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    <title>Attention India Hindi &amp; : बिज़नेस</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : बिज़नेस</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>Zomato पर खाना ऑर्डर करना हुआ और महंगा, कैश पेमेंट पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी Zomato से खाना ऑर्डर करते समय ऑनलाइन पेमेंट के बजाय कैश में पेमेंट करना पसंद करते हैं, तो अब आपको इसके लिए ज्यादा रकम देने पड़ सकते हैं. कंपनी ने कैश ऑन डिलीवरी यानी CoD से ऑर्डर करने वाले ग्राहकों से एक्स्ट्रा चार्ज लेना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चार्ज काम से कम 5 रुपए है, जबकि कुछ जगहों पर यह रकम करीब 20 रुपये तक पहुंच रही है. ऐसे में आइए जानते हैं Zomato के इस नए चार्ज से जुड़ी खास बातें.
कैश ऑन डिलीवरी पर कितना लगेगा चार्ज?
Zomato ने Cosh on Delivery (CoD) वाले कुछ ऑर्डर पर एक्स्ट्रा चार्ज लेना शुरू किया है. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस चार्ज की जानकारी शेयर की है.इस चार्ज की शुरुआती कीमत काम से कम 5 रुपए बताया जा रहा है. वहीं कुछ ग्राहकों के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर यह चार्ज करीब 20 रुपए है. यानी ऑनलाइन पेमेंट के बजाय कैश में पेमेंट करना अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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खाने के ऑर्डर पर पहले से लगते हैं ये चार्ज
Zomato से खाना ऑर्डर करते समय सिर्फ खाने की कीमत ही नहीं चुकानी पड़ सकती है, बल्कि ऑर्डर के हिसाब से कई दूसरे चार्ज भी बिल में जुड़ सकते हैं.&amp;nbsp;

डिलीवरी चार्ज
प्लेटफॉर्म फीस
खाने के सामान पर GST
डिलीवरी पार्टनर फीस पर GST
प्लेटफॉर्म फीस पर GST
रेस्टोरेंट पैकिंग चार्ज
कैश ऑन डिलीवरी का एक्स्ट्रा चार्ज&amp;nbsp;

Zomato ने पहले भी बढ़ाई थी प्लेटफॉर्म फीस
दरअसल, Zomato ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए इस साल मार्च में प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी. यह चार्ज 12.50 रुपए से बढ़ाकर 14.90 रुपए कर दिया गया था. फिलहाल कंपनी के मोबाइल ऐप पर मौजूदा जानकारी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म फीस 14.99 रुपये (GST को छोड़कर) दिखाई जा रही है.
Swiggy और Zepto पर क्या है हाल?
Zomato के मुकाबले Swiggy ने अभी तक कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर के लिए अलग से ऐसा चार्ज लगाने की शुरुआत नहीं की है. वहीं, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto पे भी कुछ ग्राहकों ने कैश पेमेंट वाले ऑर्डर पर 25 रुपये तक अतिरिक्त चार्ज जोड़ने का आरोप लगाया है. हालांकि, इस नए CoD चार्ज को लेकर Zomato की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आज कितने रुपए लीटर हुआ पेट्रोल और डीजल? देखें ताजा रेट लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर हर दिन लोगों की नजर बनी रहती है. खासकर गाड़ी चलाने वाले लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम में होने वाला छोटा बदलाव भी बजट पर असर डालता है. ऐसे में अगर आप भी आज अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जान लें.
आज 13 सितंबर 2026 को देश के खास- खास शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. हालांकि अलग-अलग राज्यों में टैक्स और शुल्क के कारण ईंधन की कीमतें अलग रहती हैं.
दिल्ली में क्या है भाव?राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत करीब 102.12 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल के लिए लोगों को करीब 95.20 रुपए प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं.
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मुंबई में कितना है दाम?मुंबई में पेट्रोल की कीमत दिल्ली के मुकाबले ज्यादा है. यहां आज पेट्रोल करीब 111.21 रुपए प्रति लीटर और डीजल करीब 97.83 प्रति लीटर बिक रहा है.
कोलकाता में आज का रेट क्या है?कोलकाता की बात करें तो यहां आज पेट्रोल करीब 113.51 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल की कीमत करीब 99.82 रुपए प्रति लीटर बनी हुई है.
चेन्नई में पेट्रोल-डीजल का भावचेन्नई में आज पेट्रोल करीब 107.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल करीब 99.55 रुपए प्रति लीटर है.
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क्यों अलग-अलग होते हैं दाम?पेट्रोल और डीजल की कीमत हर शहर में एक जैसी नहीं होती है. इसके पीछे राज्य सरकारों के टैक्स, स्थानीय शुल्क, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और कच्चे तेल की कीमत जैसे कई कारण होते हैं. यही वजह है कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट में अंतर देखने को मिलता है.
कैसे चेक कर सकते हैं पेट्रोल-डीजल का रेट?तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को रोज अपडेट किया जाता है. ऐसे में पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम आप इंडियन ऑयल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या एक एसएमएस भेजकर चेक कर सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गैस सिलेंडर के दाम पर आज आया बड़ा अपडेट, जानें आपके शहर में LPG का नया रेट</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर में करोड़ों परिवार खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में हर महीने गैस सिलेंडर के दाम में होने वाले बदलाव पर लोगों की नजर रहती है. अगर आप भी आज एलपीजी सिलेंडर बुक करने वाले हैं तो आपके लिए आज के रेट की पूरी जानकारी जरूरी है.
आज 13 सितंबर 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है. यानी ग्राहकों को फिलहाल पिछले रेट पर ही 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर मिल रहा है. नोएडा में आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर का भाव 939.50 रुपए है.&amp;nbsp;
दिल्ली में आज गैस सिलेंडर कितने का है?राजधानी दिल्ली में आज 14.2 किलो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपए है. यानी दिल्ली में गैस सिलेंडर नोएडा के मुकाबले थोड़ा महंगा है. &amp;nbsp;
आज कितने रुपए लीटर हुआ पेट्रोल और डीजल? देखें ताजा रेट लिस्ट
नोएडा में आज एलपीजी सिलेंडर का रेटनोएडा में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत आज 939.50 रुपए है. सितंबर महीने में अब तक इस कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1 सितंबर से 12 सितंबर तक भी नोएडा में एलपीजी का रेट 939.50 रुपए ही रहा है. &amp;nbsp;
मुंबई में एलपीजी का आज का भावमुंबई में आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर 941.50 रुपए में मिल रहा है. फिलहाल यहां भी घरेलू गैस की कीमत में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है.
कोलकाता में एलपीजी सिलेंडर का रेटकोलकाता में 14.2 किलो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत आज 968 रुपए है. ये दिल्ली और मुंबई के मुकाबले ज्यादा है. &amp;nbsp;
चेन्नई में आज एलपीजी का भावचेन्नई में घरेलू एलपीजी सिलेंडर आज 957.50 रुपए में मिल रहा है. यहां भी फिलहाल कीमत स्थिर बनी हुई है. &amp;nbsp;
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क्या आज एलपीजी सिलेंडर सस्ता हुआ?आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई नई कटौती नहीं हुई है. इसलिए अगर आप 200 रुपए की कटौती वाली खबरें देख रहे हैं तो ये 19 किलो कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर से जुड़ी हो सकती हैं. अगस्त में कमर्शियल एलपीजी की कीमत में 200 रुपए से ज्यादा की कटौती हुई थी, लेकिन घरेलू एलपीजी के रेट में उस समय बदलाव नहीं किया गया था. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सहारा अब किसके कब्जे में है, कौन लौटा रहा है निवेशकों के पैसे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सहारा-अब-किसके-कब्जे-में-है-कौन-लौटा-रहा-है-निवेशकों-के-पैसे</link>
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        <description><![CDATA[ एक समय था जब देश के घर-घर में सहारा इंडिया का नाम जाना जाता था. छोटे शहरों और गांवों के लाखों लोगों ने सहारा की अलग-अलग योजनाओं में अपना पैसा लगाया था. लोगों को उम्मीद थी कि जरूरत के समय उनका पैसा वापस मिल जाएगा.
लेकिन समय के साथ सहारा की मुश्किलें बढ़ती गईं. निवेशकों के पैसे को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा और धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भी कमजोर होता चला गया. आज भी लाखों लोगों का पैसा सहारा से जुड़ा हुआ है और लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर उनका पैसा कब वापस मिलेगा. साथ ही सवाल ये भी है कि सुब्रत रॉय के जाने के बाद सहारा अब किसके पास है और निवेशकों को पैसा कौन लौटा रहा है?
सुब्रत रॉय के बाद सहारा का क्या हुआ?सहारा इंडिया के संस्थापक सुब्रत रॉय का नवंबर 2023 में निधन हो गया था. उनके जाने के बाद ये सवाल उठने लगा कि अब सहारा का क्या होगा. लेकिन ऐसा नहीं है कि सुब्रत रॉय के निधन के बाद पूरा सहारा किसी एक व्यक्ति या कंपनी के हाथ में चला गया है.
सहारा की अलग-अलग कंपनियां और उनकी संपत्तियां अलग-अलग कानूनी मामलों में हैं. यानी आज की तारीख में ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि सहारा अब फलां व्यक्ति के कब्जे में है.&amp;nbsp;
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क्या अडाणी ने खरीद लिया पूरा सहारा?दरअसल साल 2025 में सहारा की तरफ से अपनी कुछ बड़ी संपत्तियों को अडाणी प्रॉपर्टीज को बेचने का प्रस्ताव सामने आया था. इसमें करीब 88 संपत्तियों की बात कही गई थी.
इन संपत्तियों में महाराष्ट्र की एंबी वैली और लखनऊ की सहारा सिटी जैसी बड़ी प्रॉपर्टी भी शामिल बताई गई थीं. कुछ संपत्तियों को बेचने का प्रस्ताव और पूरा सहारा ग्रुप खरीद लेना, दोनों अलग बातें हैं. तो हां, अडाणी ने सहारा नहीं खरीदा है.&amp;nbsp;
फिर निवेशकों का पैसा कौन लौटा रहा है?सहारा में जिन लोगों का पैसा फंसा है, उनके लिए रिफंड का प्रोसेस सरकार और अदालत के निर्देशों के अनुसार चल रहा है. खासकर सहारा की चार को-ऑपरेटिव सोसायटियों में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया है. इस पोर्टल से जमाकर्ता अपने पैसे के लिए दावा कर सकते हैं. उनके डॉक्यूमेंट्स और रिकॉर्ड की जांच के बाद पैसा वापस कर दिया जाता है.
CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल क्या है?सरकार ने जुलाई 2023 में CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया था. इसका मकसद सहारा की चार को-ऑपरेटिव सोसायटियों में पैसा जमा करने वाले लोगों को उनका पैसा वापस दिलाना है.
चार को- ऑपरेटिव सोसायटियों ये हैं-

सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड&amp;nbsp;
हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
स्टार्स मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड

आज कितने रुपए लीटर हुआ पेट्रोल और डीजल? देखें ताजा रेट लिस्ट
क्या सहारा खुद पैसा लौटा रहा है?रिफंड की प्रोसेस ऐसा नहीं है कि सीधे सहारा कंपनी ने पैसे निकाले और लोगों को लौटा दिए. सहारा से जुड़े पैसों और संपत्तियों को लेकर अदालत और सरकारी एजेंसियों ने निगरानी रखी है. ऐसे में सारे जांच के बाद ही निवेशकों को पैसा वापस किया जा रहा है. यानी निवेशकों का पैसा वापस दिलाने में CRCS, SEBI और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों अहम किरदार निभा रहे हैं.
पैसा कब तक मिलेगा?रिफंड का प्रोसेस अभी चल ही रहा है और हर निवेशक को एक ही तारीख पर पूरा पैसा नहीं मिल सकता है. पहले ये देखा जाता है कि व्यक्ति का दावा सही है या नहीं, उसके डॉक्यूमेंट्स ठीक हैं या नहीं और वो रिफंड के नियम में आते हैं या नहीं. इसके बाद ही पेमेंट किया जाता है.
इसलिए अगर आपका पैसा सहारा में फंसा है तो सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक रिफंड प्रोसेस की जानकारी लेना चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सस्ते सोलर सामान पर अमेरिका ने लगाया भारी टैक्स, अब महंगे होंगे पैनल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ते-सोलर-सामान-पर-अमेरिका-ने-लगाया-भारी-टैक्स-अब-महंगे-होंगे-पैनल</link>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर सेल और पैनल पर बड़ा झटका दिया है. U.S. Department of Commerce ने इन देशों से होने वाले सोलर आयात पर भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई है. भारत के सोलर उत्पादों पर 123.04 फीसदी का एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाया गया है.&amp;nbsp;
अमेरिका का कहना है कि इन देशों के निर्माता अमेरिकी बाजार में सोलर उत्पाद कम कीमत पर बेच रहे थे और उन्हें सरकारों से ऐसी सब्सिडी मिल रही थी जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा था. इस फैसले के बाद अब भारतीय सोलर कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने प्रोडक्ट बेचना महंगा हो जाएगा.&amp;nbsp;
सोलर पैनल पर कितना टैक्स लगा?भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए 123.04 फीसदी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाया गया है. इंडोनेशिया के लिए ये 94.36 फीसदी और लाओस के लिए 65.43 फीसदी है. इसके अलावा काउंटरवेलिंग ड्यूटी भी लागू होगा.&amp;nbsp;
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अमेरिका ने क्यों लिया ये फैसला?अमेरिका में कुछ घरेलू सोलर कंपनियों ने भारत समेत इन देशों से आने वाले सस्ते सोलर प्रोडक्ट्स को लेकर शिकायत की थी. अमेरिकी जांच में पाया गया कि इन देशों के निर्माता अपने प्रोडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में बहुत कम कीमत पर बेच रहे थे. साथ ही, अमेरिका ने आरोप लगाया कि इन देशों की सरकारों की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी से भी प्रोडक्ट को फायदा मिल रहा है.&amp;nbsp;
कंपनियों पर क्या असर होगा?इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो अमेरिकी बाजार में सोलर सेल और मॉड्यूल निर्यात करती हैं. अगर किसी कंपनी के उत्पाद पर 100 फीसदी से ज्यादा का शुल्क लगता है तो अमेरिकी बाजार में उसका दाम काफी बढ़ सकता है. कंपनियों के सामने अब दो ऑप्शन होंगे, या तो इस लागत का कुछ हिस्सा खुद उठाएं या फिर इसे अमेरिकी खरीदारों पर डालें.
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क्या भारत में सोलर पैनल महंगे होंगे?
अमेरिका का ये शुल्क सीधे भारत में बिकने वाले सोलर पैनल पर लागू नहीं होता है. यानी सिर्फ इस फैसले की वजह से भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए सोलर पैनल की कीमत तुरंत बढ़ना जरूरी नहीं है.&amp;nbsp;
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ATM से फटा या गंदा नोट निकला? समझें अपने अधिकार, RBI ने बनाए नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/atm-से-फटा-या-गंदा-नोट-निकला-समझें-अपने-अधिकार-rbi-ने-बनाए-नियम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/atm-से-फटा-या-गंदा-नोट-निकला-समझें-अपने-अधिकार-rbi-ने-बनाए-नियम</guid>
        <description><![CDATA[ आपने अक्सर यह देखा होगा कि कभी-कभी ATM से रकम निकालने के दौरान कटे-फटे नोट निकल जाते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोगों को यह लगता है कि ATM से खराब नोट निकलने के बाद अब उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. अगर ATM से पैसे निकालते समय आपके हाथ में भी कटे-फटे नोट या गंदे नोट आ जाएं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नियम तय कर रखें. ऐसे नोट मिलने पर आप बैंक से संपर्क करके उन्हें बदलवा सकते हैं. लेकिन इसके लिए सही प्रोसेस जानना बेहद जरूरी है, ताकि बैंक में आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.&amp;nbsp;
ATM से खराब नोट निकले तो सबसे पहले क्या करें?
RBI के मुताबिक, सबसे पहले उस बैंक की शाखा से जल्द से जल्द संपर्क करें, जिस बैंक के ATM से आपने पैसे निकाले हैं. साथ ही इसके लिए बैंक को एक लिखित आवेदन देकर ATM से कैश निकालने की तारीख, समय,स्थान और निकाली गई रकम की जानकारी दें.
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अगर ATM से मिली ट्रांजैक्शन स्लिप आपके पास है, तो उसकी कॉपी या स्लिप आवेदन के साथ जमा करें. वहीं अगर आपके पास स्लिप मौजूद नहीं है, तो मोबाइल पर आया बैंक का SMS या ट्रांजैक्शन की जानकारी भी प्रमाण के तौर पर दिखाई जा सकती है.&amp;nbsp;
एक बार में कितने नोट बदलवा सकते हैं?
RBI के नियमों के मुताबिक, सामान्य तौर पर एक बार में आप अधिकतम 20 नोट बदलने के लिए बैंक में दे सकते हैं. लेकिन ध्यान रहें कि इन सभी नोटों की कुल कीमत 5,000 रुपये से ज्यादा न हो. ऐसे में अगर आपकी नोटों की संख्या या कुल रकम इससे ज्यादा है, तो बैंक के नियमों के मुताबिक अलग प्रोसेस अपनाई जा सकती है. इसलिए बैंक जाने से पहले नोटों की संख्या और उनकी कुल वैल्यू जरूर चेक करें.
नोट बदलने के लिए क्या देना होगा फीस?
फटे या गंदे को बदलने के लिए बैंक की ओर से आपसे अलग से कोई फीस नहीं लिया जाना चाहिए. इसलिए अगर कोई व्यक्ति इस सेवा के लिए आपसे एक्स्ट्रा पैसे मांगता है, तो इसकी जानकारी को लेकर आप शिकायत की जा सकती है.
बैंक नोट बदलने से मना करे तो क्या करें?
अगर आपने ATM से खराब नोट निकलने के बाद बैंक में शिकायत की है, लेकिन बैंक आपकी शिकायत पर कारवाई नहीं करता है या नोट बदलने से इनकार करता है, तो आप RBI के शिकायत निवारण सिस्टम के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
किन नोटों को बदलवाना मुश्किल हो सकता है?&amp;nbsp;
ध्यान रहें कि हर तरह के खराब नोट को सामान्य प्रोसेस के तहत बदलना मुमकिन नहीं है. अगर कोई नोट पूरी तरह टुकड़ों में बंट चुका है, बुरी तरह जल गया है या उसकी हालत इतनी खराब है कि उसे पहचान करना मुश्किल हो, तो बैंक उसे बदलने से इनकार कर सकता है. &amp;nbsp;
नोट बदलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान&amp;nbsp;

नोट असली होना चाहिए.&amp;nbsp;
नोट पर सीरियल नंबर, महात्मा गांधी का वॉटरमार्क और गवर्नर के हस्ताक्षर जैसे सुरक्षा चिन्ह साफ दिखाई देने चाहिए.
फटे या गंदे नोट को बदलने के लिए बैंक को अलग से कोई फीस न दें.&amp;nbsp;
सबसे जरूरी बात यह है कि खराब नोट मिलने के बाद उसे फेंकने या किसी दूसरे व्यक्ति को देने के बजाय अपने पास संभालकर रखें.

9 अक्टूबर से शुरू होगी फ्लिपकार्ट सेल! बिग बिलियन डेज की तारीख लीक
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ATM, से, फटा, या, गंदा, नोट, निकला, समझें, अपने, अधिकार, RBI, ने, बनाए, नियम</media:keywords>
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        <title>बहुत जल्द मिलेगी अच्छी खबर, कनाडा संग डील पर बोले ट्रंप, क्या थमने वाला है ट्रेड वॉर?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को लेकर बड़ा ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और कनाडा के बीच जल्द ही ट्रेड डील होने वाली है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. ट्रंप के बयान से सवाल उठता है कि क्या अब यूएस और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर खत्म होने वाला है?
ट्रंप ने कनाडा के साथ डील को लेकर क्या कहा?
आयरलैंड में प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन के साथ मुलाकात के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कनाडा के साथ व्यापार समझौते को लेकर सवाल पूछा गया. जिसके बाद ट्रंप ने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और जल्द ही दोनों देशों के बीच डील देखने को मिल सकती है.
उन्होंने अमेरिकी किसानों के लिए बेहतर व्यापारिक शर्तों की भी मांग की है. वहीं, ट्रंप का कहना है कि कनाडा को अमेरिकी किसानों पर लगाए गए टैरिफ और दूसरे शुल्क को हटाने होंगे.&amp;nbsp;
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आखिर अमेरिका-कनाडा के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर काफी समय से तनाव चल रहा है, लेकिन यह विवाद सिर्फ टैरिफ तक ही सीमित नहीं रहा है. दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव ऑटोमोबाइल जैसे बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन के लिए भी परेशानी की वजह बन गया है. इससे पहले अगस्त में दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आखिरी समय नाकाम हो गई थी. जिसके बाद अमेरिका ने कनाडा के कई सामानों पर भारी शुल्क लगाने का रुख अपनाया.
इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान और स्टील उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया. यह मुद्दा यही तक खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसके बाद दोनों तरफ से एक के बाद एक जवाबी कदम उठाए गए, जिससे यह व्यापारिक तनाव और ज्यादा गहरा गया. हालांकि, भारत में ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के बीच ट्रंप के ताजा बयान से अब बातचीत और समझौते की उम्मीद एक बार फिर बनती हुई दिखाई दे रही है.
क्या थमने वाला है अमेरिका-कनाडा का ट्रेड वॉर?
ट्रंप के ताजा बयान से दोनों देशों के बीच विवाद सुलझने की एक उम्मीद जरूर जागी है, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर पूरी तरह खत्म होने वाला है. ट्रंप ने डील को लेकर एक उम्मीद जरूर दिया है, लेकिन औपचारिक बातचीत और ट्रैफिक को लेकर किसी ठोस समझौते को साफ नहीं किया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैंकों के पास पैसों की भरमार, RBI बाजार से खींचेगा 1 लाख करोड़, लेकिन क्यों?</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी हुई नकदी को कम करने के लिए एक अहम कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने सरकारी बॉन्ड की ओपन मार्केट बिक्री (OMO) के जरिए बाजार में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री करने का फैसला किया है. हालांकि, यह बिक्री सितंबर में तीन अलग-अलग चरणों में होगी.&amp;nbsp;
दरअसल, भारतीय बैंकिंग सिस्टम में इस वक्त जरूरत से पैसों की भरमार है. इससे रातोंरात मिलने वाली ब्याज दरें रेपो रेट से नीचे चली गई हैं. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अतिरिक्त पैसा को सिस्टम से बाहर निकालकर बाजार में ब्याज दरों को संतुलित रखना चाहता है.&amp;nbsp;
तीन किस्तों में होगी 1 लाख करोड़ के बॉन्ड की बिक्री
RBI के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज की OMO बिक्री तीन नीलामियों के जरिए की जाएगी.&amp;nbsp;

17 सितंबर 2026: 50,000 करोड़ रुपये
21 सितंबर 2026: 25,000 करोड़ रुपये
28 सितंबर 2026: 25,000 करोड़ रुपये

इन तीनों बिक्री को मिलाकर कुल रकम 1 लाख करोड़ रुपये होगी. वहीं इसकी नीलामी मल्टीपल-प्राइस मेथड के जरिए की जाएगी.
बहुत जल्द मिलेगी अच्छी खबर, कनाडा संग डील पर बोले ट्रंप, क्या थमने वाला है ट्रेड वॉर?
बैंकों में क्यों बढ़ गई इतनी ज्यादा रकम?
दरअसल, बैंकिंग सिस्टम में अचानक इतनी ज्यादा रकम बढ़ने की एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा का भारी प्रवाह भी है. विशेष फॉरेक्स स्कीम के तहत बैंकों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा करीब 127 अरब डॉलर जुटाए. यानी भारतीय करेंसी में यह रकम करीब 12.16 करोड़ रुपए है. इससे RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी हुई और बैंकिंग सिस्टम में रुपये की लिक्विडिटी भी बढ़ गई.
इसका नतीजा यह हुआ कि इस सप्ताह बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही. यानी इन दिनों बैंकों के पास उनकी जरूरत के हिसाब से काफी ज्यादा पैसे मौजूद है. &amp;nbsp;
RBI को ज्यादा रकम बाजार से क्यों निकालना पड़ रहा है?
RBI के मुताबिक, जब बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा पैसा होता है, तो ऐसे में बैंक कम ब्याज दर पर भी पैसा उधार देने के लिए तैयार हो सकते हैं. जिसका सीधा असर शॉर्ट टर्म ब्याज दरों पर पड़ता है. यही वजह है कि मौजूदा स्थिति में ओवरनाइट ब्याज दरें RBI की पॉलिसी रेपो रेट से नीचे जाने लगी थीं. ऐसे में RBI ने अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से बाहर निकालने का ऐलान किया है.&amp;nbsp;
OMO के जरिए पैसा कैसे निकलता है?
ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के जरिए RBI बाजार में सरकारी बॉन्ड खरीदता या बेचता है. ऐसे में जब RBI सरकारी बॉन्ड बेचता है, तो बैंक और दूसरे पात्र निवेशक उन्हें खरीदने के लिए पैसे देते हैं. यानी आम लफ्जों में समझें तो RBI जब बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड बाजार में बेचता है, तो बॉन्ड सप्लाई बढ़ती है.&amp;nbsp;
RBI के ऐलान का बॉन्ड बाजार पर क्या असर पड़ा?
RBI के OMO सेल के ऐलान के बाद इसका असर सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी देखने को मिला. बॉन्ड यील्ड में तेजी आई और 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.035% पहुंच गई. वहीं 5 साल के बॉन्ड की यील्ड भी बढ़कर 6.6222% हो गई.
ATM से फटा या गंदा नोट निकलने पर क्या है आपका अधिकार? जानें RBI का नियम
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैंकों, के, पास, पैसों, की, भरमार, RBI, बाजार, से, खींचेगा, लाख, करोड़, लेकिन, क्यों</media:keywords>
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        <title>पैसा वापस मिल गया, फिर भी नहीं बचेंगे विजय माल्या, ED ने ऐसा क्यों कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पैसा-वापस-मिल-गया-फिर-भी-नहीं-बचेंगे-विजय-माल्या-ed-ने-ऐसा-क्यों-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ भगौड़े कारोबारी विजय माल्या का मनी लॉन्ड्रिंग का केस पिछले कई सालों से चल रहा है. मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उन्हें भगौड़ा तक घोषित कर दिया गया है. हालांकि अब ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने पूरी रकम माल्या से रिकवर कर ली है, लेकिन फिर भी ईडी इस केस को बंद करने के लिए तैयार नहीं है. ईडी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से साफ कह दिया है कि माल्या के ऊपर आपराधिक कार्यवाही खत्म नहीं की जाएगी.
ED ने हाईकोर्ट में क्या कहा?दरअसल विजाय माल्या का मनी लॉन्ड्रिंग का केस कई सालों से चल रहा है. इस केस के तहत हाल ही में सुनवाई हुई है. जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या कहा कि वो माल्या को आखिरी मौका दे रहे हैं ये साफ करने का कि क्या वो भारत लौटकर अदालत के अधिकार क्षेत्र में खुद को पेश करेंगे. इस दौरान ईडी में भी जवाब देते हुए अपनी बात रखी है.&amp;nbsp;
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सुनवाई के दौरान ईडी ने माल्या के भारत से बाहर रहने और खुद को अदालत में पेश न करने का मुद्दा उठाया. ईडी ने कहा कि, &#039;उनकी लगातार अनुपस्थिति और उनका आचरण मौजूदा कार्यवाही की पूरी पृष्ठभूमि में प्रासंगिक बने हुए हैं.&#039; इस तथ्य को सामने रखते हुए ईडी ने हाईकोर्ट से कहा है कि वो कोई भी फैसला इस पर विचार करते हुए ही करे.
&#039;ये कारोबारी विवाद नहीं&#039;ईडी ने साफ कर दिया है कि ये मामला कोई कारोबारी विवाद नहीं है. बल्कि ये एक आपराधिक मामाला है. इसलिए माल्या से पैसा रिकवर करने के बाद भी ईडी नहीं चाहती है कि ये केस बंद हो. ईडी ने कहा, &#039;PMLA की धारा 8(8) के तहत संपत्तियों की बहाली उस व्यक्ति को संपत्ति वापस देने की कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उस संपत्ति पर वैध हित है. ये अपने आप में ये तय नहीं करती कि अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध हुआ है या नहीं.&#039;
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बता दें कि ईडी ने ये जवाब माल्या की उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने मांग की है कि इस लंबे समय से लंबित मामले को खत्म कर दिया जाए. उन्होंने कहा है कि उनके पहले ही कर्ज से ज्यादा रकम वसूल की जा चुकी है, ऐसे में इस मामले को अब खत्म किया जाए और उन्हें भारत वापस लौटने दिया जाए.
गौरतलब है कि ये मामला कई सालों से चल रहा है. माल्या ने साल 2016 में भारच छोड़ दिया था, जिसके बाद से ही वो ब्रिटेन में रह रहे हैं. साल 2019 में उन्हें इस केस के चलते भगौड़ा घोषित कर दिया गया था.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पैसा, वापस, मिल, गया, फिर, भी, नहीं, बचेंगे, विजय, माल्या, ने, ऐसा, क्यों, कहा</media:keywords>
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        <title>आसमान में छिड़ी लड़ाई, मुंबई से दिल्ली के सफर में कौन सी एयरलाइन है सबसे आगे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आसमान-में-छिड़ी-लड़ाई-मुंबई-से-दिल्ली-के-सफर-में-कौन-सी-एयरलाइन-है-सबसे-आगे</link>
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        <description><![CDATA[ मुंबई और दिल्ली के बीच का आसमानी रास्ता काफी व्यस्त रहता है. इन दोनों शहरों के बीच उड़ान को लेकर इन दिनों दो बड़ी एयरलाइंस के बीच कड़ी टक्कर भी देखने को मिल रही है. तो वहीं तीसरी एयरलाइन ने तो अपनी उड़ानें ही दोगुनी कर दी हैं.
इंडिगो- एयर इंडिया की जंगअप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मुंबई-दिल्ली रूट पर इंडिगो के पास कुल सीटों का 42.8% हिस्सा था. वहीं एयर इंडिया ग्रुप (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) की हिस्सेदारी 41.9% रही. इसका मतलब है कि दोनों एयरलाइंस के बीच अंतर बहुत कम है.
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दिल्ली-मुंबई रूट क्यों है इतना जरूरी?मुंबई-दिल्ली देश के सबसे बड़े और कमाई वाले एयर रूट्स में से एक है. खास बात ये है कि जब देश के कई दूसरे जरूरी रूट्स पर सीटों की संख्या कम हो रही है, तब दिल्ली-मुंबई रूट पर सीट क्षमता बढ़ रही है. सितंबर में इस रूट पर करीब 6.77 लाख सीटें उपलब्ध थीं, जो पिछले साल की तुलना में 13.9% ज्यादा हैं. ये देश के किसी भी डोमेस्टिक एयर रूट पर सबसे ज्यादा सीट क्षमता है. इसके मुकाबले बेंगलुरु-दिल्ली रूट की सीट क्षमता 1.8%, मुंबई-चेन्नई 8.5% और मुंबई-हैदराबाद 9.5% घट गई है.
अकासा एयर की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारीइस रूट पर सबसे ज्यादा ध्यान अकासा एयर की बढ़त पर है. पिछले साल अप्रैल-सितंबर में उसकी सीट हिस्सेदारी करीब 6% थी, जो इस साल बढ़कर 10.7% हो गई है. अकासा ने इस अवधि में मुंबई-दिल्ली के बीच अपनी उड़ानों की संख्या लगभग दोगुनी करके 1,176 कर दी. इसके साथ ही उसने स्पाइसजेट को पीछे छोड़ते हुए इस रूट की तीसरी सबसे बड़ी एयरलाइन की जगह हासिल कर ली है. स्पाइसजेट की सीट हिस्सेदारी सिर्फ 4.4% रह गई है.
बता दें कि कासा सिर्फ दिल्ली-मुंबई रूट पर ही विस्तार नहीं कर रही है. नवी मुंबई-दिल्ली रूट पर भी उसकी सीट हिस्सेदारी 9.5% हो गई है. वहीं, मुंबई-नोएडा रूट पर सितंबर में सिर्फ 30 उड़ानें चलाने के बावजूद अकासा की सीट हिस्सेदारी 51.2% रही, यानी इस रूट पर वो इंडिगो से भी आगे निकल गई है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आसमान, में, छिड़ी, लड़ाई, मुंबई, से, दिल्ली, के, सफर, में, कौन, सी, एयरलाइन, है, सबसे, आगे</media:keywords>
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        <title>महीने के 60 हजार कमाती है गुरुग्राम की नौकरानी, मनी मैनेजमेंट उड़ा देगा आपके होश</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली से सटे हरियाणा के&amp;nbsp;गुरुग्राम में घरेलू काम करने वाली एक महिला की कमाई और पैसे संभालने के तरीके ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है. गुरुग्राम में नौकरी करने वाले एक शख्स ने लिंक्डइन पर बताया कि उनके घर काम करने वाली महिला हर महीने करीब 60 हजार रुपए कमाती है और खूब बचत भी करती है.&amp;nbsp;
शख्स ने बताया कि घरेलू काम करने वाली&amp;nbsp;महिला पांच से छह घरों में काम करती हैं. वह महीने में तीन से चार छुट्टियां लेती हैं. वह सुबह सात बजे से पहले अपना काम शुरू कर देती हैं और आय का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करती है.
कमाई से EMI भी भरती है महिला- शख्स
शख्स ने आगे बताया कि महिला हर महीने लगभग 10 हजार रुपये घर के किराए के रूप में देती हैं. इसके अलावा उनकी बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है, जिसकी शिक्षा का खर्च भी वह संभालती हैं. वह अपने गांव में खरीदी गई छह लाख रुपये की जमीन की EMI भी नियमित रूप से चुका रही है.
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शख्स का कहना है कि महिला अपनी कमाई को दिखावे या गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने के बजाय परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने पर ध्यान देती है. उनके मुताबिक, महिला के लिए बेटी की पढ़ाई और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं. परिवार की जिम्मेदारियां भी समझदारी से ही पूरी करती है.
शख्स ने कॉर्पोरेट कर्मचारियों से की महिला की तुलना
शख्स ने नौकरानी की कमाई और बचत की तुलना&amp;nbsp;कॉर्पोरेट कर्मचारियों की खर्च करने की आदतों से की. शख्स ने कहा कि कई नौकरीपेशा लोग कार, महंगे गैजेट और जीवनशैली से जुड़ी चीजों के लिए EMI लेते हैं. दूसरी ओर महिला खर्च नियंत्रित करके भविष्य के लिए तैयारी कर रही है. महिला के पास कॉर्पोरेट कर्मचारियों की तरह स्वास्थ्य बीमा, कर्मचारी सुविधाएं या नौकरी से जुड़े दूसरे वित्तीय सुरक्षा साधन नहीं हैं. इसके बावजूद वह अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है.
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यह भी देखें-&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:25 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>महीने, के, हजार, कमाती, है, गुरुग्राम, की, नौकरानी, मनी, मैनेजमेंट, उड़ा, देगा, आपके, होश</media:keywords>
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        <title>एशिया में नौकरी के लिए सबसे बेस्ट कंपनियां कौनसी हैं? टॉप 100 में भारत का जलवा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एशिया-में-नौकरी-के-लिए-सबसे-बेस्ट-कंपनियां-कौनसी-हैं-टॉप-100-में-भारत-का-जलवा</link>
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        <description><![CDATA[ दुनियाभर में कई सारी बड़ी- छोटी कंपनियां, जिनमें लोग काम करते हैं. लेकिन इनमें से कौन सी कंपनी सबसे ज्यादा बेस्ट है इसका पता कैसे लग पाएगा? इसका पता लगता है कुछ रिपोर्ट्स और स्टडीज से. जैसे हाल ही में ग्रेट प्लेस टू वर्क ने एशिया की उन कंपनियों की 2026 की लिस्ट जारी की है, जहां कर्मचारियों को काम करने का बेहतर माहौल मिलता है. ये रैंकिंग कर्मचारियों की राय के आधार पर तैयार की गई है.
इस स्टडी में एशिया और मिडिल ईस्ट के करीब 89 लाख कर्मचारियों के अनुभवों को शामिल किया गया है. कर्मचारियों से कंपनी में भरोसा, नेतृत्व, काम का माहौल, नए विचारों को बढ़ावा, कंपनी की वैल्यू और उनके कुल अनुभव के बारे में पूछा गया. इसी के आधार पर दुनिया से टॉप 100 कंपनियों की लिस्ट बनाई गई है.
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देखें इस लिस्ट से टॉप 10 कंपनियांग्रेट प्लेस टू वर्क के मुताबिक, इस लिस्ट में शामिल होने का आधार कंपनी का आकार या कमाई नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वास्तविक अनुभव है. इस लिस्ट के मुताबिक बड़ी कंपनियों की कैटेगिरी मं ये 10 कंपनियां हैं:

हिलटन
मैरियोट इंटरनेशनल
सिस्को
एब्वी&amp;nbsp;
डीएचएल
इंटरकॉन्टिनेंटल होटल्स ग्रुप&amp;nbsp;
माइक्रो टेक्नोलॉजी
TP
एसेंचर
कैपेला

भारत की ये कंपनियां भी लिस्ट मेंइस पूरी रैंकिंग में भारत का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा. बड़ी कंपनियों की टॉप-100 लिस्ट में 34 कंपनियां भारत की हैं. इसके अलावा छोटी और मध्यम कंपनियों की लिस्ट में 6 भारतीय कंपनियां शामिल हैं.
भारत से शामिल प्रमुख कंपनियों में फ्लिपकर्ट ग्रुप, इंफोसिस, HDFC लाइफ इंश्योरेंस, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक, रिलायंस रिटेल, बजाज फाइनेंस, मैक्स हेल्थकेयर, Aye फाइनेंस, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक, जेनसर टेक्नोलॉजीज, एक्सपीरियन, एडलवीज लाइफ और HP Inc का नाम शामिल है.
छोटी और मध्यम भारतीय कंपनियां भी शामिलइनके अलावा इस लिस्ट में भारत की 6 छोटी और मध्यम कंपनियों का नाम भी है. इनमें NIA इंस्टीट्यूशंस, वहदम इंडिया, चैलेट होटल्स, सेरेंटिका रिन्यूबल इंडिया, किम्बल और LMS (लॉर्ड महावीरा सर्विसेज इंडिया) का नाम शामिल हैं.
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क्या पसंद कर रहे कर्मचारी?इस लिस्ट में शामिल कंपनियों में करीब 93% कर्मचारियों ने कहा कि उनकी कंपनी काम करने के लिए एक बेहतरीन जगह है. वहीं, ट्रस्ट इंडेक्स का औसत स्कोर 91% रहा. कर्मचारियों ने खास तौर पर इन चीजों को लेकर सकारात्मक राय दी जैसे, ऑफिस में सुरक्षा का अच्छा माहौल, नए कर्मचारियों का स्वागत और अपनापन, सभी के साथ समान व्यवहार इन सभी क्षेत्रों में कम से कम 95% कर्मचारियों ने सकारात्मक राय दी.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>ब्रिक्स समिट 2026: क्या दिल्ली&amp;NCR में बंद रहेंगी शराब की दुकानें?</title>
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        <description><![CDATA[ BRICS Summit 2026: क्या आप दिल्ली-NCR में रहते हैं और आज-कल में बाहर घूमने या फिर शॉपिंग करने की सोच रहे हैं तो यह जानकारी आपके काम की है. दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वें BRICS Summit के कारण कई अहम कदम उठाए गए है और 11 सितंबर से ही दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. 11 सितंबर यानी आज स्कूल-कॉलेज और कोर्ट से लेकर सरकारी दफ्तर तक बंद है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ब्रिक्स समिट के कारण दिल्ली-एनसीआर में शराब की दुकानें भी बंद रहेंगी?
दिल्ली-NCR में बंद रहेंगी शराब की दुकानें?
ब्रिक्स समिट के चलते दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, लेकिन फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में शराब के ठेके बंद करने या फिर ड्राय डे घोषित करने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. यानी ब्रिक्स समिट के दौरान शराब की दुकानें या फिर सामान्य बाजारों को बंद करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ये जरूर है कि इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी दूसरे इलाके में पहुंचने में आपको दिक्कत हो सकती है.
आज से ही लागू हैं ट्रैफिक पाबंदियां
बता दें कि आज यानी 11 सितंबर से ही शिखर सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. इसका असर खासतौर पर सेंट्रल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों पर पड़ सकता है. अगर आप सेंट्रल दिल्ली या उसके आसपास के इलाके में घूमने या फिर दूसरे कारण से जा रहे हैं तो इस समय ट्रैफिक पाबंदियों के चलते आपको परेशानी हो सकती है.
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ब्रिक्स समिट 12 &amp;nbsp;और 13 सितंबर को होगा&amp;nbsp;
इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. ये 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाला है. अगर जगह की बात करें तो ये नई दिल्ली के भारत मंडपम प्रगति मैदान में आयोजित होगा. इसी के चलते दिल्ली में जरूरी सुरक्षा फैसले लिए गए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Stock Market: सेंसेक्स ने पलटी बाजी, निचले स्तर से 200 अंक चढ़ा; निफ्टी में भी सुधार</title>
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        <description><![CDATA[ आज 11 सितंबर, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखी गई, जिससे हड़कंप मच गया. कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 742 अंक तक टूटकर 74,160.80 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 250 से अधिक अंक फिसलकर 23,231 पर पहुंच गया.
कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 742 अंक तक टूटकर 74,160.80 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 250 से अधिक अंक फिसलकर 23,231 पर पहुंच गया. चंद मिनटों में आई इस गिरावट के चलते निवेशकों के देखते ही देखते 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए.
हालांकि, शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बाद बाजार ने अपनी दमदार वापसी की. सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 200 अंक से अधिक रिकवरी की, जबकि निफ्टी भी सुधरकर 23,300 के स्तर के करीब पहुंच गया.&amp;nbsp;
बाजार को किसने दिया सहारा?
शेयर बाजार में गिरावट के बाद निचले स्तरों से &#039;वैल्यू बाइंग&#039; (सस्ते शेयरों की खरीदारी) देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 200 अंक ऊपर चढ़ गया और निफ्टी ने मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 23,250 के स्तर को फिर से हासिल करने में कामयाब रहा. इसे आज आईटी शेयरों का सहारा मिला.
ट्रेडिंग के दौरान टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में निचले स्तरों पर आई खरीदारी से सूचकांकों का नुकसान काफी कम हो गया. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,200 से 23,250 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण और एक मजबूत सपोर्ट जोन है. निफ्टी जैसे ही इस मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंचा, वहां शॉर्ट-कवरिंग और मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को और नीचे गिरने से रोक दिया.&amp;nbsp;
बाजार में आज क्यों आई गिरावट?
क्रूड ऑयल की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी से बाजार में डर का माहौल है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा यमन के मोखा बंदरगाह (Port of Mocha) पर कब्जा करने और रेड सी रूट पर बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है इसलिए क्रूड महंगा होने से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) का बड़ा जोखिम पैदा हो जाता है.
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर पूरी दुनिया के बाजारों में देखा गया. एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई. जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सुबह 1.5% से अधिक टूट गए. ग्लोबल मार्केट से मिले इन्हीं खराब संकेतों का असर आज भारतीय शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में देखने को मिला.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>चांदनी चौक में ज्वैलरी की 56 दुकानें सील, अब अंदर रखे सोने&amp;चांदी का क्या होगा?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर किसी व्यापारी की दुकान को सील कर दिया जाए तो उसके लिए ये एक सबसे बड़ी परेशानी की स्थिति है. कुछ ऐसा ही दिल्ली के चांदनी चौक में देखने को मिला है, यहां चांदनी चौक स्थित कूचा महाजनी के कारोबारियों के लिए 10 सितंबर का दिन मुसीबत भरा रहा, क्योंकि MCD ने इलाके की कई दुकानों को सील कर दिया.&amp;nbsp;
56 दुकानों को MCD ने किया सील
दरअसल, MCD ने गहनों और बुलियन का बिजनेस करने वाली 56 दुकानों को सील कर दिया. हैरानी की बात तो यह है कि दुकानों के अंदर करोड़ों रुपये के सोने-चांदी से लेकर दूसरी कीमती चीजें रखी हुई है, लेकिन MCD की कार्रवाई के बाद अब ये दुकानें बंद है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि दुकानों को सील करने के बाद जो सामान उसके अंदर है अब उसका आखिर क्या होगा?&amp;nbsp;
क्या होगा अंदर रखें सोने-चांदी का?
जानने वाली बात यह है कि अगर किसी दुकान को सील किया जाता है तो उसके अंदर रखें सामान को बाहर नहीं निकाला जा सकता. सीलिंग का मकसद ही दुकान के इस्तेमाल पर रोक लगाना है. इसी वजह से दुकानों के बाहर सरकारी सील लगाई गई है. ऐसे में जो सामान पहले से ही दुकान के अंदर है जैसे सोना-चांदी या दूसरे कीमती चीज तो वे दुकान के अंदर ही रहेगी, उसे बाहर नहीं निकाला जा सकता है. कारोबारियों के निजी सामान को जब्त करने का कानूनी अधिकार प्रशासन के पास नहीं है तो सामान दुकान के अंदर ही सुरक्षित रहेगा.
खुद से सामान बाहर निकालना पड़ेगा भारी
&amp;nbsp;कोई कारोबारी अपनी सील की गई दुकान से सामान नहीं निकाल सकता है. अगर कोई दुकानदार बिना परमिशन के सील तोड़ता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि कोई भी दुकानदार अपनी मर्जी से सील तोड़ने की कोशिश न करें.&amp;nbsp;
ब्रिक्स समिट: क्या दिल्ली-NCR में बंद रहेंगी शराब की दुकानें?
दुकानों पर क्यों लगाई गई सील?
6 सितंबर रविवार के दिन दिल्ली के सत्य निकेतन में एक कई साल पुरानी इमारत गिर गई थी, जिसमें कई लोगों की जान तक चली गई. इसके बाद से ही दिल्ली में MCD ने खतरनाक और अवैध इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी शुरू कर दी है और इसी अभियान के तहत ही चांदनी चौक के कूचा महाजनी इलाके में भी ये कार्रवाई की गई.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चांदनी, चौक, में, ज्वैलरी, की, दुकानें, सील, अब, अंदर, रखे, सोने-चांदी, का, क्या, होगा</media:keywords>
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        <title>पैकेज्ड फूड में ज्यादा नमक&amp;चीनी पर SC सख्त, प्रोडक्ट पर लगेगा रेड वॉर्निंग लेबल</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल (FoPL) लगाने के मामले में FSSAI से यह साफ करने को कहा है कि पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक, सोडियम, पोटैशियम या सैचुरेटेड फैट की वह निश्चित सीमा क्या होगी, जिसके पार जाते ही कंपनियों के लिए पैकेट पर लाल चेतावनी का निशान लगाना अनिवार्य हो जाएगा.
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने फ़ूड रेगुलेटर से पूछा कि क्या उसने यह तय करने के लिए कोई खास सीमा तय की है कि कोई प्रोडक्ट &#039;हाई शुगर&#039;, &#039;हाई साल्ट&#039; या &#039;हाई फैट&#039; जैसी वॉर्निंग्स के लायक कब माना जाएगा. कोर्ट ने प्रस्तावित सीमाओं के वैज्ञानिक आधार पर भी स्पष्टीकरण मांगा.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
FSSAI ने शुरुआती प्रस्ताव में इसे दो चरणों में लागू करने की बात कही थी. पहले चरण में लाल रंग का हेक्सागोनल (छह कोनों वाला) चेतावनी लेबल केवल उन पैकेटों पर लगेगा, जिनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो तत्व तय सीमा से अधिक हों. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि इसके लिए दो चरणों की क्या जरूरत है?
कोर्ट का कहना था कि अगर इन तीनों में से एक भी तत्व सीमा से अधिक है, तो भी पैकेट पर चेतावनी लगनी चाहिए. कोर्ट के सख्त रुख के बाद, FSSAI ने अदालत को भरोसा दिया है कि वह शुरुआत से ही सख्त नियम लागू करने और केवल एक घटक (चीनी, नमक या फैट) के ज्यादा होने पर भी लाल चेतावनी लेबल लगाने पर विचार करने के लिए तैयार है.
सीमा तय करने पर बहस
फूड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIFPA) ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि खतरे का आकलन 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर के आधार पर क्यों किया जा रहा है.
कंपनियों का कहना है कि लोग अचार या सॉस जैसी चीजें एक बार में 100 ग्राम नहीं खाते, बल्कि केवल 5 ग्राम (सर्विंग साइज) ही लेते हैं इसलिए चेतावनी तय करते समय प्रति सर्विंग साइज को आधार बनाया जाना चाहिए. बता दें कि FSSAI के प्रस्तावित नियम में 100 ग्राम (ठोस खाद्य पदार्थों के लिए) और 100 मिलीलीटर (तरल पदार्थों के लिए) को ही आधार बनाया था.&amp;nbsp;
कोर्ट ने FSSAI से मांगा वैज्ञानिक आधार
कोर्ट ने रेगुलेटर से पूछा कि किस प्रोडक्ट में &#039;हाई शुगर&#039; या &#039;हाई साल्ट&#039; है, इसके लिए क्या दिशानिर्देश तय किए गए हैं? FSSAI ने बताया कि यह सीमा ICMR-National Institute of Nutrition (NIN) की डायटरी गाइडलाइन्स 2024 के आधार पर तय की जाएगी.
कोर्ट ने इस गाइडलाइन के तहत अलग-अलग प्रोसेस्ड फूड और स्वीटेंड बेवरेजेस के लिए तय की गई सीमाओं का पूरा ब्योरा मांगा है. ध्यान रखने वाली बात है कि यह पूरा विवाद भारत में पिछले कई सालों से चल रही फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FoPL) नीति में हो रही देरी से जुड़ा है.&amp;nbsp;
लाल रंग पर कन्फ्यूजन
FSSAI ने लाल रंग के छह कोनों वाले Hexagonal वार्निंग लेबल का प्रस्ताव दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में लोग लाल रंग को मांसाहारी (Non-Veg) और हरे रंग को शाकाहारी (Veg) से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में लोग शाकाहारी जंक फूड पर &#039;लाल हेक्सागोन&#039; का निशान देखकर कन्फ्यूज हो सकते हैं इसलिए कोर्ट ने FSSAI से इस रंग के विकल्प पर दोबारा विचार करने को कहा है.

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पैकेज्ड, फूड, में, ज्यादा, नमक-चीनी, पर, सख्त, प्रोडक्ट, पर, लगेगा, रेड, वॉर्निंग, लेबल</media:keywords>
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        <title>घाटा Air India का, लेकिन बवाल विदेश में क्यों? TATA से क्या है सिंगापुर एयरलाइंस का कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Air India इन दिनों भारी घाटे से जूझ रही है और अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है. एयरलाइन ने अपने प्रमोटर टाटा संस और साझेदार सिंगापूर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की मदद मांगी है. यह भारतीय करेंसी में करीब 14,262 करोड़ रुपए है. इसमें टाटा संस करीब 10,682 करोड़ रुपए और सिंगापुर एयरलाइंस करीब 3,580 करोड़ रुपए निवेश करेगी. ऐसे में यह सवाल उठता है कि एयर इंडिया के घाटे को लेकर सिंगापुर में चर्चा क्यों हो रही है और इसका टाटा ग्रुप से क्या कनेक्शन है?
Air India को पैसे की जरूरत क्यों पड़ी?
इस समय एयर इंडिया को बेड़े के विस्तार, विमानों की संख्या बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है. कंपनी को हालिया वित्त वर्ष में करीब 2.33 अरब डॉलर का घाटा हुआ है, जो भारतीय मुद्रा के रूप में करीब 22,154 करोड़ रुपये है. यही वजह है कि एयरलाइन अपने मौजूदा शेयरधारकों से अतिरिक्त पैसा जुटा रही है.
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सिंगापुर में Air India के निवेश पर क्यों मचा बवाल?
यह मामला इसलिए दिलचस्प है, क्योंकि सिंगापुर एयरलाइंस में सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक की बड़ी हिस्सेदारी है. इसी वजह से सिंगापुर में विपक्ष ने यह सवाल उठाया कि कहीं सरकारी धन का इस्तेमाल एयर इंडिया में निवेश के लिए तो नहीं किया जा रहा है. यानी यह बवाल सीधे तौर पर एयर इंडिया को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर है कि सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश में राष्ट्रीय खजाने की कितनी भूमिका है.
हालांकि, सिंगापुर सरकार ने यह साफ किया है कि निवेश का फैसला सिंगापुर एयरलाइंस का बोर्ड करेगा और सरकार या टेमासेक सीधे एयर इंडिया को पैसे नहीं दे रहे हैं.&amp;nbsp;
TATA और Singapore Airlines का क्या है कनेक्शन?
टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस का रिश्ता नया नहीं है, इसकी शुरुआत एक विस्तारा से हुई थी. साल 2013 में दोनों कंपनियों ने मिलकर भारत में विस्तारा (Vistara) नाम की फुल-सर्विस एयरलाइन शुरू की थी, जिसने जनवरी 2015 में अपनी उड़ान भरना शुरू किया. इस विस्तारा में टाटा की 51% और सिंगापुर एयरलाइंस की 49% हिस्सेदारी थी. बाद में टाटा समूह ने एयर इंडिया को भी अपने एविएशन कारोबार में शामिल कर लिया.
जब टाटा ने 2022 में एयर इंडिया को भारत सरकार से खरीदा, तब उसके एविएशन कारोबार में एयर इंडिया के साथ विस्तारा भी शामिल थी. इसके बाद टाटा ने दोनों एयरलाइंस को एक साथ लाने का फैसला किया. हालांकि, विस्तारा में सिंगापुर एयरलाइंस की 49% हिस्सेदारी थी, इसलिए विलय के बाद उसे एयर इंडिया समूह में भी हिस्सेदारी मिली.
वहीं सिंगापुर एयरलाइंस ने अतिरिक्त निवेश के जरिए एयर इंडिया समूह में 25.1% हिस्सेदारी हासिल की, जबकि बाकी 74.9% हिस्सेदारी टाटा के पास है. नवंबर 2024 में विस्तारा का एयर इंडिया में विलय पूरा हो गया. जिसके बाद विस्तारा की उड़ानें एयर इंडिया के तहत संचालित होने लगीं.
सिंगापुर एयरलाइंस&amp;nbsp;क्यों करना चाहती है Air India में निवेश?
सिंगापुर एयरलाइंस भारत को एविएशन के लिहाज से एक बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार मानती है. ऐसे में कंपनी की रणनीति भारत को अपने मल्टी-हब नेटवर्क का एक अहम हिस्सा बनाने की है. यही वजह है कि एयरलाइन लंबे समय के नजरिए से एयर इंडिया के साथ जुड़ी हुई है. भले ही एयर इंडिया को मौजूदा घाटे से बाहर आने में कई साल लग सकते हैं, लेकिन सिंगापुर एयरलाइंस भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहती है.&amp;nbsp;
दूध की फिर बढ़ी कीमत, लेकिन आपकी जेब से नहीं जाएगा पैसा; जानें मामला
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>घाटा, Air, India, का, लेकिन, बवाल, विदेश, में, क्यों, TATA, से, क्या, है, सिंगापुर, एयरलाइंस, का, कनेक्शन</media:keywords>
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        <title>अंडा, चिकन और दूध क्यों हो रहे महंगे, जेब पर भारी दामों की असली वजह क्या?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अंडा-चिकन-और-दूध-क्यों-हो-रहे-महंगे-जेब-पर-भारी-दामों-की-असली-वजह-क्या</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में महंगाई पिछले कुछ समय से काफी तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में दूध, अंडे और चिकन के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. खास बात ये है कि इनके उत्पादन की लागत भी तेजी से बढ़ रही है. लेकिन आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? ये एक बड़ा सवाल है जो कई लोगों के मन में भी आ रहा है. आइये जानते हैं इसकी सबसे बड़ी वजह आखिर क्या है?
दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह पशुओं और मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले मक्का और सोयाबीन की महंगी कीमतें हैं. अगर आने वाले कुछ महीनों में मक्का और चारे की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
तेजी से बढ़ा पशुधन क्षेत्र का महत्वभारत के पशुधन क्षेत्र का महत्व पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है. साल 2013-14 में पशुधन से जुड़े कामों से आने वाली कीमतें फसल क्षेत्र की कीमतों से भी करीब 34% ज्यादा थी. साल 2023-24 में ये बढ़कर 57% हो गया है. इसका मतलब है कि दूध, अंडे, मांस और दूसरे पशु उत्पाद अब भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं.
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चारे की कीमत है चुनौतीमुर्गियों और दूसरे पशुओं के चारे में मक्का सबसे जरूरी भूमिका निभाता है. ब्रॉयलर मुर्गियों के चारे में करीब 55-65% मक्का होता है, जबकि अंडे देने वाली लेयर मुर्गियों के चारे में करीब 50-60% मक्का होता है. पशुओं के चारे में भी मक्के की हिस्सेदारी करीब 15-20% रहती है.
तो वहीं दूसरी तरफ, प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सोयाबीन मील, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और कपास के बीज से निकलने वाली खली का इस्तेमाल किया जाता है. ब्रॉयलर फीड में करीब 25-30% सोयाबीन मील और लेयर फीड में करीब 18-20% सोयाबीन मील होता है. ऐसे में इन कच्चे माल की कीमत बढ़ने का सीधा असर पशु चारे की लागत पर पड़ता है.
मक्का और सोयाबीन की कीमतें बढ़ींतमिलनाडु के इरोड जिले के अलंगेयम बाजार में मक्के की औसत कीमत अगस्त 2025 में 2,537 रुपये प्रति क्विंटल थी. अगस्त 2026 में ये बढ़कर 2,759 रुपये और अब करीब 2,810 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. सोयाबीन मील की कीमत में भी बड़ी तेजी देखी गई. मध्य प्रदेश के इंदौर में इसकी कीमत अगस्त 2025 में करीब 38,186 रुपये प्रति टन थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 58,156 रुपये प्रति टन हो गई. हालांकि अब ये घटकर करीब 50 हजार रुपये प्रति टन रह गई है, फिर भी पिछले साल के मुकाबले ये काफी महंगी है.
अंडे की कीमत पर असरचारे की बढ़ती लागत का असर अंडे की कीमत में भी दिखाई दिया है. दिल्ली में अंडे की फार्मगेट कीमत करीब 600 रुपये प्रति 100 अंडे है, जबकि खुदरा बाजार में कीमत लगभग 7-9 रुपये प्रति अंडा है. जुलाई में अंडे की औसत कीमत करीब 670.50 रुपये प्रति 100 अंडे रही, जो पिछले साल के मुकाबले 38.7% ज्यादा थी. इस दौरान कीमत 725-730 रुपये प्रति 100 अंडे तक पहुंच गई थी.&amp;nbsp;
चिकन का उत्पादन भी हुआ महंगापिछले चार महीनों में लेयर मुर्गियों के चारे की कीमत 24-26 रुपये से बढ़कर 30-32 रुपये प्रति किलो हो गई है. ब्रॉयलर फीड भी करीब 40 रुपये से बढ़कर 46 रुपये प्रति किलो हो गया है. ब्रॉयलर मुर्गी करीब 35-42 दिनों में 2-2.5 किलो वजन तक पहुंच जाती है. इसलिए चारे की कीमत में छोटी बढ़ोतरी भी कुल उत्पादन लागत पर बड़ा असर डालती है. पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार ब्रॉयलर की उत्पादन लागत करीब 110 रुपये प्रति किलो है.
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आगे मक्का पर रहेगी नजरसोयाबीन मील की कीमत में कुछ कमी आई है और नई फसल आने के बाद इसकी उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है. लेकिन मक्के को लेकर चिंता ज्यादा है. इस साल खरीफ में मक्के की बुआई का क्षेत्र करीब 4.1% कम बताया गया है. USDA ने 2026-27 में भारत का मक्का उत्पादन करीब 50 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है, जबकि 2025-26 में उत्पादन रिकॉर्ड 58.1 मिलियन टन रहा था.
अगर मक्का महंगा होता है तो इसका असर चारे की कीमत पर पड़ेगा. इसके बाद चारा महंगा होगा, उत्पादन लागत बढ़ेगी और दूध, अंडे और चिकन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा मक्के का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में भी होता है. इसलिए सरकार को एक तरफ ईंधन में एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य और दूसरी तरफ पशु चारे की जरूरत दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अंडा, चिकन, और, दूध, क्यों, हो, रहे, महंगे, जेब, पर, भारी, दामों, की, असली, वजह, क्या</media:keywords>
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        <title>अब आपकी जगह AI करेगा UPI पेमेंट, बिना पिन और OTP के होगा भुगतान</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप हर बार UPI से पेमेंट करते समय पिन डालने या लेनदेन को खुद मंजूरी देने से परेशान हैं, तो आने वाले समय में यह काम AI कर सकता है. भारत में UPI पेमेंट को पहले के मुकाबले और आसान बनाने के लिए ऐसे AI एजेंट्स पर काम हो रहा है, जो आपकी तरफ से खुद छोटे-मोटे पेमेंट कर सकेंगे. इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) एक ऐसी रजिस्ट्री तैयार कर रहा है, जिसमें UPI पर भुगतान करने वाले AI एजेंट्स की पहचान और निगरानी की जाएगी.
AI एजेंट कैसे कर सकेंगे UPI पेमेंट?
आने वाले समय में AI एजेंट यूजर की तरफ से कुछ तय तरीके से डिजिटल पेमेंट खुद कर सकेंग. यानी हर बार UPI ऐप खोलकर खुद पेमेंट करने की जरूरत कम हो सकती है. शुरुआत में किराने के सामान जैसी कम कीमतों वाली खरीदारी के लिए भी इसका इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके हर छोटे ट्रांजैक्शन के लिए अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी.
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बिना हर बार PIN और OTP के कैसे होगा पेमेंट?
इस नई व्यवस्था का खास मकसद यह है कि AI एजेंट यूजर की तरफ से तय नियमों के मुताबिक पेमेंट कर सकें. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि UPI पेमेंट में PIN और OTP की जरूरत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी. इसके बजाय AI एजेंट की पहचान, यूजर की इजाजत, लेनदेन की सीमा और गालट पेमेंट की जानकारी जैसे मुद्दों के लिए सिस्टम तैयार किया जा रहा है.
बड़ी बात यह है कि इस नई व्यवस्था के जरिए आपको हर छोटे भुगतान पर खुद PIN या OTP डालने की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन पेमेंट को सुरक्षित रखने के लिए एजेंट की पहचान और ऑथराइजेशन जरूरी होगा.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, आपकी, जगह, करेगा, UPI, पेमेंट, बिना, पिन, और, OTP, के, होगा, भुगतान</media:keywords>
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        <title>अब मेहंदी लगाने की भी गई नौकरी, हथेली पर मशीनें बनाएंगी डिजाइन, देखें वीडियो</title>
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        <description><![CDATA[ मेहंदी लगाना वैसे तो एक आर्ट माना जाता है, जिसका हुनर हर किसी के हाथ में नहीं होता है. त्यौहारों के मौसम में लड़कियां या महिलाएं खूब मेहंदी लगवाती हैं. तो वहीं शादियोंमें तो मेहंदी आर्टिस्ट्स की जमकर कमाई होती है. लेकिन अब ऐसा लगता है कि आने वाले समय में मेहंदी लगाने वालों की नौकरी भी खतरे में है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि बिजनेसमैन हर्ष गोयनका ने बताया है.
खतरे में मेहंदी आर्टिस्ट्स की जॉबदरअसल मशहूर उद्योगपति हर्ष गोयनका सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वो अक्सर अपने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट के जरिए कई मजेदार वीडियोज और पोस्ट्स शेयर करते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में एक महिला के हाथ पर मशीन से मेहंदी लगाई जा रही है. इस वीडियो के शेयर होते ही ये सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया है. यहां देखें वीडियो:

Some more jobs gone ???? pic.twitter.com/jKiUzB8gOA
&amp;mdash; Harsh Goenka (@hvgoenka) September 9, 2026



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इस वीडियो को शेयर करते हुए हर्ष ने कैप्शन में लिखा, &#039;कुछ और नौकरियां जाने वाली हैं&#039;. तो वहीं इस वीडियो में नजर आ रहा है कि एक महिला अपना हाथ मशीन के अंदर रखती है. इसके बाद मशीन उसके हाथ पर एक डिजाइन बना देती है. खास बात ये है कि इस पूरे काम में इंसानी मदद बहुत कम दिखाई देती है.
मेहंदी आर्टिस्ट्स के लिए चिंताये वीडियो सामने आते ही सबसे बड़ी चिंता मेहंदी लगाने वाले आर्टिस्ट्स के लिए है. क्योंकि मेहंदी लगाना सिर्फ हाथ पर डिजाइन बनाने का काम नहीं है, बल्कि ये एक स्किल और कला है. शादी, त्योहार और दूसरे खास मौकों पर लोग प्रोफेशनल मेहंदी कलाकारों को बुलाते हैं. अगर मशीनें कम समय में और एक जैसी डिजाइन बना सकती हैं, तो कुछ जगहों पर लोग मशीन का इस्तेमाल करना पसंद कर सकते हैं. इससे मेहंदी लगाने वाले कलाकारों के काम पर असर पड़ने की आशंका है.
लोगों की आई मिली-जुली प्रतिक्रियाइस वीडिय पर जनता की मिली- जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कई लोगों का कहना है कि मेहंदी कलाकारों को मशीन से डरने की जरूरत नहीं है. कई यूजर्स का मानना है कि इससे मेहंदी कलाकारों की नौकरी पर कोई खतरा नहीं है. तो वहीं कई यूजर्स ये भी कह रहे हैं कि हाथ से बनाई गई मेहंदी की खूबसूरती को मशीन पूरी तरह नहीं दोहरा सकती. हाथ से बने डिजाइन में छोटी-छोटी कमियां भी उसकी खूबसूरती और इंसानी स्पर्श का हिस्सा होती हैं.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 02:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, मेहंदी, लगाने, की, भी, गई, नौकरी, हथेली, पर, मशीनें, बनाएंगी, डिजाइन, देखें, वीडियो</media:keywords>
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        <title>चेक कर लें आज गैस सिलेंडर की कीमत, कहीं आपके शहर में बढ़े तो नहीं दाम?</title>
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        <description><![CDATA[ आज, 10 सितंबर 2026 को भारत में घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, महीने की शुरुआत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के रेट में 9.50 से 11.50 रुपये प्रति सिलेंडर का मामूली इजाफा किया था. घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर के दाम आखिरी बार 7 जून 2026 को बढ़ाए गए थे. उसके बाद से कीमतें पूरी तरह से स्थिर हैं.&amp;nbsp;
शहरवार चेक करें कीमत



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर (14.2 kg)
कमर्शियल सिलेंडर (19 kg)


दिल्ली
942.00
2,747.50


मुंबई
941.50
2,701.00


कोलकाता
968.00
2,884.00


चेन्नई
957.50
2,916.50


बेंगलुरु
955.50
2,831.00


हैदराबाद
994.00
2,996.00


पटना
1,031.50
3,029.00


नोएडा
939.50
2,747.50


गुरुग्राम
950.50
2,764.50



CEEW की रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
भारत में LPG की पहुंच ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाने की कोशिश तेज है, लेकिन &#039;काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर&#039; (CEEW) की एक नई स्टडी से पता चलता है कि उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी आज भी चूल्हा फूंक रहे हैं.
CEEW के सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के तहत 10.5 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन तो दिए जा चुके हैं, लेकिन केवल 23% ग्रामीण परिवार ही रसोई गैस का विशेष रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं. &amp;nbsp;बाकी परिवार गैस के साथ-साथ पारंपरिक ईंधन का भी उपयोग करते हैं.
ये नतीजे असम, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 2,222 ग्रामीण घरों में नवंबर 2024 और जनवरी 2025 के बीच किए गए सर्वे से मिले हैं. स्टडी में पाया गया कि 48% घर खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन के तौर पर LPG का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 50% मुख्य रूप से लकड़ी पर निर्भर हैं.
पूरी तरह से गैस पर निर्भर रहने के लिए सालभर में कम से कम 7 से 8 सिलेंडर की जरूरत होती है, जबकि उज्ज्वला लाभार्थी औसतन साल में सिर्फ 4.8 सिलेंडर ही रिफिल करवा पा रहे हैं. CEEW की इस रिपोर्ट से साफ है कि भले ही कागजों पर एलपीजी की पहुंच लगभग 100% ग्रामीण परिवारों तक दिखाई जा रही हैं, लेकिन इसका वास्तविक इस्तेमाल अब भी बेहद कम है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>78 दिनों का बोनस: रेलवे यूनियनों की बड़ी मांग, कहा&amp; 18,000 बेसिक पर हो कैलकुलेशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/78-दिनों-का-बोनस-रेलवे-यूनियनों-की-बड़ी-मांग-कहा-18000-बेसिक-पर-हो-कैलकुलेशन</link>
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        <description><![CDATA[ इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने वित्त मंत्री और रेल मंत्री को पत्र लिखकर नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) की वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है. &amp;nbsp;उनका कहना है कि दशहरे पर मिलने वाले बोनस कैलकुलेशन का आधार बढ़ाकर न्यूनतम 18,000 रुपये और महंगाई भत्ते (DA) किया जाए.&amp;nbsp;
यूनियनों की नई मांग
यूनियनों का तर्क है कि अभी 6वें वेतन आयोग (FY 2014-15) के समय तय की गई 7000 रुपये की सीलिंग के आधार पर 78 दिनों का बोनस तय होता है. इससे नॉन-गेजेटेड रेल कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपया ही बोनस मिल पाता है. अब चूंकि 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये हो चुका है इसलिए लेवल-1 कर्मचारियों के लिए बोनस की सीलिंग भी कम से कम 18,000 + 60% DA की जानी चाहिए.
एसोसिएशन की यह भी मांग है कि लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए उनकी सैलरी के अनुपात में बोनस सीलिंग को और अधिक बढ़ाया जाए. रेल यूनियनों का कहना है कि वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद जब न्यूनतम वेतन बढ़कर 18,000 रुपये हो चुका है, तो बोनस की गणना पुराने 7,000 रुपये के आधार पर क्यों हो.
रेलवे कर्मचारियों को कितना होगा फायदा?
दशहरे से पहले केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अगर उनकी यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो इससे रेलवे कर्मचारियों को बंपर फायदा होगा. अगर सरकार बिना 60% DA के भी सिर्फ 18,000 बेसिक पे को आधार मानकर कैलकुलेशन करती है, तो 78 दिनों का बोनस 46,159 से अधिक बनेगा. अगर इसमें डीए को भी शामिल कर लिया जाता है, तो रकम 27,824 रुपये तक पहुंच सकती है. फिलहाल सबकी नजरें कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं.
IRTSA की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली मुख्य संस्था- नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने सभी नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए PLB वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है. पिछले महीने, NC-JCM ने सरकार से वेतन सीमा को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का अनुरोध किया है.

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिनों, का, बोनस:, रेलवे, यूनियनों, की, बड़ी, मांग, कहा-, 18, 000, बेसिक, पर, हो, कैलकुलेशन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अब गाड़ियों में 20% से ज्यादा डलेगा एथेनॉल, PM मोदी के सलाहकार ने की पुष्टि</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-गाड़ियों-में-20-से-ज्यादा-डलेगा-एथेनॉल-pm-मोदी-के-सलाहकार-ने-की-पुष्टि</link>
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        <description><![CDATA[ सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की मदद से मौजूदा E20 के लेवल से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की इजाजत देने की तैयारी कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. सरकार का ऐसा मानना है कि चूंकि अब देश में इथेनॉल का उत्पादन हमारी मौजूदा जरूरतों से अधिक होने लगा है इसलिए अब E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) की सीमा को पार कर आगे बढ़ने का सही समय आ गया है.
&#039;द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026&#039; के चौथे एडिशन को वर्चुअली संबोधित करते हुए तरूण कपूर ने कहा कि E20 प्रोग्राम अब तक बहुत सफल रहा है और कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करने के अपने प्लान का जिक्र किया है. उन्होंने कहा, &quot;अब हमारा फोकस फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को लाने और E20 से ज्यादा परसेंट तक ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर है.&quot; उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे वाहनों के आने के साथ-साथ फ्यूल आउटलेट्स पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी.
सरकार की नई नीति का मकसद
पीएम मोदी के सलाहकार ने आगे यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच बायोफ्यूल को बढ़ावा देना और भी जरूरी हो गया है. इस संकट ने सप्लाई को बाधित किया है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही इनके और बढ़ने की आशंका भी है.
चूंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के लिए चिंताजनक है क्योंकि इससे इम्पोर्ट में खर्च ज्यादा आएगा, डॉलर अधिक खर्च होंगे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा.
अब जब इस बीच देश में चीनी और मक्के से बनने वाले इथेनॉल की उत्पादन क्षमता बढ़ी ही है, तो इस अतिरिक्त इथेनॉल का इस्तेमाल क्यों न किया जाए. इसे खपाने का सबसे बेहतरीन जरिया फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां हैं.&amp;nbsp;
फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां क्या हैं?
अभी सड़कों पर चल रही साधारण गाड़ियां अधिकतम E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) तक का ही ईंधन झेल सकती हैं. इससे ज्यादा इथेनॉल डालने पर उनके इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं. इसके विपरीत, फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles) में ऐसे इंजन लगे होते हैं, जो 20% से लेकर 85% या 100% (शुद्ध इथेनॉल) तक के मिश्रण पर आसानी से चल सकते हैं. इनमें लगे सेंसर खुद-ब-खुद ईंधन में इथेनॉल की मात्रा को पहचान कर इंजन की परफॉर्मेंस को एडजस्ट कर लेते हैं.
E20 ब्लेंडिंग को लेकर हाल ही में हुई आलोचना पर तरूण कपूर ने कहा कि इसमें से ज्यादातर या तो गलत जानकारी थी या किसी खास मकसद से इसकी आलोचना की गई होगी. उन्होंने कहा कि स्टडीज से पता चला है कि E20 अच्छा काम करता है और फ्यूल एफिशिएंसी में थोड़ी-बहुत कमी की भरपाई इसके ज्यादा ऑक्टेन कंटेंट से हो जाती है.
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78 दिनों का बोनस: रेलवे यूनियनों की बड़ी मांग, कहा- 18,000 बेसिक पर हो कैलकुलेशन&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, गाड़ियों, में, 20, से, ज्यादा, डलेगा, एथेनॉल, मोदी, के, सलाहकार, ने, की, पुष्टि</media:keywords>
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    <item>
        <title>आज कितने में बिक रहा गोल्ड, चांदी की कितनी है कीमत? चेक करें रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-कितने-में-बिक-रहा-गोल्ड-चांदी-की-कितनी-है-कीमत-चेक-करें-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-कितने-में-बिक-रहा-गोल्ड-चांदी-की-कितनी-है-कीमत-चेक-करें-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ आज 10 सितंबर, बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. गुडरिटर्न्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,54,300 रुपये है, जिसमें कल के मुकाबले मामूली 10 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत भी कल के मुकाबले 10 रुपये गिरकर आज 1,41,440 के स्तर पर आ गई है. 18 कैरेट सोने की कीमत आज प्रति 10 ग्राम 1,15,720 रुपये है. इसका भी रेट 10 रुपये गिरा है.&amp;nbsp;
शहरवार सोने की कीमत



शहर&amp;nbsp;
24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम)
18 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम)


दिल्ली
15,445 रुपये
14,159 रुपये


मुंबई
15,430 रुपये&amp;nbsp;
14,144 रुपये


बेंगलुरु
15,430 रुपये
14,144 रुपये


चेन्नई
15,430 रुपये
14,144 रुपये


कोलकाता
15,430 रुपये
14,144 रुपये


पुणे
15,430 रुपये
14,144 रुपये


जयपुर
&amp;nbsp;15,556 रुपये
14,270 रुपये


लखनऊ
&amp;nbsp;15,556 रुपये
14,270 रुपये


पटना
15,556 रुपये
14,260 रुपये



क्यों आज गिरीं सोने की कीमतें?
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली बढ़ने से सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही. वैश्विक निवेशक इस समय बेहद सतर्क हैं क्योंकि अभी इनकी नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के द्वारा लिए जाने वाले ब्याज दरों के फैसले पर टिकी हुई हैं. ब्याज दरों में संभावित बदलाव की अनिश्चितता के कारण ट्रेडर्स सोने-चांदी से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं. बता दें कि अमेरिकी फेड रिजर्व की अगली बैठक 15 और 16 सितंबर 2026 को होने जा रही है.
डॉलर इंडेक्स में मजबूती भी आज सोने की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह है. जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतें दबाव में आ जाती हैं. डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसीज वालों के लिए इसे खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में अस्थाई कमी आती है. इधर, डॉलर मजबूत होने पर निवेशक सोने से पैसा निकालने लगते हैं. चूंकि सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है यानी इस पर बैंक एफडी या सरकारी बॉन्ड की तरह कोई तय ब्याज &amp;nbsp;या डिविडेंड नहीं मिलता इसलिए ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं के बीच लोग इसे बेचकर अपना पैसा निकाल लेते हैं.
आज चांदी की कीमत?
आज भारत में चांदी की कीमत 249.90 रुपये प्रति ग्राम और 2,49,900 रुपये प्रति किलोग्राम है. इसमें प्रति ग्राम आज 0.10 पैसे की गिरावट आई है और इस हिसाब से 1 किलो की कीमत 100 रुपये कम हुई है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे, वडोदरा, अहमदाबाद जैसे तमाम शहरों में आज चांदी की कीमत प्रति 10 ग्राम 2,499 रुपये है. वहीं, चेन्नई में कीमत थोड़ी ज्यादा 2,549 रुपये है.

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब सस्ती होगी चीनी, घरेलू बाजार में 2.5 लाख टन स्टॉक बेचेंगी रिफाइनरियां</title>
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        <description><![CDATA[ त्यौहारों के सीजन में जहां चीनी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, उसी मौसम में चीनी की कीमतों ने होश उड़ा दिए हैं. चीनी की कीमतों में इजाफा होते देख कई लोगों को लग रहा था कि अब त्यौहारों की मिठास कम पड़ जाएगी. लेकिन सरकार और शुगर रिफाइनरीज मिलकर लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. इसी कड़ी में अब शुगर रिफाइनरीज घरेलू बाजार में कई लाख टन चीनी बेचने वाली है.
दरअसल हाल ही में श्री रेणुका शुगर्स के एमडी और सीईओ सुशील कुमार ने बताया है कि भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार में करीब ढाई लाख टन चीनी बेचने की प्लानिंग कर रही हैं. जिससे कि बाजार में चीनी के दामों पर लगाम लगाई जा सके.

News Alert ! Indian sugar refineries plan to sell around 2.5 lakh tonnes of refined sugar in domestic market: Shree Renuka Sugars MD &amp;amp; CEO Susheel Kumar.
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) September 9, 2026



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क्यों की जा रही ये कवायद?सरकार और शुगर रिफाइनरीज चाहती हैं कि इस त्यौहरी सीजन में किसी के भी त्यौहार की मिाठास कम ना हो, ऐसे में उनसे जितना हो पा रहा है उस हिसाब से चीनी के दामों को कम करने की कोशिश की जा रही है. चीनी का ये ढाई लाख टन स्टॉक बेचने का फैसला भी इसी के चलते लिया गया है. हालांकि कुछ दिन पहले ही चीनी के दामों में गिरावट भी देखने को मिली थी. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ताजा आंकड़े पेश कर कुछ दिन पहले ही बताया था कि देश में चीनी का औसत खुदरा भाव पिछले हफ्ते के 65.08 रुपये से घटकर 62.57 प्रति किलो पर आया है.
जनता को नहीं मिली राहतहैरान करने वाली बात ये है कि चीनी के थोक रेट 17 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं. लकिन फिर भी जनता को कोई राहत अब तक नहीं मिली है. मिल स्तर (Ex-mill) पर चीनी के दामों में 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट आई. बावजूद इसके गली-मोहल्ले में परचून की दुकानों पर आम आदमी को सिर्फ 2 से 3 रुपये कम रेट पर चीनी मिल रही है.
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हालांकि अब उम्मीद है कि आने वाले समय में जब शगर रिफाइनरीज घरेलू बाजार में इस स्टॉक को उतारेंगी, तब जाकर कुछ हद तक लोगों को चीनी के दामों में थोड़ी राहत मिल सके.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: पेंशनर्स संगठन REWA की बड़ी मांग, ToR में करें बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी ही बेसब्री से हो रहा है. इसी बीच आयोग की बैठकों का दौर भी लगातार चल ही रहा है. हाल ही में चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को 8वें वेतन आयोग की बैठक हुई है. इस बैठक में पेंशन एसोसिएशन ने भी अपनी मांग रखी है, जिसमें &amp;nbsp;ToR में बदलाव की मांग सबसे बड़ी बताई जा रही है.
क्या है पेंशन एसोसिएशन की मांग?दरअसल लाइव मिंट के मुताबिक कई पेंशन संगठनों जैसे रिटायर्ड एम्प्लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि वो प्रमुख पेंशनभोगी संगठन, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों की पेंशन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन के लिए &#039;टर्म्स ऑफ रिफरेंस&#039; (ToR) में बदलाव करें. जिससे कि आने वाले समय में उन्हें इसके अच्छी तरह से लाभ मिल सके.
इसके लिए संगठन ने 7 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री के नाम एक पत्र भी लिखा है. इस पत्र के जरिए उन्होंने ये भी कहा है कि वो इस संशोधन में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर्ड हुए पेंशनभोगियों को भी शामिल करें.
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पेशनभोगियों की सरकार से प्रमुख मांगेंREWA यानी पेंशन संगठन ने सरकार से मांग की है कि, 8वें वेतन आयोग के ToR में बदलाव कर ये साफ किया जाए कि आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करेगा. फैमिली पेंशनर्स की पेंशन में भी संशोधन की सिफारिश करेगा. तो वहीं इस मामले में जब तक नियमों में बदलाव नहीं होता, तब तक सरकार प्रेस नोट या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे.
लाखों पेंशनर्स में असमंजसREWA के मुताबिक देश में करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स हैं. इनमें इस बात को लेकर भ्रम है कि 8वां वेतन आयोग उनकी पेंशन और फैमिली पेंशन में संशोधन की सिफारिश करेगा या नहीं. इसका कारण ये है कि 8वें वेतन आयोग के ToR का एक प्रावधान है. इसमें पेंशन, ग्रेच्युटी और अलग-अलग पेंशन योजनाओं की समीक्षा की बात कही गई है, लेकिन 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स का साफतौर तौर पर जिक्र नहीं है.
REWA ने ये भी कहा कि पहले के वेतन आयोगों के नियमों में पेंशनर्स को लेकर ज्यादा स्पष्टता थी. संगठन के मुताबिक 5वें और 6वें वेतन आयोग के ToR में पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का जिक्र था. वहीं 7वें वेतन आयोग में भी रिटायरमेंट बेनिफिट्स और पुरानी पेंशन में बदलाव की बात स्पष्ट रूप से कही गई थी.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NSE IPO पर बड़ा अपडेट, OFS के जरिए 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी न्यू इंडिया इंश्योरेंस</title>
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        <description><![CDATA[ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने बुधवार, 9 सितंबर को घोषणा की है कि वो प्रस्तावित NSE IPO के जरिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी. ये प्रस्तावित बिक्री, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया में कंपनी के पास मौजूद कुल शेयरों का 29.83% है.
NSE का ये आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा, जिससे मिलने वाला पैसा कंपनी के बजाय सेलिंग शेयरधारकों के पास जाएगा.&amp;nbsp;
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कंपनी ने दी जानकारीकंपनी ने 9 सितंबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि, वो NSE के 1,05,00,000 शेयर बेचेगी. ये संख्या न्यू इंडिया एश्योरेंस के NSE में मौजूद कुल शेयरों का करीब 29.83% है. कंपनी के मुताबिक यs बिक्री जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद NSE के IPO के हिस्से के रूप में की जाएगी.
इस OFS प्रक्रिया के तहत न्यू इंडिया एश्योरेंस ने अपने NSE के शेयरों को 8 सितंबर 2026 को एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया है. इसका मतलब है कि IPO के दौरान इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है.
खास है NSE का IPONSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है. मौजूदा रिपोर्ट्स के मुताबिक IPO का साइज करीब 24,000-30,000 करोड़ रुपये हो सकता है. ये IPO पूरी तरह OFS पर आधारित होगा, यानी NSE खुद नए शेयर जारी नहीं करेगा. मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेंगे और उससे मिलने वाला पैसा उन्हीं शेयरधारकों को जाएगा.
रिपोर्ट्स की मानें तो NSE IPO के लिए कीमत करीब 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर के दायरे में तय हो सकती है. हालांकि आखिरी प्राइस बैंड की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है. IPO सितंबर में आने की उम्मीद है.
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और भी शेयर धारक बेच रहे हिस्सेदारीबता दें कि NSE के IPO में न्यू इंडिया एश्योरेंस के अलावा कई अन्य संस्थागत शेयरधारक भी अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं. ऐसे में NSE का IPO बाजार में निवेशकों के लिए इस साल के सबसे बड़े और चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब सीधे ATM से निकलेगा नया डेबिट कार्ड, कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?</title>
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        <description><![CDATA[ जब भी कोई व्यक्ति बैंक खाता खुलवाता है, तो उसके 1 हफ्ते बाद घर पर एटीएम कार्ड आ जाता है. हालांकि अब नई सर्विसेज के बाद एक दिन में भी कई मामलों में एटीएम मिल जाया करते हैं. लेकिन अब जल्दी ही सरकार एक नई सुविधा देने जा रही है. जिसके तहत अब डेबिट कार्ड सीधे एटीएम से मिल जाया करेंगे. आइये बताते हैं कि ये व्यवस्था कैसे काम करेगी.
दरअसल हाल ही में मुंबई में 8 से 11 सितंबर के बीच ग्लोबल फिटेक फेस्ट 2026 चलने वाला है. जिसके दूसरे दिन यानी आज 9 सितंबर की शाम को DFS सेक्रेटरी इस नई सुविधा को लॉन्च करने वाले हैं. ये नई सुविधा पुरानी डेबिट कार्ड इश्यूएंस की प्रोसेस को पूरी तरह से बदल देगा.
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इस नई सुविधा का उद्देश्य?इस नई सुविधा का मुख्य उद्देश्य डेबिट कार्ड जारी करने की जो प्रक्रिया अभी है, उसे आसान और तेज बनाना है. फिलहाल आमतौर पर नया डेबिट कार्ड लेने के लिए ग्राहक को बैंक शाखा में आवेदन करना पड़ता है. इसके बाद कार्ड जारी होने और ग्राहक तक पहुंचने में समय लग सकता है. लेकिन एटीएम वाली इस नई सुविधा से ग्राहकों को कार्ड जल्दी मिलने की उम्मीद है.
ब्रांच पर निर्भरता होगी कमइस व्यवस्था के शुरू होने के बाद ग्राहक बैंक की शाखा जाने की जगह एटीएम के जरिए भी डेबिट कार्ड पा सकेंगे. इससे कस्टमर्स के समय की बचत होगी और कार्ड जारी करने की प्रक्रिया भी ज्यादा सुविधाजनक बन सकती है. खासतौर पर उन ग्राहकों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें तुरंत डेबिट कार्ड की जरूरत होती है.
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कैसे काम करेगी ये नई व्यवस्था?इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बिना बैंक की शाखा में जाए ग्राहकों को डेबिट कार्ड मिल जाएगा. यदि आपका डेबिट कार्ड खो गया है, एक्सपायर हो गया है तो आप इस सुविधा का लाभ ले सकत हैं. इससे बार- बार शाखा में जाने का चक्कर खत्म होगा और आप करीबी एटीएम में जाकर डेबिट कार्ड के लिए अप्लाय कर पाएंगे.
इस कदम से बैंकिंग सेवाएं और आधुनिक हो जाएंगी. एटीएम आधारित डेबिट कार्ड जारी करने की सुविधा से ग्राहकों को मौके पर ही तेज सेवा मिल सकेगी. साथ ही बैंक शाखाओं पर काम का दबाव भी कम हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 22:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>20% बोनस की कर लें तैयारी, 21000 सैलरी वालों को सीधा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी कर्मचारियों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है. अब नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों को करीब 20 प्रतिशत तक का बोनस मिल सकता है. इस बोनस का सीधा लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी मासिक सैलरी 21 हजार रुपये तक है. ये स्टेट्यूटरी बोनस होगा, जो कर्मचारयों के हक में आएगा. हालांकि इसके लिए कर्मचारियों को कुछ नियम व शर्तें पूरी करना होंगी.
पात्र कर्मचारियों को मिलेगा बोनसदरअसल हाल ही में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इस बारे में बताया है. मंत्रालय ने बताया है कि 21 हजार रुपये तक मासिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी नए लेबर कोड और वैधानिक नियमों के तहक बोनस पाने के हकदार हैं. इस अधिसूचना के मुताबिक यदि कर्मचारी पात्रता नियम पूरे करता है तो नियम के अनुसार, कम से कम 30 दिन काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को मिनिमम 8.33% और अधिकतम 20% तक बोनस मिल सकता है.
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बोनस की गणना समझेंअगर कोई कंपनी या नियुक्ति देने वाला नियोक्ता अपने कर्मचारियों को अधिकतम 20 प्रतिशत बोनस देता है, तो उसकी गणना 7 हजार रुपये प्रति माह के आधार की जाती है. आइये यहां आपको बताते हैं कि इस गणना के आधार पर किस तरह से 20 प्रतिशत बोनस के आधार पर आपको बोनस मिलेगा.
उदाहरण के तौर पर मान लिया जाए कि किसी व्यक्ति का मासिक वेतन 7 हजार रुपये है, ऐसे में उस व्यक्ति का सालाना वेतन 84 हजार रुपये होगा. इस वेतन पर अधिकतम बोनस 20 प्रतिशत के आधार पर 16,800 रुपये होगा.
तो वहीं यदि बोनस को 8.33 प्रतिशत के आधार पर देखेंगे, तो मिनिमम बोनस 6,997 रुपयो मिलेगा.
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क्या होता है स्टैट्यूटरी बोनस?स्टैट्यूटरी बोनस को वैधानिक बोनस कहा जाता है. जो पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 के तहत पात्र कर्मचारियों को दिया जाता है. ये एक कानूनी और जरूरी बनस है जो हर साल कर्मचारियों को कंपनी के द्वारा मिलना जरूरी होता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आपका भी UPI अकाउंट हो सकता है फ्रीज, जानें क्या कहता है RBI</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल पेमेंट के लिए अधिकतर लोग केवल यूपीआई का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. यूपीआई के आने के बाद से तो जैसे कैश रखना लोगों ने लगभग बंद ही कर दिया है. इसी बीच अब कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों के यूपीआई अकाउंट फ्रीज भी हो रहे हैं. वो भी किसी स्कैम के चलते, इस बारे में हाल ही में केरल के एक व्यक्ति ने शिकायत की है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल हाल ही में सोशल नेटवर्किंग साइट X (पहले ट्विटर) पर केरल के रहने वाले फुटुम्बाका सुमा ने एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनके खाते में दो बार किसी अनजान यूपीआई से कुछ रुपये आए, जिसके बाद HDFC बैंक ने बिना कोई नोटिस दिए उनका खाता ही फ्रीज कर दिया है. शख्स ने इस पोस्ट में केरल पुलिस को टैग करते हुए लिखा:
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&#039;मैं आपके ध्यान में ये बात लाना चाहता हूं कि 31 अगस्त और 4 अगस्त को मुझे UPI के जरिए दो अनजान पेमेंट मिले. मैंने उन्हें वापस नहीं भेजा क्योंकि मुझे लगा कि ये कोई स्कैम हो सकता है. जब भेजने वाले ने व्हॉट्सएप पर मुझसे संपर्क किया, तो मैंने जिम्मेदारी दिखाते हुए कहा कि वो अपने बैंक से संपर्क करें और मैं सही तरीके से पैसे वापस करवा दूंगा, क्योंकि मैं किसी स्कैम का हिस्सा नहीं बनना चाहता था. इसके बाद, HDFC ने उस रकम को रोक दिया और मेरा पूरा अकाउंट फ्रीज कर दिया.&#039;

@TheKeralaPolice I&amp;rsquo;d like to bring to your notice that on the 31st and 4th of August I received two unknown payments via UPI. I did not send it back as I thought it was some scam. When the sender reached out on WhatsApp I did the responsible thing of saying contact your bank and&amp;hellip; pic.twitter.com/q7DmCoJAXd
&amp;mdash; Alex (@verghesaurus) September 6, 2026



आगे उन्होंने लिखा, &#039;केरल हाई कोर्ट का एक फैसला है जिसके अनुसार बैंक सिर्फ विवादित रकम को ही फ़्रीज कर सकते हैं, पूरे अकाउंट को नहीं. मैं कैसे गुजारा करूं? मैं अपने पेमेंट कैसे करूं और कर्मचारियों को उनकी सैलरी कैसे दूं? मैंने साइबर सेल को ईमेल भी लिखा है. उनकी रिस्पॉन्स टीम बहुत अच्छी थी. मैं अभी जबड़े और रीढ़ की हड्डी की चोट से उबर रहा हूं. ऐसे में मुझसे ये उम्मीद कैसे की जा सकती है कि मैं इन छोटे-मोटे मामलों को सुलझाने के लिए बैंक जाऊं?&#039;
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क्या कहते हैं नियम?RBI और कोर्ट के नियमों के मुताबिक, कोई भी बैंक आपके पूरे खाते को फ्रीज नहीं कर सकता है. नियमों के अनुसार बैंक ऐसे मांलों में सिर्फ डिस्प्यूटेड अमाउंट पर ही होल्ड लगा सकता है. ना कि पूरे खाते को फ्रीज कर सकता है. जिससे यूजर बाकी की रकम का इस्तेमाल कर सके. यदि आपके खाते को कोई बैंक ऐसे ही किसी मामले में फ्रीज कर देता है, तो 24 घंटे के अंदर आपको बैंक को इस बारे में सूचित करना होगा. जिससे बैंक तत्काल इस मामले को सुलझा सके.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आपका, भी, UPI, अकाउंट, हो, सकता, है, फ्रीज, जानें, क्या, कहता, है, RBI</media:keywords>
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        <title>Swiggy&amp;Zomato पर वार्निंग लेबल चाहते हैं कस्टमर्स, सर्वे में हुआ खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप भी ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन फूड खरीदते हैं? अगर हां, तो कैसा रहेगा यदि फूड डिलीवरी एप्स पर आपको पहले से ही वॉर्निंग लेबल दिखने लगें? ये एक अच्छी पहल होगी. तभी तो उपभोक्ताओं ने इसकी मांग की है. हाल ही में एक सर्वे रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें उपभोक्ताओं ने मांग की है कि उन्हें फूड डिलीवरी एप्स पर नमक या सैचुरेटेड फैट वाले खाने पर वॉर्निंग लेबल दिखाया जाए.
सर्वे में क्या आया सामने?दरअसल हाल ही में लोकल सर्कल्स का एक देशव्यापी सर्वे हुआ है. इस सर्वे में सामने आया है कि भारत में करीब 9 में से 8 उपभोक्ता चाहते हैं कि उन्हें प्रोडक्ट्स पर वॉर्निंग दिखाई दै. ये सर्वे देश के 328 जिलों के घरेलू उपभोक्ताओं के बीच किया गया, जिसमें 1.08 लाख से ज्यादा लोगों ने जवाब दिया है.
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वॉर्निंग लेबल चाहते हैं कस्टमर्सइस सर्वे में 89% लोगों ने कहा है कि ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट की लिस्टिंग और उसके डिटेल पेज, दोनों जगह चेतावनी साफ तौर पर दिखाई देना चाहिए. वहीं 2% लोगों ने केवल प्रोडक्ट के डिटेल पेज पर चेतावनी दिखाने का समर्थन किया. इस तरह कुल 91% उपभोक्ता ऑनलाइन चेतावनी के पक्ष में हैं. सिर्फ 7% लोगों का कहना था कि प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर चेतावनी देना ही काफी है.
इतना ही नहीं बल्कि सर्वे में करीब 80% लोगों ने कहा कि अगर किसी पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट में से किसी एक की मात्रा भी ज्यादा है, तो पहले चरण से ही उस पर चेतावनी होनी चाहिए. तो वहीं 88% उपभोक्ताओं का कहना है कि चेतावनी का साइज बड़ा हो, वो साफ दिखाई दे और ग्राहक की नजर तुरंत उस पर जाए. इतनी ही संख्या में लोगों ने कहा कि नियम तय होने के 6 महीने के अंदर कंपनियों को इन्हें लागू कर देना चाहिए.
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क्यों हो रही ये मांग?बीते कई दिनों से FSSAI की कार्रवाई इन एप्स के स्टोर्स पर चल रही है, जिसमें इनके ब्लैक स्टोर में काफी गंदगी और हाईजीन की समस्या नजर आ रही है. इसको लेकर अब ग्राहक भी सचेत हो रहे हैं. ग्राहकों का मानना है कि यदि एप्स में ही इस तरह की वॉर्निंग होगी तो व्यक्ति खरीदने से पहले ही कई बार सोचेगा या नहीं खरीदेगा.
बता दें कि FSSAI पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स के लिए लाल रंग का हेक्सागोन यानी छह कोनों वाला चेतावनी लेबल लाने की तैयारी कर रहा है. इसमें हाई शुगर, हाई सॉल्ट, हाई फैट और हाईली स्वीटन्ड बेवरेज जैसी चेतावनियां शामिल हो सकती हैं.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>चंडीगढ़ में उबर और रैपिडो पर लगा बैन, 6 महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड</title>
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        <description><![CDATA[ यदि आप चंडीगढ़ में रहते हैं और कहीं आने- जाने के लिए कैब का इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए ये खबर अहम है. दरअसल चंडीगढ़ के स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने दोनों कंपनियों के एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए हैं. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और मार्च 2027 तक जारी रहेगा.
क्यों लिया गया फैसला?चंडीगढ़ के स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी STA ने उबर और रैपिडो के लाइसेंस छह महीने के लिए इसलिए निलंबित किए हैं, क्योंकि दोनों कंपनियां चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रिगेटर्स नियन 2025 का लगातार उल्लंघन कर रही थीं. STA ने 8 सितंबर को ये आदेश जारी किया है.
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अधिकारियों का कहना है कि, &#039;कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय और कई मौके दिए गए थे. लेकिन उन्होंने नियमों का पालन करने की जगह केंद्र सरकार की मोटर व्हीकल एग्रिगेटर गाइडलाइंस, 2025 को चंडीगढ़ में लागू करने की मांग की&#039;. इतना ही नहीं बल्कि जुलाई 2026 में कंपनियों की ओर से जमा की गई गाड़ियों की सूची में कुछ नॉन-कमर्शियल यानी निजी वाहन भी शामिल थे. चंडीगढ़ में कैब सेवा के लिए ऐसे वाहनों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है.
नियमों का हो रहा था उल्लंघनइतना ही नहीं STA के सचिव नितीश सिंगला ने बताया कि, उबर और रैपिडो को ड्राइवरों के हेल्थ चेकअप, टर्म इंश्योरेंस, ट्रेनिंग और तय किराए से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था. इसके बावजूद कंपनियों ने नियमों का पालन नहीं किया. साथ ही, इनके खिलाफ नियमों के उल्लंघन की कई शिकायतें भी मिली थीं. इसी वजह से STA ने दोनों कंपनियों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है.
ओला का लाइसेंस पहले से ही है रद्दइससे पहले चंडीगढ़ में ओला और inDrive के लाइसेंस को भी छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जा चुका है. जिसके बाद अब उबर और रैपिडो का लाइसेंस भी रद्द हो जाने की वजह से यहां पर लोगों का काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. देखा जाए तो अब चंडीगढ़ में चार बड़े कैब एग्रीगेटर औला, उबर, रैपिडो और inDrive पर रोक लग गई है.
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अब कैसे चलेगा ट्रांसपोर्ट?इन चारों मेजर कैब्स के सस्पेंड होने के बाद फिलहाल शहर में सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की भारत टैक्सी ही मुख्य कैब सेवा के रूप में उपलब्ध रेहगा. इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों के पास अब ऑप्शन काफी कम हो गए हैं. ऐसे में अब शहर में लोकल ट्रांसपोर्ट को लोग ज्यादा तवज्जो देंगे.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में SAMSUNG ने की छंटनी की घोषणा, 10 दिनों में कई कंपनियों ने 6500 लोगों को निकाला</title>
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        <description><![CDATA[ नौकरी करने वालों के लिए सितंबर का महीना टेंशन के साथ शुरू हुआ है. दुनियाभर की कई बड़ी तकनीकी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है. भारत में सैमसंग ने भी अपने टेलीविजन कारोबार से जुड़े करीब 80 से 100 अधिकारियों को हटा दिया है. ये छंटनी अलग-अलग स्टेज में की जा रही है और इसमें अलग-अलग पदों पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं. &amp;nbsp;
दूसरी ओर, सितंबर के शुरुआती 10 दिनों में दुनियाभर में 6,300 से ज्यादा तकनीकी नौकरियों में कटौती की खबर सामने आई है. उबर, पेपाल, जोमैटो, एप्पल और ओरेकल जैसी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं और जहां अभी तक छंटनी नहीं हुआ है वो भी अब तैयारी कर रही हैं.&amp;nbsp;
किन लोगों की गई नौकरी?भारत में सैमसंग में जो छंटनी हुई है वो टेलीविजन और घरेलू उपकरण वाले बिजनेस के डिपार्टमेंट से हुई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने निदेशक स्तर के अधिकारियों, टीम प्रमुखों और प्रबंधक समेत कई पदों पर काम करने वाले लोगों को हटाने का आदेश दे दिया है.&amp;nbsp;
कंपनी में एक साथ सारे कर्मचारियों को नहीं हटाया जा रहा है. कर्मचारियों को अलग-अलग स्टेज में बाहर किया जा रहा है. कुछ कर्मचारियों को तो बिना नोटिस पीरियड पूरा किए बिना ही कंपनी छोड़ने के लिए कहा गया है.&amp;nbsp;
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कंपनी क्यों कर रही हैं छंटनी?इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ता खर्च और कारोबार पर दबाव है. कंपनियां चाहती हैं कि कम खर्च में ज्यादा काम हो और मुनाफे पर दबाव कम किया जा सके. सैमसंग के मामले में मेमोरी चिप की कीमत काफी बढ़ गई है. इसके अलावा रुपये की कमजोरी और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने भी कंपनी का खर्च बढ़ाया है. दूसरी तरफ, भारत में स्मार्टफोन की बिक्री में भी कमजोरी देखने को मिली है. &amp;nbsp;
कई बड़ी कंपनियां भी कर रहीं छंटनीसितंबर के शुरुआती 10 दिनों में दुनिया की कई बड़ी तकनीकी कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या घटाई है. उबर करीब 3,300 कर्मचारियों की नौकरी कम करने की योजना में है. यह उसके दुनियाभर के कर्मचारियों का करीब 10 प्रतिशत है.
&amp;nbsp;भारत में पेपाल अपने कर्मचारियों की संख्या में करीब 4 प्रतिशत की कमी करने वाला है. इससे करीब 220 कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है. वहीं जोमैटो और एप्पल ने मिलकर करीब 250 पदों को खत्म किया है. ओरेकल में भी बड़े स्तर पर कर्मचारियों की संख्या घटाने की खबर है.&amp;nbsp;
AI भी बन रही है एक वजहकंपनियों की छंटनी का एक कारण बदलती तकनीक भी है. कंपनियां अब AI तकनीक पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं. इससे कुछ ऐसे काम कम हो रहे हैं जिन्हें पहले बड़ी संख्या में कर्मचारी करते थे. महामारी के दौरान जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती हो गई थी, वो भी कंपनी ठीक कर रही हैं.&amp;nbsp;
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और छंटनी होगी?मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दीपावली के बाद कर्मचारियों की संख्या को लेकर कंपनी एक बार फिर जांच कर सकती है. फिलहाल मोबाइल कारोबार में बड़ी छंटनी का प्लान नहीं बनाया गया है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नई पेंशन स्कीम ला रही सरकार, जब पैसा हो तब जमा करें और मनचाही पेंशन पाएं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नई-पेंशन-स्कीम-ला-रही-सरकार-जब-पैसा-हो-तब-जमा-करें-और-मनचाही-पेंशन-पाएं</link>
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        <description><![CDATA[ श्रम मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एक नई यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (Universal Pension Scheme) लाने की तैयारी में है. इस स्कीम के तहत, सब्सक्राइबर्स रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में अपनी बचत का कुछ हिस्सा निकालकर ज़्यादा पेंशन ले सकेंगे और बाद में पेंशन की रकम कम कर सकेंगे, ताकि बची हुई रकम पर ब्याज मिलता रहे.
आमतौर पर रिटायरमेंट के तुरंत बाद पैसों की तुरंत जरूरत पड़ती है. मेडिकल ट्रीटमेंट पर खर्च के अलावा पारिवारिक जिम्मेदारियां भी कई होती हैं जैसे कि बच्चों के हायर स्टडीज के लिए पैसे चाहिए होते हैं या शादी पर बड़े पैमाने पर खर्च होता है. इस दौरान सब्सक्राइबर अपने कुल जमा फंड (Corpus) से ज्यादा बड़ा हिस्सा निकाल सकेंगे. बाकी का जो पैसा रह जाएगा, वह EPFO के पास ही सुरक्षित रहेगा.
उस बची हुई रकम पर सरकार द्वारा तय वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा, जिससे फंड पूरी तरह खत्म होने के बजाय बढ़ता रहेगा. इसमें उम्र बढ़ने के साथ जब वित्तीय आवश्यकताएं कम हो जाएंगी, तो सब्सक्राइबर अपनी मासिक पेंशन की राशि को कम कर सकेंगे ताकि उनका फंड लंबे समय या उम्र के आखिरी पड़ाव तक चलता रहे.&amp;nbsp;
पारंपरिक पेंशन से यह क्यों बेहतर?
फिलहाल नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी स्कीम्स में रिटायरमेंट के समय कम से कम 40% हिस्से से एन्युटी (Annuity) खरीदना अनिवार्य होता है, जिसका एक फिक्स्ड रिटर्न मिलता है और उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता. लेकिन EPFO की इस नई योजना में अनिवार्य एन्युटी के बजाय सब्सक्राइबर को अपने ही पैसों पर पूरा कंट्रोल देने का प्रस्ताव है.
आसान भाषा में कहें, तो जीवन अक्षय या NPS के तहत मिलने वाली एन्युटी में एक बार पैसा जमा करने के बाद आपका फंड लॉक हो जाता है. इस पर आपको महीने का एक फिक्स्ड अमाउंट मिलता रहता है. अगर रिटायरमेंट के बाद आपको अचानक से इमरजेंसी में ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े तो आप फंड के रूप में जमा रकम को निकाल नहीं सकते हैं. वहीं यूनिवर्सल पेंशन स्कीम में आपका पैसा EPFO के पास आपके ही खाते में रहता है. आप अपनी जरूरत के हिसाब से &amp;nbsp;सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) की तरह पैसा निकाल सकेंगे. इमरजेंसी के वक्त आप अपनी मासिक निकासी को बढ़ा सकते हैं या जरूरत पड़ने पर फंड से बड़ी रकम भी निकाल सकते हैं.
टैक्स को लेकर क्या होंगे नियम?
श्रम मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (EPFO 3.0) के लिए टैक्स के नियम मौजूदा EPFO मॉडल के समान रखने पर विचार किया जा रहा है. चूंकि यह योजना अभी ड्राफ्ट फेज में है इसलिए सरकार इसके अंतिम टैक्स नियमों को आधिकारिक लॉन्च के समय ही अधिसूचित करेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एलन मस्क की बड़ी जीत! स्टारलिंक के भारत आने का रास्ता साफ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एलन-मस्क-की-बड़ी-जीत-स्टारलिंक-के-भारत-आने-का-रास्ता-साफ</link>
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        <description><![CDATA[ Starlink, Oneweb, Reliance Jio जैसी कंपनियों के सेटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ( inter ministerial panel) द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन की ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी देने की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि सचिवों के समूह ने ट्राई की सिफारिश को मंजूरी दे दी है. हालांकि, अभी तक इस बार कोई आधिकारिक तौर पर जानकारी सामने नहीं आई है माना यह जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में कैबिनेट में इसको लेकर फैसला ले सकती है.&amp;nbsp;
कब तक लॉन्च होगी सर्विस?
सूत्रों के अनुसार, सचिवों के समूह से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट &amp;nbsp;के पास भेजा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में अंतिम मंजूरी मिलते ही इसे देश में कानूनी तौर पर लागू कर दिया जाएगा. बता दें कि Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी दिग्गज कंपनियों के पास पहले से ही GMPCS जैसे आवश्यक सैटेलाइट लाइसेंस मौजूद हैं. कैबिनेट से स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों और फीस पर अंतिम मुहर लगते ही ये कंपनियां देश में कमर्शियल सेवाएं लॉन्च करने के बेहद करीब पहुंच जाएंगी.&amp;nbsp;
5 साल के लिए मिलेगा स्पेक्ट्रम
TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, शुरुआती तौर पर कंपनियों को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम 5 साल की अवधि के लिए आवंटित किया जा सकता है. बाजार की स्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार इस अवधि को आगे 2 साल के लिए और बढ़ा सकती है. यानी कुल मिलाकर यह व्यवस्था अधिकतम 7 साल तक चल सकती है.
एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी वैश्विक कंपनियां सामान्यतः 20 साल के लंबे लाइसेंस की मांग कर रही थीं, लेकिन TRAI ने एक नया और उभरता हुआ बाजार होने के कारण समय-सीमा को 5 साल तक सीमित रखने की सिफारिश की. इसके जरिए सरकार यह देखना चाहती है कि शुरुआत में बाजार कैसे काम करता है और सुरक्षा मानकों का पालन कितनी सटीकता से होता है.
चूंकि सैटेलाइट इंटरनेट एक तेजी से बदलती हुई तकनीक है इसलिए 7 साल की सीमा के दौरान सरकार भविष्य में आने वाली नई तकनीकों के हिसाब से नियमों को आसानी से अपग्रेड कर सकेगी. इस दौरान सरकार यह देख पाएगी कि विदेशी और घरेलू कंपनियां भारतीय सुरक्षा नियमों (Data Security) का कितनी गंभीरता से पालन कर रही हैं. 5 साल की इस अवधि के दौरान नियामक ने कंपनियों से उनके Adjusted Gross Revenue (AGR) का 4% से 5% हिस्सा स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में लेने का सुझाव दिया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एलन, मस्क, की, बड़ी, जीत, स्टारलिंक, के, भारत, आने, का, रास्ता, साफ</media:keywords>
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        <title>20 करोड़ का तोहफा! कर्मचारियों को फ्री में मिलेंगे 3.43 लाख शेयर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/20-करोड़-का-तोहफा-कर्मचारियों-को-फ्री-में-मिलेंगे-343-लाख-शेयर</link>
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        <description><![CDATA[ कूलर बनाने वाली मल्टीबैगर कंपनी सिम्फनी लिमिटेड (Symphony Limited) के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. मंगलवार को कारोबार के दौरान BSE में इसके शेयर 13% से ज्यादा उछलकर 652.25% के लेवल पर पहुंच गए. कंपनी के शेयरों में आज आई इस तेजी के पीछे एक बड़ा फैसला है.&amp;nbsp;
दरअसल, सिम्फनी लिमिटेड के फाउंडर प्रमोटर अचल अनिल बाकेरी अपने वर्कर्स को लगभग 3,43,000 इक्विटी शेयर गिफ्ट कर रहे हैं. ये शेयर कंपनी की कुल पूंजी का 0.5% हैं और इनकी कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये है. यह तोहफा एक बार में नहीं, बल्कि अगले 4 साल के दौरान धीरे-धीरे कर्मचारियों को दिया जाएगा, जो उनका कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनोखा तरीका है. इसका मकसद कंपनी के सफर में उनके योगदान को पहचानना और साझा मालिकाना हक की भावना को बढ़ावा देना है.
फ्री में मिलेंगे सारे शेयर
कंपनी के इस पहल की सबसे अच्छी बात यह है कि कर्मचारियों को इन शेयरों के बदले एक भी पैस अपनी जेब से नहीं देना होगा. इसे एक गिफ्ट के तौर पर ट्रांसफर किया जाएगा. इसका कंपनी के कैश फ्लो पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 3,43,000 शेयरों की कीमत लगभग 20 करोड़ के आसपास बैठती हो, लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का बिजनेस बढ़ेगा, शेयरों की कीमत ऊपर जाएगी जैसे कि आज महज इसका ऐलान भर से शेयर 13% तक उछल गए.
अब AC भी बनाएगी कंपनी
कंपनी ने इस बीच अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने का भी फैसला लिया है. कंपनी आगे आने वाले समय में एयर कंडीशनर, एयर फ्यूरिफायर्स, BLDC सीलिंग फैन बाजार में उतारने का प्लान बना रही है. सिम्फनी का देश भर में डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क है. ऐसे में बाजार में लॉन्च होने वाले नए प्रोडक्ट्स का अपना एक मजबूत कन्ज्यूमर बेस होगा. कंपनी को ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी. इससे आने वाले समय में कंपनी के रेवेन्यू में सुधार आएगा और प्रॉफिट मार्जिन में बड़ी ग्रोथ देखी जा सकेगी, जिसका फायदा इसके लॉन्ग टर्म निवेशकों को मिल सकता है.

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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>HDFC ने घटाई लोन की ब्याज दरें, आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों को एक बड़ा तोहफा दिया है. बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए ये खुशखबरी है. दरअसल बैंक ने कुछ अवधि वाले कर्ज पर अपनी MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट में 5 से 10 बेसिस पॉइंट (bps) तक की कटौती की है. ये नई दरें बैंक के द्वारा 7 सितंबर 2026 से लागू हो गई हैं. इससे MCLR से जुड़े कर्ज लेने वाले ग्राहकों को आने वाले समय में ब्याज का बोझ कम होने की उम्मीद है.
कितनी हुईं नई MCLR दरें?1 बेसिस पॉइंट यानी 0.01 प्रतिशत होता है. नई कटौती के बाद HDFC बैंक की MCLR दरें अब 7.90% से 8.60% के बीच हैं. इससे पहले ये दरें 8% से 8.65% तक थीं. आइये देखते हैं इस बदलाव के बाद अब कितनी ब्याज दरे हो गई हैं?

ओवरनाइट MCLR 8% से घटकर 7.90% हो गई हैं.
1 महीने की MCLR 8% से घटकर 7.90% हो गई हैं.
3 महीने की MCLR 8.15% से घटकर 8.05% हो गई हैं.
6 महीने की MCLR 8.30% से घटकर 8.25% हो गई हैं.
1 साल की MCLR 8.40% से घटकर 8.35% हो गई हैं.
2 साल की MCLR 8.55% से घटकर 8.45% हो गई हैं.
3 साल की MCLR 8.65% से घटकर 8.60% हो गई हैं.

इसका मतलब है कि बैंक ने सभी बताई गई अवधि की MCLR दरों में 5 से 10 bps की कमी की है.
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कर्जदारों पर क्या होगा असर?जिन ग्राहकों का लोन HDFC बैंक की MCLR से जुड़ा है, उन्हें ब्याज दर रीसेट होने के बाद कम ब्याज का फायदा मिल सकता है. लेकिन EMI तुरंत कम होगी, ये जरूरी नहीं है. इसका असर लोन की रीसेट अवधि, बैंक द्वारा लिए जाने वाले अतिरिक्त मार्जिन यानी स्प्रेड और लोन एग्रीमेंट पर निर्भर करेगा.
वहीं, जिन लोगों का लोन MCLR से जुड़ा नहीं है, उन पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा. नया लोन लेने वालों को ये भी ध्यान रखना चाहिए कि MCLR सिर्फ ब्याज दर तय करने का एक हिस्सा है. बैंक ग्राहक की प्रोफाइल और लोन के प्रकार के आधार पर अंतिम ब्याज दर तय करता है.
क्या है MCLR?बता दें कि MCLR वो मिनिमम ब्याज दर है, जिसके आधार पर बैंक MCLR से जुड़े कर्ज की ब्याज दर तय करता है. इसे RBI ने 2016 में शुरू किया था. MCLR मुख्य रूप से बैंक के लिए पैसा जुटाने की लागत और कुछ अन्य कारकों पर निर्भर करती है. MCLR से जुड़े कर्ज की ब्याज दर एक तय समय के बाद रीसेट होती है. इसलिए MCLR घटने का मतलब ये नहीं है कि हर ग्राहक की EMI तुरंत कम हो जाएगी. इसका असर ग्राहक के लोन की रीसेट डेट और लोन की शर्तों पर निर्भर करता है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>सोने के बदले धड़ल्ले से मिल रहा कर्ज, NBFC ने बैंकों को पछाड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ सोना अब सिर्फ गहनों की जरूरत नहीं, बल्कि मुश्किल समय में पैसों का सहारा भी बन रहा है. सोने के बदले कर्ज लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसका सबसे ज्यादा फायदा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs को मिला है. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में NBFCs का गोल्ड लोन एक साल में 68.5% बढ़ गया, जबकि जुलाई 2025 में इसकी ग्रोथ 43.9% थी. वहीं, बैंकों के गोल्ड लोन की रफ्तार 136.4% से घटकर 88.1% रह गई.
जुलाई के आखिर तक NBFCs के पास सोने के गहनों के बदले दिए गए करीब 3.54 लाख करोड़ रुपये के कर्ज थे. बैंकों का गोल्ड लोन करीब 5.52 लाख करोड़ रुपये रहा. NBFCs के रिटेल लोन में गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा रहा. इससे साफ है कि सोने के बदले जल्दी कर्ज लेने की मांग बढ़ी है.
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NBFCs का कुल कर्ज भी ज्यादा हुआ&amp;nbsp;
जुलाई में NBFCs का कुल कर्ज 14.9% ज्यादा होकर 59.89 लाख करोड़ रुपये हो गया. एक साल पहले इसकी ग्रोथ 10.6% थी. लेकिन, बैंकों के कुल कर्ज में 19.1% का इजाफा हुआ. NBFCs के रिटेल लोन में भी तेजी आई और इसकी ग्रोथ जुलाई में 21.4% रही, जो एक साल पहले 13.7% थी.
रिटेल लोन में हाउसिंग लोन 11.9% ज्यादा होकर 8.55 लाख करोड़ रुपये हो गया. गाड़ी के लोन की ग्रोथ 15.1% रही. वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए दिए गए कर्ज में 51.5% की इजाफा दर्ज की गई.
इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की रफ्तार घटी
दूसरी तरफ, इंडस्ट्री को दिए जाने वाले कर्ज की ग्रोथ 9.3% से घटकर 7.4% रह गई. &amp;nbsp;इंफ्रास्ट्रक्चर लोन का इजाफा भी 8.1% से कम होकर 6.2% हो गई. पावर सेक्टर में कर्ज की ग्रोथ 12.3% से घटकर 6.9% रही.
सर्विस सेक्टर के कर्ज की ग्रोथ भी 24.5% से घटकर 15.2% रह गई. लेकिन, कमर्शियल रियल एस्टेट को दिए कर्ज में 22.3% की मजबूत बढ़ोतरी हुई. वहीं, ट्रेड से जुड़े कर्ज की ग्रोथ 14.7% और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कर्ज की ग्रोथ 10.7% रही.
कृषि कर्ज में भी जोरदार इजाफा&amp;nbsp;
कृषि और उससे जुड़ी कामों के लिए कर्ज में अच्छी तेजी आई. जुलाई में इसकी ग्रोथ 18% रही, जबकि एक साल पहले ये सिर्फ 5.4% थी. इस सेक्टर पर कुल बकाया कर्ज 80,271 करोड़ रुपये रहा.
कुल मिलाकर, NBFCs में रिटेल लोन की मांग बढ़ी है और इसमें गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ रहा है. जुलाई में कुल रिटेल लोन 26.06 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले ये 21.46 लाख करोड़ रुपये था.
यह भी पढ़े: न कोई इनकम टैक्स न कटौती, ये कंपनी पायलटों को देती है 4 करोड़ रुपए सैलरी
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोने, के, बदले, धड़ल्ले, से, मिल, रहा, कर्ज, NBFC ने, बैंकों, को, पछाड़ा</media:keywords>
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    <item>
        <title>आपके सिलेंडर में है अमेरिका की गैस, देश में US से आ रही 50% LPG</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में फरवरी के बाद से LPG को लेकर काफी कश्मकश रही है. कुछ समय सब ठीक चला लेकिन जैसे ही ईरान- यूएस के युद्ध के होर्मुज ब्लॉक हुआ और वहां से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, तब देश में तेज- गैस की काफी कमी देखी गई. जिसके बाद इससे बचने के लिए सरकार ने अब अमेरिका पर LPG गैस को लकेर निर्भरता बढ़ा दी है. जिसके चलते अगस्त में भारत के LPG आयात में अमेरिका सबसे बड़ा सप्लायर बना रहा.
हालांकि, इस दौरान खाड़ी देशों से LPG की सप्लाई में तेज बढ़ोतरी हुई. ये जानकारी Kpler और पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालाइसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों से सामने आई है.
ये भी पढ़ें: HDFC ने घटाई लोन की ब्याज दरें, आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर?
कितना रहा कुल LPG आयात?Kpler के मुताबिक अगस्त में भारत का कुल LPG आयात जुलाई के मुकाबले 14.5% बढ़ा. इस दौरान खाड़ी देशों से आने वाली LPG की मात्रा लगभग दोगुनी हो गई. इसके कारण भारत के कुल LPG आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी जुलाई के 16.4% से बढ़कर अगस्त में 29.7% हो गई.
अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायरखाड़ी देशों से सप्लाई बढ़ने के बावजूद अमेरिका भारत के LPG आयात में सबसे आगे रहा. अगस्त में अमेरिका से भारत को 7,24,150 टन LPG मिली. हालांकि, ये जुलाई के मुकाबले 25.8% कम है. फिर भी भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा रही.
UAE से सबसे ज्यादा बढ़ी सप्लाईखाड़ी देशों में UAE से LPG की सप्लाई सबसे ज्यादा बढ़ी. अगस्त में UAE ने भारत को 1,98,860 टन LPG भेजी, जो जुलाई के मुकाबले 94.9% ज्यादा है. वहीं, कुवैत से LPG आयात जुलाई के 44,230 टन से बढ़कर अगस्त में 1,14,580 टन हो गया. कतर से भी सप्लाई बढ़ी. वहां से भारत को अगस्त में 65,400 टन LPG मिली, जबकि जुलाई में ये मात्रा सिर्फ 19,320 टन थी.
ये भी पढ़ें: सोने के बदले धड़ल्ले से मिल रहा कर्ज, NBFC ने बैंकों को पछाड़ा
अगस्त में बढ़ी LPG की खपतबता दें कि अगस्त में भारत में LPG की खपत भी बढ़ी है. LPG की मांग जुलाई के मुकाबले 3.2% बढ़कर 24.2 लाख टन हो गई. ये पिछले 6 महीनों में सबसे ज्यादा खपत है. हालांकि, पिछले साल अगस्त की तुलना में LPG की मांग अभी भी 16% कम रही.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आपके, सिलेंडर, में, है, अमेरिका, की, गैस, देश, में, से, आ, रही, 50, LPG</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>8th Pay Commission: कम फिटमेंट फैक्टर के बाद भी बढ़ सकती है सैलरी, जानिए कैसे होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर्मचारी वर्ग कर रहा है. इसको लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. इसी बीच खबरें हैं कि फिटमेंट फैक्टर इस बार कम भी हो सकता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपकी सैलरी कम बढ़ेगी. कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इसका जवाब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में भी मिलेगा. अगर इस बार फिटमेंट फैक्टर 3% से बढ़ाकर 5% से 7% किया जाता है, तो लंबे समय में बेसिक सैलरी पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
इसी मुद्दे को लेकर 8वें वेतन आयोग की दो दिन की सलाह मशविरा बैठक 7 सितंबर से चेन्नई में शुरू हुई है. इसमें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और काम करने की स्थितियों पर चर्चा हो रही है. इसके बाद 9 सितंबर को पुडुचेरी में भी बैठक होगी.
यह भी पढ़े:HDFC ने घटाई लोन की ब्याज दरें, आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर?
5% से 7% इजाफा की मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने साल के इजाफा की दर बढ़ाने की मांग की है. नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स ने 6% साल का इजाफा मांगा है. ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 7% की मांग रखी है. वहीं इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 5% इजाफा के साथ 4.0 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है.
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है. 2.15 फिटमेंट फैक्टर और 3% साल का इंक्रीमेंट के हिसाब से पहले साल बेसिक पे करीब 66,435 रुपये हो सकती है. 5वें साल ये 74,773 रुपये और 10वें साल 86,683 रुपये तक पहुंच सकती है.
वहीं बिना फिटमेंट फैक्टर के 5% साला के बढ़ोतरी पर 10 साल बाद बेसिक सैलरी करीब 48,867 रुपये, 7% पर 59,015 रुपये और 10% पर 77,812 रुपये हो सकती है.
35 और 40 हजार की बेसिक सैलरी का हिसाब
35,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 2.15 फिटमेंट फैक्टर के साथ 10वें साल बेसिक पे करीब 1,01,130 रुपये हो सकती है. 40,000 रुपये की बेसिक सैलरी के मामले में ये करीब 1,15,577 रुपये हो सकती है. बिना फिटमेंट फैक्टर के 10% साल के बढ़ोतरी पर ये रकम 90,781 रुपये और 1,03,750 रुपये होगी.
लेकिन, असली सैलरी 8वें वेतन आयोग की आखरी सिफारिशों में तय होने वाले फिटमेंट फैक्टर और साल के इजाफे पर डिपेंड करेगी.
यह भी पढ़े:सोने के बदले धड़ल्ले से मिल रहा कर्ज, NBFC ने बैंकों को पछाड़ा
 ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, कम, फिटमेंट, फैक्टर, के, बाद, भी, बढ़, सकती, है, सैलरी, जानिए, कैसे, होगा, फायदा</media:keywords>
    </item>
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        <title>बैंक से चोरी हुआ गिरवी सोना तो कैसे मिलेगा मुआवजा और ब्याज?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बैंक-से-चोरी-हुआ-गिरवी-सोना-तो-कैसे-मिलेगा-मुआवजा-और-ब्याज</link>
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        <description><![CDATA[ अक्सर सोने का लोन लेते समय उसके बदले बैंक या लोन देने वाले कंपनी के पास गहने गिरवी रखने पड़ते हैं. ऐसे में अगर कर्ज चुकाने से पहले बैंक की कस्टडी में रखे गहने चोरी या गायब हो जाएं, तो यह सवाल उठता है कि नुकसान की भरपाई कौन करेगा और मुआवजा कैसे मिलेगा. हालांकि, इस मामले में बैंक की जिम्मेदारी और मुआवजे की रकम कई बातों पर निर्भर करता है.&amp;nbsp;
गिरवी रखा सोना चोरी होने पर क्या करें?
अगर आपको पता चलता है कि आपके गिरवी रखे सोने चोरी हो गए हैं, तो तुरंत बैंक को इसके बारे में जानकारी दें. साथ ही बैंक से घटना की लिखित जानकारी और पुलिस में दर्ज शिकायत या FIR की कॉपी मांगे. बैंक के साथ हुई बातचीत और सभी डॉक्युमेंट्स को अपने पास सुरक्षित रखें. बातचीत के दौरान बैंक से लिखित तौर पर पूछें कि किस स्थिति में चोरी हुए और नुकसान की भरपाई के लिए क्या प्रोसेस अपनाई जा रही है.&amp;nbsp;
Old Monk की बोतल में कितने फीसदी Rum होती है? कोर्ट में बड़ा खुलासा
मुआवजा पाने के लिए रखें ये डॉक्युमेंट
सोना जमा करते समय मिले गिरवी रसीद, गोल्ड लोन एग्रीमेंट और गहनों की वैल्यूएशन रिपोर्ट जैसी डॉक्युमेंट को अपने पास संभाल कर रखें. इन डॉक्युमेंट के जरिए यह साबित किया जा सकता है कि बैंक के पास कौन-से गहने जमा किए गए थे और उनका वजन और कीमत कितनी थी. इसके अलावा उन सोने का फोटो और खरीदारी की बिल को भी महफूज रखें.&amp;nbsp;
क्या बैंक को ब्याज समेत पैसा देना होगा?
आमतौर पर चोरी होने मुआवजे की रकम और उस पर ब्याज का फैसला मामले की परिस्थितियों, बैंक की जिम्मेदारी, अनुबंध, बीमा और लागू कानून के मुताबिक तय की जाती है. ऐसे में फिलहाल यह कहना सही नहीं है कि हर मामले में सोना की पूरी कीमत या ब्याज अपने आप मिल जाएगा.&amp;nbsp;
क्या थम गई है सोने की रफ्तार या कीमतों पर लगा मामूली सा ब्रेक, रिपोर्ट में खुलासा
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैंक, से, चोरी, हुआ, गिरवी, सोना, तो, कैसे, मिलेगा, मुआवजा, और, ब्याज</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>7 सितंबर को कितने रुपए लीटर मिल रहा है पेट्रोल&amp;डीजल, जानें अपने शहर तक का ताजा भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/7-सितंबर-को-कितने-रुपए-लीटर-मिल-रहा-है-पेट्रोल-डीजल-जानें-अपने-शहर-तक-का-ताजा-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/7-सितंबर-को-कितने-रुपए-लीटर-मिल-रहा-है-पेट्रोल-डीजल-जानें-अपने-शहर-तक-का-ताजा-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप आज अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. 7 सितंबर 2026 को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, यानी राजधानी दिल्ली में आज भी पेट्रोल और डीजल पुराने दाम पर ही मिल रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपए प्रति लीटर, जबकि डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर है. ऐसे में गाड़ी चलाने वालों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में तेल कंपनियां कीमतों में कोई बदलाव करती हैं या नहीं.
शहर अनुसार पेट्रोल के भाव-&amp;nbsp;



शहर का नाम
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;102.12 रुपए


मुंबई
111.31 रुपए


कोलकाता
113.51 रुपए


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपए


बरेली
102.25 रुपए


पटना
113.35 रुपए


रांची
106.12 रुपए


आगरा
101.90 रुपए


ग्वालियर
114.30 रुपए



बैंक से चोरी हुआ गिरवी सोना तो कैसे मिलेगा मुआवजा और ब्याज?
शहर अनुसार डीजल का भाव-&amp;nbsp;



शहर का नाम
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
95.20 रुपए


मुंबई
97.97 रुपए


कोलकाता
99.82 रुपए


चेन्नई&amp;nbsp;
99.56 रुपए


बरेली
95.46 रुपए


पटना
99.36 रुपए


रांची
100.49 रुपए


आगरा
95.02 रुपए


ग्वालियर
99.35 रुपए



क्यों नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम?
पेट्रोल और डीजल की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपए और डॉलर की विनिमय दर, टैक्स और अन्य लागत शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बदलाव का असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है. हालांकि, किसी दिन कीमत स्थिर रहने का मतलब यह नहीं है कि आगे भी यही रेट बने रहेंगे. तेल कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से कीमतों में बदलाव कर सकती हैं.
कैसे चेक करें पेट्रोल-डीजल का रेट?&amp;nbsp;
अगर आप अपने शहर का पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट जानना चाहते हैं, तो घर से निकलने से पहले ताजा रेट चेक कर सकते हैं. इसके लिए एसएमएस (92249 92249) पर RSP और डीलर कोड लिखकर भेज सकते हैं. बता दें कि अलग-अलग शहरों में स्थानीय टैक्स और अन्य कारणों से पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
Cafe, Wifi और गेमिंग जोन सिर्फ 400 रुपए में, सस्ती बुकिंग से पैसे बचाने का तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सितंबर, को, कितने, रुपए, लीटर, मिल, रहा, है, पेट्रोल-डीजल, जानें, अपने, शहर, तक, का, ताजा, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आज कितनी महंगी हुई रसोई गैस, जानें 14 और 19 किलो LPG सिलेंडर कितने का मिलेगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-कितनी-महंगी-हुई-रसोई-गैस-जानें-14-और-19-किलो-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिलेगा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-कितनी-महंगी-हुई-रसोई-गैस-जानें-14-और-19-किलो-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिलेगा</guid>
        <description><![CDATA[ रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए आज राहत की खबर है. 7 सितंबर 2026 को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है. दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर आज भी 942 रुपए में मिल रहा है.
महीने की शुरुआत में गैस सिलेंडर के दाम में बदलाव होता है या नहीं, इस पर आम लोगों की नजर रहती है. खासकर घर का बजट संभालने वाले परिवारों के लिए रसोई गैस का खर्च हर महीने के जरूरी खर्चों में शामिल होता है. ऐसे में कीमत स्थिर रहने से फिलहाल लोगों को एक्स्ट्रा बोझ नहीं उठाना पड़ेगा.
शहर अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर का दाम-&amp;nbsp;



शहर
घरेलू सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


कोलकाता
968.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


चेन्नई
957.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


बेंगलुरु
944.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


लखनऊ
942.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


नोएडा&amp;nbsp;
942.80 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


वाराणसी
943.10 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम


रांची
999.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम



7 सितंबर को कितने रुपए लीटर मिल रहा है पेट्रोल-डीजल, जानें अपने शहर तक का ताजा भाव
शहर अनुसार, कमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम-&amp;nbsp;



शहर
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
2,747.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
2,701.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता
2,884.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चेन्नई
2,916.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बेंगलुरु
2,831.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


लखनऊ
2755.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


नोएडा&amp;nbsp;
2760.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


वाराणसी
2757.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


रांची
2,933.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम



कमर्शियल सिलेंडर हुआ कितना महंगा?घरेलू गैस सिलेंडर के दाम भले ही स्थिर हैं, लेकिन होटल, रेस्तरां, ढाबे और दूसरे कारोबारी इस्तेमाल के लिए लिए जाने वाले गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपए हो गई है. पिछले महीने यह सिलेंडर 2738 रुपए में मिल रहा था, यानी इसकी कीमत में 9.50 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई है.
कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने का असर होटल और खाने-पीने से जुड़े कारोबार के खर्च पर पड़ सकता है. कारोबारियों के लिए ईंधन की लागत बढ़ने से कुल खर्च भी बढ़ सकता है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, कितनी, महंगी, हुई, रसोई, गैस, जानें, और, किलो, LPG, सिलेंडर, कितने, का, मिलेगा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अमेरिका को पछाड़ने वाला है भारत, 2 साल में बनेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अमेरिका-को-पछाड़ने-वाला-है-भारत-2-साल-में-बनेगा-दुनिया-का-दूसरा-सबसे-बड़ा-मेट्रो-रेल-नेटवर्क</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अमेरिका-को-पछाड़ने-वाला-है-भारत-2-साल-में-बनेगा-दुनिया-का-दूसरा-सबसे-बड़ा-मेट्रो-रेल-नेटवर्क</guid>
        <description><![CDATA[ देश में लगातार नए मेट्रो मार्ग शुरू किए जा रहे हैं और पुराने रास्तों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है. इसी का नतीजा है कि भारत में मेट्रो रेल नेटवर्क की टोटल लंबाई अब 1170 किलोमीटर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;सरकार का अनुमान है कि जिस रफ्तार से देश में मेट्रो रेल का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए अगले दो साल में भारत मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है. ऐसा हुआ तो चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क वाला देश बन जाएगा.&amp;nbsp;
अमेरिका और भारत के बीच कितना अंतर?केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के मुताबिक, अमेरिका में इस समय करीब 1386 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क है. वहीं भारत में इसकी लंबाई 1170 किलोमीटर हो चुकी है.
इस हिसाब से दोनों देशों के बीच करीब 216 किलोमीटर का अंतर बचा है. भारत में जिस तेजी से नए मार्ग बनाए जा रहे हैं, उसे देखते हुए सरकार को उम्मीद है कि ये अंतर अगले दो साल में ही खत्म किया जा सकता है.
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2014 से अबतक कितना बढ़ा मेट्रो नेटवर्क?
भारत में मेट्रो रेल का विस्तार पिछले कुछ सालों में काफी तेजी से हुआ है. साल 2014 में देश के केवल 5 शहरों में करीब 245 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क था. अब मेट्रो रेल का विस्तार 26 शहरों तक हो चुका है और नेटवर्क की टोटल लंबाई 1170 किलोमीटर पहुंच गई है. यानी करीब एक दशक में देश में मेट्रो रेल की पहुंच और लंबाई दोनों में बड़ा इजाफा हुआ है.
कौन सबसे आगे?मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई के मामले में चीन अभी दुनिया में सबसे आगे है. चीन में करीब 8000 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क है. इसके बाद अमेरिका और भारत का नंबर आता है.
भारत का टार्गेट अब सिर्फ बड़े महानगरों तक मेट्रो रेल नेटवर्क देने का नहीं है. देश के कई दूसरे शहरों में भी मेट्रो रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है. नए रास्ते तैयार होने से भारत के मेट्रो नेटवर्क की लंबाई और बढ़ेगी.
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इंदौर में कैसे हैं हालात?मेट्रो रेल के बढ़ते नेटवर्क में मध्य प्रदेश का इंदौर भी शामिल हो गया है. यहां मेट्रो रेल सेवा के नए मार्ग का हाल ही में उद्घाटन किया गया. इसके बाद इंदौर में मेट्रो रेल करीब 17 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हो गया है, जिसमें नए मार्ग में 16 स्टेशन शामिल हैं.&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अमेरिका, को, पछाड़ने, वाला, है, भारत, साल, में, बनेगा, दुनिया, का, दूसरा, सबसे, बड़ा, मेट्रो, रेल, नेटवर्क</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कम से कम 58,000 पेंशन की उम्मीद, कल 8वें वेतन आयोग की एक और बड़ी बैठक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कम-से-कम-58000-पेंशन-की-उम्मीद-कल-8वें-वेतन-आयोग-की-एक-और-बड़ी-बैठक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कम-से-कम-58000-पेंशन-की-उम्मीद-कल-8वें-वेतन-आयोग-की-एक-और-बड़ी-बैठक</guid>
        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग के लिए बातचीत की अगली बैठकें 7 सितंबर को चेन्नई में शुरू हो रही हैं. दो दिनों तक चलने वाली इन बैठकों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित पक्ष वेतन, पेंशन और भत्तों में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे. हाल ही में जयपुर में हुई दो दिवसीय बैठक के बाद चेन्नई की यह बैठक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है.&amp;nbsp;
चेन्नई में किन मुद्दों पर छिड़ेगी बहस?&amp;nbsp;
पिछली बार की तरह इस बार भी बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा सालाना सैलरी इंक्रीमेंट का होगा. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा 3% का इंक्रीमेंट नाकाफी है. ऐसे में अब यूनियनों ने इसे बढ़ाकर 5% से 7% करने की मांग रखी है, जिससे बेसिक सैलरी में इजाफा हो.&amp;nbsp;
कर्मचारी संगठन 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर के मुकाबले 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि मिनिमम बेसिक पे को 18,000 से बढ़ाया जा सके. इस बैठक में पेंशनर संगठनों की ओर से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग के साथ-साथ लेवल 4 से 7 तक के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन दरों को बेहतर करने पर गहन चर्चा होगी. बैठक में लॉजिस्टिक्स से संबंधित उन समस्याओं पर भी चर्चा करेंगे जिनका सामना केंद्र सरकार के कई कर्मचारियों को अपनी पोस्टिंग और ट्रांसफर के दौरान करना पड़ता है.&amp;nbsp;
मिनिमम पेंशन में भी हो बढ़ोतरी
8वें वेतन आयोग के तहत पेंशनर्स के लिए पेंशन अमाउंट में भी बढ़ोतरी की मांग है. उनकी मांग है कि नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद लेवल 7 के कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर 58,000 या उससे भी अधिक की बेसिक पेंशन मिल सके. इकोनॉमिक टाइम्स की हालिया रिपोर्ट और पेंशन कैलकुलेशन के फॉर्मूले के अनुसार, यह आंकड़ा पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार अंतिम रूप से कौन सा फिटमेंट फैक्टर तय करती है और कर्मचारी रिटायरमेंट के समय पे-मैट्रिक्स के किस स्टेज पर है. 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल 7 (ग्रेड पे 4600 रुपये) की शुरुआती बेसिक सैलरी 44,900 से लेकर अधिकतम 1,42,400 रुपये तक होती है.&amp;nbsp;
सितंबर में बैठकों का पूरा शेड्यूल
7-8 सितंबर 2026- चेन्नई में दक्षिण भारत के कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से बातचीत
9 सितंबर 2026- पुडुचेरी में स्थानीय केंद्र शासित प्रदेश के यूनियनों के साथ परामर्श
16-18 सितंबर 2026- चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ के हितधारकों से चर्चा
7-8 अक्टूबर 2026- बेंगलुरु में कर्नाटक क्षेत्र के संगठनों के साथ बैठक

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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कम, से, कम, 58, 000, पेंशन, की, उम्मीद, कल, 8वें, वेतन, आयोग, की, एक, और, बड़ी, बैठक</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सस्ती मिल रही प्याज, इन 17 शहरों में 4000 टन बफर स्टॉक लाई सरकार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ती-मिल-रही-प्याज-इन-17-शहरों-में-4000-टन-बफर-स्टॉक-लाई-सरकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सस्ती-मिल-रही-प्याज-इन-17-शहरों-में-4000-टन-बफर-स्टॉक-लाई-सरकार</guid>
        <description><![CDATA[ प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए अब राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने बाजार में प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अपने बफर स्टॉक से प्याज की रियायती बिक्री शुरू कर दी है. सरकार की ओर से 17 शहरों में अब तक करीब 4,000 टन बफर बेचा जा चुका है. बड़ी बात यह है कि चुनिंदा शहरों में ग्राहकों को प्याज 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
सरकार का कहना है कि इस कदम का असर अब बाजार में भी दिखाई देने लगा है और प्याज की कीमतों में कुछ कमी आई है. ऐसे में आने वाले दिनों में नई खरीफ फसल की अवाक शुरू होने के बाद कीमतों में और राहत मिलनी की उम्मीद है.&amp;nbsp;
सरकार ने कितना प्याज स्टॉक कर रखा है?
केंद्र सरकार ने साल 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार कर रखा है. ऐसे में इस प्याज को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग राज्यों और शहरों में भेजा जा रहा है. सरकार अपनी एजेंसियों NCCF और NAFED स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की सप्लाई कर रही है.
प्याज को उत्पादक राज्यों से बड़े शहरों तक पहुंचाने के लिए ट्रकों के अलावा &#039;कंडा एक्सप्रेस&#039; जैसी स्पेशल ट्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि दिल्ली और चेन्नई तक बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाया जा चुका है. अब गुवाहाटी के लिए भी प्याज भेजने की तैयारी की जा रही है.
कम से कम 58,000 पेंशन की उम्मीद, कल 8वें वेतन आयोग की एक और बड़ी बैठक
35 रुपये किलो में कहां मिल रहा प्याज?
सरकार ने कुछ ऐसे शहरों को चुना है जहां प्याज की कीमतें काफी ज्यादा थी. सरकार की ओर से इन जगहों पर बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर बेचा जा रहा है. NCCF के मुताबिक अब तक करीब 1,500 टन प्याज खुदरा बिक्री के जरिए बेचा जा चुका है.&amp;nbsp;
किन राज्यों में हो रही बफर प्याज की बिक्री?

दिल्ली-एनसीआर
तमिलनाडु
उत्तर प्रदेश
केरल
राजस्थान
पंजाब
ओडिशा

सरकार के कदम से कितनी गिरी प्याज की कीमत?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रियायती बिक्री शुरू होने से पहले 28 अगस्त को प्याज का आखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 48.50 रुपये प्रति किलो था. वहीं 5 सितंबर को यह कीमत बढ़कर करीब 50.79 रुपये प्रति किलो हो गया था. वहीं अलग-अलग शहरों में 5 सितंबर को प्याज के दाम इस तरह रहे हैं.&amp;nbsp;

दिल्ली: 58 रुपये प्रति किलो
मुंबई: 53 रुपये प्रति किलो
चेन्नई: 63 रुपये प्रति किलो
रांची: 40 रुपये प्रति किलो
औसत थोक कीमत: 42.79 रुपये प्रति किलो

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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सस्ती, मिल, रही, प्याज, इन, शहरों, में, 4000, टन, बफर, स्टॉक, लाई, सरकार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>DA Hike: त्योहारों से पहले बरसेगा पैसा, 1 से लागू होगा नया महंगाई भत्ता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-त्योहारों-से-पहले-बरसेगा-पैसा-1-से-लागू-होगा-नया-महंगाई-भत्ता</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-त्योहारों-से-पहले-बरसेगा-पैसा-1-से-लागू-होगा-नया-महंगाई-भत्ता</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप भी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स है, तो यह जानकारी आपके काम की है. हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते को लेकर एक बार फिर बड़ी अपडेट सामने आई है. जुलाई 2026 का AICPI-IW इंडेक्स जारी किया जा चुका है, जिसमें पिछले महीने के मुकाबले 1.3 अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस आंकड़े को देखते हुए अब कर्मचारियों की नजर अगले DA संशोधन पर है. उम्मीद है कि त्योहारों से पहले सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकरी है.&amp;nbsp;
श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में AICPI-IW इंडेक्स 1.3 अंक से बढ़कर 153.2 पर पहुंच गया. वहीं, जुलाई2026 में खुदरा महंगाई की सालाना दर 4.57% हो गई, जबकि एक साल पहले जुलाई 2025 में यह 2.66% थी. ऐसे में आने वाले समय में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर कर्मचारियों की नजर बनी हुई है.&amp;nbsp;
क्या होता है AICPI-IW इंडेक्स?
AICPI-IW यानी ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स हर महीने जारी किया जाता है. इसके जरिए औद्योगिक कर्मचारियों के रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजों और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव का पता लगाया जाता है. हालांकि इस साल की शुरुआती महीनों में भी इंडेक्स में लगातार बढ़ोतरी देखनी को मिली है.
सस्ती मिल रही प्याज, इन 17 शहरों में 4000 टन बफर स्टॉक लाई सरकार

मार्च 2026 में AICPI-IW 149.1 रहा.&amp;nbsp;
अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 149.9 हुआ.
मई में इंडेक्स 150.8 पहुंचा.&amp;nbsp;
जून में यह 151.9 रहा.
जुलाई 2026 में इंडेक्स 153.2 रहा.

यह आंकड़ा देश के 88 प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के 317 बाजारों से जुटाई गई खुदरा दामों के आधार पर तैयार किया जाता है.
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है ये इंडेक्स?
AICPI-IW में होने वाली हलचल पर केंद्रीय कर्मचारी इसलिए नजर रखते हैं क्योंकि इसका असर उनके DA और पेंशनभोगियों के DR पर पड़ता है. 7वें वेतन आयोग के तहत DA में संशोधन 12 महीने के औसत AICPI-IW के आधार पर की जाती है, यानी साल में दो बार किया जाता है. आमतौर पर इसका ऐलान मार्च और अक्टूबर के आसपास होता है.
कितना बढ़ सकता है महंगाई भत्ता (DA)?
AICPI-IW के हालिया आंकड़ों को देखते हुए इस बार कर्मचारियों को DA में करीब 3% से 4% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है. हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है. असल बढ़ोतरी AICPI-IW की बाकी आंकड़ों और केंद्र सरकार की आखिरी मंजूरी के बाद तय होगी.
कम से कम 58,000 पेंशन की उम्मीद, कल 8वें वेतन आयोग की एक और बड़ी बैठक
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hike:, त्योहारों, से, पहले, बरसेगा, पैसा, से, लागू, होगा, नया, महंगाई, भत्ता</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Old Monk की बोतल में कितने फीसदी Rum होती है? कोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/old-monk-की-बोतल-में-कितने-फीसदी-rum-होती-है-कोर्ट-में-बड़ा-खुलासा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/old-monk-की-बोतल-में-कितने-फीसदी-rum-होती-है-कोर्ट-में-बड़ा-खुलासा</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप भी Old Monk की बोतल को Rum समझकर खरीदते हैं, तो इन दिनों इससे जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है. महाराष्ट्र के बॉम्बे हाईकोर्ट में इसकी बिक्री को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान इसके तैयार होने के तरीके को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अदालत में बताया कि जिस प्रॉडएक्ट को Rum के नाम से बेचा जा रहा है, उसमें असली Rum की मात्रा बहुत कम है. यही वजह है कि महाराष्ट्र में इसकी बिक्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ है.&amp;nbsp;
दरअसल, यह मामला Old Monk के निर्माता मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है. कंपनी ने महाराष्ट्र में बिक्री पर रोक लगाने वाले FSSAI के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है. कंपनी के खोपोली प्लांट के निरीक्षण के बाद यह कारवाई की गई थी.&amp;nbsp;
Old Monk में कितनी असली Rum होने का दावा?
FSSAI की ओर से अदालत में यह दावा किया गया कि इसमें करीब 95% एक्स्ट्रा-न्यूट्रल स्पिरिट (ENA) और 5% से कम असली रम है. इसके साथ ही एजेंसी ने बोतल पर लिखे &amp;lsquo;7 साल पुरानी ब्लेंडेड रम&amp;rsquo; जैसे दावे पर भी सवाल उठाया. FSSAI का तर्क है कि न्यूट्रल स्पिरिट में Rum फ्लेवर मिलाकर तैयार किए गए प्रॉडक्ट को सिर्फ &#039;Rum&#039; के तौर पर बेचना नियमों के मुताबिक सही नहीं है.&amp;nbsp;
सस्ती मिल रही प्याज, इन 17 शहरों में 4000 टन बफर स्टॉक लाई सरकार
कंपनी ने कोर्ट में क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपने पैकेजिंग लेबल में बदलाव करने की बात कही. नए लेबल पर &amp;lsquo;Added Flavour&amp;rsquo; को प्रमुखता से दिखाने और &amp;lsquo;7 साल पुरानी ब्लेंडेड रम&amp;rsquo; लेबल को हटाने पर भी सहमति जताई. हालांकि, कंपनी ने गुरुवार को संशोधित लेबल अदालत के सामने भी पेश कर दिए है.&amp;nbsp;
कोर्ट ने Old Monk के पुराने स्टॉक पर क्या कहा?
अदालत ने कहा कि अभी पुराने स्टॉक की बिक्री की इजाजत देना करीब आखिरी राहत देने जैसा होगा. ऐसे में अगर कोर्ट यह तय करता है कि बिक्री की इजाजत नहीं दी जाती है, तो स्थिति मुश्किल हो सकती है. वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 8 सितंबर तक टाल दी है.
DA Hike: त्योहारों से पहले बरसेगा पैसा, 1 से लागू होगा नया महंगाई भत्ता
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Old, Monk, की, बोतल, में, कितने, फीसदी, Rum, होती, है, कोर्ट, में, बड़ा, खुलासा</media:keywords>
    </item>
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        <title>क्या थम गई है सोने की रफ्तार या कीमतों पर लगा मामूली सा ब्रेक, रिपोर्ट में खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-थम-गई-है-सोने-की-रफ्तार-या-कीमतों-पर-लगा-मामूली-सा-ब्रेक-रिपोर्ट-में-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ सोने की कीमतों में हाल के दिनों में भले ही उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गोल्ड का बुल रन खत्म हो गया. गोल्डमैन सैक्स से जुड़े टोनी किम के मुताबिक, फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण फिलहाल गोल्ड की डिमांड में कमी आई है. हालांकि, आने वाले समय में इसमें फिर तेजी लौट सकती है.
इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी को मानी जा रही है. ऐसे में मौजूदा दबाव को स्थायी गिरावट मानना जल्दबाजी होगी. टोनी किम का कहना है कि एक बार बाजार में अनिश्चितता कम होने के बाद गोल्ड में फिर से तेज उछाल देखनी को मिल सकता है.&amp;nbsp;
किस भाव पर सोने में निवेश का मौका?
टोनी किम के मुताबिक, अगर सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस (Dollar Per Ounce) तक आती है, तो निवेशकों के लिए खरीदारी का बेहतर मौका बन सकता है. भारतीय मुद्रा में यह कीमत करीब 1.34 लाख रुपये प्रति औंस के आसपास बैठती है. फिलहाल इस समय गोल्ड का रेट करीब 4,479 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है.
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सोने की तेजी पर क्यों लगा है ब्रेक?
जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में कुछ कमजोरी देखने को मिली है. टोनी किम के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इसे लेकर बाजार में काफी अनिश्चितता बनी हुई है. इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी ने बाजार पर भी काफी दबाव डाला है. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर में मजबूती आने से भी सोने पर असर पड़ा है.
1 सितंबर को सोने की कीमत में करीब 2% की गिरावट देखने को मिली थी. इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर में मजबूती आने से भी सोने पर असर पड़ा है. वहीं स्पॉट गोल्ड का रेट करीब 2.4% से गिरकर 4242.20 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एंटीलिया में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण भजनों पर झूम उठीं नीता अंबानी संग बहुएं</title>
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        <description><![CDATA[ बिजनसमैन मुकेश अंबानी का परिवार अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के साथ-साथ त्योहारों को पारंपरिक अंदाज में मनाने के लिए भी मशहूर है. हर साल की तरह इस बार भी मुंबई स्थित अपने आलीशान घर एंटीलिया (Antilia) में अंबानी परिवार ने जन्माष्टमी का त्योहार बेहद खास अंदाज में मनाया है. एंटीलिया में हुए इस सेलिब्रेशन की कुछ झलकियां अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें परिवार की महिलाएं भगवान कृष्ण भक्ति में डूबी हुई नजर आ रही हैं.
दरअसल, जन्माष्टमी के इस खास मौके पर नीता अंबानी अपनी बेटी ईशा अंबानी और बहुओं श्लोका मेहता व राधिका मर्चेंट के साथ भक्ति गीतों पर नृत्य करती काफी खूबसूरत अंदाज में दिखाई दे रही है. लेकिन पूजा के लिए तैयार नीता अंबानी हमेशा की तरह अपने खूबसूरत ट्रेडिशनल लुक के कारण लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.&amp;nbsp;
कृष्ण भजनों पर साथ झूमीं अंबानी परिवार की महिलाएं
जन्माष्टमी सेलिब्रेशन के मौके पर अंबानी परिवार की महिलाओं ने कृष्ण भक्ति में काफी रंग जमाया. वहीं वीडियो में नीता अंबानी भगवान कृष्ण की पूजा करती दिखाई दे रही हैं, जबकि ईशा अंबानी, श्लोका मेहता और राधिका मर्चेंट &amp;nbsp;भी भक्ति के रंग में रंगी हुई नजर आई.&amp;nbsp;
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एक्वा-ब्लू बांधनी साड़ी में दिखा नीता अंबानी का रॉयल अंदाज
जन्माष्टमी के इस खास मौके पर नीता अंबानी ने एक्वा-ब्लू रंग की बेहद खूबसूरत बांधनी साड़ी पहनी. साड़ी पर गोल्डन जरी का बारीक वर्क और गुलाबी बॉर्डर इसकी खूबसूरती को और खास बना रहा था. ट्रेडिशनल गुजराती स्टाइल में साड़ी का फ्रंट पल्लू कैरी किया गया था, जिससे उनका पूरा लुक बेहद एलिगेंट नजर आया.&amp;nbsp;
साड़ी के साथ मैचिंग ब्लाउज ने उनके एथनिक लुक को और ज्यादा निखार दिया. ब्लाउज में स्कूप नेकलाइन और हाल्फ स्लीव्स का डिजाइन देखने को मिला. हालांकि नीता अंबानी ने अपने लुक को डायमंड नेकलेस, मैचिंग ईयररिंग्स और मांग टीके से पूरा किया.
फूलों और रोशनी से सजा एंटीलिया
जन्माष्टमी के मौके पर अंबानी परिवार के घर एंटीलिया को भी खास तरीके से सजाया गया. घर के अंदर भगवान कृष्ण की पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की गई. सजावट में फूलों, दीयों और रोशनी का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरा माहौल बेहद भक्तिमय नजर आया.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>RBI ने 5 कंपनियों पर ठोका 27 लाख का जुर्माना, नियम ताक पर रखना पड़ा भारी</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में रेगुलेटरी नियमों का पालन नहीं करने पर 5 कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. केंद्रीय बैंक ने अलग-अलग मामलों में इन कंपनियों पर कुल करीब 45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. हालांकि, इस लिस्ट में ट्रांसयूनियन सिबिल, CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, सम्मान फिनसर्व और हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस शामिल किए गए हैं.&amp;nbsp;
RBI की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अलग-अलग नियमों की अनदेखी पाए जाने के कारण ही यह कारवाई की गई है. इसमें कुछ कंपनियों की ओर से रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने में कुछ खमियां सामने आई थीं, जिसके बाद ही इस पर मौद्रिक जुर्माना के तौर पर लगाया गया.&amp;nbsp;
किस कंपनी पर कितना जुर्माना लगा?
RBI की इस कारवाई में अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग रकम का जुर्माना लगाया है.

ट्रांसयूनियन सिबिल पर 26,82,800 रुपये&amp;nbsp;
CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज पर 6,89,600 रुपये&amp;nbsp;
इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज पर 1,19,400 रुपये
&amp;nbsp;सम्मान फिनसर्व पर 4.20 लाख रुपये&amp;nbsp;
हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस पर 6.20 लाख रुपये

एंटीलिया में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण भजनों पर झूम उठीं नीता अंबानी संग बहुएं
क्रेडिट ब्यूरो पर क्यों हुई RBI की कार्रवाई?
RBI के मुताबिक, ट्रांसयूनियन सिबिल, CRIF हाई मार्क और इक्विफैक्स क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज जैसी ये तीन कंपनियां कुछ शिकायतकर्ताओं को तय समय के भीतर मुआवजा की रकम देने में नाकाम रही थीं. यही वजह है कि RBI ने इन पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है.
बाकी दो कंपनियों से क्या हुई गलती?
RBI का कहना है कि बाकी दो कंपनियां से क्रेडिट रिपोर्टिंग और लोन प्राइसिंग से जुड़े नियमों में चूक हुई थी.
सम्मान फिनसर्व ने अपने एक कर्जदार से जुड़ी क्रेडिट जानकारी को Central Repository of Information on Large Credits (CRILC) में रिपोर्ट नहीं किया था. वहीं, हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस के मामले में माइक्रोफाइनेंस लोन की कीमत तय करने से जुड़ी बोर्ड से मंजूर नीति को सही तरीके से लागू नहीं किया गया था. इसी नियम के उल्लंघन पर कंपनी के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई.
RBI ने जुर्माने को लेकर क्या कहा?
RBI के मुताबिक, यह कारवाई कंपनियों की ओर से रेगुलेटरी नियमों के पालन में मिली खामियों के आधार पर की गई है. हालांकि, इस जुर्माने का मतलब यह नहीं है कि RBI ने कंपनियों और उनके ग्रहकों के बीच हुए किसी लेन-देन या समझौते की वैधता पर कई टिप्पणी की है.&amp;nbsp;
मेड इन इंडिया हथियारों का दुनिया में जलवा! फिर भी क्यों पाकिस्तान से पीछे भारत?
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>घर संभालने के लिए पत्नी को सैलरी, पति के फैसले से इंटरनेट पर तहलका</title>
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        <description><![CDATA[ शादी के बाद घर संभालने की जिम्मेदारी अक्सर परिवार में किसी एक सदस्य, खासकर पत्नी के हिस्से में आती है. ऐसे में घर का खाना बनाना, सफाई करना, घर के सदस्यों की जरूरतों का ध्यान रखना और रोजमर्रा के काम संभालना किसी भी पत्नी के लिए आसान नहीं होता. हालांकि, इन कामों के बदले आमतौर पर कोई तय रकम नहीं मिलती. लेकिन क्या घर संभालने और परिवार की जिम्मेदारियां उठाने वाले काम की भी कोई आर्थिक कीमत होनी चाहिए? इस सवाल पर सोशल मीडिया पर तहलका मच गया है.&amp;nbsp;
पति-पत्नी के रिश्ते में घर के खर्च और पैसों को लेकर अक्सर अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर सामने आई एक अनोखी कहानी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, जिसमें एक पति अपनी हाउसवाइफ को घर संभालने के बदले हर महीने एक तय रकम देता है. बड़ी बात यह है कि वह पैसा पत्नी अपनी मर्जी से खर्च या सेव कर सकती है.&amp;nbsp;
क्या है पूरा वाक्य?
दरअसल, रेडिट पर एक यूजर ने अपने बड़े भाई और भाभी से जुड़ी इस कपल की अनोखी व्यवस्था के बारे में बताया. रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, इस कपल में पति सरकारी अधिकारी हैं, जबकि उनकी पत्नी घर का पूरा काम संभालती हैं. पत्नी खाना बनाने, साफ सफाई और घर के रोजमर्रा के कामों की देखभाल करती हैं, जिसके बदले पति उन्हें हर महीने एक तय रकम देते हैं. वहीं पति किराना, बिजली बिल और के दूसरे जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी अलग से उठाते हैं.
एंटीलिया में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण भजनों पर झूम उठीं नीता अंबानी संग बहुएं
घर के काम को दी आर्थिक मान्यता
यूजर ने बताया कि उनके भाई का मानना है कि घर संभालना भी काफी मेहनत वाला काम है. अगर इन्हीं जिम्मेदारियों के लिए बाहर से किसी कूक, सफाईकर्मी या हाउस मैनेजर रखा जाए, तो परिवार को इसके लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे. ऐसे में पत्नी द्वारा किए जाने वाले कामों को सिर्फ इसलिए बिना मूल्य का नहीं माना जानया चाहिए कि वह घर के अंदर किया जा रहा है.
इसलिए पत्नी को मिलने वाला यह रकम पूरी तरह उनका अपना होता है. वह इसे अपनी जरूरतों के मुताबिक खर्च कर सकती हैं, बचा सकती हैं या अपने माता-पिता को मदद के लिए भेज दसकती हैं. इसके लिए उन्हें पति से इजाजत लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
रेडिट पर लोगों ने क्या कहा?
इस पोस्ट के सामने के बाद कई यूजर्स ने इस व्यवस्था का समर्थन किया. कुछ लोगों का कहना है कि हाउसवाइफ के पास भी अपनी जरूरतों के स्वतंत्र रकम होना बेहद जरूरी है. वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि घरेलू काम को अक्सर इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि इसके बदले सीधे सैलरी नहीं मिलती.
RBI ने 5 कंपनियों पर ठोका 27 लाख का जुर्माना, नियम ताक पर रखना पड़ा भारी
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM&amp;SYM Scheme: रोज लगाएं 2 रुपये से भी कम, 60 साल बाद हर महीने ₹3000 की गारंटी!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-sym-scheme-रोज-लगाएं-2-रुपये-से-भी-कम-60-साल-बाद-हर-महीने-3000-की-गारंटी</link>
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        <description><![CDATA[ सरकार की कई ऐसी स्कीम्स हैं, जो मुख्य रूप से देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है. आज हम आपको एक ऐसी ही स्कीम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मात्र 55 रुपये के निवेश से हर महीने 3000 रुपये की गारंटीड पेंशन देगी. यहां प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) की बात की जा रही है. मोदी सरकार की यह योजना फरवरी 2019 &amp;nbsp;में शुरू की गई थी.&amp;nbsp;
किनके लिए है यह स्कीम?
असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे कि रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, मजदूर, घरों में काम करने वाले (मेड/बाई), कृषि मजदूर जैसे पेशे से जुड़े हुए लोग इस स्कीम के तहत शामिल हो सकते हैं. बशर्तें उनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो और महीने की कुल कमाई 15,000 या उससे कम हो. इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आवेदक टैक्सपेयर न हो और ना ही पहले से EPFO, ESIC या NPS जैसी किसी अन्य सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना का सदस्य हो.&amp;nbsp;
सरकार भी देती है 50% योगदान
स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 50% योगदान सरकार की तरफ से दी जाती है. यानी कि यह एक &#039;मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन&#039; (1:1) स्कीम है. मतलब जितनी रकम आपके बैंक खाते से कटेगी, ठीक उतनी ही राशि भारत सरकार भी अपनी तरफ से आपके पेंशन खाते में जमा करेगी.
यानी कि अगर आप 55 रुपये देते हैं, तो सरकार भी 55 रुपये देगी.इस तरह से कुल जमा रकम 110 प्रति माह हो जाएगी. उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम भी बढ़ती जाती है और सरकार का अंशदान भी उस हिसाब से बना रहता है.&amp;nbsp;
कैसे करेंगे आवेदन?
आप अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर या आधिकारिक Shram Yogi Maandhan Portal पर खुद को ऑनलाइन रजिस्टर कर सकते हैं. इसके लिए सिर्फ आधार कार्ड और बचत बैंक खाता/जनधन खाता (जिससे हर महीने ऑटो-डेबिट हो सके) की आवश्यकता होती है. बता दें कि जुलाई 2026 तक स्कीम के तहत रजिस्टर्ड लाभार्थियों की संख्या 54 लाख के पार हो चुकी है. देश भर में इसके करीब 4 लाख सेंटर्स का एक नेटवर्क है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>मार्केट में मचेगा तहलका! आ रहा 30000 करोड़ का मेगा IPO, पैसे तैयार हैं ना?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मार्केट-में-मचेगा-तहलका-आ-रहा-30000-करोड़-का-मेगा-ipo-पैसे-तैयार-हैं-ना</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/मार्केट-में-मचेगा-तहलका-आ-रहा-30000-करोड़-का-मेगा-ipo-पैसे-तैयार-हैं-ना</guid>
        <description><![CDATA[ देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को आईपीओ लाने के लिए सेबी से हरी झंडी मिल गई है. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है. बताया जा रहा है कि कंपनी 15 सितंबर को प्राइस बैंड का ऐलान कर सकती है. हालांकि, सेबी के अप्रूवल के बाद ग्रे मार्केट में इसकी बड़ी डिमांड को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी इसका प्राइस बैंड लगभग 1,800 रुपये प्रति शेयर या उससे ज्यादा भी तय कर सकती है.&amp;nbsp;
NSE के इस मेगा आईपीओ का साइज 30000 करोड़ रुपये के करीब होगा. एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. यानी कि आईपीओ के जरिए कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं कर रही है और कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा. इसमें मौजूदा शेयरधारक करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे. ओएफएस होने की वजह से इससे जुटाई गई राशि एनएसई को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी. मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से न्यूजएजेंसी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एनएसई के आईपीओ के 15 सिंतबर को लॉन्च होने और 24-25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है.&amp;nbsp;
कांटे की होगी टक्कर
NSE का यह 30,000 करोड़ का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है. अक्टूबर 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ आया था, जो 27,858.75 करोड़ रुपये का था.
एनएसई (NSE) का आईपीओ करीब 30,000 करोड़ का होने के कारण हुंडई के इस रिकॉर्ड को आसानी से तोड़ देगा. हालांकि, इसकी असली टक्कर मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स से होगी. जियो के आईपीओ का साइज करीब 37,700 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.&amp;nbsp;
एक दशक का इंतजार खत्म
करीब एक दशक की नियामकीय अड़चनों के बाद आने वाला यह आईपीओ एनएसई को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है. सूत्रों के अनुसार, करीब 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से एनएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है.
एनएसई ने इस साल 17 जून को सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स जमा कराए थे. इसके अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य प्रमुख संस्थागत निवेशक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आगामी आईपीओ के तहत ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं, जिसमें एसबीआई 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा. इस बीच, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपनी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से एक भी शेयर नहीं बेचने का निर्णय लिया है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मार्केट, में, मचेगा, तहलका, आ, रहा, 30000, करोड़, का, मेगा, IPO, पैसे, तैयार, हैं, ना</media:keywords>
    </item>
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        <title>8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, हर महीने 15,800 तक HRA!</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग के तहत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. कर्मचारियों द्वारा नए फिटमेंट फैक्टर और X श्रेणी के शहरों के लिए HRA को 30% से बढ़ाकर 40% करने का प्रस्ताव रखा गया है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने के बाद लेवल 5 के कर्मचारियों को हर महीने 15,768 (लगभग 15,800) रुपये तक बंपर &amp;nbsp;HRA (मकान किराया भत्ता) मिल सकता है.&amp;nbsp;
क्या होता है HRA?
HRA या House Rent Allowance) सैलरी का एक हिस्सा है, जो कंपनी अपने कर्मचारियों को उनके रहने या मकान के किराए के खर्च को पूरा करने के लिए देती है. अगर आप किराए के मकान में रहते हैं, तो एचआरए न सिर्फ आपकी जेब का खर्च कम करता है, बल्कि इसके तहत आपको इनकम टैक्स में भी बड़ी छूट मिलती है. अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनते हैं, तो इनकम टैक्स की धारा 10(13A) के तहत आप अपने एचआरए पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं.
7वें वेतन आयोग में कितना मिल रहा HRA?
सातवें वेतन आयोग में लेवल 5 के एक कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन 29,200 रुपये पर 30% की दर से वर्तमान में 8,760 रुपये प्रति माह HRA मिल रहा है. सरकारी नियमों के मुताबिक, जब महंगाई भत्ता (DA) 50% के पार हो जाता है, तब X-कैटेगरी के शहरों के लिए HRA की दर बढ़कर 30% हो जाती है. चूंकि वर्तमान में DA 50% से ऊपर चल रहा है इसलिए लेवल 5 के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन (29,200 रुपये) का 30% यानी पूरा 8,760 हर महीने केवल मकान के किराए के लिए सरकार से मिल रहा है.
अब कर्मचारी संगठन नए वेतन आयोग में इस बेसिक पे (29,200 रुपये) को बढ़ाकर करीब 61,320 रुपये करने की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि HRA की दर को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया जाए. अगर ऐसा होता है, तो यही 8,760 रुपये का भत्ता बढ़कर सीधे 24,528 रुपये हो जाएगा.
HRA को कैसे करते हैं कैलकुलेट?
सरकार और अधिकांश प्राइवेट कंपनियां शहरों को तीन कैटेगरी में बांटकर HRA तय करती हैं:-
X श्रेणी (महानगर - जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु): यहां रहने का खर्च सबसे ज्यादा होता है इसलिए यहां बेसिक सैलरी का सबसे अधिक प्रतिशत (जैसे वर्तमान में सरकारी नियमों में 30%) एचआरए के रूप में मिलता है.
Y श्रेणी (टियर-2 शहर - जैसे लखनऊ, जयपुर, पटना)- यहां मिडियम खर्च होता है इसलिए यहां बेसिक का 20% एचआरए मिलता है.
Z श्रेणी (छोटे शहर या ग्रामीण इलाके)- यहां सबसे कम (बेसिक का 10%) एचआरए दिया जाता है.

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>67 से टूटकर ₹50 पर आई चीनी, पर आपको क्यों नहीं मिल रही सस्ती? जानें खेल</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी को परेशान कर रखा है. ऐसे में लोगों को इंतजार है कि जल्द से जल्द चीनी के रेट गिर जाए. दाम गिरे भी हैं, लेकिन सिर्फ 2 से 3 रुपये. &amp;nbsp;उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव पिछले हफ्ते के 65.08 रुपये से घटकर केवल 62.57 प्रति किलो पर आया है. हैरान करने वाली बात यह है कि चीनी के थोक रेट 17 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं.
आम आदमी को नहीं राहत?
यह सच है कि मिल स्तर (Ex-mill) पर चीनी के दामों में 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट आई है. इसके बावजूद गली-मोहल्ले में परचून की दुकानों पर आम आदमी को सिर्फ 2 से 3 रुपये कम रेट पर चीनी की बिक्री की जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मिलों में चीनी का दाम 67 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर से टूटकर 47 से 55 रुपये प्रति किलो के दायरे में आ चुका है, लेकिन देश का औसत खुदरा भाव अभी भी 62.57 प्रति किलो के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) और NFCSF के अनुसार, मिल और रिटेल के बीच अधिकतम 7 से 8 रुपये का ही अंतर होना चाहिए, लेकिन फिर भी आम आदमी को राहत नहीं है.
क्यों सस्ती नहीं हो रही चीनी?
रिटेल स्तर पर चीनी की कीमतें इसलिए कम नहीं हो रही हैं क्योंकि थोक (Wholesalers) और खुदरा दुकानदारों के पास पहले से वह स्टॉक पड़ा हुआ है, जिसे उन्होंने अगस्त के मध्य में 65 से 67 रुपये प्रति किलो के ऊंचे रेट पर खरीदा था. आमतौर पर एक किराना दुकानदार या छोटा रिटेलर एक बार में चीनी की 10 से 15 बोरियां खरीद कर रखता है.
अब चूंकि उन्होंने यह पुराना स्टॉक 65 से 67 रुपये प्रति किलो के पिछले ऊंचे रेट पर खरीदा था. अब कोई भी दुकानदार अपना नुकसान करके सामान तो बेचेगा नहीं इसलिए &amp;nbsp;वे पुराना महंगा स्टॉक खत्म होने तक कीमतें कम नहीं कर रहे हैं.&amp;nbsp;
चीनी मिलों ने भी साफ कर दिया है कि एक्स-मिल (Ex-mill) रेट गिरने का असर थोक मंडियों पर तुरंत दिखता है, लेकिन उस सस्ते माल को आपके नजदीकी किराना स्टोर तक पहुंचने और खुदरा कीमतों में पूरी तरह बदलाव दिखने में कम से कम 7 से 10 दिन का समय लगता है.

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मेड इन इंडिया हथियारों का दुनिया में जलवा! फिर भी क्यों पाकिस्तान से पीछे भारत?</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया भर में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट संकट और दक्षिण चीन सागर में तनातनी) और आधुनिक तकनीक (जैसे AI, ड्रोन्स और साइबर सुरक्षा को अपनी सेना में शामिल करने की दुनिया में देशों में होड़ सी मची हुई है. सभी चाहते हैं कि मिलिट्री पावर में उनका नंबर पहले स्थान पर हो. यही वजह है कि &amp;nbsp;दुनिया भर की सरकारें अपने रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर रही हैं और इसी के चलते डिफेंस मार्केट तेजी से बड़ा होता जा रहा है.&amp;nbsp;
ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट की बात करें, तो 138 अरब डॉलर (USD 138 Billion) के आंकड़े को पार कर चुका है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की संभावनाएं हैं. स्वीडन के थिंक टैंक SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की हाल ही में एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि वैश्विक रक्षा निर्यात के मामले में भारत का स्थान पाकिस्तान के पीछे है. जहां भारत 0.2% हिस्सेदारी के साथ 27वें स्थान पर है.वहीं, पाकिस्तान 0.4% हिस्सेदारी के साथ 21वें स्थान पर है. यह आंकड़ा भले ही हैरान कर देने वाला है, लेकिन यह सच है.&amp;nbsp;
क्यों पाकिस्तान भारत से है आगे?
डिफेंस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान के भारत से आगे रहने की सबसे बड़ी वजह चीन है. सबसे पहली बात तो पाकिस्तान खुद कोई हथियार नहीं बनाता है, बल्कि वह चीन के साथ मिलकर JF-17 थंडर फाइटर जेट को असेंबल करने का काम करता है. फिर इन्हें &amp;nbsp;म्यांमार, नाइजीरिया या अजरबैजान जैसे देशों को बेच देता है. यह आंकड़ा पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपोर्ट के खाते में जुड़ जाता है. इसी तरह से अफ्रीका और कई कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों कम कीमत वाले चीनी हथियारों को प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान से हथियार मंगाते हैं, जिससे उनका एक्सपोर्ट वॉल्यूम बढ़ता जाता है. वहीं, भारत का पूरा ध्यान निर्यात पर नहीं, बल्कि अपने देश की सेना को मजबूत करने पर रहा है. यही वजह है कि भारत दशकों तक दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा है.
महाशक्ति बनने की राह पर भारत
बेशक, ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में 0.2% है, लेकिन भारत ने इस साल 38,424 करोड़ (4.6 बिलियन डॉलर) का अपना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया है. ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस और आर्टिलरी गन्स के जरिए भारत डिफेंस एक्सपोर्ट में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हासिल करना है.
मौजूदा समय में दुनिया के 80 से अधिक देश भारत से रक्षा उपकरण खरीद रहे हैं. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के लिए हाल ही में फिलीपींस ने भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील की है. इंडोनेशिया के साथ भी 3,800 करोड़ (440 मिलियन डॉलर) का बड़ा सौदा एडवांस्ड स्टेज पर है. भारत के आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की अर्मेनिया सहित कई अफ्रीकी देशों में भी जबरदस्त मांग है.
अर्मेनिया भारत से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर का भी बड़ा खरीदार है. भारत से रक्षा साजोसामान खरीदने वाले देशों में अमेरिका और फ्रांस भी शामिल हैं, जो भारत से बड़े पैमाने पर विमानों के पुर्जे, फ्यूजलेज, मिश्र धातु (Alloys) इलेक्ट्रॉनिक सब-सिस्टम, रक्षा से जुड़े हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण और सॉफ्टवेयर कंपोनेंट्स खरीदते हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>छोटे शहरों में घर का सपना अब आसान, लोन के लिए बैंकों ने खोला खजाना</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के छोटे शहरों में सबसे ज्यादा होम लोन लिए जाते हैं, यहां पर लोग सबसे ज्यादा घर भी बना रहे हैं. ये बढ़ती हुई मांग देश में होम लोन का कारोबार बढ़ा रही है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि SGA PR की रिपोर्टमें ये बात सामने आई है.
हाउसिंग फाइनेंस इन इंडिया- द साइलेंट जाइंट ऑफ रिटेल क्रेडिट के मुताबिक, देश में होम लोन के करीब 64% वॉल्यूम टियर-II और टियर-III शहरों से आ रहे हैं. इन शहरों में 2025 के दौरान होम लोन की मांग एक साल पहले के मुकाबले 81% बढ़ी. छोटे शहरों में बढ़ती आय, बेहतर सड़क और दूसरी सुविधाएं, रोजगार के नए मौके और तेजी से हो रहा शहरीकरण लोगों को अपना घर खरीदने के लिए इंस्पायर कर रहे हैं.
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मेट्रो सिटी के मुकाबले आसान है घर खरीदनाबड़े शहरों में पिछले कुछ सालों में घरों की कीमतें काफी बढ़ी हैं. इससे आम परिवारों की आय और घर की कीमत के बीच अंतर बढ़ गया है. इसके मुकाबले छोटे शहरों और कस्बों में घर अपेक्षाकृत सस्ते मिल जाते हैं. इसलिए पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए छोटे शहर तेजी से पसंदीदा बन रहे हैं.
हालांकि, छोटे शहरों में बैंकों और वित्तीय कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं. यहां कई कस्टमर्स ऐसे होते हैं जो स्वरोजगार वाले होते हैं या उनकी आय का रिकॉर्ड सामान्य नौकरीपेशा लोगों जैसा नहीं होता. ऐसे ग्राहकों की लोन चुकाने की क्षमता चेक करना केवल सैलरी स्लिप देखने से संभव नहीं होता.
डिजिटल हो रहा होम लोनहोम लोन लेने की प्रक्रिया भी तेजी से डिजिटल हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में करीब 60% हाउसिंग फाइनेंस एप्लीकेशन डिजिटल तरीके से प्रोसेस किए जाते थे. 2024 तक ये आंकड़ा बढ़कर करीब 92% हो गया. अब ग्राहक घर बैठे लोन देने वाली कंपनियों की जानकारी ले सकते हैं, अपनी पात्रता चेक कर सकते हैं, दस्तावेज जमा कर सकते हैं और लोन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इससे छोटे शहरों के ग्राहकों को भी कई लेंडर्स तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है.
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छोटे शहर सबसे बड़ी ताकतदेखा जाए तो भारत का होम लोन बाजार केवल ब्रांच से एप की ओर नहीं बढ़ रहा है. आने वाले समय में डिजिटल तकनीक के साथ इंसानी मदद भी जरूरी रहेगी. खासकर प्रॉपर्टी की जांच, स्वरोजगार वाले ग्राहकों और छोटे शहरों के स्थानीय बाजार को समझने में इंसानों की भूमिका भी जरूरी होगी. ऐसे में भारत के छोटे शहर आने वाले वर्षों में होम लोन कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>अमेरिकी इतिहास में सबसे महंगा हुआ डीजल, रोजमर्रा की चीजों के भी बढ़े दाम</title>
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        <description><![CDATA[ इस समय केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में महंगाई तेजी से बढ़ रही है. जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहा है. अमेरिका में भी लगातार महंगाई बढ़ रही है, हाल ही में डीजल की कीमतों में यहां भयंकर इजाफा हुआ है. इसने कई सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं. फिलहाल अमेरिका में डीजल की कीमत 5.85 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है. डीजल महंगा होने से अब रोजमर्रा के सामानों समेत कई और भी चीजें महंगी हो जाएंगी.
युद्ध से पहले नहीं था इतना महंगाएसोसिएटेड प्रेस यानी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और यूएस का जब युद्ध शुरू हुआ था उससे पहले फरवरी के आखिर में अमेरिका में डीजल की औसत कीमत करीब 3.76 डॉलर प्रति गैलन थी. अब ये बढ़कर 5.85 डॉलर हो गई है. वहीं कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. युद्ध से पहले इसकी कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी.
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महंगे डीजल से बढ़ेगी महंगाईडीजल की कीमत बढ़ने से केवल आना-जाना की महंगा नहीं होगा बल्कि इससे अन्य चीजें भी महंगी होंगीय साफ शब्दों में कहें तो महंगाई लगातार बढ़ेगी. ये चीजें हो सकती हैं महंगी:

खाने- पीने और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला सामान महंगा होगा.
ताजा फल, सब्जियां, समुद्री भोजन और मांस जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों पर असर.
महंगे डीजल का असर डिलीवरी कंपनियों पर भी पड़ रहा है.
कपड़े, कॉस्मैटिक और फर्नीचर भी हो सकते हैं महंगे.

क्यों बढ़े डीजल के दाम?बता दें कि डीजल की कीमत बढ़ने की बड़ी वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध बताया जा रहा है. इस युद्ध के कारण दुनिया में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमत बढ़ी है. डीजल ट्रकों, ट्रेनों, जहाजों और खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के लिए बेहद जरूरी है. इसलिए डीजल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत भी बढ़ जाती है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>लोगों की खुजली मिटाकर हर महीने 14 लाख रुपए कमा रहा ये शख्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/लोगों-की-खुजली-मिटाकर-हर-महीने-14-लाख-रुपए-कमा-रहा-ये-शख्स</link>
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        <description><![CDATA[ चीन कितने अनोखे कारनामे करता है ये तो हम सभी जानते ही हैं. चीन के प्रोडक्ट्स को दुनियाभर में बहुत पसंद किया जाता है. चीन बिजनेस से जुड़े भी कई अनोखे आईडियाज लाता रहता है. जैसे हाल ही में एक नया बिजनेस आईडिया यहां से आया है. चीन के एक शख्स ने नया बिजनेस आईडिया लोगों को दिया है. ये बिजनेस है लोगों की खुजली मिटाने का बिजनेस. नहीं समझे? आइये बताते हैं क्या ह पूरी माजरा.
क्या है ये बिजनेस?दरअसल चीन के शेनझेन शहर के रहने वाले 32 साल के झांग शियाओचियाओ, यहां के लोगों से पैसे लेकर उनकी पीठ और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खुजाने की सर्विस देते हैं. उनका दावा है कि उनके दो आउटलेट से उन्हें हर महीने करीब 1 लाख युआन यानी लगभग 14 लाख रुपये की कमाई हो रही है. ये खबर सुनकर हर कोई हैरान रह गया है, क्योंकि अब तक तो हर कोई खुजली करने के लिए अपने पार्टनर या परिवार का सहारा लेता था.
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कैसे आया आईडिया?इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, झांग को इस बिजनेस का आइडिया पिछले साल सोशल मीडिया के जरिए ही आया था. उन्होंने एक वीडियो देखा था, जिसमें एक महिला अपने पति की पीठ खुजा रही थी. वीडियो के कमेंट्स में कुछ लोगों ने कहा कि वो भी किसी को पैसे देकर अपनी पीठ खुजवाना पसंद करेंगे. ये देखकर झांग के दिमाग में सवाल आया कि क्या पीठ खुजाने जैसे साधारण काम को भी एक प्रोफेशनल सर्विस बनाया जा सकता है.
कितनी होती है कमाई?ये बिजनेस झांग ने Suma नाम से शुरू किया है. इसका पहला आउटलेट शेनझेन के बाओआन इलाके में मई की शुरुआत में खुला. इसके करीब एक महीने बाद फुतियान इलाके में दूसरा आउटलेट शुरू किया गया. यहां एक घंटे की सर्विस की कीमत करीब 300 युआन यानी लगभग 4,200 रुपये है. यहां पर आकर ग्राहक आराम से बेड पर लेटते हैं और प्रशिक्षित कर्मचारी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में धीरे-धीरे खुजाते हैं.
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नुकीले नेल्स का लिया जाता है सहाराइसके लिए Suma के कर्मचारियों को नुकीले नेल्स दिए गए हैं, जिन्हें खासतौर से बनवाया जाता है. ग्राहक खुद बता सकते हैं कि शरीर के किस हिस्से पर ज्यादा ध्यान दिया जाए. इस सर्विस को आराम और तनाव कम करने के तरीके के तौर पर देखा जाता है. कुछ ग्राहकों का कहना है कि इससे उन्हें अच्छी और सुकूनभरी नींद भी आती है.
आगे है 100 स्टोर खोलने का प्लानझांग का कहना है कि उनके दोनों स्टोर अपनी लागत निकालने लगे हैं और अब मुनाफा कमा रहे हैं. अब उनका प्लान है कि इस बिजनेस को पूरे चीन में फैलाया जाए. झांग आने वाले समय में 100 खुजाने वाले स्टोर खोलना चाहते हैं. उनका लक्ष्य है कि ये सर्विस सिर्फ एक अजीब या अनोखा आइडिया बनकर न रह जाए, बल्कि लोगों के लिए आराम और तनाव कम करने की एक नियमित सर्विस बन जाए.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
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        <description><![CDATA[ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने पेमेंट कंपनियों पर Re-KYC के लिए सख्ती बढ़ा दी है. अब इसको लेकर पेमेंट कंपनियों ने आरबीआई से मांग की है कि उन्हें 15 सितंबर तक का समय दिया जाए. क्योंकि छोटे दुकानदारों की Re-KYC में काफी दिक्कत आ रही है. ऐसे में इन कंपनियों ने RBI से थोड़ा समय मांगा है.
मुश्किल हो रहा कंपनियों का काममनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियों के सामने हजारों छोटे और अनौपचारिक कारोबारियों का KYC पूरा करने का काम अभी बाकी है. पेटीएम, फोन पे और गूगल पे जैसी कंपनियां छोटे शहरों और गांवों में QR कोड और साउंडबॉक्स के जरिए पेमेंट लेने वाले दुकानदारों का दोबारा KYC कर रही हैं. लेकिन नए और सख्त KYC नियमों के साथ फिजिकल वेरिफिकेशन की जरूरत ने कंपनियों के लिए काम मुश्किल कर दिया है.
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दस्तावेजों की कमीरिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया से प्रभावित ज्यादातर कारोबारी छोटे दुकानदार और अनौपचारिक व्यवसाय चलाने वाले लोग हैं. इनमें से कई के पास KYC के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं. हालांकि इन कारोबारियों से होने वाले पेमेंट का कुल हिस्सा बहुत बड़ा नहीं है, फिर भी वो छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल पेमेंट और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
80% Re-KYC पूरा होने की उम्मीदज्यादातर पेमेंट कंपनियों को उम्मीद है कि वो 15 सितंबर तक करीब 80% Re-KYC का काम पूरा कर लेंगे. लेकिन बाकी कारोबारियों का KYC पूरा करना चुनौती बना हुआ है. इसकी एक बड़ी वजह ये है कि RBI के नियमों के अनुसार फिजिकल KYC पेमेंट कंपनियों के अपने कर्मचारियों को ही करना होगा. ये काम थर्ड-पार्टी एजेंसियों के कर्मचारियों से नहीं कराया जा सकता. जिस वजह से पिछले एक साल में उन्हें अपने कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाना पड़ी.
क्यों जरूरी है KYC?बता दें कि RBI के KYC नियमों का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि वित्तीय संस्थानों के पास ग्राहकों की सही पहचान और पता मौजूद हो. इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है. हालांकि कंपनियों को इन नियमों का पालन करने के लिए समय दिया गया था, लेकिन लाखों कारोबारियों का दोबारा KYC करने का काम काफी बड़ा है. इसी वजह से पेमेंट कंपनियां और समय की मांग कर रही हैं.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बंद, होंगे, छोटे, दुकानदारों, के, पेमेंट, RBI, किस, मामले, पर, है, सख्त</media:keywords>
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    <item>
        <title>Petrol&amp; Diesel Price Today: जारी हुए पेट्रोल&amp;डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-जारी-हुए-पेट्रोल-डीजल-के-नए-रेट-जानें-आपके-शहर-में-कितना-है-भाव</link>
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        <description><![CDATA[ पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ें या घटें, इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है. पेट्रोल महंगा होने से बाइक और कार चलाने का खर्च बढ़ता है, वहीं डीजल के दाम में बदलाव का असर सामान ढोने से लेकर रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है. यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के रेट में होने वाला हर छोटा-बड़ा बदलाव लोगों के लिए चर्चा का विषय बन जाता है. ऐसे में आज के पेट्रोल और डीजल के ताजा रेट क्या हैं और इनमें कितना बदलाव हुआ है, आइए जानते हैं.
शहर अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम-



शहर के नाम
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपए
95.20 रुपए


मुंबई
111.31 रुपए
97.97 रुपए


कोलकाता
113.51 रुपए
99.82 रुपए


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपए
99.56 रुपए


हैदराबाद
115.69 रुपए
103.82 रुपए


पटना
113.35 रुपए
99.36 रुपए


पोर्ट ब्लेयर
88.66 रुपए
84.56 रुपए


रायपुर
108.30 रुपए
101.32 रुपए


उदयपुर
112.95 रुपए
98.50 रुपए



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घर पर कैसे चेक करें ईंधन के दाम?&amp;nbsp;
घर बैठे पेट्रोल और डीजल के दाम इंडियन ऑयल की आधिकारिक वेबसाइट या एसएमएस के जरिए आसानी से चेक किए जा सकते हैं. अगर आप इंडियन ऑयल के ग्राहक हैं तो अपने फोन के मैसेज बॉक्स में RSP लिखकर स्पेस दें और अपने शहर और पेट्रोल पंप का डीलर कोड टाइप करके 9224992249 पर भेजें. वहीं, अगर आप भारत पेट्रोलियम के ग्राहक हैं तो RSP लिखकर स्पेस दें और डीलर कोड टाइप करके 9223112222 पर भेजें और हिंदूस्तान पेट्रोलियम के ग्राहक हैं तो HPPRICE लिखकर स्पेस दें. इसके बाद डीलर कोड टाइप करके 9222201122 पर भेजें.&amp;nbsp;
सबसे सस्ता पेट्रोल कहां मिलता है?
पेट्रोल की कीमतों की बात करें तो 4 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश में पेट्रोल करीब 99.69 रुपए प्रति लीटर है. अलग-अलग राज्यों में टैक्स और दूसरे स्थानीय शुल्क के कारण पेट्रोल के दाम अलग रहते हैं.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-, Diesel, Price, Today:, जारी, हुए, पेट्रोल-डीजल, के, नए, रेट, जानें, आपके, शहर, में, कितना, है, भाव</media:keywords>
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        <title>रसोई गैस के दाम में क्या हुआ बदलाव? जानिए 4 सितंबर का नया LPG रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रसोई-गैस-के-दाम-में-क्या-हुआ-बदलाव-जानिए-4-सितंबर-का-नया-lpg-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ रसोई गैस यानी LPG की कीमत में होने वाला बदलाव सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालता है. घर का मासिक बजट हो या होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार का खर्च, LPG की कीमत बढ़ने या घटने से लागत में फर्क पड़ता है. हर महीने LPG सिलेंडर के दाम पर लोगों की नजर रहती है. कीमत में बदलाव होने पर सबसे पहले घरेलू बजट प्रभावित होता है. अगर सिलेंडर महंगा होता है तो परिवार को रसोई के खर्च के लिए ज्यादा पैसे रखने पड़ते हैं. वहीं, कीमत कम होने पर कुछ राहत मिलती है. यहां से आप घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट के बारे में जान सकते हैं.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, एलपीजी के भाव-



शहर का नाम
घरेलू एलपीजी की कीमत
कमर्शियल एलपीजी की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2747.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,701.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता
968.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,882.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चेन्नई&amp;nbsp;
957.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,915.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बेंगलुरु
944.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,8230.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


पटना
1,031.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
3,027.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


देहरादून
961.00 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,800.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


भोपाल
947.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,752.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चंडीगढ़
951.50 रुपए प्रति 14.2 किलोग्राम
2,769.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम



जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव
एलपीजी के रेट से किसपर पड़ता है असर?
LPG की कीमत सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और कई छोटे कारोबार में खाना बनाने के लिए LPG का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है. ऐसे में गैस महंगी होने पर कारोबार की लागत बढ़ सकती है. बढ़ी हुई लागत का असर कई बार खाने-पीने की चीजों की कीमत पर भी दिखाई देता है. कारोबारियों के लिए LPG का रेट इसलिए अहम है, क्योंकि ईंधन का खर्च उनकी कुल लागत का एक हिस्सा होता है.
सरकार की जेट फ्यूल स्कीम से कंपनियों ने फेरा मुंह, फ्लाइट टिकट पर बड़ी खबर ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रसोई, गैस, के, दाम, में, क्या, हुआ, बदलाव, जानिए, सितंबर, का, नया, LPG, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Chairman’s Club की रसोई सील, 40 किलो एक्सपायरी मिर्च और कॉकरोच मिले</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chairmans-club-की-रसोई-सील-40-किलो-एक्सपायरी-मिर्च-और-कॉकरोच-मिले</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/chairmans-club-की-रसोई-सील-40-किलो-एक्सपायरी-मिर्च-और-कॉकरोच-मिले</guid>
        <description><![CDATA[ बेंगलुरु के सहकारनगर स्थित डॉलर्स कॉलोनी में चेयरमैन्स क्लब की रसोई पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी गंभीर खामियां मिलने के बाद विभाग ने क्लब की रसोई को सील कर दिया गया है. ये कार्रवाई स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने की. खाद्य सुरक्षा टीम ने गुरुवार रात क्लब में रसोई और खाद्य सामग्री के स्टोरेज एरिया की जांच की.&amp;nbsp;
क्या- क्या मिली खामियां?
निरीक्षण के दौरान रसोई में करीब 40 किलो एक्सपायरी मिर्च स्टोर मिली है. टीम ने एक्सपायरी खाद्य सामग्री को मौके पर ही जब्त कर लिया. इसके अलावा करीब 5 किलो ब्रेड क्रम्ब्स और 2 किलो शाही जीरा पर FSSAI के तय मानकों के मुताबिक जरूरी लेबलिंग नहीं मिली है. अधिकारियों के मुताबिक, रसोई में खाद्य पदार्थों को रखने और संभालने के तरीके में भी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था. खाना पकाने और स्टोरेज वाले हिस्से में गंदगी पाई गई.
जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव
कॉकरोच और रंग की मिलावट
जांच के दौरान रसोई में कॉकरोच भी मिले हैं. इसके अलावा खाने में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ ऐसे कैमिकल वाले रंग भी मिले, जिन्हें इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं थी. इसके अलावा शाकाहारी और मांसाहारी खाने के सामान को अलग रखने के बजाय एक साथ रखा गया था. खाद्य सुरक्षा के लिहाज से कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को सही तरीके से स्टोर करना जरूरी होता है. खासकर शाकाहारी और मांसाहारी सामग्री को अलग रखना क्रॉस-कंटैमिनेशन यानी एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में संक्रमण का खतरा कम करने के लिए जरूरी है.
&amp;nbsp;क्या हुई कार्रवाई?
इन सभी खामियों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने क्लब की रसोई को सील कर दिया है. अधिकारियों ने बताया कि मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
रसोई गैस के दाम में क्या हुआ बदलाव? जानिए 4 सितंबर का नया LPG रेट
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Chairman’s, Club, की, रसोई, सील, किलो, एक्सपायरी, मिर्च, और, कॉकरोच, मिले</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>SBI की UPI सर्विस आज रहेगी बंद, जानें कितनी देर नहीं कर पाएंगे लेनदेन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sbi-की-upi-सर्विस-आज-रहेगी-बंद-जानें-कितनी-देर-नहीं-कर-पाएंगे-लेनदेन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/sbi-की-upi-सर्विस-आज-रहेगी-बंद-जानें-कितनी-देर-नहीं-कर-पाएंगे-लेनदेन</guid>
        <description><![CDATA[ अगर आप पैसे भेजने, ऑनलाइन खरीदारी या किसी बिल का पेमेंट करने के लिए SBI की UPI सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक की UPI सर्विस 4 सितंबर को कुछ समय के लिए नहीं चलेगा. बैंक ने ग्राहकों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी है.
SBI के मुताबिक, ये रुकावट किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं बल्कि तय तकनीकी रखरखाव के कारण होने वाली है. बैंक समय-समय पर अपने डिजिटल सिस्टम का मेंटेनेंस करता है, ताकि सेवाओं को और सुरक्षित बनाया जा सके.&amp;nbsp;
कितनी देर नहीं चलेगा यूपीआई?
SBI की ओर से जारी जानकारी के अनुसार UPI सर्विस को 45 मिनट के लिए रोका जाएगा. SBI अलर्ट में बताया गया है कि मेंटेनेंस विंडो 4 सितंबर को रात 12:15 बजे से 1:00 बजे तक है. हालांकि, कुछ रिपोर्टों में 12:30 बजे से 1:15 बजे तक की विंडो भी बताई गई है. इस दौरान SBI की यूपीआई सर्विस से पेमेंट नहीं हो पाएगा, इसलिए अगर कोई जरूरी पेमेंट करना है तो उसे इस समय से पहले कर लेना चाहिए.
Chairman&amp;rsquo;s Club की रसोई सील, 40 किलो एक्सपायरी मिर्च और कॉकरोच मिले
कैसे होगा काम?
मेंटेनेंस के दौरान छोटे पेमेंट के लिए ग्राहक UPI Lite का इस्तेमाल कर सकते हैं. SBI ने भी ग्राहकों को UPI Lite का ऑप्शन इस्तेमाल करने की सलाह दी है. UPI Lite से छोटे मोटे पेमेंट किए जा सकते हैं और हर पेमेंट के लिए लाइट में तो UPI PIN डालने की भी जरूरत नहीं होती है. SBI की जानकारी के मुताबिक UPI Lite से एक ट्रांजैक्शन में 1000 रुपए तक का पेमेंट किया जा सकता है, जबकि UPI Lite बैलेंस की अधिकतम सीमा 5000 रुपए होती है.&amp;nbsp;
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
अगर आपको रात में किसी को पैसे भेजने हैं या कोई जरूरी ऑनलाइन पेमेंट करना है, तो बेहतर होगा कि आप उसे मेंटेनेंस शुरू होने से पहले पूरा कर लें. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या किसी दूसरे पेमेंट ऑप्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
रसोई गैस के दाम में क्या हुआ बदलाव? जानिए 4 सितंबर का नया LPG रेट
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, की, UPI, सर्विस, आज, रहेगी, बंद, जानें, कितनी, देर, नहीं, कर, पाएंगे, लेनदेन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>BRICS मेहमानों की थाली तक पहुंचने वाले खाने पर FSSAI की पैनी नजर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/brics-मेहमानों-की-थाली-तक-पहुंचने-वाले-खाने-पर-fssai-की-पैनी-नजर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/brics-मेहमानों-की-थाली-तक-पहुंचने-वाले-खाने-पर-fssai-की-पैनी-नजर</guid>
        <description><![CDATA[ 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले 18वें BRICS समिट से पहले खाने की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है. विदेशी मेहमानों की प्लेट तक खाना पहुंचने से पहले उसकी पूरी कहानी जांची जा रही है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने देश के बड़े 5-स्टार होटलों को साफ हिदायत दी है कि खाने की सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सूत्रों के मुताबिक FSSAI ने इन होटलों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की जिसमें जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया गया. यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी. इसमें होटलों के मौजूदा नियम-पालन, साफ-सफाई के पैमाने, रसोई में अपनाए जा रहे सुरक्षा तरीकों और खाने की कुल गुणवत्ता की समीक्षा की गई.&amp;nbsp;
होटलों की तरफ से कहा गया कि वे नियमों का पूरा पालन कर रहे हैं और उनकी अपनी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है लेकिन FSSAI ने साफ कर दिया कि जांच में जो भी कमी मिलेगी उस पर सीधी कार्रवाई होगी.
रैंडम इंस्पेक्शन बढ़ाए गए
समिट नजदीक आते ही FSSAI ने 5-स्टार होटलों में अचानक की जाने वाली जांच काफी बढ़ा दी है. बिना पहले से बताए टीमें रसोई में पहुंच रही हैं और वहां साफ-सफाई, कीट नियंत्रण यानी पेस्ट कंट्रोल, कच्चे माल की स्टोरेज और सबसे अहम एक्सपायर हो चुके सामान की जांच कर रही हैं.
बीते हफ्ते एरोसिटी के दो होटलों में क्या मिला
यह सख्ती अचानक नहीं आई है. कुछ दिन पहले ही FSSAI की टीम ने दिल्ली के एरोसिटी इलाके के दो बड़े होटलों जेडब्ल्यू मैरियट और होटल अंदाज की रसोई की जांच की थी. रिपोर्ट के मुताबिक वहां बदबू, कॉकरोच और मक्खियों जैसी शिकायतें दर्ज की गईं.
जांच में कुछ ब्रेड के पैकेट ऐसे मिले जिन पर एक्सपायरी के स्टिकर लगे थे. कन्फेक्शनरी सेक्शन में करीब 87 किलो एक्सपायर हो चुकी मिठाइयां मिलीं जिन्हें मौके पर ही नष्ट करा दिया गया.&amp;nbsp;पेस्ट्री सेक्शन में एक्सपायर केक बेस के साथ-साथ मक्खियां और कॉकरोच भी पाए गए. यह जांच करीब दो दिन चली और इस दौरान कुल 59 कमियां दर्ज की गईं.
समिट में कौन-कौन आ रहा है?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक 18वां BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होगा. इसमें BRICS के सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के तौर पर बुलाए गए देशों के नेता शामिल होंगे. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और यह चौथी बार है जब भारत को यह जिम्मेदारी मिली है.
इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भारत अध्यक्ष रह चुका है. इस साल भारत की अध्यक्षता की थीम है रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण.
जन्माष्टमी पर शेयर बाजार खुलेगा या बंद रहेगा? ट्रेडिंग पर आया बड़ा अपडेट
क्यों अहम है यह सख्ती
जब इतने बड़े स्तर पर विदेशी नेता, अधिकारी और कारोबारी प्रतिनिधि दिल्ली आते हैं तो होटल सिर्फ ठहरने की जगह नहीं रह जाते. वे पूरे आयोजन की मेहमाननवाजी का हिस्सा बन जाते हैं.
ऐसे में खाने से जुड़ी एक छोटी सी चूक भी बड़ी बात बन सकती है. यही वजह है कि FSSAI का संदेश सीधा है कि होटल की 5-स्टार पहचान का मतलब यह नहीं कि खाने की सुरक्षा अपने आप 5-स्टार मान ली जाए.
समिट तक FSSAI की टीमें दिल्ली और आसपास के बड़े होटलों में जांच जारी रखेंगी. जिन होटलों में कमियां मिली हैं उनसे जवाब मांगा गया है और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
मेहनत का बंपर इनाम, ये दिग्गज कंपनी कर्मचारियों पर लुटाएगी 948 करोड़ रुपए
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BRICS, मेहमानों, की, थाली, तक, पहुंचने, वाले, खाने, पर, FSSAI, की, पैनी, नजर</media:keywords>
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        <title>भुजिया खाते हैं? उसका सच उड़ा देगा होश, FSSAI ने मारा छापा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भुजिया-खाते-हैं-उसका-सच-उड़ा-देगा-होश-fssai-ने-मारा-छापा</link>
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        <description><![CDATA[ जो भुजिया आप चाय के साथ शौक से खाते हैं वह किस चीज से बन रहा था यह जानकर हैरानी हो सकती है. अजमेर के रूपनगढ़ में वाई वाई नूडल्स बनाने वाली कंपनी सीजी फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की फैक्ट्री में जांच के दौरान FSSAI को कई गड़बड़ियां मिलीं. जांच में सामने आया कि फर्श पर गिरे और टूटे हुए नूडल्स को उठाकर दोबारा भुजिया बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा था.
इन नूडल्स को दोबारा गर्म भी नहीं किया जा रहा था. FSSAI ने कार्रवाई करते हुए 32,107.2 किलो से ज्यादा स्टॉक जब्त किया और कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी.
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बिना लाइसेंस बन रहे थे दो भुजिया प्रोडक्ट
जांच में पता चला कि फैक्ट्री में Wai Wai Mama और Wai Wai Mama Punte नाम के भुजिया प्रोडक्ट बिना जरूरी लाइसेंस के बनाए जा रहे थे.
फर्श पर गिरे नूडल्स दोबारा क्यों इस्तेमाल हुए?
जांच टीम के मुताबिक फर्श पर गिरे टूटे नूडल्स को इकट्ठा कर उन्हें दोबारा भुजिया बनाने में लगाया जा रहा था.&amp;nbsp;खास बात यह थी कि इन नूडल्स को दोबारा हीट ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा था. फर्श के संपर्क में आने के बाद किसी खाद्य सामग्री को इस तरह दोबारा इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है.
पैकेट पर पहले की तारीख डालने का आरोप
फैक्ट्री में पैकेजिंग को लेकर भी गड़बड़ी मिली. जांच टीम के मुताबिक पैकेट पर पहले की तारीख डाली जा रही थी यानी पैकेज पर दिखाई जाने वाली तारीख और वास्तविक उत्पादन की तारीख को लेकर सवाल उठे हैं.
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32 हजार किलो से ज्यादा स्टॉक जब्त
FSSAI ने मौके से कुल 32,107.2 किलो स्टॉक जब्त किया. इसमें खुले में रखे टूटे हुए नूडल्स भी शामिल थे. इसके अलावा 1,925 डिब्बे एक्सपायर्ड तैयार माल भी रोका गया.
तेल और नूडल्स के सैंपल लैब भेजे
जांच के दौरान कई सैंपल लिए गए और उन्हें लैब भेजा गया है. इनमें खुले टूटे नूडल्स, दोनों भुजिया प्रोडक्ट, तलने वाली लाइन से लिया गया इस्तेमाल किया हुआ तेल और Wai Wai Ready-to-Eat Noodles शामिल हैं. लैब रिपोर्ट के बाद ही यह साफ होगा कि इन प्रोडक्ट्स में किसी तरह की खाद्य सुरक्षा संबंधी कमी पाई गई या नहीं.
साफ-सफाई और रिकॉर्ड में भी खामियां
जांच में फैक्ट्री की साफ-सफाई और रिकॉर्ड को लेकर भी कमियां सामने आईं. पेस्ट कंट्रोल के रिकॉर्ड पूरे नहीं थे. इसके अलावा हाइजीन और फूड सेफ्टी से जुड़ी अन्य खामियां भी दर्ज की गईं.
क्या है सीजी फूड्स?
सीजी फूड्स इंडिया &amp;nbsp;नेपाल के चौधरी ग्रुप की कंपनी है. Wai Wai ब्रांड की शुरुआत 1984 में काठमांडू से हुई थी और बाद में यह भारत आया. कंपनी नूडल्स के अलावा भुजिया और दूसरे स्नैक्स भी बनाती है.
FSSAI ने फूड बिजनेस ऑपरेटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. जांच में लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. इस मामले पर कंपनी की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>निजी बाइक को टैक्सी बनाने का रास्ता होगा साफ? गडकरी ने बताया बंपर कमाई का फॉर्मूला</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को &#039;सुरक्षा&#039; नामक पायलट प्रोग्राम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने सभी राज्य सरकारों से अपील की, कि वो अपने राज्य में बाइक टैक्सी को चलाने की अनुमति दें. ये अनुमति केवल कुछ एप्स या वेबसाइट्स को ही नहीं बल्कि निजी वाहन चालकों को भी मिलनी चाहिए. जिससे देश में रोजगार बढ़ सके.
दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति देने की अपील की है. उनका कहना है कि बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है. इससे देश में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
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निजी वाहनों को मिले मंजूरीगडकरी ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि, &#039;हमने यानी केंद्र सरकार ने निजी दोपहिया वाहनों जैसे स्कूटर और मोटरसाइकिल से यात्रियों को ले जाने की अनुमति दी है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी बाइक टैक्सी को मंजूरी नहीं मिली है. ट्रांसपोर्ट का मामला राज्य का अपना मामला होता है, ऐसे में मैं राज्य सरकारों से अपील करता हूं कि इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करें, जिससे और भी रोजगार के अवसर लोगों को मिल सकें.&#039;
लोगों को मिलेगा रोजगारबता दें कि गडकरी की ये अपील निजी दो पहिया वाहन चालकों के लिए है. जिससे उन्हें रोजगार का साधन प्राप्त हो सके. हालांकि ट्रांसपोर्ट से जुड़े मामले में जरूरी नहीं है कि जो केंद्र सरकार ने किया हो वही राज्य सरकारें भी करें, ये राज्य सरकारों का अपना निजी फैसला होता है. ऐसे में अब देखना होगा कि नितिन गडकरी की बात कौन से राज्य मानेंगे. गौरतलब है कि बाइक टैक्सी को फिलहाल कुछ राज्यों में मंजूरी मिली हुई है लेकिन सभी के अपने- अपने अलग नियम हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>बिहार को मिला 25000 करोड़ रुपए का कर्ज, कहां&amp;कहां होगा खर्च?</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार में रहने या फिर बिजनेस करने वालों के लिए एक खास खबर है. आने वाले समय में हो सकता है कि आपको बिहार में कई सारे बदलाव देखने को मिले, क्योंकि सरकार बिहार में उद्योगों और इंडस्ट्रीयल पार्क को बढ़ावा देने की तरफ जरूरी कदम उठा रही है.&amp;nbsp;
इन विकास कार्यों के लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी. ऐसे में सरकार को इन कामों के लिए फंडिंग की जरूरत पड़ेगी, तो अब जानते हैं कि आखिर बिहार को 25 हजार करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग कौन देगा और इस पैसे को कहां खर्च किया जाने वाला है?
किसने दिए बिहार को 25 हजार करोड़?

सरकार ने सरकारी कंपनी Housing and Urban Development Corporation Limited (HUDOC) के साथ एक डील की है.
राज्य में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए 25000 करोड़ रुपये तक की फाइनेंसिंग उपलब्ध कराई जा सकती है.
यह फंडिंग आगे चलकर बिहार में रहने वालों और बिजनेस करने वालों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.

कहां खर्च किया जाएगा पैसा?
इस पैसे को कई सारे जरूरी विकास कार्य में खर्च किए जाएंगे जैसे...

इन पैसों से जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
साथ ही कंपनियों के लिए बिजनेस करना आसान होगा.
वहीं उद्योगों के लिए जमीन खरीदी भी जाएगी.
इसके अलावा राज्य में इंडस्ट्रियल पार्क बनाएं जाएंगे.

निजी बाइक को टैक्सी बनाने का रास्ता होगा साफ? गडकरी ने बताया बंपर कमाई का फॉर्मूला
बिहार में रहने वालों को क्या होगा फायदा?

इससे सबसे जरूरी रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं.
साथ ही स्थानीय बिजनेस भी बढ़ सकता है.
इसके अलावा राज्य में अगर इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे तो बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा.
इसके अलावा बिजली, सड़क और दूसरी सुविधाएं भी पहले से ज्यादा बेहतर हो सकती हैं.
वहीं नई कंपनियां और फैक्ट्रियां राज्य में आ सकती है, जिससे भी लोगों को कमाई का जरिया मिल सकता है.

कब दिए जाएंगे पैसे?

HUDOC से मिलने वाले पैसे एक साथ न देकर जरूरत के हिसाब से थोड़े-थोड़े दिए जाएंगे.
वहीं HUDOC 25000 करोड़ का लोन दे सकती है और इस लोन को चुकाने के लिए 25 साल का समय भी दिया जा सकता है.

भुजिया खाते हैं? उसका सच उड़ा देगा होश, FSSAI ने मारा छापा
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अंबानी के एंटीलिया से भी महंगा है भारत के इस बिजनेसमैन का घर, कितने हजार करोड़ है कीमत?</title>
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        <description><![CDATA[ मुंबई में कई आलीशान घर हैं, लेकिन कुछ की कीमत इतनी ज्यादा है कि उनके बारे में जानकर हैरानी होती है. ऐसा ही एक घर है रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया का जेके हाउस. मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर बनी ये करीब 30 मंजिला रिहायशी इमारत अपनी कीमत और शानदार सर्विस के लिए जानी जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घर की अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये है.
गौतम सिंघानिया के जेके हाउस की तुलना अक्सर मुकेश अंबानी के मशहूर घर एंटीलिया से की जाती है. एंटीलिया की अनुमानित कीमत करीब 5,000 करोड़ रुपये है. वहीं जेके हाउस की कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई जाती है. यानी अनुमानित कीमत के हिसाब से सिंघानिया का घर एंटीलिया से करीब 1,000 करोड़ रुपये ज्यादा महंगा है.
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घर में ही नेचर का एहसास
जेके हाउस की खासियत सिर्फ इसकी कीमत नहीं है. करीब 145 मीटर ऊंची इस इमारत में आलीशान प्राइवेट जगहें बनाई गई हैं. इसकी ऊपरी मंजिलों पर बगीचे और हरियाली भी होने की बात कही जाती है. इसका मकसद इतनी ऊंची इमारत में भी घर के अंदर नेचर का एहसास बनाए रखना है. 30 मंजिल की ये इमारत मुंबई की खास रिहायशी इमारतों में शामिल है.
गाड़ियों का शानदार कलेक्शन
गौतम सिंघानिया को महंगी गाड़ियों का भी शौक बताया जाता है. उनके कार कलेक्शन में लैंबॉर्गिनी गैलार्डो एलपी570 सुपरलेगेरा, लोटस एलिस कन्वर्टिबल, निसान स्काईलाइन जीटीआर, फेरारी 458 इटालिया और ऑडी क्यू7 जैसे मॉडल शामिल होने की बात कही जाती है. इससे उनके लग्जरी लाइफस्टाइल का अंदाजा लगाया जा सकता है.
मुंबई का बेहद खास इलाका
अल्टामाउंट रोड मुंबई के सबसे महंगे और जाने माने इलाकों में से एक है. इसी इलाके में स्थित जेके हाउस अपनी ऊंचाई, बड़ी कीमत, निजी सुविधाओं और शानदार लोकेशन की वजह से लंबे समय से चर्चा में रहा है. इसकी करीब 6,000 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत इसे भारत के सबसे महंगे निजी घरों में शामिल करती है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>GDP विवाद पर केंद्र की दो टूक, आंकड़े मजबूत, हेरफेर के आरोप बेबुनियाद</title>
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        <description><![CDATA[ 31 अगस्त को मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम (MoSPI) ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि भारत की अर्थव्यवस्था के आंकड़े पेश किए थे. जिसमें सामने आया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था यानी GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. जिसे देख कई लोग हैरान हो गए तो वहीं कई लोगों ने इस पर सवाल भी खड़े किए. विपक्ष से लेकर आम जनता तक ने इन आंकड़ों पर आपत्ति जताई. जिसके बाद खुद सरकार ने दो दिन बाद ही इन लोगों को जवाब दिया है.
सरकार की दो टूकदरअसल हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों पर उठे विवाद और आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से सफाई पेश करते हुए बताया गया है कि चालू वर्ष की वृद्धि दर को बेहतर दिखाने के लिए पिछले साल के आंकड़ों में कोई कटौती नहीं की गई है.
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क्यों बदले GDP के आंकड़े?वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के GDP आंकड़े कम होने को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने कहा कि आंकड़े जानबूझकर कम नहीं किए गए हैं. नए आधार वर्ष 2022-23, अपडेटेड डाटा और नई इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) सीरीज शामिल होने के कारण पुराने आंकड़ों में बदलाव हुआ है. इसलिए पुरानी और नई GDP सीरीज की सीधे तुलना करना सही नहीं होगा.
मैन्युफैक्चरिंग में नेगेटिव डिफ्लेटर क्यों?मैन्युफैक्चरिंग में इनपुट यानी कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ग्रोथ 9.2% और नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही. इसी वजह से डिफ्लेटर -1.5% दिखा. इसका मतलब ये नहीं है कि प्रोडक्ट्स की कीमतें गिर गई हैं.
CPI, WPI और GDP डिफ्लेटर अलग क्यों?इस रिपोर्ट के अनुसार, तीनों महंगाई के अलग-अलग पहलुओं को मापते हैं. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) लोगों के घरेलू खर्च, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) थोक कीमतों और GDP डिफ्लेटर पूरी अर्थव्यवस्था में कीमतों के बदलाव को दिखाता है. इसलिए इनके आंकड़ों में अंतर होना साधारण बात है.
माइनिंग में बड़ा अंतरमाइनिंग का उत्पादन घटा, लेकिन कच्चे तेल, गैस और धातुओं की कीमतें ग्लोबली काफी बढ़ी है. इसलिए रियल GVA -2.4%, जबकि नॉमिनल GVA 22.3% रहा. वहीं GDP के उत्पादन और खर्च से निकाले गए आंकड़ों में अंतर को स्टेटिस्टिकल डिस्क्रीपेंसी कहा जाता है. शुरुआती आंकड़ों में ये सामान्य है और बाद में कम हो सकता है.
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क्यों उठी थी GDP के आंकड़ों पर आपत्ति?बता दें कि फरवरी से ईरान और यूएस के बीच युद्ध चल रहा है, जिसके बाद से लगातार रोजमर्रा के सामनों के साथ ही हर तरफ से महंगाई बढ़ ही रही है. चाहे पेट्रोल- डीजल के दाम हों या सोना- चांदी की कीमत हो सबकुछ इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि लोगों को लग रहा था इतनी महंगाई में देश की अर्थव्यवस्था कैसे बढ़ सकती है. क्योंकि युद्ध और महंगाई को देखते हुए उम्मीद यही थी कि देश की जीडीपी लगातार गिर रही होगी, हालांकि आंकड़े कुछ और ही सामने आए जिनको देख हर कोई हैरान रह गया.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बदल गए ATM से पैसे निकालने के नियम, फ्री लिमिट खत्म होने पर लगेगा चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप केनरा बैंक का ATM कार्ड इस्तेमाल करते हैं, तो अब पैसे निकालने से पहले नए चार्ज जान लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. 1 सितंबर 2026 से बैंक ने ATM ट्रांजैक्शन के कुछ नियम बदल दिए हैं. सेविंग्स अकाउंट वालों की फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट घट गई है, वहीं लिमिट पार करने पर कैश निकालना और पर्याप्त बैलेंस नहीं होने पर फेल हुआ ट्रांजैक्शन पहले से महंगा हो गया है.
केनरा बैंक के सेविंग्स अकाउंट कस्टमर्स को अब एक महीने में कुल 5 फ्री ATM ट्रांजैक्शन मिलेंगे. पहले ये लिमिट 6 ट्रांजैक्शन की थी. इसमें फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं. लेकिन, सीनियर सिटीजन के लिए 8 फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट खत्म होने के बाद केनरा बैंक के एटीएम और कैश रिसाइकलर से किए गए ट्रांजैक्शन पर सर्विस चार्ज लगेगा. लेकिन, कैश जमा करने वाले ट्रांजैक्शन पर ये चार्ज लागू नहीं होंगे. बैंक ने ये भी कहा है कि इन सर्विस चार्ज में समय समय पर बदलाव किया जा सकता है.
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पैसे निकालने पर अब ज्यादा चार्ज
फ्री लिमिट से ज्यादा कैश निकालने पर अब कस्टमर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे देने होंगे. केनरा बैंक के ATM से कैश निकालने का चार्ज 23 रुपये कर दिया है जो पहले 20 रुपये था. इसके अलावा इस पर जीएसटी भी लगेगा. इसमें UPI के जरिए ATM से कैश निकालना भी शामिल है.
अगर अकांउट में पैसे कम होने की वजह से ATM से किया गया ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होता है, तो इसके लिए भी अब ज्यादा पैसे देने होंगे. फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट पार होने के बाद ऐसे ट्रांजैक्शन पर लगने वाला चार्ज 17 से बढ़ाकर 23 कर दिया गया है. इस पर GST अलग से लगेगा. ये चार्ज केनरा बैंक के साथ साथ दूसरे बैंकों के ATM पर किए गए ऐसे ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा.
ग्रीन पिन बनवाने का चार्ज हुआ कम
वहीं, बैंक ने ग्रीन पिन दोबारा बनवाने का चार्ज घटा दिया है. फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद ग्रीन पिन दोबारा बनवाने का चार्ज 23 से कम होकर 5 कर दिया गया है. ये क्लासिक, स्टैंडर्ड, प्लेटिनम, बिजनेस, सलेक्ट और वर्ल्ड कार्ड जैसे कार्ड वेरिएंट पर लागू है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>10 मिनट डिलीवरी वाले ऐप्स पर सख्त नियम, 30 सितंबर तक करना होगा ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ अब घर बैठे खाने पीने का सामान मंगाने वालों के लिए एक जरूरी बदलाव होने जा रहा है. अगर आप 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाले ऐप्स से पैक्ड फूड खरीदते हैं, तो जल्द ही ऑर्डर करने से पहले ही आपको उसकी जरूरी जानकारी दिखाई देगी. FSSAI ने तुरंत डिलीवरी और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए 30 सितंबर 2026 की समय सीमा तय की है.
FSSAI के सीईओ रजित पुनहानी ने एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में बताया कि ई-कॉमर्स और तुरंत डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर सख्ती की तैयारी चल रही है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन खराब या एक्सपायर हो चुके खाने पीने के सामान की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी.
नए नियम के अनुसार कस्टमर को कोई खाने का सामान खरीदने से पहले उसके पैकेट पर दी गई जानकारी और इस्तेमाल की आखिरी तारीख दिखाई देनी चाहिए. यानी कस्टमर को सामान ऑर्डर करने से पहले ही ये पता चल सकेगा कि सामान कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
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ऑनलाइन बिक्री पर भी होगी निगरानी
FSSAI का कहना है कि ऑनलाइन बिकने वाले खाने के सामान की जांच आम दुकानों में बिकने वाले सामान की तरह ही की जाएगी. खाने पीने की लेबलिंग को लेकर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है, क्योंकि कस्टमर्स में जागरूकता बढ़ने के साथ सामान पर दी गई जानकारी की जांच भी ज्यादा हो रही है. कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि उनके सामान के लेबल पर दी गई जानकारी सही हो और वो उस खाने पीने की असली जानकारी को ठीक से बताए.
प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे
रजित पुनहानी ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सिर्फ खुद को एग्रीगेटर बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते. उनकी वेबसाइट या ऐप पर जो खाने का सामान लिस्ट में है या नहीं और बेचे जा रहे हैं, उनकी भी जवाबदेही होगी.
पिछले कुछ महीनों में FSSAI ने खाने और पीने के सामान की कंपनियों पर निगरानी बढ़ाई है. FSSAI के मुताबिक, गलत ad, गलत जानकारी और सामान के लेबल से जुड़े नियम तोड़ने पर बड़ी कंपनियों को 150 से ज्यादा नोटिस दिए गए हैं.
एक साल में 33 हजार से ज्यादा मामले
पिछले एक साल में FSSAI ने करीब 33,000 मामले दर्ज किए और 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया. जुर्माना कम होने की बात पर पुनहानी ने कहा कि छोटी रकम का जुर्माना भी किसी ब्रांड पर असर डाल सकता है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाई होना दिखाता है कि FSSAI की कार्रवाई सही तरीके से काम कर रही है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली मेट्रो में बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, एक कर्मचारी ने 14 घंटे में नापे सारे स्टेशन</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली मेट्रो वैसे तो अपनी सर्विस और कई सारे वायरल वीडियोज को लेकर काफी चर्चा में रहती है. कभी इसमें सफर करने वाले यात्रियों के बीच झगड़ा हो जाता है, तो कभी कोई यात्री इसमें रील बनाता है. लकिन इस बार दिल्ली मेट्रो जिस वजह से चर्चा में आई है ये कुछ और ही है. क्योंकि दिल्ली मेट्रो के एक कर्मचारी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया है.
दरअसल प्रफुल सिंह नाम के इस कर्मचारी ने दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशनों को सबसे कम समय में कवर करने का रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने महज 14 घंटे 54 मिनट और 36 सेकंड में दिल्ली मेट्रो के हर स्टेशन पर जाकर ये सफर पूरा किया.
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तोड़ दिया पुराना रिकॉर्डऐसा कर प्रफुल ने ना केवल नया रिकॉर्ड बनाया बल्कि पिछला गिनी वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. इससे पहले जिसने ये रिकॉर्ड बनाया था उसने 15 घंटे 21 मिनट और 4 सेकंड में ये सफर पूरा किया था. जबकि प्रफुल्ल ने करीब 26 मिनट पहले ही ये सफर पूरा कर लिया.
पहली कोशिश में मिली सीखबिजनेस टुडे के मुताबिक प्रफुल्ल ने इससे पहले साल 2022 में भी कोशिश की थी. उस समय उन्होंने 254 स्टेशन 16 घंटे 2 मिनट 17 सेकंड में पूरे किए थे. लेकिन गलत रूट लेने की वजह से उन्हें करीब 90 मिनट का नुकसान हुआ. इस बार उन्होंने पिछली गलती से सीख लेते हुए रूट और इंटरचेंज की पहले से बेहतर योजना बनाई.
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DMRC में नौकरी का फायदाप्रफुल्ल को दिल्ली मेट्रो सिस्टम की अच्छी जानकारी है क्योंकि वो DMRC में ऑपरेशंस से जुड़े कर्मचारी हैं. उन्हें अलग-अलग रूट, इंटरचेंज, कनेक्शन और मेट्रो के संचालन की जानकारी होने का फायदा मिला है. ऐसे रिकॉर्ड में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है. एक गलत मोड़ या इंटरचेंज में थोड़ी देरी भी पूरा रिकॉर्ड खराब कर सकती है.
मेट्रो स्पीड रनिंग का बढ़ रहा क्रेजमेट्रो के सभी स्टेशनों को कम से कम समय में कवर करने की ऐसी चुनौती को मेट्रो स्पीड रनिंग कहा जाता है. दुनियाभर में मेट्रो के शौकीन लोग बड़े-बड़े शहरों के नेटवर्क के हर स्टेशन तक सबसे कम समय में पहुंचने की कोशिश करते हैं. इसका क्रेज भी इन दिनों लगातार बढ़ता ही जा रहा है. भागती- दौड़ती जिंदगी में हर कोई अपना काम जल्दी जो करना चाहता है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>केंद्रीय कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत, जुलाई DA में 3% बढ़ोतरी तय!</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 में महंगाई भत्ते (DA) में बदलाव पर केंद्र सरकार के फैसले का बेसब्री से इंतजार है. DA में बदलाव साल में दो बार किया जाता है- जनवरी और जुलाई में. इसके लिए 6 महीनों के AICPI-IW को आधार बनाया जाता है. जनवरी में महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का DA/DR 58% से बढ़कर 60% हो गया था. अब सभी की नजरें जुलाई 2026 में होने वाली बढ़ोतरीकी अगली घोषणा पर टिकी हैं, जिसमें 3% की और वृद्धि (60% से बढ़कर 63%) होना लगभग तय माना जा रहा है.
कब तक हो सकता है ऐलान?
केंद्र सरकार आमतौर पर जुलाई साइकिल के DA की घोषणा दशहरे या दिवाली के आसपास करती है. इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को है, इसलिए कैबिनेट द्वारा अक्टूबर के आखिरी हफ्ते या नवंबर की शुरुआत में इस पर मुहर लगाई जा सकती है. राहत की बात यह है कि घोषणा भले ही देरी से हो, लेकिन यह 1 जुलाई 2026 से ही प्रभावी होगी. यानी कि &amp;nbsp;कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बीते महीनों (जुलाई से लेकर घोषणा वाले महीने तक) का पूरा पैसा एकमुश्त एरियर (Arrears) के रूप में मिलेगा.&amp;nbsp;
क्या होता है AICPI-IW?
AICPI-IW का पूरा नाम ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (All-India Consumer Price Index for Industrial Workers). यह डेटा हर महीने के आखिरी कार्यदिवस पर श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour &amp;amp; Employment) के अधीन आने वाले श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी किया जाता है.
इस इंडेक्स की मदद से यह देखा जाता है कि एक निश्चित समयावधि में देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में आवश्यक वस्तुओं (खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, ईंधन आदि) की खुदरा कीमतों (Retail Prices) में कितनी बढ़ोतरी हुई है. अब जब बाजार में महंगाई बढ़ती है, तो यह इंडेक्स भी ऊपर जाता है, जिससे सीधे तौर पर कर्मचारियों का DA बढ़ जाता है.
8वें वेतन आयोग पर क्या है अपडेट?
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. फिलहाल, वेतन आयोग देश भर के तमाम राज्यों का दौरान कर संबंधित सरकारी संस्थाओं, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों से बातचीत करने में जुटा है. इसके बाद आयोग सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगा.
8वें वेतन आयोग की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक कल (1 सितंबर 2026) को जयपुर के HCM RIPA (हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान) में संपन्न हुई. यह बैठक राजस्थान के केंद्र सरकार के कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य हितधारकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी. अब आगामी बैठकें 9 &amp;nbsp;सितंबर को पुडुचेरी, 16-18 सितंबर को चंडीगढ़ और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में होनी है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील से हड़कंप, ज्वेलर्स को क्यों सता रहा बड़ा डर?</title>
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        <description><![CDATA[ PM Modi Appeal on Gold: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना न खरीदने की दूसरी अपील के बाद दिल्ली समेत देशभर के ज्वेलरी कारोबार में चिंता बढ़ गई है. ज्वेलर्स, सुनार, कारीगर और छोटे रिटेल कारोबारियों को आशंका है कि इस अपील से ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित होगी और खासकर आगामी शादी सीजन में गहनों की मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है. कारोबारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का अनुमान है कि देश में सोने की सालाना खपत 700-800 टन से घटकर करीब 500 टन तक पहुंच सकती है.
दूसरी अपील के बाद कारोबारियों की बढ़ी चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी. अब एक बार फिर प्रधानमंत्री की ओर से गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने की अपील किए जाने के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और कंपनियों में चिंता का माहौल है.
दिल्ली और देश के व्यापारियों तथा उद्यमियों के शीर्ष संगठन CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की दोबारा अपील के बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने अपनी चिंता संगठन के सामने रखी है.
800 टन से घटकर 500 टन तक पहुंच सकती है खपत
CTI के मुताबिक भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है. देश में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. संगठन का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद यह खपत घटकर करीब 500 टन तक रह सकती है. कारोबारियों का मानना है कि सोने की खरीद को लेकर इस तरह के सार्वजनिक आह्वान से ग्राहकों के बीच कीमतों को लेकर अनिश्चितता और डर पैदा होता है. इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ सकता है.
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शादी सीजन से पहले ज्वेलरी कारोबार को झटका
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय आई है, जब अक्टूबर-नवंबर में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है और परिवारों ने इसकी खरीदारी अभी से शुरू कर दी है. ऐसे समय में सोने की खरीद को लेकर लोगों के बीच बनी हिचकिचाहट ज्वेलरी की मांग को प्रभावित कर सकती है. कारोबारियों को डर है कि त्योहारी और शादी सीजन से ठीक पहले बिक्री कमजोर पड़ने से ज्वेलरी इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ सकता है.
छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
छोटे ज्वेलर्स, सुनार और कारीगरों की चिंता केवल बिक्री घटने तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि यदि लंबे समय तक सोने की बिक्री प्रभावित रहती है तो कर्मचारियों का वेतन देना मुश्किल हो सकता है और नौकरियों में कटौती तक की नौबत आ सकती है. ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक मई में प्रधानमंत्री की पहली अपील के बाद छोटे मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स का कारोबार 60 प्रतिशत तक गिर चुका है. कारोबारियों को आशंका है कि दूसरी अपील के बाद स्थिति और खराब हो सकती है.
कई दुकानदारों के यहां ग्राहकों का इंतजार
कुछ रिटेलर्स का कहना है कि पिछले 7 से 10 दिनों में उनके यहां एक भी ग्राहक नहीं आया है. ग्राहकों के बीच यह धारणा बन रही है कि आने वाले समय में सोने के दाम नीचे जा सकते हैं. इसी वजह से लोग अंगूठी और झुमके जैसी छोटी खरीदारी तक टाल रहे हैं. कारोबारियों के मुताबिक बिक्री कमजोर होने के कारण कई रिटेल विक्रेताओं ने नया स्टॉक लेना और नए ऑर्डर देना भी रोक दिया है &amp;nbsp;इससे बाजार में मंदी और निराशा का माहौल बनने लगा है.
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कारीगरों के सामने रोजगार का संकट
ज्वेलरी कारोबारियों ने कहा कि पहली अपील के बाद कारोबार प्रभावित होने का असर कारीगरों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ा है. उनका कहना है कि पहले ऐसा कभी सुनने को नहीं मिला कि सोने का कारीगर ई-रिक्शा चलाने या कुलचा-छोले बेचने को मजबूर हुआ हो, लेकिन पहली अपील के बाद ऐसे मामले सामने आए हैं. कारोबारियों को चिंता है कि दूसरी अपील के बाद रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है.
बड़े कॉरपोरेट से ज्यादा छोटे कारोबारियों पर असर
ज्वेलर्स का कहना है कि सोना खरीदने से बचने की अपील का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों और कारीगरों पर पड़ता है, जबकि Titan, Kalyan जैसी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में हैं. कुछ कारोबारियों का सवाल है कि सरकार महंगे मोबाइल फोन और कार खरीदने से बचने की अपील क्यों नहीं करती, क्योंकि इन वस्तुओं की कीमत समय के साथ घटती है. कारोबारियों का तर्क है कि सोना एक तरह की संपत्ति है और कीमत बढ़ने पर खरीदार को फायदा भी हो सकता है.
सोना भारतीय संस्कृति और शादियों से जुड़ा
CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि सोना भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शादियों में इसे अनिवार्य रूप से देखा जाता है. ऐसे में सोने की खरीदारी को लेकर बनी मौजूदा स्थिति ज्वेलरी कारोबार के साथ आम लोगों के लिए भी चुनौतीपूर्ण समय है.
बड़े ब्रांड्स के शेयरों पर भी असर का अनुमान
CTI का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील का असर शेयर बाजार में सूचीबद्ध प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है. संगठन के मुताबिक Titan, Senco Gold और Kalyan Jewellers जैसी कंपनियों के शेयरों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है.
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री की दूसरी अपील को ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका बताया है. उनके मुताबिक कारोबार को बनाए रखने के लिए ज्वेलरी उद्योग को अब अपनी व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई रणनीतियां तैयार करनी होंगी. कारोबारियों के मुताबिक त्योहारी और शादी सीजन के ठीक पहले बिक्री में गिरावट, ग्राहकों की कम आवाजाही और नए स्टॉक से दूरी ने उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. छोटे ज्वेलर्स, सर्राफा कारोबारी और कारीगरों को सबसे ज्यादा दबाव रोजगार और कारोबार पर पड़ने की आ ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोदी, की, सोना, न, खरीदने, की, अपील, से, हड़कंप, ज्वेलर्स, को, क्यों, सता, रहा, बड़ा, डर</media:keywords>
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        <title>Apple से CEO जॉन टर्नस को कितनी पगार मिलेगी? Salary के ब्रेक डाउन का खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/apple-से-ceo-जॉन-टर्नस-को-कितनी-पगार-मिलेगी-salary-के-ब्रेक-डाउन-का-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ जॉन टर्नस ने 1 सितंबर से Apple के सीईओ का पद संभाला है. करीब 15 साल के बाद एप्पल कंपनी में सीईओ की पोजिशन बदली है. टिम कुक के बाद जॉन की ज्वाइनिंग ने लोगों का ध्यान उनकी तरफ खींचा है. अब लोग जानना चाहते हैं कि आखिर एप्पल के सीईओ को कितने पैसे मिलते हैं? जॉन टर्नस की मंथली सैलरी कितनी है और टिम कुक से जॉन टर्नस को कितना ज्यादा पैसा बढ़ाकर दिया जा रहा है. यहां इन सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं.&amp;nbsp;
कौन हैं CEO जॉन टर्नस?अगर आपको लगता है कि जॉन टर्नस ने इस साल एप्प्ल को ज्वाइन किया है तो आप गलत है. जॉन पिछले 25 साल से एप्प्ल में काम कर रहे हैं. उन्होंने साल 2001 में प्रोडक्ट डिजाइन टीम में एप्पल ज्वाइन क्या था. 2013 में वो हार्डवेयर इंजीनियरिंग का वाइस प्रेसिडेंट बने और कुछ ही साल बाद, यानी साल 2021 में वो सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बन गए.&amp;nbsp;
PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील से हड़कंप, ज्वेलर्स को क्यों सता रहा बड़ा डर?
जॉन टर्नस को मिलेगी कितनी सैलरी?मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉन टर्नस को 58 मिलियन डॉलर का पैकेज मिला है. इसमें 3 मिलियन डॉलर यानी 28.5 करोड़ की सिर्फ बेसिक सैलरी है और अगले साल के लिए 55 मिलियन डॉलर यानी 522 करोड़ के टारगेट स्टॉक अवॉर्ड्स भी हैं. इतना ही नहीं, जॉन के पैकेज में वन टाइम 2.5 मिलियन डॉलर का RSU ग्रांट भी शामिल है.&amp;nbsp;
टिक कुक को कितनी सैलरी मिलती थी?इधर टिम कुक के कमाई की बात करें तो इन्होंने सीईओ रहते हुए पिछले साल 74.3 मिलियन डॉलर की कमाई की है. टिम कुक की सैलरी भी कुछ कम नहीं थी. टिम 47 मिलियन डॉलर के पैकेज पर एप्पल के सीईओ थे. इस पैकेज में 2 मिलियन डॉलर की सलाना बेसिक सैलरी थी और साल 2027 के लिए 45 मिलियन डॉलर के प्लान्ड स्टॉक अवॉर्ड्स भी थे.&amp;nbsp;
केंद्रीय कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत, जुलाई DA में 3% बढ़ोतरी तय!
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>हर गली&amp;चौराहे में अंधेरा, महंगाई के बीच पाकिस्तान में गहराया बिजली संकट</title>
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        <description><![CDATA[ गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने अब एक नई मुसीबत आ गई है और वह है बिजली संकट. खासतौर पर, कराची में बिजली संकट चरम पर है. शहर के कई इलाकों में 16 से 24 घंटे तक की भीषण बिजली कटौती ने पाकिस्तान के ऊर्जा संकट को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है. आलम यह है कि पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बिजली कटौती से कम आय वाले परिवारों पर बोझ बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
कराची में जन जीवन अस्त-व्यस्त
डॉन (Dawn) की रिपोर्ट के अनुसार, &#039;सिविल सोसाइटी कलेक्टिव फॉर क्लीन एनर्जी फॉर कराची&#039; की ओर से कराची प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मुद्दा उठाया गया.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज ने इस बदतर स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय तक बिजली चले जाने से घर के रोजमर्रा के कामों, पढ़ाई और दूसरे कामकाज में रुकावटें आ रही हैं. इसका असर वॉटर सप्लाई और साफ-सफाई पर भी पड़ रहा है. &amp;nbsp;
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कराची, नाजिमाबाद और गुलिस्तान-ए-जौहर के कुछ इलाकों में बड़े पैमाने पर पावर कट हो रहे हैं. &amp;nbsp;यह संकट अब गरीब और कामकाजी परिवारों को भुखमरी और कगार पर धकेल रहा है. इसके चलते शहर के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन और ट्रैफिक जाम की भी खबरें आई हैं.
कराची में क्याें गहराया बिजली संकट?
कराची में बिजली सप्लाई कंपनी K-Electric ने अपने कुल फीडरों में से लगभग 30% पर जानबूझकर भारी लोड शेडिंग बढ़ा दी है. कंपनी का दावा है कि ओरंगी टाउन जैसे इलाकों में उपभोक्ताओं पर 17 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक का बिल बकाया है और वहां बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है.
&amp;nbsp;संकट की एक और बड़ी वजह, पाकिस्तान में बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आना है, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड में 4,000 मेगावाट से अधिक का घाटा हो चुका है. कराची और देश के अन्य हिस्सों के पावर प्लांट्स मुख्य रूप से गैस और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) पर चलते हैं, लेकिन वैश्विक और घरेलू कारणों से ईंधन की सप्लाई में भारी कमी आई है.

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केंद्रीय कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत, जुलाई DA में 3% बढ़ोतरी तय!&amp;nbsp; ]]></description>
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        <title>100 रुपये लीटर मिलेगा दूध! मुंबई के बाद इस राज्य में दाम बढ़ाने की तैयारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/100-रुपये-लीटर-मिलेगा-दूध-मुंबई-के-बाद-इस-राज्य-में-दाम-बढ़ाने-की-तैयारी</link>
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        <description><![CDATA[ 1 सितंबर 2026 को कई चीजों की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है. जिसमें कमर्शियल LPG, एटीएफ और दूध की कीमतों में भी मुंबई में इजाफा देखने को मिला. जिसके बाद अब भारत के एक और राज्य में दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं. क्योंकि यहां के किसानों ने ये मांग सरकार से की है. हम बात कर रहे हैं हरियाणा की, जहां पर जल्दी ही भैंस के दूध की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर हो सकती है.
किसानों ने किया फैसलादरअसल हरियाणा के कई जिलों में गांव और ब्लॉक स्तर पर डेयरी किसानों के समूहों ने ये फैसला किया है. किसानों का कहना है कि पशुओं के चारे, दाने, दवाइयों और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा दूध को लाने-ले जाने का खर्च भी काफी बढ़ गया है. ऐसे में मौजूदा 60 रुपये से 80 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर दूध बेचना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है.
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किस तारीख से हो सकती है बढ़ोतरी?इस मुद्दे को लेकर जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल, रोहतक और हिसार जिलों के कई गांवों में डेयरी किसानों की बैठकें हो रही हैं. हांसी के भैणी अमीरपुर गांव में किसानों ने कहा है कि 5 सितंबर से भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर और गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर बेचा जाएगा. लस्सी की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. आसपास के राजथल और थुराना गांवों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है.
क्यों बोले एसोसिएशन के अध्यक्ष?वहीं हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बात करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि, &#039;पशुओं का दाना पहले 1800 रुपये में मिलता था, जो अब बढ़कर करीब 3 हजार रुपये का हो गया है. गेहूं के भूसे की कीमत भी बढ़कर 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. कुछ जिलों के डेयरी किसानों ने वीटा सहकारी डेयरी प्लांट्स को ज्ञापन देकर कच्चे दूध की खरीद कीमत में 2 रुपये से 3 रुपये प्रति किलो बढ़ाने की मांग की है.
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किसानों का कहना है कि पशु पालने का खर्च पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गया है. पशुओं के दाने, खली, चारा, गुड़, हरा चारा, दवाइयां और मजदूरी सबकुछ महंगा हो गया है. तो वहीं कई लोगों का मानना है कि भैंस के दूध का 100 रुपये लीटर बिकना तो ठीक है, लेकिन गाय के दूध को 80 रुपये प्रति लीटर में बेचना थोड़ा महंगा लग रहा है. हालांकि अब देखना होगा कि कब तक इन दामों में बदलाव होगा.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>100, रुपये, लीटर, मिलेगा, दूध, मुंबई, के, बाद, इस, राज्य, में, दाम, बढ़ाने, की, तैयारी</media:keywords>
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        <title>चीनी&amp; दूध के बाद पेट्रोल पर आई बड़ी खबर, सरकार ने निर्यात पर बढ़ाया Windfall Tax</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी और दूध की कीमतों में हाल ही में इजाफा हुआ, जिससे जनता काफी परेशान नजर आई. वहीं अब सरकार ने पेट्रोल और डीजल को लेकर भी एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. सरकार का ये फैसला 1 सितंबर 2026 को आया है. जब पहले से ही कई चीजों पर दामों में बदलाव देखने को मिल रहा है.
कितना बढ़ाया टैक्स?दरअसल न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 प्रति लीटर के हिसाब से टैक्स लगाया है. पहले पेट्रोल के निर्यात पर कोई टैक्स नहीं लगता था. तो वहीं डीजल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड-इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को मिलाकर 25 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से टैक्स बढ़ाया है. इससे पहले ये टैक्स 24 रुपये प्रति लीटर था.
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ATF पर किया टैक्स कमकेवल पेट्रोल- डीजल ही नहीं बल्कि सरकार ने हवाई जहाज के ईंधन यानी ATF पर भी फैसला किया है. हाल ही में ATF की कीमतों बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में सरकार ने इसके टैक्स पर थोड़ी राहत दी है. सरकार ने ATF के निर्यात पर 19.50 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इन बदलावों की जानकारी दी है. हालांकि, देश में इस्तेमाल के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
जनता पर पड़ेगा असर?टैक्स के बढ़ने के बाद लोगों को ये भी शंका है कि इसका बोझ जनता पर पड़ेगा. हालांकि इसका असर किसी भी तरह से जनता के ऊपर नहीं पड़ने वाला है. बल्कि सरकार का मकसद देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए विदेशों में ईंधन बेच सकती थीं. ऐसे में सरकार ने निर्यात कम करने के लिए ये टैक्स लगाया है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी के बढ़ते दामों पर लगेगी लगाम? 15 दिन पहले शुरू होगी पेराई</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का समय आते ही चीनी के बढ़ते दामों ने लोगों की नाक में दम कर दिया है. कुछ जगहों पर चीनी 70 रुपये किलो से ज्यादा बिक चुकी है, लेकिन अब इसकी कीमत करीब 60 रुपये किलो है. दाम कम करने के लिए सरकार ने चीनी को ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी है. इसके साथ ही महाराष्ट्र की चीनी मिलों से 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा गया है. अब देखना होगा कि इस फैसले से आम लोगों को चीनी के दामों में कितनी राहत मिलती है.
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी बनाने वाला राज्य है. सोलापुर और मराठवाड़ा यहां के प्रमुख गन्ना बनाने वाले इलाके हैं. लेकिन, 15 अक्टूबर से बड़े स्तर पर गन्ने की कटाई शुरू करना आसान नहीं होगा. महाराष्ट्र के चीनी अधिकारी संजय भोसले के मुताबिक, राज्य में गन्ने की कटाई के लिए बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों से आते हैं. मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों के मजदूर आमतौर पर दशहरा और दिवाली के बाद महाराष्ट्र पहुंचते हैं. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है, इसलिए 15 अक्टूबर से ही बड़ी संख्या में मजदूरों का मिलना मुश्किल हो सकता है.
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जल्दी पेराई से कम चीनी की रिकवरी
समय से पहले पेराई शुरू करने पर सबसे बड़ी परेशानी चीनी की रिकवरी को लेकर है. रिकवरी यानी एक फिक्स मात्रा के गन्ने से कितनी चीनी निकलती है. संजय भोसले के अनुसार, 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पेराई शुरू होने पर रिकवरी 7 से 7.5% तक गिर सकती है. वहीं नवंबर के बाद ये आमतौर पर 8% से ऊपर रहती है. सोलापुर में रिकवरी 8 से 11% तक पहुंच सकती है.
रिकवरी कम होने से चीनी मिलों को बड़ा फाइनेंशियल नुकसान हो सकता है. ऐसे में मिलों के लिए जल्दी पेराई शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है.
किसानों की कमाई पर भी असर
गन्ने की जल्दी कटाई का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. पूरी तरह तैयार होने से पहले गन्ना काटने पर उसके वजन और क्वालिटी में कमी आ सकती है. इससे किसानों की पैदावार और कमाई दोनों पर असर हो सकता हैं.
राज्य के कई हिस्सों में इस साल आम बारिश नहीं हुई है. इससे गन्ने की पैदावार पर असर पड़ रहा है. ऐसे में कमजोर फसल की जल्दी कटाई करने से किसानों की परेशानी ज्यादा हो सकती है.
क्या चीनी के दाम सच में घटेंगे
सरकार को उम्मीद है कि जल्दी पेराई से बाजार में नई चीनी जल्द आएगी और कीमतें नीचे आएंगी. लेकिन सिर्फ जल्दी पेराई से खुदरा कीमत तुरंत कम होना फिक्स नहीं है. अगर गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा कम हुई और मिलों को नुकसान हुआ, तो वो कितनी चीनी बाजार में उतारेंगी, ये भी बड़ा सवाल है.
फिलहाल सरकार के सामने चुनौती है कि खरीदने वाले लोगों को महंगी चीनी से राहत मिले, लेकिन किसानों और चीनी मिलों पर इसका बोझ नहीं हो.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>श्रमिक पंजीकरण करवाने पर मिलेंगे 7000 रुपये? सरकार ने बताई वायरल दावे की सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर आए दिन कई सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी सामने आती है. इनसे जुड़े पोस्ट और वीडियोज भी तेजी से वायरल होते हैं. जिन पर कई लोग भरोसा भी कर लेते हैं. इसी तरह हाल ही में एक स्कीम के बारे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार श्रमिकों का पंजीकरण कराने पर उनके बैंक खातों में सीधे 7 हजार रुपये डालेगी. हालांकि अब इस खबर की सच्चाई भी सामने आ गई है.
क्या है खबर की सच्चाई?दरअसल PIB फैक्ट चेक ने हाल ही में इस खबर की सच्चाई उजागर कर दी है. एजेंसी ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) के जरिए इस वायरल वीडियो को शेयर किया है. इसके साथ साफतौर पर बड़े शब्द में लिखा है FAKE.
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इसके साथ ही एजेंसी ने बताया है कि, केंद्र सरकार ने श्रमिकों को पंजीकरण कराने के बदले किसी भी तरह की राशि देने की कोई घोषणा नहीं की है. इसका मतलब है कि श्रमिक के तौर पर पंजीकरण कराने पर बैंक खाते में 7 हजार रुपये की नकद राशि नहीं आएगी. यहां देखें पोस्ट:

सोशल मीडिया पर एक वीडियो इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि भारत सरकार श्रमिक पंजीकरण कराने पर बैंक खातों में सीधे ₹7,000 की मुफ्त राशि दे रही है।#PIBFactCheck:❌ यह दावा #फर्जी है । ✅ भारत सरकार ने श्रमिकों को पंजीकरण के बदले किसी भी प्रकार की राशि प्रदान करने संबंधी&amp;hellip; pic.twitter.com/kj6jhkhnnh
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) September 1, 2026



सावधान रहने की अपीलइतना ही नहीं बल्कि PIB फैक्ट चेक ने लोगों को ऐसे वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट से सावधान रहने की सलाह दी है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रम कानूनों, सरकारी योजनाओं और श्रमिकों से जुड़ी किसी भी सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए.
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लोगों के बेवकूफ बनाते हैं ठगऐसे फर्जी दावों के जरिए लोगों से उनकी निजी जानकारी, बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर या ओटीपी हासिल करने की कोशिश भी की जा सकती है. इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर करने से बचना जरूरी है. श्रमिकों से जुड़ी सरकारी योजनाओं और नीतियों की प्रमाणिक जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है. किसी योजना के तहत मिलने वाले लाभ की जानकारी भी वहीं से चेक की जा सकती है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>1 सितंबर से CNG 2 रुपए हो गई महंगी, अब आपके शहर में क्या है 1 किलो गैस के दाम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/1-सितंबर-से-cng-2-रुपए-हो-गई-महंगी-अब-आपके-शहर-में-क्या-है-1-किलो-गैस-के-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ आज, 1 सितंबर के दिन देशभर में कई सारे बदलाव हुए हैं. एक तरफ जहां दूध के दाम बढ़ रहे हैं तो वहीं कमर्शियल एलपीजी के दामों में भी उछाल आया है. हालांकि, इतने पर भी स्थिति शांत नहीं है. आम आदमी को एक और बड़ा झटका लगा है. सीएनजी के दाम में इजाफा कर दिया गया है. महानगर गैस लिमिटेड ने सीएनजी के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ा दिए हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कहां बढ़ें दाम?
राहत की बात ये है कि सीएनजी के ये दाम देशभर में नहीं बढ़े हैं, बल्कि ये बढ़त सिर्फ मुबंई की है. मुबंई में अब 2 रुपए की बढ़ोतरी के बाद सीएनजी 88 रुपये प्रति किलो हो गया है. कल तक यही सीएनजी 86 रुपए प्रति किलो पर था.&amp;nbsp;
दिल्ली में कितने बढ़े थे दाम?हाल ही में दिल्ली- एनसीआर में भी सीएनजी के दाम बढ़े थे. यहां सीएनजी 3 रुपए 89 पैसे बढ़कर 86 रुपए 98 पैसे प्रति किलो के रेट पर आ गया है. वहीं, नोएडा में सीएनजी का अब नया रेट 95.59 रुपये प्रति किलो है.&amp;nbsp;
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क्यों बढ़ें सीएनजी के दाम?मिडिल ईस्ट में तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार- चढ़ाव ही सीएनजी के बढ़ते दाम का मुख्य कारण है. इसके अलावा देशभर में सीएनजी की गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे घरेलू स्तर पर सीएनजी की मांग में भारी इजाफा हुआ है. ये भी सीएनजी के दाम बढ़ने का एक कारण हो सकता है.&amp;nbsp;
पीएनजी ने भी मारी छलांग&amp;nbsp;मुबंई में सिर्फ सीएनजी ही नहीं, पीएनजी के दाम ने भी छलांग लगाई है. घरेलू पीएनजी के दाम आज से 1 रुपए प्रति SCM बढ़ गए हैं.&amp;nbsp; यानी कि पहले जो पीएनजी 52 रुपए प्रति SCM था वो अब 53 रुपए प्रति SCM हो चुका है. इससे अब आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ने वाला है.&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>6280 रुपए किलोलीटर महंगा हुआ जेट फ्यूल, आज से महंगा हो जाएगा फ्लाइट टिकट!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/6280-रुपए-किलोलीटर-महंगा-हुआ-जेट-फ्यूल-आज-से-महंगा-हो-जाएगा-फ्लाइट-टिकट</link>
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        <description><![CDATA[ आज 1 सितंबर से जेट फ्यूल (ATF) के दाम 6.28 रुपये प्रति लीटर (6,280 रुपये प्रति किलोलीटर) बढ़ा दिए गए हैं. Indian Oil Corporation Ltd. (IOCL) के सूत्रों ने बताया कि&amp;nbsp;अभी एक महीने पहले ही 1 अगस्त 2026 को भी तेल कंपनियों ने ATF के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. यानी कि महज 30 दिनों के भीतर जेट फ्यूल के दाम लगभग 11.28 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं. इसी के साथ अब ईंधन की कीमत बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 115 रुपये थी. इससे पहले जुलाई में ATF की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी.
क्यों बढ़ाए गए जेट फ्यूल के दाम?
किसी भी एयरलाइन को ऑपरेट करने में जो खर्च आता है, उसका 40% से 45% हिस्सा केवल ईंधन खरीदने में जाता है. अब ईंधन के दाम बढ़ेंगे, तो एयरलाइंस कंपनियों पर भी वित्तीय बोझ बढ़ेगा और इसका सीधा उनके मुनाफे पर पड़ेगा. अमूमन एयरलाइंस कंपनियां इस बढ़े हुए आर्थिक दबाव का बोझ खुद उठाने के बजाय फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) या बेस फेयर बढ़ाकर इसका पूरा भार यात्रियों पर ट्रांसफर कर देती हैं.
क्या महंगे होंगे एयर टिकट्स?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि महंगे ईंधन का सबसे ज्यादा असर लो-कॉस्ट कैरियर्स (LCC) यानी बजट एयरलाइंस पर पड़ता है. आमतौर पर जहां &amp;nbsp;Air India जैसे किसी फुल-सर्विस एयरलाइंस के कुल खर्च में ईंधन का हिस्सा लगभग 33% होता है. वहीं, IndiGo या Spicejet जैसे बजट एयरलाइंस के लिए यह 40% से अधिक होता है इसलिए बजट एयरलाइंस के टिकटों के दाम अधिक तेजी से बढ़ सकते हैं.
दरअसल, सितंबर से लेकर नवंबर-दिसंबर तक भारत में त्योहारों और छुट्टियों का सीजन रहता है. इस दौरान नवरात्रि, दिवाली, छठ पूजा जैसे एक के बाद एक त्योहार आते हैं और हवाई सफर की भी मांग काफी बढ़ जाती है क्योंकि लोग छुट्टियों में घर लौट रहे होते हैं. ऐसे में एक तरफ ईंधन के बढ़ते दाम और दूसरी तरफ यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए हो सकता है कि आने वाले समय में हवाई टिकटों की कीमतों में 10-15% तक का इजाफा हो.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ट्रंप को तालिबान ने दिया 1,000,000,000,000 का ऑफर, सामने रख दी ये बड़ी शर्त</title>
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        <description><![CDATA[ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन दिनों अमेरिका के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश में जुटा हुआ है. तालिबान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाए प्रतिबंध को हटा दें और साथ ही उसके जब्त किए गए फंड को भी वापस कर दें. यह पहल अफगानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाली NATO सेनाओं की वापसी के और तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच साल बाद की जा रही है.
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने बताया कि अफगानिस्तान माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश के लिए पूरी तरह से तैयार है. मुत्ताकी ने काबुल में अपने ऑफिस में FT से कहा, &quot;अफगानिस्तान और अमेरिका के रिश्तों को पिछले 20 साल की जंग के नजरिए से नहीं, बल्कि भविष्य के सहयोग के आधार पर देखा जाना चाहिए.&quot;&amp;nbsp;
क्या है 1 ट्रिलियन डॉलर का ऑफर?
तालिबान ने अमेरिकी कंपनियों को देश में मौजूद लिथियम, तांबा (Copper), लोहा, कोबाल्ट, सोना और रेयर-अर्थ खनिजों (दुर्लभ धातुओं) के खनन और निवेश के लिए आमंत्रित किया है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के अनुसार भी अफगानिस्तान में मौजूद इन संसाधनों की कुल कीमत कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है.
सिर्फ खनन ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और द्विपक्षीय व्यापार में भी अमेरिकी निवेश का स्वागत करने की बात कही है. तालिबान ने अमेरिका में काबुल में अपने दूतावास को फिर से खोलने का आग्रह किया है और वहां की सुरक्षा की पूरी गारंटी भी दी है.&amp;nbsp;
कब से लगा रखा है प्रतिबंध?
अमेरिका ने 23 सितंबर 2001 तालिबान को &#039;विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी&#039; (SDGT) घोषित कर रखा है और इसके तहत उस पर कड़े प्रतिबंध भी लागू कर रखे हैं. अमेरिका में हुए 9/11 के आतंकी हमले के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए उसे SDGT की लिस्ट में डाल दिया था.
अगस्त 2021 में जब अगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की सरकार काबिज हुई, तब अमेरिका ने इसी पुराने SDGT दर्जे का कानूनी इस्तेमाल करके देश के 9.5 बिलियन डॉलर के फंड को तुरंत फ्रीज (जब्त) कर लिया था.
अमेरिका के लगाए गए इस प्रतिबंध के तहत, अगर कोई भी अमेरिकी नागरिक, बैंक या बहुराष्ट्रीय कंपनी तालिबान से 1 रुपये का भी व्यापार करती है, तो अमेरिकी कानून (IEEPA) के तहत उन पर लाखों डॉलर का जुर्माना और 20 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.

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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ट्रंप, को, तालिबान, ने, दिया, 1, 000, 000, 000, 000, का, ऑफर, सामने, रख, दी, ये, बड़ी, शर्त</media:keywords>
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        <title>सोना 2000 रुपए से ज्यादा सस्ता, चांदी में भी भारी गिरावट, आज क्या है Gold&amp;Silver का दाम</title>
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        <description><![CDATA[ जहां देशभर में गैस सिलेंडर, दूध, एटीएफ और ऑटो किराया ने लोगों को परेशान कर दिया है तो वहीं, दूसरी तरफ सोना- चांदी ने राहत भी दी है. आज सोना और चांदी, दोनों में ही गिरावट दर्ज की गई है. तीज- त्योहार के सीजन में सोने के गिरते दाम से आम आदमी को थोड़ा सुकून मिला है. यहां से आप सोना और चांदी, दोनों के भाव वो भी शहर अनुसार देख सकते हैं. साथ ही जान सकते हैं कि ये गिरावट कितने प्रतिशत की आई है.&amp;nbsp;
कितना सस्ता हुआ सोना?
आज 1 सितंबर, दिन मंगलवार को सोने की कीमत में 2,045 रुपये की गिरावट आई है. इसी के साथ आज सोना 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अक्टूबर माह में आपूर्ति वाले अनुबंध का भाव 2,045 रुपये यानी 1.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है. इसमें 2,680 लॉट का कारोबार हुआ है. अगर कारण के बारे में सोचें तो हाजिर बाजार में कमजोरी के रुख के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई है. वहीं, वैश्विक बाजार में सोना 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,432.51 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.&amp;nbsp;
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शहर अनुसार, सोने का भाव-&amp;nbsp;

दिल्ली- 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
मुंबई- 1,54,036 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
कोलकाता- 1,54,036 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
चेन्नई- 1,54,036 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;
पटना- 1,54,136 रुपये प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;

कितनी सस्ती हुई चांदी?
अब चांदी की बात करें तो MCX के अनुसार, चांदी की कीमत में 1,955 रुपये की गिरावट आई है. इसके बाद आज चांदी के दाम 2,40,489 रुपये प्रति किलोग्राम पर हैं. मल्टी कमोडिटी एक्स्चेंज में चांदी की कीमत 1,955 रुपये यानी 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,40,489 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है. इसमें 2,004 लॉट का कारोबार हुआ है. वहीं, वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमत 1.04 प्रतिशत लुढ़क कर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर रह गयी है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इस राज्य में अब सितंबर 2027 तक बैन रहेगा गुटखा और पान मसाला, सरकार सख्त</title>
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        <description><![CDATA[ गुटखा और पान मसाला खाने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. गुजरात सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा व पान मसाला पर लगे प्रतिबंध को 1 साल तक और बढ़ा दिया है. अब राज्य में इन उत्पादों पर बैन 12 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा.&amp;nbsp;
सरकार का कहना है कि उन्होंने यह फैसला लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया है. काफी लंबे समय से तंबाकू उत्पादों के सेवन को कई गंभीर बीमारियों से जोड़कर देखा जाता रहा है. ऐसे में साल 2012 से लागू इस बैन के तहत गुटखा और पान मसाला की बिक्री, निर्माण, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी. &amp;nbsp;
गुटखा-पान मसाला के किन कामों पर रहेगा रोक?
गुजरात में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर यह रोक 13 सितंबर से अगले एक साल तक जारी रहेगी. यह नियम उन सभी उत्पादों पर लागू होगा, जिन्हें किसी भी नाम से गुटखा या पान मसाला के रूप में बेचा जाता है. हालांकि यह नियम सिर्फ किसी एक ब्रांड या नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए लागू है. अगर अलग-अलग बेची जाने वाली सामग्रियों मिलाकर गुटखा या पान मसाला तैयार किया जाता है, तो उन पर भी यह रोक लाजिम है.
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सरकार ने क्यों बढ़ाया बैन?
सरकार ने कई एक्सपर्टों की रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि गुटखा और पान मसाला का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है. उन्होंने कहा है कि इन उत्पादों के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसके अलावा सरकार ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें कई लोग धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का भी इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
गुजरात सरकार ने कहा है कि अगर कोई इस नियम को तोड़कर प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री, निर्माण या वितरण करता है, तो खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. क्योंकि सरकार के इस नए फैसले का खास मकसद लोगों को तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान से बचाना और उनकी सेहत को बेहतर बनाना है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चीनी 30% हुई सस्ती, दुकानों पर गिरावट का असर दिखने में लगेंगे 10 दिन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-30-हुई-सस्ती-दुकानों-पर-गिरावट-का-असर-दिखने-में-लगेंगे-10-दिन</link>
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        <description><![CDATA[ बढ़ती महंगाई से इस वक्त हर कोई परेशान है. त्योहार के समय में चीनी की बढ़ती कीमत ने आम लोगों का बजट हिलाकर रख दिया है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम बढ़ने से लोगों की जेब पर भी असर पड़ रहा है. इस बीच एक राहत की खबर है. मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत में गिरावट देखने को मिली है.&amp;nbsp;
कितनी गिरावट हुई है?
दरअसल, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत लगभग 30 प्रतिशत कम हुई है. जिसके बाद अब चीनी की कीमत 47 रुपये प्रति किलो हो गई है. ऐसे में कई लोगों ये जानना चाहेंगे कि क्या इसका असर आम ग्राहकों को भी देखने को मिलेगा या नहीं?
कीमतों में अचानक गिरावट क्यों हुई?
अचानक ही मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स मिल कीमत में गिरावट नहीं हुई है, बल्कि यह गिरावट सरकार के एक फैसले के बाद हुई है. ऐसे में लोग जानना चाहेंगे कि सरकार ने क्या फैसला लिया है, जिसके बाद कीमत में गिरावट देखने को मिली है.&amp;nbsp;
रिटेल दुकानों पर गिरावट का दिखेगा असर
बता दें कि फिलहाल आम ग्राहकों को दुकानों पर इसका फायदा मिलने में कुछ समय लग सकता है. जानकारी के मुताबिक, दुकानों में ग्राहकों को इसका फायदा कम से कम 10 दिन में दिखने को मिल सकता है.
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सरकार का फैसला क्या है?
अब सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए तैयार की गई रिफाइंड चीनी को देश के बाजार में बेचने की परमिशन दे दी है. सबसे खास बात तो यह है कि आने वाले कुछ महीनों में लगभग 3 से 3.5 लाख टन चीनी बाजार में आने की उम्मीद की जा रही है.&amp;nbsp;
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आम लोगों को मिलेगा फायदा&amp;nbsp;
अगर आने वाले दिनों में दुकानों पर चीनी के दाम में गिरावट आती है तो इसका फायदा सीधे लोगों की जेब पर पड़ेगा.

जिन लोगों के घर में चीनी का इस्तेमाल ज्यादा होता है उनका खर्च कम होगा.
अगर चीनी सस्ती होती है तो मिठाई, बेकरी और दूसरे सामानों पर भी असर पड़ सकता है.
होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकान वालों का भी खर्च कम हो सकता है.
अभी दुकानों पर चीनी के दाम कम होने में समय लग सकता है तो इसलिए चीनी का फिलहाल इस्तेमाल सोच-समझकर करना ही बेहतर होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नौकरी छूटी तो तुरंत छोड़ना होगा देश, 60 दिनों का ग्रेस पीरियड खत्म करेगा US!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-छूटी-तो-तुरंत-छोड़ना-होगा-देश-60-दिनों-का-ग्रेस-पीरियड-खत्म-करेगा-us</link>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों की मुश्किल बढ़ने वाली है, खासतौर से वो भारतीय जो H1-B वीजा पर अमेरिका गए हुए हैं. &amp;nbsp;ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने किसी भी ऐसे भारतीय की नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, अभी ये नियम लागू नहीं हुआ है और फिलहाल मौजूदा 60 दिन की सुविधा जारी है.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इस सुविधा को खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव को 27 अगस्त को व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेग्युलेटरी अफेयर्स (OIRA) से रिव्यू की मंजूरी मिल गई है.
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क्या होगा इस फैसले का असर?अगर ये प्रस्ताव अंतिम नियम बन जाता है, तो नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों के पास अमेरिका में रुककर दूसरी नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों का समय भी नहीं रहेगा. अभी अगर किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वो ग्रेस पीरियड के दौरान दूसरी कंपनी तलाश सकता है. नई कंपनी उसके लिए H-1B आवेदन कर सकती है और नियमों की शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी अमेरिका में रहते हुए नई नौकरी शुरू कर सकता है.
इसके अलावा ग्रेस पीरियड खत्म होने पर नौकरी जाने के बाद कर्मचारी के इमिग्रेशन स्टेटस पर तुरंत असर पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल केवल प्रस्ताव रखा गया है, इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है. ऐसे में इसके सटीक नियमों के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.
भारतीयों पर पड़ेगा ज्यादा असरइस प्रस्ताव का असर सबेसे ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा. क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है. वित्त वर्ष 2024 में मंजूर हुए H-1B पीटिशन में 71% आवेदक भारत में जन्मे लोगों के थे. इसलिए H-1B कर्मचारियों के लिए नौकरी बदलना मुश्किल होने पर भारतीय टेक्नोलॉजी और अन्य कुशल प्रोफेशनल्स पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
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अभी क्या मिलती है सुविधा?फिलहाल जो नियम हैं उसके मुताबिक अगर किसी योग्य विदेशी कर्मचारी की अमेरिका में नौकरी चली जाती है, तो उसे अधिकतम 60 दिनों तक अमेरिका में रहने का मौका मिलता है. ये अवधि उसके मौजूदा वीजा की वेलिडिटी खत्म होने से पहले भी खत्म हो सकती है. इस दौरान कर्मचारी काम नहीं कर सकता, लेकिन उसे दूसरी नौकरी तलाशने, नया वीजा या इमिग्रेशन स्टेटस लेने या अमेरिका छोड़ने की तैयारी करने का समय मिलता है.
ये सुविधा H-1B के अलावा H-1B1, L-1, O-1, E-1, E-2, E-3 और TN जैसी कुछ अन्य श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होती है. कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Marie का बिस्किट खाते हैं आप? Wholewheat क्लेम पर लगा 1 लाख का जुर्माना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/marie-का-बिस्किट-खाते-हैं-आप-wholewheat-क्लेम-पर-लगा-1-लाख-का-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप Marie बिस्किट खाते हैं तो पैकेट पर लिखी एक बात आपके लिए भी जानना जरूरी है. McVities Wholewheat Marie बिस्किट्स को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण CCPA ने यूनाइटेड बिस्किट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 1 लाख का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण के मुताबिक, बिस्किट के नाम में होल व्हीट &amp;nbsp;लिखा था, लेकिन इसमें होल व्हीट आटे की मात्रा सिर्फ 19.5% थी.
ये मामला तब सामने आया जब CCPA ने सोशल मीडिया पर सामने आई एक खबर को देख कर खुद जांच की इसमें McVities होल व्हीट marie बिस्किट को हेल्दी, नेचुरल और ऑर्गेनिक बताकर प्रचार किए जाने और इसके इंग्रेडिएंट्स पर सवाल उठाए गए थे. इसके बाद CCPA ने बिस्किट की पैकेजिंग और ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी की जांच की. जांच में पता चला कि प्रोडक्ट में 19.5% &amp;nbsp;साबुत गेहूं का आटा था, जबकि 52% रिफाइंड गेहूं का आटा मैदा मौजूद था.
होल व्हीट नाम पर CCPA ने जताई एतराज&amp;nbsp;
CCPA का कहना था कि पैकेट पर Wholewheat शब्द को खास देखा के इस्तेमाल करने से आम कस्टमर को यह लग सकता है कि बिस्किट मुख्य रूप से पूरे गेहूं के आटे से बना है. जबकि प्रोडक्ट में इसकी मात्रा काफी कम थी. &amp;nbsp;इसी वजह से अधिकारी ने इसे गलत दावा माना. इस मामले की जांच, जांच इन्वेस्टिगेशन ने भी की थी. उसने 16 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बिस्किट के नाम और उसमें मौजूद साबुत गेहूं के आटे की मात्रा के बारे में जानकारी दी गई थी.
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कंपनी ने ट्रेडमार्क का दिया हवाला
यूनाइटेड बिस्किट्स ने अपनी सफाई में कहा कि होल व्हीट Marie बिस्किट एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है और wholewheat का इस्तेमाल ब्रांड की पहचान के लिए किया गया है. कंपनी ने पैकेट पर मौजूद डिसक्लेमर का भी हवाला दिया. कंपनी ने बाद में पैकेजिंग बदलने और रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क से wholewheat शब्द हटाने की पेशकश की. साथ ही पुराने पैकेट इस्तेमाल करने के लिए 9 महीने का समय मांगा.
CCPA ने कंपनी की दलील खारिज की
CCPA ने कहा कि किसी शब्द के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क होने से कंपनी को गलत जानकारी देने की अनुमति नहीं मिल जाती. प्राधिकरण ने यह भी कहा कि पैकेट पर दिया गया डिस्क्लेमर छोटे अक्षरों में और मुख्य दावे के नीचे था, इसलिए वो &amp;nbsp;Wholewheat के प्रमुख दावे को सही तरीके से सही नहीं करता. CCPA ने कंपनी को सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया माध्यमों से इस गलत ad को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है. &amp;nbsp;नए पैकेजिंग में भी इस दावे को हटाने को कहा गया है. साथ ही यूनाइटेड बिस्किट्स को आदेश की तारीख से 15 दिनों के अंदर नियमों का पालन करने की रिपोर्ट जमा करनी होगी.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अस्पताल, कॉलेज और बीमा, UPI से एक दिन में कहां कितनी है पेमेंट लिमिट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अस्पताल-कॉलेज-और-बीमा-upi-से-एक-दिन-में-कहां-कितनी-है-पेमेंट-लिमिट</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में UPI लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में लोग चाय-कॉफी के बिल से लेकर बड़े ऑनलाइन पेमेंट तक हर छोटी-कछोटी चीजों के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि UPI से हर जगह एक जैसी रकम का पेमेंट नहीं किया जा सकता है? हालांकि, बहुत से लोगों को लगता है कि UPI से हर तरह के पेमेंट की लिमिट सिर्फ 1 लाख रुपये तक होती है, लेकिन ऐसा नहीं है.&amp;nbsp;
दरअसल, UPI पेमेंट की लिमिट अलग-अलग सेवाओं और जरूरतों के हिसाब तय की गई है. ऐसे में अगर आप अस्पताल का बिल, कॉलेज की फीस, बीमा या टैक्स का पेमेंट UPI से करना चाहते हैं, तो आपको इसकी लिमिट के बारे में जरूर पता होनी चाहिए.
सामान्य UPI ट्रांजैक्शन की कितनी है लिमिट?
आमतौर पर सामान्य UPI पेमेंट के लिए प्रति ट्रांजैक्शन लिमिट 1 लाख रुपये तक होती है. वहीं, यह लिमिट रोजाना के सामान्य लेनदेन जैसे शॉपिंग, बिल पेमेंट और अन्य सेवाओं के लेनदेन के लिए लागू होती है. हालांकि, कुछ खास कैटेगरी में इससे ज्यादा रकम का ट्रांजैक्शन करने की सुविधा दी गई है.
BRICS समिट: दिल्ली के लग्जरी होटल फुल, कई गुना बढ़ा कमरों का किराया
इन सेवाओं में कर सकते हैं 5 लाख रुपये तक का पेमेंट&amp;nbsp;

टैक्स पेमेंट: अगर आप इनकम टैक्स या किसी अन्य पात्र टैक्स का पेमेंट UPI से करते हैं, तो इसकी लिमिट 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक कर दी गई है.&amp;nbsp;
IPO और निवेश: IPO आवेदन और RBI की रिटेल डायरेक्ट स्कीम में भी 5 लाख रुपये तक की लिमिट लागू होती है.&amp;nbsp;
अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं: अस्पतालों में इलाज से लेकर बिल पेमेंट तक के लिए 5 लाख रुपए तक की UPI पेमेंट की सुविधा मिल सकती है.&amp;nbsp;
कॉलेज: कॉलेज और अन्य शिक्षा संस्थानों की फीस जमा करने के लिए भी ज्यादा किमीट का फायदा मिलता है.&amp;nbsp;
बीमा पेमेंट: बीमा से जुड़े कुछ पेमेंट में भी ज्यादा लिमिट लागू होती है.&amp;nbsp;

UPI Lite और UPI 123Pay की अलग है लिमिट

UPI Lite: इसमें एक ट्रांजैक्शन की लिमिट 1,000 रुपए तक है और वॉलेट बैलेंस की अधिकतम लिमिट 5,000 रुपए तक रखी गई है.
UPI 123Pay: फीचर फोन यूजर्स के लिए शुरू की गई इस सिस्टम में प्रति ट्रांजैक्शन लिमिट 10,000 रुपये तक है.

ध्यान दें कि UPI लिमिट की अधिकतम लिमिट का मतलब यह नहीं है कि आप उतनी ही रकम पेमेंट कर पाएंगे. क्योंकि NPCI की तय लिमिट के बावजूद आपका बैंक या UPI ऐप अपनी अलग ट्रांजैक्शन लिमिट तय कर सकता है.
भारत से बार-बार पेट्रोल क्यों मांग रहा रूस? मंगवाना पड़ा 10 लाख बैरल तेल
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अस्पताल, कॉलेज, और, बीमा, UPI, से, एक, दिन, में, कहां, कितनी, है, पेमेंट, लिमिट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>BRICS समिट: दिल्ली के लग्जरी होटल फुल, कई गुना बढ़ा कमरों का किराया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/brics-समिट-दिल्ली-के-लग्जरी-होटल-फुल-कई-गुना-बढ़ा-कमरों-का-किराया</link>
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        <description><![CDATA[ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी दिल्ली के लग्जरी होटल बाजार में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय मेहमानों और प्रतिनिधियों की बढ़ती मांग के कारण कई बड़े होटलों में कमरे काफी तेजी से बुक हो रहे हैं. हालात यह हैं कि कई लग्जरी होटल पूरी तरह फूल हो चुके हैं, वहीं जिन होटलों में कमरे मौजूद है, वहां किराया कई गुना तक बढ़ा दिया गया है.&amp;nbsp;
दिल्ली के बड़े होटलों में कमरों की कमी
11 से 13 सितंबर के बीच होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को देखते हुए दिल्ली के कई प्रमुख लग्जरी होटलों में कमरों की मांग अचानक बढ़ गई है. खासतौर पर इसका असर लग्जरी होटल में दिखाई दे रहा है, जहां कई जगहों पर कमरे मौजूद नहीं हैं या फिर बहुत ज्यादा वे कमरे बहुत ज्यादा कीमत में मिल रहे हैं.
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बुकिंग प्लेटफॉर्म की जांच के मुताबिक, नई दिल्ली का ताज महल, ताज पैलेस और लीला पैलेस जैसे कई बड़े होटलों में इन तारीखों के लिए कमरे नहीं मिल रहे हैं. वहीं ओबेरॉय होटल में भी कई दिनों के लिए बुकिंग पूरी हो चुकी है. खासकर आईटीसी मौर्या और शांगरी-ला इरोस जैसे होटलों में मौजूदा कमरों के लिए काफी ज्यादा कीमतें वसूली जा रही हैं.
BRICS समिट से क्यों बढ़ी होटल कमरों की डिमांड?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दो दिन का आयोजन है, लेकिन इसका असर कई दिनों तक देखने को मिल रहा है. दरअसल, विदेशी प्रतिनिधि, अधिकारी और कई अन्य मेहमान इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहले ही दिल्ली पहुंच रहे हैं और कई लोग अपना ठहराव बढ़ा रहे है. यही वजह है कि नई दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में होटल कमरों की मांग अचानक बढ़ गई है.
आम यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
दरअसल, इन दिनों दिल्ली की यात्रा की प्लानिंग कर रहे पर्यटकों और कारोबारियों को अब होटल के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि होटल में कमरे मौजूद न होने के कारण कई लोगों को मुख्य इलाकों से दूर होटल तलाशने भी पड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ यात्री अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते हैं या बजट होटल का ऑप्शन चुन सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>गलत खाते में चले गए पैसे तो कैसे मिलेगा रिफंड? जानिए बैंक के जरूरी नियम</title>
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        <description><![CDATA[ डिजिटल पेमेंट के दौर में पैसे ट्रांसफर करना बेहद आसान हो गया है, लेकिन एक छोटी सी गलती पैसे को गलत अकाउंट तक पहुंचा सकती है. अकाउंट नंबर या IFSC कोड डालते समय हुई गलती के वजह से अगर पैसा किसी दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में चला जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए. समय पर शिकायत करने से रकम वापस लेने की प्रोसेस शुरू की जा सकती है.
गलत अकाउंट में पैसे पहुंचने का पता चलते ही अपने बैंक को इसकी जानकारी दे. आप कस्टमर केयर, ईमेल या बैंक शाखा के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं. बेहतर होगा कि जल्द से जल्द शाखा जाकर ब्रांच मैनेजर से भी बात करें. शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन की तारीख और समय, पैसा, अपना अकाउंट नंबर, गलत अकाउंट की जानकारी और UTR या Transaction ID जैसी जरूरी डिटेल दे. बैंक से मिलने वाला शिकायत नंबर या रसीद संभालकर रखना भी जरूरी है.
दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में पहुंच गया पैसा&amp;nbsp;
अगर पैसा किसी दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में पहुंच चुकी है, तो आपका बैंक दूसरे बैंक और अकाउंट होल्डर से संपर्क करके पैसे वापस कराने की प्रोसेस शुरू कर सकता है. अगर जिसके अकाउंट में पैसा गया है वह लौटाने के लिए तैयार हो जाता है, तो बैंक की प्रोसेस के अनुसार पैसा वापस मिल सकता है. लेकिन अगर अकाउंट होल्डर रकम लौटाने से इनकार करता है, तो मामला पेचीदा हो सकता है. ऐसी हालत में बैंक में लिखित शिकायत के बाद कानूनी प्रोसेस अपनाने की जरूरत पड़ सकती है.
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अगर अकाउंट नंबर या IFSC में गलती के वजह से बैंक उस अकाउंट को पैसा क्रेडिट नहीं कर पाता, तो कुछ मामलों में ट्रांजैक्शन फेल होकर पैसा वापस आपके अकाउंट में आ सकता है. &amp;nbsp;लेकिन, यह ट्रांजैक्शन की हालात और बैंकिंग सिस्टम पर निर्भर करता है. अगर रकम किसी वैलिड बैंक अकाउंट में सही तरीके से जमा हो गई है, तो उसे वापस आने में समय लग सकता है.
ऑनलाइन पेमेंट करते समय रखें सावधानी
पैसे भेजने से पहले अकाउंट नंबर और IFSC कोड दोबारा जांचें. किसी नए व्यक्ति को पेमेंट करते समय जल्दबाजी नहीं करें. बड़ी रकम भेजने से पहले छोटी रकम ट्रांसफर करके जानकारी चेक की जा सकती है. UPI से पैसे भेजते समय सामने वाले का नाम जरूर चेक करें और जिन लोगों को बार बार पैसे भेजते हैं, उनकी सही जानकारी सेव कर लें. अगर पैसे गलत अकाउंट में चले जाएं, तो UTR या Transaction ID, SMS और बैंक स्टेटमेंट संभालकर रखें और तुरंत बैंक में शिकायत करें.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>नेपाल को एडवांस बिजली देगा भारत, बाढ़ से ठप हुए पावर प्लांट</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बिजली उत्पादन को बड़ा झटका दिया है. कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे वहां करीब 550 मेगावाट (mw) बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आई है. ऐसे मुश्किल वक्त में भारत नेपाल की मदद करने के लिए आगे आया है. भारत अब नेपाल को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि वहां बिजली आपूर्ति को सामान्य तौर पर बनाए रखा जा सके.&amp;nbsp;
भारत के बिजली मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल ने बाढ़ के कारण हुई बिजली उत्पादन में कमी को देखते हुए भारत से अतिरिक्त बिजली आयात की मंजूरी को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है. नेपाल की मांग के अनुसार, भारत जरूरत पड़ने पर उसे बिजली उपलब्ध कराएगा.
बाढ़ से नेपाल में बिजली उत्पादन को बड़ा नुकसान
26 अगस्त 2026 को त्रिशुली और लेंडे खोला नदी बेसिन में अचानक आई बाढ़ से नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ. इस के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं का काम भी प्रभावित हुआ और बिजली उत्पादन में करीब 550 मेगावाट की कमी आई. हालांकि, बाढ़ से पहले नेपाल की कुल स्थापित बिजली उत्पादन की क्षमता 4,200 मेगावाट से ज्यादा थी. ऐसे में भारत को नेपाल से मिलने वाली बिजली आपूर्ति में भी करीब 400 मेगावाट की गिरावट आई है.
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क्या भारत की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर?
भारत के अधिकारियों का कहना है कि नेपाल को बिजली देने के बावजूद देश की घरेलू बिजली आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा है. क्योंकि भारत के पास मजबूत राष्ट्रीय पवार ग्रिड और पर्याप्त बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है. ऐसे में अस्थायी कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है.&amp;nbsp;
कई जलविद्युत परियोजनाएं हुईं प्रभावित
अचानक आए इस बाढ़ के कारण नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी काफी नुकसान पहुंचा है. जानकारी के मुताबिक, यहां काम कर रहे सैकड़ों मजदूर और कर्मचारी लापता है. बताया जा रहा है कि नौ जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 537 कर्मचारी अभी भी लापता हैं. हालांकि, बचाव दल मलबे और कीचड़ से बंद हुई सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
गलत खाते में चले गए पैसे तो कैसे मिलेगा रिफंड? जानिए बैंक के जरूरी नियम
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>यमुना एक्सप्रेसवे पर Gaurs Group ने खरीदी 700 करोड़ में 35 एकड़ जमीन</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा विस्तार करते हुए Gaurs Group ने एक बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 35 एकड़ जमीन 700 करोड़ रुपये में खरीदी है. कंपनी इस जमीन पर नई आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी कर रहा है.&amp;nbsp;
यह जमीन यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-18 में स्थित है, जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है. हालांकि, कंपनी ने यह जमीन ICICI Bank की नीलामी के जरिए खरीदी है. जिसमें तीन अलग-अलग भूखंड शामिल हैं, जहां सबसे बड़ा भूखंड करीब 24 एकड़ का है.
700 करोड़ रुपये में हुई जमीन की डील&amp;nbsp;
गौर्स ग्रुप के चेयरमैन मनोज गौर ने बताया कि कंपनी ने ICICI Bank से करीब 700 करोड़ रुपये में 35 एकड़ जमीन की खरीदारी की है. हालांकि, यह अधिग्रहण &#039;जैसा है, जहां है&#039; के आधार पर खुली नीलामी के मध्याम से किया गया है. साथ ही कंपनी ने कहा कि जमीन से जुड़े जरूरी पेमेंट जैसे EDC (एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज), किसान मुआवजा और अन्य जरूरी बकाया को पूरा किया जा रहा है. इसके बाद खरीदी गई जमीन पर आधुनिक आवासीय प्रोजेक्ट शुरू कर दिए जाएंगे.
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यमुना एक्सप्रेसवे पर बढ़ेगी कंपनी की मौजूदगी
गौर्स ग्रुप आने वाले समय में 24 एकड़ जमीन पर एक बड़ी आवासीय परियोजना शुरू करने की प्लानिंग कर रहा है. कंपनी के मुताबिक, अगले साल मार्च तक नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 3-4 नई हाउसिंग परियोजनाएं लॉन्च करने की तैयारी में है. इसके अलावा कंपनी ने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 5,500 करोड़ रुपये की बिक्री बुकिंग दर्ज की थी.
नए प्रोजेक्ट्स के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कंपनी को उम्मीद है कि वह अपने बिक्री प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखेगी और इसमें और बढ़ोतरी करेगी. हालांकि, यमुना एक्सप्रेसवे पर कंपनी पहले ही करीब 1,900 करोड़ रुपये की राजस्व क्षमता वाली प्रोजेक्ट लॉन्च कर चुकी है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>यमुना, एक्सप्रेसवे, पर, Gaurs, Group, ने, खरीदी, 700, करोड़, में, एकड़, जमीन</media:keywords>
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        <title>इस हफ्ते कब&amp;कब रहेंगे बंद? जानें 31 अगस्त से 6 सितंबर के बीच RBI छुट्टी की पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपको बैंक में कोई जरूरी काम है तो यह खबर आपके लिए काम की है. नया हफ्ता शुरू होने वाला है और इसके साथ सितंबर का महीना भी शुरू हो जाएगा. 31 अगस्त से 6 सितंबर 2026 के बीच बैंकों में एक दिन त्योहार की छुट्टी रहेगी, जबकि रविवार को देशभर में बैंक बंद रहेंगे.
हालांकि, बैंक की छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं. RBI के कैलेंडर के मुताबिक कुछ छुट्टियां सिर्फ खास राज्यों और शहरों में लागू होती हैं. इसलिए बैंक जाने से पहले अपने शहर की छुट्टी जरूर चेक कर लें.&amp;nbsp;
31 अगस्त से 6 सितंबर तक कब बंद रहेंगे बैंक?

31 अगस्त, सोमवार- बैंक खुले रहेंगे.
1 सितंबर, मंगलवार- बैंक खुले रहेंगे.
2 सितंबर, बुधवार- बैंक खुले रहेंगे.
3 सितंबर, गुरुवार- बैंक खुले रहेंगे.
4 सितंबर, शुक्रवार- जन्माष्टमी के कारण कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे.
5 सितंबर, शनिवार- यह महीने का पहला शनिवार है, इसलिए बैंक खुले रहेंगे.
6 सितंबर, रविवार- रविवार होने की वजह से देशभर में बैंक बंद रहेंगे.

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4 सितंबर को क्यों बंद रहेंगे बैंक?4 सितंबर को जन्माष्टमी है. इस मौके पर कई राज्यों में बैंक शाखाओं की छुट्टी रहेगी. हालांकि, यह छुट्टी हर राज्य में लागू नहीं है. RBI के बैंक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक 4 सितंबर को अहमदाबाद, आइजोल, भोपाल, चंडीगढ़, चेन्नई, देहरादून, गंगटोक, हैदराबाद, जयपुर, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, पटना, रायपुर, शिलॉन्ग और शिमला समेत कई जगहों पर बैंक बंद रहेंगे.
5 सितंबर को बैंक खुलेंगे या बंद?
कई लोगों को लगता है कि सितंबर की शुरुआत में शनिवार होने के कारण बैंक बंद होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. 5 सितंबर 2026 महीने का पहला शनिवार है. बैंक आम तौर पर हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं. इसलिए 5 सितंबर को बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी.
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6 सितंबर को क्या है हाल?
6 सितंबर को रविवार है. रविवार को बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होता है. इसलिए इस दिन देशभर में बैंक बंद रहेंगे. हालांकि, बैंक की यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाएं आम तौर पर खुली रहती हैं. किसी खास सेवा के लिए बैंक के नियम अलग हो सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>आठवां वेतन आयोग: पेंशन बंद होने की चर्चा पर अपडेट, रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही एक खबर ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता बढ़ा दी थी. दावा किया जा रहा था कि कुछ रिटायर्ड केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन बंद हो सकती है या 2026 के बाद रिटायर होने वालों को ही पेंशन रिवीजन का फायदा मिलेगा. अब इस दावे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है.
एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने कहा कि पेंशन बंद होने या कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन रिवीजन से बाहर किए जाने की बातें बेबुनियाद हैं.
क्या बोले शिव गोपाल मिश्रा?शिव गोपाल मिश्रा ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी कर पेंशनर्स को इस तरह की अफवाहों पर भरोसा नहीं करने को कहा है. उन्होंने बताया कि कई पेंशनर्स ने उनसे संपर्क किया था, क्योंकि सोशल मीडिया पर उनके नाम से ऐसे मैसेज फैलाए जा रहे थे जिनमें पेंशन बंद होने की बात कही गई थी.
मिश्रा ने साफ कहा कि ऐसी सभी बातें पूरी तरह गलत हैं और इन पर भरोसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पेंशनर्स की पेंशन जारी रहेगी और पेंशन में सुधार को लेकर चर्चा चल रही है.
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क्या अब पेंशन बढ़ेगी?सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा था कि सिर्फ 2026 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को ही 8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन रिवीजन का फायदा मिलेगा.
इस पर भी मिश्रा ने कहा कि पहले या बाद में रिटायर हुए पेंशनर्स के मामले पर 8वें वेतन आयोग में चर्चा चल रही है. यानी फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि पुराने पेंशनर्स को पेंशन रिवीजन से बाहर कर दिया जाएगा.
पेंशन रिवीजन पर अभी क्या हो रहा है?8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स से जुड़े मुद्दे भी रखे जा रहे हैं. एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड पहले ही मांग कर चुका है कि मौजूदा पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को पेंशन रिवीजन के दायरे में शामिल किया जाए.
कितने लोगों को फायदा होगा?8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन व पेंशन में बदलाव की सिफारिश करने के लिए किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक इसके दायरे में करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स आते हैं. आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है.
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क्या करना चाहिए?पेंशनर्स के लिए सबसे जरूरी बात ये है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हर मैसेज पर भरोसा न करें. पेंशन बंद होने या पेंशन रिवीजन से बाहर किए जाने जैसी खबरों की जांच हमेशा आधिकारिक सोर्स से करना जरूरी है. शिव गोपाल मिश्रा ने भी पेंशनर्स से कहा है कि वे केवल आधिकारिक यूनियन हैंडल या भरोसेमंद सोर्सों से जारी जानकारी पर ध्यान दें.
पेंशन में बढ़ोतरी कितनी होगी?
अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि 8वें वेतन आयोग के बाद पेंशन में कितने रुपये की बढ़ोतरी होगी. इसका फैसला सरकार की मंजूरी के आधार पर होगा.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आठवां, वेतन, आयोग:, पेंशन, बंद, होने, की, चर्चा, पर, अपडेट, रिटायर्ड, कर्मचारियों, के, लिए, बड़ी, खबर</media:keywords>
    </item>
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        <title>चीनी&amp;प्याज से जेब ढीली, किचन के सामानों पर बैन, महंगाई&amp;मिलावट ने तोड़ दी आम आदमी की कमर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-प्याज-से-जेब-ढीली-किचन-के-सामानों-पर-बैन-महंगाई-मिलावट-ने-तोड़-दी-आम-आदमी-की-कमर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-प्याज-से-जेब-ढीली-किचन-के-सामानों-पर-बैन-महंगाई-मिलावट-ने-तोड़-दी-आम-आदमी-की-कमर</guid>
        <description><![CDATA[ घर का बजट संभालना आम आदमी के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है. रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों में से कई के दाम पिछले कुछ दिनों और हफ्तों में तेजी से बढ़े हैं. सबसे ज्यादा परेशानी प्याज और चीनी ने बढ़ाई है. इसके अलावा खाद्य तेल, अंडे, दाल और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों में भी दबाव देखने को मिल रहा है.
एक तरफ बाजार में महंगाई जेब पर बोझ बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ खाने-पीने की चीजों में मिलावट और नियमों की अनदेखी को लेकर FSSAI और राज्यों की फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं. कहीं किसी उत्पाद की बिक्री पर रोक लगी है तो कहीं कंपनियों और दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं. यानी आम आदमी के सामने दोहरी परेशानी है, सामान महंगा हो रहा है और जो सामान खरीद रहे हैं उसकी क्वालिटी को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
प्याज ने सबसे ज्यादा रुलायारसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में शामिल प्याज के दाम ने हाल के दिनों में बड़ा झटका दिया है. 24 अगस्त तक अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत करीब 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी, जो एक साल पहले के मुकाबले करीब 59 फीसदी ज्यादा थी. कई शहरों में खुदरा बाजार में प्याज 60-70 रुपये किलो तक भी पहुंच गया.
सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बफर स्टॉक से प्याज निकालने और दिल्ली समेत कुछ जगहों पर कम कीमत पर प्याज बेचने की कोशिश शुरू की है. सरकार के पास करीब 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक बताया गया है. लेकिन बाजार में राहत तुरंत नजर नहीं आ रही.&amp;nbsp;
पेंशन बंद होने की चर्चा पर अपडेट, रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर
चीनी ने बिगाड़ा रसोई का हिसाबप्याज के साथ चीनी ने भी आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच चीनी की कीमत 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी करीब एक महीने में 7.52 रुपये किलो की बढ़ोतरी हुई हैं.
वहीं हाल की बाजार रिपोर्टों में खुदरा चीनी के दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है. पिछले एक महीने में इसमें करीब 34 फीसदी तक तेजी बताई गई है.
दाल, तेल और अंडे भी दे रहे झटकारसोई का खर्च सिर्फ प्याज और चीनी से ही नहीं बढ़ रहा है. हाल की रिपोर्टों में दाल, चावल, खाद्य तेल और अंडे जैसी चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उपभोक्ता मामले विभाग जिन रोजाना खुदरा दामों की निगरानी करता है, उनमें करीब एक-तिहाई वस्तुओं की कीमतें पिछले एक साल में 6 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. प्याज में करीब 63 फीसदी और चीनी में करीब 41 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खाद्य तेल और अंडे भी महंगे हुए हैं.&amp;nbsp;
मिलावट पर सरकार का डंडाएक तरफ महंगाई है तो दूसरी तरफ खाने की चीजों की क्वालिटी को लेकर चिंता. इसी बीच FSSAI ने हाल के दिनों में कई कड़े कदम उठाए हैं. सबसे ताजा कार्रवाई में FSSAI ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स और एलजी ब्रांड के कुछ कंपाउंडेड हींग उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई है.&amp;nbsp;
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घी पर लगा बैनमिलावट के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई घी को लेकर हुई है. FSSAI ने दमन स्थित SDP Industries की ओर से बनाए और बेचे जा रहे सभी तरह के घी उत्पादों की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है. इसमें श्रद्धा, श्री सरस, गोकुल जैसे नामों वाले सामान भी शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान लिए गए नमूनों में बीटा-सिटोस्टेरॉल पाया गया, जो शुद्ध घी में नहीं होना चाहिए. फैटी एसिड संरचना में भी गड़बड़ी मिली है.&amp;nbsp;
होटल-रेस्टोरेंट पर कार्रवाईमहाराष्ट्र में भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर कई जगहों पर कार्रवाई की है. पुणे में बाबा की रसोई, एमब्रोसियोस, श्रीनाथ फूड कॉर्नर और सैफायर फूड्स के KFC स्टोर के लाइसेंस सस्पेंड किए गए. जांच में कहीं बासी खाना और फूड कलर के इस्तेमाल की बात सामने आई, तो कहीं कॉकरोच और खराब साफ-सफाई मिली. KFC के एक स्टोरेज एरिया में जरूरी मंजूरी की कमी, खराब कोल्ड स्टोरेज और खाने के बॉक्स गलत तरीके से रखे पाए गए.
इससे पहले कुछ डोमिनोज और पिज्जा हट आउटलेट्स के लाइसेंस भी हाइजीन खामियों के कारण सस्पेंड किए गए थे. जांच में कीड़े, गंदगी और बिना एक्सपायरी डेट वाले खाने के सामान में कमियां सामने आई थीं.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वेनेजुएला की जमीन में दबा है दुनिया का 17% कच्चा तेल, फिर क्यों बर्बाद हुआ ये देश?</title>
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        <description><![CDATA[ सोचिए, जिस देश के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं, वही देश कभी महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट की ऐसी मार झेल चुका है कि लाखों लोगों को देश छोड़ना पड़ा. ये कहानी है वेनेजुएला की. उसके पास दुनिया के कुल साबित कच्चे तेल भंडार का करीब 17 फीसदी हिस्सा है, लेकिन तेल की इस दौलत के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला के साथ एक बड़ी ऑयल डील का ऐलान किया है. ट्रंप ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील बताया है. इस समझौते से अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा साबित तेल भंडार पर बहुमत वाला नियंत्रण मिलने की बात सामने आई है. तो सवाल उठता है कि इतना तेल होने के बावजूद वेनेजुएला बर्बाद कैसे हो गया? और अब अमेरिका इस तेल पर इतनी बड़ी बाजी क्यों लगा रहा है?
सबसे ज्यादा तेल होकर भी क्यों है देश गरीब?वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित कच्चा तेल भंडार है. देश का ज्यादातर तेल ओरिनोको ऑयल बेल्ट में मौजूद है परेशानी ये है कि यहां का ज्यादातर तेल नॉर्मल कच्चे तेल जैसा नहीं है, बल्कि भारी और ज्यादा सल्फर वाला कच्चा तेल है.
इस तेल को निकालना, प्रोसेस करना और रिफाइन करना काफी ज्यादा महंगा और मुश्किल है. इसके लिए खास तरह की तकनीक और रिफाइनिंग क्षमता चाहिए. यानी जमीन के नीचे तेल की कमी नहीं थी, लेकिन उस तेल को सही तरीके से निकालने और उससे लगातार पैसा कमाने के लिए बड़े निवेश और मजबूत तेल उद्योग की जरूरत थी.
चीनी-प्याज से जेब ढीली, किचन के सामानों पर बैन, महंगाई-मिलावट ने तोड़ दी आम आदमी की कमर
असली कहानी क्या है?वेनेजुएला की बर्बादी की सबसे बड़ी वजह ये नहीं थी कि उसके पास तेल कम था. उल्टा, देश की अर्थव्यवस्था तेल पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गई है. सरकार की कमाई, विदेशी मुद्रा और निर्यात का बड़ा हिस्सा तेल से आता था. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंची थी, तो सरकार के पास खूब पैसा आया.
लेकिन उस पैसे का बड़ा हिस्सा तेल उद्योग में वापस लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के बजाय सामाजिक योजनाओं और सरकारी खर्च में चला गया. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक तेल उद्योग में निवेश और रखरखाव की कमी के साथ कुप्रबंधन ने उत्पादन में गिरावट को तेज किया.
कब लगा वेनेजुएला को झटका?वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी. लेकिन 2002-03 की बड़ी हड़ताल के बाद कंपनी में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को हटाया गया. इसके बाद तेल उत्पादन पहले जैसी रफ्तार से वापस नहीं आ पाया.
EIA के मुताबिक 2000 में वेनेजुएला करीब 32 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन कर रहा था. सितंबर 2023 तक ये घटकर करीब 7.35 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था. यानी जिस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, वो अपनी जमीन से पर्याप्त तेल निकाल ही नहीं पा रहा था.
कैसे गिरने लगी तेल की कीमत?वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तेल पर इतनी निर्भर थी कि जब 2014-15 के आसपास दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, तो सरकार की कमाई पर सीधा असर पड़ा. तेल से मिलने वाली विदेशी मुद्रा कम हुई और सरकार के सामने खर्च चलाने की मुश्किल बढ़ गई.
EIA के मुताबिक 2014 के बाद तेल की कीमत गिरने के साथ वेनेजुएला का तेल उत्पादन भी तेजी से गिरा. 2016 में देश की शुद्ध तेल निर्यात आय करीब 22 अरब डॉलर रह गई, जबकि 2011 में यह 73 अरब डॉलर से ज्यादा थी.
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कब आया महंगाई- कर्ज का दौर?अर्थव्यवस्था कमजोर होती गई और देश कर्ज के बोझ में दबता चला गया. तेल उत्पादन गिरने का मतलब था कम निर्यात, कम विदेशी मुद्रा और कम सरकारी आमदनी. इससे अर्थव्यवस्था का संकट और गहरा गया.
IMF के मुताबिक 2015 के बाद तेल उत्पादन में गिरावट वेनेजुएला के आर्थिक संकट की बड़ी वजह बनी. 2008-13 के दौरान जहां देश का औसत तेल उत्पादन करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं 2019 में यह करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया और 2020 के बीच में करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया.
वेनेजुएला पर क्यों है अमेरिकी की नजर?US-Venezuela ऑयल डील काफी अहम मानी जा रही है. ट्रंप के ऐलान के मुताबिक समझौते से अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा साबित तेल भंडार पर बहुमत वाला नियंत्रण मिलेगा. इसके साथ अमेरिकी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में बड़ी भूमिका बढ़ सकती है. आज अमेरिका के लिए यह सिर्फ तेल खरीदने का मामला नहीं है. वेनेजुएला के तेल उत्पादन को दोबारा बढ़ाना अमेरिका को दुनिया के इस बड़े तेल भंडार तक ज्यादा पहुंच दे सकता है.
सवाल यह है कि अगर वेनेजुएला के पास इतना तेल है तो क्या अमेरिकी कंपनियां तुरंत उत्पादन बढ़ा देंगी? जवाब है, नहीं. कई साल की खराब हालत के बाद वेनेजुएला के तेल उद्योग को बड़े निवेश की जरूरत है. पुराने कुओं, पाइपलाइन, रिफाइनरी, मशीनरी और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारना होगा.&amp;nbsp;
भारत के लिए क्यों जरूरी है वेनेजुएला का तेल?भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में है. इसलिए अगर वेनेजुएला में उत्पादन बढ़ता है और दुनिया के बाजार में ज्यादा कच्चा तेल आता है, तो वैश्विक सप्लाई बढ़ सकती है. अगर सप्लाई बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को फायदा मिल सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>McD और KFC में खाते हैं आप? 10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ Bengaluru News: अगर आप भी मॉल के फूड कोर्ट में जाकर McDonald&#039;s, KFC, Burger King जैसे आउटलेट्स पर खाना पसंद करते हैं, तो यह जानकारी आपके काम की है. ग्रेटर बेंगलुरु कोरमंगला स्थित नेक्सस मॉल के फूड कोर्ट में नगर निगम की टीम ने निरीक्षण किया, जहां कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिलने पर 10 फूड आउटलेट्स पर भारी जुर्माना लगाया गया है.&amp;nbsp;
दरअसल, यह कार्रवाई 28 अगस्त को किए गए निरीक्षण के बाद की गई. अधिकारियों के मुताबिक, कई जगहों पर गीले और सूखे खचरे को अलग-अलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया गया था. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का भी इस्तेमाल किया जा रहा था. यही वजह है कि आउटलेट्स पर 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया.
10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना

चस्का बन पर सबसे ज्यादा 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया.
McDonald&#039;s, Burger King और Fish &amp;amp; Chips पर 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया.
Popeyes, Good Flippin&#039; Burgers, Wow! China, Naga&#039;s, KFC और Shiv Sagar पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना लगा.

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किस नियम का किया गया उल्लंघन?
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कुछ आउटलेट्स पर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के बजाय एक साथ मिलाया जा रहा था. इसके अलावा प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल भी अधिकारियों की नजर में आया.&amp;nbsp;
नियम तोड़े तो आगे होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम अधिकारियों ने साफ किया है कि शहर के अलग-अलग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस तरह के निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे. ऐसे में बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ-साथ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. साथ ही उन्होंने कारोबारियों और फूड आउटलेट संचालकों से कचरे को सही तरीके से अलग-अलग रखने और प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचनी की अपील की है.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Everest के मसालों पर लगा बैन, FSSAI ने जारी किया नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ Everest Masala Ban:&amp;nbsp;अगर आप भी अपने रसोई में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए बाजार में मिलने वाले पैकेट मसालों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मशहूर मसाला ब्रांड Everest के कुछ उत्पादों की जांच को लेकर सख्त कार्रवाई की है. क्योंकि इस जांच में इसके हींग को गलत तरीके से लेबल किए जाने के साथ-साथ क्वालिटी से जुड़ी कुछ खामियां भी सामने आई हैं.
इसके अलावा Everest कंपनी के Egg Curry मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाला में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है. इस मामले के बाद खाद्य नियामक ने संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर उनसे जवाब की मांग की है.&amp;nbsp;
Everest के इन मसालों पर उठे सवाल
FSSAI की करवाई में Everest की हींग को लेकर कुछ गड़बड़ी पाई गई. जिसमें हींग को गलत तरीके से ब्रांडेड और घटिया क्वालिटी का बताया गया है. इसके अलावा इन मसालों में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया है.&amp;nbsp;

Egg Curry Masala
Chicken Masala
Garam Masala

वहीं, कथित नियम उल्लंघन को लेकर लालजी गोधू एंड कंपनी को भी अलग से चेतावनी दी गई है.
McD और KFC में खाते हैं आप? 10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना
खाने की चीजों पर जल्द दिखेगा नया चेतावनी लेबल
दरअसल, यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब FSSAI ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लिए एक नए फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है. जिसके तहत पैकेट के सामने चमकीले लाल रंग का षट्भुजाकार निशान लगाने की प्लानिंग है. बड़ी बात यह है कि इस निशान के जरिए उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में आसानी से जानकारी मिल सकेगी, जिनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा हो. यानी किसी भी सामान की खरीदारी करते समय ग्राहक पैकेट देखकर ही उसके पोषण संबंधी जोखिम को आसानी से समझ सकेंगे.
फूड इंडस्ट्री ने भी जताई कुछ नियमों पर चिंता
नए लेबलिंग नियमों को लेकर खाद्य उद्योग की ओर से भी कुछ चिंताएं सामने आई हैं. कोका-कोला, नेस्ले और पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनियों को प्रतिनिधित्व करने वाले &amp;nbsp;समूहों ने प्रस्तावित व्यवस्था के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है. वहीं, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों से सिर्फ नियमों का पालन करने तक सीमित न रहने की अपील की है.
Delhi-NCR में बढ़ेगा ऑटो का किराया, CNG की महंगाई के बाद तेज हुई मांग
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Delhi&amp;NCR में बढ़ेगा ऑटो का किराया, CNG की महंगाई के बाद तेज हुई मांग</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi-NCR Auto Taxi Fare News: दिल्ली-NCR में सफर करने वाले लोगों की जेब पर जल्द ही महंगाई की मार पड़ने वाली है. दिल्ली और आसपास के शहरों में CNG की कीमत बढ़ने के बाद ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है. यूनियन का कहना है कि ईंधन महंगा होने से ड्राइवरों का खर्च लगातार बढ़ रहा है और मौजूदा किराए में गाड़ी चलाना काफी मुश्किल हो रहा है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ाने की मांग हो रही है ऑटो-टैक्सी का किराया?
CNG की कीमत में हालिया बढ़ोतरी से ड्राइवरों का रोजाना खर्च बढ़ गया है, जिससे उनकी रोजाना की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है. ऑटो-टैक्सी यूनियनों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में CNG के दाम कुल मिलाकर करीब 10-11 रुपये तक बढ़ चुके हैं. ऐसे में यूनियन चाहती है कि सरकार मौजूदा किराए की समीक्षा कर जल्द से जल्द नई दरें लागू करें. क्योंकि अगर किराया नहीं बढ़ाया जाता है, तो ड्राइवरों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
McD और KFC में खाते हैं आप? 10 फूड आउटलेट्स पर लगा भारी जुर्माना
सरकार से की गई बड़ी मांग&amp;nbsp;
ऑटो रिक्शा एसोसिएशन और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने सरकार से एक हफ्ते के भीतर किराया बढ़ाने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि अगर किराया बढ़ाना मुमकिन नहीं है, तो CNG की बढ़ी कीमतों से ड्राइवरों &amp;nbsp;को राहत देने के लिए सब्सिडी दी जाए.&amp;nbsp;
यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने जल्द किराया बढ़ाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई, तो 9 सितंबर को हड़ताल की जा सकती है. ऐसे में अगर सरकार और यूनियनों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो दिल्ली-NCR में ऑटो-टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
दिल्ली में कितनी हो गई CNG की कीमत?
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के मुताबिक, शनिवार से दिल्ली और आसपास के शहरों में CNG के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है. बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत करीब 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है.
US-वेनेजुएला में Oil समझौता, ट्रंप की मेगा डील से क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Product का लेबल और एडवाइजरी, फूड ऑर्डर करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/product-का-लेबल-और-एडवाइजरी-फूड-ऑर्डर-करने-से-पहले-इन-बातों-का-रखें-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ Food Safety News:&amp;nbsp;अगर आप भी बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं या रेस्टोरेंट में जाकर कुछ खाते हैं, तो सिर्फ स्वाद और कीमत देखकर ही चीजें न चुने. ऐसे में खाना ऑर्डर करने से पहले उसकी सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी, साफ-सफाई और फूड सेफ्टी से जुड़ी जरूरी बातों पर ध्यान दें. खासकर पैकेज्ड फूड खरीदते समय लेबल पर लिखी जानकारी को नजरअंदाज न करें.&amp;nbsp;
दरअसल, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने हाल ही में फूड सेफ्टी को लेकर ग्राहकों को कुछ जरूरी सलाह दी है. साथ ही उन्होंने कहा कि सिर्फ स्वाद के लिए खाने के बजाय, आपको अपने शरीर के लिए खाना चाहिए.
खाना ऑर्डर करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किसी रेस्टोरेंट या होटल में खाना ऑर्डर करते समय सिर्फ स्वाद या दिखावट को प्राथमिकता न दें, बल्कि पहले उससे पूछें कि उसमें कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल की गई है.&amp;nbsp;
Everest के मसालों पर लगा बैन, FSSAI ने जारी किया नोटिस

अगर आपको किसी खास खाद्य पदार्थ से एलर्जी है, तो ऑर्डर करने से पहले उसकी सामग्री की जानकारी जरूर हासिल करें.
खासकर खाने की साफ-सफाई और वहां की हाइजीन व्यवस्था पर ध्यान दें.
पैकेज्ड फूड खरीदते समय सिर्फ कीमत या एक्सपायरी डेट देखकर न खरीदें.

फूड प्रोडक्ट का लेबल को न करें नजरअंदाज&amp;nbsp;
पैकेज्ड फूड खरीदते समय उसके लेबल को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है. उसमें मौजूद सामग्री, कैलोरी, प्रोटीन और अन्य पोषण संबंधी जानकारी आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.&amp;nbsp;

प्रोडक्ट में इस्तेमाल की गई सभी सामग्री की लिस्ट चेक करें.
कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा जैसी पोषण संबंधी जानकारी लें.
इस्तेमाल किए गए तेल और अन्य प्रमुख सामग्री के बारे में जानकारी चेक करें.
प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग डेट और निर्माण से जुड़ी जानकारी देखें.
यह जांचें कि संबंधित खाद्य प्रतिष्ठान या प्रोडक्ट के पास जरूरी FSSAI लाइसेंस है या नहीं.

Delhi-NCR में बढ़ेगा ऑटो का किराया, CNG की महंगाई के बाद तेज हुई मांग
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>क्या बिना बैंक अकाउंट के भी बन सकता है क्रेडिट कार्ड? जानिए इसकी पूरी प्रक्रिया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-बिना-बैंक-अकाउंट-के-भी-बन-सकता-है-क्रेडिट-कार्ड-जानिए-इसकी-पूरी-प्रक्रिया</link>
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        <description><![CDATA[ अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए बैंक में खाता होना जरूरी है? ऐसा हर बार जरूरी नहीं होता कि केवल उसी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड मिले, जिसका उस बैंक में अकाउंट हो. कई बैंक ऐसे लोगों को भी क्रेडिट कार्ड जारी कर देते हैं, जिनका उनके यहां बैंक अकाउंट नहीं होता.
जानकारों के मुताबिक, बैंक सबसे पहले यह देखते हैं कि आवेदक की आय कितनी है, वह क्या काम करता है, उसका क्रेडिट स्कोर कैसा है और वह समय पर भुगतान कर सकता है या नहीं. अगर ये शर्तें पूरी हो जाती हैं तो बैंक बिना अकाउंट के भी क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है.
एफडी को देखकर भी जारी होता है क्रेडिट कार्ड
कई बार ऐसा भी होता है कि किसी व्यक्ति का न तो बैंक अकाउंट होता है और न ही उसकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री होती है. ऐसे में कुछ बैंक एफडी के बदले भी क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं. इससे लोगों को अपनी अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री बनाने का मौका मिलता है. यानी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड भी मिल जाता है और उसकी क्रेडिट हिस्ट्री भी मजबूत होने लगती है.
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क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया
क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, पते का प्रमाण और आय से जुड़े कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं. हालांकि हर बैंक के अपने अलग-अलग नियम और शर्तें होती हैं.
कई बार लोगों में यह गलतफहमी भी होती है कि प्रीपेड कार्ड, क्रेडिट कार्ड का विकल्प है, जबकि ऐसा नहीं है. प्रीपेड कार्ड में आप अपना ही पैसा पहले से लोड करके खर्च करते हैं.
क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड में क्या अंतर है?
क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड दोनों अलग-अलग तरह के कार्ड हैं.&amp;nbsp; क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर हो सकता है, जबकि प्रीपेड कार्ड के इस्तेमाल से क्रेडिट स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता.&amp;nbsp;
प्रीपेड कार्ड वह कार्ड होता है, जिसमें पहले से पैसे जमा (लोड) किए जाते हैं. उपयोगकर्ता केवल उतनी ही राशि खर्च कर सकता है, जितनी कार्ड में पहले से मौजूद होती है.&amp;nbsp; इसलिए प्रीपेड कार्ड को क्रेडिट कार्ड नहीं माना जाता.
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क्रेडिट कार्ड पर जरूरी सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल हमेशा सोच-समझकर करना चाहिए. जितना खर्च करें, उतना समय पर चुका भी सकें. सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड ज़रूरत के समय काफी काम आ सकता है. विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि क्रेडिट कार्ड लेने से पहले उसकी ब्याज दर, सालाना शुल्क, लेट फीस और अन्य सभी शुल्कों की पूरी जानकारी जरूर ले लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 01:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, बिना, बैंक, अकाउंट, के, भी, बन, सकता, है, क्रेडिट, कार्ड, जानिए, इसकी, पूरी, प्रक्रिया</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नोएडा&amp; गुरुग्राम समेत किन शहरों में क्या है CNG का ताजा रेट? 3.89 रुपए महंगी हुई गैस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नोएडा-गुरुग्राम-समेत-किन-शहरों-में-क्या-है-cng-का-ताजा-रेट-389-रुपए-महंगी-हुई-गैस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नोएडा-गुरुग्राम-समेत-किन-शहरों-में-क्या-है-cng-का-ताजा-रेट-389-रुपए-महंगी-हुई-गैस</guid>
        <description><![CDATA[ देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के करोड़ों लोगों के लिए सीएनजी से जुड़ी बड़ी खबर है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी ने सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ोतरी की है. नई कीमतें 29 अगस्त 2026 की सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं.
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. वहीं नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी का नया रेट 95.59 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है. गुरुग्राम में अब एक किलो सीएनजी के लिए 92.01 रुपये चुकाने होंगे.&amp;nbsp;
शहर अनुसार सीएनजी के दाम-&amp;nbsp;

दिल्ली- 86.98 रुपए प्रति किलोग्राम
नोएडा- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
गाजियाबाद- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
गौतम बुद्ध नगर- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
ग्रेटर नोएडा- 95.59 रुपए प्रति किलोग्राम
मेरठ- 95.47 रुपए प्रति किलोग्राम
मुजफ्फरनगर- 95.47 रुपए प्रति किलोग्राम
शामली- 95.47 रुपए प्रति किलोग्राम
गुरुग्राम- 92.01 रुपए प्रति किलोग्राम
रेवाड़ी- 91.59 रुपए प्रति किलोग्राम
करनाल- 91.32 रुपए प्रति किलोग्राम
हापुड़- 96.59 रुपए प्रति किलोग्राम

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क्यों बढ़े CNG के दाम?
IGL ने कीमतों में बढ़ोतरी की वजह अंतरराष्ट्रीय एलएनजी की ऊंची कीमतों को बताया है. कंपनी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे सीएनजी के लिए इस्तेमाल होने वाली इनपुट गैस की लागत बढ़ गई है. कंपनी ने कहा है कि लागत में बढ़ोतरी के असर को आंशिक रूप से कम करने के लिए सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलो की ये बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी.&amp;nbsp;
किसपर पड़ेगा ज्यादा असर?
सीएनजी की कीमत बढ़ने का सीधा असर उन लोगों की जेब पर पड़ेगा जो सीएनजी कार, ऑटो या टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं. खासकर रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों का ईंधन खर्च बढ़ जाएगा. अगर कोई वाहन एक दिन में 5 किलो सीएनजी इस्तेमाल करता है, तो 3.89 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से उसका रोज का खर्च करीब 19.45 रुपये बढ़ जाएगा. महीने में 30 दिन यही खपत रहने पर एक्स्ट्रा खर्च करीब 583.50 रुपये हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नोएडा-, गुरुग्राम, समेत, किन, शहरों, में, क्या, है, CNG, का, ताजा, रेट, 3.89, रुपए, महंगी, हुई, गैस</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आज CNG के साथ पेट्रोल&amp; डीजल के भी बदले दाम? जानें महंगा हुआ कि सस्ता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-cng-के-साथ-पेट्रोल-डीजल-के-भी-बदले-दाम-जानें-महंगा-हुआ-कि-सस्ता</link>
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        <description><![CDATA[ शनिवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर लोगों की नजर बनी हुई है. दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. सरकारी तेल कंपनियों ने आज भी पेट्रोल-डीजल के पुराने रेट बरकरार रखे हैं.
अगर आप आज गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जान लेना जरूरी है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग राज्यों में टैक्स वगैरह के कारण अलग होती हैं.
दिल्ली में आज पेट्रोल-डीजल का क्या भाव?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 29 अगस्त को पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
नोएडा- गुरुग्राम समेत किन शहरों में क्या है CNG का ताजा रेट? 3.89 रुपए महंगी हुई गैस
मुंबई में क्या हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है.
कोलकाता में क्या है ताजा भाव?
कोलकाता की बात करें तो यहां पर पेट्रोल की कीमत 113.51 रुपए प्रति लीटर है. वहीं डीजल का रेट भी 99.82 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है.
शहर अनुसार पेट्रोल और डीजल के भाव-&amp;nbsp;



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
111.31 रुपये
97.97 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.78 रुपये
99.56 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये
103.82 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये


वाराणसी
107.40 रुपये
90.10 रुपये


भुवनेश्वर
103.19 रुपये
100.68 रुपये


आगरा
&amp;nbsp;107.09 रुपये
89.80 रुपये



क्या है गुड न्यूज?
शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाने वालों के लिए सीएनजी की कीमत में 3.89 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की है. हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज इसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हुई है. सीएनजी के दाम बढ़ने से दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी कार, ऑटो और टैक्सी चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा. वहीं, दूसरी ओर जिनके पास भी पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां हैं, उनको फिलहाल ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.&amp;nbsp;
पिछले 4 महीनों में करीब 10 रुपए महंगी हुई गैस, आज 5वीं बार बढ़े दाम
कच्चे तेल की कीमतों पर क्यों है नजर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ता है. हाल के दिनों में वैश्विक तेल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के रेट शांत रहने से थोड़ी राहत है. लेकिन आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तेल कंपनियों के रेट में बदलाव हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, CNG, के, साथ, पेट्रोल-, डीजल, के, भी, बदले, दाम, जानें, महंगा, हुआ, कि, सस्ता</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नेपाल की बाढ़ में Infosys के CEO लापता, लैक्स गोपीसेट्टी पर आया कंपनी का बयान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नेपाल-की-बाढ़-में-infosys-के-ceo-लापता-लैक्स-गोपीसेट्टी-पर-आया-कंपनी-का-बयान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नेपाल-की-बाढ़-में-infosys-के-ceo-लापता-लैक्स-गोपीसेट्टी-पर-आया-कंपनी-का-बयान</guid>
        <description><![CDATA[ नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के सीईओ से संपर्क नहीं हो पा रहा है. कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि उसकी सब्सिडियरी इंफोसिस के सीईओ लक्ष गोपिसेट्टी नेपाल गए हुए थे और अभी फिलहाल पहुंच से बाहर हैं.&amp;nbsp;
इंफोसिस ने कहा कि इस समय कंपनी का फोकस गोपिसेट्टी की सुरक्षा और उनका हाल जानना है. कंपनी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटाने और उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है.
नेपाल क्यों गए थे लैक्स गोपीसेट्टी?कंपनी के मुताबिक, लैक्स गोपीसेट्टी नेपाल में व्यक्तिगत यात्रा पर गए थे. उनका वहां जाना कंपनी के किसी आधिकारिक काम से जुड़ा नहीं था. नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
इंफोसिस &amp;nbsp;ने एक बयान में कहा कि वो स्थिति पर नजर बनाए हुए है और एजेंसियों के साथ संपर्क में भी हैं. कंपनी ने गोपिसेट्टी के परिवार से भी लगातार संपर्क बनाए रखा है और इस मुश्किल समय में उन्हें हर संभव सहायता दे रही है.
आज CNG के साथ पेट्रोल- डीजल के भी बदले दाम? जानें महंगा हुआ कि सस्ता
कौन हैं लैक्स गोपीसेट्टी?लैक्स गोपीसेट्टी, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के सीईओ हैं. ये इंफोसिस लिमिटेड &amp;nbsp;की एक सब्सिडियरी है, जो खासतौर से अमेरिका और कनाडा में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े ग्राहकों को सेवाएं देती है.
गोपिसेट्टी की भूमिका कंपनी के पब्लिक सेक्टर कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बीच उनसे संपर्क नहीं हो पाने की खबर ने कंपनी और उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है.
कितने लापता, कितने लोगों की गई जान?नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है. नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के इलाकों में अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है. बचाव अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. शुक्रवार को नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की ऑफिशियल संख्या 579 हो गई, जबकि करीब 2500 लोग अभी भी लापता हैं.
कितने भारतीय हुए लापता?नेपाल में आई इस आपदा का असर वहां मौजूद भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कई सारे भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की खबर सामने आई है. भारत सरकार नेपाल में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए प्रयास कर रही है. कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं .&amp;nbsp;
फिलहाल लैक्स गोपीसेट्टी की स्थिति को लेकर इंफोसिस &amp;nbsp;की ओर से कोई और जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. कंपनी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है.
नोएडा- गुरुग्राम समेत किन शहरों में क्या है CNG का ताजा रेट? 3.89 रुपए महंगी हुई गैस
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नेपाल, की, बाढ़, में, Infosys, के, CEO, लापता, लैक्स, गोपीसेट्टी, पर, आया, कंपनी, का, बयान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आज LPG सिलेंडर कितने का मिल रहा? घरेलू और कमर्शियल गैस के ताजा रेट यहां देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिल-रहा-घरेलू-और-कमर्शियल-गैस-के-ताजा-रेट-यहां-देखें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-lpg-सिलेंडर-कितने-का-मिल-रहा-घरेलू-और-कमर्शियल-गैस-के-ताजा-रेट-यहां-देखें</guid>
        <description><![CDATA[ महीने की शुरुआत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के बाद अब 29 अगस्त को घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है. 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें फिलहाल शांत हैं. वहीं, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को अगस्त की शुरुआत में राहत मिली थी. तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 200 रुपए से ज्यादा की कटौती की थी.
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बड़ा बदलाव जून 2026 में हुआ था. इसके बाद अगस्त में घरेलू सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ऐसे में अगर आप आज गैस सिलेंडर बुक करने जा रहे हैं तो आपको अपने शहर के हिसाब से रेट देना होगा.
शहर अनुसार एलपीजी के दाम-



शहर&amp;nbsp;
घरेलू एलपीजी की कीमत
कमर्शियल एलपीजी की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपए
2,738.00 रुपए


मुंबई
941.50 रुपए
2,691.50 रुपए


कोलकाता
968.00 रुपए
2,872.50 रुपए


चेन्नई
957.50 रुपए
2,906.00 रुपए


बेंगलुरु
944.50 रुपए
2,821.00 रुपए


पटना
1,031.50 रुपए
3,018.00 रुपए


देहरादून
961.00 रुपए
2,791.00 रुपए


भोपाल
947.50 रुपए
2,743.00 रुपए


चंडीगढ़
951.50 रुपए
2,760.00 रुपए



अगस्त में कमर्शियल गैस हुई सस्तीतेल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अगस्त 2026 को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में कटौती की थी. दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर 2,930 रुपए से घटकर 2,738 रुपए हो गया है. मतलब ग्राहकों को प्रति सिलेंडर 192 रुपए की राहत मिली है. कोलकाता में भी 209 रुपए की कटौती के बाद नया रेट 2,872.50 रुपए हो गया है.
नेपाल की बाढ़ में Infosys के CEO लापता, लैक्स गोपीसेट्टी पर आया कंपनी का बयान
घरेलू सिलेंडर के दाम क्यों नहीं बदले?घरेलू एलपीजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बदलाव अलग-अलग तरीके से किया जाता है. घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई नया संशोधन नहीं हुआ है. दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपए, मुंबई में 941.50 रुपए, कोलकाता में 968 रुपए और चेन्नई में 957.50 रुपए बनी हुई है.&amp;nbsp;
एलपीजी के दाम कब बदलते हैं?तेल मार्केटिंग कंपनियां आम तौर पर हर महीने की शुरुआत में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं. घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर के रेट में बदलाव हो सकता है. हालांकि, किसी महीने कीमत में बदलाव हो, ये जरूरी नहीं है. इसलिए महीने के अंत में भी अगर आप एलपीजी सिलेंडर बुक कर रहे हैं, तो अपने शहर का मौजूदा रेट जरूर चेक कर लें. अलग-अलग शहरों में एलपीजी की कीमत अलग हो सकती है.
आज CNG के साथ पेट्रोल- डीजल के भी बदले दाम? जानें महंगा हुआ कि सस्ता
 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, LPG, सिलेंडर, कितने, का, मिल, रहा, घरेलू, और, कमर्शियल, गैस, के, ताजा, रेट, यहां, देखें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रक्षाबंधन पर सस्ती हो गई चीनी, 20 फीसदी गिरे दाम, दुकानों पर कम होंगे रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रक्षाबंधन-पर-सस्ती-हो-गई-चीनी-20-फीसदी-गिरे-दाम-दुकानों-पर-कम-होंगे-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/रक्षाबंधन-पर-सस्ती-हो-गई-चीनी-20-फीसदी-गिरे-दाम-दुकानों-पर-कम-होंगे-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ चीनी के ज्यादा होते दाम से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. पिछले कुछ दिनों में चीनी की एक्स मिल कीमतों में करीब 20% की गिरावट आई है. &amp;nbsp;इसके बाद खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम कम होने लगे हैं. &amp;nbsp;सरकार को उम्मीद है कि थोक बाजार में कीमतों में आई नरमी का असर जल्द ही दुकानों पर भी दिखाई देगा.
सरकार के मुताबिक, हाल में चीनी के दाम ज्यादा होने की वजह देश में इसकी कमी नहीं थी. बाजार में ज्यादा जमा कर के रखना और कीमत ज्यादा होने की उम्मीद में ज्यादा खरीदारी के वजह से दाम ऊपर गए थे. सरकार ने कहा है कि देश में चीनी का काफी स्टॉक मौजूद है.
सितंबर से बदलेगा कोटा सिस्टम
बाजार में चीनी की सप्लाई तेजी से ज्यादा होने के लिए सरकार सितंबर से मौजूदा महीने का कोटा इंतजाम को बदलकर हर 15 दिन में कोटा देने का इंतेजाम लागू करेगी. इसके अनुसार चीनी मिलों को पहले हफ्ते में अपने फिक्स कोटे का कम से कम 40% &amp;nbsp;हिस्सा बेचना होगा. बची हुई अगले हफ्ते बेचनी होगी.
इस बदलाव से सरकार को चीनी की मांग और सप्लाई पर नजर रखने में आसानी होगी. जरूरत पड़ने पर सरकार एकस्ट्रा कोटा भी जारी कर सकेगी.
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बिक्री के 7 दिन में भेजनी होगी चीनी
सरकार ने चीनी मिलों को बिक्री के सात दिन के अंदर चीनी भेजने को कह दिया है. इसका मकसद मिलों से डीलरों और फिर कस्टमर्स तक चीनी की सप्लाई को तेज करना है. &amp;nbsp;वहीं, थोक खरीदारों को अपनी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके नहीं रखने की सलाह दी गई है.
आने वाले महीनों में चीनी की सप्लाई और ज्यादा होने की उम्मीद है. गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होने की कोशिश है. अक्टूबर में 10 लाख टन से ज्यादा चीनी बनने का अनुमान है, जबकि नवंबर में उत्पादन करीब 45 लाख टन तक पहुंच सकता है. इसके अलावा कर्नाटक और महाराष्ट्र की चालू मिलों से सितंबर में करीब 2 लाख टन एकस्ट्रा चीनी बाजार में आने की उम्मीद है. सरकार ने अक्टूबर में बनने वाली चीनी को बिना रोक के बेचने को बोल दिया है. इससे नई चीनी जल्द बाजार में पहुंच सकेगी.
रिफाइनर को एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के अनुसार लाई गई और प्रोसेस की गई चीनी बेचने की अनुमति दी गई है. साथ ही, जिन डीलरों और थोक खरीदारों के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक है, उन्हें इसे बाजार में निकालने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. इन कदमों से चीनी की सप्लाई ज्यादा होने और कीमतों में और नरमी आने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली पहुंची 453 टन प्याज, 35 रुपए में खरीद लो, NCR की मंडियों में बढ़ेगी आवक</title>
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        <description><![CDATA[ Onion Price News: अगर आप भी दिल्ली में रहते हैं और प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है. महाराष्ट्र के नासिक से करीब 453.65 टन प्याज लेकर &amp;lsquo;कंदा एक्सप्रेस&amp;rsquo; शुक्रवार यानी आज दिल्ली पहुंच गई है. सरकार ने यह कदम दिल्ली-NCR में प्याज की सप्लाई बढ़ाने और बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए उठाया है. खास बात यह है कि बफर स्टॉक का यह प्याज दिल्ली-NCR में 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा.&amp;nbsp;
केंद्र सरकार के मुताबिक, इसका खास मकसद प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और बाजार की बढ़ी कीमतों पर लगाम लगाना है. दिल्ली के अलावा आसपास के कुछ शहरों में भी इस स्टॉक की सप्लाई की जाएगी. ऐसे में आने वाले दिनों में दिल्ली की मंडियों में प्याज की अवाक बढ़ने से इनकी कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
453 टन से ज्यादा प्याज लेकर दिल्ली पहुंची कंदा एक्सप्रेस
पहली कंदा एक्सप्रेस में प्याज के 21 वैगन लगाए गए थे. इन वैगन के जरिए शुक्रवार को करीब 453.65 टन प्याज दिल्ली पहुंचाया गया है. हालांकि, यह प्याज नासिक में रखे गए सरकारी बफर स्टॉक से भेजा गया है. बताया जा रहा है कि कुछ प्याज चंडीगढ़, लुधियाना और जम्मू जैसे आसपास के शहरों में भी भेजा जाएगा.
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दिल्ली में 62 रुपये किलो पहुंचा प्याज
दिल्ली में प्याज की कीमतों में हाल के दिनों में काफी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 62 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी महीने यह करीब 33 रुपये किलो था. वहीं, देशभर में प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 46.58 रुपये प्रति किलो और थोक भाव 38.29 रुपये प्रति किलो था.&amp;nbsp;
सरकार के पास कितना प्याज का बफर स्टॉक है?
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के पास फिलहाल करीब 1.21 लाख टन प्याज बफर स्टॉक के तौर पर मौजूद है. बताया जा रहा है कि यह स्टॉक मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखा गया है. हालांकि, सरकार इसी स्टॉक को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग शहरों में भेज रही है. ऐसे में सरकार को यह उम्मीद है कि बफर स्टॉक बाजार में आने से दिल्ली में प्याज के खुदरा भाव में करीब एक सप्ताह के भीतर कमी आ सकती है.&amp;nbsp;
इन शहरों में भी भेजा जाएगा प्याज
दिल्ली के बाद दूसरे शहरों तक भी बफर स्टॉक पहुंचाने की तैयारी की गई है. चेन्नई के लिए भी कंदा एक्सप्रेस की एक खेप तैयार की जाएगी. इसके बाद मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहरों के लिए भी प्याज ट्रेन के जरिए भेजने की योजना है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>रक्षाबंधन पर 4000 करोड़ का कारोबार, बाजारों में ज्वैलरी की जबरदस्त मांग</title>
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        <description><![CDATA[ रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली का कारोबारी बाजार इस बार खासा गुलजार नजर आया. भाई-बहन के रिश्ते का यह त्योहार सिर्फ खुशियां ही नहीं लाया, बल्कि कारोबारियों के लिए भी बड़ी कमाई का अवसर बनकर सामने आया है. कारोबारी संगठन कैट के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में रक्षाबंधन से जुड़े कारोबार का आंकड़ा करीब 4000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि देशभर में यह कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है.
राखी से लेकर मिठाई और कपड़ों तक, हर बाजार में बढ़ी खरीदारी
त्योहार से पहले ही राजधानी के प्रमुख बाजारों में खरीदारों की आवाजाही बढ़ गई थी. चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, कमला नगर, लाजपत नगर, गांधी नगर, खान मार्केट और राजौरी गार्डन समेत कई बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां तेज रहीं. राखियों के अलावा मिठाई, गिफ्ट आइटम, कपड़े, श्रृंगार का सामान और अन्य त्योहार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी ने बाजार को रफ्तार दी.
स्वदेशी राखियों और हस्तशिल्प की ओर बढ़ा रुझान
इस बार राखियों के बाजार में स्वदेशी डोरी और हस्तशिल्प से तैयार राखियों की मांग खास तौर पर दिखाई दी. स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली इन राखियों ने बाजार में अपनी जगह बनाई है. रक्षाबंधन से जुड़े इस कारोबार का फायदा केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राखी बनाने वाले कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों से लेकर गृह उद्योगों को भी मिला.
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त्योहार ने कई कारोबारों को एक साथ दिया सहारा
कैट के मुताबिक, रक्षाबंधन का सीधा असर कई अलग-अलग क्षेत्रों के कारोबार पर पड़ा है. मिठाई और फूल बेचने वालों के साथ गिफ्ट आइटम के व्यापारी, परिवहन क्षेत्र, पैकेजिंग कारोबार, कुरियर सेवाएं और ई-कॉमर्स डिलीवरी नेटवर्क भी इस दौरान सक्रिय रहे. छोटे दुकानदारों के लिए भी त्योहार का सीजन बिक्री बढ़ाने का अहम मौका बना.
दिल्ली में ज्वैलरी कारोबार का आंकड़ा 800-900 करोड़ रुपये तक
रक्षाबंधन के दौरान गहनों की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी. अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में अकेले ज्वैलरी बाजार का कारोबार करीब 800 से 900 करोड़ रुपये रहा. भाइयों की कलाई के लिए सोने और चांदी से बनी राखियों के साथ बहनों को उपहार देने के लिए आभूषण और सिक्कों की मांग भी बनी रही.
महंगी धातुओं के बीच हल्की ज्वैलरी बनी पसंद
दरीबा व्यापार मंडल के महासचिव मनीष वर्मा के अनुसार, सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद रक्षाबंधन पर ज्वैलरी की खरीदारी को लेकर लोगों में रुचि रही. हालांकि, कीमतों को देखते हुए ग्राहकों का झुकाव हल्के वजन वाले गहनों की तरफ अधिक रहा. सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के अलावा सोने-चांदी के सिक्कों की भी मांग देखने को मिली.
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देशभर में 30 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान
रक्षाबंधन के बढ़ते बाजार ने इस त्योहार की आर्थिक अहमियत को भी सामने रखा है. कैट का अनुमान है कि देशभर में इस बार राखी से जुड़ा कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक रह सकता है. दिल्ली को इसमें करीब 4000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है, जिसमें राखी और त्योहार से जुड़े विभिन्न सामानों की बिक्री के साथ ज्वैलरी कारोबार भी शामिल है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>देशभर के 2573 पेट्रोल पंपों पर बिक्री बंद, तेल में मिलावट पर सरकार का बड़ा एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ पेट्रोल में मिलावट और गाड़ियों में खराबी की शिकायतों पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. कार्रवाई के तहत बड़े पैमाने पर देश के 2 हजार 573 रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पेट्रोल की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. सरकार की ओर से यह कड़ी कार्रवाई ऐसे वक्त की गई है, जब &amp;nbsp;पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मिनिस्ट्री और सरकारी तेल कंपनियां तेल में मिलावट की गहन जांच पड़ताल कर रही हैं.
बताया जा रहा है कि देश के करीब 90 हजार पेट्रोल पंप पेट्रोलियम मिनिस्ट्री और सरकारी तेल कंपनियों की निगरानी के दायरे में हैं. जांच अभियान का मकसद जमीन के नीचे बने पेट्रोल स्टोरेज टैंकों में पानी घुसने से होने वाली मिलावट को रोकना है. पिछले दिनों इस पर देश में काफी बवाल हुआ था.
किन-किन चीजों की हो रही है जांच?

रिटेल आउटलेट्स
जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंक
टैंकर
और इथेनॉल स्टोरेज

किस कंपनी के कितने पेट्रोल पंपों की बिक्री पर लगी है रोक?

सबसे ज्यादा संख्या इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन- 1257 पेट्रोल पंप
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन- 915 पेट्रोल पंप
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन- 401 पेट्रोल पंप

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गौरतलब है कि सरकार की ओर से देश के लगभग 89 हजार रिटेल आउटलेट्स पर जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंकों में पानी घुसने की जांच की जा रही है. सरकार की ओर से जारी की गई टेस्टिंग गाइडलाइंस के मुताबिक, कई पेट्रोल पंपों पर स्टोरेज टैंकों की जांच दिन में आठ से 12 बार तक की जा रही है. जांच के दौरान मिलने वाले मॉनिटरिंग सिस्टम की पहचान करके उन्हें ठीक करने या बदलने का काम किया जा रहा है.
डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बढ़ा टेस्टिंग का दायरा
बता दें कि यह क्वालिटी चेक सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं हैं. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पूरे डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया है, जिसमें इथेनॉल टैंकर, स्टोरेज टैंक, डिपो और टर्मिनल शामिल हैं.
कार कंपनियां रख रही नजर
बता दें कि ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियां भी इस मामले पर बारीकी से नजर रख रही हैं. पिछले दिनों इंडस्ट्री की टेस्टिंग में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इकट्ठा किए गए 250 से ज्यादा फ़्यूल सैंपल शामिल थे. देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी फ्यूल की क्वालिटी की जांच की है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 21:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>महंगे होंगे बिस्किट्स, Britannia की कीमत पर Goldman का बड़ा अनुमान</title>
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        <description><![CDATA[ चाय के साथ बिस्किट खाने वालों के लिए बुरी खबर है. चीनी के दाम ज्यादा होने से बिस्किट और दूसरी मीठी चीजें महंगी हो सकती हैं. Goldman का कहना है कि चीनी की ज्यादा होती कीमतों का सबसे ज्यादा असर Britannia industries पर पड़ सकता है.
चीनी बिस्किट, चॉकलेट, मिठाई और ठंडा बनाने में इस्तेमाल होती है. अगर चीनी के दाम लंबे समय तक ज्यादा रहते हैं, तो कंपनियों का खर्च ज्यादा होगा. इससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
Britannia पर ज्यादा असर क्यों
Goldman Sachs के मुताबिक, Britannia के खर्च में चीनी और पाम ऑयल की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है. कंपनी के कई सामान छोटे और कम कीमत वाले पैक में बिकते हैं. इसलिए कंपनी के लिए ज्यादा हुआ खर्च सीधे कस्टमर्स पर डालना आसान नहीं होगा.
Goldman Sachs ने Britannia को न्यूट्रल रेटिंग दी है और इसके शेयर का 6,000 का टारगेट रखा है. नेस्ले इंडिया और वरुण बेवरेजेज पर भी महंगी चीनी का असर पड़ सकता है, लेकिन इन कंपनियों पर असर कम रहने का अनुमान है.
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चीनी क्यों हो रही है महंगी
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन रहता है. गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई, बिस्किट और दूसरी मीठी चीजों की मांग ज्यादा हो जाती है. इससे चीनी की मांग भी बाजार में तेजी से बढ़ती है.
सरकार ने पिछले महीने डीलरों को 30 दिन से ज्यादा चीनी रखने से रोकने का फैसला किया था. इसके बावजूद पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 10% ज्यादा हो गए हैं. कम बारिश और सूखे मौसम से गन्ने की फसल पर भी असर पड़ा है.
विदेशों में भी सप्लाई की परेशानी
ब्राजील में खराब मौसम के वजह से चीनी की फसल और कटाई में देरी हुई है. वहां गन्ने का इस्तेमाल चीनी के बजाय एथेनॉल बनाने में भी ज्यादा हो रहा है. इससे चीनी की सप्लाई कम होने का डर ज्यादा हो गया है.
थाईलैंड और भारत में भी चीनी का बनना कम रहने का अनुमान है. यूरोप और ब्रिटेन में तेज गर्मी जैसे मौसम के हालात ने भी परेशानी ज्यादा किया है.
सरकार ने बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियों से फिक्स समय से ज्यादा रखा चीनी का स्टॉक 31 अगस्त तक बेचने को कहा है. सरकार को उम्मीद है कि बाजार में ज्यादा चीनी आने से दाम कम हो सकते हैं. लेकिन, कंपनियों का कहना है कि अभी स्टॉक बेचकर बाद में बाजार से चीनी खरीदना महंगा पड़ सकता है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चांदी खरीदने का है प्लान, तो जान लीजिए असली और नकली में अंतर</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और घरों में चांदी की खरीदारी की तैयारी चल रही है. पायल, चेन, बिछिया, अंगूठी या पूजा के बर्तन ज्यादातर घरों में कुछ न कुछ चांदी का जरूर आता है लेकिन दुकान से लाई गई चांदी सच में उतनी शुद्ध है या नहीं, यह पता कैसे चले?
अब इसका एक आसान तरीका है और सरकार ने इसका दायरा और बड़ा कर दिया है.&amp;nbsp;भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS ने चांदी के गहनों पर लगने वाले HUID नंबर का काम तेज कर दिया है.&amp;nbsp;अब देश के 102 जिलों में 341 ऐसे सेंटर चल रहे हैं जहां चांदी की जांच और हॉलमार्किंग होती है. 25 हजार से ज्यादा चांदी के दुकानदार BIS के साथ रजिस्टर्ड हो चुके हैं.
ये भी पढ़ें: पलट गई बाजी, पेट्रोल का बड़ा सप्लायर बना भारत, सऊदी-UAE को पछाड़ा
गहने पर क्या-क्या लिखा होता है
अगर गहना हॉलमार्क वाला है तो उस पर चार चीजें दिखेंगी.

पहला - BIS का निशान.&amp;nbsp;
दूसरा- SILVER शब्द.&amp;nbsp;
तीसरा- शुद्धता का ग्रेड जैसे 925 या 800.&amp;nbsp;
चौथा - लेजर से लिखा हुआ छह अंकों का HUID नंबर

यह छह अंकों का नंबर हर गहने का अपना अलग नंबर होता है ठीक वैसे ही जैसे हर आदमी का अपना आधार नंबर. इसी नंबर से पता चलता है कि गहना कहां बना, किसने बनाया और उसकी शुद्धता क्या है.
घर बैठे कैसे चेक करें?
इसके लिए फोन में BIS CARE ऐप डाउनलोड कर लीजिए. ऐप में गहने पर लिखा छह अंकों का HUID नंबर डालिए. स्क्रीन पर उस गहने की पूरी जानकारी आ जाएगी. अगर नंबर डालने पर कुछ नहीं आता या जानकारी मेल नहीं खाती तो समझ जाइए कि कुछ गड़बड़ है.
खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें

गहना हमेशा BIS रजिस्टर्ड दुकान से ही लें. अपने आसपास कौन सी दुकानें रजिस्टर्ड हैं यह www.bis.gov.in पर देखा जा सकता है.
खरीदने के बाद पक्का बिल जरूर लें और उसे संभालकर रखें. बाद में कोई दिक्कत आए तो यही बिल काम आएगा.
अगर हॉलमार्क या HUID में कोई गड़बड़ी लगे या लगे कि किसी ने नकली हॉलमार्क लगा दिया है तो BIS CARE ऐप या BIS की वेबसाइट पर सीधे शिकायत कर सकते हैं.

एक बात जो जाननी जरूरी है
सोने की तरह चांदी पर हॉलमार्किंग अभी जरूरी नहीं है. यह दुकानदार की मर्जी पर है कि वह हॉलमार्क कराए या नहीं. चांदी के लिए यह योजना अक्टूबर 2005 में शुरू हुई थी और तब से यह मर्जी पर ही आधारित है. इसलिए दुकान पर बिना हॉलमार्क वाली चांदी भी मिल सकती है. ऐसे में ग्राहक को खुद ही सतर्क रहना पड़ता है.
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अब तक कितना काम हुआ
चांदी का HUID पोर्टल 1 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था. तब से अब तक 77 लाख से ज्यादा चांदी के गहनों पर यह नंबर लग चुका है. इनमें करीब 95 फीसदी गहने 925 और 800 ग्रेड के हैं. दक्षिण भारत इस मामले में सबसे आगे है, जहां से 62 फीसदी काम हुआ है. पश्चिमी इलाके से 18 फीसदी और मध्य भारत से 10 फीसदी.
लोग सबसे ज्यादा क्या खरीदते हैं
BIS ने यह समझने के लिए एक सर्वे भी कराया कि बाजार में चांदी की खरीद-बिक्री कैसे चलती है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 345 जिलों से 4,971 जवाब आए. सर्वे में पता चला कि लोग सबसे ज्यादा 10 से 25 ग्राम और 25 से 50 ग्राम वाले गहने खरीदते हैं. दोनों को मिलाकर करीब 74 फीसदी मांग इन्हीं की है. सबसे ज्यादा बिकने वाली चीजों में पायल, चेन, बिछिया, अंगूठी और ब्रेसलेट हैं. शुद्धता में 925 और 800 ग्रेड सबसे आम हैं.
चांदी के कितने ग्रेड होते हैं
BIS के मानक IS 2112 के हिसाब से चांदी के सात ग्रेड तय हैं. ये हैं 999, 990, 970, 958, 925, 835 और 800. नंबर जितना बड़ा, चांदी उतनी ही शुद्ध. 999 का मतलब है लगभग पूरी शुद्ध चांदी. गहनों में आमतौर पर 925 वाली चांदी इस्तेमाल होती है क्योंकि बिल्कुल शुद्ध चांदी बहुत नरम होती है और उससे गहना बनाना मुश्किल होता है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>पलट गई बाजी, पेट्रोल का बड़ा सप्लायर बना भारत, सऊदी&amp;UAE को पछाड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले दिनों भारत में पेट्रोल के दाम तेजी से बढ़े थे. जिसके बाद देश में ईंधन की किल्लत की भी खबरें आईं, हालांकि देश में पेट्रोल- डीजल की कोई किल्लत नहीं थी. इसी बीच अब भारत सबसे बड़ा पेट्रोल सप्लायर बनकर केन्या के लिए उभरा है. अफ्रीकी देश केन्या को पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई करने के मामले में भारत सबसे आगे निकल गया है.
USA और सऊदी को पछाड़ाकमोडिटी डाटा कंपनी Kpler के आंकड़ों के मुताबिक ऊर्जा अर्थशास्त्री अनास अलहज्जी ने बताया कि भारत अब केन्या को पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल का प्रमुख सप्लायर बन गया है. इतना ही नहीं बल्कि भारत ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे बड़े तेल सप्लायरों को भी पीछे छोड़ दिया है. ये बदलाव मिडिल ईस्ट में यूएस-ईरान युद्ध के कारण ईंधन की सप्लाई और व्यापार मार्गों में आई परेशानी के बीच हुआ है.
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केन्या में बढ़ी सप्लाईजुलाई 2026 में भारत का केन्या को कुल निर्यात 151.41% बढ़ा. हालांकि, ये आंकड़ा सिर्फ पेट्रोलियम उत्पादों का नहीं, बल्कि सभी तरह के सामान के निर्यात का है. इसी दौरान भारत का दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 67.64% बढ़कर 6.92 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 4.13 अरब डॉलर था.
इतना ही नहीं भारत और केन्या के बीच व्यापार भी तेजी से बढ़ रहा है. 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 4.31 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का केन्या को निर्यात 4.01 अरब डॉलर और केन्या से आयात 29 करोड़ डॉलर रहा. पेट्रोलियम उत्पाद भारत से केन्या को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में शामिल हैं.
अफ्रीका में बढ़ी भारतीय ईंधन की मांगभारत खुद अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. लेकिन देश में बड़ी रिफाइनिंग क्षमता होने के कारण वो कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधनों में बदलकर दूसरे देशों को निर्यात करता है. जुलाई 2026 में अफ्रीका को भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 66% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यूरोप में रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों पर प्रतिबंधों के कारण भारतीय ईंधन की बड़ी खेप अब अफ्रीकी देशों की ओर जा रही है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पलट, गई, बाजी, पेट्रोल, का, बड़ा, सप्लायर, बना, भारत, सऊदी-UAE, को, पछाड़ा</media:keywords>
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        <title>भारत की फाइनेंस रिच लिस्ट जारी, उदय कोटक नंबर 1, टॉप 10 में कौन&amp;कौन शामिल?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-की-फाइनेंस-रिच-लिस्ट-जारी-उदय-कोटक-नंबर-1-टॉप-10-में-कौन-कौन-शामिल</link>
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        <description><![CDATA[ भारत का फाइनेंस सेक्टर अब केवल बैंक, ब्रोकरेज और फिनटेक कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इस क्षेत्र ने कई लोगों के लिए बड़ी संपत्ति बनाने का रास्ता भी खोला है. हाल ही में भारत के टॉप 10 अरबपतियों की लिस्ट सामने आई है, जिसे देख आप भी हैरान रह जाने वाले हैं.
ये Bloomberg की पहली इंडिया फाइनेंस रिच लिस्ट है. जिसके मुताबिक भारत में वित्तीय सेवाओं के कारोबार से जुड़े 15 लोगों और परिवारों की कुल संपत्ति 65 अरब डॉलर से भी ज्यादा है.
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किस- किस का है लिस्ट में नाम?इस लिस्ट में पारंपरिक बैंकिंग और लोन कारोबार से जुड़े दिग्गजों के साथ जेरोधा जैसी कंपनियों के जरिए नई संपत्ति खड़ी करने वाले कारोबारी भी शामिल हैं. Bloomberg के मुताबिक लिस्ट में शामिल 7 लोगों की संपत्ति को हालिया सालों में रिटेल लोन में तेजी और शेयर बाजार में आम निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से खासा फायदा मिला है.
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम उदय कोटक का है, जिनके पास 16.4 अरब डॉलर की सम्पत्ति है. इसके बाद मुथूट परिवार का नाम शामिल है. तो आइये दिखाते हैं इस लिस्ट में टॉप 10 में किस- किस का नाम है और उनके पास कितनी सम्पत्ति है.



नाम
सम्पत्ति (डॉलर में)
सम्पत्ति (रुपये में)


उदय कोटक
16.4 अरब डॉलर
1.57 लाख करोड़ रुपये


मुथूट परिवार
9.9 अरब डॉलर
94.600 करोड़ रुपये


नितिन और निखिल कामठ
9.9 अरब डॉलर
94,600 करोड़ रुपये


अजय पीरामल
4.4 अरब डॉलर
42,000 करोड़ रुपये


मोतीलाल ओसवाल और रामदेव अग्रवाल
3.9 अरब डॉलर
37,260 करोड़ रुपये


संजय और अल्पना डांगी
3.9 अरब डॉलर
37,260 करोड़ रुपये


सचिन बंसल
3 अरब डॉलर
28,662 करोड़ रुपये


संजय अग्रवाल
1.9 अरब डॉलर
18,140 करोड़ रुपये


राजेश शर्मा
1.8 अरब डॉलर
17,200 करोड़ रुपये


आनंद राठी और परिवार
1.7 अरब डॉलर
16,240 करोड़ रुपये



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फाइनेंस सेक्टर में है इतना पैसा?बता दें कि Bloomberg की ये लिस्ट दिखाती है कि पिछले कुछ दशकों में भारत का वित्तीय क्षेत्र काफी बदल गया है. पहले जहां बैंकिंग और पारंपरिक लोन कारोबार का दबदबा था, वहीं अब गोल्ड लोन, शेयर ब्रोकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, डिजिटल पेमेंट और फिनटेक भी बड़ी दौलत बनाने के रास्ते बन गए हैं. हालांकि, इस तेजी का दूसरा पहलू भी है. शेयर बाजार में सट्टेबाजी करने वाले कई छोटे निवेशकों को नुकसान हुआ है. डिजिटल लोन के बढ़ने से घरेलू कर्ज भी बढ़ा है. सीधेतौर पर कहें तो भारत में बढ़ते क्रेडिट, निवेश और डिजिटल फाइनेंस ने एक नई तरह के अरबपतियों का वर्ग तैयार किया है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, की, फाइनेंस, रिच, लिस्ट, जारी, उदय, कोटक, नंबर, टॉप, में, कौन-कौन, शामिल</media:keywords>
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        <title>सस्ती प्याज 203 आउटलेट्स, 90 मोबाइल वैन से हर घर पहुंचेगी, कीमत सिर्फ 35 रुपए किलो</title>
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        <description><![CDATA[ Onion Supply via Kanda Express: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले प्याज के दाम बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज निकालना शुरू कर दिया है. प्याज को ट्रेन और सड़क, दोनों रास्तों से देश के बड़े शहरों तक भेजा जा रहा है. &amp;nbsp;नासिक से पहली कांदा एक्सप्रेस दिल्ली पहुंचने वाली है. लोगों को राहत देने के लिए प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जाएगी.
35 रुपये किलो मिलेगी प्याज
सरकार की सस्ती प्याज NCCF और NAFED की दुकानों के साथ मोबाइल वैन से बेची जाएगी. इसके अलावा सफल और केंद्रीय भंडार के आउटलेट पर भी प्याज मिलेगी. NCCF के 90 आउटलेट और 40 मोबाइल वैन, NAFED के 13 आउटलेट और 50 मोबाइल वैन लगाए गए हैं. केंद्रीय भंडार के करीब 100 आउटलेट भी इस काम में शामिल हैं.
नासिक से दिल्ली पहुंच रही कांदा एक्सप्रेस
कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्याज को सीधे किसान इलाकों से बड़े शहरों तक पहुंचाया जाता है. 2024-25 में 14 रेक के जरिए करीब 12 हजार मीट्रिक टन प्याज पांच शहरों तक भेजी गई थी. 2025-26 में 86 रेक के जरिए करीब 88 हजार मीट्रिक टन प्याज 16 शहरों तक पहुंचाई गई. अब इस वित्त वर्ष में पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई है.
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सड़क से भी भेजी जा रही प्याज
ट्रेन के साथ सड़क के रास्ते भी प्याज भेजी जा रही है. चेन्नई, कोलकाता, एर्नाकुलम, गुवाहाटी, वाराणसी, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, जम्मू और अमृतसर तक प्याज पहुंचाई जा रही है. कहां कितनी प्याज भेजनी है यह बाजार में प्याज के दाम और मांग को देखकर तय किया जाएगा.
बफर स्टॉक के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य
सरकार ने 2026-27 के लिए 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है. इसकी खरीद 15 मई 2026 से NAFED और NCCF के जरिए शुरू हुई थी. अब तक करीब 1.21 लाख टन प्याज खरीदी जा चुकी है. इस बार प्याज को स्टोर करने की जिम्मेदारी पहली बार सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को दी गई है. इससे प्याज को बेहतर तरीके से रखने और खराब होने से बचाने में मदद मिलेगी.
देश में प्याज का उत्पादन ठीक
सरकार के मुताबिक 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है. पिछले साल उत्पादन करीब 307.67 लाख टन था. अप्रैल से जून 2026 के बीच करीब 3.82 लाख टन प्याज का निर्यात भी हुआ. मलेशिया, श्रीलंका, UAE और नेपाल इसके प्रमुख खरीदार रहे.
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त्योहारों में क्यों बढ़ती है प्याज की मांग?
ओणम, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान प्याज की मांग बढ़ जाती है. इसके बाद शादी का सीजन भी शुरू हो जाता है. ऐसे में प्याज की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है और दाम बढ़ने लगते हैं. इसी वजह से सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में भेज रही है ताकि कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी न हो.
26 अगस्त को प्याज का औसत भाव 37.87 रुपये किलो
26 अगस्त 2026 को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 37.87 रुपये प्रति किलो रहा. इसी दिन टमाटर का औसत भाव 38.33 रुपये किलो, आलू 22.63 रुपये किलो, चना दाल 86.71 रुपये किलो, आटा 40.48 रुपये किलो, तूर दाल 123.30 रुपये किलो और दूध 60.82 रुपये लीटर रहा. सरकार के मुताबिक टमाटर, आलू और चना दाल के दाम पिछले साल के मुकाबले कम हैं.
579 केंद्रों से रोज जुटाया जाता है कीमतों का डेटा
उपभोक्ता मामले विभाग देशभर के 579 केंद्रों से 41 जरूरी चीजों के दाम रोज जुटाता है. इनमें प्याज भी शामिल है. इन आंकड़ों के साथ मंडियों में प्याज की आवक और बाजार की मांग को देखकर फैसला लिया जाता है कि बफर स्टॉक से कितनी प्याज निकालनी है और उसे किन शहरों में भेजना है. सरकार का कहना है कि प्याज के दाम और सप्लाई पर लगातार नजर रखी जा रही है. जरूरत पड़ने पर आगे भी बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारी जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सस्ती, प्याज, 203, आउटलेट्स, मोबाइल, वैन, से, हर, घर, पहुंचेगी, कीमत, सिर्फ, रुपए, किलो</media:keywords>
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        <title>सोने&amp;चांदी पर बड़ा फैसला लेने वाली है सरकार, त्योहारों से पहले सस्ता हो रहा गोल्ड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोने-चांदी-पर-बड़ा-फैसला-लेने-वाली-है-सरकार-त्योहारों-से-पहले-सस्ता-हो-रहा-गोल्ड</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार सोने-चांदी पर बढ़ाए गए इम्पोर्ट ड्यूटी या आयात शुल्क को वापस लेने पर गंभीरता से सोच रही है ताकि तस्करी रोकने के साथ ही कारोबार में भी आसानी हो. सर्राफा व्यापारियों और ज्वैलर्स एसोसिएशन की तरफ से सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि सोने के आयात पर टैक्स को कम कर के दोबारा 6% किया जाए ताकि व्यापार औपचारिक (formal) बना रहे. इस बीच सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ विभाग इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या कम टैक्स से तस्करी रुकेगी और औपचारिक इंपोर्ट बढ़ेगा. फिलहाल, इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.&amp;nbsp;
जुलाई 2024 में बजट के समय में सरकार ने सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था. इसके बाद 13 मई 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ते दबाव और बढ़ते इंपोर्ट बिल को काबू में करने के लिए इसे वापस से बढ़ाकर 15% कर दिया गया. अब सरकार दोबारा अपने इस फैसले पर &#039;यू-टर्न&#039; लेने का सोच रही है.&amp;nbsp;
सरकार क्यों कर रही है विचार?
सोने और चांदी के इम्पोर्ट पर ज्यादा टैक्स लगने की वजह से सोने की अवैध तस्करी और समानांतर अर्थव्यवस्था (ग्रे मार्केट) को बढ़ावा मिला है. इससे आधिकारिक और अनौपचारिक आयात के बीच कीमतों का अंतर बढ़ गया है. बेशक, सरकार ने डॉलर रिजर्व बचाने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी, लेकिन जब तस्करी के चलते अनौपचारिक रूप से डॉलर की मांग बढ़ती है, तो ओपन मार्केट में डॉलर और महंगा हो जाता है.
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि ज़्यादा टैक्स ने तस्करी को बढ़ावा दिया है. &amp;nbsp;भारत आम तौर पर हर साल 700-800 टन सोना खरीदता है और UAE, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाज़ारों में तैयार गहनों का निर्यात करता है.
कीमतों पर क्या होगा असर?
अगर सरकार वाकई में सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% करती है, तो इससे प्रति 10 ग्राम सोने पर टैक्स का बोझ काफी कम हो जाएगा. इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी आने से आयात लागत में &amp;nbsp;9% की बड़ी गिरावट आएगी, जिससे स्थानीय बाजार में कीमतें तुरंत गिरेंगी. वैसे भी अगस्त के महीने से ड्यूटी में संभावित कटौती की खबरों और सट्टेबाजी के चलते पहले से ही सर्राफा बाजारों में भारी डिस्काउंट देखा जा रहा है. अब जब आधिकारिक ऐलान होगा, तो कीमतों में और कटौती की संभावना है.

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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bilibili: क्रिएटर्स के लिए नया बिजनेस, कुल 1000 Views पर होगी 60 रुपए की कमाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bilibili-क्रिएटर्स-के-लिए-नया-बिजनेस-कुल-1000-views-पर-होगी-60-रुपए-की-कमाई</link>
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        <description><![CDATA[ वीडियो स्ट्रीमिंग की दुनिया में अब &#039;बिलीबिली&#039; (Bilibili) जलवा बिखेरने आ रहा है. यह चीन का एक बहुत बड़ा वीडियो शेयरिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. इसे आप चीन का YouTube मान सकते हैं. चूंकि चीन में यूट्यूब पर बैन लगा है इसलिए वहां लोग वीडियो देखने और शेयर करने के लिए इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. घरेलू बाजार में पैर पसारने के बाद अब Bilibili ग्लोबल मार्केट में अपना दायरा बढ़ा रहा है.&amp;nbsp;
व्यूज के अलावा भी इन चीजों का रखा जाएगा ध्यान
X पर RT की एक पोस्ट के मुताबिक, Bilibili कथित तौर पर क्रिएटर्स को हर 1,000 व्यूज के लिए लगभग 0.70 डॉलर (करीब 60 रुपये) का भुगतान कर रहा है. इस एक बात ने दुनिया भर के क्रिएटर्स का ध्यान खींचा है. यानी कि अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में &amp;nbsp;YouTube को टक्कर देने के लिए एक नया खिलाड़ी आ गया है. हालांकि, कंपनी के तरफ से अभी व्यूज के बदले दी जाने वाली राशि को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.&amp;nbsp;
सिर्फ व्यूज ही काफी नहीं
Bilibili ने कहा है कि व्यूज के बदले कमाई ऑडियंस की लोकेशन, एडवरटाइजर की डिमांड, कंटेंट की कैटेगरी और मॉनेटाइजेशन प्रोडक्ट्स जैसे कई और फैक्टर्स पर निर्भर करेगी. Bilibili में कमाई सिर्फ व्यूज के जरिए नहीं होती है. इनका सिस्टम व्यूज के साथ-साथ वीडियो की लंबाई, ऑडियंस रिटेंशन (लोग कितनी देर वीडियो देख रहे हैं) और यूजर्स के इंगेजमेंट (लाइक्स, कमेंट्स, शेयर्स और कॉइन्स) को मिलाकर एक स्कोर तैयार करता है, जिसके आधार पर फाइनल पेमेंट होता है.&amp;nbsp;
Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम की पॉलिसी के अनुसार, मॉनेटाइजेशन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रिएटर्स के पास कम से कम 100 सब्सक्राइबर्स और 2,000 वैलिड पब्लिक व्यूज होने चाहिए. इसके अलावा, कंपनी चैनल की ओरिजिनैलिटी, कॉपीराइट नियमों का पालन, कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन जैसी चीजों की भी समीक्षा करती है.
Bilibili का दुनिया में बढ़ रहा क्रेज
बिलीबिली के इस समय 37.6 करोड़ (376 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं, जिनमें से ज्यादा चीनी युवा हैं. बिलीबिली इस वक्त &amp;nbsp;अमेरिका, यूके, जापान सहित इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में उपलब्ध है. हालांकि, भारत में यह ऐप अभी आधिकारिक तौर पर लॉन्च नहीं हुआ है.

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सोने-चांदी पर बड़ा फैसला लेने वाली है सरकार, त्योहारों से पहले सस्ता हो रहा गोल्ड&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नेपाल की तरह सूरत में भी आई थी प्रलय, भीषण बाढ़ से डायमंड सिटी के डूबे थे 1800 करोड़</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नेपाल-की-तरह-सूरत-में-भी-आई-थी-प्रलय-भीषण-बाढ़-से-डायमंड-सिटी-के-डूबे-थे-1800-करोड़</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नेपाल-की-तरह-सूरत-में-भी-आई-थी-प्रलय-भीषण-बाढ़-से-डायमंड-सिटी-के-डूबे-थे-1800-करोड़</guid>
        <description><![CDATA[ नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने साल 2006 के अगस्त महीने में गुजरात के सूरत में आई भीषण बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं. सूरत शहर को आज पूरी दुनिया &#039;डायमंड सिटी&#039; के नाम से जानती है. साल 2006 में ये शहर अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में इस चमकते शहर पर ऐसा कहर टूटा, जिसने पूरी दुनिया के हीरा बाजार को हिलाकर रख दिया.
2006 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी. पानी तापी नदी पर बने उकाई बांध में भरता चला गया. बांध को टूटने से बचाने के लिए अचानक करीब 10 से 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ा. &amp;nbsp;बदकिस्मती से उसी वक्त समुद्र में हाई टाइड यानी ऊंची लहरें उठ रही थीं. समुद्र ने नदी का पानी लेने से मना कर दिया और पानी पलटकर सीधे सूरत शहर में घुस गया. देखते ही देखते 80 से 90 फीसदी सूरत 10 से 15 फीट गहरे गंदे पानी और कीचड़ में डूब गया.
कीचड़ ने करोड़ों की मशीन को बनाया कबाड़
अब सोचिए उस शहर का क्या हाल हुआ होगा, जहां दुनिया के 90 फीसदी हीरे तराशे जाते हैं. कतारगाम, वराछा और महिधरपुरा जैसे इलाके, जो हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग के सबसे बड़े गढ़ थे, पूरी तरह जलमग्न हो गए. सूरत में हीरों की करीब 6 हजार छोटी-बड़ी यूनिट्स थीं, जिनमें से एक हजार से ज्यादा यूनिट्स पूरी तरह बर्बाद हो गईं. उस दौर में महंगी लेजर कटिंग मशीनें, कंप्यूटर और डायमंड स्कैनर्स नई-नई तकनीक के तौर पर फैक्ट्रियों में आए थे. खारे पानी और कीचड़ ने करोड़ों रुपयों की इन मशीनों को कबाड़ बना दिया.
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सबसे बड़ा दर्द ये था कि कई छोटे कारखानों के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर रखे तिजोरियों और लॉकरों में पानी घुस गया. अरबों रुपये के रफ और तराशे हुए हीरे गाद और कीचड़ में दब गए या पानी के तेज बहाव में बह गए. लोग बाढ़ उतरने के बाद हीरों को कीचड़ में छानते नजर आए.&amp;nbsp;
1800 करोड़ का हुआ था नुकसान
व्यापार के नजरिए से देखें तो सूरत का हीरा उद्योग हर दिन 100 से 120 करोड़ रुपए का काम करता था. करीब 20-25 दिनों तक पूरा शहर ठप रहा, जिससे सिर्फ इस सेक्टर को करीब 1800 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान झेलना पड़ा. यह समय अगस्त का था, जब अमेरिका और यूरोप के क्रिसमस ऑर्डर तैयार किए जाते हैं. दुनिया भर की सप्लाई चेन टूट गई और भारत के जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट में उस तिमाही 15 से 17 फीसदी की भारी गिरावट आ गई.
इस त्रासदी की सबसे कमजोर कड़ी करीब 4 से 5 लाख हीरा कारीगर थे. उनके घर बह चुके थे, कारखाने बंद थे और रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं बचा था. कई छोटे कारखाने ऐसे थे, जिनका कोई इंश्योरेंस नहीं था, वो कर्ज में डूबकर हमेशा के लिए बंद हो गए.
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सूरत ने बाढ़ के बाद कैसे पाई खोई हुई चमक?
बाढ़ ने सूरत के हीरा कारोबार को करीब 1800 करोड़ की चोट दी और शहर को कुल 22 हजार करोड़ का नुकसान हुआ, लेकिन सूरत के लोगों का हौंसला ऐसा था कि बाढ़ का पानी उतरते ही कारीगरों और व्यापारियों ने मिलकर दिन-रात डबल शिफ्ट में काम करना शुरू किया और कुछ ही महीनों में दुनिया के हीरा बाजार में अपनी खोई हुई चमक फिर से वापस पा ली.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>सरकार की सख्ती से घटे चीनी के दाम, इंपोर्ट को भी मिली मंजूरी</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी के ज्यादा दामों पर सरकार की सख्ती का असर अब बाजार में दिखने लगा है. 10 लाख टन कच्ची चीनी के सामान को मंजूरी और थोक खरीदारों पर स्टॉक की लिमिट लगाने के बाद कीमतें नीचे आने लगी हैं. कोल्हापुर में महज 4 दिनों में चीनी के दाम करीब 12.59% गिर गए हैं.
नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड के स्पॉट मार्केट के आंकड़ों के हिसाब से, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मीडियम ग्रेड चीनी की कीमत 21 अगस्त को करीब 6,350 रुपये प्रति क्विंटल थी. 25 अगस्त तक ये कम होकर करीब 5,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गई. यानी कुछ ही दिनों में कीमत में करीब 12.59% की गिरावट आई है.
यह भी पढ़े :चीनी-प्याज से लेकर सब कुछ महंगा, खाने की कीमत पर RBI का अलर्ट जारी
मिलों पर ज्यादा हो सकता है दबाव
&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इसी दौरान चीनी का कीमत करीब 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर बना रहा. इससे साफ है कि सरकार के कदमों का फिलहाल बाजार पर असर दिख रहा है. लेकिन आगे चीनी के दाम कितने नीचे जाते हैं और कितने समय तक कम रहते हैं, इस पर नजर रहेगी.
कुछ बिजनेस करने वालों का कहना है कि अगर चीनी की कीमत 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे चली जाती है और ये हालात अगले सीजन तक बनी रहती है, तो चीनी मिलों पर दबाव ज्यादा हो सकता है. अगला पेराई सीजन अक्टूबर के आखिर में शुरू होने की उम्मीद है. फिलहाल चीनी बनाने की खर्च करीब 4,200-4,300 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है.
इस बीच, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 3.5 लाख टन चीनी को घरेलू बाजार में भेजने की मंजूरी दी गई है. ये चीनी पहले विदेश भेजी जानी थी. इससे जुड़े लोगों के हिसाब से, ये स्टॉक एक हफ्ते के अंदर घरेलू खरीदारों के लिए मिल सकता है. इतनी चीनी देश की करीब 5 दिन की कुल चीनी मांग को पूरा करने के लिए काफी मानी जा रही है.
त्योहारी सीजन में ज्यादा हुई मांग
इससे आने वाले दिनों में घरेलू बाजार को राहत मिल सकती है. लेकिन, बाद में ब्राजील से चीनी की खेप आने पर चीनी की जरूरत बनी रह सकती है.
भारत में अगस्त के आखिर से जनवरी तक त्यौहारों का सीजन रहता है. इस दौरान मिठाइयों और प्रोसेस्ड फूड की मांग ज्यादा होने से चीनी की खपत भी ज्यादा हो जाती है. अनुमान है कि अक्टूबर के लास्ट तक भारत 3 लाख से 6 लाख टन तक चीनी बाहर से मांगा सकता है. ये सरकार की मंजूर 10 लाख टन की सीमा से कम है, क्योंकि घरेलू कीमतें घटने से मिलों और रिफाइनरियों के लिए ज्यादा बाहर से चीनी मांगना अब कम फायदेमंद &amp;nbsp;हो गया है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>लखनऊ&amp;पटना सहित इन 6 शहरों तक पहुंच रही प्याज, 35 रुपए में मिलेगी</title>
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        <description><![CDATA[ देश में प्याज की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार ने सप्लाई बढ़ाने का काम तेज कर दिया है. नासिक से देश के बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाई जा रही है. और इसके लिए सड़क के साथ-साथ रेलवे का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि त्योहार और शादी के सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद प्याज की कीमत में एकदम से उछाल न आए.
कहां से रवाना हुई कांदा एक्सप्रेस?प्याज की सप्लाई बढ़ाने के लिए नासिक से दिल्ली के लिए पहली कांदा एक्सप्रेस रवाना की गई है. इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा प्याज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है. रेलवे के अलावा सड़क मार्ग से भी प्याज की सप्लाई की जा रही है. सरकार का फोकस उन शहरों तक प्याज पहुंचाने पर है, जहां मांग ज्यादा है और जहां कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.&amp;nbsp;
सरकार की सख्ती से घटे चीनी के दाम, इंपोर्ट को भी मिली मंजूरी
किन 6 शहरों तक पहुंचेगी प्याज?सरकार की ओर से प्याज की पहली सप्लाई लखनऊ, वाराणसी, पटना, चंडीगढ़, जम्मू और अमृतसर तक की जा रही है. इन शहरों में बफर स्टॉक से बाजार में प्याज की क्वांटिटी बढ़ाई जा रही है. मंडियों में प्याज की भरपूर सप्लाई बनी रहे और त्योहार के सीजन में अचानक कीमत न बढ़े, बस इसलिए ये कोशिश की जा रही है.
क्या है टारगेट?&amp;nbsp;सरकार ने 2026-27 के लिए करीब 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का टारगेट रखा है. अभीतक लगभग 1.21 लाख टन प्याज खरीदी जा चुकी है. इस प्याज को बफर स्टॉक के तौर पर रखा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में इसकी सप्लाई बढ़ाई जा सके. सरकार बाजार की मांग और कीमतों पर ध्यान दे रही है. अगर किसी इलाके में प्याज के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो बफर स्टॉक से वहां प्याज भेजी जा सकती है.
कितने में बिका प्याज?सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 को देश में प्याज का खुदरा भाव 37.87 रुपए प्रति किलो था. इस दिन टमाटर का भाव 38.33 रुपए प्रति किलो और आलू 22.63 रुपए किलो था. आने वाले दिनों में त्योहारों और शादी के सीजन के कारण प्याज की मांग बढ़ सकती है. ऐसे में कीमतों में तेजी का दबाव बन सकता है.
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क्या है सरकार की कोशिश?सरकार अब बफर स्टॉक से बाजार में प्याज की क्वांटिटी बढ़ाकर प्याज की बढ़ती कीमत को कंट्रोल रखना चाहती है. कोशिश की जा रही है कि प्याज 35 रुपए प्रति किलो पर कराया जा सके. बाजार में मांग और कीमतों की स्थिति को देखते हुए बफर स्टॉक से आगे भी प्याज जारी की जाएगी. इससे उम्मीद है कि आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन में बढ़ती मांग का असर सीधे आम लोगों की जेब पर कम पड़ेगा.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>लखनऊ-पटना, सहित, इन, शहरों, तक, पहुंच, रही, प्याज, रुपए, में, मिलेगी</media:keywords>
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        <title>Blinkit, Instamart और BigBasket से गायब हुए चीनी के बड़े पैकेट, जानें मिठास पर क्यों लगी लिमिट</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी की कीमतों में इतनी तेजी आई है कि अब लोगों के लिए ऑनलाइन चीनी की खरीदारी करना भी थोड़ा मुश्किल हो गया है. Blinkit, Swiggy Instamart और BigBasket जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने चीनी की खरीदारी की मात्रा पर लिमिट लगा दी है. इन ऐप्स से ऑर्डर करते समय &#039;Sorry, We Have Limited Quantities Available&#039; का मैसेज आ जाता है. ये एक्शन तब लिया गया है जब त्योहार का सीजन आ गया है और चीनी की मांग बढ़ने लगी है.
कितनी लगी लिमिट?चीनी की खरीदारी पर लगी लिमिट अलग-अलग शहरों और ब्रांड के हिसाब से अलग- अलग है. कुछ जगहों पर आप एक बार में 1 किलो के सिर्फ 3 पैकेट ही खरीद सकते हैं, जबकि कुछ जगहों पर 5 किलो का सिर्फ 1 पैकेट खरीदा जा सकता है. यानी ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार ज्यादा मात्रा में चीनी एक साथ ऑर्डर नहीं कर पा रहे हैं.
लखनऊ-पटना सहित इन 6 शहरों तक पहुंच रही प्याज, 35 रुपए में मिलेगी
कितने बढ़े दाम?चीनी की सप्लाई पर दबाव का असर इसकी कीमतों पर भी साफ नजर आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में चीनी के दाम पिछले करीब दो महीनों में लगभग 40% बढ़ चुके हैं. चीनी की कीमत जून की शुरुआत में लगभग 41 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 65 रुपये तक पहुंच गई. सरकार के फैसलों के बाद वैसे इसमें कुछ नरमी आई है और अब ये 58 रुपये किलो के आसपास बिक रही है.
क्यों आई सप्लाई में कमी?चीनी की सप्लाई पर दबाव के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. इस साल चीनी का उत्पादन कम रहा. इसके अलावा करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात और कुछ बिचौलियों की ओर से स्टॉक जमा किए जाने की वजह से बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ी है.&amp;nbsp;
सरकार ने क्या किया?कीमत और सप्लाई पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने पिछले हफ्ते ही 10 लाख टन चीनी को ड्यूटी-फ्री आयात करने की अनुमति दी है. सरकार ने इससे पहले भी चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट लागू कर दिया था. 1 अगस्त से 30 नवंबर तक डीलर्स ज्यादा से ज्यादा 4000 क्विंटल चीनी रख सकते हैं.
सरकार की सख्ती से घटे चीनी के दाम, इंपोर्ट को भी मिली मंजूरी
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>YouTube से करते हैं कमाई? अब बस 4 दिन हैं आपके पास, निपटा लें ये जरूरी काम</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube से कमाई करना आसान लग सकता है, लेकिन टैक्स का हिसाब बिगड़ा तो यही कमाई परेशानी भी बन सकती है. ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है और अब सिर्फ 4 दिन बचे हैं. अगर आप यूट्यूब, फ्रीलांस या ब्रांड डील्स से कमाते हैं, तो रिटर्न भरने से पहले ये जरूरी बातों को जरूर चेक कर लें.
यूट्यूब, कंसल्टिंग, फ्रीलांस प्रोजेक्ट, ब्रांड कॉलब्रेशन और कंटेंट क्रिएशन से अगर कमाई होती है, तो ITR भरते समय उसे सही तरीके से बताना जरूरी है. कमाई की जानकारी गलत देने पर ITR और टैक्स से जुड़े दूसरे कामों में परेशानी हो सकती है. टैक्स एक्सपर्ट गौरव के मुताबिक, फ्रीलांसर और क्रिएटर्स को सबसे पहले अपनी कमाई का सही हिसाब देना चाहिए.
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प्राइवेट खर्च को बिजनेस एक्सपेंस नहीं बनाएं
घर से काम करने या पर्सनल कार इस्तेमाल करने का मतलब ये नहीं है कि उससे जुड़े सभी खर्च काम से जुड़े दिखाए जा सकते हैं. सिर्फ वही खर्च दिखाएं जो आपके काम से जुड़ा हो और जिसका रिकॉर्ड आपके पास हो. अगर कोई ट्रैवल पर्सनल और काम दोनों कामों के लिए है, तो पूरा खर्च क्लेम करने के बजाय सिर्फ काम से जुड़े हिस्से को ही शामिल करें.
सेक्शन 44ADA से कुछ लोगों के लिए टैक्स भरना आसान हो जाता है. लेकिन इसका फायदा हर फ्रीलांसर नहीं ले सकता. पहले ये देखना जरूरी है कि आपका काम इस नियम के अनुसार आता है या नहीं. सिर्फ फ्रीलांस काम करने से 44ADA का फायदा नहीं मिलता.
GST को नजरअंदाज नहीं करें
इनकम टैक्स और GST अलग अलग जरूरी नियमों का पालन करना हैं. ITR भरने से GST की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती. सर्विस और टर्नओवर के आधार पर GST रजिस्ट्रेशन जरूरी हो सकता है. विदेशी कस्टमर्स से कमाई करने वालों को विदेश में दी जाने वाली सर्विस से जुड़े नियम भी देखने चाहिए. कुछ फ्रीलांसर और क्रिएटर्स को अपनी कमाई और काम के अनुसार अपना हिसाब रखना या ऑडिट कराना जरूरी हो सकता है. इसलिए सिर्फ ITR भरना ही काफी नहीं है.
आखिरी दिन का इंतजार नहीं करें
31 अगस्त की आखिरी तारीख नजदीक है. इसलिए अपनी कमाई, बिल, खर्चों का हिसाब, 44ADA, GST और ऑडिट से जुड़ी जरूरी चीजें अभी देख ले. समय पर सब सही रखने से बाद में टैक्स की परेशानी से बच सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Instagram&amp;Facebook पर लगी रोक, अब दिनभर सोशल मीडिया नहीं चला पाएंगे बच्चे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/instagram-facebook-पर-लगी-रोक-अब-दिनभर-सोशल-मीडिया-नहीं-चला-पाएंगे-बच्चे</link>
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        <description><![CDATA[ फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुकदमे को खत्म करने के लिए करीब 16.68 अरब डॉलर तक के समझौते पर सहमति जताई है. अमेरिका के 29 राज्यों की ओर से मेटा पर आरोप लगाए गए थे कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म को बच्चों के बीच ज्यादा इस्तेमाल और लत को बढ़ावा देने वाले तरीके से डिजाइन किया है. कंपनी पर नाबालिगों के डेटा को लेकर भी सवाल उठाए गए थे. मेटा ने आरोपों से इनकार किया है और समझौते में किसी तरह की गलती या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है.
इस समझौते के तहत मेटा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए कई नए सेफ्टी फीचर्स लागू करने होंगे. इनमें इस्तेमाल की समय सीमा, रात में ऐप ब्लॉक करना, स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन म्यूट करना और माता-पिता के लिए कंट्रोल लगाया जाएगा.
कितने घंटे चलेगा फेसबुक और इंस्टाग्राम?
नए नियमों के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रोज सिर्फ 2 घंटे की डिफॉल्ट लिमिट होगी. खास बात यह है कि दोनों ऐप्स का इस्तेमाल अलग-अलग नहीं गिना जाएगा. यानी फेसबुक पर बिताया गया समय और इंस्टाग्राम पर बिताया गया समय मिलकर दो घंटे की सीमा में शामिल होगा. इस लिमिट को हटाने या बदलने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी.
YouTube से करते हैं कमाई? अब बस 4 दिन हैं आपके पास, निपटा लें ये जरूरी काम
कबसे- कबतक बंद रहेगा ऐप?
किशोरों के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट मोड लगाया जाएगा. इस दौरान वो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर न तो कंटेंट देख पाएंगे और न ही पोस्ट कर पाएंगे. इसका मकसद देर रात सोशल मीडिया के इस्तेमाल को कम करना है.
नोटिफिकेशन भी होंगे म्यूट?
स्कूल के समय बच्चों का ध्यान सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे. हालांकि जरूरी डायरेक्ट मैसेज और अकाउंट की सुरक्षा से जुड़े अलर्ट आते रहेंगे.
Blinkit, Instamart और BigBasket से गायब हुए चीनी के बड़े पैकेट, जानें मिठास पर क्यों लगी लिमिट
हर 15 मिनट में ब्रेक का रिमाइंडर
मेटा लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले किशोरों को ब्रेक लेने के लिए भी रिमाइंड करेगा. हर 15 मिनट के लगातार इस्तेमाल के बाद उन्हें ब्रेक का प्रॉम्प्ट दिखाया जाएगा. इसके अलावा 60 और 90 मिनट का इस्तेमाल पूरा होने पर भी रिमाइंडर दिए जाएंगे.&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>14.2 किलो वाले सिलेंडर का रेट हुआ कम? चेक करें आपके शहर कितने में हो रही बुकिंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/142-किलो-वाले-सिलेंडर-का-रेट-हुआ-कम-चेक-करें-आपके-शहर-कितने-में-हो-रही-बुकिंग</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/142-किलो-वाले-सिलेंडर-का-रेट-हुआ-कम-चेक-करें-आपके-शहर-कितने-में-हो-रही-बुकिंग</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today on August 26, 2026: आज बुधवार&amp;nbsp;को भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. यानी कि आम उपभोक्ताओं के इस्तेमाल वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं, जबकि लोगों को इसकी कीमत में कटौती का लंबे समय से इंतजार है.&amp;nbsp;
तेल कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस की कीमतों में इस साल जून के महीने में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद से दिल्ली में इसके दाम 942 पर स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, इस महीने की शुरुआत में ही तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगभग 194 से 200 रुपये तक की बड़ी कटौती की थी, जिससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है.&amp;nbsp;
आज कितनी है LPG की कीमत?



शहर&amp;nbsp;
घरेलू एलपीजी की कीमत
कमर्शियल एलपीजी की कीमत


दिल्ली
942.00 रुपये
2,738.00 रुपये


मुंबई
941.50 रुपये
2,691.50 रुपये


कोलकाता
968.00 रुपये
2,872.50 रुपये


चेन्नई
&amp;nbsp;957.50 रुपये
&amp;nbsp;2,906.00 रुपये


बेंगलुरु
944.50 रुपये
2,821.00 रुपये


पटना
&amp;nbsp;1,031.50 रुपये
&amp;nbsp;3,018.00 रुपये


इंदौर
970.00 रुपये
&amp;nbsp;2,743.00 रुपये


भोपाल
947.50 रुपये
2,743.00 रुपये


रांची
999.50 रुपये
2,922.00 रुपये



अमेरिका से भर-भरकर गैस मंगा रहा भारत
भारत अपनी जरूरत की 90% रसोई गैस के लिए पहले मिडिल ईस्ट पर निर्भर था. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद प्रमुख शिपिंग रूट होर्मुज (Strait of Hormuz) के आगे भी बाधित रहने की आशंकाओं के बीच अब भारत अमेरिका से गैस खरीदने लगा है. मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म Kpler के डेटा के मुताबिक, &amp;nbsp;भारत ने अमेरिका से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है.&amp;nbsp;
भारत ने अमेरिका से &amp;nbsp;जुलाई में 0.89 मिलियन टन LPG खरीदा था. इसके बाद अगस्त में लगभग 0.62 मिलियन टन LPG का आयात किया. Kpler के डेटा से पता चला है कि अगस्त में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका से आई LPG की हिस्सेदारी 73% रही. इस बीच, अब तक भारत को सबसे ज्यादा गैस सप्लाई करने वाले खाड़ी देशों का आयात बेहद निचले स्तर पर आ गया है. अगस्त में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से एलपीजी आयात घटकर सिर्फ 1.40 लाख टन रह गया और कतर से यह मात्र 60,000 टन रहा. वहीं, जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में सऊदी अरब से आयात शून्य रहा.

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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 12:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>कहीं आज बैंक बंद तो नहीं! जानें ईद&amp;ए&amp;मिलाद पर कहां&amp;कहां ठप्प रहेगी बैंकिंग सर्विस</title>
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        <description><![CDATA[ आज हफ्ते के चौथे दिन बैंक बंद रहेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक, ईद-ए-मिलाद (जिसे मिलाद-उन-नबी भी कहा जाता है) के चलते बुधवार, 26 अगस्त को कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंक बंद रहेंगे. इस दौरान कई बड़े शहरों में ब्रांच आज बंद रहने वाले हैं, जिनमें महाराष्ट्र में मुंबई और बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, देहरादून, हैदराबाद, इंफाल, जम्मू और श्रीनगर, कानपुर और लखनऊ, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और विजयवाड़ा शामिल हैं.&amp;nbsp;
आज कहां-कहां बैंक नहीं खुलेंगे?
बेलापुर, नागपुर और मुंबई (महाराष्ट्र)
चेन्नई (तमिलनाडु)
हैदराबाद (तेलंगाना)
बेंगलुरु (कर्नाटक)
विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश)
कोच्चि और तिरुवनंतपुरम (केरल)
भोपाल (मध्य प्रदेश)
देहरादून (उत्तराखंड)
जम्मू और श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर)
इंफाल (मणिपुर)
 कानपुर एवं लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
पटना (बिहार)
नई दिल्ली (दिल्ली एनसीआर)
रायपुर (छत्तीसगढ़)
रांची (झारखंड)
बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद सभी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं ग्राहकों की सुविधा के लिए पूरी तरह से सक्रिय रहेंगी. पैसों के लेनदेन, बैलेंस चेक करने और बिल पेमेंट के लिए आप यूपीआई (UPI) ट्रांसफर (Google Pay, PhonePe, Paytm आदि), नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग और एटीएम (ATM) सेवाओं की मदद ले सकते हैं. हालांकि, काउंटर पर नकद लेन-देन, चेक से जुड़े काम और पासबुक अपडेट कराने के लिए आपको कल बैंक खुलने तक का इंतजार करना होगा.
ईद-ए-मिलाद क्या है?
ईद-ए-मिलाद, जिसे मिलाद-उन-नबी या बारावफात भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन है. यह त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने &#039;रबी-उल-अव्वल&#039; की 12 तारीख को मनाया जाता है. मुसलमानों के लिए ईद-ए-मिलाद का गहरा धार्मिक महत्व है. &#039;मिलाद&#039; का अरबी में अर्थ है &#039;जन्म&#039;.
मुस्लिम समाज के लोग इस दिन पैगंबर मोहम्मद साहब द्वारा दी गई शांति, दया और भाईचारे की शिक्षाओं को याद करते हैं. इस दिन लोग मस्जिदों या घरों में इबादत करते हैं. कई जगह महफिलें रखी जाती हैं, जिन्हें &#039;मिलाद&#039; कहा जाता है, जहां पैगंबर साहब के जीवन की कहानियां (सीरत) सुनी जाती हैं और उनके सम्मान में &#039;नाअत&#039; (धार्मिक गीत) गाए जाते हैं. आज के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना, कपड़े बांटना और पैसे दान करने का भी चलन है.

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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>सोने ने मचाया हड़कंप, 1,70.000 के करीब पहुंचा भाव; चेक करें आज 10 ग्राम का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोने-ने-मचाया-हड़कंप-170000-के-करीब-पहुंचा-भाव-चेक-करें-आज-10-ग्राम-का-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today on August 26, 2026: दिल्ली के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी जारी रही. इस दिन गोल्ड 2,700 रुपये की तेजी के साथ 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि 99.9% शुद्ध 24 कैरेट वाले सोने का भाव सोमवार को 1,64,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा था.&amp;nbsp;
आज कितनी है कीमत?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और खुदरा बाजारों में हल्की नरमी के बाद आज सोने की कीमतों में कुछ कमी आई है. Bullion.co.in के मुताबिक, बुधवार, 26 अगस्त, 2026 को सुबह लगभग 6:30 बजे सोने की कीमत 1,63,430 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जबकि चांदी की कीमत 2,45,540 रुपये प्रति किलोग्राम थी. आज बुधवार सुबह 24 कैरेट सोने की कीमत 1,63,430 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की जा रही है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,49,811 रुपये प्रति 10 ग्राम है.
बीते एक हफ्ते में 24 कैरेट सोने की कीमत में 3.18% से ज्यादा का उछाल आया है. आज सबसे ज्यादा सोने की कीमत चेन्नई में देखी जा रही है, जहां 24 कैरेट वाले सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,63,610 रुपये है. वहीं, 22 कैरेट का सोना यहां आज 1,49,976 रुपये प्रति 10 ग्राम के हिसाब से बिक रहा है. वहीं, दिल्ली में आज इसकी कीमत दूसरे बड़े शहरों के मुकाबले कम है. यहां आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,62,850 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,49,279 रुपये प्रति 10 ग्राम है.&amp;nbsp;
चांदी की कितनी है कीमत?
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, मंगलवार को चांदी की कीमत 3,500 रुपये घटकर 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गई, जबकि सोमवार के पिछली सत्र में यह 2,53,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी.
आज बुधवार को 999 फाइन सिल्वर की कीमत 2,45,540 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि 925 स्टर्लिंग सिल्वर की कीमत 2,27,125 रुपये प्रति किलोग्राम है. 999 फाइन सिल्वर की कीमत में हफ्तेभर में 3.24% का उछाल आया है.
दिल्ली में चांदी की कीमत 2,44,670 रुपये प्रति किलोग्राम है. वही, मुंबई में इसका रेट 2,45,090 रुपये प्रति किलोग्राम है. चेन्नई में कीमत 2,45,810 रुपये और बेंगलुरु में 2,45,290 रुपये प्रति किलोग्राम है.

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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>एनर्जी सेक्टर में अडानी का दबदबा: AESL को महाराष्ट्र में मिला 4,700 करोड़ का प्रोजेक्ट</title>
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        <description><![CDATA[ दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी की कंपनी अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. कंपनी ने महाराष्ट्र में 4,500 MW रिन्यूएबल पावर ग्रिड के लिए 4,700 करोड़ रुपये का बड़ा सौदा किया है.
महाराष्ट्र में कंपनी के हासिल किए इस कॉन्ट्रैक्ट का मकसद राज्य में 4,500 मेगावाट (MW) रिन्यूएबल और स्टोरेज पावर का ट्रांसमिशन करना है. यानी कि इसके जरिए महाराष्ट्र में सोलर और विंड जैसी रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) से पैदा होने वाली बिजली उन क्षेत्रों तक पहुंचाई जाएगी, जहां बिजली की मांग सबसे ज्यादा है.&amp;nbsp;
कब तक पूरा होगा काम?
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) के लिए इस पूरे प्रोजेक्ट की समयसीमा को पूरा करने के लिए 36 महीने (3 साल) है. यानी कि कंपनी को इस तय समय के भीतर प्रोजेक्ट से जुड़ा काम पूरा करना है. कंपनी इस प्रोजेक्ट को &#039;सतारा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड&#039; (Satara Power Transmission Limited) नाम की एक विशेष कंपनी (SPV) के तहत तैयार करेगी.
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के CEO कंदर्प पटेल ने इसे लेकर कहा, &#039;&#039;पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स, ग्रिड में बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर करने के लिए जरूरी फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देकर भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं. सतारा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट एक जरूरी ट्रांसमिशन बैकबोन बनाएगा, जो रिन्यूएबल एनर्जी को बाहर भेजने के साथ एनर्जी को स्टोर करने का भी काम करेगा&#039;&#039;
उन्होंने आगे कहा, &#039;&#039;इससे दक्षिणी और पश्चिमी भारत के बीच बिजली की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.&#039;&#039; वह आगे कहते हैं कि AESL भविष्य के लिए तैयार ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो रिन्यूएबल एनर्जी के विकास को बढ़ावा देता है, ग्रिड की स्थिरता को बेहतर बनाता है और भारत के लंबे समय के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों में मदद करता है.&amp;nbsp;
प्रोजेक्ट से क्या होगा फायदा?
मुख्य रूप से पश्चिमी महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से जुड़ा यह प्रोजेक्ट ग्रीन एनर्जी को महाराष्ट्र के बड़े औद्योगिक केंद्रों (Load Centres) तक पहुंचाएगा. इससे सतारा, पुणे और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में बढ़ते पंप-स्टोरेज इकोसिस्टम को भी सपोर्ट मिलेगा. इसके तहत, महाराष्ट्र के सतारा &amp;nbsp;जिले में एक बिल्कुल नया हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन बनाया जाएगा. फिर कोल्हापुर से सतारा (Satara) के बीच एक नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी. प्रोजेक्ट के तहत, कोल्हापुर में पहले से मौजूद पूलिंग स्टेशन को भी अपग्रेड किया जाएगा.
कंपनी के बिछाए इस विशाल ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए मुख्य रूप से कर्नाटक में बनने वाली रिन्यूएबल एनर्जी महाराष्ट्र में पहुंचाई जाएगी. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि इस ग्रिड नेटवर्क से पैदा होने वाली और स्टोर की गई बिजली महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक और अधिक मांग वाले क्षेत्रों जैसे सतारा, पुणे और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में पहुंचाई जाएगी. कंपनी के इस नेटवर्क में 562 सर्किट किलोमीटर की नई ट्रांसमिशन लाइनें और 9,000 MVA की ट्रांसफर्मेशन क्षमता जुड़ेंगी.

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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एनर्जी, सेक्टर, में, अडानी, का, दबदबा:, AESL, को, महाराष्ट्र, में, मिला, 4, 700, करोड़, का, प्रोजेक्ट</media:keywords>
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        <title>लोन की EMI होगी बेहद हल्की, इन जरूरी बातों का रखेंगे ध्यान तो मिलेगा बेस्ट ऑफर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/लोन-की-emi-होगी-बेहद-हल्की-इन-जरूरी-बातों-का-रखेंगे-ध्यान-तो-मिलेगा-बेस्ट-ऑफर</link>
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        <description><![CDATA[ पर्सनल लोन की ब्याज दर का सीधा असर आपकी मासिक EMI और लोन की पूरी अवधि में चुकाई जाने वाली कुल राशि पर पड़ता है. ब्याज दर में थोड़ा सा अंतर भी आपकी कुल लोन लागत को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब आप ज्यादा लोन राशि लेते हैं या लंबी अवधि के लिए लोन चुनते हैं.
कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन लेने से आपकी कुल लोन लागत कम हो सकती है और मासिक EMI चुकाना आसान हो सकता है. हालांकि, अंतिम ब्याज दर लोनदाता के आकलन पर निर्भर करती है. फिर भी, अच्छा क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखकर, अपने वित्त का जिम्मेदारी से प्रबंधन करके और लोनदाता की पात्रता शर्तों को पूरा करके आप बेहतर ब्याज दर पाने की संभावना बढ़ा सकते हैं.
अगर आप पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो ब्याज दर को प्रभावित करने वाले कारकों को समझने से आपको सोच-समझकर लोन लेने का फैसला करने में मदद मिल सकती है.
पर्सनल लोन की ब्याज दर किन चीजों पर निर्भर करती है?
आपके पर्सनल लोन की ब्याज दर आपके वित्तीय प्रोफाइल का आकलन करने के बाद तय की जाती है. लोनदाता ब्याज दर तय करने से पहले कई कारकों पर विचार करते हैं.
इनमें आमतौर पर शामिल हैं:

क्रेडिट स्कोर
मासिक आय
रोजगार का प्रकार और स्थिरता
मौजूदा वित्तीय देनदारियां
लोन चुकाने का इतिहास
लोन की राशि
लोन की अवधि

मजबूत वित्तीय प्रोफाइल होने से आपको प्रतिस्पर्धी पर्सनल लोन ब्याज दर पाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, अंतिम ब्याज दर लोनदाता के आकलन पर निर्भर करती है.
पर्सनल लोन पर कम ब्याज दर पाने के सुझाव
1. अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखेंआपका क्रेडिट स्कोर पर्सनल लोन की ब्याज दर को प्रभावित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है.
अच्छा क्रेडिट रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए:

अपनी EMI समय पर चुकाएं.
क्रेडिट कार्ड का बकाया भुगतान तय तारीख से पहले करें.
लोन की किस्त चुकाने में देरी न करें.
अपने क्रेडिट उपयोग को नियंत्रण में रखें.

जिम्मेदारी से क्रेडिट का इस्तेमाल करने से यह पता चलता है कि आप समय पर भुगतान करते हैं और इससे आपका वित्तीय प्रोफाइल मजबूत होता है.
2. अपना मौजूदा कर्ज कम करेंपर्सनल लोन मंजूर करने से पहले लोन देने वाली संस्था आपकी मौजूदा वित्तीय जिम्मेदारियों को देखती है.
अगर आप पहले से कई EMI चुका रहे हैं, तो अपने बकाया कर्ज को कम करने से आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर हो सकती है. कम कर्ज होने से आपको उपयुक्त पर्सनल लोन ब्याज दर पाने में मदद मिल सकती है.
3. केवल उतनी ही लोन राशि लें, जितनी जरूरत हो
जरूरत से ज्यादा लोन लेने पर आपकी चुकाने की जिम्मेदारी बढ़ सकती है. लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरत का सही आकलन करें. चाहे आपको मेडिकल इमरजेंसी, पढ़ाई, घर के नवीनीकरण, यात्रा, शादी के खर्च या पुराने कर्ज को चुकाने के लिए पैसे चाहिए हों, जरूरत के अनुसार लोन राशि लेने से पुनर्भुगतान करना आसान रहता है.
बजाज फाइनेंस पर्सनल लोन में 40,000 रुपये से 55 लाख रुपये तक की लोन राशि मिल सकती है. इससे पात्र ग्राहक अपनी वित्तीय जरूरत और पात्रता के अनुसार लोन राशि चुन सकते हैं.
4. अपने लिए सही लोन अवधि चुनें
लोन चुकाने की अवधि आपकी मासिक EMI और लोन की कुल लागत को प्रभावित कर सकती है. कम अवधि चुनने पर आमतौर पर मासिक EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज कम हो सकता है. वहीं, लंबी अवधि में भुगतान अधिक महीनों में बंट जाता है, जिससे EMI संभालने में आसान हो सकती है. बजाज फाइनेंस पर्सनल लोन में 12 महीने से 108 महीने तक की लचीली लोन अवधि उपलब्ध है. इससे पात्र ग्राहक अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार उपयुक्त अवधि चुन सकते हैं.
5. आय का स्थिर स्रोत बनाए रखें
स्थिर आय आपकी लोन चुकाने की क्षमता को दर्शाती है. लोन देने वाली संस्थाएं आमतौर पर आपके रोजगार के प्रकार, आय की नियमितता और काम के अनुभव को ध्यान में रखकर आपके आवेदन का आकलन करती हैं. स्थिर नौकरी या नियमित व्यवसायिक आय बनाए रखने से आपका कुल लोन प्रोफाइल मजबूत हो सकता है.
6. पूरे और सही दस्तावेज जमा करें
पूरे और सही दस्तावेज देने से लोन आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है. आपकी प्रोफाइल के आधार पर, आपसे इनमें से कुछ दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:

KYC दस्तावेज: आधार कार्ड/पासपोर्ट/वोटर आईडी/ड्राइविंग लाइसेंस/नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का पत्र/NREGA जॉब कार्ड
PAN कार्ड
कर्मचारी पहचान पत्र
पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप
पिछले 3 महीनों का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
पाइप वाली गैस का बिल
पेंशन ऑर्डर
नियोक्ता द्वारा जारी आवास आवंटन पत्र
प्रॉपर्टी/नगरपालिका टैक्स की रसीद
यूटिलिटी बिल
फोन बिल
रियल-टाइम इमेज/फोटो

सही जानकारी देने से वेरिफिकेशन के दौरान होने वाली देरी कम हो जाती है.
7. एक साथ कई लोन के लिए आवेदन करने से बचें
कम समय में कई लोन देने वाली संस्थाओं के पास आवेदन करने से आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ सकता है. इसके बजाय, आवेदन करने से पहले अपनी लोन पात्रता जांच लें. इससे आपको सही फैसला लेने और जिम्मेदारी से लोन लेने में मदद मिल सकती है.
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पर्सनल लोन एक सुविधाजनक वित्तीय विकल्प क्यों है?
पर्सनल लोन आपको वित्तीय सुविधा देता है, क्योंकि इसमें बिना कोई गारंटी या संपत्ति गिरवी रखे आप कई तरह के जरूरी या अचानक आने वाले खर्चों के लिए पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके आम इस्तेमाल इस प्रकार हैं:

मेडिकल इमरजेंसी
उच्च शिक्षा
शादी के खर्च
घर का नवीनीकरण

यात्राबजाज फाइनेंस पर्सनल लोन के लिए किसी सिक्योरिटी की जरूरत नहीं होती और योग्य आवेदकों को तुरंत मंज़ूरी, कम से कम डॉक्यूमेंटेशन और 24 घंटे के अंदर लोन मिल जाता है. आपकी क्रेडिट प्रोफाइल और योग्यता के आधार पर ब्याज दरें सालाना 10% से 30.5% के बीच होती हैं.
बजाज फाइनेंस पर्सनल लोन के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
लोन के लिए आपकी पात्रता लोन दे ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 20:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लोन, की, EMI, होगी, बेहद, हल्की, इन, जरूरी, बातों, का, रखेंगे, ध्यान, तो, मिलेगा, बेस्ट, ऑफर</media:keywords>
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        <title>सस्ती हो रही अब चीनी, एक झटके में 18% तक गिर गए दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ती-हो-रही-अब-चीनी-एक-झटके-में-18-तक-गिर-गए-दाम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सस्ती-हो-रही-अब-चीनी-एक-झटके-में-18-तक-गिर-गए-दाम</guid>
        <description><![CDATA[ केंद्र का कहना है सरकार के चीनी आयात की अनुमति देने और जमाखोरी-सट्टेबाजी पर सख्ती के बाद चीनी के एक्स-मिल दाम 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं.&amp;nbsp;पिछले हफ्ते यही दाम रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे.
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि चीनी के दाम में हाल की तेजी बाजार की वास्तविक कमी के कारण नहीं थी. सरकार के मुताबिक देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
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जमाखोरों और सट्टेबाजों पर नजर
सरकार ने पिछले हफ्ते 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी. इसके साथ ही थोक खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाई गई और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर नजर रखने के लिए राज्यों को जांच तेज करने के निर्देश दिए गए.
खाद्य सचिव के मुताबिक कुछ मिलों की ओर से कीमतें बढ़ाई गई थीं लेकिन अब एक्स-मिल कीमतें तेजी से नीचे आ रही हैं. देशभर में जमाखोरी की जांच के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड भी लगाए गए हैं.
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के मुताबिक फिलहाल किसी भी राज्य में एक्स-मिल चीनी का भाव 55 रुपये किलो से ज्यादा नहीं है और आने वाले दिनों में इसमें और गिरावट की उम्मीद है.
लेकिन घर की रसोई तक राहत कब?
अभी एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा आम ग्राहक तक नहीं पहुंचा है. 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये किलो और खुदरा भाव 63.05 रुपये किलो था यानी मिल स्तर पर चीनी सस्ती होने लगी है लेकिन दुकानों पर इसका असर आने में अभी थोड़ा समय लग सकता है. आम तौर पर एक्स-मिल और खुदरा कीमत के बीच करीब 7-8 रुपये प्रति किलो का अंतर रहता है.
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चीनी की कीमत क्यों बढ़ी थी?
2025-26 मार्केटिंग ईयर में चीनी उत्पादन का अनुमान घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है जबकि पहले 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान था. देश में सालाना चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन है.
इसके बावजूद सरकार का कहना है कि हालिया तेजी को सिर्फ उत्पादन में कमी से नहीं समझा जा सकता. सरकार ने जमाखोरी और कीमत बढ़ाने की कोशिशों पर कार्रवाई को भी इसकी एक वजह माना है.
मतलब साफ है - सरकार के आयात और जमाखोरी पर शिकंजा कसने के बाद चीनी के थोक बाजार में कीमतें नीचे आने लगी हैं. अब नजर इस बात पर है कि इसका असर आम आदमी की रसोई तक कब पहुंचता है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 20:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>UPI के 10 साल: किन 11 देशों में चलता है भारत का पैसा? जुलाई में बना ये नया रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में UPI से पेमेंट करना अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. लेकिन पिछले 10 साल में इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक नहीं रही. अब विदेशों में भी लोग UPI के जरिए पेमेंट या भारत के साथ पैसे भेजने की सर्विस का इस्तेमाल कर रहे है. सरकार के मुताबिक, UPI अब 11 देशों में पहुंच चुका है. वहीं जुलाई 2026 में इसके जरिए 29.87 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए.
इन देशों में UPI पेमेंट एक्सेप्ट करने और कुछ जगहों पर भारत के साथ सीमा पार पैसे भेजने की सर्विस के लिए इस्तेमाल हो रहा है. ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देशों में हैं. इसके अलावा भूटान, नेपाल, सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस, मालदीव जैसे 11 देश भारतीय UPI से ट्रांजैक्शन एक्सेप्ट करते हैं.
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जुलाई में हुआ बड़ा लेनदेन
जुलाई 2026 में UPI से 2,365.8 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. इनकी कुल रकम 29.87 लाख करोड़ रुपये रही. इस समय UPI से 741 बैंक जुड़े हुए थे. सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 से 2025-26 के बीच UPI के साल के ट्रांजैक्शन की संख्या करीब 12,000 गुना ज्यादा हुई है.
UPI को 2016 में शुरू किया गया था. इसके बाद इसमें कई नई सर्विसेस जोड़ी गईं. 2020 से 2022 के बीच UPI AutoPay, UPI PAY और UPI Lite जैसी सर्विसेस आईं. क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने की सर्विस भी शुरू हुई. इसी दौरान भूटान में UPI की अंतरराष्ट्रीय शुरुआत हुई.
2024 में UPI Circle शुरू किया गया, जिससे मुख्य यूजर किसी दूसरे व्यक्ति को फिक्स समय के अंदर अपने बैंक अकाउंट से पेमेंट करने की इजाजत दे सकता है. टैक्स पेमेंट के लिए UPI की सीमा भी 1 लाख से ज्यादा होकर 5 लाख रुपये कर दी गई. UPI 123PAY की सीमा 10,000 रुपये और UPI Lite की वॉलेट सीमा 5,000 रुपये की गई.
दुनिया में भी बनी पहचान
2025 में UPI में फोन के फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक से पेमेंट और आधार से फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सर्विसेस जोड़ी गईं. IMF की जून 2025 की रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 में दुनिया के रियल टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी. यानी 10 साल में UPI ने भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बदलने के साथ साथ विदेशों में भी अपनी जगह बनाई है. अब 11 देशों में इसकी मौजूदगी भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल की बढ़ती हुई पहचान को दिखाती है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 20:30:24 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission: कम नहीं है 2.1 फिटमेंट फैक्टर, गजब की मिलेगी सैलरी हाइक</title>
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        <description><![CDATA[ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार बड़ी ही बेसब्री से केंद्रीय कर्मचारी कर रहे हैं. इसे लेकर इन कर्मचारियों की काफी सारी उम्मीदें भी हैं. इन उम्मीदों के बीच फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी लगातार कयास लगाए जा रहे हैं, क्योंकि फिटमेंट फैक्टर से ही सैलरी हाइक तय होती है. वैसे तो कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 2.57 से लेकर 2.86 तक फिटमेंट फैक्टर कर दिया जाए.
हालांकि सरकार इस पर नहीं मानती है और फिटमेंट फैक्टर 2.1 भी रखती है तो भी इन कर्मचारियों की अच्छी खासी सैलरी बढ़ेगी. आइये बताते हैं कैसे?
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2.1 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी बढ़ेगी सैलरी?7वें वेतन आयोग ने कर्मचारियों का मिनिमम बेसिक पे 18 हजार रुपये कर दिया है. तो अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में यदि 2.1 फिटमेंट फैक्टर कर दिया जाएगा तो इसी के आधार पर सैलरी हाइक होगी. यहां जानें इसका गणित:
18,000x2.1 = 37,800 रुपये
आसान भाषा में समझें तो:
मौजूदा बेसिक = 18,000 रुपये8वें वेतन आयोग में अनुमानित बेसिक = 37,800 रुपयेबेसिक में अंतर = 19,800 रुपये
सिर्फ बेसिक देखें तो बढ़ोतरी 110% है, यानी नई बेसिक मौजूदा बेसिक की 2.1 गुना होगी.
कितनी होगी असली सैलरी हाइक?लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये असली सैलरी हाइक नहीं है. कर्मचारी को अभी सिर्फ 18 हजार रुपये बेसिक नहीं मिलता. इसके ऊपर DA भी मिलता है. इसलिए नई सैलरी की तुलना 18 हजार रुपये से नहीं बल्कि मौजूदा बेसिक के साथ DA से भी होना चाहिए. यही वजह है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर को सीधे 110 प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी मानना गलत होगा.
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आंकड़ा छोटा फायदा बड़ाऑल इंड&amp;zwj;िया एनपीएस इंप्&amp;zwj;लाईज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल का मानना भी यही है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर से भी कर्मचारियों को अच्छा खासा लाभ मिलने वाला है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भी इस बात को समझाने की कोशिश की है. ये आंकड़ा भले ही छोटा दिख रहा हो, लेकिन ये बड़ा फायदा पहुंचाने वाला है.

उन्होंने बताया है कि 7वें वेतन आयोग में 7000 की बेसिक पे में 7000 और बढ़ाकर यानी 2.57 फिटमेंट फैक्टर लगाकर इसे 18 हजार बेसिक किया गया है. लेकिन उस समय भी कर्मचारियों को 1.25 प्रतिशत DA मिल रहा था, ऐसे में उनकी असली सैलरी जो बढ़ी थी वो करीब 15 हजार रुपये थी.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली पहुंच रही 800 टन प्याज, 24 घंटे के भीतर 35 रुपए किलो मिलेगा &amp;apos;कांदा&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ प्याज की ज्यादा कीमतों से परेशान दिल्ली वालों के लिए राहत की खबर है. महाराष्ट्र के नासिक से 800 टन प्याज लेकर कांदा एक्सप्रेस बुधवार को दिल्ली पहुंचेगी. सरकार इस प्याज को आम बाजार के मुकाबले कम कीमत पर यानी 35 रुपये किलो बेचने की तैयारी में है. ये प्याज नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के स्टोर के जरिए लोगों को मिलेगा.
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि कांदा एक्सप्रेस के जरिए महाराष्ट्र के नासिक में रखे बफर स्टॉक से प्याज दिल्ली लाया जा रहा है. इसका मकसद ज्यादा कीमतों पर लगाम लगाना और लोगों को सस्ती दर पर प्याज देना है. फिलहाल दिल्ली में प्याज करीब 55 रुपये किलो तक बिक रहा है. ऐसे में 35 रुपये किलो की सरकारी बिक्री से लोगों को बहुत राहत मिलने की उम्मीद है.
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इन शहरों में भी भेजा जा रहा प्याज
दिल्ली के अलावा चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी में भी रेलवे के जरिए बड़ी तादाद में प्याज भेजा जा रहा है. इसके लिए अलग रेलवे का इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन शहरों में भेजा जा रहा प्याज बफर स्टॉक का हिस्सा है, जिसे बाजार में सप्लाई ज्यादा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये किलो रही. एक साल पहले ये 27.37 रुपये किलो थी. यानी कीमत में करीब 59% का इजाफा हुआ है. वहीं औसत थोक कीमत भी 21.23 रुपये से ज्यादा होकर 35.58 रुपये किलो पहुंच गई है. शहरों में चेन्नई में प्याज 60 रुपये, दिल्ली में 55 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये किलो तक बिका.
ज्यादा कीमत रोकने के लिए बफर स्टॉक
कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्याज भेजने की पहल 2024-25 में शुरू हुई थी. पिछले वित्त वर्ष में 86 रेलवे से करीब 88 हजार टन प्याज 16 बड़े शहरों तक पहुंचाया गया. सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में प्याज की सप्लाई ज्यादा की जा सके.
प्याज की कीमतों में अगस्त,सितंबर के दौरान अक्सर इजाफा देखने को मिलती है. इसके पीछे त्योहारों के समय ज्यादा मांग, मौसम की वजह से सप्लाई में रुकावट और सामान पहुंचाने में होने वाले बदलाव जैसे वजह होते हैं. सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए प्याज की कमी नहीं है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>सावधान! साइबर ठगों ने बना डाली SBI&amp;Axis बैंक की नकली वेबसाइट, अब कैसे रहेंगे सुरक्षित?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके फोन पर बैंक, क्रेडिट कार्ड या PM-KISAN से जुड़ा कोई लिंक आता है, तो उस पर जल्दबाजी में क्लिक करना मुश्किल में डाल सकता है. साइबर फ्रॉड अब ऐसी नकली वेबसाइट और ऐप बना रहे हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं. इनका इस्तेमाल लोगों की बैंकिंग और प्राइवेट जानकारी चुराने के लिए किया जा रहा है. SBI, ICICI Bank और Axis Bank के नाम पर भी ऐसे फर्जी पेज सामने आए हैं.
सरकार की साइबर सेफ्टी एजेंसी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर I4C ने 57 शक वाली वेबसाइट, फिशिंग पेज और डेटाबेस की पहचान की है. इसके बाद इसे हटाने के लिए Google को बोल दिया गया. जांच में कम से कम 7 पेज ऐसे मिले, जो SBI, ICICI Bank और Axis Bank की असली वेबसाइट जैसे दिखाई देते थे.
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बैंक की जानकारी चुराने का तरीका
इन फर्जी वेबसाइट पर लोगों को बैंक जैसा लॉगिन पेज दिखाया जाता था. यहां यूजर से बैंक आईडी, पासवर्ड या कार्ड की जानकारी भरने को कहा जाता था. जानकारी डालते ही वो फ्रॉड तक पहुंच सकती थी. यानी कस्टमर को भनक लगे बिना उसकी जरूरी बैंकिंग जानकारी चोरी हो सकती थी.
Google Firebase वेबसाइट और ऐप बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म है. साइबर फ्रॉड ने इसके कुछ टूल्स का गलत इस्तेमाल कर नकली पेज तैयार किए. भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल होने की वजह से ये पेज पहली नजर में लोगों को असली लग सकते थे.
PM-KISAN और रिवॉर्ड के नाम पर फ्रॉड&amp;nbsp;
फ्रॉड किसानों को PM-KISAN की अगली किस्त का लालच देकर फर्जी ऐप डाउनलोड करा रहे थे. वहीं, कुछ लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने या ज्यादा रिवॉर्ड पॉइंट मिलने का लालच दिया गया. इसके लिए APK फाइल डाउनलोड करने को कहा जाता था. ऐसी फाइल फोन में इंस्टॉल होने के बाद OTP, कार्ड और दूसरी प्राइवेट जानकारी चुराने की कोशिश कर सकती है.
बैंक से जुड़े काम के लिए SMS, WhatsApp या ईमेल में आए अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करे. बैंक की वेबसाइट का पता खुद टाइप करें और URL की स्पेलिंग चेक करें. अनजान APK डाउनलोड नहीं करें और बैंकिंग ऐप सिर्फ ऑफिसियल ऐप स्टोर से ही इंस्टॉल करें. थोड़ी सा ध्यान रख कर आप बड़े ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकते है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>US&amp;Canada Trade War: दूध, पनीर और शराब की बढ़ेंगी कीमतें, 50% नए टैरिफ से हाहाकार</title>
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        <description><![CDATA[ बीते दिनों ईरान और यूस के युद्ध की वजह से तमाम देशों पर इसका असर देखने को मिला. तो वहीं इन दिनों रूस और यूक्रेन के बीच भी युद्ध चल रहा है. इसी बीच अब यूएस और कनाडा के बीच भी ट्रेड वॉर शुरू हो गई है. इस वॉर का असर अमेरिका की जनता पर काफी ज्यादा पड़ता हुआ नजर आ रहा है. क्योंकि अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ यानी इम्पोर्ट ड्यूटी लागू कर दी है. इससे अमेरिका में कई चीजों की कीमत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
आम लोगों पर होगा असरअमेरिका के ड्यूटी बढ़ाने के बाद अगर कंपनियां बढ़े हुए टैरिफ का पूरा खर्च खुद नहीं उठाती हैं, तो वो इसकी भरपाई सामान की कीमत बढ़ाकर कर सकती हैं. ऐसे में अमेरिकी ग्राहकों को कागज से बने सामान, शराब और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. अगर कनाडा भी अमेरिका के सामान पर जवाबी टैरिफ लगाता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध और गहरा हो सकता है. इसका असर कंपनियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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इन चीजों के दाम बढ़ेंगेअमेरिका के टैरिफ बढ़ाने के बाद कागज और पेपर से बनने वाले सामान, डेयरी प्रोडक्ट्स और शाब की कीमतों में इजाफा हो सकता है. क्योंकि अमेरिका अपने अधिकतर ऐसे प्रोडक्ट्स जो इन सामानों से बनाए जाते हैं, कनाडा से ही खरीदता है. जैसे अमेरिका में शराब और बीयर कनाडा से ही आती है. अमेरिका ने पिछले साल कनाडा से करीब 1.5 अरब डॉलर की शराब खरीदी थी.&amp;nbsp;
तो वहीं कनाडा से आने वाले दूध, चीज, मक्खन और व्हे जैसे कई डेयरी प्रोडक्ट्स भी टैरिफ के दायरे में हैं. अमेरिका ने पिछले साल कनाडा से करीब 780 मिलियन डॉलर के डेयरी प्रोडक्ट्स खरीदे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कनाडा पर अमेरिकी डेयरी उत्पादों की बिक्री में भेदभाव करने का आरोप लगा चुके हैं. दोनों देशों के बीच कार, शराब और डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर लंबे समय से व्यापारिक मतभेद हैं.
महंगाई रोक सकती हैं कंपनियां?टैरिफ बढ़ने के बाद अमेरिकी कंपनियों के सामने तीन ही ऑप्शन बचते हैं. वो कनाडा से सामान मंगवाना बंद कर सकती हैं, मौजूदा स्टॉक खत्म होने तक इंतजार कर सकती हैं या फिर बढ़े हुए टैरिफ का खर्च खुद उठा सकती हैं. इसके अलावा कंपनियां किसी दूसरे देश से सामान खरीदने का भी ऑप्शन चुन सकती है. लेकिन इससे लागत भी बढ़ सकती है. अब देखना होगा कि ये ट्रेड वॉर कब तक चलती है और इइसका आम जनता पर क्या असर पड़ेगा.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>देश में चीनी किल्लत है या नहीं, बढ़ती कीमतों पर कब लगेगा ब्रेक? ISMA ने बताया</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में त्यौहारों का मौसम आ गया है, लेकिन इस बार जनता थोड़ी निराश है. क्योंकि हाल ही में चीनी के दामों में इतनी तेजी से इजाफा हुआ है कि त्यौहारों की मिठास मायूसी में बदल गई. लेकिन एक बात साफ है कि देश में चीनी के दाम बढ़े हैं लेकिन इसकी किल्लत नहीं है. ये बात खुद चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने बताई है.
दरअसल हाल ही में ISMA ने एक प्रेस कॉन्प्रेंस की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि देश में चीनी की कमी नहीं है. बाजार में चीनी के दाम अगले 7 से 10 दिनों में कम हो सकते हैं. सरकार की ओर से हाल में उठाए गए कदमों और नई चीनी का इम्पोर्ट बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है.
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क्या बोले ISMA के अध्यक्ष?इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि, &#039;हाल में चीनी महंगी होने की कई वजहें हैं. इनमें व्यापारियों और बड़े खरीदारों की ज्यादा खरीद, खराब मौसम के कारण प्रोडक्शन में कमी और बाजार में सट्टेबाजी शामिल है. चीनी मिलों ने जानबूझकर कृत्रिम कमी पैदा नहीं की है.
अक्टूबर में बढ़ेगा चीनी का उत्पादनसरकार ने चीनी मिलों को इस साल गन्ने की पेराई सामान्य समय से पहले शुरू करने को कहा है. आमतौर पर पेराई नवंबर की शुरुआत में शुरू होती है, लेकिन इस बार इसे 10-15 दिन पहले यानी 15 अक्टूबर के आसपास शुरू किया जा सकता है. ISMA के मुताबिक, इससे अक्टूबर में करीब 10 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है. आमतौर पर अक्टूबर में केवल 4-5 लाख टन चीनी बनती है. इतना ही नहीं बल्कि तमिलनाडु और कर्नाटक में कुछ जगहों पर ज्यादा पेराई भी चल रही है. इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ने की उम्मीद है.
देश में है चीनी का भरपूर स्टॉकISMA के मुताबिक, साल 2025-26 में भारत में चीनी का शुद्ध उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रहने का अनुमान है. देश में सालाना खपत करीब 2.8 से 2.85 करोड़ टन है. इसके अलावा करीब 35 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक भी मौजूद है. सरकार ने हाल ही में 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है. इससे भी बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी. ISMA का मानना है कि त्योहारों के दौरान खरीद सामान्य होने के बाद कीमतों पर दबाव कम हो जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Godrej चमकाएगा हरियाणा की सूरत! 20,000 करोड़ का करेगा निवेश, मिलेंगी 40 हजार नौकरियां</title>
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        <description><![CDATA[ हरियाणा में अब Godrej की एंट्री सिर्फ प्रॉपर्टी तक नहीं रहने वाली है, बल्कि कंपनी पैसा लगाने के साथ राज्य में रोजगार के भी नए रास्ते खोलने जा रही है. Godrej Industries Group करीब 20,000 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट करेगा, जिससे लगभग 40 हजार नौकरियां मिलने की उम्मीद है. इस इन्वेस्टमेंट का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट और गुरुग्राम में बनने वाले बड़े ऑफिस प्रोजेक्ट्स पर खर्च होगा.
Godrej इंडस्ट्रीज ग्रुप पहले से ही हरियाणा में काम कर रहा है. कंपनी के हिसाब से, उसने राज्य में अब तक करीब 12,000 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट किया है और उसके अलग अलग कारोबार में लगभग 9,000 लोग काम कर रहे हैं. अब नए इन्वेस्टमेंट के जरिए हरियाणा में कंपनी अपनी मौजूदगी और ज्यादा करने की तैयारी कर रही है.
यह भी पढ़े:&amp;nbsp;SIP का Rule 40 क्या है? किस उम्र में बना सकता है करोड़पति, समझें कैलकुलेशन
Godrej Properties लगाएगी 16,000 करोड़ रुपये
इस पूरे इन्वेस्टमेंट में सबसे बड़ा हिस्सा Godrej Properties का होगा. कंपनी हरियाणा में पहले ही करीब 11,000 करोड़ रुपये इन्वेस्ट कर चुकी है. अब FY28 तक करीब 16,000 करोड़ रुपये और इन्वेस्ट करने की योजना है. कंपनी के गुरुग्राम, सोनीपत, फरीदाबाद, पानीपत और कुरुक्षेत्र में कुल 18 प्रोजेक्ट चल रहे हैं. आने वाले प्रोजेक्ट्स से 11,000 से ज्यादा नौकरियां मिलने की उम्मीद है.
Godrej Ventures भी गुरुग्राम में करीब 3,500 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट करने की योजना बना रही है. ये पैसा Grade A+ ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में लगाया जाएगा. इससे सीधे और दूसरे तरीके से 30,000 से ज्यादा रोजगार बनने की उम्मीद है. कंपनी का कहना है कि इससे गुरुग्राम के कमर्शियल कारोबार को मजबूती मिलेगी और बड़ी कंपनियों के लिए शहर में बेहतर जगह बनेगा.
हरियाणा में पहले से मौजूद है Godrej का बिजनेस&amp;nbsp;
Godrej का बिजनेस सिर्फ प्रॉपर्टी तक सीमित नहीं है. Godrej Capital की हरियाणा में 5 ब्रांच हैं. वहीं Godrej Consumer Products के राज्य में 42 डायरेक्ट डिस्ट्रीब्यूटर और 250 से ज्यादा गांवों में रहने वाला स्टॉकिस्ट हैं. कंपनी हरियाणा में CSR और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों पर भी पैसा खर्च करती है.
Godrej Industries Group के चेयरपर्सन पिरोजशा गोदरेज ने कहा कि हरियाणा कंपनी के लिए तेजी से आगे जाता हुआ राज्य है. उन्होंने गुरुग्राम के बड़े बिजनेस और रोजगार केंद्र के रूप में उभरने को भी अहम बताया. कंपनी का कहना है कि नया इन्वेस्टमेंट हरियाणा के लंबे समय की ग्रोथ और बिजनेस के उम्मीदों पर उसके भरोसे को दिखाता है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>SIP का Rule 40 क्या है? किस उम्र में बना सकता है करोड़पति, समझें कैलकुलेशन</title>
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        <description><![CDATA[ SIP Rule-40 News: अगर आप भी कम उम्र में निवेश की शुरुआत करते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत आपके छोटे निवेश को भी समय के साथ एक बड़ा फंड तैयार करने में मदद कर सकती है. ऐसे में SIP का Rule-40 आपके लिए बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. इसमें हर साल SIP की रकम 10% बढ़ाई जाती है. ऐसे में अगर आप इस निवेश में औसतन 12% सालाना रिटर्न मानते हैं, तो 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल की जा सकती है.
क्या है SIP का Rule-40?
इस निवेश का सबसे बड़ा फायदा जल्दी शुरुआत करने का है. इसकी शुरुआत आप एक तय मासिक SIP से कर सकते हैं. इसकी खास बात यह है कि इसमें हर साल SIP की रकम पिछले साल के मुकाबले 10% का इजाफा होता है. यानी जैसे-जैसे कमाई बढ़ती है, निवेश की रकम भी बढ़ती जाती है.

कैलकुलेशन में औसत रिटर्न 12% सालाना माना जाता है.
SIP हर साल 10% बढ़ती है.
निवेश जितनी जल्दी शुरू होगा, शुरुआती SIP उतनी कम रखनी पड़ सकती है.

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21 से 25 साल की उम्र में कितनी SIP चाहिए?
उदाहरण के तौर पर अगर आप 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखें, तो शुरूआत की उम्र के हिसाब से जरूरी SIP अलग-अलग हो सकती है.&amp;nbsp;

21 साल की उम्र : करीब 11,796 प्रति महीने
22 साल की उम्र: करीब 13,875 प्रति महीने
23 साल की उम्र: करीब 16,370 प्रति महीने
24 साल की उम्र: करीब 19,379 प्रति महीने
25 साल की उम्र: करीब 23,031 प्रति महीने

इससे यह साफ जाहिर होता है कि निवेश शुरू करने में हर साल की देरी शुरुआती SIP की जरूरत को बढ़ा देती है. ऐसे में 21 साल की शुरुआती उम्र आप 19 साल तक करीब 72.42 लाख रुपये निवेश करते हैं, तो 12% औसत रिटर्न और 10% सालाना स्टेप-अप के आधार पर यह रकम करीब 2 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. यानी करीब 1.28 करोड़ की रकम रिटर्न से जुड़ सकती है.&amp;nbsp;
किन लोगों के लिए काम आ सकता है SIP का Rule-40?

जो लोग करियर की शुरुआत में हैं और भविष्य में आय बढ़ने की उम्मीद रखते हैं, तो SIP का Rule-40 उनके लिए काम आ सकती है.&amp;nbsp;
जो शुरुआत में बहुत बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते.
जो हर साल अपनी SIP बढ़ाने के लिए तैयार हैं.
जिनका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा निवेश फंड तैयार करना है.

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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Onion Price: प्याज ऑनलाइन खरीदेंगे तो कहां है सबसे कम कीमत? Blinkit या Zepto?</title>
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        <description><![CDATA[ Onion Online Price Check: आज के समय में महंगाई ने एक आम व्यक्ति का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है. खासकर रोजाना खाना बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली प्याज ने अब लोगों को असल जिंदगी में रुलाना शुरू कर दिया है. इस बीच काफी सारी सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. अगर बात करें प्याज की तो दिल्ली NCR में प्याज 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है.
ऐसे में कई लोग सोच समझकर प्याज का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, काफी लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी सब्जियां और ग्रोसरी खरीदते हैं. ऐसे में अलग-अलग क्विक कॉर्मस प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग रेट पर प्याज मिल सकती है. अब जानते हैं कि कौन से प्लेटफॉर्म पर कितने रुपये किलो प्लाज मिल रही है और कहां सबसे कम कीमत में प्याज खरीद सकते हैं?
सबसे सस्ती प्याज कहां मिल रही है?
Blinkit पर प्याज के रेट क्या हैं?
अगर Blinkit की बात करें तो यहां पर 1 किलो प्याज की कीमत 49 रुपये है. लेकिन प्याज की क्वालिटी के हिसाब से रेट अलग-अलग हो सकते हैं.&amp;nbsp;
Filpkart Minutes पर कितने में मिल रही है प्याज?
अगर बात करें Filpkart Minutes की तो यहां पर 1 किलो प्याज का दाम 44 रुपये है. लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि डिलीवरी के समय कोई एक्स्ट्रा चार्ज या एक्स्ट्रा हैंडलिंग फीस एड न हो जाएं.&amp;nbsp;
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Zepto पर कितने में खरीद सकते हैं प्याज?
इस प्लेटफॉर्म पर 1 किलो प्याज की कीमत 45 रुपये है. यानी Filpkart Minutes की तुलना में यहां पर आपको 1 रुपये ज्यादा देने होंगे. लेकिन अगर कोई वैध कूपन आपके पास हो तो उससे इसकी कीमत घट सकती है.&amp;nbsp;
Instamart पर कितने में मिल जाएगी प्याज?
अगर आप ज्यादातर Instamart से सामान खरीदते हैं तो यहां पर आपको 1 किलो प्याज 54 रुपये में मिलेगी. यानी इन तीनों ऐप्स के मुकाबले यहां पर प्याज के रेट सबसे ज्यादा हैं.&amp;nbsp;
कुछ बातों का खास ध्यान रखें
रेट जानने के बाद कई लोगों के मन में सवाल होगा कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रेट अलग-अलग क्यों हैं तो ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप्स पर रेट एक जैसे नहीं होते हैं. इसका कारण है कि अलग-अलग पिनकोड, स्टॉक और स्थानीय उपलब्धता के आधार पर एक ही सामान की कीमत अलग होती है. वहीं प्याज की क्वालिटी और साइज के हिसाब से भी दाम अलग-अलग हो सकते हैं.
साथ ही एक बात का ध्यान रखें कि सिर्फ सामान की कीमत ही न देखें, बल्कि फाइनल पेमेंट अमाउंट भी देखें और उसे देखकर ही तय करें कि कौन से प्लेटफॉर्म से सामान लेना आपके लिए सबसे ज्यादा किफायती हो सकता है.&amp;nbsp;
SIP का Rule 40 क्या है? किस उम्र में बना सकता है करोड़पति, समझें कैलकुलेशन
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी&amp;प्याज के बाद अब दाल भी महंगी, उड़द से अरहर तक के बढ़े रेट; देखें नई कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Pulses Price Hike News: देशभर में जिस तेजी के साथ खाने-पीने के चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, उसने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है. चीन से लेकर प्याज और खाने पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल के साथ-साथ अब दालें भी महंगी होने लगी हैं. ऐसे में मिडिल क्लास की रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है. त्योहारी सीजन में खाने-पीने की चीजों की महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.&amp;nbsp;
उड़द दाल की बढ़ी कीमत
कल यानी कि रविवार, 23 अगस्त को थोक मंडियों में साबुत उड़द (Black Gram) की कीमतों में महज एक ही दिन में 15.29% का बड़ा उछाल आया है. इसके चलते अब इसका औसत थोक भाव 10,238 प्रति क्विंटल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. कुछ मंडियों में कीमतें 13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की गई हैं. थोक मंडियों में आए इस 15.29% के उछाल का सीधा असर आपके नजदीकी किराना स्टोर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर पैकेज्ड दालों के रेट पर भी पड़ा है.
स्थानीय खुदरा बाजारों में खुली उड़द दाल (साबुत/धुली) की कीमत आज 120-150 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है. वहीं, अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर पैकेज्ड दाल की कीमत भी बढ़ी है. Dinesh Flour Mills (उड़द साबुत) के 1 किलो का पैकेट 175 रुपये में उपलब्ध है. वहीं, Tata Sampann (ऑर्गेनिक अनपॉलिश्ड उड़द) के 500 ग्राम के पैकेट की कीमत ऑनलाइन स्टोर्स पर करीब 116-125 रुपये के बीच चल रही है.&amp;nbsp;
अरहर भी हुई महंगी
कल 23 अगस्त को थोक मंडियों में अरहर दाल की कीमत भी 19.51% बढ़ी है. इसके चलते अरहर का औसत थोक भाव बढ़कर 9,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. कहीं-कहीं रेट 13,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. इसके मद्देनजर आपके नजदीकी किराना स्टोर्स और सुपरमार्केट्स में खुली अरहर दाल के भाव 140-160 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं. वहीं, पैकेज्ड अरहर दाल की कीमत 175 से 195 रुपये के बीच चल रही है.&amp;nbsp;
मसूर के भी उछले भाव&amp;nbsp;
आज 24 अगस्त 2026 को प्रमुख थोक बाजारों में मसूर दाल की कीमतों में एक ही दिन के भीतर 35.28% का ऐतिहासिक उछाल आया है. इसी के साथ आज मंडियों में मसूर दाल का औसत थोक भाव बढ़कर 10,672 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है. वहीं, कहीं-कहीं रेट 12,700 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपरी स्तर पर भी पहुंच गए हैं. थोक बाजार में आज आई इस तेजी का असर आपके लोकल किराना स्टोर्स पर भी दिखेगा. खुली मसूर दाल के भाव 110-130 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. वहीं, पैकेज्ड दालों की कीमत 140-149 के बीच बनी हुई है.&amp;nbsp;

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प्याज पर Ground Report: सरकारी कोशिश बेअसर, मंडियों में 10 दिनों से सप्लाई सुस्त, अभी और बढ़ेंगे दाम?  ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चीनी-प्याज, के, बाद, अब, दाल, भी, महंगी, उड़द, से, अरहर, तक, के, बढ़े, रेट, देखें, नई, कीमत</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: कैसे &amp;apos;इकोनॉमिक सैंडविच&amp;apos; बना सरकारी खजाना? टैक्स&amp;GST कम होने पर भी खर्च बढ़ा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-कैसे-इकोनॉमिक-सैंडविच-बना-सरकारी-खजाना-टैक्स-gst-कम-होने-पर-भी-खर्च-बढ़ा</link>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी सरकार ने एक तरफ टैक्स में कटौती की, तो दूसरी तरफ रक्षा बजट में इजाफा कर दिया. इस बीच सरकार का अपना खजाना ऐसे &amp;lsquo;इकोनॉमिक सैंडविच&amp;rsquo; में फंस गया, जिससे निकलना मुश्किल हो रहा है. पिछले साल इनकम टैक्स और गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) में कटौती से करीब 2.44 लाख करोड़ रुपए सालाना नुकसान हुआ. इस बीच रक्षा बजट को बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपए कर दिया. ये वो असली परेशानी है जो सीधे GDP, महंगाई और आम आदमी की जेब तक का सफर तय करती है. आइए इस उलझे हुए समीकरण के हर कोने को समझते हैं...
&amp;nbsp;पहली समस्या: टैक्स और GST से कमाई क्यों घटी?
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती टैक्स कलेक्शन में आई भारी कमी है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार का कुल टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान से 2.44 लाख करोड़ रुपए कम रहने का अनुमान है. यानी सरकार को उम्मीद से कहीं कम पैसा हाथ लगा. इस कमी की तीन बड़ी वजहें हैं:

टैक्स में कटौती: फरवरी 2025 में सरकार ने पर्सनल इनकम टैक्स में कटौती की. इससे सरकारी खजाने को सालाना 1 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इससे पहले 2019 में कॉर्पोरेट टैक्स कम करने से भी सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ था.
GST दरों में कटौती: सितंबर 2025 में सरकार ने GST की दरों को तर्कसंगत किया. इसका असर यह हुआ कि GST से होने वाली कमाई की रफ्तार पांच साल के निचले स्तर 5.57% पर आ गई. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल GST कलेक्शन 23.32 लाख करोड़ रुपए रहा. इसका मतलब है कि महंगाई और आर्थिक विकास के बावजूद GST से मिलने वाला पैसा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा.
कमजोर अर्थव्यवस्था: देश में नॉमिनल GDP की वृद्धि दर धीमी पड़ गई है. इसके अलावा, शहरी इलाकों में खपत कमजोर है. वैश्विक अनिश्चितता ने भी टैक्स कलेक्शन पर नकारात्मक असर डाला है.

नतीजतन, कॉर्पोरेशन टैक्स, इनकम टैक्स, GST और कस्टम ड्यूटी चारों मिलाकर बजट अनुमान से करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए कम आए. इतना ही नहीं, GST कम्पेन्सेशन सेस को साल के बीच में ही ज्यादातर चीजों पर खत्म कर दिया गया. इससे 0.75 लाख करोड़ रुपए का और नुकसान हुआ.
दूसरी समस्या: युद्ध-खर्च क्यों बढ़ा?
जहां एक तरफ कमाई घट रही है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा पर खर्च रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया है. 2026-27 के बजट में रक्षा के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है. ये पिछले साल के मुकाबले करीब 15% (लगभग 1 लाख करोड़ रुपए) ज्यादा है. इस खर्च को बढ़ाने की दो बड़ी वजहें हैं:

दो मोर्चे पर चुनौती: भारत को एक तरफ चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर मोर्चा संभालना है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की ओर से लगातार खतरा बना रहता है.
हथियारों का आधुनिकीकरण: पुराने हथियारों को बदलने और नई तकनीक के राफेल, तेजस एमके-1ए, सबमरीन्स और स्टील्थ डिस्ट्रायर्स खरीदने के लिए भारी निवेश की जरूरत है. पूंजीगत व्यय पर 2.1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं.

बता दें कि भारत का रक्षा बजट GDP का करीब 2% है, जो कि चीन (1.7-1.8%) से तो ज्यादा है, लेकिन चीन की अर्थव्यवस्था इतनी बड़ी है कि वह 245 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करता है. जो भारत से तीन गुना ज्यादा है.
पूरी परेशानी का सार क्या है?
ऐसे समझें कि जब कमाई घट रही है और खर्च बढ़ रहा है, तो सरकार के सामने राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है. राजकोषीय घाटा यानी सरकार की कुल कमाई और कुल खर्च के बीच का अंतर.
FY26 में सरकार का टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान से 1.6 लाख करोड़ रुपए कम आने का अनुमान है. BMI (Fitch Solutions की यूनिट) की रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% के लक्ष्य से बढ़कर 4.6% तक पहुंच सकता है. अप्रैल-जून 2026 में ही राजकोषीय घाटा सालाना आधार पर 10% बढ़कर 3.1 लाख करोड़ रुपए हो गया. पिछले साल की समान अवधि में ये 17.9% था, जो इस साल बढ़कर 18.2% हुआ है.
अब सरकार के पास दो ही रास्ते हैं. या तो खर्च कम करे (जो विकास को नुकसान पहुंचा सकता है) या उधारी बढ़ाए (जिससे ब्याज का बोझ बढ़ेगा).
ये परेशानी आम आदमी और राज्यों को कैसे प्रभावित करती है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आम आदमी और राज्यों पर 4 बड़े असर होंगे:

विकास दर पर असर: BMI की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण FY27 में भारत की विकास दर 7.7% से घटकर 6.7% रह सकती है.
तेल की बढ़ती कीमतें: युद्ध से पहले क्रूड ऑयल 65 डॉलर प्रति बैरल था, जो युद्ध के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया. इससे भारत का सालाना क्रूड इंपोर्ट बिल 70 अरब डॉलर बढ़ गया.
राज्यों पर बोझ: GST दरों में कटौती से राज्यों की अपनी कमाई पर भी असर पड़ा है. पंजाब, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल और राजस्थान जैसे कई राज्यों पर पहले से ही GDP के 30% से ज्यादा का कर्ज है.
सब्सिडी पर दबाव: पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से तेल और उर्वरक सब्सिडी का बिल 37% तक बढ़ गया.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube से कमाई नहीं है टैक्स फ्री, 31 अगस्त तक कर डालें ये काम; वर्ना जुर्माने के लिए रहें तैयार</title>
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        <description><![CDATA[ ITR for Content Creators: कंटेंट क्रिएटर्स की कमाई सिर्फ एक जगह से नहीं होती है. एक यूट्यूबर AdSense से पैसे कमा सकता है, Instagram क्रिएटर के लिए ब्रांड डील पैसा कमाने का एक बड़ा जरिया है. इसके अलावा, एफिलिएट कमीशन, मेंबरशिप, सुपर चैट, प्लेटफॉर्म से मिलने वाले पेमेंट और यहां तक ​​कि मर्चेंडाइज बेचकर भी कमाई हो सकती है. डिजिटल इकोनॉमी से होने वाली इस कमाई पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की पैनी नजर रहती है.
ऐसे में अगर आप भी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं और Instagram, YouTube या Facebook से मोटी कमाई कर रहे हैं, जो आपके लिए भी 31 अगस्त 2026 की डेडलाइन अहम है. कारोबारी साल 2025-26 के लिए 31 अगस्त की डेडलाइन उन टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है और जिनके अकाउंट्स का ऑडिट होना जरूरी नहीं है. यदि इस तारीख तक क्रिएटर्स ने अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया, तो उन्हें भारी जुर्माना और कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
कंटेंट क्रिएटर्स की इन 5 तरह की कमाई पर लगता है टैक्स
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की इन सभी स्त्रोतों से होने वाली आय &#039;Profits and Gains from Business or Profession&#039; (PGBP) या &#039;Income from Other Sources&#039; के तहत टैक्स के दायर में आती है:
एड रेवेन्यू- यूट्यूब मोनेटाइजेशन और वीडियो पर आने वाले विज्ञापनों से होने वाली सीधी कमाई.
स्पॉन्सर्ड पोस्ट- किसी ब्रांड, प्रोडक्ट या सर्विस को प्रमोट करने के बदले मिलने वाला पैसा.
मर्चेंडाइज और पेड सब्सक्रिप्शन- अपने नाम के कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स बेचने या यूट्यूब &#039;जॉइन&#039; बटन/फैन सपोर्ट से होने वाली आय.
एफिलिएट मार्केटिंग- बायो या डिस्क्रिप्शन पर दिए गए लिंक के जरिए सामानों के बिक्री के बदले मिलने वाला कमीशन.
फ्री प्रोडक्ट्स और गिफ्ट्स- टैक्स नियमों के अनुसार, अगर कोई कंपनी या ब्रांड आपको प्रमोशन के लिए मोबाइल, कार, लैपटॉप जैसी चीजें मुफ्त में देता है या फ्री में विदेश की सैर कराता है, तो उस पर 10% की दर से TDS कटता है.&amp;nbsp;
31 अगस्त की डेडलाइन चूकने से नुकसान
31 अगस्त के बाद रिटर्न फाइल करने पर पहले तो आपको 1000-5000 रुपये तक लेट फीस देनी होगी. साथ ही टैक्स देनदारी पर प्रति माह 1% की दर से अतिरिक्त ब्याज चुकाना हागा. टैक्स चोरी करने या विदेशी आय (यूट्यूब से डॉलर में होने वाली कमाई) को छुपाने पर आयकर विभाग का सख्त नोटिस भी आ सकता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>1 सितंबर से हलवाई और बेकरी वालों के लिए नया नियम: 15 दिन से ज्यादा चीनी जमा की तो नपेंगे</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप मिठाई, बेकरी, बिस्किट, कन्फेक्शनरी या सॉफ्ट ड्रिंक के कारोबार से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. त्योहारों से पहले चीनी की जमाखोरी और बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब ज्यादा मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े कारोबारियों को अपने स्टॉक पर तय सीमा से ज्यादा चीनी जमा करके रखना मुश्किल हो सकता है. नए नियम के तहत तय सीमा से ज्यादा चीनी जमा करके रखने पर कार्रवाई हो सकती है.
दरअसल, अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग काफी तेजी से बढ़ जाती है. इसी दौरान अक्सर कई कारोबारी पहले से बड़ी मात्रा में चीनी खरीदकर स्टॉक कर लेते हैं. सरकार ने इसी को देखते हुए बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक की अवधि घटाकर अब 15 दिन कर दी है.
कितनी चीनी का स्टॉक रख सकेंगे करोबारी?
नए आदेश के मुताबिक, यह नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. हालांकि, यह नियम उन कारोबारियों या संस्थानों पर लागू होगा, जिनकी हर महीने चीनी की खपत 10 मीट्रिक टन यानी 100 क्विंटल से ज्यादा है. ऐसे खरीदार अपनी 15 दिनों की जरूरत से ज्यादा चीनी स्टॉक में नहीं रख सकेंगे.
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किन कारोबारियों पर लागू होगा नियम?

बड़े हलवाई और मिठाई विक्रेता
बेकरी और कन्फेक्शनरी यूनिट
सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां
फूड प्रोसेसिंग कंपनियां
अन्य बड़े थोक उपभोक्ता

क्या है असल वजह?
दरअसल, सरकार ने इससे पहले कारोबारियों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की तय सीमा 30 दिन रखी थी. लेकिन कीमतों में तेजी जारी रहने के बाद अब इस तय सीमा को और कम करके 15 दिन कर दिया गया है. क्योंकि त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है और इस दौरान बिस्किट, मिठाई और कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां पहले से स्टॉक तैयार करती हैं.
सरकार कैसे करेगी स्टॉक की निगरानी?
सरकार यह पता लगाने के लिए खरीदारों की चीनी खरीद और खपत से जुड़े आंकड़ों का मिलान करेगी. इसके लिए चीनी मिलों की बड़े खरीदारों की हुई बिक्री और कारोबारियों के GST रिटर्न में दर्ज जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा.

चीनी से जुड़े HSN कोड की जानकारी चेक की जाएगी.
चीनी मिलों से हुई बिक्री का रिकॉर्ड भी चेक किया जाएगा.
खरीदार ने कितनी चीनी खरीदी और उसकी खपत कितनी है, इसका पता भी लगाया जाएगा.
इसी डेटा के आधार पर सरकार जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने वाले कारोबारियों पर नजर रखेगी.

YouTube से कमाई नहीं है टैक्स फ्री, 31 अगस्त तक कर डालें ये काम; वर्ना जुर्माने के लिए रहें तैयार
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>माल ढुलाई में बड़ा बदलाव, दिल्ली&amp;NCR में डीजल और CNG लोडिंग गाड़ियों पर ब्रेक</title>
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        <description><![CDATA[ अब दिल्ली-NCR में माल ढुलाई और डिलीवरी से जुड़े कारोबारियों के लिए आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. जिसमें वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली-NCR में हल्के और बड़े मालवाहक वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर नए नियम लागू होने जा रहे हैं. इन नियमों के तहत आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और CNG से चलने वाले कुछ हल्के और नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाई जाएगी. ऐसे में अगर आप भी दिल्ली-NCR में माल ढुलाई या डिलीवरी का काम करते हैं, तो नई गाड़ी खरीदने से पहले इन नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
कब से लागू होंगे नए वाहन रजिस्ट्रेशन नियम?

दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से CNG, डीजल या पेट्रोल से चलने वाले हल्के वाणिज्यिक डिलीवरी वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर एक-एक करके रोक लगाई जाएगी.&amp;nbsp;
सोनीपत, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गौतम बुद्ध नगर जैसे हाई व्हीकल डेंसिटी जिलों में यह नियम 7 जनवरी, 2027 से लागू होंगे.
3.5 टन या 3,500 किलोग्राम तक वजन वाले N1 कैटेगरी के हल्के वाणिज्यिक वाहनों को लेकर भी नए रजिस्ट्रेशन नियम लागू किए जाएंगे.&amp;nbsp;
N1 कैटेगरी के बड़े मालवाहक वाहनों के लिए भी पेट्रोल, डीजल और CNG वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर अलग-अलग चरणों में रोक लगाई जाएगी.

1 सितंबर से हलवाई और बेकरी वालों के लिए नया नियम: 15 दिन से ज्यादा चीनी जमा की तो नपेंगे
क्यों लिया गया यह फैसला?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मुताबिक, दिल्ली-NCR में प्रदूषण को कम करने के लिए वाहनों से होने वाले कण प्रदूषण को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है. हालांकि, CAQM ने गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण और खासकर PM2.5 के उत्सर्जन को कम करने के लिए यह फैसला लिया है. साथ ही आयोग ने बताया कि हल्के मालवाहक गाड़ी ऐक्टिव गाड़ी स्टॉक का सिर्फ 1.2% हिस्सा हैं, लेकिन कान प्रदूषण में इनका योगदान करीब 3.3% है.
CAQM का कहना है कि CNG वाहन डीजल के मुकाबले में प्राथमिक कण उत्सर्जन को काफी कम करते हैं, लेकिन इन्हें भी लंबे समय के लिए समाधान नहीं माना जा सकता है. CNG गाड़ियों से निकलने वाला नाइट्रोजन ऑक्साइड आगे चलकर सेकेंडरी PM2.5 बनने में योगदान दे सकता है.
EV की ओर बढ़ेगा माल ढुलाई का कारोबार
नए नियमों के बाद दिल्ली-NCR में माल ढुलाई और डिलीवरी करने वाली कंपनियों को आने वाले समय में नए गाड़ी खरीदते समय इन नियमों का ध्यान रखना होगा. ऐसे में कारोबारियों को डीजल, पेट्रोल और CNG गाड़ियों के बजाय EV को प्राथमिकता देने की जरूरत होगी. हालांकि, जिन कारोबारियों के पास पहले से EV का पर्याप्त बेड़ा नहीं है, उनके लिए नई गाड़ी की खरीदारी करने का प्लानिंग करना जरूरी होगा.
अब कारोबारियों को क्या करना चाहिए?
अब दिल्ली-NCR में माल ढुलाई का काम करने वाले सभी कारोबारियों को जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से बचना होगा. ऐसे में उन्हें नया डीजल, पेट्रोल या CNG गाड़ी खरीदने के बजाय आने वाले रजिस्ट्रेशन नियमों की समय सीमा को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
YouTube से कमाई नहीं है टैक्स फ्री, 31 अगस्त तक कर डालें ये काम; वर्ना जुर्माने के लिए रहें तैयार
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी, प्याज, तेल और दाल सब महंगा, रक्षाबंधन से पहले क्यों बढ़ रही महंगाई?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-प्याज-तेल-और-दाल-सब-महंगा-रक्षाबंधन-से-पहले-क्यों-बढ़-रही-महंगाई</link>
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        <description><![CDATA[ अगर रक्षाबंधन और त्योहारी सीजन से पहले आपका भी रसोई का बजट बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है, तो इसकी सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की कई जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतें हैं. पिछले कुछ दिनों में चीनी, प्याज, डाल और खाने की तेल के कीमतों में काफी तेजी से उछाल देखने को मिली है. ऐसे में आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर इसका असर पड़ सकता है.
इन चीजों की महंगाई बढ़ने के पीछे अलग-अलग वजह है. हालांकि, कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार की तरफ से कई कदम उठाए जा रहे हैं. चीनी की सप्लाई बढ़ाने से लेकर प्याज के बफर स्टॉक को बाजार में उतारने तक सरकार महंगाई को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही है.&amp;nbsp;
चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
पिछले कुछ समय में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी से बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, इसकी एक बड़ी वजह बाजार में जमाखोरी की आशंका बताई जा रही है, जिसे रोकनी के स्टॉक सीमा तय कर दी गई है. वहीं, चीनी की कीमत में पिछले एक सप्ताह में करीब 7 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. लेकिन एक महीने में कीमत करीब 17 रुपये प्रति किलो बढ़कर अब 70 रुपये तक पहुंच चुकी है.
1 सितंबर से हलवाई और बेकरी वालों के लिए नया नियम: 15 दिन से ज्यादा चीनी जमा की तो नपेंगे
सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की इजाजत दे दी है. घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए चीनी मिलों से इस बार 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने को कहा गया है.&amp;nbsp;
प्याज के दाम में भी आया उछाल
दरअसल, प्याज की कीमतों में भी पिछले कुछ हफ्तों से काफी तेजी से उछाल देखने को मिली है. इसकी खास वजह खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी को मानी गई है.
21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 40.79 रुपये प्रति किलो था. हालांकि, यह कीमत एक सप्ताह पहले करीब 36.56 रुपये प्रति किलो थी. वहीं, यह प्याज एक महीने पहले करीब 34.87 रुपये प्रति किलो बिक रहा था.
दालों की कीमत बढ़ने की क्या है वजह?
रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दालों की दाम में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है. अरहर, मूंग, उरद और चना जैसी दालों की कीमतों में भी कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान करीब 1 रुपये से लेकर 2 रुपये तक का इजाफा हुआ है. बड़ी बात यह है कि इसकी वजह मानसून और दलहन की बुवाई से जुड़ी स्थिति बताई गई है. ऐसे में अगर मानसून इसी तरह कमजोर रहता है, तो आने वाले समय में दालों की कीमत पर और दबाव देखनी को मिल सकता है.&amp;nbsp;
रक्षाबंधन से पहले क्यों बढ़ रही महंगाई?
आमतौर पर त्योहारी सीजन से पहले बाजार में खाने-पीने की चीजों की मांग काफी बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. इसी दौरान अगर किसी फसल की सप्लाई पर मौसम का असर पड़ता है, तो खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इस समय चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में अलग-अलग कारणों की वजह से महंगाई में तेजी आई हैं.&amp;nbsp;
माल ढुलाई में बड़ा बदलाव, दिल्ली-NCR में डीजल और CNG लोडिंग गाड़ियों पर ब्रेक
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चीनी, प्याज, तेल, और, दाल, सब, महंगा, रक्षाबंधन, से, पहले, क्यों, बढ़, रही, महंगाई</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अमेरिका नहीं इस देश में रहते हैं दुनिया के सबसे अमीर लोग, हर आदमी है करोड़ों का मालिक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अमेरिका-नहीं-इस-देश-में-रहते-हैं-दुनिया-के-सबसे-अमीर-लोग-हर-आदमी-है-करोड़ों-का-मालिक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अमेरिका-नहीं-इस-देश-में-रहते-हैं-दुनिया-के-सबसे-अमीर-लोग-हर-आदमी-है-करोड़ों-का-मालिक</guid>
        <description><![CDATA[ Richest People in the World: जब भी बात अमीर लोगों की आती है तो सबकी निगाहें अमेरिका और यूरोप के नागरिकों की तरफ ही जाती है. यूबिएस ग्लोबल वेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे अमीर लोग अमेरिका में नहीं रहते है, बल्की स्विटजरलैंड में रहते हैं. यूबिएस ग्लोबल वेल्थ की रिपोर्ट में टॉप सात देशों के नाम बताए गए हैं. अच्छी बात ये है कि इस लिस्ट में दो देश एशिया के भी शामिल हैं.
स्विट्जरलैंड: यूबिएस ग्लोबल वेल्थ के अनुसार इस लिस्ट में सबसे ऊपर जिस देश का नाम है वो कोई ओर नहीं बल्कि यूरोप का सबसे खूबसूरत देश स्विट्जरलैंड है. इस देश में प्रति व्यक्ति की आय 910 हजार डॉलर यानि भारतीय रुपये में करीब 9 करोड़ के आसपास है. इस देश की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बैंकिंग, बीमा और पर्यटन सेक्टर है. यहांका फार्मा सेक्टर काफी उन्नत में है, स्विस घड़ियों का नाम पूरी दुनिया में इज्जत से लिया जाता है. यहां के डेयरी प्रोडक्ट और चॉकलेट को भी दुनियाभर में बहुत पसंद किया जाता है. &amp;nbsp;
अमेरिका: सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर अमेरिका का नाम आता है. यूबीएस ग्लोबल वेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में हर आदमी की सालाना आय करीब 6.69 लाख डॉलर यानी भारतीय रुपये में 6.45 करोड़ रुपये के आसपास होती है. अमेरिका सबसे ज्यादा जीडिपी वाला देश है. दुनिया की कुल आर्थिक गतिविधियों का लगभग 26% हिस्सा अमेरिका से आता है. अमेरिकी डॉलर विश्व की सबसे प्रभावशाली और सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली मुद्रा मानी जाती है.
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लग्जमबर्ग: यूबिएस की लिस्ट के अनुसार लग्जमबर्ग सबसे अमीर देशों की लिस्ट में तीसरे स्थान में आता है. लग्जमबर्ग में प्रति व्यक्ति की आय 6.55 लाख डॉलर यानी 6.32 करोड़ रुपये के आसपास होती है. इस देश को दुनिया के सबसे अमीर और विकसित देशों में शामिल किया जाता है. इस देश में रसायन, रबर, इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फूड और स्पेस तकनीक को लेकर काफी बड़ा बाजार है.
हांगकांग: एशियाई देश हांगकांग का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है, यह चौथे स्थान पर आता है. रिपोर्ट के अनुसार, हांगकांग में प्रति व्यक्ति की सालाना आय 6.48 लाख डॉलर है, जो भारतीय रुपये में 6.25 करोड़ के आसपास है. इस देश की कुल जीडीपी 400 अरब डॉलर के आसपास है, लेकिन यहां की जनसेख्या कम होने के कारण प्रति व्यक्ति की कमाई काफी ज्यादा होती है. &amp;nbsp;
ऑस्ट्रेलिया: सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया 5वें स्थान पर आता है. यूबीएस की लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया में लोगों की औसत सालाना कमाई 6.16 लाख डॉलर होती है, जो भारतीय करेंसी में करीब 5.94 करोड़ रुपये होती है. यहां की कमाई का सबसे बड़ा जरिया सर्विस सेक्टर है, यहां की जीडीपी का 70 फीसदी का योगदान सर्विस सेक्टर को जाता है. इसके अलावा लौह अयस्क, कोयला और गैस के खनन से भी काफी कमाई होती है. भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया का कारोबार लगातार बढ़ रहा है.
सिंगापुर: एशिया के एक और देश सिंगापुर ने भी यूबीएस की इस लिस्ट में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है. सिंगापुर में हर साल लोगों की औसत कमाई 5.27 लाख डॉलर यानी करीब 5 करोड़ रुपये होती है. इस देश की सबसे ज्यादा कमाई फाइनेंशियल सर्विसेज से होती है, जो इसकी कुल जीडीपी में 73 फीसदी हिस्सेदारी निभाता है. मैन्युफैक्चरिंग में देखें तो इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, बायोमेडिकल प्रोडक्ट की पूरी दुनिया कायल है. सिंगापुर दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में भी शामिल है.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अमेरिका, नहीं, इस, देश, में, रहते, हैं, दुनिया, के, सबसे, अमीर, लोग, हर, आदमी, है, करोड़ों, का, मालिक</media:keywords>
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        <title>सस्ते में करनी है बच्चों की शॉपिंग? इन प्लेटफॉर्म पर बजट में मिलेगा सामान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सस्ते-में-करनी-है-बच्चों-की-शॉपिंग-इन-प्लेटफॉर्म-पर-बजट-में-मिलेगा-सामान</link>
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        <description><![CDATA[ Kid Online Shopping Tips: ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स के आने के बाद लोग कपड़े और रोजमर्रा की जरूरतों के सामान घर बैठे ही खरीद लेते हैं. ऐसे में अब बड़ों से ज्यादा छोटे बच्चों के कपड़े महंगे आने लगे हैं. जब भी माता-पिता अपने बच्चों के कपड़े खरीदने के बारे में सोचते हैं तो पहले उन्हें बजट तय करना होता है, ताकि उसनें वे बच्चों के कपड़े, स्कूल बैग और दूसरी जरूरत की चीजों को खरीद सकें. अगर आप भी चाहते हैं कम बचट में बच्चों की शानदार शॉपिंग करना तो ऑनलाइन शॉपिंग आपके लिए एक अच्छा विकल्प है. आज के समय में कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म हैं, जहां पर बच्चों की अच्छी-खासी शॉपिंग की जा सकती है.&amp;nbsp;
Amazon और Flipkart भी है बेहतर ऑप्शन
Amazon और Flipkart पर भी आपको बेहतर सामान मिल सकते हैं. खास बात तो यह है कि यहां पर कुछ समय-समय में बच्चों के सामान पर डिस्काउंट भी मिलता है. अगर आप सेल के समय कपड़े खरीदे तो आपको काफी फायदा हो सकता है. इन दोनों प्लेटफॉर्म पर आपको कई सारे ऑप्शन वो भी आपके बजट के अंदर मिलेंगे.
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Meesho पर मिल सकते हैं सस्ते और अच्छे कपड़े
अगर आप अपने बच्चे के लिए अच्छे और कम बजट में खिलौने, कपड़े और स्कूल बैग जैसी चीजें खरीदना चाहते हैं तो Meesho आपके लिए बेस्ट है. यहां पर आपको बजट के अदंर सामान मिल जाएगा. अगर पसंद नहीं आता तो आप रिटर्न भी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
बच्चों के कपड़ों के लिए ये प्लेटफॉर्म है बेस्ट
बच्चों से जुड़ी चीजों और कपड़ों के लिए Firstcry आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है, यहां पर आपको अलग ब्रांड के कपड़े और दूसरे सामने मिल जाएंगे. अगर आप सेल के समय सामान खरीदते हैं तो आपको सामान्य कीमत से कम दाम पर सामान मिल जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sugar Price: आपके शहर में आज क्या है चीनी का रेट? 65 रुपये तक पहुंची कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Sugar Rates Today: चीनी की कीमतों पर इन दिनों आफत मची हुई है. देशभर में इसकी कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. पिछले एक साल में लगभग 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चीनी की कीमत में 10 रुपये से 18 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है. सरकार ने स्थिति पर बारीकी से नजर रखते हुए कई बड़े कदम भी उठाए हैं, जिससे कीमतें काबू में रहे.&amp;nbsp;
कहां सबसे बढ़ी कीमत?
चीनी की कीमत सबसे ज्यादा ओडिशा में बढ़ी है. यहां शुक्रवार (21 अगस्त) को चीनी की कीमत 64.72 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो पिछले साल इसी तारीख की कीमत से 17.80 रुपये ज्यादा है. इसके बाद मध्य प्रदेश और पंजाब का नंबर आता है.
ओडिशा के अलावा, असम, दिल्ली, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भी चीनी की कीमत 65 रुपये के पार पहुंच गई है. देश में इस वक्त देश में औसत कीमत 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम है. पिछले महीने की इसी तारीख के मुकाबले मध्य प्रदेश में चीनी की कीमत 15.70 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी है. इसके बाद पंजाब का नंबर रहा, जहां कीमत में 14.67 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है.&amp;nbsp;
यूपी में चीनी ने तोड़े रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यहां मिलों से निकलने वाली चीनी का थोक भाव इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर 5400-5800 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है. इसके चलते खुदरा बाजारों में चीनी सीधे 65-68 रुपये प्रति किलो बिक रही है. वहीं, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में अच्छी क्वॉलिटी की चीनी 65-70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच चुकी है. महज एक महीने के भीतर इन शहरों में चीनी की कीमतों में 15-20 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
देश के प्रमुख शहरों में आज चीनी का रेट&amp;nbsp; (प्रति किलो)



शहर/राज्य
चीनी का ताजा खुदा भाव


दिल्ली
60-63 रुपये


मुंबई
65-70 रुपये


कोलकाता
64-70 रुपये


पंजाब और ओडिशा
64-65 रुपये


लखनऊ
65-68 रुपये


पटना
65-68 रुपये



&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कितनी बढ़ीं आज पेट्रोल&amp;डीजल की कीमतें? घर से निकलने से पहले रेट चेक करना न भूलें</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today on August 23, 2026: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें, वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई शेयर बाजार और रुपया- सब कुछ अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतें भी इससे अछूती नहीं रही हैं.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं. यह भारत के लिए चिंताजनक है, जो अपनी जरूरतों के लिए क्रूड ऑयल के आयात पर बड़े पैमाने पर निर्भर है. कच्चे तेल की ज्यादा कीमतों का मतलब है पेट्रोल और डीजल की ज्यादा कीमतें, जिससे महंगाई बढ़ती है. इन्हीं जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच, तेल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू बाजार के लिए पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी की हैं.&amp;nbsp;
आज कच्चे तेल की कीमतें
आज 23 अगस्त को रविवार होने के चलते अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट बंद है इसलिए कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार के क्लोजिंग रेट पर ही स्थिर बनी हुई हैं. इस वक्त अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 3 महीने के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है. अभी ब्रेंट क्रूड की कीमत ग्लोबल मार्केट में 94.39 डॉलर प्रति बैरल चल रही है, जिसमें शुक्रवार को 0.65% का इजाफा हुआ है. वहीं, WTI क्रूड की कीमत इस वक्त 87.06 डॉलर प्रति बैरल है, जिसमें शुक्रवार को 0.26% का उछाल आया है.&amp;nbsp;
आज पेट्रोल की कीमत
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत: 102.12 रुपये प्रति लीटरगुरुग्राम में पेट्रोल की कीमत: 102.97 रुपये प्रति लीटरगाजियाबाद में पेट्रोल की कीमत: 101.80 रुपये प्रति लीटरपटना में पेट्रोल की कीमत: 113.35 रुपये प्रति लीटरकोलकाता में पेट्रोल की कीमत: 113.43 रुपये प्रति लीटरमुंबई में पेट्रोल की कीमत: 111.12 रुपये प्रति लीटरचेन्नई में पेट्रोल की कीमत: 107.75 रुपये प्रति लीटरहैदराबाद में पेट्रोल की कीमत: 115.69 रुपये प्रति लीटरबेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत: 110.93रुपये प्रति लीटर
आज डीजल की कीमत
दिल्ली में डीजल की कीमत: 95.20 रुपये प्रति लीटरकोलकाता में डीजल की कीमत: 99.78 रुपये प्रति लीटरगाजियाबाद में डीजल की कीमत: 95.29 रुपये प्रति लीटरचंडीगढ़ में में डीजल की कीमत: 99.36 रुपये प्रति लीटरपटना में डीजल की कीमत: 113.35 रुपये प्रति लीटरमुंबई में डीजल की कीमत: 97.78 रुपये प्रति लीटरचेन्नई में डीजल की कीमत: 99.57 रुपये प्रति लीटरहैदराबाद में डीजल की कीमत: 103.82 रुपये प्रति लीटरबेंगलुरु में डीजल की कीमत: 98.79 रुपये प्रति लीटर
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव के बीच राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं देखा जा रहा है. भारत में तेल की कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों और डॉलर-रुपये के एक्सचेंज रेट के आधार पर तय की जाती हैं. अलग-अलग राज्यों में VAT और लोकल ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट के चलते हर शहर में रेट थोड़े अलग होते हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कितनी, बढ़ीं, आज, पेट्रोल-डीजल, की, कीमतें, घर, से, निकलने, से, पहले, रेट, चेक, करना, न, भूलें</media:keywords>
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        <title>बस 2 और दिन... मोबाइल और आधार लेकर बैठ जाएं, फटाफट कराए अपना LPG e&amp;KYC</title>
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        <description><![CDATA[ LPG e-KYC deadline: Indane, Bharat Gas या HP Gas का इस्तेमाल करने वाले LPG ग्राहकों के लिए e-KYC की प्रक्रिया पूरी कराने की आखिरी तारीख 23 अगस्त, 2026 है. ऐसे में जिन ग्राहकों का वेरिफिकेशन अभी भी बाकी है, उनके पास अब वक्त बहुत कम बचा है.
गनीमत है कि इसके लिए आपको कहीं लाइन में लगने या अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने की जरूरत नहीं है. वेरिफिकेशन का काम घर बैठे ही स्मार्टफोन, आधार की जानकारी और LPG कनेक्शन से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके पूरा किया जा सकता है.&amp;nbsp;
LPG e-KYC कराने के लिए क्या-क्या चाहिए?
आधार कार्ड या आधार नंबर
LPG कनेक्शन से जुड़ा मोबाइल नंबर
LPG कंज्यूमर नंबर या LPG ID
इंटरनेट की सुविधा वाला स्मार्टफोन
आपके LPG प्रोवाइडर का ऑफिशियल ऐप
Facial authentication) के लिए Aadhaar FaceRD ऐप
Indane ग्राहक e-KYC कैसे पूरा करें?
Indane ग्राहक IndianOil ONE ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. इसमें सबसे पहले अपने LPG अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके लॉग इन करें. फिर मेनू बार में जाकर My Profile पर क्लिक करें. यहां Re-KYC का विकल्प चुनें और अपना आधार नंबर डालें. आधार FaceRD ऐप के जरिए चेहरे के वेरिफिकेशन (facial verification) के लिए दिए गए निर्देशों का पालन करें. ऑथेंटिकेशन पूरा होने के बाद रिक्वेस्ट सबमिट करें.
Bharat Gas के लिए क्या है नियम?
भारत गैस के ग्राहक &#039;Hello BPCL&#039; ऐप का इस्तेमाल करें. इसमें अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें. होमपेज पर LPG सेक्शन पर जाकर LPG ID पर क्लिक करें. इसके बाद &amp;nbsp;e-KYC या आधार ऑथेंटिकेशन सेक्शन पर क्लिक करें. मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करने के बाद Aadhaar FaceRD के जरिए चेहरा स्कैन कर प्रक्रिया को पूरी करें.&amp;nbsp;
HP Gas वाले कैसे करें वेरिफाई?
HP गैस ग्राहक HP Pay ऐप के जरिए इस प्रॉसेस को पूरा कर सकते हैं. मोबाइल नंबर से रजिस्टर या साइन-इन करने के बाद ऐप के मुख्य डैशबोर्ड पर LPF/Gas Connection के ऑप्शन पर क्लिक करें. इसके बाद Aadhaar Authentication के ऑप्शन को चुनें. आधार के लिए सहमति दें और जरूरी फ़ेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान) पूरा करें. आखिर में एप्लीकेशन को चेक करके कन्फर्म करें कि वेरिफिकेशन स्टेटस सफलतापूर्वक अपडेट हो गया है या नहीं.
अगर 23 अगस्त तक e-KYC नहीं कराया तो?
&amp;nbsp;23 अगस्त तक e-KYC पूरा न कराने से सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि सरकार की तरफ से आपके बैंक अकाउंट में आने वाले सब्सिडी- चाहे वह सामान्य सब्सिडी हो या उज्जवला योजना के तहत मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी- तुरंत रोक दी जाएगी. साथ ही LPG कनेक्शन को &#039;सस्पेंडेड&#039; या &#039;डॉर्मेंट&#039; की श्रेणी में डाल दिया जाएगा. इसके बाद आप ऐप, IVR या व्हाट्सअप के जरिए बुकिंग की कोशिश करेंगे, तो आपकी बुकिंग रिजेक्ट हो जाएगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बस, और, दिन..., मोबाइल, और, आधार, लेकर, बैठ, जाएं, फटाफट, कराए, अपना, LPG, e-KYC</media:keywords>
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        <title>कमाल की है LIC की यह पॉलिसी: 5000 महीने के निवेश पर मिलेगा 100 साल का प्रोटेक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ LIC Jeevan Umang: अगर आपको किसी ऐसी पॉलिसी की तलाश है, जो जो लंबे समय तक इंश्योरेंस कवरेज दे, तो &#039;LIC जीवन उमंग&#039; पॉलिसी एक बेहतर ऑप्शन है. इस पॉलिसी में निवेश करने पर 100 साल की उम्र तक हर साल 80,000 रुपये की गारंटीड इनकम होती है. इसका एक बड़ा फायदा यह है कि LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया) सरकार के मालिकाना हक वाली इंश्योरेंस कंपनी है, जिसका मतलब है कि इसकी पॉलिसी में निवेश करने में कोई जोखिम नहीं है.
ऐसे में जो लोग रिटायरमेंट के बाद हर साल गारंटीड इनकम चाहते हैं, वे LIC जीवन उमंग प्लान में निवेश कर सकते हैं. एक होल-लाइफ इंश्योरेंस प्लान है, जो पॉलिसीहोल्डर को 100 साल की उम्र तक इंश्योरेंस कवरेज देता है.&amp;nbsp;अगर आप हर महीने 5000 रुपये से निवेश की शुरुआत करते हैं, तो इस स्कीम के तहत आपको 100 साल की उम्र तक फिक्स्ड सालाना कमाई होती रहेगी.&amp;nbsp;
स्कीम की कुछ खास बातें
इसमें पॉलिसी होल्डर को 100 साल का प्रोटेक्शन मिलता है. हालांकि, आपको पूरी जिंदगी पैसे नहीं भरने होते हैं. आप अपनी सहूलियत के हिसाब से 15,20,25,30 साल का प्रीमियम भुगतान टर्म चुन सकते हैं.&amp;nbsp;
प्रीमियम भरने का समय खत्म होने के साथ ही LIC आपको बेसिक सम एश्योर्ड (Basic Sum Assured) का 8% हर साल Survival Benefit के रूप में जीवनभर देती रहेगी.
इसकी एक और बड़ी खूबी यह है कि इसमें प्रीमियम भुगतान पर सेक्शन 80C के तहत और मिलने वाली मैच्योरिटी/रिटर्न पर सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स छूट मिलती है. पॉलिसी चालू होने के 2 साल बाद आप जरूरत पड़ने पर इस पर लोन भी ले सकते हैं.&amp;nbsp;
निवेश का समझिए पूरा गणित
मान लीजिए कि कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र में यह पॉलिसी लेता है और 20 साल तक प्रीमियम भरने का विकल्प चुनता है, तो उसके 5000 रुपये के मासिक निवेश का सालाना 60000 रुपये बनेगा. इस प्रीमियम पर लगभग 10 लाख रुपये का लाइफ कवर सेट होगा. यानी कि 20 साल बाद पॉलिसीहोल्डर जब 50 की उम्र पार कर 51 साल का होगा, तब से लेकर 100 साल की आयु तक या उसकी मृत्यु होने तक, उसे हर साल 10 लाख का 8% यानी कि 80000 रुपये सालाना फिक्स्ड मिलेंगे.&amp;nbsp;
अगर पॉलिसीधारक 100 साल के बाद भी जीवित रहता है, तो उसे सम एश्योर्ड के साथ एलआईसी द्वारा घोषित बोनस और फाइनल एडिशनल बोनस का एकमुश्त भारी फंड मैच्योरिटी बेनिफिट के तौर पर मिलता है. अगर 50 की उम्र के बाद किसी भी समय पॉलिसी धारक की मृत्यु हो जाती है, तो उनके नॉमिनी को 10 लाख का फुल सम एश्योर्ड और सालों से इकट्ठा हुआ सारा पैसा एकमुश्त दे दिया जाता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कमाल, की, है, LIC, की, यह, पॉलिसी:, 5000, महीने, के, निवेश, पर, मिलेगा, 100, साल, का, प्रोटेक्शन</media:keywords>
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        <title>340 के पार पहुंची पेट्रोल की कीमत, डीजल 368 रुपये के पार; भारत से सटे देश में बिगड़े हालात</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/340-के-पार-पहुंची-पेट्रोल-की-कीमत-डीजल-368-रुपये-के-पार-भारत-से-सटे-देश-में-बिगड़े-हालात</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price: बढ़ती महंगाई के बीच पाकिस्तान के लोगों को एक और बड़ा करारा झटका लगा है. यहां आज 22 अगस्त से पेट्रोल 3.81 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीज़ल (HSD) 3.59 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है. ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) द्वारा जारी यह नई कीमतें फिलहाल 24 अगस्त, 2026 तक ही लागू रहेंगी.&amp;nbsp;
पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की नई कीमत
पेट्रोल की कीमत में 3.81 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी नई कीमत 341.59 पाकिस्तानी रुपये हो गई है. वहीं, हाई-स्पीड डीजल की कीमत 3.59 रुपये प्रति लीटर के इजाफे के बाद अब 368.29 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सरकार ने कीमतों में यह बढ़ोतरी की है. पाकिस्तान में इससे पहले 21 अगस्त को फ्यूल रेट बढ़ाए गए थे. तब पेट्रोल 27 पैसे और डीजल 1.64 रुपये महंगा हुआ था.
सरकार वसूलती है भारी टैक्स
पेट्रोलियम डिवीज़न की सूचना के अनुसार, पाकिस्तान में सरकार जनता से पेट्रोल पर 114 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 100 रुपये प्रति लीटर बतौर टैक्स और लेवी वसूल रही है. देश में ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के चलते लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ा रहा है, पब्लिक ट्रांसपोर्ट्स का किराया बढ़ा है, ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं. इससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है.&amp;nbsp;
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए पाकिस्तान में सरकार ने हर 15 दिनों के अंतराल पर की जाने वाली समीक्षा को समाप्त कर दिया है. पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की कि पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें अब दैनिक आधार पर तय की जा रही हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जब दुबई में कुछ नहीं था, तब बनी थी Toyota बिल्डिंग, अब क्यों ढहाई जाएगी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जब-दुबई-में-कुछ-नहीं-था-तब-बनी-थी-toyota-बिल्डिंग-अब-क्यों-ढहाई-जाएगी</link>
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        <description><![CDATA[ Dubai Toyota Building News: दुबई की जब-जब बात होती है तो आंखों के सामने बड़ी बड़ी गगनचुंबी इमारतों की तस्वीर नजर आती है. ये शहर संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है. आज इस शहर की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि यहां मौजूद मशहूर टोयोटा बिल्डिंग को अब गिराया जा रहा है.&amp;nbsp;
इंटरनेट पर अकसर दुबई शहर बसने के दौरान की एक पुरानी तस्वीर वायरल होती है. इस तस्वीर की खास बात यह है कि उस वक्त बनी सभी इमारतों में सबसे ऊंची टोयटा बिल्डिंग दिखती है और उसपर लाल रंग से लिखा हुआ होता है TOYOTA. दरअसल जब दुबई में कुछ नहीं था, मतलब ऊंची ऊंची इमारते और बड़ी बड़ी कंपनियां नहीं थी, ये बिल्डिंग तब बनाई गई थी. अब इस मशहूर इमारत का अंत होने वाला है.&amp;nbsp;
खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टोयटा बिल्डिंग में 15 मंजिल है. इस बिल्डिंग को साल 1974 में बनाया गया था, जिसे नासिर रशीद लूताह बिल्डिंग के नाम से भी जाना जाता है. दुबई की शेख ज़ायद रोड के पास मौजूद इस बिल्डिंग को खाली कराया जा रहा है.&amp;nbsp;
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क्यों खाली कराई जा रही है बिल्डिंग?
बता दें कि दुबई म्युनिसिपैलिटी गैर कानूनी तरीके से बांटे गए कई अपार्टमेंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, क्योंकि इनसे सुरक्षा का बड़ा खतरा हो सकता है. म्युनिसिपैलिटी के अधिकारियों ने ऐसे अपार्टमेंट्स में बहुत ज़्यादा भीड़ होने पर चिंता जताई थी. म्युनिसिपैलिटी का मानना है कि ऐसी पुरानी इमारतों में अब आग लगने का खतरा बढ़ सकता है और इमरजेंसी के वक्त लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है.
बिल्डिंग के रियल एस्टेट डिपार्टमेंट का कहना है कि इस टोयोटा बिल्डिंग के कुछ अपार्टमेंट्स को कई कमरों में बांट दिया गया था और एक यूनिट में 15 लोग तक रह रहे थे. अब इन सभी लोगों का आशियाना छिन गया है. इन लोगों को प्रशासन ने अब कहीं ओर शिफ्ट होने को कहा है.&amp;nbsp;
गौरतलब है कि साल 1974 में जब ये बिल्डिंग बनाई गई, तब यह दुबई की शुरुआती रिहायशी ऊंची इमारतों में से एक थी. इस बिल्डिंग की ऊंचाई करीब 65 मीटर है. साल 1981 में जब इस बिल्डिंग के टॉप पर टोयोटा का एक बड़ा लाल साइन लगाया गया तो यह नासिर राशिद लूताह बिल्डिंग की जगह टोयोटा बिल्डिंग के नाम से मशहूर हो गई.
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फेमस लैंडमार्क बन गई थी ये बिल्डिंग
दिलचस्प बात यह है कि साल 2018 में टोयटा एड का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद इसे हटा दिया गय था, लेकिन इस लैंडमार्क से जुड़ी यादों और लगाव को देखते हुए जून 2022 में इसे फिर से लगा दिया गया था. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जब, दुबई, में, कुछ, नहीं, था, तब, बनी, थी, Toyota, बिल्डिंग, अब, क्यों, ढहाई, जाएगी</media:keywords>
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        <title>भारत के पास है 880 टन सोने का भंडार, US&amp;चीन के मुकाबले हम कहां?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी सोचते हैं कि किसी देश की आर्थिक ताकत का अंदाजा सिर्फ उसके पास मौजूद सोने की मात्रा से लगाया जा सकता है, तो यह बिल्कुल गलत है. आमतौर पर किसी देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोनी की हिस्सेदारी भी काफी मायने रखती है. ऐसे में अगर आप यह जानना चाहते हैं कि भारत के पास दुनिया के मुकाबले कितना सोना मौजूद है, तो यह आंकड़ा आपको हैरान कर सकता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के केंद्रीय बैंक के पास करीब 880 टन सोना है.
दरअसल, यह देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार 17.7% हिस्सा है. हालांकि, सोने की मात्रा के मुकाबले में भारत कई बड़े देशों से आगे है, लेकिन अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों के मुकाबले उसके कुल भंडार में सोने की हिस्सेदारी काफी काम है. दुनिया के कई ऐसे देश मौजूद है जो सोने को अपने विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम हिस्सा मानते हैं. लेकिन हर देश की रिजर्व रणनीति अलग-अलग होती है.&amp;nbsp;
भारत से किन देशों के पास ज्यादा सोना?
भारत के पास 880 टन सोना मौजूद है, जो जापान के 846 टन और ऑस्ट्रेलिया के 80 टन से ज्यादा है. वहीं, दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड के पास भारत से ज्यादा करीब 1,040 टन सोने मौजूद है. भारत के कुल केंद्रीय बैंक भंडार में सोने की हिस्सेदारी 17.7% है. वहीं जापान में यह 8.7%, स्विट्जरलैंड में 13.6% और ऑस्ट्रेलिया में 15.3% है.
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ब्रिटेन के पास करीब 310 टन सोना है, लेकिन उसके कुल केंद्रीय बैंक भंडार में इसकी हिस्सेदारी 20.3% है. यानी भले ही भारत के पास ब्रिटेन से कहीं ज्यादा सोना मौजूद है, लेकिन ब्रिटेन के कुल रिजर्व में सोने का अनुपात ज्यादा है.
चीन के मुकाबले भारत कहां खड़ा है?
चीन के पास भारत से दोगुने से भी ज्यादा सोना है. उसके केंद्रीय बैंक के पास करीब 2,306 टन सोना है, जो भारत के 880 टन भंडार से काफी ज्यादा है. हालांकि, चीन के कुल भंडार में सोने की हिस्सेदारी सिर्फ 8.6% है. इससे यह साफ होता है कि टन के हिसाब से चीन भारत से काफी आगे है, लेकिन कुल रिजर्व में सोने के अनुपात के मुकाबले में चीन से भारत की हिस्सेदारी ज्यादा है.&amp;nbsp;
अमेरिका के पास सबसे ज्यादा सोना
अमेरिका को दुनिया में सबसे बड़े आधिकारिक स्वर्ण भंडार वाला देश माना जाता है. हालांकि अमेरिका के पास करीब 8,133 टन सोना है और यह उसके केंद्रीय बैंक के कुल भंडार में सोने की हिस्सेदारी करीब 82.4% है.
प्रमुख देशों के पास कितना सोना
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; देश &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; टन &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; केंद्रीय बैंक के भंडार में सोने की हिस्सेदारी

अमेरिका &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;8,133 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;82.4%&amp;nbsp;
जर्मनी &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;3,350 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;82.2%
फ्रांस &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 2,437 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 79.9%
इटली &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;2,452 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 79.3%
चीन &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;2,306 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 8.6%
स्विट्जरलैंड &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,040 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 13.6%
भारत &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 880 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 17.7%
जापान &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 846 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;8.7%
तुर्की &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;614 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;54.6%
नीदरलैंड्स &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 612 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;72.9%
ब्रिटेन &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;310 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;20.3%
स्पेन &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;282 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 30.8%
ब्राजील &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;172 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;6.8%
दक्षिण कोरिया &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;104 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;3.4%
इंडोनेशिया &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;86 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 7.7%
ऑस्ट्रेलिया &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 80 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;15.3%
कनाडा &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;0 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;0%

340 के पार पहुं ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बेंगलुरु Airport पर बदले नियम, फ्लाइट लैंडिंग पर लगेगा Tax, टिकट पर होगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ Bengaluru Airport: अगर आप फ्लाइट से अक्सर सफर करते हैं और आपका बेंगलुरु आना-जाना लगा रहता है &amp;nbsp;या फिर आप आने वाले समय में बेंगलुरु की फ्लाइट से सफर करने वाले हैं तो यह जानकारी आपके लिए जरूरी है. क्योंकि बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए चार्ज से जुड़ा एक नियम लागू होने जा रहा है. आइए अब जानते हैं कि क्या नया नियम लागू होने वाला है?
क्या है नया नियम?
दरअसल नए नियम के तहत, अब बेंगलुरु एयरपोर्ट पर फ्लाइट से पहुंचने वाले यात्रियों से UDF यानी User Development Fee लिया जाएगा. यानी अब आपको केवल टिकट के ही पैसे नहीं, बल्कि टिकट के अलावा UDF चार्ज देना पड़ेगा.&amp;nbsp;
UDF क्या होता है और क्यों लिया जाता है?
सबसे पहले जानते हैं कि UDF आखिर होता क्या है और यात्रियों से क्यों लिया जाता है? UDF यानी User Development Fee एयरपोर्ट पर लिया जाने वाला एक चार्ज है, जिसे यात्रियों से इसलिए लिया जाता है, ताकि एयरपोर्ट की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जड़े खर्चों को पूरा किया जा सके. यह चार्ज आमतौर पर पहले से ही यात्रियों की टिकट में एड होता है, जिसकी दर AERA की मंजूरी के बाद ही तय की गई है.&amp;nbsp;
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कब से लागू होगा नियम?
बता दें कि ये नियम अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन 1 सितंबर 2026 से लागू कर दिया जाएगा. लेकिन एक बात का ध्यान रखें, ये चार्ज घरेलू यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से अलग-अलग लिया जाएगा.&amp;nbsp;
बेंगलुरु से बाहर जानें वाले यात्रियों को कितना देना होगा UDF?
पहले UDF केवल बेंगलुरु से फ्लाइट लेने वालों को देना होता था, लेकिन अब से बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों से भी UDF लिया जाएगा. अगर आप बेंगलुरु से बाहर जा रहे हैं तो आपके लिए राहत भरी अपडेट है, क्योंकि बेंगलुरु से बाहर जाने वाले यात्रियों से UDF कम लिया जाएगा, जो इस प्रकार है.

घरेलू यात्रियों के लिए चार्ज 550 से घटाकर 300 रुपये किया जाएगा.
वहीं अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए चार्ज 1500 रुपये से घटाकर 997 रुपये किया जाएगा.
यानी बेंगलुरु से बाहर जाने वाले यात्रियों को UDF कम देना होगा.&amp;nbsp;

कितना देना होगा चार्ज?
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले यात्रियों को कितना चार्ज देना होगा. ये इस प्रकार है...

अगर घरेलू यात्री की बात करें तो इनसे 125 रुपये UDF लिया जाएगा.
वहीं अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से 426 रुपये UDF लिया जाएगा.

यानी अब से बेंगलुरु जाने वाले यात्रियों की टिकट पर इसका असर पड़ेगा. मान लीजिए, आपकी टिकट की कीमत 3000 रुपये है और आपको 125 रुपये UDF देना होगा तो कुल आपको 3125 रुपये देने होंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बेंगलुरु, Airport, पर, बदले, नियम, फ्लाइट, लैंडिंग, पर, लगेगा, Tax, टिकट, पर, होगा, असर</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में भी होगा बदलाव, मिले संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने का इंतजार कर्मचारी वर्ग कई दिनों से कर रहा है. लगातार हो रही बैठकों के दौर ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों की उम्मीदों को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है. लेकिन हाल ही में मिले संकेतों से लगता है कि केवल कर्मचारियों ही नहीं बल्कि पेंशन भोगियों को भी इससे उम्मीद रखना चाहिए.
क्योंकि लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में मिले संकेतों से पता चलता है कि 8वें वेतन आयोग के नियमों में बदलाव करके 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन को भी शामिल किया जा सकता है. हालांकि, अभी सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है.
पेंशन योजना में हो सकता है बदलावदरअसल कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन, जैसे भारत पेंशनर समाज (BPS) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF), सरकार से 8वें वेतन आयोग के नियमों (ToR) में बदलाव की मांग कर रहे हैं. जिसके चलते खबरें हैं कि जल्दी ही 8वें वेतन आयोग की बैठकें कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के साथ होने वाली हैं. राजस्थान में 31 अगस्त और तमिलनाडु में 7 सितंबर को बैठकें होंगी. इसके बाद सितंबर के दूसरे हफ्ते में चेन्नई और पुडुचेरी में भी बैठकें होंगी.
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क्या हैं संगठन की मांगें?इन संगठनों की सबसे बड़ी मांग है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों और उनके परिवारों की पेंशन भी दोबारा तय की जाए. संगठनों का कहना है कि सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों की सैलरी पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि मौजूदा पेंशनरों और उनके परिवारों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. पेंशनर संगठनों ने ये भी मांग की है कि ToR में इस्तेमाल किए गए &#039;अनफंडेड कॉस्ट ऑफ नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन स्कीम&#039; जैसे शब्दों को हटाया जाए. उनका कहना है कि पेंशन रिटायर कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा है, केवल सरकार पर पड़ने वाला खर्च नहीं.
नियमों में हो सकता है बदलाव?जी हां! इन नियमों में बजलव हो सकता है. 8वें वेतन आयोग के नियम अंतिम और ऐसे नहीं हैं जिन्हें बदला ना जा सके. पिछले वेतन आयोगों में भी सरकार ने जरूरत पड़ने पर उनके ToR में बदलाव किए थे. 5वें वेतन आयोग के नियमों में 1995-96 के दौरान 4 बार बदलाव हुआ था. तो वहीं 6वें वेतन आयोग के ToR में 2 बार बदलाव किया गया था. इतना ही नहीं पिछले यानी 7वें वेतन आयोग के ToR में भी सितंबर 2015 में बदलाव किया गया था. इसलिए सरकार चाहे तो 8वें वेतन आयोग के दायरे में पुराने पेंशनरों की पेंशन को शामिल करने के लिए नियमों में बदलाव कर सकती है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, रिटायर, हुए, कर्मचारियों, की, पेंशन, में, भी, होगा, बदलाव, मिले, संकेत</media:keywords>
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        <title>यूपी&amp;बिहार में बढ़ रही Loan की मांग, कर्ज पर सिबिल रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-बिहार-में-बढ़-रही-loan-की-मांग-कर्ज-पर-सिबिल-रिपोर्ट-में-बड़ा-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में कर्ज या लोन लेने का चलन काफी ज्यादा है. लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए अक्सर लोन का सहारा लेते हैं, जो कि आसान भी है. कभी घर खरीदने के लिए, कभी गाड़ी खरीदने के लिए या फिर किसी अन्य जरूरत के लिए. अब कर्ज की पहुंच सिर्फ महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे बड़े और विकसित राज्यों तक सीमित नहीं है. बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी कर्ज के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
सिबिल रिपोर्ट में हुआ खुलासादरअसल हाल ही में TransUnion CIBIL की एक रिपोर्ट सामने आई है. इस नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश की करीब 75 फीसदी आबादी ने कम से कम एक बार औपचारिक तौर पर कर्ज लिया है. रिपोर्ट में मार्च 2017 से मार्च 2026 तक के आंकड़ों की स्टडी की गई है. जिससे पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में ज्यादा लोग बैंकिंग और क्रेडिट सिस्टम से जुड़े हैं.
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राज्य के अनुसार देखें क्रेडिट एक्टिव के शेयर की लिस्ट:



राज्य
मार्च 2017
मार्च 2026


उत्तर प्रदेश&amp;nbsp;
8%
11%


मध्यप्रदेश&amp;nbsp;
4%&amp;nbsp;
6%


गुजरात&amp;nbsp;
5%&amp;nbsp;
5%


महाराष्ट्र&amp;nbsp;
12%&amp;nbsp;
10%


कर्नाटक&amp;nbsp;
7%&amp;nbsp;
7%


बिहार&amp;nbsp;
3%&amp;nbsp;
5%


वेस्ट बंगाल&amp;nbsp;
4%&amp;nbsp;
5%


तेलंगाना&amp;nbsp;
5%&amp;nbsp;
5%


आंध्र प्रदेश&amp;nbsp;&amp;nbsp;
6%&amp;nbsp;
6%


तमिल नाडु&amp;nbsp;
11%&amp;nbsp;
9%



यूपी-बिहार कर्ज लेने में नंबर वनपहले कर्ज की सुविधा मुख्य रूप से केवल औद्योगिक और विकसित राज्यों को ही मिलती थी. जिसमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य थे. लेकिन अब इसका विस्तार देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कर्ज लेने वालों की संख्या और क्रेडिट की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं. इसमें यूपी और बिहार का नंबर सबसे ऊपर है, यानी ये दोनों राज्य सबसे ज्यादा कर्ज लेते हैं.
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नए कर्ज की रफ्तार में कमीवहीं इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि नए लोगों के पहली बार कर्ज लेने की रफ्तार में कमी आई है. इसलिए आने वाले समय में बैंकों और वित्तीय कंपनियों के लिए नए ग्राहकों को क्रेडिट सिस्टम से जोड़ना बड़ी चुनौती और अवसर दोनों होगा. कहा जा सकता है कि भारत का क्रेडिट बाजार अब कुछ चुनिंदा राज्यों तक सीमित नहीं रहा है. छोटे शहरों और नए राज्यों में बढ़ती कर्ज की मांग देश के विस्तार को दिखाती है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी-बिहार, में, बढ़, रही, Loan, की, मांग, कर्ज, पर, सिबिल, रिपोर्ट, में, बड़ा, खुलासा</media:keywords>
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        <title>7 करोड़ का फंड बनाना है तो कितनी SIP करनी होगी? समझें 15 साल का पूरा गणित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/7-करोड़-का-फंड-बनाना-है-तो-कितनी-sip-करनी-होगी-समझें-15-साल-का-पूरा-गणित</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/7-करोड़-का-फंड-बनाना-है-तो-कितनी-sip-करनी-होगी-समझें-15-साल-का-पूरा-गणित</guid>
        <description><![CDATA[ क्या SIP के जरिए 15 साल में 7 करोड़ रुपये का फंड बनाया जा सकता है? सुनने में ये रकम काफी बड़ी लगती है, लेकिन सही इन्वेस्टमेंट और लंबे समय के साथ ये मकसद हासिल करना मुमकिन हो सकता है. लेकिन, इसके लिए हर महीने कितनी रकम लगानी होगी और कितना रिटर्न चाहिए, इसका हिसाब समझना जरूरी है.
अगर किसी पैसा लगाने वाले को आम तौर पर 12% साल का रिटर्न मिलता है और वो 15 साल तक SIP जारी रखता है, तो करीब 7 करोड़ रुपये का फंड बनाया जा सकता है. इसके लिए हर महीने लगभग 1.5 लाख रुपये इन्वेस्टमेंट करने होंगे.
इस हिसाब से इन्वेस्टर 15 साल में कुल 2.7 करोड़ रुपये अपनी जेब से लगाएगा. अगर इन्वेस्ट पर आम तौर पर 12% रिटर्न मिलता है, तो उसके हिसाब से करीब 4.44 करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है. इस तरह 15 साल के आखिर में कुल रकम लगभग 7.14 करोड़ रुपये पहुंच सकती है.
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कंपाउंडिंग कैसे करेगी काम
इसमें सबसे अहम जिम्मेदारी कंपाउंडिंग की होती है. शुरुआती सालों में मिलने वाला रिटर्न आगे चलकर दोबारा रिटर्न कमाने में मदद करता है. जैसे जैसे इन्वेस्टमेंट का समय ज्यादा होता है, फंड की रकम भी तेजी से ज्यादा हो सकती है.
हर महीने 1.5 लाख रुपये की SIP शुरू करना हर इनवेस्टर्स के लिए आसान नहीं हो सकता. ऐसे में स्टेप-अप SIP का ऑप्शन अपनाया जा सकता है. &amp;nbsp;इसमें शुरुआत में कम पैसे से &amp;nbsp;शुरू करके कमाई ज्यादा होने के साथ SIP की रकम भी ज्यादा की जाती है. इससे शुरुआत के सालों में इन्वेस्टमेंट का बोझ कम रहता है और समय के साथ इन्वेस्टमेंट ज्यादा किया जा सकता है.
रिटर्न की गारंटी नहीं
ये पूरा हिसाब 12% औसत साल का रिटर्न मानकर लगाया गया है. असल में म्यूचुअल फंड का रिटर्न फिक्स नहीं होता और बाजार के अनुसार इसमें उतार चढ़ाव हो सकता है. इसलिए 7 करोड़ रुपये का मकसद मुमकिन तो है, लेकिन इसके लिए बड़ा इन्वेस्टमेंट, लंबा समय और बाजार में अच्छा काम जरूरी होगा. ज्यादातर मिडिल क्लास इनवेस्टर्स के लिए ये एक बड़ा फाइनेंसियल मकसद है, SIP में फिक्स रिटर्न नहीं मिलता.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>करोड़, का, फंड, बनाना, है, तो, कितनी, SIP, करनी, होगी, समझें, साल, का, पूरा, गणित</media:keywords>
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        <title>स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के बदले नियम, अब नहीं मिलेगा 4 लाख का एजुकेशन लोन</title>
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        <description><![CDATA[ Student Credit Card Loan News: बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है. इस योजना के तहत मिलने वाली चार लाख रुपए की अधिकतम लोन राशि को घटाकर अब दो लाख रुपए कर दिया गया है. बड़ी बात यह है कि अब दो लाख रुपए तक के एजुकेशन लोन के लिए बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जाएगा.
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, अगर किसी को दो लाख रुपए से ज्यादा रकम चाहिए तो अब जरूरत होने पर छात्रों को प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी पोर्टल के जरिए बैंक से लोन के लिए आवेदन करना होगा.&amp;nbsp;
बता दें कि बिहार सरकार ने हायर एजुकेशन &amp;nbsp;के लिए स्टूडेंट्स को आर्थिक मदद देने वाली इस योजना को अगले 5 सालों के लिए विस्तार दिया है, यानी यह योजना 2031 तक प्रभावी रहेगी. जिला निबंधन और परामर्श केंद्रों पर छात्रों को पोर्टल के जरिए आवेदन करने की सुविधा बिलकुल फ्री मिलेगी.
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बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना क्या है?
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना बिहार सरकार की ओर से शुरु की गई थी. इस योजना के तहत 12वीं पास कर चुके छात्रों को हायर एजुकेशन जारी रखने के लिए बिना किसी गारंटी या किसी संपत्ति को गिरवी रखे बिना एजुकेशन लोन दिया जाता है. योजना के अनुसार सामान्य छात्रों को 4 फीसदी ब्याज की दर से लोन मिलता है. वहीं, महिलाओं, दिव्यांगो और ट्रांसजेंडर छात्रों को मात्र एक फीसदी ब्याज की दर पर लोन दिया जाता है.
योजना के तहत लोन के पैसों से कॉलेज की फीस, ट्यूशन फीस, हॉस्टल का खर्च, किताबें, स्टेशनरी और लैपटॉप की खरीद जैसी जरूरतें शामिल हैं. गौरतलब है कि कोर्स पूरा होने के एक साल बाद या नौकरी मिलने के बाद छात्र को आसान किस्तों में लोन चुकाना शुरू करना होता है.
लोन लेने के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की होती है जरूरत?

आधार कार्ड
पैन कार्ड
10वीं और 12वीं की मार्कशीट
एडमिशन लेटर
फीस स्ट्रक्चर स्लिप
डोमिसाइल सर्टिफिकेट
बैंक की पासबुक
कैंसिल चेक
और पासपोर्ट साइज फोटो

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यह भी देखें-
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Crypto निवेश में इस राज्य का दबदबा, दिल्ली&amp;मुंबई भी पीछे, चौंका देगा नाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/crypto-निवेश-में-इस-राज्य-का-दबदबा-दिल्ली-मुंबई-भी-पीछे-चौंका-देगा-नाम</link>
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        <description><![CDATA[ Cryptocurrency News: क्या आपको पता है क्रिप्टो निवेश बाजार के मामले में देश का कौनसा राज्य टॉप पर है? अगर नहीं तो आप नाम जानकर चौंक जाएंगे. CoinSwitch की रिपोर्ट के मुताबिक क्रिप्टे बाजार में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश है. कॉइन स्विच ने बताया है कि उसके प्लेटफॉर्म पर हुए कुल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट में यूपी की हिस्सेदारी 12.9% रही. बड़ी बात यह है कि इस मामले में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी पीछे हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट के मामले में महाराष्ट्र 12.4% के साथ दूसरे स्थान पर है. इसके बाद कर्नाटक 8.1% और दिल्ली 7.4% है. इससे साफ है कि क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट अब सिर्फ देश के बड़े वित्तीय शहरों तक सीमित नहीं है. यूपी का पहले स्थान पर आना इसलिए खास है, क्योंकि छोटे शहरों और राज्यों से भी क्रिप्टो में इन्वेस्टमेंट ज्यादा हो रहा है.
देश के 10 बड़े क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट वाले राज्यों में 9 जगह Bitcoin सबसे पसंदीदा रहा. सिर्फ आंध्र प्रदेश में Dogecoin पहले नंबर पर रहा.
युवाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी
Q2 में CoinSwitch से जुड़ने वाले नए इनवेस्टर में 18-25 साल के लोगों की हिस्सेदारी 54.4% रही. 26-35 साल के इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी 25.4% थी. यानी करीब 4 में से 3 नए इनवेस्टर 35 साल या उससे कम उम्र के थे.
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लेकिन, खरीद-बिक्री के मामले में युवा और उम्रदराज इनवेस्टर के बीच अंतर दिखा. 18-25 साल के इनवेस्टर्स का buy-to-sell ratio 0.65 रहा. वहीं 46 साल और उससे ज्यादा उम्र के इनवेस्टर्स का ratio 1.14 रहा, जो सबसे ज्यादा था.
उम्र के साथ ज्यादा हुई क्रिप्टो की संख्या
18-25 साल के 59.2% इनवेस्टर्स के पास सिर्फ एक क्रिप्टोकरेंसी थी. 36-45 साल के हिसाब में ये आंकड़ा 36.3% रहा. इसी उम्र में 10 या उससे ज्यादा क्रिप्टो रखने वाले इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी 9.1% थी.
हर उम्र के इनवेस्टर्स में Bitcoin और Dogecoin की जोड़ी सबसे पसंद की रही. इसके बाद Bitcoin-Shiba Inu, Dogecoin-Shiba Inu और Bitcoin-Ethereum का जगह रहा. 36-45 साल वालों में Dogecoin-XRP, जबकि 26-35 और 46 साल से ज्यादा उम्र वालों में Dogecoin-Ethereum ज्यादा पसंद किया गया.
रात में सबसे ज्यादा ट्रेडिंग
गुरुवार सबसे बिजी ट्रेडिंग दिन रहा और रविवार को एक्टिविटी सबसे कम रही. रात 10 से 11 बजे के बीच ट्रेडिंग सबसे ज्यादा हुई. शाम 7 बजे से आधी रात तक खरीदारी मजबूत रही. सुबह 3 से 5 बजे के बीच एक्टिविटी सबसे कम रही.
आंध्र प्रदेश में Bitcoin की जगह Dogecoin सबसे पसंदीदा रहा. यहां कुल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट में महिलाओं की हिस्सेदारी 59.3% रही, जो टॉप 10 बाजारों में सबसे ज्यादा थी.
CoinSwitch के को-फाउंडर आशीष सिंघल ने कहा कि समय के साथ इन्वेस्टर ज्यादा जानकारी लेकर और सोच समझकर क्रिप्टो में हिस्सा ले रहे हैं. उनके मुताबिक, भारत में क्रिप्टो को अब सिर्फ नए इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के तौर पर नहीं देखा जा रहा.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सस्ता नहीं अब महंगा ही होगा पेट्रोल&amp;डीजल! कारण समझ लें</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Latest Update: पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ सकती है. दुनिया के बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. 20 अगस्त को तो ब्रेंट क्रूड 2.4 फीसदी बढ़कर 93.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. ये 24 जुलाई के बाद अब ही ये सबसे ज्यादा हाई नजर आया है. वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 2.5 फीसदी चढ़ गया है.
क्यों महंगा हुआ कच्चा तेल?कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का साथ देने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की चेतावनी दी है. अमेरिका की तरफ से ईरान पर और रोक लगाने की बात भी कही गई है. इससे बाजार में डर बढ़ गया है कि आने वाले दिनों में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
रक्षाबंधन और लॉन्ग वीकेंड, होटल और फ्लाइट टिकट हुए महंगे
तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. युद्ध के कारण इस रास्ते से तेल की आवाजाही पहले ही कम हो गई है. युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से की तेल खपत के बराबर तेल इस रास्ते से गुजरता था. अगर यहां सप्लाई और प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव आ सकता है.
पेट्रोल-डीजल पर क्या असर होगा?भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, कच्चे तेल के महंगे होने का मतलब ये नहीं है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी.
घरेलू कीमतों पर सरकार की नीतियों, टैक्स, तेल कंपनियों के मार्जिन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति जैसे कई चीजों का असर पड़ता है. लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90 डॉलर से ऊपर बनी रहती है और आगे और बढ़ती है तो पेट्रोल-डीजल को सस्ता रखना मुश्किल हो सकता है.
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के बदले नियम, अब नहीं मिलेगा 4 लाख का एजुकेशन लोन
क्या है सबसे बड़ा खतरा?फिलहाल सबसे बड़ा खतरा सप्लाई का है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से बाजार को डर है कि मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई और कम हो सकती है. इसी चिंता के चलते तेल की कीमतों में तेजी आई है. कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने का खतरा मेन कारण है.
ऐसे में अगर तनाव कम नहीं हुआ और क्रूड की कीमतें लगातार ऊपर जाती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम पर दबाव बढ़ सकता है. यानी फिलहाल ईंधन सस्ता होने की उम्मीद से ज्यादा चिंता महंगे क्रूड की बनी हुई है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सस्ता, नहीं, अब, महंगा, ही, होगा, पेट्रोल-डीजल, कारण, समझ, लें</media:keywords>
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    <item>
        <title>Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन और लॉन्ग वीकेंड, होटल और फ्लाइट टिकट हुए महंगे</title>
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        <description><![CDATA[ Raksha Bandhan 2026: आने वाली 28 अगस्त को पूरे देश में रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाएगा. रक्षा बंधन से पहले ही महंगाई ने आंख दिखानी शुरू कर दी है. रक्षा बंधन पर लोगों को अपने घर जाने की होड़ मची रहती है. इस बार लोग रक्षा बंधन के साथ साथ 2 से 3 दिन की छोटी ट्रिप का प्लान भी बना रहे हैं, क्योंकि इस बार रक्षा बंधन से अगले दिन शनिवार और रविवार है. यानी लॉन्ग वीकेंड.
ट्रैवल बुकिंग के आंकड़ों में भी रक्षा बंधन का असर दिखाई दे रहा है. कई शहरों से फ्लाइट और होटल बुकिंग में पिछले साल के मुकाबले अच्छी इजाफा हुई है. रक्षा बंधन के आसपास उत्तर और मध्य भारत के शहरों से घर जाने वालों की फ्लाइट बुकिंग ज्यादा हुई है. बड़ी बात यह है कि होटलों और फ्लाइट टिकट के दाम बढ़ गए हैं.&amp;nbsp;
कहां कितनी हुई हवाई बुकिंग?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हवाई बुकिंग पिछले साल के मुकाबले 96% ज्यादा हुई है. वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 86% और इंदौर में 82% का इजाफा दर्ज की गई. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ये इजाफा 75% और पटना में 58% रही है.
यह भी पढ़ें- स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के बदले नियम, अब नहीं मिलेगा 4 लाख का एजुकेशन लोन
त्योहार के दौरान सिर्फ घर जाने का ट्रेंड ही नहीं है. कई लोग इन कुछ दिनों में घूमने का भी प्लान बना रहे हैं. दिल्ली और उदयपुर में होटल बुकिंग पिछले साल के मुकाबले 83% ज्यादा हुई है. वहीं हैदराबाद और बेंगलुरु भी होटल बुकिंग के लिए पसंद किए जाने वाले शहरों में शामिल हैं.
अकेले सफर, ग्रुप में ठहरने का ट्रेंड
इस दौरान ट्रैवल बुकिंग में एक अलग ट्रेंड भी देखने को मिला है. करीब 75% फ्लाइट बुकिंग अकेले यात्रा करने वाले लोगों की है. दूसरी तरफ, होटल की 96.5% बुकिंग ग्रुप में रहने वालों की है. यानी कई लोग अकेले सफर कर रहे हैं, लेकिन होटल में परिवार या दोस्तों के साथ ठहर रहे हैं.
ओणम के मौके पर भी ट्रैवल ज्यादा
रक्षा बंधन के साथ ओणम के मौके पर भी ट्रैवल ज्यादा हुआ है. केरल में होटल बुकिंग पिछले साल के मुकाबले 69% ज्यादा हुई है. बस से यात्रा में तीन गुना से ज्यादा इजाफा हुई है, जबकि राज्य के अंदर हवाई बुकिंग 6% ज्यादा हुई है. केरल जाने वालों में बेंगलुरु सबसे आगे है. इसके बाद दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद का नंबर है. कोच्चि और तिरुवनंतपुरम भी ज्यादा बुक किए जाने वाले शहरों में शामिल हैं.
यह भी पढ़ें- Crypto निवेश में इस राज्य का दबदबा, दिल्ली-मुंबई भी पीछे, चौंका देगा नाम
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Withdrawal Limit: बार&amp;बार ATM से कैश निकालते हैं, फ्री लिमिट के बाद कितना होगा चार्ज? जानें SBI का नया रेट</title>
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        <description><![CDATA[ ATM Cash Withdrawal Limit: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI जिसमें करोड़ों लोगों का खाता है, उसने हाल ही में एक नया फैसला लिया है. इस फैसले का असर उन लोगों पर पड़ने वाला है जो ATM से साल में या महीने में कई बार कैश निकालते हैं. इस नए फैसले के मुताबिक अब ATM से कैश निकालने की एक लिमिट होगी, लिमिट खत्म हो जाने के बाद खाते से कुछ चार्ज कटेगा.
कितना लगेगा चार्ज?SBI बैंक ने हाल ही में अपने ऑफिशियल X अकाउंट के जरिए इसका नोटिस भी जारी कर दिया है. इस नोटिस के साथ ही ये पुष्टि भी हो गई है कि आखिर बैंक कितना चार्ज काटने वाला है. इस जारी किए गए नोटिस के मुताबिक जिन लोगों के SBI बैंक में सेविंग अकाउंट हैं, वो लोग अब केवल एक महीने में 4 बार ही कैश निकाल पाएंगे. यदि पांचवी बार कोई व्यक्ति कैश निकालने जाता है तो खाते स 15 रुपये कटेंगे और इस पर जो भी GST अमाउंट लगेगा उसके बाद जो चार्ज कटेगा वो अलग से होगा. ये व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रही है.

pic.twitter.com/5k36RH5Bmq
&amp;mdash; State Bank of India (@TheOfficialSBI) August 20, 2026



ये भी पढ़ें: Inheritance Boom: 10 सालों में भारतीय महिलाएं बनेंगी 73 लाख करोड़ की मालकिन! विरासत में मलेगी सम्पत्ति
अब तक कितनी थी लिमिट?हालांकि इससे पहले बैंक की तरफ से ऐसा कोई नियम नहीं था. सामान्य खाताधारक कितनी भी बार महीने में बैंक के एटीएम से कैश निकाल सकते थे. ये नया नियम उनके लिए लागू नहीं हुआ है, बल्कि ये नियम केवल BSBD खाता धारकों के लिए ही है. BSBD खाता धारक यदि एक महीने में 4 बार से ज्यादा बार पैसे निकालेंगे तो हर कैश निकासी पर 15 रुपये लगेंगे. पहले इस व्यवस्था के तहत महज एक बार ही पैसे काटे जाते थे.
ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर भी पड़ेगा असर?बता दें कि SBI के नोटिस में साफतौर पर लिखा है कि इस व्यवस्था को डिजिटल या ऑनलाइन ट्रांदैक्शन से पूरी तरह से अलग रखा गया है. यानी आप महीने में कितनी बार भी ऑनलाइन पेमेंट या किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन कर सकते हैं, वो आपके लिए बिलकुल फ्री रहने वाला है. ना ही इस पर कोई ट्रांजैक्शन लिमिट दी गई है. ये व्यवस्था केवल ATM से कैश निकालने वालों पर ही लागू होगी.
ये भी पढ़ें: यात्री को कनाडा जाने से रोका, एयरलाइंस देगी 1.53 लाख का मुआवजा
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>चेतावनी! एक्सपायर्ड फूड बेचने वालों पर सख्ती, अब दर्ज होगा क्रिमिनल केस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चेतावनी-एक्सपायर्ड-फूड-बेचने-वालों-पर-सख्ती-अब-दर्ज-होगा-क्रिमिनल-केस</link>
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        <description><![CDATA[ Expired Food News:&amp;nbsp;अगर आप भी अक्सर बाजार से पैक्ड फूड या खाने-पीने की चीजें खरीदते हैं, तो उसका एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें. ऐसे में अगर कोई दुकानदार या कंपनी एक्सपायर्ड खाद्य सामान पर नया लेबल लगाकर उसे दोबारा बेचता है, तो यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं मानी जाएगी. हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों पर नया लेबल लगाकर दोबारा &amp;nbsp;बाजार में उतारना लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.&amp;nbsp;
अदालत ने एक कंपनी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज करने से इनकार करते हुए कहा कि मुनाफे के लिए लोगों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता. खास तौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए खराब या एक्सपायर्ड खाना ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अर्थ रिसाइक्लर प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी से जुड़ा है. कंपनी पर आरोप है कि वह एक्सपायर्ड खाद्य सामान और खराब हो चुके दूसरे उत्पादों को इकट्ठा करने के बाद उन पर दोबारा नया लेबल या पैकेजिंग लगाकर बाजार में बेचती थी.
यात्री को कनाडा जाने से रोका, एयरलाइंस देगी 1.53 लाख का मुआवजा
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कंपनी को नोटिस भी जारी किया गया था. जांच के दौरान कई सामान बरामद किए जाने की बात सामने आई जिनमें खाद्य पदार्थों के अलावा कुछ घरेलू इस्तेमाल की चीजें भी शामिल की गई थीं. यही वजह है कि कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी.
कंपनी ने क्या दी दलील?
कंपनी ने अदालत में कहा कि उसने मुनाफे के लिए एक्सपायर्ड सामान को दोबारा लेबल, री-पैक या बेचने का काम नहीं की है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच, सैंपल लेने और आगे की प्रक्रिया में खामियां थीं. कंपनी ने इन्हीं आधारों पर अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी.
कोर्ट ने क्यों नहीं खारिज किया केस?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका खारिज कर दी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों पर नया लेबल लगाकर उन्हें ताजा बताकर दोबारा बाजार में उतारने का आरोप सही साबित होता है, तो इसे महज लापरवाही नहीं कहा जा सकता है. यह ग्राहकों के साथ धोखे और उनके स्वास्थ्य को खतरे में डालने का मामला हो सकता है.&amp;nbsp;
ग्राहक इन बातों को ध्यान रखें

पैकेट खरीदने से पहले हमेशा एक्सपायरी डेट जरूर देखें.
अगर पैकेट पर दोबारा चिपका हुआ या संदिग्ध लेबल दिखाई दे, तो उत्पाद खरीदने से बचें.
पैकेजिंग खराब, फटी या असामान्य लगे तो सामान न खरीदें.
खाद्य पदार्थों की सील और पैकेट की स्थिति भी जांच लें.

Withdrawal Limit: बार-बार ATM से कैश निकालते हैं, फ्री लिमिट के बाद कितना होगा चार्ज? जानें SBI का नया रेट
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चेतावनी, एक्सपायर्ड, फूड, बेचने, वालों, पर, सख्ती, अब, दर्ज, होगा, क्रिमिनल, केस</media:keywords>
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        <title>Sugar Import: त्यौहारों की मिठास नहीं पड़ेगी फीकी, सरकार ने चीनी के ड्यूटी फ्री आयात को दी मंजूरी</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/sugar-import-त्यौहारों-की-मिठास-नहीं-पड़ेगी-फीकी-सरकार-ने-चीनी-के-ड्यूटी-फ्री-आयात-को-दी-मंजूरी</guid>
        <description><![CDATA[ Sugar Import News: त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी के बढ़ते दामों पर काबू पाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT ने गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी करके कच्ची चीनी के आयात पर लगी ड्यूटी की दीवार को कुछ समय के लिए हटा दिया है. पिछले कुछ हफ्तों से चीनी के दाम लगातार चढ़ रहे हैं. अगस्त की शुरुआत में रिटेल में चीनी 48 से 50 रुपये किलो तक पहुंच गई थी और थोक भाव 4,750 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे थे.
अब 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना किसी इंपोर्ट ड्यूटी के देश में मंगाई जा सकेगी. यह छूट टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत दी गई है जिसका मतलब है कि तय मात्रा तक ही यह सुविधा मिलेगी और उसके बाद पुरानी ड्यूटी फिर लागू हो जाएगी.
पहले आयात की पॉलिसी Free थी लेकिन कोई अलग शर्त दर्ज नहीं थी - अब भी पॉलिसी Free ही रहेगी लेकिन इसके साथ शर्त जोड़ दी गई है कि 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन का ड्यूटी फ्री टैरिफ रेट कोटा लागू रहेगा.
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एडवांस ऑथराइजेशन वालों को एक बार का मौका
जिन कंपनियों के पास तहत पहले से एडवांस ऑथराइजेशन जारी हो चुका है उन्हें एक बार का विकल्प दिया गया है कि वे अपने ऑथराइजेशन को एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम से हटाकर TRQ स्कीम में बदल लें. यह विकल्प उतनी ही मात्रा पर मिलेगा जितनी कच्ची चीनी नोटिफिकेशन की तारीख तक असल में आयात हो चुकी है. इसमें उस कच्ची चीनी से बनी और आगे बनने वाली रिफाइंड चीनी भी शामिल होगी.
यह छूट मुफ्त नहीं है. इस बदलाव के लिए कंपनियों को वह GST चुकाना होगा जिसमें उन्हें आयात के वक्त छूट मिली थी. साथ ही शर्त यह भी है कि आयातित कच्ची चीनी से बनी रिफाइंड चीनी 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचनी होगी. इसका मतलब सीधा है. पहले पोर्ट आधारित रिफाइनरियों को इस शर्त पर ड्यूटी फ्री कच्ची चीनी मंगाने की छूट थी कि वे उतनी ही रिफाइंड चीनी बाहर एक्सपोर्ट करेंगी. अब सरकार उस चीनी को एक्सपोर्ट के बजाय घरेलू बाजार में उतारना चाहती है ताकि सप्लाई तुरंत बढ़े.
TRQ को लागू करने और एडवांस ऑथराइजेशन से TRQ स्कीम में बदलने की पूरी प्रक्रिया DGFT अलग से पब्लिक नोटिस के जरिए बताएगा. यानी कौन आयात कर सकेगा, कोटा कैसे बंटेगा, आवेदन की तारीखें क्या होंगी और मिलों को कितना हिस्सा मिलेगा, ये सारे सवाल फिलहाल खुले हैं.&amp;nbsp;
कोल्हापुर में थोक भाव अगस्त की शुरुआत से करीब 20 फीसदी चढ़कर रिकॉर्ड 5,350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे! दिलचस्प बात यह है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है और सबसे बड़ा उपभोक्ता भी. अगर यह आयात होता है तो करीब दस साल बाद पहली बार भारत बाहर से चीनी मंगाएगा.
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दामों में तेजी की कई वजहें एक साथ जुड़ी हैं
महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश कम रहने से अगले सीजन के उत्पादन पर सवाल खड़े हो गए हैं. दूसरी बड़ी वजह एथेनॉल है. सरकार के ब्लेंडिंग प्रोग्राम की वजह से गन्ने और चीनी का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में जा रहा है जिससे बाजार में चीनी की उपलब्धता घट रही है. सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले सीजन में एथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने पर रोक लगाने पर भी विचार कर रही है ताकि चीनी उत्पादन बढ़े. तीसरी वजह त्योहार हैं. गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली एक के बाद एक आ रहे हैं और इस दौरान मिठाई, प्रोसेस्ड फूड और घरेलू खपत तेजी से बढ़ती है.
एक्सपोर्ट पहले ही बंद हो चुका थायह पहला कदम नहीं है. सरकार पहले ही चीनी को बाहर जाने से रोक चुकी है. 13 मई 2026 को जारी नोटिफिकेशन के जरिए कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट को Restricted कैटेगरी से हटाकर Prohibited कैटेगरी में डाल दिया गया था जो 30 सितंबर 2026 तक लागू है.
इसके अलावा 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक के लिए स्टॉक लिमिट का आदेश भी लागू किया जा चुका है. यानी सरकार ने पहले एक्सपोर्ट रोका, फिर स्टॉक लिमिट लगाई और अब आयात का दरवाजा खोला है. तीनों कदमों का मकसद एक ही है त्योहारों में चीनी के दाम काबू में रखना. भारत ऐसे वक्त पर आयात कर रहा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार खुद तंग है. इससे आयात महंगा पड़ सकता है और घरेलू दामों में राहत उतनी तेज नहीं भी हो सकती.
उपभोक्ता के लिए यह राहत की उम्मीद है क्योंकि सप्लाई बढ़ने से दाम नरम पड़ सकते हैं. चीनी मिलों के लिए यह मिली जुली खबर है - जो मिलें रिफाइनरी चलाती हैं उन्हें सस्ता कच्चा माल मिलेगा, लेकिन जिन मिलों के पास स्टॉक है उन्हें दाम गिरने का डर रहेगा. गन्ना किसानों की चिंता यह रहेगी कि घरेलू दाम गिरने से मिलों की कमाई पर असर पड़ेगा और गन्ना बकाया चुकाने की रफ्तार धीमी हो सकती है.
एथेनॉल इंडस्ट्री के लिए यह चेतावनी जैसा संकेत है क्योंकि सरकार का झुकाव अभी चीनी की उपलब्धता की तरफ दिख रहा है एथेनॉल की तरफ नहीं. 2022-23 में एथेनॉल की कीमत तय होने के बाद से गन्ने के दाम करीब 16 फीसदी बढ़ चुके हैं जबकि एथेनॉल की कीमत नहीं बदली.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Sugar, Import:, त्यौहारों, की, मिठास, नहीं, पड़ेगी, फीकी, सरकार, ने, चीनी, के, ड्यूटी, फ्री, आयात, को, दी, मंजूरी</media:keywords>
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    <item>
        <title>PNB ने ग्राहकों को दी चेतावनी, सितंबर तक नहीं हुआ ये काम तो बंद हो जाएगा खाता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pnb-ने-ग्राहकों-को-दी-चेतावनी-सितंबर-तक-नहीं-हुआ-ये-काम-तो-बंद-हो-जाएगा-खाता</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/pnb-ने-ग्राहकों-को-दी-चेतावनी-सितंबर-तक-नहीं-हुआ-ये-काम-तो-बंद-हो-जाएगा-खाता</guid>
        <description><![CDATA[ PNB Bank Alert: क्या आपका भी खाता पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में है? अगर हां, तो ये खबर आपके लिए बहुत अहम ह. क्योंकि बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए एक अलर्ट जारी किया है. जिसके तहत अगर आपने सितंबर तक ये काम नहीं किया तो आपका खाता बंद हो सकता है. आइये जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला?दरअसल पीएनबी बैंक ने अपने ग्राहकों को बैंक खाते बंद होने को लेकर एक अलर्ट जारी किया है. बैंक ने बताया है कि ऐसे खाते जिनमें पिछले 3 साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ है और जिनमें बैलेंस भी जीरो है, उन्हें बंद किया जा सकता है. बैंक ने अपने ऑफिशियल X (पहले ट्विटर) अकाउंट के जरिए एक पोस्ट शेयर कर इस बारे में जानकारी दी है.
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क्या लिखा है पोस्ट में?बैंक इस पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा है, &#039;निष्क्रिय खातों के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना- कृपया ध्यान दें.&#039; इसके बाद जो पोस्ट है उसमें लिखा है, &#039;ये हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ खातों में पिछले 3 वर्षों से ग्राहक द्वारा कोई लेन-देन (संचालन) नहीं किया गया है और इन खातों में कोई शेष राशि (बैलेंस) भी नहीं है. इन खातों का दुरुपयोग न हो और इससे जुड़े जोखिमों को रोका जा सके, इसके लिए बैंक ने ऐसे खातों को बंद करने का निर्णय लिया है&#039;.

निष्क्रिय खातों के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना - कृपया ध्यान दें। #Notice #सूचना #Banking #PNB #बैंकिंग #पीएनबी #केवाईसी pic.twitter.com/JCEnnfyhZj
&amp;mdash; Punjab National Bank (@pnbindia) August 14, 2026



आगे लिखा है, &#039;अतः, ऐसे खातों के खाताधारकों को यह नोटिस दिया जाता है, जिनमें 30.06.2026 तक पिछले 3 वर्षों से अधिक समय से ग्राहक द्वारा कोई लेन-देन या संचालन नहीं किया गया है और जिनमें शून्य या कोई शेष राशि नहीं है. ऐसे सभी खाताधारकों से अनुरोध है कि वे 13.09.2026 या उससे पहले अपनी संबंधित बैंक शाखा में केवाईसी (KYC) दस्तावेज जमा करके अपने खातों को पुनः सक्रिय (Re-activate) करवा लें, ताकि बैंक के साथ निर्बाध बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाया जा सके.
खाता बंद करवाना चाहते हैं तो?इतना ही नहीं बैंक ने ग्राहकों से ये भी कहा है कि अगर वो खाता बंद करवाना चाहते हैं, तो पहले ये जरूर चक कर लें कि उनका खाता पेंशन, सब्सिडी, लोन, बीमा या किसी अन्य भुगतान से जुड़ा तो नहीं है. PNB ने किसी भी जानकारी या मदद के लिए टोल-फ्री नंबर भी जारी किए हैं. ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वो समय-समय पर अपने बैंक खाते में लेन-देन करें और KYC की जानकारी अपडेट रखें, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>PNB, ने, ग्राहकों, को, दी, चेतावनी, सितंबर, तक, नहीं, हुआ, ये, काम, तो, बंद, हो, जाएगा, खाता</media:keywords>
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        <title>20 अगस्त को बदले पेट्रोल&amp;डीजल के दाम या मिली राहत? घर से निकलने से पहले चेक करें रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/20-अगस्त-को-बदले-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-या-मिली-राहत-घर-से-निकलने-से-पहले-चेक-करें-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/20-अगस्त-को-बदले-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-या-मिली-राहत-घर-से-निकलने-से-पहले-चेक-करें-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Price 20 August 2026: आज सुबह अपनी गाड़ी में पेट्रोल और डीजल भरवाने से पहले रेट लिस्ट के बारे में जान लेना चाहिए. आज यानी 20 अगस्त को ईंधन के दाम में कोई बदलाव है या फिर आज भी रेट पुराने वाले ही हैं. इसके बारे में आप यहां से जान सकते हैं. यहां पेट्रोल और डीजल के भाव के बारे में डिटेल में बताया गया है. साथ ही पूरी लिस्ट भी दी गई है.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, पेट्रोल के दाम-



शहर का नाम
पेट्रोल के दाम&amp;nbsp;


दिल्ली
102.12 रुपये प्रति लीटर


कोलकाता
113.43 रुपये प्रति लीटर


मुंबई
111.12 रुपये प्रति लीटर


चेन्नई
107.75 रुपये प्रति लीटर


हैदराबाद
115.69 रुपये प्रति लीटर


बेंगलुरु
110.93 रुपये प्रति लीटर


चंढ़ीगढ़
101.54 रुपये प्रति लीटर


जयपुर
112.56 रुपये प्रति लीटर


हैदराबाद
115.69 रुपये प्रति लीटर


असम
106.59 रुपये प्रति लीटर


पंजाब
105.72 रुपये प्रति लीटर



2.0- 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
शहर अनुसार, डीजल के दाम-&amp;nbsp;



शहर का नाम
डीजल के दाम&amp;nbsp;


दिल्ली
95.20 रुपये प्रति लीटर


कोलकाता
99.78 रुपये प्रति लीटर


मुंबई
97.78 रुपये प्रति लीटर


चेन्नई
99.57 रुपये प्रति लीटर


हैदराबाद
103.82 रुपये प्रति लीटर


बेंगलुरु
98.79 रुपये प्रति लीटर


चंढ़ीगढ़
89.47 रुपये प्रति लीटर


जयपुर
97.78 रुपये प्रति लीटर


हैदराबाद
103.82 रुपये प्रति लीटर


असम
98.05 रुपये प्रति लीटर


पंजाब
95.63 रुपये प्रति लीटर



गाड़ी में कितना पेट्रोल और डीजल भरवाना चाहिए?&amp;nbsp;
वैसे तो अच्छी माइलेज के लिए हमेशा गाड़ी की टैंक को फुल रखना चाहिए. लेकिन अगर टैंक को फुल नहीं कर पा रहे हैं तो भी अपनी गाड़ी में कम से कम फ्यूल टैंक को आधा या एक चौथाई से ऊपर रखना चाहिए. फुल टैंक रखने से टैंक में हवा नहीं जमती है और फ्यूल पंप भी ठंडा रहता है. बता दें कि फ्यूल मीटर 0 दिखाने पर भी गाड़ी में 4 से 7 लीटर रिजर्व ईंधन बचता है, लेकिन कभी भी गाड़ी को उस लिमिट तक नहीं लेकर जाना चाहिए.&amp;nbsp;
ब्याज दरें कम होगी या नहीं? आरबीआई गवर्नर ने बताई सच्ची बात ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अगस्त, को, बदले, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, या, मिली, राहत, घर, से, निकलने, से, पहले, चेक, करें, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले जान लें आज का रेट, आपके शहर में कितनी है कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गैस-सिलेंडर-बुक-कराने-से-पहले-जान-लें-आज-का-रेट-आपके-शहर-में-कितनी-है-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/गैस-सिलेंडर-बुक-कराने-से-पहले-जान-लें-आज-का-रेट-आपके-शहर-में-कितनी-है-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Price 20 August 2026: आज यानी 20 अगस्त को एलपीजी के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में आपके शहर में गैस सिलेंडर कितने रुपए में मिल रहा है, इसकी जानकारी आप यहां से ले सकते हैं. यहां घरेलू के साथ- साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट के बारे में भी बताया गया है. इस रेट लिस्ट को देखकर आप अपने घर के लिए सिलेंडर बुक कर सकते हैं.
शहर अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;



शहर का नाम
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम


दिल्ली
942.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


कोलकाता
968.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


मुंबई
941.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


चेन्नई
957.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


गुड़गांव
950.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


नोएडा
939.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


बैंगलोर
944.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


भुवनेश्वर
968.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


चंडीगढ़
951.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


हैदराबाद
994.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


जयपुर
945.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


लखनऊ
979.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


पटना
1,031.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम


तिरुवनंतपुरम
951.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम&amp;nbsp;



20 अगस्त को बदले पेट्रोल-डीजल के दाम या मिली राहत? घर से निकलने से पहले चेक करें रेट
शहर अनुसार, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;



शहर का नाम
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम


दिल्ली
2,738.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


कोलकाता
2,872.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


मुंबई
2,691.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चेन्नई
2,906.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


गुड़गांव
2,755.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


नोएडा
2,738.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


बैंगलोर
2,821.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


भुवनेश्वर
2,908.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


चंडीगढ़
2,760.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


हैदराबाद
2,985.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


जयपुर
2,765.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


लखनऊ
2,860.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम


पटना
3,018.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम&amp;nbsp;



गैस सिलेंडर लेते समय किन बातों पर दें ध्यान?
गैस सिलेंडर लेते समय जरूर देखें कि उसकी सेफ्टी सील ठीक है कि नहीं. साथ ही वजन भी चेक कर लेना चाहिए. शायद ही आपको पता हो कि सिलेंडर की एक्सपायरी डेट भी होती है, वो भी चेक करना काफी ज्यादा जरूरी है. अगर सिलेंडर में लीकेज हो या टूटी सील टूटा हो तो उसे नहीं लेना चाहिए, ये रिस्की हो सकता है.&amp;nbsp;
FSSAI ने हटाई Rum पर लगी रोक, United Spirits को मिली राहत ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गैस, सिलेंडर, बुक, कराने, से, पहले, जान, लें, आज, का, रेट, आपके, शहर, में, कितनी, है, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>एक दिन में चांदी 5730 रुपए सस्ती, सोना भी धड़ाम, आपके शहर में क्या है गोल्ड&amp;सिल्वर का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-दिन-में-चांदी-5730-रुपए-सस्ती-सोना-भी-धड़ाम-आपके-शहर-में-क्या-है-गोल्ड-सिल्वर-का-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/एक-दिन-में-चांदी-5730-रुपए-सस्ती-सोना-भी-धड़ाम-आपके-शहर-में-क्या-है-गोल्ड-सिल्वर-का-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today 20 August 2026: कल यानी 19 अगस्त को सोना और चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था, जिसके बाद से ही आम आदमी की परेशानी बढ़ रही थी. लेकिन आज राहत की खबर मिली है. आज सोना और चांदी की कीमत कम हुई है. अब आपके शहर में सोना और चांदी आज किस रेट पर मिलेगा, ये आप यहां से पढ़कर जान सकते हैं.&amp;nbsp;
कितना सस्ता हुआ सोना?
कल जो सोना 1,58,800 रुपए पर था, आज वहीं 800 रुपये घटकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 4,361.76 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है, जबकि चांदी 63.33 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर है.&amp;nbsp;
गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले जान लें आज का रेट, आपके शहर में कितनी है कीमत?
शहर अनुसार, सोने की रेट लिस्ट-&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट सोना (10 ग्राम)


दिल्ली
1,58,000


मुंबई
1,58,000


कोलकाता
1,58,000


चेन्नई
1,58,000


पटना
1,58,000


लखनऊ
1,58,000


अयोध्या
1,58,000


कानपुर
1,58,000


मेरठ
1,58,000


गाजियाबाद
1,58,000


नोएडा
1,58,000


गुरुग्राम
1,58,000


जयपुर
1,58,000


लुधियाना
1,58,000


गुवाहाटी
1,58,000


इंदौर
1,58,000


अहमदाबाद
1,58,000


सूरत
1,58,000


वडोदरा
1,58,000


पुणे
1,58,000


नागपुर
1,58,000


चंडीगढ़
1,58,000


नासिक
1,58,000


बैंगलोर
1,58,000


भुवनेश्वर
1,58,000


रायपुर
1,58,000


हैदराबाद
1,58,000



कितनी सस्ती हुई चांदी?
सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमत में भी भारी गिरावट आई है. आज चांदी 5,730 रुपये घटकर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर रह गया है.&amp;nbsp;
20 अगस्त को बदले पेट्रोल-डीजल के दाम या मिली राहत? घर से निकलने से पहले चेक करें रेट
शहर अनुसार, चांदी की रेट लिस्ट-



शहर
चांदी का भाव (1 किलोग्राम)


दिल्ली
2,35,000


मुंबई
2,35,000


कोलकाता
2,35,000


चेन्नई
2,35,000


पटना
2,35,000


लखनऊ
2,35,000


अयोध्या
2,35,000


कानपुर
2,35,000


मेरठ
2,35,000


गाजियाबाद
2,35,000


नोएडा
2,35,000


गुरुग्राम
2,35,000


जयपुर
2,35,000


लुधियाना
2,35,000


गुवाहाटी
2,35,000


इंदौर
2,35,000


अहमदाबाद
2,35,000


सूरत
2,35,000


वडोदरा
2,35,000


पुणे
2,35,000


नागपुर
2,35,000


चंडीगढ़
2,35,000


नासिक
2,35,000


बैंगलोर
2,35,000


भुवनेश्वर
2,35,000


रायपुर
2,35,000


हैदराबाद
2,35,000



क्यों सस्ता हुआ सोना?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ है. भारत में सोने की घरेलू मांग में आई कमजोरी, वायदा बाजार में ट्रेडर्स द्वारा पोजीशन घटाने और घरेलू बाजार में पुराने सोने की रिकॉर्ड बिकवाली के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारतीय बाजार में सोना अधिक सस्ता हुआ है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एक, दिन, में, चांदी, 5730, रुपए, सस्ती, सोना, भी, धड़ाम, आपके, शहर, में, क्या, है, गोल्ड-सिल्वर, का, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>चीनी की मनमानी खरीद पर ने लगाई लिमिट, त्योहारों से पहले बड़ा फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीनी-की-मनमानी-खरीद-परने-लगाई-लिमिट-त्योहारों-से-पहले-बड़ा-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ New Rules of Sugar Stock: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब मिठाई बनाने वाले बड़े कारोबारी, कोल्ड ड्रिंक कंपनियां और फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी बड़ी कंपनियां जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके नहीं रख सकेंगी. सरकार ने ऐसे बड़े खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है.
कितने दिन रख सकेंगे चीनी का स्टॉक?
जारी आदेश के मुताबिक जो बड़े कारोबारी हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करते हैं वे अपने इस्तेमाल के लिए 15 दिन से ज्यादा की चीनी स्टॉक में नहीं रख पाएंगे.&amp;nbsp; यह नया नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. सरकार का मकसद त्योहारों से पहले चीनी की ज्यादा खरीद करके उसे जमा करने की कोशिशों पर रोक लगाना है.
एक दिन में चांदी 5730 रुपए सस्ती, सोना भी धड़ाम, आपके शहर में क्या है गोल्ड-सिल्वर का रेट
आखिर बड़े खरीदार कौन होंगे?
सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं की कैटेगरी भी साफ की है. इसमें मिठाई विक्रेता, कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और दूसरे बड़े संस्थागत खरीदार शामिल होंगे.&amp;nbsp;अगर किसी कारोबारी या कंपनी की पिछले एक साल में औसत मासिक चीनी खपत 10 मीट्रिक टन या उससे ज्यादा रही है तो वह इस नियम के दायरे में आएगा.
सरकार कैसे पता लगाएगी कि कितना स्टॉक है?
इसकी निगरानी के लिए सरकार चीनी की खरीद और खपत से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल करेगी. चीनी मिलों से बड़े खरीदारों को हर महीने कितनी चीनी बेची गई इसका मिलान किया जाएगा. इसके लिए GST रिटर्न में चीनी से जुड़े HSN कोड की जानकारी भी देखी जाएगी. यानी सरकार टैक्स रिटर्न के आंकड़ों से यह समझ सकेगी कि किसी बड़े खरीदार ने कितनी चीनी खरीदी और उसकी खपत कितनी है.
गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले जान लें आज का रेट, आपके शहर में कितनी है कीमत?
त्योहारों से पहले ही क्यों लिया गया फैसला?
सितंबर से नवंबर के बीच देश में गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं. इस दौरान मिठाई, पेय पदार्थ और खाने-पीने की दूसरी चीजों की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में चीनी की मांग भी बढ़ना तय है. सरकार को आशंका है कि कुछ बड़े खरीदार पहले से बड़ी मात्रा में चीनी खरीदकर रख सकते हैं जिससे बाजार में सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं.
डीलरों पर भी पहले लग चुकी है स्टॉक लिमिट
बड़े खरीदारों पर यह पहली पाबंदी नहीं है. इससे पहले सरकार ने 1 अगस्त से चीनी डीलरों के लिए भी स्टॉक लिमिट तय की थी. डीलर किसी भी समय 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी नहीं रख सकते और जिस तारीख को चीनी उनके पास पहुंचती है उसके 30 दिन से ज्यादा समय तक उसे स्टॉक में नहीं रख सकते. यह नियम भी 30 नवंबर तक लागू है.
सरकार को चीनी की कीमतों की चिंता क्यों?
पिछले कुछ महीनों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी. कीमत करीब 39 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. सरकार का कहना था कि कीमतों में यह तेजी मौजूदा मांग और सप्लाई की स्थिति के हिसाब से सामान्य नहीं है. सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी को भी कीमतों में बेवजह उतार-चढ़ाव की वजह बताया था.
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चीनी उद्योग ने भी दी थी सलाह
चीनी उद्योग के संगठनों ISMA और NFCSF ने 17 जुलाई को कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. संगठनों ने संस्थागत खरीदारों और थोक-खुदरा कारोबारियों से सट्टेबाजी के लिए ज्यादा खरीदारी नहीं करने की अपील भी की थी.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार की कोशिश है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी न आए. अगर बड़े खरीदार पहले से भारी मात्रा में चीनी जमा नहीं कर पाएंगे तो बाजार में सप्लाई बनी रहने की उम्मीद है. इसका फायदा खास तौर पर त्योहारों के दौरान मिठाई और दूसरे खाद्य उत्पाद खरीदने वाले आम ग्राहकों को मिल सकता है. त्योहारों से पहले सरकार चीनी की सप्लाई पर कड़ी नजर रख रही है. पहले डीलरों पर स्टॉक लिमिट लगाई गई और अब बड़े खरीदारों को भी 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने से रोक दिया गया है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Donald J Trump के साथ फोटो खिंचवाने के लिए देने होंगे 80 लाख, हर्ष गोयनका का ट्वीट वायरल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/donald-j-trump-के-साथ-फोटो-खिंचवाने-के-लिए-देने-होंगे-80-लाख-हर्ष-गोयनका-का-ट्वीट-वायरल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/donald-j-trump-के-साथ-फोटो-खिंचवाने-के-लिए-देने-होंगे-80-लाख-हर्ष-गोयनका-का-ट्वीट-वायरल</guid>
        <description><![CDATA[ Donald J Trump: मशहूर बिजनेस मैन हर्ष गोयनक सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. हर्ष अक्सर हर मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बात रखते हैं. इसके अलावा वो कई ऐसी जानकारी भी शेयर करते हैं जिसके बारे में कम ही लोगों को पता होता है. जैसे हाल ही में उन्होंने बताया है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रम्प के साथ फोटो खंचवाने के लिए आपको लाखों रुपये खर्च करना पड़ेंगे. आइये बताते हैं कैसे.
क्या बताया गोयनका ने?दरअसल हर्ष गोयनका ने हाल ही में बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रम्प के साथ फोटो क्लिक करवाना इतना आसान नहीं है. अगर आपकी जेब में पैसे नहीं हैं तो आप उनके साथ फोटो नहीं क्लिक करवा सकते हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हर्ष ने सोशल मीडिया पर एक रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के इनविटेशन का फोटो शेयर कर बताया है.
ये भी पढ़ें: FD नहीं गोल्ड में निवेश का है जमाना, इस सरकारी स्कीम से घर बैठे होगी कमाई
क्या है पोस्ट में?इस पोस्ट में एक इनविटेशन कार्ड का फोटो है. ये इनविटेशन कार्ड रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के ईवनिंग रिसेप्शन का इनवाइट है. ये फंक्शन 27 अगस्त 2026 को होने वाला है. जिसमं यूएस के प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे ट्रम्प भी शामिल होंगे. इस इनवाइट में रिसेप्शन से जुड़े चार्जेस की डीटेल्स है. इसमें से एक चार्ज फोटो अपॉर्च्युनिटी का भी है. जिसके लिए 88,600 डॉलर लिए जा रहे हैं, वो भी पर कपल के हिसाब से.

Anybody wants a photo-op with Trump, you will have to pay over Rs 80 lakhs. ???? pic.twitter.com/zQpo0El9iu
&amp;mdash; Harsh Goenka (@hvgoenka) August 18, 2026



इस पोस्ट को शेयर करते हुए हर्ष ने कैप्शन में लिखा, &#039;अगर किसी को ट्रम्प के साथ फोटो खिंचवाना है, तो आपको 80 लाख रुपये पे करना होंगे.&#039;
ये भी पढ़ें: क्या होर्मुज अभी भी बंद है, भारत में कहां-कहां से आ रही गैस और कच्चा तेल?
सोशल मीडिया रिएक्शंसहर्ष का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया. इस पर अब तमाम लोगों की भी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. कई सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट पर पूछ रहे हैं कि इस रुपये का क्या होगा? क्योंकि अमेरिका में कोई प्रेसिडेंट फंड नहीं है. कई लोग हैरान हो रहे हैं कि इतना रुपया केवल फोटो क्लिक करवाने के लिए लिया जा रहा है. तो वहीं कई लोग कह रहे हैं कि वो AI की मदद से भी फोटो बना सकते हैं और पोस्ट पर हंस रहे हैं.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 22:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Donald, Trump, के, साथ, फोटो, खिंचवाने, के, लिए, देने, होंगे, लाख, हर्ष, गोयनका, का, ट्वीट, वायरल</media:keywords>
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    <item>
        <title>Real Estate: UP में बिल्डरों और एजेंट्स के लिए सख्त हुए नियम, घर खरीदार जान लें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/real-estate-up-में-बिल्डरों-और-एजेंट्स-के-लिए-सख्त-हुए-नियम-घर-खरीदार-जान-लें</link>
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        <description><![CDATA[ Real Estate News: अपनी मेहनत की कमाई से हर कोई अपना घर खरीदना चाहता है, लेकिन क्या घर खरीदने के लिए केवल बजट तय करना ही काफी है तो ऐसा नहीं है, बल्कि घर खरीदने के लिए आपको कानूनी प्रक्रियाएं भी करवानी जरूरी होती है. इसके अलावा भी कई जरूरी काम होते हैं, जिनकी जानकारी होना महत्वपूर्ण है.
ऐसे में अगर आप भी उत्तर प्रदेश में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथारिटी यानी UP-RERA ने रियल एस्टेट से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जिनकी जानकारी होना आपके लिए जरूरी है.
प्रोजेक्ट से जुड़ी देनी होगी रिपोर्ट
नए नियमों के तहत बिल्डर को प्रोफेशनल्स के सर्टिफिकेट के साथ ही Quarterly Progress Report जमा करनी होगी.&amp;nbsp;
लोन का पैसा भी अलग अकाउंट में रखना होगा
इसके अलावा अब प्रोजेक्ट से जुड़ा लोन का पैसा भी अलग अकाउंट में रखना जरूरी होगा. साथ ही हर फाइनेंशियल ईयर में अकाउंट्स का ऑडिट कराना होगा.&amp;nbsp; एक बात का ध्यान रखें,&amp;nbsp;खरीदारों से प्रोजेक्ट का पैसा कैश नहीं लिया जा सकेगा.&amp;nbsp;
ट्रनिंग सर्टिफिकेट की होगी जरूरत
एजेंटों को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की जरूरत होगी. साथ ही हर तीन महीने अपने ट्रांजैक्शन की जानकारी जमा करनी होगी. याद रखें, जरूरी रिपोर्ट को लेट जमा करने पर लेट फीस लगेगी.
8452 करोड़ में से 93% रकम FD में, कहां कितना हुआ खर्च?
कितनी लगेगी फीस?
बता दें कि QPR के लिए 15 हजार रुपये. एजेंट की तिमाही रिपोर्ट के लिए 10 हजार रुपये तक की फीस लगेगी और सालाना ऑडिट रिपोर्ट के लिए 25 हजार रुपये देने पड़ सकते हैं.&amp;nbsp;
प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी देनी होगी
नए नियमों के तहत अब ग्राहक संबंध प्रबंधक और संपर्क या टोल-फ्री नंबर भी देना होगा. साथ ही बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट से जुड़े प्रोफेशनल्स की जानकारी देनी होगी, जैसे इंजीनियर और आर्किटेक्ट.&amp;nbsp;
फीस भी होगी तय
अगर अलॉटी का निधन हो जाता है तो उसके बाद प्रॉपर्टी परिवार के किसी सदस्य को ट्रांसफर करने पर फीस लगेगी, जो 1 हजार रुपये होगी. वहीं अलग परिवार के सदस्य के अलावा बाहर ट्रांसफर होती है तो फीस 25000 रुपये तक हो सकती है.
अपनी प्रोफाइल रखनी होगी अपडेट
इसके साथ ही UP-RERA की वेबसाइट पर बिल्डर को अपनी प्रोफाइल अपडेट रखना जरूरी है. इसके अलावा पार्टनर, ट्रस्टी या इनकम टैक्स रिटर्न में कोई बदलाव होता है तो उसकी जानकारी अपडेट करना होगा.&amp;nbsp;
विज्ञापन में देनी होगी जरूरी जानकारी
अब से बिल्डर को विज्ञापन में वेबसाइट, UP-RERA रजिस्ट्रेश नंबर, कलेक्शन अकाउंट,OR कोड, एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रोजेक्ट लॉन्च की डेट देना होगा.
इस मामले में खरीदर कर सकेंगे शिकायत
मानलीजिए, अगर किसी खरीदार ने बिना रजिस्टर हुए प्रोजेक्ट में प्रॉपर्टी खरीदी है तो अब वह भी UP-RERA में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है.
मेंटेनेंस के पैसों से जुड़ा नियम जानें
खरीदारों से लिया गया मेंटेनेंस का पैसा (IFMS) बिल्डर को अलग बैंक अकाउंट में रखना होगा.&amp;nbsp;बाद में जब रजिडेट्स एसोसिएशन कॉमन एरिया की जिम्मेदारी संभालेगी तो पूरा पैसा उन्हें देना होगा.ध्यान रखें, इसका उपयोग केवल मेंटेनेंस के लिए ही किया जा सकता है.
प्रोजेक्ट के लिए रखने होंगे इतने बैंक अकाउंट
अब से प्रोजेक्ट के लिए ट्रांजैक्शन अकाउंट, कलेक्शन अकाउंट और एक अलग अकाउंट रखना होगा.&amp;nbsp;
पजेशन से जुड़ा तरीका भी जानें
बिल्डर को घर का कब्जा दे तो उस समय UP-RERA के निर्धारित फॉर्मेट में offer of possession जारी करें.&amp;nbsp;
प्रोजेक्ट का नाम होना चाहिए सही
विज्ञापन में दिया गया प्रोजेक्ट का नाम सही होना चाहिए. यानी प्रोजेक्ट का नाम मंजूर किए गए प्लान में दर्ज नाम से मिलना चाहिए.&amp;nbsp;
Zepto-Zomato से खाना मंगाना महंगा, मिनिमम ऑर्डर पर नए नियम जारी
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 22:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Real, Estate:, में, बिल्डरों, और, एजेंट्स, के, लिए, सख्त, हुए, नियम, घर, खरीदार, जान, लें</media:keywords>
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    <item>
        <title>SBI ग्राहक ध्यान दें, कैश निकालने के बदल गए नियम, लगेगा चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Cash Withdrawal Rules: अगर आपका खाता भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में है और आप महीने में कई बार कैश निकालते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूर है. बैंक ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) खाताधारकों के लिए नकदी निकासी से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू कर दिए जाएंगे. इस नए नियम के बाद एक महीने में तय संख्या से ज्यादा कैश निकालने पर आपको शुल्क देना पड़ सकता है. आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से...
1 अक्टूबर क्या बदल जाएगा?
नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे. जिसके बाद BSBD खाते से हर महीने पहली चार नकद निकासी मुफ्त रहेंगी. ऐसे में अगर आप एक महीने में तय संख्या से ज्यादा कैश निकालते हैं, तो आपको 15 रुपये का चार्ज देना पड़ सकता है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि 15 रुपये के चार्ज पर लागू GST भी देना होगा. खास बात यह है कि इन नए नियमों में डिजिटल लेनदेन को चार मुफ्त निकासी की गणना से बाहर रखने वाली व्यवस्था हटा दी गई है.
Donald J Trump के साथ फोटो खिंचवाने के लिए देने होंगे 80 लाख, हर्ष गोयनका का ट्वीट वायरल
क्या है BSBD अकाउंट?
BSBD यानी बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट खासकर उन लोगों के बनाया गया है, जो बिना ज्यादा चार्ज के बचत खाता की शुरुआत करना चाहते हैं. इस खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की जरूरत नहीं होती है.
SBI BSBD खाते की क्या हैं खासियतें?

खाताधारक को बेसिक RuPay ATM-कम-डेबिट कार्ड दिया जाता है.
इस कार्ड पर वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज नहीं लगता.
इस खाते से शाखा या ATM के जरिए पैसे निकाल सकते हैं.
इस खाते में चेकबुक की सुविधा मौजूद नहीं होती.
NEFT और RTGS जैसे इलेक्ट्रॉनिक के जरिए पैसे जमा करने पर फीस नहीं लिया जाता.
निष्क्रिय खाते को दोबारा ऐक्टिव कराने के लिए कोई फीस नहीं लगता है.&amp;nbsp;

BSBD अकाउंट खोलने के लिए क्या है नियम?
अगर आप SBI में BSBD अकाउंट खुलवाना चाहते हैं, तो उसके लिए एक शर्त तय की गई है कि आपके नाम पर कोई दूसरा सेविंग्स अकाउंट नहीं होना चाहिए. ऐसे में अगर आपके पास पहले से कोई बचत खाता है, तो BSBD अकाउंट खोलने के 30 दिनों के अंदर आपको अपना पुराना सेविंग्स अकाउंट को बंद करना होगा.
SBI ग्राहकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
अगर आप BSBD खाते से महीने में कई बार कैश निकालते हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 के बाद होने वाले इस बदलाव को जरूर ध्यान में रखें. क्योंकि चार बार मुफ्त कैश निकालने के बाद आपको एक्स्ट्रा नकद निकालने पर 15 रुपये और GST का चार्ज देना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
Real Estate: UP में बिल्डरों और एजेंट्स के लिए सख्त हुए नियम, घर खरीदार जान लें
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 22:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SBI, ग्राहक, ध्यान, दें, कैश, निकालने, के, बदल, गए, नियम, लगेगा, चार्ज</media:keywords>
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        <title>FD Rates: इस बड़े बैंक ने घटा दी FD की ब्याज दरें, चेक करें नया इंटरेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fd-rates-इस-बड़े-बैंक-ने-घटा-दी-fd-की-ब्याज-दरें-चेक-करें-नया-इंटरेस्ट-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ FD Rates: क्या आप भी निवेश के लिए FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट को बेहतर समझते हैं? अगर हां! तो ये खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. क्योंकि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने अपनी FD के इंटरेस्ट रेट्स में बड़े बदलाव किए हैं. जिसके बाद इस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करवाने वालों को आगे सोच समझकर फैसला लेना होगा. ये बैंक कोई और नहीं बल्कि SBI यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जिसने अपने FD रेट्स को घटा दिया है.
कितना हुआ बदलावदरअसल हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपनी बल्क फिक्स्ड डिपॉज़िट की दरों में बदलाव किया है, हालांकि ये बदलाव कुछ कम समय वाले टेन्योर के लिए ही है. बैंक ने कुछ चुनिंदा अवधि के लिए 3 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती की है. बैंक की वेबसाइट के अनुसार, ये नई दरें 15 अगस्त, 2026 से लागू हो गई हैं.
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कितनी अवधि की FD पर हुई बदलाव?ये बदलाव 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली डिपॉजिट पर हुए हैं. कम समय की FD पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कटौती की गई है. इसके अलावा 180 दिन से 210 दिन की अवधि वाली FD के लिए बैंक ने ब्याज दर में 10 बेसिस पॉइंट्स (bps) कम किए हैं. हालांकि इसमें भी 211 दिन से 10 साल की अवधि वाली बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. SBI की नई बल्क FD दरें अवधि के आधार पर 5.25% से 6.50% के बीच हैं.
रेगुलर FD पर नहीं पड़ेगा कोई फर्कबता दें कि कम रकम वाली FD करवाने वाले ग्राहकों के लिए ये राहत की बात है. SBI ने 3 करोड़ रुपये से कम की डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. तो वहीं रेगुलर FD के लिए, आम नागरिकों को अभी अवधि के आधार पर 3.05% से 6.40% के बीच ब्याज मिलता है. सीनियर सिटिजन्स को 3.55% से 7.05% तक की दरें मिलती हैं, जिससे उन्हें ज्यादा फायदा होता है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>खाते में जमा किए 54 लाख कैश, फिर भी नहीं लगा टैक्स, केस जीत गया प्रॉपर्टी डीलर</title>
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        <description><![CDATA[ Cash Deposite Income Tax: दिल्ली के रहने वाले एक एक प्रॉपर्टी डीलर ने अपने बैंक खाते में 54 लाख रुपये नकद जमा किए, जिसके बाद तो बवाल ही मच गया. इन रुपयों को इनकम टैक्स विभाग ने उसकी अघोषित आय मान लिया. लेकिन प्रॉपर्टी डीलर भी इस पर चुप नहीं रहा बल्कि इसका विरोध किया और मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), दिल्ली पहुंचा दिया, जहां से डीलर को राहत मिल गई.
क्या है पूरा मामला?दरअसल ये मामला वित्त वर्ष 2011-12 का है. टैक्स विभाग को डीलर के बैंक खाते में बड़ी मात्रा में कैश जमा होने की जानकारी मिली. जिसके बाद विभाग ने उसे कई नोटिस भेजे, लेकिन बिल्डर की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. जिसके बाद असेसिंग ऑफिसर ने 54 लाख रुपये को उसकी आय मानकर टैक्स के दायरे में जोड़ दिया.
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डीलर ने बताई इतने कैश की वजहबाद में डीलर ने बताया कि वो प्रॉपर्टी सौदों में सिर्फ ब्रोकर का काम करता था. खरीदारों से मिली रकम वो अपने बैंक खाते में जमा करता था और फिर प्रॉपर्टी के मालिकों यानी बेचने वालों को दे देता था. डीलर ने अपने दावे के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट, खरीदारों और विक्रेताओं के हलफनामे और प्रॉपर्टी की सेल डीड जैसे दस्तावेज पेश किए. ITAT ने इन सबूतों को स्वीकार करते हुए 54 लाख रुपये की टैक्स जोड़ को हटा दिया.
अन्य डीलरों के लिए बड़ा सबकइस एक केस से अन्य डीलर्स को भी एक बड़ा सबक मिला है. किसी व्यक्ति के बैंक खाते में पैसा आ जाने का मतलब ये जरूरी नहीं है कि वो पैसा उसी व्यक्ति की आय है. असली सवाल ये है कि पैसा किसका था और इसे क्यों लिया गया था. अगर कोई प्रॉपर्टी डीलर किसी खरीदार से 50 लाख रुपये लेता है और बाद में ये साबित कर देता है कि रकम विक्रेता को देने के लिए मिली थी, तो इसे उसकी आय नहीं माना जा सकता. लेकिन इसके लिए उसके पास सबूत के रूप में कुछ दस्तावेज भी होना चाहिए, जैसे:

खरीदार या विक्रेता के साथ लिखित एग्रीमेंट या अथॉरिटी लेटर
खरीदार/विक्रेता का नाम और पेन नंबर
प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी
कैश रिसीविंग रसीद
कैश बुक या लेजर में एंट्री
रकम आगे किसे दी गई, इसका रिकॉर्ड
बैंक स्टेटमेंट में पैसे के आने-जाने का साफ रिकॉर्ड
रकम पाने वाले व्यक्ति की रसीद

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ऐसे मामले में सबसे बड़ी सीख ये है कि बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने पर सिर्फ ये कहना काफी नहीं है कि पैसा किसी और का था. डीलर को ये साबित करना होगा कि पैसा किसका था, क्यों मिला और आखिर में कहां गया. मजबूत दस्तावेज और साफ बैंक ट्रेल होने पर टैक्स विवाद से बचने में मदद मिल सकती है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 06:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Rapido का मालिक कौन है, किसने और कैसे की थी शुरूआत? नेटवर्थ जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Rapido News:&amp;nbsp;भारत में बाइक टैक्सी और राइड बुकिंग की बात हो रही हो तो रैपिडो &amp;nbsp;का नाम जरूर आता है. आज ये कंपनी देश के कई शहरों में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने की सर्विस देती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रैपिडो की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग हैं.
रैपिडो की शुरुआत साल 2015 में तीन दोस्तों अरविंद सांका, पवन गुंटुपल्ली और ऋषिकेश एसआर ने मिलकर की थी. कंपनी का संचालन Roppen Transportation Services Pvt. Ltd. के जरिए होता है. अरविंद सांका कंपनी के सह-संस्थापक होने के साथ रैपिडो के CEO भी हैं.
पहले आया आइडिया, फिर शुरू हुई बाइक टैक्सी
शुरुआत में तीनों ने लोगों को सफर की सर्विस देने के लिए कंपनी शुरू की. इसके बाद उन्होंने देखा कि शहरों में ट्रैफिक ज्यादा हो रहा है और लोगों को कम समय और कम खर्च में सफर करने के ऑप्शन की जरूरत है. इसी सोच के साथ बाइक टैक्सी का आइडिया सामने आया.
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बाइक कार के मुकाबले कम खर्चीली होती है और ट्रैफिक में आसानी से निकल सकती है. इसी वजह से रैपिडो ने बाइक टैक्सी के जरिए लोगों को सफर कराने पर ध्यान दिया. धीरे-धीरे कंपनी का काम ज्यादा होता गया और रैपिडो लोगों के बीच पहचान बनाने लगी और फिर कार टैक्सी सर्विस पर फोकस दिया गया.
रैपिडो में किस-किस की हिस्सेदारी है
रैपिडो के संस्थापकों के अलावा कंपनी में कई बड़े इन्वेस्टर ने भी पैसा लगाया है. इनमें WestBridge Capital, Nexus Venture Partners जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं. &amp;nbsp;इन इन्वेस्टर की हिस्सेदारी भी कंपनी में है.
रैपिडो का सालाना ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 600 करोड़ से 700 करोड़ के बीच रहा है, लेकिन कंपनी ने अपने कारोबार को ज्यादा करने और मार्केटिंग पर भी काफी खर्च किया. इसी वजह से कंपनी को करीब 350 करोड़ से 370 करोड़ का घाटा भी हुआ था.
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कितनी है रैपिडो की नेटवर्थ?
रैपिडो की वैल्यूएशन करीब 1.1 अरब यानी 9200 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है. इसी के साथ कंपनी यूनिकॉर्न स्टार्टअप की कैटेगरी में शामिल हुई. लेकिन वैल्यूएशन कंपनी की कीमत होती है, इसे संस्थापकों की निजी नेटवर्थ नहीं माना जाता.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 06:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Uber App से भी कर पाएंगे अब ट्रेन की टिकट बुक, जानें क्या है प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ Train Ticket Booking By Uber: IRCTC वेबसाइट से ट्रेन की टिकट जब भी कोई बुक करता है तो उसे कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन परेशानियों से अब यूजर्स को निजात मिलने वाली है. वो ऐसे क्योंकि अब Uber एप के जरिए भी ट्रेन की टिकट बुक हो जाएंगी. इसके लिए उबर इंडिया ने Ixigo के साथ मिला लिया है.
उबर ने मिलाया Ixigo से हाथदरअसल Uber एप ने अब ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी है. कंपनी ने ये सुविधा ixigo के साथ पार्टनरशिप में शुरू की है. अब यूजर्स Uber एप से ट्रेन टिकट बुक करने के साथ-साथ PNR स्टेटस भी चेक कर सकेंगे. इसके अलावा रेलवे स्टेशन तक पहुंचने या स्टेशन से घर/होटल जाने के लिए Uber कैब भी बुक की जा सकेगी. इस सुविधा का मकसद ट्रेन से सफर करने वाले लोगों की पूरी यात्रा को एक ही एप पर आसान बनाना है.
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कैसी रहेगी ixigo के साथ पार्टनरशिप?Uber ने ये नई सुविधा ixigo के साथ मिलकर शुरू की है. इसे लेकर ixigo के ग्रुप CEO अलोक बाजपेयी और ग्रुप को-CEO रजनीश कुमार ने कहा कि, कंपनी का उद्देश्य ट्रेन के सफर को आसान और भरोसेमंद बनाना है. Uber के साथ पार्टनरशिप से यात्री अब घर से लेकर अपनी डेस्टिनेशन तक की यात्रा एक ही प्लेटफॉर्म से प्लान कर सकेंगे. Uber पहले से ही देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर पिकअप और ड्रॉप-ऑफ की सुविधा देता है. अब ट्रेन टिकट बुकिंग जुड़ने से यात्रियों को स्टेशन आने-जाने और ट्रेन यात्रा से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही एप में मिल जाएंगी.
कैसे कर पाएंगे ट्रेन टिकट बुक?एप के जरिए ट्रेन की टिकट बुक करने का पूरा प्रोसेस स्टेंप- बाय स्टेप यहां जानें:

सबसे पहले फोन में मौजूद Uber एप को खोलेंगे.
इसके बाद होम स्क्रीन पर &#039;बस और ट्रेन&#039; के ऑप्शन को चुनेंगे.
इसके बाद जिस स्टेशन से ट्रेन बुक करना है उसका नाम डालेंगे, डेस्टिनेशन और तारीख डाल देंगे.
इसके बाद एवेलेबल ट्रेनों को देखेंगे, ब्राउज करते ही उसकी लिस्ट सामने आ जाएगी.
इसके बाद जैसे अन्य एप्स पर बुक करते हैं ट्रेन वैसे ही डीटेल्स भरकर टिकट बुक कर लेंगे.

बता दें कि इस एप के जरिए अब ट्रेन की टिकट बुक करने के साथ ही PNR स्टेटस भी चेक कर सकते हैं. यानी अब ट्रेन से सफर करने वालों के लिए टिकट बुकिंग से लेकर स्टेशन पहुंचने और वहां से आगे जाने तक का काम एक ही एप के जरिए करना आसान होगा. इसी मकसद से इस सुविधा को शुरू भी किया जा रहा है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Zepto: 20 किलो वजन उठा सकते हो तो मिलेगी नौकरी, Zepto की पुरुष वाली जॉब पर बवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Zepto Hirng Post: ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलवरी कंपनी Zepto इन दिनों काफी चर्चा में है. वैसे तो कंपनी के स्टोर्स पर FDA की छापेमारी की वजह से ये चर्चा में है. लेकिन हाल ही में एक और अन्य वजह से ये कंपनी चर्चा का विषय बन गई है. हाल ही में सोशल मीडिया पर इस कंपनी का एक हायरिंग पोस्ट काफी लाइम लाइट में आ गया है. जिसके चलते सोशल मीडिया पर भी काफी बड़ा विवाद खड़ा हो रहा है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल Zepto की एक इंटर्नशिप पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है. इस पोस्ट में मेल स्टाफ उम्मीदवारों के लिए 20 किलो तक वजन उठाने और 10 से 12 घंटे तक खड़े रहकर काम करने की क्षमता को जरूरी बताया गया है. सोशल नेटवर्किंग साइट X (पहले ट्विटर) पर एक प्रियांशु प्रियंक नामक यूजर ने एक फोटो शेयर की. इस पोस्ट के मुताबिक, इसमें B.Tech, BBA, BCA और B.Com (Hons) कर रहे छात्रों को आवेदन करने का मौका दिया गया था. इंटर्नशिप की अवधि 3 महीने थी और इसके लिए 20 हजार रुपये हर महीने सैलरी देने की बात कही गई थी.
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20 किलो वजन उठाने की शर्त?इस पोस्ट के स्किल रिक्वायर्ड सेक्शन में लिखा था कि उम्मीदवार में 20 किलो तक वजन उठाने और तेज गति वाले माहौल में 10 से 12 घंटे तक खड़े रहकर काम करने की क्षमता होनी चाहिए. ये पोस्ट सोशल मीडिया पर देखते ही देखते तेजी से वायरल हो गई. कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ये CSE छात्रों की इंटर्नशिप है, तो इसमें फिजिकल एक्टिविटी से जुड़ी ऐसी शर्त क्यों रखी गई है.

Zepto asking for hyrox level requirements pic.twitter.com/Zz0pJZgXRw
&amp;mdash; Priyanshu Priyank (@PriyanshuP1405) August 17, 2026



सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाइस पोस्ट पर लोग तरह- तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, &#039;अब इंटर्नशिप पाने के लिए जिम जाना भी जरूरी हो गया है. वहीं, कुछ लोगों ने इस पोस्ट को फर्जी या AI से बनाई गई तस्वीर होने की संभावना भी जताई. कुछ लोगों का कहना था कि ये शर्तें शायद डार्क स्टोर मैनेजर जैसे पद के लिए हो सकती हैं, जहां सामान उठाने की जरूरत पड़ सकती है.
हालांकि इस पोस्ट में लगा स्क्रीनशॉट असली है या नकली, इसे लेकर अभी संशय बना हुआ है. Zepto की तरफ से इसे लेकर कोई सफाई नहीं दी गई है. ऐसे में इस हायरिंग पोस्ट को सही ठहराना भी सही नहीं होगा. लेकिन सोशल मीडिया पर तो ये पोस्ट बहुत तेजी से वायरल हो रही है.
ये भी पढ़ें: खाते में जमा किए 54 लाख कैश, फिर भी नहीं लगा टैक्स, केस जीत गया प्रॉपर्टी डीलर
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Zepto:, किलो, वजन, उठा, सकते, हो, तो, मिलेगी, नौकरी, Zepto, की, पुरुष, वाली, जॉब, पर, बवाल</media:keywords>
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        <title>Income Tax: देशभर में शुरू हुई संदिग्ध लेन&amp;देन की बड़ी जांच, विदेश में रकम ट्रांसफर करने वाले रडार पर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/income-tax-देशभर-में-शुरू-हुई-संदिग्ध-लेन-देन-की-बड़ी-जांच-विदेश-में-रकम-ट्रांसफर-करने-वाले-रडार-पर</link>
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        <description><![CDATA[ Income Tax Department: आयकर विभाग ने विदेश भेजे जा रहे पैसों पर नकेल कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. विभाग के द्वारा इन संदिग्ध पैसों को लेकर देशभर में जांच शुरू की गई है. इस जांच के दायरे में करीब 394 संस्थाएं और 36 प्रोफेशनल्स शामिल हैं. इस बारे में विभाग की तरफ से एक प्रेस नोट जारी कर जानकारी दी गई है.
प्रेस नोट जारी कर दी जानकारीविभाग के द्वारा अपने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट के जरिए एक प्रेस नोट जारी किया गया है. इस प्रेस नोट के साथ कैप्शन में लिखा गया है, &#039;इनकम टैक्स विभाग ने संदिग्ध विदेशी पैसे भेजने के मामलों की देशभर में जांच शुरू की है. ये जांच डाटा की पड़ताल और जमीनी जानकारी के आधार पर शुरू की गई है. इसमें सामने आया कि कुछ ऐसी संस्थाओं ने विदेशों में बड़ी रकम भेजी, जिनका कारोबार कागजों पर बहुत कम या बिल्कुल नहीं दिखाया गया था.&#039;

The Income Tax Department has launched a nationwide verification exercise into suspicious foreign remittances. The exercise follows data analysis and ground intelligence indicating significant overseas remittances by entities with little or no reported business activity.The&amp;hellip; pic.twitter.com/paaJMYLE4Y
&amp;mdash; Income Tax India (@IncomeTaxIndia) August 18, 2026



आगे लिखा गया है, &#039;विभाग ने फॉर्म 15CB/फॉर्म 146 सर्टिफिकेट जारी करने वाले प्रोफेशनल्स से सही तरीके से जांच-पड़ताल करने और सोच-समझकर फैसला लेने की जरूरत पर जोर दिया है.&#039;
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कब से शुरू हो रही जांच?इस प्रेस नोट के जरिए बताया गया है कि, ये जांच 18 अगस्त से शुरू हुई है. इसमें खासतौर पर ऐसी कंपनियों और संस्थाओं की जांच की जा रही है, जिनके विदेश भेजे गए पैसों की रकम उनके बताए गए कारोबार और कमाई से मेल नहीं खाती. CBDT के मुताबिक, पिछले तीन साल के विदेश भेजे गए पैसों के आंकड़ों और दूसरी जानकारी की जांच के दौरान कुछ संदिग्ध संस्थाओं का पता चला.
और किन लोगों की होगी जांच?इस मामले में सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि उन 36 प्रोफेशनल्स की भी जांच होगी, जिन्होंने विदेशी पैसे भेजने के लिए फॉर्म 15CB सर्टिफिकेट जारी किए थे. CBDT को डेटा की जांच में पता चला कि कम संख्या में प्रोफेशनल्स ने बड़ी संख्या में फॉर्म 15CB सर्टिफिकेट जारी किए थे. वहीं, विदेश भेजा गया पैसा भी कुछ चुनिंदा संस्थाओं के समूह तक पहुंच रहा था. इससे विभाग को शक है कि सर्टिफिकेट जारी करने से पहले जरूरी जांच-पड़ताल ठीक से की गई थी या नहीं.
इसके अलावा भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे राज्यों में मौजूद करीब 117 संस्थाएं भी इस जांच के दायरे में हैं. बता दें कि इस मामले में आगे की जांच जारी है. अगर जांच में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन के सबूत मिलते हैं, तो संबंधित संस्थाओं और लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जा सकती है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>पिछड़े जिलों में बिजनेस करने, स्टाफ हायर करने पर मिलेगी सरकारी मदद</title>
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        <description><![CDATA[ Karnataka Jobs News: कर्नाटक सरकार ने राज्य के पिछड़े जिलों में रोजगार ज्याद करने के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है. इसके मुताबिक कुछ जिलों में नया रोजगार देने वाले कारोबारियों को सरकार की ओर से फाइनेंसियल मदद मिलेगी. सरकार का मकसद ज्यादा से ज्यादा नौकरियां देना और युवाओं के लिए रोजगार के मौके ज्यादा करना है.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उद्योग निधि योजना की घोषणा की. इसके अनुसार कर्नाटक के 10 सबसे पिछड़े जिलों में हर नई नौकरी देने वाले कारोबारी को 2,500 प्रति महीने का मदद दिया जाएगा. ये मदद दो साल तक दी जाएगी. योजना से करीब 1 लाख नई नौकरियां होने की उम्मीद है.
सरकार का बड़ा रोजगार मिशन
ये योजना सरकार के बड़े मुख्यमंत्री रोजगार मिशन का हिस्सा है. इसके जरिए युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार का कहना है कि पिछड़े जिलों में नए कारोबार और रोजगार ज्याद होने से वहां के लोगों को अपने इलाके में ही काम के अवसर मिल सकते हैं.
Cab में सवारियों ने की जातिवादी टिप्पणी, Rapido ने ड्राइवर पर लगाया 100 साल का बैन
मुख्यमंत्री ने ये भी बताया कि सरकार अलग अलग डिपार्टमेंट में खाली पड़े 72 हजार सरकारी पदों को भरने की तैयारी कर रही है. इन पदों पर भर्ती की प्रोसेस शुरू हो चुकी है. सरकार के मुताबिक, अगले 6 महीनों में इन सभी पदों को भरने के लिए नोटिफिकेशन जारी किए जाएंगे.
युवाओं को नौकरी से जोड़ने की तैयारी
सरकार युवा उद्योग सेतु नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू करेगी. इसके जरिए नौकरी तलाशने वाले युवाओं, कंपनियों और स्कूल , कॉलेज को आपस में जोड़ा जाएगा. इसका मकसद युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी के अवसरों से जोड़ना है.
इसके अलावा राज्य के 100 सरकारी ITI को रोजगार पर ध्यान देने वाले कैंपस में बदला जाएगा. निजी कंपनियों के साथ मिलकर इस पहल के जरिए करीब 10 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की योजना है.
अमिताभ बच्चन की प्रॉपर्टी से बंपर कमाई, हर महीने आएगा 33 लाख का किराया
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>कुल कमाई का 95% सैलरी और पेंशन पर खर्च कर रहा ये राज्य, खाली हो रहा खजाना</title>
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        <description><![CDATA[ Andhra Pradesh Expence on Salary and Pension: आंध्र प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन का खर्च राज्य के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है. राज्य सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में आंध्र प्रदेश ने अपनी खुद की कमाई का 95% से ज्यादा हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर खर्च किया. इस दौरान काम करने वाले लोगों से जुड़े खर्च पर करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए.
आंध्र प्रदेश में सरकारी डिपार्टमेंट, सरकारी कंपनियों, निगमों और अलग-अलग लेवल पर करीब 10 से 12 लाख लोग सीधे या घुमा कर जुड़े हैं. इसके अलावा राज्य में करीब 3.59 लाख पेंशनर्स भी हैं. इन सभी पर होने वाला खर्च राज्य के बजट पर बड़ा बोझ डाल रहा है.
दूसरे राज्यों से ज्यादा खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों की तुलना में आंध्र प्रदेश का सैलरी और पेंशन पर खर्च काफी ज्यादा है. कर्नाटक अपनी खुद की कमाई का एक तिहाई से भी कम हिस्सा कर्मचारियों पर खर्च करता है. तेलंगाना में ये करीब 44%, तमिलनाडु में 49% और केरल में करीब 68% है.
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राज्य के बंटवारे के समय 2014 में आंध्र प्रदेश का कर्मचारियों से जुड़ा खर्च उसकी कमाई का करीब 66% था. वित्त वर्ष 2014-15 में सैलरी पर 25,094 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. इसके बाद ये खर्च लगातार बढ़ा और वित्त वर्ष 2019-20 में ये राज्य की कमाई से भी ज्यादा, करीब 116% तक पहुंच गया. वित्त वर्ष 2023-24 में कर्मचारियों को सैलरी के रूप में 92,147 करोड़ रुपये दिए गए.
सरकार ने बताया पिछली सरकार की विरासत
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इसे पिछली सरकार से मिली बड़ी फाइनेंशियल परेशानी बताया. उनका कहना है कि इतने बड़े खर्च की वजह से राज्य के पास विकास और जरूरी योजनाओं के लिए पैसे कम बचते हैं. लेकिन, मौजूदा सरकार ने पिछले दो साल में इस खर्च को करीब 13 से 14% तक कम करने का दावा किया है.
कर्ज का बोझ भी ज्यादा हुआ&amp;nbsp;
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2019 में आंध्र प्रदेश पर कुल कर्ज और चुकाने की जिम्मेदारी करीब 3.75 लाख करोड़ रुपये थीं, जो मई 2024 तक ज्यादा होकर 9.74 लाख करोड़ रुपये हो गईं. सरकार का कहना है कि अब बाकी पैसे चुकाने, केंद्र से मिलने वाली मदद बढ़ाने और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने के जरिए राज्य की फाइनेंशियल हालात सुधारने की कोशिश की जा रही है.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सरपट भाग रहा सोना, चांदी की रफ्तार पर ब्रेक; जानें आज 24 से लेकर 18 कैरेट की कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today on August 18, 2026: सोमवार की तर्ज पर आज मंगलवार को भी देश में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. इसी के साथ आज 24 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर प्रति 10 ग्राम 1,55,890 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है. आज 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 230 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, कल इसकी कीमत 530 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ी थी.
22 कैरेट और 18 कैरेट की कीमत
22 कैरेट सोने की कीमत में कल यानी कि 17 अगस्त को प्रति 10 ग्राम 500 रुपये का इजाफा हुआ है. वहीं, आज इसकी कीमत 200 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ी है. इसी के साथ अब 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,42,900 रुपये पर पहुंच गई है. इसी तरह से 18 कैरेट सोने का रेट भी बढ़ा है. कल इसकी कीमत 410 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ी थी. वहीं आज कीमत में 160 रुपये का इजाफा हुआ है. इसी के साथ अब 18 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,16,920 रुपये प्रति ग्राम हो गई है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही है कीमत?
सोने की कीमतों में आज हुई बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ 60 दिनों का शांति समझौते का समाप्त होना है. इसके चलते दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की संभावनाएं फिर से तेज हो गई हैं. ऊपर से लेबनान पर किए गए इजरायल के ताजा हमलों ने वैश्विक अनिश्चितताएं और बढ़ा दी हैं. ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर भाग रहे हैं.&amp;nbsp;
अमेरिका से आए कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा अगले महीने ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाएं काफी कम हो गई हैं. ब्याज दरें कम या स्थिर रहने की स्थिति में निवेशक सोने का रुख करते हैं क्योंकि इस पर कोई फिक्स्ड ब्याज नहीं मिलता है.
चांदी की कितनी है कीमत?
आज भारत में चांदी की कीमत 250 रुपये प्रति ग्राम और 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम है. कल के मुकाबले आज चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद जैसे कई शहरों में आज चांदी की कीमत 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम है. वहीं, चेन्नई, केरल, हैदराबाद में कीमत 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>महंगा हुआ ब्रेड, अब सुबह के नाश्ते के लिए खर्च करने होंगे ज्यादा पैसे</title>
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        <description><![CDATA[ West Bengal Bread Price News: अगर आपके दिन की शुरुआत चाय और ब्रेड के साथ होती है, तो यह खबर आपकी जेब पर पहले के मुकाबले ज्यादा असर डाल सकती है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में ब्रेड की कीमतों में महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है. पश्चिम बंगाल बेकर्स एसोसिएशन ने कच्चे माल की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए एक पाउंड ब्रेड की कीमत बढ़ाने की इजाजत दे दी है.&amp;nbsp;
बेकर्स एसोसिएशन के मुताबिक, आटा, चीनी और पैकेजिंग से जुड़ी लागत में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है. ऐसे में लंबे समय तक पुराने कीमतों को जारी रखना बेकरी कारोबारियों के लिए मुश्किल हो गया था. इसलिए ब्रेड की नई कीमत 17 अगस्त 2026 से लागू कर दी गई है. ऐसे में रोजाना ब्रेड खरीदने वाले लोगों के मासिक बजट पर इसका असर देखने को मिल सकता है. आइए जानते हैं ब्रेड के नई कीमत के बारे में...
क्या है ब्रेड की नई कीमत?
पश्चिम बंगाल बेकर्स एसोसिएशन के सीईओ अरिफुल इस्लाम के मुताबिक, कीमत बढ़ाने का फैसला 8 अगस्त को हुई कार्यकारी समिति की बैठक में लिया गया था. इसे 17 अगस्त से लागू कर दिया गया है. ऐसे में एक पाउंड यानी करीब 450 ग्राम ब्रेड की कीमत पहले 32 रुपये थी, जिसे अब बढ़कर 36 रुपये कर दी गई है.
पिछड़े जिलों में बिजनेस करने, स्टाफ हायर करने पर मिलेगी सरकारी मदद
बेकर्स का कहना है कि उन्होंने कुछ समय तक कीमतों में बढ़ोतरी रोकने की कोशिश की, लेकिन लागत &amp;nbsp;में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण ऐसा करना मुश्किल हो गया. राज्य में करीब 3,000 बेकरी इस बदलाव से प्रभावित होंगी. हालांकि, नई कीमतों के हिसाब से खुदरा विक्रेताओं को बिक्री के लिए 15 दिन का समय दिया गया है.&amp;nbsp;
ब्रेड की कीमत बढ़ने की क्या है वजह?
दरअसल, ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा था, जिसका सीधा असर बेकरी कारोबार पर पड़ा है. बताया जा रहा है कि बीते महीने मैदे की कीमत में करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि चीनी की कीमत भी करीब 40 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक कर दी गई है.
इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के कारण पैकेजिंग और दूसरी लागत भी बढ़ा दी गई है. यही वजह है कि इन सभी खर्चों का असर अब ब्रेड की कीमत पर देखने को मिल रहा है.
पहले ही बढ़ चुके हैं स्लाइस ब्रेड के दाम
ब्रेड की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे वक्त में की गई है, जब संगठित क्षेत्र के कई ब्रेड ब्रांड भी पहले से अपने दाम महंगे कर चुके हैं. हालांकि, कई जगह स्लाइस ब्रेड की कीमत में करीब 4 रुपये प्रति पाउंड की बढ़ोतरी की गई है. ऐसे में इसकी कीमत करीब 36 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति पाउंड तक की जा चुकी है. एसोसिएशन के मुताबिक, खुदरा विक्रेताओं को नई कीमत पर ब्रेड बेचने के साथ-साथ वितरकों को 22% तक की छूट देने की भी बात कही गई है.
कुल कमाई का 95% सैलरी और पेंशन पर खर्च कर रहा ये राज्य, खाली हो रहा खजाना
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बिना हॉलमार्क वाला सोना बेचने पर ज्वैलर पर क्या हो सकती है कार्रवाई? जानिए कानून और जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Hallmark News:&amp;nbsp;अगर आप सोने की ज्वैलरी खरीदने जा रहे हैं, तो उसकी हॉलमार्क जरूर देखें. क्योंकि हॉलमार्क सोने की असली होने की पहचान कराने में मदद करता है. भारतीय फिक्स नियम ब्यूरो यानी BIS ने गोल्ड ज्वैलरी की हॉलमार्किंग के लिए नियम फिक्स किए हैं. हालांकि, यह नियम हर तरह की ज्वैलरी और हर ज्वैलर पर जरूरी हॉलमार्किंग एक जैसे लागू नहीं होते.&amp;nbsp;
जरूरी हॉलमार्किंग के दायरे में आने वाले जिलों में नियमों के तहत आने वाली सोने की ज्वैलरी को BIS के नियमों के अनुसार हॉलमार्क कराना जरूरी है. वहीं, 40 लाख तक साल का टर्नओवर वाले ज्वैलर्स को जरूरी हॉलमार्किंग से छूट दी गई है. इसके अलावा कुछ खास तरह की ज्वैलरी और सामान भी नियमों के अनुसार छूट मिलते हैं.
नियम तोड़ने पर ज्वैलर पर हो सकती है कार्रवाई
अगर कोई ज्वैलर जरूरी हॉलमार्किंग के नियमों का उल्लंघन करता है तो BIS उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. जांच के दौरान ज्वैलरी के सैंपल लिए जा सकते हैं. नियमों का उल्लंघन मिलने पर ज्वैलर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है. कुछ मामलों में BIS रजिस्ट्रेशन पर भी कार्रवाई हो सकती है.
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BIS Act के तहत ऐसे नियम तोड़ने के लिए सजा और जुर्माने है. जुड़े मामले में 1 साल तक की जेल या कम से कम 1 लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है. ये जुर्माना सामान की कीमत के पांच गुना तक जा सकता है. कुछ दूसरे नियमों को तोड़ने में 2 साल तक की जेल और कम से कम 2 लाख के जुर्माने है.
पुराना बिना हॉलमार्क सोना बेच सकते हैं?
घर में रखा पुराना बिना हॉलमार्क वाला सोना अपने आप में कानून के खिलाफ नहीं है. BIS के मुताबिक कस्टमर अपना पुराना बिना हॉलमार्क वाला सोना ज्वैलर को बेच सकता है. इसलिए पुराने गहने पर हॉलमार्क नहीं होने का मतलब ये नहीं है कि वो गैरकानूनी है.
नई ज्वैलरी खरीदते समय HUID जरूर चेक करें
नई हॉलमार्क वाली सोने की ज्वैलरी खरीदते समय उस पर दर्ज HUID नंबर जरूर देखें. कस्टमर BIS Care App के जरिए HUID की जानकारी जांच सकता है. इससे ज्वैलरी की हॉलमार्किंग से जुड़ी जानकारी को वेरिफाई करने में मदद मिलती है. इसके अलावा, सोने की खरीदारी करते समय उसका बिल भी जरूर लेना चाहिए, ताकि खरीदारी का रिकॉर्ड आपके पास रहे.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Airtel बैंक से सुनील मित्तल का इस्तीफा, अब कौन संभालेगा कमान?</title>
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        <description><![CDATA[ Airtel Payments Bank: एयरटेल पेमेंट्स बैंक में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सालों से इसकी कमान संभाल रहे चेयरमैन सुनील भारती मित्तल अब इसका हिस्सा नहीं होंगे. क्योंकि उन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सुनील भारती मित्तल 30 सितंबर, 2026 को चेयरमैन पद पूरी तरह से छोड़ देंगे. अब उनकी जगह पर कोई और इसकी कमान संभालने वाला है.
अब कौन संभालेगा कमान?सुनील भारती मित्तल के इस्तीफे के बाद एयरटेल पेमेंट्स बैंक की कमान शबनम सिन्हा संभालने वाली हैं. फिलहाल शबनम सिन्हा बैंक के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. वो 1 अक्टूबर से तीन साल के लिए चेयरपर्सन का पद संभालेंगी.
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दशकों का कार्यकाल होगा समाप्तसुनील भारती मित्तल अप्रैल 2016 में एयरटेल पेंमेंट्स बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरपर्सन बने थे. बैंक ने नवंबर 2016 में अपना काम शुरू किया था. ये उन 11 कंपनियों में शामिल था, जिन्हें RBI ने पेमेंट्स बैंक शुरू करने के लिए शुरुआती मंजूरी दी थी.
अपने कार्यकाल के बारे में बात करते हुए मित्तल ने कहा कि, एयरटेल पेमेंट्स बैंक के साथ काम करना उनके लिए गर्व की बात रही है. उनके कार्यकाल में बैंक ने देशभर में बड़ा बैंकिंग नेटवर्क बनाया और ऐसे लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा, जो पहले इन सुविधाओं से दूर थे.
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शबनम सिन्हा के बारे मेंबता दें कि शबनम सिन्हा काफी अनुभवी हैं. वो एयरटेल पेमेंट्स बैंक के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर होने के साथ-साथ बैंक में धोखाधड़ी की निगरानी करने वाली विशेष समिति की अध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा वो रिस्क मैनेजमेंट और आईटी समितियों की सदस्य हैं. इससे पहले सिन्हा वर्ल्ड बैंक के साथ भी काम कर चुकी हैं. वहां उन्होंने एशिया, अफ्रीका और यूरोप की सरकारों और संस्थाओं को प्रशासन, जोखिम प्रबंधन और कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़ी सलाह दी.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>FDA पर उल्टा पड़ा दांव, दुकान सील करने पर लगा 5 लाख का जुर्माना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fda-पर-उल्टा-पड़ा-दांव-दुकान-सील-करने-पर-लगा-5-लाख-का-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ FDA: पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में FDA यानी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया लगातार कार्रवाई कर रहा है. जिसके चलते कई दुकानों और कई ऑनलाइन एप्स के स्टोर्स पर चाबुक चलाया गया है. इसी बीच FDA से एक गलती भी हो गई, जिसका खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ रहा है. जिसके चलते अब FDA को 5 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा.
क्या है पूरा मामला?दरअसल 12 जून को फूड पॉइजनिंग की शिकायत और साफ-सफाई से जुड़ी चिंताओं के बाद FDA ने पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स नाम की एक मिठाई की दुकान का फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया था. दुकान ने 15 जून को इस कार्रवाई को चुनौती दी. इसके बाद दुकान ने 9 जुलाई को FDA को एक रिपोर्ट दी, जिसमें पहले बताई गई कमियों को दूर करने की जानकारी दी गई थी. इसके चार दिन बाद FDA ने दुकान की दोबारा जांच की.
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लाइसेंस नहीं किया गया बहालदोबारा की गई जांच में दुकान को 36 में से 35 अंक मिले, यानी वो 98 प्रतिशत फूड सेफ्टी मानकों पर खरी उतरी. बावजूद इसके FDA ने लाइसेंस बहाल नहीं किया और दुकान बंद रही. जब ये मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा तो FDA ने कोर्ट में कहा कि लाइसेंस निलंबन के खिलाफ विभागीय अपील लंबित होने के कारण दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई फटकारबॉम्बे हाईकोर्ट FDA की इस दलील से सहमत नहीं हुआ. जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और गौतम ए. अंखड़ की बेंच ने FDA के रवैये को बेहद अनुचित बताया. कोर्ट ने कहा कि जब दुकान ने दोबारा जांच में 98 प्रतिशत मानकों पर खरा पाया, तो भी उसे अपील करने के लिए कहना समझ से परे है. कोर्ट ने FDA की इस दलील को भी कमजोर बताया कि अपील लंबित होने के कारण लाइसेंस बहाल नहीं किया जा सकता.
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FDA भरेगा जुर्मानादुकान की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि 34 दिनों तक दुकान बंद रहने से कारोबार को करीब 8.5 लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ. हाईकोर्ट ने माना कि लोगों की सुरक्षा के लिए फूड सेफ्टी नियमों को लागू करना FDA की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने FDA को 30 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये का मुआवजा जमा करने का आदेश दिया और दुकान का लाइसेंस निलंबन रद्द कर दिया. इसके साथ ही दुकान को तुरंत कारोबार शुरू करने की अनुमति मिल गई.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>बिना OTP शेयर किए कटे 9854 रुपए, कोर्ट ने बैंक को सिखाया सबक</title>
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        <description><![CDATA[ Cyber Fraud News: आज के डिजिटल दौर में हर रोज यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से लेन-देन काफी तेजी से बढ़ रहा है. इसी के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं. कई बार साइबर ठग बहुत से लुभावने ऑफर्स और कैशबैक के लिए स्क्रैच कार्ड को स्क्रैच करने के लिए कहते हैं, अगर आप भी इस तरह के सक्रैच कार्ड्स को वेरिफाई किए बिना स्क्रैच कर लेते हैं तो सावधान हो जाइए. ऐसा ही एक मामला केरल से सामने आया, जहां एक खाताधारक के खाते से बिना OTP शेयर किए 9,854 रुपये कट गए. आइए जानते हैं...
क्या है पूरा मामला?
केरल के थिरुवनंथपुरम से ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहां फेडरल बैंक के एक खाताधारक को सोशल मीडिया के ज़रिए 13 जुलाई 2021 को एक स्क्रैच कार्ड मिला. खाताधारक ने कैशबैक के लालच में स्क्रैच कार्ड को फोन पे एप के ज़रिए दो बार स्कैन किया. इस दौरान उनके खाते से एक बार 4,885 और दूसरी बार 4,969 रूपये कट गए थे.
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इसके दो दिन बाद उन्होंने काट्टाकाड़ा पुलिस थाने में फ्रॉड की शिकायत दर्ज करवाई थी. खाताधारक ने किसी को कोई ओटीपी नहीं दिया था और न ही किसी को अकाउंट डीटेल्स दी थी.
बैंक ने पहले लौटाए पैसे, फिर दोबारा काटे&amp;nbsp;
पहले बैंक ने खाताधारक के खाते से काटी गई पूरी राशि वापिस कर दी थी, लेकिन बाद में वे रूपये दोबारा काट लिए गए. फ़िर उन्होंने बैंकिंग लोकपाल का रूख किया. लेकिन बैंक ने उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराया और शिकायत को बंद कर दिया. इसके बाद नायर ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत की.
बैंक ने क्या दी सफाई?
मामले की सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि फैसबुक और फोन पे को भी ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए. बैंक ने खाते से पैसे काटने की बात को माना लेकिन स्क्रैच कार्ड से संबंधित भूमिका पर हामी नहीं भरी. बैंक ने यह भी तर्क दिया कि आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, शुरू में इस राशि को &#039;शैडो क्रेडिट&#039; के रूप में जमा किया गया था. लेकिन बाद में इसकी जांच में पाया गया कि ग्राहक को ज्ञात क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लेनदेन किया गया था, जिसके बाद इसे वापस कर दिया गया. मामले की सुनवाई करने वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बैंक के तर्क को खारिज कर दिया.
आयोग ने बैंक की दलील क्यों खारिज की?
आयोग की तीन सदस्यता पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता ने लेन-देन होने के तुरंत बाद बैंक से भी संपर्क किया और पुलिस शिकायत भी दर्ज करवाई. पीठ ने ये भी कहा कि खाताधारक ने अनजाने में ओटीपी साझा किया होगा, इसलिए बैंक को खाताधारक की लापरवाही साबित करनी होगी. क्योंकि इस पूरे मामले में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे ये साबित किया जा सके कि शिकायतकर्ता ने इरादतन ऐसा किया है. इसलिए बैंक को पैसे लौटाने होंगे.&amp;nbsp;
बैंक को 9,854 रुपये के साथ देना होगा जुर्माना
आयोग ने अंतिम फैसला सुनाते हुए फेडरल बैंक को 30 दिन के भीतर 9854 रूपये रीफंड करने, 5000 रुपये का जुर्माना और कानूनी खर्चे के लिए 3000 रुपये देने के निर्देश दिए हैं. तय समयसीमा में निर्देश का पालन न करने पर रीफंड और जुर्माने पर 9 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज भरना होगा.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिना, OTP, शेयर, किए, कटे, 9854, रुपए, कोर्ट, ने, बैंक, को, सिखाया, सबक</media:keywords>
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        <title>आज घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर का कितने में मिलेगा? देखें रेट लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 17 August 2026: घर में 14 किलो वाला घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल होता है तो वहीं बिजनेस और फंक्शन- पार्टी में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है. दोनों ही सिलेंडर की रेट अलग- अलग होता है. अब आपके शहर में घरेलू और कमर्शियल किस रेट पर मिल रहा है, ये हम आपको यहां बता रहे हैं. अगर आप आज बुकिंग करने वाले हैं तो यहां से रेट जरूर चेक कर लें.
शहर अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर की रेट लिस्ट-

कोलकाता- 968.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
मुंबई- 941.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
चेन्नई- 957.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
गुड़गांव- 950.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
नोएडा- 939.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
बैंगलोर- 944.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
भुवनेश्वर- 968.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
चंडीगढ़- 951.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
हैदराबाद- 994.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
जयपुर- 945.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
लखनऊ- 979.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
पटना- 1,031.50 रुपए प्रति 14 किलोग्राम
तिरुवनंतपुरम- 951.00 रुपए प्रति 14 किलोग्राम

पेट्रोल-डीजल के दाम में बदलाव! जानें आपके शहर में आज कितना है भाव
शहर अनुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर रेट लिस्ट-&amp;nbsp;

कोलकाता- 2,872.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
मुंबई- 2,691.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
चेन्नई- 2,906.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
गुड़गांव- 2,755.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
नोएडा- 2,738.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
बैंगलोर- 2,821.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
भुवनेश्वरृ- 2,908.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
चंडीगढ़- 2,760.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
हैदराबाद- 2,985.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
जयपुर- 2,765.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
लखनऊ- 2,860.50 रुपए प्रति 19 किलोग्राम
पटना- 3,018.00 रुपए प्रति 19 किलोग्राम

आखिरी बार कब बदले थे दाम?
आखिरी बाद अगस्त की शुरुआत में ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत कम हुई थी. दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर का रेट जुलाई के 2,930 रुपए से घटकर 2,738 रुपए हो गया है. यानी 19 किलो वाले सिलेंडर पर 192 रुपए की राहत मिली. वहीं, घरेलू एलपीजी की कीमत में हाल में कोई कटौती नहीं हुई है.&amp;nbsp;
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आज से क्या बदला?
कल यानी 16 अगस्त को गैस सिलेंडर की ई-केवाईसी कराने का लास्ट डेट थी, ऐसे में आज से केवाईसी बंद हो गई है. डेडलाइन के बाद जिन खातों का ई-केवाईसी पूरा नहीं होगा, उन्हें 300 रुपए तक मिलने वाली सब्सिडी बंद कर दी जाएगी. अगर आपका केवाईसी नहीं हुआ है तो आज से आपको मार्केट रेट पर ही गैस सिलेंडर खरीदना पड़ेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 10:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब विदेशी पटरियों पर सरपट भागेगी वंदे भारत, कतार में खड़े अमेरिका&amp;श्रीलंका जैसे कई खरीदार</title>
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        <description><![CDATA[ Vande Bharat: आप-हम में से कई लोग हैं, जिन्होंने वंदे भारत ट्रेन की सवारी की है. अंदर से हवाई जहाज की तरह दिखने वाली और पटरियों पर हाई-स्पीड में सरपट भागने वाली इस ट्रेन के क्या ही कहने! अब इसमें बैठकर सफर का मजा दूसरे देशों में लोग भी लेने वाले हैं. जी हां, भारतीय रेलवे की तरफ से इसे विदेशों में भेजे जाने की खबरें सामने आ रही हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी कंपनी RITES और भारतीय रेलवे दोनों मिलकर विदेशी पटरियों के अनुकूल स्टैंडर्ड-गेज (Standard-Gauge) वंदे भारत प्रोटोटाइप का डिजाइन तैयार करने में लगे हुए हैं क्योंकि भारत का मौजूदा ब्रॉड-गेज नेटवर्क वैश्विक मानकों से अलग है.&amp;nbsp;
ब्राॅड गेज क्या है?
दोनों पटरियों के बीच की दूरी को ब्रॉड-गेज कहा जाता है. भारत में यह 1,676 मिमी (5 फीट 6 इंच) होती है. वहीं, दुनिया के अधिकतर देशों में हाई-स्पीड रेल और मेट्रो नकटवर्क के लिए रेलवे पटरियों के बीच की दूरी 1,435 मिमी (4 फीट 8.5 इंच) होती है. चीन, जापान और यूरोप जैसे दुनिया के अधिकतर हाई-स्पीड और सेमी-हाई स्पीड ट्रेन बनाने वाले देश केवल 1,435 मिमी स्टैंडर्ड-गेज पटरियों के लिए ही ट्रेन सेट बनाते हैं.&amp;nbsp;
वहीं, भारत में वर्तमान में चल ही वंदे भारत ट्रेन ब्रॉड-गेज सांचे में बनी है. अगर इसे अंतर्राष्ट्रीय पटरियों पर दौड़ाना है, तो पहले इसके डिजाइन को स्टैंडर्ड-गेज के हिसाब से बदलना होगा, जिस पर अभी काम चल रहा है.&amp;nbsp;
किन देशों से की जा रही है डिमांड?
नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के अलावा कनाडा, ब्राजील, मलेशिया, अर्जेंटीना, चिली ने भी भारत में सेमी हाई-स्पीड तकनीक पर बनी वंदे भारत की सराहना की है. इसकी मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि चीन, जापान और फ्रांस में बनने वाली बुलेट ट्रेन या हाई-स्पीड रेलवे तकनीक काफी महंगी होती है. इसके मुकाबले वंदे भारत काफी किफायती है. एक 16- कोच वाली वंदे भारत ट्रेन को बनाने में लगभग 130-150 करोड़ के बीच है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी दावेदारी मजबूत है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, विदेशी, पटरियों, पर, सरपट, भागेगी, वंदे, भारत, कतार, में, खड़े, अमेरिका-श्रीलंका, जैसे, कई, खरीदार</media:keywords>
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        <title>नहीं कटेगा गैस कनेक्शन, बढ़ गई एलपीजी ई&amp;केवाईसी की तारीख, जानें क्या है नई डेडलाइन</title>
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        <description><![CDATA[ LPG e-KYC Deadline: एलपीजी ग्राहकों के लिए बड़ी खबर है. आधार बेस्ड एलपीजी ई-केवाईसी की डेडलाइन बढ़ा दी गई है. पहले इसके लिए 16 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया था, लेकिन अब ग्राहकों को 23 अगस्त 2026 तक ई-केवाईसी पूरा करने का मौका दिया गया है. ऐसे में जिन लोगों ने अभी तक अपना ई-केवाईसी नहीं कराया है, उन्हें तुरंत गैस कनेक्शन बंद होने की चिंता करने की जरूरत नहीं है. वैसे इसका मतलब ये नहीं है कि आप ई-केवाईसी को नजरअंदाज करके एकदम निश्चिंत हो जाएं. समय तक केवाईसी पूरी नहीं करने पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में परेशानी हो सकती है.&amp;nbsp;
क्या है नई तारीख?एलपीजी कंपनियों की ओर से ग्राहकों को लगातार ई-केवाईसी पूरा करने के लिए कहा जा रहा था. इसके लिए 16 अगस्त 2026 की डेडलाइन तय की गई थी. लेकिन स्वतंत्रता दिवस और छुट्टियों के कारण कई ग्राहक समय पर केवाईसी नहीं कर पाए हैं. इसके बाद डेडलाइन को बढ़ाकर 23 अगस्त किया गया है. इससे उन ग्राहकों को राहत मिली है, जो अबतक अपना आधार वेरिफिकेशन नहीं करा पाए थे.
आज घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर का कितने में मिलेगा? देखें रेट लिस्ट
कट जाएगा गैस कनेक्शन?सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि अगर 23 अगस्त तक भी ई-केवाईसी नहीं कराया तो क्या गैस कनेक्शन कट जाएगा? बता दें कि ऐसा नहीं है. ई-केवाईसी पूरा नहीं होने पर घरेलू दर पर सिलेंडर नहीं मिलेगा. यानी बिना केवाईसी वालों को गैस सिलेंडर महंगा लगेगा.
घर से कैसे कर सकते हैं ई-केवाईसी?अच्छी बात यह है कि ई-केवाईसी कराने के लिए हर ग्राहक को गैस एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. अलग-अलग गैस कंपनियों ने अपने ऐप के जरिए ऑनलाइन प्रक्रिया की सुविधा दी है. इंडेन ग्राहक इंडेन ऑयल वन ऐप के जरिए ई-केवाईसी कर सकते हैं. इसके लिए आधार बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा है. वहीं भारतगैस ग्राहक हैलो बीपीसीएल ऐप और एचपी गैस ग्राहक एचपी पे ऐप के जरिए प्रोसेस पूरी कर सकते हैं. अगर किसी ग्राहक को ऑनलाइन प्रोसेस करने में दिक्कत आती है तो वह अपने एलपीजी बांटने वालों के पास जाकर भी ई-केवाईसी करा सकता है.&amp;nbsp;
अब विदेशी पटरियों पर सरपट भागेगी वंदे भारत, कतार में खड़े अमेरिका-श्रीलंका जैसे कई खरीदार ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 10:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नहीं, कटेगा, गैस, कनेक्शन, बढ़, गई, एलपीजी, ई-केवाईसी, की, तारीख, जानें, क्या, है, नई, डेडलाइन</media:keywords>
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        <title>8वें वेतन आयोग के किस नियम से खफा हुए पेंशनर्स? ToR में बदलाव के लिए पीएम मोदी से गुहार</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/8वें-वेतन-आयोग-के-किस-नियम-से-खफा-हुए-पेंशनर्स-tor-में-बदलाव-के-लिए-पीएम-मोदी-से-गुहार</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Pensioners Demand: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में 1 जनवरी से पहले रिटायर हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन और फैमिली पेंशन के स्पष्ट संसोधन को शामिल करने के लिए पेंशनभोगी संगठनों ने केंद्र सरकार से जोरदार मांग की है.
&#039;भारत पेंशनर्स समाज&#039; (BPS) और &#039;ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन&#039; (AIDEF), NCCPA और FCPA जैसे प्रमुख संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आधिकारिक दिशानिर्देशों (ToR) में संशोधन करने और कुछ विवादास्पद शब्दों को हटाने की अपील की है. &amp;nbsp;
संगठनों की क्या है मांग?&amp;nbsp;
संगठनों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के मौजूदा ToR में पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा को लेकर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, जिसे तुरंत ठीक किया जाए.
उनका कहना है कि ToR में पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में संशोधन, पुराने और भविष्य के पेंशनभोगियों के बीच समानता, पारिवारिक पेंशन में संशोधन या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अन्य लाभों के बारे में साफ़ तौर पर कोई बात नहीं कही गई है इसलिए लागू पेंशन योजनाओं के तहत पेंशन और पेंशन से जुड़े लाभों में संशोधन का प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें 1 जनवरी 2026 से पहले या उसके बाद रिटायर होने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
&#039;अनफंडेड कॉस्ट&#039; शब्द हटाने की मांग
AIDEF ने ToR में &#039;गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की बिना फंड वाली लागत&#039; के जिक्र पर भी आपत्ति जताई है. उनका तर्क है कि सरकारी सेवा से मिलने वाली पेंशन को सिर्फ बिना फंड वाली देनदारी नहीं माना जाना चाहिए इसलिए इसे तुरंत हटाने या बदले जाने की मांग की गई है क्योंकि सरकारी सेवा के बाद मिलने वाली पेंशन कोई वित्तीय बोझ नहीं, बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है.&amp;nbsp;
इसका सीधा सा मतलब यह है कि सरकार ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को &#039;वित्तीय बोझ&#039; या &#039;बिना बजट वाला खर्च&#039; मान रही है क्योंकि इसके लिए कर्मचारियों की सैलरी से कोई पैसा नहीं काटा जाता है और सारा खर्च सरकार को अपनी जेब से भरना पड़ता है. संगठनों का कहना है कि सरकारी नौकरी के बाद मिलने वाली पेंशन कोई &#039;अतिरिक्त बोझ&#039; नहीं है, बल्कि यह उनका कानूनी अधिकार है.&amp;nbsp;
पेंशन समानता की भी मांग
संगठनों की तरफ से यह भी मांग की जा रही है कि पुराने और नए सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच पेंशन की विसंगतियों को दूर कर उन्हें समान स्तर पर लाया जाए. साथ ही संगठनों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पेंशन को 9000 रुपये से बढ़ाकर 45000 रुपया प्रति माह करने का भी प्रस्ताव रखा है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 10:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8वें, वेतन, आयोग, के, किस, नियम, से, खफा, हुए, पेंशनर्स, ToR, में, बदलाव, के, लिए, पीएम, मोदी, से, गुहार</media:keywords>
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        <title>हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार धड़ाम, 116 अंक फिसला सेंसेक्स; निफ्टी भी नीचे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हफ्ते-के-पहले-दिन-शेयर-बाजार-धड़ाम-116-अंक-फिसला-सेंसेक्स-निफ्टी-भी-नीचे</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/हफ्ते-के-पहले-दिन-शेयर-बाजार-धड़ाम-116-अंक-फिसला-सेंसेक्स-निफ्टी-भी-नीचे</guid>
        <description><![CDATA[ Share Market Today on August 17, 2026: आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई है. दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट्स को प्रभावित किया है. बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक आज 116 अंक लुढ़ककर 77892 के स्तर पर खुला. वहीं, निफ्टी ने 22 अंक नीचे 24343 के लेवल से कारोबार की शुरुआत की.&amp;nbsp;
क्यों बाजार में आज आई गिरावट?
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते शिपिंग बाधित होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल है. ऊपर से कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ती जा रही हैं. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. भारत जैसे किसी देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि कच्चे तेल के आयात पर इसकी निर्भरता काफी ज्यादा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कमजोर वैश्विक संकेतों का असर
शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था. ब्रॉड मार्केट इंडेक्स 0.2% गिरकर 7785.76 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 0.3% गिरकर 26,729.16 पर आ गया. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज भी 107.58 अंक या 0.2% गिरकर 53,732.41 पर बंद हुआ. अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद आज एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला और सतर्क रुख देखा जा रहा है.
आज शुरुआती कारोबार के दौरान एक तरफ जापान का निक्केई 225 0.4% चढ़ा. वहीं, दूसरी तरफ टॉपिक्स में 0.11% की गिरावट दर्ज की गई है. दक्षिण कोरियाई बाजार आज छुट्टी के चलते बंद है. साथ ही अधिकतर कंपनियों ने अपनी पहली तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है. इससे अब बाजार बड़े ट्रिगर्स के लिए वैश्विक संकेतों पर निर्भर हो गया है.&amp;nbsp;
आज दबाव में रहने वाले स्टॉक्स
आज ऑटो, एनर्जी, मेटल और फार्मा सेक्टर्स के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज, KPIL, ONGC और डॉ. रेड्डीज जैसी कंपनियों के शेयरों पर आज अलग-अलग काॅर्पोरेट्स गतिविधियों के चलते निवेशकों की खास नजर बनी रहेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 10:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वक्त पर भरा ITR, तब भी क्यों मिल सकता है आयकर का नोटिस?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वक्त-पर-भरा-itr-तब-भी-क्यों-मिल-सकता-है-आयकर-का-नोटिस</link>
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        <description><![CDATA[ ITR Filing: अगर आपने 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर दिया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब आपको आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस नहीं मिल सकता. समय पर आईटीआर फाइल करना जरूरी है, लेकिन विभाग रिटर्न में दी गई जानकारी का मिलान अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा से भी करता है. ऐसे में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर टैक्सपेयर्स से सफाई मांगा जा सकता है.
आयकर विभाग आईटीआर में घोषित आय और फॉर्म 16, AIS, टीडीएस रिकॉर्ड और दूसरी जानकारियों के बीच मिलान करता है. अगर इन आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है, तो समय पर रिटर्न दाखिल करने वाले व्यक्ति को भी नोटिस मिल सकता है.
1.आय और विभाग के रिकॉर्ड में अंतरनोटिस आने की सबसे बड़ी वजहों में से एक आय में गड़बड़ी है. अगर आपकी आईटीआर में बताई गई सैलरी और कर्मचारी के फॉर्म 16 में दर्ज सैलरी अलग है, तो विभाग आपसे अंतर की वजह पूछ सकता है.&amp;nbsp;
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2.टीडीएस में गड़बड़ीअगर आपने आईटीआर में जिस टीडीएस&amp;nbsp;का क्रेडिट क्लेम किया है, वह फॉर्म 26AS या विभाग के रिकॉर्ड में अलग दिखाई देता है, तो भी नोटिस आ सकता है. ऐसा तब हो सकता है जब आपने ने टीडीएस रिटर्न सही तरीके से दाखिल नहीं किया हो, उसमें कोई गलती हो या बाद में सही किया गया हो और उसका डेटा अभी आपके रिकॉर्ड में अपडेट नहीं हुआ हो. इसलिए आईटीआर भरने करने से पहले फॉर्म 26AS और AIS में टैक्स की डिटेल्स को चेक करना बेहद जरूरी है.
3.गलत कटौती या छूटसमय पर आईटीआर दाखिल करने के बाद भी अगर आपने गलत कटौती या छूट क्लेम&amp;nbsp;किया है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है. मसलन, अगर आपने कोई कटौती क्लेम किया है लेकिन उसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज या पात्रता नहीं है, तो विभाग उस क्लेम पर सवाल उठा सकता है. इसके अलावा गलत आईटीआर फॉर्म का चुनाव, अधूरी जानकारी भी नोटिस की वजह बन सकती है.
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नोटिस आए तो क्या करें?अगर आपको आय टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस मिलता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले यह जांचें कि नोटिस सही है या नहीं. इसके लिए आयकर विभाग के आधिकारिक ई- फाइलिंग पोर्टल पर नोटिस की असली होने की चेकिंग करें. इसके बाद नोटिस में बताई गई वजह को ध्यान से पढ़ें और देखें कि विभाग ने किस जानकारी पर सवाल उठाया है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 22:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>Bank Holiday: अगले हफ्ते कितने दिन बंद रहेंगे बैंक? जानें 17 से 23 अगस्त के बीच की छुट्टियां</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Holiday: अगर आपको अगले हफ्ते बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो बैंक हॉलिडे की तारीख पहले से जान लेना जरूरी है. 17 अगस्त से 23 अगस्त 2026 के बीच देशभर में बैंकों के लिए कुछ छुट्टियां पड़ रही है. हालांकि, इस पूरे हफ्ते में ज्यादातर दिनों बैंक शाखाएं खुली रहेंगी. बैंक की छुट्टियां राज्य और स्थानीय त्योहारों के हिसाब से अलग भी हो सकती हैं. यहां से आप बैंक की छुट्टी की पूरा कैलेंडर देख सकते हैं.
17 से 23 अगस्त के बीच कब-कब बंद रहेंगे बैंक?



तारीख
दिन
बैंक खुले रहेंगे या बंद?


17 अगस्त
सोमवार
बैंक खुले रहेंगे&amp;nbsp;


18 अगस्त
मंगलवार
बैंक खुले रहेंगे&amp;nbsp;


19 अगस्त
बुधवार
बैंक खुले रहेंगे&amp;nbsp;


20 अगस्त
गुरुवार
बैंक खुले रहेंगे&amp;nbsp;


21 अगस्त
शुक्रवार
बैंक खुले रहेंगे&amp;nbsp;


22 अगस्त
शनिवार
बैंक बंद रहेंगे&amp;nbsp;


23 अगस्त
रविवार
बैंक बंद रहेंगे&amp;nbsp;



वक्त पर भरा ITR, तब भी क्यों मिल सकता है आयकर का नोटिस?
22-23 अगस्त को क्यों बंद रहेंगे बैंक?
22 अगस्त, शनिवार को महीने का चौथा शनिवार है. RBI के नियमों के तहत दूसरे और चौथे शनिवार को सरकारी और निजी समेत सभी बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं. इसलिए इस दिन SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, PNB समेत अन्य बैंकों की ब्रांच में सामान्य कामकाज नहीं होने वाला है. इसके अगले दिन यानी 23 अगस्त रविवार को भी बैंक बंद रहेंगे. इस तरह शनिवार और रविवार लगातार दो दिन बैंक ब्रांच नहीं खुलेंगी.
क्या नाग पंचमी के दिन बैंक बंद रहेंगे?
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी है. हालांकि, नाग पंचमी मनाए जाने के बावजूद ये तारीख देशभर के बैंक हॉलिडे कैलेंडर में सामान्य बैंक अवकाश के तौर पर दर्ज नहीं है. इसलिए इस दिन ज्यादातर जगहों पर बैंक शाखाएं नॉर्मल रूप से खुली रहेंगी. हालांकि, बैंक की छुट्टियां राज्यवार होती हैं. इसलिए किसी खास राज्य या स्थानीय क्षेत्र में छुट्टी हो सकती है. बैंक जाने से पहले अपनी स्थानीय शाखा का कैलेंडर चेक कर लें.
विमल इलायची के Ad के लिए कितने रुपए चार्ज करते हैं शाहरुख और अजय देवगन? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>SIP में निवेश का खास फॉर्मूला, Rule of 60 से कैसे बनेगा करोड़ों का फंड?</title>
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        <description><![CDATA[ Rule 60 SIP News: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के बीच इन दिनों &amp;lsquo;Rule 60&amp;rsquo; की चर्चा काफी तेजी से बढ़ रही है. यह कोई सरकारी योजना या निवेश स्कीम नहीं, बल्कि एक आसान फॉर्मूला है, जिसके जरिए लंबे समय तक SIP की ताकत को समझा जा सकता है. खासतौर पर अगर आप निवेश की शुरुआत 30 साल की उम्र में करते हैं, तो नियमित निवेश और कंपाउंडिंग के दम पर 60 साल की उम्र तक के बड़ा फंड तैयार करने का मौका मिल सकता है.
इसकी सबसे खास बात यह है कि इसकी शुरुआत के लिए बहुत बड़ी रकम की जरूरत नहीं पड़ती. आप अपनी हैसियत के मुताबिक छोटी SIP से शुरुआत कर सकते है और हर साल निवेश की रकम में धीरे-धीरे इजाफा कर सकते है. ऐसे में आपकी छोटी-छोटी बचत आगे चलकर बड़ी रकम में बदल सकती है.
क्या है Rule of 60?
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आपकी उम्र 30 साल है और आप सितंबर से SIP की शुरुआत करते हैं. ऐसे में आपके पास 60 साल की उम्र तक पूरे 30 सालों का निवेश जारी रखने का समय होगा. इस दौरान हर साल SIP की रकम में 10% की बढ़ोतरी करने का तरीका अपनाया जाता है. इस फॉर्मूले में 12% औसत सालाना रिटर्न मानने पर छोटी शुरुआत भी लंबे समय में बड़ा फंड तैयार कर सकती है.
Bank Holiday: अगले हफ्ते कितने दिन बंद रहेंगे बैंक? जानें 17 से 23 अगस्त के बीच की छुट्टियां
SIP से कितना बनेगा फंड?
अगर 30 साल की उम्र में आप हर महीने करीब 1,150 रुपये की SIP शुरू करते हैं और हर साल निवेश में 10% का इजाफा किया जाए, तो 30 साल में करीब 22.70 लाख रूपये निवेश किए जाएंगे. अनुमानित 12% रिटर्न के आधार पर यह रकम करीब 1 करोड़ रुपये का बड़ा फंड बना सकती है. हालांकि, म्युचुअल फंड का रिटर्न बाजार की उतार चढ़ाव पर डिपेंड करता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती है.&amp;nbsp;
Step-up SIP क्यों है जरूरी?
अगर आप शुरुआत में ज्यादा रकम निवेश नहीं कर पाते हैं, तो हर साल SIP को 5-10% बढ़ाया जा सकता है. आमदनी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ाने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है और बड़ा फंड तैयार करने में मदद मिलेगा.
इन बातों का रखें ध्यान

SIP को लंबे समय तक जारी रखने की कोशिश करें.
बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर SIP बंद न करें.
निवेश से पहले अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के मुताबिक ही फंड चुनें.
इमरजेंसी जरूरतों के लिए अलग से फंड तैयार रखें.
निवेश शुरू करने में ज्यादा देरी न करें.

वक्त पर भरा ITR, तब भी क्यों मिल सकता है आयकर का नोटिस?
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
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    <item>
        <title>माता&amp;पिता से मिला गिफ्ट कितना टैक्स फ्री? जानें कब देना पड़ सकता है टैक्स</title>
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        <description><![CDATA[ Gift Tax News:&amp;nbsp;शादी के बाद अक्सर माता-पिता अपनी बेटी को प्यार और आशीर्वाद के तौर पर नकद पैसे, ज्वैलरी, प्रॉपर्टी या दूसरी कीमती चीजें गिफ्ट में देते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर तोहफा लाखों रुपये का है, तो क्या बेटी को इस पर इनकम टैक्स देना पड़ेगा? हालांकि टैक्स नियमों के मुताबिक, हर गिफ्ट पर टैक्स नहीं देना पड़ता है. ऐसे में माता-पिता से मिले गिफ्ट को लेकर खास नियम लागू होते हैं, इसलिए गिफ्ट की रकम और उससे होने वाली &amp;nbsp;इनकम के टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
क्या माता-पिता से मिला गिफ्ट पूरी तरह टैक्स फ्री है?
इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक माता-पिता को करीबी रिश्तेदार की कैटेगरी में रखा गया है. ऐसे में माता-पिता की तरफ से बेटी को दिया गया पैसा, प्रॉपर्टी, ज्वैलरी या दूसरी संपत्तियां आमतौर पर यह गिफ्ट टैक्स के दायरे में नहीं आतीं.
SIP में निवेश का खास फॉर्मूला, Rule of 60 से कैसे बनेगा करोड़ों का फंड?

माता-पिता से मिला गिफ्ट सामान्य तौर पर टैक्स फ्री होता है.
गिफ्ट की रकम पर कोई तय 50,000 रुपये तक की सीमा लागू नहीं होती है.&amp;nbsp;
शादी के मौके पर पैसे के अलावा प्रॉपर्टी और ज्वैलरी जैसी चीजें भी गिफ्ट के तौर पर दी जा सकती हैं.&amp;nbsp;
लेकिन गिफ्ट का रिकॉर्ड और उससे जुड़े डॉक्यूमेंट अपने पास संभालकर रखें.

अन्य रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर क्या है नियम?
माता-पिता के अलावा अन्य रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट के लिए भी टैक्स कानून में अलग प्रावधान हैं. इसमें कुछ करीबी रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट टैक्स के दायरे से बाहर में आते हैं, जबकि गैर-रिश्तेदार से मिले गिफ्ट पर अलग से नियम लागू होते हैं. आमतौर पर गिफ्ट पर टैक्स रिश्ते और गिफ्ट के प्रकार पर निर्भर करता है. ऐसे में. नकद, प्रॉपर्टी, ज्वैलरी और कुछ अन्य संपत्तियों के लिए अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं.
गिफ्ट मिलने के बाद कब देना पड़ सकता है टैक्स?
यहां सबसे जरुरी बात यह है कि गिफ्ट मिलने पर टैक्स न लगने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उससे होने वाली हर कमाई भी टैक्स फ्री होगी. माता-पिता मिला गिफ्ट भले ही टैक्स फ्री के दायरे में हो, लेकिन उससे बाद में होने वाली कमाई पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है. ऐसे में अगर बेटी को गिफ्ट में मिले पैसे FD में जमा किए जाते हैं, तो उससे मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आएगा.
गिफ्ट लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

बड़ी रकम या संपत्ति का गिफ्ट मिलने पर उसके डॉक्यूमेंट्स को अपने पास संभाल कर रखें.
पैसे के लेन-देन के लिए बैंकिंग का इस्तेमाल करें.
गिफ्ट मिलने के बाद उससे होने वाली आय का सही रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखें.
FD, किराये या निवेश से होने वाली कमाई को ITR में लागू नियमों के मुताबिक जानकारी दें.

Bank Holiday: अगले हफ्ते कितने दिन बंद रहेंगे बैंक? जानें 17 से 23 अगस्त के बीच की छुट्टियां
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>माता-पिता, से, मिला, गिफ्ट, कितना, टैक्स, फ्री, जानें, कब, देना, पड़, सकता, है, टैक्स</media:keywords>
    </item>
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        <title>बच्चों के हाथ में Vape, नए निकोटीन प्रोडक्ट्स पर सख्ती की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ India Vape Ban Rules: भारत में ई-सिगरेट और Vape पर कानूनी रोक के बावजूद बच्चों और किशोरों तक इनकी पहुंच को लेकर चिंता जताई जा रही है. Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 के तहत ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन पर रोक है. कानून में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए ई-सिगरेट के प्रचार को भी विज्ञापन के दायरे में रखा गया है. इसके बावजूद बच्चों और युवाओं में नए तरह के निकोटीन प्रोडक्ट्स की बढ़ती पहुंच का मुद्दा सामने आ रहा है.
&amp;nbsp;
इसी मुद्दे पर Mothers Against Vaping (MAV) ने संसद में आवाज उठाए जाने का स्वागत किया है. संगठन का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच Vape को &amp;lsquo;सेफ&amp;rsquo;, &amp;lsquo;कूल&amp;rsquo; और नुकसानरहित बताकर पेश किया जा रहा है. MAV के मुताबिक सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और अवैध विक्रेताओं के जरिए इन उत्पादों की पहुंच कम उम्र के बच्चों और युवाओं तक बढ़ रही है.
&amp;nbsp;
बच्चों को &amp;lsquo;कूल&amp;rsquo; और &amp;lsquo;सेफ&amp;rsquo; बताकर Vape की ओर खींचने का आरोप
&amp;nbsp;
MAV ने कहा कि बच्चों और युवाओं को नए तरह के निकोटीन प्रोडक्ट्स से बचाना किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है. यह बच्चों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और देश के भविष्य से जुड़ा मामला है. संगठन ने ज्यादा से ज्यादा सांसदों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर सख्त कार्रवाई का समर्थन करने की अपील की है.
&amp;nbsp;
नौकरी गई तो नहीं होगी पैसों की टेंशन, 3-6-9 रूल से तैयार करें अपना इमरजेंसी फंड
&amp;nbsp;
संगठन ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई है कि देश में युवाओं की बड़ी आबादी को इन नए निकोटीन उत्पादों के लिए संभावित बाजार के तौर पर देखा जा सकता है. MAV ने विदेशी हितों को लेकर सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि भारत के बच्चे और युवा इन उत्पादों के निशाने पर न आएं.
&amp;nbsp;
Vape समेत कई नए निकोटीन प्रोडक्ट्स पर सख्ती की मांग
&amp;nbsp;
MAV ने ई-सिगरेट, ENDS, Vape, Heated Tobacco Products (HTPs), Heat-not-Burn और दूसरे नए निकोटीन डिवाइस पर लागू प्रतिबंध को पूरी तरह सख्ती से लागू करने की मांग की है. 2019 के कानून में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की परिभाषा में ENDS और Heat Not Burn Products जैसे डिवाइस भी शामिल हैं.
&amp;nbsp;
संगठन का कहना है कि सिर्फ प्रतिबंध लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रतिबंध के उल्लंघन पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. MAV के मुताबिक सरकार को उन मामलों पर भी नजर रखनी चाहिए जहां प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री या प्रचार अलग-अलग माध्यमों से बच्चों और युवाओं तक पहुंच रहा है.
&amp;nbsp;
सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी जवाबदेही
&amp;nbsp;
MAV ने सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी जवाबदेह बनाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म प्रतिबंधित नए निकोटीन प्रोडक्ट्स के प्रचार, बिक्री या वितरण को बढ़ावा देता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए. जहां मौजूदा कानून लागू होते हैं, वहां उनका सख्ती से इस्तेमाल करने और जहां कानूनी खामियां हैं, वहां कड़े प्रावधान लाने की मांग की गई है.
&amp;nbsp;
यह मांग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 2019 के कानून में &amp;lsquo;विज्ञापन&amp;rsquo; के दायरे में इंटरनेट और सोशल मीडिया को भी शामिल किया गया है. कानून ई-सिगरेट की ऑनलाइन बिक्री को भी &amp;lsquo;sale&amp;rsquo; की परिभाषा में शामिल करता है.
&amp;nbsp;
&amp;lsquo;अगली पीढ़ी को निकोटीन की लत से बचाना होगा&amp;rsquo;
&amp;nbsp;
MAV की समर्थक और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बरमी ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. उन्होंने सभी सांसदों से वेप और हीट-नॉट-बर्न डिवाइस पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की मांग की. साथ ही उन्होंने निकोटीन पाउच, पैच और गम जैसे दूसरे नए निकोटीन उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही.
&amp;nbsp;
MAV का कहना है कि बच्चों को निकोटीन की लत से बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है. इसके लिए संसद और सरकार के साथ स्कूलों, माता-पिता, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, हेल्थ एक्सपर्ट्स और समाज को मिलकर काम करना होगा. संगठन का कहना है कि सामूहिक प्रयास से ही बच्चों और युवाओं को नए तरह के निकोटीन उत्पादों से दूर रखा जा सकता है.
&amp;nbsp;
Mothers Against Vaping क्या है?
&amp;nbsp;
Mothers Against Vaping (MAV) खुद को बच्चों और युवाओं को नए तरह के निकोटीन उत्पादों से बचाने के लिए काम करने वाली माताओं का समूह बताता है. संगठन Vape, ई-सिगरेट, Heated Tobacco Products, Heat-not-Burn डिवाइस, निकोटीन पाउच और इसी तरह के दूसरे उत्पादों को बच्चों और युवाओं से दूर रखने की मांग करता है. MAV का कहना है कि ये उत्पाद बच्चों और युवाओं को निकोटीन की लत और आगे चलकर नुकसानदायक निर्भरता की ओर ले जा सकते हैं.
&amp;nbsp;
10 लाख की FD पर किस बैंक से मिलेगा ज्यादा रिटर्न?
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बच्चों, के, हाथ, में, Vape, नए, निकोटीन, प्रोडक्ट्स, पर, सख्ती, की, मांग</media:keywords>
    </item>
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        <title>सेविंग अकाउंट वालों के लिए बदला डाक का ये नियम, आम आदमी को राहत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सेविंग-अकाउंट-वालों-के-लिए-बदला-डाक-का-ये-नियम-आम-आदमी-को-राहत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सेविंग-अकाउंट-वालों-के-लिए-बदला-डाक-का-ये-नियम-आम-आदमी-को-राहत</guid>
        <description><![CDATA[ Rural Postal Life Insurance: अगर आपका सेविंग अकाउंट किसी बैंक में है और आप ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अब डाक जीवन बीमा (RPLI) लेने के लिए सिर्फ पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट होना जरूरी नहीं है. हाल ही में सरकार ने पात्रता का दायरा बढ़ाते हुए अनुसूचित बैंकों में सेविंग अकाउंट रखने वाले लोगों को भी शामिल कर लिया है.
इस फैसले से खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिन्हें ग्रामीण इलाके में रहने के बाद भी गांव से शहर नौकरी या दूसरे कामों की वजह से आना-जाना करना पड़ता था और बैंक बदलने या खाता बदलने की वजह से बीमा प्रीमियम जमा करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़त था.
केंद्रीय मंत्री ने दी अहम जानकारी
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट के जरिए यह बताया कि अब पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक (POSB) के अलावा किसी भी अनुसूचित बैंक में सेविंग अकाउंट होना RPLI के लिए अतिरिक्त पात्रता का अधार माना जाएगा. यानी अब बीमा की सुविधा लेने के लिए सिर्फ डाकघर का बचत खाता होना ही जरूरी नहीं है.

???????? On the eve of India&amp;rsquo;s Independence Day, India Post takes a great leap towards #InsuranceForAll!Advancing Hon&amp;rsquo;ble Prime Minister Shri @narendramodi Ji&amp;rsquo;s vision of universal insurance coverage, under the leadership of Hon&amp;rsquo;ble Union Minister for Communications, Shri @JM_Scindia&amp;hellip; pic.twitter.com/PVJGejEd0n
&amp;mdash; Dr. Chandra Sekhar Pemmasani (@PemmasaniOnX) August 14, 2026


क्या है RPLI का नया नियम?
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर के मुताबिक, अब किसी भी अनुसूचित बैंक का सेविंग अकाउंट रखने वाला व्यक्ति RPLI के लिए पात्र हो सकता है. ऐसे में 18 से 43 साल की उम्र के लोग ग्रामीण डाक जीवन बीमा का ऑप्शन चुन सकते हैं और &amp;nbsp;इसमें 10 लाख रुपये तक का बीमा लिया जा सकता है.
10 लाख की FD पर किस बैंक से मिलेगा ज्यादा रिटर्न?
इससे फैसले से ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर जाने वाले लोगों को प्रीमियम पेमेंट में आसानी होगी. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पॉलिसी जारी रखने के लिए बैंक खाता बदलने की वजह से आने वाली परेशानियां भी काफी हद एक कम होंगी.
पात्रता साबित करने के लिए कौन-सी डॉक्यूमेंट्स चाहिए?
सरकार के मुताबिक RPLI के लिए पात्रता साबित करने &amp;nbsp;में डिजिटल या बैंक से जुड़े डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

CBS स्टेटस&amp;nbsp;
ईमेल स्टेटमेंट
मोबाइल बैंकिंग का स्क्रीनशॉट
ATM स्टेटमेंट
अपडेटेड पासबुक
जहां डिजिटल प्रमाण उपलब्ध हैं, वहां अलग से फिजिकल बैंक सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी.&amp;nbsp;

RPLI कारोबार में भी हुई बढ़ोतरी
डाक विभाग के कारोबार में भी हाल के समय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में डाक विभाग ने 4,008.95 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 22.2 फीसदी ज्यादा है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यह पहली बार है जब इंडिया पोस्ट का पहली तिमाही में कारोबार 4,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है.

इस दौरान पार्सल सेवाओं में 49.9% की बढ़ोतरी हुई.
मेल सेवाओं का कारोबार 41.9% बढ़ा.
अंतरराष्ट्रीय कारोबार में 34.3% की वृद्धि दर्ज की गई.
नागरिक-केंद्रित सेवाओं में 85.7% की बढ़ोतरी दर्ज हुई ही.
पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस और RPLI में 20.1% की बढ़ोतरी हुई.
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक में 9.7% की वृद्धि दर्ज की गई.

नौकरी गई तो नहीं होगी पैसों की टेंशन, 3-6-9 रूल से तैयार करें अपना इमरजेंसी फंड
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सेविंग, अकाउंट, वालों, के, लिए, बदला, डाक, का, ये, नियम, आम, आदमी, को, राहत</media:keywords>
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        <title>पनीर की एक डिश, और तुकाराम मुंडे ने 2 महीने में सस्पेंड कर दिए 165 लाइसेंस</title>
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        <description><![CDATA[ Food Safety Action: अक्सर आपने ये जरूर सुना होगा कि पहले के समय में लोग ज्यादा सेहतमंद रहते थे, क्योंकि दूध, घी,पनीर या दूसरे सामान की क्वालिटी अच्छी होती थी और न ही उनमें मिलावट की जाती थी, लेकिन आज के समय में कई बीमारियां गलत खानपान की वजह से ही होती हैं. आपने भी ऐसे कई मामले सुने होंगे, जिनमें दूध या पनीर जैसे सामान में मिलावट की गई है. ऐसे में Food Safety और खाने की क्वालिटी को लेकर सख्ती करना जरूरी हो जाता है, ताकि मिलावटी सामान खाकर लोगों की सेहत पर गलत असर न पड़े.
महाराष्ट्र के FDA यानी Food and Drug Administration कमिश्नर तुकाराम मुंडे भी इसी को लेकर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं. इस बीच तुकाराम मुंडे का पनीर की डिश को लेकर एक मामला सामने आया है, जिसके बाद Food Safety को लेकर उनकी चर्चा तेज हो गई है. अब जानते हैं आखिर क्या है मामला?
पनीर की डिश से शुरू हुआ शक
NDTV Profit को दिए गए इंटरव्यू में तुकाराम मुंडे ने बताया कि FDA कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालने के बाद एक दोस्त ने उन्हें डिनर के लिए रेस्टोरेंट बुलाया था. वहां उनके एक दोस्त ने पनीर से बनी डिश ऑर्डर की. जब डिश सामने आई तो तुकाराम मुंडे को पनीर की क्वालिटी पर शक हुआ, जिसके बाद मुंडे ने पनीर से बनी डिश न खुद खाई और अपने दोस्त को भी खाने से मना किया. साथ ही इसके बारे में रेस्टोरेंट के मैनेजमेंट को भी बताया.
कमियों को सुधारने के लिए दिया समय
बता दें कि इतना ही नहीं, बल्कि जब तुकाराम मुंडे रेस्टोरेंट में आए थे तो उन्होंने ये भी देखा था कि वहां पर जरूरी Food Licence साफ तौर पर नहीं लगा था. इसके बाद उन्होंने रेस्टोरेंट को इन कमियों को सुधारने के लिए 1 दिन का समय दिया. इसके बाद अधिकारियों को दोबारा जांच करने के लिए कहा गया. बाद में जांच की गई और रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई हुई.
2 महीने में सस्पेंड कर दिए 165 लाइसेंस

तुकाराम मुंडे के मुताबिक, 700 से ज्यादा जगहों को अपनी कमियों को सुधारने के लिए नोटिस दिया गया.
पिछले दो महीनों में FDA ने लगभग 3000 से ज्यादा जगहों पर जांच की.
साथ ही165 लाइसेंस सस्पेंड किए गए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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कैसे पहचाने की पनीर असली है या नकली?

पनीर जब भी खरीदने जाए तो पनीर को हाथ से मसलकर देखें अगर आसानी से टूट रहा है कि सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर रबड़ की तरह लग रहा है तो पनीर में मिलावट हो सकती है.
साथ ही उसे खाकर ये पता करें कि पनीर का स्वाद कैसा है. अगर दूधिया है तब तो सामान्य तरीके से बना पनीर माना जा सकता है, लेकिन अगर पनीर में कड़वापन या दूसरा कोई स्वाद आ रहा है तो उससे सावधान रहें.
पनीर दूध से बनाया जाता है और उसमें खुशबू भी दूध जैसी ही आनी चाहिए, अगर केमिकल या दूसरी गंध आए तो ऐसे पनीर को लेने से बचना चाहिए.
इसके अलावा अगर पनीर किसी दुकान में सामान्य रेट से बहुत ज्यादा कम में मिल रहा है तो ऐसे में उसमें कोई क्वालिटी को लेकर दिक्कत हो सकती है.
एक बात का ध्यान रखें, घर पर किए जाने वाले टेस्ट केवल शुरुआती जांच के लिए है, पनीर की असली पहचान करने के लिए लैब टैस्ट करवाना जरूरी होता है.

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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हर महीने खत्म हो जाती है सैलरी? 80&amp;20 रूल अपनाकर बढ़ाएं बैंक बैलेंस</title>
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        <description><![CDATA[ Salary Saving Tips: पूरे महीने करने के बाद जब सैलरी खाते में आती है, तो ऐसे में ज्यादातर लोग जरूरी खर्चों, शॉपिंग और बिलों में इतना बिजी हो जाते हैं कि कुछ ही दिनों में उनका बैंक बैलेंस तेजी से कम होने लगता है. नतीजा यह होता है कि महीने के आखिरी तक बजट बिगड़ने लगता है और भविष्य के लिए पैसे जोड़ना मुश्किल हो जाता है. अगर आप भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो 80-20 बजटिंग रूल आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. आइए जानते हैं क्या है 80-20 बजटिंग रूल.
क्या होता है 80-20 रूल?
80-20 रूल के तहत आपकी इन-हैंड सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाता है.

सैलरी का 20% हिस्सा बचत और निवेश के लिए अलग रखा जाता है.
बाकी 80% हिस्सा रोजमर्रा के खर्च, बिजली बिल, शॉपिंग और अन्य जरूरी खर्चों के लिए इस्तेमाल की जाती है.&amp;nbsp;

इस नियम की सबसे खास बात यह है कि आपको अलग-अलग खर्चों को जरूरत और शौक की कैटेगरी में बांटने की जरूरत नहीं होती है. इसमें सबसे पहले बचत को प्राथमिकता दी जाती है, उसके बाद ही बाकी रकम को अपनी जरूरत के मुताबिक खर्च के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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क्यों फायदेमंद माना जाता है यह नियम?

यह लोगों में नियमित बचत की आदत विकसित करने में मदद करता है.
निवेश के लिए हर महीने तय रकम अलग हो जाती है.
इससे जरूरत से ज्यादा खर्च करने की आदत पर कंट्रोल करना आसान हो जाता है.
लंबे समय में इमरजेंसी फंड और निवेश कॉर्पस तैयार करने में काफी मदद मिलती है.
बजट बनाने की जटिल प्रक्रिया से बचा जा सकता है.

80-20 रूल को कैसे करें लागू?

सैलरी मिलते ही 20% रकम अलग खाते या निवेश ऑप्शन में ट्रांसफर कर दें.
SIP, RD, PPF या अन्य निवेश योजनाओं में नियमित निवेश करें.
इस पैसे को खर्च के लिए मौजूद रकम से अलग रखें.&amp;nbsp;
अगर आप पर कोई बड़ा कर्ज है, तो उसे जल्दी चुकाने के लिए आप बचत वाले हिस्से का इस्तेमाल कर सकते हैं.
बाकी 80% रकम से घर का किराया, राशन, बिल, यात्रा और मनोरंजन जैसे खर्च पूरे कर सकते हैं.&amp;nbsp;

इन बातों का रखें ध्यान

अपनी बचत को महीने के अंत तक टालने की गलती कभी न करें, बल्कि सैलरी मिलते ही अलग कर दें.
अपनी आय के मुताबिक खर्चों की लिमिट पहले से तय रखें.
क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल सोच-समझकर करें.
सैलरी बढ़ने के साथ बचत और निवेश की रकम भी धीरे-धीरे बढ़ाएं.
अगर 20% बचाना मुश्किल लग रहा है, तो शुरुआत 10% से करें और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाएं.

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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारतीय बैंकों से क्या चाहते हैं पीएम मोदी? लाल किले से बताया</title>
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        <description><![CDATA[ PM Modi Independence Day Speech 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था बैंक और बिजनेस से जुड़े कई बड़े लक्ष्य सामने रखे हैं. इस दौरान उन्होंने बैंकिंग सेक्टर को लेकर ऐसी बात कही जो आने वाले साल में भारतीय बैंकों की ग्लोबल पहचान को बदल सकती है. पीएम मोदी ने कहा कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के टॉप-5 बैंकों में होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय फार्मा कंपनियों को भी दुनिया की पांच सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों में जगह बनाने का टार्गेट दिया है.
बैंक के लिए पीएम ने क्या कहा?लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत का बैंकिंग सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब समय आ गया है कि देश का कोई एक बैंक वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाए. प्रधानमंत्री ने लक्ष्य रखा कि दुनिया के टॉप-5 बैंकों में कम से कम एक भारतीय बैंक का नाम होना चाहिए.&amp;nbsp;
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Fortune 500 में 50 भारतीय कंपनियां
प्रधानमंत्री ने भारतीय बिजनेस के लिए तो इससे भी बड़ा लक्ष्य सामने रखा है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में Fortune 500 की 50 कंपनियां भारत से होनी चाहिए. पीएम मोदी के अनुसार भारत का टार्गेट अब छोटा नहीं हो सकता है. भारतीय कंपनियों को अब वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों के साथ कॉम्पिटिशन करने के लिए तैयार करना होगा.&amp;nbsp;
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क्या है शक्ति की सप्त धारा?
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अगले 5 से 7 सालों में वो हासिल करने का प्रयास करना चाहिए पिछले 5 से 7 सालों में नहीं हो सका है. इसलिए उन्होंने शक्ति की सप्त धारा का जिक्र किया. इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है.
ग्लोबल पहचान में बदलने की तैयारी
पीएम मोदी के भाषण का एक संदेश ये भी रहा कि भारत को सिर्फ अपने बाजार के लिए उत्पादन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. भारतीय कंपनियों को ऐसे उत्पाद और सेवाएं तैयार करनी होंगी, जो दुनिया के बाजार में भी मुकाबला कर सकें. उन्होंने डिजिटल टेक्नोलॉजी और 6G को भी वैश्विक स्तर पर ले जाने की बात कही है. पीएम मोदी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में करीब सात गुना और मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना तेजी आई है जबकि रक्षा उत्पादन भी लगभग चार गुना बढ़े हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारतीय, बैंकों, से, क्या, चाहते, हैं, पीएम, मोदी, लाल, किले, से, बताया</media:keywords>
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    <item>
        <title>पारले का लाइसेंस सस्पेंड, रेड में मिली एक्सपायर्ड Frooti और Appy</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पारले-का-लाइसेंस-सस्पेंड-रेड-में-मिली-एक्सपायर्ड-frooti-और-appy</link>
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        <description><![CDATA[ Parle Agro FDA Raid: फ्रूटी और एप्पी फिज जैसे लोकप्रिय ड्रिंक बनाने वाली कंपनी पार्ले ॲग्रो के मुंबई वाले वेयरहाउस पर महाराष्ट्र एफडीए ने बड़ी कार्रवाई की है. एफडीए की छापेमारी के दौरान यहां काफी ज्यादा एक्सपायर्ड खाने के सामान का स्टॉक मिला है. इसके बाद अधिकारियों ने करीब 99,970 का एक्सपायर्ड स्टॉक जब्त किया और वेयरहाउस का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है.
ये कार्रवाई मुंबई में एफडीए की ओर से चलाए जा रहे फूड सेफ्टी अभियान के बीच हुई है. अधिकारियों ने इस वेयरहाउस को सील कर दिया है और वहां से सामान बाहर ले जाने या बेचने पर रोक भी लगा दी गई है.&amp;nbsp;
वेयरहाउस में क्या-क्या मिला?
महाराष्ट्र एफडीए की टीम ने मुंबई के चेंबूर इलाके में स्थित पार्ले ॲग्रो के वेलोसिटी एक्सप्रेस वेयरहाउस पर छापेमारी की थी. ये वेयरहाउस एलयू गडकरी मार्ग के प्रयाग नगर, वाशी नाका इलाके में स्थित है. जांच के दौरान अधिकारियों को फ्रूटी, एप्पी फिज और कैंडी जूस के काफी सारे एक्सपायर्ड बैच मिले. अब इन सामानों की बिक्री और उन्हें दूसरी जगह ले जाने पर रोक लगा दी गई. जब्त किए गए स्टॉक की टोटल कीमत ही करीब 99,970 रुपए बताई गई है.
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कितने घंटे चली कार्यवाई?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एफडीए की कार्रवाई 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे शुरू हुई और अगले दिन 14 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे तक चली थी. इस ऑपरेशन में FDA के आठ अधिकारी शामिल थे. अधिकारियों ने एक्सपायर्ड स्टॉक को जब्त करने के साथ वेयरहाउस को सील कर दिया. इसके अलावा उत्पादों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे दो वाहनों को भी कब्जे में लिया गया.
लाइसेंस क्यों हुआ सस्पेंड?
FDA ने कार्रवाई के बाद वेयरहाउस का फूड बिजनेस लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है. अधिकारियों ने कहा है कि आगे के आदेश तक इस परिसर से किसी भी खाने का सामान या पीने के सामान की बिक्री या आवाजाही की अनुमति नहीं होगी. ये कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या सप्लाई को लेकर बरती जा रही सख्ती के तहत की गई है.
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क्या लोगों ने पी है एक्सपायर्ड फ्रूटी?
रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि जब्त किया गया एक्सपायर्ड स्टॉक बाजार में बिक्री के लिए पहुंच चुका था या किसी ग्राहक ने इसे खरीदा था. FDA ने फिलहाल बस स्टॉक को बिक्री और ट्रांसपोर्ट से रोक दिया है. इसलिए इस घटना को लेकर ग्राहकों के बीच किसी तरह की अफवाह पर भरोसा करने के बजाय अपडेट का इंतजार करना चाहिए.&amp;nbsp;
लगातार चल रही है कार्रवाई
पार्ले ॲग्रो के वेयरहाउस पर ये कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र FDA मुंबई में फूड सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर लगातार निरीक्षण कर रहा है. इससे पहले 12 अगस्त को डोमिनोज पिज्जा के चार आउटलेट्स के फूड बिजनेस लाइसेंस भी सस्पेंड किए गए थे.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>15 अगस्त के दिन कितने का मिल रहा है गैस सिलेंडर, जानें एलपीजी की नई रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/15-अगस्त-के-दिन-कितने-का-मिल-रहा-है-गैस-सिलेंडर-जानें-एलपीजी-की-नई-रेट-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/15-अगस्त-के-दिन-कितने-का-मिल-रहा-है-गैस-सिलेंडर-जानें-एलपीजी-की-नई-रेट-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 15 August 2026: घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत हर महीने की शुरुआत में लोगों की नजर में रहती है. ऐसे में 15 अगस्त 2026 को एलपीजी ग्राहकों के लिए सवाल है कि आज 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव हुआ है या नहीं. दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपए प्रति 14.2 किलो बनी हुई है. वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2,738 प्रति 19 किलो है. मुंबई में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 941.50 रुपए बताई गई है. यानी दिल्ली के मुकाबले मुंबई में घरेलू सिलेंडर थोड़ा सस्ता है.
आज सिलेंडर सस्ता हुआ या महंगा?
15 अगस्त को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई नया बदलाव देखने को नहीं मिला है. दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर 942 रुपए में मिल रहा है. पिछले महीने भी दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपए थी. हालांकि, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए बात अलग है. दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,738 रुपए है, जो जुलाई के 2,930 रुपए के मुकाबले 192 रुपए कम है.
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कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ सस्ता
अगस्त की शुरुआत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती हुई थी. दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर का रेट जुलाई के 2,930 रुपए से घटकर 2,738 रुपए हो गया है. यानी होटल, रेस्टोरेंट को प्रति सिलेंडर 192 की राहत मिली है. वहीं, घरेलू एलपीजी की कीमत में इस समय कोई कटौती नहीं हुई है.
एलपीजी ई-केवाईसी को लेकर भी जरूरी अपडेट
एलपीजी कीमतों के साथ इस समय ग्राहकों के लिए आधार बेस्ड ई-केवाईसी भी जरूरी है. इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के घरेलू ग्राहकों को केवाईसी पूरा करने के लिए 16 अगस्त 2026 की डेडलाइन दी गई है. केवाईसी पूरी नहीं होने पर घरेलू दर पर सिलेंडर लेने में परेशानी हो सकती है.
65 के बाद भी संभाल रहीं करोड़ों का कारोबार, भारत की इन महिलाओं ने बनाई अलग पहचान
क्या सस्ता हो सकता है?
घरेलू एलपीजी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी और कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ सरकार की नीतियों और तेल कंपनियों की लागत का असर पड़ता है. फिलहाल आंकड़ों में 15 अगस्त को घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई नई कटौती नहीं दिख रही है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>8th Pay Commission: 55 से 18000 का सफर, बेसिक पे कैसे बदला?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-55-से-18000-का-सफर-बेसिक-पे-कैसे-बदला</link>
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        <description><![CDATA[ 8th वेतन आयोग: केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की नजर इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले वेतन आयोग में बेसिक पे कितना होगा और सैलरी कितनी बढ़ सकती है. लेकिन 8वें वेतन आयोग के आंकड़ों पर जाने से पहले ये जानना दिलचस्प है कि आखिर आज 18,000 रुपये तक पहुंची न्यूनतम बेसिक सैलरी का सफर शुरू कहां से हुआ था?
केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब आठ दशकों में 55 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो चुकी है. हर वेतन आयोग ने न सिर्फ सैलरी बढ़ाई, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन तय करने के तरीके में भी बदलाव किया.
पहला केंद्रीय वेतन आयोगपहला वेतन आयोग सन 1946 में लागू हुआ था. यानी देश की आजादी से पहले ही सरकारी कर्मचारियों के वेतन के लिए ये व्यवस्था शुरू हो गई थी. पहले वेतन आयोग में कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 55 रुपये प्रति महीने थी. वहीं अधिकतम बेसिक पे 2,000 रुपये थी.&amp;nbsp;
पारले का लाइसेंस सस्पेंड, रेड में मिली एक्सपायर्ड Frooti और Appy
दूसरा वेतन आयोग
फिर दूसरा वेतन आयोग सन 1959 में प्रभावी हुआ. इसमें न्यूनतम बेसिक पे को 55 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति महीने कर दिया गया. तब अधिकतम बेसिक सैलरी भी बढ़कर 3,000 रुपये हो गई.&amp;nbsp;तीसरा वेतन आयोगतीसरे वेतन आयोग के लागू होने तक न्यूनतम बेसिक पे में और बड़ा बदलाव हुआ. ये आयोग सन 1973 में प्रभावी हुआ और इसके तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर 196 रुपये प्रति महीने हो गई. वहीं अधिकतम बेसिक पे 3,500 रुपये तय की गई. महज कुछ दशकों में न्यूनतम बेसिक पे 55 रुपये से बढ़कर करीब 200 रुपये तक तो पहुंच ही गई थी.
चौथा वेतन आयोग
चौथे वेतन आयोग ने न्यूनतम बेसिक सैलरी में एक और बड़ा बदलाव किया. ये आयोग सन 1986 में लागू हुआ और न्यूनतम बेसिक पे बढ़कर 750 रुपये प्रति महीने हो गई. इस आयोग के तहत अधिकतम बेसिक पे 8,000 रुपये तक पहुंच गई.
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पांचवा वेतन आयोगसन 1996 में लागू हुए पांचवें वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई. इसे 750 रुपये से बढ़ाकर 2,550 रुपये प्रति महीने कर दिया गया. वहीं अधिकतम बेसिक पे 26,000 रुपये तय की गई.
छठा वेतन आयोगछठा वेतन आयोग 2006 में प्रभावी हुआ. इसमें न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति महीने किया गया. इस आयोग के दौरान अधिकतम बेसिक पे 80,000 रुपये तक पहुंच गई. यानी 5वें से 6वें वेतन आयोग के बीच भी सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव हुआ.
सातवां वेतन आयोग
अब आते हैं मौजूदा 7वें वेतन आयोग पर. यह 2016 में लागू हुआ और इसमें केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति महीने कर दिया गया. वहीं अधिकतम बेसिक पे 2.5 लाख रुपये तय की गई. लेकिन 7वां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण नहीं था. इसमें सरकारी कर्मचारियों के वेतन स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव किया गया.
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आठवे वेतन आयोगअब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 18,000 रुपये के बाद अगला आंकड़ा क्या होगा? अब 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक पे कितनी होगी ये तय नहीं हुई है. आयोग की सिफारिश आने और सरकार की ओर से उसे मंजूरी मिलने के बाद ही नई बेसिक सैलरी का ऑफिशियल आंकड़ा सामने आएगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>नम्रता अडाणी का स्पोर्ट्स विजन, 630 से ज्यादा स्कूलों तक पहुंचा ISSO नेटवर्क</title>
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        <description><![CDATA[ Namrata Adani News: अडानी इंटरनेशनल स्कूल और आईएसएसओ एडवाइजरी बोर्ड की फाउंडिंग डायरेक्टर नम्रता अडानी आईएसएसओ का बड़ा विस्तार हो रहा है. आईएसएसओ यानी इंटरनेशनल स्कूल्स स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन अपने अब तक के सबसे बड़े स्पोर्ट्स सीजन की शुरुआत कर रहा है.
अडानी इंटरनेशनल स्कूल में आईबी और कैम्ब्रिज जैसे ग्लोबल करिकुलम के साथ-साथ स्पोर्ट्स और ओवरऑल डेवलपमेंट पर खास ध्यान दिया जाता है. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आईएसएसओ अब भारत के स्कूल स्पोर्ट्स सिस्टम को बड़े लेवल पर मजबूत कर रहा है.
आईएसएसओ की तेजी से बढ़ती रीच
पिछले दो सालों में आईएसएसओ का नेटवर्क काफी तेजी से बढ़ा है. साल 2024-25 में 440 स्कूलों से बढ़कर 2025-26 में &amp;nbsp;630 से ज्यादा स्कूल हो गए हैं. वहीं, अब 2026-27 के सीजन में &amp;nbsp;630 से ज्यादा स्कूलों के 21 हजार 100 से बढ़कर 28 हजार से ज्यादा छात्र-एथलीट्स के हिस्सा लेने की उम्मीद है. यह ग्रोथ दिखाती है कि पेरेंट्स, स्कूल और टीचर्स का आईएसएसओ पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
पूरा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम है आईएसएसओ

आईएसएसओ केवल मैच या कॉम्पिटिशन करवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के ओवरऑल स्पोर्ट्स करियर के लिए कई नई पहल चला रहा है...
यह एक रेजिडेंशियल हाई-परफॉरमेंस ट्रेनिंग कैंप है, जहां देश और विदेश के बेहतरीन और सर्टिफाइड कोचेस बच्चों को एडवांस ट्रेनिंग देते हैं.
अच्छे खिलाड़ियों के लिए अच्छे कोच जरूरी हैं. इसके लिए आईएसएसओ ने दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स बॉडीज, जैसे ISF Academy, FIBA, ITTF, BWF और Kukkiwon के साथ मिलकर कोचेस के लिए इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किए हैं.
यह प्रोग्राम उन बच्चों के लिए है जो स्पोर्ट्स में अपना करियर या हायर स्टडीज देखना चाहते हैं. यह बच्चों को यूनिवर्सिटीज, स्पोर्ट्स प्रोफेशनल्स और इंडस्ट्री लीडर्स से कनेक्ट करता है.
आईएसएसओ ने DP World PGTI के साथ पार्टनरशिप की है, जिससे यंग गोल्फर्स को आगे बढ़ने का सही रास्ता मिल सके.

आने वाले बड़े इवेंट्स
सितंबर 2026 से आईएसएसओ कई बड़े नेशनल चैंपियनशिप्स होस्ट करने जा रहा है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं...

फुटबॉल
टेनिस
चेस
स्विमिंग
जूडो, ताइक्वांडो और कराटे
बैडमिंटन

हर बच्चे को खेल की ताकत पहचानने का मौका मिलना चाहिए- नम्रता अडानी
आईएसएसओ को लेकर नम्रता अडानी का कहना है, &#039;&#039;हर बच्चे को खेल की ताकत पहचानने का मौका मिलना चाहिए. ISSO का मकसद सिर्फ मुकाबला कराना नहीं, बल्कि बच्चों को आगे बढ़ना, सीखना और लीडर बनना सिखाना है. नम्रता अडानी के नेतृत्व में ISSO भारत में स्कूली खेलों के भविष्य के लिए एक मज़बूत आधार तैयार कर रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>​RBI ने बदला बड़ा नियम, ये फैसिलिटी समय से पहले होगी बंद</title>
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        <description><![CDATA[ RBI News: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने देश में विदेशी मुद्रा यानी डॉलर लाने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की थी. ये योजना थी FCNR (Foreign Currency Non Resident), जिसके तहत जो भारतीय विदेश में रहते हैं वो अपनी विदेशी मुद्रा को भारत में FD के रूप में जमा कर दें. इस योजना के जरिए उम्मीद से भी ज्यादा पैसा मिल गया है. जिसके बाद अब इसे जल्दी ही कुछ समय के लिए बंद किए जाने का फैसला भी कर लिया गया है.
कब बंद हो रही सुविधा?दरअसल RBI ने ये FCNR(B) डिपॉजिट के लिए शुरू की गई स्वैप सुविधा तय समय से पहले बंद करने का फैसला लिया है. RBI ने बताया कि इस योजना को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इसके जरिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश में आई है. अब बैंक 31 अगस्त 2026 तक जुटाए गए FCNR(B) डिपॉजिट पर ही RBI से स्वैप करा सकेंगे. इसके लिए RBI से स्वैप लेने की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026 होगी.
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RBI का आया बयानइसकी जानकारी देते हुए RBI ने एक बयान जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि, &#039;FCNR(B) डिपॉजिट की स्वैप सुविधा को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इससे देश में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आई है. इसलिए अब ये सुविधा 31 अगस्त 2026 तक जमा किए गए FCNR(B) डिपॉजिट के लिए ही उपलब्ध होगी. इन डिपॉजिट पर बैंक 11 सितंबर 2026 तक RBI से स्वैप सुविधा ले सकेंगे. हालांकि, ECB और OFCB के लिए स्वैप सुविधा पहले की तरह 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी&#039;.
अब तक कितना हुआ फायदा?RBI ने अपने आंकड़े भी जारी किए हैं और बताया है कि अब तक कितनी विदेशी मुद्रा देश में आ चुकी है. इन आंकड़ों के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 तक इस सुविधा के तहत 56.85 अरब डॉलर (करीब 5.42 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा देश में आई है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा FCNR(B) डिपॉजिट का रहा, जिससे 52.3 अरब डॉलर (करीब 4.99 लाख करोड़ रुपये) आए. इसके अलावा OFCBs से 2.81 अरब डॉलर (करीब 2.68 लाख करोड़ रुपये) और ECBs से 1.74 अरब डॉलर (करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये) आए.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 02:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Inflation: हरी सब्जियों के दाम बढ़े, फ्री धनिया&amp;मिर्च भी मिलना बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Vegetable Price Hike: पिछले कुछ महीनों से भारतीय किचन का बजट गड़बड़ हो रहा है. पहले कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने के कारण राशन से लेकर रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों की कीमतें बढ़ीं. ये सबकुछ ईरान और यूएस के बीच चल रहे तनाव के कारण हो रहा था. तो वहीं अब मानसून सीजन के कारण सब्जियो की कीमतों में भी भारी इजाफा देखने को मिल रहा है.
मुफ्त नहीं मिलेगा धनिया-मिर्चसब्जी खरीदते समय हर महिला, पुरुष या बच्चे को मुफ्त में धनिया- मिर्च लेने की आदत सी हो गई थी. लेकिन अब इस आदत को बदलना पड़ेगा. क्योंकि अब धनिया की एक छोटी सी गड्डी भी बड़ी महंगी पड़ने वाली है. भारी बारिश के कारण धनिया की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसकी वजह से कुछ बाजारों में इसकी कीमत 220 से 230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. थोक बाजार में इसकी कीमत करीब 175 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है. तो वहीं मिर्च की कीमत में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. बारिश के कारण इसकी सप्लाई भी प्रभावित हो रही है.
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ये सब्जियां भी हुईं महंगीधनिया ही नहीं बल्कि इसके साथ- साथ अदरक, लहसुन और प्याज भी पिछले साल के मुकाबले महंगे हो गए हैं. अदरक की महंगाई जुलाई में बढ़कर 83.62% हो गई, जबकि जून में ये 50.41% थी. इसी तरह लहसुन की महंगाई 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई. प्याज भी महंगा हुआ है. इसकी महंगाई जुलाई में 22.54% रही, जो जून में सिर्फ 4.73% थी.
कुछ में आई गिरावटहालांकि ऐसा नहीं है कि सभी सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं. कुछ सब्जयां ऐसी भी हैं जिनके दामों में गिरावट देखने को मिली है. जैसे आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 16.56% की गिरावट आई है. टमाटर और मटर भी पहले के मुकाबले सस्ते हुए हैं. दामों बढ़ोतरी केवल हरी सब्जियों के हुई, क्योंकि बारिश के मौसम में ये सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं.
बारिश है बड़ी वजहज्यादातर सब्जियां धनिया, आलू- प्याज महाराष्ट्र के नासिक से आते हैं. ऐसे में नासिक जैसे प्रमुख इलाकों में इस समय भारी बारिश हो रही है, जिसके कारण खेतों से बाजार तक सब्जियों की सप्लाई प्रभावित हुई है. धनिया जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए इसकी सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट आने पर कीमत तेजी से बढ़ सकती है. तो वहीं प्याज बारिश में भीगने से जल्दी खराब हो जाता है, जिसके कारण इसकी कीमतों में भी इजाफा होता है.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Blinkit, Zepto और Instamart पर FDA का एक्शन, 14 लाइसेंस सस्पेंड</title>
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        <description><![CDATA[ FDA Suspended Licence of Online Delivery Stores: FDA यानी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की महाराष्ट्र में लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई चल रही है. जिसमें 10 मिनट वाली ऑनलाइन ग्रोसरी डिलरीवरी एप्स के डार्क रूम और स्टोरेज पर लागातर छापेमार कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में 13 अगस्त को भी महाराष्ट्र में कई अलग- अलग जगहों पर ये कार्रवाई हुई, जिसमें करीब 14 लाइसें सस्पेंड किए गए हैं.
ब्लिंकइट, जेप्टो और इंस्टामार्ट पर छापेमारीदरअसल महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर 13 अगस्त 2026 को खाद्य विभाग के द्वारा विशेष जांच अभियान चलाया गया था. इस दौरान महाराष्ट्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खाना और खाद्य सामान बेचने वाली 86 जगहों की जांच की गई. इनमें से एक जगह को कारोबार अस्थायी रूप से बंद करने के आदेश दिए गए है, जबकि 60 सुधार नोटिस जारी किए गए. हालांकि, किसी भी फूड लाइसेंस को रद्द नहीं किया गया.
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14 फूड बिजनेस लाइसेंस रद्दइस कार्रवाई के दौरान 14 लाइसेंस सस्सपेंड किए गए हैं. इन सस्पेंड किए गए लाइसेंस में ब्लिंकइट की 5 और जेप्टो की 5 सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा इंस्टामार्ट से जुड़ी 2 जगहों के लाइसेंस भी सस्पेंड किए गए. भगवती स्टोर और स्विइंस्टा ENT Pvt Ltd के लाइसेंस पर भी कार्रवाई हुई है.
मुंबई में मिली कई गड़बड़ियांइस जांच के दौरान मुंबई में कई क्विक-कॉमर्स स्टोर्स में साफ-सफाई और खाने के सामनों को रखने के तरीके में गंभीर कमियां मिलीं. घाटकोपर के ब्लिंकइट सेंटर में गंदे स्टोरेज रैक, खाने और नहीं खाने वाली चीजों को साथ रखा गया, सड़ी हुई सब्जियां और कॉकरोच भी मिले. सेंटर की छत और फर्श भी खराब थे. मेडिकल जांच और पीने के पानी की जांच से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं मिले. इसके अलावा बांद्रा और अंधेरी में भी धूल- जाने, कचरा, चूहो की बीट मिले. साथ ही इनके रिकॉर्ड भी अधूरे मिले थे.
बता दें कि जिस सेंटर का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किया गया है, वो सस्पेंशन अवधि में खाने- पीने की चीजों की खरीदी या बिक्री नहीं कर सकते. इस कार्रवाई से पता चलता है कि ऑनलाइन डिलीवरी सिस्टम लोगों को कितना अंधेरे में रखता है. ऐसे में अब जब भी आप ऑनलाइन कुछ ऑर्डर करें तो काफी सोच- समझकर ही करें.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सोना खरीदने का बढ़िया मौका! एक दिन में 2800 रुपया हुआ सस्ता; जानें आज का लेटेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोना-खरीदने-का-बढ़िया-मौका-एक-दिन-में-2800-रुपया-हुआ-सस्ता-जानें-आज-का-लेटेस्ट-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today on August 14, 2026: सोने-चांदी की कीमतों में कल यानी कि 13 अगस्त, गुरुवार को बड़ी गिरावट देखी गई. दिल्ली के सर्राफा बाजार में कल सोने की कीमतों में 2800 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी गिरावट दर्ज की गई. इस बड़ी गिरावट के साथ सोने की कीमतों में पिछले सात दिनों से लगातार चली आ रही तेजी पर ब्रेक लगा है. सोने के साथ-साथ कल चांदी की भी कीमतों में भारी बिकवाली देखी गई. इसी के साथ चांदी का भाव भी 6000 रुपये टूटकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है.&amp;nbsp;
दिल्ली में सोने का नया भाव
कीमतों में इस बड़ी गिरावट के बाद दिल्ली में 24 कैरेट वाले सोने की कीमत 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो पिछले सत्र में 1,59,800 रुपये के स्तर पर बंद हुई थी.&amp;nbsp;
सोने में आज भी गिरावट
कल की ही तरह सोने की कीमतों में आज भी गिरावट देखी जा रही है. 24 कैरेट सोने की कीमतों में कल के मुकाबले आज मामूली 10 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,53,590 रुपये है, जो कल 1,53,600 रुपये थी.&amp;nbsp;
22 और 18 कैरेट की कितनी है कीमत?
आज 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,40,790 रुपये है. इसमें भी कल के मुकाबले 10 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. वहीं, 18 कैरेट वाला सोना भी आज गुरुवार के मुकाबले 10 रुपया सस्ता बिक रहा है. इसकी कीमत प्रति 10 ग्राम &amp;nbsp;1,15,190 रुपये है.&amp;nbsp;
आज चांदी की कितनी है कीमत?&amp;nbsp;
सोने की ही तरह आज चांदी में भी मामूली गिरावट देखी जा रही है. चांदी की कीमत आज प्रति किलोग्राम 10 रुपये की गिरावट के साथ 2,54,900 रुपये है, जो कल 2,55,000 रुपये पर है. इसी क्रम में आज चांदी की कीमत प्रति ग्राम 254.90 रुपये, प्रति 8 ग्राम 2,039.20 रुपये, प्रति 10 ग्राम 2,549 रुपये, प्रति 100 ग्राम 25,490 रुपये है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>अब ट्रंप ने इन चीजों पर ठोका 100% टैक्स, नए फरमान से हिल गईं दुनिया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-ट्रंप-ने-इन-चीजों-पर-ठोका-100-टैक्स-नए-फरमान-से-हिल-गईं-दुनिया</link>
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        <description><![CDATA[ Trump New 100% Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिका की निर्भरता को कम करने के मकसद से बाहर से मंगाए जाने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है.
व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है.&amp;nbsp;यह टैरिफ उन संवेदनशील ड्रोनों पर है, जिनका वजन 25 किलोग्राम से ज्यादा है या जिनमें थर्मल इमेजिंग जैसी एडवांस सुरक्षा तकनीक है. राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में नहीं आने वाले छोटे ड्रोनों पर 25% का कम टैरिफ लगेगा.&amp;nbsp;
ट्रंप का क्या है मकसद?
भले ही यह टैरिफ सभी देशों से आने वाले ड्रोनों पर लागू होता है, लेकिन इसका मुख्य निशाना चीन है. चीनी ड्रोन टेक्नोलॉजी के वर्चस्व को तोड़ने के लिए यह भारी-भरकम टैरिफ सिर्फ उन्हीं श्रेणियों में लगाया गया है, जहां चीन का एकाधिकार है. जैसे कि चीन का ग्लोबल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट मार्केट पर दबदबा है.
अमेरिका के कमर्शियल मार्केट में लगभग 80% ड्रोन चीन से ही आते हैं. अमेरिका में हॉलीवुड से लेकर कंटेंट क्रिएशन, रियल एस्टेट और एग्रीकल्चरल सेक्टर में भी चीनी ड्रोन्स का इस्तेमाल होता है. चीनी टेक कंपनी DJI (Da-Jiang Innovations) का दुनिया के कमर्शियल ड्रोन मार्केट्स पर 70% से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है.
ट्रंप के निशाने पर चीन
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा कि इन उपायों का मकसद ड्रोन और उनके पार्ट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना है. ज्यादातर नए टैरिफ 3 सितंबर से लागू होने वाले हैं. पिछले हफ्ते चीन ने जबरदस्ती मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमेरिका को ड्रोन के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था. चीन ने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन और 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाने के कुछ दिनों बाद उठाया.&amp;nbsp;
ट्रंप के फैसले का भारत पर असर?
ट्रंप ने भले ही भारत को 100% की सबसे सख्त श्रेणी के तहत नहीं रखा है, लेकिन भारतीय ड्रोन एक्सपोटर्स पर भी दबाव कुछ कम नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका भारतीय कमर्शियल और छोटे ड्रोनों पर भी 25% टैरिफ लगा रहा है. हालांकि, इसकी एक अच्छी बात यह है कि अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन मार्केट पर चीन का दबदबा कम होगा, तो यह ideaForge, Drone Acharya और Garuda Aerospace जैसी भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजारों में पैर पसारने का एक बढ़िया मौका भी होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, ट्रंप, ने, इन, चीजों, पर, ठोका, 100, टैक्स, नए, फरमान, से, हिल, गईं, दुनिया</media:keywords>
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        <title>ललित मोदी को गिफ्ट में मिली &amp;apos;हीरे की चम्मच&amp;apos;, उनका दिलचस्प जवाब हुआ वायरल</title>
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        <description><![CDATA[ Lalit Modi News:&amp;nbsp;आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उन्हें मिला एक खास गिफ्ट है. ललित मोदी को एक ज्वेलर की तरफ से &amp;lsquo;डायमंड स्पून&amp;rsquo; यानी हीरे की चम्मच के डिजाइन वाला नेकलेस गिफ्ट में मिला है. उन्होंने इस गिफ्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
वीडियो शेयर करते हुए ललित मोदी ने कहा, जैसा कि मैं हमेशा कहता हूं, मैं डायमंड स्पून के साथ पैदा हुआ था. ये बहुत सुंदर है. &amp;nbsp;उन्होंने इस खास गिफ्ट के लिए ज्वेलर को धन्यवाद भी दिया. &amp;nbsp;उनका ये जवाब सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया. डायमंड स्पून वाली बात ललित मोदी के लिए नई नहीं है. वो पहले भी अपनी लग्जरी लाइफ को लेकर इस तरह की बात कर चुके है.
कौन हैं ललित मोदी?
ललित मोदी IPL के संस्थापक और पहले चेयरमैन रहे हैं. IPL को शुरू करने में उनकी बड़ी भूमिका थी. वो BCCI के उपाध्यक्ष और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. ललित मोदी 2010 में भारत से बाहर चले गए थे और तब से विदेश में रह रहे हैं. वो अपनी महंगी और लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहते हैं.
दिल्ली में प्रदूषण के नाम पर वसूले 843 करोड़, नहीं हुए खर्च, डेटा भी गायब- CAG



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अभी कहां हैं और भारत कब आएंगे
ललित मोदी फिलहाल विदेश में रहते हैं. जुलाई 2026 में एक बड़े कानूनी मामले में ट्रिब्यूनल से राहत मिलने के बाद उन्होंने भारत लौटने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि वो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में भारत वापस आ सकते हैं.
ये मामला 2009 में दक्षिण अफ्रीका में हुए IPL से जुड़ा था. SAFEMA के अनुसार बने अपीलीय ट्रिब्यूनल ने इस मामले में ललित मोदी और दूसरे लोगों को बड़ी राहत दी थी. फिलहाल भारत लौटने की कोई फिक्स तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन ललित मोदी ने जल्द भारत आने की इच्छा साफ तौर पर जाहिर की है.
&#039;मस्क ने ब्रिटेन को खरीद लिया&#039;, यूजर के पोस्ट पर अरबपति ने पूछा- कितनी है देश की कीमत?
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आज 14 अगस्त को कितनी है गैस सिलेंडर की कीमत? जानें दिल्ली से पटना तक के रेट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Rate Today on August 14, 2026: आज देश की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट भी स्थिर रखे गए हैं. हालांकि, महीने की पहली तारीख को इनमें 192 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी.
शहरवार LPG की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत
19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
942 रुपये
2,738 रुपये


मुंबई
941.50 रुपये
2,691.50 रुपये&amp;nbsp;


नोएडा
939.50 रुपये
2,738 रुपये


जयपुर
945.50 रुपये
2,765.50 रुपये


हैदराबाद&amp;nbsp;
994.00 रुपये
2,985.00 रुपये


पटना
1,031.50 रुपये
3,018.00 रुपये


चंडीगढ़&amp;nbsp;
&amp;nbsp;951.50 रुपये
2,760.00 रुपये


कोलकाता
968 रुपये
2,872.50 रुपये



देश का क्या है आगे प्लान?
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है और पश्चिम एशिया में तनाव की बीच इसकी कोशिश &amp;nbsp;अपनी सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने की है. इसी के चलते भारत 2027 के लिए सालाना कॉन्ट्रैक्ट के तहत अमेरिका से और ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) हासिल करने के लिए बातचीत कर रहा है.
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का हवाला देते हुए ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन - को निर्देश दिया है कि वे 2027 के लिए भारत के LPG आयात का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी टर्म कॉन्ट्रैक्ट के जरिए हासिल करें.&amp;nbsp;
अमेरिका, भारत के लिए सबसे बड़ा सप्लायर
अमेरिका धीरे-धीरे भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बनता जा रहा है. इस साल अगस्त तक वहां से रिकॉर्ड 3.9 मिलियन टन LPG की सप्लाई हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी रिफाइनरी कंपनियां संभावित सप्लायर्स और उनके ऑफर्स की जांच-पड़ताल करने के बाद अमेरिकी LPG के लिए एक जॉइंट टेंडर जारी करने की योजना बना रही हैं.
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार भारत को एनर्जी एक्सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस इंपोर्टर्स में से एक है. हालांकि, दोनों देशों के बीच पिछले साल से ट्रेड डील पर चल रही बातचीत पर अभी तक कोई मुहर नहीं लग पाई है.

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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>हफ्ते के आखिरी दिन लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स&amp;निफ्टी दोनों लुढ़के</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हफ्ते-के-आखिरी-दिन-लाल-निशान-पर-खुला-शेयर-बाजार-सेंसेक्स-निफ्टी-दोनों-लुढ़के</link>
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        <description><![CDATA[ Share Market Today on August 14, 2026: भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत आज सुस्ती के साथ हुई है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों तक चुका है. वही, एनएसई निफ्टी भी लाल निशान में फिसलकर 24350 के स्तर पर कारोबार करता नजर आ रहा है. सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज पर गिफ्ट निफ्टी सुबह से ही कमजोर शुरुआत के संकेत दे रहा था, जिसका असर आज शेयर बाजार खुलने पर दिखा.
क्यों आज दबाव में है शेयर बाजार?
अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी बढ़ाने की चेतावनी दी है, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध भड़कने की संभावनाएं फिर से तेज हो गई हैं. इसका असर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है, जो 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुका है. विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी इस बीच भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना निवेश निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज निफ्टी का सपोर्ट लेवल 24,250-24,300 के दायरे में रहेगा, जबकि ऊपरी स्तर पर 24,600 पार करने के बाद ही कोई बड़ी तेजी देखने को मिली.&amp;nbsp;
आज किन कंपनियों के आएंगे Q1 नतीजे?
शुक्रवार को कई प्रमुख कंपनियां अपने जून तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली हैं, जिनमें NMDC, अशोक लेलैंड, भारत डायनामिक्स, एल्केम लैबोरेटरीज, ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ़ इंडिया, वोल्टास और कोचीन शिपयार्ड जैसी कंपनियां हैं.

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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हफ्ते, के, आखिरी, दिन, लाल, निशान, पर, खुला, शेयर, बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी, दोनों, लुढ़के</media:keywords>
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        <title>Bill Gates की बेटी को हो सकती है 20 साल जेल की सजा, लेकिन क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bill-gates-की-बेटी-को-हो-सकती-है-20-साल-जेल-की-सजा-लेकिन-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ Bill Gates Daughter: माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स की बेटी फोएबे गेट्स इन दिनों काफी मुश्किल में फंस गई हैं. उनके ऊपर अपने नए स्टार्टअप में &#039;कुकिंग स्टफिंग&#039; के आरोप लगे हैं. इन आरोपों के चलते हो सकता है कि फोएबे को कुछ सालों के लिए जेल भी हो जाए. रिपोर्ट्स की मानें को फोएबे करीब 20 साल के लिए जेल जा सकती हैं.
क्या है पूरा मामला?दरअसल बिल गेट्स की बेटी फोएबे गेट्स ने कुछ समय पहले ही अपने नए स्टार्टअप की शुरुआत की है. Phis नाम से उन्होंने एक नया ब्राउजर एक्सटेंशन स्टार्ट किया था, जिस पर करीब 30 मिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट किया गया है. ये ब्राउज एक्सटेंशन ऑनलाइन रिटेलर्स के यहां डिस्काउंट कोड ढूंढता है. जिससे खरीदार और रिटेलर्स दोनों की ही मदद होती है. लेकिन हाल ही में इ स्टार्टअप में &#039;कुकी स्टफिंग&#039; की शिकायत की गई है.&amp;nbsp;
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क्या है &#039;कुकी स्टफिंग&#039;?दरअसल &#039;कुकी स्टफिंग&#039; वो होता है जब कई ब्राउजर अपने काम की फेक रिपोर्ट दिखाता है. जैसे कि मान लीजिए कोई ब्राउजर एक्सेटेंशन जैसे Phia ही लोगों को खरीदारी के बाद चेकआउट के समय कोई कूपन कोड सजेस्ट करता है, तो सॉफ्टवेयर एक &#039;कुकी&#039; यानी एक छोटी ट्रैकिंग फाइल डालता है, जिससे पता चलता है कि Phia ने सेल पूरी करने में मदद की है, जिससे उसे कमीशन मिलता है. &#039;कुकी स्टफिंग&#039; तब होती है जब वो फाइल डाल दी जाती है, भले ही खरीदारी में प्लेटफॉर्म की कोई भूमिका न रही हो.
रिपोर्ट में क्या आया सामने?ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि Phia ने जुलाई में कहा था कि उन्हें इस समस्या के बारे में पिछले 24 घंटों में ही पता चला है और इसे एक तकनीकी खराबी (ग्लिच) बताया था. वहीं ये रिपोर्ट बताती है कि संस्थापकों को इसके बारे में कम से कम सात महीने पहले से पता था. रिपोर्ट में इंटरनल स्लैक मैसेज और मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का हवाला देते हुए, बताया गया है कि चेकआउट प्रोसेस में कुकीज तब भी डाली जाती थीं, जब खरीदारों ने Phia का इस्तेमाल नहीं किया होता था.
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ये सिलसिला कम से कम दिसंबर से चल रहा था और इसमें नाइक, गैप और नॉर्डस्ट्रोम जैसे रिटेलर्स शामिल थे. रिपोर्ट के मुताबिक, Phia की ज्यादातर कमाई इसी से होती थी. ब्लूमबर्ग ने बताया कि जुलाई में इन फीचर को बंद करने के बाद, औसत रोजाना कमाई लगभग 80,000 डॉलर से घटकर 10,000 डॉलर और 28,000 डॉलर के बीच रह गई. जून में, Phia ने जिस मर्चेंडाइज वैल्यू का क्रेडिट लिया था, उसमें से लगभग 51% हिस्सा &#039;कुकी स्टफिंग&#039; से आया था.
Phia की तरफ से आया जवाबPhia के एक प्रवक्ता ने &#039;द न्यूयॉर्क पोस्ट&#039; को बताया कि, &#039;गलत तरीके से रिपोर्ट दिखाने वाले सारे फीचर्स को एक महीने से भी पहले, 7 जुलाई को ही हटा दिया गया था. हम हर ट्रांजैक्शन पर नजर रख रहे हैं. ऐसे फीचर्स की वजह से ब्रांड पार्टनर्स को ट्रांजैक्शन रिवर्सल देने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं और हमने ये प्रोसेस शुरू भी कर दी है. साथ ही, हम &#039;हेड ऑफ कंप्लायंस&#039; की नियुक्ति भी कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में में ऐसी घटना दोबारा न हो.&#039;
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bill, Gates, की, बेटी, को, हो, सकती, है, साल, जेल, की, सजा, लेकिन, क्यों</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली में प्रदूषण के नाम पर वसूले 843 करोड़, नहीं हुए खर्च, डेटा भी गायब&amp; CAG</title>
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        <description><![CDATA[ ECC Fund News: दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के मकसद से वसूले गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) के इस्तेमाल को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई अहम खामियों पर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक इस चार्ज से जमा 843.12 करोड़ रुपये लंबे समय तक खर्च ही नहीं किए गए. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि चार्ज संग्रह से जुड़ा कई महीनों का रिकॉर्ड भी मौजूद नहीं पाया गया. यही वजह है कि फंड के रिकॉर्ड और निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिन पर CAG ने चिंता जताई है.
क्या है ECC?
ECC दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों पर वसूला जाने वाला चार्ज है. जिसका खास मकसद राजधानी में वायु प्रदूषण को कम करना और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना है. हालांकि यह चार्ज साल &amp;nbsp;2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू किया गया था. जिसकी वसूली दिल्ली नगर निगम (MCD) करता है और बाद में यह रकम दिल्ली सरकार के खाते में जमा की जाती है.
&#039;मस्क ने ब्रिटेन को खरीद लिया&#039;, यूजर के पोस्ट पर अरबपति ने पूछा- कितनी है देश की कीमत?
CAG रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?

साल 2015-16 से 2024-25 के बीच ECC के रूप में कुल 1,624.63 करोड़ रुपये जुटाए गए.
इनमें से सिर्फ 781.51 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए.
जबकि 843.12 करोड़ रुपये 31 मार्च 2025 तक बिना इस्तेमाल के पड़े रहे.
ऑडिट के दौरान 280 दिनों के चार्ज संग्रह का डेटा मौजूद नहीं मिला.
CAG ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

कौन-सा रिकॉर्ड गायब है?

रिपोर्ट के मुताबिक दो अलग-अलग अवधियों का रिकॉर्ड मौजूद नहीं था.
6 अप्रैल 2018 से 26 अप्रैल 2018 तक के 21 दिनों का डेटा.
18 दिसंबर 2020 से 2 सितंबर 2021 तक के 259 दिनों का डेटा.
यानी इन दोनों अवधियों को मिलाकर कुल 280 दिनों का रिकॉर्ड गायब मिला.

ECC से होने वाली कमाई में बदलाव

2015-16 में 144.06 करोड़ रुपये
2016-17 में यह बढ़कर 358.11 करोड़ रुपये
2017-18 में सबसे ज्यादा 472.63 करोड़ रुपये&amp;nbsp;
इसके बाद संग्रह में लगातार गिरावट शुरू हुई.
2023-24 में 95.30 करोड़ रुपये
2024-25 में 93.54 करोड़ रुपये&amp;nbsp;
कोविद महामारी के दौरान 2021-22 में सबसे कम 39.40 करोड़ रुपये वसूले गए.

खर्च को लेकर भी उठे सवाल

2015-16 में ECC फंड से कोई नहीं हुआ.
2016-17 में सिर्फ 0.93 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
2017-18 में यह खर्च घटकर 0.15 करोड़ रुपये रहा.
2018-19 में 271.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
2019-20 में यह घटकर 9 करोड़ रुपये के आसपास रह गया.
वहीं 2020-21 से 2022-23 तक लगातार कोई खर्च दर्ज नहीं हुआ.
2023-24 में 500 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
ऑडिट के मुताबिक 10 सालों में से 5 सालों में ECC फंड से कोई खर्च नहीं किया गया.

क्यों अहम है यह मामला?
ECC से जुटाई गई रकम का खास मकसद दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कंट्रोल करना और उस रकम का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन, सड़क ढांचे और पर्यावरण उपायों को मजबूत करना था.
नौकरी और EMI नहीं, इस एक डर ने उड़ा दी 94% कॉरपोरेट कर्मचारियों की नींद
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, प्रदूषण, के, नाम, पर, वसूले, 843, करोड़, नहीं, हुए, खर्च, डेटा, भी, गायब-, CAG</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Independence Day: आजादी के वक्त 1 रुपए में क्या&amp;क्या खरीद सकते थे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/independence-day-आजादी-के-वक्त-1-रुपए-में-क्या-क्या-खरीद-सकते-थे</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/independence-day-आजादी-के-वक्त-1-रुपए-में-क्या-क्या-खरीद-सकते-थे</guid>
        <description><![CDATA[ Independence Day 2026: बढ़ती महंगाई के दौर में एक आम व्यक्ति की 20 से 25 हजार की नौकरी में भी घर चलाना मुश्किल हो रहा है. रोजमर्रा के सामान से लेकर, घर का किराया, बिजली का बिल, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे जरूरी खर्चों को संभालना आसान नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं जिन चीजों के लिए आज के समय में हम 100 से 200 रुपये या उससे ज्यादा खर्च करते हैं, वहीं सामान आजादी के समय यानी 1947 में बेहत कम कीमत में मिल जाते थे. यहां तक कि उस 1 रुपये उस समय में कई लोगों के रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त &amp;nbsp;था. अब जानते हैं आखिर 1947 में 1 रुपये में क्या-क्या मिलता था.&amp;nbsp;
1 रुपये में क्या-क्या खरीद सकते थे लोग?
15 अगस्त 2026 को देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. तब से लेकर अब तक काफी कुछ बदल गया है. ऐसे में अब जानते हैं कि 1947 में लोग 1 रुपये में क्या-क्या खरीद सकते थे. हालांकि, एक बात का ध्यान रखें, आंकड़े शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं.&amp;nbsp;

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेहूं का आटा लगभग 30 पैसे प्रति किलो के आसपास था. इसके हिसाब 1 रुपये में लगभग 3.3 किलो आटा खरीदा जा सकता था.
इसके साथ ही 1 रुपये में हफ्तेभर की सब्जियां भी खरीदी जा सकती थी.
वहीं बात करें चावल की जो करीब 12 पैसे प्रति किलो था यानी 1 रुपये में लगभग 8 किलो चावल खरीदा जा सकता था.
इसके अलावा चीनी की कीमत 40 पैसे प्रति किलो थी, इसके हिसाब से 1 रुपये में 2.5 किलो तक चीनी खरीदी जा सकती थी.
1947 के आसपास दूध की कीमत लगभग 12 पैसे लीटर थी. यानी उस समय 1 रुपये में करीब 8 लीटर दूध खरीदा जा सकता था.
वहीं आलू 25 पैसे प्रति किलो मिलता था.

दिल्ली में प्रदूषण के नाम पर वसूले 843 करोड़, नहीं हुए खर्च, डेटा भी गायब- CAG
सोने की क्या थी कीमत?
2026 में सोने-चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं. आज के समय में एक आम व्यक्ति के लिए सोना-चांदी खरीदना मुश्किल है, लेकिन क्या आप जानते हैं आजादी के समय यानी 1947 में 10 ग्राम सोने की कीमत 88.62 बताई जाती है. यानी 1947 से लेकर 2026 तक काफी कुछ बदल गया है.
Bill Gates की बेटी को हो सकती है 20 साल जेल की सजा, लेकिन क्यों?
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Blinkit&amp;Zepto के सामान से गायब है मैन्युफैक्चरिंग डेट तो क्या करें? तुकाराम मुंढे ने बताया</title>
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        <description><![CDATA[ Tukaram Mundhe on Food Safety Importance: बीते कुछ दिनों में ब्लिंकिट और जोमौटो के वेयर हाउस पर फूड सेफ्टी विभाग की तरफ से छापामारी की गई थी, जिसमें सामने आया कि यहां पर कस्टमर्स को धोखे में रखते हुए एक्सपायरी डेट का सामान बेचा जा रह था. इतना ही नहीं एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसमें देखा गया कि डार्क स्टोर्स पर सामानों में कॉकरोच थे, एक्सपायरी डेट वाला सामान था, जिसके बाद से ही ऑनलाइन सामान मंगवाने वाले काफी परेशान नजर आ रहे हैं.
इसी बीच फूड एंड सेफ्टी विभाग के कमिश्नर ने बताया है कि अगर क्विक-कॉमर्स वेबसाइट्स से कोई सामान मंगवाया जाता है और उसमें मेन्युफैक्चरिंग डेट ना हो तो क्या करना चाहिए.
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क्या बोले तुकाराम मुंढे?दरअसल इस कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने टाइम्स नाउ के साथ बातचीत की है, इस बातचीत में उन्होंने इस दौरान साफ- साफ बताया कि ऐसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के ऊपर किस तरह के मापदंड लगाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि ब्लिंकिट-जोमैटो या दूसरे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले खाने- पीने वाले सामान की सुरक्षा तय नियमों के तहत ही की जाती है. अगर कोई कंपनी इन नयमों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
मैन्युफैक्चरिंग डेट ना हो तो क्या करें?इस बातचीत के दौरान मुंढे ने ये भी बताया कि यदि ऑनलाइन खरीदे गए सामान पर मैन्युफैक्चरिंग डेट या एक्सपायरी डेट नहीं दिखती है तो ये चिंता का विषय है. उन्होंने कस्टमर्स से कहा कि अगर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ये जरूरी जानकारी नहीं दी जा रही है, तो इसकी शिकायत FDA के पोर्टल पर जाकर कर सकते हैं.
मुंढे ने भी बताया कि, ये कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वो खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करें. वहीं ग्राहकों को भी सामान खरीदते समय लेबल ध्यान से पढ़ना चाहिए और सिर्फ एडवर्टइजमेंट या प्रोडक्ट के नाम पर भरोसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा है कि FDA का संदेश साफ है कि 10 मिनट में सामान पहुंचाने की जल्दी में खाद्य सुरक्षा और ग्राहक के जरूरी अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Income Tax डिपार्टमेंट से आया 6 हजार जमा करने का नोटिस? सरकार ने क्या कहा, जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Income Tax Department: इनकम टैक्स भरने की आखिरी तारीख तो निकल गई है, लेकिन फिर भी विभाग की तरफ से कई लोगों के पास एक नोटिस जा रहा है. जिसमें कुछ राशि जमा करने के लिए कहा जा रहा है. ये राशि बतौर टैक्स जमा करने के लिए कहा जा रहा है. अब हाल ही में खुद सरकार ने इस वायरल हो रहे नोटिस का जवाब दिया है.
क्या है वायरल दावा?दरअसल इनकम टैक्स विभाग की तरफ से एक नोटिस ऑनलाइन काफी सर्कुलेट हो रहा है. जिसमें दावा किया जा रहा है कि टैक्स के रूप में सभी को 6 हजार रुपये का पेमेंट करना होगा. इस नोटिस में बकायदा आपका नाम, तारीख और अन्य चीजें लिखी हुईं आपको नजर आएंगी. अगर आपके पास भी ये नोटिस आया है तो सावधान हो जाइये, क्योंकि सरकार ने इसकी सच्चाई बता दी है.
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क्या है वायरल दावे की सच्चाई?सरकारी एजेंसी पीआईबी फैक्ट चेक ने इस वायरल दावे की सच्चाई को उजागर किया है. इस वायरल हो रहे नोटिस को अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए शेयर किया गया है. इस नोटिस के ऊपर साफ शब्दों में फर्जी लिखा हुआ है. इसके साथ कैप्शन में लिखा है, &#039;ऑनलाइन एक नोटिस सर्कुलेट हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी किया है. इसमें रेसिपिएंट से 6 हजार रुपये टैक्स के रूप में जमा करने के लिए कहा जा रहा है.&#039;

???? SCAM ALERT!⚠️ A notice claiming to be issued by the Income Tax department is circulating online, asking the recipient to make a payment of ₹6,000/- as part of the tax payable amount. #PIBFactCheck: ❌ This notice is #Fake and a phishing attempt. ✅ The&amp;hellip; pic.twitter.com/AqndbiX49U
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) August 12, 2026



आगे पोस्ट में लिखा है, &#039;पीआईब फैक्ट चेक के मुताबिक ये नोटिस फेक है और एक फिशिंग की कोशिश है. इनकम टैक्स इंडिया ऐसे नोटिस जारी नहीं करता है. गुमराह करने वाली जानकारी से सावधान रहें और हमेशा सही जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें&#039;.
PIB में करें शिकायतबता दें कि पीआईबी फैक्ट चेक एक सरकार अधिकृत एजेंसी है. जो इस तरह की खबरों की सत्यता की पुष्टि करती है. इस एजेंसी के जरिए ऑनलाइन, ऑफलाइन या मैसेज में आने वाले ऐसे किसी भी मैसेज की सच्चाई को बताया जाता है. यदि आपके पास भी कभी ऐसा कोई मैसेज आता है सरकार के नाम पर तो आप भी इस एजेंसी की मदद लेकर सच्चाई का पता लगा सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>गुटखा&amp;पान मसाला पर बैन, बेचने या खरीदने पर क्या होगी जेल, लगेगा जुर्माना!</title>
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        <description><![CDATA[ Karnataka Gutkha Ban: अक्सर ऐसे लोग जिन्हें गुटखा या पान मसाला जैसी चीजें खाने की आदत होती है, वे हर समय अपने पास इसे खरीदकर जरूर रखते हैं. अगर आपके भी कोई जानने वाला इन चीजों का सेवन करता है तो आपने देखा होगा कि उन्हें कुछ-कुछ समय में गुटखा खाने की आदत होती है.
ऐसे में अगर आप भी तंबाकू या निकोटिन वाले गुटखा और पान मसाला जैसे सामान का सेवन करते हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. कर्नाटक सरकार ने लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों पर बैन लगा दिया है. अब अगर कोई तंबाकू, गुटखा या पान मसाला बेचता या फिर स्टॉक करता मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
कब से लागू होगा नियम?
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने ये बैन एक साल के लिए लगाया है और ये फैसला 10 अगस्त 2026 को जारी आदेश के बाद पूरे राज्य में लागू हो गया है. अब इन उत्पादों को बेचने, बनाने और रखने पर पूरी तरह रोक रहेगी. ऐसे में अब यह जानना जरूरी है कि अगर कोई दुकानदार या फिर ग्राहक भी इन उत्पादों के बैन होने के बाद भी इसे बेचता या फिर खरीदता है तो क्या उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?
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गुटखा-पान मसाला बेचने पर होगी

अब अगर कोई गुटखा-पान मसाला बेचता या फिर स्टॉक करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
उसको 6 महीने की जेल और 1 लाख से 2 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
इसके अलावा अगर इन उत्पाद से किसी की सेहत को गंभीर नुकसान होता है तो जुर्माना 5 लाख रुपये हो सकता है.
साथ ही अगर बैन किए गए उत्पाद का सेवन करने से किसी की मौत हो जाती है तो 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. इतना ही नहीं, बल्कि कम से कम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.&amp;nbsp;

क्या खरीदने वाले पर भी होगी कार्रवाई?
बता दें कि ये नियम खासतौर पर गुटखा-पान मसाला बेचने, रखने, बनाने और सप्लाई करने वालों पर लागू है. अगर कोई अपने इस्तेमाल के लिए खरीदता है तो इस आदेश में सीधे जेल की सजा का नियम नहीं है. लेकिन एक बात का ध्यान रखें, अगर कोई व्यक्ति पब्लिक प्लेस पर तंबाकू खाने के बाद थूकता है तो उस पर दूसरे नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.&amp;nbsp;
8th Pay Commission: क्या वक्त से पहले आएगी सिफारिशों की रिपोर्ट? सरकार ने दिया जवाब
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>GenZ Spendings: बिल, राशन और रोजाना की जरूरत, कहां पैसा खर्च कर रहे Gez Z? समझें हिसाब</title>
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        <description><![CDATA[ GenZ Spendings: जंतर- प्रोटस्ट के बाद से GenZ का देशभर में बोल बाला है. इस जनरेशन की हिम्मत और ताकत लोगों ने देखी और समझी. इतना ही नहीं बल्कि इस प्रोटेस्ट ने जेन जी लाइफस्टाइल को लेकर भी कई सारे राज खोले हैं. इसी बीच ये बात भी सामने आई है कि नौकरी करने वाले GenZ अपने पैसे को किस तरह से खर्च करना पसंद करते हैं.
कैसी है GenZ की लाइफस्टाइलये वाली जनरेशन यानी GenZ को घूमने-फिरने, ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन और लाइफस्टाइल पर ज्यादा खर्च करना ज्यादा पसंद है. इस पीढ़ी को यही माना भी जाता है. लेकिन एक नई स्टडी की तस्वीर कुछ अलग ही दिखाती है. दरअसल हाल ही में SalarySe की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि लाखों UPI ट्रांजैक्शन पर आधारित स्टडी में 5.2 लाख से ज्यादा सैलरी पाने वाले GenZ यूजर्स को शामिल किया गया.
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क्या कहती है रिपोर्ट?इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, GenZ की हर महीने की 70% से ज्यादा कमाई रोजमर्रा की जरूरतों और जरूरी खर्चों में चली जाती है. GenZ के महीने के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा बिल पेमेंट और सब्सक्रिप्शन का है. इस पर करीब 20.1% खर्च होता है. इसके बाद किराने पर 15.7% खर्च किया जाता है. तो वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज पर 12.2%, शॉपिंग पर 11.9%, खाने- पीने पर 11.5% और ट्रैवल पर सिर्फ 5% ही खर्च किया जाता है. इससे ये पता चलता है कि GenZ के खर्च का बड़ा हिस्सा घूमने-फिरने या मनोरंजन के बजाय घर-परिवार की जरूरतों, खाने-पीने, बिल और फाइनेंस पर जा रहा है.
UPI ने बदली तस्वीरGen Z के लिए मोबाइल और डिजिटल पेमेंट रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं. बिजली-पानी के बिल भरने, सब्सक्रिप्शन लेने, खरीदारी करने और दूसरे भुगतान के लिए युवा तेजी से डिजिटल मीडियम का इस्तेमाल कर रहे हैं. शॉपिंग से लेकर हर एक चीज के लिए ऑनलाइन पेमेंट का ऑप्शन चुना जा रहा है, क्योंकि ये बेहद आसान भी है.
खर्च के मामले में कैसा है GenZ?इस स्टडी से साफ पता चलता है कि Gen Z को सिर्फ घूमने-फिरने और मौज-मस्ती पर पैसा खर्च करने वाली पीढ़ी मानना सही नहीं है. उनके खर्च का बड़ा हिस्सा बिल भरने, किराना, खाने-पीने, फाइनेंशियल सर्विसेज और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों पर जा रहा है. यानी GenZ लाइफस्टाइल पर खर्च जरूर करती है, लेकिन उसके साथ-साथ अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी पूरी कर रही है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>FDA: अब Dominos पिज्जा का लाइसेंस सस्पेंड, सफाई नियमों की उड़ाई धज्जियां</title>
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        <description><![CDATA[ Dominos Pizza License: देशभर में खाने- पीने की चीजों के ऊपर खाद्य विभाग की कड़ी नजर है. जिसको लेकर लगातार कार्रवाई भी की जा रही है. इसी कड़ी में हाल ही में मुंबई में FDA ने Dominos पिज्जा के कई स्टोर्स पर छापामारी की है. इस दौरान इन सभी आउटलेट्स में गंदगी और हाईजीन की प्रॉब्लम नजर आई. जिसके बाद इनके लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं.
किन- किन आउटलेट्स पर हुई कार्रवाई?FDA यानी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के द्वारा मुंबई के तीन डोमिनोज आउटलेट्स पर कार्रवाई की गई है. जिनमें विले पार्ले, बोरीवली और घाटकोपर स्थित तीनों आउटलेट शामिल हैं. इन तीनों पर पर खाने की साफ-सफाई, सामान रखने और जरूरी नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है. यहां तक कि कराड के एक डॉमिनोज आउटलेट का लाइसेंस भी सस्पेंड किया गया है.
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इन गड़बड़ियों के चलते हुई कार्रवाईइस जांच के दौरान घाटकोपर के आर-सिटी मॉल में स्थित आउटलेट पर ज्यादा गड़बड़ियां सामने आई हैं. जांच के दौरान वहां कीड़े-मकौड़े होने के सबूत मिले और सही पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था और उससे जुड़े रिकॉर्ड नहीं मिले. खाने के सामान को सही तरीके से इस्तेमाल करने के नियमों को फॉलो नहीं किया जा रहा था. इसके अलावा खाने का सही तापमान बनाए रखने, सफाई और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था में भी कमी नजर आई थी. आउटलेट में सफाई का कोई तय शेड्यूल भी नहीं था. जिसके चलते ये कार्रवाई की गई है.
क्या बोले अधिकारी?वहीं इस दौरान अधिकारियों ने बताया है कि जांच के दौरान उन्हें कई जरूरी दस्तावेज नहीं दिखाए गए. इनमें फूड-ग्रेड सर्टिफिकेट, फूड हैंडलर्स की मेडिकल जांच और साफ-सफाई के रिकॉर्ड, जरूरी लाइसेंस और कर्मचारियों के ग्लव्स और एप्रेन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं. इसके अलावा खाने और पानी की जांच रिपोर्ट, मशीनों की कैलिब्रेशन और मेंटेनेंस के रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे. इतना ही नहीं अधिकारियों का ये भी कहना है कि ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 06:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>घरवालों से छिपाकर रखी मेहनत कमाई, सालभर में खा गए कीड़े; किसान को 5 लाख का नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Rajasthan Farmer News: मेहनत से कमाए गए पैसों में से अगर एक रुपये का भी नुकसान हो तो इंसान को बुरा लगता हो. लेकिन बेवजह अगर लाखों रुपये बर्बाद हो जाए, तो यह किसी सदमे से कम नहीं है. राजस्थान से एक ऐसी ही दुखद घटना सामने आ रही है. राजस्थान के बालोतरा जिले के एक किसान को 5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे वह सदमे में है.&amp;nbsp;
दीमक लूट ले गए सारा पैसा
मामला पचपदरा के पास नेवाई गांव का है. यहां के रहने वाले पेशे से किसान मांगीलाल मेघवाल के संदूक में छिपाए गए 5 लाख रुपये दीमक खा गए. मांगीलाल की गलती इतनी थी कि उसने पैसों को बैंक में रखने के बजाय अपने पास रखा और वह भी संदूक में भरकर मिट्टी के अंदर. दरअसल, मांगीलाल को एक साल पहले जमीन का एक टुकड़ा बेचकर 5 लाख रुपये मिले थे. &amp;nbsp;चोरी के डर और इस चिंता से कि कहीं उसके बेटे ये पैसे खर्च न कर दें, उसने घर पर रखने के बजाय खेत में नकदी छिपाने का फैसला किया और यही उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई.&amp;nbsp;
किसी को नहीं मिली फूटी कौड़ी
मांगीलाल ने पैसों को एक प्लास्टिक बैग में भरकर उन्हें अपने खेत में एक गड्ढे में छिपा दिया था. उसने अपनी पत्नी या बच्चों को नहीं बताया कि पैसे कहां छिपाए हैं. महीनों बाद, जब उसे खेत में एक कमरा बनाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी, तो वह पैसे निकालने गया. हालांकि, उसे वह सही जगह याद नहीं रहा, जहां उसने पैसे दबाए थे. अपने 10-बीघा के खेत में हर जगह खोजने के बावजूद, उसे पैसे नहीं मिले.
आखिरकार उसने अपने परिवार को पैसे छिपाकर रखने की सच्चाई बताई. शुरू में तो उन्हें भी उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन बाद में सभी लोगों के मिलकर ढूंढ़ने के बाद भी पैसे नहीं मिले. लगभग एक साल बाद, मॉनसून के दौरान खेत में कैश से भरा एक खराब बैग मिला. जब परिवार वालों ने उसे खोला, तो देखा कि नोटों के बंडल में दीमक लग गई थी. 500 रुपये के ज्यादातर नोट बुरी तरह खराब हो गए थे और फटकर टुकड़े-टुकड़े हो गए थे.
बैंक ने बदलने से किया मना
खराब हुए नोटों को इकट्ठा कर परिवार के लोग पचपदरा में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ब्रांच में इस उम्मीद के साथ गए कि कम से कम कुछ तो पैसे वापस मिल जाए. लेकिन खबरों के मुताबिक, नोटों की हालत इतनी खराब थी कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें बदलने से मना कर दिया. SBI मेन ब्रांच भी गए परिवार के सदस्य, लेकिन वहां भी नोट नहीं बदले गए.&amp;nbsp;
क्या बदले जा सकते हैं कटे-फटे नोट?
RBI की &#039;नोट रिफंड नियमावली&#039; के तहत दीमक द्वारा खाए गए या फटे-पुराने नोट बदले जा सकते हैं. बशर्तें, उन पर सीरियल नंबर, गांधी जी की तस्वीर और गवर्नर के हस्ताक्षर जैसे महत्वपूर्ण हिस्से सुरक्षित और पहचानने योग्य हो. फिर बैंक उन्हें बदलने से मना नहीं कर सकते हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>घरवालों, से, छिपाकर, रखी, मेहनत, कमाई, सालभर, में, खा, गए, कीड़े, किसान, को, लाख, का, नुकसान</media:keywords>
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        <title>साउथ इंडिया का सबसे पावरफुल बिजनेस घराना कौनसा है, कितनी है दौलत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/साउथ-इंडिया-का-सबसे-पावरफुल-बिजनेस-घराना-कौनसा-है-कितनी-है-दौलत</link>
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        <description><![CDATA[ Most Powerful Business Family in South India: साउथ इंडिया में कई बड़े बिजनेस घराने हैं, लेकिन लंबे इतिहास, कारोबार के फैलाव और कई सेक्टर में मौजूदगी की वजह से Murugappa Group का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. चेन्नई से जुड़े इस बिजनेस ग्रुप की शुरुआत साल 1900 में हुई थी. समय के साथ परिवार ने अपने बिजनेस को कई अलग-अलग इलाकों में फैलाया और आज ये देश के बड़े पारिवारिक बिजनेस ग्रुपों में शामिल है.
मुरुगप्पा ग्रुप का बिजनेस एग्रीकल्चर, फर्टिलाइजर, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कई दूसरे इलाकों में फैला हुआ है. ग्रुप के बिजनेस में कोरोमंडल इंटरनेशनल, ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ़ इंडिया और चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस जैसी कंपनियां शामिल हैं. फोर्ब्स के अनुसार ग्रुप में 29 बिजनेस हैं और इसकी शुरुआत 1900 में मनी लेंडिंग बिजनेस से हुई थी.
मुरुगप्पा ग्रुप के पास कितनी दौलत है?
मुरुगप्पा परिवार का नाम हुरुन इंडिया की मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेस लिस्ट में भी सामने आ चुका है. 2025 बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया में मुरुगप्पा परिवार की वैल्यू करीब 2.92 लाख करोड़ रुपये बताई गई है. ये परिवार देश के टॉप फैमिली बिजनेस में शामिल था.
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बता दें कि 2026 बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेस लिस्ट में भारत के टॉप 300 फैमिली बिजनेस की कुल वैल्यू करीब 138 लाख करोड़ रुपये बताई गई है. रिपोर्ट में अंबानी परिवार सबसे ऊपर है, जबकि अदाणी परिवार फर्स्ट जेनरेशन बिजनेस परिवारों में नंबर 1 है.
100 साल से ज्यादा पुराना है बिजनेस
दक्षिण भारत की बात करें तो मुरुगप्पा ग्रुप की खासियत इसका 100 साल से ज्यादा पुराना बिजनेस और अलग-अलग सेक्टर में मौजूदगी है. ग्रुप के बिजनेस का फैलाओ भारत के साथ साथ कई दूसरे बाजारों तक भी है. लेकिन, साउथ इंडिया का सबसे पावरफुल बिजनेस घराना मुरुगप्पा ग्रुप को साउथ इंडिया के प्रमुख और असरदार बिजनेस घरानों में से एक कहा जाता है.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोने से सरकार को कितनी कमाई होती है? कस्टम ड्यूटी कलेक्शन से समझिए</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Import Duty Collections: सोने की इंपोर्ट पर लगाम लगाने के मकसद से सरकार ने बीते 13 मई से सोने और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया. इससे सोने का आयात महंगा हो गया और टैक्स कलेक्शन में बंपर तेजी आई. संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 13 मई से 2 अगस्त, 2026 के बीच कीमती धातुओं के इंपोर्ट से सरकार ने कुल 10,463 करोड़ रुपये की कमाई की है.&amp;nbsp;
सरकार ने क्यों बढ़ाया था टैक्स?
भारत सोने की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में किया जाता है. सोने के भारी मात्रा में आयात से देश का डॉलर बड़े पैमाने पर बाहर जा रहा था, जिसे रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया. कीमती धातुओं के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से अपनी की थी वे देश के आर्थिक हितों को देखते हुए कम से कम एक साल तक सोने और ईंधन की अनावश्यक खरीदारी से बचें.&amp;nbsp;
किस बात से सरकार हुई परेशान?
अमेरिका-ईरान में जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के माहौल के बीच कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई. इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें भीषण बढ़ गई हैं. चूंकि तेल भारत की पहली जरूरत है इसलिए सरकार सोने जैसे गैर-जरूरी चीजों के आयात को कम कर विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने का काम किया. सरकार की एक और जिम्मेदारी कमजोर होते रुपये को बचाना भी था. ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल के चलते रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 रुपये के करीब पहुंच रहा था. ऐसे में सोने के आयात को काबू में कर सरकार ने रुपये पर बने दबाव को कम करने का भी काम किया.&amp;nbsp;
कीमती धातुओं के आयात से सरकार को कमाई (13 मई से 2 अगस्त 2026 तक)



कीमती धातु
कस्टम ड्यूटी से कमाई


सोना
10,040 करोड़


चांदी
328 करोड़


प्लैटिनम
95 करोड़


टोटल रेवेन्यू
10,463 करोड़




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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोने, से, सरकार, को, कितनी, कमाई, होती, है, कस्टम, ड्यूटी, कलेक्शन, से, समझिए</media:keywords>
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        <title>दिन के 43 लाख कमाते हैं एन. चंद्रशेखरन, जानिए टाटा सन्स के चेयरमैन की नेट वर्थ</title>
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        <description><![CDATA[ N Chandrasekaran Salary: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप की कमान संभालने वाले एन. चंद्रशेखरन भारत के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले कॉरपोरेट अधिकारियों में शामिल रहे हैं. आज ही उन्होंने चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद से ही उनकी कमाई और नेटवर्थ की खूब चर्चा हो रही है.
टाटा सन्स के चेयरमैन के तौर पर उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ सैलरी से नहीं बल्कि कंपनी के मुनाफे और कमीशन से भी आता है. FY26 में उन्हें टाटा सन्स से कुल 158.66 करोड़ रुपये का मेहनताना मिला है. अगर इसे पूरे साल के 365 दिनों में बांटकर देखें तो ये रकम करीब 43.47 लाख रुपये रोज का बैठती है.&amp;nbsp;
158 करोड़ रुपये की कमाई में क्या-क्या शामिल?
टाटा सन्स की FY26 की सलाना रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन को 17.97 करोड़ रुपये सैलरी और दूसरे फायदों के तौर पर मिले. इसके अलावा उन्हें 140.69 करोड़ रुपये प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन मिला है, यानी उनकी कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा कंपनी के मुनाफे पर मिलने वाले कमीशन से आया है. FY26 में उनका कुल मेहनताना पिछले साल के 155.81 करोड़ रुपये से करीब 1.8 फीसदी ज्यादा रहा.&amp;nbsp;
साउथ इंडिया का सबसे पावरफुल बिजनेस घराना कौनसा है, कितनी है दौलत?
कौन हैं एन. चंद्रशेखरन?नटराजन चंद्रशेखरन सन 1987 में टाटा ग्रुप से जुड़े थे और बाद में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के सीईओ और एमडी बने. फिर साल 2017 में उन्होंने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद संभाला. चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप में टेक्नोलॉजी के साथ-साथ एयरलाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और दूसरे नए कारोबारों में भी काफी ज्यादा काम किया है.
सैलरी से ज्यादा कमीशन से होती है कमाईचंद्रशेखरन के सैलरी की सबसे खास बात है कि इसमें फिक्स्ड सैलरी से प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन का हिस्सा काफी बड़ा है. FY26 में उन्हें 17.97 करोड़ रुपये सैलरी और फायदे मिले, जबकि कमीशन ही अकेले 140.69 करोड़ रुपये था. इसका मतलब है कि टोटल मेहनताना का करीब 89 फीसदी हिस्सा सिर्फ कमीशन से आया है.&amp;nbsp;
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कितनी है चंद्रशेखरन की नेटवर्थ?टाटा सन्स की सलाना रिपोर्ट में उनकी कुल निजी नेटवर्थ का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है. इसलिए इंटरनेट पर मौजूद अलग-अलग अनुमान को नेटवर्थ मानना सही नहीं है. उनकी कमाई का असली आंकड़ा टाटा सन्स की वार्षिक रिपोर्ट में है और इसके मुताबिक FY26 में उन्हें 158.66 करोड़ रुपये मिले हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिन, के, लाख, कमाते, हैं, एन., चंद्रशेखरन, जानिए, टाटा, सन्स, के, चेयरमैन, की, नेट, वर्थ</media:keywords>
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        <title>EV Subsidy: सरकार ने बढ़ाई EV सब्सिडी, मंजूर किए 1000 करोड़, कैसे मिलेगा फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ Central Government EV Subsidy: ईरान- यूएस वॉर के बाद लोगों ने पेट्रोल- डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी. जिसके बाद केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना की शुरुआत की. अब सरकार के द्वारा इस योजना को भी बढ़ावा दिया जाने के लिए नया कदम उठाया गया है.
क्या है सरकार का नया कदम?दरअसल केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (e2W) को बढ़ावा देने के लिए 1000 करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा राशि सब्सिडी के रूप में देने जा रही है. ये पैसा PM E-DRIVE योजना के तहत दिया जाएगा. इसके साथ ही इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की सुविधा मार्च 2028 तक जारी रहेगी.
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मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज के एक अधिकारी ने बताया कि पहले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए योजना की समय सीमा जुलाई 2026 में खत्म होने वाली थी. मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से एक्स्ट्रा बजट की मांग की थी, ताकि इस योजना को आगे भी जारी रखा जा सके. वित्त मंत्रालय ने इसके लिए 1000 हजार करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं.
क्यों उठाया ये कदम?केंद्र सरकार चाहती है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर-बाइक की बिक्री देश में बढ़े. भारत में कुल दोपहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 7.6% है. सरकार इसे बढ़ाकर कम से कम 9-10% करना चाहती है. अधिकारी के अनुसार, देश में बड़ी संख्या में लोग दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को बढ़ावा देने से आम लोगों को फायदा होगा और कम दूरी पर जाने में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
कब शुरू हुई थी ये योजना?बता दें कि PM E-DRIVE योजना सितंबर 2024 में शुरू की गई थी. इसके लिए कुल 10900 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था. योजना की शुरुआत 1 अक्टूबर 2024 से हुई थी और पहले इसे मार्च 2026 तक चलना था. बाद में सरकार ने इसकी अवधि बढ़ाई. इस योजना के तहत पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर अधिकतम 5000 तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 02:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BOI: ये काम नहीं किया तो बंद होगा Bank of India का खाता! सरकार ने क्या बताया?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Of India KYC Update: जब से भारत का डिजिटलीकरण हुआ है, तभी से बैंकिंग से लेकर हर सरकारी और प्राइवेट सुविधा के लिए फोन के द्वारा ही काम हो जाता है. फिर चाहे KYC करवाना हो और कोई अपडेट. बैंकों की तरफ से भी फोन पर ही मैसेज या मेल आ जाता है कि आप अपनी इस जानकारी को अपडेट कर लें. इसी बीच हाल ही में सरकारी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया से लोगों के पास KYC अपडेट करने का मैसेज आ रहा है. अब सरकार की तरफ से इस मैसेज को लेकर एक ताजा अपडेट सामने आया है.
क्या मैसेज आ रहा है?दरअसल सोशल मीडिया पर बैंक ऑफ इंडिया के नाम से एक फर्जी नोटिस तेजी से वायरल हो रहा है. इस नोटिस में दावा किया जा रहा है कि अगर ग्राहक अपने आधार और PAN से जुड़ा KYC अपडेट नहीं कराते हैं, तो उनका बैंक खाता तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा. हालांकि अब इस वायरल नोटिस पर सरकार की तरफ से जवाब सामने आ गया है.
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क्या है सच्चाई?सरकारी एजेंसी पीआईबी फैक्ट चेक के जरिए इस मैसेज की पुष्टि कर बताया गया है कि ये नोटिस पूरी तरह से फर्जी है. इस नोटिस के फोटो के साथ कैप्शन में लिखा गया है, &#039;बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए जाने का दावा करते हुए एक नोटिस ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है, जिसमें कहा गया है कि आधार और पैन KYC अपडेट न होने के कारण ग्राहकों के बैंक खाते तुरंत ब्लॉक कर दिए जाएंगे और उन्हें केवाईसी अपडेट करने के लिए &#039;बीओआई मोबाइल डिजिटल&#039; एप्लिकेशन डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा गया है.

???????? A notice claiming to be issued by the Bank of India is circulating online, stating that customers&amp;rsquo; bank accounts will be blocked immediately due to non-updation of Aadhaar and PAN KYC and asking them to download and install the &#039;BOI Mobile Digital&#039; application to update their&amp;hellip; pic.twitter.com/yP9cIEp0Xv
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) August 11, 2026



इस पोस्ट में आगे बताया गया है कि &#039;ये नोटिस पूरी तरह फर्जी है. बैंक ऑफ इंडिया और आरबीआई ने ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया है. वायरल हो रही इमेज पूरी तरह से फैब्रिकेटेड है और बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी नहीं की गई है.&#039;
सरकार ने उजागर किया सचसरकार ने साफ किया है कि ये नोटिस पूरी तरह से फर्जी है. इसी के सात ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वो ऐसे किसी भी मैसेज, लिंक या एप पर भरोसा ना करें. बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, ब्रांच या अन्य आधिकारिक माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करें.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब बदलेगा बैंकिंग सिस्टम, RBI गवर्नर ने  AI पर खर्च बढ़ाने को कहा</title>
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        <description><![CDATA[ RBI AI News:&amp;nbsp;भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को बैंकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल बढ़ाने को कहा.उन्होंने कहा कि बैंकों को AI के लिए टेक्नोलॉजी और जरूरी सर्विस पर ज्यादा पैसा खर्च करना चाहिए. साथ ही कर्मचारियों को AI और नई तकनीक की ट्रेनिंग भी देनी चाहिए, ताकि वे बदलती तकनीक के साथ काम कर सकें.
गवर्नर ने AI के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले खतरों को लेकर भी बैंकों को सावधान किया. उन्होंने कहा कि AI के जरिए लिए गए फैसलों में गलती या फर्क हो सकता है. कई बार ये समझना भी मुश्किल हो सकता है कि AI ने कोई फैसला क्यों लिया.इसके अलावा कस्टमर के डेटा की सेफ्टी और साइबर हमले का खतरा भी बना रहेगा.
उन्होंने कहा कि अगर कई बैंक कुछ AI मॉडल या कुछ टेक्नोलॉजी कंपनियों पर ज्यादा डिपेंड हो जाते हैं, तो किसी एक गलती का असर कई बैंकों पर पड़ सकता है.इसलिए बाहर की कंपनियों से AI सर्विस लेते समय बैंकों को सावधानी बरतनी चाहिए.
तेजी से नहीं, समझदारी से AI अपनाएं
मुंबई में एक कार्यक्रम में गवर्नर ने कहा कि AI के दौर में वो बैंक सफल नहीं होंगे जो सबसे तेजी से AI अपनाएंगे. सफल वो बैंक होंगे जो ये समझकर AI का इस्तेमाल करेंगे कि ये तकनीक कैसे काम करती है और इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाना है.
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साइबर सुरक्षा पर भी ध्यान
बैंक AI का इस्तेमाल काम को तेज और आसान बनाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन इससे साइबर हमलों और दूसरी तकनीकी परेशानियों का खतरा भी ज्यादा हो रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अप्रैल में बैंकों को AI से जुड़े खतरों को देखते हुए पहले से सेफ्टी के कदम उठाने को कहा था.
भारतीय बैंक मजबूत हालात में
गवर्नर ने कहा कि साइबर खतरों के अलावा दुनिया में चल रहे राजनीतिक तनाव और बिजनेस को लेकर चीजों का फिक्स नहीं होना भी बैंकों के लिए चुनौती हैं. लेकिन, उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक इन चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत हालात में हैं. देश में कर्ज का अच्छा इजाफा, कम कर्ज, काफी पैसा और अच्छी कमाई इसकी वजह है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा परेशानियों के बावजूद भारत की इकॉनमी और मजबूत होकर सामने आएगी. देश की अच्छी तरक्की, काबू में महंगाई और काफी विदेशी मुद्रा भंडार इसके लिए अच्छा इशारा हैं.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 02:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, बदलेगा, बैंकिंग, सिस्टम, RBI, गवर्नर, ने, पर, खर्च, बढ़ाने, को, कहा</media:keywords>
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        <title>UPI Transaction: 1 रुपया UPI करो या 1000, हर ट्रांजैक्शन पर कितनी आती है लागत? समझिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-transaction-1-रुपया-upi-करो-या-1000-हर-ट्रांजैक्शन-पर-कितनी-आती-है-लागत-समझिए</link>
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        <description><![CDATA[ UPI Payments: UPI पेमेंट्स को लेकर पिछले काफी समय से चर्चाओं का बाजार चल रहा है. जब से इसको लेकर चार्जेज की बातें चल रही हैं तब से ये और भी ज्यादा चर्चा में है. अब तक भारत में UPI पेमेंट करना ज्यादातर लोगों के लिए फ्री ही था. लेकिन UPI को चलाने में बैंकों, पेमेंट कंपनियों और दूसरे सिस्टम से जुड़े संस्थानों को हर साल बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है. अब सरकार के एक प्रस्ताव के बाद UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर कुछ मामलों में चार्ज लगने की संभावना को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
UPI चलाने में कितना होता है खर्च?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक UPI को चलाने के लिए सिर्फ मोबाइल एप ही नहीं, बल्कि पूरा डिजिटल पेमेंट सिस्टम काम करता है. इसमें एप और उसकी तकनीक को चलाने, कस्टमर सर्विस, बैंक द्वारा ट्रांजैक्शन चेक करना, साइबर सुरक्षा, KYC, क्लाउड स्टोरेज, फ्रॉड रोकना, विवादों का समाधान और नेटवर्क की लगातार निगरानी जैसे कई खर्च शामिल होते हैं.
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एक अनुमान के मुताबिक, UPI और RuPay डेबिट कार्ड का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने में कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च हो सकता है. वहीं, संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 से 2024-25 के बीच सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए करीब 8730 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी, जो डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की कुल लागत का सिर्फ करीब 11% थी. इस आधार पर डिजिटल पेमेंट सिस्टम की कुल लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपये सालाना होने का अनुमान है. इसका मतलब है कि हर ट्रांजैक्शन पर करीब 83 पैसे खर्ज होता है.
कितनी लग सकती है फीस?बड़े कारोबारियों से UPI भुगतान पर 0.3% से 0.6% तक MDR लिया जा सकता है. MDR वो फीस है, जो पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए बैंक या पेमेंट कंपनी व्यापारी से लेती है. कुछ एक्सपर्ट्स का अनुमान इससे काफी कम है. उनके मुताबिक UPI पर 0.05% से 0.07% तक MDR हो सकता है. ये फीस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों से लेने की बात कही जा रही है. तुलना करें तो क्रेडिट कार्ड पर MDR आमतौर पर 1% से 3% तक और डेबिट कार्ड पर करीब 0.9% तक होता है.
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UPI पर क्यों लग सकता है चार्ज?बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंड) बिल, 2026 पेश किया. इसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव है. इस बदलाव के बाद बैंकों और पेमेंट सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले कुछ पेमेंट्स पर फीस लेने की अनुमति मिल सकती है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर UPI भुगतान पर चार्ज लगेगा.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>11 अगस्त को कितने में मिल रहा है 1 लीटर पेट्रोल, जानें पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Price Today 11 August 2026: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आज यानी 11 अगस्त 2026 को गाड़ी चलाने के लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. तेल कंपनियों ने आज भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हैं, मतलब कि अगर आप आज अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं, तो आपको कल के मुकाबले ज्यादा पैसे नहीं देने होंगे.&amp;nbsp;
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है. खासकर रोज गाड़ी से ऑफिस जाने वाले लोगों, ट्रांसपोर्ट कारोबार और सामान की ढुलाई पर इसका असर ज्यादा ही दिखाई देता है. यही कारण है कि हर दिन सुबह पेट्रोल-डीजल के नए रेट का इंतजार रहता है.&amp;nbsp;
दिल्ली में क्या है भाव?राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है. वहीं डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है. मौजूदा रेट में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है. यानी दिल्ली में रहने वालों को आज पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देने होंगे.
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मुंबई में क्या है रेट?मुंबई की बात करें तो यहां पेट्रोल की कीमत दिल्ली ये काफी ज्यादा है. यहां आज एक लीटर पेट्रोल 111.21 रुपये में मिल रहा है. वहीं डीजल के लिए 97.83 रुपये प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं. मुंबई में भी आज कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.&amp;nbsp;
कोलकाता और चेन्नई में क्या है दाम?कोलकाता में पेट्रोल का भाव 113.51 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है. वहीं, चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 99.55 रुपये प्रति लीटर है.&amp;nbsp;
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अलग क्यों होता है पेट्रोल-डीजल का दाम?कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि जब पेट्रोल और डीजल की कीमत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव से जुड़ी है तो फिर दिल्ली और मुंबई में अलग-अलग रेट क्यों हैं. इसकी बड़ी वजह राज्य सरकारों का वैट और टैक्स है. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, डीलर कमीशन और ट्रांसपोर्टेशन खर्च से भी दाम अलग हो जाते हैं. पेट्रोल और डीजल फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं आते, इसलिए अलग-अलग राज्यों में टैक्स स्ट्रक्चर अलग होने से कीमतों में अंतर दिखाई देता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>14 किलो और 19 किलो का गैस सिलेंडर कितने में मिलेगा? जानें आज क्या है एलपीजी का दाम</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 11 August 2026: आज अगर आपके घर का गैस सिलेंडर खत्म हो गया है तो ये खबर आपके लिए है. आज एलपीजी गैस सिलेंडर का क्या रेट है, इसे आप यहां से जान सकते हैं. इससे आपको बुकिंग करते हुए बजट संभालने में मदद मिलेगी. यहां शहर अनुसार, घरेलू और कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के रेट के बारे में बताया गया है.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट-&amp;nbsp;



शहर
घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम)


दिल्ली
₹942.00 रुपए
₹2,738.00 रुपए


कोलकाता
₹968.00 रुपए
₹2,872.50 रुपए


मुंबई
₹941.50 रुपए
₹2,691.50 रुपए


चेन्नई
₹957.50 रुपए
₹2,906.00 रुपए


गुड़गांव
₹950.50 रुपए
₹2,755.00 रुपए


नोएडा
₹939.50 रुपए
₹2,738.00 रुपए


बेंगलुरू
₹944.50 रुपए
₹2,821.00 रुपए


भुवनेश्वर
₹968.00 रुपए
₹2,908.00 रुपए


चंडीगढ़
₹951.50 रुपए
₹2,760.00 रुपए


हैदराबाद
₹994.00 रुपए
₹2,985.00 रुपए


जयपुर
₹945.50 रुपए
₹2,765.50 रुपए


लखनऊ
₹979.50 रुपए
₹2,860.50 रुपए


पटना
₹1,031.50 रुपए
₹3,018.00 रुपए



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गैस सिलेंडर कैसे करें बुक?
गैस सिलेंडर बुक करने के लिए आप रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से मिस्ड कॉल, व्हाट्सएप, कॉल या यूपीआई एप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इंडेन गैस के उपभोक्&amp;zwj;ता 7718955555 पर एसएमएस भेजकर सिलेंडर रिफिल बुक कर सकते हैं. सबसे पहले 16 डिजिट का अपना कंज्&amp;zwj;यूमर नंबर लिखिए. स्&amp;zwj;पेस देते हुए जगह और फिर आधार कार्ड के आखिरी चार नंबर डालिए. अपने रजिस्&amp;zwj;टर्ड मोबाइल नंबर से 8454955555 पर मिस्ड कॉल करके भी बुकिंग कर सकते हैं.&amp;nbsp;
बुकिंग न हो तो कैसे करें शिकायत?
अगर इंडेन गैस उपभोक्&amp;zwj;ता को गैस बुकिंग या डिलिवरी को लेकर कोई दिक्कत हो तो आप शिकायत भी कर सकते हैं. शिकायत करने के लिए टोल फ्री नंबर 1800 2333 555 पर फोन किया जा सकता है. ये नंबर ग्राहक सहायता के लिए 24 घंटे खुला रहता है.&amp;nbsp;
11 अगस्त को कितने में मिल रहा है 1 लीटर पेट्रोल, जानें पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>महाराष्ट्र में दूध 2 रुपए महंगा, जानिए भैंस और गाय के मिल्क की ताजा कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महाराष्ट्र-में-दूध-2-रुपए-महंगा-जानिए-भैंस-और-गाय-के-मिल्क-की-ताजा-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र के लोगों को आज से दूध खरीदने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. राज्य में गाय और भैंस दोनों तरह के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढा दिए गए हैं. नई दरें 11 अगस्त यानी आज से लागू हो गई हैं. दूध उत्पादकों और प्रोसेसर्स का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण यह फैसला लेना बेहद जरूरी हो गया था. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>महाराष्ट्र, में, दूध, रुपए, महंगा, जानिए, भैंस, और, गाय, के, मिल्क, की, ताजा, कीमत</media:keywords>
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        <title>UPI पेमेंट पर कौन देगा चार्ज? बिल पास, वित्त मंत्री सीतारमण ने कर दिया साफ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-पेमेंट-पर-कौन-देगा-चार्ज-बिल-पास-वित्त-मंत्री-सीतारमण-ने-कर-दिया-साफ</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/upi-पेमेंट-पर-कौन-देगा-चार्ज-बिल-पास-वित्त-मंत्री-सीतारमण-ने-कर-दिया-साफ</guid>
        <description><![CDATA[ UPI Payment Charge: UPI से पेमेंट करने वाले आम लोगों के लिए राहत की खबर है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आम कस्टमर UPI से बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के पेमेंट करते रहेंगे, लेकिन फ्यूचर में कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है. MDR एक तरह का चार्ज है, जो डिजिटल पेमेंट मंजूर करने वाले मर्चेंट से लिया जाता है.
सोमवार को राज्यसभा में टैक्सेशन और other Laws Bill, 2026 पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने ये जानकारी दी. राज्यसभा ने बिल को पास कर दिया है और अब इसे कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होगी.
MDR को लेकर कोई लास्ट नियम फिक्स नहीं- सीतारमण
सीतारमण ने कहा कि अभी MDR को लेकर कोई लास्ट नियम फिक्स नहीं हुआ है. अगर आगे इसे लागू किया जाता है, तो ये सिर्फ कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगेगा और इसके लिए एक फिक्स की गई ज्यादा रकम हो सकती है.आम लोगों के छोटे UPI पेमेंट फ्री रहने की बात कही गई है. छोटे दुकानदारों को MDR से बाहर रखा जाएगा.इनमें चाय बेचने वाले, सब्जी वाले, फूल बेचने वाले, ऑटो ड्राइवर और किराना दुकानदार शामिल हैं.
बिल में पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में बदलाव का बात है. बिल पास होने के बाद एक कमेटी ये फिक्स करेगी कि MDR लागू किया जाए या नहीं और अगर किया जाए तो इसके नियम और दायरा क्या होगा.
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सीतारमण ने कार्ड पेमेंट का मिसाल देते हुए कहा कि मर्चेंट आमतौर पर क्रेडिट कार्ड पर करीब 1.5 से 2% या उससे ज्यादा MDR देते हैं.डेबिट कार्ड पर ये चार्ज 0.90 % तक हो सकता है. उन्होंने कहा कि बड़े रिटेलर आमतौर पर ये चार्ज सीधे कस्टमर्स से नहीं लेते, बल्कि डिस्काउंट, EMI और कैशबैक जैसे ऑफर देते हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि UPI के लिए कमाई का एक टिकाऊ मॉडल बनने से नए फीचर्स और मर्चेंट ऑफर्स लाने में मदद मिल सकती है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और चीन की मिसाल भी दी. जुलाई 2026 में UPI पर करीब 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही. UPI अब 11 देशों में मौजूद है.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को भी मदद&amp;nbsp;
बिल में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मदद देने के लिए भी कई बात हैं. इसके अनुसार कुछ विदेशी कंपनियों को भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के लिए मशीनरी,और कंपोनेंट्स रखने पर टैक्स से राहत मिल सकती है.
विदेशी कंपनियां कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में कंपोनेंट्स रख सकेंगी, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तक पहुंचाया जा सकेगा. इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल हैं. फिक्स टैक्स छूट 15 साल तक मिल सकती है.
 भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में इजाफा
सरकार का कहना है कि इससे भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में इजाफा हुआ है. इससे इन्वेस्टमेंट आएगा और रोजगार के मौके बनेंगे. इसके अलावा विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में डेटा सेंटर की सर्विस लेने पर भी टैक्स छूट का बात है. ये छूट 31 मार्च 2047 तक दी जा सकती है. इससे भारत में डेटा सेंटर और AI डेटा सेंटर में इन्वेस्टमेंट ज्यादा होने की उम्मीद है.
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सरकार भारत में डायमंड की होलसेल ट्रेडिंग को भी मदद करना चाहती है. फिलहाल इस बिजनेस का कुछ हिस्सा दुबई जैसी जगहों पर होता है. इसे भारत में लाने से डायमंड इंडस्ट्री और रोजगार को फायदा होने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, पेमेंट, पर, कौन, देगा, चार्ज, बिल, पास, वित्त, मंत्री, सीतारमण, ने, कर, दिया, साफ</media:keywords>
    </item>
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        <title>सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty 24550 के नीचे, जानें बाजार में गिरावट की वजह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सेंसेक्स-250-अंक-से-ज्यादा-टूटा-nifty-24550-के-नीचे-जानें-बाजार-में-गिरावट-की-वजह</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सेंसेक्स-250-अंक-से-ज्यादा-टूटा-nifty-24550-के-नीचे-जानें-बाजार-में-गिरावट-की-वजह</guid>
        <description><![CDATA[ Stock Market Today 11 August 2026: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार यानी 11 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,550 के नीचे फिसल गया है. निवेशकों के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है. वहीं एयरटेल और इंडिगो जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बनाया.
किसने दिए थे संकेत?भारतीय बाजार खुलने से पहले ही कमजोरी के संकेत मिल गए थे. NSE IX पर गिफ्ट निफ्टी 15 अंक यानी 0.06% गिरकर 24616.50 पर कारोबार कर रहा था. इससे संकेत मिल रहा था कि मंगलवार को घरेलू बाजार की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है. सोमवार को भी बाजार में ज्यादा हलचल नहीं हुई थी. सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए थे. मजबूत पहली तिमाही के नतीजों ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और मिडिल ईस्ट में तनाव ने तेजी पर ब्रेक लगाया.&amp;nbsp;
सेंसेक्स में 250 अंक से ज्यादा की गिरावटमंगलवार के शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा नीचे आ गया है. वहीं, निफ्टी 50 भी 24,550 के स्तर से नीचे चला गया. बाजार में गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही है. कुछ बड़े और प्रमुख शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों इंडेक्स दबाव में आ गए हैं.
एयरटेल और इंडिगो बने बड़े ड्रैगआज के कारोबार में भारती एयरटेल और इंडिगो के शेयर खास तौर पर दबाव में है. इन शेयरों में गिरावट का असर इंडेक्स पर भी पड़ा. इसके अलावा विप्रो, बीएसई, वोडाफोन आइडिया और हुंडई इंडिया के शेयर भी आज निवेशकों के रडार पर हैं.&amp;nbsp;
एशियाई बाजार भी कमजोरघरेलू बाजार के अलावा मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली है. अमेरिकी इक्विटी इंडेक्स फ्यूचर्स भी दबाव में रहे, यानी भारतीय बाजार को ग्लोबल मार्केट से भी बहुत मजबूत सपोर्ट नहीं मिल रहा था.&amp;nbsp;
Gold में लगातार तीसरे दिन तेजीजहां शेयर बाजार दबाव में हैं, वहीं सोने की कीमतों में तेजी जारी है. मंगलवार को सोना लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़ा और दो महीने से ज्यादा के उच्च स्तर पर पहुंच गया. सोने में तेजी का एक कारण बाजार में बनी अनिश्चितता भी है. जब शेयर बाजार को लेकर जोखिम बढ़ता है तो निवेशक अक्सर सोने की ओर भागते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 10:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में महंगा क्यों बिकता है iPhone, 1 लाख के फोन में कितना पैसा कंपनी को और कितना सरकार को जाता है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-महंगा-क्यों-बिकता-है-iphone-1-लाख-के-फोन-में-कितना-पैसा-कंपनी-को-और-कितना-सरकार-को-जाता-है</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-महंगा-क्यों-बिकता-है-iphone-1-लाख-के-फोन-में-कितना-पैसा-कंपनी-को-और-कितना-सरकार-को-जाता-है</guid>
        <description><![CDATA[ आईफोन खरीदने का सपना बहुत से लोगों का होता है. क्रेज तो ऐसा है कि भारत में लोग ईएमआई लगाकर आईफोन लेते हैं, क्योंकि ये काफी ज्यादा महंगा भी होता है. खासकर भारत में आईफोन की कीमत अमेरिका, दुबई से तो ज्यादा ही होती है. ऐसे में मन में ये सवाल जरूर आता है कि आखिर यहां आईफोन इतना महंगा क्यों बिकता है? क्या इसकी पूरी वजह सरकार का टैक्स है या एप्पल ही काफी बड़ा मार्जिन रखती है?
देखिए सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि भारत में बिकने वाला हर आईफोन पूरी तरह विदेश से तैयार होकर नहीं आता है. एप्पल ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग काफी बढ़ाई है. 2026 में तो दुनिया के करीब 26% आईफोन भारत में बनने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
सरकार को कितना मिलता है?अगर आप भारत में 1 लाख रुपए का आईफोन खरीदते हैं तो इस कीमत में जीएसटी शामिल होता है. एप्पल खुद अपनी वेबसाइट पर साफ बताता है कि उसके भारत में दिखाए गए आईफोन के दाम जीएसटी के साथ होते हैं और टैक्स बिल में अलग से दिखाया जाता है. आईफोन पर फिलहाल 18% जीएसटी लागू है. लेकिन 1 लाख रुपए पर सीधे 18000 रुपए रुपये जीएसटी नहीं निकलता, क्योंकि 1 लाख की कीमत पहले से जीएसटी के साथ ही है.
आप इसे ऐसे समझिए कि 1 लाख रुपए को 1.18 से भाग देंगे तो करीब 84746 रुपए हुए. इसका मतलब है कि टैक्स से पहले फोन की कीमत 84746 रुपए थी और इसमें करीब 15254 रुपए जीएसटी जोड़ा गया है. अब इस 15254 रुपए को सरकार का वो हिस्सा माना जा सकता है जो ग्राहक की अंतिम कीमत में जीएसटी के तौर पर शामिल है. वैसे ये जीएसटी भी सिर्फ केंद्र सरकार का पैसा नहीं है. इसमें केंद्र और राज्य सरकार के बीच सीजीएसटी/एसजीएसटी या आईजीएसटी बंटता है.
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84,746 रुपये कहां जाते हैं?अब असली सवाल यही है कि टैक्स निकालने के बाद बचे हुए 84746 रुपए में एप्पल को कितना मिलता है? इस मामले में तो एक आंकड़ा बताना सही नहीं होगा. क्योंकि ये पूरी रकम एप्पल की भी कमाई नहीं है. इसमें फोन के पार्ट्स, असेंबली, कर्मचारियों की सैलरी और मैन्युफैक्चरिंग के खर्च, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, मार्केटिंग, रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन जैसे खर्चे शामिल होते हैं. इसके बाद जो पैसा बचता है उसमें एप्पल का ऑपरेटिंग प्रॉफिट शामिल होता है. इसलिए ये कहना कि 1 लाख में से 84746 रुपए सीधे एप्पल की जेब में जाता है, ये तो गलत होगा.
भारत में फोन महंगा क्यों है?अब ये भी एक कंफ्यूजन ही है कि जब भारत में आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है तो फिर ये इतना ज्यादा महंगा क्यो बिक रहा है? असल में भारत में असेंबली होने का मतलब ये नहीं है कि फोन का हर पार्ट भारत में ही बनता है. एप्पल की सप्लाई चेन दुनियाभर में फैली हुई है. कंपनी के हजारों सप्लायर 60 से ज्यादा देशों में हैं और अलग-अलग कंपोनेंट्स मिलकर फोन को तैयार करते हैं.
मतलब कि भारत में फोन असेंबल होने के बावजूद सप्लाई चेन का तो खर्च होता ही है. इसके अलावा कुछ आईफोन मॉडल या उनके कंपोनेंट्स के आयात पर कस्टम ड्यूटी भी लग जाती है. बता दें कि भारत ने 2024 के बजट में ही मोबाइल फोन और कुछ कंपोनेंट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 15% किया था.&amp;nbsp;
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हर देश में अलग कीमत क्यों?सिर्फ टैक्स की वजह से ही आईफोन महंगा नहीं होता है. एप्पल की अपनी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी है. एप्पल एक प्रीमियम ब्रांड है और अलग-अलग देशों में उसकी कीमत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग के खर्च के आधार पर नहीं फिक्स की जाती है. इसमें बाजार की हालत, करेंसी, डिस्ट्रीब्यूशन और कंपनी की प्राइसिंग स्ट्रेटेजी भी शामिल होती है. यही वजह है कि एक ही मॉडल की कीमत अलग-अलग देशों में अलग हो जाती है.
अमेरिका में क्यों है सस्ता?जब लोग कहते हैं कि अमेरिका में आईफोन सस्ता है, तो ये एक जरूरी अंतर समझना चाहिए. अमेरिका में एप्पल की वेबसाइट पर दिखाई जाने वाली कीमत सेल्स टैक्स हटाकर होती है, जबकि भारत में एप्पल की वेबसाइट पर दिखने वाली कीमत जीएसटी के साथ होती है. एप्पल ने खुद ये बताया है. भारत में एप्पल आईफोन 17, 82900 रुपए से शुरू होता है और आईफोन 17 Pro की शुरुआती कीमत 134900 रुपए है. इनमें जीएसटी शामिल है. इसलिए सिर्फ वेबसाइट पर दिखने वाली अमेरिकी और भारतीय कीमत को देखकर पूरा अंतर टैक्स के खाते में नहीं डाल देना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, में, महंगा, क्यों, बिकता, है, iPhone, लाख, के, फोन, में, कितना, पैसा, कंपनी, को, और, कितना, सरकार, को, जाता, है</media:keywords>
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        <title>Real Estate: भारत की सबसे महंगी होम डील, गुरुग्राम में किसने खरीदा 271 करोड़ का पेंटहाउस?</title>
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        <description><![CDATA[ Gurugram Penthouse Deal: रियल एस्टेट में प्रॉपर्टीज के प्राइज लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. भारत में लोग अब एसआईपी या किसी एफडा में निवेश करने से ज्यादा प्रॉपर्टी में ही निवेश करना पसंद कर रहे हैं. इसी बीच अब भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डील चर्चा का विषय बन गई है. खबरें हैं कि गुरुग्राम में पेंटहाउस की इतनी बड़ी डील हुई है, जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान रह गया है.
कितने में हुआ सौदा?दरअसल बिजनेस स्टैंडर्ड ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि गुरुग्राम के DLF फेज-5 में बन रहे सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट द डहलियाज (The Dahlias) में एक पेंटहाउस 271 करोड़ रुपये में बिका है. ये अब तक की सबसे महंगी डील है, इससे पहले भारत में कभी भी इतनी बड़ी डील नहीं हुई. ये पेंटहाउस 17,200 स्क्वायरफीट एरिया में बना है और 10,500 स्क्वायर फीट कार्पेट एरिया है.
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किसने खरीदी प्रॉपर्टीइस पेंटहाउस को मानव सरदाना नाम के आंत्रप्रिन्योर ने खरीदा है, जो इम्पीरियल ऑटो नाम की कंपनी के मालिक है. सूत्रों की मानें तो DLF ने इसे सुपर एरिया के हिसाब से करीब 1.58 लाख रुपये पर स्क्वायर फीट की कीमत पर बेचा है. वहीं कार्पेट एरिया के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 2.6 लाख रुपये पर स्क्वायर फीट है. हालांकि इस डील पर DLF की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
प्रोजेक्ट से क्या हैं उम्मीदें?बता दें कि DLF को इस पूरे प्रोजेक्ट से 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई होने की उम्मीद है. कंपनी अब तक प्रोजेक्ट की 65 प्रतिशत से ज्यादा यूनिट्स बेच चुकी है. इस प्रोजेक्ट में एक साधारण से अपार्टमेंट की कीमत 100 करोड़ रुपये से 170 करोड़ रुपये के बीच है. वहीं, पेंटहाउस की कीमत इससे भी ज्यादा है.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Import Duty: सोने के आयात पर सख्त नियम का असर, सरकार के खजाने में आए 10,040 करोड़</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Import Duty: कुछ महीने पहले ही सरकार ने गोल्ड की इम्पोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी की थी, जिसका फायदा अब ढाई महीने बाद सरकारी खजाने में नजर आ रहा है. इस बारे में हाल ही में लोकसभा में बताया गया है. लोकसभा के मानसून सत्र में सरकार के वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोने और चांदी के आयात ड्यूटी बढ़ाने के बाद हुए फायदे के बारे में बताया है.
कितना भरा सरकारी खजाना?दरअसल सरकार के द्वारा 13 मई 2026 को सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी. जिसके महज ढाई महीने बाद ही सरकार ने 10,040 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है. सोमवार को वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ये जानकारी लोकसभा में दी. मंत्री के अनुसार 13 मई से 2 अगस्त 2026 के बीच सोने के आयात से सरकार को 10,040 करोड़ रुपये का कस्टम ड्यूटी कलेक्शन मिला.
इसी दौरान चांदी के आयात से 328 करोड़ रुपये और प्लैटिनम से 95 करोड़ रुपये की ड्यूटी मिली. सरकार ने साफ किया कि ये आंकड़े अभी शुरुआती हैं.
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कितनी बढ़ाई गई थी इम्पोर्ट ड्यूटी?सरकार ने मई में सोने और चांदी पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था. इसके लिए बेसिक कस्टम ड्यूटी को 10 प्रतिशत और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस को 5 प्रतिशत बढ़ाया गया था. इसका उद्देश्य सोने और चांदी के ज्यादा आयात को कम करना था. जिससे देश के करंट अकाउंट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव ना पड़े. सरकार को उम्मीद थी कि ज्यादा ड्यूटी लगाने से आयात को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
सोने की तस्करी पर भी हुआ कार्रवाईबता दें कि सरकार ने सोने की तस्करी पर कार्रवाई के आंकड़े भी लोकसभा में शेयर किए हैं. 13 मई से 30 जून 2026 के बीच कस्टम विभाग ने सोने की तस्करी के 287 मामले दर्ज किए. इस दौरान करीब 160.91 किलो सोना जब्त किया गया और 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. मंत्री ने ये भी बताया कि देश के घरों में कितना सोना बिना इस्तेमाल के रखा हुआ है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सरकार के पास नहीं है. सरकार इस तरह का डाटा अलग से नहीं रखती है.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Restaurant Hygiene: रेस्टोरेंट्स इंडस्ट्री पर खुलासा, देश की सिर्फ 32% खानपान वाली जगह ही हाइजीनिक&amp; सर्वे</title>
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        <description><![CDATA[ Restaurant Hygiene: किसी भी ओकेजन जैसे बर्थडे, शादी की सालगिरह, लंच- डिनर डेट या फिर किसी भी सेलिब्रेशन के लिए हम रेस्टोरेंट्स जाते हैं. वहां जाकर सेलिब्रेट करते हैं और अच्छा खाना खाते हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस रेस्टोरेंट के किचन का खाना आप खा रहे हैं वो कितना साफ- सफाई से बन रहा है? नहीं ना! अगर आप जान लेंगे तो बाहर खाना ही खाना छोड़ देंगे.
रेस्टोरेंट्स के हाईजीन की सर्वे रिपोर्टदरअसल हाल ही में LocalCircles की एक सर्वे रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में सामने आया है कि केवल 32% लोगों ने ही अपने शहर या इलाके के एयर-कंडीशंड रेस्टोरेंट की साफ-सफाई और फूड सेफ्टी को अच्छा या बहुत अच्छा बताया. तो वहीं वहीं, 42% लोगों ने इसे औसत माना है, जबकि 9% ने खराब या बहुत खराब बताया है. इस सर्वे में देश के 244 जिलों के 91 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. इनमें 64% पुरुष और 36% महिलाएं थीं. जिसमें से करीब 47% लोग टियर-1 सिटी से, 33% लोग टियर-2 सिटी से और 20% लोग टियर-3 एंड 4 सिटी से थे.
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रेस्टोरेंट्स को लेकर चिंता क्या है?इस सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि 79% लोगों के लिए रेस्टोरेंट का गंदा किचन, डाइनिंग एरिया और वॉशरूम सबसे बड़ा ऑफ पॉइंट है. वहीं 74% लोग बचे हुए या बासी खाने के दोबारा इस्तेमाल से परेशान हैं. तो वहीं 72% ने खाना पकाने के तेल को बार-बार इस्तेमाल करने की बात कही है. इसके अलावा, 63% लोगों ने खराब तरीके से रखे या एक्सपायर्ड सामानों के बारे में बताया है. जबकि 61% ने कीड़े-मकौड़े और कर्मचारियों के पर्सनल हाईजीन को टारगेट किया है.
क्या चाहते हैं कस्टमर्स?बता दें कि सर्वे रिपोर्ट में लोगों ने ये भी बताया है कि वो रेस्टोरेंट के हाइजीन को लेकर नियमों में और ज्यादा सख्ती चाहते हैं. करीब 74% लोगों ने रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी ऐप पर हाइजीन रेटिंग दिखाने की मांग की है. तो वहीं 72% लोगों ने कहा है कि र्सोटरेंट्स में हर तीन महीने में हाइजीन की जांच होना चाहिए. जबकि 71% ने बार-बार नियम तोड़ने वाले रेस्टोरेंट पर जुर्माना लगाने को भी कहा है. इतना ही नहीं कस्टमर्स चाहते हैं रेस्टोरेंट्स में पारदर्शिता हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>पति&amp;पत्नी दोनों हैं सरकारी कर्मचारी? जानें किसे है HRA क्लेम करने का अधिकार</title>
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        <description><![CDATA[ HRA Rules: पति-पत्नी जब दोनों एक ही शहर में सरकारी नौकरी में हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी क्वॉर्टर मिलता है, तो अकसर HRA (हाउस रेंट अलाउंस) के लिए पात्रता को लेकर सवाल उठते हैं. ऐसी स्थिति में इस ख्याल का आना लाजिमी है कि क्या दूसरा साथी भी HRA पाने कर हकदार है? इसे लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में नियम स्पष्ट कर दिए हैं.&amp;nbsp;
हाउस रेंट अलाउंस को लेकर क्या है नियम?&amp;nbsp;
हाल ही में अगस्त 2026 में वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया कि अगर दोनों पति-पत्नी सरकारी कर्मचारी और दोनों की पोस्टिंग एक ही शहर में हो रखी है. इनमें से किसी एक को सरकारी आवास या क्वॉर्टर अलॉट है, तो दूसरे को HRA नहीं मिलेगा. जब परिवार को पहले से ही सरकारी मकान मिल चुका है, तो किराए पर अतिरिक्त खर्च करने की कोई जरूरत ही नहीं है. चूंकि परिवार को एक यूनिट माना जाता है इसलिए लाइसेंस फीस भी उसी कर्मचारी की सैलरी से कटती है, जिसके नाम पर क्वॉर्टर है.&amp;nbsp;
अगर मकान खुद का हो तो...?
वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) उन केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है जिनके पास सरकारी आवास नहीं है और जो किराए के मकानों में रह रहे हैं. अगर पति-पत्नी दोनों ही केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और एक ही शहर में तैनात हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी आवास मिलता है, तो सरकार यह मानती है कि परिवार को वह आवास मिल गया है इसलिए दूसरे जीवनसाथी को अलग से HRA नहीं दिया जाता है.
हालांकि, अगर दोनों में किसी को भी सरकारी आवास नहीं मिला है और दोनों किराए पर या अपने खरीदे हुए मकान में रह रहे हैं, तो फिर पति-पत्नी दोनों अपने हिस्से का HRA क्लेम कर सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि नियमों के मुताबिक, सरकारी आवास अलॉट न होने की स्थिति में दोनों के साथ रहने पर भी दोनों कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी और शहर की कैटेगरी (X,Y,Z) के आधार पर अलग-अलग HRA पाने का अधिकार है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पति-पत्नी, दोनों, हैं, सरकारी, कर्मचारी, जानें, किसे, है, HRA, क्लेम, करने, का, अधिकार</media:keywords>
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        <title>AI सेक्टर में भी हाहाकार! 66% कर्मचारियों को अगले 3&amp;6 महीने में नौकरी जाने का डर</title>
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        <description><![CDATA[ AI Job News:&amp;nbsp;AI ने नौकरी की दुनिया में बड़ा बदलाव किया है. कंपनियां तेजी से AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल ज्यादा कर रही हैं.लेकिन अब AI के जगह में काम करने वाले कर्मचारियों को भी नौकरी जाने की परेशानी सताने लगी है. AI और मशीन लर्निंग से जुड़े 66% कर्मचारियों को डर है कि अगले 3 से 6 महीनों में उनकी टीम में छंटनी हो सकती है या कर्मचारियों की संख्या कम की जा सकती है.
ये सर्वे प्रोफेशनल कम्युनिटी ऐप Blind ने किया है. जुलाई 2026 में भारत में काम करने वाले 1,552 कर्मचारियों से उनकी नौकरी की सेफ्टी को लेकर सवाल पूछे गए. सर्वे में सामने आया कि AI के जगह में काम करने वाले लोगों को भी नौकरी जाने का डर उतना ही है, जितना उन जगहों के कर्मचारियों को है जिन्हें AI से ज्यादा इफेक्ट होने वाला माना जाता है.
सेल्स और मार्केटिंग में सबसे ज्यादा डर
सर्वे के मुताबिक, सेल्स और मार्केटिंग से जुड़े 68% कर्मचारियों को अगले 3 से 6 महीनों में छंटनी या कर्मचारियों की संख्या घटने का डर है.इसके बाद AI और मशीन लर्निंग का नंबर आता है, जहां 66% कर्मचारियों ने ऐसी परेशानी जताई. वहीं प्रोडक्ट और डिजाइन से जुड़े 65% कर्मचारियों को भी नौकरी में कटौती का डर है.
इंजीनियरों में डर थोड़ा कम
सर्वे में इंजीनियरिंग से जुड़े कर्मचारियों की हालत थोड़ी अलग रही. सिर्फ 24% इंजीनियरों ने कहा कि उनकी टीम में कर्मचारियों की संख्या घटने की संभावना बहुत ज्यादा है.ये सभी जगह में सबसे कम आंकड़ा रहा.
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लेकिन, इसका मतलब ये नहीं है कि इंजीनियर पूरी तरह सेफ हैं.इंजीनियरों में कुल नौकरी के जोखिम को लेकर परेशानी करीब 58% रही. वहीं डेटा और एनालिटिक्स में ये आंकड़ा करीब 51% रहा. इससे पता चलता है कि AI से जुड़े जगहों में काम करने वाले सभी कर्मचारी खुद को अनसेफ नहीं मानते.
इन कंपनियों के कर्मचारियों को ज्यादा परेशानी&amp;nbsp;
कंपनी के हिसाब से भी नौकरी जाने के डर में काफी अंतर देखने को मिला. सेल्सफोर्स में 81% और ओरेकल में 80% कर्मचारियों ने नौकरी में कटौती की डर जताई. वहीं Uber में 77% और PayPal में 75% कर्मचारियों को ऐसा डर है. दूसरी ओर, Zoho में सिर्फ 9% कर्मचारियों ने छंटनी को लेकर चिंता जताई. वहीं Freshworks में ये आंकड़ा 44% रहा.
छंटनी से पहले मिलते हैं ये संकेत
कर्मचारियों को छंटनी का डर सिर्फ ऐलान के बाद नहीं होता.कई बार कंपनी में पहले से कुछ बदलाव दिखाई देने लगते हैं. सर्वे में 27% कर्मचारियों ने नई भर्तियां रोकने यानी हायरिंग फ्रीज को बड़ा संकेत बताया. 24% लोगों ने बजट या कर्मचारियों की संख्या से जुड़े मकसद में कटौती को जरूरी माना है. वहीं सिर्फ 9% कर्मचारियों ने छंटनी की आधिकारिक ऐलान को &amp;nbsp;संकेत बताया.
AI के दौर में कैसे बचाएं नौकरी?
सर्वे से साफ है कि सिर्फ AI या किसी एक तकनीकी जगह में काम करना नौकरी की गारंटी नहीं है. कर्मचारियों को अपनी मौजूदा स्किल के साथ नई तकनीक सीखते रहना जरूरी है.खासकर AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल अपने काम को बेहतर और तेज बनाने के लिए कैसे किया जाए, ये &amp;nbsp;समझना फायदेमंद हो सकता है.
लेकिन, इस एक सर्वे के आधार पर ये कहना सही नहीं होगा कि AI या इंजीनियरिंग की नौकरियां पूरी तरह सेफ या अनसेफ हैं. सर्वे मुख्य रूप से कर्मचारियों की सोच और नौकरी को लेकर उनकी परेशानी को दिखाता है.आने वाले समय में AI नौकरियां खत्म करने के बजाय उनके काम करने के तरीके को ज्यादा बदल सकता है. ऐसे में नई तकनीक के साथ खुद को अपडेट रखने वाले प्रोफेशनल्स के लिए मौके बने रह सकते हैं.
पति-पत्नी दोनों हैं सरकारी कर्मचारी? जानें किसे है HRA क्लेम करने का अधिकार
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Money Transfer: गलती से हो गए किसी और के खाते में पैसे ट्रांसफर, अब क्या करें? सरकार करेगी मदद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/money-transfer-गलती-से-हो-गए-किसी-और-के-खाते-में-पैसे-ट्रांसफर-अब-क्या-करें-सरकार-करेगी-मदद</link>
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        <description><![CDATA[ Money Transferred to Wrong Account: ऑनलाइन बैंकिंग और UPI के बढ़ते इस्तेमाल के चलते कई बार लोग जल्दबाजी में गलती कर बैठते हैं. पैसे ट्रांसफर करते समय किसी गलत खाते में पैसे भेज देते हैं और फिर परेशान होते हैं. लेकिन ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है. अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसा हम नहीं कहते बल्कि सरकार भी इसमे आपकी पूरी तरह से मदद करती है. आइये बताते हैं कैसे?
गलत खाते में हो जाए ट्रांसफर तो क्या करें?अगर किसी भी तरह की गलतीसे आपसे किसी दूसरे के खाते में पैसे ट्रांसफर हो जाएं, तो ज्यादा परेशान ना होकर बस कुच जरूर दम उठाएं, जैसे:

सबसे पहले अपने बैंक की कस्टमर केयर या नजदीकी शाखा से संपर्क करें. ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख, समय और राशि की जानकारी दें.
अगर भुगतान UPI से किया है, तो संबंधित ऐप में &#039;रेज कम्प्लेंट या रिपोर्ट एन ईश्यू का ऑप्शन इस्तेमाल करें.
शिकायत करते समय रसीद और ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट आपके काम आएंगे, इन्हें संभालकर रखें.
बैंक को बताएं कि पैसा किस खाते में चला गया है, ताकि वो संबंधित बैंक से संपर्क कर सके.
अगर UPI लेनदेन से जुड़ा मामला है और बैंक से समाधान नहीं मिलता, तो डिजिटल पेमेंट सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है.
अगर आपको धोखाधड़ी का संदेह है या किसी फर्जीवाड़े के कारण पैसा गया है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें.
अगर बैंक तय समय में समाधान नहीं देता, तो आप आगे RBI में शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

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बैंक और सराकर करेगी पूरी मददअगर ट्रांसफर किया गया पैसा किसी वैध खाते में गलती से गया है, तो बैंक आपकी ओर से संबंधित खाताधारक से संपर्क कर सकता है. हालांकि, बिना खाताधारक की सहमति के बैंक सीधे उसके खाते से पैसा वापस नहीं निकाल सकता. इसलिए जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, समाधान की संभावना उतनी अधिक होगी।
ध्यान से करें ट्रांसफरकोशिश करें कि ऐसा कुछ आपको ना करना पड़े. जब भी किसी को पैसे भेजने हों तो पहले अकाउंट नंबर, IFSC और UPI आईडी को कम से कम एक बार जरूर चेक कर लें. छोटी-सी सावधानी आपको बड़ी वित्तीय परेशानी से बचा सकती है.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PPF, SCSS या सुकन्या: सालाना 1.5 लाख के निवेश पर कहां मिलेगा सबसे तगड़ा रिटर्न?</title>
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        <description><![CDATA[ PPF vs SCSS vs SSY: पैसा बचाने की बात आती है तो हर कोई चाहता है कि पैसा सेफ रहे और उस पर अच्छा ब्याज भी मिले. ऐसे में सरकारी बचत योजनाएं लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन होती हैं. PPF SCSS और SSY तीनों सरकारी योजनाएं हैं. लेकिन, इनकी ब्याज दर,और पैसे निकालने के नियम अलग-अलग हैं.
ब्याज दर में सुकन्या और SCSS आगे
अभी PPF पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है.वहीं SCSS और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% ब्याज है. यानी ब्याज दर के हिसाब से दोनों योजनाएं PPF से आगे हैं.लेकिन सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए.SCSS में ब्याज हर तीन महीने में मिलता है, जबकि PPF और सुकन्या में ब्याज अकाउंट में जुड़ता रहता है और आगे उस पर भी ब्याज मिलता है.
बेटी के फ्यूचर के लिए सुकन्या
अगर पैसा बेटी के फ्यूचर के लिए जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना अच्छा ऑप्शन है.10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर ये अकाउंट खोला जा सकता है.इसमें साल का 250 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं.अकांउट का समय 21 साल होती है, जबकि पैसा जमा करने का समय 15 साल तक रहती है. बेटी की पढ़ाई के लिए नियमों के अनुसार कुछ पैसा निकाला भी जा सकता है.
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PPF में लंबी बचत का फायदा
PPF पर अभी 7.1% ब्याज मिल रहा है. इसमें साल का 500 रुपये से 1.5 लाख रुपये तक जमा कर सकते हैं.इसका &amp;nbsp;समय 15 साल होती है और इसे पांच-पांच साल के लिए आगे किया जा सकता है. इसमें ब्याज अकाउंट में जुड़ता रहता है. नियमों के अनुसार लोन और कुछ रकम निकालने की सर्विस भी मिलती है.
SCSS खास तौर पर बड़े उम्र के लोगों के लिए है.इसमें 8.2% ब्याज मिलता है और ज्यादा से ज्यादा 30 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं. इसका समय पांच साल होता है.ब्याज हर तीन महीने में मिलता है. 10 लाख रुपये पर करीब 82 हजार रुपये साल का ब्याज बन सकता है.
1.5 लाख रुपये पर कौन आगे?
1.5 लाख रुपये पर PPF में 7.1% के हिसाब से करीब 10,650 रुपये साल का &amp;nbsp;ब्याज बनेगा. वहीं 8.2% की दर से SCSS और सुकन्या में करीब 12,300 रुपये बनते हैं. लेकिन लंबे समय में सुकन्या और PPF में ब्याज पर भी ब्याज मिलने का फायदा होता है.
किसके लिए कौन-सी योजना?
बेटी के फ्यूचर के लिए सुकन्या, बड़े उम्र के लोगों के लिए फिक्स समय के लिए SCSS और लंबे समय की सेफ्टी बचत के लिए PPF पर सोचा जा सकता है. इन्वेस्टमेंट से पहले उस समय लागू ब्याज दर और नियम जरूर जांच लें.&amp;nbsp;
Money Transfer: गलती से हो गए किसी और के खाते में पैसे ट्रांसफर, अब क्या करें? सरकार करेगी मदद
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>12 अगस्त से देशभर में चक्का जाम का ऐलान, क्या पाकिस्तान में फिर बढ़ेंगे पेट्रोल&amp;डीजल के दाम</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate in Pakistan: पाकिस्तान इस वक्त गहरे सुरक्षा और राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है. PoK और बलूचिस्तान में विरोध की आग सुलग रही है. वहीं, अब देश के भीतर आर्थिक मोर्चे पर भारी हंगामा खड़ा हो गया है. पाकिस्तान के ट्रांसपोर्टर्स ने कह दिया है कि अगर सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी-भरकम लेवी और करों को कम नहीं किया, तो वे 12 अगस्त, 2026 से देश भर में अनिश्चितकालीन चक्का जाम हड़ताल शुरू कर देंगे.&amp;nbsp;
ट्रांसपोर्टरों की क्या है डिमांड?&amp;nbsp;
बता दें कि ऑल पाकिस्तान पब्लिक ट्रांसपोर्ट ओनर्स फेडरेशन (APPTF) और गुड्स ट्रांसपोर्टर्स ने संयुक्त रूप से ऐलान किया है कि 12 अगस्त, 2026 की सुबह से पाकिस्तान में ट्रकों, बसों और अंतर-राज्यीय परिवहन पूरी तरह से रोक दिए जाएंगे. ट्रांसपोर्टर्स सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष के बजट में पेट्रोल और डीजल पर लगाई गई 70-80 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ है. उनका कहना है कि इस भारी टैक्स और टोल प्लाजा शुल्कों के कारण उनके लिए कारोबार करना अब असंभव सा होता जा रहा है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान मिनी माज्दा एसोसिएशन और ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट ओनर्स एसोसिएशन ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इन संगठनों के नेताओं का कहना है कि रोजाना ईंधन की कीमतें तय करने की सरकार की नीति से ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भारी बोझ पड़ रहा है. वे मांग कर रहे हैं कि कारोबार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कीमतें महीने के आधार पर तय की जाएं.
इस बात पर भी भड़के ट्रांसपोर्टर
ट्रांसपोर्टरों का यह भी आरोप है कि हर साल टोल के तौर पर अरबों रुपये वसूले जाते हैं, लेकिन बदले में सड़कें खराब हालत में रहती हैं और सिस्टम में भ्रष्टाचार फैला हुआ है. उन्होंने एक्सल-लोड नियमों के नाम पर मनमानी वसूली का भी आरोप लगाया है. गौरतलब है कि पाकिस्तानी सरकार ने हाल ही में पेट्रोल की कीमत में 3.19 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. इसके बावजूद, पेट्रोल अभी लगभग 329.82 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 382.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है और दोनों पर भारी टैक्स लगता है.
क्या पाकिस्तान में फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?&amp;nbsp;
12 अगस्त से चक्का जाम होने पर कराची पोर्ट जैसे बंदरगाहरें से रिफाइनरियों और वहां से शहरों के पेट्रोल पंपों तक कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई पूरी तरह से ठप्प हो जाएंगी. इससे ईंधन की किल्लत होगी और स्थानीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो सकती है, जिससे रिटेल स्तर पर कीमतें आसमान छू सकती हैं.
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 7 बिलियन डॉलर के बैलआउट पैकेज की अगली किस्त पाने के लिए पेट्रोलियम लेवी को और बढ़ाने का दबाव है. ग्लोबल लेवल पर भले ही कूटनीतिक वार्ताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें गिरकी 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ जाए, लेकिन पाकिस्तान सरकार आईएमएफ की शर्तों के कारण इसका फायदा जनता को देने में असमर्थ है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अगस्त, से, देशभर, में, चक्का, जाम, का, ऐलान, क्या, पाकिस्तान, में, फिर, बढ़ेंगे, पेट्रोल-डीजल, के, दाम</media:keywords>
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        <title>महंगा हुआ दूध, 11 अगस्त से 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ी कीमतें; जानें नई दरें</title>
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        <description><![CDATA[ Milk Price Hike in Maharashtra: अभी त्योहारी सीजन शुरू भी नहीं हुआ है कि चीजों की कीमतें बढ़ने लगी हैं. पहले चीनी के दाम बढ़ने की खबरें सामने आईं और अब दूध की कीमतें बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं. महाराष्ट्र में मंगलवार (11 अगस्त) से गाय और भैंस दोनों तरह के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने जा रही है. मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन&#039; की बैठक में राज्य की प्रमुा सहकारी और निजी डेयरियों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है. त्योहारी सीजन में दूध की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर पूरे राज्य में ग्राहकों पर पड़ने की उम्मीद है.
दूध की नई कीमतें
महाराष्ट्र में 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दूध के खुदरा दाम कुछ इस प्रकार होंगे:-
गाय का दूध- 60 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 62 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा.
भैंस का दूध- पहले 76 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 78 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा.
इन चीजों की भी बढ़ेंगी कीमतें
एसोसिएशन का कहना है कि दूध के साथ-साथ दही, छाछ, पनीर और घी की कीमतें भी 10% तक बढ़ेंगी. इस बीच, पिछले महीने लोकसभा में एक &#039;स्टार्ड क्वेश्चन&#039; (जिसका मौखिक जवाब दिया जाता है) के लिखित जवाब में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (जिन्हें ललन सिंह के नाम से भी जाना जाता है) ने कहा था कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और कीमतें बाजार की स्थितियों के अनुसार सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा तय की जाती रहेंगी.
उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार कई ऐसी पहलें लागू कर रही हैं, जिनका मकसद डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करना, दूध की कीमतों में स्थिरता लाना, उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखना और पूरे देश में गुणवत्ता की निगरानी को बेहतर बनाना है.
क्यों बढ़ाई जा रही हैं कीमतें?

डीजल के दाम करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं. इससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ है, जिससे कीमतें बढ़ाई जा रही हैं.
दूध के पैकेट्स और दूसरे पैकेजिंग मटेरियल्स पर खर्च में भी लगभग 30% तक का उछाल आया है.&amp;nbsp;
किसानों के लिए भी दूध खरीदने की लागत लगातार बढ़ रही हैं.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी खबर: क्या सच में 65 साल होगी रिटायरमेंट की उम्र, जानें नया अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Latest Update: केंद्रीय शिक्षक संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी कई बड़ी मांगें रखी हैं. इनमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने, रिटायरमेंट उम्र 65 साल करने, &amp;nbsp;वेतन और भत्तों में समानता, प्रमोशन कोटा बढ़ाने, ज्यादा छुट्टियां और बेहतर मेडिकल सुविधाएं शामिल हैं. हालांकि, सरकार या आयोग द्वारा इसे अभी लागू करने को लेकर कोई फैसला नहीं सुनाया गया है.&amp;nbsp;
65 साल की उम्र में हो रिटायरमेंट
शिक्षकों ने प्रस्ताव रखा है कि उनकी वर्तमान सेवानिवृत्ति आयु को 60 साल से बढ़ाकर 65 साल कर दिया जाए ताकि अनुभवी शिक्षकों को लंबे समय तक सेवा का लाभ मिल सके. उनकी एक और मांग नई पेंशन योजना (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की भी है.
सैलरी और फिटमेंट फैक्टर भी बढ़े
एंट्री-लेवल के शिक्षकों की बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 1,34,000 रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया गया है. साथ ही फिटमेंट फैक्टर को 2.62 से बढ़ाकर 3.83 गुना करने का भी सुझाव दिया गया है. सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6-7% करने की भी मांग रखी गई है.&amp;nbsp;
प्रिंसिपल के लिए प्रमोशन कोटा बढ़ाने की मांग
शिक्षक संगठनों की ओर प्रस्ताव रखा गया है कि प्रिंसिपल के पद पर 50% विभागीय शिक्षकों की नियुक्ति प्रमोशन के आधार पर हो, जबकि बाकी के 25% के लिए परीक्षा आधारित कोटा रखा जाए. इसके अलावा, हेड ऑफ सब्जेक्ट के नाम से एक नए प्रमोश्नल पद का भी प्रस्ताव है.&amp;nbsp;
सरकारी शिक्षकों के लिए कुछ और बड़ी मांगें

मौजूदा समय में अधिकतम 300 दिनों की अर्जित छुट्टियों (Earned Leave) के बदले पैसे मिलते हैं, उसे बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग है.
पुरुषों के लिए भी Child Care Leave की मांग की गई है.
65 साल की उम्र के बाद पेंशन में भी बढ़ोतरी करने की मांग है.
साल में 14 कैजुअल लीव, 20 मेडिकल लीव और 30 अर्न्ड लीव का प्रस्ताव है.&amp;nbsp;

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल आठवां वेतन आयोग देश भर के तमाम राज्यों के दौरे पर है, जहां विभिन्न कर्मचारी संगठनों व हितधारकों से बातचीत की जा रही है. कोई भी फैसला देश की आर्थिक स्थिति, वित्तीय संसाधनों और खर्चों का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा. पहले सिफारिशें केंद्र सरकारी को सौंपी जाएगी. उसके बाद ही अंतिम मुहर लगेगी.&amp;nbsp;

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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: दिल्ली में शुरू मैराथन बैठकें, उठाए गए ये 5 बड़े मुद्दे  ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नौकरी vs बिजनेस: कौन बना सकता है आपको ज्यादा अमीर?</title>
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        <description><![CDATA[ Job vs Business News:&amp;nbsp;अक्सर लोग अपने करियर की शुरुआत करते समय या कुछ साल नौकरी करने के बाद कन्फ्यूज हो जाते हैं. ऐसे समय में ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि नौकरी करना बेहतर ऑप्शन है या खुद का बिजनेस शुरू करना. हालांकि, दोनों ही रास्ते आपको कमाई और करियर बनाने का मौका देते हैं, लेकिन इन दोनों के फायदे और चुनौतियां अलग-अलग होती हैं. आइए जानते हैं नौकरी और बिजनेस के क्या है फायदे है और कौन-सा ऑप्शन आपको ज्यादा अमीर बना सकता है.
नौकरी के क्या हैं फायदे?

हर महीने तय सैलरी मिलने से आय स्थिर रहती है.
इससे खर्च और बचत की बेहतर प्लानिंग की जा सकती है.
कई कंपनियां मेडिकल इंश्योरेंस, बोनस और अन्य सुविधाएं भी देती हैं.
सरकारी नौकरी में पेंशन और अन्य रिटायरमेंट का भी फायदा मिल सकते हैं.

नौकरी की चुनौतियां

आय बढ़ने की गति सीमित हो सकती है.
प्रमोशन और सैलरी बढ़ने के लिए आपको लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है.
काम के दौरान कंपनी के रूल्स और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन करना होता है.
कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब होने पर इसका असर आपके नौकरी पर पड़ सकता है.

12 अगस्त से देशभर में चक्का जाम का ऐलान, क्या पाकिस्तान में फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
बिजनेस के क्या हैं फायदे?

बिजनेस में कमाई की कोई तय सीमा नहीं होती है.
बिजनेस बढ़ने के साथ आपकी आय भी तेजी से बढ़ सकती है.
अपने फैसले आप खुद ले सकते हैं और अपने तरीके से काम भी कर सकते हैं.
आपको खुद का मजबूत ब्रांड और संपत्ति बनाने का मौक मिलता है.
नए आइडिया और इनोवेशन के जरिए बिजनेस को आगे बढ़ाया जा सकता है.

बिजनेस में किन बातों का रखना होगा ध्यान?

बिजनेस में फायदे के साथ आपको नुकसान भी हो सकता है.
बिजनेस को सफल बनाने के लिए शुरुआती दौर में समय, पूंजी और धैर्य की जरूरत पड़ती है.
कई बार लंबे समय तक लगातार मेहनत करनी पड़ती है.

कौन बना सकता है आपको ज्यादा अमीर?
अगर आपका मकसद स्थिर आय और कम जोखिम पाना चाहते हैं, तो ऐसे में आपके लिए नौकरी बेहतर ऑप्शन हो सकती है. वहीं, अगर आप जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं और लंबे समय में एक बड़ा फंड और संपत्ति हासिल करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको बिजनेस ज्यादा कमाई का मौका दे सकता है. हालांकि, सफलता सिर्फ आपकी नौकरी और बिजनेस पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि यह आपके मेहनत, कौशल और सही फैसलों पर डिपेंड करती है.
महंगा हुआ दूध, 11 अगस्त से 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ी कीमतें; जानें नई दरें
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
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        <title>&amp;apos;तलवार से मच्छर मारने जैसा काम&amp;apos;, Amazon केस पर हाई कोर्ट की FDA को फटकार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/तलवार-से-मच्छर-मारने-जैसा-काम-amazon-केस-पर-हाई-कोर्ट-की-fda-को-फटकार</link>
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        <description><![CDATA[ Amazon Bhiwandi Warehouse: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमेजन रिटेल इंडिया के भिवंडी गोदाम पर की गई कार्रवाई को लेकर FDA को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि ये ऐसा है जैसे &amp;lsquo;तलवार से मच्छर मारने की कोशिश करना.&amp;rsquo;
हाई कोर्ट ने कहा कि नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए सही तरीका अपनाना भी जरूरी है. कोर्ट ने एफडीए से पूछा कि क्या किसी मामले में सभी बिज़नेस को बंद कर देना ही परेशानी का हल है. कोर्ट ने डिपार्टमेंट को कार्रवाई करते समय सही तरीके से काम करने की सलाह दी.
क्या है पूरा मामला?
ये मामला Amazon Retail India के भिवंडी गोदाम से जुड़ा है. FDA ने आरोप लगाया था कि गोदाम से एक्सपायर्ड खाने की चीजें बाजार में भेजी जा रही थीं, जबकि उन्हें खत्म किया जाना चाहिए था. इसी मामले में एफडीए ने गोदाम के खिलाफ कार्रवाई की थी.
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: दिल्ली में शुरू मैराथन बैठकें, उठाए गए ये 5 बड़े मुद्दे
Amazon की ओर से वकील वेंकटेश धोंड ने कोर्ट को बताया कि FDA के ऑफिसर 24 जून को गोदाम पहुंचे थे. इसके अगले ही दिन गोदाम का लाइसेंस कुछ टाइम के लिए रोक दिया गया. उनका कहना था कि इससे पहले कंपनी को अपनी कमियां ठीक करने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया गया था.
लाइसेंस भी कर दिया गया था रद्द
इसके बाद Amazon की ओर से ऑफिसर के सामने अपील की गई. लेकिन अपील पर सुनवाई चल ही रही थी कि FDA ने 1 जुलाई को वजह बताओ नोटिस जारी किया और बाद में लाइसेंस भी रद्द कर दिया.
इस पर हाई कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मामला अपील में चल रहा था, तो लाइसेंस रद्द करने का आदेश कैसे दिया जा सकता है.कोर्ट ने कहा कि अपील चलने के दौरान इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती है.
जरूरत से बड़ी की गई कार्रवाई- हाई कोर्ट
कोर्ट ने FDA को साफ कहा कि नियम लागू करने के लिए सही प्रोसेस का पालन करना जरूरी है. कोर्ट ने ये भी कहा कि सख्ती के नाम पर जरूरत से ज्यादा बड़ी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.&amp;nbsp;
सरकार की ओर से पेश वकील ने FDA की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा. बॉम्बे हाई कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को करेगा. कोर्ट की इस बात के बाद Amazon Retail India को बड़ी राहत की उम्मीद है, लेकिन मामले पर आखरी फैसला अभी बाकी है.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>पहली सैलरी मिलते ही कहां लगाएं पैसा? FD, RD या SIP में कौन है बेस्ट ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ FD vs RD vs SIP: नौकरी की पहली कमाई सिर्फ एक सैलरी नहीं, बल्कि यह आपके वित्तीय सफर की शुरुआत होती है. यही वह समय होता है जब आपके द्वारा लिए गए छोटे-छोटे फैसले भविष्य की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर डाल सकती हैं. लेकिन ज्यादातर लोग पहली सैलरी आते ही शॉपिंग, घूमने-फिरने या अन्य खर्चों में पैसा लगा देते हैं. एक्सपर्टों के मुताबिक अगर शुरुआत से ही बचत और निवेश की आदत डाला जाए, तो लंबे समय में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है.&amp;nbsp;
हालांकि किसी भी निवेश की शुरुआत करने से पहले एक मजबूत इमरजेंसी फंड तैयार करना बेहद जरूरी है. इसके बाद आप अपनी जरूरत के मुताबिक FD, RD या SIP जैसे ऑप्शनों को चुन सकते हैं.
सबसे पहले बनाएं इमरजेंसी फंड
निवेश से पहले कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर रकम को अलग रखना बेहद जरूरी है. इस पैसे को आप ऐसी जगह रखें जहां किसी इमरजेंसी में आप आसानी से निकाल सकें. आमतौर पर नौकरी छूटने, मेडिकल इमरजेंसी या किसी दूसरे जरूरत के समय यह पैसा आपके बेहद काम आ सकता है. क्योंकि इमरजेंसी फंड हमेशा आपको अचानक आने वाले खर्चों से निपटने में काफी मदद करती है.
FD, RD या SIP किसके लिए है बेहतर ऑप्शन?
FD के फायदे
अगर आपके पास एकमुश्त रकम मौजूद है और आप बिना किसी जोखिम के निवेश करना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आपके लिए बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.

निवेश पर तय ब्याज मिलता है.
इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता.
कम जोखिम पसंद करने वालों के लिए यह बेहतर है.&amp;nbsp;
शॉर्ट टर्म लक्ष्यों और इमरजेंसी सेविंग्स के लिए इस्तेमाल.

RD के फायदे
रिकरिंग डिपॉजिट (RD) उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है जो हर महीने एक निश्चित रकम बचा सकते हैं.

छोटी रकम से निवेश की शुरुआत की जा सकती है.
नियमित बचत की आदत बनती है.
इसमें निश्चित रिटर्न मिलता है.

मूड खराब है तो मत आओ ऑफिस, इस कंपनी ने लागू की Unhappy Leave पॉलिसी
SIP के फायदे
अगर आपका मकसद निवेश से भविष्य में एक बड़ा फंड तैयार करना है, तो आपके लिए SIP एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. SIP के जरिए आप म्यूचुअल फंड में भी नियमित निवेश कर सकते हैं.&amp;nbsp;

कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.
लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है.
इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं.
रिटायरमेंट, घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए फायदेमंद है.

सैलरी मिलते ही अपनाएं 50:30:20 नियम

50% आय जरूरी खर्चों के लिए
30% रकम लाइफस्टाइल और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए
20% रकम को बचत और निवेश के लिए

वहीं अगर आपके ऊपर खर्च की जिम्मेदारियां कम हैं, तो अपनी सैलरी का 30% से 40% हिस्सा आप निवेश के लिए अलग रख सकते हैं.
इन गलतियों से बचें

निवेश की शुरूआत करने में देरी बिल्कुल न करें.
कभी भी अपनी पूरी सैलरी खर्च न करें.
इमरजेंसी फंड को नजरअंदाज करने से बचें.
सिर्फ ज्यादा रिटर्न के लालच में निवेश की शुरूआत न करें.
दोस्तों के साथ मिलकर या सोशल मीडिया के ट्रेंड देखकर पैसे न लगाएं.

&#039;तलवार से मच्छर मारने जैसा काम&#039;, Amazon केस पर हाई कोर्ट की FDA को फटकार
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 02:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पहली, सैलरी, मिलते, ही, कहां, लगाएं, पैसा, FD, या, SIP, में, कौन, है, बेस्ट, ऑप्शन</media:keywords>
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    <item>
        <title>दुकानदारों और व्यापारियों के लिए भी UPI फ्री, ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगी कोई फीस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दुकानदारों-और-व्यापारियों-के-लिए-भी-upi-फ्री-ट्रांजैक्शन-पर-नहीं-लगेगी-कोई-फीस</link>
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        <description><![CDATA[ No Charges for UPI Users: अगर आप भी रोजमर्रा के छोटे-छोटे पेमेंट्स के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. सरकार ने यह साफ किया है कि अब ज्यादातर यूपीआई लेनदेन पर न तो ग्राहकों को कोई एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा और न ही छोटे कारोबारियों को. यानी साफ है कि दुकानदारों और ग्राहकों पर अतिरिक्त फीस का बोझ नहीं पड़ेगा. डिजिटल पेमेंट पहले की तरह आसान और किफायती बना रहेगा.
बता दें कि हाल ही में संसद के मानसून सत्र में &#039;कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026&#039; पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 की धारा 10ए में संशोधन करना है.&amp;nbsp;
आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा?

आम नागरिकों की ओर से किए जाने वाले यूपीआई के किसी भी पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.
एक व्यक्ति की ओर से दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसे भेजना पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा.
अधिकांश छोटे और सामान्य व्यापारियों से यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क यानी एमडीआर नहीं वसूला जाएगा.

यह भी पढ़ें- पहली सैलरी मिलते ही कहां लगाएं पैसा? FD, RD या SIP में कौन है बेस्ट ऑप्शन
पीआईबी की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, भविष्य में अगर कभी एमडीआर लागू होता है तो वह केवल एक तय सीमा से ज्यादा का कारोबार करने वाले बड़े मर्चेंट लेन-देन पर ही लगेगा. सरकार ने साफ किया है कि यह चार्ज डेबिट या क्रेडिट कार्ड के एमडीआर की तुलना में बहुत मामूली होगा. इस कानून के पास होने के बाद, एनपीसीआई की &#039;UPI and Services Steering Committee&#039; ही यह तय करेगी कि एमडीआर कब और कितना लागू करना है.
कानून में बदलाव क्यों किया जा रहा है?
कुछ लोग इस संशोधन को गलत तरीके से देख रहे हैं कि सरकार आम जनता पर चार्ज लगाने जा रही है, जबकि यह कदम यूपीआई को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए उठाया गया है. यूपीआई से करोड़ों लोग जुड़े हैं. इतने बड़े नेटवर्क पर साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने के सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की जरूरत है.
सरकार का मानना है कि भुगतान प्रणाली में और ज्यादा प्रतिस्पर्धा लाने के लिए कंपनियों के लिए एक आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल होना जरूरी है. यूपीआई के अगले चरण के विस्तार के लिए सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना संभव नहीं है.
यह भी पढ़ें- केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: दिल्ली में शुरू मैराथन बैठकें, उठाए गए ये 5 बड़े मुद्दे
जुलाई में UPI से हुआ 29.9 लाख करोड़ का कारोबार
गौरतलब है कि अकेले जुलाई 2026 में यूपीआई के जरिए 2,366 करोड़ लेन-देन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.9 लाख करोड़ रुपए रही. यूपीआई अब दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है और यह 11 विदेश देशों में लाइव हो चुका है. यानी विदेश में जाकर भी हम यूपीआई की सुविधा का फायदा उठा सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दुकानदारों, और, व्यापारियों, के, लिए, भी, UPI, फ्री, ट्रांजैक्शन, पर, नहीं, लगेगी, कोई, फीस</media:keywords>
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        <title>गांव में करना चाहते हैं अपना बिजनेस, सरकार से कैसे मिल सकती है मदद?</title>
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        <description><![CDATA[ Rural Business Ideas: अगर आप भी गांव में रहकर अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो सरकार की कई योजनाएं आपके इस सपने को हकीकत में बदल सकती है. केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीण इलाकों में अपना कारोबार करने और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लोन, सब्सिडी जैसी कई सुविधाएं दे रही हैं. इससे न सिर्फ लोगों को खुद का कारोबार शुरू करने का मौका मिलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी पैदा होते हैं.
हाल ही में जारी &amp;lsquo;स्टेट ऑफ रूरल एंटरप्रेन्योरशिप इन इंडिया 2026&amp;rsquo; रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में करीब 4.3 करोड़ ग्रामीण कारोबार मौजूद हैं. ऐसे में अगर इन छोटे ग्रामीण कारोबारों को आर्थिक सहायता, बाजार तक पहुंच और बेहतर सुविधाएं मिलें, तो यह लाखों लोगों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है.&amp;nbsp;
गांव में बिजनेस शुरू करने के लिए कौन-सी योजनाएं हैं?
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): इस योजना के जरिए अपना नया कारोबार शुरू करने के लिए 50 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पात्र लाभार्थियों को 15% से 35% तक की सब्सिडी का फायदा भी मिल सकता है.
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फूड प्रोसेसिंग कारोबार के लिए PMFME योजना: अगर आप अपना आटा चक्की, अचार बनाने का काम या तेल मिल शुरू करना चाहते हैं, तो ऐसे में PMFME योजना आपके काम आ सकती है. इस योजना के तहत 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत का 35% तक सब्सिडी मिल सकती है.&amp;nbsp;
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): इस योजना के जरिए छोटे कारोबार को शुरू करने के लिए बिना गारंटी के रकम मिलती है. इसके तहत आपको शिशु और किशोर श्रेणियों के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन लिया जा सकता है.&amp;nbsp;
कैसे करें आवेदन?

सबसे पहले अपने कारोबार की पूरी योजना और खर्च का प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें.
संबंधित योजना की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे PMEGP or Udyam Portal) या नजदीकी बैंक और CSC केंद्र के जरिए आवेदन करें.&amp;nbsp;
आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र और प्रोजेक्ट रिपोर्ट जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करें.

दुकानदारों और व्यापारियों के लिए भी UPI फ्री, ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगी कोई फीस
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>सरकार ने बदली गैस आयात रणनीति, मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कहां से आएगी 67% LPG</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Import News: देश ने पिछले कुछ महीनों में तेल और गैस की ऐसी किल्लत देखी है, कि अब सभी लोग इससे घबराए हुए हैं. ऐसे में अब सरकार भी पूरी तरह से दोबारा ऐसे हालातों से निपटने के लिए तैयारी कर रही है. अब सरकार ईरान की जगह किसी और देश पर गैस आयात के लिए निर्भर होगा. इस बारे में हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया है.
क्या बोले मंत्री?दरअसल हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया है कि, इस साल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि सरकार ने अलग-अलग देशों से ईंधन खरीदने, रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपनाई, जिससे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई.
ये भी पढ़ें: E20 पेट्रोल में क्लोराइड और पानी के दावों का सच सामने आया, तेल कंपनियों ने क्या बताया?
सीआईआई के एक कार्यक्रम में पुरी ने कहा कि, &#039;पहले भारत अपने कच्चे तेल का करीब आधा हिस्सा, 90% एलपीजी और 60% गैस ऐसे देशों से आयात करता था, जिनकी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती थी. इसके बावजूद सरकार ने दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनाए रखी. उन्होंने ये भी कहा है कि, &#039;मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि देश में एक भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म नहीं हुआ.&#039;
अमेरिका पर निर्भरतापुरी ने बताया कि भारत ने कच्चे तेल के आयात वाले देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 कर दी है. वहीं, देश में पेट्रोल पंपों की संख्या करीब 52 हजार से बढ़कर 1.07 लाख हो गई है. शहरी गैस वितरण नेटवर्क भी 55 क्षेत्रों से बढ़कर 309 क्षेत्रों तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों से एलपीजी आयात कम होने पर भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाया. साथ ही, अब अमेरिका भारत को एलपीजी की सबसे ज्यादा आपूर्ति करने वाला देश बन गया है, जो कुल आयात का करीब 67% है.
ये भी पढ़ें: Air India का बड़ा ऐलान, पायलटों की सैलरी में 17% तक का इजाफा, नया वेतन ढांचा लागू
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सरकार, ने, बदली, गैस, आयात, रणनीति, मंत्री, हरदीप, सिंह, पुरी, ने, बताया, कहां, से, आएगी, 67, LPG</media:keywords>
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    <item>
        <title>मिल गया इनकम टैक्स रिफंड? इन जरूरी कामों में लगाएं पैसा, मिलेगा लंबा फायदा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मिल-गया-इनकम-टैक्स-रिफंड-इन-जरूरी-कामों-में-लगाएं-पैसा-मिलेगा-लंबा-फायदा</link>
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        <description><![CDATA[ Income Tax Return: पिछले कुछ सालों में इंकम टैक्स विभाग ने अपनी ऑनलाइन प्रणाली को काफी बेहतर बनाया है, जिससे अब आईटीआर की प्रोसेसिंग और रिफंड जारी होने की प्रक्रिया पहले से काफी तेज हो गई है. अगर आपको इंकम टैक्स रिफंड मिल चुका है या जल्द मिलने वाला है तो यह आपके लिए अपने फ्यूचर को &amp;nbsp;फाइनेंशियल मजबूत करने का अच्छा अवसर हो सकता है.
फाइनेंशियल स्थिति मजबूत करने में करें इस्तेमाल
कई लोग टैक्स रिफंड को कम पैसा या बोनस मानकर नया मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने, छुट्टियों पर जाने या अन्य खर्चो में लगा देते हैं लेकिन ये समझना जरूरी है कि यह कोई बोनस नहीं, बल्कि आपकी अपनी कमाई का वह हिस्सा है जो सरकार आपको वापस कर रही है. इसलिए इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए, ताकि आपकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत हो सके और भविष्य &amp;nbsp;के लिए पैसे के लक्ष्य जल्दी पूरे हो.&amp;nbsp;
8th Pay Commission: दिल्ली में अहम बैठकें शुरू, सैलरी और पेंशन पर फैसला जल्द
जानकारों के अनुसार, इंकम टैक्स रिफंड का उपयोग इन कामों में करना बेहतर हो सकता है. आप ने कोई कर्ज लिया है तो उसका भुगतान करने मे क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन को देने में ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके. इमरजेंसी फंड तैयार करना चाहिए जिससे अचानक आने वाले खर्चों से आसानी से बचा जा सके.
कहां-कहां लगाएं रिफंड का पैसा?
होम लोन का पहले ही &amp;nbsp;प्री-पेमेंट करें, इससे ब्याज की बचत होगी और लोन जल्दी खत्म होगा भविष्य के लिए इंवेस्टमेंट करें. जैसे म्यूचुअल फंड या अन्य इंवेस्टमेंट विकल्पों में खर्च और बचत के बीच संतुलन रखें. अगर आप अपनी कोई छोटी इच्छा पूरी करना चाहते हैं, तो रिफंड का एक छोटा हिस्सा उस पर खर्च कर सकते हैं. बड़ी राशि की बचत करे और इंवेस्टमेंट में लगाए ताकि कर्ज कम हो सके. इस तरह आपका इंकम टैक्स रिफंड केवल एक बार की खुशी नहीं देगा, बल्कि लंबे समय तक आपकी फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत बनाने में भी मदद करेगा.
सरकार ने बदली गैस आयात रणनीति, मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कहां से आएगी 67% LPG
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मिल, गया, इनकम, टैक्स, रिफंड, इन, जरूरी, कामों, में, लगाएं, पैसा, मिलेगा, लंबा, फायदा</media:keywords>
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        <title>आज सुबह पेट्रोल&amp;डीजल के नए रेट हुए अपडेट, जानें दिल्ली से पटना अब 1 लीटर की कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-सुबह-पेट्रोल-डीजल-के-नए-रेट-हुए-अपडेट-जानें-दिल्ली-से-पटना-अब-1-लीटर-की-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-सुबह-पेट्रोल-डीजल-के-नए-रेट-हुए-अपडेट-जानें-दिल्ली-से-पटना-अब-1-लीटर-की-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel&amp;nbsp;Rate Today August 8:&amp;nbsp; दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद देशभर में पेट्रोल-डीजल के नए रेट अपडेट कर दिए गए हैं. क्रूड ऑयल फिसलकर 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. हालांकि, बावजूद इसके पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. यानी कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं. ईंधन की कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे अपडेट की जाती हैं, लेकिन आज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. &amp;nbsp;
आज कितनी है कच्चे तेल की कीमत?
वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंड क्रूड वीकेंड क्लोजिंग पर 1.40% टूटकर 82.38 डाॅलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है. वायदा अनुबंधों में यह 81.50-84.44 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है. वहरं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 0.27% की आंशिक मंदी के साथ 77.08 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ है.&amp;nbsp;
होर्मुज (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से खोलने और जहाजों व टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही 2 से 4 महीनों के लिए बहाल करने के लिए ईरान और अेमान के बीच एक संभावित मसौदे पर बातचीत चल रही है. इस कूटनीतिक बातचीत के चलते बाजार में युद्ध का जोखिम कुछ कम हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में साप्ताहिक स्तर पर गिरावट दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
&amp;nbsp;111.18 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.47 रुपये
99.82 रुपये


चेन्नई
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये
103.82 रुपये


अमृतसर
106.36 रुपये
96.22 रुपये


फतेहाबाद
104.51 रुपये
&amp;nbsp;97.20 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये



सबसे सस्ता और महंगा कहां पेट्रोल-डीजल?
पोर्ट ब्लेयर में ईंधन सबसे सस्ती है. यहां पेट्रोल की कीमत 88.66 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 78.05 रुपये प्रति लीटर है, जो पूरे भारत में सबसे कम है. वहीं, आंध्र प्रदेश में कीमतें सबसे ज्यादा हैं. यहां पेट्रोल की कीमत 117.88 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत&amp;nbsp; 103.95 रुपये प्रति लीटर है.&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें:
E20 पेट्रोल में क्लोराइड और पानी के दावों का सच सामने आया, तेल कंपनियों ने क्या बताया?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, सुबह, पेट्रोल-डीजल, के, नए, रेट, हुए, अपडेट, जानें, दिल्ली, से, पटना, अब, लीटर, की, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Bank Closed: आज बैंक खुले हैं या बंद? जानें अगस्त में कब&amp;कब कामकाज रहेगा ठप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bank-closed-आज-बैंक-खुले-हैं-या-बंद-जानें-अगस्त-में-कब-कब-कामकाज-रहेगा-ठप</link>
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        <description><![CDATA[ Bank Closed Today: आज शनिवार है और शनिवार के दिन हर किसी के मन में सवाल आता है कि आज बैंक खुले रहेंगे या बंद रहेंगे. सोमवार के बिजी शेड्यूल से बचने के लिए लोग हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार या शनिवार को बैंक से जुड़े कामकाज निपटाने की कोशिश करते हैं. इन दोनों दिनों में बैंकों में बाकी वर्किंग दिनों के मुकाबले कम भीड़ देखने को मिलती है. जानिए आज शनिवार 8 अगस्त को बैंक बंद हैं या खुले हैं.&amp;nbsp;
आज है महीने का दूसरा शनिवार
बैंकों के छुट्टी वाले कैलेंडर के मुताबिक, आज शनिवार 8 अगस्त को पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे. बैंकों की कोई भी शाखा आज के दिन काम काज नहीं करेगी. दरअसल आज महीने का दूसरा शनिवार है, इस दिन बैंकों की छुट्टी रहती है. अधिकतर सरकारी दफ्तरों में भी सेकंड सैटरडे की छुट्टी रहती है.&amp;nbsp;
शनिवार को छुट्टी पर क्या है RBI का नियम?
आपको बता दें कि महीने के दूसरे शनिवार वाला नियम सरकारी बैंकों के साथ-साथ देश के बड़े प्राइवेट बैंकों, जैसे एचडीएफसी और आईसीआईसीआई पर भी लागू होता है. यह नियम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की ओर से लागू किया गया था. नियम के अनुसार बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रखे जाते हैं.&amp;nbsp;
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हालांकि बैंक भले ही बंद हो, लेकिन ग्राहक बैंकिग से जुड़ी सभी सुविधाओं का लाभ ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए उठा सकते हैं. बैंक बंद वाले दिन भी इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम और यूपीआई पेमेंट जैसी डिजिटल पेमेंट सेवाएं चलती रहती हैं. अगर आपका कोई काम अटका हुआ है तो आप सोमवार 10 अगस्त को बैंक में विजिट कर अपना काम करा सकते हैं.
अगस्त में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

रविवार 9 अगस्त- साप्ताहिक छुट्टी
शनिवार 15 अगस्त- स्वतंत्रता दिवस
रविवार 16 अगस्त- साप्ताहिक छुट्टी
शनिवार 22 अगस्त- चौथा शनिवार
रविवार 23 अगस्त- साप्ताहिक छुट्टी
शुक्रवार 28 अगस्त- रक्षा बंधन का त्योहार
रविवार 30 अगस्त- साप्ताहिक छुट्टी

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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Closed:, आज, बैंक, खुले, हैं, या, बंद, जानें, अगस्त, में, कब-कब, कामकाज, रहेगा, ठप</media:keywords>
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        <title>रूस से सस्ता तेल बंद हुआ तो 120 रुपए के पार होगा पेट्रोल? समझें 100% US टैरिफ का गणित</title>
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        <description><![CDATA[ Russia Sanctions Bill: अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर नकेल कसने की बड़ी तैयारी कर ली है. अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के भारी बहुमत से Russia Sanctions Bill को पारित कर दिया है. इसमें भारत और चीन जैसे देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान है. बता दें कि इस बिल का नाम हाल ही में बदलकर &#039;लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026&#039; कर दिया गया है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों से आने वाले सामान पर 100% टैरिफ लगाने की इजाजत देता है, जो रूस से तेल और गैस की खरीदारी करते हैं.&amp;nbsp;
लिस्ट में कौन-कौन से देश शामिल?
अभी चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच आयातक देश हैं. इन सभी से आने वाले वाले सामानों पर अमेरिका अब 100% टैरिफ लगाने जा रहा है. इस बिल के जरिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, क्रेमलिन के शीर्ष अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों पर कड़े प्रतिबंध लगाने, सीधे रूसी आयातों पर 500% तक का टैरिफ लगाने और रूस के शैडो फ्लीट (गुप्त तेल टैंकर के नेटवर्क) को पूरी तरह से ब्लॉक करने का प्रावधान है.&amp;nbsp;
रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, यह बिल &#039;ईरान सैंक्शन्स एक्ट ऑफ 1996&#039; की समय-सीमा को 2031 तक बढ़ा देगा. यह कानून उन कंपनियों पर जुर्माना लगाता है, जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करती हैं.&amp;nbsp;
क्या भारत पर तुरंत लगेगा 100% टैरिफ&amp;zwnj;?
सीनेट में पास होने के बाद अब यह बिल अमेरिकी संसद के निचले सदन में भेजा जाएगा. निचले सदन में पास होने और अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून का रूप लेगा. इसके बाद भारत पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा या नहीं, यह अमेरिकी प्रशासन की कूटनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;
भारत मौजूदा समय में रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खरीद रहा है. ऐसे में अगर अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी बाजारों में भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं. अमेरिका में भारतीय टेक्सटाइल, आईडी हार्डवेयर और फार्मा का बड़ा बाजार है. इससे दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ताएं प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि, भारत ने भी पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि देश के ऊर्जा हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रूस, से, सस्ता, तेल, बंद, हुआ, तो, 120, रुपए, के, पार, होगा, पेट्रोल, समझें, 100, टैरिफ, का, गणित</media:keywords>
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        <title>UPI ही नहीं RuPay कार्ड से पेमेंट पर भी लगेगा चार्ज, जानिए दोनों में क्या अंतर है?</title>
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        <description><![CDATA[ UPI&amp;nbsp;vs Rupay Card: डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यूपीआई चार्ज को लेकर चर्चा तेज है. वहीं RuPay Credit Card को यूपीआई से लिंक कर पेमेंट करने पर भी MDR लागू होने की बात सामने आई है. ऐसे में जानिए सामान्य यूपीआई और RuPay Credit Card पेमेंट में क्या अंतर है और चार्ज का असर ग्राहक या मर्चेंट पर कैसे पड़ेगा.
यूपीआई क्या है?
यूपीआई एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जिससे यूजर्स बैंक अकाउंट से सीधे किसी व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेज सकते हैं. इसमें मोबाइल नंबर, यूपीआई ID या QR कोड के जरिए भुगतान किया जाता है. सामान्य बैंक अकाउंट से किए गए यूपीआई पेमेंट पर फिलहाल ग्राहकों से कोई नियमित MDR चार्ज नहीं लिया जाता.
यूपीआई पर चार्ज की चर्चा क्यों हो रही है? 
यूपीआई पर MDR को लेकर चर्चा तेज है. MDR डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट से लिया जाने वाला शुल्क है. हालांकि, इसका सीधा असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा और हर यूपीआई पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा.
RuPay Credit Card को यूपीआई से लिंक करके पेमेंट क्या है?
ग्राहक अपने RuPay Credit Card को यूपीआई से ऐप से लिंक कर मर्चेंट के QR कोड के जरिए पेमेंट कर सकते हैं. इस प्रक्रिया में पैसे बैंक खाते से नहीं कटता, बल्की क्रेडिट कार्ड की तय लिमिट से भुगतान होता है. यहां यूपीआई केवल पेमेंट करने का जरिए है, जबकि ट्रांजैक्शन क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पूरा होता है.
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RuPay Credit Card से यूपीआई पेमेंट पर MDR क्यों लगता है?
सामान्य यूपीआई में पैसा बैंक अकाउंट से कटता है, जबकि रुपे क्रेडिट कार्ड के जरिए बैंक से ट्रांजैक्शन होता है. इसमें मर्चेंट पर MDR लागू हो सकता है, जो कैटेगरी के अनुसार अलग होता है और इस पर 18% जीएसटी भी लग सकता है.
सामान्य यूपीआई और RuPay Credit Card यूपीआई में बड़ा अंतर
दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि पेमेंट का पैसा कहां से आता है.
सामान्य यूपीआई में:

पैसा सीधे बैंक अकाउंट से कटता है.
यह बैंक-टू-बैंक ट्रांजैक्शन होता है.
सामान्य यूपीआई पेमेंट पर ग्राहक से MDR नहीं लिया जाता.
QR कोड के जरिए आसानी से पेमेंट किया जा सकता है.

RuPay Credit Card-on-यूपीआई में:

पैसा लिंक किए गए RuPay Credit Card की क्रेडिट लिमिट से आता है.
ग्राहक को बाद में क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाना होता है.
मर्चेंट पर MDR लागू हो सकता है.
यह सुविधा मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट के लिए है.

&amp;nbsp;क्या हर यूपीआई पेमेंट पर MDR लगेगा?
ऐसा नहीं है कि हर यूपीआई पेमेंट पर MDR चार्ज लगेगा. सिर्फ यूपीआई इस्तेमाल करने से ग्राहक पर अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होता। सामान्य बैंक अकाउंट यूपीआई और RuPay Credit Card-on-यूपीआई ट्रांजैक्शन अलग-अलग तरीके से प्रोसेस किए जाते हैं. RuPay Credit Card यूपीआई पेमेंट पर MDR की दर मर्चेंट की कैटेगरी और ट्रांजैक्शन के प्रकार के अनुसार तय हो सकती है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, ही, नहीं, RuPay, कार्ड, से, पेमेंट, पर, भी, लगेगा, चार्ज, जानिए, दोनों, में, क्या, अंतर, है</media:keywords>
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        <title>MSME Bill: आप भी हैं पेमेंट अटकने से परेशान? MSME बिल लोकसभा से पास, जानें बड़े बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ MSME Bill Passed in Lok Sabha: सोमवार यानी 3 अगस्त को राज्यसभा में छोटे और मध्यम कारोबारियों की परेशानियां देखते हुए MSME (संशोधन) बिल को पास किया गया था. जिसके बाद आज यानी 7 अगस्त, शुक्रवार को ये बिल लोकसभा में भी पास हो गया है, खास बात ये रही इस बिल को लेकर सदन में कोई चर्चा नहीं हुई. विपक्ष के हंगामे के कारण इसे जल्दी ही पास कर दिया गया. अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून बनाया जाएगा.
क्या है बिल का मकसद?इस बिल का मकसद छोटे कारोबारियों को उनके सामान या सेवाओं का भुगतान समय पर दिलाना और भुगतान में होने वाली देरी की परेशानी को कम करना है. सरकार का कहना है कि कई छोटे कारोबारियों को बड़ी कंपनियों और सरकारी संस्थानों से समय पर भुगतान नहीं मिलता. इससे उनके कारोबार, कैश फ्लो और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ता है.
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नए कानून से क्या होगा फायदा?सरकार के द्वारा लाए जा रहे इस नए कानून के जरिए भुगतान से जुड़े विवादों का जल्दी से जल्दी समाधान करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही इस बिल में छोटे, लघु और मध्यम कारोबारियों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का भी प्रस्ताव है. इस प्लेटफॉर्म पर MSME अपना रजिस्ट्रेशन मुफ्त करवा सकते हैं. जिसके चलते इसकी मदद से ये रजिस्ट्रेशन आसानी से हो पाएगा. जिससे दुकानदारों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
कानूनी प्रक्रिया होगी आसानइस संशोधित बिल के जरिए बकाया राशि की वसूली प्रक्रिया भी तेज करने की कोशिश की जाएगी. बिल में ये भी प्रावधान किया गया है कि अगर किसी मामले में अदालत या अन्य प्राधिकरण का फैसला MSME के पक्ष में आ जाता है और खरीदार उस फैसले को चुनौती देता है, तो लंबे समय तक मामला लंबित रहने की स्थिति में अदालत खरीदार को MSME को कम से कम 50 प्रतिशत राशि देने का आदेश दे सकती है. इससे छोटे कारोबारियों को कई सालों तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
ये भी पढ़ें: UPI ही नहीं RuPay कार्ड से पेमेंट पर भी लगेगा चार्ज, जानिए दोनों में क्या अंतर है?
सरकार का मानना है कि इस कानून से छोटे उद्योगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, कारोबार करना आसान होगा और उन्हें समय पर पैसा मिलने से उत्पादन व रोजगार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tax Exemption Bill: टैक्स में छूट वाला बिल पास, रुपये को मिलेगी मजबूती! विदेशी निवेशकों को बड़ा तोहफा</title>
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        <description><![CDATA[ Tax Exemption Bill: भारत सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए लोकसभा में एक बिल पास किया है. जिसके बाद अब विदेशी निवेशकों को खूब फायदा होगा और वो भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश करेंगे. टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंड) बिल, 2026 को पास करने का मकसद विदेशी निवेशकों को भारत के सरकारी बॉन्ड में निवेश के लिए आकर्षित करना और देश में फॉरेन रिटर्न एक्सचेंज को बढ़ाना है.
इस बिल को लेकर विपक्ष का विरोध भी देखा गया, जिसके बाद लोकसभा में इसे वॉइस वोट के आधार पर पास किया गया. ये बिल 5 जून को जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा.
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क्या होगा इस बिल के तहतइस बिल के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) को सरकारी बॉन्ड में निवेश से होने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर टैक्स से छूट दी जाएगी. इससे भारत के सरकारी बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनेंगे.
क्या बोली सरकार?सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत में ज्यादा विदेशी निवेश आएगा. इससे सरकार को कम लागत पर उधार लेने में मदद मिलेगी, रुपये पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. हाल ही के वैश्विक आर्थिक हालात और बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है.
क्या- क्या है बिल में?बिल में सिर्फ सरकारी बॉन्ड ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुछ और बदलाव भी किए गए हैं. ऑफशोर निवेश फंड से जुड़े टैक्स नियम आसान किए गए हैं, ताकि भारत वैश्विक फंड मैनेजमेंट का बड़ा केंद्र बन सके. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डाटा सेंटर और डायमंड सेक्टर से जुड़े कुछ टैक्स नियमों में भी राहत दी गई है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, कारोबार करना आसान होगा और भारत में लंबे समय के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी.
ये भी पढ़ें: UPI ही नहीं RuPay कार्ड से पेमेंट पर भी लगेगा चार्ज, जानिए दोनों में क्या अंतर है?
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Flipkart: बिना ब्याज&amp;बिना क्रेडिट कार्ड के खरीदारी, फ्लिपकार्ट के इस एप पर मिलेगी No Cost EMI</title>
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        <description><![CDATA[ Flipkart Payments App: अब तक UPIपेमेंट्स के लिए लोग Phonepe, GooglePay या Paytm का ही इस्तेमाल किया करते थे, लेकिन अब इन सभी एप्स को टक्कर देने बाजार में एक और एप आ रही है. जो इन सभी पेमेंट एप्स की छुट्टी कर देगी और लोगों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग को भी आसान बनाएगी. इस नई पेमेंट एप को फ्लिपकार्ट लेकर आ रहा है.
एप का होगा नया कायाकल्पदरअसल फ्लिपकार्ट जल्दी ही Super.money को नई पेमेंट एप के रूप में लेकर आ रहा है. ये एप केवल पैसे भेजने और भुगतान करने तक ही सीमित नहीं रहेगी. बल्कि अब कंपनी ने इस एप पर स्प्लिट स्टोर नाम से नया ऑनलाइन शॉपिंग फीचर भी शुरू कर दिया है. इस फीचर की मदद से यूजर्स स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और घर के सामान की खरीदारी कर पाएंगे.
ये भी पढ़ें: Tax Exemption Bill: टैक्स में छूट वाला बिल पास, रुपये को मिलेगी मजबूती! विदेशी निवेशकों को बड़ा तोहफा
इंटरेस्ट फ्री इंस्टॉलमेंट की सुविधाइस एप की खास बात ये है कि ग्राहक बिना ब्याज वाली EMI पर भी खरीदारी कर सकते हैं. इतना ही नहीं बल्कि यूजर्स Super.money एप के अंदर ही UPI या पीयर-टू-पीयर (P2P) पेमेंट के जरिए आसानी से कोई भी पेमेंट कर सकते हैं. इसएप के जरिए शॉपिंग भी हो जाएगी और किसी को पेमेंट भी कर सकते हैं.
क्या बोले CEO?सुपर मनी के CEO प्रकाश सिकरिया ने अपनी एप के बारे में बात करते हुए कहा कि, &#039;कंपनी अब UPI के क्षेत्र में अच्छी पकड़ बना चुकी है और फ्लिपकार्ट के मजबूत नेटवर्क और डाटा की मदद से इस नई सेवा को आगे बढ़ाया जाएगा. फिलहाल ये सुविधा कुछ चुनिंदा यूजर्स के लिए शुरू की गई है. आने वाले समय में इसे सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.
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ब्रांड्स बेचेंगे सीधे प्रोडक्ट्सवहीं कंपनी का कहना है कि ये फीचर खासतौर पर GenZ और उन लोगों के लिए काम का होगा, जिन्हें पहली बार क्रेडिट की सुविधा मिल रही है या जिन्हें अभी तक बैंक और वित्तीय संस्थानों से आसानी से क्रेडिट नहीं मिल पाता. सुपर मनी के इस नए शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर कई ब्रांड सीधे अपने प्रोडक्ट बेच सकेंगे और अपनी डिलीवरी व्यवस्था के जरिए ग्राहकों तक सामान पहुंचाएंगे.
सुपर मनी एप के बारे मेंबता दें कि सुपर मनी एप की शुरुआत साल 2024 में हुई थी. फिलहाल ये एप UPI पेमेंट, क्रेडिट कार्ड, लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सुविधाए देती है और इसके करीब 1.5 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>1 लाख रुपए में एक कप चाय! इस कैफे में मिलती है दुनिया की सबसे महंगी Tea</title>
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        <description><![CDATA[ Dubai most expensive tea: अगर आप 10-20 रुपये की चाय को महंगी मानते हैं तो ये खबर आपको हैरान कर सकती है. दुबई के एक कैफे में एक कप चाय की कीमत करीब 1 लाख रुपये है. इस खास चाय का नाम &#039;गोल्ड करक टी&#039; है, जिसे पीने के लिए लोग हजारों AED खर्च कर रहे हैं.
इस चाय की कीमत करीब 5,000 AED यानी लगभग 1 लाख रुपये है. इसे भारतीय ओरिजिन एक कैफे में तैयार किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि चाय के ऊपर 24 कैरेट खाने के काबिल सोने की परत लगाई जाती है. साथ ही इसे असली चांदी के कप में दिया जाता है, जिससे इसका तजुर्बा और भी लग्जरी बन जाता है.
सिर्फ चाय नहीं, एक लग्जरी एक्सपीरियंसकैफे का कहना है कि ये सिर्फ चाय नहीं, बल्कि एक प्रीमियम एक्सपीरियंस है. इसमें इस्तेमाल होने वाली चीजें, इसकी सजावट और सर्व करने का तरीका इसे आम चाय से बिल्कुल अलग बनाता है. यही वजह है कि ये चाय दुबई के अमीर कस्टमर और लग्जरी पसंद करने वालों के बीच काफी पसंदीदा हो रही है.
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सोशल मीडिया पर हो रही बाते&amp;nbsp;लेकिन, सोशल मीडिया पर इसकी कीमत को लेकर अलग-अलगर रिएक्शन देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे शौक और लग्जरी का नया अंदाज बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि इतनी रकम में कई लोगों का महीनों का खर्च चल सकता है.
इस चाय की चर्चा सिर्फ दुबई तक सीमित नहीं है, सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुकी है. यही वजह है कि कई लोग इसे दुनिया की सबसे अनोखी और महंगी चाय में से एक मान रहे हैं.
कैफे का कहना है कि दुनिया भर में लग्जरी फूड और ड्रिंक्स का ट्रेंड लगातार ज्यादा हो रहा है. लोग सिर्फ टेस्ट ही नहीं, बल्कि एक अलग और यादगार तजुर्बा के लिए भी बड़ी रकम खर्च करने को तैयार हैं.
दुबई पहले भी सोने से सजे खाने-पीने के सामान के लिए जाना जाता रहा है. अब इस गोल्ड करक टी ने भी अपनी अलग पहचान बना ली है. ये दिखाता है कि लग्जरी फूड और बेवरेज का बाजार तेजी से ज्यादा हो रहा है और अनोखे तजुर्बा के लिए लोग बड़ी रकम खर्च करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 06:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या रक्षाबंधन पर बैंक बंद रहेंगे? जानें 28 अगस्त को छुट्टी होगी या नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Holiday On 28 August: रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या इस दिन बैंक बंद रहेंगे या नहीं. अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो छुट्टी की जानकारी पहले से होना जरूरी है, ताकि आपको बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े. रक्षाबंधन के मौके पर बैंक की छुट्टी राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक की छुट्टियों की लिस्ट के अनुसार, हर राज्य में त्योहारों के आधार पर बैंक हॉलिडे तय किए जाते हैं.
क्या 28 अगस्त को बैंक बंद रहेंगे?इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. कई राज्यों में इस दिन बैंक बंद रह सकते हैं, जबकि कुछ जगहों पर बैंक नॉर्मल रूप से खुले रहेंगे. इसलिए बैंक जाने से पहले अपने शहर या राज्य की छुट्टी की जानकारी जरूर चेक कर लें.
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किन राज्यों में रहेगी छुट्टी?रक्षाबंधन हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है और कई राज्यों में इस दिन बैंक अवकाश रखा जाता है. हालांकि, छुट्टी का फैसला तो स्थानीय त्योहारों और राज्य सरकार की छुट्टी सूची के आधार पर होता है. इसलिए सभी राज्यों में एक जैसी छुट्टी लागू नहीं होती.
बैंक बंद होने पर क्या करें?अगर रक्षाबंधन के दिन बैंक बंद रहते हैं, तो भी ग्राहकों के जरूरी काम नहीं रुकेंगे. ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम और नेट बैंकिंग जैसी सेवाएं नॉर्मल चलेंगी. ग्राहक पैसे ट्रांसफर करने, बिल भरने और अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.
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बैंक जाने से पहले क्या करें?अगर आपको कैश जमा करना, चेक से जुड़ा काम, लोन या बैंक की शाखा से जुड़ा कोई जरूरी काम करना है, तो छुट्टी से पहले ही निपटा लेना बेहतर रहेगा. इससे त्योहार के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 06:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG News: 18 रुपए महंगा होगा गैस सिलेंडर! LPG&amp;CNG पर नया चार्ज लगाने की तैयारी में सरकार</title>
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        <description><![CDATA[ LPG-CNG Price Hike: भारत ने बीते कई महीनों में गैस की किलल्तों के साथ ही कीमतों में उतार- चढ़ाव भी देखा. लेकिन लगता है कि ये दौर अब भी खत्म नहीं हुआ है. क्योंकि खबरों की मानें तो सरकार एक बार फिर से LPG और CNG की कीमतों को बढ़ाने पर विचार कर रही है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे देश में गैस का भंडार बढ़ाया जा सके.
फ्यूल रिजर्व योजनादरअसल भारत सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए रणनीतिक ईंधन भंडारण (Strategic Fuel Reserve) योजना बनाने जा रही है. ये योजना करीब 42 अरब डॉलर (लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये) की कीमत पर बनेगी. हालांकि फिलहाल इस योजना को अभी प्रधानमंत्री की कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है.&amp;nbsp;
अगर ये योजना लागू हो जाती है, तो LPG (रसोई गैस) और प्राकृतिक गैस (PNG) इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं से नया शुल्क (लेवी) लिया जा सकता है. सरकार पहली बार कच्चे तेल के साथ-साथ LPG और LNG का भी रणनीतिक भंडार बनाने की तैयारी कर रही है.
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कितने बढ़ेंगे गैस के दाम?इस प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार LPG पर 1.29 रुपये प्रति किलो की लेवी लग सकती है. इससे 14.2 किलो के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 18 रुपये बढ़ जाएगी. तो वहीं प्राकृतिक गैस (PNG) पर 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर का शुल्क लगाया जा सकता है. सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब 1.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल गैस स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में होगा.
क्यों लाई जा रही योजना?इस योजना को लाने की एक ही वजह है और वो है हाल ही में देखे गए हालात. पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट संकट के कारण ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर देश पर पड़ता है. सरकार चाहती है कि भविष्य में किसी युद्ध, सप्लाई रुकने या वैश्विक कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में देश के पास पर्याप्त ईंधन का भंडार हो.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ATM से नहीं निकले पैसे, फिर भी कट गए? कोर्ट से ग्राहक को मिला भारी मुआवजा</title>
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        <description><![CDATA[ Money not dispensed from ATM but still deducted: अगर आपने ATM से पैसे निकालने की कोशिश की और मशीन से कैश नहीं निकला, लेकिन आपके अकाउंट से पैसे कट गए तो इसे छोटी गलती समझकर छोड़िए मत. ऐसा ही मामला केरल में सामने आया, जहां एक कस्टमर के अकाउंट से 10 हजार रुपये कट गए, लेकिन ATM से एक भी रुपया नहीं निकला. बैंक से कई बार शिकायत करने के बाद भी जब कोई हल नहीं हुआ, तो मामला कंज्यूमर कमीशन पहुंचा. आखिरकार कोर्ट ने कस्टमर के हक में फैसला सुनाया और बैंक को मुआवजा देने का आदेश दिया.
10 हजार कटे, लेकिन कैश नहीं निकला
ये मामला केरल के पलक्कड़ जिले का है.कस्टमर ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के ATM से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की थी. ट्रांजैक्शन सफल दिखा और अकाउंट से पैसा भी कट गई, लेकिन ATM से कैश नहीं निकला. इसके बाद कस्टमर ने तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज कराई और अपने पैसे वापस मांगे. लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी बैंक ने उसकी परेशानी का हल नहीं निकाला.
जब बैंक से राहत नहीं मिली, तो कस्टमर ने कंज्यूमर कोर्ट का रुख किया. सुनवाई के दौरान बैंक ये साबित नहीं कर पाया कि ATM से सही में कैश निकला था.कोर्ट ने माना कि कस्टमर की शिकायत का समय पर फैसला नहीं किया गया और ये बैंक की सेवा में कमी का मामला है.
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बैंक को लौटाने पड़े पैसे और मुआवजा
कोर्ट ने अपने आदेश में बैंक को कस्टमर के अकाउंट से कटे 10 हजार रुपये लौटाने के लिए कहा. साथ ही परेशानी, समय की बर्बादी और बार-बार बैंक के चक्कर लगाने के वजह से &amp;nbsp;5 हजार रुपये ज्यादा मुआवजा देने का भी आदेश दिया. यानी बैंक को कुल 15 हजार रुपये कस्टमर को देने होंगे.
ये फैसला उन सभी बैंक कस्टमर के लिए अहम है, जो ATM का इस्तेमाल करते हैं. अगर कभी आपके साथ भी ऐसा हो कि अकाउंट से पैसे कट जाएं, लेकिन ATM से कैश न निकले, तो तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत का नंबर संभालकर रखें. अगर फिक्स &amp;nbsp;समय में बैंक आपकी परेशानी का हल नहीं करता, तो आप बैंकिंग कंज्यूमर कमीशन में शिकायत कर सकते हैं. ऐसे मामलों में कानून कस्टमर के हक की बचाओ करता है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>OFS से सरकार का बड़ा धमाका, 31,552 करोड़ जुटाकर बनाया नया रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) के शेयर बेचकर 31,552 करोड़ जुटाए हैं. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल माना जा रहा है. इस शेयर बिक्री को लोगों का शानदार रिस्पॉन्स मिला. आम निवेशकों के साथ-साथ बड़ी निवेशक कंपनियों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और सरकार ने इस OFS के जरिए LIC में अपनी 6.5% हिस्सेदारी बेची है. इसके तहत 82.23 करोड़ से ज्यादा शेयर बेचे गए. निवेशकों की अच्छी मांग को देखते हुए सरकार ने बाकी के शेयर बेचने का ऑप्शन यानी ग्रीन शू ऑप्शन भी इस्तेमाल किया है.
OFS क्या होता है?OFS की बात करें तो इसका मतलब है ऑफर फॉर सेल. इसमें सरकार या कोई कंपनी अपने कुछ शेयर शेयर बाजार के जरिए बेचती है. इन शेयरों को आम लोग भी खरीद सकते हैं और बड़ी निवेशक कंपनियां भी खरीद सकती हैं..
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सरकार को इससे क्या फायदा हुआ?इस शेयर बिक्री से सरकार को 31,552 करोड़ मिले हैं. साथ ही LIC में आम लोगों की हिस्सेदारी बढ़कर 10% हो गई. इससे कंपनी ने बाजार नियामक SEBI का जरूरी नियम भी पूरा कर लिया है.
लोगों ने इतना निवेश क्यों किया?इस OFS में शेयर की शुरुआती कीमत निवेशकों को पसंद आई. इसी वजह से आम लोगों और बड़ी निवेशक कंपनियों ने बड़ी संख्या में शेयर खरीदने के लिए आवेदन किए. मांग इतनी ज्यादा रही कि शेयरों से ज्यादा आवेदन आ गए.
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इसका क्या मतलब है?
सरकार के लिए ये शेयर बिक्री बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. इससे सरकार के पास अच्छी-खासी रकम आई है. वहीं, LIC ने भी शेयर बाजार से जुड़े जरूरी नियम समय से पहले पूरे कर लिए हैं. यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी LIC पर बना हुआ है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>इमरजेंसी फंड बनाने का सही तरीका क्या है, FD में पैसा लगाएं या सोने में?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इमरजेंसी-फंड-बनाने-का-सही-तरीका-क्या-है-fd-में-पैसा-लगाएं-या-सोने-में</link>
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        <description><![CDATA[ 
FD vs Gold Investment Planning: जिंदगी में कब कौन-सी परेशानी अचानक सामने आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. नौकरी छूट जाना, अचानक मेडिकल इमरजेंसी आ जाना या कभी किसी बड़े खर्च का सामना करना पड़ जाए, तो ऐसे समय में आपके लिए इमरजेंसी फंड ही सबसे बड़ा सहारा बनता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट हर व्यक्ति को एक मजबूत इमरजेंसी फंड तैयार करने की सलाह डेटा है. ऐसे में ज्यादातर लोगों कि मन में यह सवाल आता है कि इस पैसे को कहां रखा जाए, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में या सोने में? आइए जानते हैं....
कितना होना चाहिए इमरजेंसी फंड?

कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर रकम बचाकर रखें.
इसमें किराया, राशन, बिजली-पानी के बिल, EMI और अन्य जरूरी खर्च शामिल हैं.&amp;nbsp;
अगर आपकी नौकरी है या परिवार में आप अकेले कमाने वाले हैं, तो ऐसे में 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर फंड रखना काफी बेहतर होगा.

OFS से सरकार का बड़ा धमाका, 31,552 करोड़ जुटाकर बनाया नया रिकॉर्ड
FD में पैसा लगाएं या सोने में?

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): FD को पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है. हालांकि इसे आप अपने जरूरत के हिसाब से किसी इमरजेंसी में आसानी से तोड़ सकते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप ऑटो-स्वीप FD या छोटी-छोटी FD बनाएं, ताकि जरूरत पर न सिर्फ रकम हासिल हो सके, बल्कि बाकी रकम पर ब्याज भी मिलता रहे.&amp;nbsp;
सोना (Gold): लंबे समय के निवेश के लिए सोना काफी अच्छा ऑप्शन माना जाता है, लेकिन इमरजेंसी के लिए नहीं. आमतौर पर बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण सोने की कीमतें लगातार कम-ज्यादा होती रहती हैं, जिससे जरूरत के समय कम कीमत मिलने का जोखिम रहता है. फिजिकल गोल्ड बेचने में काफी समय भी लग सकता है. सोने को तुरंत नकदी में बदलना हमेशा आसान नहीं होता, ऐसे में नकदी की जरूरत पूरी करना मुश्किल हो सकता है.&amp;nbsp;

इमरजेंसी फंड को कैसे करें मैनेज?

30-40% रकम बचाकर अपने खाते या ऑटो-स्वीप FD में रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल तुरंत किया जा सके.
60-70% राशि लिक्विड म्यूचुअल फंड या शॉर्ट टर्म FD जैसे सुरक्षित ऑप्शनों में रखी जा सकती है.

क्यों जरूरी है सही प्लानिंग?
इमरजेंसी फंड का मकसद सिर्फ ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में नकदी पैसे देना है. इसलिए जरूरी है आप इमरजेंसी फंड के लिए सोने की बजाय FD, सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड जैसे ऑप्शनों को चुनें. क्योंकि सोना लंबी अवधि के निवेश के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन इमरजेंसी फंड के लिए नहीं.&amp;nbsp;
इन जगहों पर न लगाएं इमरजेंसी फंड

शेयर बाजार
प्रॉपर्टी
लॉक-इन वाले निवेश उत्पाद
लंबी अवधि के ऐसे निवेश जिनसे तुरंत पैसा निकालना मुश्किल हो

Stock Market Today: शेयर बाजार में शानदार शुरुआत, सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा चढ़ा, निफ्टी 24,600 के पार

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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>इमरजेंसी, फंड, बनाने, का, सही, तरीका, क्या, है, में, पैसा, लगाएं, या, सोने, में</media:keywords>
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        <title>135 साल पुराना कानून खत्म, अब कोर्ट में मान्य होंगे स्क्रीनशॉट्स&amp;डिजिटल सबूत, आप पर होगा सीधा असर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपने कभी बैंक से स्टेटमेंट निकलवाने के लिए कई चक्कर लगाए हैं या ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में बैंक रिकॉर्ड जुटाने में परेशानी हुई है तो आपके लिए खुशखबरी है. संसद ने 135 साल पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की जगह बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है. इस नए कानून का मकसद बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल दौर के हिसाब से तैयार करना है. अब सिर्फ कागजी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड भी अदालत में सबूत के तौर पर स्वीकार किए जा सकेंगे.
&#039;बैंकर बुक्स एविडेंस बिल&#039; क्या है?बैंकर बुक्स एविडेंस एक नया कानून है, जो 1891 में बने पुराने कानून की जगह लाया गया है. जब ये कानून बना था तब बैंकों में सभी रिकॉर्ड मोटी रजिस्टरों और कागजों में रखे जाते थे. लेकिन अब लगभग पूरा बैंकिंग सिस्टम डिजिटल हो चुका है. ऐसे में सरकार ने कानून को भी समय के हिसाब से अपडेट किया है. नए बिल में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल एंट्री और कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद बैंक रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता दी गई है. यानी अदालत में अब सिर्फ कागज ही नहीं, बल्कि बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे.
इमरजेंसी फंड बनाने का सही तरीका क्या है, FD में पैसा लगाएं या सोने में?
बिल में क्या हुआ बदलाव?सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब बैंकों को हर मामले में कागजी रिकॉर्ड तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जरूरत पड़ने पर डिजिटल रिकॉर्ड ही कोर्ट में पेश किए जा सकेंगे. इसके अलावा रिकॉर्ड की डिजिटल कॉपी भी इस्तेमाल की जा सकेगी. इससे डॉक्यूमेंट्स जुटाने में लगने वाला समय कम होगा और रिकॉर्ड के रखरखाव का प्रोसेस भी आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
बैंकिंग सिस्टम में क्या सुधार होगा?नया कानून लागू होने के बाद बैंकों का काफी समय और खर्च बचेगा. लाखों पुराने कागजी रिकॉर्ड संभालने की जरूरत कम होगी और जरूरत पड़ने पर डिजिटल डेटा आसानी से मिलेगा. इससे बैंक के काम में भी तेजी आएगी, रिकॉर्ड खोजने में कम समय लगेगा और डॉक्यूमेंट्स की सुरक्षा भी बेहतर होगी. डिजिटल रिकॉर्ड होने से डेटा को ट्रैक करना आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
शेयर बाजार में शानदार शुरुआत, सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा चढ़ा, निफ्टी 24,600 के पार
आम आदमी को क्या राहत मिलेगी?इस कानून का सबसे बड़ा फायदा आम बैंक ग्राहकों को मिलने वाला है. अगर किसी का बैंक से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में चल रहा है या किसी जांच एजेंसी को बैंक रिकॉर्ड चाहिए, तो डॉक्यूमेंट जुटाने में पहले जितना समय नहीं लगेगा. कई मामलों में लोगों को बैंक की शाखा के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे. अब रिकॉर्ड डिजिटल रूप में मिलेगा तो लोगों का समय भी बचेगा.
ऑनलाइन फ्रॉड में कैसे मिलेगी मदद?आजकल ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे मामलों में लेनदेन का रिकॉर्ड, लॉग, ट्रांजैक्शन डिटेल और दूसरे डिजिटल सबूत सबसे अहम होते हैं. नए कानून के बाद बैंक इन रिकॉर्ड को आसानी से अदालत या जांच एजेंसियों के सामने पेश कर सकेंगे. इससे जांच में तेजी आने और मामलों के जल्द निपटने की उम्मीद है. हालांकि, किसी मामले का फैसला अदालत सबूतों और कानून के आधार पर ही करेगी.
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चैट या स्क्रीनशॉट कैसे मदद करेगा?आज ज्यादातर लोग बैंकिंग का काम मोबाइल ऐप के जरिए करते हैं. पैसे भेजने के बाद लोग स्क्रीनशॉट भी सेव रखते हैं और कई बार व्हाट्सएप पर शेयर भी करते हैं. नए कानून से बैंक के ऑफिशियल डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देता है. ऐसे में अगर किसी लेनदेन को लेकर विवाद होता है, तो बैंक के सर्वर पर मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड सबसे जरूरी सबूत होंगे.
वहीं, बैंक ऐप का स्क्रीनशॉट या व्हाट्सएप पर शेयर किया गया ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट किसी मामले में शुरुआती जानकारी के रूप में काम आ सकता है, लेकिन अदालत में उसकी अहमियत मामले के तथ्य और दूसरे सबूतों पर निर्भर करेगी. फिर अंतिम फैसला कोर्ट ही करती है.
क्यों जरूरी था नया कानून?जब पुराना कानून बना था तब न इंटरनेट था और न ही डिजिटल बैंकिंग. आज यूपीआई, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट आम बात हो चुके हैं. ऐसे में 135 साल पुराने कानून से काम करना मुश्किल हो रहा था. इसी वजह से सरकार ने नया कानून लाकर बैंकिंग व्यवस्था को मौजूदा तकनीक के मुताबिक बनाने की कोशिश की है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>135, साल, पुराना, कानून, खत्म, अब, कोर्ट, में, मान्य, होंगे, स्क्रीनशॉट्स-डिजिटल, सबूत, आप, पर, होगा, सीधा, असर</media:keywords>
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        <title>100 रुपए में डिजिटल गोल्ड ले रहे Gen Z, इसे खरीदने का तरीका क्या है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/100-रुपए-में-डिजिटल-गोल्ड-ले-रहे-gen-z-इसे-खरीदने-का-तरीका-क्या-है</link>
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        <description><![CDATA[ Gen Z Digital Gold Investment: अक्सर लोग कमाई के साथ-साथ बचत और निवेश करने के बारे में भी सोचते हैं, क्योंकि नौकरी के बाद यही सेविंग उनके काम आती है. ऐसे में भारत में सोने को केवल गहनों के तौर पर ही नहीं देखा जाता है, बल्कि इसे निवेश का भी एक अच्छा जरिया समझा जाता है.
Gen Z केवल रील्स, सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अब आज की नई पीढ़ी भी डिजिटल गोल्ड में निवेश कर रही है. ऐसे में हो सकता है कई लोगों को डिजिटल गोल्ड के बारे में जानकारी न हो. क्या आप जानते हैं डिजिटल गोल्ड में निवेश करना काफी सस्ता है. इसकी शुरुआत महज 100 रुपये से की जाती है.&amp;nbsp;
गोल्ड मार्केट की तस्वीर बदल रहे हैं Gen Z
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की स्वर्णिम उड़ान 2047 रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले कुछ समय में भारत के गोल्ड मार्केट में Gen Z की अहम भूमिका होगी. आज की पीढ़ी बढ़ती निवेश की समझ के कारण Gen Z सोने को पैसा बढ़ाने का एक अच्छा ऑप्शन भी समझ रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, &amp;nbsp;Gen Z अब सोना और ज्वेलरी खरीदने की बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और सॉवरन गोल्ड बॉन्ड(SGB) में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. डिजिटल गोल्ड की मदद से अब युवाओं के लिए कम पैसे में निवेश करना आसान हो गया है. इसके साथ ही घर में सोना रखने की चिंता भी कम हो गई है.&amp;nbsp;
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डिजिटल गोल्ड खरीदने के फायदे क्या हैं?

इसका सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि डिजिटल गोल्ड में 100 रुपये में निवेश किया जा सकता है.
इसके साथ ही ज्यादातर प्लेटफॉर्म 24 कैरेट 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोना उपलब्ध कराते हैं.
वहीं जब आप डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं तो उसे सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है.
इसको लॉकर या घर में रखना की जरूरत नहीं पड़ती.
अगर जरूरत पड़ती है तो आप इसे कभी भी बेच सकते हैं.
अगर आप गोल्ड घर पर रखना है तो आप बाद में इसे सिक्के या गोल्ड बार के रूप में घर पर मंगवा सकते हैं.

क्या सच में 100 रुपये में खरीद सकते हैं डिजिटल गोल्ड?
अगर आपको डिजिटल गोल्ड खरीदना है तो इसका प्रोसेस काफी आसान है.&amp;nbsp;

इसके लिए सबसे पहले आप PhonePe, Paytm,Google Pay या Jar जैसे ऐप को खोलें.
इसके बाद ऐप में Gold या Digital Gold सेक्शन पर जाएं.
फिर अपनी पसंद के मुताबिक 100, 500 &amp;nbsp;रुपये या कोई भी राशि दर्ज करें.
अब UPI या नेट बैंकिंग की मदद से भुगतान कर दें.
जब पेमेंट हो जाएगी तो उतनी कीमत का 24 कैरेट सोना आपके डिजिटल अकाउंट में जुड़ जाएगा.&amp;nbsp;

निवेश से पहले ही जान लें कुछ जरूरी बातें

डिजिटल गोल्ड खरीदते समय 3 प्रतिशत GST देना पड़ता है.
वहीं खरीदने और बेचने की कीमत में भी फर्क हो सकता है.
इसके अलावा डिजिटल गोल्ड पर RBI या SEBI की निगरानी नहीं होती है.
अगर आप चाहते हैं सोना घर पर मंगवाना तो उसके लिए डिलीवरी के चार्ज अलग होते हैं.

Gen Z का गोल्ड के प्रति बदलता नजरिया
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के घरों में बड़ी मात्रा में सोना रखा हुआ है. अगर इस सोने को गोल्ड मॉनेटाइजेशन जैसी योजनाओं के जरिए वित्तीय व्यवस्था से जोड़ दिया जाए तो लगभग 315 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक वैल्यू का लाभ देश को हो सकता है. यानी आने वाले कुछ सालों में Gen Z का गोल्ड के प्रति बदलता नजरिया देश के गोल्ड मार्केट को नई दिशा दे सकती है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>100, रुपए, में, डिजिटल, गोल्ड, ले, रहे, Gen, इसे, खरीदने, का, तरीका, क्या, है</media:keywords>
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        <title>लोन लेने में UP, बिहार और MP आगे, लोग क्यों ले रहे इतना कर्ज? रिपोर्ट से समझें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/लोन-लेने-में-up-बिहार-और-mp-आगे-लोग-क्यों-ले-रहे-इतना-कर्ज-रिपोर्ट-से-समझें</link>
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        <description><![CDATA[ India Credit Market: अगर आपको लगता है कि सबसे ज्यादा लोन सिर्फ महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में लिया जाता है, तो अब ऐसा नहीं है. ट्रांसयूनियन सिबिल की ताजा रिपोर्ट के हिसाब से, उत्तर प्रदेश,बिहार और मध्य प्रदेश में पिछले कुछ सालों में लोन लेने वालों की संख्या तेजी से ज्यादा हो रही है. इसकी वजह से अब भारत का क्रेडिट मैप भी बदल रहा है और इन राज्यों की हिस्सेदारी लगातार ज्यादा हो रही है.
उत्तर और मध्य भारत में सबसे तेजी से ज्यादा हो रही क्रेडिट ग्रोथ2017 से 2026 के बीच उत्तर और मध्य भारत में क्रेडिट ग्रोथ, पश्चिम और दक्षिण भारत के मुकाबले ज्यादा रही.अब इन राज्यों में पहले से ज्यादा लोग बैंक और दूसरे &amp;nbsp;फाइनेंशियल कंपनियां से लोन ले रहे हैं.लेकिन,महाराष्ट्र और तमिलनाडु अभी भी देश के सबसे बड़े क्रेडिट मार्केट हैं, लेकिन अब उनकी हिस्सेदारी पहले के मुकाबले थोड़ी कम हो गई है. इसकी वजह ये नहीं है कि वहां लोगों ने लोन लेना कम कर दिया है, बल्कि दूसरे राज्यों में लोन लेने वालों की संख्या तेजी से ज्यादा हो रही है.
यह भी पढ़ें: टैक्स फ्री कमाई, फिर भी भरें ITR; जानें किन 10 परिस्थितियों में टैक्स रिटर्न कानूनी रूप से जरूरी
रिपोर्ट में क्या कहता हैं डेटा?डेटा की बात करें तो मार्च 2017 में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 12% थी, जो मार्च 2026 में कम होकर 10% हो गई. तमिलनाडु की हिस्सेदारी 11% से कम होकर 9% हो गई. दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश मे सबसे ज्यादा ग्रोथ दिखा. राज्य की हिस्सेदारी 8% से ज्यादा होकर 11% हो गई. मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 4% से ज्यादा होकर 6% और बिहार की हिस्सेदारी 3% से ज्यादा होकर &amp;nbsp;5% पे पहुंच गई. पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी भी 4% से ज्यादा होकर &amp;nbsp;5% हो गई.
रिपोर्ट के हिसाब से, ये बदलाव दिखाता है कि अब देश के ज्यादा लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रहे हैं और ऑफिसियल तरीके से लोन ले रहे हैं. छोटे शहरों और नए राज्यों में भी बैंकिंग और क्रेडिट की पहुंच ज्यादा हुई है. यही वजह है कि यूपी, बिहार और एमपी जैसे राज्य अब देश के क्रेडिट मार्केट में तेजी से अपनी हिस्सेदारी ज्यादा कर रहे हैं.महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे बड़े बाजार अभी भी आगे हैं, लेकिन अब दूसरे राज्य भी तेजी से उनकी बराबरी की तरफ आ रहे हैं.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लोन, लेने, में, UP, बिहार, और, आगे, लोग, क्यों, ले, रहे, इतना, कर्ज, रिपोर्ट, से, समझें</media:keywords>
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        <title>Home Loan लेने से पहले ये बैंक से पूछें ये एक सवाल, बच जाएंगे सीधे 25 लाख, जानें क्या है गणित</title>
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        <description><![CDATA[ Home Loan News: घर बनाना हर किसी का सपना होता है. अपने परिवार के साथ सुकून से रहने के लिए चार दिवारी के लिए व्यक्ति जी-तोड़ मेहनत करता है. केवल कई बार इसके लिए बैंक से लोन भी लिया जाता है. लोन लेना वैसे तो बेहद आसान है, लेकिन इसे लेने से पहले कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. जिससे कि आपको किसी भी तरह का नुकसान ना हो बल्कि बचत ही बचत हो.
बैंक से पूछें जरूर सवालअगर आप भी अपने घर का सपना देख रहे हैं और होम लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं. तो सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला करना बड़ी गलती हो सकती है. इसलिए लोन लेने से पहले बैंक से एक सवाल जरूर पूछें ये सवाल है &#039;क्या इस होम लोन पर प्रीपेमेंट (Prepayment) या पार्ट-पेमेंट की सुविधा है और उस पर कोई चार्ज तो नहीं लगेगा?&#039; यही एक सवाल है जो लंबे समय में आपके लाखों रुपये बचा सकता है.
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कैसे बचेंगे लाखों रुपये?होम लोन अक्सर 20 से 30 साल के लिए लिया जाता है. इस दौरान बैंक को ब्याज के रूप में मूल रकम से भी ज्यादा पैसा चुकाना पड़ सकता है. लेकिन अगर आपकी आय बढ़ने पर आप समय-समय पर लोन का कुछ हिस्सा पहले ही जमा कर दें, तो ब्याज का बोझ काफी कम हो जाता है.
ऐसे समझें 25 लाख बचाने का गणितइस बात को समझने के लिए उदाहरण का सहारा लेंगे. जैसे कि मान लीजिए आपने 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 8.5% ब्याज दर पर लिया है. ऐसे में आपकी एक महीने की EMI करीब 43,400 रुपये होगी और ओवरऑल लोन में आपको लगभग 54 लाख रुपये ब्याज के रूप में चुकाने पड़ सकते हैं.&amp;nbsp;
अब मान लीजिए कि लोन शुरू होने के पांचवें साल में आपने 10 लाख रुपये की पार्ट-पेमेंट कर दी. इसके बाद या तो आपकी EMI कम हो जाएगी या लोन की अवधि घट जाएगी. ऐसे में कुल ब्याज का भुगतान लगभग 25 लाख रुपये तक कम हो सकता है. यानी एक सही फैसला आपको बड़ी बचत दिला सकता है.
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कब मिलेगा ये फायदा?हालांकि, ये फायदा आपको तभी मिलेगा जब बैंक प्रीपेमेंट की सुविधा देगा और उस पर अतिरिक्त शुल्क न लेता हो. इसलिए लोन लेने से पहले बैंक से ये जानकारी जरूर लें कि पार्ट-पेमेंट कब और कितनी बार की जा सकती है, मिनिमम पेमेंट क्या होगी और कोई शुल्क लगेगा या नहीं. इसके अलावा ये भी पता करें कि लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है या फिक्स्ड रेट पर. कई बैंक फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लेते, जबकि कुछ मामलों में फिक्स्ड रेट लोन पर शुल्क लगाया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Home, Loan, लेने, से, पहले, ये, बैंक, से, पूछें, ये, एक, सवाल, बच, जाएंगे, सीधे, लाख, जानें, क्या, है, गणित</media:keywords>
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        <title>Ration Price Hike: तेल, दाल से लेकर दूध&amp;चीनी तक, राशन की 99% चीजें हुईं महंगी, देखें List</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ration-price-hike-तेल-दाल-से-लेकर-दूध-चीनी-तक-राशन-की-99-चीजें-हुईं-महंगी-देखें-list</link>
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        <description><![CDATA[ Ration Price Hike News: साल 2026 का आगाज तो जोरदार हुआ था, लेकिन दूसरे ही महीने में दुनिया में ऐसी तबाही नजर आई जिसका असर अब तक भी देखने को मिल रहा है. फरवरी में ईरान और यूएस के बीच युद्ध शुरू हुआ , जिसका असर पूरी दुनिया में देखा गया. खासतौर से भारत में हर चीज की कीमत में इजाफा हो गया. पिछले पांच महीनों से इस युद्ध के कारण अब तक महंगाई की मार लोगों को पड़ रही है. पिछले पांच महीने में राशन की चीजों में करीब 99 प्रतिशत की कीमत वृद्धि देखी गई है.
राशन की चीजों के दाम बढ़ेईरान और अमेरिका के बीच का युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 से हुई थी. तब से लेकर अब तक तक आम आदमी के खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. हाल ही में उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके अनुसार अब तक राशन की कीमतों में करीब 99 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा चुकी है.
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यहां देखें उन चीजों की लिस्ट जिनके दाम इन पांच महीनों में बढ़ गए हैं:



सामान
कीमतें (3 अगस्त 2026)
कीमतें (28 फरवरी 2026)
दामों में बढ़ोतरी का प्रतिशत


चना दाल
86.66 रुपये&amp;nbsp;
82.01 रुपये&amp;nbsp;
5.67%


अरहर दाल
123.46 रुपये&amp;nbsp;
117.50 रुपये&amp;nbsp;
5.07%


उड़द दाल&amp;nbsp;
121.51 रुपये&amp;nbsp;
115.80 रुपये&amp;nbsp;
4.93%


मूंग दाल&amp;nbsp;
111.96 रुपये&amp;nbsp;
107.41 रुपये&amp;nbsp;
4.24%


मसूर दाल&amp;nbsp;
90.63 रुपये&amp;nbsp;
86.88 रुपये&amp;nbsp;
4.32%


सरसों तेल&amp;nbsp;
196.44 रुपये&amp;nbsp;
188.88 रुपये&amp;nbsp;
4.00%


सोया तेल&amp;nbsp;
164.19 रुपये&amp;nbsp;
157.12 रुपये&amp;nbsp;
4.50%


सूरजमुखी तेल
189.42 रुपये
181.26 रुपये
4.50%


पाम तेल&amp;nbsp;
148.50 रुपये
142.10 रुपये
4.50%


मूंगफली तेल&amp;nbsp;
205.73 रुपये&amp;nbsp;
197.81 रुपये
4.00%


चीनी&amp;nbsp;
49.33 रुपये
47.08 रुपये
4.78%


नमक&amp;nbsp;
22.01 रुपये
21.16 रुपये
4.02%


दूध&amp;nbsp;
61.00 रुपये
58.00 रुपये
1.25%


चावल&amp;nbsp;
44.77 रुपये
43.20 रुपये
3.63%


आटा&amp;nbsp;
37.35 रुपये
37.13 रुपये
0.59%



तेल और दाल की कीमतों में तेजी से इजाफाइस रिपोर्ट की मानें तो खाने- पीने की मुख्य 36 चीजों में से 35 के दाम बढ़ गए हैं. इन सबमें सबसे तेजी से दाम तेल और दालों के बढ़े हैं. कुछ विशेषज्ञों की मानें तो दालों की कीमतों बढ़ोतरी की बड़ी वजह इस बार कमजोर होता मानसून है. जुलाई के आखिर तक खरीफ दालों की फसल पिछले साल की तुलना में करीब 7% कम रही है, जिसकी वजह से उत्पादन घटा और आयात बढ़ा है.
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फेस्टिव सीजन पर और बढ़ सकते हैं दामतो वहीं अगस्त के महीने से लगातार त्यौहारों की शुरुआत हो जाती है, ऐसे में अब और भी ज्यादा महंगाई बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं. सावन अभी चल ही रहा है, इसके बाद राखी, तीज, जन्माष्ट्री, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा, दीवाली आने में समय नहीं लगता है. ऐसे में त्योहारों के समय में सभी खाने- पीने की चीजों की मांग बढ़ने लगती है. अग वैश्विक स्तर पर अभी जो हालात बने हुए हैं वो ऐसे ही बने रहे, तो महंगाई और भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Digital Platforms: सरकार ने Zepto, IndiGo और PhysicsWallah समेत 9 प्लेटफॉर्म्स पर लगाया जुर्माना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/digital-platforms-सरकार-ने-zepto-indigo-और-physicswallah-समेत-9-प्लेटफॉर्म्स-पर-लगाया-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ Digital Platforms Penalized: इंडिया अब डिजिटल हो गया है, लेकिन डिजिटल होने के केवल अच्छे पहलू ही नहीं हैं, बल्कि इसके कुछ बुरे और खराब पहलू भी हो सकते हैं. कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लोगों को धोखाधड़ी का शिकार भी बना लेते हैं. ऐसे ही कुछ डार्क पैटर्न वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लेकर सरकार ने सख्ती दिखाई है और करीब 9 प्लेटफॉर्म्स पर जुर्माना लगाया है.
CCPA ने लगाया जुर्मानादरअसल हाल ही में राज्यसभा में सरकार के द्वारा इसे लेकर जानकारी पेश की गई है. जिसमें बताया गया है कि &amp;nbsp;केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ग्राहकों को ऑनलाइन खरीदारी के दौरान गुमराह करने वाले तरीकों यानी &#039;डार्क पैटर्न&#039; के इस्तेमाल पर 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की है. इनमें इंडिगो, जेप्टो, पर्स्ट क्राई, फिजिक्स वल्लाह और स्पाइसजेट का नाम भी शामिल है.
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किस कंपनी पर लगा कितना जुर्माना?राज्यसभा में ये भी बताया गया है कि किस कंपनी पर किस डार्क पैटर्न के चलते कार्रवाई हुई और जुर्माना लगाया गया है:

CCPA ने जेप्टो मार्केटप्लेस पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जांच में पाया गया कि प्लेटफॉर्म पर शुरुआत में सामान की कीमत कम दिखाई गई, लेकिन बाद में हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप फीस जोड़ दी गई.
CCPA ने फिजिक्स वल्लाह पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. प्लेटफॉर्म पर &#039;PW फाउंडेशन&#039; के लिए 10 रुपये का डोनेशन पहले से चुना हुआ था. इसके अलावा, लोगों को उस डोनेशन को बनाए रखने के लिए इमोशनल मैसेज भी दिखाया गया.
CCPA को IndiGo के मोबाइल ऐप पर भी शिकायतें मिली थीं. एयरलाइन ग्राहकों को कोई सुविधा न लेने पर &#039;नौ आई विल टेक रिस्क&#039; जैसा मैसेज दिखा रहा था.
BookMyShow पर टिकट बुक करते समय उसकी सामाजिक पहल BookASmile के लिए 1 रुपये का योगदान पहले से चुना हुआ था. CCPA ने इसे बास्केट स्नीकिंग माना और कंपनी को ये ऑप्शन हटाने का निर्देश दिया.
FirstCry पर CCPA ने 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, इस कंपनी पर भी भ्रामक काउंटडाउन टाइमर और सब्सक्रिप्शन को दोबारा शुरू किया.
PharmaEasy के ऊपर करीब 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.&amp;nbsp;
McAfee के ऊपर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
SpiceJet के ऊपर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.&amp;nbsp;
Anuj Jindal पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.&amp;nbsp;

बता दें कि सरकार ने राज्यसभा में ये भी बताया कि जून 2025 में CCPA ने ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म का खुद ऑडिट करने की सलाह दी थी, ताकि वो डार्क पैटर्न की पहचान कर सकें. इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों से अब तक करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Digital, Platforms:, सरकार, ने, Zepto, IndiGo, और, PhysicsWallah, समेत, प्लेटफॉर्म्स, पर, लगाया, जुर्माना</media:keywords>
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        <title>5 अगस्त को आपके शहर में कितने का मिलेगा 14 किलो वाला गैस सिलेंडर, देखें एलपीजी की रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/5-अगस्त-को-आपके-शहर-में-कितने-का-मिलेगा-14-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-देखें-एलपीजी-की-रेट-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ LPG Price Today 5 August 2026: अगर आपके घर का भी गैस सिलेंडर खत्म होने वाला है तो ये खबर आपके काम की है. इस महंगाई में जहां पेट्रोल- डीजल के दाम भी आसमां छू रहे हैं, ऐसे में एलपीजी को लेकर रोज घबराहट लगी रहती है. लोग हर दिन इसके रेट चेक करते हैं और पता करते हैं कि कहीं दाम कम तो नहीं हुए. इसी राहत की उम्मीद में अगर आप भी नई बुकिंग करने वाले हैं तो यहां से पहले 14 किलो और 19 किलो वाले गैस सिलेंडर का रेट चेक कर लें.&amp;nbsp;
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;

दिल्ली- 942 रुपए
नोएडा- 939.50 रुपए
गाजियाबाद- 939.50 रुपए
मुंबई- 941.50 रुपए
पटना- 1031.50 रुपए
लखनऊ- 979.50 रुपए
हैदराबाद- 994 रुपए
बेंगलुरू- 944.50 रुपए
चेन्नई- 957.50 रुपए
रांची- 999.50 रुपए

आज से 110 रुपए प्रति लीटर मिलेगा E20 पेट्रोल? पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या बताया
कमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम-&amp;nbsp;

दिल्ली- 2738 रुपए
नोएडा- 2738 रुपए
गाजियाबाद- 2738 रुपए
मुंबई- 2691.50 रुपए
पटना- 3018 रुपए
लखनऊ- 2860.50 रुपए
हैदराबाद- 2985 रुपए
बेंगलुरू- 2821 रुपए
चेन्नई- 2906 रुपए
रांची- 2922 रुपए

क्या बढ़ सकते हैं गैस सिलेंडर के दाम?&amp;nbsp;हां, आगे चलकर हो सकता है एलपीजी के रेट में बदलाव नजर आए. हालांकि ये अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की लागत, वैश्विक सप्लाई चेन और मिडिल ईस्ट के हालातों पर भी निर्भर करता है.&amp;nbsp;
3 साल की FD पर मिल रहा है 8.3% तक बंपर ब्याज, देखें बैंकों की लिस्ट
आखिरी बार कब बदले थे दाम?
हाल ही में 1 अगस्त को तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दामों में करीब 200 रुपए की कटौती की है, जबकि 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं.&amp;nbsp;
गैस सब्सिडी में कितना आता है?प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत साल 2026 में 14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर पर 300 रुपए प्रति सिलेंडर की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है. हालांकि, सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए एक साल में मिलने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर अब अधिकतम 4 सिलेंडर प्रति वर्ष कर दी है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अगस्त, को, आपके, शहर, में, कितने, का, मिलेगा, किलो, वाला, गैस, सिलेंडर, देखें, एलपीजी, की, रेट, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>अब सस्ता होकर रहेगा पेट्रोल&amp;डीजल! 80 डॉलर से नीचे आया क्रूड ऑयल</title>
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        <description><![CDATA[ Crude Oil Crash: आज 5 अगस्त 2026 को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत और होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के प्रयासों के चलते तेल की कीमतों में आज 5-6% की बड़ी गिरावट आई है. यह बीते तीन सप्ताह में क्रूड का अब तक का सबसे निचला स्तर है.&amp;nbsp;
आज ब्रेंट क्रूड गिरकर 79.06 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. इसमें लगभग 5.9% की गिरावट आई है. वहीं, WTI Crude भी आज लगभग 6.2% की गिरावट के साथ 75.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चा तेल आज 7860 रुपये प्रति बैरल के आसपास खुला. इसमें भी पिछले सत्र के मुकाबले 177 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि&amp;nbsp;कीमतों में इस गिरावट की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की संभावना है.&amp;nbsp;
क्यों कीमतों में आई गिरावट?&amp;nbsp;
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की दी गई जानकारी के मुताबिक, होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान के साथ बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है.
इधर, अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों को कम करने और एक स्थायी समझौते पर पहुंचने में मदद करने के लिए कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी एक सक्रिय भूमिका निभाते हुए मध्यस्थता भी कर रहे हैं. उन्हीं के द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान पर हमले को रोकने और बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके बाद दोनों देश समझौते के मसौदे साझा कर रहे हैं.
ओमान की भी इसमें बड़ी भूमिका है. ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक अस्थायी रूट के समझौते पर उनकी ओमान के साथ चर्चा हो रही है.
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल के दाम 79 डॉलर प्रति बैरल के पास आने से भारत को बहुत बड़ा आर्थिक फायदा होगा. इससे भारत का विदेशी मुद्रा खर्च काफी घट जाएगा. कच्चे तेल में प्रति डॉलर की गिरावट से भारत का आयात बिल लगभग 10000 करोड़ तक कम हो जाता है. कच्चा तेल सस्ते में मिलेगा, तो देश में ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी. इससे फल-सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें काबू में रहेंगी, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी.
ऊपर से अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार कुछ हफ्ते तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में भी बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें:
यूं ही नहीं देश में स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, ताजा रेट के साथ जानें मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, सस्ता, होकर, रहेगा, पेट्रोल-डीजल, डॉलर, से, नीचे, आया, क्रूड, ऑयल</media:keywords>
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        <title>RBI MPC Meeting August 2026: क्या होम और कार लोन पर सस्ती होगी EMI? रेपो रेट आज RBI का फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ RBI MPC meeting LIVE updates: भारतीय रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) आज 5 अगस्त, 2026 को रेपो रेट पर अपना फैसला सुनाएगी. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे. रेपो रेट पर फैसला वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए लिया जाएगा. ब्लूमबर्ग के एक सर्वे के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार रिजर्व बैंक रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखेगा क्योंकि महंगाईदर अभी भी आरबीआई के तय सीमा के अंदर ही है. कन्ज्यूमर महंगाई में हालिया बढ़ोतरी के बाद भी जून में महंगाई दर 4.38% रही, जो सरकार के लक्ष्य 4% से भले ही ज्यादा है, लेकिन आरबीआई की 6% की ऊपरी सुरक्षित सीमा से काफी नीचे है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति समिति के फैसलों का ऐलान करेंगे, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RBI, MPC, Meeting, August, 2026:, क्या, होम, और, कार, लोन, पर, सस्ती, होगी, EMI, रेपो, रेट, आज, RBI, का, फैसला</media:keywords>
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        <title>Gold&amp;Silver Price Today: सुबह&amp; सुबह सोने में मामूली गिरावट, जानें अपने शहर में 18K, 22K, 24K सोना और चांदी का भाव</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today: बढ़ती महंगाई ने हर किसी की जेब ढीली कर दी है. बावजूद इसके तीज- त्योहार पर सोना- चांदी तो खरीदना ही पड़ता है. ऐसे में अगर घर में शादी- ब्याह पड़ जाए तो और परेशानी बढ़ जाती है. आइये जानते हैं कि क्या सोने और चांदी के रेट से आज आम आदमी को जरा भी राहत मिलेगी या नहीं. यहां हम आज का ताजा सोने चांदी का भाव लेकर आए हैं.
सोने के कल और आज के रेट की तुलना-&amp;nbsp;



सोना (कैरेट में)
4 अगस्त का रेट (प्रति 10 ग्राम)
5 अगस्त का रेट (प्रति 10 ग्राम)


सोना (24 कैरेट)
144000 रुपए
143990 रुपए


सोना (22 कैरेट)
132000 रुपए
131990 रुपए


सोना (18 कैरेट)
108000 रुपए
107990 रुपए



अब सस्ता होकर रहेगा पेट्रोल-डीजल! 80 डॉलर से नीचे आया क्रूड ऑयल
क्या हैं चांदी के हालात?
चांदी ने तो पिछले कुछ दिनों में सिर्फ राहत ही दी है. कई दिनों से इसके रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये स्थिर हैं. आज भी चांदी 234900 रुपए प्रति किलोग्राम पर है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
सोना खरीदने से पहले रखें ये सावधानी-&amp;nbsp;
सोना खरीदना हो तो सबसे पहले बीआईएस हॉलमार्क, 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक एचयूआईडी कोड चेक करें. इसके अलावा सोने के कैरेट की शुद्धता की जांच भी करानी चाहिए. सोना हमेशा पक्के जीएसटी बिल के साथ लें और मेकिंग चार्जेंज और हिडेन चार्जेज के बारे में पुछना न भूलें. &amp;nbsp;
यूं ही नहीं देश में स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, ताजा रेट के साथ जानें मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक
चांदी खरीदने से पहले रखें ये सावधानी-&amp;nbsp;
अगर चांदी के गहने की खरीदनी हो तब भी उसकी शुद्धता की जांच तो कर ही लेनी चाहिए. सोने की तरह की चांदी की शुद्धता की भी कीमत है. जब भी चांदी खरीदें हमेशा पक्का बिल लें और हॉलमार्क जरूर चेक करें. बता दें कि चांदी पर भी मेकिंग चार्ज लगता है तो इसके बारे में भी आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Price, Today:, सुबह-, सुबह, सोने, में, मामूली, गिरावट, जानें, अपने, शहर, में, 18K, 22K, 24K, सोना, और, चांदी, का, भाव</media:keywords>
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        <title>नए&amp;नए विधायक बने प्रशांत किशोर की नेटवर्थ कितनी है? पत्नी के पास है इतनी दौलत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नए-नए-विधायक-बने-प्रशांत-किशोर-की-नेटवर्थ-कितनी-है-पत्नी-के-पास-है-इतनी-दौलत</link>
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        <description><![CDATA[ Prashant Kishor Networth: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने शानदार जीत हांसिल की है. उन्होंने इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को हराया है. इस जीत के बाद प्राशांत किशोर की राजनीतिक सफलता के साथ-साथ उनकी संपत्ती भी चर्चा का विषय बन गई है. जानिए नए नए विधायक बने प्रशांत किशोर की नेटवर्थ कितनी है. वह कितने दौलतमंद हैं.
चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रशांत किशोर के पास 96.06 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के नाम 101.93 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है.
प्रशांत किशोर की अधिकांश संपत्ति गैर- सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश से जुड़ी है. इसमें वेदास वेंचर्स में उनकी 100% &amp;nbsp;हिस्सेदारी शामिल है, जिसकी कीमत 95.26 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश और बैंक एफडी समेत 8 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी है.
यह भी पढ़ें: सोना और भी हुआ सस्ता, 24 से लेकर 18 कैरेट की गिरी कीमत; जानें अब 10 ग्राम का रेट
प्रशांत किशोर के निवेश









प्रशांत किशोर के निवेश में 7.36 करोड़ रुपये की एफडी शामिल है. उनके और परिवार के नाम एचडीएफसी बैंक में कई एफडी हैं, जिन्हें सुरक्षित और स्थिर निवेश माना जाता है.
प्रशांत किशोर के निवेश पोर्टफोलियो में एफडी, इक्विटी, बॉन्ड और अन्य वित्तीय साधन भी शामिल हैं. चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी, गाजियाबाद और नई दिल्ली के वसंत विहार में आवासीय संपत्तियां हैं. उनकी अचल संपत्तियों &amp;nbsp;का कुल मूल्य 73.87 करोड़ रुपये है, जबकि उनकी पत्नी की अचल संपत्तियों का मूल्य 12.42 करोड़ रुपये बताया गया है.




यह भी पढ़ें: अब नहीं मिलेगा रोजाना इस्तेमाल होने वाला डाबर का ये सामान, यहां देखें पूरी लिस्ट





 ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 22:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नए-नए, विधायक, बने, प्रशांत, किशोर, की, नेटवर्थ, कितनी, है, पत्नी, के, पास, है, इतनी, दौलत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Old Coin: पुराने सिक्के बेचकर कमाएं 10 लाख, PM मोदी ने वीडियो में कहा? सरकार ने क्या बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/old-coin-पुराने-सिक्के-बेचकर-कमाएं-10-लाख-pm-मोदी-ने-वीडियो-में-कहा-सरकार-ने-क्या-बताया</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/old-coin-पुराने-सिक्के-बेचकर-कमाएं-10-लाख-pm-मोदी-ने-वीडियो-में-कहा-सरकार-ने-क्या-बताया</guid>
        <description><![CDATA[ Old Coin Exibition: सोशल मीडिया पर आए दिन कई खरें वायरल होती हैं. इन खबरों में कई योजनाएं भी होती हैं, जो सरकार द्वारा चलाई जाती हैं. हालांकि हर एक योजना या खबर सही हो, ऐसा जरूरी तो नहीं है. जैसे इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, इस वीडियो में एक सरकारी योजना के जरिए लाखों रुपये कमाए जाने का दावा किया जा रहा है.
क्या है वायरल वीडियो में?इस वायरल हो रहे वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी नजर आ रहे हैं. जो बता रहे हैं कि पुराने सिक्कों की एक एग्जिबिशन सरकार के द्वराा लगाई जा रही है. जिसमें कोई भी अपने पुराने सिक्के लेकर जा सकता है, वहां उन सिक्कों को सीधे सरकार को ही बेचा जा सकता है. सरकार इन सिक्कों के एवज में 5 या 10 लाख रुपये देगी. लेकिन इस खबर के पीछे की सच्चाई तो कुछ और ही है.
ये भी पढ़ें: डाबर से उठा लोगों का भरोसा, FSSAI के एक्शन के बाद शेयरों में गिरावट
क्या है पूरी सच्चाई?इस खबर के पीछे की सच्चाई अब खुद सरकार की अधिकृत एजेंसी पीआईबी ने बताई है. पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए इस वीडियो को शेयर किया हाँ और इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया है. वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है, &#039;फेक वीडियो अलर्ट! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक डिजिटल रूप से बदला हुआ (मैनिपुलेटेड) वीडियो ऑनलाइन वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें पुराने सिक्कों की प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिए सरकार द्वारा अधिकृत खरीदार का समर्थन करते हुए दिखाया गया है.

⚠️ Fake Video Alert!???? A digitally manipulated video of Prime Minister Narendra Modi is circulating online wherein he is shown endorsing a government-authorised buyer for participation in an exhibition of old coins. #PIBFactCheck: ❌ This video is #Fake. ✅ The Prime&amp;hellip; pic.twitter.com/YTCeAxAi9n
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) August 4, 2026



आगे खबर की सच्चाई को उजागर करते हुए उन्होंने लिखा, &#039;पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक ये वीडियो फेक है. प्रधानमंत्री ने पुराने सिक्कों की प्रदर्शनी के लिए सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी खरीदार का समर्थन नहीं किया है. ऑनलाइन वायरल हो रहे ऐसे मैनिपुलेटेड कंटेंट पर भरोसा न करें, जिसका मकसद नागरिकों को गुमराह करना है. गलत जानकारी को रोकने में मदद के लिए, भारत सरकार से जुड़े संदिग्ध कंटेंट की रिपोर्ट PIBFactCheck पर करें.&#039;
झांसे में आ जाती है जनताबता दें कि ऐसे वीडियोज या किसी ऑनलाइन घूम रही योजना के झांसे में कई बार लोग फंस जाते हैं. जैसे इस वीडियो में दिखाए जा रहे सिक्कों के मुताबिक 5 और 10 रुपये के ऐसे सिक्के जिनमें पीछे की तरफ माता वैष्णो देवी की तस्वीर बनी है. इस वीडियो को देख कई लोग इन सिक्कों को इकट्ठा करने में भी जुट गए थे. हालांकि अब पीआईके जरिए इस वीडियो की सच्चाई सामने आ गई है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 22:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITR: क्या गृहणियों को भी भरना चाहिए Income Tax, इससे फायदा है या नुकसान?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/itr-क्या-गृहणियों-को-भी-भरना-चाहिए-income-tax-इससे-फायदा-है-या-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ ITR Filing News: इनकम टैक्स रिटर्न भरना एक बेहद जरूरी वित्तीय जिम्मेदारी है, जिसको हर सैलरी पाने वाला या बिजनेस करने वाला व्यक्ति भरता ही है. कई लोगों को केवल यही पता है कि इनकम टैक्स केवल नौकरीपेशा लोग ही भरते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घरेलू महिलाएं या गृहणियां जो बाहर नौकरी नहीं करती हैं वो भी टैक्स भरती है. नहीं जानते? तो आइये बताते हैं.
क्या गृहणियां भी भरती हैं ITR?गृहिणी की कोई नौकरी या तय सैलरी नहीं होती, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनकी कोई आय नहीं हो सकती. अगर किसी गृहिणी की आय ब्याज, किराए, निवेश या किसी अन्य स्रोत से होती है, तो उसे आयकर के नियमों को समझना जरूरी है और टैक्स भरना भी बेहद जरूरी है.
क्या कहते हैं नियम?इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक अगर गृहिणी की सालाना आय तय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है, तो आमतौर पर उसे ITR भरने की जरूरत नहीं होती. 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए नई टैक्स व्यवस्था में ये सीमा 4 लाख रुपये और पुराने टैक्स स्लैब में 2.5 लाख रुपये है. अगर गृहिणी की आय इस सीमा से ज्यादा है, तो उसे अपनी आय के हिसाब से ITR दाखिल करना पड़ सकता है. 80 साल से ज्यादा उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग आय सीमा लागू होती है.
ये भी पढ़ें: Old Coin: पुराने सिक्के बेचकर कमाएं 10 लाख, PM मोदी ने वीडियो में कहा? सरकार ने क्या बताया
क्या हो सकते हैं गृहणियों के आय के स्त्रोत?गृहिणियों के पास नौकरी नहीं होती, लेकिन इससे ये बिलकुल भी मतलब नहीं है कि उनका कोई सोर्स ऑफ इनकम ही नहीं होता. क्योंकि उन्हें दूसरे स्रोतों से आय मिल सकती है. आइये बताते हैं क्या हो सकते हैं ये स्त्रोत:

पति अगर घर चलाने के लिए पत्नी को पैसे देता है, तो सामान्य तौर पर इसे पत्नी की आय नहीं माना जाता. भले ही ये पैसा पत्नी के बैंक खाते में जमा हो.
अगर गृहिणी के नाम पर FD है, तो उससे मिलने वाला ब्याज उनकी आय माना जाता है और नियमों के अनुसार इस पर टैक्स लग सकता है.
अगर पति अपने पैसे से पत्नी के नाम पर निवेश करता है, तो टैक्स के नियमों के तहत निवेश और उससे होने वाली आय का अलग-अलग तरीके से आकलन किया जा सकता है. कुछ मामलों में आय को पति की आय से भी जोड़ा जा सकता है.
रिश्तेदारों से मिले कुछ गिफ्ट्स टैक्स से छूट सकते हैं. वहीं, गैर-रिश्तेदारों से मिले तोहफों की कुल कीमत एक वित्तीय वर्ष में 50 हजार से ज्यादा होने पर उन पर टैक्स लग सकता है.

कैसे पता करें टैक्स में आने वाली आयटैक्सेबल इनकम पता करने के लिए गृहिणियों को अपनी सभी टैक्स योग्य आय को जोड़ना चाहिए. इसमें बैंक या FD का ब्याज, किराए से मिलने वाली आय और निवेश से होने वाली कमाई शामिल हो सकती है. इसके बाद जिन कटौतियों और छूट का लाभ मिलता है, उन्हें घटाया जाता है. PPF, NSC, हेल्थ इंश्योरेंस और योग्य दान जैसी चीजों पर मिलने वाली कटौती भी इसमें शामिल हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 22:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ITR:, क्या, गृहणियों, को, भी, भरना, चाहिए, Income, Tax, इससे, फायदा, है, या, नुकसान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मैच्योरिटी से पहले बंद करा रहे FD, बैंक कितना लेंगे चार्ज? समझें नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मैच्योरिटी-से-पहले-बंद-करा-रहे-fd-बैंक-कितना-लेंगे-चार्ज-समझें-नियम</link>
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        <description><![CDATA[ Fixed Deposit Rule: आज की बढ़ती महंगाई में अगर कोई व्यक्ति प्राइवेट नौकरी करता है तो उसे हर समय इस बात की चिंता लगी रहती है कि रिटायरमेंट के बाद रोजमर्रा और जरूरत की चीजों के लिए कैसे इंतजाम करेगा. यही वजह है कि ज्यादातर लोग नौकरी के दौरान ही अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बचाकर निवेश करना शुरू कर देते हैं.
आमतौर पर निवेश करने के लिए कई सारे ऑप्शन मौजूद हैं और इन्हीं में से एक है फिक्सड डिपॉजिट, जिसे लोग एक सुरक्षित बेहतर निवेश का विकल्प समझते हैं. अगर आपने भी FD करवाई हुई है और अचानक आपको पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो क्या आप जानते हैं मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने पर कितना नुकसान हो सकता है?
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मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने पर क्या होगा?
अगर आप समय से पहले ही अपनी FD बंद कर देते हैं तो ऐसे मामले में बैंक सिर्फ पेनल्टी नहीं काटता है, बल्कि बैंक आपका तय किया गया रिटर्न नहीं देगा.&amp;nbsp; इसलिए FD तोड़ने से पहले ही बेहतर होगा कि सारे नियमों की जानकारी ले लीजिए.
जल्दी FD तोड़ने पर मिलेगा कम ब्याज?

इसका जवाब है हां. अगर आपने समय से पहले एफडी बंद कर दी तो बैंक आपको उतने दिन का ही ब्याज देगा, जितने दिन एफडी बैंक में रही है.
मान लीजिए, अगर आपने 3 साल के लिए FD कराई थी, लेकिन 18 महीने में पैसों की जरूरत पड़ने पर उसे तुड़वा दिया, तो ऐसे मामले में बैंक आपको 18 महीने का ही ब्याज का फायदा देगा न की 3 साल वाली ब्याज दर का फायदा.

जुर्माना भी काट सकता है बैंक?

जी हां, जल्दी एफडी तोड़ने पर बैंक अलग से पेनल्टी भी लगाते हैं.
आमतौर पर कई बैंक में 0.5 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तक की पेनल्टी लगाई जाती है.
ध्यान रखें, पेनल्टी की दर हर बैंक में अलग हो सकती है.

क्या बिना FD तोड़े काम चल सकता है?
अगर अचानक पैसों की जरूरत पड़े और आप एफडी तोड़ने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले यह जांच लें कि क्या बिना एफडी के तोड़े कम चल सकता है या नहीं? क्या आप जानते हैं कि&amp;nbsp;कई बैंक एफडी के बदले की सुविधा भी देते हैं. इस सुविधा की मदद से आपको एफडी समय से पहले बंद नहीं करनी पड़ेगी और निवेश भी जारी रहेगा. लेकिन एक बात का ध्यान रखें, इसके नियम हर बैंक में अलग हो सकते हैं, इसलिए पहले पूरी जानकारी ले, तभी कोई फैसला करें.
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कुछ बातों का रखें ध्यान

FD पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है.
साथ ही यह टैक्स आपकी इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक लगाया जाता है.
अगर आप एफडी तोड़ने की सोच रहे हैं तो बैंक की प्रीमैच्योर क्लोजर पॉलिसी के बारे में जरूर पढ़ें
वहीं ज्यादा जरूरत पड़ने पर ही एफडी क तोड़ने की सोचें.

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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>फ्लाइट्स में खराबी के बंपर केस, 6 महीने में आए 352 मामले&amp; संसद में सरकार</title>
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        <description><![CDATA[ Flight Safety Latest News: इन दिनों लगातार सामने आ रही फ्लाइट हादसे और तकनीकी गड़बड़ियों के बीच फ्लाइट की सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच सरकार द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में एयरलाइंस के खिलाफ बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई है. एविएशन वॉचडॉग DGCA ने पिछले दो सालों में अलग-अलग नियमों के खिलाफ उल्लंघन के मामलों में कई एयरलाइंस को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि एयरलाइन्स द्वारा नियमों के पालन में अब भी सुधार की जरूरत है और इसमें कई खामियां हैं.
6 महीने में कितने मामले आए सामने?

जून 2026 तक कुल 352 तकनीकी खामियां दर्ज की गईं.
इनमें से 334 मामले घरेलू उड़ानों से जुड़े थे.
वहीं 18 मामले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सामने आए.
यह जानकारी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित तौर पर जवाब दिए थे.

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किन एयरलाइंस में कितनी तकनीकी खामियां मिलीं?
संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक:

अकासा एयर &amp;ndash; 152 मामले
एयर इंडिया एक्सप्रेस &amp;ndash; 53 मामले
इंडिगो &amp;ndash; 47 मामले
एयर इंडिया &amp;ndash; 46 मामले
स्टार एयर &amp;ndash; 29 मामले
स्पाइसजेट &amp;ndash; 9 मामले
फ्लाई91 &amp;ndash; 9 मामले
इंडिया वन एयर &amp;ndash; 5 मामले
ब्लू डार्ट &amp;ndash; 2 मामले

तीन साल में कितनी तकनीकी खामियां मिलीं?

साल 2023 से जून 2026 तक में कुल 2,420 तकनीकी खामियां दर्ज की गईं.
सरकार ने इन खामियों की प्रकृति का ब्योरा नहीं दिया, लेकिन इन्हें सुरक्षा के लिहाज से खास माना गया है.&amp;nbsp;

DGCA ने क्या कारवाई की?

जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच DGCA ने नियमों के उल्लंघन पर एयरलाइंस को 382 कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notices) जारी किए.
2023 से 2025 के दौरान मानकों के गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों पर 51 प्रवर्तन कार्रवाइयां की गईं.
इनमें कार्रवाइयों में जुर्माना, चेतावनी और अनुमतियों का निलंबन जैसी कार्रवाई शामिल है.

प्रॉपर्टी खरीदारों की बल्ले-बल्ले! यूपी के रियल एस्टेट में बंपर तेजी
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पेट्रोल पर 3.5, डीजल पर 24 रुपए, तेल के निर्यात पर टैक्स बढ़ा</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Price Tax: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और तेल कंपनियों की कमाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में एक बार फिर बदलाव किया है. नए आदेश के मुताबिक, 3 अगस्त यानी आज से पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स को पहले के मुकाबले और ज्यादा चुकाना होगा. सरकार ने समय-समय पर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, निर्यात मार्जिन और तेल कंपनियों के मुनाफे को देखते हुए यह फैसला लिया है.
विंडफॉल टैक्स का का खास मकसद उन एकस्ट्रा मुनाफों पर कर लगाना है, जो तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के दौरान हासिल होते हैं. हालांकि, इस बड़े बदलाव का असर फिलहाल घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ा है.
कितना बढ़ा विंडफॉल टैक्स?

पेट्रोल निर्यात पर टैक्स 2.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 प्रति लीटर कर दिया गया है.
डीजल निर्यात पर टैक्स 15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 24 प्रति लीटर कर दिया गया है.
सरकार ने यह बदलाव आज यानी 3 अगस्त से लागू कर दी है.

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क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो तेल उत्पादक और रिफाइनिंग कंपनियों को एक्स्ट्रा मुनाफा होता है.
इसी एकस्ट्रा फायदे पर सरकार विशेष कर लगाती है, जिसे विंडफॉल टैक्स कहा जाता है.
इसका खास मकसद असाधारण मुनाफे के एक हिस्सा को सरकारी राजस्व में शामिल करना होता है.

पहले भी हुए थे बड़े बदलाव

हाल की समीक्षा में डीजल निर्यात कर को पहले 8.5 से बढ़ाकर 15.5 प्रति लीटर किया गया था.
एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर टैक्स 7.5 से बढ़ाकर 14.5 प्रति लीटर किया गया था.
पेट्रोल पर पहले टैक्स घटाकर 2.5 प्रति लीटर किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 3.5 प्रति लीटर कर दिया गया है.

क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?

फिलहाल यह टैक्स बदलाव सिर्फ निर्यात होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू है.
वहीं, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.
हालांकि, वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आधार पर आगे की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है.

फ्लाइट्स में खराबी के बंपर केस, 6 महीने में आए 352 मामले- संसद में सरकार
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पेट्रोल, पर, 3.5, डीजल, पर, रुपए, तेल, के, निर्यात, पर, टैक्स, बढ़ा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कंगना विवाद के बीच ऋतिक रोशन ने किराए पर दी अपनी प्रॉपर्टी, हर महीने मिलेंगे इतने लाख</title>
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        <description><![CDATA[ Mumbai office lease: अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत से विवाद के बीच ऋतिक रोशन अपनी प्रॉपर्टी को लेकर भी खबरों में हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने मुंबई में अपनी एक कमर्शियल प्रॉपर्टी को किराए पर दिया है. इस प्रॉपर्टी से हर महीने ऋतिक रोशन को 17 लाख रुपए की कमाई होगी.
ऋतिक रोशन ने अंधेरी में स्थित अपने ऑफिस स्पेस को क्लियरसिंथ लैब्स लिमिटेड को 5 साल के लिए किराए पर दिया है. इस डील के तहत उन्हें पहले तीन साल 17 लाख रुपये प्रति माह और अगले दो साल बाद 19.55 लाक रुपये प्रति माह किराया मिलेगा. इस लीज के लिए 68 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा कराई गई है.
यह भी पढ़ें: कमाई का हफ्ता! मिलेंगे निवेश के 7 बड़े मौके, अपने पास तैयार रखें फंड
लोटस नीलकमल बिजनेस पार्क में स्थित इस प्रॉपर्टी में कुल 7 कमर्शियल यूनिट्स शामिल हैं. करीब 6,000 वर्ग फुट में फैली इस जगह के साथ 7 कार पार्किंग स्पेस भी दिए गए हैं. &amp;nbsp;इस लीज एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन 29 जून 2026 को हुआ, जबकि यह 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक यानी 5 साल के लिए लागू रहेगा.
अंधेरी वेस्ट में प्रीमियम ऑफिस स्पेस की मांग लगातार मजबूत
CRE Matix के CEO और Co- Founder अभिषेक किरण गुप्ता का कहना है कि इस डील पता चलता है कि अंधेरी वेस्ट जैसी प्रमुख बिजनेस इलाकों में प्रीमियम ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. उन्का कहना है कि तय किराया बढ़ोतरी का मॉडल प्रॉपर्टी मालिकों और कंपनियों, दोनों के लिए फायदेमंद है.
ऋतिक रोशन पिछले कुछ समय से कमर्शियल रियल एस्टेट में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. इससे पहले भी वह मुंबई और पुणे में अपनी ऑफिस प्रॉपर्टी लीज पर दे चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी कंपनियों ने हाल ही में मुंबई में करीब 27 करोड़ रुपये में 10 कमर्शियल ऑफिस यूनिट्स खरीदी हैं. वहीं, रोशन परिवार ने भी अंधेरी वेस्ट में अपनी एक रिटेल प्रॉपर्टी फैबइंडिया को मासिक 14.5 लाख रुपये किराये पर लीज पर दी है.
यह भी पढ़ें: ट्रंप के फैसले ने रुपये को दी नई रफ्तार, 31 पैसे का आया उछाल; जानें फायदे
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कंगना, विवाद, के, बीच, ऋतिक, रोशन, ने, किराए, पर, दी, अपनी, प्रॉपर्टी, हर, महीने, मिलेंगे, इतने, लाख</media:keywords>
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    <item>
        <title>Business Investment: कारोबार के लिए कौन सा राज्य है बेस्ट? सरकार ने जारी कर दी नई लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/business-investment-कारोबार-के-लिए-कौन-सा-राज्य-है-बेस्ट-सरकार-ने-जारी-कर-दी-नई-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Best State for Business: इन दिनों नौकरियों की हालत देखकर और मंदी- मंहगाई देखते हुए हर कोई अपना बिजनेस शुरू करना चाह रहा है. लेकिन बिजनेस ऐसे ही शुरू कर देना, आसान बात नहीं है. इसके लिए कई चीजें देखना बहुत जरूरी है. राज्य की बात करें तो हाल ही में एक लिस्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि भारत के कौन से राज्य हैं जिनमें सबसे ज्यादा बिजनेस इनवेस्टमेंट किया जाता है ये राज्य इसके लिए बेस्ट हैं.
गुजरात बना नंबर वनबिजनेस के मामले में गुजरातियों का कोई तोड़ नहीं, ऐसा हमेशा से हमने सुना है. अब इस लिस्ट के मुताबिक भी यही बात साबित होती है. भारत में कारोबार और निवेश आकर्षित करने के मामले में गुजरात सबसे आगे निकल गया है. नीति आयोग इनवेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्ट 2026 की इस लिस्ट के मुताबिक गुजरात का नाम टॉप पर है, इसके बाद भी कई राज्य है.&amp;nbsp;
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टॉप 5 में हैं ये राज्यसामने आई इस लिस्ट में कई राज्यों का नाम है. हम यहां आपको दिखाते हैं बिजनेस करने के लिए टॉप 5 बेस्ट राज्यों की लिस्ट:



रैंक
राज्य
स्कोर


1
गुजरात
56.6


2
महाराष्ट्र
53.7


3
तमिल नाडु
53.3


4
गोवा
53.1


5
ओडशा
52.4



ये इंडेक्स बताता है कि किसी राज्य में कारोबार और निवेश के लिए माहौल कितना अच्छा है. इसमें सरकार की नीतियां, प्रशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबार शुरू करने में आसानी जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है.
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कमजोर रहे ये राज्यवहीं कई ऐसे राज्य भी इस लिस्ट में नजर आए, जिनमें बिजनेस में निवेश करने के आंकड़े काफी कमजोर रहे. इसमें बिहार (36.6), अरुणाचल प्रदेश (37.5), मिजोरम (39.9), लद्दाख (40.2), जम्मू-कश्मीर (27), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (30.2) और लक्षद्वीप (24.5) शामिल हैं.
क्यों जरूरी है ये रैंकिंग?इस रैंकिंग को देखना इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी भी राज्य की रैंकिंग जितनी बेहतर होती है, वहां कंपनियों के फैक्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स सेंटर, स्टार्टअप और अन्य कारोबार शुरू करने की संभावना उतनी बढ़ सकती है. ये इंडेक्स राज्य सरकारों को ये समझने में भी मदद करता है कि निवेश आकर्षित करने के लिए उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार करने की जरूरत है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>कंपनी का टारगेट अधूरा, कमर्चारी को बांधकर चेहरे पर मारा केक, मैनेजर पर केस दर्ज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कंपनी-का-टारगेट-अधूरा-कमर्चारी-को-बांधकर-चेहरे-पर-मारा-केक-मैनेजर-पर-केस-दर्ज</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कंपनी-का-टारगेट-अधूरा-कमर्चारी-को-बांधकर-चेहरे-पर-मारा-केक-मैनेजर-पर-केस-दर्ज</guid>
        <description><![CDATA[ Employee Harassment Case: अमेरिका की टेलीकॉम कंपनी कॉमकास्ट (Comcast) इन दिनों एक नए कानूनी विवाद में घिर गई है. कंपनी के एक रिटेल स्टोर में काम कर चुके पूर्व कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि खराब बिक्री रैंकिंग करने वाले कर्मचारियों को मेंटली रूप से शर्मिंदा किया जाता था. उन्होंने बताया कि बिक्री का कम टारगेट हासिल करने वाले कर्मचारियों को कुर्सी से बांधकर उनके चेहरे पर क्रीम पाई (केक) फेंकी जाती थी और इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया जाता था.&amp;nbsp;
क्या हैं पूर्व कर्मचारी के आरोप?
पूर्व कर्मचारी डेविड फिगुएरोआ ने जुलाई 2026 में अदालत में मुकदमा दायर किया है. जिसमें उन्होंने दावा किया है कि स्टोर में सबसे कम बिक्री करने वाले कर्मचारी को सजा के तौर पर बुरी तरह शर्मिंदा किया जाता था. उन्होंने बताया कि उन कर्मचारियों को कुर्सी से बांधकर उनके चेहरे पर क्रीम पाई फेंकी जाती थी.सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि इन घटनाओं की वीडियो भी रिकॉर्डिंग की जाती थी. वहीं कुछ मामलों में मैनेजर भी इनमें शामिल था.&amp;nbsp;
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कैसे चुने जाते थे कर्मचारी?
शिकायत के मुताबिक, स्टोर में कर्मचारियों की बिक्री रैंकिंग को एक व्हाइटबोर्ड पर दर्ज की जाती थी. ऐसे में जिन कर्मचारियों की रैंकिंग सबसे खराब होती है उन्हें खासतौर पर इस निशाने के साथ दर्शाया जाता था. आरोप है कि यह प्रक्रिया खासतौर पर कर्मचारियों पर दबाव बनाने और बिक्री बढ़ाने के मकसद से अपनाई जाती थी. इससे कर्मचारी के अंदर ये दर बैठ जाता था कि कम रैंकिंग होने पर वह अगला निशान बन सकता है.
कर्मचारी ने क्यों छोड़ी नौकरी?
फिगुएरोआ का बताया कि उन्होंने नौकरी फरवरी में शुरू की थी जिसके कुछ ही हफ्तों बाद उन्होंने वहां कि इस माहौल को देखा. यह देखकर उनके अंदर भी डर था कि बिक्री की रैंकिंग कम होने पर वह भी इस दंड का शिकार हो सकते हैं. ऐसे में उन्होंने अपनी शिकायत मैनेजर तक पहुंचाई, लेकिन इसके बाद भी इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद उन्होंने एक महीने से पहले ही नौकरी को इस्तेफा दे दी.
कंपनी ने क्या कहा?
कॉमकास्ट ने आरोपों से इनकार किया है. कंपनी का कहना है कि वह किसी भी तरह के गलत व्यवहार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करता है. कंपनी का कहना है कि वह अदालत में इन आरोपों का जवाब देगी और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष भी रखेगी.
सस्ता होगा होम और कार लोन? 2 दिन में फैसला कर लेगा RBI
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>हल्दीराम का लंदन वाला रेस्टोरेंट 25 दिन में हुआ बंद, सामने आई बड़ी वजह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हल्दीराम-का-लंदन-वाला-रेस्टोरेंट-25-दिन-में-हुआ-बंद-सामने-आई-बड़ी-वजह</link>
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        <description><![CDATA[ Haldiram: &amp;nbsp;भारत के मशहूर ब्रांड हल्दीराम ने लंदन के लिसेस्टर स्क्वायर में बड़े धूमधाम से अपने पहले स्टोर की ओपनिंग की थी, लेकिन अब यह रेस्टोरेंट खुलने के महज 25 दिन बाद ही बंद हो गया है. बीते 25 जून को जब यह स्टोर खुला था, तो विदेशी सरजमी पर देसी जायकों का लुत्फ उठाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था.
इस दौरान भारत के मशहूर स्नैक्स और मिठाई ब्रांड हल्दीराम प्रवासियों और स्थानीय लोगों में उत्साह देखते ही बनता था. लेकिन अब जब इस रेस्टोरेंट के अस्थायी रूप से बंद होने की खबरें आई हैं, तो यह परदेसियों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. लोग यह सोचकर हैरान हो रहे हैं कि आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि हल्दीराम को एकाएक अपना रेस्टोरेंट बंद करने का फैसला लेना पड़ा. इससे पहले कि आप ये सोचें कि कंपनी किसी विवाद में पड़ गई है या ग्राहकों की संख्या में कमी का सामना कर रही है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है.&amp;nbsp;
क्यों बंद हुआ रेस्टोरेंट?&amp;nbsp;
रेस्टोरेंट के दरवाजे पर चिपकाए एक नोटिस और अपने इंस्&amp;zwj;टाग्राम पोस्&amp;zwj;ट में हल्&amp;zwj;दीराम ने इसका खुलासा किया है. हल्दराम ने बताया है कि यूके पावर नेटवर्क्स इलाके में ग्रिड अपग्रेडेशन और मेनटेनेंस का काम चल रहा है इसलिए सुरक्षा के लिहाज से रेस्टोरेंट का काम रोकना पड़ा है. यही वजह है कि 21 जुलाई से रेस्टोरेंट लगातार बंद है. अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर कंपनी ने लिखा है, &#039;&#039;हम जल्दी दवास आएंगे.&#039;&#039;



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क्या है खास&amp;zwnj;?
हल्दीराम क लंदन में लीसेस्टर स्क्वॉयर वाला आउटलेट 3000 स्क्वॉयर फीट में फैला हुआ है. 120 सीट के साथ यह एक फुल-सर्विस रेस्टोरेंट है. इसमें रिटेल, ओपन-एयर टेरेस जैसे कई अलग-अलग सेक्शन है. यह रेस्टोरेंट खासतौर पर स्पेशल फ्यूजन डेजर्ट्स और वीगन मेन्यू के लिए लोकप्रिय है. ऐसे में अगर आपको सात समंदर पार चटपटे छोले-भटूरे या लजीज मिठाइयों का स्वाद चखना है, तो कुछ दिनों तक का इंतजार करना होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Indigo News: पायलट से CEO तक, संकट के बीच विली वॉल्श ने संभाली इंडिगो की कमान</title>
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        <description><![CDATA[ Willie Walsh IndiGo CEO: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को नया सीईओ मिल गया है. ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री के अनुभवी अधिकारी विली वॉल्श ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर कंपनी का कार्यभार संभाल लिया. मार्च 2026 में ही उनके नाम का ऐलान किया गया था.
विली वॉल्श के पास एविएशन सेक्टर में चार दशक से ज्यादा का अनुभव है. सीईओ के तौर पर अब वह एयरलाइन की रणनीति, ऑपरेशन, नेटवर्क विस्तार और कमर्शियल फैसलों की जिम्मेदारी संभालेंगे. अब नए CEO सामने इंडिगो के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को आगे बढ़ाने और परिचालन को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी होगी.
कौन हैं विली वॉल्श?
विली वॉल्श ने अपने करियर की शुरुआत आयरलैंड की एयरलाइन एयर लिंगस में पायलट के रूप में की थी. बाद में वह उसी एयरलाइन के सीईओ बने. इसके बाद उन्होंने ब्रिटिश एयरवेज और फिर इंटरनेशनल एयरलाइंस ग्रुप का नेतृत्व किया। इंडिगो से पहले वह इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन -IATA के डायरेक्टर जनरल थे. उनका कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ.
यह भी पढ़ें: कंपनी का टारगेट अधूरा, कमर्चारी को बांधकर चेहरे पर मारा केक, मैनेजर पर केस दर्ज
किस समय मिली है जिम्मेदारी?
विली वॉल्श ऐसे समय इंडिगो की कमान संभाल रहे हैं जब एयरलाइन हाल के महीनों में बड़े संकट का सामना कर चुकी है. दिसंबर 2025 में पायलटों के ड्यूटी और आराम से जुड़े नए नियम लागू होने के बाद इंडिगो को हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं. इसके बाद डीजीसीए ने एयरलाइन पर जुर्माना लगाया और उसका शेड्यूल भी घटाया था.
इसी बीच 10 मार्च 2026 को तत्कालीन सीईओ पीटर एल्बर्स ने निजी कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था. उनके जाने के बाद से सह-संस्थापक राहुल भाटिया अंतरिम रूप से कंपनी का कामकाज देख रहे थे.
आगे क्या चुनौती?
इंडिगो की घरेलू बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. ऐसे में नए सीईओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिचालन को स्थिर रखना, लगातार बढ़ रहे विमान बेड़े का प्रबंधन करना और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर एयरलाइन के विस्तार की योजना को आगे बढ़ाना होगा.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Explained: 6 साल बाद कैसे खुला भारत&amp;चीन का बॉर्डर? डिटेल में समझें A टू  Z बात</title>
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        <description><![CDATA[ India-China Border Trade: 1 अगस्त यानी शुक्रवार को भारत और चीन के बीच बॉर्डर-ट्रेड यानी व्यापार शुरू हो गया. भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी( Line of Actual control) जिसे हम वास्तविक नियंत्रण रेखा के नाम से जानते हैं, वहां तीन अलग-अलग बॉर्डर पोस्ट पर व्यापार शुरू होने की खबर आई. एएसी पर जो तीन व्यापार चौकियां हैं, उसमें एक है सिक्किम के नाथुला बॉर्डर पर, दूसरी है उत्तराखंड और नेपाल के ट्राई-जंक्शन लिपूलेख पर और तीसरी है हिमाचल प्रदेश की शिपकी ला पोस्ट.
नाथूला और लिपूलेख से कैलाश मानसरोवर का यात्रा भी तिब्बत के लिए जाता है. इन तीनों चौकियों पर एक साथ द्विपक्षीय व्यापार शुरू हो गया. भारत-चीन सीमा की रखवाली करने वाली इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, ITBP ने व्यापार शुरू होने की जानकारी दी और बॉर्डर खुलने की तस्वीरें भी साझा की. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के अलावा चीन की बॉर्डर पुलिस और दोनों देशों के व्यापारी भी वहां मौजूद हैं.
पायलट से CEO तक, संकट के बीच विली वॉल्श ने संभाली इंडिगो की कमान
भारत और चीन के व्यापार के बारे में जानें
सिक्किम के नाथुला सटे शेराथांग में भारत और चीन के व्यापारियों के बीच एक छोटी मार्केट भी है, जहां दोनों देशों के व्यापारी अपना-अपना सामान लाकर बेचते हैं. बॉर्डर खुलने पर यहां खुद सिक्किम के कॉमर्स और टूरिज्म मंत्री टीटी भूटिया भी छह साल बाद बॉर्डर पोस्ट खुलने और ट्रेड शुरु होने के उपलक्ष्य में यहां पहुंचे. &amp;nbsp;आखिर ये ट्रेड पोस्ट क्यों खोली गई हैं, उससे पहले थोड़ा भारत और चीन के व्यापार के बारे में जानने लेते हैं.
भारत और चीन के बीच हर साल करीब 155 बिलियन डॉलर यानी मान सकते हैं कि 12 लाख करोड़ का व्यापार होता है. भारत अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, मोबाइल उपकरण, दवाइयों के लिए सामग्री और इंडस्ट्रियल मशीनरी, ऑटो सेक्टर से जुड़े सामान आयात करता है तो भारत जिन &amp;nbsp;वस्तुओं का निर्यात करता है, उसमें शामिल हैं आयरन ओर, खनिज, कृषि और समुद्री उत्पाद. लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ा अंतर है.
दोनों देशों के बीच व्यापार क्यों बंद हुए?
इस वर्ष यानी 2026 के पहले छह महीने में चीन ने भारत से करीब 7 लाख करोड़ का व्यापार किया, जबकि भारत ने महज एक लाख करोड़ का. कोरोना काल के बाद और गलवान घाटी की झड़प के बाद भी दोनों देशों के बीच व्यापार पूरी तरह बंद नहीं हुआ था.
भारत ने चीन के सोशल मीडिया ऐप्स पर जरूर बैन लगाया था. लेकिन बॉर्डर ट्रेड पूरी तरह बंद कर दिया गया था. क्योंकि दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने थी. अगर बॉर्डर ट्रेड को दोनों देशों के बीच होने वाले कुल व्यापार को देखेंगे तो ये बेहद कम है. लेकिन Symbolically यानी प्रतीकात्मक रूप से ये बेहद महत्वपूर्ण है.
अगर इन तीनों चौकियों से बात करें तो भारत की तरफ से ड्राई-फ्रूट, मसाले, हैंडीक्राफ्ट और जड़ी-बूटियां निर्यात की जाती है. जैसा तस्वीरों में देख सकते हैं, इसके लिए पोनी यानी म्यूल्स और छोटी वैन का इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि ये तीन बॉर्डर पोस्ट हाई ऑल्टिट्यूड एरिया में हैं यानी 10-12 हजार फीट की ऊंचाई पर. यही वजह है कि ट्रेड पोस्ट खुलना दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्य होने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है.
गलवान घाटी की झड़प के चार साल बाद यानी 2024 में भारत और चीन ने डिस-इंगेजमेंट समझौता किया था. इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं, एलएसी और खासतौर से पूर्वी लद्दाख के सभी विवादित इलाकों से पीछे हट गई थी. लेकिन उसके बाद भी भारतीय सेना ने साफ कर दिया था कि समझौता जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी चीन पर इतनी जल्दी विश्वास नहीं किया जा सकता है. क्योंकि चीन की PLA सेना की फितरत रही है सलामी-स्लाइसिंग की यानी धीरे-धीरे कर बॉर्डर पर आगे बढ़ने और घुसपैठ करने की.&amp;nbsp;
हल्दीराम का लंदन वाला रेस्टोरेंट 25 दिन में हुआ बंद, सामने आई बड़ी वजह
भारत और चीन के संबंध पटरी पर लौट रहे
पिछले छह सालों में यानी गलवान घाटी की झड़प के बाद, पूरी 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर पूर्वी लद्दाख के काराकोरम पास से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक किसी भी सेक्टर में चीनी सेना की घुसपैठ की कोई खबर सामने नहीं आई है. ऐसे में चीन ने बॉर्डर पर धीरे-धीरे विश्वास जीतने की कोशिश की है, जिसके चलते ये तीनों बॉर्डर पोस्ट खोली गई हैं व्यापार के लिए. ये तीनों व्यापार चौकियां ऐसे समय में खोली गई हैं, जब अगले महीने यानी 12-13 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा है.
ऐसे में यें माना जा सकता है कि छह साल बाद भारत और चीन के संबंध पटरी पर लौट रहे हैं. हालांकि, पिछले साल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एसओसी समिट के लिए चीन का दौरा किया था. 2024 में रूस के कजान में हुई ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने मुलाकात की थी. उस वक्त से दोनों देशों के संबंध सामान्य होने शुरू हो गए थे. कजान शिखर सम्मेलन से ठीक पहले चीन ने भारत के साथ डिसएंगेजमेंट करार किया था.
दोनों देशों की सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई थी
छह साल पहले यानी जून 2020 में पूर्वी लद्दाख से सटी गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई थी, जिसमें भारत के एक कर्नल रैंक के अधिकारी संतोष बाबू समेत 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे. चीन को भी इस झड़प में भारी नुकसान हुआ था. हालांकि, चीन ने कभी भी अपने मारे गए सैनिकों का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया था. हां, जिन सैनिकों को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए वीरता मेडल मिले थे, वे नाम जरूर सार्वजनिक किए थे.
ऐसे में जब तक डिसएंगेजमेंट करार नहीं हुआ था, यानी 2024 तक भारत और चीन के संबंधों में जबरदस्त दरार रही थी. लेकिन इस बीच 2024 से भारत और अमेरिका के संबंधों में भी खटास आनी शुरु हो गई थी. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने से इन संबंधों में अधिक तल्ख ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>UPI से दो बार कट गए पैसे? जानिए कैसे वापस मिलेगा आपका फंड</title>
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        <description><![CDATA[ UPI Payment Failure: आज के समय में ज्यादातर लोग पेमेंट के लिए कैश के बजाय UPI का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. हालांकि कई बार डिजिटल गड़बड़ी या नेटवर्क प्रॉब्लम की वजह से एक ही ट्रांजैक्शन से दो बार रकम कट जाती है. ऐसे में ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं और समझ नहीं पाते कि अब उनका पैसा वापस कैसे मिलेगा. खासतौर पर उन्हें लगता है कि उनका पैसा अब फंस चुका है. अगर आप भी रोजमर्रा के पेमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं और आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो आप कुछ जरूरी कदम उठाकर आप अपना पैसा वापस पा सकते हैं.
सबसे पहले क्या करें?

ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक करें.
दोनों पेमेंट की ट्रांजैक्शन आईडी और 12 अंकों का RRN नंबर नोट कर अपने पास सुरक्षित रखें.
साथ ही यह देखें कि दोनों पेमेंट सफल हुआ है या किसी एक की स्थिति पेंडिंग या फेल है.
स्क्रीनशॉट और पेमेंट से जुड़ी जानकारी संभालकर रखें.

ट्रांजैक्शन फेल होने पर क्या करें?
RBI के नियमों के मुताबिक, अगर आपके खाते से पैसे कट जाता है लेकिन लाभार्थी के खाते में नहीं पहुंचे, तो निर्धारित समय के अंदर रकम अपने आप वापस कर दी जाती है. ऐसे मामलों में आमतौर पर आपको अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती है.
EPFO में 1816 करोड़ का घोटाला, अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल के खिलाफ FIR
अगर व्यापारी को दो बार पेमेंट पहुंच जाएं&amp;nbsp;
अगर आपका दोनों ट्रांजैक्शन सफल हो चुका है और व्यापारी के खाते में दो बार रकम पहुंच गया है, तो ऐसे में रिफंड की प्रोसेस अलग हो सकती है. ऐसे मामलों में पैसा ऑटोमैटिक वापस नहीं आता है, बल्कि आपको अपने UPI ऐप या बैंक के जरिए शिकायत दर्ज करनी होगी. साथ ही इसके लिए आपको व्यापारी, बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता के माध्यम से रिफंड प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है.
कहां करें शिकायत?

सबसे पहले उसी UPI ऐप में शिकायत दर्ज करें, जिससे पेमेंट किया गया था.
जरूरत पड़ने पर अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करें.
शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन आईडी, RRN नंबर, तारीख, राशि और व्यापारी की जानकारी साथ रखें.
जरूरत पड़ने पर बैंक विवाद (Dispute) प्रक्रिया शुरू कर सकता है.

रिफंड आने में कितना समय लग सकता है?

फेल या पेंडिंग ट्रांजैक्शन में रकम तय समय के अंदर अपने आप वापस आ सकती है.
अगर पेमेंट दो बार सफल हो चुका है, तो रिफंड में कुछ एक्स्ट्रा समय लग सकता है क्योंकि इसकी जांच अलग प्रक्रिया के तहत की जाती है.

रिफंड के नाम पर ठगी से कैसे बचें?

अपना UPI PIN, OTP या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ शेयर न करें.
रिफंड पाने के लिए कभी भी UPI PIN दर्ज करने की जरूरत नहीं होती.
किसी अनजान शख्स के कहने पर QR कोड स्कैन न करें.

लंदन जाने वाली डायरेक्ट उड़ानें बंद, देश की इस बड़ी विमान कंपनी ने लिया फैसला
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 02:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, से, दो, बार, कट, गए, पैसे, जानिए, कैसे, वापस, मिलेगा, आपका, फंड</media:keywords>
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        <title>UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, जुलाई में 29.88 लाख करोड़ के हुए डिजिटल पेमेंट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/upi-ने-बनाया-नया-रिकॉर्ड-जुलाई-में-2988-लाख-करोड़-के-हुए-डिजिटल-पेमेंट</link>
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        <description><![CDATA[ UPI Record: भारत में डिजिटल पेमेंट लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है. जुलाई 2026 में यूपीआई के जरिए 23.66 बिलियन ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रही. ये यूपीआई के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है. ये आंकड़े नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए हैं.&amp;nbsp;
जून से बढ़ी रफ्तार?जुलाई में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या जून के मुकाबले 4.1% बढ़ी. जून में 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जबकि जुलाई में यह बढ़कर 23.66 अरब पर पहुंच गए. वहीं, ट्रांजैक्शन की टोटल वैल्यू भी जून की तुलना में 3.3% बढ़कर 29.88 लाख करोड़ हो गई.
UPI से दो बार कट गए पैसे? जानिए कैसे वापस मिलेगा आपका फंड
एक साल में कितनी बढ़ोतरी?अगर ईयर के बेसिस पर तुलना करें तो जुलाई 2025 के मुकाबले जुलाई 2026 में यूपीआई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 22% और ट्रांजैक्शन वैल्यू में 19% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि देश में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ा UPI का इस्तेमाल?यूपीआई अब सिर्फ बड़े शहरों में नहीं होता है. टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण इलाकों में भी लोग किराना स्टोर, सब्जी मंडी, बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज और छोटे-बड़े लेनदेन के लिए UPI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. QR कोड बेस्ड पेमेंट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने इसे और फेमस बनाया है.&amp;nbsp;
IMPS और FASTag का क्या रहा हाल?NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में IMPS के जरिए 364 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जो जून के मुकाबले करीब 3% ज्यादा हैं. वहीं FASTag ट्रांजैक्शन में मामूली गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर, AePS के जरिए 100 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले महीने से अधिक हैं.&amp;nbsp;
जहां थे, वहीं आ गए मस्क, अब पहले से भी हो गए गरीब, बने थे दुनिया के पहले खरबपति
डिजिटल इकोनॉमी को मिला बूस्ट-यूपीआई की रिकॉर्ड ग्रोथ ये दिखाती है कि भारत तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, लगभग हर तरह के लोग अब डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 02:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
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        <title>फोन से लेकर AC तक सब होगा सस्ता, Amazon दे रहा 80% तक डिस्काउंट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-से-लेकर-ac-तक-सब-होगा-सस्ता-amazon-दे-रहा-80-तक-डिस्काउंट</link>
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        <description><![CDATA[ Amazon Freedom Sale 2026: अगर आप भी आने वाले दिनों में कोई नया गैजेट या अपने घर के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामना खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके बेहद काम की है. आने वाले दिनों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon India पर अपनी Freedom Sale लेकर आ रहा है. इस सेल में आपको मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंस जैसी कई प्रोडक्ट्स की खरीदारी पर शानदार ऑफर्स और भारी छूट मिल सकती है.&amp;nbsp;
Amazon की इस सेल के दौरान ग्राहकों कई बड़े ब्रांड के प्रोडक्ट्स को कम कीमत में खरीदने का मौका दिया जाएगा. खास बात यह है कि इस दौरान कुछ होम अप्लायंस पर आपको भारी छूट दी जा सकती है, जिसमें 80% तक का डिस्काउंट भी मिल सकता है.
&amp;nbsp;कब से शुरू होगी Amazon Freedom Sale?
Amazon इंडिया ने अपनी अपकमिंग Freedom Sale के लिए एक खास पेज भी तैयार किया है, जिससे आपको सेल से जुड़ी जानकारी और ऑफर्स के बारे में अपडेट मिलता रहेगा. जानकारी के मुताबिक, इस सेल की शुरुआत 7 अगस्त से होगी, जहां आपको कई कैटेगरी के प्रॉडक्ट्स पर डिस्काउंट का मौका दिया जाएगा.&amp;nbsp;
इसके अलावा सेल के दौरान चुनिंदा ग्राहकों को HDFC बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर 10% तक इंस्टेंट डिस्काउंट या कैशबैक का फायदा भी मिल सकता है. हालांकि, यह ऑफर्स सिर्फ चुनिंदा कर्ड और नियमों के मुताबिक ही मिलेगा. &amp;nbsp;
UPI से दो बार कट गए पैसे? जानिए कैसे वापस मिलेगा आपका फंड
स्मार्टफोन पर मिलेंगे बड़े ऑफर
फ्रीडम सेल के दौरान स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए भी कई शानदार मौके देखने को मिल सकते हैं. इस सेल में कई बड़े ब्रांड के मोबाइल फोन कम कीमतों में &amp;nbsp;मिल सकते हैं. ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक बजट और प्रीमियम दोनों तरह के स्मार्टफोन को अपने जरूरत के हिसाब से कम कीमत में खरीद सकते हैं. खासकर इन ब्रांड्स के स्मार्टफोन पर ऑफर मिल सकते हैं:

सैमसंग (Samsung)
रियलमी (Realme)
रेडमी (Redmi)
वीवो (Vivo)
अन्य लोकप्रिय ब्रांड

कंपानी आने वाले दिनों में अलग-अलग स्मार्टफोन &amp;nbsp;मॉडल पर मिलने वाले खास ऑफर्स का खुलासा करेगी. &amp;nbsp;
मोबाइल एक्सेसरीज पर भी मिलेगी छूट
सिर्फ फोन ही नहीं, बल्कि मोबाइल एक्सेसरीज पर भी आपको डिस्काउंट का मौका मिलने का उम्मीद है. इस सेल में aअप कई जरूरी गैजेट्स को कम कीमत में खरीदे सकते हैं. आमतौर पर इन प्रोडक्ट्स पर ऑफर मिलने की उम्मीद है:

TWS ईयरबड्स
नेकबैंड
पावर बैंक
मोबाइल चार्जर
अन्य एक्सेसरीज

AC, फ्रिज और टीवी पर भी बड़ी बचत
ऐमेजॉन इंडिया पर शुरू होने वाली Amazon Freedom Sale में होम अप्लायंस कैटेगरी पर भी कई तरह के खास ऑफर्स देखने को मिलेगी. खासकर आपके घर में इस्तेमाल होने जरूरी सामान जैसे:

एयर कंडीशनर (AC)
रेफ्रिजरेटर
वॉशिंग मशीन
स्मार्ट टीवी

इन सभी चीजों को आप कम कीमत में खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, जुलाई में 29.88 लाख करोड़ के हुए डिजिटल पेमेंट
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चायवालाज के फाउंडर रोहित शर्मा ने किया  सुसाइड, 17 की उम्र में शुरू किया था बिजनेस</title>
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        <description><![CDATA[ Chaiwalaz Businessman Death: हाल ही में राजस्थान के दौसा से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां एक मशहूर चाय कैफे चेन &#039;चायवालाज़&#039; के संस्थापक रोहित शर्मा का शनिवार को मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, 30 साल का कारोबारी रोहित शर्मा अपने घर में फांसी के फंदे से लटके हुए पाए गए. शुरुआती जांच के मुताबिक इस हादसे को आत्महत्या माना जा रहा है. फिलहाल इस घटना के पीछे की असल वजह पता नहीं चल पाया है.
हालांकि पुलिस ने लाश को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था और पोस्टमार्टम पूरी होने के बाद उसकी लाश को परिवार वालों के हवाले कर दिया गया. फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है.
क्या है पूरा मामला?
बिज़नेसमैन रोहित शर्मा दौसा की साकेत कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते थे. लेकिन अचानक शनिवार को दोपहर के करीब उनके परिवार वालों ने उन्हें घर के अंदर मृत अवस्था में पाया. यह देखकर परिवार वालों ने उन्हें तुरंत पास के जिला अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया.
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17 साल की उम्र में शुरू किया था सफर
रोहित शर्मा ने बहुत ही कम उम्र में कारोबारी की सफर चुन लिया था. उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान महज 17 साल की उम्र में जयपुर के मानसरोवर इलाके में &#039;चायवालाज़&#039; का अपना पहला आउटलेट खोला था. यहां से उनकी पहली कारोबारी की शुरुआत हुई थी. ग्राहकों की बढ़ती संख्या के साथ धीरे-धीरे उन्होंने अपने इस ब्रांड का विस्तार कई शहरों तक किया था.
कई शहरों में खोले थे कैफे
रोहित शर्मा ने पिछले कुछ सालों में &amp;lsquo;चायवालाज&#039; के करीब सात कैफे आउटलेट खोले थे. उनकी इस ब्रांड ने लोगों के बीच एक अच्छी पहचान बनाई थी. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक बताया जा रहा है कि उन्होंने &amp;nbsp;करीब छह महीने पहले अपने सभी आउटलेट बंद कर दिए थे.&amp;nbsp;
परिवार में कौन-कौन हैं?

रोहित शर्मा अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और सात साल के बेटे को छोड़ गए हैं.
उनके पिता हितेंद्र मोहन शर्मा मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं.
उनकी पत्नी एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं.

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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 02:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>डिटर्जेंट, पेंट, साबुन, नमक और बर्तन सब होगा महंगा, अगस्त से ही बढ़ेंगे दाम</title>
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        <description><![CDATA[ Daily Essentials: अगर आप अगस्त से त्योहारों की खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं, तो ये खबर आपकी जेब का बजट बिगाड़ सकती है. देश की कई बड़ी कंज्यूमर कंपनियां लगातार दूसरे 3 महीने में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें ज्यादा करने जा रही हैं. डिटर्जेंट, साबुन, बर्तन धोने की बार, नमक, पेंट, टायर और कई दूसरे रोजमर्रा के सामान महंगे होने वाले हैं. कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल और फ्यूल महंगा होने की वजह से दाम ज्यादा करना मजबूरी हो गया है.
देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर ने कहा है कि आने वाले 3 महीने में डिटर्जेंट और बर्तन धोने की बार जैसी होम केयर कैटेगरी में एक एक कर के कीमतें ज्यादा की जाएंगी. इसके अलावा एशियन पेंट्स, डोडला डेयरी समेत कई दूसरी कंपनियों ने भी प्राइस हाइक का हिंट दिया है. कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल से बनने वाले कच्चे माल की कीमतें लगातार ज्यादा हो रही हैं, जिससे कॉस्ट पर दबाव ज्यादा हो गया है.
यह भी पढ़ें: आज 1 अगस्त को जारी हुए CNG के ताजा रेट, सस्ती हुई या महंगी?
मिडिल ईस्ट तनाव का दिखा सीधा असरमिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा रहने से कंपनियों को प्रोडक्शन महंगा पड़ रहा है. इसी वजह से हैवेल्स इंडिया अपने कुछ प्रोडक्ट्स के दाम 8% तक ज्यादा कर दी है, जबकि टाटा कंज्यूमर ने नमक की कीमत करीब 7% ज्यादा कर दी है. अगर यही हाल बनी रही तो आने वाले महीनों में और भी कंपनियां कीमतें ज्यादा कर सकती हैं.
त्योहारी सीजन में ज्यादा होंगे घरेलू खर्चअगस्त से नवंबर तक देश में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं. यही समय कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा बिक्री वाला सीजन होता है. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि मजबूत मांग के लिए कस्टमर ज्यादा हुई कीमतों के बावजूद खरीदारी करेंगे और इसका असर बिक्री पर ज्यादा नहीं पड़ेगा.
जून के महीने में महंगाई लगभग डेढ़ साल के बाद पहली बार आरबीआई 4% के फिक्स नियम से ऊपर चली गई है. वित्त मंत्रालय ने भी माना है कि अब महंगाई सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक ही नहीं रुकी है, बल्कि पेट्रोल-डीजल और रोज़ के इस्तेमाल होने वाले सामानों में भी इसका असर दिखने लगा है. साथ ही, कम बारिश और एल नीनो के खतरे की वजह से महंगाई और ज्यादा हो सकती है.ऐसे में आने वाले महीनों में आम लोगों के घर का खर्च और ज़्यादा हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>किश्तों में सैलरी दे रही SpiceJet, रोजाना उड़ रहीं सिर्फ इतनी फ्लाइट</title>
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        <description><![CDATA[ SpiceJet Financial Crisis: नकदी संकट से जूझ रही घरेलू एयरलाइन SpiceJet इन दिनों एक बार फिर आर्थिक परेशानियों को लेकर सुर्खियों में है. हाल ही में एयरलाइन ने कबूल किया है कि मौजूदा हालात के कारण कर्मचारियों का वेतन एकमुश्त देने के बजाय किस्तों में जारी किया जा रहा है. साथ ही SpiceJet फिलहाल अपनी पूरी क्षमता से काफी कम उड़ानों का संचालन कर रही है.
CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने बताया कि जूनियर और सपोर्ट कर्मचारियों को मई महीने का सैलरी पेमेंट कर दिया गया है, जबकि कुछ बाकी कर्मचारियों को सैलरी किस्तों में पेमेंट किया जा रहा है. हालांकि, बाकी कर्मचारियों का पेमेंट कब तक पूरा होगा इस बारे में कंपनी ने नहीं बताया है.
रोजाना कितनी उड़ानें संचालित कर रही है कंपनी?

SpiceJet वर्तमान में प्रतिदिन करीब 85 उड़ानों का संचालन कर रही है.
ग्रीष्मकालीन शेड्यूल के तहत कंपनी ने उड़ाने करीब 140 उड़ानों की योजना बनाई थी.
यानी एयरलाइन फिलहाल अपनी तय क्षमता से काफी कम उड़ानें उड़ रही है.

त्यौहारों से पहले राज्यों को तोहफा, केंद्र ने जारी किए 1.09 लाख करोड़
बेड़े और बाजार हिस्सेदारी पर भी असर

कंपनी के पास इस समय फिलहाल 14 परिचालन विमान मौजूद हैं.
इनमें 3 एयरबस A320 विमान अस्थायी लीज पर शामिल हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, जून में SpiceJet की घरेलू बाजार हिस्सेदारी घटकर करीब 1.9% तक ही रह गई.
वहीं जनवरी में यह हिस्सेदारी 3.9% थी.

किन चुनौतियों से घिरी है एयरलाइन?

विमान लीजिंग कंपनी Aviator ML ने SpiceJet के खिलाफ दिवालियापन याचिका दायर की है.
कंपनी पर करीब 60 करोड़ के पेमेंट में चूक का आरोप लगाया गया है.
वहीं यह मामला बोइंग 737 विमान की लीज से जुड़ा है.
फिलहाल राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा है.

शेयरों पर भी दिख रहा दबाव

शुक्रवार को SpiceJet का शेयर 11.30 पर बंद हुआ.
पिछले एक महीने में शेयर में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
3 महीनों में करीब 15% से ज्यादा गिर चुका है.
साल-दर-साल आधार पर शेयर में करीब 62% की गिरावट दर्ज की गई है.

डिटर्जेंट, पेंट, साबुन, नमक और बर्तन सब होगा महंगा, अगस्त से ही बढ़ेंगे दाम
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या प्लास्टिक के नोट भी ज्यादा दिन तिजोरी में रखने पर गल जाएंगे?</title>
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        <description><![CDATA[ Polymer Currency Notes: दुनिया के कई देशों देशों में कागज के बजाय पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही भारत में प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल शुरू करने वाला है. सबसे पहले 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों को बनाकर ट्रायल किया जाएगा. इन नोटों को मौजूदा कागज के नोटों के मुकाबले में ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला माना जा रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्लास्टिक के नोट लंबे समय तक तिजोरी या अलमारी में रखने पर खराब हो सकते हैं?
क्या तिजोरी में रखने से गल जाएंगे प्लास्टिक के नोट?

पॉलीमर नोट लंबे समय तक तिजोरी में रखने पर गलते या सड़ते नहीं हैं.
ये नोट नमी और धूल के असर से काफी हद तक महफूज रहेंगे.
सामान्य तापमान और बंद वातावरण में इसकी क्वॉलिटी पर कोई खास असर नहीं पड़ता.
कागजी नोटों के मुकाबले में इनकी उम्र काफी ज्यादा मानी जाती है.

किश्तों में सैलरी दे रही SpiceJet, रोजाना उड़ रहीं सिर्फ इतनी फ्लाइट
क्या जेब की गर्मी से खराब हो सकते हैं नोट?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि लंबे समय तक जेब में रखने से प्लास्टिक नोट खराब हो सकते हैं.
इंसान के शरीर का तापमान सामान्य तौर पर करीब 37 डिग्री सेल्सियस होता है.
वहीं, पॉलीमर नोट इस तापमान से कहीं ज्यादा सहने की क्षमता रखता है.
सामान्य गर्मी, धूप या जेब में रखने से ये पिघलते या खराब नहीं होते हैं.

पॉलीमर नोटों की क्या हैं खासियतें?

पानी और नमी से जल्दी खराब नहीं होते हैं.
जल्दी फटते या घिसते नहीं हैं.
लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद भी उसकी गुणवत्ता बनी रहती है.

RBI क्यों ला रहा है पॉलीमर नोट?

नोटों की उम्र बढ़ाने के लिए.
फटे-पुराने नोटों की परेशानी कम करने के लिए.
नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए.
नोट छपाई की लागत कम करने के लिए.

त्यौहारों से पहले राज्यों को तोहफा, केंद्र ने जारी किए 1.09 लाख करोड़
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या आपको भी आते हैं बैंक के मैसेज, कैसे पहचानें असली है या नकली?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-आपको-भी-आते-हैं-बैंक-के-मैसेज-कैसे-पहचानें-असली-है-या-नकली</link>
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        <description><![CDATA[ Banking Fraud Prevention: अगर आपके मोबाइल पर भी बैंक के नाम से SMS आते हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है. साइबर फ्रॉड अब फर्जी बैंक मैसेज भेजकर लोगों के बैंक अकाउंट पर निशाना बना रहे हैं. इन मैसेज में KYC अपडेट करने, अकाउंट ब्लॉक होने, रिवॉर्ड लेने या सस्पिशियस ट्रांजैक्शन रोकने जैसी बातें लिखी होती हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति इनके बात में आ जाता है, तो उसके बैंक अकाउंट से पैसे गायब हो सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बैंकिंग से जुड़े SMS स्कैम के मामले तेजी से ज्यादा हो रहे हैं.
फ्रॉड डिटेक्शन टेक्नोलॉजी कंपनी की रिपोर्ट के हिसाब से, 2025 के दूसरे 6 महीने के मुकाबले में 2026 की पहले 6 महीने में भारत में बैंकिंग से जुड़े SMS स्कैम 146% ज्यादा हो गए हैं. रिपोर्ट बताती है कि साइबर अपराधी अब लोगों तक पहुंचने के लिए टेक्स्ट मैसेज का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि लोग बैंक के नाम से आए मैसेज पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं.
यह भी पढ़ें: Railway Rules: रेल में कितना सामान ले जा सकते हैं, क्यों बार बार बदल रहे नियम?
ऐसे करते हैं फ्रॉड की शुरुआत
फर्जी मैसेज बिल्कुल बैंक के असली मैसेज जैसे दिखते हैं. इनमें लिखा होता है कि आपका KYC पूरा नहीं है, बैंक अकाउंट बंद होने वाला है या आपके खाते से सस्पिशियस ट्रांजैक्शन हुआ है. इसके साथ एक लिंक भी दिया जाता है और तुरंत क्लिक करने के लिए कहा जाता है. लिंक खुलते ही बैंकिंग डिटेल, OTP, UPI PIN या दूसरी जरूरी जानकारी मांगी जाती है. कई बार लिंक पर क्लिक करने से फोन में वायरस भी इंस्टॉल हो जाता है, जिससे फ्रॉड आपके मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लेते हैं.
कैसे पहचानें असली और नकली मैसेज?
अगर किसी मैसेज में जल्दबाजी दिखाकर तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा जाए, अनजान लिंक भेजा गया हो या मैसेज किसी सस्पिशियस नंबर से आया हो, तो सावधान हो जाएं. बैंक कभी भी SMS या कॉल के जरिए OTP, ATM PIN, UPI PIN, पासवर्ड या CVV नहीं मांगते. अगर किसी मैसेज पर शक हो, तो उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करने की बजाय बैंक के ऑफिसियल ऐप या वेबसाइट पर जाकर जानकारी चेक करें.
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करें और अपने बैंक की जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं करें. फोन में सिर्फ भरोसेमंद ऐप ही डाउनलोड करें. अगर गलती से आपने किसी फर्जी लिंक पर अपनी जानकारी दे दी है, तो बैंक से संपर्क करें, पासवर्ड बदलें और जरूरत पड़ने पर अपना कार्ड या UPI ब्लॉक करा दें. थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है.
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आज पेट्रोल&amp;डीजल के दाम बदले या नहीं? घर से निकलने से पहले जानें अपने शहर का ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-बदले-या-नहीं-घर-से-निकलने-से-पहले-जानें-अपने-शहर-का-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आज-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-बदले-या-नहीं-घर-से-निकलने-से-पहले-जानें-अपने-शहर-का-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Price Today 2 August 2026: अगर आप आज सुबह- सुबह अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने जा रहे हैं तो पहले पेट्रोल और डीजल के ताजा रेट जरूर जान लें. सरकारी तेल कंपनियों ने 2 अगस्त के लिए नए पेट्रोल और डीजल के रेट जारी कर दिए हैं. राहत की बात यह है कि आज भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी गाड़ी चलाने वालों को पुराने रेट पर ही पेट्रोल और डीजल मिलेगा. हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य स्थानीय टैक्स की वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग हैं. इसलिए किसी दूसरे शहर की तुलना में आपके शहर में कीमतें कम या ज्यादा हो सकती हैं.&amp;nbsp;
शहर अनुसार, पेट्रोल के दाम-&amp;nbsp;

नोएडा- 101.89 रुपए प्रति लीटर
नई दिल्ली- 102.12 रुपए प्रति लीटर
मुंबई- 111.21 रुपए प्रति लीटर
कोलकाता- 113.51 रुपए प्रति लीटर
चेन्नई- 107.87 रुपए प्रति लीटर
पुणे- 112.01 रुपए प्रति लीटर
आगरा- 101.54 रुपए प्रति लीटर
गाजियाबाद- 102.12 रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम- 102.97 रुपए प्रति लीटर

क्या आपको भी आते हैं बैंक के मैसेज, कैसे पहचानें असली है या नकली?
शहर अनुसार, डीजल के दाम-&amp;nbsp;

नोएडा- 95.37 रुपए प्रति लीटर
नई दिल्ली- 95.20 रुपए प्रति लीटर
मुंबई- 97.83 रुपए प्रति लीटर
कोलकाता- 99.82 रुपए प्रति लीटर
चेन्नई- 99.65 रुपए प्रति लीटर
पटना- 100.61 रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम- 95.64 रुपए प्रति लीटर
बेंगलुरू- 99.56 रुपए प्रति लीटर
चंडीगढ़- 89.47 रुपए प्रति लीटर

कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोज सुबह 6 बजे अपडेट की जाती हैं. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, फ्रेट कॉस्ट और टैक्स जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर नई कीमतें तय करती हैं. अगर इन कारकों में बड़ा बदलाव नहीं होता, तो खुदरा कीमतें भी स्थिर रहती हैं.&amp;nbsp;
क्या प्लास्टिक के नोट भी ज्यादा दिन तिजोरी में रखने पर गल जाएंगे?
अपने शहर का रेट कैसे चेक करें?अगर आप अपने शहर का ताजा पेट्रोल-डीजल रेट जानना चाहते हैं, तो इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की आधिकारिक वेबसाइट या SMS सेवा के जरिए आसानी से जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा ऑयल कंपनियां हर सुबह नए रेट अपडेट करती हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>आज, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, बदले, या, नहीं, घर, से, निकलने, से, पहले, जानें, अपने, शहर, का, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>24 कैरेट गोल्ड 144220 पर पहुंचा, चांदी ने थामी रफ्तार, जानें सोने&amp; चांदी का नया भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/24-कैरेट-गोल्ड-144220-पर-पहुंचा-चांदी-ने-थामी-रफ्तार-जानें-सोने-चांदी-का-नया-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/24-कैरेट-गोल्ड-144220-पर-पहुंचा-चांदी-ने-थामी-रफ्तार-जानें-सोने-चांदी-का-नया-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today 1 August: अगस्त की शुरुआत हो गई है और महीने के पहले ही दिन सोना तेजी पर है. एक तरफ जहां सोने के दाम में उछाल नजर आ रहा है तो वहीं चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,220 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है, जबकि कल इसका भाव 1,43,820 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इस हिसाब से 24 कैरेट सोना आज 400 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है. प्रतिशत के लिहाज से देखें तो सोने के भाव में करीब 0.28 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. आइये यहां से 22 कैरेट, 18 कैरेट सोना और साथ ही चांदी के बारे में भी जानते हैं.
22 कैरेट सोने का कितना है भाव?सबसे ज्यादा लोग 22 कैरेट की ही ज्वेलरी खरीदते हैं. आज 22 कैरेट सोना भी तेजी के साथ कारोबार कर रहा है. 22 कैरेट गोल्ड में 91.6 फीसदी शुद्ध सोना होता है और बाकी दूसरे धातुओं को मिलाया जाता है, जिससे ये गहने बनाने के लिए ज्यादा मजबूत माना जाता है. 24 कैरेट सोने में आई तेजी के असर से 22 कैरेट सोने के भाव में भी करीब 400 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी देखने को मिली है. आज 22 कैरेट सोने का रेट 1,32,200 रुपए प्रति 10 ग्राम है.&amp;nbsp;
जुलाई में भरी सरकार की तिजोरी, पहली बार 2.11 लाख करोड़ के पार पहुंचा GST कलेक्शन
18 कैरेट सोना भी हुआ महंगा?18 कैरेट सोने की कीमतों में भी आज बढ़त दर्ज की गई है. 18 कैरेट गोल्ड में 75 फीसदी शुद्ध सोना होता है और इसका इस्तेमाल खासतौर पर डिजाइनर ज्वेलरी बनाने में किया जाता है. सोने की कीमतों में आई तेजी का असर 18 कैरेट गोल्ड पर भी पड़ा है और इसके दाम में भी आज हल्की बढ़त देखने को मिली है. आज 18 कैरेट सोने का भाव 1,08,160 रुपए प्रति 10 ग्राम है.&amp;nbsp;
चांदी के भाव में कितना बदलाव?सोने के उलट चांदी की कीमतों में आज स्थिरता देखने को मिल रही है. चांदी का भाव आज 23,50,000 रुपये प्रति किलो पर बना हुआ है. कल भी चांदी इसी रेट पर था यानी कल से आज तक चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ है.&amp;nbsp;
घरेलू गैस सिलेंडर सस्ता और कमर्शियल सिलेंडर महंगा क्यों मिलता है? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>बैंकों में अब नहीं मिलेंगे नकली नोट, लगेंगी ये मशीनें, RBI का बड़ा आदेश</title>
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        <description><![CDATA[ Currency Authentication Machine: अगर आप बैंक से कैश निकालते हैं, तो ये खबर देखे.अब बैंकों में नकली नोट मिलने की चांस काफी कम हो सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को ऑर्डर्स &amp;nbsp;दिया है. आरबीआई ने कहा है कि इंटरनेशनल बॉर्डर से लगे जिलों में मौजूद सभी बैंक ब्रांचेस में नोटों की जांच करने वाली मशीनें लगाई जाएं. इससे सीमा के रास्ते आने वाले नकली नोटों की तुरंत पहचान हो सकेगी और उन्हें दोबारा इस्तेमाल में जाने से रोका जा सकता है.
देश में नकली नोटों की परेशानी लंबे समय से बनी हुई है. इस पर काबू करने के लिए साल 2016 में नोटबंदी की गई थी. जिसमे 500 और &amp;nbsp;1,000 रुपये के पुराने नोटों को इस्तेमाल से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद 2,000 रुपये का नोट जारी हुआ, लेकिन बाद में उसे भी धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर कर दिया गया. इसके बाद भी देश में नकली नोटों पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी. अब आरबीआई ने बैंकों को साफ़ कह दिया है कि वे इस मामले में और सख्त नियम लागू करें.
यह भी पढ़ें: 31 दिनों में 385 रुपए सस्ता हुआ सिलेंडर, जानें इस साल कब-कब घटे दाम?
सभी नोटों की होगी जांच
आरबीआई ने अपनी जांच में देखा कि कुछ बैंक नकली नोटों को पकड़ने के लिए पूरी कोशिश नहीं कर रहे थे. इसके बाद अप्रैल में जारी नए सरकारी नियमों के अनुसार बैंकों को नकली नोटों की पहचान करने, उनकी जानकारी देने और उन पर नज़र रखने से जुड़े नियमों का पूरी सख्ती से पालन करने को कहा गया है. साथ ही सारे बैंकों के लिए ये भी बहुत ज़रूरी कर दिया गया है कि कैश काउंटर के स्टाफ को असली नोटों की खासियतों की अच्छी ट्रेनिंग दी जाए, ताकि वो नकली नोट आसानी से पहचान सकें.
बैंकों की तैयारी होगी मजबूत
आरबीआई ने साफ किया है कि बैंक में आने वाले हर नोट की जांच मशीनों के जरिए होगी. अगर कोई नकली नोट मिलता है, तो उसे तुरंत जब्त किया जाएगा.किसी भी हालत में वो नोट वापस नहीं मिलेगा और बैंक उसे खुद से खत्म भी नहीं कर सकते है.फिक्स नियमों के हिसाब से हर नकली भारतीय नोट की जानकारी इससे जुड़ी सरकारी एजेंसियों को देना बहुत ज़रूरी होगा. आरबीआई ने सारे बैंकों से अपने सिस्टम को चेक करने और ज़रूरत पड़ने पर उसे और मजबूत बनाने को कहा है, ताकि बॉर्डर के रास्ते आने वाले नकली नोटों को समय रहते पकड़ा जा सके और उन्हें दोबारा इस्तेमाल में जाने से रोका जा सके.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Real Estate: RERA प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन 4 महीने बढ़ी, पजेशन में होगी देरी</title>
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        <description><![CDATA[ RERA Housing Projects: अगर आप अपने भी किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में घर बुक किया है और अपने नए घर के पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. हाल ही में केंद्र सरकार ने देशभर के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के तहत रजिस्टर्ड कुछ हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए 4 महीने तक का एक्स्ट्रा समय देने की सिफारिश की है. इससे बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, लेकिन वहीं कई घर खरीदारों को अपने नए फ्लैट या मकान की चाबी मिलने में देरी हो सकती है.
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों की वजह से कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स तय समय पर पूरा नहीं हो पा रहे हैं. इसी को को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन बढ़ाने का फैसला लिया है.
क्यों बढ़ाई गई प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.
निर्माण सामग्री और कई उपकरणों की उपलब्धता में भी परेशानियां बढ़ी हैं.
ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई की लागत भी काफी इजाफा हुआ है.
सीमेंट, स्टील, एल्युमीनियम और अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता पर भी इसका असर पड़ा है.
इन परिस्थितियों को असाधारण स्थिति मानते हुए सरकार ने राहत देने का फैसला किया है.

अब बिना पैसे करें खरीदारी, फ्लिपकार्ट लाया पे लेटर, क्या है इसका प्रोसेस?
किन प्रोजेक्ट्स को मिलेगा फायदा?
यह राहत उन RERA पंजीकृत प्रोजेक्ट्स को मिल सकती है:

जिनकी मूल तय डेडलाइन 28 फरवरी 2026 या उसके बाद है.
जिनकी पहले से बढ़ाई गई समयसीमा 28 फरवरी 2026 या उसके बाद समाप्त हो रही है.
वहीं, पात्र प्रोजेक्ट्स वाले को एक बार के लिए 4 महीने का एक्स्ट्रा समय दिया जा सकता है.

क्या बिल्डरों को आवेदन करना होगा?
इस बार केंद्र सरकार ने राज्य RERA प्राधिकरणों को ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए एक समान आदेश जारी करने की सलाह दी है. इससे बिल्डरों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इससे प्रक्रिया भी आसान होगी.
घर खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा?

कई खरीदारों को पजेशन मिलने में कुछ महीने तक की देरी हो सकती है.
गृह प्रवेश, किराए के घर से शिफ्टिंग और अन्य वित्तीय योजनाएं पर भी असर पड़ सकता है.
जिन लोगों ने किराए का घर छोड़ने की प्लानिंग की थी, उन्हें अपनी योजना अब बदलनी पड़ सकती है.

रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या होगा असर?
एक्सपर्टों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन की परेशानी इसी तरह बनी रही, तो सीमेंट, स्टील, तांबा और एल्युमीनियम जैसी कई निर्माण सामग्रियों की लगत पहले के मुकाबले और ज्यादा बढ़ सकती है. हालांकि, इस बढ़ती लागत का असर उन लाखों घरों के निर्माण पर पड़ सकता है, जो अपने नए घर के चाबी मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>त्यौहारों से पहले राज्यों को तोहफा, केंद्र ने जारी किए 1.09 लाख करोड़</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/त्यौहारों-से-पहले-राज्यों-को-तोहफा-केंद्र-ने-जारी-किए-109-लाख-करोड़</link>
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        <description><![CDATA[ Central Government Funds: केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों को त्योहारों से पहल एक बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. वित्त मंत्रालय ने कुछ राज्यों के खाते में टैक्स शेयरिंग के तहत 1.09 लाख करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा किस्त ट्रांसफर किए हैं. यह रकम हर महीने मिलने वाली सामान्य से बिल्कुल अलग है. इससे राज्यों को अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में अब काफी मदद मिलेगी.
केंद्र सरकार ने 1 अगस्त 2026 यानी आज राज्यों को टैक्स शेयरिंग की अतिरिक्त किस्त जारी कर दी है. वहीं यह रकम 10 अगस्त को जारी होने वाली नियमित मासिक किस्त से बिल्कुल अलग है.
क्या है टैक्स शेयरिंग?
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र सरकार की तरह से जुटाए गए कुल टैक्स राजस्व का 41% हिस्सा राज्यों को दिया जाता है. यह रकम पूरे वित्त साल में 14 किस्तों के जरिए राज्यों तक पहुंचाई जाती है. इससे राज्यों के पास अपनी योजनाओं और त्योहारों से पहले अतिरिक्त फंड मिलेगा, जिससे वे अपने खर्चों बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे.
Real Estate: RERA प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन 4 महीने बढ़ी, पजेशन में होगी देरी
किन राज्यों को मिला कितना पैसा?
इस अतिरिक्त किस्त में उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा रकम मिली है. इसके अलावा देश के अन्य प्रमुख राज्यों को भी बड़ी रकम मिली है.

उत्तर प्रदेश: करीब 19,208 करोड़ रूपये
बिहार: करीब 10,845 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश: करीब 8,010 करोड़ रुपये
पश्चिम बंगाल: करीब 7,866 करोड़ रुपये
महाराष्ट्र: करीब 7,022 करोड़ रुपये

राज्यों को क्यों मिली एक्स्ट्रा रकम?
केंद्र सरकार की तरफवासे जारी यह एक्स्ट्रा रकम राज्यों की वित्तीय स्थिति को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने के लिए दिया गया है. इसके अलावा त्योहारों के समय बढ़ने वाले खर्च, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं के लिए यह योजना काफी मददगार साबित हो सकती है.
बैंकों में अब नहीं मिलेंगे नकली नोट, लगेंगी ये मशीनें, RBI का बड़ा आदेश
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>15 सालों से क्यों अटका रहा प्लास्टिक नोट लाने का प्लान? 10&amp;20 के नोट पर ट्रायल शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ Polymer Currency Notes: अगर आपके हाथ में जल्द ही प्लास्टिक का 10 या 20 रुपये का नोट आए तो हैरान होने की जरूरत नहीं है. केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के उस प्लान को मंजूरी दे दी है, जिसके अनुसार 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू होगा. ये नए नोट अभी चल रहे कागज के नोटों के साथ ही इस्तेमाल किए जाएंगे. दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोट चल रहे हैं, लेकिन भारत में ये प्लान करीब 15 साल तक अटकी रही.
दरअसल, RBI ने पहली बार साल 2009 में प्लास्टिक नोट लाने का प्लान रखा था. इसके बाद 2012 में केंद्र सरकार ने ट्रायल की मंजूरी दी. उस समय 10 रुपये के करीब 100 करोड़ प्लास्टिक नोट छापने की प्लान बनाई गई थी. इन नोटों का टेस्ट मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर जैसे अलग-अलग मौसम वाले शहरों में किया गया था.
सबसे बड़ी परेशानी मशीनों में सामने आई
ट्रायल के दौरान सबसे बड़ी परेशानी मशीनों में सामने आई. RBI की जांच में पता चला कि प्लास्टिक नोट हाई-स्पीड मशीनों में स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी की वजह से आपस में चिपक जाते थे. इससे नोट गिनने वाली मशीनों में बार-बार दिक्कत होने लगी और बैंकों के लिए इन्हें संभालना मुश्किल हो गया. इसी वजह से ये प्लान आगे नहीं जा सकी.
यह भी पढ़ें: RBI News: भारतीय रुपए की ढाल कैसे बना RBI? बाजार में झोंक दिए इतने अरब डॉलर
महंगे जरूर, लेकिन ज्यादा अच्छे हैं प्लास्टिक नोट
इसके बाद सरकार ने नेचर पर भी इसका असर जांचा. रिपोर्ट में सामने आया कि प्लास्टिक नोट बनाने की शुरुआती कॉस्ट ज्यादा होती है, लेकिन ये कागज के नोटों से बहुत ज्यादा समय तक चलते हैं. जल्दी फटते या खराब नहीं होते, इसलिए बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है. इससे आगे चलकर खर्चा भी कम होता है और नेचर को भी फायदा मिलता है.&amp;nbsp;
प्लान में देरी की एक वजह ये भी रही कि प्लास्टिक नोट बनाने का कच्चा माल विदेशों से मंगाना पड़ता था. वहीं बैंकों को अपनी मशीनों और सिस्टम में बदलाव के लिए भी बड़ा इंवेस्टमेंट करना पड़ता. इसके बाद 2016 की नोटबंदी आई और RBI का पूरा ध्यान नई करेंसी छापने पर चला गया, जिससे प्लास्टिक नोटों की प्लान पीछे रह गई.
सफल ट्रायल के बाद मिल सकते हैं नए प्लास्टिक नोट
अब एक बार फिर इस प्लान को मंजूरी मिली है. माना जा रहा है कि नए प्लास्टिक नोटों में होलोग्राम, ट्रांसपेरेंट विंडो और दूसरे मॉडर्न सिक्योरिटी फीचर्स दिए जाएंगे, जिससे नकली नोट बनाना और मुश्किल होगा. अगर ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में भारत में भी ज्यादा टिकाऊ, सेफ और नेचर के लिए बेहतर प्लास्टिक नोट देखने को मिल सकते हैं.
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;अब बिना पैसे करें खरीदारी, फ्लिपकार्ट लाया पे लेटर, क्या है इसका प्रोसेस?
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 05:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Indias Fiscal Deficit: कहां खर्च हो रहा देश का पैसा? अप्रैल से जून में 13.6 लाख करोड़ पहुंचा राजकोषीय घाटा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/indias-fiscal-deficit-कहां-खर्च-हो-रहा-देश-का-पैसा-अप्रैल-से-जून-में-136-लाख-करोड़-पहुंचा-राजकोषीय-घाटा</link>
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        <description><![CDATA[ Indias Fiscal Deficit: भारत का राजकोष यानी वो पैसा जिससे देश चलाया जाता है, उसकी इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े सामने आ गए हैं. जिसके मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत का राजकोषीय घाटा पूरे साल के तय लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत रहा. ये आंकड़े शुक्रवार को ही सरकार ने जारी किए हैं.
क्या कहते हैं ये आंकड़े?इन आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच राजकोषीय घाटा 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा. पिछले साल इसी समयावधि में ये 2.8 लाख करोड़ रुपये रहा था. सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 16.96 लाख करोड़ रुपये रखा है. ये देश की अनुमानित GDP का 4.3 प्रतिशत है. वित्त वर्ष 31 मार्च 2027 को खत्म होगा.
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बढ़ गया सरकारी खर्चसरकार ने अप्रैल-जून के बीच में 13.6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. पिछले साल इसी अवधि में ये खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपये था. इसी तरह, पूंजीगत खर्च भी बढ़ा है. इसमें सड़क, रेलवे और दूसरी बड़ी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण पर होने वाला खर्च भी शामिल होता है. पहली तिमाही में सरकार ने इस समय में 3.4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पिछले साल इसी समय में ये 2.75 लाख करोड़ रुपये था.
क्यों बढ़ी सरकार की कमाई?अप्रैल-जून के बीच सरकार को टैक्स से मिलने वाली कुल आय 6.4 लाख करोड़ रुपये रही. पिछले साल इसी समयावधि में ये 5.4 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं, नॉन टैक्स रेवेन्यू भी थोड़ा बढ़कर 3.8 लाख करोड़ रुपये हो गया. एक साल पहले ये 3.7 लाख करोड़ रुपये था.
क्या होता है राजकोषीय घाटा?बता दें कि राजकोषीय घाटा किसी भी देश को तब होता है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल आय से ज्यादा हो जता है. ये खासतौर पर कुल व्यय, कुल आय और सरकारी उधार के बीच का अंतर दिखाता है. साफ और सरल भाषा में कहें तो ये बताता है कि अपने खर्चों को पूरा करने के लिए सरकार को बाजार या अन्य जगहों से कितना कर्ज लेना पड़ेगा.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>FMCG: अब मच्छरों को मारना पड़ेगा महंगा, बढ़ गए रोजाना इस्तेमाल वाले प्रोडक्ट्स के दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fmcg-अब-मच्छरों-को-मारना-पड़ेगा-महंगा-बढ़-गए-रोजाना-इस्तेमाल-वाले-प्रोडक्ट्स-के-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ Godrej Products Price Hike: मानसून के सीजन में मच्छरों और छोटे कीड़ों की संख्या काफी बढ़ जाती है. ऐसे में इस समय में मच्छर और कीट भगाने के प्रोडक्ट्स की डिमांड भी बाजार में काफी बढ़ जाती है. लेकिन ऐसे ही समय में जब इन प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा हो जाए, तो ये जनता के लिए परेशानी का सबब बन जाता है. हाल ही में ऐसा ही कुछ हुआ है, जब गोदरेज कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की बढ़ती डिमांड के बीच कीमतों में इजाफा कर दिया है.
गोदरेज ने बढ़ाए प्रोडक्ट्स के दामदरअसल हाल ही में गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (GCPL) ने जुलाई में अपने कई घरेलू और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा दी है. इनमें गुडनाइट हिट और सिंथॉल साबुन जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट्स शामिल हैं. कंपनी ने ये फैसला बढ़ती लागत के दबाव के बीच लिया है.
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इन प्रोडक्ट्स की बढ़ीं इतनी कीमतें

गुड नाइट लिक्विड 45ml की कीमत 5.9% बढ़ी है, जो अब 85 रुपये से 90 रुपये हो गई.
गुड नाइट लिक्विड 60ml की कीमत जून में 4.5% बढ़ाई थी, जिसको 110 रुपये से 115 रुपये किया गया.
काला हिट 650ml की कीमत 12.9% बढ़ी है, जो अब 310 रुपये से 350 रुपये हो गई.
लाल हिट 200ml की कीमत 13.6% बढ़ी है, जो अब 110 रुपये से 125 रुपये कर दी गई है.
काला हिट 200ml की कीमत 13.6% बढ़ी है,जो अब 110 रुपये से 125 रुपये गो गई.
सिंथॉल साबुन (75gx4) की कीमत 10.5% बढ़ी है, जो अब 95 रुपये से 105 रुपये हो गई है.
सिंथॉल साबुन की अप्रैल में कीमत 100 रुपये की गई थी, जिसे बाद में घटाकर 95 रुपये कर दिया गया था.

क्यों बढ़ाई गईं कीमतें?इन प्रोडक्ट्स की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह कच्चे माल की बढ़ती लागत है. पाम ऑइल से जुड़े उत्पाद, कच्चा तेल से जुड़े केमिकल और पैकेजिंग की लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है. ऐसे में FMCG कंपनियां चुनिंदा प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा रही हैं.
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क्या बोली कंपनी?कंपनी ने पहले बताया था कि कच्चे तेल और पाम ऑइल की बढ़ती कीमतों से उसकी लागत 6-9% तक बढ़ सकती है. इस असर को कम करने के लिए कंपनी कीमतें बढ़ाने के साथ लागत घटाने और विज्ञापन खर्च को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने पर भी काम कर रही है.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>1601 करोड़ की बिल्डिंग में शिफ्ट होंगे CM फडणवीस, ऐसे बचेगा करोड़ों का किराया</title>
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        <description><![CDATA[ Maharashtra CM Office: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ऑफिस को मुंबई के नरीमन पॉइंट लोकेटेड एयर इंडिया बिल्डिंग में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है. इतना ही नहीं सरकार के बाकी मंत्रालय भी इसी बिल्डिंग में शिफ्ट होंगे. सरकार का मानना है कि इससे मैनेजमेंट का काम बेहतर होगा और हर साल करोड़ों रुपये के किराये की बचत भी होगी.&amp;nbsp;
1601 करोड़ में खरीदी गई एयर इंडिया बिल्डिंग&amp;nbsp;
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने 23 मंजिला एयर इंडिया बिल्डिंग को 1,601 करोड़ रुपये में खरीदा था. ये इमारत सरकारी जमीन पर लोकेटेड है और अब इसे राज्य का नया मेन ऑफिस बनाने की प्लान है. &amp;nbsp;सरकार चाहती है कि मंत्रालय के बाहर अलग-अलग जगहों पर चल रहे सरकारी ऑफिस को एक ही बिल्डिंग में लाया जाए, ताकि काम आसान हो सके.&amp;nbsp;
सिर्फ मुख्यमंत्री कार्यालय ही नहीं, बल्कि वो सब सरकारी डिपार्ट्मन्ट भी एयर इंडिया बिल्डिंग में शिफ्ट किए जाएंगे, जो फिलहाल किराये के ऑफिस से काम कर रहे हैं इससे सरकार को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये के किराये की बचत होने का अंदाजा है. &amp;nbsp;अभी मंत्रालय के आसपास जगह की कमी होने की वजह से कई डिपार्ट्मन्ट अलग-अलग बिल्डिंग में चल रहे हैं, जिस पर सरकार का बड़ा खर्च होता है.&amp;nbsp;
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एक ही जगह होंगे सभी सरकारी डिपार्ट्मन्ट, काम होगा तेज
सरकार का कहना है कि सभी डिपार्ट्मन्ट एक ही कैम्पस में आने से फाइलों को सॉल्व जल्दी और आसानी से किया जा सकेगा. और डिपार्ट्मन्ट के बीच बेहतर कनेक्शन भी बनेगा इसका फायदा आम लोगों को भी मिलेगा, क्योंकि उन्हें अलग-अलग सरकारी ऑफिस के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे. &amp;nbsp;साथ ही ऑफिसियल फैसले लेने की प्रोसेस भी पहले से ज्यादा तेज हो सकती है.&amp;nbsp;
लेकिन ऑफिसर के शिफ्ट होने से पहले एयर इंडिया बिल्डिंग में जरूरी मरम्मत और कई लेटेस्ट फीचर्स भी जोड़ी जाएंगी.इसके बाद एक एक कर के मुख्यमंत्री कार्यालय और दूसरे देपार्टमेंट्स को यहां शिफ्ट किया जाएगा. सरकार को लगता है कि 1,601 करोड़ रुपये की ये खरीदारी आगे चलकर बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. इससे एक तरफ किराये का बड़ा खर्च बचेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकारी कामकाज भी पहले से ज्यादा सिस्टमैटिक और तेजी से होगा.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ethanol: एथेनॉल नहीं होता तो आज 125 रुपए लीटर होता पेट्रोल का दाम, सरकार ने संसद में कहा</title>
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        <description><![CDATA[ Government on E20 Fuel: ईरान और यूएस के बीच चले युद्ध के कारण भारत में ईंधन की कीमतों में काफी ज्यादा उतार- चढ़ाव देखना पड़ा था. जिसके बाद भारत में एथेनॉल मिक्स फ्यूल लाने की बात शुरू हुई. इस चर्चा के चलते सरकार के खिलाफ भी कई लोग हुए, कई लोगों ने दावा किया कि ई20 फ्यूल के कारण गाड़ियां खराब हो रही हैं. इसी को देखते हुए अब सरकार ने संसद के मानसून सत्र में इस पेट्रोल का बचाव किया है.
संसद में E20 का बचावदरअसल केंद्र सरकार ने संसद में E20 पेट्रोल और एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर अपना पक्ष रखा है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. अगर सरकार ने कदम नहीं उठाए होते, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी.
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हालांकि, दिल्ली में लोगों को पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर में मिलता रहा. सरकार के मुताबिक, इसमें घरेलू स्तर पर तैयार एथेनॉल की उपलब्धता का भी योगदान रहा. तेल कंपनियों ने एथेनॉल करीब 70 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा.
पुरानी गाड़ियों के खराब होने की रिपोर्ट पर सरकारसरकार ने लोगों के उन दावों को भी खारिज कर दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं. सरकार के मुताबिक, लैब टेस्ट, फील्ड ट्रायल और वास्तविक इस्तेमाल में E20 से गाड़ियों की परफॉर्मेंस या इंजन के घिसने जैसा कोई बड़ा नेगेटिव असर नहीं मिला है. सरकार ने ये भी बताया कि E20 को लागू करने से पहले ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और वाहन कंपनियों के साथ मिलकर कई टेस्ट भी किए गए थे.
कई सालों से हो रहा एथेनॉल का इस्तेमालसरकार ने ये भी बताया कि E15 पेट्रोल का इस्तेमाल साढ़ तीन साल से ज्यादा और E19-E20 पेट्रोल का इस्तेमाल ढाई साल से ज्यादा समय से हो रहा है. इस दौरान 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ईंधनों पर चल रही हैं. सरकार के अनुसार, एथेनॉल की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई भी सबूत नहीं मिला है.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI का बड़ा फैसला: 1 अक्टूबर से बदलने जा रहा है FD का नियम, बैंकों की मनमानी पर रोक</title>
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        <description><![CDATA[ Reserve Bank of India: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अक्टूबर 2026 से बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और जमा दरों (Deposit Rates) के नियमों को बदलने जा रहा है. 30 जुलाई, 2026 को RBI ने &#039;रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक - डिपॉजिट पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026&#039; जारी किया. इसमें बैंकों द्वारा डिपॉजिट पर ब्याज दरें तय करने और उनके बारे में जानकारी देने के तरीके में तीन खास बदलाव किए गए हैं.&amp;nbsp;ये बदलाव 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे.&amp;nbsp;
आम जमाकर्ताओं के लिए क्या होने जा रहा बदलाव?
अगर आपका FD या RD अमाउंट 3 करोड़ रुपये से कम है, तो आरबीआई का नया नियम आपके लिए राहत भरा है. आरबीआई ने सख्त आदेश दिया है कि एक ही दिन जमा की गई समान राशि और अवधि पर एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाएं अलग-अलग ब्याज दरें लागू नहीं कर सकती.
पहले कुछ बैंक अधिक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए&amp;nbsp;अपने किसी दूसरे ब्रांच में जमा राशि पर ब्याज बढ़ाकर देते थे. अब इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है. RBI का यह निर्देश सभी स्मॉल फाइनेंस बैंकों, रीजनल रूरल बैंकों, पेमेंट बैंकों, लोकल एरिया बैंकों और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए है. इस नियम का मकसद डिपॉजिटरी के नियमों में पारदर्शिता लाना है और कमर्शियल बैंकों के साथ-साथ पूरे बैंकिंग सिस्टम में एकरूपता लाना है.&amp;nbsp;
वेबसाइट पर ही मिल जाएगी रेट पर जानकारी
RBI के नए नियमों के मुताबिक, बैंकों को हर सुबह 10 बजे वेबसाइट पर जमा दरें घोषित करनी होंगी. इससे बैंक कर्मचारी गुपचुप तरीके से ब्याज दरों में मोलतोल नहीं कर पाएंगे. इसके तहत, बैंकों को अब आपकी जमा राशि पर वही ब्याज देना होगा, जो वेबसाइट पर दिख रहे हो.
थोक जमाकर्ताओं के लिए नियम
रिजर्व बैंक ने 3 करोड़ या उससे ज्यादा रकम की FD को बल्क डिपॉजिट की कैटेगरी में रखा है. यानी कि बल्क डिपॉजिट का मतलब है 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की कोई एकमुश्त फिक्स्ड डिपॉजिट. आम रिटेल ग्राहक आमतौर पर इनमें डील नहीं करते हैं.
बल्क डिपॉजिट आमतौर पर कंपनियां, बड़े बिजनेस, ट्रस्ट और ज्यादा नेट वर्थ वाले लोग करते हैं, जो एक तय समय के लिए ब्याज दर के बदले बैंकों में बड़ी रकम जमा करते हैं. चूंकि इसमें शामिल रकम बहुत बड़ी होती है, इसलिए बैंक पहले प्राइवेट बातचीत के जरिए ये दरें तय करते थे. कभी-कभी वे पसंदीदा संस्थागत ग्राहकों को बेहतर डील देते थे, जबकि उसी दिन उतनी ही रकम जमा करने वाले दूसरे ग्राहकों को कम दरें ऑफर करते थे. अब इस तरीके को बंद किया जा रहा है. नए नियम के तहत, कमर्शियल और सहकारी बैंकों को हर रोज सुबह 10 बजे थोक जमा की अपनी दरें सार्वजनिक करनी होगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद रहे लोग, 15% गिरी खरीदारी, कारण क्या&amp;क्या हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Jewellery: महंगाई के इस दौर में सोना कभी महंगा हो रहा है तो कभी सस्ता. अब गोल्ड ज्वेलरी की खरीद को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई है. ये रिपोर्ट वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने जारी की है, जिसमें बताया गया है कि अप्रैल से जून 2026 के तीन महीने में भारत में गोल्ड ज्वेलरी की खरीदारी पिछले साल के मुकाबले 15% से कम होकर 75 टन रह गई है. वहीं, दुनिया भर में भी ज्वेलरी की मांग 278 टन रही, जो कोरोना महामारी के बाद दूसरे तीन महीने का सबसे कमजोर लेवल है.&amp;nbsp;
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की लगातार ज्यादा कीमतें हैं. महंगा सोना होने के वजह से कई लोगों ने ज्वेलरी खरीदने का प्लान टाल दिया. जिन लोगों ने खरीदारी की, उन्होंने भारी ज्वेलरी की जगह हल्के वजन वाले ज्वेलरी को ज्यादा पसंद किया. लेकिन पहले तीन महीने के मुकाबले दूसरे तीन महीने में भारत में मांग 14% ज्यादा हुई, लेकिन साल के हिसाब से इसमें कमी हो गई है.&amp;nbsp;
कम सोना खरीदा, लेकिन ज्यादा पैसे दिए&amp;nbsp;
साल 2026 के पहले 6 महीने में भारत में गोल्ड ज्वेलरी की कुल मांग 141 टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले में 17% कम है. लेकिन सोने की ज्यादा कीमतों की वजह से इस मांग की कुल वैल्यू 26% से ज्यादा होकर 21 अरब डॉलर पहुंच गई. &amp;nbsp;यानी लोगों ने कम सोना खरीदा, लेकिन ज्यादा कीमत दिया.&amp;nbsp;
एक झटके में महंगा हुआ सोना, चांदी की भी बढ़ी कीमत; जानें गोल्ड-सिल्वर का लेटेस्ट रेट
पूरे दुनिया में अप्रैल-जून तीन महीने के दौरान सोने की कुल मांग करीब 1,269 टन रही, जो पिछले साल के बराबर है. गोल्ड ETF, गोल्ड बार और सिक्कों में इंवेस्टमेंट कम होकर 262 टन रह गया. गोल्ड बार और सिक्कों में इंवेस्टमेंट पहले 6 महीने में पिछले साल के मुकाबले 21% ज्यादा रहा.&amp;nbsp;
ये भी बताया गया कि केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं.अप्रैल-जून तीन महीने में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 289 टन सोना अपने स्टॉक में जोड़ा, जो पिछले साल के मुकाबले 62% ज्यादा है. भारत के रिजर्व बैंक ने भी इस दौरान 200 किलोग्राम सोना खरीदा.
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
WGC का कहना है कि दूसरे 6 महीने मे इंवेस्टमेंट के लिए सोने की मांग ज्यादा हो गई है अगर सोने की कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो ज्वेलरी की खरीदारी पर दबाव रहेगा. ऐसे में लोग कम या हल्के ज्वेलरी खरीदना ही बेहतर ऑप्शन मान सकते हैं.
Plastic Currency: प्लास्टिक के नोट आने के बाद क्या खत्म हो जाएंगे पेपर वाले नोट? सरकार ने संसद में दिया जवाब
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PF News: पीएफ अकाउंट के 5 फायदे, जो बनाएंगे आपका भविष्य, मिलेगा बेहतर रिटर्न</title>
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        <description><![CDATA[ PF Account Benefits: क्या आपको पता है कि आपकी सैलरी से कटने वाला PF सिर्फ एक कटौती नहीं, बल्कि आपके भविष्य का एक बड़ा निवेश है. लोग PF अकाउंट तो रखते हैं, लेकिन उन्हें इसके सभी फायदों की जानकारी नहीं होती. आइए जानते है ईपीएफ अकाउंट इतना जरुरी क्यों है और इससे मिलने वाले क्या फायदे है.
PF अकाउंट के 5 सबसे बड़े फायदे
&amp;nbsp;1. बचत की आदत बनती है
PF अकाउंट एक बेहतरीन बचत योजना की तरह काम करता है. इससे आपकी सैलरी का एक छोटा हिस्सा अपने- आप PF अकाउंट में जमा हो जाता है. इससे आपको बचत करने की चिंता नहीं करनी पड़ती और धीरे- धीरे अच्छी रकम जमा हो जाती है.
2. दोगुना फायदा मिलता है
PF में सिर्फ आप ही नहीं बल्कि आपकी कंपनी भी योगदान देती है. यानी जितनी राशि आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही तय हिस्सा कंपनी को आपके PF अकाउंट में जमा करना पड़ता है. इससे आपकी बचत भी बढ़ती है और भविष्य के लिए बड़ा फंड तैयार हो जाता है.
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3. टैक्स बचाने का मौका 
पीएफ अकाउंट का तीसरा सबसे बड़ा फायदा टैक्स में राहत है. आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत पीएफ में किए गए निवेश पर आप 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं. यानी पीएफ आपके भविष्य के लिए बचत करने के साथ-साथ हर साल आपका टैक्स बोझ भी कम करने में मदद करता है.
4. सुरक्षित और भरोसेमंद निवेशअगर आप बिना जोखिम के बचत बढ़ाना चाहते हैं, तो PF एक बेहतरीन विकल्प है. इसका संचालन सरकार की निगरानी में होता है, इसलिए आपका पैसा सुरक्षित रहता है. साथ ही, हर साल मिलने वाला तय ब्याज आपकी जमा राशि को लगातार बढ़ाता है. कई बार पीएफ का ब्याज बैंक एफडी से भी अधिक होता है, जिससे आपको सुरक्षित और बेहतर रिटर्न.
5. रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षापीएफ का सबसे बड़ा फायदा रिटायरमेंट के बाद मिलता है. लंबे समय तक जमा की गई राशि एक मजबूत फंड बन जाती है, जो बुढ़ापे में खर्च, इलाज और अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टैक्स फ्री कमाई, फिर भी भरें ITR; जानें किन 10 परिस्थितियों में टैक्स रिटर्न कानूनी रूप से जरूरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टैक्स-फ्री-कमाई-फिर-भी-भरें-itr-जानें-किन-10-परिस्थितियों-में-टैक्स-रिटर्न-कानूनी-रूप-से-जरूरी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/टैक्स-फ्री-कमाई-फिर-भी-भरें-itr-जानें-किन-10-परिस्थितियों-में-टैक्स-रिटर्न-कानूनी-रूप-से-जरूरी</guid>
        <description><![CDATA[ Income Tax Return Filing 2026: कई बार टैक्सपेयर्स को ऐसा लगता है कि उनकी सालाना कमाई टैक्स छूट की सीमा (Tax Excemption Limit) से कम है इसलिए उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की जरूरत नहीं है. इनकम-टैक्स एक्ट के तहत, 10 ऐसी विशेष परिस्थितियां हैं, जिनमें आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है भले ही आपकी कुल आय पर कोई टैक्स न बनता हो. बता दें कि FY 2025-26 के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत बेसिक छूट सीमा 2.5 लाख रुपये है और नई टैक्स व्यवस्था के तहत यह 4 लाख रुपये है.&amp;nbsp;
1 लाख से अधिक का बिजली बिल
अगर किसी एक कारोबारी साल में आपने अपने घर या ऑफिस के लिए बिजली बिल के रूप में 1 लाख रुपये का भुगतान किया है, तो आपको आईटीआर भरना होगा.
2 लाख से अधिक का विदेश दौरा
अगर आपने खुद के या परिवार के किसी सदस्य के विदेश दौरे पर 2 लाख या उससे अधिक रकम खर्च किए हैं, तो आप जरूर से आईटीआर फाइल कर दें.&amp;nbsp;
सेविंग अकाउंट में 50 लाख जमा
अगर किसी फाइनेंशियल ईयर में आपके एक या एक से अधिक सेविंग्स अकाउंट्स में कुल जमा राशि 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा है, तो ITR फाइल करना जरूरी हो जाता है.&amp;nbsp;
करंट अकाउंट में 1 करोड़ जमा
अगर कोई व्यक्ति किसी फाइनेंशियल ईयर में एक या एक से ज्यादा करंट अकाउंट में कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा रकम जमा करता है, तो ITR फाइल करना जरूरी हो जाता है.
TDS या&amp;nbsp;TCS 50000 से अधिक कटना
अगर साल भर में आपकी सैलरी, फिक्स्ड डिपॉजिट या किसी दूसरे ट्रांजैक्शन पर 25000 रुपये या उससे अधिक का TDS/TCS कटा है, तो आपको आईटीआर हर हाल में भरना होगा. वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह लिमिट 50000 रुपये है.&amp;nbsp;
आय छूट की सीमा से अधिक
जिन टैक्सपेयर्स की कुल आय लागू बेसिक छूट सीमा से ज्यादा है, उन्हें भी ITR फाइल करना होगा. FY 2025-26 के लिए, पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत बेसिक छूट सीमा 2.5 लाख रुपये है और नई टैक्स व्यवस्था के तहत यह 4 लाख रुपये है.&amp;nbsp;
बिजनेस या कैपिटल लॉस
अगर आपको शेयर बाजार, क्रिप्टो की खरीद या प्रॉपर्टी बेचने पर कोई घाटा हुआ है और आप इस घाटे को अगले सालों के मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं , तो इस स्थिति में आपको आईटीआर भरना होगा.
विदेश में संपत्ति
अगर आप रहने वाले भारत के हैं, लेकिन विदेश में आपके नाम कोई संपत्ति, शेयर या बैंक अकाउंट है, तो इस स्थिति में भी आईटीआर फाइल करना पड़ता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
प्रोफेश्नल इनकम 10 लाख से अधिक
अगर आप एक फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील, आईटी पेशेवर या कंसल्टेंट हैं और आपकी प्रोफेश्नल ग्रॉस रिसीट्स 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो बिना देर किए आप अभी अपना आईटीआर फाइल कर लीजिए.
बिजनेस टर्नओर 60 लाख से अधिक
अगर आप किसी बिजनेस से जुड़े हुए हैं और आपका सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपये से ज्यादा है, तो भले ही उसमें आपका कुछ मुनाफा न हुआ हो, लेकिन आईटीआर आपको भरना ही पड़ेगा.

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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>टैक्स, फ्री, कमाई, फिर, भी, भरें, ITR, जानें, किन, परिस्थितियों, में, टैक्स, रिटर्न, कानूनी, रूप, से, जरूरी</media:keywords>
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        <title>TDS कट चुका है पर नहीं भरा ITR, जान लें नियम नहीं तो कर बैठेंगे अपना नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Income Tax Return Filing 2026: अगर आने हाल-फिलहाल में अपनी कोई प्रॉपर्टी बेची है या वर्चुअल डिजिटल एसेट्स की ट्रेडिंग से पैसे कमाए हैं या बैंक FD से अच्छा ब्याज कमाया है, तो आपका TDS भी जरूर कटा होगा. अगर TDS कटा है, तो आपको &amp;nbsp;अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भी फाइल करना होगा.
ITR के जरिए या तो आपको इनकम पर टैक्स की जानकारी देनी होगी या टैक्स रिफंड के लिए रिक्वेस्ट करनी होगी. इसे नजरअंदाज करने की गलती भूलकर भी न करें, नहीं तो टैक्स डिपार्टमेंट आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है.&amp;nbsp;
क्यों TDS कटने के बाद ITR जरूरी?
कई लोग सोचते हैं कि TDS कटने के बाद टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. TDS सिर्फ एक अनुमानित टैक्स डिडक्शन है. आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी आपके पूरे साल की कुल कमाई, निवेश और कटौती (जैसे कि 80C, 80D) को जोड़ने के बाद तय होती है.
अगर आपकी कुल आय 2.5 लाख रुपये से कम है, तो आप इस TDS कटौती की रकम को टैक्स रिफंड के तौर पर वापस पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको ITR फाइल करना होगा. अगर आपका टैक्स रिफंड बनता है, लेकिन आपने ITR फाइल नहीं किया है, तो इस बात की संभावना कम है कि टैक्स डिपार्टमेंट आपके खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा, लेकिन फिर आपको अपना रिफंड नहीं मिल पाएगा.&amp;nbsp;
इसके विपरीत, अगर आपकी सालाना आय आपके टैक्स रिजीम के अनुसार बेसिक छूट लिमिट से ज्यादा है, तो आपके लिए भी ITR फाइल करना अनिवार्य है, चाहे TDS कितना ही क्यों न कटा हो. अगर आप पर टैक्स बकाया है और आपने ITR फाइल नहीं किया है या टैक्स का भुगतान नहीं किया है, तो आयकर विभाग आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. आपके नाम नोटिस आ सकता है या कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
ITR न भरने पर क्या होगा नुकसान?

अगर आपने तय समय सीमा (31 जुलाई) तक अपना आईटीआर नहीं भरते हैं, तो बाद में आपको लेट फीस के साथ रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है. अगर आपकी सालाना आय 5 लाख से कम है, तो 1000 रुपये की लेट फीस और अगर इस लिमिट से ज्यादा है, तो 5000 तक लेट फीस का भुगतान करना होगा.&amp;nbsp;
आगे चलकर दोगुना TDS कट सकता है. अगर आपने पिछले साल का ITR फाइल नहीं किया है और उसका टोटल TDS अमाउंट 50000 रुपये से अधिक था, तो अगली बार TDS दोगुने दर से कटेगा.
अगर बिजनेस, शेयर बाजार या केपिटल गेन्स में आपको कोई घाटा हुआ है, तो समय पर ITR न भरने के कारण आप उस घाटे को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे. इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी भी कैपिटल एसेट को बेचने पर हुए घाटे को अगले सालों के मुनाफे से एडजस्ट करने के लिए समय पर आईटीआर भरना जरूरी है.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TDS, कट, चुका, है, पर, नहीं, भरा, ITR, जान, लें, नियम, नहीं, तो, कर, बैठेंगे, अपना, नुकसान</media:keywords>
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        <title>RBI ने प्लास्टिक करेंसी की टेस्टिंग के लिए 10 और 20 रुपए के नोटों को ही क्यों चुना?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rbi-ने-प्लास्टिक-करेंसी-की-टेस्टिंग-के-लिए-10-और-20-रुपए-के-नोटों-को-ही-क्यों-चुना</link>
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        <description><![CDATA[ Plastic Currency: RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ जल्द ही 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल शुरू करने वाला है. इन्हें पॉलिमर नोट भी कहा जाता है, जो कागज के नोटों से अलग होते हैं. ये प्लास्टिक करेंसी के नाम से भी जाने जाते हैं जो ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं. भारत से पहले कई ऐसे देश हैं जो इस प्लास्टिक करेंसी के इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में इस समय महज परीक्षण के लिए नोट बनाए जा रहे हैं. इसके लिए 10 और 20 रुपये के नोट को चुना गया है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि RBI ने इसके लिए सिर्फ 10 और 20 रुपये के नोटों को ही क्यों चुना है? नहीं सोचा होगा ना, तो आइये हम आपको बताते हैं.
10 और 20 रुपये के नोट ही क्यों चुने गए?दरअसल भारत में चलने वाले कुल नोटों की संख्या में 10 और 20 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है. हालांकि कुल पैसों की वैल्यू में इनका हिस्सा सिर्फ 1.4 प्रतिशत है. यानी ये नोट बड़ी संख्या में इस्तेमाल होते हैं, लेकिन इनमें ज्यादा पैसा नहीं होता. इसलिए RBI के लिए इनसे ट्रायल शुरू करना कम जोखिम वाला कदम है.
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ट्रायल के दौरान क्या देखा जाएगा?इन नोटों को फिलहाल केवल ट्रायल के लिए ही लाया जा रहा है. ऐसे में इनके बाजार में आने के बाद कुछ चीजों को नोटिस किया जाएगा, इसके बाद ही आगे बड़े नोट यानी 50, 100, 200 और 500 के नोट प्लास्टिक करेंसी में कंवर्ट किए जाएंगे. ट्रायल के दौरा इन चीजों पर मुख्य रूप से नजर होगा:

प्लास्टिक नोट कितने समय तक चलते हैं.
जनका के बीच ये कितने प़पुलर होते हैं.
इन्हें छापना कितना आसान और प्रभावी है.
इनकी सुरक्षा कितनी मजबूत है.
नकली नोट बनाने वाले इनकी नकल कर पाते हैं या नहीं.

बता दें कि RBI ने करीब 15 साल पहले भी पॉलिमर नोट शुरू करने की कोशिश की थी. साल 2009 में इसका ट्रायल किया गया था, लेकिन तकनीकी परेशानियों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी. अब RBI एक बार फिर इस पर काम कर रहा है. अगर इस बार ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में पूरी तरह से प्लास्टिक करेंसी पर निर्भर होने के बारे में सोचा जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RBI, ने, प्लास्टिक, करेंसी, की, टेस्टिंग, के, लिए, और, रुपए, के, नोटों, को, ही, क्यों, चुना</media:keywords>
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        <title>Marine Insurance: पश्चिम एशिया की जंग के बीच भारत का बड़ा फैसला! जहाजों के लिए देसी insurance शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ Marine Insurance: पश्चिम एशिया में जंग छिड़ी तो असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों पर नहीं पड़ा. समुद्र के रास्ते कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों का बीमा खर्च भी तेजी से बढ़ गया. युद्ध वाले इलाकों में जहाज भेजने पर विदेशी बीमा कंपनियों ने वॉर रिस्क प्रीमियम कई गुना बढ़ा दिया. कुछ मामलों में बीमा कवर देने से भी इनकार होने लगा. इससे भारतीय शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ी और सप्लाई चेन पर भी दबाव आया.
इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार अब देसी समाधान लेकर आई है. वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने गुरुवार को देश की पहली सरकारी गारंटी वाली P&amp;amp;I - Protection and Indemnity बीमा पॉलिसी लॉन्च की. यह भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल के तहत दी जाएगी और इसे न्यू इंडिया एश्योरेंस ने तैयार किया है.
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क्या होता है P&amp;amp;I बीमा?आसान भाषा में समझें तो जहाज का बीमा और उस पर लदे सामान का बीमा अलग-अलग होता है. लेकिन अगर जहाज की वजह से किसी तीसरे पक्ष को नुकसान हो जाए तो उसका खर्च P&amp;amp;I बीमा उठाता है.
जैसे जहाज से तेल रिसकर समुद्र प्रदूषित हो जाए या जहाज डूब जाए और उसका मलबा हटाना पड़े, चालक दल के किसी सदस्य के साथ हादसा हो जाए या किसी दूसरे जहाज या बंदरगाह को नुकसान पहुंच जाए.
ऐसे मामलों का खर्च इसी बीमा से कवर होता है. अब तक भारतीय जहाज मालिक इसके लिए ज्यादातर विदेशी बीमा क्लबों पर निर्भर थे.
जंग ने क्यों बढ़ा दी थी परेशानी?पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बाद विदेशी बीमा कंपनियों ने वॉर रिस्क प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी कर दी यानी उसी जहाज और उसी सामान के लिए भारतीय कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा बीमा प्रीमियम देना पड़ रहा था.
सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर विदेशी कंपनियां बीमा कवर देने से मना कर दें तो जहाज कई बंदरगाहों पर फंस सकते हैं क्योंकि बिना बीमा के जहाजों को प्रवेश नहीं मिलता. इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने 12 मई 2026 को भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल शुरू किया था. अब इसी के तहत पहली सरकारी P&amp;amp;I पॉलिसी जारी की गई है.
सरकार का दावा- बीमा खर्च में आई बड़ी कमीसरकार का कहना है कि BMIP शुरू होने के बाद वॉर रिस्क प्रीमियम में करीब 35 से 40 फीसदी तक कमी आई है. हालांकि सरकार ने यह नहीं बताया कि पहले और अब प्रीमियम की वास्तविक दरें क्या हैं.
29 जुलाई 2026 तक इस पूल के तहत 1,608 पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं जिनमें कार्गो वॉर रिस्क और जहाज वॉर रिस्क कवर शामिल हैं.
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पहली पॉलिसी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया कोदेश की पहली सरकारी P&amp;amp;I पॉलिसी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया - SCI को दी गई. इस पॉलिसी में चालक दल और कार्गो से जुड़ी देनदारी, समुद्री प्रदूषण का खर्च, डूबे जहाज का मलबा हटाने का खर्च और दुनिया भर के बंदरगाहों पर 24 घंटे सहायता देने वाला पोर्ट कॉरस्पॉन्डेंट नेटवर्क शामिल है. सरकार के मुताबिक इस कवर की अधिकतम सीमा 1.5 अरब डॉलर तक है.
आम लोगों पर क्या होगा असर?भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा समुद्र के रास्ते मंगाता है. तेल, खाद, दाल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई जरूरी सामान जहाजों से आते हैं. जब जहाज का बीमा महंगा होता है तो उसका असर सामान की कीमतों पर भी पड़ता है.
सरकार का कहना है कि देसी बीमा व्यवस्था से लागत कम होगी, विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी और समुद्री बीमा का पैसा देश में ही रहेगा.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Marine, Insurance:, पश्चिम, एशिया, की, जंग, के, बीच, भारत, का, बड़ा, फैसला, जहाजों, के, लिए, देसी, insurance, शुरू</media:keywords>
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        <title>मुंबई में महंगे घरों का मार्केट चमका, 10 करोड़ वाले फ्लैट्स की भारी मांग, ये इलाका बना नंबर वन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मुंबई-में-महंगे-घरों-का-मार्केट-चमका-10-करोड़-वाले-फ्लैट्स-की-भारी-मांग-ये-इलाका-बना-नंबर-वन</link>
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        <description><![CDATA[ Mumbai Luxury Housing Market 2026: मुंबई में 2026 की पहली छमाही में 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी घरों की बिक्री 18,512 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. CRE Matrix के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले साल से 12% अधिक और पांच साल पहले की तुलना में लगभग दोगुना है.
नए प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ रिसेल मार्केट की मजबूत मांग ने भी मुंबई के लग्जरी हाउसिंग बाजार को नई ऊंचाई दी. जनवरी-जून 2026 के दौरान 957 लग्जरी घर बिके, जो पिछले साल से 26% अधिक हैं. वहीं, पिछले 12 महीनों में करीब 1,700 लग्जरी घरों की बिक्री और 34,000 करोड़ रुपये के सौदों के साथ बाजार ने अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक रिकॉर्ड बनाया.
2026 में लग्जरी घरों की कीमतों में हल्की नरमी
कैलेंडर वर्ष 2021 से 2025 के बीच 10 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले लग्जरी घरों के दाम 37% बढ़े थे.हालांकि, 2026 में अब तक (YTD) इनकी कीमतों में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है. यह संकेत देता है कि डेवलपर्स खरीदारों को आकर्षित करने के लिए अब अधिक संतुलित और सावधानीपूर्ण कीमतें तय कर रहे हैं.
20-40 करोड़ रुपये के घर बने खरीदारों की पहली पसंद
मुंबई के लग्जरी हाउसिंग बाजार में खरीदारों की पसंद तेजी से 20 करोड़ से 40 करोड़ रुपये कीमत वाले घरों की ओर बढ़ रही है.
इस श्रेणी में 2023 की पहली छमाही (H1) में 66 घरों की बिक्री हुई थी, जो 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 156 घरों तक पहुंच गई. यानी इस सेगमेंट में 136% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह मुंबई के लग्जरी बाजार का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्राइस सेगमेंट बन गया. वहीं, 40 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले अल्ट्रा-लक्जरी घरों की मांग भी मजबूत बनी रही. इस अवधि में इस श्रेणी में 41 सौदे दर्ज किए गए.
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2,000-4,000 वर्गफुट वाले घरों की सबसे ज्यादा मांग
रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 से 4,000 वर्गफुट क्षेत्रफल वाले घर लग्जरी खरीदारों की सबसे पसंदीदा श्रेणी रहे. प्राइमरी मार्केट में हुई कुल बिक्री में 58% हिस्सेदारी इसी सेगमेंट की रही.
इसके अलावा, मुंबई के शीर्ष 10 माइक्रो-मार्केट्स में करीब 19% लग्जरी खरीदार दक्षिण मुंबई के बाहर के इलाकों से अपग्रेड होकर आए हैं. यह दर्शाता है कि बढ़ती संपन्नता के साथ बेहतर और अधिक प्रीमियम घरों की चाह लगातार बढ़ रही है.
मुंबई का लग्जरी हाउसिंग बाजार रिकॉर्ड स्तर पर, वर्ली बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट
2026 की पहली छमाही में मुंबई के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में वर्ली सबसे आगे रहा. यहां लग्जरी घरों की बिक्री 35 से बढ़कर 159 यूनिट हो गई, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 79% बढ़कर 4,493 करोड़ रुपये पहुंच गया. लोअर परेल ने भी 79% की बढ़ोतरी दर्ज की. रिपोर्ट के अनुसार, 35-55 वर्ष आयु वर्ग के खरीदारों ने कुल लग्जरी घरों की 58% खरीदारी की, जबकि 65 वर्ष से अधिक उम्र के खरीदारों की हिस्सेदारी 12% रही.
2026 की पहली छमाही में रिसेल मार्केट ने भी नया रिकॉर्ड बनाया और 4,840 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ. वहीं, 2,000-4,000 वर्गफुट वाले घर सबसे ज्यादा पसंद किए गए और कुल प्राइमरी बिक्री में उनकी 58% हिस्सेदारी रही.
चार साल में लग्जरी घरों की कीमतें 37% बढ़ीं, हालांकि 2026 में अब तक इनमें करीब 4% की हल्की गिरावट आई है. इसके बावजूद कीमतें 2021 के मुकाबले 32% अधिक बनी हुई हैं, जो बाजार की मजबूती को दर्शाती हैं.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मुंबई, में, महंगे, घरों, का, मार्केट, चमका, करोड़, वाले, फ्लैट्स, की, भारी, मांग, ये, इलाका, बना, नंबर, वन</media:keywords>
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        <title>कितनी बढ़ी आज पेट्रोल की कीमत, डीजल का क्या चल रहा भाव? जानें फ्यूल रेट पर ताजा अपडेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कितनी-बढ़ी-आज-पेट्रोल-की-कीमत-डीजल-का-क्या-चल-रहा-भाव-जानें-फ्यूल-रेट-पर-ताजा-अपडेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कितनी-बढ़ी-आज-पेट्रोल-की-कीमत-डीजल-का-क्या-चल-रहा-भाव-जानें-फ्यूल-रेट-पर-ताजा-अपडेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate Today on 30 July: आज पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई हैं. इनमें आखिरी बार बदलाव मई के महीने में हुआ था. इसी के साथ दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है. इसी तरह से मुंबई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमश: 111.21 रुपये और 97.83 रुपये प्रति लीटर है. अमेरिका और ईरान में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं और होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल होने की उम्मीदों के बीव पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर (100.69 डॉलर प्रति बैरल) से नीचे बनी हुई हैं.&amp;nbsp;
आज कच्चे तेल की कीमत
आज 30 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.80 डॉलर प्रति बैरल से 92.50 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी हुई है. तेल की कीमतों में आई इस गिरावट से आम उपभोक्ताओं के लिए अगस्त में ईंधन सस्ता होने की उम्मीद है. भारत पेट्रोल और डीजल के लिए मुख्य रूप से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है इसलिए कच्चे तेल की कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है. हालांकि, बढ़ती मांग, सरकारी टैक्स, रुपये-डॉलर की विनिमय दर में बदलाव और रिफाइनरी से जुड़े अनुपात जैसे अन्य कारक भी घरेलू ईंधन की कीमतों पर असर डालेंगे.
शहरवार आज पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
&amp;nbsp;111.18 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.47 रुपये
99.82 रुपये


चेन्नई
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये
103.82 रुपये


भोपाल
114.54 रुपये
99.64 रुपये


लखनऊ
102.05 रुपये
95.55 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये



सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल कहां?
भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल और डीजल पोर्ट ब्लेयर में है. यहां पेट्रोल की कीमत 82.46 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 78.05 रुपये प्रति लीटर है. यहां पूरे भारत में सबसे कम वैट सिर्फ 1% होने से पेट्रोल-डीजल सस्ता है.
इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश में पेट्रोल की कीमत 90.95 रुपये, दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव में पेट्रोल की कीमत 92.37 रुपये प्रति लीटर है. उत्तराखंड और चंडीगढ़ में भी कीमतें क्रमश: 93.27 रुपये प्रति लीटर और 94.30 रुपये प्रति लीटर है. &amp;nbsp;
वहीं, देश में सबसे महंगा पेट्रोल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बिक रहा है, जहां इसकी कीमत लगभग 117.78 रुपये प्रति लीटर है. यहां वैट की दरें 31-35% के बीच में है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कितनी, बढ़ी, आज, पेट्रोल, की, कीमत, डीजल, का, क्या, चल, रहा, भाव, जानें, फ्यूल, रेट, पर, ताजा, अपडेट</media:keywords>
    </item>
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        <title>दिल्ली में 942 और पटना में 1000 के पार पहुंची गैस सिलेंडर की कीमत, जानें अपने शहर का रेट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Rate Today on 30 July: देश में LPG की कीमतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, भले ही इसकी कीमत एक महीने से ज्यादा समय से नहीं बदली गई है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते पश्चिम एशिया वाले क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति की वजह से हाल के दिनों में होर्मुज (Strait of Hormuz) के अहम शिपिंग रूट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी भारी कमी आई है.
ऐसे में मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने और सप्लाई में रुकावट से बचने के लिए भारत 2027 तक अपनी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कुल इंपोर्ट का एक-चौथाई हिस्सा अमेरिका से मंगाने की योजना बना रहा है. भारत के इस कदम से अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर भी बात कुछ आगे बढ़ने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
शहरवार एलपीजी की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
&amp;nbsp;942.0 रुपये
3113.5 रुपये


मुंबई
941.5 रुपये
&amp;nbsp;3067.5 रुपये


कोलकाता
968.0 रुपये
3256.0 रुपये


चेन्नई
&amp;nbsp;957.5 रुपये
&amp;nbsp;3283.0 रुपये


बेंगलुरु
944.5 रुपये
&amp;nbsp;3198.0 रुपये


अमृतसर
983.0 रुपये
&amp;nbsp;3220.0&amp;nbsp;रुपये


लखनऊ
979.5 रुपये
3236.0 रुपये


गाजियाबाद
939.50 रुपये
3113.50 रुपये


पटना
1031.5 रुपये
3400.5 रुपये



खाड़ी देशों पर कम हो निर्भरता
साल की शुरुआत में ईरान और अमेरिका में जंग और इस दौरान होर्मुज की नाकेबंदी से देश में एलपीजी की भारी कमी महसूस की गई. यही वजह है कि अब भारत एलपीजी के स्रोतों में विविधता लाने का फैसला ले लिया है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है. 2025 में भारत ने अपने 21.85 मिलियन मीट्रिक टन LPG आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से मंगाया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में LPG की कुल खपत में आयात की हिस्सेदारी लगभग 66% थी.
इंडियन ऑयल ने VLGCs पर लगाया दांव
इस बीच, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी- इंडियन ऑयल कॉर्प (IOC) एक बहुत बड़े गैस कैरियर (VLGCs) में 50% हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है.
कंपनी अमेरिका से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का आयात बढ़ाने की तैयारी कर रही है. IOC VLGCs की ओनरशिप लेने वाली पहली भारतीय रिफाइनरी कंपनी होगी. यानी कि अब गैस मंगाने के लिए किराए के चार्टर्ड LPG और क्रूड टैंकरों पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी खुद के विशालकाय जहाज से अमेरिका से सीधे भारी मात्रा में रसोई गैस का आयात करेगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, 942, और, पटना, में, 1000, के, पार, पहुंची, गैस, सिलेंडर, की, कीमत, जानें, अपने, शहर, का, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Ethanol: E20 से डरे लोग, दोगुनी हुई प्रीमियम पेट्रोल की सेल, रिपोर्ट में खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ethanol-e20-से-डरे-लोग-दोगुनी-हुईप्रीमियम-पेट्रोल-की-सेल-रिपोर्ट-में-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ Ethanol: दिल्ली-NCR जैसे भारत के कई बड़े शहरों में हाल के महीनों में 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है. इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल से गाड़ियों को संभावित नुकसान की बढ़ती चिंताओं के बीच इसकी डिमांड बढ़ी है. खासतौर पर जुलाई के महीने में इसमें तेजी देखी गई है.
प्रीमियम पेट्रोल के प्रमुख ब्रांड्स
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अलग-अलग ब्रांड के तहत 100-ऑक्टेन पेट्रोल बेचती हैं, जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) का XP100, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) का Speed100 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) का poWer100 शामिल हैं.
इसे खासतौर पर सुपरकार, लग्जरी सेडान और सुपरबाइक जैसी हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों के लिए बनाया गया है. मार्केट में अब तक इसकी डिमांड काफी कम रही है, जो भारत में पेट्रोल की कुल बिक्री का सिर्फ 0.1% है क्योंकि कीमत इसकी सामान्य पेट्रोल के मुकाबले काफी ज्यादा है.&amp;nbsp;
कितना महंगा है प्रीमियम पेट्रोल?
प्रीमियम पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल के मुकाबले लगभग 57% तक महंगा होता है. दिल्ली में जहां सामान्य पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, 100- ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 160 रुपये प्रति लीटर सेज्यादा बैठती है. चूंकि अब देश भर के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाला रेगुलर पेट्रोल 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के साथ आने लगा है इसलिए अब लोगों के पास प्रीमियम पेट्रोल खरीदने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचता. एकमात्र यही एक ऐसा ईंधन है, जो 100%&amp;nbsp; शुद्ध और इथेनॉल मुक्त है.&amp;nbsp;
इथेनॉल से इंजन डैमेज होने का डर
20% इथेनॉल मिले पेट्रोल को साल 2023 में लॉन्च किया गया था. ऐसे में 2023 से पहले खरीदी गई गाड़ियों के मालिकों को इस बात की चिंता है कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल पंप, रबर पाइप में खराबी आ सकती है और इंजन में भी जंग लग सकती है. इसी डर से लोग प्रीमियम पेट्रोल को प्राथमिकता दे रहे हैं.&amp;nbsp;
हालांकि, सरकार ने इन दावों को खारिज किया कि ई20 या 20% इथेनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं. सरकार का कहना है कि ई20 ईंधन योजना के तहत एक लीटर फ्यूल में 800 मिलीलीटर पेट्रोल और 200 मिलीलीटर एथेनॉल मिलाया जाता है. इससे देश की कच्चे तेल पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा और गन्ना किसानों की आय भी बढ़ेगी.

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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>आज सोने के साथ&amp;साथ चांदी भी हुई महंगी, जानें 10 ग्राम की कितनी बैठेगी कीमत?</title>
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        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today 30 July 2026: आज देश में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज (COMEX) पर सोना 0.66% मजबूत होकर 4063 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो वैश्विक निवेशकों के बीच सोने की लगातार मांग को दर्शाता है.
वहीं, अगर घरेलू बाजार की बात करें, तो आज देश में 24 कैरेट वाला शुद्ध सोना 0.37% बढ़कर 1,42,530 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है. कल 24 कैरेट के सोने का बंद भाव 1,42,005 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा. यानी कि कीमतों में 525 रुपये का इजाफा हुआ है.&amp;nbsp;
18 और 22 कैरेट की ताजा कीमत
22 कैरेट सोने की कीमत आज प्रति 10 ग्राम 1,33,990 रुपये है. इसके कल के मुकाबले 495 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, 18 कैरेट वाले सोने की कीमत में कल के मुकाबले 405 रुपये का इजाफा हुआ है. आज इसकी कीमत प्रति 10 ग्राम 1,09,630 रुपये है.
शहरवार सोने की कीमतें



शहर
24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम)
22 कैरेट सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम)


दिल्ली
1,42,280 रुपये
1,30,423 रुपये


मुंबई
1,42,530 रुपये
1,30,653 रुपये


कोलकाता
1,42,340 रुपये
1,30,478 रुपये


चेन्नई
1,42,940 रुपये
1,31,028 रुपये


बेंगलुरु
1,42,640 रुपये
1,30,753 रुपये



चांदी की कितनी है कीमत?
आज 30 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आज स्पॉट सिल्वर 0.04% की मामूली बढ़त के साथ 58.11 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 58 डॉलर का यह मजबूत सपोर्ट लेवल इंडस्ट्रियल सेक्टर में चांदी की तेज डिमांड को दर्शाता है. वहीं, आज वैश्विक बाजार के मुकाबले घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में अधिक बढ़ोतरी देखी जा रही है.
घरेलू हाजिर बाजार में आज चांदी की कीमत 0.77% चढ़कर 2.17 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है. इस हिसाब से प्रति 10 ग्राम चांदी की कीमत 2170 रुपये है. अगर आप आज चांदी के सिक्के, बर्तन या गहने खरीदने का सोच रहे हैं, तो यह ध्यान रखें कि 2,17,000 रुपये के बेस प्राइस के ऊपर अलग से 3% GST और ज्वेलर्स का मेकिंग चार्ज भी लगेगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, सोने, के, साथ-साथ, चांदी, भी, हुई, महंगी, जानें, ग्राम, की, कितनी, बैठेगी, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बोतल&amp;कैन से हटेगा &amp;apos;एनर्जी ड्रिंक&amp;apos; का लेबल, सरकार ने कंपनियों को दी डेडलाइन</title>
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        <description><![CDATA[ Energy Drink Label Ban: भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ज्यादा कैफीन वाले पदार्थ बेचने वाली कंपनियों को &quot;एनर्जी ड्रिंक&quot; शब्द का इस्तमाल नहीं करने का निर्देश दिया है. रेगुलेटर का कहना है कि भारत में इस तरह के उत्पादों के लिए &quot;एनर्जी ड्रिंक&quot; की कोई&amp;nbsp; मानक तय&amp;nbsp; नहीं हैं.
एफएसएसएआई का कहना है कि &quot;शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है&quot; या &quot;कमजोरी दूर करता है&quot; जैसे दावें लोंगो को गुमराह करते हैं. इसलिए कंपनियों को ऐसे दावें नहीं करने चाहिए.
इस फैसले का पेप्सी के साथ- साथ कई कंपनियां विरोध कर रही है. उनका कहना है कि इससे उनके ब्रांड और बिक्री पर असर पड़ेगा. हालांकि, एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुनहानी ने साफ कर दिया कि अगर कंपनियां असहमत हैं तो वे अदालत जा सकती हैं.
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सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों ने आखिरकार नियम मानने पर सहमति जताई है और एफएसएसएआई ने लेबल बदलने के लिए 90 दिन का समय दिया है.
दुनियाभर में हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं, क्योंकि इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा ज्यादा होती है. इसी कारण इंग्लैंड में अगले साल अप्रैल से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसे पेय बेचने पर रोक लग जाएगी। वहीं, पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में इन्हें &quot;स्टिमुलेंट ड्रिंक&quot; (उत्तेजक पेय) के नाम से बेचा जाता है.
एनर्जी ड्रिंक कंपनियों की चिंता, विज्ञापनों पर भी असर
एनर्जी ड्रिंक कंपनियां अपने उत्पादों का प्रचार इस दावे के साथ करती हैं कि इन्हें पीने से तुरंत ऊर्जा मिलती है. यही वजह है कि इनके विज्ञापनों में जोश और फुर्ती बढ़ाने वाले संदेश दिखाए जाते हैं.
रेड बुल का प्रसिद्ध स्लोगन &quot;Gives You Wiiings&quot; है, जबकि पेप्सी अपने स्टिंग ड्रिंक के विज्ञापनों में दावा करती है कि इसे पीने से शरीर में बिजली जैसी ऊर्जा का एहसास होता है. इंडियन बेवरेज एसोसिएशन ने कहा कि वह सरकार के नियमों का पालन करेगी और विज्ञान पर आधारित नीतियों का समर्थन करती है.
 कारोबार हो सकता है प्रभावित&amp;nbsp;
हालांकि, एसोसिएशन ने 6 जुलाई को FSSAI को भेजे एक गोपनीय पत्र में कहा कि शुरुआती नोटिसों को सार्वजनिक करने से कंपनियों की साख को नुकसान पहुंच सकता है, कारोबार प्रभावित हो सकता है और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.
एसोसिएशन का यह भी कहना है कि कोई भी बड़ा नियम लागू करने से पहले कंपनियों से चर्चा की जानी चाहिए, ताकि नियमों को आसानी से लागू किया जा सके, विवाद कम हों और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.
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 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बोतल-कैन, से, हटेगा, एनर्जी, ड्रिंक, का, लेबल, सरकार, ने, कंपनियों, को, दी, डेडलाइन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Swiggy&amp;Zomato: बेंगलुरु में बंद होगी स्विगी&amp;जोमैटो की सर्विस! किसने और क्यों दिया अल्टीमेटम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/swiggy-zomato-बेंगलुरु-में-बंद-होगी-स्विगी-जोमैटो-की-सर्विस-किसने-और-क्यों-दिया-अल्टीमेटम</link>
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        <description><![CDATA[ Swiggy-Zomato to Shut Down in Bengaluru: स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स उन लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा है जो घर से दूर रहते हैं और उन्हें खाना बनाना नहीं आता. या फिर जब कभी समय ना हो तो स्विगी और जोमैटो से खाना मंगाया जा सकता है. घर बैठे- बैठे ही किसी भी रेस्टोरेंट और होटल से खाना मंगवाने की ये सुविधा अब जल्दी ही बेंगलुरु में बंद होने वाली है. ये कदम होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने कई समस्याओं के मद्देनजर उठाया है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल बेंगलुरु के होटल और रेस्टोरेंट मालिकों ने स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के खिलाफ सख्त कदम उठाने का मन बनाया है. रेस्टोरेंट एसोसिएशन का कहना है कि अगर उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का कोई तोड़ नहीं निकलता है तो 15 अगस्त के बाद शहर के कई रेस्टोरेंट इन प्लेटफॉर्म से ऑर्डर लेना बंद कर सकते हैं.
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स्विगी- जोमैटो से हैं शिकायतेंबेंगलुरु के होटल एसोसिएशन को स्विगी और जोमैटो से काफी शिकायतें हैं जिसके चलते ये फैसला किया जा रहा है. एसोसिएशन के मुताबिक स्विगी को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आ रही हैं, हालांकि जोमैटो भी रेस्टोरेंट मालिकों के निशाने पर है. वहीं आने वाले समय में नए फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म बेंगलुरु में अच्छी सर्विसेज देकर इन दोनों बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए कॉम्पिटीशन बढ़ा सकते हैं.
रेस्टोरेंट मालिकों की क्या मांग है?बेंगलुरु के रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने डिलीवरी प्लेटफॉर्म से पेमेंट और बिलिंग में ज्यादा ट्रांपैरेंसी की मांग की है. उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

ग्राहक की शिकायत के बाद बिना सही वजह बताए पैसे काटना बंद किया जाए.
खाना तैयार होने के बाद ऑर्डर कैंसिल होने पर रेस्टोरेंट को उसका मुआवजा मिले.
पेमेंट की पूरी जानकारी वाला स्टेटमेंट दिया जाए, ताकि हर कटौती का पता चल सके.
ऐसे नियम और शर्तें हटाई जाएं जो सिर्फ प्लेटफॉर्म के पक्ष में हों.
रेस्टोरेंट की समस्याओं के लिए अलग रिलेशनशिप मैनेजर रखा जाए.
रेस्टोरेंट की अनुमति के बिना डिस्काउंट और प्रमोशनल कैंपेन न चलाए जाएं.

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लिखित शिकायत देगा एसोसिएशनवहीं स्विगी और जोमैटो से जुड़ी शिकायतों को लेकर ब्रुहट बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन (BBHA) और अन्य संगठनों ने अपनी मांगें रखी हैं. एसोसिएशन जल्द ही दोनों कंपनियों को लिखित शिकायत देगा और उनसे लिखित जवाब और सुधार की मांग करेगा.
 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Swiggy-Zomato:, बेंगलुरु, में, बंद, होगी, स्विगी-जोमैटो, की, सर्विस, किसने, और, क्यों, दिया, अल्टीमेटम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Business Ideas: अगस्त&amp;सितंबर के त्योहारों में कमाना है पैसा? अभी शुरू करें ये बिजनेस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/business-ideas-अगस्त-सितंबर-के-त्योहारों-में-कमाना-है-पैसा-अभी-शुरू-करें-ये-बिजनेस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/business-ideas-अगस्त-सितंबर-के-त्योहारों-में-कमाना-है-पैसा-अभी-शुरू-करें-ये-बिजनेस</guid>
        <description><![CDATA[ Festival Business Ideas: जुलाई का महीना बस खत्म होने वाला है और अगस्त-सितंबर में कई त्योहार आने वाले हैं. ये त्योहार सिर्फ घरों में खुशियां ही नहीं लाते, बल्कि कमाई के नए मौके भी लेकर आते हैं. अगर आप कोई छोटा बिजनेश शुरू करना चाहते हैं तो इन महीनों से बेहतर समय आपको शायद ही मिले. रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और ओणम जैसे त्योहारों के समय लोग बाजरों में खरीदारी करने निकलते हैं. अगर आप ऐसा कोई बिजनेस शुरू कर दें, जिसकी मांग इन दिनों बढ़ती है, तो आप सिर्फ इन दो महीनों में ही अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं
मिठाई और गिफ्ट का बिजनेश करें शुरू
अगस्त के महीने में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा. इस दौरान राखी, मिठाई से लेकर गिफ्ट हैंपर तक की मांग बढ़ जाती है. अगर आप होलसेल में राखियां और गिफ्ट खरीदकर बेचते हैं तो आपको अच्छा-खासा मुनाफा हो सकता है. साथ में मिठाई भी रखते हैं तो ग्राहकों को एक ही जगह पर सारा जरूरी सामान मिल जाएगा. इससे आपकी अच्छी बिक्री हो जाएगी.
बोतल-कैन से हटेगा &#039;एनर्जी ड्रिंक&#039; का लेबल, सरकार ने कंपनियों को दी डेडलाइन
मेहंदी लगाने का बिजनेस
अगर आपको मेहंदी लगानी आती है तो आप किसी भी बाजार में अपना स्टॉल लगा सकते है, जैसे किसी कपड़े या फिर खाने-पीने की दुकान के बाहर एक टेबल लगाकर बैठ सकते हैं. अगस्त-सितंबर के महीने में कई त्योहार आते हैं, जिसमें महिलाएं मेहंदी लगवाने बाजार जाती हैं. इससे आप पूरे दिन में अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं. केवल 2 से 3 दिन के अंदर ही आप अच्छे पैसे कमा लेंगे.
पूजा-पाठ का सामान बेचें
त्योहारों के समय पूजा-पाठ के सामानों की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में ज्यादातर लोगों को अगरबत्ती, रोली, कलश, नारियल और अन्य पूजा सामग्री की जरूरत पड़ती है. अगर आप मंदिर या ऐसी जगह पर ये बिजनेस शुरू कर दें, जहां लोगों का आना-जाना लगा रहता है तो आपकी अच्छी कमाई हो जाएगी. इसमें आपको ज्यादा निवेश करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.
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कॉस्मेटिक का भी कर सकते हैं बिजनेस
त्योहार के समय में कपड़ों और कॉस्मेटिक की भी मांग बढ़ जाती है. इस दौरान महिलाएं सजने-संवरने के सामान की खूब खरीदारी करती हैं. ऐसे में आप चूड़ियां, बंदी और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं. इसकी एक स्टॉल ऐसी जगह लगाएं, जहां पर लोग आते-जाते हो. इससे भी आप अच्छे पैसे कमा सकते हैं.
बिजनेस शुरू करने से पहले जानें जरूरी बात

आप बिजनेस की शुरुआत में कम पैसे निवेश करें.
लोकेशन ऐसी देखें, जहां पर लोगों का आना-जाना लगा रहता हो.
लोगों की मांग की ध्यान पूरा रखें.
सही योजना के साथ आप अगस्त-सितंबर के महीने में बिजनेश शुरू कर सकेंगे.

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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Business, Ideas:, अगस्त-सितंबर, के, त्योहारों, में, कमाना, है, पैसा, अभी, शुरू, करें, ये, बिजनेस</media:keywords>
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        <title>Telegram CEO Networth: कितने अमीर हैं Telegram CEO पावेल, उनके 100 बच्चों को जायदाद में क्या मिलेगा?</title>
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        <description><![CDATA[ Telegram CEO Pavel Durov Net Worth: टेलीग्राम के को-फाउंडर और सीईओ पवेल डुरोव इन दिनों काफी चर्चा में आ गए हैं. रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विसेज ने उनके ऊपर कथित तौर से आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने का आरोप लगाया है. रूसी सरकारी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, अधिकारियों ने डुरोव को इंटरनेशनल लेवल पर वांटेड लिस्ट में डालने की भी बात की है. इस खबर के सामने आने के बाद से ही पवेल की नेटवर्थ के ऊपर सबकी नजर है, आइये जानते हैं.
कौन हैं पवेल डुरोव?पवेल डुरोव का जन्म रूस में हुआ था. वो टेलीग्राम के संस्थापक और मालिक हैं. टेलीग्राम एक फ्री मैसेजिंग ऐप है, जो दुनियाभर में मेटा के व्हॉट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म से मुकाबला करता है. डुरोव के पिता प्रोफेसर रहे हैं, डुरोव ने खुद भी कोई टेक्निकल डिग्री नहीं ली है फिर भी उन्होंने टेलीग्राम जैसी ऐप बनाई और दनियाभर में उसे पॉपुलर किया. क्योंकि उनकी शुरुआत से ही दिलचस्पी इसी में थी, कॉलेज के समय में उन्होंने अपने दोस्तों के लिए ऑनलाइन फोरम और छोटी वेबसाइट्स बनानी शुरू कर दी थीं.
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पवेल डुरोव की नेटवर्थ कितनी है?फोर्ब्स के मुताबिक साल 2026 में पवेल डपरोव की अनुमानित नेटवर्थ करीब 6.6 बिलियन डॉलर (करीब 631.35 हजार करोड़ रुपये) थी. इस सम्पत्ति के साथ वो दुनिया के अमीर टेक फाउंडर्स में शामिल हैं. उनकी ज्यादातर संपत्ति टेलीग्राम में उनकी पार्टनरशिप की वजह से ही है. टेलीग्राम की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ी है और प्लेटफॉर्म के 1 अरब से ज्यादा यूजर्स होने का दावा किया जाता है. इसी वजह से डुरोव की सम्पत्ति भी काफी बड़ी है.
डुरोव के हैं 100 से ज्यादा बच्चेसाल 2025 में डुरोव ने एक बयान दिया था, जो उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा था. इस बयान ने काफी हंगामा मचा दिया था. अपने बयान में उन्होंने कहा था कि, वो अपनी अनुमानित 13.9 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख 32 हजार 984 करोड़ रुपए) की संपत्ति अपने 100 से ज्यादा बच्चों के बीच बांटना चाहते हैं. उन्होंने कहा था कि उनके सभी बच्चों को बराबर अधिकार मिलना चाहिए, ताकि उनकी मौत के बाद उनके बीच संपत्ति को लेकर विवाद न हो.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Bank of Baroda: डाटा लीक से परेशान ना हों Bank Of Baroda के ग्राहक, बस रखें इन बातों का ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Bank of Baroda Data Leak: बीते दिन जैसी ही खबरें आईं कि सरकारी बैंक, बैंक ऑफ बड़ोदा का डाटा करीब 1 TB डाटा लीक हो गया है. जिसके बाद से ही कस्टमर्स के बीच में काफी हड़कंप मच गया है. बैंक से लेकर इसके ग्राहक तक सभी लोग काफी परेशान हो गए हैं. हालांकि बैंक की तरफ से बताया गया है कि कस्टमर्स से जुड़ा कोई डाटा लीक नहीं हुआ है. लेकिन फिर भी ऐसी स्थिति में ग्राहकों का परेशान होना लाजिमी है.
लेकिन ग्राहकों को परेशान होने की जगह पर कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए. जिससे कि वो किसी भी धोखाधड़ी का शिकार ना हों.
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इन बातों का ध्यान रखें ग्राहकयदि आपका खाता भी बैंक ऑफ बड़ोदा में है, तो आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान इस समय में रखने की जरूरत है. जैसे:
अनजान कॉल्स से रहें सावधानअगर आपके पास BOB के नाम से कोई भी अनजान नंबर से कॉल आता है या मैसेज- ईमेल आता है तो आपको सावधानी बरतने की जरूरत है. खासतौर से तब जब कोई आपसे बैंक से सबंधित या खाते से संबंधित जरूरी जानकारी मांगता है तो उस पर विश्वास ना करें और सही जानकारी तो बिलकुल भी ना दें.
ट्रांजैक्शन पर रखें नजरइस समय में आपको अपने खाते पर नजर रखना सबसे जरूरी है. अपने बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन को नियमित रूप से चेक करें. हो सके तो अलर्ट भी एक्टिवेट कर लें, जिससे आपको आगे जाकर कोई परेशानी ना हो.
पर्सनल जानकारी ना करें शेयरअगर आपके पास कोई OTP आता है तो उसे इग्नोर कर दें. किसी को भी अपना पासवर्ड, PIN या CVV ना दें. इसके अलाव कोई भी गोपनीय जानकारी किसी के साथ शेयर ना करें, चाहे वो कोई बैंक कर्मी ही क्यों ना हो.
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2 फैक्टर ऑथेंटिकेशनअपने खाते का पासवर्ड मजबूत रखें और 2FA (2 फैक्टर ऑथेंटिकेशन) का उपयोग करें. पासवर्ड हमेशा ऐसा बनाएं जो मजबूत हो और यूनिक हो, इसी के साथ कोई क्रैक ना कर पाए.
जानकारियों पर भरोसा ना करेंबैंक या खाते संबंधित यदि कोई भी जानकारी आपको मिले तो उस पर भरसा ना करें. सिर्फ आधिकारिक चैनल का ही उपयोग करें. बैंक की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर का ही उपयोग करें.
किसी भी गतिविधि की सूचना देंयदि आपको खाते में किसी भी तरह की कोई असामान्य गतिविधि दिखे तो उसकी सूचना तुरंत दें. अगर खाते में कोई अनजान ट्रांजैक्शन या बैंकिंग से जुड़ी कोई भी समस्या या मैसेज आए तो सबसे पहले बैंक को सूचित करें.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Bank, Baroda:, डाटा, लीक, से, परेशान, ना, हों, Bank, Baroda, के, ग्राहक, बस, रखें, इन, बातों, का, ध्यान</media:keywords>
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        <title>Artificial Sun: चीन बना रहा &amp;apos;आर्टिफिशियल सूरज&amp;apos;, जानें कैसे बनेगा और कितनी आएगी लागत</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Sun: दुनियाभर में बहुत सारे चाइनीज प्रोडक्ट्स का लोग इस्तेमाल करते हैं. भारत की बात करें तो यहां चाइनीज मोबाइल से लेकर सभी इलेक्ट्रॉनिक सामानों समेत खिलौने तक चाइनीज इस्तेमाल किए जाते हैं. इन चीजों के लोग इतने आदि हो गए हैं कि कुछ कहा नहीं जा सकता. इसी बीच अब जल्दी ही चीन दुनिया को एक आर्टिफिशियल सन भी देने वाला है. आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला.
क्या है आर्टिफिशियल सन?सबसे पहले तो जानते हैं कि आर्टिफिशियल सन क्या है. ये एक ऐसा न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर है, जो सूर्य की तरह ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया की नकल करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में ये तकनीक स्वच्छ, सुरक्षित और लगभग असीमित बिजली का बड़ा स्रोत बन सकती है.
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चीन बनाएगा &#039;आर्टिफिशियल सन&#039;इस प्रोजेक्ट के बारे में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर भी बताया गया है. उन्होंने बताया है कि &#039;आर्टिफिशियल सन&#039; (कृत्रिम सूरज) परियोजना बनाने के लिए उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट बनाकर उसका सफल परीक्षण कर लिया है. ये उपकरण न्यूक्लियर फ्यूजन से स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा पैदा करने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है.

合肥核聚变项目，目前已进入聚变能开发应用&amp;ldquo;三步走&amp;rdquo;战略中的第一步，2022年至2035年，完成聚变能实验堆发电示范，2030年至2040年，完成聚变工程堆发电示范，2040年至2050年，完成聚变商业堆商业应用。 https://t.co/rYQA19f8vi pic.twitter.com/YqfX23lJjE
&amp;mdash; 小陆师傅 (@STANLEES4) March 16, 2025



इस वीडियो को शेयर करते हुए चीन के वैज्ञानिकों ने बताया है कि हेफेई न्यूक्लियर फ्यूजन प्रोजेक्ट तीन चरणों में आगे बढ़ रहा है. इसका लक्ष्य भविष्य में फ्यूजन तकनीक से बड़े पैमाने पर बिजली बनाना है. इसके तीन चरण इस प्रकार हैं:

पहला चरण (2022&amp;ndash;2035): फ्यूजन एक्सपरिमेंटल रिएक्टर से बिजली उत्पादन का सफल प्रदर्शन करना.
दूसरा चरण (2030&amp;ndash;2040): फ्यूजन इंजीनियरिंग रिएक्टर के जरिए बिजली उत्पादन का प्रदर्शन करना.
तीसरा चरण (2040&amp;ndash;2050): फ्यूजन कमर्शियल रिएक्टर को व्यावसायिक रूप से शुरू करना, ताकि आम लोगों और उद्योगों को इससे बिजली उपलब्ध कराई जा सके.

अगर ये योजना सफल रहती है, तो चीन आने वाले सालों में फ्यूजन ऊर्जा को व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल करने वाले दुनिया के पहले देशों में शामिल हो सकता है.
कहां बन रहा &#039;आर्टिफिशियल सन&#039;?ये मैग्नेट यानी आर्टिफिशियल सन चीन की चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के प्लाज्मा फिजिक्स संस्थान ने तैयार किया है. इसका आकार अंग्रेजी के D अक्षर जैसा है. ये 21 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा और 582 टन वज वाला है. वैज्ञानिकों का कहना है कि, ये मैग्नेट दुनिया की सबसे बड़ी फ्यूजन परियोजना ITER में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट से भी बड़ा और अधिक शक्तिशाली है.
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ये लगभग 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान वाले प्लाज्मा को मजबूत चुंबकीय क्षेत्र में नियंत्रित रखने का काम करेगा, जिससे फ्यूजन प्रक्रिया संभव हो सकेगी. चीन का दावा है कि इस तकनीक को पूरी तरह अपने देश में बने उपकरणों और सामग्री से विकसित किया गया है. इससे फ्यूजन तकनीक के लिए विदेशी आपूर्ति पर उसकी निर्भरता खत्म हो गई है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>पति ने दुबई से भेजे 80 लाख, पत्नी को मिला इनकम टैक्स का नोटिस, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ Property Purchase Tax: मुंबई बेंच के आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने महिला की टैक्सेबल इनकम में 80 लाख जोड़ दिए थे, क्योंकि ये रकम उसके पति ने सीधे प्रॉपर्टी बेचने वाले के अकाउंट में भेजी थी. महिला के पति दुबई में काम करते हैं और उन्होंने यह पेमेंट ऑफिसियल चैनल के जरिए उसकी ओर से किया था.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के Insight Portal से पता चला कि महिला ने 31 मार्च 2016 को खत्म हुए फ़ाइनेंशियल ईयर में 1.40 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदी थी. यह पोर्टल फ़ाइनेंशियल लेनदेन पर नजर रखता है और टैक्स से जुड़े मामलों की पहचान करने में मदद करता है.
विभाग ने 80 लाख रुपए पर उठाए सवाल
जांच के दौरान इनकम टैक्स ऑफिसर ने माना कि प्रॉपर्टी के कुछ पेमेंट महिला के भारतीय बैंक अकाउंट से किए गए थे. लेकिन 80 लाख की उस रकम पर सवाल उठाया गया, जो उसके पति ने उसकी ओर से सीधे प्रॉपर्टी बेचने वाले के खाते में भेजी थी.
Artificial Sun: चीन बना रहा &#039;आर्टिफिशियल सूरज&#039;, जानें कैसे बनेगा और कितनी आएगी लागत
महिला के पति ने दुबई एक्सचेंज ब्युरो&amp;nbsp; के जरिए 40-40 लाख की दो किश्तों में कुल 80 लाख सीधे वेन्डोर के अकाउंट में ट्रांसफर किए थे. क्योंकि यह रकम महिला के बैंक खाते से नहीं गई थी और वह एक्सचेंज ब्युरो का रमिटन्स रिकार्ड नहीं दिखा सकी, इसलिए इनकम टैक्स ऑफिसर ने इंकम टैक्स ऐक्ट की क्लॉज़ 69 के तहत इसे छुपाया हुआ पैसा मान लिया. इसका मतलब था कि इस रकम पर ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता था.
महिला ने कोर्ट को क्या बताया?
इसके बाद महिला ITAT पहुंची. उसने कहा कि 1.40 करोड़ के पूरे पैसे का जरीया साफ है और इसके लिए उसने सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स दिए हैं. महिला ने रजिस्टर्ड सेल डीड, पति की ओर से किया गया गिफ्ट दीड, पति का ऐफिडेविट, बैंक स्टेटमेंट और दूसरे डॉक्युमेंट्स जमा किए. इनसे यह साबित होता है कि 80 लाख का पेमेंट्स उसके पति ने ही उसकी ओर से किया था.
सुनवाई के दौरान ITAT ने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने न तो पति की पहचान पर सवाल उठाया, न उनकी फ़ाइनेंशियल कैपेसिटी पर. डिपार्टमेंट ने ये भी नहीं खारिज कि 80 लाख बेचने वाले के खाते में पहुंचे थे. साथ ही गिफ्ट दीड,&amp;nbsp; ऐफिडेविट और दूसरे डॉक्युमेंट्स &amp;nbsp;की सच्चाई पर भी कोई सवाल नहीं उठाया गया.
Bank of Baroda: डाटा लीक से परेशान ना हों Bank Of Baroda के ग्राहक, बस रखें इन बातों का ध्यान
कोर्ट ने महिला के पक्ष में सुनाया फैसला
इन सभी बातों को देखते हुए ITAT ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया. ट्रिब्यूनल ने कहा कि सिर्फ दुबई एक्सचेंज ब्यूरो का एक रिकॉर्ड नहीं होने की वजह से 80 लाख को छुपाया हुआ इन्वेस्टमेंट नहीं माना जा सकता. टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ITAT ने इस मामले में सभी सबूतों को देखते हुए सही फैसला दिया.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पति, ने, दुबई, से, भेजे, लाख, पत्नी, को, मिला, इनकम, टैक्स, का, नोटिस, कोर्ट, ने, सुनाया, ये, फैसला</media:keywords>
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        <title>Paytm बैंक बंद, हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, आप पर क्या होगा असर?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/paytm-बैंक-बंद-हाई-कोर्ट-ने-सुनाया-फैसला-आप-पर-क्या-होगा-असर</link>
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        <description><![CDATA[ Paytm Payments Bank: कुछ महीने पहले ही RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था. जिसके बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट में इसे औपचारिक रूप से बंद करने की याचिका भी दायर की गई थी. जिसे हाईकोर्ट ने अपनी हरी झंडी दिखा दी है. इस बारे में हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बताया है.
RBI ने क्या बताया?दरअसल मंगलवार को RBI ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने Paytm Payments Bank को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दे दिया है. इसके साथ ही बैंक की संपत्तियों और बाकी प्रक्रियाओं को संभालने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के पूर्व अधिकारी गिरिकुमार एम. नायर को आधिकारिक लिक्विडेटर के रूप में नियुक्त किया गया है.
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गिरिकुमार एम. नायर 8 जुलाई से बैंक के लिक्विडेशन की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. इस दौरान उनके पास बैंक के निदेशक मंडल (बोर्ड) के सभी अधिकार होंगे.
RBI ने पहले किया था लाइसेंस रद्द24 अप्रैल 2026 को RBI ने Paytm Payments Bank का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था. इसके बाद बैंक को औपचारिक रूप से बंद करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जिसमें RBI ने का कहा था कि बैंक का कामकाज ऐसे तरीके से चलाया जा रहा था, जिससे बैंक और उसके जमाकर्ताओं के हितों को नुकसान पहुंच सकता था.
2015 में मिला था लाइसेंसबता दें कि Paytm Payments Bank को साल 2015 में लाइसेंस मिला था और ये देश के सबसे बड़े पेमेंट्स बैंकों में से एक था. मार्च 2022 में RBI ने निगरानी से जुड़ी चिंताओं के चलते पेटीएम पेमेंट्स बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था. इसके बाद जनवरी 2024 में लगातार नियमों का पालन न करने के कारण RBI ने बैंक पर नए जमा स्वीकार करने पर भी रोक लगा दी थी. अब अदालत के आदेश के साथ बैंक को बंद करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हर शेयर पर 110717 रुपये का डिविडेंड देगी कंपनी, टाटा ग्रुप से जुड़ा है नाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हर-शेयर-पर-110717-रुपये-का-डिविडेंड-देगी-कंपनी-टाटा-ग्रुप-से-जुड़ा-है-नाम</link>
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        <description><![CDATA[ Dividend Stock: टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने कारोबारी साल 2026 में जमकर मुनाफा कमाया है और कंपनी इसी का कुछ हिस्सा निवेशकों के बीच डिविडेंड के तौर पर बांटने के मूड में है.
कंपनी की सालाना फाइनेंशियल रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल उसने 31,961 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में कमाए गए 26,232 करोड़ रुपये से 21.8% ज्यादा है. वहीं, इस दौरान इसका टोटल रेवेन्यू 9.1% बढ़कर 42,367 करोड़ हो गया, जो FY25 में 38,835 करोड़ था. अब कंपनी अपने निवेशकों को डिविडेंड बांटने की तैयारी में है.
बंपर डिविडेंड देने की चल रही तैयारी&amp;nbsp;
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 1,10,717 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड बांटने की सिफारिश की है. कंपनी ने पिछले साल 64900 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था. यानी कि पिछले साल के मुकाबले इस बार डिविडेंड की रकम में 70% तक की भारी बढ़ोतरी की जा रही है.
अगर शेयरधारकों की आगामी सालाना बैठक (AGM) में इसे मंजूरी मिल जाती है, तो टाटा संस को कुल 4475 करोड़ रुपये का डिविडेंड चुकाना होगा. चूंकि, टाटा संस शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी नहीं है इसलिए इसका फायदा आम निवेशकों को नहीं, बल्कि इसके प्रमुख ट्रस्ट्स और प्रमोटरों को मिलेगा.
किसे होगा फायदा?
इस डिविडेंड से सबसे ज्यादा फायदा Sir Dorabji Tata Trust को होगा, जो टाटा संस में करीब 66% की हिस्सेदारी रखती है. टाटा संस इसे 1252 करोड़ भारी-भरकम डिविडेंड का भुगतान करेगी. इसके अलावा, टाटा संस के 4060 शेयर अपने पास रखने वाले नोएल टाटा को भी 45 करोड़ रुपये डिविडेंड के तौर पर मिलेंगे.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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बेंगलुरु में 2 लाख सैलरी वाले भी खुद को मान रहे गरीब, टेंशन में कट रही लाइफ&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>हर, शेयर, पर, 110717, रुपये, का, डिविडेंड, देगी, कंपनी, टाटा, ग्रुप, से, जुड़ा, है, नाम</media:keywords>
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        <title>अगस्त में 14 दिन बंद रहेगा बैंक, जानें कब&amp; कब RBI ने दिया बैंक हॉलिडे?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Holiday August 2026: अगर अगस्त महीने में बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम है तो पहले ही बैंक की छुट्टियों की लिस्ट चेक कर लें. भारतीय रिजर्व बैंक के अवकाश कैलेंडर के अनुसार अगस्त 2026 में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और साप्ताहिक अवकाशों को मिलाकर कई दिन बैंक बंद रहेंगे. हालांकि, सारी छुट्टियां सभी राज्यों में नहीं हैं, क्योंकि कुछ छुट्टियां केवल कुछ राज्यों में ही लागू होंगी. बता दें कि अगस्त के महीने में टोटल 14 दिनों तक बैंक बंद रहने वाला है. इन सभी डेट्स के बारे में यहां लिखा हुआ है.&amp;nbsp;
अगस्त 2026 में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

2 अगस्त (रविवार) &amp;ndash; साप्ताहिक अवकाश
8 अगस्त (दूसरा शनिवार) &amp;ndash; देशभर में बैंक बंद
9 अगस्त (रविवार) &amp;ndash; साप्ताहिक अवकाश
13 अगस्त &amp;ndash; मणिपुर में पैट्रियट्स डे&amp;nbsp;
15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)&amp;ndash; पूरे देश में बैंक बंद
16 अगस्त (रविवार) &amp;ndash; साप्ताहिक अवकाश
22 अगस्त (चौथा शनिवार) &amp;ndash; देशभर में बैंक बंद
23 अगस्त (रविवार) &amp;ndash; साप्ताहिक अवकाश
25 अगस्त &amp;ndash; ईद-ए-मिलाद&amp;nbsp;
28 अगस्त &amp;ndash; रक्षाबंधन&amp;nbsp;
30 अगस्त (रविवार) &amp;ndash; साप्ताहिक अवकाश

एशियाई बाजारों में हाहाकार के बीच मजबूत भारतीय शेयर बाजार, हरे निशान पर हुई ओपेनिंग
इसके अलावा कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहारों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण भी बैंक बंद रह सकते हैं. इसलिए बैंक जाने से पहले अपने राज्य की छुट्टियों की सूची जरूर जांच लें.
बैंक बंद रहने पर कौन-सी सेवाएं रहेंगी चालू?बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग सेवाएं मिलती रहेंगी. इनमें यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम से नकद निकासी और आईएमपीएस जैसी सेवाएं शामिल हैं.&amp;nbsp;
बैंक जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यानअगर आपको चेक जमा करना, ड्राफ्ट बनवाना, केवाईसी अपडेट कराना या किसी शाखा में जाकर जरूरी काम करना है, तो छुट्टियों के अनुसार पहले से योजना बना लें. इससे आपको बैंक बंद मिलने की परेशानी नहीं होगी.
इनकम 4 लाख से कम, फिर भी भरना होगा ITR; बड़े सख्त हैं ये 6 बड़े नियम ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 15:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अगस्त, में, दिन, बंद, रहेगा, बैंक, जानें, कब-, कब, RBI, ने, दिया, बैंक, हॉलिडे</media:keywords>
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        <title>बारिश बन सकती है कमाई का जरिया, शुरू करें ये बिजनेस, होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Business Ideas: देशभर के कई राज्यों में इन दिनों मूसलाधार बारिश हो रही है. ऐसे में ऑफिस, कॉलेज या अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन यही बारिश का मौसम कई लोगों के लिए कमाई का जरिया बन जाता है.
जिस तरह सर्दियों में कंबल, गर्म कपड़ों, चाय का बिजनेस तेजी से चलता है, वहीं गर्मियों में जूस, ठंडी शिकंजी, एसी और कूलर की मांग बढ़ जाती है. वैसे ही बारिश के मौसम में भी आप कुछ ऐसे छोटे बिजनेस शुरू कर सकते हैं, जिनकी डिमांड बारिश के दौरान अचानक बढ़ जाती है. खास बात तो यह है कि ये बिजनेस कम बजट में शुरू किए जा सकते हैं.
अगस्त में 14 दिन बंद रहेगा बैंक, जानें कब- कब RBI ने दिया बैंक हॉलिडे?
1.गाड़ियों की धुलाई का बिजनेस
बारिश में कीचड़ से कार और बाइक ज्यादा गंदे हो जाते हैं. ऐसे में अगर आप कार या बाइक वॉशिंग सर्विस शुरू करते हैं तो आपका बिजनेस अच्छा चल सकता है.
2.वॉटरप्रूफ एक्सेसरीज बेचें
बारिश के दौरान सबसे ज्यादा लोग अपने कीमती सामान को बचाने की कोशिश करते हैं, जैसे मोबाइल, लैपटॉप, स्कूल बैग जैसी चीजों को सुरक्षित रखने के लिए वॉटरप्रूफ कवर की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में आप इसे खरीदकर बेच सकते हैं. बारिश के मौसम में लोगों को इसकी जरूरत पड़ती है.
3.भुट्टा बेचकर कमाएं पैसे
बारिश के मौसम में अक्सर लोग बाहर गरमा-गरम भुट्टा खाना पसंद करते हैं तो आप इसका भी बिजनेस कर सकते हैं कम लागत में आपको अच्छा-खासा मुनाफा हो सकता है.&amp;nbsp;
4.छाता-रेनकोट का बिजनेस
बारिश के मौसम में बाहर आने-जाने वाले लोगों के लिए छाता और रेनकोट अपने पास रखना जरूरी हो जाता है. आप होलसेल मार्केट से छाता और रेनकोट खरीद सकते हैं और सड़क किनारे छोटी दुकान लगाकर बेच सकते हैं. आने-जाने वाले लोग दिखेंगे तो आपसे खरीद सकते हैं.
5.चाय-पकौड़े का बिजनेस
अक्सर ज्यादातर लोग बारिश के मौसम में चाय-पकौड़े खाना पसंद करते हैं. अगर आप इसका बिजनेस किसी बाजार, पार्क में चाय-पकौड़े, समोसे जैसे स्नैक्स का बिजनेस करते हैं तो आपकी अच्छी-खासी कमाई हो सकती है.
6.रबर शूज का बिजनेस
आप रबर शूज का बिजनेस कर सकते हैं. बारिश के समय जगह-जगह पर कीचड़ और पानी भर जाता है, जिससे बचने के लिए लोग रबर की चप्पलें खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि इसे पहनने के बाद फिसलने का खतरा कम हो जाता है और साथ ही इसके अंदर बारिश का पानी भी नहीं जाता है तो पैर भी सूखे रहते हैं. मानसून के दौरान यह बिजनेस अच्छा चल सकता है.
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बिजनेस शुरू करने से पहले कुछ बातें ध्यान रखें

सबसे पहले ये देखें की आपके इलाके में सबसे ज्यादा मांग किसकी है.
बिजनेस की शुरुआत में निवेश कम करें.
ऐसी लोकेशन देखें जहां पर लोगों का आना-जाना लगा रहता हो.
होलसेल में सामान खरीदें.
अपने ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से ही सामान रखें.

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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>India PMI Data: जुलाई में 4 साल के निचले स्तर पर पहुंची सर्विस सेक्टर की रफ्तार, जानें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ India PMI Data: भारत के सर्विस सेक्टर की रफ्तार जुलाई 2026 में धीमी पड़ गई है. इस दौरान भारत का HSBC फ्लैश सर्विसेज PMI गिरकर 53.1 पर आ गया है, जो फरवरी 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है. बढ़ती महंगाई के साथ इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी इसकी बड़ी वजह है.
हालांकि, इंडेक्स का 50 से ऊपर रहना इस बात का संकेत है कि भारत की सर्विस इकॉनमी बढ़ तो रही है, लेकिन बहुत धीमी रफ्तार से. जुलाई के आंकड़ों को नजरअंदाज़ करना इसलिए मुश्किल है क्योंकि इसमें तेजी से गिरावट आई है. मई में सर्विस PMI 59.8 था, जिसे ई-कॉमर्स, एंटरटेनमेंट, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और मजबूत घरेलू मांग का सहारा मिला. सिर्फ दो महीनों में इसमें 6.7 पॉइंट की गिरावट आई है.&amp;nbsp;
यह क्यों है जरूरी?
सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Services PMI) अर्थव्यवस्था की सेहत को मापने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत की टोटल जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान आधे से ज्यादा है. इस सेक्टर में IT और बैंकिंग से लेकर रेस्टोरेंट, ट्रैवल, ट्रांसपोर्ट और दूसरे कई तरह के बिजनेस शामिल हैं, जिनमें लाखों लोग काम करते हैं. अगर मंदी का दौर लंबा चला, तो इसका असर नौकरियों, लोगों की कमाई और खर्च पर भी दिखेगा.
जुलाई में क्यों कम हुआ PMI?
जुलाई में सर्विस PMI गिरने की कई वजहें हैं जैसे कि महंगाई, इनपुट कॉस्ट में वृद्धि, घरेलू मांग में सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव, जिससे कंपनियों ने मुश्किल हालातों का सामना किया, कई ऑडर्स कैंसिल हुए, सप्लाई चेन में रुकावट आई. लागत भी इस गिरावट की एक बड़ी वजह हो सकती है. ईंधन, लेबर, कच्चा माल और ट्रांसपोर्ट पहले के मुकाबले महंगे हो गए हैं. हालांकि, प्राइवेट सेक्टर्स में एक्सपोर्ट ऑडर्स बढ़े, कंपनियों ने लोगों को काम पर रखना जारी रखा और कुल मिलाकर आउटलुक पॉजिटिव बना रहा.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, OCBC की सीनियर ASEAN और इंडिया इकोनॉमिस्ट लावण्या वेंकटेश्वरन ने बताया कि शुरुआती नतीजों के आधार पर कुछ पक्का नहीं कहा सकता. उन्होंने कहा, &quot;सर्विसेज PMI का 53.1 का आंकड़ा 50 के स्तर से ऊपर बना हुआ है. स्थिति मिली-जुली है, जिसमें मजबूत मांग की तुलना में कीमतों का बढ़ता दबाव सेंटीमेंट को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>1 अगस्त से बदलेंगे कई बड़े नियम, LPG से बैंकिंग तक आपकी जेब पर पड़ेगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ Rules Change From 1 August 2026: हर महीने की पहली तारीख की तरह 1 अगस्त 2026 से भी कई नियम बदलने जा रहे हैं. इनमें एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों से लेकर बैंक छुट्टियों तक कई बदलाव शामिल हैं. इनका सीधा असर आम लोगों की जेब और दैनिक कामकाज पर पड़ सकता है. ऐसे में नए महीने की शुरुआत से पहले इन बदलावों के बारे में जान लेना जरूरी है. आइये जानते हैं कि क्या- क्या बदलने वाला है.&amp;nbsp;
1. एलपीजी सिलेंडरहर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां घरेलू यानी 14.2 किलोग्राम और कमर्शियल यानी 19 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर के नए दाम जारी करती हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार और लागत में बदलाव होता है, तो सिलेंडर की कीमतें बढ़ या घट सकती हैं. इसलिए 1 अगस्त को नई दरों पर सभी की नजर रहेगी.
जुलाई में 4 साल के निचले स्तर पर पहुंची सर्विस सेक्टर की रफ्तार, जानें वजह
2. तत्काल टिकट
तत्काल टिकट में भी काफी बड़ा बदलाव हुआ है. रेलवे रिजर्वेशन काउंटर से अब टोकन मिलेगा और फिर जब उनकी बारी आएगी तब टिकट बुक किया जाएगा. इससे काउंटर पर धक्का- मुक्की नहीं होगी.
3. बैंक की छुट्टियांअगस्त महीने के साथ ही RBI का नया बैंक हॉलिडे कैलेंडर लागू होगा. स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार समेत कई दिनों तक अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहेंगे. अगर आपको बैंक शाखा में कोई जरूरी काम है, तो पहले छुट्टियों की सूची जरूर देख लें.
4. एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाएंहालांकि एटीएम, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, लेकिन कुछ बैंक समय-समय पर अपने सेवा शुल्क, फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा या अन्य नियमों में बदलाव कर सकते हैं. ऐसे में अपने बैंक की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है.
5. क्रेडिट कार्डहर महीने की शुरुआत में कई बैंक और कार्ड जारी करने वाली कंपनियां रिवॉर्ड प्वाइंट, शुल्क, भुगतान की शर्तों या अन्य सुविधाओं में बदलाव करती हैं. यदि आपका बैंक 1 अगस्त से कोई नया नियम लागू करता है, तो उसकी जानकारी पहले ही जांच लें.
बारिश बन सकती है कमाई का जरिया, शुरू करें ये बिजनेस, होगा फायदा
6. ईंधन के दामएलपीजी के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर विमान ईंधन (ATF) और अन्य ईंधन की कीमतों में भी बदलाव हो सकता है. इसका असर एयरलाइंस और यात्रा लागत पर पड़ सकता है.
7. ITR भरना जरूरीवैसे तो सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए ITR भरने की समय सीमा 31 जुलाई तक है. लेकिन ITR-3 और ITR-4 फॉर्म भरने वाले ऐसे करदाता, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त है. अगर 31 अगस्त तक ITR दाखिल नहीं करते हैं तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत 5000 रुपए तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है.&amp;nbsp;
8. होम लोन और EMI1 अगस्त के बाद किसी भी दिन आरबीआई की बैठकर हो सकती है और इसमें रेपो रेट पर फैसला भी हो सकता है. इससे होम लोन, कार लोन, EMI और FD के ब्याज पर काफी असर पड़ने वाला है.&amp;nbsp;
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अगर अगस्त में आपका भी बैंक, गैस बुकिंग या किसी तरह का कोई काम है तो 1 अगस्त से लागू होने वाले नए नियम और रेट जरूर चेक कर लें. इससे आपको किसी तरह की परेशानी या एक्स्ट्रा खर्च का सामना नहीं करना पड़ेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पश्चिम बंगाल: बकाया DA और 7वें वेतन आयोग पर बड़ा ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ West Bengal Government Employees: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देने वाला बड़ा इशारा दिया है. सरकार ने साफ किया है कि बकाया DA का पैसा दिया जाएगा और साथ ही 7वें वेतन आयोग को भी इस साल के अंदर काम पूरा करने का काम किया जा रहा है. इससे लाखों कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की उम्मीद ज्यादा हो गई है.
मुख्यमंत्री ने 21 जुलाई को रखे गए प्रोग्राम में कहा कि सरकार कर्मचारियों से जुड़े फाइनेंशियल मामलों पर लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि 7वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस तैयार किए जा चुके हैं और आखिरी मंजूरी मिलने के बाद आयोग का ऑफिसियल सेटअप किया जाएगा. इसके बाद आयोग वेतन और भत्तों को दोबारा देख कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा.&amp;nbsp;
DA में धीरे-धीरे इजाफा किया जाएगा
सरकार ने यह भी दोहराया कि राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते का अंतर एक साथ खत्म नहीं किया जा सकता है. राज्य की फाइनेंशियल हालात को देखते हुए DA में धीरे-धीरे इजाफा किया जाएगा. हाल ही में सरकार ने DA में 20% का इजाफा किया था, जिससे दोनों के बीच मे पहले से बहुत फर्क कम हुआ है.
यह भी पढ़ें: LPG Price: 1 अगस्त से बदलेंगे गैस सिलेंडर के दाम, जानें महंगा होगा या सस्ता?
बकाया DA को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को यकीन &amp;nbsp;दिलाया कि सरकार रुके हुए पैसे देगी. लेकिन अभी तक बकाया पैसा कब मिलेगा, इसकी कोई पक्की तारीख या टाइम नहीं बताया गया है. ऐसे में कर्मचारियों को सरकार के अगले ऐलान का इंतजार रहेगा.
7वां राज्य वेतन आयोग लागू होने के बाद केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि महंगाई भत्ता पेंशन और अदर सर्विस भत्तों को भी दोबारा देखा जाएगा . &amp;nbsp;आयोग की सिफारिशों पर सरकार की मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों के वेतन सिस्टम &amp;nbsp;में बदलाव किया जाएगा.
खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल के कई सरकारी कर्मचारी अभी भी पुराने राज्य वेतन सिस्टम के तरह वेतन ले रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पहले से ही 7वें केंद्रीय वेतन आयोग का फायदा &amp;nbsp;मिल रहा है. इसी वजह से दोनों के वेतन और भत्तों में अंतर बना हुआ है.&amp;nbsp;
सरकार की अंतिम मंजूरी पर टिकी है कर्मचारियों की नजर
राज्य कैबिनेट पहले ही 7वें राज्य वेतन आयोग के सेटअप को मंजूरी दे चुकी है. इस आयोग में राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ नगर निगम, पंचायत, बोर्ड और सरकारी स्कूलों-कॉलेजों के स्टाफ भी आ सकते हैं.&amp;nbsp;
अब कर्मचारियों की नजर आयोग के ऑफिशियल शुरुआत, उसकी सिफारिशों और सरकार की अंतिम मंजूरी पर टिकी है. ये सारा काम पूरा होने के बाद ही नई सैलरी और बकाया पैसा देने का फाइनल ऑर्डर जारी होगा.
यह भी पढ़ें: भारत का 1 रुपया नेपाल में कितना होता है?
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 03:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पश्चिम, बंगाल:, बकाया, और, 7वें, वेतन, आयोग, पर, बड़ा, ऐलान</media:keywords>
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        <title>Bank Of Baroda: BOB डाटा लीक मामले का ग्राहकों पर पड़ेगा असर, बैंक ने क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank of Baroda Data Leak: सरकारी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़ी एक साइबर घटना सामने आई है. दावा किया जा रहा है कि ग्राहकों का डेटा और कुछ अंदरूनी दस्तावेज डार्क वेब पर लीक हुए हैं. बैंक ने इस मामले में साइबर घटना की पुष्टि करते हुए फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है.
बैंक ने क्या कहा?बैंक के मुताबिक एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट से छेड़छाड़ की गई जिसकी वजह से कुछ डेटा तक बिना अनुमति के पहुंच बनाई गई. बैंक का कहना है कि घटना का समय रहते पता चल गया और तुरंत जरूरी कदम उठाए गए. बैंक ने साफ किया है कि उसका कोर बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें किसी तरह की सेंध नहीं लगी है.
बैंक ने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है और नियमों के तहत संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है. साथ ही ग्राहकों और भागीदारों की जानकारी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई गई है.
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शोधकर्ता का क्या दावा है?साइबर शोधकर्ता श्रीकांत एल का दावा है कि लीक हुए डेटा में ग्राहकों की जानकारी, पहचान से जुड़े दस्तावेज, लोन से जुड़े कागजात और बैंक के अंदरूनी ऑडिट रिकॉर्ड शामिल हैं. उनके मुताबिक यह डेटा पहली बार 25 जुलाई को डार्क वेब मॉनिटरिंग वेबसाइट ransomware.live पर देखा गया था.
किन दस्तावेजों के लीक होने का दावा?शोधकर्ता के अनुसार सामने आए सैंपल दस्तावेजों में अकाउंट खोलने के फॉर्म, ग्राहकों के नाम, फोटो, आधार नंबर, ब्रांच ऑडिट रिपोर्ट, लोन अप्रेजल दस्तावेज, अंदरूनी पत्राचार और विजिलेंस जांच से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
कितना बड़ा है डेटा लीक?डेटा लीक के आकार को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. जिस वेबसाइट पर यह डेटा दिखा वहां इसे 700 GB से ज्यादा बताया गया है. वहीं कुछ भारतीय मीडिया रिपोर्ट में इसका आकार करीब 1TB बताया गया है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस घटना से कितने ग्राहक प्रभावित हुए हैं.
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किसने किया साइबर हमला?अब तक किसी भी साइबर अपराधी समूह ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है. हालांकि साइबर शोधकर्ता का अनुमान है कि इसके पीछे TripleX नाम का एक नया हैकिंग समूह हो सकता है.
RBI और CERT-In की प्रतिक्रियाइस मामले पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और CERT-In की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिपोर्ट के मुताबिक बैंक फॉरेंसिक ऑडिट करा रहा है. वहीं अब तक बैंक ऑफ बड़ौदा ने शेयर बाजार को किसी डेटा सेंधमारी की अलग से सूचना नहीं दी है.
इस मामले में बैंक और साइबर शोधकर्ता के दावों में अंतर है. बैंक का कहना है कि मामला केवल एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट तक सीमित है और कोर बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है. वहीं experts का दावा है कि बड़ी मात्रा में ग्राहकों का डेटा और बैंक के अंदरूनी दस्तावेज लीक हुए हैं. ऐसे में इस डेटा लीक का वास्तविक आकार और असर फॉरेंसिक जांच पूरी होने और संबंधित एजेंसियों की पुष्टि के बाद ही साफ हो पाएगा.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 03:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Baroda:, BOB, डाटा, लीक, मामले, का, ग्राहकों, पर, पड़ेगा, असर, बैंक, ने, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>Currency News: बंद हो जाएगा 20 रुपये का पुराना नोट? पीएम के वायरल वीडियो पर सरकार ने दी प्रतिक्रिया</title>
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        <description><![CDATA[ Old 20 Rupee Currency: सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ भी आता है तो तेजी से वायरल हो जाता है. खासतौर से अगर पीएम मोदी से जुड़ा कुछ भी होता है तो वो रातो- रात वायरल हो जाता है. ऐसा ही एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें पीएम पुराने नोट को खरीदने की बात कर रहे हैं. आइये जानते हैं इस वायरल वीडियो की आखिर सच्चाई क्या है?
क्या है वीडियो में?दरअसल सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पीएम कह रहे हैं कि सरकार 20 रुपये का पुराना नोट जनता से खरीदने वाली है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही तेजी से वायरल हो गया है, लोगों को लग रहा है कि 20 रुपये का पुराना नोट शायद अब बंद होने वाला है. इसी वजह से ये वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देख चिंता में भी पड़ गए हैं.
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क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई?अब खुद सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी ने इस खबर की सच्चाई जनता के सामने ला दी है. PIB फैक्ट चेक के आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए इस वीडियो को शेयर किया गया है. वीडियो पर बड़े अक्षरों में लिखा है FAKE, यानी ये वीडियो पूरी तरह से नकली है.
वीडियो को शेयर करते हुए एजेंसी ने कैप्शन में लिखा है, &#039;सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये कहते हुए दिखाया गया है कि पुराने 20 रुपये के नोट खरीदे जाएंगे&#039;. आगे उन्होंने वीडियो की सच्चाई बताते हुए कहा है कि पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक ये वीडियो फेक है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह कहते हुए दिखाया गया है कि पुराने ₹20 के नोट खरीदे जाएंगे।#PIBFactCheck❌ यह AI-जनरेटेड फर्जी वीडियो है। प्रधानमंत्री @narendramodi ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।⚠️कृपया सतर्क रहें। किसी&amp;hellip; pic.twitter.com/LArobSWVdu
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 27, 2026



कैप्शन में आगे लिखा गया है, &#039;ये AI-जनरेटेड फर्जी वीडियो है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है. कृपया सतर्क रहें. किसी भी अनजान या असत्यापित प्लेटफॉर्म पर अपने बैंक विवरण, OTP, आधार संख्या या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें. केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं की आधिकारिक जानकारी के लिए http://myscheme.gov.in पर जाएं. केंद्र सरकार से संबंधित किसी भी संदिग्ध वीडियो, फोटो या जानकारी को पीआईबी फैक्ट चेक पर भेजें. हम इसकी जांच कर सही जानकारी आप तक पहुंचाएंगे.&#039;
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 03:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Plastic Currency: भारत में जल्द आएंगे प्लास्टिक के नोट, सरकार ने दी RBI को मंजूरी</title>
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        <description><![CDATA[ Government Approves Plastic Currency: पिछले काफी समय से खबरें सामने आ रही थीं RBI जल्दी ही प्लास्टिक करेंसी लेकर आने वाला है. पहले इस खबर पर कोई कंफर्मेशन नहीं था, लेकिन कुछ दिन के बाद खुद रिजर्व बैंक ने ही इस खबर को कंफर्म कर दिया. वहीं अब सरकार की तरफ से भी इस प्लास्टिक करेंसी को हरी झंडी मिल गई है. जिसके बारे में हाल ही में बताया गया है.
भारत में पहली बार आएंगे प्लास्टिक नोटदरअसल हाल ही में लोकसभा में सांसद रामप्रीत मंडल और कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल ने वित्तमंत्री से प्लास्टिक नोट को लेकर सवाल पूछा था, इसी के साथ ये भी पूछा कि इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर क्या प्रभाव पड़ेगा. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी पूछा कि क्या सरकार कागजी नोटों को पूरी तरह से प्लास्टिक के साथ बदल देगी?
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लोकसभा में इन सवालों का जवाब देते हुए वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि, &#039;भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर, रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत सरकार को 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलिमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है. इतना ही नहीं ट्रायल सफल होने के बाद नियमित रूप से पॉलिमर नोट जारी करने का प्रस्ताव भेजा था. इस प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी है&#039;.
मजबूत होते हैं पॉलिमर नोटमंत्री ने बताया कि RBI के अनुसार, &#039;अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से पता चलता है कि पॉलिमर बैंक नोटों की आयु कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होती है. वर्तमान में पॉलिमर नोटों की शुरुआत प्रारंभिक चरण में है, इसलिए डिजिटल भुगतान पर इसका प्रभाव नियमित जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. साथ ही, नकद मुद्रा और डिजिटल भुगतान प्रणाली एक-दूसरे के पूरक भुगतान माध्यम हैं.
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क्या बंद होंगे कागजी नोट?इसके अलावा लोकसभा में ये भी बताया गया कि क्या भविष्य में कागजी नोट बंद होंगे. इसके बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि, RBI के अनुसार पॉलिमर बैंक नोट कागजी नोटों के साथ-साथ जारी किए जाएंगे. फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है. ऐसे में जनता को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंक कागजी नोट उसी तरह से चलते रहेंगे.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 03:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चूक न जाएं मौका! 8वें वेतन आयोग की दिल्ली बैठकों के लिए तारीखें तय, जानें कब तक कर सकेंगे आवदेन?</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Update: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने वेतन संशोधन और सेवा से जुड़े अन्य लाभों पर चर्चा जारी रखते हुए अगले महीने नई दिल्ली में हितधारकों के साथ बातचीत के दो और दौर की घोषणा की है.
23 जुलाई को जारी एक नोटिस में आयोग ने कहा कि वह 7 और 10 अगस्त को दिल्ली में कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों के साथ आमने-सामने की बैठकें करेगा. इसमें केवल वे कही कर्मचारी संघ, फेडरेशन या संगठन शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने अपना ज्ञाप पहले ही जमा कर दिया है, लेकिन आयोग के साथ अभी तक चर्चा नहीं हो पाई है. ऐसे में योग्य संघ और यूनियन आयोग के साथ अपॉइंटमेंट के लिए 31 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन के लिए प्रक्रिया
आवेदन केवल 8th Central Pay Commission Official Portal पर उपलब्ध एनआईसी (NIC) फॉर्म के जरिए ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे. हॉर्ड कॉपी या ईमेल पर भेजे गए आवेदनों को अमान्य माना जाएगा. ध्यान रहें कि फॉर्म भरते वक्त मेमोरेंडम सबमिशन के बाद मिला आपका यूनीक Memo Id दर्ज करना अनिवार्य है. आयोग ने कहा कि मीटिंग की जगह और समय की जानकारी अलग से दी जाएगी.&amp;nbsp;
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
दिल्ली में आयोजित दो-दिवसीय बैठक के दौरान सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स से संबंधित संगठन वेतन और सेवा की शर्तों से जुड़ी कई मुद्दे उठाएंगे-&amp;nbsp;

इस दौरान मिनिमम बेसिक पे को बढ़ाने की बात कही जाएगी.
नया फिटमेंट फैक्टर तय करने पर सीधी बातचीत होगी.
अलाउंसेज, प्रोमोशन और करियर प्रोग्रेशन जैसे कई अन्य लाभों पर भी चर्चा होगी.&amp;nbsp;

आयोग ने कहा कि अगस्त में होने वाली बैठकें चल रही बातचीत की प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं और आने वाले महीनों में दिल्ली के साथ-साथ अन्य राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में भी और बैठकें की जाएंगी. दिल्ली-NCR इलाके के बाहर के कर्मचारी संगठन अपने राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश में या किसी नजदीकी जगह पर बैठक के लिए समय ले सकते हैं.

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अगस्त से लॉन्च होगा CKYC 2.0, क्या बैंकिंग होगी पहले से आसान?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चूक, न, जाएं, मौका, 8वें, वेतन, आयोग, की, दिल्ली, बैठकों, के, लिए, तारीखें, तय, जानें, कब, तक, कर, सकेंगे, आवदेन</media:keywords>
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        <title>27 जुलाई को बदले गैस सिलेंडर के दाम? जानें गैस सिलेंडर की कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 27 July 2026: अगर आप आज रसोई गैस सिलेंडर बुक कराने की सोच रहे हैं, तो पहले उसके ताजा दाम जान लेना जरूरी है. 27 जुलाई 2026 को घरेलू एलपीजी यानी 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. तेल विपणन कंपनियों ने इस महीने घरेलू सिलेंडर के दाम यथावत रखे हैं. वहीं, कमर्शियल यानी 19 किलोग्राम सिलेंडर के रेट भी जुलाई में संशोधित किए जाने के बाद फिलहाल स्थिर हैं.
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में नहीं हुआ बदलाव
देश के प्रमुख शहरों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम पहले की तरह ही बने हुए हैं. हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा करती हैं, लेकिन 27 जुलाई तक घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई नई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की गई है.
दिल्ली से पटना तक जारी पेट्रोल-डीजल की नई कीमत, जानें अपने शहर का ताजा रेट
कमर्शियल सिलेंडर का क्या है हाल?
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में जुलाई की शुरुआत में कटौती की गई थी. इसके बाद से इनकी कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है. इसका लाभ होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिल रहा है.
गैस सिलेंडर की कीमतें कैसे तय होती हैं?
एलपीजी सिलेंडर की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत, कच्चे तेल के दाम, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन लागत और सरकारी नीतियां प्रमुख हैं. इन्हीं कारणों से समय-समय पर सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है.
चूक न जाएं मौका! 8वें वेतन आयोग की दिल्ली बैठकों के लिए तारीखें तय, जानें कब तक कर सकेंगे आवदेन?
गैस सिलेंडर लेते समय रखें ये सावधानियां
गैस सिलेंडर की डिलीवरी लेते समय उसकी सुरक्षा सील, वजन और किसी भी तरह के गैस रिसाव की जांच जरूर करें. यदि सिलेंडर की सील टूटी हुई हो या रिसाव महसूस हो, तो उसे स्वीकार न करें और तुरंत गैस एजेंसी को इसकी जानकारी दें. साथ ही, डिलीवरी रसीद लेना न भूलें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जुलाई, को, बदले, गैस, सिलेंडर, के, दाम, जानें, गैस, सिलेंडर, की, कीमत</media:keywords>
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    <item>
        <title>अब पेट्रोल&amp;डीजल होगा सस्ता? क्रूड ऑयल में 5% से अधिक की बड़ी गिरावट</title>
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        <description><![CDATA[ Crude oil Prices: आज सोमवार को हफ्ते के पहले दिन कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच फिर से कूटनीतिक वार्ता शुरू होने के बाद अब मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई में रुकावट का डर कम होता दिख रहा है.
यही वजह है कि ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत ट्रेडिंग के शुरुआती कुछ मिनटों में ही 5% ​​से ज्यादा गिर गई. इसके बाद कुछ समय के लिए यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई और फिर 92 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई. यूरोप में भी नैचुरल गैस की कीमतों में गिरावट आई. बीते लगातार 13 दिनों तक ईरान पर ताबड़तोड़ हमले के बाद शुक्रवार को अमेरिका पीछे गया. ईरान की सेना ने भी कहा कि उसने फिलहाल अपनी जवाबी कार्रवाई रोक दी है.&amp;nbsp;
अमेरिका ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत को थोड़ा स्पेस दे रहे हैं. अगर कोई कूटनीतिक रास्ता निकलता है, तो वह इसके पक्ष में हैं. इसी वजह से अमेरिका ने फिलहाल हमलों पर अस्थायी रोक लगा रखा है. इस बार कतर और ओमान की मध्यस्थता में यह शांति वार्ता शुरू हुई है. इसके चलते उम्मीद है कि होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल की शिपिंग और सप्लाई सामान्य हो सकेगी.
आज कितनी है कच्चे तेल की कीमत?
आज ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.89% गिरकर 91.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. इसी तरह से अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI Crude) भी लगभग 5.5% फिसलकर 84.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. पिछले हफ्ते गुरुवार (23 जुलाई) को अमेरिकी हमलों के चलते तेल की कीमतें 100.69 डॉलर के पार निकल गई थीं, लेकिन अब कुछ राहत है.&amp;nbsp;
रेटिंग एजेंसी ICRA जैसे दूसरे मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर ब्रेंट क्रूड इसी तरह से 90-92 डॉलर के आसपास स्थिर रहता है, तो हो सकता है कि सरकारी तेल कंपनियां आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-5 रुपये प्रति लीटर तक की गिरावट कर दे.&amp;nbsp;

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चूक न जाएं मौका! 8वें वेतन आयोग की दिल्ली बैठकों के लिए तारीखें तय, जानें कब तक कर सकेंगे आवदेन?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, पेट्रोल-डीजल, होगा, सस्ता, क्रूड, ऑयल, में, से, अधिक, की, बड़ी, गिरावट</media:keywords>
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        <title>सोना 1.60% टूटा, 1,44,920 पर आया भाव, चांदी 2.39 लाख के करीब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोना-160-टूटा-144920-पर-आया-भाव-चांदी-239-लाख-के-करीब</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today 27 July 2026: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है. घरेलू वायदा बाजार (MCX) में आज सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. सोना करीब 1.60 फीसदी यानी 2,350 रुपए टूटकर 1,44,920 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. वहीं, चांदी 2,39,900 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है. आइये यहां से इस गिरावट के बारे में डिटेल में समझते हैं.&amp;nbsp;
सोने की कीमत में क्यों आई गिरावट?अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर सोने की कीमतों पर पड़ा है. इसके चलते घरेलू बाजार में भी सोने के भाव में कमजोरी देखने को मिली. हालांकि, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है, इसलिए कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
27 जुलाई को बदले गैस सिलेंडर के दाम? जानें गैस सिलेंडर की कीमत
चांदी का क्या है हाल?सोने के मुकाबले चांदी के भाव ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. एमसीएक्स पर चांदी 2,39,900 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है. औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार की गतिविधियों के कारण चांदी की कीमतों में भी लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यानअगर आप सोने के आभूषण खरीदने जा रहे हैं, तो केवल बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें. वहीं, चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच जरूर करें. अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां टैक्स, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है.
चूक न जाएं मौका! 8वें वेतन आयोग की दिल्ली बैठकों के लिए तारीखें तय, जानें कब तक कर सकेंगे आवदेन?
कैसी रह सकती है बाजार की चाल?आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी. ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को बाजार पर नजर बनाए रखनी चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>क्रेडिट कार्ड से खर्च 2 लाख करोड़ के पार, ये दो बैंक हैं टॉप पर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रेडिट-कार्ड-से-खर्च-2-लाख-करोड़-के-पार-ये-दो-बैंक-हैं-टॉप-पर</link>
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        <description><![CDATA[ Credit Card Bill Payment: जून में क्रेडिट कार्ड से होने वाला खर्च एक बार फिर से 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. भारतीय रिजर्व बैंक की नई जानकारी के हिसाब से, जून में लोगों ने क्रेडिट कार्ड से टोटल 2.01 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं. क्रेडिट कार्ड से खर्च में हर साल के हिसाब से 9.8% का इजाफा हुआ है.
मई में भी क्रेडिट कार्ड से खर्च 2.02 लाख करोड़ रुपये रहा था. लेकिन जून में कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों के खर्च में कमी देखने को भी मिली है. लेकिन, क्रेडिट कार्ड से खर्च का डेटा मजबूत रहा है.
9.36% का हुआ इजाफा
डेटा के हिसाब से, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल पहले से ज्यादा हो रहा है. जून में क्रेडिट कार्ड की तादाद 12.16 करोड़ हो गई है. पिछले साल के हिसाब से इसमें 9.36% का इजाफा हुआ है. वहीं, महीने के हिसाब से भी क्रेडिट कार्ड की तादाद में करीब 0.95% का इजाफा हुआ है.
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जून में कई बैंकों के क्रेडिट कार्ड से होने वाले खर्च में फर्क देखने को मिला है. कुछ बैंकों में खर्च ज्यादा हुआ, लेकिन कुछ में कमी भी आई है. &amp;nbsp;इसकी वजह लोगों के खर्च करने के तरीके और डिजिटल पेमेंट के ज्यादा इस्तेमाल को बताया जा रहा है.
कुछ प्राइवेट बैंक अभी भी लोन से जुड़े खतरे को देखते हुए सोच-समझकर आगे जा रही है. इसी वजह से अब कुछ प्राइवेट बैंकों की ग्रोथ भी पहले जैसी नहीं रही.
सरकारी बैंकों को मिल रहा खूब फायदा
UPI से जुड़े क्रेडिट कार्ड और RuPay क्रेडिट कार्ड के ज्यादा इस्तेमाल से भी क्रेडिट कार्ड खर्च को फायदा मिला है. खासकर सरकारी बैंकों को इसका फायदा मिल रहा है. वहीं, नए क्रेडिट कार्ड भी लगातार जारी किए जा रहे हैं, जिससे कार्ड इस्तेमाल करने वालों की तादाद ज्यादा हो रही है.
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जून में नए क्रेडिट कार्ड जारी करने की तादाद में भी इजाफा हुआ है. कई बैंकों ने नए कार्ड जारी किए हैं. HDFC बैंक, SBI कार्ड, ICICI बैंक और Axis बैंक ने भी जून में नए कार्ड जोड़े हैं, जिससे कुल कार्ड की तादाद और ज्यादा हुई है.
क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल यह दिखाता है कि लोग अब सामान खरीदने और पेमेंट करने के लिए डिजिटल को ज्यादा अपना रहे हैं. लेकिन, क्रेडिट कार्ड का पैसा समय पर दे देना चाहिए, जिसके वजह से ज्यादा चार्ज और ब्याज नहीं देना परे.
वीडियो देखें-
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Layoffs के बाद IT सेक्टर की तस्वीर बदली, जानें अप्रेजल&amp; सैलरी स्ट्रक्चर और नई नौकरियों का पूरा लेखा&amp;जोखा</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले दो सालों में भारतीय आईटी सेक्टर ने तेज बदलाव देखा है. महामारी के बाद जबरदस्त भर्ती करने वाली कंपनियां अब AI, ऑटोमेशन और कमजोर वैश्विक मांग के कारण लागत घटाने पर जोर दे रही हैं. इसी वजह से FY26 में कई बड़ी कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या कम की, जबकि नई भर्ती की रफ्तार भी धीमी पड़ गई.&amp;nbsp;
इस साल कितनी हुई छंटनी?FY26 में भारत की पांच बड़ी IT कंपनियों यानी टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो और टेक महिंद्रा का कुल कर्मचारी काउंट घटा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन कंपनियों में करीब 7,000 कर्मचारियों की टोटल कमी दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष FY25 में इन्हीं कंपनियों ने 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों की नेट भर्ती की थी. सबसे बड़ा असर टीसीएस में देखने को मिला, जहां वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग की गई.&amp;nbsp;
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अब अप्रेजल कैसे हो रहा है?छंटनी के बावजूद कंपनियों ने पूरी तरह सैलरी बढ़ाना बंद नही किया है, लेकिन पहले की तुलना में अप्रेजल काफी कम हो गया है. जैसे टीसीएस ने प्रदर्शन आधारित सैलरी हाइक पर जोर दिया है. Infosys भी चुनिंदा कर्मचारियों का परफॉर्मेंस के बेसिस पर वेतन बढ़ा रही है. AI और डिजिटल स्किल्स वाले कर्मचारियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं.
वहीं, HCLTech स्किल-बेस्ड रिवार्ड्स और क्रिटिकल टैलेंट रिटेंशन पर फोकस कर रही है. विप्रो का अप्रेजल पूरी तरह व्यावसायिक प्रदर्शन और व्यक्तिगत मूल्यांकन पर आधारित है. टेक महिंद्रा लागत के साथ अच्छा प्रदर्शन करने वाले लोगों को अप्रेजल दे रही है. अब IT सेक्टर में One-size-fits-all अप्रेजल का दौर लगभग खत्म हो चुका है. अच्छे स्किल और प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को ही अधिक बढ़ोतरी मिल रही है.
सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलाव आया?पहले जहां फिक्स्ड सैलरी बढ़ाने पर जोर रहता था, वहीं अब कंपनियां वेरिएबल पे, परफॉर्मेंस बोनस और स्किल इंसेंटिव पर अधिक फोकस कर रही हैं. AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा इंजीनियरिंग और जेनरेटिव AI जैसी तकनीकों में माहिर कर्मचारियों को बेहतर पैकेज मिल रहे हैं, जबकि पुराने IT सपोर्ट और मेंटेनेंस प्रोफाइल में वेतन वृद्धि काफी लिमिटेड है.&amp;nbsp;
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हायरिंग हो गई बंद?हायरिंग पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन कंपनियों में पहले जैसी बल्क हायरिंग देखने को नहीं मिल रही है. फ्रेशर्स को ले रहे हैं, लेकिन संख्या लिमिटेड है. लैटरल हायरिंग में कमी आई है. AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स जैसी नई तकनीकों में भर्ती जारी है. मिड लेवल मैनेजमेंट में नियुक्ति काफी धीमी हो गई है. कई कंपनियां अब कम लोगों से ज्यादा काम लेने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. यही कारण है कि हायरिंग की रणनीति भी बदल रही है.&amp;nbsp;
पिछले साल और इस साल में कितना अंतर?



पिछले साल (FY25)
इस साल (FY26)


12,000 से अधिक नेट हायरिंग
करीब 7,000 की कर्मचारियों में कमी


नॉर्म अप्रेजल साइकिल
लिमिटेड और प्रदर्शन आधारित अप्रूवल


बड़े पैमाने पर कैंपस हायरिंग
चुनिंदा भर्ती और कौशल बेस्ड भर्ती


हेडकाउंट बढ़ाने पर फोकस
उत्पादकता और एआई पर फोकस


पुराने आईटी रोल्स की सबसे अधिक मांग
एआई और डिजिटल स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग



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कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
IT सेक्टर पूरी तरह मंदी में नहीं है, बल्कि बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जिन कर्मचारियों के पास AI, क्लाउड, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और ऑटोमेशन जैसी नई तकनीकों की स्किल है, उनके लिए अवसर अभी भी मौजूद हैं. वहीं पुराने प्रोफाइल में काम करने वालों के लिए रीस्किलिंग और अपस्किलिंग पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नेपाल जाने वालों को राहत, अब ले जा सकेंगे इतने हजार रुपए</title>
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        <description><![CDATA[ Nepal Currency Rules: अगर आप भी नेपाल घूमने या किसी जरूरी काम से जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों के लिए भारतीय मुद्रा ले जाने और लाने से जुड़े नियमों में बड़ी राहत दी है. अब दोनों देशों के नागरिक तय सीमा तक भारतीय नोट नेपाल ले जाना और वहां से वापस ला सकते हैं. इससे नेपाल जाने वाले यात्रियों और व्यापारियों को काफी सुविधा मिलेगी और पैसे एक्सचेंज करवाने की झंझट खत्म होगी.
हालांकि, यह अनुमति सभी नोटों पर लागू नहीं होगी. यह नियम सिर्फ कुछ खास मूल्यवर्ग के नोटों पर ही लागू होगी और इसके लिए एक अधिकतम सीमा भी तय की गई है. ऐसे में नेपाल जाने से पहले इन नए नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है.
क्या है नेपाल का नया नियम?

भारतीय और नेपाली नागरिक अब 25,000 तक की भारतीय मुद्रा नेपाल ला और वहां से ले जा सकते हैं.
एक व्यक्ति अधिकतम 25,000 तक की भारतीय मुद्रा अपने साथ रख सकता है.&amp;nbsp;
यह नियम नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) की तरफ से गुरुवार को जारी एक सूचना के तहत लागू की गई है.

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किन नोटों पर अब भी है रोक?

2016 से पहले जारी 500 और 1,000 के पुराने भारतीय नोट नेपाल में अब भी प्रतिबंधित रहेंगे.
इन नोटों को नेपाल ले जाना या वहां से लाना अनुमति के दायरे में नहीं आता.

किन बातों का रखना होगा ध्यान?

नेपाली नागरिक भारत के अलावा किसी अन्य देश से भारतीय मुद्रा नेपाल नहीं ला सकते.
इसी तरह भारत को छोड़कर किसी अन्य देश में नेपाल से भारतीय मुद्रा ले जाने की इजाजत नहीं है.
सरकार के मुताबिक यह नए नियम सिर्फ भारत-नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वाले लोगों के लिए लागू होगा.&amp;nbsp;

विदेशी मुद्रा को लेकर क्या हैं नियम?

नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री बिना सीमा शुल्क घोषणा के 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा नेपाल ला सकते हैं.
अगर इससे ज्यादा विदेशी मुद्रा साथ है, तो नेपाल पहुंचने पर सीमा शुल्क अधिकारियों के सामने इसकी घोषणा करना जरूरी होगा.

Layoffs के बाद IT सेक्टर की तस्वीर बदली, जानें अप्रेजल- सैलरी स्ट्रक्चर और नई नौकरियों का पूरा लेखा-जोखा
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नमक&amp;चाय और दाल, सब होगा महंगा, TATA बढ़ाएगी कीमतें</title>
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        <description><![CDATA[ Tata Consumer Products: अगर आप रोजमर्रा के जरूरत की समान की खरीदारी करते हैं, तो आने वाले दिनों में आपकी जेब पर ज्यादा बोझ पड़ सकता है. टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (TCPL) ने संकेत दिए हैं कि कच्चे माल की लगातार बढ़ती लागत के कारण कंपनी आने वाले दिनों में अपने कई प्रोडक्ट की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है.
कंपनी का कहना है कि अगर प्रोडक्ट लागत में लगातार बढ़ोतरी होती रही, तो मुनाफा बनाए रखने के लिए उन्हें कुछ चीजों की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है. इनमें चाय, नमक और ब्रांडेड दालें जैसी इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें शामिल हैं. फिलहाल कंपनी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुई हैं और आगे की रणनीति भी वह उसी के आधार पर करेगी.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?

कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे इसका असर कंपनी की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है.
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर सप्लाई चेन पर पड़ रहा है.
मानसून में देरी के कारण चाय की पत्तियों की कीमत बढ़ी है.
चाय की पत्तियों की लागत में करीब 7% से 10% की बढ़ोतरी हुई है.

नेपाल जाने वालों को राहत, अब ले जा सकेंगे इतने हजार रुपए
किन उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है?

टाटा टी (चाय)
टाटा सॉल्ट (नमक)
टाटा संपन्ना ब्रांड की दालें
अन्य पैकेज्ड फूड उत्पाद

कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?

तिमाही के दौरान कंपनी का कुल राजस्व 5,348.88 करोड़ रहा.
पिछले साल के मुकाबले में राजस्व में करीब 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 444.86 करोड़ हो गया, जो करीब 28% अधिक है.

क्या है कंपनी का प्लान?

कंपनी ने हाल ही में चाय की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है.
अगले 15 से 30 दिनों तक बाजार की स्थिति पर नजर रखी जाएगी.
इसके बाद जरूरत पड़ने पर कीमतों में और बदलाव का फैसला लिया जा सकता है.
अगर आने वाले इन दिनों में लागत में राहत नहीं मिली, तो अन्य उत्पादों की कीमतें भी बधाई जा सकती है.

Layoffs के बाद IT सेक्टर की तस्वीर बदली, जानें अप्रेजल- सैलरी स्ट्रक्चर और नई नौकरियों का पूरा लेखा-जोखा
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITR: ई&amp;फाइलिंग साइट ठप, टैक्सपेयर्स की बढ़ी मुश्किलें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/itr-ई-फाइलिंग-साइट-ठप-टैक्सपेयर्स-की-बढ़ी-मुश्किलें</link>
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        <description><![CDATA[ ITR Filing Deadline: 31 जुलाई को इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की लास्ट डेट है. ऐसे में कई टैक्सपेयर्स और CAs ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-फाइलिंग पोर्टल के सिस्टम में परेशानी आने की शिकायत की है. बड़ी तादाद में लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर के कहा कि पोर्टल सही से काम नहीं कर रहा है, जिससे उन्हें ITR फाइल करने और पैसा जमा करने में परेशानी हो रही है.
यूजर्स मुताबिक, कई लोगों को पोर्टल पर लॉग-इन करने में भी परेशानी हो रही है. कुछ लोगों का कहना था कि ये परेशानी कई घंटों तक हो रही थी, लेकिन कुछ यूजर्स ने कहा कि पोर्टल बिल्कुल ही डाउन हो गया था. जिससे ITR फाइलिंग और पैसा जमा करने में भी परेशानी हो रही.
यूजर्स क्या शिकायतें कर रहे हैं?
एक यूजर ने X पर लिखा, दो घंटे से इनकम टैक्स पोर्टल काम नहीं कर रहा है और ITR फाइल नहीं हो रही है और पैसा जमा भी नहीं हो रहा है. कम से कम इनकम टैक्स डे पर तो पोर्टल सही से काम करना चाहिए था. &amp;nbsp;वहीं, एक और यूजर ने लिखा कि ई-फाइलिंग पोर्टल काफी देर तक बंद रहा, इसी वजह से कोई भी रिटर्न फाइल या पैसा जमा नहीं हुआ.&amp;nbsp;

Respect to every CA who&amp;rsquo;s spending more time watching the IncomeTax portal load than actually filing ITRs today. ????I&amp;rsquo;ve been staring at the portal &amp;ldquo;LOADING&amp;rdquo; circle for 2 login attempts after clicking Proceed.Should I file my ITR or meditate? ????Anyone able to succeed today?&amp;hellip; pic.twitter.com/ePDCDTsoTy
&amp;mdash; Savings Simplified (@SavingsSimpl) July 17, 2026

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सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी बताया कि अगर ये परेशानी जल्दी सही नहीं होती है तो 31 जुलाई की ITR फाइलिंग की लास्ट डेट आगे करनी चाहिए. &amp;nbsp;लेकिन फिलहाल सरकार या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से डेडलाइन आगे करने को लेकर अभी तक कुछ नहीं कहा गया है.
अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा ITR जमा किए गए
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट के हिसाब से इस साल 2026-27 के लिए अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा ITR जमा किए गए है. हर साल लास्ट डेट आने पर बड़ी तादाद में लोग अपना रिटर्न फाइल करते हैं. ऐसे में पोर्टल पर अक्सर परेशानी भी आती हैं.&amp;nbsp;
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पोर्टल में क्या परेशानी हुई हैं, इसको लेकर कुछ नहीं कहा और ये भी नहीं बताया कि परेशानी क्यों हो रही थी. फिलहाल, जिन टैक्सपेयर्स को पोर्टल यूज करने में परेशानी हो रही है, उन्हें पोर्टल सही होने का इंतजार करना होगा. जब तक डिपार्टमेंट की तरफ से कोई अपडेट नहीं आ जाता है, तब तक ITR जमा करने की लास्ट डेट 31 जुलाई तक ही होगी.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रात में ऑनलाइन शॉपिंग से बचें, अपनाएं स्मार्ट टिप्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रात-में-ऑनलाइन-शॉपिंग-से-बचें-अपनाएं-स्मार्ट-टिप्स</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/रात-में-ऑनलाइन-शॉपिंग-से-बचें-अपनाएं-स्मार्ट-टिप्स</guid>
        <description><![CDATA[ Online Shopping Tips: आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है. अब लोगों को कपड़ों से लेकर ग्रॉसरी और इलेक्ट्रॉनिक्स के समान के लिए मार्केट जाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि अब लोग मिनटों में घर बैठे ऑर्डर कर लेते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग दिनभर बिजी रहन के कारण देर रात आराम से मोबाइल पर शॉपिंग करना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार यही आदत जरूरत से ज्यादा खर्च का कारण बन जाती है.
दरअसल, रात के समय लोग आराम के मूड में होते हैं और बिना ज्यादा सोच-समझ के ऑफर या डिस्काउंट देखकर ऑर्डर कर लेते हैं. ऐसे में कई ऐसे प्रोडक्ट भी कार्ट में शामिल कर दिया जाता है, जिनकी जरूरत हमें नहीं होती है.&amp;nbsp;
रात में क्यों बढ़ जाता है फिजूल खर्च?
रात के समय लोगों का नींद ज्यादा रिलैक्स होता है और ऐसे में लोग ज्यादातर सोशल मीडिया या शॉपिंग ऐप स्क्रॉल करते हुए कई ऐसे प्रोडक्ट खरीद लेते हैं, जिनकी वास्तव में उन्हें कोई जरूरत नहीं होती. इस दौरान लिमिटेड टाइम ऑफर, फ्लैश सेल और भारी डिस्काउंट जैसे मैसेज देखकर अचानक जल्दबाजी में खरीदारी करने का मन बन जाता है. इस आदत को इम्पल्स बायिंग कहा जाता है, जो धीरे-धीरे आपकी बजट को बिगाड़ सकती है.
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ऑनलाइन शॉपिंग कैसे करें?

खरीदारी से पहले जरूरी सामान की लिस्ट तैयार करें.
सिर्फ ऑफर या डिस्काउंट देखकर सामान न खरीदें.
महंगी चीज खरीदने से पहले सोचें कि उसकी हमें सच में जरूरत है या नहीं.
फ्री डिलीवरी या कैशबैक के लालच में गैर-जरूरी सामान खरीदने से बचें.
हर महीने ऑनलाइन शॉपिंग का बजट तय करें.
समय-समय पर अपने ऑनलाइन खर्च की नियमित समीक्षा करें.

खरीदने से पहले कीमत जरूर करें चेक
अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो ऐसे में जरूरी है कि आप किसी भी सामान को खरीदने से पहले अलग-अलग वेबसाइट और ऐप पर उसकी कीमत को ध्यान से देखें. अगर आपको उस सामान की तुरंत जरूरत नहीं है, तो एक-दो दिन इंतजार करना भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. कई बार कुछ समय बाद वही प्रोडक्ट कम कीमत में बिकने लगती है.&amp;nbsp;
ITR: ई-फाइलिंग साइट ठप, टैक्सपेयर्स की बढ़ी मुश्किलें
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रात, में, ऑनलाइन, शॉपिंग, से, बचें, अपनाएं, स्मार्ट, टिप्स</media:keywords>
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    <item>
        <title>इस ट्रेवल कंपनी पर एक्शन, 73 अरब का लगा जुर्माना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-ट्रेवल-कंपनी-पर-एक्शन-73-अरब-का-लगा-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ Online Travel Booking: अगर आप भी ऑनलाइन होटल या ट्रैवल बुकिंग करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. हाल ही में चीन की सरकार ने देश की प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनी Trip.com Group के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. सरकार ने कंपनी पर 5.2 बिलियन युआन (करीब 765 मिलियन डॉलर) यानी करीब 7,300 करोड़ (73 अरब रुपये) का जुर्माना लगाया है.
चीन बाजार के नियामक SAMR ने आरोप लगाया गया कि कंपनी ने अपनी मजबूत बाजार हिस्सेदारी का गलत फायदा उठाते हुए कुछ होटलों के साथ ऐसे समझौते किए, जिनसे उन्हें दूसरे ट्रैवल प्लेटफॉर्म के साथ काम करने में काफी दिक्कतें आई है. यह भी बताया गया कि कंपनी ने प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली कई कारोबारी शर्तें लागू की थीं, जिसके बाद सरकार ने कंपनी पर यह सख्त कार्रवाई की.
क्या हैं कंपनी पर आरोप?

कुछ होटलों के साथ एक्सक्लूसिव एग्रीमेंट करना.
प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर होटल लिस्ट करने से रोकना.
होटलों पर अपने प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा कम कीमत रखने का दबाव बनाना.
2020 में अपनी बाहर स्थिति का कथित तौर पर दुरुपयोग करना.

ITR: ई-फाइलिंग साइट ठप, टैक्सपेयर्स की बढ़ी मुश्किलें
कितना लगा जुर्माना?

कुल जुर्माना: 5.2 बिलियन युआन (765 मिलियन अमेरिकी डॉलर) यानी करीब 7,300 करोड़ (73 अरब) रुपये
अवैध कमाई जब्त: 1.6 बिलियन युआन (245 मिलियन अमेरिकी डॉलर) यानी करीब 2,330 करोड़ रुपये
अलग से लगाया गया जुर्माना: 3.5 बिलियन युआन (520 मिलियन अमेरिकी डॉलर) यानी करीब 4,970 करोड़
होटलों को लौटाने का आदेश: 122 मिलियन युआन (18 मिलियन अमेरिकी डॉलर) करीब 172 करोड़

कंपनी ने क्या कहा?
Trip.com Group ने चीन के नियामक के फैसले को कबूल करते हुए कहा है कि वह जुर्माने का पूरी तरह पालन करेगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें पहले के मुकाबले ज्यादा सुधारात्मक कदम लागू किए जाएंगे और भविष्य में इन्हीं नियमों का पालन जरूर करेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Pralhad Joshi Net Worth: कितनी है नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नेटवर्थ, जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pralhad-joshi-net-worth-कितनी-है-नए-शिक्षा-मंत्री-प्रह्लाद-जोशी-की-नेटवर्थ-जानें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/pralhad-joshi-net-worth-कितनी-है-नए-शिक्षा-मंत्री-प्रह्लाद-जोशी-की-नेटवर्थ-जानें</guid>
        <description><![CDATA[ New Education Minister Pralhad Joshi Net Worth: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के जबरदस्त विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री ध्रमेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. अब ध्रमेंद्र प्रधान की जगह केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जानिए नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नेट वर्थ कितनी है.
बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और उनके परिवार ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने हलफनामे में 21 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति घोषित की थी. प्रह्लाद जोशी कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के सांसद हैं. इन्होंने साल 2024 में उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करते समय अपनी संपत्ति का खुलासा किया था.
प्रह्लाद जोशी ने नामांकन के समय...

अपने नाम पर 2.72 करोड़ रुपए
अपनी पत्नी ज्योति के नाम पर 5.93 करोड़ रुपए
और अपनी आश्रित बेटी अनन्या जोशी के नाम पर 32.03 लाख रुपए की चल संपत्ति घोषित की थी.

बता दें कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के नाम पर 11.24 करोड़ रुपए और उनकी पत्नी के नाम पर 86.39 लाख रुपए की अचल संपत्ति है. प्रह्लाद जोशी अब शिक्षा मंत्रालय के अलावा उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय भी संभाल रहे हैं.&amp;nbsp;
ITR: ई-फाइलिंग साइट ठप, टैक्सपेयर्स की बढ़ी मुश्किलें
पूर्व शिक्षा मंत्री ध्रमेंद्र प्रधान की नेटवर्थ कितनी है?
शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले ध्रमेंद्र प्रधान की नेटवर्थ 6.92 करोड़ रुपए है. बड़ी बात यह है कि इसमें उनकी चल और अचल संपत्ति दोनों हैं. चुनाव आयोग में दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपए की संपत्ति दर्ज है. इसमें बैंक बैलेंस, इनवेस्टमेंट, गाड़ी, सोना-चांदी और कई चल संपत्तियां शामिल हैं. &amp;nbsp;अचल संपत्ति के मामले में उनके पास जमीन और घर हैं. सीजेपी के प्रदर्शनकारियों ने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर ध्रमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी.
इस ट्रेवल कंपनी पर एक्शन, 73 अरब का लगा जुर्माना
&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Pralhad, Joshi, Net, Worth:, कितनी, है, नए, शिक्षा, मंत्री, प्रह्लाद, जोशी, की, नेटवर्थ, जानें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate Today: आज कितने का मिलेगा 14 किलो वाला गैस सिलेंडर, जानें एलपीजी की ताजा रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-आज-कितने-का-मिलेगा-14-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-एलपीजी-की-ताजा-रेट-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-आज-कितने-का-मिलेगा-14-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-एलपीजी-की-ताजा-रेट-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 25 July 2026: अगर आपके घर का गैस सिलेंडर खत्म हो गया है और आप नई बुकिंग करने जा रहे हैं तो ये खबर आपके लिए ही है. आज घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के भाव में कितने बदलाव हुए हैं, ये आप यहां से चेक कर सकते हैं. यहां अलग- अलग शहर के एलपीजी रेट के बारे में डिटेल में बताया गया है.
घरेलू (14.2 किलोग्राम) एलपीजी सिलेंडर के रेट-

दिल्ली- 942.00&amp;nbsp;
मुंबई- 941.50&amp;nbsp;
कोलकाता- 968.00&amp;nbsp;
चेन्नई- 957.50&amp;nbsp;
बेंगलुरु- 945.50&amp;nbsp;
हैदराबाद- 995.50&amp;nbsp;
जयपुर- 956.50&amp;nbsp;
लखनऊ- 980.50&amp;nbsp;
चंडीगढ़- 955.50&amp;nbsp;
पटना- 1,001.00

आज का पेट्रोल-डीजल रेट, जानिए 25 जुलाई 2026 को आपके शहर में क्या हैं ताजा कीमतें
कमर्शियल (19 किलोग्राम) एलपीजी सिलेंडर के रेट-

दिल्ली- 1,766.00&amp;nbsp;
मुंबई- 1,717.00&amp;nbsp;
कोलकाता- 1,879.00&amp;nbsp;
चेन्नई- 1,929.00&amp;nbsp;
बेंगलुरु- 1,837.00&amp;nbsp;
हैदराबाद- 1,978.00&amp;nbsp;
जयपुर- 1,804.00&amp;nbsp;
लखनऊ- 1,910.00&amp;nbsp;
चंडीगढ़- 1,786.00&amp;nbsp;
पटना- 2,018.00&amp;nbsp;

क्या आज बदले गैस सिलेंडर के दाम?
आज, 25 जुलाई 2026 को घरेलू यानी 14.2 किलोग्राम और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर यानी 19 किलोग्राम की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है. तेल विपणन कंपनियों ने मौजूदा दरों को ही बरकरार रखा है.
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क्यों नहीं बदले एलपीजी के दाम?
एलपीजी सिलेंडर की कीमतें आमतौर पर हर महीने की शुरुआत में तेल कंपनियों द्वारा समीक्षा के बाद तय की जाती हैं. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, एलपीजी आयात लागत, डॉलर-रुपये की विनिमय दर और सरकारी नीतियां इन कीमतों को प्रभावित करती हैं. जुलाई के अंतिम सप्ताह तक घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के रेट स्थिर बने हुए हैं.
कैसे चेक करें अपने शहर का एलपीजी रेट?
उपभोक्ता इंडियन ऑयल, भारत गैस और एचपी गैस की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने शहर की ताजा एलपीजी कीमत देख सकते हैं. इसके अलावा, ऑनलाइन एलपीजी पोर्टल पर भी नए रेट रहते हैं.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, आज, कितने, का, मिलेगा, किलो, वाला, गैस, सिलेंडर, जानें, एलपीजी, की, ताजा, रेट, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Bank Holiday Today: आज 25 जुलाई को बैंक खुले हैं या बंद हैं? घर से निकलने से पहले दूर करें कंफ्यूजन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bank-holiday-today-आज-25-जुलाई-को-बैंक-खुले-हैं-या-बंद-हैं-घर-से-निकलने-से-पहले-दूर-करें-कंफ्यूजन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/bank-holiday-today-आज-25-जुलाई-को-बैंक-खुले-हैं-या-बंद-हैं-घर-से-निकलने-से-पहले-दूर-करें-कंफ्यूजन</guid>
        <description><![CDATA[ Bank Holiday Today 25 July 2026: अगर आज आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो घर से निकलने से पहले यह खबर जरूर पढ़ लें. आज 25 जुलाई 2026, दिन शनिवार को देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी. इसकी वजह यह है कि आज महीने का चौथा शनिवार है और RBI के नियमों के अनुसार हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहते हैं.
आज बैंक क्यों बंद हैं?RBI के बैंक अवकाश नियमों के मुताबिक देशभर में बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं. चूंकि आज 25 जुलाई चौथा शनिवार है, इसलिए सभी बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा. इसके बाद रविवार होने के कारण 26 जुलाई को भी बैंक बंद रहेंगे. इसके अलावा 27 जुलाई से 1 अगस्त के बीच किसी राज्य के लिए कोई अलग बैंक हॉलिडे नहीं है.
आज कितने का मिलेगा 14 किलो वाला गैस सिलेंडर, जानें एलपीजी की ताजा रेट लिस्ट
किन बैंकों पर लागू होगी छुट्टी?

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया&amp;nbsp;
पंजाब नेशनल बैंक
बैंक ऑफ बड़ौदा
केनरा बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
इंडियन बैंक
एचडीएफसी बैंक
आईसीआईसीआई बैंक
एक्सीस बैंक
कोटक महिंद्रा बैंक
IndusInd बैंक
यश बैंक

क्या ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं चालू रहेंगी?भले ही बैंक शाखाएं बंद रहें, लेकिन डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रहेंगी. ग्राहक UPI से भुगतान करने के लिए इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, ATM से नकदी निकासी, NEFT और IMPS और बैलेंस चेक और फंड ट्रांसफर कर सकते हैं. हालांकि, शाखा में जाकर किए जाने वाले काम जैसे नकद जमा, चेक क्लियरेंस, डिमांड ड्राफ्ट या पासबुक अपडेट अगले कार्य दिवस पर ही होंगे.
आज का पेट्रोल-डीजल रेट, जानिए 25 जुलाई 2026 को आपके शहर में क्या हैं ताजा कीमतें
अगला बैंकिंग कार्य दिवस कब होगा?आज चौथा शनिवार और कल रविवार होने के कारण बैंक लगातार दो दिन बंद रहेंगे. ऐसे में अधिकांश राज्यों में बैंक शाखाएं सोमवार, 27 जुलाई 2026 को दोबारा खुलेंगी.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Holiday, Today:, आज, जुलाई, को, बैंक, खुले, हैं, या, बंद, हैं, घर, से, निकलने, से, पहले, दूर, करें, कंफ्यूजन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CJP Protest: &amp;apos;महंगा&amp;apos; पड़ रहा जंतर मंतर प्रदर्शन, वीकएंड पर ओला उबर रैपिडो का किराया बढ़ा! मेट्रो स्टेशन बंद होने से परेशानी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cjp-protest-महंगा-पड़-रहा-जंतर-मंतर-प्रदर्शन-वीकएंड-पर-ओला-उबर-रैपिडो-का-किराया-बढ़ा-मेट्रो-स्टेशन-बंद-होने-से-परेशानी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/cjp-protest-महंगा-पड़-रहा-जंतर-मंतर-प्रदर्शन-वीकएंड-पर-ओला-उबर-रैपिडो-का-किराया-बढ़ा-मेट्रो-स्टेशन-बंद-होने-से-परेशानी</guid>
        <description><![CDATA[ CJP Protest Jantar Mantar: सोनम वांगचुके के अनशन खत्म करने के बाद भी दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जारी है. वीकएंड होने के चलते आज जंतर मंजर पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटने की आशंका है. उधर डीएमआरसी ने पहले ही जंतर मंतर और संसद के आस पास के 18 मेट्रो स्टेशन को बंद कर रखा है. ऐसे में लोगों को जंतर मंतर पहुंचने के लिए शनिवार और रविवार अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है.&amp;nbsp;
दरअसल जंतर मंतर की ओर जाने वाले सभी मेट्रो स्टेशन बंद हैं, जो वहां पहुंचने के लिए सबसे आसान तरीका है. ऐसे में अब लोग ऑनलाइन कैब बुकिंग सेवाएं ले रहे हैं. इसी वजह से ओला, उबर और रैपिडो जैसी प्रमुख राइड-हेलिंग कंपनियों ने किराए में इजाफा कर दिया है.&amp;nbsp;
बता दें कि पीक टाइम पर या किसी एक जगह पर जब यात्रियों की संख्या अचानक बहुत बढ़ जाती है तो उस इलाके में या उस इलाके की ओर जाने वाली गाड़ियों की संख्या सीमित होती है. डिमांड ज्यादा बढ़ने के चलते ऑनलाइन कैब बुकिंग सेवाएं महंगी हो जाती हैं. ऐसे में सिस्टम खुद-ब-खुद किराया बढ़ा देता है.
Bank Holiday Today: आज 25 जुलाई को बैंक खुले हैं या बंद हैं? घर से निकलने से पहले दूर करें कंफ्यूजन
जंतर मंतर जाने के लिए अभी कितना किराया वसूल रही कैब कंपनियां?
अगर गाजियाबाद से जंतर मंतर जा रहे हैं तो...

बाइक से 250 से 300 रुपए
कैब इकॉनोमी- 500 से 550 रुपए
कैब प्रायोरिटी- 600 से 650 रुपए
कैब प्रिमियम- 650 से 700 रुपए
कैब एक्सएल- 900 से 1000 रुपए

अगर नोएडा से जंतर मंतर जा रहे हैं तो...

बाइक से 200 से 250 रुपए
ऑटो एनसीआर- 300 से 350 रुपए
कैब इकॉनोमी- 450 से 500 रुपए
कैब प्रायोरिटी- 500 से 550 रुपए
कैब प्रिमियम- 550 से 650 रुपए
कैब एक्सएल- 750 से 800 रुपए

अगर गुरुग्राम से जंतर मंतर जा रहे हैं तो...

बाइक से 350 से 400 रुपए
कैब इकॉनोमी- 550 से 600 रुपए
कैब प्रायोरिटी- 580 से 650 रुपए
कैब प्रिमियम- 600 से 750 रुपए
कैब एक्सएल- 850 से 900 रुपए

कम किराए के लिए क्या करें?
बता दें कि अगर आपको गाजियाबाद, नोएडा या ग्रुरुग्राम से जंतर मंतर पहुंचना है तो आप मेट्रो स्टेशन से उस नजदीकी मेट्रो स्टेशन पहुंच सकते हैं, जो खुला भी है और जंतर मंतर के आस पास है. इसके बाद आप वहां से ऑटो या कैब बुक करके जंतर मंतर पहुंच सकते हैं. लेकिन इसके लिए आपको ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है.
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 15:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP, Protest:, महंगा, पड़, रहा, जंतर, मंतर, प्रदर्शन, वीकएंड, पर, ओला, उबर, रैपिडो, का, किराया, बढ़ा, मेट्रो, स्टेशन, बंद, होने, से, परेशानी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold&amp; Silver Price Today: क्या सावन में सस्ता होगा सोना? जानें आज 25 जुलाई को कितना है सोने&amp; चांदी का भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-क्या-सावन-में-सस्ता-होगा-सोना-जानें-आज-25-जुलाई-को-कितना-है-सोने-चांदी-का-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-क्या-सावन-में-सस्ता-होगा-सोना-जानें-आज-25-जुलाई-को-कितना-है-सोने-चांदी-का-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today 25 July 2026: सावन का महीना शुरू होते ही सोने और चांदी की खरीदारी में तेजी देखने को मिलती है. शादी-ब्याह, त्योहारों और धार्मिक अवसरों के कारण इस दौरान ज्वेलरी की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में अगर आप भी सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं तो पहले आज का ताजा भाव जान लेना जरूरी है. जान लें कि आज यानी 25 जुलाई 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. बाजार में सोना पिछले कारोबारी सत्र के स्तर पर ही कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी की कीमत भी लगभग स्थिर बनी हुई है.&amp;nbsp;
आज सोने का भाव-&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट सोना (10 ग्राम)
22 कैरेट सोना (10 ग्राम)
18 कैरेट सोना (10 ग्राम)


दिल्ली
₹147420
₹135150
₹110610


मुंबई
₹147280
₹135000
₹110460


कोलकाता
₹147280
₹135000
₹110460


चेन्नई
₹147280
₹135000
₹113150


पटना
₹147320
₹135050
₹110510


लखनऊ
₹147420
₹135150
₹110610


मेरठ
₹147420
₹135150
₹110610


अयोध्या
₹147420
₹135150
₹110610


कानपुर
₹147420
₹135150
₹110610


गाजियाबाद
₹147420
₹135150
₹110610


नोएडा
₹147420
₹135150
₹110610


गुरुग्राम
₹147420
₹135150
₹110610


चंडीगढ़
₹147420
₹135150
₹110610


जयपुर
₹147420
₹135150
₹110610


लुधियाना
₹147420
₹135150
₹110610


गुवाहाटी
₹147280
₹135000
₹110460


जलगांव
₹147280
₹135000
₹110460


इंदौर
₹147320
₹135050
₹110510


अहमदाबाद
₹147320
₹135050
₹110510


वडोदरा
₹147320
₹135050
₹110510


सूरत
₹147320
₹135050
₹110510


पुणे
₹147280
₹135000
₹110460


नागपुर
₹147280
₹135000
₹110460


नासिक
₹147310
₹135030
₹110490


बैंगलोर
₹147280
₹135000
₹110460


भुवनेश्वर
₹147280
₹135000
₹110460


रायपुर
₹147280
₹135000
₹110460


हैदराबाद
₹147280
₹135000
₹110460



&#039;महंगा&#039; पड़ रहा जंतर मंतर प्रदर्शन, वीकएंड पर ओला उबर रैपिडो का किराया बढ़ा! मेट्रो स्टेशन बंद होने से परेशानी
आज चांदी का भाव-&amp;nbsp;



शहर
1 किलो चांदी का भाव


दिल्ली
₹2,40,000


मुंबई
₹2,40,000


कोलकाता
₹2,40,000


चेन्नई
₹2,45,000


पटना
₹2,40,000


लखनऊ
₹2,40,000


अयोध्या
₹2,40,000


कानपुर
₹2,40,000


मेरठ
₹2,40,000


गाजियाबाद
₹2,40,000


नोएडा
₹2,40,000


गुरुग्राम
₹2,40,000


चंडीगढ़
₹2,40,000


जयपुर
₹2,40,000


लुधियाना
₹2,40,000


गुवाहाटी
₹2,40,000


इंदौर
₹2,40,000


अहमदाबाद
₹2,40,000


वडोदरा
₹2,40,000


सूरत
₹2,40,000


पुणे
₹2,40,000


नागपुर
₹2,40,000


नासिक
₹2,40,000


बैंगलोर
₹2,40,000


भुवनेश्वर
₹2,45,000


रायपुर
₹2,40,000


हैदराबाद
₹2,45,000



क्या सावन में सस्ता होगा सोना?
सावन में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम रहती है. इसकी वजह इस अवधि में ज्वेलरी की मांग बढ़ना है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाओं का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है. अगर वैश्विक बाजार में कमजोरी आती है तो सोने की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;
आज बैंक खुले हैं या बंद हैं? जानें 25 जुलाई को छुट्टी का क्या है कारण
अभी खरीदें या करें इंतजार?
अगर आप शादी, त्योहार या खुद की जरूरत के लिए सोना खरीद रहे हैं तो केवल कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव का इंतजार करना जरूरी नहीं है. वहीं, निवेश के नजरिए से खरीदारी करने वाले निवेशक SIP या किस्तों में निवेश की रणनीति अपना सकते हैं, जिससे कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है. ]]></description>
        <enclosure url="http://hindi.attentionindia.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a64892ec4593.jpg" length="96672" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-, Silver, Price, Today:, क्या, सावन, में, सस्ता, होगा, सोना, जानें, आज, जुलाई, को, कितना, है, सोने-, चांदी, का, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Flipkart News: ऑर्डर किया सवा लाख का iPhone, निकला दाढ़ी बढ़ाने का तेल, कोर्ट ने फ्लिपकार्ट पर ठोका भारी जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ Fine on Flipkart: ऑनलाइन शॉपिंग करना हर किसी को पसंद होता है. एक्साइटिंग ऑफर्स और महंगे प्रोडेक्ट्स पर आसान ईएमआई ऑनलाइन शॉपिंग को और दिलचस्प बना देती है. लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग में कई बार धोखाधड़ी का सामना भी करना पड़ जाता है. सोचिए आपने ऑनलाइन महंगा आईफोन ऑर्डर किया और जब डिलीवरी हुई तो उसमें आईफोन नहीं बल्कि दाढ़ी वाला तेल निकला. आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी.&amp;nbsp;
ताजा मामला देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का है. यहां एक शख्स ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट से 1 लाख 11 हजार रुपए में आईफोन 14 प्रो (128 जीबी) का ऑर्डर किया. लेकिन डिब्बे में उसको दाढ़ी बढ़ाने वाला तेल मिला. इसके बाद शख्स ने मुंबई की कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.&amp;nbsp;
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
इस केस की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फ्लिपकार्ट को एक ग्राहक को 1.11 लाख रुपए से ज्यादा की राशी वापस करने का निर्देश दिया. इतना ही नहीं कोर्ट ने फ्लिपकार्ट और आईफोन बेचने वाले विक्रेता को ग्राहक को मुआवजे और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 70 हजार रुपए का भुगतान करने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि &amp;nbsp;ग्राहकों की शिकायतों को बिना कोई राहत दिए बार-बार बंद करना अनुचित है.
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कोर्ट ने केस की सुनवाई के दौरान पाया कि ग्राहक ने जरूरी भुगतान करने के बाद फ्लिपकार्ट से आईफोन का ऑर्डर दिया था. सही प्रोडक्ट की &amp;nbsp;डिलीवरी सुनिश्चित करना प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी थी. कोर्ट ने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिक्री की सुविधा देने के बाद लेने देन से खुद को अलग नहीं रख सकता.
फ्लिपकार्ट और विक्रेता दोनों हैं सेवा में कमी के दोषी- कोर्ट
इसके बाद कोर्ट ने विक्रेता यानी इंटरनेशनल वैल्यू रिटेल प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी पाया. कोर्ट ने कहा कि बार-बार अपील करने के बावजूद विक्रेता आईफोन देने या ग्राहक की शिकायत का समाधान करने में फेल रहा. कोर्ट ने फ्लिपकार्ट और विक्रेता दोनों को संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से उत्तरदायी ठहराते हुए कहा कि वे शिकायतकर्ता को हुए नुकसान और असुविधा के लिए जिम्मेदार हैं.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 03:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP Protest: सीजेआई आंदोलन के बाद दिल्ली में व्यापार ठप, CTI ने PM मोदी को लिखा पत्र, क्या&amp;क्या मांग की?</title>
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        <description><![CDATA[ CTI Letter to PM Modi: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की ओर से लगातार हो रहे बड़े धरना-प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण राजधानी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होने का दावा किया गया है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजते हुए जल्द समाधान की मांग की है.
संगठन का कहना है कि बाजारों में ग्राहकों की संख्या तेजी से घटी है, कारोबार प्रभावित हुआ है और व्यापारियों के साथ होटल, रेस्टोरेंट और सेवा क्षेत्र पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है.
PM मोदी को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि दिल्ली में चल रहे धरना-प्रदर्शनों का सीधा असर व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. संगठन के अनुसार राजधानी में प्रतिदिन होने वाले लगभग 500 करोड़ रुपये के कारोबार में करीब 70 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की जा रही है. सीटीआई ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर जल्द समाधान निकालने का आग्रह किया है.
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5 दिनों में 1500 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान होने का दावा
सीटीआई की ओर से प्रमुख बाजारों, होटल और रेस्टोरेंट से जुटाई गई जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि पिछले पांच दिनों के दौरान दिल्ली में लगभग 1500 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ है. संगठन का कहना है कि इस अवधि में बाजारों, होटल और रेस्टोरेंट में ग्राहकों की आवाजाही करीब 70 प्रतिशत तक घट गई है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं.
बाहरी राज्यों से आने वाले ग्राहकों की संख्या भी घटी
संगठन के मुताबिक सामान्य दिनों में दिल्ली के बाजारों में खरीदारी के लिए रोजाना करीब तीन लाख लोग बाहर से आते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनकी संख्या में भारी कमी आई है. इसका असर थोक और खुदरा दोनों तरह के कारोबार पर पड़ रहा है.
16 मेट्रो स्टेशन बंद होने और जाम से बढ़ी परेशानी
CTI ने कहा कि सुरक्षा कारणों से 16 मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. वहीं जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति के कारण ग्राहक बाजारों तक पहुंचने से बच रहे हैं. इसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है.
व्यापारियों का राष्ट्रीय सम्मेलन भी करना पड़ा स्थगित
धरना-प्रदर्शनों और यातायात बाधित होने के कारण CTI को अपना प्रस्तावित व्यापारी सम्मेलन भी स्थगित करना पड़ा है. यह सम्मेलन 25 जुलाई को NDMC कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होना था, जिसमें देशभर से 2000 से अधिक व्यापारियों के शामिल होने की उम्मीद थी.
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लोकतंत्र का सम्मान, लेकिन व्यापार भी बचना चाहिए : बृजेश गोयल
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली देश का सबसे बड़ा कारोबारी केंद्र है, जहां रोजाना लाखों लोगों का आवागमन होता है. उनका कहना है कि पिछले पांच दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और मेट्रो स्टेशनों के बंद होने के कारण करीब 15 लाख व्यापारियों और 10 लाख MSME इकाइयों का काम प्रभावित हुआ है.
उन्होंने कहा कि संगठन लोकतंत्र और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन केंद्र सरकार को बातचीत के माध्यम से जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि व्यापार, पर्यटन और रोजगार पर पड़ रहे असर को कम किया जा सके.
CTI ने सरकार के सामने रखीं दो प्रमुख मांगें
CTI ने केंद्र सरकार से दो प्रमुख मांगें रखी हैं. पहली, प्रदर्शनकारियों से तत्काल बातचीत कर जंतर-मंतर पर चल रहे धरने का जल्द समाधान निकाला जाए ताकि सामान्य गतिविधियां बहाल हो सकें. दूसरी, जंतर-मंतर और प्रमुख सरकारी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में एक हजार से अधिक लोगों के प्रदर्शन पर रोक लगे तथा बाहरी दिल्ली में धरना-प्रदर्शनों के लिए एक स्थायी स्थल विकसित किया जाए.
संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेकर राजधानी के व्यापारियों, कारोबारी प्रतिष्ठानों और आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 03:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Car Loan: नई कार का सपना होगा पूरा, 7.35% की शुरुआती दर पर मिल रहा लोन, कहां है सबसे कम EMI?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/car-loan-नई-कार-का-सपना-होगा-पूरा-735-की-शुरुआती-दर-पर-मिल-रहा-लोन-कहां-है-सबसे-कम-emi</link>
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        <description><![CDATA[ Car Loan Interest Rate: अगर आप नई कार खरीदने के लिए लोन लेने की सोच रहे हैं तो जल्दबाजी में फैसला न करें. अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करने से आप अच्छी-खासी सेविंग्स कर सकते हैं. फिलहाल कुछ बैंक 7.35% सालाना की शुरुआती ब्याज दर पर भी कार लोन दे रहे हैं.&amp;nbsp;
समझने वाली बात यह है कि आपको मिलने वाली ब्याज दर आपके क्रेडिट स्कोर, नौकरी, आय, लोन की रकम और लोन की समय सीमा पर निर्भर करेगी. इसलिए हर कस्टमर &amp;nbsp;के लिए ब्याज दर अलग-अलग हो सकती है.
पॉलिसी बाजार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक...

UCO Bank सबसे कम 7.35% की शुरुआती ब्याज दर पर कार लोन दे रहा है.
इसके बाद Canara Bank और Bank of Maharashtra 7.45% से
जबकि Union Bank of India, Punjab &amp;amp; Sind Bank और Indian Bank 7.50% से कार लोन दे रहे हैं.

अगर आप 5 लाख रुपये का लोन 5 साल के लिए लेते हैं तो सबसे कम ब्याज दर पर आपकी EMI करीब 9,983 रुपये होगी. वहीं ज्यादा ब्याज दर होने पर EMI 11,634 रुपये तक पहुंच सकती है. मतलब हर महीने 1,651 रुपये ज्यादा देने पड़ सकते हैं. पूरे 5 साल में यह रकम करीब 99 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. मतलब सिर्फ सही बैंक चुनकर आप लोन की कुल कॉस्ट को काफी कम कर सकते हैं.
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प्राइवेट बैंकों की बात करें तो...

HDFC Bank- 8.15%
ICICI Bank- 8.40%
Federal Bank- 7.65%
Karnataka Bank- 8.14%
और IDFC FIRST Bank 8.99% की शुरुआती ब्याज दर पर कार लोन दे रहे हैं.

लेकिन हर कस्टमर को ब्याज दर उसके प्रोफाइल के हिसाब से ही मिलती है. अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है और आपकी इंकम फिक्स्ड है तो कम ब्याज दर मिलने के चांस बढ़ जाते हैं.
प्रोसेसिंग फीस भी जरूर देखें
कार लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस भी जरूर देख लें. कुछ बैंक कम फीस लेते हैं, जबकि कुछ बैंक लोन की रकम के हिसाब से चार्ज करती है. कई बैंक फिलहाल प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दर पर डिस्काउंट भी दे रहे हैं. साथ ही यह भी पता करें कि बैंक समय से पहले लोन चुकाने पर कोई प्रीपेमेंट चार्ज तो नहीं ले रहा है.
कार लोन लेने से पहले ब्याज दर, लोन की ईएमआई, प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और लोन की बाकी बातों को अच्छी तरह कम्पेयर कर लें. थोड़ी सी समझदारी और सही बैंक का चुनाव आपके पूरे लोन के दौरान हजारों रुपये बचा सकता है और आपकी नई कार का सपना भी ईजी बना सकता है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 03:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Car, Loan:, नई, कार, का, सपना, होगा, पूरा, 7.35, की, शुरुआती, दर, पर, मिल, रहा, लोन, कहां, है, सबसे, कम, EMI</media:keywords>
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        <title>Zomato News: ऑनलाइन खाना क्यों है महंगा? CCI ने जोमैटो को किस बेस पर दी क्लीन चिट? ग्राहक की हार</title>
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        <description><![CDATA[ Online Food Delivery Charges: आज के समय जयदातार लोग ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के जरिए खाना ऑर्डर करते हैं, जिसकी कीमत रेस्तरां के मुकाबले काफी ज्यादा महंगा होता है. अगर आपने भी काभी ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते समय यह नोटिस किया होगा कि ऐप पर खाना महंगा और रेस्तरां में सस्ता मिल रहा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है.
इसी मुद्दे को लेकर एक ग्राहक ने जोमैटो (Eternal Ltd.) के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में शिकायत दर्ज कराई. हालांकि, CCI ने इस मामले की जांच करने के बाद कंपनी को राहत देते हुए शिकायत खारिज कर दी. CCI का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी और सीधे रेस्तरां से खाना खरीदने का तरीका दो अलग-अलग बिजनेस मॉडल हैं. ऐसे में दोनों की कीमतों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती.
क्या था पूरा मामला?
एक ग्राहक ने शिकायत की कि ऑनलाइन ऑर्डर किए गए खाने की कीमत रेस्तरां की मुकाबले में काफी ज्यादा थी. उसने बताया कि रेस्तरां में एक खाने की कीमत 105 रुपये थी, जबकि उसी रेस्तरां ऐप पर उस खाने की कीमत उसे 198 रुपये दिखाई गई. ग्राहक ने आरोप लगाया कि बढ़ी हुई मेन्यू कीमत, प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और टैक्स की वजह से अपने ऐप के जरिए गरहक से ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं. साथ ही उसने यह भी कहा कि जोमैटो के कमीशन के कारण रेस्तरां को अपने ऐप पर खाने के दाम बढ़ाने पड़ते हैं.
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ऑनलाइन खाना महंगा क्यों होता है?

ऑनलाइन ऑर्डर में डिलीवरी, प्लेटफॉर्म जैसी अन्य सेवाओं का खर्च शामिल होता है.
घर बैठे खाना मंगाने की सुविधा के कारण ज्यादा कीमत देना पड़ता है.
टैक्स, डिलीवरी चार्ज और प्लेटफॉर्म फीस भी कुल बिल बढ़ा देते हैं.
फूड डिलीवरी कंपनियां रेस्तरां से कमीशन लेती हैं, जिसकी भरपाई कई बार रेस्तरां अपने ऐप के जरिए कीमत बढ़ाकर करते हैं.

CCI ने किस आधार पर दी क्लीन चिट?

CCI ने कहा कि ग्राहक अपनी सुविधा के लिए अपनी मर्जी से ज्यादा कीमत चुकाते हैं.
प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और टैक्स जैसी सभी जानकारी गरहक को पेमेंट से पहले दिखाई जाती है.
ग्राहक के पास लास्ट पेमेंट तक ऑर्डर कैन्सल करने का ऑप्शन दिया जाता है.
CCI को जांच के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि जोमैटो ने अपने ऐप का गलत फायदा उठाया है.

Credit Card: आपकी सैलरी से ज्यादा क्यों होती है क्रेडिट लिमिट? जानिए इसके पीछे की असली वजह
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Zomato, News:, ऑनलाइन, खाना, क्यों, है, महंगा, CCI, ने, जोमैटो, को, किस, बेस, पर, दी, क्लीन, चिट, ग्राहक, की, हार</media:keywords>
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        <title>ITR Rules: कम कमाई पर भी लग सकता है जुर्माना, 4 लाख वाले भी हैं इस लिस्ट में शामिल, पढ़ें शर्तें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/itr-rules-कम-कमाई-पर-भी-लग-सकता-है-जुर्माना-4-लाख-वाले-भी-हैं-इस-लिस्ट-में-शामिल-पढ़ें-शर्तें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/itr-rules-कम-कमाई-पर-भी-लग-सकता-है-जुर्माना-4-लाख-वाले-भी-हैं-इस-लिस्ट-में-शामिल-पढ़ें-शर्तें</guid>
        <description><![CDATA[ ITR Rules: इनकम टैक्स भरने की आखिरी तिथि अब नजदीक ही है, ऐसे में जिसने भी अब तक ITR फाइल ना किया हो उसे तत्काल प्रभाव से ही कर लेना चाहिए. यदि आपको लगता है कि आपकी आय कम है तो आपको ITR भरने की जरूरत नहीं है, तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है, इससे पहले आप कुछ नियम जान लें, इसके बाद ही आगे कुछ करें.
4 लाख की आय पर टैक्स भरें या ना?आमतौर पर, नई टैक्स व्यवस्था में सालाना आय 4 लाख रुपये और पुरानी टैक्स व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर ITR भरना जरूरी होता है. लेकिन कुछ मामलों में कम आय होने पर भी ITR दाखिल करना जरूरी होता है. इन नियमों को हर टैक्स भरने वाले और ना भरने वाले दोनों के लिए जान लेना बेहद जरूरी है.
ये भी पढ़ें: Used Oil: जो तेल आप खा रहे वो पहले ही हो चुका इस्तेमाल! 46 लाख लीटर पुराना ऑयल जब्त, 29 लाख का लगा जुर्माना
इन स्थितियों में ITR भरना है जरूरी हैयदि आप नहीं जानते हैं कि ITR भरना किन स्थितियों में जरूरी है, तो आइये हम आपको बताते हैं.

अगर आपके वित्त वर्ष में आपके करंट अकाउंट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा है तो ITR दाखिल करना होगा.
अगर आपने अपने या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया है तब भी ITR भरना होगा.
यदि पूरे साल में आपका बिजली बिल 1 लाख रुपये से ज्यादा आता है तो आपके लिए ITR भरना जरूरी होगा.
अगर आपके पास विदेश में कोई संपत्ति है, किसी विदेशी कंपनी में निवेश है या किसी विदेशी बैंक खाते को संचालित करने का अधिकार है, तब भी आपके लिए ITR भरना जरूरी है.

अब तक भरे जा चुके ITRआयकर विभाग के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए अब तक 3 करोड़ से ज्यादा इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल किए जा चुके हैं. सिर्फ 21 जुलाई को ही 15 लाख से ज्यादा लोगों ने अपना ITR भरा है. ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. अगर आप अब भी ITR दाखिल नहीं कर पाए हैं तो अब भी समय है वक्त रहते इनकम टैक्स भर दें.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>LPG Rate Today: गैस सिलेंडर पर 700 रुपये की सब्सिडी! संसद में सरकार का बड़ा खुलासा, इस बीच जानें आज कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-गैस-सिलेंडर-पर-700-रुपये-की-सब्सिडी-संसद-में-सरकार-का-बड़ा-खुलासा-इस-बीच-जानें-आज-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-गैस-सिलेंडर-पर-700-रुपये-की-सब्सिडी-संसद-में-सरकार-का-बड़ा-खुलासा-इस-बीच-जानें-आज-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today on July 24: सरकार की तरफ से गुरुवार को यह जानकारी दी गई कि इस साल जून में पश्चिम एशिया में संकट की वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर पर700 रुपये से ज्यादा की छिपी हुई सब्सिडी मिल रही थी, जिससे ग्राहकों के लिए रिटेल कीमतें किफायती बनी रहीं. संसद में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बहुत अधिक बढ़ने के बावजूद सरकार आम जनता पर इसका बोझ नहीं पड़ने दे रही है.
कितनी है सिलेंडर की असली कीमत?
वैश्विक अनिश्चितताओं और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच एक 14.2 किलोग्राम पर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 1600 रुपये से ज्यादा हो चुकी है. जबकि उपभोक्ताओं को यही सिलेंडर 942 रुपये में मिल रहा है. यानी कि कीमतों में इस अंतर को पाटने के लिए सरकार और सरकारी तेल कंपनियां प्रति सिलेंडर 700 रुपये से ज्यादा का नुकसान खुद उठा रही हैं ताकि आम परिवारों का बजट न बिगड़े.&amp;nbsp;
मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दुनिया भर में LPG की कीमतें तेजी से बढ़ीं. LPG की कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क- सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) अप्रैल और मई 2026 में बढ़कर 780 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया और जून में यह और बढ़कर 796 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया. मंत्रालय ने कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर जून में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की बाजार-निर्धारित कीमत 1695 रुपये है. इस भारी छूट के लिए कारोबारी साल 2025-26 और 2026-27 के दौरान तेल कंपनियों को 30000 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया.&amp;nbsp;
उज्जवला योजना के लाभार्थियों को दोगुना मुनाफा
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के लाभार्थियों को सरकार की तरफ से 300 रुपये की डायरेक्ट सब्सिडी उनके बैंक अकाउंट में भेजी ही जाती है. ऊपर से 700 रुपये की सब्सिडी भी अप्रत्यक्ष रूप से मिल रही है. यानी कि उन्हें प्रति सिलेंडर 1000 रुपये तक का फायदा मिल रहा है क्योंकि उज्जवला के लाभार्थियों को एक सिलेंडर 642 रुपये में मिलता है.&amp;nbsp;
आज कितनी है LPG की कीमत?&amp;nbsp;
आज देश में गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. घरेलू के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडर के दाम आज नहीं बदले गए हैं. इसी के साथ दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2930 रुपये है. इसी तरह मुंबई में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत क्रमश: 941.50 रुपये और 2882 रुपये है. बेंगलुरु में घरेलू सिलेंडर की कीमत 948.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3006 रुपये है.

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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, गैस, सिलेंडर, पर, 700, रुपये, की, सब्सिडी, संसद, में, सरकार, का, बड़ा, खुलासा, इस, बीच, जानें, आज, कीमत</media:keywords>
    </item>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Rate: आज कितने में फुल करा लेंगे गाड़ी की टंकी? जानें कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल&amp;डीजल</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Deisel Rate Today on July 24: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद आज देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. यह देश के आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है कि तेल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर उछाल आने के बाद भी सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियाें&amp;nbsp; (OMCs) ने रिटेल स्तर पर फ्यूल की कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया है. 
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर है.&amp;nbsp;
कब से नहीं बदले गए हैं रेट?
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आखिरी बार बदलाव 25 मई को हुआ था. उस दौरान पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए मई के महीने में लगातार चार बार दाम बढ़ाए गए थे.
सबसे पहले 15 मई को करीब 3 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. फिर 19 मई को कीमतों में लगभग 90 पैसे का इजाफा किया गया था. इसके बाद 23 मई को रेट फिर लगभग 90 पैसे बढ़ा दिए गए. आखिर में 25 मई को 2.61-2.71 रुपये प्रति लीटर की चौथी बढ़ोतरी की गई. कुल मिलाकर इन 10 दिनों के भीतर पेट्रोल लगभग 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ.&amp;nbsp;
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली&amp;nbsp;
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई&amp;nbsp;
111.21 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


पटना&amp;nbsp;
113.35 रुपये
&amp;nbsp;99.36 रुपये


सूरत
101.81 रुपये
97.92 रुपये


वाराणसी
102.03 रुपये&amp;nbsp;
95.53 रुपये


कानपुर
101.59 रुपये
95.06 रुपये



सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल कहां?
हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत सबसे ज्यादा 115.69 रुपये प्रति लीटर है. &amp;nbsp;इसके बाद दूसरे नंबर पर तिरुवनंतपुरम है, जहां पेट्रोल की कीमत 115.49 रुपये प्रति लीटर है.
दूसरी ओर, लिस्ट में शामिल शहरों में चंडीगढ़ में पेट्रोल की कीमत सबसे कम 98.10 रुपये प्रति लीटर है. कई मेट्रो शहरों के मुकाबले लखनऊ और नई दिल्ली में भी पेट्रोल की कीमतें कम- क्रमशः 102.05 रुपये और 102.12 रुपये प्रति लीटर बनी हुई हैं.&amp;nbsp;
डीजल की बात करें तो तिरुवनंतपुरम में कीमत सबसे ज्यादा 104.40 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है.इसके बाद हैदराबाद में डीजल की कीमत 103.82 रुपये प्रति लीटर लीटर है. लिस्ट में शामिल शहरों में चंडीगढ़ में डीजल की कीमत सबसे कम 86.09 रुपये प्रति लीटर है.

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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Rate:, आज, कितने, में, फुल, करा, लेंगे, गाड़ी, की, टंकी, जानें, कहां, मिल, रहा, सबसे, सस्ता, पेट्रोल-डीजल</media:keywords>
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        <title>Gold&amp;Silver Rate: सुबह&amp;सवेरे सस्ता हुआ सोना, 1100 रुपये तक लुढ़का भाव; जानें अब कितनी रह गई 10 ग्राम की कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-सुबह-सवेरे-सस्ता-हुआ-सोना-1100-रुपये-तक-लुढ़का-भाव-जानें-अब-कितनी-रह-गई-10-ग्राम-की-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-सुबह-सवेरे-सस्ता-हुआ-सोना-1100-रुपये-तक-लुढ़का-भाव-जानें-अब-कितनी-रह-गई-10-ग्राम-की-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today on July 24: आज सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और मिडिल-ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशकों ने कल के हाई लेवल पर जमकर मुनाफावसूली की है इसलिए आज भाव गिर गए हैं.
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कल सोना दो हफ्ते के ऊंचे स्तर&amp;nbsp;4100 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया था, जो आज करीब 1-2% की गिरावट के साथ 4052.50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.&amp;nbsp;
कीमतों में आई कितनी गिरावट?
घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें कल के हाई लेवल 1,47,280 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 1100 रुपये फिसलकर 1,46,170 के स्तर पर आ गई हैं. 22 कैरेट की भी कीमत कल के 1,35,000 से 1010 रुपये गिरकर 1,33,990 रुपये पर आ गई है. 18 कैरेट वाला सोना भी 830 रुपया सस्ता होकर आज 1,09,630 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है.
क्यों सस्ता हुआ सोना?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और लाल सागर में जहाजों पर हूतियों के हमलों के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है. ऐसे में निवेशक सोने जैसी संपत्तियों को बेचकर अपना मुनाफा निकाल रहे हैं और नकद पास में रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें कम हो रही हैं.
ऊपर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ गई है. बाजार को सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है. ब्याज दरें जब बढ़ती हैं, तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्ति से लोग अपना निवेश कम कर रहे हैं.&amp;nbsp;
चांदी की चमक बरकरार&amp;nbsp;
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए चांदी 2,27,180 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर है. इससे पता चलता है कि वैश्विक संकट के बीच भी निवेशक औद्योगिक मांग को देखते हुए चांदी पर दांव लगा रहे हैं. घरेलू रिटेल बाजार में भी चांदी की कीमतें 2,39,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है. चांदी का इस्तेमाल गहनों के साथ-साथ सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और 5G चिप्स में भी होता है इसलिए कल डिमांड में हुई बढ़ोतरी से आज इसके दाम कल के मुकाबले बढ़ गए हैं.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Rate:, सुबह-सवेरे, सस्ता, हुआ, सोना, 1100, रुपये, तक, लुढ़का, भाव, जानें, अब, कितनी, रह, गई, ग्राम, की, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ITR Deadline Alert: अब सिर्फ 9 दिन बचे, फटाफट फाइल करें अपना इनकम टैक्स रिटर्न; नहीं तो होगा बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ ITR Filing Last Date: अगर हर महीने आपकी भी सैलरी आती है या आप पेंशनर हैं या फिर प्रॉपर्टी या शेयर बेचकर मुनाफा कमाते हैं, तो &amp;nbsp;ITR फाइल करना आपकी जिम्मेदारी है. &amp;nbsp;
एसेसमेंट ईयर 2026-27 (कारोबारी साल 2025-26 ) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026 है. इनकम टैक्स के e-filing पोर्टल पर रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स की संख्या 14 करोड़ से ज्यादा है. 21 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 3.15 करोड़ टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न फाइल कर चुके हैं. बाकी लोगों के पास रिटर्न फाइल करने के लिए अब सिर्फ 9 दिन बचे हैं. &amp;nbsp;
इस नियम का रखें ध्यान&amp;nbsp;
इनकम टैक्स के नियम के मुताबिक, अब आपको आईटीआर फाइल करते वक्त अपने सभी एक्टिव अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी. इनमें सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, ओवरड्राफ्ट अकाउंट, कैश क्रेडिट अकाउंट या नॉन-रेसिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) अकाउंट शामिल हैं. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं और बाद में आयकर विभाग को किसी ऐसे अकाउंट का पता चलता है, जिसकी जानकारी आपने रिटर्न पाऊइल करते वक्त नहीं दी है, तो आपको प्रति बैंक अकाउंट 10000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
अटक सकता है रिफंड
टैक्स रिफंड पाने के लिए यह जरूरी है कि आपका बैंक अकाउंट इनकम टैक्स पोर्टल पर पहले से वैलिडेट हो. मान लीजिए कि अगर आपके मेन अकाउंट में कोई समस्या आती है, तो आयकर विभाग आपके द्वारा वैलिडेट किए गए किसी दूसरे अकाउंट में रिफंड ट्रांसफर कर सकता है, लेकिन सभी अकाउंट न बताने पर रिफंड का पैसा अटक सकता है.&amp;nbsp;
डेडलाइन से चूक गए तो...?
आप आईटीआई फाइल करने की समयसीमा 31 जुलाई के बाद भी अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं. आयकर अधिनियम की धारा 139 (4) के तहत आपको बिलेटेड रिटर्न फाइल करने की इजाजत है, लेकिन इसके लिए आपको लेट फीस चुकानी पड़ती है. अगर आपकी सालाना आय 5 लाख से अधिक है, तो 5000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है. अगर सालाना आय 5 लाख या उससे कम है, तो लेट फीस की रकम 1000 रुपये होगी.&amp;nbsp;
नए नहीं पुराने कानून से लोग भर रहे ITR
नया आयकर कानून 2025 लागू होने के बावजूद लोग आयकर अधिनियम 1961 के तहत ही अपना टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी आप अपनी जिस कमाई पर टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं, वह पिछले साल (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) की कमाई है. चूंकि यह अवधि पुराने कानून के दायरे में थी इसलिए रिटर्न पर आयकर अधिनियम 1961 के ही सभी नियम लागू होंगे. नया आयकर अधिनियम 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है. चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान होने वाली कमाई पर नया कानून लागू होगा. यानी कि जुलाई 2027 में जब आईटीआर भरा जाएगा, तो वह नए नियम के मुताबिक होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ITR, Deadline, Alert:, अब, सिर्फ, दिन, बचे, फटाफट, फाइल, करें, अपना, इनकम, टैक्स, रिटर्न, नहीं, तो, होगा, बड़ा, नुकसान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>होर्मुज पर नई आफत, जहाज छोड़ भाग रहे वर्कर, कंपनी दे रही 6 महीने की एक्स्ट्रा सैलरी, बढ़ेगा शिपिंग चार्ज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/होर्मुज-पर-नई-आफत-जहाज-छोड़-भाग-रहे-वर्कर-कंपनी-दे-रही-6-महीने-की-एक्स्ट्रा-सैलरी-बढ़ेगा-शिपिंग-चार्ज</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/होर्मुज-पर-नई-आफत-जहाज-छोड़-भाग-रहे-वर्कर-कंपनी-दे-रही-6-महीने-की-एक्स्ट्रा-सैलरी-बढ़ेगा-शिपिंग-चार्ज</guid>
        <description><![CDATA[ Hormuz Strait Crisis Update: दक्षिण कोरिया की बड़ी शिपिंग कंपनी सिनोकोर मर्चेंट मरीन (Sinokor Merchant Marine) ने अपने क्रू मेंबर्स को छह महीने की सैलरी के बराबर बोनस देने का ऑफर दिया है. बशर्ते उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक राउंड ट्रिप पूरा करना होगा.
सिनोकोर का यह ऑफर शिपिंग इंडस्ट्री में अब तक के सबसे बड़े &#039;Danger Allowance&#039; में से एक है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. सिनोकोर के इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर क्रू मेंबर्स ने सऊदी अरब या इराक से तेल की लोडिंग से ओमान की खाड़ी में अनलोड करने तक, एक महीने के राउंड-ट्रिप को पूरा कर लिया, तो उन्हें 6 महीने की एक्स्ट्रा सैलरी दी जाएगी.&amp;nbsp;
अभी रिस्क जोन में होर्मुज
ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष और ताबड़तोड़ मिसाइल हमलों से यह पूरा इलाका अभी काफी संवेदनशील बना हुआ है. ऐसे में सऊदी अरब से ओमान की खाड़ी तक आने-जाने के लिए जहाजों को दो बार इस समुद्री रास्ते की सैर लगानी होगी. एक बार खाली जहाज ले जाते वक्त और फिर उसे लोड कर ले आते वक्त. इसी चुनौती को देखते हुए क्रू मेंबर्स को 6 महीने का अतिरिक्त वेतन ऑफर किया गया है.&amp;nbsp;
शिपिंग कॉस्ट में तगड़ा उछाल
जब क्रू की सैलरी 6 गुना बढ़ा दी जाएगी और जहाजों का वॉर-रिस्क प्रीमियम भी बढ़ जाएगा, तो तेल की प्रति लीटर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी कई गुना बढ़ जाएगा. अब जब दूसरी कंपनियां सिनोकोर की तरह मोटा बोनस नहीं दे पाएगी, तो उनके क्रू मेंबर्स उस रूट में जाने से इंकार कर देंगे. इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की भारी किल्लत हो सकती है. नतीजतन, क्रूड ऑयल 100 डॉलर या उसके पार पहुंच सकता है.
चूंकि भारत अपने हिस्से का अधिकतर कच्चा तेल इराक और सऊदी अरब से ही मंगाता है. ऐसे में सिनोकोर द्वारा डेंजर अलाउंस को इस कदर बढ़ाना यह दिखाता है एनर्जी पर संकट कितना गहरा रहा है.यही डर इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का बड़ा कारण बना.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>होर्मुज, पर, नई, आफत, जहाज, छोड़, भाग, रहे, वर्कर, कंपनी, दे, रही, महीने, की, एक्स्ट्रा, सैलरी, बढ़ेगा, शिपिंग, चार्ज</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>गर्मी में ज्यादा AC ना चले, इस कंपनी ने मेल कर्मचारियों को हाफ पैंट में आने को कहा, महिलाए बोलीं&amp; पैर के बाल...</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गर्मी-में-ज्यादा-ac-ना-चले-इस-कंपनी-ने-मेल-कर्मचारियों-को-हाफ-पैंट-में-आने-को-कहा-महिलाए-बोलीं-पैर-के-बाल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/गर्मी-में-ज्यादा-ac-ना-चले-इस-कंपनी-ने-मेल-कर्मचारियों-को-हाफ-पैंट-में-आने-को-कहा-महिलाए-बोलीं-पैर-के-बाल</guid>
        <description><![CDATA[ 
Japan Office Dress Code: जापान में तेज गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच कर्मचारियों के लिए एक अनोखी पहल की गई है. टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार ने अपने कर्मचारियों को ऑफिस में पारंपरिक सूट-टाई की जगह शॉर्ट्स, पोलो टी-शर्ट और स्नीकर्स पहनकर आने की इजाजत दी है. इस पहल का खास मकसद कर्मचारियों को गर्मी से राहत दिलाना और एयर कंडीशनर (AC) के इस्तेमाल को कम करके ऊर्जा की बचत करना है. हालांकि, सरकार के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और ऑफिसों में एक नई बहस छिड़ गई है.&amp;nbsp;



क्या है &#039;कूल बिज़&#039; अभियान?
जापान में लंबे समय से ऑफिस में सूट और टाई पहनने की परंपरा रही है, लेकिन अब टोक्यो सरकार ने &#039;Tokyo Cool Biz&#039; अभियान के तहत ड्रेस कोड में ढील दे दी है. इसके जरिए अब कर्मचारियों को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनने के लिए कहा गया है.
खराब सामान बेचता है ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, लगा 6200 करोड़ का जुर्माना, आप तो नहीं करते यहां से शॉपिंग?
साथ ही पुरुष कर्मचारी अब शॉर्ट्स, पोलो टी-शर्ट और स्नीकर्स पहनकर ऑफिस आ सकते हैं. इसका मकसद बढ़ती गर्मी में कर्मचारियों को आराम देना और बिजली की खपत कम करना है. हालांकि इस अभियान पहली शुरुआत 2005 में हुई थी और अब इसे और ज्यादा लचीला बना दिया गया है.&amp;nbsp;
महिलाओं की क्या रही प्रतिक्रिया?
कुछ महिला कर्मचारियों ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि पुरुषों के शॉर्ट्स पहनकर आने से उनके पैरों के बाल नजर आते हैं, जिससे वे अनकंफरटेबल महसूस करती है. वहीं कुछ कर्मचारियों का कहना है कि अगर ड्रेस कोड आरामदायक हो तो गर्मी में भी काम करना आसान हो सकता है.
क्यों उठाया गया यह कदम?
जापान में इस साल भी लोग लगातार तेज गर्मी और हीटवे का सामना कर रहे हैं. वहीं कई इलाकों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है. जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि पिछले साल हीट स्ट्रोक के कारण एक लाख से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यही वजह है कि सरकार कर्मचारियों को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनने के लिए कहा गया है, ताकि AC पर लोगों की निर्भरता कम हो सके.
ITR Deadline Alert: अब सिर्फ 9 दिन बचे, फटाफट फाइल करें अपना इनकम टैक्स रिटर्न; नहीं तो होगा बड़ा नुकसान


 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गर्मी, में, ज्यादा, ना, चले, इस, कंपनी, ने, मेल, कर्मचारियों, को, हाफ, पैंट, में, आने, को, कहा, महिलाए, बोलीं-, पैर, के, बाल...</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पेट्रोल के बाद खाने का तेल महंगा, भारत को क्यों चुकाने होंगे 1.75 ट्रिलियन? PM की अपील का नहीं दिखा असर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पेट्रोल-के-बाद-खाने-का-तेल-महंगा-भारत-को-क्यों-चुकाने-होंगे-175-ट्रिलियन-pm-की-अपील-का-नहीं-दिखा-असर</link>
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        <description><![CDATA[ Food Inflation: पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ने से पहले ही जनता काफी परेशान थी, लेकिन अब रसोई की अन्य चीजों के दाम भी सातवें आसमान को छू रहे हैं. पहले दूध, फिर सब्जियां और अब खाने का तेल भी महंगा हो गया है. इसमें सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, तिल्ली का तेल, कच्चा पाम ऑइल और बिनौला तेल भी शामिल है. इससे अब एक बार फिर से गृहणियों के किचन का बजट जो है वो गड़बड़ हो जाएगा.
तेल की कीमतों में दिखा भारी उछालखाने वाला तेल हर घर, होटल और रेस्टोरेंट्स में काफी इस्तेमाल किया जाता है. खासतौर से त्यौहार के सीजन में इसकी मांगे काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं. ऐसे में बीते महीने से ही इसकी कीमतों में काफी तेजी नजर आई है. पिछले हफ्ते ही डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके कारण खाने का वो तेल जो बाहर से मंगवाया जाता है उसकी कीमत में तेजी देखी गई है.
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कितना आया भारत का खाद्य तेल आयात बिल?SEA (Solvent Extractors Association of India) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने अपने सदस्यों को लिखे एक पत्र में बढ़ते आयात बिल पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है और अब ऑइलसीड रिवोल्यूशन को और टाला नहीं जा सकता.&amp;nbsp;
उन्होंने ये भी कहा कि भारत खाद्य तेल के मामले में एक अहम मोड़ पर खड़ा है. पिछले साल देश का खाद्य तेल आयात बिल 1.61 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन इस साल इसके बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है.
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कितने बढ़े तेल के दाम?

सरसों के तेल की कीमत 650 रुपये की तेजी के साथ 16,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.
सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतों में 90 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.
सोयाबीन के तेल की कीमत 375 रुपये की तेजी के बाद 7400 से 7475 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है.
मूंगफली का तेल गुजरात में 1000 रुपये की बढ़त के साथ 17000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है.
मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल की कीमत 105 रुपये महंगा होकर 2665 से 2965 रुपये प्रति टिन (15 किलो) पर बंद हुआ है.

सोयाबीन की घटी आवक, सरसों की डिमांड में इजाफावहीं कुछ रिपोर्ट्स ने ये दावा भी किया है कि सोयाबीन की आवक मंडियों में तेजी से घट रही है. पिछले हफ्ते आवक दर 60 हजार बोरी थी जो अब घटकर महज 10 बोरी ही हो गई है. तो वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि सरसों की आवक कम हो गई है लेकिन बाजार में इसकी डिमांड कापी हद तक बढ़ गई है. जिसके चलते सरसों के तेल का दाम भी अब सोयाबीन और पाम-पामोलीन से 10 से 15 रुपये प्रति किलो के हिसब से बढ़ गया है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पेट्रोल, के, बाद, खाने, का, तेल, महंगा, भारत, को, क्यों, चुकाने, होंगे, 1.75, ट्रिलियन, की, अपील, का, नहीं, दिखा, असर</media:keywords>
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        <title>Totapuri Mango: मैंगो ड्रिंक्स में 25 फीसदी असली आम मिलाएं, GST में तभी मिलेगी छूट, कंपनियों से सरकार</title>
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        <description><![CDATA[ GST on Mango Drinks: अगर आप गर्मियों में आम का जूस या मैंगो ड्रिंक खरीदना पसंद करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अब आने वाले समय में आम के जूस की कीमत और उस पर लगने वाला GST इस बात पर निर्भर कर सकता है कि उसमें असली आम का गूदा यानी पल्प कितना इस्तेमाल किया गया है. सरकार एक नए नियम पर विचार कर रही हैं, जिसके तहत उन मैंगो ड्रिंक्स को टैक्स में राहत दी जा सकती है जिनमें असली आम का पल्प ज्यादा इस्तेमाल किया गया हो. इस प्रस्ताव का खास मकसद कंपनियों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करना और आम ग्राहकों को फायदा पहुंचना है.&amp;nbsp;
किसे मिलेगा 5% GST का फायदा?
सरकारी समिति ने बताया है कि जिन मैंगो ड्रिंक्स में 22% से 25% या उससे ज्यादा नेचुरल आम का पल्प होगा, उन्हें 5% GST की मौजूदा रियायती दर का फायदा मिलता रहेगा. वहीं, जिन उत्पादों में पल्प की मात्रा तय सीमा से कम होगी, उन पर अधिक GST लगाया जा सकता है. हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने का अंतिम फैसला सरकार और GST परिषद की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.
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क्यों आया यह प्रस्ताव?
टोटापुरी आम मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में उगया जाता है. लेकिन इस सीजन में टोटापुरी आम की कीमतों में गिरावट से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. एक्सपर्टों के मुताबिक, प्रोसेसिंग कंपनियों की धीमी खरीद और कम पल्प वाले ड्रिंक्स की बढ़ती बिक्री इसकी एक सबसे बड़ी वजह रही.&amp;nbsp;
किसानों और ग्राहकों कैसे होगा फायदा?

कंपनियां अपने उत्पादों में ज्यादा प्राकृतिक आम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित होंगी.
इससे टोटापुरी आम की मांग बढ़ने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
इससे किसानों को अपनी फसल का पहले के मुकाबले बेहतर और अच्छी कीमत में मिल सकती है.
ग्राहकों को ऐसे मैंगो ड्रिंक मिलेंगे जिनमें असली फल की मात्रा पहले से ज्यादा होगी.&amp;nbsp;
साथ ही इससे प्रोसेस्ड मैंगो इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

क्या होगा अगला कदम?

सरकार इस प्रस्ताव पर GST परिषद, FSSAI और वित्त, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण व स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ चर्चा करेगी.&amp;nbsp;
इसके बाद मैंगो ड्रिंक के लिए टैक्स (GST) ढांचा तैयार किया जा सकता है.&amp;nbsp;
समिति ने टोटापुरी आम के बागों को बेहतर बनाने के लिए और किसानों को वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करने की भी सिफारिश की है.

पेट्रोल के बाद खाने का तेल महंगा, भारत को क्यों चुकाने होंगे 1.75 ट्रिलियन? PM की अपील का नहीं दिखा असर
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Totapuri, Mango:, मैंगो, ड्रिंक्स, में, फीसदी, असली, आम, मिलाएं, GST, में, तभी, मिलेगी, छूट, कंपनियों, से, सरकार</media:keywords>
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        <title>भारत या पाकिस्तान: किस मुल्क का मुसलमान है ज्यादा अमीर और खुशहाल? जानिए चौंकाने वाले आंकड़े</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Pakistani Muslim Economy: भारत और पाकिस्तान, दोनों जगह मुसलमान बड़ी तादाद में रहते हैं, लेकिन दोनों की माली हालत में जमीन-आसमान का फर्क है. ऐसे में जानिए आखिर किस मुल्क का मुसलमान ज्यादा खुशहाल है और वहां के सबसे रईस मुसलमान कारोबारियों की जेब में कितना पैसा है. बंटवारे के 78 साल बाद भी यह सवाल बार-बार उठता है कि भारत का मुसलमान बेहतर है या पाकिस्तान का? आंकड़े दोनों तरफ की तस्वीर साफ करते हैं और नतीजा हैरान करने वाला है.
पहले समझिए, कौनसा मुल्क आर्थिक तौर पर कितना मजबूत है
भारत की अर्थव्यवस्था आज करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर है यानी पाकिस्तान से तकरीबन 10 गुना बड़ी. भारत में प्रति व्यक्ति आय 2694 डॉलर सालाना है, जबकि पाकिस्तान में यह सिर्फ 1,478 डॉलर है, यानी लगभग आधी. महंगाई के मोर्चे पर भी पाकिस्तान बुरी तरह पिछड़ा है. वहां महंगाई दर 11.07% है, जबकि भारत में महज 4.38% महंगाई है.
भारत के मुसलमान की हकीकत गरीबी घटी, पर फासला बरकरार

भारत में मुसलमानों की आबादी करीब 25 करोड़ है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यहां के मुसलमान राष्ट्रीय औसत खर्च का सिर्फ 87.9% ही खर्च कर पाते हैं और घर-संपत्ति के मामले में सिर्फ 79% के मालिक हैं, जबकि हिंदुओं का यह आंकड़ा क्रमश 100% और 93% है.
Gallup के एक सर्वे में सामने आया कि भारत के 51% मुसलमान अपनी जिंदगी के स्तर से खुश नहीं हैं, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 63% है. करीब 47% मुसलमानों ने माना कि घर चलाना उनके लिए मुश्किल है.
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर तीसरा भारतीय मुसलमान आज भी &amp;ldquo;बहुआयामी गरीबी&amp;rdquo; यानी शिक्षा, सेहत और घर जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है. करीब 80% मुसलमान असंगठित क्षेत्र में मजदूरी, दर्जी या रेहड़ी जैसे कामों में लगे हैं.
नवंबर 2025 में आई एक स्टडी के मुताबिक भारत में मुसलमानों में अत्यंत गरीबी घटकर सिर्फ 1.5% रह गई है, जो हिंदुओं के 2.3% से भी कम है.


पाकिस्तान के मुसलमानों पर है संकट!

पाकिस्तान की 97% आबादी मुस्लिम है, यानी वहां का हर आर्थिक संकट सीधे-सीधे वहां की मुस्लिम जनता पर असर डालता है.
ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में पाकिस्तान की 28.8% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जा रही है. छह साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 21.9% था. World Bank की मानें तो नए मानकों के हिसाब से यह आंकड़ा 45% तक पहुंच जाता है. वहां अत्यंत गरीबी भी 4.9% से बढ़कर 16.5% हो गई है.
पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ इतना है कि उसका debt-to-GDP ratio 70-80% तक पहुंच चुका है. लगातार IMF बेलआउट, बाढ़ और सियासी उठापटक ने वहां के आम आदमी की कमर तोड़ दी है.

भारत के टॉप 5 मुस्लिम कारोबारी इस तरह हैं...
विप्रो के मालिक अजीम प्रेमजी सबसे ऊपर हैं, उनकी दौलत करीब 11 से 15 अरब डॉलर आंकी जाती है. दूसरे नंबर पर यूसुफ अली हैं, जो लुलु ग्रुप चलाते हैं और मूल रूप से भारतीय हैं भले ही उनका कारोबार खाड़ी देशों में फैला है, उनकी संपत्ति करीब 8 से 8.5 अरब डॉलर है. तीसरे नंबर पर सिप्ला के यूसुफ हमीद हैं, जिनकी दौलत 2.5 से 4 अरब डॉलर के बीच है. चौथे और पांचवें नंबर पर VPS हेल्थकेयर के शमशेर व्यालिल और एस्टर के आजाद मूपन हैं, दोनों की संपत्ति 1.5 से 3 अरब डॉलर के दायरे में है.
अब पाकिस्तान के टॉप 5 कारोबारियों पर नजर डालिए

पाकिस्तानी मूल के शाहिद ख़ान सबसे अमीर हैं, जिनकी संपत्ति 13 से 15 अरब डॉलर है लेकिन वे अमेरिका में बस चुके हैं और वहीं से अपना कारोबार चलाते हैं.
पाकिस्तान में रहकर कारोबार करने वालों में सबसे अमीर मियां मुहम्मद मंशा हैं, जिन्हें &#039;पाकिस्तान का मुकेश अंबानी&#039; भी कहा जाता है. उनकी दौलत 5 से 7.8 अरब डॉलर के बीच है.
तीसरे नंबर पर बेस्टवे ग्रुप के अनवर परवेज हैं, जिनकी संपत्ति करीब 3.5 से 4 अरब डॉलर है.
चौथे नंबर पर रियल एस्टेट कारोबारी मलिक रियाज हैं
और पांचवें नंबर पर हाशू ग्रुप के सादरुद्दीन हाशवानी हैं, जिनकी दौलत करीब 90 करोड़ डॉलर आंकी जाती है.


आंकड़े जो सबसे ज्यादा चौंकाते हैं
भारत में आज कुल 229 अरबपति हैं, जिनकी सामूहिक दौलत 1,000 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है. पाकिस्तान में सिर्फ 15 अरबपति हैं, जिनकी कुल संपत्ति महज 71 अरब डॉलर है.
गौर करने वाली बात यह है कि अकेले मुकेश अंबानी की दौलत (करीब 115 अरब डॉलर) पाकिस्तान के सभी 15 अरबपतियों की कुल दौलत से भी ज्यादा है. वहीं भारत के सबसे अमीर मुसलमान अजीम प्रेमजी की दौलत, पाकिस्तान में रहने वाले सबसे अमीर शख़्स मियां मंशा से करीब दोगुनी बैठती है.
निचोड़: किसकी हालत बेहतर है?
आंकड़े साफ़ कहते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था और यहाx के अरबपति वर्ग, पाकिस्तान से कहीं आगे हैं चाहे वह मुस्लिम कारोबारी हों या ग़ैर-मुस्लिम.
लेकिन आम मुसलमान की बात करें तो भारत में यह समुदाय आज भी शिक्षा, रोजगार और संपत्ति के मामले में देश के बाकी समुदायों से पीछे है. वहीं पाकिस्तान में चूंकि पूरी आबादी ही मुस्लिम-बहुल है, वहाx का आर्थिक संकट सीधे वहाx की मुस्लिम जनता का संकट बन जाता है और वह संकट भारत के मुक़ाबले कहीं ज्यादा गहरा है.
यानी भारत का औसत मुसलमान, पाकिस्तान के औसत नागरिक से आर्थिक तौर पर बेहतर स्थिति में जरूर है, लेकिन भारत के भीतर वह अब भी सबसे पिछड़े तबकों में गिना जाता है. यह दोनों बातें एक साथ सच है.
(आर्टिकल World Bank, सच्चर कमेटी रिपोर्ट, NITI Aayog, Gallup सर्वे, UNDP, Forbes डेटा के आधार पर) ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, या, पाकिस्तान:, किस, मुल्क, का, मुसलमान, है, ज्यादा, अमीर, और, खुशहाल, जानिए, चौंकाने, वाले, आंकड़े</media:keywords>
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        <title>ITR: 1 करोड़ का टैक्स भरा, लेऑफ में चली गई शख्स की नौकरी, पोस्ट कर छलका दर्द, छिड़ी बहस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/itr-1-करोड़-का-टैक्स-भरा-लेऑफ-में-चली-गई-शख्स-की-नौकरी-पोस्ट-कर-छलका-दर्द-छिड़ी-बहस</link>
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        <description><![CDATA[ ITR Filing 2026: सोशल मीडिया पर एक भारतीय शख्स ने बताया कि उसने अब तक करीब 1 करोड़ रुपये का टैक्स भर दिया होगा. लेकिन फिर भी हाल ही में उसको कंपनी में हुए लेऑफ में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. अब इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया आ ही है, कोई इस शख्स के लिए दुखी हो रहा है, तो कोई उसे सांत्वना दे रहा है.
क्या है पोस्ट?दरअसल सोशल नेटवर्किंग साइट X पर एक मोहम्मद नौसथ नाम के एक युवक ने एक पोस्ट शेयर किया है. इस पोस्ट में युवक ने लिखा, &#039;14 साल के करियर में अब तक लगभग 1 करोड़ रुपये इनकम टैक्स के तौर पर भरे हैं. अब नौकरी से निकाला जा रहा है. सपोर्ट सिस्टम का कोई नामो-निशान नहीं है. धन्यवाद भारत.&#039; यो पोस्ट शेयर करते ही सोशल मीडिया पर तेजी वायरल हो गया है.

14 years of career, paid close to 1 cr as income tax so far. Now, being laid off. Absolutely no trace of any support system. Thank you India ????????
&amp;mdash; Mohamed Nowsath (@Md_Nowsath_) July 18, 2026



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सोशल मीडिया रिएक्शनइस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर भी रिएक्शंस की बारिश होने लगी है. कई यूजर्स इस पोस्ट को लेकर शख्स को सांत्वना दे रहे हैं, तो वहीं कई लोग इस पर अलग तरह की प्रतिक्रया दे रहे हैं. इस पोस्ट पर टैक्स और सरकारी सुविधाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है. क्योंकि शख्स ने ये भी बताया कि उसे अभी पता चला है कि नौकरी छोड़ने पर मिलने वाला सेवरेंस पे भी टैक्स के दायरे में आएगा.
ITR 2026 की लास्ट डेट से पहले वायरल हुआ पोस्टये पोस्ट ITR भरने की आखिरी तारीख से पहले वायरल हो गया है. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. कुछ लोगों का कहना था कि भारत में नौकरी जाने पर लोगों के लिए पर्याप्त सरकारी मदद नहीं है. वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि हर व्यक्ति को ऐसी स्थिति के लिए अपनी बचत और इमरजेंसी फंड तैयार रखना चाहिए.
सोशल मीडिया पर शुरू हुई ये बहस वाकई में कई सारे सवाल खड़े करती है. अगर इतना टैक्स भरने के बाद भी व्यक्ति को सुविधाएं ना मिलें तो ऐसा टैक्स भरने से क्या ही फायदा हो रहा है. हालांकि ऐसे समय में EPF, NPS और 80C जैसी टैक्स बचाने की योजनाएं भी लाभदायक साबित होती है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Niti Aayog: सरकार का बड़ा फैसला, नीति आयोग के नए CEO बने अनुराग जैन, कितना होगा कार्यकाल? जानें इनके बारे में</title>
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        <description><![CDATA[ Niti Aayog CEO: केंद्र सरकार ने 1989 बैच के IAS अधिकारी अनुराग जैन को नीति आयोग का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है. अनुराग जैन की नियुक्ति दो साल के लिए की गई है.&amp;nbsp;
सरकारी आदेश के मुताबिकसरकार के द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने 1989 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के IAS ऑफिसर अनुराग जैन को नीति आयोग का मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. नियुक्ति अनुराग जैन के पदभार संभालने की तारीख से लागू होगी. वो पहले अपने एक्सटेंशन की अवधि तक इस पद पर रहेंगे. इसके बाद भी उनका कुल कार्यकाल दो साल का होगा या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो.
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कई दिनों से चल रही थी नाम पर चर्चाअनुराग जैन के नाम पर पिछले कई दिनों से चर्चा चल रही थी कि उन्हें मुख्य सचिव के रूप में एक और एक्सटेंशन मिलेगा. वैसे वो 31 अगस्त 2025 को रिटायर होने वाले थे लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें ठीक एक साल का एक्सटेंसन दे दिया. तो वहीं अब एक बार फिर से उन्हें नीति आयोग का कार्यकारी अधिकारी बनाकर दो सालों का एक्सटेंशन दे दिया गया है.
कौन हैं अनुराग जैन?अनुराग जैन एक वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं और उन्हें प्रशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं को लागू करने का लंबा अनुभव है. वो अपने कार्यकाल के दौरान मीति आयोग के कामकाज और सरकार की विकास योजनाओं को आगे बढ़ेने में अहम भूमिका निभाएंगे.
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बता दें कि अनुराग जैन अक्टूबर 2024 में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव बने थे. इससे पहले वो केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में संयुक्त सचिव के पद पर भी कार्य कर चुके हैं. अब वे नीति आयोग का कार्यभार संभालेंगे, उनका प्रशासनिक सेवा लंबा अनुभव नीति आयोग के कार्यभार में भी काम आएगा. वो 1989 के IAS अधिकारी हैं जिनका चयन सीधी भर्ती के जरिए हुआ था.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Niti, Aayog:, सरकार, का, बड़ा, फैसला, नीति, आयोग, के, नए, CEO, बने, अनुराग, जैन, कितना, होगा, कार्यकाल, जानें, इनके, बारे, में</media:keywords>
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        <title>Amazon Delivery: डिलीवरी के नाम पर 149 रुपए वसूल रहा अमेजन, क्या है &amp;apos;ओपन बॉक्स फीस&amp;apos;, जिसको लेकर गुस्से में हैं लोग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/amazon-delivery-डिलीवरी-के-नाम-पर-149-रुपए-वसूल-रहा-अमेजन-क्या-है-ओपन-बॉक्स-फीस-जिसको-लेकर-गुस्से-में-हैं-लोग</link>
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        <description><![CDATA[ Amazon Open Box Inspection: अमेज़न की अनिवार्य ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन फीस को लेकर विवाद हो रहा है. लोग इस अतिरिक्त चार्ज पर सवाल उठा रहे हैं और अमेज़न की रिटर्न पॉलिसी की भी आलोचना कर रहे हैं.
कुछ ऑर्डर पर &amp;lsquo;ओपन बॉक्स इंस्पेक्शनट फीस लगाई जाती है, इसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. ग्राहकों का कहना है कि ऐसी प्रक्रिया के लिए अलग से पैसे क्यों देने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें लगता है कि विक्रेता को ज्यादा फायदा होता है.
अमेजन कर रहा घोटाला- यूजर्स
यह विवाद एक बार फिर चर्चा में तब आया जब एक यूजर ने अपनी पुरानी X पोस्ट को दोबारा शेयर किया. उन्होंने उस पोस्ट में अमेज़न इंडिया पर &quot;नए तरह का स्कैम&quot; करने का आरोप लगाया था. यूजर का कहना है कि 14,999 रुपये के एक ऑर्डर पर अमेज़न ने 99 रुपये का ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन शुल्क जोड़ दिया था. &amp;nbsp;

What are you smoking @amazonIN . Adding open box inspection for every item ? It is your job to deliver properly isn&amp;rsquo;t it ? You are saying you can&amp;rsquo;t assure safe delivery , we have to pay you to make sure your job is done correctly . This is just day light robbery . pic.twitter.com/IHsfbpu1RX
&amp;mdash; Talk to my hand (@prathap_minnu) July 21, 2026

X यूज़र ने अपनी पोस्ट में अमेजन इंडिया की ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन फीस पर सवाल उठाए थे. उन्होंने लिखा था कि यह कैसा नया तरीका है, जिसमें ग्राहकों को ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन के लिए अलग से फीस देनी पड़ती है, इसे लेने या न लेना का कोई विकल्प भी नहीं दिया जाता. उन्होंने यह भी लिखा कि एक बार इंस्पेक्शन होने के बाद रिटर्न और रिप्लेसमेंट की सुविधा भी खत्म हो जाती है. यूजर ने यह भी बोला कि अगर इंस्पेक्शन के बाद प्रोडक्ट में कोई खराबी आ जाए, तो ग्राहक क्या करेगा?
99 से 149 रुपए हुई फीस
कुछ महीने बाद यूजर ने फिर इसी मुद्दे को उठाया और दावा किया कि पहले 99 रुपए की यह फीस अब बढ़ाकर 149 रुपए कर दी गई है. उन्होंने लिखा कि अब ग्राहकों को 149 रुपए सिर्फ इस बात के लिए देने पड़ रहे हैं कि कोई दूसरा व्यक्ति उनके खरीदे हुए सामान का बॉक्स खोले और इसके बाद ग्राहक रिटर्न या रिप्लेसमेंट जैसे अधिकार भी खो देता है, इसीलिए कई लोगों ने इस अतिरिक्त शुल्क और अमेंजन की रिटर्न पॉलिसी पर सवाल उठाए.
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यह पोस्ट X पर तेजी से वायरल हो गई. इसके बाद कई यूजर ने ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन पॉलिसी पर अपनी राय दी और अपने अनुभव के बारे में भी बताया.&amp;nbsp;
वायरल पोस्ट को देखते हुए अमेजन इंडिया ने X पर जवाब दिया. कंपनी ने लिखा कि ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन वाले ऑर्डर में रिर्टन और रिप्लेसमेंट से जुड़ी परेशानी के बारे में जानकर उन्हें खेद है. कंपनी ने यूजर से कस्टमर सपोर्ट टीम से चैट के जरिए संपर्क करने को कहा और भरोसा दिलाया कि उनकी टीम आवश्यक मदद करेगी. साथ में यह भी बताया कि चैट लिंक 1 घंटे तक ही रहेगी. &amp;nbsp;
इस मुद्दे के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन के लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क पर सवाल उठाए. एक यूजर ने लिखा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के अनुसार यह कंपनी की जिम्नेदारी है. ऐसे मामले में ग्राहक कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते है और जीत भी सकते है.
अमेज़न व फ्लिपकार्ट को चुनौती दें- यूजर्स
दूसरे यूजर ने ई- कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी न करने की सलाह दी. उन्होंने लिखा, &#039;&#039;सामान सीधे कंपनी की अधिकारिक वेबसाइट से ही खरीदें, अमेज़न और फ्लिपकार्ट के बढ़ते दबदबे के कारण कुछ समय के लिए खरीदारी टाल दें और अमेज़न व फ्लिपकार्ट को चुनौती दें.&#039;&#039;
एक यूजर ने फ्लिपकार्ट के अनुभव की तुलना करते हुए बताया कि फ्लिपकार्ट पर ओपन बॉक्स इंस्पेक्शन मुफ्त होता है. उन्होंने दो दिन पहले ही जूते मंगवाए थे. डिलीवरी वाले ने कहा, &#039;&#039;भैया, आराम से अच्छी तरह चेक कर लीजिए, कोई जल्दी नहीं है. जब आप पूरी तरह संतुष्ट हो जाएं, तभी मुझे OTP दीजिए.&#039;&#039;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Amazon, Delivery:, डिलीवरी, के, नाम, पर, 149, रुपए, वसूल, रहा, अमेजन, क्या, है, ओपन, बॉक्स, फीस, जिसको, लेकर, गुस्से, में, हैं, लोग</media:keywords>
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        <title>सरकार ने संसद में बताया बैंक फ्रॉड का डरावना सच, 5 साल में डूबे 1.42 लाख करोड़, कितनी हुई रिकवरी?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Fraud News: देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर संसद में एक बहुत ही चौंकानेवाला खुलासा हुआ है. बीते मंगलवार को संसद में वित्त मंत्रालय की तरफ से पेश आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में देश के बैंकों में 1.42 लाख करोड़ से अधिक (1,42,112 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. इनमें से केवल 4.5% (6389 रुपये) की ही रिकवरी हो पाई है.
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि ये आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से मिली जानकारी पर आधारित हैं. इस डेटा में कमर्शियल बैंक पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB), प्राइवेट सेक्टर बैंक, विदेशी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक और ऑल-इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं.
रिकवरी पर और क्या बोली सरकार?
बैंक धोखाधड़ी की कुल रकम और रिकवर की गई राशि के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि जिन अकाउंट्स से फ्रॉड हुए हैं उनसे रकम की रिकवरी लगातार की जाती रहती है.
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों ने पिछले पांच फाइनेंशियल वर्षों में ऐसे धोखाधड़ी वाले खातों से कुल 6,389 करोड़ रुपये रिकवर किए हैं. जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर्स) के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में मंत्री ने कहा कि RBI ऐसे कर्जदारों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई की जानकारी नहीं रखता है. हालांकि, पब्लिक सेक्टर के बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर, 31 मार्च, 2026 तक कानूनी और रिकवरी से जुड़े अहम कदम उठाए गए हैं.
बैंकों ने की तगड़ी कार्रवाई
सरकार ने बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों (wilful defaulters) के खिलाफ 15,577 रिकवरी केस दायर किए हैं. इसके अलावा, 10,894 मामलों में SARFAESI एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ 7,173 FIR दर्ज की गई हैं.&amp;nbsp;
रिकवरी इतनी कम क्यों?
किसी बड़े फ्रॉड को पहचानने और उसे धोखाधड़ी घोषित करने में बैंकों को अमूमन 2-5 साल का वक्त लग जाता है. इस देरी का फायदा उठाते हुए आरोपी या तो फंड को शेल कंपनियों के नेटवर्क में ट्रांसफर कर देते हैं या विदेशी बैंकों में भेज देते हैं. या फिर फ्रॉड के पैसों से बेनामी संपत्तिया या क्रिप्टोकरेंसी खरीद ली जाती है. ऊपर से लंबी कानूनी प्रक्रियाओं, सालों से चलने वाले मुकदमे और अकाउंट फ्रीज करने या संपत्तियों की बिक्री में देरी भी ऐसी वजहें, जिनके चलते रिकवरी की रफ्तार धीमी रहती है और पूरे पैसे वापस भी नहीं मिल पाते हैं.

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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सरकार, ने, संसद, में, बताया, बैंक, फ्रॉड, का, डरावना, सच, साल, में, डूबे, 1.42, लाख, करोड़, कितनी, हुई, रिकवरी</media:keywords>
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        <title>New LPG Connection: मिनटों में मिलेगा नया गैस कनेक्शन, जानें कैसे सुपरफास्ट होगी सिलेंडर की डिलीवरी</title>
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        <description><![CDATA[ Instant LPG Connection: अगर नया एलपीजी गैस कनेक्शन लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है तो अब ये परेशानी खत्म होने वाली है. भारत पेट्रोलियम ने Bharatgas Lite ZIP नाम से नई प्रीमियम एलपीजी सर्विस लॉन्च की है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ग्राहकों को इंस्टेंट गैस कनेक्शन और एक्सप्रेस सिलेंडर डिलीवरी की सुविधा मिलेगी. यहां से आप इसके बारे में जान सकते हैं.
क्या है भारतगैस लाइट जिप?भारतगैस लाइट जिप एक नई प्रीमियम सेवा है, जिसे तेजी से बदलती शहरी जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसके तहत ग्राहक बिना लंबे प्रोसेस के ही नया एलपीजी कनेक्शन ले सकेंगे और सिलेंडर भी पहले के मुकाबले काफी जल्दी मिलेगा. फिलहाल इसकी शुरुआत मुंबई से हुई है.
सरकार ने संसद में बताया बैंक फ्रॉड का डरावना सच, 5 साल में डूबे 1.42 लाख करोड़, कितनी हुई रिकवरी?
कैसे मिलेगा नया गैस कनेक्शन?इस सेवा के जरिए ग्राहक BPCL के डिजिटल प्लेटफॉर्म या अधिकृत भारतगैस डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से नया कनेक्शन ले सकेंगे. डॉक्यूमेंट प्रोसेस पूरा होने के बाद कनेक्शन जल्दी जारी किया जाएगा और सिलेंडर की डिलीवरी भी एक्सप्रेस मोड में की जाएगी. कंपनी का मकसद नए ग्राहकों के लिए पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है.&amp;nbsp;
क्या है खासियत?&amp;nbsp;भारतगैस लाइट जिप में कंपनी का कॉम्पोजिट एलपीजी सिलेंडर दिया जाएगा. ये पारंपरिक स्टील सिलेंडर की तुलना में हल्का है, जंग नहीं लगता और इसमें पारदर्शी बॉडी होने की वजह से गैस का लेवल भी आसानी से देखा जा सकता है. इसके अलावा इसमें बेहतर सुरक्षा फीचर्स भी दिए गए हैं.&amp;nbsp;
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100 शहरों तक पहुंचेगी सेवाBPCL ने बताया है कि अभी इस सेवा की शुरुआत मुंबई से की गई है. कंपनी की योजना है कि 15 अगस्त 2026 तक 24 राज्यों के 100 शहरों में भारतगैस लाइट जिप का विस्तार किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को इसका फायदा मिल सके. ये सेवा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जिन्हें जल्दी गैस कनेक्शन चाहिए या जो तेज डिलीवरी चाहते हैं. नौकरीपेशा लोग, छोटे परिवार और नए घर में शिफ्ट होने वाले ग्राहक इससे सबसे ज्यादा लाभ उठा सकेंगे.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पाकिस्तान ने अमेरिका से मांग लिए 96000 करोड़ रुपये, आखिर एकाएक क्यों पड़ गई इतने पैसों की जरूरत?</title>
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        <description><![CDATA[ Pakistan 10 Billion Dollar Help: पैसों के लिए दर-दर भटक रहे पाकिस्तान ने अब अमेरिका के सामने हाथ फैलाए हैं. पाकिस्तान ने अमेरिका से पूरे 10 अरब डॉलर (लगभग 96000 करोड़) रुपये मांगे हैं. इन पैसों का इस्तेमाल पाकिस्तान अपनी इकोनॉमी को मजबूत बनाने में करना चाहता है. पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब उसने अमेरिका से यह मदद एक ऐसे समय में मांगी है, जब उस पर इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) का बेलआउट प्रोग्राम पहले से चल रहा है.&amp;nbsp;
कर्ज के भरोसे जैसे-जैसे चल रही इकोनॉमी
साल 2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की कगार पर था, तब उसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिले 3 अरब डॉलर के आपाकालीन पैकेज ने बचा लिया. इसके बाद पाकिस्तान ने IMF से फिर 7 अरब डॉलर का एक और बड़ा लोन लिया. हालांकि, IMF से लोन मिलने की शर्त ही यह थी कि पाकिस्तान को इसके बदले जनता की कमाई पर सरकार द्वारा वसूले जाने वाले टैक्स को बढ़ाना होगा. इससे देश में महंगाई चरम पर पहुंच गई.&amp;nbsp;
पाकिस्तान के साथ एक और बड़ी दिक्कत यह भी है कि उसका विदेशी मुद्रा भंडार भी चीन और सऊदी अरब जैसे मित्र देशों से लिए गए उधार के भरोसे है. इस स्थिति में अगर अमेरिका से 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबलाइज़ेशन सुविधा (मुद्रा विनिमय स्थिरता सुविधा) मिल जाती है, तो पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
पाकिस्तान का नया दांव
पाकिस्तान का यह अनुरोध हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के दौरान दोनों देशों की आपस में बातचीत कराने की उसकी भूमिका के बाद आया. अमेरिका-ईरान में मध्यस्थता से पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक स्थिति मजबूत हुई और ऐसी उम्मीदें जगीं कि वह अब अमेरिका से और मजूबूत आर्थिक मदद मांग सकता है. शायद यही वजह रही होगी कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात कर उनसे 10 अरब डॉलर की द्विपक्षीय विनिमय स्थिरता सहायता सुविधा मांगी.
यह सामान्य लोन से अलग क्यों?&amp;nbsp;
यह कोई पारंपरिक लोन या उधार नहीं है, बल्कि यह एक तरह का करेंसी स्वैप है. इसके तहत, अमेरिकी ट्रेजरी पाकिस्तान को कोई फंड दान या भीख में नहीं देता, बल्कि वह अमेरिकी डॉलर के बदले पाकिस्तान रुपये का एक अस्थायी विनिमय (Swap) होता है. इससे पता चलता है कि देश के पास डॉलर की शॉर्ट टर्म गारंटी है. इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है और देश में विदेशी निवेश की दोबारा शुरुआत होती है. इससे पाकिस्तान को IMF के कड़े शर्तों का सामना भी नहीं करना पड़ता.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>हवाईजहाज में क्यों नहीं बैठ रहे लोग? घट रही यात्रियों की संख्या, क्या सिर्फ महंगा सफर है कारण?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हवाईजहाज-में-क्यों-नहीं-बैठ-रहे-लोग-घट-रही-यात्रियों-की-संख्या-क्या-सिर्फ-महंगा-सफर-है-कारण</link>
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        <description><![CDATA[ Air Traffic: मई-जून में गर्मियों की छुट्टियां होती हैं और इसी समय में लोग सबसे ज्यादा वेकेशन पर जाते हैं. अब उम्मीद की जाती है कि सबसे ज्यादा हवाई यात्रा भी इन्हीं महीनों में होती होगी, लेकिन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा दिखाया है. डीजीसीए की रिपोर्ट के अनुसार, जून के महीने में घरेलू हवाई यात्रा में 12 फीसदी गिरावट आई है.&amp;nbsp;
कितनी धीमी पड़ी रफ्तार?रिपोर्ट के अनुसार, मई के महीने में 1.53 करोड़ लोगों ने हवाईसफर किया लेकिन जून में ये आंकड़ा 12 फीसदी गिरकर 1.35 करोड़ पर आ गया. आमतौर पर तो मई और जून में ही लोग ज्यादा ट्रैवल करते हैं, इसके बाद तो वैसे भी कमजोर सीजन आ जाता है.
पाकिस्तान ने अमेरिका से मांग लिए 96000 करोड़ रुपये, आखिर एकाएक क्यों पड़ गई इतने पैसों की जरूरत?
क्या है कारण?अब अगर हवाई यात्रा में कमी आने के कारण के बारे में बात करें तो सबसे पहला कारण एटीएफ ही है. ATF यानी विमान ईंधन. मिडिल ईस्ट संकट के दौरान एटीएफ बढ़ गया, जिससे एयरलाइंस ने ही कुछ रूटों की फ्लाइट कम कर दी. इसके अलावा कुछ रूट्स का तो किराया भी बढ़ गया है. ऐसे में लोगों ने ज्यादा यात्रा करने से तौबा कर लिया और बस फिर क्या था आंकड़े खुद ही गिर गए.&amp;nbsp;
कौन है हवाई बाजार का सरदार?
हालांकि, इस गिरते आंकड़े में भी इंडिगो सबसे ज्यादा फायदे में रहा है. हवाई बाजार में कंपनी पहले 64.9 फीसदी हिस्सेदारी पर थी जो अब बढ़कर 66.3 फीसदी पर आ दया है. लेकिन एयर इंडिया का बाजार कम हुआ है. एयर इंडिया तो सीधा 23.9 फीसदी हिस्से पर आ गई है. इसके अलावा उड़ान में अकासा एयर भी पीछे नहीं है और टोटल 6.4 फीसदी घेरे हुए है, वहीं, स्पाइसजेट सबसे पीछे हैं और 1.9 फीसदी हिस्से में ही है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
मिनटों में मिलेगा नया गैस कनेक्शन, जानें कैसे सुपरफास्ट होगी सिलेंडर की डिलीवरी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>E20 Fuel: सरकार E20 पेट्रोल पर पीछे हटेगी या नहीं? संसद में बताया, एथेनॉल से खराब हो रही गाड़ियों पर क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/e20-fuel-सरकार-e20-पेट्रोल-पर-पीछे-हटेगी-या-नहीं-संसद-में-बताया-एथेनॉल-से-खराब-हो-रही-गाड़ियों-पर-क्या-कहा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/e20-fuel-सरकार-e20-पेट्रोल-पर-पीछे-हटेगी-या-नहीं-संसद-में-बताया-एथेनॉल-से-खराब-हो-रही-गाड़ियों-पर-क्या-कहा</guid>
        <description><![CDATA[ Govt on E20 Fuel: जब से पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं तभी से E20 फ्यूल काफी चर्चा में आ गया है. इस फ्यूल को लेकर लोगों ने सरकार का काफी विरोध किया है. कई लोगों का मानना है कि इस फ्यूल की वजह से गाड़ी का इंजर खराब हो रहा है. जिसके बाद सरकार से लोगों ने इस फ्यूल को वापस लेने की बात भी की थी. वहीं अब सरकार ने खुद साफ कर दिया है कि वो ऐसा करने वाली है या नहीं.
E20 पर पीछे हटेगी सरकार?संसद का मानसून सत्र चल रहा है, जिसमें ई20 पर भी सरकार जनता के हर सवाल का जवाव दे रही है. इसी दौरान संसद में सरकार ने बताया है कि वो ई20 पेट्रोल पर पीछे नहीं हटेगी, क्योंकि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित, जांचा-परखा और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है. ऑटोमोबाइल कंपनियां इसके साथ पूरा सहयोग कर रही हैं और वारंटी भी दे रही हैं. इसलिए सरकार का E0 या E10 पेट्रोल को दोबारा शुरू करने का कोई इरादा नहीं है.
ये भी पढ़ें: E20: एथेनॉल और कच्चा तेल खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करती है सरकार? संसद में बताया प्रति लीटर का हिसाब
नहीं मिली गाड़ी खराब होने की शिकायतेंसरकार ने इस दौरान ये भी बताया कि उन्हें E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के खराब होने या उनकी परफॉर्मेंस खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली है. इतना ही नहीं बल्कि देश में पिछले करीब साढ़े तीन सालों से E15+ और करीब ढाई साल से E19 qJ E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार के मुताबिक करीब 20 करोड़ दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इस फ्यूल पर बिना किसी इंजन फेलियर के चल रही हैं. कंपनियां आज भी E20 पर चलने वाली गाड़ियों को वारंटी दे रही हैं.
सरकार ने दिए तेल कंपनियों को आदेशनीति आयोग की समिति ने इस फ्यूल की बराबर से टेस्टिंग की है, जिससे साफ है कि पुरानी गाड़ियों में भी स्टार्टिंग, ड्राइविंग, मेटल और प्लास्टिक के पुर्जों पर भी इसका कोई नुकसानदायक प्रभाव नहीं पड़ रहा है. जिसके बाद सरकार ने नीति के तहत तेल विपणन कंपनियों को पूरे देश में BIS मानकों के अनुरूप 20% तक एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल सप्लाई करने के निर्देश दिए हैं.
ये भी पढ़ें: अंडे, चिकन और मीट खाने वालों को बड़ा झटका, बढ़ी कीमतें, आने वाले दिनों में राहत मिलेगी या नहीं?
1 अप्रैल से लागू हुआ नया नियमवहीं सरकार ने ये भी बताया कि 1 अप्रैल 2026 से कम से कम 95 RON (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) वाले एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को अधिसूचित किया गया है, जो ईंधन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाता है. इस फ्यूल को जनता के सामने लाने का मकसद पर्यावरण के संरक्षण, देश की ऊर्जा सुरक्षा किसानों की आय को ध्यान में रखकर लिया गया है. ऐसे में ये फ्यूल देश का पैसा बचाएगा और किसीनों को भी मालामाल बनाएगा.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>E20, Fuel:, सरकार, E20, पेट्रोल, पर, पीछे, हटेगी, या, नहीं, संसद, में, बताया, एथेनॉल, से, खराब, हो, रही, गाड़ियों, पर, क्या, कहा</media:keywords>
    </item>
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        <title>Mutual Fund: सेबी ने आसान बनाए मौत के बाद क्लेम पाने के नियम, म्यूचुअल फंड ट्रांसफर का नया तरीका जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mutual-fund-सेबी-ने-आसान-बनाए-मौत-के-बाद-क्लेम-पाने-के-नियम-म्यूचुअल-फंड-ट्रांसफर-का-नया-तरीका-जानें</link>
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        <description><![CDATA[ Mutual Fund: अपने किसी करीबी को खो देना किसी के लिए भी बहुत आसान नहीं होता. ये वो दुख है जिसे कोई जाहिर भी नहीं कर सकता. ऐसे समय में जब किसी भी क्लेम सेटलमेंट के बारे में बात की जाती है तो वो पूरी प्रक्रिया बहुत एग्जॉस्टिंग होती है. इस इमोशनल डैमेज को और ज्यादा ट्रिगर कर देती है ये सारी फंड्स और क्लेम से जुड़ी समस्याएं. लेकिन अब इस समस्या को देखते हुए खुद SEBI ने इस प्रक्रिया को काफी आसान कर दिया है, आइये जानें कैसे.
पहले से आसान हुई प्रक्रियादरअसल म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के लिए क्लेम की प्रक्रिया अब पहले से काफी आसान हो गई है. सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां हर छोटी गलती या जानकारी के मिसमैच होने पर उसे छोटा मामला ही मानेंगी.
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इसके अलावा पहले अगर म्यूचुअल फंड खाते में दर्ज पता और नॉमिनी के KYC में दिया गया पता अलग होता था, तो कई और दस्तावेज जैसे एफिडेविट और डिक्लेरेशन मांगे जाते थे, लेकिन अब AMC KYC में दर्ज सबसे नया पता मानकर क्लेम का निपटारा कर सकती है. इतना ही नहीं बल्कि नाम या हस्ताक्षर में मामूली सा फर्क होने पर भी अब क्लेम बार-बार वापस नहीं किया जाएगा. तय प्रक्रिया के तहत इनकी जांच करके क्लेम आगे बढ़ाया जाएगा.
क्लेम लेने वालों को क्या होगा फायदा?सेबी के द्वारा किए गए इस बदलाव के बाद क्लेम पाने वाले लोगों को काफी आसानी होगी. ऐसी दुख की स्थित में वो थोड़ी राहत की सांस लेंगे. जैसे पहले छोटी-सी गलती के कारण परिवारों को बार-बार दस्तावेज जमा करने पड़ते थे, जिससे क्लेम पूरा होने में कई हफ्तों या दो महीने तक लग जाते थे. लेकिन इन नए नियमों के बाद ऐसा नहीं होगा. इसके बाद आसानी से क्लेम किया जा सकेगा और आसानी से ही क्लेम मिल भी जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>33000 करोड़ रुपए दान करने वाले अरबपति की मौत, जीते जी लुटा दी पूरी दौलत, बोले थे&amp; कंगाल होकर जाऊंगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/33000-करोड़-रुपए-दान-करने-वाले-अरबपति-की-मौत-जीते-जी-लुटा-दी-पूरी-दौलत-बोले-थे-कंगाल-होकर-जाऊंगा</link>
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        <description><![CDATA[ Denny Sanford Death: बिजनेसमैन, बैंकर और समाजसेवी टी. डेनी सैनफोर्ड (T. Denny Sanford) का 90 साल की उम्र में निधन हो गया. डेनी ने 18 जुलाई को अंतिम सांस ली. उन्होंने अपनी जिंदगी में 4 अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा का दान किया है. उनकी हमेशा यही सोच थी कि वो अपनी पूरी संपत्ति समाज के काम में लगा दें. आइये जानते हैं कौन थे डेनी सैनफोर्ड?
डेनी की ये बात रहेगी हमेशा यादसाल 2007 में फोर्ब्स के साथ बात करते हुए डेनी ने कहा था कि, &#039;मैं चाहता हूं कि जब मेरी मौत हो, तब मेरे पास कोई पैसा न बचे. मैं जिंदगी को एक निवेशक की तरह देखता हूं. मेरा मानना है कि पैसा वहीं लगाना चाहिए, जहां उससे मुझे या समाज को सबसे ज्यादा फायदा मिले.&#039; अपनी इस फिलोसॉफी के चलते उन्होंननें अरबों रुपये दान किए, लेकिन फिर भी इस साल मार्च तक उनकी सम्पत्ति करीब 2.4 अरब डॉलर थी.
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कैसे हुई सफर की शुरुआत?टी. डेनी सैनफोर्ड का बचपन आसान नहीं था. चार साल की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था. आठ साल की उम्र से ही वो अपने पिता के कपड़ों के कारोबार में मदद करने लगे. बाद में उन्होंने फाइनेंस की दुनिया में करियर बनाया. साल 1986 में उन्होंने साउथ डकोटा के सिउक्स फॉल्स में एक छोटा बैंक खरीदा, जिसे बाद में फर्स्ट प्रीमियर बैंक के रूप में पहचान मिली. उनकी कंपनी प्रीमियर बैंकार्ड ने ऐसे लोगों को क्रेडिट कार्ड दिए, जिनका क्रेडिट रिकॉर्ड कमजोर था. इसी कारोबार ने उन्हें अरबपति बना दिया.
दान देने से मिली पहचानसैनफोर्ड ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाया. उन्होंने करीब 2 अरब डॉलर सिर्फ सैनफोर्ड हेल्थ को दिए. साल 2007 में उन्होंने इस हेल्थ सिस्टम को 40 करोड़ डॉलर का दान दिया, जो उस समय अमेरिका के किसी हेल्थ सिस्टम को मिला सबसे बड़ा एकमुश्त दान था. बाद में इसी संस्था का नाम बदलकर सैनफोर्ड हेल्थ रखा गया.
स्वास्थ्य- शिक्षा को दिया बढ़ावाअपने दान के जरिए सैनफोर्ड ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वैज्ञानिक रिसर्च और कई सामुदायिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है. उन्होंने बिल्ड डकोटा स्कॉलरशिप्स, सैनफोर्ड अंडरग्राउंड रिसर्च फेसिलिटी, चिल्ड्रन्स होम सोसाइटी और कई अन्य संस्थानों को भी आर्थिकरूप से सशक्त बनाया था.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP Protest: कपिल सिब्बल की नेटवर्थ कितनी है, जो सोनम वांगचुक का लड़ रहे हैं केस?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cjp-protest-कपिल-सिब्बल-की-नेटवर्थ-कितनी-है-जो-सोनम-वांगचुक-का-लड़-रहे-हैं-केस</link>
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        <description><![CDATA[ CJP Protest: पिछले कई दिनों से जंतर- मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को वहां से हटाकर सफदरजंग अस्ताल ले जाया गया. जिसके बाद उनकी पत्नी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सोनम को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करने की गुजारिश की. हाईकोर्ट में सोनम के इस केस की पैरवी कपिल सिब्बल, उनके बेटे और टीम ने की है. जिसके बाद हाईकोर्ट ने पत्नी गीतांजली की गुजारिश को मान लिया और सोनम को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया.
कपिल सिब्बल का खुद इस केस को अपने हाथ में लेना इस कस को हाईप्रोफाइल बना देता है. ऐसे ेमं आइये जानते हैं कपिल सिब्बल कितनी सम्पत्ति के मालिक हैं?
कितनी सम्पत्ति के मालिक हैं कपिल सिब्बल?कपिल सिब्बल वैसे तो कांग्रेस के मशहूर नेताओं में से एक हैं. लेकिन को पेशे से वकील भी हैं और देश के कई हाईप्रोफाइल केसेस को लड़ते हैं. सोनम की सम्पत्ति की बात करें तो वो 100 करोड़ से भी ज्यादा सम्पत्ति के मालिक हैं. साल 2016 में भरे गए हलफनामा के मुताबिक उनकी सम्पत्ति 212 करोड़ रुपये है. जिसमें से करीब 14 करोड़ रुपये जमा बैंक खातों में थे. उस समय उनके पास कुल 3 लाख रुपये का कैश अमाउंट भी था.
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करोड़ों की प्रॉपर्टी के हैं मालिकइतना ही नहीं कपिल सिब्बल ने अपनी सम्पत्ति का बड़ा हिस्सा कई शहरों में प्रॉपर्टी के रूप में निवेश किया हुआ है. उनकी कमर्शियल लुधियाना, चंडीगढ़, दिल्ली और बेंगलुरू में हैं, जिनकी कीमत करीब 3.65 करोड़ रुपये है. तो वहीं उनकी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज सिकंदराबाद, पटना, दिल्ली, चंडीगढ़, और बेंगलुरू में है, जिसकी कीमत करीब 3.65 करोड़ रुपये है.
लग्जरी गाड़ियों के भी हैं शौकीनकपिल सिब्बल को लग्जरी गाड़ियों का भी काफी शौक है. उनके पास कुल 89.48 लाख रुपये की गाड़ियां हैं. इनमें 1995 की एक सुजुकी जीप, साल 2001 की ह्युंडई सोनाटा, 2003 की टोयोटा कोरोला, 2012 की मारुति डिजायर, 2015 की मर्सिडीज GLC और साल 2016 की टोयोटा कार्मी भी शामिल है. इसके अलावा उनके पास 1997 में खरीदी हुई एक रॉयल एनफील्ड बुलेट और 2016 की हीरो स्पलेंडर जैसी मोटरसाइकिल भी है.
इनवेस्टमेंट में भी आगे हैं सिब्बलकपिल सिब्बल शेयर बाजार में भी निवेश करते हैं. शेयर मार्केट की लिस्टेड कंपनियों में उन्होंने 7 करोड़ रुपये निवेश किए हैं. तो वहीं नॉन-लिस्टेड कंपनियों में उन्होंने 53 हजार रुपये का निवेश किया है. वहीं बांड, एफडी और कॉरपोरेट बांड में भी उन्होंने 3 करोड़ रुपये का निवेश किया हुआ है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Petrol Diesel Price: पेट्रोल&amp;डीजल की कीमतों पर संसद में गूंजे सवाल, सरकार ने समझाया फ्यूल पर टैक्स का गणित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-पेट्रोल-डीजल-की-कीमतों-पर-संसद-में-गूंजे-सवाल-सरकार-ने-समझाया-फ्यूल-पर-टैक्स-का-गणित</link>
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        <description><![CDATA[ Government on Petrol-Diesel Rate: ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा किया गया. पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अब राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री से ईंधन की कीमतें और कराधान को लेकर सवाल पूछा गया. सांसद चंद्रकांत दामोदर हंडोरे ने पूछा क्या सरकार ने पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का घरेलू बजट और महंगाई पर प्रभाव आंका है?
मंत्रालय के राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने इस सवाल के जवाब में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का महंगाई पर प्रभाव थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में उनके भार (Weightage) के आधार पर आंका जाता है. जैसे...

पेट्रोल का भार: 1.73%
डीजल का भार: 4.03%

इसके अलावा संसद में मंत्रालय से सवाल पूछा गया कि पिछले पांच सालों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार की ओर से वसूले गए कर एवं उपकर (सेस) का विवरण क्या है? इस सवाल के जवाब में सुरेश गोपी ने बताया कि पेट्रोलियम क्षेत्र से केंद्र सरकार को प्राप्त कुल राजस्व (कर, उपकर, रॉयल्टी, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क आदि) इस प्रकार रहा...
Ethanol: पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलेगा या नहीं? सरकार ने संसद में बताया, कहा- अब सबसे चर्चा...
पेट्रोलियम क्षेत्र से केंद्र सरकार को कुल राजस्व योगदान (कर, उपकर, रॉयल्टी आदि)



वित्तीय वर्ष


केंद्र सरकार को कुल योगदान (₹ करोड़ में)




2021-22
4,92,302.5


2022-23
4,28,067.1


2023-24
4,32,394.1


2024-25*
4,24,826.7


2025-26*
4,75,739.0



इनमें प्रमुख मदों में उत्पाद शुल्क (Excise Duty), कस्टम ड्यूटी, कच्चे तेल पर सेस, रॉयल्टी, IGST, CGST, कॉरपोरेट टैक्स, डिविडेंड और अन्य शुल्क शामिल हैं.
केवल उत्पाद शुल्क (Excise Duty):



वित्तीय वर्ष


केंद्र सरकार को कुल योगदान (₹ करोड़ में)




2021-22
4,92,302.5


2022-23
4,28,067.1


2023-24
4,32,394.1


2024-25*
4,24,826.7


2025-26*
4,75,739.0



इसके अलावा संसद में पूछा गया कि क्या सरकार करों का युक्तिकरण (Rationalisation) कर ईंधन की कीमतें कम करने की योजना बना रही है? अगर हां तो विवरण, अगर नहीं तो कारण क्या हैं?
इस जवाब में मंत्री ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार आधारित (Market Determined) हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय बाजार और अन्य कारकों को देखते हुए कीमत तय करती हैं. हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर सरकार कर संरचना में हस्तक्षेप करती रही है.
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम...

नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में पेट्रोल पर 13 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर की कटौती की, जिसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया.
मार्च 2024 में तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 2 रुपए प्रति लीटर घटाई.
अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाया, लेकिन इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया.
मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई. उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटा दिया.

सरकार के अनुसार, इस कटौती से केंद्र सरकार के कर राजस्व पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा, लेकिन इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के प्रभाव से बचाना था.
India-China Border Trade: 6 साल बाद भारत-चीन ट्रेड को&amp;nbsp;मिली हरी झंडी, 1 अगस्त से सस्ते मिलेंगे तिब्बती ऊन और पश्मीना
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol, Diesel, Price:, पेट्रोल-डीजल, की, कीमतों, पर, संसद, में, गूंजे, सवाल, सरकार, ने, समझाया, फ्यूल, पर, टैक्स, का, गणित</media:keywords>
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    <item>
        <title>Plastic Note: भारत में आने वाले प्लास्टिक नोटों में होंगे हाईटेक सिक्योरिटी फीचर्स! जानिए और किन देशों में चल रही है ये करेंसी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/plastic-note-भारत-में-आने-वाले-प्लास्टिक-नोटों-में-होंगे-हाईटेक-सिक्योरिटी-फीचर्स-जानिए-और-किन-देशों-में-चल-रही-है-ये-करेंसी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/plastic-note-भारत-में-आने-वाले-प्लास्टिक-नोटों-में-होंगे-हाईटेक-सिक्योरिटी-फीचर्स-जानिए-और-किन-देशों-में-चल-रही-है-ये-करेंसी</guid>
        <description><![CDATA[ Plastic Currency: कुछ दिन पहले RBI ने बताया कि जल्दी ही वो प्लास्टिक करेंसी लेकर आने वाले हैं. जिसके बाद से ही इन नए नोटों को लेकर लोगों के कई सारे सवाल भी हैं. जैसे कि ये नोट कैसे दिखेंगे, क्या इनकी डिजाइन बदलेगी, क्या इन्हें ATM से निकाला जा सकेगा आदि. इसके अलावा एक सवाल और है इन नोटों के सेफ्टी फीचर्स के बारे में, कि क्या इसमें कोई सीक्रेट सिक्योरिटी फीचर होगा? आइये बताते हैं इस सवाल का जवाब.
प्लास्टिक नोटों में होंगे सिक्योरिटी फीचर्स?इस सवाल का जवाब है हां! प्लास्टिक नोटों में सीक्रेट सिक्योरिटी फीचर्स हो सकते हैं. इन नोटों में सालों से चल रहे कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा आधुनिक और मजबूत सिक्योरिटी फीचर्स हो सकते हैं. इनमें ट्रांसपैरेंट विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग, रंग बदलने वाली स्याही, उभरी हुई छपाई, लेजर बेस्ड डिजाइन और स्पेशल होलोग्राफिक तत्व जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं. इन तकनीकों के कारण नकली नोट तैयार करना काफी मुश्किल हो जाता है.
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इन देशों में पहले से चल रही है प्लास्टिक करेंसीभारत से पहले दुनिया के कई देशों में प्लास्टिक करेंसी पहले से इस्तेमाल हो रही है. सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने साल 1988 में प्लास्टिक नोट जारी किए थे. इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, ब्रुनेई, रोमानिया, वियतनाम और कई अन्य देशों ने भी पॉलीमर नोट अपनाए. इन देशों का अनुभव बताता है कि प्लास्टिक नोट कागज के नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं, पानी से खराब नहीं होते और लंबे समय तक चलते हैं.
मजबूत होते हैं प्लास्टिक नोटइतना ही नहीं सुरक्षा के लिहाज से भी पॉलीमर नोट काफी मजबूत माने जाते हैं. इनमें बने ट्रांसपैरेंट सेफ्टी फीचर्स और स्पेशल प्रिंटिंग तकनीक की नकल करना बेहद कठिन होता है. यही वजह है कि कई देशों में नकली नोटों पर काफी हद तक लगाम लगाने में प्लास्टिक करेंसी को प्रभावी माना गया है.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Plastic, Note:, भारत, में, आने, वाले, प्लास्टिक, नोटों, में, होंगे, हाईटेक, सिक्योरिटी, फीचर्स, जानिए, और, किन, देशों, में, चल, रही, है, ये, करेंसी</media:keywords>
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        <title>50 Rupee: 100&amp; 200 ही नहीं 50 रुपये के नकली नोट से भी हो सकती है धोखाधड़ी, इस तरह पहचानें असली नोट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/50-rupee-100-200-ही-नहीं-50-रुपये-के-नकली-नोट-से-भी-हो-सकती-है-धोखाधड़ी-इस-तरह-पहचानें-असली-नोट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/50-rupee-100-200-ही-नहीं-50-रुपये-के-नकली-नोट-से-भी-हो-सकती-है-धोखाधड़ी-इस-तरह-पहचानें-असली-नोट</guid>
        <description><![CDATA[ 50 Rupee Note: खरीदारी करते समय कभी हमारे हाथ में जब छुट्टे पैसे यानी 100, 50, 20, 10 के नोट मिलते हैं तो उन्हें बिना देखे सीधा जेब में रख लेते हैं. लेकिन ऐसे में ही कई बार धोखे का शिकार बी हो जाते हैं. कई बार जेब में असली की जगह पर नकली नोट आ जाते हैं. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बहुत ही आसान तरीके से 50 रुपये के नोट को पहचानने का तरीका बताया है.
RBI ने बताई नोट की पहचानभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए हर भारतीय नोट की असली पहचान बताई गई है. इसी में 50 रुपये के नोट के भी कई फीचर्स बताए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि ये नोट असली है या नकली. इन फीचर्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उनकी नकल करना भी आसान नहीं है. ऐसे में इन पॉइंट्स को ध्यान में पढ़ें और असली नोट की पहचान करें.
ये भी पढ़ें: Plastic Note: भारत में आने वाले प्लास्टिक नोटों में होंगे हाईटेक सिक्योरिटी फीचर्स! जानिए और किन देशों में चल रही है ये करेंसी
50 रुपये के असली नोट को ऐसे पहचानेंRBI की वेबसाइट के मुताबिक 50 रुपये के असली नोट को पहचानने का तरीका बेहद आसान है. आइये बताते हैं:

नोट के नीचे बाईं ओर 50 का सी-थ्रू सिक्योरिटी फीचर दिया गया है, जो नोट को रोशनी के सामने रखने पर साफ दिखाई देता है.
नोट पर 50 अंक देवनागरी (हिंदी) में भी लिखा गया है.
नोट के सामने वाले हिस्से के बीच में महात्मा गांधी की तस्वीर छपी है.
50 रुपये के नोट की दाईं ओर आरबीआई की गारंटी, गवर्नर के हस्ताक्षर, भुगतान का वादा और RBI का लोगो दिया गया है.
नोट के ऊपर बाईं ओर सीरियल नंबर छोटे अंक से शुरू होकर बड़े अंक तक बढ़ते क्रम में लिखा गया है.
नोट के नीचे दाईं ओर भी सीरियल नंबर छोटे से बड़े आकार में बढ़ते क्रम में छपा है.
नोट के नीचे दाईं ओर अशोक स्तंभ का प्रतीक (राष्ट्रीय चिन्ह) बना हुआ है.

बता दें कि RBI समय-समय पर लोगों से अपील करता है कि नकली नोटों से बचने के लिए करेंसी पर मौजूद सुरक्षा फीचर्स की जानकारी रखें. यदि किसी नोट को लेकर संदेह हो, तो उसे रोशनी में देखकर और इन सुरक्षा चिन्हों की जांच करके उसकी असलियत का पता लगाया जा सकता है. ऐसे में आपके पास जब भी 50 रुपये का नोट आए तो आप उसे अच्छी तरह से चेक करें उसके बाद ही इस्तेमाल करें.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rupee:, 100-, 200, ही, नहीं, रुपये, के, नकली, नोट, से, भी, हो, सकती, है, धोखाधड़ी, इस, तरह, पहचानें, असली, नोट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp; Diesel Price Today: आज टैंक फुल कराने से पहले चेक कर लें नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है पेट्रोल&amp;डीजल का भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-आज-टैंक-फुल-कराने-से-पहले-चेक-कर-लें-नए-रेट-जानें-आपके-शहर-में-कितना-है-पेट्रोल-डीजल-का-भाव</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Price Today 21 July: अगर आप आज गाड़ी लेकर घर से निकलने वाले हैं, तो एक बार पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जरूर देख लें. सरकारी तेल कंपनियों ने 21 जुलाई के लिए ईंधन की नई कीमतें जारी कर दी हैं. अच्छी बात ये है कि आज भी आम लोगों को राहत मिली है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर शहर में एक ही कीमत होगी. अलग-अलग राज्यों में लगने वाले वैट और स्थानीय टैक्स की वजह से पेट्रोल और डीजल के रेट अलग-अलग बने हुए हैं. यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में ईंधन की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है.
शहर अनुसार पेट्रोल- डीजल के दाम-



शहर का नाम
पेट्रोल का भाव
डीजल का भाव


दिल्ली
102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
111.21 रुपये&amp;nbsp;
97.83 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


चेन्नई
107.77 रुपये
99.55 रुपये


पटना
113.35 रुपये&amp;nbsp;
99.36 रुपये


चंडीगढ़
101.51 रुपये
89.47 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये
103.82 रुपये


भुवनेश्वर
108.97 रुपये
100.68 रुपये



100- 200 ही नहीं 50 रुपये के नकली नोट से भी हो सकती है धोखाधड़ी, इस तरह पहचानें असली नोट
रोज सुबह क्यों जारी होते हैं नए रेट?देश की तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपडेट करती हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और राज्यों के टैक्स को ध्यान में रखकर ये कीमतें तय की जाती हैं. इसलिए कई बार बिना किसी बड़े बदलाव के भी अलग-अलग शहरों में रेट अलग दिखाई देते हैं.
कैसे पता करें सही रेट?&amp;nbsp;अगर आप अपने शहर का ताजा रेट जानना चाहते हैं, तो इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की वेबसाइट या SMS सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपको घर बैठे ही अपने इलाके में पेट्रोल और डीजल की सटीक कीमत पता चल जाएगी.
भारत में आने वाले प्लास्टिक नोटों में होंगे हाईटेक सिक्योरिटी फीचर्स! जानिए और किन देशों में चल रही है ये करेंसी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-, Diesel, Price, Today:, आज, टैंक, फुल, कराने, से, पहले, चेक, कर, लें, नए, रेट, जानें, आपके, शहर, में, कितना, है, पेट्रोल-डीजल, का, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate Today: 14 किलो और 19 किलो का गैस सिलेंडर कितने में मिलेगा? जानें आज क्या है एलपीजी का दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-14-किलो-और-19-किलो-का-गैस-सिलेंडर-कितने-में-मिलेगा-जानें-आज-क्या-है-एलपीजी-का-दाम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-14-किलो-और-19-किलो-का-गैस-सिलेंडर-कितने-में-मिलेगा-जानें-आज-क्या-है-एलपीजी-का-दाम</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 21 July 2026: रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. 21 जुलाई को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है. यानी इस महीने की शुरुआत में जो रेट तय किए गए थे, वही आज भी लागू हैं और कुछ महंगा नहीं हुआ है. ऐसे में अगर आप आज गैस सिलेंडर बुक कराने की सोच रहे हैं तो आपको पिछली कीमत पर ही सिलेंडर मिलेगा. वैसे भी पेट्रोल और डीजल की तरह LPG सिलेंडर के दाम रोजाना अपडेट नहीं होते हैं. तेल विपणन कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को कीमतों की समीक्षा करती हैं.&amp;nbsp;
आपके शहर में कितना है घरेलू सिलेंडर का रेट?

दिल्ली- 942.0 रुपये
मुंबई- 941.5 रुपये
कोलकाता- 968.0 रुपये
चेन्नई- 957.5 रुपये
चंडीगढ़- 951.5 रुपये
देहरादून- 961.0 रुपये&amp;nbsp;
हैदराबाद- 934.0 रुपये
भुवनेश्वर- 968.0 रुपये
तिरुवनंतपुरम- 951.0 रुपये

आज टैंक फुल कराने से पहले चेक कर लें नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है पेट्रोल-डीजल का भाव
आपके शहर में कितना है कमर्शियल सिलेंडर का रेट? 

दिल्ली- 2930.0 रुपये
मुंबई- 2885.5 रुपये
कोलकाता- 3082.0 रुपये
चेन्नई- 3106.0 रुपये
चंडीगढ़- 2954.5 रुपये&amp;nbsp;
देहरादून- 2983.5 रुपये
हैदराबाद- 2052.5 रुपये
भुवनेश्वर- 3115.0 रुपये
तिरुवनंतपुरम- 2970.5 रुपये

घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर में क्या है अंतर?घरेलू 14.2 किलोग्राम वाला LPG सिलेंडर घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसाय में उपयोग किया जाता है. इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई थी, जबकि घरेलू सिलेंडर के दाम स्थिर रखे गए थे.
100- 200 ही नहीं 50 रुपये के नकली नोट से भी हो सकती है धोखाधड़ी, इस तरह पहचानें असली नोट
अगले बदलाव पर रहेगी नजरअब गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले लोगों की नजर 1 अगस्त की कीमतों पर है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव होता है तो अगले महीने घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल 21 जुलाई को रसोई गैस के दाम स्थिर बने हुए हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, किलो, और, किलो, का, गैस, सिलेंडर, कितने, में, मिलेगा, जानें, आज, क्या, है, एलपीजी, का, दाम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बड़ी खबर: बंद होंगे 11 करोड़ टीवी, 4 से 6 गुना बढ़ेगा केबल और DTH का मंथली चार्ज? सरकार का आया बयान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बड़ी-खबर-बंद-होंगे-11-करोड़-टीवी-4-से-6-गुनाबढ़ेगा-केबल-और-dthका-मंथली-चार्ज-सरकार-का-आया-बयान</link>
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        <description><![CDATA[ TV- DTH News: सोशल मीडिया पर इन दिनों टीवी बंद होने की खबर एकदम चर्चा में है. असल में एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार जल्दी ही 11 करोड़ टीवी बंद करने वाली है और टीवी ब्रॉडकास्ट बहुत महंगे होने वाले हैं. आइये यहां से समझचे हैं कि पूरा मामला क्या है और इस पूरे मामले के पीछे क्या और कितनी सच्चाई है.
क्या है पूरा मामला?&amp;nbsp;वायरल हो रहे पोस्ट में लिखा हुआ है कि &#039;मोदी सरकार का एक फैसला और बंद हो जाएंगे 11 करोड़ टीवी. पहले ही मोबाइल के चलते 1 करोड़ टीवी बंद हो चुके हैं. टीवी इंडस्ट्री बड़े खतरे में है, जिसकी अर्थी सरकार ने सजा दी है. सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 12 जून को नए नियमों का ड्राफ्ट पेश किया है. टीवी ब्रॉडकास्ट और टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक ही नियम होंगे. एक जैसे नियमों से सरकार को मोटी लाइसेंस फीस मिलेगी.

A social media post claims that the @MIB_India&#039;s new draft rules will force 11 crore TVs to shut down, increase cable and DTH charges 4 to 6 times, impose heavy licensing fees, and destroy millions of jobs.#PIBFactCheck❌ This claim is FAKE. The Union Government has NOT&amp;hellip; pic.twitter.com/aAdsGOdVQf
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 20, 2026



इस पोस्ट में ये भी लिखा हुआ है कि इस चलते टीवी ब्रॉडकास्ट बहुत महंगा हो जाएगा. सर्विस प्रोवाइडर और केबल ऑपरेटर अपने चार्ज 4 से 6 गुना कर देंगे. DTH और केबल टीवी खत्म हो जाएंगे. एक झटके में टीवी तो बंद होंगे ही, लाखों लोगों के रोजगार भी एक झटके में खत्म हो जाएंगे. पैसे की भूखी सरकार देश को तबाह करने पर उतारू है.&#039;&amp;nbsp;
क्या है सच्चाई?पीआईबी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ये साफ कहा है कि ये पोस्ट झूठा है और केंद्र सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जिससे टीवी सब्सक्रिप्शन का खर्च 4 से 6 गुना बढ़ जाए या देश में टीवी सेवाएं बंद हो जाएं.&amp;nbsp;
साथ ही पीआईबी ने लिखा कि MIB ने टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीविजन, रेडियो और संबंधित सेवाएं) नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर अभी 27 जुलाई, 2026 तक जनता और संबंधित लोगों से राय मांगी जा रही है. ड्राफ्ट नियमों में किसी भी तरह की फीस बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है. साथ ही इन नियमों का मकसद टीवी और रेडियो सेवाओं के लिए जारी अलग-अलग गाइडलाइंस को एक साथ लाना है. इनका मकसद मौजूदा व्यवस्था को आसान और एक जैसा बनाना है, ताकि टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में आसानी से काम किया जा सके.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 22:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बड़ी, खबर:, बंद, होंगे, करोड़, टीवी, से, गुना बढ़ेगा, केबल, और, DTH का, मंथली, चार्ज, सरकार, का, आया, बयान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Chaayos समेत 41 रेस्टोरेंट्स को भरना पड़ा 50 हजार जुर्माना, जानें आपसे कोई सर्विस चार्ज लें तो कहां करें शिकायत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chaayos-समेत-41-रेस्टोरेंट्स-को-भरना-पड़ा-50-हजार-जुर्माना-जानें-आपसे-कोई-सर्विस-चार्ज-लें-तो-कहां-करें-शिकायत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/chaayos-समेत-41-रेस्टोरेंट्स-को-भरना-पड़ा-50-हजार-जुर्माना-जानें-आपसे-कोई-सर्विस-चार्ज-लें-तो-कहां-करें-शिकायत</guid>
        <description><![CDATA[ Restaurant Service Charge: अगर आप किसी होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं और बिल में बिना पूछे सर्विस चार्ज जोड़ दिया जाता है तो ये खबर आपके लिए ही है. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने Chaayos, Barbeque Nation समेत देशभर के 41 रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की है. इन रेस्टोरेंट्स पर ग्राहकों की सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ने का आरोप है. कई मामलों में 50000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है और ग्राहकों से वसूला गया सर्विस चार्ज लौटाने के भी निर्देश दिए गए हैं. आइये समझते हैं कि सर्विस चार्ज से जुड़े क्या- क्या अधिकार ग्राहकों के पास हैं.
क्या है पूरा मामला?CCPA के अनुसार, कई रेस्टोरेंट ग्राहकों के बिल में 5% या 10% सर्विस चार्ज अपने आप जोड़ रहे थे. कई ग्राहक इसे GST समझकर भुगतान कर देते थे, जबकि सर्विस चार्ज और GST दोनों अलग-अलग चीजें हैं. सरकार का कहना है कि किसी भी ग्राहक से उसकी मंजूरी के बिना सर्विस चार्ज लेना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है. इसी वजह से रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है.&amp;nbsp;
बड़ी खबर: बंद होंगे 11 करोड़ टीवी, 4 से 6 गुना&amp;nbsp;बढ़ेगा केबल और DTH&amp;nbsp;का मंथली चार्ज? सरकार का आया बयान
क्या सर्विस चार्ज देना जरूरी है?नहीं, सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं है. CCPA के अनुसार होटल या रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज देने के लिए फोर्स नहीं कर सकते हैं. अगर बिल में ये चार्ज जोड़ा गया है और आप इसे नहीं देना चाहते तो रेस्टोरेंट से इसे हटाने की मांग कर सकते हैं. रेस्टोरेंट सिर्फ इसलिए आपको खाना देने से मना नहीं कर सकता क्योंकि आपने सर्विस चार्ज देने से इनकार किया है.&amp;nbsp;
सर्विस चार्ज और GST में क्या अंतर है?कई लोग सर्विस चार्ज और GST को एक ही समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. GST सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स है, जिसे देना जरूरी होता है. सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट लगाते हैं और ये ऑप्शनल होता है. इसे देना या न देना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है.&amp;nbsp;
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सर्विस चार्ज के लिए कैसे करें शिकायत?अगर कोई रेस्टोरेंट आपकी बात नहीं मानता और जबरन सर्विस चार्ज वसूलता है तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर 1915 नंबर पर कॉल करें या फिर एनसीएच एप या वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत करें. इसके अलावा consumerhelpline.gov.in पर जाकर शिकायत कर सकते हैं.&amp;nbsp;
इन बातों का रखें ध्यानरेस्टोरेंट का बिल ध्यान से देखें. अगर उसमें सर्विस चार्ज जुड़ा है और आप उसे नहीं देना चाहते, तो तुरंत हटाने के लिए कहें. बिल और भुगतान का बिल अपने पास जरूर रखें. यही डॉक्यूमेंट शिकायत के समय आपके काम आएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Chaayos, समेत, रेस्टोरेंट्स, को, भरना, पड़ा, हजार, जुर्माना, जानें, आपसे, कोई, सर्विस, चार्ज, लें, तो, कहां, करें, शिकायत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Diesel Blending: एथेनॉल की तरह डीजल में बायोडीजल का मिश्रण शुरू, पंपों पर हो रही बिक्री, जानें कितने परसेंट है मिलावट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/diesel-blending-एथेनॉल-की-तरह-डीजल-में-बायोडीजल-का-मिश्रण-शुरू-पंपों-पर-हो-रही-बिक्री-जानें-कितने-परसेंट-है-मिलावट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/diesel-blending-एथेनॉल-की-तरह-डीजल-में-बायोडीजल-का-मिश्रण-शुरू-पंपों-पर-हो-रही-बिक्री-जानें-कितने-परसेंट-है-मिलावट</guid>
        <description><![CDATA[ Diesel Blending: पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंड करने को लेकर देशभर में काफी बवाल चल रहा है. कई लोगों ने शिकायत की है कि उनकी गाड़ी इस पेट्रोल की वजह से खराब हो रही है. हालांकि सरकार ने इसे वापस लेने का कोई फैसला नहीं किया है. तमाम विरोध और शिकायतों के बीच अब सरकार पेट्रोल के बाद मिलावटी डीजल लाने की भी तैयारी कर रही है. जैसे बाजार में ई20 आ गया है, वैसे ही अब बी5 भी साल 2020 तक आने वाला है.
कितने प्रतिशत होगी मिलावट?दरअसल ई-20 के बाद अब सरकार जल्दी ही बी-5 फ्यूल लाने की तैयारी कर रही है. ये मिलावटी डीजल होगी, जैसे पेट्रोल में एथेनॉल का 20 प्रतिशत मिलाकर उसे ई-20 पेट्रोल बनाया गया है, उसी तरह से 95 प्रतिशत डीजल में 5 प्रतिशत जैवित मिलाकर इस बी-5 डीजल को बनाया जाएगा. सरकार का कहना है कि इसे इंजन में किसी तरह के संशोधन के बिना इस्तेमाल किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: Chaayos समेत 41 रेस्टोरेंट्स को भरना पड़ा 50 हजार जुर्माना, जानें आपसे कोई सर्विस चार्ज लें तो कहां करें शिकायत?
कैसे बनेगा बायोडीजल?इंडियन ऑइल की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार ये डीजल जटरोफा और करंजिया से बनाया जाएगा. ये दोनों वनस्पति तेल होते हैं जिनका खाने- पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. ऐसे में इनकी मदद से अच्छी किस्म का बायोडीजल बन पाएगा. सरकार के द्वारा पहले भी बायोडीजल पर बनाकर उसकी परीक्षण किया जा चुका है, जो सफल भी रहा है. हरियाणा रोडवेज, रेलवे, टाटा की मदद से 5 से 10 प्रतिशत तक मिलाकर व्यापक परीक्षण किया जा चुका है.
प्रदूषण होगा नियंत्रितइस बायोडीजल को बनाना के उद्देश्य वही है जो ई-20 को लेकर सरकार का लक्ष्य रहा है. सरकार चाहती है कि तेल को लेकर अन्य देशों पर निर्भरता सही नहीं है. ऐसे में घरेलू उत्पादन ही ज्यादा सही होगा. इसके अलावा इस फ्यूल की मदद से प्रदूषण भी नियंत्रित होगा. ई-20 का लक्ष्य तय समय से पहले ही प्राप्त हो गया है. ऐसे में साल 2030 तक बायोडीजल लाने का भी सरकार का प्लान है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Diesel, Blending:, एथेनॉल, की, तरह, डीजल, में, बायोडीजल, का, मिश्रण, शुरू, पंपों, पर, हो, रही, बिक्री, जानें, कितने, परसेंट, है, मिलावट</media:keywords>
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        <title>पानी से भी सस्ता पेट्रोल, दुनिया के सबसे सस्ते तेल वाले देशों की लिस्ट आई सामने, पहले नंबर पर कौन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पानी-से-भी-सस्ता-पेट्रोल-दुनिया-के-सबसे-सस्ते-तेल-वाले-देशों-की-लिस्ट-आई-सामने-पहले-नंबर-पर-कौन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पानी-से-भी-सस्ता-पेट्रोल-दुनिया-के-सबसे-सस्ते-तेल-वाले-देशों-की-लिस्ट-आई-सामने-पहले-नंबर-पर-कौन</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol and Diesel Prices: क्या आप यकीन करेंगे कि लीबिया में पेट्रोल पानी से भी सस्ता मिलता है. भारत में एक लीटर पानी की बोतल का दाम औसतन 15 से 20 रुपए है. मान लीजिए एक लीटर पानी की बोतल के लिए हम 15 रुपए खर्च करते हैं. इतने में लीबिया में 6 लीटर पेट्रोल खरीद सकते हैं. यह कोई मजाक नहीं, बल्की हकीकत है. लीबीया में एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा में सिर्फ 2.25 रुपए है.
युद्ध और वैश्विक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, जबकि दुनिया में पेट्रोल की औसत कीमत 141 प्रति लीटर हो गई है. इसके बावजूद कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां पेट्रोल की कीमत 4 प्रति लीटर से कम बनी हुई है.
सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले देश
लीबिया में एक लीटर पेट्रोल 2.25 रुपये है, आज की डेट में सबसे सस्ता पेट्रोल है. ग्लोबल पेट्रोल प्राइस की लिस्ट के अनुसार दूसरे नंबर में ईरान है, यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.27 रुपये है. तीसरे नंबर पर वेनेजुएला है, यंहा पेट्रोल की कीमत 3.36 रुपये लीटर है. ये देश कच्चे तेल के उत्पादक हैं.
यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;Plastic Bank Notes: क्या प्लास्टिक के नोट फोल्ड हो सकेंगे, इन्हें गिनने वाली मशीनें बदलनी पड़ेंगी?
कुवैत में पेट्रोल की कीमत 32.60 रुपये लीटर है वहीं, अंगोला में पेट्रोल की कीमत 31.43 रुपय लीटर है. तुर्कमेनिस्तान में 41.27 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल है. इजिप्ट में एक लीटर की कीमत 45.49 रुपय है, ये भी दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप 10 देशों में शामिल है.
कतर और अऊदी अरब भी टॉप 10 देशो में शामिल हैं, लेकिन यहां पेट्रोल के दाम 50 रुपये से ऊपर हैं. कतर में पेट्रोल की कीमत 55.38 रुपये लीटर है, वहीं सऊदी अरब में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 59.58 रुपये है.
सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाले देश
अगर दुनिया के सबसे महंगे पेट्रोल वाले देशों की बात करें, तो हांगकांग सबसे ऊपर है, जहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 390.52 है. इसके बाद मलावी (310.97) और डेनमार्क (257.87) का स्थान आता है. वहीं, इजरायल और नीदरलैंड समेत कई यूरोपीय देशों में भी पेट्रोल की कीमत 200 प्रति लीटर से ज्यादा बनी हुई है.
सबसे सस्ता और महंगा डीजल बेचने वाले देश
अगर सबसे सस्ता डीजल बेचने वाले देशों की बात करें, तो वेनेजुएला सबसे ऊपर है, जहां एक लीटर डीजल की कीमत 40 पैसे है. इसके बाद ईरान में 55 पैसे और लीबिया में 2.25 रुपये लीटर. अल्जीरिया में एक लीटर डीजल की कीमत 22.37 रुपये है. तुर्केमेनिस्तान में डीजल 27.51 रुपये प्रति लीटर है, कुवैत में 35.70 रुपये, इजिप्ट में 38.35 रुपये प्रति लीटर है और अंगोला में 44 रुपये लीटर. कतर में एक लीटर डीजल की कीमत 54 रुपये है और सऊदी अरब में 44 रुपये.
डीजल की कीमतों के मामले में भी हांगकांग दुनिया में सबसे आगे है, जहां एक लीटर डीजल की कीमत 420 है. इसके बाद मलावी (348), सिंगापुर (261.84) और डेनमार्क (258.36) का स्थान है. वहीं, स्विट्जरलैंड (237.34), फिनलैंड (237), इजरायल (235) और नीदरलैंड (229) में भी डीजल की कीमतें काफी ऊंची हैं.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पानी, से, भी, सस्ता, पेट्रोल, दुनिया, के, सबसे, सस्ते, तेल, वाले, देशों, की, लिस्ट, आई, सामने, पहले, नंबर, पर, कौन</media:keywords>
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        <title>अपने Youtube चैनल से कितना पैसा कमाते हैं सोनम वांगचुक? क्या इस कमाई से सरकार को देते हैं टैक्स?</title>
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        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk YouTube Income: पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं. हाल ही में उनकी भूख हड़ताल और स्वास्थ्य को लेकर खबरें सामने आने के बाद लोग उनकी निजी जिंदगी और कमाई के स्त्रोतों के बारे में भी जानना चाहते हैं. खासकर लोग यह जानना चाहते हैं कि वह अपने YouTube चैनल से कितनी कमाई करते हैं और क्या वह इस कमाई पर टैक्स भी देते है.&amp;nbsp;
कितना पैसा कमाते हैं सोनम वांगचुक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनम वांगचुक का वांगचुक वर्ल्ड (Wangchuk World) नाम से एक YouTube चैनल है, जहां लाखों सब्सक्राइबर हैं. बताया जा रहा है कि इस चैनल से उन्हें हर महीने करीब 3 लाख से 7 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है. इसके अलावा सोनम वांगचुक की कमाई का जरिए कई तरह से होता है. YouTube चैनल के अलावा उन्हें देश-विदेश में आयोजित लेक्चर, कॉन्फ्रेंस और मोटिवेशनल स्पीकिंग से भी पैसे आते हैं. साथ ही उनकी नेटवर्थ करीब 75 लाख रुपये बताई जाती है.
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क्या YouTube की कमाई पर टैक्स लगता है?
भारत में YouTube, AdSense, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से होने वाली कमाई पूरी तरह टैक्स के दायरे में आती है. जिसे आमतौर पर बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय कहा जाता है. ऐसे में कमाई से जुड़े खर्च घटाने के बाद बची हुई आय पर लागू टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स देना होता है. वहीं अगर आपकी तय सीमा से ज्यादा कारोबार होने पर GST से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं.
क्या सोनम वांगचुक सरकार को टैक्स देते हैं?
सार्वजनिक बयानों में सोनम वांगचुक ने खुद कई बार यह कह चुके हैं कि वे अपनी कमाई पर नियमित रूप से टैक्स का पेमेंट करते हैं. हालांकि लद्दाख के कुछ इलाकों के निवासियों को इनकम टैक्स के तहत विशेष छूट मिल सकती है. लेकिन सोनम वांगचुक ने इसे अपना नैतिक दायित्व बताते हुए कहा है कि वे अपनी कमाई के मुताबिक सरकार को पूरा टैक्स देते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अपने, Youtube, चैनल, से, कितना, पैसा, कमाते, हैं, सोनम, वांगचुक, क्या, इस, कमाई, से, सरकार, को, देते, हैं, टैक्स</media:keywords>
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        <title>Plastic Bank Notes: क्या प्लास्टिक के नोट फोल्ड हो सकेंगे, इन्हें गिनने वाली मशीनें बदलनी पड़ेंगी?</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Polymer Notes: अगर भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की योजना सफल रही, तो आने वाले समय में आपको देश में कागजी नोटों की जगह पॉलीमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट को देखनी का मौका मिलेगा. RBI के मुताबिक शुरुआत में 10 और 20 के पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा सकता है. यह नोट मौजूदा नोटों के मुकाबले में काफी बेहतर, मजबूत और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ए नोट आसानी से फोल्ड किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या प्लास्टिक के नोट फोल्ड किए जा सकेंगे?
पॉलीमर नोट आपको देखने में भले ही प्लास्टिक की तरह लगें, लेकिन यह आपको डेबिट या क्रेडिट कार्ड की तरह सख्त नहीं लगेंगे. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह लचीली और काफी पतले होते हैं. इसे आप मौजूदा कागजी नोटों की तरह आसानी से मोड़कर जेब या वॉलेट में रख सकते हैं. लेकिन यह कागजी नोटों से इसलिए अलग है क्योंकि इसे फोल्ड करने पर स्थायी क्रीज़ नहीं पड़ती और ये दोबारा अपने पुराने शेप में आने की कोशिश करते हैं.
अपने Youtube चैनल से कितना पैसा कमाते हैं सोनम वांगचुक? क्या इस कमाई से सरकार को देते हैं टैक्स?
क्या बदलनी पड़ेंगी नोट गिनने वाली मशीनें?
पॉलीमर नोटों की बनावट और मोटाई मौजूदा कागजी नोटों के मुकाबले काफी अलग होती है. ऐसे में मौजूदा नोट गिनने वाली मशीनों, कैश हैंडलिंग और ATM को इन नए नोटों की पहचानने और गिनने के लिए के लिए अपग्रेड करना पड़ सकता है. हालांकि जरूरत पड़ने पर कैश हैंडलिंग सिस्टम में भी तकनीकी बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि लोग इन नए नोटों का इस्तेमाल बिना किसी परेशानी के आराम से कर सकें.&amp;nbsp;
पॉलीमर नोटों की क्या हैं खासियतें?

कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक टिकाऊ होते हैं.
इन पर गंदगी और बैक्टीरिया कम जमा होते हैं.
पानी, नमी और फटने से बेहतर सुरक्षा मिलती है.
एटीएम मशीनों को भी इन नोटों के अनुसार तैयार किया जाएगा.
पारदर्शी विंडो और आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स के कारण नकली नोट बनाना मुश्किल होता है.

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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 06:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Plastic, Bank, Notes:, क्या, प्लास्टिक, के, नोट, फोल्ड, हो, सकेंगे, इन्हें, गिनने, वाली, मशीनें, बदलनी, पड़ेंगी</media:keywords>
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        <title>LPG Cylinder Price Today: आज गैस सिलेंडर खरीदना पड़ेगा महंगा या मिलेगा राहत? जानिए 19 जुलाई का ताजा एलपीजी रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-cylinder-price-today-आज-गैस-सिलेंडर-खरीदना-पड़ेगा-महंगा-या-मिलेगा-राहत-जानिए-19-जुलाई-का-ताजा-एलपीजी-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-cylinder-price-today-आज-गैस-सिलेंडर-खरीदना-पड़ेगा-महंगा-या-मिलेगा-राहत-जानिए-19-जुलाई-का-ताजा-एलपीजी-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Price Today 19 July 2026: अगर आप नया LPG गैस सिलेंडर बुक कराने की सोच रहे हैं, तो पहले आज के ताजा रेट जरूर जान लें. सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 19 जुलाई 2026 के लिए घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें जारी कर दी हैं. इस महीने की शुरुआत में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी की गई थी, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई थी. आज इन दरों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है और ग्राहक मौजूदा कीमतों पर ही सिलेंडर खरीद सकेंगे.
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;

दिल्ली- 942.0 रुपये
मुंबई- 941.5 रुपये
कोलकाता- 968.0 रुपये
चेन्नई- 957.5 रुपये
चंडीगढ़- 951.5 रुपये
देहरादून- 961.0 रुपये&amp;nbsp;
हैदराबाद- 934.0 रुपये
भुवनेश्वर- 968.0 रुपये
तिरुवनंतपुरम- 951.0 रुपये

19 जुलाई को जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;

दिल्ली- 2930.0 रुपये
मुंबई- 2885.5 रुपये
कोलकाता- 3082.0 रुपये
चेन्नई- 3106.0 रुपये
चंडीगढ़- 2954.5 रुपये&amp;nbsp;
देहरादून- 2983.5 रुपये
हैदराबाद- 2052.5 रुपये
भुवनेश्वर- 3115.0 रुपये
तिरुवनंतपुरम- 2970.5 रुपये

घर बैठे कैसे चेक करें रेट?
अगर आप अपने शहर के ताजा एलपीजी रेट जानना चाहते हैं, तो इंडेन, भारत गैस और HP Gas की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. वहां शहरवार घरेलू और कमर्शियल दोनों सिलेंडरों की कीमतें रहती हैं.&amp;nbsp;
27000 करोड़ का बड़ा घोटाला, अनिल अंबानी की कंपनियों पर शिकंजा, 15 ठिकानों पर छापेमारी
गैस सिलेंडर लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?
एलपीजी गैस सिलेंडर लेते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले सिलेंडर की सेफ्टी सील सही है या नहीं, यह जरूर जांचें. सिलेंडर से गैस की लीकेज आने पर उसे स्वीकार न करें. सिलेंडर पर लिखी एक्सपायरी डेट भी देख लें और डिलीवरी के समय संभव हो तो उसका वजन भी चेक करें. रेगुलेटर सही तरीके से फिट हो रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि करें और भुगतान के बाद बिल या कैश मेमो जरूर लें. साथ ही, सिलेंडर को हमेशा सीधी और हवादार जगह पर रखें तथा आग या तेज धूप से दूर रखें, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Cylinder, Price, Today:, आज, गैस, सिलेंडर, खरीदना, पड़ेगा, महंगा, या, मिलेगा, राहत, जानिए, जुलाई, का, ताजा, एलपीजी, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gold&amp; Silver Price Today: आज रविवार को महंगा हुआ सोना, जानें चांदी के क्या हैं हालात, यहां है शहरवार रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-आज-रविवार-को-महंगा-हुआ-सोना-जानें-चांदी-के-क्या-हैं-हालात-यहां-है-शहरवार-रेट-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-आज-रविवार-को-महंगा-हुआ-सोना-जानें-चांदी-के-क्या-हैं-हालात-यहां-है-शहरवार-रेट-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today 19 July 2026: अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा रेट जरूर जान लें. 19 जुलाई 2026 को सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में कल के मुकाबले हल्की तेजी दर्ज की गई है, जबकि चांदी के दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं. ऐसे में निवेश या ज्वेलरी खरीदने से पहले अपने शहर के लेटेस्ट रेट और कीमतों में हुए बदलाव की जानकारी लेना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. यहां से आप सोना और चांदी का भाव देख सकते हैं.&amp;nbsp;
आज क्या है सोने का भाव?

24 कैरेट सोना- करीब 1,43,440 रुपए प्रति 10 ग्राम
22 कैरेट सोना- करीब 1,31,450 रुपए प्रति 10 ग्राम
18 कैरेट सोना- करीब 1,07,620 रुपए प्रति 10 ग्राम

आज गैस सिलेंडर खरीदना पड़ेगा महंगा या मिलेगा राहत? जानिए 19 जुलाई का ताजा एलपीजी रेट
आज चांदी कितने की मिल रही है?आज 999 प्योरिटी वाली चांदी का भाव लगभग 1,68,000 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है. हालांकि, अलग-अलग शहरों और स्थानीय टैक्स के कारण इसमें थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
कल के मुकाबले आज क्या बदला?
आज 19 जुलाई को जारी रेट के अनुसार सोने की कीमत में मामूली बढ़त देखने को मिली है. 24 कैरेट सोना करीब 200 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा होकर लगभग 1,43,440 रुपए पर पहुंच गया, जबकि 22 कैरेट सोना भी करीब 200 रुपए चढ़कर 1,31,450 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया. वहीं, चांदी की कीमत में आज कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ और ये लगभग 1,68,000 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास स्थिर बनी हुई है. सर्राफा बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार में सोने की मांग और डॉलर में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिल रही है.&amp;nbsp;
19 जुलाई को जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव
सोना खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यानसोना हमेशा BIS हॉलमार्क वाला ही खरीदें और खरीदारी के बाद पक्का बिल जरूर लें. हमेशा 22 कैरेट और 24 कैरेट के रेट की तुलना करें. मेकिंग चार्ज और GST की जानकारी पहले ही ले लें और निवेश के लिए गोल्ड ETF या डिजिटल गोल्ड जैसे ऑप्शन के बारे में बता करें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-, Silver, Price, Today:, आज, रविवार, को, महंगा, हुआ, सोना, जानें, चांदी, के, क्या, हैं, हालात, यहां, है, शहरवार, रेट, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Bank Holiday Calender: 20 से 26 जुलाई के बीच कब&amp; कब बंद रहेंगे बैंक? जानें क्या आपके शहर में भी है सरकारी छुट्टी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bank-holiday-calender-20-से-26-जुलाई-के-बीच-कब-कब-बंद-रहेंगे-बैंक-जानें-क्या-आपके-शहर-में-भी-है-सरकारी-छुट्टी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/bank-holiday-calender-20-से-26-जुलाई-के-बीच-कब-कब-बंद-रहेंगे-बैंक-जानें-क्या-आपके-शहर-में-भी-है-सरकारी-छुट्टी</guid>
        <description><![CDATA[ Bank Holiday July 2026: अगर आपको अगले सप्ताह बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम निपटाना है तो पहले बैंक हॉलिडे कैलेंडर जरूर देख लें. भारतीय रिजर्व बैंक की छुट्टियों की लिस्ट के अनुसार, 20 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के बीच देश के अलग-अलग राज्यों में त्योहारों और साप्ताहिक अवकाश छुट्टी के चलते कई दिन बैंक बंद रहेंगे. हालांकि, सभी राज्यों में एक साथ छुट्टी नहीं होगी. यहां से आप छुट्टियों के बारे में डिटेल में जान सकते हैं.&amp;nbsp;
20 से 26 जुलाई के बीच कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

20 जुलाई (सोमवार)- इस दिन ज्यादातर राज्यों में बैंक खुले रहेंगे. बैंक की छुट्टी नहीं है.&amp;nbsp;
21 जुलाई (मंगलवार)- कुछ राज्यों में स्थानीय पर्व के चलते बैंक की छुट्टी हो सकती है. वैसे बैंक बंद नहीं रहने वाला है.&amp;nbsp;
22 जुलाई (बुधवार)- खारची पूजा के अवसर पर अगरतला (त्रिपुरा) में बैंक बंद रहेगा.
23 जुलाई (गुरुवार)- गुरुवार के दिन बैंक खुले रहेंगे.
24 जुलाई (शुक्रवार)- स्थानीय त्योहारों वाले कुछ राज्यों में बैंक बंद रह सकते हैं.
25 जुलाई (शनिवार)- ये महीने का चौथा शनिवार है और आरबीाई के नियमों के अनुसार पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे.
26 जुलाई (रविवार)- 26 को रविवार है और इसी कारण देशभर में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी.

आज रविवार को महंगा हुआ सोना, जानें चांदी के क्या हैं हालात, यहां है शहरवार रेट लिस्ट
क्यों अलग-अलग राज्यों में अलग होती हैं बैंक की छुट्टियां?RBI हर साल बैंक हॉलिडे कैलेंडर जारी करता है. इसमें राष्ट्रीय अवकाश, धार्मिक त्योहार, क्षेत्रीय पर्व और राज्य सरकारों द्वारा घोषित छुट्टियां शामिल होती हैं. इसलिए किसी राज्य में बैंक बंद हो सकते हैं, जबकि दूसरे राज्य में बैंक सामान्य रूप से खुले रहते हैं.
क्या ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी चालू?बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी. ग्राहक ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर, बिल भुगतान और अन्य डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.
आज गैस सिलेंडर खरीदना पड़ेगा महंगा या मिलेगा राहत? जानिए 19 जुलाई का ताजा एलपीजी रेट
बैंक जाने से पहले जरूर करें यह कामअगर आपको चेक जमा करना, ड्राफ्ट बनवाना, कैश जमा या निकासी जैसे काम करने हैं, तो बैंक जाने से पहले अपने शहर की बैंक हॉलिडे लिस्ट जरूर जांच लें. इससे आपको बेमतलब परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Holiday, Calender:, से, जुलाई, के, बीच, कब-, कब, बंद, रहेंगे, बैंक, जानें, क्या, आपके, शहर, में, भी, है, सरकारी, छुट्टी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>इस महिला ने लिया 1 लाख का लोन, अब हर साल कमा रही 8 लाख, गांव की औरत कैसे बनीं बिजनेस वुमन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-महिला-ने-लिया-1-लाख-का-लोन-अब-हर-साल-कमा-रही-8-लाख-गांव-की-औरत-कैसे-बनीं-बिजनेस-वुमन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/इस-महिला-ने-लिया-1-लाख-का-लोन-अब-हर-साल-कमा-रही-8-लाख-गांव-की-औरत-कैसे-बनीं-बिजनेस-वुमन</guid>
        <description><![CDATA[ Lakhpati Didi: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के लडुवा गांव की रहने वाली दिलमती ने मेहनत के दम पर अपनी पूरी जिंदगी बदल दी. कभी पारंपरिक खेती से गुजारा करने वाला उनका परिवार आज सूअर पालन के सफल कारोबार से हर साल करीब 7 से 8 लाख रुपये की कमाई कर रहा है. दिलमती की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि अब आसपास के गावों की महिलाओं के लिए भी एक मिसाल बन चुकी है. यही वजह है कि आज उन्हें इलाके की सफल &#039;लखपति दीदी&#039; के नाम से जाना जाता है.
कैसे शुरू हुआ कारोबार?
दिलमती &#039;मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह&#039; (SHG) से जुड़ी हुई हैं. पहले उनका परिवार सिर्फ खेती पर निर्भर था, जिसके उनके घर का खर्च चलना काफी मुश्किल हो गया था. स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ने के बाद दिलमती ने 1 लाख रुपये का लोन लिया और झारखंड से 10 सूअर खरीदकर एक छोटा कारोबार शुरू कर दिया.&amp;nbsp;
Gold- Silver Price Today: आज रविवार को महंगा हुआ सोना, जानें चांदी के क्या हैं हालात, यहां है शहरवार रेट लिस्ट
आज कैसे हो रही है लाखों की कमाई?
शुरुआत में उनका यह कारोबार काफी छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार उन्हें काफी अच्छा मुनाफा देने लगा. आज उनके पास कई मादा सूअर हैं. हर मादा सूअर एक बार में 9 से 10 बच्चों को जन्म देती है और हर बच्चों की कीमत करीब 5,000 रुपये तक मिल जाती है.
सूअर पालन से होने वाली कमाई को दिलमती ने फिर से कारोबार और खेती में निवेश किया. उन्होंने पशुओं के लिए बेहतर शेड बनवाया, कृषि उपकरण खरीदे, ड्रिप सिंचाई अपनाई और जैविक सब्जियों की खेती भी शुरू की जिससे उनकी आय के कई स्रोत तैयार हो गए. इस कारोबार के बदौलत आज हर साल उनकी कमाई करीब 7-8 लाख रुपये तक है.&amp;nbsp;
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
दिलमती की इस सफलता को देखते हुए उनके गांव के करीब 10 से 15 परिवारों ने भी सूअर पालन का व्यवसाय शुरू किया है. इसके साथ ही वह अब अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुडने, नियमित बचत करने और स्वरोजगार के लिए लोन का सही इस्तेमाल की सलाह दे रही है.
Bank Holiday Calender: 20 से 26 जुलाई के बीच कब- कब बंद रहेंगे बैंक? जानें क्या आपके शहर में भी है सरकारी छुट्टी
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इस, महिला, ने, लिया, लाख, का, लोन, अब, हर, साल, कमा, रही, लाख, गांव, की, औरत, कैसे, बनीं, बिजनेस, वुमन</media:keywords>
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        <title>Sonam Wangchuk: अनशन करने वाले सोनम वांगचुक पैसा कैसे कमाते हैं, अब कितनी है उनकी नेटवर्थ?</title>
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        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk Net Worth: पर्यावरण कार्यकर्ता, इंजीनियर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिससे उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. ऐसे में कई लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर सोनम वांगचुक की कमाई कैसे होती है और उनकी नेटवर्थ कितनी है. आइए यहां से डिटेल में बताते हैं.&amp;nbsp;
कितनी है नेटवर्थ?सोनम वांगचुक ने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति या नेटवर्थ का कोई ऑफिशियल खुलासा नहीं किया है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी नेटवर्थ करीब 75 लाख रुपये बताई जाती है. कुछ दूसरे रिपोर्ट्स में ये आंकड़ा इससे अधिक भी बताया गया है, लेकिन इसका कोई ऑफिशियल डेटा नहीं है.&amp;nbsp;
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कहां से होती है कमाई?सोनम वांगचुक की इनकम के कई सोर्स हैं. उनका अपना यूट्यूब चैनल वांगचुक वर्ल्ड नाम से है, जहां लाखों सब्सक्राइबर हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस चैनल से ही वो 3 से 7 लाख तक महीने की कमाई करते हैं. इसके अलावा उनको राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लेक्चर, कॉन्फ्रेंस और मोटिवेशनल स्पीकिंग से भी पैसे आते हैं.&amp;nbsp;
मिला है रैमोन मैग्सेसे पुरस्कार&amp;nbsp;लद्दाख के रहने वाले सोनम वांगचुक ने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की सह-स्थापना की और बाद में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई है. वो आइस स्तूप जैसी पर्यावरणीय तकनीक के लिए दुनियाभर में पहचाने जाते हैं. उन्हें 2018 में रैमोन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.&amp;nbsp;
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क्यों चर्चा में हैं सोनम वांगचुक?सोनम वांगचुक फिलहाल अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनकी सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनके आंदोलन और मांगों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बच्चों को पैसे की अहमियत कैसे सिखाएं? फाइनेंस एक्सपर्ट ने बताए 5 आसान तरीके, जो जिंदगीभर आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ Money Tips for Kids: आज के समय में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पैसों की सही समझ देना भी उतना ही जरूरी हो गया है.&amp;nbsp; विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बचपन में ही अच्छी आर्थिक आदतें विकसित हो जाएं, तो आगे चलकर बच्चे जिम्मेदारी से पैसे खर्च करना और बचत करना सीखते हैं.
HT Lifestyle से बातचीत में फिनटेक कंपनी Finnovate के सह-संस्थापक नेहल मोटा ने बताया कि बच्चों को फाइनेंशियल रूप से समझदार बनाने के लिए बड़े-बड़े निवेश के पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है. रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें ही उन्हें पैसों की असली कीमत समझा सकती हैं.
तीन हिस्सों में बांटें जेब खर्च
नेहल मोटा के मुताबिक, बच्चों को मिलने वाले पॉकेट मनी को तीन हिस्सों में बांटने की आदत डालनी चाहिए. एक हिस्सा खर्च के लिए, दूसरा बचत के लिए और तीसरा जरूरतमंदों की मदद या दान के लिए. इससे बच्चे शुरू से ही पैसे का सही इस्तेमाल करना सीखते हैं.
Sonam Wangchuk: अनशन करने वाले सोनम वांगचुक पैसा कैसे कमाते हैं, अब कितनी है उनकी नेटवर्थ?
खरीदारी के दौरान सिखाएं सही फैसला लेना
HT Lifestyle के अनुसार, किराने या सुपरमार्केट में खरीदारी के समय बच्चों से पूछें कि कौन-सी चीज जरूरी है और कौन-सी सिर्फ इच्छा उन्हें समझ आएगा कि हर चीज खरीदना जरूरी नहीं होता और हर खर्च सोच-समझकर करना चाहिए.
हर मांग तुरंत पूरी न करें
अगर बच्चा किसी खिलौने या दूसरी चीज की जिद करता है, तो उसे तुरंत खरीदने के बजाय एक दिन इंतजार करने के लिए कहें. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बच्चों में धैर्य बढ़ता है और बिना सोचे-समझे खर्च करने की आदत कम होती है.
कीमतों की तुलना करना सिखाएं
नेहल मोटा की सलाह है कि बच्चों को एक ही सामान की अलग-अलग जगहों पर कीमत देखने की आदत डालें. इससे वे समझ पाएंगे कि खरीदारी करते समय तुलना करना क्यों जरूरी है और कैसे समझदारी से पैसे बचाए जा सकते हैं.
बचत को बनाएं बच्चों के लिए मजेदार
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों के लिए पारदर्शी सेविंग जार या किसी लक्ष्य का चार्ट तैयार किया जा सकता है. जब वे अपनी बचत को धीरे-धीरे बढ़ते हुए देखते हैं, तो उनमें नियमित बचत करने की प्रेरणा मिलती है.
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छोटी आदतें, बड़ा असर
HT Lifestyle से बातचीत में नेहल मोटा ने कहा कि आर्थिक समझ&amp;nbsp; एक दिन नहीं बनती. यह रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों से विकसित होती है. यही आदतें आगे चलकर बच्चों में जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और पैसों को लेकर बेहतर फैसले लेने की क्षमता विकसित करती हैं.
वहीं, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक शोध के मुताबिक, बच्चों में पैसों से जुड़ी कई बुनियादी आदतें सात साल की उम्र तक बननी शुरू हो जाती हैं. ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि बचपन से दी गई सही सीख भविष्य में मजबूत आर्थिक आधार तैयार कर सकती है.
&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बच्चों, को, पैसे, की, अहमियत, कैसे, सिखाएं, फाइनेंस, एक्सपर्ट, ने, बताए, आसान, तरीके, जो, जिंदगीभर, आएंगे, काम</media:keywords>
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        <title>Home Loan Tips: होम लोन लेने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर जरूर चेक करें, वरना बढ़ सकता है ब्याज का बोझ</title>
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        <description><![CDATA[ Home Loan Credit Score: अगर आप घर खरीदने के लिए होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर लें. बैंक लोन देने से पहले यह जरूर देखते हैं कि आपने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया है या नहीं. इसी रिकॉर्ड के आधार पर आपका क्रेडिट स्कोर बनता है.
आइए जानते हैं क्या होता है क्रेडिट स्कोर?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर होता है, जिससे बैंक यह समझते हैं कि आपने पहले लिया गया लोन या क्रेडिट कार्ड का पैसा समय पर चुकाया है या नहीं.
हालांकि क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा का स्कोर अच्छा माना जाता है. ऐसे लोगों को बैंक आसानी से लोन देने के साथ-साथ कम ब्याज दर भी दे सकते हैं.&amp;nbsp;वहीं, अगर स्कोर 700 से कम है, तो लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है. कई बार बैंक ज्यादा ब्याज दर पर लोन देते हैं या कुछ शर्तें भी लगा सकते हैं.
ब्याज दर में थोड़ा-सा अंतर भी आपके खर्च को काफी बढ़ा सकता है. मान लीजिए आपने 20 या 25 साल के लिए होम लोन लिया ह. ऐसे में अगर ब्याज दर सिर्फ आधा प्रतिशत भी ज्यादा है, तो आपको लाखों रुपये चुकाने पड़ सकते हैं.
लेकिन सिर्फ अच्छा क्रेडिट स्कोर होने से ही लोन मिल जाए, ऐसा जरूरी नहीं होता है.

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आपकी नौकरी या कारोबार कैसा है?
हर महीने आपकी सैलरी कितनी है, ओर क्या आपकी पहले से कितनी EMI चल रही हैं और जिस घर के लिए लोन लिया जा रहा है, उसके कागज पूरे हैं या नहीं. डाउन पेमेंट भी लोन मंजूर होने में अहम भूमिका निभाती है.
अगर आपका क्रेडिट स्कोर कम है, तो उसे धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा सकता है.

&amp;nbsp;इसके लिए सभी EMI और क्रेडिट कार्ड के बिल समय पर भरें.
क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट इस्तेमाल करने से बचें और कोशिश करें कि उसका इस्तेमाल 30 प्रतिशत से ज्यादा न हो.
इसके अलावा, कम समय में कई जगह लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से भी बचना चाहिए.
समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट भी चेक करते रहें, ताकि अगर उसमें कोई गलती हो तो उसे ठीक किया जा सके.

Sonam Wangchuk: अनशन करने वाले सोनम वांगचुक पैसा कैसे कमाते हैं, अब कितनी है उनकी नेटवर्थ?
होम लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर पर ही ध्यान न दें.
प्रोसेसिंग फीस, दूसरे चार्ज, समय से पहले लोन चुकाने के नियम और पूरे लोन के दौरान कुल कितना पैसा चुकाना होगा, इन बातों को भी समझना जरूरी है. थोड़ी-सी तैयारी और अच्छा क्रेडिट स्कोर आपको बेहतर शर्तों पर होम लोन दिलाने में मदद कर सकता है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Home, Loan, Tips:, होम, लोन, लेने, से, पहले, अपना, क्रेडिट, स्कोर, जरूर, चेक, करें, वरना, बढ़, सकता, है, ब्याज, का, बोझ</media:keywords>
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        <title>30 लाख की सैलरी पर क्या 9 लाख इनकम टैक्स देना पड़ता है? जानिए नए टैक्स रिजीम में कैसे बचेंगे आपके पैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Income Tax: अक्सर लोगों को लगता है कि अगर किसी की सालाना सैलरी 30 लाख है, तो उसे सीधे 30% यानी करीब 9 लाख इनकम टैक्स देना होगा. लेकिन नए टैक्स रिजीम में ऐसा नहीं होता. टैक्स पूरी सैलरी पर एक साथ 30% की दर से नहीं लगता, बल्कि अलग-अलग आय वर्ग (स्लैब) के हिसाब से लगाया जाता है.&amp;nbsp; यही वजह है कि वास्तविक टैक्स इससे काफी कम बनता है.
चार्टर्ड अकाउंटेंट संतोष मिश्रा के मुताबिक, सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को नए टैक्स रिजीम में 75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. यानी अगर किसी की सालाना सैलरी 30 लाख है, तो पहले 75,000 घटाए जाएंगे. इसके बाद टैक्स की गणना 29.25 लाख की टैक्सेबल इनकम पर होगी.&amp;nbsp;
Sonam Wangchuk: अनशन करने वाले सोनम वांगचुक पैसा कैसे कमाते हैं, अब कितनी है उनकी नेटवर्थ?
AY 2026-27 (FY 2025-26) के नए टैक्स रिजीम के स्लैब इस प्रकार हैं...

4 लाख तक &amp;ndash; कोई टैक्स नहीं
4 लाख से 8 लाख &amp;ndash; 5%
8 लाख से 12 लाख &amp;ndash; 10%
12 लाख से 16 लाख &amp;ndash; 15%
16 लाख से 20 लाख &amp;ndash; 20%
20 लाख से 24 लाख &amp;ndash; 25%
24 लाख से ऊपर &amp;ndash; 30%

इसका मतलब यह नहीं है कि 29.25 लाख की पूरी आय पर 30% टैक्स लगेगा. 30% की दर सिर्फ 24 लाख से ऊपर की आय, यानी 5.25 लाख पर लागू होगी. बाकी आय पर संबंधित स्लैब के अनुसार 5% से 25% तक की दर से टैक्स लिया जाएगा.
इस गणना के अनुसार कुल इनकम टैक्स 4,57,500 बनता है. इसमें 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस जोड़ने के बाद कुल टैक्स 4,75,800 हो जाता है.
चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिनंदन पांडेय के अनुसार, अगर कुल टैक्स को कुल सैलरी से तुलना करें तो प्रभावी (Effective) टैक्स रेट करीब 15.86% बैठता है. यानी 30 लाख की सालाना सैलरी पर 30% नहीं, बल्कि लगभग 15.86% टैक्स देना पड़ता है.
RBI के हेड को गवर्नर ही क्यों कहते हैं, चेयरमैन या कुछ और क्यों नहीं? इनको कितनी मिलती है सैलरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत में टैक्स स्लैब सिस्टम लागू है, जिसमें हर स्लैब की टैक्स दर सिर्फ उसी हिस्से की आय पर लागू होती है. इसके अलावा 75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी टैक्सेबल इनकम को कम कर देता है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>लाख, की, सैलरी, पर, क्या, लाख, इनकम, टैक्स, देना, पड़ता, है, जानिए, नए, टैक्स, रिजीम, में, कैसे, बचेंगे, आपके, पैसे</media:keywords>
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        <title>सुबह चलिए और रात तक घर वापस, रामनगर&amp;देहरादून एक्सप्रेस के बारे में जानें, कहां&amp;कहां रुकेगी ये ट्रेन, वक्त भी जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सुबह-चलिए-और-रात-तक-घर-वापस-रामनगर-देहरादून-एक्सप्रेस-के-बारे-में-जानें-कहां-कहां-रुकेगी-ये-ट्रेन-वक्त-भी-जानें</link>
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        <description><![CDATA[ Ramnagar Dehradun Express Train: उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रेल मंत्रालय ने रामनगर-देहरादून-रामनगर द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस के संचालन को मंजूरी दे दी है. नई ट्रेन शुरू होने से नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिले का सीधा रेल संपर्क प्रदेश की राजधानी देहरादून से होगा. लंबे समय से इस रेल सेवा की मांग की जा रही थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है.
बताया गया है कि क्षेत्रीय जनता की मांग और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के प्रयासों के बाद रेल मंत्रालय ने इस नई एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन का निर्णय लिया है. यह रामनगर और देहरादून के बीच चलने वाली पहली एक्सप्रेस ट्रेन होगी.
सप्ताह में दो दिन चलेगी ट्रेन
रेल मंत्रालय के अनुसार 15310/15309 रामनगर-देहरादून-रामनगर एक्सप्रेस का संचालन प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को किया जाएगा. रामनगर से यह ट्रेन सुबह 5:50 बजे रवाना होकर दोपहर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी. वहीं वापसी में देहरादून से दोपहर 3:55 बजे चलकर रात 11:30 बजे रामनगर पहुंचेगी. इससे यात्रियों को एक ही दिन में देहरादून जाकर अपना काम निपटाकर वापस लौटने की सुविधा मिलेगी.
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इन प्रमुख स्टेशनों पर होगा ठहराव
नई एक्सप्रेस अपने सफर के दौरान...

काशीपुर
रोशनपुर
पीपलसाना
मुरादाबाद
नजीबाबाद
और हरिद्वार रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी.

इससे उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों के यात्रियों को भी इस सेवा का लाभ मिलेगा.
छात्रों, किसानों और कारोबारियों को राहत
नई रेल सेवा शुरू होने से नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून के अलावा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिले के यात्रियों को भी बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी. खासतौर पर छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं, किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह ट्रेन काफी उपयोगी मानी जा रही है. अब रामनगर और आसपास के क्षेत्रों के लोग राजधानी देहरादून जाकर सरकारी, शैक्षणिक और अन्य जरूरी कार्य एक ही दिन में पूरा कर सकेंगे.
पर्यटन और धार्मिक यात्रा को मिलेगा बढ़ावा
नई एक्सप्रेस ट्रेन से उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को भी गति मिलने की उम्मीद है. रामनगर स्थित जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान आने वाले पर्यटकों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी. इसके अलावा गिरिजा देवी मंदिर, सीतावनी (सीतामढ़ी) जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना भी आसान होगा. दूसरी ओर देहरादून और हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए आगे की यात्रा करने में भी सुविधा मिलेगी.
सिर्फ 55 रुपये में मिल रहा ये वायरल प्रोडक्ट, बिना पानी और बिना धोए मिनटों में साफ होंगे आपके जूते
यात्रियों को मिलेंगी कई श्रेणियों की सुविधाएं
रेल मंत्रालय के अनुसार इस एक्सप्रेस में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न श्रेणियों के कोच लगाए जाएंगे. ट्रेन में एसी सेकेंड, एसी थर्ड, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, सेकेंड सीटिंग और जनरल कोच उपलब्ध रहेंगे, जिससे हर वर्ग के यात्री अपनी जरूरत और बजट के अनुसार यात्रा कर सकेंगे.
क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग हुई पूरी
रामनगर से देहरादून के बीच सीधी एक्सप्रेस ट्रेन की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी. अभी तक यात्रियों को कई बार ट्रेन बदलनी पड़ती थी या सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता था. नई रेल सेवा शुरू होने के बाद कुमाऊं और गढ़वाल के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा तथा प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सुबह, चलिए, और, रात, तक, घर, वापस, रामनगर-देहरादून, एक्सप्रेस, के, बारे, में, जानें, कहां-कहां, रुकेगी, ये, ट्रेन, वक्त, भी, जानें</media:keywords>
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        <title>Samosa vs Burger: भारत के समोसे ने बर्गर को धोया, McDonald से दोगुना है हल्दीराम का मुनाफा, हर स्टोर कमाता है 20 करोड़</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/samosa-vs-burger-भारत-के-समोसे-ने-बर्गर-को-धोया-mcdonald-से-दोगुना-है-हल्दीराम-का-मुनाफा-हर-स्टोर-कमाता-है-20-करोड़</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/samosa-vs-burger-भारत-के-समोसे-ने-बर्गर-को-धोया-mcdonald-से-दोगुना-है-हल्दीराम-का-मुनाफा-हर-स्टोर-कमाता-है-20-करोड़</guid>
        <description><![CDATA[ Samosa vs Burger: हर भारतीय खाने का बहुत शौकीन होता है. चटपटा मसालेदार खाना भारत की एक तरह से पहचान ही है. लेकिन फिर भी भारतीयों का पसंदीदा अक्सर विदेशी खाना ही होता है. पिज्जा, बर्गर, चाइनीज जैसे फूड आइटम्स को लेकर लोगों के बीच काफी क्रेज है. लेकिन फिर भी जब बात देसी खाने की आती है तो उसका कोई जवाब ही नहीं है. तभी तो बाजार में समोसे के सामने बर्गर भी फेल हो गया. आइये बताते हैं कैसे?
बर्गर पर भारी पड़ा समोसादरअसल मशहूर बिजनेसमैन हर्ष गोयनका सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वो अक्सर अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए कई पोस्ट शेयर करते रहते हैं. इसी दौरान उन्होंने एक ट्वीट पर ये दावा किया है कि हल्दीराम का समोसा मैक डोनल्ड के बर्गर पर भारी पड़ गया है. इस पोस्ट को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, &#039;भारत वर्सेज अमेरिका- किसका खाना भारत में जीता?&#039; यहां देखें पोस्ट:

Indian vs American- whose food wins in India ? pic.twitter.com/1Xh3b9PaEB
&amp;mdash; Harsh Goenka (@hvgoenka) July 17, 2026



ये भी पढ़ें: RBI Rule: अब अपनी ही संपत्ति दोबारा नहीं खरीद पाएंगे बैंक के कर्जदार, आरबीआई ने सख्त किया नियम
हल्दीराम की कमाईउन्होंने जो पोस्ट शेयर किया है उसमें हल्दीराम और मैकडोनल्ड्स के भारतीय स्टोर्स और कमाई की डीटेल है. जिसमें लिखा है कि हल्दीरा के भारत में 400 से भी ज्यादा स्टोर्स हैं. इसका रेवेन्यू 8000 करोड़ रुपये है, जिनसे 800 करोड़ रुपये का मुनाफा होता है. हर स्टोर से 20 करोड़ रुपये तक की कमाई होती है.
मैक डोनल्ड्स की कामईतो वहीं मैक डोनल्ड्स के भारत में 550 स्टोर्स है. जिसका रेवेन्यू भारत में 4500 करोड़ रुपये जनरेट होता है. इस स्टोर्स से 180 करोड़ रुपये का प्रॉफिट होता है. मैक डी के एक स्टोर से भारत में 8.2 करोड़ रुपुये का मुनाफा होता है.
ये आंकड़े बताते हैं कि वाकई में हल्दीराम का समोसा मैक डी के बर्गर के सामने राजा की तरह है. भीरतीय खाने की बात आती है तो हर भारतीय अपने देश को ही तवज्जो देता है. हालांकि ये दावा हम नहीं कर रहे हैं ये दावा हर्ष गोयनका की वायरल हो रही पोस्ट में किया जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Samosa, Burger:, भारत, के, समोसे, ने, बर्गर, को, धोया, McDonald, से, दोगुना, है, हल्दीराम, का, मुनाफा, हर, स्टोर, कमाता, है, करोड़</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>RBI News: रुक गई है पेमेंट तो 7500 में मिलेगा 1 लाख रुपए का रिफंड, RBI लाया नया नियम? सरकार ने क्या कहा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rbi-news-रुक-गई-है-पेमेंट-तो-7500-में-मिलेगा-1-लाख-रुपए-का-रिफंड-rbi-लाया-नया-नियम-सरकार-ने-क्या-कहा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/rbi-news-रुक-गई-है-पेमेंट-तो-7500-में-मिलेगा-1-लाख-रुपए-का-रिफंड-rbi-लाया-नया-नियम-सरकार-ने-क्या-कहा</guid>
        <description><![CDATA[ RBI News: RBI पिछले कई दिनों से अपने नियमों में कई बदलाव कर रहा है. इसी बीच एक खबर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि अपनी रुकी हुई रकम को रिफंड करने के लिए रिजर्व बैंक कुछ रुपये की डिमांड कर रहा है. क्या वाकई में ऐसा कुछ है? आइये जानते हैं.
क्या है पूरी खबर?दरअसल सोशल मीडिया पर RBI का एक लेटर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लिखा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपकी 1 लाख रुपये की राशि जारी करने के लिए पहले 7,500 रुपये टैक्स के रूप में जमा करवा रहा है. इस खबर को पढ़कर हर कोई हैरान रह गया है. कई लोगों के पास ऐसे मैसेज और ईमेल लेटर के साथ पहुंच रहे हैं.
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क्या खबर की सच्चाई?अब इस वायरल हो रही खबर की सच्चाई को पीआईबी फैक्ट चेक ने उजागर किया है. PIB ने अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए इस लेटर का स्क्रीनशॉट शेयर किया है. इसके साथ साफ शब्दों में FAKE लिखा गया है. इसका मतलब है कि ये खबर पूरी तरह से निराधार है. इस पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा गया है, &#039;इंटरनेट पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नाम से एक लेयर वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया गया है कि 1,00,000 की रुकी हुई रकम पाने के लिए 7,500 रुपये का रिफंडेबल टैक्स देना होगा.

⚠️Scam Alert!???? A letter doing rounds on the internet reportedly issued by the Reserve Bank of India (RBI) claims that the recipient must pay a refundable tax amount of ₹7,500 to facilitate the release of a pending amount of ₹1,00,000. #PIBFactCheck: ❌ This letter is&amp;hellip; pic.twitter.com/qKfnpQz36Q
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 17, 2026



आगे लिखा गया है, &#039;पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक ये लेटर फर्जी है. RBI कभी भी आम जनता से पैसे या किसी भी तरह की निजी जानकारी मांगने के लिए बिना मांगे फोन कॉल या ईमेल के ज़रिए संपर्क नहीं करता है. अगर आप ऐसे स्कैम का शिकार हुए हैं, तो स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों (पुलिस) के पास अपनी शिकायत दर्ज कराएं.
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ऑथेंटिक सोर्स पर ही करें भरोसाइसके अलावा एजेंसी ने ये भी कहा है कि केंद्र सरकार से जुड़ी किसी भी संदिग्ध जानकारी की रिपोर्ट PIB फैक्ट चेक को करें और हम आपको इसके पीछे का सच बताएंगे. इसके साथ ही पीआईबी का कॉन्टेक्ट नंबर और ईमेल भी दिया गया है.
बता दें कि पीआईबी एक सरकारी एजेंसी है, जो सरकार से संबंधित हर फर्जी खबर का फैक्ट चेक कर सच्चाई जनता के सामने लाती है. ऐसे में यदि किसी भी खबर को लेकर संदेह की स्थिति हो तो पीआईबी से कॉन्टेक्ट किया जा सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RBI, News:, रुक, गई, है, पेमेंट, तो, 7500, में, मिलेगा, लाख, रुपए, का, रिफंड, RBI, लाया, नया, नियम, सरकार, ने, क्या, कहा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp; Diesel Price Today: 18 जुलाई को कितना महंगा हुआ पेट्रोल&amp; डीजल, जानें आपके शहर का ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-18-जुलाई-को-कितना-महंगा-हुआ-पेट्रोल-डीजल-जानें-आपके-शहर-का-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-18-जुलाई-को-कितना-महंगा-हुआ-पेट्रोल-डीजल-जानें-आपके-शहर-का-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Price Today 18 july 2026: देशभर के गाड़ी चलाने वालों के लिए राहत की खबर है. 18 जुलाई 2026 को भी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने लगातार एक और दिन ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं. ऐसे में उपभोक्ताओं को फिलहाल बढ़ती महंगाई के बीच राहत मिली हुई है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन इसका असर अभी घरेलू खुदरा कीमतों पर देखने को नहीं मिला है. हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए जाते हैं, लेकिन आज भी कीमतें पहले जैसी ही बनी हुई हैं.
शहर अनुसार, पेट्रोल- डीजल के दाम-&amp;nbsp;



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली&amp;nbsp;
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई&amp;nbsp;
111.21 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


पटना&amp;nbsp;
113.35 रुपये
&amp;nbsp;99.36 रुपये


चंडीगढ़&amp;nbsp;
101.51 रुपये
89.47 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये&amp;nbsp;
103.82 रुपये


भुवनेश्वर
108.97 रुपये
100.68 रुपये



रुक गई है पेमेंट तो 7500 में मिलेगा 1 लाख रुपए का रिफंड, RBI लाया नया नियम? सरकार ने क्या कहा
आज क्यों नहीं बदले दाम?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई चीजों पर निर्भर करती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, फ्रेट कॉस्ट और केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स शामिल हैं. हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हलचल जरूर देखने को मिली है, लेकिन तेल कंपनियों ने फिलहाल खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.&amp;nbsp;
सुबह 6 बजे अपडेट होंगे दाम
सरकारी तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं. अगर किसी दिन कीमतों में बदलाव होता है, तो नई दरें उसी समय से लागू हो जाती हैं.
भारत के समोसे ने बर्गर को धोया, McDonald से दोगुना है हल्दीराम का मुनाफा, हर स्टोर कमाता है 20 करोड़
आने वाले दिनों में क्या होगा?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी या गिरावट आती है और रुपये की दर में भी बदलाव होता है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव हो सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-, Diesel, Price, Today:, जुलाई, को, कितना, महंगा, हुआ, पेट्रोल-, डीजल, जानें, आपके, शहर, का, ताजा, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate Today: आज कितने का मिलेगा 14 और 19 किलो वाला गैस सिलेंडर, जानें आपके शहर में एलपीजी का क्या है रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-आज-कितने-का-मिलेगा-14-और-19-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-आपके-शहर-में-एलपीजी-का-क्या-है-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-आज-कितने-का-मिलेगा-14-और-19-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-आपके-शहर-में-एलपीजी-का-क्या-है-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 18 July 2026: देशभर के करोड़ों एलपीजी ग्राहकों के लिए आज खुशी की खबर है. 18 जुलाई 2026 को घरेलू 14.2 किलोग्राम LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने इस महीने की शुरुआत में जारी की गई दरों को ही बरकरार रखा है. वहीं, 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 1 जुलाई को कटौती की गई थी, जिसके बाद फिलहाल उसी दर पर सिलेंडर उपलब्ध हैं.&amp;nbsp;हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं. ऐसे में फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को पिछले रेट पर ही सिलेंडर मिल रहा है.
घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम-&amp;nbsp;



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
942.0 रुपये
2930.0 रुपये


मुंबई
941.5 रुपये
2885.5 रुपये


कोलकाता
968.0 रुपये
3082.0 रुपये


चेन्नई
957.5 रुपये
3106.0 रुपये


चंडीगढ़
951.5 रुपये
2954.5 रुपये&amp;nbsp;


देहरादून
961.0 रुपये
2983.5 रुपये


हैदराबाद
934.0 रुपये
2052.5 रुपये


भुवनेश्वर&amp;nbsp;
968.0 रुपये
3115.0 रुपये


तिरुवनंतपुरम
&amp;nbsp;951.0 रुपये
2970.5 रुपये



18 जुलाई को कितना महंगा हुआ पेट्रोल- डीजल, जानें आपके शहर का ताजा रेट
घर बैठे चेक करें गैस सिलेंडर के दाम-
उपभोक्ता इंडेन, भारत गैस और HP गैस की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए अपने शहर में LPG सिलेंडर की ताजा कीमत देख सकते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन गैस बुकिंग और रिफिल की सुविधा भी मिल जाती है.
क्या अगले महीने बदल सकते हैं दाम?
एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG और कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव होता है, तो अगले मासिक संशोधन में घरेलू या कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल 18 जुलाई 2026 तक घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है.
रुक गई है पेमेंट तो 7500 में मिलेगा 1 लाख रुपए का रिफंड, RBI लाया नया नियम? सरकार ने क्या कहा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, आज, कितने, का, मिलेगा, और, किलो, वाला, गैस, सिलेंडर, जानें, आपके, शहर, में, एलपीजी, का, क्या, है, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बदले जाएंगे 10 और 20 रुपए के नोट, आरबीआई ने कर दिया बड़ा ऐलान, इनकी जगह क्या आएगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बदले-जाएंगे-10-और-20-रुपए-के-नोट-आरबीआई-ने-कर-दिया-बड़ा-ऐलान-इनकी-जगह-क्या-आएगा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बदले-जाएंगे-10-और-20-रुपए-के-नोट-आरबीआई-ने-कर-दिया-बड़ा-ऐलान-इनकी-जगह-क्या-आएगा</guid>
        <description><![CDATA[ 10 and 20 Rupees Plastic Notes: यूपीआई का जमाना है. लोग कैश कम ही अपने पास रखते हैं. वजह वाजिब भी है क्योंकि कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं. बड़ी आसानी से फट भी जाते हैं. हालांकि, अब यह समस्या दूर होने वाली है क्योंकि आपकी जेब में रखा नोट आने वाले समय में प्लास्टिक का हो सकता है.
भारतीय रिजर्व बैंक की नोट छापने वाली विंग BRBNMPL ने प्लास्टिक के नोट बनाने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला है. कंपनी ने दुनियाभर की कंपनियों से पॉलिमर शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) मांगी है यानी पहली बार नोट छापने के लिए जरूरी प्लास्टिक मटेरियल खरीदने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू होती दिख रही है. शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
आखिर प्लास्टिक नोट होते क्या हैं?
प्लास्टिक नोट को पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये सामान्य प्लास्टिक नहीं, बल्कि एक खास तरह की मजबूत प्लास्टिक फिल्म पर छपते हैं. इस फिल्म पर सफेद कोटिंग की जाती है ताकि नोट की छपाई हो सके. नोट में एक ट्रांसपरेंट विंडो भी होता है, जो इसकी सबसे बड़ी सुरक्षा पहचान मानी जाती है. इसी वजह से ऐसे नोटों की नकली कॉपी बनाना बेहद मुश्किल होता है.
सबसे पहले कौन से नोट बदल सकते हैं?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो 10 और 20 रुपये के नोट सबसे पहले पॉलिमर में आ सकते हैं. वजह साफ है ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और सबसे जल्दी खराब भी होते हैं.
RBI Rule: जब्त जमीनों-मकानों पर आरबीआई का हंटर, बैंकों के लिए बनाया नया नियम, आप पर क्या होगा असर?
RBI का यह कदम कितना बड़ा है?
BRBNMPL वही कंपनी है, जो मैसूरु और सालबोनी की प्रेस में भारतीय करेंसी छापती है. जब यही कंपनी पॉलिमर शीट खरीदने के लिए वैश्विक कंपनियों से प्रस्ताव मांग रही है, तो यह सिर्फ एक विचार नहीं बल्कि तैयारी का ठोस संकेत माना जा रहा है. हालांकि अभी इसका मतलब यह नहीं है कि अगले महीने से प्लास्टिक के नोट बाजार में आ जाएंगे. फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है.
5 जून, 2026 को मौद्रिक नीति के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है. उन्होंने साफ किया था कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और केंद्रीय बैंक इसके फायदे और नुकसान का आकलन कर रहा है.&amp;nbsp;
कहानी कोई नई नहीं

भारत में पॉलिमर नोट का विचार करीब 14 साल पुराना है.&amp;nbsp;
2009 के आसपास पहली बार इस पर चर्चा शुरू हुई
2012 में सरकार ने 10 रुपये के 100 करोड़ पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी.
2014 में तय हुआ कि कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में अलग-अलग मौसम में इनका परीक्षण होगा.
2016 में सरकार ने बताया कि सामग्री खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन तकनीकी और परिचालन कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया

अब फिर क्यों शुरू हुई तैयारी?
डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़े हैं, लेकिन नकदी की मांग भी लगातार बढ़ रही है. मई 2026 तक देश में चलन में नकदी 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. दूसरी ओर हर साल बड़ी संख्या में कटे-फटे और गंदे नोट नष्ट करने पड़ रहे हैं. 2024-25 में करीब 23.8 अरब नोट चलन से हटाए गए. नोट छापने पर भी हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर नोट सरकार और RBI के लिए लागत कम करने का विकल्प बन सकते हैं.
प्लास्टिक नोटों के फायदे

सबसे बड़ा फायदा इनकी लंबी उम्र है.
ये कागज के नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा चल सकते हैं.
ये पानी से जल्दी खराब नहीं होते आसानी से फटते नहीं हैं और गंदगी भी कम पकड़ते हैं.
कई शोधों में पाया गया है कि इनकी सतह पर बैक्टीरिया भी कम टिकते हैं. सबसे अहम बात इनकी पारदर्शी विंडो और आधुनिक सुरक्षा फीचर इन्हें नकली बनाना बेहद कठिन बना देते हैं.

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

पॉलिमर नोट शुरू में महंगे पड़ते हैं क्योंकि इनके लिए खास मटेरियल चाहिए जिसे फिलहाल विदेशों से खरीदना पड़ सकता है.
देशभर के ATM और नोट गिनने वाली मशीनों को भी नए नोटों के हिसाब से अपग्रेड करना पड़ सकता है.
भारत जैसे गर्म देश में अत्यधिक तापमान का असर भी एक चुनौती माना जाता है. इसके अलावा कई देशों में लोगों ने शिकायत की है कि नए पॉलिमर नोट आपस में चिपक जाते हैं और मोड़ने पर उन पर स्थायी सिलवट पड़ जाती है.

दुनिया में कहां-कहां चलते हैं पॉलिमर नोट?
ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले पॉलिमर नोट शुरू किए और बाद में पूरी करेंसी बदल दी गई.
इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई समेत 40 से ज्यादा देशों ने इन्हें अपनाया. इन देशों का अनुभव बताता है कि शुरुआत में लागत ज्यादा होती है, लेकिन लंबे समय में नोट ज्यादा टिकाऊ साबित होते हैं.
आगे क्या होगा?
अभी EOI केवल पहला कदम है# इसके बाद टेंडर, तकनीकी जांच, सैंपल टेस्टिंग, सुरक्षा परीक्षण और पायलट प्रिंटिंग जैसी कई प्रक्रियाएं होंगी यानी कागज के नोट अभी खत्म नहीं होने वाले. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ा तो शुरुआत छोटे मूल्य के नोटों से हो सकती है और कुछ समय तक कागज और पॉलिमर दोनों तरह के नोट साथ-साथ चलेंगे. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि 14 साल से रुकी हुई पॉलिमर नोट की योजना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीरता से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है.

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बदले, जाएंगे, और, रुपए, के, नोट, आरबीआई, ने, कर, दिया, बड़ा, ऐलान, इनकी, जगह, क्या, आएगा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Zara के पॉपुलर ट्राउजर को पहनकर अस्पताल पहुंच रहे लोग, कई की टूटी टांग, अभी लॉन्च किया था स्टॉक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/zara-के-पॉपुलर-ट्राउजर-को-पहनकर-अस्पताल-पहुंच-रहे-लोग-कई-की-टूटी-टांग-अभी-लॉन्च-किया-था-स्टॉक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/zara-के-पॉपुलर-ट्राउजर-को-पहनकर-अस्पताल-पहुंच-रहे-लोग-कई-की-टूटी-टांग-अभी-लॉन्च-किया-था-स्टॉक</guid>
        <description><![CDATA[ Zara Wide Leg Trousers: फैशन ब्रांड Zara का एक नया ट्राउजर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह इसके डिजाइन की खूबसूरती नहीं बल्कि इससे जुड़े हादसे हैं. कंपनी के Flowing Wide Leg Trousers को पहनने के बाद कई लोगों ने यह दावा किया है कि इसे पहनने के दौरान वे गिर गए और चोटिल हो गए. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे मजाकिया अंदाज में &quot;Death Pants&quot; और &quot;Lethal Trousers&quot; जैसे नाम देने शुरू कर दिए हैं.&amp;nbsp;
क्यों बन रहे हैं हादसे की वजह?
दरअसल यह ट्राउजर बेहद चौड़े पैरों और लंबी फ्लोइंग डिजाइन के साथ आता है. यही वजह है कि इसका कपड़ा चलते समय पैरों या जूतों में फंस जाते हैं और इससे बैलेंस बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. खासकर सीढ़ियों, एस्केलेटर, ऊबड़-खाबड़ रास्तों या सैंडल और ओपन फुटवियर के साथ इसे पहनने पर गिरने की चांसेज बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
जापान में बच्चों से ज्यादा हुई जानवरों की संख्या, बदला बिजनेस ट्रेंड, कुत्ते-बिल्ली के डायपर बनाने वालों की बंपर कमाई
सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई मामले
टिकटॉक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो शेयर कर दावा किया कि इस ट्राउजर को पहनने के बाद वे गिरकर घायल हो गए. हालांकि कुछ लोगों को हाथ, कलाई और पैरों में चोट आने की बात भी बताई गई, जबकि कुछ ने अस्पताल तक पहुंचने की बात कही है. यही वजह है कि लोगों ने इसे &quot;ज़ारा डेथ पैंट्स&quot; तक कहना शुरू कर दिया है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं फैशन एक्सपर्ट?
फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बहुत ज्यादा चौड़े और लंबे ट्राउजर में चलते वक्त कपड़ा दूसरे पैर या जूते से उलझ सकते हैं, जिससे ठोकर लगकर गिरने की उम्मीद बढ़ जाती है. ऐसे में जरूरी है कि आप इस ट्राउजर को पहनते समय सही लंबाई का चुनाव करें और ऐसे फुटवियर का इस्तेमाल करें जिनमें कपड़ा आसानी से न फंसे. साथ ही अगर आपका ट्राउजर जमीन को छू रहा हो, तो उसे अल्टर करवाना न भूले.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Zara, के, पॉपुलर, ट्राउजर, को, पहनकर, अस्पताल, पहुंच, रहे, लोग, कई, की, टूटी, टांग, अभी, लॉन्च, किया, था, स्टॉक</media:keywords>
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        <title>PF Balance: 50% कर्मचारी सिर्फ 10 से 20 हजार रुपए के साथ हो रहे रिटायर, EPFO ने बताया पीएफ खातों का सच</title>
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        <description><![CDATA[ EPFO News: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत हर कर्मचारी का एक पीएफ अकाउंट होता है. जिसमें उस कर्मचारी के भविष्य और जरूरतों के लिए फंड इकट्ठा होता है. लेकिन इस अकाउंट को लेकर कई लोगों के बीच अवेयरनेस की कमी है. जिसके चलते हाल ही में खुलासा हुआ है कि करीब 50 प्रतिशत कर्मचारी रिटायरमेंट के समय महज 10 या 20 हजार रुपये बैलेंस के साथ रिटायर हो रहे हैं. जिसे देखते हुए अब संगठन ने एक नया फैसला किया है.
EPFO का नया फैसलादरअसल EPFO ने बताया है कि नए EPF स्कीम 2026 में PF खाते में कुल जमा राशि का कम से कम 25% हिस्सा बनाए रखना जरूरी होगा. बिजनेस स्टैंडर्ड के भेजे गए मेल पर रिप्लाय करते हुए EPFO ने ये भी बताया कि करीब 48.7 प्रतिशत कर्मचारियों के PF खाते में आखिरी भुगतान के समय सिर्फ 10,000 से 20,000 रुपये ही बचते थे. इससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा कमजोर हो जाती थी.
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आधे से ज्यादा निकालने पर भी होगी बचतEPFO का ये भी कहना है कि अगर कोई कर्मचारी 20 साल तक हर महीने 15,000 रुपये की सैलरी पर नौकरी करता है, तो उसके PF खाते में करीब 14 लाख रुपये जमा हो सकते हैं. अगर वो बीच में 75% राशि निकाल भी ले, तब भी उसके खाते में करीब 3.5 लाख रुपये बचेंगे. इससे रिटायरमेंट के समय पहले की तुलना में 7 से 35 गुना ज्यादा बचत हो सकती है.
किए गए हैं कई बदलाव1 जुलाई 2026 से लागू हुई नई EPF स्कीम में कई बदलाव किए गए हैं. अब अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग नियमों की जगह एक आसान व्यवस्था बनाई गई है. कर्मचारी 12 महीने की नौकरी पूरी करने के बाद बीमारी, पढ़ाई, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए PF से पैसा निकाल सकते हैं.
25% राशि रखना होगा अनिवार्यअब यदि आपको कोई जरूरत होगी तो आप अपने पीएफ खाते से बैलेंस निकाल सकते हैं. लेकिन उससे पहले आपको कम से कम 25% राशि खाते में रखना जरूरी होगा. ये बदलाव कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है क्योंकि इससे जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना आसान होगा और रिटायरमेंट के लिए भी अच्छी बचत बनी रहेगी.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप का टेलीप्रॉम्प्टर चलाने वाला शख्स सस्पेंड, भाषण पर खेलता था सट्टा, &amp;apos;शब्द&amp;apos; बेचकर कमाता था डॉलर</title>
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        <description><![CDATA[ Donald Trump TP Reader Suspended: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टेलीप्रॉम्पटर ऑपरेटर को हाल ही में सस्पेंड कर दिया गया है. ये खबर हर तरफ आग की तरह फैल गई है. ये कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि शख्स पर आरोप लगा है कि वो ट्रंप के भाषण पर ऑनलाइन बेटिंग एप के जरिए सट्टा लगाता था. जिसके चलते व्हाइट हाउस की तरफ से ये कदम उठाया गया है.
अनपेड लीव पर भेजे गए TP ऑपरेटरदरअसल ट्रंप के टीपी ऑपरेटर गेब्रियल पेरेज को फिलहाल बिना वेतन वाली छुट्टी यानी अनपेड लीव पर भेज दिया गया है. इस बारे में खुद व्हाइट हाउस की तरफ से बताया गया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि, &#039;राष्ट्रपति ट्रंप को इस मामले की जानकारी है. उन्होंने इसे काफी दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया है. व्हाइट हाउस में नैतिकता से जुड़े बहुत सख्त नियम हैं, इसलिए संबंधित कर्मचारी को जांच पूरी होने तक बिना वेतन छुट्टी पर रखा गया है.&#039;
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कई बार उठाया अंदरूनी जानकारी का फायदाएबीसी न्यूज की एर रिपोर्ट के अनुसार, गेब्रियल पेरेज साल 2016 से ट्रंप के टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर हैं. उन्होंने राष्ट्रपति के भाषणों की अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर कई बार दांव लगाए. इनमें इस साल का स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण भी शामिल है. इन जानकारियों का इस्तेमाल करके गेब्रियल ने ऑनलाइन प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म Kalshi पर सट्टा लगाया और इससे 1 लाख डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) से ज्यादा कमाए है.
Kalshi के नियमों का हुआ उल्लघंनये मामला त सामने आया जब Kalshi के वकील और एनफॉर्समेंट प्रमुख रॉबर्ट डेनॉल्ट ने संदिग्ध गतिविधियों को पहचानकर उनकी जांच की. ये सच सामने आने के बाद रॉबर्ट ने इस मामले को अमेरिकी नियामक संस्था कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) को भेज दिया. हालांकि उन्होंने किसी कर्मचारी का नाम नहीं लिया. ये मामला बेटिंग एप Kalshi के नियमों के भी खिलाफ था. Kalshi के नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपनी नौकरी के दौरान मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर सट्टा नहीं लगा सकता.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Top Airports in India: खजुराहो और औरंगाबाद एयरपोर्ट बने नंबर 1, टॉप 10 रैकिंग में कौन&amp;कौनसे शहर शामिल?</title>
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        <description><![CDATA[ AAI Customer Satisfaction Survey: देश के हवाई अड्डों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं को लेकर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने कस्टमर सैटिस्फैक्शन सर्वे जारी किया है. AAI की ओर से जनवरी-जून 2026 के बीच किए गए सर्वे में यात्रियों से एयरपोर्ट की सुविधाओं और सेवाओं को लेकर फीडबैक लिया गया. इस सर्वे में देश के 60 एयरपोर्ट शामिल किए गए थे.
जिसमें खजुराहो और औरंगाबाद एयरपोर्ट ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है. वहीं, प्रयागराज एयरपोर्ट ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार देश के टॉप-10 एयरपोर्ट्स में अपनी जगह बनाई है.&amp;nbsp;
खजुराहो और औरंगाबाद एयरपोर्ट रहे नंबर-1
AAI के सर्वे के मुताबिक, खजुराहो और औरंगाबाद एयरपोर्ट ने सबसे ज्यादा स्कोर हासिल किया. दोनों एयरपोर्ट्स को 5 में से 4.98 अंक मिले और ये संयुक्त रूप से देश के नंबर-1 एयरपोर्ट बने. एयरपोर्ट का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने, साफ-सफाई बनाए रखने और सेवा की गुणवत्ता सुधारने के लगातार कोशिशों का असर ही इस रैंकिंग में दिखाई दिया है.
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टॉप-10 एयरपोर्ट रैंकिंग में शामिल शहर&amp;nbsp;
AAI के जनवरी-जून 2026 ग्राहक संतुष्टि सर्वे में टॉप प्रदर्शन करने वाले एयरपोर्ट में शामिल हैं.&amp;nbsp;

खजुराहो एयरपोर्ट
औरंगाबाद एयरपोर्ट
प्रयागराज एयरपोर्ट
कोल्हापुर एयरपोर्ट
बेलगावी एयरपोर्ट
बारापानी (शिलांग) एयरपोर्ट
तूतीकोरिन एयरपोर्ट

किन सुविधाओं के आधार पर होती है रैंकिंग?
AAI का यह सर्वे यात्रियों के अनुभव के आधार पर तैयार किया जाता है. इसमें 30 से ज्यादा मानकों को शामिल किया गया है.&amp;nbsp;

चेक-इन प्रक्रिया
सुरक्षा जांच की सुविधा
एयरपोर्ट की साफ-सफाई
यात्रियों का इंतजार समय
दिशा बताने वाले संकेतक
सामान ट्रॉली की उपलब्धता
सुरक्षा कर्मचारियों का व्यवहार
खाने-पीने की सुविधाएं
अन्य यात्री सेवाएं

एयरपोर्ट अड़गिकारियों के मुताबिक, बेहतर रैंकिंग से यह पता चलता है कि यात्रियों की सुविधा और यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे कोशिशों का सही असर हो रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 06:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>39 हफ्तों तक वेतन, फ्री हेल्थ इंश्योरेंस... छंटनी वाले कर्मचारियों को क्या&amp;क्या देगी माइक्रोसॉफ्ट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/39-हफ्तों-तक-वेतन-फ्री-हेल्थ-इंश्योरेंस-छंटनी-वाले-कर्मचारियों-को-क्या-क्या-देगी-माइक्रोसॉफ्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Microsoft Layoffs: माइक्रोसॉफ्ट ने दुनियाभर में करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है. यह कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 2.1 प्रतिशत है. बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है. इस पैकेज में सेवा अवधि और पद के आधार पर कई तरह की आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य लाभ दिए जाएंगे, ताकि नौकरी जाने के बाद कर्मचारियों को कुछ समय तक आर्थिक और सामाजिक सहारा मिल सके.
सेवा अवधि के हिसाब से मिलेगा भुगतान
रिपोर्ट के अनुसार, छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि और पद के अनुसार सेवरेंस पे दिया जाएगा. कई कर्मचारियों को अधिकतम 39 सप्ताह तक का मूल वेतन मिल सकता है. कंपनी के अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भुगतान का तरीका अलग रखा गया है. वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अलग मुआवजा योजना भी तैयार की गई है, जिसका लाभ पात्र कर्मचारियों को कंपनी के तय नियमों और शर्तों के अनुसार मिलेगा.
Top Airports in India: खजुराहो और औरंगाबाद एयरपोर्ट बने नंबर 1, टॉप 10 रैकिंग में कौन-कौनसे शहर शामिल?
स्टॉक और स्वास्थ्य बीमा का भी मिलेगा लाभ
आर्थिक सहायता के अलावा योग्य कर्मचारियों को कुछ समय तक कंपनी के शेयरों से जुड़े लाभ भी मिलते रहेंगे. इसके साथ ही छह महीने तक स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी जारी रहेगी. जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अतिरिक्त अवधि तक स्वास्थ्य बीमा कवरेज बढ़ाने का विकल्प भी चुन सकेंगे. कंपनी का कहना है कि यह व्यवस्था कर्मचारियों को नई नौकरी मिलने तक राहत देने और आर्थिक दबाव कम करने के उद्देश्य से की गई है.&amp;nbsp;
बदलते कारोबार के बीच लिया गया फैसला
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि बदलती तकनीक और कारोबार की जरूरतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. कंपनी इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े ढांचे और नई तकनीकों में बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। इसी रणनीति के तहत खर्च कम करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए कई विभागों में बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका असर हजारों कर्मचारियों पर पड़ा है और आगे भी ऐसे बदलाव जारी रह सकते हैं.
Saving Tips: पैसे बचाने के लिए नहीं करनी पड़ेगी कंजूसी, अपनाएं ये आसान फाइनेंशियल टिप्स ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 06:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Cryptocurrency: RBI और SEBI मिलकर रेगुलेट करेंगे क्रिप्टो? सरकार का आया बयान, क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cryptocurrency-rbi-और-sebi-मिलकर-रेगुलेट-करेंगे-क्रिप्टो-सरकार-का-आया-बयान-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ Cryptocurrency News: क्रिप्टो करेंसी पिछले कई दिनों से काफी चर्चा का विषय बनी हुई है. कई दिनों से इसको रेगुलेट करने की खबरों पर संशय बना हुआ है. हालांकि कुछ दिन पहले ही RBI ने बताया था कि वो क्रिप्टो को लागू नहीं कर रहे हैं. जिसके बाद अब हाल ही में एक खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. जिसमें बताया जा रहा है कि सरकार ने क्रिप्टो करेंसी को मंजूरी दे दी है.
क्या है खबर?दरअसल हाल ही में एक सोशल मीडिया पेज पर क्रिप्टो इंडिया के नाम से एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण क फोटो लगा है. इस खबर में लिखा है कि वित्त मंत्रालय ने RBI और SEBI दोनों को मिलकर क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने की मंजूरी दे दी है. हालांकि अब खुद सरकार की तरफ से इस खबर की सच्चाई सामने आई है.
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क्या है वायरल दावे की सच्चाई?सरकारी एजेंसी PIB फैक्ट चेक के सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए इस खबर का स्क्रीशॉट शेयर किया गया है, जिस पर साफ शब्दों में लिखा है FAKE. इसके साथ कैप्शन में लिखा गया है, &#039;फेक न्यूज़ अलर्ट! सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया है कि वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से क्रिप्टो को रेगुलेट करने पर विचार करने के लिए कहा है.&#039;

⚠️Fake News Alert!????A social media post claims that the Ministry of Finance has asked the Reserve Bank of India (RBI) and Securities &amp;amp; Exchange Board of India (SEBI) to consider regulating crypto.#PIBFactCheck: ❌ This claim is #Fake. ✅ India does not recognise crypto as&amp;hellip; pic.twitter.com/yEbCWkG2lQ
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 15, 2026



पोस्ट में आगे लिखा गया है, &#039;पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक ये दावा फेक है. भारत क्रिप्टो को एसेट (संपत्ति) नहीं मानता है. वित्त मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है. हमेशा वेरिफाइड जानकारी के लिए सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें. भारत सरकार से जुड़े संदिग्ध कंटेंट को रोकने में PIB FactCheck की मदद करें.
RBI ने जारी किया था बयानबता दें कि कुछ दिन पहले ही RBI ने एक संसदीय समिति को बताया था कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हैं. उन्होंने आगे ये भी गुहार लगाई थी कि देश में ऐसी एसेट्स को कानूनी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए. इसके जरिए RBI ने खुद ही क्रिप्टो या किसी भी वर्चुअल करेंसी का विरोध किया है. तो ऐसे में सरकार के द्वारा ऐसा कोई आदेश दिया जाना ही अपने आप में सवालिया निशान खड़े करता है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Stock Market: Youtube देखकर स्टॉक मार्केट में लगाते हैं पैसा? साउथ कोरिया में जो हुआ, उससे सबक लें आप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/stock-market-youtube-देखकर-स्टॉक-मार्केट-में-लगाते-हैं-पैसा-साउथ-कोरिया-मेंजो-हुआ-उससे-सबक-लें-आप</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/stock-market-youtube-देखकर-स्टॉक-मार्केट-में-लगाते-हैं-पैसा-साउथ-कोरिया-मेंजो-हुआ-उससे-सबक-लें-आप</guid>
        <description><![CDATA[ Stock Market News: क्या आप भी यूट्यूब वीडियो देखकर स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं? क्या आप किसी एक ही यूट्यूबर को फॉलो कर बस उसकी बात मानकर इनवेस्ट करते हैं? अगर हां तो ये खबर आपके लिए ही है. साउथ कोरिया से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां पर एक युवक ने यूट्यूबर का वीडियो देख निवेश तो कर दिया लेकिन लॉस झेल नहीं पाया और गुस्से में यूट्यूबर पर ही हमला कर दिया.
क्या है पूरा मामला?दरअसल साउथ कोरिया के बुसान निम्बु पुलिस स्टेशन के मुताबिक ये मामला 13 जुलाई की सुबह 8 बजकर 9 मिनट के आसपास एक कमर्शियल बिल्डिंग के पास का है. लगभग 20 साल का एक युवक एक यूट्यूबर को फॉलो करता था और वीडियो में उसकी दी गई एडवाइस को मानकर ही स्टॉक मार्केट में इनवेस्ट किया करता था. एक दिन ऐसा करने के बाद युवक को तगड़ा लॉस हो गया, जिससे वो गुस्से में आ गया और यूट्यूबर को अकेले में पाकर उस पर चाकू से हमला कर दिया.
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हालांकि हमलावर को पुलिस हिरासत में है और घायल शख्स अस्पताल में भर्ती है. वहीं पुलिस लगातार आरोपी से पूछताछ कर रही है जिससे हमले की असली वजह का पता चल पाए. शुरुआती जांच में शख्स ने माना है कि उसने निवेश में हुए नुकसान की वजह से ये कदम उठाया. हालांकि, पुलिस ये भी जांच कर रही है कि इसके पीछे कोई और कारण तो नहीं था.
इस घटना से आप भी सीखेंइस घटना से हर किसी को ये सीख मिलती है कि सोशल मीडिया पर दी जाने वाली हर जानकारी सही नहीं होती है. खासतौर से निवेश जब भी करें तो बिना जानकारी कोई कदम ना उठाएं. पहले निवेश को अच्छी तरह से समझें रिस्क को समझें उसके बाद ही कोई फैसला करें. किस भी यूट्यूबर या यूट्यूब चैनल को फॉलो करके उस पर भरोसा करने से पहले 10 बार सोच लें. क्योंकि निराशा कई बार लोग झेल नहीं पाते हैं और ऐसा ही कोई कदम उठा लेते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कच्चा तेल 85 डॉलर के पार, जेब पर मंदी की मार, जानिए क्यों कांप रहा है भारतीय रुपया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कच्चा-तेल-85-डॉलर-के-पार-जेब-पर-मंदी-की-मार-जानिए-क्यों-कांप-रहा-है-भारतीय-रुपया</link>
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        <description><![CDATA[ Currency Update: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की जेब पर भी दिखने लगा है. गुरुवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 96.2475 पर खुला. यह मई में बने अपने सबसे निचले स्तर 96.96 के बेहद करीब पहुंच गया है. इस महीने अब तक रुपया करीब 1.7% कमजोर हो चुका है.
रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. डर इस बात का है कि अगर हालात और बिगड़े तो होर्मुज से तेल की सप्लाई और ज़्यादा प्रभावित हो सकती है. दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल भेजता है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है इसलिए तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ने लगता है.
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तनाव बढ़ने से बाजार क्यों घबराया?
बुधवार को अमेरिका ने ईरान के तटीय रक्षा और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया. इसके बाद ईरान ने ऊर्जा निर्यात और घटाने की चेतावनी दी. ऐसे में दुनिया को डर है कि तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से निवेशकों ने सुरक्षित मानी जाने वाली अमेरिकी डॉलर की ओर रुख किया जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया.
RBI की कोशिशों का असर क्यों नहीं दिख रहा?
कुछ हफ्ते पहले जब कच्चा तेल सस्ता हुआ था तब रिजर्व बैंक ने डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए थे. इससे उम्मीद थी कि रुपया मजबूत होगा लेकिन अब तेल फिर महंगा हो गया है. बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से RBI के उन कदमों का असर कमजोर पड़ गया है.
आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?

कमजोर रुपया और महंगा तेल, दोनों मिलकर आम लोगों का खर्च बढ़ा सकते हैं.
पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं.
हवाई ईंधन महंगा होने से फ्लाइट टिकट महंगे पड़ सकते हैं.
मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे आयातित सामान की कीमत बढ़ सकती है.
विदेश में पढ़ाई और विदेश यात्रा का खर्च बढ़ सकता है.
खाने-पीने की कई आयातित चीजें भी महंगी हो सकती हैं.

अगर तेल और रुपया दोनों पर दबाव लंबे समय तक बना रहा तो महंगाई बढ़ सकती है. ऐसे में RBI के लिए ब्याज दरें घटाना भी मुश्किल हो सकता है जिससे लोन और EMI पर असर पड़ सकता है.
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आगे क्या होगा?
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर है. अगर तनाव बढ़ता है तो कच्चा तेल और महंगा हो सकता है और रुपये पर दबाव बना रह सकता है. अगर रुपया 96.96 के स्तर से भी नीचे चला गया तो यह डॉलर के मुकाबले अब तक का सबसे कमजोर स्तर होगा.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 14:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>E20 पेट्रोल पर सबसे बड़ा सर्वे, एथेनॉल से गाड़ी का माइलेज बढ़ा या घटा? जानें कार मालिकों ने क्या बताया</title>
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        <description><![CDATA[ E20 Petrol Survey: E20 पेट्रोल पर मचे बवाल के बीच एक नई सर्वे रिपोर्ट आई है, जिसमें 10 में से 6 गाड़ियों के मालिकों ने माना कि E20 पेट्रोल के आने के बाद माइलेज में 10% से ज्यादा की कमी आई है. LocalCircles के सर्वे के मुताबिक, साल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लगभग 60% मालिकों का कहना है कि अप्रैल 2025 में पूरे देश में E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल लागू होने के बाद जब उन्होंने अपनी गाड़ियों में इसका इस्तेमाल किया, तो माइलेज 10% से अधिक गिर गया.
नई गाड़ियों का भी एक जैसा हाल
सर्वे के नतीजों से एक चौंकानेवाला खुलासा यह भी हुआ है कि माइलेज की यह समस्या सिर्फ पुरानी गाड़ियों तक ही सीमित नहीं है. 2023-2024 में खरीदी गई नई गाड़ियों के 59% (10 में से 6) मालिकों का भी यही कहना है कि इसमें भी माइलेज में 10% से ज्यादा की गिरावट आई है. कुछ ने तो माइलेज में 20% तक गिरावट आने की भी बात कही है. इसससे पता चलता है कि समस्या सिर्फ पुरानी गाड़ियों में ही नहीं, बल्कि नई गाड़ियों में भी एक जैसी ही है.&amp;nbsp;
CNG कारों पर भी असर
पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के साथ-साथ सीएनजी कार मालिकों ने भी शिकायत की है कि E20 फ्यूल की वजह से गाड़ी स्टार्ट करते वक्त या पेट्रोल मोड पर चलाते वक्त ओवरऑल एवरेज पर असर पड़ रहा है.&amp;nbsp;
कहां आ रही है दिक्कत?&amp;nbsp;
लोकलसर्कल्स ने कहा, &quot;इससे इस बात की संभावना काफी बढ़ जाती है कि भारत में पेट्रोल में मिलावट या अशुद्धि की समस्या है. हो सकता है कि पंपों पर मिलने वाला ईंधन E20 के मानकों के अनुरूप न हो. वाहन निर्माताओं ने भी इस चिंता को दोहराया है और सरकार ने भी हाल ही में राज्यों को इथेनॉल-ब्लेंडेड सप्लाई सीरीज में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.&quot;
सर्वे में इस बात का अंदेशा लगाया जा रहा है कि पेट्रोल की रिटेल कीमत (95-105 रुपये प्रति लीटर) से एथेनॉल की कीमत (60-72 रुपये प्रति लीटर) काफी कम है. इस मार्जिन के लालच में शायद पेट्रोल पंपों में 20% की तय सीमा से अधिक ओवर-ब्लेंडिंग की जा रही है. ईंधन में मिलावट होगी, तो गाड़ियों को नुकसान पहुंचेगा ही. अब इथेनॉल की ब्लेंडिंग रिफाइनरियों के बजाय तेल कंपनियों के टर्मिनलों पर की जाती है. इसका नेटवर्क 400 से ज्यादा डिस्टिलरीज से लेकर लगभग 90,000 रिटेल आउटलेट्स तक फैला है. मिक्सिंग का काम ऐसी जगहों पर होने लगा है जहां निगरानी कम होती है.&amp;nbsp;
सरकार का क्या है रुख?
अप्रैल 2025 में E20 पेट्रोल को जब लॉन्च किया गया, तब इसके इस्तेमाल से माइलेज कम होने, परफॉर्मेंस घटने जैसी शिकायतें सामने आई थीं. इस पर सफाई देते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा कि इथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू कम होने के कारण ज्यादा ब्लेंड वाले पेट्रोल से माइलेज में बहुत मामूली कमी (3-5%) आ सकती है, लेकिन उन्होंने इंजन के खराक होने के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया.

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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 14:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>E20, पेट्रोल, पर, सबसे, बड़ा, सर्वे, एथेनॉल, से, गाड़ी, का, माइलेज, बढ़ा, या, घटा, जानें, कार, मालिकों, ने, क्या, बताया</media:keywords>
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        <title>Instamart पर करें बुकिंग, मिनटों में घर पहुंचेगा LPG सिलेंडर; कनेक्शन न भी हो तो चलेगा</title>
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        <description><![CDATA[ LPG on Instamart: भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है. आज के समय में कभी भी किसी भी चीज की जरूरत हो, तो हम तुरंत ऑर्डर कर देते हैं और सामान मिनटों में घर पहुंच जाता है. अब वह दिन दूर नहीं, जब किचन में खाना पकाते वक्त अगर अचानक से गैस खत्म हो जाए, तो ऑनलाइन LPG सिलेंडर ऑर्डर करने का भी हमें ऑप्शन मिलेगा.
इसे हकीकत में बदलने के लिए देश की दिग्गज सरकारी तेल कंपनी HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) ने हाथ मिलाया है. दोनों ने देश की पहली ऑन-डिमांड लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर डिलीवरी सर्विस शुरू करने का ऐलान कर दिया है. इसके जरिए जैसे आप रोजमर्रा की चीजें और राशन का सामान ऑनलाइन ऑर्डर देते हैं, ठीक उसी तरह से आगे आने वाले समय में Swiggy Instamart ऐप के जरिए ऑन-डिमांड LPG गैस सिलेंडर भी ऑर्डर कर सकेंगे.&amp;nbsp;
पहले से कनेक्शन होने का नहीं टेंशन
इस सर्विस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नए सिलेंडर की खरीद के लिए ग्राहकों के पास पहले से घरेलू LPG कनेक्शन का होना जरूरी नहीं है. पहली बार ऑर्डर करने पर इसे नए सिलेंडर की खरीद माना जाएगा, जिसमें आईडी प्रूफ के लिए कुछ डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ेगी. बाद में ऑर्डर के तौर पर ग्राहक रिफिल का अनुरोध कर सकते हैं और डिलीवरी के समय खाली सिलेंडर ले लिया जाएगा.
चेक कर पाएंगे सिलेंडर में गैस का लेवल
Swiggy Instamart के साथ हुई पार्टनरशिप के तहत HPCL &#039;HP Navya&#039;को लॉन्च करने की तैयारी में है. यह एक नेक्स्ट जेनरेशन का 10 किलो का कम्पोजिट LPG सिलेंडर है, जिसकी बॉडी ट्रांसपरेंट और पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर से 50% तक हल्की होगी. इसमें आप समय-समय पर चेक कर पाए्ंगे कि अब सिलेंडर में गैस का लेवल कितना है. &amp;nbsp;ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों का ख्याल रखते हुए प्लेटफॉर्म पर 5 किलो वाला स्टैंडर्ड मेटल LPG सिलेंडर भी उपलब्ध कराया जाएगा. इससे स्टूडेंट्स, कामकाजी लोगों और छोटे परिवारों के लिए काफी सहूलियत होगी, जिनके पास आमतौर पर कोई फॉर्मल गैस कनेक्शन नहीं होता है.&amp;nbsp;
इसके लेकर इंस्टामार्ट के CEO अमितेश झा ने कहा, &#039;&#039;इंस्टामार्ट ने ग्रॉसरी से आगे बढ़कर अपनी सर्विस का दायरा बढ़ाया है. HPCL के साथ मिलकर हम घर की एक जरूरी सर्विस के लिए भी यह सुविधा दे रहे हैं और सुरक्षा व भरोसे के मानकों का पालन करते हुए इंस्टामार्ट पर LPG उपलब्ध करा रहे हैं.&#039;&#039;
डिलीवरी का क्या होगा पैटर्न?
Instamart के जरिए दिए गए ऑर्डर HPCL के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटरों के मौजूदा नेटवर्क से पूरे किए जाएंगे, जबकि डिलीवरी डिस्ट्रीब्यूटर के ट्रेंड कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा और रेगुलेटरी नियमों के अनुसार की जाएगी. यह सर्विस अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बेंगलुरु के कुछ चुनिंदा इलाकों में शुरू की गई है. जल्द ही इसे देश के दूसरे शहरों में भी शुरू किए जाने की उम्मीद है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 14:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Instamart, पर, करें, बुकिंग, मिनटों, में, घर, पहुंचेगा, LPG, सिलेंडर, कनेक्शन, न, भी, हो, तो, चलेगा</media:keywords>
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        <title>होम लोन के लिए तरस गई 10000 करोड़ की कंपनी, 800 से ज्यादा CIBIL स्कोर से भी नहीं बनी बात</title>
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        <description><![CDATA[ Home Loan: आज के समय में होम लोन का मिलना कोई बड़ी बात नहीं है. अगर बैंक में आपकी अच्छी जान-पहचान है और क्रेडिट हिस्ट्री भी बेहतर तो काम और भी आसान हो जाता है. लेकिन हर किसी के लिए बात एक समान नहीं है. कई बार CIBIL स्कोर शानदार होते हुए भी बैंक आपको लोन देने से मना कर सकता है. कुछ ऐसा ही हुआ फिनटेक कंपनी रेज फाइनेंशियल सर्विसेज (Raise Financial Services) के सीईओ प्रवीण जाधव (Pravin Jadhav) के साथ. उनका CIBIL स्कोर 800 के ऊपर है, कंपनी की वैल्यूएशन भी 10000 करोड़ रुपये के बराबर है. बावजूद इसके उनका लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट होना वाकई में चौंकानेवाली है. CEO ने X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इस पर अपना दर्द भी बांटा है.&amp;nbsp;
सोशल मीडिया पर CEO का छलका दर्द
बुधवार को X पर एक पोस्ट में जाधव ने लिखा कि एक बड़े प्राइवेट बैंक ने उनका होम लोन एप्लीकेशन सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया क्योंकि वह एक फाउंडर है. उन्होंने यह भी बताया कि ये वही बैंक है, जो उन्हें देश के टॉप फिनटेक इनोवेटर्स में से एक के तौर पर सम्मानित भी कर चुका है. CEO ने आगे कहा, &quot;वो हमारी कंपनी में काम करने वाले लोगों को तो लोन दे सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं &amp;ndash; क्योंकि एक फाउंडर के तौर पर मैं &#039;हाई रिस्क&#039; कैटेगरी में आता हूं.&quot; उन्होंने आगे यह भी बताया कि वह 25 साल से ज्यादा समय से उस बैंक के साथ जुड़े हुए हैं और उनका मानना ​​है कि एसेट्स (संपत्ति) के मामले में वे बैंक के टॉप 0.1% ग्राहकों में से एक हैं. बतौर प्रवीण बैंक के साथ उनका रिश्ता लोन की वैल्यू से 5-6 गुना ज्यादा का है. इतना ही नहीं, उनका सिबिल स्कोर भी 800 से ज्यादा है, जो कि काफी अच्छा माना जाता है.

Founder&#039;s life is hard!My home loan application got rejected by a top private bank - just because I am a founder.&gt; 25 years+ of customer&gt; ~800 CIBIL Score&gt; 5x-6x of loan value in relationship with this bank&gt; may be in top 0.1% of its customers by assets&gt; and irony is this&amp;hellip;
&amp;mdash; pj (@BeingPractical) July 14, 2026



फाउंडर्स को क्यों &#039;हाई रिस्क&#039; मानते हैं बैंक?
बैंक स्टार्टअप फाउंडर्स और एंटरप्रेन्योर्स को लोन देना जोखिम भरा मानते हैं क्योंकि इनकी कोई फिक्स्ड या गारंटीड सैलरी नहीं होती है. ऊपर से इनकी इनकम भी ऊपर-नीचे होती रहती है. ऐसे में बैंक को डर रहता है कि कहीं इनकी ईएमआई न डूब जाए इसलिए बैंक अमूमन इन्हें लोन देने से कतराते हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 14:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Top Banks: दुनिया के टॉप 10 में से 7 बैंक चीन के, अमेरिका और यूरोप से आगे, भारत कितना सुरक्षित? </title>
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        <description><![CDATA[ World&#039;s 10 Biggest Banks: ग्लोबल बैंकिंग से जुड़ी मशहूर मैगजीन &#039;द बैंकर&#039; दुनिया के 100 सबसे बड़े बैंकों की एक लिस्ट बनाई है, इनमें टॉप-10 बैंकों में से 7 बैंक अकेले चीन के हैं. इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC), चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक, एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना और बैंक ऑफ चाइना टॉप चार पोजीशन पर हैं. ये इस पोजीशन पर साल 2019 से कायम रहे हैं. &amp;nbsp;
पोस्टल सेविंग्स बैंक ऑफ़ चाइना - जो 2007 में पोस्ट ऑफिस के सेविंग्स काउंटर से बनाया गया था - पहली बार टॉप दस में शामिल हुआ है. टॉप 100 में 22 चीनी बैंक है. लिस्ट में &amp;nbsp;जेपी मॉर्गन चेस, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप भी हैं, जो चीन के नहीं है. टॉप 100 की लिस्ट में भारतीय बैंकों का कोई अता-पता नहीं है.
चीन का क्या है इरादा?
चीन के सभी बड़े बैंक सरकारी हैं, जो पैसों का इस्तेमाल कारोबार से ज्यादा अपनी विदेश नीति के लिए करते हैं. इन बैंकों के पास इतना पैसा होता है, तो कि यह श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे अपने पड़ोस में स्थित देशों को भारी-भरकम कर्ज देने का दम रखते हैं.
जब ये देश कर्ज नहीं चुका पाते हैं, तो चीन इनके बंदरगाहों या जमीन को कब्जे में ले लेता है. इसे &#039;स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स&#039; या भारत को घेरने की रणनीति कहते हैं.&amp;nbsp;&#039;स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स&#039; को आप एक जियोपॉलिटिकल थ्योरी के तौर पर समझ सकते हें, जो यह बताती है कि चीन, भारत को किस तरह से जमीन और समुद्र के रास्ते घेरने की तैयारी कर रहा है.
चीन की तगड़ी है प्लानिंग
चीन का सबसे बड़ा बैंक ICBC है, जो 7.6 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति को संभालता है. भारत की पूरी जीडीपी इसकी आधी है. चीन के टॉप बैंकों के मुकाबले भारत का सबसे बड़ा बैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) काफी छोटा है. चीन इन बैंकों के जरिए अमेरिकी डॉलर का रूतबा खत्म करा चाहता है. चीन चाहता है कि डॉलर की जगह दुनियाभर में कारोबार के लिए युआन का इस्तेमाल हो.
चूंकि इन बैंकों के पास पैसों की कोई कमी नहीं है इसलिए ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लाॅकचेन जैसी नई तकनीकों पर भर-भरकर निवेश कर रहे हैं ताकि भविष्य की टेक्नोलॉजी पर इनका कब्जा हो. ऐसे में अगर आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग, इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे पर चीनी बैंकों का दबदबा रहेगा, तो ऑनलाइन सुरक्षा के नियम, तकनीक वगैरह येही तय करेंगे, जाे भारत के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगी.

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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 14:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Noida Airport: जेवर एयरपोर्ट का एक महीना पूरा, उम्मीदें आसमान पर लेकिन रफ्तार सुस्त, क्यों नहीं मिल रहे यात्री?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/noida-airport-जेवर-एयरपोर्ट-का-एक-महीना-पूरा-उम्मीदें-आसमान-पर-लेकिन-रफ्तार-सुस्त-क्यों-नहीं-मिल-रहे-यात्री</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/noida-airport-जेवर-एयरपोर्ट-का-एक-महीना-पूरा-उम्मीदें-आसमान-पर-लेकिन-रफ्तार-सुस्त-क्यों-नहीं-मिल-रहे-यात्री</guid>
        <description><![CDATA[ Noida Airport Report: करीब 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (पहले&amp;nbsp; फेज़) को शुरू हुए एक महीना पूरा हो गया है. चार हफ्तों के आंकड़े बताते हैं कि एयरपोर्ट पर धीरे-धीरे उड़ानें और यात्रियों की संख्या तो आगे बढ़ रही है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही बड़ा है.
1.2 करोड़ सालाना यात्रियों की क्षमता वाले इस एयरपोर्ट से पहले महीने में सिर्फ 61 हजार 287 यात्रियों ने सफर किया यानी एयरपोर्ट फिलहाल अपनी क्षमता का करीब 5 फीसदी ही इस्तेमाल कर पा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट पर पूरे दिन में जितनी फ्लाइट्स ऑपरेट होती हैं, उतनी दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर करीब आधे घंटे में उड़ जाती हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जेवर जल्द दिल्ली एयरपोर्ट का मजबूत विकल्प बन पाएगा या इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा?
चार हफ्तों में बदली तस्वीर लेकिन शुरुआत बेहद छोटी
15 जून से 21 जून के बीच एयरपोर्ट पर सिर्फ 86 फ्लाइट मूवमेंट हुए थे. दूसरे हफ्ते में यह संख्या 88 रही. तीसरे हफ्ते में बड़ा उछाल आया और फ्लाइट मूवमेंट बढ़कर 201 हो गए.&amp;nbsp;चौथे हफ्ते यानी 6 से 12 जुलाई के बीच यह आंकड़ा 224 पहुंच गया. यानी पहले हफ्ते के मुकाबले उड़ानों की संख्या करीब तीन गुना हो चुकी है.
LPG: 4 दिन में ही जवाब दे गया गैस सिलेंडर, जब चेक किया तो निकला पानी, आप ऐसे करें धोखे से बचाव
यात्रियों की संख्या भी पहले दिन के 1,427 से बढ़कर एक दिन में करीब 2,800 तक पहुंच गई है. शुरुआत में एयरपोर्ट सिर्फ 5 शहरों से जुड़ा था, अब यह संख्या बढ़कर 15 हो गई है. हालांकि रोजाना औसतन 2500 से 2600 यात्री ही सफर कर रहे हैं, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट पर हर दिन करीब 1,300 फ्लाइट्स ऑपरेट होती हैं.
40 फीसदी यात्री सिर्फ फ्लाइट बदलने वाले
15 जून से 13 जुलाई के बीच एयरपोर्ट से 18 हजार 424 यात्रियों ने उड़ान भरी और 18 हजार 89 यात्री यहां उतरे. लेकिन सबसे दिलचस्प आंकड़ा कनेक्टिंग यात्रियों का है. इस दौरान 11 हजार 732 ट्रांसफर और 13 हजार 42 इन-ट्रांजिट यात्री रहे यानी कुल ट्रैफिक का करीब 40 फीसदी हिस्सा ऐसे यात्रियों का था, जो सिर्फ दूसरी फ्लाइट पकड़ने के लिए जेवर पहुंचे थे. इसका मतलब यह भी है कि स्थानीय यात्रियों की संख्या अभी उम्मीद से काफी कम है.
एयरलाइंस ने भी बदली रणनीति
एयरपोर्ट की शुरुआत तीन एयरलाइंस के साथ हुई थी, लेकिन पहले ही महीने एयर इंडिया एक्सप्रेस ने यहां से अपनी उड़ानें बंद कर दीं. अकासा एयर ने भी बेंगलुरु और नवी मुंबई रूट बंद कर दिए और अब सिर्फ मुंबई के लिए दो फ्लाइट चला रही है.
फिलहाल सबसे बड़ा दांव इंडिगो ने लगाया है. इंडिगो अब जेवर से 15 शहरों के लिए हफ्ते में 105 फ्लाइट्स चला रही है. लखनऊ और जयपुर के लिए दिन में दो-दो उड़ानें हैं. हालांकि कम यात्रियों की वजह से नोएडा-चंडीगढ़ रूट भी बंद करना पड़ा.
सबसे बड़ी बात यह है कि &#039;इंटरनेशनल एयरपोर्ट&#039; कहलाने वाले जेवर से एक महीने बाद भी कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू नहीं हुई है.
ग्राउंड रिपोर्ट- उम्मीद भी है चिंता भी
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एयरपोर्ट के बाहर टैक्सी और कैब चालकों से बात हुई. उनका कहना है कि फिलहाल सवारी बहुत कम मिल रही है. एक कैब ड्राइवर ने बताया अभी ज्यादातर लोग ट्रांजिट वाले होते हैं. फ्लाइट से बाहर निकलकर शहर जाने वाले यात्री बहुत कम हैं. कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है.
हालांकि स्थानीय लोगों की राय पूरी तरह निराशाजनक नहीं है. कई लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट अभी नया है. जैसे-जैसे ज्यादा एयरलाइंस आएंगी नए शहर जुड़ेंगे और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी वैसे-वैसे यात्रियों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी.
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कनेक्टिविटी अभी सबसे बड़ी चुनौती
यात्रियों का कहना है कि एयरपोर्ट तक पहुंचना अभी आसान नहीं है. परी चौक के बाद यमुना एक्सप्रेसवे का लंबा सुनसान हिस्सा, खासकर सुबह और रात के समय, लोगों को असहज करता है.
YEIDA एक्सप्रेसवे पर लाइटिंग और दूसरी सुविधाएं बेहतर करने पर काम कर रही है. वहीं NHAI दनकौर के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला इंटरचेंज बना रहा है जिसके 15 अगस्त तक खुलने की उम्मीद है.&amp;nbsp; इससे गाजियाबाद, हापुड़ और आसपास के इलाकों से एयरपोर्ट पहुंचना आसान होगा. हालांकि मेट्रो या रैपिड रेल जैसी सीधी कनेक्टिविटी अभी दूर की बात है.
2030 तक असली परीक्षा
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दिल्ली का IGI एयरपोर्ट अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है. उसकी सालाना क्षमता करीब 11 करोड़ यात्रियों की है लेकिन पिछले साल वहां 8 करोड़ से भी कम यात्रियों ने सफर किया.
दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर यात्रियों के पास अभी भी बेहतर कनेक्टिविटी, ज्यादा उड़ानों और सस्ते सार्वजनिक परिवहन के साथ IGI का विकल्प मौजूद है. इसके अलावा पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने, महंगे एविएशन फ्यूल और कमजोर रुपए जैसी चुनौतियों ने भी एयरलाइंस पर दबाव बढ़ाया है. ऐसे माहौल में नई उड़ानें शुरू करना कंपनियों के लिए आसान नहीं है.
पहले महीने के आंकड़े दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाते हैं. एक तरफ उड़ानों और शहरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, दूसरी तरफ एयरपोर्ट अभी अपनी क्षमता के सिर्फ 5 फीसदी पर चल रहा है.
ग्राउंड पर लोगों में उम्मीद है कि अगर ज्यादा एयरलाइंस जुड़ती हैं अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होती हैं और एयरपोर्ट तक पहुंच आसान बनती है तो आने वाले वर्षों में जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का बड़ा एविएशन हब बन सकता है. लेकिन फिलहाल इसका सफर अभी सिर्फ शुरू हुआ है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Noida, Airport:, जेवर, एयरपोर्ट, का, एक, महीना, पूरा, उम्मीदें, आसमान, पर, लेकिन, रफ्तार, सुस्त, क्यों, नहीं, मिल, रहे, यात्री</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;केस खत्म करने के बदले नहीं हुई कोई डील&amp;apos;, गौतम अडानी ने अमेरिकी कोर्ट में सभी आरोपों को किया खारिज</title>
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        <description><![CDATA[ Gautam Adani News: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अमेरिकी कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर उन सभी अफवाहों और कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके खिलाफ अमेरिकी मामले को बंद करने के पीछे कोई गुप्त समझौता या डील हुई है.
अडानी ने साफ कहा है कि अमेरिकी न्याय विभाग यानी DoJ की ओर से उनके खिलाफ आपराधिक आरोपों को हटाने के फैसले के पीछे कोई वादा, लेन-देन या गुप्त डील नहीं थी. उन्हें ऐसी किसी भी बात की कोई जानकारी नहीं है.
फायदे के बदले केस हटाने की बात पूरी तरह गलत- अडानी
यह हलफनामा अमेरिकी कोर्ट के जज निकोलस गराउफिस के 8 जुलाई के आदेश के जवाब में दाखिल किया गया है. जज ने अडानी से लिखित में पूछा था कि क्या वे आरोपों को हटाने के बदले में किसी भी तरह के वादे, ऑफर या समझौते के बारे में जानते हैं. इसके जवाब में अडानी ने कहा, &#039;&#039;मुझे ऐसी किसी भी बात की जानकारी नहीं है, जिसे इस केस को बंद करने के बदले में किसी को देने, लेने, वादा करने या स्वीकार करने की बात कही गई हो. किसी भी तरह के कीमती सामान या फायदे के बदले केस हटाने की बात पूरी तरह गलत है.&quot;
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कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अडानी ग्रुप ने अमेरिका में जो 10 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी, उसी के बदले उनके खिलाफ केस हटाया गया है. इसका जवाब देते हुए अडानी ने बताया, &#039;&#039;अडानी ग्रुप ने अमेरिका में निवेश करने का फैसला 13 नवंबर 2024 को ही सार्वजनिक कर दिया था, जबकि उनके खिलाफ अमेरिकी कोर्ट का मामला इसके बाद सामने आया था.&#039;&#039;
अडानी के वकीलों (सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP) ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं और एक प्रस्ताव भी दिया था कि अगर अमेरिकी प्रशासन चाहे तो इस निवेश को मामले के समाधान का हिस्सा मान सकता है. हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने वकीलों को साफ कर दिया था कि केस हटाने के फैसले में इस निवेश का कोई रोल नहीं होगा. इसलिए, अडानी ने साफ किया कि इस निवेश योजना का केस बंद होने से कोई लेना-देना नहीं है.
अमेरिकी न्याय विभाग ने भी अफवाहों को नकारा
इससे पहले 4 जुलाई को अमेरिकी सरकारी वकीलों ने भी कोर्ट में साफ किया था कि निवेश के बदले केस हटाने की खबरें पूरी तरह झूठी हैं. यह फैसला लेने वाले मुख्य अधिकारी आर. ट्रेंट मैककॉप्टर ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने यह केस इसलिए हटाने की मांग की, क्योंकि यह मामला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं था.
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केस हटाने के कारण क्या थे?

कथित गड़बड़ी मुख्य रूप से भारत में हुई थी.
इस मामले में किसी भी अमेरिकी निवेशक को कोई नुकसान नहीं हुआ है.
भारत में पहले से ही इस मामले की जांच चल रही है.
यह मामला जो बाइडन प्रशासन के आखिरी दिनों में केवल &quot;नाम खराब करने&quot; के मकसद से लाया गया था.

अब अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले को हमेशा के लिए बंद करने की मांग की है, जिससे यह केस पूरी तरह खत्म हो जाएगा. जज इस पर अंतिम फैसला सुनाने से पहले अडानी का पक्ष जानना चाहते थे, जो अब हलफनामे के जरिए साफ हो चुका है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>केस, खत्म, करने, के, बदले, नहीं, हुई, कोई, डील, गौतम, अडानी, ने, अमेरिकी, कोर्ट, में, सभी, आरोपों, को, किया, खारिज</media:keywords>
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        <title>Bank Deal: बिकने जा रहा देश का ये बड़ा बैंक, कनाडा के अरबपति खरीद रहे, क्या आपका भी है इसमें खाता?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Deal: पिछले कई दिनों से सरकार IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर प्लानिंग कर रही थी. लेकिन अब ये प्लानिंग जल्दी ही पूरी होने वाली है. कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय मूल के अरबपति प्रेम वत्स जल्दी ही इस बैंक के आधिकारिक रूप से मालिक बन सकते हैं. क्योंकि इस बैंक को खरीदने के लिए उन्होंने सबसे बड़ा प्रपोजल सरकार के सरकार के सामने रखा है.
कंपनी ने सामने रखा प्रपोजलदरअसल भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स IDBI को खरीदने के लिए काफी दिलचस्पी दिखा रही है. कंपनी की तरफ से बैंक को खरीदने के लिए 5.5 बिलियन से 5.7 बिलियन डॉलर (करीब 47,000-49,000 करोड़ रुपये) का प्रपोजल रखा है.
ये भारत के बैंकिंग सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक होगा. हालांकि, सरकार ने अभी इस पर आखिरी फैसला नहीं लिया है और फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है.
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क्यों किया जा रहा है बैंक का सदा?IDBI एक निजी क्षेत्र बैंक है जिसकी 60.7% हिस्सेदारी &amp;nbsp;सरकार और LIC के पास है. जिसे वो बेचना चाहते हैं. फिलहाल सरकार के पास बैंक की करीब 45.5% और LIC के पास 49.2% हिस्सेदारी है. ये फैसला इसलिए लिया जा रहा है कि कुछ साल पहले IDBI बैंक खराब कर्ज (NPA) और कमजोर वित्तीय स्थिति से जूझ रहा था. 2018 में RBI ने बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) ढांचे में भी रखा था.&amp;nbsp;
हालांकि अब बैंक ने खराब कर्ज कम किया, मुनाफा बढ़ाया और अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया है. जिसकी वजह से वैश्विक निवेशक इसमें निवेश करने के लिए तैयार हैं. बैंक के लिए दो कंपनियों फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई की एमिरेट्स NBD ने दाव खेला है.
ग्राहकों पर क्या होगा असर?अगर फेयरफैक्स बैंक की हिस्सेदारी खरीद भी लेती है, तो आम ग्राहकों के लिए तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. बैंक की शाखाएं, जमा राशि, लोन और अन्य बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह ही जारी रहेंगी. फिलहाल सरकार दोनों कंपनियों की बोलियों की समीक्षा कर रही है और आखिरी मंजूरी मिलने के बाद ही इस सौदे पर फैसला होगा.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Content Creator: भारत के 66% कंटेंट क्रिएटर्स अब छोटे शहरों से, लेकिन नहीं कर पा रहे कमाई, जानें इसका क्या कारण है</title>
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        <description><![CDATA[ Content Creation: भारत में अब कोई और प्रोफेशन चुनने की बजाय लोग कंटेंट क्रिएशन को ही प्रोफेशन के रूप में चुन रहे हैं. कोविड के समय से शुरू हुआ कंटेंट क्रिएसन का काम शहरों से लेकर गांव तक हर जगह पर पॉपुलर हो रहा है. लेकिन इन दिनों कंटेंट क्रिएशन के काम में कई लोगों को थोड़ा ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ रहा है. ये लोग हैं छोटी जगहों के क्रिएटर्स.
इन क्रिएटर्स के सामने चुनौतीदरअसल हाल ही में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) और Hashfame की एक रिपोर्ट सामने आई है, इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2025 में भारत में करीब 41.2 लाख कंटेंट क्रिएटर हैं. इनमें से दो-तिहाई नॉन-मेट्रो शहरों से हैं. साल 2020 से 2025 के बीच छोटे शहरों के क्रिएटर्स की संख्या 6.4 गुना बढ़ी, जबकि मेट्रो सिटीज में ये बढ़ोतरी 2.6 गुना रही.
इस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र मिलाकर ही देश के हर चार लोगों में से एक क्रिएटर बनकर सामने आता है. वहीं तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात में भी उनकी आबादी के अनुपात से ज्यादा क्रिएटर हैं. छोटे शहरों के 50% से ज्यादा क्रिएटर ऐसे हैं जिनके सोशल मीडिया पर 1,000 से 10,000 फॉलोअर्स हैं. वहीं 28% क्रिएटर्स के 10,000 से 1 लाख फॉलोअर्स हैं.
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भाषावादी क्रिएटर्सबात करें भाषा के बारे में तो हिंदी में कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स 42% हैं. जबकि क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट बनाने वाले क्रिटर्स 58% हैं. हालांकि, भोजपुरी और कन्नड़ जैसी भाषाओं में कंटेंट बनाने वालों को उनकी संख्या के मुकाबले कम कमाई के मौके मिल रहे हैं. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि 2020 में जहां औसत इंगेजमेंट रेट 1.8% था, वो 2025 में बढ़कर 7.2% हो गया है. यानी लोग पहले की तुलना में कंटेंट पर ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
कमाई बनी सबसे बड़ी समस्याइसके बावजूद सबसे बड़ी समस्या कमाई बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, केवल करीब 15% क्रिएटर ही अपने कंटेंट से अच्छी खासी कमाई कर पा रहे हैं. बाकी अधिकतर लोगों के लिए कंटेंट क्रिएशन अभी भी एक्स्ट्रा आय का जरिया है, न कि रोजगार का जरिया है. खास बात ये भी है कि जो पहले से क्रिएटर हैं उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जो नए क्रिएटर्स आ रहे हैं उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price: गाड़ी में तेल भरवाने से पहले जान लें 15 जुलाई के नए रेट, आपके शहर में आज कितने का है पेट्रोल&amp; डीजल?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-गाड़ी-में-तेल-भरवाने-से-पहले-जान-लें-15-जुलाई-के-नए-रेट-आपके-शहर-में-आज-कितने-का-है-पेट्रोल-डीजल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-गाड़ी-में-तेल-भरवाने-से-पहले-जान-लें-15-जुलाई-के-नए-रेट-आपके-शहर-में-आज-कितने-का-है-पेट्रोल-डीजल</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today 15 July 2026: सुबह- सुबह गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं तो रुकिए. हर दिन की तरह आज भी सरकारी तेल कंपनियों ने 15 जुलाई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आपको अपनी बाइक या कार का टैंक फुल कराने से पहले अपने शहर की कीमत जरूर चेक कर लें. अच्छी बात ये है कि आज भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है. यहां से शहर अनुसार रेट लिस्ट देखें.
आज पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)-&amp;nbsp;

दिल्ली- 102.12 रुपये&amp;nbsp;
मुंबई- 111.21 रुपये&amp;nbsp;
कोलकाता- 113.51 रुपये&amp;nbsp;
अहमदाबाद- 101.70 रुपये&amp;nbsp;
चेन्नई-&amp;nbsp; 107.77 रुपये &amp;nbsp;
पटना-&amp;nbsp; 113.35 रुपये &amp;nbsp;
लेह- 109.81 रुपये&amp;nbsp;
हैदराबाद- 115.69 रुपये &amp;nbsp;
कोहिमा- 104.39 रुपये&amp;nbsp;

अगर होर्मुज पर अमेरिका ने किया कब्जा तो भारत पर क्या होगा असर, ट्रंप ऐंठेंगे हमारे अरबों डॉलर?
आज डीजल की कीमत (प्रति लीटर)-&amp;nbsp;

दिल्ली- 95.20 रुपये
मुंबई&amp;nbsp; 97.83 रुपये
कोलकाता- 99.82 रुपये
अहमदाबाद- 97.84 रुपये
चेन्नई-&amp;nbsp; 99.55 रुपये
पटना-&amp;nbsp; 99.36 रुपये
लेह- 97.92 रुपये
हैदराबाद- 103.82 रुपये
कोहिमा- 95.91 रुपये&amp;nbsp;

क्यों नहीं बदले दाम?पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम एक जैसे ही बने हुए हैं. इसकी बड़ी वजह तेल कंपनियों की रेट सेट करने की नीति, टैक्स और बाजार की मौजूदा स्थिति है. ऐसे में फिलहाल गाड़ी चलाने वालों को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ा है.
भारत से लेकर जापान तक,&amp;nbsp;जानें किस देश में कितनी होती है इथेनॉल मिक्सिंग, वहां कैसा है पेट्रोल मॉडल
अलग- अलग क्यों होता है रेट?अगर आपके शहर में पेट्रोल या डीजल का रेट दिल्ली या मुंबई से अलग है तो इसका सीधा कारण राज्य सरकारों का VAT, स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत है. इसलिए हर राज्य और शहर में पेट्रोल और डीजल की कीमत अलग-अलग होती हैं.
कितने बजे आते हैं नए रेट?इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट अपडेट करते हैं. अगर किसी दिन कीमतों में बदलाव होता है तो वो भी इसी समय पता चल जाता है.
170 KM वाले होर्मुर्ज से बचने के लिए दुबई की कंपनी ने बनाया प्लान, अब ऐसे निकलेंगे जहाज ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, गाड़ी, में, तेल, भरवाने, से, पहले, जान, लें, जुलाई, के, नए, रेट, आपके, शहर, में, आज, कितने, का, है, पेट्रोल-, डीजल</media:keywords>
    </item>
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        <title>LPG Rate Today: अमेरिका&amp;ईरान में तनाव के बीच कहीं आज बढ़ तो नहीं गया सिलेंडर का रेट? फटाफट चेक करें कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-अमेरिका-ईरान-में-तनाव-के-बीच-कहीं-आज-बढ़-तो-नहीं-गया-सिलेंडर-का-रेट-फटाफट-चेक-करें-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-अमेरिका-ईरान-में-तनाव-के-बीच-कहीं-आज-बढ़-तो-नहीं-गया-सिलेंडर-का-रेट-फटाफट-चेक-करें-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today on July 15: आज सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने देश भर में एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. होर्मुज (Strait of Hormuz)&amp;nbsp; की नाकाबंदी और पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़ते तनाव के बावजूद आज भी कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतें स्थिर रखी गई हैं. इससे पहले 1 जुलाई को 19 किलो वाले कमर्शिल सिलेंडर की कीमतों में 183.50 रुपये की बड़ी कटौती की गई थीं, जबकि 14.2 किलो घरेलू रसोई गैस की कीमतें 7 जून को 29 रुपये बढ़ाई गई थीं, तब से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.&amp;nbsp;
आज शहरवार LPG की कीमतें&amp;nbsp;



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
942.0 रुपये
2930.0 रुपये


मुंबई
941.5 रुपये
2885.5 रुपये


कोलकाता
968.0 रुपये
3082.0 रुपये


चेन्नई
957.5 रुपये
3106.0 रुपये


चंडीगढ़
951.5 रुपये
2954.5 रुपये&amp;nbsp;


देहरादून
961.0 रुपये
2983.5 रुपये


हैदराबाद
934.0 रुपये
2052.5 रुपये


भुवनेश्वर&amp;nbsp;
968.0 रुपये
3115.0 रुपये


तिरुवनंतपुरम
&amp;nbsp;951.0 रुपये
2970.5 रुपये



अमेरिका और ईरान में फिर से तनाव
पश्चिम एशिया में पिछले तीन हफ्तों से चला आ रहा युद्ध विराम पूरी तरह से टूट गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड एक तरफ जहां दक्षिणी ईरान के तटीय शहरों, रडार सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और एयर डिफेंड सिस्टम्स को निशाना बना रहे हैं. अमेरिकी सेना के 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों लड़ाकू विमानों ने ईरान के समुद्री रास्तों का पूरी तरह से घेर लिया है. इससे ईरानी बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही ठप्प हो गई है.&amp;nbsp;
वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन, कुवैत, जॉर्डल और ओमान जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं. इस भयंकर सैन्य टकराव का असर क्रूड ऑयल पर पड़ा है, जो 71 डॉलर प्रति बैरल के अपने पिछले निचले स्तर से अब धीरे-धीरे फिर से अपने उच्चतम स्तर की ओर बढ़ रहा है.
इससे आगे आने वाले समय में भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों पर असर पड़ सकता है क्योंकि भारत का ज्यादातर एनर्जी शिपमेंट होर्मुज से होकर होता है. ऐसे में महंगे क्रूड का दबाव तो पहले से ही है, ऊपर से होर्मुज से सप्लाई चेन टूटने पर जहाजों व टैंकरों को केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता तय करना होगा, जिसमें वक्त भी अधिक लगेगा यानि कि माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, साथ ही समुद्री बीमा प्रीमियम बढ़ने से देश में ईंधन की कीमतें भी बढ़ेंगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, अमेरिका-ईरान, में, तनाव, के, बीच, कहीं, आज, बढ़, तो, नहीं, गया, सिलेंडर, का, रेट, फटाफट, चेक, करें, कीमत</media:keywords>
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    <item>
        <title>क्या आपके पास है यह शेयर जिस पर विजय केडिया ने लगाया बड़ा दांव? खरीद डाले पूरे 83930 शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ Small Cap Stock: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अगर मुनाफा कमाना है, तो बाजार की हर गतिविधि पर नजर रखनी होगी. किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि किन-किन दिग्गज निवेशकों ने इस पर अपनी हिस्सेदारी कम की है या बढ़ाई है.
अगर आप भी एक रिटेल निवेशक है और आपको मुनाफे के लिए किसी बेहतरीन स्टॉक की तलाश है, तो हम आपको एक ऐसी ही कंपनी के शेयर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया है.&amp;nbsp;
केडिया ने खरीदे 83930 शेयर
यहां स्मॉलकैप माइनिंग इंजीनियरिंग कंपनी Eimco Elecon की बात की जा रही है. केडिया ने अपनी इंवेस्टमेंट यूनिट &#039;केडिया सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड&#039; के जरिए कंपनी ने नई एंट्री ली है. विजय केडिया ने इस कंपनी के 83930 शेयर खरीदे हैं, जिसके बाद कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 1.45% हो गई है. कल मंगलवार को BSE पर ईमको एलेकॉन के शेयर 1767 रुपये के स्तर पर बंद हुए. इस हिसाब से कंपनी में केडिया की हिस्सेदारी की टोटल वैल्यू करीब 14.8 करोड़ रुपये से 15 करोड़ के रेंज में बैठ रही है.&amp;nbsp;
शेयर का कैसा रहा है परफॉर्मेंस?
ईमको एलेकॉन के शेयरों में पिछले एक महीने में 14% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है. 1019 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली इस कंपनी के शेयरों का 52- वीका का हाई लेवल 2578.65 रुपये और 52- वीक का लो लेवल 1413.70 रुपये है.
केडिया ने क्यों किया भरोसा?
जून 2026 की तिमाही में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भी स्टॉक पर अपनी हिस्सेदारी 3.10% से बढ़ाकर 3.25% कर ली है. मार्च 2026 तक&amp;nbsp;अंडरग्राउंड और ओपनकास्ट माइनिंग में इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरण और मशीनरी बनाने वाली इस कंपनी पर केवल 4 करोड़ रुपये का कर्ज था. इसके मुकाबले कंपनी के पास 462 करोड़ का मजबूत कैश रिजर्व और 205 करोड़ का निवेश पोर्टफोलियो मौजूद है. भारत में माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स में जिस तेजी से मॉर्डन और क्लीन-टेक मशीनों की मांग बढ़ रही है, जिससे कैश-रिच इस कंपनी को बड़ा मुनाफा हो सकता है.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, आपके, पास, है, यह, शेयर, जिस, पर, विजय, केडिया, ने, लगाया, बड़ा, दांव, खरीद, डाले, पूरे, 83930, शेयर</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Price Today: सुबह&amp; सुबह सस्ता हुआ सोना, चांदी स्थिर, जानें अपने शहर में कितना है 18K, 22K, 24K सोने का भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सुबह-सुबह-सस्ता-हुआ-सोना-चांदी-स्थिर-जानें-अपने-शहर-में-कितना-है-18k-22k-24k-सोने-का-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सुबह-सुबह-सस्ता-हुआ-सोना-चांदी-स्थिर-जानें-अपने-शहर-में-कितना-है-18k-22k-24k-सोने-का-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today 15 July 2026: अगर आपके घर भी शादी, पार्टी या फंक्शन आ रहे हैं और आप सोना या चांदी खरीदने वाली हैं तो ये खबर आपके लिए है. असल में खुशखबर ही है, क्योंकि सोना सस्ता हो गया है. आज 15 जुलाई 2026 को एक बार फिर सोने की कीमतों में 0.38% की हल्की गिरावट दर्ज की गई है. 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर 540 रुपये सस्ता होकर 142260 रुपये पर पहुंच गया है. वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत भी 500 रुपये घटकर 130400 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. दूसरी ओर, चांदी को देखें तो इसकी कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है. यहां से आप सोना और चांदी, दोनों की ही रेट लिस्ट देख सकते हैं.&amp;nbsp;
शहर अनुसार सोने का भाव (10 ग्राम वजन में)-&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट सोना&amp;nbsp;
22 कैरेट सोना
18 कैरेट सोना


दिल्ली
142950
131050
107250


मुंबई
142800
130900
107100


कोलकाता
142800
130900
107100


चेन्नई
143460
131500
109700


पटना
142850
130950
107150


लखनऊ
142950
131050
107250


मेरठ
142950
131050
107250


अयोध्या
142950
131050
107250


कानपुर
142950
131050
107250


गाजियाबाद
142950
131050
107250


नोएडा
142950
131050
107250


गुरुग्राम
142950
131050
107250


चंडीगढ़
142950
131050
107250


जयपुर
142950
131050
107250


लुधियाना
142950
131150
107250


गुवाहाटी
142800
130900
107100


इंदौर
142850
131050
107150


अहमदाबाद
142850
₹130950
107150


वडोदरा
142850
130950
107150


सूरत
142850
130950
107150


पुणे
142800
130900
107100


नागपुर
142800
130900
107100


नासिक
142830
130930
107130


बैंगलोर
142800
130900
107100


भुवनेश्वर
142800
130900
107100


रायपुर
142800
130900
107100


हैदराबाद
142800
130900
107100



गाड़ी में तेल भरवाने से पहले जान लें 15 जुलाई के नए रेट, आपके शहर में आज कितने का है पेट्रोल- डीजल?
शहर अनुसार चांदी का भाव-&amp;nbsp;



शहर
1 किलो चांदी का भाव


दिल्ली
2,35,000


मुंबई
2,35,000


कोलकाता
2,35,000


चेन्नई
2,40,000


पटना
2,35,000


लखनऊ
2,35,000


मेरठ
2,35,000


अयोध्या
2,35,000


कानपुर
2,35,000


गाजियाबाद
2,35,000


नोएडा
2,35,000


गुरुग्राम
2,35,000


जयपुर
2,35,000


लुधियाना
2,35,000


गुवाहाटी
2,35,000


इंदौर
2,35,000


अहमदाबाद
2,35,000


वडोदरा
2,35,000


सूरत
2,35,000


पुणे
2,35,000


नागपुर
2,35,000


चंडीगढ़
2,35,000


नासिक
2,35,000


बैंगलोर
2,35,000


भुवनेश्वर
2,40,000


रायपुर
2,35,000


हैदराबाद
2,40,000



सोना खरीदते समय रखें इन बातों का खास ख्याल-&amp;nbsp;&amp;nbsp;
सोना हमेशा हॉलमार्क का ही लें और इसकी शुद्धता भी चेक करें. देखें कि सोना कितने कैरेट का है. साथ ही सोने पर 6 अंको का HUID नंबर होता है, वो चेक करें. सोना लेने से पहले मेकिंग चार्ज पूछें और लेने के बाद पक्का बिल जरूर लें. सोने की खरीद पर नियमानुसार 3% का जीएसटी (GST) अलग से लगाया जाता है, जिसे आपके बिल में जोड़ा जाएगा, तो इसके बारे में भी पूछ लें.
क्या आपके पास है यह शेयर जिस पर विजय केडिया ने लगाया बड़ा दांव? खरीद डाले पूरे 83930 शेयर ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Price, Today:, सुबह-, सुबह, सस्ता, हुआ, सोना, चांदी, स्थिर, जानें, अपने, शहर, में, कितना, है, 18K, 22K, 24K, सोने, का, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>37700 करोड़ के IPO से पहले Jio ने लिया बड़ा फैसला, जानें कंपनी ने एकाएक उठाया कौन सा कदम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/37700-करोड़-के-ipo-से-पहले-jio-ने-लिया-बड़ा-फैसला-जानें-कंपनी-ने-एकाएक-उठाया-कौन-सा-कदम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/37700-करोड़-के-ipo-से-पहले-jio-ने-लिया-बड़ा-फैसला-जानें-कंपनी-ने-एकाएक-उठाया-कौन-सा-कदम</guid>
        <description><![CDATA[ Jio IPO: अगर आप भी उनमें से हैं, जिन्हें मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ के आने का बेसब्री से इंतजार है, तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, कंपनी ने अपनी टॉप लीडरशिप में बड़ा बदलाव किया है.
कंपनी ने किरण थॉमस (Kiran Thomas) की जगह पंकज पवार (Pankaj Mohan Pawar) को अपना नया CEO (Chief Executive Officer) चुना है. इस बदलाव की जानकारी IPO के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट पेपर्स में दी गई है. इसके मुताबिक, पूर्व सीईओ किरण थॉमस ने 23 मार्च को CEO के अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके अगले ही दिन 24 &amp;nbsp;मार्च को पंकज पवार ने बतौर हट गए और पवार ने इसके अगले ही दिन 24 मार्च से बतौर सीईओ कमान संभाल ली थी.&amp;nbsp;
कौन है नए सीईओ पंकज पवार?
53 साल के पंकज पवार साल 2000 से रिलायंस ग्रुप से जुड़े हुए हैं. उन्हें कन्ज्यूमर और डिजिटल बिजनेस का करीब 30 साल का लंबा अनुभव है. इससे पहले वह जियो की टेलीकॉम यूनिट Reliance Jio Infocomm के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं.
कब आ रहा जियो का आईपीओ?
जियो का आईपीओ अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच बाजार में लॉन्च हो सकता है. कंपनी ने बीते 19 जून को सेबी के पास अपना DRHP जमा करा दिया है.कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब चार अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की तैयारी में है. इस आईपीओ के लिए जियो की वैल्यूएशन करीब 137 बिलियन डॉलर (लगभग 11.5 लाख करोड़) आंकी जा रही है. आईपीओ में कोई &#039;ऑफर फॉर सेल&#039; (OFS) नहीं होगा. यानी कि जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने बिजनेस ग्रोथ, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने और पुराने कर्ज चुकाने के लिए करेगी.

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        <enclosure url="http://hindi.attentionindia.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a5713e270310.jpg" length="77814" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>37700, करोड़, के, IPO, से, पहले, Jio, ने, लिया, बड़ा, फैसला, जानें, कंपनी, ने, एकाएक, उठाया, कौन, सा, कदम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price: होर्मुज संकट से टेंशन में सरकार, पेट्रोल&amp;डीजल होगा महंगा या टैक्स घटाएगी सरकार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-होर्मुज-संकट-से-टेंशन-में-सरकार-पेट्रोल-डीजल-होगा-महंगा-या-टैक्स-घटाएगी-सरकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-होर्मुज-संकट-से-टेंशन-में-सरकार-पेट्रोल-डीजल-होगा-महंगा-या-टैक्स-घटाएगी-सरकार</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol Diesel News: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध एक बार फिर से शुरू हो गया है. जिसके कारण एक बार फिर से लोगों के मन में डर बैठ गया है कि क्या दोबारा महंगाई बढ़ेगी? होर्मुज पर एक बार फिर से युद्ध के कारण संकट की स्थिति है जिसकी वजह से लग रहा है कि अब दोबारा पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ेंगी. हालांकि फिलहाल सरकार की तरफ से ऐसा कुछ कहा नहीं गया है. लेकिन फिर भी एक बार समझते हैं कि सरकार ऐसी संकट की स्थिति में क्या कर सकती है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतेंमार्च और अप्रैल के महीने में कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी हुई थी. जिसकी वजह से मई में सरकार को पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा करना पड़ा था. जिससे आम जनता काफी परेशान हुई थी. तो वहीं अब एक बार फिर से स्थिति वैसी ही है. क्योंकि ईरान- अमेरिका का युद्ध शुरू हो गया है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से बढ़ गई हैं. आज यानी मंगलवार को ब्रेंट क्रूड ऑइल की कीमत करीब 86 रुपये डॉलर प्रति बैरेल हो गई है.
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सरकार के पास हैं दो रास्तेसरकार के पास फिलहाल की स्थिति में दो रास्ते हैं या तो वो पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाकर जनता पर इसका सारा बोझ डाल दे, या फिर टैक्स घटाकर सारा बोझ खुद के ऊपर ले ले. हालांकि फिलहाल सरकार ने ऐसी कोई बात नहीं की है लेकिन फिर भी जनता के मन में लगातार कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से अच्छा- खासा तनाव है.
तेल कंपनियों पर भी है दबावजनता से भी ज्यादा दबाव में इस समय यदि कोई है तो वो हैं तेल कंपनियां, क्योंकि तेल महंगा होने का सबसे बड़ा असर सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ता है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) - भारत पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसे सरकारी कंपनियां कई बार राजनीतिक और सामाजिक कारणों से तुरंत कीमतें नहीं बढ़ा पाते. जिसका दबाव उनके ऊपर पड़ता है और कंपनियां घाटे में जाती हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक इन कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी. इसका मतलब है कि कंपनियां लंबे समय तक लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचती रहीं. अब अगर एक बार फिर से वैसी ही स्थिति बनती है तो दोबारा तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा.
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मई में बढ़ी थीं कीमतेंईरान- यूएस के बीच का युद्ध फरवी से चल रहा था, लेकिन सरकार ने अप्रैल तक टैक्स कम किया और लोगों के ऊपर कीमतें बढ़ने का दबाव नहीं आने दिया. लेकिन जब सरकार और तेल कंपनियों पर ज्यादा दबाव बढ़ा तब सरकार ने पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया. मई के महीने में 4 बार पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ. यदि एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतें 100 रुपये डॉलर प्रति बैरल के पार होती हैं तो एर बार फिर से सरकारी और तेल कंपनियां दबाव में आ जाएंगी. तब सरकार के पास यही दो विकल्प रह जाएंगे. अब देखना होगा कि सरकार पहले ही जनता पर बोझ डालती है या कुछ समय स्थित को संभालती है.
 ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 22:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, होर्मुज, संकट, से, टेंशन, में, सरकार, पेट्रोल-डीजल, होगा, महंगा, या, टैक्स, घटाएगी, सरकार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Flight Tickets: 4999 का फ्लाइट टिकट 9000 में कैसे बदल जाता है? कम किराया दिखाकर कैसे जेब काटती हैं एयरलाइंस? समझें पूरा खेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/flight-tickets-4999-का-फ्लाइट-टिकट-9000-में-कैसे-बदल-जाता-है-कम-किराया-दिखाकर-कैसे-जेब-काटती-हैं-एयरलाइंस-समझें-पूरा-खेल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/flight-tickets-4999-का-फ्लाइट-टिकट-9000-में-कैसे-बदल-जाता-है-कम-किराया-दिखाकर-कैसे-जेब-काटती-हैं-एयरलाइंस-समझें-पूरा-खेल</guid>
        <description><![CDATA[ Flight Ticket Booking: फ्लाइट का टिकट बुक करते वक्त आपने भी यह महसूस किया होगा. सर्च करते समय किराया 4999 रुपए दिखता है, लेकिन पेमेंट करते-करते बिल 8 से 9 हजार पहुंच जाता है.&amp;nbsp;सीट चुनने के पैसे, बैग के पैसे, खाने के पैसे और आखिर में कन्वीनियंस फीस अलग से. यह कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि एयरलाइंस और बुकिंग प्लेटफॉर्म्स का सोचा-समझा बिजनेस मॉडल है.&amp;nbsp;
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते के अंदर नए एविएशन नियम पेश करने का निर्देश दिया है. भले ही ये नियम अभी संसद में रखे गए हों या नहीं.&amp;nbsp;
सबसे पहले समझिए सस्ते टिकट का झांसा क्या है?
एयरलाइंस की कमाई का गणित अब सिर्फ टिकट से नहीं चलता. एयरलाइंस अपनी फ्लाइट की कुछ सीटें औसत लागत से भी कम दाम पर बेचती हैं, ताकि कम पैसे देने वाले ग्राहक आकर्षित हों.&amp;nbsp;यही सस्ता किराया विज्ञापनों में दिखाया जाता है. असली कमाई बाद में होती है, जिसे इंडस्ट्री की भाषा में एंसिलरी रेवेन्यू कहते हैं.
दुनियाभर में एयरलाइंस की कुल कमाई का करीब 14 से 16 फीसदी हिस्सा अब इन्हीं अतिरिक्त चार्ज से आता है. यानी बैग, सीट, खाना, प्रायोरिटी बोर्डिंग, सब कुछ अलग से बिकता है.
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बुकिंग से बोर्डिंग तक कहां-कहां कटती है जेब?
पहला पड़ाव है सर्च और बुकिंग&amp;nbsp;
यहां आपको बेस फेयर दिखाया जाता है. पेमेंट पेज तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, फ्यूल चार्ज और एयरपोर्ट फीस जुड़ती जाती है. फिर ट्रैवल पोर्टल्स की कन्वीनियंस फीस अलग से लगती है जो ज्यादातर बड़े प्लेटफॉर्म्स पर प्रति यात्री करीब 149 से 499 रुपए तक होती है. यह पैसा एयरलाइन को नहीं बल्कि बुकिंग पोर्टल को जाता है.
दूसरा पड़ाव है सीट सिलेक्शन
विंडो या पसंदीदा सीट चुनने के लिए आमतौर पर 300 से 800 रुपए प्रति फ्लाइट देने पड़ते हैं और एक्स्ट्रा लेगरूम वाली सीटों के दाम इससे कहीं ज्यादा होते हैं. परिवार साथ बैठना चाहे तो अक्सर हर सदस्य के लिए अलग पेमेंट करनी पड़ती है.
तीसरा पड़ाव है बैगेज
यह इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा विवाद है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि सभी निजी एयरलाइंस ने बिना किसी ठोस वजह के इकोनॉमी क्लास यात्रियों का फ्री चेक-इन बैगेज 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया यानी जो सुविधा पहले टिकट में शामिल थी, उसे कमाई का नया जरिया बना दिया गया. तय सीमा से ज्यादा वजन होने पर घरेलू उड़ानों में 400 से 750 रुपए प्रति किलो तक वसूले जाते हैं
चौथा पड़ाव है कैंसिलेशन और बदलाव
टिकट कैंसिल करने पर आमतौर पर 2500 से 3500 रुपए तक की फीस कट जाती है, जो कई बार सस्ते टिकट की पूरी कीमत के बराबर होती है.
डार्क पैटर्न यानी स्क्रीन पर छिपा जाल
सरकार खुद मानती है कि बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर यात्रियों को भ्रमित करने वाले तरीके इस्तेमाल होते हैं. उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण CCPA ने नवंबर 2023 में 13 तरह के डार्क पैटर्न पर रोक लगाई थी, जिनमें फॉल्स अर्जेंसी, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, ड्रिप प्राइसिंग जैसे तरीके शामिल हैं.
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आसान भाषा में समझें तो फॉल्स अर्जेंसी का मतलब है स्क्रीन पर बार-बार &#039;सिर्फ 2 सीटें बचीं&#039; जैसा दबाव दिखाना.&amp;nbsp;बास्केट स्नीकिंग का मतलब है आपकी मर्जी के बिना इंश्योरेंस या मील जैसी चीज कार्ट में जोड़ देना और ड्रिप प्राइसिंग का मतलब है असली कीमत आखिरी पेमेंट स्टेप पर जाकर खोलना.
यह समस्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा एक सर्वे से लगता है. LocalCircles के सर्वे में 62 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें फ्लाइट बुकिंग में ऐसे हिडन चार्ज का सामना बार-बार करना पड़ा जो पहले से नहीं बताए गए थे, जबकि 40 फीसदी ने कहा कि उनकी सहमति के बिना कोई सर्विस उनके कार्ट में जोड़ दी गई.
दिसंबर 2025 में इंडिगो के बड़े संकट के दौरान जब हफ्तेभर में 5000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं, तब ऐसी शिकायतें और बढ़ गईं. एयरलाइन ने फ्री कैंसिलेशन और पूरे रिफंड का वादा किया था, लेकिन कई यात्रियों ने बताया कि ऐप पर कैंसिल का विकल्प ही काम नहीं कर रहा था और सिर्फ तारीख बदलने का ऑप्शन दिख रहा था.
डायनेमिक प्राइसिंग, यानी एक ही सीट के कई दाम
अब सवाल यह कि आखिर किराया घटता-बढ़ता कैसे है. दरअसल 1994 में एयर कॉरपोरेशन एक्ट खत्म होने के बाद से भारत में हवाई किराया पूरी तरह बाजार तय करता है. सरकार किराया न तय करती है और न नियंत्रित करती है. एयरलाइंस कई प्राइस लेवल यानी बकेट्स में टिकट बेचती हैं जिन्हें RBD कहा जाता है.
सबसे सस्ती बकेट पहले बिकती है और जैसे-जैसे सीटें भरती हैं, दाम अगली महंगी बकेट में चला जाता है. यही वजह है कि त्योहार या लंबे वीकेंड पर किराया कई गुना हो जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने खुद इसका उदाहरण दिया. बेंच ने कहा कि एक ही दिन, एक ही रूट पर एक एयरलाइन इकोनॉमी का 8000 रुपए ले रही है तो दूसरी 18000 रुपए.
सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ, पूरी टाइमलाइन
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका से शुरू हुआ. नवंबर में कोर्ट ने केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था. याचिका में एक ऐसे मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर की मांग की गई है, जो किराए में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे. कोर्ट किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी को &#039;शोषण&#039; तक कह चुका है.
याचिका का सबसे तीखा तर्क यह है कि फिलहाल किसी भी अथॉरिटी के पास किराए या अतिरिक्त फीस की समीक्षा करने या उन पर सीमा लगाने की ताकत नहीं है, जिससे एयरलाइंस हिडन चार्ज और अनिश्चित प्राइसिंग के जरिए उपभोक्ताओं का शोषण कर पाती हैं.
अब जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र से पूछा कि नए एविएशन नियम अधिसूचित करने में देरी क्यों हो रही है. केंद्र की ओर से बताया गया कि भारतीय व ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Flight, Tickets:, 4999, का, फ्लाइट, टिकट, 9000, में, कैसे, बदल, जाता, है, कम, किराया, दिखाकर, कैसे, जेब, काटती, हैं, एयरलाइंस, समझें, पूरा, खेल</media:keywords>
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        <title>LPG News: बचाकर चलो गैस, होर्मुज से 90% एलपीजी सप्लाई पर मंडराया खतरा, कंपनियों ने झेला 700 रुपए का नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ LPG News: पिछली बार यानी फरवरी में जब यूएस और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ था, तब तेल और गैस की किल्लत से भारत भी परेशान था. जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम लगा तो जनता ने और सरकार ने थोड़ी राहत की सांस ली थी. लेकिन अब जब एक बार फिर दोनों देशों के बीच ये युद्ध शुरू हो गया है तो एक बार फिर स्थिति जस की तस हो गई है. ऐसे हालातों में रसोई गैस को सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है, आइये जानते हैं क्यों?
LPG को लेकर स्थिति हुई गंभीरदरअसर भारत अपनी जरूरत की LPG का अधिकतम हिस्सा बाहर से आयात करता है, जिसमें से भी 90 प्रतिशत LPG &amp;nbsp;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए भारत आती है. ऐसे में सबसे बड़ा खतरा गैस की किल्लतों को लेकर ही है. मार्च, अप्रैल और मई के महीने में भारत ने गैस की खूब किल्लत देखी, लोगों को एक- एक महीना सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ा, तो वहीं लंबी लाइनों में भी लगना पड़ा. ऐसे अगर युद्ध के कारण दोबारा समुद्री रास्ता बाधित हुआ तो घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इतना ही नहीं कीमतों में भी इजाफा हो सकता है.
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सरकारी तेल कंपनियों ने उठाया नुकसानजैसे पेट्रोल डीजल की कीमतें ना बढ़ा पाने के कारण तेल कंपनियों ने नुकसान झेला है, वैसे ही गैस की वजह से भी तेल कंपनियों ने काफी नुकसान झेला है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियां हर घरेलू LPG सिलेंडर पर 500 से 700 रुपये तक का नुकसान उठा रही थीं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें फिर बढ़ती हैं तो सरकार के सामने दो ही ऑप्शन होंगे या तो सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर सिलेंडर महंगा किया जाए.
रणनीतिक भंडार की है जरूरतदेश को इस संकट की स्थिति से बचने के लिए रणनीति बनाकर चलने की जरूरत है. केवल रोजाना तेल खरीदाकर इस्तेमाल करने से बेहतर होगा कि देश में इसका भंडार रखा जाए. फिलहाल भारत के पास 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जो सिर्फ 9.5 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है. जबकि IEA करीब 90 दिन का रणनीतिक भंडार रखने की सलाह देता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Share vs Bond: अपना ज्ञान बढ़ाएं, शेयर और बॉन्ड में क्या अंतर होता है, कहां मिलता है ज्यादा फायदा? आसान भाषा में समझें</title>
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        <description><![CDATA[ Share vs Bond: आजकल हर व्यक्ति बचत को सही जगह निवेश करने पर ज्यादा जोर दे रहा है. इसके लिए लोग ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं, जहां से उन्हें अच्छा-खासा रिटर्न मिल सके. मौजूदा समय में निवेश के कई सारे विकल्प मौजूद हैं. इनमें शेयर और बॉन्ड भी लोगों के बीच चर्चा में रहते हैं. लेकिन कई लोग इन दोनों को एक जैसा समझने की गलती कर देते हैं. जबकि, दोनों का जोखिम और कमाई का तरीका बिल्कुल अलग होता है. इसलिए बेहतर यही है कि निवेश करने से पहले इन दोनों के बीच के अंतर के बारे में समझ लेना चाहिए.&amp;nbsp;
क्या होता है शेयर?
अगर आसान शब्दों में समझें तो जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं तो आप उस कंपनी में हिस्सेदार बन जाते हैं. इसका मतलब यह है कि अगर कंपनी को फायदा होगा तो आपको भी फायदा होगा, लेकिन उसके नुकसान का असर भी आपके निवेश पर पड़ सकता है. अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो शेयर की कीमत बढ़ सकती है, जिसकी वजह से आपको अच्छा रिटर्न भी मिल सकता है. लेकिन वहीं कंपनी का प्रदर्शन खराब रहता है तो निवेश की गई वैल्यू पर भी असर पड़ेगा. यानी उसकी वैल्यू घट सकती है.
बचाकर चलो गैस, होर्मुज से 90% एलपीजी सप्लाई पर मंडराया खतरा, कंपनियों ने झेला 700 रुपए का नुकसान
क्या होता है बॉन्ड?
अब बात करते हैं बॉन्ड की. इसमें निवेश करने का मतलब कि आप किसी कंपनी या सरकार को तय समय के लिए पैसा उधार दे रहे हैं. जब आप पैसे उधार देते हो तो इसके बदले में आपको तय ब्याज मिलता है और समय पूरा होने पर आपका पूरा पैसा भी वापस कर दिया जाता है. इसमें निवेशक कंपनी का मालिक नहीं बनता, वह सिर्फ उधार देने वाला होता है.&amp;nbsp;
दोनों के अंतर को समझें

जब आप शेयर खरीदते हैं तो आप कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं, जबकि बॉन्ड खरीदने पर आप सिर्फ कंपनी या सरकार को लोन देने वाले होते हैं.
शेयर में निवेशक की कमाई कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करती है और शेयर की कीमत पर भी निर्भर करती है, जबकि बॉन्ड में आपको लोन देने के बाद तय ब्याज मिलता है.
जोखिम की बात करें तो शेयर में ज्यादा होता है, क्योंकि अगर कंपनी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता है तो उसका असर निवेश पर पड़ेगा.
आमतौर पर देखा जाए तो बॉन्ड को सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें पहले से ही ब्याज तय रहता है.
हालांकि, शेयर से मिलने वाला मुनाफा सीमित नहीं होता है, वहीं बॉन्ड में रिटर्न पहले से ही तय रहता है.&amp;nbsp;

कहां मिलेगा ज्यादा फायदा?

अगर आप ज्यादा जोखिम उठाकर ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आपके लिए शेयर एक बेहतर ऑप्शन है.
वहीं अगर आप एक तय रिटर्न और सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं तो बॉन्ड एक अच्छा विकल्प है.

होर्मुज संकट से टेंशन में सरकार, पेट्रोल-डीजल होगा महंगा या टैक्स घटाएगी सरकार?
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Bond:, अपना, ज्ञान, बढ़ाएं, शेयर, और, बॉन्ड, में, क्या, अंतर, होता, है, कहां, मिलता, है, ज्यादा, फायदा, आसान, भाषा, में, समझें</media:keywords>
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        <title>RBI आपके फोन में डालेगा नकद पैसा, जानें क्या है रिजर्व बैंक का नया डिजिटल करेंसी सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ RBI News: सरकार लगातार जनता से डिजिटल होने की अपील कर रही है. लेकिन वहीं दूसरी तरफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI सीधे ग्राहकों के फोन में नकद डालने की बात कर रहा है. रिजर्व बैंक की ये बात सुनकर हर कोई हैरानी में है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? इस बारे में RBI की तरफ से खुद अपने ग्राहकों को बताया जा रहा है. बताते हैं कैसे.
RBI का मैसेजदरअसल RBI की तरफ से लोगों के फोन में एक मैसेज जा रहा है. जिसके जरिए बताया जा रहा है कि वो जल्दी ही लोगों के फोन में सीधे नकदी भेजने वाले हैं. इस मैसेज में लिखा है, &#039;क्या हो यदि नकद पैसे आपके फोन में ही आ जाएं? डिजिटल रुपया (eरुपया) के साथ यह संभव है.&#039; इस मैसेज के मुताबिक RBI आपके फोन में डिजिटल रुपया डालने की बात कर रहा है. जिसके जरिए आप आसानी से कहीं भी पेमेंट कर पाएंगे.

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इस मैसेज में आगे लिखा है, &#039;आरबीआई द्वारा जारी की गई डिजिटल करेंसी. छुट्टे पैसों की चिंता नहीं. यूपीआई सहित सभी क्यूआर कोड पर काम करता है. भारत के केंद्रीय बैंक के विश्वास के साथ, अब स्मार्ट तरीके से भुगतान करें. आरबीआई कहता है डिजिटल रुपया: नकद, लेकिन डिजिटल.&#039; इस मैसेज के मुताबिक RBI अब &amp;nbsp;यूपीआई नहीं बल्कि डिजिटल करेंसी अपनाने पर जोर दे रहा है.
क्या है डिजिटल करेंसी?डिजिटल करेंसी एक तरह से नकदी ही है लेकिन डिजिटल फॉर्म में. ये रुपये पैसे का एक इलैक्ट्रॉनिक रूप है, जिसे छू नहीं सकती लेकिन इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल मोबाइल, कंप्यूटर या डिजिटल वॉलेट के रूप में किया जा सकता है. इससे ऑनलाइन भुगतान, पैसे भेजना, खरीदारी करना ये सब काम किया जा सकता है.
RBI अब नकदी की जगह पर इसी डिजिटल करेंसी को बढ़ावा दे रहा है. जिससे लोग नकदी का इस्तेमाल कम से कम करें और डिजिटली सारा काम करें.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 06:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Inflation News: AC से लेकर कार, आलू से लेकर LPG तक, सस्ता हो गया ये सामान, जानिए महंगा क्या&amp;क्या हुआ?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/inflation-news-ac-से-लेकर-कार-आलू-से-लेकर-lpg-तक-सस्ता-हो-गया-ये-सामान-जानिए-महंगा-क्या-क्या-हुआ</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/inflation-news-ac-से-लेकर-कार-आलू-से-लेकर-lpg-तक-सस्ता-हो-गया-ये-सामान-जानिए-महंगा-क्या-क्या-हुआ</guid>
        <description><![CDATA[ Inflation News: ईरान और यूएस के बीच फरवरी से युद्ध चल रहा था, जिस पर जून में कुछ दिन का ब्रेक लगा लेकिन अब एक बार फिर से दोनों देशों के बीच घमासान शुरू हो गया. जिसकी वजह से देशभर में मार्च के बाद से ही महंगाई पैर पसारने लगी थी. खासतौर से मई के महीने में तो महंगाई बहुत तेजी से बढ़ी जिसका असर जनता की जेब पर भी पड़ा था. वहीं हाल ही में जून के महीने की महंगाई दर सामने आई है, जिसने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है.
जून में बढ़ी महंगाईमई के मुकाबले जून में महंगाई काफी बढ़ी है. CPI की हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक जून में रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर 4.38% हो गई है. जो मई के महीने में 3.93% थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक खाने- पीने की चीजों पर महंगाई जून में 5.32% रही, जबकि मई में ये 4.78% थी. तो आइये बताते हैं क्या महंगा हुआ है और क्या सस्ता.
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इन चीजों के बढ़े दामजून के महीने में महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण मई में पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा रहा है. जिसके कारण ट्रांसपोर्टेशन क खर्च भी बढ़ा है. इसकी वजह से इन चीजों के दाम बढ़े हैं:



सामान
मई की महंगाई दर (प्रतिशत में)
जून की महंगाई दर (प्रतिशत में)


चांदी की ज्वेलरी&amp;nbsp;
155.25%
133.21%


अदरक&amp;nbsp;
32.50%
50.41%


टमाटर&amp;nbsp;
48.43%
31.92%


गोल्ड एंड डायमंड ज्वेलरी
40.91
36.82%



इन चीजों के दाम हुए कमहालांकि केवल चीजों के दाम बढ़े ही नहीं हैं बल्कि कई रोजमर्रा की चीजों के दाम घटे भी हैं जिसमें सब्जियां और फल भी शामिल हैं. इन चीजों की लिस्ट इस प्रकार है:



सामान
मई की महंगाई दर (प्रतिशत में)
जून की महंगाई दर (प्रतिशत में)


आलू&amp;nbsp;
-23.71
-20.34%


मटर&amp;nbsp;
-11.47
-9.67%


मोटर कार/जीप&amp;nbsp;
-7.19
-6.89%


जीरा&amp;nbsp;
-4.59
-3.75%



बता दें कि मई के मुकाबले जून के महीने में महंगाई की दर इस वजह से बढ़ी है क्योंकि सरकार ने मई में ही पेट्रोल- डीजल गैस सभी के दाम बढ़ाए थे. जिसका असर रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर पड़ा था. दूध से लेकर ट्रांसपोर्ट तक हर चीज महंगी होना शुरू हो गई थी. अब जुलाई की रिपोर्ट में क्या सामने आता है ये भी देखना दिलचस्प होगा.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 06:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Inflation, News:, से, लेकर, कार, आलू, से, लेकर, LPG, तक, सस्ता, हो, गया, ये, सामान, जानिए, महंगा, क्या-क्या, हुआ</media:keywords>
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        <title>Loan EMI: लोन की ईएमआई न भरने पर बैंक ब्लॉक कर देगा आपका सिम? 90 दिनों का यह नियम जानना है जरूरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/loan-emi-लोन-की-ईएमआई-न-भरने-पर-बैंक-ब्लॉक-कर-देगा-आपका-सिम-90-दिनों-का-यह-नियम-जानना-है-जरूरी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/loan-emi-लोन-की-ईएमआई-न-भरने-पर-बैंक-ब्लॉक-कर-देगा-आपका-सिम-90-दिनों-का-यह-नियम-जानना-है-जरूरी</guid>
        <description><![CDATA[ Bank Loan EMI: अगर आपने बैंक या किसी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी से लोन लिया है और किसी वजह से आप समय पर उसकी ईएमआई नहीं भर पाए हैं तो क्या बैंक आपका मोबाइल सिम ब्लॉक करा सकता है? जानिए इसकी सच्चाई क्या है और आपको क्या जानना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
अगर कोई व्यक्ति ईएमआई नहीं भरता तो बैंक चुकाई गई रकम की वसूली के लिए कानूनी तरीका अपना सकता है, लेकिन मोबाइल नंबर बंद करवाना उसके अधिकार में नहीं आता.
क्या कभी फोन की सुविधाएं सीमित की जा सकती हैं?
अगर आप समय पर ईएमआई नहीं भर पाते हैं तो बैंक आपका मोबाइल नंबर या सिम बंद नहीं कर सकता, लेकिन इसके कुछ दूसरे नुकसान जरूर हो सकते हैं.

सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है. इसका मतलब है कि आगे चलकर बैंक से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड लेना मुश्किल हो सकता है.
ईएमआई देर से भरने पर बैंक जुर्माना पेनल्टी लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज भी ले सकता है. इससे आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं.
अगर कई महीनों तक ईएमआई नहीं भरी जाती तो बैंक नियमों के मुताबिक कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है.
अगर आपने घर, गाड़ी या किसी दूसरी चीज को गिरवी रखकर लोन लिया है, तो बैंक उस पर भी कार्रवाई कर सकता है.

जितनी चलेगी कार, उतना ही लेना होगा इंश्योरेंस, क्या है Pay-As-You-Drive, जिससे होगी बंपर बचत?
क्या फोन की सुविधाएं बंद हो सकती हैं?
ऐसा सिर्फ तब हो सकता है, जब आपने मोबाइल फोन ही ईएमआई पर खरीदा हो. RBI के नियमों के मुताबिक, बैंक तुरंत कोई कार्रवाई नहीं कर सकता. पहले कम से कम 90 दिन तक ईएमआई नहीं भरने और पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही फोन की कुछ सुविधाओं पर रोक लगाई जा सकती है. लेकिन कॉल, इंटरनेट और इमरजेंसी (SOS) जैसी जरूरी सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की जा सकतीं.
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी कारण से ईएमआई भरने में दिक्कत आ रही है तो बैंक से बात छिपाने के बजाय तुरंत संपर्क करना बेहतर होता है. कई बैंक जरूरत पड़ने पर लोन री-स्ट्रक्चरिंग, ईएमआई में बदलाव या भुगतान के लिए अतिरिक्त समय जैसी सुविधाएं भी देते हैं. समय रहते बातचीत करने से मामला बिगड़ने और कानूनी विवाद की नौबत आने से बचा जा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 06:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Loan, EMI:, लोन, की, ईएमआई, न, भरने, पर, बैंक, ब्लॉक, कर, देगा, आपका, सिम, दिनों, का, यह, नियम, जानना, है, जरूरी</media:keywords>
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        <title>ITR Filing: आईटीआर में गड़बड़ी की तो लगेगा 25000 का फटका, देरी होने पर देने होंगे 5000, समझें नियम</title>
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        <description><![CDATA[ ITR Filing: अगर आप वेतनभोगी कर्मचारी हैं तो आपको ये बात पता ही होगी कि 31 जुलाई ITR फाइल करने की आखिरी तारीख है. इससे पहले सभी कर्मचारियों के लिए ITR भरना बेहद जरूरी है. लेकिन सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न भर देना ही काफी नहीं है. अगर आप समय पर ITR दाखिल नहीं करते, अपनी इनकम की गलत जानकारी देते हैं या टैक्स नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो आपको जुर्माना, ब्याज और लेट फीस देनी पड़ सकती है.
गलती पड़ सकती है भारीITR भरते वक्त आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इसे भरते समय आपको किसी भी तरह की गलती करने से बचना चाहिए. क्योंकि यदि कोई व्यक्ति अपनी आय कम दिखाता है, तो धारा 270A के तहत उस पर कम दिखाई गई आय पर बनने वाले टैक्स का 50% जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, अगर जानबूझकर गलत जानकारी दी गई हो, गलत डिडक्शन का दावा किया गया हो या कुछ फैक्ट्स छुपाए गए हों, तो लंबा- चौड़ा जुर्माना देना पड़ सकता है. ये जुर्माना टैक्स का 200% तक हो सकता है.
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देरी पर लगेगा जुर्मानाITR भरने की एक तय समय सीमा होती है, अगर आप तय समय के बाद ITR भरते हैं, तो आयकर कानून की धारा 234F के तहत 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है. हालांकि, अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये से कम है, तो ये फीस अधिकतम 1,000 रुपये होगी.
इन गलतियों को भी करने से बचेंकेवल एक गलती ही नहीं बल्कि और भी कई सारी गलतियां हैं जिन पर ध्यान नहीं देने से आपके ऊपर जुर्माना लग सकता है. जैसे TDS/TCS रिटर्न देर से जमा करने पर 200 रुपये प्रतिदिन की फीस देनी पड़ सकती है. जिन कारोबारियों या पेशेवरों को हिसाब-किताब की किताबें रखना जरूरी है, लेकिन वो ऐसा नहीं करते, उन पर 25,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है. जिन लोगों के लिए टैक्स ऑडिट जरूरी है और वो ऑडिट नहीं कराते, उन पर टर्नओवर का 0.5% (अधिकतम 1.5 लाख रुपये) तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
अगर आप इस जुर्माने से बचना चाहते हैं तो समय पर ITR फाइल करें, अपनी सभी आय की सही जानकारी दें, टैक्स समय पर जमा करें और जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड सही रखें. इससे नोटिस, एक्स्ट्रा खर्च और टैक्स विभाग से विवाद से बचा जा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Penalty on Builder: फ्लैट बेच दिया, 10 साल तक नहीं लगाई लिफ्ट, कोर्ट ने बिल्डर पर ठोका इतने लाख का जुर्माना</title>
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        <description><![CDATA[ Penalty on Builder: एक बिल्डर को अपने वादे की खिलाफत करना इतना भारी पड़ गया कि उसके ऊपर साढ़े सात लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है. ये मामला दिल्ली का है जहां पर दो बिल्डरों ने खरीदारों को फ्लैट बेचते समय वादा किया था कि वो बिल्डिंग में लिफ्ट लगवाकर देगा. लेकिन 10 साल बीत जाने पर भी ऐसा नहीं हुआ, जिससे नाराज होकर लोगों ने कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कर दी.
क्या है पूरा मामला?दरअसल दो फ्लैट मालिकों ने आयोग में शिकायत की थी कि उन्होंने साल 2013 और साल 2014 में फ्लैट खरीदे थे. उस समय बिल्डरों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि रजिस्ट्री के एक महीने के अंदर लिफ्ट लगा दी जाएगी. फ्लैट की कीमत में लिफ्ट का खर्च भी शामिल था, लेकिन कई साल बाद भी ये वादा पूरा नहीं हुआ. जिससे नाराज फ्लैट मालिकों ने बिल्डर की शिकायत कर दी.
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कानूनी नोटिस भेजाइस मामले के करीब चार साल तक इंतजार करने के बाद फ्लैट मालिकों ने साल 2018 में कानूनी नोटिस भेजा. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच 19 अगस्त 2018 को समझौता हुआ. समझौते के अनुसार, बिल्डरों को 31 मार्च 2019 तक लिफ्ट लगानी थी. अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें फ्लैट मालिकों को 6 लाख रुपये देने थे.
आयोग का फैसलाफ्लैट मालिकों की शिकायत के बाद आयोग ने पाया कि बिल्डरों ने न तो तय समय तक लिफ्ट लगाई और न ही 6 लाख रुपये का भुगतान किया. दस्तावेजों में भी साफ लिखा था कि खरीदारों को इमारत की लिफ्ट और अन्य शेयर की गई सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अधिकार होगा. इसलिए लिफ्ट देना बिल्डरों की जिम्मेदारी थी. आयोग ने बिल्डरों को फ्लैट मालिकों को 6 लाख रुपये, मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 50,000 रुपये देने का आदेश दिया.
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इतना ही नहीं आयोग ने ये भी कहा कि बिल्डर खरीदारों से किए गए वादों और तय सुविधाओं को समय पर उपलब्ध कराने के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें मुआवजा देना पड़ सकता है.
क्या कर सकते हैं उपभोक्ता?यदि आपके साथ या आपके किसी करीबी के साथ ऐसा कुछ होता है तो आप कानून की मदद ले सकते हैं. कोर्ट आपकी ऐसे मामलों में सहायता करेगा और आपको हर्जाना भी दिलवाएगा.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 06:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>82 साल बुजुर्ग के पेंशन अकाउंट में आए 759 करोड़ रुपये, फिर आगे क्या हुआ? बिहार का है मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Bihar Account Error News:&amp;nbsp;बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पेंशन निकालने गए 82 साल के बुज़ुर्ग अपने बैंक अकाउंट में लगभग 759 करोड़ रुपये देख हैरान हो गए. यह अजीबोगरीब घटना सकरा प्रखंड के थतिया सिहो गांव के रहने वाले कामेश्वर मिश्रा के साथ हुई है.
पेशे से कवि और सोशल सिक्योरिटी पेंशन स्कीम के लाभार्थी कामेश्वर रविवार को जब पेंशन निकालने एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में गए, तो उन्होंने देखा कि 759,69,51,951 रुपये - यानी लगभग 759 करोड़ रुपये है. मामला तब सामने आया, जब पेंशन की रकम निकालने के बाद उन्होंने बैलेंस चेक करने का सोचा. उस वक्त साथ में उनका दिव्यांग बेटा भी था. हैरानी तब और बढ़ गई, जब बेटे का अकाउंट चेक करने पर उसमें भी इतने ही बड़े अमाउंट का बैलेंस दिखा. दोनों अकाउंट में कुल मिलाकर 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम थी.&amp;nbsp;
बुजुर्ग ने किया यह काम
कामेश्वर मिश्रा ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अकाउंट में अचानक से इतने पैसे कहां से आ गए. सूझबूझ से काम लेते हुए उन्होंने बैंक और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उनसे मामले की जांच करने का आग्रह किया ताकि अगर कोई गलती हुई हो, तो उसे तत्काल प्रभाव से ठीक कर सके. हालांकि, अभी तक किसी अधिकारी ने इस पर स्पष्टीकरण नहीं दिया है. हालांकि, बताया जा रहा है बैंक सर्वर की तकनीकी गड़बड़ी या बैंकिंग सिस्टम की गलती इसकी वजह हो सकती है.&amp;nbsp;
गया जिले में भी यही हुआ
गया जिले के डेल्हा से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां एक ई-रिक्शा शिव कुमार पटेल के खाते में भी ठीक इसी तरह से 759 करोड़ रुपये आ गए थे. वैशाली और समस्तीपुर जिले में भी कुछ पेंशनर्स के अकाउंट में 740 करोड़ रुपये का बैलेंस शो हुआ था.

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Govt Survey on Shopping: आप राशन, गैजेट्स या कपड़ों पर कितना खर्च करते हैं? अब हिसाब रखेगी सरकार, किया ये बड़ा ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/govt-survey-on-shopping-आप-राशन-गैजेट्स-या-कपड़ों-पर-कितना-खर्च-करते-हैं-अब-हिसाब-रखेगी-सरकार-किया-ये-बड़ा-ऐलान</link>
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        <description><![CDATA[ Govt Survey on Shopping: क्या आप नोटिस करते हैं कि हर महीने आपके घर में राशन, कपड़ों, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स या दूसरी जरूरी चीजों पर कितना खर्च हो जाता है? अब सरकार इन सभी खरीदारी का पूरा ट्रेंड समझने की तैयारी में है. इसके लिए देश का पहलारिटेल कंजम्पशन सर्वे होने वाला है. इस सर्वे से पता लगाया जाएगा कि लोग किस सामान पर कितना खर्च कर रहे हैं. ये सर्वे ही बताएगा कि देशभर में खरीदारी का पैटर्न कैसे बदल रहा है.&amp;nbsp;
सरकार का कहना है कि अभी तक घरेलू खर्च से जुड़े जो भी आंकड़े मिलते हैं उसमें पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है और पता नहीं चल पाता है कि कि अलग-अलग तरह की दुकानों पर कौन- कौन सी चीजें बिक रही हैं.
82 साल बुजुर्ग के पेंशन अकाउंट में आए 759 करोड़ रुपये, फिर आगे क्या हुआ? बिहार का है मामला
क्या-क्या पता चलेगा?सर्वे में किराना स्टोर, कपड़ों की दुकान, मेडिकल स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन की दुकान और दूसरे रिटेल आउटलेट्स से बिक्री से जुड़ी जानकारी इकट्टी की जाएगी. इससे ये समझने में मदद मिलेगी कि लोग रोज की जरूरतों, गैजेट्स, कपड़ों और दूसरे सामान पर कितना खर्च कर रहे हैं.
सरकार मांगेगी हिसाब?इस सर्वे से सरकार किसी भी व्यक्ति की पर्सनल खरीदारी या टैक्स की डिटेल लेना नहीं है. इसका पूरा फोकस रिटेल बाजार और लोगों के खर्च को समझना है. यानी सरकार बस यही जानना चाहती है कि देश में किन सामानों की मांग बढ़ रही है, किनकी घट रही है और अब लोगों का खर्च किस दिशा में जा रहा है.
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इससे क्या होगा फायदा?बात करें फायदे कि तो इस सर्वे से सरकार को अर्थव्यवस्था और लोगों की आर्थिक स्थिति समझने में मदद मिलेगी. अगर ये पता चल जाए कि देशभर में लोग किन चीजों पर ज्यादा या कम खर्च कर रहे हैं तो उसी के हिसाब से आर्थिक नीतियां, महंगाई और रिटेल सेक्टर से जुड़े फैसले लेना आसान होगा. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इस सर्वे का सबसे ज्यादा फायदा सिर्फ सरकार को ही नहीं बल्कि कारोबारियों को भी मिलेगा. कंपनियां ये समझ सकेंगी कि मार्केट में किस तरह के प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ रही है.
कब से शुरू होगा सर्वे?फिलहाल तो सरकार इस सर्वे का रोडमैप तैयार कर रही है. सर्वे शुरू होने की तारीख के बारे में ऑफिशियल तौर पर अभी कुछ भी नहीं बोला गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या है Thumpn स्टार्टअप, जिसमें अरिजीत सिंह, बादशाह और सुनिधि ने लगाया पैसा, इससे क्या फायदा होगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-है-thumpn-स्टार्टअप-जिसमें-अरिजीत-सिंह-बादशाह-और-सुनिधि-ने-लगाया-पैसा-इससे-क्या-फायदा-होगा</link>
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        <description><![CDATA[ thumpN Startup: लाइव शोज के बारे में पता लगाने और टिकट बुक करने वाले देश के पहले एआई-नेटिव प्लेटफॉर्म thumpN ने हाल ही में अपने प्री-सीड फंडिंग राउंड में 3.75 मिलियन (करीब 35.7 करोड़) जुटाए हैं. इस राउंड में बिजनेस जगत के दिग्गजों से लेकर संगीत जगत के नामचीन सितारों ने पैसे लगाए हैं, जिनमें Paytm के फाउंडर विजय शेखर शर्मा और कंपनी के CFO मधुर देवरा के साथ अरिजीत सिंह, सुनिधि चौहान और बादशाह जैसे कलाकारों ने बड़ा निवेश किया है. thumpN मुंबई बेस्ड स्टार्टअप है.&amp;nbsp;
thumpN कैसे काम करता है?
thumpN एक एआई-बेस्ड लाइव एंटरटेनमेंट डिस्कवरी और टिकटिंग प्लेटफॉर्म है, जो लोगों को सही इवेंट का पता लगाने और उसके लिए टिकट बुक कराने की प्रक्रिया को आसान बनाता है. इसमें Shadow के नाम से एक एडवांस एआई एजेंट है, जिनसे आप बात कर सकते हैं. ऐप की मदद से आप अपने शहर में चल रहे म्यूजिक कॉन्सर्ट और लाइव बैंड शोज से लेकर स्टैंड-अप कॉमेडी और थियेटर, नाइटलाइफ या किसी दूसरे बड़े इवेंट्स का पता लगा सकते हैं.
आमतौर पर लोग आज के समय में शोज वगैरह का पता लगाने के लिए दोस्तों या व्हाट्सऐप ग्रुप या इंस्टाग्राम रील्स वगैरह की मदद लेते हैं, लेकिन थम्पसन आपको एक ही क्लिक में यह बता देगा अभी आपके शहर में कौन-कौन से इवेंट्स चल रहे हैं, टिकट की बुकिंग कैसे करनी है वगैरह. आप Shadow एआई एजेंट से पूछ सकते हैं कि अभी शहर में बेस्ड कॉमेडी स्टैंडअप कॉमेडी शोज कहां चल रहे हैं? उनकी टिकट कैसे बुक करानी है.
thumpN अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटाकर आपको बेस्ट शो के बारे में बताएगा. धीरे-धीरे आप जैसे-जैसे इसके साथ बात करते जाएंगे यह आपको आपकी पसंद के हिसाब से आपको रिजल्ट दिखाएगा.&amp;nbsp;
BookMy Show और Zomato को कड़ी टक्कर
भारत का लाइव एंटरटेनमेंट मार्केट इस वक्त तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें मौजूदा समय में BookMy Show और Zomato के District App और SkillBox का दबदबा है. अब इन्हें टक्कर देने के लिए मार्केट में thumpN भी आ गया है.&amp;nbsp;
स्टार्स क्यों लगा रहे पैसे?
अरिजीत सिंह, सुनिधि चौहान और बादशाह देश-विदेश में लाइव शोज करते हैं. thumpN एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो उन्हें डायरेक्ट उनके फैंस से कनेक्ट करेगा. इन्हें पता है कि जिस तेजी से लाइव एंटरटेनमेंट का मार्केट आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए इसमें निवेश उन्हें भविष्य में बड़ा मुनाफा दिला सकता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्रेडिट कार्ड नहीं तो इमरजेंसी में कहां से मिलेगा पैसा? और क्या&amp;क्या विकल्प हैं, जहां सस्ता मिल जाएगा लोन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रेडिट-कार्ड-नहीं-तो-इमरजेंसी-में-कहां-से-मिलेगा-पैसा-और-क्या-क्या-विकल्प-हैं-जहां-सस्ता-मिल-जाएगा-लोन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/क्रेडिट-कार्ड-नहीं-तो-इमरजेंसी-में-कहां-से-मिलेगा-पैसा-और-क्या-क्या-विकल्प-हैं-जहां-सस्ता-मिल-जाएगा-लोन</guid>
        <description><![CDATA[ Cheapest Loan in Emergency: इमरजेंसी की स्थिति में पैसों की जरूरत पड़ने पर क्रेडिट कार्ड लोन का एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. घर में कोई जरूरी काम हो या बच्चों की फीस भरनी हो या घर में किसी की शादी हो, तो क्रेडिट कार्ड से आप लोन लेकर बाद में ब्याज सहित इसका भुगतान आराम से कर सकते हैं, लेकिन क्या हो जब अपने पास कोई क्रेडिट कार्ड ही न हो, तो? आज हम आपको कुछ ऐसे ही बेहतरीन ऑप्शंस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके लिए क्रेडिट कार्ड होने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और सस्ते में लोन भी मिल जाएगा.&amp;nbsp;
कहां मिलेगा सबसे सस्ता लोन?
गोल्ड लोन- अगर आपके पास थोड़ा-बहुत सोना रखा है, तो आप उसे गिरवी रखकर लोन ले सकते हैं. इसमें ब्याज दरें भी काफी कम- 8-10% के बीच होती है.&amp;nbsp;
PPF या LIC पर लोन- सरकारी स्कीम हो या इंश्योरेंस पॉलिसी दोनों ही जरूरत के समय लोन के अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं. इसमें सरेंडर वैल्यू पर काफी कम इंटरेस्ट रेट पर आपको लोन मिल जाता है.&amp;nbsp;
FD पर लोन- बैंक आपको आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर 90% तक लोन देता है. इसमें एफडी पर मिलने वाले इंटरेस्ट से महज 1-2% ज्यादा ही ब्याज चुकाना पड़ता है.
लोन लेने के कुछ और आसान विकल्प
मान लीजिए कि आपके पास गिरवी रखने के लिए कुछ भी नहीं है, तो उस स्थिति में भी आपको कई अन्य तरीकों से लोन मिल जाएंगे. इनमें से एक है Buy Now Pay Later का ऑप्शन. अमेजन, पेटीएम या फ्लिपकार्ट जैसे ऐप जरूरत पड़ने पर कुछ हजार तक की क्रेडिट लिमिट पर ब्याज देते हैं. सही समय पर चुकाने पर इसमें ब्याज भी नहीं देना पड़ता है. इसके अलावा, KreditBee, Moneytrap&amp;nbsp; और NAVI जैसे भी कुछ ऐप हैं, जो सिर्फ पैन या आधार कार्ड पर कुछ हजार तक लोन दे देते हैं. कुछ ऐप ऐसे भी हैं, जो आपकी सैलरी के आधार पर छोटा-मोटा लोन तुरंत दे देते हैं.

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol Price: पाकिस्तान&amp;बांग्लादेश में 40% से ज्यादा महंगा हुआ पेट्रोल, भारत में कीमतों को लेकर सरकार ने दिया अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ Fuel Prices in Pakistan-Bangladesh: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में काफी देखने को मिली. इसके चलते भारत के पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. पाकिस्तान में पेट्रोल लगभग 40-50% तक महंगा हो चुका है. बांग्लादेश में भी पेट्रोल की कीमतें करीब 43% तक बढ़ गई हैं. गनीमत है कि भारत सरकार ने सूझबूझ से कदम उठाते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को इस बड़े झटके से बचा लिया.&amp;nbsp;
पाकिस्तान और बांग्लादेश में बिगड़े हालात
पाकिस्तान में सरकार ने हाल ही में बीते 11 जुलाई को पेट्रोल की कीमतों में 13 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की है. इससे अब यहां पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर बढ़कर 310.71PKR हो गई है, जो भारतीय मुद्रा में 106.59 रुपये के बराबर है. यहां डीजल की कीमत 323.30 रुपये है, जो भारतीय करेंसी में करीब 110.91 रुपये है.&amp;nbsp;
बांग्लादेश का भी कुछ यही हाल है. यहां पेट्रोल की कीमतें जून में 109.82 टका प्रति लीटर है, जबकि जून 2022 में यहां पेट्रोल की कीमतें 76.97 टका थी. यानी कि कीमतों में 42.69% का उछाल आया है. इससे साफ है कि भारतीय मुद्रा के हिसाब से देखें, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ही देशों में ईंधन की कीमतें भारत के कई राज्यों के मुकाबले 5-10 रुपये तक महंगी पड़ रही है.&amp;nbsp;
भारत में क्या है स्थिति?
वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें भले ही आसमान छू रही हैं, लेकिन इस संकट के दौर में भी भारत में ईंधन की कीमतों में महज 5.58%-7.76% का ही इजाफा हुआ. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ी कीमतों के झटके को सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) झेल गईं ताकि आम जनता पर महंगाई का कोई असर न पड़े. स्थिति थोड़ी सामान्य हुई, तो पेट्रोल और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 1 जुलाई, 2026 से सभी अस्थायी पाबंदियां हटा ली.&amp;nbsp;
इसके अलावा, सरकार ने घरेलू स्तर पर सप्लाई बढ़ाने के लिए पेट्रोल पर निर्यात शुल्क को बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया ताकि कंपनियां देश के बाहर तेल बेचने से पहले घरेलू बाजारों को प्राथमिकता दे.&amp;nbsp;

Q2. How did India move to 20 percent blending so quickly?????In 2021, India required around 500 to 600 crore litres of ethanol annually to achieve 10 percent blending. As fresh investments expanded production capacity, annual ethanol availability approached 1,200 crore litres.&amp;hellip; pic.twitter.com/HKYjmSAKnp
&amp;mdash; PIB India (@PIB_India) July 10, 2026



E20 पर सरकार ने क्या दी सफाई?
सरकार ने E20 फ्यूल को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों पर सफाई देते हुए इससे पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंचने की आशंकाओं को खारिज कर दिया. सरकार का दावा है कि E20 ईंधन को बाजार में उतारने से पहले 40000 से अधिक वाहनों पर इसका व्यापक परीक्षण किया गया है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>इतनी ज्यादा सैलरी पहले कभी नहीं बढ़ी! क्यों आठवां वेतन आयोग अब तक का सबसे महंगा वेतन संशोधन? जानें</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Salary Hike: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने बीते 28 अक्टूबर को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के &#039;टर्म्स ऑफ रेफरेंस&#039; को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा, सरकार ने नए CPC का गठन और उसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है. आयोग के गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने होंगे. आठवें वेतन आयोग के तहत रक्षा सेवा कर्मियों सहित लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा.
क्यों आठवां वेतन आयोग सबसे महंगा?&amp;nbsp;
बताया जा रहा है कि आठवां वेतन आयोग भारत के इतिहास का अब तक का सबसे महंगा वेतन संशोधन होगा क्योंकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की संख्या में हुए भारी इजाफे और फिटमेंट फैक्टर व भत्तों में बड़े बदलावों की मांग के कारण इस बार सरकारी खजाने पर अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है. आठवें वेतन आयोग के तहत होने वाले सैलरी रिवीजन से 1.2 करोड़ से अधिक परिवार प्रभावित होंगे. इनमें लगभग 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स शामिल हैं.&amp;nbsp;
अभी 7वें वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये है. 8वें वेतन आयोग के तहत विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 1.92 से लेकर 3.83 गुना तक बढ़ाने की मांग की है. भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ जैसे संगठनों ने तो न्यूनतम मूल वेतन को 18000 से बढ़ाकर 72000 (4 गुना फिटमेंट फैक्टर) करने का प्रस्ताव रखा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
भत्तों को भी बढ़ाने का प्रस्ताव
अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी महासंघ जैसे संगठनों ने बड़े शहरों में रहने की बढ़ती लागत को देखते हुए HRA को 30%, 20% और 10% से बढ़ाकर क्रमश: 36%, 24% और 12% करने की मांग की है. चूंकि सभी भत्ते बेसिक सैलरी के हिसाब से तय होते हैं इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो भत्तों पर खर्च भी अपने आप ही बढ़ जाएगा. हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन पर टोटल खर्च 4 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच सकता है. पिछली लगभग पांच तिमाहियों के एरियर (बकाया राशि) को मिलाकर कुल वित्तीय बोझ 9 लाख करोड़ के करीब पहुंच सकता है, जिससे यह अब तक का सबसे महंगा सैलरी रिविजन बन सकता है.

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>4 महीने बाद FPI की तगड़ी वापसी, जुलाई में अब तक खरीद डाले 15157 करोड़ के भारतीय शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market: विदेशी पोर्टफोलियाे निवेशक (FPIs) इन दिनों दिल खोलकर भारतीय शेयरों की खरीदारी कर रहे हैं. पिछले लगातार 4 महीने तक बिकवाली करने के बाद जुलाई 2026 &amp;nbsp;के शुरुआती हफ्तों में FPIs ने 15157 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं. इससे पहले जून के अंतिम हफ्तों में भी FPIs ने निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू की थी, लेकिन जुलाई में जिस आक्रामक तरीके से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों पर पैसे लगाए हैं, उसे पिछले 4 महीने के सूखे को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. FPIs इक्विटी के साथ-साथ सरकारी बॉन्ड और डेट मार्केट में भी निवेश कर रहे हैं. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी काफी सपोर्ट मिल रहा है.
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPIs ने जून में 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे थे. अब ये दोबारा से भारतीय शेयर बाजार की ओर रुख कर रहे हैं. बिकवाली के दौर से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था. साल 2026 में अब तक FPIs भारतीय शेयरों से कुल 2.60 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं.&amp;nbsp;
क्यों भारतीय शेयर खरीद रहे FPIs?

HDFC Bank, Kotak Mahindra Bank और Yes Bank जैसी दिग्गज कंपनियों के कारोबारी साल 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे आए. इससे यह साबित हुआ कि भारतीय बैंकिंग और उपभोक्ता बाजार की नींव बहुत मजबूत है. FPIs इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक मानते हैं.&amp;nbsp;
अमेरिका में जून में रोजगार की सुस्त रफ्तार से एक बार फिर यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ गई हैं: जब फेड रिजर्व ब्याज दरें घटाता है, तो निवेशक अपना पैसा भारत जैसे उभरते बाजारों में लगाने लगते हैं.
अमेरिका में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स के अपने हाई लेवल से नीचे फिसलने की वजह से भारतीय रुपये को मजबूती मिलती है, जिससे विदेशी निवेशकों का करेंसी रिस्क खत्म हो गया है.&amp;nbsp;

FPIs ने किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा लगाया पैसा?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बड़े प्राइवेट बैंकों, ग्रामीण मांग में सुधार को देखते हुए FMCG सेक्टर्स, कच्चे तेल में गिरावट के चलते पेंट और एविएशन स्टॉक्स में ज्यादा से ज्यादा निवेश कर रहे हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>पैसे बचाने का नायाब तरीका, लाइफस्टाइल बदलने की भी नहीं जरूरत; बेंगलुरु के शख्स ने सुझाए टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Tips for saving money: आमतौर पर बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की यही शिकायतें रहती हैं कि महीने के आखिर तक उनके पास कोई सेविंग्स नहीं बचती है. आधी से भी ज्यादा सैलरी तो घर के किराए, ट्रांसपोर्ट, किराने का सामान लाने में ही खर्च हो जाते हैं.
खासकर, अगर मुंबई-बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले कई कामकाजी लोगों के लिए खर्चों को मैनेज करना एक चुनौती बन गया है. इन सबके ही बीच बेंगलुरु में ही रहने वाले एक शख्स ने कुछ ऐसी आसान आदतें बताई हैं, जिनसे उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कोई बड़ा समझौता किए बगैर पैसे बचाने में मदद मिल रही है.
अक्षय CN नाम के इस व्यक्ति ने अपने इंस्टाग्राम पेज @bangalore_viral पर ये टिप्स शेयर किए. वीडियो में उन्होंने बताया कि कैसे अपनी लाइफस्टाइल और खर्च करने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल को मेंटेंन रखते हुए भी फालतू के खर्च कम किए. पोस्ट के कैप्शन में अक्षय ने लिखा, &quot;मैंने अपनी लाइफस्टाइल से समझौता किए बगैर बेंगलुरु में अपने खर्च कैसे कम किए.&quot;
मेट्रो के पास रहना सबसे किफायती
सबसे पहले तो अक्षय ने अपने रहने के लिए किसी महंगे या फैंसी इलाके को नहीं चुना, बल्कि मेट्रो स्टेशन के पास रहने को अहमियत दी. अक्षय ने लिखा,&quot;मैंने किसी &#039;फैंसी&#039; इलाके में जाने के बजाय मेट्रो के पास रहने का फैसला किया. शुरुआत में किराया थोड़ा ज्यादा लगा, लेकिन रोजाना आने-जाने, पेट्रोल और ऑटो के खर्च में मेरे काफी पैसे बचे और मानसिक तनाव भी कम हुआ.&quot; उन्होंने बताया कि सफर में कम समय लगने और ट्रांसपोर्ट का खर्च कम होने से उनके महीने के खर्च में फर्क साफ देखने को मिला.
सहूलियत पर खर्च कम
अक्षय ने बताया कि बेंगलुरु में रहते हुए उन्होंने अपनी सहूलियत के लिए किए जाने वाले खर्च को धीरे-धीरे कम करना शुरू किया. क्विक डिलीवरी, ऑटो सब्सक्रिप्शन और ऑनलाइन छोटी-मोटी खरीदारी से महीने में खर्च का पैमाना धीरे-धीरे बढ़ता गया. अक्षय ने लास्ट मिनट के बजाय पूरे वीकेंड का प्लान पहले से ही बनाना शुरू कर दिया.
अक्षय का कहना है कि बिना सोचे-समझे कैफे या पब चले जाना, मन में कुछ अचानक से आने पर खर्च कर बैठना, इन सारी चीजों का तुरंत पता चले बिना ही सेविंग्स पर असर पड़ता है. अक्षय ने आगे कहा, &quot;मैंने बिना सोचे-समझे खर्च करने के बजाय अपने वीकेंड का प्लान बनाना शुरू किया. बिना प्लान के कैफ़ घूमना, पब जाना और अचानक घूमने-फिरने का मन बनाकर खर्च करना, बेंगलुरु में लोगों को पता चलने से कहीं ज्यादा तेजी से बचत को खत्म कर देता है.&quot;



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लाइफस्टाइल मेंटेन करने का प्रेशर
वीडियो में अक्षय ने बेंगलुरु के वर्क कल्चर में लोगों पर अपने लाइफस्टाइल को लगातार बेहतर बनाने के दबाव के बारे में भी बात की. यहां कई लोग सिर्फ बाहर से खुद को अपडेटेड दिखाने या &amp;nbsp;अपने आस-पास के ट्रेंड्स के साथ बने रहने के लिए पैसे खर्च करते हैं.
अक्षय ने बताया कि दूसरों की तरह उन्होंने अपने गैजेट्स अपग्रेड करने बंद कर दिए. रोज रेस्टारेंट्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर निर्भर रहने के बजाय घर पर खाना पकाने का भी बचत के साथ-साथ सेहत पर भी असर पड़ा. अपने पोस्ट के आखिर में अक्षय ने लिखा कि सैलरी ज्यादा होने से ही सिर्फ आपकी आर्थिक परेशानियां हल नहीं हो जाती हैं. बेहतर आदतें ज्यादा मायने रखती हैं.

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पैसे, बचाने, का, नायाब, तरीका, लाइफस्टाइल, बदलने, की, भी, नहीं, जरूरत, बेंगलुरु, के, शख्स, ने, सुझाए, टिप्स</media:keywords>
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        <title>भारत के इस पड़ोसी देश में हाहाकार! 4.54 लाख करोड़ के &amp;apos;बैड लोन&amp;apos; में डूबा, बैंकिंग सिस्टम भी हुआ फेल</title>
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        <description><![CDATA[ Bangladesh Banking Crisis: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश की बैंकिंग हालत इन दिनों लगातार बिगड़ती हुई नजर आ रही है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश के बैंकों पर डूबे हुए कर्ज (NPA) का बोझ काफी तेजी से बढ़ गया है, जिसकी वसूली कर पाना मुश्किल हो गया है. ऐसे में बैंकों की कुल कर्ज अब करीब 32.26% हिस्सा नॉन-परफॉर्मिंग एसेट में बदल चुका है. एनपीए वाले देशों के लिस्ट में अब बांग्लादेश दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है.&amp;nbsp;
लगतार तेजी से बढ़ते बैड लोन, बैंकिंग व्यवस्था में कमजोर निगरानी ने हालत और बदतर बना दी है. इसका असर सिर्फ बैंकों पर ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रही है. एक्सपर्टों के मुताबिक, अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था का अंजाम काफी बुरा हो सकता है.&amp;nbsp;
कितने करोड़ रुपये के बराबर पहुंचा बैड लोन
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक &amp;nbsp;बांग्लादेश में बैड लोन यानी डूबा हुआ कर्ज बढ़कर 5.89 लाख करोड़ टका (करीब 4.54 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है. सिर्फ तीन महीनों में ही करीब 31,000 करोड़ टका कर्ज एनपीए में बदल चुका है. ऐसे में बताया जा रहा है कि देश के कुल बैंक ऋण का कारीब एक-तिहाई अब वसूली से बाहर हो गया है.
हैदराबाद के &#039;बंटी-बबली&#039; से मिलो, निवेश के नाम पर ऐंठे करोड़ों रुपए, स्विट्जरलैंड में मनाया &#039;हनीमून&#039;
क्यों बिगड़ी बैंकिंग व्यवस्था?
दरअसल, बैंकों ने लोन देते समय आने वाले खतरे का सही से अंदाजा नहीं लगाया. उन्होंने उधार लेने वाले की पेमेंट क्षमता की बजाय राजनीतिक प्रभाव और व्यक्तिगत संबंधों के बुनियाद पर बड़े कर्ज दे दिए, जिनकी बाद में समय रहते वसूली नहीं हो सकी. यही वजह है कि आज बैंकों की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई. ऐसे में अब बैंकों के पास पूंजी कम होने से उद्योग, कारोबार और आम लोगों को नए लोन देना भी काफी मुश्किल हो गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>भारत, के, इस, पड़ोसी, देश, में, हाहाकार, 4.54, लाख, करोड़, के, बैड, लोन, में, डूबा, बैंकिंग, सिस्टम, भी, हुआ, फेल</media:keywords>
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        <title>FD vs Lump Sum Investment: 10 लाख रुपये का निवेश करने पर कहां मिलेगा ज्यादा मुनाफा? जानिए दोनों विकल्पों का फर्क</title>
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        <description><![CDATA[ FD vs Lump Sum Investment: अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हर कोई निवेश करना चाहता है. एक निवेश होता है जिसमें किश्तों में थोड़े- थोड़े पैसे जमा करना होते हैं. लेकिन जब आपके पास एक मुश्त रकम हो तब क्या करेंगें? इसकी या तो एफडी करवाएंगे, या फिर लम्प सम इनवेस्टमेंट में इसे निवेश करेंगे. इन दोंनों में से किसमें निवेश करना बेहतर है? आइये जानते हैं.
FD में कितना मिल सकता है रिटर्न?FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन माना जाता है जो बिना जोखिम के तय रिटर्न चाहते हैं. फिलहाल कई बैंक 5 साल की FD पर करीब 6.5% से 7.5% तक ब्याज दे रहे हैं. अगर 10 लाख रुपये को 7% सालाना ब्याज पर 5 साल के लिए FD में रखा जाए, तो मैच्योरिटी पर रकम लगभग 14 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है. यानी करीब 4 लाख रुपये का ब्याज मिल सकता है. हालांकि, ब्याज पर टैक्स भी देना पड़ सकता है.
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लम्प सम निवेश में कितना फायदा?अगर यही 10 लाख रुपये किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में लम्प सम इनवेस्टमेंट में निवेश किए जाएं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिले, तो 5 साल में निवेश की वैल्यू करीब 17.6 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. यानी लगभग 7.6 लाख रुपये का फायदा हो सकता है. हालांकि, म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है और इसमें नुकसान की संभावना भी रहती है.
निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान

सिर्फ संभावित रिटर्न देखकर फैसला न लें.
अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को जाचें.
इमरजेंसी के लिए कुछ रकम सुरक्षित रखें.
म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले फंड का रिकॉर्ड और खर्च जरूर देखें.
जरूरत पड़ने पर किसी वित्तीय सलाहकार की सलाह लें.

हैदराबाद के &#039;बंटी-बबली&#039; से मिलो, निवेश के नाम पर ऐंठे करोड़ों रुपए, स्विट्जरलैंड में मनाया &#039;हनीमून&#039;
दोनों में से क्या है फायदेमंद?यदि आपको इन दोनों में से कुछ एक चुनना है तो आप अपनी समझ और जरूरत के हिसाब से चुनें. जैसे अगर आपका लक्ष्य पूंजी को सुरक्षित रखना है और आप बिना जोखिम के निश्चित रिटर्न चाहते हैं, तो FD बेहतर ऑप्शन हो सकती है. वहीं, अगर आपका निवेश का समय लंबा है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव को झेल सकते हैं, तो लम्प सम म्यूचुअल फंड निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Lump, Sum, Investment:, लाख, रुपये, का, निवेश, करने, पर, कहां, मिलेगा, ज्यादा, मुनाफा, जानिए, दोनों, विकल्पों, का, फर्क</media:keywords>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Rate: वीकेंड पर बाहर निकलने का है प्लान? पहले जानें आज पेट्रोल&amp;डीजल का क्या चल रहा रेट?</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate Today on July 12: आज 12 जुलाई, रविवार को देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जबकि शुक्रवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई थी. इस दिन ब्रेंट क्रूड फिसलकर 76.24 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 72.04 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ. तेल की कीमतों में यह गिरावट तनाव के बावजूद अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर और शांति समझौते को लेकर आई पॉजिटिव खबरों के बीच आई, जिससे होर्मुज (Strait of Hormuz) से एनर्जी शिपिंग फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी. अमेरिका ने इस बीच ईरान के मुख्य एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने से परहजे किया. उन्होंने यह भी कहा कि &#039;&#039;यह संघर्ष एक लंबे युद्ध में नहीं बदलेगा.&#039;&#039; उनके ऐसा कहने से निवेशकों का डर कुछ कम हुआ है.&amp;nbsp;
क्या अभी कम होंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते संकेत दिया था कि अभी घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें कम करने पर कोई विचार नहीं हो रहा है. यह फैसला तब लिया गया है जब OPEC+ ने अगस्त 2026 से तेल उत्पादन में हर दिन 1,88,000 बैरल की और बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है. यह लगातार 50वां महीना है, जब OPEC+ में शामिल देशों ने अपनी प्रोडक्शन लिमिट बढ़ाई है. बता दें कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव शुरू होने के बाद से पिछले चार महीनों में देश में ईंधन की कीमतें चार बार बढ़ी हैं, जिससे इस दौरान कीमतें लगभग 7.5-8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई हैं.
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली&amp;nbsp;
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई&amp;nbsp;
111.21 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


पटना&amp;nbsp;
113.35 रुपये
&amp;nbsp;99.36 रुपये


लेह
109.81 रुपये
97.92 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये&amp;nbsp;
103.82 रुपये


कोहिमा
104.39 रुपये
95.91 रुपये



क्यों अलग-अलग शहरों में रेट अलग-अलग?
केंद्र सरकार पूरे देश में एक समान एक्साइज ड्यूटी लगाती है, लेकिन राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर अपने अलग-अलग प्रतिशत में VAT या सेल्स टैक्स लगाती है. जैसे कि अंडमान-निकोबार में टैक्स बहुत कम होने के चलते वहां तेल सस्ता है. वहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में टैक्स ज्यादा&amp;nbsp;लगने की वजह से तेल महंगा हो जाता है. ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और मांग-आपूर्ति की मौजूदा स्थिति भी उस रिटेल कीमत पर असर डालती है, जो ग्राहकों को पेट्रोल पंप पर दिखती है.

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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>40 साल का सूखा खत्म! भारत&amp;न्यूजीलैंड ने तैयार किया &amp;apos;विजन 2030&amp;apos;, 35000 करोड़ का होगा ट्रेड, क्या समझौते हुए?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/40-साल-का-सूखा-खत्म-भारत-न्यूजीलैंड-ने-तैयार-किया-विजन-2030-35000-करोड़-का-होगा-ट्रेड-क्या-समझौते-हुए</link>
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        <description><![CDATA[ India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. करीब 40 साल बाद न्यूजीलैंड के किसी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच हुई अहम बातचीत ने व्यापारिक रिश्तों के लिए नए रास्ता खोल दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने मिलकर &#039;विजन 2030&#039; का रोडमैप तैयार किया है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है.&amp;nbsp;दोनों देशों की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए.
भारत- न्यूजीलैंड रिश्तों में नई शुरुआतभारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से अच्छे कूटनीतिक संबंध रहे हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच व्यापार की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई थी. अब दोनों देशों ने इस अंतर को कम करने के लिए विजन 2030 तैयार किया है. प्रधानमंत्री मोदी और पीएम लक्सन की बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देश एक-दूसरे के बाजारों में पहुंच आसान बनाने, निवेश बढ़ाने और कारोबारी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे.
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35000 करोड़ रुपये का ट्रेड&amp;nbsp;भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार बढ़ाने पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है. दोनों देश चाहते हैं कि आने वाले समय में व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ें और कंपनियों को नए अवसर मिलें. न्यूजीलैंड भारत के लिए कृषि, डेयरी और तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है. वहीं, भारत न्यूजीलैंड के लिए फार्मा, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बड़ा बाजार बन सकता है.
न्यूजीलैंड एक्सपोर्ट को टैरिफ फ्री एंट्रीभारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ट्रेड समझौते का सबसे बड़ा फायदा न्यूजीलैंड के एक्सपोर्टर्स को मिलने की उम्मीद है. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के अनुसार, ट्रेड डील लागू होने के बाद पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के 57% निर्यात को भारत में बिना टैरिफ के एंट्री मिलेगी. इससे न्यूजीलैंड के कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी के सामान को भारतीय बाजार में पहुंच बनाने में मदद मिलेगी. वहीं, भारत को भी न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पादों के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है. इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे.&amp;nbsp;
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क्या हैं बड़े समझौते?
1. व्यापार और निवेश- भारत और न्यूजीलैंड कारोबारियों के लिए निवेश को आसान बनाने और नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर जोर देने वाले हैं.&amp;nbsp;
2. शिक्षा- दोनों देश छात्र, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर काम करेंगे.&amp;nbsp;
3. कृषि और डेयरी- न्यूजीलैंड अपनी डेयरी और कृषि तकनीक के लिए मशहूर है. भारत को इस सहमति से लाभ मिल सकता है.
4. सुरक्षा- दोनों देशों ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही है. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती स्थितियों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है.
5. टेक्नोलॉजी- डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप में भी दोनों देश मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साल, का, सूखा, खत्म, भारत-न्यूजीलैंड, ने, तैयार, किया, विजन, 2030, 35000, करोड़, का, होगा, ट्रेड, क्या, समझौते, हुए</media:keywords>
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        <title>हवाई यात्रियों की जान जोखिम में! सुरक्षा नियमों में ढिलाई पर इंडिगो को लगी फटकार, कब&amp; कब लगा जुर्माना?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हवाई-यात्रियों-की-जान-जोखिम-में-सुरक्षा-नियमों-में-ढिलाई-पर-इंडिगो-को-लगी-फटकार-कब-कब-लगा-जुर्माना</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/हवाई-यात्रियों-की-जान-जोखिम-में-सुरक्षा-नियमों-में-ढिलाई-पर-इंडिगो-को-लगी-फटकार-कब-कब-लगा-जुर्माना</guid>
        <description><![CDATA[ IndiGo Flight Disruption: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में शामिल इंडिगो एक बार फिर सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर सवालों के घेरे में है. एविएशन रेगुलेटर डीसीजीए ने एयरलाइन को खतरनाक सामानों की हैंडलिंग से जुड़े नियमों में लापरवाही को लेकर चेतावनी दिया है. डीसीजीए की जांच में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें तय सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था.
इस कार्रवाई के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, डीसीजीए ने अभी इस मामले में जुर्माना नहीं लगाया है, बल्कि नियमों में सुधार के लिए चेतावनी दी है और एयरलाइन से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है.
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क्या है पूरा मामला?डीसीजीए की ओर से की गई जांच में इंडिगो के इंजीनियरिंग स्टोरेज और खतरनाक सामानों की हैंडलिंग प्रोसेस में कुछ कमियां पाई गई हैं. जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में खतरनाक सामान को संभालने के लिए नियम और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी तरह पालन नहीं हुआ.
एयरलाइन ने भी एक घटना का जिक्र किया जिसमें फ्लाइट में भेजे गए खतरनाक सामान से जुड़ी समस्या सामने आई थी. इसके बाद डीसीजीए ने सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती दिखाई और इंडिगो को सुधार करने के निर्देश दिए.
इंडिगो पर कब-कब हुई डीसीजीए की बड़ी कार्रवाई?
1. जुलाई 2026डीसीजीए ने विशेष ऑडिट में पाया कि इंडिगो ने खतरनाक सामान की हैंडलिंग से जुड़े कुछ सुरक्षा नियमों और एसओपी का पूरी तरह पालन नहीं किया. इसके बाद एयरलाइन को वार्निंग लेटर जारी किया गया और एक महीने के भीतर सुधार करके रिपोर्ट मांगी गई. इस मामले में कोई जुर्माना नहीं लगाया गया, केवल चेतावनी दी गई.
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2. जनवरी 2026दिसंबर 2025 में हजारों उड़ानों के रद्द और लेट होने के मामले में डीसीजीए ने इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया. जांच में पाया गया कि ऑपरेशन प्लानिंग, क्रू मैनेजमेंट और रेगुलेटरी तैयारी में गंभीर कमियां थीं. डीसीजीए ने एयरलाइन से 50 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भी मांगी ताकि आगे चलकर ऐसी स्थिति दोबारा न हो.
3. अक्टूबर 2025&amp;nbsp;डीसीजीए ने पायलट ट्रेनिंग और कैटगरी सी एयरपोर्ट ऑपरेशन से जुड़े नियमों के पालन में कमी मिलने पर इंडिगो पर 20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. एयरलाइन ने बाद में इस आदेश को चुनौती देने की बात कही थी.
4. दिसंबर 2025&amp;nbsp;फ्लाइट कैंसिलेशन संकट के दौरान डीसीजीए ने इंडिगो के सीइओ समेत वरिष्ठ अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया. इसके अलावा एयरलाइन की उड़ानों पर खास निगरानी रखी गई, अधिकारियों को एयरपोर्ट और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर में तैनात किया गया और कंपनी से नियमित रिपोर्ट मांगी गई. ये कार्रवाई बाद में 22.20 करोड़ रुपए के जुर्माने का आधार बनी.
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यात्रियों की सुरक्षा पर कितना असर?एविएशन सेक्टर में सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी माना जाता है. खासतौर पर खतरनाक सामान जैसे सामानों की सही पहचान, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन में छोटी सी लापरवाही भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती है. डीसीजीए लगातार एयरलाइंस की निगरानी करता है ताकि यात्री सुरक्षा से जुड़े नियमों में कोई कमी न रहे. इंडिगो को जारी चेतावनी भी इसी निगरानी का हिस्सा है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हवाई, यात्रियों, की, जान, जोखिम, में, सुरक्षा, नियमों, में, ढिलाई, पर, इंडिगो, को, लगी, फटकार, कब-, कब, लगा, जुर्माना</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मुंबई में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क, खर्च होंगे 6066 करोड़, क्या&amp;क्या होगा खास?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मुंबई-में-बनेगा-दुनिया-का-सबसे-बड़ा-वॉटर-मेट्रो-नेटवर्क-खर्च-होंगे-6066-करोड़-क्या-क्या-होगा-खास</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/मुंबई-में-बनेगा-दुनिया-का-सबसे-बड़ा-वॉटर-मेट्रो-नेटवर्क-खर्च-होंगे-6066-करोड़-क्या-क्या-होगा-खास</guid>
        <description><![CDATA[ Mumbai&amp;nbsp;Water Metro Project: अगर आप भी मुंबई के रहने वाले है, तोयह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. दरअसल मुंबई और उसके आसपास के शहरों में बढ़ते ट्रैफिक से राहत दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक खास योजना की तैयारी कर रही है. सरकार दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क तैयार करेगी, जिसकी लागत करीब 6,066 करोड़ रुपये है. इसका खास मकसद सड़कों और रेलवे पर बढ़ते दबाव को कम करना है. इसके साथ ही यात्रा को तेज बनाने और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है.
इस योजना के तहत सैकड़ों किलोमीटर लंबा जलमार्ग नेटवर्क बनाया किया जाएगा. इसके अलावा इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड नौकाएं चलाई जाएगी और सिंधुदुर्ग में आधुनिक बोट बनाने का केंद्र भी स्थापित की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत आने वाले सालों में करोड़ों यात्रियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा.
क्या-क्या होगा खास?

6,066 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना विकसित की जाएगी.
340 किलोमीटर लंबा वॉटर मेट्रो नेटवर्क तैयार होगा.
कुल 33 जलमार्ग और 44 आधुनिक टर्मिनल बनाए जाएंगे.
यात्रियों के लिए 203 इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड नौकाएं चलाई जाएंगी.
पूरा होने पर यह दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क होगा.

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2031 तक करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा
महाराष्ट्र का मकसद है कि साल 2031 तक करीब 7.5 करोड़ यात्रियों को इस सेवा का फायदा मिल सकें. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक, मुंबई की ट्रैफिक परेशानी का हल सिर्फ सड़क और रेल नेटवर्क बढ़ाने से मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि परिवहन को भी शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है. इसके अलावा बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में पॉड टैक्सी सेवा भी शुरू करने की उम्मीद है.
कहां बनेगा आधुनिक बोट निर्माण केंद्र?
मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड और ज़ोया मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता किया गया है. जिसके तहत सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी तालुका में करीब 22 एकड़ जमीन पर करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रिक बोट निर्माण केंद्र बनाया जाएगा. यहां वॉटर मेट्रो के लिए इलेक्ट्रिक और पर्यावरण अनुकूल नौकाएं तैयार की जाएंगी.
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मुंबई, में, बनेगा, दुनिया, का, सबसे, बड़ा, वॉटर, मेट्रो, नेटवर्क, खर्च, होंगे, 6066, करोड़, क्या-क्या, होगा, खास</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत की तिजोरी में आया डॉलर का सैलाब, विदेशी मुद्रा भंडार 674 अरब डॉलर के पार, बढ़ने के क्या हैं कारण?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-की-तिजोरी-में-आया-डॉलर-का-सैलाब-विदेशी-मुद्रा-भंडार-674-अरब-डॉलर-के-पार-बढ़ने-के-क्या-हैं-कारण</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/भारत-की-तिजोरी-में-आया-डॉलर-का-सैलाब-विदेशी-मुद्रा-भंडार-674-अरब-डॉलर-के-पार-बढ़ने-के-क्या-हैं-कारण</guid>
        <description><![CDATA[ India&#039;s Forex Reserve:&amp;nbsp;भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत की खबर आई है. भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़े देखें तो 3 जुलाई 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर बढ़कर 674.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. पिछले सप्ताह इसमें गिरावट दिखी थी, लेकिन इस बार मजबूत उछाल है. आइये विदेशी मुद्रा भंडार के बारे में और डिटेल में जानते हैं और समझते हैं कि पीएम मोदी की अपील से कितना फर्क पड़ा है.
विदेशी मुद्रा भंडार क्या है?विदेशी मुद्रा भंडार वो पूंजी है जिसे RBI डॉलर, यूरो, पाउंड, येन जैसी विदेशी मुद्राओं, सोने, IMF के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स और IMF में रिजर्व पोजिशन के रूप में रखता है. यही भंडार जरूरत पड़ने पर रुपये को सहारा देती है और आयात का भुगतान करने और किसी आर्थिक संकट से निपटने में काम आती है. किसी भी देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक ताकत मानी जाती है.
मुंबई में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क, खर्च होंगे 6066 करोड़, क्या-क्या होगा खास?
674 अरब डॉलर कैसे पहुंचा आंकड़ा?इस बार विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के पीछे कई कारण रहे. सबसे बड़ा योगदान फॉरेन करेंसी एसेट्स का रहा, जो 4.51 अरब डॉलर बढ़कर 545.58 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इसके अलावा सोने का भंडार भी 2.67 अरब डॉलर बढ़कर 105.21 अरब डॉलर हो गया. वहीं, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के SDR और रिजर्व पोजिशन में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ. इसके अलावा FCNR जमा और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स के जरिए भी डॉलर का फ्लो बढ़ा है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली है.
पीएम मोदी ने क्या अपील की?
कुछ महीने पहले जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मांग में तेजी आई थी, तब पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी. उन्होंने लोगों से कहा था कि जितना हो सके विदेशी यात्राएं टालें, ईंधन बचाएं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें और कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी से बचें. असल में भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और सोना आयात करता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है. अगर देश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम होती है और सोने की मांग नियंत्रित रहती है, तो डॉलर की बचत होती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है.
हवाई यात्रियों की जान जोखिम में! सुरक्षा नियमों में ढिलाई पर इंडिगो को लगी फटकार, कब- कब लगा जुर्माना?
पीएम मोदी की अपील का क्या असर पड़ा?
पीएम मोदी की अपील के बाद लोगों में ऊर्जा बचत की है और गैर-जरूरी खर्चों को कंट्रोल किया है. हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूदा बढ़ोतरी का सीधा कारण केवल आम लोगों की बचत नहीं है, बल्कि इसमें विदेशी निवेश, निर्यात से आने वाली कमाई, डॉलर की आवक और सोने की कीमतों में बदलाव जैसे कई बड़े आर्थिक कारण शामिल हैं. फिर भी, सरकार की ओर से आयात कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिशों ने लंबे समय में काफी मदद की है.
40 साल का सूखा खत्म! भारत-न्यूजीलैंड ने तैयार किया &#039;विजन 2030&#039;, 35000 करोड़ का होगा ट्रेड, क्या समझौते हुए? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, की, तिजोरी, में, आया, डॉलर, का, सैलाब, विदेशी, मुद्रा, भंडार, 674, अरब, डॉलर, के, पार, बढ़ने, के, क्या, हैं, कारण</media:keywords>
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        <title>Ethanol Rice: सरकारी राशन में हेराफेरी! एथेनॉल बनाने वाला FCI का सरकारी चावल प्राइवेट मिल को बेचा</title>
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        <description><![CDATA[ Ethanol Plant: मध्य प्रदेश में एथेनॉल बनाने के लिए भेजे गए सरकारी राशन की चावल की हेराफेरी का मामला सामने आया है, जहां भारतीय खाद्य निगम (FCI) से एथेनॉल बनाने के लिए भेजी गई चावल की खेप तय जगह पहुंचने की बजाय एक निजी राइस मिल में पहुंच गई. इस मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी. शक के मुताबिक शुरुआत जांच में बताया गया है कि सरकारी योजना के जरिए दिए गए चावल का गलत तरीके से इस्तेमाल कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?
प्रारम्भिक जांच के मुताबिक, FCI से जारी सरकारी चावल छिंदवाड़ा के एक एथेनॉल प्लांट के लिए भेजी गई थी, लेकिन चावल से भरा ट्रक छिंदवाड़ा जाने की बजाय बालाघाट जिले की एक निजी राइस मिल में खड़ा मिला. बताया जा रहा है कि उस ट्रक में करीब 242.55 क्विंटल चावल से भरे 490 बोरे बरामद हुए है. जिसके बाद पुलिस ने ट्रक और उसमें मौजूद चावल को जब्त कर लिया.
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FIR में क्या लगाए गए हैं आरोप?
FIR के मुताबिक, एथेनॉल कंपनी के एक अधिकृत प्रतिनिधि पर सरकारी चावल को हेर-फेर करने का आरोप लगाया गया है. बताया जा रहा है कि सरकारी चावल की जगह सस्ता टूटा चावल एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही थी. इस हेराफेरी से सरकार को काफी नुकसान पहुंची है. हालांकि, पुलिस ने इस मामले में ट्रक चालक और राइस मिल के मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.
एथेनॉल योजना में FCI चावल कैसे मिलता है?
केंद्र सरकार एथेनॉल बनाने के लिए पात्र डिस्टिलरी को FCI का चावल देती है. FCI का यह चावल सिर्फ वही डिस्टिलरी खरीद सकती हैं, जिसके पास ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ एथेनॉल सप्लाई का समझौता होता है. सरकार एथेनॉल बनाने के लिए यह चावल रियायती कीमतों पर दिया जाता है.&amp;nbsp;
अब क्या होगी कार्रवाई?
इस मामले की चेकिंग के लिए खास जांच दल (SIT) बनाया गया है. फिलहाल पुलिस भी इस मामले से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी चावल को जानबूझकर गलत जगह भेजा गया था या नहीं. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही असल दोषी के खिलाफ कारवाई की जाएगी. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM Modi News: न कैश, ना क्रेडिट कार्ड, जानिए पीएम मोदी विदेशी दौरों पर कैसे पेमेंट करते हैं</title>
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        <description><![CDATA[ PM Modi News: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर विदेश दौरे पर होते हैं. इस समय भी पीएम मोदी तीन देशों की यात्रा पर हैं. फिलहाल वो इस यात्रा के अंतिम चरण पर न्यूजीलैंड पहुंचे हैं. अपनी विदेश यात्राओं के दौरान पीएम मोदी अक्सर कई चीजें भी खरीदते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पीएम विदेश में पेमेंट कैसे करते हैं? नहीं सोचा होगा ना? ना ही जानते होंगे? तो आइये हम आपको बताते हैं.
पीएम मोदी कैसे करते हैं पेमेंट्स?पीएम मोदी साल 2018 में जब सिंगापुर के दौरा पर थे, उस दौरान उन्होंने वहां से एक मधुबनी पेंटिंग खरीदी थी. इस पेंटिंग को खरीदते समय उन्होंने RuPay कार्ड का इस्तेमाल किया था. तो वहीं अगस्त 2019 में भूटान भी उन्होंने एक आधिकारिक यात्रा के दौरान स्थानीय भूटानी हस्तशिल्प सामग्री खरीदी और RuPay कार्ड का इस्तेमाल किया.&amp;nbsp;
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तो वहीं फरवरी 2024 में अबू धाबी दौरे के समय पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत के UPI को यूएई के &#039;AANI&#039; पेमेंट सिस्टम से और रुपे कार्ड को वहां के &#039;JAYWAN&#039; कार्ड से जोड़ने की शुरुआत की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के कार्ड को स्वाइप कर लाइव ट्रांजैक्शन होते हुए भी देखा था.
भारतीय UPI को देते हैं बढ़ावाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेशों में इन सामानों को खरीदने और खुद पेमेंट करने का मकसद भारतीय पर्यटकों और दुनिया को ये दिखाना होता है कि भारत की फिनटेक तकनीकें जैसे UPI और RuPay अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पूरी तरह सुरक्षित और स्वीकृत हैं. ऐसे में भारतीय लोग भी विदेश यात्रा पर जाएं तो इन तकनीकों का ही इस्तेमाल करें, ना कि करेंसी एक्सचेंज करवाकर.
किन देशों में चलता है UPI और RuPay?भारतीय UPI और RuPay भारत समेत फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, ओमान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में चलता है. हालांकि फ्रांस के कुछ हिस्सों में RuPay नहीं चलता है, लेकिन कुछ हिस्सों में काम करता है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:30:24 +0530</pubDate>
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        <title>भारत के &amp;apos;आइंस्टीन&amp;apos; तैयार कर रहा अडानी ग्रुप! RSI&amp;India 2026 में देश के छात्रों को मिली फ्री साइंटिफिक ट्रेनिंग</title>
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        <description><![CDATA[ RSI-India 2026: भारत में भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करने के लिए एक बेहद खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अदानी ग्रुप और अमेरिका की संस्था सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन यानी सीईई ने मिलकर &#039;रिसर्च साइंस इनिशिएटिव&#039; नाम के एक स्पेशल साइंस कैंप का आयोजन किया. छह हफ्तों तक चला यह कैंप बेंगलुरु के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में आयोजित किया गया था, जिसका हाल ही में समापन हुआ.
कार्यक्रम के बारे में जानें
यह कार्यक्रम हाई स्कूल छात्रों के लिए एक स्पेशल साइंस रिसर्च प्रोग्राम है. यह अमेरिका की मशहूर यूनिवर्सिटी &#039;एमआईटी&#039; में होने वाले प्रोग्राम की तर्ज पर भारत में आयोजित किया गया था. इस साल देश भर से सिर्फ 32 बेहद होनहार और टैलेंटेड छात्रों को इसके लिए चुना गया था. खास बात यह है कि इस छह हफ्ते के एडवांस कोर्स के लिए बच्चों से कोई फीस नहीं ली गई, यह बिल्कुल मुफ्त था.
बच्चों ने खुद लैब में किया काम
इस कैंप में हिस्सा लेने वाले छात्रों ने बताया कि यह उनके लिए एक अनोखा और बेहतरीन अनुभव था. छात्रों को सीधे आईआईएससी के बड़े-बड़े प्रोफ़ेसरों के साथ काम करने और उनकी लैब में रिसर्च को समझने का मौका मिला. तनिष्ष्क नाम के एक छात्र ने बताया, &quot;यह बहुत शानदार अनुभव था. हमें न केवल बड़े प्रोफ़ेसरों के साथ सीखने को मिला, बल्कि उन साथियों के साथ वक्त बिताने का मौका मिला जिनकी रुचि भी साइंस में है.&quot;
वहीं, एक अन्य छात्र शिव मांडलिक ने मीडिया को बताया, &#039;&#039;हाल ही में मुझे &#039;रिसर्च साइंस इनिशिएटिव इन इंडिया&#039; के छह हफ्ते के कोर्स में हिस्सा लेने का मौका मिला. मैं पूरे देश के हाई स्कूल के छात्रों को ऐसा शानदार अनुभव देने के लिए अडानी ग्रुप का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, क्योंकि हर किसी को मुफ़्त में ऐसे कड़े और बेहतरीन प्रोग्राम में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिलता.&#039;&#039;

#WATCH | Bengaluru: Participant student Shiv Mandlik says, &quot;I recently got an opportunity to participate in a 6-week course of the Research Science Initiative in India underwritten by the Adani Group and powered by the Center for Excellence in Education. I wholeheartedly like to&amp;hellip; https://t.co/6AKBLn1H0J pic.twitter.com/IutlYCCfZE
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 9, 2026



इंजीनियरिंग और डॉक्टर से आगे सोचने की जरूरत- प्रोफेसर
कार्यक्रम को लेकर आईआईएससी के प्रोफेसर और संयोजक दीपक सैनी ने बताया कि भारत में ज़्यादातर स्कूली बच्चे या तो डॉक्टर बनना चाहते हैं या इंजीनियर. वे इसी सोच में बंध जाते हैं. लेकिन भारत को आज ऐसे वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स की बहुत जरूरत है जो देश के लिए नए आविष्कार कर सकें.
प्रोफ़ेसर सैनी ने कहा, &quot;बच्चों को साइंस की तरफ मोड़ने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उन्हें खुद लैब में काम करने का स्वाद चखाया जाए. इस काम में अडानी ग्रुप हमारा पूरा साथ दे रहा है और उनके सहयोग से ही हम आने वाली पीढ़ी के वैज्ञानिक तैयार कर पा रहे हैं.&quot; इस समापन समारोह में बच्चों ने अपने रिसर्च प्रोजेक्ट्स को सबके सामने पेश किया और उन्हें सम्मानित भी किया गया.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, के, आइंस्टीन, तैयार, कर, रहा, अडानी, ग्रुप, RSI-India, 2026, में, देश, के, छात्रों, को, मिली, फ्री, साइंटिफिक, ट्रेनिंग</media:keywords>
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        <title>WFH Survey: ऑफिस जाना पसंद है या वर्क फ्रॉम होम? सर्वे में भारतीयों ने कर दी इस मॉडल की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ WFH Survey: साल 2019 में जब COVID महामारी आई थी, उससे पहले कोई भी वर्क फ्रॉम होम का कॉन्सेप्ट नहीं जानता था. खासतौर से भारत में. लेकिन इस महामारी के बाद से लोगों ने वर्क फ्रॉम हो किया और उन्हें ये काफी पसंद आया. हालांकि करीब 2-3 साल लागातर गऱ से ऑफिस का काम करना थोड़ा सा एग्जॉस्टिंग भी लगने लगा था. लेकिन अब जब एक बार फिर से वर्क फ्रॉम ऑफिस शुरू हुआ, तब लोगों को फिर WFH की याद आई. इसी बीच अब अब एक सर्वे में कुछ नई ही बात सामने आई है.
WFH सर्वे में क्या आया सामने?दरअसल हाल ही में ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया वॉइस ऑफ इंडिया 2025 का एक सर्वे सामने आया है. इसके अनुसार, अगर कर्मचारियों को ऑप्शन मिले तो 39% लोग हाइब्रिड वर्क मॉडल को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. सर्वे में बताया गया है कि प्रोफेशनल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी सेक्टर के कर्मचारी हाइब्रिड मॉडल को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. अब कंपनियां इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं कि कर्मचारी कहां से काम कर रहे हैं, इसके बजाय वो कितना अच्छा काम कर रहे हैं.
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क्या है हाइब्रिड वर्क मॉडल?हाइब्रिड वर्क मॉडल &#039;वर्क फ्रॉम होम&#039; और &#039;वर्क फ्रॉम ऑफिस&#039; का मिक्सचर है. इसमें कर्मचारी को हफ्ते में दो या तीन दिन ऑफिस जाना होता है और बाकी दिन वो घर से काम करता है. इसे ही हाईब्रिड वर्क मॉडल कहते हैं. इससे घर पर आराम से रहकर काम भी हो जाता है और कुछ दिन ऑफिस से काम करने पर माइंड भी फ्रेश हो जाता है. इसलिए लोग इसे काफी पसंद करते हैं.
हाइब्रिड वर्क मॉडल के क्या फायदे हैं?हाइब्रिड वर्क मॉडल के कई सारे फायदे होते हैं, जैसे:

इसमें कर्मचारी कुछ दिन घर से और कुछ दिन ऑफिस से काम करते हैं.
इसमें वो अपने काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन बना पाते हैं.
हाइब्रिड तरीके से काम करने पर कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ती है, नौकरी छोड़ने की संभावना कम होती है.
कंपनियों को अच्छे टैलेंट को आकर्षित करने में भी मदद मिलती है.

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WFO होगा खत्म?इस सर्वे की मानें तो ऐसा नहीं है. कई ऐसे सेक्टर हैं जहां ऑफिस या साइट पर मौजूद रहकर काम करना जरूरी है. उदाहरण के लिए, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन सेक्टर में 72% कर्मचारी आज भी मुख्य रूप से वर्कप्लेस पर जाकर काम करते हैं. वहीं, ऑन-साइट काम करने वाले 59% कर्मचारी अपने नियोक्ता के दफ्तर या फैक्ट्री से काम करते हैं.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>टैक्स वसूली में हरियाणा देश में नंबर&amp;1, बिहार सबसे फिसड्डी, रिपोर्ट में राज्यों की आत्मनिर्भरता पर खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टैक्स-वसूली-में-हरियाणा-देश-में-नंबर-1-बिहार-सबसे-फिसड्डी-रिपोर्ट-में-राज्यों-की-आत्मनिर्भरता-पर-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ Tax Report: यह तो सभी जानते हैं कि किसी राज्य में सड़क, अस्पताल से लेकर स्कूल और दूसरे सरकारी सुविधाओं पर होने वाले खर्च इस बात पर निर्भर करते हैं कि उस राज्य में कितना टैक्स जुटाया जा रहा है. अभी हाल ही में देश के राज्यों की वित्तीय स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बहुत बड़ा अंतर देखने को मिला है. रिपोर्ट में देखा गया है कि कुछ राज्य टैक्स से अच्छी-खासी आय जुटा रहे हैं, लेकिन वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं जो अभी भी केंद्र सरकार से मिलने वाले टैक्स शेयर और आर्थिक सहायता पर ही निर्भर हैं.&amp;nbsp;
सबसे आगे है हरियाणा
फाइनेंशियल ईयर 2024-24 के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा टैक्स वसूली के मामले में सबसे आगे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा की कुल आय का 73.23 प्रतिशत हिस्सा खुद के टैक्स से आया. &amp;nbsp;मतलब साफ है कि हरियाणा अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खुद ही जुटा रहा है.
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सबसे पीछे है बिहार
अगर बात करें बिहार की तो यह टैक्स वसूली के मामले में सबसे पीछे हैं. राज्य के कुल आय का केवल 24.50 प्रतिशित हिस्सा ही खुद के टैक्स से आया, जिसकी वजह से बिहार को केंद्र सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद का सहारा लेना पड़ता है.&amp;nbsp;
पहले ये राज्य था सबसे आगे
फाइनेंशियल ईयर 2017 से 2020 तक टैक्स के मामले में सबसे आगे महाराष्ट्र था. लेकिन 2020-21 के बाद अब हरियाणा ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है. खास बात तो यह है कि तब से लेकर अभी तक पहले स्थान पर हरियाणा ही है.
हरियाणा के अलावा इन राज्यों ने भी किया अच्छा प्रदर्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 साल में इन राज्यों ने भी अच्छा-खासा टैक्स से मजबूत कमाई की है. इनमें शामिल है...

कर्नाटक
हरियाणा
तमिलनाडु
तेलंगाना
और महाराष्ट्र

इन राज्यों की दूसरे राज्यों के मुकाबले टैक्स वसूली ज्यादा रही.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Explained: पहले हरदीप सिंह पुरी ने कहा&amp; &amp;apos;सब ठीक&amp;apos;, फिर नितिन गडकरी ने माना&amp; &amp;apos;माइलेज घटेगा&amp;apos;, आखिर क्या है सच?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-पहले-हरदीप-सिंह-पुरी-ने-कहा-सब-ठीक-फिर-नितिन-गडकरी-ने-माना-माइलेज-घटेगा-आखिर-क्या-है-सच</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/explained-पहले-हरदीप-सिंह-पुरी-ने-कहा-सब-ठीक-फिर-नितिन-गडकरी-ने-माना-माइलेज-घटेगा-आखिर-क्या-है-सच</guid>
        <description><![CDATA[ 6 दिन पहले यानी 4 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था, &#039;E20 पूरी तरह सफल है, किसी को कोई दिक्कत नहीं है.&#039; लेकिन 10 जुलाई 2026 को सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद कहा,&#039;E20 से माइलेज पर असर पड़ेगा.&#039; इन्हीं दो बयानों ने देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ आम लोग सोशल मीडिया पर अपनी गाड़ियों के माइलेज घटने और इंजन खराब होने की शिकायतें कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के दो बड़े मंत्री अलग-अलग बातें कह रहे हैं. आखिर चल क्या रहा है, क्या वाकई माइलेज पर फर्क पड़ेगा और बयानों के मायने क्या हैं...
E20 पेट्रोल पर बवाल क्या है?
E20 का मतलब है 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण. इथेनॉल गन्ना और मक्का जैसी फसलों से बनता है. सरकार ने अप्रैल 2026 से देशभर में E20 पेट्रोल को मानक ईंधन बना दिया. इससे पहले E10 (10% इथेनॉल) चलता था, जिसके लिए ज्यादातर पुरानी गाड़ियां डिजाइन की गई थीं.
सरकार का कहना है कि इससे तेल आयात कम होगा, किसानों को फायदा होगा और प्रदूषण घटेगा. भारत ने 2013-14 में 1.5% इथेनॉल ब्लेंडिंग से शुरू करके 2025-26 तक 20% का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल कर लिया.
दिक्कतों की जड़ यह है कि इथेनॉल अल्को्हल है. इसकी दो बड़ी कैमिकल प्रॉपर्टीज हैं जो गाड़ी के लिए सिरदर्द बन सकती हैं:

पानी सोखने की आदत: इथेनॉल हवा से नमी खींचता है. जब पेट्रोल में पानी की मात्रा बढ़ जाती है तो &amp;lsquo;फेज सेपरेशन&amp;rsquo; होता है यानी इथेनॉल और पानी नीचे बैठ जाते हैं और ऊपर पेट्रोल रह जाता है. यह निचली परत सीधे इंजन में जाकर जंग और खराब कंबस्शन पैदा करती है.
रबर और प्लास्टिक की गलन: पुरानी गाड़ियों की फ्यूल लाइनें, सील और गैस्केट एथेनॉल-रेसिस्टेंट मटेरियल से नहीं बने होते. इथेनॉल इन्हें धीरे-धीरे गला देता है, जिससे ईंधन रिसाव और महंगी मरम्मत का खतरा पैदा होता है.

पहले बोले हरदीप सिंह पुरी- &#039;सब ठीक है, कोई दिक्कत नहीं&#039;
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 को लेकर साफ कहा, &#039;देश में 20 करोड़ दोपहिया और करीब 20 लाख कारें E20 पेट्रोल का इस्तेमाल कर रही हैं और किसी को कोई दिक्कत नहीं है.&#039;
पुरी ने बताया कि भारत में पिछले साढ़े तीन साल से E15 और अप्रैल 2025 से E20 इस्तेमाल हो रहा है. कार-बाइक कंपनियां और मैकेनिक दोनों मान चुके हैं कि E20 से इंजन में कोई खराबी नहीं आ रही. पुरी ने यह भी कहा कि सरकार अब E25 (25% इथेनॉल) पर टेस्टिंग कर रही है. उन्होंने E20 को &#039;पूरी तरह सफल&#039; बताया.
फिर बोले नितिन गडकरी- &#039;माइलेज घटेगी, पर गाड़ी खराब नहीं होगी&#039;
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी. उन्होंने सबसे पहले माना कि E20 से माइलेज पर असर पड़ेगा क्योंकि इथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू (ऊर्जा) पेट्रोल से कम होती है. गडकरी ने कहा, &#039;इथेनॉल और पेट्रोल की कैलोरिफिक वैल्यू में अंतर है और यह एक फैक्ट है.&#039;
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर मामलों में यह असर बहुत मामूली होगा. गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा, &#039;दिल्ली-गुरुग्राम के रुक-रुक कर चलने वाले ट्रैफिक में आप लगातार ब्रेक लगाते हैं, स्पीड 40-50 से ऊपर नहीं जाती. लेकिन अगर आप 100 किमी/घंटा की लगातार स्पीड पर चलते हैं, तो कुछ अंतर दिख सकता है.&#039;
गडकरी ने E20 से इंजन खराब होने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, &#039;मुझे एक भी ऐसी कार दिखाओ जो E20 की वजह से खराब हुई हो. सोशल मीडिया पर जो चल रहा है, वह एक झूठी कहानी का हिस्सा है.&#039;
गडकरी ने यह भी बताया कि E20 को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और वाहन कंपनियों के कई टेस्ट के बाद ही लॉन्च किया गया. पुरानी गाड़ियों के लिए कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि सर्विसिंग के दौरान कुछ पार्ट्स (जैसे वॉशर) मुफ्त में बदलें.
तो फिर क्यों E20 पर मचा है बवाल?
केंद्र सराकर के बयान के बावजूद आम लोगों की शिकायतें थम नहीं रही हैं. सोशल मीडिया पर हजारों लोग इंजन के खराब होने, माइलेज घटने और परफॉर्मेंस पर असर की शिकायत कर रहे हैं. कुछ लोगों ने तो दिल्ली में प्रदर्शन भी किया.
बड़ी समस्या यह है कि पुरानी गाड़ियां (जो E10 के लिए बनी थीं) अब E20 से चल रही हैं. हालांकि अनब्लेंडेड पेट्रोल (बिना इथेनॉल वाला) अब भी मिलता है, लेकिन वह 40-50% ज्यादा महंगा है. यानी आम आदमी के पास कोई विकल्प नहीं है. ARAI की रिपोर्ट ने भी पुरानी E10-कंपैटिबल गाड़ियों में रबर फ्यूल-सिस्टम पार्ट्स पर खतरे की बात कही है.
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को गंभीरता से उठाया. केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर साफ जवाब मांगा कि क्या E20 से पुरानी गाड़ियों को नुकसान होगा. केजरीवाल ने कहा कि कुछ कंपनियों के मैनुअल में E20 की जगह E10 की सलाह दी गई है. उन्होंने कंपनियों से लिखित आश्वासन मांगा कि E20 से न तो माइलेज घटेगा और न ही इंजन खराब होगा.
आखिर E20 पेट्रोल को लेकर सच क्या है?
नितिन गडकरी ने आलोचकों को खुली चुनौती दी है, &#039;अगर E20 पेट्रोल से एक भी कार, बाइक या स्कूटर खराब हुआ है, तो नाम बताइए.&#039; उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि E20 के खिलाफ &#039;झूठी और पेड मुहिम&#039; चलाई जा रही है. वहीं, हरदीप सिंह पुरी ने साफ कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आम जनता को E20 से कोई दिक्कत है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, E20 से माइलेज पर असर पड़ेगा, यह सच है. गडकरी ने खुद इसे माना है. इथेनॉल में पेट्रोल से कम ऊर्जा होती है, इसलिए माइलेज थोड़ी कम होना स्वाभाविक है. कंपनियों ने भी 3-3.5% माइलेज घटने की बात कही है. कुछ अनुमानों के मुताबिक यह 4-12% तक हो सकती है.
दूसरी ओर E20 से इंजन खराब होने के कोई ठोस सबूत नहीं है. सरकार, ARAI और कंपनियों का कहना है कि टेस्टिंग के बाद ही E20 लॉन्च किया गया. मारुति सुजुकी ने कहा कि उसने 1.5 करोड़ से ज्यादा पुरानी गाड़ियों &amp;nbsp; की सर्विसिंग की, जिनमें E20 से जुड़ी कोई खराबी नहीं मिली. लेकिन बड़ी समस् ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, पहले, हरदीप, सिंह, पुरी, ने, कहा-, सब, ठीक, फिर, नितिन, गडकरी, ने, माना-, माइलेज, घटेगा, आखिर, क्या, है, सच</media:keywords>
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        <title>Per Capita Income: सिक्किम के लोग सबसे अमीर, बिहार अभी भी सबसे गरीब, प्रति व्यक्ति आय में किन राज्यों ने मारी बाजी?</title>
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        <description><![CDATA[ Per Capita Income: देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है लेकिन अभी भी देश के हर राज्य में लोगों की कमाई एक जैसी नहीं है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय के मामले में सिक्किम अभी देश का सबसे अमीर राज्य बना है, जबकि बिहार सबसे निचले पायदान पर है. रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि राज्यों के बीच आमदनी का अंतर अभी भी काफी बड़ा है. किसी राज्य की प्रति व्यक्ति आय बताती है कि वहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई कितनी है. इससे उस राज्य की आर्थिक स्थिति और लोगों के लाइफस्टाइल का भी अंदाजा लगाया जाता है.
क्या है प्रति व्यक्ति आय?
किसी राज्य की टोटल इनकम को वहां की कुल आबादी से भाग देने पर जो आंकड़ा निकलता है, उसे ही प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर व्यक्ति की कमाई उतनी ही है, लेकिन इससे राज्य की आर्थिक स्थिति का अंदाजा जरूर मिल जाता है.
पहले हरदीप सिंह पुरी ने कहा- &#039;सब ठीक&#039;, फिर नितिन गडकरी ने माना- &#039;माइलेज घटेगा&#039;, आखिर क्या है सच?
सिक्किम कैसे बना नंबर 1?
रिपोर्ट के अनुसार, सिक्किम ने प्रति व्यक्ति आय के मामले में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है. इसके पीछे के कारण की बात करें तो एक्सपर्ट्स इसे राज्य की छोटी आबादी, पर्यटन, जलविद्युत परियोजनाओं और मजबूत आर्थिक गतिविधियों को ही कारण मान रहे हैं. कम आबादी और अच्छे टैक्स के कारण ही यहां प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे ज्यादा है.
बिहार सबसे पीछे क्यों?
रिपोर्ट के साफ कहा हया है कि बिहार फिर से प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे नीचे है. इसकी वजह राज्य की बड़ती आबादी, कम औद्योगिक विकास और प्रति व्यक्ति कम आय को ही माना गया है. हालांकि, पिछले कुछ साल में बिहार की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में वो अभी भी दूसरे राज्यों से काफी पीछे है.
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कौन- कौन से राज्य हैं आगे?
सिक्किम अकेला ही आगे नहीं है. इसके अलावा गोवा, दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों की प्रति व्यक्ति आय भी देश में सबसे ज्यादा है. इन राज्यों में उद्योग, आईटी, सेवा क्षेत्र और पर्यटन जैसी गतिविधियां मजबूत होने के कारण लोगों की एवरेज आय ज्यादा है.&amp;nbsp;
समझें राज्य की तस्वीर-
प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का मतलब ये माना जाता है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं और लोगों की औसत कमाई बढ़ रही है. हालांकि किसी राज्य की पूरी तस्वीर समझने के लिए रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनयापन की लागत जैसे दूसरे पहलुओं को भी देखना जरूरी होता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>फिजूलखर्ची बंद करो, खुद की कमाई बढ़ाओ, राज्यों से सरकार ने ऐसा क्यों कहा, आप पर क्या होगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ Financial Planning: किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए अच्छी टैक्स वसूली जरूरी होती है, लेकिन कई बार टैक्स से अच्छी कमाई होने के बाद भी राज्यों की आर्थिक स्थिति उतनी मजबूत नहीं हो पाती है और इसका कारण जरूरत से ज्यादा खर्च करना है. केवल कमाई बढ़ाने से ही आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होती, जब तक लगातार होने वाले खर्चों पर काबू न रखा जाए. इसी को देखते हुए 16वें वित्त आयोग ने राज्यों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए एक जरूरी सुझाव दिया है.&amp;nbsp;
दरअसल, आयोग का ऐसा मानना है कि कुछ राज्यों में आय उतनी नहीं बढ़ रही है, जितनी तेजी से खर्चा बढ़ रहा है. इसलिए राज्यों को अपनी कमाई को बढ़ाने की कोशिश करनी होगी और वहीं कमाई बढ़ाने के साथ ही अपने गैर-जरूरी खर्चों को भी कम करना होगा, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर बनी रहे.
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बजट के बाहर लोन न लें
इसके अलावा आयोग का कहना है कि राज्य बजट से ज्यादा लोन न लें, ऐसा करने से बचना चाहिए. अगर किसी कारणवश लोन लेना भी पड़े तो उससे जुड़ी सभी जानकारी हर साल बजट में लोगों के सामने रखी होगी.
राजस्व घाटा अनुदान मिलेगा या नहीं?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार किसी भी राज्य को राजस्व घाटा अनुदान यानी Revenue Deficit Grant देने की सिफारिश नहीं की गई है. इतना ही नहीं, बल्कि किसी भी राज्य या क्षेत्र को अलग से खास आर्थिक मदद देने का भी प्रस्ताव नहीं रखा गया है. इसके साथ ही आयोग ने सलाह दी है कि राज्यों को अपनी कमाई के हिसाब से ही खर्च करना चाहिए. यही कारण है कि आयोग ने कहा कि किसी भी राज्य का राजकोषीय घाटा उसकी कुल आर्थिक क्षमता के 3 प्रतिशत के अंदर ही रखा जाए, इससे ज्यादा नहीं होना चाहिए.
सिक्किम के लोग सबसे अमीर, बिहार अभी भी सबसे गरीब, प्रति व्यक्ति आय में किन राज्यों ने मारी बाजी?
आयोग ने राज्यों को दी सलाह

आयोग का कहना है कि अब राज्यों को अपनी टैक्स से होने वाली कमाई को बढ़ाना चाहिए.
साथ ही &amp;nbsp;जरूरत के मुताबिक ही खर्च करें. अगर जरूरत नहीं है तो गैर-जरूरी खर्चों पर नियंत्रण करें.
इससे राज्य आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगे.

इसका लोगों पर क्या असर होगा?
इसका असर लोगों पर भी पड़ेगा जैसे...

अगर राज्य आर्थिक तौर पर मजबूत होगा तो बेहतर सुविधाएं लोगों तक पहुंचेगी.
आर्थिक स्थिति मजबूत होने से सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं पर पहले से ज्यादा खर्च हो पाएगा.
राज्य को किसी प्रकार का लोन नहीं लेना पड़ेगा.
जरूरी विकास योजनाओं के लिए अच्छा-खासा पैसा उपलब्ध रहेगा.
आगे चलकर यह पैसा सरकारी कामों में मदद कर सकता है.

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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Old Currency: 50 और 100 रुपए के ये खास नोट बना देंगे करोड़पति! चेक करें अपना पर्स, बीवी की तिजोरी भी देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Old 50 and 100 rs Notes: कई लोगों को पुरानी चीजें यादों के रूप में इकट्ठा करने की आदत होती है. ऐसे ही कई लोग एक रिकॉर्ड बनाने के लिए भी कुछ चीजों का कलेक्शन बनाते हैं. जैसे अलग- अलग तरह के पेन, पत्ते, किताब, या फिर पुराने सिक्के या नोट. ऐसा कर लोग गिनीज बुक में भी अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुराने नोट या सिक्के जो अब बाजार में चलते भी नहीं हैं, उनका कलेक्शन रखने वाले घर बैठे- बैठे करोड़पति तक बन सकते हैं. आइये बताते हैं कैसे.
यूनिक नोटों की बढ़ रहीं मांगदरअसल इन दिनों पुराने और यूनिक नोटों की बाजार में काफी डिमांड है. जिसमें पुराने नोटों के साथ कुछ खास सीरियल नंबर भी लोग जमा करना पसंद करते हैं. जैसे कि 786 नंबर को काफी लकी माना जाता है, ऐसे में यदि किसी नोट के सीरियल नंबर के आखिर में 786 होता है तो वो रेयर नोट की गिनती में आ जाता है. ऐसे नोटों की मार्केट में भयंकर वैल्यू है.
ये भी पढ़ें: Electronic Market: रुक जाओ! सस्ते होंगे फोन-गैजेट्स, सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स पर हटाई कस्टम ड्यूटी, बचेंगे टैक्स के पैसे
पुराने नोट नया जमानाजमाने के साथ पुरानी चीजें भी बदल जाती हैं, ऐसे में समय के साथ- साथ नोट का रूप भी बदलता चला गया. 5 रुपये, 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये और 100 रुपये के पुराने नोट, जिनके सीरियल नंबर में आखिर में 786 या कोई और सीरियल नंबर जो लकी या यूनिक होता है, उसका क्रेज बाजार में काफी होता है. लेकिन ध्यान रहे कि पुराने नोट ही केवल इस सीरीज में पसंद किए जाते हैं.
50 रुपये का दबदबापुराने डिजाइन वाले 50 रुपये के नोट भी काफी पसंद किए जा रहे हैं. अगर ऐसा नोट बिल्कुल नया हो, उस पर कोई दाग, कट या ज्यादा मोड़ न हो और उसमें कोई प्रिंटिंग एरर भी ना हो या यूनिक सीरियल नंबर हो, तो उसकी कीमत हजारों रुपये से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, करोड़ों रुपये मिलने के दावे बहुत कम ही होता हैं, लेकिन होते जरूर हैं.
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कहां पर बेचें नोटआजकल बाजार में कई सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होते हैं, जो ऐसे खास पुराने नोटों को खरीदते हैं. अंगर आपके पास भी ऐसे यूनिक नोट हैं तो आप भी इन्हें बेंच सकते हैं और मोटी कमाई कर सकते हैं. कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं जहां इन्हें अपलोड करके सीधे पुराने नोट बेच सकते हैं. वहां नोट की फोटो अपलोड कर कीमत तय की जा सकती है और खरीदार से सीधे बात भी की जा सकती है. इससे पहले सही बाजार भाव जानना भी जरूरी है, क्योंकि कई बार बहुत ज्यादा कीमत मांगने पर खरीदार नहीं मिलते.
सावधानी भी बरतेंहालांकि सोशल मीडिया पर किए जाने वाले हर दावे को सही मानना बेवकूफी हो सकती है. ऐसी कई फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं जिनमें गलत प्रिंटिंग, अलग-अलग सीरियल नंबर या अन्य खास गलतियां होती हैं. लेकिन हर वायरल दावा सही नहीं होता. इसलिए किसी भी नोट की कीमत तय करने से पहले उसकी असलियत और बाजार में मांग जरूर चेक कर लेना चाहिए. इसके अलावा ऐसे लोगों पर भरोसा ना करें जो फोन- मैसेज कर तुरंत खरीदने या बहुत ज्यादा कीमत देने का दावा करे.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>आपको तो नहीं दे गया कोई 500 का नकली नोट, सिगरेट बेचने वाली महिला के एक कदम ने किया सबका भला</title>
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        <description><![CDATA[ Fake 500 Rupee Note: आज के समय में डिजिटल टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से तरक्की कर रही है, उतनी ही तेजी से ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं. नकली नोटों का कारोबार अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आमतौर पर कई लोगों को धोके से फर्जी नोट पकड़ा दिया जाता है. ऐसा ही एक मामला कर्नाटक के बेंगलुरु से सामने आया है, जहां एक दुकानदार महिला की सूझबूझ से 500 रुपये के नोटों का मामला उजागर हुआ है. ऐसे में अगर आपके पास भी 500 रुपये का नोट है, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले एक बार अच्छी तरह चेक जरूर कर लें.
क्या है पूरा मामला?
एक ग्राहक ने सिगरेट खरीदने के बाद महिला को 500 रुपये का नकली नोट थमा दिया. महिला को उस नोट पर शक हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कारवाई. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी और एक ऐसे आरोपी तक पहुंचे, जिस पर लंबे समय से बाजार में नकली नोट चलाने का आरोप था.
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पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान रुद्रेश के रूप में हुई है, जिसकी उम्र करीब 41 साल है. उस पर बेंगलुरु, तुमकुरु और आसपास के इलाकों में 500 रुपये के जाली नोट चलाने का आरोप है. जांच के दौरान जब पुलिस आरोपी के घर पहुंची, तो शुरुआत में वह नहीं मिला. लेकिन तलाशी लेने पर वह पलंग के नीचे बनी एक अलमारी में छिपा हुआ मिला. जिसके बाद पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर पूछताछ करना शुरू कर दिया.&amp;nbsp;
कैसे पहचानें 500 रुपये का असली नोट?

जब आप नोट को रोशनी में देखते हैं तो उसपर महात्मा गांधी की वॉटरमार्क तस्वीर और 500 की वॉटरमार्क दिखाई देती है.
सुरक्षा धागा (Security Thread) रंग बदलता है और उस पर भारत और RBI लिखा होता है.
जब आप नोट को तिरछा करेंगे तो उसपर 500 का अंक हरे से नीले रंग में बदलता हुआ दिखाई देगा.&amp;nbsp;
महात्मा गांधी की तस्वीर, अशोक स्तंभ और अन्य छपाई उभरी हुई होती है, जिसे छूकर महसूस किया जा सकता है.
पीछे की तरफ लाल किले की तस्वीर और स्वच्छ भारत का लोगो बना होना चाहिए.

Electronic Market: रुक जाओ! सस्ते होंगे फोन-गैजेट्स, सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स पर हटाई कस्टम ड्यूटी, बचेंगे टैक्स के पैसे
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol News: 20 रुपए सस्ता होगा ये वाला पेट्रोल, सरकार ने एथेनॉल पर बना लिया नया प्लान, हरदीप पुरी ने क्या बताया?</title>
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        <description><![CDATA[ E85 Fuel: पिछले कई दिनों से बाजार में एथेनॉल मिक्स पेट्रोल को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो रही हैं. एक तरफ सरकार इसका समर्थन कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसके खिलाफ भी नजर आ रहे हैं. जब से ये फ्यूल अनाउंस हुआ है तभी से इसमें कई नुख्स निकाले जा रहे हैं. अब इसी बीच सरकार की तरफ से E20 फ्यूल को लेकर सारी उड़ रही अफवाहों को खारिज कर दिया गया है.
क्या बोले पेट्रोलियम मिनिस्टरदरअसल हाल ही में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी न्यूज 18 के एक प्रोग्राम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर खुल बात की और हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. इसी दौरान उन्होंने 20% एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल यानी E20 को लेकर लोगों की चिंताओं को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि, &#039;E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की खबरें गलत हैं. ये योजना पर्यावरण को बेहतर बनाने और भारत की तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए शुरू की गई है&#039;.
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E85 लाने की तैयारी में सरकारइस दौरान ही मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E85 फ्यूल को लेकर भी बात की और बताया कि सरकार जल्दी ही इसे लाने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा, &#039;सरकार E85 पेट्रोल लाने की तैयारी कर रही है. इसमें 85% तक एथेनॉल होगा और इसकी कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम हो सकती है. हालांकि इसका इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) में ही किया जा सकेगा.
E25 की भी हो रही टेस्टिंगइतना ही नहीं बल्कि मंत्री हरदीर सिंह पुरी ने ये भी साफ किया कि E25 पेट्रोल अभी केवल टेस्टिंग लेवल पर ही है. इसे लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए. सरकार वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही आगे कोई फैसला करेगी. उन्होंने ये भी कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भी पूरा समर्थन देती है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहन, दोनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Petrol, News:, रुपए, सस्ता, होगा, ये, वाला, पेट्रोल, सरकार, ने, एथेनॉल, पर, बना, लिया, नया, प्लान, हरदीप, पुरी, ने, क्या, बताया</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission की मीटिंग में न्यूनतम बेसिक सैलरी पर बड़ा मंथन, सीधे 72000 होगा वेतन!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-की-मीटिंग-में-न्यूनतम-बेसिक-सैलरी-पर-बड़ा-मंथन-सीधे-72000-होगा-वेतन</link>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Kolkat Meeting: जबसे केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग को मंजूरी दी है, तभी से लगातार इसकी बैठकों का दौर जारी है. इन बैठकों में आठवें वेतनमान को लेकर लगातार चर्चा हो रही है. जिसमें फिटमेंट फैक्टर, पेंशनर्स से संबंधित चर्चा और अन्य ही कई मुद्दों को लेकर चर्चा हो रही है. हाल ही में एक बैठक गुरुवार यानी 9 जुलाई 2026 को कोलकाता में हुई. जिसमें भी ऐसे ही तमाम मुद्दों को लेकर सार्थक चर्चा चल रही है.
ये दो दिवसीय बैठक शुक्रवार 10 जुलाई 2026 तक चलने वाली है. इससे पहले आयोग ने भुवनेश्वर, दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख जैसे शहरों में भी ऐसी ही बैठक रखी थी, जहां पर कर्मचारियों के वेतन को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं हुई थीं. तो वहीं अब कोलकाता में चल रही इस बैठक पर कर्मचारियों की नजरें हैं, आइये बताते हैं इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
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8वें वेतन आयोग की कोलकाता मीटिंग में चर्चा के मुद्दे&amp;nbsp;8वें वेतन आयोग की इस बैठक में कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्य के वेतन, महंगाई भत्ते समेत पेंशनर्स की पेंशन को लेकर चर्चाजारी है. इस दौरान यहां मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा होने वाली है. जिनमें अहम मुद्दें इस प्रकार हैं:

कर्मचारी संगठन सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग कर रहा हैं. अभी 7वें वेतन आयोग में ये 2.57 था. जिसे बढ़ाकर इब 3.8 तक करने की मांग की जा रही है.
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने 4 गुना फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. इससे मिनिमम बेसिक सैलरी 72,000 रुपये हो सकती है.
वहीं नेशनल काउंसिल (JCM) स्टाफ साइड (NCJCM) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है.

बेसिक सैलरी भी बढ़ेगीयदि इस बैठक में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने पर मंजूरी मिल जाती है तो कर्मचारियों का बेसिक वेतन भी बढ़ेगा. फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, जिसे बढ़ाने की मांग की जा रही है. तो वहीं कई कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग भी उठा सकते हैं. हालांकि सरकार यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू कर चुकी है, लेकिन कई संगठन अभी भी OPS को दोबारा वापस लाना चाहते हैं.
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इस मुद्दों पर भी होगी चर्चाकेवल इतना ही नहीं बल्कि इस बैठक में अन्य कई मुद्दों पर भी चर्चा होगी जैसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बदलाव, एक जैसी महंगाई राहत (Dearness Relief), पेंशनर्स के लिए बेहतर मेडिकल सुविधाएं, MACP (Modified Assured Career Progression) योजना में सुधार आदि.
बैठक में होगा फैसला?कई लोगों को लग रहा है कि इस बैठक के बाद कोई फैसला आ जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं है, कोलकाता की बैठक में वेतन बढ़ाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं होगा. आयोग सिर्फ कर्मचारियों और संगठनों की राय और सुझाव ले रहा है. इन्हीं सुझावों के आधार पर बाद में अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Household Income: देश के इस शहर में है सबसे रईस लोग! घरेलू इनकम के मामले में तोड़े सारे रिकॉर्ड, मुंबई&amp;दिल्ली सब पीछे छूटे</title>
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        <description><![CDATA[ Household Income: मुंबई- दिल्ली जैसे भागदौड़ भरे शहर, जहां पर महंगाई भी ज्यादा है और लोगों की भीड़ भी ज्यादा है. इन शहरों में सर्वाइव करने के लिए घर के केवल एक सदस्य की कमाई ही काफी नहीं है, बल्कि पूरे परिवार को मिलकर इसमें हाथ बंटना चाहिए, और ऐसा होता भी है. लेकिन हाल ही में एक डाटा सामने आया है, जिसमें पता चला है कि मुंबई- दिल्ली नहीं बल्कि एक ऐसा शहर भी है जहां पर हाउसहोल्ड इनकम इन शहरों से भी ज्यादा है.&amp;nbsp;
कौन सा शहर है सबसे आगे?साल 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, औसत घरेलू आय यानी Household Income के मामले में बेंगलुरु ने दिल्ली और मुंबई को भी पछाड़ दिया है. देश में सबसे ज्यादा हाउसहोल्ड इनकम के मामले में बेंगलुरु टॉप पर है, जबकि देश की राजधानी दिल्ली तीसरे नंबर है तो वहीं मायानगरी कही जाने वाली मुंबई पांचवे नंबर है.
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Paytm के संस्थापक ने किया खुलासाये आंकड़े तब चर्चा में आए जब Paytm के संस्थापक ने एक पोस्ट शेयर की. विजय शेखर शर्मा ने अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में उन्होंने PRICE और Tata Sons की रिसर्च 2025-26 के आधार पर ये आंकड़े बताए हैं. पोस्ट के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, &#039;हर घर की हाउसहोल्ड इनकम में दिल्ली तीसरे, मुंबई पांचवे नंबर पर है. बेंगलुरु और चंडीगढ़ लिस्ट में टॉप पर हैं&#039;.

टॉप 5 शहरों की आय कितनी है?इस चार्ट के मुताबिक बेंगलुरु सबसे आगे है, यहां पर एक परिवार की औसत सालाना आय करीब 28 लाख रुपये है, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके साथ ही चंडीगढ़ भी लिस्ट में इसकी बराबरी पर ही है. दोनों शहरों की आय लगभग एक जैसी ही है, ऐसे में चंडीगढ़ इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है. तो वहीं दिल्ली करीब 26 लाख रुपये की औसत सालाना घरेलू आय के साथ तीसरे नंबर पर है. इसके बाद वडोदरा चौथे और मुंबई करीब 25 लाख रुपये की औसत आय के साथ पांचवें नंबर पर इस लिस्ट में है.
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कई शहरों की आय में कम है अंतरइस चार्ट के मुताबिक कई शहरों के बीच आय का अंतर बहुत कम है. जिसमें पुणे, तिरुवनंतपुरम, सूरत और हैदराबाद में औसत घरेलू आय करीब 22 लाख से 24 लाख रुपये सालाना है. तो वहीं कोयंबटूर में औसत आय लगभग 20 लाख रुपये है. वहीं अहमदाबाद, कोच्चि और चेन्नई में ये आंकड़ा करीब 19 लाख रुपये सालाना है.
इस रैंकिंग के मुताबिक तिरुप्पुर, जयपुर, लखनऊ, कोलकाता, मदुरै, रांची और छत्रपति संभाजीनगर जैसे छोटे शहर भी हैं. इन शहरों में औसत घरेलू आय करीब 15 लाख से 18 लाख रुपये सालाना के बीच है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 09:30:29 +0530</pubDate>
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        <title>Train Food: ट्रेन में सबसे ज्यादा कौनसा फूड ऑर्डर करते हैं लोग? Swiggy ने बताया, लिस्ट में शामिल हैं ये 5 चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ Swiggy Food on Train: कुछ ट्रेनों में खाना मिलता है जैसे शताब्दी, वंदे भारत, राजधानी आदि में, लेकिन इसके अलावा भी अब ट्रेन में खाने के कई सारे ऑप्शंस भी आ गए हैं. जैसे ऑनलाइन ऑर्डर का ऑप्शन, अब स्विगी ने भी ट्रेन में खाना डिलीवर करना शुरू कर दिया है. इसकी फऊड ऑन ट्रेन सर्विस का लोग काफी इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसके जरिए खाने- पीने की कुछ खास चीजें ऑर्डर की जाती हैं. जिनकी लिस्ट भी हाल ही में स्विगी इंडिया ने जारी की है.
जून में कितना हुआ खाना ऑर्डर?हाल ही में स्विगी की एक रिपोर्ट जारी हुई है, जिसमें बताया गया है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच उनकी &#039;फूड ऑन ट्रेन&#039; सेवा की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान ट्रेन में खाने के ऑर्डर पिछले साल की अपेक्षा तीन गुना बढ़ गए. कंपनी के मुताबिक, गर्मियों की छुट्टियों में ज्यादा लोगों ने ट्रेन से यात्रा की, जिससे इस सेवा का इस्तेमाल भी बढ़ा. कई यात्रियों ने एक ही टिकट (PNR) पर दो या उससे ज्यादा स्टेशनों के लिए खाना ऑर्डर किया. ऐसे ऑर्डर पिछले साल के मुकाबले 300% से ज्यादा बढ़े. इन यात्रियों ने एक स्टेशन पर ऑर्डर करने वालों की तुलना में करीब 2.2 गुना ज्यादा खर्च किया.
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क्या हुआ सबसे ज्यादा ऑर्डर?गर्मी के मौसम में ठंडी ड्रिंक्स और स्वीट्स की मांग भी काफी बढ़ी. सॉफ्ट ड्रिंक के ऑर्डर 354%, आइसक्रीम के ऑर्डर 140% और लस्सी के ऑर्डर दोगुने हो गए. वहीं, मैंगो शेक सबसे पसंदीदा समर ड्रिंक रहा, जिसकी मांग सर्दियों के मुकाबले लगभग 10 गुना बढ़ गई. खाने की बात करें तो गर्मियों में Swiggy के जरिए 4 लाख से ज्यादा रोटियां ऑर्डर की गईं. रोटी सबसे ज्यादा ऑर्डर किया जाने वाला फूड आइटम रही. इसके बाद मसाला डोसा, आलू पराठा और मैक आलू टिक्की बर्गर का नंबर रहा. नॉन-वेज में चिकन बिरयानी सबसे ज्यादा पसंद की गई.
नए रेलवे स्टेशन जुड़ेइतना ह नहीं कंपनी ने इस तिमाही में 17 नए रेलवे स्टेशनों को भी अपनी इस सर्विस से जोड़ा है. इन स्टेशनों में गुरुग्राम, उदयपुर, बीकानेर, नांदेड़ और निजामाबाद भी शामिल हैं. इसके अलावा कंपनी ने अपनी ये सर्विस देश के 180 से ज्यादा शहरों तक पहुंचा दी है. कई यात्रियों ने अपनी यात्रा शुरू होने से चार दिन पहले ही खाना बुक कर लिया.
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ऐसे कर सकते हैं खाना बुकअगर आपने भी अब तक इस सर्विस का लाभ नहीं उठाया है तो अब भी मौका है, ये बेहद आसान है. अगर आने वाले समय में आप यात्रा करने वाले हैं तो यात्रा से पहले भी स्विगी की ऐप पर &#039;Scan Your Ticket&#039; नाम का नया फीचर है, इसके लिए अपने रेलवे टिकट को स्कैन करके PNR अपने-आप जोड़ सकते हैं, जिससे खाना ऑर्डर करना और आसान हो जाएगा.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 09:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Rate: ट्रंप की धमकी से क्रूड ऑयल में उबाल, क्या अब पेट्रोल&amp;डीजल के बढ़ेंगे रेट? जानें आज कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-rate-ट्रंप-की-धमकी-से-क्रूड-ऑयल-में-उबाल-क्या-अब-पेट्रोल-डीजल-के-बढ़ेंगे-रेट-जानें-आज-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate Today on July 9: अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के चलते बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6% का उछाल आया. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.58 डॉलर या 6.09% बढ़कर 78.66 डॉलर प्रति बैरल हो गए, जबकि U.S. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 4.22 डॉलर या 6% की तेजी के साथ 74.65 डॉलर प्रति बैरल हो गया. ये दोनों ही बेंचमार्क 23 जून के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं. ऐसे में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने की उम्मीदें भी कम हो गई हैं, जो हाल में कच्चे तेल में आई गिरावट के बाद जगी थी.&amp;nbsp;
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 25 मई के बाद से स्थिर बनी हुई है. आखिरी बार &amp;nbsp;सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर 102.12 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है, जबकि डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.&amp;nbsp;
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली&amp;nbsp;
&amp;nbsp;102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई&amp;nbsp;
111.21 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
99.82 रुपये


अहमदाबाद
101.70 रुपये
97.84 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


पटना&amp;nbsp;
113.35 रुपये
&amp;nbsp;99.36 रुपये


लेह
109.81 रुपये
97.92 रुपये


तिरुवनंतपुरम
115.49 रुपये&amp;nbsp;
104.40 रुपये


पुणे&amp;nbsp;
111.52 रुपये
98.15 रुपये



तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
अमेरिकी रष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्की के अंकारा में चल रहे नाटो (NATO)&amp;nbsp; समिट के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए ईरान के साथ सीजफायर खत्म होने की बात कही. उन्होंने कहा, &#039;&#039;मेरे हिसाब से यह सीजफायर अब खत्म हो चुका है.&#039;&#039; उन्होंने जून में अमेरिका-ईरान के बीच हस्ताक्षरित शांति समझौते को लेकर कहा कि ईरान से बात करना पूरी तरह से समय की बर्बादी है. ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने और होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए तेल की सप्लाई रुकने का डर फिर से सताने लगा है. यही वजह है कि कल एकाएक तेल की कीमतें बढ़ गईं.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ता है क्योंकि इनके लिए आयात महंगा हो जाता है. वैश्विक बाजार में अगर इसी रफ्तार से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती रहीं और लंबे समय तक 80 डॉलर के पार बनी रही, तो आने वाले दिनों में भारत में भी घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं.&amp;nbsp;

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Petrol-Diesel: अमेरिका का एक फैसला भारत में सस्ता करा सकता है पेट्रोल-डीजल! ईरान से भी है कनेक्शन&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 09:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Rate:, ट्रंप, की, धमकी, से, क्रूड, ऑयल, में, उबाल, क्या, अब, पेट्रोल-डीजल, के, बढ़ेंगे, रेट, जानें, आज, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate Today: 14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर का आज क्या चल रहा भाव? चेक करें दिल्ली से पटना तक के रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-142-किलो-वाले-गैस-सिलेंडर-का-आज-क्या-चल-रहा-भाव-चेक-करें-दिल्ली-से-पटना-तक-के-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-142-किलो-वाले-गैस-सिलेंडर-का-आज-क्या-चल-रहा-भाव-चेक-करें-दिल्ली-से-पटना-तक-के-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Rate Today on July 9: भारत में आज 9 जुलाई, गुरुवार को घरेलू रसोई गैस और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस की कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर और 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर का रेट 2930 रुपये है. कल अंतर्राष्ट्रीय बाजारा में कच्चे तेल की कीमतों में 6% के भारी उछाल के बाद आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में तेल कंपनियां गैस की कीमतों की दोबारा समीक्षा कर सकती हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
शहरवार LPG की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
942.0 रुपये
2930.0 रुपये


मुंबई
941.5 रुपये
2885.5 रुपये


कोलकाता
968.0 रुपये
3082.0 रुपये


चेन्नई
957.5 रुपये
3106.0 रुपये


चंडीगढ़
951.5 रुपये
2954.5 रुपये&amp;nbsp;


देहरादून
961.0 रुपये
2983.5 रुपये


हैदराबाद
934.0 रुपये
2052.5 रुपये


गाजियाबाद/नोएडा
968.0 रुपये
3115.0 रुपये


तिरुवनंतपुरम
&amp;nbsp;939.50 रुपये
2930.00 रुपये



क्या गैस सिलेंडर के बढ़ेंगे दाम?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम पर सवाल उठाए जाने के बाद बुधवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5.2% बढ़कर 78.02 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई और कारोबार के दौरान कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गई. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की बेंचमार्क कीमतों में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव का असर भारत में घरेलू ईंधन की कीमतों पर पड़ता है.&amp;nbsp;
कमर्शियल गैस की कीमतों की समीक्षा सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, HPCL, BPCL) समय-समय पर करती हैं. अगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कीमतों पर दबाव बढ़ता है, तो 1 जुलाई को 183.50 रुपये की राहत अगली समीक्षा में वापस ली जा सकती है. जहां तक रही घरेलू गैस की बात, तो सरकार इसे हर तरह से स्थिर रखने की कोशिश करती है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और अंडर रिकवरी लगातार बढ़ती रहीं, तो सरकार को मजबूरन इसकी भी कीमतें बढ़ानी पड़ती है. &amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 09:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
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        <title>Gold&amp;Silver Rate Fall: ईरान&amp;अमेरिका में तनाव के बीच सस्ता हुआ सोना, चांदी में भी गिरावट; जानें लेटेस्ट कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-fall-ईरान-अमेरिका-में-तनाव-के-बीच-सस्ता-हुआ-सोना-चांदी-में-भी-गिरावट-जानें-लेटेस्ट-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-fall-ईरान-अमेरिका-में-तनाव-के-बीच-सस्ता-हुआ-सोना-चांदी-में-भी-गिरावट-जानें-लेटेस्ट-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today on July 9: आज भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. COMEX (Commodity Exchange) पर भले ही सोना बिना किसी बदलाव के आज 4804.70 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है. इससे पता चलता है कि&amp;nbsp; अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव का कीमतों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ा है. हालांकि, घरेलू स्तर पर कीमतों मेें गिरावट आई है.
आज कितनी है सोने की कीमत?
आज देश के सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,43,890 रुपये है, जो कल के मुकाबले 1.18% की गिरावट को दर्शाता है. कल&amp;nbsp; 24 कैरेट सोने की कीमत 1,45,600 के आसपास थी. इसी तरह से आज 22 कैरेट सोने की कीमत 1,31,803 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो कल के 1,33,377 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 1574 रुपये कम है. यानी कि प्रति ग्राम कीमतों में 157 रुपये की गिरावट आई है. आज 18 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 1,07,917.5 रुपये है, जबकि कल कीमत इससे 1288 रुपये ज्यादा 1,09,206.13 रुपये थी.&amp;nbsp;
शहरवार सोने की कीमतें



शहर
24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम)
22 कैरेट सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम)


दिल्ली
1,43,650 रुपये
1,31,680 रुपये


मुंबई
1,44,090 रुपये
1,31,940 रुपये


कोलकाता
1,44,090 रुपये
1,32,000 रुपये


चेन्नई
1,44,450 रुपये
1,32,350 रुपये


बेंगलुरु
1,44,090 रुपये
1,31,940 रुपये


हैदराबाद
1,44,150 रुपये
1,32,000 रुपये


अहमदाबाद
1,44,090 रुपये
1,31,940 रुपये



चांदी की आज कीमतें
वैश्विक बाजार में आज चांदी कल के मुकाबले 0,26% की मामूली बढ़त के साथ 58.69 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रही है. भारतीय बाजारों में कल के मुकाबले 3.35% की गिरावट के साथ चांदी 2.29 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है. इससे पहले भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच चांदी रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई थी, लेकिन अब कीमतों में वापस से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही है. &amp;nbsp;
सोने-चांदी में गिरावट का अमेरिका से कनेक्शन
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के टूटने और मिडिल ईस्ट में तनाव दोबारा बढ़ने की स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 5% से ज्यादा उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. तेल महंगा होने से वैश्विक बाजारों में महंगाई बढ़ने का डर बना रहेगा, जिसे काबू में लाने के लिए अमेरिकी फेड रिजर्व (US Fed) को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेगी. इससे निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड में लगाने लगेंगे, जिससे कीमती धातुओं की डिमांड कम होंगी और कीमतें गिरेंगी.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 09:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Rate, Fall:, ईरान-अमेरिका, में, तनाव, के, बीच, सस्ता, हुआ, सोना, चांदी, में, भी, गिरावट, जानें, लेटेस्ट, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>DA Hike: सरकार ने बढ़ा दिया DA, जानिए अब हर महीने अकाउंट में कितनी बढ़कर आएगी सैलरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-सरकार-ने-बढ़ा-दिया-da-जानिए-अब-हर-महीने-अकाउंट-में-कितनी-बढ़कर-आएगी-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ DA Hike News: केरल में ओणम (Onam 2026) से पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए 2% DA Hike का ऐलान किया गया है. डीए में की गई इस बढ़ोतरी का फायदा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा. बताया जा रहा है कि सरकार ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है और बढ़े हुआ डीए कर्मचारियों को अगस्त 2026 की सैलरी के साथ मिलने लगेगा.&amp;nbsp;
सरकार दे रही ओणम का तोहफा
ओणम का त्योहार इस साल अगस्त के आखिरी हफ्ते में मनाया जाना है. त्योहार से पहले कर्मचारियों को वित्तीय राहत देने के लिए इस किस्त को मंजूरी दिए जाने की बात कही जा रही है. सरकारी कर्मचारियों के लिए डीए में 2% बढ़ोतरी के प्रस्ताव की आंतरिक तैयारी पूरी हो चुकी है और बहुत जल्द इस पर आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा. इससे पहले, फरवरी 2026 में केरल सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए डीए में 10% की भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया था, जिसका लाभ मार्च की सैलरी के साथ मिलने लगा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?
डीए का कैलकुलेशन हमेशा बेसिक सैलरी के आधार पर किया जाता है. मान लीजिए कि अगर किसी की बेसिक सैलरी 30000 रुपये है, तो 2% हाइक के हिसाब से सैलरी में हर महीने 600 रुपये का इजाफा होगा. इसी तरह से अगर किसी की सैलरी 50000 रुपये है, तो उसे अब महीने 1000 रुपये बढ़कर मिलेंगे. हालांकि, डीए में 2% की बढ़ोतरी के चलते राज्य सरकार पर अतिरिक्त 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.&amp;nbsp;
केंद्रीय कर्मचारियों का भी बढ़ा DA
केरल में सरकार ने यह फैसला वित्त मंत्रालय द्वारा इस साल 1 जनवरी से DA और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी के बाद लिया है. इसके चलते बेसिक पे पहले के 58% से बढ़कर 60% हो गया है. DA में बदलाव ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आधार पर हर छह महीने में किया जाता है. DA Hike को लेकर ऐलान आमतौर पर मार्च और अक्टूबर में किया जाता है, जबकि इसे लागू जनवरी और जुलाई में किया जाता है.&amp;nbsp;
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ने के बाद इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने भी &amp;nbsp;मई, जून और जुलाई 2026 के लिए सभी स्तरों के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए संशोधित DA और DR का ऐलान किया. इससे उनकी बेसिक सैलरी में 48,000 से 1,17,000 तक और DA में 435 से 1,050 रुपये तक का इजाफा हुआ.

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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hike:, सरकार, ने, बढ़ा, दिया, DA, जानिए, अब, हर, महीने, अकाउंट, में, कितनी, बढ़कर, आएगी, सैलरी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Flight Ticket: पसंदीदा सीट के लिए मोटी रकम दे रहे लोग, क्या है कम्फर्ट Tax जो खाली कर रहा जेब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/flight-ticket-पसंदीदा-सीट-के-लिए-मोटी-रकम-दे-रहे-लोग-क्या-है-कम्फर्ट-tax-जो-खाली-कर-रहा-जेब</link>
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        <description><![CDATA[ Flight Seat Charges: आप भी जब फ्लाइट की टिकट लेते होंगे तो विंडो सीट या आगे की सीट के लिए अलग से पैसे देते ही होंगे. ब्रिटेन में तो काफी ज्यादा लोग अपनी फेवरेट सीट लेने के लिए एक्स्ट्रा पैसे दे रहे हैं. डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म Numan की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीट को लेकर बढ़ रही चिंता की वजह से लोग न सिर्फ ज्यादा पैसे दे रहे हैं, बल्कि कई बार ट्रैवल करने का प्लान तक कैंसल कर देते हैं. इसी ट्रेंड को अब कंफर्ट टैक्स का नाम दिया जा रहा है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, कई यात्री सिर्फ इस डर से कि उन्हें बीच वाली सीट न मिल जाए या परिवार से अलग न बैठना पड़े. ऐसे में फिर लोग टिकट बुकिंग के दौरान ही सीट चुनने के लिए एक्स्ट्रा पैसे चुका रहे हैं. एयरलाइंस के लिए यह कमाई का बड़ा जरिया बनता जा रहा है, जबकि यात्रियों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.
क्या है कंफर्ट टैक्स?कंफर्ट टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है. ये वो एक्स्ट्रा पैसे हैं जो यात्री अपनी सुविधा के लिए खुद खर्च करते हैं. जैसे विंडो सीट, एक्स्ट्रा लेगरूम, फ्रंट रो या परिवार के साथ बैठने के लिए सीट चुनना.
क्या पेट्रोल में एथेनॉल की तरह सीएनजी में भी मिलावट हो सकती है, आपको क्या जानना जरूरी है?
रिपोर्ट में क्या सामने आया?ब्रिटेन में किए गए सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग सीट को लेकर तनाव महसूस करते हैं. कई लोग एक्स्ट्रा पैसे देकर अपनी पसंद की सीट बुक करते हैं, जबकि कुछ लोग सीट को लेकर असहज महसूस होने पर यात्रा टालने तक का फैसला कर लेते हैं. यही वजह है कि सीट को लेकर बढ़ती चिंता और कंफर्ट टैक्स जैसे शब्द तेजी से चर्चा में हैं.
भारत में बढ़ रहा है ट्रेंड-
भारत में भी इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट जैसी ज्यादातर एयरलाइंस पसंदीदा सीट चुनने के लिए अलग से पैसे लेती हैं. खासकर विंडो सीट, आगे की सीट और ज्यादा लेगरूम वाली सीट के लिए यात्रियों को ज्यादा ही पैसे अलग से देने पड़ते हैं. ऐसे में कई भारतीय यात्री भी जाने- अनजाने में कंफर्ट टैक्स चुका रहे हैं.
ट्रंप की हुंकार से शेयर बाजार का हुआ बुरा हाल, 1800 अंक लुढ़का सेंसेक्स; निफ्टी भी 493 अंक नीचे
सीट बुक करते समय कैसे बचाएं पैसे?

जल्दी ऑनलाइन चेक-इन करें
अगर किसी खास सीट की जरूरत नहीं है, तो ऑटो-सीट अलॉटमेंट चुनें
टिकट बुक करते समय सीट चुनने के पैसे पहले ही देख लें
सिर्फ जरूरत होने पर ही पेड सीट चुनें

कंफर्ट टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं, बल्कि आपकी सुविधा की कीमत है. अगर सही प्लानिंग की जाए, तो इस एक्स्ट्रा खर्च से बचा भी जा सकता है.
उधर अमेरिका ने दागी मिसाइल, इधर कच्चे तेल में लगी आग; मिडिल ईस्ट में टेंशन से 6% उछला क्रूड ऑयल ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Flight, Ticket:, पसंदीदा, सीट, के, लिए, मोटी, रकम, दे, रहे, लोग, क्या, है, कम्फर्ट, Tax, जो, खाली, कर, रहा, जेब</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Share Market Crash: अमेरिका&amp;ईरान तनाव फिर ले डूबा शेयर बाजार, 8 लाख करोड़ एक झटके में स्वाहा! मार्केट क्रैश से सहमे निवेशक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/share-market-crash-अमेरिका-ईरान-तनाव-फिर-ले-डूबा-शेयर-बाजार-8-लाख-करोड़-एक-झटके-में-स्वाहा-मार्केट-क्रैश-से-सहमे-निवेशक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/share-market-crash-अमेरिका-ईरान-तनाव-फिर-ले-डूबा-शेयर-बाजार-8-लाख-करोड़-एक-झटके-में-स्वाहा-मार्केट-क्रैश-से-सहमे-निवेशक</guid>
        <description><![CDATA[ Share Market Crash Reasons: मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक बार फिर से ईरान और अमेरिका के बीच का युद्ध शुरू हो गया. रातभर दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले हुए और युद्धविराम खत्म हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप ने भी एक समिट के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम खत्म हो गया. इसी के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सीधे 6 प्रतिशकत का उछाल आया. इतनी ही नहीं बल्कि शेयर बाजार पर भी इसका गहरा असर पड़ा है. BSE सेंसेक्स और निफ्टी 50 के अंकों में भारी गिरावट आई है. आइये जानते हैं ऐसा क्यों?
शेयर बाजार का हालबुधवार की सुबह NIFTY50 24,259 अंक पर खुला और दोपहर करीब ढाई बजे 500 अंकों की गिरावट के साथ 23,897 पर बंद हुआ. तो वहीं सेंसेक्स का हाल भी बेहाल रहा, ये सुबह के वक्त 77,816 पर खुला और दोपहर में 76,302.46 तक गिर गया. इसी के साथ आखिर में ये 1900 अंक पर बंद हुआ. जिससे निवेशकों के बीच भी डर का माहौल देखने को मिल रहा है.
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निवेशकों का हुआ भारी नुकसानBSE के डाटा के मुताबिक शेयर बाजार में आई इस गिरावट से BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये तक घट गया. मंगलवार को ये 480 लाख करोड़ रुपये था, जो बुधवार को घटकर 472 लाख करोड़ रुपये रह गया. इसका सबसे ज्यादा असर तेल- गैस, ऑटो, एफएमसीजी, तेल कंपनियों आदि सेक्टरों पर पड़ा है.
भारतीय स्टॉक मार्केट के गिरने की वजह?आज यानी 8 जुलाई 2026 बुधवार को स्टॉक मार्केट में गिरावट क्यों आई? ये एक बड़ा सवाल ह. वैसे तो ईरान- यूएस युद्ध इसकी सबसे बड़ी वजह है, लेकिन ये अकेली ही वजह नहीं है. यहां आपको बताते हैं उन 5 वजहों के बारे में जो आज के शेयर बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह हैं.

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. दोनों देशों के बीच दोबारा शुरू हुए युद्ध के कारण दुनियाभर के शेयर बाजारों पर इसका असर पड़ा है.
कच्चे तेल की कीमतों में भी युद्ध के कारण इजाफा हुआ है, और भारत दुनिया में कच्चे तेल का बड़ा आयातक है. ये भी शेयर बाजार क्रेश होने की एक बड़ी वजह है.
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. ऐसे में कंपनियों के अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे कमजोर रहने की आशंका है. इसी डर से निवेशक पहले से ही शेयर बेच रहे हैं.
विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. रुपये की कमजोरी और बढ़ते जोखिम के कारण विदेशों से होने वाला निवेश अब कम हो रहा है.
रुपये के कमजोर होने और बढ़ते जोखिम की वजह से निवेशकों में डर बैठ गया है. जिसका असर इंडिया VIX पर भी दिखा, जो बुधवार को 5% से ज्यादा बढ़ गया.

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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Market, Crash:, अमेरिका-ईरान, तनाव, फिर, ले, डूबा, शेयर, बाजार, लाख, करोड़, एक, झटके, में, स्वाहा, मार्केट, क्रैश, से, सहमे, निवेशक</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>वेज हो या नॉन&amp;वेज, दोनों थालियां हुईं महंगी, महंगाई से 5 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा खाने का खर्च</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वेज-हो-या-नॉन-वेज-दोनों-थालियां-हुईं-महंगी-महंगाई-से-5-महीने-के-रिकॉर्ड-स्तर-पर-पहुंचा-खाने-का-खर्च</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/वेज-हो-या-नॉन-वेज-दोनों-थालियां-हुईं-महंगी-महंगाई-से-5-महीने-के-रिकॉर्ड-स्तर-पर-पहुंचा-खाने-का-खर्च</guid>
        <description><![CDATA[ Kitchen Budget: अगर इन दिनों आपको भी यह महसूस हो रहा है कि आपकी रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है तो यह सिर्फ आपको नहीं लग रहा है, बल्कि ताजा आंकड़े भी यही बताते हैं. जून 2026 में घर पर बनने वाले खाने की बजट में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, खासकर शाकाहारी और नॉन-वेज दोनों तरह की थालियों में. पिछले 5 महीनों में यह पहली बार है जब दोनों की लागत पहले के मुकाबले और ज्यादा महंगी हो गई है.&amp;nbsp;
घर की रसोई का खर्च बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने के तेल, एलपीजी सिलेंडर और ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में आई तेजी है. क्रिसिल इंटेलिजेंस की मासिक &#039;रोटी-राइस रेट&#039; रिपोर्ट के मुताबिक, जून में एक शाकाहारी थाली की कीमत 28.4 पहुंच गई, जबकि मई में यह 27.4 रुपये थी. वहीं, नॉन-वेज थाली की औसत कीमत जून में 58.2 रुपये दर्ज की गई है, जो मई में 56.5 रुपये थी.
नॉन-वेज थाली क्यों हुई महंगी?

नॉन-वेज थाली की कीमत बढ़ने का कारण ब्रॉयलर चिकन के दाम में आई तेजी है.
पिछले साल के मुकाबले ब्रॉयलर चिकन की कीमत करीब 7% बढ़ी है, जबकि एक महीने में इसमें करीब 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
क्रिसिल के मुताबिक, नॉन-वेज थाली की कुल कीमत में सबसे बड़ा हिस्सा ब्रॉयलर चिकन का होता है.
यही वजह है कि इसकी कीमत बढ़ने से पूरी थाली महंगी हो गई.

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किन वजहों से बढ़ा रसोई का खर्च?

बाजार में महंगा रबी स्टॉक आने से प्याज की कीमत करीब 2% बढ़ी.
खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में करीब 10-10% की बढ़ोतरी.&amp;nbsp;
एक साल में टमाटर की कीमत करीब 31% बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो हो गई.
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा.
मई के मुकाबले जून में टमाटर 17%, प्याज 8% और आलू 5% महंगे हुए.&amp;nbsp;
नई रबी फसल आने से सालाना आधार पर आलू की कीमत 14% घटी, जिससे लागत में कुछ हद तक राहत मिली.

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 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वेज, हो, या, नॉन-वेज, दोनों, थालियां, हुईं, महंगी, महंगाई, से, महीने, के, रिकॉर्ड, स्तर, पर, पहुंचा, खाने, का, खर्च</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Richest Cities List: कमाने में बेंगलुरु&amp;दिल्ली नंबर&amp;1 तो उड़ाने में चंडीगढ़ आगे, देश के सबसे अमीर शहरों की लिस्ट देख लो</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/richest-cities-list-कमाने-में-बेंगलुरु-दिल्ली-नंबर-1-तो-उड़ाने-में-चंडीगढ़-आगे-देश-के-सबसे-अमीर-शहरों-की-लिस्ट-देख-लो</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/richest-cities-list-कमाने-में-बेंगलुरु-दिल्ली-नंबर-1-तो-उड़ाने-में-चंडीगढ़-आगे-देश-के-सबसे-अमीर-शहरों-की-लिस्ट-देख-लो</guid>
        <description><![CDATA[ Income of Top Cities in India: भारत में कई बड़े- छोटे शहर हैं, हर शहर की अपनी क्षमता के हिसाब से खर्च करने की और कमाई की क्षमता है. जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में लोगों को खबह अच्छी सैलरी मिलती है. तो ऐसे में इन शहरों में लोगों के खर्च भी इनकम के हिसाब से ही हैं. हाल ही में इसे लेकर अर्बन इंडियाज की एक रिपोर्ट भी सामने आई है. जिसमें बताया गया है कि कौन सा शहर सबसे ज्यादा खर्चीला है और कौन सा शहर कमाई में सबसे आगे हैं.
नई रिपोर्ट में क्या आया?दरअसल हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया ने डेटा एनालिटिक्स कंपनी PRICE और टाटा संस की एक रिपोर् निकाली है. जिसमें इन शहरों से जुड़ा डाटा बताया गया है. &#039;Many Urban Indias&#039; के मुताबिक, देश के 6 बड़े शहर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद मिलकर भारत की कुल खपत का 46% हिस्सा रखते हैं. शहरी इलाकों की कुल खपत में इन शहरों की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है.
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दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट पर ही होते हैं अरबों खर्चदिल्ली-एनसीआर देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बनकर सामने आया है. यहां सालाना खपत करीब 126 अरब डॉलर है. इसका मुख्य कारण यहां की बड़ी आबादी है. दिल्ली-एनसीआर में लगभग 75 लाख परिवार रहते हैं. दिल्ली-एनसीआर के परिवार केवल ट्रांसपोर्ट पर ही हर साल 33 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करते हैं.
मुंबई- पुणे का हालतो वहीं मुंबई में करीब 46 लाख परिवार हैं. ये खर्च पुणे या अहमदाबाद जैसे शहरों के पूरे उपभोक्ता बाजार से भी ज्यादा है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि देश के टॉप 100 शहरों में भारत की 20% से भी कम आबादी रहती है, लेकिन ये शहर देश की एक-तिहाई से ज्यादा आय कमाते हैं और कुल खपत का 31% हिस्सा रखते हैं.
इस रिपोर्ट में इन शहरों को चार अलग- अलग ग्रुप्स में बांटा गया है. जो इस प्रकार हैं:

Big Six: 1 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले शहर, जिनकी औसत सालाना आय करीब 23 लाख रुपये होगी.
Boomtowns: अहमदाबाद, जयपुर, सूरत और पुणे जैसे शहर, जिनकी औसत आय 17 लाख रुपये होगी.
Breakout Cities: 15 से 25 लाख आबादी वाले शहर, जिनकी औसत आय 14 लाख रुपये होगी.
Frontier Cities: 5 से 15 लाख आबादी वाले शहर, जिनकी औसत आय 12 लाख रुपये होगी.

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मिडिल क्लास परिवारइस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 सालों में 6 लाख से 36 लाख रुपये सालाना कमाने वाले मिडिल क्लास परिवारों की हिस्सेदारी 29% से बढ़कर 53% हो गई है. 2030 तक ये बढ़कर 60% हो सकतीहै. इस मामले में हैदराबाद सबसे आगे है.
हाई इनकम वाले परिवारवहीं 36 लाख रुपये से ज्यादा सालाना कमाने वाले हाई-इनकम परिवारों की हिस्सेदारी भी 3% से बढ़कर 12% हो गई है. साल 2030 तक ये आंकड़ा करीब 20% तक पहुंच सकता है. अभी इस वर्ग में दिल्ली, मुंबई और पुणे आगे हैं, जबकि रायपुर, थूथुकुडी और कन्नूर जैसे शहरों में हाई-इनकम और मिडिल-इनकम परिवारों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ रही है.
इस रिपोर्ट में ये भी अंदाजा लगाया गया है कि 1.5 लाख रुपये से कम सालाना कमाई वाले परिवारों की संख्या साल 2030 तक टॉप 100 शहरों में लगभग खत्म हो जाएगी और उनकी हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 0.3% रहने की संभावना होगी.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Richest, Cities, List:, कमाने, में, बेंगलुरु-दिल्ली, नंबर-1, तो, उड़ाने, में, चंडीगढ़, आगे, देश, के, सबसे, अमीर, शहरों, की, लिस्ट, देख, लो</media:keywords>
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        <title>Explained: जून 2026 में 3.6 लाख EV गाड़ियां बिकीं! जबकि पूरे देश में सिर्फ 27 हजार चार्जिंग स्टेशन, क्या बढ़ेगा &amp;apos;चार्जिंग संकट&amp;apos;?</title>
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        <description><![CDATA[ जून 2026 का महीना भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक रहा. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, पूरे देश में कुल 25,57,234 वाहनों की रिटेल बिक्री हुई, जो पिछले साल जून के मुकाबले 21.83 फीसदी ज्यादा है. यह जून महीने का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, लेकिन असली हैरान करने वाली बात EV सेगमेंट में है. टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल की कुल EV रिटेल बिक्री 3,06,220 यूनिट तक पहुंच गई. यह किसी भी महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है और EV की कुल पैठ 12.5 फीसदी तक जा पहुंची हैं. लेकिन सवाल यही है कि इतनी सारी EV गाड़ियां कहां चार्ज होंगी...
जून में रिकॉर्ड बिक्री के आंकड़े क्या कहते हैं?
FADA के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल (कार और SUV) सेगमेंट में EV कारों की रिटेल बिक्री रिकॉर्ड 31,823 यूनिट रही. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह कि पहली बार CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कुल हिस्सेदारी 40.35 फीसदी तक पहुंच गई. यानी जून में बिकने वाली हर पांच में से दो कार या तो CNG थी, हाइब्रिड थी या फिर पूरी तरह इलेक्ट्रिक.
CNG की हिस्सेदारी 24.33 फीसदी, हाइब्रिड की 8.27 फीसदी और EV की 7.75 फीसदी रही. पिछले साल जून में यही आंकड़ा 33.3 फीसदी था. पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी पहली बार 60 फीसदी से नीचे आ गई.
EV टू-व्हीलर की हिस्सेदारी पहली बार 10.60 फीसदी तक पहुंची. पिछले साल जून में यह 7.34 फीसदी थी. थ्री-व्हीलर सेगमेंट तो पहले से ही EV की तरफ झुका हुआ था, लेकिन अब EV की हिस्सेदारी 64.08 फीसदी तक जा पहुंची. कमर्शियल व्हीकल में भी EV की पैठ रिकॉर्ड 3.5 फीसदी तक पहुंच गई.
FADA के प्रेसिडेंट सीएस विग्नेश्वर ने कहा कि शहर हो या गांव, हर जगह डिमांड बढ़ रही है. ग्रामीण बाजार शहरी बाजार से भी तेजी से बढ़ रहा है. जून में ग्रामीण बिक्री 35.1 फीसदी बढ़ी, जबकि शहरी बिक्री 24.7 फीसदी.
चार्जिंग स्टेशनों का गणित: आंकड़े, राज्य और हकीकत
सरकार ने राज्यसभा में 1 मार्च 2026 तक के आंकड़े पेश किए देशभर में 27,737 पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं. लेकिन इनमें से 22,753 ही ऑपरेशनल हैं. यानी करीब 5,000 चार्जिंग स्टेशन या तो खराब पड़े हैं या चालू नहीं हो पाए हैं.
इसके अलावा FAME-II स्कीम के तहत 9,332 चार्जिंग स्टेशन मंजरू किए गए थे. 1 मार्च 2026 तक इनमें से सिर्फ 6,645 ऑपरेशनल थे. यानी FAME-II के तहत भी करीब 2,700 स्टेशन अभी भी कागजों में या बंद पड़े हैं.
राज्यवार आंकड़े भी दिलचस्प हैं. FAME-II के तहत सबसे ज्यादा 957 चार्जर तमिलनाडु में लगे. इसके बाद उत्तर प्रदेश (937) और महाराष्ट्र (670) हैं. लेकिन ऑपरेशनल होने की बात करें तो महाराष्ट्र ने 670 में से 615 चालू किए, जबकि उत्तर प्रदेश ने 937 में से सिर्फ 456.
JMK रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक देशभर में 29,151 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन थे. इनमें कर्नाटक अकेले 6,096 स्टेशनों के साथ 20.91 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. महाराष्ट्र 4,166 स्टेशनों (14.29 फीसदी) के साथ दूसरे नंबर पर है, तमिलनाडु 1,780 और तेलंगाना 1,062 स्टेशनों के साथ है. यानी दक्षिण के तीन राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना मिलकर देश के 30 फीसदी से ज्यादा पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर कब्जा जमाए हुए हैं.
दरअसल, बात सिर्फ संख्या की नहीं है. फास्ट चार्जर की कमी एक बड़ी समस्या है. देश में 50kW+ के फास्ट चार्जर करीब 20 फीसदी से भी कम हैं. मतलब ज्यादातर चार्जर धीमे (स्लो) हैं, जिनमें कार को पूरा चार्ज होने में घंटों लग जाते हैं. एक फास्ट चार्जर पर 235 EV गाड़ियां आती हैं. दुनिया के बाकी EV बाजारों में यह अनुपात 6:1 से 20:1 के बीच होता है, यानी वहां एक चार्जर पर 6 से 20 गाड़ियां, जबकि भारत में एक चार्जर पर 235 गाड़ियां.
नीति आयोग के 30 फीसदी EV पैठ के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 2030 तक करीब 13 लाख चार्जिंग स्टेशन चाहिए. अभी 29,000-30,000 हैं यानी 2030 तक 40 गुना ज्यादा चार्जर बनाने होंगे. इस रफ्तार से तो ऐसा होता नजर नहीं आ रहा.
सिर्फ संख्या ही नहीं, चार्जिंग की और भी हैं असली मुश्किलें &amp;nbsp;
पहली मुश्किल: चार्जर बने तो बने, पर चलते क्यों नहीं?
यह कोई नई बात नहीं है. दिल्ली, गोवा और कर्नाटक समेत हर जगह यही हाल है. गोवा में एक तिहाई EV चार्जिंग स्टेशन नॉन-फंक्शनल या डिकमीशन हो चुके हैं. कर्नाटक के तुमकुरु में BESCOM ने चार्जिंग स्टेशन लगवाए, मगर बिजली की सप्लाई न होने की वजह से वे बेकार पड़े हैं. फरीदाबाद में करीब 25,000 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं, लेकिन एक भी सरकारी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन नहीं है. MCD के तहत आवंटित आधे से ज्यादा EV चार्जिंग स्टेशन अभी तक ऑपरेशनल नहीं हो पाए हैं.
दूसरी मुश्किल: घर पर चार्जिंग का झंझट
करीब 45 फीसदी भारतीय घरों में EV चार्जिंग के लिए बिजली के अपग्रेड की जरूरत है. अलायंस फॉर एन एनर्जी एफिशियंट इकोनॉमी (AEEE) और कजम की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिहायशी चार्जिंग इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है. यानी पुराने वायरिंग, पार्किंग की समस्या और बिजली के लोड को संभालने की क्षमता ये सब रोड़े हैं.
तीसरी मुश्किल: बिजली का ग्रिड संभालेगा कैसे?
फास्ट चार्जर (350kW) एक बार में 50-70 घरों के बराबर बिजली खींच लेते हैं. पुराने ट्रांसफार्मर इस लोड को संभाल नहीं पाते. नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन ने पहले ही चेतावनी दी है कि अनियंत्रित EV चार्जिंग से ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है और इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई पर असर पड़ सकता है. छोटे शहरों में वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, खराब अर्थिंग और अनौपचारिक कनेक्शन EV चार्जिंग के लिए सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं.
हालांकि, एक राहत की बातभी है कि देशभर की सभी EVs की सालाना बिजली की मांग 20.07 टेरावॉट-घंटा है, जो भारत की सालाना बिजली उत्पादन का करीब 1.1 फीसदी ही है. यानी कुल बिजली की कमी तो नहीं है, मगर स्थानीय स्तर पर लोड मैनेजमेंट की चुनौती बड़ी है.
चौथ ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Anti Women Skew: दिल्ली की कंपनियों में औरतों संग भेदभाव? हर 10 में से 9 कर्मचारी हैं मर्द, रिपोर्ट ने बताई कड़वी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Anti Women Skew: दुनियाभर में महिला संरक्षण और महिलाओं को समान अधिकार देने वाली बातें तो कई बार हमने सुनी हैं. लेकिन जब कोई रिपोर्ट या डाटा देखते हैं तो जमीनी हकीकत के बारे में पता चलता है. जैसे हाल ही में आई एक रिपोर्ट से पता चला है कि दिल्ली के ऑफिसों में महिला कर्मचारियों की अपेक्षा पुरुष कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है.
क्या कहती है रिपोर्टदरअसल हाल ही में नेशनल स्टेटिक्स ऑफिस (NSO) की एक रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के छोटे कारोबार अच्छी कमाई कर रहे हैं, लेकिन इन कारोबारों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी बहुत कम है. रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के ऐसे छोटे कारोबार, जो कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड नहीं हैं, उनमें काम करने वाले लोगों में सिर्फ 13.5% ही महिलाएं हैं. जिसका मतलब है कि हर 10 कर्मचारियों में लगभग 9 पुरुष और सिर्फ 1 महिला है.
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ये जानकारी &#039;अर्बन अनइनकॉर्पोरेटेड एंटरप्राइजेस लैंडस्केप: ASUSE 2025- इनसाइट्स फ्रॉम मिलियन प्लस सिटीज की रिपोर्ट में दी गई है. इस रिपोर्ट में 10 लाख से भी ज्यादा आबादी वाले 46 शहरों के छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, मरम्मत की दुकानों, छोटे निर्माताओं और काम करने वाले कारोबारों का अध्ययन किया गया. इसमें बड़ी कंपनियों, सरकारी संस्थानों और बड़े कारखानों को शामिल नहीं किया गया.
महिलाओं के पास नहीं है मालिकाना हक भीरिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में ऐसे करीब 5.92 लाख छोटे कारोबार हैं, जिनमें लगभग 13.94 लाख लोग काम करते हैं. वहीं पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) में इनकी संख्या 10.34 लाख कारोबार और 22.31 लाख तक है. वहीं बात करें कारोबार के मालिक बनने की तो इस मामले में भी महिलाओं की संख्या कम है. दिल्ली में सिर्फ 16.2% छोटे कारोबार महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि 80% से ज्यादा कारोबार के मालिक पुरुष हैं.
हालांकि, NSO ने इस रिपोर्ट के बारे में ये भी कहा है कि ये आंकड़े सैम्पल सर्वे के आधार पर जारी किए गए हैं, ऐसे में इन्हें अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>SBI Manager Salary: कागज पर 35 लाख रुपए, हाथ में कितना? SBI मैनेजर की सैलरी स्लिप देख घूम गया लोगों का सिर</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Bank Manager Salary Slip: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI, अक्सर काफी चर्चा मेंबना रहता है. बैंक के कर्मचारियों का व्यवहार, उनकी बैंकिंग गतिविधियां और अन्य कई चीजें अक्सर चर्चा का विषय होती हैं. इसके अलावा एक और चीज है जो काफी चर्चा में रहती है, वो है SBI बैंक कर्मचारियों की सैलरी. जिसके लिए कई लोग इस बैंक में नौकरी की भी चाहत रखते हैं. लेकिन इससे इतर इन दिनों सोशल मीडिया पर SBI बैंक के मैनेजर की सैलरी स्लिप तेजी से वायरल हो रही है.
कितनी होती है SBI बैंक मैनेजर की सैलरी?दरअसल सोशल नेटवर्किंग साइट X (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक मैनेजर का Form 16 नजर आ रहा है. जो तेजी से वायरल हो रहा है. इस फॉर्म में मैनेजर की सालाना ग्रॉस सैलरी करीब 35.24 लाख रुपये नजर आ रही है. इस आंकड़े को देखकर कई लोग हैरान रह गए और सरकारी बैंक कर्मचारियों की सैलरी को लेकर सोशल मीडिया पर तेज बहस शुरू हो गई है.
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इस पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन में यूजर ने लिखा, &#039;अक्सर लोग कहते हैं कि SBI कर्मचारियों की नौकरी पूरी तरह सेटल होती है. लेकिन SBI के एक स्केल-3 मैनेजर की सैलरी देखकर आपकी सोच बदल सकती है. करीब 8 साल पहले उन्होंने SBI में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के तौर पर नौकरी शुरू की थी. आज उनकी FY 2025-26 की Form 16 में 35.24 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी दिखाई गई है. पहली नजर में ये रकम बहुत बड़ी लगती है, लेकिन पूरी सच्चाई कुछ और है&#039;.

People often say that SBI employees have a &quot;settled life&quot;but this Scale 3 Manager&#039;s salary slip might completely change your perspective.Eight years ago, a young man joined State Bank of India as a Probationary Officer.Today, he is a Scale 3 Manager, and his Form 16 for FY&amp;hellip; pic.twitter.com/Iy7TJOkUJI
&amp;mdash; Pooja (@poojaofficial5) July 5, 2026



क्या है सैलरी की सच्चाई?आगे इस पोस्ट में यूजर ने सैलरी की डिस्क्राइब करते हुए लिखा, &#039;इस ग्रॉस सैलरी में LFC एन्कैशमेंट और लीव एन्कैशमेंट जैसे भुगतान भी शामिल हैं. ये हर महीने मिलने वाली सैलरी का हिस्सा नहीं होते, बल्कि चार साल में एक बार मिलने वाले लाभ हैं. इसके अलावा हर महीने इनकम टैक्स, NPS, EPF, होम लोन, कार लोन और टू-व्हीलर लोन की EMI जैसी कई कटौतियां भी होती हैं. यही वजह है कि Form 16 में दिखाई गई ग्रॉस सैलरी और हर महीने बैंक खाते में आने वाली टेक-होम सैलरी में काफी अंतर होता है.&#039;
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसइस पोस्ट के आखिर ने यूजर ने लोगों से उनकी राय बताने को भी कहा है, ऐसे में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है. कई लोग इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए कह रहे हैं कि वाकई में लोगों को दूर से ये सैलरी काफी अच्छी लगती है, लेकिन असलियत का अंदाजा उन्हें नहीं होता है. हालांकि कई यूजर्स ऐसे भी हैं जो इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Airlines News: भारतीय एयरलाइंस का दबदबा, मई में 1.53 करोड़ यात्रियों ने किया सफर, DCGA की रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Airlines News: भारत में इन दिनों एयर ट्रैवल यानी हवाई यात्रा की धूम मची हुई है. बीते दिनों देखे गए हालातों के चलते विदेश यात्रा तो लोगों ने कुछ हद तक कम की है. लेकिन घरेलू उड़ानें काफी ज्यादा भरी गई हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि DCGA की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. इस रिपोर्ट में आए आंकड़ों के अनुसार करीब डेढ़ करोड़ यात्रियों में डोमेस्टिक एयरलाइंस से सफर किया है.
DCGA की रिपोर्ट में खुलासादरअसल हाल ही में आई DCGA की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, भारत में मई 2026 के दौरान करीब 1.53 करोड़ यात्रियों ने घरेलू उड़ानों से यात्रा की. ये संख्या अप्रैल के 1.38 करोड़ यात्रियों की तुलना में करीब 11% ज्यादा है. वहीं, पिछले साल मई के मुकाबले घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में 9.49% की बढ़ोतरी हुई है.
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DGCA की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच घरेलू एयरलाइंस से 729.40 लाख यात्रियों ने सफर किया. पिछले साल इसी समयावधि में ये आंकड़ा 715.70 लाख था. यानी इस दौरान यात्री संख्या में 1.91% की वृद्धि दर्ज की गई.
INDIGO बनी सबसे बड़ी एयरलाइनइस रिपोर्ट की मानें तो इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन बनी रही, हालांकि उसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 64.9% रह गई. वहीं एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़कर 25.6% हो गई. अकासा एयर की हिस्सेदारी 5.8% पर स्थिर रही, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी घटकर 2.5% रह गई.
समय पर उड़ान के मामले में कौन आगे?इसके अलावा समय पर उड़ान भरने के मामले में भी इंडिगो सबसे आगे रही. मई में देश के 10 प्रमुख हवाई अड्डों पर इंडिगो की 82.8% उड़ानें समय पर रहीं. इसके बाद अकासा एयर (78.3%) और एयर इंडिया समूह (74.5%) रहा. अलायंस एयर की समयबद्धता 70.5% रही, जबकि स्पाइसजेट का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा और उसका केवल 26.5% उड़ानें समय पर रहा.
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कितनी उड़ानें हुईं रद्द?इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि मई में 0.55% उड़ानें रद्द हुईं. इससे 63,723 यात्री प्रभावित हुए. इन यात्रियों को मुआवजा और अन्य सुविधाएं देने पर एयरलाइंस ने 70.32 लाख रुपये खर्च किए. इसके अलावा, 1.77 लाख से अधिक यात्रियों को उड़ानों में देरी का सामना करना पड़ा. वहीं, 900 यात्रियों को अलग-अलग कारणों से विमान में सवार होने की अनुमति नहीं दी गई.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>10 से 50 रुपये तक महंगी हो सकती है शराब की बोतल, जानें कहां रेट बढ़ाने की चल रही तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ Liquor Price Hike: तमिलनाडु में शराब पीने वालों के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है. राज्य सरकार अपने यहां शराब की कीमतें 10-50 रुपये प्रति बोतल बढ़ाने का सोच रही है. &amp;nbsp;
सोमवार को चेन्नई में सचिवालय में शराबबंदी और आबकारी मंत्री के. विग्नेश की अध्यक्षता में तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (Tasmac) की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई. हो सकता है कि इसी हफ्ते के आखिर से प्रति बोतल शराब के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़े.&amp;nbsp;
कितनी बढ़ जाएगी प्रति बोतल कीमत?&amp;nbsp;
बताया जा रहा है कि साधारण और मिडियम रेंज के ब्रांड्स के लिए प्रति बोतल 10-20 रुपये का इजाफा होगा. प्रीमियम और विदेशी शराब (IMFL) के लिए प्रति बोतल 30-50 रुपये का इजाफा होगा. इसी तरह से बीयर की कीमत में भी प्रति बोतल 10 रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है.
हालांकि, अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. राज्य में शराब की कीमतों में पिछली बार बदलाव 1 फरवरी, 2024 को किया गया था, जब सरकार ने शराब के विभिन्न ब्रांडों की कीमतों में 10 से 80 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी. अगर इस बार कीमतें बढ़ाए जाने की मंजूरी मिलती है, तो यह दो साल से ज्यादा समय में कीमतों में पहला बदलाव होगा.
क्यों बढ़ाई जा रही है कीमत?
सरकार ने हाल ही में स्कूल-कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंड और मंदिरों के पास स्थित 717 Tasmac रिटेल आउटलेट्स बंद करा दिए. इससे सरकार के रेवेन्यू में भारी कमी आई. हो सकता है कि रेट बढ़ाकर सरकार इसी नुकसान की भरपाई करना चाह रही हो.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, Tasmac के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि राज्य में हाल ही में &amp;nbsp;IMFL प्रोडक्ट्स और बीयर सप्लाई करने वाले शराब निर्माताओं पर एक मैन्युफैक्चरिंग सेस लागू किया गया था. इस शुल्क से सरकार को सालाना करीब 6000-10000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. इधर, बढ़ते टैक्स और कच्चे माल की बढ़ती लागत के चलते शराब बनाने वाली कंपनियों ने भी सरकार को खरीद मूल्य बढ़ाने के लिए कहा था. &amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>से, रुपये, तक, महंगी, हो, सकती, है, शराब, की, बोतल, जानें, कहां, रेट, बढ़ाने, की, चल, रही, तैयारी</media:keywords>
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        <title>शेयर बाजार में दहाड़ रहा यह स्टॉक, लिस्टिंग के बाद दनादन मार रहा अपर सर्किट; क्या दांव लगाना रहेगा सही?</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market News: Cordelia Cruises की ऑपरेटन कंपनी Waterways Leisure Tourism के शेयर इन दिनों बाजार में धूम मचा रहे हैं. शेयर मार्केट में लिस्टिंग के बाद लगातार दो दिनों तक यह 10% के अपर सर्किट को टच करने में कामयाब रहा.
सोमवार शाम एक्सचेंज फाइलिंग में दी जानकारी में कंपनी ने बताया कि शुक्रवार, 10 जुलाई को होने वाली बोर्ड की बैठक में स्टॉक स्प्लिट पर विचार किया जाएगा. वॉटरवेज लीजर टूरिज्म शेयर मार्केट में कदम रखने वाली एक नई कंपनी है. अगले शुक्रवार को इसका 8वां कारोबारी दिन होगा. लिस्टिंग के महज चार दिनों के भीतर ही वॉटरवेज लीजर टूरिज्म के शेयरों ने लगातार दो दिनों तक 10-10% के अपर सर्किट को छुआ है.&amp;nbsp;
कंपनी लेकर आई थी IPO
वॉटरवेज लीजर टूरिज्म 585 करोड़ रुपये का अपना आईपीओ लेकर आई थी. इसका इश्यू प्राइस 808 रुपये था. हालांकि, कमजोर डिमांड के चलते 1 जुलाई को इसकी लिस्टिंग करीब 15-16% के डिस्काउंट पर 681-690 रुपये पर हुई. डिस्काउंट पर लिस्टिंग के तुरंत बाद इसके शेयरों की ताबड़तोड़ खरीदारी हुई, जिसके चलते शेयरों में दो-दो बार अपर सर्किट्स लगे. मौजूदा समय में शेयर अपने निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी करते हुए 800 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है.
स्टॉक स्प्लिट की चल रही तैयारी
कंपनी ने हाल ही में बताया कि कंपनी 10 जुलाई को होने वाली बोर्ड मीटिंग में स्टॉक स्प्लिट करने पर विचार कर रही है. इससे शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ गई. स्टॉक स्प्लिट का मतलब है शेयरों के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटना. जब शेयरों की कीमत बढ़ जाती है और रिटेल निवेशक उसे खरीद नहीं पाते हैं, तो कंपनियां स्टॉक स्प्लिट करती हैं. इससे बाजार में शेयरों की संख्या बढ़ जाती है और उसी अनुपात में शेयरों की कीमत कम हो जाती है, जिससे छोटे निवेशकों के लिए भी उसे खरीदना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;
क्या लगा सकते हैं दांव?
अगर आप स्टॉक स्प्लिट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो कम पैसों के साथ सख्त स्टॉप-लॉस अपनाकर दांव लगा सकते हैं. लॉन्ग टर्म इंवेस्टर्स अभी जल्दबाजी करने से बचे क्योंकि यह अभी एक नई लिस्टेड कंपनी है. इसके 1-2 तिमाही के नतीजे के बाद ही इसमें बड़े निवेश का सोच सकते हैं, तब तक शेयरों में स्थिरता भी आ जाएगी और वैल्यूएशन में भी सुधार आएगा.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Ethanol: माइलेज घटा और इंजन खराब हुआ तो जिम्मेदारी किसकी? E20 पेट्रोल पर भड़के ट्रांसपोर्टर्स, सरकार पर दागे सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Transporters on Ethanol Blending:&amp;nbsp;देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E-20 पेट्रोल को तेजी से लागू किया जा रहा है. सरकार इसे हरित ऊर्जा, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बता रही है. हालांकि, ट्रांसपोर्ट उद्योग ने इस नीति के तकनीकी और आर्थिक प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि यदि E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, माइलेज कम होता है या रखरखाव का खर्च बढ़ता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए.
छोटे ट्रांसपोर्टरों पर बढ़ सकता है आर्थिक दबाव
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि देश में लाखों छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्टर बैंक से ऋण लेकर ट्रक, हल्के वाणिज्यिक वाहन और अन्य कमर्शियल वाहन संचालित कर रहे हैं. ऐसे में यदि E-20 पेट्रोल के कारण ईंधन की खपत बढ़ती है या वाहनों के रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च आता है, तो इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट कारोबार की लागत पर पड़ेगा.
माइलेज घटने का दावा, बढ़ सकती है परिवहन लागत
एसोसिएशन का दावा है कि विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में E-20 ईंधन के उपयोग से लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक माइलेज कम होने की बात सामने आई है. भले ही यह आंकड़ा देखने में छोटा लगे, लेकिन रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए यह हर महीने हजारों रुपये का अतिरिक्त ईंधन खर्च बन सकता है. ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो अंततः इसका असर मालभाड़े, व्यापारिक लागत और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.
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पुराने वाहनों की तकनीकी सुरक्षा पर भी उठे सवाल
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि जो पुराने कमर्शियल वाहन E-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किए गए हैं, उनमें फ्यूल पाइप, रबर सील, गैस्केट, फ्यूल पंप और ईंधन प्रणाली के अन्य हिस्सों पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ सकता है. उनका कहना है कि यदि भविष्य में ऐसे वाहनों में तकनीकी खराबियां सामने आती हैं, तो वाहन निर्माता कंपनियां, तेल कंपनियां या सरकार में से कौन इसकी जिम्मेदारी लेगा, यह पहले से स्पष्ट होना चाहिए.
&#039;नीतिगत प्रयोग&#039; का माध्यम न बनें करोड़ों के वाणिज्यिक वाहन
एसोसिएशन का कहना है कि देश में करोड़ों रुपये मूल्य के वाणिज्यिक वाहनों को किसी नई नीति का प्रयोगात्मक आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. संगठन का मानना है कि किसी भी नई ईंधन नीति को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभावों का स्वतंत्र, पारदर्शी और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप परीक्षण कराया जाना चाहिए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए.
सरकार के सामने रखे गए चार बड़े सवाल
ट्रांसपोर्ट उद्योग ने केंद्र सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं. इनमें यह जानना शामिल है कि क्या देश में चल रहे सभी वाणिज्यिक वाहन E-20 के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित हैं. क्या सरकार के पास ऐसा कोई सार्वजनिक वैज्ञानिक अध्ययन है जो 8 से 15 वर्ष पुराने कमर्शियल वाहनों पर E-20 के सुरक्षित उपयोग की पुष्टि करता हो. यदि भविष्य में इंजन या फ्यूल सिस्टम में खराबी आती है तो उसकी भरपाई कौन करेगा. साथ ही, यदि माइलेज घटने से परिवहन लागत बढ़ती है तो उसका आर्थिक बोझ ट्रांसपोर्टर, व्यापारी या आम उपभोक्ता में से कौन उठाएगा.
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IIT समेत विशेषज्ञों की संयुक्त समिति बनाने की मांग
एसोसिएशन ने कहा है कि वह पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और किसानों के हितों के पक्ष में है, लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने के दौरान ट्रांसपोर्ट उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए. संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT), वैज्ञानिक संस्थानों, वाहन निर्माता कंपनियों, तेल कंपनियों और ट्रांसपोर्ट संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल कर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए. यह समिति वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में E-20 के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करे और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.
क्षतिपूर्ति नीति और जवाबदेही तय करने की भी मांग
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि यदि E-20 के कारण किसी वाहन को तकनीकी या आर्थिक नुकसान होता है, तो उसके लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की जानी चाहिए. साथ ही प्रभावित वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए क्षतिपूर्ति की पारदर्शी व्यवस्था भी घोषित की जानी चाहिए.
&#039;यह केवल ईंधन का नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था का मुद्दा&#039;
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहा कि यह मामला केवल ईंधन बदलने तक सीमित नहीं है. इसका संबंध करोड़ों वाहन मालिकों, लाखों ट्रांसपोर्ट कारोबारियों, व्यापारिक गतिविधियों और देश की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ा हुआ है. उन्होंने मीडिया और जनप्रतिनिधियों से भी इस विषय को गंभीरता से उठाने की अपील करते हुए कहा कि नई नीति लागू करने से पहले वैज्ञानिक पारदर्शिता, आर्थिक सुरक्षा और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ethanol:, माइलेज, घटा, और, इंजन, खराब, हुआ, तो, जिम्मेदारी, किसकी, E20, पेट्रोल, पर, भड़के, ट्रांसपोर्टर्स, सरकार, पर, दागे, सवाल</media:keywords>
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        <title>Mobile Recharge: कमर कस लें, अगले 3&amp;4 महीनों में महंगे हो जाएंगे मोबाइल रिचार्ज, कितनी कटेगी जेब?</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Recharge Costlier: भारत में एक बार फिर से रीचार्ज प्लांस महंगे होने जा रहे हैं. सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले तीन से चार महीनों में टैरिफ में 12-15% की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारती एयरटेल और रिलायंस जियो के सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ती रहेगी, जबकि वोडाफोन आइडिया अपने 5G नेटवर्क का विस्तार करेगा.&amp;nbsp;
रीचार्ज पर कितना पड़ेगा असर?
अगर टेलीकॉम कंपनियां 15% की भी बढ़ोतरी करती है, तो 199 वाले रीचार्ज प्लान पर खर्च बढ़कर लगभग 229 रुपये हो जाएगा. 299 वाला डेटा प्लान बढ़कर लगभग 344-359 रुपये तक पहुंच जाएगा. 999 वाले लॉन्ग टर्म वाला प्लान बढ़कर करीब 1149 तक जा सकता है. इससे साफ है आपको अभी के मुकाबले आने वाले समय में रीचार्ज के लिए ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों कंपनियां बढ़ा रही हैं रेट?
Reliance Jio और Airtel जैसी कंपनियां देश भर में 5G इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए काफी भारी-भरकम निवेश कर रही हैं. इसकी भरपाई कंपनियां कहीं न कहीं ग्राहकों से भी करना चाहती है.
कंपनियां अपने &#039;एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर&#039; (ARPU)&amp;nbsp; के टारगेट को बढ़ाना चाहती है. Average Revenue Per User यानी ARPU से यह पता चलता है कि एक तय अवधि में आप अपने बिजनेस में हर सक्रिय यूजर से औसतन कितना रेवेन्यू कमा रहे हैं.&amp;nbsp;
दाम बढ़ाने की एक और वजह यह है कि भारत में टेलीकॉम सेक्टर के मार्केट में रिलायंस जियो और एयरटेल का ही दबदबा है. अब चूंकि कॉम्पिटिशन कम है इसलिए कंपनियों के लिए दाम बढ़ाना भी आसान है. रिपोर्ट में भारती एयरटेल और रिलायंस जियो के सब्सक्राइबर्स की संख्या में भी भारी इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर तिमाही में रिलायंस जियो संग लगभग 70 लाख नए सब्सक्राइबर जुड़ते जाएंगे, जबकि &amp;nbsp;इसी दौरान भारती एयरटेल के लगभग 50 लाख नए सब्सक्राइबर जोड़ने की उम्मीद है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Mobile, Recharge:, कमर, कस, लें, अगले, 3-4, महीनों, में, महंगे, हो, जाएंगे, मोबाइल, रिचार्ज, कितनी, कटेगी, जेब</media:keywords>
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        <title>Microsoft Layoff: टेक जगत में फिर हड़कंप, माइक्रोसॉफ्ट ने की 4800 कर्मचारियों की छंटनी, HR हेड ने बताई वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Microsoft Layoff: टेक जगत में अचानक से उस वक्त हड़कंप मच गया जब दिग्गज कंपनी Microsoft ने यहां के कई कर्मचारियों को अचानक से नौकरी से निकाल दिया. इस खबर से ना केवल टेक जगत बल्कि यहां नौकरी का सपना देखने वाले युवा भी सख्ते में आ गए हैं. हाल ही में आई खबर के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है. ये फैसला कंपनी ने क्यों लिया, इस बारे में कंपनी की हेड HR ने खुद बताया है.
माइक्रोसॉफ्ट ने निकले 4800 कर्मचारीदरअसल दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कुल कर्मचारियों में लगभग 2.1% कर्मचारियों को हाल ही में निकाल दिया. जिसमें करीब 4800 कर्मचारियों का नाम शामिल है. कंपनी ऐसे समय में ये फैसला किया, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है और खर्च कम करने की कोशिश की जा रही है.
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हेड HR ने बताई वजहइस खबर के बारे में कंपनी की हेड HR एमी कोलमेन ने खुद बताया है. उन्होंने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में इस छंटनी की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ये फैसला सिर्फ खर्च कम करने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव का हिस्सा है.
एमी कोलमैन ने मेमो में लिखा, &#039;आज हम अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या का करीब 2.1%, यानी लगभग 4,800 पद खत्म कर रहे हैं. हमारा मकसद अपने कर्मचारियों, निवेश और संसाधनों को उन प्राथमिकताओं पर केंद्रित करना है, जिनकी मदद से Microsoft तेजी से बदलती टेक इंडस्ट्री में अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देता रहे.&#039;
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कंपनी के शेयरों में भी आई गिरावटइस साल माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई है. साल 2026 के पहले छह महीनों में कंपनी का शेयर करीब 23% तक गिर गया, जो 2022 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है. इससे पहले कंपनी ने अमेरिका में अपने करीब 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Buyout) का प्रस्ताव भी दिया था.
इस साल हुई बड़ी छंटनीबता दें कि सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट ही नहीं बल्कि बल्कि अमेजॉन और मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी इस साल हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं. AI पर बढ़ते खर्च के कारण कंपनियों पर मुनाफा बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 00:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Microsoft, Layoff:, टेक, जगत, में, फिर, हड़कंप, माइक्रोसॉफ्ट, ने, की, 4800, कर्मचारियों, की, छंटनी, हेड, ने, बताई, वजह</media:keywords>
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        <title>Gadgets Price Hike: &amp;apos;दीवाली पर खरीदूंगा&amp;apos;... फेस्टिव डील्स पर डिस्काउंट अब नहीं मिलेगा! दिन पर दिन महंगे हो रहे फोन और गैजेट्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gadgets-price-hike-दीवाली-पर-खरीदूंगा-फेस्टिव-डील्स-पर-डिस्काउंट-अब-नहीं-मिलेगा-दिन-पर-दिन-महंगे-हो-रहे-फोन-और-गैजेट्स</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gadgets-price-hike-दीवाली-पर-खरीदूंगा-फेस्टिव-डील्स-पर-डिस्काउंट-अब-नहीं-मिलेगा-दिन-पर-दिन-महंगे-हो-रहे-फोन-और-गैजेट्स</guid>
        <description><![CDATA[ Gadgets Price Hike: त्यौहारों के मौके पर अक्सर फेस्टिव डील्स चलती है. चाहे ऑनलाइन बाजार हो या ऑफलाइन बाजार, हर जगह तगड़ा डिस्काउंट होता है. आप भी फिलहार कुछ खरीदने के लिए &amp;nbsp;दशहरा, दीवाली या नवरात्रि का इंतजार जरूर कर रहे होंगे. अगर वाकई में कर रहे हैं तो रुक जाइए और जो भी खरीदना है अभी खरीद लीजिए. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आने वाले समय में मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतें बढ़ने वाली हैं. तो इन डील्स में आपको फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होगा.
क्यों बढ़ रहे दाम?दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI कंप्यूटिंग की दुनिया में नई क्रांति ला रहा है. लेकिन इसका असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है. AI की वजह से स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स महंगे हो सकते हैं. ऐसे में यदि आप इंतजार कर रहे हैं किसी अच्छी डील का तो ये आपको काफी महंगी पड़ सकती है.
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AI क्यों बन रहा महंगाई की वजह?ऐसा इसलिए क्योंकि NVIDIA, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा, अमेजॉन, ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां AI के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं. इसके चलते मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ गई है. बढ़ती मांग को देखते हुए चिप बनाने वाली कंपनियां अब AI सर्वर में इस्तेमाल होने वाली महंगी और ज्यादा फायदा देने वाली मेमोरी Chips का उत्पादन बढ़ा रही हैं. इसकी वजह से स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली सामान्य DRAM और NAND फ्लैश चिप्स की सप्लाई कम हो रही है.
इसी का नतीजा है कि इन चिप्स की कीमतों लगातार बढ़ रही हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने की लागत भी बढ़ गई है. यही कारण है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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उदाहरण से समझें कैसे बढ़ेगी कीमतजैसे अभी कुछ दिन पहले ही एप्पल के टैब की कीमत बढ़ गई थी, जिसके बाद लोगों को लगा कि अब जैसे टैब की कीमतें बढ़ीं हैं वैसे ही एप्पल के फोन की कीमतें भी बढ़ेंगी. तो लोगों ने धड़ल्ले से फोन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे फोन की कीमतें भी बढ़ गई हैं. अब ऐसे ही आने वाले समय में अन्य चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती है. जिसके बाद फेस्टिवल्स के दौरान जो भी डील्स होंगी उसमें आपको मान लीजिए 10 हजार रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है, तो वो आज की कीमत में ही मिलेगा. तो ऐसे में तो खरीदने वाले का नुकसान ही है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 00:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gadgets, Price, Hike:, दीवाली, पर, खरीदूंगा..., फेस्टिव, डील्स, पर, डिस्काउंट, अब, नहीं, मिलेगा, दिन, पर, दिन, महंगे, हो, रहे, फोन, और, गैजेट्स</media:keywords>
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        <title>Crude Oil News: सऊदी ने 26 साल में सबसे सस्ता किया तेल, भारत को क्या होगा फायदा? आसान भाषा में समझिए</title>
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        <description><![CDATA[ Saudi Arab Crude Oil: दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरामको ने एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल की कीमत में 26 साल की सबसे बड़ी कटौती कर दी है.&amp;nbsp;अगस्त में डिलीवरी होने वाले अरब लाइट क्रूड का दाम 11 डॉलर प्रति बैरल घटा दिया गया है. अब यह तेल ओमान-दुबई बेंचमार्क से भी 1.50 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलेगा.
यह सिर्फ सऊदी अरब का फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है.
सऊदी ने तेल इतना सस्ता क्यों किया?
इसकी सबसे बड़ी वजह है बाजार में बढ़ती सप्लाई और घटती मांग. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई सामान्य होने लगी है. इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया.
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दूसरी तरफ चीन जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है पिछले दो महीनों से सऊदी से कम तेल खरीद रहा है क्योंकि उसे रूस और ईरान का तेल सस्ता मिल रहा है. ऐसे में ग्राहकों को वापस आकर्षित करने के लिए सऊदी ने कीमतें घटा दीं. इसके साथ ही OPEC प्लस ने भी लगातार पांचवें महीने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है यानी बाजार में तेल और ज्यादा आएगा.
भारत के लिए यह खबर क्यों अहम है?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और इसमें खाड़ी देशों में खासकर सऊदी अरब की बड़ी हिस्सेदारी है. अगर सऊदी से मिलने वाला तेल सस्ता होगा तो भारत का तेल आयात बिल कम हो सकता है. इसका सीधा फायदा सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल को मिलेगा, क्योंकि उन्हें कच्चा तेल पहले के मुकाबले कम कीमत पर मिलेगा.
क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय तक इसी तरह नीचे बनी रहती हैं तो पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने की संभावना बन सकती है. हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियां और सरकार ही लेंगी. कंपनियां पहले अपने पुराने नुकसान की भरपाई भी करना चाह सकती हैं.
हवाई सफर और एलपीजी पर भी असर
सस्ता कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता. अगर क्रूड सस्ता रहता है तो एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी राहत मिल सकती है. इससे आगे चलकर हवाई किरायों पर भी असर पड़ सकता है.
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इसके अलावा एलपीजी आयात की लागत भी कम हो सकती है. कच्चा तेल सस्ता रहने से महंगाई पर दबाव भी घट सकता है क्योंकि तेल की कीमतों का असर कई जरूरी चीजों की लागत पर पड़ता है.
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल सऊदी ने सिर्फ अपने आधिकारिक बिक्री मूल्य (OSP) में कटौती की है.&amp;nbsp;भारत को वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में ब्रेंट और दुबई क्रूड की कीमतें किस स्तर पर रहती हैं. अगर होर्मुज से सप्लाई सामान्य बनी रहती है और ओपेक प्लस उत्पादन बढ़ाता रहता है तो कच्चा तेल और सस्ता हो सकता है. लेकिन अगर पश्चिम एशिया में फिर तनाव बढ़ा तो कीमतें दोबारा ऊपर जा सकती हैं.
फिलहाल इतना तय है कि सऊदी की इस बड़ी कटौती से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG News: अब नहीं होगी सिलेंडर की किल्लत, अमेरिका से दोगुनी गैस खरीदेगा भारत, सरकार ने बदला प्लान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-news-अब-नहीं-होगी-सिलेंडर-की-किल्लत-अमेरिका-से-दोगुनी-गैस-खरीदेगा-भारत-सरकार-ने-बदला-प्लान</link>
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        <description><![CDATA[ LPG News: ईरान और यूएस के बीच फिलहाल युद्ध विराम है. लेकिन कई महीनों तक चले इस युद्ध का असर अब तक भी कम नहीं हुआ है. इस युद्ध की वजह से भारत में तेल और गैस की काफी किल्लत देखने को मिली थी. लेकिन अब इससे निपटने का इंतजार भारत सरकार ने कर लिया है. क्योंकि अब रसोई गैस (LPG) के लिए भारत को सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. आइये बताते हैं आखिर ऐसा क्यों?
यूएस से होगा LPG का आयातदरअसल अब सरकारी तेल कंपनियां अमेरिका से हर साल होने वाले करीब 22 लाख टन LPG आयात को दोगुना करने की प्लानिंग कर रही है. साथ ही, अल्जीरिया जैसे नए देशों से भी LPG खरीदने के ऑप्शंस तलाशे जा रहे हैं, ताकि किसी एक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता न रहे. नवंबर 2025 में भारत और अमेरिका के बीच एक साल का समझौता हुआ था. जिसके तहत 2026 में भारत अपनी सालाना LPG जरूरत का करीब 10% अमेरिका से खरीदने पर सहमत हुआ.
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क्या कहा अधिकारियों ने?तेल कंपनी के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने TOI से बात करते हुए बताया कि, मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान कच्चे तेल की उपलब्धता बड़ी समस्या नहीं थी, लेकिन LPG की सप्लाई चुनौती बन गई थी. ऐसे समय में अमेरिका ने एक्सट्रा गैस उपलब्ध कराकर भारत की जरूरत पूरी करने में जरूरी भूमिका निभाई. अमेरिका के पास LPG निर्यात करने की बड़ी क्षमता है. इसलिए भविष्य में भारत वहां से ज्यादा गैस खरीदकर अपनी सप्लाई को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
बता दें कि भारत अब तक अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से मंगाता रहा है. लेकिन मार्च में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से LPG की सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई थी. कच्चे तेल की तुलना में रसोई गैस की उपलब्धता ज्यादा मुश्किल हो गई थी. ऐसे समय में अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़े LPG सप्लायर में से एक बनकर सामने आया. इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया से भी LPG खरीदी.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>100 Rupee: आपकी जेब में पड़ा 100 रुपए का नोट नकली तो नहीं? RBI ने किया सतर्क, चेक करने के बताए 7 तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ How to Recognize 100 Rupee Original Note: बाजार में कई बार हम खरीदारी करने जाते हैं तो हमें खुल्ले पैसे मिलते हैं. इन खुल्ले पैसों में कई बार ऐसे नोट भी आ जाते हैं जिनको देखकर सवाल मन में आता है कि ये असली है या नकली? कई बार नकली नोट भी ऐसे होते हैं जो असली की तरह ही लगते हैं. ऐसे में इन्हें पहचान पाना बहुत मुश्किल है. लेकिन यहां पर हम आपको बताने वाले हैं कि 100 रुपये के नोट की असलियत कैसे पहचानें.
RBI ने बताया कैसे पहचानें असली नोट?RBI की ऑफिशियल वेबसाइट पर इंडियन करेंसी के बारे में पूरी जानकारी दी गई है. इसके बैंक नोट सेक्शन में सभी नोटों की असलियत पहचानने के तरीके बताए गए हैं. जैसे 100 रुपये के नोट को पहचानने के लिए भी 7 टिप्स बताई गई हैं. जिनके जरिए आप पता लगा सकते हैं कि आपके पास आया 100 रुपये का नोट असली है या नकली.
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नोट के नीचे लेफ्टस साइड पर &#039;100&#039; अंक वाला एक सी-थ्रू रजिस्टर (आर-पार दिखाई देने वाला सुरक्षा चिन्ह) होता है, जो नोट को रोशनी के सामने रखने पर साफ दिखाई देता है.
असली नोट पर &#039;100&#039; का मूल्य देवनागरी लिपि में भी लिखा होता है.
नोट के सामने वाले हिस्से के बीच में महात्मा गांधी का चित्र होता है.
नोट के राइट साइड गारंटी क्लॉज, आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर (भुगतान के वचन के साथ) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का प्रतीक चिन्ह होता है.
नोट के नीचे राइट साइड नंबर पैनल होता है, जिसमें अंक छोटे से बड़े आकार में लिखे होते हैं.
नोट के ऊपर लेफ्ट साइड भी नंबर पैनल होता है, जिसमें अंक छोटे से बड़े आकार में दिखाई देते हैं.
नोट के नीचे राइट साइड अशोक स्तंभ का प्रतीक चिन्ह बना होता है.

RBI के बताए हुए इन 7 तरीकों से आप असली और नकली नोट के बीच में अच्छी तरह से फर्क कर सकते हैं. इससे आप किसी भी तरह की ठगी या धोखाधड़ी का शिकार नहीं होंगे.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Finance Tips: सिर्फ 10000 की मंथली सेविंग्स से बनें 10 करोड़ रुपए के मालिक, जानिए क्या है इसका पूरा गणित</title>
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        <description><![CDATA[ Mutual Fund Investment:&amp;nbsp;10 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाना बहुत से लोगों मुश्किल लग सकता है, लेकिन सही निवेश और लंबे समय तक अनुशासन के साथ इसे हासिल किया जा सकता है. वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करने में सबसे यहां भूमिका समय की होती है. जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाता है, उतनी ही कम पैसा लगाकर एक बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है.
आज के समय में म्यूचुअल फंड की SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) लंबे समय में पैसा बनाने का एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है. वहीं, इसमें मिलने वाला रिटर्न फंड बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर रहता है और इसकी कोई गारंटी नहीं दी जाती है.
10 हजार रुपये की SIP से कैसे बनेगा 10 करोड़ का फंड?
अगर कोई व्यक्ति हर महीने 10,000 रुपये का SIP शुरू करता है और हर साल निवेश की रकम में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करता है, तो काफी समय बाद इससे एक बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है.
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गणना के मुताबिक, अगर औसत सालाना रिटर्न 12 फीसदी माना जाए, तो करीब 31 साल में यह निवेश बढ़कर करीब 10.18 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इस दौरान निवेशक की ओर से कुल करीब 2.18 करोड़ रुपये लगाए जाएंगे, जबकि बाकी रकम 8 करोड़ रुपये कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि की ताकत से बढ़ेगी.
जल्दी करोड़पति बनने के लिए बढ़ाएं निवेश राशि
दूसरी ओर, अगर कोई व्यक्ति ज्यादा रकम से शुरुआत करता है, तो 10 करोड़ रुपये का लक्ष्य कम समय में हासिल किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, अगर शुरुआत में 25,000 रुपये की एसआईपी (SIP) की जाए और हर साल इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए, तो करीब 25 साल में 10.69 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो सकता है. इस कुल निवेश रकम करीब 2.95 करोड़ रुपये होगी.
वहीं, अगर कोई व्यक्ति जल्दी लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, तो वे हर महीने 50,000 रुपये की की SIP से करीब 20 साल में 10 करोड़ रुपये के करीब पहुंच सकते हैं. SIP की राशि भले ही ज्यादा है, लेकिन काफी काम समय में हो जाएगा.
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स्टेप-अप SIP से बढ़ती है संपत्ति बनाने की रफ्तार
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्टेप-अप SIP लंबे समय में धन बनाने का बेहतर तरीका हो सकता है. इसमें आय बढ़ने के साथ-साथ निवेश की रकम भी बढ़ाई जाती है, जिससे बिना आर्थिक दबाव के बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है.
हालांकि, निवेश करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, लक्ष्य और जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है. म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े निवेश हैं, इसलिए इनमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होता. इसलिए आप किसी भी बड़े निवेश का फैसले करने से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें , यह आपके लिए बेहतर ऑप्शन हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>MP के शिवपुरी में बनेगा मिसाइल इकोसिस्टम, 2500 करोड़ खर्च करेगा अडानी डिफेंस, युवाओं को मिलेगा रोजगार</title>
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        <description><![CDATA[ Missile Ecosystem in Shivpuri: भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 2500 करोड़ के बड़े निवेश के साथ दक्षिण एशिया के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर मिसाइल इकोसिस्टम की आधारशिला रखी है.
इस अत्याधुनिक प्रोजेक्ट के तहत एक ही जगह पर कंपोजिट प्रोपेलेंट और टीएनटी का उत्पादन किया जाएगा. टीएनटी एक प्रकार का विस्फोटक है. भारत के निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) में इस तरह की बड़े पैमाने की क्षमता पहली बार तैयार की जा रही है.
5000 युवाओं को मिलेगा रोजगार
अदाणी समूह के इस निवेश से क्षेत्र की आर्थिक और औद्योगिक सूरत बदलने की उम्मीद है. इस परियोजना से लगभग 5000 डायरेक्ट और इनडायरेक्ट कुशल रोजगार पैदा होंगे. इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSMEs के लिए नए अवसर खुलेंगे, जिससे मध्य प्रदेश देश के एक प्रमुख डिफेंस हब के रूप में स्थापित होगा. यह प्लांट भारतीय सशस्त्र बलों को बड़े पैमाने पर स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को शामिल करने में मदद करेगा.
SIP Investment: 5 साल की देरी से सीधा 2.42 करोड़ का नुकसान, आज ही शुरू करें SIP, समझ लें निवेश का गणित
इस निवेश का स्वागत करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, &#039;&#039;यह ऐतिहासिक निवेश रणनीतिक विनिर्माण के लिए एमपी के उभरते चेहरे को दर्शाता है. इससे देश के रक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी और राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी आएगी.&quot;
वहीं गुना-शिवपुरी क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे क्षेत्र के लिए एक नया अध्याय बताया. उन्होंने कहा, &#039;&#039;एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को राज्य के केंद्र में लाकर यह सुविधा हमारे युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा करेगी और भविष्य के लिए एक मजबूत औद्योगिक ढांचा तैयार करेगी.&quot;
देश की सुरक्षा होगी और मजबूत
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के डायरेक्टर जीत अदाणी ने इस शुरुआत को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर मिसाइल सिस्टम इंटीग्रेशन और जरूरी सामग्री का उत्पादन होने से भारत की रक्षा तैयारियां मजबूत होंगी और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा योगदान होगा.
किन आधुनिक मिसाइलों का होगा उत्पादन?
यह प्लांट एडवांस्ड ऑटोमेटेड प्रोडक्शन सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों से लैस होगा, जहां एक साथ कई मिसाइल कार्यक्रमों पर काम किया जा सकेगा. डीआरडीओ के साथ अदाणी डिफेंस के सफल परीक्षणों के बाद कई अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियां अब उत्पादन के चरण में हैं, जिनमें शामिल हैं...

क्स्ट जनरेशन एंटी-रेडिएशन मिसाइल
रुद्रम-2 मिसाइल
नेवल एंटी-शिप मिसाइल (शॉर्ट रेंज)
लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम
टैक्टिकल ऑटोनॉमस रिकोनिसेंस एंड अटैक सिस्टम

ग्वालियर में छोटे हथियार बना रहा अदाणी ग्रुप
गौरतलब है कि अदाणी डिफेंस साल 2020 से मध्य प्रदेश के ही ग्वालियर में छोटे हथियारों, जैसे पिस्तौल, लाइट मशीन गन, कार्बाइन और असॉल्ट राइफल का एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित कर चुका है, जिनकी सप्लाई भारतीय सेना को की जा रही है. अब शिवपुरी का यह नया प्रोजेक्ट भारत को सटीक निशाना लगाने वाले आधुनिक हथियारों का एक भरोसेमंद वैश्विक सप्लायर बनाने में मदद करेगा.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>के, शिवपुरी, में, बनेगा, मिसाइल, इकोसिस्टम, 2500, करोड़, खर्च, करेगा, अडानी, डिफेंस, युवाओं, को, मिलेगा, रोजगार</media:keywords>
    </item>
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        <title>LPG Price Today: जारी हो गया घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के लिए आज का नया रेट, फटाफट करें चेक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-जारी-हो-गया-घरेलू-और-कमर्शियल-सिलेंडर-के-लिए-आज-का-नया-रेट-फटाफट-करें-चेक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-जारी-हो-गया-घरेलू-और-कमर्शियल-सिलेंडर-के-लिए-आज-का-नया-रेट-फटाफट-करें-चेक</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Price Today on July 6: रसोई गैस की कीमतों में आज भी कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है. जबकि आम लोगों को उम्मीद है कि जिस तरह से कमर्शियल सिलेंडर के दाम हाल-फिलहाल में कम हुए हैं, उसी तरह से घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भी कुछ राहत मिलेगी. फिलहाल दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है. वहीं, यहां 19- किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर बीते 1 जुलाई को कीमतों में 183.50 रुपये की कटौती के बाद अभी 2930 रुपये के स्तर पर आ गया है.&amp;nbsp;
शहरवार एलपीजी की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
942.0 रुपये
2930.0 रुपये


मुंबई
941.5 रुपये
2885.5 रुपये


कोलकाता
968.0 रुपये
3082.0 रुपये


चेन्नई
957.5 रुपये
3106.0 रुपये


चंडीगढ़
951.5 रुपये
2954.5 रुपये&amp;nbsp;


देहरादून
961.0 रुपये
2983.5 रुपये


हैदराबाद
934.0 रुपये
2052.5 रुपये


भुवनेश्वर&amp;nbsp;
968.0 रुपये
3115.0 रुपये


तिरुवनंतपुरम
&amp;nbsp;951.0 रुपये
2970.5 रुपये



कच्चे तेल के दाम फिर हुए कम&amp;nbsp;
आज सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर टैंकरों की आवाजाही में सुधार होने और &amp;nbsp;OPEC+ के अगस्त से प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच ओपेक प्लस में शामिल देशों ने जुलाई-अगस्त से बाजार में रोजाना 1,88,000 बैरल अतिरिक्त तेज उतारने का फैसला लिया है. इससे आने वाले समय में कीमतें और गिर सकती हैं. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल के रेंज में आ गई है. इससे पता है कि होर्मुज में अमेरिका द्वारा सुरक्षित कॉरिडोर से तेल और गैस की शिपमेंट में सुधार आ रहा है.&amp;nbsp;
क्या अब कम होंगी LPG की कीमत?
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम तुरंत नहीं घटेंगे. अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक इस स्तर पर बनी रहती हैं, तो जुलाई अंत या अगस्त में कीमतों में कुछ कमी आने की उम्मीद की जा सकती है. दरअसल, भारत में अभी जो एलपीजी गैस, पेट्रोल-डीजल बिक रहा है, उन्हें पहले ऊंचे दामों में खरीदा गया था. अभी जो नया स्टॉक है, उसे भारत पहुंचने और रिफाइन होने में समय लगेगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Today:, जारी, हो, गया, घरेलू, और, कमर्शियल, सिलेंडर, के, लिए, आज, का, नया, रेट, फटाफट, करें, चेक</media:keywords>
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    <item>
        <title>Petrol&amp; Diesel Price Today: 6 जुलाई को जारी हुए पेट्रोल&amp; डीजल के नए रेट, जानिए दिल्ली से पटना तक कहां कितना महंगा हुआ तेल</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Price Today: देशभर में 6 जुलाई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए गए हैं. सरकारी तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे लेटेस्ट रेट अपडेट किए. कई शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि कुछ जगहों पर मामूली बदलाव देखने को मिला है.
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. इसके बावजूद फिलहाल भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट की वजह से दाम अलग हैं.
कच्चे तेल का क्या है हाल?
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड करीब 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. वहीं WTI क्रूड भी 82 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. मिडिल ईस्ट तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता की वजह से तेल बाजार में दबाव बना हुआ है.
जारी हो गया घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के लिए आज का नया रेट, फटाफट करें चेक
देश के बड़े शहरों में आज का पेट्रोल-डीजल रेट-



शहर का नाम&amp;nbsp;
पेट्रोल (प्रति लीटर)
डीजल (प्रति लीटर)


दिल्ली
₹94.72
₹87.62


मुंबई
₹103.44
₹89.97


कोलकाता
₹104.95&amp;nbsp;
₹91.76


चेन्नई
₹100.85
₹92.44&amp;nbsp;


नोएडा&amp;nbsp;
₹94.87&amp;nbsp;&amp;nbsp;
₹88.01&amp;nbsp;


गुरुग्राम
₹95.19
₹88.05


पटना
₹105.58
₹92.42


लखनऊ&amp;nbsp;
₹94.69
₹87.80


जयपुर
₹104.88&amp;nbsp;
₹90.36


भोपाल
₹106.31
₹91.72



आखिर हर शहर में अलग क्यों होता है रेट?
पेट्रोल और डीजल की बेस कीमत लगभग समान होती है, लेकिन राज्यों में लगने वाला VAT, स्थानीय टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट अलग-अलग होती है. इसी वजह से हर शहर में तेल के दाम बदल जाते हैं.
आगे सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
फिलहाल लोगों की नजर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है. अगर क्रूड ऑयल में बड़ी गिरावट आती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो सकते हैं. हालांकि अभी कंपनियों ने किसी बड़ी कटौती का संकेत नहीं दिया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-, Diesel, Price, Today:, जुलाई, को, जारी, हुए, पेट्रोल-, डीजल, के, नए, रेट, जानिए, दिल्ली, से, पटना, तक, कहां, कितना, महंगा, हुआ, तेल</media:keywords>
    </item>
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        <title>LPG पर बड़ी खबर, सरकार ने LNG सप्लाई पर लगा बैन हटाया, होर्मुज से भारत में दौड़ेगी गैस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-पर-बड़ी-खबर-सरकार-ने-lng-सप्लाई-पर-लगा-बैन-हटाया-होर्मुज-से-भारत-में-दौड़ेगी-गैस</link>
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        <description><![CDATA[ LNG Supply News: देश के लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार ने LNG की सप्लाई पर लगाए गए आपातकालीन रोक हटा दिए हैं. ये फैसला तब लिया गया है, जब मध्य पूर्व से भारत आने वाली LNG की सप्लाई फिर से पहले जैसी हो गई है. कुछ महीने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण गैस की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिसके चलते सरकार को खास इंतजाम करने पड़े थे. अब हालात सुधरने के बाद पाबंदियां हटा दी गई हैं.
क्या है पूरा मामला?मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले LNG जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी. इसके कारण भारत में गैस की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी. ऐसे में सरकार ने मार्च में आपातकालीन नियम लागू किए थे जिससे गैस को पहले जरूरी जगहों तक पहुंचाया जाए. अब जब शआंती है और जहाजों की आना- जाना नॉर्मल हो गया है तो इन नियमों की जरूरत नहीं रही.
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किन्हें मिलेगा फायदा?LNG पर लगे रोक हटने से सबसे ज्यादा फायदा उन सेक्टरों को होगा जो प्राकृतिक गैस ही पर निर्भर हैं. इसमें सीएनजी, पीएनजी, फर्टिलाइजर, रिफाइनरी, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और कई इंडस्ट्री शामिल हैं. अब यहां पहले की तरह ही गैस की सप्लाई मिल सकेगी.
क्या LPG सस्ता हो जाएगा?वैसे तो सरकार ने LPG सिलेंडर की कीमतों में अभी किसी तरह केबदलाव का ऐलान नहीं किया है. लेकिन गैस की सप्लाई सही होने से आगे चलकर सप्लाई चेन पर दबाव कम हो सकता है. इससे घरेलू और कमर्शियल गैस के दाम पर असर पड़ सकता है. बता दें कि कीमतों में बदलाव का फैसला तेल कंपनियां और सरकार अलग से करती हैं.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, पर, बड़ी, खबर, सरकार, ने, LNG, सप्लाई, पर, लगा, बैन, हटाया, होर्मुज, से, भारत, में, दौड़ेगी, गैस</media:keywords>
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    <item>
        <title>Bhutan E20 News: क्या भूटान ने ठुकराया भारत का E20 पेट्रोल? सरकार के बयान ने कर दिया सबकुछ साफ, जानें क्या कहा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bhutan-e20-news-क्या-भूटान-ने-ठुकराया-भारत-का-e20-पेट्रोल-सरकार-के-बयान-ने-कर-दिया-सबकुछ-साफ-जानें-क्या-कहा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/bhutan-e20-news-क्या-भूटान-ने-ठुकराया-भारत-का-e20-पेट्रोल-सरकार-के-बयान-ने-कर-दिया-सबकुछ-साफ-जानें-क्या-कहा</guid>
        <description><![CDATA[ Bhutan Ethanol Petrol News: भूटान की ओर से भारत से E20 पेट्रोल यानी एथेनॉल वाला पेट्रोल आयात करने के प्रस्ताव को ठुकराए जाने की खबरें हैं. अब पेट्रोलियम मंत्रालय ने सब कुछ साफ कर दिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि भूटान को लेकर किए जा रहे सभी दावे गलत हैं.&amp;nbsp;
भूटान को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया- मंत्रालय
मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, &#039;&#039;तेल विपणन कंपनियों (OMC) की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है और भूटान को E20 पेट्रोल निर्यात करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.&#039;&#039; मंत्रालय ने कहा कि कृपया केवल पर्यावरण और कृषि मंत्रालय (MoPNG) और तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें.
LPG पर बड़ी खबर, सरकार ने LNG सप्लाई पर लगा बैन हटाया, होर्मुज से भारत में दौड़ेगी गैस

Fact Check❌ Claims that Bhutan declined an offer to import E20 petrol from India are incorrect.No such offer has been made by the Oil Marketing Companies (OMCs), and there is no proposal for export of E20 petrol to Bhutan.✅ Please rely only on official information from&amp;hellip; pic.twitter.com/sqyAcEIvbw
&amp;mdash; Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) July 5, 2026



क्या है पूरा मामला?
बता दें कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में शनिवार को दावा किया गया था कि भूटान ने भारत की तेल कंपनियों के के E20 पेट्रोल सप्लाई करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. रिपोर्ट्स में कहा गया था कि भूटान ने इस बात पर चिंता जताई है कि भारत के फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पुराने हो चुके हैं. साथ ही भूटान के &amp;nbsp;पहाड़ी इलाकों के लिए इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल सही नहीं है. हालांकि अब सरकार ने तस्वीर बिलकुल साफ कर दी है.&amp;nbsp;
रिपोर्ट में और क्या दावे किए गए थे.
&#039;द भूटानीज़&#039; की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से यह अनुरोध किया था कि जब तक भारतीय बाज़ार में सामान्य पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उसकी सप्लाई जारी रखी जाए. रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से यह भी लिखा गया था कि पुराने टैंकों में पानी रिसने का खतरा है, जिससे फ्यूल की क्वालिटी खराब हो सकती है, क्योंकि इथेनॉल आसानी से नमी सोख लेता है.
Isobutanol in Diesel: पेट्रोल के बाद अब डीजल की बारी, गाड़ियों में 15% तक मिलाया जाएगा &#039;आइसोब्यूटेनॉल&#039;, जानें क्या है ये
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bhutan, E20, News:, क्या, भूटान, ने, ठुकराया, भारत, का, E20, पेट्रोल, सरकार, के, बयान, ने, कर, दिया, सबकुछ, साफ, जानें, क्या, कहा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>3 करोड़ की नौकरी छोड़ किराना स्टोर चला रहा IIT गोल्ड मेडलिस्ट, कारण सुन विवेक को सलाम करेंगे आप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/3-करोड़-की-नौकरी-छोड़-किराना-स्टोर-चला-रहा-iit-गोल्ड-मेडलिस्ट-कारण-सुन-विवेक-को-सलाम-करेंगे-आप</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/3-करोड़-की-नौकरी-छोड़-किराना-स्टोर-चला-रहा-iit-गोल्ड-मेडलिस्ट-कारण-सुन-विवेक-को-सलाम-करेंगे-आप</guid>
        <description><![CDATA[ IIT Bombay Graduate News:&amp;nbsp;आजकल ज्यादातर लोगों का यह सपना होता है कि वह विदेश में जाकर करोड़ों रुपये की नौकरी हासिल कर सकें. ऐसे में जरा सोचिए कि आपको अमेरिका सेसालाना 3 करोड़ रुपये की नौकरी का ऑफर मिले और आप उसे ठुकराकर अपने शहर में किराना स्टोर खोल लें. सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता हैं, &amp;nbsp;लेकिन कानपुर के एक युवक ने ऐसा फैसला लिया जिसने सबको हैरान कर दिया है.
आईआईटी बॉम्बे से कंप्युटर साइंस में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले विवेक शर्मा को अमेरिका से करीब 3 करोड़ रुपये सालाना की जॉब का ऑफर मिला था. लेकिन उन्होंने विदेश जाकर अपना करियर बनाने के बजाय अपने शहर में रहकर परिवार के किराना स्टोर को संभालने का फैसला किया. आज सोशल मीडिया पर लोग उनके इस फैसले और सोच की जमकर तारीफ कर रहे है.&amp;nbsp;
विदेश से मिला करोड़ों का जॉब ऑफर&amp;nbsp;
वायरल पोस्ट के मुताबिक, विवेक शर्मा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के एक स्टार्टअप से करीब 2.40 लाख डॉलर (2.90 करोड़ रुपये सालाना) का जॉब ऑफर मिला था. इसमें वीजा स्पांसरशिप, रीलोकेशन बेनिफिट और ग्लोबल लेवल पर करियर बनाने का मौका भी शामिल था.
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माता-पिता की बीमारी ने बदल दिया फैसला
विवेक एक लोअर मिडिल क्लास फैमिली से हैं. उनके पिता रेलवे में क्लर्क हैं, जबकि उनकी मां ट्यूशन पढ़ाकर घर की आर्थिक मदद करती थीं. परिवार ने उनकी पढ़ाई के लिए अपनी बचत तक खर्च कर दी और आईआईटी तक पहुंचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की है.&amp;nbsp;
अमेरिका जाने की तैयारी चल रही थी इसी दौरान अचानक विवेक की किस्मत ने करवट बदल दी. विवेक के पिता को हार्ट अटैक आ गया और मां को कैंसर होने का पता चला. ऐसे में विवेक ने विदेश जाकर अपना करियर बनाने के बजाय अपने माता-पिता के साथ रहने का फैसला बेहतर समझा. यही वजह है कि परिवार का खर्च चलाने के लिए विवेक ने कानपुर में किराना स्टोर खोल दिया. &amp;nbsp;साथ ही उन्होंने जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में कोडिंग सिखाना भी शुरू कर दिया.
सोशल मीडिया पर मिल रही खूब सराहना
विवेक की स्टोरी सामने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि सफलता का पैमाना सिर्फ बड़ी सैलरी से नहीं, बल्कि आपके परिवार के लिए लिए गए फैसलों से भी मापी जाती है.
Bhutan E20 News: क्या भूटान ने ठुकराया भारत का E20 पेट्रोल? सरकार के बयान ने कर दिया सबकुछ साफ, जानें क्या कहा
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>करोड़, की, नौकरी, छोड़, किराना, स्टोर, चला, रहा, IIT, गोल्ड, मेडलिस्ट, कारण, सुन, विवेक, को, सलाम, करेंगे, आप</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Ethanol: अब एथेनॉल से उड़ेंगे हवाई जहाज, प्रदूषण फैलाने वाला जेट फ्यूल होगा रिप्लेस! किसने लिया फैसला?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ethanol-अब-एथेनॉल-से-उड़ेंगे-हवाई-जहाज-प्रदूषण-फैलाने-वाला-जेट-फ्यूल-होगा-रिप्लेस-किसने-लिया-फैसला</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ethanol-अब-एथेनॉल-से-उड़ेंगे-हवाई-जहाज-प्रदूषण-फैलाने-वाला-जेट-फ्यूल-होगा-रिप्लेस-किसने-लिया-फैसला</guid>
        <description><![CDATA[ Ethanol: दुनियाभर में प्रदूषण कम करने के लिए नए-नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं. अब एविएशन फील्ड में भी बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है. दक्षिण कोरिया ने एथेनॉल बेस्ड सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी SAF को बढ़ावा देने का फैसला किया है. इसका मकसद पुराने जेट फ्यूल पर निर्भरता कम करके हवा में कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों का घुलने से रोकना है.&amp;nbsp;
क्या है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल?सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, पुराने पेट्रोलियम बेस्ड जेट फ्यूल से ज्यादा इको फ्रेंडली माना जाता है. इसे एथेनॉल, कृषि अवशेष, इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल और दूसरे ऑर्गेनिक सोर्स से तैयार किया जा सकता है. इस फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे विमान उड़ाने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड कम निकलता है.
3 करोड़ की नौकरी छोड़ किराना स्टोर चला रहा IIT गोल्ड मेडलिस्ट, कारण सुन विवेक को सलाम करेंगे आप
दक्षिण कोरिया ने क्या फैसला लिया?मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया सरकार ने विमानन क्षेत्र में SAF के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए नया तरीका अपनाया है. अब एथेनॉल बेस्ड ईंधन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार चाहती है कि आने वाले साल में एयरलाइंस धीरे-धीरे पुराने जेट फ्यूल की जगह ज्यादा ईको- फ्रेंडली ईंधन का इस्तेमाल करें.&amp;nbsp;
भारत और बायोफ्यूल कनेक्शनभारत भी लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर तेजी से काम कर रहा है. पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर देश आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा भारत में भी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल पर रिसर्च और विकास का काम चल रहा है.&amp;nbsp;
क्या भूटान ने ठुकराया भारत का E20 पेट्रोल? सरकार के बयान ने कर दिया सबकुछ साफ, जानें क्या कहा
क्या जल्द पूरी तरह बदल जाएगा जेट फ्यूल?फिलहाल पारंपरिक जेट फ्यूल को पूरी तरह बदलना आसान नहीं है. विमान इंजन, ईंधन सप्लाई और उत्पादन क्षमता जैसी कई चुनौतियां अभी मौजूद हैं. इसलिए आने वाले समय में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को पुराने जेट फ्यूल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किए जाने की संभावना अधिक है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ethanol:, अब, एथेनॉल, से, उड़ेंगे, हवाई, जहाज, प्रदूषण, फैलाने, वाला, जेट, फ्यूल, होगा, रिप्लेस, किसने, लिया, फैसला</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सॉरी नुई साहिबा! जिस भारत को आप कोस कह रही हैं, उसी में ये 7 महिलाएं राज कर रही हैं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सॉरी-नुई-साहिबा-जिस-भारत-को-आप-कोस-कह-रही-हैं-उसी-में-ये-7-महिलाएं-राज-कर-रही-हैं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सॉरी-नुई-साहिबा-जिस-भारत-को-आप-कोस-कह-रही-हैं-उसी-में-ये-7-महिलाएं-राज-कर-रही-हैं</guid>
        <description><![CDATA[ Indian Women Business Leaders: पेप्सिको की पूर्व CEO इंदिरा नुई ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि अगर वो अमेरिका नहीं गई होतीं तो शायद किसी बड़ी कंपनी की CEO नहीं बन पातीं. उनका कहना था कि अमेरिका ने उन्हें वह मौका दिया जो शायद कहीं और नहीं मिलता. बात उनके अनुभव की थी और हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है. लेकिन इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने एक सवाल जरूर पूछा कि क्या सच में भारत में महिलाओं के लिए बड़े पदों तक पहुंचना नामुमकिन है? इस सवाल का जवाब आंकड़ों से कम और उन महिलाओं से ज्यादा मिलता है, जिन्होंने भारत में रहकर ही बड़े बिजनेस की कमान संभाली है.&amp;nbsp;
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 2000... पीएम मोदी के बयान ने सबको चौंकाया! बताया संकट के समय क्या हुआ
यहां से आप उन महिलाओं के बारे में जान सकते हैं कि जिन्होंने भारत में रहकर ही बड़ी कंपनियों में अपनी धाक जमाई है-&amp;nbsp;
1. फाल्गुनी नायरजिस उम्र में लोग रिटायरमेंट की प्लानिंग करते हैं उस पड़ाव पर फाल्गुनी नायर ने Nykaa शुरुआत की. देखते ही देखते कंपनी शेयर बाजार तक पहुंच गई और वो भारत की सबसे सफल महिला उद्यमियों में लिस्ट में शामिल हो गईं.
2. किरण मजूमदार-शॉआज Biocon का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन इसकी शुरुआत एक छोटे से गैरेज से हुई थी. किरण मजूमदार-शॉ ने ऐसे समय में बायोटेक कंपनी शुरू की थी, जब इस क्षेत्र में महिलाओं की मौजूदगी बेहद कम थी.
3. रोशनी नाडरHCLTech जैसी बड़ी आईटी कंपनी की चेयरपर्सन रोशनी नाडर आज भारत की सबसे पावरफुल बिजनेस लीडर्स में गिनी जाती हैं. टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र में उनका काम अपने आप में एक बड़ी कामयाबी है.
सोमवार, 6 जुलाई को क्यों बंद रहेंगे बैंक, क्या है छुट्टी का कारण? घर से निकलने से पहले जान लें अपडेट
4. विभा पाडलकरHDFC Life की एमडी और सीईओ विभा पाडलकर देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनियों में से एक को लीड कर रही हैं. बीमा कंपनी के क्षेत्र में उनका नाम खूब सम्मान के साथ लिया जाता है.&amp;nbsp;
5. प्रिया नायरHindustan Unilever जैसी बड़ी FMCG कंपनी की कमान भी अब एक महिला के हाथ में ही है. प्रिया नायर का इस पद तक पहुंचना इस बात का सबूत है कि इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्ड तेजी से बदल रहा है.
6. राधिका गुप्ताबचपन में गर्दन की परेशानी के कारण उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज राधिका गुप्ता Edelweiss Mutual Fund की एमडी और सीईओ हैं और लाखों निवेशकों का भरोसा जीत चुकी हैं.
भारत में अमेरिकी राशन खरीदना कितना महंगा? महिला का बिल देखकर चकरा जाएगा आपका सिर
7. नायरिका होल्करThe Leela Hotels की चेयरपर्सन नायरिका होल्कर ने देश के लग्जरी होटल बिजनेस को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है. आज उनका नाम भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल है.
तस्वीर लगातार बदल रही हैक्या भारत में महिलाओं के सामने चुनौतियां नहीं हैं? बिल्कुल हैं. परिवार और करियर के बीच बैलेंस करके लीड करने तक का सफर आसान नहीं होता है, लेकिन ये कहना भी सही नहीं होगा कि महिलाओं के लिए रास्ते बंद हैं. आज भारत में बैंकिंग, आईटी, फार्मा, ऑटो, स्टार्टअप, FMCG और फाइनेंस जैसे लगभग हर बड़े सेक्टर में महिलाएं बड़े-बड़े पदों पर पहुंच रही हैं और बेहद कामयाब हैं.
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हर किसी की अलग है कहानीइंदिरा नुई के अनुभव का सम्मान होना चाहिए, लेकिन भारत की कहानी सिर्फ एक अनुभव से तय नहीं होती है. यहां भी लाखों महिलाएं अपने दम पर आगे बढ़ रही हैं और कई सारी महिलाएं ऐसी हैं जो देश की सबसे बड़ी कंपनियों की कमान संभाल रही हैं. इसलिए शायद तस्वीर को एक ही फ्रेम में देखने के बजाय पूरा एल्बम देखना ज्यादा सही होगा. भारत में चुनौतियां हैं, लेकिन अवसर भी हैं और इन अवसरों का सबसे मजबूत सबूत वही महिलाएं हैं, जो आज बोर्डरूम में फैसले ले रही हैं और हजारों कर्मचारियों को लीड कर रही हैं. ये महिलाएं दुनिया को बता रही हैं कि मंजिल मेहनत से मिलती है, सिर्फ जगह बदलने से नहीं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सॉरी, नुई, साहिबा, जिस, भारत, को, आप, कोस, कह, रही, हैं, उसी, में, ये, महिलाएं, राज, कर, रही, हैं</media:keywords>
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        <title>Real Estate News: नोएडा में फ्लैट&amp;प्लॉट खरीदने से पहले रुकें, अथॉरिटी ने बताया कहां डील करना है गैरकानूनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/real-estate-news-नोएडा-में-फ्लैट-प्लॉट-खरीदने-से-पहले-रुकें-अथॉरिटी-ने-बताया-कहां-डील-करना-है-गैरकानूनी</link>
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        <description><![CDATA[ Noida Property Purchase: अगर आप भी नोएडा में प्लॉट, मकान या प्रॉपर्टी खरीदने का सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है. दरअसल नोएडा अथॉरिटी ने नई सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए कुछ इलाकों में जमीनों पर खरीद-फरोख्त से बचने की सलाह दी है. अथॉरिटी की मुताबिक, इन इलाकों की कई जमीनें पहले से अधिग्रहित या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं.
इसके बावजूद यहां अवैध निर्माण और कब्जे के मामले सामने आए है. ऐसे में बिना पूरी जांच-पड़ताल और जमीन के डॉक्युमेंट्स चेक किए इन इलाकों में कोई भी प्रॉपर्टी खरीदना आपके लिए कानूनी और आर्थिक परेशानी का जरिया बन सकता है.&amp;nbsp;
किन इलाकों और खसरा नंबरों पर लागू है चेतावनी?

भंगेल बेगमपुर
हाजीपुर
सालारपुर खादर

अथॉरिटी ने सालारपुर खादर के खसरा नंबर 700&amp;ndash;711, 723, 724, 728&amp;ndash;735, 745&amp;ndash;752, 759, 760, 762&amp;ndash;764, 779, 780 और 795&amp;ndash;798, और भंगेल बेगमपुर के खसरा नंबर 176, 178, 217, 221, 223, 225, 226, 247, 250 और 251 को सरकारी रिकॉर्ड में शामिल किया है. प्रभावित जमीनों की पहचान के लिए नोटिस के साथ नक्शे और सैटेलाइट तस्वीरें भी जारी की गई हैं.&amp;nbsp;
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क्यों जारी की गई चेतावनी?
नोएडा अथॉरिटी के मुताबिक, सालारपुर खादर, भंगेल बेगमपुर और हाजीपुर गावों में कुछ भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों ने अधिग्रहण जमीन पर गैरकानूनी निर्माण कर रखा है. इन गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ अथॉरिटी समय-समय पर तोड़फोड़ और सीलिंग अभियान चलाती रही है. इसके अलावा कई लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है.&amp;nbsp;
अथॉरिटी ने कहा है कि इन चिन्हित जमीनों पर किसी भी बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं दी गई है. ऐसे में यहां बना कोई भी मकान या प्लॉट कानूनी तौर पर वैध नहीं माना जाएगा. सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इन इलाकों में बिजली, पानी, सड़क और नाली जैसी कई तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी.
खरीदारों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति आपको इन इलाकों में प्लॉट या मकान बेचने का प्रस्ताव देता है, तो इसे खरीदने से पहले आप खसरा नंबर और जमीन के रिकॉर्ड की अच्छी तरह से जांच लें. अगर वह मकान सालारपुर खादर का कोई प्लॉट खसरा नंबर 730 में आता है, तो वह अथॉरिटी की चेतावनी के दायरे में होगा.
ऐसी जमीन खरीदने पर आपको भविष्य में कई तरह की खतरा का सामना करना पड़ेगा खासकर निर्माण गिराए जाने, सरकारी सुविधाएं न मिलने और लंबे कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए जरूरी है कि प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आप सभी दस्तावेजों का सत्यापन अच्छे तरीके से कर लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Real, Estate, News:, नोएडा, में, फ्लैट-प्लॉट, खरीदने, से, पहले, रुकें, अथॉरिटी, ने, बताया, कहां, डील, करना, है, गैरकानूनी</media:keywords>
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        <title>Isobutanol in Diesel: पेट्रोल के बाद अब डीजल की बारी, गाड़ियों में 15% तक मिलाया जाएगा &amp;apos;आइसोब्यूटेनॉल&amp;apos;, जानें क्या है ये</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isobutanol-in-diesel-पेट्रोल-के-बाद-अब-डीजल-की-बारी-गाड़ियों-में-15-तक-मिलाया-जाएगा-आइसोब्यूटेनॉल-जानें-क्या-है-ये</link>
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        <description><![CDATA[ Isobutanol Blending in Diesel: पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग को लेकर देशभर में बवाल छिड़ा हुआ है. अब सरकार डीजल में ब्लेंडिंग की तैयारी कर रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार ईंधन के आयात को कम करने कोशिश कर रही है. इसी के तहत अब सरकार &amp;nbsp;अपने बायोफ्यूल प्रोग्राम के अगले चरण की तैयारियों में जुटी हुई है. गडकरी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि इस प्रोग्राम के तहत अब डीजल के साथ 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की मंजूरी देने की योजना पर काम चल रहा है.
वैकल्पिक ईंधन को लेकर रोडमैप के बारे में बताते हुए नितिन गडकरी ने का कि एथेनॉल को सीधे डीजल के साथ नहीं मिलाया जा सकता, इसलिए इथेनॉल को एक व्यावहारिक और कुशल विकल्प के तौर पर आइसोब्यूटेनॉल में बदलने पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा, &#039;&#039;आइसोब्यूटेनॉल डीजल का बढ़िया विकल्प बन सकता है. हमारा मकसद साफ सुथरे ईंधन को बढ़ावा देते हुए ऊर्जा सुरक्षा हासिल करना है.&#039;&#039;
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सरकार ने जेनरेटर पर किया टेस्ट
आइसोब्यूटेनॉल के बारे में बात करते हुए गडकरी ने कहा कि मंत्रालय ने 100 फीसदी एथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल पर दो जेनरेटर सेट सफलतापूर्वक चलाए हैं. इससे साबित होता है कि ऐसे इंजन बनाए जा सकते हैं, जो इन ईंधनों पर चल सकें. उन्होंने कहा, &#039;&#039; इस तकनीक से संकेत मिलता है कि आने वाले सालों में इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है.&#039;&#039;
क्या है आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग?
गैस को कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस के साथ मिलाया जाता है. इस रिएक्शन से आइसोब्यूटिरलडिहाइड बनता है. इस एल्डिहाइड में हाइड्रोजन जोड़ी जाती है, जिससे शुद्ध आइसोब्यूटेनॉल तैयार हो जाता है.

इथेनॉल के मुकाबले आइसोब्यूटेनॉल में ज्यादा एनर्जी होती है, जिससे गाड़ी के माइलेज और परफॉर्मेंस पर बुरा असर नहीं पड़ता.
जब डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाया जाता है तो गाड़ियों से निकलने वाला हानिकारक धुआं काफी कम हो जाता है.
वैज्ञानिक तरीके से आइसोब्यूटेनॉल को आसानी से डीजल में घोला जा सकता है.

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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Isobutanol, Diesel:, पेट्रोल, के, बाद, अब, डीजल, की, बारी, गाड़ियों, में, 15, तक, मिलाया, जाएगा, आइसोब्यूटेनॉल, जानें, क्या, है, ये</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Adani News: &amp;apos;यह अमेरिका का काम नहीं&amp;apos;, US न्याय विभाग ने अडानी पर केस बंद करने के फैसले को ठहराया सही</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/adani-news-यह-अमेरिका-का-काम-नहीं-us-न्याय-विभाग-ने-अडानी-पर-केस-बंद-करने-के-फैसले-को-ठहराया-सही</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/adani-news-यह-अमेरिका-का-काम-नहीं-us-न्याय-विभाग-ने-अडानी-पर-केस-बंद-करने-के-फैसले-को-ठहराया-सही</guid>
        <description><![CDATA[ US DoJ on Adani Case: अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में अमेरिका के न्याय विभाग ने बड़ा बयान दिया है. न्याय विभाग यानी DOJ ने इस केस को पूरी तरह से बंद करने के फैसले का बचाव किया है. विभाग ने फेडरल जज से कहा है कि ये केस कानूनी रूप से बेहद कमजोर था और कूटनीतिक रूप से नुकसानदेह थे. इसे तो पहले ही खत्म हो जाना चाहिए था.
दरअसल यह पूरा मामला साल 2024 का है, जब अमेरिका में बाइडन प्रशासन था. उस समय अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अडानी और अन्य लोगों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में सौर ऊर्जा के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 2100 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की योजना बनाई. साथ ही अमेरिकी निवेशकों से झूठ बोलकर अरबों डॉलर का निवेश जुटाया. अब न्याय विभाग ने इस केस को पूरी तरह से खारिज करने के लिए अदालत में 10 पेज का एक सख्त जवाब दाखिल किया है.
केस बंद करने का फैसला एक दम सही- न्याय विभाग
यह जवाब तब आया, जब अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने न्याय विभाग से पूछा कि वह इस केस को हमेशा के लिए क्यों बंद करना चाहते हैं? इसके जवाब में न्याय विभाग के अधिकारी आर ट्रेंट मैकॉटर ने कोर्ट को दो टूक कहा कि अदालतों को सरकारी फैसलों की इस तरह जांच पड़ताल नहीं करनी चाहिए. ऐसा करने से विभाग के आंतरिक वीटो और विशेषाधिकारों का हनन होता है. उन्होंने साफ कहा कि इस केस को वापस लेने का फैसला कोई मुश्किल फैसला नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से सही कदम है.
Isobutanol in Diesel: पेट्रोल के बाद अब डीजल की बारी, गाड़ियों में 15% तक मिलाया जाएगा &#039;आइसोब्यूटेनॉल&#039;, जानें क्या है ये
न्याय विभाग ने केस बंद करने की बताई वजह&amp;nbsp;

विभाग ने साफ लिखा कि यह पूरी तरह से एक विदेशी मामला है. इसमें कुछ भारतीय लोग भारतीय सरकार को टैक्स रीबेट प्रोग्राम के जरिए पेमेंट करके भारतीय बिजली को भारत के लोगों तक पहुंचाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट ले रहे थे.
अमेरिका का इसमें पड़ना कूटनीतिक रिश्ते खराब करता है और देश के संसाधनों की बर्बादी है. भारत अपने आंतरिक मामलों को संभालने में वाशिंगटन या ब्रुकलिन के वकीलों से कहीं ज्यादा सक्षम है.
भारतीय जांच एजेंसियों ने पहले ही इसकी जांच की और उन्हें कोई गड़बड़ी नहीं मिली.
अमेरिकी निवेशकों को एक भी रुपए का नुकसान नहीं हुआ है. सभी बॉन्ड्स का पैसा या तो चुका दिया गया है या समय पर दिया जा रहा है.
इस केस से जुड़े मुख्य सबूत और गवाह अमेरिका से बाहर हैं.
धोखाधड़ी के जो आरोप लगाए गए थे, वे सिर्फ कॉर्पोरेट जगत की सामान्य बातें थीं, जिन पर इतने बड़े निवेशक आंख मूंदकर भरोसा नहीं करते.

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यह एक कमजोर केस- न्याय विभाग
न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि जून 2025 में आई नई अमेरिकी नीति के तहत अब अमेरिकी सुरक्षा, अमेरिकी कंपनियों को नुकसान या गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर ही फोकस किया जाएगा और अडानी का मामला इस दायरे में नहीं आता. इसके अलावा अमेरिकी मीडिया में चल रही उन खबरों को भी विभाग ने पूरी तरह झूठा करार दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अडानी ग्रुप द्वारा अमेरिका में निवेश के वादे के बदले यह केस बंद किया जा रहा है. अधिकारी ने कहा कि अगर निवेश की कोई बात न भी होती, तब भी वे इस कमजोर केस को बंद करने की ही मांग करते.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Adani, News:, यह, अमेरिका, का, काम, नहीं, न्याय, विभाग, ने, अडानी, पर, केस, बंद, करने, के, फैसले, को, ठहराया, सही</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Cylinder Price Today: गैस सिलेंडर की कीमतों पर बड़ा अपडेट, जानिए घरेलू और कमर्शियल LPG के नए रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-cylinder-price-today-गैस-सिलेंडर-की-कीमतों-पर-बड़ा-अपडेट-जानिए-घरेलू-और-कमर्शियल-lpg-के-नए-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-cylinder-price-today-गैस-सिलेंडर-की-कीमतों-पर-बड़ा-अपडेट-जानिए-घरेलू-और-कमर्शियल-lpg-के-नए-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Price Today: जुलाई महीने की शुरुआत के साथ कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें जारी कर दी थीं. इस बार घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों और कमर्शियल गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए अलग-अलग अपडेट आया है. एक तरफ जहां 14 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में बड़ी कटौती की गई है. ये सारी नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू हैं.
घरेलू LPG सिलेंडर के दामदेशभर में घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14 किलो वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में इस महीने भी कोई बदलाव नहीं हुआ है यानी आम उपभोक्ताओं को फिलहाल पुराने रेट पर ही गैस सिलेंडर मिलेगा. तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को कीमतों की समीक्षा करती हैं, लेकिन इस बार घरेलू ग्राहकों को राहत देते हुए कीमतें स्थिर रखी गई हैं.
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कमर्शियल LPG सिलेंडरहोटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कारोबारियों के लिए राहत की खबर है. 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 तक की कटौती की गई है. राजधानी दिल्ली में अब 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर ₹2,930 में मिलेगा.&amp;nbsp;
हर महीने क्यों बदलती हैं कीमतें?एलपीजी सिलेंडर की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और सरकारी नीतियों के आधार पर तय की जाती हैं. इसी वजह से हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां नई दरें जारी करती हैं.
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ऐसे चेक करें सिलेंडर का रेटअगर आप अपने शहर में घरेलू या कमर्शियल LPG सिलेंडर की ताजा कीमत जानना चाहते हैं, तो इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर जाकर आसानी से जानकारी ले सकते हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Cylinder, Price, Today:, गैस, सिलेंडर, की, कीमतों, पर, बड़ा, अपडेट, जानिए, घरेलू, और, कमर्शियल, LPG, के, नए, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold&amp; Silver Price Today: फिर से महंगा हुआ सोना, जानें चांदी के क्या हैं हाल, देखें 24K, 22K, 18K गोल्ड&amp; सिल्वर की रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-फिर-से-महंगा-हुआ-सोना-जानें-चांदी-के-क्या-हैं-हाल-देखें-24k-22k-18k-गोल्ड-सिल्वर-की-रेट-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-फिर-से-महंगा-हुआ-सोना-जानें-चांदी-के-क्या-हैं-हाल-देखें-24k-22k-18k-गोल्ड-सिल्वर-की-रेट-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today: अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो पहले नए रेट जरूर जान लें. 4 जुलाई 2026 के लिए सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की ताजा कीमतें जारी हो गई हैं. पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में कीमती धातुओं में मजबूती देखने को मिली है. वैश्विक बाजार में तेजी और निवेशकों की बढ़ती मांग का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है. यहां से आप शहर अनुसार सोना- चांदी का भाव जानें.
आज 4 जुलाई का गोल्ड रेट-&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट सोना (10 ग्राम)
22 कैरेट सोना (10 ग्राम)
18 कैरेट सोना (10 ग्राम)


दिल्ली
₹147150
₹134900
₹110400


मुंबई
₹147000
₹134750
₹110250


कोलकाता
₹147000
₹134750
₹110250


पटना
₹147050
₹134800
₹110300


लखनऊ
₹147150
₹134900
₹110400


अयोध्या
₹147150
₹134900
₹110400


मेरठ
₹147150
₹134900
₹110400


कानपुर
₹147150
₹134900
₹110400


गाजियाबाद
₹147150
₹134900
₹110400


नोएडा
₹147150
₹134900
₹110400


गुरुग्राम
₹147150
₹134900
₹110400


चेन्नई
₹149560
₹137000
₹114400


चंडीगढ़
₹147150
₹134900
₹110400


जयपुर
₹147150
₹134900
₹110400


लुधियाना
₹147150
₹134900
₹110400


गुवाहाटी
₹147000
₹134750
₹110250


इंदौर
₹147050
₹134800
₹110300


अहमदाबाद
₹147050
₹134800
₹110300


सूरत
₹147050
₹134800
₹110300


पुणे
₹147000
₹134750
₹110250


नागपुर
₹147000
₹134750
₹110250


नासिक
₹147030
₹134780
₹110280


बैंगलोर
₹147000
₹134750
₹110250


वडोदरा
₹147050
₹134800
₹110300


भुवनेश्वर
₹147000
₹134750
₹110250


रायपुर
₹147000
₹134750
₹110250


हैदराबाद
₹147000
₹134750
₹110250



गैस सिलेंडर की कीमतों पर बड़ा अपडेट, जानिए घरेलू और कमर्शियल LPG के नए रेट
आज 4 जुलाई का सिल्वर रेट-&amp;nbsp;



शहर
10 ग्राम चांदी का भाव
100 ग्राम चांदी का भाव
1 किलो चांदी का भाव


दिल्ली
₹2,500
₹25,000
₹2,50,000


मुंबई
₹2,500
₹25,000
₹2,50,000


कोलकाता
₹2,500
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पटना
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लखनऊ
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मेरठ
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अयोध्या
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कानपुर
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गाजियाबाद
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नोएडा
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गुरुग्राम
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चेन्नई
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जयपुर
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लुधियाना
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जलगांव
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इंदौर
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चंडीगढ़
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भुवनेश्वर
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₹26,000
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हैदराबाद
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₹26,000
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सोने-चांदी की कीमतें क्यों बदलती हैं?
भारत में सोने और चांदी की कीमतें कई चीजों की वजह से बदलती है. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, जीएसटी और घरेलू मांग प्रमुख हैं. शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने से भी कीमतों पर असर पड़ता है.
क्या आज बदले पेट्रोल-डीजल के दाम? सुबह 6 बजे आया नया अपडेट, चेक करें लेटेस्ट रेट ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-, Silver, Price, Today:, फिर, से, महंगा, हुआ, सोना, जानें, चांदी, के, क्या, हैं, हाल, देखें, 24K, 22K, 18K, गोल्ड-, सिल्वर, की, रेट, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
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        <title>ज्यादा ब्याज दर, KYC के भी तोड़े नियम, इस बैंक पर RBI ने लगाया 63 लाख का जुर्माना, क्या इसमें है आपका खाता?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ज्यादा-ब्याज-दर-kyc-के-भी-तोड़े-नियम-इस-बैंक-पर-rbi-ने-लगाया-63-लाख-का-जुर्माना-क्या-इसमें-है-आपका-खाता</link>
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        <description><![CDATA[ Bank of Baroda: आजकल ज्यादातर लोग अपनी बचत बैंक में जमा करते हैं, ताकि उन्हें उस पर ब्याज मिले और उनको फायदा हो. इसके अलावा कई लोग जरूरत पड़ने पर बैंक से लोन भी लेते हैं. ऐसे में सोचिए जिस बैंक में आपका अकाउंट हो, उसपर RBI किसी कारणवश कार्रवाई कर दे तो ऐसी स्थिति में ग्राहकों के मन में कई सवाल आएंगे. इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर जुर्माना लगाया है. जानिए इस जुर्माने के पीछे की क्या वजह है? &amp;nbsp;
RBI ने बैंक पर क्यों लगाया जुर्माना?
RBI की जांच में सामने आया है कि बैंक ने KYC और लेंडर्स के लिए फेयर प्रैक्टिस कोड से जुड़े कुछ जरूरी नियमों का पालन नहीं किया, इसलिए उस पर जुर्माना लगाया गया. इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोन खातों पर तय नियमों से ज्यादा ब्याज लिया गया. इतना ही नहीं, बल्कि कुछ ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड भी समय पर अपलोड नहीं की गई.
सभी आरोप निकले सच
बता दें कि RBI की जांच के दौरान नियमों के पालन में कमी मिली थी, जिसके बाद RBI ने बैंक ऑफ बड़ौदा को कारण बताने के लिए एक नोटिस भेजा था. जिसमें RBI ने आरोपों को सही पाया, जिसके बाद बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.&amp;nbsp;
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क्या ग्राहकों को होगी दिक्कत?

RBI ने यह कार्रवाई बैंक के नियमों का पालन न करने पर की.
इसलिए इस जुर्माने का ग्राहकों के बैंक अकाउंट पर किसी तरह को कोई असर नहीं होगा.
ग्राहक जो भी सेवा बैंक से ले रहे हैं, वह पहले की ही तरह जारी रहेगी.
इस कार्रवाई का कोई असर ग्राहक को नहीं होगा.

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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ज्यादा, ब्याज, दर, KYC, के, भी, तोड़े, नियम, इस, बैंक, पर, RBI, ने, लगाया, लाख, का, जुर्माना, क्या, इसमें, है, आपका, खाता</media:keywords>
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        <title>Tomato Price: मानसून गर्मी से राहत देगा, महंगाई से नहीं! बचाकर चलो टमाटर, फिर बढ़ गए रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tomato-price-मानसून-गर्मी-से-राहत-देगा-महंगाई-से-नहीं-बचाकर-चलो-टमाटर-फिर-बढ़-गए-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ Tomato Price Hike: रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाला टमाटर एक बार फिर लोगों के बजट पर असर डालने लगा है. देश के कई राज्य में इसकी कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है. मौसम की मार, तेज गर्मी और मानसून की धीमी शुरुआत की वजह से टमाटर की फसलें काफी प्रभावित हुई है. यही वजह है कि इसका असर अब बाजार में भी दिखाई देने लगा है, जहां टमाटर के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं.&amp;nbsp;
टमाटर की कीमत ने बधाई रसोई की चिंता&amp;nbsp;
देश के बड़े उत्पादक राज्यों से टमाटरों की सप्लाई कम होने के कारण कीमतों में तेजी बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजारों में टमाटर की खुदरा कीमतें पिछले महीने के मुकाबले 16% और पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले में 23% तक बढ़ चुकी हैं. ऐसे में अगर आप भी रोजाना सब्जी में टमाटर का इस्तेमाल करते हैं, तो आने वाले दिनों में आपकी रसोई के बजट पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं टमाटर के दाम?
टमाटर की बढ़ती कीमतों की सबसे बड़ी वजह मौसाम की खराबी को माना जा रहा है. खासकर गर्मी के मौसम में कम खेती और कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में खराब मौसम के कारण आने वाले महीनों में टमाटर महंगा होने की संभावना है. वहीं, टमाटर का कुल उत्पाद पिछले साल के मुकाबले में बढ़ेगा. ऐसे में अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब टमाटर की कीमत 100 के पार जाएगी.&amp;nbsp;
LPG News: ये देश ना होता तो आज भारत में गैस सिलेंडर के लाले पड़ जाते! यूएई और सऊदी अरब छूटे पीछे
इसके अलावा टमाटर की फसल मौसम पर काफी निर्भर होती है. अक्सर देखा जाता है कि अगर किसी बड़े उत्पादक राज्य में बारिश, गर्मी या किसी अन्य वजह से फसल प्रभावित होती है, तो बाजार में सप्लाई घाट जाता है. यही वजह है कि जून से अगस्त और अक्टूबर से नवंबर के दौरान टमाटर की कीमतों में अक्सर तेज उछाल देखने को मिलता है.&amp;nbsp;
कहां पड़ रहा है इसका असर&amp;nbsp;
महंगे टमाटर की असर अब सिर्फ रसोई पर ही नहीं, बल्कि कारोबारी पर भी दिखाई दे रहा है. खासकर होटल और रेस्तरां कारोबार ने टमाटर का इस्तेमाल करना अब कम कर दिया है, ताकि उनकी जेबों पर ज्यादा गहरा असर न पड़ें.&amp;nbsp;
ज्यादा ब्याज दर, KYC के भी तोड़े नियम, इस बैंक पर RBI ने लगाया 63 लाख का जुर्माना, क्या इसमें है आपका खाता?
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Tomato, Price:, मानसून, गर्मी, से, राहत, देगा, महंगाई, से, नहीं, बचाकर, चलो, टमाटर, फिर, बढ़, गए, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Cryptocurrency: RBI का बड़ा कदम, क्रिप्टोकरेंसी को अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया, संसदीय समिति को दी रिपोर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cryptocurrency-rbi-का-बड़ा-कदम-क्रिप्टोकरेंसी-को-अर्थव्यवस्था-के-लिए-खतरा-बताया-संसदीय-समिति-को-दी-रिपोर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ RBI on Cryptocurrency: भारत में क्रिप्टोकरेंसी को वर्चुअल डिजिटल एसेट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसको लेकर तरह- तरह की बातें की जाती है, सरकार चाहती है कि इसे बैन कर दिया जाए, तो वहीं कई लोगों की मांग है कि इसे भारत में लीगलाइज किया जाए. अब RBI ने खुद इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और बताया है कि वो क्रिप्टोकरेंसी को भारत में लीगलाइज नहीं करेंगे.
क्रिप्टोकरेंसी नहीं होगी लीगलाइजदरअसल हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली एक संसदीय समिति को बताया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हैं और देश में ऐसी एसेट्स को कानूनी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए. इसके अलावा उन्होंने बताया कि चीन और कतर उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने ऐसी वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगा दी है, जबकि यूरोप ने बहुत कड़े और रेगुलेटेड तरीके से वर्चुअल डिजिटल एसेट्स की अनुमति दी है.
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डिजिटल मनी से होंगे ये नुकसानRBI ने इस दौरान एक छोटी सी रिपोर्ट भी सबमिट की है, जिसमें उसने बताया है कि डिजिटल मनी का इस्तेमाल कुछ इल-लीगल एक्टिविटीज जैसे टेरर फंडिंग या नार्कोटिक्स स्मगलिंग के लिए किया जा सकता है. ऐसे में इसके लीगलाइज करने पर बाहरी देशों में किए जाने वाले इस्तेमाल पर नजर रखना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में RBI ने इसे लीगलाइज ना करने पर जोर दिया है.
क्रिप्टो के इस्तेमाल पर रोक है जरूरी- RBIवहीं इस बैठक के दौरान RBI की तरफ से बताया गया है कि क्रिप्टो का इस्तेमाल भारत की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है,. ऐसे में इसके इस्तेमाल पर जल्द से जल्द रोक लगा देनी चाहिए. RBI ने कहा, &#039;पेमेंट और सेटलमेंट में क्रिप्टो के इस्तेमाल को रोककर, बैंकिंग सेक्टर के जोखिम को सीमित करके और सिस्टम से जुड़े कनेक्शन को कम करके, क्रिप्टो पर रोक लगाने जैसी सावधानी भरी रणनीति से फाइनेंशियल सिस्टम को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.&#039;
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 03:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cryptocurrency:, RBI, का, बड़ा, कदम, क्रिप्टोकरेंसी, को, अर्थव्यवस्था, के, लिए, खतरा, बताया, संसदीय, समिति, को, दी, रिपोर्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>200 Note: कैसे पहचानें 200 रुपए का नोट असली है या नकली, RBI के इन 7 प्वाइंट्स से दूर करें कंफ्यूजन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/200-note-कैसे-पहचानें-200-रुपए-का-नोट-असली-है-या-नकली-rbi-के-इन-7-प्वाइंट्स-से-दूर-करें-कंफ्यूजन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/200-note-कैसे-पहचानें-200-रुपए-का-नोट-असली-है-या-नकली-rbi-के-इन-7-प्वाइंट्स-से-दूर-करें-कंफ्यूजन</guid>
        <description><![CDATA[ How to Recognize Real 200 Rupee Note: बाजार में जब भी हम खरीदारी करने जाते हैं तो बंधा नोट देने पर जो छुट्टा रुपया मिलता है, उसकी जांच कई बार हम नहीं करते. हमें लगता है कि नोट जो मिला है वो सही ही होगा. लेकिन ऐसे ही कई बार लोग बिना जांचे नोट रख लेने पर धोखे का शिकार भी हो जाते हैं. ऐसे ही धोखे से बचने के लिए RBI ने ग्राहकों को असली नोट की पहचान करने के 7 तरीके बताए हैं. आइये जानते हैं.
RBI ने बताए तरीकेदरअसल RBI ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सभी भारतीय नोटों की असलियत पहचानने के लिए कुछ तरीके बताए हैं. इसी में 200 रुपये के असली नोट को पहचानने के लिए सात टिप्स बताए गए हैं. आइये आपको भी बताते हैं इन टिप्स केबारे में, जिनकी मदद से आप आसानी से 200 रुपये के असली नोट पहचान पाएंगे और नकली नोट से चकमा नहीं खाएंगे.
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ऐसे पहचानें 200 रुपये का नोट

200 रुपये के नोट की लेफ्ट साइड में नीचे की ओर एक ट्रांसपेरेंट हिस्सा होता है, जिसमें &#039;200&#039; लिखा होता है. नोट को रोशनी के सामने रखने पर ये साफ दिखाई देता है.
200 रुपये के नोट पर &#039;200&#039; की राशि देवनागरी (हिंदी) अंकों में भी लिखी होती है.
इस नोट के सामने वाले हिस्से में (फ्रंट साइड) के बीच में महात्मा गांधी की फोटो होती है.
नोट के राइट साइड में गवर्नर के हस्ताक्षर, भुगतान का वादा (गारंटी क्लॉज) और आरबीआई का लोगो बना होता है.
इस नोट के लेफ्ट साइड ऊपर की ओर नंबरों का एक पैनल होता है, जिसमें अंक छोटे से बड़े आकार में लिखे होते हैं.
इसी तरह नीचे की तरफ राइट साइड में भी नंबरों का एक पैनल होता है, जिसमें अंक छोटे से बड़े आकार में दिखाई देते हैं.
नोट में नीचे की तरफ राइट साइड अशोक स्तंभ का प्रतीक (राष्ट्रीय चिन्ह) भी बना होता है.

तो अब जब भी आपके हाथ कोई 200 रुपये का नोट लगे और आपको जरा सा भी शक हो कि ये नोट नकली है, तो इन सात जरूरी निशानियों को अच्छी तरह से चेक कर लें. इससे आप किसी भी तरह की धोखाधड़ी से भी बच जाएंगे.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>200, Note:, कैसे, पहचानें, 200, रुपए, का, नोट, असली, है, या, नकली, RBI, के, इन, प्वाइंट्स, से, दूर, करें, कंफ्यूजन</media:keywords>
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        <title>Gold Price: क्या आज है सोना खरीदने का अच्छा मौका? एक्सपर्ट्स ने बताया, अब और कीमत गिरेगी या नहीं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-price-क्या-आज-है-सोना-खरीदने-का-अच्छा-मौका-एक्सपर्ट्स-ने-बताया-अब-और-कीमत-गिरेगी-या-नहीं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-price-क्या-आज-है-सोना-खरीदने-का-अच्छा-मौका-एक्सपर्ट्स-ने-बताया-अब-और-कीमत-गिरेगी-या-नहीं</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Price Today: सोने की कीमतों में आए दिन उतार चढ़ाव आता ही रहता है. लेकिन इन दिनों MCX गोल्ड अगस्त फ्यूचर्स (Gold August Futures) में तेजी बनी हुई है. निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी के बाद सोने की कीमत मजबूत स्थिति में कारोबार कर रही है. ऐसे में अब एक्सपर्ट्स ने बताया है कि आज के दिन यानी 3 जुलाई को सोना खरीदना चाहिए या नहीं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी डिपार्टमेंट के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने के मुताबिक सोने की कीमत अभी शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और पिछले कारोबारी सेशन के सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है. इससे ये संकेत मिलता है कि बाजार में खरीदारों की पकड़ अभी भी मजबूत है, हालांकि RSI ओवरबॉट जोन में पहुंच चुका है.
ये भी पढ़ें: 200 Note: कैसे पहचानें 200 रुपए का नोट असली है या नकली, RBI के इन 7 प्वाइंट्स से दूर करें कंफ्यूजन
कब खरीदें सोनाआज यानी 3 जुलाई को अगर सोना खरीदने का मन बना रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक आपको सलाह दी जाती है कि अगर कीमत 1,47,400 रुपये के आसपास आए तो खरीदारी के बारे में सोचा जा सकता है. वहीं, जोखिम से बचने के लिए 1,46,800 रुपये के नीचे सख्त स्टॉप-लॉस जरूर रखें.
तकनीकि चार्ट के मुताबिकतो वहीं तकनीकी चार्ट पर सोने की चाल अभी भी मजबूत दिखाई दे रही है. कीमतें लगातार हायर हाई (Higher High) और हायर लो (Higher Low) बना रही हैं, जो तेजी के ट्रेंड का संकेत है. इसके अलावा शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज में बुलिश क्रॉसओवर, MACD का पॉजिटिव संकेत और पिछले कारोबारी दिन के पिवट सपोर्ट के ऊपर कारोबार करना ये दिखाता है कि बाजार में खरीदारी का माहौल अभी भी मजबूत है.
तो ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह को समझते हुए उसी हिसाब से सोच- समझकर ही फैसला करें और सोने में निवेश करें.
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 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Price:, क्या, आज, है, सोना, खरीदने, का, अच्छा, मौका, एक्सपर्ट्स, ने, बताया, अब, और, कीमत, गिरेगी, या, नहीं</media:keywords>
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