अब ऐसे में अगर आपको भी एफडी करवानी है तो पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान देना महत्वपूर्ण है.
FD करवाने से पहले जानें ले जरूरी बात
अगर एफडी करवानी है और आप बड़ी रकम जमा करने की सोच रहे हैं तो आप पहले कुछ हफ्तों का इंतजार कर लें, ताकि बैंक एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दें और इसका फायदा आपको मिल सकें. &amp;nbsp;
लोन लेने वालों को होगी दिक्कत
रेपो रेट के बढ़ने से अब लोन लेने वाले ग्राहकों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि कार लोन, पर्सनल लोन और होम लोन की ब्याज दरें बढ़ने पर ग्राहकों की EMI में भी बढ़ोतरी हो सकती है. अब उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा EMI देनी पड़ सकती है. यानी जहां एक तरह एफडी करवाने वालों के लिए ब्याज दरों में इजाफा होने की उम्मीद की जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ कर्ज लेने वालों की जेब पर असर पड़ सकता है.
RBI ने दिया बड़ा झटका, 4 साल बाद रेपो रेट में हुई बढ़ोतरी, कितनी बढ़ेगी EMI?
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली के इन मार्केट से खरीदें सस्ती चनिया&amp; चोली, सिर्फ 500 में बनेगा नवरात्र स्पेशल आउटफिट</title>
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        <description><![CDATA[ नवरात्रि आते ही लड़कियों के बीच सबसे ज्यादा एक्साइटमेंट गरबा और डांडिया नाइट के आउटफिट को लेकर रहती है. चनिया चोली, लहंगा, मिरर वर्क वाला दुपट्टा और ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी से पूरा गरबा लुक तैयार किया जाता है. लेकिन अगर आप हर नाइट के लिए नया आउटफिट खरीदने की सोच रही हैं तो बजट बिगड़ सकता है.
ऐसे में दिल्ली की कुछ मार्केट आपके काम आ सकती हैं. यहां आपको कम बजट में चनिया चोली से लेकर लहंगा, कुर्ती और ज्वेलरी तक मिल सकती है. तो अगर आप सस्ता और स्टाइलिश नवरात्रि आउटफिट ढूंढ रही हैं, इन मार्केट को ट्राई कर सकती हैं. ये शॉपिंग के लिए बेस्ट हैं.
1. सरोजिनी मार्केट
कम बजट में शॉपिंग की बात हो और दिल्ली में सरोजिनी नगर का नाम न आए, ऐसा कैसे हो सकता है. यहां आपको रंग-बिरंगे टॉप, स्कर्ट, दुपट्टे और इंडो-वेस्टर्न कपड़ों के साथ गरबा लुक के लिए कई बजट ऑप्शन मिल सकते हैं. कुछ जगहों पर चनिया चोली और एथनिक सेट भी मिल जाते हैं. यहां बातचीत करके पैसे भी कम हो जाते हैं.
नवरात्रि के लिए यहां करीब 500 रुपए से 2,000 रुपए के आसपास चनिया चोली सेट मिल सकते हैं. अगर आपका बजट कम है और आपको एक से ज्यादा आउटफिट लेने हैं, तो ये मार्केट अच्छा ऑप्शन है.
&amp;nbsp;2. जनपथ
जनपथ में गुजराती और ट्रेडिशनल कपड़ों की शॉपिंग के लिए काफी ऑप्शन मिलते हैं. यहां मिरर वर्क, कलरफुल स्कर्ट, दुपट्टे और ट्रेडिशनल एक्सेसरीज जैसी चीजें मिल सकती हैं. खास बात ये है कि यहां से सिर्फ ड्रेस ही नहीं बल्कि ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी और दूसरी छोटी-छोटी एक्सेसरीज लेकर आप अपना पूरा नवरात्रि लुक तैयार कर सकती हैं.
जनपथ पर चनिया चोली सेट करीब 1,000 से 2,500 रुपए के बीच मिल जाते हैं. बाकि तो आप बार्गेनिंग करके पैसे कम करा ही सकती हैं.
3. लाजपत नगर
लाजपत नगर मार्केट उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है जो बहुत ज्यादा महंगा भी नहीं खरीदना चाहते, लेकिन कपड़े की क्वालिटी और डिजाइन से ज्यादा समझौता भी नहीं करना चाहते. यहां आपको एथनिक वियर, लहंगा, कुर्ती और फेस्टिव आउटफिट की कई दुकानें मिल जाएंगी. यहां अच्छे चनिया चोली सेट करीब 1,500 रुपए से 4,000 रुपए के आसपास मिल सकते हैं. भारी वर्क वाले आउटफिट इससे महंगे हो सकते हैं.
4. चांदनी चौक
कई सारे एथनिक वियर स्टोर्स के अलावा चांदनी चौक की अलग-अलग गलियों में आपको फेस्टिव कपड़ों के कई ऑप्शन मिल जाएंगे. यहां खास फायदा यह है कि आप लहंगा या चनिया चोली के साथ मैचिंग दुपट्टा, बॉर्डर, ज्वेलरी और दूसरी चीजें भी ढूंढ सकती हैं. अगर आपको ज्यादा ट्रेडिशनल या थोड़ा हैवी गरबा लुक चाहिए तो ये मार्केट सही है.
यहां शॉपिंग करते समय एक दुकान पर रुकने के बजाय 3-4 दुकानों में रेट पूछते चलें. इससे आपको कीमत का अंदाजा लग जाएगा.
5. करोल बाग
करोल बाग में भी एथनिक वियर की कई दुकानें हैं. अगर आपको बहुत ज्यादा गुजराती पैटर्न वाला चनिया चोली नहीं चाहिए और उसकी जगह लहंगा, एथनिक स्कर्ट, कुर्ती या इंडो-वेस्टर्न आउटफिट पहनना है तो यहां ऑप्शन देख सकती हैं.
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, के, इन, मार्केट, से, खरीदें, सस्ती, चनिया-, चोली, सिर्फ, 500, में, बनेगा, नवरात्र, स्पेशल, आउटफिट</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: बेंगलुरु मीटिंग से पहले किन 5 प्रमुख मांगों पर बना एजेंडा?</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की बैठकों का दौर लगातार जारी है. इसी कड़ी में आयोग की अगली बैठक बेंगलुरु में होने जा रही है. जिससे पहले ही कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने अपनी कई सारी मांगें रख दी हैं. इससे साफ पता चलता है कि कर्मचारियों की आयोग से क्या उम्मीदें हैं. अलग- अलग यूनियनों ने अपनी अलग- अलग डिमांड्स आयोग के सामने रखी हैं.
किसी ने फिटमेंट फैक्टर में बदलाव की मांग की है, जिससे कि बेसिक सैलरी स्ट्रक्चर महंगाई को देखते हुए अच्छा- खासा बढ़ जाए. तो वहीं किसी ने डीए में बढ़ोतरी की मांग की है. तो आइये जानते हैं किस यूनियन ने क्या डिमांड आयोग से की है.
इन संगठनों ने रखीं डिमांड्सबेंगलुरु में होने वाली 8वें वेतन आयोग की बैठक से पहले प्रमुख रूप से दो कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांग आयोग के सामने रखी है. जिसमें से एक है IRTSA यानी इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन और दूसरा संगठन है RSCWS यानी रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसायटी. ये दोनों सगठन रेलवे के कर्मचारियों और रिटायर्ड हुए कर्मचारयों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन्हीं दोनों संगठनों ने आठवें वेतन आयोग की बेंगलुरु में होने वाली बैठक से पहले अपनी मुख्य मांगें आयोग के सामने रखी हैं.
IRTSA की मांगें?इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने बेंगलुरु में होने वाली मीटिंग से पहले फिटमेंट फैक्टर, मिनिमम पे, अलाउंस आदि को लेकर अपनी पांच मांगे रखी हैं जो इस प्रकार हैं.

संगठन की पहली मांग है कि मिनिमम पे बढ़ाकर 52,600 किया जाए.
तो वहीं फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी अलग- अलग लेवल के कर्मचारियों के हिसाब से बदलाव किया जाए, जैसे:
&amp;nbsp;




लेवल
फिटमेंट फैक्टर


लेवल 1-5
2.92 फिटमेंट फैक्टर


लेवल 6-8
3.50 फिटमेंट फैक्टर


लेवल 9-12
3.80 फिटमेंट फैक्टर


लेवल 13-16
4.09 फिटमेंट फैक्टर


लेवल 17-18
4.38 फिटमेंट फैक्टर




&amp;nbsp;
तो वहीं इन कर्मचारियों के मिताबिक हर साल 5% एनुअल इंक्रीमेंट भी कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए.
इसके अलावा नाइट ड्यूटी, ओवरटाइम रिस्क टेकिंग जॉब के लिए अलग से अलाउंस दिया जाए.
तो वहीं कर्मचारियों को पेंशन और रिटायरमेंट के बाद के लिए सर्विस के दौरान ही अच्छा पैसा दिया जाना चाहिए.

RSCWS की मांगे?रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसायटी (RSCWS) ने भी इसी तरह रिटायर्ड कर्मचारियों के संगठन के लिए मांगे रखी हैं. जो इस प्रकार हैं:

रिटायर्ड कर्मचारियों के इस संगठन ने बेसिक पे के कम्पोनेंट को बढ़ाने की मांग की है.
HRA और TA के पीरियोडिक रिवीजन के लिए बेसिक पे और अलाउंस के बीच बेहतर बैलेंस बनाने की मांग रखी है.
स्पेशलाइज्ड ड्यूटी और हार्डशिप को इनहेंस करने के लिए रिव्यू करने की मांग रखी है.
तो वहीं रिटायरमेंट सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए मीनिंगफुर बेसिक पे को लेकर भी मांग की गई है.
इसके अलावा जरूरी अलाउंस को महंगाई के हिसाब से रिव्यू कर बढ़ाने के लिए भी संगठन ने कहा है.

बेंगलुरु मीटिंग में क्या आएगा नतीजा?बता दें कि आयोग की अगली बैठक बेंगलुरु में है, जिसमें फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिविजन और पेंशन पेंशन रिफॉर्म्स जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. हालांकि इन चीजों को लेकर केवल चर्चा होने वाली है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकाला सामने नहीं आएगा. आयोग की फाइनल रिपोर्ट जून 2027 में आने वाली है.
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, बेंगलुरु, मीटिंग, से, पहले, किन, प्रमुख, मांगों, पर, बना, एजेंडा</media:keywords>
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        <title>8 रुपए तक महंगा होगा दूध, इस राज्य में सरकार ने दी हरी झंडी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8-रुपए-तक-महंगा-होगा-दूध-इस-राज्य-में-सरकार-ने-दी-हरी-झंडी</link>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक राज्य में हुई कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फैसले किए गए. इस बैठक में राज्य सरकार ने दूध के दामों में इजाफा करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की और चर्चा का नतीजा ये निकला कि सरकार ने दूध के दाम बढ़ाने पर मंजूरी दे दी है. सरकार ने नंदिनी मिल्क पर 8 रुपये तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर मोहर लगा दी है.
इस खबर से जहां एक तरफ मिल्क यूनियनों में खुशी की लहर है, तो वहीं दूसरी ओर आम जनता के ऊपर महंगाई की मार पड़ गई है. अब रोजमर्रा का खर्च भी इस राज्य के नगरिकों के लिए बढ़ जाएगा. हालांकि ये नई कीमतें कब तक लागू होंगी इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है.
मिल्क यूनियनों ने रखा था प्रस्तावकर्नाटक राज्य में नंदिनी दूध की कीमतें बढ़ाने के लिए मिल्क यूनियनों ने प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव के मुताबिर यूनियनों ने सरकार से मांग की थी कि दूध की कीमतों में 8 से 10 रुपये तक का इजाफा किया जाए. यूनियनों की इस मांग पर कैबिनेट की बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का समर्थन किया.
चुनाव आयोग की मंजूरी है जरूरीहालांकि दूध के दामों में ये बढ़ोतरी फिलहाल लागू नहीं होगी, क्योंकि फिलहाल कैबिनेट ने ही इसे मंजूरी दी है. जब तक चुनाव आयोग इसके लिए मंजूर नहीं दे देता है तब तक दामों में इजाफा नहीं किया जा सकेगा. क्योंकि राज्य में MLC चुनावों के कारण अभी आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए राज्य सरकार को चुनाव आयोग से मंजूरी लेना होगी. ऐसे में जब तक चुनाव आयोग इसके लिए मंजूरी नहीं दे देता है, तब तक कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी.
जनता पर पड़ेगी महंगाई की मारबता दें कि दूध के दाम सीधे 8 रुपये बढ़ने से राज्य की जनता पर अचानक से बोझ बढ़ जाएगा. क्योंकि दूध हर रोज की जरूरत की चीज है, रोज सुबह की चाय या कॉफी, बच्चों का दूध आदि के लिए दूध खरीदा जाता है. ऐसे में कीमतों में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी से आम जनता का रोजमर्रा का बजट बिगड़ जाएगा. देखना होगा कि कैबिनेट कब तक इसे मंजूरी देती है और इस पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रहती है.
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गुरुग्राम में 11.5 करोड़ का लग्जरी विला, इसमें रहने वालों को क्या&amp;क्या मिलता है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गुरुग्राम-में-115-करोड़-का-लग्जरी-विला-इसमें-रहने-वालों-को-क्या-क्या-मिलता-है</link>
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        <description><![CDATA[ रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग चाहते हैं कि हर सुविधा से युक्त घर या शहर में रहें. लोगों की इसी मांग को देखते हुए गुरुग्राम के सबसे बड़े रिय एस्टेट डेवलपर्स DLF ने एक नए रिटायरमेंट प्रोजेक्ट की घोषणा की. ये रिटायरमेंट प्रोजेक्ट है &#039;द ऑरेवा&#039;, इसे खासतौर से बुजुर्गों के लिए ही बनाया गया है. ये प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो चुका है और अब तक इसके सभी 172 घर बेचे जा चुके हैं.
इन घरों की कुल बिक्री करीब 1,985 करोड़ रुपये की हुई है. इसका मतलब है कि एक घर की औसत कीमत करीब 11.5 करोड़ रुपये पड़ती है. इस प्रोजेक्ट में लोगों का काफी इंटरेस्ट आ रहा है और लोग इसमें निवेश करना भी पसंद कर रहे हैं. आइये जानते हैं इस 11 करोड़ के घर में क्या- क्या सुविधाएं मिलने वाली हैं.
11.5 करोड़ रुपये में क्या- क्या मिलेगा?ये कोई साधारण या आम घर रिटायरमेंट होम नहीं हैं, बल्कि ये एक 45 मंजिल की लग्जरी बिल्डिंग है, जिसमें सभी घर 4 BHK हैं. हर एक घर करीब 4121 वर्गफुट के बिक्री योग्य क्षेत्र में बना है. जिसमें प्राइवेट बालकनी, मेड के लिए अलग जगह, 3 कारों की पार्किंग भी है. इन घरों को बुजुर्गों की सभी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए डिजाइन किया गया है.
लग्जरी घरों के अलावा यहां क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, स्पा, जिम और वेलनेस सेंटर, योग और मेडिटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, गार्डन और फंक्शंस करने के लिए जगह जैसी सुविधाएं भी होंगी.
मेडिकल सेंटर की होगी सुविधाइस प्रोजेक्ट में ऑन-साइट मेडिकल सेंटर और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सुविधा भी होगी. इसका मतलब है कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए निवासियों को हर छोटी जरूरत पर बाहर नहीं जाना पड़ेगा. बल्कि इसी सोसायी एरिया में मेडिकल की सुविधा उपलब्ध रहेगी.&amp;nbsp;
कितनी होगी घर की कीमत?द ऑरेवा में एक घर की कीमत औसतन करीब 28,000 रुपये प्रति वर्गफुट है. इसके अलावा खरीदारों को GST, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और अन्य शुल्क भी देने पड़ सकते हैं.
क्यों है ये &#039;रिटायरमेंट होम&#039;?DLF का मकसद सिर्फ बुजुर्गों को रहने की जगह देना नहीं है. कंपनी ऐसा माहौल बनाना चाहती है जहां उम्रदराज लोग आजादी से रह सकें, फिटनेस और मनोरंजन की सुविधाएं पा सकें, लोगों से मिल-जुल सकें और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाएं भी पास में मिलें.
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>किन शहरों के लिए सबसे महंगे हुए फ्लाइट टिकट, इस बार दिवाली छठ जेब पर भारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/किन-शहरों-के-लिए-सबसे-महंगे-हुए-फ्लाइट-टिकट-इस-बार-दिवाली-छठ-जेब-पर-भारी</link>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारों के सीजन में जहां एक तरफ लोगों के घर एक्स्ट्रा खर्च बढ़ जाते हैं, तो वहीं इस बार महंगाई की चौतरफा मार भी पड़ रही है. किचन के बजट से लेकर अब ट्रैवल का खर्च भी बढ़ गया है. यदि इस फेस्टिव सीजन में आप कहीं बाहर जाने का ट्रैवल का प्लान कर रहे हैं तो उसके लिए आपको अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में डोमेस्टिक एयर फेयर भी 68% की बढ़ोतरी देखी जा रही है.
घूमने ना सही लेकिन यदि कोई छठ या दीपावली के लिए अपने घर की क्यों ना जा रहा हो, उसका भी किराया बढ़ गया है. ये फेयर कई मेजर रूट्स जैसे दिल्ली- मुंबई, मुंबई- कलकत्ता जैसे बड़े रूट्स पर बढ़ गया है. जो लोगों की जेब पर बहुत ज्यादा भारी पड़ने वाला है.
उड़ानों की संख्या घटीना केवल टिकिट का किराया बढ़ा है बल्कि फ्लाइट्स की संख्या भी कम हुई है. ऐसे में जिन लोगों को फेयर के बढ़ने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, वो लोग समय से फ्लाइट बुक ना करें तो हो सकता है कि उन्हें सीट भी ना मिल पाए. हाल ही में ग्लोबल एनालिटिक्स फर्म OAG ने इसको लेकर डाटा पेश किया है. जिसमें बताया गया है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच पिछले साल के मुकाबले 5% प्रतिशत घरेलू फ्लाइट्स कम चल रही है.
हालांकि, कुल सीट की कैपेसिटी में केवल 1.2% की कमी आई है. इससे ये पता चलता है कि एयरलाइंस कम उड़ानें भर रही हैं, लेकिन ज्यादा सीटों वाली बड़ी फ्लाइट्स का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे पैसेंजर्स की कुल कैपेसिटी लगभग स्थिर बनी हुई है.
इन शहरों का बढ़ा किरायाजिन शहरों का एयर फेयर बढ़ा है, उनकी लिस्ट में मुंबई से जामनगर, दिल्ली से नवी मुंबई, अहमदाबाद से कोलकाता, हैदराबाद से जयपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं. इन शहरों में नवरात्री, दीपावली की ज्यादा धूम होती है, ऐसे में यहां पर किराया भी बढ़ा दिया गया है.
क्यों एकदम से बढ़े दाम?बता दें कि ये दाम ऐसे ही नहीं बढ़ें हैं बल्कि, जेट फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ है. जेट फ्यूल के बढ़ने से फ्लाइट्स को ऑपरेट करने की लागत बढ़ गई है. जिसके कारण टिकट की कॉस्ट बढ़ाकर कंपनियां यात्रियों से वसूली कर रही हैं. हालांकि इससे पहले कंपनियों ने काफी समय तक कोशिश की है कि यात्रियों पर बोझ ना पड़े, लेकिन अब जो खर्च हो रहा है उसे कंपनियों को उठाने में मुश्किल हो रही है.
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सस्ती हो गई AI वाली वॉशिंग मशीन, 1388 रुपए की EMI पर घर लाएं</title>
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        <description><![CDATA[ घर में फुल ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, लेकिन कीमत देखकर हर बार रुक जा रहे हैं तो इस बार आपके पास बड़ा मौका है. ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन और फ्लिपकार्ट पर Samsung और LG की कुछ फुली ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीनें अच्छी कीमतों पर उपलब्ध हैं.
खास बात यह है कि इनमें बड़ी क्षमता के साथ कई स्मार्ट फीचर्स भी मिल रहे हैं. ऐसे में अगर पुरानी मशीन बदलने या पहली बार वॉशिंग मशीन खरीदने की तैयारी है तो इन दोनों मॉडल पर नजर डाल सकते हैं.
EMI 1388 रुपये से शुरू
Samsung की 10 किलो की फुली ऑटोमैटिक टॉप-लोड वॉशिंग मशीन WA80F10E2LTL इस समय करीब 24,990 रुपये में मिल रही है. इसकी कीमत 40,990 रुपये पहले थी, यानी MRP के मुकाबले करीब 16,000 रुपये की बचत हो रही है. यह करीब 39 फीसदी की कमी है. कंपनी की वेबसाइट पर इस मॉडल की स्टैंडर्ड EMI करीब 1388 रुपये प्रति महीने से शुरू बताई गई है. वहीं Amazon पर दिखाई देने वाली EMI बैंक, कार्ड और चुने गए टेन्योर के हिसाब से अलग हो सकती है.
इस मशीन में AI वॅाश, इकोब्बल और डिजिटल इनवर्टर मोटर जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसके साथ Wi-Fi और समार्ट थिंगस सपोर्ट भी मिलता है. 10 किलो क्षमता होने के चलते यह बड़े परिवार के लिए भी काम की हो सकती है. कंपनी &amp;nbsp;डिजिटल इनवर्टर मोटर पर 10 साल और प्रोडक्ट पर 2 साल की वारंटी देती है.LG की 8 किलो मशीन भी बजट में
अगर 10 किलो की मशीन की जरूरत नहीं है और बजट थोड़ा कम रखना चाहते हैं तो LG T80VBMB4Z भी एक ओपशन है यह 8 किलो की फुली ऑटोमैटिक टॉप-लोड वॉशिंग मशीन है. इसकी ऑनलाइन कीमत करीब 21,990 रुपये है.
LG के इस मॉडल में 5 स्टार रेटिंग, स्मार्ट इंवरटर मोटर और टोरबोडर्म टेक्नोलॉजी दी गई है. इसके अलावा स्मार्ट डाइगनोसिज, वाटरफॅाल सरक्यूलेशन, लोडसेंस और ओटो रिस्टार्ट जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. स्मार्ट इंवरटर मोटर पर कंपनी 10 साल की वारंटी देती है.
दोनों में से कौन सी मशीन आपके लिए बेहतर?
अगर परिवार बड़ा है और ज्यादा कपड़े एक साथ धोने की जरूरत पड़ती है तो Samsung का 10 किलो मॉडल ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है. इसके अलावा इसमें AI वॅाश, Wi-Fi और स्मार्ट थिंगस जैसे स्मार्ट फीचर्स भी मिलते हैं. वहीं 2-4 लोगों के परिवार के लिए LG की 8 किलो मशीन पर्याप्त हो सकती है और इसकी कीमत भी Samsung मॉडल से कम है.
खरीदने से पहले कीमत जरूर जांचें
ऑनलाइन शॉपिंग में कीमत, EMI, बैंक ऑफर और कैशबैक लगातार बदल सकते हैं. इसलिए ऑर्डर करने से पहले Amazon पर दिखाई जा रही अंतिम कीमत और EMI जरूर चेक करें. खासकर 1,388 रुपये वाली EMI किसी विशेष बैंक, कार्ड या टेन्योर से जुड़ी हो सकती है. ऐसे में बिना शर्तें देखे केवल EMI देखकर खरीदारी न करें.
यह भी पढ़ें- 6 अक्टूबर से महंगी होगी हवाई यात्रा, इंडिगो ने सभी रूटों पर बढ़ाए टिकट के दाम
यह भी देखें-
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>शराब से ज्यादा बीयर पी रहे लोग, इस राज्य को मिला 11500 करोड़ का कलेक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ शराब वैसे तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है, लेकिन ये राज्य सरकार की ताबड़तोड़ कमाई भी करवाती है. जैसे हाल ही में कर्नाटक सरकार की शराब बिक्री से ताबड़तोड़ कमाई हुई है. राज्य में इस साल दूसरे क्वार्टर में यानी जुलाई से सितंबर 2026 के बीच आबकारी विभाग को 11,595.88 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है.&amp;nbsp;
ये पिछले साल इसी समय में मिले 10,303.94 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 12.54% ज्यादा है. सरकार की कमाई बढ़ने की बड़ी वजह बीयर और इंडियन मेड लिकर (IML) की बिक्री में बढ़ोतरी रही.
बीयर की बिक्री में तगड़ा उछालसामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कर्नाटक में बीयर की बिक्री 126.68 लाख केस बॉक्स रही. पिछले साल इसी समय में 84.63 लाख केस बॉक्स की बिक्री हुई थी. यानी बीयर की बिक्री में 42.05 लाख केस बॉक्स की बढ़ोतरी हुई, जो सालाना आधार पर करीब 49.69% है.
बीयर से हुई सरकार की कमाईबीयर की बिक्री बढ़ने का सीधा असर सरकार की कमाई पर भी पड़ा. बीयर से आबकारी राजस्व पिछले साल के 1,234.50 करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल 1,463.07 करोड़ रुपये हो गया. यानी इसमें 18.52% की बढ़ोतरी हुई.
IML की बिक्री भी बढ़ीइस साल इंडियन मेड लिकर यानी IML की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई, हालांकि ये बीयर के मुकाबले काफी कम रही. जुलाई-सितंबर 2026 में IML की बिक्री 171.69 लाख केस बॉक्स रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 169.12 लाख केस बॉक्स की बिक्री हुई थी. यानी बिक्री में करीब 1.52% की बढ़ोतरी हुई. IML से सरकार को इस दौरान 9,033.21 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व मिला. पिछले साल ये रकम 7,968.69 करोड़ रुपये थी. यानी IML से सरकार की कमाई 13.36 फीसदी बढ़ी और 1,064.52 करोड़ रुपये ज्यादा राजस्व मिला.
लाइसेंस और जुर्माने से कमाई स्थिरशराब से जुड़े दूसरे स्रोतों, जैसे लाइसेंस फीस और जुर्माने से सरकार को 1,099.60 करोड़ रुपये मिले. पिछले साल ये रकम 1,100.75 करोड़ रुपये थी. यानी इस हिस्से से होने वाली कमाई में कोई खास बदलाव नहीं आया.
ये भी पढ़ें: किन शहरों के लिए सबसे महंगे हुए फ्लाइट टिकट, इस बार दिवाली छठ जेब पर भारी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>शराब, से, ज्यादा, बीयर, पी, रहे, लोग, इस, राज्य, को, मिला, 11500, करोड़, का, कलेक्शन</media:keywords>
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        <title>स्मित मच्छार पर पैसों की बारिश, जानें हीरो पायलट को किसने दिया कितना इनाम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्मित-मच्छार-पर-पैसों-की-बारिश-जानें-हीरो-पायलट-को-किसने-दिया-कितना-इनाम</link>
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        <description><![CDATA[ फ्लाईदुबई की फ्लाइट (FZ1073) में अपनी जान जोखिम में डालकर 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने बहादुरी की मिशाल पेश की है. मुश्किल हालात में फ्लाइट को संभालने वाले स्मित को अब प्यार और सम्मान के साथ-साथ लाखों-करोड़ों रुपए के इनाम भी मिल रहे हैं.
बता दें कि स्मित के साहस, संयम और सूझबूझ की वैसे तो दुनिया भर में सराहना हो ही रही है. साथ ही साथ मैनकाइंड फार्मा से लेकर गुजरात सरकार और राज्यसभा सांसद तक ने उनके लिए नकद पुरस्कार का भी ऐलान किया है.
मैनकाइंड फार्मा ने दिए 1 करोड़ रुपएस्मित मच्छार को सबसे बड़ा नकद इनाम मैनकाइंड फार्मा की तरफ से मिला है. कंपनी ने उनके और उनके परिवार के लिए 1 करोड़ रुपए के पुरस्कार का ऐलान किया है. कंपनी ने कहा कि स्मित ने अपनी जान की परवाह किए बिना क्रू और यात्रियों की सुरक्षा की है, जो जिम्मेदारी की मिसाल है.&amp;nbsp;
गुजरात सरकार का 25 लाख का इनामस्मित मूल रूप से गुजरात से हैं. उनकी बहादुरी को देखते हुए गुजरात सरकार ने उन्हें &amp;lsquo;विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार&amp;rsquo; देने का ऐलान किया है. इसके साथ ही सरकार ने 25 लाख रुपए का नकद इनाम भी देने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी थी.&amp;nbsp;
राज्यसभा सांसद ने भी किया 25 लाख का ऐलानइसके अलावा राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी (सन फाउंडेशन) ने भी स्मित मच्छार के लिए 25 लाख रुपए के स्मित मच्छार शौर्य पुरस्कार का ऐलान किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्मित को राष्ट्रीय स्तर का बहादुरी पुरस्कार देने की मांग भी की है.&amp;nbsp;
इतना ही नहीं, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) और दूसरी जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री से उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार या अशोक चक्र देने का अनुरोध किया है.&amp;nbsp;
क्या हुआ था फ्लाइट में?30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी. विमान में 174 लोग सवार थे. उड़ान के दौरान कॉकपिट में सह-पायलट ने स्मित मच्छार पर हमला कर दिया है. इस दौरान स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.&amp;nbsp;
हालात बिगड़ने के बावजूद उन्होंने विमान को संभाले रखा है. बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया और सुरक्षित लैंडिंग कराई गई. इस तरह विमान में सवार सभी 174 यात्रियों की जान बच गई. घटना की जांच अभी जारी है.&amp;nbsp;
अब कैसे हैं स्मित मच्छार?
स्मित मच्छार अभी इस घटना में लगी चोटों से उबर रहे हैं. उनके साहस को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें बहादुरी का सम्मान देने की मांग उठ रही है. भारतीय पायलट संघ ने भी सरकार से उन्हें बहादुरी पुरस्कार देने की मांग की है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>स्मित, मच्छार, पर, पैसों, की, बारिश, जानें, हीरो, पायलट, को, किसने, दिया, कितना, इनाम</media:keywords>
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        <title>अब बंद हो जाएंगी ये 60 दुकानें, रिलायंस ने तोड़ डाली 7 साल पुरानी डील</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-बंद-हो-जाएंगी-ये-60-दुकानें-रिलायंस-ने-तोड़-डाली-7-साल-पुरानी-डील</link>
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        <description><![CDATA[ Reliance Retail और दुनिया की जानी-मानी कन्वीनिएंस स्टोर चेन 7-Eleven भारत में अपना पांच साल का मास्टर फ्रैंचाइज एग्रीमेंट खत्म कर रहे हैं. इस फैसले के लते दोनों कंपनियों के तहत चल रहे करीब 60 स्टोर्स में से ज्यादातर अब बंद होने की कगार पर हैं.
कुछ स्टोर्स पर बचा हुआ सामान बेचने के बाद उन्हें भी बंद किया जा सकता है. इन्हें रिलायंस भारी डिस्काउंट या &#039;बाय वन गेट वन&#039; (BOGO) जैसे ऑफर्स के जरिए जल्द से जल्द बेचेगी ताकि फंसा हुआ पैसा निकल सके.
2021 में शुरू हुआ था सफर
Reliance और 7-Eleven दोनों ने 9 अक्टूबर 2021 से भारत में साथ अपना सफर शुरू करने का फैसला लिया था. मुंबई के अंधेरी ईस्ट (मरोल) इलाके में इसका पहला स्टोर खोला गया था. 7-Eleven ने सबसे पहले किशोर बियानी के &#039;फ्यूचर ग्रुप&#039; (Future Group) के साथ एक डील साइन की थी, लेकिन फिर कोरोना महामारी और वित्तीय संकट के चलते अक्टूबर 2021 में यह डील टूट गई. फिर इसके बाद इसने मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल के साथ हाथ मिलाया.&amp;nbsp;
भारत में क्यों नहीं चल पाया बिजनेस?
भारत में 7-Eleven जैसे कन्वीनिएंस स्टोर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि यहां हर गली-नुक्कड़ पर किराने की दुकान है. लोगों को सामान मंगाने के लिए मॉल या मार्केट जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है. वहीं, अमेरिका और जापान जैसे देशों में इसे सफलता इस वजह से मिली है क्योंकि वहां अचानक सामान खरीदने के लिए इससे बेहतर विकल्प कुछ और नहीं है.&amp;nbsp;
इसके अलावा, भारत में Blinkit, Zepto और Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म मिनटों में सामान घर पर डिलीवर कर देते हैं. ऐसे में लोगों को कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है. आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी को 92 करोड़ के रेवेन्यू पर 90 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जो इस बात का सबूत है कि इसका ऑपरेश्नल कॉस्ट काफी अधिक है. एक तो प्राइम लोकेशंस पर भारी किराया, &amp;nbsp;ब्रांडेड स्टोर का रखरखाव, और फ्रेंचाइजी फीस देने के बाद मुनाफे का मार्जिन लगभग खत्म हो जाता था. ऐसे में कंपनी प्रॉफिट करें, तो कैसे करें. इसके चलते भारत में इसकी दुकानें कुछ खास कमाल नहीं कर पाईं.
अब आगे क्या होगा?
रिलायंस के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद &amp;nbsp;भारत में जितने भी 7-Eleven स्टोर चल रहे हैं (लगभग 60 स्टोर), उन सभी से 7-Eleven का नाम और बोर्ड हटा दिया जाएगा. हालांकि, सारे स्टोर्स एक बार में बंद नहीं किए जाएंगे. रिलायंस इनमें कुछ चुनिंदा स्टोर्स को चालू रखकर अपने खुद के किसी ब्रांड जैसे Reliance Smart Point में बदल देगी.

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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>6 अक्टूबर से महंगी होगी हवाई यात्रा, इंडिगो ने सभी रूटों पर बढ़ाए टिकट के दाम</title>
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        <description><![CDATA[ दीवाली और छठ से पहले हवाई यात्रियों को बड़ा झटका लगा है. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने सोमवार को जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. फ्यूल सरचार्ज 6 अक्टूबर से लागू हो जाएगा. ऐसे में यात्रियों को टिकट के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.&amp;nbsp;
दरअसल, एयरलाइन ने यह बदलाव जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते किया है. घरेलू उड़ानों में यात्रा की दूरी के हिसाब से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया गया है. हालांकि, इसका असर इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये पर भी देखने को मिलेगा.
घरेलू फ्लाइट्स के लिए कितना बढ़ा खर्च?
इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के फ्यूल सरचार्ज में 100 रुपये से 350 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की है. किराए में यह बढ़ोतरी यात्रा की दूरी के आधार पर अलग-अलग होगी. यानी कम दूरी और लंबी दूरी की फ्लाइट्स के लिए बढ़ा हुआ यह चार्ज अलग हो सकता है. फिलहाल यह नई दरें 6 अक्टूबर 2026 यानी कल से लागू होंगी.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी बढ़ा चार्ज
सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी फ्यूल सरचार्ज में बदलाव किया है. हालांकि, विदेश जाने वाली उड़ानों पर कितना सरचार्ज लगेगा, यह रूट और उसकी दूरी पर डिपेंड करेगा. ऐसे में विदेश यात्रा की प्लानिंग कर रहे यात्रियों को टिकट बुक करते समय बढ़े हुए इस खर्च का खास ध्यान रखना होगा.&amp;nbsp;
ATF की कीमत बढ़ने से क्यों महंगा हुआ हवाई सफर?
इंडिगो के मुताबिक, जेट फ्यूल की कीमत में लगातार तेजी देखी जा रही है. हालिया ईंधन की कीमत में महीने-दर-महीने बढ़ोतरी 14% से ज्यादा रही है. यही वजह है कि ATF की कीमत करीब एक दशक के सबसे ऊंचे स्तरों में पहुंच गई है. एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च में विमान ईंधन की बड़ी हिस्सेदारी होती है. ऐसे में &amp;nbsp;जब ईंधन महंगा होता है, तो फ्लाइट चलाने का खर्च भी बढ़ जाता है. इसी बढ़ती खर्च को देखते हुए इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज में बदलाव किया है.
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अक्टूबर, से, महंगी, होगी, हवाई, यात्रा, इंडिगो, ने, सभी, रूटों, पर, बढ़ाए, टिकट, के, दाम</media:keywords>
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    <item>
        <title>सरकार ने वेरिएबल DA में किया इजाफा, त्योहारों से पहले कर्मचारियों को बड़ी राहत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सरकार-नेवेरिएबल-da-में-किया-इजाफा-त्योहारों-से-पहले-कर्मचारियों-को-बड़ी-राहत</link>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों से पहले कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 से सेंट्रल स्फीयर के तहत आने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए वेरिएबल डियरनेस अलाउंस यानी वीडीए में संशोधन कर न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है.
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले लेबल ब्यूरो ने इस रिवाइज्ड वीडीए का ऑर्डर 30 सितंबर को जारी कर दिया था. ये बदलाव इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए औसत कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI-IW) पर आधारित है, जो 30 जून 2026 तक 424.80 था, लेकिन अब बढ़कर 431.42 हो गया है. ये 6.62 पॉइंट की बढ़ोतरी दिखाता है. बदला हुआ VDA 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा.
कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का कितना बढ़ा VDAकंस्ट्रक्शन और मेंटेनेंस वर्क का काम करने वाले मजदूरों का मेहनताना 840 रुपये प्रति दिन मिनिमम हो गया है. हालांकि ये वेज इनके स्किल कैटेगिरी के हिसाब से मिलेगा. इसके अलावा काम करने की जगह भी इसमें महत्वपूर्ण है.



वर्कर कैटेगिरी
एरिया A
एरिया B
एरिया C


अनस्किल्ड
840 रुपये
704 रुपये
565 रुपये


सेमी-स्किल्ड/अनस्किल्ड सुपरवायजरी
933 रुपये
794 रुपये
661 रुपये


स्किल्ड/क्लैरिकल
1,024 रुपये
933 रुपये
794 रुपये


हाइली स्किल्ड
1,111 रुपये
1,024 रुपये&amp;nbsp;
933 रुपये



कंस्ट्रक्शन कैटेगिरी में...ऊपर बताए गए चार्ट के हिसाब से, कंस्ट्रक्शन कैटेगरी में सड़कों, रनवे और बिल्डिंग से जुड़े काम के साथ-साथ जमीन के नीचे बिजली, टेलीफोन और अन्य कम्युनिकेशन केबल, पानी की सप्लाई लाइन और सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का काम भी शामिल है. यानी कि इन सभी काम करने वाले श्रमिकों के वीडीए में बढ़ोतरी की गई है.
एग्रीकल्चर वर्कर्स का कितना बढ़ा VDAकेवल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स ही नहीं बल्कि 1 अक्टूबर से खेती-बाड़ी में काम करने वालों को भी ज्यादा मिनिमम वेज मिलेगी. इसके लिए भी कैटेगिरीज भी कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की तरह ही तैयार की गई है. यहां देखें:



वर्कर कैटेगिरी
एरिया A
एरिया B
एरिया C


अनस्किल्ड
537 रुपये
491 रुपये
486 रुपये


सेमी स्किल्ड/अनस्किल्ड सुपरवाइजरी
587 रुपये
539 रुपये
496 रुपये


स्किल्ड/क्लेरिकल
637 रुपये
587 रुपये
538 रुपये


हाइली स्किल्ड
705 रुपये
655 रुपये
587 रुपये



क्या है VDA?बता दें कि वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) महंगाई से जुड़ा कंपोनेंट है. केंद्र सरकार इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए &#039;कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स&#039; (CPI) में होने वाले बदलावों के आधार पर हर छह महीने में इसे संशोधित करती है. श्रम मंत्रालय ने पहले भी बताया है कि VDA व्यवस्था का मकसद मिनिमम वेतन को महंगाई के असर से बचाना है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सरकार, ने वेरिएबल, में, किया, इजाफा, त्योहारों, से, पहले, कर्मचारियों, को, बड़ी, राहत</media:keywords>
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        <title>महंगी होगी CNG और PNG! सरकार ने बढ़ा दी प्राकृतिक गैस की कीमतें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महंगी-होगी-cng-और-png-सरकार-नेबढ़ा-दी-प्राकृतिक-गैस-की-कीमतें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/महंगी-होगी-cng-और-png-सरकार-नेबढ़ा-दी-प्राकृतिक-गैस-की-कीमतें</guid>
        <description><![CDATA[ सरकार ने मुश्किल और गहरे गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली प्राकृतिक गैस की कीमत की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है. नई कीमत 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई है और अगले छह महीने यानी 31 मार्च 2027 तक प्रभावित रहेगी. प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल CNG, PNG के अलावा बिजली और खाद बनाने जैसे कई क्षेत्रों में होता है. ऐसे में गैस की कीमत में बदलाव का असर आने वाले समय में सेक्टर पर पड़ सकता है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गहरे पानी, अति गहरे पानी और हाई प्रेशर-हाई टेंपरेचर वाले क्षेत्रों से निकलने वाली गैस के लिए अधिकतम कीमत 8.90 डॉलर से बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति MMBtu कर दी है. यानी भारतीय रुपए में इसे देखें तो यह करीब 930 प्रति MMBtu से बढ़कर 1030 प्रति MMBtu के आसपास हैं. ऐसे में अगर आप भी CNG या PNG का इस्तेमाल करते हैं, तो प्राकृतिक गैस की कीमत में हुआ यह बदलाव आपकी जेब पर असर डाल सकता है.
सरकार ने क्यों बढ़ाई प्राकृतिक गैस की कीमत?
यह बदलाव खासतौर पर उन गैस इलाकों पर लागू होगा, जहां गैस निकालने में सामान्य इलाकों के मुकाबले में ज्यादा लागत आती है. हालांकि, इसका फायदा मुश्किल समुद्री क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस निकालने वाली कंपनियों को भी मिल सकता है. वहीं, कृष्णा-गोदावरी बेसिन के KG-D6 जैसे ब्लॉक इस व्यवस्था के दायरे में आते हैं.
CNG और PNG पर क्या होगा असर?
प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल शहरों में CNG और PNG की सप्लाई के लिए किया जाता है. इसके अलावा यह खाद बनाने और बिजली उत्पादन में भी खास कच्चा माल है. इसलिए घरेलू गैस की कीमतों में बदलाव का असर इन इलाकों की &amp;nbsp;गैस लागत पर पड़ सकता है. हालांकि, सिर्फ गैस की अधिकतम कीमत बढ़ने ला हरगिज यह मतलब नहीं है कि CNG और PNG के दाम उसी अनुपात के मुताबिक तुरंत बढ़ जाएंगे.&amp;nbsp;
किन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है?
प्राकृतिक गैस भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है. इसका इस्तेमाल वाहनों में CNG, घरों में PNG के अलावा बिजली उत्पादन और उर्वरक बनाने में भी होता है. ऐसे में प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ने से इन क्षेत्रों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;

CNG और PNG की सप्लाई
उर्वरक उत्पादन
बिजली उत्पादन
शहरी गैस वितरण
प्राकृतिक गैस के नए क्षेत्रों में निवेश

पेट्रोल डीजल पर बड़ा अलर्ट, गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत हरियाणा के इन 14 जिलों के लोग ध्यान दें
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>महंगी, होगी, CNG, और, PNG, सरकार, ने बढ़ा, दी, प्राकृतिक, गैस, की, कीमतें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पेट्रोल डीजल पर बड़ा अलर्ट, गुरुग्राम&amp;फरीदाबाद समेत हरियाणा के इन 14 जिलों के लोग ध्यान दें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पेट्रोल-डीजल-पर-बड़ा-अलर्ट-गुरुग्राम-फरीदाबाद-समेत-हरियाणा-के-इन-14-जिलों-के-लोग-ध्यान-दें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पेट्रोल-डीजल-पर-बड़ा-अलर्ट-गुरुग्राम-फरीदाबाद-समेत-हरियाणा-के-इन-14-जिलों-के-लोग-ध्यान-दें</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप हरियाणा के एनसीआर इलाके में रहते हैं और अपनी गाड़ी से सफर करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अहम है. अब पेट्रोल, डीजल या सीएनजी भरवाने से पहले आपके वाहन का वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) चेक किया जा सकता है. हरियाणा परिवहन विभाग ने एनसीआर के पेट्रोल पंपों को बिना वैध PUC वाले गाड़ियों में ईंधन नहीं भरने का निर्देश दिया है. दिल्ली-NCR में यह सिस्टम 1 अक्टूबर से लागू हुए &amp;lsquo;नो पीयूसी, नो फ्यूल&amp;rsquo; नियम के तहत की जा रही है.
इसका पहल का खास मकसद वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाना और दिल्ली-NCR की हवा को बेहतर करना है. इसके तहत शुरुआत में पंप कर्मचारी PUC की मैन्युअल जांच करेंगे, जबकि आगे चलकर नंबर प्लेट कैमरों के जरिए ऑनलाइन PUC डेटाबेस से वाहन की जानकारी वेरीफिकेशन की जाएगी.&amp;nbsp;
किन वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल?
जिन वाहनों के पास वैध PUC नहीं होगा, उसे पेट्रोल, डीजल या सीएनजी देने से इनकार किया जा सकता है. पेट्रोल पंप पर कर्मचारी ईंधन भरने से पहले वहां के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए PUC की वैधता जांचेंगे. ANPR कैमरा सिस्टम के जरिए वाहन का नंबर ऑनलाइन PUC डेटाबेस से चेक किया जाएगा.
ऐसे में जब तक सभी जगह कैमरा सिस्टम पूरी तरह चालू नहीं होता, तब तक मैन्युअल तरीके से PUC की जांच की जाएगी. वहीं, अगर किसी वाहन का वैध PUC नहीं है, तो उस वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर भी रिकॉर्ड किया जा सकता है.
हरियाणा के इन 14 जिलों में लागू होगा नियम
हरियाणा के एनसीआर इलाके में आने वाले इन 14 जिलों के वाहन चालकों को खास तौर पर ध्यान रखना होगा.&amp;nbsp;

गुरुग्राम (Gurugram)
फरीदाबाद (Faridabad)
सोनीपत (Sonipat)
पानीपत (Panipat)
रोहतक (Rohtak)
झज्जर (Jhajjar)
रेवाड़ी (Rewari)
पलवल (Palwal)
नूंह (Mewat / Nuh)
महेंद्रगढ़ (Mahendragarh)
भिवानी (Bhiwani)
चरखी दादरी (Charkhi Dadri)
जींद (Jind)
करनाल (Karnal)

PUC नहीं है तो क्या करना होगा?
अगर आपके पास वैध PUC नहीं है, तो ऐसे में पेट्रोल पंप पर आपको ईंधन देने से इनकार किया जा सकता है. इसलिए अपने नजदीकी अधिकृत PUC टेस्ट सेंटर से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवा लें.&amp;nbsp;
क्योंकि वाहन में वैध PUC नहीं होने के कारण आपको सिर्फ पेट्रोल या डीजल मिलने में ही परेशानी नहीं होगी, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना भी लग सकता है. लागू मोटर वाहन नियमों के तहत बिना वैध PUC वाहन चलाने पर आपके खिलाफ 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
EMI बढ़ने का खतरा! RBI फिर बढ़ा सकता है Repo Rate, 6% तक जाने की आशंका
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पेट्रोल, डीजल, पर, बड़ा, अलर्ट, गुरुग्राम-फरीदाबाद, समेत, हरियाणा, के, इन, जिलों, के, लोग, ध्यान, दें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gym जाने वाले जरा ध्यान दें, प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स वाली कंपनियों का इलाज करेगा FDA</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gym-जाने-वाले-जरा-ध्यान-दें-प्रोटीन-पाउडर-और-सप्लीमेंट्स-वाली-कंपनियों-का-इलाज-करेगा-fda</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gym-जाने-वाले-जरा-ध्यान-दें-प्रोटीन-पाउडर-और-सप्लीमेंट्स-वाली-कंपनियों-का-इलाज-करेगा-fda</guid>
        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) न्यूट्रास्यूटिकल्स और हेल्थ सप्लीमेंट जैसी प्रोडक्ट्स की जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में अगर आप भी Gym जाते हैं और प्रोटीन पाउडर, हेल्थ सप्लीमेंट या दूसरे न्यूट्रास्यूटिकल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. क्योंकि अब इसमें सिर्फ पैकेजिंग या लेबल ही नहीं, बल्कि प्रोडक्ट में इस्तेमाल की गई सामग्री, उसके सेवन और बिक्री से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है.
दरअसल, महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने इन उत्पादों को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना कि कुछ प्रोडक्ट्स में ऐसे तत्व मौजूद होने का दावा किया जाता है, जो असल में उनमें मौजूद नहीं होते. ऐसे में सप्लीमेंट्स के दावों और उनकी वास्तविक सामग्री पर भी FDA नजर रखेगा.
सप्लीमेंट्स के विज्ञापनों पर क्यों उठ रहे सवाल?
न्यूट्रास्यूटिकल्स के विज्ञापनों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं. भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) के मुताबिक, भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स को खाद्य पदार्थों की कैटेगरी में रखा जाता है, लेकिन कई बार इनके विज्ञापनों में बीमारी या इलाज से जुड़े दावे किए जाते हैं.
ASCI की 2025-26 की शिकायत रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य और पेय पदार्थों से जुड़े जिन विज्ञापनों की जांच की गई, उनमें 52% मामले न्यूट्रास्यूटिकल्स से जुड़े थे. इनमें से 96% विज्ञापनों में बदलाव की जरूरत पाई गई. वहीं कई विज्ञापनों में वजन घटाने, हेल्थ, पुरानी बीमारियों, बच्चों की ग्रोथ, फर्टिलिटी और शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए गए.
सप्लीमेंट के पैकेट पर क्या जानकारी जरूरी है?

FSSAI के नियमों के मुताबिक, प्रोडक्ट किस कैटेगरी में आता है, जैसे हेल्थ सप्लीमेंट या न्यूट्रास्यूटिकल इसकी जानकारी होनी चाहिए.
इसमें मौजूद प्रमुख सामग्री और उनकी मात्रा के बारे में बताना है.
साथ ही इसके इस्तेमाल करने का सही तरीका और अनुशंसित मात्रा भी लिखी होनी चाहिए.
लेबल पर &#039;चिकित्सा उपयोग के लिए नहीं&#039; जैसी जरूरी चेतावनी होनी चाहिए.
इसके अलावा जरूरत से ज्यादा सेवन न करने की भी चेतावनी दी जानी चाहिए.
संभावित सावधानियों और साइड इफेक्ट्स की जानकारी भी देनी है.
प्रोडक्ट को बच्चों की पहुंच से दूर रखने की चेतावनी भी दी होनी चाहिए.

ऐसे में Gym जाने वालों के लिए जरूरी है कि वह किसी भी प्रोटीन पाउडर या सप्लीमेंट को खरीदने से पहले उसका लेबल, सामग्री और इस्तेमाल करने के तरीके से जुड़े सभी जानकारी को ध्यान से चेक करें.&amp;nbsp;
महंगी होगी CNG और PNG! सरकार ने&amp;nbsp;बढ़ा दी प्राकृतिक गैस की कीमतें
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gym, जाने, वाले, जरा, ध्यान, दें, प्रोटीन, पाउडर, और, सप्लीमेंट्स, वाली, कंपनियों, का, इलाज, करेगा, FDA</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>खाते में जमा थे 2.47 करोड़ कैश, Income Tax ने पकड़ा, फिर कैसे कोर्ट में जीता दवा कारोबारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/खाते-में-जमा-थे-247-करोड़-कैश-income-tax-ने-पकड़ा-फिर-कैसे-कोर्ट-में-जीता-दवा-कारोबारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/खाते-में-जमा-थे-247-करोड़-कैश-income-tax-ने-पकड़ा-फिर-कैसे-कोर्ट-में-जीता-दवा-कारोबारी</guid>
        <description><![CDATA[ अक्सर किसी बैंक खाते में जब बड़ी रकम नकद के तौर पर जमा होती है, तो आयकर विभाग उस पैसे के स्रोत को लेकर सवाल पूछता है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली के एक दवा कारोबारी के साथ सामने आया, जिनके बैंक खातों में काफी बड़ी मात्रा में नकदी जमा हुई थी. जिसके बाद आयकर विभाग ने इस रकम को लेकर उनसे जवाब मांगा, लेकिन अधिकारी ने कारोबारी के जवाब को स्वीकार नहीं किया गया. इसके बाद यह मामला आगे बढ़कर आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) तक पहुंचा, जहां कारोबारी को राहत मिल गई.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक दवा की दुकान चलाने वाले कारोबारी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने तीन सेविंग बैंक खातों में करीब 2.47 करोड़ रुपये की नकदी जमा की थी. आयकर विभाग ने इस रकम के स्रोत को लेकर सवाल पूछा. कारोबारी ने बताया कि यह पैसा उनकी फार्मेसी में हुई बिक्री से हासिल हुआ था और बिक्री की रकम उनके बिजनेस रिकॉर्ड में दर्ज थी.
हालांकि, उन्होंने अपने दावे को सही साबित करने के लिए कई जरूरी डॉक्युमेंट भी अधिकारियों के सामने पेश किए. इनमें ऑडिटेड बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, बैंक स्टेटमेंट, VAT रिटर्न और बिक्री के बिल शामिल थे.
Income Tax विभाग ने क्यों नहीं माना जवाब?
Income Tax विभागने कारोबारी के जवाब को स्वीकार नहीं किया. अधिकारी का कहना था कि बिजनेस के खर्चों को लेकर बैंक खातों में उसी तरह की डेबिट एंट्री दिखाई नहीं दे रही थी, जैसा कि खातों में दर्ज खर्चों से उम्मीद की जाती है.
इसके अलावा वेतन और बोनस के पेमेंट को लेकर भी सवाल उठाए गए. इसके बाद CIT(A) ने भी आयकर विभाग के आकलन को बरकरार रखा. आखिकार कारोबारी ने दिल्ली ITAT में अपील की.
ITAT ने कारोबारी के पक्ष में क्यों दिया फैसला?
दिल्ली ITAT ने पाया कि कारोबारी ने अपनी बिक्री से जुड़ी रकम का रिकॉर्ड पेश किया था. बैंक स्टेटमेंट के जरिए नकद जमा और निकासी की जानकारी दी गई थी. इसके अलावा बैलेंस शीट और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट भी अधिकारियों के सामने रखे गए थे. खास बात यह रही कि अधिकारियों ने इन दस्तावेजों में कोई ठोस कमी नहीं बताई थी और न ही कारोबारी की अकाउंट बुक को भी धारा 145 के तहत खारिज किया था.&amp;nbsp;
ITAT ने माना कि कारोबारी ने नकदी के स्रोत और उपलब्धता को लेकर जो जानकारी दी थी, उसे सपोर्ट करने के लिए काफी सबूत उनके पास मौजूद थे. न्यायाधिकरण को इन डॉक्युमेंट्स में ऐसी कोई कमी नहीं मिली, जिसके आधार पर कारोबारी के दावे को खारिज किया जा सके. इसलिए उन्होंने कारोबारी को राहत देते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया.&amp;nbsp;
Gym जाने वाले जरा ध्यान दें, प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स वाली कंपनियों का इलाज करेगा FDA
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>खाते, में, जमा, थे, 2.47, करोड़, कैश, Income, Tax, ने, पकड़ा, फिर, कैसे, कोर्ट, में, जीता, दवा, कारोबारी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कल 5 रुपए बढ़े थे दाम, आज कितने का मिलेगा पेट्रोल&amp; डीजल? देखें अपने शहर की ताजा रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कल-5-रुपए-बढ़े-थे-दाम-आज-कितने-का-मिलेगा-पेट्रोल-डीजल-देखें-अपने-शहर-की-ताजा-रेट-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कल-5-रुपए-बढ़े-थे-दाम-आज-कितने-का-मिलेगा-पेट्रोल-डीजल-देखें-अपने-शहर-की-ताजा-रेट-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल और डीजल भरवाने वालों के लिए राहत की खबर है. सरकारी तेल कंपनियों ने आज भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है. यानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में ईंधन पुराने दाम पर ही मिल रहा है.&amp;nbsp;
राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है. दोनों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. यहां से आप आज के पेट्रोल और डीजल के ताजे दाम के बारे में जान सकते हैं. साथ ही यहां सीएनजी के दाम भी बताए गए हैं.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, पेट्रोल के दाम-&amp;nbsp;



अहमदाबाद
₹102.15


बैंगलोर
₹111.68


चेन्नई
₹107.76


गुडगाँव
₹102.97


हैदराबाद
₹116.15


जयपुर
₹113.19


कोलकाता
₹113.51


लखनऊ
₹101.86


मुंबई
₹111.21


नई दिल्ली
₹102.12


नोएडा
₹101.96


पुणे
₹112.02



शहर अनुसार, डीजल के दाम-&amp;nbsp;



अहमदाबाद
₹98.27


बैंगलोर
₹99.56


चेन्नई
₹99.55


गुडगाँव
₹95.64


हैदराबाद
₹104.23


जयपुर
₹98.25


कोलकाता
₹99.82


लखनऊ
₹95.36


मुंबई
₹97.83


नई दिल्ली
₹95.2


नोएडा
₹95.44


पुणे
₹98.66



शहर अनुसार सीएनजी के दाम-&amp;nbsp;



अहमदाबाद
₹94.02


बैंगलोर
₹97


चेन्नई
₹97.5


गुडगाँव
₹92.01


हैदराबाद
₹112


जयपुर
₹97.5


कोलकाता
₹93.5


लखनऊ
₹95.75


मुंबई
₹88


नई दिल्ली
₹86.98


नोएडा
₹95.59


पुणे
₹98.5



क्यों अलग-अलग होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमत अलग होती है. इसकी बड़ी वजह राज्य सरकारों का कर और अन्य स्थानीय शुल्क हैं. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत, रुपए और डॉलर की कीमत में बदलाव और तेल की खरीद लागत का भी असर पड़ता है. ऐसे में आपको अपने शहरों में पेट्रोल और डीजल के रेट अलग- अलग मिलते हैं.&amp;nbsp;
कहां बढ़े हैं पेट्रोल- डीजल के दाम?
नायरा एनर्जी ने अलग से कल यानी 3 अक्टूबर को पेट्रोल में 5 रुपए और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. ये बढ़ोतरी सिर्फ निजी कंपनी के पंपों पर लागू है और सरकारी तेल कंपनियों के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कल, रुपए, बढ़े, थे, दाम, आज, कितने, का, मिलेगा, पेट्रोल-, डीजल, देखें, अपने, शहर, की, ताजा, रेट, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>4 अक्टूबर को कितने का मिलेगा 14.2 और 19 किलो वाला गैस सिलेंडर? जानें एलपीजी का ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/4-अक्टूबर-को-कितने-का-मिलेगा-142-और-19-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-एलपीजी-का-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/4-अक्टूबर-को-कितने-का-मिलेगा-142-और-19-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-एलपीजी-का-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ महीने की शुरुआत होते ही लोगों की नजर सबसे पहले रसोई गैस के दाम पर रहती है. खासकर त्योहारों के मौसम में जब घर का खर्च बढ़ जाता है, तब गैस सिलेंडर की कीमत में होने वाला छोटा बदलाव भी बजट पर असर डालता है. ऐसे में 4 अक्टूबर को घरेलू गैस सिलेंडर खरीदने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है.&amp;nbsp;आज 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
दिल्ली में यह सिलेंडर 942 रुपए में मिल रहा है. मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपए, कोलकाता में 968 रुपए और चेन्नई में 957.50 रुपए है. यहां से देखें घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की पूरी रेट लिस्ट.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;



शहर का नाम
घरेलू सिलेंडर के रेट
कमर्शियल सिलेंडर के रेट&amp;nbsp;


दिल्ली
942 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,810 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,763.5 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता&amp;nbsp;
968 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,946.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बेंगलुरु
944.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,893.5 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


हैदराबाद
994 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
3,058.5 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चेन्नई
957.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,978.5 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कटक
968.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,947.5 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोयंबटूर&amp;nbsp;
959.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
3,002.5 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


रांची&amp;nbsp;
1,010.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
2,988 रुपए प्रति 19 किलोग्राम



कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा
जहां घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर हैं, वहीं कमर्शियल इस्तेमाल वाले 19 किलो के सिलेंडर की कीमत में 1 अक्टूबर से बढ़ोतरी हुई है.दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 62.50 रुपए महंगा होकर 2,810 रु पये हो गया है. मुंबई में इसकी कीमत 2,764.50 रुपए, कोलकाता में 2,954 रुपए और चेन्नई में 2,983 रुपए हो गई है.
इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे कारोबार चलाने वालों पर पड़ सकता है. कमर्शियल गैस का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है, इसलिए सिलेंडर महंगा होने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
घरेलू गैस और कमर्शियल गैस में क्या है अंतर?&amp;nbsp;
घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है. इसका वजन आम तौर पर 14.2 किलो होता है. वहीं 19 किलो वाला सिलेंडर मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और दूसरे कमर्शियल कामों में इस्तेमाल किया जाता है. दोनों की कीमत अलग होती है और इनके दाम में बदलाव भी अलग तरीके से होता है.
कल 5 रुपए बढ़े थे दाम, आज कितने का मिलेगा पेट्रोल- डीजल? देखें अपने शहर की ताजा रेट लिस्ट
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अक्टूबर, को, कितने, का, मिलेगा, 14.2, और, किलो, वाला, गैस, सिलेंडर, जानें, एलपीजी, का, ताजा, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>14.60 रुपए लीटर बढ़ गए थोक डीजल के दाम, आपकी जेब पर भी पड़ेगा असर!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/1460-रुपए-लीटर-बढ़-गए-थोक-डीजल-के-दाम-आपकी-जेब-पर-भी-पड़ेगा-असर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/1460-रुपए-लीटर-बढ़-गए-थोक-डीजल-के-दाम-आपकी-जेब-पर-भी-पड़ेगा-असर</guid>
        <description><![CDATA[ दुनियाभर में डीजल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ग्लोबल मार्केट में डीजल की कमी ने इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है. इसका असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है. देश में बल्क डीजल की कीमत में सीधे 14.60 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है.
हालांकि, आम ग्राहक के लिए अभी पेट्रोल पंप पर बिकने वाले डीजल की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है. लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो आने वाले समय में इसका असर ट्रांसपोर्ट से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
बल्क डीजल हुआ कितना महंगा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बल्क डीजल की कीमत 138.97 रुपए से बढ़कर 153.57 रुपए प्रति लीटर हो गई है. यानी एक लीटर पर सीधे 14.60 रुपए का इजाफा हुआ है.
पेट्रोल पंप का डीजल मिलेगा सस्ता?
बल्क डीजल और नॉर्मल पेट्रोल पंप पर मिलने वाले डीजल की कीमत में काफी ज्यादा अंतर है. दिल्ली में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंप पर डीजल करीब 95.64 रुपए प्रति लीटर है, जबकि बल्क डीजल की कीमत 153.57 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है. यानी दोनों के बीच करीब 58 रुपए प्रति लीटर का अंतर है.
इसी वजह से कुछ कमर्शियल ग्राहक बल्क खरीदने के बजाय नॉर्मल पेट्रोल पंप से डीजल लेने लगे हैं. इससे पेट्रोल पंपों पर डीजल की मांग बढ़ जाती है.
क्यों बढ़ रहा डीजल का संकट?
ग्लोबल मार्केट में डीजल की सप्लाई भी तंग होती जा रही है. कई देशों में डीजल का स्टॉक कम है और रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ा हुआ है. रूस से डीजल की सप्लाई पर लगी पाबंदियों और अलग-अलग देशों में सप्लाई रूट से जुड़ी दिक्कतों ने भी बाजार पर असर डाला है. ऐसे में डीजल कम होने पर उसकी कीमत बढ़ रही है. यही वजह है कि दुनिया के कई बाजारों में डीजल क्रैक स्पीड काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.
क्रैक स्पीड क्या है?रिफाइनरी कच्चा तेल खरीदकर उससे डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन बनाती है और क्रैक स्पीड ये बताता है कि कच्चे तेल की लागत और उससे तैयार होने वाले ईंधन की कीमत के बीच रिफाइनरी को कितना मार्जिन मिल रहा है. अगर डीजल की कीमत कच्चे तेल की तुलना में तेजी से बढ़ती है तो क्रैक स्पीड बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबावअब सवाल ये है कि अगर डीजल महंगा है तो भारत में लोगों को इसका असर क्यों नहीं दिख रहा है? इसकी एक बड़ी वजह सरकारी तेल कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति है.
कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू पंप पर पेट्रोल-डीजल की कीमत को नहीं बढ़ा रही हैं. इससे उनकी मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है. यानी कंपनियों के लिए कच्चा तेल और ईंधन महंगा पड़ रहा है, लेकिन वो ग्राहकों से उतनी कीमत नहीं वसूल रही हैं.
आपके बजट पर कैसे पड़ेगा असर?अगर ग्लोबल डीजल संकट और महंगा कच्चा तेल लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप पर नहीं पड़ने वाला है. डीजल महंगा होने का सबसे पहला असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है. ट्रक, बस और दूसरी कमर्शियल गाड़ियां डीजल पर चलती हैं.
ईंधन महंगा होने पर माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है. इसके बाद इसका असर सब्जी, फल, दूध, किराना जैसे सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
4 अक्टूबर को कितने का मिलेगा 14.2 और 19 किलो वाला गैस सिलेंडर? जानें एलपीजी का ताजा रेट
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>14.60, रुपए, लीटर, बढ़, गए, थोक, डीजल, के, दाम, आपकी, जेब, पर, भी, पड़ेगा, असर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>GST में बड़ा बदलाव! टैक्स चोरी पर नहीं होगी गिरफ्तारी? 7 अक्टूबर को फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gst-में-बड़ा-बदलाव-टैक्स-चोरी-पर-नहीं-होगी-गिरफ्तारी-7-अक्टूबर-को-फैसला</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gst-में-बड़ा-बदलाव-टैक्स-चोरी-पर-नहीं-होगी-गिरफ्तारी-7-अक्टूबर-को-फैसला</guid>
        <description><![CDATA[ GST लागू होने के करीब 9 साल बाद टैक्स सिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सरकार जीएसटी अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्ति हटाने पर विचार कर रही है. इस प्रस्ताव पर 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा हो सकती है.
अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारियों के पास सीधे गिरफ्तारी करने की मौजूदा शक्ति खत्म हो सकती है. इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है.&amp;nbsp;
अभी GST अधिकारियों के पास क्या अधिकार हैं?
मौजूदा GST कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान है. खासकर फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामलों में कार्रवाई हो सकती है. CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है. इसके लिए अधिकारी के पास ये मानने का पर्याप्त आधार होना चाहिए कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है.&amp;nbsp;
सरकार ने 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे. इनमें कहा गया था कि सिर्फ इसलिए गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए क्योंकि कानून में इसकी अनुमति है. गिरफ्तारी के लिए मामले की गंभीरता और व्यक्ति की भूमिका समेत दूसरे पहलुओं को देखना जरूरी है.&amp;nbsp;
अब क्यों हो रहा है बदलाव पर विचार?
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें बताई जा रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पिछले करीब 8-9 महीनों से इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है. कारोबारियों और कंपनियों की तरफ से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं.
खासकर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं. सरकार अब GST सिस्टम में ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई भी बनी रहे और कारोबारियों को डर का सामना भी न करना पड़े.
4 साल में हुई 887 गिरफ्तारियां
आंकड़ों से पता चलता है कि GST कानून के तहत गिरफ्तारी का इस्तेमाल हुआ है. 2021-22 से 2024-25 के बीच 72,393 जीएसटी अपराध के मामले दर्ज हुए और केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये आंकड़ा सिर्फ केंद्रीय जीएसटी फॉर्मेशन का है. राज्य GST अधिकारियों की गिरफ्तारियां इसमें शामिल नहीं हैं.&amp;nbsp;
फ्रॉड करने वालों पर कार्रवाई कैसे होगी?
प्रस्तावित बदलाव में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है. फर्क ये हो सकता है कि GST कानून के तहत टैक्स अधिकारी खुद गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल न करें.
ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक जानबूझकर किए गए गंभीर फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
7 अक्टूबर को क्या होगा?
अब सबकी नजर 7 अक्टूबर की जीएसटी काउंसिल बैठक पर है. इसी बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है. अगर परिषद से प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो जीएसटी कानून में संशोधन की जरूरत होगी. इसके बाद सरकार इसे संसद में ला सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक आगामी शीतकालीन सत्र में कानून में बदलाव किया जा सकता है.&amp;nbsp;
अभी फिलहाल तो जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म नहीं हुई है. ये एक प्रस्ताव है और अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले और आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा.
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPI पर चार्ज लगा तो क्या बंद कर देंगे डिजिटल पेमेंट? सर्वे में सामने आया बड़ा सच</title>
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        <description><![CDATA[ UPI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान से लेकर शॉपिंग, बिल पेमेंट और बड़े सामान की खरीदारी तक लोग QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर रहे हैं. लेकिन अब 15 अक्टूबर से कुछ बड़े UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है. इसके बाद सवाल ये उठ रहा है कि क्या लोग UPI से दूरी बनाने लगेंगे?
एक नए सर्वे ने इस सवाल का जवाब दिया है. सर्वे के मुताबिक अगर दुकानदार इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं तो बड़ी संख्या में लोग UPI छोड़कर कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
कितने फीसदी लोग छोड़ देंगे यूपीआई?
LocalCircles के सर्वे में 67 हजार से बात किया गया है. लोगों से पूछा गया कि अगर 2000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर दुकानदार उनसे एक्स्ट्रा पैसा लेने लगे तो वे क्या करेंगे. इसके जवाब में 27% लोग कैश में पेमेंट करने की बात कह रहे हैं, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड और 14% डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं. 4% लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का रास्ता चुनेंगे.
वहीं सिर्फ 14% लोगों ने कहा कि वो एक्स्ट्रा पैसे देकर भी UPI से ही पेमेंट करते रहेंगे. यानी ज्यादातर ग्राहक UPI का चार्ज सीधे अपनी जेब से देने के बजाय दूसरा रास्ता चुन सकते हैं.&amp;nbsp;
फीस को लेकर क्या है कंफ्यूजन?
सर्वे में साफ है कि अगर लोगों से फीस लिया जाता है तो 76% UPI यूजर बड़े पेमेंट के लिए UPI छोड़ने की सोच रहे हैं. लेकिन सोचने वाली बात ये भी है कि UPI चार्ज ग्राहक पर है ही नहीं. यहां लोगों को काफी ज्यादा कन्फ्यूजन हो रही है. ग्राहकों के लिए UPI ट्रांसफर फ्री है.&amp;nbsp;
15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR सीधे ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है. ये दुकानदार पर लगने वाली फीस है. इनपर 2000 रुपए से ऊपर के पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा.
ग्राहक UPI क्यों छोड़ेंगे?
सरकार और NPCI का कहना है कि MDR ग्राहक से नहीं लिया जाना चाहिए. सरकार ऐसा सिस्टम बनाने पर विचार कर रही है जिससे दुकानदार MDR को ग्राहक तक पास न कर सकें.&amp;nbsp;लेकिन LocalCircles के एक अलग सर्वे में सिर्फ 17% दुकानदारों ने कहा कि वे 0.4% MDR खुद वहन करने को तैयार हैं.
वहीं 41% ने कहा कि वो कोई MDR नहीं देना चाहते और 9% दुकानदार UPI से पेमेंट लेंगे ही नहीं.&amp;nbsp;
UPI ट्रांजेक्शन कम हो गया?&amp;nbsp;
MDR लागू होने से पहले ही सितंबर के UPI आंकड़ों में मामूली गिरावट देखने को मिली है. अगस्त में रिकॉर्ड 24.51 अरब UPI ट्रांजेक्शन हुए थे, जो सितंबर में घटकर 24.07 अरब हो गए हैं. यानी करीब 1.8% की गिरावट आई.
GST में बड़ा बदलाव! टैक्स चोरी पर नहीं होगी गिरफ्तार? 7 अक्टूबर को फैसला
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>वित्तीय मजबूती के बावजूद नए संकट का खतरा बरकरार, RBI गवर्नर की चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद भारत की वित्तीय व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फ्यूचर में किसी तरह का कोई खतरा नहीं आएगा. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्तीय स्थिरता को लेकर अलर्ट रहने की जरूरत बताई है. उन्होंने कहा कि आज की मजबूत वित्तीय स्थिति यह गारंटी नहीं देती कि फ्यूचर में कोई खतरा नहीं आएगा. लंबे समय तक आर्थिक स्थिति स्थिर रहने पर लोग और संस्थान ज्यादा जोखिम लेने लग सकते हैं और कर्ज भी बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में कहा कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं है कि किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ही शुरू हो. बदलते समय में साइबर अटैक, भू-राजनीतिक घटनाएं और तकनीकी गड़बड़ियां भी वित्तीय संकट का कारण बन सकती हैं. ऐसे में इसका असर वित्तीय व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों पर भी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
मजबूत वित्तीय व्यवस्था के बावजूद क्यों बढ़ सकता है खतरा?
RBI गवर्नर के मुताबिक, भू-राजनीतिक घटनाएं, साइबर अटैक और दूसरे देश के असर जैसे कई वजहों के कारण वित्तीय संकट का खतरा बढ़ सकता है.&amp;nbsp;

भू-राजनीतिक घटनाएं: दुनिया में होने वाली बड़ी घटनाओं से वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
साइबर अटैक: साइबर हमले से बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम प्रभावित हो सकता है.&amp;nbsp;
तकनीकी गड़बड़ी: किसी बड़ी तकनीकी समस्या का असर बैंक, वित्तीय संस्थानों और बाजारों पर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
दूसरे देशों का असर: एक देश में शुरू हुआ वित्तीय संकट दूसरे देशों तक भी पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
ज्यादा कर्ज और जोखिम: लंबे समय तक स्थिरता रहने पर लोग और संस्थान ज्यादा जोखिम ले सकते हैं और कर्ज बढ़ सकते हैं.&amp;nbsp;

बैंकों के अलावा इन क्षेत्रों पर भी नजर जरूरी
RBI गवर्नर का कहना है कि वित्तीय स्थिरता सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है. ऐसे में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), शेयर बाजार, पेमेंट सिस्टम, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण थर्ड-पार्टी सर्विस और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को भी मजबूत रखना जरूरी है.
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>दुनिया के सातवें सबसे अमीर व्यक्ति बने Jensen Huang, दौलत 200 अरब डॉलर के पार</title>
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        <description><![CDATA[ कुछ साल पहले तक दुनिया के आम लोगों के लिए जेन्सेन हुआंग का नाम शायद उतना जाना-पहचाना नहीं था. लेकिन AI की दौड़ ने उनकी किस्मत बदल दी. आज एनवीडिया की चिप की मांग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा फायदा कंपनी के प्रमुख जेन्सेन हुआंग को मिल रहा है.
जेन्सेन हुआंग की दौलत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. अब उनकी टोटल संपत्ति 200 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुकी है और वो दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में सातवें नंबर पर पहुंच गए हैं.
कैसे बढ़ी दौलत?जेन्सेन हुआंग की दौलत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह एनवीडिया के शेयरों में आई तेजी है. कंपनी के शेयर लगातार ऊपर जा रहे हैं. इस साल अब तक एनवीडिया के शेयर करीब 26 फीसदी बढ़ चुके हैं.
एनवीडिया में जेन्सेन हुआंग की करीब 4 फीसदी हिस्सेदारी है. इसलिए कंपनी के शेयर बढ़ने पर उनकी दौलत भी तेजी से बढ़ती है.
AI की बढ़ती मांग का फायदा
आज दुनिया की बड़ी-बड़ी तकनीकी कंपनियां AI पर भारी पैसा खर्च कर रही हैं. इसके लिए खास तरह की चिप की जरूरत होती है और एनवीडिया ऐसी चिप बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में से एक है. AI के बढ़ते इस्तेमाल से एनवीडिया के कारोबार को लगातार फायदा मिल रहा है. इसी वजह से निवेशकों की कंपनी के शेयरों में दिलचस्पी बनी हुई है.
एनवीडिया की कीमत कितनी है?
एनवीडिया का कुल बाजार मूल्य करीब 5.7 लाख करोड़ डॉलर पहुंच गया है. कंपनी के शेयरों में तेजी का असर उसके प्रमुख जेन्सेन हुआंग की दौलत पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
अगर एनवीडिया के शेयरों में आगे भी तेजी जारी रहती है तो हुआंग की संपत्ति और बढ़ सकती है. हालांकि, शेयर बाजार में कीमतें हर दिन ऊपर-नीचे होती रहती हैं.
कब शुरू की थी एनवीडिया?
जेन्सेन हुआंग ने साल 1993 में एनवीडिया की शुरुआत की थी. वह आज भी कंपनी के प्रमुख हैं. तीन दशक से ज्यादा समय में एनवीडिया ने कंप्यूटर चिप के कारोबार से निकलकर AI के क्षेत्र में अपनी मजबूत जगह बनाई है. AI का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और इसका फायदा एनवीडिया को मिल रहा है. यही वजह है कि जेन्सेन हुआंग की दौलत भी लगातार बढ़ रही है.
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>तिरुवनंतपुरम से रियाद और बहरीन जाएंगी सीधी Flights, कब होंगी शुरू?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप इन दिनों केरल से सऊदी अरब या बहरीन जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जल्द ही रियाद और बहरीन के लिए सीधी उड़ान सेवा शुरू होने वाली है. इससे खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट के झंझट से राहत मिल सकती है और यात्रा के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन भी मिलेगा.&amp;nbsp;
एयर इंडिया एक्सप्रेस की ये नई उड़ानें 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगी. वहीं इन दोनों रूट्स के लिए बुकिंग भी शुरू हो चुकी है. आइए जानते हैं रियाद और बहरीन के लिए उड़ानों का शेड्यूल क्या रहेगा और किन यात्रियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा.
रियाद के लिए हफ्ते में कितने दिन मिलेगी फ्लाइट?
एयर इंडिया एक्सप्रेस की तिरुवनंतपुरम से रियाद के लिए सीधी फ्लाइट सेवा हफ्ते में 3 दिन संचालित रहेगी. यानी मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को फ्लाइट चलेगी. इस नई उड़ान से केरल और सऊदी अरब की राजधानी रियाद के बीच सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. हालांकि, यह सेवा दम्माम के लिए पहले से चल रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की दैनिक उड़ानों के अलावा होगी.
बहरीन के लिए भी शुरू होगी सीधी Flight
तिरुवनंतपुरम से बहरीन के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस नई सीधी उड़ान भी 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी. यह सेवा हफ्ता में दो दिन गुरुवार और शनिवार को संचालित की जाएगी. बहरीन के लिए तिरुवनंतपुरम से पहले से गल्फ एयर की दैनिक उड़ानें भी चलती हैं. ऐसे में नई सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों के पास बहरीन जाने के लिए एक और ऑप्शन मौजूद होगा.
खाड़ी देशों के लिए पहले से मजबूत है कनेक्टिविटी
तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से फिलहाल खाड़ी क्षेत्र के लिए हर सप्ताह 250 से ज्यादा हवाई आवागमन होते हैं. यहां से यात्रियों को दुबई, अबू धाबी, शारजाह, दोहा, मस्कट, कुवैत और दम्माम जैसे प्रमुख शहरों के लिए कनेक्टिविटी मिलती है.
किन यात्रियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस नई रियाद सेवा से खासतौर पर दक्षिणी केरल और आसपास के तमिलनाडु इलाकों में रहने वाले लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिनके परिवार के सदस्य या जो खुद सऊदी अरब में रहते और काम करते हैं.&amp;nbsp;
वित्तीय मजबूती के बावजूद नए संकट का खतरा बरकरार, RBI गवर्नर की चेतावनी
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अनंत अंबानी उठाएंगे बच्चे के 9 करोड़ रुपए के इलाज का खर्च, सच क्या है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अनंत-अंबानी-उठाएंगे-बच्चे-के-9-करोड़-रुपए-के-इलाज-का-खर्च-सच-क्या-है</link>
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        <description><![CDATA[ अनंत अंबानी और 23 महीने के वेदांश सिंह के इलाज को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा काफी तेजी से वायरल हो रहा है. स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 से जूझ रहे वेदांश के इलाज के लिए करीब 9 करोड़ रुपए की जरूरत बताई जा रही है. बच्चे की मदद के लिए मुंबई में फंड जुटाने की मुहिम चल रही थी. इसी बीच सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर मयूरेश गुजर ने दावा किया कि अनंत अंबानी ने वेदांश के इलाज का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की है.
दरअसल, मयूरेश गुजर और उनकी टीम कई हफ्तों से मुंबई के अलग-अलग इलाकों में लोगों से वेदांश के इलाज के लिए मदद करने की अपील कर रहे थे. इस अभियान के जरिए अब तक करीब 2.22 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके थे. इसी बीच लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान अनंत अंबानी से हुई एक मुलाकात ने इस पूरे अभियान को एक नया मोड़ दे दिया. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पूरा मामला.&amp;nbsp;
लालबागचा राजा के पास क्या हुआ?
मयूरेश गुजर के मुताबिक, 21 सितंबर को वह अपनी टीम के साथ मुंबई में लालबागचा राजा के पास वेदांश के इलाज के लिए बैनर लेकर फंड जुटाने का अभियान चला रहे थे. इसी दौरान अनंत अंबानी की नजर उनके बैनर पर पड़ी और उन्होंने अपनी कार रुकवाई.&amp;nbsp;
गुजर ने बताया कि अनंत अंबानी ने उनसे करीब पांच मिनट तक बातचीत की. इस दौरान उन्होंने अनंत अंबानी को वेदांश की बीमारी और इलाज के लिए चलाए जा रहे अभियान के बारे में बताया. इसके बाद बातचीत के दौरान अनंत अंबानी ने बच्चे के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही और वेदांश को अपने अस्पताल लाने के लिए कहा. हालांकि, दोनों ने एक-दूसरे से कॉन्टेक्ट नंबर भी लिया.&amp;nbsp;



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वायरल वीडियो में क्या कहा गया?
दरअसल, इन्फ्लुएंसर मयूरेश गुजर ने इस मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है. वीडियो के साथ उन्होंने बताया कि उनकी टीम के लिए यह मुलाकात अभियान का एक नया मोड़ साबित हुई. उन्होंने कहा कि कई दिनों की मेहनत और लोगों से मदद की अपील के बाद अनंत अंबानी से हुई मुलाकात से उन्हें उम्मीद की एक नई किरण मिली है.
क्या अनंत अंबानी सच में उठाएंगे पूरा खर्च?
सबसे अहम बात यह है कि अभी तक सामने आई जानकारी मयूरेश गुजर के बयान पर आधारित है. अंबानी परिवार या अनंत अंबानी की ओर से इस दावे की कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है. हालांकि वीडियो में अनंत अंबानी ने मदद का पूरा आश्वासन दिया है और फंड रेज़ करने वालों ने उनका आभार जताया है.
कौन हैं वेदांश?
वेदांश सिंह 23 महीने का एक बच्चा है और वह स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 से जूझ रहा है. यह एक गंभीर जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाली नसें प्रभावित होती हैं. इसी इलाज के लिए 9 करोड़ रुपए की जरूरत बताई गई है.&amp;nbsp;
वित्तीय मजबूती के बावजूद नए संकट का खतरा बरकरार, RBI गवर्नर की चेतावनी
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Tax Notice इग्नोर करना महिला को पड़ा भारी, जुड़ा 1.5 करोड़ का टैक्स</title>
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        <description><![CDATA[ एक महिला को इनकम टैक्स के कई सारे नोटिस का जवाब ना देना, भारी पड़ गया है. जिसके चलते इनकम टैक्स विभाग ने अब महिला पर कार्रवाई की है. विभाग ने नोटिस के जरिए महिला के बैंक खातों में जमा रकम और प्रॉपर्टी खरीदने को लेकर सवाल पूछे थे, लेकिन उन्होंने कई नोटिस का जवाब नहीं दिया. बाद में उन्होंने CIT(A) यानी आयकर आयुक्त (अपील) के सामने भी अपनी बात नहीं रखी.
जिसके बाद CIT(A) ने महिला की अपील खारिज करते हुए इनकम टैक्स अधिकारी की ओर से की गई करीब 1.55 करोड़ रुपये की टैक्स जोड़ को बरकरार रखा. मामला दिल्ली के इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) पहुंचा. अब ITAT ने CIT(A) का आदेश रद्द कर दिया और मामले की दोबारा सुनवाई करने को कहा है.
क्या है पूरा मामला?ये मामला असेसमेंट ईयर 2020-21 का है, जिसके लिए जसबिंदर कौर नाम की महिला ने 4 जनवरी 2021 को रिटर्न फाइल किया था और अपनी आय 10.41 लाख रुपये बताई थी. बाद में इनकम टैक्स विभाग को उनके बैंक खातों में 21.90 लाख रुपये की नकद जमा और 74 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीद की जानकारी मिली. विभाग ने पूछा कि इतना पैसा कहां से आया, लेकिन महिला ने नोटिस का जवाब नहीं दिया.
जांच के दौरान बैंकों से मिली जानकारी में खातों में कुल 80.94 लाख रुपये की नकद जमा और अन्य क्रेडिट पाए गए. 34 लाख रुपये के लोन को छोड़कर बाकी रकम का स्रोत स्पष्ट नहीं किया गया. इसके अलावा 74 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीद को लेकर भी कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई. इस आधार पर करीब 1.55 करोड़ रुपये की टैक्स जोड़ की गई.
CIT(A) ने खारिज की अपीलमहिला ने इस आदेश के खिलाफ CIT(A) के पास अपील की, लेकिन सुनवाई के लिए भेजे गए चार नोटिस का भी जवाब नहीं दिया. इसके बाद CIT(A) ने उनकी अपील खारिज कर दी.
ITAT पहुंचा मामलाजिसके बाद ये मामला ITAT पहुंचा, जहां महिला के वकील ने कहा कि प्रॉपर्टी के लिए होम लोन और रिश्तेदारों से मिली रकम का इस्तेमाल हुआ था. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण वो पहले की कार्यवाही में शामिल नहीं हो पाईं. ITAT ने कहा कि CIT(A) को सिर्फ नोटिस का जवाब न मिलने के आधार पर अपील खारिज नहीं करनी चाहिए थी. उसे मामले के तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करके कारणों के साथ फैसला देना जरूरी था.
ITAT ने CIT(A) का आदेश रद्द कर मामला दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया. हालांकि, ITAT ने ये नहीं कहा कि 1.55 करोड़ रुपये की टैक्स जोड़ गलत है. महिला को अब बैंक स्टेटमेंट, लोन और प्रॉपर्टी खरीद से जुड़े दस्तावेज देने होंगे. अगर वो फिर नोटिस का जवाब नहीं देती हैं, तो मामला उनकी गैर-मौजूदगी में तय किया जा सकता है.
टैक्सपेयर्स के लिए सीखइस मामले में इनकम टैक्स भरने वाले लोगों को भी जरूरी सीख मिलती है. टैक्स पेयर्स को नोटिस का सही समय पर जवाब देना चाहिए, ना कि उसे नजरअंदाज करना चाहिए. समय पर जवाब और जरूरी दस्तावेज नहीं देने पर विभाग उपलब्ध जानकारी के आधार पर टैक्स जोड़ सकता है.
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पाकिस्तान ने बढ़ाए पेट्रोल के दाम, 2 अक्टूबर से मिलने लगा 3 रुपये महंगा</title>
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        <description><![CDATA[ वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने का असर दिखाई दे रहा है. जिसके कारण अलग- अलग देशों में ईंधन के दामों में भी लगातार बदलाव हो रहा है. इसी कड़ी में भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी पेट्रोल की कीमतों में इजाफा हुआ है. पाकिस्तान सरकार ने 2 अक्टूबर को देश में पेट्रोल के दाम 3 रुपये 26 पैसे बढ़ा दिए हैं.
इस बढ़ोतरी के बाद अब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 390 रुपये 66 पैसे प्रति लीटर हो गई है. इस बढ़ोतरी से देश की जनता के ऊपर महंगाई का बोझ एक बार फिर से बड़ गया है.
भारत के दामों से कितना है अंतर?पाकिस्तान में बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 390 रुपये 66 पैसे हो गई है. तो वहीं बात करें भारत की तो यहां के पेट्रोल की कीमत पाकिस्तान के मुकाबले करीब 200 रुपये कम है. भारत की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये 12 पैसे है. तो वहीं बात करें अन्य राज्यों की तो भारत में हर राज्य में पेट्रोल पर अलग वैट लगाया जाता है इस वजह से अलग- अलग राज्यों में कीमतें भी अलग होती हैं. बात करें दोनों देशों की तो कीमत के हिसाब से तो ये एक बड़ा अंतर है.
हालांकि इसे बड़ा अंतर मानना भी पूरी तरह से सही नहीं है. क्योंकि दोनों देशों की करेंसी की कीमत अलग- अलग है. ऐसे में कीमतों में फर्क होना लाजिमी बात है.
कुछ दिन पहले ही मिली थी राहतकुछ दिन पहले ही सरकार न पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर जनता को थोड़ी राहत दी थी. सरकार ने 29 सितंबर 2026 को ही पेट्रोल की कीमत में 2.27 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.56 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी. जिसके बाद अब पेट्रोल की कीमत 389.03 रुपये और हाई स्पीड डीजल 404.97 रुपये प्रति लीटर हो गया था. तो वहीं अब पेट्रोल की कीमतों में इजाफा जनता के लिए परेशानी की बात है.
पाकिस्तान में कैसे तय होते हैं पेट्रोल के दाम?बता दें कि पाकिस्तान में हर रोज ही पेट्रोल के दामों में कुछ ना कुछ बदलाव होते हैं. ये बदलाव कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर होते हैं. पेट्रोल के बेस प्राइस की गणना अंतरराष्ट्रीय बाजार तेल के औसत भाव और डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की विनिमय दर से होती है. जिसके बाद OGRA फॉर्मूले के तहत एक्स-डिपो और उपभोक्ता कीमतों का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजती है और नोटिफिकेशन जारी करती है.
इसके बाद पेट्रोल के बेस प्राइस में पेट्रोलियम लेवी, कस्टम ड्यूटी और GST जोड़े जाते हैं. इसके बाद सरकार वो दाम तय करती है जो जनता के लिए लागू होते हैं.
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI के नए Executive Director बने सुधाकर मल्ली, संभालेंगे ये जिम्मेदारियां</title>
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        <description><![CDATA[ RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. केंद्रीय बैंक ने हाल ही में अपने सुधाकर मल्ली को नया एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ED) नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई है. अब वो केंद्रीय बैंक में निगरानी का काम देखेंगे.
RBI के मुताबिक, ED बनने से पहले सुधाकर मल्ली डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन में मुख्य महाप्रबंधक- प्रभारी के पद पर काम कर रहे थे.
क्या जिम्मेदारी संभालेंगे मल्ली?सुधार मल्ली अब रिजर्व बैंक में डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन के सुपरवाइजरी असेसमेंट से जुड़े काम देखेंगे. ये विभाग सेंट्रल बैंक से जुड़े तमाम बैंकों और दूसरी वित्तीय संस्थाओं की निगरानी करता है और ये देखता है कि वो नियमों का सही तरीके से पालन कर रहे हैं या नहीं. इस निगरानी की जिम्मेदारी अब सुधाकर मल्ली की होगी.
कौन हैं सुधाकर मल्ली?सुधाकर मल्ली को केंद्रीय बैंकिंग सेक्टर में करीब तीन दशक का अनुभव है. उन्होंने 20 साल से ज्यादा समय तक बैंकों, NBFC और सहकारी बैंकों की निगरानी से जुड़े अलग-अलग काम किए हैं. इसके अलावा, उन्हें विदेशों में भी करीब 5 साल का सुपरविजन से जुड़ा अनुभव है. उन्होंने RBI के करेंसी मैनेजमेंट विभाग में भी काम किया है.
बात करें उनकी पढ़ाई- लिखाई के बारे में तो, सुधाकर मल्ली ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया है. वो CAIIB के प्रमाणित एसोसिएट भी हैं.
अहम है सुधाकर मल्ली की नियुक्ति?बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी में लंबे अनुभव को देखते हुए सुधाकर मल्ली की नई जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. उनके अनुभव का इस्तेमाल बैंकों की निगरानी, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है.
RBI में हाल में हुईं कई बड़ी नियुक्तियांबता दें कि RBI में हाल के महीनों में कई नियुक्तियां हुई हैं. पिछले महीने सुमन रे को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया था. इससे पहले वो महाराष्ट्र के क्षेत्रीय निदेशक थे. फिलहाल वो DICGC और प्रिमाइसेस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. सुमन रे को भी RBI में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है.
इसके अलावा, अगस्त में मोनीषा चक्रवर्ती को भी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया था. वो फिलहाल फॉरेन एक्सचेंज और फाइनेंशियल मार्केट्स रेगुलेशन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>आज, 3 अक्टूबर को बैंक बंद रहेंगे या खुले? घर से निकलने से पहले पढ़ लें खबर</title>
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        <description><![CDATA[ अक्टूबर के पहल हफ्ते के वीकेंड को लॉन्ग वीकेंड के रूप में देखा जा रहा गै. क्योंकि 2 अक्टूबर की सरकारी छुट्टी रही, इसके बाद अगले दो दिन शनिवार और रविवार की छुट्टी रही. लेकिन बैंकों का क्या हाल है, क्या आपने इस बारे में सोचा है? क्योंकि 2 अक्टूबर को ते बैंक बंद थे, लेकिन 3 अक्टूबर को क्या बैंक बंद रहने वाले हैं या खुले, आइये जानते हैं.
नहीं है बैंकों का लॉन्ग वीकेंड?अगर आप शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो पहले ये जान लेना जरूरी है कि इस दिन बैंक खुले रहेंगे या बंद. बैंक की छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं. कुछ छुट्टियां सभी बैंकों पर लागू होती हैं, जबकि कुछ छुट्टियां राज्य और शहर के हिसाब से अलग होती हैं.
बैंकिंग प्रणाली में हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं. वहीं, पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को आमतौर पर बैंक खुले रहते हैं. ऐसे में 3 अक्टूबर 2026, शनिवार महीने का पहला शनिवार है. इसलिए नियम के मुताबिक इस दिन बैंक शाखाएं खुली रहेंगी और ग्राहक अपने जरूरी बैंक के काम निपटा सकते हैं.
लॉन्ग वीकेंड का असरहालांकि ऐसा हो सकता है कि लॉन्ग वीकेंड के कारण बैंक स्टाफ में से कुछ सदस्य मौजूद ना हों. शुक्रवार की छुट्टी के बाद शनिवार की किसी ने यदि छुट्टी ली होगी तो, उस व्यक्ति से जुड़ा काम आपका नहीं हो पाएगा. ऐसे में शाखा में तभी जाएं जब काम कुछ बहुत जरूरी हो.
ये काम रहेंगे जारीअगर किसी कारण से 3 अक्टूबर को आपके शहर में बैंक शाखा बंद रहती है, तब भी ज्यादातर डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी. ग्राहक UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन नकद जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज और दूसरी शाखा-आधारित सेवाओं के लिए बैंक खुलने का इंतजार करना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>HDFC Bank के CEO को कितनी मिलती है सैलरी? अनुप बागची का सालाना पैकेज जानकर चौंक जाएंगे</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक में नौकरी करने वालों की सैलरी से लेकर बड़े अधिकारियों की कमाई तक, लोगों की दिलचस्पी हमेशा रहती है. अब HDFC Bank के CEO की सैलरी भी चर्चा में है. बैंक की FY26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन MD और CEO शशिधर जगदीशन को वित्त वर्ष 2025-26 में टोटल 15.13 करोड़ रुपए का रिम्यूनरेशन मिला है. पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.&amp;nbsp;
अगर इस सालाना रकम को 12 महीनों में बांटकर देखें तो ये करीब 1.26 करोड़ रुपए प्रति महीने बैठती है. हालांकि, इसे CEO की फिक्स्ड मासिक सैलरी समझना सही नहीं होगा, क्योंकि इस रकम में बेसिक पे के अलावा अलाउंस, परफॉर्मेंस बोनस और दूसरे कंपोनेंट शामिल हैं.
बेसिक सैलरी कितनी है?FY26 में शशिधर जगदीशन की बेसिक सैलरी करीब 3.09 करोड़ रुपए रही है. इसके अलावा उन्हें करीब 3.46 करोड़ रुपए के अलाउंस और परक्विजिट्स मिले हैं. यानी CEO की कुल कमाई सिर्फ बेसिक सैलरी से नहीं बनती है, इसमें कई तरह के भुगतान जुड़े होते हैं.
बोनस कितना मिलता है?FY26 में जगदीशन की कमाई बढ़ने की बड़ी वजह उनका परफॉर्मेंस बोनस रहा. उन्हें करीब 7.28 करोड़ रुपए का परफॉर्मेंस बोनस मिला, जबकि FY25 में यह रकम करीब 4.67 करोड़ रुपए थी. यानी बोनस में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई.&amp;nbsp;
इसके अलावा RBI के नियमों के मुताबिक, उन्हें वित्त वर्ष 2024-25 के परफॉर्मेंस से जुड़ी कैश वैरिएबल पे का 50 फीसदी हिस्सा यानी करीब 2.67 करोड़ रुपए जनवरी 2026 में मिला था.&amp;nbsp;
महीने की सैलरी कितनी है?अगर सिर्फ कुल सालाना रिम्यूनरेशन ₹15.13 करोड़ को 12 से बांटें तो रकम करीब 1.26 करोड़ महीना. इस 1.26 करोड़ को हर महीने मिलने वाली फिक्स्ड सैलरी नहीं कहा जा सकता. सालाना रिम्यूनरेशन में परफॉर्मेंस बोनस, वैरिएबल पे और दूसरे लाभ भी शामिल हैं. इसलिए हर महीने बैंक खाते में इतनी रकम आना जरूरी नहीं है.
CEO से भी ज्यादा किसे मिली सैलरी?FY26 में HDFC Bank में सबसे ज्यादा कुल रिम्यूनरेशन पाने वाले अधिकारी खुद CEO शशिधर जगदीशन नहीं थे. बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर कैज़ाद मानेक भरूचा को FY26 में कुल 17.14 करोड़ रुपए का रिम्यूनरेशन मिला. ये CEO के 15.13 करोड़ रुपए से करीब 2 करोड़ रुपए ज्यादा है. बहरूचा की कमाई में अलावा FY26 में करीब 8.57 करोड़ रुपए का परफॉर्मेंस बोनस मिला.
नए CEO की कितनी मिलेगी सैलरी?अब HDFC Bank में CEO की कुर्सी बदलने वाली है. अनुप बागची को RBI की मंजूरी मिल चुकी है और वो 27 अक्टूबर 2026 से HDFC Bank के MD और CEO का पद संभालेंगे.&amp;nbsp;
बागची की नियुक्ति को RBI ने मंजूरी दी है, जिसमें उनकी रिम्यूनरेशन भी शामिल है. हालांकि उनकी सटीक सैलरी का आंकड़ा सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है, इसलिए अभी उनके महीने के वेतन का कोई फिक्स आंकड़ा बताना सही नहीं होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Amazon और Flipkart सेल में कौनसा कार्ड देगा सबसे ज्यादा डिस्काउंट?</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान बड़ा डिस्काउंट देखकर तुरंत खरीदारी करने का मन जरूर करता है, लेकिन असली बचत कहीं और छिपी हो सकती है. अगर आप भी Amazon और Flipkart की फेस्टिव सेल में खरीदारी करने का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ प्रोडक्ट की कीमत देखकर खरीदारी न करें. सही डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके आप इंस्टेंट डिस्काउंट या कैशबैक का फायदा ले सकते हैं. हालांकि, हर बैंक और कार्ड पर एक जैसे ऑफर्स लागू नहीं होते हैं.&amp;nbsp;
इस बार Amazon और Flipkart की फेस्टिव सेल में&amp;nbsp; अलग-अलग बैंक कार्ड पर इंस्टेंट डिस्काउंट और कैशबैक जैसे ऑफर मिल रहे हैं. ऐसे में खरीदारी करने से पहले ये देखना जरूरी है कि आपके कार्ड पर कौन-सा ऑफर लागू है.&amp;nbsp;
8 और 9 अक्तूबर से शुरू होंगी बड़ी सेल
Amazon की ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल 8 अक्तूबर 2026 से शुरू होगी, जबकि फ्लिपकार्ट की Big Billion Days सेल 9 अक्तूबर से शुरू होगी. फ्लिपकार्ट प्लस, ब्लैक सदस्यों और फ्लिपकार्ट क्रेडिट कार्ड धारकों को 8 अक्टूबर से ही अर्ली एक्सेस की जानकारी दी गई है.
Flipkart पर Axis और ICICI कार्ड का फायदा
Flipkart की बिग बिलियन डेज सेल में एक्सिस बैंक (Axis Bank) और ICICI बैंक के चुनिंदा कार्ड पर खरीदारी करने पर 10 प्रतिशत तक इंस्टेंट डिस्काउंट का ऑफर दिया गया है. इसके अलावा फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पर भी 10 प्रतिशत तक इंस्टेंट डिस्काउंट का ऑफर है.
वहीं, Flipkart की सुपर मनी कि सेवा से जुड़ा एक अतिरिक्त ऑफर भी है. इसके तहत सेल के दौरान पहली ट्रांजैक्शन पर 10 प्रतिशत तक कैशबैक मिल सकता है. हालांकि, इस ऑफर के लिए तय नियम और पात्रता लागू होगी.
Amazon पर SBI कार्ड धारकों को 10 प्रतिशत इंस्टेंट डिस्काउंट
Amazon ग्रेट इंडियन फेस्टिवल में SBI डेबिट और क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए 10 प्रतिशत इंस्टेंट डिस्काउंट का ऑफर है. यह सुविधा कुछ EMI ट्रांजैक्शन पर भी लागू है. इसके अलावा एक अलग ऑफर के तहत पात्र खरीदारी पर 35 प्रतिशत कैश बैक भी दिया जा सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 150 रुपये है.
Amazon पे लेटर से पात्र खरीदारी पर 10 प्रतिशत कैशबैक का विकल्प भी दिया गया है. वहीं, एमाजोन पे ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से Amazon पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को 5 प्रतिशत अनलिमिटेड कैशबैक मिल सकता है.
&#039;10 प्रतिशत तक&#039; डिस्काउंट का मतलब समझना जरूरी
सेल में दिखने वाला &#039;10 प्रतिशत तक डिस्काउंट&#039; हर खरीदारी पर पूरे 10 प्रतिशत की बचत की गारंटी नहीं देता. वास्तविक छूट एक तय अधिकतम सीमा, खरीदारी की राशि और कार्ड की पात्रता पर निर्भर कर सकती है.
इसके अलावा कॉरपोरेट कार्ड कुछ ऑफर्स से बाहर हो सकते हैं और सामान्य कार्ड पेमेंट तथा EMI पेमेंट के नियम भी अलग हो सकते हैं. Amazon और Flipkart ने सभी ऑफर्स की पूरी exclusions list अभी जारी नहीं की है. इसलिए खरीदारी पूरी करने से पहले चेकआउट पेज पर लागू शर्तों और अधिकतम डिस्काउंट की सीमा जरूर जांच लें.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Amazon, और, Flipkart, सेल, में, कौनसा, कार्ड, देगा, सबसे, ज्यादा, डिस्काउंट</media:keywords>
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        <title>7 अक्टूबर को RBI का फैसला, रेपो रेट बदला तो आपकी EMI और FD पर क्या होगा असर?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/7-अक्टूबर-को-rbi-का-फैसला-रेपो-रेट-बदला-तो-आपकी-emi-और-fd-पर-क्या-होगा-असर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/7-अक्टूबर-को-rbi-का-फैसला-रेपो-रेट-बदला-तो-आपकी-emi-और-fd-पर-क्या-होगा-असर</guid>
        <description><![CDATA[ अक्टूबर महीने में आम लोगों की नजर RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है. RBI की 6 सदस्यीय MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक चलेगी और 7 अक्टूबर को रेपो रेट पर फैसला आएगा. फिलहाल रेपो रेट 5.25% है.
इस बार सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि महंगाई बढ़ रही है, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हैं और रुपये पर भी दबाव है. ऐसे में बाजार में रेपो रेट बढ़ने की चर्चा तेज है. हालांकि, RBI का फैसला 7 अक्टूबर को ही सामने आएगा. अब समझते हैं कि अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो आपकी EMI और FD पर क्या असर पड़ेगा.
रेपो रेट क्या होता है?रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा देता है. जब RBI इस दर को बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है. इसका असर आगे चलकर बैंक के लोन और ब्याज दरों पर पड़ सकता है. वहीं अगर RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंकों के लिए फंडिंग लागत कम होने की संभावना रहती है.
EMI पर क्या असर पड़ेगा?अगर RBI 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करता है, तो खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर इसका असर पड़ सकता है. मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपए का होम लोन 20 साल के लिए लिया है. अगर ब्याज दर 8.5% से बढ़कर 8.75% हो जाती है तो EMI करीब 43,391 रुपए से बढ़कर 44,186 रुपए हो सकती है. यानी करीब 795 रुपए प्रति महीने का फर्क पड़ सकता है.
हालांकि, इसका असर आपके बैंक, लोन के ब्याज मॉडल, बकाया रकम और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा. हर बैंक रेपो रेट में बदलाव को बिल्कुल उसी अनुपात में और तुरंत ग्राहक तक पहुंचाए, यह जरूरी नहीं है.
होम लोन पर क्या पड़ेगा असर?रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर होम लोन के अलावा दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर भी पड़ सकता है. इसमें कुछ पर्सनल लोन और ऑटो लोन भी शामिल हो सकते हैं. इसलिए जिन लोगों की EMI पहले से चल रही है, उनके लिए 7 अक्टूबर का फैसला महत्वपूर्ण है.
हालांकि, अगर आपका लोन फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट पर है तो रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर आमतौर पर आपकी मौजूदा EMI पर नहीं पड़ता.
RBI रेपो रेट नहीं बढ़ाता तो?अगर 7 अक्टूबर को RBI रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखता है, तो मौजूदा ब्याज दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव जरूरी नहीं है. ऐसी में जिन लोगों की EMI चल रही है, उन्हें RBI के फैसले से सीधे अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. वहीं FD निवेशकों को भी मौजूदा FD पर वही तय ब्याज मिलता रहेगा.
रेपो रेट घटा तो क्या होगा?अगर उम्मीद के उलट RBI रेपो रेट में कटौती करता है तो इसका असर कर्ज लेने वालों के लिए राहत के रूप में आ सकता है. फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दर कम होने पर EMI घट सकती है या लोन की अवधि कम हो सकती है.
लेकिन FD निवेशकों के लिए इसका दूसरा पहलू है. रेपो रेट घटने पर बैंक आगे चलकर नई FD की ब्याज दरें कम कर सकते हैं. यानी भविष्य में FD कराने वाले लोगों को पहले के मुकाबले कम रिटर्न मिल सकता है.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>टल गया गैस संकट, होर्मुज से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची LNG की सप्लाई</title>
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        <description><![CDATA[ फरवरी के महीने से ईरान और यूएस-इजरायल के बीच युद्ध शुरू हुआ था. इस युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल- गैस की सप्लाई काफी प्रभावित हो रही थी. लेकिन अब हालात कुछ हद तक सुधर गए हैं हालांकि चिंता पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, अब भी बनी हुई है. इसी बीच सितंबर के महीने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई ज्यादा बढ़ गई है. जो एक राहत भरी खबर है.
दरअसल सितंबर के महीने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LNG ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बढ़ गई है. और युद्ध शुरू होने के बाद ये सितंबर महीने का आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा रहा है.वहीं इसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर के महीने में ये आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ने वाला है.
सितंबरम में 19 LNG कार्गे निकलेS&amp;amp;P ग्लोबल एनर्जी के प्रिंसिपल एनालिस्ट एरिक येप ने बताया कि, सितंबर में कुल 19 LNG कार्गो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर निकले. इनमें 13 जहाज कतर और 6 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से थे. उन्होंने ये भी बताया कि, सितंबर के आखिरी 15 दिन में LNG जहाजों की आवाजाही तेजी से बढ़ी. अगर अक्टूबर में भी ये रफ्तार बनी रहती है, तो युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में LNG की आवाजाही करीब 25% तक पहुंच सकती है.
Kpler के आंकड़े क्या कहते हैं?शिपिंग डाटा कंपनी Kpler के मुताबिक, सितंबर में 21 LNG कार्गो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकले. जून में ये संख्या 15 थी. पिछले कुछ हफ्तों में कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी से जुड़े कई LNG जहाज भी इस रास्ते से गुजरे हैं. इनमें कुछ जहाजों में गैस भरी हुई थी, जबकि कुछ खाली थे.
तो वहीं इस हफ्ते में कतर के रास लफन गैस टर्मिनल से जुड़े तीन और LNG जहाज होर्मुज से बाहर दिखाई दिए. इनमें अल &amp;nbsp;खरैतियत, अल घराफा और मिलाहा कतर शामिल हैं. अल खरैतियत और अल गर्राफा जहाज होर्मुज के अंदर दिखाई देने के कुछ दिनों बाद भारत के पश्चिमी तट के पास नजर आए. वहीं, मिलाहा कतर नाम का जहाज भी होर्मुज से निकलकर भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचा और बाद में गुजरात के हजीरा बंदरगाह पर अपना LNG कार्गो उतारने लगा.
अक्टूबर में बढ़ सकती है शिपिंगसितंबर महीने के आंकड़ों को देखते हुए साफ लगता है कि अक्टूबर में ही यदि हालात थोड़े स्थिर रहे, तो अक्टूबर में जहाजों की आवाजाही का आंकड़ा बढ़ सकता है. जिसके बाज भारत में भी त्यौहारी सीजन में गैस की कमी नहीं होगी.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>दालों पर घटेगी इंपोर्ट ड्यूटी, त्यौहारों से पहले सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ भारत सरकार देश में बढ़ती हुई महंगाई को कम करने के लिए तमाम कोशिशें कर रही है. लेकिन खाने- पीने की चीजों के दामों में इतनी तेजी से इजाफा हो रहा है कि आम जनता परेशान है. अधिकतर घरों में रोज बनने वाली दाल की कीमतों में भी भारी इजाफा हो रहा है. जिसको कंट्रोल करने के लिए सरकार दाल की आयात ड्यूटी में कटौती कर सकती है.
हालांकि इस पर फिलहाल सरकार ने कुछ भी बयान नहीं दिया है ना ही कोई घोषणा की है. दालों की सप्लाई बढ़ाने और उनकी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कुछ दालों के आयात पर लगने वाला टैक्स कम करने पर विचार जरूर किया जा रहा है.
किन दालों पर घट सकता है आयात शुल्क?सरकार अगर आयात शुल्क घटाती है तो इसका फायदा मसूर दाल और पीली मटर को मिल सकता है. हालांकि, चना को इस छूट से बाहर रखा जा सकता है. फिलहाल भारत में मसूर और चने के आयात पर 10% टैक्स, जबकि पीली मटर पर 30% आयात शुल्क लगता है. वहीं, अरहर और उड़द के आयात को मार्च 2027 तक शुल्क फ्री किया गया है.
क्यों जरूरी है ये फैसला?इस फैसले की जरूरत इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि इस साल मानसून सामान्य नहीं रहा है और इससे देश में दालों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. दालों की खेती का बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर रहता है. इस साल जून से सितंबर के बीच देश के प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में सामान्य से 30% तक कम बारिश हुई है. इससे दालों का उत्पादन काफी कम हुआ होगा.
त्योहारों में बढ़ी मांगभारत में त्योहारों के मौसम में दालों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है. खासकर चने की ज्यादा मांग रहती है, क्योंकि घरों के साथ-साथ मिल और खाद्य कंपनियां भी पहले से स्टॉक जमा करती हैं. देश में खाने- पीने की चीजों की महंगाई भी बढ़ रही है. अगस्त में ये 5.95% रही. दालों में भी कीमतों का दबाव बना हुआ है. अगस्त में अरहर की कीमतों में सालाना आधार पर 5.6% और उड़द की कीमतों में 7.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>HDFC बैंक को मिला नया बॉस, अनूप बागची संभालेंगे MD और CEO की कमान</title>
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        <description><![CDATA[ अक्टूबर महीने की शुरुआत अपने साथ बहुत सारे बदलाव लेकर आई है. रोजरमर्रा की चीजों के भाव से लेकर बैंकिंग सेक्टर में भी इस महीने में कई सारे बदलाव हुए हैं. इन्हीं में एक बड़ा फेरबदल HDFC बैंक में भी देखने को मिला है. वो ऐसे कि अब एचडीएफसी बैंक का मैनेजमेंट अनूप बागची संभालने वाले हैं.
ये फैसला 1 अक्टूबर को ही सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि अनूप बागची को अब एचडीएफसी बैंक का सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. इसके लिए RBI ने भी अपनी मंजूरी दे दी है.
इस तारीख से संभालेंगे चार्जबतौर एमडी और सीईओ अनूप बागची 27 अक्टूबर 2026 से अपना पदभार ग्रहण करेंगे. फिलहाल बैंक में शशिधर जगदीशन एमडी और सीईओ का प्रभार संभाल रहे हैं. उनका कार्यकाल 27 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है, जिसके बाद अनूप इस पद को संभालेंगे. जगदीश ने अब तक अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है.
एचडीएफसी बैंक ने इस पद के लिए दो नाम RBI को भेजे थे. इनमें अनूप बागची के अलावा बैंक के डिप्टी एमडी कैजाद भरूचा का नाम भी शामिल था. RBI ने बागची की नियुक्ति और उनके वेतन को मंजूरी दे दी है.
कौन हैं अनूप बागची?अनूप बागची को बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है. वो 1992 से ICICI ग्रुप से जुड़े हुए हैं. इस दौरान उन्होंने ट्रेजरी, रिटेल बैंकिंग, होलसेल बैंकिंग, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में काम किया है. बागची ICICI सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ रह चुके हैं. इसके अलावा वो ICICI बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रहे हैं. फिलहाल वो ICICI प्रोडेंशियल लाइफ इंश्यरेंस के एमडी और सीईओ हैं.
2017 से 2023 के बीच ICICI बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहते हुए उन्होंने रिटेल, बिजनेस और ग्रामीण बैंकिंग का काम संभाला. इस दौरान बैंक के रिटेल कारोबार को बढ़ाने और मुनाफे में सुधार पर उनका फोकस रहा. इसी अवधि में ICICI बैंक का रिटेल मॉर्गेज पोर्टफोलियो 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा.
ये भी पढ़ें: इस राज्य ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दी सौगात, DA-DR में की बढ़ोतरी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>गांधी जयंती की छुट्टी पर बैंक से लेकर शेयर बाजार तक, क्या बंद है और क्या खुला?</title>
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        <description><![CDATA[ 2 अक्टूबर को हर साल गांधी जयंती मनाई जाती है. इस साल ये महात्मा गांधी की 157वीं जयंती होगी. हर साल की तरह इस साल भी इस मौके पर राष्ट्रीय छुट्टी रहने वाली है. इस दिन सरकारी से लेकर प्राइवेट तक कई संस्थान बंद रहते हैं. बैंक, शेयर बाजार और कई सरकारी संस्थान बंद रहते हैं. तो वहीं देशभर में ड्राई डे भी मनाया जाता है, यानी कि इस दिन सारी सरकारी और प्राइवेट शराब की दुकाने भी बंद रहने वाली हैं. हालांकि, कुछ ऑनलाइन सुविधाएं हैं जो चालू रहने वाली हैं. आइये जानते हैं इस दिन क्या बंद रहेगा और क्या खुला रहने वाला है.
शेयर बाजार का क्या रहेगा हाल?शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के मौके पर भारतीय शेयर बाजार बंद रहने वाला है. NSE और BSE पर कोई डील नहीं होगी. अब लगातार तीन दिनों तक शेयर बाजार बंद रहने वाला है. क्योंकि गांधी जयंती शुक्रवार को है और इसके बाद अगले दो दिन शनिवार और रविवार है और वीकेंड पर शेयर बाजार वैसे भी बंद ही रहता है.
बैंक बंद रहेंगे या खुले?गांधी जयंती के मौके पर तमाम सरकारी, निजी, विदेशी और सहकारी बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी. इसका मतलब है कि बैंक जाकर होने वाले काम इस दिन नहीं हो सकेंगे. हालांकि, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी. ग्राहक UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, NEFT और RTGS जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसके अलावा ATM और कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) भी चालू रहेंगी.
स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर रहेंगे बंदकेंद्र सरकार के दफ्तरों में 2 अक्टूबर को छुट्टी रहेगी. दिल्ली और नई दिल्ली के केंद्रीय सरकारी कार्यालयों की छुट्टियों की लिस्ट में गांधी जयंती को राजपत्रित अवकाश रखा गया है. राज्य सरकार के दफ्तरों में छुट्टी संबंधित राज्य के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार होगी. हालांकि, ज्यादातर राज्यों में गांधी जयंती पर छुट्टी रहती है.
इसके अलावा स्कूल और कॉलेज भी 2 अक्टूबर को बंद रहने वाले हैं. हालांकि, कुछ शिक्षण संस्थान अपने एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार फैसला ले सकते हैं. कुछ स्कूल-कॉलेज गांधी जयंती के मौके पर कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं.
प्राइवेट दफ्तर रहेंगे बंद?प्राइवेट कंपनियों और व्यावसायिक संस्थानों के अपने नियम और कानून होते हैं. उनकी छुट्टी उनके अपने हॉलिडे कैलेंडर और काम की जरूरतों पर निर्भर करती है. कई कंपनियां इस दिन कर्मचारियों को छुट्टी देती हैं, लेकिन कुछ जरूरी सेवाओं वाले कार्यालय खुले रह सकते हैं.
ये भी पढ़ें: चीनी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, स्टॉक रखने की लिमिट की फिक्स ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, स्टॉक रखने की लिमिट की फिक्स</title>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारों के मौसम में चीनी के दाम बढ़ने के कारण जनता काफी परेशान है. ऐसे में सरकार तमाम कोशिशें कर रही है कि वो कैसे भी करके चीनी के दामों को कंट्रोल कर सके. इसी कड़ी में हाल ही में सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. इस फैसले के तहत अब डीलर अपने स्टॉक में केवल 1,000 क्विंटल चीनी ही रख सकेंगे. सरकार के द्वारा ये फैसला गुरुवार को ही किया गया है. नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा.
सरकार के इस फैसले के बाद चीनी की कीमतों में और भी ज्यादा कमी देखने को मिल सकती है. अगस्त के महीने में ही चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 15% तक कम हुई थी. वहीं, चीनी मिलों से निकलने वाली कीमत यानी एक्स-मिल कीमत में भी करीब 28% की गिरावट देखने को मिली थी. हालांकि पिछले तीन महीनों से ये कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
इन राज्यों में ज्यादा है लिमिटदेशभर में डीलरों के स्टॉक रखने की लिमिट 1000 क्विंटल है, लेकिन कोलकाता और उसके आसपास के विस्तारित महानगरीय क्षेत्र और असम के लिए ये सीमा 2000 क्विंटल होगी. सरकार ने इन क्षेत्रों की अलग जरूरतों को देखते हुए ये छूट दी है. सरकार के इस फैसले के बाद अब डीलर अपने पास चीनी का स्टॉक अधिकतम 15 दिन तक ही रह सकेगा.
क्यों लिया गया फैसला?इस फैसले के पीछे का कारण भी सरकार ने बताया है, जिसमें कहा गया है कि चीनी की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करने से बाजार में चीनी की बेवजह जमाखोरी नहीं होगी. इससे चीनी मिलों से डीलरों और फिर ग्राहकों तक इसकी सप्लाई आसानी से जारी रहेगी. इस कदम का मकसद जमाखोरी, सट्टेबाजी और चीनी का जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने पर रोक लगाना है.
पहले भी घटाई जा चुकी है स्टॉक सीमासरकार ने इससे पहले अगस्त में डीलरों के लिए देशभर में 4000 क्विंटल चीनी रखने की सीमा तय की थी. तब डीलरों को चीनी मिलने की तारीख से अधिकतम 30 दिन तक स्टॉक रखने की अनुमति थी. इसके बाद 15 सितंबर से सीमा घटाकर 2000 क्विंटल कर दी गई. अब 15 अक्टूबर से इसे और घटाकर 1000 क्विंटल किया जा रहा है.
ये भी पढ़ें: दालों पर घटेगी इंपोर्ट ड्यूटी, त्यौहारों से पहले सरकार का बड़ा फैसला ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>स्मित माछर वाली FlyDubai कितनी बड़ी कंपनी है? जानिए इस एयरलाइन की पूरी कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ 1073 दुबई से तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट जा रही थी. इसी बीच कॉकपिट में को- पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित माछर ने फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग कराई. अब &amp;nbsp;स्मित माछर की पूरी दुनिया तारीफ कर रही है. साथ ही फ्लाईदुबई एयरलाइंस के बारे में भी लोग काफी ज्यादा सर्च कर रहे हैं.&amp;nbsp;
घटना के बाद से ही फ्लाईदुबई की चर्चा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्लाईदुबई कोई छोटी-मोटी एयरलाइन नहीं है बल्कि दुबई की बड़ी सरकारी विमानन कंपनियों में से एक है. ये एयरलाइन पिछले 17 साल से यात्रियों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा रही है. आइए जानते हैं कि फ्लाईदुबई कहां की कंपनी है, इसकी शुरुआत कब हुई और आज ये कितनी बड़ी एयरलाइन बन चुकी है.
कहां की कंपनी है फ्लाईदुबई?फ्लाईदुबई संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की एयरलाइन है और इसका मुख्यालय दुबई में ही है. कंपनी का ऑफिशियल नाम दुबई एविएशन कॉर्पोरेशन है और इसे आम तौर पर फ्लाईदुबई नाम से जाना जाता है.
ये एयरलाइन पूरी तरह से दुबई सरकार की है. इसकी स्थापना 2008 में हुई थी, जबकि एयरलाइन ने जून 2009 में अपनी पहली उड़ान शुरू की थी. इसका मकसद दुबई से ऐसे बाजारों को जोड़ना भी रहा है, जहां सीधे हवाई संपर्क बहुत कम या बिल्कुल नहीं था.
कितनी बड़ी है फ्लाईदुबई?फ्लाईदुबई का नेटवर्क पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है. सितंबर 2026 तक कंपनी 56 देशों में 125 से ज्यादा डेस्टिनेशन के लिए उड़ानें संचालित कर रही थी. एयरलाइन औसतन करीब 2,200 फ्लाइट्स हर हफ्ते चलाती है.&amp;nbsp;
कंपनी के मुताबिक, 2009 में ऑपरेशन शुरू करने के बाद से फ्लाईदुबई अब तक 13.7 करोड़ से ज्यादा यात्रियों को सफर करा चुकी है. यानी ये सिर्फ दुबई और आसपास के देशों तक लिमिटेड एयरलाइन नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क कई महाद्वीपों तक भी फैला हुआ है.&amp;nbsp;
कितने विमान हैं कंपनी के पास?फ्लाईदुबई का बेड़ा फिलहाल 98 बोइंग 737 विमानों का है. कंपनी एक ही तरह के एयरक्राफ्ट यानी Boeing 737 family पर अपना ऑपरेशन चलाती है. इसके बेड़े में 25 Boeing 737- 800, 69 Boeing 737 MAX 8, 4 Boeing 737 MAX 9 शामिल हैं.&amp;nbsp;
हालांकि, कंपनी का फोकस सिर्फ बेड़े तक नहीं है. 2023 के दुबई एयरशो में फ्लाईदुबई ने पहली बार वाइड-बॉडी विमान के लिए ऑर्डर दिया था. कंपनी ने 30 Boeing 787-9 Dreamliner का ऑर्डर दिया है.
कितना मुनाफा कमा रही है कंपनी?ऑर्थिक रूप से फ्लाईदुबई काफी मजबूत कंपनी है. कंपनी की ऑफिशयल वेबसाइट पर ये बताया गया है कि 31 दिसंबर 2024 को खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए AED 2.5 बिलियन यानी USD 674 मिलियन का टैक्स-पूर्व मुनाफा दर्ज किया गया है. ये 2023 की तुलना में 16% ज्यादा है. &amp;nbsp;वहीं, सालाना रेवेन्यू भी 15% बढ़कर AED 12.8 अरब (USD 3.5 अरब) हो गया है.
कितने यात्रियों को लेकर उड़ती है फ्लाईदुबई?फ्लाईदुबई का कारोबार सिर्फ डेस्टिनेशन की संख्या में ही बड़ा नहीं है. 2025 में एयरलाइन ने रिकॉर्ड 1.57 करोड़ यात्रियों को सफर कराया. ये 2024 के मुकाबले यात्री संख्या में बढ़ोतरी थी.&amp;nbsp;
कंपनी ने 2025 में 13.6 अरब UAE दिरहम, यानी करीब 3.7 अरब डॉलर का कुल टैक्स दर्ज किया है. इसी साल कंपनी का टैक्स से पहले मुनाफा करीब 2.2 अरब दिरहम यानी 591 मिलियन डॉलर रहा है. यानी कारोबार के लिहाज से भी फ्लाईदुबई एक बड़ी इंटरनेशनल एयरलाइन बन चुकी है.
एमिरेट्स से क्या है कनेक्शन?फ्लाईदुबई और एमिरेट्स अलग-अलग एयरलाइंस हैं, लेकिन दोनों के बीच साझेदारी है. दोनों कंपनियों के नेटवर्क को जोड़ने की वजह से यात्रियों को दुबई के जरिए कई जगहों तक कनेक्टिविटी मिलती है. फ्लाईदुबई के मुताबिक, उसके कुछ कोडशेयर फ्लाइट्स के यात्रियों को दुबई एयरपोर्ट के जरिए एमिरेट्स के नेटवर्क से भी कनेक्शन मिलता है.&amp;nbsp;
लो-कॉस्ट एयरलाइन है फ्लाईदुबई?फ्लाईदुबई की शुरुआत कम लागत वाली एयरलाइन के तौर पर हुई थी, लेकिन समय के साथ इसका नेटवर्क और बिजनेस मॉडल काफी बड़ा हुआ है. कंपनी अब सिर्फ सस्ती उड़ानों तक सीमित नहीं है.
इसका नेटवर्क अफ्रीका, मध्य एशिया, काकेशस, यूरोप, मिडिल ईस्ट, साउथ एशिया और साउथईस्ट एशिया तक फैला हुआ है. कंपनी ने 100 से ज्यादा ऐसे नए रूट भी खोले हैं, जहां पहले दुबई के लिए सीधी हवाई कनेक्टिविटी नहीं थी.
छठ- दीवाली से पहले फ्लाइट टिकट महंगे होना तय, लगातार तीसरे महीने बढ़े ATF के दाम
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>स्मित, माछर, वाली, FlyDubai, कितनी, बड़ी, कंपनी, है, जानिए, इस, एयरलाइन, की, पूरी, कहानी</media:keywords>
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        <title>दशहरा&amp;दीवाली में नहीं महंगी होनी चीनी, त्योहारों से पहले सरकार ने बढ़ाया बिक्री कोटा</title>
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        <description><![CDATA[ नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और दीवाली जैसे त्याेहारों के मौके पर मिठाइयों की डिमांड खूब होगी, जिससे चीनी की मांग भी बढ़ेगी. इसे देखते हुए सरकार ने चीनी की बिक्री का कोटा बढ़ा दिया है ताकि त्योहारों में अधिक मांग के चलते इसकी कीमतें न बढ़े.&amp;nbsp;
खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (Department of Food and Public Distribution) ने अक्टूबर के शुरुआती 15 दिनों के लिए चीनी की बिक्री का कोटा 1.40 मिलियन टन तय किया है, जो सितंबर में इसी अवधि के लिए तय 1.30 मिलियन टन से ज्यादा है. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि यह बढ़ा हुआ कोटा अक्टूबर में नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा और उसके बाद नवंबर में दीवाली से पहले तय किया गया है क्योंकि अमूमन इस दौरान चीनी की मांग बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
हर 15 दिन में तय होता है कोटा
सरकार ने सितंबर से चीनी की बिक्री के लिए हर 15 दिन में कोटा तय करने की व्यवस्था शुरू की है. पहले पूरे महीने के लिए एक साथ कोटा जारी होता था. इससे कई बार बड़े-बड़े कारोबारी महीने के आखिर में अपने मन मुताबिक कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए स्टॉक रोक लेते थे.
अब हर 15 दिन में समीक्षा की जाती है, जिसमें देखा जाता है कि बाजार में चीनी की डिमांड कितनी है और फिर उसी हिसाब से बाजार में चीनी की उपलब्धता घटाई या बढ़ाई जाती है. इस कदम का मकसद सप्लाई को स्थिर रखना और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकना है. बता दें कि अक्टूबर 2025 के लिए यह कोटा 2.40 मिलियन टन था, जबकि अक्टूबर 2024 में यह 2.55 मिलियन टन था.
खूब बढ़ गई थीं कीमतें
जुलाई और अगस्त में चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया था. इसके लते आने वाले महीनों में सप्लाई कम होने और सट्टेबाजी वाली खरीदारी को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं. हालांकि, तब सरकार नेव्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय करने और कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के आयात की मंजूरी देने जैसे कई कदम उठाए, जिससे सप्लाई की स्थिति में सुधार हुआ. अभी चीनी की खुदरा कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से 11-12% गिरकर औसतन लगभग 57.50 प्रति किलोग्राम हो गई हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>60 के पार 30 रुपये वाली प्याज, आम आदमी की रसाेई का फिर बिगड़ा बजट</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारी सीजन में आम आदमी को एक और बड़ा झटका लगा है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सिटी रिसर्च (Citi Research) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि इस साल भारत में उम्मीद से कमजोर मानसून होने की वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. देश के कुल प्याज उत्पादन में लगभग 40% की हिस्सेदारी रखने वाले राज्य महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति के चलते प्याज की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई हैं.&amp;nbsp;
हालांकि, इस साल खरीफ की फसल की कुल बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 1.2% कम होकर सामान्य स्तर के आसपास बना हुआ है, लेकिन जबकि देश का तीन-चौथाई प्याज, दो-तिहाई दालें और आधा चावल पैदा करने वाले राज्यों में बारिश में 10% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. इसका असर फसलों की पैदावार पर देखने को मिल सकता है. बहरहाल, कीमतों में दबाव पहले से ही देखा जा रहा है.&amp;nbsp;
कमजोर मानसून ने बिगाड़ा खेल
मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन (MoSPI) द्वारा जारी किए गए अगस्त के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों से पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ी हैं, जो कमजोर मानसून का ही असर है.
सितंबर में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह रुख देखने को मिला. प्याज के अलावा चीनी, चावल और दालों की भी कीमतों में तेजी देखी गई. इसके पीछे वजह ही यही है कि कमजोर मानसून के चलते भारत के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 के आखिर तक देश के लगभग आधे हिस्से (49.4% से अधिक) में सूखे जैसी स्थिति है, जो पिछले सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. जहां साल 2023 में देश का केवल 30% ही हिस्सा सूखे की चपेट में था, वह इस साल सितंबर के अंत तक बढ़कर लगभग 50% तक पहुंच चुका है. इनमें से भी लगभग 10% हिस्सा ऐसा है, जहां स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है.&amp;nbsp;
महाराष्ट्र और पंजाब का बुरा हाल
अगर बड़े राज्यों की बात करें, तो महाराष्ट्र के लगभग 84% और पंजाब के 80% हिस्से में सूखे जैसे हालात हैं. &amp;nbsp;सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ आईआईटी-गांधीनगर (IIT-Gandhinagar) की डेटा से पता चलता है कि महाराष्ट्र में 358 में से 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं. यानी कि राज्य का लगभग 74% प्रभावित है. इनमें से भी लगभग 37% हिस्सा बहुत ज्यादा सूखे की हालात का सामना कर रहा है.
भारत में मुख्य रूप से अल नीनो की स्थिति के कारण लंबे समय के औसत के मुकाबले 12% कम बारिश दर्ज की गई है. &amp;nbsp;रिपोर्ट के अनुसार, 2015 के बाद से यह मानसून में आई अब तक की सबसे बड़ी कमी है, जिससे खरीफ फसलों पर खतरा मंडरा रहा है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>FlyDubai के स्मित मच्छार की कमाई कितनी, दुबई में पायलटों को कितनी मिलती है सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुई घटना के बाद भारतीय पायलट स्मित मच्छार की दुनियाभर में तारीफ हो रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के रहने वाले स्मित मच्छार जून 2022 से फ्लाईदुबई में Boeing 737 के कैप्टन हैं. इससे पहले उन्होंने करीब 11 साल तक स्पाइस जेट में काम किया है.
उनका लिंक्डइन प्रोफाइल कहता है कि उनके पास 9,750 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर फ्लाईदुबई अपने पायलट को कितनी सैलरी देती है? क्या स्मित मच्छार की सैलरी भी इतनी ही है? आइए जानते हैं.
स्मित मच्छार की सैलरी कितनी है?वैसे तो ऑफिशियल तरीके से स्मित मच्छार की सैलरी का आंकड़ा पब्लिक नहीं है. इसलिए ये साफ- साफ सही नहीं कह सकते कि हर महीने उन्हें कितना वेतन मिलता होगा. लेकिन, फ्लाईदुबई की आधिकारिक करियर वेबसाइट पर कंपनी ने अपने कैप्टन पद की सैलरी का स्ट्रक्चर बताया है.
इसके मुताबिक कैप्टन को बेसिक सैलरी के साथ हाउसिंग और ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस मिलाकर हर महीने 50,235 UAE दिरहम मिलते हैं. इसके अलावा 70 घंटे की फ्लाइंग के बेसिस पर करीब 16,310 दिरहम प्रति महीने वैरिएबल फ्लाइंग पे दिया जाता है. यानी अगर सिर्फ फ्लाइंग पे को जोड़ें तो स्मित मच्छार की मंथली कमाई करीब 66,545 UAE दिरहम हो जाती है..
भारतीय रुपये में कितने हुए?1 UAE दिरहम भारत में 26.13 रुपए होता है, तो 66545 दिरहम 17 लाख 39 हजार 108.32 रुपए प्रति महीना हुआ. इस हिसाब से कैप्टन स्मित मच्छार की सालाना कमाई 2 करोड़ रुपए हुई.
फर्स्ट ऑफिसर की कितनी सैलरी है?फ्लाईदुबई में पायलट बनने की शुरुआत करने वाले फर्स्ट ऑफिसर की सैलरी कैप्टन से कम होती है. कंपनी के मुताबिक, बेसिक सैलरी, हाउसिंग और ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस मिलाकर फर्स्ट ऑफिसर को 37,000 दिरहम प्रति महीने मिलते हैं.
इसके अलावा औसतन 70 फ्लाइंग घंटे के आधार पर 11,410 दिरहम का वैरिएबल फ्लाइंग पे मिलता है. यानी एवरेज आधार पर कुल रकम करीब 48,410 दिरहम प्रति महीने हो सकती है. भारतीय रुपये में यह रकम करीब 12 लाख रुपए प्रति महीने के आसपास बैठती है.
पायलट को क्या मिलता है फायदा?फ्लाईदुबई में पायलटों के पैकेज में सिर्फ सैलरी ही नहीं मिलती है. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक पायलट को मेडिकल इंश्योरेंस, एजुकेशन असिस्टेंस, एंड ऑफ सर्विस बेनिफिट, साल में 42 दिन की पेड लीव और परिवार-दोस्तों के लिए रियायती टिकट जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. इसके अलावा कंपनी पायलटों को इनकम प्रोटेक्शन की सुविधा भी देती है.
स्मित मच्छार का अनुभव कितना है?स्मित मच्छार ने फ्लाईदुबई से पहले SpiceJet में करीब 11 साल काम किया है. वहां वो सीनियर कमांडर और बाद में लाइन ट्रेनिंग कैप्टन भी रहे. इसके बाद फ्लाईदुबई में वह जून 2022 से Boeing 737 के कैप्टन हैं. उनके पास 9,750 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग है और SpiceJet में वो 6,400 घंटे से ज्यादा पायलट-इन-कमांड के तौर पर उड़ान भर चुके थे.&amp;nbsp;
दुबई में पायलट की सैलरी कितनी होती है?दुबई में हर पायलट की सैलरी एक जैसी नहीं होती है. ये एयरलाइन, एक्सपीरियंस और पद के हिसाब से होता है. जुलाई 2026 में आए एक रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, दुबई में पायलट की औसत बेस सैलरी करीब 13,430 दिरहम प्रति महीने है.&amp;nbsp;
60 के पार 30 रुपये वाली प्याज, आम आदमी की रसाेई का फिर बिगड़ा बजट
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>FlyDubai, के, स्मित, मच्छार, की, कमाई, कितनी, दुबई, में, पायलटों, को, कितनी, मिलती, है, सैलरी</media:keywords>
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        <title>गौतम अडानी का जलवा, बने भारत के सबसे अमीर; दूसरे नंबर पर अंबानी</title>
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        <description><![CDATA[ गौतम अडानी ने फोर्ब्स की भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में फिर से पहला स्थान हासिल किया है. पिछले तीन साल से दूसरे नंबर पर रहने के बाद इस साल उन्होंने शानदार वापसी की है. फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक साल के भीतर उनकी संपत्ति में 20.7 अरब डॉलर (लगभग 1.73 लाख करोड़) का भारी इजाफा हुआ है और इसी के साथ अडानी परिवार की कुल संपत्ति 112.7 अरब डॉलर हो गई है.
1 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा बरकरार
गुरुवार को फोर्ब्स की जारी लिस्ट के मुताबिक, भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की कुल संपत्ति उतनी ही है जितनी पिछली थी - यानी लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर. यह ऐसे साल में हुआ है जब रुपये की कीमत में 8.5% की गिरावट आई और शेयर बाजार 9.5% नीचे गिरा.
दरअसल, विपरीत आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद भी 1 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा इसलिए बना रहा है क्योंकि जहां एक तरफ मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस और शिव नाडार और अजीम प्रेमजी जैसे आईटी सेक्टर्स के दिग्गजों के शेयरों में गिरावट आई. वहीं दूसरी तरफ गौतम अडानी की संपत्ति में 20.7 अरब डॉलर और लक्ष्मी मित्तल की संपत्ति में 74% की भारी बढ़ोतरी ने इस नुकसान की पूरी भरपाई कर दी.
अडानी की कमाई सबसे ज्यादा
डॉलर के मामले में इस साल भारत के सबसे बड़े गेनर या सबसे ज्यादा कमाने वाले व्यक्ति गौतम अडानी ही हैं. हालांकि, यह अभी भी साल 2022 में बनी 150 अरब डॉलर की सबसे ज्यादा वैल्यू से कम है. अडानी ग्रुप अपने कारोबार को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और इस सिलसिले में AI इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 अरब डॉलर का बड़ा दांव भी लगाया है. वहीं, &amp;nbsp;प्रतिशत के लिहाज से इस साल सबसे ज्यादा मुनाफा लक्ष्मी मित्तल को हुआ है. उनकी संपत्ति में 74% का जोरदार उछाल आया है और वे आठवें पायदान से सीधे चौथे स्थान पर आ गए हैं.
अंबानी क्यों रह गए पीछे
फोर्ब्स की इस लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी 86.3 अरब डॉलर की नेट वर्थ के साथ दूसरे नंबर पर आ गए हैं. इस साल उनकी संपत्ति में 18.7 अरब डॉलर (लगभग 1.56 लाख करोड़) की कमी आई है.
दरअसल, इस साल रिलायंस के रिटेल बिजनेस के प्रॉफिट मार्जिन में कमी आई. साथ ही इसके ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) यानी तेल और रिफाइनरी बिजनेस पर भी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर पड़ा. ऊपर से इस सेक्टर में कंपनी बढ़ते कर्ज को लेकर निवेशक टेंशन में रहे.
रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारी साल 2025-26 &amp;nbsp;में रिलायंस का सकल कर्ज 3,74,421 करोड़ रुपये रहा. इन सबके चलते निवेशकों का सेंटिमेंट गड़बड़ाया और शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों की कीमत नीचे आ गई, जिससे अंबानी की संपत्ति घट गई.&amp;nbsp;
तीसरे नंबर पर कौन?
फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2026 के अनुसार, भारत के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में 39.8 अरब डॉलर (लगभग 3.33 लाख करोड़) की कुल संपत्ति के साथ सावित्री जिंदल तीसरे नंबर पर हैं. वह ओपी जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन हैं. उनके बाद चौथे नंबर पर लक्ष्मी मित्तल हैं. पांचवें नंबर पर भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के फाउंडर और चेयरमैन सुनील मित्तल हैं. उनकी कुल संपत्ति 32.9 अरब डॉलर (लगभग 2.76 लाख करोड़) है.

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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारियों ने वापस लिया No UPI Day, विरोध खत्म</title>
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        <description><![CDATA[ 2 अक्टूबर को तमाम रिटेलर्स UPI-MDR चार्जेस के खिलाफ No UPI Day मनाकर विरोध प्रदर्शन करने वाले थे. लेकिन अब ये विरोध प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है. क्योंकि हाल ही में रिटेलर्स बॉडी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बातचीत की है. जिसके बाद ये अहम फैसला किया गया है.
दरअसल बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक बैठक हुई थी, इस बैठक में व्यापारिक समुदाय ने 2 हजार रुपये से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लगने वाले 0.4% शुल्क को लेकर अपनी सरकार के सामने रखीं. जिसके बाद इस विरोध प्रदर्शन को रद्द कर दिया गया है.
बैठक में कौन- कौन था शामिल?इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 20 व्यापार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया. व्यापारियों ने कहा कि प्रस्तावित शुल्क से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर एक्स्ट्रा वित्तीय बोझ पड़ सकता है और डिजिटल पेमेंट को अपनाने की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है.
सरकार से मांगी स्पष्टताअपनी सारी बातों को सरकार के सामने रखने के बाद, तमाम प्रतिनिधियों ने सरकार से प्रस्तावित शुल्क को लेकर सबकुछ स्पष्ट करने कोकहा है. इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा है कि इस फैसले पर अमल करने से पहले व्यापारिक समुदाय की चिंताओं को ध्यान में रखा जाए.
इससे पहले ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को &#039;नो यूपीआई डे&#039; मनाने की घोषणा की थी. हालांकि, वित्त मंत्री के साथ चर्चा के बाद दोनों संगठनों ने अपना विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम वापस लेने का फैसला किया है.
किस फैसले का किया जा रहा विरोधबता दें कि 15 सितंबर को सरकार ने घोषणा की थी कि, अब 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट के ऊपर 0.4% का MDR चार्ज लगाया जाएगा. ये चार्ज मर्चेंट से लिया जाएगा, लेकिन ग्राहकों पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ेगा. इस शुल्क 15 अक्तूबर से लागू होने वाला है. जिसको लेकर तमाम व्यापारी संगठन लगातार विरोध कर रहे थे. उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर असर पड़ेगा.
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        <title>अब आपकी लोकेशन तय करेगी McDonald&amp;apos;s के बर्गर की कीमत, अमीरों से ज्यादा होगी वसूली!</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में जंक फूड कौन खाना पसंद नहीं करता है और वहीं बात अगर बर्गर, फ्राइज की हो तो ज्यादातर लोग इसे खाना पसंद करते हैं. ऐसे में क्या आप भी McDonald&#039;s से बर्गर मंगवाते हैं तो अब आने वाले समय में बर्गर की कीमत हर जगह एक जैसी रहे ऐसा जरूरी नहीं है. क्योंकि अब कंपनी बर्गर की कीमत तय करने के लिए टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है.
दरअसल, अब कंपनी AI और डेटा की मदद से अलग-अलग रेस्टोरेंट के हिसाब से मेन्यू की कीमतें तय की करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है. यानी अब हर जगह बर्गर की कीमत एक ही रहे ऐसा जरूरी नहीं है. कीमत अब लोकेशन और ग्राहक कितने रुपये तक की खरीदारी कर सकते हैं, इसके आधार पर तय की जा सकती है.
AI का मुख्य काम क्या रहेगा?
McDonald&#039;s अब इलाके के हिसाब से बर्गर की कीमत तय करने की दिशा में काम कर रहा है, जैसे अगर किसी इलाके में लोग ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार है तो वहां पर बर्गर की कीमत ज्यादा हो सकती है और वहीं अगर किसी इलाके में ग्राहक ज्यादा महंगा बर्गर खरीदने को तैयार नहीं होते हैं तो ऐसे इलाकों में रेट वहां के हिसाब से तय किए जा सकते हैं.
इसके अलावा AI अलग-अलग रेस्टोरेंट का पुराना बिक्री डेटा भी देखेगा और ये भी देखेगा कि वहां पर किस चीज की ज्यादा डिमांड है. इसलिए दो अलग-अलग इलाकों में बर्गर की कीमत में अंतर देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
भारत में लागू हो गया है ये सिस्टम?
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल ये AI सिस्टम भारत में लागू नहीं हुआ है ये अमेरिका में McDonald&#039;s के रेस्टोरेंट में इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन अभी तक भारत में इसके लागू होने की कोई बात सामने नहीं आई है.
लाखों ट्रांजैक्शन के डेटा पर नजर
सबसे अहम बात तो यह है कि McDonald&#039;s का AI सिस्टम बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट्स ट्रांजैक्शन का डेटा देखता है. इसका मकसद यह है कि इससे पता ये चलेगा कि कौन से इलाके में कितनी बर्गर की डिमांड है और किस इलाके के ग्राहक कितने रुपये तक खर्च कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mumbai Real Estate: 14 साल में पहली बार सितंबर में टूटा घरों की बिक्री का रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ मुंबई के रियल एस्टेट बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. सितंबर 2026 में मुंबई शहर में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन ने पिछले 14 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इस महीने कुल 12,622 संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जो सितंबर 2025 के मुकाबले में 5% ज्यादा है. यानी इससे मुंबई के होऊसिंग मार्केट में जारी मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि, रजिस्ट्रेशन बढ़ने के बावजूद राज्य सरकार की स्टांप ड्यूटी से होने वाली कमाई में गिरावट दर्ज की गई.&amp;nbsp;
ये आंकड़े महाराष्ट्र के रजिस्ट्रेशन और स्टांप विभाग के हैं, जिनका एनालिसिस नाइट फ्रैंक इंडिया ने किया है. इसमें मुंबई के बीएमसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों को शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
सितंबर में कितने घरों की हुई रजिस्ट्री?

सितंबर 2026 में कुल 12,622 प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन हुई.&amp;nbsp;
यह आंकड़ा पिछले साल सितंबर के मुकाबले में करीब 5% ज्यादा है.&amp;nbsp;
सितंबर महीने के लिहाज से यह पिछले 14 सालों का सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन है.&amp;nbsp;
वहीं, महाराष्ट्र सरकार को स्टांप ड्यूटी से करीब 1,227 करोड़ रुपए मिले.&amp;nbsp;
स्टांप ड्यूटी कलेक्शन पिछले साल की तुलना में 5% कम रहा.&amp;nbsp;

गणेश उत्सव के दौरान बढ़ी प्रॉपर्टी की खरीदारी
मुंबई में गणेश चतुर्थी के आसपास प्रॉपर्टी की खरीदारी में खास तेजी देखनी को मिली है. 14 से 25 सितंबर 2026 के बीच मुंबई शहर में 5,379 प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन हुए. त्योहारी अवधि में यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि से 22% ज्यादा रहा. हालांकि, यह पिछले चार सालों में गणेश चतुर्थी की अवधि का सबसे ऊंचा रजिस्ट्रेशन आंकड़ा है.
इसी दौरान सरकार को करीब 640 करोड़ रुपये का स्टांप ड्यूटी कलेक्शन हुआ. त्योहारी अवधि में हुई यह कमाई पूरे सितंबर के कुल स्टांप ड्यूटी कलेक्शन की आधे से ज्यादा रही. यानी पिछले साल के मुकाबले में 32% ज्यादा बढ़ा.
अगस्त के मुकाबले सितंबर में क्या बदला?

अगस्त 2026 में मुंबई में 12,580 प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन हुए थे.
सितंबर में यह संख्या बढ़कर 12,622 हो गई.
यानी महीने-दर-महीने आधार पर रजिस्ट्रेशन करीब स्थिर रहे.
अगस्त में स्टांप ड्यूटी से 1,131 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था.
सितंबर में यह बढ़कर 1,227 करोड़ रुपये हो गया, यानी करीब 8% की बढ़ोतरी हुई.

पेट्रोल से प्याज तक, सोने से स्मार्ट फोन और हवाई टिकट से लेकर मिठाई तक, बढ़ गई महंगाई
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Mumbai, Real, Estate:, साल, में, पहली, बार, सितंबर, में, टूटा, घरों, की, बिक्री, का, रिकॉर्ड</media:keywords>
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        <title>बड़ी खबर: दूध की कीमतों में 3 रुपए की बढ़ोतरी, 1 अक्टूबर से लागू होंगी नई कीमतें</title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश के इंदौर में एक अक्टूबर से दूध की कीमत में इजाफा होने जा रहा है. इंदौर दूध विक्रेता संघ ने दूध की कीमत 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया है. अब डेयरी और दुकानों पर दूध 65 रुपए के बजाय 68 रुपए प्रति लीटर मिलेगा. वहीं अगर आप दूध अपने घर पर मंगाते हैं तो उसके लिए एक रुपया ज्यादा खर्च करना होगा. यानी घर पर डिलीवर होने वाला दूध 69 रुपए का मिलेगा.
ये कीमतें 1 अक्टूबर यानी कल से लागू होने जा रही हैं. जिसके बाद आम आदमी की जेब पर काफी बोझ बढ़ जाएगा. अब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला दूध भी महंगा होगा तो हर रोज के किचन का खर्च बढ़ेगा.
किसानों को भी मिलेगा ज्यादा पैसादूध की नई कीमतें बढ़ने के बाद दूध उत्पादक किसानों को भी पहले के मुकाबले ज्यादा पैसा मिलेगा. किसानों को प्रति फैट 33 पैसे ज्यादा मिलेंगे. दूध की कीमत उसकी फैट की मात्रा के आधार पर तय की जाती है. नई दरें 5.5 से 6 फैट वाले दूध के आधार पर तय की गई हैं.
होम डिलीवरी के लिए देना होगा 1 रुपये ज्यादाकई लोग दूध सीधे अपने घर पर मंगवाते हैं, उनके लिए दूध की कीमतें एक रुपये और ज्यादा होने वाली है. क्योंकि जो कंज्यूमर घर पर होम डिलीवरी मंगवाएंगे उन्हें एक रुपये ज्यादा डिलीवरी चार्ज के रूप में देना होगा. इसका मतलब है कि 68 रुपये का दूध ऐसे ग्राहकों को 69 रुपये का पड़ने वाला है.
अन्य राज्यों में भी बढ़ेंगे दाम?फिलहाल केवल इंदौर में दूध के दाम बढ़ने की खबर सामने आई है, लेकिन हो सकता है क कल यानी 1 अक्टूबर से अन्य राज्यों में भी दूध के दाम बढ़ जाएं. क्योंकि 1 अक्टूबर से कई और चीजों के दामों में बदलाव किया जा रहा है.
1 अक्टूबर से बढ़ रही महंगाईबता दें कि 1 अक्टूबर से देशभर में इलेक्ट्रॉनिक उपकणों के दाम बढ़ने जा रहे हैं. तो हीं होम अप्लायंस के दामों में भी 5 से 8 प्रतिशत तक का इजाफा होने जा रहा है. दीपावली के मौके पर टीवी, फ्रिज, एसी आदि चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ने वाले हैं.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें: वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारियों ने वापस लिया No UPI Day, विरोध खत्म ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैंक मर्ज होने के बाद भी चलेगा पुराना चेक? हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ क्या दो बैंकों का मर्जर होने पर ग्राहकों को मिले चेक वैलिड होते हैं? क्या ये सवाल आपके मन में भी कभी आया है? यदि हां, तो हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसका जवाब दिया है. दरअसल कोर्ट ने हाल ही में ऐसे ही एक मामले में सुनवाई की है और बाताया है कि अगर किसी बैंक का दूसरे बैंक में विलय हो जाता है, तो सिर्फ इस वजह से उस बैंक का पहले से जारी किया गया चेक अमान्य नहीं हो जाता. विलय के बाद पुराने बैंक की संपत्ति, देनदारियां और ग्राहक खाते नई बैंकिंग संस्था के पास चले जाते हैं.
ये मामला विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के मर्जर से जुड़ा हुआ है. जिनका मर्जर साल 2019 में हो गया था. इसके बाद एक महिला ने विजया बैंक के खाते से जारी किया गया चेक बैंक ऑफ बड़ौदा में लगाया था, लेकिन वो चेक भुगतान के लिए स्वीकार नहीं किया गया.
क्या है पूरा मामला?दरअसल एक महिला ने विजया बैंक का जारी किया हुआ चेक एक दूसरी महिला को दिया था, जिसे बैंक ऑफ बड़ौदा ने मान्य ना करते हुए अस्वीकृत कर दिया था. जिसके बाद महिला ने इस मामले को कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने रखा. मामले की सुनवाई करते जस्टिस गोविंदराज ने फैसला सुनाते हुए महिला का साथ दिया.
चेक नहीं दिया था शिकायतकर्ता कोचेक जारी करने वाली महिला ने कोर्ट में कहा कि उसने ये चेक शिकायतकर्ता को नहीं दिया था. उनका दावा था कि चेक कहीं खो गया था और उसका गलत इस्तेमाल किया गया. उन्होंने ये भी तर्क दिया कि विजया बैंक अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उसका चेक भी मान्य नहीं होना चाहिए.
हाईकोर्ट ने अस्वीकार की दलीलकर्नाटक हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि महिला का विजया बैंक में खाता था और संबंधित चेक उसी खाते से जुड़ा था, इस बात पर विवाद नहीं है. बैंक के विलय के बाद उस खाते की जिम्मेदारी बैंक ऑफ बड़ौदा की हो गई थी.
कोर्ट ने ये भी कहा कि चेक वास्तव में महिला ने जारी किया था या वो खो गया था, जिसका गलत इस्तेमाल हुआ, ये मामला ट्रायल कोर्ट में सबूतों के आधार पर तय किया जाएगा. इसलिए हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैंक कर्मचारियों के लिए वीक में 5 दिन काम की तैयारी, बनी स्पेशल कमेटी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बैंक-कर्मचारियों-के-लिए-वीक-में-5-दिन-काम-की-तैयारी-बनी-स्पेशल-कमेटी</link>
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        <description><![CDATA[ रविवार को हुई IBA और UFBU की देर रात बैठक के बाद बैंकों की हड़ताल को स्थिगित कर दी गई. बैंक कर्मी 5 डे वर्क वीक की डिमांड समेत कई मुद्दों को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल करने वाले थे. अब बैंकों में 5 दिन कामकाज और शनिवार-रविवार की छुट्टी लागू करने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है.
दरअसल इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने इस प्रस्ताव को लागू करने के तरीके पर चर्चा के लिए एक हाईलेवल कमेटी बनाई है. इस कमेटी में बैंक प्रबंधन और बैंक कर्मचारी यूनियनों, दोनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
बातचीत के बाद हुआ फैसलाये फैसला 27 सितंबर को देर रात हुई IBA और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया. कमेटी के अध्यक्ष बैंक ऑफ इंडिया के MD और CEO राजनीश कर्नाटक होंगे. वहीं, पंजाब नेशनल बैंक के MD और CEO अशोक चंद्रा ऑप्शनल अध्यक्ष बनाए गए हैं.
कमेटी में IBA की तरफ से इंडियन बैंक के MD और CEO बिनोद कुमार, बैंक ऑफ इंडिया के MD और CEO राकेश शर्मा और SBI के चीफ जनरल मैनेजर (HR &amp;amp; CDO) जीएस राणा शामिल हैं. तो वहीं, बैंक कर्मचारी यूनियनों की ओर से AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBOC और INBEF के महासचिव कमेटी में शामिल होंगे. BKSM के महासचिव विनोद निकम को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है.
अभी कैसे होता है कामकाज?बैंकों में 5 दिन कामकाज की मांग पिछले कई साल से चल रही है. अगर ये प्रस्ताव लागू होता है तो सभी शनिवार को बैंकों की छुट्टी होगी. फिलहाल बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं, जबकि बाकी शनिवार को काम हर रोज की तरह होता है.
समय बढ़ाया जाएगाइस व्यवस्था को लागू करने के लिए रोजाना बैंकिंग के कामकाज के समय में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी रखा गया था. 31 जनवरी 2023 को IBA ने रोजाना काम के समय में 45 मिनट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था. कर्मचारी यूनियनों ने इससे पहले 30 मिनट का समय बढ़ाने का सुझाव दिया था. दिसंबर 2023 में IBA और UFBU के बीच हुए समझौते में IBA ने सरकार से सभी शनिवार को छुट्टी घोषित करने की सिफारिश करने और जल्द मंजूरी के लिए मामला आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एन चंद्रशेखरन दोबारा नहीं बन पाएंगे Tata Sons के चेयरमैन? टाटा ट्रस्ट की मंजूरी बनेगी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ टाटा ग्रुप के बीच पिछले कई दिनों से काफी बवाल मचा हुआ है. खासतौर से जबसे एन चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाने का फैसला किया गया है, तब से मामला बढ़ता ही जा रहा है. नोएल टाटा नहीं चाहते हैं कि चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाया जाए. लेकिन टाटा ग्रुप के कई और सदस्य उन्हें दोबारा से कार्यभार सौंपना चाहते हैं.
इसी बीच अब खबरें ऐसी भी सामने आ रही हैं कि टाटा ट्रस्ट का यदि मंजूरी नहीं होगी, तो एन चंद्रशेखरन दोबारा से टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन पाएंगे. ऐसा सीनियर एडवोकेट एचपी रनिना ने खुद बताया है.
क्या बोले एचपी रनिन?हाल ही में सीनियर एडवोकेट एचपी रनिना ने इस मामले को लेकर न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने कहा है कि, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है. उन्होंने 29 सितंबर को दिए एक बयान में कहा कि, &#039;सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी इस मामले में फैसला करेंगे. इसके बाद वो टाटा संस के बोर्ड में अपने प्रतिनिधि निदेशकों को बताएंगे कि दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर किस तरह वोट करना है.
नोएल टाटा नहीं करेंगे फैसलारनिना ने इस दौरान ये भी बताया कि, ये फैसला सिर्फ नोएल टाटा का नहीं है. टाटा ट्रस्ट की ओर से बोर्ड में नामित निदेशकों में नोएल टाटा और वेणुगोपाल श्रीनिवासन शामिल हैं. इन्हें ट्रस्ट के निर्देश के अनुसार वोट करना होगा.
दोनों ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की सहमति जरूरीटाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में इस तरह की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट ने नामित निदेशकों की तरफ से अफर्मेटिव वोट को जरूरी बताया गया है. रनिना के मुताबिक, अगर इन नामित निदेशकों में से किसी एक की भी सहमति नहीं होती है, तो चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति आगे नहीं बढ़ सकती.
साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट करीब तीन साल पहले इस व्यवस्था को वैध बता चुका है. कोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के नामित निदेशकों की सकारात्मक सहमति को अनिवार्य करना गैरकानूनी नहीं है.
शेयर होल्डर्स की मंजूरी भी जरूरीबता दें कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए कंपनी के शेयर होल्डर्स की मंजूरी भी जरूरी होगी. ये प्रस्ताव एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयर होल्डर्स के सामने रखा जाएगा. अगर शेयर होल्डर्स प्रस्ताव के खिलाफ वोट करते हैं, तो चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन नियुक्त नहीं किया जा सकता.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फुल कराना है फ्यूल टैंक? पहले जानें आज कितना चल रहा पेट्रोल&amp;डीजल का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फुल-कराना-है-फ्यूल-टैंक-पहले-जानें-आज-कितना-चल-रहा-पेट्रोल-डीजल-का-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ आज देश भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं. बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के 7-दिवसीय शांति प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल देखने को मिला था. ईरान के इस प्रस्ताव का मकसद तनाव को खत्म करने के साथ ही होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना था.&amp;nbsp;
आज कितनी है कीमत?
दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है. कोलकाता में कीमत 113.51 रुपये, मुंबई में 111.21 रुपये और चेन्नई में 1 पैसे की बढ़ोतरी के साथ 107.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है. बेंगलुरु में भी कीमत 111.68 रुपये पर स्थिर है.&amp;nbsp;
अन्य प्रमुख शहरों में, गुड़गांव में पेट्रोल की कीमत अभी भी 102.97 रुपये प्रति लीटर है. नोएडा में पेट्रोल 101.96 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि चंडीगढ़ में कीमत 101.54 रुपये है. देश में भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बदले गए हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच रही है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल और केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर के महीने में खाड़ी देशों के प्रमुख तेल उत्पादकों का कच्चा तेल निर्यात बढ़कर करीब 13 से 17.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जो जेपी मॉर्गन की रिसर्च के मुताबिक युद्ध से पहले के स्तर का लगभग 98% है.
शहरवार चेक करें कीमत



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
111.31 रुपये
97.97 रुपये


जमशेदपुर
106.09 रुपये
101.23 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपये
99.56 रुपये


जयपुर
113.19 रुपये
98.25 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये


कानपुर
101.78 रुपये
95.27 रुपये


भोपाल
115.41 रुपये
100.47 रुपये


मेरठ
101.44 रुपये
94.91 रुपये



आज क्रूड ऑयल की कीमत
आज 30 सितंबर, 2026 को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ही आसपास बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 102.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई है. वहीं, अमेरिकी क्रूड 89.38 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फुल, कराना, है, फ्यूल, टैंक, पहले, जानें, आज, कितना, चल, रहा, पेट्रोल-डीजल, का, रेट</media:keywords>
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        <title>महाराष्ट्र में 122 साल पुराने Cafe का लाइसेंस सस्पेंड, करोड़ों का मिलावटी सामान जब्त</title>
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        <description><![CDATA[ मुंबई का बेहद मशहूर और करीब 122 साल पुराना kyani &amp;amp; CO कैफे इन दिनों में खाद्य सुरक्षा को लेकर चर्चा में है. महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA ने गंदगी को लेकर कैफे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है और कैफे का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है. जांच के दौरान कैफे की रसोई में खाद्य सामग्री रखने वाली जगह पर साफ-सफाई से जुड़ी कई गंभीर कमियां मिलीं.&amp;nbsp;
FDA की टीम ने कैफे का ओचक निरीक्षण किया था. जांच के दौरान अधिकारियों को खाद्य पदार्थ तैयार करने और रखने वाली जगहों पर चूहों की बीट, जिंदा मक्खियां और मरे हुए कॉकरोच देखने को मिले. इसके अलावा परिसर में बिल्लियां भी देखने को मिली. एक फ्रिज के अंदर खून जमा हुआ मिला, जिससे सफाई व्यवस्था पर सवाल उठे.
खुले सीवेज मैनहोल के पास तैयार हो रहा था खाना
जांच के दौरान फूड प्रोसेसिंग एरिया में खुला सीवेज मैनहोल भी पाया गया. कुछ खाद्य सामग्री सीधे फर्श पर रखी हुई थी, वहीं कच्चे आटे को अखबार से ढककर रखा गया था. अधिकारियों को कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था में भी कमी मिली.
FDA के मुताबिक, इस तरह की स्थिति से खाने के दूषित होने और ग्राहकों की सेहत पर असर पड़ने का खतरा काफी बढ़ सकता है, इसलिए विभाग ने इसे गंभीर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ा मामला माना गया.
लाइसेंस तत्काल निलंबित
जांच के बाद FDA ने Kyani &amp;amp; Co.कैफे का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया. कार्रवाई के तहत कैफे को खाद्य पदार्थों की खरीद, तैयारी, स्टोरेज, बिक्री और वितरण रोकने के निर्देश दिए गए हैं. यानी जब तक जरूरी कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक कैफे का कारोबार प्रभावित रहेगा.
महाराष्ट्र में चला था विशेष अभियान
Kyani कैफे पर हुई यह कार्रवाई महाराष्ट्र FDA के 23 से 27 सितंबर तक चलाए गए राज्यव्यापी खाद्य सुरक्षा अभियान का हिस्सा है. इस अभियान के दौरान कई खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई. रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई में 30 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट निलंबित किए गए और बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री भी जब्त की गई.
बता दें कि साल 1904 में शुरू हुआ Kyani &amp;amp; Co.कैफे मुंबई के पुराने ईरानी कैफे में शामिल है. इतने लंबे इतिहास वाले इस कैफे पर हुई FDA की कार्रवाई ने अब इसकी स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>महाराष्ट्र, में, 122, साल, पुराने, Cafe, का, लाइसेंस, सस्पेंड, करोड़ों, का, मिलावटी, सामान, जब्त</media:keywords>
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        <title>UPI पर 15 अक्टूबर से चार्ज, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में 4 हफ्तों बाद क्या होगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-पर-15-अक्टूबर-से-चार्ज-लेकिन-सुप्रीम-कोर्ट-में-4-हफ्तों-बाद-क्या-होगा</link>
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        <description><![CDATA[ यूपीआई से दो हजार रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर 15 अक्तूबर से चार्ज यानी एमडीआर लागू हो जाएगा. इससे पहले इस मामले को लेकर 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने चार्ज लगाने के नियमों पर स्टे लगाने से साफ इनकार कर दिया. इसका मतलब है कि यूपीआई पर चार्ज अपनी तय तारीख 15 अक्तूबर से लागू हो जाएगा.&amp;nbsp;
गौर करने वाली बात यह है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भले ही इस फैसले पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया हो, लेकिन अदालत ने इस मामले को लेकर आरबीआई, एनपीसीआई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है. अब सवाल यह है कि अगर यूपीआई पर 15 अक्तूबर से चार्ज लागू हो जाएगा तो फिर इन 4 हफ्तों का मतलब क्या है?
नोटिस जारी करने का मतलब समझिए
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई को नोटिस जारी करने का सीधा मतलब यह है कि कोर्ट ने इस मुद्दे को आगे की सुनवाई के लायक माना है, लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं दिया है. कोर्ट ने केंद्र और आरबीआई को जो नोटिस थमाया है, उसका कतई ये मतलब नहीं है कि यह कोर्ट सरकार से चार्ज वापस लेने वाले फैसले को वापस लेने के लिए कह रहा हो.&amp;nbsp;
नोटिस का सीधा मतलब यह होता है कि सुप्रीम कोर्ट याचिका दाखिल करने वालों की दलीलों को सुन चुका है और अब वह इस मामले पर केंद्र सरकार यानी वित्त मंत्रालय और आरबीआई का पक्ष जानना चाहता है. ताकि मामले की तह तक जाया जा सके.
याचिकाकर्ता का क्या कहना है?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूपीआई पर एमडीआर लगने के बाद नकद लेनदेन की वापसी को बढ़ावा मिलेगा और यह काले धन के लिए अभिशाप साबित होगा. याचिकाकर्ता का कहना है कि यूपीआई चार्ज पर किसी से कोई चर्चा नहीं की गई है और न इस फैसले को लेकर जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है. इससे छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा, जिसके बाद वह कैश में ट्रांसजेक्शन का रुख करेंगे और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर होगा.
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अभी आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए यूपीआई ट्रांजेक्शन पूरी तरह मुफ्त हैं. पेमेंट कंपनियों और बैंकों का तर्क रहा है कि यूपीआई नेटवर्क और साइबर सुरक्षा को बनाए रखने में भारी खर्च आता है, ऐसे में वह चाहते हैं कि बड़े व्यापारियों से चार्ज लेने की अनुमति दी जाए, ताकि यह मॉडल आर्थिक रूप से टिकाऊ बन सके. उन्होंने बताया कि एमडीआर न तो कर है और न ही सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कोई शुल्क.
क्या लागू होने के बाद वापस हो सकता है MDR का फैसला?
फिलहाल आम लोगों के लिए कुछ भी नहीं बदला है. हालांकि 15 अक्तूबर से यूपीआई पर चार्ज लागू हो जाएगा. तब तक करीब दो हफ्ते बीत चुके होंगे. ऐसे में आरबीआई, एनपीसीआई और सरकार के बास जवाब दाखिल करने के लिए दो और हफ्ते बचेंगे. जब तक केंद्र सरकार और आरबीआई अपना जवाब दाखिल नहीं करते और सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई के बाद कोई अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक चार्ज लागू ही रहेगा. अगले 4 हफ्तों में केंद्र और आरबीआई अपना हलफनामा दाखिल करेंगे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट इस बात पर आखिरी बहस सुनेगा कि यूपीआई पर एमडीआर लगना चाहिए या नहीं.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, पर, अक्टूबर, से, चार्ज, लेकिन, सुप्रीम, कोर्ट, में, हफ्तों, बाद, क्या, होगा</media:keywords>
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        <title>दुबई में सोना खरीदना भारत से कितना सस्ता, वहां कितने का 10 ग्राम गोल्ड?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में इस वक्त सोने की कीमत 4,133 रुपये की गिरावट के साथ 1.48 लाख रुपये के स्तर पर है. आज देश में 24 कैरेट के सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,47,980 रुपये है. दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जहां सोना भारत के मुकाबले कहीं सस्ता मिलता है. इन्हीं में से एक है दुबई.
यहां के एयरपोर्ट में कदम रखने के साथ ही आपको इस बात का एहसास हो जाएगा. यहां एक के बाद एक लाइन से सोने की दुकानें लगी हुई रहती हैं, जहां चेन, चूड़ियां, सिक्के सबकुछ सस्ते रेट पर मिल जाते हैं. सबसे बड़ी बात है यह है कि दुबई में सोना पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है यानी कि इसमें 0% VAT लगता है. साथ ही, शुद्धता की भी 100% गारंटी होती है.&amp;nbsp;
दुबई में सोना खरीदना कितना सस्ता?
आज दुबई में 24 कैरेट सोने की कीमत AED 497.25 प्रति ग्राम चल रही है, जो भारतीय करेंसी के हिसाब से &amp;nbsp;लगभग 13,008 रुपये प्रति ग्राम है (AED 1 = 26.16 रुपये). यानी कि यहां 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 1,30,080 रुपये है. जबकि भारत में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 14,880 प्रति ग्राम है. यानी दोनों देशों के बीच सोने की कीमत में 12.6% का अंतर है. बता दें कि इसमें अभी मेकिंग चार्ज को शामिल नहीं किया गया है. दुबई में सोना भारत के मुकाबले सस्ता होने की वजह से ही भारत के लोग वहां से सोना खरीदकर लाते हैं.
भारत लाते-लाते क्यों हो जाता महंगा?
दुबई से सोना खरीदकर लाना बेशक सस्ता है और वहां से सोना खरीदकर लाने में कोई गैरकानूनी बात भी नहीं है. हालांकि, इसके कुछ नियम है. जब भी आप किसी दूसरे देश से अपने देश लौटते हैं, तो आपको यह जानकारी देनी होती है कि आपने वहां से क्या-क्या खरीदकर लाया है.
यह जानकारी एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग के &#039;रेड चैनल&#039; (Red Channel) काउंटर पर जाकर देना होगा. वहां आपको एक Customs Declaration Form दिया जाएगा, जिसमें आपको दुबई से खरीदे गए सोने का सही वजन और उसकी कीमत लिखनी होगी.
कितना सोना ला सकते हैं?&amp;nbsp;
दुबई से गोल्ड खरीदकर लाने की लिमिट महिला और पुरुषों में अलग-अलग होती है. महिलाओं के लिए दुबई से ड्यूटी फ्री सोने की लिमिट 40 ग्राम (अधिकतम वैल्यू 1,00,000 रुपये तक) और पुरुषों के लिए 20 ग्राम (अधिकतम वैल्यू 50,000 रुपये तक) है. अगर पति-पत्नी साथ सफर कर रहे हैं, तो 60 ग्राम तक सोना बिना किसी टैक्स के बिल्कुल मुफ्त ला सकते हैं. लेकिन अगर सोने की मात्रा तय लिमिट से ज्यादा हुई, तो इसमें प्रति ग्राम के हिसाब से लगभग 15% से 18% तक कस्टम ड्यूटी और टैक्स लगाया जाता है.
यानी कि वहां से आप 13,080 प्रति ग्राम के रेट पर सोना लेकर आए. उस पर करीब 15% कस्टम ड्यूटी (लगभग 1,962 रुपये प्रति ग्राम का टैक्स) लगाई गई. यानी कि अब उस सोने की कुल कीमत आपको 15,042 प्रति ग्राम रुपये पड़ गई, जबकि भारत में सोने का रेट ही अभी करीब 14,623 से 14,956 है. यानी कि सस्ते में लाया गया सोना आपको भारत आते-आते महंगा पड़ ही गया.&amp;nbsp;
यहां भी फंसा है पेंच
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि इंडियन पासपोर्ट रखने वाला पुरुष अपने साथ 20 ग्राम तक सोना दुबई से भारत ला सकता है. बशर्ते, उसकी वैल्यू 50,000 रुपये से ज्यादा न हो. लेकिन चूंकि अभी सोने के दाम काफी बढ़ चुके हैं इसलिए 50,000 रुपये की लिमिट में सिर्फ 3.5 से 4 ग्राम तक ही सोना लिया जा सकता है. 
ऐसे में आज के नियम के हिसाब से एक पुरुष यात्री दुबई से सिर्फ लगभग 3.8 ग्राम सोना या 50,000 तक की लिमिट में जितना आ सके, उतना ही बस बिना टैक्स के ला सकता है. इससे ज्यादा लाने पर उन्हें एयरपोर्ट पर भारी-भरकम कस्टम ड्यूटी देनी होगी. महिलाओं के लिए भी नियम यही है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दुबई, में, सोना, खरीदना, भारत, से, कितना, सस्ता, वहां, कितने, का, ग्राम, गोल्ड</media:keywords>
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        <title>दुर्गा पूजा से पहले दो बोनस... 8वें वेतन आयोग के बीच डाक कर्मियों की बड़ी डिमांड</title>
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        <description><![CDATA[ डाक विभाग में काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने 2025-26 के लिए अपने प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) का भुगतान जल्द करने की मांग की है. डाक कर्मचारी यूनियनों ने सरकार से दुर्गा पूजा से पहले बोनस जारी करने को कहा है. साथ ही, कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत बोनस को कैलकुलेट करने के तरीके में भी बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं.
त्योहारों से पहले मिले बोनस
सात डाक कर्मचारी यूनियनों के संगठन &#039;जॉइंट काउंसिल ऑफ पोस्टल एम्प्लॉइज&#039; (JCPE) ने 26 सितंबर को डाक विभाग के सचिव को पत्र लिखकर मांग की कि पात्र कर्मचारियों को 2025-26 का PLB 17 अक्टूबर तक दे दिया जाए. काउंसिल ने बताया कि इस साल दुर्गा पूजा 17 अक्टूबर से शुरू हो रही है और दशहरा 21 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दीवाली इसके बाद 8 नवंबर 2026 को है. यूनियनों का कहना है कि इन बड़े त्योहारों में कर्मचारियों और उनके परिवारों के कई खर्चे होते हैं. ऐसे में इन्हें समय पर वित्तीय मदद की बेहद जरूरत है. JCPE ने कहना है कि त्योहारों के मौसम में खर्च काफी बढ़ जाते हैं. ऐसे में कर्मचारियों को पहले ही बोनस मिलने की उम्मीद हैं और विभाग से 17 अक्टूबर तक भुगतान की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है.
वेज सीलिंग में भी बदलाव की मांग
जल्द पेमेंट की मांग के साथ-साथ बोनस कैलकुलेट करने के लिए इस्तेमाल होने वाली वेज सीलिंग (वेतन सीमा) को भी बदलने की मांग की जा रही है.
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने &#039;कोड ऑन वेजेज, 2019&#039; के तहत 25 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी किया. इसमें कहा गया कि अगर किसी योग्य कर्मचारी का वेतन 7,000 रुपये प्रति माह से ज्यादा है, तो बोनस की कैलकुलेशन 7,000 या केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन (इनमें से जो भी ज्यादा हो) के आधार पर की जाएगी. यह नोटिफिकेशन 21 नवंबर 2025 से लागू माना गया.
नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ पक्ष ने कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखकर बोनस कैलकुलेशन की सीमा को 7,000 से बढ़ाकर 21,000 करने की मांग की है. नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी योग्य कर्मचारी का वेतन 7,000 रुपये प्रति माह से अधिक है, तो बोनस की गणना 7,000 या केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage)- जो भी अधिक हो-के आधार पर की जानी चाहिए.
चूंकि केंद्र सरकार ने अपनी संशोधित रूपरेखा में न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रति माह संदर्भित किया है, इसलिए NC-JCM ने तर्क दिया है कि बोनस कैलकुलेशन की सीमा (Ceiling Limit) को भी तुरंत 7,000 से बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाए. अगर सरकार की तरफ से NC-JCM की इस डिमांड को मंजूरी मिल जाती है, तो केंद्रीय और डाक कर्मचारियों का बोनस आधार तीन गुना बढ़ जाएगा, जिससे त्योहारी सीजन में उनके हाथ में आने वाली रकम काफी बड़ी होगी.

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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>दुर्गा, पूजा, से, पहले, दो, बोनस..., 8वें, वेतन, आयोग, के, बीच, डाक, कर्मियों, की, बड़ी, डिमांड</media:keywords>
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        <title>देशभर में Red Bull के स्टॉक जब्त, FSSAI के आदेश के खिलाफ कानूनी जंग</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले कई दिनों से FSSAI यानी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया लगातार फूड, बेवरेजेस और उनकी पैकेजिंग को लेकर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है. खाद्य विभाग की टीम जगह- जगह जाकर छापेमारी कर रही है और कंपनियों की बेइमानी को उजागर कर रही है. इसी कड़ी में हाल ही में विभाग ने रेड बुल कंपनी के स्टॉक को भी जब्त कर लिया है.
जिसके बाद कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख अख्तियार कर लिया है. कंपनी ने FSSAI के उस आदेश के खिलाफ ये कदम उठाया है, जिसमें विभाग ने उसे अपनी पैक्जिंग से &#039;एनर्जी ड्रिंक&#039; का डिस्क्रिप्शन हटाने के लिए कहा है.
दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामलादरअसल सोमवार को जस्टिस अमित महाजन ने इस मामले की सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने FSSAI से ये स्पष्टीकरण मांगा कि क्या आदेश जारी करने से पहले रेड बुल को &#039;शो-कॉज नोटिस&#039; जारी किया गया है था और क्या उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था.
इतना ही नहीं बल्कि कोर्ट ने कंपनी का पक्ष सुने बिना तुरंत कार्रवाई करने की जरूरत पर भी सवाल उठाए और FSSAI से इस मामले में निर्देश लेने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी. सोमवार की कार्यवाही के दौरान रेड बुल को कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है.
क्या लिखा है याचिका में?याचिका के अनुसार, रेड बुल 2002 से भारत में अपने प्रोडक्ट्स को एनर्जी ड्रिंक के रूप में बेच रही है. कंपनी का आरोप है कि 30 जून का निर्देश बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का मौका दिए जारी किया गया था. कंपनी ने ये दावा भी किया है कि इसके बाद जुलाई में जारी कम्युनिकेशन के कारण एनफोर्समेंट एक्शन लिया गया, जिसके तहत देश भर में कई जगहों पर उसके प्रोडक्ट्स को ज़ब्त कर लिया गया.
बता दें कि कंपनी ने FSSAI के रुख में बदलाव के आधार पर सवाल उठाए हैं. उसने मार्च 2024 की एक एडवाइजरी का हवाला देते हुए कहा है कि कैफीन वाले ड्रिंक्स के लिए लागू फूड कैटेगरी में आने वाले प्रोडक्ट्स के लिए एनर्जी ड्रिंक शब्द के इस्तेमाल की मंजूरी को स्पष्ट किया गया था.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>इंश्योरेंस कमीशन में  होगी 50% तक कटौती, अब ग्राहक को सस्ता मिलेगा बीमा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इंश्योरेंस-कमीशन-में-होगी-50-तक-कटौती-अब-ग्राहक-को-सस्ता-मिलेगा-बीमा</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप लाइफ, हेल्थ या जनरल इंश्योरेंस खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. बीमा सेक्टर में कमीशन और कंपनियों के खर्च को लेकर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने नए बदलावों का प्रस्ताव पेश किए हैं. इस प्रस्ताव का खास मकसद बीमा कंपनियों और एजेंटों व डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले कमीशन को कंट्रोल करना और पॉलिसी की बिक्री को ज्यादा पारदर्शी बनाना है. &amp;nbsp;
दरअसल, IRDAI ने 23 सितंबर 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में बीमा कंपनियों के Expenses of Management (EoM) से जुड़े नियमों को धीरे-धीरे कम करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग बीमा उत्पादों और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन की अधिकतम सीमा तय करने की भी बात कही है.
कमीशन को लेकर क्या है नया प्रस्ताव?
इस नए प्रस्ताव के मुताबिक, डिस्ट्रीब्यूटर को दिया गया पेमेंट चाहे कमीशन, इनाम, इंसेंटिव या किसी अन्य नाम से हो, उसे कमीशन में शामिल किया जाएगा. सामान्य बीमा कंपनियों के लिए मौजूदा 30% की सीमा को दो साल में घटकर 25% तक करने का प्रस्ताव है. पांच साल की अवधि में यह सीमा 20% तक लाई जा सकती है.&amp;nbsp;
IRDAI ने सिर्फ कमीशन ही नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च को भी कम करने का प्रस्ताव दिया है. जीवन बीमा कंपनियों के लिए EoM सीमा को दो साल में 15% और पांच साल में 12.5% तक लाने का प्रस्ताव है.
कमीशन में हर तरह का भुगतान होगा शामिल
नए प्रस्ताव में सिर्फ सीधे दिए जाने वाले कमीशन को ही नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाले दूसरे फायदे भी कमीशन में शामिल करने की बात कही गई है.

नकद भुगतान
गिफ्ट और इंसेंटिव
ब्रांड या मार्केटिंग से जुड़ा सपोर्ट
डिस्ट्रीब्यूटर को दिए जाने वाले अन्य वित्तीय लाभ

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर के करच और कमीशन पर ज्यादा नियंत्रण हो सकता है. IRDAI के मुताबिक EoM में कमी से बीमा की कुल लागत कम करने में मदद मिल सकती है. इसका असर आगे चलकर पॉलिसी की कीमतों और ग्राहकों को मिलने वाले लाभ पर पड़ने की उम्मीद है. हालांकि, किसी पॉलिसी का प्रीमियम वास्तव में कितना कम होगा, यह अभी तय नहीं है.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>इंश्योरेंस, कमीशन, में, होगी, 50, तक, कटौती, अब, ग्राहक, को, सस्ता, मिलेगा, बीमा</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर ही तय नहीं करेगा बेसिक सैलरी, जानें और क्या&amp;क्या है जरूरी</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी ही बेसब्री से है. जिसकी बैठकें अलग- अलग राज्यों में लगातार चल रही हैं. अक्टूबर के महीने में बेंगलुरु और मुंबई में अलग- अलग बैठकें होने जा रही हैं. जिनमें फिटमेंट फैक्टर, DA, HRA आदि को लेकर चर्चा हो सकती है.&amp;nbsp;
इसी बीच एक सवाल ये भी है कि क्या बेसिक सैलरी को तय करने के लिए केवल फिटमेंट फैक्टर ही काफी है या कुछ और भी? तो आइये जानते हैं कि बेसिक सैलरी को तय करने के लिए और क्या- क्या चाहिए.
सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं है काफीदरअसल 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है. फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को नई बेसिक पे में बदलने के लिए किया जाता है. हालांकि, नई बेसिक सैलरी तय करने में सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही अकेला आधार नहीं होगा. बल्कि इस पर कई और भी चीजों का असर पड़ेगा. जैसे:

मौजूदा बेसिक सैलरी
महंगाई भत्ता (DA)
महंगाई और रहने का खर्च
पे मैट्रिक्स और वेतन स्तर
भत्ते और दूसरे लाभ
सरकार की वित्तीय क्षमता

अभी तय नहीं हुआ फिटमेंट फैक्टरबता दें कि फिलहाल 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है. कर्मचारी संगठनों की ओर से 3.833 और 4.0 जैसे अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है, लेकिन ये मांगें हैं, सरकार या आयोग का अंतिम फैसला नहीं.
इसलिए अभी 2.75, 3.0, 3.5 या 3.833 जैसे किसी भी आंकड़े के आधार पर मिलने वाली सैलरी को पक्की नई बेसिक सैलरी नहीं माना जा सकता. अंतिम रकम 8वें वेतन आयोग की सिफारिश और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगी.
अक्टूबर में होनी हैं दो बैठकेंबता दें कि 8वें वेतन आयोग की अगली बैठक 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरू में होने वाली है. तो वहीं इसके बाद 22 और 23 अक्टूबर को ये बैठक मुंबई में होने वाली है. जिसके लिए अंतिम आवेदन 10 अक्टूबर तक लिया जाएगा. अब देखना होगा कि इन बैठकों में क्या बातें होती हैं और क्या फैसले किए जाते हैं.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>शेयर बाजार में लिस्ट नहीं होगी टाटा संस? ट्रस्ट ने बनाया प्लान, होगा दो कंपनियों का मर्जर</title>
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        <description><![CDATA[ टाटा ग्रुप के बीच पिछले कई दिनों से काफी उठा-पटक चल रही है. जिसकी वजह से कंपनी काफी सुर्खियों में भी बनी हुई है. इसी बीच अब हाल ही में टाटा संस ने नया प्लान बनाया है जिससे कि कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग ना हो सके.&amp;nbsp;
दरअसल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के NBFC और प्रमुख निवेश कंपनी (CIC) वाले नियमों के दायरे से बाहर लाने की तैयारी हो रही है. इसके लिए टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है. ट्रस्ट ने टाटा संस के बोर्ड से कहा है कि वो इस प्रस्ताव पर विचार करे और जरूरी प्रक्रिया शुरू करे.
दो कंपनियों का हो मर्जरइस प्रस्ताव के तहत टाटा ग्रुप की दो कंपनियों टाटा इलेक्रिट्रॉनिक्स सिस्टम सोल्यूशंस (TESS) और टाटा कसल्टिंग इजीनियर्स (TCE) का टाटा संस में विलय किया जाएगा. इसका मकसद टाटा संस के कारोबार और उसका फाइनेंशियल स्ट्रक्चर में बदलाव करना है, ताकि विलय के बाद कंपनी NBFC या CIC के लिए लागू नियामकीय शर्तों के दायरे में न आए. हालांकि, विलय से पहले RBI से मंजूरी लेना जरूरी होगा.
टाटा संस को प्राइवेट बनाए रखना है मकसदटाटा ट्रस्ट्स लंबे समय से टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के पक्ष में नहीं है. प्रस्तावित पुनर्गठन का एक अहम उद्देश्य टाटा संस को नॉन लिस्टिकल यानी अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी बनाए रखना भी है. टाटा संस में पहले से ही दो तरह की चीजें हैं, एक तरफ ग्रुप की कंपनियों में निवेश और दूसरी तरफ कारोबार. प्रस्तावित विलय के बाद ये पुराना स्ट्रक्चर फिर से मजबूत होगा.
RBI के नियम क्यों बने मुद्दा?साल 2022 में RBI ने टाटा संस को &#039;अपर लेयर NBFC&#039; के रूप में डिफरेंशिएट किया था. इस वजह से कंपनी के लिए कुछ नियामकीय नियम लागू हो गए और उसके शेयर बाजार में लिस्ट होने का मुद्दा जरूरी बन गया. टाटा संस ने इस क्लासिफिकेशन से बाहर निकलने का अनुरोध किया था, लेकिन RBI ने इसे सितंबर में खारिज कर दिया.
अब टाटा ट्रस्ट का प्रस्ताव है कि कंपनी का स्ट्रक्चर ही इस तरह बदला जाए कि वो NBFC या CIC की परिभाषा और जरूरी शर्तों के दायरे में न आए.
ट्रस्ट और टाटा संस बोर्ड में मतभेदबता दें कि टाटा संस की लिस्टिंग और कंपनी के मैनेजमेंट को लेकर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बोर्ड के बीच मतभेद चल रह हैं. नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. जुलाई 2025 में दोनों प्रमुख टाटा ट्रस्ट ने कंपनी को नॉन लिस्टिकल प्राइवेट कंपनी बनाए रखने की कोशिश जारी रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था.
वहीं, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर भी विवाद हुआ. उन्होंने अगस्त में कहा था कि वो फरवरी 2027 के बाद एक और कार्यकाल के लिए दावा नहीं करेंगे. बावजूद इसके 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने उन्हें पांच साल का एक और कार्यकाल देने का फैसला किया. नोएल टाटा ने इसका विरोध किया था. ट्रस्ट ने बाद में इसे कंपनी के नियमों के अनुरूप नहीं बताया.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कितनी है कीमत? 22 और 18 कैरेट का भी चेक करें रेट</title>
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        <description><![CDATA[ आज हफ्ते के पहले दिन देश में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,470 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि चांदी की कीमत 2,35,070 रुपये प्रति किलोग्राम है. वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत आज 1,38,848 रुपये प्रति 10 ग्राम है.
पिछले महीने 24 कैरेट सोने की कीमतों में लगभग 3.5% की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि पिछले साल इसमें करीब 32% का इजाफा हुआ था. पिछले हफ्ते शुक्रवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी. जबकि इस दौरान चांदी की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई थी. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 1,50,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी.
आज सोने की कीमत

आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 15,147 रुपये, प्रति 10 ग्राम 151,470 रुपये और प्रति 100 ग्राम 1,514,700 रुपये है.&amp;nbsp;
आज 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 13,885 रुपये, प्रति 10 ग्राम 138,848 रुपये और प्रति 100 ग्राम 1,388,475 रुपये है.&amp;nbsp;
आज 18 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 11,360 रुपये, प्रति 10 ग्राम 113,603 रुपये और प्रति 100 ग्राम 1,136,025 रुपये है.&amp;nbsp;

शहरवार कितनी है कीमत?

मुंबई- 1,51,200 प्रति 10 ग्राम
दिल्ली- 1,50,940 प्रति 10 ग्राम
चेन्नई- 1,51,640 प्रति 10 ग्राम
हैदराबाद- 1,51,440 प्रति 10 ग्राम
कोलकाता- 1,51,000 प्रति 10 ग्राम
बेंगलुरु- 1,51,320 प्रति 10 ग्राम

इस हफ्ते कैसा रहेगा कारोबार?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हफ्ते सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है. उनके मुताबिक, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिलेगा.
2 अक्टूबर (शुक्रवार) को महात्मा गांधी की जयंती के चलते छोटा कारोबारी सप्ताह होने के बीच बाजार की नजर अमेरिका के उपभोक्ता विश्वास, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर रहेगी. इसके अलावा, यूरोजोन की मुद्रास्फीति, विनिर्माण पीएमआई, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयान और अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी बाजार को दिशा देंगे.
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?
एलकेपी सिक्योरिटीज के जिंस एवं मुद्रा शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि बाजार की नजर अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़ों पर रहेगी, जो अक्टूबर में फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले की उम्मीदों के लिए महत्वपूर्ण होंगे.&amp;nbsp;
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा शोध) प्रणव मेर ने कहा कि सोने पर दबाव केवल मुद्रा बाजार से नहीं है. अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जबकि 30 साल की यील्ड 2004 के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है. ऊंची दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड से आम तौर पर सोने और चांदी जैसे निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल का बाजार भी महत्वपूर्ण कारक रहेगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली में दिवाली पर शराब और बीयर होगी महंगी, बढ़ सकती है एक्साइज ड्यूटी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-में-दिवाली-पर-शराब-और-बीयर-होगी-महंगी-बढ़-सकती-हैएक्साइज-ड्यूटी</link>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में जाम छलकाने वालों के लिए बुरी खबर है. बताया जा रहा है कि दीवाली से पहले राट्रीय राजधानी में शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं. &#039;द इंडियन एक्सप्रेस&#039; की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार अपनी नई आबकारी नीति के तहत रेवेन्यू बढ़ाने के लिए आबकारी शुल्क (excise duty) और रिटेल मार्जिन बढ़ाने की योजना बना रही है. अगर इस नीति को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो अक्टूबर के महीने में यानी कि पीक फेस्टिव सीजन से ठीक पहले दिल्ली में शराब के शौकीनों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है.&amp;nbsp;
&#039;द इंडियन एक्सप्रेस&#039; की रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है, &quot;अगर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जाती है, तो शराब की कीमतें भी बढ़ेंगी.&quot; एक सीनियर अधिकारी ने &#039;द इंडियन एक्सप्रेस&#039; को बताया, &quot;नई एक्साइज पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट तैयार है.&quot; रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते दिल्ली के एक्साइज कमिश्नर रवि झा का तबादला अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया. उनकी जगह किसी और के आने के बाद ड्राफ्ट प्रपोजल को फाइनल अप्रूवल के लिए दिल्ली कैबिनेट और उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के पास भेजा जाएगा.
लाइसेंस फीस में भी 10% का इजाफा
सरकार ने मौजूदा आबकारी नीति के तहत &#039;होटल, क्लब और रेस्टोरेंट&#039; (HCR) कैटेगरी के शराब लाइसेंसों को कारोबारी साल 2026-27 के अंत तक रिन्यू करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही लाइसेंस फीस में 10% तक की बढ़ोतरी का फैसला भी सुनाया गया है. वेंडर्स और रेस्टोरेंट मालिक इस बढ़ी हुई फीस का बोझ अंततः ग्राहकों पर ही डालेंगे. हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों की संख्या में कमी आने की भी आशंका है.
बंपर डिमांड का मिलेगा फायदा
दिल्ली में हर साल दीवाली और न्यू ईयर के जश्न के दौरान शराब की डिमांड काफी बढ़ जाती है. पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार, दिवाली के महज 15 दिनों में दिल्ली सरकार ने 600 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू कमाया था. इसी हाई डिमांड का फायदा उठाते हुए सरकार रेवेन्यू जुटाने के अपने टारगेट को पूरा करना चाहती है. चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने शराब से लगभग 7,200 करोड़ रुपये का टैक्स जुटाने का लक्ष्य रखा है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>शेयर बाजार में हाहाकार! खुलते ही 700 अंक से अधिक लुढ़का सेंसेक्स</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखी जा रही है. बाजार खुलने के साथ ही बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 700 से अधिक अंक लुढ़ककर 73172 पर आ गया.
वहीं, एनएसई का निफ्टी 219&amp;nbsp; अंकों की गिरावट के साथ 22991 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप चंद मिनटों में 4,81,88,998.45 से घटकर 4,77,59,117.49 रुपये पर आ गया.&amp;nbsp;
बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस सात-दिवसीय समझौते को ठुकरा दिए जाने के चलते आज कच्चे तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है.
आज अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.5% से 2% की बढ़त के साथ 105.64 से 106.20 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गया है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में भी 1.1% से अधिक की मजबूती देखी जा रही है और यह 93.40 से 93.55 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है.
ईरान ने अपने इस प्रस्ताव में शर्त रखी थी कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकाबंदी हटा दें, तो इसके बदले वह महत्वपूर्ण शिपिंग रूट होर्मुज (Strait of Hormuz) को कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल देगा. हालांकि, ट्रंप ने इसे मंजूरी नहीं दी है. ट्रंप के इस फैसले के साथ ही सप्लाई में रुकावट आने और भविष्य में तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका और बढ़ गई हैं. गिरावट की दूसरी वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी ब्याज दरों का भी दबाव है.&amp;nbsp;
चंद मिनट में डूबे 4 लाख करोड़
आज कारोबार के दौरान &amp;nbsp;सबसे ज्यादा बिकवाली बैंकिंग, FMCG और रियल्टी शेयरों में देखी जा रही है. टॉप लूजर में HDFC बैंक, बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक शामिल रहे. यह गिरावट इतनी बड़ी है कि 16 &amp;nbsp;में से 14 सेक्टर्स लाल निशान में कारोबार करे नजर आ रहे हैं. साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.2% तक नीचे आ गए हैं.
इसके चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों के टोटल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Mcap) को चंद मिनटों में ही करीब 4,29,881 करोड़ (लगभग 4.3 लाख करोड़) का नुकसान पहुंचा.आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाजार खुलने के कुछ ही समय भीतर मार्केट कैप 4,81,88,998.45 करोड़ से गिरकर 4,77,59,117.49 करोड़ के लेवल पर आ गया.

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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>15 अक्टूबर से यूपी में खुली मिठाइयों पर भी लिखनी होगी एक्सपायरी डेट, सरकार का बड़ा फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/15-अक्टूबर-से-यूपी-में-खुली-मिठाइयों-पर-भी-लिखनी-होगी-एक्सपायरी-डेट-सरकार-का-बड़ा-फैसला</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/15-अक्टूबर-से-यूपी-में-खुली-मिठाइयों-पर-भी-लिखनी-होगी-एक्सपायरी-डेट-सरकार-का-बड़ा-फैसला</guid>
        <description><![CDATA[ शादी और त्योहार के समय मिठाइयों की दुकान पर भीड़ लग जाती है. ऐसे में जब कोई व्यक्ति मिठाई खरीदने जाता है तो दुकान पर खुली हुई मिठाई में से कोई मिठाई पसंद करके खरीद तो लेता है, लेकिन उस मिठाई की एक्सपायरी डेट के बारे में नहीं जान पाता कि आखिर मिठाई कितनी पुरानी है, इसे कब बनाया गया था और इस मिठाई को कब तक खाना सही रहेगा? इसी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने अहम कदम उठाया है.
दरअसल, अगर अब आप उत्तर प्रदेश में खुली मिठाई खरीदते हैं तो अब आपको उस मिठाई की एक्सपायरी डेट के बारे में जानकारी मिल सकेगी. यानी अब कोई ग्राहक मिठाई की एक्सपायरी देखकर अपने पसंद की मिठाई खरीद सकेंगे.&amp;nbsp;
मिठाई को लेकर नया नियम
बता दें कि उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने दुकानों में खुली मिठाइयों को लेकर एक अहम नियम लागू करने का फैसला किया है. नए नियम के तहत अब मिठाई की दुकानों पर खुली मिठाइयों की एक्सपायरी डेट से जुड़ी जानकारी लिखी जाएगी. यानी मिठाई कितनी पुरानी है और इसे कितने समय तक खाया जा सकता है, अब इसकी जानकारी ग्राहकों को देनी होगी.
त्योहारों के दौरान लिया फैसला
अहम बात तो ये है कि अक्टूबर और नवंबर के दौरान दुर्गा पूजा से लेकर दीवाली, छठ तक जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं और इस दौरान बड़ी मात्रा में लोग मिठाई खरीदते हैं. ऐसे में खुली मिठाइयों पर उसकी यूज-बाय या एक्सपायरी डेट लिखी होगी तो ग्राहकों के लिए अच्छा रहेगा.&amp;nbsp;
अक्टूबर से लागू होगा नया नियम
जानकारी के मुताबिक, खुली मिठाइयों की एक्सपायरी डेट की जानकारी 15 अक्टूबर से लिखनी होगी. पहले खुली मिठाई खरीदने पर ग्राहकों को उसकी एक्सपायरी डेट के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी, लेकिन अब नए नियमों के बाद मिठाई बनाने वाली यूनिट्स को साफ तौर पर खुली मिठाई की एक्सपायरी डेट लिखनी होगी, ताकि उसकी जानकारी ग्राहकों को रहे कि जो मिठाई वे खरीद रहे हैं, उसे कितने समय तक खाया जा सकता है.
दिल्ली में दिवाली पर शराब और बीयर होगी महंगी, बढ़ सकती है&amp;nbsp;एक्साइज ड्यूटी
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दीवाली से पहले महंगाई का झटका! 8% तक बढ़ेंगे एसी&amp; टीवी के दाम</title>
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        <description><![CDATA[ इस बार नवंबर के महीने में दीपावली मनाई जाएगी. इस त्यौहार पर लोग अपने घर का रिनोवेशन करते हैं. लिपाई- पुताई करते हैं, नए सोफा, टीवी, फ्रिज, एसी आदि खरीदते हैं. तो वहीं कई लोग तो पूरे साल इसी चीज का इंतजार करते हैं कि वो दीवाली पर घर की जरूरत का सामान खरीदेंगे. लेकिन इस बार यदि आपने ऐसा सोचा है तो आपका दीपावली का बजट हिल सकता है.
क्योंकि दीवाली से पहले घर के लिए एसी, LED TV, वॉशिंग मशीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने वालों को कंपनियों ने झटका दिया है. कंपनियां 1 अक्टूबर से कई इलेक्ट्रॉनिक और होम अप्लायंस की कीमतों में 5% से 8% तक बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं.
इन कंपनियों ने किया कीमत बढ़ाने का फैसलाहोम अप्लायंस कंनियां जैसे ब्लू स्टार, गोदरेज अप्लायंसेज, हायर, डैकिन और सुपर प्लास्ट्रोनिक्स ने अलग-अलग प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है. कुछ कंपनियों ने अलग-अलग कैटेगरी में 4% से 10% तक कीमतें बढ़ाई हैं. वहीं पैनासोनिक अभी स्थिति पर नजर रख रही है. रिपोर्ट के मुताबिक LG और बॉश होम कंफर्ट जो हिताची ब्रांड के AC बनाती है, ने भी AC की कीमतों में करीब 5% की बढ़ोतरी की है.
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?अपने इस फैसले को लेकर इन कंपनियों का कहना है कि कॉपर, स्टील, एल्युमिनियम और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा माल ढुलाई का खर्च भी पहले की अपेक्षा काफी बढा गया है. तो वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी लागत पर पड़ा है. जिसके कारण कंपनियों न ये फैसला किया है.
2026 में तीसरी बार बढ़ेंगे दामइसी साल में यानी 2026 में अब तक इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों में पहले ही दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है, अब कंपनियां तीसरी बार दाम बढ़ाने जा रही हैं. कंपनियां लंबे समय से बढ़ते प्रोडक्शन कॉस्ट से परेशान हैं. AC की कीमतों में करीब 5% से 8% तक बढ़ोतरी की तैयारी है. वहीं कुछ कंपनियां वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED टीवी के दाम 3% से 4% तक बढ़ा सकती हैं.&amp;nbsp;
पुरानी कीमत में मिल सकता है सामानकीमत बढ़ने के बावजूद दीवाली के दौरान ग्राहकों को कुछ समय तक पुराने दाम पर सामान मिल सकता है. गोदरेज एंटरप्राइजेस ग्रुप के मुताबिक डीलरों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने अगस्त और सितंबर में पुरानी कीमतों पर काफी सामान पहले ही खरीदकर स्टॉक कर लिया है. ये पुराना स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक चल सकता है.
जिससे साफ है कि दीवाली के आसपास कुछ दुकानों पर पुराने स्टॉक का सामान पुरानी कीमत पर मिल सकता है. लेकिन दीवाली के बाद नई कीमतें ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेंगी.
ये भी पढ़ें: कल से 3 दिन की बैंक हड़ताल, क्या UPI भी होगा बंद? जानें ATM खुले रहेंगे कि नहीं ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>शेयर खरीदने पर भी लगेगा UPI चार्ज, ब्रोकर देंगे या ग्राहक?</title>
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        <description><![CDATA[ UPI पर MDR चार्जेस लागू होने जा रहे हैं, अब ये चार्जेस केवल व्यापारियों तक नहीं बल्कि शेयर बाजार तक भी पहुंच गए हैं. इसको लेकर ऐसी खबरें सामने आईं कि NSE और सरकार के बीच बातचीत चल रही है. जिसके बारे में हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के MD और CEO आशीष कुमार चौहान ने बात की है.
उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स के साथ बातचीत में बताया है कि, UPI के नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर NSE की सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने ये साफ कर दिया है कि ये मामला पूरी तरह से स्टॉक ब्रोकर और उनके ग्राहकों के बीच का है. दोनों को मिलकर तय करना होगा कि नए शुल्क का असर कैसे संभाला जाए.
15 अक्टूबर से लागू होगा MDR15 अक्टूबर 2026 से शेयर बाजार और दूसरे कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट पर 0.02% MDR लागू होगा. इसमें शेयर, सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर से जुड़े पेमेंट शामिल हैं. हालांकि इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये पर ट्रांजैक्शन रखी गई है. यानी बड़ी रकम के पेमेंट पर भी एक ट्रांजैक्शन के लिए 300 रुपये से ज्यादा MDR नहीं लगेगा.
ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगाMDR का भुगतान सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाना है. ये मर्चेंट यानी पेमेंट लेने वाले पक्ष की लागत है. लेकिन सवाल ये है कि इस अतिरिक्त खर्च को आखिर ब्रोकर या दूसरी कंपनियां खुद उठाएंगी या भविष्य में किसी तरह ग्राहकों पर इसका असर पड़ेगा.
ब्रोकरों के सामने है समस्यामान लीजिए किसी ग्राहक ने UPI से अपने ब्रोकर के अकाउंट में पैसे जमा किए, लेकिन बाद में उसने उन पैसों से कोई शेयर नहीं खरीदा. ऐसी स्थिति में भी ब्रोकर को MDR देना पड़ सकता है. इसी वजह से ये सवाल उठ रहा है कि ऐसे मामलों में एक्स्ट्रा खर्च कौन उठाएगा. NSE के CEO आशीष चौहान के मुताबिक, इसका समाधान ब्रोकर और ग्राहक को मिलकर निकालना होगा. उन्होंने कहा कि अभी ये देखना होगा कि ब्रोकर और ग्राहक नए शुल्क के साथ कैसा रिएक्शन देते हैं.
ये भी पढ़ें: UPI-MDR चार्ज के खिलाफ मोबाइल फोन रिटेलर्स, 2 अक्टूबर को मनाएंगे No UPI Day ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPI&amp;MDR चार्ज के खिलाफ मोबाइल फोन रिटेलर्स, 2 अक्टूबर को मनाएंगे No UPI Day</title>
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        <description><![CDATA[ 15 सितंबर को सरकार ने घोषणा की है कि अब से यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत का MDR चार्जेस लगेगा. जिसका विरोध तभी से ही दुकानदार और व्यापारी संगठन व्यापक रूप से कर रहे हैं. अब हाल ही में देशभर के मोबाइल फोन रिटेलर्स ने घोषणा कर दी है कि वो 2 अक्टूबर को इसके खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन करेगें.
इसके तहत वो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के मौके पर No UPI Day मनाने वाले हैं. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने इस विरोध का आह्वान किया है.
दुकानदार क्या करेंगे?दरअसल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मोबाइल दुकानदार UPI से पेमेंट लेना बंद कर सकते हैं. इसके अलावा दुकानों पर लगे UPI QR कोड को काले कपड़े से ढककर सांकेतिक विरोध किया जाएगा. दुकानदारों का कहना है कि उनका विरोध UPI या डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं है, बल्कि नए शुल्क के खिलाफ है.
AIMRA की क्या मांग है?AIMRA का कहना है कि अगर देश में डिजिटल पेमेंट और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना है, तो UPI को दुकानदारों के लिए Zero MDR यानी बिना किसी शुल्क के जारी रखना चाहिए. एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी इस शुल्क पर दोबारा विचार करने और छोटे व मध्यम मोबाइल दुकानदारों को राहत देने की मांग की है.
ये मोबाइल रिटेलर्स की चिंताAIMRA का कहना है कि मोबाइल फोन खरीदने के लिए होने वाले ज्यादातर पेमेंट 2,000 रुपये से ज्यादा के होते हैं. ऐसे में 0.4% शुल्क का सीधा असर दुकानदारों की कमाई पर पड़ सकता है. एसोसिएशन के मुताबिक, अगर कोई छोटा दुकानदार हर महीने UPI के जरिए 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक का कारोबार करता है, तो उसे करीब 2,000 रुपये से 12,000 रुपये हर महीने एक्स्ट्रा खर्च उठाना पड़ सकता है.
नए UPI-MDR चार्जेस के बारे मेंबता दें कि सरकार की घोषणा के मुताबिक नए UPI-MDR चार्जेस 15 अक्टूबर से लागू होने वाले हैं. इसी दिन से दुकानदारों को जब भी कोई ग्राहक 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करेगा तो उस पर 0.4% MDR लागू होगा. हालांकि पर्सन टू पर्सन यानी P2P पेमेंट पर यह शुल्क नहीं लगेगा. 2,000 तक के छोटे UPI पेमेंट भी इस शुल्क से बाहर रखे गए हैं.
ये भी पढ़ें: दीवाली से पहले महंगाई का झटका! 8% तक बढ़ेंगे एसी- टीवी के दाम ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: अक्टूबर की बैठकों का शिड्यूल हुआ तय, फिटमेंट फैक्टर पर हो सकती है चर्चा</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन भोगियों को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार है. जिसकी बैठकों का दौर लगातार कई महीनों से चल रहा है. कर्मचारियों और पेंशनर्स की नडर अब आयोग की अगली पर बैठक पर है. जो मुंबई और बेंगलुरु में होने जा रही है. इस मीटिंग का शिड्यूल भी तय कर लिया गया है.
ये दोनों बैठकें इन कर्मचारियों के लिए बेहद अहम हैं. क्योंकि हो सकता है कि इन दोनों में ही उनके फिटमेंट फैक्टर और बेसिक सैलरी को तय किया जाए.
क्या हैं मुंबई- बेंगलुरु की बैठक का शिड्यूल?आयोग ने अक्टूबर 2026 में होने वाली मीटिंग का शिड्यूल हाल ही में बताया है. जिसके तहत सबसे पहले बेंगलुरु में बैठ होने वाली है. इसके लिए आयोग ने 7 और 8 अक्टूबर की तारीख तय की है. इस मीटिंग के लिए एपॉइंटमेंट रिक्वेस्ट भेजने की आखिर तारीख 18 सितंबर 2026 रखी गई थी. हालांकि ये तारीख अब निकल चुकी है. ऐसे में अब कर्मचारियों को बैठक का बेसब्री से इंतजार है.
तो वहीं इसके बाद आयोग मुंबई में जाकर बैठक करने वाला है. इसके लिए आयोग की तरफ से 22 और 23 अक्टूबर की तारीख तय की गई है. मुंबई में होने वाली बैठक में स्टेकहोल्डर मीटिंग्स करेगा, जिसमें योग्य कर्मचारी यूनियन, प्रतिनिधि संगठन, पेंशनर एसोसिएशन, फेडरेशन और अन्य संबंधित संगठन शामिल होंगे. जिसके लिए 10 अक्टूबर 2026 आवेदन देने के लिए अंतिम तारीख है.
बैठक में किस बारे में हो सकती है चर्चा?बता दें कि इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संगठनों की मांगें सुनी जाएंगी. इसी दैरान उन पर विचार भी किया जाएगा. हो सकता है कि इस दौरान ही फिटमेंट फैक्टर और बेसिक सैलरी को लेकर चर्चा हो, लेकिन इसकी पुष्टि करना अभी जल्दबाजी हो जाएगा. क्योंकि आयोग की अलग- अलग राज्यों में हो रही बैठकें अभी कंसल्टेशन प्रॉसेस का हिस्सा हैं. इन बैठकों के खत्म होने के बाद ही बाकी सबकुछ तय किया जाएगा, मांगों पर विचार किया जाएगा इसके बाद ही कोई फैसला सुनाया जाएगा.
ये भी पढ़ें: शेयर खरीदने पर भी लगेगा UPI चार्ज, ब्रोकर देंगे या ग्राहक? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सभी सरकारी बैंकों ने हटाया ATM चार्ज, हड़ताल से पहले बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर में 28 से 30 सितंबर तक सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक तीन दिवसीय हड़ताल पर रहने वाले हैं. इससे पहले सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को थोड़ी राहत देने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. हड़ताल के दौरान ग्राहकों को ATM से पैसे निकालने में सरकारी बैंकों ने राहत देने का फैसला किया है. अब इन तीन दिनों के बीच पैसा निकालने पर ये बैंक कस्टमर से कोई चार्ज नहीं लेंगे.
दरअसल इस फैसले के मुताबिक हड़ताल के दौरान सरकारी बैंकों ने मुफ्त ATM ट्रांजैक्शन की तय लिमिट से ज्यादा कैश निकालने पर लगने वाला एक्स्ट्रा शुल्क माफ करने का फैसला किया है.
इन बैंकों ने की घोषणाइस फैसले की घोषणा सरकारी बैंक जैसे SBI, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक समेत कई बैंकों ने की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक पेज से पोस्ट कर ये सूचना ग्राहकों के साथ शेयर की है. इस फैसले का मतलब है कि हड़ताल के दौरान ग्राहक अपने बैंक के ATM के अलावा दूसरे बैंकों के ATM से भी पैसे निकाल सकेंगे, और तय मुफ्त सीमा से ज्यादा बार पैसे निकालने पर अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा.

Banking doesn&amp;rsquo;t stop. Your needs don&amp;rsquo;t have to wait.Even during the proposed strike period, SBI continues to keep essential banking services accessible through ATMs, YONO, Internet Banking, Mobile Banking, WhatsApp Banking and 24&amp;times;7 Contact Centre services.For Seamless&amp;hellip; pic.twitter.com/P1FTsjtSws
&amp;mdash; State Bank of India (@TheOfficialSBI) September 24, 2026



क्या है कैश निकालने का सामान्य नियम?RBI के नियमों के अनुसार, आमतौर पर ग्राहक अपने बैंक के ATM से हर महीने में 5 बार तक मुफ्त पैसे निकाल सकते हैं. बड़े शहरों में दूसरे बैंक के ATM से 3 बार, जबकि अन्य जगहों पर 5 बार तक मुफ्त कैश निकाले की सुविधा होती है. इस सीमा से ज्यादा बार ATM इस्तेमाल करने पर बैंक शुल्क ले सकता है. लेकिन 28 से 30 सितंबर की हड़ताल के दौरान इस अतिरिक्त शुल्क को अस्थायी रूप से माफ किया गया है.
क्यों हो रही हड़ताल?बता दें कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले बैंक कर्मचारी 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में हफ्ते में सिर्फ पांच दिन बैंक खोलने की मांग शामिल है. करीब 90 प्रतिशत बैंक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन इस हड़ताल में शामिल हैं. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी इसमें शामिल होंगे.
ये भी पढ़ें: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, जुलाई के DA बढ़ोतरी पर जल्द फैसले की उठी मांग ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बॉस बनकर आया AI का फोन, बैंक चेयरमैन ने ट्रांसफर कर दिए 1034 करोड़</title>
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        <description><![CDATA[ AI ने जहां एक तरफ लोगों के काम को आसान कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ इसने ठगों के इरादों को भी बुलंद कर दिया है. हाल ही में एक बड़े बैंक के साथ AI की मदद से करोड़ों की ठगी हुई है. ठगों ने इस बैंक में AI की मदद से कॉल किया, और बैंक के चेयरमैन से करीब 9.5 करोड़ यूरो ट्रांसफर करवा लिए.
ये मामला इटली का है, जहां के बड़े इंटेंसा सानपाओलो प्राइवेट बैंक की बैंकिंग इकाई फाइड्युरम (Fideuram) से ठगों ने AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से करीब 9.5 करोड़ यूरो (लगभग 1,034 करोड़ रुपये) की ठगी कर ली है.
कैसे हुई ठगी?दरअसल Reuters के मुताबिक, ये मामला फरवरी में शुरू हुआ. उस समय फाइड्युरम के चेयरमैन पाओलो मोलेसिनी को व्हाट्सएप पर एक मैसेज मिला. मैसेज ऐसा लग रहा था जैसे वह इंटेंसा सानपाओलो के CEO कार्लो मेसिना ने भेजा हो. मैसेज में विदेश में एक जरूरी लेनदेन के लिए मदद मांगी गई थी. इसके बाद ठगों ने फोन करके एक बड़ी लॉ फर्म के सीनियर लॉयर की तरह बात की और इस लेनदेन की पुष्टि की.&amp;nbsp;
सूत्रों के मुताबिक, ठगों ने AI तकनीक से वकील की आवाज की नकल की थी. मैसेज और फोन कॉल को असली समझकर मोलेसिनी ने बैंक के वित्त विभाग को विदेशी बैंक खातों में पैसे भेजने का निर्देश दे दिया. इनमें से ज्यादातर पैसे चीन और हांगकांग के खातों में भेजे गए.
ठगी गई रकम मिली वापसहालांकि, ठगी गई रकम में से करीब 5.3 करोड़ यूरो (करीब 578 करोड़ रुपये) वापस बरामद कर लिए गए हैं. लेकिन अभी भी लगभग 3.6 करोड़ यूरो (393 करोड़ रुपये) का पता नहीं चल पाया है.
कैसे पता चला ठगी के बारे में?फाइड्युरम को जल्द ही इन पैसों के ट्रांसफर में कुछ गड़बड़ी नजर आई. बैंक ने तुरंत दूसरे देशों के बैंकों और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी. चीन, पुर्तगाल और इटली की एजेंसियों के बीच सहयोग से करीब 5.3 करोड़ यूरो वापस बरामद कर लिए गए. लेकिन बाकी रकम कई विदेशी बैंक खातों से होते हुए क्रिप्टोकरेंसी में बदल दी गई, इसलिए उसका पता नहीं चल पाया है.
जांच जारीसूत्रों के मुताबिक, पाओलो मोलेसिनी या फाइड्युरम (Fideuram) के किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ जांच नहीं चल रही है. हालांकि, मिलान के अभियोजकों ने यूरोप के बाहर रहने वाले एक विदेशी नागरिक के खिलाफ कंप्यूटर फ्रॉड के शक में जांच शुरू की है. मोलेसिनी ने मार्च में निजी कारणों का हवाला देते हुए फाइड्युरम के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था.
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>कौन है Muthoot Fincorp का मालिक, कंपनी बनी टीम इंडिया की टाइटल स्पॉन्सर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कौन-है-muthoot-fincorp-का-मालिक-कंपनी-बनी-टीम-इंडिया-की-टाइटल-स्पॉन्सर</link>
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        <description><![CDATA[ शनिवार, 26 सितंबर को BCCI और मुथूट फिनकॉर्प ने मिलकर घोषणा की है कि अब कंपनी (मुथूट फिनकॉर्क) भारतीय क्रिकेट की घरेलू सीरीज को स्पॉन्सर करेगी, यानी अब यही कंपनी भारतीय क्रिकेट टीम की नई टाइटल स्पॉन्सर होगी. इस डील के तहत मुथूट फिनकॉर्प को भारत में होने वाले क्रिकेट मैचों के लिए टाइटल स्पॉन्सर का अधिकार मिला है. इसमें सिर्फ पुरुष टीम ही नहीं, बल्कि BCCI के कई घरेलू और राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले शामिल होंगे.
इसी बीच कंपनी के मालिक और उनकी सम्पत्ति को लेकर कई लोगों के बीच चर्चा चल रही है. तो आइये बताते हैं कौन है मुथूट फिनकॉर्प का मालिक और कितनी है इसकी नेटवर्थ.
क्या है मुथूट फिनकॉर्प?सबसे पहले तो आपको ये बताते हैं कि मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी है. ये कंपनी मुथूट पच्चापन ग्रुप (MPG) का हिस्सा है. इसे मुथूट ब्लू के नाम से भी जाना जाता है. कंपनी मुख्य रूप से गोल्ड लोन और दूसरी फाइनेंस सेवाओं से जुड़ा कारोबार भी करती है. कंपनी को खासतौर पर गोल्ड लोन के लिए ही जाना जाता है.
कौन है मुथूट पच्चापन ग्रुप का मालिक?मुथूट पच्चापन ग्रुप की कमान थॉमस जॉन मुथूट संभालते हैं. वो ग्रुप के चेयरमैन हैं और ग्रुप के संस्थापक मुथूट पच्चापन के बेटे हैं. थॉमस मुथूट पच्चापन ग्रुप से जुड़े हर काम को संभालते हैं. ना केवल थॉमस बल्कि पूरा मुथूट परिवार मिलकर सारे कारोबार को संभाल रहा है. ये कंपनी पीढ़ियों से चली आ रही है और फिलहाल इस कंपनी का नेतृत्व तीसरी पीढ़ी के तीन भाई संभाल रहे हैं.
कौन संभालता है मुथूट फिनकॉर्प की कमान?मुथूट फिनकॉर्प किसी व्यक्ति का अकेले चलाया हुआ छोटा कारोबार नहीं है. बल्कि मुथूट पच्चापन ग्रुप का ही एक महत्वपूरण फाइनेंस बिजनेस है. इसके प्रमोटर परिवार में थॉमस जॉन मुथूट, थॉमस जॉर्ज मुथूट और थॉमस मुथूट प्रमुख नाम हैं. ये तीनों भाई ही इस कंपनी को संभाल रहे हैं.
हालांकि कंपनी के वर्तमान सीईओ शाजी वर्गीज हैं.
कितनी है मुथूट फिनकॉर्प की नेटवर्थ?बात करें मुथूट फिनकॉर्प की नेटवर्थ की तो, वित्तीय आंकड़ों और नियामक दस्तावेजों के मुताबिक, मुथूट फिनकॉर्प की कुल नेटवर्थ करीब 8,200 करोड़ रुपये से 8,600 करोड़ रुपये के बीच है. तो वहीं, कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है.
मुथूट पप्पाचन परिवार की संपत्तिमुथूट पप्पाचन परिवार की कुल निजी संपत्ति का कोई एक सटीक और आधिकारिक आंकड़ा नहीं है. क्योंकि परिवार ने अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है. हालांकि, मुथूट परिवार को भारत के बड़े कारोबारी परिवारों में गिना जाता है. मुथूट ग्रुप की अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में प्रमोटर परिवार की हिस्सेदारी है. इन कंपनियों में परिवार की हिस्सेदारी की बाजार कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये में है.
मुथूट पच्चापन ग्रुप के बारे मेंबता दें कि मुथूट पच्चापन ग्रुप की शुरुआत मुथूट पच्चापन ने की थी. आज ये ग्रुप फाइनेंस सेवाओं के अलावा हॉस्पिटैलिटी, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और दूसरे कारोबारों में भी मौजूद है. कंपनी के मुताबिक ग्रुप के पास 4200 से ज्यादा शाखाएं और 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं.
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रविवार को कौनसे बैंक खुले हैं और कौनसे बंद? हड़ताल से पहले लें जरूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ 28 सितंबर यानी सोमवार से देश के सभी बैंक तीन दिवसीय हड़ताल पर जा रहे हैं. ये हड़ताल 30 सितंबर तक चलेगी, जिससे सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीनों दिन बैंक बंद रहेंगे. ऐसे में ग्राहकों को थोड़ी राहत देने के लिए हड़ताल से महज एक दिन पहले कुछ सरकारी बैंकों ने फैसला किया है कि वो रविवार, 27 सितंबर को बैंक शाखाएं खोलेंगे.
इस फैसले के तहत रविवार को सभी सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) खुले रखने का फैसला किया गया है. इसका मकसद ये है कि हड़ताल और उससे पहले पड़ने वाली छुट्टियों के कारण बैंकिंग सेवाएं लगातार कई दिनों तक प्रभावित न हों.
27 सितंबर को खुलेंगे बैंकदरअसल वित्त मंत्रालय ने 23 सितंबर को ही बता दिया था कि रविवार को सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सामान्य रूप से काम करेंगे. RBI ने भी बैंक शाखाओं, ऑफिस, ATM से जुड़े केंद्रों और करेंसी चेस्ट को रविवार को चालू रखने की मंजूरी दी है. इससे ग्राहकों को हड़ताल शुरू होने से पहले जरूरी बैंकिंग काम निपटाने का मौका मिलेगा.
सरकारी बैंक जो रविवार को खुलेंगेइस लिस्ट में सबसे पहला नाम SBI यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का है. इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक आदि रविवार के दिन खुले रहने वाले हैं. इसके अलावा ग्रामीण बैंक भी रविवार को खुलने वाले हैं. यदि आपका खाता सरकारी बैंक या ग्रामीण बैंक में है तो बैंक संबंधित काम करने शाखा में जा सकते हैं.
इसके अलावा हड़ताल के समय में अन्य बैंकिंग सुविधाएं जैसे कैश ट्रांजैक्शन, एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी. &amp;nbsp;
क्या निजी बैंक भी खुलेंगे?सरकार के इस फैसले का निजी बैंकों से कोई संबंध नहीं है, जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक जैसे बड़े निजी बैंक रविवार को नहीं खुलेंगे. क्योंकि हो सकता है कि इन बैंकों का काम हड़ताल के दौरान भी सुचारू रूप से चले. हालांकि ग्राहक अपने संबंधित बैंक से स्थानीय शाखा के कामकाज की स्थिति जरूर चेक कर लें.
क्यों हो रही हड़ताल?बता दें कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28 से 30 सितंबर तक देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना शामिल है. बैंकिंग क्षेत्र में पेंशन से जुड़े मुद्दे भी यूनियनों की मांगों में शामिल हैं.
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>MDR के बाद अब TMR, मेडिकल डिवाइस के अंधाधुंध मुनाफे पर कैसे लगेगी रोक?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर कोई मरीज अस्पताल में अपना इलाज करवाने गया है तो इलाज के दौरान कई बार दवाइयों के अलावा भी दूसरे मेडिकल सामान का भी इस्तेमाल होता है, जिसकी वजह से आखिरी में आया बिल काफी ज्यादा बढ़ जाता है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत कितनी होती है और अस्पताल आपसे उसके कितने पैसे वसूल करता है? अगर खरीद कीमत और मरीज से ली गई रकम में काफी ज्यादा अंतर हो तो ऐसे में कई सवाल उठ सकते हैं. इसी बात को लेकर इस समय चर्चा की जा रही है.&amp;nbsp;
दरअसल, इसकी चर्चा तब तेज हुई जब मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और जो पैसे मरीजों से लिए जा रहे थे उनमें अंतर मिला, जिसके बाद ही TMR यानी Trade Margin Rationalisation पर चर्चा शुरू हुई. ऐसे में हो सकता है कि कई लोगों को TMR के बारे में जानकारी न हो कि आखिर ये होता क्या है तो सबसे पहले इसके बारे में जानते हैं.&amp;nbsp;
क्या होता है TMR?
सबसे पहले बात करते हैं TMR की आखिर ये होता क्या है तो TMR के तहत एक ऐसी प्राइसिंग व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, जिसमें मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और मरीज से उसके बदले में ली गई रकम के बीच के बड़े अंतर को कम करना है. मान लीजिए, अगर अस्पताल को कोई मेडिकल सामान 100 रुपये का मिल रहा है और वे मरीज से उसके लिए 400 रुपये ले रहे हैं तो TMR में इसी अंतर को कम करने पर ध्यान दिया जाता है. इस को लेकर फिलहाल चर्चा जारी है.&amp;nbsp;
जांच में मिला बड़ा अंतर
बता दें कि महाराष्ट्र FDA की जांच के दौरान कुछ हैरान करने वाले खुलासे हुए. जांच में कुछ मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और MRP के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है.&amp;nbsp;
कितना मार्जिन तय होगा?
जानने वाली बात ये है कि आखिर सरकार मेडिकल डिवाइस पर कितना मार्जिन तय करने वाली है? सरकार कितना मार्जिन तय करेगी फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं किया गया है इसपर चर्चा की जा रही है.&amp;nbsp;
सर्वे में ओर क्या खुलासे हुए?
सर्वे में पता चला कि मेडिकल प्रोडक्ट पर 150 प्रतिशत से लेकर 2,841 प्रतिशत तक का मुनाफा कमाया जा रहा है.&amp;nbsp;

कैथेटर की अस्पताल की खरीद कीमत 29.41 और मरीज से 310 रुपये वसूल गए.
सिरिंज की अस्पताल की खरीद कीमत 6.75 रुपये और मरीज से 57.20 रुपये वसूले गए.
नेबुलाइजर/ऑक्सीजन मास्क 40 से 45 रुपये अस्पताल की खरीद और मरीज से 650 से 715 तक वसूले गए.&amp;nbsp;
IV इन्फ्यूजन सेट की अस्पताल की खरीद कीमत 11.05 रुपये और मरीज से 325 रुपये वसूले गए.

अस्पतालों का क्या कहना है?
इस पर अस्पतालों का साफ कहना है कि कोई भी मेडिकल सामान कितने में खरीदा गया है और मरीज से कितने पैसे लिए गए हैं, इसका अंतर अस्तपाल का मुनाफा नहीं होता है. अस्पतालों का ये कहना है कि उन्हें कई सारे दूसरे जरूरी खर्चों को भी देखना होता है.
क्या बदल सकता है TMR?&amp;nbsp;

TMR का मतलब यही है कि मेडिकल सामान की खरीद कीमत और जो रकम मरीज से ली जा रही है, उसके बीच के अंतर को कम करना.
यानी इस पर ध्यान दिया जाएगा कि सामान अस्तपाल को कितने में पड़ा और अब अस्तपाल सामान के बदले मरीज से कितने पैसे वसूल रहा है.&amp;nbsp;

अस्पतालों को कौन-कौन से खर्च उठाने होते हैं?&amp;nbsp;
अस्पतालों का कहना है कि मेडिकल प्रोडक्ट का MRP बनाने वाली कंपनी ही तय करती है. साथ ही अस्पताल को मशीन, साफ-सफाई, मरीजों की सुरक्षा, इमरजेंसी और स्टाफ से जुड़े खर्च भी उठाने होते हैं.&amp;nbsp;
खतरे में हैं ज्यादा कर्ज बांटने वाले बैंक? RBI ने दूर किया सबसे बड़ा डर
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>खतरे में हैं ज्यादा कर्ज बांटने वाले बैंक? RBI ने दूर किया सबसे बड़ा डर</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले कुछ समय में जमा रकम की तुलना में बैंकों के कर्ज बांटने की रफ्तार काफी ज्यादा हो गई है. इससे बैंकों के कर्ज-जमा अनुपात को लेकर चिंता बढ़ गई थी. लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट ने ये साफ किया है कि सिर्फ कर्ज-जमा अनुपात 80 फीसदी से ऊपर होने का मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि बैंक किसी बड़े खतरे में हैं.
आरबीआई के सितंबर 2026 के बुलेटिन में कर्ज-जमा अनुपात को लेकर काफी सारी जानकारी दी गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 से बैंक कर्ज की बढ़ोतरी कुल जमा की बढ़ोतरी से ज्यादा रही है. इसी वजह से कर्ज-जमा अनुपात 80 फीसदी से ऊपर पहुंचा है. &amp;nbsp;
अनुपात 80% से ऊपर क्यों पहुंचा?कर्ज-जमा अनुपात देखकर ये पता किया जाता है कि बैंक के पास जमा हुए पैसे से कितना ज्यादा बैंक ने कर्ज दिया है. अगर किसी बैंक के पास ग्राहकों की जमा रकम 100 रुपए है और बैंक ने 80 रुपए का कर्ज दिया है, तो उसका कर्ज-जमा अनुपात 80 फीसदी हुआ.&amp;nbsp;
आरबीआई के मुताबिक, पिछले कुछ साल में बैंक कर्ज की मांग मजबूत रही है और कर्ज बढ़ने की रफ्तार जमा रकम से ज्यादा रही है. इसी वजह से ये अनुपात 80 फीसदी से ऊपर गया है.&amp;nbsp;
क्या बैंक के लिए खतरा है?सिर्फ कर्ज-जमा अनुपात देखकर ये कहना सही नहीं होगा कि बैंक खतरे में हैं. आरबीआई के बुलेटिन के मुताबिक, ये अनुपात अकेले बैंकिंग व्यवस्था की वित्तीय कमजोरी या पैसे की कमी के जोखिम को मापने का सही पैमाना नहीं है.&amp;nbsp;
मतलब ये है कि अगर किसी बैंक का कर्ज-जमा अनुपात 80 फीसदी से ऊपर है तो इसका मतलब ये नहीं है कि बैंक के पास पैसे खत्म हो रहे हैं.&amp;nbsp;
बैंक जमा से ज्यादा कर्ज कैसे दे पाते हैं?&amp;nbsp;आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बैंकिंग व्यवस्था के खास पहलू की तरफ ध्यान दिलाया है. बैंक जब कर्ज देते हैं या निवेश करते हैं तो उसी प्रोसेस के दौरान जमा रकम भी पैदा हो सकती है. इसलिए ऐसा जरूरी नहीं है कि बैंक को हर बार पहले उतनी ही जमा रकम जुटानी पड़े, तभी वो कर्ज दे सके. &amp;nbsp;
हालांकि इसका मतलब ये भी नहीं है कि बैंक बिना किसी सीमा के कर्ज बांट सकते हैं. बैंक को अपनी कमाई, जोखिम, नियम को ध्यान में रखकर कर्ज देना होता है.
तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच पर सरकार का बड़ा एक्शन, देशभर में बैन के आदेश
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सितंबर की सैलरी में हो सकती है देरी, 3 दिन की बैंक हड़ताल पर अपडेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सितंबर-की-सैलरी-में-हो-सकती-है-देरी-3-दिन-की-बैंक-हड़ताल-पर-अपडेट</link>
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        <description><![CDATA[ सितंबर महीने में नौकरी वालों की परेशानी बढ़ सकती है. UFBU ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन के बैंक हड़ताल का ऐलान किया है. अब हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बैंक की ब्रांच सेवाओं पर पड़ेगा और इससे सैलरी होगी लेट. इसलिए महीने के आखिरी दिनों में हड़ताल होने से सैलरी क्रेडिट को लेकर लोगों में मन में कई साल सवाल उठ रहे हैं. &amp;nbsp;
हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि सभी कर्मचारियों की सितंबर की सैलरी देर से ही आएगी. सैलरी कब आएगी, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी कब और किस बैंकिंग सिस्टम के जरिए पेरोल प्रोसेस करती है. अगर कंपनी ने पहले से पेरोल प्रोसेस कर दिया है, तो बैंक हड़ताल के बावजूद सैलरी समय पर खाते में आ भी सकती है.&amp;nbsp;
कबतक चलेगी बैंक की हड़ताल?
UFBU ने पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था समेत अपनी मांगों को लेकर 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल कर रहे हैं. इससे पहले 11 सितंबर को भी एक दिन की बैंक हड़ताल हुई थी. सरकार के मुताबिक, अब 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल प्रस्तावित है. 30 सितंबर को बैंकों का हाफ-ईयर क्लोजिंग भी है.&amp;nbsp;
संडे को खुले रहेंगे सरकारी बैंक?
ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं की परेशानी न हो, इसके लिए सरकार ने 27 सितंबर यानी रविवार को सभी पब्लिक सेक्टर बैंक और रीजनल रूरल बैंक खुले रखने का फैसला किया है. RBI ने भी इस दिन बैंक ब्रांच, ऑफिस, ATM-लिंक ब्रांच और करेंसी चेस्ट को ऑपरेशनल रखने की मंजूरी दी है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
सितंबर की सैलरी अटक सकती है?
सैलरी को लेकर सबसे जरूरी बात ये है कि सभी कर्मचारियों की सैलरी पर एक जैसा असर नहीं पड़ेगा. केंद्र सरकार ने संभावित दिक्कत को देखते हुए अपने कर्मचारियों, औद्योगिक कर्मचारियों और पेंशनर्स के सितंबर महीने के भुगतान को पहले ही जारी करने की व्यवस्था की है.
केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सितंबर की सैलरी, वेतन और पेंशन का भुगतान 25 सितंबर को करने के निर्देश दिए गए थे. ये कदम 28 से 30 सितंबर की बैंक हड़ताल को देखते हुए उठाया गया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
प्राइवेट नौकरी करने वालों का क्या होगा?
प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए सैलरी क्रेडिट करना पेरोल प्रक्रिया पर डिपेंड करेगी. अगर कंपनी महीने के अंत से पहले सैलरी फाइल और पेमेंट प्रक्रिया पूरी कर देती है, तो बैंक हड़ताल का सीधा असर जरूरी नहीं है.
वहीं, अगर सैलरी पेमेंट 28 से 30 सितंबर के दौरान प्रोसेस होना है और इसमें हड़ताल में शामिल बैंक की सेवाओं पर डिपेंड है, तो क्रेडिट में देरी हो सकती है. इसलिए कर्मचारियों के लिए अपनी कंपनी के HR से सैलरी प्रोसेसिंग के बारे में पता करना चाहिए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
खतरे में हैं ज्यादा कर्ज बांटने वाले बैंक? RBI ने दूर किया सबसे बड़ा डर
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सितंबर, की, सैलरी, में, हो, सकती, है, देरी, दिन, की, बैंक, हड़ताल, पर, अपडेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>आज का सोना&amp;चांदी का रेट: सोना 1.50 लाख के पार, चांदी भी तेजी से चढ़ी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-का-सोना-चांदी-का-रेट-सोना-150-लाख-के-पार-चांदी-भी-तेजी-से-चढ़ी</link>
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        <description><![CDATA[ एक बार फिर तीज- त्योहार और शादी का सीजन नजदीक आ गया है. ऐसे में हर किसी की नजर सोना और चांदी के रेट पर ही है. आइये जानते हैं कि आज गोल्ड और सिल्वर से राहत मिली है या फिर लगा है बड़ा झटका.&amp;nbsp;
बता दें कि आज सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. सोना 150 रुपए की बढ़त के साथ 1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया तो वहीं, चांदी का भाव भी 368 रुपए चढ़कर 2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है.&amp;nbsp;
आज सोने का क्या भाव है?मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर आज सोने की कीमत 150 रुपए यानी 0.1 प्रतिशत की तेजी पर नजर आई. इसी के साथ 26 सितंबर को सोना 1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है.&amp;nbsp;



शहर का नाम
24 कैरेट सोने का भाव


दिल्ली
1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम


नोएडा
1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम


गुरुग्राम
1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम


मुंबई
1,50,960 रुपए प्रति 10 ग्राम


कोलकाता
1,50,760 रुपए प्रति 10 ग्राम


चेन्नई
1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम


पटना
1,50,890 रुपए प्रति 10 ग्राम


लखनऊ
1,50,960 रुपए प्रति 10 ग्राम


वाराणसी
1,50,860 रुपए प्रति 10 ग्राम



चांदी भी हुई महंगीसोने के साथ- साथ चांदी के भाव में भी तेजी आ गई है. MCX पर चांदी की कीमत 368 रुपए यानी 0.16 प्रतिशत बढ़ गई है. इस बढ़त के साथ चांदी एक बार फिर 2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है.&amp;nbsp;



शहर का नाम
चांदी का भाव&amp;nbsp;


दिल्ली
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


नोएडा
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


गुरुग्राम
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


मुंबई
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


कोलकाता
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


चेन्नई
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


पटना
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


लखनऊ
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम


वाराणसी
2,33,850 रुपए प्रति किलोग्राम



ग्लोबल मार्केट के कैसे हैं हालात?अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखने को मिली है. यहां सोने का भाव 0.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,275.38 डॉलर प्रति औंस है तो वहीं, चांदी की कीमत 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63.80 डॉलर प्रति औंस हो गई है.&amp;nbsp;
सितंबर की सैलरी में हो सकती है देरी, 3 दिन की बैंक हड़ताल पर अपडेट
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>आज, का, सोना-चांदी, का, रेट:, सोना, 1.50, लाख, के, पार, चांदी, भी, तेजी, से, चढ़ी</media:keywords>
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        <title>दुनियाभर के 500 Airbus विमानों में निर्माण खामी, IndiGo भी दायरे में</title>
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        <description><![CDATA[ Airbus A321neo विमान में फ्यूजलेज की surface protection coating से जुड़ी एक क्वालिटी समस्या सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर में करीब 500 A321neo विमान इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं. इनमें IndiGo के करीब 12 विमान भी शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि Airbus ने साफ किया है कि यह सुरक्षा से जुड़ी समस्या नहीं है और प्रभावित विमान अपनी उड़ान जारी रख सकते हैं.
क्या गड़बड़ी मिली?
Airbus के मुताबिक नियमित जांच और काम के दौरान विमान के फ्यूजलेज के निचले हिस्से के आगे वाले हिस्से में कुछ components की surface protection में खामी सामने आई. सरल भाषा में समझें तो विमान के कुछ हिस्सों पर जंग और दूसरे नुकसान से बचाने के लिए लगाई जाने वाली protective coating तय मानकों के मुताबिक नहीं मिली. कंपनी का कहना है कि समस्या की वजह का पता लगा लिया गया है और उसे नियंत्रित कर लिया गया है. इसे ठीक करने की प्रक्रिया भी Airbus के पास मौजूद है.
करीब 500 विमान प्रभावित
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस समस्या का असर करीब 500 A321neo विमानों पर हो सकता है. इनमें कुछ विमान पहले ही एयरलाइंस को डिलीवर किए जा चुके हैं जबकि कुछ अभी निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं.
IndiGo के सूत्रों के मुताबिक एयरलाइन के करीब 12 A321neo विमान इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं. हालांकि इस संख्या की Airbus या IndiGo ने अलग से आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
Airbus ने कहा- उड़ान जारी रख सकते हैं विमान
Airbus ने इस मामले को quality issue, not a safety issue बताया है यानी इस खामी के सामने आने के बाद प्रभावित A321neo विमानों को तुरंत उड़ान से हटाने की जरूरत नहीं बताई गई है. विमान तय प्रक्रिया के तहत उड़ान जारी रख सकते हैं. Airbus के मुताबिक नई प्रक्रिया के तहत की गई coating सभी जरूरी मानकों को पूरा करती है.
विमान का हिस्सा खोलने की जरूरत नहीं
इस समस्या को ठीक करने के लिए विमान के फ्यूजलेज के हिस्से को खोलने या stringers को हटाने की जरूरत नहीं होगी. Airbus के मुताबिक तय प्रक्रिया के तहत उसी जगह पर जरूरी rework किया जा सकता है. काम पूरा होने के बाद विमान को उसकी मूल डिजाइन स्थिति के अनुरूप माना जाएगा.
यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल इस समस्या के कारण यात्रियों की उड़ानों पर तत्काल असर पड़ने की जानकारी नहीं है. Airbus का कहना है कि प्रभावित विमान उड़ान जारी रख सकते हैं और समस्या को ठीक करने का समाधान उपलब्ध है. एयरलाइंस अपने नियमित रखरखाव कार्यक्रम के दौरान इन विमानों पर जरूरी rework कर सकती हैं.
MDR के बाद अब TMR, मेडिकल डिवाइस के अंधाधुंध मुनाफे पर कैसे लगेगी रोक?
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>46% भारतीयों के पास इमरजेंसी फंड नहीं, 60% पर नहीं है हेल्थ कवर&amp; रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ कमाई और निवेश करने के बावजूद भी ज्यादातर भारतीय परिवार इमरजेंसी के खर्चों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी लोगों के पास तीन महीने का खर्च चलाने के लिए भी इमरजेंसी फंड नहीं है. वहीं, 60 फीसदी लोगों के पूरे परिवार के पास 25 लाख रुपये से कम का हेल्थ इंश्योरेंस कवर है.&amp;nbsp;
फिनोवेट फाइनेंशियल सर्विसेज की इस रिपोर्ट में सेविंग, कर्ज, टैक्स प्लानिंग, निवेश और परिवार की सुरक्षा जैसे कई पहलुओं को देखा गया है.&amp;nbsp;
कितने लोगों के पास इमरजेंसी फंड नहीं है?
इमरजेंसी फंड ऐसी रकम है जिसे नौकरी जाने, अचानक मेडिकल खर्च आने और परिवार में किसी जरूरी जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है. सर्वे में 46 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके पास तीन महीने के खर्च के बराबर रकम नहीं है या उनके पास कोई इमरजेंसी फंड ही नहीं है.
ऐसे में अगर अचानक कमाई रुक जाए या बड़ा खर्च आ जाए तो घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है. इमरजेंसी फंड की सही रकम हर परिवार के लिए अलग हो सकती है. ये आपकी कमाई, EMI, परिवार की जिम्मेदारियों और नौकरी पर निर्भर करती है.&amp;nbsp;
60% लोगों का हेल्थ कवर 25 लाख से कम
हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर भी रिपोर्ट में बड़ा गैप सामने आया है. सर्वे के मुताबिक, 60 फीसदी लोगों के पूरे परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस कवर 25 लाख रुपये से कम है.&amp;nbsp;
आज के समय में अस्पताल का खर्च तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में सिर्फ इंश्योरेंस होना ही काफी नहीं है, बल्कि ये देखना भी जरूरी है कि आपकी पॉलिसी बड़े मेडिकल खर्च को कवर करने के लिए पर्याप्त है या नहीं.
हेल्थ इंश्योरेंस है या नहीं?
सर्वे में बताया गया कि करीब 43 फीसदी लोगों के पास कंपनी की ओर से मिलने वाला और खुद लिया गया, दोनों तरह का हेल्थ इंश्योरेंस है. वहीं, 14 फीसदी लोग सिर्फ अपनी कंपनी के हेल्थ कवर पर निर्भर हैं. इसके अलावा 14 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है.&amp;nbsp;
कंपनी की पॉलिसी नौकरी से जुड़ी होती है. नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद ये कवर जारी रहे, ये जरूरी नहीं है. इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से अलग हेल्थ इंश्योरेंस रखना जरूरी है.
क्यों बढ़ रही है चिंता?मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेडिकल महंगाई करीब 11-14 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि महंगाई 6-7 फीसदी के आसपास बताई गई है.&amp;nbsp;
इसका मतलब है कि आज जो हेल्थ कवर पर्याप्त लग रहा है, आने वाले साल में वही कवर कम पड़ सकता है.&amp;nbsp;
57% लोगों पर EMI का बोझरिपोर्ट में लोगों की कर्ज की स्थिति भी सामने आई है. सर्वे में 57 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके ऊपर किसी न किसी तरह की EMI चल रही है.
इनमें 21 फीसदी लोग अपनी आय का 20 से 40 फीसदी हिस्सा EMI में खर्च करते हैं, जबकि 9 फीसदी लोगों की आय का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा EMI में चला जाता है.&amp;nbsp;
अभी नहीं लगेगा चार्ज, 3 दिन तक किसी भी बैंक के ATM से फ्री निकालें कैश- SBI
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>PLI स्कीम: सरकार ने कंपनियों को जारी किए 36,754 करोड़, बढ़ेगा उत्पादन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pli-स्कीम-सरकार-ने-कंपनियों-को-जारी-किए-36754-करोड़-बढ़ेगा-उत्पादन</link>
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        <description><![CDATA[ देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की PLI स्कीम लगातार आगे बढ़ रही है. सरकार ने PLI स्कीम के तहत कंपनियों को अब तक 36,754 करोड़ रुपए का इंसेंटिव जारी किया है. ये रकम जून 2026 तक के आंकड़ों हैं. &amp;nbsp;
PLI स्कीम के तहत कंपनियों को उनके उत्पादन और बिक्री में बढ़ोतरी के आधार पर इंसेंटिव दिया जाता है. सरकार का मकसद देश में ज्यादा से ज्यादा सामान बनाना, निवेश बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है.
सबसे ज्यादा पैसा किसे मिला?PLI स्कीम के तहत सबसे ज्यादा इंसेंटिव बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेक्टर को मिला है. इस सेक्टर की कंपनियों को जून 2026 तक 19,090.98 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं.&amp;nbsp;
इसके बाद फार्मा सेक्टर की कंपनियों को 6662 करोड़ रुपए मिले हैं. वहीं, फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर को 3271.44 करोड़ रुपए और ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर को 3,174.15 करोड़ रुपए का इंसेंटिव मिला है. &amp;nbsp;
किन-किन सेक्टर को मिला इंसेंटिव?PLI स्कीम के तहत सरकार ने कई अलग- अलग सेक्टर को फायदा दिया है. इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स और व्हाइट गुड्स जैसे सेक्टर शामिल हैं.
जून 2026 तक कुछ प्रमुख सेक्टर में जारी इंसेंटिव की लिस्ट यहां देखें-&amp;nbsp;

बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण- 19,090.98 करोड़ रुपए
फार्मास्यूटिकल्स- 6,662 करोड़ रुपए
फूड प्रोडक्ट्स- 3,271.44 करोड़ रुपए
ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स- 3,174.15 करोड़ रुपए
दूरसंचार और नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स- 2,796 करोड़ रुपए
व्हाइट गुड्स- 593 करोड़ रुपए
टेक्सटाइल- 386 करोड़ रुपए
स्पेशलिटी स्टील- 236 करोड़ रुपए
आईटी हार्डवेयर- 98 करोड़ रुपए
ड्रोन- 93 करोड़ रुपए &amp;nbsp;

कितने करोड़ रुपए का निवेश आया?
PLI स्कीम का असर सिर्फ इंसेंटिव तक नहीं है. DPIIT के आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक 14 PLI सेक्टर में कुल 2.58 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हुआ है.&amp;nbsp;
इस निवेश से इन सेक्टर में उत्पादन और बिक्री भी बढ़ी है. जून 2026 तक PLI स्कीम के तहत 23.79 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन और बिक्री दर्ज की गई है, जबकि निर्यात 15.53 लाख करोड़ रुपए रहा है. &amp;nbsp;
14.57 लाख से ज्यादा बने रोजगारसरकार ने साल 2020 में 14 प्रमुख सेक्टर के लिए PLI स्कीम शुरू की थी. सरकार के मुताबिक PLI स्कीम से रोजगार के मौके भी बढ़े हैं. जून 2026 तक इस योजना के तहत 14.57 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा हुए हैं. &amp;nbsp;
अभी नहीं लगेगा चार्ज, 3 दिन तक किसी भी बैंक के ATM से फ्री निकालें कैश- SBI
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Real Estate: मजबूत मोबाइल नेटवर्क वाली इमारतों को मिलेगा डिजिटल सर्टिफिकेट, आप चुन सकेंगे बेस्ट घर</title>
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        <description><![CDATA[ मान लीजिए आप कोई घर, दफ्तर-दुकान या किसी और तरह की प्रॉपर्टी खरीदते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि वहां तो नेटवर्क ही ठीक से नहीं आ रहा है तो ऐसे में बड़ी मुश्किल हो सकती है. कंज्यूमर्स की इसी दिक्कत को दूर करने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने आज डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग (DCR) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया.
TRAI ने इमारतों के अंदर डिजिटल कनेक्टिविटी की जांच के लिए एक खास मोबाइल ऐप भी पेश किया गया है. घर, ऑफिस या किसी अन्य इमारत में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी कैसी है, अब इसकी जानकारी लोगों को पहले से मिल सकेगी जिससे आप अपने लिए बेस्ट प्रॉपर्टी को पसंद कर सकते हैं.&amp;nbsp;
लोगों का क्या फायदा होगा?
आजकल किसी भी ऑफिस, घर-संस्थान में सही मोबाइल नेटवर्क मिलना बेहद जरूरी है. TRAI ने ये डिजिटल कनेक्टिविटी प्लेटफॉर्म शुरू किया है जिससे इमारतों के अंदर डिजिटल कनेक्टिविटी की जांच होगी. इसकेअलावा एक खास मोबाइल ऐप भी पेश किया है जिससे लोगों को पहले से घर, ऑफिस या किसी अन्य इमारत में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी कैसी है, इसकी जानकारी मिल पाएगी.&amp;nbsp;
क्यों लिया TRAI ने ये फैसला
TRAI ने ये फैसला लिया जिससे घर-प्रॉपर्टी लेने से पहले ही कस्टमर जान सके कि उस जगह पर नेटवर्क कनेक्टिविटी कैसी रहेगी. मोबाइल डेटा की करीब 70-80 परसेंट खपत घरों और दूसरी इमारतों के अंदर होती है. ऐसे में किसी प्रॉपर्टी की डिजिटल कनेक्टिविटी उसके खरीदारों और किरायेदारों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई है. नया प्लेटफॉर्म लोगों को किसी प्रॉपर्टी की कनेक्टिविटी से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद करेगा, जिससे वे खरीदने या लीज पर लेने का फैसला ज्यादा बेहतर कर सकेंगे.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा प्लेटफॉर्म?
डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म पोर्टल और मोबाइल ऐप के कॉम्बिनेशन के तौर पर काम करेगा. प्रॉपर्टी मैनेजर इसमें अपनी प्रॉपर्टी को रजिस्टर कर सकेंगे, रेटिंग के लिए अप्लाई कर सकेंगे, जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड कर सकेंगे और रजिस्टर्ड डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसी (DCRA) को चुन सकेंगे. आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी.
वहीं, DCRA के जरिए प्रॉपर्टी का फील्ड असेसमेंट किया जाएगा. एजेंसियां खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर इमारत के अंदर डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े विभिन्न मानकों की जांच करेंगी और टेस्ट के नतीजे प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेंगी.
ग्राहक भी ऑनलाइन देख सकेंगे रेटिंग
इस प्लेटफॉर्म का एक अहम हिस्सा इसका पब्लिक रेटिंग सर्च पेज है. ग्राहक किसी प्रॉपर्टी का नाम या लोकेशन डालकर उसकी डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग देख सकेंगे. इसके अलावा पब्लिश्ड रेटिंग और संबंधित सर्टिफिकेट को भी ऑनलाइन सर्टिफाइड किया जा सकेगा. इससे घर या ऑफिस खरीदने अथवा किराये पर लेने वाले लोगों को प्रॉपर्टी की डिजिटल कनेक्टिविटी को भी अपने फैसले में शामिल करने का मौका मिलेगा.
डिजिटल कनेक्टिविटी को मिलेगी रेटिंग
TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि &quot;डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म (DCR) की शुरुआत प्रॉपर्टीज में डिजिटल कनेक्टिविटी आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे कंज्यूमर को कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर और इसके परफॉर्मेंस से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी मुहैया कराने में मदद मिलेगी.&quot;
अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी भी होंगी शामिल
TRAI का यह सिस्टम केवल तैयार इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा. अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टीज के लिए भी रेटिंग और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की गई है.
किन चीजों की होगी जांच?
डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग फ्रेमवर्क में प्रॉपर्टी की कनेक्टिविटी का आकलन इन बातों पर किया जाएगा-

फाइबर कनेक्टिविटी की तैयारी (Fibre Readiness)
इन-बिल्डिंग डिजिटल कनेक्टिविटी सॉल्यूशन
Wi-Fi इंफ्रास्ट्रक्चर
मोबाइल नेटवर्क की अवेलिबिटी
डिजिटल कनेक्टिविटी में नेटवर्क की स्थिरता
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिजली की अवेलिबिलिटी

इन अलग-अलग कैटेगरी की प्रॉपर्टीज के लिए तय मानकों और बेंचमार्क पर प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन किया जाएगा.
2024 के फ्रेमवर्क पर बनाया गया DCR और ऐप
TRAI का ये DCR प्लेटफॉर्म 2024 में जारी &amp;nbsp;Digital Connectivity Rating Framework पर आधारित है. इसका मकसद प्रॉपर्टीज में डिजिटल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर और उसकी रियल वर्किंग केपेबिलिटीज का एक स्टेंडर्ड तरीके से आकलन करना है.
यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;बैंकों की 3 दिन की हड़ताल से पहले ग्राहकों को क्या-क्या सलाह दी गई है? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Real, Estate:, मजबूत, मोबाइल, नेटवर्क, वाली, इमारतों, को, मिलेगा, डिजिटल, सर्टिफिकेट, आप, चुन, सकेंगे, बेस्ट, घर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>UPI MDR: कुछ दिनों के लिए विदेश जा रहे, क्या फिर भी देना होगा चार्ज? सरकार ने बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-mdr-कुछ-दिनों-के-लिए-विदेश-जा-रहे-क्या-फिर-भी-देना-होगा-चार्ज-सरकार-ने-बताया</link>
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        <description><![CDATA[ क्या आप कुछ दिनों के लिए विदेश जाने वाले हैं? वहां भी तो आपको UPI से पेमेंट करना ही होगा. तो आपके मन में ये सवाल जरूर होगा कि क्या नए नियम के बाद हर पेमेंट पर अलग से फीस देना पड़ेगा? सरकार ने इस सवाल का भी जवाब दे दिया है.&amp;nbsp;
सरकार के मुताबिक, MDR का फीस ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा. यानी UPI से पेमेंट करने वाले आम लोगों पर नया फीस नहीं लगाया जाएगा. दुकानदार भी ये फीस ग्राहक से नहीं वसूल सकते हैं.
15 अक्टूबर से क्या बदलेगा?&amp;nbsp;15 अक्टूबर 2026 से कुछ बड़े UPI पेमेंटों पर MDR लागू होगा. नए नियम के तहत 2,000 रुपए से ज्यादा के पात्र दुकानदार पेमेंट पर 0.4 फीसदी शुल्क तय किया गया है.
75,000 रुपए या उससे ज्यादा के ऐसे पेमेंट पर ज्यादा से ज्यादा 300 रुपए तक की फीस को ही तय किया गया है. लेकिन जरूरी बात ये भी है कि ये ग्राहक से लिया जाने वाली फीस नहीं है.&amp;nbsp;
विदेश जाने वालों को क्या करना होगा?
अगर आप कुछ दिनों के लिए विदेश जा रहे हैं और वहां किसी दुकान पर UPI से पेमेंट करते हैं, तो सिर्फ विदेश में होने की वजह से आपसे अलग से MDR फीस नहीं लिया जाएगा.
हालांकि, विदेश में हर जगह UPI नहीं चलता है. इसलिए विदेश जाने से पहले ये जरूर जांच लें कि जिस जगह आप जा रहे हैं, वहां UPI से पेमेंट की सुविधा मिलती है या नहीं.
और किसपर नहीं लगेगा चार्ज?
अगर आप विदेश जाने से पहले या विदेश में रहते हुए भारत में अपने परिवार या किसी दोस्त को UPI से पैसे भेजते हैं, तो इस पर भी कोई MDR नहीं लगेगा.
मतलब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाला पेमेंट पहले की तरह बिना शुल्क के जारी रहेगा.
46% भारतीयों के पास इमरजेंसी फंड नहीं, 60% पर नहीं है हेल्थ कवर- रिपोर्ट
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>आज 25 सितंबर को कितनी है पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत, फटाफट चेक करें रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-25-सितंबर-को-कितनी-है-पेट्रोल-डीजल-की-कीमत-फटाफट-चेक-करें-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-25-सितंबर-को-कितनी-है-पेट्रोल-डीजल-की-कीमत-फटाफट-चेक-करें-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ आज शुक्रवार, 25 सितंबर को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ. सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने सुबह 6 बजे फ्यूल रेट्स अपडेट कर दिए हैं और रिटेल स्तर पर कीमतों को पहले जैसा ही रखा गया है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है.
OMCs जब हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों को अपडेट करती हैं, तोइंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें, रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, टैक्स और लोकल मार्केट की स्थिति जैसी चीजों का पूरा ध्यान रखती हैं. हालांकि, ग्लोबल क्रूड मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद आम आदमी को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं.&amp;nbsp;
शहरवार चेक करें कीमत



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
111.31 रुपये
97.97 रुपये


जमशेदपुर
106.09 रुपये
101.23 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपये
99.56 रुपये


लखनऊ
101.86&amp;nbsp; रुपये
95.36 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये


बिलासपुर
108.76 रुपये
102.10 रुपये


भोपाल
115.41 रुपये
100.47 रुपये


कोच्चि
105.71 रुपये
96.30 रुपये



सऊदी से बढ़ी क्रूड की सप्लाई
गुरुवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट आई, जिसमें बताया गया कि सऊदी अरब ने होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ा दी है. हाल ही में सऊदी अरब की मशूहर 746-मील लंबी इस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (Petroline) पर हमला किए जाने के रेड सी में स्थित यानबू पोर्ट के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई में रुकावट आ गई थी, लेकिन अब इसे फिर से बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया गया है. इसके चलते सितंबर में शिपमेंट फरवरी के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.
ब्लूमबर्ग के टैंकर-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस महीने अब तक सऊदी से कच्चे तेल का शिपमेंट औसतन 5.28 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा है, जो फरवरी के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. ट्रेडर्स के हवाले से बताए गए रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते सऊदी अरब ने होर्मुज के रास्ते एशियाई देशों की रिफाइनरीज को अक्टूबर और नवंबर में डिलीवरी के लिए लगभग 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल कच्चा तेल बेचा है. इससे पिछले दिनों आई सप्लाई की कमी को टालने में मदद मिल रही है.

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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, सितंबर, को, कितनी, है, पेट्रोल-डीजल, की, कीमत, फटाफट, चेक, करें, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>आज कितने का पड़ेगा 14.2 किलो वाला सिलेंडर, कहीं बढ़ तो नहीं गए दाम? चेक करें रेट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) का अपने देश में काफी बोलबाला है. घरों से लेकर रेस्टोरेंट्स, ढाबों में खाना पकाने के लिए इसी का ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है. चूंकि यह लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है इसलिए इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का बजट पर बहुत असर पड़ता है. LPG सिलेंडर की कीमतें समय-समय पर बदलती रहती हैं, जो दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सरकार के फैसलों और ट्रांसपोर्टेशन की लागत से प्रभावित होते हैं. चूंकि भारत बड़े पैमाने इसका आयात भी करता है इसलिए ग्लोबल मार्केट की स्थिति का भी कीमतों पर सीधा असर पड़ता है.
आज गैस सिलेंडर की कीमत
भारत में अभी 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 941.50 रुपये से 994.00 रुपये के बीच है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,701.00 से 2,996.00 के बीच बनी हुई है. LPG सिलेंडर की कीमतें अमूमन तीन चीजों के आधार पर तय होती हैं- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमत, गैस आयात करने की लागत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स. तेल कंपनियां समय-समय पर LPG की कीमतों का हिसाब लगाती हैं और उनमें बदलाव करती हैं.&amp;nbsp;
शहरवार चेक करें कीमत



शहर
घरेलू सिलेंडर के रेट
कमर्शियल सिलेंडर के रेट&amp;nbsp;


दिल्ली
942 रुपये
2,747.50 रुपये


मुंबई
941.50 रुपये
2,701 रुपये


कोलकाता&amp;nbsp;
968 रुपये
2,884 रुपये


बेंगलुरु
944.50 रुपये
2,831 रुपये


हैदराबाद
994 रुपये
2,996 रुपये


चेन्नई
957.50 रुपये
2,916.5 रुपये


कटक
968.00 रुपये
2,885 रुपये


कोयंबटूर
959.00 रुपये
2,940 रुपये


रांची&amp;nbsp;
1,010.50 रुपये
2,925.50 रुपये



भारत के लिए LPG आयात का बदला नक्शा
ईरान में जंग के चलते खाड़ी देशों से एनर्जी सप्लाई में रुकावट आई, तो भारत ने दूसरे देशों का रूख किया. इस बीच, अमेरिका भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा सोर्स बनकर उभरा. ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल तक भारत के एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी महज 6% थी, जो अब तेजी से बढ़कर 20% से अधिक हो गई है। इसके साथ ही अमेरिका अब खाड़ी देशों के मुकाबले भारत का सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर बन गया है.

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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, कितने, का, पड़ेगा, 14.2, किलो, वाला, सिलेंडर, कहीं, बढ़, तो, नहीं, गए, दाम, चेक, करें, रेट</media:keywords>
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        <title>सिर्फ भारत नहीं, UPI सर्विस वाले 11 देशों में भी लगेगा पेमेंट पर चार्ज&amp; वित्त मंत्रालय सूत्र</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर इन दिनों बवाल मचा हुआ है. देश भर के व्यापारियों और कारोबारी संगठनों में इसे लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है. आलम यह है कि अब व्यापारियों ने इसके खिलाफ 2 अक्टूबर को &#039;No UPI Day&#039; मनाने का फैसला लिया है. इस दौरान दुकानदार ग्राहकों से UPI के जरिए पेमेंट नहीं लेंगे और दुकानों से UPI बोर्ड या तो हटा देंगे या काले कपड़े से ढ़क देंगे.
देश में यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर यानी 0.4% के चार्ज के विरोध के बीच अब खबर आई है कि भारत के अलावा जिन-जिन देशों में यूपीआई चलता है, वहां भी एमडीआर वाला नियम लागू किया जाएगा. वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी है. यानी कि भारत में लागू होने वाला यूपीआई एमडीआर का नियम अब ग्लोबल होने जा रहा है.
वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि बदले हुए MDR स्ट्रक्चर का मकसद UPI इकोसिस्टम के लिए एक ज्यादा टिकाऊ फाइनेंशियल मॉडल बनाना है, जो अब तक मुख्य रूप से मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत काम कर रहा था.
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह भी कहा है कि MDR से UPI इकोसिस्टम को बनाए रखने की पूरी लागत कवर नहीं होती है और ये दरें इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत करके तय की हैं. सरकार की 15 अक्टूबर की समय-सीमा को आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.&amp;nbsp;

VIDEO | PTI Exclusive: MDR on UPI payments above Rs 2,000 will not be passed on to customers, says Finance Minister Nirmala Sitharaman.She says, &quot;This is a complete misconception. Today, the opposition is levelling allegations against the government without fully understanding&amp;hellip; pic.twitter.com/tNh5FzWAF0
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) September 24, 2026



किन 11 देशों पर लागू होगा UPI MDR वाला नियम?
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी है. जिन देशों में यूपीआई की सर्विस चालू है, वहां भी एमडीआर वाला नियम लागू किया जाएगा. इनमें संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, फ्रांस, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव जैसे देश शामिल हैं.
हालांकि, विदेश यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों, छात्रों और आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई से भुगतान करना पूरी तरह फ्री रहेगा. यह चार्ज केवल इंटरनेशनल लेवल पर भुगतान स्वीकार करने वाले विदेशी मर्चेंट्स और एक्वायरिंग पार्टनर्स के दायरे में आएगा.

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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सिर्फ, भारत, नहीं, UPI, सर्विस, वाले, देशों, में, भी, लगेगा, पेमेंट, पर, चार्ज-, वित्त, मंत्रालय, सूत्र</media:keywords>
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    <item>
        <title>1600 रुपये गिरा सोने का भाव, चांदी भी हुई सस्ती; जानें अब कितना चल रहा रेट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/1600-रुपये-गिरा-सोने-का-भाव-चांदी-भी-हुई-सस्ती-जानें-अब-कितना-चल-रहा-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में 1,600 रुपये की गिरावट दर्ज की गई. इसके साथ ही अब कीमत 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है. यह लगातार चौथा सेशन है, जब सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई.
इसके पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कारक जिम्मेदार हैं. स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत बुधवार के 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव से 1,600 रुपये टूटकर 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई.&amp;nbsp;
चांदी भी हुई सस्ती
वहीं, चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई. पिछले लगातार दो दिन स्थिर रहने के बाद गुरुवार को चांदी 5,000 रुपये टूटकर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई. इससे एक दिन पहले यानी कि बुधवार को चांदी 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी. कारोबारियों ने कहा कि सोने में लगातार बिकवाली के कारण इसकी कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा.
व्यापारियों ने इस कमजोरी के लिए कमजोर वैश्विक संकेतों और ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली को जिम्मेदार ठहराया. चांदी पर अधिक असर पड़ने की वजह इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का होना है. औद्योगिक मांग से जुड़े होने के कारण इस पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे यह दिन के अंत में अपने पिछले बंद भाव से काफी नीचे रही. उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के 95.96 के स्तर तक गिरने से घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला, जिससे गिरावट की सीमा सीमित रही.&amp;nbsp;
...तो इसलिए गिरता जा रहा भाव
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी के अनुसार, कमजोर वैश्विक संकेतों और खुदरा मांग में कमी के बीच घरेलू सोने की कीमतों में गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि मजबूत डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी का असर कीमती धातुओं पर पड़ना जारी रहा. &amp;nbsp;
यह दबाव विदेशी बाजारों में भी समान रूप से देखा गया, जहां हाजिर सोना 33.74 डॉलर (लगभग एक प्रतिशत) टूटकर 4,253.61 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी 1.4 प्रतिशत टूटकर 63.56 डॉलर प्रति औंस रह गई. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी कीमती धातुओं के लिए एक और नकारात्मक कारक साबित हुआ.

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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>1600, रुपये, गिरा, सोने, का, भाव, चांदी, भी, हुई, सस्ती, जानें, अब, कितना, चल, रहा, रेट</media:keywords>
    </item>
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        <title>UPI पर चार्ज, अब क्या क्रेडिट डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ेगा सस्ता? NPCI ने बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-पर-चार्ज-अब-क्या-क्रेडिट-डेबिट-कार्ड-इस्तेमाल-करना-पड़ेगा-सस्ता-npci-ने-बताया</link>
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        <description><![CDATA[ UPI से पेमेंट वसूलने पर जो घमासान जारी है उसमें कई कस्टमर्स को समझ नहीं आ रहा है कि आगे वो कौनसा रास्ता अपनाएं. कस्टमर्स पूछ रहे हैं कि क्या यूपीआई का इस्तेमाल कम कर देना चाहिए या पहले की तरह क्रेडिट-डेबिट कार्ड से पेमेंट के ऑप्शन पर लौटा जाए. रोजाना के ट्रांजेक्शन्स यूपीआई से करने वाले कस्टमर्स सोच में हैं कि यूपीआई (Unified Payment Interface) को यूज करने से ज्यादा पैसे तो नहीं देने होंगे? यहां इसका जवाब आपको मिलेगा.
दरअसल अगले महीने यानी 15 अक्टूबर से कुछ यूपीआई में 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर 0.4 परसेंट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा. खास बात ये है कि जो कस्टमर्स आपस में एक दूसरे को पेमेट करेंगे उन पर ये MDR नहीं लगाया जाएगा. एमडीआर केवल पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) तक के पेमेंट पर लागू होगा.&amp;nbsp;
जानिए ये पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) क्या है-
जब ग्राहक किसी कारोबारी या दुकानदार को यूपीआई के जरिए ट्रांजेक्शन करते हैं तो ये पर्सन-टू-मर्चेंट पेमेंट (P2M) कहलाता है.
जो कस्टमर्स 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट किसी दुकान/मर्चेंट पर करेंगे तो इस पर 0.4 परसेंट MDR लगेगा.
पर्सन-2मर्चेंट (P2M) ट्रांजेक्शन&amp;nbsp;
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए इस कनफ्यूजन &amp;nbsp;(NPCI) को साफ किया है. इसने बताया है कि 0.4 परसेंट एमडीआर के बावजूद भी यूपीआई करना क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से ज्यादा सस्ता पड़ेगा. NPCI के मुताबिक यूपीआई पर नए MDR लगने के बाद भी ये डेबिट और क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स पर लगने वाले चार्ज से सस्ता है. आप भी समझें-
नियमित P2M ट्रांजेक्शन्स के लिए

रोजाना के आम ट्रांजेक्शन्स पर: कोई MDR नहीं
2000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजेक्शन्स पर : शून्य MDR
2000 रुपये से ऊपर के यूपीआई ट्रांजेक्शन्स पर : 0.4 परसेंट MDR
75,000 रुपये या इससे ऊपर के ट्रांजेक्शन पर: 300 रुपये MDR
छोटे दुकानदार या कारोबारियों पर कोई MDR नहीं लगेगा
स्ट्रीट वेंडर्स या अन्य छोटे बिजनेस करने वालों पर भी ये एमडीआर लागू नहीं होगा.

पेमेंट का तरीका और इसके बीच के फर्क को जानें

एनपीसीआई ने कहा है कि 10,000 रुपये के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर लगाने के बाद ये कीमत 40 रुपये होगी.
क्रेडिट कार्ड के जरिए पेमेंट करने से 2 परसेंट &amp;nbsp;के हिसाब से इस पर 200 रुपये का चार्ज लगेगा.
डेबिट कार्ड से भी 10,000 रुपये का पेमेंट करने पर 0.9 फीसदी चार्ज के हिसाब से 90 रुपये का चार्ज लगेगा.

सोर्स- NPCI पोस्ट&amp;nbsp;
NPCI पूरे भारत में रिटेल पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम को चलाने वाली कंपनी है.&amp;nbsp;
क्या UPI से पेमेंट करना महंगा होगा?
नहीं, ऐसा नहीं होगा क्योंकि ये मर्चेंट की तरफ आपस में दी जाने वाली प्रोसेसिंग फीस है और ग्राहकों को इस चार्ज को नहीं चुकाना होगा.
सरकार की तरफ से बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि दुकानदार इस एमडीआर के बोझ को ग्राहकों पर ना डालें. &amp;nbsp;
एनपीसीआई का कहना है कि रोजाना के यूपीआई पेमेंट्स पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा. 2000 रुपये तक के P2M ट्रांजेक्शन भी कोई एमडीआर नहीं लगेगा. इससे जनता पर कोई असर नहीं आएगा. ध्यान दें कि यूपीआई के कुल ट्रांजेक्शन्स में ऐसे रेगुलर पेमेंट का हिस्सा लगभग 96 परसेंट हैं. केवल दुकानदारों-कारोबारियों (मर्चेंट) को ही इस एमडीआर कॉस्ट को देना होगा. ग्राहकों पर इसकी वजह से वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा.
आसान भाषा में समझिए
अगर आप 10,000 रुपये का यूपीआई पेमेंट किसी मर्चेंट को करते हैं तो इस पर 0.4 परसेंट MDR के हिसाब से 40 रुपये का चार्ज बनेगा. वहीं 1 लाख रुपये का यूपीआई ट्रांजेक्शन करने पर 300 रुपये का ही अधिकतम एमडीआर लगेगा और इसे मर्चेंट को उठाना होगा.
1 अक्टूबर से ATM से पैसे निकालने पर लगेगा चार्ज, SBI ग्राहक ध्यान दें ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, पर, चार्ज, अब, क्या, क्रेडिट, डेबिट, कार्ड, इस्तेमाल, करना, पड़ेगा, सस्ता, NPCI, ने, बताया</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Air India Express का बड़ा तोहफा, टिकट पर 10% की छूट, ले जा सकेंगे 25 किलो सामान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/air-india-express-का-बड़ा-तोहफा-टिकट-पर-10-की-छूट-ले-जा-सकेंगे-25-किलो-सामान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/air-india-express-का-बड़ा-तोहफा-टिकट-पर-10-की-छूट-ले-जा-सकेंगे-25-किलो-सामान</guid>
        <description><![CDATA[ Air India Express ने इस त्योहारी सीजन में एक खास ऑफर निकाला है जिसमें यात्रियों को फ्लाइट टिकट पर डिस्काउंट और दूसरे कई बेनेफिट मिलने वाले हैं. ये खास ऑफर स्टूडेंट्स के लिए है और इसके तहत उन्हें घरेलू उड़ानों की टिकटों पर 10 परसेंट का डिस्काउंट मिलेगा. इसके अलावा उनको एक्स्ट्रा बैगेज ले जाने का मौका मिलेगा. साथ ही&amp;nbsp;ट्रैवल डेट चेंज करने का मौका बेहद कम कीमत में मिलेगा.&amp;nbsp;
ये ऑफर स्टूडेंट्स को 20 अक्टूबर 2026 तक के लिए मुहैया कराया जा रहा है. इसके लिए उन्हें एयरलाइन्स की ऑफिशियल बुकिंग वेबसाइट और इसके ऐप पर जाना होगा.
ऑफर में स्टूडेंट्स को क्या-क्या मिलेगा?
स्टूडेंट्स को इस शानदार ऑफर में फ्लाइट टिकट की वैल्यू पर 10 परसेंट डिस्काउंट मिलेगा. इस ऑफर में छात्रों को 25 किलो तक वजन वाले बैगेज को ले जाने की सुविधा मिलेगी, जो कि साधारण बुकिंग के दौरान केवल 15 किलो का मिलता है. इसका मतलब है कि स्टूडेंट्स को एक्स्ट्रा 10 किलो का बैगेज ले जाने का मौका मिलेगा.
जो स्टूडेंट्स सीधा एयरलाइन की वेबसाइट पर जाकर या मोबाइल ऐप के जरिए बुकिंग करेंगे उन्हें ही इस ऑफर के तहत अपनी ट्रैवल डेट चेंज करने का मौका मिलेगा. इसके लिए उन्हें केवल 99 रुपये का खर्च देना पड़ेगा.
एयरलाइन ने ये भी कहा है कि VIBES कोड के जरिए जो स्टूडेंट्स घरेलू या इंटरनेशनल फ्लाइट्स को बुक करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त 5 परसेंट का डिस्काउंट मिलेगा. हालांकि इसके ऊपर नियम व शर्तें लागू होंगी.&amp;nbsp;
कौन से स्टूडेंट्स ले सकते हैं इस ऑफर का फायदा-
स्टूडेंट्स की उम्र 12 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए और उनके पास वैलिड स्टूडेंट फोटो आईडी होनी चाहिए. ये आईडी किसी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान से होनी चाहिए.इस आई़डी पर स्टूडेंट का नाम और डेट ऑफ बर्थ साफ-साफ दिखना चाहिए. स्टूडेंट्स को इस आईडी को एयरपोर्ट पर चेक-इन के दौरान दिखाना पड़ेगा.
एयरइंडिया एक्सप्रेस के और ऑफर
एयरलाइंस कुछ अन्य ऑफर भी दे रही है जिसमें एलिजिबिल वीजा डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए फ्लाइट टिकट बुकिंग कराने पर 600 रुपये की छूट मिल सकती है. इसके लिए कस्टमर्स को VISAFLY कोड का यूज़ करना पड़ेगा और ये घरेलू और अंतर्राष्टीय उड़ानों पर लागू होता है. ये ऑफर 9 अक्टूबर 2026 तक के लिए लागू है.
एयरइंडिया एक्सप्रेस के मुताबिक ये एयरलाइन 48 घरेलू और 16 घरेलू डेस्टिनेशन्स को कनेक्ट करती है. इसके लिए एयरलाइन रोजाना 500 से ज्यादा फ्लाइट्स का संचालन करती है. इसके बेड़े में 100 बोइंग 737 और एयरबस A320 से ज्यादा एयरक्राफ्ट शामिल हैं.&amp;nbsp;
1 लाख की सैलरी में क्या खरीद सकते हैं 1 करोड़ का फ्लैट? लोन और EMI का गणित समझें ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Air, India, Express, का, बड़ा, तोहफा, टिकट, पर, 10, की, छूट, ले, जा, सकेंगे, किलो, सामान</media:keywords>
    </item>
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        <title>शेयर बाजार क्यों डूबा, निवेशकों को कितने हजार करोड़ का नुकसान हुआ?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शेयर-बाजार-क्यों-डूबा-निवेशकों-को-कितने-हजार-करोड़-का-नुकसान-हुआ</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/शेयर-बाजार-क्यों-डूबा-निवेशकों-को-कितने-हजार-करोड़-का-नुकसान-हुआ</guid>
        <description><![CDATA[ शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसी बिकवाली हुई कि निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया. आज तो देखते ही देखते लोगों को बड़ा झटका लगा है. सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 383.70 अंक टूटकर 23,063.10 पर आ गया. इस गिरावट में BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 4.33 लाख करोड़ रुपए घट गई है.
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर बाजार एक ही दिन में इतना क्यों टूट गया? इसके पीछे सिर्फ एक वजह तो नहीं हो सकती है. आइये स्टॉक मार्केट गिरने के पीछे के कारण को समझते हैं.&amp;nbsp;
सबसे बड़ी वजह क्या है?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही है. ये बढ़कर करीब 5.11 फीसदी तक पहुंच गई, जो करीब 19 साल का ऊंचा स्तर है. जब अमेरिका में सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो निवेशकों को वहां कम जोखिम वाले निवेश ज्यादा सही लगने लगते हैं. ऐसे में शेयर बाजार जैसे ज्यादा जोखिम वाले एसेट से पैसा निकल सकता है. इसका असर भारत के बाजार पर भी पड़ता है.
फेट रेट भी है वजह?
दूसरी बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दर बढ़ना भी हो सकती है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने यह चिंता बढ़ाई है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए US फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या आगे बढ़ा सकता है.
अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो वहां निवेश ज्यादा हो सकता है. इसका मतलब ये भी है कि विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयर बाजार में आने वाला पैसा कम हो सकता है.&amp;nbsp;
कच्चा तेल है तीसरी वजह?
बाजार के लिए तीसरी बड़ी चिंता क्रूड ऑयल है. बेंट क्रूड की कीमत फिर से 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल, रुपए, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
डॉलर और रुपए से भी बढ़ा दबाव?
तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच डॉलर भी मजबूत हुआ है. इससे उभरते बाजारों की करेंसी और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है. भारत के लिए कमजोर रुपया खास तौर पर चिंता की बात है क्योंकि महंगे डॉलर की वजह से कच्चे तेल और दूसरी जरूरी चीजों का इंपोर्ट महंगा पड़ सकता है. यही वजह है कि बाजार के निवेशक इस समय ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं.&amp;nbsp;
बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली
गिरावट सिर्फ आईटी या किसी एक सेक्टर में नहीं रही है. बैंकिंग और फाइनेंसियल सर्विसेस स्टॉक पर दबाव देखने को मिला है. बजाज फाइनेंस, एक्सिक बैंक और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों में तेज गिरावट आई है, वहीं इसके अलावा इंश्योरेंस सेक्टर भी दबाव में दिखा. IRDAI की प्रस्तावित नए कमीशन कैप को लेकर बाजार में चिंता बनी रही जिससे कुछ इंश्योरेंस और फाइनेंसियल स्टॉक पर भी दबाव देखने को मिला है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शेयर, बाजार, क्यों, डूबा, निवेशकों, को, कितने, हजार, करोड़, का, नुकसान, हुआ</media:keywords>
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        <title>क्या सरकारी बैंक वाले केंद्रीय कर्मचारी होते हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिन की हड़ताल बुलाई है. इस दौरान ऑनलाइन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी, लेकिन बैंकों की शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहेगा. हड़ताल की वजह से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में देरी न हो, इसके लिए वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को 25 सितंबर तक ही भुगतान खातों में भेजने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले के बाद एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या सरकारी बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी भी केंद्रीय कर्मचारी माने जाते हैं. जानिए इसका सही जवाब क्या है.
दरअसल भारत में सरकारी कर्मचारियों को मुख्य रूप से दो तरीकों से बांटा जाता है. पहले यह कि वह किस सरकार या संस्थान के अधीन काम करते हैं, फिर पद के स्तर यानी ग्रुप के हिसाब से.&amp;nbsp;
सरकार-संस्थान की श्रेणी में कौन आते हैं?



श्रेणी
कौन आते हैं
उदाहरण


केंद्रीय सरकारी कर्मचारी
केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग, अटैच्ड या सबऑर्डिनेट ऑफिस


आईएएस-आईपीएस, आयकर, रेलवे (रेलवे बोर्ड के तहत), डाक, रक्षा नागरिक कर्मचारी




राज्य सरकारी कर्मचारी
राज्य सरकार के विभाग
पीसीएस, राज्य पुलिस, राज्य शिक्षा, राज्य स्वास्थ्य


स्थानीय निकाय कर्मचारी
नगर निगम, पंचायत और नगर पालिका
नगर निगम क्लर्क, सफाईकर्मी, नगरपालिका इंजीनियर


पब्लिक सेक्टर (पीएसयू-पीएसबी) कर्मचारी
सरकार की बहुमत हिस्सेदारी वाली कंपनियां या बैंक
एसबीआई, पीएनबी, ओएनजीसी, बीएचईएल, एलआईसी, रेलवे पीएसयू


स्वायत्त संस्था / संवैधानिक निकाय
सरकार से जुड़े, लेकिन स्वतंत्र निकाय
यूपीएससी, चुनाव आयोग, आरबीआई, विश्वविद्यालय, आईआईटी/एम्स के कुछ पद



पिछली बात के हिसाब से &amp;nbsp;पब्लिक बैंक कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारी नहीं, बल्कि पब्लिक सेक्टर बैंक कर्मचारी हैं. केंद्र और ज्यादातर राज्यों में पदों को ग्रुप ए, बी, सी में बांटा जाता है. पुराना ग्रुप डी अब ज्यादातर ग्रुप सी में मिला दिया गया है.
ग्रुप ए में कौन-कौन शामिल?
ग्रुप ए की &amp;nbsp;श्रेणी में सबसे ऊपरी स्तर पर नीति बनाने, प्रशासन और नेतृत्व वाले पद आते हैं. यानी ज्यादातर गजेटेड अधिकारी. जैसे- आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस, इसरो या डीआरडीओ के वैज्ञानिक, केंद्रीय अस्पताल के डॉक्टर.
ग्रुप बी में कौन-कौन शामिल?
ग्रुप बी में मिड-लेवल यानी नीति लागू करवाना, सुपरविजन, कुछ गजेटेड और कुछ नॉन-गजेटेड अधिकारी शामिल होते हैं. जैसे- सेक्शन ऑफिसर, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, जूनियर इंजीनियर, डीएसपी (राज्य), कुछ शिक्षक पद.
ग्रुप सी में कौन-कौन शामिल? &amp;nbsp;
इस ग्रुप में सबसे बड़ी संख्या क्लर्क, ऑपरेशनल और सपोर्ट स्टॉफ की होती है. जैसे- एलडीसी और यूडीसी, स्टेनो, कांस्टेबल, टैक्स असिस्टेंट, तकनीशियन और बैंक क्लर्क.
ग्रुप डी में कौन-कौन शामिल?&amp;nbsp;
ग्रुप डी अब लगभग खत्म कर दिया गया है. इस ग्रुप में चपरासी, सफाईकर्मी, माली, ड्राइवर जैसे छोटे पद वाले लोग आते हैं. बता दें कि अब नई भर्ती ज्यादातर ग्रुप सी में या आउटसोर्स होते हैं.
दो छोटे, लेकिन जरूरी विभाजन
गजेटेड बनाम नॉन-गजेटेड &amp;nbsp;

गजेटेड- नियुक्ति गजट में छपती है, कुछ कानूनी अधिकार होते हैं (ग्रुप ए और कुछ ग्रुप बी). &amp;nbsp;
नॉन-गजेटेड- बाकी ज्यादातर ग्रुप बी और पूरा ग्रुप सी.

स्थायी बनाम अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट &amp;nbsp;

स्थायी- सरकारी कर्मचारी. &amp;nbsp;
कॉन्ट्रैक्ट- आउटसोर्स, दैनिक वेतन भोगी.&amp;nbsp;

ये लोग सरकारी दफ्तर में काम तो करते हैं, लेकिन वही सेवा नियम और पेंशन नहीं मिलती.
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों की बल्ले&amp;बल्ले, एरियर के मिलेंगे 18 लाख रुपए</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बड़ी ही बेसब्री ले इंतजार है. कर्मचारियों की कई सारी मांगे हैं और अब अंत में यही देखना होगा कि उनकी कितनी मांगे मानी जाती हैं और कितनी नहीं. इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा में यदि कुछ है तो वो है फिटमेंट फैक्टर. क्योंकि इसी के जरिए बेसिक सैलरी, DA और एरियर्स तय किया जाता है.
हालांकि फिलहाल फिटमेंट फैक्टर कितना रहेगा इस पर कोई अपडेट नहीं आया है. लेकिन कई कर्मचारी संघों ने मांग की है कि फिटमेंट फैक्टर 2.57 दिया जाए. लेकिन यदि ये मांग मान ली जाती है तो इसके मुताबिक लेवल 8 के कर्मचारियों को कितना एरियर्स मिलेगा?
कितना बनेगा लेवल-8 कर्मचारियों का एरियर?यदि एरियर कैल्कुलेटर में चेक करें तो 2.57 फिटमेंट फैक्टर से लेवल 8 के केंद्रीय कर्मचारियों को करीब 18 लाख रुपये तक का एरियर मिल सकता है. वो ऐसे कि, रिपोर्ट लागू होने में यदि 20-24 महीने का वक्त लगता है तो मौजूदा 47,600 की बेसिक सैलरी बढ़कर 1,22,332 रुपये हो जाएगी. इन-हैंड सैलरी 74,732 रुपये होगी. अगर इसे लागू करने में 24 महीने का समय लगता है तो एरियर अपने आप 17,93,568 रुपये का बन जाएगा.
अलग- अलग फिटमेंट फैक्टर पर कितना एरियर मिलेगा?



फिटमेंट फैक्टर
कितना बनेगा एरियर


2.15
13,13,760 रुपये&amp;nbsp;


2.28
14,62,272 रुपये



क्या होता है एरियर?एरियर वो रुका हुआ पैसा होता है जो किसी भी कारण से आने में देरी हो जाती है. इस देरी के कारण वो पैसा सारा एक साथ कर्मतारी के खाते में आ जाता है. ऐसे में 8वें वेतन आयोग में जितनी देरी होगी एरियर उतना ज्यादा बढ़ता जाएगा.
बैठकों का दौर है जारीबता दें कि 8वें वेतन आयोग की फिलहाल बैठकें चल रही हैं. सितंबर में जयपुर, चेन्नई, पुडुचेरी के साथ-साथ चंडीगढ़ में आयोग ने कुछ अहम बैठकें की हैं. तो वहीं अब अक्टूबर में भी कई अपनी अहम बैठकें होंगी. आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था, जिसके बाद सरकार ने रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त दिया था. जिसके तहत मई 2027 तक आयोग को रिपोर्ट सौंपनी है. फिलहाल बैठकों का दौर अभी जारी है और सभी को इन रिपोर्ट्स क बेसब्री से इंतजार है.
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>2026 में कौन है भारत का सबसे बड़ा रईस? 27 लोग बने नए अरबपति</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/2026-में-कौन-है-भारत-का-सबसे-बड़ा-रईस-27-लोग-बने-नए-अरबपति</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के बड़े बिजनेसमैन या सबसे रईस शख्स का नाम लेते ही अंबानी और अडानी जैसे नाम खुद-ब-खुद जुबान पर आ जाते हैं. लेकिन इन दोनों में से या भारत के सबसे रईस लोगों की लिस्ट में और भी बहुत सारे नाम आते हैं. हाल ही में इसकी एक लिस्ट सामने आई है, जिसमें भारत के टॉप 27 रईसों के नाम लिखे हैं.
M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 के मुताबिक, भारत के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में गौतम अडानी और उनका परिवार एक बार फिर पहले नंबर पर पहुंच गया है. इस लिस्ट के मुताबिक अडानी परिवार की कुल संपत्ति करीब 9.23 लाख करोड़ रुपये है.
अंबानी को पछाड़कर अडानी आए आगेपिछले साल इस लिस्ट में मुकेश अंबानी और उनका परिवार पहले नंबर पर था. इस साल अंबानी परिवार की संपत्ति घटकर करीब 8.63 लाख करोड़ रुपये रह गई. वहीं, अडानी परिवार की संपत्ति में पिछले साल के मुकाबले करीब 13% की बढ़ोतरी हुई है.
टॉप 10 अरबपतियों की लिस्ट

गौतम अडानी और परिवार
मुकेश अंबानी और परिवार
एलएन मित्तल और परिवार
साइरस पूनावाला और परिवार
रोशनी नाडर मल्होत्रा और परिवार&amp;nbsp;
कुमार मंगलम बिड़ला और परिवार
दिलीप सांघवी और परिवार
अजीम प्रेमजी और परिवार
अनिल अग्रवाल और परिवार
समीर मेहता और परिवार

देश में बढ़ी अरबपतियों की संख्याइस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब 1 अरब डॉलर यानी करीब 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति वाले 391 अरबपति हैं. पिछले एक साल में ऐसे अरबपतियों की लिस्ट में 27 नाम और जुड़ गए हैं. पांच साल पहले भारत में 237 डॉलर अरबपति थे. यानी इस दौरान इनकी संख्या काफी बढ़ी है.
कैसे बढ़ी सम्पत्ति?इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि अब सिर्फ पारंपरिक कारोबार ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डाटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों से भी बड़ी सम्पत्ति बन रही है. AI से जुड़े 19 लोगों को इस साल की लिस्ट में शामिल किया गया है. इनमें 15 लोग पहली बार इस लिस्ट में आए हैं. इसके अलावा डिफेंस, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी नए अमीर कारोबारी तेजी से बढ़े हैं.
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>2026, में, कौन, है, भारत, का, सबसे, बड़ा, रईस, लोग, बने, नए, अरबपति</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG सिलेंडर की किल्लत अब नहीं होगी, सरकार ने बढ़ाया गैस का उत्पादन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-सिलेंडर-की-किल्लत-अब-नहीं-होगी-सरकार-ने-बढ़ाया-गैस-का-उत्पादन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-सिलेंडर-की-किल्लत-अब-नहीं-होगी-सरकार-ने-बढ़ाया-गैस-का-उत्पादन</guid>
        <description><![CDATA[ त्यौहारों का मौसम आते ही रसोई गैस यानी LPG की डिमांड काफी बढ़ जाती है. इसी को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने इस त्यौहारी सीजन में इसकी तैयारी कर ली है. दरअसल सरकारी तेल कंपनियों ने LPG का घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया है. ये कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पर्शियन गल्फ में चल रहे संघर्ष के कारण LPG की सप्लाई प्रभावित हो रही है.
सूत्रों की मानें तो, सरकारी रिफाइनरियां इस समय हर रोज करीब 44,000 टन LPG का उत्पादन कर रही हैं. ये अगस्त के औसत उत्पादन से करीब 20 फीसदी ज्यादा है.
क्यों बढ़ रही LPG की मांग?सरकार ने मार्च में ग्रामीण परिवारों के लिए LPG सिलेंडर दोबारा भरवाने की अवधि बढ़ाकर 45 दिन कर दी थी. अब सप्लाई की स्थिति बेहतर होने के बाद इसे घटाकर 25 दिन कर दिया गया है. इसके साथ ही देश में त्यौहारी सीजन शुरू हो गया है, जो नवंबर में दीपावली तक चलेगा. इस दौरान घरों में खाना पकाने और दूसरे घरेलू कामों के लिए LPG की मांग बढ़ती है.
भारत है दुनिया का सबसे बड़ा आयातकभारत ने स्थिति से निपटने के लिए घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया था. बाद में अमेरिका और अफ्रीका से LPG की आने लगी और ओमान के सोहर बंदरगाह से भी सप्लाई शुरू हुई, तो घरेलू उत्पादन कुछ कम कर दिया गया था. अब मांग बढ़ने के कारण उत्पादन फिर से बढ़ा दिया गया है.
भारत दुनिया में LPG का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है. पहले भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा का LPG पर्शियन गल्फ कंट्रीज से मंगाता था. इस वजह से वहां संघर्ष शुरू होने पर भारत की सप्लाई पर भी असर पड़ा.
कम ही है मांगहालांकि इस साल LPG की कुल मांग पिछले साल की अपेक्षा थोड़ी कम है. पिछले साल इसी समय के मुकाबले इस बार मांग करीब 10% कम है. इसकी एक बड़ी वजह ये है कि युद्ध के दौरान उद्योगों की LPG मांग में जो कमी आई थी, वो अभी पूरी तरह वापस नहीं आई है. उस समय सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की सप्लाई को प्राथमिकता दी थी. सर्दियों में भी आमतौर पर LPG की खपत बढ़ती है. ऐसे में आने वाले समय में सरकारी कंपनियों को घरेलू उत्पादन और बढ़ाना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>त्योहार से पहले राहत! खाने के तेल पर सरकार ने घटाया आयात शुल्क</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/त्योहार-से-पहले-राहत-खाने-के-तेल-पर-सरकार-ने-घटाया-आयात-शुल्क</link>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों के मौसम से पहले सरकार ने खाने के तेल को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने कुछ खाद्य तेलों पर लगने वाला आयात शुल्क यानी बाहर से तेल मंगाने पर लगने वाला टैक्स कम कर दिया है. नई दरें 24 सितंबर 2026 से लागू होंगी.
सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में खाने के तेल की कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
खाने के तेल पर कितना घटा टैक्स?
सरकार ने अलग-अलग खाने के तेल पर आयात शुल्क में कटौती की है. यहां देखें लिस्ट:

क्रूड सोयाबीन ऑयल: 10% से घटकर 5%
क्रूड पाम ऑयल: 10% से घटकर 5%
रिफाइंड सोयाबीन ऑयल: 32.5% से घटकर 27.5%
रिफाइंड पाम ऑयल: 32.5% से घटकर 27.5%
क्रूड सनफ्लावर ऑयल: 10% से घटकर शून्य
रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल: 32.5% से घटकर 22.5%

नई दरें 24 सितंबर 2026 से लागू होंगी.
कच्चे और रिफाइंड तेल पर क्या असर होगा?
भारत में कच्चे खाद्य तेल पर पहले 10 फीसदी और रिफाइंड तेल पर 32.5 फीसदी मूल आयात शुल्क था. अब शुल्क कम होने से विदेश से तेल मंगाने की लागत घट सकती है. इसका फायदा आगे चलकर बाजार में भी दिख सकता है.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 24 सितंबर से ही दुकानों पर तेल सस्ता हो जाएगा. तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत और कंपनियों के पास मौजूद पुराने स्टॉक जैसी कई चीजों पर निर्भर करती है.
त्योहार से पहले क्यों लिया फैसला?
त्योहारों के समय खाने के तेल की मांग बढ़ जाती है. मिठाई, नमकीन और दूसरी तली हुई चीजों की बिक्री बढ़ने से तेल की खपत भी ज्यादा होती है. ऐसे समय में सरकार ने आयात शुल्क घटाकर बाहर से तेल मंगाना थोड़ा सस्ता करने और बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की है.
भारत को विदेश से क्यों मंगाना पड़ता है तेल?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाद्य तेल विदेशों से खरीदता है. पाम तेल मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से आता है. वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की भी बड़ी मात्रा दूसरे देशों से आयात की जाती है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा या सस्ता होने का असर भारत में भी दिखाई देता है.
क्या अब खाने का तेल सस्ता होगा?
इसकी उम्मीद है &amp;nbsp;लेकिन यह पक्का नहीं है.आयात शुल्क कम होने से कंपनियों का खर्च घट सकता है और इससे तेल की कीमतों में कमी की गुंजाइश बन सकती है लेकिन अगर इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया तो शुल्क में कमी का फायदा कम हो सकता है. इसके अलावा कंपनियों के पास पहले से मौजूद पुराने स्टॉक पर भी नई दर का असर तुरंत नहीं आता. इसलिए बाजार में कीमत घटने में कुछ समय लग सकता है.
किसानों पर भी पड़ेगा असर
सरकार को तेल की कीमत कम करने के साथ किसानों का भी ध्यान रखना होगा. अगर विदेश से तेल सस्ता आएगा तो घरेलू तेल और तिलहन की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. इसका असर सोयाबीन और दूसरे तिलहन किसानों पर हो सकता है. इसलिए सरकार के सामने उपभोक्ताओं को सस्ता तेल देने और किसानों को उचित कीमत दिलाने के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है.
पहले भी बदला गया था आयात शुल्क
सरकार ने सितंबर 2024 में घरेलू किसानों को राहत देने के लिए खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाया था. इसके बाद मई 2025 में कच्चे खाद्य तेल पर शुल्क कम किया गया था.&amp;nbsp;अब सितंबर 2026 में सरकार ने एक बार फिर कुछ श्रेणियों में आयात शुल्क घटाया है.
आम आदमी के लिए क्या मतलब?
सीधी बात यह है कि सरकार ने त्योहारों से पहले विदेश से खाने का तेल मंगाने पर लगने वाला टैक्स कम किया है. इससे तेल कंपनियों की लागत घट सकती है और आगे चलकर इसका कुछ फायदा ग्राहकों को मिल सकता है &amp;nbsp;लेकिन तेल वास्तव में कितना सस्ता होगा &amp;nbsp;यह अंतरराष्ट्रीय बाजार और देश के घरेलू बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>रविवार को भी खुलेंगे बैंक, हड़ताल से पहले सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक यूनियनों की ओर से तीन दिन की बैंक हड़ताल के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. वित्त मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए रविवार 27 सितंबर को सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को खुला रखने का निर्देश दिया है.
बता दें कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की तरफ से 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुलाई गई है. इसे देखते हुए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 27 सितंबर 2026 (रविवार) को सभी पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को आम दिनों की तरह सामान्य रूप से खुले रखने का बड़ा फैसला लिया है.

An Important Update!All PNB branches will remain open on Sunday, 27 September 2026, for the convenience of customers.@RBI @DFS_India @FinMinIndia #PNB #PunjabNationalBank #BankingUpdate #CustomerConvenience #BankingServices pic.twitter.com/sLrOVkcXOj
&amp;mdash; Punjab National Bank (@pnbindia) September 23, 2026



क्यों लिया गया यह फैसला?
मंगलवार को डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर के सामने हुई यह सुलह बैठक को कोई ठोस नतीजा नहीं निकला और यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने हड़ताल पर आगे बढ़ने का फैसला किया. इसके चलते सरकार को रविवार को बैंक खोलने का यह आपातकालीन कदम उठाना पड़ा.
वित्त मंत्रालय ने 23 सितंबर को एक बयान में कहा कि यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की प्रस्तावित हड़ताल 26 और 27 सितंबर की सप्ताहांत की छुट्टियों के बाद हो रही है. ऐसे में अगर रविवार को बैंक नहीं खुले, तो इससे ग्राहकों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. बता दें कि 26 सितंबर को चौथा शनिवार होने के चलते बैंक बंद रहेंगे और 27 सितंबर को रविवार की छुट्टी रहेगी. यानी कि तीन दिवसीय हड़ताल से पहले बैंक दो और दिन बंद रहेंगे यानी कि कुल मिलाकर 5 दिन बैंक का कामकाज ठप रहेगा.
सोमवार से हड़ताल पर जा रहे कर्मचारी
मंत्रालय ने कहा, &quot;यह सुनिश्चित करने के लिए कि आम लोगों की बैंकिंग से जुड़ी जरूरी जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों, सभी पब्लिक सेक्टर बैंक और रीजनल रूरल बैंक रविवार, 27 सितंबर, 2026 को सामान्य रूप से काम करेंगे.&quot; इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सोमवार से शुरू होने वाली प्रस्तावित हड़ताल से पहले ग्राहकों को जरूरी बैंकिंग सेवाएं मिल सकें. मंत्रालय ने कहा कि सरकार और बैंक मैनेजमेंट ने भी यूनियनों से हड़ताल टालने की अपील की है.
RBI ने दी मंजूरी
रविवार को बैंक खुले रखने के वित्त मंत्रालय के फैसले को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी मंजूरी दी है. RBI की मंज़ूरी में सिर्फ रेगुलर बैंक ब्रांच ही नहीं, बल्कि ऑफिस, ATM-लिंक ब्रांच और करेंसी चेस्ट भी शामिल हैं, जो सामान्य दिनों की तरह चालू रहेंगे. मंत्रालय का कहना है, &quot;बैंक ग्राहकों का कल्याण और सुविधा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.&quot; प्रस्तावित हड़ताल 28 सितंबर से 30 सितंबर तक यानी तीन दिनों के लिए होनी है. पब्लिक सेक्टर के बैंकों और रीजनल रूरल बैंकों के लिए रविवार को वर्किंग डे घोषित किए जाने से ग्राहकों को हड़ताल से पहले ब्रांच-बेस्ड बैंकिंग ट्रांजैक्शन करने का मौका मिलेगा.

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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रविवार, को, भी, खुलेंगे, बैंक, हड़ताल, से, पहले, सरकार, का, बड़ा, फैसला</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Rate Today: छठ&amp;दीवाली से पहले संभले सोने के दाम, 2 दिनों की गिरावट के बाद आज फिर चमका गोल्ड</title>
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        <description><![CDATA[ आज 23 सितंबर, 2026 को देश में पिछले दो दिनों से जारी गिरावट पर आखिरकार ब्रेक लग लग गया. आज 24-कैरेट सोने की कीमत में प्रति 100 ग्राम 8,700 रुपये और प्रति 10 ग्राम 870 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, पिछले दो दिनों में प्रति 100 ग्राम सोने की कीमत में 25,100 रुपये और प्रति 10 ग्राम 2,510 रुपये की गिरावट आई थी.&amp;nbsp;
क्यों अचानक बढ़ गए सोने के दाम?
पिछले दो दिनों में सोने की कीमतों में आई 25,100 की भारी गिरावट के चलते निवेशकों और स्थानीय ज्वैलर्स ने निचले स्तरों पर ताबड़तोड़ खरीदारी की. चूंकि सामने शादियों का सीजन है और कई त्योहार भी आने वाले हैं, ऐसे में सोने की कीमतों में गिरावट से लोगों को इसमें निवेश का शानदार मौका मिला, जिससे निचले रेट पर आज सुबह से ही हाजिर मांग काफी बढ़ गई, जिससे घरेलू कीमतों को तुरंत सपोर्ट मिला और भाव उछल गए.
चीन भी है जिम्मेदार
चीन दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और चीन के केंद्रीय बैंक (PBOC) और वहां के खुदरा निवेशकों की तरफ से सोने की मांग रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने इस साल अगस्त तक 1,000 टन से भी ज्यादा सोने का आयात किया है. यह पिछले साल खरीदे गए सोने के मुकाबले काफी ज्यादा है. इस ग्लोबल डिमांड के चलते आज भारतीय बाजारों में भी सोने के दाम बढ़ गए.&amp;nbsp;
आज सोने की कीमत
आज 100 ग्राम 24-कैरेट सोने की कीमत15,42,000 रुपये है, जो कल के मुकाबले 8700 रुपये ज्यादा है. वहीं, प्रति 10 ग्राम कीमत 870 रुपये बढ़कर 1,54,200 रुपये हो गई है.
इसी तरह से 22-कैरेट सोने की कीमत प्रति 100 ग्राम 8,000 रुपये बढ़कर 14,13,500 और प्रति 10 ग्राम 800 रुपये बढ़कर 1,41,300 हो गई है.
18 कैरेट सोने की कीमत में भी प्रति 100 ग्राम कल के मुकाबले 6,500 रुपये की तेजी आई है और आज इसकी कीमत 11,56,500 रुपये है. वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम &amp;nbsp;यह650 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 1,15,650 रुपये पर पहुंच गई है. यह इस हफ्ते सोने की कीमतों में आई पहली तेजी है.&amp;nbsp;
आज चांदी की कीमत
आज 23 सितंबर 2026 को चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, आज चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 2,366 रुपये बढ़कर 2,35,000 (2.35 लाख रुपये) पर पहुंच गई है. वहीं, अगर रिटेल मार्केट की बात करें, तो आज 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत लगभग 2,500 प्रति 10 ग्राम यानी कि 2,50,000 प्रति किलो के स्तर पर हैं.

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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Rate, Today:, छठ-दीवाली, से, पहले, संभले, सोने, के, दाम, दिनों, की, गिरावट, के, बाद, आज, फिर, चमका, गोल्ड</media:keywords>
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        <title>20 साल के निचले स्तर पर गिरे हीरों के दाम, फिर भी क्यों सस्ते नहीं हो रहे डायमंड के गहने?</title>
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        <description><![CDATA[ हीरों कि कीमत में अब इतनी गिरावट आ गई है कि अब डायमंड रिंग और नेकलेस खरीदना बजट में रह सकता है. लेकिन जब ग्राहक दुकान पर पहुंचते है तब बिल देखकर तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. हीरों की थोक कीमतें 2021 के अपने उच्च स्तर से करीब 30-40 प्रतिशत नीचे गिर चुकी हैं. बाजार में कमजोर मांग, बढ़ते स्टाक डायमंड कि बढ़ती उपलब्धता ने प्राकृतिक हीरों कि कीमतों के ऊपर दबाव बनाया है.&amp;nbsp;
डि बीरस कि हीरा उद्योग की बढ़ी कंपनी भी इस आंकड़े को दिखाते है. साल 2026 कि शुरुआत में कंपनी की औसत रफ डायमंड बिक्री कीमत सालाना आधार पर 32 प्रतिशित घटकर 105 डॅालर प्रति कैरेट रह गई. वहीं दूसरी ओर उसका औसत रफ डायमंड प्राइस इंडेक्स भी 16 प्रतिशत नीचे आ गया.&amp;nbsp;फिर ज्वेलरी का बिल कम क्यों नहीं हुआइसका कारण केवल यह है कि ज्वेलरी कि कीमत केवल हीरे से तय नहीं की जाती. किसी रंग या नेकलेस की कीमत में डायमंड के अलावा सोना या प्लेटिनम, डिजाइन ,मेकिंग और दूसरे रिटेल खर्च भी शामिल रहते हैं. भारत में सोने की ऊंची कीमत इस अंतर को और भी ज्यादा बढ़ा रही है. वर्लड गोल्ड काउंसल के अनुसार अगस्त साल 2026 में सोने की&amp;nbsp; कीमत 12 प्रतिशत बढ़कर 1,58,854 प्रति ग्राम हो गई थी. सितंबर के महीने में इसमें कुछ गिरावट देखने को मिली लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.&amp;nbsp;
यानी कि अगर ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाले डायमंड की कीमत घटती भी है, तो महंगे सोने और अन्य खर्चो के कारण पूरी ज्वेलरी कि कीमत उसी अनुपात में कम हो यह जरूरी नहीं हैं.&amp;nbsp;
हर डायमंड की कीमत में एक जैसी गिरावट नहीं
डायमंड मार्केट में भी सभी पत्थरों की कीमत समान गति से नहीं बदली है. बड़े और बेहतर क्वालिटी वाले प्राकृतिक हीरों की मांग मजबूत बनी हुई है,जबकि छोटे और कम क्वालिटी वाले डायमंड्स पर हीरों का दबाव ज्यादा है.&amp;nbsp;
इसलिए किसी ग्राहक को मिलने वाला फायदा इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह किस आकार, रंग, क्लैरिटी और ग्रेड का हीरा खरीद रहा है.
लेब- ग्रोन डायमंड ने बदला पूरा बाजार
लैब में तैयार किए जाने वाले डायमंड ने भी प्राकृतिक हीरों के बाजार को प्रभावित किया है. खासकर छोटे और कम कीमत वाले प्राकृतिक हीरों को इनसे कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. डि बीरस ने भी 2026 में लो-वैल्यू नेचुरल डायमंड्स पर सिंथेटिक डायमंड के दबाव की बात कही है.
भारत पर भी पड़ा असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग केंद्रों में शामिल है. GJEPC के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कट और पॉलिश किए गए डायमंड का निर्यात 12.16 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 8.52 प्रतिशत कम था. वैश्विक इन्वेंट्री में सुधार, कमजोर खर्च और दूसरे लग्जरी विकल्पों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसके प्रमुख कारणों में शामिल रहे.
यानी आसान भाषा में समझें तो कच्चे या ढीले हीरे की कीमत में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन ज्वेलरी की अंतिम कीमत सिर्फ डायमंड पर निर्भर नहीं करती. महंगा सोना, डिजाइन, मेकिंग और अन्य खर्च मिलकर ग्राहक का अंतिम बिल तय करते हैं.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साल, के, निचले, स्तर, पर, गिरे, हीरों, के, दाम, फिर, भी, क्यों, सस्ते, नहीं, हो, रहे, डायमंड, के, गहने</media:keywords>
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    <item>
        <title>प्याज 80 पार, नींबू 700 तो धनिया 350 किलो, सब्जियों के दाम छू रहे आसमान</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही राजधानी दिल्ली समेत देश भर में एक बार फिर से सब्जियों के दाम बढ़ने लगे हैं. बीते एक महीने में ही सब्जियों की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक कि बढ़ोतरी हो गयी है, वहीं फलों की कीमतें आसमान छूती नजर आ रही हैं जिसका सीधा और सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर पड़ रहा है और लोगों को जहां सब्जियों-फलों की खरीदारी में राशनिंग करनी पड़ रही है तो वहीं, दूसरी तरफ अन्य खर्चो में भी कटौती करने को मजबूर होना पड़ रहा है.
आलू-प्याज की कीमतें भी बढ़ी
सब्जियों की लगातार बढ़ रही कीमतें इस मौसम में भी दिल्ली वालों के माथे पर पसीना निकाल रही हैं. आलम यह है कि, हर दिन घरों में इस्तेमाल होने वाले आलू-प्याज की कीमतें भी बीते समय से ऊंची कीमतों पर बिक रही है. वहीं हरी सब्जियों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है. अगर औसत की बात करें तो सभी सब्जियों की कीमतें लगभग डेढ़ से दोगुने तक बढ़ गयी हैं.
मंडियों में ये रही सब्जियों की कीमतें
सब्जियों की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर जब एबीपी लाईव की टीम ने सब्जी विक्रेताओं से बात की तो उन्होंने बताया कि, खुदरे बाजार में टमाटर 40 से 60 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिक रही है, वहीं, कुछ दिनों पहले तक 30-40 रुपये किलो बिक रही प्याज की कीमत बढ़कर 80 प्रति किलो तक पहुंच गई है.अदरक और लहसुन के दाम भी खूब चढ़े हुए हैं. अदरक 240 प्रति किलों के आस-पास बिक रहा है.अन्य हरी सब्जियां भिंडी, खीरा और टिंडा जैसी सब्जियों के थोक और खुदरा भाव में भी भारी तेजी देखने को मिल रही है.
बात करें थोक और खुदरा दरों की तो, 12 रुपये किलो की दर से थोक में बिक रहा आलू खुदरा बाजारों में पहुंचते-पहुंचते 20 रुपये किलो तक पहुंच रहा है. 36-45 रुपये किलो थोक में बिक रहा प्याज खुदरा में 75-80 रुपये किलो मिल रहा है. टमाटर थोक में 23-25 जबकि खुदरा में 40-60, &amp;nbsp;बिन्स थोक में 28 और खुदरा बाजार में 50 से 60, थोक भाव में 20 रुपये किलो बिकने वाला बैंगन खुदरा में 40 से 60, पत्ता गोभी 15 रुपये थोक और खुदरा में 40, थोक में 30 की मिल रही फूलगोभी 60-80 रुपये किलो की दर से बिक रहा है.
मंडी विक्रेताओं की मानें तो, महंगाई के मुख्य कारण खराब मौसम और बारिश हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा और सप्लाई बाधित हुई है. मंडियों में हरी सब्जियों की आवक कम होने से कीमतों में यह उछाल आया है. सम्भव है कि, त्योहारों में मांग बढ़ने पर आने वाले दिनों में कीमतों में और इजाफा देखने को मिल सकता है.
बाजार में आज कोई भी सब्जी सस्ती नहीं
खरीदारी करने पहुंचे महिलाओं का कहना है कि बाजार में आज कोई भी ऐसी सब्जी नहीं हैं, जिसके दर समान्य हो. सीजनल गोभी आने लगे हैं, बावजूद उसके, अभी भी गोभी के दाम 60 से 80 रुपए किली तक बने हुए है. जबकि, सरसो एवं पालक के साग 100 रुपए किलो से ऊपर बिक रहे है. वहीं, नींबू की कीमत आसमान पर पहुंचते हुए 500 से 700 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिक रहा है. हरी धनिया का पत्ता 350 रुपए किलो है. सब्जियों की ये बढ़ी कीमतें उनके घर का बजट बिगाड़ रही हैं.
छठ-दीवाली से पहले संभले सोने के दाम, 2 दिनों की गिरावट के बाद आज फिर चमका गोल्ड
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>प्याज, पार, नींबू, 700, तो, धनिया, 350, किलो, सब्जियों, के, दाम, छू, रहे, आसमान</media:keywords>
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        <title>सरकार तय नहीं कर सकती चीनी का भाव, बढ़ती कीमतों पर बोले नितिन गडकरी</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी के पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ रहे थे, जिसे लेकर जनता से विपक्ष तक सरकार को इसका जिम्मेदार ठहरा रहे थे. हालांकि अब जाकर चीनी की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. जिसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार का बचाव किया है. उन्होंने साफ कह दिया है कि सरकार चीनी के दाम तय नहीं करती है.
दरअसल हाल ही में केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ लिमिटेड (NFCSF) के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान वहां मौजूद राज्य के मंत्रियों और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने चीनी के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने की मांग की थी. इसका जवाब देते हुए गडकरी ने ये बात कही है.
क्या बोले गडकरी?इस मांग पर गडकरी ने जवाब देते हुए कहा कि, &#039;अब हम एक ग्लोबल इकॉनमी में हैं, और ऐसी इकॉनमी में कोई भी सरकार एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स के दाम तय नहीं कर सकती, भले ही वो ऐसा करना चाहे. चीनी के दाम ब्राजील में तय होते हैं, मक्के के दाम अमेरिका तय करता है, और पाम ऑइल की कीमतें मलेशिया तय करता है.&#039;
उन्होंने आगे कहा, &#039;इसीलिए, जो लोग अभी विपक्ष में हैं, वो स्वाभाविक रूप से किसानों के लिए ऐसे दामों की मांग करते हैं, लेकिन जब वो खुद सत्ता में होते हैं तो कुछ नहीं कह पाते. बोलना आसान है, लेकिन उन्हें लागू करने में व्यावहारिक मुश्किलें आती हैं.&#039;
कब होते हैं चीनी के दाम कम?गडकरी ने आगे चीनी के दाम कम होने को लेकर बाया कि, &#039;ब्राजील में जमीन का एक टुकड़ा लगभग 2 हजार से 3 हजार एकड़ का होता है. उनके पास बहुत जीमीन है और वो मशीनों का इस्तेमाल करते हैं. वहां चीनी बनाने की लागत 23 रुपये प्रति किलो है, जबकि हमारी लागत कम से कम 33-34 रुपये प्रति किलो पड़ती है. अगर ब्राजील में चीनी का एक्स्ट्रा स्टॉक होता है, तो भारत में कीमतें अपने आप गिर जाती है.&#039;
चीनी बनाकर कमाई करना नहीं है काफीइतना ही नहीं गडकरी ने ये भी कहा कि किसानों के लिए सिर्फ चीनी बनाकर कमाई करना काफी नहीं है. चीनी उद्योग को अपनी कमाई बढ़ाने के लिए गन्ने से निकलने वाले दूसरे उत्पादों पर भी ध्यान देना होगा. इनमें गन्ने का कचरा, बायोमास से बनने वाले प्रोडक्ट्स और जैविक खाद शामिल हैं. इन चीजों से किसानों और चीनी उद्योग को ज्यादा आमदनी मिल सकती है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सरकार, तय, नहीं, कर, सकती, चीनी, का, भाव, बढ़ती, कीमतों, पर, बोले, नितिन, गडकरी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>UPI चार्ज से होगी 7500 करोड़ की कमाई, गूगल पे, फोनपे और Paytm की चांदी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-चार्ज-से-होगी-7500-करोड़-की-कमाई-गूगल-पे-फोनपे-और-paytm-की-चांदी</link>
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        <description><![CDATA[ 15 सितंबर को सरकार ने UPI पेमेंट्स पर MDR चार्ज लगाने का फैसला किया. जिसके बाद से ही ये फैसला काफी चर्चा में बना हुआ है. सरकार के इस फैसले का कुछ व्यापारी संगठन विरोध भी कर रहे हैं. इसी बीच अब इस पेमेंट से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी सामने आ रही है. खबरों की मानें तो इस नए चार्ज से पेमेंट कंपनियों की कमाई भी बढ़ सकती है.&amp;nbsp;दरअसल ब्रोकरेज फर्म Bernstein के मुताबिक, मार्च 2028 तक इस नई फीस से पेमेंट एप्स को हर साल करीब 1.1 अरब डॉलर तक की एक्स्ट्रा कमाई हो सकती है. मौजूदा बाजार की हिस्सेदारी को देखें तो इसमें फोनपे और गूगल पे की हिस्सेदारी करीब 900 मिलियन डॉलर (लगभग 7,500 करोड़ रुपये) हो सकती है.
फोनपे और गूगल पे का दबदबाUPI के बाजार में Walmart के समर्थन वाली फोनपे और गूगल पे का बड़ा हिस्सा है. पिछले महीने के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों कंपनियों ने मिलकर UPI के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 80% हिस्सा संभाला है. नई फीस से इन कंपनियों के पास ज्यादा पैसा आएगा. जिससे वो टेक्नोलॉजी, नए ग्राहकों तक पहुंच और छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में विस्तार पर ज्यादा निवेश कर सकती हैं.
15 अक्टूबर से लागू हो रही फीससरकार के फैसले के मुताबिक भारत में 2 हजार रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% की मर्चेंट फीस लगेगी. ये नियम 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है. अगर ऐसा होता है तो करीब 6 साल बाद UPI पर मर्चेंट फीस वापस आएगी. अभी तक UPI के जरिए पेमेंट करने पर दुकानदारों से इस तरह की फीस नहीं ली जाती थी.
ग्राहकों पर पड़ेगा असरनई फीस को लेकर एक चिंता ये भी है कि दुकानदार इस एक्स्ट्रा खर्च के बोझ को ग्राहकों पर डाल सकते हैं. हालांकि, रिपोर्ट में शामिल रिटेलर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि लोग रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI पर काफी निर्भर हो चुके हैं. इसलिए लोग दोबारा बड़े पैमाने पर कैश का इस्तेमाल शुरू कर दें, इसकी संभावना कम है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, चार्ज, से, होगी, 7500, करोड़, की, कमाई, गूगल, पे, फोनपे, और, Paytm, की, चांदी</media:keywords>
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        <title>एक साल में 60% महंगा हुआ सोना, 98000 से 1.57 लाख तक पहुंचा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-साल-में-60-महंगा-हुआ-सोना-98000-से-157-लाख-तक-पहुंचा-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ सोने और चांदी की कीमतें हर रोज बदलती हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तेजी से सोने के भाव चढ़े हैं, वो देखने लायक ही है. दूर क्यों जाएं, पिछले एक साल का ही डाटा उठाकर यदि देखें तो सोने के दाम सीधेतौर पर दो गुना बढ़ गए हैं. जिसके कारण गोल्ड की बिक्री भी काफी घट गई है.
पिछले साल इन्हीं दिनों यानी गणेश चतुर्थी के मौके पर सोने का भाव करीब 98 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम था, तो वहीं अब गणेश चतुर्थी के वक्त पर 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम दाम हो गया है. जिससे साफ पता चलता है कि एक साल में इसकी कीमत लगभग 60% बढ़ी है.
घट गई सोने की बिक्रीत्यौहारी सीजन में या यूं कहें कि गणेश चतुर्थी के मौके पर इस साल सोने की बिक्री की कुछ कम नजर आई. पछले साल की तुलना में इस साल अब तक करीब 15% बिक्री में कमी देखी गई है. कारोबारियों का मानना है कि, सोने की कीमत बढ़ने से ग्राहकों के लिए गहने खरीदना महंगा हो गया है. इसलिए कई लोगों ने खरीदारी कम कर दी या फिर हल्के वजन वाले गहने पसंद किए.
सिक्कों की मांग बढ़ीसोने की बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों के खरीदारी करने का तरीका भी बदल रहा है. अब कई लोग भारी गहनों की जगह हल्की ज्वैलरी खरीद रहे हैं. कुछ ग्राहक सोने के गहनों की बजाय सोने के सिक्के खरीदना पसंद कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि लोग बजट के अनुसार सोना खरीदने की कोशिश कर रहे हैं.
कीमत बढ़ने से खर्च भी बढ़ासोने के दाम बढ़ने के साथ ही हॉलमार्किंग जैसे अन्य खर्चों में बढ़ोतरी भी ग्राहकों के कुल खर्च को प्रभावित कर रही है. ऐसे में शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए सोना खरीदने वाले लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है.
बता दें कि अगर सोने की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में ग्राहक कम वजन के गहने खरीद सकते हैं. इतना ही नहीं हो सकता है कि लोग सोना खरीदना ही बंद कर दें. जिसका असर तेजी से ज्वैलरी कारोबार पर भी देखने को मिल सकता है. हालांकि, सोने के सिक्कों और छोटे गहनों की मांग बनी रह सकती है, क्योंकि लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एक, साल, में, 60, महंगा, हुआ, सोना, 98000, से, 1.57, लाख, तक, पहुंचा, रेट</media:keywords>
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        <title>दाल, सब्जी और तेल महंगा, एक हफ्ते में बेतहाशा बढ़े राशन के दाम</title>
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        <description><![CDATA[ महंगाई की दर लगातार तेजी से बढ़ रही है. खासतौर से ईरान- यूएस के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण सबसे पहले मंहगाई बढ़ना शुरू हुई थी. जिसके कारण अब तक भी लोगों के किचन का बजट बिगड़ा हुआ है. खाने- पीने के सामानों में इतनी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है कि पिछले एक हफ्ते में ही काफी बजट हिल गया है.
पिछले कुछ दिनों में खाने का तेल, अरहर दाल और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है. कुछ हरी सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं.
सरकारी आंकड़ों में आया सामनेउपभोक्ता मंत्रालय ने हाल ही में कुछ आंकड़े जारी किए हैं, जिनके मुताबिक, अरहर दाल की खुदरा कीमत 124.23 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. एक साल पहले ये 113.66 रुपये प्रति किलो थी. इसका मतलब है कि इसकी कीमत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा चना, उड़द, मूंग और मसूर दाल के दाम भी पिछले साल के मुकाबले तेजी से बढ़े हैं.
प्याज ने रुलया, सब्जियों के बढ़े दामसब्जियों के दाम भी हाल फिलहाल में तेजी से बढ़ रहे हैं. जिसमें सबसे ज्यादा तो प्याज ने ही लोगों रुलाया है. प्याज की कीमत में लगभग दो गुना बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.23 रुपये प्रति किलो है. पिछले साल इन्हीं दिनों में प्याज की कीमत महज 25.97 रुपये प्रति किलो थी.
तो वहीं प्याज के साथ ही रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले टमामट की कीमत 39.16 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. जबकि पिछले साल इसका भाव 36.48 रुपये था. आलू भी करीब 22 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. इसके अलावा हरी सब्जियां, अदरक लहसुन के दामों में भी तेजी देखने को मिली है.
खाने का तेल हुआ महंगाखाने का तेल भी अच्छा- खासा महंगा हुआ है. पिछले एक साल में सनफ्लावर ऑइल करीब 31 रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है. इसका भाव 161.40 रुपये से बढ़कर 192.56 रुपये प्रति किलो हो गया है. मूंगफली तेल 186.93 रुपये से बढ़कर 208.44 रुपये और सरसों तेल 188.80 रुपये से बढ़कर 201.02 रुपये प्रति किलो हो गया है. पाम तेल भी 132.98 रुपये से बढ़कर 151.40 रुपये प्रति किलो हो गया है.
क्या है महंगाई की वजह?महंगाई बढ़ने के पीछे वैसे तो कई कारण हैं, लेकिन फिलहाल मौसम के कारण ये महंगाई बढ़ रही है. कमजोर मानसून के कारण कई इलाकों में बारिश कम हुई है. इससे तिलहन और दूसरी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता है. इसके अलावा भारत अपनी जरूरत का काफी हिस्सा खाद्य तेल आयात करता है. इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में पाम तेल का इस्तेमाल बायोडीजल बनाने में बढ़ने से इसकी कीमत पर असर पड़ा है.
इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और काला सागर क्षेत्र में परिवहन संबंधी दिक्कतों के कारण भी खाद्य तेलों के आयात की लागत बढ़ी है. इसका असर भारत में तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दाल, सब्जी, और, तेल, महंगा, एक, हफ्ते, में, बेतहाशा, बढ़े, राशन, के, दाम</media:keywords>
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        <title>300 रुपये तक घट गए गैस सिलेंडर के दाम! चेक करें आपके शहर में क्या चल रहा रेट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/300-रुपये-तक-घट-गए-गैस-सिलेंडर-के-दाम-चेक-करें-आपके-शहर-में-क्या-चल-रहा-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ आज 22 सितंबर 2026 को देश में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं. इसकी कीमतें आखिर बार जून में 29 रुपये बढ़ाई गई थीं. उसके बाद बीते 3 महीनों से कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में आखिर बार बदलाव महीने की शुरुआत यानी 1 सितंबर 2026 को हुआ था. उस दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 9.50 रुपये प्रति सिलेंडर की मामूली बढ़ोतरी की थी.&amp;nbsp;
300 रुपये कम हुई कीमत
जून में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव चरम में पहुंचने की स्थिति में &amp;nbsp;सरकारी तेल कंपनियों ने दो बार में गैस के दाम बढ़ाए थे. सबसे पहले 1 जून को कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 42-53 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई थी. इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3,113 रुपये हो गई, जो इसका अब तक का सबसे महंगा रेट है.
यह कीमत आज चल रहे कमर्शियल सिलेंडर की औसत कीमत 2,747.50 से 365.50 रुपये कम है. कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए जाने के 6 दिन बाद 7 जून 2026 को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की सीधी बढ़ोतरी की थी. इसके चलते घरेलू LPG 913 रुपये से महंगा होकर 942 रुपये का हो गया था.
शहरवार चेक करें कीमत



शहर
घरेलू सिलेंडर के रेट
कमर्शियल सिलेंडर के रेट&amp;nbsp;


दिल्ली
942 रुपये
2,747.50 रुपये


मुंबई
941.50 रुपये
2,701 रुपये


कोलकाता&amp;nbsp;
968 रुपये
2,884 रुपये


बेंगलुरु
944.50 रुपये
2,831 रुपये


हैदराबाद
994 रुपये
2,996 रुपये


चेन्नई
957.50 रुपये
2,916.50 रुपये


जयपुर
945.50 रुपये
2,776 रुपये


बीकानेर
953.50 रुपये
2,798.50 रुपये


रांची&amp;nbsp;
1,010.50 रुपये
2,925.50 रुपये



LPG बुकिंग नियम में बड़ा बदलाव
एलपीजी सप्&amp;zwj;लाई की स्थिति सुधरते ही सरकार ने एलपीजी बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत, दो सिलेंडर की डिलीवर के बीच का वक्त बढ़ाकर 25 दिन &amp;nbsp;कर दिया गया है, जो पहले 45 दिन हुआ करता था. यह नियम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है. शहरी क्षेत्रों में पहले से ही बुकिंग की अवधि 25 दिन है.
सरकार के निर्देश पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी तेल कंपनियों ने इसे तुरंत प्रभाव से लागू भी कर दिया है.

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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>300, रुपये, तक, घट, गए, गैस, सिलेंडर, के, दाम, चेक, करें, आपके, शहर, में, क्या, चल, रहा, रेट</media:keywords>
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        <title>कहां जमा है मोदी के मंत्रियों की दौलत? आधी कैबिनेट को स्टॉक मार्केट नहीं है पसंद </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कहां-जमा-है-मोदी-के-मंत्रियों-की-दौलत-आधी-कैबिनेट-को-स्टॉक-मार्केट-नहीं-है-पसंद</link>
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        <description><![CDATA[ अपने आपने वाले कल को सिक्योर करने के लिए लोग निवेश करते हैं. किसी को स्टॉक मार्केट में पैसा लगाना पसंद है, तो कोई रियल एस्टेट में दांव लगाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बड़े-बड़े नेता-मंत्री अपना पैसा कहां लगाते हैं? आइए जानते हैं.
मोदी कैबिनेट के मंत्रियों ने कारोबारी साल 2025-26 के लिए अपनी संपत्ति का ऐलान किया. इनकी घोषित संपत्तियों के विश्लेषण से पता लगता है कि कैबिनेट में आधे से ज्यादा मंत्रियों को शेयर बाजार या स्टॉक मार्केट में पैसा लगाने बिल्कुल भी नहीं पसंद है, बल्कि ये &amp;nbsp;फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), जमीन, आभूषण और मवेशियों जैसे पारंपरिक और सुरक्षित विकल्पों में पैसा लगाना पसंद करते हैं.&amp;nbsp;
FD है सबसे पसंदीदा विकल्प
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कैबिनेट मंत्रियों की ओर से दी गई संपत्ति की जानकारी के मुताबिक, 30 में से 8 मंत्रियों ने सिर्फ FD में पैसा लगा रखा है. शेयर बाजार में निवेश से इनका कोई लेना-देना नहीं है. वहीं, 15 मंत्रियों ने बाजार में पैसर लगा रखा है. इनमें से 5 ऐसे हैं, जिनका पैसा म्यूचुअल फंड में लगा हुआ है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्री के.आर. नायडू, जनजातीय मामलों के मंत्री जुआल ओराम और कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह जैसे कई वरिष्ठ नेता ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ FD में पैसा लगाया है. स्टॉक मार्केट में इनका कोई निवेश नहीं है.
किसने कहां लगा रखा है पैसा?
एस. जयशंकर ने 5.59 करोड़ रुपये की FD और सरकारी कंपनी IRFC के बॉन्ड्स में 50 लाख रुपये लगाए हैं, जहां पैसा डूबने का रिस्क बिल्कुल जीरो है. इसी तरह से जे.पी. नड्डा ने अपने इंवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में गोल्ड गाड़ी (Innova) और रियल एस्टेट को जगह दी है. अपना घर बनाने के लिए उन्होंने बैंक लोन और पर्सनल सेविंग्स का इस्तेमाल किया है, जो कि एक आम मध्यमवर्गीय भारतीय की तरह ही वित्तीय अनुशासन को दिखाता है.&amp;nbsp;
अमित शाह ने कहां कर रखा है निवेश?
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने अपने हलफनामे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2.23 करोड़ रुपये लिस्टेड सिक्योरिटीज में और 3.07 लाख रुपये नॉन-लिस्टेड सिक्योरिटीज में लगाने की जानकारी दी है. &amp;nbsp;लिस्टेड सिक्योरिटीज का मतलब ऐसे वित्तीय साधनों से है, जो NSE और BSE जैसे &amp;nbsp;आधिकारिक तौर पर मान्यता स्टॉक एक्सचेंज पर रजिस्टर्ड होते हैं. वहीं, नॉन-लिस्टेड सिक्योरिटीज किसी सार्वजनिक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं होते हैं. उनकी ही तरह वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी लिस्टेड सिक्योरिटीज में 9.70 करोड़ रुपये और नॉन-लिस्टेड सिक्योरिटीज में 1.01 लाख रुपये का निवेश कर रखा है.&amp;nbsp;
मार्केट में इनकी भी है दिलचस्पी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने अडानी पावर, गुजरात अल्कलीज एंड केमिकल्स लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीद रखे हैं. इनका पैसा नॉन-लिस्टेड कंपनियों में भी लगा हुआ है, जिनमें श्री साई आशीष डाइंग एंड प्रिंटिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, श्री साई प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड और अवनीप सिल्क मिल्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ONGC के 540 शेयर खरीद रखे हैं, जिनकी कीमत 1.33 लाख रुपये है. उनके पास SBI के 1,500 शेयर हैं, जिनकी कीमत 15.65 लाख रुपये है. JIO FIN के 24 शेयर हैं, जिनकी कीमत 5,826 रुपये है. रिलायंस के 48 शेयर हैं, जिनकी कीमत 63,792 रुपये है और रिलायंस पावर के 27 शेयर हैं, जिनकी कीमत 661.77 रुपये है. साथ ही उन्होंने 5 FD भी करा रखी हैं, जिनकी कुल कीमत 28.25 लाख रुपये है.

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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कहां, जमा, है, मोदी, के, मंत्रियों, की, दौलत, आधी, कैबिनेट, को, स्टॉक, मार्केट, नहीं, है, पसंद </media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत को समुद्र में मिला गैस का बड़ा भंडार, ओडिशा में ONGC को मिली बड़ी कामयाबी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-को-समुद्र-में-मिला-गैस-का-बड़ा-भंडार-ओडिशा-में-ongc-को-मिली-बड़ी-कामयाबी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/भारत-को-समुद्र-में-मिला-गैस-का-बड़ा-भंडार-ओडिशा-में-ongc-को-मिली-बड़ी-कामयाबी</guid>
        <description><![CDATA[ ओएनजीसी यानी कि ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है. इसने &amp;nbsp;बीते &amp;nbsp;18 सितंबर को समंदर में गैस का बड़ा भंडार ढूंढ़ निकाला है. ओएनजीसी ने MN-DW18-1-H-D कुएं की खोज ओडिशा के कोणार्क तट से लगभग 43 किलोमीटर दूर 1,441 मीटर से 1,452 मीटर की गहराई में की है.&amp;nbsp;

#ONGC strikes gas in the deep waters of Mahanadi Basin. MDW-28, the maiden well of ONGC&amp;rsquo;s current deepwater campaign in the Mahanadi Basin is flowing gas with encouraging rates and sustained reservoir pressure. The campaign was launched on 25 July 2026 by Hon&#039;ble Minister of&amp;hellip; pic.twitter.com/whAV8TubIK
&amp;mdash; Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) September 21, 2026



84,000 करोड़ की &#039;समुद्र मंथन&#039; पहल का असर
ONGC ने सोमवार को जानकारी दी कि उसने 18 सितंबर को MN-DW18-1-H-D कुएं में यह खोज की है. इस कुएं की खुदाई 1,623 मीटर की तय गहराई तक की गई थी. यह &#039;राष्ट्रीय अपतटीय खोज मिशन&#039; (National Offshore Exploration Mission - Samudra Manthan) के तहत महानदी बेसिन में मिली पहली बड़ी सफलता है, जो यह साबित करता है कि भारत के पूर्वी अपतटीय (Eastern Offshore) क्षेत्रों में अभी भी ऊर्जा के ऐसे विशाल भंडार मौजूद हैं, जिनकी खोज अभी तक नहीं की जा सकी है.&amp;nbsp;
ONGC ने बताया कि कुएं की खुदाई के वक्त1,441 मीटर और 1,452 मीटर की गहराई के बीच गैस मिली है. कुआं कोणार्क के तट से करीब 43 किमी दूर स्थित है. अगर आगे की जांच और मूल्यांकन में यह खोज व्यावसायिक रूप से फायदेमंद साबित होती है, तो इस स्थिति से जल्द कमाई शुरू करने में मदद मिल सकती है. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कुआं तट के करीब है इसलिए गैस को पाइपलाइन और ऑनशोर प्रोसेसिंग प्लांट तक लाना आसान होगा और इसमें खर्च भी कम बैठेगा.&amp;nbsp;
कंपनी का आगे क्या है प्लान?
ONGC ने एक बयान में कहा, &quot;पिछले तीन दिनों से इस कुएं से अच्छे फ्लो और रिजर्वायर प्रेशर के साथ गैस निकल रही है। यह खोज ONGC के डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम और भारत के अपने हाइड्रोकार्बन रिसोर्स बेस को बढ़ाने की कोशिशों को मजबूत करती है.
इस इलाके में हुई दूसरी खोजों के साथ-साथ यह खोज भी PNG रूल्स, 2025 के तहत साझा सुविधाओं के जरिए विकास के लिए एक विकल्प हो सकती है, जिससे डीपवॉटर रिसोर्स का उत्पादन शुरू हो सकेगा.&quot; यानी कि PNG रूल्स, 2025 के आने से ONGC इन सभी अलग-अलग गैस के कुओं को एक ही नेटवर्क से जोड़कर उनका संचालन कर सकेगी.
यह गैस की खोज ऐसे समय में हुई है जब सरकार घरेलू स्तर पर खोज और उत्पादन को बढ़ाना चाहती है, खासकर ऑफशोर और डीपवॉटर इलाकों में. सरकार ने जुलाई में 84,000 करोड़ रुपये की &#039;समुद्र मंथन&#039; पहल शुरू की थी ताकि ड्रिलिंग की लागत और खोज से जुड़े जोखिमों को कम करके भारत के ऑफशोर इलाकों में खोज को बढ़ावा दिया जा सके.

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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, को, समुद्र, में, मिला, गैस, का, बड़ा, भंडार, ओडिशा, में, ONGC, को, मिली, बड़ी, कामयाबी</media:keywords>
    </item>
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        <title>23 सितंबर से दुनियाभर में बंद होगी इस देश की एयरलाइन, अमेरिका ने किया ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/23-सितंबर-सेदुनियाभर-में-बंद-होगी-इस-देश-की-एयरलाइन-अमेरिका-ने-किया-ऐलान</link>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक पाबंदी का ऐलान किया है. अमेरिका ने कहा है कि 23 सितंबर से दुनिया भर में सभी ईरानी एयरलाइंस का संचालन पूरी तरह बंद (शटडाउन) हो जाएगा. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक स्तर पर यह चेतावनी जारी की है.
स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगर किसी भी देश या विदेशी कंपनी ने ईरानी विमानों को ईंधन दिया, लैंडिंग सेवाएं मुहैया कराईं या उनके टिकट बेचे तो उन्हें अमेरिकी डॉलर और वैश्विक बैंकिंग प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा. यूएस का आरोप है कि ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस सरकारी और सैन्य गतिविधियों, हथियारों और सैनिकों की आवाजाही में मदद कर रही हैं.
ईरान का दुनिया से हवाई संपर्क होगा खत्म!
गौरतलब है कि इस कड़े &#039;सेकेंडरी सैंक्शन्स&#039; के डर से इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी फ्लाइ्ट्स की सर्विस ठप होने और ईरान का दुनिया से हवाई संपर्क लगभग कट जाने के आसार हैं.
अमेरिका की ओर से यह घोषणा यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट के फैसले के बाद की गई है. यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 8 सितंबर को 27 ईरानी एयरलाइंस को बैन करने का फैसला लिया था. यूएस ने ईरान की इन एयरलाइंस पर ईरानी सरकार और सैन्य गतिविधियों का समर्थन करने का आरोप लगाया है. अमेरिका का दावा है कि इन एयरलाइंस के जरिए हथियार, कर्मचारी और अवैध सामान की आवाजाही हो रही है.
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किन-किन एयरलाइंस पर लगेगा बैन?
अमेरिका की ओर से बैन के दायरे में आने वाली एयरलाइंस में..

ईरान एयर टूर
ईरान आसमान एयरलाइंस
केशम एयर
किश एयरलाइंस
सेपेहरान एयरलाइंस
और वारेश एयरलाइंस शामिल हैं.

बता दें कि&amp;nbsp;यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने एयरलाइंस से जुड़ी तीन अनुमतियों को भी सस्पेंड कर दिया है, जो कुछ खास ओवरफ्लाइट्स और ईरान जाने वाली उड़ानों में यूएस में बने या अमेरिका के नियंत्रण वाले कमर्शियल विमानों के इस्तेमाल से संबंधित थीं. कहा जा रहा है कि विमानन सुरक्षा से जुड़े अनुरोधों की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सितंबर, से दुनियाभर, में, बंद, होगी, इस, देश, की, एयरलाइन, अमेरिका, ने, किया, ऐलान</media:keywords>
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        <title>छठ&amp;दीवाली से पहले एक और झटका! 7&amp;8% महंगा हो सकता है खाने का तेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/छठ-दीवाली-से-पहले-एक-और-झटका-7-8-महंगा-हो-सकता-है-खाने-का-तेल</link>
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        <description><![CDATA[ आने वाले महीनों में कई बड़े त्योहार हैं- दशहरा, छठ पूजा और दीवाली. लोग इनकी तैयारियों में जुटे हुए हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई ने आम आदमी को टेंशन में डाल दिया है. प्याज, चीनी, नींबू के बाद अब सुनने में आ रहा है कि खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल की भी कीमतें बढ़ने वाली हैं.
भारत अपनी जरूरत का लगभग 58% खाद्य तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है. अगर अगले फेस्टिव सीजन से पहले कीमतें बढ़ती हैं, तो यह मार्च के बाद एडिबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का तीसरा दौर होगा.
18-20% तक बढ़ जाएंगे दाम!
अगर अगले फेस्टिव सीजन से पहले कीमतें बढ़ती हैं, तो यह मार्च के बाद एडिबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का तीसरा दौर होगा. मार्च से शुरू हुए दो दौर में कंपनियां 5-6% तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं. इसके चलते मार्च और जून के बीच कुल कीमतें 10-12% तक बढ़ तक बढ़ गई हैं. अब मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे माल की सप्लाई में कमी होने की वजह से कीमतों में 7-8% की एक और बढ़ोतरी की आशंका है. अगर ऐसा होता है, तो &amp;nbsp;मार्च से लेकर अब तक खाद्य तेलों के कुल दाम करीब 18-20% तक बढ़ जाएंगे.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ाए जाएंगे दाम?
कीमतों पर यह नया दबाव कच्चे खाने वाले तेलों की ज्यादा आयात लागत की वजह से है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के डेटा से पता चला है कि 18 सितंबर को मुंबई बंदरगाहों पर कच्चा पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल क्रमशः 1,265 डॉलर, 1,314 डॉलर और 1,380 डॉलर प्रति टन की कीमत पर पहुंचा. जहां पाम और सोयाबीन तेल की लागत एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा थी.&amp;nbsp; वहीं, सूरजमुखी तेल की लागत में 7% का इजाफा हुआ है.
कमजोर रुपये, बढ़ा हुआ ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से दुनिया भर में वेजिटेबल ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसने रिफाइनरों और प्रोसेसर्स पर बोझ बढ़ा दिया है. इमामी ग्रुप के डायरेक्टर आदित्य अग्रवाल ने कहा, &quot;कच्चे खाने वाले तेल की लैंडेड कॉस्ट लगभग 8 से 11% बढ़ गई है. हो सकता है कि कंपनियों के पास इस लागत को ग्राहकों पर डालने के अलावा कोई और विकल्प न बचे.&quot; इस ग्रुप की कंपनी इमामी एग्रोटेक है, जिसके पास &#039;हेल्दी एंड टेस्टी&#039; और &#039;बेस्ट चॉइस&#039; जैसे खाने वाले तेल के ब्रांड हैं.

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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>छठ-दीवाली, से, पहले, एक, और, झटका, 7-8, महंगा, हो, सकता, है, खाने, का, तेल</media:keywords>
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        <title>दीवाली से पहले बिजली संकट, 40% पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक लगभग खत्म&amp; सरकार</title>
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        <description><![CDATA[ दीपावली के त्यौहार में लगभग एक महीने का समय ही बचा है, ऐसे समय में जब बिजली की खपत बढ़ जाती है तब देश बिजली संकट से जूझ रहा है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सरकारी डाटा के आंकड़े बता रहे हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 40 प्रतिशत कोयले से चलने वाले प्वार प्लांट के पास बहुत कम मात्रा में फ्यूल बचा है.
एक हफ्ते में बढ़ गई संख्यादरअसल सोमवार को सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के डाटा से इस बात का पता चला है. इस डाटा के मुताबिक 19 सितंबर तक ऐसे पावर प्लांट जिनके पास कोयले का बहुत कम स्टॉक बचा है, उनकी संख्या तेजी से बढ़कर 74 हो गई. पंलांट्स के पास 35 प्रतिशत से भी कम कोयले का स्टॉक बचा है, जिससे केवल तीन दिन से भी कम समय तक बिजली पैदा हो सकती है. ये संख्या पिछले हफ्ते तक करीब 60 थी. जो एक हफ्ते में ही तेजी से बढ़ गई है.
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क्यों हो रही कोयले की कमी?रिपोर्ट्स के मुतबाकि अलनीनो के असर और मौसम के बदलते मिजाज के कारण ऐसा हो रहा है. इस पीक समय में बिजली की जरूरत भी ज्यादा ही पड़ रही है. अल नीनो और हीट वेव के कारण मौसम जरूरत से ज्यादा गर्म बना हुआ है. इसी की वजह से बिजली की खपत भी ज्यादा हो रही है और प्लांट में कोयले की कमी भी हो रही है.
कितनी है भारत की &#039;पीक पावर डिमांड&#039;?सरकारी डाटा के मुताबिक भारत में बिजली की अधिकतम जरूरत, यानी &#039;पीक पावर डिमांड&#039;, पिछले हफ्ते 230 गीगावाट से 250 गीगावाट के बीच रही. तो वहीं मई में बिजली की अधिकतम मांग 270.70 गीगावाट के अब तक के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई थी.
इसे लेकर क्रिसिल के एनालिस्ट्स का कहना है कि पावर प्लांट के स्टॉक में कमी सप्लाई से जुड़ी किसी बुनियादी दिक्कत का संकेत नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स से जुड़ी एक अस्थायी समस्या लगती है.
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सरकार ने बढ़ाई थी सप्लाईसितंबर की शुरुआत में भारत के कोयला और रेलवे मंत्रालय ने कहा था कि, अनिश्चित मानसून की स्थिति के चलते शिपमेंट पर काफी असर पड़ा था, जिसके बाद से ही वो पावर प्लांट में सप्लाई भी बढ़ा रहे हैं. क्रिसिल के मुताबिक, अप्रैल और अगस्त के बीच रिन्यूएबल पावर का प्रोडक्शन करीब 21 प्रतिशत तक बढ़ा था, लेकिन क्लीन एनर्जी की सप्लाई में उतार-चढ़ाव की वजह से, चौबीसों घंटे बिजली की मांग को पूरा करने में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट की भूमिका अहम बनी रही.
तो वहीं Reuters की पिछले हफ्ते की रिपोर्ट में ये सामने आया कि अगस्त में भारत में बिजली उत्पादकों का कोयला आयात भी बढ़ गया था, ये अपने 15 महीने के स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया था. इसके पीछे की वजह हीट वेव और गर्मी थी, ऐसे में जल-बिजली का उत्पादन कम हुआ और बिजली कंपनियों को महँगा कोयला खरीदना पड़ा.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दीवाली, से, पहले, बिजली, संकट, 40, पावर, प्लांट्स, में, कोयले, का, स्टॉक, लगभग, खत्म-, सरकार</media:keywords>
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        <title>पेट्रोल&amp;डीजल की कीमतों में भारी उछाल, पड़ोसी मुल्क में आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 17.4 फीसदी का भारी इजाफा कर दिया है. इससे बांग्लादेश में आम आदमी की जेब और कारोबारियों पर बोझ बढ़ गया है जो पहले ही वहां बिजली और गैस की कमी से जूझ रहे हैं. बांग्लादेश सरकार ने देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने के पीछे पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष, ग्लोबल कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों और शिपिंग कॉस्ट को वजह बताया है.

नए नियमों के तहत डीजल के दामों में 17.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई जिसके बाद ये 115 टका से 135 टका प्रति लीटर तक जा पहुंची हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा पेट्रोल के दाम 140 टका से बढ़कर 160 टका हो गए हैं.
केरोसीन की कीमतें 135 टका से बढ़कर 155 टका हो गई हैं.
इसके अलावा ऑक्टेन गैसोलीन के दाम 165 टका से बढ़कर 165 टका तक हो गए हैं.

अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल
ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें मार्च 2026 के बाद से अब तक दोगुनी हो चुकी हैं. इसके अलावा देश में फैली आंतरिक अस्थिरता के कारण भी माल ढुलाई की लागत में जोरदार बढ़ोतरी देखी गई है. इसी वजह से बांग्लादेशी जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
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बढ़ी हुई कीमतें आज से लागू
बढ़ी हुई फ्यूल कीमतें आज (21 सितंबर 2026) से लागू हो गई हैं और इससे वहां ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है. इसकी वजह से आयात पर निर्भर इस देश के लिए मुश्किलें और बढ़ने का डर है क्योंकि यहां इंडस्ट्रीज पहले से ही भारी ऊर्जा संकट से जूझ रही हैं, खासतौर से बांग्लादेश का गारमेंट एक्सपोर्ट सेक्टर बुरी तरह प्रभावित है जो देश के राजस्व में काफी बड़ा योगदान देता है.
बांग्लादेश सरकार का क्या है जवाब
इससे पहले बांग्लादेश की सरकार ने अप्रैल और जून में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की थी. उस समय भी सरकार ने इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ने के पीछे ग्लोबल ऑयल कीमतों को जिम्मेदार ठहराते हुए फ्यूल कीमतों में इजाफा किया था.&amp;nbsp;
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से कहा गया कि गंभीर ऊर्जा संकट के बीच भी सरकार ने एलएनजी पर सब्सिडी देना जारी रखा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली और गैस की सप्लाई तब भी जारी रखी है, जब क्षेत्रीय ऊर्जा संकट की वजह से इंपोर्ट पर बड़ा संकट देखा जा रहा है.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पेट्रोल-डीजल, की, कीमतों, में, भारी, उछाल, पड़ोसी, मुल्क, में, आम, आदमी, की, जेब, पर, बढ़ा, बोझ</media:keywords>
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        <title>रोज 50000 रुपये का इनकम, वकालत छोड़ कुत्तों को घूमा रही लड़की</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रोज-50000-रुपये-का-इनकम-वकालत-छोड़-कुत्तों-को-घूमा-रही-लड़की</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आपको भी लगता है कि अच्छी कमाई के लिए सिर्फ बड़ी डिग्री और कॉरपोरेट नौकरी जरूरी है, तो ब्रिटेन की लिज़ ईस्ट की कहानी आपको हैरान कर सकती है. करियर में अच्छी कमाई के बावजूद कई बार काम का तनाव इंसान को पेशा बदलने पर मजबूर कर देता है. ब्रिटेन की 30 साल की लीज ईस्ट के साथ कुछ ऐसा ही मामला पेश आया है. चार साल तक आपराधिक मामलों में वकालत करने के बाद उन्होंने लगातार तनाव और लंबे काम के घंटों से परेशान होकर अपना करियर बदलने का फैसला किया. अब वह फुल टाइम डॉग वॉकर हैं और अपने नए काम से रोजाना हजारों रुपये कमा रही हैं.
क्यों छोड़ी वकालत की नौकरी?
ईस्ट के मुताबिक, कानूनी पेशे में काम के दौरान उन्हें कोर्ट, जेल और क्लाइंट से मिलने के साथ-साथ कई तरह के प्रशासनिक काम भी संभालने पड़ते थे. लंबे काम के घंटों और लगातार दबाव के कारण उन्हें लगने लगा कि यह काम लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल है. इसके बाद उन्होंने अपने पति के डॉग-वॉकिंग और डॉग-बोर्डिंग के काम से खुश होकर खुद भी इस क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया.
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पहले पब में किया काम, फिर शुरू हुआ डॉग वॉकिंग बिजनेस
वकालत छोड़ने के बाद ईस्ट ने शुरुआत में अपने खर्च चलाने के लिए उन्होंने एक स्थानीय पब में नौकरी की और नौकरी के साथ-साथ नए बिजनेस के लिए ग्राहक बनाए. इसी दौरान उन्होंने धीरे-धीरे पालतू जानवरों की देखभाल की सर्विस शुरू की.
अब रोज 20-30 कुत्तों की देखभाल&amp;nbsp;
करीब एक साल में उनके पास इतने नियमित ग्राहक आ गए कि उनका पूरा शेड्यूल बुक रहने लगा. अब ईस्ट रोजाना करीब चार ग्रुप वॉक करवाती हैं और हर दिन में करीब 20 से 30 कुत्तों की देखभाल करती हैं. वह एक कुत्ते के लिए करीब 14 पाउंड यानी करीब 1,800 रुपये प्रति घंटे चार्ज करती हैं.
इसी तरह उनकी रोजाना कमाई करीब 300 से 400 पाउंड, यानी करीब 38,500 से 51,400 रुपये तक बताई जा रही है. ईस्ट का कहना है कि अब वह अपनी कॉरपोरेट नौकरी के मुकाबले कम समय काम करके ज्यादा कमाती है.&amp;nbsp;
लोगों ने कहा- छह साल की पढ़ाई बेकार कर दी
करियर बदलने के बाद कुछ लोगों ने ईस्ट से सवाल किया कि कानून की पढ़ाई और वकालत का करियर छोड़कर उन्होंने डॉग वॉकिंग को क्यों चुना. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि उनकी छह साल की पढ़ाई बेकार चली गई. हालांकि, ईस्ट का कहना है कि उनकी पढ़ाई बेकार नहीं गई और कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने जो सीखा, उसका इस्तेमाल वह आज भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में करती हैं.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रोज, 50000, रुपये, का, इनकम, वकालत, छोड़, कुत्तों, को, घूमा, रही, लड़की</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>FD Rate: ये बैंक दे रहे 8.50% का तगड़ा रिटर्न! फिक्स्ड डिपॉजिट करने से पहले देख लें लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fd-rate-ये-बैंक-दे-रहे-850-का-तगड़ा-रिटर्न-फिक्स्ड-डिपॉजिट-करने-से-पहले-देख-लें-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/fd-rate-ये-बैंक-दे-रहे-850-का-तगड़ा-रिटर्न-फिक्स्ड-डिपॉजिट-करने-से-पहले-देख-लें-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट में लोग एक बड़े अमाउंट को बैंक में फिक्स कर देते हैं. जिसके ऊपर बैंक उस पर ब्याज देते हैं. ये ब्याज हर साल के हिसाब से दिया जाता है. लेकिन इसमें भी सीनियर सिटीजन को फायदा होता है, क्योंकि उनकी FD की ब्याज दरें आम लोगों से थोड़ी ज्यादा होती हैं. जिससे कि उन्हें बुढ़ापे में परेशानी का सामना ना करना पड़े.
सितंबर में करवा रहे हैं FD?यदि आप भी वरिष्ठ नागरिक हैं और सितंबर के महीने में FD करने का मन बना रहे हैं, तो आइये आपको बताते हैं कि कौन सा बैंक आपको 8.50 प्रतिशत तक की ब्याज दर दे रहा है. सितंबर के बीच कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक हैं जो सीनियर सिटीजन को इतना ब्याज दे रहे हैं.
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ये बैंक दे रहे 8.50% तक ब्याजसीनियर सिटीजन्स के लिए कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक हैं जो 8.50% का ब्याज FD पर दे रहे हैं. हालांकि तीन बैंकों में ये अलग- अलग अवधि पर मिल रही है. यहां देखें इन बैंकों की लिस्ट:



बैंक
अवधि
ब्याज दर (प्रतिशत में)


इक्विटाज स्मॉल फाइनेंस बैंक
3 साल 1 दिन
8.50%


ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक
800 दिन
8.50%


सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक
5 साल
8.50%


जन स्मॉल फाइनेंस बैंक
2 से 3 साल
8.30%


उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक
3 साल 1 दिन
8.30%


शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक
23 महीना 1 दिन
8.25%


उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक
666 दिन
8.25%



प्राइवेट सेक्टर के बैंक कितना ब्याज दे रहे?प्राइवेट सेक्टर के बैंक स्मॉल फाइनेंस की बजाय कम ब्याज FD पर दे रहे हैं. यहां देखें इन बैंकों की लिस्ट:



बैंक
अवधि
ब्याज दर (प्रतिशत में)


एक्सिस बैंक
5 साल
7.25%


बंधन बैंक
2 साल
7.95%


सिटी यूनियन बैंक
555 दिन
7.50%


CSB बैंक
18 महीने&amp;nbsp;
7.35%


DBS बैंक
400 दिन
7.35%


DCB बैंक
25 महीने
8.00%


फेडरल बैंक
48 महीने
7.20%


HDFC बैंक
3 साल 1 दिन
7.10%


ICICI बैंक
3 साल 1 दिन
6.75%


IDFC फर्स्ट बैंक
500 दिन
7.35%


इंडसइंड बैंक
2-3 साल
7.75%


जम्मू एंड कश्मीर बैंक
888 दिन
7.55%


IDBI बैंक
2 साल
7.00%


कर्नाटक बैंक
555 दिन
7.40%


कोटक महिंद्रा बैंक
2 साल
7.30%&amp;nbsp;


यस बैंक
18 महीने
7.75%



सरकारी बैंकों में कितना मिल रहा ब्याज?सरकारी बैंक आपको स्मॉल फाइनेंस और निजी बैंकों से भी कम ब्याज देता है, लेकिन इसमें आपकी FD सुरक्षित रहती है. आइये देखें लिस्ट, कौन सा बैंक कितना ब्याज दे रहा है:



बैंक
अवधि
ब्याज दर (प्रतिशत के हिसाब से)


बैंक ऑफ बड़ौदा
555 दिन
7.25%


बैंक ऑफ इंडिया
3 साल
7.45%


बैंक ऑफ महाराष्ट्र
400 दिन
7.15%


कैनरा बैंक
555 दिन
7.10%


सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
444 दिन
7.25%


इंडियन बैंक
555 दिन
7.15%


इंडियन ओवरसीज बैंक
444 दिन
7.10%


पंजाब नेशनल बैंक
444 दिन
7.10%


पंजाब एंड सिंध बैंक
666 दिन
7.35%


स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
5-10 साल
7.05%


यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
555 दिन
7.05%



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बता दें कि कुछ बैंक 80 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को सामान्य वरिष्ठ नागरिक दर के ऊपर भी अतिरिक्त ब्याज देते हैं. इसलिए FD खोलने से पहले ये जरूर देखना चाहिए कि बैंक की सुपर सीनियर सिटीजन के लिए अलग दर है या नहीं. यदि आप उस एज ग्रुप में आते हैं तो उसी के हिसाब से FD करें.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rate:, ये, बैंक, दे, रहे, 8.50, का, तगड़ा, रिटर्न, फिक्स्ड, डिपॉजिट, करने, से, पहले, देख, लें, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप चला रहा बेटा, उसूल पर कंपनी की डायरेक्टर ने छोड़ दिया पद</title>
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        <description><![CDATA[ अगर किसी सरकारी कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र डायरेक्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति के परिवार का उसी कंपनी के साथ कारोबार हो, तो स्वतंत्रता से जुड़े नियमों पर सवाल उठ सकते हैं. ऐसा ही एक मामला सरकारी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) से सामने आया है, जहां कंपनी की डायरेक्टर अल्का मुंद्रा ने अपनी पद संभालने के करीब एक महीने बाद इस्तीफा दे दिया है.
अल्का मुंद्रा के बेटे माधव मुंद्रा राजस्थान के उदयपुर में इंडियन ऑयल का एक पेट्रोल पंप चलाते हैं. अल्का मुंद्रा ने अपने इस्तीफे में बताया कि बेटे की इस डीलरशिप की वजह SEBI के लिस्टिंग नियमों के तहत उनके डायरेक्टर पद को लेकर सवाल उठ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह साफ तौर पर बताया है कि उनके बेटे का कारोबार अलग से चलता है और इसमें उनका कोई दखल नहीं है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;क्या है पूरा मामला?
अल्का मुंद्रा को 15 अगस्त 2026 को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) में डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया था. इसके करीब एक महीने बाद उन्होंने 18 सितंबर 2026 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव को अपना इस्तीफा भेजा.&amp;nbsp;
महाराष्ट्र के मंत्री पर RBI का बड़ा एक्शन, इस बैंक से किया बाहर, लेकिन क्यों?
उनके बेटे माधव मुंद्रा साल 2020 से उदयपुर में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के रिटेल आउटलेट स्वर्ण गंगा KSK का संचालन कर रहे हैं. इस कारोबारी संबंध को देखते हुए अल्का मुंद्रा अपने पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देना बेहतर समझा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस्तीफा देने के पीछे कोई दूसरा ठोस कारण नहीं है.&amp;nbsp;
कौन हैं अल्का मुंद्रा?
अल्का मुंद्रा की पढ़ाई राजनीति विज्ञान, कानून और लोक नीति से जुड़ी है. उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में PHD की है. वह महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास से जुड़ी कई पहलों में भी काम कर चुकी हैं.
किचन के काम को बनाएं आसान, 1000 रुपये के बजट में खरीदें ये सामान
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इंडियन, ऑयल, का, पेट्रोल, पंप, चला, रहा, बेटा, उसूल, पर, कंपनी, की, डायरेक्टर, ने, छोड़, दिया, पद</media:keywords>
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        <title>चंद्रशेखरन की ताजपोशी को Tata Trust ने बताया गैर&amp;कानूनी, खारिज किया बोर्ड का फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड की ओर से एन चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन नियुक्त किए जाने को गैर कानूनी बताया है और बोर्ड के फैसले को खारिज कर दिया है. टाटा ट्रस्ट्स का साफ कहना है कि बोर्ड की बैठक में पड़े 4:1 के वोट का कोई कानूनी मतलब नहीं है, क्योंकि कंपनी के नियमों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स की सहमति अनिवार्य शर्त है, जो कि पूरी नहीं हुई.
टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए दोबारा चैयरमेन के पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को कानूनी रूप से शून्य करार दिया है. टाटा ट्रस्ट्स ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि कंपनी के नियमों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों का सकारात्मक समर्थन किसी भी निर्णय लेने के लिए बोर्ड को नहीं दिया गया था.&amp;nbsp;
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&#039;कास्टिंग वोट&#039; के इस्तेमाल का तर्क भी खारिज
ट्रस्ट्स ने बोर्ड की ओर से &#039;कास्टिंग वोट&#039; के इस्तेमाल के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि जब नियम साफ हैं तो इसे गतिरोध नहीं कहा जा सकता. टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि अध्यक्ष का निर्णायक मत केवल तभी लागू होता है, जब पूरे बोर्ड में मतों की बराबरी हो. यह टाटा ट्रस्ट्स के मनोनीत निदेशकों पर लागू नहीं होता. चाहे मतदान का रिजल्ट 4:1 रहा हो या कोई और आंकड़ा, यह मान्य योग्य नहीं है.
टाटा ट्रस्ट्स ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया है कि टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित सदस्य हैं. दो में से बहुमत दो होता है, एक नहीं. एक निदेशक ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था और इसलिए एसोसिएशन के नियमों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों का सकारात्मक समर्थन नहीं दिया गया. ट्रस्ट्स ने कहा कि ऐसे में शर्त पूरी नहीं हुई और इसलिए प्रस्ताव भी विफल हो गया.
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टाटा ट्रस्ट्स ने दिया साइरस मिस्त्री विवाद का हवाला
टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के नियमों के तहत ट्रस्ट के नामित डायरेक्टर्स को मिले Affirmative Voting Rights पूरी तरह वैध हैं, क्योंकि खुद टाटा संस ने पहले सुप्रीम कोर्ट में साइरस मिस्त्री विवाद के दौरान इन्हीं नियमों का जोरदार बचाव किया था. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने भी टाटा संस की दलील मानते हुए इन नियमों को सही ठहराया था.
ऐसे में ट्रस्ट्स का तर्क है कि जिस सुरक्षा और अधिकार को खुद टाटा संस ने देश की सबसे बड़ी अदालत में सही साबित कराया था, आज वह अपनी सुविधानुसार उसी नियम से पीछे नहीं हट सकती और न ही उसे नजरअंदाज कर सकती है.यह भी देखें-
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चंद्रशेखरन, की, ताजपोशी, को, Tata, Trust, ने, बताया, गैर-कानूनी, खारिज, किया, बोर्ड, का, फैसला</media:keywords>
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        <title>गोवर्धन योजना: प्लांट लगाने पर 30 करोड़ देगी सरकार, बायोगैस पर नियम जारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गोवर्धन-योजना-प्लांट-लगाने-पर-30-करोड़-देगी-सरकार-बायोगैस-पर-नियम-जारी</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप कचरे से बायोगैस या कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने का प्लांट लगाने की योजना बना रहे हैं, तो सरकार की गोवर्धन योजना आपके लिए अहम हो सकती है. इस योजना के तहत पात्र CBG परियोजनाओं को पूंजी सहायता के साथ गैस की सुनिश्चित खरीद और तय कीमत का फायदा मिल सकता है. सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक के लिए गोवर्धन योजना का नया ढांचा लागू किया है.&amp;nbsp;
इस योजना का खास मकसद गोबर, कृषि अवशेष, खाद्य कचरे और दूसरे जैविक कचरे से CBG और जैविक खाद बनाने वाली परियोजनाओं को बढ़ावा देना है. ऐसे में आइए जानते हैं कि सरकार की इस योजना में क्या-क्या फायदे मिलेंगे और प्लांट लगाने वालों के लिए नए नियम क्या हैं.
क्या है गोवर्धन योजना?
गोवर्धन (Galvanising Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना के तहत गोबर, कृषि अवशेष, खाद्य कचरे और दूसरे जैविक कचरे को बायोगैस, CBG और जैविक खाद जैसे उत्पादों में बदला जाता है. सरकार ने इस योजना के लिए 23,731 करोड़ का प्रवधान किया है. हालांकि सरकार का मानना है कि इससे CBG प्लांट लगाने वालों को बाजार और कमाई को लेकर ज्यादा स्पष्ट मिलेगी.&amp;nbsp;
इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप चला रहा बेटा, उसूल पर कंपनी की डायरेक्टर ने छोड़ दिया पद
प्लांट लगाने पर मिलेगी 30 करोड़ रुपये तक की मदद

पात्र CBG परियोजनाओं को अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता मिल सकती है.
नए ग्रीनफील्ड प्लांट के लिए पात्र CBG क्षमता के हिसाब से 1.25 करोड़ रुपये प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक सहायता मिल सकती है.
ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को अतिरिक्त क्षमता के लिए ग्रीनफील्ड दर की 50% तक सहायता दी जा सकती है.
मौजूदा बायोगैस प्लांट को CBG उत्पादन के लिए अपग्रेड करने पर प्रति TPD 0.60 करोड़ रुपये तक सहायता का प्रावधान है.
इसके अलावा फीडस्टॉक कलेक्शन और जैविक खाद से जुड़ी मशीनरी पर पात्र खर्च की 50% तक हो सकती है, जिसकी सीमा 0.75 करोड़ रुपये प्रति TPD है.

CBG की खरीद और कीमत को लेकर भी राहत&amp;nbsp;
इस नई योजना के तहत पात्र उत्पादक बिक्री के लिए उपलब्ध CBG की 100% तक की सुनिश्चित खरीद का ऑप्शन चुन सकते हैं. हालांकि सरकार ने 95% मीथेन कंटेंट के आधार पर CBG के लिए करीब 98 रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर कीमत तय की है. यह कीमत कम से कम 31 मार्च 2036 तक लागू रहने का प्रावधान है.&amp;nbsp;
चंद्रशेखरन की ताजपोशी को Tata Trust ने बताया गैर-कानूनी, खारिज किया बोर्ड का फैसला
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गोवर्धन, योजना:, प्लांट, लगाने, पर, करोड़, देगी, सरकार, बायोगैस, पर, नियम, जारी</media:keywords>
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    <item>
        <title>1000 करोड़ की जमीन खरीदेगी आशियाना हाउसिंग, कहां&amp;कहां बनेंगे घर और Flats?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/1000-करोड़-की-जमीन-खरीदेगी-आशियाना-हाउसिंग-कहां-कहां-बनेंगे-घर-और-flats</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी रियल एस्टेट से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी रखते हैं, तो आशियाना हाउसिंगकी विस्तार योजना आपके लिए अहम हो सकती है. आशियाना हाउसिंग कंपनी ने इस वित्त साल में जमीन खरीदने के लिटीए करीब 1,000 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी में है. कंपनी का फोकस सामान्य आवास के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई हाउसिंग बनाने पर भी रहेगा.&amp;nbsp;
आशियाना हाउसिंग के MD विशाल गुप्ता के मुताबिक, आवास की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. इसी को देखते हुए कंपनी दिल्ली-NCR, राजस्थान, महाराष्ट्र और तामिलनडु जैसे जैसे बाजारों में अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है.&amp;nbsp;
किन शहरों में बढ़ाएगी कंपनी अपना कारोबार?
आशियाना हाउसिंग दिल्ली-NCR, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे बाजारों में विस्तार कर रही है. हालांकि जमीन का इस्तेमाल सामान्य आवासीय और वरिष्ठ नागरिकों के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स विकसित करने में किया जाएगा. जमीन सीधे खरीदने के अलावा कंपनी जमीन मालिकों के साथ ज्वाइंट डेवलपमेंट के जरिए भी प्रोजेक्ट्स तैयार करेगी. कंपनी के पास जमीन खरीद के लिए निवेश को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी मौजूद है.
इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप चला रहा बेटा, उसूल पर कंपनी की डायरेक्टर ने छोड़ दिया पद
पुणे में खरीदी 28.55 एकड़ जमीन
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान आशियाना हाउसिंग ने पुणे में 28.55 एकड़ जमीन सीधे खरीदी है. यह कंपनी का वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रोजेक्ट विकसित करने का अब तक का सबसे बड़ा जमीन सौदा बताया गया है. जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का बिक्री योग्य क्षेत्र करीब 20 लाख वर्ग फुट होगा और इससे करीब 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
कंपनी की बिक्री बुकिंग में आई गिरावट
आशियाना हाउसिंग ने वित्त वर्ष 2026-27 में बिक्री बुकिंग पिछले वित्त वर्ष के आसपास रखने का लक्ष्य बताया है. पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की प्री-सेल्स करीब 2,400 करोड़ रुपये से ज्यादा रही थी. हालांकि, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी की बिक्री बुकिंग घटकर 358 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 431 करोड़ रुपये था.
किचन के काम को बनाएं आसान, 1000 रुपये के बजट में खरीदें ये सामान
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>1000, करोड़, की, जमीन, खरीदेगी, आशियाना, हाउसिंग, कहां-कहां, बनेंगे, घर, और, Flats</media:keywords>
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        <title>कितने में होगी आज गैस सिलेंडर की बुकिंग? जानें कमर्शियल और घरेलू LPG के रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कितने-में-होगी-आज-गैस-सिलेंडर-की-बुकिंग-जानें-कमर्शियल-और-घरेलू-lpg-के-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कितने-में-होगी-आज-गैस-सिलेंडर-की-बुकिंग-जानें-कमर्शियल-और-घरेलू-lpg-के-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ आज रविवार, 20 सितंबर 2026 को सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ( IOCL, BPCL, HPCL) ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. घरेलू सिलेंडर के दाम पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, इस महीने की शुरुआत (1 सितंबर) को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 9.50 रुपये प्रति सिलेंडर की मामूली बढ़ोतरी की गई थी.&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर के कब-कब बदले गए दाम?
साल 2026 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल व LNG की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के चलते घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में दो बार बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. सबसे पहले 7 मार्च को 60 रुपये बढ़ाए गए थे. उस दौरान पश्चिम एशिया में संकट के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया था. इसके बाद 7 जून, 2026 को 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, तब से लेकर आज तक कीमतें स्थिर हैं.&amp;nbsp;
शहरवार चेक करें कीमत



शहर
घरेलू सिलेंडर के रेट
कमर्शियल सिलेंडर के रेट&amp;nbsp;


दिल्ली
942 रुपये
2,747.50 रुपये


मुंबई
941.50 रुपये
2,701 रुपये


कोलकाता&amp;nbsp;
968 रुपये
2,884 रुपये


बेंगलुरु
944.50 रुपये
2,831 रुपये


हैदराबाद
994 रुपये
2,996 रुपये


चेन्नई
957.50 रुपये
2,916.50 रुपये


जयपुर
945.50 रुपये
2,776 रुपये


बीकानेर
953.50 रुपये
2,798.50 रुपये


रांची&amp;nbsp;
1,010.50 रुपये
2,925.50 रुपये



अमेरिका और ईरान के बीच जंग की क्या है स्थिति?
मिडिल ईस्ट में संकट के माहौल के बीच कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव का रुख बरकरार है. इस बीच, वॉशिंगटन में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. इस दौरान दक्षिण कोरिया ने अमेरिका को भरोसा दिलाया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य &amp;nbsp;(Strait of Hormuz) से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बहाल करने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में अपना सक्रिय योगदान देगा. दक्षिण कोरिया खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है.
अगर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य सहयोगी देश मिलकर इस समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करते हैं, तो सप्लाई चेन के बाधित होने का डर कम होगा. इससे अंर्तराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही अचानक तेजी पर लगाम लगने की संभावना है. भारत के लिए यह राहत की बात होगी क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है. होर्मुज में सुरक्षा बढ़ेगी, तो भारतीय तेल कंपनियों को स्थिर कीमतों पर क्रूड ऑयल मिलता रहेगा, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी.

ये भी पढ़ें:
LPG: आधार से पहचान नहीं कराई तो क्या गैस सिलेंडर मिलना बंद हो जाएगा?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कितने, में, होगी, आज, गैस, सिलेंडर, की, बुकिंग, जानें, कमर्शियल, और, घरेलू, LPG, के, रेट</media:keywords>
    </item>
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        <title>अगले हफ्ते 6 दिन बैंक रहेंगे बंद, देखें 21 से 27 सितंबर के बीच छुट्टियों की पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अगले-हफ्ते-6-दिन-बैंक-रहेंगे-बंद-देखें-21-से-27-सितंबर-के-बीच-छुट्टियों-की-पूरी-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अगले-हफ्ते-6-दिन-बैंक-रहेंगे-बंद-देखें-21-से-27-सितंबर-के-बीच-छुट्टियों-की-पूरी-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप अगले हफ्ते यानी कि कल 21 सितंबर से शुरू हो रहे सप्ताह में बैंक जाकर अपना कोई जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो आपको थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. दरअसल, इस दौरान रीजनल छुट्टियों और वीकेंड के चलते बैंक के कामकाज पर असर पड़ेगा. &amp;nbsp;21 सितंबर से 27 सितंबर, 2026 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक 6 दिन बंद रहेंगे. हालांकि, इस दौरान पूरे भारत में बैंक एक साथ बंद नहीं रहेंगे क्योंकि स्थानीय त्योहारों या किसी खास मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक अलग-अलग दिन बंद रहते हैं.
21 से 27 सितंबर 2026 के बीच बैंक हॉलिडे का पूरा शेड्यूल

21 सितंबर 2026 (सोमवार)- गुवाहाटी, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में श्रीमंत शंकरदेव की जयंती और श्री नारायण गुरु समाधि दिवस के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे.&amp;nbsp;
22 सितंबर 2026 (मंगलवार)- कर्मा पूजा के मौके पर रांची में बैंकों की छुट्टी रहेगी.
23 सितंबर 2026 (बुधवार)- महाराजा हरि सिंह जी की जयंती के उपलक्ष्य में जम्मू और श्रीनगर में बैंकों में कामकाज बंद रहेगा.
25 सितंबर 2026 (शुक्रवार)- &amp;nbsp;इंद्रजात्रा के पावन त्योहार पर गंगटोक (सिक्किम) में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी.
26 सितंबर 2026 (शनिवार)- महीने का चौथा शनिवार होने के कारण पूरे भारत में सभी बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे.
27 सितंबर 2026 (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश होने की वजह से देशभर के सभी बैंकों में छुट्टी रहेगी.

डिजिटल सेवाएं रहेंगी चालू
बैंक शाखाएं भले ही बंद रहे, लेकिन ग्राहकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस दौरान सभी डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाएं 24/7 चालू रहेंगी. ATM से कैश निकाल सकेंगे, बैलेंस चेक कर सकेंगे. मोबाइल बैंकिंग ऐप चालू रहेंगे. Google Pay, PhonePe, Paytm के जरिए पैसों का लेन-देन हमेशा की तरह आसानी से किया जा सकेगा. इनके जरिए आप बिल पेमेंट, रिचार्ज वगैरह भी कर सकते हैं. हालांकि, अगर आप कैश डिपॉजिट या चेक क्लियरिंग या फिर लॉकर से जुड़ा कोई जरूरी काम करना चाहते हैं, तो आपको बैंक खुलने तक का इंतजार करना होगा.&amp;nbsp;

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सरकारी खजाने में बंपर इजाफा, कहां खर्च होता है आपकी जेब से निकला पैसा?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अगले, हफ्ते, दिन, बैंक, रहेंगे, बंद, देखें, से, सितंबर, के, बीच, छुट्टियों, की, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>NTPC ने कैंसिल किया 400 करोड़ का टेंडर, सोमवार को फोकस में रहेंगे शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी एनटीपीसी (NTPC) ने जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने शनिवार को कहा कि उसने GR Infraprojects के 400 करोड़ रुपये के टेंडर को कैंसिल कर दिया है, जो महाराष्ट्र के मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन पर 400-MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ था.&amp;nbsp;
क्यों हुआ कैंसिल?
कंपनी ने एक बयान में कहा कि कॉन्ट्रैक्टर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने और प्रोजेक्ट में जरूरी प्रोग्रेस हासिल करने में नाकाम रहा. कंपनी ने कहा, &quot;NTPC ने मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन पर 400-MWh BESS प्रोजेक्ट के लिए GR Infraprojects को दिया गया कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया है क्योंकि कॉन्ट्रैक्टर अपनी कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी जिम्मेदारियां पूरी करने और प्रोजेक्ट में जरूरी प्रोग्रेस हासिल करने में नाकाम रहा.&#039;&#039;
राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों के तहत इस प्रोजेक्ट को ठेका मिलने की तारीख (अप्रैल 2026) से 15 महीनों के भीतर पूरा किया जाना था, लेकिन शुरुआती 6 महीनों में ही इसके मुख्य निर्माण कार्यों में काफी देरी हो गई.
एनटीपीसी ने कहा कि उसने जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के लिए संविदात्मक नोटिस भी जारी किया था, लेकिन बावजूद इसके कोई कदम नहीं उठाए जाने की वजह से दोनों कंपनियों के बीच विवाद बढ़ा और प्रोजेक्ट आखिरकार कैंसिल हो गया.&amp;nbsp;
फोकस में रहेंगे शेयर
कल यानी कि 21 सितंबर को हफ्ते के पहले कारोबारी दिन दोनों ही कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी. एक तरफ 400 करोड़ से अधिक का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट हाथ से निकलने की खबर से सोमवार को GR Infraprojects के शेयर में भारी बिकवाली देखी जा सकती है. दूसरी तरफ एनटीपीसी चूंकि एक दिग्गज नवरत्न कंपनी है इसलिए 400 करोड़ के प्रोजेक्ट के कैंसिल होने की खबरों का इसके शेयरों पर कोई नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है.&amp;nbsp;
बता दें कि एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited) भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और यह वर्तमान में देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी है. भारत में पैदा होने वाली कुल बिजली का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले एनटीपीसी के पावर प्लांटों से आता है. कंपनी पारंपरिक थर्मल पावर के साथ-साथ अब रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) में भी तेजी से विस्तार कर रही है.

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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सरपट भाग रही &amp;apos;कांदा एक्सप्रेस&amp;apos;, फिर क्यों नहीं थम रहे प्याज के दाम; कब होगी सस्ती?</title>
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        <description><![CDATA[ लोकल सब्जी मार्केट में, किराने की दुकान या ठेले पर प्याज अभी भी 70 रुपये प्रति किलो के लगभग बेची जा रही है. जबकि कीमतें कम करने की सरकार की कोशिश लगातार बनी हुई है. बफर स्टॉक से बाजार में भारी सप्लाई बढ़ाई गई है, &#039;कांदा एक्सप्रेस&#039; जैसी विशेष ट्रेनों के जरिए शहरों तक प्याज पहुंचाने का काम किया जा रहा है. फिर भी दाम नहीं घट रहे हैं.
जानकारों का कहना है कि देर से आए मॉनसून की वजह से खरीफ की नई फसल आने में देरी हुई है इसलिए सितंबर और अक्टूबर में भी बाजार में कीमतें ऊंची रहने की संभावना है. हालांकि, नवंबर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
थोक और रिटेल प्राइस में बड़ा अंतर
कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के डेटा के अनुसार, 18 सितंबर को प्याज की ऑल-इंडिया औसत रिटेल कीमत 53.86 रुपये प्रति किलो थी, जो एक साल पहले की 27.6 रुपये की कीमत से 95% ज्यादा है. कहीं-कहीं बाजारों में कीमतें अभी भी 70 रुपये के आसपास बनी हुई हैं. 18 सितंबर को ही औसत होलसेल कीमत 45.76 रुपये प्रति किलो रही, जो एक साल पहले की 21.51 रुपये की कीमत से दोगुनी से भी ज्यादा है.&amp;nbsp;
सरकार NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) और Nafed (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) जैसी कोऑपरेटिव संस्थाओं, केंद्रीय भंडार आउटलेट्स और मोबाइल वैन के जरिए अपने प्राइस-स्टेबिलाइजेशन बफर से 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी वाली कीमत पर प्याज सप्लाई कर रही है.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस साल सरकार के 1,20,000 टन के बफ़र स्टॉक से अब तक लगभग 9,200 टन प्याज भेजा जा चुका है. इन सबके बावजूद थोक और खुदरा बाजार के बीच भारी अंतर देखा जा रहा है.&amp;nbsp;
क्याें कीमतें नहीं हो रहीं कम?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिसिल में रिसर्च डायरेक्टर पूषण शर्मा ने कहा, &quot;हाल ही में रिटेल मार्केट में प्याज की कीमतों में जो तेजी आई है, वह मुख्य रूप से सप्लाई की वजह से है.&quot;
सालाना प्याज उत्पादन में रबी फसल का हिस्सा लगभग 60-70% होता है और आमतौर पर सितंबर के आखिर तक बाजार में इसकी सप्लाई होती है. लेकिन इस साल मानसून में देरी और बेमौसम अत्यधिक बारिश के चलते खेतों और गोदामों में रखी रबी प्याज की क्वालिटी खराब हो गई है. ये खराब स्टॉक बाजारों में बेचने लायक नहीं रहे. अब खरीफ की नई आवक अक्टूबर के अंत या नवंबर में ही शुरू हो पाएगी. तब तक बाजार पूरी तरह से पुराने सीमित बफर स्टॉक पर ही निर्भर है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>कल बाजार खुलने से पहले देख लें शेयरों की ये लिस्ट, सही दांव कराएगा तगड़ी कमाई!</title>
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        <description><![CDATA[ कल से एक नया कारोबारी हफ्ता शुरू हो रहा है. इस दौरान कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. इन पर सही तरीके और सूझबूझ से लगाया गया दांव तगड़ी कमाई करा सकता है इसलिए कल कारोबार के दौरान इन शेयरों पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी. आइए कल फोकस में रहने वाले स्टॉक्स की लिस्ट में एक नजर डालते हैं:-
Manipal Health Enterprises
मणिपाल हॉस्पिटल को चलाने वाली इस कंपनी ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, मणिपाल हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 5,310 करोड़ के लिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर का पूर्ण रूप से भुगतान (Redeem) कर दिया है. यह कदम कंपनी की लिस्टिंग के बाद की वित्तीय रणनीति का एक हिस्सा है, जिसका मकसद बैलेंस शीट को मजबूत करना है. कंपनी के इस गतिविधि का असर कल इसके शेयरों में दिख सकता है.&amp;nbsp;
Mazagon Dock Shipbuilders
डिफेंस सेक्टर की इस नवरत्न पीएसयू ने शुक्रवार, 18 सितंबर को आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में एक विशाल ग्रीनफील्ड शिपयार्ड बनाने के लिए नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-AP (NSHIP-AP) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत अगले पांच से सात सालों में करीब 45,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिससे आंध्र प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा.&amp;nbsp;
Lenskart Solutions
आईवियर रिटेलर Lenskart Solutions Ltd में लगभग 2,047.4 करोड़ की ब्लॉक डील होने वाली है, जिसमें Platinum Jasmine A 2018 Trust 682.45 रुपे प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर शेयर बेच रहा है. यह शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस 706.60 रुपये से करीब 3.5% डिस्काउंट पर है. इससे स्टॉक के कल दबाव में रहने की संभावना है.&amp;nbsp;
Maruti Suzuki India
ऑटोमेकर कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने &#039;ऑटो ग्रीन मिशन&#039; के तहत Swift, Dzire और Baleno मॉडल्स के ऑटोमैटिक S-CNG वेरिएंट्स लॉन्च किए हैं, जिनमें CNG पावरट्रेन को ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) के साथ जोड़ा गया है. बढ़ते इनपुट कॉस्ट के बीच कंपनी की इस नई वॉल्यूम-ड्रिवेन रणनीति पर कल निवेशकों की नजर रहेगी.&amp;nbsp;
Nibe&amp;nbsp;
डिफेंस इंजीनियरिंग कंपनी निबे लिमिटेड ने शुक्रवार (18 सितंबर) को बताया कि उसने &amp;nbsp;फ्रांस की दिग्गज रक्षा कंपनी नेवल ग्रुप के साथ नेवल शिपबिल्डिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसमें अंडरवॉटर ड्रोन, सबमरीन सिस्टम, माइन काउंटरमेज़र सिस्टम और नेवल वेपन लॉन्चिंग सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल हैं. इस खबर के चलते सोमवार को निबे के शेयरों पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी.
Nestle India
FSSAI ने नेस्ले इंडिया के &#039;NAN Excella Pro Stage 1&#039; और &#039;Lactogen Pro 1&#039; प्रोडक्ट्स से जुड़े नियमों का पालन न करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है इस कार्रवाई पर नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि ये प्रोडक्ट्स लागू नियमों के मुताबिक हैं और इनके लेबल को FSSAI की एक्सपर्ट कमिटी द्वारा बाकायदा मंजूरी दी गई थी. इस खबर का शेयरों पर असर दिख सकता है.
NDMC
सरकारी आयरन ओर उत्पादक कंपनी NMDC ने साल 2047 तक अपने ऑपरेशनल उत्सर्जन को नेट-जीरो करने के लिए एक विस्तृत 3-चरणीय रोडमैप जारी किया है. कंपनी का लक्ष्य परिचालन से होने वाले अपने उत्सर्जन में 90% की सीधी कटौती करना है. इसमें सीधे ईंधन की खपत और बिजली की खपत से होने वाले &#039;स्कोप 1&#039; और &#039;स्कोप 2&#039; एमिशन शामिल हैं.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>महिलाओं के लिए खुशखबरी, अब हर रसोई में पहुंचेगी बर्तन धोने की मशीन, सस्ते हुए डिशवॉशर</title>
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        <description><![CDATA[ एक ऐसा भी समय था जब भारत के घरों में डिशवॅाशर को जरूरत से ज्यादा महंगा और लगजरी माना जाता था. लेकिन अब कुछ समय से इसका आईना बदलता नजर आ रहा है. कीमतों में कमी और डिशवॅाशर कि मांग जरूरतों के आधार पर बढ़ती नजर आ रही है. इसकी मांग ज्यादातर छोटे शहरों में देखने को मिल रही है.&amp;nbsp;GST के घटने से कीमतों में आई कमी22 सितंबर साल 2025 में डिशवॅाशर पर GST को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था. इसी के चलते कंपनियों ने भी कीमतों में करीब 4,500 से 7,500 रुपये तक कि कमी कि गयी है. अब से डिशवॅाशर कि शुरुआती कीमत लगभग 25 हजार रुपये कर दी गयी है, जिससे यह साबित होता है कि अब के समय में डिशवॅाशर कि कीमत फ्रिज और वॅाशिंग मशीन जैसे घरेलू उपकरणों कि कीमत के मुकाबले पहुंच चुकी है.&amp;nbsp;
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2026 में खरीदारी ने पकड़ी रफ्तारजब से टेक्स में बदलाव कराये गये हैं, तब ही से डिशवॅाशर की खरीदारी मार्किट में तेजी से बढ़ती नजर आ रही है. साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में इसकी बिक्री पिछले साल के मुकाबले में अवधि की तुलना में 49 प्रतिशत बढ़ी है. वहीं दूसरी ओर 15 प्लेट सेटिंग वाले बढ़े मॅाडल की बिक्री में 137 प्रतिशत दर्ज &amp;nbsp;कराई गयी. टियर-2 के शहर अब कुल यूनिट बिक्री में करीब 30 प्रतिशत योगदान दिखाई दिया गया.&amp;nbsp;भारतीय बर्तनों के लिए तैयार हो रही मशीनें&amp;nbsp;
डिशवॉशर कि कंपनियां अब भारतीय किचन के बर्तनों के हिसाब से बना रहीं हे डिशवॅाशर की मशीनें. साधारण शब्दों में कहा जाए तो इसका मतलब है कि भारतीय किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तन जैसे कि कड़ाही धोने, मसाले के दाग हटाने और बिरयानी के बर्तन व प्रेशर कुकर साफ करने जैसे विकल्प दिए जा रहें हैं. कुछ कंपनियां तो ग्राहकों को मशीन समझाने के लिए ट्रायल और रिटर्न कि सुविधा भी दे रही हैं.&amp;nbsp;अभी भी कम है घरों &amp;nbsp;तक पहुंच&amp;nbsp;इतनी मांग के बावजूद भी देश में डिशवॅाशर की पहुंच अभी काफी कम है. करीब 0.5 प्रतिशत भारतीय घरों में ही इसका इस्तेमाल होता है. इसके मुकाबले अमेरिका और यूरोप में इसकी मांग 70-75 प्रतिशत तक है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>महिलाओं, के, लिए, खुशखबरी, अब, हर, रसोई, में, पहुंचेगी, बर्तन, धोने, की, मशीन, सस्ते, हुए, डिशवॉशर</media:keywords>
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        <title>दुनिया की टॉप 10 एयरलाइंस की लिस्ट जारी, आप किसकी फ्लाइट में करते हैं सफर?</title>
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        <description><![CDATA[ देश से विदेश या फिर एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए लोग फ्लाइट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अक्सर लोग फ्लाइट टिकट बुक करते समय केवल किराया ही नहीं देखते, बल्कि ये भी देखते हैं कि जिस एयरलाइन से सफर करने वाले हैं उसमें सुविधाएं क्या-क्या है और क्या वो दूसरी एयरलाइंस के मुकाबले ज्यादा बेहतर है? ऐसे में दुनिया की सबसे बेहतरीन एयरलाइंस को लेकर लिस्ट सामने आई है.&amp;nbsp;
दरअसल, Skytrax की 2026 की रैंकिंग सामने आई है, जिसमें अलग-अलग देशों की एयरलाइंस को यात्रियों के एक्सपीरियंस के आधार पर रखा गया है. ऐसे में जानते हैं कि इस लिस्ट में टॉप पर किस एयरलाइंस का नाम है?
नंबर वन पर कौन है?

टॉप एयरलाइंस की लिस्ट में Singapore Airlines का नाम नंबर वन पर है.
फिर Qatar Airways दूसरे नंबर पर है.
इसके बाद Cathay Pacific तीसरे नंबर पर है.
चौथे नंबर पर ANA All Nippon Airways है.
इसके बाद Turkish Airlines पांचवे नंबर पर है.
वहीं छठे नंबर पर Emirates है.
फिर सातवे नंबर पर Air France है.
आगे आठवें नंबर पर Hainan Airlines है.
फिर नौवें नंबर पर Japan Airlines ने अपनी जगह बनाई है.
और दसवें नंबर पर Korean Air ने अपनी जगह बनाई है.

टॉप 20 में &amp;nbsp;इन एयरलाइंस ने बनाई जगह

Skytrax की 2026 की लिस्ट में 11वें नंबर पर EVA Air है.
फिर 12वें नंबर पर Qantas Airways है
आगे 13वें नंबर पर STARLUX Airlines है.
फिर 14वें नंबर पर Lufthansa है.
आगे 15वें नंबर पर Saudi Arabian Airlines ने अपनी जगह बनाई है.
फिर 16वें नंबर पर Iberia है
17 वें नंबर पर Air Canada है.
18वें नंबर पर Virgin Atlantic है.
19 वें SWISS International Air Lines है.
20 वें नंबर पर Thai Airways है.

महिलाओं के लिए खुशखबरी, अब हर रसोई में पहुंचेगी बर्तन धोने की मशीन, सस्ते हुए डिशवॉशर
कैसे तैयार की गई लिस्ट?
Skytrax World Airline Awards की 2026 की लिस्ट यात्रियों के एक्सपीरियंस और उनकी राय के आधार पर बनाई गई है. खास बात तो ये है कि इसमें 24.8 मिलियन से ज्यादा यात्रियों के सर्वे शामिल किए गए हैं. साथ ही इसमें 100 से ज्यादा देशों के यात्रियों ने भी अपनी राय दी है. वहीं 300 से ज्यादा एयरलाइंस की राय भी शामिल की गई है. इस लिस्ट को यात्रियों के 2025 से अगस्त 2026 के बीच मिले एक्सपीरियंस के आधार पर बनाई गई है.
सरकारी खजाने में बंपर इजाफा, कहां खर्च होता है आपकी जेब से निकला पैसा?
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दुनिया, की, टॉप, एयरलाइंस, की, लिस्ट, जारी, आप, किसकी, फ्लाइट, में, करते, हैं, सफर</media:keywords>
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        <title>UPI नहीं तो कार्ड पर 2% चार्ज लगा सकता है दुकानदार? RBI ने बताया</title>
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        <description><![CDATA[ यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर बवाल जारी है. व्यापारी वर्ग इसका खूब विरोध कर रहे हैं. व्यापारियों ने साफ कहा है कि हम 15 अक्टूबर के बाद 2000 रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट नहीं लेंगे. इस बीच अब क्रेडिट कार्ड से पेमेंट की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि अगर यूपीआई से पेमेंट नहीं होगा तो लोग या तो कैश देंगे या कार्ड से पेमेंट करेंगे.&amp;nbsp;
क्रेडिट कार्ड से पेमेंट को लेकर पहले ही व्यापारी ग्राहकों से 2% के हिसाब से चार्ज वसूलते हैं. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि क्या 2% चार्ज को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने कोई नियम बनाया है. जानिए आरबीआई का इसपर क्या कहना है.
RBI ने क्या बताया?
RBI ने स्पष्ट किया है कि क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर ऐसे चार्ज को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. ऐसे में अगर कोई दुकानदार आपसे एक्स्ट्रा चार्ज मांगता है तो उसका भुगतान न करें और साथ ही दुकानदार एक्स्ट्रा चार्ज किस लिए ले रहा है, इस बारे में जरूर पूछे.&amp;nbsp;
शिकायत कर सकते हैं आप
अगर दुकानदार आपके पीछे पड़ता है और बार-बार आपसे एक्स्ट्रा चार्ज देने के लिए कहता है तो ऐसे में आप सीधा शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए आप संबंधित बैंक या फिर कार्ड जारी करने वाली संस्थान से भी शिकायत कर सकते हैं और अगर जरूरत पड़ती है तो आप सीधे RBI के शिकायत पोर्टल की मदद से भी मामला दर्ज करवा सकते हैं. इसलिए हमेशा ध्यान रखें, कि अगर कोई दुकानदार क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा चार्ज मांगता है तो आप बिल्कुल भी पैसे न दें.&amp;nbsp;
दुनिया की टॉप 10 एयरलाइंस की लिस्ट जारी, आप किसकी फ्लाइट में करते हैं सफर?
कैसे करें शिकायत?
सबसे पहले तो आप संबंधित बैंक के पास शिकायत करें और अगर आपकी समस्या का वहां पर कोई समाधान नहीं होता है तो आप सीधे RBI के CMS( Complaint Management System) पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं.

शिकायत करने के लिए सबसे पहले आप RBI के आधिकारिक शिकायत पोर्टल पर जाएं.
इसके बाद आपको यहां पर File a Complaint का ऑप्शन मिलेगा.
फिर आपसे कुछ जानकारी मांगी जाएगी, उन सभी जानकारियों को भरें.
अब आपको संबंधित बैंक का नाम चुनना होगा.
इसके बाद शिकायत की कैटेगरी में Violation of Rules/ Merchant Practices का ऑप्शन चुनें.
फिर दुकानदार का नाम क्या है और एड्रेस भरकर शिकायत सबमिट कर दें.

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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>पेट्रोल पंपों पर UPI बंद, 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर लगी रोक?</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर आए दिन कई तरह के दावे वायरल होते हैं, जिस पर कई लोग तो आंख बंद करके भरोसा भी कर लेते हैं. लेकिन असल में उसके पीछे की सच्चाई जाननी जरूरी होती है. ऐसे में इन दिनों भी सोशल मीडिया पर पेट्रोल पंप से जुड़ा एक मैसेज जमकर शेयर किया जा रहा है, जिसमें कहां जा रहा है कि अब पेट्रोल पंपों पर 2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर रोक लगाई जाएगी. इतना ही नहीं, बल्कि 23 सितंबर को नौ UPI डे मनाने की भी बात सामने आई है. लेकिन हकीकत में इस दावे की सच्चाई क्या है ये जानना सभी के लिए काफी जरूरी है.
क्या दावा किया जा रहा है?
दरअसल, इंडियन ऑयल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस वायरल दावे की जानकारी शेयर की है. इसके साथ ही इस दावे की सच्चाई क्या है उस बारे में भी जानकारी दी है. दावा यह किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में अगर कोई व्यक्ति पेट्रोल पंप पर 2000 से ज्यादा का भुगतान UPI से करता है तो उसको स्वीकार नहीं किया जाएगा. यानी मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप मालिक 2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर MDR लागू किए जाने का विरोध करेंगे. साथ ही 23 सितंबर 2026 को इंदौर में नौ UPI डे &amp;nbsp;मनाने तक की बात कही गई है.

ClaimA message is going viral on social media claiming that petrol pump owners in Madhya Pradesh have announced that UPI payments exceeding ₹2,000 will not be accepted in protest against merchant fees and that a &amp;ldquo;No-UPI Day&amp;rdquo; will be observed in Indore on September 23, 2026.&amp;hellip; pic.twitter.com/NwvmmkJFhx
&amp;mdash; Indian Oil Corp Ltd (@IndianOilcl) September 19, 2026



इंडिया ऑयल ने क्या बताया?
इंडियन ऑयल ने एक्स पर इस दावे की सच्चाई बताई है. एक्स पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है. उन्होंने 2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई है. यानी जो वायरल दावे में बताया जा रहा है ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इंदौर में नौ UPI डे &amp;nbsp;मनाने वाला दावा सही है या नहीं?
नौ UPI डे मनाने वाले दावे की सच्चाई क्या है?
इंदौर में नौ UPI डे मनाने का दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है, लेकिन अहम बात यह है कि पेट्रोलियम डीलरों के ग्रुप की तरफ से ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. यानी पेट्रोलियम डीलरों के संगठन ने इस तरह की कोई घोषणा नहीं की है.&amp;nbsp;
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क्या UPI पेमेंट किया जा सकता है?
हां, आप पेट्रोल पंप पर यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकते हैं. पेट्रोल पंप मालिकों ने यूपीआई पेमेंट पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई है. यानी ये दावा पूरी तरह से फेक है और केवल लोगों को गुमराह करने के लिए बनाया गया है. इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी दावे पर भरोसा न करें, पहले उस दावे के पीछे की सच्चाई जरूर चेक करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पेट्रोल, पंपों, पर, UPI, बंद, 2000, से, ज्यादा, के, पेमेंट, पर, लगी, रोक</media:keywords>
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        <title>सीधे 8 रुपया महंगा होगा दूध! सरकार को मिल चुका है 3 दिनों का अल्टीमेटम</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक में लोगों को त्योहारी सीजन से पहले एक औ बड़ा झटका मिल सकता है. यहां जल्द ही दूध की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. दरअसल, कर्नाटक में राज्य के दुग्ध उत्पादक संघों ने दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग की है. यह मांग बेंगलुरु प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाई गई है.
क्यों की जा रही कीमतें बढ़ाने की मांग?
उनका कहना है कि उत्पादन की बढ़ती लागत और दूध के घटते उत्पादन का उन पर दबाव पड़ रहा है. कर्नाटक मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, बामुल (Bamul), चामुल (Chamul), मांड्या मिल्क और तुमकुर (Tumkur) समेत कई बड़े मिल्क यूनियन इस मांग के पक्ष में हैं. संघों ने दूध उत्पादकों को दिए जाने वाले सरकारी प्रोत्साहन (इंसेंटिव) में भी बढ़ोतरी की मांग की है.
इन मांगों को पूरा करने के लिए उत्पादकों ने सरकार को 3 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. अगर इस बीच सरकार कैबिनेट की बैठक बुलाकर इस पर फैसला नहीं लेती, तो उत्पादकों ने &#039;विधान सौध&#039; तक विरोध मार्च निकालने की चेतावनी दी है.&amp;nbsp;
संकट में डेयरी किसान
बामुल मिल्क यूनियन के प्रेसिडेंट नागराज ने कहा कि डेयरी एसोसिएशन पिछले आठ महीनों से राज्य सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है. यूनियनों ने अब दूध की खरीद की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग की है.
दुग्ध संघों के अनुसार, डेयरी किसान इस समय भारी वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं. एक तरफ कम बारिश के चलते मवेशियों के लिए हरे चारे की भारी कमी हो गई है. ऊपर से पशु आहार और कच्चे माल की कीमतों में 25% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. इस पर ट्रांसपोर्टेशन पर भी खर्च बढ़ा है, इन सबको मिलाकर दूध उत्पादन की लागत काफी ऊपर चली गई है. ऐसे में किसानों के लिए मवेशियों को पालना मुश्किल हो गया है. इसका असर उनके कुल उत्पादन पर भी पड़ रहा है.
आम उपभोक्ताओं पर असर
अगर राज्य सरकार दुग्ध संघों की तरफ से उठाई गईं मांगों को मान लेती है और कीमतें बढ़ाने केप्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो नवरात्रि और दीवाली से ठीक पहले नंदिनी जैसे ब्रांड का दूध बेहद महंगा हो जाएगा. इससे न केवल रसोई का बजट गड़बड़ाएगा, बल्कि त्योहारी सीजन में मिठाई, खोया और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं.

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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन की कमाई का पूरा सच, किसकी कितनी है सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ टाटा ग्रुप इन दिनों काफी चर्चा में है, गुरुवार को मुंबई में हुई समूह की बैठक में टाटा एंड संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यभार एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है. इसी बीच ये भी चर्चा सामने आई कि इस बात से नोएल टाटा बिलकुल भी खुश नहीं है. जब चंद्रशेखरन को दोबारा कार्यभार सौंपने के लिए वोटिंग हुई तो नोएल टाटा ने इस पर आपत्ति जताई. हालांकि अन्य बोर्ड मेंबर्स इस फैसले के समर्थन में थे, ऐसे में एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन बना दिया गया है.
नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन दोनों ही टाटा समूह का एक अहम हिस्सा हैं. नोएल टाटा, टाटा फैमिली के मेंबर हैं तो वहीं चंद्रशेखरन पिछले 10 साल से बतौर चेयरमैन पद संभाल रहे हैं. दोनों के बीच के मतभेद का कारण क्या है ये तो कोई नहीं जानता है, लेकिन दोनों ही टाटा समूह के लिए बहुत जरूरी हैं. आइये दोनों के बारे में जानते हैं और दोनों की सम्पत्ति का भी ब्यौरा निकालते हैं.
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कौन हैं नोएल टाटा?नोएल टाटा, टाटा परिवार के सदस्य हैं. वो रतन टाटा के सौतेले भाई हैं. उनके ऊपर टाटा समूह की कई कंपनियों की जिम्मेदारी है. वो बोर्ड में गैर-कार्यकारी भूमिका निभाते हैं और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा ग्रुप में अहम भूमिका है. टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इसका नेतृत्व करने वाला सदस्य भी महत्वपूर्ण पद पर होता है.
कितनी संपत्ति के मालिक हैं नोएल टाटा?वेल्थ इंडेक्स में नोएल टाटा की खुद की संपत्ति का अनुमान करीब 1.5 अरब डॉलर, यानी लगभग 12,000- 12,600 करोड़ रुपये बताया गया है. हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में उनकी संपत्ति के आंकड़े काफी अलग हैं. कुछ अनुमानों में उनकी प्रत्यक्ष शेयरहोल्डिंग और व्यक्तिगत इक्विटी के आधार पर संपत्ति करीब 1,245 करोड़ रुपये यानी लगभग 150 मिलियन डॉलर बताई गई है.
तो वहीं, हुरुन इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, नोएल टाटा और उनके परिवार की संयुक्त संपत्ति 38,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. इसलिए नोएल टाटा की संपत्ति का आंकड़ा इस बात पर निर्भर करता है कि गणना में केवल उनकी खुद की हिस्सेदारी शामिल की जा रही है या परिवार की संपत्ति और अन्य होल्डिंग्स को भी जोड़ा जा रहा है.
नोएल टाटा को कितनी सैलरी मिलती है?सैलरी की बात करें तो नोएल टाटा को किसी सामान्य कर्मचारी की तरह एक कंपनी से हर महीने तय सैलरी नहीं मिलती. वो टाटा समूह की कई कंपनियों में गैर-कार्यकारी निदेशक या चेयरमैन की भूमिका में हैं.
वो ट्रेंट, टाटा स्टील, टाइटन, वोल्टास और टाटा इनवेस्टमेंट जैसी कंपनियों के बोर्ड से जुड़े रहे हैं. इन कंपनियों से उन्हें बोर्ड मीटिंग की फीस और डायरेक्टर कमीशन के रूप में पारिश्रमिक मिलता है. उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, इन सभी भूमिकाओं से उनका कुल सालाना पारिश्रमिक करीब 4.5 से 5 करोड़ रुपये बताया जाता है.
इसके अलावा नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन भी हैं. ये एक परोपकारी संस्था है और इस भूमिका को सामान्य कॉर्पोरेट नौकरी की तरह वेतन वाले पद के रूप में नहीं देखा जाता.
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कौन हैं एन चंद्रशेखरन?एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन हैं. वो पिछले 10 सालों से इस पद को संभाल रहे हैं. तो वहीं आगे आने वाले 5 साल तक और इस पद को संभालने वाले हैं. हालांकि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और वो फरवरी 2027 में इस पद को छोड़ने वाले थे. लेकिन समूह ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा, जिसके बाद वो दोबारा से पद को ग्रहण करने के लिए मान गए.
कितनी है एन चंद्रशेखरन की नेटवर्थ?एन चंद्रशेखरन टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं. उनकी सैलरी नोएल टाटा की बोर्ड फीस की तुलना में काफी ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक, उनका सालाना पैकेज करीब 135 से 155 करोड़ रुपये के बीच बताया जाता है. उनके पैकेज में करीब 13-15 करोड़ रुपये बेसिक सैलरी और भत्ते शामिल बताए जाते हैं. इसके अलावा पैकेज का बड़ा हिस्सा टाटा संस के प्रदर्शन और मुनाफे से जुड़े कमीशन से आता है.
इसका मतलब है कि एन चंद्रशेखरन की कमाई का बड़ा हिस्सा केवल फिक्स्ड सैलरी नहीं, बल्कि कंपनी की परफॉर्मेंस से जुड़ा हुआ है.
दोनों की कमाई में कितना अंतर है?अगर नोएल टाटा के करीब 4.5-5 करोड़ रुपये के सालाना बोर्ड सैलरी और चंद्रशेखरन के 135-155 करोड़ रुपये के अनुमानित सालाना पैकेज की तुलना करें, तो दोनों की सैलरी में करीब 130-150 करोड़ रुपये का अंतर है. इस हिसाब से चंद्रशेखरन का सालाना पैकेज नोएल टाटा को मिलने वाली बोर्ड सैलरी से लगभग 27-30 गुना ज्यादा हो सकता है.
क्यों है ये अंतर?इसका सबसे बड़ा कारण दोनों की भूमिकाओं में अंतर है. एन चंद्रशेखरन एक एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं. यानी वो टाटा संस के रोजमर्रा के बड़े कारोबारी फैसलों, रणनीति और प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभालते हैं. इसलिए उनके पारिश्रमिक में वेतन के साथ कंपनी के परफॉर्मेंस से जुड़ा बड़ा हिस्सा शामिल है.
दूसरी ओर, नोएल टाटा मुख्य रूप से गैर-कार्यकारी बोर्ड भूमिकाओं में हैं. उनका काम कंपनियों के बोर्ड स्तर पर निगरानी, सलाह और रणनीतिक मार्गदर्शन से जुड़ा है. इसलिए उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक एक फुल-टाइम एग्जीक्यूटिव के पैकेज जैसा नहीं है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नोएल, टाटा, और, एन, चंद्रशेखरन, की, कमाई, का, पूरा, सच, किसकी, कितनी, है, सैलरी</media:keywords>
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        <title>सस्ती हुई CNG और PNG, इस शहर में गैस पर टैक्स कटौती का बड़ा ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में लोगों को त्योहारी सीजन से पहले CNG और PNG की कीमतों पर बड़ी राहत मिली है. यहां प्रशासन ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए नेचुरल गैस पर लगने वाले वैट (VAT) को 12.5% से घटाकर सीधे 5% कर दिया है. नई दरें 18 सितंबर 2026 की मध्यरात्रि से पूरी तरह से लागू हो गई हैं.&amp;nbsp;
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
वैट की दर में 7% से ज्यादा की इस ऐतिहासिक कटौती से शहर में कॉम्प्रेस्ड प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी. चंडीगढ़ में इस वक्त घरेलू पीएनजी की कीमत करीब 54.70 रुपये प्रति एससीएम (SCM) है.
वैट में हुई इस भारी कटौती के बाद कीमतों में 3.42 रुपये प्रति एससीएम तक की कमी आने का अनुमान है. इसी तरह से गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी गैस की रिटेल कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा. सीएनजी की कीमत में प्रति किलोग्राम की गिरावट से वाहन चालकों और ऑटो-कैब ऑपरेटरों को सीधा फायदा होगा.&amp;nbsp;
टैक्स में क्यों की गई कटौती?
वैट की दर में कमी के पीछे चंडीगढ़ प्रशासन का मकसद शहर में प्रदूषण को कम करना है और इसके लिए लोगों को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन जैसे सीएनजी और पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
जाहिर सी बात है कि टैक्स कम होगी, तो गैस की सप्लाई करने वाली कंपनियों के लिए शहर में नैचुरल गैस नेटवर्क को बढ़ाने में मदद मिलेगी, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगी. &amp;nbsp;चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के करीब 1.70 लाख घरों को पीएनजी कनेक्शन से जोड़ने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में गैस सस्ती होगी, तो लोग पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से पारंपरिक एलपीजी सिलेंडरों को छोड़कर पीएनजी में शिफ्ट होंगे.
क्या होता है वैट?
वैट यानी कि Value Added Tax एक अप्रत्यक्ष कर है, जो किसी वस्तु के शुरुआती कच्चे माल से लेकर अंतिम रूप में ग्राहक तक पहुंचने के हर एक चरण पर लगाया जाता है. भारत में 1 जुलाई 2017 से पहले अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर वैट (VAT) ही लगाया जाता था, लेकिन 2017 में सरकार ने &#039;एक देश, एक टैक्स&#039; प्रणाली के तहत वैट और अन्य कई टैक्सों को मिलाकर GST (Goods and Services Tax) लागू कर दिया.
हालांकि, भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पाद (जैसे कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ) और प्राकृतिक गैस जैसे कि CNG और PNG को अभी भी GST के दायरे से बाहर रखा गया है इसलिए चंडीगढ़ में वैट को घटाया गया है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सस्ती, हुई, CNG, और, PNG, इस, शहर, में, गैस, पर, टैक्स, कटौती, का, बड़ा, ऐलान</media:keywords>
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        <title>अब भारत पर लगेगा 100% टैरिफ! रूस प्रतिबंध कानून को ट्रंप ने दी मंजूरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-भारत-पर-लगेगा-100-टैरिफ-रूस-प्रतिबंध-कानून-को-ट्रंप-ने-दी-मंजूरी</link>
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        <description><![CDATA[ रुस से तेल और गैस के आयात पर सख्ती बरतते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को &#039;सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026&#039; पर दस्तखत कर दिए हैं. इसी के साथ इस नए कानून पर मुहर लग गई है. इसका मकसद यूक्रेन पर हमलों के लिए रुस की फंडिंग को रोकना है. रूस पर इस कड़े प्रतिबंध वाले बिल को मंजूरी दिए जाने के साथ ही अब भारत और चीन जैसे देशों पर 100% टैरिफ का खतरा मंडराने लगा है क्योंकि दोनों ही रुस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस का आयात करते हैं.&amp;nbsp;
क्या है ट्रंप का नया कानून?
लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. यह नया कानून रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूसी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, अहम वित्तीय संस्थानों और मौजूदा समुद्री प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकरों के &#039;शैडो फ्लीट&#039; पर भी प्रतिबंध लगाता है.
बता दें कि यूक्रेन में जंग के बाद रूस पर लगे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने सैकड़ों तेल टैंकरों का एक गुप्त बेड़ा तैयार किया था, जिसे &#039;शैडो फ्लीट&#039; कहा जाता है. यह नया अमेरिकी कानून इन सभी संदिग्ध टैंकरों को ब्लैकलिस्ट करता है और साथ ही इन जहाजों को अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर डॉक करने, बीमा सेवाएं लेने और समुद्री मार्गों का उपयोग करने से रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना और खुफिया तंत्र को विशेष अधिकार भी देता है.
रूसी अर्थव्यवस्था को पहुंचेगी चोट
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि बिल का मकसद रूस की इकोनॉमी को चोट पहुंचाना है, जिससे यूक्रेन से जंग लड़ने के लिए उसके पास फंड की कमी हो जाए. कानून के प्रावधानों के अनुसार, कानून लागू होने से पिछले 12 महीनों में जो 5 देश रूस से सबसे अधिक मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीद रहे थे और आगे भी नई खरीदारी जारी रखते हैं, वे इसके दायरे में आएंगे. भारत और चीन इसके सबसे बड़े खरीदार हैं.&amp;nbsp;
भारत का क्या है रूख?
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत देश की 140 करोड़ की जनता की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. भारत ने कह दिया है कि उसे अपने देश के लिए किफायती और विश्वसनीय स्त्रोतों की जरूरत है. अगर ट्रंप के नए कानून के बाद भी भारत रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखता है, तो इससे भारत-अमेरिका के मजबूत द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है.

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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>UPI पर ग्राहकों से चार्ज वसूला तो ब्लॉक होगा QR कोड, सरकार की बड़ी तैयारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-पर-ग्राहकों-से-चार्ज-वसूला-तो-ब्लॉक-होगा-qr-कोड-सरकार-की-बड़ी-तैयारी</link>
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        <description><![CDATA[ UPI से 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर मर्चेंट को चार्ज देना होगा. मर्चेंट ये चार्ज ग्राहकों से न वसूल कर पाएं, इसके लिए&amp;nbsp;सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है, जिससे अगर कोई व्यापारी भविष्य में ग्राहकों से चार्ज लेने की कोशिश करे तो उसपर लगाम लगाई जा सके.&amp;nbsp;
ग्राहक से MDR लेने पर QR कोड हो सकता है ब्लॉक
नई व्यवस्था में नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई का विकल्प भी रखा जा सकता है. अगर कोई व्यापारी ग्राहक से जबरदस्ती MDR शुल्क वसूलता पाया जायेगा तो उसका UPI और कोड ब्लॉक किया जा सकता है. इससे व्यापारी के लिए UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करना संभव नहीं रह पाएगा.
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इसके अलावा ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने पर भी अधिक विचार किया जा रहा है. इसके जरिए ग्राहक MDR के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की स्थिति में अपनी शिकायत आराम से बिना किसी परेशानी के दर्ज करा सकते हैं.&amp;nbsp;सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद सिर्फ यही है कि UPI भुगतान के दौरान ग्राहकों से अनुचित शुल्क वसूले जाने पर रोक लगाई जाए, साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाई सुनिश्चित की जा सके.
बता दें कि 15 अक्टूबर से देश भर में यूपीआई पर चार्ज वाला नियम लागू हो जाएगा. एनपीसीआई के मुताबिक 2000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट पर 0.4% की दर से चार्ज लगाया जाएगा और चार्ज पर 18 फीसदी जीएसटी भी वसूला जाएगा. ऐसे में मर्चेंट को 2000 रुपए के पेमेंट पर करीब 9 रुपए 44 पैसे चार्ज देना होगा.&amp;nbsp;
व्यापारियों ने दी है चेतावनी
यूपीआई पर एमडीआर को लेकर व्यापारियों ने चेतावनी दी है. व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार ने नियमों में बदलाव नहीं किया तो मजबूरन उनको कैश की ओर लौटना होगा या फिर 2000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट को स्वीकार नहीं करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>PVR INOX ने कैश लेने से किया इनकार, वकील ने भेजा कानूनी नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ जो लोग सिनमाघरों में फिल्में देखना पसंद करते हैं, उन्हें PVR- INOX की कैशलेस पेमेंट के बारे में तो पता ही होगा. इस पॉलिसी के चलते ही हाल ही में एक एडवोकेट ने इस मल्टीप्लेक्स चेन के नाम नोटिस भेजा है. क्योंकि उनकी इस पॉलिसी की वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल ये मामला अहमदाबाद का है, जहां के रहने वाले एडवोकेट उत्कर्ष दुबे 13 सितंबर को पैलेडियम मॉल में फिल्म देखने गए थे. जब उन्होंने टिकट खरीदने पर पेमेंट कैश में करना चाही तो तो स्टाफ ने उनकी पेमेंट एक्सेप्ट हीं की और उनसे यूपीआई पेमेंट करने के लिए कहा. इतना ही नहीं जब इंटरवल में वो कुछ स्नैक्स लेने के लिए गए तो वहां उन्हें इसी परेशानी का सामना करना पड़ा.
नोटिस में ये साफ कहा गया है कि शिकायतकर्ता यानी दवे को डिजिटल पेमेंट से कोई आपत्ति नहीं है बल्कि इस बात से है कि कार्ड और यूपीआई के अलावा कैश पेमेंट को यहां पूरी तरह से नकार दिया गया है. इस रूल की वजह से कंज्यूमर अपनी मनमर्जी पेमेंट मोट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, यही सबे बड़ी परेशानी है.
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जो UPI नहीं चलाते उनका क्या?इस नोटिस के जरिए दवे ने ये भी पूछा है कि जो लोग UPI नहीं चलाते हैं, उनका क्या होगा? क्योंकि कई बार नेटवर्क का इश्यू भी होता है, या फिर किसी के खाते में पर्टिक्युलर अमाउंट ना हो तो वो व्यक्ति कैसे पेमेंट करेगा, ये बड़ा सवाल है. दवे ने पूछा है कि किसी व्यक्ति के पास UPI की सुविधा नहीं होगी तो क्या उसे टिकट नहीं दिया जाएगा? या फिर उसके लिए कोई व्यवस्था की गई है?
इसके अलावा अपने नोटिस में उन्होंने किसी तरह के रिटन इंस्ट्रक्शंस की कॉपी मांगी है, जो कर्मचारियों को दिया गया हो. जिसके कारण वो पेमेंट लेने से पूरी तरह से ही मना कर रहे हैं.
वहीं अपने इस नोटिस में दवे ने RBI के सेक्शन 26(1) के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 का हवाला देते हुए ये भी कहा है कि RBI ने नोट को लीगल टेंडर बताया है. वहीं उन्होंने इस पॉलिसी में ट्रांसपैरेंसी की बात भी की है.
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सात दिन में देना होगा जवाबदवे ने PVR-INOX को कानूनी नोटिस का जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर कंपनी सैटिस्फैक्टरी जवाब नहीं देती है, तो वो कंज्यूमर कमीशन और अन्य संबंधित अधिकारियों के पास भी जा सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>दुनिया के टॉप 10 अमीरों में शामिल वॉरेन बफे की नेटवर्थ कितनी है? बर्कशायर हैथवे से दिया इस्तीफा</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप दुनिया के सबसे दिग्गज निवेशकों की बात करें, तो वॉरेन बफे का नाम सबसे पहले आने वाले नामों में शामिल है. करीब छह दशक तक बर्कशायर हैथवे को लीड करने के बाद अब कंपनी में उनकी पद बदल गई है. आज यानी 18 सितंबर 2026 को वॉरेन बफे ने घोषणा की है कि वह कंपनी के चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर चेयरमैन एमेरिटस की पद संभालेंगे. हालांकि वह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बने रहेंगे और कंपनी को सलाह देते रहेंगे.&amp;nbsp;
कंपनी की उत्तराधिकार योजना के तहत बफे की जगह उनके बेटे हॉवर्ड बफे को बोर्ड का नया चेयरमैन चुना गया है. हॉवर्ड 1993 से कंपनी के बोर्ड में डायरेक्टर हैं. वहीं, ग्रेग एबेल कंपनी के CEO के तौर पर काम करते रहेंगे. यह बदलाव बर्कशायर की लंबे समय से चली आ रही लीडरशिप सक्सेशन प्लान का हिस्सा है. लेकिन अब उनके चेयरमैन पद छोड़ने के बाद एक बार फिर उनकी दौलत और निवेश की कहानी सुर्खियों में है. ऐसे में चलिए जानते हैं वॉरेन बफे कितने अमीर हैं?
वॉरेन बफे की कितनी है नेटवर्थ?
फोर्ब्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वॉरेन बफे की रियल-टाइम नेटवर्थ करीब 146.3 अरब डॉलर ($145 billion) यानी करीब 13.88 लाख करोड़ रुपये है. इस संपत्ति के साथ वह दुनिया के सबसे मशहूर टॉप 10 अमीरों की लिस्ट शामिल हैं. उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा बर्कशायर हैथवे में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ा है. फोर्ब्स ने बताया कि वह अब तक 72 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति दान कर चुके हैं और 99% से ज्यादा संपत्ति दान करने का संकल्प भी ले चुके हैं.
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क्या काम करते हैं वॉरेन बफे?
वॉरेन बफे मुख्य रूप से निवेशक और बिजनेसमैन के तौर पर जाने जाते हैं. बर्कशायर हैथवे की शुरुआत कभी एक टेक्सटाइल कंपनी के तौर पर हुई थी. वॉरेन बफे &amp;nbsp;ने 1965 में कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लिया. इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक बर्कशायर हैथवे का नेतृत्व किया और कंपनी के जरिए बीमा, रेलवे, एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे कारोबारों में निवेश किया. उनकी मेहनत के कारण आज बर्कशायर हैथवे &amp;nbsp;दुनिया के प्रमुख कंपनियां में शामिल है.&amp;nbsp;
वॉरेन बफे की जिंदगी और निवेश से जुड़ी 10 खास बातें

वॉरेन बफे ने महज 11 साल की उम्र में शेयर बाजार अपना पहला निवेश (Cities Service Preferred) खरीदा था. कम उम्र से ही उन्हें कारोबार और निवेश में दिलचस्पी थी. 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर किया था.
अमेरिका के ओमाहा में रहने वाले बफे को दुनिया भर में &#039;Oracle of Omaha&#039; के नाम से जाना जाता है.&amp;nbsp;
बफे ने बेंजामिन ग्राहम से निवेश के कई अहम सिद्धांत सीखे. उनका जोर ऐसी कंपनियों को समझने और उनमें निवेश करने पर रहा है जिनका बिजनेस मजबूत हो और जिनमें लंबे समय तक बढ़ने की क्षमता हो.
एक समय टेक्सटाइल कारोबार से जुड़ी बर्कशायर हैथवे को बफे ने अलग-अलग बिजनेस और निवेशों वाला बड़ा समूह बना दिया.&amp;nbsp;
बफे के लंबे समय के बिजनेस पार्टनर चार्ली मंगर ने भी उनकी निवेश सोच को प्रभावित किया. दोनों ने मिलकर मजबूत और अच्छी कंपनियों में उचित कीमत पर निवेश करने के नजरिए को आगे बढ़ाया.
बफे की निवेश यात्रा यह दिखाती है कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखना और रिटर्न को दोबारा निवेश करना संपत्ति बनाने में खास भूमिका निभा सकता है.&amp;nbsp;
बफे अपनी सादगी भरी जिंदगी के लिए भी जाने जाते हैं. Forbes के मुताबिक, वह आज भी ओमाहा के उसी घर में रहते हैं जिसे उन्होंने 1958 में 31,500 डॉलर में खरीदा था.
बफे का मानना है कि निवेशक को उसी बिजनेस में पैसा लगाना चाहिए जिसमें वह अच्छी तरह समझना काफी अहम है.
बफे ने अपनी ज्यादातर संपत्ति परोपकारी कार्यों में देने की प्रतिबद्धता जताई है और अब तक अरबों डॉलर दान कर चुके हैं.
बफे की निवेश रणनीति में लंबी अवधि, अच्छी कंपनियों पर भरोसा और जोखिम को समझकर फैसला लेना अहम रहा है.

भारत की समंदर में बड़े स्तर पर खुदाई की तैयारी, खर्च होंगे 15000 करोड़, लेकिन क्यों?
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>ये सरकारी बैंक दे रहे हैं सबसे सस्ता होम लोन, 7% है शुरुआती दर</title>
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        <description><![CDATA[ घर खरीदने के लिए होम लोन लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए सितंबर में कई बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की शुरुआती ब्याज दर 7% के आसपास है. हालांकि, ग्राहक को मिलने वाली वास्तविक दर उसकी प्रोफाइल और लोन की शर्तों पर निर्भर करेगी. जानिए कौनसा बैंक किस दर पर होम लोन ऑफर कर रहा है.
सरकारी बैंकों में 7% से दर शुरू 
18 सितंबर 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बैंक औफ महाराष्ट्र और Central Bank of India में होम लोन की शुरुआती ब्याज दर 7% है. वहीं बैंक औफ इंडिया में यह 7.10%, जबकि इंडिया बैंक, UCO बैंक और Union Bank of India में 7.15% से शुरू होती है.
बैंक औफ बढोदा की शुरुआती दर 7.20% और सटेट बैंक औफ इंडिया की 7.25% है. केनरा बैंक में लोन की राशि के अनुसार शुरुआती दर 7.15% से 7.25% के बीच है.
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निजी बैंकों में कितनी है ब्याज दर?
प्राइवेट सेक्टर में साउथ इंडियन बैंक की शुरुआती दर 7.25% है. HSBC बैंक में यह 7.45%, ICICI बैंक में 7.55%, कोटक महिंदरा बैंक में 7.60% और HDFC बैंक में 7.75% से शुरू हो रही है. वहीं, Axis बैंक की होम लोन दर 8% से शुरू होती है. इन दरों में ग्राहक की पात्रता के आधार पर बदलाव हो सकता है.&amp;nbsp;
HFCs में भी 7% से ऊपर विकल्प
हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में LIC Housing Finance की शुरुआती ब्याज दर 7.15% है. Bajaj Housing Finance 7.25%, ICICI Home Finance 7.50% और Godrej Housing Finance 7.65% से होम लोन दे रहे हैं. PNB Housing Finance की शुरुआती दर लोन राशि के हिसाब से 7.50% से है.&amp;nbsp;
लोन की राशि से भी बदल सकती है दर
हर बैंक सभी लोन अमाउंट पर एक जैसी दर नहीं रखता. उदाहरण के लिए, केनरा बैंक में 30 लाख रुपये तक के लोन पर शुरुआती दर 7.25% है, जबकि 30-75 लाख रुपये के लिए 7.20% और 75 लाख रुपये से अधिक पर 7.15% से शुरुआत होती है.
सिर्फ शुरुआती ब्याज दर देखकर न करें फैसला 
बैंक द्वारा बताई गई सबसे कम दर हर ग्राहक को मिलना जरूरी नहीं है. क्रेडिट स्कोर, आय, नौकरी का प्रोफाइल, लोन-टू-वैल्यू रेशियो और प्रॉपर्टी की जानकारी के आधार पर अंतिम ब्याज दर तय हो सकती है. इसलिए होम लोन लेते समय केवल शुरुआती रेट नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस, अन्य शुल्क और पूरी लोन अवधि में लगने वाले ब्याज को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>2 करोड़ का फ्लैट, ना जिम&amp;ना सुविधाएं, RERA ने बिल्डर पर ठोका 10 लाख जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ करोड़ों रुपये खर्च करके खरीदा गया घर सिर्फ चार दीवारों तक सीमित रह जाए तो खरीदार के लिए यह किसी झटके से कम नहीं होता. बेंगलुरु में भी कुछ होमबायर्स के साथ ऐसा ही हुआ, जब जिस प्रोजेक्ट को खरीदते समय कई आधुनिक सुविधाओं के साथ पेश किया गया था, उसकी हकीकत सामने आने लगी. मामला आखिरकार RERA तक पहुंचा, जहां खरीदारों की शिकायत पर अथॉरिटी ने बिल्डर के खिलाफ अहम फैसला सुनाया.
2.08 करोड़ में खरीदा था फ्लैटआरटी नगर के रहने वाले चार लोगों ने इस प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदे थे. प्रत्येक खरीदार ने इसके लिए करीब 2.08 करोड़ रुपयों का भुगतान किया था और साल 2022 में सेल डीड पूरी की गई थी. खरीदारी के दौरान प्रोजेक्ट में कई सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन बाद में इनमें से कई सुविधाएं मौजूद नहीं मिलीं. खरीदारों का आरोप था कि प्रोजेक्ट की ब्रोशर और अन्य दस्तावेजों में जिन सुविधाओं का उल्लेख किया गया था,उनका निर्माण नहीं किया गया.
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ना जिम, ना बैडमिंटन कोर्ट मिला
खरीदारों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में ओपन जिम, ओपन एम्फीथिएटर और बैडमिंटन कोर्ट जैसी सुविधाएं देने की बात कही गई थी. इसके अलावा स्पोर्ट्स सुविधाओं और क्लब हाउस से जुड़ी कई सुविधाएं भी पूरी नहीं हुई थीं.
मामले में संयुक्त निरीक्षण भी किया गया. 14 मई 2026 को हुई इस जांच के दौरान प्रोजेक्ट की स्थिति की तस्वीरें ली गईं. निरीक्षण में कई निर्माण कार्य अधूरे पाए जा चुके हैं. हालांकि, बच्चों के खेलने की जगह, पार्क और योगा डेक जैसी कुछ सुविधाएं पूरी मिलीं.ब्रोशर में किए वादे को माना अहम
4 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में कर्नाटक RERA ने कहा कि प्रोजेक्ट की ब्रोशर, अलॉटमेंट लेटर और एग्रीमेंट में दिखाई गई सुविधाओं को खरीदारों के सामने पेश किया गया था. इन सुविधाओं को उपलब्ध नहीं कराने को अथॉरिटी ने गलत प्रस्तुति मानी गई.
RERA ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सेल डीड हो जाने से बिल्डर की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती, अगर प्रोजेक्ट में दस्तावेजों के मुताबिक तय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं.प्रोजेक्ट में मिलीं कई और कमियां
जांच के दौरान सिर्फ सुविधाओं की कमी ही सामने नहीं आई. प्रोजेक्ट के कुछ हिस्सों में कंपाउंड वॉल अधूरी थी. इसके अलावा STP और WTP की देखरेख को लेकर भी समस्याएं दर्ज की गईं. एक निजी क्षेत्र में बोरवेल बनाए जाने का मुद्दा भी निरीक्षण में सामने आया.
हालांकि, क्लब हाउस को लेकर RERA ने एक अलग स्थिति स्पष्ट की. बिक्री समझौते के अनुसार क्लब हाउस का निर्माण BIAAPA के साइट रिलीज ऑर्डर के बाद तय समय में किया जाना था. चूंकि अभी केवल आंशिक रिलीज ऑर्डर जारी हुआ था, इसलिए इस आधार पर बिल्डर को फिलहाल पूरी तरह जिम्मेदार नहीं माना गया.60 दिन में देना होगा मुआवजा
K-RERA ने बिल्डर को चारों होमबायर्स को कुल 10 लाख रुपये का मुआवजा 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया है. निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर मुआवजे की राशि पर ब्याज भी लागू होगा.
यह मामला उन होमबायर्स के लिए भी महत्वपूर्ण है जिन्हें प्रॉपर्टी खरीदते समय ब्रोशर, विज्ञापन या एग्रीमेंट में सुविधाओं का वादा किया जाता है, लेकिन बाद में वे सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं.RERA में कैसे कर सकते हैं शिकायत?
अगर किसी होमबायर को बिल्डर की ओर से वादा की गई सुविधाएं नहीं मिलती हैं, तो वह संबंधित राज्य की RERA अथॉरिटी में शिकायत कर सकता है. आमतौर पर इसके लिए प्रोजेक्ट और बिल्डर की जानकारी, समस्या से जुड़े दस्तावेज और उपलब्ध सबूत जमा करने होते हैं. शिकायत के बाद अथॉरिटी मामले की सुनवाई कर सकती है और परिस्थितियों के आधार पर मुआवजा या अन्य राहत का आदेश दे सकती है.
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>500 रुपए वाला बैग 8.3 लाख का, बिजनेसमेन ने पूछा&amp; कब चोरी बंद करेंगे लग्जरी ब्रैंड</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप भी बैग के शोकीन हैं और इस नवरात्रि कुछ नये तरीके का बैग लेने की इच्छा रखते हैं तो जानें आजकल मार्किट में ऐसा कौनसा बैग चर्चा में शामिल हुआ है, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए है. भारत के बड़े उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इस बैग को लेकर एक्स पर पोस्ट लिखा है.
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Fendi के बैग की तस्वीर दिखाते हुए इसकी कीमत और डिजाइन को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने इसकी तुलना गुजरात के बाजारों में मिलने वाले 500 रुपए के बैग से की और कहा कि भारतीय कारीगरों को इस तरह के डिजाइन के लिए पर्याप्त पहचान नहीं मिलती.
गोयनका ने Fendi के डिजाइन पर क्या कहा?गोयनका ने अपनी पोस्ट में हाल ही में सामने आए Prada के कोलाहपुरी चप्पल पर विवाद का भी जिक्र किया. उनका सवाल था कि लग्जरी ब्रांड भारतीय पारंपरिक कला को अपने प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करते समय उससे जुड़े कारीगरों को उचित श्रेय आखिर कब देंगे.&amp;nbsp;
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किरण मजुमदार शॉ ने भी जताई आपत्ति
इस मुद्दे पर बाइओकोइन की संस्थापक किरण मजुमदार शोव ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने Fendi के डिजाइन को लेकर सांस्कृतिक विरासत और भारतीय कारीगरों की पहचान से जुड़े सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कला को लग्जरी प्रोडक्ट के रूप में पेश करते समय उन कारीगरों और समुदायों की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने इन परंपराओं को लंबे समय से संभालकर रखा है.क्या है Fendi का यह बैग?
Fendi की वेबसाइट पर यह प्रोडक्ट &amp;ldquo;Baguette 26424 &amp;ndash; Multicolour Re Edition bag with embroidery and mirrors&amp;rdquo; के नाम से दर्ज है. ब्रांड के अनुसार यह फौल- विटंर 2026-27 कलेक्शन का हिस्सा है और मूल Baguette डिजाइन से जुड़ा हुआ है.
बैग पर हाथ से कढ़ाई की गई है. इसमें करीब 39,500 बीड्स और 475 मिरर लगाए गए हैं. Fendi के मुताबिक इसे तैयार करने में 138 घंटे से ज्यादा का कारीगरी वाला काम लगता है.
मेड इन इटली, लेकिन चर्चा भारत के पारंपरिक कला की
Fendi के मुताबिक यह बैग इटली में तैयार किया गया है. इसमें सिल्क, ग्लास एम्ब्रॉयडरी, कैल्फ लेदर और लिनेन जैसी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है. इसका वजन करीब 0.46 किलोग्राम है.
इस बैग को लेकर बहस सिर्फ इसकी कीमत तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर मुख्य चर्चा इस बात को लेकर है कि भारतीय पारंपरिक डिजाइन से मिलतेजुलते तत्वों को अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांड किस तरह पेश करते हैं और उससे भारतीय कारीगरों को कितनी पहचान मिलती है.भारतीय क्राफ्ट पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
Fendi से पहले भी कुछ अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड भारतीय पारंपरिक कला से मिलते-जुलते डिजाइन को लेकर चर्चा में रहे हैं. Prada की कोलाहपुरी सटाइल चप्पलों और Dior के लखनवी मुकाइश इंमबोइडरी वाले महंगी चीजों को लेकर भी सवाल उठे थे. राफ लोरिन के कुछ इंमबोइडरी डिजाइंस पर भी भारतीय जरदोजी से समानता को लेकर चर्चा हुई थी.
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>500, रुपए, वाला, बैग, 8.3, लाख, का, बिजनेसमेन, ने, पूछा-, कब, चोरी, बंद, करेंगे, लग्जरी, ब्रैंड</media:keywords>
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        <title>9 साल बाद RBI का बड़ा एक्शन, पहले चरण में बेच दिए 50000 करोड़ के बॉन्ड</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक इन दनों बैंकिंग सिस्टम से एक्स्ट्रा कैश या लिक्विडिटी खत्म करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत कुछ बॉन्ड्स बेचने का काम कर रहा है. जिसका पहला चरण आज यानी 17 सितंबर को था. अपने पहले चरण में केंद्रीय बैंक ने करीब 50000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इतना ही नहीं RBI ऐसा दोबारा भी कर सकता है, ताकि अगर आने वाले समय में ब्याज दर बढ़ाई जाती है, तो उसका असर बैंकों के लोन की ब्याज दरों पर जल्दी दिखाई दे.
9 साल बाद बेचे सरकारी बॉन्डRBI ने हाल ही में करीब 9 साल बाद पहली बार खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. केंद्रीय बैंक ने एक नीलामी के जरिए 5,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से इतनी ही रकम निकाल ली. इस नीलामी में निवेशकों की ओर से अच्छी मांग देखने को मिली. RBI ने वित्त वर्ष 2029 से 2032 के बीच मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इनकी बिक्री जिस ब्याज दर (यील्ड) पर हुई, वो बाजार के अनुमान से थोड़ी ज्यादा थी. RBI अगले दो हफ्तों में 2,500-2,500 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचने की प्लानिंग भी कर रहा है.
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क्यों निकाला जा रहा बैंकों का पैसा?बैंकिंग सिस्टम में एक्स्ट्रा नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी 6 सितंबर को रिकॉर्ड 11.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी. हालांकि, इसके बाद इसमें करीब एक-तिहाई की कमी आई है और अब ये लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये रह गई है. ये पैसा बैंकों के पास ज्यादा नकदी होने का संकेत है. जब बैंकों के पास पर्याप्त पैसा होता है, तो उन्हें RBI से उधार लेने की जरूरत कम पड़ती है. इससे RBI की नीतिगत ब्याज दर में बदलाव का असर बैंक लोन की ब्याज दरों तक पहुंचने में समय लग सकता है. इसी वजह से RBI अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है.
अक्टूबर में बढ़ सकती है ब्याज दरबाजार में इस बात की उम्मीद है कि RBI की अक्टूबर में बैठक के दौरान रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में केंद्रीय बैंक चाहता है कि ब्याज दर बढ़ाने का फैसला बैंकों की लोन दरों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे.
ICICI सिकयोरिटीज प्राइमरी डीलरशिप का मानना है कि RBI बॉन्ड बिक्री के जरिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम से निकाल सकता है. इसके साथ ही अक्टूबर से ब्याज दर बढ़ाने का दौर भी शुरू हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Personal Loan: कौनसा बैंक दे रहा है सबसे सस्ता कर्ज, कितनी बनेगी EMI?</title>
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        <description><![CDATA[ छोटी- मोटी जरूरतों के लिए लोग अक्सर पर्सनल लोन लेते हैं. जो छोटा होता है और मिलना भी आसान होता है. लेकिन पर्सनल लोन या कोई सा भी लोन लेने से पहले आपको सबसे पहले ब्याज दरों को चेक करना जरूरी है. अलग- अलग बैंकों की अलग- अलग ब्याज दरें होती हैं, किसी में कम होती है तो किसी में ज्यादा होती है. अगर आप आने वाले समय में लोन लेना चाहते हैं तो आपको बताते हैं कि कौन सा बैंक आपको कम ब्याज दरों पर लोन दे रहा है?
अगर आप सितंबर 2026 में पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों में अंतर रहेगा. अभी पर्सनल लोन की शुरुआती ब्याज दर 8.75% सालाना से शुरू हो रही है. बड़े प्राइवेट बैंकों में ब्याज दर करीब 9.99% सालाना से शुरू है.
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पांच लाख के लोन पर कितनी EMI?मान लेते हैं यदि किसी व्यक्ति को अपनी जरूरत के लिए 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन चाहिए, वो भी पांच साल के लिए, तो 8.75% ब्याज दर पर उसकी EMI करीब 10,319 रुपये प्रति माह होगी.&amp;nbsp;
वहीं अगर 9.99% की शुरुआती ब्याज दर पर EMI करीब 10,621 रुपये प्रति माह होगी. ये EMI 60 महीने की अवधि और घटती ब्याज दर के आधार पर बताई गई है.
अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर



बैंक
ब्याज दरें


बैंक ऑफ महाराष्ट्र
8.75% से 13.55%


एचएसबीसी बैंक
9.75% से शुरू


एक्सिस बैंक
9.99% से शुरू


एचडीएफसी बैंक
9.99% से शुरू


आईसीआईसीआई बैंक
9.99% से शुरू


आईडीएफसी फर्स्ट बैंक
9.99% से शुरू


कोटक महिंद्रा बैंक
9.99% से शुरू


स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
10% से शुरू


बैंक ऑफ बड़ौदा
10.15% से 18%


इंडसइंड बैंक
10.35% से शुरू



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सिर्फ ब्याज दर देखकर लोन न लेंपर्सनल लोन की असली लागत केवल ब्याज दर से तय नहीं होती. बैंक प्रोसेसिंग फीस, अन्य चार्ज और समय से पहले लोन चुकाने की फीस भी ले सकते हैं. उदाहरण के लिए, अलग-अलग बैंकों की प्रोसेसिंग फीस लोन राशि का 1%, 2%, 3.5% या इससे ज्यादा हो सकती है. इसलिए लोन लेने से पहले कुल खर्च देखना जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Personal, Loan:, कौनसा, बैंक, दे, रहा, है, सबसे, सस्ता, कर्ज, कितनी, बनेगी, EMI</media:keywords>
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        <title>सस्ता कुकिंग ऑयल देने के लिए टैक्स घटाएगी सरकार! सालभर में 20% उछले दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ता-कुकिंग-ऑयल-देने-के-लिए-टैक्स-घटाएगी-सरकार-सालभर-में-20-उछले-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है और अब खाने के तेल की कीमत भी लोगों की जेब पर असर डाल रही है. पिछले एक साल में भारत में कुकिंग ऑयल की कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही तेल की मांग और बढ़ने वाली है. ऐसे में सरकार कीमतों को काबू में रखने के लिए एडिबल ऑयल के आयात पर लगने वाला टैक्स घटाने पर विचार कर रही है.
हालांकि अभी इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है. सूत्रों के मुताबिक सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि तेल सस्ता भी हो और घरेलू किसानों को भी नुकसान न पहुंचे.
क्यों बढ़ रहे हैं तेल के दाम?
भारत में खाने के तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा होता है. देश अपनी टोटल कुकिंग ऑयल की जरूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है. इसमें पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल खासतौर से आयात किए जाते हैं. भारत इन्हें मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से आयात करता है.&amp;nbsp;
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इन तेलों की कीमतों पर दबाव रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी सप्लाई में रुकावट और खराब मौसम जैसी वजहों ने ग्लोबल सप्लाई को प्रभावित किया है. इसका असर ही भारत में आने वाले तेल की कीमत पर पड़ा है.&amp;nbsp;
देश भर में बैन होगा &#039;सस्ता&#039; पनीर, त्योहारी सीजन से पहले फूड सेफ्टी का हंटर
सरकार कितना टैक्स घटा सकती है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार एडिबल ऑयल पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में करीब 5 फीसदी की कटौती करने पर विचार कर सकती है. हालांकि सरकार को किसानों के हित का भी ध्यान रखना है. अगर विदेशी तेल बहुत सस्ता हो जाता है तो घरेलू सोयाबीन और दूसरे तिलहन की कीमतों पर दबाव आ सकता है.&amp;nbsp;
त्योहार से पहले क्यों आएगा फैसला?सितंबर से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सीजन रहता है. इस दौरान घरों में मिठाइयां, पकौड़े, नमकीन और दूसरी तली हुई चीजें ज्यादा बनती हैं, यानी खाने के तेल का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है.
ऐसे समय में अगर तेल की कीमतें पहले से ही ऊंची रहेंगी तो इसका सीधा असर आम आदमी के किचन बजट पर पड़ेगा. इसलिए सरकार कीमतों को कम करने के लिए आयात शुल्क में बदलाव पर विचार कर रही है.
पहले भी घटा है इंपोर्ट टैक्स?सरकार इससे पहले मई 2025 में कच्चे एडिबल ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर चुकी है. इसमें क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल शामिल थे.&amp;nbsp;
UPI MDR: सदर बाजार से चांदनी चौक तक फूटा गुस्सा, व्यापारी बोले- लौटेगा कैश का चलन
टैक्स घटने से तेल सस्ता हो जाएगा?
टैक्स कम होते ही दुकानों पर तेल की कीमत कम हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है. अगर भारत इंपोर्ट ड्यूटी घटाता है तो देश में विदेशी तेल की मांग बढ़ सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल की कीमतें ऊपर जा सकती हैं. यानी सरकार जितनी राहत टैक्स घटाकर देना चाहती है, उसका कुछ हिस्सा ग्लोबल कीमतों की बढ़ोतरी से खत्म भी हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सस्ता, कुकिंग, ऑयल, देने, के, लिए, टैक्स, घटाएगी, सरकार, सालभर, में, 20, उछले, दाम</media:keywords>
    </item>
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        <title>Xप्लेन: भारत के बैंकों में CEO की किल्लत क्यों? दुनियाभर में भारतीय संभाल रहे कमान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-भारत-के-बैंकों-में-ceo-की-किल्लत-क्यों-दुनियाभर-में-भारतीय-संभाल-रहे-कमान</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के लोग दुनिया के सबसे बड़े बैंकों और कंपनियों को चला रहे हैं, लेकिन अपने ही देश के बैंकों को अगला CEO ढूंढने में पसीने छूट रहे हैं. ये भारत की बैंकिंग इंडस्ट्री की आज की सच्चाई है. दुनिया भर में भारतीय मूल के बैंकरों ने बड़े-बड़े वित्तीय संस्थानों की कमान संभाली है. ड्यूश बैंक से लेकर सिटीग्रुप और बार्कलेज तक, हर जगह भारतीय मूल के लोग CEO की कुर्सी पर बैठे हैं. जब बात अपने देश की आती है, तो तस्वीर पूरी तरह से उलटी दिखती है. लेकिन क्यों, कैसे और इसका हल क्या है...
भारतीय प्राइवेट बैंकों को नहीं मिल रहे CEO
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बात सिर्फ किसी एक बैंक की नहीं है, बल्कि पूरे सेक्टर की समस्या बन चुकी है. हाल ही में देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक के CEO सशिधर जगदीशन ने अचानक ऐलान किया कि वो अपना कार्यकाल बढ़ाना नहीं चाहते. इसके बाद बैंक को सिर्फ दो महीने के अंदर नया CEO ढूंढना है.
दूसरी तरफ कोटक महिंद्रा बैंक भी तीन साल के अंदर दूसरी बार CEO की तलाश कर रहा है. दोनों बैंकों के पास अपना कोई वारिस तैयार नहीं था, जिसकी वजह से ये प्रोसेस बेहद मुश्किल हो गई है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में बैंकिंग टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात बड़े संस्थान को चलाने की आती है, तो उस लायक अनुभव वाले लोगों की संख्या बहुत कम हो जाती है.
ग्लोबल एग्जीक्यूटिव सर्च और लीडरशिप एडवाइजरी फर्म स्पेंसर स्टुअर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 महीनों में 30 बड़े प्राइवेट बैंकों और NBFC में से 17 ने अपने CEO बदले हैं. इनमें से करीब 60% नियुक्तियां बाहर से की गई थीं. इसका मतलब ये है कि बैंकों के पास अपने अंदर ही अच्छे लीडर तैयार नहीं हो पा रहे और उन्हें बाहर से लोगों को लाना पड़ रहा है.
इस उलझे मामले की पूरी कहानी क्या है?
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि भारत की बैंकिंग इंडस्ट्री अब पहले जैसी नहीं रही. पहले HDFC बैंक के आदित्य पुरी या कोटक के उदय कोटक जैसे दिग्गज दशकों तक CEO रहे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. पिछले एक दशक में 52% प्राइवेट बैंक CEO सिर्फ पांच साल या उससे भी कम समय तक टिक पाए हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम.
RBI के मुताबिक, किसी भी बैंक CEO का कार्यकाल अधिकतम 15 साल का हो सकता है, या वो 70 साल की उम्र तक ही काम कर सकते हैं. अगर CEO बैंक का प्रमोटर है, तो उसका कार्यकाल सिर्फ 12 साल का होता है. RBI ये भी चाहता है कि बैंक अपने CEO के रिटायरमेंट से 6 महीने पहले तक उनके उत्तराधिकारी के नाम रेगुलेटर को भेज दे. HDFC बैंक अपने CEO के अचानक इस्तीफे की वजह से ये समय-सीमा पूरी नहीं कर पाया.
RBI की मंजूरी के बिना कोई भी बैंक CEO की नियुक्ति नहीं कर सकता. बैंकों को एक ही नाम नहीं, बल्कि कई नाम प्राथमिकता के क्रम में भेजने होते हैं. उम्मीदवारों की लिस्ट इतनी छोटी होती है कि एक ही नाम कई बैंकों की लिस्ट में आ जाता है.
रिक्रूटमेंट फर्म कोर्न फेरी की सीनियर पार्टनर लीना राजपूत के मुताबिक किसी बड़े प्राइवेट बैंक के CEO की तलाश में शुरुआत में 20 उम्मीदवार होते हैं. नॉमिनेशन कमेटी तक पहुंचते-पहुंचते 5 से भी कम लोग बचते हैं. ये नाम टॉप 5 बैंकों के लिए लगभग एक जैसे ही होते हैं.
भारत में CEO क्यों नहीं मिल रहे?
अजय केडिया इस समस्या की 3 बड़ी वजहें बताते हैं:

बैंकों ने पिछले 20 सालों में अपने अंदर जॉब रोटेशन करना लगभग बंद कर दिया है. पहले ऐसा होता था कि किसी एग्जीक्यूटिव को रिटेल बैंकिंग, कॉर्पोरेट बैंकिंग, फाइनेंस, क्रेडिट और रिस्क मैनेजमेंट जैसे अलग-अलग डिपार्टमेंट में घुमाया जाता था, ताकि उसे पूरे बैंक का एक्सपीरियंस हो जाए. अब ऐसा नहीं होता. इस वजह से बैंकों के पास रिटेल बैंकिंग के एक्सपर्ट तो हैं, लेकिन ऐसा कोई नहीं है जो पूरे बैंक को चलाने का हुनर रखता हो.
भारत में प्राइवेट बैंक CEO की सैलरी RBI की सख्त निगरानी में तय होती है. HDFC बैंक के CEO सशिधर जगदीशन को FY25 में सिर्फ 12.08 करोड़ रुपए का पैकेज मिला. यह उनके ग्लोबल कॉम्पिटीटर्स के मुकाबले बहुत कम है. वहीं सरकारी बैंक SBI के चेयरमैन को सिर्फ 63.87 रुपए लाख सालाना मिलते हैं, जो प्राइवेट सेक्टर के CEO की सैलरी का 5% से भी कम है. ऐसे में अच्छे टैलेंट को भारत में रोकना मुश्किल हो जाता है. वो विदेशी बैंकों या फिनटेक कंपनियों में चले जाते हैं.
ज्यादातर बैंकों में सक्सेशन प्लान सिर्फ कागजों पर होता है. जब तक कोई CEO लंबे समय तक अपनी कुर्सी पर बैठा रहता है, तब तक उसके नीचे काम करने वाले लोगों को टॉप जॉब का एक्सपोजर नहीं मिल पाता. जब वो CEO अचानक चला जाता है, तो बोर्ड के पास कोई तैयार उत्तराधिकारी नहीं होता.

दुनिया में भारतीय CEOs की बोलती तूती
अब जरा दूसरी तरफ देखिए. भारतीय मूल के लोग दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों और बैंकों को चला रहे हैं. बार्कलेज के CEO सीएस वेंकटकृष्णन भारत के मैसूर में पैदा हुए थे. ड्यूश बैंक को अंशु जैन ने ग्लोबल लेवल पर खड़ा किया था. सिटीग्रुप के CEO विक्रम पंडित भी भारतीय मूल के थे. बैंकिंग के अलावा टेक्नोलॉजी, फार्मा और कंज्यूमर गुड्स समेत हर सेक्टर में भारतीय मूल के लोग CEO हैं.
माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, गूगल के सुंदर पिचाई, IBM के अरविंद कृष्णा, चैनल के लीना नायर और नोवार्टिस के वसंत नरसिम्हन भारत में पैदा हुए और आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों को चला रहे हैं.
इससे पता चलता है कि विदेशों में बैंकों में सक्सेशन प्लानिंग बहुत मजबूत है. वहां CEO बनने से पहले लोगों को अलग-अलग डिवीजनों में काम करने का मौका मिलता है. वहीं, भारत में बैंकों ने अपने अंदर लीडरशिप डेवलपमेंट पर ध्यान देना बंद कर दिया है.
इसका क्या हो रहा है असर?
इस पूरी समस्या का सीधा असर बैंकों की वैल्यूएशन पर पड़ रहा है. HDFC बैंक का शेयर 2026 में अब तक 27% से ज्यादा गिर चुका है, जबकि बाकी बैंकिंग इंडेक्स सिर्फ 6 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Xप्लेन:, भारत, के, बैंकों, में, CEO, की, किल्लत, क्यों, दुनियाभर, में, भारतीय, संभाल, रहे, कमान</media:keywords>
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        <title>UPI AutoPay पर नहीं लगेगा नया चार्ज, OTT से लेकर SIP तक समझें पूरा नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-autopay-पर-नहीं-लगेगा-नया-चार्ज-ott-से-लेकर-sip-तक-समझें-पूरा-नियम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/upi-autopay-पर-नहीं-लगेगा-नया-चार्ज-ott-से-लेकर-sip-तक-समझें-पूरा-नियम</guid>
        <description><![CDATA[ यूपीआई को लेकर पिछले कुछ दिनों से एक खबर ने लोगों को कन्फ्यूज कर दिया है. 15 अक्टूबर 2026 से कुछ यूपीआई पेमेंट पर MDR लागू होने वाला है. इसके बाद 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 फीसदी तक MDR लगेगा. ऐसे में जिन लोगों के खाते से हर महीने नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, बिजली का बिल, इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड एसआईपी का पैसा अपने आप कटता है, उनके मन में सवाल है कि क्या अब इन पेमेंट पर भी ज्यादा पैसा देना पड़ेगा?
बता दें कि यूपीआई ऑटो पे पर नया MDR चार्ज नहीं लगने वाला है. NPCI ने इसकी साफ जानकारी दी है कि यानी अगर आपने किसी ओटीटी सब्सक्रिप्शन, एसआईपी, इंश्योरेंस या बिल के लिए यूपीआई ऑटो पे सेट कर रखा है तो आपका पेमेंट महंगा नहीं होने वाला है.&amp;nbsp;
यूपीआई ऑटो पे क्या है?यूपीआई ऑटो पे ऐसी सुविधा है जिसके जरिए आप पहले से ही पेमेंट की डेट फिक्स कर लेते हैं और फिर&amp;nbsp;तय तारीख पर पैसा आपके बैंक अकाउंट से अपने आप कट जाता है.
जैसे आपने नेटफ्लिक्स को ऑटो पे लगा रखा है तो हर महीने आपको खुद से यूपीआई खोलकर पेमेंट करने की जरूरत नहीं पड़ती है. तय तारीख पर पैसा अपने आप कट जाता है. इसी तरह म्यूचुअल फंड एसआईपी, बिजली का बिल, मोबाइल बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम, EMI&amp;nbsp;भी यूपीआई ऑटो पे से खुद ही कट जाते&amp;nbsp;हैं.
सस्ता कुकिंग ऑयल देने के लिए टैक्स घटाएगी सरकार! सालभर में 20% उछले दाम
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
15 अक्टूबर 2026 से पर्सन टू मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR लागू होने वाला है. मर्चेंट पेमेंट में 2000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR का लगेगा. वहीं, 75000 रुपए या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए का फ्लैट चार्ज कटेगा..&amp;nbsp;
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हर यूपीआई यूजर को 2000 रुपए से ज्यादा का पेमेंट करने पर अपनी जेब से अलग चार्ज देना होगा. MDR सिर्फ मर्चेंट ही भरेंगे, ग्राहक नहीं. सरकार और NPCI ने साफ किया है कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री ही रहने वाला है.&amp;nbsp;
एसआईपी&amp;nbsp;के लिए क्या नियम है?
मान लीजिए आपकी हर महीने 10000 रुपए की एसआईपी है और आपने उसका पेमेंट यूपीआई ऑटो पे से सेट किया हुआ है. हर महीने तय तारीख पर 10000 रुपए आपके अकाउंट से कटते हैं.
नए नियम के बाद भी ये पेमेंट उसी तरह चलता रहेगा. यूपीआई ऑटो पे के जरिए होने वाली इस एसआईपी पर MDR नहीं लगेगा और ना ही आपके एसआईपी के पैसे बढ़ेंगे. लेकिन अगर आप म्यूचुअल फंड में एक ही बार एक नया यूपीआई पेमेंट करते हैं तो कैपिटल मार्केट पेमेंट के लिए 0.02 फीसदी MDR का प्रावधान है, वो भी 300 रुपए तक की लिमिट&amp;nbsp;है.&amp;nbsp;
ओटीटी सब्सक्रिप्शन पर कितना लगेगा चार्ज?
अगर आपके नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम , जियो हॉटस्टार या किसी दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म का पेमेंट यूपीआई ऑटो पे से होता है तो सिर्फ इस नए MDR नियम की वजह से उस ऑटो पे पेमेंट पर नया चार्ज नहीं लगेगा. यानी महीने की सब्सक्रिप्शन फीस जितनी है, ऑटो पे के जरिए उतना ही पैसा कटेगा.&amp;nbsp;
देश भर में बैन होगा &#039;सस्ता&#039; पनीर, त्योहारी सीजन से पहले फूड सेफ्टी का हंटर
बिजली, मोबाइल बिल और EMI का क्या होगा?अगर आपका बिजली का बिल, मोबाइल बिल या EMI पेमेंट यूपीआई ऑटो पे से अपने आप कटता है तो उस पेमेंट पर भी MDR नहीं लगने वाला है.&amp;nbsp;
इंश्योरेंस प्रीमियम पर कितने पैसे बढ़े?इंश्योरेंस पेमेंट जिसका 2,000 रुपए से ज्यादा है, उसपर 5 रुपए का MDR तय किया गया है. लेकिन अगर प्रीमियम यूपीआई ऑटो पे से ही कट रहा है तो उस ऑटो पे कोई MDR लागू नहीं होगा. लेकिन अगर आपका 50,000 रुपए का सालाना इंश्योरेंस प्रीमियम यूपीआई ऑटो पे से अपने आप कटता है तो अब आपके खाते से 200 रुपए एक्स्ट्रा भी कटेंगे.
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, AutoPay, पर, नहीं, लगेगा, नया, चार्ज, OTT, से, लेकर, SIP, तक, समझें, पूरा, नियम</media:keywords>
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        <title>UPI MDR से हर साल कितने हजार करोड़ की कमाई करेगी सरकार? आ गया डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में ऑनलाइन पेमेंट करना हर व्यक्ति की पहली पसंद है. UPI के जरिए पेमेंट करने के फायदे भी काफी हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि आप चाहे कहीं भी हो आप UPI के जरिए किसी को भी पैसे भेज सकते हैं और किसी से भी पैसे रिसीव कर सकते हैं. ऐसे में UPI के जरिए पेमेंट करने को लेकर लोगों को आने वाले समय में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
दरअसल, नए नियम के तहत अगर 2000 से ज्यादा की UPI से पेमेंट की जाती है तो उस पर MDR चार्ज लगाया जा सकता है. ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि अगर UPI पेमेंट पर MDR लागू होने से सरकार की हर साल कितनी कमाई होगी?
कितने प्रतिशत लगेगा MDR?
जानकारी के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी दुकान से 2000 से ज्यादा का सामान खरीदता है और उसकी पेमेंट UPI के जरिए करता है तो उसपर 0.4 प्रतिशत का MDR लगाया जाएगा. हां, ये जरूर है कि ये चार्ज ग्राहक को नहीं देना होगा. ग्राहक ने अगर 3000 का सामान खरीदा है तो उसे केवल 3000 रुपये का ही भुगतान करना है, न की उसपर लगने वाले MDR का. लेकिन अब इससे UPI से जुड़े बैंक और Fintech कंपनियों को एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
हर साल कितने हजार करोड़ की होगी कमाई?
MDR लागू होने के बाद UPI और Banking सेक्टर की करोड़ों रुपये की हर साल की कमाई हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, UPI और Banking सेक्टर की कमाई की बात करें तो लगभग 15,000 करोड़ से 20,600 करोड़ तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.&amp;nbsp;
नया नियम कब से होगा लागू?
बता दें कि 2000 से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू- मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू 15 अक्टूबर 2026 से किया जाने वाला है. हालांकि, एक बात को समझना काफी जरूरी है कि 15000 करोड़ से 20,600 करोड़ ये रकम सरकार की कमाई की नहीं है, बल्कि ये UPI और बैंकिंग सेक्टर में होने वाली अनुमानित कमाई बताई गई है.
UPI AutoPay पर नहीं लगेगा नया चार्ज, OTT से लेकर SIP तक समझें पूरा नियम
क्या आम लोगों को देना होगा MDR?
UPI पेमेंट पर MDR लागू होने की बात के बाद आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चार्ज उनको देना होगा? तो असल में ऐसा नहीं है. MDR सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा.&amp;nbsp;

अगर आप अपने दोस्त या परिवार को UPI के जरिए पैसे भेज रहे हैं या फिर उनसे रिसीव कर रहे हैं तो उसपर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा. चाहे आप 2000 भेजे या फिर 20,000 भेजते हैं.
वहीं 2000 से ज्यादा के Eligible merchant payment पर MDR लागू होता है.
हालांकि, यह चार्ज ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, बल्कि योग्य मर्चेंट को देना होगा, न की ग्राहक को.
अगर ग्राहक 2000 से कम या ज्यादा की भी पेमेंट करता है उसके बावजूद ये चार्ज उसको नहीं देना होगा.

Xप्लेन: भारत के बैंकों में CEO की किल्लत क्यों? दुनियाभर में भारतीय संभाल रहे कमान
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>अगले 5 साल और टाटा की कमान संभालेंगे एन चंद्रशेखरन, टाटा संस बोर्ड ने दी हरी झंडी</title>
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        <description><![CDATA[ टाटा ग्रुप में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को अगले पांच सालों के लिए दोबारा से बढ़ा दिया गया है. चंद्रशेखरन की नियुक्ति चेयरमैन के रूप में दोबारा होने जा रही है. जिसका फैसला गुरुवार को हुई टाटा संस बोर्ड मीटिंग के दौरान लिया गया. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>EPS में होगा 67% का तगड़ा उछाल, 6857 की जगह अब मिलेगी 11,429 की पेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ बुधवार को हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक के दौरान EPF को लेकर अहम फैसला किया गया. इस फैसले के तहत अब ईपीएफ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है. जिसके बाद तमाम कर्मचारी वर्ग में खुशी का माहौल है. ये फैसला अकेला नहीं आया है बल्कि अपने साथ कई सौगात भी लेकर आया है. जैसे कि इस फैसले के बाद अब कर्मचारियों के EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना में भी 67 प्रतिशत तक का उछाल आ गया है.
EPS में आया तगड़ा उछालसरकार के इस फैसले के बाद EPS यानी एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम में भी तगड़ा उछाल आया है. अब तक इस योजना के तहत जहां कर्मचारियों को मिनिमम पेंशन 6856 रुपये मिला करती थी, वही अब 11,429 रुपये मिला करेगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें: पेट्रोल पंपों पर UPI विवाद, डीलरों ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र, कहा- हटाएं चार्ज
अब 25 हजार की नई वेतन सीमा के तहत, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर 25 हजार या उससे कम है, उन्हें EPF के साथ EPS का सदस्य भी बनाया जाएगा. हालांकि, पेंशन पाने के लिए उन्हें कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करनी होगी.
कैसे होगी EPS पेंशन की गणना?EPS पेंशन निकालने का सामान्य फॉर्मूला है:
मासिक EPS पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन X पेंशन योग्य सेवा) &amp;divide; 70
यहां पेंशन योग्य वेतन का मतलब नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 60 महीनों के औसत बेसिक वेतन + DA से है.
कैसे मिलेगी 11,429 पेंशनअगर किसी कर्मचारी ने 30 साल की नौकरी पूरी की है, तो EPS नियम के तहत पेंशन की गणना में 2 साल का एक्स्ट्रा लाभ मिलेगा. इसका मतलब है कि उसकी पेंशन 32 साल की सेवा मानकर निकाली जाएगी. मान लीजिए कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है तो उसकी पेंशन योग्य सेवा 32 साल होगी. 15 हजार रुपये वेतन सीमा के हिसाब से पेंशन 6,857 रुपये हर महीने थी. तो ऐसे में अब 25 हजार की वेतन सीमा के हिसाब से पेंशन 11,429 रुपये हर महीने होगी.
इसका मतलब है कि नई वेतन सीमा के तहत पेंशन में लगभग 67% की बढ़ोतरी हुई है.
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ 199 का सब्सक्रिप्शन और लाखों का मुनाफा, मेजर ऋषभ संब्याल का इनकम मॉडल जानें</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाकर कमाई करने का तरीका समझना चाहते हैं, तो मेजर ऋषभ सिंह संब्याल का इंस्टाग्राम सब्सक्रिप्शन मॉडल आपके लिए दिलचस्प हो सकता है. उनके अकाउंट पर पेड सब्सक्रिप्शन की सुविधा मौजूद है, जिसके लिए यूजर्स को हर महीने एक तय रकम चुकानी होती है. हालांकि, सब्सक्राइबर की संख्या और प्लेटफॉर्म के हिसाब अलग कीमत होने के कारण उनकी असल कमाई का आंकड़ा बताना मुमकिन नहीं है.&amp;nbsp;
दरअसल, 15 सितंबर को मिंट की ओर से किए गए जांच में उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 1,569 सब्सक्राइबर दिखाई दे रहे थे. लेकिन, यह संख्या समय के साथ बदल सकती है, क्योंकि कोई भी यूजर कभी भी सब्सक्रिप्शन ले सकता है या उसे कैंसिल कर सकता है.
इंस्टाग्राम सब्सक्रिप्शन की कितनी है कीमत?
रिपोर्ट के मुताबिक बताया जा रहा है कि अलग-अलग डिवाइस पर सब्सक्रिप्शन की कीमत अलग थी.&amp;nbsp;

Android&amp;nbsp;यूजर्स के लिए कीमत 180 रुपये प्रति महीना थी.
iPhone&amp;nbsp;यूजर्स के लिए यह चार्ज 199 रुपये प्रति महीना था.

हालांकि, 1,569 सब्सक्राइबर में कितने एंड्रॉयड और कितने आईफोन यूजर्स हैं, इसकी जानकारी मौजूद नहीं है. ऐसे में उनकी असल मासिक कमाई का सटीक आंकड़ा निकालना मुमकिन नहीं है.
छंटनी में गई नौकरी, फिर भी सुबह 9 बजे ऑफिस के लिए निकलता है शख्स, जानें क्यों?
1,569 सब्सक्राइबर से कितनी बन सकती है कमाई?
अगर आप सिर्फ इसे गणित के आधार पर देखें और मान लें कि सभी सभी 1,569 लोग एक ही प्लान पर हैं, तो अलग-अलग स्थिति में इसकी अनुमानित रकम अलग हो सकती है. यानी अगर सभी सब्सक्राइबर 180 रुपये वाले प्लान लें, तो मासिक रकम करीब 2.82 लाख रुपये बैठती है.
वहीं, अगर सभी सब्सक्राइबर 199 रुपये वाला प्लान लेते हैं, तो यह रकम करीब 3.12 लाख रुपये प्रति महीने हो सकती है. इसी गणना 12 महीने में आधार पर देखा जाए तो 180 रुपये वाले प्लान के हिसाब से रकम करीब 33.89 लाख रुपए और 199 रुपये वाले प्लान के हिसाब से करीब 37.47 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. लेकिन यह उनकी असल कमाई नहीं है.&amp;nbsp;
सब्सक्राइबर को क्या-क्या फायदे मिलते हैं?

एक्सक्लूसिव पोस्ट
सब्सक्राइबर बैज
सोशल चैनल का एक्सेस
Ask Me Anything सेशन
अर्ली एक्सेस
कोचिंग

EPS में होगा 67% का तगड़ा उछाल, 6857 की जगह अब मिलेगी 11,429 की पेंशन
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>आज से खुल गया Hero Motors का IPO, क्या पैसा लगाना रहेगा सही?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-से-खुल-गया-hero-motors-का-ipo-क्या-पैसा-लगाना-रहेगा-सही</link>
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        <description><![CDATA[ ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने वाली कंपनी हीरो मोटर्स का IPO आज यानी 16 सितंबर, बुधवार को खुल गया है. ये IPO मोस्ट अवेटेड आईपीओ में से एक था, जो तीन दिनों तक यानी 18 सितंबर तक खुला रहेगा. IPO खुलने के पहले ही दिन निवेशकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिला है.
NSE के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने 8.86 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे थे, जबकि निवेशकों ने करीब 12.26 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई. इसका मतलब है कि हीरो मोटर्स IPO को पहले दिन 1.38 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.
हजार करोड़ जुटाने की प्लानिंगकंपनी ने कुल 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है. इसमें 600 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करके जुटाए जाएंगे, जबकि 400 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर ओपी मुंजाल होल्डिंग्स और हीरो साइकल्स बेचेंगे.
ये भी पढ़ें: EPS में होगा 67% का तगड़ा उछाल, 6857 की जगह अब मिलेगी 11,429 की पेंशन
पहले दिन कितनी लगी बोली?NSE के आंकड़ों के अनुसार, 8.86 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे, जबकि निवेशकों ने करीब 12.26 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई. रिटेल निवेशकों और NII यानी गैर-संस्थागत निवेशकों की ओर से अच्छी मांग देखने को मिली. दोनों कैटेगरी को 2.23 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.
ग्रे मार्केट में स्थिति16 सितंबर को हीरो मोटर्स के शेयर ग्रे मार्केट में करीब 23% प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे. इसे ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) कहा जाता है. हालांकि GMP आधिकारिक आंकड़ा नहीं है. ये कभी भी बदल सकता है और इससे ये तय नहीं होता कि शेयर की वास्तविक लिस्टिंग किस कीमत पर होगी.
IPO से मिले पैसे कहांहोंगे इस्तेमाल?कंपनी नए शेयर जारी करके मिलने वाले 600 करोड़ रुपये का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपना कर्ज चुकाने में करेगी. कंपनी के ऊपर 190 करोड़ रुपये का कर्ज है जिसे सबसे पहले चुकाया जाएगा. इसके बाद 200 करोड़ रुपये का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर प्लांट में क्षमता बढ़ाने के लिए नए उपकरण खरीदने में किया जाएगा. बाकी बची हुई रकम का इस्तेमाल दूसरी कंपनियों को टेकओवर करने और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा.
ये भी पढ़ें: बंद होगी देश की बड़ी वैक्सीन PSU कंपनी, केंद्रीय कैबिनेट ने दी हरी झंडी
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, से, खुल, गया, Hero, Motors, का, IPO, क्या, पैसा, लगाना, रहेगा, सही</media:keywords>
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        <title>अडानी को पछाड़कर TikTok के फाउंडर बने एशिया के सबसे अमीर शख्स, लिस्ट में और किसका नाम</title>
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        <description><![CDATA[ बुधवार को ब्लूमबर्ग ने एशिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट के में भारत से गौतम अडानी का नाम भी शामिल है. लेकिन इस लिस्ट में जिस नाम ने चौंकाया है उसने सम्पत्ति के मामले में अडानी को भी पछाड़ दिया है. ये शख्स हैं TikTok के फाउंडर झांग यिमिंग. जिनका नाम इस लिस्ट में टॉप पर आ गया है.
झांग यिमिंग टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance के फाउंडर हैं. वो एशिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में पहली बार टॉप पर आए हैं. Bloomberg Billionaires Index के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 105 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है.
ये भी पढ़ें: आज से खुल गया Hero Motors का IPO, क्या पैसा लगाना रहेगा सही?
एशिया के टॉप 5 सबसे अमीर व्यक्ति कौन हैं?



नाम
कंपनी और देश


झांग यिमिंग
बाइटडांस (चीन)


गौतम अडानी
अडानी ग्रुप (भारत)


मुकेश अंबानी
रिलायंस ग्रुप (भारत)


तादाशी यानाई
यूनिक्लो फाउंडर (जापान)


मसायोशी सोना
सॉफ्टबैंक फाउंडर (जापान)



अंबानी- अडानी को भी छोड़ा पीछेइस लिस्ट के मुताबिक झांग यिमिंग ने सम्पत्ति के मामले में भारत के गौतम अडानी और मुकेश अंबानी को भी पीछे छोड़ दिया है. ये बड़ी ही हैरानी वाली बात भी है. इस लिस्ट में यिमिंग पहले नंबर पर तो दूसरे और तीसरे नंबर पर क्रमशः गौतम अडानी और मुकेश अंबानी हैं.
तेजी से बढ़ी झांग की सम्पत्तिमार्च 2019 में ब्लूमबर्ग ने झांग की संपत्ति को ट्रैक करना शुरू किया था. उस समय उनकी संपत्ति करीब 13 अरब डॉलर थी. अब ये बढ़कर 105 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है. इसका मतलब है कि उनकी सम्पत्ति करीब सात साल में 8 गुना से भी ज्यादा बढ़ी है. इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह ByteDance की बढ़ती वैल्यू और कंपनी के AI कारोबार में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी है.
ये भी पढ़ें: सिर्फ 199 का सब्सक्रिप्शन और लाखों का मुनाफा, मेजर ऋषभ संब्याल का इनकम मॉडल जानें
दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्टइसके अलावा ब्लूमबर्ग ने दुनिया के सबसे अमीर शख्सों की लिस्ट भी जारी की है. जिसमें इलॉन मस्क सबसे ज्यादा सम्पत्ति के मालिक के रूप में टॉप पर छाए हुए हैं. आइये नीचे देखें टॉप 10 दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति:



नाम
कुल सम्पत्ति


इलॉन मस्क
892 अरब डॉलर


लैरी पेज
295 अरब डॉलर


सर्गेई ब्रिन
274 अरब डॉलर


जेफ बेजोस
274 अरब डॉलर


माइकल डेल
253 अरब डॉलर


मार्क जुकरबर्ग
238 अरब डॉलर


लैरी एलिसन
194 अरब डॉलर


जेनसन हुआंग
176 अरब डॉलर


स्टीव बाल्मर
174 अरब डॉलर


वॉरेन&amp;nbsp;
147 अरब डॉलर



दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में गौतम अडानी का नाम भी 20 वें नंबर पर है. तो वहीं टिकटॉक के फाउंडर झांग यिमिंग के बारे में बात करें तो इस लिस्ट में भी वो अडानी से ऊपर ही हैं.
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अडानी, को, पछाड़कर, TikTok, के, फाउंडर, बने, एशिया, के, सबसे, अमीर, शख्स, लिस्ट, में, और, किसका, नाम</media:keywords>
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        <title>UPI: दुनिया को राह दिखाई, पर अब अपना खर्च निकालने की चुनौती</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-दुनिया-को-राह-दिखाई-पर-अब-अपना-खर्च-निकालने-की-चुनौती</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/upi-दुनिया-को-राह-दिखाई-पर-अब-अपना-खर्च-निकालने-की-चुनौती</guid>
        <description><![CDATA[ भारत का यूपीआई आज दुनियाभर के कई हिस्सों में डिजिटल पेमेंट की मिसाल बन चुका है. चाय की दुकान हो या रिक्शा या फिर कोई बड़ा मॉल, हर जगह ही कुछ सेकेंड में पेमेंट हो जाता है. दोस्त को पैसे भेजने हों या बिजली का बिल भरना हो यूपीआई ने कैश रखने की जरूरत ही कम कर दी है.
NPCI के मुताबिक यूपीआई एक इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम है, जिससे दो बैंक खातों के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं. लेकिन अब इसी यूपीआई के सामने एक अलग तरह की चुनौती खड़ी हो रही है. सवाल ये है कि जिस पेमेंट सिस्टम को इस्तेमाल करना लोगों के लिए लगभग फ्री है उसके पीछे आने वाला भारी खर्च आखिर कौन उठाएगा?
यूपीआई के पीछे क्या खर्च आता है?इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आम यूजर बैंक अकाउंट से किसी दूसरे व्यक्ति या दुकानदार को यूपीआई के जरिए पेमेंट करता है और उसके लिए अलग से फीस नहीं देना पड़ती है. इसलिए भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. लेकिन हर यूपीआई ट्रांजैक्शन के पीछे टेक्नोलॉजी, सर्वर, बैंकिंग सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड मॉनिटरिंग और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च आता है. यूजर को पेमेंट भले ही फ्री दिखाई दे, लेकिन इस पूरे सिस्टम को चलाने में पैसा खर्च होता है.&amp;nbsp;
यूपीआई से पेट्रोल डीजल CNG फुल कराना पड़ेगा महंगा, अब लगेगा इतना चार्ज
कमाई का मॉडल क्या है?&amp;nbsp;यूपीआई के बैंक- अकाउंट बेस्ड पेमेंट में ग्राहक से कोई फीस नहीं लिया जाता है. वहीं दुकानदारों से लिया जाने वाला MDR भी लंबे समय से यूपीआई के लेनदेन में बड़ा मुद्दा रहा है. इस पैसे का हिस्सा पेमेंट इकोसिस्टम को जाता है. लेकिन यूपीआई को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए इस तरह के फीस को सीमित या खत्म करने की नीति ने इसे यूजर्स के लिए बेहद सस्ता बना दिया. अब चैलेंज ये है कि इतने बड़े नेटवर्क को टिकाऊ कैसे रखा जाए.&amp;nbsp;
यूपीआई का खर्च कौन उठाता है?यूपीआई के पीछे सिर्फ एक ऐप काम नहीं करता है. इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, NPCI और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी काम करती हैं. हर दिन करोड़ों ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लगता है. इसके अलावा साइबर फ्रॉड को रोकने, सिस्टम को 24 घंटे चालू रखने और ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने पर भी लगातार खर्च होता रहता है. यानी जैसे-जैसे यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ता है, वैसे-वैसे इस नेटवर्क को संभालने की लागत भी बढ़ती है.
क्या अब यूपीआई पर चार्ज लगेगा?क्या अब हर यूपीआई पर चार्ज लगेगा? बस यही सवाल अभी लोगों के मन में है. फिलहाल ऐसा नहीं है कि आम यूजर के लिए हर यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगा दिया गया हो. बल्कि बहस इस बात पर है कि यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके पूरे इकोसिस्टम को कमाई का ऐसा मॉडल कैसे मिले, जिससे इसका खर्च निकल सके और कंपनियां भी इस सिस्टम में निवेश करें.
नहीं बचेंगे चाय-पकौड़ी, सब्जी और रेहड़ी-पटरी वाले, यूपीआई की 1 लाख की लिमिट है बहुत कम!
छोटे दुकानदारों पर क्या पड़ेगा असर?अगर आगे चलकर बड़े मर्चेंट्स पर किसी तरह का फीस लगाया जाता है तो इसका असर और छोटे दुकानदारों पर अलग-अलग हो सकता है. इसलिए यूपीआई के लिए कमाई का मॉडल बनाने में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका बोझ किस पर डाला जाए. सरकार और रेगुलेटर्स को एक तरफ तो यूपीआई को आम लोगों के लिए सस्ता बनाए रखना है तो दूसरी तरफ पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना भी जरूरी है.
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI:, दुनिया, को, राह, दिखाई, पर, अब, अपना, खर्च, निकालने, की, चुनौती</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिवाली से पहले सस्ता हुआ सोना, जानें चांदी के क्या हैं हालात?</title>
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        <description><![CDATA[ आज यानी 16 सितंबर, दिन बुधवार को सर्राफा बाजार में कमजोर वैश्विक रुख और मजबूत डॉलर के बीच सोने की कीमत में गिरावट आई है. आज सोना 1000 रुपए टूटकर 1,54,400 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. बता दें कि एक महीने में ये आंकड़ा सबसे ज्यादा निचले स्तर पर है. इससे पहले भी सोना 7 अगस्त को इसी रेट पर था. वहीं अब चांदी की बात करें तो चांदी लोगों को आजकल राहत की सांस दे रहा है. आज चांदी की कीमत लगातार दूसरे दिन 2,34,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर स्थिर है. यानी चांदी के लिए आपको ज्यादा पैसे नहीं खर्च करने हैं.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, सोने का भाव-&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट सोना (10 ग्राम)




दिल्ली
1,54,400 रुपए


मुंबई
1,54,400 रुपए


कोलकाता
1,54,400 रुपए


चेन्नई
1,54,400 रुपए


पटना
1,54,600 रुपए


लखनऊ
1,54,400 रुपए


मेरठ
1,54,400 रुपए


अयोध्या
1,54,400 रुपए


कानपुर
1,54,400 रुपए


अलीगढ़
1,54,400 रुपए


मुरादाबाद
1,54,400 रुपए


मिर्जापुर
1,54,400 रुपए


झांसी
1,54,400 रुपए


मथुरा
1,54,400 रुपए


आगरा
1,54,400 रुपए


गोरखपुर
1,54,400 रुपए


बरेली
1,54,400 रुपए


प्रयागराज
1,54,400 रुपए


वाराणसी
1,54,400 रुपए


गाजियाबाद
1,54,400 रुपए


नोएडा
1,54,400 रुपए


गुरुग्राम
1,54,400 रुपए



UPI: दुनिया को राह दिखाई, पर अब अपना खर्च निकालने की चुनौती
शहर अनुसार चांदी का भाव-



शहर का नाम
1 किलो चांदी का भाव&amp;nbsp;




दिल्ली
2,34,600 रुपए


मुंबई
2,34,600 रुपए


कोलकाता
2,34,600 रुपए


चेन्नई
2,34,600 रुपए


पटना
2,34,600 रुपए


लखनऊ
2,34,600 रुपए


मेरठ
2,34,600 रुपए


अयोध्या
2,34,600 रुपए


कानपुर
2,34,600 रुपए


अलीगढ़
2,34,600 रुपए


मुरादाबाद
2,34,600 रुपए


मिर्जापुर
2,34,600 रुपए


झांसी
2,34,600 रुपए


मथुरा
2,34,600 रुपए


गोरखपुर
2,34,600 रुपए


बरेली
2,34,600 रुपए


आगरा
2,34,600 रुपए


गाजियाबाद
2,34,600 रुपए


नोएडा
2,34,600 रुपए


गुरुग्राम
2,34,600 रुपए



अंतर्राष्ट्रीय बाजार का क्या है हाल?&amp;nbsp;
आज कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सोने की कीमतों में गिरावट आई है. सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गया और एक महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है. कहा जा रहा है कि ये गिरावट मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते बॉण्ड प्रतिफल के कारण आई है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है. &amp;nbsp;विदेशी बाजारों में, सोने की कीमत 22.28 डॉलर यानी 0.52 प्रतिशत टूटकर 4,276.52 डॉलर प्रति औंस रह गई है, जबकि चांदी मामूली गिरावट के साथ 63.07 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है.
14.2 किलो वाला सिलेंडर का आज क्या है रेट? कहीं फिर से तो नहीं बढ़ी कीमत, करें चेक
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>पाकिस्तान में लॉकडाउन! शाम 8 बजे के बाद पसरेगा सन्नाटा, आखिर क्या है मामला?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पाकिस्तान-में-लॉकडाउन-शाम-8-बजे-के-बाद-पसरेगा-सन्नाटा-आखिर-क्या-है-मामला</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव और सऊदी अरब के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूतियों के हमलों के बीच पाकिस्तान में ईंधन संकट गहराने लगा है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस हिसाब से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं उसका पाकिस्तान के पहले से ही कम विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ रहा है. ऐसे में इस बढ़ते वित्तीय बोझ और ईंधन की खपत कम करने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार देश भर में &#039;पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन&#039; लगाने पर विचार कर रही है.
हाल ही में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें आपातकालीन योजना के ड्राफ्ट पर चर्चा की गई है. इसके तहत सरकार ईंधन और बिजली की खपत को तुरंत घटाने के लिए कई कड़े कदमों पर विचार कर रही है. सरकार सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के संस्थानों के लिए हफ़्ते में चार दिन काम करने का नियम लागू करने पर विचार कर रही है जैसे कि 4 दिन का वर्किंग वीक और 3 दिन की छुट्टी, रोटेशन बेस्ड ड्यूटी, ऑनलाइन क्लासेज वगैरह. &amp;nbsp;
प्रस्तावित लॉकडाउन में लगने वाली पाबंदियां

सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों को हफ्ते में केवल 4 दिन खोलने का प्रस्ताव है. शुक्रवार, शनिवार और रविवार को छुट्टी का ऐलान हो सकता है.
स्कूल बंद रहने के साथ कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई को तुरंत ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट किया जा सकता है.
कॉर्पोरेट और आईटी सेक्टर की कंपनियों के वर्कर्स को हफ्ते में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) देने और सरकारी कर्मचारियों के लिए रोटेशन ड्यूटी सिस्टम लागू करने का सुझाव है.
बिजली बचाने के लिए कमर्शियल मार्केट्स और शॉपिंग मॉल्स को शाम 8:00 बजे तक बंद करने का आदेश दिया जा सकता है. &amp;nbsp;रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल्स को रात 10:00 बजे तक बंद करना होगा. सिर्फ मेडिकल स्टोर जैसी आवश्यक सेवाओं को इस नियम के दायरे से बाहर रखा जाएगा.
सरकारी विभागों और मंत्रियों को मिलने वाले पेट्रोल भत्ते (Fuel Allocations) में 50% तक की कटौती की जा सकती है.&amp;nbsp;

पाकिस्तान में क्यों लगाना पड़ रहा लॉकडाउन?
पाकिस्तान अभी गहरे ईंधन संकट के दौर से गुजर रहा है. अमेरिका और ईरान में जंग के बीच एक तरफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से सप्लाई ठप है. पाकिस्तान अपनी जरूरत का 70% पेट्रोलियम मिडिल ईस्ट के देशों से आयात करता है. मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के चलते अनुमान है कि पाकिस्तान के पास अभी सिर्फ 28 दिनों का ही पेट्रोल और डीजल का स्टॉक बचा है.
ऊपर से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार के और तेजी से खर्च होने का भी डर है. ऐसे में सरकार के पास अभी स्थिति को काबू में करने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के अलावा कोई चारा नहीं है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पाकिस्तान, में, लॉकडाउन, शाम, बजे, के, बाद, पसरेगा, सन्नाटा, आखिर, क्या, है, मामला</media:keywords>
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        <title>टाटा संस को लाना ही होगा आईपीओ, बॉम्बे हाई कोर्ट में RBI की कैविएट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टाटा-संस-को-लाना-ही-होगा-आईपीओ-बॉम्बे-हाई-कोर्ट-में-rbi-की-कैविएट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/टाटा-संस-को-लाना-ही-होगा-आईपीओ-बॉम्बे-हाई-कोर्ट-में-rbi-की-कैविएट</guid>
        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट (Caveat) दाखिल कर टाटा संस (Tata Sons) की लिस्टिंग या IPO को रोकने की कानूनी कोशिशें सीमित कर दी है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, &amp;nbsp;टाटा संस की NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को नामंजूर करने के बाद रिजर्व बैंक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक &#039;कैविएट&#039; (सूचना की अर्जी) दायर की है.
RBI ने ऐसा क्यों किया?
RBI ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस मामले में कोई भी आदेश जारी होने से पहले उनकी बात सुनी जाए. यानी कि अगर टाटा संस, टाटा ट्रस्ट्स या कोई अन्य शेयरधारक RBI के अनिवार्य लिस्टिंग वाले फैसले को अदालत में चुनौती देता है, तो कोर्ट RBI का पक्ष सुने बिना कोई भी एकतरफा स्थगन आदेश या अंतरिम राहत जारी न कर सके.&amp;nbsp;
RBI ने सितंबर 2026 में टाटा संस &amp;nbsp;की उस अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसे कंपनी ने मार्च 2024 में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दायर किया था. इस फैसले के बाद टाटा संस के लिए स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना जरूरी हो गया है क्योंकि वह RBI के &#039;अपर-लेयर&#039; NBFC (NBFC-UL) के नियमों के दायरे में आती है. हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स जैसे कई शेयरहोल्डर यूनिट्स, जिसके पास कंपनी की दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी है- इस लिस्टिंग के पक्ष में नहीं हैं.&amp;nbsp;
क्यों लिस्टिंग से बच रही टाटा संस?
टाटा संस (Tata Sons) ने वित्त वर्ष 2023-24 में अपना 21,813 करोड़ का पूरा स्टैंडअलोन लोन चुका दिया था और कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो गई थी. &amp;nbsp;कर्ज चुकाने के बाद मार्च 2024 में टाटा संस ने RBI के पास अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए अर्जी भी दी थी.
कंपनी का कहना था कि चूंकि उन्होंने अपना पूरा कर्ज चुका दिया है और अभी वे सीधे तौर पर बैंकों या जनता से कोई नया फंड नहीं जुटा रहे हैं इसलिए उन्हें NBFC फ्रेमवर्क और अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिलनी चाहिए. इस पर RBI ने तर्क देते हुए कहा कि भले ही टाटा संस खुद सीधे तौर पर बाजार से पैसा नहीं उठा रही है, लेकिन टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स जैसी टाटा ग्रुप की कई लिस्टेड कंपनियां टाटा संस में हिस्सेदारी (Equity Stake) रखती हैं.
इन लिस्टेड कंपनियों में आम जनता और बैंकों का पैसा लगा हुआ है इसलिए टाटा संस सीधे तौर पर नहीं, तो परोक्ष रूप से जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रही है. साथ ही जून 2026 से प्रभावी नए नियमों के तहत 1 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति वाली किसी भी निजी NBFC को अपर-लेयर में रहना और लिस्ट होना अनिवार्य है. मार्च 2026 तक टाटा संस की संपत्ति 2 लाख करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो इस लिमिट से दोगुनी है.
अब आगे क्या होगा?
अब चूंकि रिजर्व बैंक ने टाटा संस की अर्जी खारिज करने के साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट में एक कैविएट (Caveat) भी दाखिल कर दी है. इसके चलते अगर टाटा संस इस फैसले के खिलाफ अदालत जाती है, तो कोर्ट आरबीआई का पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश या स्टे (Stay) जारी नहीं कर सकता.

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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>टाटा, संस, को, लाना, ही, होगा, आईपीओ, बॉम्बे, हाई, कोर्ट, में, RBI, की, कैविएट</media:keywords>
    </item>
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        <title>तेल, प्याज से लेकर गैस तक, क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं खाने&amp;पीने की चीजों के दाम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/तेल-प्याज-से-लेकर-गैस-तक-क्यों-तेजी-से-बढ़-रहे-हैं-खाने-पीने-की-चीजों-के-दाम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/तेल-प्याज-से-लेकर-गैस-तक-क्यों-तेजी-से-बढ़-रहे-हैं-खाने-पीने-की-चीजों-के-दाम</guid>
        <description><![CDATA[ पिछले कुछ समय में महंगाई ने खूब पैर पसारे हैं, जिसने लोगों के घर के बजट को तेजी से हिलाकर रख दिया है. घर पर हर रोज बनने वाला खाने-पीने की चीजों के दाम बड़ी ही तेजी से बढ़ रहे हैं. जिसकी वजह से हर रोज की थाली भी बजट से बाहर जाती जा रही है. लेकिन ये महंगाई इतनी तेजी से बढ़ क्यों रही है? क्या इस बारे में आप जानते हैं? नहीं ना! तो आइये पता लगाते हैं कि इतनी तेजी से महंगाई क्यों देश में बढ़ रही है.
बेसिक चीजों के बढ़ रहे दामखाने- पीने में इस्तेमाल होने वाली बेसिक चीजें, जैसे प्याज जिससे हर रोज घर के किचन में तड़का लगता है, तेल, जिसके बिना सब्जी बन ही नहीं सकती. गैस, जो नहीं होगा तो खाना कैसे पकेगा? ऐसे ही अदरक, लहसुन, चीनी आदि की कीमतों में भी लगातार तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. आइये दिखाते हैं अगस्त में कितना प्रतिशत खाने- पीने की चीजों में बढ़ोतरी हुई है.
ये भी पढ़ें: विदेश जाने पर सरकारी पहरा, क्यों अपने नागरिकों पर ट्रैवल पाबंदियां कस रहा चीन?
अगस्त में इन चीजों के बढ़े हैं दाम



सामान
अगस्त में बढ़ी महंगाई (प्रतिशत में)


अदरक
74%


प्याज
48%


लहसुन
44%


चीनी
24%


चिकन
14%


अंडे
11%


खाने का तेल
9%


चावल
6%


पनीर
4%


पल्सेस
4%



क्यों बढ़ रही महंगाई?इसकी सबसे बड़ी वजह है मॉनसून की बारिश, हालांकि ये मौसम इस महीने खत्म होने वाला है. जून में शुरू होने के बाद से बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत कम हुई है, और मौसम विभाग ने सितंबर में भी बारिश के सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया है. इसके अलावा अल नीनो की वजह से भी मौसम काफी खराब रहा था, जिसकी वजह से भी महंगाई बढ़ रही है.
खराब मौसम की वजह से चावल से लेकर सोयाबीन, मक्का और गन्ने जैसी फसलों की पैदावार पर ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है. चावल और मक्के की बुआई पिछले सीजन के मुकाबले 3% से ज्यादा पीछे चल रही है और अब बहुत कम समय बचा है. साथ ही, अगस्त में कमी की आशंका के कारण देश में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. इस वजह से सरकार को बिना ड्यूटी के चीनी आयात करने की इजाज़त देनी पड़ी. ये एक ऐसा देश है जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है, इसलिए ऐसा कदम उठाना कोई आम बात नहीं है.
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जनवरी 2026 से अगस्त तक 2026 तक कितनी बढ़ी महंगाई?



महीना
पिछले साल से कितने प्रतिशत बढ़ी महंगाई


जनवरी 2026
2.13


फरवरी 2026
3.47


मार्च 2026
3.87


अप्रैल 2026
4.2


मई 2026
4.78


जून 2026
5.32


जुलाई 2026
5.52


अगस्त 2026
5.95



युद्ध भी है वजहहालांकि केवल मौसम की मार ही नहीं बल्कि ईरान- अमेरिका का युद्ध भी महंगाई की वजह है. खासतौर से कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने से, देश में ईंधन की कीमत तेजी से बढ़ी. जिसका असर ट्रांसपोर्ट के साथ ही अन्य खाने- पीने की चीजों पर भी पड़ा है. फरवरी से शुरू हुआ ये युद्ध अब तक भी लगातार चल ही रहा है, ऐसे में आने वाले समय में और भी ज्यादा महंगाई बढ़ सकती है.
 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>तेल, प्याज, से, लेकर, गैस, तक, क्यों, तेजी, से, बढ़, रहे, हैं, खाने-पीने, की, चीजों, के, दाम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सिर्फ 4% बड़े ट्रांजैक्शन पर लगेगा UPI चार्ज, आपसी लेन&amp;देन हमेशा रहेंगे मुफ्त</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-4-बड़े-ट्रांजैक्शन-पर-लगेगा-upi-चार्ज-आपसी-लेन-देन-हमेशा-रहेंगे-मुफ्त</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-4-बड़े-ट्रांजैक्शन-पर-लगेगा-upi-चार्ज-आपसी-लेन-देन-हमेशा-रहेंगे-मुफ्त</guid>
        <description><![CDATA[ UPI ट्रांजैक्शन को लेकर हाल ही में सरकार ने फैसला किया है कि 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अब से चार्ज देना होगा. या यूं कहें कि 2000 रुपये तक का ट्रांजैक्शन पूरी तरह से मुफ्त रहेगा. जिसे लेकर काफी कंफ्यूजन लोगों के बीच नजर आ रहा है. इसके अलावा व्यापारियों ने भी इसे लेकर विरोध जताया है. जिसके बाद अब खुद सरकार ने इस मामले पर लोगों का कंफ्यूजन दूर किया है. सरकारी की तरफ साफ किया गया है कि P2P यानी पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन पूरी तरह से फ्री रहने वाला है.
मर्चेंट्स पहले से ही दे रहे चार्जवित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले मर्चेंट पहले से ही MDR चार्ज के रूप में करीब 1 से 2 प्रतिशत का भुगतान कर रहे हैं. फिर भी, बड़े रिटेलर या मर्चेंट आमतौर पर ग्राहकों से कोई अलग चार्ज नहीं लेते हैं. इसके बजाय, वो डिस्काउंट और EMI ऑफर के जरिए कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देते हैं.
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इसके अलावा मर्चेंट या कोई भी व्यापारी पहले से ही पेमेंट स्वीकार करने के लिए चार्ज देते हैं. क्योंकि डिजिटल पेमेंट के जरिए लोग ज्यादा खरीदारी करते हैं और बड़े टिकट साइज यानी ज्यादा कीमत वाले ट्रांजैक्शन में मदद मिलती है. जिसका पेमेंट पहले से ही मर्चेंट को उठाना पड़ रहा है.
96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन पहले से ही हैं मुफ्तइतना ही नहीं मंत्रालय ने ये भी बताया कि 96% UPI मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन 2000 रुपये से कम के होते हैं और ये 100% चार्ज-फ़्री हैं. इसका साफ भाषा में ये मतलब है कि अधिकतर लोग सामान खरीदते समय 2000 रुपये से कम कीमत का सामन खरीदते हैं और उतना ही पेमेंट भी करते हैं. जिसे कि 2000 से कम के ट्रांजैक्शन 96% होते हैं. महज 4 प्रतिशत ट्रांजैक्शन पर ही UPI चार्ज लगेगा.&amp;nbsp;
इससे छोटे मर्चेंट या छोटे ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ता है. ग्राहक किसी भी ट्रांजैक्शन का चार्ज नहीं देते हैं. MDR उन मर्चेंट पर लागू होता है जो पेमेंट स्वीकार करते हैं.
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P2P ट्रांजैक्शन है पूरी तरह फ्रीसरकार के द्वारा दी गई इस अपडेट से साफ पता चलता है कि 2000 के ऊपर भी यदि ट्रांजैक्शन होता है तो उसका असर किसी भी तरह से किसी व्यक्ति पर नहीं पड़ेगा. ये चार्जेज केवल मर्चेंट पेमेंट के लिए होंगे. P2P यानी किसी व्यक्ति को आमतौर पर UPI ट्रांजैक्शन करना पूरी तरह से फ्री रहने वाला है.
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फ्रेंड को 1 लाख तब भी फ्री, दुकानदार को 2500 पर भी चार्ज, ये कैसा कुतर्क है? अशनीर ग्रोवर</title>
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        <description><![CDATA[ UPI ट्रांजैक्शन को लेकर लगातार विवाद चल रहा है. सोमवार को जब से वित्त मंत्रालय ने नया फैसला किया है, तभी से इस विवाद ने तूल पकड़ लिया है. सरकार के इस फैसले के तहत अब यूपीआई के जरिए 2000 रुपये से ज्यादा की पेमेंट करने पर चार्जेस लगेंगे. सरकार के इस फैसले के बाद तमाम व्यापारियों और जनता समेत अलग- अलग लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. वहीं हाल ही में BharatPe के फॉर्मर फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने भी इसे लेकर बात की है.
अशनीर के सरकार के इस फैसला का जरा भी समर्थन नहीं किया, बल्कि उन्होंने इस फैसले पर आपत्ति जताई है. इतना ही नहीं बल्कि अशनीर ने सरकार के इस फैसले को पूरी तरह से बेवकूफी भरा बता दिया है.
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क्या बोले अशनीर ग्रोवर?दरअसल हाल ही में अशनीर ग्रोवर टाइम्स नाओ नवभारत की एक डिबेट में शामिल होने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सरकार के इस फैसले को लेकर बात की. अशनीर से जब पूछा गया कि सरकार की 2 हजार रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन योजना के बारे में वो सोचते हैं, तब उन्होंने इसका जवाब देते हुए सरकार के फैसले की कड़ी निदा की. उन्होंने इस फैसले को गलत बताते हुए इसका उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा,
&#039;मुझे तो ये सब देखकर बहुत मजा आता है. क्योंकि जब मैं सोचता हूं कि सरकार की बेवकूफियां कम हो गई हैं, तभी बढ़ जाती हैं. मैं साफ देता हूं, मान लीजिए मान लीजिए मैंने एक हजार रुपये अपने दोस्त को यूपीआई से भेजे. मैंने 1 लाख अपने दोस्त को भेजे या 3 हजार किसी क्यूआर कोड पर स्कैन करके दिए, तीनों मामलों में कॉस्ट ऑफ रनिंग द सिस्टम एक ही है. फिर आप बताइयये कि दोस्त को एक लाख भेजने पर किसी को कोई पैसे नहीं लगेंगे, लेकिन एक छोटे दुकानदार को 500 रुपये की पेमेंट करने पर पैसे लगाने हैं. इसका क्या लॉजिक है?&#039;
कहां खर्च कर रही सरकार?इस दौरान उन्होंने सरकार के खर्च पर सवाल उठाते हुए ये भी कह कि सरकार हमेशा कहती है कि उसका खर्च हो रहा है तो ये भी बताए कि कहां खर्च हो रहा है. उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि RBI ने सरकार को FY26 में 3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस दिया है, तो वहीं UPI में शामिल बैंकों का कुल मुनाफा भी 4.2 लाख करोड़ रुपये है, NPCI का प्री-टैक्स प्रॉफिट FY26 में हजार करोड़ रुपये है तो ऐसे में नुकसान किसे हो रहा है?
उन्होंने कहा कि, &#039;अगर किसी का नुकसान ही नहीं हो रहा है तो आप छोटे दुकानदार से किस बात की भरपाई करवा रहे हो?&#039;
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सरकार के तर्क पर अशनीर का कटाक्षवहीं अस दौरान जब सरकार के तर्क को लेकर बात की गई कि 2021 से 2025 के बीच UPI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 8700 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी. तब इसे लेकर अशनीर ने साफ कहा कि सरकार ने कोई नेट सब्सिडी नहीं दी है. उन्होंने कहा, &#039;आप RBI, मुनाफा कमाने वाले बैंकों और NPCI से पैसा व टैक्स ले रहे हैं. NPCI एक &#039;नॉट फॉर प्रॉफिट&#039; संस्था है, जो अपने स्टेटमेंट में प्रॉफिट की जगह सरप्लस लिखती है, फिर भी सरकार ने पिछले साल उनसे हजार करोड़ का टैक्स लिया है. गूगल करने पर 3 मिनट में सब साफ हो जाता है. सरकार के ये आंकड़े बिल्कुल बेवकूफी भरे हैं. अगर आपको लगता है कि ये सबसे बड़ा सब्सिडी बिल है और देश के सामने सबसे बड़ी समस्या है, तो भगवान ही देश को बचाए&#039;.
आम लोगों में भी चिंताबता दें कि UPI पेमेंट को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से आए नए नोटिफिकेशन के बाद 2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगने की अटकलें तेज हो गई हैं. वाराणसी की एक चाय की दुकान पर मौजूद लोगों ने भी इस बात को लेकर चिंता जताई है कि अगर 2000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगता है तो ये आम लोगों की जेब पर भारी पड़ेगा. एटीएम और कैश रूपयों पर निर्भर होना पड़ेगा, जबकि आज ज्यादातर लोग यूपीआई पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं.
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>5000 पर 20 और 10000 पर कटेंगे 40 रुपए, UPI पेमेंट पर चार्ज का फॉर्मूला तय</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/5000-पर-20-और-10000-पर-कटेंगे-40-रुपए-upi-पेमेंट-पर-चार्जका-फॉर्मूला-तय</link>
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        <description><![CDATA[ डिजिटल ट्रांजैक्शंस पर शुल्क लगाए जाने को लेकर उठे विरोध के बीच सरकार ने यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर नया फैसला लिया है. सरकार के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट्स को 0.4 प्रतिशत शुल्क देना होगा.
NPCI ने मंगलवार को बताया है कि 15 अक्टूबर से UPI के जरिए 2 हजार रुपये के ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों को 0.4 प्रतिशत की फीस देना होगी. वहीं सोमवार को ही सरकार ने साफ किया था कि 2000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते.

Regarding Merchant Discount Rate (MDR) on Select UPI (P2M) TransactionsPlease refer to the FAQs here: https://t.co/DTOZFVHAVB pic.twitter.com/4HMU0YZ2AC
&amp;mdash; NPCI (@NPCI_NPCI) September 15, 2026



कितनी होगी अधिकतम सीमा?इस शुल्क को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कहा जाता है. ये शुल्क 0.4% होगा, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये पर ट्रांजैक्शन तय की गई है. इसका मतलब है कि अगर कोई ग्राहक किसी व्यापारी को 75,000 रुपये या उससे ज्यादा का UPI पेमेंट करता है, तो 0.4% के हिसाब से उस पर 300 रुपये से ज्यादा शुल्क बन सकता है, लेकिन व्यापारी से अधिकतम 300 रुपये ही MDR शुल्क लिया जाएगा.
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कैसा होगा नया फ्रेमवर्क?15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन के लिए UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का नया फ़्रेमवर्क लागू होगा. साथ ही, ग्राहकों के लिए 2 हजार रुपये तक के सभी ट्रांजैक्शन के लिए UPI पूरी तरह से फ्री रहेगा. नए नियमों के तहत, QR कोड के ज़रिए हर महीने 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे मर्चेंट को कोई MDR नहीं देना होगा.



अमाउंट
एप्लिकेबल MDR
मर्चेंट के द्वारा पे किया जाने वाला MDR


2000 रुपये
-
0


3000 रुपये
0.40%
12 रुपये


50,000 रुपये
0.40%
200 रुपये


75,000 रुपये या उससे ज्यादा
फिक्स्ड 300 रुपये
300 रुपये



खास कैटेगरी पर लगेगी फ्लैट फीसइसके अलावा रेलवे और फ्यूल जैसी खास कैटेगरी में 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये की फ्लैट फीस लगेगी, और दूसरे ज्यादा वैल्यू वाले P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% चार्ज लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी.
छोटे वेंडरों के लिए खा फेडसरकार की इस पहल के तहत छोटे वेंडर और टियर-3 मार्केट के लिए डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए एक खास फंड भी बनाया जाएगा. सभी मर्चेंट के लिए 2000 रुपये तक के छोटे वैल्यू वाले UPI ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जो सभी UPI P2M ट्रांज़ैक्शन का 95% से ज्यादा हिस्सा हैं.
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक गलत नंबर और फंस गए 3.25 लाख, हाई कोर्ट ने बैंक से कराई भरपाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-गलत-नंबर-और-फंस-गए-325-लाख-हाई-कोर्ट-ने-बैंक-से-कराई-भरपाई</link>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक हाईकोर्ट ने फेडर्ल बैंक को एक महिला के उसके 3.25 लाख रुपये वापिस लौटाने का आदेश सुनाया. जिसमें महिला ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह पैसे अपने पिता को आरटिजिएस के जरिए भेजना चाहती थी, लेकिन पिंन का गलत कोड डालने के कारण पैसे किसी और के बैंक खाते में चला गया था.&amp;nbsp;क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला कर्नाटक की रहने वाली एक महिला नाम नुजौबा जलील से जुड़ा है. दरसल 17 दिसंबर 2025 को नुजौबा ने अपने पिता को आरटिजिएस के द्वारा शुल्क भेजा था, लेकिन पिंन के आखिरी चार अंक गलत डालने के कारण रकम स्टेंडरड इंजीनिरिंग वर्कस के एक बैंक के खाते में पहुंच गयी थी. जिसके खाते में वह शुल्क पहुंचा उसके मालिक की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी.&amp;nbsp;मदद के लिए पहुंची आरबिआई &amp;nbsp;
नुजौबा को जब एक जगह से प्राप्त संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी, तब उसने RBI का दरवाजा खटखटाया. लेकिन अफसोस की बात यह है कि वहां से भी उसकी मांग को खारिज कर दिया गया था. RBI का कहना था कि जिनके पास रकम पहुंची है उनकी सहमती के बगैर उनके पैसे वापिस नहीं मिल सकते है.&amp;nbsp;
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क्या था कोर्ट का फैसला?
जब महिला के लिए सभी दरवाजे बंद हो चुके है तो उसने कर्नाटक हाईकोर्ट जाने का फैसला किया. कोर्ट में अपनी दलील देने के बाद, कोर्ट ने यह जवाब दिया कि जिस इंसान के खाते में रुपये पहुंचे है उसका कोई अता-पता नहीं है, और कोई उस रकम का गलत इस्तेमाल कर सकता है. महिला ने यह भी कहा कि अपनी रकम से वंचित रहना संविधान 300A के तहत अपने अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.&amp;nbsp;
अदालत ने बैंक को रकम महिला के खाते में दुबारा से ट्रांसफर कर देने का आदेश सुनाया. कोर्ट ने ध्यान दिया कि स्टेंडरड इंजीनिरिंग वर्कस को भेजा गया नोटिस वापिस आ गया था, और जिसके खाते में रकम पहुंची थी उससे भी कोेई संपर्क नहीं हो पा रहा था. इसके बाद न्यायमूर्ति सी एम पुनाचा ने बैंक को 3.25 लाख रुपये देने का आदेश सुनाया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>सुपरफास्ट होगी फेस्टिवल डिलीवरी, Amazon ने 118 शहरों में बनाए 150 नए स्टेशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सुपरफास्ट-होगी-फेस्टिवल-डिलीवरी-amazon-ने-118-शहरों-में-बनाए-150-नए-स्टेशन</link>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है, अब लोग ताबड़तोड़ शॉपिंग भी करेंगे. बाजार जाने से बेहतर आजकर लोग ऑनलाइन शॉपिंग पसंद करते हैं. इसमें थकान भी नहीं होती और घर बैठे ही आपको जो और जैसा सामान चाहिए होता है वो मिल जाता है. ऐसे में देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में से एक अमेजन ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है. कंपनी ने इस त्योहारी सीजन के लिए अपनी डिलीवरी को सुपरफास्ट करने के लिए नई स्ट्रैटेजी बनाई है.
अमेजन की नई स्ट्रैटेजीदरअसल अमेजन ने त्योहारी सीजन से पहले भारत में अपने डिलीवरी और स्टोरेज नेटवर्क का बड़ा कर लिया है. कंपनी ने देश में 20 नए फुलफिलमेंट सेंटर, 6 नए सॉर्ट सेंटर और 150 नए लास्ट-माइल डिलीवरी स्टेशन शुरू करने का ऐलान किया है. इसके बाद अमेजन की कुल स्टोरेज क्षमता 50% बढ़कर 6.4 करोड़ क्यूबिक फीट हो गई है.
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बड़े-छोटे दोनों शहरों पर फोकसअमेजन ने इस बार बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों पर भी खास ध्यान दिया है. कंपनी के सभी 6 नए सॉर्ट सेंटर और 7 नए फुलफिलमेंट सेंटर नॉन-मेट्रो सिटीज में शुरू किए जा रहे हैं. रायपुर, रांची और वाराणसी में पहली बार अमेजन के फुलफिलमेंट सेंटर शुरू होंगे. इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में ग्राहकों को सामान जल्दी पहुंचाने में मदद मिलेगी.
क्या बोली कंपनी?इस बारे में बात करते हुए कंपनी ने बताया कि, इस विस्तार के लिए वो इस साल 2,800 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश कर रही है. इस रकम का इस्तेमाल ऑपरेशनल नेटवर्क को मजबूत करने, तकनीक को बेहतर बनाने और कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए किया जाएगा. तो वहीं कंपनी ने ये भी बताया कि, इन सेंटरों का संचालन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में काम करने वाले उसके रणनीतिक साझेदार करेंगे.
नए डिलीवरी स्टेशन खुलेंगेअमेजन ने 118 शहरों में 150 नए लास्ट-माइल डिलीवरी स्टेशन भी शुरू किए हैं. इनमें आसनसोल, भटिंडा, बीकानेर, कोयंबटूर, डोडा, उधमपुर और वेस्ट गारो हिल्स जैसे शहर शामिल हैं. इनमें से 12 शहरों में पहली बार अमेजन का डिलीवरी स्टेशन शुरू हुआ है. भोजपुर, बोकाजन, जालौन और जहानाबाद भी इनमें शामिल हैं. इसका मतलब है कि अब छोटे शहरों और कस्बों तक अमेजन की पहुंच और मजबूत होगी.
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तेज होगी डिलीवरीकंपनी के मुताबिक, पिछले एक साल में सेम-डे डिलीवरी की सुविधा 30% ज्यादा शहरों तक पहुंची है. नए सेंटर शुरू होने से अमेजन विक्रेताओं का सामान ग्राहकों के करीब रखा जा सकेगा. इससे ऑर्डर मिलने के बाद सामान पहुंचाने में कम समय लगेगा.&amp;nbsp;
कंपनी ने बताया कि, &#039;ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग डिलीवरी ऑप्शंस चुन सकेंगे. इनमें कुछ मिनटों में अमेजन नाओ डिलीवरी, कुछ घंटों में डिलीवरी, सेम-डे और नेक्स्ट-डे डिलीवरी शामिल हैं.&#039; इतनी ही नहीं बल्कि कंपनी ने अपने डिलीवरी नेटवर्क से जुड़े कर्मचारियों और डिलीवरी पार्टनर्स के कल्याण के लिए &#039;सम्मान&#039; कार्यक्रम भी शुरू किया है. इसमें बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप, सरकारी योजनाओं का लाभ, बीमा, वित्तीय सहायता और सड़क सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सुपरफास्ट, होगी, फेस्टिवल, डिलीवरी, Amazon, ने, 118, शहरों, में, बनाए, 150, नए, स्टेशन</media:keywords>
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    <item>
        <title>प्याज, अदरक और लहसुन महंगा, सस्ता क्या क्या हुआ? देखें लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/प्याज-अदरक-और-लहसुन-महंगा-सस्ता-क्या-क्या-हुआ-देखें-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/प्याज-अदरक-और-लहसुन-महंगा-सस्ता-क्या-क्या-हुआ-देखें-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आपको भी इन दिनों सब्जी खरीदते समय पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह कुछ जरूरी चीजों के बढ़ते दाम हो सकते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर 4.82% पर पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 4.45% थी. खास तौर पर अदरक, प्याज और लहसुन जैसी सब्जियों की कीमतों ने लोगों की जेब पर ज्यादा असर डाला है.
वहीं, महंगाई के बीच राहत की बात यह है कि कुछ जरूरी सब्जियों और दूसरी चीजों के दाम में भी गिरावट देखने को मिली है. ऐसे में आइए जानते हैं कि अगस्त में किन चीजों की कीमत बढ़ी और किन सामानों के दाम कम हुए.
क्या-क्या हुआ महंगा?
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में कई चीजों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;

चांदी के आभूषण की कीमत में 107.11% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
अदरक के दाम 73.82% बढ़े.
प्याज की कीमत में 48.27% की बढ़ोतरी हुई.
लहसुन के दाम 43.60% बढ़े.
सोना, हीरा और प्लेटिनम के आभूषण 35.53% महंगे हुए.

अदरक की कीमत हाल के हफ्तों में तेजी से बढ़ी है और कई बाजारों में इसका भाव करीब 300 से 400 रुपये किलो तक देखने को मिल है. वहीं लहसुन के दाम भी बढ़कर करीब 200 से 400 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. वहीं, प्याज कई खुदरा बाजारों में 50 से 65 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है.
एक गलत नंबर और फंस गए 3.25 लाख, हाई कोर्ट ने बैंक से कराई भरपाई
किन चीजों के दाम हुए सस्ते?
बढ़ती महंगाई के बीच कुछ जरूरी समानों की कीमतों में कमी भी गिरावट दर्ज की गई है. इससे आम लोगों को थोड़ी राहत मिली.&amp;nbsp;

टमाटर 31.09% सस्ता हुआ.
आलू के दाम में 13.14% की कमी आई.
मोटर कार और जीप 6.72% सस्ती हुईं.
भिंडी की कीमत 5.41% घटी.
परवल और कुंदरू के दाम में 3.60% की गिरावट दर्ज की गई.

2026 में लगातार बढ़ी खुदरा महंगाई
साल 2026 के दौरान खुदरा महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है.

जनवरी: 2.75%
फरवरी: 3.21%
मार्च: 3.40%
अप्रैल: 3.48%
मई: 3.93%
जून: 4.38%
जुलाई: 4.45%
अगस्त: 4.82%

अगर इन आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो जनवरी के मुकाबले अगस्त में खुदरा महंगाई दर काफी ऊपर पहुंच गई.
सुपरफास्ट होगी फेस्टिवल डिलीवरी, Amazon ने 118 शहरों में बनाए 150 नए स्टेशन
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>प्याज, अदरक, और, लहसुन, महंगा, सस्ता, क्या, क्या, हुआ, देखें, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>हर वक्त ऑन रखो कैमरा, WFH पर अरबपति बॉस का फरमान, भड़के कमर्चारी</title>
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        <description><![CDATA[ कोविड के बाद से दुनियाभर में वर्क फ्रॉम होम का कल्चर शुरू हुआ था. जिसको कई कंपनियां अब तक भी कंटीन्यू कर रही हैं. कर्मचारियों की सहूलियत के लिए कंपनियां उन्हें वर्क फ्रॉम हो दे देती है. लेकिन हाल ही में एक मामला ऐसा सामने आया है जिसमें एक बॉस की वर्क फ्रॉम होम की पॉलिसी पर कर्मचारियों ने आपत्ति जताई और एक साथ नौकरी ही छोड़ दी.
क्या है पूरा मामला?दरअसल हम बात कर रहे हैं अमेरिका की, जहां के अरबपति वकील और फ्लोरिडा के राजनेता जॉन मॉर्गन के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है. जिसके चलते मॉर्गन की कंपनी में वर्क फ्रॉम होम करने वाले 23 कर्मचारियों ने सिर्फ एक हफ्ते में ही नौकरी छोड़ दी. इसके पीछे की वजह रही कंपनी की नई कैमरा मॉनिटरिंग पॉलिसी, जिससे परेशान होकर लोगों ने नौकरी ही छोड़ दी. इस बारे में खुद जॉन मॉर्गन ने एक पॉडकास्ट में बताया है.
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WFH में कैमरा रहेगा ऑनजॉन मॉर्गन ने &#039;द आइस्ड कॉफी हावर&amp;rsquo; पॉडकास्ट में बताया कि, &#039;जो कर्मचारी ऑफिस वापस नहीं आना चाहते थे, उन्हें घर से काम करने की अनुमति दी गई थी. लेकिन इसके लिए उनके ऑफिस के लैपटॉप से कैमरा चालू रखकर निगरानी की शर्त रखी गई. इस नीति के लागू होने के बाद पहले ही हफ्ते में 23 कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया था.&#039;
हालांकि मॉर्गन ने इन ये भी बताया कि उन्होंने इन इस्तीफों को इस तरह देखा कि कुछ कर्मचारी कंपनी की ओर से की जाने वाली निगरानी और जवाबदेही को स्वीकार नहीं करना चाहते थे. उन लोगों को घर से काम करने में परेशानी नहीं थी, बल्कि वो काम करना ही नहीं चाहते थे.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसमॉर्गन के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या घर से काम करने वाले कर्मचारियों पर पूरे समय कैमरे से नजर रखना सही तरीका है. तो वहीं कई लोगों ने ये भी कहा कि कर्मचारी शायद काम से नहीं, बल्कि हर समय निगरानी और प्राइवेसी में दखल से परेशान थे. उनके मुताबिक ये ऐसा है जैसे बॉस पूरे दिन कर्मचारी के कंधे के ऊपर खड़े होकर उसे देखता रहे.
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI बाजार से खींच रहा 1 लाख करोड़, आपके होम लोन और FD पर क्या असर पड़ेगा?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपका होम लोन चल रहा है या बैंक की एफडी में पैसा जमा होकर रखा है तो आपको आरबीआई के नए फैसले की जानकारी होनी ही चाहिए. आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद एक्स्ट्रा पैसे यानी सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है. ये बिक्री सितंबर में तीन चरणों में होगी.
अब सवाल ये है कि आरबीआई के इस कदम से आम जनता पर क्या फर्क पड़ने वाला है और क्या इससे होम लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी? क्या इससे एफडी पर ब्याज ज्यादा मिलेगा?&amp;nbsp;
आरबीआई 1 लाख करोड़ क्यों निकाल रहा है?
दरअसल, इस समय भारतीय बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से काफी ज्यादा पैसा मौजूद है. सितंबर की शुरुआत में बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी करीब 10.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी. अब आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में मौजूद एक्स्ट्रा नकदी को कम करने के लिए बाजार से 1 लाख करोड़ रुपए निकाल रहा है.&amp;nbsp;
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आरबीआई बाजार से पैसा कैसे खींचता है?
आरबीआई जब सरकारी बॉन्ड बेचता है तो बैंक और दूसरे निवेशक उन बॉन्ड को खरीदने के लिए पैसा देते हैं. ये पैसा बैंकिंग सिस्टम से निकलकर आरबीआई के पास चला जाता है. इस तरह बाजार में घूम रहा एक्स्ट्रा पैसा कम हो जाता है. आरबीआई ने 1 लाख करोड़ रुपए की बॉन्ड बिक्री को तीन हिस्सों में करने का फैसला किया है. पहली बिक्री 17 सितंबर को 50000 करोड़ रुपए की होगी, जबकि 21 और 28 सितंबर को 25000- 25000 करोड़ रुपए की बिक्री की जाएगी.
होम लोन पर क्या असर पड़ेगा?
जब आरबीआई बाजार से पैसा खींचता है तो इसका होम लोन पर असर पड़ता ही है. बैंक के पास नकदी की कमी हो जाती है इसलिए वो अपनी लागत की भरपाई के लिए ब्याज बढ़ा देते हैं. इससे ईएमआई भी महंगी हो जाती है. इतना ही नहीं, कुछ बैंक तो लोन चुकाने का समय भी बढ़ा देते हैं.&amp;nbsp;
एफडी पर क्या पड़ेगा असर?
एफडी में पैसा रखने वालों पर भी इसका असर पड़ता है. चूंकि बाजार में पैसे की कमी होने लगती है, इसलिए बैंकों को अपनी लोन देने की जरूरतों को पूरा करने के लिए आम जनता से फंड जुटाना पड़ता है.&amp;nbsp;
लेकिन अगर सिस्टम में एक्स्ट्रा पैसा कम होता है और बैंक को फंड की जरूरत पड़ती है तो वो ज्यादा डिपॉजिट करते हैं और इसके लिए एफडी के ब्याज दर बढ़ जाते हैं. यानी लंबे समय में आरबीआई की नकदी की कमी एफडी रेट्स बढ़ा सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सारे बैंक तुरंत एफडी पर ब्याज बढ़ा देंगे.
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सैलरी के मामले में देहरादून ने सबको पछाड़ा, यहां कामगारों की कमाई है सबसे ज्यादा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-के-मामले-में-देहरादून-ने-सबको-पछाड़ा-यहां-कामगारों-की-कमाई-है-सबसे-ज्यादा</link>
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        <description><![CDATA[ एक आम आदमी सुबह अपने काम के लिए निकलता है और पूरे दिन मेहनत करके घर वापस लौटता है. ऐसे में जब महीना पूरा होने के बाद हाथ में सैलरी आती है और सैलरी अच्छी-खासी हो तो, हर व्यक्ति अपने साथ-साथ अपने परिवार की जरूरतों को भी खुशी-खुशी पूरा करता है. लेकिन अगर सैलरी काम के मुकाबले जरूरत से ज्यादा कम हो तो उसमें गुजारा करना मुश्किल हो जाता है.
इस बीच देश में अलग-अलग जिलों में कर्मचारियों की कमाई को लेकर सरकारी आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें देहरादून का नाम टॉप पर है. यहां पर कर्मचारियों को मिलने वाली औसत सालाना कमाई 4 लाख से भी ज्यादा दर्ज की गई है.
कितनी है सैलरी?
दरअसल, यहां पर गैर-निगमित कारोबारों में काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी के बारे में जानकर हर कोई हैरान रह सकता है, क्योंकि यहां पर कामगारों की औसत कमाई 4.6 लाख रुपये है. हां, ये जरूर है कि &amp;nbsp;सैलरी के मामले में देहरादून नंबर वन पर है, लेकिन इसके अलावा भी कई जिले हैं, जहां पर सालाना कमाई 2.5 लाख से 3.5 लाख के बीच रही है.
देहरादून के अलावा कौन से जिले हैं शामिल?

दूसरे नंबर पर दक्षिण कन्नड़ ( कर्नाटक) है.
वहीं तीसरे नंबर पर अजमेर ( राजस्थान ) है.
इसके बाद चौथे नंबर पर इंदौर ( मध्य प्रदेश) है.
फिर पांचवें नंबर पर कन्नूर ( केरल) है.

इन जिलों में कर्मचारियों की औसत सालाना कमाई लगभग 2.5 से 3.5 लाख रुपये के बीच रही.
नौकरी ढूंढने वालों के लिए जरूरी है आंकड़े
इस महंगाई के दौर में नौकरी करना काफी जरूरी है, क्योंकि हर व्यक्ति बिजनेस नहीं कर सकता है. अगर आप भी नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने की सोच रहे हैं तो इन आंकड़ों से ये साफ होता है कि देहरादून में कर्मचारियों की औसत कमाई सबसे ज्यादा है. यानी मतलब साफ है कि यहां गैर-निगामित कारोबारों में काम करने वालों की सैलरी अच्छी है.&amp;nbsp;
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सैलरी ही नहीं, काम के मामले में भी आगे
ये बात तो साफ है कि देहरादून में कर्मचारियों की औसत कमाई तो ज्यादा है , लेकिन इसके साथ ही काम के दौरान ज्यादा सेवाएं और काम तैयार करने में भी देहरादून आगे है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ 7 दिन का बचा तेल! सऊदी की वजह से पेट्रोल&amp;डीजल की बढ़ेंगी रिकॉर्ड कीमतें?</title>
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        <description><![CDATA[ सऊदी अरब के पास एक्सपोर्ट करने लायक तेल का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है. जानकारों का कहना है कि सऊदी के यानबू पोर्ट और मिस्र के टर्मिनलों पर पहले से स्टोर किया हुआ जो बैकअप तेल है, उससे फिलहाल सप्लाई बनी हुई है.
लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह स्टॉक केवल 5 से 7 दिनों में खत्म हो जाएगा. अगर ऐसा हुआ, तो ग्लोबल सप्लाई में 4% तक की कमी आ सकती है. यानी कि दुनिया भर में रोजाना होने वाले कच्चे तेल के कुल कारोबार में से 40 से 50 लाख बैरल तेल का बाजार से अचानक गायब हो जाना.&amp;nbsp;
सप्लाई पर क्यों आई आफत?
यूएस-ईरान में जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) वाला रास्ता पहले से ही ब्लॉक था. ऐसे में सऊदी तेल के सप्लाई के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल कर रहा था, जिसे बीते शुक्रवार को हुए ड्रोन हमलों के बाद एहतियातन बंद कराना पड़ा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द से जल्द इस पाइपलाइन को दोबारा शुरू नहीं किया गया, तो वैश्विक तेल बाजार में तेल की भारी किल्लत हो जाएगी.
सूत्रों के लगाए गए अनुमानों के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि सऊदी अरब की पाइपलाइन को पहुंचे नुकसान को ठीक करने में पांच से छह हफ्ते का समय लग सकते है. कुछ का कहना है कि इसे जल्दी भी ठीक किया जा सकता है और मरम्मत के दौरान ही आंशिक रूप से पंपिंग फिर से शुरू की जा सकती है.
सऊदी की जान ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन
बता दें कि 1,200 किलोमीटर लंबी और 5-मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब की लाइफलाइन रही है. इसने ग्लोबल एक्सपोर्ट को अमेरिका-ईरान में जंग की वजह से होर्मुज के बंद होने के असर से बचाए रखा. रोज रेगिस्तान से होकर गुजरने वाली इसी पाइपलाइन का इस्तेमाल करके सऊदी ने लगभग 40 लाख बैरल (bpd) तेल- जो ग्लोबल सप्लाई का लगभग 4% है- को लाल सागर पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाया है, लेकिन सऊदी एक्सपोर्ट की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, पाइपलाइन के बंद होने की वजह से यानबू में अब 5-7 दिनों का ही एक्सपोर्ट लायक स्टॉक बचा है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>क्यों भारतीय कारोबारियों की पहली पसंद है ग्वांगझू? दिल्ली से डायरेक्ट भरें उड़ान</title>
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        <description><![CDATA[ चीन के राष्ट्रपति जब 12 सितंबर को BRICKs SUMMIT में नई दिल्ली पहुंचे तब उसके बाद यह फैसला लिया गया चीन कि CHINA SOUTHERN AIRLINES 21 सितंबर से फिर शुरु कि जाने वाली है. यह उड़ाने पूरे छह साल बाद शुरु की जाने वाली है. भारतीय यात्रियों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;चीन के दक्षिण का ग्वांगझू देश प्रमुख व्यापारिक और परिवहन में शामिल है. इस शहर कि खास पहचान यह है कि यह इलेक्ट्रोनिक्स, कपड़े और अन्य मशीनरी सामानों के जाना जाता है. माना जाता है कि ग्वांगझू देश में भारतीय व्यापारियों ने अपना काफी कारोबार जमा रखा है, कहा जाता है कि करीब 3,000 भारतीय प्रमुख कारोबारी &amp;nbsp;यहां मौजूद है.
ग्वांगझू देश कि एक और बढ़ी पहचान क्या है?
ग्वांगझू देश अपने Canton Fair के लिए भी काफी ज्यादा पहचाना जाता है. यह मेला प्रमुख व्यापार के लिए जाना जाता है. इस मेले में अलग-अलग देश से व्यापारी शामिल होते है. z21 सितंबर से शुरु होने वाली उड़ाने अब से सभी भारतीय व्यापारियों और कारोबारयों के लिए समय और यात्रा में खर्च करने कि बचत में आसानी रहेगी.
यह एशिया के सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण एयर ट्रांजिट है, क्योंकि वहां से सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रायों के लिए कनेक्टिंग फलाईट है. अमेरिका के साथ-साथ और भी अन्य यात्रियों के लिए ट्रांजिट पॅाइंट है.&amp;nbsp;
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क्यों रोकी गई थी फलाईट?
कोरोना महामारी के चलते भारत से जाने वाली सारी चीन की फलाईट बंद कर दी गयी थी, जिसके कारण भारतीय व्यापारियों को और अन्य यात्रियों के लिए परेशानी हो गयी थी. सभी भारतीयों को बैंगकोक, सिंगापोर और होंग-कोंग से चीन जाने के लिए फलाईट लेनी पड़ती थी. इसकी वजह से यात्रियों का खर्चा और समय दोनों बरबाद होता था. &amp;nbsp;
अब बिल्कुल सीधी उड़ान हो जाने के कारण सभी भारतीय व्यापारी और अन्य यात्रियों के लिए काफी हद तक सुविधाजनक साबित होगा. कहा जारा हे कि सीधी उड़ानो कि वजह से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों के आवागमन को एक नई उम्मीद मिलने कि आकंशा जताई जा रही है.&amp;nbsp;
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission: साल में 4 बार बढ़े DA और 25% पर हो बेसिक में मर्जर</title>
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        <description><![CDATA[ चेन्नई और पुडुचेरी के बाद अब आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब चंडीगढ़ का रुख करने जा रहा है. चंडीगढ़ में 16-18 अगस्त के बीच वेतन आयोग की बैठक होगी. चंडीगढ़ में होने जा रही बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न कर्मचारी संघ और पेंशनर्स संगठन आयोग के सामने अपनी-अपनी मांगे रखेंगे. इसमें फिटमेंट फैक्टर, DA और HRA का मुद्दा उठ सकता है. इसके बाद 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक होगी.
साल में 4 बार बढ़े DA
वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) साल में दो बार (जनवरी और जुलाई) संशोधित किया जाता है, लेकिन अब बढ़ती महंगाई को देखते हुए कई कर्मचारी संगठनों ने यह मांग रखी है कि DA की समीक्षा अब साल में 4 बार यानी कि हर 3 महीने में की जाए महंगाई के असर से कुछ हद तक बचा स जा सके.&amp;nbsp;
25% DA पर बेसिक पे पर मर्जर
शनल काउंसिल (NC-JCM) सहित कुछ अन्य संगठनों ने मांग की है कि महंगाई भत्ता (DA) 25% होने पर उसे बेसिक पे में मिला दिया जाए. इससे आने वाले समय में कर्मचारियों की सैलरी और HRA, TA जैसे भत्तों का कैलकुलेशन बढ़े हुए बेस पर होगी, जिससे वेतन में तेजी से बढ़ोतरी होगी. बता दें कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों का DA 60% के पार चल रहा है.&amp;nbsp;
कर्मचारियों की कुछ अन्य मांगे

कर्मचारियों की मांग हर 10 साल की जगह हर 5 साल में फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (MACP) की है.
कुछ संगठनों ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है ताकि उस हिसाब से बेसिक पे भी बढ़ जाए.&amp;nbsp;
7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट को 3 माना गया था, जिसे अब आठवें वेतन आयोग में बढ़ाकर 5 करने की मांग की जा रही है.&amp;nbsp;

बता दें कि अभी कर्मचारी संगठनों द्वारा दी गई मांगें और सुझाव दिए जा रहे हैं. इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है. हालांकि, इसे 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा.

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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इस हफ्ते 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, देखें 14 से 20 सितंबर तक RBI का हॉलिडे कैलेंडर</title>
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        <description><![CDATA[ इस हफ्ते यानी 14 सितंबर से 20 सितंबर 2026 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक कई दिन बंद रहने वाले हैं. हालांकि सभी राज्यों और शहरों में एक ही दिन छुट्टी नहीं होने वाली है. RBI की हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार इस हफ्ते अलग-अलग जगहों पर छुट्टियों की वजह से बैंक ब्रांच बंद रहेंगी. इसके अलावा रविवार की छुट्टी भी रहने वाली है.&amp;nbsp;
इस हफ्ते कितने दिन बंद रहेंगे बैंक?बता दें कि 14 से 20 सितंबर के बीच बैंक 4 दिन तक बंद रह सकते हैं. हालांकि ये छुट्टियां शहर और राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं. इसका मतलब ये है कि अगर आपके शहर में किसी दिन बैंक की छुट्टी है तो जरूरी नहीं कि उसी दिन दूसरे शहरों में भी बैंक बंद हों. इसलिए ब्रांच जाने से पहले अपने शहर की छुट्टी जरूर चेक कर लें. &amp;nbsp;
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14 सितंबर को बैंक क्यों बंद रहेंगे?14 सितंबर, सोमवार को गणेश चतुर्थी समेत अलग-अलग जगहों पर स्थानीय त्योहारों के कारण कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे. इस दिन महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में बैंकिंग सेवाओं पर छुट्टी रहने वाली है.&amp;nbsp;
15 सितंबर को क्यों है छुट्टी?15 सितंबर को जैन समुदाय का पर्व संवत्सरी है और ओडिशा का कृषि उत्सव नुआखाई भी है. साथ ही इस दिन गणेश चतुर्थी का दूसरा दिन भी है. इन्हीं त्योहारों के कारण बैंक ब्रांच बंद रह सकती हैं. इसलिए अगर आपका काम बैंक की ब्रांच में जाकर ही पूरा होना है तो तारीख और अपने शहर की छुट्टी पहले देख लेना सही रहेगा.
16 सितंबर को कहां बैंक बंद रहेंगे?16 सितंबर को भी कुछ जगह जैसे गोवा में क्षेत्रीय छुट्टी है. RBI की छुट्टियों की व्यवस्था में बैंक हॉलिडे पूरे देश के लिए एक जैसी नहीं होती है. अलग-अलग बैंकिंग सेंटर के हिसाब से छुट्टी तय की जाती है. यही कारण है कि SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, PNB और दूसरे बैंक भी अलग-अलग शहरों में उसी RBI कैलेंडर के हिसाब से अपनी ब्रांच बंद रखते हैं.&amp;nbsp;
सोना-चांदी पर बड़ी अपडेट, आज क्या है 10 ग्राम गोल्ड और 1 किलो सिल्वर का भाव?
20 सितंबर को रविवार की छुट्टी20 सितंबर, रविवार को देशभर में बैंक ब्रांच बंद रहने वाली है. रविवार की छुट्टी सभी बैंकों पर लागू होती है. इससे पहले 19 सितंबर शनिवार है. ऐसे में ये भी देखना जरूरी है कि महीने का कौन-सा शनिवार है, क्योंकि दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं, जबकि पहले और तीसरे शनिवार को बैंक खुले रहते हैं. &amp;nbsp;
बैंक बंद हैं तो कैसे होगा काम?बैंक की ब्रांच बंद होने का मतलब ये नहीं है कि सभी बैंकिंग सेवाएं बंद हो जाएंगी. छुट्टी के दौरान आमतौर पर बैंक के UPI, मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. ग्राहक बैलेंस चेक करने, पैसे ट्रांसफर करने और बिल पेमेंट जैसे कई काम तो ऑनलाइन ही कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>खर्च करने में मुंबई&amp;दिल्ली छूटे पीछे, ये है देश की सबसे ज्यादा खर्चीली City</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में जब ज्यादा खर्च करने वाले शहरों की बात होती है, तो आमतौरपर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों का नाम सामने आता है. लेकिन एक नई रिपोर्ट ने इस तस्वीर को थोड़ा बदल दिया है. प्रति परिवार औसत खर्च के मामले में छोटे और मझोले शहर कई बड़े महानगरों से आगे निकल गए हैं. &#039;द मेनी अर्बन इंडियाज&#039; रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ सबसे ऊपर है, जबकि तिरुवनंतपुरम दूसरे नंबर पर है.
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर में भी परिवारों का औसत खर्च मुंबई के परिवारों से काफी ज्यादा है. लेकिन कुल उपभोग बाजार के मामले में बड़े महानगर अभी भी आगे हैं, क्योंकि वहां परिवारों की संख्या ज्यादा है.
सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शहर कौन से हैं?
चंडीगढ़ प्रति परिवार औसत उपभोग के मामले में सबसे आगे है. वहीं, तिरुवनंतपुरम अभी दूसरे स्थान पर है. अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर में भी औसत घरेलू खर्च मुंबई से ज्यादा बताया गया है. हालांकि, चंडीगढ़ की औसत सालाना घरेलू आय करीब 28.3 लाख रुपये बताई गई है. यहां परिवारों का खर्च भी देश के दूसरे शहरों के मुकाबले में काफी ज्यादा है.&amp;nbsp;
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मुंबई-दिल्ली क्यों नहीं हैं टॉप पर?
इस रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि मुंबई या दिल्ली की खर्च करने की क्षमता कम हो गई है. आबादी और ज्यादा कमाई वाले परिवारों की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से यह देश के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल हैं. बताया जा रहा है कि मुंबई में एक औसत परिवार की सालाना आय करीब 24.2 लाख रुपये है और वह करीब 14 लाख रुपये खर्च करता है.
दिल्ली-NCR में करीब 75 लाख परिवार हैं, जबकि मुंबई में करीब 46-47 लाख परिवार हैं. इसी बड़े परिवार के आधार की वजह से महानगर कुल खर्च के मामले में आगे रहते हैं.&amp;nbsp;
भारत के 100 शहरों में कितना होता है खर्च?
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के टॉप 100 शहर मिलकर सालाना करीब 844 अरब डॉलर का उपभोक्ता बाजार बनाते हैं. बड़ी बात यह है कि भारत की कुल आबादी का करीब 19% हिस्सा इन शहरों में रहता है, लेकिन ये शहर देश की इनकम और खपत में काफी बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं.
वहीं आंकड़े में बताया गया कि इन 100 शहरों में एक औसत परिवार का सालाना घरेलू खर्च करीब 12.1 लाख रुपये है. यानी भारत की शहरी अर्थव्यवस्था में अब सिर्फ बड़े महानगर ही नहीं, बल्कि छोटे और तेजी से विकसित शहर भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>गर्लफ्रेंड पर लुटाए 3.5 करोड़, ब्रेकअप होते ही कोर्ट पहुंचे भारतीय मूल के CEO</title>
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        <description><![CDATA[ रिलेशनशिप में रहते हुए प्यार के नाम पर अपनी गर्लफ्रेंड पर करोड़ों रुपये खर्च करना एक भारतीय मूल के CEO को भारी पड़ गया. सिंगापुर में एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी ने ब्रेकअप के बाद अपने एक्स-गर्लफ्रेंड पर खर्च किए गए 3.5 करोड़ रुपए की रकम वापस लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. लेकिन कोर्ट ने उनकी मांग को खारिज कर दिया.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सिंगापुर हाई कोर्ट का है, जहां भारत में लिस्टेड लॉजिस्टिक्स कंपनी TCI Express के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर चंदर अग्रवाल ने 2023 में ब्रेकअप के बाद अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड फेलिशिया ली के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. अग्रवाल ने दावा किया कि उन्होंने ली करीब 468,090 सिंगापुर डॉलर यानी भारतीय करेंसी में 3.5 करोड़ रुपए ब्याज मुक्त कर्ज के तौर पर दिए थे, जिसे वापस किया जाना चाहिए.&amp;nbsp;
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किन चीजों में खर्च हुए करोड़ों रुपये?
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, रिश्ते के दौरान चंदर अग्रवाल ने फेलिशिया ली के कई खर्चों का पेमेंट किया था. इन खर्चों में कई तरह के निजी खर्च और महंगी खरीदारी शामिल थीं.&amp;nbsp;

क्रेडिट कार्ड बिलों पर करीब 2.06 लाख सिंगापुर डॉलर खर्च किए गए, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.38 करोड़ रुपये हैं.
विदेश यात्राओं पर करीब 1.29 लाख सिंगापुर डॉलर यानी करीब 86.4 लाख रुपये खर्च हुए.
जीवन बीमा के प्रीमियम के लिए करीब 15,775 सिंगापुर डॉलर, जो भारतीय मुद्रा के रूप में 10.6 लाख रुपये दिए गए.
फेंगशुई से जुड़ी सलाह के लिए करीब 17,000 सिंगापुर डॉलर यानी 11.4 लाख रुपये खर्च किए.
स्टैनफोर्ड-एनयूएस के एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए करीब 30,000 सिंगापुर डॉलर यानी 20.1 लाख रुपये का पेमेंट किया गया.
इसके अलावा, हर्मेस, डायर, प्राडा और लुई विटॉन जैसे कई लग्जरी ब्रांड की खरीदारी भी इन खर्चों में शामिल थी.&amp;nbsp;

कोर्ट ने क्यों नहीं माना इसे कर्ज?
अग्रवाल का कहना था कि उन्होंने यह रकम अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड को कर्ज के तौर पर दिया था और ब्रेकअप के बाद इसे अब वापस किया जाना चाहिए. हालांकि, अदालत के सामने इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं रखा जा सका.&amp;nbsp;
सिंगापुर हाई कोर्ट ने 9 सितंबर को दिए फैसले में कहा कि यह रकम कर्ज के तौर पर नहीं, बल्कि रिश्ते के दौरान अपनी इच्छा से गिफ्ट के तौर पर दिए गए थे. अदलट के मुताबिक, मौजूदा सबूत इस बात की ओर इशारा करता है कि ये रकम रिलेशनशिप के दौरान दिए गए थे. इसलिए ब्रेकअप के बाद इसे कर्ज बताकर मांगना कानूनी तौर पर सही नहीं माना जा सकता है.&amp;nbsp;
CEO को कोर्ट से क्या मिल फैसला?
सिंगापुर हाई कोर्ट ने चंदर अग्रवाल का यह दावा खारिज कर दिया. इसका मतलब है कि वह अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड से 468,090 सिंगापुर डॉलर यानी करीब 3.5 करोड़ रुपये वापस नहीं ले पाएंगे. इसके अलावा, कोर्ट ने उन्हें फेलिशिया ली के कानूनी खर्चों का भुगतान करने का भी आदेश दिया है.
खर्च करने में मुंबई-दिल्ली छूटे पीछे, ये है देश की सबसे ज्यादा खर्चीली City
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>आपके बैंक खाते से लेन&amp;देन पर लग सकती है रोक, RBI से आई बड़ी खबर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके बैंक खाते में अचानक किसी संदिग्ध लेन-देन की पहचान होती है, तो आने वाले समय में उस रकम को कुछ समय के लिए रोक दिया जा सकता है. साथ ही जरूरत पड़ने पर पूरे खाते से पैसे निकलने या ट्रांसफर करने पर भी अस्थायी रोक लगा सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साइबर फ्रॉड और मनी-म्यूल अकाउंट से जुड़े खातों से निपटने के लिए एक जैसी प्रोसेस का ड्राफ्ट जारी किया है. इस नए प्रस्ताव का मकसद साइबर फ्रॉड के पैसे को आगे दसूरे खातों में जाने से रोकना है. फिलहाल यह प्रोसेस प्रस्तावित है और इस पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं.
किन बैंक खातों पर लग सकती है रोक?
अगर बैंक के ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम को कोई लेन-देन मनी-म्यूल गतिविधि या साइबर फ्रॉड से जुड़ा संदिग्ध लगता है, तो उस रकम को कुछ समय के लिए रोकने का प्रस्ताव है. प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, 1,000 रुपये या उससे ज्यादा का लेन-देन तभी संदिग्ध माना जाएगा, जब बैंक के सिस्टम में फ्रॉड से जुड़ा फ्लैग मिल हो.
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वहीं, अगर पूरा बैंक खाता ही मनी-म्यूल अकाउंट के लिए इस्तेमाल होने का संदेह हो, तो उस खाते से पैसे निकालने या ट्रांसफर करने पर भी अस्थायी रोक लगाई जा सकती है.&amp;nbsp;
मनी-म्यूल अकाउंट क्या होता है?
मनी-म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड या किसी गैरकानूनी तरीके से मिले पैसे को लेने और फिर उसे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है. हालांकि, कई बार लोग जानबूझकर अपना खाता इसके लिए इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के अपना बैंक अकाउंट किसी दूसरे शख्स को इस्तेमाल करने को दे देते हैं.
खाता होल्ड होने पर ग्राहक को क्या मिलेगा?
अगर बैंक किसी खाते पर अस्थायी डेबिट रोक लगाता है, तो उसे ग्राहक को इसकी नोटिस पहले देनी होगी. नोटिस में रोक लगाने की वजह, उसे हटाने की प्रोसेस और लेन-देन के बारे में जानकारी देना होगा. हालांकि, ग्राहक को अपना जवाब देने के लिए 20 दिन तक का समय मिल सकता है. वहीं, अस्थायी डेबिट रोक आमतौर पर 60 दिन तक रह सकती है. &amp;nbsp;
कब से लागू हो सकते हैं नए नियम?
फिलहाल RBI का यह ड्राफ्ट नियम हैं, आखिरी नियम नहीं. RBI ने इस पर लोगों को अपनी सुझाव देने की आखिरी तारीख 2 अक्टूबर 2026 रखी है. प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं.&amp;nbsp;
गर्लफ्रेंड पर लुटाए 3.5 करोड़, ब्रेकअप होते ही कोर्ट पहुंचे भारतीय मूल के CEO
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Zomato पर खाना ऑर्डर करना हुआ और महंगा, कैश पेमेंट पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी Zomato से खाना ऑर्डर करते समय ऑनलाइन पेमेंट के बजाय कैश में पेमेंट करना पसंद करते हैं, तो अब आपको इसके लिए ज्यादा रकम देने पड़ सकते हैं. कंपनी ने कैश ऑन डिलीवरी यानी CoD से ऑर्डर करने वाले ग्राहकों से एक्स्ट्रा चार्ज लेना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चार्ज काम से कम 5 रुपए है, जबकि कुछ जगहों पर यह रकम करीब 20 रुपये तक पहुंच रही है. ऐसे में आइए जानते हैं Zomato के इस नए चार्ज से जुड़ी खास बातें.
कैश ऑन डिलीवरी पर कितना लगेगा चार्ज?
Zomato ने Cosh on Delivery (CoD) वाले कुछ ऑर्डर पर एक्स्ट्रा चार्ज लेना शुरू किया है. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस चार्ज की जानकारी शेयर की है.इस चार्ज की शुरुआती कीमत काम से कम 5 रुपए बताया जा रहा है. वहीं कुछ ग्राहकों के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर यह चार्ज करीब 20 रुपए है. यानी ऑनलाइन पेमेंट के बजाय कैश में पेमेंट करना अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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खाने के ऑर्डर पर पहले से लगते हैं ये चार्ज
Zomato से खाना ऑर्डर करते समय सिर्फ खाने की कीमत ही नहीं चुकानी पड़ सकती है, बल्कि ऑर्डर के हिसाब से कई दूसरे चार्ज भी बिल में जुड़ सकते हैं.&amp;nbsp;

डिलीवरी चार्ज
प्लेटफॉर्म फीस
खाने के सामान पर GST
डिलीवरी पार्टनर फीस पर GST
प्लेटफॉर्म फीस पर GST
रेस्टोरेंट पैकिंग चार्ज
कैश ऑन डिलीवरी का एक्स्ट्रा चार्ज&amp;nbsp;

Zomato ने पहले भी बढ़ाई थी प्लेटफॉर्म फीस
दरअसल, Zomato ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए इस साल मार्च में प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी. यह चार्ज 12.50 रुपए से बढ़ाकर 14.90 रुपए कर दिया गया था. फिलहाल कंपनी के मोबाइल ऐप पर मौजूदा जानकारी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म फीस 14.99 रुपये (GST को छोड़कर) दिखाई जा रही है.
Swiggy और Zepto पर क्या है हाल?
Zomato के मुकाबले Swiggy ने अभी तक कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर के लिए अलग से ऐसा चार्ज लगाने की शुरुआत नहीं की है. वहीं, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto पे भी कुछ ग्राहकों ने कैश पेमेंट वाले ऑर्डर पर 25 रुपये तक अतिरिक्त चार्ज जोड़ने का आरोप लगाया है. हालांकि, इस नए CoD चार्ज को लेकर Zomato की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>आज कितने रुपए लीटर हुआ पेट्रोल और डीजल? देखें ताजा रेट लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर हर दिन लोगों की नजर बनी रहती है. खासकर गाड़ी चलाने वाले लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम में होने वाला छोटा बदलाव भी बजट पर असर डालता है. ऐसे में अगर आप भी आज अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जान लें.
आज 13 सितंबर 2026 को देश के खास- खास शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. हालांकि अलग-अलग राज्यों में टैक्स और शुल्क के कारण ईंधन की कीमतें अलग रहती हैं.
दिल्ली में क्या है भाव?राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत करीब 102.12 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल के लिए लोगों को करीब 95.20 रुपए प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं.
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मुंबई में कितना है दाम?मुंबई में पेट्रोल की कीमत दिल्ली के मुकाबले ज्यादा है. यहां आज पेट्रोल करीब 111.21 रुपए प्रति लीटर और डीजल करीब 97.83 प्रति लीटर बिक रहा है.
कोलकाता में आज का रेट क्या है?कोलकाता की बात करें तो यहां आज पेट्रोल करीब 113.51 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल की कीमत करीब 99.82 रुपए प्रति लीटर बनी हुई है.
चेन्नई में पेट्रोल-डीजल का भावचेन्नई में आज पेट्रोल करीब 107.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल करीब 99.55 रुपए प्रति लीटर है.
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क्यों अलग-अलग होते हैं दाम?पेट्रोल और डीजल की कीमत हर शहर में एक जैसी नहीं होती है. इसके पीछे राज्य सरकारों के टैक्स, स्थानीय शुल्क, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और कच्चे तेल की कीमत जैसे कई कारण होते हैं. यही वजह है कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट में अंतर देखने को मिलता है.
कैसे चेक कर सकते हैं पेट्रोल-डीजल का रेट?तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को रोज अपडेट किया जाता है. ऐसे में पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम आप इंडियन ऑयल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या एक एसएमएस भेजकर चेक कर सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>गैस सिलेंडर के दाम पर आज आया बड़ा अपडेट, जानें आपके शहर में LPG का नया रेट</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर में करोड़ों परिवार खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में हर महीने गैस सिलेंडर के दाम में होने वाले बदलाव पर लोगों की नजर रहती है. अगर आप भी आज एलपीजी सिलेंडर बुक करने वाले हैं तो आपके लिए आज के रेट की पूरी जानकारी जरूरी है.
आज 13 सितंबर 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है. यानी ग्राहकों को फिलहाल पिछले रेट पर ही 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर मिल रहा है. नोएडा में आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर का भाव 939.50 रुपए है.&amp;nbsp;
दिल्ली में आज गैस सिलेंडर कितने का है?राजधानी दिल्ली में आज 14.2 किलो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपए है. यानी दिल्ली में गैस सिलेंडर नोएडा के मुकाबले थोड़ा महंगा है. &amp;nbsp;
आज कितने रुपए लीटर हुआ पेट्रोल और डीजल? देखें ताजा रेट लिस्ट
नोएडा में आज एलपीजी सिलेंडर का रेटनोएडा में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत आज 939.50 रुपए है. सितंबर महीने में अब तक इस कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1 सितंबर से 12 सितंबर तक भी नोएडा में एलपीजी का रेट 939.50 रुपए ही रहा है. &amp;nbsp;
मुंबई में एलपीजी का आज का भावमुंबई में आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर 941.50 रुपए में मिल रहा है. फिलहाल यहां भी घरेलू गैस की कीमत में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है.
कोलकाता में एलपीजी सिलेंडर का रेटकोलकाता में 14.2 किलो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत आज 968 रुपए है. ये दिल्ली और मुंबई के मुकाबले ज्यादा है. &amp;nbsp;
चेन्नई में आज एलपीजी का भावचेन्नई में घरेलू एलपीजी सिलेंडर आज 957.50 रुपए में मिल रहा है. यहां भी फिलहाल कीमत स्थिर बनी हुई है. &amp;nbsp;
Zomato पर खाना ऑर्डर करना हुआ और महंगा, कैश पेमेंट पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज
क्या आज एलपीजी सिलेंडर सस्ता हुआ?आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई नई कटौती नहीं हुई है. इसलिए अगर आप 200 रुपए की कटौती वाली खबरें देख रहे हैं तो ये 19 किलो कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर से जुड़ी हो सकती हैं. अगस्त में कमर्शियल एलपीजी की कीमत में 200 रुपए से ज्यादा की कटौती हुई थी, लेकिन घरेलू एलपीजी के रेट में उस समय बदलाव नहीं किया गया था. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सहारा अब किसके कब्जे में है, कौन लौटा रहा है निवेशकों के पैसे?</title>
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        <description><![CDATA[ एक समय था जब देश के घर-घर में सहारा इंडिया का नाम जाना जाता था. छोटे शहरों और गांवों के लाखों लोगों ने सहारा की अलग-अलग योजनाओं में अपना पैसा लगाया था. लोगों को उम्मीद थी कि जरूरत के समय उनका पैसा वापस मिल जाएगा.
लेकिन समय के साथ सहारा की मुश्किलें बढ़ती गईं. निवेशकों के पैसे को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा और धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भी कमजोर होता चला गया. आज भी लाखों लोगों का पैसा सहारा से जुड़ा हुआ है और लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर उनका पैसा कब वापस मिलेगा. साथ ही सवाल ये भी है कि सुब्रत रॉय के जाने के बाद सहारा अब किसके पास है और निवेशकों को पैसा कौन लौटा रहा है?
सुब्रत रॉय के बाद सहारा का क्या हुआ?सहारा इंडिया के संस्थापक सुब्रत रॉय का नवंबर 2023 में निधन हो गया था. उनके जाने के बाद ये सवाल उठने लगा कि अब सहारा का क्या होगा. लेकिन ऐसा नहीं है कि सुब्रत रॉय के निधन के बाद पूरा सहारा किसी एक व्यक्ति या कंपनी के हाथ में चला गया है.
सहारा की अलग-अलग कंपनियां और उनकी संपत्तियां अलग-अलग कानूनी मामलों में हैं. यानी आज की तारीख में ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि सहारा अब फलां व्यक्ति के कब्जे में है.&amp;nbsp;
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क्या अडाणी ने खरीद लिया पूरा सहारा?दरअसल साल 2025 में सहारा की तरफ से अपनी कुछ बड़ी संपत्तियों को अडाणी प्रॉपर्टीज को बेचने का प्रस्ताव सामने आया था. इसमें करीब 88 संपत्तियों की बात कही गई थी.
इन संपत्तियों में महाराष्ट्र की एंबी वैली और लखनऊ की सहारा सिटी जैसी बड़ी प्रॉपर्टी भी शामिल बताई गई थीं. कुछ संपत्तियों को बेचने का प्रस्ताव और पूरा सहारा ग्रुप खरीद लेना, दोनों अलग बातें हैं. तो हां, अडाणी ने सहारा नहीं खरीदा है.&amp;nbsp;
फिर निवेशकों का पैसा कौन लौटा रहा है?सहारा में जिन लोगों का पैसा फंसा है, उनके लिए रिफंड का प्रोसेस सरकार और अदालत के निर्देशों के अनुसार चल रहा है. खासकर सहारा की चार को-ऑपरेटिव सोसायटियों में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया है. इस पोर्टल से जमाकर्ता अपने पैसे के लिए दावा कर सकते हैं. उनके डॉक्यूमेंट्स और रिकॉर्ड की जांच के बाद पैसा वापस कर दिया जाता है.
CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल क्या है?सरकार ने जुलाई 2023 में CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया था. इसका मकसद सहारा की चार को-ऑपरेटिव सोसायटियों में पैसा जमा करने वाले लोगों को उनका पैसा वापस दिलाना है.
चार को- ऑपरेटिव सोसायटियों ये हैं-

सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड&amp;nbsp;
हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
स्टार्स मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड

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क्या सहारा खुद पैसा लौटा रहा है?रिफंड की प्रोसेस ऐसा नहीं है कि सीधे सहारा कंपनी ने पैसे निकाले और लोगों को लौटा दिए. सहारा से जुड़े पैसों और संपत्तियों को लेकर अदालत और सरकारी एजेंसियों ने निगरानी रखी है. ऐसे में सारे जांच के बाद ही निवेशकों को पैसा वापस किया जा रहा है. यानी निवेशकों का पैसा वापस दिलाने में CRCS, SEBI और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों अहम किरदार निभा रहे हैं.
पैसा कब तक मिलेगा?रिफंड का प्रोसेस अभी चल ही रहा है और हर निवेशक को एक ही तारीख पर पूरा पैसा नहीं मिल सकता है. पहले ये देखा जाता है कि व्यक्ति का दावा सही है या नहीं, उसके डॉक्यूमेंट्स ठीक हैं या नहीं और वो रिफंड के नियम में आते हैं या नहीं. इसके बाद ही पेमेंट किया जाता है.
इसलिए अगर आपका पैसा सहारा में फंसा है तो सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक रिफंड प्रोसेस की जानकारी लेना चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सस्ते सोलर सामान पर अमेरिका ने लगाया भारी टैक्स, अब महंगे होंगे पैनल</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर सेल और पैनल पर बड़ा झटका दिया है. U.S. Department of Commerce ने इन देशों से होने वाले सोलर आयात पर भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई है. भारत के सोलर उत्पादों पर 123.04 फीसदी का एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाया गया है.&amp;nbsp;
अमेरिका का कहना है कि इन देशों के निर्माता अमेरिकी बाजार में सोलर उत्पाद कम कीमत पर बेच रहे थे और उन्हें सरकारों से ऐसी सब्सिडी मिल रही थी जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा था. इस फैसले के बाद अब भारतीय सोलर कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने प्रोडक्ट बेचना महंगा हो जाएगा.&amp;nbsp;
सोलर पैनल पर कितना टैक्स लगा?भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए 123.04 फीसदी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाया गया है. इंडोनेशिया के लिए ये 94.36 फीसदी और लाओस के लिए 65.43 फीसदी है. इसके अलावा काउंटरवेलिंग ड्यूटी भी लागू होगा.&amp;nbsp;
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अमेरिका ने क्यों लिया ये फैसला?अमेरिका में कुछ घरेलू सोलर कंपनियों ने भारत समेत इन देशों से आने वाले सस्ते सोलर प्रोडक्ट्स को लेकर शिकायत की थी. अमेरिकी जांच में पाया गया कि इन देशों के निर्माता अपने प्रोडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में बहुत कम कीमत पर बेच रहे थे. साथ ही, अमेरिका ने आरोप लगाया कि इन देशों की सरकारों की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी से भी प्रोडक्ट को फायदा मिल रहा है.&amp;nbsp;
कंपनियों पर क्या असर होगा?इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो अमेरिकी बाजार में सोलर सेल और मॉड्यूल निर्यात करती हैं. अगर किसी कंपनी के उत्पाद पर 100 फीसदी से ज्यादा का शुल्क लगता है तो अमेरिकी बाजार में उसका दाम काफी बढ़ सकता है. कंपनियों के सामने अब दो ऑप्शन होंगे, या तो इस लागत का कुछ हिस्सा खुद उठाएं या फिर इसे अमेरिकी खरीदारों पर डालें.
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क्या भारत में सोलर पैनल महंगे होंगे?
अमेरिका का ये शुल्क सीधे भारत में बिकने वाले सोलर पैनल पर लागू नहीं होता है. यानी सिर्फ इस फैसले की वजह से भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए सोलर पैनल की कीमत तुरंत बढ़ना जरूरी नहीं है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ATM से फटा या गंदा नोट निकला? समझें अपने अधिकार, RBI ने बनाए नियम</title>
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        <description><![CDATA[ आपने अक्सर यह देखा होगा कि कभी-कभी ATM से रकम निकालने के दौरान कटे-फटे नोट निकल जाते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोगों को यह लगता है कि ATM से खराब नोट निकलने के बाद अब उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. अगर ATM से पैसे निकालते समय आपके हाथ में भी कटे-फटे नोट या गंदे नोट आ जाएं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नियम तय कर रखें. ऐसे नोट मिलने पर आप बैंक से संपर्क करके उन्हें बदलवा सकते हैं. लेकिन इसके लिए सही प्रोसेस जानना बेहद जरूरी है, ताकि बैंक में आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.&amp;nbsp;
ATM से खराब नोट निकले तो सबसे पहले क्या करें?
RBI के मुताबिक, सबसे पहले उस बैंक की शाखा से जल्द से जल्द संपर्क करें, जिस बैंक के ATM से आपने पैसे निकाले हैं. साथ ही इसके लिए बैंक को एक लिखित आवेदन देकर ATM से कैश निकालने की तारीख, समय,स्थान और निकाली गई रकम की जानकारी दें.
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अगर ATM से मिली ट्रांजैक्शन स्लिप आपके पास है, तो उसकी कॉपी या स्लिप आवेदन के साथ जमा करें. वहीं अगर आपके पास स्लिप मौजूद नहीं है, तो मोबाइल पर आया बैंक का SMS या ट्रांजैक्शन की जानकारी भी प्रमाण के तौर पर दिखाई जा सकती है.&amp;nbsp;
एक बार में कितने नोट बदलवा सकते हैं?
RBI के नियमों के मुताबिक, सामान्य तौर पर एक बार में आप अधिकतम 20 नोट बदलने के लिए बैंक में दे सकते हैं. लेकिन ध्यान रहें कि इन सभी नोटों की कुल कीमत 5,000 रुपये से ज्यादा न हो. ऐसे में अगर आपकी नोटों की संख्या या कुल रकम इससे ज्यादा है, तो बैंक के नियमों के मुताबिक अलग प्रोसेस अपनाई जा सकती है. इसलिए बैंक जाने से पहले नोटों की संख्या और उनकी कुल वैल्यू जरूर चेक करें.
नोट बदलने के लिए क्या देना होगा फीस?
फटे या गंदे को बदलने के लिए बैंक की ओर से आपसे अलग से कोई फीस नहीं लिया जाना चाहिए. इसलिए अगर कोई व्यक्ति इस सेवा के लिए आपसे एक्स्ट्रा पैसे मांगता है, तो इसकी जानकारी को लेकर आप शिकायत की जा सकती है.
बैंक नोट बदलने से मना करे तो क्या करें?
अगर आपने ATM से खराब नोट निकलने के बाद बैंक में शिकायत की है, लेकिन बैंक आपकी शिकायत पर कारवाई नहीं करता है या नोट बदलने से इनकार करता है, तो आप RBI के शिकायत निवारण सिस्टम के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
किन नोटों को बदलवाना मुश्किल हो सकता है?&amp;nbsp;
ध्यान रहें कि हर तरह के खराब नोट को सामान्य प्रोसेस के तहत बदलना मुमकिन नहीं है. अगर कोई नोट पूरी तरह टुकड़ों में बंट चुका है, बुरी तरह जल गया है या उसकी हालत इतनी खराब है कि उसे पहचान करना मुश्किल हो, तो बैंक उसे बदलने से इनकार कर सकता है. &amp;nbsp;
नोट बदलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान&amp;nbsp;

नोट असली होना चाहिए.&amp;nbsp;
नोट पर सीरियल नंबर, महात्मा गांधी का वॉटरमार्क और गवर्नर के हस्ताक्षर जैसे सुरक्षा चिन्ह साफ दिखाई देने चाहिए.
फटे या गंदे नोट को बदलने के लिए बैंक को अलग से कोई फीस न दें.&amp;nbsp;
सबसे जरूरी बात यह है कि खराब नोट मिलने के बाद उसे फेंकने या किसी दूसरे व्यक्ति को देने के बजाय अपने पास संभालकर रखें.

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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बहुत जल्द मिलेगी अच्छी खबर, कनाडा संग डील पर बोले ट्रंप, क्या थमने वाला है ट्रेड वॉर?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बहुत-जल्द-मिलेगी-अच्छी-खबर-कनाडा-संग-डील-पर-बोले-ट्रंप-क्या-थमने-वाला-है-ट्रेड-वॉर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बहुत-जल्द-मिलेगी-अच्छी-खबर-कनाडा-संग-डील-पर-बोले-ट्रंप-क्या-थमने-वाला-है-ट्रेड-वॉर</guid>
        <description><![CDATA[ भारत में ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को लेकर बड़ा ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और कनाडा के बीच जल्द ही ट्रेड डील होने वाली है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. ट्रंप के बयान से सवाल उठता है कि क्या अब यूएस और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर खत्म होने वाला है?
ट्रंप ने कनाडा के साथ डील को लेकर क्या कहा?
आयरलैंड में प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन के साथ मुलाकात के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कनाडा के साथ व्यापार समझौते को लेकर सवाल पूछा गया. जिसके बाद ट्रंप ने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और जल्द ही दोनों देशों के बीच डील देखने को मिल सकती है.
उन्होंने अमेरिकी किसानों के लिए बेहतर व्यापारिक शर्तों की भी मांग की है. वहीं, ट्रंप का कहना है कि कनाडा को अमेरिकी किसानों पर लगाए गए टैरिफ और दूसरे शुल्क को हटाने होंगे.&amp;nbsp;
ATM से फटा या गंदा नोट निकलने पर क्या है आपका अधिकार? जानें RBI का नियम
आखिर अमेरिका-कनाडा के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर काफी समय से तनाव चल रहा है, लेकिन यह विवाद सिर्फ टैरिफ तक ही सीमित नहीं रहा है. दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव ऑटोमोबाइल जैसे बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन के लिए भी परेशानी की वजह बन गया है. इससे पहले अगस्त में दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आखिरी समय नाकाम हो गई थी. जिसके बाद अमेरिका ने कनाडा के कई सामानों पर भारी शुल्क लगाने का रुख अपनाया.
इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान और स्टील उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया. यह मुद्दा यही तक खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसके बाद दोनों तरफ से एक के बाद एक जवाबी कदम उठाए गए, जिससे यह व्यापारिक तनाव और ज्यादा गहरा गया. हालांकि, भारत में ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के बीच ट्रंप के ताजा बयान से अब बातचीत और समझौते की उम्मीद एक बार फिर बनती हुई दिखाई दे रही है.
क्या थमने वाला है अमेरिका-कनाडा का ट्रेड वॉर?
ट्रंप के ताजा बयान से दोनों देशों के बीच विवाद सुलझने की एक उम्मीद जरूर जागी है, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर पूरी तरह खत्म होने वाला है. ट्रंप ने डील को लेकर एक उम्मीद जरूर दिया है, लेकिन औपचारिक बातचीत और ट्रैफिक को लेकर किसी ठोस समझौते को साफ नहीं किया है.&amp;nbsp;
सस्ते सोलर सामान पर अमेरिका ने लगाया भारी टैक्स, अब महंगे होंगे पैनल
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बहुत, जल्द, मिलेगी, अच्छी, खबर, कनाडा, संग, डील, पर, बोले, ट्रंप, क्या, थमने, वाला, है, ट्रेड, वॉर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बैंकों के पास पैसों की भरमार, RBI बाजार से खींचेगा 1 लाख करोड़, लेकिन क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बैंकों-के-पास-पैसों-की-भरमार-rbi-बाजार-से-खींचेगा-1-लाख-करोड़-लेकिन-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी हुई नकदी को कम करने के लिए एक अहम कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने सरकारी बॉन्ड की ओपन मार्केट बिक्री (OMO) के जरिए बाजार में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री करने का फैसला किया है. हालांकि, यह बिक्री सितंबर में तीन अलग-अलग चरणों में होगी.&amp;nbsp;
दरअसल, भारतीय बैंकिंग सिस्टम में इस वक्त जरूरत से पैसों की भरमार है. इससे रातोंरात मिलने वाली ब्याज दरें रेपो रेट से नीचे चली गई हैं. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अतिरिक्त पैसा को सिस्टम से बाहर निकालकर बाजार में ब्याज दरों को संतुलित रखना चाहता है.&amp;nbsp;
तीन किस्तों में होगी 1 लाख करोड़ के बॉन्ड की बिक्री
RBI के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज की OMO बिक्री तीन नीलामियों के जरिए की जाएगी.&amp;nbsp;

17 सितंबर 2026: 50,000 करोड़ रुपये
21 सितंबर 2026: 25,000 करोड़ रुपये
28 सितंबर 2026: 25,000 करोड़ रुपये

इन तीनों बिक्री को मिलाकर कुल रकम 1 लाख करोड़ रुपये होगी. वहीं इसकी नीलामी मल्टीपल-प्राइस मेथड के जरिए की जाएगी.
बहुत जल्द मिलेगी अच्छी खबर, कनाडा संग डील पर बोले ट्रंप, क्या थमने वाला है ट्रेड वॉर?
बैंकों में क्यों बढ़ गई इतनी ज्यादा रकम?
दरअसल, बैंकिंग सिस्टम में अचानक इतनी ज्यादा रकम बढ़ने की एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा का भारी प्रवाह भी है. विशेष फॉरेक्स स्कीम के तहत बैंकों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा करीब 127 अरब डॉलर जुटाए. यानी भारतीय करेंसी में यह रकम करीब 12.16 करोड़ रुपए है. इससे RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी हुई और बैंकिंग सिस्टम में रुपये की लिक्विडिटी भी बढ़ गई.
इसका नतीजा यह हुआ कि इस सप्ताह बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही. यानी इन दिनों बैंकों के पास उनकी जरूरत के हिसाब से काफी ज्यादा पैसे मौजूद है. &amp;nbsp;
RBI को ज्यादा रकम बाजार से क्यों निकालना पड़ रहा है?
RBI के मुताबिक, जब बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा पैसा होता है, तो ऐसे में बैंक कम ब्याज दर पर भी पैसा उधार देने के लिए तैयार हो सकते हैं. जिसका सीधा असर शॉर्ट टर्म ब्याज दरों पर पड़ता है. यही वजह है कि मौजूदा स्थिति में ओवरनाइट ब्याज दरें RBI की पॉलिसी रेपो रेट से नीचे जाने लगी थीं. ऐसे में RBI ने अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से बाहर निकालने का ऐलान किया है.&amp;nbsp;
OMO के जरिए पैसा कैसे निकलता है?
ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के जरिए RBI बाजार में सरकारी बॉन्ड खरीदता या बेचता है. ऐसे में जब RBI सरकारी बॉन्ड बेचता है, तो बैंक और दूसरे पात्र निवेशक उन्हें खरीदने के लिए पैसे देते हैं. यानी आम लफ्जों में समझें तो RBI जब बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड बाजार में बेचता है, तो बॉन्ड सप्लाई बढ़ती है.&amp;nbsp;
RBI के ऐलान का बॉन्ड बाजार पर क्या असर पड़ा?
RBI के OMO सेल के ऐलान के बाद इसका असर सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी देखने को मिला. बॉन्ड यील्ड में तेजी आई और 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.035% पहुंच गई. वहीं 5 साल के बॉन्ड की यील्ड भी बढ़कर 6.6222% हो गई.
ATM से फटा या गंदा नोट निकलने पर क्या है आपका अधिकार? जानें RBI का नियम
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैंकों, के, पास, पैसों, की, भरमार, RBI, बाजार, से, खींचेगा, लाख, करोड़, लेकिन, क्यों</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पैसा वापस मिल गया, फिर भी नहीं बचेंगे विजय माल्या, ED ने ऐसा क्यों कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पैसा-वापस-मिल-गया-फिर-भी-नहीं-बचेंगे-विजय-माल्या-ed-ने-ऐसा-क्यों-कहा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पैसा-वापस-मिल-गया-फिर-भी-नहीं-बचेंगे-विजय-माल्या-ed-ने-ऐसा-क्यों-कहा</guid>
        <description><![CDATA[ भगौड़े कारोबारी विजय माल्या का मनी लॉन्ड्रिंग का केस पिछले कई सालों से चल रहा है. मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उन्हें भगौड़ा तक घोषित कर दिया गया है. हालांकि अब ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने पूरी रकम माल्या से रिकवर कर ली है, लेकिन फिर भी ईडी इस केस को बंद करने के लिए तैयार नहीं है. ईडी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से साफ कह दिया है कि माल्या के ऊपर आपराधिक कार्यवाही खत्म नहीं की जाएगी.
ED ने हाईकोर्ट में क्या कहा?दरअसल विजाय माल्या का मनी लॉन्ड्रिंग का केस कई सालों से चल रहा है. इस केस के तहत हाल ही में सुनवाई हुई है. जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या कहा कि वो माल्या को आखिरी मौका दे रहे हैं ये साफ करने का कि क्या वो भारत लौटकर अदालत के अधिकार क्षेत्र में खुद को पेश करेंगे. इस दौरान ईडी में भी जवाब देते हुए अपनी बात रखी है.&amp;nbsp;
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सुनवाई के दौरान ईडी ने माल्या के भारत से बाहर रहने और खुद को अदालत में पेश न करने का मुद्दा उठाया. ईडी ने कहा कि, &#039;उनकी लगातार अनुपस्थिति और उनका आचरण मौजूदा कार्यवाही की पूरी पृष्ठभूमि में प्रासंगिक बने हुए हैं.&#039; इस तथ्य को सामने रखते हुए ईडी ने हाईकोर्ट से कहा है कि वो कोई भी फैसला इस पर विचार करते हुए ही करे.
&#039;ये कारोबारी विवाद नहीं&#039;ईडी ने साफ कर दिया है कि ये मामला कोई कारोबारी विवाद नहीं है. बल्कि ये एक आपराधिक मामाला है. इसलिए माल्या से पैसा रिकवर करने के बाद भी ईडी नहीं चाहती है कि ये केस बंद हो. ईडी ने कहा, &#039;PMLA की धारा 8(8) के तहत संपत्तियों की बहाली उस व्यक्ति को संपत्ति वापस देने की कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उस संपत्ति पर वैध हित है. ये अपने आप में ये तय नहीं करती कि अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध हुआ है या नहीं.&#039;
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बता दें कि ईडी ने ये जवाब माल्या की उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने मांग की है कि इस लंबे समय से लंबित मामले को खत्म कर दिया जाए. उन्होंने कहा है कि उनके पहले ही कर्ज से ज्यादा रकम वसूल की जा चुकी है, ऐसे में इस मामले को अब खत्म किया जाए और उन्हें भारत वापस लौटने दिया जाए.
गौरतलब है कि ये मामला कई सालों से चल रहा है. माल्या ने साल 2016 में भारच छोड़ दिया था, जिसके बाद से ही वो ब्रिटेन में रह रहे हैं. साल 2019 में उन्हें इस केस के चलते भगौड़ा घोषित कर दिया गया था.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पैसा, वापस, मिल, गया, फिर, भी, नहीं, बचेंगे, विजय, माल्या, ने, ऐसा, क्यों, कहा</media:keywords>
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        <title>आसमान में छिड़ी लड़ाई, मुंबई से दिल्ली के सफर में कौन सी एयरलाइन है सबसे आगे?</title>
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        <description><![CDATA[ मुंबई और दिल्ली के बीच का आसमानी रास्ता काफी व्यस्त रहता है. इन दोनों शहरों के बीच उड़ान को लेकर इन दिनों दो बड़ी एयरलाइंस के बीच कड़ी टक्कर भी देखने को मिल रही है. तो वहीं तीसरी एयरलाइन ने तो अपनी उड़ानें ही दोगुनी कर दी हैं.
इंडिगो- एयर इंडिया की जंगअप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मुंबई-दिल्ली रूट पर इंडिगो के पास कुल सीटों का 42.8% हिस्सा था. वहीं एयर इंडिया ग्रुप (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) की हिस्सेदारी 41.9% रही. इसका मतलब है कि दोनों एयरलाइंस के बीच अंतर बहुत कम है.
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दिल्ली-मुंबई रूट क्यों है इतना जरूरी?मुंबई-दिल्ली देश के सबसे बड़े और कमाई वाले एयर रूट्स में से एक है. खास बात ये है कि जब देश के कई दूसरे जरूरी रूट्स पर सीटों की संख्या कम हो रही है, तब दिल्ली-मुंबई रूट पर सीट क्षमता बढ़ रही है. सितंबर में इस रूट पर करीब 6.77 लाख सीटें उपलब्ध थीं, जो पिछले साल की तुलना में 13.9% ज्यादा हैं. ये देश के किसी भी डोमेस्टिक एयर रूट पर सबसे ज्यादा सीट क्षमता है. इसके मुकाबले बेंगलुरु-दिल्ली रूट की सीट क्षमता 1.8%, मुंबई-चेन्नई 8.5% और मुंबई-हैदराबाद 9.5% घट गई है.
अकासा एयर की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारीइस रूट पर सबसे ज्यादा ध्यान अकासा एयर की बढ़त पर है. पिछले साल अप्रैल-सितंबर में उसकी सीट हिस्सेदारी करीब 6% थी, जो इस साल बढ़कर 10.7% हो गई है. अकासा ने इस अवधि में मुंबई-दिल्ली के बीच अपनी उड़ानों की संख्या लगभग दोगुनी करके 1,176 कर दी. इसके साथ ही उसने स्पाइसजेट को पीछे छोड़ते हुए इस रूट की तीसरी सबसे बड़ी एयरलाइन की जगह हासिल कर ली है. स्पाइसजेट की सीट हिस्सेदारी सिर्फ 4.4% रह गई है.
बता दें कि कासा सिर्फ दिल्ली-मुंबई रूट पर ही विस्तार नहीं कर रही है. नवी मुंबई-दिल्ली रूट पर भी उसकी सीट हिस्सेदारी 9.5% हो गई है. वहीं, मुंबई-नोएडा रूट पर सितंबर में सिर्फ 30 उड़ानें चलाने के बावजूद अकासा की सीट हिस्सेदारी 51.2% रही, यानी इस रूट पर वो इंडिगो से भी आगे निकल गई है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आसमान, में, छिड़ी, लड़ाई, मुंबई, से, दिल्ली, के, सफर, में, कौन, सी, एयरलाइन, है, सबसे, आगे</media:keywords>
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        <title>महीने के 60 हजार कमाती है गुरुग्राम की नौकरानी, मनी मैनेजमेंट उड़ा देगा आपके होश</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली से सटे हरियाणा के&amp;nbsp;गुरुग्राम में घरेलू काम करने वाली एक महिला की कमाई और पैसे संभालने के तरीके ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है. गुरुग्राम में नौकरी करने वाले एक शख्स ने लिंक्डइन पर बताया कि उनके घर काम करने वाली महिला हर महीने करीब 60 हजार रुपए कमाती है और खूब बचत भी करती है.&amp;nbsp;
शख्स ने बताया कि घरेलू काम करने वाली&amp;nbsp;महिला पांच से छह घरों में काम करती हैं. वह महीने में तीन से चार छुट्टियां लेती हैं. वह सुबह सात बजे से पहले अपना काम शुरू कर देती हैं और आय का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करती है.
कमाई से EMI भी भरती है महिला- शख्स
शख्स ने आगे बताया कि महिला हर महीने लगभग 10 हजार रुपये घर के किराए के रूप में देती हैं. इसके अलावा उनकी बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है, जिसकी शिक्षा का खर्च भी वह संभालती हैं. वह अपने गांव में खरीदी गई छह लाख रुपये की जमीन की EMI भी नियमित रूप से चुका रही है.
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शख्स का कहना है कि महिला अपनी कमाई को दिखावे या गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने के बजाय परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने पर ध्यान देती है. उनके मुताबिक, महिला के लिए बेटी की पढ़ाई और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं. परिवार की जिम्मेदारियां भी समझदारी से ही पूरी करती है.
शख्स ने कॉर्पोरेट कर्मचारियों से की महिला की तुलना
शख्स ने नौकरानी की कमाई और बचत की तुलना&amp;nbsp;कॉर्पोरेट कर्मचारियों की खर्च करने की आदतों से की. शख्स ने कहा कि कई नौकरीपेशा लोग कार, महंगे गैजेट और जीवनशैली से जुड़ी चीजों के लिए EMI लेते हैं. दूसरी ओर महिला खर्च नियंत्रित करके भविष्य के लिए तैयारी कर रही है. महिला के पास कॉर्पोरेट कर्मचारियों की तरह स्वास्थ्य बीमा, कर्मचारी सुविधाएं या नौकरी से जुड़े दूसरे वित्तीय सुरक्षा साधन नहीं हैं. इसके बावजूद वह अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एशिया में नौकरी के लिए सबसे बेस्ट कंपनियां कौनसी हैं? टॉप 100 में भारत का जलवा</title>
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        <description><![CDATA[ दुनियाभर में कई सारी बड़ी- छोटी कंपनियां, जिनमें लोग काम करते हैं. लेकिन इनमें से कौन सी कंपनी सबसे ज्यादा बेस्ट है इसका पता कैसे लग पाएगा? इसका पता लगता है कुछ रिपोर्ट्स और स्टडीज से. जैसे हाल ही में ग्रेट प्लेस टू वर्क ने एशिया की उन कंपनियों की 2026 की लिस्ट जारी की है, जहां कर्मचारियों को काम करने का बेहतर माहौल मिलता है. ये रैंकिंग कर्मचारियों की राय के आधार पर तैयार की गई है.
इस स्टडी में एशिया और मिडिल ईस्ट के करीब 89 लाख कर्मचारियों के अनुभवों को शामिल किया गया है. कर्मचारियों से कंपनी में भरोसा, नेतृत्व, काम का माहौल, नए विचारों को बढ़ावा, कंपनी की वैल्यू और उनके कुल अनुभव के बारे में पूछा गया. इसी के आधार पर दुनिया से टॉप 100 कंपनियों की लिस्ट बनाई गई है.
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देखें इस लिस्ट से टॉप 10 कंपनियांग्रेट प्लेस टू वर्क के मुताबिक, इस लिस्ट में शामिल होने का आधार कंपनी का आकार या कमाई नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वास्तविक अनुभव है. इस लिस्ट के मुताबिक बड़ी कंपनियों की कैटेगिरी मं ये 10 कंपनियां हैं:

हिलटन
मैरियोट इंटरनेशनल
सिस्को
एब्वी&amp;nbsp;
डीएचएल
इंटरकॉन्टिनेंटल होटल्स ग्रुप&amp;nbsp;
माइक्रो टेक्नोलॉजी
TP
एसेंचर
कैपेला

भारत की ये कंपनियां भी लिस्ट मेंइस पूरी रैंकिंग में भारत का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा. बड़ी कंपनियों की टॉप-100 लिस्ट में 34 कंपनियां भारत की हैं. इसके अलावा छोटी और मध्यम कंपनियों की लिस्ट में 6 भारतीय कंपनियां शामिल हैं.
भारत से शामिल प्रमुख कंपनियों में फ्लिपकर्ट ग्रुप, इंफोसिस, HDFC लाइफ इंश्योरेंस, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक, रिलायंस रिटेल, बजाज फाइनेंस, मैक्स हेल्थकेयर, Aye फाइनेंस, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक, जेनसर टेक्नोलॉजीज, एक्सपीरियन, एडलवीज लाइफ और HP Inc का नाम शामिल है.
छोटी और मध्यम भारतीय कंपनियां भी शामिलइनके अलावा इस लिस्ट में भारत की 6 छोटी और मध्यम कंपनियों का नाम भी है. इनमें NIA इंस्टीट्यूशंस, वहदम इंडिया, चैलेट होटल्स, सेरेंटिका रिन्यूबल इंडिया, किम्बल और LMS (लॉर्ड महावीरा सर्विसेज इंडिया) का नाम शामिल हैं.
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क्या पसंद कर रहे कर्मचारी?इस लिस्ट में शामिल कंपनियों में करीब 93% कर्मचारियों ने कहा कि उनकी कंपनी काम करने के लिए एक बेहतरीन जगह है. वहीं, ट्रस्ट इंडेक्स का औसत स्कोर 91% रहा. कर्मचारियों ने खास तौर पर इन चीजों को लेकर सकारात्मक राय दी जैसे, ऑफिस में सुरक्षा का अच्छा माहौल, नए कर्मचारियों का स्वागत और अपनापन, सभी के साथ समान व्यवहार इन सभी क्षेत्रों में कम से कम 95% कर्मचारियों ने सकारात्मक राय दी.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ब्रिक्स समिट 2026: क्या दिल्ली&amp;NCR में बंद रहेंगी शराब की दुकानें?</title>
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        <description><![CDATA[ BRICS Summit 2026: क्या आप दिल्ली-NCR में रहते हैं और आज-कल में बाहर घूमने या फिर शॉपिंग करने की सोच रहे हैं तो यह जानकारी आपके काम की है. दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वें BRICS Summit के कारण कई अहम कदम उठाए गए है और 11 सितंबर से ही दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. 11 सितंबर यानी आज स्कूल-कॉलेज और कोर्ट से लेकर सरकारी दफ्तर तक बंद है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ब्रिक्स समिट के कारण दिल्ली-एनसीआर में शराब की दुकानें भी बंद रहेंगी?
दिल्ली-NCR में बंद रहेंगी शराब की दुकानें?
ब्रिक्स समिट के चलते दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, लेकिन फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में शराब के ठेके बंद करने या फिर ड्राय डे घोषित करने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. यानी ब्रिक्स समिट के दौरान शराब की दुकानें या फिर सामान्य बाजारों को बंद करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ये जरूर है कि इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी दूसरे इलाके में पहुंचने में आपको दिक्कत हो सकती है.
आज से ही लागू हैं ट्रैफिक पाबंदियां
बता दें कि आज यानी 11 सितंबर से ही शिखर सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. इसका असर खासतौर पर सेंट्रल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों पर पड़ सकता है. अगर आप सेंट्रल दिल्ली या उसके आसपास के इलाके में घूमने या फिर दूसरे कारण से जा रहे हैं तो इस समय ट्रैफिक पाबंदियों के चलते आपको परेशानी हो सकती है.
आज कितने में मिलेगा 14.2 किलो वाला सिलेंडर? 1000 से कम या ज्यादा है कीमत?
ब्रिक्स समिट 12 &amp;nbsp;और 13 सितंबर को होगा&amp;nbsp;
इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. ये 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाला है. अगर जगह की बात करें तो ये नई दिल्ली के भारत मंडपम प्रगति मैदान में आयोजित होगा. इसी के चलते दिल्ली में जरूरी सुरक्षा फैसले लिए गए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ब्रिक्स, समिट, 2026:, क्या, दिल्ली-NCR, में, बंद, रहेंगी, शराब, की, दुकानें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Stock Market: सेंसेक्स ने पलटी बाजी, निचले स्तर से 200 अंक चढ़ा; निफ्टी में भी सुधार</title>
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        <description><![CDATA[ आज 11 सितंबर, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखी गई, जिससे हड़कंप मच गया. कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 742 अंक तक टूटकर 74,160.80 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 250 से अधिक अंक फिसलकर 23,231 पर पहुंच गया.
कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 742 अंक तक टूटकर 74,160.80 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 250 से अधिक अंक फिसलकर 23,231 पर पहुंच गया. चंद मिनटों में आई इस गिरावट के चलते निवेशकों के देखते ही देखते 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए.
हालांकि, शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बाद बाजार ने अपनी दमदार वापसी की. सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 200 अंक से अधिक रिकवरी की, जबकि निफ्टी भी सुधरकर 23,300 के स्तर के करीब पहुंच गया.&amp;nbsp;
बाजार को किसने दिया सहारा?
शेयर बाजार में गिरावट के बाद निचले स्तरों से &#039;वैल्यू बाइंग&#039; (सस्ते शेयरों की खरीदारी) देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 200 अंक ऊपर चढ़ गया और निफ्टी ने मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 23,250 के स्तर को फिर से हासिल करने में कामयाब रहा. इसे आज आईटी शेयरों का सहारा मिला.
ट्रेडिंग के दौरान टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में निचले स्तरों पर आई खरीदारी से सूचकांकों का नुकसान काफी कम हो गया. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,200 से 23,250 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण और एक मजबूत सपोर्ट जोन है. निफ्टी जैसे ही इस मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंचा, वहां शॉर्ट-कवरिंग और मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को और नीचे गिरने से रोक दिया.&amp;nbsp;
बाजार में आज क्यों आई गिरावट?
क्रूड ऑयल की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी से बाजार में डर का माहौल है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा यमन के मोखा बंदरगाह (Port of Mocha) पर कब्जा करने और रेड सी रूट पर बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है इसलिए क्रूड महंगा होने से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) का बड़ा जोखिम पैदा हो जाता है.
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर पूरी दुनिया के बाजारों में देखा गया. एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई. जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सुबह 1.5% से अधिक टूट गए. ग्लोबल मार्केट से मिले इन्हीं खराब संकेतों का असर आज भारतीय शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में देखने को मिला.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चांदनी चौक में ज्वैलरी की 56 दुकानें सील, अब अंदर रखे सोने&amp;चांदी का क्या होगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चांदनी-चौक-में-ज्वैलरी-की-56-दुकानें-सील-अब-अंदर-रखे-सोने-चांदी-का-क्या-होगा</link>
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        <description><![CDATA[ अगर किसी व्यापारी की दुकान को सील कर दिया जाए तो उसके लिए ये एक सबसे बड़ी परेशानी की स्थिति है. कुछ ऐसा ही दिल्ली के चांदनी चौक में देखने को मिला है, यहां चांदनी चौक स्थित कूचा महाजनी के कारोबारियों के लिए 10 सितंबर का दिन मुसीबत भरा रहा, क्योंकि MCD ने इलाके की कई दुकानों को सील कर दिया.&amp;nbsp;
56 दुकानों को MCD ने किया सील
दरअसल, MCD ने गहनों और बुलियन का बिजनेस करने वाली 56 दुकानों को सील कर दिया. हैरानी की बात तो यह है कि दुकानों के अंदर करोड़ों रुपये के सोने-चांदी से लेकर दूसरी कीमती चीजें रखी हुई है, लेकिन MCD की कार्रवाई के बाद अब ये दुकानें बंद है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि दुकानों को सील करने के बाद जो सामान उसके अंदर है अब उसका आखिर क्या होगा?&amp;nbsp;
क्या होगा अंदर रखें सोने-चांदी का?
जानने वाली बात यह है कि अगर किसी दुकान को सील किया जाता है तो उसके अंदर रखें सामान को बाहर नहीं निकाला जा सकता. सीलिंग का मकसद ही दुकान के इस्तेमाल पर रोक लगाना है. इसी वजह से दुकानों के बाहर सरकारी सील लगाई गई है. ऐसे में जो सामान पहले से ही दुकान के अंदर है जैसे सोना-चांदी या दूसरे कीमती चीज तो वे दुकान के अंदर ही रहेगी, उसे बाहर नहीं निकाला जा सकता है. कारोबारियों के निजी सामान को जब्त करने का कानूनी अधिकार प्रशासन के पास नहीं है तो सामान दुकान के अंदर ही सुरक्षित रहेगा.
खुद से सामान बाहर निकालना पड़ेगा भारी
&amp;nbsp;कोई कारोबारी अपनी सील की गई दुकान से सामान नहीं निकाल सकता है. अगर कोई दुकानदार बिना परमिशन के सील तोड़ता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि कोई भी दुकानदार अपनी मर्जी से सील तोड़ने की कोशिश न करें.&amp;nbsp;
ब्रिक्स समिट: क्या दिल्ली-NCR में बंद रहेंगी शराब की दुकानें?
दुकानों पर क्यों लगाई गई सील?
6 सितंबर रविवार के दिन दिल्ली के सत्य निकेतन में एक कई साल पुरानी इमारत गिर गई थी, जिसमें कई लोगों की जान तक चली गई. इसके बाद से ही दिल्ली में MCD ने खतरनाक और अवैध इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी शुरू कर दी है और इसी अभियान के तहत ही चांदनी चौक के कूचा महाजनी इलाके में भी ये कार्रवाई की गई.&amp;nbsp;
बढ़ गया सोने का रेट, चांदी भी हुई महंगी; जानें आज 10 ग्राम का भाव
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चांदनी, चौक, में, ज्वैलरी, की, दुकानें, सील, अब, अंदर, रखे, सोने-चांदी, का, क्या, होगा</media:keywords>
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        <title>पैकेज्ड फूड में ज्यादा नमक&amp;चीनी पर SC सख्त, प्रोडक्ट पर लगेगा रेड वॉर्निंग लेबल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पैकेज्ड-फूड-में-ज्यादा-नमक-चीनी-पर-sc-सख्त-प्रोडक्ट-पर-लगेगा-रेड-वॉर्निंग-लेबल</link>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल (FoPL) लगाने के मामले में FSSAI से यह साफ करने को कहा है कि पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक, सोडियम, पोटैशियम या सैचुरेटेड फैट की वह निश्चित सीमा क्या होगी, जिसके पार जाते ही कंपनियों के लिए पैकेट पर लाल चेतावनी का निशान लगाना अनिवार्य हो जाएगा.
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने फ़ूड रेगुलेटर से पूछा कि क्या उसने यह तय करने के लिए कोई खास सीमा तय की है कि कोई प्रोडक्ट &#039;हाई शुगर&#039;, &#039;हाई साल्ट&#039; या &#039;हाई फैट&#039; जैसी वॉर्निंग्स के लायक कब माना जाएगा. कोर्ट ने प्रस्तावित सीमाओं के वैज्ञानिक आधार पर भी स्पष्टीकरण मांगा.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
FSSAI ने शुरुआती प्रस्ताव में इसे दो चरणों में लागू करने की बात कही थी. पहले चरण में लाल रंग का हेक्सागोनल (छह कोनों वाला) चेतावनी लेबल केवल उन पैकेटों पर लगेगा, जिनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो तत्व तय सीमा से अधिक हों. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि इसके लिए दो चरणों की क्या जरूरत है?
कोर्ट का कहना था कि अगर इन तीनों में से एक भी तत्व सीमा से अधिक है, तो भी पैकेट पर चेतावनी लगनी चाहिए. कोर्ट के सख्त रुख के बाद, FSSAI ने अदालत को भरोसा दिया है कि वह शुरुआत से ही सख्त नियम लागू करने और केवल एक घटक (चीनी, नमक या फैट) के ज्यादा होने पर भी लाल चेतावनी लेबल लगाने पर विचार करने के लिए तैयार है.
सीमा तय करने पर बहस
फूड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIFPA) ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि खतरे का आकलन 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर के आधार पर क्यों किया जा रहा है.
कंपनियों का कहना है कि लोग अचार या सॉस जैसी चीजें एक बार में 100 ग्राम नहीं खाते, बल्कि केवल 5 ग्राम (सर्विंग साइज) ही लेते हैं इसलिए चेतावनी तय करते समय प्रति सर्विंग साइज को आधार बनाया जाना चाहिए. बता दें कि FSSAI के प्रस्तावित नियम में 100 ग्राम (ठोस खाद्य पदार्थों के लिए) और 100 मिलीलीटर (तरल पदार्थों के लिए) को ही आधार बनाया था.&amp;nbsp;
कोर्ट ने FSSAI से मांगा वैज्ञानिक आधार
कोर्ट ने रेगुलेटर से पूछा कि किस प्रोडक्ट में &#039;हाई शुगर&#039; या &#039;हाई साल्ट&#039; है, इसके लिए क्या दिशानिर्देश तय किए गए हैं? FSSAI ने बताया कि यह सीमा ICMR-National Institute of Nutrition (NIN) की डायटरी गाइडलाइन्स 2024 के आधार पर तय की जाएगी.
कोर्ट ने इस गाइडलाइन के तहत अलग-अलग प्रोसेस्ड फूड और स्वीटेंड बेवरेजेस के लिए तय की गई सीमाओं का पूरा ब्योरा मांगा है. ध्यान रखने वाली बात है कि यह पूरा विवाद भारत में पिछले कई सालों से चल रही फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FoPL) नीति में हो रही देरी से जुड़ा है.&amp;nbsp;
लाल रंग पर कन्फ्यूजन
FSSAI ने लाल रंग के छह कोनों वाले Hexagonal वार्निंग लेबल का प्रस्ताव दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में लोग लाल रंग को मांसाहारी (Non-Veg) और हरे रंग को शाकाहारी (Veg) से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में लोग शाकाहारी जंक फूड पर &#039;लाल हेक्सागोन&#039; का निशान देखकर कन्फ्यूज हो सकते हैं इसलिए कोर्ट ने FSSAI से इस रंग के विकल्प पर दोबारा विचार करने को कहा है.

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घाटा Air India का, लेकिन बवाल विदेश में क्यों? TATA से क्या है सिंगापुर एयरलाइंस का कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Air India इन दिनों भारी घाटे से जूझ रही है और अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है. एयरलाइन ने अपने प्रमोटर टाटा संस और साझेदार सिंगापूर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की मदद मांगी है. यह भारतीय करेंसी में करीब 14,262 करोड़ रुपए है. इसमें टाटा संस करीब 10,682 करोड़ रुपए और सिंगापुर एयरलाइंस करीब 3,580 करोड़ रुपए निवेश करेगी. ऐसे में यह सवाल उठता है कि एयर इंडिया के घाटे को लेकर सिंगापुर में चर्चा क्यों हो रही है और इसका टाटा ग्रुप से क्या कनेक्शन है?
Air India को पैसे की जरूरत क्यों पड़ी?
इस समय एयर इंडिया को बेड़े के विस्तार, विमानों की संख्या बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है. कंपनी को हालिया वित्त वर्ष में करीब 2.33 अरब डॉलर का घाटा हुआ है, जो भारतीय मुद्रा के रूप में करीब 22,154 करोड़ रुपये है. यही वजह है कि एयरलाइन अपने मौजूदा शेयरधारकों से अतिरिक्त पैसा जुटा रही है.
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सिंगापुर में Air India के निवेश पर क्यों मचा बवाल?
यह मामला इसलिए दिलचस्प है, क्योंकि सिंगापुर एयरलाइंस में सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक की बड़ी हिस्सेदारी है. इसी वजह से सिंगापुर में विपक्ष ने यह सवाल उठाया कि कहीं सरकारी धन का इस्तेमाल एयर इंडिया में निवेश के लिए तो नहीं किया जा रहा है. यानी यह बवाल सीधे तौर पर एयर इंडिया को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर है कि सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश में राष्ट्रीय खजाने की कितनी भूमिका है.
हालांकि, सिंगापुर सरकार ने यह साफ किया है कि निवेश का फैसला सिंगापुर एयरलाइंस का बोर्ड करेगा और सरकार या टेमासेक सीधे एयर इंडिया को पैसे नहीं दे रहे हैं.&amp;nbsp;
TATA और Singapore Airlines का क्या है कनेक्शन?
टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस का रिश्ता नया नहीं है, इसकी शुरुआत एक विस्तारा से हुई थी. साल 2013 में दोनों कंपनियों ने मिलकर भारत में विस्तारा (Vistara) नाम की फुल-सर्विस एयरलाइन शुरू की थी, जिसने जनवरी 2015 में अपनी उड़ान भरना शुरू किया. इस विस्तारा में टाटा की 51% और सिंगापुर एयरलाइंस की 49% हिस्सेदारी थी. बाद में टाटा समूह ने एयर इंडिया को भी अपने एविएशन कारोबार में शामिल कर लिया.
जब टाटा ने 2022 में एयर इंडिया को भारत सरकार से खरीदा, तब उसके एविएशन कारोबार में एयर इंडिया के साथ विस्तारा भी शामिल थी. इसके बाद टाटा ने दोनों एयरलाइंस को एक साथ लाने का फैसला किया. हालांकि, विस्तारा में सिंगापुर एयरलाइंस की 49% हिस्सेदारी थी, इसलिए विलय के बाद उसे एयर इंडिया समूह में भी हिस्सेदारी मिली.
वहीं सिंगापुर एयरलाइंस ने अतिरिक्त निवेश के जरिए एयर इंडिया समूह में 25.1% हिस्सेदारी हासिल की, जबकि बाकी 74.9% हिस्सेदारी टाटा के पास है. नवंबर 2024 में विस्तारा का एयर इंडिया में विलय पूरा हो गया. जिसके बाद विस्तारा की उड़ानें एयर इंडिया के तहत संचालित होने लगीं.
सिंगापुर एयरलाइंस&amp;nbsp;क्यों करना चाहती है Air India में निवेश?
सिंगापुर एयरलाइंस भारत को एविएशन के लिहाज से एक बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार मानती है. ऐसे में कंपनी की रणनीति भारत को अपने मल्टी-हब नेटवर्क का एक अहम हिस्सा बनाने की है. यही वजह है कि एयरलाइन लंबे समय के नजरिए से एयर इंडिया के साथ जुड़ी हुई है. भले ही एयर इंडिया को मौजूदा घाटे से बाहर आने में कई साल लग सकते हैं, लेकिन सिंगापुर एयरलाइंस भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहती है.&amp;nbsp;
दूध की फिर बढ़ी कीमत, लेकिन आपकी जेब से नहीं जाएगा पैसा; जानें मामला
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>अंडा, चिकन और दूध क्यों हो रहे महंगे, जेब पर भारी दामों की असली वजह क्या?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में महंगाई पिछले कुछ समय से काफी तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में दूध, अंडे और चिकन के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. खास बात ये है कि इनके उत्पादन की लागत भी तेजी से बढ़ रही है. लेकिन आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? ये एक बड़ा सवाल है जो कई लोगों के मन में भी आ रहा है. आइये जानते हैं इसकी सबसे बड़ी वजह आखिर क्या है?
दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह पशुओं और मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले मक्का और सोयाबीन की महंगी कीमतें हैं. अगर आने वाले कुछ महीनों में मक्का और चारे की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
तेजी से बढ़ा पशुधन क्षेत्र का महत्वभारत के पशुधन क्षेत्र का महत्व पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है. साल 2013-14 में पशुधन से जुड़े कामों से आने वाली कीमतें फसल क्षेत्र की कीमतों से भी करीब 34% ज्यादा थी. साल 2023-24 में ये बढ़कर 57% हो गया है. इसका मतलब है कि दूध, अंडे, मांस और दूसरे पशु उत्पाद अब भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं.
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चारे की कीमत है चुनौतीमुर्गियों और दूसरे पशुओं के चारे में मक्का सबसे जरूरी भूमिका निभाता है. ब्रॉयलर मुर्गियों के चारे में करीब 55-65% मक्का होता है, जबकि अंडे देने वाली लेयर मुर्गियों के चारे में करीब 50-60% मक्का होता है. पशुओं के चारे में भी मक्के की हिस्सेदारी करीब 15-20% रहती है.
तो वहीं दूसरी तरफ, प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सोयाबीन मील, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और कपास के बीज से निकलने वाली खली का इस्तेमाल किया जाता है. ब्रॉयलर फीड में करीब 25-30% सोयाबीन मील और लेयर फीड में करीब 18-20% सोयाबीन मील होता है. ऐसे में इन कच्चे माल की कीमत बढ़ने का सीधा असर पशु चारे की लागत पर पड़ता है.
मक्का और सोयाबीन की कीमतें बढ़ींतमिलनाडु के इरोड जिले के अलंगेयम बाजार में मक्के की औसत कीमत अगस्त 2025 में 2,537 रुपये प्रति क्विंटल थी. अगस्त 2026 में ये बढ़कर 2,759 रुपये और अब करीब 2,810 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. सोयाबीन मील की कीमत में भी बड़ी तेजी देखी गई. मध्य प्रदेश के इंदौर में इसकी कीमत अगस्त 2025 में करीब 38,186 रुपये प्रति टन थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 58,156 रुपये प्रति टन हो गई. हालांकि अब ये घटकर करीब 50 हजार रुपये प्रति टन रह गई है, फिर भी पिछले साल के मुकाबले ये काफी महंगी है.
अंडे की कीमत पर असरचारे की बढ़ती लागत का असर अंडे की कीमत में भी दिखाई दिया है. दिल्ली में अंडे की फार्मगेट कीमत करीब 600 रुपये प्रति 100 अंडे है, जबकि खुदरा बाजार में कीमत लगभग 7-9 रुपये प्रति अंडा है. जुलाई में अंडे की औसत कीमत करीब 670.50 रुपये प्रति 100 अंडे रही, जो पिछले साल के मुकाबले 38.7% ज्यादा थी. इस दौरान कीमत 725-730 रुपये प्रति 100 अंडे तक पहुंच गई थी.&amp;nbsp;
चिकन का उत्पादन भी हुआ महंगापिछले चार महीनों में लेयर मुर्गियों के चारे की कीमत 24-26 रुपये से बढ़कर 30-32 रुपये प्रति किलो हो गई है. ब्रॉयलर फीड भी करीब 40 रुपये से बढ़कर 46 रुपये प्रति किलो हो गया है. ब्रॉयलर मुर्गी करीब 35-42 दिनों में 2-2.5 किलो वजन तक पहुंच जाती है. इसलिए चारे की कीमत में छोटी बढ़ोतरी भी कुल उत्पादन लागत पर बड़ा असर डालती है. पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार ब्रॉयलर की उत्पादन लागत करीब 110 रुपये प्रति किलो है.
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आगे मक्का पर रहेगी नजरसोयाबीन मील की कीमत में कुछ कमी आई है और नई फसल आने के बाद इसकी उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है. लेकिन मक्के को लेकर चिंता ज्यादा है. इस साल खरीफ में मक्के की बुआई का क्षेत्र करीब 4.1% कम बताया गया है. USDA ने 2026-27 में भारत का मक्का उत्पादन करीब 50 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है, जबकि 2025-26 में उत्पादन रिकॉर्ड 58.1 मिलियन टन रहा था.
अगर मक्का महंगा होता है तो इसका असर चारे की कीमत पर पड़ेगा. इसके बाद चारा महंगा होगा, उत्पादन लागत बढ़ेगी और दूध, अंडे और चिकन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा मक्के का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में भी होता है. इसलिए सरकार को एक तरफ ईंधन में एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य और दूसरी तरफ पशु चारे की जरूरत दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अब आपकी जगह AI करेगा UPI पेमेंट, बिना पिन और OTP के होगा भुगतान</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप हर बार UPI से पेमेंट करते समय पिन डालने या लेनदेन को खुद मंजूरी देने से परेशान हैं, तो आने वाले समय में यह काम AI कर सकता है. भारत में UPI पेमेंट को पहले के मुकाबले और आसान बनाने के लिए ऐसे AI एजेंट्स पर काम हो रहा है, जो आपकी तरफ से खुद छोटे-मोटे पेमेंट कर सकेंगे. इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) एक ऐसी रजिस्ट्री तैयार कर रहा है, जिसमें UPI पर भुगतान करने वाले AI एजेंट्स की पहचान और निगरानी की जाएगी.
AI एजेंट कैसे कर सकेंगे UPI पेमेंट?
आने वाले समय में AI एजेंट यूजर की तरफ से कुछ तय तरीके से डिजिटल पेमेंट खुद कर सकेंग. यानी हर बार UPI ऐप खोलकर खुद पेमेंट करने की जरूरत कम हो सकती है. शुरुआत में किराने के सामान जैसी कम कीमतों वाली खरीदारी के लिए भी इसका इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके हर छोटे ट्रांजैक्शन के लिए अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी.
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बिना हर बार PIN और OTP के कैसे होगा पेमेंट?
इस नई व्यवस्था का खास मकसद यह है कि AI एजेंट यूजर की तरफ से तय नियमों के मुताबिक पेमेंट कर सकें. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि UPI पेमेंट में PIN और OTP की जरूरत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी. इसके बजाय AI एजेंट की पहचान, यूजर की इजाजत, लेनदेन की सीमा और गालट पेमेंट की जानकारी जैसे मुद्दों के लिए सिस्टम तैयार किया जा रहा है.
बड़ी बात यह है कि इस नई व्यवस्था के जरिए आपको हर छोटे भुगतान पर खुद PIN या OTP डालने की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन पेमेंट को सुरक्षित रखने के लिए एजेंट की पहचान और ऑथराइजेशन जरूरी होगा.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अब मेहंदी लगाने की भी गई नौकरी, हथेली पर मशीनें बनाएंगी डिजाइन, देखें वीडियो</title>
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        <description><![CDATA[ मेहंदी लगाना वैसे तो एक आर्ट माना जाता है, जिसका हुनर हर किसी के हाथ में नहीं होता है. त्यौहारों के मौसम में लड़कियां या महिलाएं खूब मेहंदी लगवाती हैं. तो वहीं शादियोंमें तो मेहंदी आर्टिस्ट्स की जमकर कमाई होती है. लेकिन अब ऐसा लगता है कि आने वाले समय में मेहंदी लगाने वालों की नौकरी भी खतरे में है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि बिजनेसमैन हर्ष गोयनका ने बताया है.
खतरे में मेहंदी आर्टिस्ट्स की जॉबदरअसल मशहूर उद्योगपति हर्ष गोयनका सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वो अक्सर अपने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट के जरिए कई मजेदार वीडियोज और पोस्ट्स शेयर करते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में एक महिला के हाथ पर मशीन से मेहंदी लगाई जा रही है. इस वीडियो के शेयर होते ही ये सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया है. यहां देखें वीडियो:

Some more jobs gone ???? pic.twitter.com/jKiUzB8gOA
&amp;mdash; Harsh Goenka (@hvgoenka) September 9, 2026



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इस वीडियो को शेयर करते हुए हर्ष ने कैप्शन में लिखा, &#039;कुछ और नौकरियां जाने वाली हैं&#039;. तो वहीं इस वीडियो में नजर आ रहा है कि एक महिला अपना हाथ मशीन के अंदर रखती है. इसके बाद मशीन उसके हाथ पर एक डिजाइन बना देती है. खास बात ये है कि इस पूरे काम में इंसानी मदद बहुत कम दिखाई देती है.
मेहंदी आर्टिस्ट्स के लिए चिंताये वीडियो सामने आते ही सबसे बड़ी चिंता मेहंदी लगाने वाले आर्टिस्ट्स के लिए है. क्योंकि मेहंदी लगाना सिर्फ हाथ पर डिजाइन बनाने का काम नहीं है, बल्कि ये एक स्किल और कला है. शादी, त्योहार और दूसरे खास मौकों पर लोग प्रोफेशनल मेहंदी कलाकारों को बुलाते हैं. अगर मशीनें कम समय में और एक जैसी डिजाइन बना सकती हैं, तो कुछ जगहों पर लोग मशीन का इस्तेमाल करना पसंद कर सकते हैं. इससे मेहंदी लगाने वाले कलाकारों के काम पर असर पड़ने की आशंका है.
लोगों की आई मिली-जुली प्रतिक्रियाइस वीडिय पर जनता की मिली- जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कई लोगों का कहना है कि मेहंदी कलाकारों को मशीन से डरने की जरूरत नहीं है. कई यूजर्स का मानना है कि इससे मेहंदी कलाकारों की नौकरी पर कोई खतरा नहीं है. तो वहीं कई यूजर्स ये भी कह रहे हैं कि हाथ से बनाई गई मेहंदी की खूबसूरती को मशीन पूरी तरह नहीं दोहरा सकती. हाथ से बने डिजाइन में छोटी-छोटी कमियां भी उसकी खूबसूरती और इंसानी स्पर्श का हिस्सा होती हैं.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>चेक कर लें आज गैस सिलेंडर की कीमत, कहीं आपके शहर में बढ़े तो नहीं दाम?</title>
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        <description><![CDATA[ आज, 10 सितंबर 2026 को भारत में घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, महीने की शुरुआत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के रेट में 9.50 से 11.50 रुपये प्रति सिलेंडर का मामूली इजाफा किया था. घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर के दाम आखिरी बार 7 जून 2026 को बढ़ाए गए थे. उसके बाद से कीमतें पूरी तरह से स्थिर हैं.&amp;nbsp;
शहरवार चेक करें कीमत



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर (14.2 kg)
कमर्शियल सिलेंडर (19 kg)


दिल्ली
942.00
2,747.50


मुंबई
941.50
2,701.00


कोलकाता
968.00
2,884.00


चेन्नई
957.50
2,916.50


बेंगलुरु
955.50
2,831.00


हैदराबाद
994.00
2,996.00


पटना
1,031.50
3,029.00


नोएडा
939.50
2,747.50


गुरुग्राम
950.50
2,764.50



CEEW की रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
भारत में LPG की पहुंच ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाने की कोशिश तेज है, लेकिन &#039;काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर&#039; (CEEW) की एक नई स्टडी से पता चलता है कि उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी आज भी चूल्हा फूंक रहे हैं.
CEEW के सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के तहत 10.5 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन तो दिए जा चुके हैं, लेकिन केवल 23% ग्रामीण परिवार ही रसोई गैस का विशेष रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं. &amp;nbsp;बाकी परिवार गैस के साथ-साथ पारंपरिक ईंधन का भी उपयोग करते हैं.
ये नतीजे असम, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 2,222 ग्रामीण घरों में नवंबर 2024 और जनवरी 2025 के बीच किए गए सर्वे से मिले हैं. स्टडी में पाया गया कि 48% घर खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन के तौर पर LPG का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 50% मुख्य रूप से लकड़ी पर निर्भर हैं.
पूरी तरह से गैस पर निर्भर रहने के लिए सालभर में कम से कम 7 से 8 सिलेंडर की जरूरत होती है, जबकि उज्ज्वला लाभार्थी औसतन साल में सिर्फ 4.8 सिलेंडर ही रिफिल करवा पा रहे हैं. CEEW की इस रिपोर्ट से साफ है कि भले ही कागजों पर एलपीजी की पहुंच लगभग 100% ग्रामीण परिवारों तक दिखाई जा रही हैं, लेकिन इसका वास्तविक इस्तेमाल अब भी बेहद कम है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>78 दिनों का बोनस: रेलवे यूनियनों की बड़ी मांग, कहा&amp; 18,000 बेसिक पर हो कैलकुलेशन</title>
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        <description><![CDATA[ इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने वित्त मंत्री और रेल मंत्री को पत्र लिखकर नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) की वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है. &amp;nbsp;उनका कहना है कि दशहरे पर मिलने वाले बोनस कैलकुलेशन का आधार बढ़ाकर न्यूनतम 18,000 रुपये और महंगाई भत्ते (DA) किया जाए.&amp;nbsp;
यूनियनों की नई मांग
यूनियनों का तर्क है कि अभी 6वें वेतन आयोग (FY 2014-15) के समय तय की गई 7000 रुपये की सीलिंग के आधार पर 78 दिनों का बोनस तय होता है. इससे नॉन-गेजेटेड रेल कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपया ही बोनस मिल पाता है. अब चूंकि 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये हो चुका है इसलिए लेवल-1 कर्मचारियों के लिए बोनस की सीलिंग भी कम से कम 18,000 + 60% DA की जानी चाहिए.
एसोसिएशन की यह भी मांग है कि लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए उनकी सैलरी के अनुपात में बोनस सीलिंग को और अधिक बढ़ाया जाए. रेल यूनियनों का कहना है कि वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद जब न्यूनतम वेतन बढ़कर 18,000 रुपये हो चुका है, तो बोनस की गणना पुराने 7,000 रुपये के आधार पर क्यों हो.
रेलवे कर्मचारियों को कितना होगा फायदा?
दशहरे से पहले केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अगर उनकी यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो इससे रेलवे कर्मचारियों को बंपर फायदा होगा. अगर सरकार बिना 60% DA के भी सिर्फ 18,000 बेसिक पे को आधार मानकर कैलकुलेशन करती है, तो 78 दिनों का बोनस 46,159 से अधिक बनेगा. अगर इसमें डीए को भी शामिल कर लिया जाता है, तो रकम 27,824 रुपये तक पहुंच सकती है. फिलहाल सबकी नजरें कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं.
IRTSA की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली मुख्य संस्था- नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने सभी नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए PLB वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है. पिछले महीने, NC-JCM ने सरकार से वेतन सीमा को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का अनुरोध किया है.

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब गाड़ियों में 20% से ज्यादा डलेगा एथेनॉल, PM मोदी के सलाहकार ने की पुष्टि</title>
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        <description><![CDATA[ सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की मदद से मौजूदा E20 के लेवल से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की इजाजत देने की तैयारी कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. सरकार का ऐसा मानना है कि चूंकि अब देश में इथेनॉल का उत्पादन हमारी मौजूदा जरूरतों से अधिक होने लगा है इसलिए अब E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) की सीमा को पार कर आगे बढ़ने का सही समय आ गया है.
&#039;द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026&#039; के चौथे एडिशन को वर्चुअली संबोधित करते हुए तरूण कपूर ने कहा कि E20 प्रोग्राम अब तक बहुत सफल रहा है और कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करने के अपने प्लान का जिक्र किया है. उन्होंने कहा, &quot;अब हमारा फोकस फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को लाने और E20 से ज्यादा परसेंट तक ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर है.&quot; उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे वाहनों के आने के साथ-साथ फ्यूल आउटलेट्स पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी.
सरकार की नई नीति का मकसद
पीएम मोदी के सलाहकार ने आगे यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच बायोफ्यूल को बढ़ावा देना और भी जरूरी हो गया है. इस संकट ने सप्लाई को बाधित किया है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही इनके और बढ़ने की आशंका भी है.
चूंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के लिए चिंताजनक है क्योंकि इससे इम्पोर्ट में खर्च ज्यादा आएगा, डॉलर अधिक खर्च होंगे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा.
अब जब इस बीच देश में चीनी और मक्के से बनने वाले इथेनॉल की उत्पादन क्षमता बढ़ी ही है, तो इस अतिरिक्त इथेनॉल का इस्तेमाल क्यों न किया जाए. इसे खपाने का सबसे बेहतरीन जरिया फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां हैं.&amp;nbsp;
फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां क्या हैं?
अभी सड़कों पर चल रही साधारण गाड़ियां अधिकतम E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) तक का ही ईंधन झेल सकती हैं. इससे ज्यादा इथेनॉल डालने पर उनके इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं. इसके विपरीत, फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles) में ऐसे इंजन लगे होते हैं, जो 20% से लेकर 85% या 100% (शुद्ध इथेनॉल) तक के मिश्रण पर आसानी से चल सकते हैं. इनमें लगे सेंसर खुद-ब-खुद ईंधन में इथेनॉल की मात्रा को पहचान कर इंजन की परफॉर्मेंस को एडजस्ट कर लेते हैं.
E20 ब्लेंडिंग को लेकर हाल ही में हुई आलोचना पर तरूण कपूर ने कहा कि इसमें से ज्यादातर या तो गलत जानकारी थी या किसी खास मकसद से इसकी आलोचना की गई होगी. उन्होंने कहा कि स्टडीज से पता चला है कि E20 अच्छा काम करता है और फ्यूल एफिशिएंसी में थोड़ी-बहुत कमी की भरपाई इसके ज्यादा ऑक्टेन कंटेंट से हो जाती है.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, गाड़ियों, में, 20, से, ज्यादा, डलेगा, एथेनॉल, मोदी, के, सलाहकार, ने, की, पुष्टि</media:keywords>
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        <title>आज कितने में बिक रहा गोल्ड, चांदी की कितनी है कीमत? चेक करें रेट</title>
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        <description><![CDATA[ आज 10 सितंबर, बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. गुडरिटर्न्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,54,300 रुपये है, जिसमें कल के मुकाबले मामूली 10 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत भी कल के मुकाबले 10 रुपये गिरकर आज 1,41,440 के स्तर पर आ गई है. 18 कैरेट सोने की कीमत आज प्रति 10 ग्राम 1,15,720 रुपये है. इसका भी रेट 10 रुपये गिरा है.&amp;nbsp;
शहरवार सोने की कीमत



शहर&amp;nbsp;
24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम)
18 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम)


दिल्ली
15,445 रुपये
14,159 रुपये


मुंबई
15,430 रुपये&amp;nbsp;
14,144 रुपये


बेंगलुरु
15,430 रुपये
14,144 रुपये


चेन्नई
15,430 रुपये
14,144 रुपये


कोलकाता
15,430 रुपये
14,144 रुपये


पुणे
15,430 रुपये
14,144 रुपये


जयपुर
&amp;nbsp;15,556 रुपये
14,270 रुपये


लखनऊ
&amp;nbsp;15,556 रुपये
14,270 रुपये


पटना
15,556 रुपये
14,260 रुपये



क्यों आज गिरीं सोने की कीमतें?
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली बढ़ने से सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही. वैश्विक निवेशक इस समय बेहद सतर्क हैं क्योंकि अभी इनकी नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के द्वारा लिए जाने वाले ब्याज दरों के फैसले पर टिकी हुई हैं. ब्याज दरों में संभावित बदलाव की अनिश्चितता के कारण ट्रेडर्स सोने-चांदी से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं. बता दें कि अमेरिकी फेड रिजर्व की अगली बैठक 15 और 16 सितंबर 2026 को होने जा रही है.
डॉलर इंडेक्स में मजबूती भी आज सोने की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह है. जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतें दबाव में आ जाती हैं. डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसीज वालों के लिए इसे खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में अस्थाई कमी आती है. इधर, डॉलर मजबूत होने पर निवेशक सोने से पैसा निकालने लगते हैं. चूंकि सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है यानी इस पर बैंक एफडी या सरकारी बॉन्ड की तरह कोई तय ब्याज &amp;nbsp;या डिविडेंड नहीं मिलता इसलिए ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं के बीच लोग इसे बेचकर अपना पैसा निकाल लेते हैं.
आज चांदी की कीमत?
आज भारत में चांदी की कीमत 249.90 रुपये प्रति ग्राम और 2,49,900 रुपये प्रति किलोग्राम है. इसमें प्रति ग्राम आज 0.10 पैसे की गिरावट आई है और इस हिसाब से 1 किलो की कीमत 100 रुपये कम हुई है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे, वडोदरा, अहमदाबाद जैसे तमाम शहरों में आज चांदी की कीमत प्रति 10 ग्राम 2,499 रुपये है. वहीं, चेन्नई में कीमत थोड़ी ज्यादा 2,549 रुपये है.

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब सस्ती होगी चीनी, घरेलू बाजार में 2.5 लाख टन स्टॉक बेचेंगी रिफाइनरियां</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-सस्ती-होगी-चीनी-घरेलू-बाजार-में-25-लाख-टन-स्टॉक-बेचेंगी-रिफाइनरियां</link>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारों के सीजन में जहां चीनी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, उसी मौसम में चीनी की कीमतों ने होश उड़ा दिए हैं. चीनी की कीमतों में इजाफा होते देख कई लोगों को लग रहा था कि अब त्यौहारों की मिठास कम पड़ जाएगी. लेकिन सरकार और शुगर रिफाइनरीज मिलकर लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. इसी कड़ी में अब शुगर रिफाइनरीज घरेलू बाजार में कई लाख टन चीनी बेचने वाली है.
दरअसल हाल ही में श्री रेणुका शुगर्स के एमडी और सीईओ सुशील कुमार ने बताया है कि भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार में करीब ढाई लाख टन चीनी बेचने की प्लानिंग कर रही हैं. जिससे कि बाजार में चीनी के दामों पर लगाम लगाई जा सके.

News Alert ! Indian sugar refineries plan to sell around 2.5 lakh tonnes of refined sugar in domestic market: Shree Renuka Sugars MD &amp;amp; CEO Susheel Kumar.
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) September 9, 2026



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क्यों की जा रही ये कवायद?सरकार और शुगर रिफाइनरीज चाहती हैं कि इस त्यौहरी सीजन में किसी के भी त्यौहार की मिाठास कम ना हो, ऐसे में उनसे जितना हो पा रहा है उस हिसाब से चीनी के दामों को कम करने की कोशिश की जा रही है. चीनी का ये ढाई लाख टन स्टॉक बेचने का फैसला भी इसी के चलते लिया गया है. हालांकि कुछ दिन पहले ही चीनी के दामों में गिरावट भी देखने को मिली थी. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ताजा आंकड़े पेश कर कुछ दिन पहले ही बताया था कि देश में चीनी का औसत खुदरा भाव पिछले हफ्ते के 65.08 रुपये से घटकर 62.57 प्रति किलो पर आया है.
जनता को नहीं मिली राहतहैरान करने वाली बात ये है कि चीनी के थोक रेट 17 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं. लकिन फिर भी जनता को कोई राहत अब तक नहीं मिली है. मिल स्तर (Ex-mill) पर चीनी के दामों में 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट आई. बावजूद इसके गली-मोहल्ले में परचून की दुकानों पर आम आदमी को सिर्फ 2 से 3 रुपये कम रेट पर चीनी मिल रही है.
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हालांकि अब उम्मीद है कि आने वाले समय में जब शगर रिफाइनरीज घरेलू बाजार में इस स्टॉक को उतारेंगी, तब जाकर कुछ हद तक लोगों को चीनी के दामों में थोड़ी राहत मिल सके.
 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: पेंशनर्स संगठन REWA की बड़ी मांग, ToR में करें बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी ही बेसब्री से हो रहा है. इसी बीच आयोग की बैठकों का दौर भी लगातार चल ही रहा है. हाल ही में चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को 8वें वेतन आयोग की बैठक हुई है. इस बैठक में पेंशन एसोसिएशन ने भी अपनी मांग रखी है, जिसमें &amp;nbsp;ToR में बदलाव की मांग सबसे बड़ी बताई जा रही है.
क्या है पेंशन एसोसिएशन की मांग?दरअसल लाइव मिंट के मुताबिक कई पेंशन संगठनों जैसे रिटायर्ड एम्प्लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि वो प्रमुख पेंशनभोगी संगठन, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों की पेंशन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन के लिए &#039;टर्म्स ऑफ रिफरेंस&#039; (ToR) में बदलाव करें. जिससे कि आने वाले समय में उन्हें इसके अच्छी तरह से लाभ मिल सके.
इसके लिए संगठन ने 7 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री के नाम एक पत्र भी लिखा है. इस पत्र के जरिए उन्होंने ये भी कहा है कि वो इस संशोधन में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर्ड हुए पेंशनभोगियों को भी शामिल करें.
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पेशनभोगियों की सरकार से प्रमुख मांगेंREWA यानी पेंशन संगठन ने सरकार से मांग की है कि, 8वें वेतन आयोग के ToR में बदलाव कर ये साफ किया जाए कि आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करेगा. फैमिली पेंशनर्स की पेंशन में भी संशोधन की सिफारिश करेगा. तो वहीं इस मामले में जब तक नियमों में बदलाव नहीं होता, तब तक सरकार प्रेस नोट या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे.
लाखों पेंशनर्स में असमंजसREWA के मुताबिक देश में करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स हैं. इनमें इस बात को लेकर भ्रम है कि 8वां वेतन आयोग उनकी पेंशन और फैमिली पेंशन में संशोधन की सिफारिश करेगा या नहीं. इसका कारण ये है कि 8वें वेतन आयोग के ToR का एक प्रावधान है. इसमें पेंशन, ग्रेच्युटी और अलग-अलग पेंशन योजनाओं की समीक्षा की बात कही गई है, लेकिन 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स का साफतौर तौर पर जिक्र नहीं है.
REWA ने ये भी कहा कि पहले के वेतन आयोगों के नियमों में पेंशनर्स को लेकर ज्यादा स्पष्टता थी. संगठन के मुताबिक 5वें और 6वें वेतन आयोग के ToR में पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का जिक्र था. वहीं 7वें वेतन आयोग में भी रिटायरमेंट बेनिफिट्स और पुरानी पेंशन में बदलाव की बात स्पष्ट रूप से कही गई थी.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, पेंशनर्स, संगठन, REWA, की, बड़ी, मांग, ToR, में, करें, बदलाव</media:keywords>
    </item>
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        <title>NSE IPO पर बड़ा अपडेट, OFS के जरिए 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी न्यू इंडिया इंश्योरेंस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/nse-ipo-पर-बड़ा-अपडेट-ofs-के-जरिए-105-करोड़-शेयर-बेचेगी-न्यू-इंडिया-इंश्योरेंस</link>
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        <description><![CDATA[ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने बुधवार, 9 सितंबर को घोषणा की है कि वो प्रस्तावित NSE IPO के जरिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी. ये प्रस्तावित बिक्री, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया में कंपनी के पास मौजूद कुल शेयरों का 29.83% है.
NSE का ये आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा, जिससे मिलने वाला पैसा कंपनी के बजाय सेलिंग शेयरधारकों के पास जाएगा.&amp;nbsp;
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कंपनी ने दी जानकारीकंपनी ने 9 सितंबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि, वो NSE के 1,05,00,000 शेयर बेचेगी. ये संख्या न्यू इंडिया एश्योरेंस के NSE में मौजूद कुल शेयरों का करीब 29.83% है. कंपनी के मुताबिक यs बिक्री जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद NSE के IPO के हिस्से के रूप में की जाएगी.
इस OFS प्रक्रिया के तहत न्यू इंडिया एश्योरेंस ने अपने NSE के शेयरों को 8 सितंबर 2026 को एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया है. इसका मतलब है कि IPO के दौरान इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है.
खास है NSE का IPONSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है. मौजूदा रिपोर्ट्स के मुताबिक IPO का साइज करीब 24,000-30,000 करोड़ रुपये हो सकता है. ये IPO पूरी तरह OFS पर आधारित होगा, यानी NSE खुद नए शेयर जारी नहीं करेगा. मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेंगे और उससे मिलने वाला पैसा उन्हीं शेयरधारकों को जाएगा.
रिपोर्ट्स की मानें तो NSE IPO के लिए कीमत करीब 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर के दायरे में तय हो सकती है. हालांकि आखिरी प्राइस बैंड की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है. IPO सितंबर में आने की उम्मीद है.
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और भी शेयर धारक बेच रहे हिस्सेदारीबता दें कि NSE के IPO में न्यू इंडिया एश्योरेंस के अलावा कई अन्य संस्थागत शेयरधारक भी अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं. ऐसे में NSE का IPO बाजार में निवेशकों के लिए इस साल के सबसे बड़े और चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब सीधे ATM से निकलेगा नया डेबिट कार्ड, कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?</title>
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        <description><![CDATA[ जब भी कोई व्यक्ति बैंक खाता खुलवाता है, तो उसके 1 हफ्ते बाद घर पर एटीएम कार्ड आ जाता है. हालांकि अब नई सर्विसेज के बाद एक दिन में भी कई मामलों में एटीएम मिल जाया करते हैं. लेकिन अब जल्दी ही सरकार एक नई सुविधा देने जा रही है. जिसके तहत अब डेबिट कार्ड सीधे एटीएम से मिल जाया करेंगे. आइये बताते हैं कि ये व्यवस्था कैसे काम करेगी.
दरअसल हाल ही में मुंबई में 8 से 11 सितंबर के बीच ग्लोबल फिटेक फेस्ट 2026 चलने वाला है. जिसके दूसरे दिन यानी आज 9 सितंबर की शाम को DFS सेक्रेटरी इस नई सुविधा को लॉन्च करने वाले हैं. ये नई सुविधा पुरानी डेबिट कार्ड इश्यूएंस की प्रोसेस को पूरी तरह से बदल देगा.
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इस नई सुविधा का उद्देश्य?इस नई सुविधा का मुख्य उद्देश्य डेबिट कार्ड जारी करने की जो प्रक्रिया अभी है, उसे आसान और तेज बनाना है. फिलहाल आमतौर पर नया डेबिट कार्ड लेने के लिए ग्राहक को बैंक शाखा में आवेदन करना पड़ता है. इसके बाद कार्ड जारी होने और ग्राहक तक पहुंचने में समय लग सकता है. लेकिन एटीएम वाली इस नई सुविधा से ग्राहकों को कार्ड जल्दी मिलने की उम्मीद है.
ब्रांच पर निर्भरता होगी कमइस व्यवस्था के शुरू होने के बाद ग्राहक बैंक की शाखा जाने की जगह एटीएम के जरिए भी डेबिट कार्ड पा सकेंगे. इससे कस्टमर्स के समय की बचत होगी और कार्ड जारी करने की प्रक्रिया भी ज्यादा सुविधाजनक बन सकती है. खासतौर पर उन ग्राहकों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें तुरंत डेबिट कार्ड की जरूरत होती है.
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कैसे काम करेगी ये नई व्यवस्था?इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बिना बैंक की शाखा में जाए ग्राहकों को डेबिट कार्ड मिल जाएगा. यदि आपका डेबिट कार्ड खो गया है, एक्सपायर हो गया है तो आप इस सुविधा का लाभ ले सकत हैं. इससे बार- बार शाखा में जाने का चक्कर खत्म होगा और आप करीबी एटीएम में जाकर डेबिट कार्ड के लिए अप्लाय कर पाएंगे.
इस कदम से बैंकिंग सेवाएं और आधुनिक हो जाएंगी. एटीएम आधारित डेबिट कार्ड जारी करने की सुविधा से ग्राहकों को मौके पर ही तेज सेवा मिल सकेगी. साथ ही बैंक शाखाओं पर काम का दबाव भी कम हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>20% बोनस की कर लें तैयारी, 21000 सैलरी वालों को सीधा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी कर्मचारियों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है. अब नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों को करीब 20 प्रतिशत तक का बोनस मिल सकता है. इस बोनस का सीधा लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी मासिक सैलरी 21 हजार रुपये तक है. ये स्टेट्यूटरी बोनस होगा, जो कर्मचारयों के हक में आएगा. हालांकि इसके लिए कर्मचारियों को कुछ नियम व शर्तें पूरी करना होंगी.
पात्र कर्मचारियों को मिलेगा बोनसदरअसल हाल ही में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इस बारे में बताया है. मंत्रालय ने बताया है कि 21 हजार रुपये तक मासिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी नए लेबर कोड और वैधानिक नियमों के तहक बोनस पाने के हकदार हैं. इस अधिसूचना के मुताबिक यदि कर्मचारी पात्रता नियम पूरे करता है तो नियम के अनुसार, कम से कम 30 दिन काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को मिनिमम 8.33% और अधिकतम 20% तक बोनस मिल सकता है.
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बोनस की गणना समझेंअगर कोई कंपनी या नियुक्ति देने वाला नियोक्ता अपने कर्मचारियों को अधिकतम 20 प्रतिशत बोनस देता है, तो उसकी गणना 7 हजार रुपये प्रति माह के आधार की जाती है. आइये यहां आपको बताते हैं कि इस गणना के आधार पर किस तरह से 20 प्रतिशत बोनस के आधार पर आपको बोनस मिलेगा.
उदाहरण के तौर पर मान लिया जाए कि किसी व्यक्ति का मासिक वेतन 7 हजार रुपये है, ऐसे में उस व्यक्ति का सालाना वेतन 84 हजार रुपये होगा. इस वेतन पर अधिकतम बोनस 20 प्रतिशत के आधार पर 16,800 रुपये होगा.
तो वहीं यदि बोनस को 8.33 प्रतिशत के आधार पर देखेंगे, तो मिनिमम बोनस 6,997 रुपयो मिलेगा.
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क्या होता है स्टैट्यूटरी बोनस?स्टैट्यूटरी बोनस को वैधानिक बोनस कहा जाता है. जो पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 के तहत पात्र कर्मचारियों को दिया जाता है. ये एक कानूनी और जरूरी बनस है जो हर साल कर्मचारियों को कंपनी के द्वारा मिलना जरूरी होता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आपका भी UPI अकाउंट हो सकता है फ्रीज, जानें क्या कहता है RBI</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल पेमेंट के लिए अधिकतर लोग केवल यूपीआई का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. यूपीआई के आने के बाद से तो जैसे कैश रखना लोगों ने लगभग बंद ही कर दिया है. इसी बीच अब कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों के यूपीआई अकाउंट फ्रीज भी हो रहे हैं. वो भी किसी स्कैम के चलते, इस बारे में हाल ही में केरल के एक व्यक्ति ने शिकायत की है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल हाल ही में सोशल नेटवर्किंग साइट X (पहले ट्विटर) पर केरल के रहने वाले फुटुम्बाका सुमा ने एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनके खाते में दो बार किसी अनजान यूपीआई से कुछ रुपये आए, जिसके बाद HDFC बैंक ने बिना कोई नोटिस दिए उनका खाता ही फ्रीज कर दिया है. शख्स ने इस पोस्ट में केरल पुलिस को टैग करते हुए लिखा:
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&#039;मैं आपके ध्यान में ये बात लाना चाहता हूं कि 31 अगस्त और 4 अगस्त को मुझे UPI के जरिए दो अनजान पेमेंट मिले. मैंने उन्हें वापस नहीं भेजा क्योंकि मुझे लगा कि ये कोई स्कैम हो सकता है. जब भेजने वाले ने व्हॉट्सएप पर मुझसे संपर्क किया, तो मैंने जिम्मेदारी दिखाते हुए कहा कि वो अपने बैंक से संपर्क करें और मैं सही तरीके से पैसे वापस करवा दूंगा, क्योंकि मैं किसी स्कैम का हिस्सा नहीं बनना चाहता था. इसके बाद, HDFC ने उस रकम को रोक दिया और मेरा पूरा अकाउंट फ्रीज कर दिया.&#039;

@TheKeralaPolice I&amp;rsquo;d like to bring to your notice that on the 31st and 4th of August I received two unknown payments via UPI. I did not send it back as I thought it was some scam. When the sender reached out on WhatsApp I did the responsible thing of saying contact your bank and&amp;hellip; pic.twitter.com/q7DmCoJAXd
&amp;mdash; Alex (@verghesaurus) September 6, 2026



आगे उन्होंने लिखा, &#039;केरल हाई कोर्ट का एक फैसला है जिसके अनुसार बैंक सिर्फ विवादित रकम को ही फ़्रीज कर सकते हैं, पूरे अकाउंट को नहीं. मैं कैसे गुजारा करूं? मैं अपने पेमेंट कैसे करूं और कर्मचारियों को उनकी सैलरी कैसे दूं? मैंने साइबर सेल को ईमेल भी लिखा है. उनकी रिस्पॉन्स टीम बहुत अच्छी थी. मैं अभी जबड़े और रीढ़ की हड्डी की चोट से उबर रहा हूं. ऐसे में मुझसे ये उम्मीद कैसे की जा सकती है कि मैं इन छोटे-मोटे मामलों को सुलझाने के लिए बैंक जाऊं?&#039;
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क्या कहते हैं नियम?RBI और कोर्ट के नियमों के मुताबिक, कोई भी बैंक आपके पूरे खाते को फ्रीज नहीं कर सकता है. नियमों के अनुसार बैंक ऐसे मांलों में सिर्फ डिस्प्यूटेड अमाउंट पर ही होल्ड लगा सकता है. ना कि पूरे खाते को फ्रीज कर सकता है. जिससे यूजर बाकी की रकम का इस्तेमाल कर सके. यदि आपके खाते को कोई बैंक ऐसे ही किसी मामले में फ्रीज कर देता है, तो 24 घंटे के अंदर आपको बैंक को इस बारे में सूचित करना होगा. जिससे बैंक तत्काल इस मामले को सुलझा सके.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Swiggy&amp;Zomato पर वार्निंग लेबल चाहते हैं कस्टमर्स, सर्वे में हुआ खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप भी ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन फूड खरीदते हैं? अगर हां, तो कैसा रहेगा यदि फूड डिलीवरी एप्स पर आपको पहले से ही वॉर्निंग लेबल दिखने लगें? ये एक अच्छी पहल होगी. तभी तो उपभोक्ताओं ने इसकी मांग की है. हाल ही में एक सर्वे रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें उपभोक्ताओं ने मांग की है कि उन्हें फूड डिलीवरी एप्स पर नमक या सैचुरेटेड फैट वाले खाने पर वॉर्निंग लेबल दिखाया जाए.
सर्वे में क्या आया सामने?दरअसल हाल ही में लोकल सर्कल्स का एक देशव्यापी सर्वे हुआ है. इस सर्वे में सामने आया है कि भारत में करीब 9 में से 8 उपभोक्ता चाहते हैं कि उन्हें प्रोडक्ट्स पर वॉर्निंग दिखाई दै. ये सर्वे देश के 328 जिलों के घरेलू उपभोक्ताओं के बीच किया गया, जिसमें 1.08 लाख से ज्यादा लोगों ने जवाब दिया है.
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वॉर्निंग लेबल चाहते हैं कस्टमर्सइस सर्वे में 89% लोगों ने कहा है कि ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट की लिस्टिंग और उसके डिटेल पेज, दोनों जगह चेतावनी साफ तौर पर दिखाई देना चाहिए. वहीं 2% लोगों ने केवल प्रोडक्ट के डिटेल पेज पर चेतावनी दिखाने का समर्थन किया. इस तरह कुल 91% उपभोक्ता ऑनलाइन चेतावनी के पक्ष में हैं. सिर्फ 7% लोगों का कहना था कि प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर चेतावनी देना ही काफी है.
इतना ही नहीं बल्कि सर्वे में करीब 80% लोगों ने कहा कि अगर किसी पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट में से किसी एक की मात्रा भी ज्यादा है, तो पहले चरण से ही उस पर चेतावनी होनी चाहिए. तो वहीं 88% उपभोक्ताओं का कहना है कि चेतावनी का साइज बड़ा हो, वो साफ दिखाई दे और ग्राहक की नजर तुरंत उस पर जाए. इतनी ही संख्या में लोगों ने कहा कि नियम तय होने के 6 महीने के अंदर कंपनियों को इन्हें लागू कर देना चाहिए.
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क्यों हो रही ये मांग?बीते कई दिनों से FSSAI की कार्रवाई इन एप्स के स्टोर्स पर चल रही है, जिसमें इनके ब्लैक स्टोर में काफी गंदगी और हाईजीन की समस्या नजर आ रही है. इसको लेकर अब ग्राहक भी सचेत हो रहे हैं. ग्राहकों का मानना है कि यदि एप्स में ही इस तरह की वॉर्निंग होगी तो व्यक्ति खरीदने से पहले ही कई बार सोचेगा या नहीं खरीदेगा.
बता दें कि FSSAI पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स के लिए लाल रंग का हेक्सागोन यानी छह कोनों वाला चेतावनी लेबल लाने की तैयारी कर रहा है. इसमें हाई शुगर, हाई सॉल्ट, हाई फैट और हाईली स्वीटन्ड बेवरेज जैसी चेतावनियां शामिल हो सकती हैं.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>चंडीगढ़ में उबर और रैपिडो पर लगा बैन, 6 महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड</title>
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        <description><![CDATA[ यदि आप चंडीगढ़ में रहते हैं और कहीं आने- जाने के लिए कैब का इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए ये खबर अहम है. दरअसल चंडीगढ़ के स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने दोनों कंपनियों के एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए हैं. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और मार्च 2027 तक जारी रहेगा.
क्यों लिया गया फैसला?चंडीगढ़ के स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी STA ने उबर और रैपिडो के लाइसेंस छह महीने के लिए इसलिए निलंबित किए हैं, क्योंकि दोनों कंपनियां चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रिगेटर्स नियन 2025 का लगातार उल्लंघन कर रही थीं. STA ने 8 सितंबर को ये आदेश जारी किया है.
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अधिकारियों का कहना है कि, &#039;कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय और कई मौके दिए गए थे. लेकिन उन्होंने नियमों का पालन करने की जगह केंद्र सरकार की मोटर व्हीकल एग्रिगेटर गाइडलाइंस, 2025 को चंडीगढ़ में लागू करने की मांग की&#039;. इतना ही नहीं बल्कि जुलाई 2026 में कंपनियों की ओर से जमा की गई गाड़ियों की सूची में कुछ नॉन-कमर्शियल यानी निजी वाहन भी शामिल थे. चंडीगढ़ में कैब सेवा के लिए ऐसे वाहनों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है.
नियमों का हो रहा था उल्लंघनइतना ही नहीं STA के सचिव नितीश सिंगला ने बताया कि, उबर और रैपिडो को ड्राइवरों के हेल्थ चेकअप, टर्म इंश्योरेंस, ट्रेनिंग और तय किराए से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था. इसके बावजूद कंपनियों ने नियमों का पालन नहीं किया. साथ ही, इनके खिलाफ नियमों के उल्लंघन की कई शिकायतें भी मिली थीं. इसी वजह से STA ने दोनों कंपनियों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है.
ओला का लाइसेंस पहले से ही है रद्दइससे पहले चंडीगढ़ में ओला और inDrive के लाइसेंस को भी छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जा चुका है. जिसके बाद अब उबर और रैपिडो का लाइसेंस भी रद्द हो जाने की वजह से यहां पर लोगों का काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. देखा जाए तो अब चंडीगढ़ में चार बड़े कैब एग्रीगेटर औला, उबर, रैपिडो और inDrive पर रोक लग गई है.
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अब कैसे चलेगा ट्रांसपोर्ट?इन चारों मेजर कैब्स के सस्पेंड होने के बाद फिलहाल शहर में सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की भारत टैक्सी ही मुख्य कैब सेवा के रूप में उपलब्ध रेहगा. इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों के पास अब ऑप्शन काफी कम हो गए हैं. ऐसे में अब शहर में लोकल ट्रांसपोर्ट को लोग ज्यादा तवज्जो देंगे.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में SAMSUNG ने की छंटनी की घोषणा, 10 दिनों में कई कंपनियों ने 6500 लोगों को निकाला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-samsung-ने-की-छंटनी-की-घोषणा-10-दिनों-में-कई-कंपनियों-ने-6500-लोगों-को-निकाला</link>
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        <description><![CDATA[ नौकरी करने वालों के लिए सितंबर का महीना टेंशन के साथ शुरू हुआ है. दुनियाभर की कई बड़ी तकनीकी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है. भारत में सैमसंग ने भी अपने टेलीविजन कारोबार से जुड़े करीब 80 से 100 अधिकारियों को हटा दिया है. ये छंटनी अलग-अलग स्टेज में की जा रही है और इसमें अलग-अलग पदों पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं. &amp;nbsp;
दूसरी ओर, सितंबर के शुरुआती 10 दिनों में दुनियाभर में 6,300 से ज्यादा तकनीकी नौकरियों में कटौती की खबर सामने आई है. उबर, पेपाल, जोमैटो, एप्पल और ओरेकल जैसी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं और जहां अभी तक छंटनी नहीं हुआ है वो भी अब तैयारी कर रही हैं.&amp;nbsp;
किन लोगों की गई नौकरी?भारत में सैमसंग में जो छंटनी हुई है वो टेलीविजन और घरेलू उपकरण वाले बिजनेस के डिपार्टमेंट से हुई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने निदेशक स्तर के अधिकारियों, टीम प्रमुखों और प्रबंधक समेत कई पदों पर काम करने वाले लोगों को हटाने का आदेश दे दिया है.&amp;nbsp;
कंपनी में एक साथ सारे कर्मचारियों को नहीं हटाया जा रहा है. कर्मचारियों को अलग-अलग स्टेज में बाहर किया जा रहा है. कुछ कर्मचारियों को तो बिना नोटिस पीरियड पूरा किए बिना ही कंपनी छोड़ने के लिए कहा गया है.&amp;nbsp;
FD पर 8.50% का शानदार ब्याज दे रहा यह बैंक, पैसा डूबने का भी नहीं डर
कंपनी क्यों कर रही हैं छंटनी?इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ता खर्च और कारोबार पर दबाव है. कंपनियां चाहती हैं कि कम खर्च में ज्यादा काम हो और मुनाफे पर दबाव कम किया जा सके. सैमसंग के मामले में मेमोरी चिप की कीमत काफी बढ़ गई है. इसके अलावा रुपये की कमजोरी और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने भी कंपनी का खर्च बढ़ाया है. दूसरी तरफ, भारत में स्मार्टफोन की बिक्री में भी कमजोरी देखने को मिली है. &amp;nbsp;
कई बड़ी कंपनियां भी कर रहीं छंटनीसितंबर के शुरुआती 10 दिनों में दुनिया की कई बड़ी तकनीकी कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या घटाई है. उबर करीब 3,300 कर्मचारियों की नौकरी कम करने की योजना में है. यह उसके दुनियाभर के कर्मचारियों का करीब 10 प्रतिशत है.
&amp;nbsp;भारत में पेपाल अपने कर्मचारियों की संख्या में करीब 4 प्रतिशत की कमी करने वाला है. इससे करीब 220 कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है. वहीं जोमैटो और एप्पल ने मिलकर करीब 250 पदों को खत्म किया है. ओरेकल में भी बड़े स्तर पर कर्मचारियों की संख्या घटाने की खबर है.&amp;nbsp;
AI भी बन रही है एक वजहकंपनियों की छंटनी का एक कारण बदलती तकनीक भी है. कंपनियां अब AI तकनीक पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं. इससे कुछ ऐसे काम कम हो रहे हैं जिन्हें पहले बड़ी संख्या में कर्मचारी करते थे. महामारी के दौरान जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती हो गई थी, वो भी कंपनी ठीक कर रही हैं.&amp;nbsp;
ज्यादा पेट्रोल फूंकने वालों के लिए ईरान ने दोगुने किए दाम, सस्ता फ्यूल हुआ महंगा
और छंटनी होगी?मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दीपावली के बाद कर्मचारियों की संख्या को लेकर कंपनी एक बार फिर जांच कर सकती है. फिलहाल मोबाइल कारोबार में बड़ी छंटनी का प्लान नहीं बनाया गया है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>नई पेंशन स्कीम ला रही सरकार, जब पैसा हो तब जमा करें और मनचाही पेंशन पाएं</title>
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        <description><![CDATA[ श्रम मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एक नई यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (Universal Pension Scheme) लाने की तैयारी में है. इस स्कीम के तहत, सब्सक्राइबर्स रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में अपनी बचत का कुछ हिस्सा निकालकर ज़्यादा पेंशन ले सकेंगे और बाद में पेंशन की रकम कम कर सकेंगे, ताकि बची हुई रकम पर ब्याज मिलता रहे.
आमतौर पर रिटायरमेंट के तुरंत बाद पैसों की तुरंत जरूरत पड़ती है. मेडिकल ट्रीटमेंट पर खर्च के अलावा पारिवारिक जिम्मेदारियां भी कई होती हैं जैसे कि बच्चों के हायर स्टडीज के लिए पैसे चाहिए होते हैं या शादी पर बड़े पैमाने पर खर्च होता है. इस दौरान सब्सक्राइबर अपने कुल जमा फंड (Corpus) से ज्यादा बड़ा हिस्सा निकाल सकेंगे. बाकी का जो पैसा रह जाएगा, वह EPFO के पास ही सुरक्षित रहेगा.
उस बची हुई रकम पर सरकार द्वारा तय वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा, जिससे फंड पूरी तरह खत्म होने के बजाय बढ़ता रहेगा. इसमें उम्र बढ़ने के साथ जब वित्तीय आवश्यकताएं कम हो जाएंगी, तो सब्सक्राइबर अपनी मासिक पेंशन की राशि को कम कर सकेंगे ताकि उनका फंड लंबे समय या उम्र के आखिरी पड़ाव तक चलता रहे.&amp;nbsp;
पारंपरिक पेंशन से यह क्यों बेहतर?
फिलहाल नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी स्कीम्स में रिटायरमेंट के समय कम से कम 40% हिस्से से एन्युटी (Annuity) खरीदना अनिवार्य होता है, जिसका एक फिक्स्ड रिटर्न मिलता है और उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता. लेकिन EPFO की इस नई योजना में अनिवार्य एन्युटी के बजाय सब्सक्राइबर को अपने ही पैसों पर पूरा कंट्रोल देने का प्रस्ताव है.
आसान भाषा में कहें, तो जीवन अक्षय या NPS के तहत मिलने वाली एन्युटी में एक बार पैसा जमा करने के बाद आपका फंड लॉक हो जाता है. इस पर आपको महीने का एक फिक्स्ड अमाउंट मिलता रहता है. अगर रिटायरमेंट के बाद आपको अचानक से इमरजेंसी में ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े तो आप फंड के रूप में जमा रकम को निकाल नहीं सकते हैं. वहीं यूनिवर्सल पेंशन स्कीम में आपका पैसा EPFO के पास आपके ही खाते में रहता है. आप अपनी जरूरत के हिसाब से &amp;nbsp;सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) की तरह पैसा निकाल सकेंगे. इमरजेंसी के वक्त आप अपनी मासिक निकासी को बढ़ा सकते हैं या जरूरत पड़ने पर फंड से बड़ी रकम भी निकाल सकते हैं.
टैक्स को लेकर क्या होंगे नियम?
श्रम मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (EPFO 3.0) के लिए टैक्स के नियम मौजूदा EPFO मॉडल के समान रखने पर विचार किया जा रहा है. चूंकि यह योजना अभी ड्राफ्ट फेज में है इसलिए सरकार इसके अंतिम टैक्स नियमों को आधिकारिक लॉन्च के समय ही अधिसूचित करेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>एलन मस्क की बड़ी जीत! स्टारलिंक के भारत आने का रास्ता साफ</title>
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        <description><![CDATA[ Starlink, Oneweb, Reliance Jio जैसी कंपनियों के सेटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ( inter ministerial panel) द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन की ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी देने की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि सचिवों के समूह ने ट्राई की सिफारिश को मंजूरी दे दी है. हालांकि, अभी तक इस बार कोई आधिकारिक तौर पर जानकारी सामने नहीं आई है माना यह जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में कैबिनेट में इसको लेकर फैसला ले सकती है.&amp;nbsp;
कब तक लॉन्च होगी सर्विस?
सूत्रों के अनुसार, सचिवों के समूह से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट &amp;nbsp;के पास भेजा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में अंतिम मंजूरी मिलते ही इसे देश में कानूनी तौर पर लागू कर दिया जाएगा. बता दें कि Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी दिग्गज कंपनियों के पास पहले से ही GMPCS जैसे आवश्यक सैटेलाइट लाइसेंस मौजूद हैं. कैबिनेट से स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों और फीस पर अंतिम मुहर लगते ही ये कंपनियां देश में कमर्शियल सेवाएं लॉन्च करने के बेहद करीब पहुंच जाएंगी.&amp;nbsp;
5 साल के लिए मिलेगा स्पेक्ट्रम
TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, शुरुआती तौर पर कंपनियों को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम 5 साल की अवधि के लिए आवंटित किया जा सकता है. बाजार की स्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार इस अवधि को आगे 2 साल के लिए और बढ़ा सकती है. यानी कुल मिलाकर यह व्यवस्था अधिकतम 7 साल तक चल सकती है.
एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी वैश्विक कंपनियां सामान्यतः 20 साल के लंबे लाइसेंस की मांग कर रही थीं, लेकिन TRAI ने एक नया और उभरता हुआ बाजार होने के कारण समय-सीमा को 5 साल तक सीमित रखने की सिफारिश की. इसके जरिए सरकार यह देखना चाहती है कि शुरुआत में बाजार कैसे काम करता है और सुरक्षा मानकों का पालन कितनी सटीकता से होता है.
चूंकि सैटेलाइट इंटरनेट एक तेजी से बदलती हुई तकनीक है इसलिए 7 साल की सीमा के दौरान सरकार भविष्य में आने वाली नई तकनीकों के हिसाब से नियमों को आसानी से अपग्रेड कर सकेगी. इस दौरान सरकार यह देख पाएगी कि विदेशी और घरेलू कंपनियां भारतीय सुरक्षा नियमों (Data Security) का कितनी गंभीरता से पालन कर रही हैं. 5 साल की इस अवधि के दौरान नियामक ने कंपनियों से उनके Adjusted Gross Revenue (AGR) का 4% से 5% हिस्सा स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में लेने का सुझाव दिया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>20 करोड़ का तोहफा! कर्मचारियों को फ्री में मिलेंगे 3.43 लाख शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ कूलर बनाने वाली मल्टीबैगर कंपनी सिम्फनी लिमिटेड (Symphony Limited) के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. मंगलवार को कारोबार के दौरान BSE में इसके शेयर 13% से ज्यादा उछलकर 652.25% के लेवल पर पहुंच गए. कंपनी के शेयरों में आज आई इस तेजी के पीछे एक बड़ा फैसला है.&amp;nbsp;
दरअसल, सिम्फनी लिमिटेड के फाउंडर प्रमोटर अचल अनिल बाकेरी अपने वर्कर्स को लगभग 3,43,000 इक्विटी शेयर गिफ्ट कर रहे हैं. ये शेयर कंपनी की कुल पूंजी का 0.5% हैं और इनकी कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये है. यह तोहफा एक बार में नहीं, बल्कि अगले 4 साल के दौरान धीरे-धीरे कर्मचारियों को दिया जाएगा, जो उनका कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनोखा तरीका है. इसका मकसद कंपनी के सफर में उनके योगदान को पहचानना और साझा मालिकाना हक की भावना को बढ़ावा देना है.
फ्री में मिलेंगे सारे शेयर
कंपनी के इस पहल की सबसे अच्छी बात यह है कि कर्मचारियों को इन शेयरों के बदले एक भी पैस अपनी जेब से नहीं देना होगा. इसे एक गिफ्ट के तौर पर ट्रांसफर किया जाएगा. इसका कंपनी के कैश फ्लो पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 3,43,000 शेयरों की कीमत लगभग 20 करोड़ के आसपास बैठती हो, लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का बिजनेस बढ़ेगा, शेयरों की कीमत ऊपर जाएगी जैसे कि आज महज इसका ऐलान भर से शेयर 13% तक उछल गए.
अब AC भी बनाएगी कंपनी
कंपनी ने इस बीच अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने का भी फैसला लिया है. कंपनी आगे आने वाले समय में एयर कंडीशनर, एयर फ्यूरिफायर्स, BLDC सीलिंग फैन बाजार में उतारने का प्लान बना रही है. सिम्फनी का देश भर में डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क है. ऐसे में बाजार में लॉन्च होने वाले नए प्रोडक्ट्स का अपना एक मजबूत कन्ज्यूमर बेस होगा. कंपनी को ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी. इससे आने वाले समय में कंपनी के रेवेन्यू में सुधार आएगा और प्रॉफिट मार्जिन में बड़ी ग्रोथ देखी जा सकेगी, जिसका फायदा इसके लॉन्ग टर्म निवेशकों को मिल सकता है.

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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>HDFC ने घटाई लोन की ब्याज दरें, आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों को एक बड़ा तोहफा दिया है. बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए ये खुशखबरी है. दरअसल बैंक ने कुछ अवधि वाले कर्ज पर अपनी MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट में 5 से 10 बेसिस पॉइंट (bps) तक की कटौती की है. ये नई दरें बैंक के द्वारा 7 सितंबर 2026 से लागू हो गई हैं. इससे MCLR से जुड़े कर्ज लेने वाले ग्राहकों को आने वाले समय में ब्याज का बोझ कम होने की उम्मीद है.
कितनी हुईं नई MCLR दरें?1 बेसिस पॉइंट यानी 0.01 प्रतिशत होता है. नई कटौती के बाद HDFC बैंक की MCLR दरें अब 7.90% से 8.60% के बीच हैं. इससे पहले ये दरें 8% से 8.65% तक थीं. आइये देखते हैं इस बदलाव के बाद अब कितनी ब्याज दरे हो गई हैं?

ओवरनाइट MCLR 8% से घटकर 7.90% हो गई हैं.
1 महीने की MCLR 8% से घटकर 7.90% हो गई हैं.
3 महीने की MCLR 8.15% से घटकर 8.05% हो गई हैं.
6 महीने की MCLR 8.30% से घटकर 8.25% हो गई हैं.
1 साल की MCLR 8.40% से घटकर 8.35% हो गई हैं.
2 साल की MCLR 8.55% से घटकर 8.45% हो गई हैं.
3 साल की MCLR 8.65% से घटकर 8.60% हो गई हैं.

इसका मतलब है कि बैंक ने सभी बताई गई अवधि की MCLR दरों में 5 से 10 bps की कमी की है.
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कर्जदारों पर क्या होगा असर?जिन ग्राहकों का लोन HDFC बैंक की MCLR से जुड़ा है, उन्हें ब्याज दर रीसेट होने के बाद कम ब्याज का फायदा मिल सकता है. लेकिन EMI तुरंत कम होगी, ये जरूरी नहीं है. इसका असर लोन की रीसेट अवधि, बैंक द्वारा लिए जाने वाले अतिरिक्त मार्जिन यानी स्प्रेड और लोन एग्रीमेंट पर निर्भर करेगा.
वहीं, जिन लोगों का लोन MCLR से जुड़ा नहीं है, उन पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा. नया लोन लेने वालों को ये भी ध्यान रखना चाहिए कि MCLR सिर्फ ब्याज दर तय करने का एक हिस्सा है. बैंक ग्राहक की प्रोफाइल और लोन के प्रकार के आधार पर अंतिम ब्याज दर तय करता है.
क्या है MCLR?बता दें कि MCLR वो मिनिमम ब्याज दर है, जिसके आधार पर बैंक MCLR से जुड़े कर्ज की ब्याज दर तय करता है. इसे RBI ने 2016 में शुरू किया था. MCLR मुख्य रूप से बैंक के लिए पैसा जुटाने की लागत और कुछ अन्य कारकों पर निर्भर करती है. MCLR से जुड़े कर्ज की ब्याज दर एक तय समय के बाद रीसेट होती है. इसलिए MCLR घटने का मतलब ये नहीं है कि हर ग्राहक की EMI तुरंत कम हो जाएगी. इसका असर ग्राहक के लोन की रीसेट डेट और लोन की शर्तों पर निर्भर करता है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>सोने के बदले धड़ल्ले से मिल रहा कर्ज, NBFC ने बैंकों को पछाड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ सोना अब सिर्फ गहनों की जरूरत नहीं, बल्कि मुश्किल समय में पैसों का सहारा भी बन रहा है. सोने के बदले कर्ज लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसका सबसे ज्यादा फायदा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs को मिला है. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में NBFCs का गोल्ड लोन एक साल में 68.5% बढ़ गया, जबकि जुलाई 2025 में इसकी ग्रोथ 43.9% थी. वहीं, बैंकों के गोल्ड लोन की रफ्तार 136.4% से घटकर 88.1% रह गई.
जुलाई के आखिर तक NBFCs के पास सोने के गहनों के बदले दिए गए करीब 3.54 लाख करोड़ रुपये के कर्ज थे. बैंकों का गोल्ड लोन करीब 5.52 लाख करोड़ रुपये रहा. NBFCs के रिटेल लोन में गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा रहा. इससे साफ है कि सोने के बदले जल्दी कर्ज लेने की मांग बढ़ी है.
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NBFCs का कुल कर्ज भी ज्यादा हुआ&amp;nbsp;
जुलाई में NBFCs का कुल कर्ज 14.9% ज्यादा होकर 59.89 लाख करोड़ रुपये हो गया. एक साल पहले इसकी ग्रोथ 10.6% थी. लेकिन, बैंकों के कुल कर्ज में 19.1% का इजाफा हुआ. NBFCs के रिटेल लोन में भी तेजी आई और इसकी ग्रोथ जुलाई में 21.4% रही, जो एक साल पहले 13.7% थी.
रिटेल लोन में हाउसिंग लोन 11.9% ज्यादा होकर 8.55 लाख करोड़ रुपये हो गया. गाड़ी के लोन की ग्रोथ 15.1% रही. वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए दिए गए कर्ज में 51.5% की इजाफा दर्ज की गई.
इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की रफ्तार घटी
दूसरी तरफ, इंडस्ट्री को दिए जाने वाले कर्ज की ग्रोथ 9.3% से घटकर 7.4% रह गई. &amp;nbsp;इंफ्रास्ट्रक्चर लोन का इजाफा भी 8.1% से कम होकर 6.2% हो गई. पावर सेक्टर में कर्ज की ग्रोथ 12.3% से घटकर 6.9% रही.
सर्विस सेक्टर के कर्ज की ग्रोथ भी 24.5% से घटकर 15.2% रह गई. लेकिन, कमर्शियल रियल एस्टेट को दिए कर्ज में 22.3% की मजबूत बढ़ोतरी हुई. वहीं, ट्रेड से जुड़े कर्ज की ग्रोथ 14.7% और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कर्ज की ग्रोथ 10.7% रही.
कृषि कर्ज में भी जोरदार इजाफा&amp;nbsp;
कृषि और उससे जुड़ी कामों के लिए कर्ज में अच्छी तेजी आई. जुलाई में इसकी ग्रोथ 18% रही, जबकि एक साल पहले ये सिर्फ 5.4% थी. इस सेक्टर पर कुल बकाया कर्ज 80,271 करोड़ रुपये रहा.
कुल मिलाकर, NBFCs में रिटेल लोन की मांग बढ़ी है और इसमें गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ रहा है. जुलाई में कुल रिटेल लोन 26.06 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले ये 21.46 लाख करोड़ रुपये था.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>आपके सिलेंडर में है अमेरिका की गैस, देश में US से आ रही 50% LPG</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आपके-सिलेंडर-में-है-अमेरिका-की-गैस-देश-में-us-से-आ-रही-50-lpg</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में फरवरी के बाद से LPG को लेकर काफी कश्मकश रही है. कुछ समय सब ठीक चला लेकिन जैसे ही ईरान- यूएस के युद्ध के होर्मुज ब्लॉक हुआ और वहां से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, तब देश में तेज- गैस की काफी कमी देखी गई. जिसके बाद इससे बचने के लिए सरकार ने अब अमेरिका पर LPG गैस को लकेर निर्भरता बढ़ा दी है. जिसके चलते अगस्त में भारत के LPG आयात में अमेरिका सबसे बड़ा सप्लायर बना रहा.
हालांकि, इस दौरान खाड़ी देशों से LPG की सप्लाई में तेज बढ़ोतरी हुई. ये जानकारी Kpler और पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालाइसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों से सामने आई है.
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कितना रहा कुल LPG आयात?Kpler के मुताबिक अगस्त में भारत का कुल LPG आयात जुलाई के मुकाबले 14.5% बढ़ा. इस दौरान खाड़ी देशों से आने वाली LPG की मात्रा लगभग दोगुनी हो गई. इसके कारण भारत के कुल LPG आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी जुलाई के 16.4% से बढ़कर अगस्त में 29.7% हो गई.
अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायरखाड़ी देशों से सप्लाई बढ़ने के बावजूद अमेरिका भारत के LPG आयात में सबसे आगे रहा. अगस्त में अमेरिका से भारत को 7,24,150 टन LPG मिली. हालांकि, ये जुलाई के मुकाबले 25.8% कम है. फिर भी भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा रही.
UAE से सबसे ज्यादा बढ़ी सप्लाईखाड़ी देशों में UAE से LPG की सप्लाई सबसे ज्यादा बढ़ी. अगस्त में UAE ने भारत को 1,98,860 टन LPG भेजी, जो जुलाई के मुकाबले 94.9% ज्यादा है. वहीं, कुवैत से LPG आयात जुलाई के 44,230 टन से बढ़कर अगस्त में 1,14,580 टन हो गया. कतर से भी सप्लाई बढ़ी. वहां से भारत को अगस्त में 65,400 टन LPG मिली, जबकि जुलाई में ये मात्रा सिर्फ 19,320 टन थी.
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अगस्त में बढ़ी LPG की खपतबता दें कि अगस्त में भारत में LPG की खपत भी बढ़ी है. LPG की मांग जुलाई के मुकाबले 3.2% बढ़कर 24.2 लाख टन हो गई. ये पिछले 6 महीनों में सबसे ज्यादा खपत है. हालांकि, पिछले साल अगस्त की तुलना में LPG की मांग अभी भी 16% कम रही.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission: कम फिटमेंट फैक्टर के बाद भी बढ़ सकती है सैलरी, जानिए कैसे होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर्मचारी वर्ग कर रहा है. इसको लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. इसी बीच खबरें हैं कि फिटमेंट फैक्टर इस बार कम भी हो सकता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपकी सैलरी कम बढ़ेगी. कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इसका जवाब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में भी मिलेगा. अगर इस बार फिटमेंट फैक्टर 3% से बढ़ाकर 5% से 7% किया जाता है, तो लंबे समय में बेसिक सैलरी पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
इसी मुद्दे को लेकर 8वें वेतन आयोग की दो दिन की सलाह मशविरा बैठक 7 सितंबर से चेन्नई में शुरू हुई है. इसमें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और काम करने की स्थितियों पर चर्चा हो रही है. इसके बाद 9 सितंबर को पुडुचेरी में भी बैठक होगी.
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5% से 7% इजाफा की मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने साल के इजाफा की दर बढ़ाने की मांग की है. नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स ने 6% साल का इजाफा मांगा है. ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 7% की मांग रखी है. वहीं इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 5% इजाफा के साथ 4.0 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है.
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है. 2.15 फिटमेंट फैक्टर और 3% साल का इंक्रीमेंट के हिसाब से पहले साल बेसिक पे करीब 66,435 रुपये हो सकती है. 5वें साल ये 74,773 रुपये और 10वें साल 86,683 रुपये तक पहुंच सकती है.
वहीं बिना फिटमेंट फैक्टर के 5% साला के बढ़ोतरी पर 10 साल बाद बेसिक सैलरी करीब 48,867 रुपये, 7% पर 59,015 रुपये और 10% पर 77,812 रुपये हो सकती है.
35 और 40 हजार की बेसिक सैलरी का हिसाब
35,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 2.15 फिटमेंट फैक्टर के साथ 10वें साल बेसिक पे करीब 1,01,130 रुपये हो सकती है. 40,000 रुपये की बेसिक सैलरी के मामले में ये करीब 1,15,577 रुपये हो सकती है. बिना फिटमेंट फैक्टर के 10% साल के बढ़ोतरी पर ये रकम 90,781 रुपये और 1,03,750 रुपये होगी.
लेकिन, असली सैलरी 8वें वेतन आयोग की आखरी सिफारिशों में तय होने वाले फिटमेंट फैक्टर और साल के इजाफे पर डिपेंड करेगी.
यह भी पढ़े:सोने के बदले धड़ल्ले से मिल रहा कर्ज, NBFC ने बैंकों को पछाड़ा
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, कम, फिटमेंट, फैक्टर, के, बाद, भी, बढ़, सकती, है, सैलरी, जानिए, कैसे, होगा, फायदा</media:keywords>
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        <title>बैंक से चोरी हुआ गिरवी सोना तो कैसे मिलेगा मुआवजा और ब्याज?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बैंक-से-चोरी-हुआ-गिरवी-सोना-तो-कैसे-मिलेगा-मुआवजा-और-ब्याज</link>
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        <description><![CDATA[ अक्सर सोने का लोन लेते समय उसके बदले बैंक या लोन देने वाले कंपनी के पास गहने गिरवी रखने पड़ते हैं. ऐसे में अगर कर्ज चुकाने से पहले बैंक की कस्टडी में रखे गहने चोरी या गायब हो जाएं, तो यह सवाल उठता है कि नुकसान की भरपाई कौन करेगा और मुआवजा कैसे मिलेगा. हालांकि, इस मामले में बैंक की जिम्मेदारी और मुआवजे की रकम कई बातों पर निर्भर करता है.&amp;nbsp;
गिरवी रखा सोना चोरी होने पर क्या करें?
अगर आपको पता चलता है कि आपके गिरवी रखे सोने चोरी हो गए हैं, तो तुरंत बैंक को इसके बारे में जानकारी दें. साथ ही बैंक से घटना की लिखित जानकारी और पुलिस में दर्ज शिकायत या FIR की कॉपी मांगे. बैंक के साथ हुई बातचीत और सभी डॉक्युमेंट्स को अपने पास सुरक्षित रखें. बातचीत के दौरान बैंक से लिखित तौर पर पूछें कि किस स्थिति में चोरी हुए और नुकसान की भरपाई के लिए क्या प्रोसेस अपनाई जा रही है.&amp;nbsp;
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मुआवजा पाने के लिए रखें ये डॉक्युमेंट
सोना जमा करते समय मिले गिरवी रसीद, गोल्ड लोन एग्रीमेंट और गहनों की वैल्यूएशन रिपोर्ट जैसी डॉक्युमेंट को अपने पास संभाल कर रखें. इन डॉक्युमेंट के जरिए यह साबित किया जा सकता है कि बैंक के पास कौन-से गहने जमा किए गए थे और उनका वजन और कीमत कितनी थी. इसके अलावा उन सोने का फोटो और खरीदारी की बिल को भी महफूज रखें.&amp;nbsp;
क्या बैंक को ब्याज समेत पैसा देना होगा?
आमतौर पर चोरी होने मुआवजे की रकम और उस पर ब्याज का फैसला मामले की परिस्थितियों, बैंक की जिम्मेदारी, अनुबंध, बीमा और लागू कानून के मुताबिक तय की जाती है. ऐसे में फिलहाल यह कहना सही नहीं है कि हर मामले में सोना की पूरी कीमत या ब्याज अपने आप मिल जाएगा.&amp;nbsp;
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 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैंक, से, चोरी, हुआ, गिरवी, सोना, तो, कैसे, मिलेगा, मुआवजा, और, ब्याज</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>7 सितंबर को कितने रुपए लीटर मिल रहा है पेट्रोल&amp;डीजल, जानें अपने शहर तक का ताजा भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/7-सितंबर-को-कितने-रुपए-लीटर-मिल-रहा-है-पेट्रोल-डीजल-जानें-अपने-शहर-तक-का-ताजा-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/7-सितंबर-को-कितने-रुपए-लीटर-मिल-रहा-है-पेट्रोल-डीजल-जानें-अपने-शहर-तक-का-ताजा-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप आज अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. 7 सितंबर 2026 को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, यानी राजधानी दिल्ली में आज भी पेट्रोल और डीजल पुराने दाम पर ही मिल रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपए प्रति लीटर, जबकि डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर है. ऐसे में गाड़ी चलाने वालों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में तेल कंपनियां कीमतों में कोई बदलाव करती हैं या नहीं.
शहर अनुसार पेट्रोल के भाव-&amp;nbsp;



शहर का नाम
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;102.12 रुपए


मुंबई
111.31 रुपए


कोलकाता
113.51 रुपए


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपए


बरेली
102.25 रुपए


पटना
113.35 रुपए


रांची
106.12 रुपए


आगरा
101.90 रुपए


ग्वालियर
114.30 रुपए



बैंक से चोरी हुआ गिरवी सोना तो कैसे मिलेगा मुआवजा और ब्याज?
शहर अनुसार डीजल का भाव-&amp;nbsp;



शहर का नाम
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
95.20 रुपए


मुंबई
97.97 रुपए


कोलकाता
99.82 रुपए


चेन्नई&amp;nbsp;
99.56 रुपए


बरेली
95.46 रुपए


पटना
99.36 रुपए


रांची
100.49 रुपए


आगरा
95.02 रुपए


ग्वालियर
99.35 रुपए



क्यों नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम?
पेट्रोल और डीजल की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपए और डॉलर की विनिमय दर, टैक्स और अन्य लागत शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बदलाव का असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है. हालांकि, किसी दिन कीमत स्थिर रहने का मतलब यह नहीं है कि आगे भी यही रेट बने रहेंगे. तेल कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से कीमतों में बदलाव कर सकती हैं.
कैसे चेक करें पेट्रोल-डीजल का रेट?&amp;nbsp;
अगर आप अपने शहर का पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट जानना चाहते हैं, तो घर से निकलने से पहले ताजा रेट चेक कर सकते हैं. इसके लिए एसएमएस (92249 92249) पर RSP और डीलर कोड लिखकर भेज सकते हैं. बता दें कि अलग-अलग शहरों में स्थानीय टैक्स और अन्य कारणों से पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सितंबर, को, कितने, रुपए, लीटर, मिल, रहा, है, पेट्रोल-डीजल, जानें, अपने, शहर, तक, का, ताजा, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आज कितनी महंगी हुई रसोई गैस, जानें 14 और 19 किलो LPG सिलेंडर कितने का मिलेगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-कितनी-महंगी-हुई-रसोई-गैस-जानें-14-और-19-किलो-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिलेगा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-कितनी-महंगी-हुई-रसोई-गैस-जानें-14-और-19-किलो-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिलेगा</guid>
        <description><![CDATA[ रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए आज राहत की खबर है. 7 सितंबर 2026 को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है. दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर आज भी 942 रुपए में मिल रहा है.
महीने की शुरुआत में गैस सिलेंडर के दाम में बदलाव होता है या नहीं, इस पर आम लोगों की नजर रहती है. खासकर घर का बजट संभालने वाले परिवारों के लिए रसोई गैस का खर्च हर महीने के जरूरी खर्चों में शामिल होता है. ऐसे में कीमत स्थिर रहने से फिलहाल लोगों को एक्स्ट्रा बोझ नहीं उठाना पड़ेगा.
शहर अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर का दाम-&amp;nbsp;



शहर
घरेलू सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


कोलकाता
968.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


चेन्नई
957.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


बेंगलुरु
944.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


लखनऊ
942.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


नोएडा&amp;nbsp;
942.80 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


वाराणसी
943.10 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


रांची
999.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम



7 सितंबर को कितने रुपए लीटर मिल रहा है पेट्रोल-डीजल, जानें अपने शहर तक का ताजा भाव
शहर अनुसार, कमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम-&amp;nbsp;



शहर
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
2,747.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
2,701.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता
2,884.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चेन्नई
2,916.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बेंगलुरु
2,831.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


लखनऊ
2755.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


नोएडा&amp;nbsp;
2760.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


वाराणसी
2757.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


रांची
2,933.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम



कमर्शियल सिलेंडर हुआ कितना महंगा?घरेलू गैस सिलेंडर के दाम भले ही स्थिर हैं, लेकिन होटल, रेस्तरां, ढाबे और दूसरे कारोबारी इस्तेमाल के लिए लिए जाने वाले गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपए हो गई है. पिछले महीने यह सिलेंडर 2738 रुपए में मिल रहा था, यानी इसकी कीमत में 9.50 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई है.
कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने का असर होटल और खाने-पीने से जुड़े कारोबार के खर्च पर पड़ सकता है. कारोबारियों के लिए ईंधन की लागत बढ़ने से कुल खर्च भी बढ़ सकता है.
बैंक से चोरी हुआ गिरवी सोना तो कैसे मिलेगा मुआवजा और ब्याज?
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, कितनी, महंगी, हुई, रसोई, गैस, जानें, और, किलो, LPG, सिलेंडर, कितने, का, मिलेगा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अमेरिका को पछाड़ने वाला है भारत, 2 साल में बनेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अमेरिका-को-पछाड़ने-वाला-है-भारत-2-साल-में-बनेगा-दुनिया-का-दूसरा-सबसे-बड़ा-मेट्रो-रेल-नेटवर्क</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अमेरिका-को-पछाड़ने-वाला-है-भारत-2-साल-में-बनेगा-दुनिया-का-दूसरा-सबसे-बड़ा-मेट्रो-रेल-नेटवर्क</guid>
        <description><![CDATA[ देश में लगातार नए मेट्रो मार्ग शुरू किए जा रहे हैं और पुराने रास्तों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है. इसी का नतीजा है कि भारत में मेट्रो रेल नेटवर्क की टोटल लंबाई अब 1170 किलोमीटर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;सरकार का अनुमान है कि जिस रफ्तार से देश में मेट्रो रेल का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए अगले दो साल में भारत मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है. ऐसा हुआ तो चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क वाला देश बन जाएगा.&amp;nbsp;
अमेरिका और भारत के बीच कितना अंतर?केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के मुताबिक, अमेरिका में इस समय करीब 1386 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क है. वहीं भारत में इसकी लंबाई 1170 किलोमीटर हो चुकी है.
इस हिसाब से दोनों देशों के बीच करीब 216 किलोमीटर का अंतर बचा है. भारत में जिस तेजी से नए मार्ग बनाए जा रहे हैं, उसे देखते हुए सरकार को उम्मीद है कि ये अंतर अगले दो साल में ही खत्म किया जा सकता है.
आज कितना महंगा हुआ रसोई गैस, जानें 14 और 19 किलो LPG सिलेंडर कितने का मिलेगा
2014 से अबतक कितना बढ़ा मेट्रो नेटवर्क?
भारत में मेट्रो रेल का विस्तार पिछले कुछ सालों में काफी तेजी से हुआ है. साल 2014 में देश के केवल 5 शहरों में करीब 245 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क था. अब मेट्रो रेल का विस्तार 26 शहरों तक हो चुका है और नेटवर्क की टोटल लंबाई 1170 किलोमीटर पहुंच गई है. यानी करीब एक दशक में देश में मेट्रो रेल की पहुंच और लंबाई दोनों में बड़ा इजाफा हुआ है.
कौन सबसे आगे?मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई के मामले में चीन अभी दुनिया में सबसे आगे है. चीन में करीब 8000 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क है. इसके बाद अमेरिका और भारत का नंबर आता है.
भारत का टार्गेट अब सिर्फ बड़े महानगरों तक मेट्रो रेल नेटवर्क देने का नहीं है. देश के कई दूसरे शहरों में भी मेट्रो रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है. नए रास्ते तैयार होने से भारत के मेट्रो नेटवर्क की लंबाई और बढ़ेगी.
7 सितंबर को कितने रुपए लीटर मिल रहा है पेट्रोल-डीजल, जानें अपने शहर तक का ताजा भाव
इंदौर में कैसे हैं हालात?मेट्रो रेल के बढ़ते नेटवर्क में मध्य प्रदेश का इंदौर भी शामिल हो गया है. यहां मेट्रो रेल सेवा के नए मार्ग का हाल ही में उद्घाटन किया गया. इसके बाद इंदौर में मेट्रो रेल करीब 17 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हो गया है, जिसमें नए मार्ग में 16 स्टेशन शामिल हैं.&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अमेरिका, को, पछाड़ने, वाला, है, भारत, साल, में, बनेगा, दुनिया, का, दूसरा, सबसे, बड़ा, मेट्रो, रेल, नेटवर्क</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कम से कम 58,000 पेंशन की उम्मीद, कल 8वें वेतन आयोग की एक और बड़ी बैठक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कम-से-कम-58000-पेंशन-की-उम्मीद-कल-8वें-वेतन-आयोग-की-एक-और-बड़ी-बैठक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कम-से-कम-58000-पेंशन-की-उम्मीद-कल-8वें-वेतन-आयोग-की-एक-और-बड़ी-बैठक</guid>
        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग के लिए बातचीत की अगली बैठकें 7 सितंबर को चेन्नई में शुरू हो रही हैं. दो दिनों तक चलने वाली इन बैठकों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित पक्ष वेतन, पेंशन और भत्तों में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे. हाल ही में जयपुर में हुई दो दिवसीय बैठक के बाद चेन्नई की यह बैठक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है.&amp;nbsp;
चेन्नई में किन मुद्दों पर छिड़ेगी बहस?&amp;nbsp;
पिछली बार की तरह इस बार भी बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा सालाना सैलरी इंक्रीमेंट का होगा. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा 3% का इंक्रीमेंट नाकाफी है. ऐसे में अब यूनियनों ने इसे बढ़ाकर 5% से 7% करने की मांग रखी है, जिससे बेसिक सैलरी में इजाफा हो.&amp;nbsp;
कर्मचारी संगठन 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर के मुकाबले 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि मिनिमम बेसिक पे को 18,000 से बढ़ाया जा सके. इस बैठक में पेंशनर संगठनों की ओर से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग के साथ-साथ लेवल 4 से 7 तक के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन दरों को बेहतर करने पर गहन चर्चा होगी. बैठक में लॉजिस्टिक्स से संबंधित उन समस्याओं पर भी चर्चा करेंगे जिनका सामना केंद्र सरकार के कई कर्मचारियों को अपनी पोस्टिंग और ट्रांसफर के दौरान करना पड़ता है.&amp;nbsp;
मिनिमम पेंशन में भी हो बढ़ोतरी
8वें वेतन आयोग के तहत पेंशनर्स के लिए पेंशन अमाउंट में भी बढ़ोतरी की मांग है. उनकी मांग है कि नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद लेवल 7 के कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर 58,000 या उससे भी अधिक की बेसिक पेंशन मिल सके. इकोनॉमिक टाइम्स की हालिया रिपोर्ट और पेंशन कैलकुलेशन के फॉर्मूले के अनुसार, यह आंकड़ा पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार अंतिम रूप से कौन सा फिटमेंट फैक्टर तय करती है और कर्मचारी रिटायरमेंट के समय पे-मैट्रिक्स के किस स्टेज पर है. 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल 7 (ग्रेड पे 4600 रुपये) की शुरुआती बेसिक सैलरी 44,900 से लेकर अधिकतम 1,42,400 रुपये तक होती है.&amp;nbsp;
सितंबर में बैठकों का पूरा शेड्यूल
7-8 सितंबर 2026- चेन्नई में दक्षिण भारत के कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से बातचीत
9 सितंबर 2026- पुडुचेरी में स्थानीय केंद्र शासित प्रदेश के यूनियनों के साथ परामर्श
16-18 सितंबर 2026- चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ के हितधारकों से चर्चा
7-8 अक्टूबर 2026- बेंगलुरु में कर्नाटक क्षेत्र के संगठनों के साथ बैठक

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जिसका था डर वही हुआ, 100 डॉलर के बेहद करीब पहुंचा क्रूड; अब आगे क्या?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कम, से, कम, 58, 000, पेंशन, की, उम्मीद, कल, 8वें, वेतन, आयोग, की, एक, और, बड़ी, बैठक</media:keywords>
    </item>
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        <title>सस्ती मिल रही प्याज, इन 17 शहरों में 4000 टन बफर स्टॉक लाई सरकार</title>
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        <description><![CDATA[ प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए अब राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने बाजार में प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अपने बफर स्टॉक से प्याज की रियायती बिक्री शुरू कर दी है. सरकार की ओर से 17 शहरों में अब तक करीब 4,000 टन बफर बेचा जा चुका है. बड़ी बात यह है कि चुनिंदा शहरों में ग्राहकों को प्याज 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
सरकार का कहना है कि इस कदम का असर अब बाजार में भी दिखाई देने लगा है और प्याज की कीमतों में कुछ कमी आई है. ऐसे में आने वाले दिनों में नई खरीफ फसल की अवाक शुरू होने के बाद कीमतों में और राहत मिलनी की उम्मीद है.&amp;nbsp;
सरकार ने कितना प्याज स्टॉक कर रखा है?
केंद्र सरकार ने साल 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार कर रखा है. ऐसे में इस प्याज को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग राज्यों और शहरों में भेजा जा रहा है. सरकार अपनी एजेंसियों NCCF और NAFED स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की सप्लाई कर रही है.
प्याज को उत्पादक राज्यों से बड़े शहरों तक पहुंचाने के लिए ट्रकों के अलावा &#039;कंडा एक्सप्रेस&#039; जैसी स्पेशल ट्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि दिल्ली और चेन्नई तक बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाया जा चुका है. अब गुवाहाटी के लिए भी प्याज भेजने की तैयारी की जा रही है.
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35 रुपये किलो में कहां मिल रहा प्याज?
सरकार ने कुछ ऐसे शहरों को चुना है जहां प्याज की कीमतें काफी ज्यादा थी. सरकार की ओर से इन जगहों पर बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर बेचा जा रहा है. NCCF के मुताबिक अब तक करीब 1,500 टन प्याज खुदरा बिक्री के जरिए बेचा जा चुका है.&amp;nbsp;
किन राज्यों में हो रही बफर प्याज की बिक्री?

दिल्ली-एनसीआर
तमिलनाडु
उत्तर प्रदेश
केरल
राजस्थान
पंजाब
ओडिशा

सरकार के कदम से कितनी गिरी प्याज की कीमत?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रियायती बिक्री शुरू होने से पहले 28 अगस्त को प्याज का आखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 48.50 रुपये प्रति किलो था. वहीं 5 सितंबर को यह कीमत बढ़कर करीब 50.79 रुपये प्रति किलो हो गया था. वहीं अलग-अलग शहरों में 5 सितंबर को प्याज के दाम इस तरह रहे हैं.&amp;nbsp;

दिल्ली: 58 रुपये प्रति किलो
मुंबई: 53 रुपये प्रति किलो
चेन्नई: 63 रुपये प्रति किलो
रांची: 40 रुपये प्रति किलो
औसत थोक कीमत: 42.79 रुपये प्रति किलो

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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सस्ती, मिल, रही, प्याज, इन, शहरों, में, 4000, टन, बफर, स्टॉक, लाई, सरकार</media:keywords>
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        <title>DA Hike: त्योहारों से पहले बरसेगा पैसा, 1 से लागू होगा नया महंगाई भत्ता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-त्योहारों-से-पहले-बरसेगा-पैसा-1-से-लागू-होगा-नया-महंगाई-भत्ता</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स है, तो यह जानकारी आपके काम की है. हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते को लेकर एक बार फिर बड़ी अपडेट सामने आई है. जुलाई 2026 का AICPI-IW इंडेक्स जारी किया जा चुका है, जिसमें पिछले महीने के मुकाबले 1.3 अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस आंकड़े को देखते हुए अब कर्मचारियों की नजर अगले DA संशोधन पर है. उम्मीद है कि त्योहारों से पहले सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकरी है.&amp;nbsp;
श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में AICPI-IW इंडेक्स 1.3 अंक से बढ़कर 153.2 पर पहुंच गया. वहीं, जुलाई2026 में खुदरा महंगाई की सालाना दर 4.57% हो गई, जबकि एक साल पहले जुलाई 2025 में यह 2.66% थी. ऐसे में आने वाले समय में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर कर्मचारियों की नजर बनी हुई है.&amp;nbsp;
क्या होता है AICPI-IW इंडेक्स?
AICPI-IW यानी ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स हर महीने जारी किया जाता है. इसके जरिए औद्योगिक कर्मचारियों के रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजों और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव का पता लगाया जाता है. हालांकि इस साल की शुरुआती महीनों में भी इंडेक्स में लगातार बढ़ोतरी देखनी को मिली है.
सस्ती मिल रही प्याज, इन 17 शहरों में 4000 टन बफर स्टॉक लाई सरकार

मार्च 2026 में AICPI-IW 149.1 रहा.&amp;nbsp;
अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 149.9 हुआ.
मई में इंडेक्स 150.8 पहुंचा.&amp;nbsp;
जून में यह 151.9 रहा.
जुलाई 2026 में इंडेक्स 153.2 रहा.

यह आंकड़ा देश के 88 प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के 317 बाजारों से जुटाई गई खुदरा दामों के आधार पर तैयार किया जाता है.
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है ये इंडेक्स?
AICPI-IW में होने वाली हलचल पर केंद्रीय कर्मचारी इसलिए नजर रखते हैं क्योंकि इसका असर उनके DA और पेंशनभोगियों के DR पर पड़ता है. 7वें वेतन आयोग के तहत DA में संशोधन 12 महीने के औसत AICPI-IW के आधार पर की जाती है, यानी साल में दो बार किया जाता है. आमतौर पर इसका ऐलान मार्च और अक्टूबर के आसपास होता है.
कितना बढ़ सकता है महंगाई भत्ता (DA)?
AICPI-IW के हालिया आंकड़ों को देखते हुए इस बार कर्मचारियों को DA में करीब 3% से 4% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है. हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है. असल बढ़ोतरी AICPI-IW की बाकी आंकड़ों और केंद्र सरकार की आखिरी मंजूरी के बाद तय होगी.
कम से कम 58,000 पेंशन की उम्मीद, कल 8वें वेतन आयोग की एक और बड़ी बैठक
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Old Monk की बोतल में कितने फीसदी Rum होती है? कोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी Old Monk की बोतल को Rum समझकर खरीदते हैं, तो इन दिनों इससे जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है. महाराष्ट्र के बॉम्बे हाईकोर्ट में इसकी बिक्री को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान इसके तैयार होने के तरीके को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अदालत में बताया कि जिस प्रॉडएक्ट को Rum के नाम से बेचा जा रहा है, उसमें असली Rum की मात्रा बहुत कम है. यही वजह है कि महाराष्ट्र में इसकी बिक्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ है.&amp;nbsp;
दरअसल, यह मामला Old Monk के निर्माता मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है. कंपनी ने महाराष्ट्र में बिक्री पर रोक लगाने वाले FSSAI के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है. कंपनी के खोपोली प्लांट के निरीक्षण के बाद यह कारवाई की गई थी.&amp;nbsp;
Old Monk में कितनी असली Rum होने का दावा?
FSSAI की ओर से अदालत में यह दावा किया गया कि इसमें करीब 95% एक्स्ट्रा-न्यूट्रल स्पिरिट (ENA) और 5% से कम असली रम है. इसके साथ ही एजेंसी ने बोतल पर लिखे &amp;lsquo;7 साल पुरानी ब्लेंडेड रम&amp;rsquo; जैसे दावे पर भी सवाल उठाया. FSSAI का तर्क है कि न्यूट्रल स्पिरिट में Rum फ्लेवर मिलाकर तैयार किए गए प्रॉडक्ट को सिर्फ &#039;Rum&#039; के तौर पर बेचना नियमों के मुताबिक सही नहीं है.&amp;nbsp;
सस्ती मिल रही प्याज, इन 17 शहरों में 4000 टन बफर स्टॉक लाई सरकार
कंपनी ने कोर्ट में क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपने पैकेजिंग लेबल में बदलाव करने की बात कही. नए लेबल पर &amp;lsquo;Added Flavour&amp;rsquo; को प्रमुखता से दिखाने और &amp;lsquo;7 साल पुरानी ब्लेंडेड रम&amp;rsquo; लेबल को हटाने पर भी सहमति जताई. हालांकि, कंपनी ने गुरुवार को संशोधित लेबल अदालत के सामने भी पेश कर दिए है.&amp;nbsp;
कोर्ट ने Old Monk के पुराने स्टॉक पर क्या कहा?
अदालत ने कहा कि अभी पुराने स्टॉक की बिक्री की इजाजत देना करीब आखिरी राहत देने जैसा होगा. ऐसे में अगर कोर्ट यह तय करता है कि बिक्री की इजाजत नहीं दी जाती है, तो स्थिति मुश्किल हो सकती है. वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 8 सितंबर तक टाल दी है.
DA Hike: त्योहारों से पहले बरसेगा पैसा, 1 से लागू होगा नया महंगाई भत्ता
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Old, Monk, की, बोतल, में, कितने, फीसदी, Rum, होती, है, कोर्ट, में, बड़ा, खुलासा</media:keywords>
    </item>
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        <title>क्या थम गई है सोने की रफ्तार या कीमतों पर लगा मामूली सा ब्रेक, रिपोर्ट में खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-थम-गई-है-सोने-की-रफ्तार-या-कीमतों-पर-लगा-मामूली-सा-ब्रेक-रिपोर्ट-में-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ सोने की कीमतों में हाल के दिनों में भले ही उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गोल्ड का बुल रन खत्म हो गया. गोल्डमैन सैक्स से जुड़े टोनी किम के मुताबिक, फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण फिलहाल गोल्ड की डिमांड में कमी आई है. हालांकि, आने वाले समय में इसमें फिर तेजी लौट सकती है.
इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी को मानी जा रही है. ऐसे में मौजूदा दबाव को स्थायी गिरावट मानना जल्दबाजी होगी. टोनी किम का कहना है कि एक बार बाजार में अनिश्चितता कम होने के बाद गोल्ड में फिर से तेज उछाल देखनी को मिल सकता है.&amp;nbsp;
किस भाव पर सोने में निवेश का मौका?
टोनी किम के मुताबिक, अगर सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस (Dollar Per Ounce) तक आती है, तो निवेशकों के लिए खरीदारी का बेहतर मौका बन सकता है. भारतीय मुद्रा में यह कीमत करीब 1.34 लाख रुपये प्रति औंस के आसपास बैठती है. फिलहाल इस समय गोल्ड का रेट करीब 4,479 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है.
DA Hike: त्योहारों से पहले बरसेगा पैसा, 1 से लागू होगा नया महंगाई भत्ता
सोने की तेजी पर क्यों लगा है ब्रेक?
जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में कुछ कमजोरी देखने को मिली है. टोनी किम के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इसे लेकर बाजार में काफी अनिश्चितता बनी हुई है. इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी ने बाजार पर भी काफी दबाव डाला है. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर में मजबूती आने से भी सोने पर असर पड़ा है.
1 सितंबर को सोने की कीमत में करीब 2% की गिरावट देखने को मिली थी. इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर में मजबूती आने से भी सोने पर असर पड़ा है. वहीं स्पॉट गोल्ड का रेट करीब 2.4% से गिरकर 4242.20 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था.
Old Monk की बोतल में कितने फीसदी Rum होती है? कोर्ट में बड़ा खुलासा
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एंटीलिया में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण भजनों पर झूम उठीं नीता अंबानी संग बहुएं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एंटीलिया-में-जन्माष्टमी-की-धूम-कृष्ण-भजनों-पर-झूम-उठीं-नीता-अंबानी-संग-बहुएं</link>
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        <description><![CDATA[ बिजनसमैन मुकेश अंबानी का परिवार अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के साथ-साथ त्योहारों को पारंपरिक अंदाज में मनाने के लिए भी मशहूर है. हर साल की तरह इस बार भी मुंबई स्थित अपने आलीशान घर एंटीलिया (Antilia) में अंबानी परिवार ने जन्माष्टमी का त्योहार बेहद खास अंदाज में मनाया है. एंटीलिया में हुए इस सेलिब्रेशन की कुछ झलकियां अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें परिवार की महिलाएं भगवान कृष्ण भक्ति में डूबी हुई नजर आ रही हैं.
दरअसल, जन्माष्टमी के इस खास मौके पर नीता अंबानी अपनी बेटी ईशा अंबानी और बहुओं श्लोका मेहता व राधिका मर्चेंट के साथ भक्ति गीतों पर नृत्य करती काफी खूबसूरत अंदाज में दिखाई दे रही है. लेकिन पूजा के लिए तैयार नीता अंबानी हमेशा की तरह अपने खूबसूरत ट्रेडिशनल लुक के कारण लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.&amp;nbsp;
कृष्ण भजनों पर साथ झूमीं अंबानी परिवार की महिलाएं
जन्माष्टमी सेलिब्रेशन के मौके पर अंबानी परिवार की महिलाओं ने कृष्ण भक्ति में काफी रंग जमाया. वहीं वीडियो में नीता अंबानी भगवान कृष्ण की पूजा करती दिखाई दे रही हैं, जबकि ईशा अंबानी, श्लोका मेहता और राधिका मर्चेंट &amp;nbsp;भी भक्ति के रंग में रंगी हुई नजर आई.&amp;nbsp;
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एक्वा-ब्लू बांधनी साड़ी में दिखा नीता अंबानी का रॉयल अंदाज
जन्माष्टमी के इस खास मौके पर नीता अंबानी ने एक्वा-ब्लू रंग की बेहद खूबसूरत बांधनी साड़ी पहनी. साड़ी पर गोल्डन जरी का बारीक वर्क और गुलाबी बॉर्डर इसकी खूबसूरती को और खास बना रहा था. ट्रेडिशनल गुजराती स्टाइल में साड़ी का फ्रंट पल्लू कैरी किया गया था, जिससे उनका पूरा लुक बेहद एलिगेंट नजर आया.&amp;nbsp;
साड़ी के साथ मैचिंग ब्लाउज ने उनके एथनिक लुक को और ज्यादा निखार दिया. ब्लाउज में स्कूप नेकलाइन और हाल्फ स्लीव्स का डिजाइन देखने को मिला. हालांकि नीता अंबानी ने अपने लुक को डायमंड नेकलेस, मैचिंग ईयररिंग्स और मांग टीके से पूरा किया.
फूलों और रोशनी से सजा एंटीलिया
जन्माष्टमी के मौके पर अंबानी परिवार के घर एंटीलिया को भी खास तरीके से सजाया गया. घर के अंदर भगवान कृष्ण की पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की गई. सजावट में फूलों, दीयों और रोशनी का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरा माहौल बेहद भक्तिमय नजर आया.
67 से टूटकर ₹50 पर आई चीनी, पर आपको क्यों नहीं मिल रही सस्ती? जानें खेल
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एंटीलिया, में, जन्माष्टमी, की, धूम, कृष्ण, भजनों, पर, झूम, उठीं, नीता, अंबानी, संग, बहुएं</media:keywords>
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        <title>RBI ने 5 कंपनियों पर ठोका 27 लाख का जुर्माना, नियम ताक पर रखना पड़ा भारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rbi-ने-5-कंपनियों-पर-ठोका-27-लाख-का-जुर्माना-नियम-ताक-पर-रखना-पड़ा-भारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/rbi-ने-5-कंपनियों-पर-ठोका-27-लाख-का-जुर्माना-नियम-ताक-पर-रखना-पड़ा-भारी</guid>
        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में रेगुलेटरी नियमों का पालन नहीं करने पर 5 कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. केंद्रीय बैंक ने अलग-अलग मामलों में इन कंपनियों पर कुल करीब 45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. हालांकि, इस लिस्ट में ट्रांसयूनियन सिबिल, CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, सम्मान फिनसर्व और हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस शामिल किए गए हैं.&amp;nbsp;
RBI की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अलग-अलग नियमों की अनदेखी पाए जाने के कारण ही यह कारवाई की गई है. इसमें कुछ कंपनियों की ओर से रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने में कुछ खमियां सामने आई थीं, जिसके बाद ही इस पर मौद्रिक जुर्माना के तौर पर लगाया गया.&amp;nbsp;
किस कंपनी पर कितना जुर्माना लगा?
RBI की इस कारवाई में अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग रकम का जुर्माना लगाया है.

ट्रांसयूनियन सिबिल पर 26,82,800 रुपये&amp;nbsp;
CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज पर 6,89,600 रुपये&amp;nbsp;
इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज पर 1,19,400 रुपये
&amp;nbsp;सम्मान फिनसर्व पर 4.20 लाख रुपये&amp;nbsp;
हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस पर 6.20 लाख रुपये

एंटीलिया में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण भजनों पर झूम उठीं नीता अंबानी संग बहुएं
क्रेडिट ब्यूरो पर क्यों हुई RBI की कार्रवाई?
RBI के मुताबिक, ट्रांसयूनियन सिबिल, CRIF हाई मार्क और इक्विफैक्स क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज जैसी ये तीन कंपनियां कुछ शिकायतकर्ताओं को तय समय के भीतर मुआवजा की रकम देने में नाकाम रही थीं. यही वजह है कि RBI ने इन पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है.
बाकी दो कंपनियों से क्या हुई गलती?
RBI का कहना है कि बाकी दो कंपनियां से क्रेडिट रिपोर्टिंग और लोन प्राइसिंग से जुड़े नियमों में चूक हुई थी.
सम्मान फिनसर्व ने अपने एक कर्जदार से जुड़ी क्रेडिट जानकारी को Central Repository of Information on Large Credits (CRILC) में रिपोर्ट नहीं किया था. वहीं, हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस के मामले में माइक्रोफाइनेंस लोन की कीमत तय करने से जुड़ी बोर्ड से मंजूर नीति को सही तरीके से लागू नहीं किया गया था. इसी नियम के उल्लंघन पर कंपनी के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई.
RBI ने जुर्माने को लेकर क्या कहा?
RBI के मुताबिक, यह कारवाई कंपनियों की ओर से रेगुलेटरी नियमों के पालन में मिली खामियों के आधार पर की गई है. हालांकि, इस जुर्माने का मतलब यह नहीं है कि RBI ने कंपनियों और उनके ग्रहकों के बीच हुए किसी लेन-देन या समझौते की वैधता पर कई टिप्पणी की है.&amp;nbsp;
मेड इन इंडिया हथियारों का दुनिया में जलवा! फिर भी क्यों पाकिस्तान से पीछे भारत?
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RBI, ने, कंपनियों, पर, ठोका, लाख, का, जुर्माना, नियम, ताक, पर, रखना, पड़ा, भारी</media:keywords>
    </item>
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        <title>घर संभालने के लिए पत्नी को सैलरी, पति के फैसले से इंटरनेट पर तहलका</title>
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        <description><![CDATA[ शादी के बाद घर संभालने की जिम्मेदारी अक्सर परिवार में किसी एक सदस्य, खासकर पत्नी के हिस्से में आती है. ऐसे में घर का खाना बनाना, सफाई करना, घर के सदस्यों की जरूरतों का ध्यान रखना और रोजमर्रा के काम संभालना किसी भी पत्नी के लिए आसान नहीं होता. हालांकि, इन कामों के बदले आमतौर पर कोई तय रकम नहीं मिलती. लेकिन क्या घर संभालने और परिवार की जिम्मेदारियां उठाने वाले काम की भी कोई आर्थिक कीमत होनी चाहिए? इस सवाल पर सोशल मीडिया पर तहलका मच गया है.&amp;nbsp;
पति-पत्नी के रिश्ते में घर के खर्च और पैसों को लेकर अक्सर अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर सामने आई एक अनोखी कहानी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, जिसमें एक पति अपनी हाउसवाइफ को घर संभालने के बदले हर महीने एक तय रकम देता है. बड़ी बात यह है कि वह पैसा पत्नी अपनी मर्जी से खर्च या सेव कर सकती है.&amp;nbsp;
क्या है पूरा वाक्य?
दरअसल, रेडिट पर एक यूजर ने अपने बड़े भाई और भाभी से जुड़ी इस कपल की अनोखी व्यवस्था के बारे में बताया. रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, इस कपल में पति सरकारी अधिकारी हैं, जबकि उनकी पत्नी घर का पूरा काम संभालती हैं. पत्नी खाना बनाने, साफ सफाई और घर के रोजमर्रा के कामों की देखभाल करती हैं, जिसके बदले पति उन्हें हर महीने एक तय रकम देते हैं. वहीं पति किराना, बिजली बिल और के दूसरे जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी अलग से उठाते हैं.
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घर के काम को दी आर्थिक मान्यता
यूजर ने बताया कि उनके भाई का मानना है कि घर संभालना भी काफी मेहनत वाला काम है. अगर इन्हीं जिम्मेदारियों के लिए बाहर से किसी कूक, सफाईकर्मी या हाउस मैनेजर रखा जाए, तो परिवार को इसके लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे. ऐसे में पत्नी द्वारा किए जाने वाले कामों को सिर्फ इसलिए बिना मूल्य का नहीं माना जानया चाहिए कि वह घर के अंदर किया जा रहा है.
इसलिए पत्नी को मिलने वाला यह रकम पूरी तरह उनका अपना होता है. वह इसे अपनी जरूरतों के मुताबिक खर्च कर सकती हैं, बचा सकती हैं या अपने माता-पिता को मदद के लिए भेज दसकती हैं. इसके लिए उन्हें पति से इजाजत लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
रेडिट पर लोगों ने क्या कहा?
इस पोस्ट के सामने के बाद कई यूजर्स ने इस व्यवस्था का समर्थन किया. कुछ लोगों का कहना है कि हाउसवाइफ के पास भी अपनी जरूरतों के स्वतंत्र रकम होना बेहद जरूरी है. वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि घरेलू काम को अक्सर इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि इसके बदले सीधे सैलरी नहीं मिलती.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>PM&amp;SYM Scheme: रोज लगाएं 2 रुपये से भी कम, 60 साल बाद हर महीने ₹3000 की गारंटी!</title>
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        <description><![CDATA[ सरकार की कई ऐसी स्कीम्स हैं, जो मुख्य रूप से देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है. आज हम आपको एक ऐसी ही स्कीम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मात्र 55 रुपये के निवेश से हर महीने 3000 रुपये की गारंटीड पेंशन देगी. यहां प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) की बात की जा रही है. मोदी सरकार की यह योजना फरवरी 2019 &amp;nbsp;में शुरू की गई थी.&amp;nbsp;
किनके लिए है यह स्कीम?
असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे कि रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, मजदूर, घरों में काम करने वाले (मेड/बाई), कृषि मजदूर जैसे पेशे से जुड़े हुए लोग इस स्कीम के तहत शामिल हो सकते हैं. बशर्तें उनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो और महीने की कुल कमाई 15,000 या उससे कम हो. इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आवेदक टैक्सपेयर न हो और ना ही पहले से EPFO, ESIC या NPS जैसी किसी अन्य सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना का सदस्य हो.&amp;nbsp;
सरकार भी देती है 50% योगदान
स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 50% योगदान सरकार की तरफ से दी जाती है. यानी कि यह एक &#039;मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन&#039; (1:1) स्कीम है. मतलब जितनी रकम आपके बैंक खाते से कटेगी, ठीक उतनी ही राशि भारत सरकार भी अपनी तरफ से आपके पेंशन खाते में जमा करेगी.
यानी कि अगर आप 55 रुपये देते हैं, तो सरकार भी 55 रुपये देगी.इस तरह से कुल जमा रकम 110 प्रति माह हो जाएगी. उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम भी बढ़ती जाती है और सरकार का अंशदान भी उस हिसाब से बना रहता है.&amp;nbsp;
कैसे करेंगे आवेदन?
आप अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर या आधिकारिक Shram Yogi Maandhan Portal पर खुद को ऑनलाइन रजिस्टर कर सकते हैं. इसके लिए सिर्फ आधार कार्ड और बचत बैंक खाता/जनधन खाता (जिससे हर महीने ऑटो-डेबिट हो सके) की आवश्यकता होती है. बता दें कि जुलाई 2026 तक स्कीम के तहत रजिस्टर्ड लाभार्थियों की संख्या 54 लाख के पार हो चुकी है. देश भर में इसके करीब 4 लाख सेंटर्स का एक नेटवर्क है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>मार्केट में मचेगा तहलका! आ रहा 30000 करोड़ का मेगा IPO, पैसे तैयार हैं ना?</title>
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        <description><![CDATA[ देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को आईपीओ लाने के लिए सेबी से हरी झंडी मिल गई है. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है. बताया जा रहा है कि कंपनी 15 सितंबर को प्राइस बैंड का ऐलान कर सकती है. हालांकि, सेबी के अप्रूवल के बाद ग्रे मार्केट में इसकी बड़ी डिमांड को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी इसका प्राइस बैंड लगभग 1,800 रुपये प्रति शेयर या उससे ज्यादा भी तय कर सकती है.&amp;nbsp;
NSE के इस मेगा आईपीओ का साइज 30000 करोड़ रुपये के करीब होगा. एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. यानी कि आईपीओ के जरिए कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं कर रही है और कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा. इसमें मौजूदा शेयरधारक करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे. ओएफएस होने की वजह से इससे जुटाई गई राशि एनएसई को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी. मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से न्यूजएजेंसी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एनएसई के आईपीओ के 15 सिंतबर को लॉन्च होने और 24-25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है.&amp;nbsp;
कांटे की होगी टक्कर
NSE का यह 30,000 करोड़ का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है. अक्टूबर 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ आया था, जो 27,858.75 करोड़ रुपये का था.
एनएसई (NSE) का आईपीओ करीब 30,000 करोड़ का होने के कारण हुंडई के इस रिकॉर्ड को आसानी से तोड़ देगा. हालांकि, इसकी असली टक्कर मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स से होगी. जियो के आईपीओ का साइज करीब 37,700 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.&amp;nbsp;
एक दशक का इंतजार खत्म
करीब एक दशक की नियामकीय अड़चनों के बाद आने वाला यह आईपीओ एनएसई को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है. सूत्रों के अनुसार, करीब 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से एनएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है.
एनएसई ने इस साल 17 जून को सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स जमा कराए थे. इसके अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य प्रमुख संस्थागत निवेशक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आगामी आईपीओ के तहत ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं, जिसमें एसबीआई 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा. इस बीच, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपनी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से एक भी शेयर नहीं बेचने का निर्णय लिया है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, हर महीने 15,800 तक HRA!</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग के तहत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. कर्मचारियों द्वारा नए फिटमेंट फैक्टर और X श्रेणी के शहरों के लिए HRA को 30% से बढ़ाकर 40% करने का प्रस्ताव रखा गया है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने के बाद लेवल 5 के कर्मचारियों को हर महीने 15,768 (लगभग 15,800) रुपये तक बंपर &amp;nbsp;HRA (मकान किराया भत्ता) मिल सकता है.&amp;nbsp;
क्या होता है HRA?
HRA या House Rent Allowance) सैलरी का एक हिस्सा है, जो कंपनी अपने कर्मचारियों को उनके रहने या मकान के किराए के खर्च को पूरा करने के लिए देती है. अगर आप किराए के मकान में रहते हैं, तो एचआरए न सिर्फ आपकी जेब का खर्च कम करता है, बल्कि इसके तहत आपको इनकम टैक्स में भी बड़ी छूट मिलती है. अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनते हैं, तो इनकम टैक्स की धारा 10(13A) के तहत आप अपने एचआरए पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं.
7वें वेतन आयोग में कितना मिल रहा HRA?
सातवें वेतन आयोग में लेवल 5 के एक कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन 29,200 रुपये पर 30% की दर से वर्तमान में 8,760 रुपये प्रति माह HRA मिल रहा है. सरकारी नियमों के मुताबिक, जब महंगाई भत्ता (DA) 50% के पार हो जाता है, तब X-कैटेगरी के शहरों के लिए HRA की दर बढ़कर 30% हो जाती है. चूंकि वर्तमान में DA 50% से ऊपर चल रहा है इसलिए लेवल 5 के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन (29,200 रुपये) का 30% यानी पूरा 8,760 हर महीने केवल मकान के किराए के लिए सरकार से मिल रहा है.
अब कर्मचारी संगठन नए वेतन आयोग में इस बेसिक पे (29,200 रुपये) को बढ़ाकर करीब 61,320 रुपये करने की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि HRA की दर को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया जाए. अगर ऐसा होता है, तो यही 8,760 रुपये का भत्ता बढ़कर सीधे 24,528 रुपये हो जाएगा.
HRA को कैसे करते हैं कैलकुलेट?
सरकार और अधिकांश प्राइवेट कंपनियां शहरों को तीन कैटेगरी में बांटकर HRA तय करती हैं:-
X श्रेणी (महानगर - जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु): यहां रहने का खर्च सबसे ज्यादा होता है इसलिए यहां बेसिक सैलरी का सबसे अधिक प्रतिशत (जैसे वर्तमान में सरकारी नियमों में 30%) एचआरए के रूप में मिलता है.
Y श्रेणी (टियर-2 शहर - जैसे लखनऊ, जयपुर, पटना)- यहां मिडियम खर्च होता है इसलिए यहां बेसिक का 20% एचआरए मिलता है.
Z श्रेणी (छोटे शहर या ग्रामीण इलाके)- यहां सबसे कम (बेसिक का 10%) एचआरए दिया जाता है.

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>67 से टूटकर ₹50 पर आई चीनी, पर आपको क्यों नहीं मिल रही सस्ती? जानें खेल</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी को परेशान कर रखा है. ऐसे में लोगों को इंतजार है कि जल्द से जल्द चीनी के रेट गिर जाए. दाम गिरे भी हैं, लेकिन सिर्फ 2 से 3 रुपये. &amp;nbsp;उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव पिछले हफ्ते के 65.08 रुपये से घटकर केवल 62.57 प्रति किलो पर आया है. हैरान करने वाली बात यह है कि चीनी के थोक रेट 17 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं.
आम आदमी को नहीं राहत?
यह सच है कि मिल स्तर (Ex-mill) पर चीनी के दामों में 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट आई है. इसके बावजूद गली-मोहल्ले में परचून की दुकानों पर आम आदमी को सिर्फ 2 से 3 रुपये कम रेट पर चीनी की बिक्री की जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मिलों में चीनी का दाम 67 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर से टूटकर 47 से 55 रुपये प्रति किलो के दायरे में आ चुका है, लेकिन देश का औसत खुदरा भाव अभी भी 62.57 प्रति किलो के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) और NFCSF के अनुसार, मिल और रिटेल के बीच अधिकतम 7 से 8 रुपये का ही अंतर होना चाहिए, लेकिन फिर भी आम आदमी को राहत नहीं है.
क्यों सस्ती नहीं हो रही चीनी?
रिटेल स्तर पर चीनी की कीमतें इसलिए कम नहीं हो रही हैं क्योंकि थोक (Wholesalers) और खुदरा दुकानदारों के पास पहले से वह स्टॉक पड़ा हुआ है, जिसे उन्होंने अगस्त के मध्य में 65 से 67 रुपये प्रति किलो के ऊंचे रेट पर खरीदा था. आमतौर पर एक किराना दुकानदार या छोटा रिटेलर एक बार में चीनी की 10 से 15 बोरियां खरीद कर रखता है.
अब चूंकि उन्होंने यह पुराना स्टॉक 65 से 67 रुपये प्रति किलो के पिछले ऊंचे रेट पर खरीदा था. अब कोई भी दुकानदार अपना नुकसान करके सामान तो बेचेगा नहीं इसलिए &amp;nbsp;वे पुराना महंगा स्टॉक खत्म होने तक कीमतें कम नहीं कर रहे हैं.&amp;nbsp;
चीनी मिलों ने भी साफ कर दिया है कि एक्स-मिल (Ex-mill) रेट गिरने का असर थोक मंडियों पर तुरंत दिखता है, लेकिन उस सस्ते माल को आपके नजदीकी किराना स्टोर तक पहुंचने और खुदरा कीमतों में पूरी तरह बदलाव दिखने में कम से कम 7 से 10 दिन का समय लगता है.

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>मेड इन इंडिया हथियारों का दुनिया में जलवा! फिर भी क्यों पाकिस्तान से पीछे भारत?</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया भर में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट संकट और दक्षिण चीन सागर में तनातनी) और आधुनिक तकनीक (जैसे AI, ड्रोन्स और साइबर सुरक्षा को अपनी सेना में शामिल करने की दुनिया में देशों में होड़ सी मची हुई है. सभी चाहते हैं कि मिलिट्री पावर में उनका नंबर पहले स्थान पर हो. यही वजह है कि &amp;nbsp;दुनिया भर की सरकारें अपने रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर रही हैं और इसी के चलते डिफेंस मार्केट तेजी से बड़ा होता जा रहा है.&amp;nbsp;
ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट की बात करें, तो 138 अरब डॉलर (USD 138 Billion) के आंकड़े को पार कर चुका है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की संभावनाएं हैं. स्वीडन के थिंक टैंक SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की हाल ही में एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि वैश्विक रक्षा निर्यात के मामले में भारत का स्थान पाकिस्तान के पीछे है. जहां भारत 0.2% हिस्सेदारी के साथ 27वें स्थान पर है.वहीं, पाकिस्तान 0.4% हिस्सेदारी के साथ 21वें स्थान पर है. यह आंकड़ा भले ही हैरान कर देने वाला है, लेकिन यह सच है.&amp;nbsp;
क्यों पाकिस्तान भारत से है आगे?
डिफेंस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान के भारत से आगे रहने की सबसे बड़ी वजह चीन है. सबसे पहली बात तो पाकिस्तान खुद कोई हथियार नहीं बनाता है, बल्कि वह चीन के साथ मिलकर JF-17 थंडर फाइटर जेट को असेंबल करने का काम करता है. फिर इन्हें &amp;nbsp;म्यांमार, नाइजीरिया या अजरबैजान जैसे देशों को बेच देता है. यह आंकड़ा पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपोर्ट के खाते में जुड़ जाता है. इसी तरह से अफ्रीका और कई कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों कम कीमत वाले चीनी हथियारों को प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान से हथियार मंगाते हैं, जिससे उनका एक्सपोर्ट वॉल्यूम बढ़ता जाता है. वहीं, भारत का पूरा ध्यान निर्यात पर नहीं, बल्कि अपने देश की सेना को मजबूत करने पर रहा है. यही वजह है कि भारत दशकों तक दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा है.
महाशक्ति बनने की राह पर भारत
बेशक, ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में 0.2% है, लेकिन भारत ने इस साल 38,424 करोड़ (4.6 बिलियन डॉलर) का अपना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया है. ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस और आर्टिलरी गन्स के जरिए भारत डिफेंस एक्सपोर्ट में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हासिल करना है.
मौजूदा समय में दुनिया के 80 से अधिक देश भारत से रक्षा उपकरण खरीद रहे हैं. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के लिए हाल ही में फिलीपींस ने भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील की है. इंडोनेशिया के साथ भी 3,800 करोड़ (440 मिलियन डॉलर) का बड़ा सौदा एडवांस्ड स्टेज पर है. भारत के आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की अर्मेनिया सहित कई अफ्रीकी देशों में भी जबरदस्त मांग है.
अर्मेनिया भारत से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर का भी बड़ा खरीदार है. भारत से रक्षा साजोसामान खरीदने वाले देशों में अमेरिका और फ्रांस भी शामिल हैं, जो भारत से बड़े पैमाने पर विमानों के पुर्जे, फ्यूजलेज, मिश्र धातु (Alloys) इलेक्ट्रॉनिक सब-सिस्टम, रक्षा से जुड़े हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण और सॉफ्टवेयर कंपोनेंट्स खरीदते हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मेड, इन, इंडिया, हथियारों, का, दुनिया, में, जलवा, फिर, भी, क्यों, पाकिस्तान, से, पीछे, भारत</media:keywords>
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        <title>छोटे शहरों में घर का सपना अब आसान, लोन के लिए बैंकों ने खोला खजाना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/छोटे-शहरों-में-घर-का-सपना-अब-आसान-लोन-के-लिए-बैंकों-ने-खोला-खजाना</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के छोटे शहरों में सबसे ज्यादा होम लोन लिए जाते हैं, यहां पर लोग सबसे ज्यादा घर भी बना रहे हैं. ये बढ़ती हुई मांग देश में होम लोन का कारोबार बढ़ा रही है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि SGA PR की रिपोर्टमें ये बात सामने आई है.
हाउसिंग फाइनेंस इन इंडिया- द साइलेंट जाइंट ऑफ रिटेल क्रेडिट के मुताबिक, देश में होम लोन के करीब 64% वॉल्यूम टियर-II और टियर-III शहरों से आ रहे हैं. इन शहरों में 2025 के दौरान होम लोन की मांग एक साल पहले के मुकाबले 81% बढ़ी. छोटे शहरों में बढ़ती आय, बेहतर सड़क और दूसरी सुविधाएं, रोजगार के नए मौके और तेजी से हो रहा शहरीकरण लोगों को अपना घर खरीदने के लिए इंस्पायर कर रहे हैं.
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मेट्रो सिटी के मुकाबले आसान है घर खरीदनाबड़े शहरों में पिछले कुछ सालों में घरों की कीमतें काफी बढ़ी हैं. इससे आम परिवारों की आय और घर की कीमत के बीच अंतर बढ़ गया है. इसके मुकाबले छोटे शहरों और कस्बों में घर अपेक्षाकृत सस्ते मिल जाते हैं. इसलिए पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए छोटे शहर तेजी से पसंदीदा बन रहे हैं.
हालांकि, छोटे शहरों में बैंकों और वित्तीय कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं. यहां कई कस्टमर्स ऐसे होते हैं जो स्वरोजगार वाले होते हैं या उनकी आय का रिकॉर्ड सामान्य नौकरीपेशा लोगों जैसा नहीं होता. ऐसे ग्राहकों की लोन चुकाने की क्षमता चेक करना केवल सैलरी स्लिप देखने से संभव नहीं होता.
डिजिटल हो रहा होम लोनहोम लोन लेने की प्रक्रिया भी तेजी से डिजिटल हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में करीब 60% हाउसिंग फाइनेंस एप्लीकेशन डिजिटल तरीके से प्रोसेस किए जाते थे. 2024 तक ये आंकड़ा बढ़कर करीब 92% हो गया. अब ग्राहक घर बैठे लोन देने वाली कंपनियों की जानकारी ले सकते हैं, अपनी पात्रता चेक कर सकते हैं, दस्तावेज जमा कर सकते हैं और लोन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इससे छोटे शहरों के ग्राहकों को भी कई लेंडर्स तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है.
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छोटे शहर सबसे बड़ी ताकतदेखा जाए तो भारत का होम लोन बाजार केवल ब्रांच से एप की ओर नहीं बढ़ रहा है. आने वाले समय में डिजिटल तकनीक के साथ इंसानी मदद भी जरूरी रहेगी. खासकर प्रॉपर्टी की जांच, स्वरोजगार वाले ग्राहकों और छोटे शहरों के स्थानीय बाजार को समझने में इंसानों की भूमिका भी जरूरी होगी. ऐसे में भारत के छोटे शहर आने वाले वर्षों में होम लोन कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अमेरिकी इतिहास में सबसे महंगा हुआ डीजल, रोजमर्रा की चीजों के भी बढ़े दाम</title>
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        <description><![CDATA[ इस समय केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में महंगाई तेजी से बढ़ रही है. जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहा है. अमेरिका में भी लगातार महंगाई बढ़ रही है, हाल ही में डीजल की कीमतों में यहां भयंकर इजाफा हुआ है. इसने कई सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं. फिलहाल अमेरिका में डीजल की कीमत 5.85 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है. डीजल महंगा होने से अब रोजमर्रा के सामानों समेत कई और भी चीजें महंगी हो जाएंगी.
युद्ध से पहले नहीं था इतना महंगाएसोसिएटेड प्रेस यानी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और यूएस का जब युद्ध शुरू हुआ था उससे पहले फरवरी के आखिर में अमेरिका में डीजल की औसत कीमत करीब 3.76 डॉलर प्रति गैलन थी. अब ये बढ़कर 5.85 डॉलर हो गई है. वहीं कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. युद्ध से पहले इसकी कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी.
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महंगे डीजल से बढ़ेगी महंगाईडीजल की कीमत बढ़ने से केवल आना-जाना की महंगा नहीं होगा बल्कि इससे अन्य चीजें भी महंगी होंगीय साफ शब्दों में कहें तो महंगाई लगातार बढ़ेगी. ये चीजें हो सकती हैं महंगी:

खाने- पीने और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला सामान महंगा होगा.
ताजा फल, सब्जियां, समुद्री भोजन और मांस जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों पर असर.
महंगे डीजल का असर डिलीवरी कंपनियों पर भी पड़ रहा है.
कपड़े, कॉस्मैटिक और फर्नीचर भी हो सकते हैं महंगे.

क्यों बढ़े डीजल के दाम?बता दें कि डीजल की कीमत बढ़ने की बड़ी वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध बताया जा रहा है. इस युद्ध के कारण दुनिया में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमत बढ़ी है. डीजल ट्रकों, ट्रेनों, जहाजों और खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के लिए बेहद जरूरी है. इसलिए डीजल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत भी बढ़ जाती है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>लोगों की खुजली मिटाकर हर महीने 14 लाख रुपए कमा रहा ये शख्स</title>
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        <description><![CDATA[ चीन कितने अनोखे कारनामे करता है ये तो हम सभी जानते ही हैं. चीन के प्रोडक्ट्स को दुनियाभर में बहुत पसंद किया जाता है. चीन बिजनेस से जुड़े भी कई अनोखे आईडियाज लाता रहता है. जैसे हाल ही में एक नया बिजनेस आईडिया यहां से आया है. चीन के एक शख्स ने नया बिजनेस आईडिया लोगों को दिया है. ये बिजनेस है लोगों की खुजली मिटाने का बिजनेस. नहीं समझे? आइये बताते हैं क्या ह पूरी माजरा.
क्या है ये बिजनेस?दरअसल चीन के शेनझेन शहर के रहने वाले 32 साल के झांग शियाओचियाओ, यहां के लोगों से पैसे लेकर उनकी पीठ और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खुजाने की सर्विस देते हैं. उनका दावा है कि उनके दो आउटलेट से उन्हें हर महीने करीब 1 लाख युआन यानी लगभग 14 लाख रुपये की कमाई हो रही है. ये खबर सुनकर हर कोई हैरान रह गया है, क्योंकि अब तक तो हर कोई खुजली करने के लिए अपने पार्टनर या परिवार का सहारा लेता था.
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कैसे आया आईडिया?इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, झांग को इस बिजनेस का आइडिया पिछले साल सोशल मीडिया के जरिए ही आया था. उन्होंने एक वीडियो देखा था, जिसमें एक महिला अपने पति की पीठ खुजा रही थी. वीडियो के कमेंट्स में कुछ लोगों ने कहा कि वो भी किसी को पैसे देकर अपनी पीठ खुजवाना पसंद करेंगे. ये देखकर झांग के दिमाग में सवाल आया कि क्या पीठ खुजाने जैसे साधारण काम को भी एक प्रोफेशनल सर्विस बनाया जा सकता है.
कितनी होती है कमाई?ये बिजनेस झांग ने Suma नाम से शुरू किया है. इसका पहला आउटलेट शेनझेन के बाओआन इलाके में मई की शुरुआत में खुला. इसके करीब एक महीने बाद फुतियान इलाके में दूसरा आउटलेट शुरू किया गया. यहां एक घंटे की सर्विस की कीमत करीब 300 युआन यानी लगभग 4,200 रुपये है. यहां पर आकर ग्राहक आराम से बेड पर लेटते हैं और प्रशिक्षित कर्मचारी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में धीरे-धीरे खुजाते हैं.
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नुकीले नेल्स का लिया जाता है सहाराइसके लिए Suma के कर्मचारियों को नुकीले नेल्स दिए गए हैं, जिन्हें खासतौर से बनवाया जाता है. ग्राहक खुद बता सकते हैं कि शरीर के किस हिस्से पर ज्यादा ध्यान दिया जाए. इस सर्विस को आराम और तनाव कम करने के तरीके के तौर पर देखा जाता है. कुछ ग्राहकों का कहना है कि इससे उन्हें अच्छी और सुकूनभरी नींद भी आती है.
आगे है 100 स्टोर खोलने का प्लानझांग का कहना है कि उनके दोनों स्टोर अपनी लागत निकालने लगे हैं और अब मुनाफा कमा रहे हैं. अब उनका प्लान है कि इस बिजनेस को पूरे चीन में फैलाया जाए. झांग आने वाले समय में 100 खुजाने वाले स्टोर खोलना चाहते हैं. उनका लक्ष्य है कि ये सर्विस सिर्फ एक अजीब या अनोखा आइडिया बनकर न रह जाए, बल्कि लोगों के लिए आराम और तनाव कम करने की एक नियमित सर्विस बन जाए.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बंद होंगे छोटे दुकानदारों के QR पेमेंट! RBI किस मामले पर है सख्त?</title>
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        <description><![CDATA[ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने पेमेंट कंपनियों पर Re-KYC के लिए सख्ती बढ़ा दी है. अब इसको लेकर पेमेंट कंपनियों ने आरबीआई से मांग की है कि उन्हें 15 सितंबर तक का समय दिया जाए. क्योंकि छोटे दुकानदारों की Re-KYC में काफी दिक्कत आ रही है. ऐसे में इन कंपनियों ने RBI से थोड़ा समय मांगा है.
मुश्किल हो रहा कंपनियों का काममनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियों के सामने हजारों छोटे और अनौपचारिक कारोबारियों का KYC पूरा करने का काम अभी बाकी है. पेटीएम, फोन पे और गूगल पे जैसी कंपनियां छोटे शहरों और गांवों में QR कोड और साउंडबॉक्स के जरिए पेमेंट लेने वाले दुकानदारों का दोबारा KYC कर रही हैं. लेकिन नए और सख्त KYC नियमों के साथ फिजिकल वेरिफिकेशन की जरूरत ने कंपनियों के लिए काम मुश्किल कर दिया है.
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दस्तावेजों की कमीरिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया से प्रभावित ज्यादातर कारोबारी छोटे दुकानदार और अनौपचारिक व्यवसाय चलाने वाले लोग हैं. इनमें से कई के पास KYC के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं. हालांकि इन कारोबारियों से होने वाले पेमेंट का कुल हिस्सा बहुत बड़ा नहीं है, फिर भी वो छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल पेमेंट और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
80% Re-KYC पूरा होने की उम्मीदज्यादातर पेमेंट कंपनियों को उम्मीद है कि वो 15 सितंबर तक करीब 80% Re-KYC का काम पूरा कर लेंगे. लेकिन बाकी कारोबारियों का KYC पूरा करना चुनौती बना हुआ है. इसकी एक बड़ी वजह ये है कि RBI के नियमों के अनुसार फिजिकल KYC पेमेंट कंपनियों के अपने कर्मचारियों को ही करना होगा. ये काम थर्ड-पार्टी एजेंसियों के कर्मचारियों से नहीं कराया जा सकता. जिस वजह से पिछले एक साल में उन्हें अपने कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाना पड़ी.
क्यों जरूरी है KYC?बता दें कि RBI के KYC नियमों का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि वित्तीय संस्थानों के पास ग्राहकों की सही पहचान और पता मौजूद हो. इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है. हालांकि कंपनियों को इन नियमों का पालन करने के लिए समय दिया गया था, लेकिन लाखों कारोबारियों का दोबारा KYC करने का काम काफी बड़ा है. इसी वजह से पेमेंट कंपनियां और समय की मांग कर रही हैं.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बंद, होंगे, छोटे, दुकानदारों, के, पेमेंट, RBI, किस, मामले, पर, है, सख्त</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp; Diesel Price Today: जारी हुए पेट्रोल&amp;डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-जारी-हुए-पेट्रोल-डीजल-के-नए-रेट-जानें-आपके-शहर-में-कितना-है-भाव</link>
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        <description><![CDATA[ पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ें या घटें, इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है. पेट्रोल महंगा होने से बाइक और कार चलाने का खर्च बढ़ता है, वहीं डीजल के दाम में बदलाव का असर सामान ढोने से लेकर रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है. यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के रेट में होने वाला हर छोटा-बड़ा बदलाव लोगों के लिए चर्चा का विषय बन जाता है. ऐसे में आज के पेट्रोल और डीजल के ताजा रेट क्या हैं और इनमें कितना बदलाव हुआ है, आइए जानते हैं.
शहर अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम-



शहर के नाम
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपए
95.20 रुपए


मुंबई
111.31 रुपए
97.97 रुपए


कोलकाता
113.51 रुपए
99.82 रुपए


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपए
99.56 रुपए


हैदराबाद
115.69 रुपए
103.82 रुपए


पटना
113.35 रुपए
99.36 रुपए


पोर्ट ब्लेयर
88.66 रुपए
84.56 रुपए


रायपुर
108.30 रुपए
101.32 रुपए


उदयपुर
112.95 रुपए
98.50 रुपए



सरकार की जेट फ्यूल स्कीम से कंपनियों ने फेरा मुंह, फ्लाइट टिकट पर बड़ी खबर
घर पर कैसे चेक करें ईंधन के दाम?&amp;nbsp;
घर बैठे पेट्रोल और डीजल के दाम इंडियन ऑयल की आधिकारिक वेबसाइट या एसएमएस के जरिए आसानी से चेक किए जा सकते हैं. अगर आप इंडियन ऑयल के ग्राहक हैं तो अपने फोन के मैसेज बॉक्स में RSP लिखकर स्पेस दें और अपने शहर और पेट्रोल पंप का डीलर कोड टाइप करके 9224992249 पर भेजें. वहीं, अगर आप भारत पेट्रोलियम के ग्राहक हैं तो RSP लिखकर स्पेस दें और डीलर कोड टाइप करके 9223112222 पर भेजें और हिंदूस्तान पेट्रोलियम के ग्राहक हैं तो HPPRICE लिखकर स्पेस दें. इसके बाद डीलर कोड टाइप करके 9222201122 पर भेजें.&amp;nbsp;
सबसे सस्ता पेट्रोल कहां मिलता है?
पेट्रोल की कीमतों की बात करें तो 4 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश में पेट्रोल करीब 99.69 रुपए प्रति लीटर है. अलग-अलग राज्यों में टैक्स और दूसरे स्थानीय शुल्क के कारण पेट्रोल के दाम अलग रहते हैं.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-, Diesel, Price, Today:, जारी, हुए, पेट्रोल-डीजल, के, नए, रेट, जानें, आपके, शहर, में, कितना, है, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रसोई गैस के दाम में क्या हुआ बदलाव? जानिए 4 सितंबर का नया LPG रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रसोई-गैस-के-दाम-में-क्या-हुआ-बदलाव-जानिए-4-सितंबर-का-नया-lpg-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/रसोई-गैस-के-दाम-में-क्या-हुआ-बदलाव-जानिए-4-सितंबर-का-नया-lpg-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ रसोई गैस यानी LPG की कीमत में होने वाला बदलाव सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालता है. घर का मासिक बजट हो या होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार का खर्च, LPG की कीमत बढ़ने या घटने से लागत में फर्क पड़ता है. हर महीने LPG सिलेंडर के दाम पर लोगों की नजर रहती है. कीमत में बदलाव होने पर सबसे पहले घरेलू बजट प्रभावित होता है. अगर सिलेंडर महंगा होता है तो परिवार को रसोई के खर्च के लिए ज्यादा पैसे रखने पड़ते हैं. वहीं, कीमत कम होने पर कुछ राहत मिलती है. यहां से आप घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट के बारे में जान सकते हैं.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, एलपीजी के भाव-



शहर का नाम
घरेलू एलपीजी की कीमत
कमर्शियल एलपीजी की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2747.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,701.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता
968.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,882.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चेन्नई&amp;nbsp;
957.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,915.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बेंगलुरु
944.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,8230.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


पटना
1,031.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
3,027.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


देहरादून
961.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,800.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


भोपाल
947.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,752.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चंडीगढ़
951.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,769.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम



जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव
एलपीजी के रेट से किसपर पड़ता है असर?
LPG की कीमत सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और कई छोटे कारोबार में खाना बनाने के लिए LPG का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है. ऐसे में गैस महंगी होने पर कारोबार की लागत बढ़ सकती है. बढ़ी हुई लागत का असर कई बार खाने-पीने की चीजों की कीमत पर भी दिखाई देता है. कारोबारियों के लिए LPG का रेट इसलिए अहम है, क्योंकि ईंधन का खर्च उनकी कुल लागत का एक हिस्सा होता है.
सरकार की जेट फ्यूल स्कीम से कंपनियों ने फेरा मुंह, फ्लाइट टिकट पर बड़ी खबर ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रसोई, गैस, के, दाम, में, क्या, हुआ, बदलाव, जानिए, सितंबर, का, नया, LPG, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Chairman’s Club की रसोई सील, 40 किलो एक्सपायरी मिर्च और कॉकरोच मिले</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chairmans-club-की-रसोई-सील-40-किलो-एक्सपायरी-मिर्च-और-कॉकरोच-मिले</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/chairmans-club-की-रसोई-सील-40-किलो-एक्सपायरी-मिर्च-और-कॉकरोच-मिले</guid>
        <description><![CDATA[ बेंगलुरु के सहकारनगर स्थित डॉलर्स कॉलोनी में चेयरमैन्स क्लब की रसोई पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी गंभीर खामियां मिलने के बाद विभाग ने क्लब की रसोई को सील कर दिया गया है. ये कार्रवाई स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने की. खाद्य सुरक्षा टीम ने गुरुवार रात क्लब में रसोई और खाद्य सामग्री के स्टोरेज एरिया की जांच की.&amp;nbsp;
क्या- क्या मिली खामियां?
निरीक्षण के दौरान रसोई में करीब 40 किलो एक्सपायरी मिर्च स्टोर मिली है. टीम ने एक्सपायरी खाद्य सामग्री को मौके पर ही जब्त कर लिया. इसके अलावा करीब 5 किलो ब्रेड क्रम्ब्स और 2 किलो शाही जीरा पर FSSAI के तय मानकों के मुताबिक जरूरी लेबलिंग नहीं मिली है. अधिकारियों के मुताबिक, रसोई में खाद्य पदार्थों को रखने और संभालने के तरीके में भी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था. खाना पकाने और स्टोरेज वाले हिस्से में गंदगी पाई गई.
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कॉकरोच और रंग की मिलावट
जांच के दौरान रसोई में कॉकरोच भी मिले हैं. इसके अलावा खाने में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ ऐसे कैमिकल वाले रंग भी मिले, जिन्हें इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं थी. इसके अलावा शाकाहारी और मांसाहारी खाने के सामान को अलग रखने के बजाय एक साथ रखा गया था. खाद्य सुरक्षा के लिहाज से कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को सही तरीके से स्टोर करना जरूरी होता है. खासकर शाकाहारी और मांसाहारी सामग्री को अलग रखना क्रॉस-कंटैमिनेशन यानी एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में संक्रमण का खतरा कम करने के लिए जरूरी है.
&amp;nbsp;क्या हुई कार्रवाई?
इन सभी खामियों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने क्लब की रसोई को सील कर दिया है. अधिकारियों ने बताया कि मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>SBI की UPI सर्विस आज रहेगी बंद, जानें कितनी देर नहीं कर पाएंगे लेनदेन</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप पैसे भेजने, ऑनलाइन खरीदारी या किसी बिल का पेमेंट करने के लिए SBI की UPI सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक की UPI सर्विस 4 सितंबर को कुछ समय के लिए नहीं चलेगा. बैंक ने ग्राहकों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी है.
SBI के मुताबिक, ये रुकावट किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं बल्कि तय तकनीकी रखरखाव के कारण होने वाली है. बैंक समय-समय पर अपने डिजिटल सिस्टम का मेंटेनेंस करता है, ताकि सेवाओं को और सुरक्षित बनाया जा सके.&amp;nbsp;
कितनी देर नहीं चलेगा यूपीआई?
SBI की ओर से जारी जानकारी के अनुसार UPI सर्विस को 45 मिनट के लिए रोका जाएगा. SBI अलर्ट में बताया गया है कि मेंटेनेंस विंडो 4 सितंबर को रात 12:15 बजे से 1:00 बजे तक है. हालांकि, कुछ रिपोर्टों में 12:30 बजे से 1:15 बजे तक की विंडो भी बताई गई है. इस दौरान SBI की यूपीआई सर्विस से पेमेंट नहीं हो पाएगा, इसलिए अगर कोई जरूरी पेमेंट करना है तो उसे इस समय से पहले कर लेना चाहिए.
Chairman&amp;rsquo;s Club की रसोई सील, 40 किलो एक्सपायरी मिर्च और कॉकरोच मिले
कैसे होगा काम?
मेंटेनेंस के दौरान छोटे पेमेंट के लिए ग्राहक UPI Lite का इस्तेमाल कर सकते हैं. SBI ने भी ग्राहकों को UPI Lite का ऑप्शन इस्तेमाल करने की सलाह दी है. UPI Lite से छोटे मोटे पेमेंट किए जा सकते हैं और हर पेमेंट के लिए लाइट में तो UPI PIN डालने की भी जरूरत नहीं होती है. SBI की जानकारी के मुताबिक UPI Lite से एक ट्रांजैक्शन में 1000 रुपए तक का पेमेंट किया जा सकता है, जबकि UPI Lite बैलेंस की अधिकतम सीमा 5000 रुपए होती है.&amp;nbsp;
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
अगर आपको रात में किसी को पैसे भेजने हैं या कोई जरूरी ऑनलाइन पेमेंट करना है, तो बेहतर होगा कि आप उसे मेंटेनेंस शुरू होने से पहले पूरा कर लें. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या किसी दूसरे पेमेंट ऑप्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>BRICS मेहमानों की थाली तक पहुंचने वाले खाने पर FSSAI की पैनी नजर</title>
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        <description><![CDATA[ 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले 18वें BRICS समिट से पहले खाने की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है. विदेशी मेहमानों की प्लेट तक खाना पहुंचने से पहले उसकी पूरी कहानी जांची जा रही है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने देश के बड़े 5-स्टार होटलों को साफ हिदायत दी है कि खाने की सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सूत्रों के मुताबिक FSSAI ने इन होटलों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की जिसमें जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया गया. यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी. इसमें होटलों के मौजूदा नियम-पालन, साफ-सफाई के पैमाने, रसोई में अपनाए जा रहे सुरक्षा तरीकों और खाने की कुल गुणवत्ता की समीक्षा की गई.&amp;nbsp;
होटलों की तरफ से कहा गया कि वे नियमों का पूरा पालन कर रहे हैं और उनकी अपनी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है लेकिन FSSAI ने साफ कर दिया कि जांच में जो भी कमी मिलेगी उस पर सीधी कार्रवाई होगी.
रैंडम इंस्पेक्शन बढ़ाए गए
समिट नजदीक आते ही FSSAI ने 5-स्टार होटलों में अचानक की जाने वाली जांच काफी बढ़ा दी है. बिना पहले से बताए टीमें रसोई में पहुंच रही हैं और वहां साफ-सफाई, कीट नियंत्रण यानी पेस्ट कंट्रोल, कच्चे माल की स्टोरेज और सबसे अहम एक्सपायर हो चुके सामान की जांच कर रही हैं.
बीते हफ्ते एरोसिटी के दो होटलों में क्या मिला
यह सख्ती अचानक नहीं आई है. कुछ दिन पहले ही FSSAI की टीम ने दिल्ली के एरोसिटी इलाके के दो बड़े होटलों जेडब्ल्यू मैरियट और होटल अंदाज की रसोई की जांच की थी. रिपोर्ट के मुताबिक वहां बदबू, कॉकरोच और मक्खियों जैसी शिकायतें दर्ज की गईं.
जांच में कुछ ब्रेड के पैकेट ऐसे मिले जिन पर एक्सपायरी के स्टिकर लगे थे. कन्फेक्शनरी सेक्शन में करीब 87 किलो एक्सपायर हो चुकी मिठाइयां मिलीं जिन्हें मौके पर ही नष्ट करा दिया गया.&amp;nbsp;पेस्ट्री सेक्शन में एक्सपायर केक बेस के साथ-साथ मक्खियां और कॉकरोच भी पाए गए. यह जांच करीब दो दिन चली और इस दौरान कुल 59 कमियां दर्ज की गईं.
समिट में कौन-कौन आ रहा है?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक 18वां BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होगा. इसमें BRICS के सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के तौर पर बुलाए गए देशों के नेता शामिल होंगे. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और यह चौथी बार है जब भारत को यह जिम्मेदारी मिली है.
इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भारत अध्यक्ष रह चुका है. इस साल भारत की अध्यक्षता की थीम है रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण.
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क्यों अहम है यह सख्ती
जब इतने बड़े स्तर पर विदेशी नेता, अधिकारी और कारोबारी प्रतिनिधि दिल्ली आते हैं तो होटल सिर्फ ठहरने की जगह नहीं रह जाते. वे पूरे आयोजन की मेहमाननवाजी का हिस्सा बन जाते हैं.
ऐसे में खाने से जुड़ी एक छोटी सी चूक भी बड़ी बात बन सकती है. यही वजह है कि FSSAI का संदेश सीधा है कि होटल की 5-स्टार पहचान का मतलब यह नहीं कि खाने की सुरक्षा अपने आप 5-स्टार मान ली जाए.
समिट तक FSSAI की टीमें दिल्ली और आसपास के बड़े होटलों में जांच जारी रखेंगी. जिन होटलों में कमियां मिली हैं उनसे जवाब मांगा गया है और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>भुजिया खाते हैं? उसका सच उड़ा देगा होश, FSSAI ने मारा छापा</title>
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        <description><![CDATA[ जो भुजिया आप चाय के साथ शौक से खाते हैं वह किस चीज से बन रहा था यह जानकर हैरानी हो सकती है. अजमेर के रूपनगढ़ में वाई वाई नूडल्स बनाने वाली कंपनी सीजी फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की फैक्ट्री में जांच के दौरान FSSAI को कई गड़बड़ियां मिलीं. जांच में सामने आया कि फर्श पर गिरे और टूटे हुए नूडल्स को उठाकर दोबारा भुजिया बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा था.
इन नूडल्स को दोबारा गर्म भी नहीं किया जा रहा था. FSSAI ने कार्रवाई करते हुए 32,107.2 किलो से ज्यादा स्टॉक जब्त किया और कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी.
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बिना लाइसेंस बन रहे थे दो भुजिया प्रोडक्ट
जांच में पता चला कि फैक्ट्री में Wai Wai Mama और Wai Wai Mama Punte नाम के भुजिया प्रोडक्ट बिना जरूरी लाइसेंस के बनाए जा रहे थे.
फर्श पर गिरे नूडल्स दोबारा क्यों इस्तेमाल हुए?
जांच टीम के मुताबिक फर्श पर गिरे टूटे नूडल्स को इकट्ठा कर उन्हें दोबारा भुजिया बनाने में लगाया जा रहा था.&amp;nbsp;खास बात यह थी कि इन नूडल्स को दोबारा हीट ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा था. फर्श के संपर्क में आने के बाद किसी खाद्य सामग्री को इस तरह दोबारा इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है.
पैकेट पर पहले की तारीख डालने का आरोप
फैक्ट्री में पैकेजिंग को लेकर भी गड़बड़ी मिली. जांच टीम के मुताबिक पैकेट पर पहले की तारीख डाली जा रही थी यानी पैकेज पर दिखाई जाने वाली तारीख और वास्तविक उत्पादन की तारीख को लेकर सवाल उठे हैं.
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32 हजार किलो से ज्यादा स्टॉक जब्त
FSSAI ने मौके से कुल 32,107.2 किलो स्टॉक जब्त किया. इसमें खुले में रखे टूटे हुए नूडल्स भी शामिल थे. इसके अलावा 1,925 डिब्बे एक्सपायर्ड तैयार माल भी रोका गया.
तेल और नूडल्स के सैंपल लैब भेजे
जांच के दौरान कई सैंपल लिए गए और उन्हें लैब भेजा गया है. इनमें खुले टूटे नूडल्स, दोनों भुजिया प्रोडक्ट, तलने वाली लाइन से लिया गया इस्तेमाल किया हुआ तेल और Wai Wai Ready-to-Eat Noodles शामिल हैं. लैब रिपोर्ट के बाद ही यह साफ होगा कि इन प्रोडक्ट्स में किसी तरह की खाद्य सुरक्षा संबंधी कमी पाई गई या नहीं.
साफ-सफाई और रिकॉर्ड में भी खामियां
जांच में फैक्ट्री की साफ-सफाई और रिकॉर्ड को लेकर भी कमियां सामने आईं. पेस्ट कंट्रोल के रिकॉर्ड पूरे नहीं थे. इसके अलावा हाइजीन और फूड सेफ्टी से जुड़ी अन्य खामियां भी दर्ज की गईं.
क्या है सीजी फूड्स?
सीजी फूड्स इंडिया &amp;nbsp;नेपाल के चौधरी ग्रुप की कंपनी है. Wai Wai ब्रांड की शुरुआत 1984 में काठमांडू से हुई थी और बाद में यह भारत आया. कंपनी नूडल्स के अलावा भुजिया और दूसरे स्नैक्स भी बनाती है.
FSSAI ने फूड बिजनेस ऑपरेटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. जांच में लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. इस मामले पर कंपनी की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>निजी बाइक को टैक्सी बनाने का रास्ता होगा साफ? गडकरी ने बताया बंपर कमाई का फॉर्मूला</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को &#039;सुरक्षा&#039; नामक पायलट प्रोग्राम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने सभी राज्य सरकारों से अपील की, कि वो अपने राज्य में बाइक टैक्सी को चलाने की अनुमति दें. ये अनुमति केवल कुछ एप्स या वेबसाइट्स को ही नहीं बल्कि निजी वाहन चालकों को भी मिलनी चाहिए. जिससे देश में रोजगार बढ़ सके.
दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति देने की अपील की है. उनका कहना है कि बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है. इससे देश में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
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निजी वाहनों को मिले मंजूरीगडकरी ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि, &#039;हमने यानी केंद्र सरकार ने निजी दोपहिया वाहनों जैसे स्कूटर और मोटरसाइकिल से यात्रियों को ले जाने की अनुमति दी है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी बाइक टैक्सी को मंजूरी नहीं मिली है. ट्रांसपोर्ट का मामला राज्य का अपना मामला होता है, ऐसे में मैं राज्य सरकारों से अपील करता हूं कि इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करें, जिससे और भी रोजगार के अवसर लोगों को मिल सकें.&#039;
लोगों को मिलेगा रोजगारबता दें कि गडकरी की ये अपील निजी दो पहिया वाहन चालकों के लिए है. जिससे उन्हें रोजगार का साधन प्राप्त हो सके. हालांकि ट्रांसपोर्ट से जुड़े मामले में जरूरी नहीं है कि जो केंद्र सरकार ने किया हो वही राज्य सरकारें भी करें, ये राज्य सरकारों का अपना निजी फैसला होता है. ऐसे में अब देखना होगा कि नितिन गडकरी की बात कौन से राज्य मानेंगे. गौरतलब है कि बाइक टैक्सी को फिलहाल कुछ राज्यों में मंजूरी मिली हुई है लेकिन सभी के अपने- अपने अलग नियम हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>बिहार को मिला 25000 करोड़ रुपए का कर्ज, कहां&amp;कहां होगा खर्च?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बिहार-को-मिला-25000-करोड़-रुपए-का-कर्ज-कहां-कहां-होगा-खर्च</link>
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        <description><![CDATA[ बिहार में रहने या फिर बिजनेस करने वालों के लिए एक खास खबर है. आने वाले समय में हो सकता है कि आपको बिहार में कई सारे बदलाव देखने को मिले, क्योंकि सरकार बिहार में उद्योगों और इंडस्ट्रीयल पार्क को बढ़ावा देने की तरफ जरूरी कदम उठा रही है.&amp;nbsp;
इन विकास कार्यों के लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी. ऐसे में सरकार को इन कामों के लिए फंडिंग की जरूरत पड़ेगी, तो अब जानते हैं कि आखिर बिहार को 25 हजार करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग कौन देगा और इस पैसे को कहां खर्च किया जाने वाला है?
किसने दिए बिहार को 25 हजार करोड़?

सरकार ने सरकारी कंपनी Housing and Urban Development Corporation Limited (HUDOC) के साथ एक डील की है.
राज्य में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए 25000 करोड़ रुपये तक की फाइनेंसिंग उपलब्ध कराई जा सकती है.
यह फंडिंग आगे चलकर बिहार में रहने वालों और बिजनेस करने वालों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.

कहां खर्च किया जाएगा पैसा?
इस पैसे को कई सारे जरूरी विकास कार्य में खर्च किए जाएंगे जैसे...

इन पैसों से जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
साथ ही कंपनियों के लिए बिजनेस करना आसान होगा.
वहीं उद्योगों के लिए जमीन खरीदी भी जाएगी.
इसके अलावा राज्य में इंडस्ट्रियल पार्क बनाएं जाएंगे.

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बिहार में रहने वालों को क्या होगा फायदा?

इससे सबसे जरूरी रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं.
साथ ही स्थानीय बिजनेस भी बढ़ सकता है.
इसके अलावा राज्य में अगर इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे तो बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा.
इसके अलावा बिजली, सड़क और दूसरी सुविधाएं भी पहले से ज्यादा बेहतर हो सकती हैं.
वहीं नई कंपनियां और फैक्ट्रियां राज्य में आ सकती है, जिससे भी लोगों को कमाई का जरिया मिल सकता है.

कब दिए जाएंगे पैसे?

HUDOC से मिलने वाले पैसे एक साथ न देकर जरूरत के हिसाब से थोड़े-थोड़े दिए जाएंगे.
वहीं HUDOC 25000 करोड़ का लोन दे सकती है और इस लोन को चुकाने के लिए 25 साल का समय भी दिया जा सकता है.

भुजिया खाते हैं? उसका सच उड़ा देगा होश, FSSAI ने मारा छापा
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>अंबानी के एंटीलिया से भी महंगा है भारत के इस बिजनेसमैन का घर, कितने हजार करोड़ है कीमत?</title>
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        <description><![CDATA[ मुंबई में कई आलीशान घर हैं, लेकिन कुछ की कीमत इतनी ज्यादा है कि उनके बारे में जानकर हैरानी होती है. ऐसा ही एक घर है रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया का जेके हाउस. मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर बनी ये करीब 30 मंजिला रिहायशी इमारत अपनी कीमत और शानदार सर्विस के लिए जानी जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घर की अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये है.
गौतम सिंघानिया के जेके हाउस की तुलना अक्सर मुकेश अंबानी के मशहूर घर एंटीलिया से की जाती है. एंटीलिया की अनुमानित कीमत करीब 5,000 करोड़ रुपये है. वहीं जेके हाउस की कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई जाती है. यानी अनुमानित कीमत के हिसाब से सिंघानिया का घर एंटीलिया से करीब 1,000 करोड़ रुपये ज्यादा महंगा है.
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घर में ही नेचर का एहसास
जेके हाउस की खासियत सिर्फ इसकी कीमत नहीं है. करीब 145 मीटर ऊंची इस इमारत में आलीशान प्राइवेट जगहें बनाई गई हैं. इसकी ऊपरी मंजिलों पर बगीचे और हरियाली भी होने की बात कही जाती है. इसका मकसद इतनी ऊंची इमारत में भी घर के अंदर नेचर का एहसास बनाए रखना है. 30 मंजिल की ये इमारत मुंबई की खास रिहायशी इमारतों में शामिल है.
गाड़ियों का शानदार कलेक्शन
गौतम सिंघानिया को महंगी गाड़ियों का भी शौक बताया जाता है. उनके कार कलेक्शन में लैंबॉर्गिनी गैलार्डो एलपी570 सुपरलेगेरा, लोटस एलिस कन्वर्टिबल, निसान स्काईलाइन जीटीआर, फेरारी 458 इटालिया और ऑडी क्यू7 जैसे मॉडल शामिल होने की बात कही जाती है. इससे उनके लग्जरी लाइफस्टाइल का अंदाजा लगाया जा सकता है.
मुंबई का बेहद खास इलाका
अल्टामाउंट रोड मुंबई के सबसे महंगे और जाने माने इलाकों में से एक है. इसी इलाके में स्थित जेके हाउस अपनी ऊंचाई, बड़ी कीमत, निजी सुविधाओं और शानदार लोकेशन की वजह से लंबे समय से चर्चा में रहा है. इसकी करीब 6,000 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत इसे भारत के सबसे महंगे निजी घरों में शामिल करती है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>GDP विवाद पर केंद्र की दो टूक, आंकड़े मजबूत, हेरफेर के आरोप बेबुनियाद</title>
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        <description><![CDATA[ 31 अगस्त को मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम (MoSPI) ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि भारत की अर्थव्यवस्था के आंकड़े पेश किए थे. जिसमें सामने आया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था यानी GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. जिसे देख कई लोग हैरान हो गए तो वहीं कई लोगों ने इस पर सवाल भी खड़े किए. विपक्ष से लेकर आम जनता तक ने इन आंकड़ों पर आपत्ति जताई. जिसके बाद खुद सरकार ने दो दिन बाद ही इन लोगों को जवाब दिया है.
सरकार की दो टूकदरअसल हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों पर उठे विवाद और आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से सफाई पेश करते हुए बताया गया है कि चालू वर्ष की वृद्धि दर को बेहतर दिखाने के लिए पिछले साल के आंकड़ों में कोई कटौती नहीं की गई है.
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क्यों बदले GDP के आंकड़े?वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के GDP आंकड़े कम होने को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने कहा कि आंकड़े जानबूझकर कम नहीं किए गए हैं. नए आधार वर्ष 2022-23, अपडेटेड डाटा और नई इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) सीरीज शामिल होने के कारण पुराने आंकड़ों में बदलाव हुआ है. इसलिए पुरानी और नई GDP सीरीज की सीधे तुलना करना सही नहीं होगा.
मैन्युफैक्चरिंग में नेगेटिव डिफ्लेटर क्यों?मैन्युफैक्चरिंग में इनपुट यानी कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ग्रोथ 9.2% और नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही. इसी वजह से डिफ्लेटर -1.5% दिखा. इसका मतलब ये नहीं है कि प्रोडक्ट्स की कीमतें गिर गई हैं.
CPI, WPI और GDP डिफ्लेटर अलग क्यों?इस रिपोर्ट के अनुसार, तीनों महंगाई के अलग-अलग पहलुओं को मापते हैं. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) लोगों के घरेलू खर्च, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) थोक कीमतों और GDP डिफ्लेटर पूरी अर्थव्यवस्था में कीमतों के बदलाव को दिखाता है. इसलिए इनके आंकड़ों में अंतर होना साधारण बात है.
माइनिंग में बड़ा अंतरमाइनिंग का उत्पादन घटा, लेकिन कच्चे तेल, गैस और धातुओं की कीमतें ग्लोबली काफी बढ़ी है. इसलिए रियल GVA -2.4%, जबकि नॉमिनल GVA 22.3% रहा. वहीं GDP के उत्पादन और खर्च से निकाले गए आंकड़ों में अंतर को स्टेटिस्टिकल डिस्क्रीपेंसी कहा जाता है. शुरुआती आंकड़ों में ये सामान्य है और बाद में कम हो सकता है.
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क्यों उठी थी GDP के आंकड़ों पर आपत्ति?बता दें कि फरवरी से ईरान और यूएस के बीच युद्ध चल रहा है, जिसके बाद से लगातार रोजमर्रा के सामनों के साथ ही हर तरफ से महंगाई बढ़ ही रही है. चाहे पेट्रोल- डीजल के दाम हों या सोना- चांदी की कीमत हो सबकुछ इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि लोगों को लग रहा था इतनी महंगाई में देश की अर्थव्यवस्था कैसे बढ़ सकती है. क्योंकि युद्ध और महंगाई को देखते हुए उम्मीद यही थी कि देश की जीडीपी लगातार गिर रही होगी, हालांकि आंकड़े कुछ और ही सामने आए जिनको देख हर कोई हैरान रह गया.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बदल गए ATM से पैसे निकालने के नियम, फ्री लिमिट खत्म होने पर लगेगा चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप केनरा बैंक का ATM कार्ड इस्तेमाल करते हैं, तो अब पैसे निकालने से पहले नए चार्ज जान लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. 1 सितंबर 2026 से बैंक ने ATM ट्रांजैक्शन के कुछ नियम बदल दिए हैं. सेविंग्स अकाउंट वालों की फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट घट गई है, वहीं लिमिट पार करने पर कैश निकालना और पर्याप्त बैलेंस नहीं होने पर फेल हुआ ट्रांजैक्शन पहले से महंगा हो गया है.
केनरा बैंक के सेविंग्स अकाउंट कस्टमर्स को अब एक महीने में कुल 5 फ्री ATM ट्रांजैक्शन मिलेंगे. पहले ये लिमिट 6 ट्रांजैक्शन की थी. इसमें फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं. लेकिन, सीनियर सिटीजन के लिए 8 फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट खत्म होने के बाद केनरा बैंक के एटीएम और कैश रिसाइकलर से किए गए ट्रांजैक्शन पर सर्विस चार्ज लगेगा. लेकिन, कैश जमा करने वाले ट्रांजैक्शन पर ये चार्ज लागू नहीं होंगे. बैंक ने ये भी कहा है कि इन सर्विस चार्ज में समय समय पर बदलाव किया जा सकता है.
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पैसे निकालने पर अब ज्यादा चार्ज
फ्री लिमिट से ज्यादा कैश निकालने पर अब कस्टमर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे देने होंगे. केनरा बैंक के ATM से कैश निकालने का चार्ज 23 रुपये कर दिया है जो पहले 20 रुपये था. इसके अलावा इस पर जीएसटी भी लगेगा. इसमें UPI के जरिए ATM से कैश निकालना भी शामिल है.
अगर अकांउट में पैसे कम होने की वजह से ATM से किया गया ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होता है, तो इसके लिए भी अब ज्यादा पैसे देने होंगे. फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट पार होने के बाद ऐसे ट्रांजैक्शन पर लगने वाला चार्ज 17 से बढ़ाकर 23 कर दिया गया है. इस पर GST अलग से लगेगा. ये चार्ज केनरा बैंक के साथ साथ दूसरे बैंकों के ATM पर किए गए ऐसे ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा.
ग्रीन पिन बनवाने का चार्ज हुआ कम
वहीं, बैंक ने ग्रीन पिन दोबारा बनवाने का चार्ज घटा दिया है. फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद ग्रीन पिन दोबारा बनवाने का चार्ज 23 से कम होकर 5 कर दिया गया है. ये क्लासिक, स्टैंडर्ड, प्लेटिनम, बिजनेस, सलेक्ट और वर्ल्ड कार्ड जैसे कार्ड वेरिएंट पर लागू है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>10 मिनट डिलीवरी वाले ऐप्स पर सख्त नियम, 30 सितंबर तक करना होगा ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ अब घर बैठे खाने पीने का सामान मंगाने वालों के लिए एक जरूरी बदलाव होने जा रहा है. अगर आप 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाले ऐप्स से पैक्ड फूड खरीदते हैं, तो जल्द ही ऑर्डर करने से पहले ही आपको उसकी जरूरी जानकारी दिखाई देगी. FSSAI ने तुरंत डिलीवरी और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए 30 सितंबर 2026 की समय सीमा तय की है.
FSSAI के सीईओ रजित पुनहानी ने एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में बताया कि ई-कॉमर्स और तुरंत डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर सख्ती की तैयारी चल रही है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन खराब या एक्सपायर हो चुके खाने पीने के सामान की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी.
नए नियम के अनुसार कस्टमर को कोई खाने का सामान खरीदने से पहले उसके पैकेट पर दी गई जानकारी और इस्तेमाल की आखिरी तारीख दिखाई देनी चाहिए. यानी कस्टमर को सामान ऑर्डर करने से पहले ही ये पता चल सकेगा कि सामान कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
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ऑनलाइन बिक्री पर भी होगी निगरानी
FSSAI का कहना है कि ऑनलाइन बिकने वाले खाने के सामान की जांच आम दुकानों में बिकने वाले सामान की तरह ही की जाएगी. खाने पीने की लेबलिंग को लेकर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है, क्योंकि कस्टमर्स में जागरूकता बढ़ने के साथ सामान पर दी गई जानकारी की जांच भी ज्यादा हो रही है. कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि उनके सामान के लेबल पर दी गई जानकारी सही हो और वो उस खाने पीने की असली जानकारी को ठीक से बताए.
प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे
रजित पुनहानी ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सिर्फ खुद को एग्रीगेटर बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते. उनकी वेबसाइट या ऐप पर जो खाने का सामान लिस्ट में है या नहीं और बेचे जा रहे हैं, उनकी भी जवाबदेही होगी.
पिछले कुछ महीनों में FSSAI ने खाने और पीने के सामान की कंपनियों पर निगरानी बढ़ाई है. FSSAI के मुताबिक, गलत ad, गलत जानकारी और सामान के लेबल से जुड़े नियम तोड़ने पर बड़ी कंपनियों को 150 से ज्यादा नोटिस दिए गए हैं.
एक साल में 33 हजार से ज्यादा मामले
पिछले एक साल में FSSAI ने करीब 33,000 मामले दर्ज किए और 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया. जुर्माना कम होने की बात पर पुनहानी ने कहा कि छोटी रकम का जुर्माना भी किसी ब्रांड पर असर डाल सकता है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाई होना दिखाता है कि FSSAI की कार्रवाई सही तरीके से काम कर रही है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली मेट्रो में बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, एक कर्मचारी ने 14 घंटे में नापे सारे स्टेशन</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली मेट्रो वैसे तो अपनी सर्विस और कई सारे वायरल वीडियोज को लेकर काफी चर्चा में रहती है. कभी इसमें सफर करने वाले यात्रियों के बीच झगड़ा हो जाता है, तो कभी कोई यात्री इसमें रील बनाता है. लकिन इस बार दिल्ली मेट्रो जिस वजह से चर्चा में आई है ये कुछ और ही है. क्योंकि दिल्ली मेट्रो के एक कर्मचारी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया है.
दरअसल प्रफुल सिंह नाम के इस कर्मचारी ने दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशनों को सबसे कम समय में कवर करने का रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने महज 14 घंटे 54 मिनट और 36 सेकंड में दिल्ली मेट्रो के हर स्टेशन पर जाकर ये सफर पूरा किया.
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तोड़ दिया पुराना रिकॉर्डऐसा कर प्रफुल ने ना केवल नया रिकॉर्ड बनाया बल्कि पिछला गिनी वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. इससे पहले जिसने ये रिकॉर्ड बनाया था उसने 15 घंटे 21 मिनट और 4 सेकंड में ये सफर पूरा किया था. जबकि प्रफुल्ल ने करीब 26 मिनट पहले ही ये सफर पूरा कर लिया.
पहली कोशिश में मिली सीखबिजनेस टुडे के मुताबिक प्रफुल्ल ने इससे पहले साल 2022 में भी कोशिश की थी. उस समय उन्होंने 254 स्टेशन 16 घंटे 2 मिनट 17 सेकंड में पूरे किए थे. लेकिन गलत रूट लेने की वजह से उन्हें करीब 90 मिनट का नुकसान हुआ. इस बार उन्होंने पिछली गलती से सीख लेते हुए रूट और इंटरचेंज की पहले से बेहतर योजना बनाई.
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DMRC में नौकरी का फायदाप्रफुल्ल को दिल्ली मेट्रो सिस्टम की अच्छी जानकारी है क्योंकि वो DMRC में ऑपरेशंस से जुड़े कर्मचारी हैं. उन्हें अलग-अलग रूट, इंटरचेंज, कनेक्शन और मेट्रो के संचालन की जानकारी होने का फायदा मिला है. ऐसे रिकॉर्ड में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है. एक गलत मोड़ या इंटरचेंज में थोड़ी देरी भी पूरा रिकॉर्ड खराब कर सकती है.
मेट्रो स्पीड रनिंग का बढ़ रहा क्रेजमेट्रो के सभी स्टेशनों को कम से कम समय में कवर करने की ऐसी चुनौती को मेट्रो स्पीड रनिंग कहा जाता है. दुनियाभर में मेट्रो के शौकीन लोग बड़े-बड़े शहरों के नेटवर्क के हर स्टेशन तक सबसे कम समय में पहुंचने की कोशिश करते हैं. इसका क्रेज भी इन दिनों लगातार बढ़ता ही जा रहा है. भागती- दौड़ती जिंदगी में हर कोई अपना काम जल्दी जो करना चाहता है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>केंद्रीय कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत, जुलाई DA में 3% बढ़ोतरी तय!</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 में महंगाई भत्ते (DA) में बदलाव पर केंद्र सरकार के फैसले का बेसब्री से इंतजार है. DA में बदलाव साल में दो बार किया जाता है- जनवरी और जुलाई में. इसके लिए 6 महीनों के AICPI-IW को आधार बनाया जाता है. जनवरी में महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का DA/DR 58% से बढ़कर 60% हो गया था. अब सभी की नजरें जुलाई 2026 में होने वाली बढ़ोतरीकी अगली घोषणा पर टिकी हैं, जिसमें 3% की और वृद्धि (60% से बढ़कर 63%) होना लगभग तय माना जा रहा है.
कब तक हो सकता है ऐलान?
केंद्र सरकार आमतौर पर जुलाई साइकिल के DA की घोषणा दशहरे या दिवाली के आसपास करती है. इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को है, इसलिए कैबिनेट द्वारा अक्टूबर के आखिरी हफ्ते या नवंबर की शुरुआत में इस पर मुहर लगाई जा सकती है. राहत की बात यह है कि घोषणा भले ही देरी से हो, लेकिन यह 1 जुलाई 2026 से ही प्रभावी होगी. यानी कि &amp;nbsp;कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बीते महीनों (जुलाई से लेकर घोषणा वाले महीने तक) का पूरा पैसा एकमुश्त एरियर (Arrears) के रूप में मिलेगा.&amp;nbsp;
क्या होता है AICPI-IW?
AICPI-IW का पूरा नाम ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (All-India Consumer Price Index for Industrial Workers). यह डेटा हर महीने के आखिरी कार्यदिवस पर श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour &amp;amp; Employment) के अधीन आने वाले श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी किया जाता है.
इस इंडेक्स की मदद से यह देखा जाता है कि एक निश्चित समयावधि में देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में आवश्यक वस्तुओं (खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, ईंधन आदि) की खुदरा कीमतों (Retail Prices) में कितनी बढ़ोतरी हुई है. अब जब बाजार में महंगाई बढ़ती है, तो यह इंडेक्स भी ऊपर जाता है, जिससे सीधे तौर पर कर्मचारियों का DA बढ़ जाता है.
8वें वेतन आयोग पर क्या है अपडेट?
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. फिलहाल, वेतन आयोग देश भर के तमाम राज्यों का दौरान कर संबंधित सरकारी संस्थाओं, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों से बातचीत करने में जुटा है. इसके बाद आयोग सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगा.
8वें वेतन आयोग की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक कल (1 सितंबर 2026) को जयपुर के HCM RIPA (हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान) में संपन्न हुई. यह बैठक राजस्थान के केंद्र सरकार के कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य हितधारकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी. अब आगामी बैठकें 9 &amp;nbsp;सितंबर को पुडुचेरी, 16-18 सितंबर को चंडीगढ़ और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में होनी है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील से हड़कंप, ज्वेलर्स को क्यों सता रहा बड़ा डर?</title>
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        <description><![CDATA[ PM Modi Appeal on Gold: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना न खरीदने की दूसरी अपील के बाद दिल्ली समेत देशभर के ज्वेलरी कारोबार में चिंता बढ़ गई है. ज्वेलर्स, सुनार, कारीगर और छोटे रिटेल कारोबारियों को आशंका है कि इस अपील से ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित होगी और खासकर आगामी शादी सीजन में गहनों की मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है. कारोबारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का अनुमान है कि देश में सोने की सालाना खपत 700-800 टन से घटकर करीब 500 टन तक पहुंच सकती है.
दूसरी अपील के बाद कारोबारियों की बढ़ी चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी. अब एक बार फिर प्रधानमंत्री की ओर से गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने की अपील किए जाने के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और कंपनियों में चिंता का माहौल है.
दिल्ली और देश के व्यापारियों तथा उद्यमियों के शीर्ष संगठन CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की दोबारा अपील के बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने अपनी चिंता संगठन के सामने रखी है.
800 टन से घटकर 500 टन तक पहुंच सकती है खपत
CTI के मुताबिक भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है. देश में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. संगठन का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद यह खपत घटकर करीब 500 टन तक रह सकती है. कारोबारियों का मानना है कि सोने की खरीद को लेकर इस तरह के सार्वजनिक आह्वान से ग्राहकों के बीच कीमतों को लेकर अनिश्चितता और डर पैदा होता है. इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ सकता है.
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शादी सीजन से पहले ज्वेलरी कारोबार को झटका
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय आई है, जब अक्टूबर-नवंबर में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है और परिवारों ने इसकी खरीदारी अभी से शुरू कर दी है. ऐसे समय में सोने की खरीद को लेकर लोगों के बीच बनी हिचकिचाहट ज्वेलरी की मांग को प्रभावित कर सकती है. कारोबारियों को डर है कि त्योहारी और शादी सीजन से ठीक पहले बिक्री कमजोर पड़ने से ज्वेलरी इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ सकता है.
छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
छोटे ज्वेलर्स, सुनार और कारीगरों की चिंता केवल बिक्री घटने तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि यदि लंबे समय तक सोने की बिक्री प्रभावित रहती है तो कर्मचारियों का वेतन देना मुश्किल हो सकता है और नौकरियों में कटौती तक की नौबत आ सकती है. ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक मई में प्रधानमंत्री की पहली अपील के बाद छोटे मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स का कारोबार 60 प्रतिशत तक गिर चुका है. कारोबारियों को आशंका है कि दूसरी अपील के बाद स्थिति और खराब हो सकती है.
कई दुकानदारों के यहां ग्राहकों का इंतजार
कुछ रिटेलर्स का कहना है कि पिछले 7 से 10 दिनों में उनके यहां एक भी ग्राहक नहीं आया है. ग्राहकों के बीच यह धारणा बन रही है कि आने वाले समय में सोने के दाम नीचे जा सकते हैं. इसी वजह से लोग अंगूठी और झुमके जैसी छोटी खरीदारी तक टाल रहे हैं. कारोबारियों के मुताबिक बिक्री कमजोर होने के कारण कई रिटेल विक्रेताओं ने नया स्टॉक लेना और नए ऑर्डर देना भी रोक दिया है &amp;nbsp;इससे बाजार में मंदी और निराशा का माहौल बनने लगा है.
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कारीगरों के सामने रोजगार का संकट
ज्वेलरी कारोबारियों ने कहा कि पहली अपील के बाद कारोबार प्रभावित होने का असर कारीगरों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ा है. उनका कहना है कि पहले ऐसा कभी सुनने को नहीं मिला कि सोने का कारीगर ई-रिक्शा चलाने या कुलचा-छोले बेचने को मजबूर हुआ हो, लेकिन पहली अपील के बाद ऐसे मामले सामने आए हैं. कारोबारियों को चिंता है कि दूसरी अपील के बाद रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है.
बड़े कॉरपोरेट से ज्यादा छोटे कारोबारियों पर असर
ज्वेलर्स का कहना है कि सोना खरीदने से बचने की अपील का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों और कारीगरों पर पड़ता है, जबकि Titan, Kalyan जैसी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में हैं. कुछ कारोबारियों का सवाल है कि सरकार महंगे मोबाइल फोन और कार खरीदने से बचने की अपील क्यों नहीं करती, क्योंकि इन वस्तुओं की कीमत समय के साथ घटती है. कारोबारियों का तर्क है कि सोना एक तरह की संपत्ति है और कीमत बढ़ने पर खरीदार को फायदा भी हो सकता है.
सोना भारतीय संस्कृति और शादियों से जुड़ा
CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि सोना भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शादियों में इसे अनिवार्य रूप से देखा जाता है. ऐसे में सोने की खरीदारी को लेकर बनी मौजूदा स्थिति ज्वेलरी कारोबार के साथ आम लोगों के लिए भी चुनौतीपूर्ण समय है.
बड़े ब्रांड्स के शेयरों पर भी असर का अनुमान
CTI का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील का असर शेयर बाजार में सूचीबद्ध प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है. संगठन के मुताबिक Titan, Senco Gold और Kalyan Jewellers जैसी कंपनियों के शेयरों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है.
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री की दूसरी अपील को ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका बताया है. उनके मुताबिक कारोबार को बनाए रखने के लिए ज्वेलरी उद्योग को अब अपनी व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई रणनीतियां तैयार करनी होंगी. कारोबारियों के मुताबिक त्योहारी और शादी सीजन के ठीक पहले बिक्री में गिरावट, ग्राहकों की कम आवाजाही और नए स्टॉक से दूरी ने उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. छोटे ज्वेलर्स, सर्राफा कारोबारी और कारीगरों को सबसे ज्यादा दबाव रोजगार और कारोबार पर पड़ने की आ ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोदी, की, सोना, न, खरीदने, की, अपील, से, हड़कंप, ज्वेलर्स, को, क्यों, सता, रहा, बड़ा, डर</media:keywords>
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        <title>Apple से CEO जॉन टर्नस को कितनी पगार मिलेगी? Salary के ब्रेक डाउन का खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ जॉन टर्नस ने 1 सितंबर से Apple के सीईओ का पद संभाला है. करीब 15 साल के बाद एप्पल कंपनी में सीईओ की पोजिशन बदली है. टिम कुक के बाद जॉन की ज्वाइनिंग ने लोगों का ध्यान उनकी तरफ खींचा है. अब लोग जानना चाहते हैं कि आखिर एप्पल के सीईओ को कितने पैसे मिलते हैं? जॉन टर्नस की मंथली सैलरी कितनी है और टिम कुक से जॉन टर्नस को कितना ज्यादा पैसा बढ़ाकर दिया जा रहा है. यहां इन सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं.&amp;nbsp;
कौन हैं CEO जॉन टर्नस?अगर आपको लगता है कि जॉन टर्नस ने इस साल एप्प्ल को ज्वाइन किया है तो आप गलत है. जॉन पिछले 25 साल से एप्प्ल में काम कर रहे हैं. उन्होंने साल 2001 में प्रोडक्ट डिजाइन टीम में एप्पल ज्वाइन क्या था. 2013 में वो हार्डवेयर इंजीनियरिंग का वाइस प्रेसिडेंट बने और कुछ ही साल बाद, यानी साल 2021 में वो सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बन गए.&amp;nbsp;
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जॉन टर्नस को मिलेगी कितनी सैलरी?मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉन टर्नस को 58 मिलियन डॉलर का पैकेज मिला है. इसमें 3 मिलियन डॉलर यानी 28.5 करोड़ की सिर्फ बेसिक सैलरी है और अगले साल के लिए 55 मिलियन डॉलर यानी 522 करोड़ के टारगेट स्टॉक अवॉर्ड्स भी हैं. इतना ही नहीं, जॉन के पैकेज में वन टाइम 2.5 मिलियन डॉलर का RSU ग्रांट भी शामिल है.&amp;nbsp;
टिक कुक को कितनी सैलरी मिलती थी?इधर टिम कुक के कमाई की बात करें तो इन्होंने सीईओ रहते हुए पिछले साल 74.3 मिलियन डॉलर की कमाई की है. टिम कुक की सैलरी भी कुछ कम नहीं थी. टिम 47 मिलियन डॉलर के पैकेज पर एप्पल के सीईओ थे. इस पैकेज में 2 मिलियन डॉलर की सलाना बेसिक सैलरी थी और साल 2027 के लिए 45 मिलियन डॉलर के प्लान्ड स्टॉक अवॉर्ड्स भी थे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>हर गली&amp;चौराहे में अंधेरा, महंगाई के बीच पाकिस्तान में गहराया बिजली संकट</title>
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        <description><![CDATA[ गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने अब एक नई मुसीबत आ गई है और वह है बिजली संकट. खासतौर पर, कराची में बिजली संकट चरम पर है. शहर के कई इलाकों में 16 से 24 घंटे तक की भीषण बिजली कटौती ने पाकिस्तान के ऊर्जा संकट को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है. आलम यह है कि पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बिजली कटौती से कम आय वाले परिवारों पर बोझ बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
कराची में जन जीवन अस्त-व्यस्त
डॉन (Dawn) की रिपोर्ट के अनुसार, &#039;सिविल सोसाइटी कलेक्टिव फॉर क्लीन एनर्जी फॉर कराची&#039; की ओर से कराची प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मुद्दा उठाया गया.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज ने इस बदतर स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय तक बिजली चले जाने से घर के रोजमर्रा के कामों, पढ़ाई और दूसरे कामकाज में रुकावटें आ रही हैं. इसका असर वॉटर सप्लाई और साफ-सफाई पर भी पड़ रहा है. &amp;nbsp;
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कराची, नाजिमाबाद और गुलिस्तान-ए-जौहर के कुछ इलाकों में बड़े पैमाने पर पावर कट हो रहे हैं. &amp;nbsp;यह संकट अब गरीब और कामकाजी परिवारों को भुखमरी और कगार पर धकेल रहा है. इसके चलते शहर के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन और ट्रैफिक जाम की भी खबरें आई हैं.
कराची में क्याें गहराया बिजली संकट?
कराची में बिजली सप्लाई कंपनी K-Electric ने अपने कुल फीडरों में से लगभग 30% पर जानबूझकर भारी लोड शेडिंग बढ़ा दी है. कंपनी का दावा है कि ओरंगी टाउन जैसे इलाकों में उपभोक्ताओं पर 17 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक का बिल बकाया है और वहां बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है.
&amp;nbsp;संकट की एक और बड़ी वजह, पाकिस्तान में बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आना है, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड में 4,000 मेगावाट से अधिक का घाटा हो चुका है. कराची और देश के अन्य हिस्सों के पावर प्लांट्स मुख्य रूप से गैस और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) पर चलते हैं, लेकिन वैश्विक और घरेलू कारणों से ईंधन की सप्लाई में भारी कमी आई है.

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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>100 रुपये लीटर मिलेगा दूध! मुंबई के बाद इस राज्य में दाम बढ़ाने की तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ 1 सितंबर 2026 को कई चीजों की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है. जिसमें कमर्शियल LPG, एटीएफ और दूध की कीमतों में भी मुंबई में इजाफा देखने को मिला. जिसके बाद अब भारत के एक और राज्य में दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं. क्योंकि यहां के किसानों ने ये मांग सरकार से की है. हम बात कर रहे हैं हरियाणा की, जहां पर जल्दी ही भैंस के दूध की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर हो सकती है.
किसानों ने किया फैसलादरअसल हरियाणा के कई जिलों में गांव और ब्लॉक स्तर पर डेयरी किसानों के समूहों ने ये फैसला किया है. किसानों का कहना है कि पशुओं के चारे, दाने, दवाइयों और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा दूध को लाने-ले जाने का खर्च भी काफी बढ़ गया है. ऐसे में मौजूदा 60 रुपये से 80 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर दूध बेचना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है.
ये भी पढ़ें: LPG का संकट खत्म, भारत ने अमेरिका से खरीदी 2.6 अरब डॉलर की गैस
किस तारीख से हो सकती है बढ़ोतरी?इस मुद्दे को लेकर जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल, रोहतक और हिसार जिलों के कई गांवों में डेयरी किसानों की बैठकें हो रही हैं. हांसी के भैणी अमीरपुर गांव में किसानों ने कहा है कि 5 सितंबर से भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर और गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर बेचा जाएगा. लस्सी की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. आसपास के राजथल और थुराना गांवों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है.
क्यों बोले एसोसिएशन के अध्यक्ष?वहीं हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बात करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि, &#039;पशुओं का दाना पहले 1800 रुपये में मिलता था, जो अब बढ़कर करीब 3 हजार रुपये का हो गया है. गेहूं के भूसे की कीमत भी बढ़कर 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. कुछ जिलों के डेयरी किसानों ने वीटा सहकारी डेयरी प्लांट्स को ज्ञापन देकर कच्चे दूध की खरीद कीमत में 2 रुपये से 3 रुपये प्रति किलो बढ़ाने की मांग की है.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान में महंगाई से भुखमरी की कगार पर लोग, दूध-मीट और गेहूं थाली से गायब
किसानों का कहना है कि पशु पालने का खर्च पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गया है. पशुओं के दाने, खली, चारा, गुड़, हरा चारा, दवाइयां और मजदूरी सबकुछ महंगा हो गया है. तो वहीं कई लोगों का मानना है कि भैंस के दूध का 100 रुपये लीटर बिकना तो ठीक है, लेकिन गाय के दूध को 80 रुपये प्रति लीटर में बेचना थोड़ा महंगा लग रहा है. हालांकि अब देखना होगा कि कब तक इन दामों में बदलाव होगा.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी&amp; दूध के बाद पेट्रोल पर आई बड़ी खबर, सरकार ने निर्यात पर बढ़ाया Windfall Tax</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी और दूध की कीमतों में हाल ही में इजाफा हुआ, जिससे जनता काफी परेशान नजर आई. वहीं अब सरकार ने पेट्रोल और डीजल को लेकर भी एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. सरकार का ये फैसला 1 सितंबर 2026 को आया है. जब पहले से ही कई चीजों पर दामों में बदलाव देखने को मिल रहा है.
कितना बढ़ाया टैक्स?दरअसल न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 प्रति लीटर के हिसाब से टैक्स लगाया है. पहले पेट्रोल के निर्यात पर कोई टैक्स नहीं लगता था. तो वहीं डीजल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड-इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को मिलाकर 25 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से टैक्स बढ़ाया है. इससे पहले ये टैक्स 24 रुपये प्रति लीटर था.
ये भी पढ़ें: दूध 100 रुपया महंगा, मुंबई के बाद अब यहां दाम बढ़ाने की तैयारी
ATF पर किया टैक्स कमकेवल पेट्रोल- डीजल ही नहीं बल्कि सरकार ने हवाई जहाज के ईंधन यानी ATF पर भी फैसला किया है. हाल ही में ATF की कीमतों बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में सरकार ने इसके टैक्स पर थोड़ी राहत दी है. सरकार ने ATF के निर्यात पर 19.50 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इन बदलावों की जानकारी दी है. हालांकि, देश में इस्तेमाल के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
जनता पर पड़ेगा असर?टैक्स के बढ़ने के बाद लोगों को ये भी शंका है कि इसका बोझ जनता पर पड़ेगा. हालांकि इसका असर किसी भी तरह से जनता के ऊपर नहीं पड़ने वाला है. बल्कि सरकार का मकसद देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए विदेशों में ईंधन बेच सकती थीं. ऐसे में सरकार ने निर्यात कम करने के लिए ये टैक्स लगाया है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी के बढ़ते दामों पर लगेगी लगाम? 15 दिन पहले शुरू होगी पेराई</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का समय आते ही चीनी के बढ़ते दामों ने लोगों की नाक में दम कर दिया है. कुछ जगहों पर चीनी 70 रुपये किलो से ज्यादा बिक चुकी है, लेकिन अब इसकी कीमत करीब 60 रुपये किलो है. दाम कम करने के लिए सरकार ने चीनी को ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी है. इसके साथ ही महाराष्ट्र की चीनी मिलों से 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा गया है. अब देखना होगा कि इस फैसले से आम लोगों को चीनी के दामों में कितनी राहत मिलती है.
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी बनाने वाला राज्य है. सोलापुर और मराठवाड़ा यहां के प्रमुख गन्ना बनाने वाले इलाके हैं. लेकिन, 15 अक्टूबर से बड़े स्तर पर गन्ने की कटाई शुरू करना आसान नहीं होगा. महाराष्ट्र के चीनी अधिकारी संजय भोसले के मुताबिक, राज्य में गन्ने की कटाई के लिए बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों से आते हैं. मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों के मजदूर आमतौर पर दशहरा और दिवाली के बाद महाराष्ट्र पहुंचते हैं. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है, इसलिए 15 अक्टूबर से ही बड़ी संख्या में मजदूरों का मिलना मुश्किल हो सकता है.
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जल्दी पेराई से कम चीनी की रिकवरी
समय से पहले पेराई शुरू करने पर सबसे बड़ी परेशानी चीनी की रिकवरी को लेकर है. रिकवरी यानी एक फिक्स मात्रा के गन्ने से कितनी चीनी निकलती है. संजय भोसले के अनुसार, 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पेराई शुरू होने पर रिकवरी 7 से 7.5% तक गिर सकती है. वहीं नवंबर के बाद ये आमतौर पर 8% से ऊपर रहती है. सोलापुर में रिकवरी 8 से 11% तक पहुंच सकती है.
रिकवरी कम होने से चीनी मिलों को बड़ा फाइनेंशियल नुकसान हो सकता है. ऐसे में मिलों के लिए जल्दी पेराई शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है.
किसानों की कमाई पर भी असर
गन्ने की जल्दी कटाई का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. पूरी तरह तैयार होने से पहले गन्ना काटने पर उसके वजन और क्वालिटी में कमी आ सकती है. इससे किसानों की पैदावार और कमाई दोनों पर असर हो सकता हैं.
राज्य के कई हिस्सों में इस साल आम बारिश नहीं हुई है. इससे गन्ने की पैदावार पर असर पड़ रहा है. ऐसे में कमजोर फसल की जल्दी कटाई करने से किसानों की परेशानी ज्यादा हो सकती है.
क्या चीनी के दाम सच में घटेंगे
सरकार को उम्मीद है कि जल्दी पेराई से बाजार में नई चीनी जल्द आएगी और कीमतें नीचे आएंगी. लेकिन सिर्फ जल्दी पेराई से खुदरा कीमत तुरंत कम होना फिक्स नहीं है. अगर गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा कम हुई और मिलों को नुकसान हुआ, तो वो कितनी चीनी बाजार में उतारेंगी, ये भी बड़ा सवाल है.
फिलहाल सरकार के सामने चुनौती है कि खरीदने वाले लोगों को महंगी चीनी से राहत मिले, लेकिन किसानों और चीनी मिलों पर इसका बोझ नहीं हो.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>श्रमिक पंजीकरण करवाने पर मिलेंगे 7000 रुपये? सरकार ने बताई वायरल दावे की सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर आए दिन कई सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी सामने आती है. इनसे जुड़े पोस्ट और वीडियोज भी तेजी से वायरल होते हैं. जिन पर कई लोग भरोसा भी कर लेते हैं. इसी तरह हाल ही में एक स्कीम के बारे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार श्रमिकों का पंजीकरण कराने पर उनके बैंक खातों में सीधे 7 हजार रुपये डालेगी. हालांकि अब इस खबर की सच्चाई भी सामने आ गई है.
क्या है खबर की सच्चाई?दरअसल PIB फैक्ट चेक ने हाल ही में इस खबर की सच्चाई उजागर कर दी है. एजेंसी ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) के जरिए इस वायरल वीडियो को शेयर किया है. इसके साथ साफतौर पर बड़े शब्द में लिखा है FAKE.
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इसके साथ ही एजेंसी ने बताया है कि, केंद्र सरकार ने श्रमिकों को पंजीकरण कराने के बदले किसी भी तरह की राशि देने की कोई घोषणा नहीं की है. इसका मतलब है कि श्रमिक के तौर पर पंजीकरण कराने पर बैंक खाते में 7 हजार रुपये की नकद राशि नहीं आएगी. यहां देखें पोस्ट:

सोशल मीडिया पर एक वीडियो इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि भारत सरकार श्रमिक पंजीकरण कराने पर बैंक खातों में सीधे ₹7,000 की मुफ्त राशि दे रही है।#PIBFactCheck:❌ यह दावा #फर्जी है । ✅ भारत सरकार ने श्रमिकों को पंजीकरण के बदले किसी भी प्रकार की राशि प्रदान करने संबंधी&amp;hellip; pic.twitter.com/kj6jhkhnnh
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) September 1, 2026



सावधान रहने की अपीलइतना ही नहीं बल्कि PIB फैक्ट चेक ने लोगों को ऐसे वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट से सावधान रहने की सलाह दी है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रम कानूनों, सरकारी योजनाओं और श्रमिकों से जुड़ी किसी भी सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए.
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लोगों के बेवकूफ बनाते हैं ठगऐसे फर्जी दावों के जरिए लोगों से उनकी निजी जानकारी, बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर या ओटीपी हासिल करने की कोशिश भी की जा सकती है. इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर करने से बचना जरूरी है. श्रमिकों से जुड़ी सरकारी योजनाओं और नीतियों की प्रमाणिक जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है. किसी योजना के तहत मिलने वाले लाभ की जानकारी भी वहीं से चेक की जा सकती है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>श्रमिक, पंजीकरण, करवाने, पर, मिलेंगे, 7000, रुपये, सरकार, ने, बताई, वायरल, दावे, की, सच्चाई</media:keywords>
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        <title>1 सितंबर से CNG 2 रुपए हो गई महंगी, अब आपके शहर में क्या है 1 किलो गैस के दाम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/1-सितंबर-से-cng-2-रुपए-हो-गई-महंगी-अब-आपके-शहर-में-क्या-है-1-किलो-गैस-के-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ आज, 1 सितंबर के दिन देशभर में कई सारे बदलाव हुए हैं. एक तरफ जहां दूध के दाम बढ़ रहे हैं तो वहीं कमर्शियल एलपीजी के दामों में भी उछाल आया है. हालांकि, इतने पर भी स्थिति शांत नहीं है. आम आदमी को एक और बड़ा झटका लगा है. सीएनजी के दाम में इजाफा कर दिया गया है. महानगर गैस लिमिटेड ने सीएनजी के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ा दिए हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कहां बढ़ें दाम?
राहत की बात ये है कि सीएनजी के ये दाम देशभर में नहीं बढ़े हैं, बल्कि ये बढ़त सिर्फ मुबंई की है. मुबंई में अब 2 रुपए की बढ़ोतरी के बाद सीएनजी 88 रुपये प्रति किलो हो गया है. कल तक यही सीएनजी 86 रुपए प्रति किलो पर था.&amp;nbsp;
दिल्ली में कितने बढ़े थे दाम?हाल ही में दिल्ली- एनसीआर में भी सीएनजी के दाम बढ़े थे. यहां सीएनजी 3 रुपए 89 पैसे बढ़कर 86 रुपए 98 पैसे प्रति किलो के रेट पर आ गया है. वहीं, नोएडा में सीएनजी का अब नया रेट 95.59 रुपये प्रति किलो है.&amp;nbsp;
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क्यों बढ़ें सीएनजी के दाम?मिडिल ईस्ट में तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार- चढ़ाव ही सीएनजी के बढ़ते दाम का मुख्य कारण है. इसके अलावा देशभर में सीएनजी की गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे घरेलू स्तर पर सीएनजी की मांग में भारी इजाफा हुआ है. ये भी सीएनजी के दाम बढ़ने का एक कारण हो सकता है.&amp;nbsp;
पीएनजी ने भी मारी छलांग&amp;nbsp;मुबंई में सिर्फ सीएनजी ही नहीं, पीएनजी के दाम ने भी छलांग लगाई है. घरेलू पीएनजी के दाम आज से 1 रुपए प्रति SCM बढ़ गए हैं.&amp;nbsp; यानी कि पहले जो पीएनजी 52 रुपए प्रति SCM था वो अब 53 रुपए प्रति SCM हो चुका है. इससे अब आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ने वाला है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>6280 रुपए किलोलीटर महंगा हुआ जेट फ्यूल, आज से महंगा हो जाएगा फ्लाइट टिकट!</title>
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        <description><![CDATA[ आज 1 सितंबर से जेट फ्यूल (ATF) के दाम 6.28 रुपये प्रति लीटर (6,280 रुपये प्रति किलोलीटर) बढ़ा दिए गए हैं. Indian Oil Corporation Ltd. (IOCL) के सूत्रों ने बताया कि&amp;nbsp;अभी एक महीने पहले ही 1 अगस्त 2026 को भी तेल कंपनियों ने ATF के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. यानी कि महज 30 दिनों के भीतर जेट फ्यूल के दाम लगभग 11.28 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं. इसी के साथ अब ईंधन की कीमत बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 115 रुपये थी. इससे पहले जुलाई में ATF की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी.
क्यों बढ़ाए गए जेट फ्यूल के दाम?
किसी भी एयरलाइन को ऑपरेट करने में जो खर्च आता है, उसका 40% से 45% हिस्सा केवल ईंधन खरीदने में जाता है. अब ईंधन के दाम बढ़ेंगे, तो एयरलाइंस कंपनियों पर भी वित्तीय बोझ बढ़ेगा और इसका सीधा उनके मुनाफे पर पड़ेगा. अमूमन एयरलाइंस कंपनियां इस बढ़े हुए आर्थिक दबाव का बोझ खुद उठाने के बजाय फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) या बेस फेयर बढ़ाकर इसका पूरा भार यात्रियों पर ट्रांसफर कर देती हैं.
क्या महंगे होंगे एयर टिकट्स?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि महंगे ईंधन का सबसे ज्यादा असर लो-कॉस्ट कैरियर्स (LCC) यानी बजट एयरलाइंस पर पड़ता है. आमतौर पर जहां &amp;nbsp;Air India जैसे किसी फुल-सर्विस एयरलाइंस के कुल खर्च में ईंधन का हिस्सा लगभग 33% होता है. वहीं, IndiGo या Spicejet जैसे बजट एयरलाइंस के लिए यह 40% से अधिक होता है इसलिए बजट एयरलाइंस के टिकटों के दाम अधिक तेजी से बढ़ सकते हैं.
दरअसल, सितंबर से लेकर नवंबर-दिसंबर तक भारत में त्योहारों और छुट्टियों का सीजन रहता है. इस दौरान नवरात्रि, दिवाली, छठ पूजा जैसे एक के बाद एक त्योहार आते हैं और हवाई सफर की भी मांग काफी बढ़ जाती है क्योंकि लोग छुट्टियों में घर लौट रहे होते हैं. ऐसे में एक तरफ ईंधन के बढ़ते दाम और दूसरी तरफ यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए हो सकता है कि आने वाले समय में हवाई टिकटों की कीमतों में 10-15% तक का इजाफा हो.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ट्रंप को तालिबान ने दिया 1,000,000,000,000 का ऑफर, सामने रख दी ये बड़ी शर्त</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ट्रंप-को-तालिबान-ने-दिया-1000000000000-का-ऑफर-सामने-रख-दी-ये-बड़ी-शर्त</link>
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        <description><![CDATA[ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन दिनों अमेरिका के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश में जुटा हुआ है. तालिबान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाए प्रतिबंध को हटा दें और साथ ही उसके जब्त किए गए फंड को भी वापस कर दें. यह पहल अफगानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाली NATO सेनाओं की वापसी के और तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच साल बाद की जा रही है.
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने बताया कि अफगानिस्तान माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश के लिए पूरी तरह से तैयार है. मुत्ताकी ने काबुल में अपने ऑफिस में FT से कहा, &quot;अफगानिस्तान और अमेरिका के रिश्तों को पिछले 20 साल की जंग के नजरिए से नहीं, बल्कि भविष्य के सहयोग के आधार पर देखा जाना चाहिए.&quot;&amp;nbsp;
क्या है 1 ट्रिलियन डॉलर का ऑफर?
तालिबान ने अमेरिकी कंपनियों को देश में मौजूद लिथियम, तांबा (Copper), लोहा, कोबाल्ट, सोना और रेयर-अर्थ खनिजों (दुर्लभ धातुओं) के खनन और निवेश के लिए आमंत्रित किया है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के अनुसार भी अफगानिस्तान में मौजूद इन संसाधनों की कुल कीमत कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है.
सिर्फ खनन ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और द्विपक्षीय व्यापार में भी अमेरिकी निवेश का स्वागत करने की बात कही है. तालिबान ने अमेरिका में काबुल में अपने दूतावास को फिर से खोलने का आग्रह किया है और वहां की सुरक्षा की पूरी गारंटी भी दी है.&amp;nbsp;
कब से लगा रखा है प्रतिबंध?
अमेरिका ने 23 सितंबर 2001 तालिबान को &#039;विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी&#039; (SDGT) घोषित कर रखा है और इसके तहत उस पर कड़े प्रतिबंध भी लागू कर रखे हैं. अमेरिका में हुए 9/11 के आतंकी हमले के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए उसे SDGT की लिस्ट में डाल दिया था.
अगस्त 2021 में जब अगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की सरकार काबिज हुई, तब अमेरिका ने इसी पुराने SDGT दर्जे का कानूनी इस्तेमाल करके देश के 9.5 बिलियन डॉलर के फंड को तुरंत फ्रीज (जब्त) कर लिया था.
अमेरिका के लगाए गए इस प्रतिबंध के तहत, अगर कोई भी अमेरिकी नागरिक, बैंक या बहुराष्ट्रीय कंपनी तालिबान से 1 रुपये का भी व्यापार करती है, तो अमेरिकी कानून (IEEPA) के तहत उन पर लाखों डॉलर का जुर्माना और 20 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.

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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सोना 2000 रुपए से ज्यादा सस्ता, चांदी में भी भारी गिरावट, आज क्या है Gold&amp;Silver का दाम</title>
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        <description><![CDATA[ जहां देशभर में गैस सिलेंडर, दूध, एटीएफ और ऑटो किराया ने लोगों को परेशान कर दिया है तो वहीं, दूसरी तरफ सोना- चांदी ने राहत भी दी है. आज सोना और चांदी, दोनों में ही गिरावट दर्ज की गई है. तीज- त्योहार के सीजन में सोने के गिरते दाम से आम आदमी को थोड़ा सुकून मिला है. यहां से आप सोना और चांदी, दोनों के भाव वो भी शहर अनुसार देख सकते हैं. साथ ही जान सकते हैं कि ये गिरावट कितने प्रतिशत की आई है.&amp;nbsp;
कितना सस्ता हुआ सोना?
आज 1 सितंबर, दिन मंगलवार को सोने की कीमत में 2,045 रुपये की गिरावट आई है. इसी के साथ आज सोना 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अक्टूबर माह में आपूर्ति वाले अनुबंध का भाव 2,045 रुपये यानी 1.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है. इसमें 2,680 लॉट का कारोबार हुआ है. अगर कारण के बारे में सोचें तो हाजिर बाजार में कमजोरी के रुख के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई है. वहीं, वैश्विक बाजार में सोना 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,432.51 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.&amp;nbsp;
1 सितंबर से CNG 2 रुपए हो गई महंगी, अब आपके शहर में क्या है 1 किलो गैस के दाम?
शहर अनुसार, सोने का भाव-&amp;nbsp;

दिल्ली- 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
मुंबई- 1,54,036 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
कोलकाता- 1,54,036 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
चेन्नई- 1,54,036 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
पटना- 1,54,136 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;

कितनी सस्ती हुई चांदी?
अब चांदी की बात करें तो MCX के अनुसार, चांदी की कीमत में 1,955 रुपये की गिरावट आई है. इसके बाद आज चांदी के दाम 2,40,489 रुपये प्रति किलोग्राम पर हैं. मल्टी कमोडिटी एक्स्चेंज में चांदी की कीमत 1,955 रुपये यानी 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,40,489 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है. इसमें 2,004 लॉट का कारोबार हुआ है. वहीं, वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमत 1.04 प्रतिशत लुढ़क कर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर रह गयी है.
6280 रुपए किलोलीटर महंगा हुआ जेट फ्यूल, आज से महंगा हो जाएगा फ्लाइट टिकट!
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>इस राज्य में अब सितंबर 2027 तक बैन रहेगा गुटखा और पान मसाला, सरकार सख्त</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-राज्य-में-अब-सितंबर-2027-तक-बैन-रहेगा-गुटखा-और-पान-मसाला-सरकार-सख्त</link>
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        <description><![CDATA[ गुटखा और पान मसाला खाने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. गुजरात सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा व पान मसाला पर लगे प्रतिबंध को 1 साल तक और बढ़ा दिया है. अब राज्य में इन उत्पादों पर बैन 12 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा.&amp;nbsp;
सरकार का कहना है कि उन्होंने यह फैसला लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया है. काफी लंबे समय से तंबाकू उत्पादों के सेवन को कई गंभीर बीमारियों से जोड़कर देखा जाता रहा है. ऐसे में साल 2012 से लागू इस बैन के तहत गुटखा और पान मसाला की बिक्री, निर्माण, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी. &amp;nbsp;
गुटखा-पान मसाला के किन कामों पर रहेगा रोक?
गुजरात में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर यह रोक 13 सितंबर से अगले एक साल तक जारी रहेगी. यह नियम उन सभी उत्पादों पर लागू होगा, जिन्हें किसी भी नाम से गुटखा या पान मसाला के रूप में बेचा जाता है. हालांकि यह नियम सिर्फ किसी एक ब्रांड या नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए लागू है. अगर अलग-अलग बेची जाने वाली सामग्रियों मिलाकर गुटखा या पान मसाला तैयार किया जाता है, तो उन पर भी यह रोक लाजिम है.
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सरकार ने क्यों बढ़ाया बैन?
सरकार ने कई एक्सपर्टों की रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि गुटखा और पान मसाला का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है. उन्होंने कहा है कि इन उत्पादों के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसके अलावा सरकार ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें कई लोग धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का भी इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
गुजरात सरकार ने कहा है कि अगर कोई इस नियम को तोड़कर प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री, निर्माण या वितरण करता है, तो खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. क्योंकि सरकार के इस नए फैसले का खास मकसद लोगों को तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान से बचाना और उनकी सेहत को बेहतर बनाना है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चीनी 30% हुई सस्ती, दुकानों पर गिरावट का असर दिखने में लगेंगे 10 दिन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-30-हुई-सस्ती-दुकानों-पर-गिरावट-का-असर-दिखने-में-लगेंगे-10-दिन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-30-हुई-सस्ती-दुकानों-पर-गिरावट-का-असर-दिखने-में-लगेंगे-10-दिन</guid>
        <description><![CDATA[ बढ़ती महंगाई से इस वक्त हर कोई परेशान है. त्योहार के समय में चीनी की बढ़ती कीमत ने आम लोगों का बजट हिलाकर रख दिया है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम बढ़ने से लोगों की जेब पर भी असर पड़ रहा है. इस बीच एक राहत की खबर है. मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत में गिरावट देखने को मिली है.&amp;nbsp;
कितनी गिरावट हुई है?
दरअसल, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत लगभग 30 प्रतिशत कम हुई है. जिसके बाद अब चीनी की कीमत 47 रुपये प्रति किलो हो गई है. ऐसे में कई लोगों ये जानना चाहेंगे कि क्या इसका असर आम ग्राहकों को भी देखने को मिलेगा या नहीं?
कीमतों में अचानक गिरावट क्यों हुई?
अचानक ही मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स मिल कीमत में गिरावट नहीं हुई है, बल्कि यह गिरावट सरकार के एक फैसले के बाद हुई है. ऐसे में लोग जानना चाहेंगे कि सरकार ने क्या फैसला लिया है, जिसके बाद कीमत में गिरावट देखने को मिली है.&amp;nbsp;
रिटेल दुकानों पर गिरावट का दिखेगा असर
बता दें कि फिलहाल आम ग्राहकों को दुकानों पर इसका फायदा मिलने में कुछ समय लग सकता है. जानकारी के मुताबिक, दुकानों में ग्राहकों को इसका फायदा कम से कम 10 दिन में दिखने को मिल सकता है.
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सरकार का फैसला क्या है?
अब सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए तैयार की गई रिफाइंड चीनी को देश के बाजार में बेचने की परमिशन दे दी है. सबसे खास बात तो यह है कि आने वाले कुछ महीनों में लगभग 3 से 3.5 लाख टन चीनी बाजार में आने की उम्मीद की जा रही है.&amp;nbsp;
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आम लोगों को मिलेगा फायदा&amp;nbsp;
अगर आने वाले दिनों में दुकानों पर चीनी के दाम में गिरावट आती है तो इसका फायदा सीधे लोगों की जेब पर पड़ेगा.

जिन लोगों के घर में चीनी का इस्तेमाल ज्यादा होता है उनका खर्च कम होगा.
अगर चीनी सस्ती होती है तो मिठाई, बेकरी और दूसरे सामानों पर भी असर पड़ सकता है.
होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकान वालों का भी खर्च कम हो सकता है.
अभी दुकानों पर चीनी के दाम कम होने में समय लग सकता है तो इसलिए चीनी का फिलहाल इस्तेमाल सोच-समझकर करना ही बेहतर होगा.&amp;nbsp;

 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नौकरी छूटी तो तुरंत छोड़ना होगा देश, 60 दिनों का ग्रेस पीरियड खत्म करेगा US!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-छूटी-तो-तुरंत-छोड़ना-होगा-देश-60-दिनों-का-ग्रेस-पीरियड-खत्म-करेगा-us</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-छूटी-तो-तुरंत-छोड़ना-होगा-देश-60-दिनों-का-ग्रेस-पीरियड-खत्म-करेगा-us</guid>
        <description><![CDATA[ अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों की मुश्किल बढ़ने वाली है, खासतौर से वो भारतीय जो H1-B वीजा पर अमेरिका गए हुए हैं. &amp;nbsp;ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने किसी भी ऐसे भारतीय की नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, अभी ये नियम लागू नहीं हुआ है और फिलहाल मौजूदा 60 दिन की सुविधा जारी है.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इस सुविधा को खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव को 27 अगस्त को व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेग्युलेटरी अफेयर्स (OIRA) से रिव्यू की मंजूरी मिल गई है.
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क्या होगा इस फैसले का असर?अगर ये प्रस्ताव अंतिम नियम बन जाता है, तो नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों के पास अमेरिका में रुककर दूसरी नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों का समय भी नहीं रहेगा. अभी अगर किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वो ग्रेस पीरियड के दौरान दूसरी कंपनी तलाश सकता है. नई कंपनी उसके लिए H-1B आवेदन कर सकती है और नियमों की शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी अमेरिका में रहते हुए नई नौकरी शुरू कर सकता है.
इसके अलावा ग्रेस पीरियड खत्म होने पर नौकरी जाने के बाद कर्मचारी के इमिग्रेशन स्टेटस पर तुरंत असर पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल केवल प्रस्ताव रखा गया है, इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है. ऐसे में इसके सटीक नियमों के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.
भारतीयों पर पड़ेगा ज्यादा असरइस प्रस्ताव का असर सबेसे ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा. क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है. वित्त वर्ष 2024 में मंजूर हुए H-1B पीटिशन में 71% आवेदक भारत में जन्मे लोगों के थे. इसलिए H-1B कर्मचारियों के लिए नौकरी बदलना मुश्किल होने पर भारतीय टेक्नोलॉजी और अन्य कुशल प्रोफेशनल्स पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
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अभी क्या मिलती है सुविधा?फिलहाल जो नियम हैं उसके मुताबिक अगर किसी योग्य विदेशी कर्मचारी की अमेरिका में नौकरी चली जाती है, तो उसे अधिकतम 60 दिनों तक अमेरिका में रहने का मौका मिलता है. ये अवधि उसके मौजूदा वीजा की वेलिडिटी खत्म होने से पहले भी खत्म हो सकती है. इस दौरान कर्मचारी काम नहीं कर सकता, लेकिन उसे दूसरी नौकरी तलाशने, नया वीजा या इमिग्रेशन स्टेटस लेने या अमेरिका छोड़ने की तैयारी करने का समय मिलता है.
ये सुविधा H-1B के अलावा H-1B1, L-1, O-1, E-1, E-2, E-3 और TN जैसी कुछ अन्य श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होती है. कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Marie का बिस्किट खाते हैं आप? Wholewheat क्लेम पर लगा 1 लाख का जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप Marie बिस्किट खाते हैं तो पैकेट पर लिखी एक बात आपके लिए भी जानना जरूरी है. McVities Wholewheat Marie बिस्किट्स को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण CCPA ने यूनाइटेड बिस्किट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 1 लाख का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण के मुताबिक, बिस्किट के नाम में होल व्हीट &amp;nbsp;लिखा था, लेकिन इसमें होल व्हीट आटे की मात्रा सिर्फ 19.5% थी.
ये मामला तब सामने आया जब CCPA ने सोशल मीडिया पर सामने आई एक खबर को देख कर खुद जांच की इसमें McVities होल व्हीट marie बिस्किट को हेल्दी, नेचुरल और ऑर्गेनिक बताकर प्रचार किए जाने और इसके इंग्रेडिएंट्स पर सवाल उठाए गए थे. इसके बाद CCPA ने बिस्किट की पैकेजिंग और ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी की जांच की. जांच में पता चला कि प्रोडक्ट में 19.5% &amp;nbsp;साबुत गेहूं का आटा था, जबकि 52% रिफाइंड गेहूं का आटा मैदा मौजूद था.
होल व्हीट नाम पर CCPA ने जताई एतराज&amp;nbsp;
CCPA का कहना था कि पैकेट पर Wholewheat शब्द को खास देखा के इस्तेमाल करने से आम कस्टमर को यह लग सकता है कि बिस्किट मुख्य रूप से पूरे गेहूं के आटे से बना है. जबकि प्रोडक्ट में इसकी मात्रा काफी कम थी. &amp;nbsp;इसी वजह से अधिकारी ने इसे गलत दावा माना. इस मामले की जांच, जांच इन्वेस्टिगेशन ने भी की थी. उसने 16 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बिस्किट के नाम और उसमें मौजूद साबुत गेहूं के आटे की मात्रा के बारे में जानकारी दी गई थी.
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कंपनी ने ट्रेडमार्क का दिया हवाला
यूनाइटेड बिस्किट्स ने अपनी सफाई में कहा कि होल व्हीट Marie बिस्किट एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है और wholewheat का इस्तेमाल ब्रांड की पहचान के लिए किया गया है. कंपनी ने पैकेट पर मौजूद डिसक्लेमर का भी हवाला दिया. कंपनी ने बाद में पैकेजिंग बदलने और रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क से wholewheat शब्द हटाने की पेशकश की. साथ ही पुराने पैकेट इस्तेमाल करने के लिए 9 महीने का समय मांगा.
CCPA ने कंपनी की दलील खारिज की
CCPA ने कहा कि किसी शब्द के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क होने से कंपनी को गलत जानकारी देने की अनुमति नहीं मिल जाती. प्राधिकरण ने यह भी कहा कि पैकेट पर दिया गया डिस्क्लेमर छोटे अक्षरों में और मुख्य दावे के नीचे था, इसलिए वो &amp;nbsp;Wholewheat के प्रमुख दावे को सही तरीके से सही नहीं करता. CCPA ने कंपनी को सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया माध्यमों से इस गलत ad को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है. &amp;nbsp;नए पैकेजिंग में भी इस दावे को हटाने को कहा गया है. साथ ही यूनाइटेड बिस्किट्स को आदेश की तारीख से 15 दिनों के अंदर नियमों का पालन करने की रिपोर्ट जमा करनी होगी.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अस्पताल, कॉलेज और बीमा, UPI से एक दिन में कहां कितनी है पेमेंट लिमिट?</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में UPI लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में लोग चाय-कॉफी के बिल से लेकर बड़े ऑनलाइन पेमेंट तक हर छोटी-कछोटी चीजों के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि UPI से हर जगह एक जैसी रकम का पेमेंट नहीं किया जा सकता है? हालांकि, बहुत से लोगों को लगता है कि UPI से हर तरह के पेमेंट की लिमिट सिर्फ 1 लाख रुपये तक होती है, लेकिन ऐसा नहीं है.&amp;nbsp;
दरअसल, UPI पेमेंट की लिमिट अलग-अलग सेवाओं और जरूरतों के हिसाब तय की गई है. ऐसे में अगर आप अस्पताल का बिल, कॉलेज की फीस, बीमा या टैक्स का पेमेंट UPI से करना चाहते हैं, तो आपको इसकी लिमिट के बारे में जरूर पता होनी चाहिए.
सामान्य UPI ट्रांजैक्शन की कितनी है लिमिट?
आमतौर पर सामान्य UPI पेमेंट के लिए प्रति ट्रांजैक्शन लिमिट 1 लाख रुपये तक होती है. वहीं, यह लिमिट रोजाना के सामान्य लेनदेन जैसे शॉपिंग, बिल पेमेंट और अन्य सेवाओं के लेनदेन के लिए लागू होती है. हालांकि, कुछ खास कैटेगरी में इससे ज्यादा रकम का ट्रांजैक्शन करने की सुविधा दी गई है.
BRICS समिट: दिल्ली के लग्जरी होटल फुल, कई गुना बढ़ा कमरों का किराया
इन सेवाओं में कर सकते हैं 5 लाख रुपये तक का पेमेंट&amp;nbsp;

टैक्स पेमेंट: अगर आप इनकम टैक्स या किसी अन्य पात्र टैक्स का पेमेंट UPI से करते हैं, तो इसकी लिमिट 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक कर दी गई है.&amp;nbsp;
IPO और निवेश: IPO आवेदन और RBI की रिटेल डायरेक्ट स्कीम में भी 5 लाख रुपये तक की लिमिट लागू होती है.&amp;nbsp;
अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं: अस्पतालों में इलाज से लेकर बिल पेमेंट तक के लिए 5 लाख रुपए तक की UPI पेमेंट की सुविधा मिल सकती है.&amp;nbsp;
कॉलेज: कॉलेज और अन्य शिक्षा संस्थानों की फीस जमा करने के लिए भी ज्यादा किमीट का फायदा मिलता है.&amp;nbsp;
बीमा पेमेंट: बीमा से जुड़े कुछ पेमेंट में भी ज्यादा लिमिट लागू होती है.&amp;nbsp;

UPI Lite और UPI 123Pay की अलग है लिमिट

UPI Lite: इसमें एक ट्रांजैक्शन की लिमिट 1,000 रुपए तक है और वॉलेट बैलेंस की अधिकतम लिमिट 5,000 रुपए तक रखी गई है.
UPI 123Pay: फीचर फोन यूजर्स के लिए शुरू की गई इस सिस्टम में प्रति ट्रांजैक्शन लिमिट 10,000 रुपये तक है.

ध्यान दें कि UPI लिमिट की अधिकतम लिमिट का मतलब यह नहीं है कि आप उतनी ही रकम पेमेंट कर पाएंगे. क्योंकि NPCI की तय लिमिट के बावजूद आपका बैंक या UPI ऐप अपनी अलग ट्रांजैक्शन लिमिट तय कर सकता है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>BRICS समिट: दिल्ली के लग्जरी होटल फुल, कई गुना बढ़ा कमरों का किराया</title>
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        <description><![CDATA[ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी दिल्ली के लग्जरी होटल बाजार में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय मेहमानों और प्रतिनिधियों की बढ़ती मांग के कारण कई बड़े होटलों में कमरे काफी तेजी से बुक हो रहे हैं. हालात यह हैं कि कई लग्जरी होटल पूरी तरह फूल हो चुके हैं, वहीं जिन होटलों में कमरे मौजूद है, वहां किराया कई गुना तक बढ़ा दिया गया है.&amp;nbsp;
दिल्ली के बड़े होटलों में कमरों की कमी
11 से 13 सितंबर के बीच होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को देखते हुए दिल्ली के कई प्रमुख लग्जरी होटलों में कमरों की मांग अचानक बढ़ गई है. खासतौर पर इसका असर लग्जरी होटल में दिखाई दे रहा है, जहां कई जगहों पर कमरे मौजूद नहीं हैं या फिर बहुत ज्यादा वे कमरे बहुत ज्यादा कीमत में मिल रहे हैं.
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बुकिंग प्लेटफॉर्म की जांच के मुताबिक, नई दिल्ली का ताज महल, ताज पैलेस और लीला पैलेस जैसे कई बड़े होटलों में इन तारीखों के लिए कमरे नहीं मिल रहे हैं. वहीं ओबेरॉय होटल में भी कई दिनों के लिए बुकिंग पूरी हो चुकी है. खासकर आईटीसी मौर्या और शांगरी-ला इरोस जैसे होटलों में मौजूदा कमरों के लिए काफी ज्यादा कीमतें वसूली जा रही हैं.
BRICS समिट से क्यों बढ़ी होटल कमरों की डिमांड?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दो दिन का आयोजन है, लेकिन इसका असर कई दिनों तक देखने को मिल रहा है. दरअसल, विदेशी प्रतिनिधि, अधिकारी और कई अन्य मेहमान इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहले ही दिल्ली पहुंच रहे हैं और कई लोग अपना ठहराव बढ़ा रहे है. यही वजह है कि नई दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में होटल कमरों की मांग अचानक बढ़ गई है.
आम यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
दरअसल, इन दिनों दिल्ली की यात्रा की प्लानिंग कर रहे पर्यटकों और कारोबारियों को अब होटल के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि होटल में कमरे मौजूद न होने के कारण कई लोगों को मुख्य इलाकों से दूर होटल तलाशने भी पड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ यात्री अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते हैं या बजट होटल का ऑप्शन चुन सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>गलत खाते में चले गए पैसे तो कैसे मिलेगा रिफंड? जानिए बैंक के जरूरी नियम</title>
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        <description><![CDATA[ डिजिटल पेमेंट के दौर में पैसे ट्रांसफर करना बेहद आसान हो गया है, लेकिन एक छोटी सी गलती पैसे को गलत अकाउंट तक पहुंचा सकती है. अकाउंट नंबर या IFSC कोड डालते समय हुई गलती के वजह से अगर पैसा किसी दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में चला जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए. समय पर शिकायत करने से रकम वापस लेने की प्रोसेस शुरू की जा सकती है.
गलत अकाउंट में पैसे पहुंचने का पता चलते ही अपने बैंक को इसकी जानकारी दे. आप कस्टमर केयर, ईमेल या बैंक शाखा के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं. बेहतर होगा कि जल्द से जल्द शाखा जाकर ब्रांच मैनेजर से भी बात करें. शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन की तारीख और समय, पैसा, अपना अकाउंट नंबर, गलत अकाउंट की जानकारी और UTR या Transaction ID जैसी जरूरी डिटेल दे. बैंक से मिलने वाला शिकायत नंबर या रसीद संभालकर रखना भी जरूरी है.
दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में पहुंच गया पैसा&amp;nbsp;
अगर पैसा किसी दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में पहुंच चुकी है, तो आपका बैंक दूसरे बैंक और अकाउंट होल्डर से संपर्क करके पैसे वापस कराने की प्रोसेस शुरू कर सकता है. अगर जिसके अकाउंट में पैसा गया है वह लौटाने के लिए तैयार हो जाता है, तो बैंक की प्रोसेस के अनुसार पैसा वापस मिल सकता है. लेकिन अगर अकाउंट होल्डर रकम लौटाने से इनकार करता है, तो मामला पेचीदा हो सकता है. ऐसी हालत में बैंक में लिखित शिकायत के बाद कानूनी प्रोसेस अपनाने की जरूरत पड़ सकती है.
BRICS समिट: दिल्ली के लग्जरी होटल फुल, कई गुना बढ़ा कमरों का किराया
अगर अकाउंट नंबर या IFSC में गलती के वजह से बैंक उस अकाउंट को पैसा क्रेडिट नहीं कर पाता, तो कुछ मामलों में ट्रांजैक्शन फेल होकर पैसा वापस आपके अकाउंट में आ सकता है. &amp;nbsp;लेकिन, यह ट्रांजैक्शन की हालात और बैंकिंग सिस्टम पर निर्भर करता है. अगर रकम किसी वैलिड बैंक अकाउंट में सही तरीके से जमा हो गई है, तो उसे वापस आने में समय लग सकता है.
ऑनलाइन पेमेंट करते समय रखें सावधानी
पैसे भेजने से पहले अकाउंट नंबर और IFSC कोड दोबारा जांचें. किसी नए व्यक्ति को पेमेंट करते समय जल्दबाजी नहीं करें. बड़ी रकम भेजने से पहले छोटी रकम ट्रांसफर करके जानकारी चेक की जा सकती है. UPI से पैसे भेजते समय सामने वाले का नाम जरूर चेक करें और जिन लोगों को बार बार पैसे भेजते हैं, उनकी सही जानकारी सेव कर लें. अगर पैसे गलत अकाउंट में चले जाएं, तो UTR या Transaction ID, SMS और बैंक स्टेटमेंट संभालकर रखें और तुरंत बैंक में शिकायत करें.
अस्पताल, कॉलेज और बीमा, UPI से एक दिन में कहां कितनी है पेमेंट लिमिट?
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>नेपाल को एडवांस बिजली देगा भारत, बाढ़ से ठप हुए पावर प्लांट</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बिजली उत्पादन को बड़ा झटका दिया है. कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे वहां करीब 550 मेगावाट (mw) बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आई है. ऐसे मुश्किल वक्त में भारत नेपाल की मदद करने के लिए आगे आया है. भारत अब नेपाल को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि वहां बिजली आपूर्ति को सामान्य तौर पर बनाए रखा जा सके.&amp;nbsp;
भारत के बिजली मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल ने बाढ़ के कारण हुई बिजली उत्पादन में कमी को देखते हुए भारत से अतिरिक्त बिजली आयात की मंजूरी को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है. नेपाल की मांग के अनुसार, भारत जरूरत पड़ने पर उसे बिजली उपलब्ध कराएगा.
बाढ़ से नेपाल में बिजली उत्पादन को बड़ा नुकसान
26 अगस्त 2026 को त्रिशुली और लेंडे खोला नदी बेसिन में अचानक आई बाढ़ से नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ. इस के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं का काम भी प्रभावित हुआ और बिजली उत्पादन में करीब 550 मेगावाट की कमी आई. हालांकि, बाढ़ से पहले नेपाल की कुल स्थापित बिजली उत्पादन की क्षमता 4,200 मेगावाट से ज्यादा थी. ऐसे में भारत को नेपाल से मिलने वाली बिजली आपूर्ति में भी करीब 400 मेगावाट की गिरावट आई है.
अस्पताल, कॉलेज और बीमा, UPI से एक दिन में कहां कितनी है पेमेंट लिमिट?
क्या भारत की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर?
भारत के अधिकारियों का कहना है कि नेपाल को बिजली देने के बावजूद देश की घरेलू बिजली आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा है. क्योंकि भारत के पास मजबूत राष्ट्रीय पवार ग्रिड और पर्याप्त बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है. ऐसे में अस्थायी कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है.&amp;nbsp;
कई जलविद्युत परियोजनाएं हुईं प्रभावित
अचानक आए इस बाढ़ के कारण नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी काफी नुकसान पहुंचा है. जानकारी के मुताबिक, यहां काम कर रहे सैकड़ों मजदूर और कर्मचारी लापता है. बताया जा रहा है कि नौ जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 537 कर्मचारी अभी भी लापता हैं. हालांकि, बचाव दल मलबे और कीचड़ से बंद हुई सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
गलत खाते में चले गए पैसे तो कैसे मिलेगा रिफंड? जानिए बैंक के जरूरी नियम
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>यमुना एक्सप्रेसवे पर Gaurs Group ने खरीदी 700 करोड़ में 35 एकड़ जमीन</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा विस्तार करते हुए Gaurs Group ने एक बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 35 एकड़ जमीन 700 करोड़ रुपये में खरीदी है. कंपनी इस जमीन पर नई आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी कर रहा है.&amp;nbsp;
यह जमीन यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-18 में स्थित है, जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है. हालांकि, कंपनी ने यह जमीन ICICI Bank की नीलामी के जरिए खरीदी है. जिसमें तीन अलग-अलग भूखंड शामिल हैं, जहां सबसे बड़ा भूखंड करीब 24 एकड़ का है.
700 करोड़ रुपये में हुई जमीन की डील&amp;nbsp;
गौर्स ग्रुप के चेयरमैन मनोज गौर ने बताया कि कंपनी ने ICICI Bank से करीब 700 करोड़ रुपये में 35 एकड़ जमीन की खरीदारी की है. हालांकि, यह अधिग्रहण &#039;जैसा है, जहां है&#039; के आधार पर खुली नीलामी के मध्याम से किया गया है. साथ ही कंपनी ने कहा कि जमीन से जुड़े जरूरी पेमेंट जैसे EDC (एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज), किसान मुआवजा और अन्य जरूरी बकाया को पूरा किया जा रहा है. इसके बाद खरीदी गई जमीन पर आधुनिक आवासीय प्रोजेक्ट शुरू कर दिए जाएंगे.
नेपाल को एडवांस बिजली देगा भारत, बाढ़ से ठप हुए पावर प्लांट
यमुना एक्सप्रेसवे पर बढ़ेगी कंपनी की मौजूदगी
गौर्स ग्रुप आने वाले समय में 24 एकड़ जमीन पर एक बड़ी आवासीय परियोजना शुरू करने की प्लानिंग कर रहा है. कंपनी के मुताबिक, अगले साल मार्च तक नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 3-4 नई हाउसिंग परियोजनाएं लॉन्च करने की तैयारी में है. इसके अलावा कंपनी ने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 5,500 करोड़ रुपये की बिक्री बुकिंग दर्ज की थी.
नए प्रोजेक्ट्स के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कंपनी को उम्मीद है कि वह अपने बिक्री प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखेगी और इसमें और बढ़ोतरी करेगी. हालांकि, यमुना एक्सप्रेसवे पर कंपनी पहले ही करीब 1,900 करोड़ रुपये की राजस्व क्षमता वाली प्रोजेक्ट लॉन्च कर चुकी है.
अस्पताल, कॉलेज और बीमा, UPI से एक दिन में कहां कितनी है पेमेंट लिमिट?
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>यमुना, एक्सप्रेसवे, पर, Gaurs, Group, ने, खरीदी, 700, करोड़, में, एकड़, जमीन</media:keywords>
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        <title>इस हफ्ते कब&amp;कब रहेंगे बंद? जानें 31 अगस्त से 6 सितंबर के बीच RBI छुट्टी की पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपको बैंक में कोई जरूरी काम है तो यह खबर आपके लिए काम की है. नया हफ्ता शुरू होने वाला है और इसके साथ सितंबर का महीना भी शुरू हो जाएगा. 31 अगस्त से 6 सितंबर 2026 के बीच बैंकों में एक दिन त्योहार की छुट्टी रहेगी, जबकि रविवार को देशभर में बैंक बंद रहेंगे.
हालांकि, बैंक की छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं. RBI के कैलेंडर के मुताबिक कुछ छुट्टियां सिर्फ खास राज्यों और शहरों में लागू होती हैं. इसलिए बैंक जाने से पहले अपने शहर की छुट्टी जरूर चेक कर लें.&amp;nbsp;
31 अगस्त से 6 सितंबर तक कब बंद रहेंगे बैंक?

31 अगस्त, सोमवार- बैंक खुले रहेंगे.
1 सितंबर, मंगलवार- बैंक खुले रहेंगे.
2 सितंबर, बुधवार- बैंक खुले रहेंगे.
3 सितंबर, गुरुवार- बैंक खुले रहेंगे.
4 सितंबर, शुक्रवार- जन्माष्टमी के कारण कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे.
5 सितंबर, शनिवार- यह महीने का पहला शनिवार है, इसलिए बैंक खुले रहेंगे.
6 सितंबर, रविवार- रविवार होने की वजह से देशभर में बैंक बंद रहेंगे.

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4 सितंबर को क्यों बंद रहेंगे बैंक?4 सितंबर को जन्माष्टमी है. इस मौके पर कई राज्यों में बैंक शाखाओं की छुट्टी रहेगी. हालांकि, यह छुट्टी हर राज्य में लागू नहीं है. RBI के बैंक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक 4 सितंबर को अहमदाबाद, आइजोल, भोपाल, चंडीगढ़, चेन्नई, देहरादून, गंगटोक, हैदराबाद, जयपुर, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, पटना, रायपुर, शिलॉन्ग और शिमला समेत कई जगहों पर बैंक बंद रहेंगे.
5 सितंबर को बैंक खुलेंगे या बंद?
कई लोगों को लगता है कि सितंबर की शुरुआत में शनिवार होने के कारण बैंक बंद होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. 5 सितंबर 2026 महीने का पहला शनिवार है. बैंक आम तौर पर हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं. इसलिए 5 सितंबर को बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी.
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6 सितंबर को क्या है हाल?
6 सितंबर को रविवार है. रविवार को बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होता है. इसलिए इस दिन देशभर में बैंक बंद रहेंगे. हालांकि, बैंक की यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाएं आम तौर पर खुली रहती हैं. किसी खास सेवा के लिए बैंक के नियम अलग हो सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आठवां वेतन आयोग: पेंशन बंद होने की चर्चा पर अपडेट, रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही एक खबर ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता बढ़ा दी थी. दावा किया जा रहा था कि कुछ रिटायर्ड केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन बंद हो सकती है या 2026 के बाद रिटायर होने वालों को ही पेंशन रिवीजन का फायदा मिलेगा. अब इस दावे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है.
एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने कहा कि पेंशन बंद होने या कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन रिवीजन से बाहर किए जाने की बातें बेबुनियाद हैं.
क्या बोले शिव गोपाल मिश्रा?शिव गोपाल मिश्रा ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी कर पेंशनर्स को इस तरह की अफवाहों पर भरोसा नहीं करने को कहा है. उन्होंने बताया कि कई पेंशनर्स ने उनसे संपर्क किया था, क्योंकि सोशल मीडिया पर उनके नाम से ऐसे मैसेज फैलाए जा रहे थे जिनमें पेंशन बंद होने की बात कही गई थी.
मिश्रा ने साफ कहा कि ऐसी सभी बातें पूरी तरह गलत हैं और इन पर भरोसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पेंशनर्स की पेंशन जारी रहेगी और पेंशन में सुधार को लेकर चर्चा चल रही है.
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क्या अब पेंशन बढ़ेगी?सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा था कि सिर्फ 2026 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को ही 8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन रिवीजन का फायदा मिलेगा.
इस पर भी मिश्रा ने कहा कि पहले या बाद में रिटायर हुए पेंशनर्स के मामले पर 8वें वेतन आयोग में चर्चा चल रही है. यानी फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि पुराने पेंशनर्स को पेंशन रिवीजन से बाहर कर दिया जाएगा.
पेंशन रिवीजन पर अभी क्या हो रहा है?8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स से जुड़े मुद्दे भी रखे जा रहे हैं. एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड पहले ही मांग कर चुका है कि मौजूदा पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को पेंशन रिवीजन के दायरे में शामिल किया जाए.
कितने लोगों को फायदा होगा?8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन व पेंशन में बदलाव की सिफारिश करने के लिए किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक इसके दायरे में करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स आते हैं. आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है.
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क्या करना चाहिए?पेंशनर्स के लिए सबसे जरूरी बात ये है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हर मैसेज पर भरोसा न करें. पेंशन बंद होने या पेंशन रिवीजन से बाहर किए जाने जैसी खबरों की जांच हमेशा आधिकारिक सोर्स से करना जरूरी है. शिव गोपाल मिश्रा ने भी पेंशनर्स से कहा है कि वे केवल आधिकारिक यूनियन हैंडल या भरोसेमंद सोर्सों से जारी जानकारी पर ध्यान दें.
पेंशन में बढ़ोतरी कितनी होगी?
अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि 8वें वेतन आयोग के बाद पेंशन में कितने रुपये की बढ़ोतरी होगी. इसका फैसला सरकार की मंजूरी के आधार पर होगा.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>आठवां, वेतन, आयोग:, पेंशन, बंद, होने, की, चर्चा, पर, अपडेट, रिटायर्ड, कर्मचारियों, के, लिए, बड़ी, खबर</media:keywords>
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        <title>चीनी&amp;प्याज से जेब ढीली, किचन के सामानों पर बैन, महंगाई&amp;मिलावट ने तोड़ दी आम आदमी की कमर</title>
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        <description><![CDATA[ घर का बजट संभालना आम आदमी के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है. रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों में से कई के दाम पिछले कुछ दिनों और हफ्तों में तेजी से बढ़े हैं. सबसे ज्यादा परेशानी प्याज और चीनी ने बढ़ाई है. इसके अलावा खाद्य तेल, अंडे, दाल और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों में भी दबाव देखने को मिल रहा है.
एक तरफ बाजार में महंगाई जेब पर बोझ बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ खाने-पीने की चीजों में मिलावट और नियमों की अनदेखी को लेकर FSSAI और राज्यों की फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं. कहीं किसी उत्पाद की बिक्री पर रोक लगी है तो कहीं कंपनियों और दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं. यानी आम आदमी के सामने दोहरी परेशानी है, सामान महंगा हो रहा है और जो सामान खरीद रहे हैं उसकी क्वालिटी को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
प्याज ने सबसे ज्यादा रुलायारसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में शामिल प्याज के दाम ने हाल के दिनों में बड़ा झटका दिया है. 24 अगस्त तक अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत करीब 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी, जो एक साल पहले के मुकाबले करीब 59 फीसदी ज्यादा थी. कई शहरों में खुदरा बाजार में प्याज 60-70 रुपये किलो तक भी पहुंच गया.
सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बफर स्टॉक से प्याज निकालने और दिल्ली समेत कुछ जगहों पर कम कीमत पर प्याज बेचने की कोशिश शुरू की है. सरकार के पास करीब 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक बताया गया है. लेकिन बाजार में राहत तुरंत नजर नहीं आ रही.&amp;nbsp;
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चीनी ने बिगाड़ा रसोई का हिसाबप्याज के साथ चीनी ने भी आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच चीनी की कीमत 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी करीब एक महीने में 7.52 रुपये किलो की बढ़ोतरी हुई हैं.
वहीं हाल की बाजार रिपोर्टों में खुदरा चीनी के दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है. पिछले एक महीने में इसमें करीब 34 फीसदी तक तेजी बताई गई है.
दाल, तेल और अंडे भी दे रहे झटकारसोई का खर्च सिर्फ प्याज और चीनी से ही नहीं बढ़ रहा है. हाल की रिपोर्टों में दाल, चावल, खाद्य तेल और अंडे जैसी चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उपभोक्ता मामले विभाग जिन रोजाना खुदरा दामों की निगरानी करता है, उनमें करीब एक-तिहाई वस्तुओं की कीमतें पिछले एक साल में 6 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. प्याज में करीब 63 फीसदी और चीनी में करीब 41 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खाद्य तेल और अंडे भी महंगे हुए हैं.&amp;nbsp;
मिलावट पर सरकार का डंडाएक तरफ महंगाई है तो दूसरी तरफ खाने की चीजों की क्वालिटी को लेकर चिंता. इसी बीच FSSAI ने हाल के दिनों में कई कड़े कदम उठाए हैं. सबसे ताजा कार्रवाई में FSSAI ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स और एलजी ब्रांड के कुछ कंपाउंडेड हींग उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई है.&amp;nbsp;
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घी पर लगा बैनमिलावट के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई घी को लेकर हुई है. FSSAI ने दमन स्थित SDP Industries की ओर से बनाए और बेचे जा रहे सभी तरह के घी उत्पादों की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है. इसमें श्रद्धा, श्री सरस, गोकुल जैसे नामों वाले सामान भी शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान लिए गए नमूनों में बीटा-सिटोस्टेरॉल पाया गया, जो शुद्ध घी में नहीं होना चाहिए. फैटी एसिड संरचना में भी गड़बड़ी मिली है.&amp;nbsp;
होटल-रेस्टोरेंट पर कार्रवाईमहाराष्ट्र में भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर कई जगहों पर कार्रवाई की है. पुणे में बाबा की रसोई, एमब्रोसियोस, श्रीनाथ फूड कॉर्नर और सैफायर फूड्स के KFC स्टोर के लाइसेंस सस्पेंड किए गए. जांच में कहीं बासी खाना और फूड कलर के इस्तेमाल की बात सामने आई, तो कहीं कॉकरोच और खराब साफ-सफाई मिली. KFC के एक स्टोरेज एरिया में जरूरी मंजूरी की कमी, खराब कोल्ड स्टोरेज और खाने के बॉक्स गलत तरीके से रखे पाए गए.
इससे पहले कुछ डोमिनोज और पिज्जा हट आउटलेट्स के लाइसेंस भी हाइजीन खामियों के कारण सस्पेंड किए गए थे. जांच में कीड़े, गंदगी और बिना एक्सपायरी डेट वाले खाने के सामान में कमियां सामने आई थीं.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>वेनेजुएला की जमीन में दबा है दुनिया का 17% कच्चा तेल, फिर क्यों बर्बाद हुआ ये देश?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वेनेजुएला-की-जमीन-में-दबा-है-दुनिया-का-17-कच्चा-तेल-फिर-क्यों-बर्बाद-हुआ-ये-देश</link>
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        <description><![CDATA[ सोचिए, जिस देश के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं, वही देश कभी महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट की ऐसी मार झेल चुका है कि लाखों लोगों को देश छोड़ना पड़ा. ये कहानी है वेनेजुएला की. उसके पास दुनिया के कुल साबित कच्चे तेल भंडार का करीब 17 फीसदी हिस्सा है, लेकिन तेल की इस दौलत के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला के साथ एक बड़ी ऑयल डील का ऐलान किया है. ट्रंप ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील बताया है. इस समझौते से अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा साबित तेल भंडार पर बहुमत वाला नियंत्रण मिलने की बात सामने आई है. तो सवाल उठता है कि इतना तेल होने के बावजूद वेनेजुएला बर्बाद कैसे हो गया? और अब अमेरिका इस तेल पर इतनी बड़ी बाजी क्यों लगा रहा है?
सबसे ज्यादा तेल होकर भी क्यों है देश गरीब?वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित कच्चा तेल भंडार है. देश का ज्यादातर तेल ओरिनोको ऑयल बेल्ट में मौजूद है परेशानी ये है कि यहां का ज्यादातर तेल नॉर्मल कच्चे तेल जैसा नहीं है, बल्कि भारी और ज्यादा सल्फर वाला कच्चा तेल है.
इस तेल को निकालना, प्रोसेस करना और रिफाइन करना काफी ज्यादा महंगा और मुश्किल है. इसके लिए खास तरह की तकनीक और रिफाइनिंग क्षमता चाहिए. यानी जमीन के नीचे तेल की कमी नहीं थी, लेकिन उस तेल को सही तरीके से निकालने और उससे लगातार पैसा कमाने के लिए बड़े निवेश और मजबूत तेल उद्योग की जरूरत थी.
चीनी-प्याज से जेब ढीली, किचन के सामानों पर बैन, महंगाई-मिलावट ने तोड़ दी आम आदमी की कमर
असली कहानी क्या है?वेनेजुएला की बर्बादी की सबसे बड़ी वजह ये नहीं थी कि उसके पास तेल कम था. उल्टा, देश की अर्थव्यवस्था तेल पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गई है. सरकार की कमाई, विदेशी मुद्रा और निर्यात का बड़ा हिस्सा तेल से आता था. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंची थी, तो सरकार के पास खूब पैसा आया.
लेकिन उस पैसे का बड़ा हिस्सा तेल उद्योग में वापस लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के बजाय सामाजिक योजनाओं और सरकारी खर्च में चला गया. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक तेल उद्योग में निवेश और रखरखाव की कमी के साथ कुप्रबंधन ने उत्पादन में गिरावट को तेज किया.
कब लगा वेनेजुएला को झटका?वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी. लेकिन 2002-03 की बड़ी हड़ताल के बाद कंपनी में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को हटाया गया. इसके बाद तेल उत्पादन पहले जैसी रफ्तार से वापस नहीं आ पाया.
EIA के मुताबिक 2000 में वेनेजुएला करीब 32 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन कर रहा था. सितंबर 2023 तक ये घटकर करीब 7.35 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था. यानी जिस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, वो अपनी जमीन से पर्याप्त तेल निकाल ही नहीं पा रहा था.
कैसे गिरने लगी तेल की कीमत?वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तेल पर इतनी निर्भर थी कि जब 2014-15 के आसपास दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, तो सरकार की कमाई पर सीधा असर पड़ा. तेल से मिलने वाली विदेशी मुद्रा कम हुई और सरकार के सामने खर्च चलाने की मुश्किल बढ़ गई.
EIA के मुताबिक 2014 के बाद तेल की कीमत गिरने के साथ वेनेजुएला का तेल उत्पादन भी तेजी से गिरा. 2016 में देश की शुद्ध तेल निर्यात आय करीब 22 अरब डॉलर रह गई, जबकि 2011 में यह 73 अरब डॉलर से ज्यादा थी.
आठवां वेतन आयोग: पेंशन बंद होने की चर्चा पर अपडेट, रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर
कब आया महंगाई- कर्ज का दौर?अर्थव्यवस्था कमजोर होती गई और देश कर्ज के बोझ में दबता चला गया. तेल उत्पादन गिरने का मतलब था कम निर्यात, कम विदेशी मुद्रा और कम सरकारी आमदनी. इससे अर्थव्यवस्था का संकट और गहरा गया.
IMF के मुताबिक 2015 के बाद तेल उत्पादन में गिरावट वेनेजुएला के आर्थिक संकट की बड़ी वजह बनी. 2008-13 के दौरान जहां देश का औसत तेल उत्पादन करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं 2019 में यह करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया और 2020 के बीच में करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया.
वेनेजुएला पर क्यों है अमेरिकी की नजर?US-Venezuela ऑयल डील काफी अहम मानी जा रही है. ट्रंप के ऐलान के मुताबिक समझौते से अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा साबित तेल भंडार पर बहुमत वाला नियंत्रण मिलेगा. इसके साथ अमेरिकी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में बड़ी भूमिका बढ़ सकती है. आज अमेरिका के लिए यह सिर्फ तेल खरीदने का मामला नहीं है. वेनेजुएला के तेल उत्पादन को दोबारा बढ़ाना अमेरिका को दुनिया के इस बड़े तेल भंडार तक ज्यादा पहुंच दे सकता है.
सवाल यह है कि अगर वेनेजुएला के पास इतना तेल है तो क्या अमेरिकी कंपनियां तुरंत उत्पादन बढ़ा देंगी? जवाब है, नहीं. कई साल की खराब हालत के बाद वेनेजुएला के तेल उद्योग को बड़े निवेश की जरूरत है. पुराने कुओं, पाइपलाइन, रिफाइनरी, मशीनरी और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारना होगा.&amp;nbsp;
भारत के लिए क्यों जरूरी है वेनेजुएला का तेल?भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में है. इसलिए अगर वेनेजुएला में उत्पादन बढ़ता है और दुनिया के बाजार में ज्यादा कच्चा तेल आता है, तो वैश्विक सप्लाई बढ़ सकती है. अगर सप्लाई बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को फायदा मिल सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>McD और KFC में खाते हैं आप? 10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mcd-और-kfc-में-खाते-हैं-आप-10-फूड-आउटलेट्स-पर-लगा-भारी-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ Bengaluru News: अगर आप भी मॉल के फूड कोर्ट में जाकर McDonald&#039;s, KFC, Burger King जैसे आउटलेट्स पर खाना पसंद करते हैं, तो यह जानकारी आपके काम की है. ग्रेटर बेंगलुरु कोरमंगला स्थित नेक्सस मॉल के फूड कोर्ट में नगर निगम की टीम ने निरीक्षण किया, जहां कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिलने पर 10 फूड आउटलेट्स पर भारी जुर्माना लगाया गया है.&amp;nbsp;
दरअसल, यह कार्रवाई 28 अगस्त को किए गए निरीक्षण के बाद की गई. अधिकारियों के मुताबिक, कई जगहों पर गीले और सूखे खचरे को अलग-अलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया गया था. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का भी इस्तेमाल किया जा रहा था. यही वजह है कि आउटलेट्स पर 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया.
10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना

चस्का बन पर सबसे ज्यादा 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया.
McDonald&#039;s, Burger King और Fish &amp;amp; Chips पर 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया.
Popeyes, Good Flippin&#039; Burgers, Wow! China, Naga&#039;s, KFC और Shiv Sagar पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना लगा.

कमाई के मामले में दिल्ली देश में नंबर 1, केंद्र से नहीं मांगनी पड़ती मदद
किस नियम का किया गया उल्लंघन?
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कुछ आउटलेट्स पर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के बजाय एक साथ मिलाया जा रहा था. इसके अलावा प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल भी अधिकारियों की नजर में आया.&amp;nbsp;
नियम तोड़े तो आगे होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम अधिकारियों ने साफ किया है कि शहर के अलग-अलग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस तरह के निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे. ऐसे में बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ-साथ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. साथ ही उन्होंने कारोबारियों और फूड आउटलेट संचालकों से कचरे को सही तरीके से अलग-अलग रखने और प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचनी की अपील की है.
US-वेनेजुएला में Oil समझौता, ट्रंप की मेगा डील से क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Everest के मसालों पर लगा बैन, FSSAI ने जारी किया नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ Everest Masala Ban:&amp;nbsp;अगर आप भी अपने रसोई में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए बाजार में मिलने वाले पैकेट मसालों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मशहूर मसाला ब्रांड Everest के कुछ उत्पादों की जांच को लेकर सख्त कार्रवाई की है. क्योंकि इस जांच में इसके हींग को गलत तरीके से लेबल किए जाने के साथ-साथ क्वालिटी से जुड़ी कुछ खामियां भी सामने आई हैं.
इसके अलावा Everest कंपनी के Egg Curry मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाला में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है. इस मामले के बाद खाद्य नियामक ने संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर उनसे जवाब की मांग की है.&amp;nbsp;
Everest के इन मसालों पर उठे सवाल
FSSAI की करवाई में Everest की हींग को लेकर कुछ गड़बड़ी पाई गई. जिसमें हींग को गलत तरीके से ब्रांडेड और घटिया क्वालिटी का बताया गया है. इसके अलावा इन मसालों में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया है.&amp;nbsp;

Egg Curry Masala
Chicken Masala
Garam Masala

वहीं, कथित नियम उल्लंघन को लेकर लालजी गोधू एंड कंपनी को भी अलग से चेतावनी दी गई है.
McD और KFC में खाते हैं आप? 10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना
खाने की चीजों पर जल्द दिखेगा नया चेतावनी लेबल
दरअसल, यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब FSSAI ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लिए एक नए फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है. जिसके तहत पैकेट के सामने चमकीले लाल रंग का षट्भुजाकार निशान लगाने की प्लानिंग है. बड़ी बात यह है कि इस निशान के जरिए उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में आसानी से जानकारी मिल सकेगी, जिनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा हो. यानी किसी भी सामान की खरीदारी करते समय ग्राहक पैकेट देखकर ही उसके पोषण संबंधी जोखिम को आसानी से समझ सकेंगे.
फूड इंडस्ट्री ने भी जताई कुछ नियमों पर चिंता
नए लेबलिंग नियमों को लेकर खाद्य उद्योग की ओर से भी कुछ चिंताएं सामने आई हैं. कोका-कोला, नेस्ले और पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनियों को प्रतिनिधित्व करने वाले &amp;nbsp;समूहों ने प्रस्तावित व्यवस्था के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है. वहीं, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों से सिर्फ नियमों का पालन करने तक सीमित न रहने की अपील की है.
Delhi-NCR में बढ़ेगा ऑटो का किराया, CNG की महंगाई के बाद तेज हुई मांग
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Delhi&amp;NCR में बढ़ेगा ऑटो का किराया, CNG की महंगाई के बाद तेज हुई मांग</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi-NCR Auto Taxi Fare News: दिल्ली-NCR में सफर करने वाले लोगों की जेब पर जल्द ही महंगाई की मार पड़ने वाली है. दिल्ली और आसपास के शहरों में CNG की कीमत बढ़ने के बाद ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है. यूनियन का कहना है कि ईंधन महंगा होने से ड्राइवरों का खर्च लगातार बढ़ रहा है और मौजूदा किराए में गाड़ी चलाना काफी मुश्किल हो रहा है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ाने की मांग हो रही है ऑटो-टैक्सी का किराया?
CNG की कीमत में हालिया बढ़ोतरी से ड्राइवरों का रोजाना खर्च बढ़ गया है, जिससे उनकी रोजाना की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है. ऑटो-टैक्सी यूनियनों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में CNG के दाम कुल मिलाकर करीब 10-11 रुपये तक बढ़ चुके हैं. ऐसे में यूनियन चाहती है कि सरकार मौजूदा किराए की समीक्षा कर जल्द से जल्द नई दरें लागू करें. क्योंकि अगर किराया नहीं बढ़ाया जाता है, तो ड्राइवरों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
McD और KFC में खाते हैं आप? 10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना
सरकार से की गई बड़ी मांग&amp;nbsp;
ऑटो रिक्शा एसोसिएशन और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने सरकार से एक हफ्ते के भीतर किराया बढ़ाने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि अगर किराया बढ़ाना मुमकिन नहीं है, तो CNG की बढ़ी कीमतों से ड्राइवरों &amp;nbsp;को राहत देने के लिए सब्सिडी दी जाए.&amp;nbsp;
यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने जल्द किराया बढ़ाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई, तो 9 सितंबर को हड़ताल की जा सकती है. ऐसे में अगर सरकार और यूनियनों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो दिल्ली-NCR में ऑटो-टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
दिल्ली में कितनी हो गई CNG की कीमत?
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के मुताबिक, शनिवार से दिल्ली और आसपास के शहरों में CNG के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है. बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत करीब 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है.
US-वेनेजुएला में Oil समझौता, ट्रंप की मेगा डील से क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Product का लेबल और एडवाइजरी, फूड ऑर्डर करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/product-का-लेबल-और-एडवाइजरी-फूड-ऑर्डर-करने-से-पहले-इन-बातों-का-रखें-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ Food Safety News:&amp;nbsp;अगर आप भी बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं या रेस्टोरेंट में जाकर कुछ खाते हैं, तो सिर्फ स्वाद और कीमत देखकर ही चीजें न चुने. ऐसे में खाना ऑर्डर करने से पहले उसकी सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी, साफ-सफाई और फूड सेफ्टी से जुड़ी जरूरी बातों पर ध्यान दें. खासकर पैकेज्ड फूड खरीदते समय लेबल पर लिखी जानकारी को नजरअंदाज न करें.&amp;nbsp;
दरअसल, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने हाल ही में फूड सेफ्टी को लेकर ग्राहकों को कुछ जरूरी सलाह दी है. साथ ही उन्होंने कहा कि सिर्फ स्वाद के लिए खाने के बजाय, आपको अपने शरीर के लिए खाना चाहिए.
खाना ऑर्डर करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किसी रेस्टोरेंट या होटल में खाना ऑर्डर करते समय सिर्फ स्वाद या दिखावट को प्राथमिकता न दें, बल्कि पहले उससे पूछें कि उसमें कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल की गई है.&amp;nbsp;
Everest के मसालों पर लगा बैन, FSSAI ने जारी किया नोटिस

अगर आपको किसी खास खाद्य पदार्थ से एलर्जी है, तो ऑर्डर करने से पहले उसकी सामग्री की जानकारी जरूर हासिल करें.
खासकर खाने की साफ-सफाई और वहां की हाइजीन व्यवस्था पर ध्यान दें.
पैकेज्ड फूड खरीदते समय सिर्फ कीमत या एक्सपायरी डेट देखकर न खरीदें.

फूड प्रोडक्ट का लेबल को न करें नजरअंदाज&amp;nbsp;
पैकेज्ड फूड खरीदते समय उसके लेबल को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है. उसमें मौजूद सामग्री, कैलोरी, प्रोटीन और अन्य पोषण संबंधी जानकारी आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.&amp;nbsp;

प्रोडक्ट में इस्तेमाल की गई सभी सामग्री की लिस्ट चेक करें.
कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा जैसी पोषण संबंधी जानकारी लें.
इस्तेमाल किए गए तेल और अन्य प्रमुख सामग्री के बारे में जानकारी चेक करें.
प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग डेट और निर्माण से जुड़ी जानकारी देखें.
यह जांचें कि संबंधित खाद्य प्रतिष्ठान या प्रोडक्ट के पास जरूरी FSSAI लाइसेंस है या नहीं.

Delhi-NCR में बढ़ेगा ऑटो का किराया, CNG की महंगाई के बाद तेज हुई मांग
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या बिना बैंक अकाउंट के भी बन सकता है क्रेडिट कार्ड? जानिए इसकी पूरी प्रक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए बैंक में खाता होना जरूरी है? ऐसा हर बार जरूरी नहीं होता कि केवल उसी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड मिले, जिसका उस बैंक में अकाउंट हो. कई बैंक ऐसे लोगों को भी क्रेडिट कार्ड जारी कर देते हैं, जिनका उनके यहां बैंक अकाउंट नहीं होता.
जानकारों के मुताबिक, बैंक सबसे पहले यह देखते हैं कि आवेदक की आय कितनी है, वह क्या काम करता है, उसका क्रेडिट स्कोर कैसा है और वह समय पर भुगतान कर सकता है या नहीं. अगर ये शर्तें पूरी हो जाती हैं तो बैंक बिना अकाउंट के भी क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है.
एफडी को देखकर भी जारी होता है क्रेडिट कार्ड
कई बार ऐसा भी होता है कि किसी व्यक्ति का न तो बैंक अकाउंट होता है और न ही उसकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री होती है. ऐसे में कुछ बैंक एफडी के बदले भी क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं. इससे लोगों को अपनी अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री बनाने का मौका मिलता है. यानी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड भी मिल जाता है और उसकी क्रेडिट हिस्ट्री भी मजबूत होने लगती है.
यह भी पढ़ें- कमाई के मामले में दिल्ली देश में नंबर 1, केंद्र से नहीं मांगनी पड़ती मदद
क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया
क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, पते का प्रमाण और आय से जुड़े कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं. हालांकि हर बैंक के अपने अलग-अलग नियम और शर्तें होती हैं.
कई बार लोगों में यह गलतफहमी भी होती है कि प्रीपेड कार्ड, क्रेडिट कार्ड का विकल्प है, जबकि ऐसा नहीं है. प्रीपेड कार्ड में आप अपना ही पैसा पहले से लोड करके खर्च करते हैं.
क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड में क्या अंतर है?
क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड दोनों अलग-अलग तरह के कार्ड हैं.&amp;nbsp; क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर हो सकता है, जबकि प्रीपेड कार्ड के इस्तेमाल से क्रेडिट स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता.&amp;nbsp;
प्रीपेड कार्ड वह कार्ड होता है, जिसमें पहले से पैसे जमा (लोड) किए जाते हैं. उपयोगकर्ता केवल उतनी ही राशि खर्च कर सकता है, जितनी कार्ड में पहले से मौजूद होती है.&amp;nbsp; इसलिए प्रीपेड कार्ड को क्रेडिट कार्ड नहीं माना जाता.
यह भी पढ़ें- Everest के मसालों पर लगा बैन, FSSAI ने जारी किया नोटिस
क्रेडिट कार्ड पर जरूरी सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल हमेशा सोच-समझकर करना चाहिए. जितना खर्च करें, उतना समय पर चुका भी सकें. सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड ज़रूरत के समय काफी काम आ सकता है. विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि क्रेडिट कार्ड लेने से पहले उसकी ब्याज दर, सालाना शुल्क, लेट फीस और अन्य सभी शुल्कों की पूरी जानकारी जरूर ले लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, बिना, बैंक, अकाउंट, के, भी, बन, सकता, है, क्रेडिट, कार्ड, जानिए, इसकी, पूरी, प्रक्रिया</media:keywords>
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    <item>
        <title>नोएडा&amp; गुरुग्राम समेत किन शहरों में क्या है CNG का ताजा रेट? 3.89 रुपए महंगी हुई गैस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नोएडा-गुरुग्राम-समेत-किन-शहरों-में-क्या-है-cng-का-ताजा-रेट-389-रुपए-महंगी-हुई-गैस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नोएडा-गुरुग्राम-समेत-किन-शहरों-में-क्या-है-cng-का-ताजा-रेट-389-रुपए-महंगी-हुई-गैस</guid>
        <description><![CDATA[ देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के करोड़ों लोगों के लिए सीएनजी से जुड़ी बड़ी खबर है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी ने सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ोतरी की है. नई कीमतें 29 अगस्त 2026 की सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं.
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. वहीं नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी का नया रेट 95.59 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है. गुरुग्राम में अब एक किलो सीएनजी के लिए 92.01 रुपये चुकाने होंगे.&amp;nbsp;
शहर अनुसार सीएनजी के दाम-&amp;nbsp;

दिल्ली- 86.98 रुपए प्रति किलोग्राम
नोएडा- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
गाजियाबाद- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
गौतम बुद्ध नगर- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
ग्रेटर नोएडा- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
मेरठ- 95.47 रुपए प्रति किलोग्राम
मुजफ्फरनगर- 95.47 रुपए प्रति किलोग्राम
शामली- 95.47 रुपए प्रति किलोग्राम
गुरुग्राम- 92.01 रुपए प्रति किलोग्राम
रेवाड़ी- 91.59 रुपए प्रति किलोग्राम
करनाल- 91.32 रुपए प्रति किलोग्राम
हापुड़- 96.59 रुपए प्रति किलोग्राम

FD कराने वालों के लिए खुशखबरी, HDFC और फेडरल बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें
क्यों बढ़े CNG के दाम?
IGL ने कीमतों में बढ़ोतरी की वजह अंतरराष्ट्रीय एलएनजी की ऊंची कीमतों को बताया है. कंपनी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे सीएनजी के लिए इस्तेमाल होने वाली इनपुट गैस की लागत बढ़ गई है. कंपनी ने कहा है कि लागत में बढ़ोतरी के असर को आंशिक रूप से कम करने के लिए सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलो की ये बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी.&amp;nbsp;
किसपर पड़ेगा ज्यादा असर?
सीएनजी की कीमत बढ़ने का सीधा असर उन लोगों की जेब पर पड़ेगा जो सीएनजी कार, ऑटो या टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं. खासकर रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों का ईंधन खर्च बढ़ जाएगा. अगर कोई वाहन एक दिन में 5 किलो सीएनजी इस्तेमाल करता है, तो 3.89 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से उसका रोज का खर्च करीब 19.45 रुपये बढ़ जाएगा. महीने में 30 दिन यही खपत रहने पर एक्स्ट्रा खर्च करीब 583.50 रुपये हो सकता है.&amp;nbsp;
पैकेटबंद खाने पर लगेगा लाल खतरे का निशान, एक्शन में FSSAI ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नोएडा-, गुरुग्राम, समेत, किन, शहरों, में, क्या, है, CNG, का, ताजा, रेट, 3.89, रुपए, महंगी, हुई, गैस</media:keywords>
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        <title>आज CNG के साथ पेट्रोल&amp; डीजल के भी बदले दाम? जानें महंगा हुआ कि सस्ता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-cng-के-साथ-पेट्रोल-डीजल-के-भी-बदले-दाम-जानें-महंगा-हुआ-कि-सस्ता</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-cng-के-साथ-पेट्रोल-डीजल-के-भी-बदले-दाम-जानें-महंगा-हुआ-कि-सस्ता</guid>
        <description><![CDATA[ शनिवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर लोगों की नजर बनी हुई है. दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. सरकारी तेल कंपनियों ने आज भी पेट्रोल-डीजल के पुराने रेट बरकरार रखे हैं.
अगर आप आज गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जान लेना जरूरी है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग राज्यों में टैक्स वगैरह के कारण अलग होती हैं.
दिल्ली में आज पेट्रोल-डीजल का क्या भाव?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 29 अगस्त को पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
नोएडा- गुरुग्राम समेत किन शहरों में क्या है CNG का ताजा रेट? 3.89 रुपए महंगी हुई गैस
मुंबई में क्या हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है.
कोलकाता में क्या है ताजा भाव?
कोलकाता की बात करें तो यहां पर पेट्रोल की कीमत 113.51 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल का रेट भी 99.82 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है.
शहर अनुसार पेट्रोल और डीजल के भाव-&amp;nbsp;



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
111.31 रुपये
97.97 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपये
99.56 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये
103.82 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये


वाराणसी
107.40 रुपये
90.10 रुपये


भुवनेश्वर
103.19 रुपये
100.68 रुपये


आगरा
&amp;nbsp;107.09 रुपये
89.80 रुपये



क्या है गुड न्यूज?
शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाने वालों के लिए सीएनजी की कीमत में 3.89 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की है. हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज इसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हुई है. सीएनजी के दाम बढ़ने से दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी कार, ऑटो और टैक्सी चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा. वहीं, दूसरी ओर जिनके पास भी पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां हैं, उनको फिलहाल ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.&amp;nbsp;
पिछले 4 महीनों में करीब 10 रुपए महंगी हुई गैस, आज 5वीं बार बढ़े दाम
कच्चे तेल की कीमतों पर क्यों है नजर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ता है. हाल के दिनों में वैश्विक तेल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के रेट शांत रहने से थोड़ी राहत है. लेकिन आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तेल कंपनियों के रेट में बदलाव हो सकता है.
 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, CNG, के, साथ, पेट्रोल-, डीजल, के, भी, बदले, दाम, जानें, महंगा, हुआ, कि, सस्ता</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नेपाल की बाढ़ में Infosys के CEO लापता, लैक्स गोपीसेट्टी पर आया कंपनी का बयान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नेपाल-की-बाढ़-में-infosys-के-ceo-लापता-लैक्स-गोपीसेट्टी-पर-आया-कंपनी-का-बयान</link>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के सीईओ से संपर्क नहीं हो पा रहा है. कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि उसकी सब्सिडियरी इंफोसिस के सीईओ लक्ष गोपिसेट्टी नेपाल गए हुए थे और अभी फिलहाल पहुंच से बाहर हैं.&amp;nbsp;
इंफोसिस ने कहा कि इस समय कंपनी का फोकस गोपिसेट्टी की सुरक्षा और उनका हाल जानना है. कंपनी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटाने और उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है.
नेपाल क्यों गए थे लैक्स गोपीसेट्टी?कंपनी के मुताबिक, लैक्स गोपीसेट्टी नेपाल में व्यक्तिगत यात्रा पर गए थे. उनका वहां जाना कंपनी के किसी आधिकारिक काम से जुड़ा नहीं था. नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
इंफोसिस &amp;nbsp;ने एक बयान में कहा कि वो स्थिति पर नजर बनाए हुए है और एजेंसियों के साथ संपर्क में भी हैं. कंपनी ने गोपिसेट्टी के परिवार से भी लगातार संपर्क बनाए रखा है और इस मुश्किल समय में उन्हें हर संभव सहायता दे रही है.
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कौन हैं लैक्स गोपीसेट्टी?लैक्स गोपीसेट्टी, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के सीईओ हैं. ये इंफोसिस लिमिटेड &amp;nbsp;की एक सब्सिडियरी है, जो खासतौर से अमेरिका और कनाडा में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े ग्राहकों को सेवाएं देती है.
गोपिसेट्टी की भूमिका कंपनी के पब्लिक सेक्टर कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बीच उनसे संपर्क नहीं हो पाने की खबर ने कंपनी और उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है.
कितने लापता, कितने लोगों की गई जान?नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है. नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के इलाकों में अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है. बचाव अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. शुक्रवार को नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की ऑफिशियल संख्या 579 हो गई, जबकि करीब 2500 लोग अभी भी लापता हैं.
कितने भारतीय हुए लापता?नेपाल में आई इस आपदा का असर वहां मौजूद भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कई सारे भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की खबर सामने आई है. भारत सरकार नेपाल में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए प्रयास कर रही है. कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं .&amp;nbsp;
फिलहाल लैक्स गोपीसेट्टी की स्थिति को लेकर इंफोसिस &amp;nbsp;की ओर से कोई और जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. कंपनी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नेपाल, की, बाढ़, में, Infosys, के, CEO, लापता, लैक्स, गोपीसेट्टी, पर, आया, कंपनी, का, बयान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आज LPG सिलेंडर कितने का मिल रहा? घरेलू और कमर्शियल गैस के ताजा रेट यहां देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिल-रहा-घरेलू-और-कमर्शियल-गैस-के-ताजा-रेट-यहां-देखें</link>
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        <description><![CDATA[ महीने की शुरुआत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के बाद अब 29 अगस्त को घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है. 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें फिलहाल शांत हैं. वहीं, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को अगस्त की शुरुआत में राहत मिली थी. तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 200 रुपए से ज्यादा की कटौती की थी.
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बड़ा बदलाव जून 2026 में हुआ था. इसके बाद अगस्त में घरेलू सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ऐसे में अगर आप आज गैस सिलेंडर बुक करने जा रहे हैं तो आपको अपने शहर के हिसाब से रेट देना होगा.
शहर अनुसार एलपीजी के दाम-



शहर&amp;nbsp;
घरेलू एलपीजी की कीमत
कमर्शियल एलपीजी की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपए
2,738.00 रुपए


मुंबई
941.50 रुपए
2,691.50 रुपए


कोलकाता
968.00 रुपए
2,872.50 रुपए


चेन्नई
957.50 रुपए
2,906.00 रुपए


बेंगलुरु
944.50 रुपए
2,821.00 रुपए


पटना
1,031.50 रुपए
3,018.00 रुपए


देहरादून
961.00 रुपए
2,791.00 रुपए


भोपाल
947.50 रुपए
2,743.00 रुपए


चंडीगढ़
951.50 रुपए
2,760.00 रुपए



अगस्त में कमर्शियल गैस हुई सस्तीतेल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अगस्त 2026 को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में कटौती की थी. दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर 2,930 रुपए से घटकर 2,738 रुपए हो गया है. मतलब ग्राहकों को प्रति सिलेंडर 192 रुपए की राहत मिली है. कोलकाता में भी 209 रुपए की कटौती के बाद नया रेट 2,872.50 रुपए हो गया है.
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घरेलू सिलेंडर के दाम क्यों नहीं बदले?घरेलू एलपीजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बदलाव अलग-अलग तरीके से किया जाता है. घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई नया संशोधन नहीं हुआ है. दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपए, मुंबई में 941.50 रुपए, कोलकाता में 968 रुपए और चेन्नई में 957.50 रुपए बनी हुई है.&amp;nbsp;
एलपीजी के दाम कब बदलते हैं?तेल मार्केटिंग कंपनियां आम तौर पर हर महीने की शुरुआत में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं. घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर के रेट में बदलाव हो सकता है. हालांकि, किसी महीने कीमत में बदलाव हो, ये जरूरी नहीं है. इसलिए महीने के अंत में भी अगर आप एलपीजी सिलेंडर बुक कर रहे हैं, तो अपने शहर का मौजूदा रेट जरूर चेक कर लें. अलग-अलग शहरों में एलपीजी की कीमत अलग हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, LPG, सिलेंडर, कितने, का, मिल, रहा, घरेलू, और, कमर्शियल, गैस, के, ताजा, रेट, यहां, देखें</media:keywords>
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        <title>रक्षाबंधन पर सस्ती हो गई चीनी, 20 फीसदी गिरे दाम, दुकानों पर कम होंगे रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रक्षाबंधन-पर-सस्ती-हो-गई-चीनी-20-फीसदी-गिरे-दाम-दुकानों-पर-कम-होंगे-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/रक्षाबंधन-पर-सस्ती-हो-गई-चीनी-20-फीसदी-गिरे-दाम-दुकानों-पर-कम-होंगे-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ चीनी के ज्यादा होते दाम से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. पिछले कुछ दिनों में चीनी की एक्स मिल कीमतों में करीब 20% की गिरावट आई है. &amp;nbsp;इसके बाद खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम कम होने लगे हैं. &amp;nbsp;सरकार को उम्मीद है कि थोक बाजार में कीमतों में आई नरमी का असर जल्द ही दुकानों पर भी दिखाई देगा.
सरकार के मुताबिक, हाल में चीनी के दाम ज्यादा होने की वजह देश में इसकी कमी नहीं थी. बाजार में ज्यादा जमा कर के रखना और कीमत ज्यादा होने की उम्मीद में ज्यादा खरीदारी के वजह से दाम ऊपर गए थे. सरकार ने कहा है कि देश में चीनी का काफी स्टॉक मौजूद है.
सितंबर से बदलेगा कोटा सिस्टम
बाजार में चीनी की सप्लाई तेजी से ज्यादा होने के लिए सरकार सितंबर से मौजूदा महीने का कोटा इंतजाम को बदलकर हर 15 दिन में कोटा देने का इंतेजाम लागू करेगी. इसके अनुसार चीनी मिलों को पहले हफ्ते में अपने फिक्स कोटे का कम से कम 40% &amp;nbsp;हिस्सा बेचना होगा. बची हुई अगले हफ्ते बेचनी होगी.
इस बदलाव से सरकार को चीनी की मांग और सप्लाई पर नजर रखने में आसानी होगी. जरूरत पड़ने पर सरकार एकस्ट्रा कोटा भी जारी कर सकेगी.
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बिक्री के 7 दिन में भेजनी होगी चीनी
सरकार ने चीनी मिलों को बिक्री के सात दिन के अंदर चीनी भेजने को कह दिया है. इसका मकसद मिलों से डीलरों और फिर कस्टमर्स तक चीनी की सप्लाई को तेज करना है. &amp;nbsp;वहीं, थोक खरीदारों को अपनी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके नहीं रखने की सलाह दी गई है.
आने वाले महीनों में चीनी की सप्लाई और ज्यादा होने की उम्मीद है. गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होने की कोशिश है. अक्टूबर में 10 लाख टन से ज्यादा चीनी बनने का अनुमान है, जबकि नवंबर में उत्पादन करीब 45 लाख टन तक पहुंच सकता है. इसके अलावा कर्नाटक और महाराष्ट्र की चालू मिलों से सितंबर में करीब 2 लाख टन एकस्ट्रा चीनी बाजार में आने की उम्मीद है. सरकार ने अक्टूबर में बनने वाली चीनी को बिना रोक के बेचने को बोल दिया है. इससे नई चीनी जल्द बाजार में पहुंच सकेगी.
रिफाइनर को एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के अनुसार लाई गई और प्रोसेस की गई चीनी बेचने की अनुमति दी गई है. साथ ही, जिन डीलरों और थोक खरीदारों के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक है, उन्हें इसे बाजार में निकालने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. इन कदमों से चीनी की सप्लाई ज्यादा होने और कीमतों में और नरमी आने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली पहुंची 453 टन प्याज, 35 रुपए में खरीद लो, NCR की मंडियों में बढ़ेगी आवक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-पहुंची-453-टन-प्याज35-रुपए-में-खरीद-लो-ncr-की-मंडियों-में-बढ़ेगी-आवक</link>
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        <description><![CDATA[ Onion Price News: अगर आप भी दिल्ली में रहते हैं और प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है. महाराष्ट्र के नासिक से करीब 453.65 टन प्याज लेकर &amp;lsquo;कंदा एक्सप्रेस&amp;rsquo; शुक्रवार यानी आज दिल्ली पहुंच गई है. सरकार ने यह कदम दिल्ली-NCR में प्याज की सप्लाई बढ़ाने और बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए उठाया है. खास बात यह है कि बफर स्टॉक का यह प्याज दिल्ली-NCR में 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा.&amp;nbsp;
केंद्र सरकार के मुताबिक, इसका खास मकसद प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और बाजार की बढ़ी कीमतों पर लगाम लगाना है. दिल्ली के अलावा आसपास के कुछ शहरों में भी इस स्टॉक की सप्लाई की जाएगी. ऐसे में आने वाले दिनों में दिल्ली की मंडियों में प्याज की अवाक बढ़ने से इनकी कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
453 टन से ज्यादा प्याज लेकर दिल्ली पहुंची कंदा एक्सप्रेस
पहली कंदा एक्सप्रेस में प्याज के 21 वैगन लगाए गए थे. इन वैगन के जरिए शुक्रवार को करीब 453.65 टन प्याज दिल्ली पहुंचाया गया है. हालांकि, यह प्याज नासिक में रखे गए सरकारी बफर स्टॉक से भेजा गया है. बताया जा रहा है कि कुछ प्याज चंडीगढ़, लुधियाना और जम्मू जैसे आसपास के शहरों में भी भेजा जाएगा.
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दिल्ली में 62 रुपये किलो पहुंचा प्याज
दिल्ली में प्याज की कीमतों में हाल के दिनों में काफी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 62 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी महीने यह करीब 33 रुपये किलो था. वहीं, देशभर में प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 46.58 रुपये प्रति किलो और थोक भाव 38.29 रुपये प्रति किलो था.&amp;nbsp;
सरकार के पास कितना प्याज का बफर स्टॉक है?
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के पास फिलहाल करीब 1.21 लाख टन प्याज बफर स्टॉक के तौर पर मौजूद है. बताया जा रहा है कि यह स्टॉक मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखा गया है. हालांकि, सरकार इसी स्टॉक को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग शहरों में भेज रही है. ऐसे में सरकार को यह उम्मीद है कि बफर स्टॉक बाजार में आने से दिल्ली में प्याज के खुदरा भाव में करीब एक सप्ताह के भीतर कमी आ सकती है.&amp;nbsp;
इन शहरों में भी भेजा जाएगा प्याज
दिल्ली के बाद दूसरे शहरों तक भी बफर स्टॉक पहुंचाने की तैयारी की गई है. चेन्नई के लिए भी कंदा एक्सप्रेस की एक खेप तैयार की जाएगी. इसके बाद मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहरों के लिए भी प्याज ट्रेन के जरिए भेजने की योजना है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>रक्षाबंधन पर 4000 करोड़ का कारोबार, बाजारों में ज्वैलरी की जबरदस्त मांग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रक्षाबंधन-पर-4000-करोड़-का-कारोबार-बाजारों-में-ज्वैलरी-की-जबरदस्त-मांग</link>
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        <description><![CDATA[ रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली का कारोबारी बाजार इस बार खासा गुलजार नजर आया. भाई-बहन के रिश्ते का यह त्योहार सिर्फ खुशियां ही नहीं लाया, बल्कि कारोबारियों के लिए भी बड़ी कमाई का अवसर बनकर सामने आया है. कारोबारी संगठन कैट के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में रक्षाबंधन से जुड़े कारोबार का आंकड़ा करीब 4000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि देशभर में यह कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है.
राखी से लेकर मिठाई और कपड़ों तक, हर बाजार में बढ़ी खरीदारी
त्योहार से पहले ही राजधानी के प्रमुख बाजारों में खरीदारों की आवाजाही बढ़ गई थी. चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, कमला नगर, लाजपत नगर, गांधी नगर, खान मार्केट और राजौरी गार्डन समेत कई बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां तेज रहीं. राखियों के अलावा मिठाई, गिफ्ट आइटम, कपड़े, श्रृंगार का सामान और अन्य त्योहार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी ने बाजार को रफ्तार दी.
स्वदेशी राखियों और हस्तशिल्प की ओर बढ़ा रुझान
इस बार राखियों के बाजार में स्वदेशी डोरी और हस्तशिल्प से तैयार राखियों की मांग खास तौर पर दिखाई दी. स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली इन राखियों ने बाजार में अपनी जगह बनाई है. रक्षाबंधन से जुड़े इस कारोबार का फायदा केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राखी बनाने वाले कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों से लेकर गृह उद्योगों को भी मिला.
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त्योहार ने कई कारोबारों को एक साथ दिया सहारा
कैट के मुताबिक, रक्षाबंधन का सीधा असर कई अलग-अलग क्षेत्रों के कारोबार पर पड़ा है. मिठाई और फूल बेचने वालों के साथ गिफ्ट आइटम के व्यापारी, परिवहन क्षेत्र, पैकेजिंग कारोबार, कुरियर सेवाएं और ई-कॉमर्स डिलीवरी नेटवर्क भी इस दौरान सक्रिय रहे. छोटे दुकानदारों के लिए भी त्योहार का सीजन बिक्री बढ़ाने का अहम मौका बना.
दिल्ली में ज्वैलरी कारोबार का आंकड़ा 800-900 करोड़ रुपये तक
रक्षाबंधन के दौरान गहनों की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी. अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में अकेले ज्वैलरी बाजार का कारोबार करीब 800 से 900 करोड़ रुपये रहा. भाइयों की कलाई के लिए सोने और चांदी से बनी राखियों के साथ बहनों को उपहार देने के लिए आभूषण और सिक्कों की मांग भी बनी रही.
महंगी धातुओं के बीच हल्की ज्वैलरी बनी पसंद
दरीबा व्यापार मंडल के महासचिव मनीष वर्मा के अनुसार, सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद रक्षाबंधन पर ज्वैलरी की खरीदारी को लेकर लोगों में रुचि रही. हालांकि, कीमतों को देखते हुए ग्राहकों का झुकाव हल्के वजन वाले गहनों की तरफ अधिक रहा. सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के अलावा सोने-चांदी के सिक्कों की भी मांग देखने को मिली.
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देशभर में 30 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान
रक्षाबंधन के बढ़ते बाजार ने इस त्योहार की आर्थिक अहमियत को भी सामने रखा है. कैट का अनुमान है कि देशभर में इस बार राखी से जुड़ा कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक रह सकता है. दिल्ली को इसमें करीब 4000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है, जिसमें राखी और त्योहार से जुड़े विभिन्न सामानों की बिक्री के साथ ज्वैलरी कारोबार भी शामिल है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रक्षाबंधन, पर, 4000, करोड़, का, कारोबार, बाजारों, में, ज्वैलरी, की, जबरदस्त, मांग</media:keywords>
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        <title>देशभर के 2573 पेट्रोल पंपों पर बिक्री बंद, तेल में मिलावट पर सरकार का बड़ा एक्शन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देशभर-के-2573-पेट्रोल-पंपों-पर-बिक्री-बंद-तेल-में-मिलावट-पर-सरकार-का-बड़ा-एक्शन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/देशभर-के-2573-पेट्रोल-पंपों-पर-बिक्री-बंद-तेल-में-मिलावट-पर-सरकार-का-बड़ा-एक्शन</guid>
        <description><![CDATA[ पेट्रोल में मिलावट और गाड़ियों में खराबी की शिकायतों पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. कार्रवाई के तहत बड़े पैमाने पर देश के 2 हजार 573 रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पेट्रोल की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. सरकार की ओर से यह कड़ी कार्रवाई ऐसे वक्त की गई है, जब &amp;nbsp;पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मिनिस्ट्री और सरकारी तेल कंपनियां तेल में मिलावट की गहन जांच पड़ताल कर रही हैं.
बताया जा रहा है कि देश के करीब 90 हजार पेट्रोल पंप पेट्रोलियम मिनिस्ट्री और सरकारी तेल कंपनियों की निगरानी के दायरे में हैं. जांच अभियान का मकसद जमीन के नीचे बने पेट्रोल स्टोरेज टैंकों में पानी घुसने से होने वाली मिलावट को रोकना है. पिछले दिनों इस पर देश में काफी बवाल हुआ था.
किन-किन चीजों की हो रही है जांच?

रिटेल आउटलेट्स
जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंक
टैंकर
और इथेनॉल स्टोरेज

किस कंपनी के कितने पेट्रोल पंपों की बिक्री पर लगी है रोक?

सबसे ज्यादा संख्या इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन- 1257 पेट्रोल पंप
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन- 915 पेट्रोल पंप
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन- 401 पेट्रोल पंप

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गौरतलब है कि सरकार की ओर से देश के लगभग 89 हजार रिटेल आउटलेट्स पर जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंकों में पानी घुसने की जांच की जा रही है. सरकार की ओर से जारी की गई टेस्टिंग गाइडलाइंस के मुताबिक, कई पेट्रोल पंपों पर स्टोरेज टैंकों की जांच दिन में आठ से 12 बार तक की जा रही है. जांच के दौरान मिलने वाले मॉनिटरिंग सिस्टम की पहचान करके उन्हें ठीक करने या बदलने का काम किया जा रहा है.
डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बढ़ा टेस्टिंग का दायरा
बता दें कि यह क्वालिटी चेक सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं हैं. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पूरे डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया है, जिसमें इथेनॉल टैंकर, स्टोरेज टैंक, डिपो और टर्मिनल शामिल हैं.
कार कंपनियां रख रही नजर
बता दें कि ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियां भी इस मामले पर बारीकी से नजर रख रही हैं. पिछले दिनों इंडस्ट्री की टेस्टिंग में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इकट्ठा किए गए 250 से ज्यादा फ़्यूल सैंपल शामिल थे. देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी फ्यूल की क्वालिटी की जांच की है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देशभर, के, 2573, पेट्रोल, पंपों, पर, बिक्री, बंद, तेल, में, मिलावट, पर, सरकार, का, बड़ा, एक्शन</media:keywords>
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        <title>महंगे होंगे बिस्किट्स, Britannia की कीमत पर Goldman का बड़ा अनुमान</title>
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        <description><![CDATA[ चाय के साथ बिस्किट खाने वालों के लिए बुरी खबर है. चीनी के दाम ज्यादा होने से बिस्किट और दूसरी मीठी चीजें महंगी हो सकती हैं. Goldman का कहना है कि चीनी की ज्यादा होती कीमतों का सबसे ज्यादा असर Britannia industries पर पड़ सकता है.
चीनी बिस्किट, चॉकलेट, मिठाई और ठंडा बनाने में इस्तेमाल होती है. अगर चीनी के दाम लंबे समय तक ज्यादा रहते हैं, तो कंपनियों का खर्च ज्यादा होगा. इससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
Britannia पर ज्यादा असर क्यों
Goldman Sachs के मुताबिक, Britannia के खर्च में चीनी और पाम ऑयल की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है. कंपनी के कई सामान छोटे और कम कीमत वाले पैक में बिकते हैं. इसलिए कंपनी के लिए ज्यादा हुआ खर्च सीधे कस्टमर्स पर डालना आसान नहीं होगा.
Goldman Sachs ने Britannia को न्यूट्रल रेटिंग दी है और इसके शेयर का 6,000 का टारगेट रखा है. नेस्ले इंडिया और वरुण बेवरेजेज पर भी महंगी चीनी का असर पड़ सकता है, लेकिन इन कंपनियों पर असर कम रहने का अनुमान है.
यह भी पढ़े :&amp;nbsp;पंप पर फिर लौटेगा E10 पेट्रोल! लेकिन चुकानी होगी ज्यादा कीमत, ये है सरकार का प्लान&amp;nbsp;
चीनी क्यों हो रही है महंगी
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन रहता है. गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई, बिस्किट और दूसरी मीठी चीजों की मांग ज्यादा हो जाती है. इससे चीनी की मांग भी बाजार में तेजी से बढ़ती है.
सरकार ने पिछले महीने डीलरों को 30 दिन से ज्यादा चीनी रखने से रोकने का फैसला किया था. इसके बावजूद पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 10% ज्यादा हो गए हैं. कम बारिश और सूखे मौसम से गन्ने की फसल पर भी असर पड़ा है.
विदेशों में भी सप्लाई की परेशानी
ब्राजील में खराब मौसम के वजह से चीनी की फसल और कटाई में देरी हुई है. वहां गन्ने का इस्तेमाल चीनी के बजाय एथेनॉल बनाने में भी ज्यादा हो रहा है. इससे चीनी की सप्लाई कम होने का डर ज्यादा हो गया है.
थाईलैंड और भारत में भी चीनी का बनना कम रहने का अनुमान है. यूरोप और ब्रिटेन में तेज गर्मी जैसे मौसम के हालात ने भी परेशानी ज्यादा किया है.
सरकार ने बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियों से फिक्स समय से ज्यादा रखा चीनी का स्टॉक 31 अगस्त तक बेचने को कहा है. सरकार को उम्मीद है कि बाजार में ज्यादा चीनी आने से दाम कम हो सकते हैं. लेकिन, कंपनियों का कहना है कि अभी स्टॉक बेचकर बाद में बाजार से चीनी खरीदना महंगा पड़ सकता है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चांदी खरीदने का है प्लान, तो जान लीजिए असली और नकली में अंतर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चांदी-खरीदने-का-है-प्लान-तो-जान-लीजिए-असली-और-नकली-में-अंतर</link>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और घरों में चांदी की खरीदारी की तैयारी चल रही है. पायल, चेन, बिछिया, अंगूठी या पूजा के बर्तन ज्यादातर घरों में कुछ न कुछ चांदी का जरूर आता है लेकिन दुकान से लाई गई चांदी सच में उतनी शुद्ध है या नहीं, यह पता कैसे चले?
अब इसका एक आसान तरीका है और सरकार ने इसका दायरा और बड़ा कर दिया है.&amp;nbsp;भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS ने चांदी के गहनों पर लगने वाले HUID नंबर का काम तेज कर दिया है.&amp;nbsp;अब देश के 102 जिलों में 341 ऐसे सेंटर चल रहे हैं जहां चांदी की जांच और हॉलमार्किंग होती है. 25 हजार से ज्यादा चांदी के दुकानदार BIS के साथ रजिस्टर्ड हो चुके हैं.
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गहने पर क्या-क्या लिखा होता है
अगर गहना हॉलमार्क वाला है तो उस पर चार चीजें दिखेंगी.

पहला - BIS का निशान.&amp;nbsp;
दूसरा- SILVER शब्द.&amp;nbsp;
तीसरा- शुद्धता का ग्रेड जैसे 925 या 800.&amp;nbsp;
चौथा - लेजर से लिखा हुआ छह अंकों का HUID नंबर

यह छह अंकों का नंबर हर गहने का अपना अलग नंबर होता है ठीक वैसे ही जैसे हर आदमी का अपना आधार नंबर. इसी नंबर से पता चलता है कि गहना कहां बना, किसने बनाया और उसकी शुद्धता क्या है.
घर बैठे कैसे चेक करें?
इसके लिए फोन में BIS CARE ऐप डाउनलोड कर लीजिए. ऐप में गहने पर लिखा छह अंकों का HUID नंबर डालिए. स्क्रीन पर उस गहने की पूरी जानकारी आ जाएगी. अगर नंबर डालने पर कुछ नहीं आता या जानकारी मेल नहीं खाती तो समझ जाइए कि कुछ गड़बड़ है.
खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें

गहना हमेशा BIS रजिस्टर्ड दुकान से ही लें. अपने आसपास कौन सी दुकानें रजिस्टर्ड हैं यह www.bis.gov.in पर देखा जा सकता है.
खरीदने के बाद पक्का बिल जरूर लें और उसे संभालकर रखें. बाद में कोई दिक्कत आए तो यही बिल काम आएगा.
अगर हॉलमार्क या HUID में कोई गड़बड़ी लगे या लगे कि किसी ने नकली हॉलमार्क लगा दिया है तो BIS CARE ऐप या BIS की वेबसाइट पर सीधे शिकायत कर सकते हैं.

एक बात जो जाननी जरूरी है
सोने की तरह चांदी पर हॉलमार्किंग अभी जरूरी नहीं है. यह दुकानदार की मर्जी पर है कि वह हॉलमार्क कराए या नहीं. चांदी के लिए यह योजना अक्टूबर 2005 में शुरू हुई थी और तब से यह मर्जी पर ही आधारित है. इसलिए दुकान पर बिना हॉलमार्क वाली चांदी भी मिल सकती है. ऐसे में ग्राहक को खुद ही सतर्क रहना पड़ता है.
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अब तक कितना काम हुआ
चांदी का HUID पोर्टल 1 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था. तब से अब तक 77 लाख से ज्यादा चांदी के गहनों पर यह नंबर लग चुका है. इनमें करीब 95 फीसदी गहने 925 और 800 ग्रेड के हैं. दक्षिण भारत इस मामले में सबसे आगे है, जहां से 62 फीसदी काम हुआ है. पश्चिमी इलाके से 18 फीसदी और मध्य भारत से 10 फीसदी.
लोग सबसे ज्यादा क्या खरीदते हैं
BIS ने यह समझने के लिए एक सर्वे भी कराया कि बाजार में चांदी की खरीद-बिक्री कैसे चलती है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 345 जिलों से 4,971 जवाब आए. सर्वे में पता चला कि लोग सबसे ज्यादा 10 से 25 ग्राम और 25 से 50 ग्राम वाले गहने खरीदते हैं. दोनों को मिलाकर करीब 74 फीसदी मांग इन्हीं की है. सबसे ज्यादा बिकने वाली चीजों में पायल, चेन, बिछिया, अंगूठी और ब्रेसलेट हैं. शुद्धता में 925 और 800 ग्रेड सबसे आम हैं.
चांदी के कितने ग्रेड होते हैं
BIS के मानक IS 2112 के हिसाब से चांदी के सात ग्रेड तय हैं. ये हैं 999, 990, 970, 958, 925, 835 और 800. नंबर जितना बड़ा, चांदी उतनी ही शुद्ध. 999 का मतलब है लगभग पूरी शुद्ध चांदी. गहनों में आमतौर पर 925 वाली चांदी इस्तेमाल होती है क्योंकि बिल्कुल शुद्ध चांदी बहुत नरम होती है और उससे गहना बनाना मुश्किल होता है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चांदी, खरीदने, का, है, प्लान, तो, जान, लीजिए, असली, और, नकली, में, अंतर</media:keywords>
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        <title>पलट गई बाजी, पेट्रोल का बड़ा सप्लायर बना भारत, सऊदी&amp;UAE को पछाड़ा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पलट-गई-बाजी-पेट्रोल-का-बड़ा-सप्लायर-बना-भारत-सऊदी-uae-को-पछाड़ा</link>
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        <description><![CDATA[ पिछले दिनों भारत में पेट्रोल के दाम तेजी से बढ़े थे. जिसके बाद देश में ईंधन की किल्लत की भी खबरें आईं, हालांकि देश में पेट्रोल- डीजल की कोई किल्लत नहीं थी. इसी बीच अब भारत सबसे बड़ा पेट्रोल सप्लायर बनकर केन्या के लिए उभरा है. अफ्रीकी देश केन्या को पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई करने के मामले में भारत सबसे आगे निकल गया है.
USA और सऊदी को पछाड़ाकमोडिटी डाटा कंपनी Kpler के आंकड़ों के मुताबिक ऊर्जा अर्थशास्त्री अनास अलहज्जी ने बताया कि भारत अब केन्या को पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल का प्रमुख सप्लायर बन गया है. इतना ही नहीं बल्कि भारत ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे बड़े तेल सप्लायरों को भी पीछे छोड़ दिया है. ये बदलाव मिडिल ईस्ट में यूएस-ईरान युद्ध के कारण ईंधन की सप्लाई और व्यापार मार्गों में आई परेशानी के बीच हुआ है.
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केन्या में बढ़ी सप्लाईजुलाई 2026 में भारत का केन्या को कुल निर्यात 151.41% बढ़ा. हालांकि, ये आंकड़ा सिर्फ पेट्रोलियम उत्पादों का नहीं, बल्कि सभी तरह के सामान के निर्यात का है. इसी दौरान भारत का दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 67.64% बढ़कर 6.92 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 4.13 अरब डॉलर था.
इतना ही नहीं भारत और केन्या के बीच व्यापार भी तेजी से बढ़ रहा है. 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 4.31 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का केन्या को निर्यात 4.01 अरब डॉलर और केन्या से आयात 29 करोड़ डॉलर रहा. पेट्रोलियम उत्पाद भारत से केन्या को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में शामिल हैं.
अफ्रीका में बढ़ी भारतीय ईंधन की मांगभारत खुद अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. लेकिन देश में बड़ी रिफाइनिंग क्षमता होने के कारण वो कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधनों में बदलकर दूसरे देशों को निर्यात करता है. जुलाई 2026 में अफ्रीका को भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 66% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यूरोप में रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों पर प्रतिबंधों के कारण भारतीय ईंधन की बड़ी खेप अब अफ्रीकी देशों की ओर जा रही है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत की फाइनेंस रिच लिस्ट जारी, उदय कोटक नंबर 1, टॉप 10 में कौन&amp;कौन शामिल?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-की-फाइनेंस-रिच-लिस्ट-जारी-उदय-कोटक-नंबर-1-टॉप-10-में-कौन-कौन-शामिल</link>
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        <description><![CDATA[ भारत का फाइनेंस सेक्टर अब केवल बैंक, ब्रोकरेज और फिनटेक कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इस क्षेत्र ने कई लोगों के लिए बड़ी संपत्ति बनाने का रास्ता भी खोला है. हाल ही में भारत के टॉप 10 अरबपतियों की लिस्ट सामने आई है, जिसे देख आप भी हैरान रह जाने वाले हैं.
ये Bloomberg की पहली इंडिया फाइनेंस रिच लिस्ट है. जिसके मुताबिक भारत में वित्तीय सेवाओं के कारोबार से जुड़े 15 लोगों और परिवारों की कुल संपत्ति 65 अरब डॉलर से भी ज्यादा है.
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किस- किस का है लिस्ट में नाम?इस लिस्ट में पारंपरिक बैंकिंग और लोन कारोबार से जुड़े दिग्गजों के साथ जेरोधा जैसी कंपनियों के जरिए नई संपत्ति खड़ी करने वाले कारोबारी भी शामिल हैं. Bloomberg के मुताबिक लिस्ट में शामिल 7 लोगों की संपत्ति को हालिया सालों में रिटेल लोन में तेजी और शेयर बाजार में आम निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से खासा फायदा मिला है.
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम उदय कोटक का है, जिनके पास 16.4 अरब डॉलर की सम्पत्ति है. इसके बाद मुथूट परिवार का नाम शामिल है. तो आइये दिखाते हैं इस लिस्ट में टॉप 10 में किस- किस का नाम है और उनके पास कितनी सम्पत्ति है.



नाम
सम्पत्ति (डॉलर में)
सम्पत्ति (रुपये में)


उदय कोटक
16.4 अरब डॉलर
1.57 लाख करोड़ रुपये


मुथूट परिवार
9.9 अरब डॉलर
94.600 करोड़ रुपये


नितिन और निखिल कामठ
9.9 अरब डॉलर
94,600 करोड़ रुपये


अजय पीरामल
4.4 अरब डॉलर
42,000 करोड़ रुपये


मोतीलाल ओसवाल और रामदेव अग्रवाल
3.9 अरब डॉलर
37,260 करोड़ रुपये


संजय और अल्पना डांगी
3.9 अरब डॉलर
37,260 करोड़ रुपये


सचिन बंसल
3 अरब डॉलर
28,662 करोड़ रुपये


संजय अग्रवाल
1.9 अरब डॉलर
18,140 करोड़ रुपये


राजेश शर्मा
1.8 अरब डॉलर
17,200 करोड़ रुपये


आनंद राठी और परिवार
1.7 अरब डॉलर
16,240 करोड़ रुपये



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फाइनेंस सेक्टर में है इतना पैसा?बता दें कि Bloomberg की ये लिस्ट दिखाती है कि पिछले कुछ दशकों में भारत का वित्तीय क्षेत्र काफी बदल गया है. पहले जहां बैंकिंग और पारंपरिक लोन कारोबार का दबदबा था, वहीं अब गोल्ड लोन, शेयर ब्रोकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, डिजिटल पेमेंट और फिनटेक भी बड़ी दौलत बनाने के रास्ते बन गए हैं. हालांकि, इस तेजी का दूसरा पहलू भी है. शेयर बाजार में सट्टेबाजी करने वाले कई छोटे निवेशकों को नुकसान हुआ है. डिजिटल लोन के बढ़ने से घरेलू कर्ज भी बढ़ा है. सीधेतौर पर कहें तो भारत में बढ़ते क्रेडिट, निवेश और डिजिटल फाइनेंस ने एक नई तरह के अरबपतियों का वर्ग तैयार किया है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, की, फाइनेंस, रिच, लिस्ट, जारी, उदय, कोटक, नंबर, टॉप, में, कौन-कौन, शामिल</media:keywords>
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    <item>
        <title>सस्ती प्याज 203 आउटलेट्स, 90 मोबाइल वैन से हर घर पहुंचेगी, कीमत सिर्फ 35 रुपए किलो</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ती-प्याज-203-आउटलेट्स-90-मोबाइल-वैन-से-हर-घर-पहुंचेगी-कीमत-सिर्फ-35-रुपए-किलो</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सस्ती-प्याज-203-आउटलेट्स-90-मोबाइल-वैन-से-हर-घर-पहुंचेगी-कीमत-सिर्फ-35-रुपए-किलो</guid>
        <description><![CDATA[ Onion Supply via Kanda Express: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले प्याज के दाम बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज निकालना शुरू कर दिया है. प्याज को ट्रेन और सड़क, दोनों रास्तों से देश के बड़े शहरों तक भेजा जा रहा है. &amp;nbsp;नासिक से पहली कांदा एक्सप्रेस दिल्ली पहुंचने वाली है. लोगों को राहत देने के लिए प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जाएगी.
35 रुपये किलो मिलेगी प्याज
सरकार की सस्ती प्याज NCCF और NAFED की दुकानों के साथ मोबाइल वैन से बेची जाएगी. इसके अलावा सफल और केंद्रीय भंडार के आउटलेट पर भी प्याज मिलेगी. NCCF के 90 आउटलेट और 40 मोबाइल वैन, NAFED के 13 आउटलेट और 50 मोबाइल वैन लगाए गए हैं. केंद्रीय भंडार के करीब 100 आउटलेट भी इस काम में शामिल हैं.
नासिक से दिल्ली पहुंच रही कांदा एक्सप्रेस
कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्याज को सीधे किसान इलाकों से बड़े शहरों तक पहुंचाया जाता है. 2024-25 में 14 रेक के जरिए करीब 12 हजार मीट्रिक टन प्याज पांच शहरों तक भेजी गई थी. 2025-26 में 86 रेक के जरिए करीब 88 हजार मीट्रिक टन प्याज 16 शहरों तक पहुंचाई गई. अब इस वित्त वर्ष में पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई है.
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सड़क से भी भेजी जा रही प्याज
ट्रेन के साथ सड़क के रास्ते भी प्याज भेजी जा रही है. चेन्नई, कोलकाता, एर्नाकुलम, गुवाहाटी, वाराणसी, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, जम्मू और अमृतसर तक प्याज पहुंचाई जा रही है. कहां कितनी प्याज भेजनी है यह बाजार में प्याज के दाम और मांग को देखकर तय किया जाएगा.
बफर स्टॉक के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य
सरकार ने 2026-27 के लिए 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है. इसकी खरीद 15 मई 2026 से NAFED और NCCF के जरिए शुरू हुई थी. अब तक करीब 1.21 लाख टन प्याज खरीदी जा चुकी है. इस बार प्याज को स्टोर करने की जिम्मेदारी पहली बार सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को दी गई है. इससे प्याज को बेहतर तरीके से रखने और खराब होने से बचाने में मदद मिलेगी.
देश में प्याज का उत्पादन ठीक
सरकार के मुताबिक 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है. पिछले साल उत्पादन करीब 307.67 लाख टन था. अप्रैल से जून 2026 के बीच करीब 3.82 लाख टन प्याज का निर्यात भी हुआ. मलेशिया, श्रीलंका, UAE और नेपाल इसके प्रमुख खरीदार रहे.
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त्योहारों में क्यों बढ़ती है प्याज की मांग?
ओणम, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान प्याज की मांग बढ़ जाती है. इसके बाद शादी का सीजन भी शुरू हो जाता है. ऐसे में प्याज की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है और दाम बढ़ने लगते हैं. इसी वजह से सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में भेज रही है ताकि कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी न हो.
26 अगस्त को प्याज का औसत भाव 37.87 रुपये किलो
26 अगस्त 2026 को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 37.87 रुपये प्रति किलो रहा. इसी दिन टमाटर का औसत भाव 38.33 रुपये किलो, आलू 22.63 रुपये किलो, चना दाल 86.71 रुपये किलो, आटा 40.48 रुपये किलो, तूर दाल 123.30 रुपये किलो और दूध 60.82 रुपये लीटर रहा. सरकार के मुताबिक टमाटर, आलू और चना दाल के दाम पिछले साल के मुकाबले कम हैं.
579 केंद्रों से रोज जुटाया जाता है कीमतों का डेटा
उपभोक्ता मामले विभाग देशभर के 579 केंद्रों से 41 जरूरी चीजों के दाम रोज जुटाता है. इनमें प्याज भी शामिल है. इन आंकड़ों के साथ मंडियों में प्याज की आवक और बाजार की मांग को देखकर फैसला लिया जाता है कि बफर स्टॉक से कितनी प्याज निकालनी है और उसे किन शहरों में भेजना है. सरकार का कहना है कि प्याज के दाम और सप्लाई पर लगातार नजर रखी जा रही है. जरूरत पड़ने पर आगे भी बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारी जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सस्ती, प्याज, 203, आउटलेट्स, मोबाइल, वैन, से, हर, घर, पहुंचेगी, कीमत, सिर्फ, रुपए, किलो</media:keywords>
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        <title>सोने&amp;चांदी पर बड़ा फैसला लेने वाली है सरकार, त्योहारों से पहले सस्ता हो रहा गोल्ड</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार सोने-चांदी पर बढ़ाए गए इम्पोर्ट ड्यूटी या आयात शुल्क को वापस लेने पर गंभीरता से सोच रही है ताकि तस्करी रोकने के साथ ही कारोबार में भी आसानी हो. सर्राफा व्यापारियों और ज्वैलर्स एसोसिएशन की तरफ से सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि सोने के आयात पर टैक्स को कम कर के दोबारा 6% किया जाए ताकि व्यापार औपचारिक (formal) बना रहे. इस बीच सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ विभाग इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या कम टैक्स से तस्करी रुकेगी और औपचारिक इंपोर्ट बढ़ेगा. फिलहाल, इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.&amp;nbsp;
जुलाई 2024 में बजट के समय में सरकार ने सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था. इसके बाद 13 मई 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ते दबाव और बढ़ते इंपोर्ट बिल को काबू में करने के लिए इसे वापस से बढ़ाकर 15% कर दिया गया. अब सरकार दोबारा अपने इस फैसले पर &#039;यू-टर्न&#039; लेने का सोच रही है.&amp;nbsp;
सरकार क्यों कर रही है विचार?
सोने और चांदी के इम्पोर्ट पर ज्यादा टैक्स लगने की वजह से सोने की अवैध तस्करी और समानांतर अर्थव्यवस्था (ग्रे मार्केट) को बढ़ावा मिला है. इससे आधिकारिक और अनौपचारिक आयात के बीच कीमतों का अंतर बढ़ गया है. बेशक, सरकार ने डॉलर रिजर्व बचाने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी, लेकिन जब तस्करी के चलते अनौपचारिक रूप से डॉलर की मांग बढ़ती है, तो ओपन मार्केट में डॉलर और महंगा हो जाता है.
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि ज़्यादा टैक्स ने तस्करी को बढ़ावा दिया है. &amp;nbsp;भारत आम तौर पर हर साल 700-800 टन सोना खरीदता है और UAE, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाज़ारों में तैयार गहनों का निर्यात करता है.
कीमतों पर क्या होगा असर?
अगर सरकार वाकई में सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% करती है, तो इससे प्रति 10 ग्राम सोने पर टैक्स का बोझ काफी कम हो जाएगा. इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी आने से आयात लागत में &amp;nbsp;9% की बड़ी गिरावट आएगी, जिससे स्थानीय बाजार में कीमतें तुरंत गिरेंगी. वैसे भी अगस्त के महीने से ड्यूटी में संभावित कटौती की खबरों और सट्टेबाजी के चलते पहले से ही सर्राफा बाजारों में भारी डिस्काउंट देखा जा रहा है. अब जब आधिकारिक ऐलान होगा, तो कीमतों में और कटौती की संभावना है.

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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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