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    <title>Attention India Hindi &amp; : बिज़नेस</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : बिज़नेस</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>Petrol&amp; Diesel Price: अब सस्ता होगा पेट्रोल&amp;डीजल! सरकार ने किया इशारा, कब और क्यों कम हो सकती हैं कीमतें?</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel News: कच्चे तेल की कीमतों बढ़ोतरी के बाद भारत में भी पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ. जिससे आम जनता काफी परेशान हो गई है. क्योंकि इससे ना केवल ईंधन महंगा हुआ है बल्कि इससे जुड़ी हर एक चीज की कीमतें बढ़ रही हैं. इसी बीच महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार के मंत्री ने बताया है कि तेल की कीमतें ज्यादा लंबे समय तक बढ़ी हुई नहीं रहेंगी.
सरकार बोली तेल की कीमतें होंगी कम!दरअसल हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया है कि कच्चे तेल और गैस की मौजूदा कीमतें लंबे समय तक नहीं टिकेंगी और आने वाले महीनों में ये कीमतें कम हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि, &#039;भारत के पास पर्याप्त तेल और गैस भंडार मौजूद हैं. मौजूदा स्टॉक देश की जरूरतों को लगभग 70 से 80 दिनों तक पूरा कर सकता है. इससे कम समय के संकट से निपटने में मदद मिलेगी&#039;. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अगर संघर्ष जारी रहता है तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है.
ये भी पढ़ें: LPG Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1600 रुपए पहुंच गई गैस सिलेंडर की कीमत, फिर भी सस्ता दे रही सरकार, जानें वजह
कूटनीति से हल निकाल रहा भारतभारत अपनी जरूरत का तेल का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. ऐसे में अगर खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई प्रभावित होती है तो अमेरिका और कनाडा जैसे पश्चिमी देशों से तेल की आपूर्ति बढ़ाकर कमी पूरी की जा सकती है. इस बीच भारत लगातार सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील कर रहा है. विदेश मंत्रालय ने भी हालिया तनाव पर चिंता जताते हुए तुरंत तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने की जरूरत बताई है.
बता दें कि ईरान और यूएस के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है. इसके चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती है.
ये भी पढ़ें: Petrol News: नेपाल में भारत से 60 रुपए महंगा है पेट्रोल, कीमतों में अंतर का फायदा उठा रहे तस्कर, सरकार ने लिया ये एक्शन
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:30:34 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITR News: मौत के बाद भी खत्म नहीं होता टैक्स, जानिए कैसे भरा जाता है मृत व्यक्ति का आईटीआर</title>
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        <description><![CDATA[ ITR after Death:&amp;nbsp;एक करदाता की मृत्यु उनके आयकर दायित्वों को समाप्त नहीं करती है. आयकर अधिनियम, 2025 के तहत आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने और किसी भी बकाया कर का निपटान करने की जिम्मेदारी मृत व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधि को हस्तांतरित हो जाती है. अनुपालन में विफलता नोटिस, दंड और संपत्ति के निपटान में जटिलताओं का कारण बन सकती है. जैसे-जैसे आईटीआर दाखिल करने का मौसम नजदीक आता है, परिवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मृतक रिश्तेदारों के कर मामलों को समय पर संबोधित किया जाए.
मृत करदाता का आईटीआर कौन दाखिल कर सकता है?
आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 302, जो पहले के कानून की धारा 159 के अनुरूप है, मृतक के कानूनी प्रतिनिधि पर कर अनुपालन की जिम्मेदारी डालती है. एक कानूनी प्रतिनिधि में जीवनसाथी, वयस्क बच्चा, माता-पिता, वसीयत में नामित निष्पादक, संपत्ति का प्रशासक, या नाबालिग कानूनी उत्तराधिकारी की ओर से कार्य करने वाला अभिभावक शामिल हो सकता है. यदि मृतक ने एक वैध वसीयत छोड़ी है तो निष्पादक को रिटर्न दाखिल करने और संपत्ति से कर देनदारियों का निपटान करने की जिम्मेदारी होती है, इससे पहले कि संपत्ति को लाभार्थियों में वितरित किया जाए. उन मामलों में जहां मृतक की बिना वसीयत के मृत्यु हो गई, कानूनी उत्तराधिकारी जैसे जीवनसाथी, बच्चे या माता-पिता इस जिम्मेदारी को लागू उत्तराधिकार कानूनों के तहत स्वीकार कर सकते हैं.
कानूनी प्रतिनिधि के रूप में पंजीकरण कैसे करें
एक कानूनी उत्तराधिकारी सीधे मृत व्यक्ति के आयकर खाते तक पहुंच नहीं सकता. प्रतिनिधि असेसी के रूप में पंजीकरण अनिवार्य है. प्रक्रिया शुरू करने के लिए, कानूनी प्रतिनिधि को आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने खाते में लॉग इन करना होगा और &quot;अधिकृत भागीदार&quot; अनुभाग के तहत आवेदन करना होगा. आवेदन में निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है...

मृत करदाता का पैन
मृत्यु प्रमाण पत्र
कानूनी उत्तराधिकारी का प्रमाण या संपत्ति का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार

एक बार आयकर विभाग द्वारा अनुमोदित होने के बाद, प्रतिनिधि अपने लॉगिन के माध्यम से मृत करदाता के खाते तक पहुंच सकते हैं और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. रिपोर्ट की जाने वाली आय आईटीआर में वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लेकर मृत्यु की तारीख तक मृतक द्वारा अर्जित सभी आय शामिल होनी चाहिए. इसमें शामिल हो सकता है...

वेतन पेंशन किराये की आय
ब्याज आय
लाभांश आय
अन्य कर योग्य आय

करदाता की मृत्यु के बाद उत्पन्न आय को अलग से माना जाता है. यदि वसीयत के माध्यम से एक कार्यकारी नियुक्त किया गया है तो कार्यकारी को संपत्ति के वितरण तक रिटर्न दाखिल करना जारी रखना चाहिए. वसीयत की अनुपस्थिति में विरासत में मिली संपत्ति से आय कानूनी उत्तराधिकारियों के हाथों में कर योग्य हो जाती है और इसे उनके संबंधित पैन के तहत रिपोर्ट किया जाना चाहिए.
अनुपालन न करने के परिणाम
यदि रिटर्न दाखिल नहीं किए जाते हैं, तो कर विभाग नोटिस जारी कर सकता है और मूल्यांकन कार्यवाही शुरू कर सकता है. कानूनी प्रतिनिधियों को देर से दाखिल करने की फीस, ब्याज शुल्क और कर कानूनों के तहत लागू अन्य दंड का भी सामना करना पड़ सकता है. जिन मामलों में कर नहीं चुकाए जाते हैं, उनमें ब्याज के प्रावधान लागू हो सकते हैं.
उदाहरण के लिए, जब अग्रिम कर दायित्व पूरे नहीं होते हैं, तब धारा 234B और 234C के तहत ब्याज लगाया जा सकता है. ये प्रावधान आमतौर पर कर की कमी पर प्रति माह 1 प्रतिशत ब्याज लगाते हैं. हालांकि, कानूनी उत्तराधिकारियों की देयता मृत व्यक्ति की संपत्ति से विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य तक सीमित होती है.
खो सकते हैं रिफंड 
मृत करदाता का रिटर्न दाखिल करने में विफलता से योग्य कर रिफंड का नुकसान भी हो सकता है. यदि विलंबित रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित समय सीमा चूक जाती है तो कोई भी लंबित रिफंड दावा अनुपलब्ध हो सकता है. जल्दी योजना बनाना समस्याओं को रोक सकता है कर विशेषज्ञ कानूनी प्रतिनिधि की पहचान जल्दी करने, आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने और आयकर पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने की सलाह देते हैं, इससे पहले कि दाखिल करने की समय सीमा निकट आए. समय पर कार्रवाई परिवारों को दंड, नोटिस और संपत्ति निपटान में देरी से बचने में मदद कर सकती है.
अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश सलाह नहीं है ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:30:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Share Market: बाजार में हाहाकार के बीच भी इन 3 शेयरों ने काटा गदर, निवेशकों को दिया बंपर रिटर्न</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/share-market-बाजार-में-हाहाकार-के-बीच-भी-इन-3-शेयरों-ने-काटा-गदर-निवेशकों-को-दिया-बंपर-रिटर्न</link>
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        <description><![CDATA[ Share Market News: भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सोमवार 8 जून को तेज गिरावट के साथ समाप्त हुए, क्योंकि निवेशकों ने एशियाई बाजारों में व्यापक बिकवाली और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि पर प्रतिक्रिया दी. बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और उच्च ऊर्जा लागतों को लेकर चिंताओं ने पूरे ट्रेडिंग सत्र के दौरान बाजार की धारणा पर दबाव डाला. निफ्टी 50 लगभग 300 अंक नीचे खुला लेकिन शुरुआती रिकवरी करते हुए इंट्राडे उच्च स्तर 23,267.30 को छूने में सफल रहा.
हालांकि, सत्र के उत्तरार्ध में बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे सूचकांक अपने दिन के उच्च स्तर से 140 अंक से अधिक नीचे खिसक गया. निफ्टी 50 अंततः 23,123 पर बंद हुआ, जो 243.70 अंक या 1.04 प्रतिशत की गिरावट थी.
शीर्ष 3 मूल्य-वॉल्यूम ब्रेकआउट स्टॉक्स:
एक्सिकॉम टेली-सिस्टम्स लिमिटेड: एक्सिकॉम टेली-सिस्टम्स लिमिटेड ने सत्र के दौरान मूल्य-वॉल्यूम ब्रेकआउट देखा, जिसमें स्टॉक वर्तमान में 146.70 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके पिछले बंद 133.85 रुपये से 9.60 प्रतिशत ऊपर है. स्टॉक ने इंट्राडे उच्च स्तर 154.32 रुपये को छुआ जबकि वॉल्यूम 7.63 करोड़ शेयरों तक बढ़ गया, जो बाजार गतिविधि में वृद्धि का संकेत देता है. स्टॉक अपने 52-सप्ताह के उच्च 208.84 रुपये से नीचे बना हुआ है और अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर से 94.05 प्रतिशत रिटर्न दिया है. उच्च वॉल्यूम और तेज मूल्य वृद्धि का संयोजन ट्रेडिंग सत्र के दौरान मजबूत भागीदारी को दर्शाता है.
थॉमस कुक (इंडिया) लिमिटेड: थॉमस कुक (इंडिया) लिमिटेड ने मूल्य-वॉल्यूम ब्रेकआउट दर्ज किया, जिसमें स्टॉक वर्तमान में 104.44 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके पिछले बंद 93.86 रुपये से 11.27 प्रतिशत की वृद्धि है. दिन के दौरान, स्टॉक ने 109.70 रुपये का उच्च स्तर मारा और 5.12 करोड़ शेयरों का ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्ज किया. स्टॉक अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर 188.29 रुपये से नीचे ट्रेड कर रहा है और अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर से 20.95 प्रतिशत रिटर्न उत्पन्न किया है. मूल्य में वृद्धि के साथ-साथ उच्च वॉल्यूम सत्र के दौरान काउंटर में बढ़ती ट्रेडिंग रुचि को इंगित करता है.
बीसीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड: बीसीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने भी प्राइस-वॉल्यूम ब्रेकआउट देखा, जिसमें स्टॉक वर्तमान में 37.25 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके पिछले बंद 33.45 रुपये से 11.36 प्रतिशत ऊपर है. स्टॉक ने इंट्राडे हाई 39.20 रुपये का स्पर्श किया और 2.20 करोड़ शेयर्स के ट्रेडिंग वॉल्यूम रिकॉर्ड किए, जो गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है. स्टॉक अपने 52-सप्ताह के उच्च 49.30 रुपये से नीचे है और इसके 52-सप्ताह के निम्न स्तर से 45.91 प्रतिशत रिटर्न दिया है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cheap Petrol: 20 रुपये सस्ता पेट्रोल मिलना तो शुरू हो गया, लेकिन अब तक नहीं आया कोई खरीदार, क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cheap-petrol-20-रुपये-सस्ता-पेट्रोल-मिलना-तो-शुरू-हो-गया-लेकिन-अब-तक-नहीं-आया-कोई-खरीदार-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ Cheap Fuel News: देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए सरकार ने इसके लिए सस्ता विकल्प तैयार किया है. ये सस्ता विकल्प है E-85 ईंधन. जिसका पहला स्टेशन दिल्ली में खोला गया है. इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है, ये ईंधन सामान्य पेट्रोल के मुकाबले करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि इसकी इसे अब तक कोई खरीदने के लिए सामने नहीं आया है.
क्या है ई-85 ईंधन?E-85 एक ऐसा ईंधन है, जिसमें 85 फीसदी एथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल का मिश्रण होता है. सरकार लंबे समय से एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा दे रही है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सके.
ये भी पढ़ें: Petrol- Diesel Price: अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल! सरकार ने किया इशारा, कब और क्यों कम हो सकती हैं कीमतें?
कम कीमत के बावजूद नहीं हो रही बिक्रीहालांकि, कम कीमत के बावजूद E-85 को लेकर ग्राहकों में उत्साह नहीं दिख रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि सामान्य पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों में E-85 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके लिए विशेष प्रकार के फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) इंजन वाली गाड़ियों की जरूरत होती है, जो अभी भारतीय बाजार में बहुत कम संख्या में उपलब्ध हैं.
जानकारी का अभावइसके अलावा, ज्यादातर वाहन मालिकों को E-85 ईंधन के बारे में पर्याप्त जानकारी भी नहीं है. कई लोगों को ये पता ही नहीं है कि ये ईंधन क्या है और किन वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी कारण पेट्रोल पंपों पर E-85 उपलब्ध होने के बावजूद मांग नहीं बन पाई है.
ये भी पढ़ें: LPG Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1600 रुपए पहुंच गई गैस सिलेंडर की कीमत, फिर भी सस्ता दे रही सरकार, जानें वजह
फ्लेक्स- फ्यूल वाहनों की संख्याजब तक फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या नहीं बढ़ती और लोगों के बीच इस ईंधन के प्रति जागरूकता नहीं आती, तब तक इसकी बिक्री में तेजी आने की संभावना कम है. सरकार और ऑटो कंपनियां आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही हैं. ऐसे में भविष्य में E-85 ईंधन की मांग बढ़ सकती है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG संकट के बीच भारत के लिए बड़ी खबर: अब अर्जेंटीना से होगी LNG की सप्लाई, अडानी पोर्ट्स को मिला ठेका</title>
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        <description><![CDATA[ Adani Ports and Special Economic Zone: देश में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और ईरान में जंग के चलते होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच भारत के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है.
दरअसल, दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी की कंपनी- अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) को अर्जेंटीना के पहले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए &amp;nbsp;10 साल का मरीन सर्विस कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इसके साथ ही कंपनी ने पहली बार दक्षिण अमेरिका में अपने इंटरनेशनल मरीन ऑपरेशन का विस्तार किया है.&amp;nbsp;
क्या काम करेगी कंपनी?&amp;nbsp;
यह कॉन्ट्रैक्ट APSEZ की सब्सिडियरी कंपनी &#039;अडानी हार्बर इंटरनेशनल FZCO&#039; को अर्जेंटीना की &#039;मेरिडियन ग्रुप&#039; के कंसोर्टियम को ग्लोबल टेंडर प्रक्रिया के तहत मिला है. यह कॉन्ट्रैक्ट प्रोजेक्ट डेवलपर &#039;सदर्न एनर्जी S.A. (SESA)&#039; द्वारा निकाले गए ग्लोबल कॉम्पिटिटिव टेंडर के बाद मिला है. इस समझौते के तहत, अडानी-मेरिडियन कंसोर्टियम प्रोजेक्ट साइट से चलने वाले LNG कैरियर के लिए एंड-टू-एंड मरीन सर्विस देगा.
इसमें टगबोट ऑपरेशन, ऑफशोर लॉजिस्टिक्स और सप्लाई सपोर्ट, और क्रू ट्रांसफर सर्विस शामिल हैं. इस काम के लिए चार हाई-स्पेसिफिकेशन टगबोट, एक एंकर हैंडलिंग टग सप्लाई वेसल और एक क्रू बोट का इस्तेमाल किया जाएगा.
फाइलिंग के अनुसार, इस कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा इन्वेस्टमेंट लगभग 70 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है. कुल मिलाकर आसान भाषा में कहें, तो अर्जेंटीना के समुद्र तट पर गैस ले जाने वाले बड़े-बड़े जहाजों को सुरक्षित ले आने-जाने का काम अडानी पोर्ट्स का होगा. इसके लिए कंपनी 4 स्पेशल टगबोट और क्रू बोट्स तैनात करेगी. इस प्रोजेक्ट पर सितंबर 2027 से काम शुरू होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
क्यों अहम है यह कॉन्ट्रैक्ट?
इजरायल और श्रीलंका के बाद अडानी ग्रुप ने पहली बार दक्षिण अमेरिका के बाजार में एंट्री ली है. कंपनी का लक्ष्य साल 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा ऑपरेटर बनना है. इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत अडानी पोर्ट्स को हर साल 7 मिलियन डॉलर की बंधी-बंधाई कमाई होगी. भारत के लिए यह खबर अहम इसलिए है क्योंकि इससे भविष्य में भारत के लिए अर्जेंटीना से गैस का एक्सपोर्ट हो सकता है. इससे गैस के लिए भारत की खाड़ी देशों से आयात पर निर्भरता कम होगी.&amp;nbsp;

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टाटा ट्रस्ट की महाबैठक: टाटा संस IPO, चेयरमैन के कार्यकाल और घाटे के बिजनेस पर फैसलों पर लगेगी मुहर!&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ब्लैक मंडे: शेयर बाजार में हाहाकार! 800 अंक टूटा सेंसेक्स, निवेशकों के डूबे 500000 करोड़</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ब्लैक-मंडे-शेयर-बाजार-में-हाहाकार-800-अंक-टूटा-सेंसेक्स-निवेशकों-के-डूबे-500000-करोड़</link>
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        <description><![CDATA[ Share Market Crash: शेयर बाजार निवेशकों के लिए आज का दिन &#039;ब्लैक मंडे&#039; हुआ. कारोबार शुरु होने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके करोड़ों का निवेश पानी में डूब गए. सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही निफ्टी 50 और सेंसेक्स दोनों औंधे मुंह गिर गए.
कमजोर ग्लोबल संकेतों, विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर बुरा असर डाला, जिससे शेयर बाजार की चाल भी डगमगा गई. आज बाजार में चौतरफा बिकवाली के चलते सेंसेक्स लगभग 800 अंक तक टूट गया और निफ्टी भी 23100 के करीब फिसल गया. इस बड़ी गिरावट की वजह से महज कुछ ही घंटों में निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. इससे BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया.
बाजार के सामने बढ़ी चुनौतियां
आज बाजार में हर तरफ बिकवाली देखी गई. सेंसेक्स में शामिल हर स्टॉक गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था. बेंचमार्क इंडेक्स के अलावा भी बाजार में कमजोरी साफ देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में 1% से ज्यादा की गिरावट आई, जो निवेशकों के बीच जोखिम से बचने के मूड को दिखाता है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार बताते हैं, &quot;हफ्ते की शुरुआत में बाजार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. पिछले शुक्रवार नैस्डैक में 4.18% की भारी गिरावट ने ग्लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया था, जिससे टेक-हेवी दक्षिण कोरिया और ताइवान में जबरदस्त बिकवाली हो रही है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और लेबनान में इजरायल की कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल दागने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 96 डॉलर के पार चली गई है. अमेरिका से मई के महीने के लिए आए जॉब्स के आंकड़े भी अच्छे हैं इसलिए फेडरल रिजर्व (Fed) दरों में कटौती न करने की भी उम्मीदें तेज हैं.&amp;nbsp;
शेयर बाजार में गिरावट की वजहें
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ा तनाव- रविवार रात ईरान द्वारा इजरायल पर नए सिरे से किए गए मिसाइल हमलों और इस पर इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद भू-राजनीतिक तनाव गहरा गया है. इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है.
क्रूड ऑयल में उछाल- ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 3.29% उछलकर 96.15 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है. ऐसे में आयात महंगा होगा, तो महंगाई बढ़ने का भी खतरा रहेगा. इससे कॉर्पोरेट कंपनियों के मुनाफे पर काले बादल छा सकते हैं.&amp;nbsp;
अमेरिकी टेक बाजार में गिरावट- बीते शुक्रवार को अमेरिकी बाजार का टेक इंडेक्स Nasdaq 4.18% और S&amp;amp;P 500 2.64% तक क्रैश हो गया. अमेरिकी शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर शेयरों में आई बड़ी गिरावट का असर भारत के आईटी सेक्टर के शेयरों पर भी दिखा. इससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.85% तक क्रैश हो गया.&amp;nbsp;
विदेशी निवेशकों की बिकवाली- विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी फंड गोल्ड जैसे सेफ हेवेन एसेट्स का रुख कर रहे हैं. इससे बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है.&amp;nbsp;
कमजोर होता रुपया- वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 38 पैसे टूटकर 95.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न कम करता है, जिससे बाजार में वे और ज्यादा बिकवाली करते हैं.&amp;nbsp;

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Share Market: हफ्ते के पहले दिन क्रैश हुआ शेयर मार्केट, 800 से ज्यादा अंक फिसला सेंसेक्स; निफ्टी भी 286 अंक नीचे&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ब्लैक, मंडे:, शेयर, बाजार, में, हाहाकार, 800, अंक, टूटा, सेंसेक्स, निवेशकों, के, डूबे, 500000, करोड़</media:keywords>
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        <title>Rajesh Exports: गबन&amp; हेराफेरी के आरोपों के बीच लगातार तीसरे दिन गिरे राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर, PLI स्कीम से भी हटाई जा सकती है कंपनी</title>
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        <description><![CDATA[ Rajesh Export LTD Shares: बीते गुरुवार यानी 4 जून को राजेश एक्सपोर्ट उस समय चर्चा में आ गई, जब कंपनी के ऊपर धोखाधड़ी और गबन का आरोप लगा. कंपनी तभी से जांच के दायरे में है. इसी बीच सोमवार को लगातार तीसरे दिन राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड कंपनी के शेयर गिरे हैं. तो वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि कंपनी को जल्दी ही PLI स्कीम से भी हटाया जा सकता है.
कंपनी के शेयर्स में भारी गिरावटदरअसल सोमवार को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. कंपनी का शेयर लगातार तीसरे कारोबारी दिन 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया. शेयर 4.95 रुपये गिरकर 94.50 रुपये पर बंद हुआ.
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PLI स्कीम से बाहर हो सकती है कंपनीइसी बीच कुछ सूत्रों ने ये जानकारी दी है कि मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज, राजेश एक्सपोर्ट्स को एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए दी गई PLI योजना के लाभार्थियों की लिस्ट से हटाने पर भी विचार कर रही है. आखिर फैसला केंद्रीय मंत्री एडी कुमारस्वामी की मंजूरी के बाद लिया जाएगा.
SEBI ने लगाए हैं ये आरोपसिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने 3 जून को जारी एक अंतरिम आदेश में आरोप लगाया कि कंपनी के कुछ फंड निजि खातों और प्रमोटरों से जुड़ी संस्थाओं के जरिए भेजे गए, जिसकी सही जानकारी निवेशकों को नहीं दी गई. SEBI का ये भी दावा है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच अपने (Revenue) को करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो सकता है.
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कंपनी ने आरोपों को बताया गलतवहीं इस पूरे मामले पर जब कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन राजेश मेहता का भी बयान सामने आया है. उन्होंने बताया कि SEBI के आरोप पूरी तरह से गलत हैं. उनका कहना है कि कंपनी पहले ही 300 से 400 जीबी डेटा और लाखों पन्नों के दस्तावेज जमा कर चुकी है. हो सकता है कि SEBI को जरूरी दस्तावेज नहीं मिले हों. कंपनी आने वाले 15 दिनों में सभी दस्तावेज दोबारा जमा करेगी.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rajesh, Exports:, गबन-, हेराफेरी, के, आरोपों, के, बीच, लगातार, तीसरे, दिन, गिरे, राजेश, एक्सपोर्ट्स, के, शेयर, PLI, स्कीम, से, भी, हटाई, जा, सकती, है, कंपनी</media:keywords>
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        <title>LPG Price Hike: एलपीजी गैस सिलेंडर और होगा महंगा, केंद्र सरकार ने कर दिया साफ, कारण भी बता दिया</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Price Hike: यूएस-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण भारत में भी लोगों को महंगाई की मार झेलना पड़ रही है. बीते कुछ दिनों में पेट्रोल- डीजल के साथ ही कमर्शियल और एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए हैं. लेकिन ये महंगाई की मार अभी थमी नहीं है बल्कि आने वाले समय में और भी बढ़ने वाली है. सरकार की तरफ से ये बात कंफर्म कर दी गई है कि आने वाले समय में घरेलू गैस के दाम और भी बढ़ने वाले हैं. &amp;nbsp;
सरकार की तरफ से आया बयानदरअसल हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया है कि आने वाले समय में पेट्रोल- डीजल के दामों में इजाफा हो सकता है. उन्होंने कहा, &#039;गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से हमें भी दुख और अफसोस है. लेकिन इसकी आलोचना करने से पहले लोगों को दुनिया की मौजूदा स्थिति को समझना चाहिए. इस समय पूरी दुनिया कई गंभीर संकटों का सामना कर रही है.&#039;
उन्होंने आगे कहा, &#039;दुनिया भर में माल की ढुलाई और सप्लाई (ट्रांसशिपमेंट) प्रभावित हो रही है. एलपीजी भी अब बहुत कम जगहों से उपलब्ध हो रही है. ऐसे में सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है.&#039;
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आम लोगों के लिए चिंतित है सरकारउन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, &#039;ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) का खर्च काफी बढ़ गया है. गैस की मूल कीमत (बेस कॉस्ट) भी ज्यादा है. इसके अलावा, सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में 40-45 दिन लग रहे हैं, जिससे बीमा (इंश्योरेंस) का खर्च भी बढ़ गया है. आम लोगों की परेशानी को लेकर हम भी उतने ही चिंतित हैं, लेकिन मौजूदा हालात में गैस की कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया है.&#039;
हाल में बढ़े हैं दामबता दें कि हाल ही में 7 जून, रविवार को घरेलू गै सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई है. प्रति सिलेंडर 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब बाजार में 14.2 किलो का सिलेंडर दिल्ली में 942 रुपये का हो गया है. वहीं इससे पहले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में भी बढ़ोतरी हुई थी. जिससे व्यापारियों और खाने से जुड़ा कारोबार करने वालों के बीच काफी तनाव देखा गया था.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Hike:, एलपीजी, गैस, सिलेंडर, और, होगा, महंगा, केंद्र, सरकार, ने, कर, दिया, साफ, कारण, भी, बता, दिया</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Price Today 7 June: सोना&amp;चांदी खरीदने वालों की हुई बल्ले&amp;बल्ले! 5 दिनों में धड़ाम हुए दाम, जानें आज के ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-7-june-सोना-चांदी-खरीदने-वालों-की-हुई-बल्ले-बल्ले-5-दिनों-में-धड़ाम-हुए-दाम-जानें-आज-के-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-7-june-सोना-चांदी-खरीदने-वालों-की-हुई-बल्ले-बल्ले-5-दिनों-में-धड़ाम-हुए-दाम-जानें-आज-के-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today 7 June 2026: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. पिछले पांच दिनों में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. खासकर चांदी के दाम में तेज गिरावट आई है, जबकि सोना भी लगातार दबाव में बना हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और निवेशकों की बदली रणनीति का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
पांच दिनों में कितना सस्ता हुआ सोना?
देश के कई बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने के दाम में पिछले कुछ दिनों के दौरान अच्छी- खासी गिरावट दर्ज की गई है. दिल्ली में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.6 लाख रुपये के आसपास से फिसलकर लगभग 1.52 से 1.59 लाख रुपये के दायरे में पहुंच गया है. इससे उन लोगों को राहत मिली है जो शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना खरीदने का इंतजार कर रहे थे.
चंडीगढ़ से दिल्ली-NCR तक CBI ने लगाई रेड, 661 करोड़ रुपये की हेराफेरी पर आज की बड़ी कार्रवाई
आज सोना का भाव-&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट सोना (10 ग्राम)
22 कैरेट सोना (10 ग्राम)
18 कैरेट सोना (10 ग्राम)


दिल्ली
₹155910
₹140150
₹116990


मुंबई
₹152730
₹140000
₹114550


कोलकाता
₹152730
₹140000
₹114550


चेन्नई
₹154910
₹142000
₹119100


पटना
₹155810
₹140050
₹116890


लखनऊ
₹155910
₹140150
₹116990


अयोध्या
₹155910
₹140150
₹116990


मेरठ
₹155910
₹140150
₹116990


कानपुर
₹155910
₹140150
₹116990


गाजियाबाद
₹155910
₹140150
₹116990


नोएडा
₹155910
₹140150
₹116990


गुरुग्राम
₹155910
₹140150
₹116990


चंडीगढ़
₹155910
₹140150
₹116990


जयपुर
₹155910
₹140150
₹116990


लुधियाना
₹155910
₹140150
₹116990


गुवाहाटी
₹152730
₹140000
₹114550


इंदौर
₹155810
₹140050
₹116890


अहमदाबाद
₹155810
₹140050
₹116890


वडोदरा
₹155810
₹140050
₹116890


सूरत
₹155810
₹140050
₹116890


पुणे
₹152730
₹140000
₹114550


नागपुर
₹152730
₹140000
₹114550


नासिक
₹152760
₹140030
₹114580


बैंगलोर
₹152730
₹140000
₹114550


भुवनेश्वर
₹152730
₹140000
₹114550


कटक
₹152730
₹140000
₹114550


केरल
₹152730
₹140000
₹114550


रायपुर
₹152730
₹140000
₹114550


हैदराबाद
₹152730
₹140000
₹114550



आज चांदी का भाव-&amp;nbsp;



शहर
10 ग्राम चांदी का भाव
100 ग्राम चांदी का भाव
1 किलो चांदी का भाव


दिल्ली
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


मुंबई
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


कोलकाता
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


चेन्नई
₹2,700
₹27,000
₹2,70,000


पटना
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


लखनऊ
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


अयोध्या
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


मेरठ
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


कानपुर
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


गाजियाबाद
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


नोएडा
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


गुरुग्राम
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


चंडीगढ़
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


जयपुर
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


अहमदाबाद
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


वडोदरा
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


लुधियाना
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


गुवाहाटी
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


इंदौर
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


सूरत
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


पुणे
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


नागपुर
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


नासिक
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


बैंगलोर
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


भुवनेश्वर
₹2,700
₹27,000
₹2,70,000


कटक
₹2,700
₹27,000
₹2,70,000


रायपुर
₹2,650
₹26,500
₹2,65,000


हैदराबाद
₹2,700
₹27,000
₹2,70,000



चांदी में आई बड़ी गिरावट
सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली है. हाल के दिनों में चांदी की कीमत में हजारों रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है. बाजार रिपोर्ट्स के अनुसार, चांदी में निवेश करने वाले कई निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है.&amp;nbsp;
महंगाई की मार: घरेलू एलपीजी 29 रुपया महंगा, भड़की जनता; विपक्ष ने पीएम मोदी को कहा- &#039;इंफ्लेशन मैन&#039;
क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के भाव?
सोना और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है. निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेगा, जिससे डॉलर मजबूत हुआ है. आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोने और चांदी की मांग कमजोर पड़ जाती है. इसके अलावा, हाल के महीनों में कीमतों में तेज उछाल के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुख का असर भारतीय सर्राफा बाजार पर भी पड़ा, जिसके चलते सोना और चांदी दोनों के दाम लगातार नीचे आए हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक हालात और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे की कीमतों की दिशा तय करेंगे.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Price, Today, June:, सोना-चांदी, खरीदने, वालों, की, हुई, बल्ले-बल्ले, दिनों, में, धड़ाम, हुए, दाम, जानें, आज, के, ताजा, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Gas Supply: क्या भारत में रुक जाएगी गैस की सप्लाई? होर्मुज में फंसे एलपीजी जहाजों का क्या है सच?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-gas-supply-क्या-भारत-में-रुक-जाएगी-गैस-की-सप्लाई-होर्मुज-में-फंसे-एलपीजी-जहाजों-का-क्या-है-सच</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-gas-supply-क्या-भारत-में-रुक-जाएगी-गैस-की-सप्लाई-होर्मुज-में-फंसे-एलपीजी-जहाजों-का-क्या-है-सच</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Gas Supply through Hormuz: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की शुरुआत बीते 28 फरवरी, 2026 को हुई थी. इसके बाद से ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस रूट पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया. यह रास्ता दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई के लिए अहम है. इस रुकावट से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई और सरकारों तथा शिपिंग कंपनियों को व्यापार जारी रखने के लिए नई रणनीतियां बनानी पड़ी.
भारत के लिए यह मामला बहुत अहम था, जो ऊर्जा की अपनी जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी जलमार्ग पर निर्भर है. भारत का लगभग 30 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 70 प्रतिशत लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इसी रास्ते से आता है. हालांकि, हालात बिगड़ने के बावजूद भारत इस इलाके से जहाजों की आवाजाही को लगातार बनाए रखने में कामयाब रहा है.
क्या होर्मुज में फंसे हैं भारतीय जहाज?&amp;nbsp;
फरवरी के आखिर में जब तनाव बढ़ा और होर्मुज पर पाबंदियां लगाई गईं, तो भारतीय झंडे वाले 36 से 38 कमर्शियल जहाज या तो खाड़ी इलाके में फंसे हुए थे या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास मौजूद थे. इन जहाजों पर 1,100 से ज्यादा भारतीय नाविकों की भी संख्या थी. कई जहाजों में भारत की ऊर्जा जरूरतों और कमर्शियल सप्लाई चेन से जुड़े जरूरी सामान लदे हुए थे. कुछ अन्य जहाज औद्योगिक उत्पादन और घरेलू खपत के लिए जरूरी सामान ले जाने का इंतजार कर रहे थे.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के मध्य से अब तक भारतीय झंडे वाले लगभग 23 से 25 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं. मई के आखिर तक, खबर है कि भारतीय झंडे वाले सिर्फ 13 ही जहाज खाड़ी देशों के आसपास या जलडमरूमध्य वाले इलाके में बचे हुए हैं. इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सरकार हाई-प्रॉयोरिटी इमरजेंसी ऑपरेशन कर रही है.
क्या भारत में है गैस की किल्लत?
सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक देश में घरेलू सिलेंडराें की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित है. होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए देश के भीतर तेल रिफाइनरियां अपनी अधिकतम कैपेसिटी पर काम कर रही हैं. इससे दैनिक एलपीजी उत्पादन बढ़कर 50000 मीट्रिक टन हो गया है, जो देश की कुल जरूरत का 60% से अधिक हिस्सा पूरा कर रहा है.
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए साफ कहा है, &#039;&#039;घरेलू उपभोक्ताओं के लिए देश में LPG सिलेंडर की कोई किल्लत नहीं है और गैस सप्लाई पूरी तरह से सामान्य है. नागरिकों को किसी भी तरह से घबराने की कोई जरूरत नहीं है.&#039;&#039;

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LPG Price Hike: क्यों बढ़ती जा रही हैं गैस सिलेंडर की कीमतें? क्या अब आगे और बढ़ेगा रेट?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Gas, Supply:, क्या, भारत, में, रुक, जाएगी, गैस, की, सप्लाई, होर्मुज, में, फंसे, एलपीजी, जहाजों, का, क्या, है, सच</media:keywords>
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        <title>Crude Oil Crisis: कच्चे तेल से बिगाड़ेगा घर का बजट! 100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड, अर्थशास्त्री ने दी बड़ी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ Crude Oil Crisis: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखने लगा है. सबसे ज्यादा चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर है. हालात ऐसे बन गए हैं कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है.
क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें?
इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने ANI से हुई बातचीत में बताया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है. भारत भी अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर काफी हद तक निर्भर है. शर्मा के मुताबिक, भारत के कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आता है.
LPG Gas Supply: क्या भारत में रुक जाएगी गैस की सप्लाई? होर्मुज में फंसे एलपीजी जहाजों का क्या है सच?
100 डॉलर तक पहुंचा कच्चा तेल
विशेषज्ञों के अनुसार, जब पश्चिम एशिया में तनाव की शुरुआत हुई थी तब कच्चे तेल की कीमत 67-68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. लेकिन हालात बिगड़ने के बाद इसमें तेजी से उछाल आया है. वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है, जबकि स्पॉट मार्केट में कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक बताई जा रही हैं. यह बढ़ोतरी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गई है.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है. ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, सब्जियों, फलों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी दिखाई देता है. मनोरंजन शर्मा का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें घरेलू बजट को प्रभावित करेंगी और परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ पैदा करेंगी.
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सरकार के सामने चुनौती
हालांकि सरकार लगातार आम लोगों को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट के सामने उसकी भी सीमाएं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत को सरकार या तेल कंपनियां अपने ऊपर नहीं ले सकतीं. यही वजह है कि पिछले कुछ सप्ताहों में ईंधन की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिली है.
क्या है समाधान?
मनोरंजन शर्मा का मानना है कि भारत को भविष्य में ऐसे झटकों से बचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अधिक ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि देश पहले से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और भारत के कुल ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई तक पहुंच चुकी है. हालांकि आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में अभी समय लगेगा.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>भारत बनेगा ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन, रूसी CEO ने की बड़ी भविष्यवाणी</title>
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        <description><![CDATA[ रूसी तेल कंपनी Rosneft के सीईओ इगोर सेचिन ने भारत को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की है. उन्होंने कहा है कि आने वाले एक दशक में दुनिया में जितनी भी नई तेल मांग बढ़ेगी, उसका लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आएगा. यानी भारत धीरे-धीरे ग्लोबल एनर्जी मार्केट का सबसे बड़ा ड्राइविंग फोर्स बन सकता है.
भारत क्यों बनेगा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता?
इगोर सेचिन के मुताबिक भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती आबादी, शहरीकरण और वाहन उपयोग में वृद्धि इसके मुख्य कारण हैं. उन्होंने बताया कि 2035 तक भारत का तेल खपत लगभग 44% बढ़कर करीब 8 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है. उनका कहना है कि विकासशील देशों में ऊर्जा की मांग सबसे तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इनमें भारत सबसे आगे है. इसलिए आने वाले वर्षों में ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारत की भूमिका और भी अहम हो जाएगी.
कच्चे तेल से बिगाड़ेगा घर का बजट! 100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड, अर्थशास्त्री ने दी बड़ी चेतावनी
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव
Rosneft CEO ने यह भी संकेत दिया कि दुनिया का ऊर्जा ढांचा बदल रहा है. विकसित देशों में तेल की मांग स्थिर या धीमी हो सकती है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में मांग तेजी से बढ़ेगी. इसी वजह से ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ का बड़ा हिस्सा भारत से जुड़ जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत सिर्फ तेल उपभोक्ता ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है.
रूस-भारत ऊर्जा साझेदारी का बढ़ता असर
सेचिन ने यह भी बताया कि रूस से भारत को मिलने वाले तेल सप्लाई ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत किया है. 2022 के बाद से भारत और चीन को सस्ते रूसी तेल से अरबों डॉलर का फायदा हुआ है. इससे यह साफ होता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार अब सिर्फ सप्लाई और डिमांड का खेल नहीं रहा, बल्कि इसमें भू-राजनीति की भूमिका भी काफी बढ़ गई है.
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आने वाले समय में क्या चुनौती होगी?
हालांकि भारत के लिए यह ग्रोथ एक अवसर है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी हैं. तेल की बढ़ती मांग का मतलब है कि देश की आयात निर्भरता और बढ़ सकती है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊपर जाती हैं तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर पड़ेगा. विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी और वैकल्पिक ईंधन पर भी तेजी से काम करना होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>भारत, बनेगा, ग्लोबल, ऑयल, डिमांड, ग्रोथ, का, सबसे, बड़ा, इंजन, रूसी, CEO, ने, की, बड़ी, भविष्यवाणी</media:keywords>
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        <title>SpaceX IPO: दुनिया का सबसे बड़ा IPO ला रहे हैं Elon Musk, क्या भारतीय कर पाएंगे SpaceX में निवेश? जान लें सारे रिस्क</title>
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        <description><![CDATA[ SpaceX IPO: दुनिया की सबसे चर्चित निजी कंपनियों में शामिल SpaceX जल्द ही शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है. Elon Musk की इस कंपनी के संभावित IPO को लेकर निवेशकों में काफी ज्यादा एक्साइटमेंट है. ये इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है. ऐसे में भारत के रिटेल निवेशकों के मन में भी सवाल है कि क्या वे इस IPO में सीधे निवेश कर पाएंगे या नहीं. साथ ही इसमें क्या- क्या रिस्क हो सकते हैं.
SpaceX IPO क्यों है इतना खास?
SpaceX रॉकेट लॉन्च, सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का संभावित वैल्यूएशन 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर देगा. IPO के जरिए कंपनी करीब 75 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में है.&amp;nbsp;
क्या भारत में रुक जाएगी गैस की सप्लाई? होर्मुज में फंसे एलपीजी जहाजों का क्या है सच?
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है नियम?
बता दें कि भारत में रहने वाले रिटेल निवेशकों के लिए सीधे अमेरिकी IPO में हिस्सा लेना आसान नहीं है. अमेरिकी IPO आमतौर पर वहां के संस्थागत निवेशकों और स्थानीय रिटेल निवेशकों को प्राथमिकता देते हैं. भारतीय निवेशकों को आम तौर पर कंपनी के शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद ही शेयर खरीदने का मौका मिलता है.&amp;nbsp;
लिस्टिंग के बाद कैसे खरीद सकते हैं शेयर?
अगर SpaceX अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो भारतीय निवेशक विदेशी शेयरों में निवेश की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म्स के जरिए इसके शेयर खरीद सकते हैं. इसके लिए निवेशकों को भारतीय रिजर्व बैंक की Liberalised Remittance Scheme के नियमों का पालन करना होगा. इसके अलावा GIFT City के माध्यम से भी विदेशी शेयरों में निवेश के ऑप्शन आ सकते हैं.&amp;nbsp;
भारत बनेगा ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन, रूसी CEO ने की बड़ी भविष्यवाणी
निवेश से पहले जान लें ये 4 अहम बातें-&amp;nbsp;
1. 2025 में घाटे में रही SpaceX
SpaceX ने साल 2025 में 18.67 अरब डॉलर का कुल राजस्व दर्ज किया, जिसमें सबसे बड़ा योगदान Starlink कनेक्टिविटी बिजनेस का रहा. हालांकि, कंपनी को 2025 में करीब 4.9 अरब डॉलर का घाटा हुआ, जबकि 2024 में उसे 791 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ था. लेकिन ये घाटा मुख्य रूप से भारी पूंजी निवेश की वजह से हुआ. कंपनी ने 2025 में xAI/Grok के AI इंफ्रास्ट्रक्चर और Starlink सैटेलाइट नेटवर्क के विस्तार पर 20.7 अरब डॉलर का निवेश किया, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है. SpaceX के प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, उसके स्पेस, AI डेटा सेंटर और कनेक्टिविटी कारोबार का कुल संभावित बाजार 28.5 ट्रिलियन डॉलर का है.
2. कंपनी के पास Bitcoin में बड़ा निवेश
SpaceX के निवेश पोर्टफोलियो में 8,285 बिटकॉइन शामिल हैं, जिनकी मौजूदा कीमत लगभग 642 मिलियन डॉलर है. ये बिटकॉइन Coinbase Prime की कस्टडी में रखे गए हैं. कंपनी ने बताया है कि भविष्य में उसकी आय पर बिटकॉइन की कीमतों का बड़ा असर पड़ सकता है. Bitcoin की कीमत में हर 10,000 डॉलर के उतार-चढ़ाव से कंपनी की तिमाही शुद्ध आय में करीब 83 मिलियन डॉलर का बदलाव आ सकता है.
3. Elon Musk के पास 85.1% वोटिंग पावर
Elon Musk के पास Class B शेयरों के जरिए कंपनी की कुल वोटिंग पावर का 85.1% हिस्सा है. पब्लिक को मिलने वाले Class A शेयरों में प्रति शेयर 1 वोट का अधिकार होगा, जबकि Class B शेयरों में प्रति शेयर 10 वोट का अधिकार होगा. इसके अलावा Class B शेयरधारकों के पास कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अधिकांश सदस्यों को चुनने का विशेष अधिकार भी रहेगा.
4. SpaceX के पास xAI और Starlink जैसे कारोबार
SpaceX ने फरवरी 2026 में Elon Musk के AI स्टार्टअप xAI का ऑल-स्टॉक अधिग्रहण पूरा किया था. वहीं Starlink भी तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रहा है. 31 मार्च 2026 तक Starlink के 164 देशों, क्षेत्रों और बाजारों में 1.03 करोड़ (10.3 मिलियन) सक्रिय ग्राहक हो चुके थे. कंपनी लगातार दुनिया के कई देशों में अपनी सेवाएं शुरू कर रही है, जिससे उसके कारोबार के और बढ़ने की उम्मीद है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SpaceX, IPO:, दुनिया, का, सबसे, बड़ा, IPO, ला, रहे, हैं, Elon, Musk, क्या, भारतीय, कर, पाएंगे, SpaceX, में, निवेश, जान, लें, सारे, रिस्क</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price: क्या घरेलू सिलेंडर के साथ आज पेट्रोल&amp;डीजल की भी बढ़ी कीमत? चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-क्या-घरेलू-सिलेंडर-के-साथ-आज-पेट्रोल-डीजल-की-भी-बढ़ी-कीमत-चेक-करें-लेटेस्ट-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-क्या-घरेलू-सिलेंडर-के-साथ-आज-पेट्रोल-डीजल-की-भी-बढ़ी-कीमत-चेक-करें-लेटेस्ट-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate Today on June 7: देश के आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को आज एक बड़ा झटका लगा है क्योंकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है. सरकार ने LPG की कीमतों में यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में सप्लाई में रुकावट की बढ़ती आशंकाओं के कारण की है.
इस साल मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद पिछले तीन महीनों में घरेलू LPG की कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है. इस बदलाव के बाद, दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 915.50 रुपये से बढ़कर 944.50 रुपये हो गई है. यह बढ़ोतरी देश के प्रमुख शहरों में घरेलू कुकिंग गैस सिलेंडरों पर लागू होती है, जबकि कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
पेट्रोल-डीजल की बदली कीमत?
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद राहत की बात यह है कि आज देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पश्चिम एशिया संकट की वजह से भले ही आज दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन सरकारी तेल कंपनियां अभी भी लागत से काफी कम पर ईंधन बेच रही हैं. मौजूदा समय में उन्हें पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा हे.&amp;nbsp;
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपये
&amp;nbsp;95.20 रुपये


मुंबई
111.18 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.47 रुपये
99.82 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
&amp;nbsp;98.80 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये


जयपुर
112.66 रुपये
97.78 रुपये


लखनऊ
102.05 रुपये
95.55 रुपये


भोपाल
114.54 रुपये
99.64 रुपये



देश में सबसे सस्ता और सबसे महंगा पेट्रोल कहां?
25 मई, 2026 को हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत सबसे ज्यादा 115.69 रुपये प्रति लीटर रही. इसके बाद तिरुवनंतपुरम का नंबर रहा, जहां पेट्रोल की कीमत 115.49 रुपये प्रति लीटर थी. दूसरी ओर, लिस्ट में शामिल शहरों में चंडीगढ़ में पेट्रोल की कीमत सबसे कम 98.10 रुपये प्रति लीटर है. कई मेट्रो शहरों की तुलना में लखनऊ और नई दिल्ली में भी पेट्रोल की कीमतें कम रहीं, जहां ये क्रमशः 102.05 रुपये और 102.12 रुपये प्रति लीटर हैं.
डीजल के मामले में, तिरुवनंतपुरम में सबसे ज्यादा कीमत 104.40 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है. इसके बाद हैदराबाद में डीजल की कीमत 103.82 रुपये प्रति लीटर है. लिस्ट में शामिल शहरों में चंडीगढ़ में डीजल की कीमत सबसे कम 86.09 रुपये प्रति लीटर है.

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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:30:34 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, क्या, घरेलू, सिलेंडर, के, साथ, आज, पेट्रोल-डीजल, की, भी, बढ़ी, कीमत, चेक, करें, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Price Hike: क्या रेट बढ़ने के साथ नियम भी गए हैं बदल? जानें रसोई गैस को लेकर सरकार का रुख</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-hike-क्या-रेट-बढ़ने-के-साथ-नियम-भी-गए-हैं-बदल-जानें-रसोई-गैस-को-लेकर-सरकार-का-रुख</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-hike-क्या-रेट-बढ़ने-के-साथ-नियम-भी-गए-हैं-बदल-जानें-रसोई-गैस-को-लेकर-सरकार-का-रुख</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Price Hike: आज यानी कि 7 जून, रविवार को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई. हालांकि, रेट बढ़ाने के साथ नियमों में भले ही कोई बदलाव नहीं किया गया हो, लेकिन तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा पहले जारी दिशा-निर्देश पूरी तरह से प्रभावी हैं.
कीमतों में वृद्धि के बीच उपभोक्ताओं की सुरक्षा, गैस की कालाबाजारी रोकने और सप्लाई सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई नियम लागू किए हैं. आइए इन पर एक नजर डालते हैं:-
ड्यूल कनेक्शन पर रोक
अगर आपके पास पाइपलाइन वाली नैचुरल गैस (PNG) का कनेक्शन है, तो आप घरेलू सिलेंडर नहीं रख सकते. पीएनजी चालू होने के 30 दिनों के भीतर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य है. ऐसा न करने पर तेल कंपनियां आपके एलपीजी कनेक्शन को अपने आप ही ब्लॉक कर देंगी.
रीफिल लॉकिंग पीरियड
दो गैस सिलेंडरों की बुकिंग के बीच समयसीमा बढ़ाई गई है. एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन पहले बुक नहीं हो सकता. यह नियम शहरी उपभोक्ताओं के लिए है. गांवों में बुकिंग का यह अंतर 45 दिन तय किया गया है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके.&amp;nbsp;
डिलीवरी ऑथेन्टिकेशन कोड
सुरक्षा व्यवस्था के तहत गैस बुक करते ही उपभोक्ता के फोन पर एक सिक्योरिटी पिन या ओटीपी (OTP) भेजा जाता है. डिलीवरी बॉय को यह कोड दिखाने के बाद ही सिलेंडर हैंडओवर किया जाएगा. इससे सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग, गैस की चोरी नहीं होगी. सिलेंडर गलत पते या गलत व्यक्ति को डिलीवर नहीं होगा. गैस कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का लाइव डेटा अपडेटेड रहेगा.&amp;nbsp;
आधार बायोमेट्रिक e-KYC
सभी वैद्य उपभोक्ताओं के लिए गैस खाते की e-KYC प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है. जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक एजेंसी में जाकर या मोबाइल ऐप के जरिए अपनी बायोमेट्रिक या आधार केवाईसी अपडेट नहीं कराई है, उनकी गैस सब्सिडी रोकी जा सकती है या अगली बुकिंग में दिक्कत आ सकती है.&amp;nbsp;
सालाना कोटा तय
प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में केवल 12 रियायती (सब्सिडी वाले) घरेलू सिलेंडर ही मिलेंगे. इससे अधिक सिलेंडर की आवश्यकता होने पर बाजार की वर्तमान ऊंची दरों (जैसे दिल्ली में 942 रुपये) का भुगतान करना होगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:30:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Hike:, क्या, रेट, बढ़ने, के, साथ, नियम, भी, गए, हैं, बदल, जानें, रसोई, गैस, को, लेकर, सरकार, का, रुख</media:keywords>
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        <title>LPG Price Hike: 942 रुपये के पार हुआ घरेलू सिलेंडर, जानिए दाम बढ़ने के बाद अब खाते में कितनी आएगी सब्सिडी?</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Gas Subsidy: घरेलू LPG की कीमतों में बदलाव किया गया है और नई दरें रविवार, 7 जून से लागू हो गई हैं. प्रति सिलेंडर 29 रुपये की हालिया बढ़ोतरी के बाद घरेलू रसोई गैस अब और भी महंगी हो गई है. कीमतों में यह बढ़ोतरी तेल कंपनियों द्वारा 7 मार्च को LPG की कीमतों में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी किए जाने के लगभग तीन महीने बाद हुई है.
इस ताजा बदलाव के बाद, 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत अब दिल्ली में 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, हैदराबाद में 994 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये हो गई है. सिर्फ बेंगलुरु में घरेलू LPG की कीमतें 915.50 प्रति सिलेंडर पर ही बनी हुई हैं. कीमत में हुई इस बढ़ोतरी के साथ अब दिमाग में इस सवाल का आना लाजिमी है कि क्या सरकार ने सब्सिडी को लेकर नियमों में कोई बदलाव किया है या नहीं? आइए जानते हैं.&amp;nbsp;
क्या सब्सिडी पर बदले हैं नियम?
आज घरेलू सिलेंडर के दाम 29 रुपये बढ़ने के बाद भी सरकार की तरफ से दी जाने वाली सब्सिडी राशि (Subsidy Amount) में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. सरकार ने इस बढ़ी हुई कीमत का पूरा बोझ बाजार दरों पर डाल दिया है, जिससे सब्सिडी का पुरा ढांचा ही लागू रहेगा. अलग-अलग कैटेगरीज में उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी पर आइए एक नजर डालते हैं:-
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना&amp;nbsp;
उज्जवला योजना (PMUY) के तहत आने वाले परिवारों को पहले की तरह ही राहत मिलती रहेगी. इसके तहत, 300 रुपये प्रति सिलेंडर सीधे लिंक किए गए बैंक अकाउंट में भेज दिए जाएंगे. दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत अब 942.00 रुपये हो चुकी है, लेकिन 300 रुपये की सब्सिडी के बाद उज्जवला लाभार्थियों को यह 642.00 रुपये का पड़ेगा. यह सब्सिडी एक कारोबारी साल में केवल 12 सिलेंडरों तक ही मान्य है.
सामान्य उपभोक्ताओं को सब्सिडी
अगर आप उज्जवला योजना के लाभार्थी नहीं है और सामान्य कनेक्शन का उपयोग करते हैं, तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ गया है. सामान्य उपभोक्ताओं को मिलने वाली यह सब्सिडी बेहद सीमित है. कई शहरों में यह पूरी तरह बंद है, तो कुछ शहरों में स्थानीय मालभाड़े (Freight Subsidy) के रूप में केवल 12-40 रुपये के बीच ही बैंक खाते में आती है.&amp;nbsp;
सामान्य उपभोक्ताओं को अब अपने शहर की पूरी बढ़ी हुई नई कीमत अदा करनी होगी जैसे दिल्ली में 942 रुपये और पटना में 1031.50 रुपये.&amp;nbsp;
सब्सिडी रोकने के नियम
अगर आपके खाते में सब्सिडी नहीं आ रही है, तो इसके दो कारण हो सकते हैं:-

अगर आपकी या आपके पति/पत्नी की सालाना टैक्सेबल इनकम 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा है, तो नियमानुसार आपको एलपीजी सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा.
e-KYC तेल कंपनियों के नए नियमों के तहत जिन लोगों ने अपनी गैस एजेंसी पर जाकर आधार e-KYC की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनकी सब्सिडी अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:30:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>महंगाई की मार: घरेलू एलपीजी 29 रुपया महंगा, भड़की जनता; विपक्ष ने पीएम मोदी को कहा&amp; &amp;apos;इंफ्लेशन मैन&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महंगाई-की-मार-घरेलू-एलपीजी-29-रुपया-महंगा-भड़की-जनता-विपक्ष-ने-पीएम-मोदी-को-कहा-इंफ्लेशन-मैन</link>
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        <description><![CDATA[ LPG Price Hike Public Reaction: घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह तीन महीनों में दूसरी बार की गई बढ़ोतरी है. इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, 7 जून से दिल्ली में 14.2 किलो वाले LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो जाएगी. इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी.
यह बढ़ोतरी मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट और इंटरनेशनल फ्यूल की कीमतों में उछाल के बाद की गई थी. इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि इस बढ़ोतरी से घरेलू LPG की बिक्री पर हुए नुकसान की सिर्फ कुछ हद तक ही भरपाई हो पाई है. सूत्रों के मुताबिक, कीमतों में इस ताजा बदलाव से पहले, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर LPG सिलेंडर की बिक्री पर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था.
पेट्रोल-डीजल और CNG की भी बढ़ी कीमत
मई के बीच से पेट्रोल और डीजल के दाम भी कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं, जबकि कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के दाम लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं. हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियां अभी भी पेट्रोल और डीजल को लागत से कम कीमत पर बेच रही हैं, जिससे उन्हें पेट्रोल पर लगभग 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
सरकार ने अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ईंधन के बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के कारण सरकार सरकारी ईंधन कंपनियों के जरिए बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हिस्सा खुद उठा रही है.

#WATCH | 29 रुपए बढ़ी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत, महिलाओं ने इस पर क्या कहा सुनिए@aparna_journo | @sushilemediahttps://t.co/smwhXUROiK#LPGCylinder #PriceHike #DomesticCylinder #ABPNews pic.twitter.com/LtLwQMJSl5
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) June 7, 2026



चौरतफा महंगाई की मार
पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, कमर्शियल सिलेंडर के बाद अब घरेलू एलपीजी की कीमत बढ़ने से जनता में आक्रोश है. खासतौर पर, गृहणियों और मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि मई के महीने से अब तक पेट्रोल-डीजल के दाम 7.50 रुपये प्रति लीटर और CNG के दाम 6 रुपये प्रति किलो बढ़ाए जा चुके हैं. अब घरेलू सिलेंडर की कीमत बढ़ने से रसोई गैस का बजट भी गड़बड़ा गया है.&amp;nbsp;
इधर, देश के कई हिस्सों से पैनिक बुकिंग की भी खबरें सामने आ रही हैं. लोग आने वाले महीनों में दाम और बढ़ने के डर से एडवांस बुकिंग करने के लिए गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं.&amp;nbsp;

#WATCH | Patna, Bihar: On domestic LPG cylinder price hike, Samajwadi Party MP Neeraj Maurya says, &quot;... We have been continuously opposing the rising inflation, the increasing cylinder prices, and the shortage of cylinders. The government has failed to control this. An all-party&amp;hellip; pic.twitter.com/IaaA06Cnyb
&amp;mdash; ANI (@ANI) June 7, 2026



विपक्ष ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
कीमत में हुई इस ताजा बढ़ोतरी के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. कांग्रेस व अन्य विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी काे &#039;इंफ्लेशन मैन&#039; का नाम दिया है. उनका आरोप है कि चुनाव होने के ठीक बाद जनता पर यह &#039;इंफ्लेशन बिल&#039; थोपा जा रहा है.

&#039;महंगाई मैन मोदी&#039; का चाबुक फिर चला है।&amp;bull; अब घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपए महंगा कर दिया गया।&amp;bull; मोदी का फंडा साफ है- जनता से वसूली करो, अमीर दोस्त की तिजोरी भरो। pic.twitter.com/Z3zUg6ofNE
&amp;mdash; Congress (@INCIndia) June 6, 2026



छोटे कारोबारियों को चिंता
1 जून को कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 42 से 53.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी. अब घरेलू सिलेंडर के महंगा होने से छोटे कैटरर्स, चाय वाले, टिफिन सर्विस चलाने वालों का कहना है कि उनके पास खाने की थाली और चाय के दाम बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tallest Skyscraper: मुंबई नहीं, इस शहर में बनेगी देश की सबसे ऊंची बिल्डिंग, जानिए क्या है ग्लोबल सिटी का पूरा प्लान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tallest-skyscraper-मुंबई-नहीं-इस-शहर-में-बनेगी-देश-की-सबसे-ऊंची-बिल्डिंग-जानिए-क्या-है-ग्लोबल-सिटी-का-पूरा-प्लान</link>
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        <description><![CDATA[ Tallest Skyscraper: भारत में जल्द ही एक नया रिकॉर्ड बनने वाला है. अब तक देश की सबसे ऊंची इमारत का नाम मुंबई के पास था, लेकिन आने वाले समय में यह रिकॉर्ड गुरुग्राम के नाम हो सकता है. हरियाणा सरकार की ग्लोबल सिटी परियोजना के तहत गुरुग्राम में एक ऐसी गगनचुंबी इमारत बनाने की तैयारी है, जो भारत की सबसे ऊंची बिल्डिंग होगी.
क्या है ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट?
हरियाणा सरकार गुरुग्राम में एक बड़ा और आधुनिक शहर विकसित कर रही है, जिसे ग्लोबल सिटी नाम दिया गया है. ये गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे के पास करीब 1,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट का मकसद गुरुग्राम को दुनिया के बड़े बिजनेस हब्स की तरह विकसित करना है. इसी योजना के तहत यहां एक बेहद ऊंची इमारत बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. बताया जा रहा है कि यह बिल्डिंग इतनी ऊंची होगी कि मौजूदा भारतीय रिकॉर्ड आसानी से टूट जाएगा.
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कितनी ऊंची होगी यह इमारत?
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित टावर की ऊंचाई 620 मीटर से 700 मीटर के बीच हो सकती है. वर्तमान में भारत की सबसे ऊंची इमारत मुंबई की पैलेस रॉयल (Palais Royale) है, जिसकी ऊंचाई लगभग 320 मीटर है. ऐसे में गुरुग्राम का यह टावर मौजूदा रिकॉर्ड को दोगुने से भी ज्यादा अंतर से पीछे छोड़ सकता है. यह सिर्फ एक ऊंची इमारत नहीं होगी, बल्कि इसमें ऑफिस, होटल, शॉपिंग स्पेस, कॉन्फ्रेंस सेंटर और कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी. यानी यह एक तरह से अपने आप में पूरा बिजनेस सेंटर होगी. सरकार का मानना है कि इससे बड़ी-बड़ी देशी और विदेशी कंपनियां गुरुग्राम की ओर आकर्षित होंगी और निवेश बढ़ेगा.
गुरुग्राम को क्या फायदा होगा?
इस परियोजना के पूरा होने से हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है. निर्माण कार्य से लेकर बाद में चलने वाले बिजनेस तक, कई नए अवसर पैदा होंगे. इसके अलावा गुरुग्राम की पहचान सिर्फ आईटी और कॉर्पोरेट शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक बिजनेस डेस्टिनेशन के रूप में भी बनेगी. रियल एस्टेट सेक्टर को भी इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
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कब होगा शुरू?
फिलहाल यह परियोजना शुरुआती चरण में है. डिजाइन, मंजूरी और डेवलपर के चयन जैसी प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं. इसलिए इस बिल्डिंग को बनने में कई साल लग सकते हैं. अगर यह योजना सफल होती है, तो गुरुग्राम भारत के नक्शे पर एक नई पहचान बना सकता है. देश की सबसे ऊंची बिल्डिंग सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं होगी, बल्कि यह दिखाएगी कि भारत तेजी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक स्तर की सुविधाओं की ओर बढ़ रहा है. आने वाले वर्षों में गुरुग्राम की तस्वीर पूरी तरह बदलती हुई नजर आ सकती है.
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 00:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Tallest, Skyscraper:, मुंबई, नहीं, इस, शहर, में, बनेगी, देश, की, सबसे, ऊंची, बिल्डिंग, जानिए, क्या, है, ग्लोबल, सिटी, का, पूरा, प्लान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG संकट के बीच जान लें गैस सिलेंडर के ये 7 सरकारी नियम, कभी नहीं कटेगा कनेक्शन, मिलेंगे फायदे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-संकट-के-बीच-जान-लें-गैस-सिलेंडर-के-ये-7-सरकारी-नियम-कभी-नहीं-कटेगा-कनेक्शन-मिलेंगे-फायदे</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-संकट-के-बीच-जान-लें-गैस-सिलेंडर-के-ये-7-सरकारी-नियम-कभी-नहीं-कटेगा-कनेक्शन-मिलेंगे-फायदे</guid>
        <description><![CDATA[ LPG News: अगर आप घर में LPG गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. हाल के दिनों में गैस कनेक्शन और सिलेंडर वितरण को लेकर कई नए नियम लागू किए गए हैं. इनका मकसद फर्जी कनेक्शन, कालाबाजारी और डुप्लीकेट उपभोक्ताओं पर रोक लगाना है. अगर ग्राहक इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें गैस बुकिंग या सिलेंडर डिलीवरी में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
LPG से जुड़े 7 जरूरी नियम-&amp;nbsp;
1. OTP वेरिफिकेशन&amp;nbsp;
अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय OTP वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है. सिलेंडर बुक करने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा. डिलीवरी बॉय को यह OTP बताने के बाद ही सिलेंडर मिलेगा. इसका मकसद सही ग्राहक तक सिलेंडर पहुंचाना है.
मुंबई नहीं, इस शहर में बनेगी देश की सबसे ऊंची बिल्डिंग, जानिए क्या है ग्लोबल सिटी का पूरा प्लान
2. ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक अपडेट
सरकार और तेल कंपनियां ग्राहकों से ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं. कई जगहों पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी किया जा रहा है. अगर आपका KYC अपडेट नहीं है, तो भविष्य में गैस सेवा लेने में दिक्कत आ सकती है.
3. मोबाइल नंबर अपडेट&amp;nbsp;
आपका मोबाइल नंबर गैस एजेंसी के रिकॉर्ड में अपडेट होना चाहिए. OTP, बुकिंग मैसेज और अन्य जरूरी जानकारी इसी नंबर पर भेजी जाती है. अगर नंबर बदल गया है तो जल्द से जल्द एजेंसी में अपडेट करवा लें.
4. दूसरी बुकिंग नहीं होगी
नए नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में एक सिलेंडर लेने के बाद 25 दिन से पहले दूसरी LPG बुकिंग नहीं की जा सकेगी. इसका उद्देश्य जरूरत के अनुसार गैस वितरण सुनिश्चित करना है.
5. गांवों में 45 दिन का नियम
ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरी सिलेंडर बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतर रखा गया है. इससे फर्जी बुकिंग और गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
क्या फिर 5 रुपया महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? तेल कंपनियों को हो रहे घाटे के बीच एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
6. PNG में सब्सिडी पर नजर
जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां LPG सब्सिडी और कनेक्शन से जुड़े नियमों की निगरानी बढ़ाई जा रही है. सरकार चाहती है कि दोनों सुविधाओं का गलत फायदा न उठाया जाए.
7. एक पते पर कई कनेक्शन की जांच
तेल कंपनियां अब ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं जहां एक ही पते पर कई LPG कनेक्शन मौजूद हैं. यदि कोई कनेक्शन फर्जी या नियमों के खिलाफ पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है.
इन नियमों का फायदा क्या होगा?
इन नए नियमों से असली उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर मिल सकेगा. साथ ही फर्जी कनेक्शन, डुप्लीकेट उपभोक्ता और कालाबाजारी पर रोक लगेगी. इससे गैस वितरण व्यवस्था और ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी.
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 00:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, संकट, के, बीच, जान, लें, गैस, सिलेंडर, के, ये, सरकारी, नियम, कभी, नहीं, कटेगा, कनेक्शन, मिलेंगे, फायदे</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IPL स्टार होने के बावजूद वैभव सूर्यवंशी से क्यों पीछे हट रही हैं बड़ी कंपनियां, यह है असली वजह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ipl-स्टार-होने-के-बावजूद-वैभव-सूर्यवंशी-से-क्यों-पीछे-हट-रही-हैं-बड़ी-कंपनियां-यह-है-असली-वजह</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ipl-स्टार-होने-के-बावजूद-वैभव-सूर्यवंशी-से-क्यों-पीछे-हट-रही-हैं-बड़ी-कंपनियां-यह-है-असली-वजह</guid>
        <description><![CDATA[ Vaibhav Suryavanshi: IPL के फैंस तो दुनिया के कोने-कोने में हैं, लेकिन अब इसका शोर थम चुका है. IPL ट्रॉफी पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू ने कब्जा जमा लिया है. सभी खिलाड़ी अपने अगले आसाइनमेंट की तैयारी में जुट चुके हैं, लेकिन एक नाम जो काफी चर्चा में है और वह है वैभव सूर्यवंशी. 15 साल के इस युवा क्रिकेटर ने IPL 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे क्रिकेट फैंस लंबे टाइम तक नहीं भूल सकते हैं.&amp;nbsp;
शानदार प्रदर्शन से जीता दिल
राजस्थान रॉयल्स यानी RR के लिए खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने इस सीजन में 16 मैचों में 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की. सिर्फ यहीं नहीं , उन्हें सीजन का मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर भी चुना गया. इस जबरदस्त प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी की ब्रांड वैल्यू भी तेजी से बढ़ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी एंडोर्समेंट फीस प्रति डील करीब 50 लाख रुपये से बढ़कर 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. वैभव सूर्यवंशी फिलहाल राजस्थान रॉयल्स के साथ 1.10 करोड़ रुपये के सालाना कॉन्ट्रैक्ट पर जुड़े हुए हैं. वैभव की ब्रांड मार्केट में डिमांड तेजी से बढ़ रही है.
LPG संकट के बीच जान लें गैस सिलेंडर के ये 7 सरकारी नियम, कभी नहीं कटेगा कनेक्शन, मिलेंगे फायदे
विज्ञापनों में सीमित मौजूदगी क्यों?
इन सभी चीजों के बीच अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी चर्चा और सफलता के बाद भी वैभव सूर्यवंशी फिलहाल बहुत कम विज्ञापनों में क्यों दिखाई दें रहे हैं? उनकी उम्र केवल 15 साल है, जिसकी वजह से कुछ कानूनी और व्यावहारिक सीमाएं हैं. इसी कारण बड़ी ऑटोमोबाइल और कुछ लाइफस्टाइल कंपनियां उन्हें फिलहाल साइन नहीं कर पा रही हैं.&amp;nbsp;
लाइफस्टाइल और फाइनेंस ब्रांड्स की सीमाएं
बता दें कि डियोड्रेंट, ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स, लग्जरी घड़ियां और फैंटेसी ऐप्स जैसी कई कैटेगरी एडल्ट ऑडियंस को टारगेट करती हैं. भारत में ASCI और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के नियमों के चलते ऐसे ब्रांड्स नाबालिग को फेस नहीं बना सकते. इसी तरह ही क्रेडिट कार्ड, म्यूचुअल फंड जैसी कंपनियां भी सावधानी बरतती है.
परिवार और टीम का संतुलित फैसला
वैभर के ब्रांड को मैनेज करने में राजस्थान रॉयल्स और उनका परिवार बहुत संतुलित रणनीति अपना रहा है. वह जानकर उन्हें ज्यादा विज्ञापन और मीडिया चमक-दमक से दूर रख रहे हैं, ताकि उनका ध्यान खेल पर बना रहे. फिलहाल वैभव सिर्फ वहीं ब्रांड्स के साथ जुड़ रहे हैं जो उनकी उम्र के मुताबिक उपयुक्त है जैसे Complan और Google Pay का पॉकेट मनी ऐप. जानकारी के मुताबिक, अब ब्रांड्स युवा खिलाड़ियों के साथ लंबे कॉन्ट्रैक्ट के बजाय 2-3 साल के शॉर्ट-टर्म एग्रीमेंट कर रहे हैं. अभी परिवार और मैनेजमेंट चाहते हैं कि वह धीरे-धीरे आगे बढ़े और उनका करियर लंबे समय तक स्तिर रहे.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 00:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IPL, स्टार, होने, के, बावजूद, वैभव, सूर्यवंशी, से, क्यों, पीछे, हट, रही, हैं, बड़ी, कंपनियां, यह, है, असली, वजह</media:keywords>
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        <title>Bank KYC: केवाईसी के तोड़े नियम, इस बैंक पर RBI ने लगाया भारी भरकम जुर्माना, क्या इसमें है आपका खाता?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank KYC: अगर आपका खाता सरकारी बैंक केनरा बैंक में है, तो यह खबर आपके लिए ही है. भारतीय रिजर्व बैंक ने केवाईसी नियमों का पालन नहीं करने पर केनरा बैंक पर 41.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. हालांकि, इससे बैंक ग्राहकों के पैसे या जमा राशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ये मामला बैंकिंग नियमों के पालन को लेकर चर्चा में आ गया है.&amp;nbsp;
आरबीआई ने क्यों लगाया जुर्माना?
आरबीआई की जांच में पाया गया कि बैंक ने कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड तय समय पर सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री में अपलोड नहीं किए. इसके अलावा कुछ खातों को गलत तरीके से इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया गया था, जबकि उन खातों में लेनदेन हुआ था. इन कमियों को आरबीआई ने नियमों का उल्लंघन माना.&amp;nbsp;
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क्या ग्राहकों को घबराने की जरूरत है?
नहीं. आरबीआई द्वारा लगाया गया जुर्माना बैंक की कार्यप्रणाली में पाई गई कमियों के कारण है. इसका ग्राहकों के जमा पैसे, बचत खाते, एफडी या अन्य बैंकिंग सेवाओं पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. बैंक का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा.&amp;nbsp;
केवाईसी इतना जरूरी क्यों है?
केवाईसी का मतलब है ग्राहक की पहचान और पते की पुष्टि करना. इसके जरिए बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि खाते का इस्तेमाल किसी गलत या गैरकानूनी गतिविधि के लिए न हो. इसी वजह से समय-समय पर बैंक ग्राहकों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर और पते से जुड़े दस्तावेज अपडेट करने को कहते हैं.
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केवाईसी अपडेट नहीं है तो क्या होगा?यदि लंबे समय तक केवाईसी अपडेट नहीं किया जाता है, तो बैंक कुछ सेवाओं पर रोक लगा सकता है. कई मामलों में खाते से लेनदेन सीमित हो सकता है या बैंक ग्राहक से दोबारा दस्तावेज जमा करने को कह सकता है. इसलिए बैंक से केवाईसी अपडेट का मैसेज या कॉल आने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
आरबीआई क्यों सख्ती कर रहा है?पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने केवाईसी नियमों को लेकर काफी सख्ती दिखाई है. कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया जा चुका है. आरबीआई का मानना है कि मजबूत केवाईसी व्यवस्था से फर्जी खातों, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, KYC:, केवाईसी, के, तोड़े, नियम, इस, बैंक, पर, RBI, ने, लगाया, भारी, भरकम, जुर्माना, क्या, इसमें, है, आपका, खाता</media:keywords>
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        <title>Gas Discovery: ईरान वॉर के बीच अंडमान में मिला गैस का महाभंडार, ऑयल इंडिया को मिली बड़ी कामयाबी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gas-discovery-ईरान-वॉर-के-बीच-अंडमान-में-मिला-गैस-का-महाभंडार-ऑयल-इंडिया-को-मिली-बड़ी-कामयाबी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gas-discovery-ईरान-वॉर-के-बीच-अंडमान-में-मिला-गैस-का-महाभंडार-ऑयल-इंडिया-को-मिली-बड़ी-कामयाबी</guid>
        <description><![CDATA[ Gas Discovery in India: हाल ही में खबरें सामने आई थीं कि भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तेल का भंडार मिला है. इसके अलावा गैस को लेकर भी खबरें हैं कि वहां गैस का भंडार भी मिला है. जिससे पाकिस्तान में खुशी का माहौल बन गया. इसी बीच अब खबरें हैं कि भारत में भी गैस का भंडार मिला है. बीते कई दिनों से गैस की किल्लत चलने के बाद अब गैस का भंडार मिलना अपने आप में खुशी और राहत की बात है.
ऑइल इंडिया की रिपोर्टदरअसल सरकारी कंपनी ऑइल इंडिया लिमिटेड को भारत के अंडमान समुद्र क्षेत्र में नेचुरल गैस का एक और बड़ा भंडार मिला है. कंपनी की तरफ से बताया गया है कि अंडमान के तट के समीप विजयपुरम-3 में एक कुएं में प्राकृतिक गैस मिली है. ये इस क्षेत्र में कंपनी की दूसरी जरूरी हाइड्रोकार्बन (तेल- गैस) की खोज है. कंपनी के मुताबिक विजयपुरम-3 कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है.
ये भी पढ़ें: RBI News: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर आई मजबूती, 682 अरब डॉलर के पार पहुंचा खजाना
गहराई में मिली प्राकृतिक गैसइस जगह की ड्रिलिंग 355 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में की गई. शुरुआती जांच के दौरान 1900 मीटर से ज्यादा गहराई में प्राकृतिक गैस के संकेत मिले और लगातार गैस निकलती दिखाई दी, जिससे यहां इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई.&amp;nbsp;
ऑइल इंडिया का बयानइस बारे में बात करते हुए ऑइल इंडिया ने कहा कि ये खोज इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे ये संकेत मिलता है कि अंडमान समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस के बड़े भंडार मौजूद हो सकते हैं. हालांकि अभी ये तय नहीं हुआ है कि यहां से बिजनेस के लिहाज से उत्पादन संभव होगा या नहीं. इसके लिए आने वाले समय में और ज्यादा टेस्ट किए जाएंगे. कंपनी फिलहाल गैस के सैम्पल की जांच कर रही है जिससे उसकी गुणवत्ता और ऊर्जा क्षमता का पता लगाया जा सके. इतना ही नहीं वैज्ञानिक ये स्टडी कर रहे हैं कि गैस किस स्त्रोत से बनी है.
ये भी पढ़ें: Oil- Gas Discovery: भारत के पड़ोसी देश में मिला खजाना, बंद कुएं से निकला तेल, गैस का भी पता चला
बता दें कि इससे पहले सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 कुएं में भी प्राकृतिक गैस मिलने की जानकारी सामने आई थी. अब तक इस ब्लॉक में खोदे गए तीन कुओं में से दो में गैस के संकेत मिल चुके हैं. इससे क्षेत्र की संभावनाओं को लेकर भरोसा और भी बढ़ गया है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gas, Discovery:, ईरान, वॉर, के, बीच, अंडमान, में, मिला, गैस, का, महाभंडार, ऑयल, इंडिया, को, मिली, बड़ी, कामयाबी</media:keywords>
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    <item>
        <title>Cheap Fuel: इस राज्य में मिलेगा पेट्रोल से 20 रुपये सस्ता ईंधन! सरकार लेकर आई कम खर्च में गाड़ी चलाने का मास्टर प्लान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cheap-fuel-इस-राज्य-में-मिलेगा-पेट्रोल-से-20-रुपये-सस्ता-ईंधन-सरकार-लेकर-आई-कम-खर्च-में-गाड़ी-चलाने-का-मास्टर-प्लान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/cheap-fuel-इस-राज्य-में-मिलेगा-पेट्रोल-से-20-रुपये-सस्ता-ईंधन-सरकार-लेकर-आई-कम-खर्च-में-गाड़ी-चलाने-का-मास्टर-प्लान</guid>
        <description><![CDATA[ Cheap Fuel News: देशभर में पेट्रोल- डीजल के दान महज 10 दिनों में ही 4 बार बढ़े. जिससे आम जनता की जेब पर काफी बोझ पड़ गया. पेट्रोल- डीजल के महंगा होने की वजह से रोजमर्रा में इस्तेमल होने वाली चीजें भी महंगी होने लगी हैं. इसी बीच सरकार की तरफ से एक राहत की खबर सामने आई है. पेट्रोल- डीजल की कीमत तो कम नहीं हुई है लेकिन दिल्ली में आपको सफर करना अब इतना महंगा नहीं पड़ेगा. आइये बताते हैं क्यों?
क्या है सरकार का मास्टर प्लानदरअसल देश की राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार ने एक ऐसे ईंधन का इंतजाम कर दिया है जो पेट्रोल से भी करीब 20 रुपये सस्ता मिलने वाला है. जिसके लिए सरकार की तरफ से देश का पहला E-85 फ्यूल स्टेशन लॉन्च किया गया है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस फ्यूल स्टेशन का उद्घाटन किया, जो इंडियन ऑइल के पुसा रोड आउटलेट पर स्थित है.
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क्या है E-85 फ्यूल?ई-85 एक ऑप्शनल ईंधन है, जिसमें एथेनॉल मिला होता है. ई-85 से तात्पर्य है कि इस पेट्रोल में करीब 85 प्रतिशत एथेनॉल मिला होगा और बाकी 15 प्रतिशत पेट्रोल होगा. पेट्रोल में ज्यादा मात्रा में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल पर इसकी डिपेंडेंसी कम हो जाती है. इससे कच्चा तेल यदि आयात कम भी होगा तो पेट्रोल की कमी नहीं होगी. एथेनॉल भारत में ही बनाया जाता है ऐसे में इस पर कोई आयात शुल्क नहीं होता है. ना केवल इससे पेट्रोल की कीमतों में कटौती होगी बल्कि किसानों का भी मुनाफा होगा.
कितना होगा कीमत में फर्क?बात करें ई-85 फ्यूल की तो ये पेट्रोल से करीब 20 रुपये तक सस्ता मिल सकता है. फिलहाल राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. फिलहाल जो पेट्रोल ई-20 मिल रहा है, उसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है और बाकी 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है.
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बता दें कि जनता की सुविधा के लिए फ्यूल स्टेशन पर ई-85 के डिस्पेंसर पर अलग से ब्रांडिंग और लेबल लगाए जाएंगे, जिससे किसी को भी किसी तरह की भ्रम की स्थिति पैदा ना हो. ग्राहकों को आसानी से समझ में आए कि वो कौन सा पेट्रोल भरवा रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cheap, Fuel:, इस, राज्य, में, मिलेगा, पेट्रोल, से, रुपये, सस्ता, ईंधन, सरकार, लेकर, आई, कम, खर्च, में, गाड़ी, चलाने, का, मास्टर, प्लान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Rate: आज बढ़ा है पेट्रोल&amp;डीजल का भाव या कीमतें हैं कल जितनी? फटाफट चेक करें रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-rate-आज-बढ़ा-है-पेट्रोल-डीजल-का-भाव-या-कीमतें-हैं-कल-जितनी-फटाफट-चेक-करें-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-rate-आज-बढ़ा-है-पेट्रोल-डीजल-का-भाव-या-कीमतें-हैं-कल-जितनी-फटाफट-चेक-करें-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate on June 6: पिछले कुछ हफ्तों से कई दफा रेट बढ़ने के बाद आज 5 जून, 2026 को देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के चलते एनर्जी सप्लाई में आ रही रुकावटों की वजह से ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इस बीच, मार्केट एक्सपर्ट्स ईंधन की कीमतों में एक और बदलाव की संभावना पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्यों बढ़ाई गईं कीमतें?&amp;nbsp;
ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर बढ़ते दबाव के कारण हुई है. इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि मई के महीने में कई बार कीमतें बढ़ने के बावजूद OMCs को अभी भी पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर काफी नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है. रिपोर्टों से पता चलता है कि घाटे का पैमाने इतना ज्यादा है, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुनाफा कमाने के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.&amp;nbsp;
अब तक कितनी हुई बढ़ोतरी?&amp;nbsp;
पिछले कुछ हफ्तों में ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई है, जिससे कई शहरों में इनकी कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है. तेल कंपनियों ने एनर्जी मार्केट में जारी उठा-पटक के बीच खरीद और रिफाइनिंग की बढ़ती लागत की भरपाई करने के लिए ये कीमतें धीरे-धीरे बढ़ाईं.
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपये
95.20 रुपये


गाजियाबाद
101.73 रुपये
95.29 रुपये


नोएडा
102.42 रुपये
95.37 रुपये


मुंबई
111.21 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.51 रुपये
100 रुपये लगभग


चेन्नई&amp;nbsp;
107.75 रुपये
94.00 रुपये


लखनऊ
101.86 रुपये
95.53 रुपये


जयपुर
113.91 रुपये
98.54 रुपये


पटना
113.77 रुपये
100 रुपये लगभग


 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Rate:, आज, बढ़ा, है, पेट्रोल-डीजल, का, भाव, या, कीमतें, हैं, कल, जितनी, फटाफट, चेक, करें, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Price Today: आज कितनी है 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत? कमर्शियल सिलेंडर का भी चेक करें रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-आज-कितनी-है-142-किलो-वाले-घरेलू-सिलेंडर-की-कीमत-कमर्शियल-सिलेंडर-का-भी-चेक-करें-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-आज-कितनी-है-142-किलो-वाले-घरेलू-सिलेंडर-की-कीमत-कमर्शियल-सिलेंडर-का-भी-चेक-करें-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Price Today on June 6: कमर्शियल कुकिंग गैस और कम्प्रैस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी के बाद LPG, CNG और PNG की कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. फिलहाल घरेलू LPG की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं.
कितनी बढ़ाई जा चुकीं कीमतें?&amp;nbsp;
1 जून को कमर्शियल LPG की कीमतों में फिर से बदलाव किया गया. दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 42 रुपये और कोलकाता में 53.5 रुपये और बढ़ गई. वहीं, दिल्ली में 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर की कीमत 11 रुपये बढ़ने के बाद अब 821.5 रुपये हो गई है. घरेलू ग्राहकों के लिए कीमतों में तुरंत कोई बदलाव नहीं हुआ है.
14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत मार्च की शुरुआत से ही 913 रुपये के स्तर पर बनी हुई है. उस दौरान कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया गया था. ये बदलाव जो ईंधन की उपलब्धता, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा लागत और तेल कंपनियों पर दबाव के कारण हुए हैं. सरकार का कहना है कि वह ईंधन भंडार को मजबूत करने और घरेलू आपूर्ति को संभालने के लिए कदम उठा रही है. किश्तों में हो रही इस बढ़ोतरी का मकसद &amp;nbsp;महंगाई का बड़ा झटका दिए बिना तेल कंपनियों पर मार्जिन का दबाव कम करना है, हालांकि महंगाई पर असर पड़ने की उम्मीद अभी भी है.&amp;nbsp;
शहरवार LPG सिलेंडर की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
913.0 रुपये
&amp;nbsp;3071.5 रुपये


मुंबई
912.5 रुपये
3024.0 रुपये


कोलकाता
&amp;nbsp;939.0 रुपये
3202.5 रुपये


चेन्नई
928.5 रुपये
3237.0 रुपये


पटना&amp;nbsp;
1002.5 रुपये
&amp;nbsp;3347.0 रुपये


जयपुर
&amp;nbsp;916.5 रुपये
3099.0 रुपये



सप्लाई रेट में भी हुई बढ़ोतरी
हाल के महीनों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के सप्लाई रेट में लगभग दो-पांचवें हिस्से की बढ़ोतरी हुई है, जो लगभग 1200 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच चुकी है. आम उपभोक्ताओं को यही सिलेंडर 913 रुपये में मिल रहा है. सप्लाई लागत में यह बढ़ोतरी प्रोपेन के लिए सऊदी अनुबंध मूल्य (Saudi Contract Price) में भारी वृद्धि के कारण हुई है.
भारत एलपीजी की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसके लिए सऊदी अरामको के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस को ग्लोबल बेंचमार्क माना जाता है. होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए सप्लाई रुकने के बाद अप्रैल में इसमें 38% का उछाल आया. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, &amp;nbsp;वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बावजूद भारत में घरेलू LPG की दरें इस क्षेत्र में सबसे कम बनी हुई हैं. सब्सिडी वाले और बिना सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर, दोनों की कीमतें पड़ोसी देशों में समान कुकिंग गैस सिलेंडरों की तुलना में कम हैं, हालांकि सिलेंडरों के आकार में अंतर है.

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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Today:, आज, कितनी, है, 14.2, किलो, वाले, घरेलू, सिलेंडर, की, कीमत, कमर्शियल, सिलेंडर, का, भी, चेक, करें, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Hindustan Zinc में 2% की हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, खबर मिलते ही लगा 5% का लोअर सर्किट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hindustan-zinc-में-2-की-हिस्सेदारी-बेचेगी-सरकार-खबर-मिलते-ही-लगा-5-का-लोअर-सर्किट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/hindustan-zinc-में-2-की-हिस्सेदारी-बेचेगी-सरकार-खबर-मिलते-ही-लगा-5-का-लोअर-सर्किट</guid>
        <description><![CDATA[ Hindustan Zinc: आज हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में 5% से अधिक की भारी गिरावट देखी गई. इंट्रा-डे में शेयर अपने पिछले बंद भाव से टूटकर 570 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गए. शेयरों की कीमत में आई इस कमी के पीछे एक बड़ी वजह है. दरअसल, सरकार हिंदुस्तान जिकं में अपनी 2% &amp;nbsp;तक की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है, जिससे बाजार से करीब 5000 करोड़ रुपये तक जुटाए जा सके.&amp;nbsp;
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के तहत आने वाला डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) हिस्सेदारी बेचे जाने की इस प्रक्रिया को इसी महीने या जुलाई से शुरू कर सकती है. सरकार ने इसके लिए देश के बड़े मर्चेंट बैंकर्स से सलाह लेने का काम भी शुरू कर दिया है. इनमें मुख्य रूप से ICICI Securities, Axis Capital, IIFL Capital Services, HDFC Securities शामिल हैं.&amp;nbsp;
मौजूदा शेयर होल्डिंग पैटर्न&amp;nbsp;
हिंदुस्तान जिंक देश की सबसे बड़ी जिंग, लेड और चांदी उत्पादक कंपनियों में से एक है. इस कंपनी में अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड की लगभग 61% की हिस्सेदारी है, जबकि सरकार के पास कंपनी की करीब 28% हिस्सेदारी है. इसमें से सरकार 2% बेचने जा रही है. यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) रूट के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर की जाएगी.&amp;nbsp;
शेयर की कीमतों पर असर
इस खबर के सामने आते ही शुक्रवार को हिंदुस्तान जिकं के शेयरों में अच्छी-खासी गिरावट देखी गई. शेयर लगभग 5% टूटकर 570-575 रुपये के स्तर पर पहुंच गए, जो पिछले दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर है. हिंदुस्तान जिंक की मुख्य प्रमोटर कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयरों में भी आज करीब 3-5% तक की गिरावट आई है.&amp;nbsp;
गिरावट की वजह
सरकार जब भी OFS लेकर आती है, तो वह शेयरों की मौजूदा बाजार कीमत से कुछ डिस्काउंट पर फ्लोर प्राइस तय करती है. इसी डिस्काउंट की उम्मीद में बाजार में पहले से ही बिकवाली शुरू हो जाती है. &amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hindustan, Zinc, में, की, हिस्सेदारी, बेचेगी, सरकार, खबर, मिलते, ही, लगा, का, लोअर, सर्किट</media:keywords>
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        <title>Credit Card News: बैंक बिना बताए क्यों घटा रहे हैं आपकी कार्ड लिमिट, कम होने पर क्या करें?</title>
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        <description><![CDATA[ Credit Card Limit: अगर आपने हाल ही में नोटिस किया है कि आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट पहले से कम हो गई है, तो हैरान होने की जरूरत नहीं है. कई बैंक और कार्ड कंपनियां समय-समय पर ग्राहकों की प्रोफाइल की जांच करते हैं और जोखिम के आधार पर क्रेडिट लिमिट बढ़ाने या घटाने का फैसला लेते हैं. ये प्रोसेस ज्यादातर तो ऑटोमैटिक ही होता है. लेकिन जब लिमिट कम हो जाती है, तब आपको क्या करना है ये आप यहां से जान सकते हैं.&amp;nbsp;
बैंक क्रेडिट लिमिट क्यों घटाते हैं?
बैंक आमतौर पर बिना वजह लिमिट कम नहीं करते. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे क्रेडिट कार्ड का बहुत कम इस्तेमाल करना, लगातार ज्यादा लिमिट का उपयोग करना, क्रेडिट स्कोर में गिरावट, लोन या ईएमआई का बढ़ता बोझ, आय में कमी या अपडेटेड इनकम डिटेल्स न होना. इसके अलावा बैंक की आंतरिक रिस्क मैनेजमेंट पॉलिसी में बदलाव भी लिमिट कम होने का कारण बन सकती है.
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क्या बैंक बिना बताए लिमिट कम कर सकते हैं?
कई मामलों में बैंक कार्डधारक समझौते के तहत क्रेडिट लिमिट की समय-समय पर समीक्षा कर सकते हैं. हालांकि आमतौर पर SMS, ईमेल या ऐप नोटिफिकेशन के जरिए जानकारी दी जाती है, लेकिन कई ग्राहक इसे बाद में नोटिस करते हैं.&amp;nbsp;
लिमिट कम होने से क्या नुकसान होगा?
क्रेडिट लिमिट घटने का सबसे बड़ा असर आपके क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर पड़ता है. उदाहरण के लिए, अगर आपकी लिमिट 2 लाख रुपये से घटकर 1 लाख रुपये हो जाती है और खर्च 50,000 रुपये है, तो आपका यूटिलाइजेशन 25% से बढ़कर 50% हो जाएगा. ज्यादा क्रेडिट यूटिलाइजेशन आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है और भविष्य में लोन या नया क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी हो सकती है.&amp;nbsp;
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लिमिट कम हो जाए तो क्या करें?
अगर आपकी क्रेडिट लिमिट कम हो गई है, तो सबसे पहले बैंक से संपर्क करें और कारण जानने की कोशिश करें. इसके अलावा आपको यहां दिए काम करने हैं-

सभी बिल समय पर भरें
क्रेडिट कार्ड का उपयोग लिमिट के 30% से कम रखें
CIBIL स्कोर बेहतर बनाए रखे
बैंक में अपनी आय संबंधी जानकारी अपडेट करें
एक साथ कई नए कार्ड के लिए आवेदन करने से बचें&amp;nbsp;

किन लोगों को ज्यादा ध्यान देना है?
जो लोग क्रेडिट कार्ड का लगातार या फिर बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, न्यूनतम भुगतान करते हैं या जिनका क्रेडिट स्कोर हाल में गिरा है, उनकी लिमिट घटने की संभावना ज्यादा हो सकती है.
क्या लिमिट दोबारा बढ़ सकती है?
हां. अगर आपका भुगतान रिकॉर्ड अच्छा है, आय बढ़ी है और क्रेडिट स्कोर मजबूत है, तो आप बैंक से लिमिट बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं. कई बैंक समय-समय पर अच्छे ग्राहकों को खुद भी लिमिट बढ़ाने का ऑफर देते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google में फिर छंटनी! क्लाउड और टॉप साइबर सिक्योरिटी टीम के कर्मचारियों की गई नौकरी, क्या है कारण?</title>
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        <description><![CDATA[ Google layoff News: इस महंगाई के दौर में लोगों की नौकरी बची रहे यही सब चाहते हैं. हर कोई हर तरीके से अपनी नौकरी को बचाने की जुगत में लगा रहता है. इसी बीच खबरें हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक गूगल ने अपने स्टाफ से कई कर्मचारियों को निकाल दिया है. ये खबर ऐसे मंदी के दौर में आई है जहां एक तरफ ईरान और यूएस का युद्ध चल रहा है. तो वहीं दूसरी तरफ महंगाई बढ़ती ही जा रही है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल खबरें हैं कि गूगल ने अपने क्लाउड डिवीजन में कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है. बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो हफ्तों में गूगल क्लाउड की कई टीमों में नौकरी में कटौती की गई है. प्रभावित इकाइयों में गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप भी शामिल है, जो ग्लोबल हैकिंग ऑपरेशंस पर रिसर्च कर रिपोर्ट को पब्लिश करती है.
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इस रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने साल 2022 में 5.4 अरब डॉलर में एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी को टेकओवर किया था, जिसका नाम Mandiant है. इसके कुछ कर्मचारियों पर भी इस छंटनी का असर हुआ है. हालांकि, फिलहाल कंपनी ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि उन्होंने कितने कर्मचारियों को निकाला है.
कर्मचारी का पोस्टइस खबर की पुष्टि करने के लिए गूगल के एक कर्मचारी ने लिंक्डइन पर भी पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में बताया गया है कि इस कर्मचारी के समेत कई और लोगों को इनकी टीम से निकाला जा चुका है. इसके बाद इस कर्मचारी ने अपने आगे के प्लान के बारे में लिखते हुए बताया है कि कुछ समय के ब्रेक के बाद वो नई नौकरी ढूंढेंगे.

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कंपनी की तरफ से बयानसूत्रों के अनुसार, गूगल ने कुछ मामलों में संसाधनों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शिफ्ट करने को इस फैसले की वजह बताया है. कंपनी के एक स्पोक्सपर्सन ने बताया कि, गूगल समय-समय पर अपने इंटरनल स्ट्रक्चर को बदलती है जिससे कस्टमर्स और बिजनेस की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को बेहतर ढंग से तैयार कर सके.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission पर बड़ी खबर, 65 की उम्र में 70% &amp;90 साल पर 100% सैलरी जितनी पेंशन की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही कर्मचारियों के बीच काफी हलचल देखी जा रही है. कर्मचारी संगठनों की वेतन आयोग से कुछ उम्मीदें हैं, तो वहीं पेंशनर्स की भी कुछ अलग उम्मीदें हैं. कर्मचारी संगठनों की मांगों के बाद अब पेंशनर्स संगठनों की तरफ से भी पेंशन स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग इस वेतन आयोग से की गई है. अब पेंशनभोगी चाहते हैं कि उन्हें उम्र के हिसाब से बढ़कर पेंशन मिला.
उम्र के हिसाब से हो पेंशन8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों से लेकर पेंशनर्स तक ने अपनी- अपनी डिमांड रखी है. किसी ने DA को बढ़ाने की मांग की है, किसी ने सैलरी रिवीजन की मांग की है तो वहीं किसी ने पेंशन बेनेफिट्स की मांग की है. कर्मचारियों की मांग के अलावा पेंशन संगठनों की मांग है कि रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी उम्र के हिसाब से पेंशन दी जाए. जिसकी उम्र जिनती ज्यादा उसे पेंशन के रूप में रिटायरमेंट के दौरान सैलरी का उतना प्रतिशत हिस्सा मिले. ये स्ट्रक्चर इस प्रकार रखने की मांग की गई है:
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65 वर्ष के रिटायर्ड कर्मचारी को अपनी आखिरी सैलरी का 70% पेंशन के रूप में मिले.
70 वर्ष के रिटायर्ड कर्मचारी को अपनी आखिरी सैलरी का 75% पेंशन के रूप में मिले.
75 वर्ष के रिटायर्ड कर्मचारी को अपनी आखिरी सैलरी का 80% पेंशन के रूप में मिले.
80 वर्ष के रिटायर्ड कर्मचारी को अपनी आखिरी सैलरी का 85% पेंशन के रूप में मिले.
85 वर्ष के रिटायर्ड कर्मचारी को अपनी आखिरी सैलरी का 90% पेंशन के रूप में मिले.
90 वर्ष या उससे अधिक उम्र के रिटायर्ड कर्मचारी को अपनी आखिरी सैलरी पूरी 100% पेंशन के रूप में मिले.

इतना ही नहीं कर्मचारियों ने भी पेंशन को लेकर अपनी मांगे रखी हैं. जिनमें:

मिनिमम पेंशन को अंतिम वेतन (एलपीडी) के 67% तक बढ़ाना, या सर्विस के अंतिम 10 महीनों के दौरान मिले औसत वेतन के बराबर करना.
पेंशन गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले फिटमेंट फैक्टर में संशोधन करना.
महंगाई राहत (DR) संरचना की समीक्षा करना और इसे पेंशन लाभों में एकीकृत करना.
पारिवारिक पेंशन लाभों के दायरे का विस्तार करना.

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बता दें कि 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद कर्मचारियों और पेंशन भोगियों की मांगे मान ली जाती है, तो करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. तो वहीं करीब 56 लाख रिटायर्ड पेंशनभोगियों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनमें डिफेंस और रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी भी होंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission, पर, बड़ी, खबर, की, उम्र, में, 70, -90, साल, पर, 100, सैलरी, जितनी, पेंशन, की, मांग</media:keywords>
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        <title>India GDP Growth: ग्लोबल मंदी का डर बेअसर, चालू वित्त वर्ष में 7.7% की रफ्तार से दौड़ेगी भारत की जीडीपी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/india-gdp-growth-ग्लोबल-मंदी-का-डर-बेअसर-चालू-वित्त-वर्ष-में-77-की-रफ्तार-से-दौड़ेगी-भारत-की-जीडीपी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/india-gdp-growth-ग्लोबल-मंदी-का-डर-बेअसर-चालू-वित्त-वर्ष-में-77-की-रफ्तार-से-दौड़ेगी-भारत-की-जीडीपी</guid>
        <description><![CDATA[ India GDP Growth: ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था लगातार डगमगा रही थी. इसी बीच अब खबरें हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में इसकी रफ्तार मजबूत होकर बढ़ी है. सरकार के द्वारा बताए गए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश की वास्तविक जीडीपी (GDP) में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की अपेक्षा 7.1% की दर ज्यादा है.
ये डाटा मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लिमेंटेशन (MoSPI) ने शुक्रवार को ही जारी किए हैं. इन आंकड़ों के अनुसार जनवरी- मार्च 2026 की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी है. इससे पता चलता है कि वित्त वर्ष के आखिरी तीन महीनों में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं.
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भारत की GDP में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब दुनियाभर में अर्थव्यवस्था हिली हुई है, भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड ऑइल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, जिससे लगातार चुनौतियां भी सामने आ रही है.
स्थिर (2022-23) कीमतों के आधार पर मापी गई वास्तविक जीडीपी (Real GDP) वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले यानी वित्तवर्ष 2025 में 299.89 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं नॉमिनल जीडीपी जिसमें महंगाई का असर भी शामिल होता है, वित्तवर्ष 2026 में 8.9% बढ़कर 346.36 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. पिछले वित्त वर्ष में ये 318.07 लाख करोड़ रुपये थी.
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सरकार के मुताबिक ये अनुमान कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों के आधार पर तैयार किए गए हैं. इनमें औद्योगिक उत्पादन, जीएसटी कलेक्शन, कंपनियों के रिजल्ट्स, वाहन बिक्री, माल ढुलाई, टेलीकॉम सेवाओं का उपयोग, बैंकिंग गतिविधियां, टैक्स संग्रह और व्यापार से जुड़े आंकड़े शामिल हैं.
मंत्रालय ने क्या कहा?MoSPI मंत्रालय ने बताया कि नए अनुमान तैयार करते समय वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के ताजा आंकड़ों के साथ-साथ पहले की तिमाहियों के संशोधित आंकड़ों को भी शामिल किया गया है. मंत्रालय ने ये भी कहा कि भविष्य में जारी होने वाले जीडीपी आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की नई सीरीज का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका आधार वर्ष 2022-23 होगा.
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल- जून 2026 के जीडीपी आंकड़े 31 अगस्त 2026 को जारी किए जाएंगे.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>SIP News: गिरते बाजार में एसआईपी रोकने की भूल कतई न करें, उठाना पड़ेगा भारी नुकसान, जानिए क्यों</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sip-news-गिरते-बाजार-में-एसआईपी-रोकने-की-भूल-कतई-न-करें-उठाना-पड़ेगा-भारी-नुकसान-जानिए-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ SIP News: SIP यानी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान को हम हमेशा एक सेविंग की तरह देखते हैं. हर महीने एक छोटी रकम कटवाकर उसे सालों तक निवेश करते हैं और फिर उस पर ब्याज मिलता है, जो हमारे भविष्य को सुरक्षित रखता है. लेकिन इसका एक पहलू और भी है, वो ये है कि जब भी शेयर बाजार में गिरावट आती है तब यही SIP हमारा सबसे बड़ा सहारा बनती है. आइये बताते हैं कैसे?
बाजार में गिरावट है बड़ा अवसरदरअसल जब भी शेयर मार्केट में तेज गिरावट आती है, तो निवेशक घबरा जाते हैं. हर कोई उस समय में अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की वैल्यू घटती देखकर SIP रोकने या बंद करने का फैसला कर लेते हैं. लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि बाजार में गिरावट का दौर उन निवेशकों के लिए अवसर की तरह होता है जो लंबे समय का निवेश करते हैं.
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SIP का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आप हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं, चाहे बाजार ऊपर हो या नीचे. जब बाजार गिरता है, तो म्यूचुअल फंड की NAV (नेट एसेट वैल्यू) भी कम हो जाती है. ऐसे में आपकी वही SIP राशि पहले की तुलना में ज्यादा यूनिट्स खरीदती है. यानी कम कीमत पर ज्यादा हिस्सेदारी मिलती है. इसे अगर आसान भाषा में समझें तो बाजार में गिरावट के दौरान आप &quot;सस्ते में खरीदारी&quot; कर रहे होते हैं. बाद में जब बाजार में सुधार आता है, तो यही एक्स्ट्रा यूनिट्स आपके रिटर्न को बढ़ाने में मदद करती हैं.
XIRR क्यों है निवेशकों के लिए जरूरी?ज्यादातर निवेशक अपने निवेश का प्रदर्शन देखने के लिए CAGR का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन SIP में हर महीने अलग-अलग समय पर पैसा लगाया जाता है. इसलिए SIP के लिए XIRR ज्यादा सटीक माना जाता है. ये हर किस्त की तारीख और रकम को ध्यान में रखकर सटीक रिटर्न बताता है.
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उदाहरण से समझिएमान लीजिए दो लोगों ने एक ही समय पर महीने 10,000 रुपये की SIP की है. जैसे ही बाजार में गिरावट आई तो निवेशक ने अपनी SIP जारी रखी और दूसरे निवेशक ने बंद कर दी और बाजार सामान्य होने पर दोबारा शुरू कर दी. तो ऐसी स्थिति में गिरावट के दौरान SIP जारी रखने वाले निवेशक ने कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीदीं. बाजार में रिकवरी आने के बाद उसका पोर्टफोलियो करीब 2.51 लाख रुपये तक पहुंच गया और उसका XIRR लगभग 49% रहा.
तो वहीं SIP रोकने वाले निवेशक का पोर्टफोलियो करीब 1.46 लाख रुपये रहा और उसका XIRR लगभग 27% तक सीमित रहा. इसका मतलब है कि बाजार गिरने पर निवेश जारी रखने वाले निवेशक को ज्यादा फायदा मिलता है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SIP, News:, गिरते, बाजार, में, एसआईपी, रोकने, की, भूल, कतई, न, करें, उठाना, पड़ेगा, भारी, नुकसान, जानिए, क्यों</media:keywords>
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    <item>
        <title>IndiGo News: इन 6 रूट्स पर 3 महीने तक बंद रहेंगी इंडिगो की उड़ानें, सफर से पहले देख लें लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/indigo-news-इन-6-रूट्स-पर-3-महीने-तक-बंद-रहेंगी-इंडिगो-की-उड़ानें-सफर-से-पहले-देख-लें-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/indigo-news-इन-6-रूट्स-पर-3-महीने-तक-बंद-रहेंगी-इंडिगो-की-उड़ानें-सफर-से-पहले-देख-लें-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ IndiGo News: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने अपने कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ान सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है. कंपनी ने बताया कि यात्रियों की मांग में संभावित कमी और बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट को देखते हुए ये फैसला लिया गया है.
इन रूट्स की उड़ानें रहेंगी रद्दएयरलाइन के मुताबिक, लंकावी (Langkawi), कराबी (Krabi), हो ची मिन सिटी (Ho Chi Minh City), हॉन्ग कॉन्ग (Hong Kong), शंघाई (Shanghai) और सीम रीप (Siem Reap) के लिए संचालित होने वाली उड़ानें रद्द रहने वाली हैं. ये उड़ानें 1 जुलाई या 3 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक के लिए निलंबित रहेंगी. इस दौरान इन रूट्स पर कोई नियमित उड़ान सेवा उपलब्ध नहीं होगी.
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क्या बोला IndiGo प्रशासन?इस मामले पर IndiGo की तरफ से बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि आने वाली तिमाही में इन रूट्स के लिए यात्रियों की मांग अपेक्षा से कम रहने की संभावना है. इतना ही नहीं ईंधन, एयरपोर्ट शुल्क और अन्य परिचालन खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से ये फैसला किया गया है. हालांकि, एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि ये फैसला अस्थायी है और मांग में सुधार होने पर इन रूट्स पर सेवाएं दोबारा शुरू की जा सकती हैं.
कंपनी फिलहाल हर हफ्ते 1800 से भी ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन कर रही है और अन्य प्रमुख विदेशी रूट्स पर उसकी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी. ऐसे में इस फैसले का एयरलाइन के कुल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर सीमित असर पड़ने की उम्मीद है.
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यात्रियों के लिए मैसेजतो वहीं IndiGo ने यात्रियों के लिए कहा है कि जिन भी यात्रियों ने इन रूट्स पर पहले से टिकट बुक कर रखी है, उन्हें सीधे सूचित किया जाएगा. प्रभावित यात्रियों को एयरलाइन की नीतियों के अनुसार री-शेड्यूलिंग या रिफंड की सुविधा दी जाएगी. यदि आप इन रूट्स पर आने वाले समय में यात्रा करने का प्लान कर रहे हैं तो सावधान रहें, पहले जांच लें उसके बाद ही यात्रा करने का फैसला करें.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IndiGo, News:, इन, रूट्स, पर, महीने, तक, बंद, रहेंगी, इंडिगो, की, उड़ानें, सफर, से, पहले, देख, लें, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>UPI News: अब इस देश में भी QR कोड स्कैन कर आसानी से कर सकेंगे यूपीआई पेमेंट, टूरिस्ट्स के लिए बड़ी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ UPI in Cambodia for Tourists: भारत ने कंबोडिया में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लॉन्च किया है. जिसकी मदद से भारतीय &amp;nbsp;ग्राहक को UPI करने में आसानी होगी. साथ ही अब भारतीय दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश में 40 लाख से ज्यादा खुदरा दुकानों पर मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए सीधे भुगतान कर सकते हैं. भारत की ओर से उठाया हुआ यह महत्वपूर्ण कदम बड़ा ही कारगार माना जा रहा है. यात्री भारतीय बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के सहभागी यूपीआई ऐप का उपयोग करके कंबोडियाई व्यापारियों की ओर से पेश किया गया केएचक्यूआर कोड को स्कैन करके जल्द भुगतान कर सकते हैं.
NIPL और ACLEDA बैंक की साझेदारी&amp;nbsp;
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की विदेशी शाखा, एनपीसीआई ओवरसीज पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और कंबोडिया के एसीलेडा बैंक पीएलसी ने इस सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की है. यह समझौता कंबोडिया के राष्ट्रीय क्यूआर भुगतान प्रणाली, जिसे केएचक्यूआर के नाम से जाना जाता है और जो बाकोंग डिजिटल भुगतान प्रणाली के अंतर्गत काम करती है, जो भारत के यूपीआई नेटवर्क से जोड़ता है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने घरेलू डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और यात्रियों के अंतरराष्ट्रीय खर्च को सुविधाजनक बनाने के भारत के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण कदम है.&amp;nbsp;
यात्री कैसे कर सकते हैं भुगतान?
यह सिस्टम घरेलू यूपीआई लेनदेन की तरह ही काम करता है. यात्री अपने लिंक किए गए बैंक खातों से सीधे क्यूआर कोड के तौर पर भुगतान कर सकते हैं, जिससे उन्हें बहुत सारा कैश साथ ले जाने या विदेशी डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. इस सिस्टम के शुरुआती चरण का लक्ष्य कंबोडिया जाने वाले भारतीय &amp;nbsp;ग्राहक को सुविधा देना है. बाद के चरण में, कंबोडियाई &amp;nbsp;ग्राहक को भी यूपीआई मर्चेंट जगाहों पर अपने केएचक्यूआर-सक्षम ऐप का इस्तेमाल करके भारत में भुगतान करने की सुविधा मिलेगी.
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने क्या कहा?&amp;nbsp;
भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, &#039;भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) सीमा पार भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI को अन्य देशों की त्वरित भुगतान प्रणालियों से जोड़ने के लिए बेहतर रूप से कोशिश है. यह पहलें सीमा पार भुगतान को बेहतर बनाने के लिए G20 रोडमैप के समान हैं, जिसका मकसद सस्ते, ज्यादा कुशल, ज्यादा पारदर्शी और अधिक सुलभ भुगतान पर ध्यान केंद्रित करना है.&#039;
योजना का केंद्र भारतीय ग्राहक
इस योजना के पहले चरण में कंबोडिया आने वाले भारतीय ग्राहक पर ध्यान केंद्रित किया गया है. बाद के चरण में मंजूरी शुरू होने की उम्मीद है, जिससे कंबोडियाई ग्राहको यूपीआई व्यापारी स्थानों पर अपने केएचक्यूआर-सक्षम एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके भारत में भुगतान कर सकेंगे.
भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम में कंबोडिया का जुड़ना यूपीआई के ग्लोबल लेवल के लिए एक बेहद खास कदम है. अब यात्रियों के पास एक और ऐसा स्थान है जहां भोजन, टैक्सी या स्मारक के लिए भुगतान करना क्यूआर कोड स्कैन करने और स्मार्टफोन पर लेनदेन को मंजूरी देने जितना आसान हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, News:, अब, इस, देश, में, भी, कोड, स्कैन, कर, आसानी, से, कर, सकेंगे, यूपीआई, पेमेंट, टूरिस्ट्स, के, लिए, बड़ी, राहत</media:keywords>
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        <title>Free laptop Scheme: बच्चों को फ्री लैपटॉप बांट रही सरकार? छात्रों और अभिभावकों के लिए जरूरी खबर, PIB का आया बयान</title>
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        <description><![CDATA[ Free Laptop Scheme: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार की तरफ से छात्रों को फ्री में लैपटॉप बांटे जाएंगे. ये काम केंद्र सरकार की &#039;नेशनल स्टूडेंट लैपटॉप स्कीम 2026&#039; के अंतर्गत किया जाने वाला है. अब खुद सरकार की तरफ से इस योजना की सच्चाई का पर्दाफाश किया गया है.
क्या है मामले की सच्चाई?इस मामले के सामने आने के बाद सरकार की फैक्ट-चेकिंग एजेंसी PIB Fact Check ने इस दावे की पोल खोल दी है. PIB ने स्पष्ट कर दिया है कि ये पूरी तरह से फेक न्यूज है. भारत सरकार ने ऐसी किसी भी योजना की घोषणा नहीं की है. PIB के आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट के जरिए एक पोस्ट शेयर कर इस खबर की सच्चाई बताई गई है.
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???? Free laptops for students? A WhatsApp message is circulating claiming that the Government is accepting applications for free laptops under the &amp;lsquo;National Student Laptop Scheme 2026&amp;rsquo;.#PIBFactCheck: ❌ This claim is #FAKE.✅ The Government of India has NOT announced any&amp;hellip; pic.twitter.com/uZ9iPy5JRL
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) June 4, 2026



इस पोस्ट में वायरल हो रहे मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा है FAKE. इसके साथ ही कैप्शन में लिखा गया है, &#039;व्हाट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार &#039;नेशनल स्टूडेंट लैपटॉप स्कीम 2026&#039; के तहत मुफ्त लैपटॉप देने के लिए आवेदन स्वीकार कर रही है. PIB फैक्ट चेक के अनुसार येदावा पूरी तरह से फर्जी है.&#039;
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सावधान रहने की हिदायतइसके साथ ही इ, पोस्ट में आगे लिखा है, &#039;भारत सरकार ने ऐसी किसी भी योजना की घोषणा नहीं की है. इस तरह के मैसेज अक्सर लोगों की निजी या वित्तीय जानकारी एकत्रित करने के उद्देश्य से फैलाए जाते हैं. ऐसी किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि किए बिना ऐसे मैसेज को आगे न भेजें. सतर्क रहें और संदिग्ध सामग्री की शिकायत PIB Fact Check को करें&#039;.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Free, laptop, Scheme:, बच्चों, को, फ्री, लैपटॉप, बांट, रही, सरकार, छात्रों, और, अभिभावकों, के, लिए, जरूरी, खबर, PIB, का, आया, बयान</media:keywords>
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        <title>Share Market: गिरकर शेयर बाजार ने खुद को संभाला, 74000 के पार पहुंचा सेंसेक्स; निफ्टी में भी तेजी</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market Today on June 4: आज शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के बाद खुद को संभालते हुए तेजी से पटरी पर लौटा. सेंसेक्स 122 अंकों की बढ़त के साथ 74468 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी भी 7 अंकों की बढ़त के साथ अभी 23412.60 पर कारोबार कर रहा है. कल आईटी शेयरों में गिरावट के बाद आज बाजार को बैंकिंग सेक्टर के शेयरों का सहारा मिला. State Bank of India] ICICI जैसे बड़े बैंकिंग स्टॉक्स में तेजी आई. इनके अलावा, इटरनल के शेयरों ने भी 4.31% परसेंट की बढ़त हासिल की. टॉप गेनर्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाइटन और एशियन पेंट्स जैंसे शेयर भी हैं.&amp;nbsp;
आज सुबह शेयर बाजार लाल निशान में खुला था. निफ्टी 50 इंडेक्स 123 अंकों की गिरावट के साथ 23283 पर कारोबार की शुरुआत की थी. वहीं, सेंसेक्स भी बुधवार के बंद स्तर से करीब 450 अंक टूटकर 73900-74000 की रेंज में आ गया था.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्यों गिरा शेयर बाजार?

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है. इसके चलते निवेशक जोखिम लेने से कतरा रहे हैं.&amp;nbsp;
युद्ध की बढ़ती आशंका के बीच अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गए, जो भारत जैसी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता रखने वाली अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है.
आज सुबह एशियाई शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई, जिसका असर दलाल स्ट्रीट पर पड़ता नजर आ रहा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

अमेरिकी बाजार
कल रात अमेरिकी शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ. डाऊ जोन्स इंडेक्स में 620.72 अंक या 1.21% की गिरावट देखी गई. S&amp;amp;P 500 इंडेक्स 56.10 अंक फिसलकर 7553.68 पर बंद हुआ. इसके 11 में से 6 प्रमुख सेक्टर्स घाटे में नजर आए. हेवी टेक शेयरों वाला नैस्डेक कम्पोजिट इंडेक्स 240 अंकों के नुकसान के साथ 26853.98 के स्तर पर बंद हुआ. मिडिल ईस्ट में ईरान द्वारा कुवैत एयरपोर्ट पर किए गए हालिया हमलों के बाद अमेरिकी और ईरानी सेना के बीच सीधी झड़पें हुईं. फिर से रफ्तार पकड़ते इस जियोपॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों को फिर से डरा दिया है.
क्रूड ऑयल की कीमत
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 95.43 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं. दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स आज सुबह 97.07 डॉलर पर ट्रेड करते नजर आए. इससे पहले 29 मई को ब्रेंट क्रूड लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण पिछले कुछ सत्रों में कीमतें फिर से बढ़ी हैं. COMEX पर कच्चे तेल की कीमतें 0.59% गिरकर 95.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं.
अमेरिकी डॉलर
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) आज 0.09% की गिरावट के साथ 99.45 पर ट्रेड करता नजर आया. इस बास्केट में ब्रिटिश पाउंड, यूरो, स्वीडिश क्रोना, जापानी येन, स्विस फ्रैंक जैसी करेंसीज शामिल हैं. 03 जून को रुपया 0.45% कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.71 पर बंद हुआ था.&amp;nbsp;
चांदी |RBI ने किया Redemption Price Announce| Paisa Live&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/jeQiVDwJ29Q&quot; width=&quot;775&quot; height=&quot;436&quot; frameborder=&quot;0&quot; allowfullscreen=&quot;allowfullscreen&quot;&gt;
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RBI के पास अब कितना सोना बचा है? केंद्रीय बैंक ने खुद बताया, देश को दे दी फॉरेन एक्सचेंज की जानकारी&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:30:34 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Market:, गिरकर, शेयर, बाजार, ने, खुद, को, संभाला, 74000, के, पार, पहुंचा, सेंसेक्स, निफ्टी, में, भी, तेजी</media:keywords>
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        <title>Gold&amp;Silver Rate: सोने और चांदी दोनों के भाव आज गिरे, जानें आपके शहर में कितनी है अभी ताजा कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-सोने-और-चांदी-दोनों-के-भाव-आज-गिरे-जानें-आपके-शहर-में-कितनी-है-अभी-ताजा-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-सोने-और-चांदी-दोनों-के-भाव-आज-गिरे-जानें-आपके-शहर-में-कितनी-है-अभी-ताजा-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today on June 4: आज देश में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखी जा रही है. कल यानी कि 3 जून की भारी गिरावट के बाद आज सुबह शुरुआती वायदा कारोबार (MCX) में मामूली सुधार होते जरूर देखा गया, लेकिन रिटेल स्तर पर कीमतें अभी भी अपने हाई लेवल से काफी नीचे बनी हुई हैं. आज 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत लगभग 1,59,380 रुपये से 1,56,360 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है. वहीं, गहनों के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत आज प्रति 10 ग्राम 1,43,100-1,46,340 रुपये के स्तर पर टिका हुआ है.
क्यों गिरी आज सोने की कीमत?
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनातनी के कारण भू-राजनीतिक तनाव के और गहराने की आशंकाएं बढ़ गई हैं. तनाव बढ़ा, तो क्रूड ऑयल की कीमतें भी उछलेंगी. इससे महंगाई बढ़ने का डर बना रहेगा. महंगाई बढ़ेगी, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे ऊंचा रहेगा. ब्याज दरें ऊंची होंगी, तो निवेशक बैंक बॉन्ड्स या दूसरी सरकारी स्कीम्स में लगाएंगे क्योंकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है. सोने की मांग कम होगी, तो कीमतें भी गिरेंगी.&amp;nbsp;
शहरवार आज सोने की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम)
22 कैरेट सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम)


नोएडा&amp;nbsp;
1,56,360 रुपये
1,43,340 रुपये


मुंबई&amp;nbsp;
1,59,380 रुपये
1,46,100 रुपये


कोलकाता&amp;nbsp;
1,59,380 रुपये
1,46,100 रुपये


चेन्नई
1,61,240 रुपये
1,47,800 रुपये


बेंगलुरु
1,59,380 रुपये
1,46,100 रुपये


हैदराबाद
1,59,380 रुपये&amp;nbsp;
1,46,100 रुपये


अहमदाबाद&amp;nbsp;
1,59,430 रुपये&amp;nbsp;
1,46,150 रुपये


लखनऊ&amp;nbsp;
1,59,530 रुपये&amp;nbsp;
1,46,230 रुपये


जयपुर&amp;nbsp;
1,59,530 रुपये&amp;nbsp;
1,46,230 रुपये



चांदी की कीमत&amp;nbsp;
कल 3 जून को देश के सर्राफा बाजारों में चांदी की कीमतों में 3000-4500 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट देखी गई थी. हालांकि, आज सुबह वायदा बाजार (MCX) पर जुलाई फ्यूचर्स में 2,64,060-2,76,598 रुपये प्रति किलो के दायरे में हल्की रिकवरी देखी जा रही है.
देश के अलग-अलग शहराें में बिना मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी के बिना आज 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत नोएडा और गाजियाबाद में 2,79,900 रुपये प्रति किलो है. वहीं, दिल्ली में रेट 2,96,900 रुपये किलो है. मुंबई में आज एक किलो चांदी की कीमत 2,95,900 रुपये है. हालांकि, चेन्नई और हैदराबाद में रेट कुछ ज्यादा है. यहां एक किलो चांदी की कीमत 3,02,900 रुपये से 3,05,900 रुपये प्रति किलो के स्तर पर है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:30:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Rate:, सोने, और, चांदी, दोनों, के, भाव, आज, गिरे, जानें, आपके, शहर, में, कितनी, है, अभी, ताजा, कीमत</media:keywords>
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    <item>
        <title>इन लोगों को Tax से मिल सकती है बड़ी आजादी, कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने की तैयारी में सरकार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इन-लोगों-को-tax-से-मिल-सकती-है-बड़ी-आजादी-कैपिटल-गेन्स-टैक्स-हटाने-की-तैयारी-में-सरकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/इन-लोगों-को-tax-से-मिल-सकती-है-बड़ी-आजादी-कैपिटल-गेन्स-टैक्स-हटाने-की-तैयारी-में-सरकार</guid>
        <description><![CDATA[ Capital Gains Tax: इकोनॉमी को लेकर लगातार चिंताओं के बीच और विदेशी निवेश को लुभाने के मकसद से एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाने का फैसला किया है. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि इस प्रस्ताव को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.
यह मंजूरी कैपिटल इनफ्लो को बढ़ावा देने, रुपये को मजबूती देने और ईरान में जारी जंग व कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के असर से अर्थव्यवस्था को बचाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है. कैबिनेट ने इन बदलावों को लागू करने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन हेतु एक अध्यादेश को भी मंजूरी दी है. यह फैसला राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू होगा.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब भारत रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी निवेशकों के बाहर जाने, रुपये पर दबाव और पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण बढ़ती ऊर्जा लागत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने सरकार को विदेशी बॉन्ड निवेश पर टैक्स कम करने की सिफारिश की थी.&amp;nbsp;
अभी क्या है नियम?
मौजूदा नियमों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों को भारत में बॉन्ड निवेश पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के टैक्स देने पड़ते हैं. 12 महीने से अधिक समय तक बॉन्ड रखने पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है. वहीं, 12 महीने से कम समय में बेचने पर कैटेगरी के हिसाब से 30-40% तक का भारी शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है.
अब अध्यादेश के बाद सरकारी प्रतिभूतियों पर लगने वाला यह कैपिटल गेन टैक्स पूरी तरह से शून्य हो जाएगा. पहले ब्याज पर मिलने वाले ब्याज पर भी विदेशी निवेशकों को 20% विथहोल्डिंग टैक्स देना होता था. अब सरकार इस 20% टैक्स को भी आधा करने या इसमें ढील देने के लिए पैकेज पर काम कर रही है. यही वजह है कि कई विदेशी निवेशक भारतीय बॉन्ड मार्केट से दूरी बनाए रखते थे.&amp;nbsp;
अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग और वैश्विक अनिश्चितता के चलते इस साल अब तक भारतीय बाजारों से 2.47 लाख करोड़ की बिकवाली हाे चुकी है. इससे रुपया भी 96.96 के निचले स्तर पर चला गया है. टैक्स हटने से ग्लोबल लेवल पर बड़े फंड्स (सॉवरेन वेल्थ फंड्स और पेंशन फंड्स) भारत के डेट मार्केट में सालाना 10 बिलियन डॉलर से 30 बिलियन डॉलर (80000 करोड़ से लेकर 2.5 लाख करोड़) का निवेश ला सकते हैं. जब भारतीय बॉन्ड्स खरीदने के लिए विदेशी निवेशक बाजार में डॉलर लगाएंगे, तो डॉलर का इनफ्लो मजबूत होगा. इससे रुपये को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
बॉन्ड यील्ड में गिरावट
भारी खरीदारी से भारत सरकार के बॉन्ड्स की यील्ड (ब्याज दर) नीचे आएगी. बॉन्ड यील्ड गिरने का सीधा मतलब यही है कि सरकार को कर्ज उठाने के लिए कम ब्याज देना होगा, जिससे वित्तीय घाटे में भी गिरावट आएगी.

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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:30:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इन, लोगों, को, Tax, से, मिल, सकती, है, बड़ी, आजादी, कैपिटल, गेन्स, टैक्स, हटाने, की, तैयारी, में, सरकार</media:keywords>
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        <title>Business Idea: आज ही शुरू करें LED विज्ञापन का बिजनेस, हर महीने होगी मोटी कमाई, जानें पूरा तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ LED Screen Business: आपने भी कभी न कभी तो शहर के बड़े चौराहों, मॉल में लगी LED स्क्रीन पर विज्ञापन चलते देखा ही होगा. ये स्क्रीन लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि इससे कमाई कैसे होती होगी? यह बिजनेस आपके लिए काफी दिलचस्प हो सकता है. आज के टाइम में डिजिटल विज्ञापन का बाजार तेजी से बढ़ गया है. ऐसे में आप भी LED स्क्रीन लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं.
सही लोकेशन का चुनाव है जरूरी
अगर आप LED स्क्रीन के जरिए बिजनेस करके पैसे कमाना चाहते हैं तो इस बिजनेस की सफलता काफी हद तक लोकेशन पर निर्भर करती है. इसके लिए आपको ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां लोगों का आना-जाना काफी ज्यादा हो और साथ ही स्क्रीन काफी दूर से आसानी से दिखाई दे दें जैसे, बड़े चौराहे, बाजार, मॉल के आसपास का इलाका और हाई ट्रैफिक रोड इसके लिए काफी हद तक बेहतर माने जाते हैं. अगर आपकी लोकेशन अच्छी होगी तो विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करना काफी आसान हो जाएगा.
इन लोगों को Tax से मिल सकती है बड़ी आजादी, कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने की तैयारी में सरकार
LED स्क्रीन कैसे चुनें?
मार्केट में अलग-अलग साइज और गुणवत्ता की LED स्क्रीन आसानी से मिल जाती है. आउटडोर विज्ञापन के लिए हाई-ब्राइटनेस और वेदर-रेसिस्टेंट स्क्रीन का उपयोग किया जाता है, ताकि धूप, बारिश और धूल में भी आपका विज्ञापन अच्छे से नजर आए. स्क्रीन का साइज और तकनीक आपकी जरूरत और साथ ही बजट पर निर्भर करती है. शुरुआत छोटे या मीडियम साइज की स्क्रीन से भी की जा सकती है.
परमिशन और लाइसेंस लेना है जरूरी
LED विज्ञापन स्क्रीन लगाने से पहले स्थानीय नगर निगम, विकास प्राधिकरण या संबंधित विभाग से परमिशन लेना जरूरी हो सकता है. कई शहरों में आउटडोर विज्ञापन के लिए अलग नियम और चार्ज तय हैं. इसके अलावा बिजली कनेक्शन, सुरक्षा मानकों और स्थानीय नियमों का पालन करना भी आवश्यक है. अगर आप बिना किसी परमिशन के स्क्रीन लगाते हैं तो आपके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है.
कितनी आएगी लागत?
अगर इस बिजनेस के कुल खर्च की बात करें तो स्क्रीन के साइज, गुणवत्ता, लोकेशन और इंस्टॉलेशन पर &amp;nbsp;निर्भर करती है. एक मीडियम साइज की स्क्रीन लगाने में कुछ लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं. इसके अलावा स्ट्रक्चर,बिजली, इंटरनेट, कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और रखरखाव का खर्च भी शामिल होता है.&amp;nbsp;
587 रुपये में मिल रहा 900 से ज्यादा का सिलेंडर, 10 करोड़ से ज्यादा परिवार उठा रहे फायदा
कमाई कैसे होगी?
इस बिजनेस में कमाई विज्ञापन देखने पर होती है. इसके लिए आप स्थानीय दुकानदारों, स्कूलों, अस्पतालों, रेस्टोरेंट्स, रियल एस्टेट कंपनियों, ऑटोमोबाइल डीलरों और बड़े ब्रांड्स को अपनी LED स्क्रीन पर विज्ञापन चलाने की सुविधा दे सकते हैं. आमतौर पर विज्ञापन कुछ सेकंड के स्लॉट में दिखाए जाते हैं और इसके बदले ग्राहकों से महीने या तय समय के मुताबिक चार्ज &amp;nbsp;लिया जाता है. अगर आपकी लोकेशन और स्क्रीन अच्छी है तो आप विज्ञापन दिखाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी का बड़ा हंटर, कथित वित्तीय हेरफेर के बाद 5% के लोअर सर्किट पर लगा शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ Rajesh Export Shares: सोने और ज्वेलरी के कारोबार से जुड़ी कंपनी रोजश एक्सपोर्ट और उसके प्रोमोटर राजेश मेहता पर मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने तगड़ा एक्शन लिया है. इसके चलते कंपनी के शेयर गुरुवार, 4 जून को 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गए. बीएसई और एनएसई पर यह शेयर गिरकर 103.92 रुपये से 104.65 रुपये के स्तर पर आ गया. कंपनी के शेयरों में यीह गिरावट उस समय आई, जब सेबी ने कंपनी के प्रोमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया और शेयर बाजार में उनके कारोबार पर रोक लगा दी.&amp;nbsp;
क्या है आरोप?
सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, कंपनी ने कारोबारी साल 2021 से 2025 के बीच अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को करीब 15.35 लाख करोड़ रुपये तक का बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया. इसमें से 15.15 लाख करोड़ यानी कि लगभग 98.7% का रेवेन्यू पूरी तरह से फर्जी पाया गया. असल रेवेन्यू 20111 करोड़ रुपये का था.&amp;nbsp;&amp;nbsp;सेबी की जांच में और भी कई गंभीर बातें सामने आई हैं.
कंपनी के कागजों पर फर्जी कंपनियां बनाई. राजेश एक्सपोर्ट्स खुद ही माल खरीदकर खुल को ही सामान बेचा. इससे घूम-फिरकर अपनी ही कंपनियों को सामान बेचकर रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया. जांच में पाया गया कि कंपनी का पैसा बिना बोर्ड याद ऑडिट कमेटी की मंजूरी के बिना प्रोमोटर के पर्सनल बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किए गए और नियमों का उल्लंघन किया गया.&amp;nbsp;
शेयर बाजार और निवेशकों पर असर
सेबी के लगाए गए इन आरोपों के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के भविष्य को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राजेश, एक्सपोर्ट्स, पर, सेबी, का, बड़ा, हंटर, कथित, वित्तीय, हेरफेर, के, बाद, के, लोअर, सर्किट, पर, लगा, शेयर</media:keywords>
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        <title>संकट में भारत की &amp;apos;रूसी तेल लाइफलाइन&amp;apos;, क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल&amp;डीजल, अमेरिका ने अब क्या किया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/संकट-में-भारत-की-रूसी-तेल-लाइफलाइन-क्या-फिर-महंगा-होगा-पेट्रोल-डीजल-अमेरिका-ने-अब-क्या-किया</link>
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        <description><![CDATA[ Russion Oil: रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले भारत के लिए आने वाले दिनों में एक नई मुसीबत आ खड़ी हो सकती है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने हालिया बयान में कहा कि अमेरिका इन छूटों को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है. यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद की बार-बार टिप्पणी की है. यह दावा करते हुए कि कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली आय मॉस्को के सैन्य अभियान को आर्थिक सहायता प्रदान करने में मदद करती है.
मंगलवार को सीनेट की विदेश संबंध बैठक हुई. इस दौरान इन टिप्पणियों ने नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के एक मुद्दे को फिर से हवा दे दी है. यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद की बार-बार आलोचना की है, यह दावा करते हुए कि कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली आय मॉस्को के सैन्य अभियान को आर्थिक पुष्टी करने में मदद करती है. हालांकि, ट्रंप ने तब अस्थायी छूट भी दी थी जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रस्ताव के दबाव का सामना करना पड़ा था. बता दें, पहली बार छूट मार्च में दी गई थी और बाद में दो बार बढ़ाई गई, 17 जून को समाप्त होने वाली है.&amp;nbsp;
भारत के मजबूत रुख अपनाने की संभावना&amp;nbsp;
अब मामले में भारत की ओर से मजबूत रुख अपनाने की आशंका है. ऐसे में कई एक्पर्टों ने साफ किया है कि भारत की ओर से रूसी तेल के आयात ने रूसी कच्चे तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करके, भले ही वह रियायती दरों पर बेचा गया हो, ऊर्जा संकट को और गंभीर होने से रोकने में मदद की. यह मुद्दा केवल तेल तक ही सीमित नहीं है.&amp;nbsp;
नई दिल्ली ने लगातार यह कहा है कि ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित, संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा से प्रेरित होती है. सरकार ने बार-बार देश की जरूरतों को पूरा करने वाले किसी भी व्यापारी से तेल खरीदने के अपने अधिकार का बचाव किया है.
भारत को तगड़ा झटका देंगे ट्रंप, फिर लगाएंगे टैरिफ, लिस्ट में चीन-बांग्लादेश का भी नाम, पाकिस्तान को छूट?
भारत के लिए इसका क्या है मतलब ?&amp;nbsp;
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत तक शुल्क लगाया है. जिसके बाद भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद पर दबाव बढ़ गया है. ट्रंप ने नई दिल्ली पर यूक्रेन में रूस के युद्ध प्रयासों को आर्थिक सहायता करने में मदद का आरोप लगाया था. &amp;nbsp;वाशिंगटन ने बार-बार मामले में अपना पक्ष रखा है. वाशिंगटन ने &amp;nbsp;कहा रूसी कच्चे तेल के निर्यात से प्राप्त राजस्व मॉस्को को अपने सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता देता था.&amp;nbsp;
ट्रंप ने कई मौकों पर यह दावा भी किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिया था कि भारत धीरे-धीरे रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा. हालांकि नई दिल्ली ने खुलेआम ऐसी किसी वफादारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह मुद्दा बाद में दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार बातचीत के दौरान सामने आया.
&#039;क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन का बढ़ता दबदबा सुरक्षा के लिए खतरा&#039;, बोले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद व्हाइट हाउस के मुताबिक, &amp;nbsp;ट्रंप ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वापस लेने पर सहमति जताई, जब भारत ने रूसी संघ के तेल की खरीद बंद करने की वफादारी जताई. दस्तावेज़ में कहा गया है कि टैरिफ में कमी भारत की ओर से रूसी कच्चे तेल के आगे या पीछे आयात को रोकने की शपथ से जुड़ी थी. साथ ही पाबंदीयों को लेकर चिंता के पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक लक्ष्य है. वाशिंगटन भारत और अन्य प्रमुख आयातकों पर रूसी कच्चे तेल पर अपने भरोसे को धीरे-धीरे कम करने और अन्य स्रोतों, विशेष रूप से वेनेजुएला से आपूर्ति प्राप्त करने के लिए दबाव डाल रहा है.
&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 02:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>संकट, में, भारत, की, रूसी, तेल, लाइफलाइन, क्या, फिर, महंगा, होगा, पेट्रोल-डीजल, अमेरिका, ने, अब, क्या, किया</media:keywords>
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        <title>TCS Share Crash: टीसीएस के शेयरों में 9% की एतिहासिक गिरावट, कोविड काल के बाद सबसे बड़ा सिंगल&amp;डे क्रैश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tcs-share-crash-टीसीएस-के-शेयरों-में-9-की-एतिहासिक-गिरावट-कोविड-काल-के-बाद-सबसे-बड़ा-सिंगल-डे-क्रैश</link>
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        <description><![CDATA[ TCS Share Crash: सबसे बड़ी IT कंपनियों की लिस्ट में से एक दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में बुधवार को 8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ये गिरावट मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान आई भारी गिरावट के बाद कंपनी के शेयर की सबसे बड़ी गिरावट है, जो एक ही दिन में देखने को मिली है.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर TCS का शेयर 2,241.70 रुपये पर बंद हुआ. इससे पहले कंपनी के शेयर में पिछले दो बिजनेस सेशन के दौरान करीब 9% की वृद्धि देखी गई थी, लेकिन बुधवार की बिकवाली ने इस पूरी वृद्धि को खत्म कर दिया है.
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IT सेक्टर पर पड़ रहा गिरावट का असरTCS में आई इस गिरावट का असर पूरे आईटी सेक्टर पर पड़ रहा है. आईटी शेयरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला. मंगलवार को निफ्टी आईटी इंडेक्स में 4% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई थी, जो मई 2026 के बाद उसकी सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त थी.
क्या बोले एक्सपर्ट्सइकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार विशेषज्ञों का कहना है कि, TCS को 2,600 से 2,605 रुपये के स्तर पर मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद शेयर में तेज गिरावट आई है. इस बारे में बात करते हुए SBI सिक्योरिटीज के तकनीकी विश्लेषक सुदीप शाह का कहना है कि, &#039;शेयर कई महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के कारण नीचे फिसल गया है, जो कमजोरी का संकेत है. 2,210 से 2,200 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट है और इसके नीचे जाने पर गिरावट और तेज हो सकती है.&#039;
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तो वहीं, INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी का मानना है कि हाल ही में आई तेजी केवल एक अस्थायी उछाल थी. बाजार अब आईटी सेक्टर की धीमी वृद्धि, AI से बढ़ता कॉम्पिटीशन और मौजूदा वैल्यूएशन को ध्यान में रखते हुए शेयरों का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है.
निवेशकों की नजरबता दें कि निवेशकों की नजर अब TCS के 52 हफ्ते के निचले स्तर 2,206 रुपये पर रहेगी. अगर शेयर इस स्तर से नीचे बंद होता है, तो इसमें और कमजोरी देखने को मिल सकती है. वहीं 2,400 से 2,450 रुपये का दायरा फिलहाल मुख्य रुकावट माना जा रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 02:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TCS, Share, Crash:, टीसीएस, के, शेयरों, में, की, एतिहासिक, गिरावट, कोविड, काल, के, बाद, सबसे, बड़ा, सिंगल-डे, क्रैश</media:keywords>
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        <title>41% भारतीयों के मानसिक तनाव की बड़ी वजह है &amp;apos;फाइनेंशियल गोल्स&amp;apos;, युवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव&amp; रिपोर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/41-भारतीयों-के-मानसिक-तनाव-की-बड़ी-वजह-है-फाइनेंशियल-गोल्स-युवाओं-पर-सबसे-ज्यादा-दबाव-रिपोर्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/41-भारतीयों-के-मानसिक-तनाव-की-बड़ी-वजह-है-फाइनेंशियल-गोल्स-युवाओं-पर-सबसे-ज्यादा-दबाव-रिपोर्ट</guid>
        <description><![CDATA[ Financial Goal: शहरों में रहने वाले कई भारतीयों के लिए पैसे से जुड़े लक्ष्य पूरे करना तनाव की बड़ी वजह बन गया है. लोग अच्छी बचत और आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन इसके साथ अपनी सेहत और जीवन का संतुलन बनाए रखना भी उनके लिए चुनौती बन रहा है.
मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस और YouGov India की इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 41 फीसदी शहरी भारतीयों का मानना है कि पैसों से जुड़े लक्ष्य पूरे करने की कोशिश उन्हें तनाव और चिंता देती है. यही वजह है कि आर्थिक चिंताएं लोगों की सेहत पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हो गई हैं. स्टडी में आर्थिक स्थिति को सबसे कम अंक मिले, जहां शारीरिक स्वास्थ्य को 68 और सामाजिक स्वास्थ्य को 66 अंक मिले, वहीं आर्थिक स्थिति को 100 में से सिर्फ 62 अंक प्राप्त हुए.
16 शहरों के 2600 लोगों से की गई बातचीत&amp;nbsp;
इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 के लिए 16 शहरों के 2,600 लोगों से बातचीत की गई. इसमें लोगों की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति से जुड़े पहलुओं को समझने की कोशिश की गई. रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक दबाव सिर्फ बचत या निवेश तक सीमित नहीं है. करीब 36 फीसदी लोगों ने कहा कि हेल्दी खाना, पोषण संबंधी उत्पाद और नियमित हेल्थ चेकअप पर होने वाला खर्च उनके बजट पर अतिरिक्त बोझ डालता है.
वहीं 40 फीसदी लोगों का कहना है कि तनाव और चिंता का असर उनकी शारीरिक सेहत पर पड़ रहा है. इतने ही लोगों ने यह भी माना कि परिवार और दोस्तों के साथ कम समय बिताने से उनके काम या पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.
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युवाओं पर सबसे ज्यादा आर्थिक दबाव
स्टडी में यह बात सामने आई कि कई लोग अपनी कमाई, बचत और भविष्य के खर्चों को लेकर लगातार चिंता में रहते हैं. इसका असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब सेहत से जुड़ी जरूरतें बढ़ती हैं, तो लोगों को उस पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, युवा वर्ग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित है. खासकर 25 से 34 साल की उम्र के लोग अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने, घर-परिवार की जिम्मेदारियों और बढ़ते खर्चों के कारण अधिक दबाव महसूस कर रहे हैं. अध्ययन में महिलाओं ने भी आर्थिक मामलों को लेकर ज्यादा चिंता जताई. कई महिलाओं का मानना है कि भविष्य के खर्चों, बचत और वित्तीय सुरक्षा को लेकर उन्हें अधिक सतर्क रहना पड़ता है.
 आर्थिक रूप से मजबूत बनना बड़ी प्राथमिकता
रिपोर्ट बताती है कि आज लोगों के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है. कई लोग अपनी शारीरिक या मानसिक सेहत से पहले अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि आर्थिक सुरक्षा बेहतर जीवन की नींव है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 02:30:19 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>41, भारतीयों, के, मानसिक, तनाव, की, बड़ी, वजह, है, फाइनेंशियल, गोल्स, युवाओं, पर, सबसे, ज्यादा, दबाव-, रिपोर्ट</media:keywords>
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        <title>Wedding SIP: बिना कर्ज लिए करनी है शाही शादी? आज ही शुरू करें वेडिंग एसआईपी और बनाएं बड़ा फंड, समझें गणित</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/wedding-sip-बिना-कर्ज-लिए-करनी-है-शाही-शादी-आज-ही-शुरू-करें-वेडिंग-एसआईपी-और-बनाएं-बड़ा-फंड-समझें-गणित</guid>
        <description><![CDATA[ Wedding SIP: क्या आप भी सपने देखते हैं कि आपकी शादी रॉयल और ग्रैंड हो? क्या आप भी सेलेब्स की तरह डेस्टिनेशन वेडिंग करना चाहते हैं? या फिर आपको भी सेलेब्स की तरह अपनी शादी में डिजाइनर लहंगा पहनना है? तो इसके लिए बहुत सारे रुपये भी चाहिए, वो कहां से आएंगे? ये कोई मुश्किल काम नहीं है बल्कि बेहद आसान है. इसके लिए बहुत थोड़ी सी समझ और एक रुटीन होना जरूरी है. आइये बताते हैं कैसे.
शादी के लिए कैसे जोड़े पैसे?आजकल शादी का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच जाता है. ऐसे में कई लोग शादी के लिए लोन लेते हैं या अपनी सेविंग्स को खत्म कर देते हैं. लेकिन अगर आप अपनी सेविंग्स भी बचाकर रखना चाहते हैं और लोन भी नहीं लेना चाहते, तो आप अभी से ही निवेश शुरू कर दें. इसके लिए आप वेडिंग SIP का सहारा ले सकते हैं. ये आसान भी होगा और आपको बहुत ज्यादा कर्ज भी आपके ऊपर नहीं चढ़ेगा.
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कैसे करेगी वेडिंग SIP काम?शादी तो कभी ना कभी हर किसी को करना ही होती है, ऐसे में यदि मान लीजिए आपकी शादी 10 साल बाद होना है और इसके लिए 20 लाख रुपये की जरूरत है. अगर आप अभी से हर महीने SIP में निवेश शुरू करते हैं और लगभग 12% सालाना रिटर्न आपको मिलता है तो लाखों रुपया अपनी शादी के लिए जमा कर सकते हैं.
अगर आपकी शादी को 5 साल हैं, तो भी आप करीब 5 लाख रुपये की सेविंग तो कर ही सकते हैं. इसके लिए आपको हर महीने करीब 2500 रुपये SIP में निवेश करना होगा. ये कोई बड़ी रकम नहीं है, लेकिन ये आपकी शादी में आपका खर्च तो उठा ही सकती है.
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कौन से खर्च हो सकते हैं पूरे?अगर आप दुल्हन हैं और आपने 5 लाख रुपये SIP के जरिए जमा कर रखे हैं, तो आपकी शादी के कपड़े, गहने, हर फंक्शन का मेकअप, जूते- चप्पल, जैसे खर्चो को आप खुद ही उठा सकती हैं. ऐसा करने से आपको किसी भी चीज के लिए मन नहीं मारना होगा और परिवार के ऊपर भी ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा.
तो वहीं यदि आप दूल्हा हैं, तो कपड़े गहनों का तो खर्च नहीं होता है. लेकिन आप अपनी शादी की केटरिंग या हॉल बुक करने जैसी सुविधाओं का बोझ खुद उठा पाएंगे. या इससे आप शादी के बाद हनीमून पर भी जा पाएंगे.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 02:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Wedding, SIP:, बिना, कर्ज, लिए, करनी, है, शाही, शादी, आज, ही, शुरू, करें, वेडिंग, एसआईपी, और, बनाएं, बड़ा, फंड, समझें, गणित</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel: आज कितने में बिक रहा है 1 लीटर पेट्रोल? डीजल की भी कितनी है कीमत? चेक करें ताजा रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today on June 3: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 मई को हुई बढ़ोतरी के बाद 3 जून को पूरे भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर रहीं. पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर बने हुए हैं और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं. 25 मई की बढ़ोतरी इससे पहले बीते दो हफ्तों में कीमतों में हुई चौथी बढ़ोतरी थी.
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमत



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
102.12 रुपये
95.20 रुपये


मुंबई
&amp;nbsp;111.18 रुपये
97.83 रुपये


कोलकाता
113.47 रुपये
99.82 रुपये


चेन्नई
107.77 रुपये
&amp;nbsp;99.55 रुपये


बेंगलुरु
110.93 रुपये
98.80 रुपये


हैदराबाद
115.69 रुपये
103.82 रुपये


अहमदाबाद
101.70 रुपये
97.84 रुपये


लखनऊ&amp;nbsp;
&amp;nbsp;102.05 रुपये
&amp;nbsp;95.55 रुपये


पटना
113.35 रुपये
99.36 रुपये



महंगाई बढ़ने का खतरा
CRISIL की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई का काफी दबाव डाल सकती हैं. आने वाले महीनों में ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों और कोर महंगाई, दोनों के बढ़ने की उम्मीद है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 मई से अब तक खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. अगर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है. तेल मार्केटिंग कंपनियां धीरे-धीरे अपने नुकसान (under-recoveries) को कम कर रही हैं, ऐसे में आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में कुल बढ़ोतरी 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है.
CRISIL ने क्या लगाया अनुमान?
CRISIL के लगाए गए अनुमानों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई में सीधे तौर पर लगभग 36 बेसिस पॉइंट्स (bps) की वृद्धि कर सकती है, जबकि 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से यह असर बढ़कर लगभग 48 bps तक पहुंच सकता है.
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाला खर्च एक ऐसा बड़ा और अहम जरिया है, जिससे ईंधन की महंगाई पूरे अर्थव्यवस्था में फैलती है. भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में माल ढुलाई का हिस्सा 54 परसेंट है, जबकि देश की लगभग 71 परसेंट माल ढुलाई सड़क परिवहन के जरिए होती है. सड़क परिवहन की लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 42 परसेंट है, जिससे यह क्षेत्र ईंधन की बढ़ती कीमतों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाता है.

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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel:, आज, कितने, में, बिक, रहा, है, लीटर, पेट्रोल, डीजल, की, भी, कितनी, है, कीमत, चेक, करें, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>Silver Import: सरकार ने अचानक कड़े किए चांदी के आयात नियम, सराफा बाजार&amp;ज्वेलर्स के लिए बड़ी खबर</title>
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        <description><![CDATA[ Silver Import: ईरान और यूएस का युद्ध जबसे शुरू हुआ है, तभी से इसने भारत की अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया है. इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार कई कड़े कदम उठा रही है लेकिन फिर भी महंगाई की मार जनता पर पड़ ही रही है. इसी को देखते हुए अब हाल ही में भारत सरकार ने एक बार फिर से चांदी के आयात के नियमों में बदलाव कर दिया है. ये नियम अब और भी ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं.
दरअसल भारत सरकार ने चांदी के आयात पर नियंत्रण बढ़ाते हुए इसके नियम और भी ज्यादा सख्त कर दिए हैं. अब चांदी के दाने (ग्रेन), पाउडर और 99.9% शुद्धता वाली चांदी का आयात करने के लिए पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी. जिसके लिए आदेश मंगलवार को ही जारी हुए हैं.&amp;nbsp;
इस आदेश के अनुसार ऐसे सभी आयातकों को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से वैध आयात अनुमति (इंपोर्ट ऑथराइजेशन) लेना होगा. बिना इसकी मंजूरी के इन उत्पादों का आयात नहीं किया जा सकेगा.
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पिछले कुछ समय में हुए बदलावसरकार ने पिछले महीने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था. इसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच गैर-जरूरी आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना है. हाल ही के महीनों में चांदी के आयात में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है. अप्रैल में चांदी का आयात सालाना आधार पर 157% बढ़कर 411 मिलियन डॉलर पहुंच गया. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक ये करीब 150% बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.
चांदी व्यापरियों में बढ़ चिंतासरकार के इस फैसले से चांदी व्यापारियों के बीच भी काफी हलचल मच गई है. नए नियमों से आयातकों के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है और आयात प्रक्रिया भी थोड़ी ज्यादा मुश्किल हो सकती है. जिसका खामियाजा व्यापारियों को भुगतना होगा.
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सख्ती बढ़ाने की वजह?बता दें कि भारत दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और हाल के समय में इसके आयात में तेज बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 12 अरब डॉलर की चांदी आयात की, जबकि इससे पिछले वित्त साल में ये आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था. सरकार बढ़ते आयात पर लगाम लगाना चाहती है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) पर दबाव कम हो सके. इसी दिशा में पिछले महीने सोने और चांदी पर आयात शुल्क भी 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया था.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Silver, Import:, सरकार, ने, अचानक, कड़े, किए, चांदी, के, आयात, नियम, सराफा, बाजार-ज्वेलर्स, के, लिए, बड़ी, खबर</media:keywords>
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        <title>AI Business Ideas: घर बैठे शुरू करें ये 6 स्मार्ट बिजनेस, हो सकती है लाखों की कमाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-business-ideas-घर-बैठे-शुरू-करें-ये-6-स्मार्ट-बिजनेस-हो-सकती-है-लाखों-की-कमाई</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ai-business-ideas-घर-बैठे-शुरू-करें-ये-6-स्मार्ट-बिजनेस-हो-सकती-है-लाखों-की-कमाई</guid>
        <description><![CDATA[ AI Business Ideas: आज के समय में AI का इस्तेमाल हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है. एजुकेशन, मीडिया, हेल्थकेयर, मार्केटिंग और ऑटोमेशन में यह काम को आसान और तेज बना रहा है. इसी वजह से AI आधारित बिजनेस काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.कई लोग AI की मदद से छोटे स्तर पर काम शुरू करके हर महीने ₹1 लाख से ₹3 लाख तक की कमाई कर रहे हैं.
इस सेक्टर की डिमांड लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसका मार्केट और बड़ा होने की संभावना है.अगर आप कम निवेश में बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो AI आपके लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है. आइए जानते हैं AI से जुड़े कुछ बेहतरीन बिजनेस आइडियाज, उनका इनकम मॉडल, जरूरी टूल्स और शुरुआत करने का तरीका
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&amp;nbsp;AI संबंधित बिज़नेस योजना
1. AI कंटेंट क्रिएशन एजेंसी
AI टूल्स की मदद से आप घर बैठे कंटेंट राइटिंग और मार्केटिंग का काम शुरू कर सकते हैं. इसे फ्रीलांसर या छोटी एजेंसी के रूप में शुरू किया जा सकता है. इसमें ब्लॉग आर्टिकल, वीडियो स्क्रिप्ट, सोशल मीडिया पोस्ट और ई-बुक्स लिखने जैसे काम किए जाते हैं. क्लाइंट्स पाने के लिए Fiverr, Upwork और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है.
इस बिजनेस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लागत बहुत कम लगती है. कमाई के तौर पर एक आर्टिकल के ₹500 से ₹3,000 और वीडियो स्क्रिप्ट के ₹800 से ₹5,000 तक मिल सकते हैं. वहीं मंथली पैकेज के जरिए हर महीने ₹10,000 से ₹1 लाख तक की कमाई भी की जा सकती है.
2. AI वॉइसओवर और वीडियो ऑटोमेशन सेवाएं
इसमें &amp;nbsp;AI टूल्स की मदद से रील्स, शॉर्ट्स और एक्सप्लेनर वीडियो बनाए जाते हैं. इसमें वॉयसओवर, बैकग्राउंड म्यूजिक और एनिमेशन जोड़कर प्रोफेशनल वीडियो तैयार किए जाते हैं.
इस काम की डिमांड यूट्यूबर्स, इंस्टाग्राम एजेंसियों और स्टार्टअप्स में तेजी से बढ़ रही है. कमाई के तौर पर एक शॉर्ट वीडियो के ₹500 से ₹2,000 और एक्सप्लेनर वीडियो के ₹3,000 से ₹10,000 तक मिल सकते हैं. इस काम के लिए ElevenLabs, Lovo AI, Synthesia, Pictory, InVideo और CapCut जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.
3. AI चैटबॉट डेवलपमेंट
AI Chatbot Services में पहले से तैयार chatbots बनाकर SMEs को बेचे जाते हैं. इसमें hospitality, retail और coaching सेक्टर के for custom chatbot solutions दिए जाते हैं, जो WhatsApp और वेबसाइट पर ऑटोमैटिक रिप्लाई का काम करते हैं.इस काम में एक chatbot के ₹5,000 से ₹25,000 तक मिल सकते हैं. वहीं AMC और monthly subscription से ₹1,000 से ₹5,000 प्रति क्लाइंट हर महीने कमाए जा सकते हैं. इस काम के लिए Dialogflow, Botpress, ManyChat और Chatbase जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.
4.&amp;nbsp; AI पर्सनलाइज्ड &amp;nbsp;ट्यूटरिंग, कोचिंग सेवाएं
इसमें AI की मदद से स्टूडेंट्स को पर्सनलाइज्ड पढ़ाई और डाउट सॉल्विंग की सुविधा दी जाती है. इसमें वेबसाइट या ऐप के जरिए प्रश्नोत्तरी प्रतिक्रिया और पढ़ाई की विषय-वस्तु उपलब्ध कराया जाता है. भारत में एग्जाम तैयारी और हिंदी माध्यम टूल्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. कमाई के तौर पर सब्सक्रिप्शन ₹199 से ₹999 प्रति माह तक रखा जा सकता है, जिससे ₹10,000+ मंथली इनकम बनाई जा सकती है. इस काम के लिए ChatGPT API, Notion, Typeform और Webflow जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.
5. AI रेज्यूमे और करियर गाइडेंस सेवा
इसमें Resume, Cover Letter, LinkedIn प्रोफाइल और Interview Feedback जैसी सेवाएं दी जाती हैं. इसमें job seekers के लिए Resume और AI Interview Prep पैकेज तैयार किए जाते हैं.फ्रेशर्स और सरकारी-प्राइवेट नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. कमाई के तौर पर एक resume के ₹500 से ₹3,000 और mock interview prep के ₹1,000 से ₹5,000 तक मिल सकते हैं.इस काम के लिए Resume.io, Rezi AI, InterviewWarmup, Canva और ChatGPT जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.
6. AI- पावर्ड सोशल मीडिया मैनेजमेंट
AI सोशल मीडिया मैनेजमेंट में क्लाइंट्स के लिए सोशल मीडिया कंटेंट को स्केड्यूल क्रिए और विश्लेषणकिया जाता है. इसमें इंस्टाग्राम फेसबुक और यूट्यूब शॉट्स के लिए स्वचालित सामग्री तैयार किया जाता है. छोटे बिजनेस, डॉक्टर और इंस्टिट्यूट्स को मासिक वेतन में ये सेवाएं दी जाती हैं. आज हर स्थानीय व्यापारी इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है, इसलिए इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. इस काम में ₹3,000 से ₹25,000 प्रति माह प्रति क्लाइंट तक कमाई की जा सकती है. इसके लिए ChatGPT, Buffer, Lately.ai, Canva और CapCut जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है
ट्रेन में सफर के दौरान हर परेशानी का समाधान है रेलवे हेल्पलाइन 139, मिनटों में मिलेगी मदद
AI और भविष्य की संभावनाएं
AI और भविष्य की संभावनाएं बहुत व्यापक और प्रभावशाली हैं. आने वाले समय में AI न सिर्फ काम करने के तरीके को बदल देगा, बल्कि कई नए रोजगार और बिजनेस अवसर भी पैदा करेगा.साथ ही, AI की मदद से छोटे व्यवसाय भी तेजी से बड़े बन सकेंगे और लोग कम समय में ज्यादा काम कर पाएंगे. सही स्किल्स सीखकर और AI टूल्स को समझकर भविष्य में बेहतर करियर और इनकम के मौके हासिल किए जा सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Business, Ideas:, घर, बैठे, शुरू, करें, ये, स्मार्ट, बिजनेस, हो, सकती, है, लाखों, की, कमाई</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate Today: क्या आज हुआ है गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव? फटाफट चेक करें रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-क्या-आज-हुआ-है-गैस-सिलेंडरों-की-कीमतों-में-कोई-बदलाव-फटाफट-चेक-करें-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-today-क्या-आज-हुआ-है-गैस-सिलेंडरों-की-कीमतों-में-कोई-बदलाव-फटाफट-चेक-करें-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Rate on June 3: आज 3 जून को भी देश में LPG की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. तेल कंपनियों ने 1 जून को जारी किया गया रेट ही बरकरार रखा है. हालांकि, जून की पहली तारीख को 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं. कीमतों में करीब 42 रुपये की बढ़ोतरी की जा चुकी है.इसके अलावा, 5 किलो वाले &#039;छोटू&#039; गैस सिलेंडर के भी दाम बढ़ाए गए, जो आमतौर पर छोटे परिवारों और सीमित उपयोग वाले ग्राहकों के बीच लोकप्रिय है.&amp;nbsp;
शहरवार LPG सिलेंडरों की कीमतें



शहर&amp;nbsp;
घरेलू सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
913.0 रुपये
3071.5 रुपये


मुंबई
&amp;nbsp;912.5 रुपये
3024.0 रुपये


कोलकाता
939.0 रुपये
&amp;nbsp;3202.5 रुपये


चेन्नई
&amp;nbsp;928.5 रुपये
3237.0 रुपये


बेंगलुरु
915.5 रुपये
3152.0 रुपये


जयपुर
916.5 रुपये
&amp;nbsp;3099.0 रुपये


लखनऊ
950.5 रुपये
&amp;nbsp;3194.0 रुपये


अगरतला
1073.5 रुपये
3415.5 रुपये


पटना
1002.5 रुपये
&amp;nbsp;3347.0 रुपये



आम जनता को राहत&amp;nbsp;
जून में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं कर सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत दी है. हालांकि, होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट्स में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है. पहले मई की तारीख को इसमें सीधे 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. फिर अब जून में रेट में करीब 42 रुपये का इजाफा किया गया. तेल कंपनियों ने 5 किलो वाले फ्री-ट्रेड (FTL) गैस सिलेंडरों के दाम भी बढ़ा दिए हैं. अब दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 821.50 रुपये तक पहुंच गई है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ाई गई कीमत?
जून में गैस सिलेंडरों में बढ़ोतरी का कारण भी भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावट है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी मिडिल ईस्ट देशों से आयात करता है इसलिए वहां तनाव की स्थिति के चलते भारत तक गैस कार्गो का पहुंचना मुश्किल और खर्चीला हो गया है. इससे कंपनियों का इनपुट कॉस्ट बढ़ रहा है.&amp;nbsp;

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Petrol-Diesel: आज कितने में बिक रहा है 1 लीटर पेट्रोल? डीजल की भी कितनी है कीमत? चेक करें ताजा रेट&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, क्या, आज, हुआ, है, गैस, सिलेंडरों, की, कीमतों, में, कोई, बदलाव, फटाफट, चेक, करें, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>Payroll System: एक बार नहीं, महीने में 2 बार मिले सैलरी, इस दिग्गज बिजनेसमैन ने कंपनियों से की बड़ी अपील</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/payroll-system-एक-बार-नहीं-महीने-में-2-बार-मिले-सैलरी-इस-दिग्गज-बिजनेसमैन-ने-कंपनियों-से-की-बड़ी-अपील</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/payroll-system-एक-बार-नहीं-महीने-में-2-बार-मिले-सैलरी-इस-दिग्गज-बिजनेसमैन-ने-कंपनियों-से-की-बड़ी-अपील</guid>
        <description><![CDATA[ Payroll System: शादी डॉट कॉम (Shaadi.com) के संस्थापक अनुपन मित्तल ने कंपनियों से अपने कर्मचारियों को भुगतान करने के तरीके पर फिर से विचार करने की अपील की है. उनका कहना है कि जिस ब्रिटिश युग की पारंपरिक महीने के लास्ट या अलगे महीने सैलरी देने की व्यवस्था को अब बदलने की जरूरत है. उनकी राय में कर्मचारियों को महीने में दो बार सैलरी मिलनी चाहिए.
LinkedIn पोस्ट में क्या कहा?
बता दें कि अनुपम मित्तल ने लिंक्डइन पर पोस्ट किया. इसमें उन्होंने कहा कि कई कंपनियां कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए फ्री खाना, वर्क फ्रॉम होम और लंबी छुट्टियों जैसे फायदे देती हैं, लेकिन अक्सर वे कर्मचारियों की सबसे बुनियादी जरूत समय पर सैलरी को नजरअंदाज कर देती हैं. उन्होंने लिखा कि ज्यादातर कंपनियां 7 तारीख या फिर उससे पहले सैलरी देती हैं, लेकिन कई बार यह तारीख वीकेंड के कारण और आगे खिसक जाती है, जिससे कर्मचारियों को देरी का सामना करना पड़ता है.
मई में बजा यूपीआई का डंका, 30 लाख करोड़ के पार पहुंचा ट्रांजैक्शन, किन शहरों का रहा दबदबा?
कंपनी ने किया था बदलाव
अनुपाम मित्तल ने बताया कि Shaadi.com ने कुछ साल पहले अपनी पेरोल प्रणाली में चेंज किया था और अब सैलरी अगले महीने के बजाय उसी महीने के अंत में दी जाती है. मित्तल के मुताबिक, यह कोई सुविधा नहीं है, बल्कि सामान्य समझ का हिस्सा है. उन्होंने आगे कहा कि सैलरी में देरी केवल कुछ दिनों की बात नहीं होती है, बल्कि इसका सीधा असर कर्मचारियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. इसकी वजह से EMI बाउंस होना, किराया टाइम पर न भर पाना और आर्थिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. उनका कहना है कि नकद प्रवाह ही असल में सम्मान और सुरक्षा देता है.&amp;nbsp;
महीने में दो बार सैलरी देने का सुझाव
अनुपम मित्तल ने सुझाव दिया कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों को महीने में दो बार यानी 15 और 30 तारीख को सैलरी देने पर विचार करना चाहिए. उनका मानना है कि आज के आधुनिक तकनीक के इस दौर में यह प्रक्रिया मुश्किल नहीं है और इससे कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है. इससे कर्ज के दबाव में कमी आएगी और खर्च करने की क्षमता भी बेहतर होगी.
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मित्तल के मुताबिक, अगर कंपनियां इस सिस्टम को अपनाती हैं तो कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव कम होगा और पूरी अर्थव्यवस्था में खर्च की गति बढ़ सकती है. उनका कहना है कि यह कदम कर्मचारियों, कंपनियों और देश की अर्थव्यवस्था तीनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:30:18 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Payroll, System:, एक, बार, नहीं, महीने, में, बार, मिले, सैलरी, इस, दिग्गज, बिजनेसमैन, ने, कंपनियों, से, की, बड़ी, अपील</media:keywords>
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        <title>AI Engineer Salary: इस कंपनी में एआई इंजीनियर्स को मिल रहा है करोड़ों का पैकेज, सैलरी जान उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ AI Engineer Salary: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में इन दिनों एनवीडिया यानी (NVIDIA) का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है. यह कंपनी खासतौर पर AI चिप्स यानी GPU बनाती है, जिनकी मांग पूरी दुनिया में है. लेकिन इस बार कंपनी अपने टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि कर्मचारियों को दी जा रही भारी-भरकम सैलरी की वजह से चर्चा में है.&amp;nbsp;
करोड़ों का सैलरी पैकेज
अमेरिका सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एनवीडिया अपने कर्मचीरियों को करीब 4.7 करोड़ रुपये तक का सालाना पैकेज दे रही है. इस पैकेज में बेसिक सैलरी शामिल है, जबकि स्टॉक ऑप्शन और बोनस इससे अलग होते हैं, जो इसे और भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं.
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विदेशी टैलेंट को बड़ा मौका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब कई बड़ी टेक कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती कम कर रही हैं, तक एनवीडिया लगातार बाहर के टैलेंट को मौका दे रही है. कंपनी ने H-1B वीजा वाले कर्मचारियों की भर्ती भी बढ़ाई है. इस साल शुरुआती छह महीनों में लगभग 1,200 H-1B पदों को मंजूरी दी गई, जबकि पिछले साल यह संख्या लगभग 1,000 थी. इसके उलट गूगल और अमेजन जैसी कंपनियों में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में कमी देखी गई है.
किन पदों पर कितनी सैलरी?
एनवीडिया में अलग-अलग पदों पर करोड़ों रुपये का पैकेज दिया जा रहा है जैसे...

Research Scientist: ₹99 लाख से ₹3.41 करोड़
Principal Research Scientist: ₹2.60 करोड़ से ₹4.12 करोड़
Software Engineer: ₹1.03 करोड़ से ₹3.74 करोड़
Principal Architect: ₹2.37 करोड़ से ₹4.07 करोड़
AI Algorithms Engineer: ₹2.94 करोड़ से ₹4.50 करोड़
Software Engineering Director: ₹3.72 करोड़ से ₹4.50 करोड़

क्यों दे रही है इतनी बड़ी सैलरी?
एनवीडिया का मानना है कि AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी के इस दौर में सबसे बड़ा हथियार टैलेंट है. कंपनी के CEO जेन्सेन हुआंग के मुताबिक, दुनिया भर से बेहतरीन दिमागों को जोड़ना उनकी सबसे बड़ी रणनीति है. कंपनी डेटा सेंटर और AI सिस्टम को मजबूत करने में लगातार इन्वेस्ट कर रही है, जिसके लिए हाई-लेवल इंजीनियर और रिसर्चर्स की जरूरत है.
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टेक इंडस्ट्री पर असर
सबसे बड़ी बात तो यह है कि जहां कई कंपनियां लागत कम करने के लिए छंटनी और भर्ती में कटौती कर रही हैं, वहीं एनवीडिया का यह कदम दिखाता है कि AI सेक्टर में प्रतिभा की कीमत तेजी से बढ़ रही है. ध्यान देने वाली बात तो यह है कि इस ट्रेंड से आने वाले टाइम में टेक इंडस्ट्री में कंपटीशन और बढ़ सकता है. साथ ही भारत जैसे देशों के इंजीनियरों के लिए भी विदेशी कंपनियों में बड़े पैकेज पर नौकरी के नए मौके बन सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>LPG Crisis: घरेलू गैस सिलेंडर बेचने पर कंपनियों को हो रहा कितना घाटा? सरकार ने बताया, कीमतों में होगा भारी इजाफा?</title>
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        <description><![CDATA[ LPG News: ईरान और यूएस के बीच चल रहा युद्ध दुनियाभर में परेशानी का सबब बन रहा है. खासतौर से क्रूड ऑइल की कीमतों में इजाफा होने के चलते गैस सिलेंडर और पेट्रोल- डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. भारत की बात करें तो कुछ दिन पहले ही पेट्रोल- डीजल की कीमतो में यहां भारी इजाफा हुआ है. जिसके बाद बीते दिन की कमर्शियल सिलेंडर और छोटू गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं. वहीं अब खबरें ऐसी सामने आ रही हैं कि जल्दी ही घरेलू गैस सिलेंडर यानी 14.2 किलो के गैस सिलेंडर की कीमतें भी बढ़ने वाली है.
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसानदरअसल हाल ही में सरकार की तरफ से बताया गया है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) फिलहाल बेचे जा रहे हर घरेलू LPG सिलेंडर पर लगभग 650 रुपये का घाटा उठा रही हैं. इस बारे में बात करते हुए एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया है कि, &#039;घरेलू एलपीजी की बिक्री पर OMC को वर्तमान में प्रति सिलेंडर लगभग 650 रुपये का नुकसान हो रहा है.&#039;
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घर का बजट बिगड़ने से बचा रही सरकाररसोई गैस पर तेल कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए घरेलू गैस सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए हैं. सरकार चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरों के बजट पर न पड़े. अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में कुछ ईंधन कीमतों में बदलाव के बाद भी सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) हर दिन भारी नुकसान झेल रही हैं.
हाल में बढ़े हैं कमर्शियल गैस के दामबता दें कि हाल ही में 1 जून से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं. बड़े शहरों में इसकी कीमत 53.50 रुपये तक बढ़ी है. तो वहीं 5 किलों वाले छोटे गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>India&amp;US Trade Deal: अमेरिकी ट्रेड एक्ट की वो &amp;apos;खतरनाक&amp;apos; धारा, जिससे सुरक्षा के लिए भारत बना रहा है खास रणनीति</title>
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        <description><![CDATA[ US Trade Act: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका यानी यूएस व्यापार समझौते की ओर अग्रसर होते दिख रहे हैं. हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले दौर की करीब सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं. जैसे-जैसे बातचीत आखिरी चरण में दाखिल हो रही है, एक बेहद जरूरी मुद्दा भी अब सुर्खियां बटौर रहा है.
अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 क्या है?
दरअसल&amp;nbsp; अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की एक धारा है. ये धारा है 301. धारा 301 का इस्तेमाल अमेरिका अन्य देशों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी वाली व्यापार रणनीतियों से निपटने के लिए करता है. इस प्रावधान के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूटीआर) को विदेशी सरकारों की जांच करने और उनकी नीतियों को अमेरिकी व्यवसायों या व्यापारिक हितों के लिए नुकसान पाए जाने पर जवाबी कार्रवाई करने की इजाजत देता है.&amp;nbsp;
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धारा 301 का इस्तमाल कब किया जा सकता है?
अमेरिका यूएसटीआर धारा 301 के तहत जांच शुरू कर सकता है, अगर उसे लगता है कि किसी देश की व्यापार नीतियां अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करती हैं या अमेरिकी व्यवसायों को अनुचित रूप से नुकसान पहुंचाती हैं. जिसमें जबरन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, श्रम अधिकारों का उल्लंघन, अत्यधिक उत्पादन को बढ़ावा देने वाली बड़ी सरकारी सब्सिडी जैसी चिंताएं शामिल हैं.&amp;nbsp;
व्यापार समझौते से मिलेगी राहत?
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर दोनों देश 24 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते पर पहुंच जाते हैं तो अमेरिका संभवतः भारत को यह आश्वासन देगा कि धारा 301 के तहत कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा. गौरतलब है कि ऐसे समझौतों के बिना देशों को धारा 301 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर काफी ज्यादा शुल्क का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए ही भारत इस धारा से अपनी सुरक्षा के लिए रणनितियां तैयार कर रहा है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Trump Tariff: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, इन उत्पादों पर टैरिफ घटाने की घोषणा, ट्रेड वॉर के बीच यू&amp;टर्न</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/trump-tariff-डोनाल्ड-ट्रंप-का-बड़ा-फैसला-इन-उत्पादों-पर-टैरिफ-घटाने-की-घोषणा-ट्रेड-वॉर-के-बीच-यू-टर्न</link>
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        <description><![CDATA[ Trump Tariff News: ईरान से जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा एलान किया है. &amp;nbsp;ट्रंप ने कृषि और औद्योगिक उपकरणों की एक अलग-अलग श्रेणियों पर शुल्क में 10 प्रतिशत की कमी की घोषणा की, जिससे अगले साल के आखिर तक शुल्क 25% से घटकर 15% हो गया. तमाम देश 85 प्रतिशत अमेरिकी स्टील या एल्यूमीनियम का इस्तमाल करते हैं. टैरिफ पर यह बदलाव 2027 तक प्रभावी रहेगा.
बदलावों के तहत, कंबाइन, हार्वेस्टर और अन्य कृषि उपकरणों जैसी कृषि मशीनरी पर टैरिफ मौजूदा 25% से घटकर 15% हो जाएगा. अमेरिकी सरकार ने कहा कि इस कटौती का उद्देश्य उत्पादकों के लिए लागत कम करना और साथ ही अमेरिका के कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है. इस घोषणा से औद्योगिक उपकरणों के उस दायरे का भी विस्तार हुआ है, जिन पर 15% की कम टैरिफ दर लागू होगी.
India-US Trade Deal: अमेरिकी ट्रेड एक्ट की वो &#039;खतरनाक&#039; धारा, जिससे सुरक्षा के लिए भारत बना रहा है खास रणनीति
बुलडोजर, फोर्कलिफ्ट और इसी तरह के अन्य उपकरण समेत मोबाइल इंडस्ट्रीयल मशीनरी, जो अमेरिकी व्यापार समझौतों के अंतर्गत आने वाले देशों से मंगाई जाती हैं, अब कम शुल्क के लाभ के लिए पात्र होंगी. घरेलू धातु उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक और प्रोत्साहन के रूप में, विदेशी निर्माताओं को आयातित पूंजीगत उपकरणों पर 10% की और भी कम टैरिफ दर का लाभ मिलेगा, अगर &amp;nbsp;उनके उपकरणों में वजन के हिसाब से कम से कम 85% अमेरिकी निर्मित स्टील या एल्यूमीनियम शामिल हो. इसके लिए स्टील को संयुक्त राज्य अमेरिका में पिघलाकर ढाला जाना चाहिए, जबकि एल्यूमीनियम को घरेलू स्तर पर पिघलाकर ढाला जाना चाहिए.&amp;nbsp;
व्हाइट हाउस के एक बयान में कहा गया है, &#039;राष्ट्रपति ट्रम्प ने आयातित एल्युमीनियम, स्टील और तांबे पर टैरिफ का इस्तेमाल संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण उद्योगों की आर्थिक स्थिरता और अमेरिकी परिवारों, समुदायों और व्यवसायों की वित्तीय स्थिति को कम कीमत वाले विदेशी आयात के खतरे से बचाने के लिए किया है&#039;.
अब घरों में रखें 32000 टन सोने पर सरकार की नजर, PM मोदी की अपील से कैसे बचेगा विदेशी मुद्रा भंडार?
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Organic Waste: &amp;apos;गीले कचरे&amp;apos; से करोड़ों कमाएगा हिंदुस्तान, जानें इससे देश की अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगी रफ्तार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/organic-waste-गीले-कचरे-से-करोड़ों-कमाएगा-हिंदुस्तान-जानें-इससे-देश-की-अर्थव्यवस्था-को-कैसे-मिलेगी-रफ्तार</link>
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        <description><![CDATA[ Organic Waste Economy: भारत के शहरों में तेजी से बढ़ रहा गीला कचरा अब सिर्फ एक चुनौती नहीं, बल्कि रोजगार, स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक विकास का बड़ा अवसर बन सकता है. &#039;काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर&#039; (CEEW) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का शहरी ऑर्गेनिक कचरा (रसोई का बचा खाना, सब्जियों के छिलके और बागवानी का कचरा) साल 2047 तक करीब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की अर्थव्यवस्था खड़ी हो सकती है और 26 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिल सकता है.
क्या होता है जैविक कचरा?
आपके रसोई के गीले कचरे में सच में एक &#039;खजाना&#039; छिपा होता है. इस कचरे को जैविक खजाना या &#039;काला सोना&#039; भी कहा जाता है. गीले कचरे में फलों-सब्जियों के छिलके, चाय की पत्तियां और बचा हुआ खाना जैसी चीजें आती हैं. इसे बेकार समझकर फेंकने के बजाय आप इसका इस्तेमाल कम्पोस्ट, बायोगैस, बायो-CNG और अन्य ऑर्गेनिक उत्पादों के रूप में कर सकते है, जिसकी बड़ी भूमिका होगी.
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हर दिन 1.71 लाख टन कचरा
एक रिपोर्ट के मुताबिक, &#039;भारतीय &amp;nbsp;शहरों में प्रतिदिन करीब 1,71,000 टन नगरपालिका ठोस कचरा निकलता हैं, जिसमें से करीब आधा गीला कचरा होता है. मौजूदा कुल नगरपालिका ठोस कचरे का करीब 61 प्रतिशत सुधार किया जाता है. साल 2047 तक केवल शहरी नगरपालिका कचरा ही हर साल करीब 20 करोड़ टन तक पहुंच सकता है&#039;.
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लाखों नौकरियां पैदा हो सकती हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि, कचरे के संग्रह, छंटाई, प्रोसेसिंग, प्लांट संचालन, तकनीकी रखरखाव और अन्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सकते हैं. बेहतर कचरा प्रबंधन से करीब 26 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां बनने की संभावना है. रिपोर्ट का मानना है कि अगर भारत गीला कचरे को समस्या की बजाय रोजगार के रूप में देखे और उसके प्रबंधन पर तेजी से काम करे, तो यह क्षेत्र आने वाले सालों में रोजगार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Richest Chief Minister: देश के सबसे अमीर CM होंगे DK शिवकुमार, 1413 करोड़ की संपत्ति के साथ टॉप पर</title>
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        <description><![CDATA[ DK Shivakumar Richest CM: सिद्दारमैया के इस्तीफा देने के बाद अब कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बनने जा रहे हैं. शिवकुमार 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. जिसको लेकर जनता के साथ ही पूरी कांग्रेस पर्टी काफी उत्साहित है. इसी बीच अब कुछ खबरें डीके शिवकुमार के हलफनामे को लेकर भी सामने आ रही हैं, जो बता रहा है कि वो देश के सबसे रईस और अमीर मुख्यमंत्री बनने वाले हैं.
दरअसल साल 2023 के हलफनामे के मुताबिक उनकी घोषित कुल संपत्ति करीब 1,413 करोड़ रुपये है. ये संपत्ति उन्हें देश के कई बड़े नेताओं से आगे खड़ा करती है.
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कितनी सम्पत्ति के हैं मालिक?इस हलफनामे के अनुसार डीके शिवकुमार की चल संपत्ति लगभग 1,140 करोड़ रुपये है. तो वहीं उनकी अचल संपत्ति लगभग 273 करोड़ रुपये की है. इन दोनों को मिलाकर डीके शिवकुमार के पास करीब 1,413 करोड़ रुपये की कुल सम्पत्ति है. इसके अलावा उनके ऊपर कुछ कर्ज भी हैं, जो करीब 265 करोड़ रुपये है. बात करें उनके कारोबार के बारे में तो वो रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, खनन और शिक्षा संस्थानों जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है.
इतने Assets के हैं मालिकडीके शिवकुमार के पास बेंगलुरु, मैसूरु, कनकपुरा और नई दिल्ली में कई कीमती रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियां हैं. उनकी सबसे कीमती सम्पत्तियों में बेंगलुरु के गोपालपुरा इलाके में स्थित एक कमर्शियल मॉल की जमीन शामिल है. कर्नाटक में जमीन की कीमतें बढ़ने से इस संपत्ति का मूल्य पिछले दो दशकों में काफी बढ़ गया है. इसके अलावा उन्हें लग्जरी घड़ियों का भी शौक है, तो वहीं वो निवेश से भी अपनी सम्पत्ति को बढ़ाते हैं.
रियल एस्टेट के अलावा डीके शिवकुमार के पास कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), कई सारे निवेश, लग्जरी घड़ियां और एक्सेसरीज हैं. उनके पास रोलेक्स और हब्लोट जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स की महंगी घड़ियां भी हैं.
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लिस्ट में है इन मुख्यमंत्रियों का नाम भी शामिलडीके शिवकुमार के अलावा अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी हैं जो इस अमीरी की लिस्ट में शुमार होते हैं. इस लिस्ट में साउथ इंडिया के नेताओं का राज है. डीके शिवकुमार के बाद एन चंद्रबाबू नायडू की घोषित संपत्ति लगभग 931 से 936 करोड़ रुपये है. उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा हेरिटेज फऊड्स लिमिटेड में हिस्सेदारी से जुड़ा है. इसके अलावा हाल ही में एक्टर से तमिलनाडु के सीएम बने जोसफ विजय का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है. विजय के पास घोषित संपत्ति 640 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जाती है.
बात करें साउथ इंडिया के अलावा अन्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्रियों के बारे में तो, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू करीब 332 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. वो भी भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Richest, Chief, Minister:, देश, के, सबसे, अमीर, होंगे, शिवकुमार, 1413, करोड़, की, संपत्ति, के, साथ, टॉप, पर</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: रिटायरमेंट बेनिफिट के बदल सकते हैं नियम, जानें OPS&amp;NPS और UPS पर क्या है ताजा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग का जबसे गठन हुआ है, तभी से इसको लेकर काफी चर्चा होती रहती है. इस बार 8वें वेतन आयोग में केवल फिटमेंट फैक्टर और DA पर ही चर्चा नहीं हो रही है, बल्कि रिटायर हो चुके केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन स्कीम को लेकर भी विचार किया जा रहा है. इसका मकसद है कि कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद बेहतर और सम्मानजनक जीवन मिल सके.
पेंशन बढ़ाने का प्रस्तावकर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पूरी पेंशन को मौजूदा 50% की बजाय अंतिम वेतन का 67% किया जाए. उनका कहना है कि इससे रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी. एक संसदीय समिति की सिफारिश का हवाला देते हुए ये भी प्रस्ताव रखा गया है कि 65 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में पेंशन बढ़ाई जाए.
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ऐसा हो पेंशन स्ट्रक्चररिटायरमेंट के बाद एक सम्मानजनक और अच्छी जिंदगी का सपना हर कर्मचारी का होता है. इसके लिए 8वें वेतन आयोग में पेंशन स्ट्रक्चर में भी बदलाव के लिए प्रस्ताव दिया गया है. नया पेंशन स्ट्रक्चर कुछ इस हिसाब से तय किया जाना है.



उम्र
अंतिम वेतन का प्रस्तावित प्रतिशत


65
70%


70&amp;nbsp;
75%


75
80%


80
85%


85
90%


90
100%



इस नए स्ट्रक्चर के जरिए अब 90 साल की आयु पर कर्मचारी को उसके अंतिम वेतन के बराबर पेंशन मिल सकती है.
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OPS, NPS और UPS में चुनने का विकल्प?लाइव मिंट की रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारी संगठनों ने ये मांग भी उठाई है कि कर्मचारियों को अपनी जरूरत के हिसाब से पेंशन योजना चुनने की आजादी दी जाए. इसके लिए तीन ऑप्शंस होते हैं:

OPS (Old Pension Scheme)
NPS (National Pension Scheme)
UNS (Unified Pension Scheme)

ओपीएस (Old Pension Scheme)ये पुरानी पेंशन स्कीम है, इसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चितरूप से पेंशन मिलती है. इसमें पेंशन आखिरी वेतन और DA के आधार पर तय होती है, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाती है. इसके लिए कर्मचारी को अलग से योगदान नहीं देना पड़ता है.
एनपीएस (National Pension System)इस स्कीम में कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान रहता है. रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि जमा फंड और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है. इस पेंशन स्कीम में निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती.
यूपीएस (Unified Pension Scheme)ये पेंशन स्कीम OPS और NPS का मिला- जुला मॉडल है. इसमें योगदान भी होता है और निश्चित पेंशन का प्रावधान भी रखा गया है. कई कर्मचारी संगठनों का मानना है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर नहीं होनी चाहिए.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>TCS vs Infosys: टीसीएस है देश की सबसे बड़ी IT कंपनी, लेकिन इंफोसिस के CEO सलिल पारेख की सैलरी 3 गुना ज्यादा क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tcs-vs-infosys-टीसीएस-है-देश-की-सबसे-बड़ी-it-कंपनी-लेकिन-इंफोसिस-के-ceo-सलिल-पारेख-की-सैलरी-3-गुना-ज्यादा-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ TCS vs Infosys: भारत की सबसे बड़ी IT कंपनियों की लिस्ट में शुमार TCS और इंफोसिस किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. दोनों ही कंपनियों में लोगों को बड़ी दिलचस्पी रहती है. हाल ही में दोनों कंपनियों के सीईओ को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. दोनों कंपनियों से सामने आए सालाना रिकॉर्ड्स के मुताबिक कंपनियों के सीईओ की सैलरी में बड़ा फर्क है, लेकिन ऐसा क्यों? आइये जानें.
CEO की सैलरी में फर्कदरअसल हाल ही में इंफोसिस और टीसीएस की वित्त वर्ष 2025-26 की सालाना रिपोर्ट सामने आई है. जिसके मुताबिक इंफोसिस के CEO सलिल पारेख को इस साल में 82.6 करोड़ रुपये वेतन के रूप में मिले. तो वहीं TCS के CEO के कृथिवासन को 28 करोड़ रुपये वेतन के रूप में मिले. इसका मतलब है कि सैलरी के मामले में सलील पारेख की कमाई TCS के CEO से करीब 55 करोड़ रुपये ज्यादा रही है.
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बड़ी कंपनी छोटी कमाईदोनों सीईओ की सैलरी में इतना बड़ा अंतर इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि TCS कारोबार, इंफोसिस के कारोबार से काफी बड़ा है. टीसीएस का वित्त वर्ष 2026 रेवेन्यू 2.67 लाख करोड़ रुपये है. जिसमें कंपनी का मुनाफा 49,210 करोड़ रुपये बताया जा रहा है.&amp;nbsp;
तो वहीं इंफोसिस का वित्त वर्ष 2026 का रेवेन्यू 1.79 लाख करोड़ रुपये है. जिसमें कंपनी का मुनाफा 29,440 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. इसका मतलब है कि कंपनी छोटी होने के बावजूद भी इंफोसिस के सीईओ को ज्यादा वेतन मिला है.
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क्यों है सलिल पारेख का इतना मोटा पैकेज?सलील पारेख का कुल पैकेज 82.6 करोड़ रुपये है. जो इस प्रकार बांटा गया है:
फिक्स्ड सैलरी: 7.97 करोड़ रुपयेरिटायरमेंट और अन्य लाभ: 0.53 करोड़ रुपयेपरफॉर्मेंस आधारित बोनस: 8.5 करोड़ रुपयेस्टॉक (शेयर) आधारित इंसेंटिव: 23.35 करोड़ रुपयेशेयर ऑप्शन बेचने/एक्सरसाइज करने से फायदा: 50.75 करोड़ रुपये
इस गणित को देखें तो उनकी कमाई का मोटा हिस्सा कंपनी के शेयरों और स्टॉक इंसेंटिव से आया है.
के कृथिवासन का पैकेज कितना और कैसा है?इंफोसिस के सीईओ के. कृथिवासन का कुल सालाना पैकेज 28 करोड़ रुपये है. जो इस प्रकार से बांटा गया है:
बेसिक सैलरी: 1.67 करोड़ रुपयेभत्ते और अन्य सुविधाएं: 1.43 करोड़ रुपयेप्रदर्शन आधारित कमीशन: 25 करोड़ रुपये
इसका मतलब है कि उनकी सैलरी का अधिकांश हिस्सा नकद वेतन और बोनस से आता है, जबकि स्टॉक आधारित भुगतान बहुत कम था.
फिर भी बड़ी कंपनी है TCSहालांकि TCS, इंफोसिस से बड़ी और ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी है, फिर भी इंफोसिस के CEO सलिल पारेख की कमाई कहीं ज्यादा है. इसकी मुख्य वजह ये है कि उनके वेतन पैकेज में शेयर और स्टॉक आधारित इंसेंटिव का बड़ा हिस्सा शामिल है. यही कारण है कि उनकी कुल कमाई TCS के CEO से लगभग तीन गुना ज्यादा हो गई है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TCS, Infosys:, टीसीएस, है, देश, की, सबसे, बड़ी, कंपनी, लेकिन, इंफोसिस, के, CEO, सलिल, पारेख, की, सैलरी, गुना, ज्यादा, क्यों</media:keywords>
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        <title>LPG Price Hike: कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए आपके शहर में क्या हैं नए रेट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Rate Today 1 June: देशभर में 1 जून से कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है. तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 42 रुपये तक का इजाफा किया है. इसका असर रेस्टोरेंट, होटल, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर पड़ सकता है, जो रोजमर्रा के कामकाज के लिए LPG पर निर्भर हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है.
कमर्शियल LPG सिलेंडर के बढ़े दाम
नई कीमतों के बाद दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में 42 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसकी कीमत बढ़कर अब 3113.50 रुपए हो गई है. मुंबई में इसकी कीमत 3067 है. वहीं कोलकाता में कीमतों में 53.50 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कीमत 3255.50 रुपए हो गई है और चेन्नई में 3283 पहुंच गई है.
1 जून से बदले ये 5 बड़े नियम! LPG से UPI तक, जानें आपकी जेब और जिंदगी पर पड़ेगा कितना असर
घरेलू सिलेंडर की कीमतों में नहीं हुआ बदलाव
बता दें कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर हैं. दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये, मुंबई में 912, कोलकाता में 939 और चेन्नई में 928.50 बनी हुई है.
अपने शहर में LPG सिलेंडर के रेट देखें
शहर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; घरेलू LPG (14.2 Kg)&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;कमर्शियल LPG (19 Kg)नई दिल्ली&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹913.00&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3113.50कोलकाता&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹939.00&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,255.00मुंबई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹912.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹3,067.00चेन्नई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹928.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,283.00गुरुग्राम&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹921.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,130.00नोएडा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹910.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,113.50बेंगलुरु&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹915.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,198.00भुवनेश्वर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹939.00&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹3,290.00चंडीगढ़&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹922.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹3,136.50हैदराबाद&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹965.00&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹3,367.00जयपुर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹916.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹3,141.00लखनऊ&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹950.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,236.00पटना&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹1,002.50&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹3,400.50तिरुवनंतपुरम&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹922.00&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹3,152.00
क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और यु्द्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने से ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 65 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 90 प्रतिशत LPG खाड़ी देशों से आता है.&amp;nbsp;
1 जून से लगा महंगाई का झटका, 5 किलो वाले छोटू गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़े, जानें नया रेट
हर महीने बदलती हैं LPG की कीमतें
भारत में LPG सिलेंडर के दाम आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को संशोधित किए जाते हैं. इन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर, परिवहन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:30:28 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>LPG, Price, Hike:, कमर्शियल, गैस, सिलेंडर, हुआ, महंगा, जानिए, आपके, शहर, में, क्या, हैं, नए, रेट</media:keywords>
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        <title>Gold&amp; Silver Price Today: सोना&amp;चांदी खरीदने से पहले चेक करें भाव, 1 जून को क्या हैं आपके शहर के रेट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सोना-चांदी-खरीदने-से-पहले-चेक-करें-भाव-1-जून-को-क्या-हैं-आपके-शहर-के-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सोना-चांदी-खरीदने-से-पहले-चेक-करें-भाव-1-जून-को-क्या-हैं-आपके-शहर-के-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold- Silver Price Today 1 June: अगर आप भी सोना-चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. 1 जून 2026 यानी आज सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है. वैश्विक बाजार के रुझान, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और घरेलू मांग का असर इनकी कीमतों पर पड़ रहा है. आइए जानते हैं आज आपके शहर में सोने और चांदी के ताजा भाव क्या हैं?
सोने की कीमतों में बढ़त
महंगाई और वैश्विक मांग के दबाव के चलते सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई है. आज 24 कैरेट ( 999 शुद्धता) सोने की कीमत 15,703 रुपये प्रति ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोना 14,394 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर बिक रहा है.
कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए आपके शहर में क्या हैं नए रेट
प्रमुख शहरों में सोने का भाव
शहर &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;24 कैरेट सोना (प्रति ग्राम)&amp;nbsp; &amp;nbsp;22 कैरेट सोना (प्रति ग्राम)&amp;nbsp; &amp;nbsp;18 कैरेट (प्रति ग्राम)
चेन्नई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹15,959&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹14,629&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹12,274मुंबई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹15,703&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹14,394&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹11,777दिल्ली&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹15,718&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹14,409&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹11,792कोलकाता&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹15,703&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹14,394&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹11,777बेंगलुरु&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹15,703&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹14,394&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹11,777हैदराबाद&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹15,703&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹14,394&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹11,777केरल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹15,703&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹14,394&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹11,777पुणे&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹15,703&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹14,394&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹11,777वडोदरा&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹15,708&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹14,399&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹11,782अहमदाबाद&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹15,708&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹14,399&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹11,782
जानें चांदी के ताजा दाम
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है. देश में चांदी की कीमत लगभग 2,79,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिजनेस कर रही है. वहीं सिल्वर 925 की कीमत करीब 2,74,000 रुपये प्रति किलोग्राम है.
प्रमुख शहरों में चांदी का भाव
शहर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;सिल्वर 999 (प्रति 10 ग्राम)दिल्ली&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹2,799मुंबई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹2,799कोलकाता&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ₹2,799चेन्नई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;₹2,899
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इन्वेस्टर्स की नजर बाजार पर
चांदी का उपयोग सिर्फ आभूषणों में ही नहीं, बल्कि कई उद्योगों में भी होता है. यही कारण है कि औद्योगिक मांग बढ़ने या घटने का असर इसकी कीमतों पर साफ दिखाई देता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और इन्वेस्टर्स की मांग के चलते आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-, Silver, Price, Today:, सोना-चांदी, खरीदने, से, पहले, चेक, करें, भाव, जून, को, क्या, हैं, आपके, शहर, के, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>Share Market Today: शेयर बाजार में 440 अंकों की तेजी, 75200 के पार पहुंचा सेंसेक्‍स, निफ्टी भी 100 अंक उछला</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market Today: जून महीने के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की है. शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 440 अंक की तेजी के साथ 75,200 के स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई निफ्टी 100 अंकों से अधिक चढ़कर 23,650 के आसपास कारोबार करता नजर आया.
विदेशी बाजारों की तेजी का दिखा असर
अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र की मजबूती और एशियाई बाजारों में तेजी का सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला. जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के प्रमुख सूचकांकों में बढ़त के बीच घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ.
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पिछले सप्ताह की गिरावट से उबरा बाजार
शुक्रवार को विदेशी निवेशकों की बिकवाली और MSCI रीबैलेंसिंग के कारण बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि, सोमवार को निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिससे बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है.
बैंकिंग और आईटी शेयरों में खरीदारी
बाजार की तेजी में बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों का अहम योगदान रहा है. प्रमुख निजी और सरकारी बैंकों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है. इसके अलावा आईटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने रुचि दिखाई.
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क्या कहते हैं जानकार?
एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे. यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में फिलहाल रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं. हालांकि निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सतर्क रहने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश करने की सलाह दी जा रही है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:30:26 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Share, Market, Today:, शेयर, बाजार, में, 440, अंकों, की, तेजी, 75200, के, पार, पहुंचा, सेंसेक्‍स, निफ्टी, भी, 100, अंक, उछला</media:keywords>
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        <title>Financial Rules: अमीर बनना है तो गांठ बांध लें निवेश के ये 7 सुनहरे नियम, बदल जाएगी आपकी किस्मत</title>
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        <description><![CDATA[ 
7 Rule of Investing: निवेश की दुनिया में पैसा बढ़ाने के कई तरीके होते हैं. शेयर बाजार (इक्विटी), बॉन्ड (डेट) म्यूचुअल फंड जैसे अलग-अलग विकल्पों में लोग अपने रिस्क लेने की क्षमता और जरूरत के हिसाब से पैसे लगाते हैं. लेकिन सिर्फ निवेश करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही तरीके और नियमों को समझकर निवेश करना जरूरी होता है.
हालांकि, सबसे अहम बात यह भी है कि पूरा पैसा निवेश में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि कुछ हिस्सा इमरजेंसी के लिए सुरक्षित रखना चाहिए. इसी को ध्यान में रखते हुए यहां 7 फॉर्मूले बताए गए हैं, जो निवेश को समझने और सही दिशा देने में मदद करते हैं.
Rule of 72 और Rule of 114
Rule of 72 के मुताबिक, यह पता लगाया जा सकता है कि आपका पैसा कितने साल में डबल हो जाएगा. इस फॉर्मूला के इस्तेमाल के लिए 72 को रेट ऑफ रिटर्न से डिवाइड करना होता है. जैसे अगर कहीं सालाना 12% की रफ्तार से रिटर्न मिल रहा है, तो उसमें पैसा 72/12 यानी करीब 6 साल में डबल हो जाएगा.
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Rule of 114 इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल यह जानने के लियी होता है कि पैसा कितने समय में तीन गुना या उससे ज्यादा हो सकता है. उदाहरण के लिए 12% की दर से रिटर्न मिल रहा है तो उसमें निवेश पर 144/12 यानी 12 साल में पैसा चार गुना के आसपास पहुंच सकता है.
50-30-20 और 100 माइनस एज रूल
50-30-20 नियम के तहत अपनी कमाई का 50% हिस्सा अपनी जरूरतों, 30% अपने शौक पर और बाकी 20% सेविंग्स पर खर्च करना चाहिए. यह नियम आमतौर पर खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाता है.
100 माइनस एज रूल बताता है कि आपकी उम्र के मुताबिक कितना पैसा इक्विटी और कितना पैसा डेट में लगाना चाहिए. अगर उम्र 30 साल है, तो 70% पैसा इक्विटी में और बाकी 30% डेट में लगाना सही माना जाता है.
निवेश और इमरजेंसी फंड के नियम
Minimum 10% Investment Rule कहता है कि अपनी कमाई का कम से कम 10% लॉन्ग टर्म के लिए हर महीने निवेश करना चाहिए और इसे हर साल 10% की रफ्तार से बढ़ाना भी चाहिए. इससे लंबे समय में बड़ा फंड तैयार होता है.
Emergency Fund Rule के मुताबिक, इसमें कुछ फंड इतना भी होना चाहिए, जो किसी इमरजेंसी में सहारा दे सके. यह फंड कितना होना चाहिए, इसका कोई फिक्स्ड रूल नहीं है लेकिन इसमें कम से कम 6 महीने के खर्चों के बराबर पैसा होना चाहिए, ताकि अचानक नौकरी जाने या बीमारी जैसी स्थिति में दिक्कत न हो.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Financial, Rules:, अमीर, बनना, है, तो, गांठ, बांध, लें, निवेश, के, ये, सुनहरे, नियम, बदल, जाएगी, आपकी, किस्मत</media:keywords>
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        <title>Share Market: शेयर बाजार में बड़ा बदलाव, 10 मिनट बढ़ा ट्रेडिंग का समय, फटाफट नोट करें नया मार्केट क्लोजिंग टाइम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/share-market-शेयर-बाजार-में-बड़ा-बदलाव-10-मिनट-बढ़ा-ट्रेडिंग-का-समय-फटाफट-नोट-करें-नया-मार्केट-क्लोजिंग-टाइम</link>
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        <description><![CDATA[ Share Market New Closing Time: अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो ये खबर आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है. शेयर बाजार से जुड़े एक बड़े बदलाव के तहत ट्रेडिंग टाइम में 10 मिनट की बढ़ोतरी की गई है. नए नियम लागू होने के बाद अब निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए पहले से ज्यादा समय मिलेगा.
क्या है नया समय?
नए बदलाव के तहत बाजार के क्लोजिंग टाइम को 10 मिनट आगे बढ़ा दिया गया है. यानी अब ट्रेडर्स और निवेशक अतिरिक्त 10 मिनट तक शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे. इसे आसानी से समझें कि अगस्त 2026 से F&amp;amp;O सेगमेंट की ट्रेडिंग टाइमिंग 10 मिनट बढ़ जाएगी यानी अभी F&amp;amp;O बाजार शाम 3:30 बजे बंद होता है, लेकिन अब अगस्त से ये 3 बजकर 40 मिनट पर बंद होगा. बता दें कि सभी शेयरों के लिए ट्रेडिंग समय नहीं बदला है. ये बदलाव सिर्फ F&amp;amp;O सेगमेंट के लिए ही है. कैश मार्केट की टाइमिंग में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वो पहले की तरह 3:30 बजे ही बंद होगा.
शेयर बाजार में 440 अंकों की तेजी, 75200 के पार पहुंचा सेंसेक्&amp;zwj;स, निफ्टी भी 100 अंक उछला
निवेशकों को क्या होगा फायदा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक्स्ट्रा 10 मिनट मिलने से निवेशकों को बाजार की चाल समझने और अपने सौदों को बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी. खासतौर पर उन दिनों में जब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, ये 10 मिनट का समय काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
फ्यूचर्स का क्लोजिंग प्राइस कैसे तय होगा?फ्यूचर्स के लिए VWAP फॉर्मूला जारी रहेगा. लेकिन समय की गणना बदल जाएगी. पहले 3:00 PM से 3:30 PM के VWAP से क्लोजिंग भाव तय होता था. अब 3:10 PM से 3:40 PM के VWAP से क्लोजिंग भाव तय होगा.
क्यों लिया गया फैसला?
बाजार नियामक और एक्सचेंज समय-समय पर ट्रेडिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए बदलाव करते रहते हैं. इसी कड़ी में ट्रेडिंग समय बढ़ाने का फैसला लिया गया है ताकि बाजार की दक्षता बढ़ सके और निवेशकों को अधिक सुविधा मिल सके.
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निवेशकों के लिए सलाह
अगर आप नियमित रूप से शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं तो नए ट्रेडिंग समय को जरूर नोट कर लें. इससे किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सकेगा और आप अपने निवेश संबंधी फैसले समय पर ले सकेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Market:, शेयर, बाजार, में, बड़ा, बदलाव, मिनट, बढ़ा, ट्रेडिंग, का, समय, फटाफट, नोट, करें, नया, मार्केट, क्लोजिंग, टाइम</media:keywords>
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    <item>
        <title>Multibagger स्टॉक करने जा रहा स्टॉक स्प्लिट और बोनस शेयर का ऐलान, फोकस में रहेंगे शेयर</title>
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        <description><![CDATA[ AVI Polymers Limited Shares: पॉलिमर बनाने वाली कंपनी एवीआई पॉलीमर्स लिमिटेड (AVI Polymers Shares) के शेयर शुक्रवार, 29 मई को 5 परसेंट के अपर सर्किट को टच करते हुए 15.21 पर बंद हुए. कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 4 जून, 2026 को एक अहम बैठक होने जा रही है.
इसमें 1:10 के रेशियो में स्टॉक स्प्लिट और 10:1 के रेशियो में बोनस शेयर के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और मंजूरी दी जाएगी. कंपनी ने जैसे ही बीते शुक्रवार को इसकी जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी शेयरों में तेजी देखने को मिली.&amp;nbsp;
निवेशकों को क्या होगा फायदा?
अगर बोर्ड मीटिंग में वाकई में इन दोनों प्रस्तावों को मंजूरी दे दी जाती है, तो निवेशकों के पास अभी मौजूद शेयरों की संख्या पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाएगी. 1:10 के रेशियो में स्टॉक स्प्लिट होने से आपके पास मौजूद 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 1 शेयर के टुकड़े होकर 1 रुपये फेस वैल्यू के 10 शेयर बन जाएंगे. स्टॉक स्प्लिट होने के बाद आपको हर शेयर पर 10 फ्री बोनस शेयर मिलेंगे. इसे इस तरह से समझें- अगर आपके पास अभी एवीआई पॉलीमर्स के 100 शेयर हैं, तो 1:10 स्प्लिट के बाद शेयरों की संख्या 1000 (100&amp;times;10) जाएगी.&amp;nbsp;
वहीं, 1:10 के बोनस के बाद 1000 शेयरों पर 1000 &amp;times;10= 10000 बोनस शेयर मुफ्त में मिलेंगे. यानी कुल शेयरों की संख्या 11000 हो जाएगी. यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि शेयरों की संख्या 110 गुना बढ़ने के अनुपात में शेयर बाजार में इनकी कीमत भी नीचे आ जाएगी. लेकिन टोटल वैल्यू समान ही रहेगी.&amp;nbsp;
शेयर ने कराया मुनाफा
लगभग 143.10 रुपये के मार्केट कैप वाली इस कंपनी ने पिछले एक साल में लगभग 138% से 140% तक का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है. इसके 52- हफ्तों का हाई रेंज 29.41 रुपये और लो रेंज 5.43 रुपये रहा है. कंपनी केमिकल और पॉलीमर बिजनेस के साथ अब ग्रीन टेक्नोलॉजी, वेस्ट मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग जैसे नए और भविष्य के सेक्टर्स में भी एंट्री लेने की तैयारी में है.
(यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 00:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Multibagger, स्टॉक, करने, जा, रहा, स्टॉक, स्प्लिट, और, बोनस, शेयर, का, ऐलान, फोकस, में, रहेंगे, शेयर</media:keywords>
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    <item>
        <title>8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, आयोग में बढ़ा दी मेमोरेंडम की डेडलाइन; जानें नई डेट क्या है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-पर-बड़ा-अपडेट-आयोग-में-बढ़ा-दी-मेमोरेंडम-की-डेडलाइन-जानें-नई-डेट-क्या-है</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-पर-बड़ा-अपडेट-आयोग-में-बढ़ा-दी-मेमोरेंडम-की-डेडलाइन-जानें-नई-डेट-क्या-है</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) कर्मचारी संगठनों के लिए मेमोरेंडम (ज्ञापन) जमा करने की समय सीमा को बढ़ाकर 15 जून, 2026 कर दिया है.
जबकि पहले इस मेमोरेंडम को ऑनलाइन जमा करने की डेडलाइन 31 मई, 2026 तय की गई थी. इसे अब आधिकारिक तौर पर बढ़ा दिया गया है यानी कि कर्मचारियों को अपनी बात रखने का एक और मौका दिया गया है. नए नियम के तहत, कर्मचारी यूनियन और पेंशनर्स एसोसिएशन 15 जून तक अपने सुझाव और मांगें आयोग को सौंप सकते हैं.
यह एक आखिरी मौका
आयोग के मुताबिक, यह कर्मचारी यूनियनों के लिए आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने का आखिरी मौका होगा क्योंकि इसके बाद समय सीमा में और विस्तार नहीं किया जाएगा. सभी आवेदनों और ज्ञापनों को केवल 8वें वेतन आयोग के आधिकारिक पोर्टल 8cpc.gov.in पर जाकर ही तय फाॅर्मेट में जमा कराना होगा. ऑफलाइन पोस्ट या हाथ से लिखी गई प्रतियां या पीडीएफ फॉर्मेट में भेजे गए मेमोरेंडम स्वीकार नहीं किए जाएंगे.&amp;nbsp;
आयोग की अगली बैठकें
मेमोरेंडम जमा करने की प्रक्रिया के साथ-साथ आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठकर उनकी मांगें सुन रही हैं, बातचीत कर रही है. आने वाले दिनों में भी कई जगह बैठक होने वाले हैं:-
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख- 1 से 4 जून (श्रीनगर/जम्मू) और 8 जून लद्दाख में बैठक होगी.
उत्तर प्रदेश (लखनऊ)- 22-23 जून&amp;nbsp;
ओडिशा (भुवनेश्वर)- 6-7 जुलाई
पश्चिम बंगाल (कोलकाता)- 9-10 जुलाई
मेमोरेंडम में कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

बेसिक सैलरी को 18000 से बढ़ाकर 69000 प्रति महीना करना.
फिटमेंट फैक्टर को 7वें वेतन आयोग के 2.57 से बढ़ाकर 3.83 करना.
हर साल मिलने वाले इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करना.&amp;nbsp;
NPS की जगह Old pension scheme को बहाल करना.


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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 00:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>महंगाई का डबल अटैक: पेट्रोल&amp;डीजल और गैस के बाद अब दालों की कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट</title>
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        <description><![CDATA[ Pulses Price Hike after Petrol-Diesel: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद अब दालों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. इससे आम जनता की रसोई का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के मद्देनजर एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बीते 15 दिनों में 7.50 रुपये तक बढ़ गई हैं. वहीं, अब ट्रांसपोर्टेशन और मौसम की मार से दालों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही हैं दालों की कीमत?&amp;nbsp;

पेट्रोल-डीजल के दाम इन दिनों बढ़े हैं. क्रूड ऑयल महंगा होने से पहले ही आयात महंगा हो गया है. अब देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का असर मालभाड़े पर पड़ रहा है. ट्रकों का किराया पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है. इससे मंडियों से किराना दुकानों तक दाल पहुंचाने की लागत बढ़ गई है.&amp;nbsp;
बेमौसम बारिश और अल-नीनो (El Nino) की वजह से देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में उड़द और तुअर या अरहर की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.&amp;nbsp;
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों की वजह से आयात भी महंगा हो गया है इसलिए देश में दालों की कीमतें बढ़ती जा रही हैं.&amp;nbsp;

अभी कितनी है कीमत?&amp;nbsp;



दाल
कीमत


अरहर
115-150 रुपये


उड़द
110-140 रुपये


मूंग
95-130 रुपये


मसूर
85-110 रुपये


चना दाल
80-95 रुपये



अरहर के सबसे बढ़े दाम
थोक बाजार में इस समय अरहर के दाल के दामों में सबसे तेजी देखने को मिल रही है. कारोबारियों का कहना है कि थोक बाजार में अरहर दाल 12 फीसदी महंगी होकर 9000-12250 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई हैं. उत्तर प्रदेश की मंडियों में इसका औसत थोक भाव 10440 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है. वहीं, सिलीगुड़ी जैसी कुछ और बड़ी मंडियों में कीमत अधिकतम 11000 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई हैं.&amp;nbsp;
क्यों अरहर के सबसे ज्यादा उछले दाम?
भारत अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए म्यांमार और अफ्रीकी देशों से बड़े पैमाने पर अरहर दाल आयात करता है. पश्चिम एशिया में तनाव के चलते समुद्री मालभाड़ा इतना अधिक बढ़ गया है कि विदेशों से अरहर दाल भारत आते-आते महंगी होती जा रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 00:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SIP: मात्र 1000 की मंथली एसआईपी से बनाना है 5 लाख का फंड? जानें कितने साल लगेंगे</title>
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        <description><![CDATA[ SIP News: म्यूचुअल फंड में एसआईपी छोटे और नियमित निवेश से बड़ा फंड बनाने का आज के समय में एक बेहतरीन जरिया बन चुका है. जहां, हर महीने अगर आप केवल 1 हजार रुपये का निवेश करते हैं तो, 5 लाख रुपये का लक्ष्य कितने समय में पूरा होगा, यह पूरी तरह आपके मिलने वाले सालाना रिटर्न पर ही निर्भर करता है. इस खबर में आपको तीन विभिन्न तरह के रिटर्न दरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.&amp;nbsp;
1. 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न पर
इसमें करीब 15 साल तक आपका कुल निवेश रहता है, यानी लगभग 1.80 लाख रुपये और बाकि 3.20 लाख रुपये से ज्यादा की ब्याज पर ब्याज और रिटर्न के ज़रिए जुड़ेगी. इसके अलावा लंबी अवधि के लिए कई अच्छे इक्विटी फंड्स में 12 प्रतिशत का रिटर्न एक अनुमान माना जाता है.&amp;nbsp;
2. 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न पर
इसमें करीब 13 साल 3 महीने का ही समय होता है, जहां आपको कुल निवेश 1.59 लाख रुपये तक बिना किसी परेशानी के आसानी से हो जाता है. इसके फायदे के बारे में बात करें तो, बेहतर प्रदर्शन करने वाले फ्लेक्सी कैप फंड्स में लंबी अवधि में ऐसा रिटर्न देखने को मिलता है.&amp;nbsp;
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3. 20 प्रतिशत सालाना रिटर्न पर
तो वहीं, 12 प्रतिशत रिटर्न के मुकाबले में लगभग 4 साल पहले यानी करीब 11 साल में यह लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
जानें इसकी ताकत और बाज़ार के जोखिम के बारे में&amp;nbsp;
एसआईपी की सबसे बड़ी खासियत है उसका कंपाउंडिंग. रिटर्न में सिर्फ कुछ प्रतिशत का सुधार भी आपके लक्ष्य तक पहुंचने के समय को कई साल पहले ही कम कर देता है. लेकिन, इस बात का ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है कि म्यूचुअल फंड में रिटर्न कभी भी तय या फिर पूरी तरह से फिक्स नहीं होता है. यह पूरी तरह से बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ-साथ आपकी चुनी गई स्कीम पर ही निर्भर करता है.
तो &amp;nbsp;वहीं, कम समय के निवेश में रिटर्न कभी-कभी कम हो जाता है. हांलाकि, लंबी अवधि में निवेश करने पर ज्यादा से ज्यादा फायदा मिलने की संभावना भी रहती है. इसलिए निवेश करते समय इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि सिर्फ और सिर्फ ऊंचे रिटर्न के पीछे भागने के बजाय अनुशासन के साथ निवेश करने पर सही तरीके से ध्यान दें, ताकि निवेश करने पर यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सके.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 00:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>20 लाख मुंबई में और 8 लाख जयपुर में कमाना, सारे खर्चे जोड़कर बिजनेस एक्सपर्ट ने बताया कौन करता है ज्यादा बचत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/20-लाख-मुंबई-में-और-8-लाख-जयपुर-में-कमाना-सारे-खर्चे-जोड़कर-बिजनेस-एक्सपर्ट-ने-बताया-कौन-करता-है-ज्यादा-बचत</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आपसे पूछा जाए कि मुंबई में 20 लाख रुपये सालाना कमाने वाला और जयपुर में 8 लाख रुपये सालाना कमाने वाला, इनमें से कौन ज्यादा पैसे बचाता होगा, तो ज्यादातर लोग पहला विकल्प चुनेंगे. लेकिन एक बिजनेस एक्सपर्ट की गणना कुछ और ही कहानी बताती है. उनके मुताबिक, सैलरी जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है उस शहर में रहने का खर्च. कई बार कम कमाई वाला व्यक्ति भी ज्यादा बचत कर लेता है, अगर उसका खर्च कम हो.
मुंबई का हिसाब-किताब
बिजनेस एक्सपर्ट ने ऐसा दावा किया है कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और यहां सैलरी पैकेज भी आमतौर पर ज्यादा होते हैं. लेकिन इसके साथ रहने का खर्च भी काफी ऊंचा है. एक बेडरूम फ्लैट का किराया कई इलाकों में 45 हजार रुपये महीने तक पहुंच जाता है. इसके अलावा खाने-पीने, ट्रांसपोर्ट, पार्किंग और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों पर भी अच्छा-खासा पैसा खर्च होता है. यानी बड़ी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा शुरुआत में ही खर्चों में निकल जाता है.
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जयपुर के क्या हैं हालात 
दूसरी तरफ जयपुर जैसे टियर-2 शहर में रहने की लागत काफी कम है. यहां एक बेडरूम फ्लैट करीब 18 हजार रुपये महीने में मिल सकता है. खाने-पीने, यात्रा और अन्य घरेलू खर्च भी महानगरों की तुलना में कम होते हैं. ऐसे में भले ही सैलरी कम हो, लेकिन महीने के अंत में बचत के लिए ज्यादा पैसा बच जाता है.
रोज के खर्चे में अंतर
बिजनेस एक्सपर्ट के अनुसार, अगर जयपुर में किसी चीज पर 100 रुपये खर्च होते हैं तो मुंबई में उसी चीज के लिए करीब 148 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं. यह अंतर सिर्फ एक-दो सामान तक सीमित नहीं है. किराना, बाहर खाना, कैब, बिजली बिल और दूसरी कई सेवाएं मुंबई में महंगी पड़ती हैं. यही वजह है कि दोनों शहरों की कमाई की तुलना सिर्फ सैलरी के आधार पर नहीं की जा सकती.
मुंबई में रहने वाले लोगों की एक बड़ी शिकायत ट्रैफिक को लेकर रहती है. कई कर्मचारी रोजाना दो घंटे या उससे ज्यादा समय सड़क पर बिताते हैं. वहीं जयपुर में ज्यादातर लोग 15 से 20 मिनट में अपने ऑफिस या जरूरी जगहों तक पहुंच जाते हैं. इससे न सिर्फ समय बचता है, बल्कि पेट्रोल और यात्रा पर होने वाला खर्च भी कम होता है.
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आखिर कौन करता है ज्यादा बचत?
बिजनेस एक्सपर्ट के मुताबिक, जब किराया, रोजमर्रा का खर्च, यात्रा और जीवनशैली से जुड़े दूसरे खर्चों को जोड़कर देखा जाता है तो जयपुर में रहने वाला व्यक्ति सालाना करीब 3 लाख रुपये ज्यादा बचा सकता है. यानी 8 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति भी कई मामलों में 20 लाख रुपये कमाने वाले से बेहतर स्थिति में हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लाख, मुंबई, में, और, लाख, जयपुर, में, कमाना, सारे, खर्चे, जोड़कर, बिजनेस, एक्सपर्ट, ने, बताया, कौन, करता, है, ज्यादा, बचत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Patanjali Foods: पतंजलि फूड्स का महा&amp;धमाका, 40000 करोड़ के पार पहुंचा सालाना राजस्व, डिविडेंड का किया ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/patanjali-foods-पतंजलि-फूड्स-का-महा-धमाका-40000-करोड़-के-पार-पहुंचा-सालाना-राजस्व-डिविडेंड-का-किया-ऐलान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/patanjali-foods-पतंजलि-फूड्स-का-महा-धमाका-40000-करोड़-के-पार-पहुंचा-सालाना-राजस्व-डिविडेंड-का-किया-ऐलान</guid>
        <description><![CDATA[ Patanjali Revenue: पतंजलि फूड्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक नया रिकॉर्ड बना दिया है. कंपनी का सालाना परिचालन राजस्व पहली बार 40,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है. मजबूत बिक्री, खासकर खाद्य तेल और एफएमसीजी कारोबार में बढ़ोतरी के दम पर कंपनी ने यह उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.75 रुपये प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया है. इसके साथ पूरे साल का कुल डिविडेंड 3.50 रुपये प्रति शेयर हो गया है.
17% से ज्यादा बढ़ा राजस्व
मार्च 2026 तिमाही में पतंजलि फूड्स का परिचालन राजस्व 11,155.60 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 17.28 फीसदी ज्यादा है. तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 524.02 करोड़ रुपये रहा. यह सालाना आधार पर 46.16 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है. वहीं EBITDA 501.96 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का कहना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में मांग मजबूत रहने से कारोबार को फायदा मिला है.
20 लाख मुंबई में और 8 लाख जयपुर में कमाना, सारे खर्चे जोड़कर बिजनेस एक्सपर्ट ने बताया कौन करता है ज्यादा बचत
40,169 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में पतंजलि फूड्स का कुल परिचालन राजस्व 40,169.58 करोड़ रुपये रहा. यह कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सालाना राजस्व है. वहीं पूरे साल का EBITDA 1,931.52 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. कंपनी के कुल राजस्व में FMCG कारोबार का योगदान 27.60 फीसदी और EBITDA में 61.13 फीसदी रहा. इससे साफ है कि खाद्य उत्पादों और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग कंपनी के लिए बड़ा सहारा बन रही है.
खाद्य तेल कारोबार बना सहारा
पतंजलि फूड्स के लिए खाद्य तेल कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन साबित हुआ. मार्च तिमाही में इस कारोबार से 8,324.11 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जो सालाना आधार पर 23.28 फीसदी ज्यादा है. पूरे वित्त वर्ष में खाद्य तेल कारोबार का राजस्व 29,313.54 करोड़ रुपये रहा. कंपनी के मुताबिक बिक्री की मात्रा बढ़ने से इस सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला. ब्रांडेड खाद्य तेलों का योगदान कुल बिक्री में करीब 75 फीसदी रहा.
FMCG कारोबार ने भी दिखाई ताकत
मार्च तिमाही में FMCG कारोबार से कंपनी को 2,890.46 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. वहीं पूरे साल में यह आंकड़ा 11,188.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. होम एंड पर्सनल केयर श्रेणी में 35.42 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की गई. स्किन केयर सेगमेंट में तो 57.66 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली. कंपनी का लोकप्रिय दूध बिस्कुट ब्रांड भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. इसकी सालाना बिक्री 1,300 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है.
ऑयल पाम प्रोजेक्ट में भी तेजी
पतंजलि फूड्स ऑयल पाम खेती पर भी तेजी से काम कर रही है. मार्च 2026 तक कंपनी का ऑयल पाम खेती क्षेत्र बढ़कर 1,10,722 हेक्टेयर हो गया है. यह पिछले साल की तुलना में 23.65 फीसदी अधिक है. कंपनी 12 राज्यों में इस परियोजना का विस्तार कर रही है और भविष्य में घरेलू खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही है.
सिर्फ प्रीमियम देखकर न खरीदें बीमा कंपनियों के शेयर, निवेश से पहले चेक करें ये कड़े नियम
प्रबंधन ने क्या कहा?
कंपनी के CEO संजीव अस्थाना ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी फसल और सरकारी योजनाओं के कारण मांग मजबूत बनी रही. वहीं शहरी बाजारों में प्रीमियम उत्पादों की मांग बढ़ी है. उन्होंने कहा कि खाद्य तेल कारोबार में मजबूत प्रदर्शन कंपनी की रणनीति और बेहतर क्रियान्वयन का नतीजा है.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना राजस्व, मजबूत मुनाफा, बढ़ता FMCG कारोबार और डिविडेंड की घोषणा यह संकेत देती है कि पतंजलि फूड्स अपने कारोबार का दायरा लगातार बढ़ा रही है. आने वाले समय में कंपनी की नजर खाद्य तेल, FMCG और हेल्थ प्रोडक्ट्स सेगमेंट में विस्तार पर रहेगी.
 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Patanjali, Foods:, पतंजलि, फूड्स, का, महा-धमाका, 40000, करोड़, के, पार, पहुंचा, सालाना, राजस्व, डिविडेंड, का, किया, ऐलान</media:keywords>
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    <item>
        <title>Insurance Stocks: सिर्फ प्रीमियम देखकर न खरीदें बीमा कंपनियों के शेयर, निवेश से पहले चेक करें ये कड़े नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/insurance-stocks-सिर्फ-प्रीमियम-देखकर-न-खरीदें-बीमा-कंपनियों-के-शेयर-निवेश-से-पहले-चेक-करें-ये-कड़े-नियम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/insurance-stocks-सिर्फ-प्रीमियम-देखकर-न-खरीदें-बीमा-कंपनियों-के-शेयर-निवेश-से-पहले-चेक-करें-ये-कड़े-नियम</guid>
        <description><![CDATA[ शेयर बाजार में बीमा सेक्टर को लंबे समय से स्थिर और भरोसेमंद निवेश विकल्प माना जाता है. जब किसी बीमा कंपनी के प्रीमियम कलेक्शन या पॉलिसी बिक्री के आंकड़े तेजी से बढ़ते हैं, तो निवेशकों का ध्यान भी उसकी तरफ जाता है. लेकिन सिर्फ प्रीमियम बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी अच्छा मुनाफा भी कमा रही है. बीमा कारोबार दूसरे बिजनेस से थोड़ा अलग होता है. यहां कंपनी पहले ग्राहकों से प्रीमियम लेती है और बाद में दावों का भुगतान करती है. ऐसे में किसी बीमा कंपनी की असली ताकत समझने के लिए सिर्फ प्रीमियम नहीं, बल्कि कई दूसरे आंकड़ों को भी देखना जरूरी होता है.
सिर्फ प्रीमियम ग्रोथ देखकर न लें फैसला
बीमा कंपनियां अक्सर अपने प्रीमियम कलेक्शन में बढ़ोतरी को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती हैं. जीवन बीमा कंपनियों में नया बिजनेस प्रीमियम और नवीनीकरण प्रीमियम पर नजर रखी जाती है, जबकि सामान्य बीमा कंपनियों में ग्रॉस रिटन प्रीमियम देखा जाता है. हालांकि कई बार कंपनियां ज्यादा ग्राहकों को जोड़ने के लिए कम कीमत पर पॉलिसी बेचती हैं या ज्यादा कमीशन देती हैं. इससे शुरुआती आंकड़े तो अच्छे दिख सकते हैं, लेकिन भविष्य में दावों का बोझ बढ़ने पर मुनाफा प्रभावित हो सकता है.
20 लाख मुंबई में और 8 लाख जयपुर में कमाना, सारे खर्चे जोड़कर बिजनेस एक्सपर्ट ने बताया कौन करता है ज्यादा बचत
एम्बेडेड वैल्यू बताती है असली ताकत
जीवन बीमा कंपनियों का मूल्यांकन करते समय एम्बेडेड वैल्यू एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है. यह बताता है कि कंपनी की मौजूदा पॉलिसियों से भविष्य में कितना लाभ मिलने की उम्मीद है. क्योंकि जीवन बीमा की पॉलिसियां कई सालों तक चलती हैं, इसलिए आज बेची गई पॉलिसी आने वाले वर्षों में भी कमाई का जरिया बन सकती है. एम्बेडेड वैल्यू निवेशकों को यह समझने में मदद करती है कि कंपनी के पास भविष्य के लिए कितना मजबूत आधार मौजूद है.
VNB और VNB मार्जिन पर भी रखें नजर
बीमा क्षेत्र में VNB यानी वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस एक अहम संकेतक माना जाता है. यह बताता है कि नई बेची गई पॉलिसियों से कंपनी को भविष्य में कितना फायदा हो सकता है. अगर किसी कंपनी का VNB मार्जिन अच्छा है तो इसका मतलब है कि वह सिर्फ ज्यादा पॉलिसियां नहीं बेच रही, बल्कि लाभदायक पॉलिसियां भी बेच रही है. निवेशकों के लिए यह संकेत काफी महत्वपूर्ण होता है.
ग्राहक कंपनी के साथ टिके हुए हैं या नहीं?
बीमा कारोबार में ग्राहक को बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. इसी को परसिस्टेंसी रेशियो यानी स्थायित्व अनुपात से मापा जाता है. यह आंकड़ा बताता है कि पॉलिसी खरीदने के बाद कितने ग्राहक समय पर प्रीमियम जमा करते रहते हैं. अगर यह अनुपात ज्यादा है तो इसका मतलब है कि ग्राहक कंपनी पर भरोसा कर रहे हैं. वहीं कम अनुपात गलत बिक्री या कमजोर ग्राहक सेवा का संकेत हो सकता है.
सामान्य बीमा कंपनियों के लिए संयुक्त अनुपात जरूरी
अगर आप किसी जनरल इंश्योरेंस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं तो संयुक्त अनुपात जरूर देखें. यह दावों और खर्चों को जोड़कर बताता है कि कंपनी अंडरराइटिंग से मुनाफा कमा रही है या नहीं. 100 फीसदी से कम संयुक्त अनुपात को अच्छा माना जाता है. इसका मतलब है कि कंपनी प्रीमियम से ज्यादा कमा रही है और खर्च कम कर रही है.
सरकार के इस एक फैसले से फीकी पड़ी सोने की चमक, 70% तक घटी खरीदारी, बाजार में हलचल
सॉल्वेंसी रेशियो भी है बेहद अहम
बीमा कारोबार भरोसे पर चलता है. ग्राहक इस उम्मीद में प्रीमियम भरते हैं कि जरूरत पड़ने पर कंपनी उनका दावा चुकाएगी. सॉल्वेंसी रेशियो बताता है कि कंपनी के पास भविष्य की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी है या नहीं. मजबूत सॉल्वेंसी वाली कंपनियां आमतौर पर ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं.
उत्पाद और वितरण नेटवर्क भी देखें
सभी बीमा उत्पाद समान रूप से लाभदायक नहीं होते. कुछ पॉलिसियों में मार्जिन ज्यादा होता है, जबकि कुछ में कम. इसके अलावा कंपनी ग्राहकों तक कैसे पहुंच रही है, यह भी महत्वपूर्ण है. मजबूत एजेंट नेटवर्क, बैंक साझेदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ में मदद करते हैं.
निवेश से पहले यह चेकलिस्ट जरूर अपनाएं
बीमा कंपनियों में निवेश करते समय सिर्फ प्रीमियम ग्रोथ देखकर फैसला न लें. एम्बेडेड वैल्यू, VNB, VNB मार्जिन, परसिस्टेंसी रेशियो, संयुक्त अनुपात, सॉल्वेंसी रेशियो और उत्पाद पोर्टफोलियो जैसे संकेतकों का भी विश्लेषण करें.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Insurance, Stocks:, सिर्फ, प्रीमियम, देखकर, न, खरीदें, बीमा, कंपनियों, के, शेयर, निवेश, से, पहले, चेक, करें, ये, कड़े, नियम</media:keywords>
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        <title>कब &amp;apos;डेड&amp;apos; मान लिया जाएगा आपका क्रेडिट कार्ड? नए नियम पढ़ लें, आपको लग सकता है झटका</title>
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        <description><![CDATA[ Credit Card Update: अक्सर क्रेडिट कार्ड को कम समय में उधार और बकाया जमा करने के लिए लाभदायक माना गया है. हालांकि लंबे समय से कार्ड का इस्तेमाल नहीं होता है तो बैंक की ओर से कार्ड को बंद किया जा सकता है. जिसका नतीजा होता है कि ग्राहक जमा अच्छी क्रेडिट राशि भी खो देते है. ऐसे में अपने क्रेडिट कार्ड को समय -समय पर स्टेबल रखने से क्रेडिट कार्ड को बंद होने से बचाया जा सकता है.&amp;nbsp;
अक्सर क्रेडिट कार्ड होल्डर के लिए जो बैंक की गाइडलाइन्स होती है कि तीन से 12 महीने के बीच कोई भी गतिविधि ना होना. क्रेडिट कार्ड होल्डर जरूरी है कि, तीस दिनों के भीतर कार्ड के बंद होने की जानकारी बैंक को दें और जिससे वह अपने कार्ड के दोबारा शुरू होने की जानकारी पा सकते है.&amp;nbsp;
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लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करें तो क्या होगा?
बैंकबाज़ार के सीईओ, अधिल शेट्टी ने कहा, अगर 12 महीनों के भीतर ग्राहक क्रेडिट कार्ड का किसी भी हालत में इस्तेमाल नहीं करता है, बैंक की ओर से कोई भी कदम उठाने से &amp;nbsp;पहले ग्राहक के अमल में यह जानकारी होना जरूरी है.
आरबीआई के गाइड्सलाइन के मुताबिक, अगर क्रेडिट कार्ड की ओर से साल भर में किसी तरह की कोई भी आर्थिक लेन देन नहीं होता है तो, जैसे स्टेटमेंट जनरेशन, पिन बदलना, लेन देन में बदलाव का होना और लेन देन में कंट्रोल शामिल है. यहां तक कि कार्ड को नोटिस नहीं किया जाएगा और जिसका सीधा -सीधा असर जमा क्रेडिट स्कोर पर पड़ेगा.&amp;nbsp;
क्रेडिट कार्ड के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी
लंबे समय से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल ना होने जोखिम भर हो सकता है. शेट्टी ने कहा, इसका असर अलग अलग तरीके से हो सकता है. यह निर्भर करता है ग्राहक की पिछली लेन देन पर. इसी के साथ आंकड़ों को देखते हुए, महीने में कार्ड का इस्तेमाल तय करता है प्रतिशत सीमा.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol&amp;Diesel: पूरे 22 रुपये सस्ता हो गया पेट्रोल और डीजल, सरकार ने घटाए दाम तो लोगों ने ली राहत की सांस</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Cut: ईरान-अमेरिका में लड़ाई, होर्मुज की नाकेबंदी और पश्चिम एशिया में टेंशन के बीच एक तरफ जहां भारत सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं. वहीं, भारत के ही पड़ोसी देश पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार घट रहे हैं.
सरकार ने दिया ईद का तोहफा
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार ने बीते 29 मई को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत में भारी कटौती का ऐलान किया है. यहां सरकार ने ईद-अल-अजहा के मौके पर देश की जनता को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम पहले के मुकाबले और कम कर दिए हैं और इसे &#039;ईद का तोहफा&#039; बताया है. कल पाकिस्तान में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल दोनों के दाम सीधे 22 रुपये घटा दिए गए.&amp;nbsp;
लगातार तीसरी बार कम हुई कीमत

सबसे पहले 15 मई को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई.
फिर 22 मई को साप्ताहिक समीक्षा के तहत पेट्रोल के दाम 6 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 6.80 रुपये प्रति लीटर कम किए गए.&amp;nbsp;
ईद के मौके पर 29 मई को तीसरी बार सबसे बड़ी कटौती की गई. सरकार ने दोनों के ही दाम 22 रुपये कम कर दिए.&amp;nbsp;

कुल मिलाकर पाकिस्तान में मई के महीने में पेट्रोल कुल 33 रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ है. वहीं, डीजल के दाम कुल 33.80 रुपये कम किए गए हैं.
क्यों कम किए गए रेट?
पाकिस्तान की आवाम महंगाई से परेशान थी. मार्च और अप्रैल में यहां ईंधन की कीमतें पहली बार 414 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई थीं. इसके चलते माल ढुलाई से लेकर ट्रांसपोर्ट बेहद महंगा हो गया था.लोग सड़कों पर उतर आए थे. जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होने लगे. अपनी सरकार को बचाने और घरेलू राजनीतिक स्थिरता के लिए सरकार ने दाम कम किए. इस क्रम में सरकार ने ईद के मौके पर अधिकारियों को तेल कंपनियों को होने वाले मुनाफे या टैक्स का कुछ हिस्सा घटाकर सीधे जनता को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कीमतें कम करने की एक और वजह भी है. पाकिस्तान इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नियमों पर चल रहा है. IMF ने प्रति लीटर तेल पर एक निश्चित लेवी वसूलने की शर्त रखी थी. अब चूंकि सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए टैक्स कलेक्शन का अपना टारगेट पूरा कर पा रही है इसलिए बंतर्राष्ट्रीय बाजारदमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभी टैक्स के रूप में खुद रखने के बजाय उपभोक्ताओं को दे रही है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission: रेलवे ने फिटमेंट फैक्टर पर कर दी बड़ी मांग, जानें कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने अपने कर्मचारियों के लिए बड़ी मांग रखी है. इसके तहत, रेलवे ने सभी कर्मचारियों के लिए एक समान के बजाय पे-मैट्रिक्स के आधार पर 5- ग्रेडेड फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. यानी कि अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग. इस फॉर्मूले के तहत, उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों और टेक्निकल स्टाफ की बेसिक सैलरी में 192% से अधिकतम 338% &amp;nbsp;तक का इजाफा हो सकता है.&amp;nbsp;
क्या है 5-ग्रेडेड फिटमेंट फैक्टर का पूरा कैलकुलेशन?
7वें वेतन आयोग के तहत सभी के लिए एक समान 2.57 का फिटमेंट फैक्टर था. इसके विपरीत, IRTSA ने पदों की जिम्मेदारी के हिसाब से पांच अलग-अलग Multipliers तय करने का प्रस्ताव दिया है.&amp;nbsp;

लेवल 1-5 : 2.92
लेवल 6-8 : 3.50
लेवल 9-12 : 3.80
लेवल 13-16 : 4.09
लेवल 17-18 : 4.38

इतना ही नहीं, IRTSA ने रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स के लिए नया कैडर स्ट्रक्चर और शुरुआती वेतन भी सुझाया है. यह कुछ इस प्रकार से है:-

जूनियर इंजीनियर (Level-7) 1,57,400 रुपये
सीनियर सेक्शन इंजीनियर (Gr-B, Level-8) 1,66,800 रुपये
असिस्टेंट मैनेजर (Gr-B, Level-9) 2,01,600 रुपये
मैनेजर (Gr-B, Level-10) 2,13,000 रुपये
सीनियर मैनेजर (Gr-A, Level-11) 2,57,000 रुपये

क्या है रेलवे का तर्क?
रेलवे एसोसिएशन का तर्क है कि पिछले वेतन आयोगों के कारण सीनियर सुपरवाइजर और उनके नीचे काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में अंतर बहुत कम हो गया था. कई बार सुपरवाइजर को अपने अंडर काम करने वाले कर्मचारी के बराबर ही वेतन मिलता है. 4.38% का फिटमेंट फैक्टर इसी विसंगति को दूर करेगा.
इसके अलावा, रेलवे में टॉप लेवल के इंजीनियर्स और दूसरे बड़े पदों के लिए बड़ी सैलरी हाइक का प्रस्ताव इसलिए रखा गया है ताकि सरकारी नौकरी की सैलरी भी प्राइवेट सेक्टर के मुकाबले आकर्षक बना रहे. इसके अलावा, संगठन ने और भी कई मांगे की हैं जैसे कि DA का बेसिक सैलरी में ऑटोमेटिक मर्जर, 5% का एनुअल सैलरी ग्रोथ वगैरह.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Iran War: इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों की बढ़ी टेंशन, बढ़ती महंगाई कॉर्पोरेट आय पर कैसे डालेगी दबाव?</title>
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        <description><![CDATA[ Iran War:&amp;nbsp;अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है. इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई देने लगा है. सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है. हाल के दिनों में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहा तो महंगाई बढ़ सकती है और इसका सीधा असर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है.
महंगाई क्यों बन रही है बड़ा खतरा?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो परिवहन, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है. धीरे-धीरे इसका असर रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी दिखने लगता है. पिछले कुछ महीनों में महंगाई नियंत्रण में थी, जिससे कंपनियों को राहत मिली थी. लेकिन अब तेल की कीमतों में आई तेजी ने फिर से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है. अगर ईंधन महंगा होता है तो कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और अंततः इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
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कॉर्पोरेट आय पर कैसे पड़ेगा असर?
किसी भी कंपनी की कमाई सिर्फ बिक्री पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी लागत भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. जब कच्चा माल, ईंधन और परिवहन खर्च बढ़ते हैं तो कंपनियों का मुनाफा घटने लगता है. हालांकि कुछ बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाकर इस असर को कम कर सकती हैं, लेकिन हर कंपनी के लिए ऐसा करना आसान नहीं होता. खासकर उन सेक्टरों में जहां प्रतिस्पर्धा ज्यादा है, वहां कीमत बढ़ाने से बिक्री प्रभावित हो सकती है. ऐसे में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है.&amp;nbsp;
इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव
तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर एयरलाइंस कंपनियों पर पड़ सकता है. विमानन ईंधन उनकी लागत का बड़ा हिस्सा होता है. ऐसे में ईंधन महंगा होने पर या तो टिकट महंगे होंगे या कंपनियों का मुनाफा घटेगा. पेंट, केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर भी दबाव में आ सकते हैं क्योंकि इनका कच्चा माल सीधे तौर पर कच्चे तेल से जुड़ा होता है. कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन कंपनियों के मार्जिन पर असर दिखाई दे सकता है.&amp;nbsp;इसके अलावा एफएमसीजी कंपनियां, सीमेंट निर्माता, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां और उर्वरक उद्योग भी बढ़ती लागत का सामना कर सकते हैं. माल ढुलाई महंगी होने से इनके खर्च बढ़ेंगे और मुनाफा प्रभावित हो सकता है.&amp;nbsp;
शेयर बाजार पर भी दिख सकता है असर
बढ़ती महंगाई और ऊंची तेल कीमतें शेयर बाजार के लिए भी अच्छी खबर नहीं मानी जाती हैं. निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है. इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. आने वाली तिमाहियों के नतीजे यह तय करेंगे कि बढ़ती लागत का कंपनियों की कमाई पर कितना असर पड़ा है.&amp;nbsp;
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क्या FY27 में कमाई के अनुमान घट सकते हैं?
अभी तक FY27 के लिए कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीदें सकारात्मक बनी हुई हैं. लेकिन अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो कई सेक्टरों के लिए आय अनुमान में कटौती की जा सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि पहली और दूसरी तिमाही के नतीजों में इस दबाव की तस्वीर साफ दिखाई दे सकती है. खासकर उन कंपनियों पर ज्यादा असर होगा जिनकी लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन और आयातित कच्चे माल पर निर्भर है.&amp;nbsp;
आगे क्या है सबसे बड़ी चिंता?
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि मध्य-पूर्व में तनाव कितना लंबा चलता है. अगर हालात जल्द सामान्य हो जाते हैं तो तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है. लेकिन अगर संघर्ष बढ़ता है तो महंगाई, कंपनियों की कमाई और शेयर बाजार तीनों पर दबाव बढ़ सकता है. यही वजह है कि निवेशकों से लेकर कंपनियों तक, सभी की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर टिकी हुई है. आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि बढ़ती इनपुट कॉस्ट सिर्फ अस्थायी परेशानी है या फिर भारत इंक के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाली है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Iran, War:, इनपुट, कॉस्ट, बढ़ने, से, कंपनियों, की, बढ़ी, टेंशन, बढ़ती, महंगाई, कॉर्पोरेट, आय, पर, कैसे, डालेगी, दबाव</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: क्या है ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला, अब खाने की थाली तय करेगी आपकी सैलरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-क्या-है-icmr-का-3490-कैलोरी-फॉर्मूला-अब-खाने-की-थाली-तय-करेगी-आपकी-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच लगातार चर्चा चल रही है. कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी को लेकर है. इसी बीच एक ऐसा फॉर्मूला चर्चा में आ गया है, जिसका सीधा संबंध कर्मचारियों की खाने की थाली से है. दरअसल, राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र ने सरकार को दिए अपने ज्ञापन में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के 3490 कैलोरी फॉर्मूले को वेतन निर्धारण का आधार बनाने की मांग की है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना चाहती है तो न्यूनतम वेतन तय करते समय उनकी जरूरतों को ध्यान में रखना होगा और इनमें सबसे पहली जरूरत भोजन और पोषण की है.
क्या है ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला?
ICMR देश की प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था है, जो समय-समय पर लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देती है. इसके अनुसार एक औसत कामकाजी व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 3490 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है. यह कैलोरी सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने, काम करने की क्षमता बनाए रखने और पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी मानी जाती है. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब सरकार न्यूनतम वेतन तय करती है तो उसे यह देखना चाहिए कि कर्मचारी अपने परिवार के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीद पाने में सक्षम है या नहीं. अगर वेतन इतना कम हो कि परिवार की बुनियादी जरूरतें भी पूरी न हों, तो वेतन वृद्धि का मकसद अधूरा रह जाता है.
रेलवे ने फिटमेंट फैक्टर पर कर दी बड़ी मांग, जानें कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?
खाने की थाली से सैलरी का क्या संबंध?
पहली नजर में यह सवाल अजीब लग सकता है कि खाने की थाली का सैलरी से क्या लेना-देना है. लेकिन वेतन आयोगों के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि न्यूनतम वेतन तय करने में कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों को हमेशा आधार बनाया गया है. इन जरूरतों में भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य जरूरी खर्च शामिल होते हैं. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में महंगाई पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है. ऐसे में पुराने मानकों से कर्मचारियों के खर्च का सही आकलन नहीं हो सकता. यही वजह है कि अब ICMR के आधुनिक पोषण मानकों को शामिल करने की मांग की जा रही है. इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि एक परिवार को स्वस्थ जीवन जीने के लिए हर महीने खाने-पीने पर कितना खर्च करना पड़ता है और उसी आधार पर न्यूनतम वेतन तय किया जाए.
69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग क्यों?
JCM ने सरकार को दिए ज्ञापन में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन करीब 69,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी पीछे रह गई है. उनका तर्क है कि आज के समय में सिर्फ राशन और भोजन ही महंगा नहीं हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज, किराया, बिजली-पानी, इंटरनेट, मोबाइल और यात्रा जैसे खर्च भी तेजी से बढ़े हैं. ऐसे में कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए अधिक वेतन की जरूरत है.
फिटमेंट फैक्टर पर भी टिकी हैं उम्मीदें
8वें वेतन आयोग की चर्चा में फिटमेंट फैक्टर भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है. फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को बढ़ाया जाता है. हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि फिटमेंट फैक्टर ऐसा हो जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ा इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि अगर सरकार कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार करती है तो बेसिक सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
पूरे 22 रुपये सस्ता हो गया पेट्रोल और डीजल, सरकार ने घटाए दाम तो लोगों ने ली राहत की सांस
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह बहस?
सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ जीवनयापन का खर्च भी तेजी से बढ़ा है. ऐसे में सिर्फ मामूली वेतन वृद्धि से काम नहीं चलेगा. वे चाहते हैं कि वेतन निर्धारण का तरीका भी समय के साथ बदले. ICMR के 3490 कैलोरी फॉर्मूले को शामिल करने की मांग इसी सोच का हिस्सा है.&amp;nbsp;
सरकार का क्या है रुख?
फिलहाल सरकार की तरफ से ICMR के 3490 कैलोरी फॉर्मूले या 69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. 8वें वेतन आयोग से जुड़ी कई सिफारिशों और मांगों पर अभी चर्चा चल रही है. अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कर्मचारियों की सभी मांगें स्वीकार होंगी या नहीं.
लाखों कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर
देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस बार सिर्फ वेतन बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा. अगर वेतन निर्धारण में ICMR के पोषण मानकों जैसे आधुनिक पैमानों को शामिल किया जाता है तो यह कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है. इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol Diesel Price: ट्रंप होर्मुज से नाकाबंदी हटा देंगे तो क्या भारत में सस्ता हो जाएगा पेट्रोल&amp;डीजल? जानें कहां फंस सकता है पेंच</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Price in India: भारत में पिछले 15 दिनों के अंदर पेट्रोल और डीजल के दामों में चार बार बढ़ोतरी की गई है. जनता दिन पर दिन बढ़ती महंगाई से त्रस्त है. इसका कारण है ईरान और अमेरिका के बीच पिछले तीन महीनों से जारी युद्ध और होर्मुज संकट. लेकिन अब देश की जनता को बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में हलचल मचा दी है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से नाकाबंदी हटाने के लिए तैयार है. समझिए ट्रंप के इस बयान का भारत में तेल की बढ़ती कीमतों पर क्या असर होगा.&amp;nbsp;
ट्रंप ने क्या कहा है?
दरअसल ट्रंप ने कहा है कि ईरान को हर हाल में परमाणु बम बनाने का इरादा छोड़ना होगा. इसी के साथ उन्होंने ऐलान किया कि हॉर्मुज स्ट्रेट को तुरंत बिना किसी टैक्स और रुकावट के दोनों तरफ की शिपिंग के लिए खोल दिया जाएगा. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने वहां बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नष्ट कर दिया है और जो जहाज वहां फंसे थे, वे अब अपने घर लौट सकते हैं.
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तो क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
ट्रंप के इस फैसले का सीधा और बड़ा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है. अगर हॉर्मुज से नाकाबंदी पूरी तरह हट जाती है तो भारत में पेट्रोल-डीजल के सस्ता होने की पूरी संभावना बन जाएगी.
इसके तीन कारण हैं...
पहला- रास्ता साफ होने से दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी. जब सप्लाई बढ़ेगी तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम गिरेंगे.
दूसरा- युद्ध के खतरे की वजह से जहाजों का जो बीमा और माल ढुलाई का किराया आसमान छू रहा था, वो अब कम हो जाएगा. यानी भारत को तेल का आयात करना सस्ता पड़ेगा.
तीसरा- ट्रंप के बयान से साफ है कि ईरान के साथ भी बातचीत का रास्ता खुल रहा है. अगर ईरान अमेरिका की मांगों पर सहमति दे देता है तो कीमतें और तेजी से नीचे आ सकती हैं.
कहां फंस सकता है पेंच?
हालांकि एक बात समझनी जरूरी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम घटते ही भारत में तुरंत पेट्रोल सस्ता नहीं होता. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत की सरकारी तेल कंपनियां इस गिरावट का फायदा आम जनता तक कितनी जल्दी पहुंचाती हैं. साथ ही अगर सरकार ने इस मौके पर टैक्स नहीं बढ़ाया तो आने वाले दिनों में आपको पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बड़ी राहत देखने को मिल सकती है.
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भारत में कितना महंगा हुआ पेट्रोल डीजल?
भारत में आखिरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम 25 मई को बढ़ाए गए थे. 25 मई को पेट्रोल 2 रुपए 61 पैसे और डीजल 2 रुपए 71 पैसे महंगा हुआ था. बीते 15 दिनों में देश में पेट्रोल 7 रुपए 35 पैसे और &amp;nbsp;डीजल 7 रुपए 53 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है. तेल के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम भी बढ़ गए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Indian Govt: LPG गैस के स्टॉक पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, तेल कंपनियों से कहा&amp; 1 महीने के लिए...</title>
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        <description><![CDATA[ LPG News: ईरान और यूएस के बीच फरवरी से युद्ध चल रहा है, जो अब तक खत्म नहीं हो रहा है. इसका असर दुनियाभर में तेल के आयात पर पड़ रहा है. भारत में भी इस युद्ध की वजह से तेल और गैस की किल्लत हो रही है. इसी बीच हाल ही में भारत की मोदी सरकार ने गैस को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. सरकार की तरफ से फैसला किया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को अब कम से कम 30 दिन का एलपीजी स्टॉक रखना होगा.&amp;nbsp;
क्या बोली सरकार?दरअसल हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफिंग की, जिसमें उन्होंने कहा कि, &#039;तेल विपणन कंपनियों को कम से कम 30 दिन का एलपीजी रिजर्व बनाने के लिए कहा गया है.&#039; ये फैसला फिलहाल की स्थिति को देखते हुए लिया गया है. ताकि देशवासियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े.
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तो वहीं घरेलू एलपीजी की मांग पर सुजाता शर्मा ने कहा कि, &#039;अभी खपत 72,000 मीट्रिक टन प्रति दिन है, जिसमें से 50,000 से 52,000 मीट्रिक टन घरेलू उत्पादन है. पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले भारत का घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रति दिन था. पिछले चार दिनों में 1.78 करोड़ एलपीजी रिफिल बुकिंग मिली हैं और लगभग 1.8 करोड़ सिलेंडर डिलीवर किए गए हैं.&#039;
पेट्रोल- डीजल की बढ़ती मांग की पुष्टिइतना ही नहीं सरकार ने ये भी बताया है कि देश के कई जिलों में पेट्रोल- डीजल की मांग भी बढ़ी है. सुजाता शर्मा ने बताया कि, &#039;150 जिलों में पेट्रोल की मांग में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि 14 जिलों में 100 प्रतिशत वृद्धि देखी जा रही है. इसी तरह 156 जिलों में डीजल की मांग में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी है, जबकि 6 जिलों में 100 प्रतिशत वृद्धि देखी जा रही है.&#039;
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इसके अलावा सुजाता शर्मा ने तेल की कालाबाजारी और जमाखोरी को भी रोकने की अपील की है. साथ ही साथ कमर्शियल LPG की सप्लाई के बारे में बात करते हुए कहा है कि &#039;1 मई से अब तक 186,000 मीट्रिक टन कमर्शियल एलपीजी बेचा गया है&#039;.
समुद्री यातायात पर भी मिला अपडेटइतना ही नहीं इस प्रेस ब्रीफिंग में समुद्री यातायात पर अपडेट देते हुए बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा कि, &#039;मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज निसोस केरोस ने 25-26 मई की रात को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित पार किया और इसके 3 जून 2026 को विशाखापट्टनम पहुंचने की उम्मीद है. ये व्यापारी जहाज लगभग 270,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल ले जा रहा है. इसमें सभी विदेशी क्रू सदस्य हैं.&#039;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>SBI Rewards: एसबीआई रिवार्ड्स रीडीम करने पर मिल रहे हजारों रुपए, क्या आपके पास आया मेसेज?</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Rewards: कई बैंक अपनी किली नई स्कीम या किसी नए अपडेट को लेकर लोगों के फोन में मैसेज करते हैं. ये मैसेज किसी भी तरह के हो सकते हैं, चाहे तो मल्टीमीडिया मैसेज, टेक्स्ट मैसेज, लेकिन क्या ये सभी असली होते हैं? इस बात का पता कैसे चलेगा.? जैसे हाल ही में कुछ लोगों के पास SBI बैंक के नाम से एक मैसेज पहुंच रहा है, जिसमें रिवॉर्ड पाने के लिए APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने के लिए कहा जा रहा है. लेकिन क्या ये मैसेज सही है? क्या ये फाइल डाउनलोड करना चाहिए? आइये बताते हैं.
क्या है पूरा मामला?दरअसल कुछ दिनों से कई लोगों के पास SBI बैंक की तरफ से एक मैसेज आ रहा है. इस मैसेज में लिखा है, &#039;प्रिय कस्टमर्स, आपका एसबीआई नेटबैंकिंग रिवॉर्ड पॉइंट (Rs 9980.00) आप एक्सपायर होने वाला है! इसे अभी SBI रिवॉर्ड एप इंस्टॉल करके क्लेम करें, आपका रिवॉर्ड कैश के रूप में खाते में जमा हो जाएगा. धन्यवाद. टीम एसबीआई.&#039; अब इस मैसेज की सच्चाई खुद सरकार ने बताई है.

Did you also receive a message asking you to download &amp;amp; install an APK file to redeem SBI rewards❓Beware‼️ #PIBFactCheck❌@TheOfficialSBI NEVER sends links or APK files over SMS/WhatsApp.✔️Never download unknown files or click on such links. pic.twitter.com/mWIXrSYpRe
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) May 29, 2026



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क्या है मैसेज की सच्चाई?अब इस मैसेज की सच्चाई सरकरी एजेंसी PIB फैक्ट चेक के जरिए उजागर की गई है. जिसमें इस मैसेज के स्क्रीनशॉट को शेयर किया गया है, जिस पर साफ शब्दों में लिखा है FAKE. इसके अलावा लिखा है, &#039;ठगों से बचकर रहें! SBI कभी लिंक या अनसॉलिसिटेड एपीके फाइल्स एसएमएस या व्हॉट्सएप पर नहीं भेजता है.&#039;
इसके साथ कैप्शन में लिखा गया है, &#039;क्या आपको भी SBI रिवॉर्ड रिडीम करने के लिए APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने का मैसेज मिला है? सावधान!&#039; आगे इसे फैक्ट चेक करते हुए लिखा गया है, कि PIB फैक्ट चेक इस खबर की पुष्टि नहीं करता. &amp;nbsp;इसके साथ @TheOfficialSBI को टैग करते हुए लिखा गया है, &#039;कभी भी SMS/WhatsApp पर लिंक या APK फाइलें नहीं भेजता है. अज्ञात फाइलें डाउनलोड न करें या ऐसे लिंक पर क्लिक न करें.&#039;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Rupee News: कमजोर रुपया, मजबूत कमाई! जानिए कैसे बढ़ सकता है आपका पोर्टफोलियों रिटर्न</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Rupee: अधिकांश निवेशक शेयर बाजार पर नजर रखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग मुद्रा यानी रुपये और डॉलर की चाल पर ध्यान देते हैं. जबकि सच ये है कि रुपये की कमजोरी आपके निवेश रिटर्न को बढ़ाने में मदद कर सकती है. खासकर तब, जब आपने अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड में निवेश किया हो.&amp;nbsp;
अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड में निवेशअंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड निवेशकों का पैसा विदेशी बाजारों और अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में लगाते हैं. ऐसे में निवेश का रिटर्न सिर्फ शेयर बाजार के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि डॉलर-रुपया विनिमय दर पर भी निर्भर करता है.
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उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक ने उस समय 1 लाख रुपये अंतरराष्ट्रीय फंड में लगाए, जब 1 डॉलर = 75 रुपये था, तो उसका निवेश करीब 1,333 डॉलर के बराबर हुआ. बाद में अगर डॉलर 85 रुपये तक पहुंच जाए, तो बिना बाजार बढ़े भी निवेश की वैल्यू करीब 1.13 लाख रुपये हो सकती है. यानी सिर्फ रुपये की कमजोरी से फायदा मिल सकता है.
बाजार के प्रदर्शन से पड़ता है फर्कअगर वैश्विक बाजार भी अच्छा प्रदर्शन करें, तो रिटर्न और बढ़ सकता है. मान लीजिए फंड डॉलर में 8% रिटर्न दे और उसी दौरान रुपया 3% कमजोर हो जाए, तो भारतीय निवेशक का कुल प्रभावी रिटर्न करीब 11% तक पहुंच सकता है. अंतरराष्ट्रीय फंड सिर्फ मुद्रा लाभ के लिए नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए भी जरूरी हैं. इससे निवेशक अमेरिकी टेक कंपनियों, हेल्थकेयर और वैश्विक ब्रांड्स जैसे सेक्टरों में निवेश का मौका पा सकते हैं.
हालांकि, मुद्रा हमेशा फायदा नहीं देती. अगर रुपया मजबूत होता है, तो रिटर्न कम भी हो सकता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय फंड को लंबी अवधि के निवेश और विविधीकरण के नजरिए से देखना बेहतर माना जाता है. आमतौर पर सलाह दी जाती है कि निवेशक अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा अंतरराष्ट्रीय फंड में रख सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>BSE Limited: ट्रेडर जीते या हारे, कमाई पक्की! जानें निवेशकों की हर खरीद&amp;बिक्री से कैसे कमाता है BSE?</title>
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        <description><![CDATA[ BSE Limited: दुनिया के हर कैसीनो में एक कहावत मशहूर है, &#039;हाउस हमेशा जीतता है.&#039; यानी खिलाड़ी जीतें या हारें, कैसीनो मालिक हर दांव से पैसा कमाता है. कुछ ऐसा ही मॉडल भारत के शेयर बाजार में भी देखने को मिलता है, खासकर BSE Limited के बिजनेस में. भारत में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&amp;amp;O) ट्रेडिंग करने वाले 90% से ज्यादा छोटे निवेशक पैसा गंवाते हैं. इसके बावजूद BSE का कारोबार तेजी से बढ़ा है. वजह ये है कि BSE हर ट्रेड, हर एक्सपायरी और हर सौदे पर फीस कमाता है. ट्रेडर को फायदा हो या नुकसान, एक्सचेंज की कमाई होती रहती है.
BSE का इतिहासएशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज BSE साल 1875 में शुरू हुआ था. लंबे समय तक ये नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी NSE से पीछे माना जाता था. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी तस्वीर बदल गई. जब सुंदररमन राममूर्ति 2023 में CEO बने, तब BSE का मार्केट कैप करीब 5,000 करोड़ रुपये था. अब ये बढ़कर लगभग 1.68 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. पिछले पांच साल में शेयर ने करीब 3,985% रिटर्न दिया है.
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BSE का बिजनेस मॉडल है मजबूतइस तेजी की सबसे बड़ी वजह डेरिवेटिव कारोबार में बढ़ोतरी रही. SEBI के सख्त नियमों और NSE के कुछ बदलावों के बाद BSE के Sensex और Bankex ऑप्शन प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग तेजी से बढ़ी. FY26 में डेरिवेटिव कारोबार से मिलने वाली ट्रांजैक्शन फीस 87% बढ़कर 3,795 करोड़ रुपये पहुंच गई. BSE का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत माना जाता है क्योंकि ये खुद बाजार में दांव नहीं लगाता. ये सिर्फ ट्रेडिंग के लिए प्लेटफॉर्म, टेक्नोलॉजी और सिस्टम उपलब्ध कराता है और हर लेनदेन पर फीस कमाता है.
हालांकि इसमें जोखिम भी हैं. अगर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया भविष्य में F&amp;amp;O ट्रेडिंग पर और सख्त नियम लागू करता है, तो BSE की कमाई पर असर पड़ सकता है. फिर भी फिलहाल बढ़ती ट्रेडिंग गतिविधि और निवेशकों की संख्या BSE के लिए बड़ा फायदा साबित हो रही है.
ये भी पढ़ें: SBI Rewards: एसबीआई रिवार्ड्स रीडीम करने पर मिल रहे हजारों रुपए, क्या आपके पास आया मेसेज?
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Ethanol News: इथेनॉल वाले पेट्रोल से घट रहा है गाड़ियों का माइलेज? सर्वे में 10 में से 5 लोगों ने दिया ये जवाब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ethanol-news-इथेनॉल-वाले-पेट्रोल-से-घट-रहा-है-गाड़ियों-का-माइलेज-सर्वे-में-10-में-से-5-लोगों-ने-दिया-ये-जवाब</link>
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        <description><![CDATA[ Ethanol Fuel Impact Report: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर कई देशों पर देखने को मिल रहा है. अगर बात करें भारत की तो यहां पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और कीमतों पर इसका असर पड़ा है. हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऐसे में भारत सरकार &amp;nbsp;इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल यानी E20 पेट्रोल को तेजी से बढ़ावा दे रही है. सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों को फायदा पहुंचाने में मदद मिलेगी, लेकिन अब कई वाहन मालिकों, खासकर पुरानी पेट्रोल कार और बाइक चलाने वालों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं.&amp;nbsp;
सर्वे में क्या सामने आया?
अगर बात करें सर्वे की तो हाल ही में LocalCircles के एक सर्वे में सामने आया है कि 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के करीब 10 में से 5 मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेड कम हो गया है. इस सर्वे में 24 हजार से ज्यादा वाहन मालिकों की राय शामिल की गई. सर्वे के मुताबिक, जिन लोगों ने माइलेज घटने की शिकायत की, उनमें लगभग 25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी गाड़ी का माइलेज 20 प्रतिशत से ज्यादा तक कम हो गया. वहीं, 7 प्रतिशत लोगों ने 15 से 20 प्रतिशत तक और 13 प्रतिशत लोगों ने 10 से 15 प्रतिशत तक माइलेज घटने की बात कही.&amp;nbsp;
अब पेट्रोल पंप पर खुद चुन सकेंगे गाड़ी के हिसाब से इथेनॉल ब्लेंड, नया नियम तैयार- रिपोर्ट
सरकारी दावों और लोगों के अनुभव में फर्क
बता दें कि यह आंकड़े इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि पहले सरकार की तरफ से कहा गया था कि E20 पेट्रोल से माइलेज पर बहुत कम असर पड़ेगा. अनुमान लगाया गया था कि माइलेज में केवल 1 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन अब कई यूजर्स का कहना है कि असल जिंदगी में उन्हें ज्यादा फर्क महसूस हो रहा है. ऐसे में यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है.
पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर क्यों?
दरअसल, 2023 से पहले खरीदे गए कई पेट्रोल गाड़ी E5 या E10 जैसे कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के हिसाब से बनाए गए थे. ऐसे में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर पुराने इंजन पर ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी सामान्य पेट्रोल से कम होती है. इसका साफ मतलब यह है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा लंबे टाइम तक उपयोग करने पर इथेनॉल पुराने गाड़ियों के रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
मरम्मत खर्च बढ़ने की भी शिकायत
इसके साथ ही सर्वे में केवल माइलेज ही नहीं बल्कि गाड़ी खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं. लगभग 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उन्हें इंजन, फ्यूल लाइन, कार्बेरेटर या फिर अन्य हिस्सों से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हालांकि, ये दावे गाड़ी मालिकों के अनुभवों पर आधारित हैं. यह कोई वैज्ञानिक या सरकारी रिसर्च नहीं है. फिर भी इससे लोगों के बीच E20 पेट्रोल को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है.
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सरकार क्यों दे रही E20 को बढ़ावा?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में सरकार इथेनॉल मिश्रण को लंबे टाइम की रणनीति के तौर पर देख रही है. इससे तेल आयात कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और गन्ना व मक्का किसानों को फायदा देने की कोशिश की जा रही है. सरकार ने E20 लक्ष्य तय टाइम से पहले हासिल कर लिया है और अब फ्यूचर में E22,E25,E30 और कुछ मामलों में E85 जैसे ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी काम किया जा रहा है.
यूजर्स की सबसे बड़ी चिंता
गाड़ी मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर माइलेज कम होगा तो हर महीने पेट्रोल पर खर्च बढ़ जाएगा. इसके साथ अगर गाड़ी की मरम्मत का खर्च भी बढ़ता है तो पुरानी पेट्रोल गाड़ियां चलाना पहले के मुकाबले महंगा पड़ सकता है. हालांकि, सरकार इथेनॉल मिश्रण को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी मान रही है. वहीं दूसरी तरफ, यूजर अब यह जानना चाहते हैं कि फ्यूचर में बढ़ते इथेनॉल के साथ उनके पुराने गाड़ी कितना बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:30:47 +0530</pubDate>
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        <title>बड़ी खबर: अब पेट्रोल पंप पर खुद चुन सकेंगे गाड़ी के हिसाब से इथेनॉल ब्लेंड, नया नियम तैयार&amp; रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Ethanol&amp;nbsp;Blend: देश भर के वाहन चालकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, सरकार &#039;सुपरमार्केट-स्टाइल चॉइस&#039; लागू करने की दिशा में काम कर रही है. इसके चलते फ्यूल स्टेशनों में गाड़ी चलाने वालों को अलग-अलग इथेनॉल ब्लेंड वाले पेट्रोल का विकल्प दे सकते हैं, जिससे ग्राहक अपनी गाड़ी की कम्पैटिबिलिटी के आधार पर फ्यूल चुन सकेंगे.&amp;nbsp;
द मिंट ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि सरकार ने तेल कंपनियों को E20, E22, E25 और E30 ईंधन वेरिएंट के लिए डिस्पेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की सलाह दी है. यह कदम ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा नए इथेनॉल मिश्रणों के लिए नियम लागू करने और अप्रैल में सरकार के पूरी तरह से इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने के प्रस्ताव के बाद उठाया गया है.&amp;nbsp;
इसके पीछे सरकार का मकसद
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस नियम को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. भारत ने पहले ही 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल कर लियर है और अब इस नई नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य अगले 1-2 साल में (2027-2028 तक) इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाकर 25% (E25) और 30% (E30) तक ले जाना है. इससे कच्चे तेल की आयात पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी. पेट्रोल पंपों पर जितना अधिक इथेनॉल का ऑप्शन मिलेगा, उतनी तेजी से तेल का आयात घटता जाएगा. इससे सरकार की अरबों डॉलर की बचत होगी.&amp;nbsp;
इसका एक दूसरा फायदा यह है कि चूंकि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के और खराब अनाज से बनाया जाता है इसलिए जब पेट्रोल पंपों पर इसकी मांग बढ़ेगी, सरकार को भारी मात्रा में इथेनॉल खरीदना होगा. इसका सीधा फायदा देश के किसानों और चीनी मिलों को होगा. इन्हें इनकी फसलों का सही दाम मिलेगा.
इथेनॉल के फायदे
इथेनॉल के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पेट्रोल के मुकाबले कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसें कम छोड़ता है. इसी के चलते सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि अब वे कार और टू-व्हीलर व्हीकल्स के लिए ऐसे इंजन बनाएं, जो E20 से ऊपर यानी कि E25,E27 और E30 ईंधन को भी बिना किसी खराबी के झेल सके.
इथेनॉल के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का यह कदम शहरों में प्रदूषण को कम करने की दिशा में गेम चेंजर साबित होगा. हालांकि, इसके लिए अभी अलग डिस्पेंसिंग सिस्टम, स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लेंडिंग कंट्रोल और फ्यूल क्वालिटी मॉनिटरिंग मैकेनिज्म में निवेश की जरूरत होगी. मिंट से बात करते हुए एक सूत्र ने कहा, &amp;ldquo;फ्यूल स्टेशनों पर बिकने वाले इथेनॉल-ब्लेंडिंग पेट्रोल की जानकारी डिस्पेंसिंग पंपों पर साफ-साफ दिखानी होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि वे कौन सा फ्यूल खरीद रहे हैं। रिटेल आउटलेट्स को अलग-अलग तरह के फ्यूल पर लेबल लगाना होगा.&amp;rdquo;

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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:30:47 +0530</pubDate>
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        <title>Loan News: कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं, बैंक के इस &amp;apos;गेम&amp;apos; से बचें, घटेगा ब्याज का बोझ</title>
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        <description><![CDATA[ Loan and EMI: ज्यादातर लोग लोन लेते समय सिर्फ और सिर्फ ईएमआई की तरफ ही देखते हैं. अगर ईएमआई बजट में लगती है तो लोग जल्द से जल्द लोन लेने की योजना बनाना शुरू कर देते हैं. ऐसे में यह तरीका आपको किसी परेशानी में भी डाल सकता है. कम ईएमआई का मतलब लंबा कार्यकाल होता है जिसकी वजह से आपको समय के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा ब्जाज का बोझ चुकाना पड़ सकता है. इसलिए जब भी आप लोन लें तो इन नियमों का हमेशा ध्यान रखें.&amp;nbsp;
1. अपनी जरूरत के अनुसार ही लें उधार
हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि, आपकी सभी ईएमआई आपकी मासिक आय के सीमित हिस्से के अंदर ही होनी चाहिए. अपनी क्षमता के मुताबिक की उधार लें.&amp;nbsp;
2. लंबे कार्यकाल का नुकसान
इसके अलावा कार्यकाल जितना ज्यादा लंबा होगा, ब्याज भी समय के साथ-साथ जुड़ता जाएगा. इसलिए, थोड़ा ज्यादा ईएमआई देकर छोटा कार्यकाल चुनना आपके लिए बेहतरीन विक्लप है.&amp;nbsp;
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3. ब्याज दर और छिपे हुए खर्च
इतना ही नहीं, सिर्फ विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली ब्याज दरों की तुलना करना बंद कर देनी चाहिए. प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट पेनाल्टी जैसे छिपे हुए खर्चों को आपको सही तरह से समझने की जरूरत है.&amp;nbsp;
4. छोटे प्रीपेमेंट का बड़ा असर
एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि लोन को जल्दी खत्म करने के लिए किसी बड़ी रकम का इंतजार न करें. यानी समय-समय पर किए गए छोटे-छोटे भुगतान भी लोन को बेहद ही कम करने में सबसे ज्यादा मदद करता है. ऐसा करने से भविष्य में लगने वाला ब्याज और लोन धीरे-धीरे कम होने लगता है.&amp;nbsp;
हांलाकि, लोन तभी किफायती होता है जब वह आपके भविष्य पर किसी तरह का दबाव नहीं डालता है. सिर्फ ईएमआई देखने के बजाय कार्यकाल, कुल ब्याज और अपनी वास्तविक चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखना अनिवार्य है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:30:46 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Loan, News:, कम, EMI, का, मतलब, हमेशा, सस्ता, लोन, नहीं, बैंक, के, इस, गेम, से, बचें, घटेगा, ब्याज, का, बोझ</media:keywords>
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        <title>Desi Bling: पत्नी को हर साल 3 किलो सोना देता है ये बिजनेसमैन, ऐसा क्या काम करता है ये अरबपति आदमी?</title>
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        <description><![CDATA[ Desi Bling: इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में बना रियलिटी शो &#039;देसी ब्लिंग&#039; दुबई के बड़े बिजनेसमैन और उनकी लाइफ को दिखा रहा है. ये रियलिटी शो कंटेस्टेंट्स के हाई- फाई अंदाज और उनकी दुबई की लाइफ क वजह से काफी लाइम लाइट बटोर रहा है. इस शो में एक बिजनेसमैन ने अपनी पत्नी के साथ पार्टिसिपेट किया है. जिन्होंने शो के दौरान ये बताया कि उनके पास 40 किलो सोना है. ये सुकर हर कोई हैरान रह गया और सभी लोग जानना चाहते हैं कि इनका आखिर किस चीज का कारोबार है?
कौन हैं ये बिजनेसमैन?दरअसल ये बिजनेसमैन सतीश सानपाल हैं, जो हैं तो भारतीय लेकिन अब दुबई में सैटल हो गए हैं. सतीश की पत्नी बिंदा ने शो के दौरान बताया है कि सतीश उन्हें हर साल 3 किलो गोल्ड दिलाते हैं. हर साल 3 किलो गोल्ड मिलकर अब बिंदाके पास कुल 40 किलो गोल्ड हो गया है. इस एक बात ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है.
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कौन हैं सतीश सानपाल और क्या करते हैं?सतीश सानपाल अब दुबई में रहते हैं लेकिन पहले वो भारतीय मूल के ही रहे हैं. सतीश पहले मध्यप्रदेश के जबलपुर के निवासी थे. लेकिन अब वो कई सालों से दुबई में सेल हो गए हैं. यहां उनके कई सारे बिजनेस हैं, जो दुनियाभर में मशहूर हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी और छोटे कारोबार से शुरुआत की. बाद में वो दुबई चले गए, जहां उन्होंने बिजनेस खड़ा किया.
मुख्य रूप से सतीश ANAX Holding के फाउंडर और चेयरमैन हैं. उनकी कंपनी रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और इन्वेस्टमेंट सेक्टर में काम करती है. उनका बिजनेस लग्जरी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट, हॉस्पिटैलिटी और होटल बिजनेस, निवेश और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, हाई-एंड प्रॉपर्टी और लक्जरी लाइफस्टाइल सेक्टर जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है.
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सतीश पर दर्ज हैं कई आपराधिक मामले?रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि सतीश के ऊपर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं. भारतीय पुलिस दस्तावेजों के हिसाब से सतीश के खिलाफ मध्यप्रदेश के कई थानों में कुल नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं. उनके ऊपर सट्टेबाजी, जुआ और कई गैर कानूनी मामलों में FIR दर्ज हैं. इसके अलावा उनके ऊपर 1000 करोड़ के हवाला रैकेट में शामिल होने के भी आरोप लगे हुए हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:30:45 +0530</pubDate>
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        <title>DK Shivakumar Net worth: कलाई में रोलेक्स&amp;करोड़ों की जमीन, अरबों के मालिक हैं कर्नाटक के होने वाले सीएम डीके शिवकुमार, जानें नेटवर्थ</title>
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        <description><![CDATA[ DK Shivakumar Net worth: कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है. इसके लिए वो राजभवन में पहुंचे जहां राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को उन्होंने इस्तीफा सौंपा, क्योंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत वहां मौजूद नहीं थे. इस दौरान सिद्धारमैया काफी इमोशनल भी नजर आए. वहीं अब उनके बाद कर्नाटक के नए सीएम डीके शिवकुमार बनने जा रहे हैं.
डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्रीसिद्धारमैया ने इस्तीफा देने से पहले गुरुवार को अपने कैबिनेट के साथियों के साथ चर्चा की, इस दौरान ही उन्होंने अपने इस्तीफा देने के फैसले के बारे में बताया. साथ ही ये भी बताया कि कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर उपमुख्यमंत्री डी शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे. अब इसके बाद से ही डीके शिवकुमार की सम्पत्ति को लेकर भी चर्चा हो रही है. तो आइये जानते हैं डीके शिवकुमार कितनी सम्पत्ति के मालिक है.
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डीके शिवकुमार की नेटवर्थडीके शिवकुमार की कुल घोषित संपत्ति लगभग 1,413 करोड़ रुपये है. चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक, इसमें 1,140 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 273 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है. वहीं उन पर करीब 265 करोड़ रुपये की देनदारी भी है.
साल 2023 में उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय ये जानकारी दी थी. साल 2018 में उनकी घोषित संपत्ति 840 करोड़ रुपये थी, जो अब काफी बढ़ गई है.&amp;nbsp;
महंगी गाड़ी और घड़ियों के हैं शौकीनडीके शिवकुमार के हलफनामे के मुताबिक उन्हें महंगी गाड़ियों और क्लासिक वॉचेज का काफी शौक है. उनके पास एक रजिस्टर्ड टोयोटा क्वालिस गाड़ी, रोलैक्स और हुब्लोट जैसे महंगे ब्रांड्स की घड़ियां हैं. इसके अलावा सोना-चांदी और अन्य संपत्तियां भी उनके नाम पर हैं.
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आपराधिका मामले भी हैं दर्जहलफनामे में ये भी बताया गया है कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय कनकपुरा से विधायक शिवकुमार के खिलाफ 19 आपराधिक मामले लंबित थे. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 00:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>Siddaramaiah Net Worth: देश के तीसरे सबसे अमीर मुख्यमंत्री थे सिद्धारमैया, अमीरी में भी और कर्ज में भी आगे, जानें नेट वर्थ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/siddaramaiah-net-worth-देश-के-तीसरे-सबसे-अमीर-मुख्यमंत्री-थे-सिद्धारमैया-अमीरी-में-भी-और-कर्ज-में-भी-आगे-जानें-नेट-वर्थ</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/siddaramaiah-net-worth-देश-के-तीसरे-सबसे-अमीर-मुख्यमंत्री-थे-सिद्धारमैया-अमीरी-में-भी-और-कर्ज-में-भी-आगे-जानें-नेट-वर्थ</guid>
        <description><![CDATA[ Karnataka Former CM Siddaramaiah Net Worth: कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अब डीके शिवकुमार कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री होंगे. इस बीच उनके इस्तीफे की खबरों के साथ ही उनकी संपत्ति और कर्ज को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. ADR और MyNeta की रिपोर्ट के मुताबिक, 77 साल के सिद्धारमैया देश के तीसरे सबसे अमीर मुख्यमंत्री माने जा रहे हैं, लेकिन साथ ही वे सबसे ज्यादा कर्जदार मुख्यमंत्रियों में भी शमिल हैं.
करोड़ों की संपत्ति के मालिक सिद्धारमैया
बता दें कि चुनाव के दौरान दिए गए हलफनामे के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और उनके परिवार की टोटल संपत्ति करीब 51.93 करोड़ ( लगभग 52 करोड़ रुपये) बताई गई है.
क्या है रेट्रो जीएसटी, क्यों ऑनलाइन गेमिंग कंपनी से सरकार वसूल रही 10 साल का बकाया टैक्स?
बैंक से लेकर निवेश तक बड़ा पोर्टफोलियो
उनकी चल संपत्ति में कई तरह के इन्वेस्ट शामिल हैं जैसे...

अलग-अलग बैंकों में लगभग 7 करोड़ जमा.
वहीं शेयर,बॉन्ड और म्यूचुअल फंड में करीब 2.42 करोड़.
इसके साथ ही जीवन बीमा योजनाओं में लगभग 33 लाख का इन्वेस्ट.
और सोना-चांदी मिलाकर करीब 97 लाख रुपये की संपत्ति.

अचल संपत्ति में भी मजबूत है स्थिति
सिद्धारमैया और उनकी पत्नी के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन और मकान हैं. मैसूरु और बेगलुरु के आसपास कृषि भूमि, व्यावसायिक प्लॉट और आवासीय प्रॉपर्टी मिलाकर इनकी कीमत 30 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है.&amp;nbsp;
चारधाम जा रहे हैं तो सावधान! ढीली हो रही श्रद्धालुओं की जेब, पेट्रोल-डीजल के साथ होटल और टैक्सी भी हुई महंगी
कर्ज का बोझ भी काफी भारी
हैरानी की बात तो यह है कि जहां एक तरफ संपत्ति का आंकड़ा बड़ा है तो वहीं दूसरी ओर कर्ज भी कम नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, उनके परिवार पर करीब 23.86 करोड़ का लोन है. अगर बात करें देशभर की तो कर्ज के मामले में वे दूसरे नंबर पर हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 00:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Inflation: पेट्रोल&amp; डीजल के बाद मुंबई में महंगी हुईं सब्जियां, Heatwave का भी है इसमें बड़ा हाथ, जानें कैसे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/inflation-पेट्रोल-डीजल-के-बाद-मुंबई-में-महंगी-हुईं-सब्जियां-heatwave-का-भी-है-इसमें-बड़ा-हाथ-जानें-कैसे</link>
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        <description><![CDATA[ Mumbai Vegetable Price Hike: देशभर में लगातार पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ रहे हैं. महज 10 दिनों में चार बार दाम बढ़ने की वजह से जनता के ऊपर काफी दबाव बन रहा है. मुंबई में भी लोग ईंधन के दाम बढ़ने से पहले से ही परेशान थे, वहीं अब खबरें हैं कि यहां सब्जियों की कीमत भी आसमान छू रही है. APMC वाशी मार्केट में पिछले कुछ हफ्तों में ही सब्जियों के दाम इतनी तेजी से बढ़ गए कि लोगों के घर के किचन तक का बजट हिल गया है.
क्यों बढ़े दाम?मुंबई में सब्जियों के दाम बढ़ने वजह पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ना तो बताया ही जा रहा है. साथ ही साथ व्यापारियों का ये भी कहना है कि तेज गर्मी, फसल खराब होना भी इसकी बड़ी वजह हैं. मंगलवार को बाजार में सब्जियां लेकर करीब 480 गाड़ियां पहुंचीं, लेकिन ये सामान्य दिनों के मुकाबले कम थीं. थोक बाजार में सब्जियों के दाम करीब 20% बढ़ चुके हैं, जबकि खुदरा बाजार में कीमतें इससे भी ज्यादा बढ़ी हैं. मटर, फ्रेंच बीन्स और सेम जैसी सब्जियां मुंबई और नवी मुंबई के कई इलाकों में 100 रुपये किलो से ऊपर बिक रही हैं.
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किचन का हिल गया है बजटमिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक उनके साथ कई खरीदारी करने आए लोगों ने बातचीत में बताया है कि उनके घर के किचन का सारा बजट गड़बड़ा गया है. खारघर की रहने वाली फातिमा बर्डे ने कहा कि, &#039;हर हफ्ते सब्जियों का खर्च बढ़ रहा है. पहले 400-500 रुपये में 2-3 दिन की सब्जियां आ जाती थीं, लेकिन अब सामान्य सब्जियां भी महंगी हो गई हैं.जिसकी वजह से हरी सब्जियां और बीन्स खरीदना कम करना पड़ रहा है.&#039;
वाशी की रहने वाली सविता राजीव ने का कहना है कि, &#039;अब लोग कम मात्रा में सब्जियां खरीद रहे हैं. टमाटर, बीन्स, धनिया और पत्तेदार सब्जियां काफी महंगी हो चुकी हैं. इसका सबसे ज्यादा असर मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ रहा है.
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जून में बढ़ेंगे और दामइतना ही नहीं व्यापारियों का तो यहां तक कहना है कि अभी स्कूल बंद हैं और छुट्टियां चल रही हैं इस वजह से मांग थोड़ी कम है. लेकिन जून के पहले हफ्ते से घरों, होटलों, कैंटीन और टिफिन सेवाओं की मांग बढ़ेगी. अगर बाजार में सब्जियों की सप्लाई कम रही, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 00:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Inflation:, पेट्रोल-, डीजल, के, बाद, मुंबई, में, महंगी, हुईं, सब्जियां, Heatwave, का, भी, है, इसमें, बड़ा, हाथ, जानें, कैसे</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Inflation News: आपकी बढ़ती सुख&amp;सुविधाएं खा रही हैं आपका फंड, क्या होती है &amp;apos;लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन&amp;apos;?</title>
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        <description><![CDATA[ Lifestyle Inflation: जब सैलरी बढ़ती है, तो लोगों का पहला मन होता है कि अब लाइफस्टाइल को बेहतर बनाया जाए. इसके लिए लोग नया फोन खरीदते हैं, बड़ा घर खरीदते हैं, महंगी कार लेते हैं, विदेश घूमते हैं और ज्यादा से ज्यादा खर्च करते हैं. धीरे-धीरे ये शौक लोगों की जरूरत बन जाते हैं. इसे ही &#039;लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन&#039; कहा जाता है.
बढ़ती जा रही समस्याआज के समय में ये समस्या और बढ़ गई है क्योंकि सोशल मीडिया पर हर दिन लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाई देती है. लोग अब पड़ोसियों से नहीं, बल्कि इन्फ्लुएंसर्स, सेलिब्रिटीज और अमीर लोगों से तुलना करने लगे हैं. इससे महंगा खर्च करना सामान्य लगने लगता है. धीरे-धीरे महंगे मोबाइल, ब्रांडेड कपड़े, बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग और लग्जरी चीजें रोजमर्रा का हिस्सा बन जाती हैं. समस्या ये है कि एक बार बढ़ा खर्च बाद में कम करना मुश्किल होता है. नौकरी जाने या आर्थिक परेशानी के समय यही खर्च बोझ बन जाते हैं.
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20 साल बाद बढ़ सकता है खर्चऐसी लाइफस्टाइल आने वाले समय में आपका खर्च बढ़ा सकती है. जैसे मान लीजिए आज आपके परिवार का खर्च 50,000 रुपये महीना है. अगर महंगाई औसतन 6% साल के हिसाब से रही, तो 20 साल बाद यही खर्च लगभग 1.6 लाख रुपये महीना हो सकता है. यानी अगर आपकी लाइफस्टाइल नहीं भी बदले, तब भी महंगाई खर्च को कई गुना बढ़ा देती है. अगर हर कुछ साल में लाइफस्टाइल भी महंगी होती जाए, तो भविष्य की आर्थिक जरूरतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी.
इसी वजह से कई लोग अच्छी कमाई के बावजूद पैसे बचा नहीं पाते. उनकी आय बढ़ती है, लेकिन खर्च उससे भी तेजी से बढ़ जाते हैं.
इन गलतियों को करने से बचेंअगर आप भी लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन के जाल से बचना चाहते हैं, तो कुछ गलतियांकरने से आपको बचना चाहिए. जैसे:

हर बार सैलरी बढ़ने पर खर्च बढ़ाना
सिर्फ दिखावे के लिए बड़ा घर या महंगी कार खरीदना
हर चीज EMI पर लेना
इमरजेंसी फंड न बनाना
निवेश को टालते रहना

SIP है जरूरीमहंगाई और लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका SIP (Systematic Investment Plan) है. इससे धीरे-धीरे बड़ा फंड बनाया जा सकता है. अगर कोई 25 साल की उम्र में 10,000 रुपये महीने की SIP शुरू करे और हर साल उसे 10% बढ़ाए, तो 30 साल में करीब 8 करोड़ रुपये तक का फंड बन सकता है.
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सबसे जरूरी बातमहंगाई को रोकना संभव नहीं है, लेकिन लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन को कंट्रोल किया जा सकता है. ज्यादा पैसा कमाना ही असली लक्ष्य नहीं होना चाहिए. असली लक्ष्य भविष्य को सुरक्षित रखना, आर्थिक आजादी और तनावमुक्त जीवन है. अच्छी कमाई आपकी लाइफस्टाइल बेहतर बनाती है, लेकिन अनुशासित निवेश आपका भविष्य सुरक्षित बनाता है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI Proposal: 10000 से ज्यादा के ऑनलाइन ट्रांसफर में होगी 1 घंटे की देरी? RBI के प्रस्ताव पर बैंकों ने क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rbi-proposal-10000-से-ज्यादा-के-ऑनलाइन-ट्रांसफर-में-होगी-1-घंटे-की-देरी-rbi-के-प्रस्ताव-पर-बैंकों-ने-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ RBI New Proposal: RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से समय- समय पर फ्रॉड और स्कैम रोकने के लिए नए- नए तरीके आजमाए जाते रहे हैं. इसी कड़ में हाल ही में ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए RBI ने बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी लागू करने का प्रस्ताव दिया है. लेकिन RBI के इस प्रस्ताव पर कई बैंकों ने चिंता जाहिर की है.
क्या कहना है बैंकों का?कई बैंकों का कहना है कि RBI द्वारा तय की गई 10,000 रुपये की लिमिट बहुत कम है. उनका मानना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 25,000 रुपये किया जाना चाहिए. बैंक के कर्मचारियों के मुताबिक, 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी से UPI और ऑनलाइन पेमेंट की रफ्तार प्रभावित हो सकती है.
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एनडीटीवी प्रॉफिट के साथ बातचीत में एक वरिष्ठ सरकारी बैंक अधिकारी ने कहा कि इमरजेंसी पेमेंट और टैक्स से जुड़े ट्रांजैक्शन को इस नियम से बाहर रखा जाना चाहिए. साथ ही कुछ छोटे और कम तकनीकी क्षमता वाले बैंकों के लिए किल स्विच जैसी सुविधा लागू करना मुश्किल हो सकता है.
क्या था RBI का प्रपोजल?बता दें कि RBI ने पिछले महीने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए एक चर्चा पत्र जारी किया था. इसमें चार बड़े सुझाव दिए गए थे, जिसमें:

बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी
हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए एक्स्ट्रा सुरक्षा जांच
केवल भरोसेमंद खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की अनुमति
ग्राहकों को बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त कंट्रोल देना

RBI के इस फैसले के बाद पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि 25 लाख से ज्यादा रकम पाने वाले खातों की अलग जांच वाला नियम भी व्यवहारिक नहीं है. फ्रॉड करने वाले लोग कई छोटे खातों का इस्तेमाल कर इस नियम से बच सकते हैं. भारत में डिजिटल फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साल 2025 में डिजिटल धोखाधड़ी के करीब 28 लाख मामले सामने आए, जबकि 2024 में ये दर 24 लाख थी. वहीं फ्रॉड की रकम बढ़कर लगभग 22,931 करोड़ पहुंच गई.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Elon Musk का महा प्लान, एक होने जा रही हैं Tesla और Space X? बाजार में मची हलचल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/elon-musk-का-महा-प्लान-एक-होने-जा-रही-हैं-tesla-और-space-x-बाजार-में-मची-हलचल</link>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk: दुनिया के सबसे चर्चित कारोबारी और अरबपतियों की लिस्ट में शुमार इलॉन मस्क एक बार फिर से चर्चा में छाए हुए हैं. खबरें हैं कि इलॉन बिजनेस जगत में कुछ बड़ा और नया करने जा रहे हैं. जिसके चलते बाजार में भी हलचल मची हुई है.&amp;nbsp;
दरअसल खबरें हैं कि इलॉन मस्क की कंपनी SpaceX जल्द ही बड़ा IPO लाने की तैयारी में है. इसी बीच एक रिपोर्ट में ये भी दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में SpaceX और Tesla का मर्जर करने की प्लानिंग भी मस्क कर रहे हैं.
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IPO के दस्तावेज हुए जमाकुछ रिपोर्ट्स की मानें तो, SpaceX की तरफ से 20 मई 2026 को अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के पास IPO के डॉक्युमेंट्स भी जमा किए गए हैं. माना जा रहा है कि ये दुनिया के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है. कंपनी करीब 75 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में है और इसकी वैल्यूएशन लगभग 1.75 ट्रिलियन डॉलर आंकी जा रही है.
टेस्ला और स्पेसएक्स होंगी एकसीएनबीसी की रिपोर्ट्स की मानें तो इलॉन मस्क ने अपने करीबी लोगों के साथ टेस्ला और स्पेसएक्स को एक करने पर चर्चा की है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं हुई है. रिपोर्ट में तो ये भी कहा गया है कि दोनों कंपनियां पहले से कई संसाधन भी शेयर करती हैं. टेस्ला के कुछ कर्मचारियों का मानना है कि दोनों कंपनियों का एक साथ आना लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है.
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इंटरेस्टिंग होगा कोलेबोरेशनइन दोनों कंपनियों का कोलेबोरेशन काफी इंटरेस्टिंग माना जा रहा है. क्योंकि टेस्ला इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी है और स्पेसएक्स अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करती है ऐसे में दोनों कंपनियां मिलकर क्या कमाल करेंगी इस पर नजर है. हालांकि दोनों कंपनियों में एक बात कॉमन है कि दोनों ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से निवेश कर रही हैं.
इतना ही नहीं दोनों कंपनियों के बोर्ड में भी कई समान लोग शामिल हैं. इलॉन मस्क दोनों कंपनियों के बोर्ड का हिस्सा हैं और कई अन्य अधिकारी भी पहले टेस्ला और स्पेसएक्स दोनों से जुड़े रहे हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price Today: 28 मई को फिर महंगा हुआ सफर? जानिए आपके शहर में क्या हैं पेट्रोल&amp;डीजल के ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-28-मई-को-फिर-महंगा-हुआ-सफर-जानिए-आपके-शहर-में-क्या-हैं-पेट्रोल-डीजल-के-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-28-मई-को-फिर-महंगा-हुआ-सफर-जानिए-आपके-शहर-में-क्या-हैं-पेट्रोल-डीजल-के-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Price Today: देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पिछले करीब 13 दिनों में तेल कंपनियां कई बार दाम बढ़ा चुकी हैं और अब इसका असर सीधे लोगों के घर के बजट पर दिखाई दे रहा है. 28 मई 2026 यानी आज भी देश के ज्यादातर शहरों में पेट्रोल और डीजल ऊंचे स्तर पर बिक रहे हैं. मिडिल ईस्ट तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से भारत में तेल महंगा बना हुआ है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी हो सकती है.
पिछले 13 दिनों में कितना महंगा हुआ तेल?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 13 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है. इस दौरान चार बार दाम बढ़ाए गए. दिल्ली में जहां पेट्रोल पहले 94-95 रुपये प्रति लीटर के आसपास था, वहीं अब यह 102 रुपये के पार पहुंच चुका है. डीजल भी करीब 8 रुपये तक महंगा हो चुका है.
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा हो रहा है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए ग्लोबल बाजार में बढ़ोतरी का असर सीधे यहां दिखाई देता है. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी तेल आयात को और महंगा बना रही है.
भारत में बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम, पाकिस्तान क्या कर रहा? जानें दोनों देशों की ताजा स्थिति
28 मई 2026: राज्य अनुसार पेट्रोल-डीजल रेट लिस्ट-&amp;nbsp;



राज्य / शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल (₹/लीटर)
डीजल (₹/लीटर)


दिल्ली &amp;nbsp;
102.14 &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;
94.28


मुंबई
111.21
97.83 &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;


कोलकाता
105.63&amp;nbsp;
96.45&amp;nbsp;


चेन्नई
104.98&amp;nbsp;
96.12 &amp;nbsp;


नोएडा&amp;nbsp;
99.84 &amp;nbsp;
91.12&amp;nbsp; &amp;nbsp;


गुरुग्राम&amp;nbsp;
100.45&amp;nbsp;
&amp;nbsp;92.08&amp;nbsp;


&amp;nbsp;पटना&amp;nbsp;
110.34&amp;nbsp;
&amp;nbsp;96.89 &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;


लखनऊ
101.22 &amp;nbsp;
93.41


अहमदाबाद
99.92 &amp;nbsp; &amp;nbsp;
94.16 &amp;nbsp;



दिल्ली-NCR में सबसे ज्यादा असर
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में लाखों लोग रोजाना निजी गाड़ियों से ऑफिस जाते हैं. ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों का महीने का फ्यूल बजट बिगाड़ दिया है. ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि कमाई का बड़ा हिस्सा अब सिर्फ ईंधन में ही निकल जा रहा है.
मुंबई और पटना में सबसे ज्यादा दबाव
मुंबई और पटना जैसे शहरों में पेट्रोल पहले ही 110 रुपये के आसपास पहुंच चुका है. इन शहरों में ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर अब सब्जियों, राशन और दूसरी जरूरी चीजों पर भी दिखने लगा है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी इकोनॉमी पर पड़ता है.
आम आदमी का बिगड़ा बजट
पिछले कुछ दिनों में सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि सीएजी, दूध और दूसरी जरूरी चीजों के दाम भी बढ़े हैं. ऐसे में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. बता दें कि&amp;nbsp;अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं.
अब सरकार कराएगी शॉपिंग, जल्द लॉन्च होगी वेबसाइट, जानिए आपको इससे कैसे मिलेगा फायदा? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price, Today:, मई, को, फिर, महंगा, हुआ, सफर, जानिए, आपके, शहर, में, क्या, हैं, पेट्रोल-डीजल, के, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>सैलरी&amp;DA हाइक पर सबसे बड़ा अपडेट, 8वें वेतन आयोग को लेकर इस दिन कर्मचारियों के साथ होगी महाबैठक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-da-हाइक-पर-सबसे-बड़ा-अपडेट-8वें-वेतन-आयोग-को-लेकर-इस-दिन-कर्मचारियों-के-साथ-होगी-महाबैठक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-da-हाइक-पर-सबसे-बड़ा-अपडेट-8वें-वेतन-आयोग-को-लेकर-इस-दिन-कर्मचारियों-के-साथ-होगी-महाबैठक</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Meeting News: बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों के बीच वेतन और पेंशन संशोधन के लिए कर्मचारी संगठनों के लगातार दबाव की वजह से आठवें वेतन आयोग को लेकर विचार-विमर्श तेज हो गया है.अब आठवां वेतन आयोग को लेकर बेहद जरूरी खबर आ रही है. &amp;nbsp;6 और 7 जुलाई को आठवां वेतन आयोग भुवनेश्वर, ओडिशा का दौरा करेगा और संगठनों, यूनियनों और कर्मचारी संघों से बातचीत करेगा. ये दौरा क्षेत्रीय वार्ताओं को मजबूत बनाने और वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़ी &amp;nbsp;मांगों को जानने के मकसद से किया जा रहा है.
26 मई को जारी एक सरकारी नोटिस में आयोग ने कहा कि भुवनेश्वर दौरे के दौरान आयोग से बातचीत करने के इच्छुक हितधारक 15 जून, 2026 या उससे पहले समय के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं. नोटिस में कहा गया है कि, संगठनों और यूनियनों को आयोग के सामने अपना प्रस्ताव दाखिल करने के बाद बने &quot;अद्वितीय ज्ञापन आईडी&quot; के साथ अपने अनुरोध प्रस्तुत करने होंगे.
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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 8वां वेतन आयोग कर्मचारी प्रतिनिधियों और पेंशनभोगी निकायों से प्रतिक्रिया और मांगें जानने के लिए देश के अलग अलग हिस्सों में सुझाव का दायरा धीरे-धीरे बढ़ा रहा है. आयोग पहले ही दिल्ली में बैठकें कर चुका है और हाल के हफ्तों में लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर सहित कई अन्य शहरों के दौरे का भी एलान किया है.&amp;nbsp;
सरकारी सूचना के अनुसार, हितधारक 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए से सूचना-पत्र पेश किया जा सकता हैं. सूचना-पत्र पेश करने की आखिरी तारिख 31 मई, 2026 है. सूचना में कहा गया है, &#039;स्थान और बैठक की समय सारिणी की जानकारी अलग से दी जाएगी. साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग से बैठकें जरूरी समय पर आयोजित की जाएंगी.
एयर इंडिया से उड़ने वाले सावधान, घरेलू-अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कर दी भारी कटौती, सफर से पहले देखें लिस्ट
कर्मचारी संघों ने आयोग के सामने रखी ये मांगें-

उच्चतर उपयुक्तता कारक
महंगाई भत्ता (डीए) का मूल वेतन में विलय
परिवार इकाई सूत्र में संशोधन
पेंशन सुधार
और ओपीएस जैसे सुरक्षा उपाय

ऐसे में गौर करने वाली बात यह है कि, भुवनेश्वर की यह दौरा चर्चाओं का एक और जरूरी दौर बनने की उम्मीद है क्योंकि आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले स्थानीय टिप्पणी इकट्ठा करना जारी रखेगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सैलरी-DA, हाइक, पर, सबसे, बड़ा, अपडेट, 8वें, वेतन, आयोग, को, लेकर, इस, दिन, कर्मचारियों, के, साथ, होगी, महाबैठक</media:keywords>
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        <title>Shopping News: अब सरकार कराएगी शॉपिंग, जल्द लॉन्च होगी वेबसाइट, जानिए आपको इससे कैसे मिलेगा फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ Khaadi India Portal: हमारे देश में खादी सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसी को लेकर खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन मनोज कुमार ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि देश में जल्द ही खादी इंडिया उत्पादों के लिए एक नया और आधुनिक ई-कॉमर्स पोर्टल की शुरुआत होने जा रही है. जहां, पिछले साल 2 लाख करोड़ की बिक्री के बाद अब आम जनता के लिए बड़ा एक खजाना खुलने जा रहा है.&amp;nbsp;
1. क्या है नए पोर्टल की खास तकनीक?
चेयरमैन मनोज कुमार ने इस नए पोर्टल की तकनीक और फीचर्स के बारे में बताया कि यह पोर्टल मोबाइल-फर्स्ट पर ही पूरी तरह से आधारित होगा. जिसमें, हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें, बेहतर भुगतान सुविधाएं और &#039;शॉप द लुक&#039; जैसे कमाल के फीचर्स ग्राहकों को देखने को मिलेंगे. इसके अलावा उन्होंने आगे कहा कि इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य यह है कि जेन जी को सबसे ज्यादा आकर्षित कर ब्रांड की कहानी को पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ पेश करना है.&amp;nbsp;
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2. बिक्री और उत्पादन के रिकॉर्ड आंकड़े
तो वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी उत्पादों की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. जहां, रिकॉर्ड 1 लाख 87 हजार 105 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. जो कि साल 2013-14 में केवल 31 हजार 154 करोड़ रुपये हुआ करता था. इतना ही नहीं, वित्त वर्ष 2026-27 में इस बिक्री के 2.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है.&amp;nbsp;
3. रोजगार में देखने को मिली बढ़ोतरी
खादी और ग्रामोद्योग गतिविधियों में कुल रोजगार 2013-14 के 1.30 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 2.04 करोड़ हो गया है. यानी, साल 2013-14 के मुकाबले &amp;nbsp;2025-26 में खादी के माध्यम से करोड़ों को लोगों को रोजगार का अवसर मिला है.&amp;nbsp;
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4. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का योगदान
इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 में 66 हजार 494 नई इकाइयां स्थापित की गईं. जिसके तहत 7 लाख 31 हजार 434 लोगों को रोजगार के सुनहरे मौके मिले. इसके लिए 7 हजार 375 करोड़ रुपये के कर्ज पर 2 हजार 457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी भी लोगों को दी जा चुकी है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 20:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rupee News: तेल, रुपया और युआन... जानिए क्यों पुराने आर्थिक नियमों से नहीं संभल रही हमारी करेंसी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ सालों में पेट्रोल, गैजेट्स और रोजमर्रा की चीजें तेजी से महंगी हुई हैं, तो इसके पीछे सिर्फ महंगाई नहीं है. असली कहानी तीन बड़ी ताकतों के इर्द-गिर्द घूम रही है रुपया, कच्चा तेल और चीनी युआन. पहले माना जाता था कि अगर रुपया कमजोर होगा तो भारत के एक्सपोर्ट बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. 2019 से 2025 के बीच के आर्थिक ट्रेंड बताते हैं कि अब कमजोर रुपया हमेशा फायदे का सौदा नहीं रहा. आज भारत की अर्थव्यवस्था सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं है, बल्कि तेल की कीमतें और चीन पर बढ़ती निर्भरता भी रुपये की चाल तय कर रही हैं.
भारत के लिए तेल क्यों सबसे बड़ा खतरा?
भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही सीधा असर भारत की जेब पर पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो भारत पर सालाना करीब 16 अरब डॉलर से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यही वजह है कि जब तेल महंगा होता है, तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का खर्च भी बढ़ जाता है.
रुपया कमजोर होने का फायदा अब कम क्यों?
एक समय था जब कमजोर रुपया भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए फायदा माना जाता था. क्योंकि इससे भारत का सामान विदेशों में सस्ता पड़ता था. लेकिन अब भारत की अर्थव्यवस्था बदल चुकी है. पहले भारत मुख्य रूप से कपड़े और सस्ते उत्पाद बेचता था. अब भारत फार्मा, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है. इन सेक्टर्स में सिर्फ सस्ता होना काफी नहीं है. यहां क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन ज्यादा मायने रखती है. इसलिए अब सिर्फ रुपये के कमजोर होने से एक्सपोर्ट में बड़ा फायदा नहीं मिलता.
आईटी सेक्टर और फैक्ट्रियों की अलग कहानी
कमजोर रुपया हर सेक्टर को एक जैसा प्रभावित नहीं करता. आईटी और BPO कंपनियों को कुछ फायदा जरूर मिलता है क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है. लेकिन अब AI और ऑटोमेशन की वजह से यह फायदा भी पहले जितना बड़ा नहीं रहा. दूसरी तरफ मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की मुश्किल बढ़ जाती है. भारत में मोबाइल, कार और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों को चिप्स, मशीनें और पार्ट्स विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. जब रुपया गिरता है, तो इन चीजों की कीमत और बढ़ जाती है. यानी उत्पादन महंगा हो जाता है और कंपनियों का मुनाफा कम हो जाता है.
चीन बना सबसे बड़ी चिंता
डॉलर के अलावा अब चीन का युआन भी भारत के लिए बड़ा फैक्टर बन गया है. भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सोलर सेक्टर में चीन पर काफी निर्भर है. स्थिति ऐसी है कि भारत की कई इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान का 80 से 95 प्रतिशत हिस्सा चीन से आता है. अगर रुपया कमजोर होता है, तो चीन से आने वाला सामान और महंगा हो जाता है. इसका असर भारत की फैक्ट्रियों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है.
क्यों पहले बढ़ता है नुकसान?
अर्थशास्त्र में इसे जे कर्व इफेक्ट कहा जाता है. इसका मतलब है कि जब रुपया कमजोर होता है, तो शुरुआत में फायदा नहीं बल्कि नुकसान ज्यादा दिखाई देता है. क्योंकि भारत तेल जैसी जरूरी चीजें खरीदना बंद नहीं कर सकता. भले कीमत बढ़ जाए, फिर भी आयात करना पड़ता है. यानी कमजोर रुपया पहले व्यापार घाटा बढ़ाता है और बाद में जाकर कुछ फायदा देता है. 2022 में भी ऐसा ही हुआ था, जब भारत का चालू खाता घाटा काफी बढ़ गया था.
अब सिर्फ रुपये से नहीं चलेगा काम
अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ रुपये को बचाना नहीं है. असली चुनौती है देश के अंदर मजबूत उत्पादन तैयार करना. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को तेल पर निर्भरता कम करनी होगी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी और चीन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा घटाना होगा. अगर भारत हाई-टेक प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मजबूत सप्लाई चेन तैयार कर लेता है, तो रुपया लंबे समय तक मजबूत रह सकता है.
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रुपया कितना गिरेगा. असली सवाल यह है कि भारत कितना मजबूत उत्पादन कर पाएगा. क्योंकि आने वाले समय में वही देश आगे बढ़ेंगे जो सिर्फ मुद्रा नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत होंगे. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 20:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CNG Price: महंगी सीएनजी ने बढ़ाई सबकी परेशानी, टूट रहा लोगों का सब्र, ABP से बोले ड्राइवर्स&amp; अब तो बस...</title>
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        <description><![CDATA[ CNG Price Hike: दिल्ली NCR समेत देश के सही राज्यों में CNG की कीमतों में फिर बढ़ोतरी ने आम लोगों और कमर्शियल ड्राइवरों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच टैक्सी, ऑटो और कैब चलाने वाले लोग अब खुद को आर्थिक दबाव में घिरा महसूस कर रहे हैं. ड्राइवरों का कहना है कि कमाई घट रही है, खर्च बढ़ रहा है और कंपनियां अपना कमीशन काटने में कोई कमी नहीं कर रहीं.
छोटी दूरी की राइड्स में भी कंपनियां का 25 से 30 फीसदी तक होता है कमीशन
कार ड्राइवर गुलशन कुमार सैनी का कहना है कि मौजूदा हालात में गाड़ी चलाना घाटे का सौदा बन चुका है. उनका आरोप है कि छोटी दूरी की राइड्स में भी कंपनियां 25 से 30 फीसदी तक कमीशन काट लेती हैं. उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को प्राइवेट गाड़ियों की जगह कमर्शियल वाहन और मेट्रो इस्तेमाल करने की सलाह देती है, लेकिन लोग अब भी अकेले कार लेकर निकल रहे हैं. ऐसे में ट्रैफिक और ईंधन दोनों का दबाव बढ़ता जा रहा है.
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सैलरी नहीं बढ़ती, सिर्फ महंगाई बढ़ती है
जसवीर सिंह (नौकरी पेशा वाले) ने कहा कि सभी प्रकार की ईंधनों की कीमतें धीरे-धीरे इसलिए बढ़ाई जा रही हैं ताकि जनता का गुस्सा अचानक न भड़के. उनका मानना है कि अगर महंगाई के साथ लोगों की आय भी बढ़ती तो असर कम पड़ता, लेकिन फिलहाल हालात उल्टे हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण जरूरी है, वरना आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ेंगी.
पेट्रोल-डीजल से लेकर सिलेंडर तक, लोगों ने सरकार पर उठाए सवाल
निजी कार चालक अमित नाम के एक अन्य नागरिक ने मौजूदा हालात को लेकर सरकार पर तीखी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष में रहते हुए जो नेता महंगे पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर को लेकर विरोध करते थे, अब वही मुद्दों पर चुप हैं. उनका कहना है कि CNG के दाम 35 रुपये से बढ़कर 83 रुपये तक पहुंच चुके हैं, लेकिन टैक्सी किराए में कोई राहत नहीं दी जा रही. उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा दबाव मिडिल क्लास और ड्राइवरों पर पड़ रहा है.
रेट बढ़े तो घटने भी चाहिए, लोगों ने मांगी राहत
रूपेश कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर भारत में तुरंत असर दिखता है, लेकिन जब कीमतें कम होती हैं तो राहत नहीं मिलती. उनका कहना है कि मिडिल क्लास हर तरफ से दबाव झेल रहा है. टैक्स से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक सबसे ज्यादा बोझ नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आने वाले समय में आम लोगों की परेशानियों को समझेगी.
EMI, लोन और घटती कमाई ने ड्राइवरों की बढ़ाई चिंता
गजेंद्र बजाज ने बताया कि होम लोन, गाड़ी की किश्त और लगातार बढ़ती महंगाई ने ड्राइवरों की आर्थिक हालत कमजोर कर दी है. उनका कहना है कि कई ड्राइवर मानसिक तनाव में जी रहे हैं क्योंकि आमदनी पहले जैसी नहीं रही. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐप बेस्ड कंपनियां बेहद कम किराए में राइड्स करा रही हैं, जिससे स्थानीय ड्राइवरों की कमाई पर असर पड़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि कर्ज और बैंक के दबाव की वजह से कई लोग मानसिक रूप से टूट चुके हैं.
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दिल्ली में फिर 11 दिन में चौथी बार बढ़े CNG के दाम
राजधानी दिल्ली में CNG अब 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है. इससे पहले कीमत 81.09 रुपये प्रति किलो थी. बीते 11 दिनों में यह चौथी बार है जब CNG महंगी हुई है. 23 मई को भी 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी. लगातार बढ़ रही कीमतों ने कैब, ऑटो और निजी वाहन चालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है.
देश के कई शहरों में CNG 90 रुपये के पार
दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता जैसे शहरों में CNG के दाम 90 रुपये प्रति किलो के आसपास या उससे ऊपर पहुंच चुके हैं. हैदराबाद में CNG सबसे महंगी होकर 97 रुपये प्रति किलो बिक रही है. वहीं मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन वहां भी लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है.
बढ़ती महंगाई के बीच राहत की उम्मीद में आम लोग
ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम आदमी के बजट को पूरी तरह प्रभावित किया है. टैक्सी और ऑटो चालक जहां किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, वहीं नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है. लोगों का कहना है कि अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में हालात और मुश्किल हो सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 20:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Byju Raveendran: मेस्सी और टीम इंडिया की जर्सी से जेल तक, सबसे बड़े स्टार्टअप ने रवींद्रन को बना दिया था अरबपति</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/byju-raveendran-मेस्सी-और-टीम-इंडिया-की-जर्सी-से-जेल-तक-सबसे-बड़े-स्टार्टअप-ने-रवींद्रन-को-बना-दिया-था-अरबपति</link>
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        <description><![CDATA[ Byju&#039;s Collapsed News: इन दिनों मशहूर एडटेक कंपनी बायजू &amp;nbsp;वित्तीय संकट और कानूनी विवादों में घिरी हुई है. बायजूस के फाउंडर रवींद्रन को सिंगापुर की एक कोर्ट ने छह महीने की जेल की सजा सुनाई है. &amp;nbsp;उन पर कोर्ट के कई आदेशों का पालन नहीं करने का आरोप है. &amp;nbsp;कोर्ट ने साथ ही उन पर 70,500 डॉलर का जुर्माना भी लगाया है.
एक समय ऐसा भी था जब प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी बायजू के ग्लोबल अंबेसडर बने, जिससे पता चलता है कि भारत का सबसे फेमस एडटेक स्टार्टअप कितना बड़ा बन चुका था. कंपनी का लोगो भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर दिखाई दिया. ग्लोबल इन्वेस्टरों ने स्टार्टअप में अरबों डॉलर का निवेश किया. जिसके बाद बायजू रवींद्रन भारत के स्टार्टअप बूम के सबसे बड़े चेहरों में से एक बन गए.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला और क्यों हुई सजा?
दरअसल, यह पूरा मामला रवींद्रन की प्रोपर्टीयों और कानूनी आदेशों को नजरअंदाज से जुड़ा हुआ है. सिंगापुर की कोर्ट के मुताबिक, &amp;nbsp;रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों से जुड़ी &amp;nbsp;वित्तीय जानकारी को जानबूझकर नजरअंदाज किया. इन आदेशों का पालन न करने की वजह से उन्हें कोर्ट &amp;nbsp;की अवमानना का दोषी पाया गया और छह महीने की जेल की सजा तय की गई. सजा के अलावा, कोर्ट ने रवींद्रन पर जुर्माना भी लगाया है. कानूनी खर्च के तौर पर 90,000 सिंगापुर डॉलर (करीब 70,500 अमेरिकी डॉलर) का भुगतान करने का निर्देश दिया है.&amp;nbsp;
Byju Raveendran: बायजूस के संस्थापक रवींद्रन को 6 महीने की जेल, लेकिन क्यों? कभी थे अरबपति, अब 0 है नेटवर्थ
एक समय कंपनी के सर पर था &#039;ताज&#039;
साल 2011 जब थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड के रूप में कंपनी ने अपनी नीव रखी. बायजू ने भारत में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की भारी मांग का फायदा उठाते हुए तेजी से विकास किया. समय भी बिल्कुल अनुकूल था. जहां भारत में स्मार्टफोन का विस्तार हो रहा था तो, दूसरी ओर ऑनलाइन शिक्षा मुख्यधारा बन गई, कंपनी ने खुद को शिक्षा के भविष्य के रूप में खुद को खड़ा किया.&amp;nbsp;
बात साल 2020 की है. जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रहा था, स्कूल बंद हो गए, छात्र ऑनलाइन पढ़ाई करने लगे और डिजिटल शिक्षा की मांग में जबरदस्त उछाल आया. निवेशकों ने तुरंत निवेश किया और बायजू ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़े लेवल पर अपना विस्तार किया.
आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने आकाश एजुकेशनल सर्विसेज, ग्रेट लर्निंग और एपिक समेत कई फर्मों पर अपना कब्जा किया, जिनके सौदे आमतौर पर करीब 3 अरब डॉलर के थे. जिसके बाद साल 2022 में बायजू की कुल वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर के पार पहुंच गई. कंपनी ने बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाए, मशहूर हस्तियों के साथ कोलाबरेशन किया, &amp;nbsp;रवींद्रन विश्व के नए टेक अरबपति का खिताब अपने नाम कर चुके थे.
एयर इंडिया से उड़ने वाले सावधान, घरेलू-अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कर दी भारी कटौती, सफर से पहले देखें लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 20:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITR News: फॉर्म 16 आने से पहले क्या भर सकते हैं आईटीआर? जल्दबाजी में टैक्स फाइल करने वाले जान लें जरूरी बात</title>
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        <description><![CDATA[ ITR Rules 2026: आयकर रिटर्न दाखिल करने में बहुत दिक्कतें होती हैं. हर साल की तरह इस बार भी आयकर विभाग ने ऑनलाइन फाइलिंग शुरू कर दी है. विभाग ने आईटीआर-1 और आईटीआर-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटीज़ जारी कर दी हैं, जिससे कई टैक्सपेयर फॉर्म 16 प्राप्त होने से पहले ही प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, जो आमतौर पर जून के बीच तक आता है.&amp;nbsp;
दिलचस्प बात यह है कि इस साल टैक्स दाखिल करने के नियमों में कुछ जरूरी बदलाव हैं. हालांकि फाइलिंग का तरिका पहली नज़र में थोड़ा फैमिलियर लग सकता है, लेकिन फॉर्म और रिपोर्टिंग नियमों में कई बदलावों का मतलब है कि टैक्सपेयर को पहले से ज्यादा जागरूक रहने की जरूरत हो सकती है. वही नए प्रकटीकरण आवश्यकताओं से लेकर वित्तय फायदा रिपोर्टिंग में बदलाव तक, आकलन साल (AY) 2026-27 के लिए अपना रिटर्न दाखिल करना पिछले साल जैसा बिल्कुल नहीं हो सकता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा, भले ही नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो चुका है, फिर भी पुराने आयकर एक्ट 1961 के तहत यह रिटर्न दाखिल करने का आखिरी राउंड होगा. चूंकि वित्तीय साल 2025-26 के लिए टैक्स का हिसाब पुराने कानून के तहत ही किया जाएगा, इसलिए टैक्सपेयर को रिटर्न दाखिल करते समय जरूर ध्यान देना चाहिए.
दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय की रिपोर्टिंग
इस साल की एक बड़ी राहत उन टैक्सपेयर के लिए है जिनके पास एक से अधिक मकान हैं. पहले, आयकर-1 (सहज) दाखिल करने वाले कर्मचारी व्यक्तियों और आयकर-4 (सुगम) दाखिल करने वाले लघु व्यवसाय करदाताओं के पास आय रिपोर्टिंग के लिए सीमित ऑपशन थे. लेकिन अब, टैक्सपेयर इन प्रपत्रों का इस्तमाल करते हुए ज्यादातर दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय का खुलासा कर सकते हैं. सरल शब्दों में, यह है कि वेतनभोगी और दो मकानों के मालिक व्यक्ति जटिल आयकर प्रपत्रों के बजाय आसान आयकर प्रपत्रों का उपयोग जारी रख सकते हैं.
Rupee vs Dollar: क्या वाकई अपनी असली कीमत से कम पर ट्रेड कर रहा है भारतीय रुपया? RBI गवर्नर ने दिया जबाव
वसूल न हो सकने वाले किराए को लेकर नया खुलासा
इसी के साथ एक और बदलाव जिस पर मकान मालिकों का ध्यान जा सकता है, वह है वसूल न हो सकने वाले किराए से जुड़ा एक नई खुलासा आवश्यकता. दरअसल, आयकर विभाग ने आईटीआर फॉर्म, जिनमें आईटीआर-1 और आईटीआर-4 शामिल हैं, में &quot;वसूल न हो सकने वाले किराए की राशि&quot; नामक एक अलग खंड जोड़ा है. &amp;nbsp;बात करें पहले कि तो, पहले इन फॉर्मों को भरने वाले करदाताओं के पास वसूल न हो सकने वाले किराए की जानकारी देने के लिए कोई अलग स्थान नहीं था. &amp;nbsp;इस बदलाव का मकसद किराये से होने वाली कमाई के खुलासे को ज्यादा व्यापक और साफ सुथरा बनाना है.
ITR Filing: टैक्सपेयर्स ध्यान दें! इनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले तैयार रखें ये जरूरी डॉक्यूमेंट्स
बैंक बैलेंस की जानकारी देना अब जरूरी&amp;nbsp;
Presumptive Taxation Scheme के तहत आयकर रिटर्न (ITR-4) दाखिल करने वाले टैक्सपेयर के लिए एक ज्यादा जानकारी देना जरूरी हो गया है. धारा 44एडी, 44एडीए और 44एई के तहत आने वाले लोगो को अब 31 मार्च, 2026 तक अपने सभी एक्टिव बैंक खातों का कुल समापन बैलेंस बताना होगा. यह जानकारी आयकर रिटर्न(ITR-4) के ई21 क्षेत्र में देनी जरूरी है. टैक्स एक्सपर्टों &amp;nbsp;का कहना है कि गलत रिपोर्टिंग या बकाया राशि का खुलासा न करने पर कर नोटिस या जुर्माना लग सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ITR, News:, फॉर्म, आने, से, पहले, क्या, भर, सकते, हैं, आईटीआर, जल्दबाजी, में, टैक्स, फाइल, करने, वाले, जान, लें, जरूरी, बात</media:keywords>
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        <title>Education Loan: युवा भारतीयों में कर्ज लेने का बढ़ा क्रेज, क्यों तेजी से बढ़ रही है स्टूडेंट लोन की मांग?</title>
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        <description><![CDATA[ Education Loan News: अक्सर लोग घर बनाने, जमीन खरीदने के लिए लोन लेते है. आजकल भारतीय युवाओं में लोन लेने को लेकर इच्छुकता बढ़ी है. अब बड़ी संख्या में युवा खरीदारी के लिए ही नहीं ब्लकि कुछ अलग उद्देश्यों के लिए लोन ले रहे हैं, जैसे कि नए स्किल्स सीखना और करियर की संभावनाओं को बेहतर बनाना.&amp;nbsp;
दरअसल, आज के इस डीजिटल दौर में कई युवा भारतीयों के लिए, शिक्षा अब कॉलेज तक ही नहीं सिमट कर रह गई है. &amp;nbsp;भले ही डिग्री पहला द्वार खोलने में मदद करती है. लेकिन काम की जगाहों में योग्य बने रहने के लिए लगातार नए स्किल्स, प्रमाणपत्र और एक्सपेरीमेंट प्राप्त करना बेहद जरूरी है. &amp;nbsp;आगे बढ़ने का दबाव बेहद जरूरी हो गया है, और इसके साथ-साथ लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है.
बात चाहे सरकारी परीक्षा की तैयारी हो, कोडिंग प्रशिक्षण शिविर में दाखिला लेना हो, कोई विदेशी भाषा सीखना हो या कोई ऑनलाइन कोर्स करना हो, शिक्षा धीरे-धीरे एक बार का लक्ष्य नहीं बल्कि एक फिक्सड यानी तय &amp;nbsp;खर्च बनती जा रही है, और कई युवा कमाने वाले भारी बचत होने तक इंतजार नहीं करना चाहते.&amp;nbsp;
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युवा लोनदाता ट्रेंड में चल रहा आगे&amp;nbsp;
डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म रुपीरेडी के आंकड़ों के अनुसार, शिक्षा से जुडे़ लोन युवा भारतीयों के बीच तेजी से पसंद किया जा रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष में, सभी पर्सनल लोन लेने वालों में से लगभग 14 प्रतिशत ने शिक्षा से जुड़े लोन लिए है.&amp;nbsp;
लोन को लेकर युवाओं में बढ़ी दिलचस्पी&amp;nbsp;
सबसे दिलचस्प बात यह कि, पढ़ाई से जुड़े इन लोनों में से करीब 46% प्रतिशत &amp;nbsp;21 से 30 &amp;nbsp;साल की उम्र के लोगों ने लिया था. वही 16.1% प्रतिशत लोन 31 से 35 साल की उम्र &amp;nbsp;के उधारकर्ताओं द्वारा लिए गए थे. ऐसे में &amp;nbsp;यह एक जरूरी बदलाव की ओर इशारा करता है, शिक्षा से जुड़ा लोन अब केवल कॉलेज की फीस जमा &amp;nbsp;करने वाले छात्रों या परिवारों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कामकाजी आयु के युवा भी इन्हें ज्यादा अहमियत दे रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>ब्याज दरों का खेल और शेयर बाजार की चाल, जानिए क्यों रेपो रेट बढ़ते ही मार्केट में आ जाता है तूफान</title>
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        <description><![CDATA[ Central Bank Repo Rate: जब भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या फेडरल रिजर्व जैसे सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को लेकर कोई भी अपडेट देते हैं, तब सिर्फ बैंकिंग सेक्टर ही नहीं बल्कि पूरा शेयर बाजार उथल- पुथळ हो जाता है. दरें बढ़ने की खबर आते ही अक्सर बाजार में गिरावट दिखती है, जबकि दरें घटने पर इनवेस्टर खरीदारी शुरू कर देते हैं और बाजार में तेजी आ जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि ब्याज दरों का सीधा असर कंपनियों की कमाई, निवेशकों के फैसलों और शेयरों की वैल्यू पर पड़ता है.
कैसे शुरू होता है असर?सेंट्रल बैंक जिस दर पर बैंकों को पैसा उधार देता है, उसे भारत में रेपो रेट कहा जाता है. जब RBI इस दर को बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है. इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन पर ब्याज बढ़ा देते हैं. इसका असर सीधे कंपनियों और आम लोगों दोनों पर पड़ता है.
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कंपनियों का खर्च बढ़ जाता हैज्यादातर कंपनियां कारोबार बढ़ाने के लिए बैंक से कर्ज लेती हैं. मान लीजिए किसी ऑटो कंपनी ने 1,000 करोड़ रुपये का लोन लिया हुआ है. अगर ब्याज दर 8% से बढ़कर 9% हो जाए, तो कंपनी को हर साल करोड़ों रुपये एक्स्ट्रा ब्याज देना पड़ेगा. इससे कंपनी का मुनाफा घट जाता है. दूसरी तरफ, महंगे कार लोन की वजह से ग्राहक नई कार खरीदने से बचते हैं. यानी कंपनी को एक तरफ ज्यादा ब्याज देना पड़ता है और दूसरी तरफ बिक्री भी घट जाती है. यही वजह है कि शेयर कीमतों पर दबाव बढ़ता है.
शेयरों की वैल्यू क्यों घटती है?शेयर बाजार भविष्य की कमाई पर चलता है. निवेशक ये देखते हैं कि कोई कंपनी आने वाले सालों में कितना मुनाफा कमा सकती है. लेकिन जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बैंक एफडी और सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है. ऐसे में निवेशकों को सुरक्षित निवेश ज्यादा आकर्षक लगने लगता है.
उदाहरण के लिए, अगर बैंक FD सिर्फ 3% ब्याज दे रही हो, तो लोग बेहतर रिटर्न के लिए शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं. लेकिन अगर FD पर 7%&amp;ndash;8% रिटर्न मिलने लगे, तो कई निवेशक जोखिम वाले शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश में चले जाते हैं.
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बाजार से पैसा निकलने लगता हैहाई इंटरेस्ट रेट के दौर में बड़े निवेशक और फंड मैनेजर भी अपना पैसा शेयर बाजार से निकालकर बॉन्ड और FD जैसे सुरक्षित ऑप्शंस में लगाने लगते हैं. इससे बाजार में नकदी कम हो जाती है और शेयर सूचकांकों पर दबाव बढ़ जाता है.
किन सेक्टरों पर पड़ता है ज्यादा असर?

टेक और ग्रोथ कंपनियां: टेक कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य पर आधारित होता है. इसलिए ब्याज दर बढ़ने पर इनके शेयर सबसे ज्यादा दबाव में आते हैं.
बैंकिंग सेक्टर: कई बार बैंकों को शुरुआती दौर में फायदा होता है. बैंक लोन पर ब्याज जल्दी बढ़ा देते हैं, लेकिन जमा पर ब्याज धीरे बढ़ाते हैं. इससे उनका मार्जिन बेहतर हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Silver News: अब नकली चांदी से सावधान! सिक्कों और गहनों में मिलाई जा रही है सस्ती धातु, BIS ने किया अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Silver Purity News: भारतीय बाजार में इन दिनों तेजी से सोने और चांदी की कीमतों में इजाफा हो रहा है. जिसके बावजूद भी इसकी डिमांड भी लगातार बढ़ ही रही है. वैश्विक स्तर पर चल रहे हालातों का भी इसकी बिक्री पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है. इसी बीच अब खबरें ऐसी भी सामने आ रही हैं कि चांदी की खपत और मांग के चलते बाजार में इसकी शुद्धता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
बाजार में मिल रही मिलावटी चांदीदरअसल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) ने सितंबर 2025 से चांदी की सभी चीजों पर हॉलमार्किंग को जरूरी कर दिया था, लेकिन अभी तक भी बड़ी संख्या में व्यापारी इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं. बाजार में बिकने वाले कई चांदी के बार, सिक्के और बर्तन 999 शुद्धता मानक पर खरे नहीं उतरते हैं और उनमें BIS प्रमाणित हॉलमार्क भी नहीं होती है. ऐसे में ये ग्राहकों के साथ धोखा ही कहलाया जाता है.
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ये है चांदी के बड़े केंद्रभारत में चांदी के केंद्र माने जाने वाले शहरों में जयपुर, राजकोट, आगरा, कोल्हापुर, सलेम और कटक हैं. यहां पर बड़े स्तर पर धार्मिक वस्तुएं और गहने बनाए जाते हैं. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये शहर भीअशुद्ध चांदी के केंद्र हो सकते हैं. इन सभी जगहों पर बड़ी मात्रा में चांदी के बर्तन, गहने, सिक्के आदि तैयार किए जाते हैं.
चांदी की खपतबता दें कि भारत में हर साल करीब 7 हजार टन चांदी की खपत होती है, लेकिन इसके लिए केवल 286 अस्सेयिंग और हॉलमार्किंग सेंटर मौजूद हैं. ऐसे में शुद्धता मापी भी कैसे जाए. तो वहीं चांदी के मुकाबले देश में सोने की खपत करीब 800-850 टन है, लेकिन उसके लिए 1,595 हॉलमार्किंग सेंटर हैं. ऐसे में स्थिति साफ है कि चांदी की खपत ज्यादा होने के बाद भी बाजार में इसकी जांच व्यवस्था काफी कमजोर है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>बाजार गिरा, फिर भी चमके डिविडेंड शेयर! ITC से बजाज ऑटो तक, जानें किन स्टॉक्स पर है फोकस,</title>
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        <description><![CDATA[ EX-Dividend Date: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 करीब 0.49 प्रतिशत से टूटकर 23,913.70 के स्तर पर बंद हुआ. बाजार के कमजोर होते ही निवेशकों की नजर अब उन बड़ी कंपनियों पर टिकी हुई हैं, जिन्होंने मई 2026 के लिए डिविडेंड और एक्स-डिविडेंड डेट का ऐलान किया है.
इस लिस्ट में आईटीसी लिमिटेड, बजाज ऑटो, टोरेंट फार्मास्युटिकल्स, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, और बैंक ऑफ इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
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एक्स-डिविडेंड डेट क्या है?एक्स-डिविडेंड डेट वो तारीख है, जो तय करती है कि किसी निवेशक को कंपनी का घोषित डिविडेंड मिलेगा या नहीं. अगर किसी निवेशक को डिविडेंड का फायदा लेना है, तो उसे एक्स-डिविडेंड डेट से पहले शेयर खरीदने होते हैं. अगर शेयर एक्स-डेट वाले दिन या उसके बाद खरीदे जाते हैं, तो उस डिविडेंड का अधिकार पुराने शेयरधारक के पास ही रहता है. इसी वजह से डिविडेंड में रुचि रखने वाले निवेशक इन तारीखों का खास ख्याल रखते हैं.
इन कंपनियों पर है निवेशकों की नजर?
आईटीसी लिमिटेडये देश की सबसे बड़ी विविध कारोबार वाली कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी FMCG, सिगरेट, होटल, पैकेजिंग और एग्री बिजनेस जैसे क्षेत्रों में काम करती है. ITC लंबे समय से लगातार डिविडेंड देने के लिए जानी जाती है.
बजाज ऑटोये भारत की प्रमुख टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहन निर्माता कंपनी है. पल्सर और डोमिनार जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के कारण कंपनी की मजबूत पहचान है. मजबूत कैश फ्लो की वजह से कंपनी को निवेशक पसंद करते हैं.
टोरेंट फार्मास्यूटिकल्सये दवा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में शामिल है. जिसमें हार्ट संबंधी बीमारियां, डायबिटीज और अन्य बीमारियों की दवाइयों के कारोबार में निवेश किया जाता है.
ICICI लोम्बार्डये निजी क्षेत्र की बड़ी जनरल इंश्योरेंस कंपनी है, जो मोटर, हेल्थ और ट्रैवल इंश्योरेंस जैसी सेवाएं देती है.
बैंक ऑफ इंडियाये सार्वजनिक क्षेत्र का बड़ा बैंक है, जो रिटेल बैंकिंग, कॉर्पोरेट लोन और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर तेजी से काम कर रहा है.
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डिविडेंड स्टॉक्स क्यों पसंद करते हैं निवेशक?डिविडेंड देने वाली कंपनियों को आमतौर पर मजबूत और स्थिर माना जाता है. ऐसे स्टॉक्स निवेशकों को नियमित आय के साथ लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने का मौका भी देते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल ज्यादा डिविडेंड देखकर निवेश नहीं करना चाहिए. कंपनी की वित्तीय स्थिति, भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन को भी ध्यान में रखना जरूरी है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Nepal: नेपाल में महंगाई का महा&amp;विस्फोट, 3 महीने में 60% महंगा हुआ डीजल, रोटी, कपड़ा और मकान पर भी संकट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/nepal-नेपाल-में-महंगाई-का-महा-विस्फोट-3-महीने-में-60-महंगा-हुआ-डीजल-रोटी-कपड़ा-और-मकान-पर-भी-संकट</link>
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        <description><![CDATA[ Nepal LPG Price Update: ईरान युद्ध और होर्मुज तनाव का सीधा असर केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि भारत के पड़ोसी देश नेपाल पर भी सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है. जहां, नेपाल में तेजी से बढ़ती जा रही महंगाई ने आम जनता की जेब पर प्रहार करना शुरू कर दिया है. इसी बीच कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में पिछले तीन महीनों के अंदर डीजल की कीमतों में 60 प्रतिशत और पेट्रोल के दामों में 28 प्रतिशत तक का रिकॉर्ड उछाल दर्ज किया जा चुका है.&amp;nbsp;
नेपाल के हर घरों में बिगड़ा बजट
दरअसल, युद्ध की वजह से तेजी से हुए ईंधनों की कीमतों में उछाल के कारण अब नेपाल के हर घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ता हुआ नज़र आ रहा है. जहां, रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली रसोई गैस की कीमतों में भी 11.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली रही है. इसके अलावा अब लोगों को सबसे ज्यादा इस बात की चिंता है कि वे आखिर अपना घर कैसे चलाएंगे?
Petrol-Diesel Price Hike: 10-15 रुपये सस्ता हो पेट्रोल-डीजल, बढ़ती कीमतों के बीच CTI की सरकार से बड़ी मांग
माल ढुलाई की लागत में बढ़ोतरी दर्ज
इतना ही नहीं, ईंधन के महंगा होने का सबसे बड़ा असर देश की परिवहन व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. जहां, आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सार्वजनिक वाहनों का किराया 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है. जिसकी वजह से देश के अंदर सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने की लागत में लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
हांलाकि, माल ढुलाई महंगी होने का सीधा असर अब लोगों की रसोई घर में देखने को मिल रहा है. जिसको लेकर खुदरा व्यापारियों ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि परिवहन खर्च बढ़ने की वजह से फल, सब्जियां, दालें और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों के दाम हर हफ्ते तेजी से बदलते जा रहे हैं जिसकी वजह से लोगों ने खरीददारी भी कम कर दी है.&amp;nbsp;
Petrol-Diesel Price Hike: 10 दिनों में चौथा झटका! बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, दिल्ली में 100 रुपये के पार पहुंचा भाव
आम जनता की जेब पर पड़ रहा असर
नेपाल में इस वक्त हालात बेहद चिंताजनक वाले हैं. एक तरफ जहां लोगों की जेब पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ खाने-पीने की सारी चीजें लगातार तेजी से महंगी होते जा रही है. जिसको लेकर कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जल्द ही सुधार नहीं देखने को मिलता है, तो आने वाले दिनों में नेपाल में महंगाई की स्थिति और भी ज्यादा खराब होते जाएगी.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fixed Deposit Rules: मैच्योरिटी से पहले एफडी बंद करने पर बैंक कितना काटते हैं चार्ज? जानें नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fixed-deposit-rules-मैच्योरिटी-से-पहले-एफडी-बंद-करने-पर-बैंक-कितना-काटते-हैं-चार्ज-जानें-नियम</link>
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        <description><![CDATA[ Fixed Deposit: आमतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट को सबसे ज्यादा सुरक्षित निवेश के रूप में माना जाता है. जहां, लोग सालों के लिए अपना पैसा सुरक्षित तरह से बिना किसी परेशानी के जमा करते हैं. लेकिन, ज्यादातर लोग यह सोचकर भी अपनी एफडी करवाते हैं कि अवधि पूरी होने से पहले वे जमा किए गए पैसे की तरफ देखेंगे भी नहीं. आप से बेहद ही कम लोगों को इस बारे में जानकारी होगी कि अचानक जरूरत पड़ने पर समय से पहले एफडी तोड़ना आपका कितना भारी पड़ सकता है और क्यों?
एफडी तोड़ना क्यों पड़ सकता है भारी?
ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि एफडी को बीच में ही तोड़ने पर बैंक ज्यादा से ज्यादा जुर्माना के तौर पर उनकी रकम को काटेगा. लेकिन, जल्दबाजी के चक्कर में लोग यह भूल जाते हैं कि बैंक आपके मुनाफे का पूरा हिसाब-किताब ही बदल देती है. जैसे उदाहरण के लिए, अगर आपने 5 साल के लिए एफडी की थी और किसी कारणवर्श उसे एक साल के अंदर ही तोड़ दिया तो बैंक आपको 5 साल वाली उच्च ब्याज दर का फायदा देने से पूरी तरह से साफ इंकार कर देगा.&amp;nbsp;
UPI यूजर्स के लिए अलर्ट! ब्लॉक हो जाएगा पेमेंट या घट जाएगी लिमिट, असामान्य लेनदेन पर बैंक सख्त
इतना ही नहीं, बैंक उन जमा की गई राशि पर सिर्फ और सिर्फ 1 साल वाली कम अवधि की ब्याज दर को पूरी तरह से लागू भी कर देगा. तो &amp;nbsp;वहीं, दूसरी तरफ कम अवधि की ब्याज दर लागू होने के बाद आपका &amp;nbsp;बैंक उस पर 0.5 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तक का जुर्माना अलग से लगाएगा. &amp;nbsp;
आखिर क्या है बैंकों के विभिन्न नियम?&amp;nbsp;
इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि एफडी तोड़ने के नियम हर बैंकों में अलग-अलग होते हैं. जिसको लेकर कुछ बैंक वरिष्ठ नागरिकों को जुर्माने में थोड़ी छूट देने का काम करते हैं. इसके अलावा, अन्य बैंकों में तो, &amp;lsquo;नो-पेनल्टी एफडी&amp;rsquo; भी उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें सामान्य एफडी के मुकाबले शुरुआत से ही ब्याज दर लोगों को कम दिया जाता है.&amp;nbsp;
पैसे होने के बावजूद भी समय से पहले क्यों नहीं चुका सकते लोन? जानिए क्या है 12 महीने का कड़ा नियम
एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि एफडी अगर आप समय से पहले तोड़ देते हैं तो, जितने दिन भी आपका पैसा बैंक में रहा और उस पर जो भी ब्याज बनेगा, वह पूरी तरह से टैक्सेबल माना जाएगा. ऐसे में यह लगने वाला टैक्स आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से कटेगा जिससे हाथ में आने वाला पैसा और घट जाएगा. इसलिए, एफडी तोड़ने का कदम उठाने से पहले अपने बैंक के नियमों और नुकसान के बारे में अच्छी तरह से जानना बेहद ही अनिवार्य होता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब खाने के तेल पर सरकार की नजर, नहीं चलेगा वजन का खेल, नए नियम का क्या होगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ New Rules For Oil Packs: मार्केट में खाने के तेल के पैकेट कई अलग-अलग साइज में बिक रहे हैं, जैसे 650 ग्राम, 700 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम. ऐसे में ग्राहकों को कीमतों की सही तुलना करने में दिक्कत होती है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार नए नियम लाने पर विचार कर रही है.
उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक, खाने के तेल के पैकेट के लिए मानक साइज तय किए जा सकते हैं. यह कदम लीगल मेट्रोलॉजी यानी वैधानिक माप-तौल नियमों के तहत उठाया जाएगा. नए नियम लागू होने के बाद पैकेट 200 ml, 500 ml, 1 से 5 लीटर, 15 लीटर या किलो और 20 लीटर या 20 किलो जैसे तय साइज में मिल सकते हैं.&amp;nbsp;
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उद्योग संगठनों ने जताई चिंता
बता दें कि हाल ही में उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें खाने के तेल उद्योग से जुड़े बड़े संगठनों ने हिस्सा लिया. इस संगठनों ने बाजार में पैकेट के बढ़ते अलग-अलग साइज को लेकर चिंता जताई है. उद्योग संगठनों का कहना है कि एक जैसे मानक साइज होने से ग्राहकों को तेल की कीमत समझने और अलग-अलग ब्रांड की तुलना करने में आसानी होगी. इसी वजह से खाने के तेल की प्रमुख किस्मों के लिए मानक पैकेट साइज तय करने पर सहमति बनी है.
छोटे पैकेट फिलहाल रह सकते हैं बाहर
उद्योग संगठनों ने सुझाव दिया है कि 200 ml से छोटे पैकेट को इस नियम के दायरे से बाहर रखा जाए. इससे कम कीमत वाले छोटे पैकेट पहले की तरह बाजार में उपलब्ध रहेंगे और आम ग्राहकों को परेशानी नहीं होगी.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>तेल की धार&amp;जेब पर मार: पिछले 12 दिनों में महंगाई से लुट गया आम आदमी, बिगड़े बजट का रिपोर्ट कार्ड देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Inflation In India:&amp;nbsp;पिछले 12 दिनों में आम आदमी की जेब पर महंगाई ने ऐसा हमला किया है कि घर का पूरा बजट ही गड़बड़ा गया है. पेट्रोल-डीजल से लेकर सीएनजी, दूध, सोना-चांदी और रोजमर्रा की कई चीजों के दाम बढ़ चुके हैं. जैसे- जैसे घर का खर्च बढ़ रहा है वैसे- वैसे लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है.
सबसे बड़ी बात ये है कि एक- दो नहीं, एकसाथ कई जरूरी चीजें महंगी हुई हैं. यानी आम आदमी चाहे गाड़ी चलाए, सफर करे, दूध खरीदे या शादी के लिए सोना ले. हर जगह जेब ढीली करनी पड़ रही है.
12 दिनों में 4 बार बढ़े तेल के दाम
बढ़ती महंगाई की बात करें तो सबसे ज्यादा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने डाला है. पिछले 12 दिनों में चार बार तेल के दाम बढ़ाए जा चुके हैं. कई शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है, जबकि डीजल भी लगातार महंगा हो रहा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ा है. लेकिन आम लोगों के लिए इससे फर्क सिर्फ इतना है कि अब गाड़ी चलाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है.
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सीएनजी ने भी बढ़ाई टेंशन
अब जो लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बचने के लिए CNG गाड़ियां चला रहे थे, वो भी इस महंगाई से बच नहीं पाए हैं. पिछले कुछ दिनों में सीएनजी के दाम भी चार बार बढ़ चुके हैं. कई शहरों में CNG रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. ऑटो और कैब ड्राइवरों का कहना है कि अब कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ ईंधन में चला जा रहा है. कई जगह किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू हो गई है.
रसोई का बजट बिगड़ा
महंगाई की मार सिर्फ सड़क तक ही नहीं है. घर का राशन भी डमाडोल हो रहा है. दूध कंपनियों ने दूध की कीमत बढ़ा दी हैं. बता दें कि कुछ जगहों पर तो दूध में प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. दूध के अलावा ब्रेड, दाल भी महंगा हो चुका है. इन चीजों का महंगा होना सीधे किचन के बजट पर असर डाल रहा है. चाय से लेकर बच्चों के खाने और मुंबई के वड़ा- पाव तक, हर चीज पर खर्च बढ़ गया है.
सोना-चांदी खरीदना हुआ मुश्किल
महंगाई की मार यही खत्म नहीं होती है. शादी का सीजन शुरू होते ही सोने-चांदी की कीमतों ने भी लोगों को झटका दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से सोना लगातार महंगा हो रहा है. कई शहरों में सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है. मिडिल क्लास के परिवारों के लिए अब शादी-ब्याह में सोना खरीदना बड़ा बोझ बनता जा रहा है.
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ट्रांसपोर्ट महंगा, हर चीज पर असर
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ी वालों पर नहीं पड़ता. ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ते ही सब्जियां, राशन, फल और दूसरी जरूरी चीजें भी महंगी होने लगती हैं. ट्रक ऑपरेटर्स का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ी है. इसका असर बाजार में दिखाई देना शुरू हो गया है.
EMI और खर्च के बीच फंसा मिडिल क्लास
मिडिल क्लास इस समय सबसे ज्यादा दबाव महसूस कर रहा है. एक तरफ घर और गाड़ी की EMI, बच्चों की फीस और बिजली बिल हैं, दूसरी तरफ रोजमर्रा का खर्च लगातार बढ़ रहा है. कई लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में घर का महीने का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है. पहले जितने पैसे में महीने का खर्च चल जाता था, अब उससे काम नहीं चल पा रहा.
आखिर कब मिलेगी राहत?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं होतीं, तब तक राहत मिलना मुश्किल है. मिडिल ईस्ट तनाव और डॉलर की मजबूती की वजह से भारत जैसे देशों पर दबाव बना हुआ है. हालांकि सरकार लगातार हालात पर नजर रखने की बात कह रही है, लेकिन फिलहाल आम आदमी को राहत मिलती नहीं दिख रही. साफ है कि पिछले 12 दिनों में बढ़ी महंगाई ने लोगों की बचत, बजट और रोजमर्रा की जिंदगी में एकदम उथल- पुथल मचाकर रख दिया है. अब देखने वाली बात है कि आखिर इससे कबतक राहत मिलती है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol Diesel News: पेट्रोल&amp; डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद जानें तेल कंपनियों का हाल, अब भी हर दिन हो रहा इतना नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel News: देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, इसकी शुरुआत तेल की कीमतों से होती है. जो 10 दिनों में लगातार चौथी बार बढ़ चुके हैं. अब पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद तेल कंपनियों को हो रहे घाटे में थोड़ी कमी आई है. इस बारे में खुद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से जानकारी दी गई है. जिसमें मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने बताया है कि सरकारी तेल कंपनियों को लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने से हो रहे नुकसान में कमी आई है.
मंत्रालय की तरफ से आया अपडेटदरअसल हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को हुई एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार चरणों करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. जिससे सरकारी तेल कंपनियों को लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने से हो रहे नुकसान में कमी आई है. ये नुकसान घटकर लगभग 600 करोड़ रुपये प्रति दिन रह गया है.
ये भी पढ़ें: 7 रुपए की बढ़ोतरी भी कम! क्रूड ऑयल सस्ता, फिर भी और महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, वजह जानें
उन्होंने आगे बताया कि 15 मई को मूल्य संशोधन शुरू होने से पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू खाना पकाने की गैस एलपीजी की बिक्री पर नुकसान लगभग 1,000 करोड़ रुपये प्रति दिन था. अब ये नुकसान लगभग 600 करोड़ रुपये प्रति दिन से थोड़ा कम है. इस नुकसान में घरेलू एलपीजी की बिक्री से होने वाला नुकसान भी शामिल है. घरेलू उपयोग के लिए बेची जाने वाली एलपीजी एक सब्सिडी वाला उत्पाद है, और लागत, खुदरा विक्रय मूल्य के बीच का अंतर सरकार द्वारा पूरा किया जाता है.
दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल अनियंत्रित उत्पाद हैं जिनकी कीमत बाजार द्वारा निर्धारित होती है. ईरान में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि होने के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों को खुदरा दरों को स्थिर रखने के बाद इन उत्पादों पर नुकसान हुआ.
ये भी पढ़ें: रॉकेट बना डिफेंस कंपनी का शेयर, 12% तक उछला भाव; कंपनी के पास 1432 करोड़ का मजबूत ऑर्डर
चौथी बार बढ़े पेट्रोल- डीजल के दामबता दें कि आज मई के महीने में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है. पेट्रोल की कीमत में आज 2.61 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है और डीजल कीकीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. जिससे महंगाई भी लगातार बढ़ती जा रही है. वहीं कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में और भी बढ़ोतरी हो सकती है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Petrol, Diesel, News:, पेट्रोल-, डीजल, की, कीमतें, बढ़ने, के, बाद, जानें, तेल, कंपनियों, का, हाल, अब, भी, हर, दिन, हो, रहा, इतना, नुकसान</media:keywords>
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        <title>LPG News: पीएनजी इस्तेमाल करने वाले सावधान! सरकार के इस आदेश के बाद आप नहीं खरीद पाएंगे गैस सिलेंडर</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Supply: ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से तेल और गैस के संकट से भारत पिछले काफी समय से जूझ रहा है. जिसके चलते गैस सिलेंडर की किल्लत लोगों को झेलना पड़ी. वहीं अब हाल ही में सरकार की तरफ से एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जो लोग अपने घर पर पाइपलाइन से नेचुरल गैस (एलपीजी) इस्तेमाल कर रहे हैं, उन लोगों को अब LPG सिलेंडर नहीं मिलेगा.
सरकारी ने जारी किए आदेशदरअसल सोमवार को ही सरकार ने आदेश जारी किए हैं, जिसमें तत्काल प्रभाव से PNG कनेक्शन वालों के लिए LPG सिलेंडर खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान पर चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से एलपीजी की कमी हो गई है, जिसके चलते भारत ने कुछ उद्योगों को एलपीजी की आपूर्ति में कटौती की है.
ये भी पढ़ें: Travel Expense: PM मोदी की अपील से पहले ही कम हुआ भारतीयों के विदेश घूमने का क्रेज, RBI के आंकड़े ने चौंकाया
भारत ने साल 2025 में 33.15 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत की थी, जिसका ज्यादातर उपयोग खाना पकाने के लिए किया गया. इस खपत में आयात की हिस्सेदारी लगभग 60% थी. इस आयात का लगभग 90% हिस्सा मध्य पूर्व से आया था.
PNG कनेक्शन के लिए प्रोत्साहित कर रही सरकारएक तरफ सरकार ग्राहकों को पाइप वाली गैस का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. तो हीं दूसरी तरफ पीएनजी धारकों को गैस सिलेंडर ना देने का फैसला किया गया है. ऐसा सरकार के द्वारा गैस की किल्लतों को देखते हुए किया जा रहा है. हाल ही में पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है. जिसके बाद अब गैस सिलेंडर के दामों के बढ़ने की भी बारी आ सकती है.
ये भी पढ़ें: Petrol Diesel Price: हर दिन बदलते पेट्रोल-डीजल के दाम, ट्रांसपोर्ट वालों ने केंद्र सरकार से की ये खास अपील ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 00:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, News:, पीएनजी, इस्तेमाल, करने, वाले, सावधान, सरकार, के, इस, आदेश, के, बाद, आप, नहीं, खरीद, पाएंगे, गैस, सिलेंडर</media:keywords>
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        <title>Travel Expense: PM मोदी की अपील से पहले ही कम हुआ भारतीयों के विदेश घूमने का क्रेज, RBI के आंकड़े ने चौंकाया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/travel-expense-pm-मोदी-की-अपील-से-पहले-ही-कम-हुआ-भारतीयों-के-विदेश-घूमने-का-क्रेज-rbi-के-आंकड़े-ने-चौंकाया</link>
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        <description><![CDATA[ Indians on foreign travel: भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेश यात्रा को लेकर चौंकाने वाले आंकड़ों का खुलासा किया है. आरबीआई ने बताया है कि भारतीयों की ओर से विदेश यात्रा पर किया जाने वाला खर्च मार्च महीने में घटकर 1.09 अरब डॉलर तक सीमीत रह गया है. जानकारी के अनुसार जनवरी में विदेशी खर्च 1.65 अरब डॉलर और फरवरी में 1.30 अरब डॉलर डॉलर था.
आरबीआई की उदारीकृत धन प्रेषण योजना यानी एलआरएस के तहत इन सभी आंकड़ों को सही तरीके से समझना बेहद ही जरूरी है.&amp;nbsp; मार्च के महीने में बात करें तो भारतीय यात्रियों द्वारा विदेशों में भेजी गई कुल राशि 2.59 अरब डॉलर रही, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी यात्रा पर हुए खर्च की देखने को मिली.
नियमों के मुताबिक, एलआरएस के तहत कोई भी निवासी भारतीय एक साल में &amp;nbsp;2.50 लाख डॉलर तक की राशि को सिर्फ और सिर्फ लेन-देन के लिए ही विदेश भेज सकता है.&amp;nbsp;
RBI का केंद्र को तोहफा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच मंजूर किया 2.87 लाख करोड़ का लाभांश
अब अन्य खर्चों पर डालते हैं एक नजर
भारतीय द्वारा किए गए अन्य खर्चों के गणित को भी समझना बाकि है, जहां अन्य यात्रा श्रेणी में घूमने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड के खर्च को शामिल किया गया है. इसके अलावा, मार्च के महीने में 62.30 करोड़ डॉलर खर्च किए गए थे, जो कुल यात्रा का लगभग 57 प्रतिशत है.
1. शिक्षा और पढ़ाई
सबसे पहले शिक्षा संबंधी यात्रा पर 45.01 करोड़ डॉलर खर्च किए गए है. तो वहीं, &#039;विदेश में अध्ययन&#039; श्रेणी में मार्च का खर्च घटकर 15.17 करोड़ डॉलर रह गया, जो जनवरी में 26.74 करोड़ डॉलर था.&amp;nbsp;
2. परिजनों को आर्थिक मदद&amp;nbsp;
इतना ही नहीं, विदेश में रहने वाले परिजनों को भेजा गया राशि मार्च में बढ़कर 38.97 करोड़ डॉलर हो गया था जो फरवरी में 26.61 करोड़ डॉलर था. इसके अलावा अन्य खर्च में व्यापार यात्रा, तीर्थयात्रा और चिकित्सा पर 2.13 करोड़ डॉलर खर्च हुए, जबकि विदेश में रियल एस्टेट की खरीद पर खर्च घटकर 3.86 करोड़ डॉलर अब देखने को मिल रहा है.
RBI Warning: और बढ़ेंगे पेट्रोल- डीजल के दाम! नहीं रुका युद्ध तो आएगी दूसरे दौर की महंगाई, RBI ने दी चेतावनी
पीएम मोदी ने कुछ दिनों पहले क्या की थी अपील?
विदेश यात्राओं पर होने वाले इस भारी-भरकम खर्च को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले देश के अमीर और मध्यम वर्ग के लोगों से बेहद ही खास अपील की थी. जिसमें उन्होंने &#039;वेड इन इंडिया&#039; और &#039;देखो अपना देश&#039;पर सबसे ज्यादा जोर देने को कहा था. जिसपर पीएम मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीयों को अपने जीवन के बड़े आयोजन, जैसे शादियां और छुट्टियां, विदेशों में मनाने के बजाय भारत के खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर ही योजना बनाने के बारे में विचार करना चाहिए.&amp;nbsp;
इसके अलावा पीएम मोदी ने आगे कहा था कि जब देश का पैसा देश के अंदर ही खर्च होगा, तो इससे स्थानीय पर्यटन को न सिर्फ बढ़ावा मिलेगा बल्कि ऐसा करने पर रोजगार के नए अवसर के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था में भी तेजी से सुधार देखने को मिलेगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Travel, Expense:, मोदी, की, अपील, से, पहले, ही, कम, हुआ, भारतीयों, के, विदेश, घूमने, का, क्रेज, RBI, के, आंकड़े, ने, चौंकाया</media:keywords>
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        <title>डरा रहा तेल संकट! 27 देशों ने मांगा वर्ल्ड बैंक से लोन, क्या भारत का नाम भी है शामिल?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/डरा-रहा-तेल-संकट-27-देशों-ने-मांगा-वर्ल्ड-बैंक-से-लोन-क्या-भारत-का-नाम-भी-है-शामिल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/डरा-रहा-तेल-संकट-27-देशों-ने-मांगा-वर्ल्ड-बैंक-से-लोन-क्या-भारत-का-नाम-भी-है-शामिल</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol Diesel News: दुनिया भर में बढ़ते तनाव के बीच अब कई देश भविष्य के बड़े संकट को लेकर तैयारी करने लगे हैं. वर्ल्ड बैंक के एक रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन 27 देश ऐसे हैं जो चाहते हैं कि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत इमरजेंसी फंड मिल सके. इसके लिए ये सभी देश वर्ल्ड बैंक और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ लोन के लिए बातचीत कर रहे हैं. अब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या इन देशों में भारत का नाम भी शामिल है?
दरअसल, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, बढ़ते तेल के दाम और आर्थिक दबाव की वजह से कई देशों को डर है कि आने वाले समय में वित्तीय संकट और बड़ा हो सकता है. यही कारण है कि अब सभी देश पहले से तैयारी करना चाहते हैं, जिससे जब भी अचानक हालात बिगड़ने पर उनके पास फंड की कमी न हो.
वर्ल्ड बैंक क्यों देता है इमरजेंसी फंड?
वर्ल्ड बैंक और दूसरी वैश्विक वित्तीय संस्थाएं जरूरत पड़ने पर देशों को आर्थिक सहायता देती हैं, इसे ही इमरजेंसी फंड भी कहते हैं. इस फंड का इस्तेमाल आर्थिक संकट, युद्ध, प्राकृतिक आपदा और तेल संकट जैसी परेशानियों में किया जाता है. अब 27 देश चाहते हैं कि अगर हालात और खराब होते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द फंड मिल सके और इसके लिए ज्यादा इंतजार भी न करना पड़े.
क्यों बढ़ रही है चिंता?
देखा जाए तो इस समय दुनियाभर के देश कई तरह का दबाव झेल रहे हैं. मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट की वजह से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है. अगर हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसके अलावा कई देशों पर पहले से भारी कर्ज है. महंगाई भी कई जगह कंट्रोल से बाहर बनी हुई है. ऐसे में अगर नई आर्थिक परेशानी आती है, तो कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.
पीएनजी इस्तेमाल करने वाले सावधान! सरकार के इस आदेश के बाद आप नहीं खरीद पाएंगे गैस सिलेंडर
कौन-कौन से देश शामिल?
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में सभी देशों के नाम तो नहीं बताए गए हैं, लेकिन जानकारी के अनुसार इसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देश शामिल हैं. ये देश पहले भी आर्थिक संकट का सामना कर चुके हैं और अब पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना चाहते हैं. हालांकि, अभी तक इस लिस्ट में भारत का नाम सामने नहीं आया है.
तेल संकट बना सबसे बड़ा खतरा
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट संकट लंबा चला तो दुनिया को बड़ा तेल संकट देखने को मिल सकता है. इसका सीधा असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई, ट्रांसपोर्ट, व्यापार और नौकरियों पर भी पड़ सकता है. कई देशों को डर है कि तेल महंगा होने से उनकी अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव आ सकता है. इसलिए वो पहले से इमरजेंसी फंड सुनिश्चित करना चाहते हैं.
आम लोगों पर क्या असर होगा?
अगर वैश्विक आर्थिक संकट बढ़ता है तो असल तो आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई देगा ही. महंगाई भी और ज्यादा बढ़ सकती है. साथ ही नौकरी के अवसर कम हो सकते हैं और जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है. कोविड के बाद कई देशों की अर्थव्यवस्था अभी भी कमजोर बनी हुई है और अब नए जियोपॉलिटिकल तनाव ने चिंता और बढ़ा दी है.
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आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल वर्ल्ड बैंक और दूसरी संस्थाएं इन देशों की मांग पर विचार और चर्चा कर रही हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में इमरजेंसी फंड को लेकर नए नियम बन सकते हैं. दुनिया के कई देश अब समझ चुके हैं कि अचानक आने वाले आर्थिक झटकों से बचने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>डरा, रहा, तेल, संकट, देशों, ने, मांगा, वर्ल्ड, बैंक, से, लोन, क्या, भारत, का, नाम, भी, है, शामिल</media:keywords>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price Hike: 10 दिनों में चौथा झटका! बढ़ी पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत, दिल्ली में 100 रुपये के पार पहुंचा भाव</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज फिर से बढ़ोतरी की गई है. 25 मई, 2026 सुबह 6 बजे से &amp;nbsp;दिल्ली में पेट्रोल 2 रुपए 61 पैसे महंगा होकर 102 रुपए 12 पैसे प्रति लीटर पर पहुंच गया है. जबकि डीजल 2 रुपए 71 पैसे बढ़कर 95 रुपए 20 पैसे प्रति लीटर हो गया है.
सबसे बड़ी बात ये है कि पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ये चौथी बढ़ोतरी मानी जा रही है. 15 मई को करीब 3 रुपए, फिर 19 मई को लगभग 90 पैसे, 23 मई को फिर करीब 90 पैसे और अब 25 मई को एक बार फिर बड़ा इजाफा किया गया है. कुल मिलाकर &amp;nbsp;पिछले 10 दिन में पेट्रोल 7 रुपये 35 पैसे और &amp;nbsp;डीजल 7 रुपये 53 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है.
दिल्ली में कितनी बढ़ी कीमत?
कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में पहले जो डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर था, वह अब आज से 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बिकेगा. यानी कि डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है. इसी तरह से पहले पेट्रोल की कीमत &amp;nbsp;99.51 रुपये प्रति लीटर थी, जो आज 25 मई को बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.
राजधानी में सिर्फ सामान्य पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि प्रीमियम ईंधनों के दाम भी उसी रफ्तार से बढ़े हैं. &amp;nbsp;XP95 जो 106.63 रुपये प्रति लीटर था, वह 25 मई को 109.24 रुपये हो गया. XG की कीमत 97.81 रुपये से बढ़कर 100.52 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई.
मुंबई में भी बढ़े दाम
मुंबई में आज पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर है, जो कल के रेट 108.45 के मुकाबले कुछ ज्यादा है. यहां पेट्रोल की अब तक सबसे कम कीमत 6 मई को 103 रुपये प्रति लीटर थी.&amp;nbsp;
शहरवार पेट्रोल-डीजल की नई कीमत

नोएडा में डीजल की कीमत 95.56 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर, XP95 की कीमत 110.68 रुपये प्रति लीटर और XG की कीमत 101.17 रुपये प्रति लीटर है.
भोपाल में डीजल की कीमत 99.64 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल 114.57 रुपये प्रति लीटर, XP95 123.88 रुपये प्रति लीटर और XG की कीमत 104.90 रुपये प्रति लीटर है.
चंडीगढ़ में डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल का दाम 101.51 रुपये प्रति लीटर और XG की कीमत 94.65 रुपये प्रति लीटर है.&amp;nbsp;
गांधीनगर में डीजल की कीमत 98.13, पेट्रोल की कीमत 102.01, XP95 की कीमत 110.57 &amp;nbsp;और XG की कीमत 103.37 रुपये प्रति लीटर है.&amp;nbsp;
गुवाहाटी में डीजल की नई कीमत 97.23 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल की कीमत 105.73 रुपये प्रति लीटर और XP95 की कीमत 114.68 रुपये प्रति लीटर है.
जयपुर में आज कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद डीजल की कीमत 97.78 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल की कीमत 112.69 रुपये प्रति लीटर, XP95 की कीमत 121.97 रुपये प्रति लीटर और XG की कीमत 103.23 रुपये प्रति लीटर है.
बिहार की राजधानी पटना में डीजल की कीमत 99.36 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल की कीमत 113.37 रुपये प्रति लीटर और XP95 की कीमत 122.25 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.


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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price, Hike:, दिनों, में, चौथा, झटका, बढ़ी, पेट्रोल-डीजल, की, कीमत, दिल्ली, में, 100, रुपये, के, पार, पहुंचा, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>चौथी बार पढ़े पेट्रोल&amp;डीजल के दाम, दिल्ली में 100 के पार तो मुंबई में 111, जानें कहां कितनी हुई कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Price Today List: आम आदमी की जेब तो जैसे फटती ही जा रही है. आज सुबह- सुबह एक बार फिर पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ गए. 10 दिनों में ये चौथी बार है, जब पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़े हैं. इसी के साथ प्रीमियम ईंधन भी महंगे हो गए हैं और अब मंजर कुछ ऐसा है कि सड़क पर गाड़ी निकालना मुश्किल हो गया है. देशभर में कीमत बढ़ी है ये तो सभी जान चुके हैं लेकिन आपके अपने शहर में पेट्रोल और डीजल किस दाम पर बिक रहा है, ये आप यहां से जान सकते हैं.&amp;nbsp;
नोएडा&amp;nbsp;नोएडा में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये 12 पैसे और डीजल का दाम बढ़कर 95 रुपये 56 पैसे हो गया है. यहां XP95 11 रुपये 68 पैसे और XG 101 रुपये 17 पैसे का बिक रहा है.
मुंबई&amp;nbsp;मुंबई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर आज 111 रुपये 21 पैसे हो गए. कल यानी 24 मई को इसकी कीमत 108 रुपये 45 पैसे थे. वहां सबसे सस्ता रेट 103 रहा है और वो भी 6 मई के दिन.&amp;nbsp;
Petrol-Diesel Price Hike: 10 दिनों में चौथा झटका! बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, दिल्ली में 100 रुपये के पार पहुंचा भाव
गुवाहाटीअसम के गुवाहाटी में पेट्रोल का दाम 112 रुपये 69 पैसे हो चुका है. वहीं डीजल का रेट यहां 97 रुपये 78 पैसे है. वहीं, प्रीमियम ईंधन XP95 की कीमत 121 रुपये 97 पैसे और XG की कीमत 103 रुपये 23 पैसे है.&amp;nbsp;
गांधीनगरगुजरात के गांधीनगर में पेट्रोल आज बढ़कर 102 रुपये 1 पैसे हुआ तो वहीं डीजल का दाम 98 रुपये 13 पैसे रहा. यहां XP95 की कीमत 110 रुपये 57 पैसे और XG का रेट 103 रुपये 37 पैसे हुआ है. &amp;nbsp;
पटनाबिहार के पटना में पेट्रोल 25 मई की सुबह पेट्रोल 113 रुपये 37 पैसे का हो गया और डीजल भी बढ़कर 99 रुपये 36 पैसे पर आ पहुंचा. यहां XP95 की कीमत 122 रुपये 25 पैसे हुई है.&amp;nbsp;
8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों को झटका! ओल्ड पेंशन स्कीम में अब लौटना होगा मुश्किल, जानें क्यों?
जयपुर&amp;nbsp;राजस्थान के जयपुर की बात करें तो यहां डीजल 97 रुपया 78 पैसा हो चुका है और पेट्रोल 112 रुपये 69 पैसे का बिक रहा है. वहीं प्रीमियम ईंधन का रेट देखें तो XP95 का रेट 121 रुपये 97 पैसे और XG 103 रुपये 23 पैसै हो गया है. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चौथी, बार, पढ़े, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, दिल्ली, में, 100, के, पार, तो, मुंबई, में, 111, जानें, कहां, कितनी, हुई, कीमत</media:keywords>
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        <title>LPG Price Today: पेट्रोल&amp;डीजल की बढ़ती हुई कीमतों के बीच गैस सिलेंडर हुआ महंगा या सस्ता? चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-पेट्रोल-डीजल-की-बढ़ती-हुई-कीमतों-के-बीच-गैस-सिलेंडर-हुआ-महंगा-या-सस्ता-चेक-करें-लेटेस्ट-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Price Today on May 25: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज फिर से बढ़ा दी गई हैं. आज प्रति लीटर कीमत में 2.71 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. आज बीते 10 दिनों में रेट में की गई यह चौथी बढ़ोतरी है. इससे पहले 15 मई को करीब 3 रुपये, फिर 19 मई को लगभग 90 पैसे, 23 मई को फिर करीब 90 पैसे और अब 25 मई को एक बार फिर बड़ा इजाफा किया गया है. इस बीच, LPG उपभोक्ताओं को राहत है क्योंकि देशभर में LPG की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं किया गया. रेट पहले के स्तर पर स्थिर बने हुए हैं.&amp;nbsp;
शहरवार LPG की कीमत



शहर
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
913.0 रुपये
3071.5 रुपये


मुंबई
912.5 रुपये
3024.0 रुपये


कोलकाता
939.0 रुपये
3202.5 रुपये


बेंगलुरु
915.5 रुपये
3152.0 रुपये


चेन्नई
928.5 रुपये
3237.0 रुपये


जयपुर
916.5 रुपये
3099.0 रुपये


लखनऊ
950.5 रुपये
3194.0 रुपये


पटना
1002.5 रुपये
3347.0 रुपये


भोपाल
918.5 रुपये
3077.0 रुपये



मार्च में आखिरी बार बढ़ी कीमत
घरेलू सिलेंडर के दाम आखिरी बार 7 मार्च 2026 को 60 रुपये बढ़ाए गए थे. इसके बाद से कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. घरेलू कुकिंग गैस की कीमतों को स्थिर रखने का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं के बीच वैश्विक कच्चे तेल और LPG बाजार अस्थिर बने हुए हैं. होर्मुज (Strait of Hormuz) पर शिपिंग रूट से जुड़ी चिंताओं के बीच हाल के हफ्तों में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस के अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क मूल्यों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.
कमर्शियल सेक्टर पर पड़ी मार
इस बीच कमर्शियल सेक्टर को बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा है क्योंकि मई की पहली तारीख को 19- किलो वाले LPG सिलेंडरों की कीमत 900 रुपये से ज्यादा बढ़ा दी गई. हालांकि, उसके बाद से कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां, ग्लोबल कीमतों में बढ़ोतरी के चलते घरेलू LPG की बिक्री पर होने वाले नुकसान का कुछ हिस्सा खुद उठा रही हैं.

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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Today:, पेट्रोल-डीजल, की, बढ़ती, हुई, कीमतों, के, बीच, गैस, सिलेंडर, हुआ, महंगा, या, सस्ता, चेक, करें, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CNG Price Today: आज कितना महंगा हुआ CNG? दिल्ली&amp; मुबंई से पटना तक, जानें 25 मई को क्या है सीएनजी का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cng-price-today-आज-कितना-महंगा-हुआ-cng-दिल्ली-मुबंई-से-पटना-तक-जानें-25-मई-को-क्या-है-सीएनजी-का-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ CNG Price Today: एक बार फिर आज पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ गए हैं. ऐसे में सीएनजी वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करने वाले, इसके रेट लिस्ट को सर्च रहे हैं. असल में पेट्रोल- डीजल के मुकाबले CNG को किफायती ऑप्शन माना जाता है और ज्यादातर लोगों के पास अब सीएनजी कार भी है. अगर आपके पास भी सीएनजी कार है तो यहां से आप 25 मई 2026 की रेट लिस्ट देख सकते हैं और जान सकते हैं कि आज इसकी कीमत में कितने बदलाव हुए हैं.
सीएनजी रेट लिस्ट 25 मई 2026-&amp;nbsp;

दिल्ली (Delhi): ₹81.09 प्रति किलो
नोएडा (Noida): ₹89.70 प्रति किलो
गुड़गांव (गुरुग्राम) (Gurugram): ₹82.12 प्रति किलो
गाजियाबाद (Ghaziabad): ₹100.90 प्रति किलो
फरीदाबाद (Faridabad): ₹88.30 प्रति किलो
मुंबई (Mumbai): ₹81.00 प्रति किलो
कोलकाता (Kolkata): ₹93.50 प्रति किलो
चेन्नई (Chennai): ₹91.50 प्रति किलो
बेंगलुरु (Bangalore): ₹90.00 प्रति किलो
हैदराबाद (Hyderabad): ₹97.00 प्रति किलो
अहमदाबाद (Ahmedabad): ₹82.25 प्रति किलो
पुणे (Pune): ₹92.50 प्रति किलो
सोनीपत (Sonipat): ₹86.60 प्रति किलो
करनाल (Karnal): ₹85.43 प्रति किलो
लखनऊ (Lucknow): ₹95.75 प्रति किलो
आगरा (Agra): ₹95.75 प्रति किलो
मेरठ (Meerut): ₹86.05 प्रति किलो
पटना (Patna): ₹87.90 प्रति किलो
इन्दौर (Indore): ₹93.55 प्रति किलो
जयपुर (Jaipur): ₹90.91 प्रति किलो
सूरत (Surat): ₹82.95 प्रति किलो

चौथी बार पढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, दिल्ली में 100 के पार तो मुंबई में 111, जानें कहां कितनी हुई कीमत
तीसरी बार बढ़ें सीएनजी के दाम-&amp;nbsp;23 मई, शनिवार के दिन सीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति किलो बढ़ोतरी की गई. पहले CNG का रेट 80.09 पैसे था जो अब बढ़कर 81.09 पैसे हो गया है. बता दें कि मई में तीन बार सीएनजी के दाम बढ़ चुके हैं.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रहे हैं सीएनजी के दाम?गैस वितरण कंपनी IGL के अनुसार, &#039;इंटरनेशनल मार्केट में गैस की लागत बढ़ने और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर सीएनजी की लागत पर पड़ा है. यही वजह है कि कंपनी को खुदरा कीमतों में बदलाव करना पड़ा. हालांकि, कंपनी ने दावा किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सीएनजी अभी भी पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता ईंधन है.&#039;
सरकारी कर्मचारियों को झटका! ओल्ड पेंशन स्कीम में अब लौटना होगा मुश्किल, जानें क्यों? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CNG, Price, Today:, आज, कितना, महंगा, हुआ, CNG, दिल्ली-, मुबंई, से, पटना, तक, जानें, मई, को, क्या, है, सीएनजी, का, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Price Prediction: सोना 3 लाख का, चांदी 5 लाख के पार; रॉबर्ट कियोसाकी की भविष्णवाणी ने बढ़ाई टेंशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-prediction-सोना-3-लाख-का-चांदी-5-लाख-के-पार-रॉबर्ट-कियोसाकी-की-भविष्णवाणी-ने-बढ़ाई-टेंशन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-prediction-सोना-3-लाख-का-चांदी-5-लाख-के-पार-रॉबर्ट-कियोसाकी-की-भविष्णवाणी-ने-बढ़ाई-टेंशन</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Prediction: &#039;Rich Dad Poor Dad&#039; के मशहूर लेखक रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) ने एक बार फिर से वैश्विक बाजार में ऐतिहासिक गिरावट आने की चेतावनी दी है. साथ ही उन्होंने सोने-चांदी की कीमतों में बंपर उछाल आने का भी अनुमान लगाया है. अपने सोशल मीडिया पोस्ट में रॉबर्ट कियोसाकी ने दिग्गज मार्केट एनालिस्ट जिम रिकॉर्ड्स के हवाले से कहा है कि आने वाले समय में सोना 100000 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच सकता है. साथ ही चांदी भी 200 डॉलर प्रति आउंस के ऑल टाइम हाई लेवल को टच कर सकती है.&amp;nbsp;
रॉबर्ट कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में कहा, &quot;मार्केट में गिरावट तय है. जिम रिकार्ड्स का अनुमान है कि सोना 100,000 डॉलर तक पहुंच जाएगा. आज सोने की कीमत 4,500 डॉलर है. मुझे लगता है कि चांदी की कीमत 200 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच जाएगी. आज चांदी की कीमत 75 डॉलर है.&quot; रॉबर्ट कियोसाकी का यह बयान एक ऐसे वक्त पर आया है, जब वैश्विक बाजार पहले से ही बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, लगातार बनी हुई महंगाई, बढ़ते सरकारी कर्ज और केंद्रीय बैंक की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता से जूझ रहा है.

Crash imminent.Jim Richard&amp;rsquo;s calls for gold to get to$ 100,000Today gold is at $4,500I think silver will hit $200 an ounceToday silver is at $75.What do you think?The best investors are able to see the future and take action. Remember you do not have to be a&amp;hellip;
&amp;mdash; Robert Kiyosaki (@theRealKiyosaki) May 23, 2026



आखिर किस ओर बढ़ रही है दुनिया?&amp;nbsp;
कियोसाकी की इस ताजा चेतावनी ने एक बार फिर इस बात पर चर्चा छेड़ दी है कि क्या दुनिया एक और बड़े वित्तीय बदलाव (financial reset) की ओर बढ़ रही है, जो आखिरकार निवेशकों को ठोस संपत्तियों (hard assets) की ओर धकेल सकता है।
रॉबर्ट कियोसाकी ने कहा, &quot;सबसे अच्छे निवेशक वे होते हैं जो भविष्य को देख पाते हैं और उसके अनुसार कदम उठाते हैं. याद रखें, इस गिरावट (crash) में आपको पीड़ित बनने की जरूरत नहीं है. आप और भी अमीर बन सकते हैं.&quot; सालों से, कियोसाकी लगातार इस बात की वकालत करते रहे हैं कि सिर्फ कागजी मुद्राओं या पारंपरिक वित्तीय संपत्तियों पर निर्भर रहने के बजाय, सोना, चांदी और बिटकॉइन जैसी असली संपत्तियों को अपने पास रखना चाहिए. उनकी ताजा टिप्पणियां एक बार फिर उनके इस पुराने विचार को मजबूती देती हैं. उन्होंने बिटकॉइन के भी 750,000 डॉलर तक पहुंचने की बात कही है.&amp;nbsp;
दूसरे मार्केट एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और देशों पर बढ़ते सरकारी कर्ज को देखते हुए कई एक्सपर्ट्स आंशिक रूप से सहमत हैं कि सोने-चांदी की कीमतों में आने वाले समय में तेजी बनी रहेगी.&amp;nbsp; हालांकि, कई कियोसाकी की आलोचना भी करते हैं कि वे सालों से बाजार क्रैश होने की एक जैसी भविष्यवाणियां करते आ रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वल्ड बैंक की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर सरकारी कर्ज बढ़कर 100 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है, जो दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 94% है. अमेरिका, जापान, सूडान, सिंगापुर जैसे कई देश इस वक्त भारी सरकारी कर्ज की चपेट में हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Price, Prediction:, सोना, लाख, का, चांदी, लाख, के, पार, रॉबर्ट, कियोसाकी, की, भविष्णवाणी, ने, बढ़ाई, टेंशन</media:keywords>
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        <title>Stocks to watch: मोटी कमाई का दम रखते हैं ये स्टॉक्स, जानें कल निवेशकों की रडार पर रहने वाले स्टॉक्स की लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Stocks to focus: कल सोमवार, 25 मई को शेयर बाजार में एक और कारोबारी हफ्ता शुरू हो रहा है. इस दौरान निवेशकों की नजर कुछ ऐसे स्टॉक्स पर रहेगी, जो बंपर कमाई करा सकते हैं. हाल ही में जारी हुए शानदार तिमाही नतीजों, ब्रोकरेज हाउसेज की पॉजिटिव रिपोर्ट्स और मजबूत कॉर्पोरेट ट्रिगर्स के कारण इन शेयरों में तगड़ी हलचल दिखने की उम्मीद की जा रही है. आइए इन शेयरों की लिस्ट पर एक नजर डालते हैं:-
Paytm
चौथी तिमाही के नतीजे के बाद से ही पेटीएम के शेयर फोकस में हैं. मार्केट एक्सपर्ट Equentis के मुताबिक, कंपनी द्वारा कॉस्ट कटिंग के उपायों और फाइनेंशियल इकोसिस्टम के विस्तार के बाद अब स्टॉक्स केवल चर्चा में ही नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस के दम पर रिकवरी दिखा रहा है.&amp;nbsp;
Hindalco Industries
हिंडालको ने भी हाल ही में अपने Q4 के नतीजे जारी किए. शुक्रवार को संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी खरीदारी के चलते बाजार बंद होने से ठीक पहले शेयर ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए 1085 रुपये के मजबूत स्तर को छूने में सफलता पाई.
Sun Pharma
कंपनी ने Q4 के नतीजे के बाद डिविडेंड देने के फैसले पर विचार किया है. 11.75 बिलियन डॉलर में Organon का अधिग्रहण करने और कमजोर होते रुपये के बीच (कंपनी की 53% कमाई विदेशी बाजारों से ही होती है) एक्सपर्ट्स इसे सबसे सुरक्षित डिफेंसिव स्टॉक मान रहे हैं.&amp;nbsp;
BPCL
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच BPCL इस समय अपने इतिहास के सबसे निचले वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है. 2.84.45 रुपये के मौजूदा भाव पर यह अपने 52-वीक लो के बेहद करीब है. इस वजह से वैल्यू इंवेस्टर्स के लिए यह बड़ा दांव बन सकता है.&amp;nbsp;
इन शेयरों के अलावा Blue Dart Express, Ola Electric, Crompton Greaves, L&amp;amp;T, Pradeep Phosphates के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.
(यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Stocks, watch:, मोटी, कमाई, का, दम, रखते, हैं, ये, स्टॉक्स, जानें, कल, निवेशकों, की, रडार, पर, रहने, वाले, स्टॉक्स, की, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>कहीं ₹ 300, तो कहीं ₹190 बढ़ी कीमत, दुनिया में पेट्रोल&amp;डीजल के लिए त्राहिमाम; अकेले भारत में स्थिति काबू में</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Prices All over the world: भारत में बीते 10 दिनों में 3 बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं. इसके चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल लगभग 4.80 प्रति लीटर से लेकर 5.00 रुपये तक का इजाफा हुआ है.
रेट बढ़ने के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई. फ्यूल स्टेशनों में भीड़ जमा होने लगी, विरोधी पार्टियां सरकार को बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर घेरने लगी, कहीं-कहीं लोग भी सरकार को कोसने लगे. लेकिन क्या आपको पता है कि इस वक्त इकलौता भारत ऐसा देश है, जहां स्थिति काबू में है. पूरी दुनिया के मुकाबले अकेले भारत में अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें सबसे कम बढ़ी हैं. दुनिया के बाकी देशों का हाल जानेंगे, तो आपके होश उड़ जाएंगे.&amp;nbsp;
भारत में अब तक 3 बार बढ़ी कीमतें
फरवरी से मई 2026 के बीच वैश्विक संकट के बीच अलग-अलग देशों में पेट्रोल में की कीमतों में बंपर उछाल आया है, जिनमें भारत में हुआ इजाफा सबसे कम है. पश्चिम एशिया में सकंट के दबाव में भारत में लंबे समय बाद 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतें 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं. इसके ठीक चार दिन बाद 19 मई को दूसरी किश्त में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर दाम और बढ़ाए गए. फिर 23 मई को पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे का और इजाफा किया गया. अगर इसकी तुलना दुनिया के दूसरे देशों से किया जाए, तो यह काफी कम है.
कहां कितनी बढ़ी कीमत?



देश
कहां कितनी बढ़ी कीमत


म्यांमार
89.7% (सबसे ज्यादा बढ़ोतरी)


पाकिस्तान
54.9%


यूएई
52.4%


अमेरिका
44.5%


नेपाल
38.2%


चीन
21.7%


ब्रिटेन
19.2%


भारत
5.0%



भारत में सरकार ने क्या उपाय किए?
अमेरिका और ईरान में जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Starit of Hormuz) की नाकेबंदी के चलते जब पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भी भारत ने पूरे 76 दिनों तक पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ने दिए. इस दौरान IOCL, BPCL और HPCL जैसी भारतीय तेल कंपनियों ने करीब 1000 करोड़ रुपये तक का प्रतिदिन नुकसान सहा, लेकिन आम जनता पर महंगाई का बोझ नहीं पड़ने दिया. मार्च 2026 में क्रूड ऑयल की सप्लाई में संकट गहराने से पहले सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की थी, जिससे कीमतों को 100 रुपये के आसपास बनाए रखने में मदद मिली.&amp;nbsp;
दुनिया में पेट्रोल-डीजल के लिए हाहाकार
लंदन में पेट्रोल की कीमतें 190 रुपये प्रति लीटर के पार निकल गई हैं. यूरोपीय यूनियन में भी कीमत 179 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई हैं. दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल अभी हांगकांग में है. यहा कीमतें 300 लीटर के करीब पहुंच चुकी हैं. नीदरलैंड्स में पेट्रोल अभी 2.90 USD में बिक रहा है, जो भारतीस करेंसी के हिसाब से करीब 245-255 रुपये प्रति लीटर है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कहीं, ₹, 300, तो, कहीं, ₹190, बढ़ी, कीमत, दुनिया, में, पेट्रोल-डीजल, के, लिए, त्राहिमाम, अकेले, भारत, में, स्थिति, काबू, में</media:keywords>
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        <title>DA Hike: रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने बढ़ा दिया DA, जानें अब कितनी बढ़कर आएगी पेंशन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-रिटायर्ड-कर्मचारियों-के-लिए-बड़ी-खबर-सरकार-ने-बढ़ा-दिया-da-जानें-अब-कितनी-बढ़कर-आएगी-पेंशन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-रिटायर्ड-कर्मचारियों-के-लिए-बड़ी-खबर-सरकार-ने-बढ़ा-दिया-da-जानें-अब-कितनी-बढ़कर-आएगी-पेंशन</guid>
        <description><![CDATA[ DA Hike News: केंद्र सरकार के पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने 22 मई को एक आधिकारिक आदेश जारी कर कुछ पुराने केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने इनके लिए महंगाई राहत (DR) को बढ़ाने का फैसला लिया है. यह फैसला उन रिटायर्ड कर्मचारियों और &amp;nbsp;उनके पात्र परिवार के सदस्यों के लिए है, जो अब भी 5वें वेतन आयोग (5th CPC) के दायरे में आते हैं. नए DR रेट 1 जुलाई 2025 और 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे.
किन्हें होगा फायदा?&amp;nbsp;
यह बढ़ा हुआ DR सीमित श्रेणी के पुराने CPF लाभार्थियों और उनके परिवार के पात्र सदस्यों को ही मिलेगा. पहली श्रेणी में वे जीवित CPF लाभार्थी आएंगे, जो 18 नवंबर 1960 से 31 दिसंबर 1985 के बीच रिटायर हुए हैं और जिन्हें बेसिक एक्स-ग्रेशिया पेमेंट मिल रहा है. इन लोगों के लिए DR की नई दरें इस प्रकार होंगी:-

1 जुलाई 2025 से 474%&amp;nbsp;1 जनवरी 2026 से 483%

दूसरी कैटेगरी मृत CPF लाभार्थियों की विधवाएं और पात्र आश्रित बच्चे, साथ ही 18 नवंबर 1960 से पहले रिटायर हुए कर्मचारी आएंगे, जिन्हें एक्स-ग्रेशिया पेमेंट मिल रहा है. इनके लिए DR की नई दरें इस प्रकार होंगी:-

1 जुलाई 2025 से 466%&amp;nbsp;1 जनवरी 2026 से 475%

चूंकि ये दरें पिछली तारीखों (जुलाई 2025 और जनवरी 2025) से लागू हाेंगी इसलिए पात्र लाभार्थियों को पिछले महीनों के बकाए का भी पूरा भुगतान किया जाएगा.
कैलकुलेशन के वक्त इन बातों का रखा जाएगा ध्यान
सरकार ने यह साफ कर दिया है DR का कैलकुलेशन करते वक्त अगर कोई राशि पैसों में आती है, तो उसे नियमों के तहत अगले उच्च रुपये (Next Higher Rupee) में बदल दिया जाएगा. मिसाल के तौर पर- अगर कैलकुलेशन 200.15 &amp;nbsp;में आती है, तो उसे 201 माना जाएगा. सरकार ने यह भी कह दिया है कि हर मामले में सही DR कैलकुलेशन की जिम्मेदारी पेंशन देने वाली एजेंसियों और सरकारी बैंकों की होगी.&amp;nbsp;
बता दें कि यह DR Hike पुराने CPF (Contributory Provident Fund) योजना के तहत एक्स-ग्रेशिया प्राप्त करने वाले गिने-चुने वरिष्ठ नागरिकों के लिए है. इसके विपरीत, जो सामान्य केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 7वें वेतन आयोग के दायरे में आते हैं, उनका महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) वर्तमान में 60% (1 जनवरी 2026) की दर पर तय है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hike:, रिटायर्ड, कर्मचारियों, के, लिए, बड़ी, खबर, सरकार, ने, बढ़ा, दिया, DA, जानें, अब, कितनी, बढ़कर, आएगी, पेंशन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>8th Pay Commission: लखनऊ में बंद कमरे में चल रही आठवें वेतन आयोग की अहम बैठक, जानें अब उठेगा कौन सा मुद्दा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-लखनऊ-में-बंद-कमरे-में-चल-रही-आठवें-वेतन-आयोग-की-अहम-बैठक-जानें-अब-उठेगा-कौन-सा-मुद्दा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-लखनऊ-में-बंद-कमरे-में-चल-रही-आठवें-वेतन-आयोग-की-अहम-बैठक-जानें-अब-उठेगा-कौन-सा-मुद्दा</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वां वेतन आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बैठकें कर रहा है, जिसमें विभिन्न कर्मचारी संघों, संगठनों, सेवारत कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों से सुझाव (इनपुट) लिए जा रहे हैं. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 22-23 को दो दिवसीय परामर्श बैठकें रखी गई हैं. इससे पहले दिल्ली, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में बैठकें की जा चुकी हैं.
लखनऊ में होने वाली बैठक की अधिसूचना 21 मई 2026 को 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई थी. केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर, 2025 को गठित किए गए इस आयोग का यह दौरा देश के 1.1 करोड़ स अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्ते और पेंशन के स्ट्रक्चर को तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.&amp;nbsp;
किन मुद्दों पर होगी बात?
बताया जा रहा है कि लखनऊ में दो दिवसीय मैराथन बैठकों में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि आयोग के सामने मिनिमम बेसिक सैलरी और नए फिटमेंट फैक्टर पर अपनी बात रख सकते हैं. उनकी तरफ से यह डिमांड की जा सकती है कि 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था. अब इसे बढ़ाकर 3.68-3.83 तक करने की मांग की जा रही है. अगर आयोग की तरफ से 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग मान ली जाती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में 18000 से सीधे 69000 रुपये प्रति माह का इजाफा हो जाएगा.
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, लखनऊ, में, बंद, कमरे, में, चल, रही, आठवें, वेतन, आयोग, की, अहम, बैठक, जानें, अब, उठेगा, कौन, सा, मुद्दा</media:keywords>
    </item>
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        <title>Petrol&amp;Diesel: 6 रुपये सस्ता हुआ पेट्रोल, डीजल का रेट भी हुआ कम; जानें कहां की सरकार ने दी राहत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-6-रुपये-सस्ता-हुआ-पेट्रोल-डीजल-का-रेट-भी-हुआ-कम-जानें-कहां-की-सरकार-ने-दी-राहत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-6-रुपये-सस्ता-हुआ-पेट्रोल-डीजल-का-रेट-भी-हुआ-कम-जानें-कहां-की-सरकार-ने-दी-राहत</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate on May 23: भारत में इस बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती ही है. रेट में बढ़ोतरी का यह सिलसिला बीते 15 मई से शुरू हुआ है. महज 10 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में हुई तीन बार बढ़ोतरी से अफरा-तफरी का माहौल है. हालांकि, भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में स्थिति इससे उलट हे. यहां सरकार ने पेट्रोल-डीजल दोनों की कीमतों में कटौती की है.
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार ने आज 23 मई को पेट्रोल की कीमतों में 6 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में 6.80 रुपये प्रति लीटर की कमी का ऐलान किया है. इससे यहां की जनता की काफी हद तक राहत पहुंची है.&amp;nbsp;
क्यों कम की गईं कीमतें?
पाकिस्तान पेट्रोलियम डिवीजन और डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए हालिया उतार-चढ़ाव और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन (IFEM) दरों में बदलाव के चलते वहां की सरकार ने बेस प्राइस को एडजस्ट करते हुए कीमतों में कमी की है. यहां सरकार चाह रही है कि पिछले हफ्ते कच्चे तेल के दामों में आई मामूली गिरावट का फायदा सीधे यहां की जनता को पहुंचे.&amp;nbsp;
पाकिस्तान में साप्ताहिक समीक्षा (Weekly Review) सिस्टम लागू की गई है. इसके तहत, हर शुक्रवार की रात को वैश्विक तेल बाजार के हिसाब से कीमतें तय की जाती हैं. चूंकि पिछले हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल के रेट कुछ कम हुए हैं इसलिए तय नियमों के मुताबिक यहां पेट्रोल-डीजल भी सस्ता कर दिया गया है.&amp;nbsp;
IMF की शर्त हुई पूरी
पाकिस्तान इस वक्त अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लिए कर्ज के तहत उसकी शर्तों पर चल रहा है. IMF की एक शर्त यह भी थी कि पाकिस्तान में सरकार पेट्रोल-डीजल पर औसतन 80 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोलियम लेवी (Tax) वसूले. चूंकि सरकार पिछले ही हफ्ते टैक्स वसूली का अपना टारगेट पूरा कर चुकी है इसलिए अब जब वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम कुछ गिरे, तो सरकार ने उसका फायदा जनता को पहुंचाने का फैसला लिया.

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel:, रुपये, सस्ता, हुआ, पेट्रोल, डीजल, का, रेट, भी, हुआ, कम, जानें, कहां, की, सरकार, ने, दी, राहत</media:keywords>
    </item>
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        <title>Senior Citizen FD Rates: 3 साल की FD पर 8% तक रिटर्न दे रहे ये बैंक, अभी देखें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/senior-citizen-fd-rates-3-साल-की-fd-पर-8-तक-रिटर्न-दे-रहे-ये-बैंक-अभी-देखें-पूरी-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Senior Citizen FD Rates: पैसों का निवेश करने के लिए आज भी बैंक FD लोगों के पसंदीदा विकल्पों में से एक है क्योंकि इसमें फिक्स्ड रिटर्न मिलने की गारंटी होती है और पैसा डूबने का कोई डर भी नहीं रहता.
खासकर वरिष्ठ नागरिकों के बीच यह काफी मशहूर है क्योंकि इन्हें बैंक एफडी में सामान्य नागरिकों के मुकाबले जमा राशि पर अधिक रिटर्न मिलता है. ऐसे में अगर आप भी सीनियर सिटीजन या आपकी जान-पहचान में कोई सीनियर सिटीजन है, तो यह खबर आपके काम की है क्योंकि इसमें हम आपको कुछ ऐसे बैंकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 3 साल की एफडी पर 8% पर इंटरेस्ट दे रहे हैं.&amp;nbsp;
स्मॉल फाइनेंस बैंक
जना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana SFB)- 3 साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को सालाना पूरे 8 परसेंट तक ब्याज.
उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक (Utkarsh SFB)- यहां भी सीनियर सिटीजन्स को 3 साल की एफडी पर 8 परसेंट का शानदार ब्याज ऑफर किया जा रहा है.&amp;nbsp;
एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (Equitas SFB)- 3 साल की अवधि के लिए यह बैंक भी 7.50-8% तक की दर से एफडी पर शानदार रिटर्न दे रहा है.&amp;nbsp;
प्राइवेट सेक्टर के बैंक
यस बैंक (YES Bank)- 3 साल की एफडी पर यस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा 7.75 की दर से इंटरेस्ट दे रहा है.&amp;nbsp;
आरबीएल बैंक (RBL Bank)- यह बैंक भी 3 साल की मैच्योरिटी वाली एफडी पर 7.70 की दर से रिटर्न दे रहा है.&amp;nbsp;
आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank)- यह बैंक भी 3 साल की अवधि में जमा राशि पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.50 परसेंट की दर से ब्याज दे रहा है.&amp;nbsp;
सरकारी बैंक
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)- देश का सबसे बड़ा बैंक 2-3 साल की एफडी पर 6.90% और 3-5 साल की एफडी पर 6.80 परसेंट की दर से ब्याज दे रहा है.
बैंक ऑफ इंडिया (BOI)- बैंक ऑफ इंडिया 3 साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.45% तक का शानदार रिटर्न दे रहा है.
पंजाब नेशनल बैंक (PNB)- 3 साल की अवधि पर यह बैंक बुजुर्गों को 6.80% की रेट से इंटरेस्ट दे रहा है.

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Senior, Citizen, Rates:, साल, की, पर, तक, रिटर्न, दे, रहे, ये, बैंक, अभी, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>IPO Alert: कमाई का बंपर मौका! आ रहा है 1400 करोड़ का आईपीओ, जानें कब से लगा सकेंगे दांव?</title>
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        <description><![CDATA[ Dhoot Transmission IPO:&amp;nbsp; ऑटो कॉम्पोनेंट बनाने वाली कंपनी और बैन कैपिटल समर्थित कंपनी Dhoot Transmission ने 1400 करोड़ के आईपीओ के लिए अपने कदम आगे बढ़ा दिए हैं. इस क्रम में कंपनी ने मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के पास अपना अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर जमा करा दिया है.
इससे पहले कंपनी को गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट के जरिए 5 मई, 2026 को सेबी से मंजूरी मिल चुकी है. मेनबोर्ड सेगमेंट के इस आईपीओ के बाद कंपनी के शेयर BSE और NSE दोनों एक्सचेजों पर लिस्ट किए जाएंगे.&amp;nbsp;
आईपीओ का क्या होगा स्ट्रक्चर?
इस पब्लिक इश्यू में नए शेयरों के साथ-साथ पुराने शेयरों की बिक्री (OFS) को भी शामिल किया गया है. इसमें कंपनी 1400 करोड़ मूल्य के बिल्कुल नए इक्विटी शेयर जारी करेगी और OFS विंडो के तहत मौजूदा प्रोमोटर्स और शेयरहोल्डर्स अपने हिस्से के 1.63 करोड़ तक के इक्विटी शेयर बेचेंगे. OFS के तहत, US-बेस्ड बेन कैपिटल अपनी सहयोगी कंपनी BC Asia Investments XV Ltd के जरिए लगभग 1.32 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेगी, जबकि मंगलम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड (जिसे पहले मंगलम कॉइल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) कंपनी के 31.18 लाख शेयर बेचेगी.
जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल
कंपनी फ्रेश इश्यू से जुटाए गए पैसों में लगभग 493.9 करोड़ का इस्तेमाल अपने पुराने कर्ज का भुगतान करने में करेगी. 272.58 करोड़ धूत ऑटोकंपोनेंट्स और धूत यूके जैसी इसकी सहायक कंपनियों में निवेश किए जाएंगे. 150 करोड़ का इस्तेमाल हरियाणा के झज्जर और तमिलनाड़ु के शूलगिरी में नए प्लांट लगाने में किया जाएगा.
क्या करती है कंपनी?
1999 में बनी कंपनी Dhoot Transmission वायरिंग हार्नेस बनाती और सप्लाई करती है. ये हार्नेस इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और कंट्रोलर, स्विच, टर्मिनल, कनेक्टर, जंक्शन बॉक्स, हाई-वोल्टेज इंटरकनेक्शन सिस्टम और डेटा केबल को इंटीग्रेट करते हैं और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एप्लिकेशन-स्पेसिफिक आर्किटेक्चर डिलीवर करते हैं.
कंपनी का दावा है कि वह देश के टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वायरिंग हार्नेस मार्केट में शीर्ष दो कंपनियों में से एक है, जिसका FY25 में मूल्य के हिसाब से मार्केट शेयर 44.64 परसेंट है. इसके ग्राहकों में Bajaj Auto, TVS Motor Company, Honda Motorcycle and Scooter India और Royal Enfield शामिल हैं.
(यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>GST on Petrol&amp;Diesel: पेट्रोल&amp;डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की मांग, CTI ने PM मोदी को लिखा पत्र</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel GST: चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इसे GST के दायरे में लाए जाने की मांग उठाई है. इस विषय पर उन्होंने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है.
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल को तुरंत जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाए. लंबे समय से व्यापारी, फैक्ट्री ओनर और आम आदमी इसकी मांग कर रहे हैं, जिससे उन्हें इस भारी महंगाई से राहत मिल सके.&amp;nbsp;
पेट्रोल-डीजल पर लग रहे भारी टैक्स
दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा है कि अगर हम दिल्ली की बात करें तो &amp;nbsp;22 मई तक के आंकड़ों के अनुसार पेट्रोल का वास्तविक मूल्य 66.29 रुपये था, इस पर एक्साइज ड्यूटी 11.90 रुपये और VAT 16.03 रुपये लगता है, जबकि डीलर का मार्जिन 4.42 रुपये था. डीजल का वास्तविक मूल्य 67.36 रुपये, एक्साइज ड्यूटी 7.80 रुपये और VAT 13.39 रुपये था, जबकि डीलर मार्जिन 3.03 रुपये था.
उन्होंने बताया कि आज के समय में पेट्रोल के वास्तविक मूल्य पर एक्साइज ड्यूटी और वैट को मिलाकर लगभग 42% टैक्स लगता है जबकि डीजल पर लगभग 32% टैक्स लगता है. CTI के मुताबिक देश में तेलंगाना में पेट्रोल सबसे महंगा है क्योंकि तेलंगाना में पेट्रोल पर सर्वाधिक वैट 35.2% लगता है जबकि अंडमान निकोबार में पेट्रोल डीजल पर केवल 1% वैट लगने के कारण वहां सबसे सस्ता है.
GST के दायरे में आए पेट्रोल-डीजल
बृजेश गोयल ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि 2017 में जब GST लागू किया गया था, तो वन नेशन वन टैक्स की बात कही गई थी और कहा गया था कि देश में हर चीज पर एक समान टैक्स होगा और एक समान रेट होगा, लेकिन पेट्रोल-डीजल पर सभी राज्य मनमानी करते हुए अपने अपने हिसाब से वैट वसूल रहे हैं. इसके कारण हर राज्य में पेट्रोल-डीजल की दरें अलग-अलग हैं.
इसके कारण वन नेशन वन टैक्स की अवधारणा पर भी कुठाराघात हो रहा है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और वैट को समाप्त करके GST के दायरे में लाया जाए. इससे ना केवल पूरे देश में पेट्रोल-डीजल की दरें एक समान हो जाएंगी बल्कि पेट्रोल-डीजल के रेट में भी कमी आएगी.

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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>GST, Petrol-Diesel:, पेट्रोल-डीजल, को, जीएसटी, के, दायरे, में, लाए, जाने, की, मांग, CTI, ने, मोदी, को, लिखा, पत्र</media:keywords>
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        <title>Gold Price Today: सोने की तेजी थमी, चांदी भी हुई सस्ती, जानें अपने शहर के ताजा रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today May 23: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर कई देशों पर देखने को मिल रहा है. भारत में भी महंगाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन इसी बीच देश में सोने की कीमतों में जारी तेजी पर अब ब्रेक लग गया है. 23 मई शनिवार की सुबह सोने के दामों में गिरावट देखने को मिली है. अगर बात करें राजधानी दिल्ली की तो यहां 24 कैरेट सोना घटकर 1,59,630 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं मुंबई में इसकी कीमत 1,59,480 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है.&amp;nbsp;
बता दें कि एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 600 रुपये गिरकर 1,64,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर सोना 4,522.32 डॉलर प्रति औंस के आसपास बिजनेस कर रहा है.
मई में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, आम आदमी के बजट पर बढ़ा दबाव
सोने की कीमतों पर क्यों पड़ा असर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर इन्वेस्टर्स सर्तक बने हुए हैं. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी स्थिति और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है. इसके साथ ही भारतीय रुपये की अस्थिरता भी सोने के रेट को प्रभावित कर रही है.
अपने शहर के ताजा रेट जानें
शहर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 146240&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 159630मुंबई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;146190&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;159480अहमदाबाद&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 146240&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;159530चेन्नई&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 147790&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;161230कोलकाता&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;146190&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;159480हैदराबाद&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 146190&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 159480जयपुर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 146240&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 159630भोपाल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 146240&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 159530लखनऊ&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 146240&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;159630चंडीगढ़&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;146240&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;159630
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की मांग, CTI ने PM मोदी को लिखा पत्र
चांदी की कीमत में भी गिरावट
बता दें कि सोने के साथ-साथ चांदी कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है. 23 मई यानी आज सुबह चांदी 2,84,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है. &amp;nbsp;इससे पहले इस साल जनवरी में चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को भी पार कर चुकी थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 75.87 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Price, Today:, सोने, की, तेजी, थमी, चांदी, भी, हुई, सस्ती, जानें, अपने, शहर, के, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>LPG Rate Today: पेट्रोल&amp;डीजल के बाद क्या LPG भी हुआ महंगा? जानें आज गैस सिलेंडर की कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Price Today on May 23: पेट्रोल और डीजल की कीमतें आज एक बार फिर से बढ़ा दी गई हैं. पेट्रोल 87 पैसा और महंगा हुआ है, जबकि डीजल में 91 पैसे की बढ़ोतरी की गई है. यह इस महीने तीसरी बार है, जब कीमतों में फिर से इजाफा किया गया है.
हालांकि, LPG के मोर्चे पर आज भी उपभोक्ताओं को राहत है क्योंकि आज 23 मई, 2026 को भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इनकी कीमतें आज स्थिर हैं. हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव अभी जारी है. बावजूद इसके देश में तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने देश की आम जनता को राहत देते हुए कीमतों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है.&amp;nbsp;
शहरवार आज LPG सिलेंडर की कीमत



शहर&amp;nbsp;
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत


दिल्ली
913.0 रुपये
3071.5 रुपये


मुंबई
912.5 रुपये
3024.0 रुपये


कोलकाता
939.0 रुपये
3202.5 रुपये


चेन्नई
928.5 रुपये
&amp;nbsp;3237.0 रुपये


बेंगलुरु
915.5 रुपये
3152.0 रुपये


नोएडा
910.50 रुपये
3071.5 रुपये


हैदराबाद
905.0 रुपये
2176.5 रुपये


पटना
1002.5 रुपये
3347.0 रुपये


भोपाल
&amp;nbsp;918.5 रुपये
3077.0 रुपये



एक और LPG टैंकर भारत पहुंचा
मिडिल-ईस्ट संकट और अमेरिका व ईरान में छिड़ी जंग के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर है. दरअसल, कतर से रवाना हुआ एक और बड़ा एलपीजी टैंकर MV SYMI सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला पोर्ट पर पहुंच गया है.
इसके साथ ही वियतनाम के झंडे वाला एक और विशालकाय Envy Sunshine भी करीब 46000 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंच चुका है. इन टैंकरों के भारत पहुंचने सप्लाई काफी हद तक सामान्य होगी. हालांकि, तेल कंपनियां अब भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार से ऊंचे रेट पर गैस खरीद रही है. नागरिकों को बचाने के लिए फिलहाल OMCs इस घाटे को खुद वहन कर रही है. ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी रहती है.

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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, पेट्रोल-डीजल, के, बाद, क्या, LPG, भी, हुआ, महंगा, जानें, आज, गैस, सिलेंडर, की, कीमत</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में कितनी होगी सैलरी बढ़ोतरी? यहां समझे &amp;apos;फिटमेंट फैक्टर&amp;apos; का पूरा गणित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-8वें-वेतन-आयोग-में-कितनी-होगी-सैलरी-बढ़ोतरी-यहां-समझे-फिटमेंट-फैक्टर-का-पूरा-गणित</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-8वें-वेतन-आयोग-में-कितनी-होगी-सैलरी-बढ़ोतरी-यहां-समझे-फिटमेंट-फैक्टर-का-पूरा-गणित</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: पिछले कई दिनों से आठवें आयोग को लेकर काफी चर्चाओं का बाजार गर्म है. हाल ही में 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी मिली है. जिसके बाद अब लोगों को अपनी सैलरी के बढ़ने का इंतजार है. इसी बीच &#039;फिटमेंट फैक्टर&#039; को लेकर भी तेजी से चर्चाएं हो रही हैं. तो आइये बताते हैं फिटमेंट फैक्टर क्या है और इसका आपकी सैलरी पर क्या असर होगा.
&#039;फिटमेंट फैक्टर&#039; क्या है?8वें वेतन आयोग के बाद &#039;फिटमेंट फैक्टर&#039; पर सभी की नजर है, क्योंकि इसी के आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन बढ़ाई जाती है. फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा गुणांक (Multiplier) होता है, जिसकी मदद से कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है.
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फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मुला:फिटमेंट फैक्टर का एक बेसिक फॉर्मुला होता है, जिससे आपकी सैलरी डिसाइड की जाती है.
नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक सैलरी &amp;times; फिटमेंट फैक्टर
कैसे काम करता है फॉर्मुला?अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, इंक्रीमेंट और एरियर भी बढ़ जाते हैं.
उदाहरण के तौर पर, 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. इससे मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी. फॉर्मुला के हिसाब से:
7,000 &amp;times; 2.57 = 18,000
हालांकि इस देखकर लगता है कि ये काफी बड़ी बढ़ोतरी है, लेकिन वेतन आयोग आमतौर पर 10 साल में एक बार लागू होता है.
8वें वेतन आयोग में होगा फिटमेंट फैक्टर?फिलहाल 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है. लेकिन कई रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया जा रहा है कि ये 2.28 से 3.83 के बीच हो सकता है.
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बता दें कि 6वें और 7वें वेतन आयोग के दौरान भी फिटमेंट फैक्टर काफी चर्चा में रहा था. इससे पहले वेतन बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था, जैसे महंगाई भत्ते को जोड़ना और वेतन संरचना में बदलाव करना. पहले पांच वेतन आयोगों में &#039;फिटमेंट फैक्टर&#039; जैसा कोई एक तय फॉर्मूला नहीं था. उस समय वेतन बढ़ाने के लिए पूरे सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाता था. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rupee Fall: रुपये की गिरती कीमत से टेंशन में सरकार, अब RBI चलाएगा अपना पुराना &amp;apos;मास्टर स्ट्रोक&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ Taper Tantrum Playbook: फरवरी से शुरू हुआ ईरान और यूएस का युद्ध, अब तक भी चल ही रहा है. जिसका असर अन्य पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है. भारत भी इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है. जिसके चलते डॉलर के सामने लगातार रुपया की कीमत घटती जा रही है. ऐसे में अब सरकार ने भी अपना पुराना &#039;मास्टर स्ट्रोक&#039; खेलने की प्लानिंग कर ली है.
RBI का पुराना मास्टर स्ट्रोकदरअसल रुपये की लगातार गिरती हुई कीमत को देखते हुए अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस संकट से बचने के लिए अपना पुराना दाव खेलने का मन बना लिया है. RBI अब रुपये को संभालने के लिए साल 2013 में आर्थिक संकट के दौरान अपनाए गए तरीकों को फिर से इस्तेमाल कर सकता है. इस बारे में खुद RBI के गवर्र संजय मल्होत्रा ने बताया है.
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संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग न्यूज के साथ बातचीत में बताया है कि, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​के नेतृत्व में बैंक करेंसी को स्टेबल करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि, एडिशनल करेंसी की अदला-बदली और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तरीकों पर विचार कर रहा है.
क्या है टैपर टैंट्रम प्लेबुक?जब अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक जब बाजार में पैसा डालना बंद कर देता है, तब विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों में पैसा डालना बंद कर देते हैं. जिससे रुपया कमजोर हो जाता है, शेयर बाजार में गिरावट आती है, डॉलर महंगा हो जाता है, भारत पर आर्थिक दबाव बनता है. ऐसी स्थिति साल 2013 में बनी थी, तब RBI ने &#039;टैपर टैंट्रम प्लेबुक&#039; नीति अपनाई थी. इसमें RBI डॉलर को बेचकर रुपया संभालता है, ब्याज दरें बढ़ा देता है.
2013 में भी अपनाई थी यही रणनीतिबता दें कि सरकार ने साल 2013 में भी यही रणनीति अपनाई थी. जब उस दौर में आर्थिक संकट से देश जूझ रहा था, तब भी टैपर टैंट्रम प्लेबुक का सहारा लेकर देश में डॉलर को बेचकर रुपये को संभाला गया था. अब RBI इस योजना के तहत अपने डॉलर बेचेगा जिससे डॉलर की कमी ना हो और रुपये में गिरावट ना आए.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:31:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI का केंद्र को तोहफा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच मंजूर किया 2.87 लाख करोड़ का लाभांश</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Dividend: ईरान और इजरायल- अमेरिका के बीच फरवरी से ही युद्ध चल रहा है. जिसके कारण वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. जिसकी वजह से भारत पर आर्थिक रूप से काफी दबाव भी बढ़ रहा है. ऐसे में अब आरबीआई ने भारत की केंद्र सरकार को थोड़ी राहत की सांस दी है. जिससे अब क्रूड ऑयल की कीमतों के बढ़ने से भी सरकार को खासा फर्क नहीं पड़ेगा.
आरबीआई का केंद्र को तोहफादरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने FY25-26 के लिए केंद्र सरकार को एक बड़ा तोहफा दिया है. क्रूड ऑइल की बढ़ती कीमतों के बीच RBI ने 2.87 लाख करोड़ रुपये सरकार को देने की मंजूरी दे दी है. ये पैसा RBI अपने मुनाफे में से सरकार को देता है, जिसे लाभांश (डिविडेंड) कहा जाता है.

RBI की तरफ से मिली जानकारीइस बारे में आरबीआी ने खुद एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया है. जिसमें उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 623वीं मीटिंग के दौरान ये फैसला किया गया है. ये मीटिंग आज यानी शुक्रवार 22 मई को मुंबई में हुई, जिसमें आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी शामिल हुए.
पिछले साल की रकम से भी ज्यादा दी गईइसमें ये भी बताया गया कि ये रकम पिछले साल के 2.69 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. इससे पहले RBI ने 2023-24 में 2.1 लाख करोड़ रुपये और 2022-23 में 87,416 करोड़ रुपये सरकार को दिए थे. RBI ने बताया कि 2025-26 में उसकी कुल शुद्ध आय बढ़कर करीब 3.96 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल ये 3.13 लाख करोड़ रुपये थी.
अर्थव्यवस्था संभालने में मिलेगी मददइसके अलावा, RBI की कुल संपत्ति यानी बही-खाता भी 20.61% बढ़कर लगभग 92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. आसान शब्दों में कहें तो RBI को इस साल ज्यादा मुनाफा हुआ है, इसलिए वो सरकार को रिकॉर्ड रकम दे रहा है. इससे सरकार को खर्च चलाने और अर्थव्यवस्था संभालने में मदद मिलेगी. इस समय देश के जो हालात हैं उन्हें देखा जाए तो ये रकम सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. फिलहाल महंगाई के दौर को देखते हुए ये एक बड़ा तोहफा ही माना जाएगा.


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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:31:16 +0530</pubDate>
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        <title>SBI ने जारी की ग्राहकों के लिए एडवायजरी, बताया दो दिनों की हड़ताल पर क्या करें और क्या नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Staff Strike: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI अपने ग्राहकों की सुविधा का हमेशा से ख्याल रखता है. शुक्रवार को बैंक की तरफ से ग्राहकों के लिए एक एडवायजरी जारी की गई है. जिसमें बताया गया है कि बैंक के कर्मचारी दो दिवसीय हड़ताल पर हैं, ऐसे में ग्राहकों को यदि बैंक से संबंधित काम हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए.
बैंक ने जारी की एडवायजरीबैंक के आधिकारिक x अकाउंट के जरिए एक पोस्ट शेयर किया गया है. जिसके जरिए बैंक की तरफ से ग्राहकों को जानकारी दी गई है कि हड़ताल के समय में बैंक की शाखाओं में जरूरी बैंकिंग सेवाएं जारी रखने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, बैंक ने ग्राहकों से असुविधा को कम करने के लिए अल्टरनेटिव बैंकिंग चैनलों का उपयोग करने की सलाह दी है.

pic.twitter.com/1B6bJTc9Co
&amp;mdash; State Bank of India (@TheOfficialSBI) May 22, 2026



ये भी पढ़ें: RBI का केंद्र को तोहफा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच मंजूर किया 2.87 लाख करोड़ का लाभांश
इस पोस्ट में लिखा है, &#039;कृपया ध्यान दें कि अखिल भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने 25 और 26 मई 2026 को दो दिवसीय हड़ताल की सूचना दी है. हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि ब्रांच में ग्राहकों को जरूरी सुविधाएं मिल सकें.&#039; इसके बाद बैंक ने तीन मुख्य बिंदुओं में ग्राहकों से जरूरी निवेदन किया है. जिसमें लिखा है:

कैश की जरूरत पड़ने पर ATM/ADWMs का इस्तेमाल करें.
कस्टमर सर्विस पॉइंट का इस्तेमाल करें (CSPs)
इंटरनेट बैंकिंग, योनो, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को प्रिफर करें.

इसके बाद बैंक की तरफ से ग्राहकों से असुविधाओं के लिए माफी भी मांगी गई है.
बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी 25 और 26 मई को दो दिवसीय हड़ताल पर रहने वाले हैं. इससे पहले 23 और 24 मई को शनिवार और रविवार है और इसके बाद भी बैंक की ईद की छुट्टी है. ऐसे में SBI बैंक पूरे छह दिनों तक बंद रहने वाला है. यदि आपको ब्रांच से जुड़ा कोई भी काम हो तो उसे पहले ही निपटा लें.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:31:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>RBI Warning: और बढ़ेंगे पेट्रोल&amp; डीजल के दाम! नहीं रुका युद्ध तो आएगी दूसरे दौर की महंगाई, RBI ने दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Warning of Inflation: फरवरी से शुरू हुआ ईरान और यूएस का युद्ध अब तक भी जारी है. इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कचेच तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी पड़ रहा है. इसी बीच अब RBI ने भी चेतावनी दे दी है कि यदि ये युद्ध ऐस ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत में दूसरे दौर की महंगाई आ जाएगी.
पेट्रोल- डीजल के बढ़ सकते हैं दामरिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का कहना है कि वेस्ट मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव जितना लंबा खिंचेगा ऊर्जा कीमतें, ट्रेड डिफिसिट और रुपये पर उतना ही ज्यादा दबाव बढ़ेगा. इस युद्ध के कारण ग्लोबल लेवल पर कच्चा तेल और पेट्रोल-डीजल महंगा हो रहा है. इससे भारत में भी पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं.
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महंगाई पर असरRBI ने कहा है कि अगर वेस्ट एशिया संकट इसी तरह लंबा चला तो दूसरे दौर की महंगाई बढ़ सकती है यानी ट्रांसपोर्ट से लेकर खाने-पीने तक सबकुछ महंगा हो सकता है. इतना ही नहीं इसका असर सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है. युद्ध की वजह से समुद्री रास्तों और सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है. इससे सामान की डिलीवरी और आयात-निर्यात महंगा हो सकता है.
शेयर बाजार और निवेशग्लोबल तनाव बढ़ने पर विदेशी निवेशक पैसा निकाल सकते हैं. इससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. साल 2021-25 के बीच भारत की औसत ग्रोथ 8.2% रही. RBI ने 2026-27 के लिए भी करीब 6.9% ग्रोथ का अनुमान दिया है. अभी भारत में महंगाई 4% के आसपास कंट्रोल में है लेकिन तेल संकट से खतरा बढ़ सकता है. भारत के पास करीब 11 महीने के आयात जितना विदेशी मुद्रा भंडार है इसलिए तुरंत बड़ा आर्थिक खतरा नहीं है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:31:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RBI, Warning:, और, बढ़ेंगे, पेट्रोल-, डीजल, के, दाम, नहीं, रुका, युद्ध, तो, आएगी, दूसरे, दौर, की, महंगाई, RBI, ने, दी, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>Investment Tips: किन लोगों को शेयरों में निवेश नहीं करना चाहिए? दिग्गज अरबपति ने बताया, गिनाए कारण</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/investment-tips-किन-लोगों-को-शेयरों-में-निवेश-नहीं-करना-चाहिए-दिग्गज-अरबपति-ने-बताया-गिनाए-कारण</link>
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        <description><![CDATA[ Warren Buffett Investment Tips: शेयर बाजारों में उतार- चढ़ाव की स्थिति तो हमेशा ही बनी रहती है. अगर आप भी स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं तो आपको पता ही होगा कि इस समय बाजार की स्थिति काफी दयनीय है. शेयरों में लगातार गिरावट की वजह से निवेशकों के बीच मायूसी देखी जा रही है. फरवरी से चल रहे ईरान- यूएस युद्ध के कारण ही ये गिरवाट देखी जा रही है.
यदि आप भी इसकी वजह से मायूस हैं, तो आपको अमेरिकी निवेशक वॉरेन बफेट से कुछ सीखने की जरूरत है. उन्होंने शेयर बाजार की गिरावट को लेकर जो कुछ कहा है वो किसी मोटिवेशन से कम नहीं है. उन्होंने बताया है कि किसे स्टॉक्स में निवेश नहीं करना चाहिए और क्यों?
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किसे नहीं करना चाहिए निवेश?दिग्गज अमेरिकी निवेशक वॉरेन बफेट ने साल 2015 में The Street के साथ एक इंटरव्यू किया था, इस दौरान उन्होंने बताया था कि जिसे करेक्शन से डर लगता है उसे शेयरों में निवेश नहीं करना चाहिए. वॉरेन बताया था, &#039;अगर आपको करेक्शन से डर लगता है, तो आपको शेयर नहीं खरीदने चाहिए&#039;. इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया था कि लंबी अवधि के टारगेट के साथ अपने रिटायरमेंट के लिए या फिर घर खरीदने के लिए शेयरों में निवेश कर रहे हैं, तो आपको कभी भी शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को लेकर परेशान नहीं होना है.
शेयर बाजार में निवेश के टिप्सअगर आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो आपको वॉरेन बफेट की इन टिप्स को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है. जैसे:

वॉरेन बफेट के मुताबिक शेयर बाजार में असली कमाई लंबी अवधि के निवेश से होती है.
शॉर्ट टर्म निवेश में मुनाफा हो सकता है, लेकिन जोखिम थोड़ा ज्यादा रहता है.
बाजार के हर रोज चढ़ता- उतरता है, ऐसे में इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए.
सही कीमत पर अच्छे शेयर खरीदकर उन्हें लंबे समय तक होल्ड करना ज्यादा बेहतर है.
गिरावट आते ही घबराकर शेयर बेचने वाले निवेशकों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है.
हर बड़ी गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी आती है, इसलिए परेशान होने की बजाय थोड़ी हिम्मत और सूझ बूझ से काम लें.
जो निवेशक गिरावट के दौर में धैर्य बनाए रखते हैं, उन्हें रिकवरी में सबसे ज्यादा फायदा मिलता है.

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बता दें कि फिलहाल बाजार की जो स्थिति है वो किसी से छुपी नहीं है, ऐसे में निवेशकों के लिए ये एक बड़ा चैलेंज है. लेकिन इस समय में थोड़ा धीर से काम लेना होगा, जिससे किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dollar vs Yuan: अमेरिकी डॉलर को पछाड़ रही चीन की करेंसी, 3 साल के टॉप पर पहुंचा &amp;apos;युआन&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/dollar-vs-yuan-अमेरिकी-डॉलर-को-पछाड़-रही-चीन-की-करेंसी-3-साल-के-टॉप-पर-पहुंचा-युआन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/dollar-vs-yuan-अमेरिकी-डॉलर-को-पछाड़-रही-चीन-की-करेंसी-3-साल-के-टॉप-पर-पहुंचा-युआन</guid>
        <description><![CDATA[ Dollar vs Yuan: पिछले कई महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा है. इस युद्ध का असर ग्लोबल मार्केट पर इतना पड़ रहा है कि भारत का रुपया लगातार अपनी वैल्यू डॉलर के आगे खोता जा रहा है. केवल भारतीय रुपया ही नहीं बल्कि कई देशों की करेंसी डॉलर के आगे घुटने टेक रही है. इसी बीच एक देश ऐसा भी है, जिसकी करेंसी ग्लोबल लेवल पर खासी चमक रही है. ये करेंसी है &#039;युआन&#039;.
&#039;युआन&#039; ने डॉलर को पछाड़ादरअसल चीन के केंद्रीय बैंक पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने गुरुवार को बताया कि युआन, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार मजबूत हो रही है. अपने जारी किए गए डाटा में बैंक ने बताया युआन का दैनिक रेफरेंस रेट 6.8349 प्रति डॉलर तय की गई है, जो फरवरी 2023 के बाद का सबसे मजबूत स्तर है. इससे साफ संकेत मिलता है कि चीन अपनी मुद्रा को स्थिर और मजबूत बनाए रखना चाहता है.
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वैश्विक स्तर पर चमका युआनइस खबर के सामने आने के बाद अब वैश्विक बाजार में भी कई बड़े बैंक युआन को लेकर काफी पॉजिटिव नजर आ रहे हैं. दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है. इसी वजह से निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे चीनी करेंसी की तरफ बढ़ रहा है. ऑफशोर युआन भी लगातार मजबूत हुआ है और गुरुवार को ये करीब 6.803 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता दिखा.
इस वजह से बढ़ रही वैल्यूबता दें कि पिछले साल से चीन के निर्यात में मजबूती आई है, जिसका फायदा युआन को मिल रहा है. इसके अलावा चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों का भरोसा भी बेहतर हुआ है. अमेरिका और चीन के रिश्तों में स्थिरता आने की उम्मीद भी युआन को समर्थन दे रही है. बैंक ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के अंत तक युआन 6.70 प्रति डॉलर तक मजबूत हो सकता है. बैंक का ये भी मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम रहता है और चीन मुद्रा स्थिरता की नीति जारी रखता है, तो युआन में और तेजी देखने को मिल सकती है.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Royal Pop: 40 हजार की घड़ी, जिसे हाथ पर नहीं पहन सकते, उसको खरीदने को बेताब हुए लोग, क्यों है खास?</title>
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        <description><![CDATA[ Royal Pop Pocket Watch: लग्जरी &amp;nbsp;के घड़ियों के शौकीन कई लोग होते हैं, जो नया कलेक्शन लॉन्च होते ही बाजार में नजर आते हैं. ऐसे ही हाल ही में दो लग्जरी वॉच ब्रैंड्स स्वैच और ऑडेमर्स पिगुएट ने साथ में मिलकर कोलैबोरेट किया है. लोगों को उम्मीद थी कि इस कोलैबरेशन से उनके कलेक्शन में कुछ नया और बेहद ही खास जुड़ने वाला है. ऐसा ही हुआ ही. जैसे ही इन कोलैब के अंतर्गत नया कलेक्शन लॉन्च हुआ बाजार में देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी.
&#039;रॉयल पॉप&#039; हुई लॉन्चस्वैच और ऑडेमर्स पिगुएट ने मिलकर कोलैबरेट किया और इसके तहत रॉयल पॉप (Royal Pop) नाम से नई पॉकेट वॉच कलेक्शन को लॉन्च किया है. 16 मई 2026 को लॉन्च हुई इस सीरीज में 8 कलरफुल पॉकेट वॉच शामिल हैं, जिनकी कीमत 400 से 420 डॉलर रखी गई है (भारतीय रुपया के हिसाब से 40 हजार रुपये). इन घड़ियों के लॉन्च के बाद दुनियाभर के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कई जगहों पर पुलिस बुलानी पड़ी और सुरक्षा कारणों से 30 से ज्यादा स्टोर्स बंद करने पड़े.&amp;nbsp;
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लॉन्च ईवेंट हुए रद्दइतना ही नहीं भारत में मुंबई, दिल्ली और दुबई के लॉन्च ईवेंट तक रद् करना पड़े. जबकि बेंगलुरु में लंबी लाइनें देखने को मिलीं. ये कोलैबोरेशन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ऑडेमार्स पिगुए दुनिया के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित वॉच ब्रांड्स में गिना जाता है. आमतौर पर इसकी घड़ियों की शुरुआती कीमत करीब 20,000 डॉलर होती है. ऐसे में कम कीमत वाली स्वैच के साथ साझेदारी ने वॉच प्रेमियों को हैरान कर दिया.
GenZ में देखने को मिल रहा क्रेजलॉन्च के दौरान बड़ी संख्या में स्टोर्स पर Gen Z ग्राहक नजर आए. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन युवाओं के बीच इसका कितना क्रेज है. सोशल मीडिया पर इस कलेक्शन की जमकर चर्चा हो रही है. तो वहीं &amp;nbsp;रीसेल मार्केट में इन्हें हजारों डॉलर में बेचने की कोशिशें भी शुरू हो गईं.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LIC का बड़ा धमाका! चौथी तिमाही में 23% उछला मुनाफा, डिविडेंड का भी दिया तोहफा</title>
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        <description><![CDATA[ LIC Q4 Results: लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी LIC ने अपने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4) में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का शुद्ध मुनाफा 23 प्रतिशत बढ़कर 23,467 करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ये 19,039 करोड़ रुपए था.
डिविडेंड किया घोषितकंपनी ने अपने निवेशकों के लिए 10 रुपए फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 10 रुपए के अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है. बोनस शेयर जारी होने से पहले ये राशि प्रति शेयर 20 रुपए के बराबर होगी. डिविडेंड पाने के लिए रिकॉर्ड डेट 25 जून तय की गई है. वहीं, 1:1 बोनस शेयर इश्यू के लिए रिकॉर्ड डेट 29 मई होगी और बोनस शेयर 1 जून 2026 तक निवेशकों के खाते में आने की उम्मीद है.
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LIC की शुद्ध आयइन रिजल्ट्स में एलआईसी की कुल शुद्ध प्रीमियम आय चौथी तिमाही में 12 प्रतिशत बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल इसी अवधि में ये 1.48 लाख करोड़ रुपए थी. कंपनी को ये बढ़त रिन्यूअल और सिंगल प्रीमियम दोनों सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ से मिली. जनवरी-मार्च तिमाही में पिछले साल का प्रीमियम 17 प्रतिशत बढ़कर 13,009 करोड़ रुपए पहुंच गया. वहीं, रिन्यूअल प्रीमियम आय भी बढ़कर 82,233 करोड़ रुपए हो गई.
कंपनी के बढ़े हैं खर्च भीनिवेश से होने वाली एलआईसी की आय में भी मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. चौथी तिमाही में निवेश आय 1.09 लाख करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल 93,443 करोड़ रुपए थी. हालांकि, इस दौरान कंपनी के खर्च भी बढ़े. कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च में इजाफा हुआ. इसके बावजूद कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो बढ़कर 2.35 पहुंच गया, जो मजबूत वित्तीय स्थिति को दिखाता है. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में एलआईसी का कुल मुनाफा 19 प्रतिशत बढ़कर 57,453 करोड़ रुपए हो गया. वहीं, पूरे साल की प्रीमियम आय 10 प्रतिशत बढ़कर 5.38 लाख करोड़ रुपए रही.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Intuit AI Layoff: Mata के बाद अब इस कंपनी से निकाले जाएंगे हजारों लोग, कई ऑफिस भी होंगे बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Intuit Layoff: ग्लोबल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी फर्म Intuit ने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में से 17 परसेंट कर्मचारियों यानी कि करीब 3000 लोगों की छंटनी करने का बड़ा ऐलान कर दिया है.
कंपनी के इंटरनल मेमो के अनुसार, CEO Sasan Goodarzi ने बुधवार को कर्मचारियों को बताया कि इस रीस्ट्रक्चरिंग का मकसद जटिलता को कम करना और कंपनी के संगठनात्मक ढांचे को सरल बनाना है ताकि बेहतर प्रोडक्ट्स दिए जा सकें और इनोवेशन की गति को तेज किया जा सके.&amp;nbsp;
क्या इंसान को AI से रिप्लेस कर रही है कंपनी?&amp;nbsp;
कंपनी का मकसद ऑर्गेनाइजेशन की जटिलताओं को कम करने और ऑपरेशंस को बेहतर बनाना है. इस क्रम में Intuit अपने रिसोर्सेज को AI-बेस्ड टेक्नोलॉजी की तरफ शिफ्ट कर रहा है.
कंपनी ने हाल ही में अपने TurboTax और QuickBooks जैसे फाइनेंशियल और टैक्स सॉफ्टवेयर में एआई जोड़ने के लिए OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों के साथ समझौते भी किए. बहरहाल, कंपनी ने सीईओ ने यह साफ कह दिया है कि छंटनी वर्कर्स को एआई से रिप्लेस करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि यह कंपनी की अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने का एक रणनीतिक हिस्सा है.
प्रभावित कर्मचारियों को क्या मिलेगा?
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इस छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को 16 हफ्ते की बेसिक सैलरी दी जाएगी. साथ ही कंपनी में बिताए गए हर साल की सर्विस के लिए अतिरिक्त 2 हफ्ते की सैलरी को भी पैकेज में शामिल किया जाएगा.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
भारत पर असर
Intuit की इस वैश्विक छंटनी का असर भारत पर भी पड़ना तय है क्योंकि भारत में खासतौर पर बेंगलुरु, कंपनी के ग्लोबल हब में से एक है. यहां प्रोडक्ट डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग और डेटा साइंस की बड़ी टीमें काम करती हैं इसलिए इन ऑफिसेज में भी कुछ रोल खत्म किए जा साकते हैं. Intuit Reno, Nevada और Woodland Hills, California में अपने ऑफिसेज भी बंद करने जा रही है. कंपनी ने इस छंटनी का ऐलान उसी दिन किया, जिस तरह Meta ने अपने यहां से 8000 लोगों को निकाल दिए जाने का ऐलान किया.

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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 20:30:32 +0530</pubDate>
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        <title>ATF Tax: दिल्ली, मुंबई ने जेट फ्यूल टैक्स घटाया! इसका एयरलाइंस और टिकटों पर क्या असर पड़ सकता है?</title>
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        <description><![CDATA[ ATF Tax Relief: भारत के दो सबसे बड़े एविएशन हब दिल्ली और मुंबई ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF पर वैट (VAT) में बड़ी कटौती की है. इस फैसले से एयरलाइंस को बढ़ती लागत से राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ईंधन कीमतें, रुपये की कमजोरी और ऑपरेशनल खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं.
दिल्ली और मुंबई में कितना टैक्स घटा?
अगर बात करें टैक्स की तो दिल्ली ने ATF पर VAT को 25 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. यह राहत छह महीने के लिए लागू की गई है. वहीं महाराष्ट्र ने मुंबई में घरेलू उड़ानों के लिए ATF पर VAT को 18 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब एयरलाइंस फ्यूल की बढ़ती कीमतों से जूझ रही थी और सरकार को लागत बढ़ाने की चेतावनी दे चुकी थी.
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फ्यूल संकट ने बढ़ाई एयरलाइंस की मुश्किल
एविएशन सेक्टर इस समय भारी फ्यूल संकट से जूझ रहा है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस यानी FIA, जिसमें Air India, Indigo और SpiceJet जैसी कंपनियां शामिल हैं, ने सरकार को चेतावनी दी थी कि बढ़ती ईंधन लागत की वजह से कई रूट आर्थिक रूप से नुकसानदेह होते जा रहे हैं. FIA के मुताबिक, पहले फ्यूल लागत एयरलाइंस के टोटल खर्च का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हुआ करती थी, लेकिन अब यह बढ़कर 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
वैश्विक तनाव का असर
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास सप्लाई में पैदा हुई दिक्कतों का असर जेट फ्यूल की कीमतों पर भी दिखाई दिया. दुनिया भर में तेल और LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. फरवरी 2026 के अंत में जेट फ्यूल की कीमत जहां लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं मई 2026 तक यह बढ़कर करीब 263 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई.
दिल्ली और मुंबई क्यों हैं इतने अहम?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बताए गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के Indira Gandhi International Airport 2024-25 में करीब 8 करोड़ यात्रियों को संभाला, जबकि मुंबई हवाई अड्डे ने 2025 में 5.55 करोड़ यात्रियों को संभाला और 3,31,000 से अधिक विमानों की आवाजाही दर्ज की. देश की सबसे ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इन्हीं दोनों शहरों से संचालित होती हैं. यही वजह है कि यहां ईंधन पर टैक्स में कमी का असर पूरे एविएशन सेक्टर पर दिखाई देगा.
ATF की बढ़ती खपत
भारत में ATF की मांग लगातार बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में देश में करीब 764 हजार मीट्रिक टन ATF की खपत हुई. वहीं 2025 में घरेलू एयरलाइंस ने लगभग 167 मिलियन यात्रियों को यात्रा कराई. इतनी बड़ी मांग के बीच ईंधन की कीमतों में थोड़ी राहत भी एयरलाइंस के लिए बड़ी बचत साबित हो सकती है.
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एयरलाइंस पर बढ़ता वित्तीय दबाव
एयरलाइंस पहले से कई तरह की वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही हैं. बढ़ते लीज रेंटल, विमानों की कमी, इंजन में तकनीकी समस्याएं, मेंटेनेंस खर्च और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने कंपनियों की मुश्किल बढ़ा दी हैं. इसका असर कंपनियों के प्रदर्शन पर भी दिखाई देने लगा है. Air India ने शिकागो, नेवार्क और शंघाई जैसी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद कर दी हैं, जबकि कई रूटों पर उड़ानों की संख्या घटाई गई है. दूसरी ओर इंडिगो का शुद्ध लाभ वित्त साल 2026 की तीसरी तिमाही में लगभग 77.6 प्रतिशत गिर गया.&amp;nbsp;
फ्यूल टैंकरिंग में आ सकती है कमी
ATF टैक्स में कमी का असर एयरलाइंस की फ्यूल रणनीति पर भी पड़ सकता है. अब तक कई एयरलाइंस फ्यूल टैंकरिंग रणनीति अपनाती थी. यानी वे कम टैक्स वाले एयरपोर्ट से ज्यादा ईंधन भरवा लेती थी ताकि महंगे एयरपोर्ट पर दोबारा फ्यूल न लेना पड़े. हालांकि, इससे विमान का वजन बढ़ जाता था और फ्यूल एफिशिएंसी प्रभावित होती थी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिल्ली और मुंबई में टैक्स कम होने से ऐसी रणनीतियों की जरूरत कम होगी.&amp;nbsp;
क्या सस्ते होंगे हवाई टिकट?
टैक्स कटौती के बाद यात्रियों को तुरंत सस्ते टिकट मिलने की संभावना कम है. एविएशन सेक्टर में किराया सेक्टर में किराया सिर्फ लागत से तय नहीं होता, बल्कि मांग और सप्लाई भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. फिलहाल यात्रियों की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि विमानों की कमी और तकनीकी दिक्कतों की वजह से उड़ानों की क्षमता सीमित है. ऐसे में एयरलाइंस पहले अपने वित्तीय दबाव को कम करने की कोशिश करेंगी.
राज्यों को होगा राजस्व नुकसान
इस फैसले से राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान भी होगा. दिल्ली सरकार के अनुमान VAT कटौती से उसे लगभग 985 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. वहीं महाराष्ट्र को सालाना 550 से 600 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है. इसके बाद दोनों सरकारों का मानना है कि यह कदम उनके शहरों को मजबूत एविएशन हब बनाए रखने में मदद करेगा.&amp;nbsp;
ATF को GST में लाने की मांग तेज
इस पूरे मुद्दे के बीच एविएशन इंडस्ट्री की पुरानी मांग एक बार फिर तेज हो गई है कि ATF को GST के दायरे में लाया जाए. फिलहाल ATF पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग VAT लागू है और एयरलाइंस इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं उठा पाती. इंडस्ट्री का मानना है कि अगर ATF को GST में शामिल किया जाता है तो पूरे देश में ईंधन लागत को स्थिर किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 20:30:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ATF, Tax:, दिल्ली, मुंबई, ने, जेट, फ्यूल, टैक्स, घटाया, इसका, एयरलाइंस, और, टिकटों, पर, क्या, असर, पड़, सकता, है</media:keywords>
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        <title>Inspiring Story: IIT से पढ़कर मुर्गियां पाल रहा है ये लड़का, पहले लोग उड़ाते थे मजाक, आज हर महीने 1 करोड़ से ज्यादा की है कमाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/inspiring-story-iit-से-पढ़कर-मुर्गियां-पाल-रहा-है-ये-लड़का-पहले-लोग-उड़ाते-थे-मजाक-आज-हर-महीने-1-करोड़-से-ज्यादा-की-है-कमाई</link>
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        <description><![CDATA[ Who is Saikesh Goud: आज के समय में ज्यादातर छात्रों का आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद एक बेहतरीन पैकेज वाली सुरक्षित नौकरी का सपना होता है. लेकिन, कुछ युवा ऐसे होते हैं जो अपनी किस्मत को खुद ही लिखने में विश्वास रखते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है तेलंगाना के रहने वाले सैकेश गौड की. जिन्होंने आईआईटी के बदले अपने खुद का बिजनेस बनाने के सपनों को हौसला दिया और आज वह हर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बन चुके हैं.
नौकरी छोड़ मीट इंडस्ट्री में रखा कदम
सैकेश गौड ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी वाराणसी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. जिसके बाद पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के रूप में 28 लाख रुपये सालाना का शानदार पैकेज भी मिला. लेकिन, वो हमेशा से ही खुद का कुछ करने के बारे में सोचते रहते थे.
कौन हैं हेमाम्बर रेड्डी और मोहम्मद सामी उद्दीन?
तो वहीं, अपने सपनों को पंख देते समय इसी बीच उनकी मुलाकात हेमाम्बर रेड्डी और मोहम्मद सामी उद्दीन से हो गई. जानकारी के मुताबिक, हेमाम्बर रेड्डी इस समय हमारे देश के रिटेल मीट सेक्टर को समझने की कोशिश में जुटे थे. तो वहीं, सैकेश गौड ने इस सेक्टर में छिपी अपार संभावनाओं को पहचानने की कोशिश करना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा रिस्क लेते हुए अपनी शानदार सैलरी वाली नौकरी को हमेशा के लिए अलविदा कहते हुए इस नए सफर में कदम रखने के बड़ा फैसला लिया.&amp;nbsp;
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कैसे हुई कंट्री चिकन कंपनी की शुरुआत?
दरअसल, अपने बिजनेस को सही तरह से चलाने के लिए उन्होंने ICAR-नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इन्क्यूबेशन प्रोग्राम से तकनीकी से पढ़ाई कर साल 2022 में तीन दोस्तों के साथ मिलकर &#039;कंट्री चिकन कंपनी&#039; की पहली नींव रखी. जहां, उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि अस्वच्छ मीट की दुकानों की छवि को पूरी तरह से बदला जा सकता है इसके अलावा हाइजीनिक सुपरमार्केट जैसे स्टोर को बनाकर उच्च गुणवत्ता वाला देसी चिकन को रखने के बारे में उन्होंने एक नई रणनीति बनाई.
जब लोग उड़ाते थे सैकेश गौड का मजाक
शुरुआती दिनों में समाज के अलावा उनके दोस्तों और अन्य लोगों ने भी जमकर मजाक उड़ाया. यहां तक कि लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया था कि &quot;आईआईटी से इतनी बड़ी पढ़ाई करके अब मुर्गी बेचने का काम करोगे?&quot; लेकिन, वो कहते हैं न सुनो सबकि लेकिन करो अपनी. बस उन्होंने किसी के बारे में परवाह न करते हुए अपने सपनों पर जमकर काम किया. इसके अलावा उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स को एक गिफ्ट आइटम की तरह प्रीमियम पैकेजिंग में बेचना शुरू कर दिया, जिसे ग्राहकों ने बिना किसी देर के हाथों-हाथ खरीदना शुरू कर दिया.
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करोड़ों का रेवेन्यू और किसानों को मिला फायदा
तो वहीं, हैदराबाद में भारत का पहला ऑथेंटिक देसी चिकन स्टोर खोलने के बाद उनकी कंपनी ने तेजी से विस्तार करना शुरू कर दिया. आज कंपनी ने दक्षिण भारत में 15 हजार से ज्यादा पोल्ट्री किसानों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जिससे किसानों को भी अपनी उपज का सही मूल्य मिल रहा है.
हांलाकि, जनवरी 2022 में जिस कंपनी का रेवेन्यू महज 3 लाख रुपये महीना था, वह अप्रैल 2023 तक बढ़कर 1.2 करोड़ रुपये प्रति महीने के पार पहुंच गया है. जो, वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी का कुल टर्नओवर 5 करोड़ रुपये तक देखने को मिला था. सैकेश गौड की यह कहानी बताती है कि खुद पर विश्वास हो तो दुनिया में ऐसी कोई भी चीज नहीं है जो हम हासिल नहीं कर सकते हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 20:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Inspiring, Story:, IIT, से, पढ़कर, मुर्गियां, पाल, रहा, है, ये, लड़का, पहले, लोग, उड़ाते, थे, मजाक, आज, हर, महीने, करोड़, से, ज्यादा, की, है, कमाई</media:keywords>
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        <title>DA Hike: इस राज्य के कर्मचारियों का बढ़ा 2% महंगाई भत्ता, जानें अब कितनी मिलेगी टेक होम सैलरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-इस-राज्य-के-कर्मचारियों-का-बढ़ा-2-महंगाई-भत्ता-जानें-अब-कितनी-मिलेगी-टेक-होम-सैलरी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/da-hike-इस-राज्य-के-कर्मचारियों-का-बढ़ा-2-महंगाई-भत्ता-जानें-अब-कितनी-मिलेगी-टेक-होम-सैलरी</guid>
        <description><![CDATA[ DA Hike News: बिहार, केरल और तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश सरकार भी केंद्र के नक्शे कदम पर चल रही है. केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ने के फैसले के बाद राज्य की सरकारें भी अपने कर्मचारियों को ये सौगात दे रही हैं. अब हाल ही में उत्तर प्रदेश के कर्मचरियों को भी महंगाई भत्ते पर बढ़ोतरी मिली है. जिससे कर्मचारियों के बीच खासा खुशी का माहौल है.
कितना बढ़ा महंगाई भत्ता?दरअसल हाल ही में ऐलान किया गया है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी. जिसके बाद अब कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58% से 60% हो गया है. इसके लिए उत्तर प्रदेश के ACS वित्त दीपक कुमार ने आदेश भी जारी कर दिए हैं.
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कितनी मिलेगी टेक होम सैलरी?कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में छोटी सी भी बढ़ोतरी घर ले जाने वाली सैलरी में नजर आ सकती है. ऐसे में इंडिया टुडे के मुताबिक आइये आपको एक टेबल के जरिए बताते हैं कि 18 हजार रुपये बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी से ढाई लाख रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी का कितना महंगाई भत्ता बढ़ेगा.



बेसिक सैलरी (महीने के हिसाब से)
हर महीने कितना अमाउंट जुड़ेगा (लगभग)
वृद्धि (प्रतिशत में)


18,000 रुपये
360 से 540 रुपये
2%


29,200 रुपये
584 से 876 रुपये
2%


30,000 रुपये
600 रुपये
2%


56,100 रुपये
1,122 रुपये
2%


1,00,000 रुपये
2,000 &amp;nbsp;रुपये
2%


2,50,000 रुपये
5,000 से 7,500 रुपये
2%



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बता दें कि सरकार के आदेश के अनुसार ये महंगाई भत्ता 1 जनवरी से लागू होगा. जिसका लाभ पेंशन भोगियों को भी मिलने वाला है. इस बार शासन का ये आदेश थोड़ा लेट हो गया है, जिसकी वजह से कर्मचारियों के बीच काफी हलचल थी. वहीं अब केंद्र सरकार ने 8वें वेतनमान को भी लागू करने की मंजूरी दे दी है. ऐसे में ये कर्मचारियों के लिए दोगुनी खुशी की तरह है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 20:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hike:, इस, राज्य, के, कर्मचारियों, का, बढ़ा, महंगाई, भत्ता, जानें, अब, कितनी, मिलेगी, टेक, होम, सैलरी</media:keywords>
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        <title>Bank Layoff: ये बड़ा बैंक खत्म करेगा 7000 से ज्यादा नौकरियां, इंसानों की जगह लेंगे रोबोट और AI</title>
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        <description><![CDATA[ Standard Chartered Bank Layoffs: स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक अगले चार सालों में यानी 2030 तक 7,000 से अधिक नौकरियों को खत्म करने की योजना बना रहा है क्योंकि अभी तेजी से दक्षता बढ़ाने और मुनाफा बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन मुख्यालय वाला यह बैंक 2030 तक अपने कॉरपोरेट विभागों में लगभग 15% पदों को कम करने का लक्ष्य रखता है.&amp;nbsp;
रॉयटर्स के अनुमान के अनुसार, इस पुनर्गठन का असर उन विभागों में काम करने वाले 52,000 से ज्यादा कर्मचारियों में से 7,000 से अधिक कर्मचारियों पर पड़ सकता है. बैंक में दुनियाभर में करीब 82,000 लोग काम करते हैं. बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बिल विंटर्स (Bill Winters) के अनुसार, यह कदम केवल लागत कम करने के लिए नहीं है, बल्कि यह एक बड़े तकनीकी बदलाव का हिस्सा है.
CEO ने कहा कि जो लोग रीस्किल होना चाहते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं, हम उन्हें नई जगह रीपोजीशन करने का पूरा अवसर दे रहे हैं. बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ कर्मचारियों को नए पदों के लिए प्रशिक्षित और शिफ्ट किया जा सकता है.
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AI और ऑटोमेशन से बदलेगा बैंकिंग सिस्टम
बैंक दक्षता बढ़ाने और लाभ कमाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का बड़े पैमाने पर उपयोग करेगा. विंटर्स ने कहा कि कुछ मामलों में यह कम-मूल्य वाली मानव पूंजी को वित्तीय और निवेश पूंजी से बदलने जैसा है.बैंक के अनुसार, इसका सबसे बड़ा असर चेन्नई, बेंगलुरु, कुआलालंपुर और वारसॉ जैसे शहरों में स्थित बैक-ऑफिस केंद्रों पर पड़ने की संभावना है
बैंकिंग सेक्टर में बड़ा टेक्नोलॉजी बदलाव
इस कदम के साथ, बैंक ने अपने दीर्घकालिक लाभ के आउटलुक को बढ़ा दिया है. बैंक को उम्मीद है कि टेंजिबल इक्विटी पर रिटर्न &amp;nbsp;2028 तक 15% से अधिक और 2030 तक लगभग 18% तक बढ़ जाएगा.भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, बैंक का ध्यान समृद्ध रिटेल बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे उच्च-मार्जिन वाले व्यवसायों पर रहेगा.
Mata के बाद अब इस कंपनी से निकाले जाएंगे हजारों लोग, कई ऑफिस भी होंगे बंद
जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थान &#039;मिज़ूहो फाइनेंशियल ग्रुप&#039; ने पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि वे ऑटोमेशन और नई तकनीकों के दम पर अगले 10 वर्षों यानी एक दशक में अपनी वर्कफोर्स से 5,000 नौकरियां कम करेंगे. यह किसी एक बैंक का फैसला नहीं है बल्कि पूरी ग्लोबल बैंकिंग इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव आ रहा है.वित्तीय संस्थान वैश्विक बाजारों में खुद को प्रतिस्पर्धी और ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिटेबल बनाए रखने के लिए लगातार AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 20:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Layoff:, ये, बड़ा, बैंक, खत्म, करेगा, 7000, से, ज्यादा, नौकरियां, इंसानों, की, जगह, लेंगे, रोबोट, और</media:keywords>
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        <title>Indian Billionaires: भारत में अमीरों की संपत्ति में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी, मिले 26 नए अरबपति, जानें अब कितनी हो गई संख्या</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Billionaires: देश के अमीरों की संपत्ति में इस बार रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी देखने को मिली है. जिसने हर किसी को हैरान करके रख दिया है. देश के 229 अरबपतियों की कुल संपत्ति पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर (97.5 लाख करोड़) के पार पहुंच गई है. इतना ही नहीं इस बार इस लिस्ट में 26 नए नाम भी जुड़े हैं. ये सभी मिलकर देश की बढ़ती आर्थिक ताकत को दुनिया के सामने मजबूती से रख रहे हैं.
टॉप पर मुकेश अंबानीफोर्ब्स इंडिया की सामने आई इस लिस्ट में मुकेश अंबानी ने एक बार फिर टॉप किया है. मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बनकर शीर्ष पर काबिज हो गए हैं. इस लिस्ट में टेक्नोलॉजी, रिटेल, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने इस दौलत की रफ्तार को नई ऊंचाई दी है. भारत अब सिर्फ विकासशील नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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लिस्ट में टॉप 10 अमीर लोगों के नाम



नाम
सम्पत्ति (अरब डॉलर में)
सम्पत्ति कितनी बढ़ी/घटी


मुकेश अंबानी
99.7
7.8%


गौतम अडानी&amp;nbsp;
63.8
13.3%


सावित्री जिंदल&amp;nbsp;
39.1
10.1%


लक्ष्मी मित्तल&amp;nbsp;
31
61.5%


शिव नाडार&amp;nbsp;
30.9
10.4% (घटी)


साइरस पूनावाला&amp;nbsp;
27
16.9%


दिलीप शांघवी&amp;nbsp;
25.6
2.8%


केएम बिड़ला&amp;nbsp;
21.1
1.9%


आर दमानी&amp;nbsp;
15.7
1.9%


उदय कोटक&amp;nbsp;
14.4
2.9%



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टॉप गेनर्स की लिस्टफोर्ब्स ने ऐसे बिजनेसमैन की लिस्ट भी तैयार की है जिन्होंने इस साल अपनी नेटवर्थ में अच्छा- खासा इजाफा किया है. जिसमें लक्ष्मी मित्तल का नाम सबसे ऊपर है, जिनके शेयर्स में 61.5% की बढ़ोतकी आई है. इसके बाद जॉय अलुक्कास 57.6%, अल्पना दांगी 57.1%, इंदर जयसिंघनी, रमेश जयसिंघनी, अजय जयसिंघनी 56.3%, गिरधारी जयसिंघनी53.8%, फाल्गुनी नायर 51.7%, विक्राम लाल एंड फैमिली 48.2% और जॉर्ज एलेक्जेंडर मुथूट 47.4% के शेयर्स में भी इजाफा हुआ है.
टॉप लूजर्स की लिस्ट2026 में जहां कई भारतीय अरबपतियों की दौलत ने नए रिकॉर्ड बनाए, वहीं कुछ बड़े नाम ऐसे भी रहे जिनकी संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई. जिनमें वेदांत फैशन के रवि मोदी, जोहो कॉर्पोरेशन के राधा वेम्बू, मैक्रोटेक डेवलपर्स के मंगल प्रभात लोढा, जोहो कॉर्पोरेशन के सेकार वेम्बू, पतंजलि आयुर्वेदा के आचार्य बालकृष्ण, विप्रो लिमिटेड के अजीम प्रेमजी और इंफो एज इंडिया के संजीव बिखचंदानी का नाम शामिल है. इनकी कंपनियों में भारी गिरावट इस साल देखी गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 08:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Milk Price Hike: अब इस राज्य के लोगों पर महंगाई की मार, इस तारीख से बढ़ने जा रहे दूध के दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/milk-price-hike-अब-इस-राज्य-के-लोगों-पर-महंगाई-की-मार-इस-तारीख-से-बढ़ने-जा-रहे-दूध-के-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ Milk Price Hike: देशभर में में इस समय महंगाई का दौर देखने को मिल रहा है. हाल ही में पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इससे कुछ दिन पहले मदर डेयरी और अमूल जैसी कंपनियों ने दूध की कीमत में 2 रुपये का इजाफा किया था. अब इसी तर्ज पर केरल की मिल्क कंपनी भी चल पड़ी है. केरल की दूध कंपनी मिल्मा (Milma) ने भी अपने ब्रांड के दूध की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है.
कितनी बढ़ेंगी कीमतें?केरल में हाल ही में नई सरकार का गठन हुआ है, वीडी सतीशन ने 18 मई को शपथ ग्रहण की है. जिसके बाद राज्य की जनता पर महंगाई की मार पड़ने वाली है. राज्य की डेयरी संस्था मिल्मा ने फैसला किया है कि वो अपने मिल्क प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने जा रहे हैं. कंपनी के दूध में अब 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा रही है. ये नई दरें 1 जून से लागू होने वाली है.&amp;nbsp;
कंपनी के चेयरमैन ने दी जानकारीमिल्मा कंपनी के चेयरमैन के एस मणि ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग होने के बाद दूध के दाम बढ़ने की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि कीमतें बढ़ने का बड़ा शेयर दूध उत्पादकों को मिलेगा. इस फैसले के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि &#039;कीमत बढ़ाने का फैसला नया नहीं है. इसे पहले की सरकार ने भी मंजूरी दे दी थी, लेकिन उस समय चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से इसे लागू नहीं किया गया था&#039;.
आगे उन्होंने बताया कि नई सरकार के काम संभालने के बाद बोर्ड ने इस मुद्दे पर फिर चर्चा की. विभाग के मंत्री को लेकर स्थिति साफ नहीं थी, इसलिए सीधे मुख्यमंत्री से मुलाकात की गई. मुख्यमंत्री से मंजूरी मिलने के बाद दूध की कीमत बढ़ाने का आखिरी फैसला लिया गया है.
बता दें कि मिल्मा केरल की एक भरोसेमंद दूध कंपनी है, जिस पर केरल की आधी से ज्यादा जनता निर्भर है. ऐसे में दूध की कीमतों के बढ़ने का सीधा असर जनता की जेब पर ही पड़ने वाला है. चूंकि ये रोजमर्रा की जरूरत की चीज है तो ऐसे में इससे आम लोगों के घर का बजट पूरी तरह से हिलने वाला है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Milk, Price, Hike:, अब, इस, राज्य, के, लोगों, पर, महंगाई, की, मार, इस, तारीख, से, बढ़ने, जा, रहे, दूध, के, दाम</media:keywords>
    </item>
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        <title>Ola Electric: घाटे से ग्रोथ की ओर Ola Electric! 500 करोड़ पर आया नुकसान, अब बैटरी विस्तार पर बड़ा दांव</title>
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        <description><![CDATA[ Ola Electric Report: भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को हाई लेवल पर बढ़त के साथ बंद हुआ. इस दौरान निवेशकों की खास नजर इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के ऊपर बनी रही. इसी बीच ओला इलेक्ट्रिक के शेयर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 36.96 रुपये पर पहुंच गए. कंपनी ने अपने Q4FY26 अपडेट में घाटे में कमी, सेवा सुधार और बैटरी विस्तार की बड़ी योजनाओं की जानकारी दी.
कंपनी का कहना है...कंपनी के मुताबिक, मार्च 2026 की तिमाही में उसका राजस्व घटकर 265 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 611 करोड़ रुपये था. हालांकि, इस दौरान कंपनी का घाटा काफी कम हुआ. Q4FY26 में शुद्ध घाटा 500 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ये 870 करोड़ रुपये था. ओला इलेक्ट्रिक ने बताया कि उसके ग्रॉस मार्जिन में भी सुधार हुआ है. साथ ही ऑपरेटिंग EBITDA घाटा भी पहले की तुलना में कम हुआ है. पूरे FY26 में कंपनी का कुल राजस्व 2,253 करोड़ रुपये रहा, जबकि सालाना शुद्ध घाटा घटकर 1,833 करोड़ रुपये पर आ गया.
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सर्विस क्वालिटी में हुआ सुधारकंपनी ने ये भी बताया है कि उसकी सर्विस क्वालिटी में बड़ा सुधार देखने को मिला है. अक्टूबर 2025 में जहां ग्राहकों की सर्विस में औसतन 9 दिन लगते थे, वहीं मार्च 2026 तक ये समय घटकर करीब 1 दिन रह गया. वारंटी लागत भी 555 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 59 करोड़ रुपये रह गई.&amp;nbsp;
बैटरी कारोबार में विस्तारइस घाटे के बाद अब बैटरी विस्तार कर एक बड़ा दांव खेलने वाली है. ओला इलेक्ट्रिक ने बैटरी कारोबार में बड़ा विस्तार करने की योजना भी बताई है. कंपनी की 6 GWh गीगाफैक्ट्री का काम लगभग पूरा हो चुका है और इसे जल्द शुरू किया जाएगा. कंपनी अगले साल तक बैटरी क्षमता को बढ़ाकर 20 GWh करने की तैयारी में है.
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की मांग बढ़ीइसके अलावा कंपनी ने बताया कि अप्रैल 2026 में उसके वाहन रजिस्ट्रेशन 20 प्रतिशत बढ़े हैं. रोडस्टर इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है और कंपनी इस सेगमेंट में लगभग 50 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी का दावा कर रही है. ओला इलेक्ट्रिक को उम्मीद है कि FY27 की पहली तिमाही में ऑर्डर दोगुने तक बढ़ सकते हैं. कंपनी का मानना है कि बेहतर सर्विस, मजबूत सप्लाई और बढ़ती मांग से कारोबार को आगे फायदा मिलेगा.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Ola, Electric:, घाटे, से, ग्रोथ, की, ओर, Ola, Electric, 500, करोड़, पर, आया, नुकसान, अब, बैटरी, विस्तार, पर, बड़ा, दांव</media:keywords>
    </item>
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        <title>Rubal vs Dollar: ईरान&amp;अमेरिका युद्ध से रूस की हुई चांदी, तेल बिक्री से &amp;apos;रूबल&amp;apos; बनी नंबर&amp;1 करेंसी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rubal-vs-dollar-ईरान-अमेरिका-युद्ध-से-रूस-की-हुई-चांदी-तेल-बिक्री-से-रूबल-बनी-नंबर-1-करेंसी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/rubal-vs-dollar-ईरान-अमेरिका-युद्ध-से-रूस-की-हुई-चांदी-तेल-बिक्री-से-रूबल-बनी-नंबर-1-करेंसी</guid>
        <description><![CDATA[ Russian Rubal: ईरान और यूएस के बीच पिछले कई महीनों से युद्ध चल रहा है, जिसके चलते अन्य कई देशों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इसी बीच एक देश ऐसा भी है जिसकी चांदी ही चांदी हो रही है. ये देश है रशिया, जिसकी मुद्रा ईरान और अमेरिका के युद्ध की वजह से तेल बिक्री के कारण नंबर वन करेंसी बन गई है.
रूबल vs डॉलरब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत से अब तक रूबल करीब 12 प्रतिशत मजबूत होकर 72.6 प्रति डॉलर तक पहुंच गया है. ये फरवरी 2023 के बाद रूबल का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है. लगातार दूसरे साल रूबल बाजार और सरकारी अनुमानों से उलट मजबूत बना हुआ है. पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि रूस की मुद्रा कमजोर होगी, लेकिन मौजूदा हालात ने तस्वीर बदल दी है.
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सरकार की नीतियों ने दिया सहारारूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और सरकार की सख्त मौद्रिक नीति ने भी रूबल को सहारा दिया है. रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान भारी सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखी हैं. इससे विदेशी मुद्रा की मांग कम हुई और रूबल मजबूत हुआ.
रूस के मंत्री बोले...रूस के अर्थव्यवस्था मंत्री मैक्सिम रेशेट्निकोव (Maxim Reshetnikov) ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा आर्थिक मॉडल के कारण आने वाले सालों में भी रूबल मजबूत रह सकता है. वहीं अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है और तेल की कीमतें बढ़ सकती है, तो रूबल और मजबूत होकर 65-70 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
तो वहीं रूप से वित्त मंत्री एंटोन सिलुनॉय (Anton Siluanov) ने कहा है कि सरकार फिलहाल मजबूत रूबल को लेकर परेशान नहीं है, क्योंकि तेल से होने वाली आय अभी भी बजट जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Rubal, Dollar:, ईरान-अमेरिका, युद्ध, से, रूस, की, हुई, चांदी, तेल, बिक्री, से, रूबल, बनी, नंबर-1, करेंसी</media:keywords>
    </item>
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        <title>स्टारबक्स में छंटनी, वाइस प्रेसिडेंट से लेकर मैनेजर तक की गई नौकरी, सैकड़ों कर्मचारियों की छुट्टी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्टारबक्स-में-छंटनी-वाइस-प्रेसिडेंट-से-लेकर-मैनेजर-तक-की-गई-नौकरी-सैकड़ों-कर्मचारियों-की-छुट्टी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/स्टारबक्स-में-छंटनी-वाइस-प्रेसिडेंट-से-लेकर-मैनेजर-तक-की-गई-नौकरी-सैकड़ों-कर्मचारियों-की-छुट्टी</guid>
        <description><![CDATA[ Starbucks Layoffs Update: इन दिनों बड़ी- बड़ी कंपनियों में छंटनी का दौर चल रहा. छंटनी का नाम सुनते ही अक्सर कर्मचारियों की रूह कांप उठती है. यह कर्मचारी के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है. ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी कॉफी हाउस और रोस्टरी चैन में शामिल &#039;स्टारबक्स&#039; कंपनी ने यूएस में छंटनी को लेकर बड़ा ऐलान किया है.&amp;nbsp;
यूएस में &amp;nbsp;बेक टू स्टारबक्स नीति के तहत, &amp;nbsp;सीईओ बरियन निकोल ने &#039;स्टारबक्स&#039; के करीब 100 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है. वही, वेबसाइट लिवस्टीन ट्रिब्यून और सिट्ल्स ट्रिब्यून के मुताबिक, हाल ही में हुई छंटनी में करीब 252 कर्मचारियों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. स्टारबक्स के मुताबिक, &amp;nbsp;कंपनी ने बीते सप्ताह करीब &amp;nbsp;300 से ज्यादा कर्मचारियों को निकालने का फैसला लिया था. जिसमें पद, प्रशासनिक असिसटेंट, मैनेजर और अन्य वाइस प्रेसेडिंट भी शामिल थे.&amp;nbsp;
कभी भी बढ़ सकता है LPG का दाम, जानिए आज आपके शहर में कितने का मिल रहा है गैस सिलेंडर
कर्मचारियों के ट्रांसफर और नई जगहों पर शिफ्टिंग की तैयारी
इसी के साथ सिएटल स्थित कॉफी चेन अपनी क्षेत्रीय सहायता सेवाओं को भी मजबूत कर रही है. जिसमें शिकागो, डल्लास, अटलांटा, बरबैंक और केलिफॉर्निया जैसे देशों का भी नाम शामिल है. साथ ही उन स्थानों पर कार्यरत कर्मचारियों को कही ओर दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, &amp;nbsp;सिएटल, न्यू योर्क और नशविले में चल रही कंपनी अन्य चेन को स्पोर्ट कर रही है. जिसमें लीज पर दी हुई छह -छह मंजिला इमारत भी शामिल है. इसी के साथ यह छंटनी का सिलसिला 17 जुलाई से शुरू होकर 1 फरवरी तक चलेगा. &amp;nbsp;
कंपनी में छंटनी और कॉस्ट कटिंग पर बड़ा फैसला
गौरतलब है कि, &amp;nbsp;निकोल ने जब से कंपनी का जिम्मा लिया है. जब से बेक टू स्टारबक्स नीती के तहत कंपनी में मौजूदा हालात कर्मचारी का कम होना देखा जा रहा है. ऐसे में कंपनी अब कोस्ट कटिंग, ऑपरेशन और लंबे समय चलने वाली नीती को खास तौर पर देख रही है. &amp;nbsp;सिएटल टाइम्स के अनुसार, फरवरी 2025 से अब तक स्टारबक्स ने करीब वॉशिंगटन बेस्ड कंपनी ने दो हजार से ज्याद कर्मचारियों कंपनी से निकाल चुकी है. जिसमें स्टाफ, स्टोर, रिटेल और रोस्टेरी लोकेशन मौजूद है.
ऑनलाइन धोखाधड़ी से मिलेगा छुटकारा, RBI लागू करने जा रहा है नया डिजिटल सुरक्षा चक्र
सिएटल को दिए बयान में स्टारबक्स के प्रवक्ता ने कहा, यह फैसला कंपनी को मजबूत बनाने के लिए बेहद ही निर्णनायक कदम है. इससे कंपनी को अच्छी ग्रोथ मिलेगी और कंपनी में सही ढंग से काम हो सकेगा. बात करें हाल ही में कंपनी की कमाई की तो स्टारबक्स ने 9.5 बिलियन डोलर सेल्स के साथ करीब 511 मिलियन डोलर की कमाई की है. जो की एक साल का आंकड़ा है.
मिली जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने अनुमान लगाया है कि उसकी आगामी योजनाओं पर करीब 400 मिलियन डॉलर की लागत आएगी. &amp;nbsp;जिसमें कर्मचारियों की छंटनी का खर्च और उसके रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में बदलाव भी शामिल हैं.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>स्टारबक्स, में, छंटनी, वाइस, प्रेसिडेंट, से, लेकर, मैनेजर, तक, की, गई, नौकरी, सैकड़ों, कर्मचारियों, की, छुट्टी</media:keywords>
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        <title>LPG Rate Today: कभी भी बढ़ सकता है LPG का दाम, जानिए आज आपके शहर में कितने का मिल रहा है गैस सिलेंडर</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Gas Cylinder Price Today: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब सिर्फ कच्चे तेल तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका दबाव LPG और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर भी देखा जा रहा है. इसी बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में दो बार बढ़ोतरी के बाद कई राज्यों में ईंधन के दाम भी बढ़ चुके हैं. ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या LPG गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए हैं या नहीं?
देश में LPG सिलेंडर के रेट में बदलाव?
20 मई यानी आज बुधवार को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इंडेन के मुताबिक, 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम के अलग-अलग शहरों में पहले जैसे ही बने हुए हैं. अगर बात करें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तो यहां LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है और कमर्शियल LPG सिलेंडर 19 किलो वाला 3,071.50 है. वहीं देहरादून में यह 932 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3129 रुपये में मिल रहा है. अंडमान में घरेलू सिलेंडर 989 रुपये और कमर्शियल 3490 में बिक रहा है.
फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? यहां देखें दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद समेत अन्य शहरों के नए रेट्स
इंदौर में घरेलू सिलेंडर 941 है, जबकि रायपुर में यह 984.5 और कमर्शियल सिलेंडर 3294.5 में उपलब्ध है. पटना की बात करें तो यहां घरेलू गैस सिलेंडर 1002.50 तक पहुंच गया है. जयपुर में घरेलू LPG सिलेंडर 916. 5 और 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर 3099 में बिक रहा है. बेंगलुरु में घरेलू सिलेंडर 915.50 रुपये और हैदराबाद में 965 रुपये में मिल रहा है. उत्तर प्रदेश में 14.2 किलो घरेलू &amp;nbsp;सिलेंडर की कीमत करीब 900 रुपये से 950 के बीच बनी हुई है.
कमर्शियल सिलेंडर 3000 रुपये के पार
हालांकि, घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन 19 किलों वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत कई जगहों पर 3000 रुपये के पार पहुंच गई है, जिससे होटल और व्यापारिक सेक्टर पर असर देखा जा रहा है.
आने वाले समय में बढ़ सकते हैं दाम
अभी फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन आने वाले महीनों में LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें हैं. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर के चलते ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. भारत की सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने की पहली तारीक को LPG की कीमतों की समीक्षा करती हैं.
रॉकेट की रफ्तार पकड़ रहा सोना तो चांदी ने दी राहत की सांस, जानें आज का सोने- चांदी का भाव
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dollar vs Rupee: लगातार 9वें दिन रुपये का निकला दम, क्या डॉलर के मुकाबले आज हो गया 100 पार?</title>
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        <description><![CDATA[ Dollar vs Rupee: रुपये में आज लगातार नौंवे सत्र में गिरावट आई है. डॉलर के मुकाबले रुपया आज 0.3 फीसदी गिर गया है. इसी के साथ रुपया 96.86 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 41 पैसे गिरकर 96.96 तक चला गया. अब वो दिन दूर नहीं जब रुपया 97 पर होगा. इस गिरावट ने हर किसी को परेशान कर दिया है. इस गिरावट का ही परिणाम है कि आज रुपया सबसे कमजोर मुद्रा बन गया है.
क्यों गिरता जा रहा है रुपया?
FII लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा वापस निकाल रहे हैं, जिसकी वजह से रुपया कमजोर होता जा रहा है. इसके अलावा भारत अपनी जरूरतों के लिए कच्चा तेल आयात करता है और इस समय जैसी अंतराष्ट्रीय स्थिति है, उसकी वजह से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं.&amp;nbsp;
कभी भी बढ़ सकता है LPG का दाम, जानिए आज आपके शहर में कितने का मिल रहा है गैस सिलेंडर
सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला मुद्रा
रुपया साल 2026 में एशिया की सबसे कमजोर और खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है. इस महीने अबतक इसमें 1.5 प्रतिशत और इस साल 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है. विदेशी मुद्रा कारोबारी और एक्टपर्ट्स का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से निर्यात और खाड़ी देशों से आयात में बाधा आने के कारण रुपये की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है.
कैसे हो रहा आयात में नुकसान?लंबे समय से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है. इससे रुपया कमजोर हो रहा है और भारत का आयात बिल बढ़ रहा है. साथ ही चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा गहरा गया है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का चालू खाते का घाटा काफी बढ़ सकता है. मध्य पूर्व से आने वाले रेमिटेंस पर संभावित असर और भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विदेशी निवेश प्रवाह कमजोर रहने की आशंका भी दबाव बढ़ा रही है.
स्टारबक्स में छंटनी, वाइस प्रेसिडेंट से लेकर मैनेजर तक की गई नौकरी, सैकड़ों कर्मचारियों की छुट्टी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: क्या डॉलर के मुकाबले शतक पार कर जाएगा रुपया? 5 एक्सपर्ट्स की राय एक&amp;दूजे से जुदा, निचोड़ क्या निकला?</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रुपया इस समय भारी दबाव में है और लगातार नए रिकॉर्ड निचले स्तर को छू रहा है. 19 मई 2026 को यह डॉलर के मुकाबले 96.52 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. साल 2026 की शुरुआत में रुपया 89 के आसपास था, लेकिन अब तक यह 6-7% कमजोर हो चुका है. इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को 105-107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतों ने आयात बिल बढ़ा दिया है और डॉलर की मांग बढ़ गई है. दूसरी तरफ, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं. 2026 में अब तक 2.65 लाख करोड़ रुपए की निकासी हो चुकी है.
ऐसे में हर किसी के मन में एक ही सवाल है- क्या रुपया 100 के पार जाएगा? इसपर बात करते हुए कई एक्सपर्ट्स ने अपनी राय रखी है. आइए जानते हैं 5 एक्सपर्ट्स की राय, जिनमें 2 रुपये के 100 के पार जाने के पक्ष में हैं, 2 विपक्ष में और 1 न्यूट्रल राय रखते हैं...
पक्ष में: ये एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रुपया 100 के पार जा सकता है
पूर्व UN सलाहकार और अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा ने ANI से बात करते हुए कहा, &#039;पिछले तीन महीनों में रुपया 90 के नीचे से गिरकर करीब 96 प्रति डॉलर पर आ गया है. इसका अपना मुद्रास्फीति पर असर होगा.&#039; उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा, &#039;अगर मौजूदा दबाव जारी रहता है, तो रुपया अगली तिमाही में बहुत आसानी से 100 रुपये प्रति डॉलर को छू सकता है.&#039; उनकी यह राय रुपये के 100 के पार जाने की संभावना को बल देती है.
करेंसी एक्सपर्ट के.एन. डे भी रुपये के 100 के पार जाने की संभावना से इनकार नहीं करते. ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा, &#039;11 मई के बाद से रुपये में जिस रफ्तार से गिरावट आई है, उसने बाजार को चौंका दिया है, फिर भी रेगुलेटर और नॉर्थ ब्लॉक दोनों चुप हैं.&#039; उन्होंने आगे कहा, &#039;चूंकि कोई निचला स्तर नजर नहीं आ रहा है, इसलिए स्थिरता बिंदु का अनुमान लगाना महज अंदाजा है. 100 की ओर मनोवैज्ञानिक स्लाइड भी अब संभव है.&#039; उनका बयान बाजार में अचानक हो रही उथल-पुथल और गिरावट की तेज रफ्तार को बयान करता है.
विपक्ष में: ये एक्सपर्ट्स जल्द ही 100 का आंकड़ा पार होने की संभावना नहीं मानते
फाइनेंस एनालिस्ट और FX स्ट्रैटेजिस्ट धीरज निम का मानना है कि RBI रुपये को जल्द ही 100 के स्तर तक नहीं पहुंचने देगा. उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, &#039;हमें नहीं लगता कि RBI फिलहाल रुपये को 100 के स्तर तक जाने देगा.&#039; ANZ रिसर्च को उम्मीद है कि रुपया साल के अंत तक 97.5 प्रति डॉलर पर रहेगा, जो मौजूदा स्तरों से कमजोर होने के बावजूद 100 के आंकड़े से दूर रहने का संकेत है.
हेड ऑफ FX और EM मैक्रो स्ट्रैटेजी एशिया (बार्कलेज) मितुल कोटेचा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, &#039;यह हमारा पूर्वानुमान नहीं है कि रुपया 100 रुपए प्रति डॉलर को छुएगा.&#039; हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रुपये के डेप्रिसिएशन की रफ्तार उनके अनुमान से कहीं ज्यादा तेज और चौंकाने वाली रही है. उन्होंने कहा, &#039;हम पहले ही उन स्तरों को पार कर चुके हैं जिन्हें पहले मंदी का पूर्वानुमान माना जाता था.&#039; फिर भी, उन्होंने साफ कहा है कि 100 का स्तर उनके आधिकारिक पूर्वानुमान में शामिल नहीं है.
न्यूट्रल: यह एक्सपर्ट नियंत्रित गिरावट को चिंता की बात नहीं मानते
कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर निलेश शाह रुपये के 100 के पार जाने को लेकर एक संतुलित नजरिया रखते हैं. ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, &#039;एक दिन हम रुपये को तीन अंकों में जाते देखेंगे? काफी संभावना है.&#039; हालांकि, उनका जोर इस बात पर है कि यह गिरावट कैसे होती है. उन्होंने कहा, &#039;अगर यह व्यवस्थित डेप्रिसिएशन है, तो यह सुनिश्चित करता है कि हमारी अर्थव्यवस्था मुकाबला करती रहे.&#039; उनका मानना है कि &#039;विदेशी मुद्राओं की तुलना में रुपया गिरता रहता है&#039; और अगर यह बड़े बदलाव के बिना और व्यवस्थित तरीके से होता है तो यह चिंता की बात नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था को मुकाबले में बनाए रखने के लिए एक तालमेल बैठाना है.
रुपए की गिरावट के बीच RBI की भूमिका अहम
रुपया 100 के पार जाएगा या नहीं, यह काफी हद तक तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर करेगा. अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो रुपया 92-93 के स्तर तक वापस आ सकता है. वहीं, RBI के पास अभी भी लगभग 700 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिसके दम पर वह रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोक सकता है. हालांकि, अगर वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो 100 का मनोवैज्ञानिक स्तर एक वास्तविक संभावना बन सकता है.
फिलहाल, एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है, लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि आने वाले महीने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol&amp;Diesel News: 2026 में 2 बार और 2022 में 13 बार बढ़े थे पेट्रोल&amp;डीजल के दाम, आखिरी बार कब हुआ था सस्ता?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-news-2026-में-2-बार-और-2022-में-13-बार-बढ़े-थे-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-आखिरी-बार-कब-हुआ-था-सस्ता</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price: यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रहा है, जिसके चलते होर्मुज ब्लॉक है और कच्चे तेल का आयात इससे प्रभावित हो रहा है. दो महीनों से भारत में भी तेल और गैस की किल्लत देखने को मिल रही है. ना केवल किल्लत बल्कि हाल ही में पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में भी वृद्धि हुई है. लेकिन क्या आपको याद है कि आखिर बार पेट्रोल की कीमतें कब कम हुई थीं?
2026 में दो बार बढ़ी कीमतेंसाल 2026 की शुरुआत ही मिडिल ईस्ट के तनाव के साथ हुई है. जिसके बाद से ही आम जनता समेत हर शख्स ही इस भय में था कि ये युद्ध इसी तरह जारी रहा तो तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी गड़बड़ा जाएंगी. ऐसा ही देखने को भी मिल रहा है. 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये का इजाफा हुआ है. जिसमें पेट्रोल की कीमत 3 रुपये 14 पैसे बढ़ी है, तो वहीं डीजल की कीमत 3 रुपये 11 पैसे बढ़ी है. जिसके चार दिन बाद यानी 19 मई को ही एक बार फिर से पेट्रोल- डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से वृद्धि हुई है.
ये भी पढ़ें: Petrol Diesel Price: और महंगा होगा पेट्रोल-डीजल, किस्तों में क्यों बढ़ रहे दाम? तेल कंपनियों ने बताया अपना फॉर्मूला
2022 में 13 बार बढ़े दामफिलहाल तेल बाजार में जैसी उथल- पुथल देखने को मिल रही है, उसे देखते हुए लग रहा है कि 2022 का दौर दोबारा से आने वाला है. जिस तरह से महज चार दिनों में ही पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़े हैं, उसी तरह साल 2022 में पेट्रोल डीजल की कीमतों में कुल 13 बार इजाफा हुआ था. उस समय रूस और यूक्रेन के बीच चले युद्ध की वजह से तेल बाजार में काफी अफरा- तफरी मची थी और कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ गई थी.
जिसके बाद भारत सरकार ने भी महज 15 दिनों के अंदर ही 13 बार पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं. इस दौरान मार्च से अप्रैल के बीच 10 दिनों तक हर रोज 80 पैसा प्रति लीटर के हिसाब से दाम बढ़ाए गए थे. जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं 2022 का दौर दोबारा लौट सकता है. क्योंक फिलहाल एक्सपर्ट्स भी बता रहे हैं कि धीरे- धीरे करके ईंधर की कीमतें और भी बढ़ने वाली हैं.
ये भी पढ़ें: Cheapest Gold Price: दुनिया के इन 10 देशों में मिलता है सबसे सस्ता सोना, जानें इस लिस्ट में कितने नंबर पर है भारत
कब हुआ था पेट्रोल- डीजल सस्ता?पेट्रोल- डीजल की कीमतों में अब तक केवल बढ़ोतरी पर लोगों की नजर है. साल 2022 के बाद सीधे अब यानी 2026 में ईंधन के दाम बढ़ रहे हैं. लेकिन क्या आपको याद है कि साल 2024 में इनकी कीमतें कम हुई थीं. दरअसल 15 मार्च 2024 में सरकार की तरफ से पेट्रोल- डीजल की कीमतो में 2 रुपये की कटौती की गई थी. जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये और डीजल की कीमत 87.62 रुपये हो गई थीं.&amp;nbsp;बता दें कि साल 2026 में अब तक पेट्रोल कीमत में 4 रुपये और डीजल की कीमतों में 3 रुपए 94 पैसे का इजाफा हुआ है. जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये और डीजल की कीमत 91.58 रुपये हो गई है. इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ रहा है. हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल- डीजल की कीमतों में और भी ज्यादा इजाफा हो सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, News:, 2026, में, बार, और, 2022, में, बार, बढ़े, थे, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, आखिरी, बार, कब, हुआ, था, सस्ता</media:keywords>
    </item>
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        <title>Explained: रोजाना 80 लाख बिक्री और 1.6 करोड़ कमाई! मुंबई की पहचान &amp;apos;वड़ा पाव&amp;apos; का महंगा होना नॉर्मल क्यों नहीं? कितना बड़ा असर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-रोजाना-80-लाख-बिक्री-और-16-करोड़-कमाई-मुंबई-की-पहचान-वड़ा-पाव-का-महंगा-होना-नॉर्मल-क्यों-नहीं-कितना-बड़ा-असर</link>
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        <description><![CDATA[ मुंबई और वड़ा पाव का रिश्ता कोई नाजुक रिश्ता नहीं है. ये वो स्नैक है, जो मुंबई की रफ्तार का ईंधन है, मजदूर का पेट भरने वाला सहारा है और करोड़पति बिजनेसमैन की भी कमजोरी. लेकिन इन दिनों मुंबईकरों के लिए एक बुरी खबर है. उनका अपना वड़ा पाव अब उनकी जेब पर पहले से ज्यादा भारी पड़ने लगा है. शहर में पिछले कुछ हफ्तों में वड़ा पाव की कीमत में इजाफा हुआ है, जिसके चलते ये सस्ता और पेट भरने वाला स्नैक अब 25 से 30 रुपए तक पहुंच गया है. पहले जो वड़ा पाव 15 से 20 रुपए में मिलता था, अब उसके लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है. लेकिन तेल-गैस और अन्य चीजों के दाम बढ़ने पर इतनी तेज चर्चा नहीं हुई, जितना वड़ा पाव पर हो रही, क्यों?
सिर्फ पांच रुपये की बढ़ोतरी नहीं, मुंबई की &#039;लाइफलाइन&#039; पर चोट
ये महज 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि ये उस अर्थव्यवस्था और भावना पर चोट है, जो करोड़ों मुंबईकरों को रोज जोड़ती है. गौरतलब है कि कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी और कच्चे माल के दाम आसमान छूने की वजह से ये संकट खड़ा हुआ है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और उससे प्रभावित ईंधन आपूर्ति ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है. नतीजा ये हुआ कि 2026 की शुरुआत में ही वड़ा पाव विक्रेताओं ने इसकी कीमत 5 रुपए तक बढ़ा दी.
मार्च 2026 में आई FPJ की रिपोर्ट के मुताबिक, कई इलाकों में वड़ा पाव 25 रुपए प्रति पीस बिकने लगा था. अब ताजा रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये कीमत 25 से 30 रुपए तक पहुंच गई है. LPG संकट के चलते खाने-पीने की चीजों के दामों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ब्रेड के दाम में 5 रुपये तक का इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर वड़ा पाव, मिसल पाव और सैंडविच जैसे स्नैक्स पर पड़ा है.
क्यों बढ़ रहे हैं वड़ा पाव के दाम?
वड़ा पाव की बढ़ती कीमतों के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई बड़ी वजहें हैं:

पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में छोटे होटल और स्ट्रीट फूड विक्रेता या तो बंद होने की कगार पर हैं या फिर उन्होंने अपने मेन्यू से कई चीजें हटा दी हैं. मुंबई के एक उपनगर में वड़ा पाव की दुकान चलाने वाले बबन यादव ने पाव की कीमत बढ़ने की वजह से वड़ा पाव के दाम 3 रुपए बढ़ा दिए हैं. उन्होंने समोसा तलना तक बंद कर दिया है.
खाद्य तेल की कीमतों में 30 से 40 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है. बेसन, आलू और मिर्च जैसे कच्चे माल के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे व्यापारियों को भारी घाटा सहना पड़ रहा है.
BMC ने बेकरियों में लकड़ी और कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जिससे पाव के उत्पादन की लागत में और इजाफा होने की आशंका है. इस फैसले के विरोध में बेकरी एसोसिएशन का कहना है कि इससे पाव की कीमत 3 रुपए से बढ़कर 5 रुपए प्रति पीस तक हो सकती है, जिसका सीधा असर वड़ा पाव की कीमत पर पड़ेगा.

ये सिर्फ शुरुआत है. LPG की कमी ने मुंबई की बेकरी इंडस्ट्री को घुटनों पर ला दिया है. शहर की 1200 बेकरियों में से लगभग 600 बेकरियां रोजाना करीब 32 लाख पाव का उत्पादन करती हैं. लेकिन गैस की कमी की वजह से ये बेकरियां बंद होने के कगार पर हैं, जिससे पूरी सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है.
रोजाना कितने लोग खाते हैं वड़ा पाव और कितना बड़ा है ये कारोबार?
वड़ा पाव मुंबई की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और मजबूत हिस्सा है, हालांकि इसका कोई एक आधिकारिक आंकड़ा नहीं है. FPJ की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में रोजना करीब 10,000 से 20,000 लोग वड़ा पाव खाते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, मुंबई में वड़ा पाव की लगभग 5,000 स्टॉल्स हैं. वहीं, फूड एंड वाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में 20,000 से भी ज्यादा वड़ा पाव के स्टॉल हैं. इस अनौपचारिक उद्योग से रोजाना लगभग 1.6 करोड़ रुपये का कारोबार होता है.
फूड एंड वाइन की रिपोर्ट बताती है कि शहर की रोजाना पाव की खपत 80 लाख से ज्यादा है, जिसमें से करीब 60 लाख पाव स्ट्रीट वेंडर्स और खाने-पीने की दुकानों पर सप्लाई होते हैं. गोली वड़ा पाव जैसे बड़े ब्रांड रोजाना 70,000 से ज्यादा वड़ा पाव बेचते हैं. मुंबई उपनगरीय रेलवे के 70 लाख से ज्यादा यात्रियों के लिए वड़ा पाव एक सस्ता और जल्दी मिलने वाला आहार है, जो उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. वहीं, BMS.CO.IN की रिपोर्ट &#039;माय मुंबई एंड माय वड़ा पाव&#039; के मुताबिक, मुंबई में रोजाना 1 लाख वड़ा पाव खाए जाते हैं.
एक वड़ा पाव से कितने परिवारों का चलता है घर?
वड़ा पाव ने अनगिनत परिवारों की आजीविका का जरिया बनकर उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता दिलाई है. एक छोटी सी रेहड़ी लगाने वाले से लेकर बड़े ब्रांड तक, ये स्नैक लाखों लोगों को रोजगार देता है. &#039;माय मुंबई एंड माय वड़ा पाव&#039; रिपोर्ट के मुताबिक, सेटअप का खर्च 50,000 रुपये से लेकर 5,00,000 रुपये तक हो सकता है, लेकिन सही जगह और स्वाद होने पर मुनाफा तुरंत शुरू हो जाता है. एक वेंडर रोजाना 500 से 1000 वड़ा पाव तक बेच लेता है. एक वेंडर हर वड़ा पाव पर करीब 8 रुपये बचाता है, जो दिनभर में अच्छी-खासी कमाई बन जाती है.
कुछ मशहूर स्टॉल्स की कमाई सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. कई वेंडर्स महीने के 2.8 लाख रुपये तक कमा लेते हैं, जो कि किसी बड़ी IT कंपनी की नौकरी से भी ज्यादा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक वड़ा पाव विक्रेता ने बताया कि वो सालाना 24 लाख रुपये तक कमा लेता है, जो सुनकर कई बड़ी नौकरी वाले भी हैरान रह गए.
मुंबई की मशहूर &#039;अशोक वड़ा पाव&#039; की दुकान हर महीने 30 लाख रुपये का कारोबार करती है. ये दुकान, जो अब तीसरी पीढ़ी चला रही है, इस बात का सबूत है कि वड़ा पाव किस तरह एक परिवार की तकदीर बदल सकता है. एक अनुमान के मुताबिक, मुंबई में करीब 2 लाख डिलीवरी वर्कर रोजाना साइकिल और मोटरसाइकिल से ताजा पाव की सप्लाई करते हैं. ये दर्शाता है कि इस एक स्नैक से जुड़ी सप्लाई  ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Investment by Rich: अमीरों का सीक्रेट, म्यूचुअल फंड छोड़ अब कहां पैसा लगा रहे हैं भारत के रईस? सीखें निवेश</title>
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        <description><![CDATA[ Investment Tips: पिछले दो सालों में भारत के अमीर निवेशकों यानी 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति वाले का रुझान म्युचुअल फंड और रियल एस्टेट से हटकर वैकल्पिक निवेश कोष (AIF), विशेषकर SME-केंद्रित फंड्स की तरफ तेजी से बढ़ा है. इस खबर में आपको यह बताएंगे कि&amp;nbsp;म्यूचुअल फंड के अलावा आप किन जगहों पर अपने पैसों को निवेश कर सकते हैं.&amp;nbsp;
म्युचुअल फंड बनाम AIF की सीमाएं
दरअसल, म्युचुअल फंड ने खुदरा निवेशकों को अनुशासन देने का काम किया है. तो वहीं, दूसरी तरफ सेबी (SEBI) के नियमों की वजह से ही वे किसी एक बेहतरीन माइक्रो-कैप कंपनी में बड़ा दांव नहीं लगा सकते हैं. इतना ही नहीं, यह बड़े निवेशकों के लिए एक &#039;स्पीड लिमिटर&#039; की तरह का काम करता है. हांलाकि, इसके विपरीत, कैटेगरी I और III AIF फंड प्रबंधकों को कम शेयरों, उच्च दृढ़ता और गहन शोध के साथ एक केंद्रित पोर्टफोलियो बनाने की अनुमति देते हैं. तो वहीं, &amp;nbsp;इसकी न्यूनतम निवेश सीमा 1 करोड़ रुपये है, जो इसे बेहद ही खास बनाता है.&amp;nbsp;
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यहां जानें SME क्षेत्र में छिपे अवसर के बारे में&amp;nbsp;
BSE SME और NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर 5 हजार से ज्यादा कंपनियां अपना काम करती हैं. जिन पर बड़े संस्थानों या फिर खुदरा निवेशकों की बड़ी नजर नहीं है. लेकिन, इनमें से कई कंपनियां रक्षा, स्पेशलिटी केमिकल्स और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में 25-40 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ इस साल अप्रैल के महीने में वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव में भी इन घरेलू कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है.&amp;nbsp;
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निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक
इस बदलाव से सीखने के लिए आपको 1 करोड़ रुपये की आवश्यकता नहीं है. जहां, बड़े निवेशक अब सर्वश्रेष्ठ SIP रिटर्न खोजने के बजाय यह देख रहे हैं कि वास्तविक अल्फा (Alpha) आखिर है कहां. इसके अलावा भारत का असली ग्रोथ इंजन निफ्टी 50 के बजाय 500 से 2 हजार करोड़ रुपये की ये उभरती हुई कंपनियां हो सकती हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Inspiring Story: 5000 की नौकरी छोड़ खड़ा किया 48 करोड़ का बिजनेस, आपको हैरान कर देगी इस महिला की कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ Who is Nayana Vaidya: एक समय था जब भारत की महिलाओं को पढ़ने-लिखने का कोई अधिकार नहीं था. तो वहीं, आज का समय है जहां लड़कियों को न सिर्फ पढ़ाया जा रहा बल्कि पढ़-लिखकर वह खुद का बिज़नेस भी शुरू कर रही हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है नयना वैद्य की. जिन्होंने अपनी 5 हजार रुपये की नौकरी छोड़कर 48 करोड़ का बिजनेस खड़ा कर हर किसी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है. आज वह हर महिला के लिए एक प्रेरणादायक बन चुकी हैं.&amp;nbsp;
आखिर कौन हैं नयना वैद्य?&amp;nbsp;
यह प्रेरणादायक कहानी नयना वैद्य की है, जिन्होंने कभी केवल 5 हजार रुपये की मामूली सैलरी से अपने करियर की शुरुआत की थी और आज वह 48 करोड़ के बिजनेस की मालकिन हैं. &#039;ओम साई सर्जिकल्स&#039; (Om Sai Surgicals) नाम की हेल्थकेयर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी चलाने वाली नयना वैद्य ने हाल ही में &#039;करोड़ क्लब&#039; (Crore Club) पॉडकास्ट पर अपने जीवन के सफर के बारे में शेयर किया. जहां, उन्होंने बिजनेस में आए उतार चढ़ाव के बारे में भी जिक्र किया.&amp;nbsp;
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&quot;खुशी काम करने में है, पैसे में नहीं&quot;
पॉडकास्ट के दौरान नयना ने जानकारी देते हुए बताया कि इस साल मार्च के महीने में उनकी कंपनी का टर्नओवर लगभग 48 करोड़ रुपये का था. जिसको लेकर उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी सफलता के बाद वह आज भी उनके पैर जमीन पर ही है. जिसको लेकर उन्होंने आगे बताया कि &quot;मुझे इस बात को लेकर कोई बहुत बड़ा घमंड या गर्व महसूस नहीं होता, क्योंकि सफर अभी भी जारी है, &quot;खुशी काम करने में है, पैसे में नहीं&quot;.
5,000 से 48 करोड़ तक का शानदार सफर
साल 1997 में नयना वैद्य एक फार्मास्युटिकल (दवा) कंपनी में सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम किया करतीं थी. जिसपर उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि &amp;nbsp;&quot;1997 में उस फार्मा कंपनी में मेरी मासिक सैलरी करीब 5 हजार रुपये थी. उन्होंने आगे कहा कि &quot;जॉनसन एंड जॉनसन ने मेरे पति को एक डीलरशिप का शानदार ऑफर दिया था. क्योंकि मैंने शादी से पहले फार्मेसी की पढ़ाई की थी, इसलिए मेरे पास इस बिजनेस के लिए जरूरी लाइसेंस और योग्यताएं मौजूद थीं. इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि इस तरह हम दोनों ने मिलकर इस डीलरशिप को हासिल किया और अपने सपनों को उड़ान देने के बारे में योजना बनाना शुरू कर दिया.&amp;nbsp;
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यहां जानें उनकी नेटवर्थ और पहली कमाई
हांलाकि, जब पॉडकास्ट में नयना से उनकी कुल संपत्ति (Net Worth) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधा आंकड़ा बताने से पूरी तरह से इंकार कर दिया. जिसपर उन्होंने आगे बताया कि &quot;मैंने जितना भी कमाया है, उससे मैं एक बहुत ही आरामदायक जीवन जी पा रही हूं और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में सक्षम रही हूं&quot;. इतना ही नहीं,&amp;nbsp;
लेकिन, उन्होंने यह जरूर बताया कि साल 2010 के आसपास अपना पहला करोड़ रुपया कमाया था. इसके साथ ही उन्होंने अपने बिजनेस की शुरुआत साल 2000 में की थी, यानी कंपनी शुरू करने के पूरे एक दशक बाद वे इस मुकाम पर पहुंच गईं थीं.&amp;nbsp;
इतना ही नहीं, आज के समय में नयना को अपनी संपत्तियों से किराए की आय भी मिलती है. इसके अलावा साल 2019 में उन्होंने एक घर खरीदने के लिए होम लोन लिया था, जिसकी कीमत आज बढ़कर 4 करोड़ रुपये हो चुकी है. उनकी यह कहानी दर्शाती है कि सही योग्यता, कड़ी मेहनत और निरंतर कोशिश से किसी भी बड़े लक्ष्य को आसानी हासिल किया जा सकता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Online Fraud: ऑनलाइन धोखाधड़ी से मिलेगा छुटकारा, RBI लागू करने जा रहा है नया डिजिटल सुरक्षा चक्र</title>
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        <description><![CDATA[ Online Scams and RBI: डिजिटल पेमेंट ने जहां काम को बेहद ही आसान बना दिया है तो वहीं, दूसरी तरफ भारत में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध ने लोगों को जीना मुश्किल कर रखा है. ऐसे में अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बेहद ही सख्त कदम के साथ-साथ आधुनिक सिस्टम पर तेजी से काम कर रहा है. जहां, इस नई पहल के तहत अब हर डिजिटल बैंक डिपॉजिट और ट्रांजैक्शन को एक रिस्क स्कोर (Risk Score) दिया जाएगा.&amp;nbsp;
म्यूल अकाउंट्स पर कसेगा शिकंजा
आपमें से बेहद ही कम लोगों को इस बारे में जानकारी होगी कि साइबर अपराधी ज्यादातर धोखाधड़ी का पैसा छिपाने के लिए दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिसे दूसरे शब्दों में म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) भी कहा जाता है. इस पर शिकंजा कसने के लिए रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर mulehunter.ai नाम की खास तरह की एआई (AI) टूल को विकसित किया है. जो एडवांस्ड मशीन लर्निंग (ML) एल्गोरिदम पर पूरी तरह से काम करता है. इस टूल के माध्यम से संदिग्ध खातों को पकड़ने में बेहद ही आसानी हो जाएगी.&amp;nbsp;
UPI Transaction: UPI पेमेंट फेल और कट गए पैसे? घबराएं नहीं, इन आसान स्टेप्स से तुरंत वापस आएगा फंड
अब IDPIC संभालेगा कमान
इसके अलावा इस पूरे सुरक्षा के संचालन की जिम्मेदारी IDPIC (Indian Digital Payment Intelligence Corporation) को फिलहाल सौंपी गई है. जहां, साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले संदिग्ध खातों की एक &#039;साझा रजिस्ट्री&#039; को सबसे पहले तैयार किया जाएगा. इतना ही नहीं, देश के दो बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में इस एआई टूल (AI Tool) का पायलट परीक्षण (Pilot Test) किया जा चुका है, जिसके बाद से इसके अच्छे खासे परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं.&amp;nbsp;
Dollar, रुपया और बाथ जानें क्यों होती है हर देश की करेंसी की वैल्यू अलग? अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है असर
तो वहीं, दूसरी तरफ RBI सभी बैंकों को इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है ताकि पूरे भारतीय बैंकिंग ढांचे को साइबर हमलों से जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी सुरक्षित किया जा सके.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dollar, रुपया और बाथ जानें क्यों होती है हर देश की करेंसी की वैल्यू अलग? अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है असर</title>
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        <description><![CDATA[ Currency Value: भारतीय रुपये की वैल्यू वैश्विक स्तर पर काफी नीचे गिर गई है. तो वहीं डॉलर की कीमत बढ़ गई है. ये खबर आम जनता के लिए काफी परेशान करने वाली है, क्योंकि इससे देश में महंगाई बढ़ जाएगी. वैसे दुनिया के हर देश की अपनी अलग मुद्रा यानी करेंसी होती है. कहीं डॉलर चलता है, कहीं रुपया, तो कहीं दिनार या पाउंड. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी देश की करेंसी की कीमत ज्यादा और किसी की कम क्यों होती है?
क्यों होती है करेंसी वैल्यू अलग- अलग?असल में किसी भी करेंसी की वैल्यू उस देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, महंगाई और दुनिया में उसके भरोसे पर निर्भर करती है. जब एक देश की मुद्रा दूसरे देश की मुद्रा के मुकाबले खरीदी या बेची जाती है, तब उसका एक्सचेंज रेट तय होता है.
उदाहरण के लिए: 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 96.283 भारतीय रुपये के बराबर है, जबकि 1 कुवैती दिनार की कीमत भारतीय रुपये से काफी ज्यादा है. इसका मतलब ये नहीं कि कोई देश गरीब या अमीर है, बल्कि उसकी मुद्रा की मांग और सप्लाई अलग होती है.
ये हैं करेंसी की वैल्यू अलग होने के बड़े कारणहर एक देश की करेंसी की वैल्यू अलग- अलग होने के कई कारण हो सकते हैं. जिनकी एक लिस्ट हमने आपके लिए तैयार की है. यहां जानें ये वजहे:

इसका सबसे बड़ा खेल अर्थव्यवस्था की ताकत का होता है. जिस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, उसकी करेंसी पर लोगों का भरोसा ज्यादा होता है. जैसे कि US की अर्थव्यवस्था मजबूत मानी जाती है, इसलिए अमेरिकी डॉलर की मांग दुनियाभर में रहती है.
अगर किसी देश में महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ती है, तो वहां की करेंसी कमजोर होने लगती है. क्योंकि लोगों की खरीदने की क्षमता घट जाती है. जैसे इन दिनों भारत की करेंसी थोड़ी कमजोर हुई है.
देश का केंद्रीय बैंक अगर ब्याज दर बढ़ाता है, तो विदेशी निवेश बढ़ सकता है. इससे उस देश की करेंसी की मांग बढ़ती है और वैल्यू मजबूत हो सकती है.
जो देश ज्यादा सामान निर्यात करता है, वहां विदेशी मुद्रा ज्यादा आती है. इससे उसकी करेंसी मजबूत हो सकती है.
अगर किसी देश में राजनीतिक स्थिरता और अच्छी नीतियां हों, तो निवेशक वहां पैसा लगाना पसंद करते हैं. इससे करेंसी मजबूत रहती है.
जिस देश के पास ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) होता है, उसकी करेंसी पर दबाव कम रहता है.

हालांकि ये बता दें कि महंगी करेंसी का मतलब हमेशा अमीर देश नहीं होता. कई बार देश अपनी मुद्रा को जानबूझकर कमजोर रखते हैं ताकि उनका सामान विदेशों में सस्ता बिके और निर्यात बढ़ सके. दुनिया की सबसे मजबूत मुद्राओं में कुवैत का कुवैती दिनार, बहराइन का बहरीन दिनार और यूनाइटेड किंगडम का पाउंड स्टर्लिंग शामिल हैं. आसान शब्दों में कहें तो जिस करेंसी पर दुनिया का भरोसा ज्यादा होगा, उसकी कीमत भी उतनी ही मजबूत होगी. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>पंखा&amp;बल्ब तो क्या, घर बंद हो तब भी देना पड़ेगा बिजली बिल! लागू हुआ ये प्रस्ताव तो ढीली हो जाएगी जेब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पंखा-बल्ब-तो-क्या-घर-बंद-हो-तब-भी-देना-पड़ेगा-बिजली-बिल-लागू-हुआ-ये-प्रस्ताव-तो-ढीली-हो-जाएगी-जेब</link>
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        <description><![CDATA[ Electricity News: पेट्रोल, डीजल और CNG के बढ़ते दामों से पहले ही आम आदमी परेशान है. अब बिजली बिल को लेकर भी बड़ा झटका लग सकता है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसके लागू होने पर लोगों को हर महीने ज्यादा फिक्स चार्ज देना पड़ सकता है. यानी अगर आपके घर में पंखा-बल्ब तक न चले, घर पर ताला लगा हो, तब भी बिजली बिल का एक हिस्सा भरना ही पड़ेगा.&amp;nbsp;
आखिर क्या है पूरा मामला?
अभी बिजली बिल दो हिस्सों में आता है. पहला- जितनी यूनिट बिजली खर्च हुई उसका चार्ज और दूसरा- फिक्स चार्ज. फिक्स चार्ज वह रकम होती है, जो हर महीने तय होती है, चाहे बिजली कम इस्तेमाल हो या ज्यादा. अब CEA चाहता है कि इस फिक्स चार्ज को बढ़ाया जाए ताकि बिजली कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके. रिपोर्ट के मुताबिक बिजली कंपनियों का बड़ा खर्च बिजली नेटवर्क, ट्रांसमिशन लाइन, कर्मचारियों की सैलरी और रखरखाव पर होता है. लेकिन उनकी कमाई का छोटा हिस्सा ही फिक्स चार्ज से आता है.
ग्लोबल कमजोरी के बाद भी भारत में क्यों महंगा है सोना? एक्सपर्ट्स ने बताई सप्लाई और ड्यूटी की इनसाइड स्टोरी
घर बंद हो तब भी देना होगा पैसा
इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. अगर यह नियम लागू हो जाता है, तो कम बिजली खर्च करने वालों को भी हर महीने मोटा फिक्स चार्ज देना पड़ सकता है. मान लीजिए कोई व्यक्ति नौकरी या छुट्टियों के कारण एक महीने घर से बाहर है. अभी तक उसका बिल कम आता था क्योंकि बिजली खर्च नहीं हुई. लेकिन नए सिस्टम में घर बंद होने के बावजूद फिक्स चार्ज देना पड़ेगा. यही वजह है कि लोग इसे नो यूज, फिर भी बिल वाला सिस्टम कह रहे हैं.
आखिर बिजली कंपनियों को क्यों पड़ रही जरूरत?
दरअसल, देश में तेजी से रूफटॉप सोलर का इस्तेमाल बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में लोग अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर खुद बिजली बना रहे हैं. इससे बिजली कंपनियों से खरीदी जाने वाली बिजली कम हो रही है. CEA का कहना है कि कंपनियों को फिर भी पूरा नेटवर्क तैयार रखना पड़ता है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर यही उपभोक्ता सरकारी ग्रिड का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में कंपनियों की कमाई घट रही है लेकिन खर्च कम नहीं हो रहा.
किस पर कितना असर पड़ेगा?
प्रस्ताव के मुताबिक घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए फिक्स चार्ज को कुल लागत का 25 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. वहीं फैक्ट्री, मॉल और बड़े कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए इसे 2030 तक 100 फीसदी तक ले जाने की बात कही गई है. यानी आने वाले समय में बिजली बिल का बड़ा हिस्सा &amp;ldquo;फिक्स&amp;rdquo; हो सकता है और यूनिट खर्च का हिस्सा कम.
पेट्रोल-डीजल के फिर बढ़ेंगे दाम! अब भी कंपनियों को हो रहा 750 करोड़ का नुकसान, सरकार का आया बयान
मध्यम वर्ग की बढ़ सकती है टेंशन
पहले ही महंगाई, EMI और रोजमर्रा के खर्च से परेशान मध्यम वर्ग के लिए यह प्रस्ताव चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर पड़ सकता है जो बिजली की बचत करके बिल कम रखने की कोशिश करते हैं. हालांकि अभी ये सिर्फ प्रस्ताव है और इसे लागू करने पर अंतिम फैसला रेगुलेटरी संस्थाएं लेंगी. लेकिन अगर यह लागू हुआ, तो आने वाले दिनों में बिजली बिल लोगों के घरेलू बजट पर बड़ा असर डाल सकता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पंखा-बल्ब, तो, क्या, घर, बंद, हो, तब, भी, देना, पड़ेगा, बिजली, बिल, लागू, हुआ, ये, प्रस्ताव, तो, ढीली, हो, जाएगी, जेब</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price Hike: 5 दिन में दूसरा झटका... फिर से बढ़ी पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत, जानें अब क्या है नई कीमत?</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Hike: आज 19 मई, मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जो एक हफ्ते से भी कम समय में की गई दूसरी बढ़ोतरी है. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, देश की राजधानी में पेट्रोल की कीमतें 97.77 से अब बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल की दरें 90.67 से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं. पिछले शुक्रवार को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी.
चेक करें नया फ्यूल रेट&amp;nbsp;

दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया.
मुंबई में पेट्रोल 107.59 और डीजल 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गया.
कोलकाता में पेट्रोल 109.70 और डीजल 96.07रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया.
चेन्नई में पेट्रोल 104.49 और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर हो गया.
जयपुर में पेट्रोल की कीमत अब बढ़कर 108.84 रुपये और डीजल की कीमत 94.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.&amp;nbsp;

सरकारी तेल कंपनियों को हो रहा घाटा
भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले चार सालों में रिटेल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी. वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था, जिसकी भरपाई करने के लिए अब रेट धीरे-धीरे बढ़ाए जा रहे हैं. बीते दिन 3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नुकसान थोड़ा कम होकर &amp;nbsp;750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर आ गया. अब देखना है कि आज की गई बढ़ोतरी के बाद इस नुकसान को पाटने में कितनी मदद मिलती है.
बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जो अब 100-110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85 परसेंट से अधिक तेल बाहर से आयात करता है इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price, Hike:, दिन, में, दूसरा, झटका..., फिर, से, बढ़ी, पेट्रोल-डीजल, की, कीमत, जानें, अब, क्या, है, नई, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate Today: आज आपके शहर में कितने का बिक रहा घरेलू सिलेंडर, कमर्शियल सिलेंडर का भी देखें रेट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Price Today, 19 May 2026: देशभर में रोजाना सोना- चांदी, दूध और तेल की दाम बढ़ ही रहे हैं. लेकिन आज 19 मई 2026, दिन मंगलवार को एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में कोई हलचल देखने को नहीं मिली. राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर 913 रुपये का मिल रहा है तो वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3071.50 रुपये है. यहां से आप जान सकते हैं कि आपके शहर में गैस सिलेंडर कितने रुपये में आज मिलने वाला है. यहां LPG के घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की पूरी रेट लिस्ट मौजूद है.&amp;nbsp;
शहर अनुसार एलपीजी गैस सिलेंडर का दाम-



शहर का नाम
घरेलू सिलेंडर का दाम
कमर्शियल सिलेंडर का दाम


नई दिल्ली
913.00 रुपये
3,071.50 रुपये


कोलकाता
939.00 रुपये
3,202.00 रुपये


मुंबई
912.50 रुपये
3,024.00 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
928.50 रुपये
3,237.00 रुपये


गुरुग्राम&amp;nbsp;
921.50 रुपये
3,088.00 रुपये


नोएडा
910.50 रुपये
3,071.50 रुपये


बेंगलुरु
915.50 रुपये
3,152.00 रुपये


भुवनेश्वर
939.00 रुपये
3,238.00 रुपये


हैदराबाद
965.00 रुपये
3,315.00 रुपये


जयपुर
916.50 रुपये
3,099.00 रुपये


पटना
1,002.50 रुपये
3,346.50 रुपये


लखनऊ
950.50 रुपये
3,225.50 रुपये



क्या गैस सिलेंडर की बढ़ेंगी कीमतें?
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पश्चिम एशिया संकट के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियां जैसे IOCL, BPCL, HPCL हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं या आपूर्ति बाधित हुई तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा, जिससे आने वाले महीनों जैसे जून 2026 में घरेलू सिलेंडर के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं.
आज फिर बढ़ाई गई पेट्रोल-डीजल की कीमत
मंगलवार (19 मई) को पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर से बढ़ा दी गईं. अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में रुकावटों के बीच महज पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गईं, जबकि डीजल की कीमतें 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गईं.
कीमतों में यह ताजा बदलाव 15 मई (शुक्रवार) को घोषित 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी के बाद हुआ है. इससे उन ग्राहकों पर दबाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही महंगाई और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं. मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर हो गईं, जबकि डीजल की कीमतें 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गईं.

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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate, Today:, आज, आपके, शहर, में, कितने, का, बिक, रहा, घरेलू, सिलेंडर, कमर्शियल, सिलेंडर, का, भी, देखें, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gen Z  Flavored Drinks: कड़वी शराब से तौबा! फ्लेवर्ड ड्रिंक्स की बढ़ी भारी मांग, Gen Z की हैबिट से बाजार में आए बड़े बदलाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gen-z-flavored-drinks-कड़वी-शराब-से-तौबा-फ्लेवर्ड-ड्रिंक्स-की-बढ़ी-भारी-मांग-gen-z-की-हैबिट-से-बाजार-में-आए-बड़े-बदलाव</link>
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        <description><![CDATA[ &amp;nbsp;Flavored Drinks: भारतीय शराब उद्योग में इन दिनों बेहद ही बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां, देश के युवा उपभोक्ता अब व्हिस्की और पारंपरिक ड्रिंकिंग की आदतों को तेजी से छोड़ने में जुटे हुए हैं. जिसको लेकर कुछ शराब निर्माताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि यह युवा पीढ़ी अब फ्लेवर्ड अल्कोहल, फेस्टिवल-आधारित मार्केटिंग और हल्के अनुभवों को तेजी से अपनाने की कोशिश में जुटी हुई है.&amp;nbsp;
फ्लेवर्ड अल्कोहल को पसंद कर रहे हैं युवा
भारतीय शराब उद्योग में आए इस बड़े बदलाव ने हर किसी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है. जहां, अब हमारे देश के युवा उपभोक्ता पारंपरिक विज्ञापनों और मजबूत व्हिस्की के बजाय फ्लेवर्ड अल्कोहल, फेस्टिवल-आधारित मार्केटिंग और आसान ड्रिंकिंग अनुभवों को तेजी से न सिर्फ पसंद कर रहे हैं बल्कि अपनी आदतों में डालने की कोशिश कर रहे हैं. इतना ही नहीं, &#039;स्मिरनॉफ&#039; और &#039;जॉनी वॉकर&#039; बनाने वाली कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स ने इस मामले में जानकारी जदेते हुए बताया कि बाजार में यह ग्रोथ पूरी तरह से फ्लेवर को ऊपर ही आधारित है. जहां, उनके नए प्रयोग &#039;मिंटी जामुन&#039; ने बिक्री के सारे रिकॉर्ड को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है.&amp;nbsp;
Petrol Diesel News: &#039;देश में बचा सिर्फ 2 दिन का पेट्रोल, पंपों पर हो रही मारामारी&#039;, अब आया सरकार का बयान
क्यों भारतीय स्वादों को मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया?&amp;nbsp;
दरअसल, यह बड़ा बदलाव पूरे शराब उद्योग जगत में देखने को मिल रहा है. जहां, हाल ही में &#039;मैजिक मोमेंट्स&#039; वोदका बेचने वाली कंपनी रेडिको खेतान ने इस साल में 21 प्रतिशत की बढ़त को हासिल करने में बड़ी सफलता हासिल की है. तो वहीं, दूसरी तरफ कंपनी ने यह भी बताया कि जामुन, आम और ठंडाई जैसे भारतीय स्वादों (Flavors of India) को देश भर में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है. यह बात भी सच है कि कई सालों से भारत में शराब केवल पुरुष और प्रीमियम स्टेटस के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता था, लेकिन आज के समय में कंपनियां जेन-जी (Gen Z) को लुभाने के लिए सोशल मीडिया क्रिएटर्स और म्यूजिक कंसर्ट्स का सबसे ज्यादा सहारा ले रही हैं ताकि उन्हें बिक्री करने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े&amp;nbsp;
Excise Policy: शराब के शौकीनों और ब्रांड्स के लिए बड़ी खबर, नई शराब नीति लागू, इस सरकार ने पेश किया नया मॉडल
आज के युवा नए प्रयोग करना करते हैं पसंद
दरअसल, आज का युवा वर्ग एक ही तरह की शराब पीने के बजाय अब अलग-अलग अवसरों पर नए प्रयोग (Repertoire Drinking) करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. तो वहीं, इसी बड़े बदलाव को देखते हुए सुला वाइनयार्ड्स जैसी कंपनियां वाइन टूरिज्म और &#039;सुलाफेस्ट&#039; जैसे आयोजनों को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं. जिसकी वजह उनका टूरिज्म बिजनेस 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. लेकिन, इस बात पर ध्यान देने की सबसे ज्यादा जरूरत है कि आज भी पारंपरिक स्कॉच और व्हिस्की का बाजार सबसे ज्यादा बड़ा है. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 19:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gen, Flavored, Drinks:, कड़वी, शराब, से, तौबा, फ्लेवर्ड, ड्रिंक्स, की, बढ़ी, भारी, मांग, Gen, की, हैबिट, से, बाजार, में, आए, बड़े, बदलाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>FD Interest Rate: इस सरकारी बैंक ने बढ़ा दिया FD पर ब्याज, आज से ही लागू हो गए हैं नए रेट्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fd-interest-rate-इस-सरकारी-बैंक-ने-बढ़ा-दिया-fd-पर-ब्याज-आज-से-ही-लागू-हो-गए-हैं-नए-रेट्स</link>
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        <description><![CDATA[ FD Interest Rate: बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) ने अपने ग्राहकों को सौगात देते हुए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिए हैं. जहां ज्यादातर बैंकों ने फरवरी 2025 से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर रेट कम कर दिए हैं. वहीं, बैंक ऑफ़ इंडिया ने इसके विपरीत कदम उठाते हुए कुछ चुनिंदा मध्यम और लंबी अवधि के डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ा दी हैं.इस सरकारी बैंक ने 3 करोड़ रुपये से कम की फिक्स्ड डिपॉजिट पर अपनी ब्याज दरें बढ़ा दी है. ये नई दरें आज 18 मई, 2026 से लागू हो गई हैं.&amp;nbsp;
नए FD रेट्स पर डालें नजर



FD अवधि
सामान्य नागरिक
वरिष्ठ नागरिक (60-80 साल)
सुपर सीनियर सिटीजन्स (80+ उम्र)


1 साल से लेकर 2 साल से कम
6.50%
7.00%
7.15%


2 साल से लेकर 3 साल से कम
6.60%
7.10%
7.25%


3 साल की FD पर
6.70%
7.45%
7.60%



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में किन्हें मिलेगी पुरानी पेंशन, JCM ने मीटिंग में कर दी यह बड़ी डिमांड&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 19:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Interest, Rate:, इस, सरकारी, बैंक, ने, बढ़ा, दिया, पर, ब्याज, आज, से, ही, लागू, हो, गए, हैं, नए, रेट्स</media:keywords>
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        <title>LPG News: देश में तेल&amp;गैस का स्टॉक बचा है या नहीं? सरकार ने दिया सवाल का जवाब, कहा&amp; होर्मुज संकट से...</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-news-देश-में-तेल-गैस-का-स्टॉक-बचा-है-या-नहीं-सरकार-ने-दिया-सवाल-का-जवाब-कहा-होर्मुज-संकट-से</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-news-देश-में-तेल-गैस-का-स्टॉक-बचा-है-या-नहीं-सरकार-ने-दिया-सवाल-का-जवाब-कहा-होर्मुज-संकट-से</guid>
        <description><![CDATA[ Petroleum Ministry: बीते कई महीनों से मिडिल ईस्ट में देखे जा रहे तनाव के कारण कई देशों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है. इसी के चलते हाल ही में भारत में भी पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है. जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्दी ही LPG और अन्य गैस उर्वरकों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. लेकिन इसी बीच अब सरकार ने भी इसे लेकर ताजा अपडेट दे दिया है. सरकार ने आश्वासन दे दिया है कि देश में गैस का भरपूर भंडारण है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया अपडेटदेश के हालातों को देखते हुए हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने हाल ही में कहा है कि तेल, गैस और अन्य किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है. हाल ही में इंटर मिनिस्टीरियल ब्रीफिंग के दौरान सुजाता ने बताया कि, &#039;पश्चिम एशिया संकट शुरू हुए ढाई महीने से ज्यादा समय हो गया है, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है&#039;.&amp;nbsp;
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उन्होंने आगे कहा, &#039;इसके परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और LPG की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इन सब कारणों से, कच्चे तेल, LPG और प्राकृतिक गैस के हमारे आयात पर भी असर पड़ा है. हालांकि, हमारी रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं, और हमारे पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है&#039;.
उर्वरकों की उपलब्धता पर अपडेटवहीं इस ब्रीफिंग के दौरान DOF विभाग की जॉइंट सेक्रेटरी ने भी अपने विभाग की स्थिति के बारे में बताया है. उन्होंने कहा, &#039;उर्वरक विभाग की ओर से ये सूचित किया जाता है कि इस मौसम, यानी खरीफ मौसम के लिए, राज्यों में उर्वरकों की उपलब्धता 51% से अधिक बनी हुई है और पूरे देश में लगभग 200.98 LMT उर्वरक उपलब्ध हैं. प्रमुख उर्वरकों के MRP में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. संकट काल के बाद घरेलू उत्पादन काफी अधिक रहा है, यानी 86.2 LMT, और 22 LMT से ज्यादा आयात हमारे तटों तक पहुंच चुका है.&#039;
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, News:, देश, में, तेल-गैस, का, स्टॉक, बचा, है, या, नहीं, सरकार, ने, दिया, सवाल, का, जवाब, कहा-, होर्मुज, संकट, से...</media:keywords>
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        <title>बंगाल में महिलाओं को 3000 रुपए देने का ऐलान, कैसे मिलेंगे ये पैसे, कैसे करें आवेदन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बंगाल-में-महिलाओं-को-3000-रुपए-देने-का-ऐलान-कैसे-मिलेंगे-ये-पैसे-कैसे-करें-आवेदन</link>
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        <description><![CDATA[ Annapurna Bhandar 2026:&amp;nbsp;पश्चिम बंगाल में खुशी की लहर है. सीएम शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल की महिलाओं के हित में कुछ अहम फैसले जो लिए हैं. असल में शुभेंदु सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट की बैठक में ही महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये और बस में फ्री सफर की सुविधा देने की घोषणा कर दी है. इस फैसले को अन्नपूर्णा भंडार योजना का नाम दिया गया है. इस घोषणा के बाद से ही ये सर्च किया जा रहा है कि रजिस्ट्रेशन कैसे करना है. साथ ही कौन-कौन इस योजना के लाभार्थी लिस्ट में आएंगे. योजना से जुड़ी सारी जानकारी आप यहां से भी ले सकते हैं.
कब से शुरू हो रही है अन्नपूर्णा भंडार योजना?पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत 1 जून से होगी (ये संभावित तारीख है). इस योजना के तहत बंगाल की महिलाओं को 3000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. साथ ही फ्री बस सेवा भी इस योजना में शामिल है. यानी कि बंगाल की महिलाएं बस में मुफ्त में यात्रा कर पाएंगी.&amp;nbsp;
इस सरकारी बैंक ने बढ़ा दिया FD पर ब्याज, आज से ही लागू हो गए हैं नए रेट्स
किन्हें महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ?

पश्चिम बंगाल का स्थायी निवास हो
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हों
सलाना आय कम हो
25 साल से ज्यादा आयु हो
राशन कार्ड में नाम हो (BPL/AAY/PHH)

किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ?

पश्चिम बंगाल का स्थायी निवास नहीं हो
परमानेंट या रिटार्यड सरकारी कर्मचारी हों
सलाना आय 2 लाख से ज्यादा हो

अन्नपूर्णा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज-&amp;nbsp;

आधार कार्ड
राशन कार्ड
आधार से लिंक पासबुक
निवास प्रमाण पत्र
पासपोर्ट साइज फोटो

निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये स्वाहा, आज शेयर बाजार में कोहराम की क्या है वजह?
अन्नपूर्णा योजना में रजिस्ट्रेशन कैसे करें?&amp;nbsp;अभी फिलहाल पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा योजना के रजिस्ट्रेशन की शुरुआत नहीं हुई है. योजना का आधिकारिक पोर्टल लॉन्च होने पर योग्य महिलाएं अपना मोबाइल नंबर और राशन कार्ड डालकर पंजीकरण कर सकेंगी.&amp;nbsp;
अन्नपूर्णा भंडार का उद्देश्य-&amp;nbsp;अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ पश्चिम बंगाल में रहने वाली महिलाएं उठा सकती हैं. बता दें कि लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को अब खुद ही अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ मिलेगा.&amp;nbsp;इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रुप से कमजोर और मिडिल क्लास महिलाओं को सशक्त करना है. मासिक तौर पर मिलने वाली ये राशि महिलाओं को घरेलु खर्च और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से निपटने में मदद करेगी.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बंगाल, में, महिलाओं, को, 3000, रुपए, देने, का, ऐलान, कैसे, मिलेंगे, ये, पैसे, कैसे, करें, आवेदन</media:keywords>
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        <title>Water Fuel: अब पेट्रोल&amp;डीजल नहीं, &amp;apos;पानी&amp;apos; से चलेंगी गाड़ियां, इस विदेशी कंपनी ने निकाला तोड़, फॉर्मूला भी बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/water-fuel-अब-पेट्रोल-डीजल-नहीं-पानी-से-चलेंगी-गाड़ियां-इस-विदेशी-कंपनी-ने-निकाला-तोड़-फॉर्मूला-भी-बताया</link>
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        <description><![CDATA[ Fuel Saving Technology: वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच एक विदेशी कंपनी ने ऐसा दावा किया है जिसने सबका ध्यान खींच लिया है. मोनाको की कंपनी FOWE Eco Solutions ने एक ऐसी तकनीक पेश करने का दावा किया है, जिसकी मदद से गाड़ियां और औद्योगिक मशीनें कम ईंधन में ज्यादा काम कर सकती हैं. कंपनी का कहना है कि इस तकनीक में पानी का इस्तेमाल करके ईंधन की खपत 10% तक कम की जा सकती है.
यह प्रस्ताव भारत के लिए एक नाजुक समय में आया है, जब देश अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में ईंधन बचाने वाली किसी भी तकनीक का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और रुपये पर पड़ता है. इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ईंधन बचाने पर जोर दे चुके हैं.
कैसे काम करती है यह तकनीक?
कंपनी के मुताबिक, उसकी पेटेंट तकनीक &amp;ldquo;कैविटेक फ्यूल इमल्शन&amp;rdquo; ईंधन और पानी को खास तरीके से मिलाती है. इससे ईंधन के अंदर पानी की बेहद छोटी बूंदें बनती हैं, जो जलने के दौरान कण के अंदर &amp;ldquo;माइक्रो एक्सप्लोजन&amp;rdquo; पैदा करती हैं.
Petrol-Diesel Price Today: क्या फिर बढ़े हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए दिल्ली-NCR, मुंबई-बेंगलुरू में क्या हैं कीमतें
इस प्रक्रिया से ईंधन ज्यादा बेहतर तरीके से जलता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है और धुआं भी कम निकलता है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस तकनीक के लिए इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती. साथ ही इसका इस्तेमाल बिना मशीन बंद किए हुए भी किया जा सकता है.
ईंधन बचत और प्रदूषण घटाने का दावा
कंपनी और स्वतंत्र परीक्षण आंकड़ों के मुताबिक, इस तकनीक से बॉयलर और समुद्री इंजनों में 6-10% तक ईंधन बचत देखी गई है. भारत के कुछ रिफाइनरी और इस्पात संयंत्रों में भी परीक्षण किए गए, जिनमें ईंधन की बचत 3.6% से 6% तक दर्ज की गई.
FOWE का कहना है कि इससे NOx और SOx जैसे हानिकारक उत्सर्जन में भी 40% तक कमी लाई जा सकती है. साथ ही बॉयलर और भट्टियों के अंदर गंदगी कम जमा होती है, जिससे रखरखाव का खर्च भी घट सकता है.
हालांकि, यह तकनीक अभी बड़े स्तर पर आम वाहनों में इस्तेमाल नहीं हो रही है. फिलहाल इसका परीक्षण औद्योगिक इकाइयों, जहाजों और बिजली संयंत्रों में किया जा रहा है. वहीं, एक्सपर्टों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो आने वाले दिनों में ईंधन बचत के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है.
Gold Import: गोल्ड की खरीद पर बड़ी खबर, PM मोदी की अपील पर 10 में से 6 लोगों ने बदला अपना फैसला- सर्वे ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 07:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Import: गोल्ड की खरीद पर बड़ी खबर, PM मोदी की अपील पर 10 में से 6 लोगों ने बदला अपना फैसला&amp; सर्वे</title>
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        <description><![CDATA[ PM Narendra Modi Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश में सोने की खरीदारी को लेकर लोगों का नजरिया बदलता दिख रहा है. लोकलसर्कल्स के एक सर्वे के मुताबिक, 61% सोना खरीदने वाले लोगों ने कहा कि वे अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से परहेज करेंगे. सरकार का मानना है कि इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.
यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में सोने का आयात रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है. बढ़ते आयात के कारण अमेरिका और इजराइल मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है, खासकर वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच. इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोने का आयात
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 71.98 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जो पिछले साल 2025 के मुकाबले 58 अरब डॉलर से 24% से ज्यादा है. हालांकि, सोने की मात्रा में थोड़ी कमी आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से कुल आयात बिल काफी बढ़ गया.
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हैदराबाद में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, &quot;हमें हर हाल में विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है.&quot; इसके बाद किए गए सर्वे में 66% लोगों ने माना कि अगर लोग कुछ समय तक सोना खरीदने से परहेज करें, तो इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, सोने और चांदी का कुल आयात बढ़कर 102.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
लोगों की सोच में दिखा बदलाव
सर्वे में शामिल 84,000 लोगों में से 28% लोगों ने कहा कि वे सोने की खरीदारी काफी कम कर देंगे, जबकि 36% लोगों ने कहा कि अगले एक साल तक वे सोना खरीदने की योजना नहीं बना रहे हैं.
वहीं, 19% लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद वे सिर्फ शादी-ब्याह या पारिवारिक परंपराओं के लिए ही सोना खरीदना जारी रखेंगे. दूसरी तरफ कुछ लोग अब भी सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं और उनका कहना है कि अनिश्चितता के दौर में वे इसकी खरीद जारी रखेंगे.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 07:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Cheapest Cosmetic Market: 2 रुपए से शुरू होता है मेकअप का ये बाजार! दिल्ली में यहां मिलते हैं बेहद सस्ते कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cheapest-cosmetic-market-2-रुपए-से-शुरू-होता-है-मेकअप-का-ये-बाजार-दिल्ली-में-यहां-मिलते-हैं-बेहद-सस्ते-कॉस्मेटिक-प्रोडक्ट्स</link>
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        <description><![CDATA[ Cheapest Cosmetic Market: हर लड़की और महिला चाहती है कि उसके पास अच्छा मेकअप कलेक्शन हो, क्योंकि मेकअप से उनकी खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं, लेकिन आज के महंगाई में मेकअप के रेट भी आसमान छू रहे हैं, जिसकी वजह से लोग अपनी पसंद का सामान नहीं खरीद पाते हैं. ऐसे में सोचिए अगर आपको 2 रुपये में लिपस्टिक और 5 रुपये का काजल मिल जाए तो कैसा रहेगा? सुनने में जरूर आपको अजीब लग रहा है, लेकिन दिल्ली में एक ऐसी मार्केट है जहां मेकअप का सामान काफी सस्ता मिल जाता है.&amp;nbsp;
ये है दिल्ली का सबसे सस्ता कॉस्मेटिक मार्केट
अगर बात करें मार्केट की तो दिल्ली में सबसे बेस्ट जगह है सदर बाजार, यहां हर चीज बहुत ही कम रेट में आसानी से मिल जाती है. सदर बाजार दिल्ला का सबसे बड़ा थोक बाजार माना जाता है. यह बाजार सस्ते और किफायती सामान के लिए बेहद मशहूर है. यहां आपको मेकअप का लगभग सारा सामान बेहद कम कीमत में मिल जाता है. अगर बात करें रेट की तो यहां 2, 5 और 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक में लिपस्टिक, काजल और दूसरे कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स आसानी से मिल जाते हैं.
&amp;nbsp;सोना ही नहीं, चांदी भी है कमाई का मजबूत जरिया, महंगाई में बचाएगी आपका पैसा, जानें कैसे उठाएं फायदा
बड़े ब्रांड्स का भी मिलता है सामान
खास बात तो यह है कि यहां पर Blue Heaven और Swiss Beauty जैसे कई पॉपुलर ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स मिल जाते हैं. इसके अलावा लोकल ब्रांड्स के भी ढेरों ऑप्शन यहां मौजूद हैं. आपको &amp;nbsp;यहां अलग-अलग शेड्स और डिजाइन में कई तरह के प्रोडक्ट्स मिलेंगे, जैसे...

लिक्विड लिपस्टिक
काजल पेंसिल
आईलाइनर
नेल पेंट
मेकअप किट

थोक में खरीदना पड़ता है सामान
ध्यान रहें कि सदर बाजार थोक बाजार है तो यहां कई दुकानदार दर्जन या पूरे बॉक्स के हिसाब से सामान बेचते हैं. ऐसे में 2 रुपये वाला सामान आपको एक पीस में शायद न मिले, लेकिन थोक में खरीदने पर भी काफी सस्ती पड़ती है.
खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान

प्रोडक्ट की क्वालिटी जरूर चेक करें
ब्रांडेड सामान की कॉपी से सावधान रहें
सीधे दुकानदार से बात करें
दलालों या बिचौलियों से बचें
रेट अच्छे से पूछकर ही खरीदें

&amp;nbsp;रेल में सफर के लिए 3AC और 3E कोच में कौन है बेहतर? यात्रा से पहले जान लें जरूरी बात
इस समय खुलता है बाजार
सदर बाजार आमतौर पर सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच खुलता है. वहीं शाम में 7 बजे से 8 बजे तक बाजार बंद हो जाता है. इसके साथ ही रविवार को बाजार की ज्यादातर दुकाने खुली रहती हैं तो अगर आप भी कम रेट में सामान खरीदना चाहते हैं तो सदर बाजार आपके लिए एक बेहदर ऑप्शन है.
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 07:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Wrong Money in Account: खाते में आ गए गलती से पैसे? एक भूल और लग सकता है 60% टैक्स और पेनाल्टी का झटका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/wrong-money-in-account-खाते-में-आ-गए-गलती-से-पैसे-एक-भूल-और-लग-सकता-है-60-टैक्स-और-पेनाल्टी-का-झटका</link>
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        <description><![CDATA[ Bank Account: बैंक खाते में अचानक से पैसे आ जाते हैं तो लोग ज्यादातर असमंजस में पड़ जाते हैं कि क्या इस रकम पर टैक्स लगेगा और उन्हें तुरंत क्या करना चाहिए.
कुछ विशेषज्ञों का यह मानना है कि सिर्फ गलती से खाते में पैसे आने पर टैक्स देनदारी नहीं बनती है, लेकिन अगर खाताधारक यह जानने के बाद भी कि पैसा उसका नहीं है, उसका उपयोग करता है, तो यहां सबसे बड़ी समस्या देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;
क्या गलती से आए पैसे पर लग सकता है टैक्स?
आयकर कानून के मुताबिक, टैक्स आमतौर पर उसी आय पर लगता है जो करदाता की अपनी हो या जिसे वेतन, व्यापार, उपहार या फिर किसी अन्य वैध स्रोतों से कमाया गया हो. हांलाकि, अगर बैंकिंग त्रुटि (Banking Error) की वजह से कोई राशि गलत तरीके से क्रेडिट हो जाती है, तो उसे योग्य आय नहीं माना जाएगा लेकिन प्राप्तकर्ता का उस पर कोई कानूनी दावा नहीं होता है.&amp;nbsp;
क्या रिटायरमेंट के बाद भी लगता है इनकम टैक्स, छूट के क्या हैं नियम? इनकम का ऐसे करें हिसाब
ऐसे में क्या कहते हैं टैक्स पार्टनर?&amp;nbsp;
तो वहीं, इस मामले में एन.ए. शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा न जानकारी देते हुए बताया कि टॉक्स सिर्फ और सिर्फ तभी देय होता है जब पैसा वास्तव में करदाता का हो. यानी, अगर कोई गलत क्रेडिट हुआ है और करदाता तुरंत बैंक को लिखित में इसकी सूचना दे देता है, तो उसे टैक्स के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है.
शुरुआत में करदाता को ही टैक्स अधिकारियों के सामने इस जमा राशि की प्रकृति को पूरी तरह से बताना होगा.&amp;nbsp;
यहां जानें आयकर विभाग की सख्त धाराएं और जुर्माना
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 69A के अनुसार, अगर करदाता पैसे के स्रोत की सही तरीके से व्याख्या नहीं कर पाता है, तो इसे उस वित्तीय साल (Financial Year) की &#039;डीम्ड इनकम&#039; (माना गया धन) मान लिया जाता है. हांलाकि, ऐसी स्थिति में इस राशि पर 60 प्रतिशत की दर से टैक्स, अधिभार (सर्चार्ज) और शिक्षा उपकर लगाया जाता है.&amp;nbsp;
EPFO News: EPFO पर बड़ा अपडेट, अब क्लेम सेटलमेंट में नहीं होगी देरी, ऐसे मिनटों में होगा घंटों का काम
पैसे तुरंत आने पर क्या करना चाहिए तुरंत?
सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर कुणाल सवानी और अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि अगर आपके खाते में पैसे आ जाते हैं तो उन राशि को भूलकर भी खर्च या फिर ट्रांसफर करने की कोशिश न करें.
दूसरी तरफ तुरंत अपने बैंक को लिखित में या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित करें और शिकायत संदर्भ संख्या (Complaint Reference Number) का रिकॉर्ड को चेक करना न भूलें. इसके अलावा अगर भेजने वाले की पहचान हो जाती है, तो उचित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से राशि को जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी वापस करवा दें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>CNG Price Hike: दिल्ली&amp;NCR में फिर बढ गए CNG के दाम, जानिए कितने रुपए की हुई बढ़ोतरी, अब क्या है ताजा रेट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cng-price-hike-दिल्ली-ncr-में-फिर-बढ-गए-cng-के-दाम-जानिए-कितने-रुपए-की-हुई-बढ़ोतरी-अब-क्या-है-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/cng-price-hike-दिल्ली-ncr-में-फिर-बढ-गए-cng-के-दाम-जानिए-कितने-रुपए-की-हुई-बढ़ोतरी-अब-क्या-है-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ CNG Price Hike in Delhi-NCR: दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है. दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है. सीएनजी एक रुपए प्रति किलो महंगी हो गई है. इससे पहले गैस कंपनियों ने दो रुपए की बढ़ोतरी की थी. यानी कुल मिलाकर तीन दिनों के भीतर सीएनजी 3 रुपए महंगी हो गई है.
दिल्ली में एक किलो सीएनजी की कीमत 80.09 रुपए हो गई है. वहीं, गाजियाबाद में एक किलो सीएनजी की कीमत अब 88.70 रुपए है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सीएनजी 84 रुपए प्रति किलोग्राम है.
PNG और घरेलू सिलेंडर के दाम में अभी बदलाव नहीं
हालांकि, आम जनता की रसोई तक पाइप से मुहैया कराई जाने वाली प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी और घरेलू खाना पकाने वाले एलपीजी गैस सिलेंडर, दोनों की कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है.
पेट्रोल के दाम बढ़े, अब सरकार ने लगाया 3 रुपए का Tax, इससे आपकी जेब ढीली होगी या नहीं? जानें सबकुछ
यहां देखें कहां कितने रुपए है सीएनजी की कीमत (Revised Rate List)




क्र.सं.
शहर का नाम (हिंदी)
City Name (English)
नई दर (₹/Kg)




1
दिल्ली (NCT)
NCT of Delhi
₹80.09/-


2
नोएडा
Noida
₹88.70/-


3
गाजियाबाद
Ghaziabad
₹88.70/-


4
मुजफ्फरनगर
Muzaffarnagar
₹88.58/-


5
मेरठ
Meerut
₹88.58/-


6
शामली
Shamli
₹88.58/-


7
गुरुग्राम
Gurugram
₹85.12/-


8
रेवाड़ी
Rewari
₹84.70/-


9
करनाल
Karnal
₹84.43/-


10
कैथल
Kaithal
₹85.43/-


11
कानपुर
Kanpur
₹91.42/-


12
हमीरपुर
Hamirpur
₹91.42/-


13
फतेहपुर
Fatehpur
₹91.42/-


14
अजमेर
Ajmer
₹89.44/-


15
पाली
Pali
₹89.44/-


16
राजसमंद
Rajsamand
₹89.44/-


17
महोबा
Mahoba
₹86.42/-


18
बांदा
Banda
₹86.42/-


19
चित्रकूट
Chitrakoot
₹86.42/-


20
हापुड़
Hapur
₹89.70/-


21
गौतम बुद्ध नगर
Gautam Budh Nagar
₹88.70/-


22
ग्रेटर नोएडा
Greater Noida
₹88.70/-



क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
दरअसल देश अपनी जरूरत के हिसाब से &amp;nbsp;प्राकृतिक गैस का आयात 50 फीसदी से ज्यादा करता है. होर्मुज संकट के बाद आपूर्ति में कमी और मांग बढने से गैस कंपनियों के लिए गैस खरीदना महंगा हो गया.
कंपनियों का कहना है कि अगर अब कीमतें नहीं बढ़ाई तो कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा, इसलिए लागत का बोझ अब ग्राहकों पर डालना ही एक मात्र विकल्प है. दिल्ली-एनसीआर में आईजीएल और महाराष्ट्र में एमजीएल सीएनजी-पीएनजी गैस की सप्लाई करती है.
सोने के बाद अब चांदी पर सख्ती, सरकार ने बदल दिया ये बड़ा नियम, अब कोई भी...
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CNG, Price, Hike:, दिल्ली-NCR, में, फिर, बढ, गए, CNG, के, दाम, जानिए, कितने, रुपए, की, हुई, बढ़ोतरी, अब, क्या, है, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>Petrol Diesel News: हैदराबाद में दिल्ली&amp;मुंबई से भी ज्यादा है पेट्रोल&amp;डीजल के दाम, इस मेट्रो सिटी में क्यों है सबसे ज्यादा महंगाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Hyderabad Petrol and Diesel Hike: उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने ईंधन की ऊंची कीमतों के लिए मुख्य रूप से तेलंगाना के अत्यधिक मूल्य वर्धित कर (वैट) को जिम्मेदार ठहराया है. जहां अब राज्य में पेट्रोल पर 35.20 प्रतिशत और डीजल पर 27 प्रतिशत वैट पूरी तरह से लागू कर दिया गया है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा है. &amp;nbsp;इस ताजा संशोधन के बाद, देश के 6 महानगरों में हैदराबाद के निवासियों को अब ईंधन के लिए सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है.&amp;nbsp;
पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की दरों में बदलाव
दरअसल, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट की वजह से ही ईंधन की दरों में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहे हैं. जिसको लेकर तेल कंपनियों ने चार साल के लंबे समय के बाद यह संशोधन किया है. जिसपर डीलर्स ने जानकारी देते हुए कहा है कि वैश्विक तनाव की वजह से बढ़ते घाटे को कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाना बेहद ही जरूरी था.&amp;nbsp;
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हैदराबाद में कितने बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम?
इस संशोधन &amp;nbsp;के बाद हैदराबाद में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान को छू रहे हैं. जहां, पेट्रोल की कीमतों में &amp;nbsp;3.39 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.26 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से आम जनता की जल्द ही जेब पर भारी असर पड़ने वाला है. तो वहीं, दूसरी तरफ इस बढ़ोतरी के बाद हैदराबाद में अब डीजल की कीमत 98.96 रुपये प्रति लीटर हो गई है. इसके अलावा तेलंगाना में प्रीमियम श्रेणियों के ईंधन जैसे XP100 पेट्रोल की कीमत 163 रुपये प्रति लीटर और XP95 की कीमत 120.33 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं.&amp;nbsp;
महानगरों में कितने हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
अन्य मेट्रोपॉलिटन शहरों के बारे में बात की जाए तो, हैदराबाद के बाद कोलकाता दूसरे स्थान पर (108.74 रुपये) है. इसके बाद सपनों की नगरी मुंबई में 106.64 रुपये, बेंगलुरु में 106.17 रुपये, चेन्नई में 103.90 रुपये और सबसे आखिरी में देश की राजधानी दिल्ली में सबसे कम 97.77 रुपये प्रति लीटर है.
तो वहीं, डीजल के मामले में हैदराबाद (98.96 रुपये) पहले नंबर पर है, जिसके बाद चेन्नई (95.47 रुपये), कोलकाता (95.13 रुपये), बेंगलुरु (94.10 रुपये), मुंबई (93.14 रुपये) और नई दिल्ली (90.67 रुपये) का नंबर आता है.
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तेलंगाना पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव ने क्या बताया?
तो वहीं, अब इस मामले में &amp;nbsp;तेलंगाना पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव विनोद विश्वनाथ ने जानकारी देते हुए बताया कि भारी वैट की वजह से ही पेट्रोल और डीजल के दामों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है. इतना ही नहीं, इस विषय पर ईंधन विक्रेता कुणाल सोंथालिया ने भी कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी मौजूदा तनाव को देखते हुए उन्हें आने वाले समय में कीमतों में 15 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol, Diesel, News:, हैदराबाद, में, दिल्ली-मुंबई, से, भी, ज्यादा, है, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, इस, मेट्रो, सिटी, में, क्यों, है, सबसे, ज्यादा, महंगाई</media:keywords>
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        <title>Gold Silver Price Today Live: सोने&amp;चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव, महंगा हुआ या सस्ता? जानें दिल्ली&amp;NCR, मुंबई में क्या हैं ताजा कीमतें</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: पिछले कई दिनों से लगातार सोना और चांदी को लेकर नए-नए नियम सामने आ रहे हैं, जिनका सीधा असर सोने चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है. बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जानें दिल्ली-एनसीआर और मुंबई समेत मेट्रो शहरों में आज सोने चांदी की कीमतें क्या हैं.
इंडियन बुलियन एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, आज देश के खुदरा बाजार में 24 कैरेट सोने की औसत कीमत 1 लाख 59 हजार110 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बनी हुई है. वहीं, आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला 22 कैरेट सोना 1 लाख 45 हजार 851 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा शुद्ध चांदी यानी ट्रिपल नाइन फाइन सिल्वर की कीमत 2 लाख 70 हजार के पार होकर 2 लाख 71 हजार 740 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है.
क्या फिर बढ़े हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए दिल्ली-NCR, मुंबई-बेंगलुरू में क्या हैं कीमतें
ध्यान रहे, यह बेस प्राइज है. जब आप अपने नजदीकी ज्वैलर के पास जाएंगे तो इस बिल में मेकिंग चार्जेस, लोकल टैक्स और 3 फीसदी जीएसटी भी जोड़ा जाएगा, जिससे आपके शहर में फाइनल रेट थोड़ा अलग हो सकता है.
देश के बड़े महानगरों के ताजा रेट्स पर नजर
मुंबई
मुंबई में आज 24 कैरेट सोने का भाव 1 लाख 59 हजार 820 रुपए प्रति दस ग्राम है. वहीं 22 कैरेट सोना 1 लाख 45 हजार 585 रुपए और चांदी 2 लाख 71 हजार 250 रुपए प्रति किलो बिक रही है.
दिल्ली&amp;nbsp;
दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1 लाख 59 हजार 550 रुपए प्रति 10 ग्राम चल रही है. 22 कैरेट के दाम 1 लाख 45 हजार 338 रुपए हैं, जबकि चांदी 2 लाख 70 हजार780 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर है.
चेन्नई&amp;nbsp;
24 कैरेट सोने का भाव 1 लाख 59 हजार 800 रुपए, 22 कैरेट का भाव 1 लाख 46 हजार 67 रुपए और चांदी का भाव 2 लाख 72 हजार चालीस रुपए प्रति किलो है.
बेंगलुरु-हैदराबाद और कोलकाता
24 कैरेट सोना 1 लाख 59 हजार 400 रुपए और हैदराबाद में 1 लाख 59 हजार 70 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है. कोलकाता में 24 कैरेट का रेट 1 लाख 59 हजार 610 रुपए दर्ज किया गया है.
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आगे बाजार का रुख कैसा रहेगा?&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स और टाटा म्यूचुअल फंड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में आने वाले दिनों में थोड़ी स्थिरता या उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है. अमेरिकी ब्याज दरों में लंबे समय तक बढ़ोतरी की आशंका, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऊंचे बॉन्ड यील्ड्स के कारण बाजार में करीब पांच प्रतिशत तक का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंकाओं ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:30:19 +0530</pubDate>
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    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price Today: क्या फिर बढ़े हैं पेट्रोल&amp;डीजल के दाम? जानिए दिल्ली&amp;NCR, मुंबई&amp;बेंगलुरू में क्या हैं कीमतें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-क्या-फिर-बढ़े-हैं-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-जानिए-दिल्ली-ncr-मुंबई-बेंगलुरू-में-क्या-हैं-कीमतें</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today City Wise: दिल्ली-एनसीआर वालों को हर दिन महंगाई का झटका लग रहा है. कभी पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ रहे हैं तो कभी सीएनजी महंगी हो रही है. आज सीएनजी एक रुपए और महंगी हो गई. जानिए क्या आज पेट्रोल डीजल के दाम भी बढ़े हैं या नहीं. जानिए आपके शहर में तेल की ताजा कीमतें क्या हैं.
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देशभर में पेट्रोल डीजल की कीमतों में तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अचानक आई इस तेजी ने आम आदमी से लेकर कारोबारियों तक सबको चौंका दिया. हालांकि आज पेट्रोल-डीजल महंगा नहीं हुआ है. अब आपको बताते हैं कि देश के मेट्रो शहरों में आज यानी 17 मई को नई कीमतें क्या हैं.
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नई दिल्ली&amp;nbsp;

पेट्रोल 97 रुपए 77 पैसे प्रति लीटर है.
डीजल की कीमत 90 रुपए 67 पैसे प्रति लीटर है

कोलकाता

पेट्रोल अब 108 रुपए 70 पैसे
डीजल 95 रुपए 13 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है

मुंबई&amp;nbsp;

एक लीटर पेट्रोल 106 रुपए 68 पैसे
डीजल के लिए 93 रुपए 14 पैसे चुकाने पड़ रहे हैं

चेन्नई&amp;nbsp;

पेट्रोल 103 रुपए 67 पैसे&amp;nbsp;
डीजल 95 रुपए 25 पैसे प्रति लीटर&amp;nbsp;

दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों का हाल
दिल्ली से सटे एनसीआर के इलाकों और देश के दूसरे बड़े शहरों में भी कीमतें आसमान छू रही हैं. अगर आप नोएडा में रहते हैं तो यहां आज पेट्रोल 97 रुपए 76 पैसे और डीजल 90 रुपए 99 पैसे प्रति लीटर है. वहीं गुरुग्राम में पेट्रोल 98 रुपए 47 पैसे और डीजल 90 रुपए 94 पैसे प्रति लीटर पर बिक रहा है.&amp;nbsp;
हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में पेट्रोल का भाव 110 रुपए के आंकड़े को भी पार कर गया है. हैदराबाद में पेट्रोल 110 रुपए 89 पैसे और तिरुवनंतपुरम में 110 रुपए 61 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है. इसके अलावा पटना में पेट्रोल 108 रुपए 92 पैसे और जयपुर में 107 रुपए 61 पैसे प्रति लीटर है.
पेट्रोल के दाम बढ़े, अब सरकार ने लगाया 3 रुपए का Tax, इससे आपकी जेब ढीली होगी या नहीं? जानें सबकुछ
कीमतों में बढ़ोतरी की असली वजह
आखिर अचानक पेट्रोल-डीजल के दाम इतने क्यों बढ़ गए? इसकी मुख्य वजह भारत में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव है. इस समय पूरी दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट यानी एनर्जी क्राइसिस का सामना कर रही है.पश्चिम एशिया, यानी मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में &#039;ब्रेंट क्रूड ऑयल&#039; यानी कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ चुकी हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>Diesel&amp;Petrol Price: पेट्रोल&amp;डीजल 5 रुपए सस्ता, इस सरकार ने घटा दिए तेल के दाम, जानें नईं कीमतें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/diesel-petrol-price-पेट्रोल-डीजल-5-रुपए-सस्ता-इस-सरकार-ने-घटा-दिए-तेल-के-दाम-जानें-नईं-कीमतें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/diesel-petrol-price-पेट्रोल-डीजल-5-रुपए-सस्ता-इस-सरकार-ने-घटा-दिए-तेल-के-दाम-जानें-नईं-कीमतें</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर कई देशों पर पड़ा रहा है. जब भी पेट्रोल डीजल के दाम बदलते हैं तो सबसे पहले इसका असर आम आदमी के महीने के बजट पर पड़ता है. ऐसे में शुक्रवार यानी 16 मई को भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि इसी बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान की सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की है. इस खबर ने अब लोगों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है.
पाकिस्तान में कितने रुपए सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल?
पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है. कटौती के बाद वहां पेट्रोल की कीमत 409.78 रुपए प्रति लीटर हो गई है. हाई-स्पीड डीजल की कीमत 409.58 प्रति लीटर हो गई है. पाकिस्तान सरकार 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान यूद्ध के बाद से हर शुक्रवार रात पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा कर रही है.
पेट्रोल के दाम बढ़े, अब सरकार ने लगाया 3 रुपए का Tax, इससे आपकी जेब ढीली होगी या नहीं? जानें सबकुछ
पिछले हफ्ते सरकार ने पेट्रोल में 14.92 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 15 रुपए लीटर बढ़ोतरी की थी. युद्ध शुरू होने के बाद 6 मार्च को सबसे पहले पेट्रोल-डीजल 55 रुपए प्रति लीटर महंगा किया गया था. इसके बाद 9 मार्च को सरकार ने खर्च घटाने के कुछ बड़े फैसला भी लिए थे.
भारत में 3 रुपए महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल
भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने चार साल बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव किया है. शुक्रवार को दोनों ईधनों के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर को बढ़ोतरी की गई. पेट्रोल-डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर थी. हालांकि, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले दोनों ईंधनों पर 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई थी.&amp;nbsp;
दूसरे देशों के मुकाबले भारत में कम बढ़े दाम
वैश्विक तेल संकट के बाद भी &amp;nbsp;भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कई बड़े देशों के मुकाबले कम रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में पेट्रोल 89.7 प्रतिशत और डीजल 112.7 प्रतिशत तक महंगा हुआ. इसके अलावा मलेशिया, पाकिस्तान, UAE और अमेरिका में भी ईंधन कीमतों में 40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं श्रीलंका,कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस में भी पेट्रोल-डीजल तेजी से महंगे हुए हैं. मतलब साफ है कि इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल केवल 3.2 प्रतिशत और डीजल 3.2 प्रतिशत महंगा हुआ है.
अब ये वाला टैक्स खत्म करने की तैयारी में सरकार! किसे और कैसे मिलेगा फायदा? जल्द लग सकती है मुहर
 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Diesel-Petrol, Price:, पेट्रोल-डीजल, रुपए, सस्ता, इस, सरकार, ने, घटा, दिए, तेल, के, दाम, जानें, नईं, कीमतें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Word Longest Oil Pipeline: कैसे काम करती है दुनिया की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन, यह किन&amp;किन देशों से गुजरती है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/word-longest-oil-pipeline-कैसे-काम-करती-है-दुनिया-की-सबसे-बड़ी-तेल-पाइपलाइन-यह-किन-किन-देशों-से-गुजरती-है</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/word-longest-oil-pipeline-कैसे-काम-करती-है-दुनिया-की-सबसे-बड़ी-तेल-पाइपलाइन-यह-किन-किन-देशों-से-गुजरती-है</guid>
        <description><![CDATA[ Word Longest Crude Oil Pipeline: दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन एक विशाल औद्योगिक नेटवर्क की तरह काम करती है, जो हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है. इस पाइपलाइन की बात करें तो यह ऊबड़-खाबड़ इलाकों और कई देशों की सीमाओं को पार करते हुए हर दिन करोड़ों बैरल कच्चा तेल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है. इसे 1990 के दशक की बेहतरीन इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक माना जाता है.&amp;nbsp;
कौन सी है दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन?
दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन की बात करें तो क्रॉस-कंट्री तेल पाइपलाइन रूस की द्रुजबा पाइपलाइन है. इसे Friendship Pipeline भी कहा जाता है. ये पाइपलाइन रूस से शुरू होकर कई देशों से गुजरते हुए मध्य और उत्तरी यूरोप तक जाती है. यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का एक जरूरी हिस्सा मानी जाती है.
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आखिर किन देशों से गुजरती है पाइपलाइन?
द्रुजबा पाइपलाइन रूस के अल्मेत्येव्स्क से शुरू होती है और फिर कई देशों से होकर गुजरती है. ये पाइपलाइन खासकर इन देशों को जोड़ती है जैसे...

रूस
बेलारूस
पोलैंड
जर्मनी
यूक्रेन
हंगरी
स्लोवाकिया
चेक गणराज्य

साथ ही इसका नेटवर्क यूरोप के बड़े हिस्से को तेल सप्लाई करता है.
कितनी लंबी है द्रुज़बा पाइपलाइन?

इसके मुख्य ट्रंक लाइन करीब 4 हजार किमी.
वहीं पूरे नेटवर्क ( ब्रांच सहित) करीब 5500 किमी.

ये पाइपलाइन रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता रखती है.
दुनिया की अन्य लंबी तेल पाइपलाइनें
द्रुजबा के अलावा भी दुनिया में कई लंबी पाइपलाइनें हैं जैसे...

ESPO Pipeline (रूस से एशिया) &amp;ndash; 4,850 किमी
Keystone Pipeline (कनाडा से USA) &amp;ndash; 3,400 किमी
Kazakhstan&amp;ndash;China Pipeline &amp;ndash; 2,230 किमी
Baku&amp;ndash;Tbilisi&amp;ndash;Ceyhan Pipeline &amp;ndash; 1,768 किमी

अब ये वाला टैक्स खत्म करने की तैयारी में सरकार! किसे और कैसे मिलेगा फायदा? जल्द लग सकती है मुहर
द्रुजबा पाइपलाइन की खास जानकारी

सबसे पहले यह रोजाना लगभग 1.2 से 1.4 मिलियन बैरल तेल ट्रांसपोर्ट कर सकती है.
इसके साथ ही ये 45 से ज्यादा बड़ी नदियों को पार करती है.
वहीं इसे 1960 से 1964 के बीच बनाया गया था.
इसका मकसद सोवियत देशों को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा देना था.
यह आज भी यूरोप की ऊर्जा जरूरतों में जरूरी भूमिका निभाती है.

ऊर्जा सप्लाई में इसका महत्व क्या है?
द्रुजबा पाइपलाइन केवल एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा है. हालांकि, समय के साथ इसमें कई बदलाव और रुकावटें भी आई हैं, लेकिन यह आज भी यूरोप के लिए कच्चे तेल की एक जरूरी लाइफलाइन बनी हुई है.
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Word, Longest, Oil, Pipeline:, कैसे, काम, करती, है, दुनिया, की, सबसे, बड़ी, तेल, पाइपलाइन, यह, किन-किन, देशों, से, गुजरती, है</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Chinese Street Vendor: फ्राइड राइस बेचकर हर महीने 7 लाख कमा रहा है 19 साल का लड़का, लगाता है ग्लैमर का तड़का</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chinese-street-vendor-फ्राइड-राइस-बेचकर-हर-महीने-7-लाख-कमा-रहा-है-19-साल-का-लड़का-लगाता-है-ग्लैमर-का-तड़का</link>
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        <description><![CDATA[ Fried Rice Business: चीन से बेहद ही अनोखा मामला सामने आया है. जहां, एक 19 साल के युवा स्ट्रीट वेंडर ने अपने छोटे से फ्राइड राइस स्टॉल के बेहद ही बड़े बिज़नेस में बदलकर हर किसी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है. इतना ही नहीं, सूट-बूट पहने इस युवा शेफ की तेज गति के साथ-साथ अनोखे अंदाज में खाना बनाते हुए देखने के लिए न सिर्फ रुकते हैं बल्कि वीडियो भर बनाते हैं.
सोशल मीडिया से मिली लोकप्रियता&amp;nbsp;
&#039;साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट&#039; के मुताबिक, &amp;nbsp;लू नाम का यह युवक अपने परिवार के साथ स्टॉल चलाता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद से लोग न सिर्फ देखने आते हैं बल्कि इस युवक का वीडियो भी बनाते हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ सोशल मीडिया से मिली लोकप्रियता के बाद उसके व्यवसाय में तेजी से बदलाव देखने को मिला है. जिसको लेकर लू ने जानकारी देते हुए बताया कि स्टॉल का मासिक टर्नओवर लगभग 50,000 युआन (करीब 7,07,119 रुपये) तक पहुंच गया है.&amp;nbsp;
फिटिंग सूट पहनकर क्यों बनाते हैं खाना?
आम तौर पर बाजार में काम करते समय लोग ज्यादातर सभ्य दिखाई देते हैं. लेकिन, लू ने सभ्य दिखने की बजाय फिटिंग सूट पहनकर खाना बनाने का बड़ा फैसला लिया. बस फिर क्या था, उनके इस बड़े फैसले ने ग्राहकों को अपनी तरफ तेजी से आकर्षित किया. इसके साथ ही फ्राइड राइस बनाते समय कुछ खास हाव-भाव दिखाता है, जैसे अपने बालों को संवारना, ग्राहकों को देखकर आंख मारना और परिवार द्वारा फेंके गए अंडों को हवा में पकड़कर कड़ाही में डालना, लू के काम करने के तरीके को देखकर हर कोई पूरी तरह से हैरान रह जाता है.&amp;nbsp;
जापानी एनिमे से क्यों की जा रही है लू की तुलना?
इतना ही नहीं, लोग आज कल लू की तुलना जापानी एनिमे &#039;वन पीस&#039; के काल्पनिक रसोइये &#039;सेंजी&#039; से करने में जुटे हुए हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ लू ने भी इस तुलना को अपनाया और &#039;#sanjifriedrice&#039; हैशटैग का सोशल मीडिया पर तेजी से इस्तेमाल शुरू कर दिया, जिससे उसके 46 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं.&amp;nbsp;
केवल तीन मिनट में फ्राइड राइस कर लेते हैं तैयार
दरअसल, यह काम सबसे ज्यादा थका देने वाला है. जहां, स्टॉल रोजाना शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक खुली रहती है. इतना ही नहीं, लू महज तीन मिनट में फ्राइड राइस की एक प्लेट पूरी तरह से तैयार कर लेता है और रोजाना 200 से ज्यादा प्लेटें बिकती हैं. जहां, &amp;nbsp;एक प्लेट की कीमत 10 युआन (लगभग 141 रुपये) है. इसके अलावा सभी खर्चे निकालने के बाद लू को हर महीने लगभग 20 हजार युआन (करीब ₹2.8 लाख) का बड़ा फायदा होता है, &amp;nbsp;इस काम में उसके पिता भी सामग्री तैयार करने में उसकी सबसे ज्यादा मदद करते हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Silver News: सोने के बाद अब चांदी पर सख्ती, सरकार ने बदल दिया ये बड़ा नियम, अब कोई भी...</title>
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        <description><![CDATA[ Silver Bar News: सोने-चांदी को लेकर सरकार हर दिन नए-नए नियम बना रही है. पहले सरकार ने सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी तो अब सरकार ने चांदी के व्यापार पर बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने चांदी के आयात पर एक और सख्ती कर दी है. जानिए नया नियम क्या है.
विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने आज चांदी के बार यानी ईंट के दो कोड 71069221 और 71069229 को फ्री कैटेगरी से हटाकर वर्जित कैटेगरी में डाल दिया है. मतलब अब कोई भी कारोबारी सीधे बाहर से चांदी की ईंट नहीं मंगा सकता.
अब चांदी सिर्फ तीन रास्तों से ही आएगी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के नामित बैंक
डीजीएफटी की नामित एजेंसियां
या इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर अथॉरिटी यानी IFSCA से मंजूर योग्य जौहरी, जो इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) के जरिए आयात करेंगे.&amp;nbsp;

पेट्रोल के दाम बढ़े, अब सरकार ने लगाया 3 रुपए का Tax, इससे आपकी जेब ढीली होगी या नहीं? जानें सबकुछ
तुरंत लागू हो गया है फैसला&amp;nbsp;
बता दें कि यह फैसला तुरंत लागू हो गया है. यह कदम ऐसे समय आया है, जब बस चार दिन पहले ही सरकार ने सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की थी. &amp;nbsp;
गौरतलब है कि साल 2025 में भारत ने 9.2 अरब डॉलर की चांदी मंगाई थी, &amp;nbsp;जो 2024 से 44 प्रतिशत ज्यादा है. चांदी के दाम भी एक साल में लगभग तीन गुना बढ़कर 2.43 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं.&amp;nbsp;
चांदी का आयात हर तरह से कम करना चाहती है सरकार
व्यापार घाटा भी 333 अरब डॉलर के रिकॉर्ड पर है और रुपए पर भारी दबाव है. यही वजह है कि सरकार चांदी का आयात हर तरह से कम करना चाहती है. पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी, ताकि विदेशी मुद्रा का खर्च रोका जा सके.
Gold-Silver Price Today: आज घटे या बढ़े सोना-चांदी के दाम? जानिए आपके शहर में क्या हैं ताजा कीमतें ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Two Luxurious Apartment: 294 करोड़ में साइन हुई मुंबई की सबसे बड़ी अपार्टमेंट डील्स, किसने और क्या खरीदा?</title>
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        <description><![CDATA[ Godrej Family: गोदरेज परिवार की वंशज और गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप की कार्यकारी निदेशक तान्या दुबाश ने मुंबई के पॉश इलाके वर्ली सी फेस पर एक निर्माणाधीन प्रीमियम आवासीय टॉवर में 294 करोड़ रुपये से ज्यादा में समुद्र के सामने वाले (सी-फेसिंग) दो आलीशान अपार्टमेंट खरीदकर हर किसी को हैरान कर दिया है. &amp;nbsp;इकनॉमिक टाइम्स (ET) द्वारा देखे गए संपत्ति पंजीकरण दस्तावेजों से इस मामले की जानकारी हासिल हुई है.&amp;nbsp;
देश के सबसे महंगे आवासीय सौदों में से है एक
इस सौदे के तहत अपार्टमेंट की कीमत लगभग 2.5 लाख प्रति वर्ग फुट से ज्यादा की बताई जा रही है, जो प्रति वर्ग फुट दर के आधार पर देश के सबसे महंगे आवासीय सौदों में से एक की गिनती में आती है.
दरअसल ये दोनों अपार्टमेंट &#039;नमन ज़ाना&#039; (Naman Xana) नाम के &amp;nbsp;अल्ट्रा-लक्जरी टॉवर की 19वीं और 20वीं मंजिल पर स्थित हैं. हांलाकि, कुछ दस्तावेजों का मानना है कि, प्रत्येक अपार्टमेंट का कारपेट एरिया लगभग 5 हजार 812 वर्ग फुट है, जिसके साथ 645 वर्ग फुट की बालकनी भी है. इतना ही नहीं, इस बालकनी को छोड़कर दोनों आवासों का कुल क्षेत्रफल 11 हजार 500 वर्ग फुट से भी ज्यादा है.&amp;nbsp;
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एक कंपनी ने पहले भी खरीदा था डुप्लेक्स अपार्टमेंट
हांलाकि, इस टॉवर में गोदरेज परिवार का यह पहला निवेश नहीं है. पिछले साल भी तान्या दुबाश से जुड़ी एक कंपनी ने इसी प्रोजेक्ट की 30वीं और 31वीं मंजिल पर 225.76 करोड़ में एक डुप्लेक्स अपार्टमेंट खरीदकर सभी को चौंका दिया था. इतना ही नहीं, यह अल्ट्रा-लक्जरी टॉवर देश के सबसे महंगे आवासीय पतों में से एक बनकर सबके सामने आया है जो अरबपति प्रमोटरों, उद्योगपतियों और शीर्ष कॉर्पोरेट अधिकारियों को अपनी तरफ तेजी से आकर्षित कर रहा है.&amp;nbsp;
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आखिर कौन हैं तान्या दुबाश?&amp;nbsp;
आपमें से बेहद ही कम लोगों को तान्या दुबाश के बारे में जानकारी हासिल होगी. आदि गोदरेज की बड़ी बेटी हैं और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और गोदरेज एग्रोवेट समेत कई सूचीबद्ध गोदरेज समूह की कंपनियों के बोर्ड में पूरी तरह से शामिल हैं. जिसको लेकर विशेषज्ञों ने जानकारी देते हुए कहा कि मुंबई कोस्टल रोड जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार की वजह से वर्ली माइक्रो-मार्केट में अल्ट्रा-लक्जरी संपत्तियों की मांग काफी तेजी से बड़ गई है. इसके अलावा &amp;nbsp;बड़े प्रमोटर परिवार और अत्यधिक अमीर लोग (UHNWIs) मुंबई के इन आलीशान आवासों को विरासत संपत्ति के रूप में देख रहे हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में मुंबई से सस्ती क्यों है CNG? कीमतों में है इतना बड़ा अंतर, जानें दोनों शहरों में क्या है रेट</title>
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        <description><![CDATA[ CNG Price Hike: पेट्रोल- डीजल के बाद हाल ही में CNG की कीमतें भी दिल्ली औक मुंबई में बढ़ गई हैं. जिसकी वजह से अब आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. ये महंगाई की मार हर आम व्यक्ति जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट या सीएनजी के भरोसे ट्रेवल करता है उसकी जेब पर पड़ने वाली है.&amp;nbsp;
दिल्ली और मुंबई में अब CNG की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दी गई है. जिसके बाद दिल्ली में CNG का दाम 77.09 रुपये से बढ़कर 79.09 रुपये प्रति किलो हो गया है. तो वहीं मुंबई और आसपास के इलाकों में CNG अब 84 रुपये प्रति किलो मिलेगी.
ये भी पढ़ें: इस राज्य ने फ्यूल पर घटा दिया VAT, 18% से सीधे 7% किया, महंगाई के बीच जनता को मिली राहत
दिल्ली के मुकाबले मुंबई में महंगी CNG, क्यो?दिल्ली और मुंबई दोनों ही जगहों पर CNG की कीमत में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. दोनों जगह एक जैसी कीमत बढ़ी है, फिर भी दोनों जगहों की कीमतों में इतना फर्क क्यों? ये सवाल हर किसी के मन में है. दरअसल मुंबई में CNG की कीमत दिल्ली से ज्यादा है क्योंकि मुंबई को महंगी विदेशी LNG (गैस) ज्यादा खरीदना पड़ती है. वहां टैक्स (VAT) ज्यादा है. गैस पहुंचाने और वितरण का खर्च भी ज्यादा आता है. वहीं दिल्ली में गैस सप्लाई अपेक्षाकृत सस्ती पड़ती है, इसलिए यहां पर कीमतें थोड़ी कम हैं.
आम आदमी पर पड़ेगा असरदिल्ली और मुंबई में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी और बसों में CNG का ही इस्तेमाल किया जाता है. अब CNG के महंगा होने से यहां ऑटो और टैक्सी का किराया बढ़ सकता है. बस ऑपरेटरों पर भी दबाव बढ़ेगा और रोज यात्रा करने वाले लोगों का खर्च भी बढ़ सकता है. इसी बीच कीमतें बढ़ने के साथ ही मुंबई में ऑटो यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू कर दी है. वे बेस किराए में 1 रुपये बढ़ाने की बात कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें: PM मोदी के UAE दौरे से LPG की टेंशन खत्म! आएगा भारी निवेश, इन सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत
महंगी क्यों हुई CNG?बता दें कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मज में सप्लाई रुकने से दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों बढ़ोतरी हुई है. जिसकी वजह से ही हाल ही में पेट्रोल- डीजल में भी 3 रुपये की बढ़ोतरी भारत में की गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, मुंबई, से, सस्ती, क्यों, है, CNG, कीमतों, में, है, इतना, बड़ा, अंतर, जानें, दोनों, शहरों, में, क्या, है, रेट</media:keywords>
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        <title>Sugar Export: चीनी पर सरकार टेंशन में क्यों? स्टॉक भरपूर फिर क्यों अपनाया प्रोटेक्शन मोड? जानें निर्यात बैन की वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Sugar Export Banned: भारत में लगातार बढ़ रही महंगाई मार लोगों की जेब तक आ पहुंची है. बाहर से आने वाले क्रूड ऑइल की लगातार बढ़ती कीमत की वजह से ईंधन की कीमतों में भी इजाफा हुआ है. इसी बीच भारत सरकार ने 13 मई को फैसला किया कि अब चीनी के निर्यात पर सितंबर 2026 तक पूरी तरह रोक रहेगी. इसका मतलब है कि अब भारत से चीनी बाहर नहीं भेजी जाएगी, सिर्फ कुछ बहुत कम मात्रा यूरोप और अमेरिका ही जाएगी. क्या इस फैसला असर महंगाई पर रोक लगाएगा या नहीं?
सरकार ने क्यों किया फैसला?सरकार का ये फैसला महंगाई की मार के बीच आया है, इसके पीछे की वजह अल नीनो बताई जा रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अल-नीनो (El Ni&amp;ntilde;o) तूफान की वजह से भारत में बारिश कम हो सकती है और गर्मी बढ़ सकती है. जिसकी वजह से अगले साल गन्ने की खेती प्रभावित होने का खतरा है. खासकर 2027-28 की चीनी उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: Explained: पेट्रोल-डीजल से लेकर EMI तक! आपकी जेब पर कैसे पड़ रही है डबल मार? एक्सपर्ट से समझिए पूरा गणित
इसके अलावा मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के कारण खाद की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. गन्ने की फसल को बहुत पानी और खाद चाहिए होती है. अगर खाद कम मिली तो उत्पादन घट सकता है. इतना ही नहीं फिलहाल सरकार को स्टॉक पर पूरा भरोसा भी नहीं है. कुछ चीनी मिलों के पास जितना स्टॉक बताया जा रहा है, उतना वाकई में है या नहीं इस पर भी सरकार को शक है, इसलिए सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है. कई चीनी कंपनियों के शेयर भी गिरे हैं, ऐसे में सरकार का ये शक भी जाहिर है.
इन चीनी कंपनियों के शेयर गिरे



कंपनी
गिरावट (प्रतिशत में)


धामपुर शुगर मिल्स
6.66


द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज
5.88


डालमिया भारत शुगर
5.86


बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल्स
5.22


उत्तम शुगर मिल्स
5.08


मवाना शुगर्स
4.18


राजश्री शुगर्स&amp;nbsp;
4.02


श्री रेणुका शुगर्स
2.41



देश में चीनी की स्थिति2025-26 में भारत में लगभग 279 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है. पुराने स्टॉक मिलाकर कुल उपलब्धता लगभग 329 लाख टन है. देश की जरूरत लगभग 280 लाख टन है. यानी फिलहाल चीनी की कमी नहीं है. सरकार ने पहले 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी. उसमें से लगभग 6.5 लाख टन चीनी पहले ही बाहर भेजी जा चुकी है. अब आगे कोई नया निर्यात नहीं होगा.
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क्या बढ़ेंगे चीनी के दाम?फिलहाल घरेलू बाजार में चीनी बेचने पर मिलों को ज्यादा फायदा मिल रहा है. इसलिए वैसे भी एक्सपोर्ट ज्यादा नहीं हो रहा था. बैन लगाने से सरकार ने सिर्फ पूरी तरह रास्ता बंद कर दिया है. सरकार की सबसे बड़ी चिंता ये है कि भविष्य में चीनी की कमी या महंगाई ना बढ़ें, इसलिए पहले से ही सावधानी के तौर पर एक्सपोर्ट रोक दिया है गया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Sugar, Export:, चीनी, पर, सरकार, टेंशन, में, क्यों, स्टॉक, भरपूर, फिर, क्यों, अपनाया, प्रोटेक्शन, मोड, जानें, निर्यात, बैन, की, वजह</media:keywords>
    </item>
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        <title>अब ये वाला टैक्स खत्म करने की तैयारी में सरकार! किसे और कैसे मिलेगा फायदा? जल्द लग सकती है मुहर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-ये-वाला-टैक्स-खत्म-करने-की-तैयारी-में-सरकार-किसे-और-कैसे-मिलेगा-फायदा-जल्द-लग-सकती-है-मुहर</link>
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        <description><![CDATA[ Withholding Tax: भारत में बढ़ती हुई महगाई के बीच सरकार और RBI देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की प्लानिंग कर रही है. इसके लिए सरकार टैक्स सिस्टम को आसान बनाते हुए विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) में बदलाव करने की तैयारी कर रही है. खबरों की मानें तो सरकार की तरफ से इसे खत्म करने की प्लानिंग चल रही है. अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा फायदा निवेशकों, कंपनियों और विदेश से पैसा कमाने वालों को मिल सकता है.
विदहोल्डिंग टैक्स को लेकर सरकार की चिंताद इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों से विदहोल्डिंग टैक्स को खत्म करने की चर्चा चल रही है. नीति निर्माता विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और मिडिल में जारी तनाव के बीच विदेशी खाते को सुरक्षित रखने के लिए ये कदम उठाना चाहते हैं. सरकार और RBI इस वजह से चिंता में है क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आ रही है, साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी है. पिछले दो महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 38 अरब डॉलर की कमी आई है.
साल 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजारों से लगभग 22.5 अरब डॉलर निकाल चुके हैं. रुपये में भी भारी कमजोरी देखने को मिली है. युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5% टूट चुका है. ऐसे में सरकार का चिंता करना भी जायज है.
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क्या होता है विदहोल्डिंग टैक्स?विदहोल्डिंग टैक्स वो टैक्स होता है जो किसी भुगतान से पहले ही काट लिया जाता है. जैसे बैंक ब्याज पर TDS, विदेश से मिलने वाली कमाई पर टैक्स कटौती और डिविडेंड या रॉयल्टी पेमेंट पर टैक्स. इसे ही विदहोल्डिंग टैक्स कहा जाता है. जिसका आसान भाषा में मतलब है कि पैसा मिलने से पहले सरकार अपना हिस्सा काट लेती है. सरकार इसे खत्म इसलिए करना चाहती है ताकि टैक्स सिस्टम को आसान बनाया जा सके, विदेशी निवेश को बढ़ाया जा सके, कारोबार की लागत कम हो और कंपनियों- निवेशकों को ज्यादा नकदी मिल सके.
किसे फायदा मिलेगा?

सरकार के इस कदम से विदेशी निवेशकों को फायदा मिलेगा. अगर टैक्स कटौती कम या खत्म होती है, तो भारत में निवेश करना ज्यादा आकर्षक होगा.
कंपनियों के पास तुरंत ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे वो निवेश और विस्तार कर सकेंगी.
TDS कम होने से हाथ में मिलने वाली रकम बढ़ सकती है और रिफंड का झंझट कम होगा.
ऐसे स्टार्टअप और IT सेक्टर जो विदेश से पेमेंट लेते हैं, उन्हें टैक्स कटौती से राहत मिल सकती है.
इतना ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी टैक्स रिफंड का इंतजार कम करना होगा.
निवेश पर मिलने वाली रकम बढ़ सकती है.
बैंक ब्याज या डिविडेंड पर तुरंत कटने वाला टैक्स कम हो सकता है.

ये भी पढ़ें: इस राज्य ने फ्यूल पर घटा दिया VAT, 18% से सीधे 7% किया, महंगाई के बीच जनता को मिली राहत
बता दें कि फिलहाल इस पर सरकार ने कोई फैसला नहीं किया है बल्कि फिलहाल सरकार और RBI दोनों ही इस पर विचार कर रहे हैं. आखिरी फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि किन सेक्टरों और लोगों को पूरी राहत मिलेगी. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, ये, वाला, टैक्स, खत्म, करने, की, तैयारी, में, सरकार, किसे, और, कैसे, मिलेगा, फायदा, जल्द, लग, सकती, है, मुहर</media:keywords>
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    <item>
        <title>अभी तो छंटनी बाकी है! पिछले 14 दिनों में 25000 लोगों की छूटी नौकरी, खत्म हो रहा है IT का सुनहरा दौर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अभी-तो-छंटनी-बाकी-है-पिछले-14-दिनों-में-25000-लोगों-की-छूटी-नौकरी-खत्म-हो-रहा-है-it-का-सुनहरा-दौर</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Layoffs 2026: दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों में इस समय छंटनी का दौर लगातार जारी है. साल 2026 में अब तक हजारों कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 के दो हफ्तों में ही करीब 25 हजार टेक कर्मचारियों की नौकरी चली गई. सबसे बड़ी बात ये है कि ज्यादातर कंपनियां अब AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज्यादा फोकस कर रही हैं और इसी वजह से कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है. यहां से जानें वो कौन सी कंपनियां हैं, जो ले ऑफ कर रही हैं या कर चुकी हैं और छटनी का असली कारण क्या है, इसकी जानकारी भी यहां दी गई है.
कौन-कौन सी कंपनियों ने निकाले कर्मचारी?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक PayPal, Cisco और Cloudflare जैसी बड़ी कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की है. सबसे ज्यादा चर्चा PayPal की हो रही है. कंपनी अगले कुछ सालों में अपनी लगभग 20 प्रतिशत वर्कफोर्स कम करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स देखें तो इससे करीब 4700 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं. कंपनी अब AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा निवेश करना चाहती है. वहीं, Cisco ने भी करीब 4000 नौकरियां खत्म करने का फैसला लिया है. कंपनी का कहना है कि अब वह AI और तेजी से बढ़ते टेक सेक्टर पर फोकस करना चाहती है.&amp;nbsp;
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क्या है छटनी की वजह?
पहले कंपनियां लागत कम करने या बिजनेस घाटे की वजह से कर्मचारियों को निकालती थीं, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. अब AI को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. कई कंपनियों का कहना है कि AI की मदद से कई काम तेजी और कम लागत में हो रहे हैं. ऐसे में कंपनियां छोटी टीम के साथ ज्यादा काम करना चाहती हैं. यही वजह है कि टेक सेक्टर में लगातार रिस्ट्रक्चरिंग यानी बदलाव देखने को मिल रहा है.
लिंक्डइन से लेकर फ्रेशवर्क्स तक असर
छंटनी की मार सिर्फ अमेरिकी कंपनियों तक सीमित नहीं है. लिंक्डइन, फ्रेशवर्क्स, कॉइनबेस और ट्रूकॉलर जैसी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं. फ्रेशवर्क्स ने करीब 500 कर्मचारियों की छंटनी की है. कंपनी का कहना है कि AI की वजह से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है.&amp;nbsp;
कर्मचारियों में बढ़ रही चिंता
लगातार हो रही छंटनी की वजह से टेक इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों के बीच डर और अनिश्चितता बढ़ रही है. सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म पर भी लोग नौकरी को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं. कई लोग मानते हैं कि आने वाले समय में AI की वजह से और नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं ले सकता. नए दौर में वही लोग ज्यादा सुरक्षित रहेंगे जो नई टेक्नोलॉजी सीखते रहेंगे और खुद को लगातार अपडेट करेंगे.
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क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में टेक कंपनियों में रिस्ट्रक्चरिंग और बढ़ सकती है. कंपनियां अब कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने की प्लानिंग पर काम कर रही हैं. फिलहाल टेक सेक्टर में नौकरी करने वालों के लिए सबसे जरूरी चीज है नई स्किल सीखना और AI के साथ काम करने की क्षमता बढ़ाना,&amp;nbsp;क्योंकि अब इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और आने वाला समय पूरी तरह टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन का माना जा रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अभी, तो, छंटनी, बाकी, है, पिछले, दिनों, में, 25000, लोगों, की, छूटी, नौकरी, खत्म, हो, रहा, है, का, सुनहरा, दौर</media:keywords>
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    <item>
        <title>होर्मुज अब बीते कल की बात, UAE बना रहा है तेल की नई पाइपलाइन, दोगुनी होगी निर्यात क्षमता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/होर्मुज-अब-बीते-कल-की-बात-uae-बना-रहा-है-तेल-की-नई-पाइपलाइन-दोगुनी-होगी-निर्यात-क्षमता</link>
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        <description><![CDATA[ UAE New Pipeline Project: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे खतरनाक चोकपॉइंट बन गया है. यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है लेकिन फिलहाल ईरान से इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया है. इससे कच्चे तेल का आयात- निर्यात बंद हो गया और सीधा असर ईंधन की कीमत पर नजर आया है. लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरत यानी यूएई ने इसका तोड़ निकाल लिया है. यहां से इसके बारे में विस्तार से जानें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- पेट्रोल-डीजल-CNG महंगा, एल नीनो से फसलें बर्बाद और बढ़ेगी EMI! आखिर क्या है &#039;महंगाई का दुष्चक्र&#039;?
क्या है यूएई का मास्टप्लान?यूएई अब होर्मुज को बाइपास करके पश्चिम से पूर्व तट तक एक नई पाइपलाइन बना रहा है. नई पाइपलाइन के शुरू होने से फुजैरा से तेल निर्यात की क्षमता दोगुनी हो जाएगी. अभी जो हबशान-फुजैरा पाइपलाइन रोजाना 18 लाख बैरल तेल ले जाती है वही रोज 18 लाख बैरल तेल ले जा पाएगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- बिना एक भी रुपया खर्च किए कर सकते हैं ये 3 बिजनेस, कुछ ही महीनों में हो जाएंगे मालामाल
कब तक शुरू होगी नई पाइपलाइन?अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद ने कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी को पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन परियोजना में तेजी लाने का निर्देश दिया। उम्मीद है कि साल 2027 से ये नई पाइपलाइन शुरू हो जाएगी, जिसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य &amp;nbsp;को आसानी से बायपास कर दिया जाएगा.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
फुजैराह पहले से ही दुनिया के बड़े तेल स्टोरेज और बंकरिंग हब्स में शामिल है. अब इस नए प्रोजेक्ट के बाद यहां से तेल एक्सपोर्ट क्षमता काफी बढ़ जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूएई की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार में उसकी पकड़ को और मजबूत करेगा. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर चिंता के बीच यूएई लगातार अपने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटा है. ADNOC का यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है. इससे यूएई को तेल निर्यात के लिए होर्मुज रूट पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और वैश्विक सप्लाई को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>होर्मुज, अब, बीते, कल, की, बात, UAE, बना, रहा, है, तेल, की, नई, पाइपलाइन, दोगुनी, होगी, निर्यात, क्षमता</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol Diesel Price: 2014 से अब तक पेट्रोल&amp;डीजल में दाम में कितना हुआ इजाफा? कब&amp;कब कितनी बढ़ी कीमतें?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-2014-से-अब-तक-पेट्रोल-डीजल-में-दाम-में-कितना-हुआ-इजाफा-कब-कब-कितनी-बढ़ी-कीमतें</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Price Hike: इंटरनेशनल मार्केट में लगातार कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने का असर अब भारत में भी दिखने लगा है. आज यानी 15 मई को भारत सरकार ने पेट्रोल- डीजल की कीमतों मे इजाफा कर दिया है. सरकार की तरफ से पेट्रोल- डीजल पर 3 रुपये और सीएनजी पर 2 रुपये की बढ़ोतरी की है. जिससे आम आदमी की जेब पर अच्छा- खासा दबाव बना है.
हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है पेट्रोल- डीजल के दामों में इस कदर उछाल आया हो, पिछले 12 सालों में यानी 2014 से अब तक कई बार पेट्रोल- डीजल की कीमतों में उछाल देखा गया है. आइये बताते हैं इसका ग्राफ.
ये भी पढ़ें: वो 24 देश, जहां भारत से कई फीसदी ज्यादा महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, एक ने तो 112% तक बढ़ा दिए दाम; देखें लिस्ट
यहां देखें साल के हिसाब से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कितना बदलाव आया है.



साल
पेट्रोल की कीमत (एवरेज)
डीजल की कीमत (एवरेज)


2014
71 रुपये 41 पैसे
55 रुपये 49 पैसे


2015
66 रुपये 29 पैसे
52 रुपये 28 पैसे


2016
63 रुपये 02 पैसे
46 रुपये 43 पैसे


2017
68 रुपये 09 पैसे
57 रुपये 35 पैसे


2018
74 रुपये 63 पैसे
65 रुपये 93 पैसे


2019
73 रुपये 13 पैसे
66 रुपये 71 पैसे


2020
69 रुपये 59 पैसे
62 रुपये 29 पैसे


2021
90 रुपये 40 पैसे
80 रुपये 73 पैसे


2022
96 रुपये 72 पैसे
89 रुपये 62 पैसे


2026
97 रुपये 77 पैसे
90 रुपये 67 पैसे



बता दें कि 2022 के बाद से यानी पांच साल बाद आज 15 मई 2026 को पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ी हैं. साल 2014 में देश के कई शहरों में पेट्रोल करीब 70-75 रुपये प्रति लीटर था. जो 2021-22 तक 100 रुपये के पार पहुंच गया था. अब 2026 में फिर से कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है.

ये भी पढ़ें: आजादी के समय कितने रुपए लीटर मिलता था पेट्रोल? इतने में फुल हो जाती थी टंकी, चौंकाने वाली है कीमत
गौरतलब है कि साल 2020 के बाद कोरोना काल और फिर ग्लोबल सप्लाई संकट के चलते पेट्रोल तेजी से महंगा हुआ. 2021 में कई शहरों में पहली बार पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचा. यही वो दौर था जब पेट्रोल- डीजल की कीमतों में तेजी से उछाल आया. जिसके बाद मई 2026 में कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol, Diesel, Price:, 2014, से, अब, तक, पेट्रोल-डीजल, में, दाम, में, कितना, हुआ, इजाफा, कब-कब, कितनी, बढ़ी, कीमतें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मसालों, चायपत्ति से लेकर चावल तक... सब हुआ महंगा, अभी और बढ़ेंगे दाम, देखें सामानों की ताजा रेट लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मसालों-चायपत्ति-से-लेकर-चावल-तक-सब-हुआ-महंगा-अभी-और-बढ़ेंगे-दाम-देखें-सामानों-की-ताजा-रेट-लिस्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/मसालों-चायपत्ति-से-लेकर-चावल-तक-सब-हुआ-महंगा-अभी-और-बढ़ेंगे-दाम-देखें-सामानों-की-ताजा-रेट-लिस्ट</guid>
        <description><![CDATA[ सखी सैयां तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाए जात है... महंगाई की मार ने हर घर में हाहाकार मचा दिया है. दूध का रेट तो बढ़े ही थे लेकिन तेल, मसाले, साबून, शैंपू ने भी जीना मुश्किल कर दिया है. बीते 2 महीनों में तकरीबन 10 से 30 फीसदी की बढ़ोदरी हुई है. यहां से आप सभी सामानों की रेट लिस्ट देख सकते हैं और जान सकते हैं कि ये आपका कितना बजट बिगाड़ने वाली है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- होर्मुज अब बीते कल की बात, UAE बना रहा है तेल की नई पाइपलाइन, दोगुनी होगी निर्यात क्षमता
यहां देखें रेट लिस्ट-&amp;nbsp;



सामान&amp;nbsp;
पुराने दाम
नए दाम


मूंगफली
160 प्रति किलो
200 प्रति किलो


रिफाइंड ऑयल
135 प्रति लीटर
148 प्रति लीटर


सरसों तेल
170 प्रति लीटर
190 प्रति लीटर


चावल
60- 120 प्रति किलो
70- 130 प्रति किलो


जीरा
300 प्रति किलो
360 प्रति किलो


चायपत्ती&amp;nbsp;
500 प्रति किलो
545 प्रति किलो


सूखा धनिया
180 प्रति किलो
220 प्रति किलो


लाल मिर्च&amp;nbsp;
300 प्रति किलो
350 प्रति किलो


हल्दी पाउडर
210 प्रति किलो
250 प्रति किलो



&amp;nbsp;
बता दें कि इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की डायरेक्टर मेघा अरोड़ा ने बताया है कि थोक महंगाई और बढ़कर नौ फीसदी तक पहुंच सकती है. मेघा अरोड़ा के अनुसार, &amp;nbsp;ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर नजर आएगा.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- पेट्रोल-डीजल-CNG महंगा, एल नीनो से फसलें बर्बाद और बढ़ेगी EMI! आखिर क्या है &#039;महंगाई का दुष्चक्र&#039;?
खुदरा महंगाई दर की क्या है हालत?बता दें कि अप्रैल 2026 में भारती की खुदरा महंगाई दर यानी CPI 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है. आश्चर्य की बात ये है कि एक महीना पहले ही यानी मार्च में ये 3.40 प्रतिशत थी. मई 2026 के आंकड़े जून 2026 में बताए जाएंगे.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही है राशन की कीमत?मिडिल ईस्ट के यु्द्ध ने सिर्फ पेट्रोल-डीजल और दूध ही नहीं, राशन के सामान पर भी असर डाला है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में टैक्स, कच्चा तेल जैसी चीजों के रेट में काफी बदलाव हुए हैं और इसकी असर खुदरा सामान पर भी पड़ रहा है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मसालों, चायपत्ति, से, लेकर, चावल, तक..., सब, हुआ, महंगा, अभी, और, बढ़ेंगे, दाम, देखें, सामानों, की, ताजा, रेट, लिस्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ऐतिहासिक गिरावट! मंदी और वैश्विक तनाव के आगे बेबस हुआ रुपया, पहली बार 96 के पार निकला डॉलर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ऐतिहासिक-गिरावट-मंदी-और-वैश्विक-तनाव-के-आगे-बेबस-हुआ-रुपया-पहली-बार-96-के-पार-निकला-डॉलर</link>
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        <description><![CDATA[ Rupee Crash: भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है. शुक्रवार को पहली बार ऐसा हुआ जब डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के स्तर के पार चला गया. यानी अब 1 डॉलर खरीदने के लिए पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. बता दें कि कल ही यानी 14 मई को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.74 से खिसक कर 95.86 पर आता दिखा, इसका मतलब है कि सीधा 20 पैसे की कमी आई. इसके पहले भी 13 मई को भी रुपया 95.80 पर पहुंचने के बाद 95.66 प्रति डॉलर पर नजर आया. लेकिन अब तो हालात बद से बदतर हो गए हैं और रुपया 96 पहुंच गया है. &amp;nbsp;
आखिर रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी हलचल है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब तेल महंगा होता है तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इसी वजह से रुपये पर दबाव बढ़ता है और उसकी कीमत गिरने लगती है.
इस समय रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह बढ़ती तेल कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है. विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं और डॉलर खरीद रहे हैं. इससे डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है. इसके अलावा दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता भी बनी हुई है. ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ जाते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग और बढ़ जाती है.
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आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
रुपये के कमजोर होने का असर धीरे-धीरे हर व्यक्ति तक पहुंचता है. सबसे पहले पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं. क्योंकि भारत तेल बाहर से खरीदता है और भुगतान डॉलर में होता है. अगर तेल महंगा हुआ तो ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ेगा. इसका असर सब्जियों, राशन, दूध और रोजमर्रा की दूसरी चीजों पर भी दिखाई दे सकता है. यानी आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है. इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे हो सकते हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाला काफी सामान विदेशों से आता है.
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शेयर बाजार पर भी असर
रुपये में गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला. निवेशकों में थोड़ी चिंता का माहौल है. हालांकि आईटी कंपनियों को कमजोर रुपये से फायदा हो सकता है, क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है. लेकिन बाकी सेक्टरों के लिए यह स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं मानी जा रही.
क्या डॉलर 100 रुपये तक जाएगा?
अब बाजार में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में डॉलर 100 रुपये तक पहुंच सकता है. फिलहाल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा तुरंत होना मुश्किल है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़े तो दबाव बढ़ सकता है. हालांकि RBI लगातार हालात पर नजर रखे हुए है. जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक बाजार में दखल देकर रुपये को संभालने की कोशिश कर सकता है. फिलहाल, आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर रुपया लगातार कमजोर होता रहा, तो महंगाई और बढ़ सकती है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ऐतिहासिक, गिरावट, मंदी, और, वैश्विक, तनाव, के, आगे, बेबस, हुआ, रुपया, पहली, बार, के, पार, निकला, डॉलर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gig Workers Strike: Zomato&amp;Swiggy डिलीवरी ठप! महंगे पेट्रोल के खिलाफ गिग वर्कर्स की हड़ताल का ऐलान, रखी ये मांग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gig-workers-strike-zomato-swiggy-डिलीवरी-ठप-महंगे-पेट्रोल-के-खिलाफ-गिग-वर्कर्स-की-हड़ताल-का-ऐलान-रखी-ये-मांग</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gig-workers-strike-zomato-swiggy-डिलीवरी-ठप-महंगे-पेट्रोल-के-खिलाफ-गिग-वर्कर्स-की-हड़ताल-का-ऐलान-रखी-ये-मांग</guid>
        <description><![CDATA[ Gig Workers Strike Petrol Price: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद अब इसका असर ऐप आधारित डिलीवरी और कैब सेवाओं पर भी दिखने लगा है. गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ विरोध का ऐलान किया है. यूनियन ने कहा है कि शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक गिग वर्कर्स ऐप बंद रखकर विरोध जताएंगे.
यूनियन का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सबसे ज्यादा असर डिलीवरी बॉय और ड्राइवरों पर पड़ रहा है. Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले लाखों वर्कर्स अपनी कमाई के लिए पूरी तरह बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं. ऐसे में ईंधन के दाम बढ़ने से उनकी रोज की बचत लगातार कम होती जा रही है.
20 रुपये प्रति किलोमीटर रेट की मांग
यूनियन ने कंपनियों से मांग की है कि गिग वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर सर्विस रेट तय किया जाए. यूनियन का कहना है कि जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं तो खर्च तुरंत बढ़ जाता है, लेकिन कंपनियां डिलीवरी चार्ज या प्रति किलोमीटर भुगतान नहीं बढ़ातीं.
GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स पहले से ही दबाव में हैं. अब ईंधन महंगा होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां भुगतान बढ़ाने पर फैसला नहीं लेतीं तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा.
ऐतिहासिक गिरावट! मंदी और वैश्विक तनाव के आगे बेबस हुआ रुपया, पहली बार 96 के पार निकला डॉलर
1 करोड़ से ज्यादा वर्कर्स पर असर
यूनियन के नेशनल कोऑर्डिनेटर निर्मल गोराना ने कहा कि देश में करीब 1 करोड़ 20 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स हैं. इनमें फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और कैब सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर इन वर्कर्स की कमाई पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें अपनी जेब से पेट्रोल, गाड़ी की सर्विस और बाकी खर्च उठाने पड़ते हैं.
सरकार से भी की मांग
यूनियन ने सरकार से मांग की है कि ऐप आधारित कंपनियों को भुगतान बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि बढ़ती ईंधन कीमतों का पूरा बोझ वर्कर्स पर न पड़े.
यूनियन का कहना है कि शुक्रवार को होने वाला यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और इसका मकसद गिग वर्कर्स की आर्थिक परेशानियों को सरकार और कंपनियों तक पहुंचाना है.
मसालों, चायपत्ति से लेकर चावल तक... सब हुआ महंगा, अभी और बढ़ेंगे दाम, देखें सामानों की ताजा रेट लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Gig, Workers, Strike:, Zomato-Swiggy, डिलीवरी, ठप, महंगे, पेट्रोल, के, खिलाफ, गिग, वर्कर्स, की, हड़ताल, का, ऐलान, रखी, ये, मांग</media:keywords>
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        <title>Petrol Saving: WFH से  30000 लीटर पेट्रोल बचाएगी ये दिग्गज कंपनी, कर दिया ऐलान, काम के साथ होगी बचत</title>
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        <description><![CDATA[ Work From Home: शादी.कॉम (Shaadi.com) के संस्थापक और सीईओ अनुपम मित्तल को कौन नहीं जानता होगा. इन दिनों सोशल मीडिया पर अनुपम मित्तल जमकर सुर्खियां बटोर रहे हैं. जहां, हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्क फ्रॉम होम को लेकर खास अपील की थी. जिसके बाद से उन्होंने ने भी अपने कर्मचारियों के लिए सप्ताह में एक दिन घर से काम करने की बड़ी घोषणा की है.&amp;nbsp;
ईंधन की बचत और राष्ट्र निर्माण
इसके अलावा अनुपम मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर इस फैसले को शेयर करते हुए यह बताया कि कंपनी में अब हर बुधवार को &#039;वर्क फ्रॉम होम&#039; रहेगा. इसके साथ ही उन्होंने एक गणितीय अनुमान को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि उनके लगभग 500 कर्मचारियों के एक दिन घर से काम करने से साल भर में करीब 30 हजार लीटर पेट्रोल की बचत होगी.&amp;nbsp;
Work From Home: UP में वर्क फ्रॉम होम, CM योगी ने पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए हफ्ते में 2 दिन WFH देने को कहा
इतना ही नहीं, अनुपम मित्तल ने अपनी पोस्ट में यह लिखा कि &amp;nbsp;&quot;कभी सोचा नहीं था, लेकिन 500 कर्मचारियों के लिए 1 दिन का रिमोट वर्क मतलब साल में 30 हजार लीटर पेट्रोल की एक बड़ी बचत कर सकेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि अब बुधवार को वर्क फ्रॉम होम होगा. तो वहीं, &amp;nbsp;उन्होंने इसे एक &quot;छोटा कदम लेकिन सच्ची मंशा&quot; वाला फैसला भी बताया है. जहां, उनके मुताबिक राष्ट्र निर्माण के लिए हमेशा बड़े बलिदानों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सड़क पर वाहनों की संख्या कम करके भी इसकी बेहतरीन शुरुआत की जा सकती है.&amp;nbsp;
2 हजार से ज्यादा अब नहीं भरा पाएंगे पेट्रोल, संकट के बीच इस राज्य में शुरू राशनिंग; जानें नया नियम
सोशल मीडिया पर लोगों की विभिन्न प्रतिक्रियाएं
जैसे ही अनुपम मित्तल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पोस्ट को शेयर किया वैसे ही कई लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ देखने को मिल रही है. जहां, लाखों लोग उनके इस पोस्ट को जमकर पसंद कर रहे हैं. तो वहीं, कई अन्य यूजर्स ने उनके इस फैसले को पर्यावरण के हित में बताते हुए जमकर सराहना भी की है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 07:30:30 +0530</pubDate>
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        <title>तेल के लिए भारत&amp;UAE के बीच बिछेगी सीधी अंडरवाटर पाइपलाइन, हॉर्मुज संकट का मास्टर प्लान तैयार&amp; रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ India-UAE Direct Pipeline News:&amp;nbsp;ईरान वॉर के बीच भारत ने दुनिया के सबसे बिज़ी समुद्री रास्ते &#039;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#039; को बायपास करने का मास्टप्लान तैयार कर लिया है.&amp;nbsp;भारत एक ऐसी महात्वाकांक्षी योजना पर विचार कर रहा है, जो सीधे खाड़ी देशों से भारत तक तेल और गैस पहुंचाएगी. भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक डायरेक्ट अंडर-सी पाइपलाइन यानी समंदर के नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइन की सुगबुगाहट तेज हो गई है.
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक,&amp;nbsp;यह प्रस्ताव इस समय भारत सरकार के उच्चतम स्तर पर विचाराधीन है. पीएमओ इस प्रोजेक्ट के रणनीतिक फायदों का आकलन कर रहा है.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, &quot;यह केवल तत्काल संकट के प्रबंधन के बारे में नहीं है, बल्कि अगले दो-तीन दशकों के लिए भारत की ऊर्जा आपूर्ति सीरीज में रणनीतिक लचीलापन बनाने के बारे में है.&quot; यह पाइपलाइन न केवल कच्चे तेल बल्कि एलएनजी और एलपीजी की सीधी सप्लाई भी सुनिश्चित करेगी.
आसमान में महंगाई की आग, अब जेट फ्यूल की कीमत हुई दोगुनी, हवाई सफर पर ढीली होगी जेब
इस पाइपलाइन के क्या फायदे होंगे?

समुद्री टैंकरों पर होने वाले हमलों और समुद्री डकैती का खतरा खत्म हो जाएगा.
लागत में कमी आएगी, क्योंकि समुद्री रास्तों में अक्सर तनाव के दौरान शिपिंग फ्रेट रेट्स और इंश्योरेंस प्रीमियम यानी बीमा की लागत बहुत बढ़ जाती है. डायरेक्ट पाइपलाइन होने से भारत इन अस्थिर कीमतों से बच सकेगा.
यह भारत को भविष्य के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय ऊर्जा पार्टनर के रूप में UAE के साथ और भी मजबूती से जोड़ेगा.

हालांकि, यह प्रोजेक्ट आसान नहीं रहने वाला है. विशेषज्ञों का मानना है कि समंदर के गहरे पानी में इतनी लंबी पाइपलाइन बिछाना एक इंजीनियरिंग चुनौती है. इसमें भारी निवेश की जरूरत होगी और इसे पूरा होने में कम से कम 5 से 7 साल का समय लग सकता है. लेकिन रणनीतिक लिहाज से भारत अब जोखिम नहीं लेना चाहता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी UAE यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है.
इसकी जरूरत क्यों पड़ी?&amp;nbsp;
दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब आधा कच्चा तेल और लगभग 90 फीसदी एलपीजी इसी रास्ते से मंगाता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक ऐसा चोकपॉइंट है, जहां जरा सा भी तनाव होने पर भारत की पूरी एनर्जी सप्लाई चेन ठप हो सकती है और ऐसा फिलहाल देखने को भी मिल रहा है.
महंगा पेट्रोल-डीजल नहीं बेचने पर रोका जा रहा स्टॉक, डीलर्स की संस्था CIPD के HPCL पर गंभीर आरोप
हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो न केवल तेल की कीमतें आसमान छुएंगी, बल्कि भारत में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 07:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>तेल, के, लिए, भारत-UAE, के, बीच, बिछेगी, सीधी, अंडरवाटर, पाइपलाइन, हॉर्मुज, संकट, का, मास्टर, प्लान, तैयार-, रिपोर्ट</media:keywords>
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        <title>नॉर्मल पेट्रोल और प्रीमियम पेट्रोल में क्या है अंतर, दोनों की कीमत में कितना फर्क है, बढ़ा लें अपनी नॉलेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नॉर्मल-पेट्रोल-और-प्रीमियम-पेट्रोल-में-क्या-है-अंतर-दोनों-की-कीमत-में-कितना-फर्क-है-बढ़ा-लें-अपनी-नॉलेज</link>
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        <description><![CDATA[ Normal vs Premium Petrol: इन दिनों पेट्रोल को लेकर देशभर में काफी चर्चा हो रही है. जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन की खपत पर लगाम लगाने की बात कही है, तभी से लोगों को लग रहा है कि इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं. हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई घोषणा या पुख्ता जानकारी नहीं सामने आई है. इसी बीच हम आपको पेट्रोल के बारे में थोड़ी सी जानकारी देंगे, क्या आप जानते हैं कि दो तरह के पेट्रोल भारत में इस्तेमाल किए जाते हैं.
भारत में पेट्रोल मुख्य तौर पर दो तरह का मिलता है, पहला नॉर्मल पेट्रोल और दूसरा प्रीमियम पेट्रोल. दोनों का काम गाड़ी चलाना ही है, लेकिन दोनों में अलग- अलग गुण होते हैं और दोनों की कीमतों में भी काफी डिफरेंस होता है.
ये भी पढ़ें: VD Satheesan Net Worth: केरल के कैप्टन CM सतीशन कितने अमीर हैं, कितना है कैश? जानिए नेटवर्थ
नॉर्मल पेट्रोल क्या है?नॉर्मल पेट्रोल वो ईंधन है, जो आमतौर पर रोजमर्रा की गाड़ियों बाइक, स्कूटर और कारों में इस्तेमाल होता है. इसे रेगुलर पेट्रोल भी कहा जाता है. भारत में सादा पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर आमतौर पर 91 होता है, जो सामान्य इंजन वाली गाड़ियों के लिए पर्याप्त माना जाता है.
प्रीमियम पेट्रोल क्या है?प्रीमियम पेट्रोल एक खास तरह का पेट्रोल होता है, जिसमें नॉर्मल पेट्रोल की तुलना में ज्यादा ऑक्टेन और कुछ एडवांस एडिटिव्स मिलाए जाते हैं. इसे हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के लिए बेहतर माना जाता है. भारत में प्रीमियम पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर आमतौर पर 95 या उससे ज्यादा होता है.
नॉर्मल पेट्रोल और प्रीमियम पेट्रोल में अंतर?

दोनों के ऑक्टेन नंबर में फर्क होता है, जो बताता है कि ईंधन इंजन में कितनी आसानी से और नियंत्रित तरीके से जलता है.
हाई ऑक्टेन पेट्रोल हाई-परफॉर्मेंस इंजन में बेहतर काम करता है और नॉकिंग यानी इंजन में झटके या आवाज की समस्या को कम करता है.
प्रीमियम पेट्रोल में कुछ खास एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, जो इंजन को साफ रखने, कार्बन जमा होने से बचाने और इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद करते हैं.
इससे कई बार गाड़ी की स्मूदनेस और माइलेज में भी थोड़ा सुधार देखने को मिलता है.

ये भी पढ़ें: Petrol News: दिल्ली या मुंबई नहीं, इस राज्य के लोग पी रहे हैं सबसे ज्यादा पेट्रोल, चौंका देंगे आंकड़े
किस गाड़ी में कौन सा पेट्रोल डलवाएं?अगर आपकी गाड़ी का इंजन सामान्य है और कंपनी ने नॉर्मल पेट्रोल की सलाह दी है, तो सादा पेट्रोल ही भरवाएं. लेकिन स्पोर्ट्स बाइक, लग्जरी कार या टर्बो इंजन वाली गाड़ियों में कंपनी अक्सर हाई ऑक्टेन फ्यूल इस्तेमाल करने की सलाह देती है. ऐसी गाड़ियों में प्रीमियम पेट्रोल बेहतर प्रदर्शन करता है.
कीमत में भी होता है अंतरप्रीमियम पेट्रोल की कीमत हमेशा नॉर्मल पेट्रोल से 8 से 15 रुपये प्रति लीटर ज्यादा होती है. ये अंतर शहर और कंपनी के हिसाब से बदल सकता है. फिलहाल कीमतों की बात करें तो नॉर्मल पेट्रोल की कीमत दिल्ली में इस समय 94.81 रुपये प्रति लीटर है. तो वहीं प्रीमियम पेट्रोल की कीमत मार्च में बढ़ी थी, जिसके बाद ये 113.77 रुपये हो गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 07:30:28 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नॉर्मल, पेट्रोल, और, प्रीमियम, पेट्रोल, में, क्या, है, अंतर, दोनों, की, कीमत, में, कितना, फर्क, है, बढ़ा, लें, अपनी, नॉलेज</media:keywords>
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        <title>IT सेक्टर में धमाका! इस शेयर ने दिया TCS, Infosys और Wipro से भी ज्यादा डिविडेंड, निवेशकों की लगी लॉटरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/it-सेक्टर-में-धमाका-इस-शेयर-ने-दिया-tcs-infosys-और-wipro-से-भी-ज्यादा-डिविडेंड-निवेशकों-की-लगी-लॉटरी</link>
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        <description><![CDATA[ LTIMindtree Limited Q4 Results:&amp;nbsp;शेयर मार्केट के निवेशकों की जल्द ही लॉटरी लगने वाली है. एक बड़ी आईटी कंपनी ने अपने निवेशको को डिविडेंड देने का ऐलान किया है. असल में कंपनी को 45 प्रतिशत का मुनाफा हुआ है, जिसके बाद कंपनी ने ये ऐलान किया कि वो 53 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी. ये कंपनी कोई और नहीं बल्कि एलटीआईमाइंडट्री है. डिविडेंड के आंकड़े बताने के साथ ही एलटीआईमाइंडट्री ने TCS, Infosys और Wipro को पछाड़ दिया.&amp;nbsp;
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एलटीआईमाइंडट्री के बारे में जानिए-&amp;nbsp;एलटीआईमाइंडट्री असल में लार्सन एंड टुब्रो ग्रुप की आईटी कंपनी है. ये कंपनी साल 2022 में एलएंडटी इंफोटेक और माइंडट्री के मर्जर के बाद बनी और आज ये देश की छठी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है. इस कंपनी में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दी जाती है. साथ ही साथ अब इसे बेहतरीन डिविडेंड देने वाली कंपनी के तौर पर भी जाना जा रहा है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें- महंगा पेट्रोल-डीजल नहीं बेचने पर रोका जा रहा स्टॉक, डीलर्स की संस्था CIPD के HPCL पर गंभीर आरोप
कंपनियां क्यों देती हैं डिविडेंड?जब भी कोई कंपनी मुनाफा कमाती है तो वो अपने निवेशकों को मुनाफे में भी कुछ हिस्सा देती है. इसे ही डिविडेंड कहा जाता है. जब निवेशकों को मुनाफे में से डिविडेंड मिलता है तो इससे कंपनी और निवेशक के बीच का रिश्ता मजबूत होता है. साथ ही दूसरे निवेशक भी ज्यादा डिविडेंड दे रही कंपनी के शेयर खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं. एक निश्चित अंतराल पर डिविडेंड देने वाली कंपनी निवेशकों का न सिर्फ भरोसा जीत लेती है बल्कि उन्हें इस बात का संकेत देती है कि वो आर्थिक रूप से कितने मजबूत है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 07:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सेक्टर, में, धमाका, इस, शेयर, ने, दिया, TCS, Infosys, और, Wipro, से, भी, ज्यादा, डिविडेंड, निवेशकों, की, लगी, लॉटरी</media:keywords>
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        <title>वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने&amp;चांदी की कीमतों में बदलाव, चांदी 2600 रुपये टूटी; जानिए आपके शहर का ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वैश्विक-अनिश्चितताओं-के-बीच-सोने-चांदी-की-कीमतों-में-बदलाव-चांदी-2600-रुपये-टूटी-जानिए-आपके-शहर-का-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/वैश्विक-अनिश्चितताओं-के-बीच-सोने-चांदी-की-कीमतों-में-बदलाव-चांदी-2600-रुपये-टूटी-जानिए-आपके-शहर-का-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: घरेलू फ्यूचर मार्केट में गुरुवार, 14 मई को सोने-चांदी की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. सोने में हल्की तेजी है, वहीं चांदी में गिरावट देखने को मिल रही है. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 450 रुपये की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा था.
एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,61,888 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,62,186 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.
सुबह करीब 11:00 बजे, गोल्ड वायदा 0.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,640 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,63,055 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपके शहर में इन बहुमूल्य धातुओं को कीमत क्या चल रही हैं?&amp;nbsp;
चांदी की कीमत
एमसीएक्स पर 3 जुलाई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 0.88 प्रतिशत या 2,638 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,98,373 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,99,000 रुपये था.
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 3,000 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 30,000 रुपये देने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,150 रुपये चल रही है.&amp;nbsp;
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,260 रुपए22 कैरेट - 1,48,950 रुपए18 कैरेट - 1,21,900 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,330 रुपए22 कैरेट - 1,48,800 रुपए18 कैरेट - 1,21,750 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,64,180 रुपए22 कैरेट - 1,50,500 रुपए18 कैरेट - 1,25,700 रुपए

कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,330 रुपए22 कैरेट - 1,48,800 रुपए18 कैरेट - 1,21,750 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,380 रुपए22 कैरेट - 1,48,850 रुपए18 कैरेट - 1,21,800 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,260 रुपए22 कैरेट - 1,48,950 रुपए18 कैरेट - 1,21,900 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,380 रुपए22 कैरेट - 1,48,850 रुपए18 कैरेट - 1,21,800 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,62,330 रुपए22 कैरेट - 1,48,800 रुपए18 कैरेट - 1,21,750 रुपए
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;
इस देश में अब एक बूंद भी नहीं बचा डीजल-पेट्रोल, सरकार ने घोषित किया &#039;ब्लैकआउट&#039; संकट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वैश्विक, अनिश्चितताओं, के, बीच, सोने-चांदी, की, कीमतों, में, बदलाव, चांदी, 2600, रुपये, टूटी, जानिए, आपके, शहर, का, ताजा, रेट</media:keywords>
    </item>
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        <title>महंगाई हुई बेकाबू, आसमान छुएंगे पेट्रोल&amp;डीजल के दाम, दिग्गजों की चेतावनी से समझिए क्यों संकट में है देश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महंगाई-हुई-बेकाबू-आसमान-छुएंगे-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-दिग्गजों-की-चेतावनी-से-समझिए-क्यों-संकट-में-है-देश</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/महंगाई-हुई-बेकाबू-आसमान-छुएंगे-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-दिग्गजों-की-चेतावनी-से-समझिए-क्यों-संकट-में-है-देश</guid>
        <description><![CDATA[ India Inflation Latest News: महंगाई को लेकर देश में चिंता लगातार बढ़ती जा रही है और आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं. ईरान संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अब बड़े उद्योगपति भी आर्थिक हालात को लेकर चेतावनी देने लगे हैं.
उदय कोटक जैसे दिग्गज बिजनेसमैन &amp;nbsp;ने कहा हैं कि भारत के आर्थिक हालात बहुत जल्द दबाव में आ सकते हैं. वहीं सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत तक पहुंच गई है. लगातार छठे महीने महंगाई बढ़ने से यह चिंता और गहरी हो गई है. अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की कई चीजें और महंगी हो सकती हैं.
उदय कोटक ने कहा आगे और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
Uday Kotak ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चिंता जताई है. CII की एनुअल बिजनेस समिट में उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले संभावित संकट के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए. उनका मानना है कि हालात आगे चलकर काफी मुश्किल हो सकते हैं, इसलिए समय रहते तैयारी करना जरूरी है.
उदय कोटक ने कहा कि अभी तक आम लोगों ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों का पूरा असर महसूस नहीं किया है, लेकिन आने वाले समय में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और ईरान युद्ध की वजह से हालात और गंभीर हो सकते हैं. उनके मुताबिक, अगर जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो पेट्रोल-डीजल समेत कई जरूरी चीजों की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है. जिसका सीधा बोझ आम लोगों पर देखने को मिल सकता हैं.&amp;nbsp;
तेल संकट पर आरबीआई का बयान
आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि अगर पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है.
उनका कहना हैं कि लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का पूरा बोझ सरकार लंबे समय तक अपने ऊपर नहीं रख पाएगी. ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.&amp;nbsp;

महंगाई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत के आंकड़े तक पहुंच गई है. लगातार छठे महीने इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ सकती है. वहीं खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर भी पिछले महीने के 3.87% से बढ़कर 4.20% हो गई है.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>महंगाई, हुई, बेकाबू, आसमान, छुएंगे, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, दिग्गजों, की, चेतावनी, से, समझिए, क्यों, संकट, में, है, देश</media:keywords>
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        <title>Global Sugar Effect: सरकार ने रोक दिया चीनी का एक्सपोर्ट, भारत के इस फैसले से दुनिया पर पड़ेगा भारी असर, लेकिन...</title>
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        <description><![CDATA[ Sugar Export: भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को बढ़ने से रोकने को नियंत्रित करने के लिए चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. जहां, यह रोक 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक फिललहाल पूरी तरह से जारी रहेगा. इसके साथ ही भारत सरकार का यह बेहद ही महत्वपूर्ण फैसला एक ऐसे समय में लिया गया है जब खाद्य कीमतें भारतीय परिवारों के लिए राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई हैं.&amp;nbsp;
दो प्रकार की चीनी पर लागू रहेगा प्रतिबंध&amp;nbsp;
दरअसल, यह प्रतिबंध कच्चे (Raw) और रिफाइंड दोनों प्रकार की चीनी पर पूरी तरह से लागू रहेगा. लेकिन, सरकार ने उन शिपमेंट को एक बड़ी राहत दी है जो पहले से ही इस प्रक्रिया में शामिल हैं. इसके अलावा अगर अधिसूचना जारी होने से पहले लोडिंग शुरू हो चुकी थी, जहाज बंदरगाह पर आ चुके थे, या स्टॉक सीमा शुल्क (Customs) विभाग को सौंपा जा चुका था, तो उन खेपों को निर्यात की अनुमति दिए जाने का भी फैसला लिया गया है.&amp;nbsp;
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नीति में अचानक बदलाव की क्या है असली वजह?
जानकारी के मुताबिक, इससे पहले सरकार ने 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, क्योंकि तब उत्पादन खपत से ज्यादा रहने का अनुमान लगाया जा रहा था. लेकिन अब अनुमान कमजोर पड़ गए हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की कम पैदावार की वजह से भारत में लगातार दूसरे सीजन में खपत की तुलना में उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है.&amp;nbsp;
भारत सरकार के इस फैसले से क्या पड़ेगा वैश्विक प्रभाव?
यह तो सभी जानते हैं कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक में से एक में आता है. तो वहीं, भारत सरकार के अस बड़े फैसले से &amp;nbsp;भारतीय आपूर्ति रुकने से एशिया और अफ्रीका के देश अब ब्राजील और थाईलैंड की तरफ तेजी से रुख करने लगेंगे. &amp;nbsp;जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी की वायदा कीमतों में पहले के मुताबिक और भी ज्यादा तेजी देखने को मिलेगी. हांलाकि, &amp;nbsp;मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ती ऊर्जा लागत ने पहले ही वैश्विक शिपिंग रूटों पर अपना दबाव बनाना शुरू कर दिया है.&amp;nbsp;
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आर्थिक संदर्भ और क्या लिए जा सकते हैं अन्य कदम?&amp;nbsp;
चीनी निर्यात पर रोक के एक दिन पहले ही सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है. हांलाकि, &amp;nbsp;यह कदम विदेशी मुद्रा बचाने को पूरी तरह से कम करने के लिए ही उठाया गया है. तो वहीं, दूसरी तरफ ईरान से जुड़े संघर्ष और डॉलर के मुकाबले रुपये के 95.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने की वजह से अर्थव्यवस्था फिलहाल दबाव में देखने को मिल रहा है. जिसको लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की खास तौर से अपील की है ताकि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को जितना जल्दी हो सके उतना स्थिर किया जा सके.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: क्या रूस से ऑयल इम्पोर्ट का ऑप्शन बाकी, रूसी मंत्री ने क्यों कहा भारत तेल की चिंता न करे? जानें पर्दे के पीछे की कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ एक तरफ रूस का दोस्ताना हाथ है जो सस्ते तेल का भरोसा दिला रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका का चाबुक है जो टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकी से हर आयात को महंगा बनाने पर तुला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को यह कहना पड़ा कि लोग पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करें, क्योंकि जिस इलाके से दुनिया को सबसे ज्यादा तेल मिलता है वो जंग की आग में जल रहा है. इसी बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स बैठक से ठीक पहले बयान दिया, &#039;भारत तेल की चिंता बिल्कुल न करे.&#039; सवाल ये है कि जब आंकड़े पूरी तरह उलटी तस्वीर दिखा रहे हैं, तो क्या वाकई ये भरोसा काफी है?
लावरोव के आश्वासन के पीछे का असली दांव
रूसी विदेश मंत्री ने RT इंडिया को दिए इंटरव्यू में खुलकर कहा कि भारत और रूस के रिश्ते आजादी से पहले के हैं और दुनिया की कोई भी ताकत इसे कमजोर नहीं कर सकती. जब उनसे पूछा गया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर बैन के बाद भारत का आयात क्यों गिरा, तो उन्होंने सीधे अमेरिका को निशाने पर लिया.
लावरोव ने कहा, &#039;यह अमेरिका का गैरकानूनी फैसला है. भारत का इससे कोई लेना-देना नहीं है. हम सुनिश्चित करेंगे कि यह खेल हमारे कॉन्ट्रैक्ट्स पर असर न डाले और भारत के हितों को कोई नुकसान न हो.&#039; उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का मकसद बस इतना है कि तुम सस्ता रूसी तेल न खरीदो, बल्कि मेरा महंगा तेल और LNG खरीदो ताकि मैं दुनिया की ऊर्जा पर राज कर सकूं.
&amp;nbsp;

सर्जेई लावरोव ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ गैरकानूनी है.

जमीनी हकीकत के आंकड़े डरा क्यों रहे हैं?
बातों-बातों में भरोसा अच्छी चीज है, लेकिन असली कहानी तो आंकड़े सुनाते हैं. भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. यूक्रेन जंग के बाद रूस ने जो सस्ता तेल देना शुरू किया, उसने पूरा गणित ही बदल दिया. जुलाई 2024 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 44.6% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. लेकिन फिर अमेरिका ने कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ की धमकियों की झड़ी लगा दी.
नतीजा यह हुआ कि महज डेढ़ साल के अंदर जनवरी 2026 तक यह हिस्सा गिरकर सीधे 20.6% पर आ गया. मान लीजिए, आपकी सस्ती रसोई गैस का सिलेंडर अचानक आधे से भी कम हो जाए, तो चिंता तो होगी ही. यही भारत के ऊर्जा सुरक्षा का हाल है.
एक्सपर्ट्स के बीच सीधी जंग: अमेरिका से डरें या रूस से साथी बढ़ाएं?
इस मसले पर दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों में राय बंटी हुई है. पूर्व वाणिज्य अधिकारी और ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के प्रमुख अजय श्रीवास्तव साफ-साफ आक्रामक रुख अपनाने की सलाह देते हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा है कि यह &#039;आपातकाल जैसी स्थिति&#039; है. वह समझाते हैं, &#039;खाड़ी देशों से आने वाला करीब 50 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट के चलते अटका है और बाकी 30 फीसदी जो हम रूस से ले रहे थे वो अमेरिकी दबाव में रुक गया है. हमें अमेरिका की जायज-नाजायज धमकियों को दरकिनार करते हुए अभी से 30-50 साल का समझैता कर लेना चाहिए.&#039; उनका तर्क है कि अमेरिका के पास इतना तेल है ही नहीं कि वह रूस की जगह ले सके, क्योंकि उसकी रिफाइनरियां आने वाले 10 साल तक ही बन पाएंगी.
लेकिन दूसरी तरफ, ORF अमेरिका के फेलो रिसर्चर विवेक मिश्र इस कड़वे सच की ओर इशारा करते हैं कि भारत फिलहाल अमेरिका से खुलकर भिड़ने की स्थिति में नहीं है. उन्होंने कहा, &#039;रूस के साथ तेल खरीदने के लिए स्ट्रैटजिक प्लान की जरूरत है. अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर सैंक्शन लगाए हैं. अगर भारत ने तेल खरीदा तो भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. PM मोदी ने तेल-गैस बचाने की अपील की है, जिसपर सख्ती से अमल करना चाहिए. न कि सैंक्शन्ड रूसी तेल खरीदने की तरफ.&#039;

यही वजह है कि भारत सरकार ने एक बेहद चालाकी भरी &#039;धुंधली&#039; नीति अपनाई हुई है. न तो यह कभी ऐलान किया गया कि रूस से तेल खरीद बंद कर दिया और न ही खरीदारी के आंकड़ों पर कभी खुलकर बात की गई. फरवरी-मार्च 2026 में रूसी तेल की खरीद में हल्का उछाल भी आया, लेकिन यह पूरी तरह पर्दे के पीछे चल रहा है.
भारत के पास आगे का रास्ता क्या होगा?
यह तनाव सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिक्स जैसे मंचों पर भी फूट साफ नजर आती है. अमेरिका जहां भारत को अपनी तरफ खींच रहा है, वहीं रूस और चीन के साथ ईरान एक नया ध्रुवीकरण कर चुके हैं.
लावरोव भले ही तसल्ली दे रहे हों, लेकिन जब तक भारत के पास अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों से बचने का कोई स्थायी कूटनीतिक हल नहीं निकलता, तब तक सस्ता रूसी तेल एक &amp;lsquo;ऑप्शन&amp;rsquo; तो बना रहेगा, लेकिन उसे बेधड़क इस्तेमाल करने की आजादी नहीं मिल पाएगी. यह एक ऐसी सुई की नोक पर चलने जैसा है, जहां एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा है तो दूसरी तरफ अमेरिकी बाजार और निवेश. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>अमूल&amp;मदर डेयरी के बाद अब पंजाब की इस कंपनी ने भी बढ़ाए दूध के दाम, अब कितने का मिलेगा 1 लीटर मिल्क?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अमूल-मदर-डेयरी-के-बाद-अब-पंजाब-की-इस-कंपनी-ने-भी-बढ़ाए-दूध-के-दाम-अब-कितने-का-मिलेगा-1-लीटर-मिल्क</link>
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        <description><![CDATA[ Verka Milk Price Hike: देश में लगातार पेट्रोल- डीजल के दाम और गैस की कीमतों के बढ़ने का असर अब तक आम आदमी की जेब पर पड़ रहा था. वहीं अब डेयरी इंडस्ट्री की तरफ से भी लोगों को बड़ा झटका लगा है. लगातार कई बड़ी दूध कंपनियों ने अपने एक लीटर दूध में 2 रुपये का इजाफा किया है. इससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ने वाला है. इसी कड़ी में अब पंजाब की कंपनी वेरका का नाम भी जुड़ गया है.
वेरका ने बढ़ाए दूध के दाम
अमूल और मदर डेयरी के बाद अब पंजाब की कोऑपरेटिव मिल्क कंपनी वेरका ने भी दूध के दाम बढ़ा दिए हैं. वेरका ने 1 लीटर दूध पर 2 रुपये की वृद्धि की है. दूध की ये नई दरें कल यानी 14 मई 2026 से लागू हो जाएंगी. कल सुबह से ही दूध के दाम एक लीटर पर दो रुपये और आधा लीटर पर एक रुपये बढ़ जाएंगे.
कितने रुपये का मिलेगा दूध?
कल सुबह यानी 14 मई की सुबह से वेरका के फुल क्रीम दूध का आधा लीटर पैकेट अब 35 रुपए का नहीं बल्कि 36 रुपये का मिलेगा. जबकि स्टैंडर्ड दूध आधा लीटर की कीमत 32 रुपए से बढ़ाकर 33 रुपये की जा रही है. दूध की अन्य कैटेगरीज में भी एक रुपया आधा लीटर और दो रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है. इसके अलावा कंपनी ने बड़े पैक वाले दूध की कीमतों में भी बदलाव किया है. अब 1.5 लीटर फुल क्रीम दूध 106 रुपये में मिलेगा, जबकि स्टैंडर्ड दूध की कीमत 96 रुपये होगी.
छोटे पैक में नहीं कोई बदलाव
हालांकि, 200 ml और 350 ml के छोटे पैकेट की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं, 6 लीटर वाले बड़े पैक की कीमत भी पहले जैसी ही रहेगी. कंपनी ने ये भी साफ किया है कि कल सुबह से ही कीमतें बढ़ जाएंगी. हो सकता है कि कुछ पैकेट पर पुराने दाम ही छपे हुए हों, लेकिन कीमत नई दरों के हिसाब से ही ली जाएगी.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 03:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Price: सोना महंगा&amp;खरीदार कम, फिर भी कीमत क्यों नहीं गिर रही? इन 4 वजहों से समझ आएगी बात</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-price-सोना-महंगा-खरीदार-कम-फिर-भी-कीमत-क्यों-नहीं-गिर-रही-इन-4-वजहों-से-समझ-आएगी-बात</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-price-सोना-महंगा-खरीदार-कम-फिर-भी-कीमत-क्यों-नहीं-गिर-रही-इन-4-वजहों-से-समझ-आएगी-बात</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Import Duty Hike: भारत सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है. मकसद साफ है आयात घटाना और रुपए पर दबाव कम करना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है. इसके बावजूद बाजार में सोने की कीमत थम नहीं रही.
आज 13 मई 2026 को भारत में सोने का भाव एक बड़े उछाल के साथ खुला. MCX पर सोना आज 6 फीसदी उछलकर करीब 1,62,390 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. इंट्राडे में यह 1.64 लाख रुपए के पार भी गया.
अब सवाल यह है कि जब सरकार खरीद रोकना चाहती है खरीदार भी कम हैं तो फिर कीमत ऊपर क्यों जा रही है? इसके जवाब एक नहीं कई हैं.
पहला कारण- ईरान-अमेरिका युद्ध का असर
जब भी दुनिया में कोई बड़ा संकट आता है, निवेशक सोने की तरफ भागते हैं. सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है. पश्चिम एशिया में तनाव के बीच वैश्विक बाजार में सोने की कीमत पहले से ऊंची है. भारत अपना लगभग पूरा सोना आयात करता है इसलिए बाहर की कीमत यहां सीधे असर डालती है.
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दूसरा कारण- खुद आयात शुल्क की बढ़ोतरी
&amp;nbsp;सरकार ने शुल्क इसलिए बढ़ाया ताकि सोना महंगा हो और लोग कम खरीदें, लेकिन इससे उल्टा भी होता है. जब शुल्क बढ़ता है तो घरेलू बाजार में सोने की कीमत और ऊपर चली जाती है. जो निवेशक पहले से सोना खरीदे हुए हैं उनका मुनाफा बढ़ता है. इससे नए निवेशक भी आकर्षित होते हैं कि कहीं वे पीछे न रह जाएं.
तीसरा कारण- निवेश मांग रिकॉर्ड स्तर पर
&amp;nbsp;इस साल मार्च तिमाही में पहली बार ऐसा हुआ कि सोने में निवेश की मांग, गहनों की मांग से आगे निकल गई. सोना ETF में निवेश एक साल में 186 फीसदी उछलकर 20 मीट्रिक टन के रिकॉर्ड पर पहुंच गया. शेयर बाजार से कमजोर रिटर्न के बीच लोगों ने सोने को चुना.
चौथा कारण- भारतीय खरीदार की मानसिकता
पिछले एक दशक में सोने की कीमत 443 फीसदी बढ़ी फिर भी सालाना मांग 666 से 803 मीट्रिक टन के बीच बनी रही. 2012-13 में भी जब शुल्क 2 से 10 फीसदी हुआ था मांग नहीं टूटी थी. ग्रामीण भारत में सोना बचत का साधन है, कर्ज की गारंटी है. इसे आसानी से छोड़ा नहीं जाता.
यही वजह है कि कम खरीदार होने के बावजूद कीमत नहीं गिर रही. वैश्विक संकट, बढ़ता हुआ आयात शुल्क, निवेश की बदलती प्राथमिकताएं और भारतीय बाजार की संरचना मिलकर सोने को ऊपर थामे हुए हैं.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 03:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Gold, Price:, सोना, महंगा-खरीदार, कम, फिर, भी, कीमत, क्यों, नहीं, गिर, रही, इन, वजहों, से, समझ, आएगी, बात</media:keywords>
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        <title>क्या पाकिस्तान में भी सोना और पेट्रोल&amp; डीजल नहीं खरीद पा रहे लोग, जानें ईरान युद्ध संकट से कैसे निपट रहा है पाक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-पाकिस्तान-में-भी-सोना-और-पेट्रोल-डीजल-नहीं-खरीद-पा-रहे-लोग-जानें-ईरान-युद्ध-संकट-से-कैसे-निपट-रहा-है-पाक</link>
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        <description><![CDATA[ Economic Strain In Pakistan: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ युद्ध वाले देशों तक सीमित नहीं रह गया है. ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. भारत पर तो इसका असर दिख ही रहा है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान पर भी इसका कहर साफ नजर रहा है. वैसे तो पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहा था और अब ऐसे में तेल और सोने की बढ़ती कीमतों ने वहां रह रहे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. पाकिस्तान में हालत किस कदर बिगड़ी है और इससे निपटने के लिए वहां क्या- क्या उपाय किए जा रहे हैं, ये आप यहां से जान सकते हैं.
क्यों है पाकिस्तान परेशान?
दरअसल, जैसे ही युद्ध या तनाव बढ़ता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सोने की कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं. निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ भागते हैं, जबकि तेल सप्लाई को लेकर डर पैदा हो जाता है. पाकिस्तान जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, उन पर इसका सीधा असर पड़ता है. पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर चल रही थीं. अब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने से सरकार पर दबाव और बढ़ गया है. ऐसे में आम आदमी के लिए सड़क पर गाड़ी चलाना काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है.
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क्या है पाकिस्तान की स्ट्रैटेजी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार इन हालातों में सुधार लाने के लिए लगातार तेल कंपनियों और आर्थिक सलाहकारों के साथ बैठक कर रही है ताकि कीमतों को पूरी तरह बेकाबू होने से रोका जा सके. हालांकि, राहत की गुंजाइश कम दिखाई दे रही है, क्योंकि पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी बहुत मजबूत स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में आम लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ी है. कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे शहरों में लोग सोशल मीडिया पर बढ़ती महंगाई को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कई जगहों पर लोग यह तक कह रहे हैं कि अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है. पेट्रोल महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट, सब्जियां, राशन और बाकी जरूरी सामान भी महंगे हो जाते हैं.
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क्या पाकिस्तान में सोना खरीद रहे हैं लोग?
सोने की बात करें तो पाकिस्तान में इसकी कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है. शादी का सीजन हो या निवेश, दोनों पर खूब असर पड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कई ज्वेलर्स ने ये दावा किया है कि अब पाकिस्तान में ग्राहक सोने की खरीदारी कम कर रहे हैं और लोग पुराने गहने बेचने ज्यादा पहुंच रहे हैं. कह सकते हैं कि पाकिस्तान में अब मिडिल क्लास के लिए सोना धीरे-धीरे लग्जरी बनता जा रहा है.
साऊदी और आईएमएफ ने की मदद&amp;nbsp;
फिलहाल पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को बाहरी संकटों से कैसे बचाए. ईरान युद्ध संकट को देखते हुए पाकिस्तान सरकार फिलहाल बचाव की रणनीति पर काम कर रही है. सरकार ऊर्जा बचत, आयात नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दे रही है. वहीं, इसी बीच खबर आई कि पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए सऊदी अरब और IMF ने बड़ी आर्थिक मदद की है. सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता और 5 अरब डॉलर के लोन की अवधि बढ़ाई है, जबकि IMF ने 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम के तहत 1.32 अरब डॉलर की किश्त मंजूर की है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान में पेट्रोल डीजल और सोना की खपत अब कितने हो रही है?
13 मई, बुधवार को पाक में पेट्रोल की कीमतें 414 रुपये के पार चली गई, जिससे लोग काफी परेशान हैं. असल में &amp;nbsp;पाकिस्तान में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की संयुक्त दैनिक खपत लगभग 5.88 करोड़ लीटर है. वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में कच्चे तेल की कुल खपत लगभग 4.5 लाख से 4.8 लाख बैरल प्रति दिन है, जो प्रति व्यक्ति के हिसाब से मात्र 0.08 गैलन प्रतिदिन बैठती है. वहीं, बात करें सोने की तो पाकिस्तान में सोने के बिस्कुट और सिक्कों की निवेश मांग प्रति तिमाही लगभग 4.5 से 4.8 टन के आसपास रहती है. लेकिन अब ये आकड़ा भी काफी गिर चुका है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 03:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, पाकिस्तान, में, भी, सोना, और, पेट्रोल-, डीजल, नहीं, खरीद, पा, रहे, लोग, जानें, ईरान, युद्ध, संकट, से, कैसे, निपट, रहा, है, पाक</media:keywords>
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    <item>
        <title>Mother Dairy Milk Price: अमूल के बाद मदर डेयरी ने इन 6 प्रोडक्ट्स के बढ़ा दिए दाम, यहां देखें रेट लिस्ट, कितनी बढ़ी कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/mother-dairy-milk-price-अमूल-के-बाद-मदर-डेयरी-ने-इन-6-प्रोडक्ट्स-के-बढ़ा-दिए-दाम-यहां-देखें-रेट-लिस्ट-कितनी-बढ़ी-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ Mother Dairy Milk Price Hike: वैश्विक आर्थिक संकट के बीच देश में लगातार जनता के ऊपर महंगाई की मार पड़ रही है. पहले प्रीमियम पेट्रोल, औद्योगिक डीजल और हाल में कमॉर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए. अब दूध की कीमतों में जबरदस्त इजाफा किया गया है. अमूल, मदर डेयरी और सांची ने दूध की कीमतों में इजाफा किया है. बढ़ीं हुईं कीमतें 14 मई से लागू होंगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
मदर डेयरी ने बढ़ाई दूध की कीमत
अमूल प्रति लीटर दूध की कीमतों में 2 रुपये तक का इजाफा किया है. इसके बाद मदर डेयरी और सांची ने भी दूध की कीमतों में फौरन बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया. मदर डेयरी के अब 6 प्रोडक्ट्स की कीमतें गुरुवार से बढ़ी जाएगी.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें: अमूल-मदर डेयरी के बाद अब पंजाब की इस कंपनी ने भी बढ़ाए दूध के दाम, अब कितने का मिलेगा 1 लीटर मिल्क?
यहां देखें वो प्रोडक्ट्स जिनकी कीमत बढ़ी है:



प्रोडक्ट्स
पुरानी कीमत (प्रति लीटर)
नई कीमत (प्रति लीटर)


बल्क वेंडेड मिल्क&amp;nbsp;
56 रुपये&amp;nbsp;
58 रुपये


फुल क्रीम मिल्क&amp;nbsp;
70 रुपये&amp;nbsp;
72 रुपये


टोन्ड मिल्क&amp;nbsp;
58 रुपये&amp;nbsp;
60 रुपये


डबल टोन्ड मिल्क&amp;nbsp;
52 रुपये&amp;nbsp;
54 रुपये


काऊ मिल्क&amp;nbsp;
60 रुपये&amp;nbsp;
62 रुपये


प्रो मिल्क&amp;nbsp;
70 रुपये&amp;nbsp;
72 रुपये



ये भी पढ़ें: Amul Price Hike: महंगाई का झटका! देशभर में कल से अमूल दूध के बढ़ जाएंगे दाम, 2 रुपये बढ़ाने का फैसला
बता दें कि हाल ही में अमूल कंपनी ने भी देशभर में दूध की कीमतें बढ़ाई हैं. अमूल ने भी 2 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध की कीमत में इजाफा किया है. तो वहीं इसके बाद पंजाब की कंपनी वेरका ने भी दूध की कीमत बढ़ा दी है. वेरका के दूध की कीमत में भी 2 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से इजाफा हुआ है.
अमूल और मदर डेयरी दोनों ही अपनी कुल बिक्री से होने वाली आय का लगभग 75-80% हिस्सा सीधे दूध उत्पादकों को देते हैं. मदर डेयरी देशभर में प्रतिदिन करीब 55 लाख लीटर दूध बेचती है और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इसकी प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में गिनती होती है. दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में अमूल की नई दरों के अनुसार, 500 मिलीलीटर पैक में &amp;lsquo;स्लिम एंड ट्रिम&amp;rsquo; दूध 27 रुपये, &amp;lsquo;ताजा&amp;rsquo; 30 रुपये, &amp;lsquo;गाय का दूध&amp;rsquo; 31 रुपये और &amp;lsquo;गोल्ड&amp;rsquo; 36 रुपये में मिलेगा.
वहीं, भैंस के दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसकी नई कीमत 80 रुपये प्रति लीटर हो गई है. मदर डेयरी ने भी अपनी कीमतों में संशोधन किया है. थोक में मिलने वाले टोन्ड दूध की कीमत 56 रुपये से बढ़ाकर 58 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. पैकेट में मिलने वाला फुल क्रीम दूध अब 72 रुपये प्रति लीटर होगा.
पैकेट वाला टोन्ड दूध 58 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डबल-टोन्ड दूध की कीमत 54 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. इसके अलावा, गाय के दूध की कीमत भी 60 रुपये से बढ़ाकर 62 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 03:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Mother, Dairy, Milk, Price:, अमूल, के, बाद, मदर, डेयरी, ने, इन, प्रोडक्ट्स, के, बढ़ा, दिए, दाम, यहां, देखें, रेट, लिस्ट, कितनी, बढ़ी, कीमत</media:keywords>
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        <title>SIP vs RD: 10000 की मंथली बचत पर कहां बनेगा सबसे ज्यादा पैसा? 10&amp;15&amp;20 साल का पूरा कैलकुलेशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sip-vs-rd-10000-की-मंथली-बचत-पर-कहां-बनेगा-सबसे-ज्यादा-पैसा-10-15-20-साल-का-पूरा-कैलकुलेशन</link>
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        <description><![CDATA[ Which is more Better SIP vs RD: आज कल हर कोई अपने फ्यूचर के लिए इन्वेस्टमेंट करना पसंद करता है. इन्वेस्टमेंट करने वाले हर व्यक्ति के मन में एक सवाल होता है कि हर महीने 10 हजार बचाने पर SIP बेहतर है या फिर RD?
ये दोनों ही ऑप्शन नियमित इन्वेस्ट की आदत डालते हैं, लेकिन रिटर्न, जोखिम और लंबे समय में बनने वाले फंड में बड़ा अंतर होता है. अगर आप भी 10,15,20 साल में एक बड़ा फंड बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी होगा कि कौन सा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद रहेगा.
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SIP और RD में क्या अंतर है?
अगर बात करें RD यानी Recurring Deposit की तो इसमें...

बैंक और पोस्ट ऑफिस की सरकारी/वित्तीय योजना, इसलिए जोखिम बहुत कम होता है.
साथ ही हर महीने तय रकम जमा करनी होती है.
इसके साथ ही फिक्सड ब्याज मिलता है.
रिर्टन पहले से तय होता है.
इसमें जोखिम बहुत कम होता है.

SIP यानी Systematic Investment Plan

म्यूचुअल फंड में नियमित इन्वेस्ट का तरीका.
इक्विटी, डेट या हाइब्रिड फंड में इन्वेस्ट
मार्केट आधारित रिटर्न मिलता है.
लंबे समय में ज्यादा कमाई की संभावना होती है.
लेकिन इसमें जोखिम RD से ज्यादा होता है.

अगर हर महीने 10 हजार इन्वेस्ट करें तो RD में कितना पैसा बनेगा?
अगर 6.05 प्रतिशत से देखा जाए तो&amp;nbsp;

10 साल में RD
महीने में इन्वेस्ट- 10 हजार
टोटल जमा राशि-16,48,781

15 साल में RD

पहले 10 साल RD
मैच्योरिटी रकम FD में इन्वेस्ट
साथ में नई 5 साल की RD
टोटल राशि- 29,27,702

20 साल में RD

10 साल RD
रकम अगले 10 साल FD में
साथ में नई RD
टोटल राशि- 46,54,471

SIP में कितना पैसा बन सकता है?
इसका रिटर्न आपके चुने गए फंड पर निर्भर करता है. आमतौर पर

डेट फंड: 6 प्रतिशत-7 प्रतिशत
हाइब्रिड फंड: 8 प्रतिशत-10 प्रतिशत
इक्विटी फंड: 10 प्रतिशत-13 प्रतिशत

10 साल में 10,000 SIP
रिटर्न कुल राशि

6 प्रतिशत ₹16.32 लाख
8 प्रतिशत ₹18.12 लाख
10 प्रतिशत ₹20.14 लाख
12 प्रतिशत ₹22.40 लाख
13 प्रतिशत ₹23.63 लाख

15 साल में ₹10,000 SIP
रिटर्न कुल राशि

6 प्रतिशत ₹28.83 लाख
8 प्रतिशत ₹33.97 लाख
10 प्रतिशत ₹40.16 लाख
12 प्रतिशत ₹47.59 लाख
13 प्रतिशत ₹51.85 लाख

20 साल में ₹10,000 SIP
रिटर्न कुल राशि

6 प्रतिशत ₹45.56 लाख
8 प्रतिशत ₹57.26 लाख
10 प्रतिशत ₹72.39 लाख
12 प्रतिशत ₹91.98 लाख
13 प्रतिशत ₹1.03 करोड़

कौन है ज्यादा बेहतर?
अगर हम RD चुनते हैं तो

आपको सुरक्षित इन्वेस्टमेंट चाहिए.
आपको तय रिटर्न चाहिए.
साथ ही रिस्क नहीं लेना चाहते.
आपका शॉर्ट टर्म लक्ष्य है.

वहीं SIP चुनें अगर

लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट चाहते हैं.
साथ ही ज्यादा रिटर्न भी चाहिए.
लेकिन मार्केट उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं.
वेल्थ बनाना चाहते हैं.

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एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 5 साल से ज्यादा के इन्वेस्टमेंट के लिए SIP ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.&amp;nbsp;अगर बात करें युवा इन्वेस्टर्स की तो SIP इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि

इसमें कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.
महंगाई को मात देता है.
लंबे समय में एक बड़ा फंड बनाता है.
वहीं अगर आपका लक्ष्य सुरक्षित बचत है तो RD ज्यादा फायदा दे सकती है.
लेकिन आप अगर 10-20 साल में बड़ा फंड बनाना चाहते हैं तो SIP ज्यादा फायदा दे सकती है.

 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:30:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SIP, RD:, 10000, की, मंथली, बचत, पर, कहां, बनेगा, सबसे, ज्यादा, पैसा, 10-15-20, साल, का, पूरा, कैलकुलेशन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp; Diesel Price: पाकिस्तान में पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत ने तोड़े रिकॉर्ड, जानें अब कितने रुपए का है एक लीटर Petrol&amp;Diesel</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-पाकिस्तान-में-पेट्रोल-डीजल-की-कीमत-ने-तोड़े-रिकॉर्ड-जानें-अब-कितने-रुपए-का-है-एक-लीटर-petrol-diesel</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-पाकिस्तान-में-पेट्रोल-डीजल-की-कीमत-ने-तोड़े-रिकॉर्ड-जानें-अब-कितने-रुपए-का-है-एक-लीटर-petrol-diesel</guid>
        <description><![CDATA[ Pakistan Petrol Diesel Price: यूएस- ईरान वॉर का असर केवल भारत पर ही नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर भी पड़ रहा है. जिस तरह से गैस और तेल की कमी भारत में देखने को मिल रही है, उसी तरह से पाकिस्तान में भी देखी जा रही है. पड़ोसी मुल्क का तो हाल इतना बुरा है कि यहां महज एक हफ्ते में ही पेट्रोल- डीजल के दाम दोबारा से बढ़ गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 15 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है.
पेट्रोल- डीजल की कीमत में बढ़ोतरीदरअसल पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल की कीमत 399.86 पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 414.78 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं हाई स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 399.58 रुपये से बढ़कर 414.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है. ये महज एक हफ्ते में दूसरी बार है जब पाकिस्तान में पेट्रो- डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं.
ये भी पढ़ें: Budget-Friendly Summers: मौज कर दी! अब महंगे नहीं होंगे AC और फ्रिज, सरकार ने मार्च 2027 तक बढ़ा दी ये वाली छूट
लगातार तीसरी बार बढ़े दामवहीं स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, पाकिस्तान सरकार ने लगातार तीसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है. पिछले दो हफ्तों में सरकार पेट्रोल के दाम 33.28 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 46.16 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा चुकी है. इसके अलावा शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली लेवी (टैक्स) भी 13.91 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी है.
बता दें कि ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) ने आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को करीब 1.32 अरब डॉलर की वित्तीय मदद देने का भरोसा दिया है. IMF ने शुक्रवार, 8 मई को बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान को उसकी एक्सेंडेड फंड फेसिलिटी के तहत 1.1 अरब डॉलर मिलेंगे. इसके अलावा जलवायु और पर्यावरण से जुड़ी योजनाओं के लिए रेजिलेंस एंड सस्टेनेबिलिटी फेसिलिटी के तहत करीब 22 करोड़ डॉलर की मदद भी दी जाएगी.
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:30:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-, Diesel, Price:, पाकिस्तान, में, पेट्रोल-डीजल, की, कीमत, ने, तोड़े, रिकॉर्ड, जानें, अब, कितने, रुपए, का, है, एक, लीटर, Petrol-Diesel</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बहुत बड़े झटके के लिए तैयार रहे भारत... ईरान&amp;US जंग को लेकर उदय कोटक ने दी चेतावनी, जानें और क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बहुत-बड़े-झटके-के-लिए-तैयार-रहे-भारत-ईरान-us-जंग-को-लेकर-उदय-कोटक-ने-दी-चेतावनी-जानें-और-क्या-कहा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बहुत-बड़े-झटके-के-लिए-तैयार-रहे-भारत-ईरान-us-जंग-को-लेकर-उदय-कोटक-ने-दी-चेतावनी-जानें-और-क्या-कहा</guid>
        <description><![CDATA[ CII Business Summit: CII Annual Business Summit 2026 में अपनी बात रखते हुए दिग्गज बैंकर और कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक &amp;nbsp;(Uday Kotak) ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग का असर अब दिखना शुरू हो सकता है इसलिए भारत को अब सबसे बुरे हालात का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
भारतीय कारोबार जगत को एक कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों ने दुनिया ने जिस राहत का अनुभव किया है, वह अब खत्म होने वाला है. ऐसे में लंबे समय से &#039;कम्फर्ट जोन&#039; में रह रहे भारत को अब इससे बाहर निकलकर मजबूत और स्थायी समाधान खोजने की जरूरत है.&amp;nbsp;
लगेगा महंगाई का करारा झटका&amp;nbsp;
उदय कोटक ने कहा कि पिछले दो महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध का पूरा आर्थिक असर अभी तक भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है. इसकी वजह पुराने स्टॉक और तेल कंपनियों द्वारा वहन किया जा रहा घाटा है. लेकिन अब एक बहुत बड़ा झटका आ रहा है. यह खासतौर पर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए ईंधन की बढ़ती कीमतें और उससे होने वाली महंगाई एक बड़ी चुनौती होगी. &amp;nbsp;
पीएम मोदी की अपील का किया समर्थन
उन्होंने बताया कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती है, तो भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर 2.5% तक जा सकता है. &amp;nbsp;कोटक ने सुझाव देते हुए कहा कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को एक &#039;कॉर्पोरेट बैलेंस शीट&#039; की तरह मैनेज करना चाहिए, जहां अनावश्यक खपत को कम किया जाए. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की हाल ही में इस लेकर की गई एक अपील का समर्थन किया.
उन्होंने कहा कि भारत को सही मायने में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए विदेशी निवेश पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और दीर्घकालिक जोखिम पूंजी का एक मजबूत घरेलू आधार बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए.
बतौर कोटक, सही मायने में आत्मनिर्भर राष्ट्र वह है जिसे किसी और के पैसे या ताकत पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती.&amp;nbsp;

#WATCH | Delhi: Founder of Kotak Mahindra Bank, Uday Kotak says, &quot;My view is we should prepare for paranoia before the event. We must hope that tough times do not come or remain, but we must prepare for the worst. It is about preparation. Be ready for tough times, rather than&amp;hellip; pic.twitter.com/A9sabctqel
&amp;mdash; ANI (@ANI) May 12, 2026



सावधानी ही सुरक्षा
उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय बिजनेस लीडर्स को Strategic Paranoia अपनाने को कहा- यानी संकट आने से पहले ही उसके लिए सबसे खराब स्थिति की तैयारी कर लेना.&amp;nbsp;

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Petrol- Diesel Price: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमत ने तोड़े रिकॉर्ड, जानें अब कितने रुपए का है एक लीटर Petrol-Diesel  ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:30:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बहुत, बड़े, झटके, के, लिए, तैयार, रहे, भारत..., ईरान-US, जंग, को, लेकर, उदय, कोटक, ने, दी, चेतावनी, जानें, और, क्या, कहा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold Import Duty: पीएम मोदी की अपील के बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सोने&amp;चांदी के आयात पर बढ़ाया शुल्क</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-import-duty-पीएम-मोदी-की-अपील-के-बाद-सरकार-ने-लिया-बड़ा-फैसला-सोने-चांदी-के-आयात-पर-बढ़ाया-शुल्क</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-import-duty-पीएम-मोदी-की-अपील-के-बाद-सरकार-ने-लिया-बड़ा-फैसला-सोने-चांदी-के-आयात-पर-बढ़ाया-शुल्क</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Import Duty: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी. इसके कुछ ही दिनों बाद भारत सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क (Effective Import Duty) को 6 परसेंट से बढ़ाकर 15 परसेंट कर दिया, जो 13 मई, 2026 की आधी रात से लागू हो चुका है.
सरकार ने मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty- BCD) को बढ़ाकर 10 परसेंट कर दिया है, जिस पर 5 परसेंट कृषि बुनियादी ढांचा और विकास उपकर (AIDC) लागू है. इससे टोटल टैक्स बढ़कर 15 परसेंट हो गया. इसी तरह से प्लैटिनम और ज्वेलरी फाइंडिंग्स (पिन, हुक) पर भी 10 परसेंट का नया शुल्क लागू होगा.&amp;nbsp;

Import duty on gold and other precious metals has been increased, and the revised rates will come into effect from midnight tonight pic.twitter.com/7iWfOFp6j6
&amp;mdash; IANS (@ians_india) May 12, 2026



क्यों बढ़ाया गया आयात शुल्क?
सोने और दूसरी महंगी धातुओं के आयात शुल्क को बढ़ाने का मकसद इनके आयात को काबू में करना, व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करते हुए भारतीय रुपये को मजबूती दिलाना है.
कारोबारी साल 2026 में सोने का आयात रिकॉर्ड 72 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर असर पड़ा है. ईरान-अमेरिकी में छिड़ी जंग के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया.&amp;nbsp;
बाजार और निवेशकों पर असर
आयात शुल्क बढ़ने से सोने और चांदी की कीमतों में 2000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक का तत्काल उछाल देखा जा सकता है. पीएम मोदी की अपील और अब इस खबर के बाद Titan, Kalyan Jewellers और Senco Gold जैसी कंपनियों के शेयरों पर बड़ा असर दिख सकता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
तस्करी का बढ़ सकता है खतरा
आयात शुल्क को 6 परसेंट से बढ़ाकर 15 परसेंट कर देगना तस्करों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बन सकता है क्योंकि जब ड्यूटी कम थी, तो मार्जिन कम था. अब 15 परसेंट ड्यूटी और 3 परसेंट GST को मिलाकर टैक्स में टोटल 18 &amp;nbsp;परसेंट का अंतर बैठ रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुबई जैसे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और भारतीय बाजारों के बीच प्रति किलो सोने पर अब 11 लाख से अधिक का अंतर हो सकता है, जो अवैध नेटवर्क को सक्रिय करने के लिए काफी है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Import, Duty:, पीएम, मोदी, की, अपील, के, बाद, सरकार, ने, लिया, बड़ा, फैसला, सोने-चांदी, के, आयात, पर, बढ़ाया, शुल्क</media:keywords>
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        <title>शेयर बाजार की उठापटक के बीच SIP का जलवा, अप्रैल में आया 2.39 लाख करोड़ का निवेश, टूटा रिकॉर्ड!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शेयर-बाजार-की-उठापटक-के-बीच-sip-का-जलवा-अप्रैल-में-आया-239-लाख-करोड़-का-निवेश-टूटा-रिकॉर्ड</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/शेयर-बाजार-की-उठापटक-के-बीच-sip-का-जलवा-अप्रैल-में-आया-239-लाख-करोड़-का-निवेश-टूटा-रिकॉर्ड</guid>
        <description><![CDATA[ Mutual Funds Investment: बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में घरेलू निवेशकों ने म्यूचुअल फंड्स में दिल खोलकर पैसा लगाया, जो 3 लाख करोड़ से भी ज्यादा है. इसे निवेश का एक &#039;ऐतिहासिक मोड़&#039; माना जा रहा है.
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी ताजा मासिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने अप्रैल 2026 में कुल 3.22 लाख करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया, जबकि कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 81.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इससे पता चलता है कि बाजार में थोड़े समय के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक म्यूचुअल फंड को लंबे समय में दौलत बनाने के एक विकल्प के तौर पर देखते आ रहे हैं.
गिरावट को इग्नोर कर दांव लगा रहे निवेशक&amp;nbsp;
अप्रैल में ग्रोथ और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीम में 38440.20 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ. हालांकि यह मार्च के मुकाबले करीब 5 परसेंट कम जरूर है, लेकिन फिर भी इक्विटी फंड में निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी रही. महीने के आखिर तक इक्विटी स्कीम का कुल AUM 35.74 लाख करोड़ रुपये रहा.
इक्विटी कैटेगरी में, फ्लेक्सी-कैप फंड में सबसे ज्यादा 10147.85 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ. यह कैटेगरी फंड मैनेजरों को लार्ज-, मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करने की छूट देती है, जिससे अनिश्चित बाजार स्थितियों में डाइवर्सिफिकेशन चाहने वाले निवेशकों के लिए यह आकर्षक बन जाती है.
स्मॉल-कैप फंड में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी बनी रही और इसमें 6885.90 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ, जबकि मिड-कैप फंड में 6551.40 करोड़ रुपये आए. लार्ज और मिड-कैप फंड में 4490.49 करोड़ रुपये आए, जबकि मल्टी-कैप फंड में 3806.01 करोड़ रुपये आए.
निवेश का क्या है लॉजिक?

सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) भारतीयों के लिए निवेश का एक अनुशासित तरीका बन गया है. मार्च 2026 में मासिक SIP इनफ्लो 32087 करोड़ रुपये रहा, जो लॉन्ग टर्म में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है.&amp;nbsp;
फंड मैनेजर और रिटेल निवेशक बाजार की गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देख रहे हैं. स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में जोखिम लेना जारी रख रहे हैं.&amp;nbsp;
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय निवेशक देश के इकोनॉमिक ग्रोथ और घरेलू बाजार की मजबूती पर भरोसा कर रहे हैं.&amp;nbsp;
निवेशक अब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे पारंपरिक विकल्पों के बजाय बेहतर &#039;इंफ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न&#039; के लिए म्यूचुअल फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं.&amp;nbsp;


(यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 19:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पीएम मोदी की अपील: वजह नहीं अब आंकड़ों से समझिए सरकार ने क्यों सोना और पेट्रोल&amp;डीजल खरीदने से किया मना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पीएम-मोदी-की-अपील-वजह-नहीं-अब-आंकड़ों-से-समझिए-सरकार-ने-क्यों-सोना-और-पेट्रोल-डीजल-खरीदने-से-किया-मना</link>
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        <description><![CDATA[ PM Modi Appeal on Gold Petrol Diesel: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश की जनता से कई अपील कीं. पीएम मोदी ने कहा कि अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदना है. साथ ही उन्होंने पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल &amp;nbsp;का इस्तेमाल कम करने की भी अपील की. पीएम मोदी ने लोगों से विदेश यात्राओं को टालने का भी आह्वान किया. अब आंकड़ों से समझिए आखिरकार पीएम मोदी को ऐसी अपील क्यों करनी पड़ी. इसकी असल वजह क्या है.&amp;nbsp;
दरअसल भारत हर साल विदेशों से 15 लाख करोड़ का कच्चा तेल खरीदता है और सात 7 लाख करोड़ का सोना भी खरीदता है. यह कीमत सरकार को डॉलर में चुकानी पड़ती है. बड़ी बात यह है कि कच्चा तेल और सोना, दोनों मिलकर देश के इंपोर्ट बिल का 30 फीसदी से ज्यादा है.&amp;nbsp;
जितना खरीदेंगे, उतनी बढ़ेगी डॉलर की मांग
अब आसान भाषा में समझिए. तेल और सोने की जितनी ज़्यादा खरीद उतनी डॉलर की मांग भी बढ़ती है और जितनी मांग बढ़ती है, उतनी डॉलर की कीमत भी बढ़ जाती है. सीधे तौर पर हमारा रुपया कमजोर हो जाता है. अब रुपया जितना टूटता है, उतना कच्चा तेल और सोना खरीदना और महंगा हो जाता है. आज डॉलर का दाम करीब 96 रुपए है.&amp;nbsp;
उलझन में व्यापारी! PM मोदी की सोने वाली अपील पर बोले सुनार- &#039;प्रधानमंत्री जी के लिए नुकसान उठाना...&#039;
अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव
दरअसल ईरान युद्ध के बाद से भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है. युद्ध शुरू होने के सिर्फ दो महीनों के अंदर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 38 बिलियन डॉलर गिरकर 691 बिलियन डॉलर पर आ गया है. अभी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100-105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है,
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात बिल लगभग दोगुना होकर 72 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जो 2022-23 में 35 बिलियन डॉलर था, इसमें सालाना 24 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. विदेश यात्राओं और अन्य खर्चों के लिए भारत से बाहर जाने वाला पैसा काफी बढ़ गया है. अकेले विदेश यात्रा पर लगभग 15 बिलियन डॉलर खर्च हुए हैं. ऐसे में अगर जनता सोने की खरीद में 30 से 40 फीसदी की कमी करते हैं, तो देश की लगभग 20 से 25 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बच सकती है.
भारत में सबसे ज्यादा सोना खरीदते हैं इन राज्यों के लोग, जानिए कहां होता है सबसे ज्यादा उत्पादन
सरकार की मंशा भी जान लीजिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील का मकसद बिना किसी तत्काल वित्तीय सख्ती, जैसे आयात शुल्क बढ़ाना के जनता की सोच में बदलाव लाकर आयात बिल को नियंत्रित करना है. इससे चालू खाता घाटे यानी करंट अकाउंट डेफेसिट को कम करने और रुपए को स्थिरता देने में मदद मिलेगी. इसके विकल्प के रूप में सरकार &#039;गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम&#039; को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है, ताकि घरों में रखे बेकार सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाया जा सके. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 19:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पीएम, मोदी, की, अपील:, वजह, नहीं, अब, आंकड़ों, से, समझिए, सरकार, ने, क्यों, सोना, और, पेट्रोल-डीजल, खरीदने, से, किया, मना</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: रेलवे यूनियन ने कहा&amp; DA&amp;HRA कैलकुलेश को सुधारें, सरकार के सामने रखी बड़ी मांग</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के गठन की चर्चाओं के बीच इंडियन रेलवे टेक्नीकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (IRTSA) और अन्य रेलवे यूनियनों ने महंगाई भत्ते (DA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) कैलकुलेशन के तरीकों में बड़े बदलाव की मांग की है.
रेलवे यूनियनों की यह है डिमांड
यूनियनों का कहना है कि DA कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले वस्तुओं के बास्केट (Consumer Price Index) में नए जमाने की जरूरतों के हिसाब से इंटरनेट फीस, बोतलबंद पानी और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को भी शामिल किया जाना चाहिए. यूनियनों की तरफ से मांग रखी गई है कि जब DA 50 परसेंट तक पहुंच जाएं, तो उसे मूल वेतन (Basic Pay) में मिला दिया जाना चाहिए, जैसा कि पांचवें वेतन आयोग में होता था.
HRA के लिए फोर-टियर सिस्टम
मौजूदा समय में HRA तीन कैटेगरीज (X,Y,Z शहरों) में बंटा हुआ है. IRTSA ने इसे बदलकर फोर-टियर सिस्टम बनाने का प्रस्ताव रखा है.&amp;nbsp;

A कैटेगरी (50 लाख से ज्यादा की आबादी)- 40% HRA
B कैटेगरी (20-25 लाख की आबादी)- 30% HRA
C कैटेगरी (5-20 लाख की आबादी)-20% HRA
D कैटेगरी (5 लाख से कम आबादी)- 10% HRA

अन्य प्रमुख मांगें

मिनिमम बेसिक सैलरी को 18000 से बढ़ाकर 52600-69000 के बीच करने की मांग.
सैलरी हाइक के लिए फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.86 से 3.83 तक करने की मांग.&amp;nbsp;
बच्चों के लिए शिक्षा भत्ते (CEA) की प्रतिपूर्ति को बढ़ाकर 10000 रुपये प्रति माह करने और इसे पोस्ट-ग्रैजुएशन तक जारी रखने की मांग.

प्रस्ताव में ये बातें भी शामिल
एसोसिएशन ने &#039;मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम&#039; में कुछ अहम बदलावों का भी प्रस्ताव रखा है. अभी कर्मचारियों को नौकरी के दौरान बहुत कम फाइनेंशियल अपग्रेड मिलते हैं, लेकिन 30 साल के करियर के दौरान IRTSA ने पांच फाइनेंशियल अपग्रेड की मांग की है. इस योजना के मुताबिक, कर्मचारियों को इन शर्तों को पूरा करने पर मुआवजा दिया जाएगा: छह साल की नौकरी; 12 साल की नौकरी; 18 साल की नौकरी; 24 साल की नौकरी और 30 साल की सेवा. ग्रुप के अनुसार, इससे रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रोफेशनल तरक्की और फाइनेंशियल सुरक्षा के मौके बढ़ेंगे.
यूनियन ने छुट्टी के बदले नकद भुगतान (leave encashment) से जुड़े नियमों में बदलाव का सुझाव भी दिया है. IRTSA के अनुसार, कर्मचारियों को नौकरी के दौरान ही अपने खाते में जमा छुट्टियों में से कम से कम आधी छुट्टियों के बदले नकद भुगतान लेने की सुविधा मिलनी चाहिए. इसके अलावा, संगठन ने रिटायरमेंट के समय छुट्टी के बदले नकद भुगतान की अधिकतम सीमा को 300 दिनों से बढ़ाकर 600 दिन करने का भी प्रयास किया है. संगठन का मानना ​​है कि कर्मचारियों को नौकरी के कई वर्षों के दौरान जमा हुई छुट्टियों के लिए आर्थिक रूप से अधिक मुआवजा मिलना चाहिए.

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8th Pay Commission: कर्मचारी यूनियनों की बड़ी मांग, 3 के बजाय 5 सदस्यों के आधार पर तय हो नई सैलरी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 19:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, रेलवे, यूनियन, ने, कहा-, DA-HRA, कैलकुलेश, को, सुधारें, सरकार, के, सामने, रखी, बड़ी, मांग</media:keywords>
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        <title>Gold Reserve News: भारत या पाकिस्तान, गोल्ड रिजर्व के मामले में कौनसा देश है आगे? चौंका देंगे आंकड़े</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-reserve-news-भारत-या-पाकिस्तान-गोल्ड-रिजर्व-के-मामले-में-कौनसा-देश-है-आगे-चौंका-देंगे-आंकड़े</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-reserve-news-भारत-या-पाकिस्तान-गोल्ड-रिजर्व-के-मामले-में-कौनसा-देश-है-आगे-चौंका-देंगे-आंकड़े</guid>
        <description><![CDATA[ India Vs Pakistan Gold Comparison: सोना हर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. आज के टाइम में जब दुनिया में महंगाई और युद्ध का डर बढ़ रहा है तो कई देश अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं. दुनियाभर के केंद्रीय बैंक जैसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI और फेडरल रिजर्व अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना रखते हैं.
अगर भारत और पाकिस्तान की तुलना करें तो सोने के मामले में भारत काफी आगे है. सरकारी भंडार से लेकर निजी खपत तक, हर मामले में भारत पाकिस्तान से कई गुना आगे नजर आता है.
गोल्ड रिजर्व में भारत की मजबूत स्थिति
2026 के आंकड़ों के मुताबिक, RBI के पास लगभग 880 टन सोना है. वहीं State Bank of Pakistan के पास लगभग 64.76 टन सोना मौजूद है. साफ मतलब है कि भारत का सरकारी स्वर्ण भंडार पाकिस्तान के मुकाबले करीब 13 गुना ज्यादा है.&amp;nbsp;
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खरीदारी में कौन है आगे?
अगर बात करें खरीदारी की तो भारत ने पिछले 5 सालों में अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए 227 टन से ज्यादा सोना खरीदा है. वहीं पाकिस्तान की खरीदारी सीमित रही है और उसकी अर्थव्यवस्था ज्यादा दबाव में होने के कारण बड़े स्तर पर सोना खरीदना आसान नहीं रहा.&amp;nbsp;
निजी खपत में बड़ा अंतर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है. यहां हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. वहीं अगर पाकिस्तान की बात करें तो सालाना सोने की मांग केवल 60 से 90 टन के बीच रहती है.
घरों में कितना सोना?
भारत में परिवारों और मंदिरों के पास लगभग 25 हजार टन सोना होने का अनुमान है. वहीं पाकिस्तान में लोगों के पास करीब 5 हजार टन सोना होने की बात कही जाती है. यानी निजी होल्डिंग्स में भी भारत पाकिस्तान से कई गुना आगे है.
भारत में सोने की इतनी मांग क्यों?
भारत के लोग सोने को सिर्फ इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा मानते हैं. शादी-ब्याह हो या फिर कोई त्योहार यहां सोने की अहम भूमिका होती है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान की क्या स्थिति है?
पाकिस्तान में सोने का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक बाजार के जरिए खरीदा-बेचा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां लगभग 90 प्रतिशत गोल्ड ट्रेड अनौपचारिक चैनलों से होता है.
भारत के लिए क्यों चिंता की बात?
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा सोना आयात करता है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है, ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और रुपया कमजोर हो सकता है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री की सोने की खरीद को लेकर की गई अपील के पीछे आर्थिक संतुलन बनाए रखने की चिंता भी जुड़ी हुई है. आंकड़े साफ बताते हैं कि सोने के मामले में भारत पाकिस्तान से काफी आगे है.
भारत में सबसे ज्यादा सोना खरीदते हैं इन राज्यों के लोग, जानिए कहां होता है सबसे ज्यादा उत्पादन
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 19:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Reserve, News:, भारत, या, पाकिस्तान, गोल्ड, रिजर्व, के, मामले, में, कौनसा, देश, है, आगे, चौंका, देंगे, आंकड़े</media:keywords>
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        <title>Cheapest Shoes: यूपी में यहां मिलते हैं सबसे सस्ते जूते, नोट कर लीजिए बाजारों की है लिस्ट, बचेंगे पैसे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cheapest-shoes-यूपी-में-यहां-मिलते-हैं-सबसे-सस्ते-जूते-नोट-कर-लीजिए-बाजारों-की-है-लिस्ट-बचेंगे-पैसे</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/cheapest-shoes-यूपी-में-यहां-मिलते-हैं-सबसे-सस्ते-जूते-नोट-कर-लीजिए-बाजारों-की-है-लिस्ट-बचेंगे-पैसे</guid>
        <description><![CDATA[ Cheapest Shoes Market in UP: अगर आपका बजट कम है, लेकिन आपको अच्छे और टिकाऊ जूते खरीदने हैं तो उत्तर प्रदेश की कई मार्केट्स आपके लिए शानदार ऑप्शन हो सकती है, जहां आपको आपकी पसंद के और ब्रांडेड जूते कम रेट में आसानी से मिल जाएंगे. लेदर, स्पोर्टस, कैजुअल और फॉर्मल जूतों की अच्छी वैरायटी सस्ते दामों में मिल जाती है.
1. आगरा का बिजली घर मार्केट
बिजली घर मार्केट आज भी देश की सबसे सस्ती लेदर जूता मार्केट मानी जाती है. यहां सोमवार और शुक्रवार को लगने वाले बाजार में लेदर जूते बहुत ही कम रेट में मिल जाते हैं. अगर इसके रेट की बात करें तो बाजार में लेदर जूते 100 से 500 रुपये के बीच में आसानी से मिल जाते हैं. वहीं कुछ फैक्ट्री आउटलेट्स पर सैंडर और बेलीज की कीमत 68 रुपये से शुरू होती है. अगर आपको काफी अच्छी वैरायटी चाहिए तो सुबह जल्दी पहुंचना काफी बेहतर रहता है.
Cheapest Shoes: दिल्ली में यहां मिलते हैं सबसे सस्ते जूते, एक नहीं 14 बाजारों की है लिस्ट, ब्रांडेड भी मिलेंगे
2. मुरादाबाद का टाउनहॉल मार्केट
टाउनहॉल मार्केट में स्पोर्ट्स और कैजुअल जूतों की अच्छी रेंज मिलती है. अगर कीमत की बात करें तो यहां 250 से 300 रुपये से शुरू होती हैं. इसके साथ ही काफी दुकानदार जूतों पर 1 साल तक की वारंटी और रिपेयरिंग की सुविधा देते हैं.
3. कानपुर का चमनगंज और परेड मार्केट
कानपुर के चमनगंज और परेड मार्केट में आपको थोक जूतों की काफी वैरायटी मिलेगी. ये मार्केट थोक जूतों के लिए ही काफी फेमस है. यहां के रेट की बात करें को फॉर्मल जूते 260 रुपये और कैजुअल जूते 240 रुपये से शुरू हो जाते हैं.
4. मेरठ का बुढ़ाना गेट मार्केट&amp;nbsp;
बुढ़ाना गेट मार्केट में आपको स्नीकर्स और कैनवास जूतों की शानदार रेंज मिलेगी. यहां जूते 200 से 250 रुपये के बीच में आसानी से मिल जाते हैं.
5.लखनऊ का अमीनाबाद मार्केट&amp;nbsp;अमीनाबाद &amp;nbsp;मार्केट बजट शॉपिंग के लिए काफी फेमस है. यहां पर लेटेस्ट स्नीकर्स, फॉर्मल शूज और कैजुअल फुटवियर काफी कम दाम में मिल जाते हैं. लेकिन अगर वहीं आप अच्छी बार्गेनिंग करेंगे तो आपको जूते और भी सस्ते दाम पर मिल जाएंगे.
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खरीदारी के लिए खास टिप
अगर आप खरीदारी करने आगरा जा रहे हैं तो लाल किले के पास बिजली घर मार्केट में सुबह 5 बजे पहुंचना अच्छा रहेगा. &amp;nbsp;इसी टाइम आपको सबसे अच्छी वैरायटी और दाम भी कम मिल सकते हैं. अगर आप भी कम दाम में अच्चे जूते खरीदना चाहते हैं तो यूपी की इन मार्केट में जरूर जाए.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 07:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold News: भारतीय घरों की मिनी&amp;आरबीआई! भारतीय महिलाओं के पास दुनिया का कितने फीसदी सोना है?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-news-भारतीय-घरों-की-मिनी-आरबीआई-भारतीय-महिलाओं-के-पास-दुनिया-का-कितने-फीसदी-सोना-है</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Owned by Indian Women: जब से पीएम मोदी ने एक साल तक सोना ना खरीदने की बात कही है, तभी से हर जगह लोगों की सोने पर ही नजर है. सोना यानी गोल्ड, भारत में परंपरा से जुड़ा है. हर तीज- त्यौहार पर घर की महिलाएं सोना पहनती हैं. शादी- ब्याह में भी सोने का एक अलग महत्व है. यहां तक कि अक्षय तृतीया और पुष्य नक्षत्र के मौके पर तो सोना खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसे में भारतीय महिलाओं के पास तो सोने का भंडार बना हुआ है.
कितना है भारतीय महिलाओं के पास &#039;सोना&#039;?जनवरी 2026 की वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाओं के पास दुनिया भर के कुल सोने का करीब 11 प्रतिशत सोना है. आंकड़ों में बात करें तो लगभग 24 हजार से 25 हजार टन सोना केवल भारतीय महिलाओं के पास है. ये कोई छोटी- मोटी संख्या नहीं, बल्कि काफी बड़ा आंकड़ा है. ये वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड माना जाता है.
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साउथ की महिलाओं के पास सबसे ज्यादा हिस्साभारत में भी सबसे ज्यादा सोने के गहने साउथ इंडियान महिलाओं के पास हैं. साउथ में सोने की सबसे पवित्र धातु माना जाता है. ऐसे में यहां पर सोना धरोहर की तरह संभालकर रखा जाता है. रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत में भारत के कुल सोने का लगभग 40% हिस्सा मौजूद है, और अकेले तमिलनाडु में लगभग 28% सोना रखा गया माना जाता है.
सोना है निवेश का बेहतर साधनसोना केवल परंपरा और संस्कृति का हिस्सा नहीं है बल्कि ये अब निवेश का भी साधन बन चुका है. सोने की बढ़ती कीमतों के चलते लोगों के घरों में पड़ा थोड़ा सोना भी अब लाखों का हो गया है. ऐसे में लोग अपने घर पर रखे सोने को सम्पत्ति की तरह ही देखते हैं. अब सोना केवल धरोहर और परंपरा की तरह ही नहीं बल्कि सम्पत्ति और निवेश का जरिया भी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Prices: एक ही सोना, फिर हर देश में अलग&amp;अलग दाम क्यों, विदेशों में गोल्ड रेट कम होने के ये हैं कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Why Gold Prices Differ Globally: सोना खरीदते समय काफी बार आपने ये सोचा होगा कि एक ही समय पर अलग-अलग देशों में इसके दाम इतने अलग क्यों होते हैं. किसी देश में सोना सस्ता मिल रहा होता है तो वहीं किसी देश में काफी महंगा, लेकिन इसी फर्क के पीछे कई जरूरी बातें हैं, जिसे जानना हर किसी के लिए काफी महत्वपूर्ण है.&amp;nbsp;
अगर बात करें इसके पीछे के कारण कि तो इसके मुख्य कारण है आयात शुल्क, टैक्स, करेंसी एक्सचेंज रेट और स्थानीय मांग-आपूर्ति. हालांकि, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है और जब इसे स्थानीय मुद्रा में बदला जाता है तो दाम बदल जाते हैं.
&#039;सोना न खरीदें...&#039; पीएम मोदी की अपील के बाद आज घटा या बढ़ा गोल्ड रेट? जानें चांदी की कीमत
आयात शुल्क और टैक्स का असर
बता दें कि सोने की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आयात शुल्क और टैक्स होते हैं. भारत की बात करें तो सोने पर लगभग 10 प्रतिशत आयात शुल्क और 3 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है, जिससे इसकी कीमत बढ़ जाती है और वहीं दुबई जैसे देशों में टैक्स बहुत कम या न के बराबर होता है, जिसके कारण वहां सोना सस्ता मिलता है.&amp;nbsp;
करेंसी एक्सचेंज रेट का असर
सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती है. जब स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है तो उस देश में सोना महंगा हो जाता है.
मांग और आपूर्ति का फर्क
इसी के साथ ही जिस देश में सोने की मांग ज्यादा होती है, जैसे भारत, वहां कीमतें अक्सर ज्यादा रहती हैं. वहीं अगर कम है तो उन देशों में तुलनात्मक रूप से कम हो सकते हैं.
भारत के इन राज्यों में मिलता है सबसे सस्ता सोना, क्या इस लिस्ट में है आपके स्टेट का नाम?
परिवहन और अन्य खर्च
कीमत अलग होने का यह भी सबसे बड़ा कारण है. सोने की कीमत में परिवहन, बीमा और लॉजिस्टिक खर्च भी जुड़ते हैं, जिससे अलग-अलग देशों में इसकी कीमत बदल जाती है. इन्हीं सब फर्क के चलते अलग-अलग देशों में सोने के दाम में अलग होते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 07:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Prices:, एक, ही, सोना, फिर, हर, देश, में, अलग-अलग, दाम, क्यों, विदेशों, में, गोल्ड, रेट, कम, होने, के, ये, हैं, कारण</media:keywords>
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        <title>Gold News: गोल्ड&amp;सिल्वर मार्केट में बड़ी हलचल, सरकार ने टाल दिया अपना ये फैसला, जानें ग्राहकों पर क्या होगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Import Duties: बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में लोगों से अपील की थी कि &#039;एक साल तक सोना ना खरीदें&#039;. जिसके बाद सोमवार को शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयर्स में भारी गिरावट दर्ज की गई. जिससे निवेशकों के बीच अफरा- तफरी मच गई थी कि अब सोने- चांदी में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने वाली है. हालांकि इस पर अब सरकार ने खुद अपनी प्रतिक्रिया देकर इस बात को साफ कर दिया है.
सोने- चांदी पर लगेगी इम्पोर्ट ड्यूटी?दरअसल सोमवार को एक सरकारी सूत्र ने न्यूज एजेंसी Reuters को बताया है कि सरकार फिलहाल ऐसी कोई प्लानिंग नहीं कर रही है. सोने और चांदी पर फिलहाल कोई आयात शुल्क नहीं बढ़ाया जा रहा है. सरकार के हालिया संकेत के मुताबिक पॉलिसी मेकर्स टैक्स बढ़ाने या आयात पर पाबंदी लगाने के बजाय लोगों को समझाने की रणनीति अपना रहे हैं.
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भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा और चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. ऐसे में सोने के आयात पर खास नजर रखी जाती है, क्योंकि इसका असर देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है. भारत में FY2025 के दौरान सोने का आयात करीब 58&amp;ndash;60 अरब डॉलर अनुमानित रहा है, जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है. सोने के आयात में ये तेजी यूनियन बजट 2024 के बाद देखने को मिली, जब सरकार ने सोने पर कस्टम ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी थी. इसके बाद सोने का आयात तेजी से बढ़ गया.
पीएम का बयानबता दें कि बीते दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक संबोधन के दौरान लोगों से कहा था कि मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें. उन्होंने लोगों से ईंधन की खपत कम करने, विदेशों में छुट्टियां मनाने और फिलहाल सोना खरीदने को टालने की सलाह दी थी. सरकार को आशंका है कि ईरान से जुड़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ती चिंताओं की वजह से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Share Market: क्रैश हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 1100 अंकों की गिरावट; निफ्टी 301 अंक नीचे</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market Today on May 11: शेयर बाजार में गिरावट का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. अभी सेंसेक्स 1047 अंक (1.35 परसेंट) टूटकर 76280 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. वहीं, निफ्टी 1.25 परसेंट या 301 अंकों की गिरावट के साथ 23852 के स्तर पर बना हुआ है. आज के टॉप लूजर्स में Titan, SBI और IndiGo जैी कंपनियों के शेयर शामिल हैं. इनमें क्रमश: 6.06 परसेंट, 2.80 परसेंट और 2.84 परसेंट की गिरावट देखी जा रही है.&amp;nbsp;
आज हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सेशन खुलने के साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए. एक तरफ बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 690 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76638 के लेवल पर खुला. वहीं, निफ्टी 206 अंक लुढ़ककर 23970 पर कारोबार की शुरुआत की. बता दें कि भारतीय रुपया भी आज अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.62 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है.&amp;nbsp;
क्यों गिरा बाजार?

ब्रेंट क्रूड का 104 डॉलर के पार जाना भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा झटका है. इससे तेल आयात करने वाली कंपनियो के मुनाफे में कमी आ सकती है.
होर्मुल की नाकेबंदी, सप्लाई चेन के ठप रहने और इंवेट्री सूखने की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है.&amp;nbsp;
वैश्विक तनाव को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर डॉलर या सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों पर लगा रहे हैं.&amp;nbsp;

एशियाई बाजार
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को एशियाई बाजार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच मिले-जुले रुख के साथ कारोबार करते नजर आए. जापान का निक्केई 225 0.81 परसेंट चढ़ा. टॉपिक्स में भी 0.32 परसेंट की बढ़त दर्ज की गई. दक्षिण कोरिया के कोप्सी ने 3.67 परसेंट की छलांग लगाते हुए एक और नया रिकॉर्ड बनाया, जबकि कोस्डैक में मामूली बढ़त देखने को मिली. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का S&amp;amp;P/ASX 200 0.71 परसेंट तक फिसल गया.&amp;nbsp;
अमेरिकी बाजार
सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स नीचे रहे। Dow Jones Industrial Average से जुड़े फ्यूचर्स 189 पॉइंट्स या 0.3 परसेंट तक गिर गए. वहीं, शुक्रवार को US स्टॉक मार्केट बढ़त के साथ बंद हुए थे. Nasdaq Composite 1.71 परसेंट या 440.88 पॉइंट्स की उछाल के साथ 26,247.08 पर बंद हुआ, जबकि S&amp;amp;P 500 0.84 परसेंट ​​या 61.82 पॉइंट्स बढ़कर 7,398.93 पर सेटल हुआ. इस बीच, Dow Jones Industrial Average 12.19 पॉइंट्स या 0.02 परसेंट की मामूली बढ़त के साथ 49,609.16 पर बंद हुआ.
कच्चा तेल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चर्चा का विषय बनी हुई हैं. सोमवार को शुरुआती कारोबार में, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 3.67 परसेंट बढ़कर 99.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 3.44 परसेंट बढ़कर 104.81 डॉलर प्रति बैरल हो गया.

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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Market:, क्रैश, हुआ, शेयर, बाजार, सेंसेक्स, में, 1100, अंकों, की, गिरावट, निफ्टी, 301, अंक, नीचे</media:keywords>
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        <title>Hormuz Strait: 2 और महीने बंद रहा होर्मुज तो मचेगा हाहाकार, जानें सबसे ज्यादा किन्हें खतरा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hormuz-strait-2-और-महीने-बंद-रहा-होर्मुज-तो-मचेगा-हाहाकार-जानें-सबसे-ज्यादा-किन्हें-खतरा</link>
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        <description><![CDATA[ Hormuz Strait: ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले और इसके जवाब स्वरूप तेहरान की होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं. आलम यह है कि वैश्विक तेल भंडार 8 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
Goldman Sachs की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में जहां दुनिया के पास 105 दिनों का तेल का स्टॉक था, वह अब घटकर 101 दिन रह गया है. मई के अंत तक इसके 98 दिन तक गिरने का अनुमान है.&amp;nbsp;
तेजी से घटता जा रहा ऑयल रिजर्व
फरवरी के अंत से यानी कि जब से ईरान में जंग की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक दुनिया भर के भंडारों से 100 करोड़ (1 बिलियन) से अधिक तेल का उपयोग किया जा चुका है. फिलहाल, ग्लोबल लेवल पर हर दिन 10-13 मिलियन बैरल तेल की कमी हो रही है. जहां तक रही भारत की बात, तो देश के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में मौजूदा समय में केवल 3.37 मिलियन टन कच्चा तेल ही बचा है.
इन्वेन्ट्री में तेज गिरावट ने सरकार और एनर्जी मार्केट दोनों को चिंता में डाल दिया है. होर्मुज के लगभग दो महीने बंद रहने से अब तक एक अरब बैरल से ज्यादा की सप्लाई को नुकसान पहुंचा है. अब अगर यह और कुछ दिनों तक बंद रहा, तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं. बता दें कि होर्मुज दुनिया का एक बड़ा महत्वपूर्ण &#039;चेक पॉइंट&#039; है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 परसेंट और LNG का 20 परसेंट हिस्सा गुजरता है.&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स ने दे डाली चेतावनी&amp;nbsp;
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स और IEA और IMF जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने गंभीर चेतावनी दी है. इनका कहना है कि अगर होर्मुज सितंबर तक बंद रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 167 डॉलर से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
ऊर्जा की कमी और बढ़ती कीमतों से दुनिया की GDP को 3.5 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. इससे आने वाले 6-7 &amp;nbsp;महीनों में खाद्य संकट भी पैदा हो सकता है क्योंकि उर्वरक (Fertilizer) बनाने में गैस का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा, जहाजों के इंश्योरेंस और माल ढुलाई के दाम भी कई गुना तेजी से बढ़ सकते हैं.&amp;nbsp;
जेपी मॉर्गन ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज आगे भी बंद रहता है, तो अगले महीने की शुरुआत में OECD इन्वेंट्री &#039;ऑपरेशनल स्ट्रेस लेवल&#039; तक पहुंच सकती है और सितंबर तक इसके &#039;ऑपरेशनल मिनिमम&#039; लेवल तक गिरने का अनुमान है.
किन देशों को सबसे ज्यादा खतरा?&amp;nbsp;

भारत अपनी जरूरत का 88 परसेंट तेल और 80 परसेंट LPG आयात करता है. सप्लाई रुकने से भारत में ईंधन की भारी कमी और महंगाई बढ़ने का खतरा है.&amp;nbsp;
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर है. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सिक्योरिटी होर्मुज के इस रास्ते पर सीधे तौर पर निर्भर है.&amp;nbsp;
बांग्लादेश और पाकिस्तान भी खतरे से खाली नहीं है. यहां पेट्रोल पंपों पर पहले से ही लंबी कतारें लगी हुई हैं. ईंधन की भारी कमी के बीच इन देशों में बिजली उत्पादन में मुश्किलें आ रही हैं. ऐसे में औद्योगिक उत्पादन ठप पड़ने की भी आशंका है.


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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hormuz, Strait:, और, महीने, बंद, रहा, होर्मुज, तो, मचेगा, हाहाकार, जानें, सबसे, ज्यादा, किन्हें, खतरा</media:keywords>
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        <title>बढ़ेगी महंगाई&amp;गिरेगी GDP... अब खतरे में है भारत, किसने कही ये बात? PM मोदी की अपील ने भी बढ़ा दी टेंशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बढ़ेगी-महंगाई-गिरेगी-gdp-अब-खतरे-में-है-भारत-किसने-कही-ये-बात-pm-मोदी-की-अपील-ने-भी-बढ़ा-दी-टेंशन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बढ़ेगी-महंगाई-गिरेगी-gdp-अब-खतरे-में-है-भारत-किसने-कही-ये-बात-pm-मोदी-की-अपील-ने-भी-बढ़ा-दी-टेंशन</guid>
        <description><![CDATA[ Iran-US War Impact: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और अब इसका असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है. एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण से कच्चे तेल की कीमतें लबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं. इससे भारत में महंगाई बढ़ने के साथ ही आर्थिक विकास दर पर भी असर पड़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमतें रह सकती हैं ऊंची
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, ADB के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा कि अगर मिडिल ईस्ट संकट ज्यादा समय तक जारी रहता है तो सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ेगा और साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. उनके मुताबिक, 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है. वहीं 2027 में यह लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल बनी रह सकती है.
Hormuz Strait: 2 और महीने बंद रहा होर्मुज तो मचेगा हाहाकार, जानें सबसे ज्यादा किन्हें खतरा?
भारत की GDP ग्रोथ पर पड़ेगा असर
अल्बर्ट पार्क ने कहा कि इस संकट का असर भारत की आर्थिक विकास दर पर भी पड़ेगा. ADB का अनुमान है कि भारत की GDP ग्रोथ में 0.6 प्रतिशत की कमी आ सकती है और यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह सकती है. गौरतलब है कि अप्रैल में ADB के चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए भारत की GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जबकि अगले फाइनेंशियल ईयर में इसके 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी. लेकिन राहत की बात यह है कि अगले साल भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सकती है.
क्या बढ़ सकती है महंगाई?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर केवल GDP तक सीमित नहीं रहेगा. इसी के साथ ही भारत में महंगाई भी बढ़ सकती है. &amp;nbsp;ADB ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए महंगाई दर का अनुमान पहले 4.5 प्रतिशत लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर 6.9 &amp;nbsp;प्रतिशत कर दिया गया है. यानी महंगाई में 2.4 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिल सकता है.
Share Market: क्रैश हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 900 से ज्यादा अंकों की गिरावट; निफ्टी 290 अंक नीचे
क्यों बढ़ेगी महंगाई?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस महंगे होते हैं तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ता है. इसके अलावा, गैस की कीमत बढ़ने से खाद और उर्वरक महंगे होंगे, जिससे किसानों की लागत बढ़ेगी.
अगर किसान कम उर्वरक इस्तेमाल करते हैं तो फसल उत्पादन घट सकता है. इसका असर सीथे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा. यानी मतलब ,साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक चला तो इसका सीधा असर भारत में महंगाई पर पड़ेगा, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा.
 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बढ़ेगी, महंगाई-गिरेगी, GDP..., अब, खतरे, में, है, भारत, किसने, कही, ये, बात, मोदी, की, अपील, ने, भी, बढ़ा, दी, टेंशन</media:keywords>
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        <title>Gold News: सुनारों पर छंटनी की तलवार! ज्वेलरी बाजार में हड़कंप, पीएम मोदी की गोल्ड वाली अपील से सहमे व्यापारी</title>
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        <description><![CDATA[ Jewellery Market News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील ने ज्वेलरी इंडस्ट्री में खासी खलबली मचा दी है. दिल्ली समेत पूरे देश के ज्वेलरी व्यापारी, सुनार और छोटे कारोबारी इस अपील से बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं.
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि अपील सामने आते ही सैकड़ों व्यापारियों ने उनसे संपर्क किया और अपनी गहरी चिंता जताई है. गोयल ने कहा कि शादियों का पीक सीजन चल रहा है और इस समय प्रधानमंत्री की इस अपील से गहनों और ज्वेलरी की मांग में भारी गिरावट आने की आशंका है.
800 टन से घटकर 500 टन खपत का अनुमान
भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है. CTI के अनुसार देश में हर साल औसतन 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. बृजेश गोयल का कहना है कि पीएम मोदी की इस अपील के बाद सोने की खपत 800 टन से घटकर 500 टन तक रह सकती है.
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छोटे ज्वेलर्स, सुनार और कारीगरों पर छंटनी का खतरा
CTI चेयरमैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक साल तक सोने की बिक्री प्रभावित रही तो छोटे ज्वेलर्स, सुनार और कारीगरों को अपने कर्मचारियों को वेतन देने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में कई जगहों पर मजबूरन कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ सकती है. ज्वेलर्स का मानना है कि इस तरह के आह्वान से ग्राहकों के मन में डर का माहौल बन जाता है, जिसके चलते सोने की बिक्री खासकर शादियों के सीजन में काफी कम हो सकती है.
सोना संस्कृति का हिस्सा है
CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि सोना केवल एक धातु या निवेश का साधन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है. शादियों में गहने लगभग अनिवार्य माने जाते हैं. इसलिए यह अपील ज्वेलरी इंडस्ट्री के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण समय पैदा कर रही है.
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शेयर बाजार पर भी असर
CTI के अनुसार टाइटन, सेनको गोल्ड, कल्याण ज्वेलर्स जैसी प्रमुख लिस्टेड ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी इस अपील का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. बृजेश गोयल ने आगे कहा कि यह अपील ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. इसलिए अब इंडस्ट्री को अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए नई रणनीतियां अपनानी पड़ेंगी. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cheapest Market: सरोजिनी छोड़िए, दिल्ली में ये हैं सबसे सस्ती कपड़े की मार्केट, दूर होगी शॉपिंग की टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ Cheapest Cloth Market: दिल वालों की दिल्ली अपने आप में ही पूरी दुनियाभर में सबसे ज्यादा मशहूर है. जहां, देश के कोने-कोने से लोग भारत की राजधानी दिल्ली में आकर कपड़ों की शॉपिंग करना बेहद ही पसंद करते हैं. यह तो सभी जानते हैं कि दिल्ली की सरोजिनी नगर मार्केट कपड़ों के मामले में सबसे ज्यादा सस्ती मार्केटों में से एक है. लेकिन, क्या आप यह जानते हैं कि सरोजिनी नगर मार्केट के अलावा ऐसी कई अन्य मार्केट है जो आपकी शॉपिंग की टेंशन को पूरी तरह से खत्म कर देती है.&amp;nbsp;
1. जनपद मार्केट (Janpath Market)
जनपद मार्केट को आखिर कौन नहीं जानता होगा. कनॉट प्लेस के पास स्थित यह मार्केट उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा बेस्ट है जो बोहो-चिकन और विंटेज स्टाइल की खोज में शॉपिंग करते हैं. इतना ही नहीं, इस मार्केट में आपको सरोजिनी से ज्यादा बेहतरीन क्वालिटी के न सिर्फ डेनिम मिलेंगी बल्कि ट्रेंडी टॉप्स का भी एक अलग नजारा देखने को मिलेगा. इस मार्केट की खास बात यह है कि यहां आपको मोलभाव (Bargaining) करने की कला आनी चाहिए.&amp;nbsp;
2. पालिका बाज़ार (Palika Bazaar)
तो वहीं, दूसरे नंबर पर है दिल्ली की सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाली मार्केट में से एक पालिका बाज़ार. जहां रोजाना लाखों की संख्या में लोगों की चहल-पहल देखने को मिलती है. अगर आपको गर्मी में खुले आसमान के नीचे शॉपिंग करना पसंद नहीं है ता पालिका बाज़ार आपके लिए है. कपड़ों के अलावा यहां आपको &amp;nbsp;इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स भी बेहद ही सस्तों दामों पर मिलेगा.&amp;nbsp;
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3. करोल बाग (Karol Bagh)
तीसरे नंबर पर एक ऐसी मार्केट है जो खासतार से सिर्फ और सिर्फ शादी और पार्टी वियर को लेकर ही पूरी दिल्ली में सबसे ज्यादा मशहूर है. करोल बाग पहुंचने पर आपको अजमल खान रोड पर कपड़ों की फर्स्ट कॉपी और सुंदर एथनिक वियर बेहद ही कम दाम में मिलेंगे, जिससे आप आसनी से खरीद सकते हैं. इसके अलावा, करोल बाग में स्थित गफ्फार मार्केट में विदेशी ब्रांड्स के जूतों और एक्सेसरीज का अगल ही बोलबाला देखने को मिलता है.&amp;nbsp;
4. लाजपत नगर (Central Market)
लाजपत नगर को दिल्लीवासियों की जान भी कहा जाता है. जहां, आपको बेहतरीन गुणवत्ता (Quality) में हर बजट में कुर्तियों से लेकर साड़ी मिलेगी. इतना ही नहीं, अगर आप अपने कपड़े को सिलवाने के शौकिन हैं तो, लाजपत नगर आपके लिए सबसे ज्यादा बेहतरीन विकल्पों में से एक है. यहां कपड़ों के सिलवाने के लिए कपड़ों की फैब्रिक्स की बहुत बड़ी रेंज शामिल है.
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5. कमला नगर (Kamla Nagar)
नॉर्थ कैंपस के पास होने की वजह से कमला नगर मार्केट अब छात्रों की पसंदीदा मार्केट में से एक बन चुकी है. जहां, शोरूम्स से बाहर लगी सेल में आप 100 रुपये से लेकर 400 रुपये तक के कपड़ों को आसानी से खरीद सकते हैं. इतना ही नहीं, कमला नगर में मिलने वाले कपड़ों का स्टॉक दिल्ली के लेटेस्ट फैशन ट्रेंड्स के साथ पूरी तरह से अपडेट रहता है.&amp;nbsp;
6. गांधी नगर (Gandhi Nagar)
यह केवल दिल्ली की ही नहीं, बल्कि एशिया की सबसे बड़ी थोक मार्केट (Wholesale) मार्केट की श्रेणी में आती है. अगर आप कम बजट में ढेर सारी शॉपिंग करना चाहते हैं तो गांधी नगर से बढ़िया आपके लिए कुछ नहीं है. इस मार्केट में रेडीमेड शर्ट्स और जींस की कीमतें आपको पूरी तरह से हैरान भी कर सकती हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 23:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Loan EMI: होम लोन में मां को बनाएं &amp;apos;को&amp;एप्लिकेंट&amp;apos; और बचाएं लाखों का टैक्स, जानें इस स्मार्ट निवेश के बड़े फायदे</title>
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        <description><![CDATA[ Home Loan: इस दुनिया में रहने वाला हर कोई चाहता है कि उसका खुदका अपना घर हो. घर खरीदना जीवन के सबसे बड़े फैसलों का बेहद ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. तो वहीं, होम लोन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए &#039;जॉइंट होम लोन&#039; एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसके साथ ही अगर आपकी मां को को-एप्लिकेंट (Co-Applicant) के रूप में जोड़ा जाए तो यह न सिर्फ लोन मिलने की संभवाना को और भी ज्यादा बढ़ाएगा, बल्कि आपको और आपके पूरे परिवार को लाखों रुपये की बचत से भी बचा सकेगा.&amp;nbsp;
टैक्स बेनिफिट्स का मिलेगा बड़ा फायदा&amp;nbsp;
आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत मूलधन (Principal) के भुगतान पर 1.5 लाख रुपये और धारा 24(b) के तहत ब्याज (Interest) के भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की आपको बड़ी छूट मिल सकती है. लेकिन, इस बात का खास ध्यान रखें कि अगर आप और आपकी मां दोनों सह-उधारकर्ता (Co-borrowers) हैं और दोनों की आय का स्रोत है, तो आप दोनों अलग-अलग इन छूटों को बिना किसी परेशानी के तहत सही दावा भी कर सकते हैं. जिसका सीधा-सीधा यह मतलब है कि एक ही परिवार के रूप में आप कुल 7 लाख तक की टैक्स कटौती का जमकर फायदा उठा सकते हैं.&amp;nbsp;
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कम ब्याज दर की बढ़ेगी ज्यादा संभावना
जानकारी के मुताबिक, हमारे देश की कई ऐसे बैंक है जो वित्तीय संस्थान महिला कर्जदारों के लिए ब्याज दरों में 0.05 प्रतिशत से &amp;nbsp;0.10 प्रतिशत की खास छूट देते हैं. लेकिन, 30 साल लंबे होम लोन की अवधि की वजह से यह आपकी ही ईएमआई (EMI) और कुल ब्याज भुगतान में लाखों रुपये की बचत करने का काम करता है, जिससे कम ब्याज दर की संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
क्या लोन एलिजिबिलिटी में भी होती है वृद्धि?&amp;nbsp;
बात करें, लोन एलिजिबिलिटी के बारे में तो, अगर आपकी आय लोन राशि के लिए उतनी नहीं, जितनी होनी चाहिए तो आपकी मां की आय को जोड़ने से आपकी कुल लोन एलिजिबिलिटी (Loan Eligibility) बेहद ही आसानी से बढ़ सकती है. दरअसल, बैंक दोनों की आय के आधार पर ज्यादा लोन की राशि को मंजूर करेगा, जिससे आप अपनी पसंद का एक शानदार घर खरीदने के सपने को पूरा कर सकेंगे.&amp;nbsp;
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भावनात्मक और वित्तीय सुरक्षा का रखें ध्यान
मां को सह-मालिक या फिर सह-आवेदक बनाने से उन्हें वित्तीय सुरक्षा और संपत्ति में कानूनी अधिकार पूरी तरह से मिल सकता है. दरअसल, &amp;nbsp;यह न सिर्फ परिवार के भविष्य को पूरी तरह से सुरक्षित करता है, बल्कि संपत्ति के उत्तराधिकार की प्रक्रिया को भी सरल बनाने में बेहद ही मदद करता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Home, Loan, EMI:, होम, लोन, में, मां, को, बनाएं, को-एप्लिकेंट, और, बचाएं, लाखों, का, टैक्स, जानें, इस, स्मार्ट, निवेश, के, बड़े, फायदे</media:keywords>
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        <title>किसी को गिफ्ट में दिया चेक और हो गया बाउंस तब क्या होगा, क्या आप पर हो सकता है केस? जानिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/किसी-को-गिफ्ट-में-दिया-चेक-और-हो-गया-बाउंस-तब-क्या-होगा-क्या-आप-पर-हो-सकता-है-केस-जानिए</link>
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        <description><![CDATA[ Cheque Bounce: अगर आपने किसी को गिफ्ट में चेक दिया हो और वह बाउंस हो जाए तो क्या आपके खिलाफ केस हो सकता है. यह सवाल अक्सर लोगों के मान में आता है. अक्सर लोगों को लगता है कि चेक बाउंस होते ही सीधे केस दर्ज हो जाता है, लेकिन कानून ऐसा नहीं कहता. क्योंकि अगर चेक सिर्फ गिफ्ट या फिर मदद के तौर पर दिया गया है तो इस मामले में स्थिति बदल जाती है.
नेगोशिएबल इंस्टुमेंट एक्ट की धारा 138 तभी लागू होती है जब चेक किसी देनदारी या फिर लोन को चुकाने के लिए दिया गया हो. लेकिन जरूरी बात यह है कि ऐसे मामलों में कोर्ट को साबित करना पड़ सकता है कि चेक किसी लोन के लिए नहीं दिया गया था.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - हाइवे पर सफर करने वाले ध्यान दें: ब्लैकलिस्ट हो सकता आपका FASTag, NHAI ने नियमों में लाई सख्ती
क्या गिफ्ट में दिया चेक बाउंस होने पर केस हो सकता है?
अगर इसकी बात करें तो इसका सीधा जवाब होगा नहीं. अगर आपने किसी को शादी, त्योहार, दान या फिर किसी पर्सनल मदद के लिए चेक दिया है और वो बाउंस हो जाता है तो आमतौर पर धारा 138 के तहत आपराधिक मामला नहीं बनता.
क्योंकि कानून कहता है
चेक किसी कानूनी लोन के लिए होना चाहिए.गिफ्ट को कानूनी देनदारी नहीं माना जाता है.इसलिए ही हर गिफ्ट चेक बाउंस केस नहीं बनता है.
जानिए कब-कब आए ऐसे मामले
साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट में विजय बनाम लक्ष्मण का केस सामने आया था. इस केस में शिकायतकर्ता विजय ने दावा किया कि उसने लक्ष्मण (आरोपी) को 1 लाख 15 हजार का पर्सनल लोन दिया था. लक्ष्मण ने इस लोन को चुकाने के लिए एक चेक दिया, जो बैंक में डालने पर पैसे की कमी की वजह से बाउंस हो गया. लक्ष्मण ने कहा कि उसने कोई लोन नहीं लिया था. उसने यह चेक सिर्फ सिक्योरिटी के तौर पर विजय के पिता को दिया था, क्योंकि वह वहां दूध सप्लाई करता था.&amp;nbsp;
कार्ट का फैसला क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि विजय यह साबित नहीं कर पाया कि उसने लोन कब और कैसे दिया था. जिस पर कोर्ट ने कहा कि चेक हाथ में होने से यह साबित नहीं होता कि लोन कानूनी रूप से सही है, जिसके बाद कोर्ट ने लक्ष्मण को बरी कर दिया और विजय की शिकायत खारिज कर दी.
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में आया था ऐसा ही मामला
ऐसा ही एक ओर केस आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में आया बी कृष्णा रेड्डी बनाम एम.चंद्रशेखर का मामला आया था. इस केस में भी शिकायतकर्ता लोन साबित नहीं कर पाया. जिसके बाद कोर्ट ने साफ कहा कि अगर चेक गिफ्ट या फिर किसी पर्सनल मदद के तौर पर दिया है तो इसे चेक बाउंस अपराध नहीं माना जा सकता.
धारा 139 के तहत कोर्ट शुरुआत में मानकर चलता है कि चेक किसी देनदारी के लिए दिया गया था. ऐसे में आपको साबित करना पड़ सकता है जैसे...

चेक गिफ्ट के तौर पर दिया गया था.
कोई लोन नहीं था.
और साथ ही सामने वाले का दावा गलत था.

यह भी पढ़ें - 40 मिनट में तय होगा गुरुग्राम से नोएडा का सफर, 15 हजार करोड़ के RRTS प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
खुद को कैसे बचाएं?

चेक देने से पहले उस पर कारण लिखे जैसे शादी का गिफ्ट या फिर त्योहार का गिफ्ट
गिफ्ट लेटर रखें जैसे बड़ी कम हो तो लिखित नोट जरूर दें.
इसका रिकॉर्ड संभालकर रखें जैसे मैसेज, चेट या फिर लेटर सबूत बन सकते हैं.

 ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>किसी, को, गिफ्ट, में, दिया, चेक, और, हो, गया, बाउंस, तब, क्या, होगा, क्या, आप, पर, हो, सकता, है, केस, जानिए</media:keywords>
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        <title>बड़ी खबर: PM नरेंद्र मोदी ने की सोने के गहने नहीं खरीदने की अपील, बोले&amp; हमारी देशभक्ति... देखें Video</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बड़ी-खबर-pm-नरेंद्र-मोदी-ने-की-सोने-के-गहने-नहीं-खरीदने-की-अपील-बोले-हमारी-देशभक्ति-देखें-video</guid>
        <description><![CDATA[ PM Modi on Gold Jewellery Video: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से बहुत बड़ी अपील की है. पीएम मोदी ने जनता से एक साल तक सोने के गहने नहीं खरीदने की अपील की है. पीएम मोदी ने कहा है कि देश हित में हमको यह तय करना पड़ेगा कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे.
पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए कहा, &#039;&#039;एक जमाना था जब संकट आता था, कोई युद्ध होता था तो लोग देश हित में सोना दान दे देते थे. आज दान की जरूरत नहीं है. लेकिन देश हित में हमको यह तय करना पड़ेगा कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे. विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा.&#039;&#039;
भारत को आत्मनिर्भर बनाना होगा- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा, &#039;&#039;एक समय था जब हम कॉपर एक्सपोर्ट करते थे, लेकिन आज भारत के सामने स्थिति ऐसी बन गई कि अब हमें कॉपर को भी इंपोर्ट करना पड़ता है. हमारे देश में हड़तालें करवाकर कॉपर प्लांट्स को ठप करवा दिया गया और अब हालत यह हो गई कि हमें कॉपर बार से मंगाना पड़ता है और उसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है, इसलिए मैं ऐसे सभी श्रमिक समूह मजदूर संगठनों से भी कहूंगा कि हमें ऐसी बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए. भारत को आत्मनिर्भर बनने से जो भी कदम रोकते हैं, उनमें हमें दूरी बनानी होगी.&#039;&#039;



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फिर बदले सोना-चांदी के दाम, खरीदने से पहले देखें आपके शहर में क्या है कीम
बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, &#039;&#039;जो लोग ऐसी साजिशों में जुटे हैं उन पर भी कड़ी नजर रखनी होगी. मैं देश की अदालतों से भी आग्रह करूंगा कि ऐसी स्थिति आने पर देश हित में हमें कोई ना कोई रास्ता निकालने की तरफ बढ़ना चाहिए. साथियों ऐसे ही खाने के तेल का भी है. इसके आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है. हर परिवार अगर खाने के तेल में खाने का तेल का जो उपयोग करता है अगर वह कुछ कमी करें मैंने बार-बार कहा है 10% कम करो. अगर हम तेल खाना कम करें ना तो भी वह देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है. आप देश सेवा में योगदान दे सकते हैं और इससे देश सेवा भी होगी और देह सेवा भी होगी. इससे देश के खजाने का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार के हर सदस्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा.&#039;&#039;
केमिकल फर्टिलाइजर खेती से धरती मां को हो रही पीड़ा- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा, &#039;&#039;साथियों विदेशी मुद्रा की खपत वाला एक और सेक्टर हमारी खेती है. हम बहुत बड़ी मात्रा में बाहर से केमिकल फर्टिलाइजर इंपोर्ट करते हैं. केमिकल फर्टिलाइजर खेती के कारण हमारी धरती मां को बहुत पीड़ा हो रही है. हमारे खेत बर्बाद हो रहे हैं. अगर आज हम अपने खेत को नहीं बचाएंगे तो भविष्य में फसलों पर भी खतरा आ जाएगा. इसलिए बहुत जरूरी है कि हम केमिकल फर्टिलाइजर की खपत 25%, 30%, 40%, 50%, उसको घटाएं और आधी कर दें और हम इस उसके साथ-साथ नेचुरल फार्मिंग की तरफ बढ़े. हम फर्टिलाइजर का उपयोग कम करके विदेशी मुद्रा भी बचा सकते हैं और साथ-साथ अपने खेत को बचा सकते हैं. हमारी ये धरती मां को बचा सकते हैं और यह हमें करना ही होगा.&#039;&#039;
लेबर कोड का नया दौर शुरू, आज से लागू हुए 4 नए नियम, जानें आपकी सैलरी-छुट्टियों पर क्या होगा असर ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बड़ी, खबर:, नरेंद्र, मोदी, ने, की, सोने, के, गहने, नहीं, खरीदने, की, अपील, बोले-, हमारी, देशभक्ति..., देखें, Video</media:keywords>
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        <title>PM Modi on Cooking Oil: पीएम मोदी ने की खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने की अपील, बोले&amp; आप देश सेवा में...</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-modi-on-cooking-oil-पीएम-मोदी-ने-की-खाने-के-तेल-का-इस्तेमाल-कम-करने-की-अपील-बोले-आप-देश-सेवा-में</link>
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        <description><![CDATA[ PM Modi on Cooking Oil News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश की जनता से खाने के तेल यानी कुकिंग ऑयल के इस्तेमाल को कम करने की अपील की है. पीएम मोदी ने कहा है कि खाने के तेल के आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है.
पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा, &#039;&#039;साथियों अब एक साल तक सोने के गहने न खरीदें, ऐसे ही खाने के तेल का भी है. इसके आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है. हर परिवार अगर खाने के तेल में खाने का तेल का जो उपयोग करता है, अगर वह कुछ कमी करें तो भी वह देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है.&#039;&#039;
खान के तेल का इस्तेमाल 10 फीसदी कम कर दो- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा, &#039;&#039;मैंने बार-बार कहा है कि खान के तेल का इस्तेमाल 10 फीसदी कम कर दो. अगर हम तेल खाना कम करें तो&amp;nbsp; आप देश सेवा में योगदान दे सकते हैं और इससे देश सेवा भी होगी और देह सेवा भी होगी.&#039;&#039; उन्होंने कहा कि इससे देश के खजाने का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार के हर सदस्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा.&#039;&#039;
बड़ी खबर: PM नरेंद्र मोदी ने की सोने के गहने नहीं खरीदने की अपील, बोले- हमारी देशभक्ति... देखें Video
पीएम मोदी ने कहा कि आज वैश्विक संकटों से जो चुनौतियां आई है, हमें उन चुनौतियों को परास करना होगा. भारत सरकार खेतों में डीजल पंप की जगह सोलर पंप की योजना चला रही है. हम खेतों में डीजल पंप की जगह सोलर पंप का उपयोग करने का जोर देना होगा. मैं कोविड काल में भी आग्रह करता था कि हम स्थानीय चीजें खरीदें. वोकल फॉर लोकल के मंत्र को लेकर चले. हम मेड इन इंडिया चीजें खरीद कर भी विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं और हमारे देश में स्थानीय उत्पादन की कोई कमी नहीं है. चाहे जूते हो, पर्थ हो, बैग हो, हमें स्वदेशी पर बल देना चाहिए.
 नए विदेशी प्रोडक्ट हमें नहीं खरीदने चाहिए- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने साफ किया, &#039;&#039;मैं यह नहीं कह रहा कि जो आपके पास विदेशी चीजें खरीदी हुई है, विदेशी ब्रांड की है, उनको जाकर के फेंक दो. ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं. लेकिन मेरा आग्रह है कि नए विदेशी प्रोडक्ट हमें नहीं खरीदने चाहिए.&#039;&#039;
फिर बदले सोना-चांदी के दाम, खरीदने से पहले देखें आपके शहर में क्या है कीम ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Richest Family: दिल्ली का सबसे अमीर परिवार कौन? 5.70 लाख करोड़ की नेटवर्थ के साथ है दबदबा, बढ़ा लें अपनी नॉलेज</title>
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        <description><![CDATA[ Richest Family in Delhi: आज के टाइम में हर व्यक्ति अमीर बनने के सपना देखता है, जिसके लिए दिन-रात मेहनत करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं देश की राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा अमीर परिवार कौन है? अगर नहीं तो आज हम बताएंगे कि कौन है वो परिवार जो दिल वालों की दिल्ली में सबसे अमीर माना जाता है.&amp;nbsp;
दिल्ली-एनसीआर के सबसे अमीर परिवारों में पहले नंबर पर सुनील भारती मित्तल और उनका परिवार माना जाता है. इस परिवार की टोटल नेटवर्थ जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इनकी टोटल नेटवर्थ 5,70,312 करोड़ बताई गई है, जो उन्हें देश के सबसे बड़े बिजनेस घरानों में शामिल करती है. अगर इनके बिजनेस की बात करें तो सुनील भारती मित्तल ने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर भारती एयरटेल को भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक बनाया है.
यह भी पढ़ें - 1 करोड़ वाली नौकरी छोड़कर साफ-सफाई का काम करने लगी मुंबई की महिला, क्यों चुना ऐसा करियर? खुद बताया
छोटे बिजनेस से शुरू हुआ बड़ा सफर
सुनील मित्तल ने साल 1976 में एक छोटे से बिजनेस से अपनी शुरुआत की थी. उस समय शायद ही किसी ने यह सोचा होगा कि ये बिजनेस आगे चलकर एक ग्लोबल टेलीकॉम कंपनी का रूप ले लेगा. लेकिन इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत है. सबसे खास बात तो यह है कि आज भारती एयरटेल दुनिया की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में गिनी जाती है.
600 मिलियन से ज्यादा है ग्राहक

भारती एयरटेल आज भारत में मजबूत नेटवर्क रखती है.
साथ ही अफ्रीका समेत कई देशों में मौजूद है.
ये कंपनी 600 मिलियन से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रही है.
ये कंपनी मोबाइल नेटवर्क, ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाएं में बड़ी पहचान बना चुकी है.

सिर्फ टेलीकॉम तक सीमित नहीं&amp;nbsp;
इस परिवार ने टेलीकॉम के अलावा कई दूसरे क्षेत्रों में भी इन्वेस्ट किया है जैसे...

डिजिटल टेक्नोलॉजी
ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर
सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट्स
OneWeb जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स

इससे परिवार का बिजनेस लगातार बढ़ता जा रहा है.
न कार-न सोना, ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी की कितनी है नेटवर्थ, बनेंगे बंगाल के CM
नई पीढ़ी संभाल रही है जिम्मेदारी
बता दें कि सुनील मित्तल के बेटे श्राविन मित्तल अब परिवार के ग्लोबल बिजनेस विस्तार में अहम भूमिका निभा रहे हैं. वह भारती ग्लोबल के जरिए कंपनी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार का नेतृत्व कर रहे हैं.
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 11:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cheapest Shoes: दिल्ली में यहां मिलते हैं सबसे सस्ते जूते, एक नहीं 14 बाजारों की है लिस्ट, ब्रांडेड भी मिलेंगे</title>
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        <description><![CDATA[ Cheapest Shoes in Delhi Markets: जूते खरीदने हैं लेकिन आपका बजट कम है तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. दिल्ली में कई ऐसे बाजार हैं, जहां कम कीमत में अच्छे और स्टाइलिश जूते-चप्पल आसानी से मिल जाते हैं. सबसे खास बात तो यह है कि चाहे आपको एथनिक फुटवियर चाहिए, स्पोर्ट्स शूज, फर्स्ट कॉपी स्नीकर्स या ब्रांडेड आउटलेट्स सब कुछ बजट में मिलेगा. अब जानते हैं दिल्ली के कुछ बेहतरीन फुटवियर मार्केट्स के बारे में. इस लिस्ट में एक नहीं, बल्कि 14 मार्केट शामिल है.
1. Janpath Market
अगर आपको जूतियां, कोल्हापुरी और एथनिक फुटवियर ज्यादा पसंद है तो जनपथ मार्केट आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है.&amp;nbsp;

यहां आपको सिल्प-ऑन सैंडल
लेदर फुटवियर
एथनिक जूतियां काफी कम दाम में मिल जाएगी.
इसकी कीमत 100 रुपये से शुरू होती है.
नजदीकी मेट्रो- Delhi Metro राजीव चौक
समय- 11 AM &amp;ndash; 9 PM

2. Majnu Ka Tila
वहीं अगर आपको ट्रेंडी स्नीकर्स पसंद हैं तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है.

यहां आपको मिलेंगे सफेद स्नीकर्स
फर्स्ट कॉपी फुटवियर
बूट्स और हील्स
कीमत- 850 रुपये से शुरू होती है.
नजदीकी मेट्रो- विधान सभा

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3. Karol Bagh
यह मार्केट सिर्फ शादी की शॉपिंग के लिए फेमस नहीं है, बल्कि फुटवियर के लिए भी काफी फेमस है.

यहां आपको जूतियां
कोल्हापुरी
फॉर्मल शूज़
महिलाओं के सैंडल मिलेंगे.
कीमत- 400 रुपये से शुरू होगी.

4. Chor Bazaar
ये दिल्ली सबसे फेमस मार्केट है. अगर आपको कम दाम में ब्रांडेड लुक वाले जूते चाहिए तो यह मार्केट आपके लिए बेस्ट है.

यहां आपको मिलेंगे Woodland
Clarks
Steve Madden
Zara जैसे ब्रांड्स के जूते बेहद कम कीमत पर.
कीमत- 500 रुपये से शुरू
लेकिन ध्यान रहे ये मार्केट केवल रविवार को खुलता है.

5. Paharganj Market
पहाड़गंज मार्केट लेदर फुटवेयर के लिए फेमस है.

यहां मिलती है पंजाबी जूतियां
कोल्हापुरी
लेदर सैंडल
कस्टमाइज्ड फुटवियर
कीमत- 300 रुपये से शुरू

6. Sarojini Nagar Market
ये मार्केट लड़कियों के बीच काफी चर्चित है. अगर आपको स्टाइलिश और ट्रेंडी फुटवियर चाहिए तो यहां जरूर जाएं.

यहां मिलते हैं बूट्स
बैलेरीना
वेजेज
स्नीकर्स
कीमत- 300 रुपये से शुरू होगी.

7. Sadar Bazaar

सर्दियों के बूट्स और सिंपल फुटवियर के लिए अच्छा ऑप्शन.
कीमत- 1000 रुपये से शुरू

8. Mahipalpur फैक्ट्री आउटलेट्स
अगर ब्रांडेड जूते सस्ते में खरीदने हैं तो यहां जाएं.

यहां मिलते हैं Adidas
Nike
Puma
Reebok
MRP से 30-40 प्रतिशत कम में.

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9. Palika Bazaar
ये मार्केट कम बजट में स्नीकर्स और कैजुअल शूज के लिए बेस्ट है.

कीमत- 300 रुपये से शुरू होगी.
यहां मोलभाव जरूर करें.

10. Rajouri Garden

यहां आपको मिलेंगे फ्लैट्स
हील्स
फॉर्मल शूज़
ट्रेंडी फुटवियर
कीमत- 300 रुपये से शुरू

11. Humayunpur
अगर chunky sneakers पसंद हैं तो यह जगह आपके लिए है.

यहां फर्स्ट कॉपी स्नीकर्स काफी मशहूर हैं.
कीमत- 1000 रुपये से शुरू होगी.

12. Monastery Market

स्पोर्ट्स शूज़ के लिए बढ़िया जगह है.
कीमत- 500 रुपये से शुरू होगी.

13. Kolhapur Road
कमला नगर का यह मार्केट सस्ते जूते-चप्पलों के लिए जाना जाता है.

यहां आपको मिलेगी हील्स
जूतियां
बैलेरीना
कीमत- 500 रुपये से शुरू होगी.

14. South Extension
वहीं अगर आपको थोड़ी प्रीमियम शॉपिंग करनी पसंद है तो आप यहां जा सकते हैं. यहां आपको मिलेंगे

Bata
Crocs
Metro Shoes
कीमत- 1200 रुपये से शुरू होगी.

शॉपिंग करते समय ध्यान रखें जरूरी बातें

सबसे पहले मोलभाव करें.
जूतों को पहने बिना न खरीदे.
जूते की क्वालिटी जरूर चेक करें.
भीड़ वाले दिन सुबह के समय जाएं.

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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cheapest, Shoes:, दिल्ली, में, यहां, मिलते, हैं, सबसे, सस्ते, जूते, एक, नहीं, बाजारों, की, है, लिस्ट, ब्रांडेड, भी, मिलेंगे</media:keywords>
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        <title>Petrol&amp;Diesel: 30 हजार करोड़ का नुकसान, इस तारीख से पहले बढ़ सकते हैं पेट्रोल&amp;डीजल के दाम, वजह क्या?</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price: अगर आप भी अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की दामों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. पिछले लगभग 4 सालों से स्थिर चल रही कीमतों में अब एक बड़ा बदलाव आने की पूरी संभावना है.&amp;nbsp;
बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि 15 मई से पहले देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. सबसे बड़ी वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में आया भारी उछाल. कुछ समय पहले तक जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है.&amp;nbsp;
सूत्रों का कहना है कि महंगे क्रूड ऑयल और होर्मुज संकट की वजह से सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसका खामियाजा देश की सरकारी तेल कंपनियों यानी OMCs (Indian Oil, BPCL, HPCL) को भुगतना पड़ा रहा है. इन कंपनियों को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है. कंपनियां अभी पेट्रोल पर करीब 24 रुपए और डीजल पर करीब 30 रुपए प्रति लीटर का बोझ खुद उठा रही हैं, जिसे &#039;अंडर-रिकवरी&#039; कहा जाता है.
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आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा?&amp;nbsp;
रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है. सिर्फ इतना ही नहीं घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में भी 40 से 50 रुपए का इजाफा देखा जा सकता है. याद रहे कि 2022 के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन अब तेल कंपनियों के लिए इस बढ़ते वित्तीय बोझ को और ज्यादा सहना मुश्किल हो गया है.
दुनिया के कई देशों में ईंधन का संकट गहराया हुआ है. अमेरिका में भी पेट्रोल के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई है. इधर बांग्लादेश में राशनिंग हो रही है तो पड़ोसी देश पाकिस्तान और श्रीलंका में काम के दिन घटा दिए गए हैं. तुलनात्मक रूप से भारत ने अब तक स्थिति को काफी बेहतर तरीके से संभाला है.
होर्मुज की वजह से बढ़ रहा है दबाव
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की और रूस, अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका जैसे नए देशों से कच्चा तेल आयात कर सप्लाई को सुचारू रखा. यहां तक कि हमारी रिफाइनरियां अपनी क्षमता से 100 प्रतिशत ज्यादा पर काम कर रही हैं. लेकिन वैश्विक स्तर पर हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण सप्लाई रूट बाधित होने से दबाव बढ़ता ही जा रहा है.
हर साल 1.5 लाख रुपए का निवेश 15 साल में आपको कितना बना देगा अमीर? समझें कैलकुलेशन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel:, हजार, करोड़, का, नुकसान, इस, तारीख, से, पहले, बढ़, सकते, हैं, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, वजह, क्या</media:keywords>
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        <title>Investment Tips: SIP के अलावा इन 7 स्मार्ट ऑप्शंस में लगाएं पैसा, बिना काम किए हर महीने आएगी सैलरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/investment-tips-sip-के-अलावा-इन-7-स्मार्ट-ऑप्शंस-में-लगाएं-पैसा-बिना-काम-किए-हर-महीने-आएगी-सैलरी</link>
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        <description><![CDATA[ Smart Investment Options: आपमें से कई लोग अपने पैसे को निवेश करने के बारे में सोचते जरूर होंगे. या इस बात को लेकर ज्यादातर लोगों के दिमाग में यह सवाल आते हैं कि आखिर वह अपनी कमाई कौन सी सुरक्षित जगह में निवेश करें ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े. तो आइए इस खबर में जानते हैं कि किन सात स्मार्ट ऑप्शंस में आप अपने पैसों को लगा सकते हैं, ताकि बिना काम किए भी हर महीने आपकी सैलरी बेहद ही आसानी से आ सके.&amp;nbsp;
1. म्यूचुअल फंड SWP (Mutual Fund SWP)&amp;nbsp;
&amp;nbsp;यह निवेश निकालने का एक बेहद ही आसान तरीका है, जहां आप इसमें अपनी महनत की कमाई से एक निश्चित राशि हर महीने बेहद ही आसानी से निकाल सकते हैं. इसके अलावा म्यूचुअल फंड SWP की एक खासियत यह है कि आपका बाकी पैसा निवेश होकर लगातार बढ़ता रहता है.&amp;nbsp;
2. पोस्ट ऑफिस MIS (Post Office MIS)
यह खासतौर से उन लोगों के लिए बेहद ही बेहतरीन विकल्प है जो अपने निवेश से किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं. इतना ही नहीं, इसमें न सिर्फ आपकी जमा पूंजी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी बल्कि केंद्र सरकार हर महीने तय ब्याज आपके खात में आसानी से जमा भी करती रहेगी.&amp;nbsp;
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3. डिविडेंड स्टॉक्स (Dividend Stocks)
आपमें से बेहद ही कम लोगों को डिविडेंड स्टॉक्स के बारे में सही जानकारी होगी. दरअसल, डिविडेंड स्टॉक्स वे कंपनियां होती है, जहां लोग अपने फायदे का एक हिस्सा नियमित रूप से शेयरधारकों को नकदी के रूप में दी जाती है. इसके अलावा, ज्यादा डिविडेंड स्टॉक्स की कंपनियां स्थिर कंपनियों की श्रेणी में आती हैं. इसके अलावा आप किसी बड़ी कंपनियों के शेयर को खरीदकर उनके मुनाफे का एक बेहतरीन हिस्सा भी बन सकते हैं.&amp;nbsp;
4. कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (Corporate Bonds)&amp;nbsp;
कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश करते समय आप किसी निजी कंपनियों को पैसा उधार के रूप में देते हैं. दरइअसल, इसमें निवेश के दौरान यह आपको बैंक या फिर किसी FD से ज्यादा की मात्रा में अधिक ब्याज देते हैं. हांलाकि, इसमें निवेश करते समय इस बात का खास रूप से ध्यान रखें कि कंपनी की साख यानी (Credit Rating) की जांच के बारे में जानना बेहद ही अनिवार्य होता है.&amp;nbsp;
5. सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (Senior Citizen Saving Scheme)&amp;nbsp;
इस स्कीम को खास तौर से बुजुर्गों के लिए बनाया गया है. जहां, तिमाही आधार यानी (Quarterly Basis) पर ही ब्याज भुगतान न सिर्फ किया जाता है बल्कि इसमें निवेश के दौरान बुजुर्गों को टैक्स में भी पूरी तरह से छूट दी जाती है. बुजुर्ग इस स्कीम को सबसे ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं.&amp;nbsp;
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6. REITs
REITs एक तरह से रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए किसी बेहतरीन विकल्प से कम नहीं है. इसमें आप मॉल या ऑफिस स्पेस के मालिक बने बिना ही किराए से होने वाली कमाई में अपना आधा हिस्सा बेहद ही आसानी से पा सकते हैं.&amp;nbsp;
7. मासिक ब्याज FD (Monthly Intrestes FD)
आपमें से बेहद ही कम लोगों को मासिक ब्याज एफडी के बारे में जानकारी होगी. दरअसल, यह खासतौर से उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो अपनी राशि पर नियमित रूप से किसी तरह का मासिक आय चाहते हैं. इसके अलावा इस साल 2026 में प्रमुख बैंक और NBFCs लगभग 6.5 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत हर साल तक की ब्याज दर देने का काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, आप बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करते समय &#039;मंथली पेआउट&#039; विकल्प को चुनकर इस बचत को पेंशन की तरह भी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 19:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Investment, Tips:, SIP, के, अलावा, इन, स्मार्ट, ऑप्शंस, में, लगाएं, पैसा, बिना, काम, किए, हर, महीने, आएगी, सैलरी</media:keywords>
    </item>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में उबाल, अब भारत में क्या है पेट्रोल&amp;डीजल का दाम, जानें अपने शहर का हाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-अंतरराष्ट्रीय-बाजार-में-उबाल-अब-भारत-में-क्या-है-पेट्रोल-डीजल-का-दाम-जानें-अपने-शहर-का-हाल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-अंतरराष्ट्रीय-बाजार-में-उबाल-अब-भारत-में-क्या-है-पेट्रोल-डीजल-का-दाम-जानें-अपने-शहर-का-हाल</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today: शनिवार यानी आज 9 मई को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है. सरकार ने घरेलू यूजर्स को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के असर से बचाने के लिए कीमतों को स्थिर रखा है. वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर में कच्चे तेल Crude Oil की सप्लाई चेन में रुकावट और युद्ध जैसी स्थिति के चलते ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है.
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल
हाल ही में शुक्रवार को अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच झड़पों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेज बाजार में हलचल बढ़ गई है.

ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 2.9% की बढ़ोतरी हुई.
कीमत बढ़कर करीब $103 प्रति बैरल तक पहुंच गई.
बाद में इसमें थोड़ी गिरावट भी दर्ज की गई.

यह भी पढ़ें - Investment Tips: SIP के अलावा इन 7 स्मार्ट ऑप्शंस में लगाएं पैसा, बिना काम किए हर महीने आएगी सैलरी
10 हफ्तों से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों पर भी इसका असर पड़ा है.
भारत में पेट्रोल की कीमतें (₹/लीटर)&amp;nbsp;

नई दिल्ली -94.77
कोलकाता -105.41
मुंबई- 103.54
चेन्नई - 100.84
गुड़गांव -95.51
नोएडा-95.48
बेंगलुरु -102.92
भुवनेश्वर -101.16
चंडीगढ़ -94.30
हैदराबाद- 107.50
जयपुर- 104.91
लखनऊ- 94.69
पटना - 105.23
तिरुवनंतपुरम -107.48&amp;nbsp;

जानिए डीजल की कीमत कितनी है?(₹/लीटर)&amp;nbsp;

नई दिल्ली - 87.67
कोलकाता - 92.02
मुंबई - 90.03
चेन्नई&amp;nbsp; - 92.39
गुड़गांव- 87.94
नोएडा -88.01
बेंगलुरु- 90.99
भुवनेश्वर -92.74
चंडीगढ़ -82.45
हैदराबाद -95.70
जयपुर -90.38
लखनऊ -87.81
पटना - 91.49
तिरुवनंतपुरम -96.48

कच्चे तेल की कीमतों का असर क्यों बढ़ रहा है?
मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है.

युद्ध से पहले कीमत: लगभग $73 प्रति बैरल
30 अप्रैल को बढ़कर: $126 प्रति बैरल (4 साल का उच्चतम स्तर)
6 मई को गिरकर: $97.77 प्रति बैरल

महंगाई (Inflation) पर असर &amp;nbsp;WPI बनाम CPI
एक्सपर्टेस के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों का असर ज्यादा होगा.
सबसे जरूरी बातें&amp;nbsp;
WPI (Wholesale Price Index) पर असर ज्यादा होगा.CPI (Consumer Price Index) पर असर कम रहेगा.
क्यों होगा?

सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल और घरेलू LPG की कीमतें स्थिर रखी हैं.
इसलिए आम यूजर्स पर तुरंत बड़ा असर नहीं दिख रहा.

सरकार की रणनीति 

अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं.
घरेलू LPG पर भी ज्यादा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया.
सिर्फ कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.

 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price, Today:, अंतरराष्ट्रीय, बाजार, में, उबाल, अब, भारत, में, क्या, है, पेट्रोल-डीजल, का, दाम, जानें, अपने, शहर, का, हाल</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Rate Today: सोने की तेजी पर लगा ब्रेक, लेकिन चमकी चांदी, जानें दिल्ली&amp;मुंबई समेत बड़े शहरों में दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-today-सोने-की-तेजी-पर-लगा-ब्रेक-लेकिन-चमकी-चांदी-जानें-दिल्ली-मुंबई-समेत-बड़े-शहरों-में-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today: देश के ज्यादातर शहरों में सोन की कीमतों में तेजी पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. शनिवार 9 मई यानी आज सुबह दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में सोने के दाम हल्के नरम हुए देखे गए हैं, जबकि वहीं चेन्नई में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
अगर बात करें राजधानी दिल्ली की तो 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,870 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है. वहीं मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,52,670 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है. दिल्ली के सर्राफा बाजार में एक दिन पहले यानी शुक्रवार को सोने की कीमत 100 रुपये गिरकर 1,55,900 प्रति 10 ग्राम हो गई थी.
जानें अंतरराष्ट्रीय बाजार के हाल?
वैश्विक बाजार की बात करें तो हाजिर सोना फिलहाल 4,721 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल रहा है.
देश के बड़े शहरों में सोने के ताजा रेट क्या है?
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;शहर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 22 कैरेट&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;24 कैरेट

दिल्ली&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,40,090&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,870
मुंबई &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,39,940&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,52,670
अहमदाबाद 1,39,940&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,720
चेन्नई &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,41,030&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,53,850
कोलकाता&amp;nbsp; &amp;nbsp;1,39,940&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,52,670
हैदराबाद&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,39,940&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,670
जयपुर&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,40,090&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,870
भोपाल&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,39,940&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,720
लखनऊ&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,40,090&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,870
चंडीगढ़&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 1,40,090&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;1,52,870&amp;nbsp;

चांदी की कीमतों में लगातार तेजी
सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है. 9 मई की सुबह चांदी का भाव बढ़कर 2,75,100 प्रति किलोग्राम पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 81.14 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है.
एक दिन पहले क्या था हाल?
दिल्ली के सर्राफा बाजार में एक दिन पहले चांदी की कीमत 200 रुपये गिरकर ₹2,61,300 प्रति किलोग्राम रह गई थी. हालांकि, अब फिर इसमें तेजी देखने को मिल रही है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Rate, Today:, सोने, की, तेजी, पर, लगा, ब्रेक, लेकिन, चमकी, चांदी, जानें, दिल्ली-मुंबई, समेत, बड़े, शहरों, में, दाम</media:keywords>
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    <item>
        <title>Roopa Ganguly: महाभारत में द्रौपदी बनीं रूपा गांगुली ने पहनी थी 250 मीटर लंबी साड़ी, तब क्या थी कीमत? इस कंपनी ने बनाई थी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/roopa-ganguly-महाभारत-में-द्रौपदी-बनीं-रूपा-गांगुली-ने-पहनी-थी-250-मीटर-लंबी-साड़ी-तब-क्या-थी-कीमत-इस-कंपनी-ने-बनाई-थी</link>
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        <description><![CDATA[ Mahabharat Drapadi Scene Fact: साल1988 में बीआर चोपड़ा द्वारा बनाई गई महाभारत तो सभी ने देखी है. आज भी इस टीवी सीरियल चर्चा होती है. महाभारत में आपने द्रौपदी चीरहरण का दृश्य भी आपने जरूर देखा होगा. ये दृश्य इतिहास के सबसे यादगार और चर्चित दृश्यों में से एक माना जाता है. बीआर चौपड़ा की इस सीरिज ने अपने समय में इतिहास रच दिया था. द्रौपदी का किरदार मशहूर अभिनेत्री रूपा गांगुली ने निभाया था, जो अब बंगाल में बीजेपी की बड़ी नेता हैं.&amp;nbsp;
कितनी लंबी साड़ी का किया था इस्तेमाल?
द्रौपदी चीरहरण के दृश्य को फिल्माने के लिए मेकर्स ने 250 मीटर लंबी एक ही कपड़े की पीली सिल्क साड़ी तैयार करवाई थी. हालांकि, द्रौपदी का किरदार निभाने वाली रूपा गांगुली ने केवल 6 मीटर की सामान्य साड़ी पहनी थी, लेकिन भगवान कृष्ण के साड़ी बढ़ाए वाले सीन को दिखाने के लिए इस लंबी साड़ी का इस्तेमाल किया गया था.
कितनी अमीर हैं रूपा गांगुली, जो बन सकती हैं बंगाल की डिप्टी सीएम? &#039;द्रौपदी&#039; से हैं मशहूर
खास ऑर्डर देकर बनवाई गई थी द्रौपदी की साड़ी
सीरियल के डायरेक्टर रवि चौपड़ा ने बताया था कि यह साड़ी उस टाइम पर ऑर्डर देकर तैयार करवाई गई थी और इस साड़ी को Binny &amp;amp; Co. ने बनाया था, जो उस दौर की मशहूर टेक्सटाइल कंपनी थी. बताया जाता है कि 1988 में एक अच्छी क्रेप सिल्क साड़ी की कीमत 450 से 750 रुपये के बीच होती थी. ऐसे में 250 मीटर लंबी इस खास साड़ी को तैयार करवाने में लगभग 34 हजार खर्च हुए थे, जो उस टाइम बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी.
इस साड़ी तो बनाने वाली कंपनी को जानें
बता दें कि बीन्नी की जड़ें साल 1799 में &#039;बिन्नी एंड कंपनी&#039; की स्थापना के साथ जुड़ी हैं, जिसे जॉन बिन्नी ने मद्रास (अब चेन्नई) में शुरू किया था. यह भारत के सबसे पुराने कपड़ा मिल समूहों में से एक था. इसकी मुख्य मिलें &#039;बकिंघम मिल&#039; और &#039;कर्नाटक मिल&#039; थीं, जिन्हें मिलाकर बाद में बकिंघम एंड कर्नाटक मिल्स के नाम से जाना गया. बीन्नी की &#039;क्रेप सिल्क&#039; साड़ियां बहुत प्रसिद्ध थीं. साल 1970 और 80 के दशक में बीन्नी सिल्क की साड़ियां शादियों और विशेष अवसरों के लिए पहली पसंद मानी जाती थीं. इनके सूती और सिंथेटिक कपड़े इतने मजबूत होते थे कि लोग मजाक में कहते थे कि बीन्नी का कपड़ा कभी फटता नहीं.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Roopa, Ganguly:, महाभारत, में, द्रौपदी, बनीं, रूपा, गांगुली, ने, पहनी, थी, 250, मीटर, लंबी, साड़ी, तब, क्या, थी, कीमत, इस, कंपनी, ने, बनाई, थी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IMF Loan to Pakistan: कंगाली पाकिस्तान को IMF ने दी $1.32 बिलियन की मदद, भारत ने सुरक्षा पर उठाए थे सवाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/imf-loan-to-pakistan-कंगाली-पाकिस्तान-को-imf-ने-दी-132-बिलियन-की-मदद-भारत-ने-सुरक्षा-पर-उठाए-थे-सवाल</link>
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        <description><![CDATA[ IMF Loan to Pakistan: अतंरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने पाकिस्तान को बड़ा राहत दी है. IMF ने पाकिस्तान के लिए लगभग 1.32 बिलियन डॉलर की नई वित्तीय सहायता मंजूर कर दी है. ये मंजूरी भारत की आपत्तियों के बावजूद दी गई है. भारत ने IMF बोर्ड की बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया था, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान को यह फंड जारी करने की मंजूरी मिल गई.&amp;nbsp;
यह मंजूरी IMF के Extended Fund Facility यानी EFF कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के आर्थिक सुधार कार्यक्रम की पहली समीक्षा पूरी होने के बाद दी गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को लगभग 1.1 बिलियन डॉलर EFF के तहत और 220 मिलियन डॉलर Resilience and Sustainability Facility के तहत मिलेंगे.&amp;nbsp;
SBI का मेगा लोन धमाका, 80000 करोड़ के कर्ज बांटेगा बैंक, 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को होगा फायदा
कुल मदद बढ़कर 4.8 बिलियन डॉलर पहुंची
बता दें कि इस नई मंजूरी के बाद IMF के इन दोनों के कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली टोटल राशि बढ़कर लगभग 4.8 बिलियन डॉलर हो जाएगी. IMF का कहना है कि पाकिस्तान ने अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और जरूरी आर्थिक सुधार लागू करने में प्रगति दिखाई है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान को मदद क्यों दी गई?
IMF के मुताबिक, पाकिस्तान ने हाल के महीनों में कई आर्थिक मोर्चों पर सुधार दिखाया है. इनमें शामिल हैं जैसे...

महंगाई दर में कमी
विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार
राजकोषीय अनुशासन बेहतर करना
आर्थिक सुधारों को लागू करना

IMF ने कहा कि गंभीर आर्थिक संकट से गुजरने के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है.
IMF ने दी सलाह
IMF ने पाकिस्तान को साफ कहा है कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उसे लगातार सुधार जारी रखने होंगे. इसमें शामिल हैं...

टैक्स कलेक्शन बढ़ाना
ऊर्जा क्षेत्र के नुकसान कम करना
सख्त मौद्रिक नीतियां बनाए रखना
महंगाई पर नियंत्रण रखना

भारत ने जताई थी आपत्ति
भारत ने IMF बोर्ड में पाकिस्तान को बार-बार वित्तीय मदद दिए जाने पर चिंता जताई थी. भारत का कहना था कि इस फंडिंग का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. हालांकि, IMF बोर्ड ने इन आपत्तियों के बाद भी समीक्षा के मंजूरी दे दी.
Pakistan LPG: पाकिस्तान में गुब्बारों में गैस भरकर खाना बना रहे लोग, वहां अब कितनी है LPG सिलेंडर की कीमत?
पाकिस्तान ने फैसले का किया स्वागत
पाकिस्तान सरकार ने IMF के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी साथ ही आर्थिक सुधारों को रफ्तार मिलेगी और इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ेगा. इसके साथ ही पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह IMF के तय सुधारों को आगे भी लागू करता रहेगा.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IMF, Loan, Pakistan:, कंगाली, पाकिस्तान, को, IMF, ने, दी, 1.32, बिलियन, की, मदद, भारत, ने, सुरक्षा, पर, उठाए, थे, सवाल</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>न कार&amp;न सोना, ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी की कितनी है नेटवर्थ, बनेंगे बंगाल के CM</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/न-कार-न-सोना-ममता-बनर्जी-को-हराने-वाले-शुभेंदु-अधिकारी-की-कितनी-है-नेटवर्थ-बनेंगे-बंगाल-के-cm</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/न-कार-न-सोना-ममता-बनर्जी-को-हराने-वाले-शुभेंदु-अधिकारी-की-कितनी-है-नेटवर्थ-बनेंगे-बंगाल-के-cm</guid>
        <description><![CDATA[ Suvendu Adhikari Networth News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है. शुभेंदु अधिकारी, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का दायां हाथ माना जाता था, अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. अमित शाह ने खुद उनके नाम का ऐलान किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बंगाल की सत्ता संभालने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के पास कुल कितनी संपत्ति है?
साल 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी की कुल नेटवर्थ करीब 85 लाख 87 हजार रुपए है. इस संपत्ति को दो हिस्सों में बांटा गया है, चल संपत्ति यानी मूवेबल एसेट्स और अचल संपत्ति यानी इमूवेबल एसेट्स.
कैश-इन-हैंड के नाम पर सिर्फ 12000 रुपए
बड़ी बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी के पास नकद यानी कैश-इन-हैंड के नाम पर सिर्फ 12000 रुपए हैं. इतना ही नहीं उनके नाम पर न कोई अपनी कार है, न कोई प्राइवेट गाड़ी और न ही उन्होंने सोने के गहनों या ज्वैलरी के कॉलम में कुछ दिखाया है. यानी उनके पास कोई सोना भी नहीं है.
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उनकी चल संपत्ति की कुल वैल्यू करीब 24 लाख 57 हजार रुपए है. शुभेंदु के पास अलग-अलग 14 बैंक खाते हैं, जिनमें पीएनबी, एसबीआई, एक्सिस बैंक और कई को-ऑपरेटिव बैंक शामिल हैं. इन खातों में कुल जमा राशि लगभग 7 लाख 34 हजार रुपए है.
शुभेंदु के पास हैं 6 एलआईसी पॉलिसी
इसके अलावा उन्होंने नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) में 5 लाख 45 हजार रुपए और किसान विकास पत्र में 2 लाख 60 हजार रुपए का निवेश किया है. उनके पास 6 एलआईसी (LIC) पॉलिसी भी हैं, जिनकी कीमत करीब 7 लाख 71 हजार रुपए है.
शुभेंदु अधिकारी की अचल संपत्ति की कुल कीमत करीब 61 लाख 30 हजार रुपए आंकी गई है. उनकी ज्यादातर संपत्तियां पूर्वी मेदिनीपुर जिले में हैं, जो दशकों से अधिकारी परिवार का राजनीतिक गढ़ रहा है. नंदीग्राम में उनके पास 9 लाख रुपए की कृषि भूमि है.
इसके अलावा पंचदरिया और धर्मदासबर जैसे इलाकों में उनकी गैर-कृषि भूमि है, जिसकी कीमत 27.5 लाख रुपए है. उनके पास तामलुक और कुमारपुर में फ्लैट्स हैं और करकुली में एक पुश्तैनी मकान में हिस्सा है. इन रिहायशी संपत्तियों की कुल कीमत करीब 24 लाख 75 हजार रुपए बताई गई है.
उनकी कमाई कहां से होती है?
हलफनामे के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में उनकी कुल आय 17 लाख 38 हजार रुपए से ज्यादा थी. उनकी कमाई का मुख्य जरिया विधायक (MLA) के रूप में मिलने वाली सैलरी, सांसद (MP) की पेंशन और बिजनेस है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन पर कोई कर्ज या देनदारी यानी लायबिलिटी नहीं है.
ममता बनर्जी को नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों पर हराकर इतिहास रचने वाले शुभेंदु अधिकारी अब बंगाल की कमान संभालने को तैयार हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>न, कार-न, सोना, ममता, बनर्जी, को, हराने, वाले, शुभेंदु, अधिकारी, की, कितनी, है, नेटवर्थ, बनेंगे, बंगाल, के</media:keywords>
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        <title>Roopa Ganguly Net Worth: कितनी अमीर हैं रूपा गांगुली, जो बन सकती हैं बंगाल की डिप्टी सीएम? &amp;apos;द्रौपदी&amp;apos; से हैं मशहूर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/roopa-ganguly-net-worth-कितनी-अमीर-हैं-रूपा-गांगुली-जो-बन-सकती-हैं-बंगाल-की-डिप्टी-सीएम-द्रौपदी-से-हैं-मशहूर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/roopa-ganguly-net-worth-कितनी-अमीर-हैं-रूपा-गांगुली-जो-बन-सकती-हैं-बंगाल-की-डिप्टी-सीएम-द्रौपदी-से-हैं-मशहूर</guid>
        <description><![CDATA[ Roopa Ganguly Net Worth: टीवी की &#039;द्रौपदी&#039; के नाम से मशहूर एक्ट्रेस रूपा गांगुली अब राजनीतिक जगत का एक बड़ा नाम हैं. हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनावों के नतीजे आने के बाद से खबरें हैं कि रूपा को यहां की राजनीति में एक अहम पद दिया जाने वाला है. खबरों की मानें तो रूपा गांगुली को पश्चिम बंगाल का डिप्टी सीएम बनाने की चर्चा जोरों पर है. टीवी से घर- घर में पहचान बनाने वाली रूपा का राजनीतिक करियर भी काफी अच्छा रहा है. ऐसे में उनकी नेटवर्थ को लेकर भी काफी चर्चा रहती है.
कितनी सम्पत्ति की मालकिन हैं रूपा गांगुली?रूपा गांगुली अब फल्मों और टीवी में नजर नहीं आती हैं, ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठता है कि अब उनकी आय का साधान क्या है? उनकी आय अब कितनी है, या वो कितनी सम्पत्ति की मालकिन हैं. तो आपको बता दें कि हाल ही में 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनकी सम्पत्ति की जानकारी सामने आई है. इस दौरान दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, रूपा गांगुली की कुल संपत्ति करीब 9.4 करोड़ रुपये है और उन पर कोई कर्ज नहीं है.
ये भी पढ़ें: न कार-न सोना, ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी की कितनी है नेटवर्थ, बनेंगे बंगाल के CM
चल- अचल सम्पत्ति का ब्यौरा?रूपा के पास करीब 6.95 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है, जिसमें कोलकाता के टॉलीगंज में एक फ्लैट समेत अन्य प्रॉपर्टी शामिल हैं. तो वहीं, चल संपत्तियों में बैंक बैलेंस के अलावा 1.1 करोड़ रुपये से ज्यादा के म्यूचुअल फंड इनवेस्टमेंट और गाड़ियों में महिंद्रा स्कॉर्पियो, हुंडई ग्रैंड i10 जैसी गाड़ियां शामिल हैं. इसके अलावा रूपा के पास 495.398 ग्राम का 65,78,305 रुपये का गोल्ड भी है.
टीवी से राजनीति का सफररूपा गांगुली ने बीआर चोपड़ा की &#039;महाभारत&#039; में &#039;द्रौपदी&#039; का किरदार निभाया था. इस किरदार में उन्हें बहुत पसंद किया गया था. इसके अलावा वो कई और टेलीविजन धारावाहिक और हिंदी- बंगाली फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं. उनकी कमाई का असल जरिया यही रहा है. वो कई कैम्पेन, ईवेंट्स में जाने के लिए भी चार्ज करती हैं. कुछ समय के बाद वो राजनीति में भी आ गईं. यहां आने के बाद भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुईं.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें: Pakistan LPG: पाकिस्तान में गुब्बारों में गैस भरकर खाना बना रहे लोग, वहां अब कितनी है LPG सिलेंडर की कीमत? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>SBI का मेगा लोन धमाका, 80000 करोड़ के कर्ज बांटेगा बैंक, 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Loan Offer: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. अब ये असर यहां के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा. इसी बीच देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने MSME सेक्टर को बड़ी राहत देने की तैयारी की है. जिसके लिए केंद्र सरकार के द्वारा एक नई स्कीम लाई जा रही है. जिसके तहत छोटे और मध्यम बिजनेस को कर्ज उपलब्ध करवाया जाएगा.
केंद्र सरकार की एमरजेंसी क्रेडिट लाइन स्कीमदरअसल बैंक ने हाल ही में संकेत दिया है कि केंद्र सरकार की एमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 के तहत अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को 75,000 से 80,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है. इस बारे में SBI के चेयरमैन सीएस सेटी ने NDTV Profit के साथ बातचीत की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि ये बैंक की अधिकतम कर्ज क्षमता है, लेकिन वास्तविक उपयोग इससे कम रहने की संभावना है.
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उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में केवल 30 से 40 फीसदी पात्र MSME ही इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. उन्होंने ये भी बताया है कि ये अनुमान उन MSME ग्राहकों के आधार पर तैयार किया गया है जो ECLGS 5.0 के तहत पात्र हैं. फिलहाल बैंक के पास ज्यादा लोन की डिमांड नहीं आई है. इसकी वजह है कि अभी इस योजना के पूरे दिशा- निर्देश लागू नहीं हुए हैं. सरकार ने भी सबसे खराब स्थिति में 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के उपयोग का अनुमान लगाया है.
साइबर सुरक्षा के लिए सीरियससेटी ने ये कहा है कि बैंकिंग सेक्टर अब साइबर सुरक्षा और AI से जुड़े खतरों पर भी गंभीरता से काम कर रहा है. जिसके लिए निवेश बढ़ाने पर भी फोकस किया जा रहा है, इस समय &amp;nbsp;बैंक ने FY27 के लिए 13-15 फीसदी क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य रखा है. होम लोन, पर्सनल लोन और गोल्ड लोन की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. SBI को FY27 में 11-12 फीसदी डिपॉजिट ग्रोथ और 3 फीसदी नेट इंटरेस्ट मार्जिन हासिल करने की उम्मीद है. इसके अलावा बैंक सितंबर 2026 तक अपनी एसेट मैनेजमेंट कंपनी की लिस्टिंग पर भी विचार कर सकता है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>1 करोड़ वाली नौकरी छोड़कर साफ&amp;सफाई का काम करने लगी मुंबई की महिला, क्यों चुना ऐसा करियर? खुद बताया</title>
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        <description><![CDATA[ Women Quits 1cr Job: आर्थिक रूप से मजबूत होना हर किसी के लिए बहुत जरूरी है. खासतौर से महिलाओं के लिए तो ये सबसे जरूरी है. एक सम्मानजनक नौकरी, अच्छा जीवन, अच्छा रहन- सहन कौन नहीं चाहता. इसके लिए लोग सालों पढ़ाई- लिखाई कर अपने पैरों पर खड़े होते हैं और नौकरी करते हैं. लेकिन हाल ही में एक महिला ने बताया है कि उसमें अच्छी सम्मानजनक नौकरी छोड़कर विदेश में सफाईकर्मी बनना चुना. आइये जानते हैं ऐसा क्यों.
श्वेता देसाई नाम की एक महिला ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि कैसे लंदन में करोड़ों रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें मेलबर्न में एयरबीएनबी अपार्टमेंट्स की सफाई का काम करना पड़ा. श्वेता ने अपने इस अनुभव के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और अपनी पहचान से जुड़ा बड़ा सबक सीखा.
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1 करोड़ की नौकरी छोड़ीइस वीडियो में महिला ने बताया कि वो मुंबई की रहने वाली हैं और साल 2008 में पढ़ाई के लिए लंदन गई थीं. वहां उन्होंने करीब 15 साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया और एक बड़े कमर्शियल बिजनेस वेबसाइट में हैड ऑफ प्रोडक्ट के पद पर काम करती थीं. साल 2023 तक उनकी सालाना कमाई लगभग 1 करोड़ रुपये थी.
मेलबर्न होना पड़ा शिफ्टहालांकि, पति की नौकरी के कारण उन्हें 2023 में मेलबर्न शिफ्ट होना पड़ा. ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद उन्हें अपने अनुभव के मुताबिक नौकरी नहीं मिली. उन्होंने बताया कि मेलबर्न का जॉब मार्केट लंदन से काफी अलग है और लंबे समय तक कोशिश करने के बावजूद उन्हें कॉर्पोरेट रोल नहीं मिला. आर्थिक रूप से खुद को मजबूत करने के लिए उन्होंने Airbnb अपार्टमेंट मैनेजमेंट का काम शुरू किया. इसमें कमरों की सफाई, शीट्स बदलना और गेस्ट्स के सवालों का जवाब देना शामिल था.
आसान नहीं था ये बदलावइस बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि, &#039;शुरुआत में ये बदलाव उनके लिए बेहद कठिन था. एक समय ऐसा आया जब उन्हें लगा कि उन्होंने अपनी पहचान खो दी है. लेकिन धीरे- धीरे सोच बदली और उन्हें अच्छा लगने लगा. महिला के मुताबिक, लंदन में उनकी लाइफस्टाइल काफी शानदार थी. ब्रांडेड कपड़े, महंगे मेकअप और लग्जरी लाइफस्टाइल उनकी दिनचर्या का हिस्सा थे, लेकिन मेलबर्न आने के बाद सब बदल गया. बेरोजगारी के दौरान वो मानसिक रूप से टूटने लगी थीं और लोगों के &#039;आप क्या करती हैं?&#039; जैसे सवालों का जवाब देने में असहज महसूस करती थीं.
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हालांकि समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि नौकरी किसी भी व्यक्ति की असली पहचान नहीं होता. उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें खुद को नए तरीके से समझने में मदद की. अब वो Airbnb मैनेजमेंट के साथ बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाती हैं और अपना बिजनेस व कोचिंग प्रैक्टिस भी शुरू कर रही हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Share Market: होर्मुज पर गोलीबारी ने निवेशकों को चौंकाया, लाल निशान पर खुला शेयर बाजार; सेंसेक्स&amp;निफ्टी लुढ़के</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market Today on May 8: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार लाल निशान पर खुला. एक तरफ बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 212 अंकों की गिरावट के साथ 77631 के लेवल पर खुला. वहीं, एनएसई का निफ्टी &amp;nbsp;93 अंकों के नुकसान के साथ 24233 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की. शुरआती कारोबार में कोल इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है.&amp;nbsp;
क्यों गिरा शेयर बाजार?

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर गोलीबारी होने और तनाव बढ़ने से निवेशक सकते में आ गए, जिसका बाजार पर असर देखने को मिला.&amp;nbsp;
दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका से ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जो तेल के आयात पर निर्भर भारतीय इकोनॉमी के लिए बुरी खबर है.&amp;nbsp;
ग्लोबल मार्केट में गिरावट का असर आज दलाल स्ट्रीट पर भी देखा जा रहा है.

एशियाई बाजार
आज 8 मई की सुबह एशियाई बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दबाव देखा गया. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में हुई गोलीबारी की खबरों ने फिर से निवेशकों को परेशानी में डाल दिया है.&amp;nbsp;
इसके चलते आज दक्षिण कोरिया का Kospi 1.88 परसेंट गिर गया. हालांकि, स्मॉल-कैप Kosdaq 0.56 परसेंट ऊपर चढ़ने में सफल रहा. जापान का Nikkei 225 गुरुवार को रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कुछ मुनाफा-वसूली के चलते 0.62 परसेंट नीचे फिसल गया. हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स फ्यूचर्स 26285 पर था, जो पिछले बंद स्तर 26626.28 से कम है.
अमेरिकी शेयर बाजार
अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान और अमेरिकी के बीच हुई गोलीबारी और ब्रेंट क्रूड के फिर से 102 डॉलर प्रति डॉलर के पार निकल जाने के चलते निवेशकों को महंगाई बढ़ने का डर सताने लगा.
इन्हीं सब बातों का नतीजा है कि गुरुवार को S&amp;amp;P 500 इंडेक्स 0.38 परसेंट गिरकर 7337.11 पर बंद हुआ. Nasdaq Composite की भी क्लोजिंग 0.13 परसेंट की गिरावट के साथ 25806.20 पर हुई. Dow Jones Industrial Average में 313.62 अंकों या 0.63 परसेंट की गिरावट आई और यह 49,596.97 पर सेटल हुआ.
कच्चा तेल
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स आज 2.06 परसेंट बढ़कर 96.76 डॉलर प्रति बैरल पर था. वहीं, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स आज सुबह 2.27 परसेंट बढ़कर 102.33 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. COMEX पर कच्चे तेल की कीमतें 2.13 परसेंट &amp;nbsp;बढ़कर 96.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं.

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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ITR News: आपने खरीदी है 10 लाख से महंगी कार? जो टैक्स भरा था, वह डूबेगा नहीं... ऐसे वापस पाएं हजारों रुपए</title>
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        <description><![CDATA[ Ways to refund money: अगर आपने भी 10 लाख रुपये से ज्यादा की कार खरीदी है, तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, अब 10 लाख रुपये से ज्यादा महंगी गाड़ी खरीदने पर आपको TCS (Tax Collected at Source) के रूप में एक अतिरिक्त राशि का भुगतान करना बेहद ही जरूरी हो जाएगा. जानकारी के मुताबिक, आयकर नियमों में 10 लाख रुपये से ज्यादा की महंगी गाड़ियों को खरीदने पर शोरूम द्वारा 1 प्रतिशत का TCS काटा जाता है. लेकिन, इसमें खास बात यह है कि आपका पैसा कही डूबता नहीं है, बल्कि आप अपने पैसे को वापस भी पा सकते हैं.&amp;nbsp;
यहां जानें आखिर कैसे काम करता है यह स्कीम?
यह तो सभी जानते हैं कि जैसे ही आप नई गाड़ी खरीदते हैं तो, डीलर आपसे कार की कीमत का 1 प्रतिशत टैक्स जरूर वसूलता है जहां वसूले गए टैक्स को सरकार के पास जमा किया जाता है. यह आपके Form 26AS और AIS (Annual Information Statement) में दिखाई देता है, जो असल में आपके एडवांस में चुकाया गया टैक्स है.&amp;nbsp;
Best Savings Plan: FD से ज्यादा रिटर्न और जोखिम जीरो, पैसा बढ़ाने के लिए ये हैं 5 बेस्ट सरकारी बचत योजनाएं
आप किन तरीकों से पा सकते हैं अपने पैसे?&amp;nbsp;
तीन मुख्य तरीकों से आप अपने राशि को बेहद ही आसानी से पा सकते हैं. सबसे पहले आप साल के आखिरी में अपना Income Tax Return (ITR) को पूरी तरह से फाइल कर सकते हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ अगर आपकी टैक्स देनदार TCS से बेहद ही कम है तो आपका पैसा सीधे आपके बैंक के खाते में ही आसानी से रिफंड हो जाएगा. इतना ही नहीं, अगर आपको पूरे साल की कमाई पर एक साथ ही टैक्स चुकाना है तो आप चाहें तो अपनी 1 प्रतिशत की TCS राशि को पूरी तरह से घटा भी सकते हैं.&amp;nbsp;
हांलाकि, जो लोग नौकरी में हैं उन्हें यहां एक सबसे बेहतरीन विकल्प दिया जाता है, जहां कर्मचारियों को गाड़ी खरीद की रसीद को सही तरीके से जमा करना होता है. जहां, कंपनी आपकी सैलरी से काटने वाले TDS को पूरी तरह से कम कर देती है.&amp;nbsp;
टैक्स की टेंशन खत्म! &#039;Kar Saathi&#039; देगा आपके हर सवाल का जवाब, ITR फाइलिंग हुई अब और भी आसान
इन जरूरी दस्तावेजों के बिना नहीं हो पाएगा काम
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आपको इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने साथ रखना होगा. जिसमें सबसे पहले TCS सर्टिफिकेट (Form 27D), जहां कार डीलर इस सर्टिफिकेट को आपसे जरूर मांगेगा. इसके अलावा इस बात का खास ध्यान रखें कि AIS चेक करने के दौरान कार डीलर ने आपके PAN पर यह टैक्स जमा किया है या फिर नहीं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold&amp;Silver Rate: महंगा हुआ सोना, दिल्ली&amp;मुंबई में डेढ़ लाख के पार पहुंची कीमत, 22 और 18 कैरेट में भी तेजी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-महंगा-हुआ-सोना-दिल्ली-मुंबई-में-डेढ़-लाख-के-पार-पहुंची-कीमत-22-और-18-कैरेट-में-भी-तेजी</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: आज 8 मई को देश में सोने की कीमत में तेजी देखने को मिल रही है. अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कीमत में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर डिमांड बढ़ने की वजह से सोने की कीमतों में उछाल आया है.
आज भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1,53,000 से 1,53,800 रुपये के बीच चल रही है. 22 कैरेट सोने की कीमत भी प्रति 10 ग्राम 1,40,000-1,41,000 के बीच बनी हुई है. कुल मिलाकर कल के मुकाबले सोने की कीमत में 80 से 200 रुपये प्रति ग्राम का उछाल आया है.&amp;nbsp;
शहरों के हिसाब से रेट

दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,52,880 रुपये है.
मुंबई में आज 24 कैरेट सोने का रेट प्रति 10 ग्राम 1,52,680 रुपये है.
चेन्नई में आज इसकी कीमत प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 1,53,840 रुपये है.
वहीं, लखनऊ में कीमत प्रति 10 ग्राम 1,52,880 रुपये है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

चांदी की कीमत&amp;nbsp;
सोने के साथ-साथ आज चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखी जा रही है. भारत में आज चांदी की कीमत प्रति ग्राम 275 रुपये और प्रति किलो 2,75,000 रुपये है. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में आज कीमत 2,70,100 रुपये प्रति किलो है. नोएडा में कीमत 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम है. चेन्नई में कीमत 2,74,900 रुपये व लखनऊ और कानपुर में कीमत 2,70,100 रुपये प्रति किलो है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ी आज सोने-चांदी की कीमत?

मिडिल ईस्ट में टेंशन- ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी की मांग में फिर तेजी देखी जा रही है, जिससे कीमतें भी बढ़ी हैं.
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी- भारत में RBI सहित दुनिया के दूसरे देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए तेजी से गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं. इस बीच, रिजर्व बैंक भी विदेशों में रखा अपना सोना वापस लेकर आ रहा है. बैंक ऑफ इंग्लैंड (BOE), बैंक ऑफ यूरोप (BOE) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास रखे भारत के गोल्ड रिजर्व में कमी आ रही है. साल 2023 से भारत अब तक 150.67 मीट्रिक टन सोना वापस ला चुका है.&amp;nbsp;
घरेलू बाजारों में डिमांड- देश में शादियों के सीजन में रिटेल स्तर पर गहनों की डिमांड अकसर बनी रहती है. भारत में सोने के गहनों के बिना शादी पूरी ही नहीं मानी जाती है. घरेलू स्तर पर मांग बढ़ेगी, तो कीमतों पर भी इसका असर दिखेगा.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>हॉर्मुज तनाव से भारत में LPG की किल्लत, आयात रुकने से मचा है हाहाकार, सप्लाई में 16% की गिरावट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Shortage in India: ईरान-अमेरिका और इजरायल में जंग और इसके चलते मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का कुछ ऐसा असर हुआ कि मार्च 2026 से भारत के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के आयात में गिरावट आई है. भारत LPG की जरूरतों का 60 परसेंट हिस्सा आयात करता है. ऐसे में होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से सप्लाई में बड़े पैमाने पर रुकावटें आ रही हैं.
फरवरी 2026 तक भारत हर महीने लगभग 20 लाख टन LPG आयात करता था, जो मार्च में घटकर 11 लाख टन और अप्रैल में मात्र 9.5 लाख टन तक रह गया. लगातार बनी अनिश्चितता और इस बात पर स्पष्टता की कमी के चलते कि होर्मुज से जहाजों की आवाजाही कब युद्ध से पहले की तरह सामान्य होगी, भारत के सामने LPG सप्लाई की चुनौती अभी खत्म होने से कोसों दूर है &amp;nbsp;और ऐसा लगता है कि आने वाले समय में भी सप्लाई की कमी बनी रहेगी.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
LPG की सप्लाई पर संकट&amp;nbsp;&amp;nbsp;
ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट एक ऐसा समुद्री रास्ता है, जिससे होकर आमतौर पर दुनिया भर के पेट्रोलियम का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. ईरान और मिडिल ईस्ट में जैसे-जैसे तनाव गहराता गया, वैसे-वैसे इस रास्ते जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई, जो अब नाममात्र की रह गई है.
ईरान में जंग शुरू होने से पहले जहां इस रास्ते से होकर रोजाना 130-140 जहाज गुजरते थे. वहीं, अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है. इस रुकावट ने भारत सहित ऊर्जा का आयात करने वाले कई देशों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. इससे क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई पर भी असर पड़ा है, लेकिन LPG की सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.&amp;nbsp;
तेजी से घट रहा LPG का आयात
कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म Kpler के वेसल ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 2025-26 के शुरुआती 11 महीनों &amp;mdash; अप्रैल से फरवरी &amp;mdash; में भारत का LPG आयात औसतन लगभग 2 मिलियन टन प्रति माह रहा.डेटा से पता चलता है कि मार्च में LPG आयात गिरकर 1.1 मिलियन टन रह गया और अप्रैल में यह और घटकर 0.95 मिलियन टन हो गया. 
&amp;nbsp;
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस रुकावट की वजह से भारत को औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों के लिए LPG सप्लाई को सीमित करना पड़ा है ताकि उन करोड़ों परिवारों को प्राथमिकता दी जा सके जो अपनी रसोई चलाने के लिए इस ईंधन पर निर्भर हैं. भारत में 33 करोड़ से ज्यादा ऐसे परिवार हैं, जिनके पास LPG कनेक्शन हैं. मांग को काबू में रखने के लिए एक उपाय के तौर पर, परिवारों द्वारा LPG रीफिल बुक करने के बीच का न्यूनतम अंतराल भी बढ़ा दिया गया है.
कितना घटा इम्पोर्ट?




महीना
LPG का आयात (लाख टन में)
खपत में गिरावट
वजह


फरवरी 2026
20.0
0% सामान्य
जंग से पहले की स्थिति


मार्च 2026
11.0
13% की गिरावट
होर्मुज की नाकेबंदी से इम्पोर्ट रह गया आधा


अप्रैल 2026
0.95
16.2% की गिरावट
इम्पोर्ट अब तक के सबसे निचले स्त पर पहुंचा&amp;nbsp;





&amp;nbsp;

ये भी पढ़ें:
पाकिस्तान में मेडिकल इमरजेंसी! ईरान-होर्मुज संकट के बीच इस चीज की किल्लत से लोगों में हाहाकार ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हॉर्मुज, तनाव, से, भारत, में, LPG, की, किल्लत, आयात, रुकने, से, मचा, है, हाहाकार, सप्लाई, में, 16, की, गिरावट</media:keywords>
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        <title>SIP vs Step&amp;up SIP: SIP और Step&amp;up SIP में क्या है अंतर? ये वाला तरीका है करोड़पति बनने का शॉर्टकट, छोटा निवेश बनेगा बड़ा फंड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sip-vs-step-up-sip-sip-और-step-up-sip-में-क्या-है-अंतर-ये-वाला-तरीका-है-करोड़पति-बनने-का-शॉर्टकट-छोटा-निवेश-बनेगा-बड़ा-फंड</link>
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        <description><![CDATA[ Difference Between SIP and Step up SIP: महंगाई के इस दौर में हर कोई चाहता है कि वो ज्यादा से ज्यााद पैसा सेव कर ले. पैसे सेव करने के लिए लोग इनवेस्टमेंट करते हैं, जिससे ब्याज मिलता है और पैसा सेव होता है. इसके लिए लोग सबसे ज्यादा SIP का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि SIP के अलावा स्टेप-अप एसआईपी भी होती है, जो आपके लिए बेहतर निवेश भी बन सकती है.
SIP क्या है?एसआईपी को सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान कहते हैं. ये निवेश का सबसे सरल और सबसे ज्यादा प्रचलित तरीका है. इसमें हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में बतौर किश्त जमा की जाती है. इसके बाद बाजार के भाव के मुताबिक इसमें उतार- चढ़ाव होता है. धीरे- धीरे करके ये कुछ सालों में एक मजबूत निवेश बन जाता है.
ये भी पढ़ें: Multibagger Stock: गजब! शेयर हो तो ऐसा, 1 लाख के बना दिए 14 करोड़; 24 साल में दिया 1400 गुना रिटर्न
Step-Up SIP क्या है?स्टेप-अप एसआईपी, आम एसआईपी का ही एक एडवांस रूप है. इसमें व्यक्ति हर साल अपनी निवेश की गई राशि को बढ़ाता जाता है, इससे ये समय के साथ आम निवेश से ज्यादा बढ़ जाती है. जैसे समय के साथ आय बढ़ती है वैसे ही स्टेपअप एसआईपी में भी समय के साथ किश्त राशि को बढ़ाया जाता है.
SIP और Step-Up SIP में अंतर?एसआईपी में आप एक तय अमाउंट सालों तक निवेश करते हैं जिससे साल की दर के हिसाब से ब्याज लगता है और ये राशि बढ़ती है. तो वहीं स्टेपअप एसआईपी के जरिए आप तय अमाउंट को बढ़ाकर हर साल ब्याज दर बढ़ा सकते हैं, ये ज्यादा फायदेमंद होती है.
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स्टेप-अप एसआईपी को उदाहरण के साथ समझिए

मान लीजिए आपने हर महीने के हिसाब से 5 हजार रुपये की SIP ली है.
इसे 12 महीने तक निवेश करने पर 60 हजार का निवेश होता है और इस पर 10 से 12 प्रतिशत ब्याज बढ़ता है.
एक साल होने के बाद अगर आपने SIP बढ़ाकर 6 हजार रुपये कर दी, तो सालभर का 72 हजार निवेश होगा.
तो वहीं इस 72 हजार रुपये पर ब्याज मिलेगा, ऐसे में आपका निवेश बढ़ेगा लेकिन साथ ही ब्याज भी मिलेगा और सेविंग ज्यादा होगी.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 03:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SIP, Step-up, SIP:, SIP, और, Step-up, SIP, में, क्या, है, अंतर, ये, वाला, तरीका, है, करोड़पति, बनने, का, शॉर्टकट, छोटा, निवेश, बनेगा, बड़ा, फंड</media:keywords>
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        <title>Indian Mango: अमेरिका में मिनटों में बिक रहे भारत के आम, अल्फांसो और केसर का दिखा जबरदस्त क्रेज! खत्म हुए स्टॉक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/indian-mango-अमेरिका-में-मिनटों-में-बिक-रहे-भारत-के-आम-अल्फांसो-और-केसर-का-दिखा-जबरदस्त-क्रेज-खत्म-हुए-स्टॉक</link>
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        <description><![CDATA[ Indian Mango Craze in America: गर्मियों का मौसम केवल छुट्टियों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि आम प्रेमी (Mango Lovers) भी इस सीजन का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं. गर्मियां आते ही आम का बाजार गुलजार हो जाता है. लोगों की भीड़ आम की दुकानों पर टूट पड़ती है. ये हाल केवल भारत का ही नहीं बल्कि अमेरिका का भी है. अमेरिका में भी लोग भारतीय आम को बहुत पसंद करते हैं. इसका अंदाजा फिलहाल के मार्केट रेट से भी लगाया जा सकता है.
अमेरिका में &#039;आम&#039; का जलवाभारतीय आम अब विदेश में भी खूब पसंद किए जा रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि आम यहां के बाजार में आते ही आउट ऑफ स्टॉक हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि अमेरिका के एक स्टोर में आम 4:56 बजे आए और 5:16 बजे इसका स्टॉक खत्म हो गया. हालांकि ये पोस्ट फिलहाल सोशल मीडिया पर नहीं दिख रहा है. लेकिन ये काफी तेजी से वायरल हुआ जिसके बाद यूजर ने इसे हटा लिया.
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न्यूयॉर्क में भी आम का क्रेजवहीं न्यूयॉर्क सिटी में रहने वाली एक भारतीय महिला ने भी अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया इस वीडियो में महिला आम खाते हुए नजर आ रही है. उन्होंने बताया है कि ये आम उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी में 5 डॉलर के तीन खरीदे हैं. हालांकि ये खाते हुए वो भारत में अपने भाई- बहनों के साथ आम खाना मिस कर रही है. सोशल मीडिया के इन पोस्ट्स से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विदेश में भारतीय आम का कितना क्रेज है.
केसर और अल्फॉन्सो के लिए क्रेजभारतीय आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहते हैं, विदेश में भी जिस फल का बोलबाला हो, उसे राजा कहना तो बनता भी है. अमेरिका में सबसे ज्यादा अल्फॉन्सो (हापुस) और केसर का क्रेज देखा जा रहा है. अमेरिका में रहने वाले भारतीय इसे लेने के लिए स्टोर के बाहर ही खड़े नजर आ रहे हैं. तो वहीं कई लोगों ने तो इसकी एडवांस बुकिंग तक की हुई है.
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बता दें कि हापुस आम की मिठास और इसकी खुशबू लोगों को दीवाना बना देती है. तो वहीं केसर आम बेहद रसदार होता है, जिसे लोग खाना बहुत पसंद करते हैं. इन दोनों ही किस्म के आमों के अलावा भारत में और भी कई तरह के आम मिलते हैं जो बेहद खास होते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 03:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Indian, Mango:, अमेरिका, में, मिनटों, में, बिक, रहे, भारत, के, आम, अल्फांसो, और, केसर, का, दिखा, जबरदस्त, क्रेज, खत्म, हुए, स्टॉक</media:keywords>
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        <title>TVK चीफ थलापति विजय की पत्नी के पास है Gold का भंडार, 1&amp;2 नहीं... इतने करोड़ का है सोना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tvk-चीफ-थलापति-विजय-की-पत्नी-के-पास-है-gold-का-भंडार-1-2-नहीं-इतने-करोड़-का-है-सोना</link>
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        <description><![CDATA[ Thalapathy Vijay Assests: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली तमिलगा वेट्टी कजगम यानी TVK इन दिनों सरकार गठन की कोशिशों में जुटी है. इस पार्टी के प्रमुख और तमिल सुपरस्टार थलपति विजय ने राजनीति में जोरदार एंट्री करके सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
जब से चुनावों के नतीजे जनता के सामने आए है तब से विजय की संपत्ति और उनके चुनावी हलफनामें की खूब चर्चा हो रही है. हलफनामे के मुताबिक, विजय और उनकी पत्नी संगीता विजय के पास करोड़ों रुपये का सोना, चांदी और हीरे हैं.
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जानें विजय के पास कितना सोना-चांदी है?

हलफनामे के मुताबिक, विजय के पास 883 ग्राम सोना है.
इसकी कीमत लगभग 1.20 करोड़ रुपये बताई गई है.
इसके साथ ही विजय के पास लगभग 15 लाख रुपये की चांदी भी है.
यानी सोना-चांदी के मामले में विजय के पास करोड़ों की संपत्ति है.

पत्नी संगीता के पास है 4 करोड़ से ज्यादा का सोना
अब वहीं अगर विजय की पत्नी संगीत विजय की बात करें तो वह इस मामले में उनसे भी काफी आगे हैं. हलफनामे के मुताबिक, संगीता विजय के पास...

3,132 ग्राम लगभग 3.1 किलो सोना है, जिसकी कीमत करीब 4.07 करोड़ रुपये है.
इसके अलावा उनके पास 2 किलो चांदी, जिसकी कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये बताई गई है.
यानी उनकी पत्नी के पास टोटल 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ज्वेलरी है.

कितनी है थलपति विजय की कुल संपत्ति?
चुनावी हलफनामे के मुताबिक, थलपति विजय की कुल नेटवर्थ लगभग 624 करोड़ रुपये है.&amp;nbsp;
इसमें शामिल हैं:
यानी विजय के पास करीब 404 करोड़ की नकद/ज्वेलरी/इन्वेस्टमेंट जैसी संपत्ति और लगभग 200 करोड़ से ज्यादा की जमीन-जायदाद है.
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&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 03:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TVK, चीफ, थलापति, विजय, की, पत्नी, के, पास, है, Gold, का, भंडार, 1-2, नहीं..., इतने, करोड़, का, है, सोना</media:keywords>
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    <item>
        <title>21000 रुपए के इन्वेस्टमेंट से 30 लाख तक का रिटर्न, क्या है वायरल खबर की सच्चाई? सरकार ने बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/21000-रुपए-के-इन्वेस्टमेंट-से-30-लाख-तक-का-रिटर्न-क्या-है-वायरल-खबर-की-सच्चाई-सरकार-ने-बताया</link>
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        <description><![CDATA[ Nirmala Sitharaman Viral Fake Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक खास इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म का सर्मथन कर रही हैं.
वीडियो में यह भी कहा जा रहा है कि अगर कोई व्यक्ति 21 हजार रुपये इन्वेस्ट करता है तो उसे 30 लाख रुपये तक का रिटर्न मिल सकता है. इस वीडियो को देखकर कई लोग इसे सच मानने लगे हैं, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; Gold-Silver Rate: महंगा हुआ सोना, जानें 22 कैरेट के गहने बनवाने में आज प्रति 10 ग्राम कितना पड़ेगा खर्च?
क्या दावा किया जा रहा है?
वायरल हो रहे वीडियो में निर्मला सीतारमण को एक इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म को बारे में बात करते हुए दिखाया गया है. इसके साथ ही वीडियो में दावा किया जा रहा है कि...

केवल 21 हजार का इन्वेस्ट करना होगा.
इसके बदले आपको 30 लाख तक का रिटर्न मिलेगा.
साथ ही यह योजना सरकार से जुड़ी और भरोसेमंद बताई जा रही है.
वीडियो इस तरह बनाया गया है कि हर कोई इसे सच मान रहा है.

दावे की सच्चाई क्या है?
इस वायरल वीडियो की जांच PIB Fact Check ने की है. जांच में सामने आया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है.
PIB Fact Check ने क्या कहा?
अब इस वायरल हो रहे वीडियो की जांच PIB Fact Check ने की है. जांच में सामने आया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बनाया गया है. PIB Fact Check ने साफ कहा कि...

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐसी कोई भी स्कीम का समर्थन नहीं किया है.
साथ ही भारत सरकार ने किसी भी ऐसे इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म को मंजूरी नहीं दी है.
और ये वीडियो लोगों को ठगने के लिए बनाया गया है.


???? Beware of Online Investment Scams❗A link circulating on #WhatsApp directs users to a video falsely portraying Union Finance Minister Nirmala Sitharaman endorsing an investment platform. The video claims that an investment of ₹21,000 can generate returns of up to ₹30 lakh.&amp;hellip; pic.twitter.com/cDgY5AneP9
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) May 7, 2026



वायरल वीडियो में क्या है?
वायरल वीडियो में निर्मला सीतारमण की तरह दिखने वाला चेहरा और आवाज इस्तेमाल की गई है. साथ ही वीडियो में इन्वेस्ट करने के लिए लोगों को लालच दिया जा रहा है और कम टाइम में ज्यादा रिटर्न देने का दावा किया जा रहा है. यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है कि यह एक फर्जी इन्वेस्ट स्कैम हो सकता है.
PIB Fact Check ने क्या चेतावनी दी?
PIB Fact Check ने लोगों को चेतावनी दी है और साथ ही कहा कि धोखेबाज आजकल AI तकनीक का उपयोग करके फर्जी वीडियो बना रहे हैं. ऐसे वीडियो लोगों को धोखा देने और ज्यादा रिटर्न का लालच देकर ठगने की कोशिश करते हैं.
ऐसे स्कैम से कैसे बचें?
अगर आपके पास भी ऐसा कोई वीडियो या लिंक आए तो&amp;nbsp;

आप तुरंत उस पर क्लिक न करें.
साथ ही अपनी बैंकिंग और पर्सनल जानकारी शेयर न करें.
पहले आधिकारिक सरकारी स्रोतों से जानकारी जांचें कि सही है या नहीं.
ध्यान रहे कि अगर कोई भी स्कीम बहुत कम इन्वेस्ट में ज्यादा रिटर्न देने का दावा करती है तो सर्तक हो जाएं.

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शिकायत कहां करें?
अगर आपको ऐसा कोई मैसेज, वीडियो या फिर लिंक मिलता है तो तुरंत इसकी शिकायत करें.
WhatsApp: +91 8799711259Email: factcheck@pib.gov.in
 ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 03:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>21000, रुपए, के, इन्वेस्टमेंट, से, लाख, तक, का, रिटर्न, क्या, है, वायरल, खबर, की, सच्चाई, सरकार, ने, बताया</media:keywords>
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    <item>
        <title>पाकिस्तान में मेडिकल इमरजेंसी! ईरान&amp;होर्मुज संकट के बीच इस चीज की किल्लत से लोगों में हाहाकार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पाकिस्तान-में-मेडिकल-इमरजेंसी-ईरान-होर्मुज-संकट-के-बीच-इस-चीज-की-किल्लत-से-लोगों-में-हाहाकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पाकिस्तान-में-मेडिकल-इमरजेंसी-ईरान-होर्मुज-संकट-के-बीच-इस-चीज-की-किल्लत-से-लोगों-में-हाहाकार</guid>
        <description><![CDATA[ Pakistan Medical Emergency: ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध का असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है. कहीं तेल की किल्लत है, कहीं गैस की किल्लत है तो कहीं किसी और चीज की. ऐसे में हर एक देश किसी ना किसी कमी की वजह से परेशानी का सामना कर रहा है. इसी बीच अब खबरें हैं कि पाकिस्तान में भी ईरान युद्ध की वजह से मेडिकल इमरजेंसी आन पड़ है. यहां पर इस समय दवाईयों की किल्लत देखी जा रही है.
पाकिस्तान में मेडिकल इमरजेंसीद एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर की सप्लाई चेन को इस युद्ध ने काफी प्रभावित किया है. इसके कारण शिपिंग का खर्च बढ़ गया है और पाकिस्तान के दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, जो इस रास्ते से ही आयात किया जाता था. पाकिस्तान बड़ी मात्रा में दवाइयों के कच्चे पदार्थ और तैयार दवाएं आयात करता है. जिसके कारण ये प्रभाव उस पर पड़ रहा है.
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बड़े शहरों में भी दवाईयों की कमीपाकिस्तान के बड़े शहरों कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में दवाईयों की कमी के साथ ही इसकी कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल रही है, जिससे आम लोगों के लिए इलाज कराना मुश्किल हो गया है. खासकर शुगर, हार्ट पेशेंट्स और कैंसर जैसी बीमारियों के मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान के शहरों में 2023 से दवाइयों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. 2024 में जरूरी दवाओं के दाम करीब 50% तक बढ़ा दिए गए थे और 2025 में फिर 30 से 40% तक बढ़ोतरी हुई थी. इसके अलावा, शहबाज़ शरीफ सरकार ने भी दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और सामान पर 18% जीएसटी लगाने के फैसले ने इलाज को और महंगा बना दिया है, जिससे आम लोगों के लिए जरूरी दवाएं खरीदना मुश्किल हो गया है.
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बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला कर दिया था. इस हवाई हमले में वहां के सैन्य ठिकाने और सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाया गया था. इन हमलों में ईरान के कई बड़े अधिकारियों की मौत हो गई, जिनमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई भी शामिल हैं. इसके बाद से ही ऐसी स्थिति बनी और दुनिभर में क्रूड ऑइल की कमी देखी गई. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पाकिस्तान, में, मेडिकल, इमरजेंसी, ईरान-होर्मुज, संकट, के, बीच, इस, चीज, की, किल्लत, से, लोगों, में, हाहाकार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Ted Turner Net Worth: CNN फाउंडर टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन, मीडिया को दिए नए आयाम, कितनी थी नेटवर्थ?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ted-turner-net-worth-cnn-फाउंडर-टेड-टर्नर-का-87-साल-की-उम्र-में-निधन-मीडिया-को-दिए-नए-आयाम-कितनी-थी-नेटवर्थ</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ted-turner-net-worth-cnn-फाउंडर-टेड-टर्नर-का-87-साल-की-उम्र-में-निधन-मीडिया-को-दिए-नए-आयाम-कितनी-थी-नेटवर्थ</guid>
        <description><![CDATA[ Ted Turner Net Worth: अमेरिकी मीडिया को सीएनएन न्यूज का तोहफा देने वाले इसके संस्थापक टेड टर्नर का निधन हो गया है. 87 साल की उम्र में टेड टर्नर ने अंतिम सांस ली है. जिसकी जानकारी टर्नर एंटरप्राइजेज की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई है. इस खबर से पूरे मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.
24 घंटे न्यूज मॉड्यूल किया था शुरूटेड टर्नर वही शख्स हैं जिन्होंने मीडिया जगत को नए आयाम दिए थे. उन्होंने ही दुनिया भर में 24 घंटे न्यूज चैनल मॉडल की शुरुआत की थी. जब CNN की स्थापना हुई थी तब इस प्रयोग को एक जोखिम की तरह माना जा रहा था, लेकिन वो पीछे नहीं हटे और ये जोखिम लिया. समय के साथ उनका ये विचार वर्ल्डवाइड मीडिया तक भी पहुंचा और आज चैनलों में 24 घंटे न्यूज मॉड्यूल चलाया जाता है.
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टेड टर्नर की नेटवर्थफोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक टेड टर्नर की मृत्यु के समय उनकी कुल सम्पत्ति लगभग 2.2 अरब डॉलर से 2.8 अरब डॉलर के बीच थी. वैसे तो वो मीडिया जगत का एक बड़ा नाम थे, लेकिन उनकी सम्पत्ति ज्यादातर जमीनों से आई थी. इसी की वजह से वो अमेरिका के सबसे बड़े निजी जमीन मालिकों में शामिल थे. उनके पीक समय में उनकी सम्पत्ति करीब 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी, लेकिन AOL और Time Warner के विलय के बाद इसमें तेजी से गिरावट आई.
उन्होंने 1996 में अपनी कंपनी को Time Warner को 7.3 अरब डॉलर के शेयर में बेच दिया था. लेकिन 2001 में जब AOL ने Time Warner को खरीदा, तो कंपनी के शेयर गिर गए और टर्नर की सम्पत्ति में भी बड़ी कमी आ गई. टेड टर्नर अमेरिका के चौथे सबसे बड़े निजी जमीन मालिकों में से एक थे. उनके पास करीब 20 लाख एकड़ जमीन थी.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ted, Turner, Net, Worth:, CNN, फाउंडर, टेड, टर्नर, का, साल, की, उम्र, में, निधन, मीडिया, को, दिए, नए, आयाम, कितनी, थी, नेटवर्थ</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price: क्या आज 7 मई को पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत में हुआ कोई बदलाव? फटाफट चेक करें रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today on May 7: आज 7 मई, 2026 को भारत के कई बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं दिखा. इसी तरह से ईंधन की कीमतों में स्थिरता का मौजूदा दौर जारी रहा. ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट्स में उतार-चढ़ाव और करेंसी एक्सचेंज रेट में बदलाव के बावजूद देश में रिटेल स्तर पर ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की दरों में तत्काल कोई संशोधन नहीं किया गया.
भारत की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs)&amp;mdash;इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)&amp;mdash;वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के अनुरूप ईंधन की कीमतों में रोजाना संशोधन करती हैं. हालांकि, हाल के दिनों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
100 के ऊपर पहुंचा पेट्रोल
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है, जबकि डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, मुंबई में कीमतें अधिक हैं, जहां पेट्रोल 103.54 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 90.03 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे ज्यादातर मेट्रो शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बनी हुई हैं, जबकि डीजल की कीमतें 100 रुपये के निशान से नीचे बनी हुई हैं.
आज पेट्रोल-डीजल का रेट



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली&amp;nbsp;
94.77 रुपये
&amp;nbsp;87.67 रुपये


मुंबई
103.54 रुपये
90.03 रुपये


कोलकाता&amp;nbsp;
105.45 रुपये
92.02 रुपये


चेन्नई
100.80 रुपये
92.39 रुपये


बेंगलुरु
102.92 रुपये
90.99 रुपये


पटना
&amp;nbsp;105.18 रुपये
92.04 रुपये


पुडुचेरी
96.26 रुपये
86.47 रुपये


रायपुर
&amp;nbsp;99.44 रुपये
93.39 रुपये


रांची
&amp;nbsp;97.86 रुपये
92.62 रुपये



मई 2022 के बाद से स्थिर कीमतें
वैश्विक कच्चे तेल के बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कुछ सालों से काफी हद तक स्थिर रही हैं. मई 2022 के बाद से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोर्ठ बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला. उस दौरान केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी (पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये) घटाने के बाद लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहीं.&amp;nbsp;
खुदरा ईंधन की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं, जिनमें वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, रुपया-डॉलर विनिमय दर, केंद्र और राज्य के कर, परिवहन लागत और मांग-आपूर्ति के समीकरण शामिल हैं. चूंकि भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए वैश्विक कीमतों में कोई भी उतार-चढ़ाव या मुद्रा विनिमय में बदलाव घरेलू ईंधन दरों पर असर डाल सकता है.

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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, क्या, आज, मई, को, पेट्रोल-डीजल, की, कीमत, में, हुआ, कोई, बदलाव, फटाफट, चेक, करें, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>होम लोन&amp;कार लोन लेने का गोल्डन रूल! क्या है 30% EMI नियम, जो कभी कर्ज में फंसने नहीं देता?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/होम-लोन-कार-लोन-लेने-का-गोल्डन-रूल-क्या-है-30-emi-नियम-जो-कभी-कर्ज-में-फंसने-नहीं-देता</link>
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        <description><![CDATA[ 30% EMI Rule: अपना घर हो, खुद की गाड़ी हो, इसका सपना हर किसी का होता है. बैंक इसके लिए आसानी से लोन भी ऑफर करता है. लेकिन क्सा आपने कभी सोचा है कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में खर्च होनी चाहिए, जिससे आपकी लाइफस्टाइल पर कुछ खास असर न पड़े. अगर आप भी इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं, तो आपके लिए 30% EMI फार्मूला काम आ सकता है.&amp;nbsp;
सेविंग्स के साथ जरूरतें भी होंगी पूरी
30% वाला नियम यह कहता है कि आपके सभी लोन की टोटल EMI आपकी मंथली सैलरी की 30 परसेंट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. घर या कार खरीदते वक्त जब भी आप लोन लेते हैं, तो बैंक आपको आपकी इनकम के आधार पर 40-50 परसेंट तक लोग दे देता है, लेकिन एक्सपर्ट्स वित्तीय स्थिरता और भविष्य की स्थिरता का ख्याल रखते हुए 30 परसेंट के रूल को ही फॉलो करने के लिए कहते हैं.
30% वाले ईएमआई रूल में होम लोन से लेकर कार लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड ईएमआई ये सारी चीजें शामिल होती हैं. इसे ऐसे समझिए- अगर आपकी सैलरी 1,00,000 रुपये है, तो 30 परसेंट के हिसाब से 30,000 रुपये तक EMI में खर्च होने चाहिए. बाकी 70 परसेंट का अमाउंट घर की जरूरतों, इमरजेंसी फंड के लिए सुरक्षित रहने चाहिए.&amp;nbsp;
30 परसेंट रूल के फायदे

नौकरी छूटने या इमरजेंसी की स्थिति में भी आपके पास ईएमआई भरने जितने पैसे हो.
ईएमआई की लिमिट तय होने से समय पर भुगतान होता रहेगा, जिसका असर आपके CIBIL स्कोर पर देखने को मिलेगा.&amp;nbsp;
अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होगा और डेट-टू-इनकम रेश्यो कम होगा, तो बैंक आपको तुरंत लोन दे देगा.&amp;nbsp;
इस फार्मूले से आपके निवेश पर भी कोई असर नहीं पड़ता. इससे आप फाइनेंशियली स्ट्रॉन्ग होते जाते हैं.


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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>होम, लोन-कार, लोन, लेने, का, गोल्डन, रूल, क्या, है, 30, EMI, नियम, जो, कभी, कर्ज, में, फंसने, नहीं, देता</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IT सेक्टर में महा&amp;छंटनी, अब ये कंपनी निकालेगी 15000 कर्मचारी, भारत पर टूटेगा दुखों का पहाड़!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/it-सेक्टर-में-महा-छंटनी-अब-ये-कंपनी-निकालेगी-15000-कर्मचारी-भारत-पर-टूटेगा-दुखों-का-पहाड़</link>
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        <description><![CDATA[ Cognizant Layoff News: IT सेक्टर में एक बार फिर छंटनी का दौर एक बार फिर शुरू हो सकता है. खबरों के मुताबिक, दिग्गज अमेरिकी आईटी कंपनी Cognizant अपने कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कटौती करने पर विचार कर रही है और इसका असर भारत में बड़ी संख्या में इसके कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका है.
बताया जा रहा है कि कंपनी अपने &#039;प्रोजेक्ट लीप&#039; के तहत ग्लोबल लेवल पर करीब 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी के बारे में सोच रही है. Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर छंटनी भारत में होने की आशंका जताई जा रही है.&amp;nbsp;
&#039;प्रोजेक्ट लीप&#039; के तहत होगी छंटनी
बीते 29 अप्रैल को, Nasdaq में लिस्टेड इस कंपनी ने बताया कि उसे अपनी नई इनीशिएटिव &#039;Project Leap&#039; के तहत कर्मचारियों को नौकरी से हटाने पर 230 डॉलर मिलियन से 320 मिलियन डॉलर के बीच खर्च होने की उम्मीद है.
यानी कि छंटनी के चलते कंपनी को मुआवजे के रूप में 230 डॉलर मिलियन से 320 मिलियन डॉलर (1900-2600 करोड़) का खर्च उठाना पड़ सकता है. &amp;nbsp;हालांकि, कंपनी ने नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी तक जारी नहीं किया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
Cognizant में इस समय दुनिया भर में 357,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, जिनमे से &amp;nbsp;250,000 से ज्यादा कर्मचारी भारत में काम करते हैं. चूंकि भारत में कर्मचारियों का वेतन और सेवरेंस पे विकसित देशों के मुकाबले कम है इसलिए इस कटौती का सबसे बड़ा हिस्सा भारत से होने की संभावना है.&amp;nbsp;
क्यों छंटनी करने के मूड में कंपनी?
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपने पुराने मॉडल से हटकर नए AI-बेस्ड और लीन मॉडल को अपनाने पर जोर रहे हैं. कंपनी अब अपने पिरामिड मॉडल के तहत एक साथ बहुत सारे सीनियर और जूनियर्स के साथ मिलकर काम करने में इच्छुक नहीं है. कंपनी आईटी सेक्टर में घटती मांग के कारण अपने गैर-जरूरी खर्चों को कम कर नई तकनीक में निवेश करना चाहती है ताकि लागत में कमी आए.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सेक्टर, में, महा-छंटनी, अब, ये, कंपनी, निकालेगी, 15000, कर्मचारी, भारत, पर, टूटेगा, दुखों, का, पहाड़</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Crude Oil Reserve: खत्म होने की कगार पर कच्चा तेल, जानें बचे स्टॉक से कितने दिन की डिमांड हो सकती है पूरी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/crude-oil-reserve-खत्म-होने-की-कगार-पर-कच्चा-तेल-जानें-बचे-स्टॉक-से-कितने-दिन-की-डिमांड-हो-सकती-है-पूरी</link>
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        <description><![CDATA[ World&#039;s Crude Oil Reserve: अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ने के बाद कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट, कच्चे तेल की कीमतों में ग्लोबल ऑयल मार्केट्स में उछाल को लेकर कई खबरें लगातार सामने आ रही हैं.
इस बीच, दुनिया में कच्चे तेल के भंडार पर Goldman Sachs की एक नई रिपोर्ट भी आई है. 2026 की इस रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का कुल भंडार घटकर अब केवल 101 दिनों के बराबर रह गया है, जो बीते आठ सालों का सबसे निचले स्तर है.&amp;nbsp;
तेल से घट रहा फ्यूल का भंडार
फरवरी 2026 के अंत में वैश्विक तेल भंडार 106 दिनों की मांग के बराबर था, जो अब घटकर 101 दिनों के बराबर रह गया है. गोल्डमैन का कहना है कि मई 2026 तक यह 98 दिनों की मांग के बराबर रह जाएगा. कच्चे तेल के अलावा, पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल जैसे कमर्शियल फ्यूल का भंडार भी युद्ध से पहले के 50 दिनों से घटकर 45 दिनों की मांग के बराबर रह गया है.
अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से इस सप्लाई में बड़ी रुकावट आई, जिससे अब रिजर्व में कमी की नौबत आ गई है. सप्लाई में कमी के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमातें में अब तक 6 परसेंट से ज्यादा का उछाल आ चुका है.&amp;nbsp;
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के पास मौजूदा समय में लगभग 60 दिनों की मांग पूरी करने के बराबर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है. जबकि सरकार के मुताबिक, देश के पास 74 दिनों का फ्यूल स्टॉक मौजूद है. हालांकि, भारत अपनी सप्लाई चेन में विविधता लेकर आया है. मिडिल ईस्ट में शामिल देशों के अलावा भारत लगभग 40 दूसरे देशों से कच्चे तेल का आयात करता है ताकि होर्मुज में आई रुकावट का ज्यादा असर न पड़े.

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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Crude, Oil, Reserve:, खत्म, होने, की, कगार, पर, कच्चा, तेल, जानें, बचे, स्टॉक, से, कितने, दिन, की, डिमांड, हो, सकती, है, पूरी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>होम लोन की EMI 25000 है, बैंक बैलेंस रह गया 20 हजार; अब क्या होगा, क्या लगेगा जुर्माना?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/होम-लोन-की-emi-25000-है-बैंक-बैलेंस-रह-गया-20-हजार-अब-क्या-होगा-क्या-लगेगा-जुर्माना</link>
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        <description><![CDATA[ Home Loan EMI: रोटी, कपड़ा और मकान ये तीन चीजें लोगों की बेसिक जरूरते हैं. खुद के अपने घर का सपना हर किसी का होता है, जिसे पूरा करने के लिए लगभग सभी बैंक और कई हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां होम लोन देती हैं. होम लोन से मकान की जरूरत भी पूरी हो जाती है और आप आसान किस्तों में इसकी भरपाई भी कर देते हैं.
हालांकि, कई बार समय पर ईएमआई चुकाने में काफी मुश्किलें भी आती है क्योंकि ईएमआई की रकम कोई छोटी रकम नहीं होती है. इसे हर महीने की किसी एक निर्धारित तारीख पर जमा करानी होती है. मान लीजिए कि कभी ऐसी स्थिति आए कि आपके अकाउंट में 20000 रुपये पड़े हो और होम लोन पर आपकी किस्त 25000 रुपये है, तो जाहिर तौर पर आपकी ईएमआई बाउंस होनी ही है. अब सवाल यह आता है कि अगर ईएमआई बाउंस हो जाए, तो क्या बैंक जुर्माना लगाता है और क्या इसका आपके सिबिल स्कोर पर असर पड़ता है. आइए जानते हैं:-
क्या बैंक लगाएगा जुर्माना?
होम लोन पर अगर आपकी ईएमआई बाउंस हो जाएं, तो आपको बैंक को जुर्माना देना होगा. बैंक में बैलेंस पर्याप्त नहीं होगा, तो ऑटो डेबिट फेल हो जाएगा. इस पर बैंक 250-500 रुपये के बीच बाउंस चार्ज काटेगा. इसके अलावा, लोन पेनल्टी भी लगाई जाएगी.
इसके तहत, आपने जिस भी बैंक या संस्था से लोन लिया है, वह 500-1000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना या बकाया ईएमआई पर 1-2 परसेंट प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) वसूलेगी.&amp;nbsp;
अगर आपकी पहली ईएमआई बाउंस हुई है औ आपने ऐसा जानबूझकर नहीं किया है, तो आपको बिना कुछ सोचे अपने बैंक ब्रांच में जाना होगा. वहां मैनेजर से मिलकर अपनी बात उनके साथ रखें और भविष्य में ऐसा न होने का भरोसा दें. उन्हें आपकी बताई गई बात वाजिब लगे, तो हो सकता है कि बैंक की ओर से लगाई गई पेनल्टी में कुछ कमी आ सकती है.
अगर एक बाद दूसरी किस्त भी आपकी बाउंस हो गई है, तो पहले तो अपनी किस्त भरें और फिर बैंक मैनेजर से रिक्वेस्ट कर सिविल में नेगेटिव रिपोर्ट न भेजने का रिक्वेस्ट करें. लगातार तीन महीने तक किस्त बाउंस होने पर आपका सिबिल स्कोर गड़बड़ा सकता है. अगर सिबिल स्कोर खराब हो गया, तो दोबारा लोन मिलने में परेशानी आ सकती है.
सिबिल स्कोर पर असर
EMI बाउंस होने पर इसकी सूचना तुरंत क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है. इससे आपका सिबिल स्कोर कम हो जाएगा, जिससे भविष्य में नया लोन मिलने में चुनौती आ सकती है. और तो और सिबिल गड़बड़ाने से आपको क्रेडिट कार्ड मिलने में भी दिक्कतें आ सकती हैं.&amp;nbsp;
अगर लंबे समय तक हीं चूका पाएं EMI तो?&amp;nbsp;
अगर आप पैसों का इंतजाम लंबे समय तक नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने बैंक से बात कर कुछ समय का Grace Period मांग सकते हैं. आप बैंक को अपनी मजबूरी बताकर कुछ समय के लिए किस्त को होल्ड पर रखने का आवेदन भी कर सकते हैं.
अगर सैलरी लेट आने की वजह से आपको हर बार किस्त भरने में दिक्कतें आ रही हैं, तो आप एरियर EMI के लिए अपने बैंक मैनेजर से बात कर सकते हैं, जिसमें ईएमआई की रकम महीने के आखिर में भरनी होती है. जबकि आमतौर पर लोगों को एडवांस ईएमआई का विकल्प दिया जाता है. इसमें महीने की शुरुआत में किस्त की रकम भरनी होती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>होम, लोन, की, EMI, 25000, है, बैंक, बैलेंस, रह, गया, हजार, अब, क्या, होगा, क्या, लगेगा, जुर्माना</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Business News: Nykaa मुश्किल में! इस कंपनी ने मांगा 20000000 का हर्जाना, होई कोर्ट तक पहुंच गया मामला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/business-news-nykaa-मुश्किल-में-इस-कंपनी-ने-मांगा-20000000-का-हर्जाना-होई-कोर्ट-तक-पहुंच-गया-मामला</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/business-news-nykaa-मुश्किल-में-इस-कंपनी-ने-मांगा-20000000-का-हर्जाना-होई-कोर्ट-तक-पहुंच-गया-मामला</guid>
        <description><![CDATA[ Nykaa Controversy Update: हाल ही में Nykaa ब्यूटी ब्रांड की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा की जा रही है. इन दिनों यह ब्रांड चारों तरफ खुब सुर्खियां बटोर रहा है. दरअसल, जानकारी के मुताबिक Zee Entertainment Enterprises ने फैशन ब्यूटी ब्रांड Nykaa पर दिल्ली हाईकोर्ट में $210,000 यानी (लगभग ₹1.75 करोड़) का हर्जाना (Damages) की बेहद ही कड़ी मांग की है. इस खबर के फैलते ही मानो सोशल मीडिया पर एक बवाल देखने को मिल रहा है.&amp;nbsp;
आखिर कंपनी ने क्या लगाए आरोप?
Zee Entertainment Enterprises कंपनी ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि &amp;nbsp;Nykaa ने अपने प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए Instagram रील्स में Zee के कॉपीराइट वाले गानों का इस्तेमाल किया था. जिसको लेकर कंपनी ने सख्त नाराजगी जाहिर की है. इसके साथ ही ऐसा करने से&amp;nbsp;Meta Platforms के म्यूजिक लाइसेंसिंग के नियमों में इसे किसी उल्लंघन से कम नहीं देखा जा रहा है. हांलाकि, अब इस मामले में Nykaa के वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि 12 फ्लैग किए गए लिंकों को पूरी तरह से हटा दिया गया है. फिलहाल, यह मामला बड़े ब्रांड्स की दुनिया में&amp;nbsp;एक नई चुनौती के तौर पर बाहर आया है. लेकिन, अब इस मामले की सुनवाई 26 मई को की जाएगी.&amp;nbsp;
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कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर चर्चा जारी
जानकारी के अनुसार, Nykaa, अपनी पैरेंट कंपनी PB Fintech Ltd. के तहत, ई-कॉमर्स बाजार में बेहद ही मजबूत पकड़ बनाने का काम करती है. तो वहीं, इस कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹83,505 करोड़ है. लेकिन, अब इस कंपनी की मुश्किलें बढ़ भी सकती हैं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कंपनी पर पहले भी एक पूर्व एग्जीक्यूटिव पर डेटा चोरी और कर्मचारी छंटनी का बेहद ही गंभीर आरोप लगाया जा चुका है. दूसरी तरफ Zee Entertainment का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹8,600-8,700 करोड़ है और इसका पी/ई रेशियो (P/E Ratio) करीब 13.9-15.5 है. इतना ही बीते कुछ दिनों में इस कंपनी के शेयर में काफी बार उतार चढ़ाव भी देखने को मिला है.&amp;nbsp;
दोनों कंपनियों के लिए क्या हो सकती हैं कानूनी प्रक्रियाएं?
Nykaa जैसे बड़ी कंपनी के लिए यह किसी बड़ी कानूनी जोखिम से कम नहीं देखने को मिल रहा है. हांलाकि, इस कंपनी ने लाखों लोगों को रोजगार देने में बड़ी सफलता हासिल जरूर की है लेकिन, कॉपीराइट उल्लंघन के फैसले इस कंपनी के मार्केटिंग में कहीं ज्यादा गहरा असर डालने का काम कर सकते हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ Zee Entertainment के लिए, यह कॉपीराइट क्लेम फिलहाल मौजूदा कानूनी का एक तरह से हिस्सा देखने को मिल सकता है.
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SEBI द्वारा फंड डायवर्जन में कमी के आरोपों को लेकर नोटिस जारी जैसी परेशानियां कंपनी की योजनाओं पर सबसे ज्यादा बुरा प्रकाश डाल सकता है. इन तमाम चिंताओं की वजह से हाल ही के दिनों में Zee के शेयरों में एक बड़ा नुकसान भी देखने को मिला है. फिलहाल, दोनों ही कंपनियां एक ऐसे माहौल में काम कर रही हैं जहां, डिजिटल कंटेंट और बिजनेस प्रैक्टिसेज पर निगरानी बढ़ाई जा रही है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Business, News:, Nykaa, मुश्किल, में, इस, कंपनी, ने, मांगा, 20000000, का, हर्जाना, होई, कोर्ट, तक, पहुंच, गया, मामला</media:keywords>
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        <title>महंगा होकर रहेगा पेट्रोल&amp;डीजल, IMF ने कहा अब बढ़ाने ही होंगे दाम, सब्सिडी पर भी आया बयान</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Diesel Price Hike: यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से क्रूड ऑइल की कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है. हालांकि भारत ने इसका असर फिलहाल जनता पर ज्यादा नहीं पड़ने दिया है. इसी बीच अब IMF (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) के एशिया पैसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कृष्ण श्रीनिवासन ने कहा कै कि ऐसा ही चलता रहा तो भारत की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा सकती है. ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाने पर ध्यान देना होगा.
क्या बोले श्रीनिवासन?दरअसल कृष्णा श्रीनिवासन 5 मई को नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद भी पेट्रोल- डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो इसका असर पूरी तरह से बाजार पर पड़ेगा. उन्होंने ये भी बताया है कि यदि उर्वरक की कीमतों को कम कर दिया जाए तो लोगों की जेब पर असर कम पड़ेगा.
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कितनी हुई क्रूड ऑइल की कीमतें?ईरान और यूएस के बीच चल रहे तनाव की वजह से क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसी की वजह से क्रूड ऑइल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रही हैं, तो वहीं 30 अप्रैल तक भारत का क्रूड बास्केट करीब 118.70 प्रति बैरल के हिसाब से चल रहा था.
मिडिल- ईस्ट तनाव से सप्लाई प्रभावितबता दें कि मिडिल ईस्ट में तनाव फरवरी 2026 से चल रहा है. जिसकी वजह से ना केवल पेट्रोल- डीजल बल्कि कमर्शियल और घरेलू गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं देशभर में लोगों को इसकी कमी से भी जूझना पड़ रहा है. ऐसे में IMF की तरफ से आया ये ताजा बयान लोगों की नींदें उड़ाने वाला है.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>महंगा, होकर, रहेगा, पेट्रोल-डीजल, IMF, ने, कहा, अब, बढ़ाने, ही, होंगे, दाम, सब्सिडी, पर, भी, आया, बयान</media:keywords>
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        <title>थलापति विजय के खजाने का खुलासा, 624 करोड़ की संपत्ति और शेयर बाजार में भारी निवेश!</title>
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        <description><![CDATA[ Thalapathy Vijay Investment: एक्टर से राजनीति का नया चेहरा बने थलपति विजय की पार्टी TVK ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा सीट हासिल की हैं. विजय की इस जीत पर उनके सभी को-स्टार्स के साथ ही उनके सभी फैंस बेहद खुश हैं. इस जीत के बाद अब विजय के राज्य के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. इसी बीच आइये आपको बताते हैं एक्टर विजय की सम्पत्ति के बार में और उन्होंने शेयर बाजार में कितना निवेश किया है.
इतनी सम्पत्ति के मालिक हैं विजयविजय ने नामांकन दर्ज करने के साथ ही 30 मार्च 2026 को चुनाव आयोग में अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा दिया था. एक्टर ने बताया था कि उनकी नेटवर्थ 624 करोड़ रुपये है. तीन दशकों के अपने करियर में विजय ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सबसे अमीर स्टार्स में अपना नाम दर्ज कर लिया है. 624 करोड़ की सम्पत्ति में से उनके पास 404 करोड़ रुपये के मूवेबल एसेट्स हैं. तो वहीं 220 करोड़ की अचल सम्पत्ति है.
ये भी पढ़ें: Gold Tips: क्यों अब गहनों से ज्यादा गोल्ड बार और कॉइन्स की है डिमांड? आपको क्या खरीदना चाहिए
इन कंपनियों में किया है निवेशविजय ने अपने तीन दशक के करियर में काफी सम्पत्ति बनाने के साथ ही कई जगह निवेश भी किया है. एफिडेविट से पता चलता है कि एक्टर ने कुल 19.37 लाख रुपये शेयर में निवेश किए हैं. जया नगर प्रॉपर्टी के 19.03 लाख रुपये के शेयर, इंडियन ओवरसीज बैंक के 9,600 रुपये के शेयर हैं और सन पेपर मिल के 25,000 रुपये के शेयर हैं. इन सभी को मिलाकर उनका शेयर बाजार में निवेश 19.37 लाख रुपये का है.
महंगी गाड़ियों के शौकीन हैं विजयTVK प्रमुख विजय के सेविंग अकाउंट में 213 करोड़ रुपये हैं, इसके अलावा उन्हें महंगी गाड़ियों का शौक है. इसके अलावा कुछ एफडी भी उनके नाम पर हैं, जिससे पता चलता है कि वो इनवेस्टमेंट से ज्यादा पैसों को एफडी में रखना पसंद करते हैं. विजय ने ये कमाई ना केवल फिल्मों से बल्कि कुछ ईवेंट्स, एड्स से भी की है.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Tips: क्यों अब गहनों से ज्यादा गोल्ड बार और कॉइन्स की है डिमांड? आपको क्या खरीदना चाहिए</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Investment Tips: भारत में सोना खरीदना पूरी तरह से एक इनवेस्टमेंट बन गया है. जिस तरह से दिन पर दिन सोने की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है, उस हिसाब से ये अब पहनने के लिए खरीदना तो मुश्किल ही है. ऐसे में लोग सोने के सिक्के और बार खरीदकर उन्हें इनवेस्टमेंट के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. तो आइये आपको बताते हैं कि सोने के सिक्के खरीदना सही है या बार खरीदने में फायदा है.
गहनों से ज्यादा कॉइन्स और बार क्यों खरीद रहे ग्राहक?इन दिनों ग्राहक सोने की ज्वेलरी से ज्यादा दिलचस्पी सोने के सिक्के और सोने के बार में दिखा रहे हैं. रियूटर्स के साथ बातचीत में WGC इंडिया के चीफ एग्जिक्यूटिव सचिन जैन ने बताया है कि, &#039;पहली बार इनवेस्ट की मांग ज्वेलरी की मांग से ज्यादा हो गई है. आने वाली तिमाहियों में निवेश की मांग और भी ज्यादा हो जाएगी, क्योंकि वित्तीय और खुदरा दोनों निवेशक सोने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं.&#039;
क्या कहते हैं WGC के आंकड़ेWGC के आंकड़ों के मुताबिक मार्च तिमाही में इनवेस्टमेंट की मांग पिछले साल की अपेक्षा 52% की तेजी नजर आई है. अब ये मांग 82 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है. इसके उलट गहनों की मांग में 19.5% की गिरावट आई और ये 66 टन रही. इस अंतर के बावजूद, भारत में सोने की कुल खपत 10.2% बढ़कर 151 मीट्रिक टन हो गई है. इससे पता चलता है कि लोग अब सोना केवल इनवेस्टमेंट के लिए ही खरीद रहे हैं.
गहनें, सिक्के या बार, जानें क्या खरीदना चाहिएअगर आप अब भी नहीं समझ पा रहे हैं कि आपको क्या खरीदना चाहिए, तो आइये आपको बताते हैं कि इन तीनों में से क्या आप खरीदेंगे जिससे फायदा होगा.
सोने के सिक्केअगर आप छोटे या मीडियम निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं, तो सोने के सिक्के 24 कैरेट में भी उपलब्ध होंगे. ऐसे में आप इन्हें खरीद सकते हैं और इन्हें बेचना भी आसान होगा. साथ ही साथ इनकी कीमत भी समय के साथ बढ़ेगी ही.&amp;nbsp;
सोने के बारअगर आपको बड़ी मात्रा में इनवेस्टमेंट करना है तो सबसे अच्छा है कि आप सोने के बार में इनवेस्ट करें. क्योंकि इस पर कोई मेकिंग चार्ज नहीं लगता है. ऐसे में इसमें इनवेस्ट करना आपके लिए अच्छा होगा.
सोने के गहनेसोने के गहनों पर मेकिंग चार्ज लगता है, ऐसे में अगर आपको पहनने के लिए सोना लेना है तो आप इसे खरीद सकते हैं. लेकिन अगर आप इनवेस्टमेंट के पर्पज से आप गहने खरीद रहे हैं तो ये बिलकुल भी अच्छा आईडिया नहीं है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Tips:, क्यों, अब, गहनों, से, ज्यादा, गोल्ड, बार, और, कॉइन्स, की, है, डिमांड, आपको, क्या, खरीदना, चाहिए</media:keywords>
    </item>
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        <title>चेतावनी! 4 दिन लगातार ठप रहेगा SBI का कामकाज, देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, जानें तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Bank Services: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को चेतावनी दी है, कि आने वाले दिनों में यदि बैंक से जुड़ा कोई काम हो तो तारीखों का ख्याल रखें. आने वाले कुछ दिनों में बैंक का काम 4 दिनों के लिए ठप पड़ा रहने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक के कर्मचारी आने वाले दिनों में हड़ताल पर जाने वाले हैं, जिसके चलते बैंक से जुड़े कोई भी काम नहीं हो पाएंगे.
कब होगी हड़ताल?AISBISF यानी ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन ने बताया है कि 25 और 26 मई को एसबीआई का सारा स्टाफ हड़ताल पर रहेगा. हड़ताल दो दिन की होगी लेकिन बैंक का काम 4 दिनों तक स्थगित रहने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि 23 मई को चौथा शनिवार है और 24 मई को रविवार की छुट्टी है. इसके बाद के दो दिन यानी सोमवार और मंगलवार के दिन कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे. जिस वजह से ही 4 दिनों तक बैंक का सारा कामकाज ठप रहेगा.
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क्यों कर रहे कर्मचारी हड़ताल?AISBISF ने बताया है कि ये हड़ताल लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का निराकरण करने के लिए की जा रही है. स्टाफ की कमी, नौकरी की शर्तें, भर्ती के नियम और पेंशन से जुड़ी समस्याओं से पिछले कई दिनों से स्टाफ परेशान है. यूनियन का आरोप है कि काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है और पहले हुए कई समझौते भी अभी तक लागू नहीं किए गए हैं. फेडरेशन ने 2 मई को SBI के चेयरमैन को दिए नोटिस में कहा है कि ये हड़ताल इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 के तहत की जाएगी.
ब्रांच से जुड़ी सर्विसेज रहेंगी बंदबता दें कि इस हड़ताल का असर किसी भी तरह से ऑनलाइन सर्विसेज पर नहीं पड़ेगा. इसकी वजह से केवल ब्रांच से संबंधित काम नहीं हो पाएंगे. चेक जमा करना, कैश डिपॉजिट जैसी सुविधाएं इन 4 दिनों के लिए बंद रहने वाली हैं. जबकि डिजिटल सर्विसेज हमेशा ही तरह ही चलेंगी.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 07:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चेतावनी, दिन, लगातार, ठप, रहेगा, SBI, का, कामकाज, देशव्यापी, हड़ताल, का, ऐलान, जानें, तारीख</media:keywords>
    </item>
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        <title>Gold&amp;Silver Rate Today: बंगाल&amp;असम में भगवा लहर के बाद गिरा सोना, जानें 24 से लेकर 18 कैरेट की आज कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-today-बंगाल-असम-में-भगवा-लहर-के-बाद-गिरा-सोना-जानें-24-से-लेकर-18-कैरेट-की-आज-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today on May 5: सोमवार, 4 मई को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बीच मंगलवार को 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.
चांदी की भी चमक आज कुछ फीकी पड़ी है. एक तरफ कच्चा तेल 110 &amp;nbsp;डॉलर प्रति बैरल के पार चला या गया है, &amp;nbsp;जिससे महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है. महंगाई की इन आशंकाओं के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं भी कम होती दिख रही हैं. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक सोने-चांदी के बजाय फिक्स्ड रिटर्न देने वाले बॉन्ड या डिपॉजिट में पैसे लगाना बेहतर समझते हैं.&amp;nbsp;
आज कितनी है सोने की कीमत?
गुडरिटर्नस की रिपोर्ट के मुताबिक, आज 24 कैरेट सोने की कीमत में कल के 1,49,620 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 440 रुपये की गिरावट आई है. इसी के साथ आज इसकी कीमत 1,49,180 रुपये प्रति 10 ग्राम है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत 400 रुपये प्रति 10 ग्राम कम होकर आज 1,36,750 रुपये है. आज 18 कैरेट सोने की कीमत में भी प्रति 10 ग्राम 330 रुपये की गिरावट आई है. अभी इसकी कीमत 10 ग्राम के हिसाब से 1,11,890 रुपये है.
चेक करें रेट



शहर
24 कैरेट की कीमत
22 कैरेट की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
14,923 रुपये
13,690 रुपये


मुंबई
14,918 रुपये
13,675 रुपये


कोलकाता
14,918 रुपये
13,675 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
15,077 रुपये
13,820 रुपये


बेंगलुरु
14,918 रुपये
13,675 रुपये


हैदराबाद
14,918 रुपये
13,675 रुपये



आज चांदी की कीमत
आज भारत में चांदी की कीमत 255 रुपये प्रति ग्राम और 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम है. इनमें कल के मुकाबले क्रमश: 10 रुपये और 10,000 रुपये की गिरावट आई है. मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे तमाम बड़े शहरों में आज चांदी की कीमत प्रति किलो 2,55,000 रुपये है. वहीं, चेन्नई, केरलम और हैदराबाद जैसे कुछ दक्षिण भारतीय शहरों में आज इसकी कीमत 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम है.

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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SBI की बड़ी चेतावनी! YONO यूजर्स को कंगाल कर रहे हैं स्कैमर्स, भूलकर भी न करें ये गलती</title>
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        <description><![CDATA[ YONO Scam Alert: भारत जितना डिजिटलाइज होता जा रहा है, उतने ही ज्यादा स्कैम भी बढ़ते ही जा रहे हैं. डिजिटल बैंकिंग सेक्टर में भी स्कैमर्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. आए दिन खबरें आती हैं कि कोई ना कोई ठगी का शिकार हुआ है. इसी की वजह से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों को ऐसे ही स्कैमर्स से बचने के लिए सतर्क किया है. बैंक की तरफ से YONO ऐप यूज करने वालों को जरूरी चेतावनी दी गई है. बैंक ने बताया है कि साइबर ठग नए-नए तरीकों से ग्राहकों को निशाना बना रहे हैं और छोटी-सी लापरवाही से अकाउंट खाली हो सकता है.
YONO के नाम पर धोखाधड़ीदरअसल इन दिनों सोशल मीडिया पर YONO SBI के नाम से फर्जी पेज बनाकर स्कैमर्स लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ये स्कैमर्स गलत स्पॉन्सर्ड विज्ञापन चलाते हैं, जिनमें लिखा होता है &#039;यूजरनेम या पासवर्ड भूल गए? इस लिंक पर क्लिक करें और तुरंत रिकवर करें.&#039; SBI ने इसे लेकर ही साफ चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी लिंक पर क्लिक ना करें. क्योंकि ये पूरी तरह फर्जी होते हैं और आपकी बैंकिंग जानकारी चुरा सकते हैं.
सावधान रहें, सतर्क रहेंअगर कोई भी यूजर ऐसी किसी लिंक पर क्लिक करके अपनी डिटेल्स डाल देता है, तो वो तुरंत ही ठगी का शिकार हो सकता है. ऐसे में बैंक की तरफ से सलाह दी गई है कि हमेशा YONO SBI ऐप या ऑफिशियल वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें और किसी भी अनजान लिंक, मैसेज या कॉल पर कोई पर्सनल डिटेल ना दें. खासतौर से OTP या पासवर्ड तो बिलकुल भी शेयर ना करें.
बैंक अधिकारी बताकर कर सकते हैं कॉलइसके अलावा SBI के मुताबिक, ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर कॉल, SMS या ईमेल के जरिए आपसे संपर्क कर सकते हैं. वो KYC अपडेट, अकाउंट ब्लॉक होने या रिवॉर्ड प्वाइंट्स का लालच देकर यूजर्स से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं. बैंक ने साफ किया है कि कोई भी अधिकारी कभी भी फोन या मैसेज के जरिए OTP, PIN, पासवर्ड या कार्ड डिटेल नहीं मांगता. अगर कोई ऐसा करता है तो वो निश्चित रूप से फ्रॉड है. खासतौर पर YONO SBI यूजर्स को अलर्ट रहने की जरूरत है, क्योंकि ये ऐप सीधे बैंक खाते से जुड़ा होता है.
इस नंबर से करता है बैंक कॉलवहीं बैंक ने ये भी बताया है कि बैंक के नाम पर आने वाले फोन कॉल्स से भी सतर्क रहने की जरूरत है. आमतौर पर SBI का ऑफिशियल कॉल 1600 से शुरू होने वाले नंबरों से आता है. इसके अलावा किसी और नंबर से कॉल आता है तो उसे आप संदिग्ध मानकर ही बात करें और कोई डिटेल शेयर ना करें. अगर आप किसी भी तरह से ठगी का शिकार हो गए हैं तो देर ना करते हुए नेशनल साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और शिकायत दर्ज कराएं. इसके अलावा आप cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>एक आम कर्मचारी को CEO जितना कमाने में लगेंगे 490 साल! 5 जन्मों तक करनी होगी नौकरी&amp; रिपोर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-आम-कर्मचारी-को-ceo-जितना-कमाने-में-लगेंगे-490-साल-5-जन्मों-तक-करनी-होगी-नौकरी-रिपोर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ CEO Pay: ऑक्सफैम इंटरनेशनल और इंटरनेशनल ट्रेड यूनियन कॉन्फेडरेशन (ITUC) की तरफ से जारी एक नई ग्लोबल रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया के टॉप CEOs की सैलरी कर्मचारियों के मुकाबले 20 गुना तेजी से बढ़ी है.
एनालिसिस में बताया गया है कि एक एग्जीक्यूटिव का मुआवजा तेजी से बढ़ा, जबकि लाखों मजदूर बढ़ती कीमतों और मजदूरी में कम बढ़ोतरी से जूझते रहे. रिसर्च करने वालों ने पाया कि पिछले साल ग्लोबल CEO की सैलरी, मजदूरों की सैलरी के मुकाबले 20 गुना तेजी से बढ़ी.&amp;nbsp;
फायदे में CEOs, नुकसान में वर्कर्स&amp;nbsp;
साल 2025 में ग्लोबल लेवल पर CEOs की सैलरी में वास्तविक रूप से मुद्रास्फीति को एडजस्ट करने के बाद 11 परसेंट का उछाल आया. इसके विपरीत, सामान्य कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में केवल 0.5 परसेंट की ही वृद्धि हुई 33 बड़े देशों की 1500 बड़ी कंपनियों में एक CEO की औसत सैलरी 2024 के 7.6 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 8.4 मिलियन डॉलर (करीब 70 करोड़ रुपये) हो गई.
साल 2019-2025 के बीच बढ़ती महंगाई के चलते वैश्विक स्तर पर कर्मचारियों का वास्तविक वेतन 12 परसेंट घटा है. यह कर्मचारियों द्वारा 108 दिनों तक बिना किसी वेतन के काम करने के बराबर है. वहीं, इस दौरान CEOs के कुल मुआवजे में 54 परसेंट तक की बढ़ोतरी हुई है. स्टडी में बताया गया है कि 2025 में अरबपतियों ने अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो से मिलने वाले डिविडेंड के जरिए हर सेकंड लगभग 2,500 डॉलर कमाए.
अमेरिका में सबसे ज्यादा अंतर
अमेरिका में ऐसा होते सबसे ज्यादा देखा गया. यहां S&amp;amp;P 500 कंपनियों के सीईओ के वेतन में 2024 से 2025 के बीच 25.6 परसेंट की भारी बढ़ोतरी हुई. इसके उलट, अमेरिका में प्राइवेट कंपनियों के वर्कर्स का प्रति घंटा वेतन इसी दौरान सिर्फ 1.3 परसेंट ही रहा. ऑक्सफैम और ITUC के इस रिपोर्ट के आधार पर सरकारों से मांग की गई है कि वे आर्थिक स्तर पर इस असमानता को कम करने के लिए CEOs के वेतन को लिमिट में रखें और अमीरों पर निष्पक्ष कर लागू करें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:30:18 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>एक, आम, कर्मचारी, को, CEO, जितना, कमाने, में, लगेंगे, 490, साल, जन्मों, तक, करनी, होगी, नौकरी-, रिपोर्ट</media:keywords>
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        <title>कौन हैं सुधा रेड्डी? 18000 करोड़ की मालकिन हैं, हैदराबाद की बिजनेस वुमने का मेट गाला लुक चर्चा में</title>
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        <description><![CDATA[ Businesswoman Sudha Reddy: हैदराबाद की मशहूर बिजनेसवुमन और समाजसेविका सुधा रेड्डी एक बार फिर चर्चा में हैं. हाल ही में उन्होंने मेट गाला 2026 के रेड कार्पेट पर अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज कराई. सुधा रेड्डी अपनी लग्जरी लाइफस्टाइव, सोशल वर्क और फैशन स्टेटमेंट के लिए भारत की चर्चित महिला उद्यमियों में गिनी जाती हैं.&amp;nbsp;
कौन हैं सुधा रेड्डी?
सुधा रेड्डी मुख्प रूप से हैदराबाद में रहती हैं और बिजनेस के साथ-साथ कई सामाजिक कामों से भी जुड़ी हुई हैं. वह शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशाक्तिकरण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स में सक्रिय भूमिका निभाती हैं. सुधा रेड्डी इससे पहले मेट गाला 2024 में भी चर्चा में रही थी. अब एक बार फिर वह मेट गाला 2026 में अपने खास अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं.
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क्या करती हैं सुधा रेड्डी?
अगर बात करें सुधा रेड्डी की तो वह एक बिजनेसवुमन होने के साथ-साथ समाजसेविका भी हैं. इसके साथ ही फैशन और लग्जरी लाइफस्टाइल की दुनिया में भी उनकी अलग पहचान है. अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने के कारण उनका नाम अक्सर सुर्खियों में रहता है.
क्या है उनका बिजनेस?
अगर बात करें उनके बिजनेस की तो सुधा रेड्डी का संबंध मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (MEIL) से जुड़े कारोबारी परिवार से हैं. यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है, जो भारत की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में गिनी जाती है.&amp;nbsp;
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कौन है सुधा रेड्डी के पति?
सुधा रेड्डी के पति पीवी कृष्णा रेड्डी हैं. वह मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. फोर्ब्स के मुताबिक उनकी अनुमानित नेटवर्थ 2.2 बिलियन डॉलर बताई जाती है. मेट गाला 2026 में उनकी मौजूदगी ने एक बार फिर उन्हें चर्चा में ला दिया है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>कोयले की कमी से देश में गंभीर बिजली संकट&amp;ग्रिड फेल होने की स्थिति, क्या है दावे की सच्चाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Coal Shortage: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि कोयले की कमी की वजह से भारत गंभीर बिजली संकट और ग्रिड फेलियर का सामना कर रहा है. इस दावे को लेकर PIB Fact Check ने सच्चाई सामने रखी है. इस पोस्ट को लेकर अब खूब चर्चाएं हो रही हैं.
जानें क्या किया जा रहा है दावा?
वायरल पोस्ट की तो इसमें कहा गया है कि देश के कई थर्मल प्लांट्स में कोयले का स्टॉक बेहद कम है. इसी के साथ यह भी दावा किया गया है कि भारत का पावर ग्रिड खतरे में है और बड़े स्तर पर बिजली कटौती हो सकती है.&amp;nbsp;

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कोयले की कमी के कारण भारत गंभीर बिजली संकट और ग्रिड फेलियर का सामना कर रहा है।⚠️ ये दावे भ्रामक हैं और अनावश्यक घबराहट फैलाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।✅ 02 मई 2026 को अधिकतम पीक डिमांड 229 गीगावॉट रही, जिसे&amp;hellip; https://t.co/f9Dn3Tc9gU
&amp;mdash; पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) May 3, 2026



यह भी पढ़ें - सैलरी बढ़ाने में भारत सबसे आगे, सर्वे का दावा- इस साल इतने फीसदी बढ़ेगी आपकी तनख्वाह, जानें
दावे की सच्चाई क्या है?
PIB Fact Check ने इन दावों को पूरी तरह गुमराह करने वाला बताया है. एजेंसी के मुताबिक, यह जानकारी बेवजह घबराहट फैलाने के लिए शेयर की जा रही है.
PIB ने क्या कहा?

PIB ने साफ कहा कि 2 मई 2026 को देश की अधिकतम बिजली मांग 229 गीगावॉट थी, जिसे पूरी तरह पूरा किया गया.
इसके अलावा देश के थर्मल पावर प्लांट्स के पास 53.702 मिलियन टन कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
PIB ने यह भी बताया कि देश में बिजली की उपलब्धता पूरी तरह पर्याप्त है.
साथ ही ग्रिड संचालन और वितरण सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है.
इसी के साथ ही मौजूदा फ्रीक्वेंसी कंट्रोल सिस्टम सुरक्षित संचालन के लिए पर्याप्त है.

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PIB ने लोगों से की अपील
PIB ने लोगों से अपील कि है. PIB ने लिखा कि ,&quot; अगर आपको भारत सरकार से जुड़ा कोई भी भ्रामक कंटेंट दिखे तो उसकी तुरंत रिपोर्ट करें. &amp;nbsp;इसके लिए उन्होंने एक नंबर भी शेयर किया है जिस पर लोग रिपोर्ट कर सकते हैं. &amp;nbsp;शिकायत WhatsApp +91 8799711259 या ईमेल factcheck@pib.gov.in &amp;nbsp;पर की जा सकती है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 03:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कोयले, की, कमी, से, देश, में, गंभीर, बिजली, संकट-ग्रिड, फेल, होने, की, स्थिति, क्या, है, दावे, की, सच्चाई</media:keywords>
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        <title>सरकार के इस फैसले से चीन की हो गई मौज! हिस्सेदारी के लिए FDI नियमों में दी ढील, समझें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ FDI Norms India: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने FEMA नियमों में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत 10 परसेंट तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को अब &#039;ऑटोमैटिक रूट&#039; से निवेश करने की मंजूरी मिल गई है.
यह नया नियम 1 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है. यानी कि भारत में जिन वैश्विक कंपनियों में चीन या भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देश (चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि) की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे कम है, वे अब बिना किसी सरकारी मंजूरी के भारत में सीधा निवेश कर सकती है.&amp;nbsp;
देश में कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में यह नियम बनाया गया था कि भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों या उनके निवेशकों को भारत में निवेश के लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य थी. अब नए नियमों के तहत, किसी विदेशी कंपनी में अगर चीनी निवेशकों की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे ज्यादा है, तो वह कंपनी भारत में &#039;ऑटोमैटिक रूट&#039; ( बिना सरकारी मंजूरी) से सीधे निवेश कर सकेंगे.&amp;nbsp;
पहले क्या था नियम?
पहले भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देशों की कोई एक कंपनी भी अगर भारत में 1 रुपये का निवेश करना चाहती थी, तो पहले उसे सरकार से लिखित मंजूरी लेनी पड़ती थी. अगर किसी बड़ी अमेरिकी या यूरोपीय कंपनी में चीनी कंपनी की हिस्सेदारी सिर्फ 1 परसेंट भी होती थी, तो भी उस कंपनी को भारत में निवेश के लिए महीनों सरकारी मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
यह छूट सिर्फ चीन या हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों के लिए नहीं है, बल्कि उन अमेरिकी या यूरोपीय मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए है, जिनमें चीन के निवेशकों का एक छोटा सा हिस्सा है. यानी कि चीन और हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों को अभी से सरकारी मंजूरी लेनी होगी.&amp;nbsp;
बदलाव का मकसद
FDI के नियमों में ढील देने का मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण और निवेश को तेज करना है.

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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 03:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सरकार, के, इस, फैसले, से, चीन, की, हो, गई, मौज, हिस्सेदारी, के, लिए, FDI, नियमों, में, दी, ढील, समझें, कैसे</media:keywords>
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        <title>30 साल में पहली बार हुआ ऐसा! कुवैत ने अप्रैल में नहीं किया एक भी बैरल तेल का निर्यात, दुनिया हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Kuwait Crude Halt: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, टैंकर ट्रैकर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत ने अप्रैल 2026 के दौरान एक भी बैरल कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया. यह पिछले तीन दशकों में पहली बार हुआ है. अगर इस खबर की आधिकारिक पुष्टि होती है तो यह 1991 में खाड़ी युद्ध खत्म होने के बाद पहला मौका होगा जब कुवैत का मासिक कच्चे तेल का निर्यात जीरो रहा है.
निगरानी समूह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि कुवैत ने अप्रैल महीने में कच्चे तेल का कोई निर्यात नहीं किया. हालांकि देश में तेल उत्पादन जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत अपने उत्पादित तेल का कुछ हिस्सा स्टोरेज में रख रहा है, जबकि बाकी को रिफाइंड प्रोडक्ट्स में बदलकर उसका निर्यात किया जा रहा है.

BREAKING: DURING APRIL 2026, KUWAIT EXPORTED ZERO BARRELS OF CRUDE OIL FOR THE FIRST TIME SINCE THE END OF GULF WAR I#OOTT #IranWar #Tankers #Kuwait
&amp;mdash; TankerTrackers.com, Inc. (@TankerTrackers) May 2, 2026



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निर्यात रुकने की वजह क्या है?

रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्रीय शिपिंग मार्गों में आई रुकावट इसकी वजह हो सकती है.
साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव भी बड़ा कारण माना जा रहा है.

कतर ने ईरान से अपील की
इसी बीच कतर ने ईरान से अंतरराष्ट्रीय कानून और UN चार्टर का पालन करने की अपील की है. कतर ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव कम करने और मिडिल ईस्ट में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को संयम बरतना चाहिए.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर चेतावनी
कतर ने विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया था. बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि नौवहन की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना क्षेत्र और दुनिया के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है.
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अमेरिका की बढ़ी गतिविधियां
वहीं अमेरिका सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि पिछले 20 दिनों में अमेरिका ने फारसी खाड़ी, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 48 जहाजों का रास्ता बदला है. अमेरिका नौसेना का जहाड USS News Orleans अरब सागर में तैनात है और क्षेत्र की गातिविधियों पर नजर रखे हुए है.
दूसरी ओर ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान के जरिए भेजा गया ईरान का हालिया राजनयिक प्रस्ताव दोनों देशों के बीच तनाव खत्म करने और स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से भेजा गया है. उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के साथ-साथ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 03:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साल, में, पहली, बार, हुआ, ऐसा, कुवैत, ने, अप्रैल, में, नहीं, किया, एक, भी, बैरल, तेल, का, निर्यात, दुनिया, हैरान</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग के 6 महीने पूरे, जानें सैलरी&amp;पेंशन बढ़ने से कितने दूर केंद्रीय कर्मचारी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-news-8वें-वेतन-आयोग-के-6-महीने-पूरे-जानें-सैलरी-पेंशन-बढ़ने-से-कितने-दूर-केंद्रीय-कर्मचारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-news-8वें-वेतन-आयोग-के-6-महीने-पूरे-जानें-सैलरी-पेंशन-बढ़ने-से-कितने-दूर-केंद्रीय-कर्मचारी</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को छह महीने पूरे हो चुके हैं. इसी के साथ 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) एक निर्णायक चरण में पहुंच गया है. अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी व पेंशन में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका लाखों की संख्या में लोगों को इंतजार है. सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग का गठन किया था, जिसके जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है.
अब कितना टाइम है बचा?&amp;nbsp;
आयोग की टीम अब जमीनी स्तर पर यूनियनों के साथ बैठकें कर रही हैं. यह टीम 18-19 मई को हैदराबाद और 1-4 जून के बीच श्रीनगर का दौरा कर कर्मचारी संगठनों का फीडबैक लेगी. इस बीच, आयोग ने कर्मचारी और पेंशनर संघों के लिए अपनी मांगें और सुझाव जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है.
कुल मिलाकर 3 नवंबर 2025 को गठित इस पैनल ने अब अपनी सिफारिशें जमा करने के लिए आवंटित 18 महीने की समय-सीमा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पूरा कर लिया है और अब मामला फाइनल स्टेज में है. यानी कि आठवें वेतन आयोग पर रिपोर्ट आने में अब सिर्फ 12 महीने का समय बचा है.
केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने यानी&amp;nbsp; कि 540 दिन का वक्त दिया था. इस हिसाब से आयोग को मई 2027 तक केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी.
बचे हुए 12 महीनों में क्या-क्या होगा?

आयोग ने कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोिगयों से सुझाव ऑनलाइन प्राप्त करने की समय सीमा 31 मई, 2026 तक बढ़ा दी है.
जून से दिसंबर के बीच आयोग विभिन्न राज्यों का दौरा कर रेलवे, डिफेंस और अन्य केंद्रीय विभागों के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करेगा.&amp;nbsp;
जनवरी 2027-मई 2027 के बीच प्राप्त सुझावों और सरकार के राजस्व का आकलन कर सैलरी, पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा.


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8th Pay Commission: 283 परसेंट बढ़कर आ सकती है सैलरी, पेंशन में भी होगा इजाफा; क्या पूरी होगी मांग? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 03:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission, News:, 8वें, वेतन, आयोग, के, महीने, पूरे, जानें, सैलरी-पेंशन, बढ़ने, से, कितने, दूर, केंद्रीय, कर्मचारी</media:keywords>
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    <item>
        <title>सैलरी बढ़ाने में भारत सबसे आगे, सर्वे का दावा&amp; इस साल इतने फीसदी बढ़ेगी आपकी तनख्वाह, जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-बढ़ाने-में-भारत-सबसे-आगे-सर्वे-का-दावा-इस-साल-इतने-फीसदी-बढ़ेगी-आपकी-तनख्वाह-जानें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-बढ़ाने-में-भारत-सबसे-आगे-सर्वे-का-दावा-इस-साल-इतने-फीसदी-बढ़ेगी-आपकी-तनख्वाह-जानें</guid>
        <description><![CDATA[ Salary Hike 2026: भारत वैश्विक स्तर पर वेतन बढ़ोतरी के मामले में सबसे आगे चल रहा है. 2026 औसतन 9.1% तक सैलरी बढ़ने का अनुमान है, जो 2025 में 8.9% से थोड़ा ज्यादा है. एओन के वेतन वृद्धि और टर्नओवर सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, यह अमेरिका (4.3 प्रतिशत) और ब्रिटेन (4.1 प्रतिशत) जैसे विकसित देशों की तुलना में काफी आगे है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में घरेलू मांग बढ़ने के कारण रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय सेवाओं (एनबीएफसी) जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक सैलरी बढ़ रही है. वहीं कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर घटकर 16.2% हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में काम है.&amp;nbsp;
भारत में सैलरी बढ़ोतरी में बड़ा उछाल
एक्सपर्टों के अनुसार, जूनियर कर्मचारियों में सबसे ज्यादा औसतन 9.6% सैलरी मिल रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अच्छे कर्मचारियों को रखने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. खासकर जूनियर और नए कर्मचारियों को अच्छी सैलरी देते हैं, ताकि वह नौकरी न छोड़ें.
एओन के पार्टनर और रिवॉर्ड्स कंसल्टिंग लीडर (टैलेंट सॉल्यूशंस, इंडिया) रूपांक चौधरी ने कहा कि दुनिया में चल रही अस्थिरता के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है, इसलिए भारत में नौकरी का मूल्यांकन दूसरे बड़े देशों की तुलना में कहीं अधिक है.
ये भी पढ़ें: 55 रुपए से 18000 तक... वेतन आयोग ने कैसे बदली कर्मचारियों की माली हालत, जानें साल दर साल कितना बढ़ी सैलरी
किन क्षेत्रों में कितनी बढ़ोतरी
ऑटोमोबाइल और वाहन निर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है, 2025 में 9.8% थी और 2026 में 9.9% तक पहुंच रही है. इसके बाद बैंकिंग क्षेत्र में करीब 8.4% थी और अब बढ़कर 8.8% तक वेतन बढ़ोतरी का अनुमान है. वहीं केमिकल और इंजीनियरिंग सेक्टर में भी करीब 8.5% वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसमें अब 8.8% तक बढ़ोतरी देखी जा रही है. हालांकि, टेक कंसल्टिंग क्षेत्र में स्थिति सबसे अलग है, जहां आईटी सेवाओं में वेतन वृद्धि दर सबसे कम है, जो करीब 6.8 % है.&amp;nbsp;
नौकरी छोड़ने की दर और विशेषज्ञों की राय
सर्वे से यह पता चलता है कि कुल मिलाकर कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर लगातार काम होती जा रही है. 2025 में यह घटकर 16.2% हो गई, जो कोविड-19 से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई. 2024 में यह दर 17.7% और 2023 में 18.7% थी.&amp;nbsp;
विशेषज्ञों का कहना है कि अब कंपनियां सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि स्किल, परफॉर्मेंस और करियर ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. तो वहीं अब कर्मचारी भी बार-बार नौकरी बदलने के बजाय ऐसे नौकरी की तलाश करते हैं, जिसमें उन्हें अच्छी सैलरी बढ़ोतरी मिले, उनके काम की साफ समझ हो और उनके अच्छे काम की सही पहचान हो.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सैलरी, बढ़ाने, में, भारत, सबसे, आगे, सर्वे, का, दावा-, इस, साल, इतने, फीसदी, बढ़ेगी, आपकी, तनख्वाह, जानें</media:keywords>
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        <title>Bank Holiday Next Week: न होगा चेक क्लीयरेंस, न बंद करा पाएंगे अकाउंट; जानें अगले हफ्ते कब&amp;कब बैंक रहेगा बंद?</title>
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        <description><![CDATA[ Bank Holiday Next Week: बैंक कब-कब किस-किस काम के लिए जाना है इसकी प्लानिंग हमें पहले से ही बना लेनी चाहिए क्योंकि कई बार छुट्टियों के चलते बैंक बंद रहने से आने-जाने में समय की बर्बादी होती है. 4 मई से 10 मई, 2026 वाले हफ्ते में बैंक में दो दिन की छुट्टी रहेगी. इन छुट्टियों के अलावा रविवार की नियमित छुट्टी भी शामिल है, जिसका असर बैंक शाखाओं में मिलने वाली सर्विसेज पर पड़ सकता है.
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक, HDFC बैंक, ICICI बैंक और अन्य बैंकों सहित सभी बैंक हर महीने कई छुट्टियां मनाते हैं. इन छुट्टियों में आम तौर पर दूसरे और चौथे शनिवार के साथ-साथ सभी रविवार भी शामिल होते हैं. अगले आने वाले दिनों में बैंकों का कामकाज दो दिनों तक ठप रह सकता है.&amp;nbsp;
अगले हफ्ते बैंकों में छुट्टियों की लिस्ट

9 मई (शनिवार)- रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर कोलकाता में बैंक बंद रहेंगे.&amp;nbsp;देश के अन्य हिस्सों में बैंक की शाखाएं खुली रहेंगी.
10 मई (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश के कारण पूरे भारत में बैंक बंद रहेंगे. चूंकि, बैंकिंग अवकाश स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग-अलग होते हैं, इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी असुविधा से बचने के लिए वे अपनी संबंधित शाखाओं से समय-सारिणी की पुष्टि कर लें.

कोलकाता में 9 मई को क्यों होगी छुट्टी?&amp;nbsp;
कोलकाता में 9 मई को छुट्टी रवींद्रनाथ टैगोर जयंती मनाने के लिए होती है, जिसे रवींद्र जयंती या &#039;पच्चीशे बोइशाख&#039; भी कहा जाता है. हालांकि, उनका जन्मदिन 7 मई को पड़ता है, लेकिन इस साल यह 9 मई को मनाया जाएगा.
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 1861 में कोलकाता में हुआ था और उन्हें भारत की सबसे महान साहित्यिक और सांस्कृतिक हस्तियों में से एक माना जाता है. यह दिन साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में उनके विशाल योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है.
बैंक की छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं, ये क्षेत्रीय त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राज्यों के खास मौकों से प्रभावित होती हैं. इनके अलावा, RBI के नियमों के अनुसार, सभी बैंक सरकारी छुट्टियों (Gazetted Public Holidays) के साथ-साथ दूसरे और चौथे शनिवार और हर रविवार को भी बंद रहते हैं. आम तौर पर, बैंक की शाखाएं पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुली रहती हैं, जब तक कि कोई खास छुट्टी घोषित न की गई हो.

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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bank, Holiday, Next, Week:, न, होगा, चेक, क्लीयरेंस, न, बंद, करा, पाएंगे, अकाउंट, जानें, अगले, हफ्ते, कब-कब, बैंक, रहेगा, बंद</media:keywords>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price: LPG की बढ़ गई कीमत, फिर पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत जस की तस क्यों? जानें सरकार की पॉलिसी</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today: देश में बीते शुक्रवार को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG की 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई. यह इस साल अब तक जितनी भी कीमतें बढ़ाई गई हैं, उनमें सबसे ज्यादा है. कीमतों में यह इजाफा एक ऐसे समय में किया गया, जब गुरुवार सुबह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें चार साल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो 126 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक थीं. इससे लोग अंदाजा लगा रहे थे कि अब ईंधन की कीमतें बढ़ने वाली हैं.
बीते हफ्ते सोशल मीडिया पर कई फर्जी नोटिस सर्कुलेट होते रहे और विपक्षी नेताओं ने भी जोर देकर कहा कि कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी. हालांकि, हाल के हफ्तों में तेल विपणन कंपनियों को भारी नुकसान होने के बावजूद पिछले साल मार्च में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद से ईंधन की कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं. मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद घरेलू LPG की दरें भी अपरिवर्तित रखी गईं और पेट्रोल व डीजल की कीमतें भी नहीं बदली गईं.&amp;nbsp;
क्यों नहीं बढ़ रहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?&amp;nbsp;
इस बीच, Indian Express से बात करते हुए एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, &#039;&#039;यह तो होना ही है। बस समय की बात है कि (पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG की) कीमतें बढ़ेंगी.&#039;&#039; लेकिन पूरे भारत में विधानसभा चुनाव खत्म होने के लगभग एक हफ्ते बाद भी सरकार ने अभी तक ऐसा कोई बदलाव लागू नहीं किया है.
पिछले चार सालों से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें लगभग वैसी ही बनी हुई हैं और सरकार ने कई बार सफाई देते हुए कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है. यह सब तब हो रहा है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 50 परसेंट से ज्यादा बढ़ गई हैं और कुछ हालिया अनुमानों के मुताबिक, रोजाना का नुकसान 2,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
सरकारी तेल कंपनियां &amp;mdash; Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation &amp;mdash; इस दौरान कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर चुकी हैं. रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला शुरू करने के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं.
हालांकि, इस साल की शुरुआत में ये घटकर लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थीं, लेकिन गुरुवार को ये 126 डॉलर के आंकड़े को पार कर गईं. कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई नरमी से कंपनियों का रेवेन्यू काफी ज्यादा बढ़ा था. वित्त वर्ष 2024 में ही तेल कंपनियों (OMCs) का कुल मुनाफा 86,000 करोड़ रुपये के चौंकाने वाले स्तर पर पहुंच गया था. यह &amp;nbsp;शायद एक अहम वजह है जिसकी बदौलत तेल कंपनियां मौजूदा नुकसान को झेल पा रही हैं.
आज पेट्रोल-डीजल की कीमत&amp;nbsp;



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
94.77 रुपये
&amp;nbsp;87.67 रुपये


मुंबई
103.54 रुपये
90.03 रुपये


कोलकाता
105.45 रुपये
92.02 रुपये


चेन्नई
100.80 रुपये
92.39 रुपये


बेंगलुरु
102.92 रुपये
90.99 रुपये


भुवनेश्वर
101.10 रुपये
92.69 रुपये


चंडीगढ़&amp;nbsp;
94.30 रुपये
82.45 रुपये


देहरादून&amp;nbsp;
&amp;nbsp;93.17 रुपये
88.01 रुपये


फतेहाबाद&amp;nbsp;
97.09 रुपये
&amp;nbsp;89.56 रुपये




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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fuel Price Today: क्या LPG के बाद अब बढ़ेगी पेट्रोल&amp;डीजल की कीमत? सरकार ने बताई सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today: आजकल सोशल मीडिया एक फर्जी डॉयक्यूमेंट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल की कीमतों में 10 रुपये और डीजल की कीमतों में 12.50 रुपये बढ़ोतरी का आदेश दिया है. हालांकि, PIB (Press Information Bureau) Fact Check ने इन दावों का खंडन किया है.
PIB ने क्या बताया?&amp;nbsp;
PIB ने साफ-साफ कह दिया है कि यह एक FAKE न्यूज है और सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है. PIB ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अपुष्ट और भ्रामक खबरों को सोशल मीडिया पर शेयर न करें.
इस बीच, आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले समय में घरेलू LPG सिलेंडर 40-50 रुपये प्रति सिलेंडर तक महंगे हो सकते हैं. यह बीते लगभग चार सालों में ईंधन की कीमतों में पहली बड़ी बढ़ोतरी होगी. अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चा तेल हाल ही में बढ़कर लगभग 120&amp;ndash;126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है और 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर ही बना हुआ है.
क्या कीमतों में होगा इजाफा?&amp;nbsp;
इस &amp;nbsp;बीच, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने चेतावनी दी है कि सामान्य से कम मॉनसून और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर मिलकर आने वाले महीनों में &#039;महंगाई में अचानक तेजी&#039; ला सकता है &amp;mdash; यह उन परिवारों के लिए दोहरी मार होगी, जो पहले से ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं. नागेश्वरन ने चार ऐसे अलग-अलग तरीकों की पहचान की है, जिनके जरिए पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत पर असर डाल रहा है &amp;mdash; कीमतों और आपूर्ति में अचानक बदलाव, व्यापार में रुकावट, लॉजिस्टिक्स की लागत का स्थिर रहना और विदेश से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) में कमी &amp;mdash; और साथ ही यह भी आगाह किया कि यह संकट कोई कुछ समय का तूफान नहीं है.
उन्होंने बताया कि भारत अपनी LPG की 60 परसेंट जरूरतें आयात करता है, जिसमें से 90 परसेंट अब बंद हो चुके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर आता है. उन्होंने इसे &#039;बहुत ही चुनौतीपूर्ण स्थिति&#039; बताया.
पिछले हफ्ते तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद लगभग चार सालों से खुदरा कीमतें न बदलने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
आज पेट्रोल-डीजल की कीमत



शहर&amp;nbsp;
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
94.77 रुपये&amp;nbsp;
87.67 रुपये&amp;nbsp;


मुंबई
103.54 रुपये&amp;nbsp;
90.03 रुपये&amp;nbsp;


कोलकाता
105.45 रुपये&amp;nbsp;
92.02 रुपये&amp;nbsp;


चेन्नई&amp;nbsp;
100.80 रुपये&amp;nbsp;
&amp;nbsp;92.39 रुपये&amp;nbsp;


बेंगलुरु
102.92 रुपये&amp;nbsp;
90.99 रुपये&amp;nbsp;


अगरतला
97.53 रुपये&amp;nbsp;
86.55 रुपये&amp;nbsp;


अहमदाबाद
94.56 रुपये&amp;nbsp;
90.25 रुपये&amp;nbsp;


अमृतसर
98.29 रुपये&amp;nbsp;
&amp;nbsp;88.06 रुपये&amp;nbsp;


भोपाल
106.52 रुपये&amp;nbsp;
91.89 रुपये&amp;nbsp;




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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Fuel, Price, Today:, क्या, LPG, के, बाद, अब, बढ़ेगी, पेट्रोल-डीजल, की, कीमत, सरकार, ने, बताई, सच्चाई</media:keywords>
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        <title>Gold Silver Price Today: हफ्ते भर उतार&amp;चढ़ाव के बाद आज कितनी है सोने की कीमत? फटाफट चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today: देश में इस हफ्ते 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता, &amp;nbsp;अमेरिकी डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों ने सावधानी बरती. इसके चलते साप्ताहिक आधार पर कीमतों में सीमित गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, 3 मई को यानी कि आज हफ्ते के आखिरी दिन कीमतों में हल्का सुधार जरूर हुआ.&amp;nbsp;
कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण

ईरान और अमेरिका के बीच जारी चर्चाओं ने वैश्विक स्तर पर सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर बनाए रखा, जिससे कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट नहीं हुई.&amp;nbsp;
क्रूड ऑयल में तेजी ने मंहगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इस वजह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं, इससे सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिली.&amp;nbsp;
भारत में शादी-ब्याह के सीजन में मांग को देखते हुए आज सप्ताहांत में सोने की कीमतों में स्थिरता और हल्का उछाल दर्ज किया गया.&amp;nbsp;

आज सोने की कीमत
24 कैरेट- 1,51,230 रुपये प्रति 10 ग्राम. इसमें प्रति 10 ग्राम के हिसाब से कल के मुकाबले 330 रुपये की तेजी आई है.&amp;nbsp;
22 कैरेट- 1,38,500 रुपये प्रति 10 ग्राम. इसमें 300 रुपये की मामूली बढ़त देखी जा रही है.&amp;nbsp;
18 कैरेट- 1,13,500 रुपये प्रति 10 ग्राम. इसमें 250 रुपये का उछाल आया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
चेक करें रेट



शहर&amp;nbsp;
24 कैरेट सोने की कीमत&amp;nbsp;
22 कैरेट सोने की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
1,51,230 रुपये&amp;nbsp;
1,38,500 रुपये


मुंबई
1,50,930 रुपये
1,38,350 रुपये


चेन्नई
1,52,730 रुपये
1,40,000 रुपये


कोलकाता&amp;nbsp;
1,50,930 रुपये
1,38,350 रुपये


बेंगलुरु
1,50,930 रुपये
1,38,350 रुपये


जयपुर
1,51,130 रुपये&amp;nbsp;
1,38,500 रुपये


लखनऊ
1,51,230 रुपये&amp;nbsp;
1,38,500 रुपये



चांदी की कीमत
आज भारत में चांदी की कीमत 265 रुपये प्रति ग्राम और 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम है. मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद, वडोदरा जैसे तमाम शहरों में आज चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 2,65,000 रुपये है. वहीं, चेन्नई में इसकी कीमत आज प्रति किलो के हिसाब से 2,70,000 रुपये है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price, Today:, हफ्ते, भर, उतार-चढ़ाव, के, बाद, आज, कितनी, है, सोने, की, कीमत, फटाफट, चेक, करें, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Stock in Focus: अगले हफ्ते शेयर बाजार में हलचल, 270 से ज्यादा कंपनियां करेंगी Q4 नतीजे का ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/stock-in-focus-अगले-हफ्ते-शेयर-बाजार-में-हलचल-270-से-ज्यादा-कंपनियां-करेंगी-q4-नतीजे-का-ऐलान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/stock-in-focus-अगले-हफ्ते-शेयर-बाजार-में-हलचल-270-से-ज्यादा-कंपनियां-करेंगी-q4-नतीजे-का-ऐलान</guid>
        <description><![CDATA[ Stocks to Focus Next Week (May 4 to 9th): सोमवार यानी कि कल 4 मई से एक नया हफ्ता शुरू होने जा रहा है. इस दौरान 270 से ज्यादा कंपनियां 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई अपनी चौथी तिमाही के नतीजों के साथ डिविडेंड का ऐलान कर सकती हैं.
4 मई से 9 मई के बीच Nifty 50 में शामिल अंबुजा सीमेंट, L&amp;amp;T, M&amp;amp;M और बजाज ऑटो जैसी बड़ी कंपनियां Q4 के अपने &amp;nbsp;फाइनेंशियल नतीजे का ऐलान करेंगी. इसके अलावा, डाबर, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज (UBL) जैसे FMCG कंपनियों के नतीजों पर भी निवेशकों का फोकस बना रहेगा. आइए इस पर एक नजर डालते हैं ताकि कमाई के किसी मौके से आप चूक न जाएं.
4 मई
4 मई को, कॉर्पोरेट इंडिया अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट अपने Q4 नतीजे का ऐलान करेगी. इसके अलावा, FY26 के लिए कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स डिविडेंड की भी सिफारिश कर सकते हैं. BHEL और Petronet LNG जैसी &amp;nbsp;PSU कंपनियां भी अपने नतीजे घोषित करेंगी. इन कंपनियों ने भी डिविडेंड की सिफारिश का प्रस्ताव रखा है.
टाटा ग्रुप की कंपनियां Tata Chemicals और Tata Technologies भी सोमवार को अपने फाइनेंशियल नतीजे घोषित करेंगी. फोकस में रहने वाली अन्य प्रमुख कंपनियों में Exide Industries, Godrej Properties, Jindal Stainless, Manappuram Finance और KEI Industries शामिल हैं. कुल मिलाकर, 4 मई को 47 कंपनियां अपने Q4 और सालाना नतीजे घोषित करेंगी.
5 मई
लार्ज-कैप ऑटो स्टॉक्स M&amp;amp;M और Hero MotoCorp मंगलवार, 5 मई को अपने फाइनेंशियल नतीजे घोषित करेंगी. Mahindra का बोर्ड इस तिमाही के लिए डिविडेंड की सिफारिश भी कर सकता है.
Larsen &amp;amp; Toubro के फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी इस दौरान फोकस में रहेंगे क्योंकि बोर्ड FY26 के लिए डिविडेंड का प्रस्ताव रख सकता है. फाइनेंशियल स्टॉक्स में, Punjab National Bank के Q4 नतीजे फोकस में रहेंगे क्योंकि बोर्ड डिविडेंड की सिफारिश कर सकता है.
वहीं, J&amp;amp;K Bank भी मंगलवार को अपने नतीजे घोषित करेगा. Poonawalla Fincorp और Aavas Financiers भी उसी दिन अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट जारी करेंगे. United Breweries और Marico समेत FMCG स्टॉक्स अपने तिमाही नतीजे घोषित करेंगे. मशहूर रिटेल ब्रांड्स Raymond और Shoppers Stop के आंकड़े भी 5 मई को जारी किए जाएंगे.
IT की बड़ी कंपनी Coforge भी इसी दिन अपने नतीजे घोषित करेगी. कंपनी का बोर्ड FY26 के लिए अंतरिम डिविडेंड की सिफारिश भी कर सकता है. कुल मिलाकर, बताई गई तारीख को 55 कंपनियां अपने फाइनेंशियल नतीजे घोषित करेंगी.
6 मई&amp;nbsp;


Bajaj Auto और Paytm अपने फाइनेंशियल नतीजे घोषित करेंगे. लार्ज-कैप शेयरों में, Bajaj Auto और Shree Cements बुधवार, 6 मई को अपने Q4 और पूरे साल के नतीजे घोषित करेंगे. ये कंपनियां 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल साल के लिए डिविडेंड की भी सिफारिश कर सकती हैं.
वहीं, फिनटेक सेक्टर में Paytm (One 97 Communications) और PolicyBazaar (PB Fintech) के बोर्ड की बैठकें भी बुधवार को ही होनी हैं. South Indian Bank भी 6 मई को अपने नतीजे घोषित करेगा और बोर्ड डिविडेंड की भी सिफारिश कर सकता है.
Godrej Consumer Products, Radico Khaitan, CESC, KPIT Technologies, Sula Vineyards और Blue Star ने अपने तिमाही और पूरे साल के नतीजे घोषित करने के लिए 6 मई की तारीख तय की है. हाल ही में लिस्ट हुई कंपनी Meesho भी बुधवार को अपने नतीजे घोषित करेगी. कुल मिलाकर, 55 कंपनियां अपने फाइनेंशियल नतीजे घोषित करेंगी.


7 मई
गुरुवार, 7 मई को 63 कंपनियां अपने वित्तीय नतीजे घोषित करेंगी. इनमें ल्यूपिन और बायोकॉन जैसे बड़े फार्मा स्टॉक्स शामिल हैं. ये कंपनियां डिविडेंड की भी सिफारिश कर सकती हैं. इनके अलावा, डाबर इंडिया, MRF भी Q4 के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित करने के साथ डिविडेंड की भी सिफारिश कर सकता है.
अन्य महत्वपूर्ण लार्ज कैप स्टॉक्स में बजाज होल्डिंग्स, भारत फोर्ज, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और थर्मैक्स शामिल हैं. इसके अलावा, V-Mart Retail, Westlife Foodworld, Suryoday Small Finance Bank, Pidilite Industries, Sonata Software, Route Mobile और Wonderla Holidays भी अपने Q4 नतीजों के चलते निवेशकों के फोकस में बने रहेंगे.&amp;nbsp;
8 मई&amp;nbsp;


PSU बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) शुक्रवार, 8 मई को अपने स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल नतीजे जारी करेंगे. ये कंपनियां डिविडेंड का भी प्रस्ताव रख सकती हैं. इनके अलावा, Swiggy, Kalyan Jewellers, Titan Company और Tata Consumer Products भी शुक्रवार को अपने नतीजे का ऐलान करने के साथ डिविडेंड का प्रस्ताव रख सकती हैं.
&amp;nbsp;
अन्य बड़ी कंपनियों में ABB India, Ujjivan Small Finance Bank, Balkrishna Industries, CreditAccess Grameen और Intellect Design Arena शामिल हैं. &amp;nbsp;कुल मिलाकर, शुक्रवार को 46 कंपनियां अपने Q4 के नतीजे घोषित करेंगी.
9 मई
लॉजिस्टिक्स कंपनी ब्लू डार्ट एक्सप्रेस शनिवार, 9 मई को अपने Q4 और पूरे साल के वित्तीय नतीजे घोषित करेगी. कंपनी अपने इक्विटी शेयरों पर डिविडेंड की भी सिफारिश कर सकती है. कपड़ों का मशहूर ब्रांड केवल किरण क्लोथिंग और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी D-Link India भी शनिवार को अपने नतीजे घोषित करेंगी. ये कंपनियां भी डिविडेंड का प्रस्ताव दे सकती हैं. कुल 12 कंपनियां 9 मई को अपने नतीजे घोषित करेंगी.

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8th Pay Commission: 283 परसेंट बढ़कर आ सकती है सैलरी, पेंशन में भी होगा इजाफा; क्या पूरी होगी मांग?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Stock, Focus:, अगले, हफ्ते, शेयर, बाजार, में, हलचल, 270, से, ज्यादा, कंपनियां, करेंगी, नतीजे, का, ऐलान</media:keywords>
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        <title>8th Pay Commission: 283 परसेंट बढ़कर आ सकती है सैलरी, पेंशन में भी होगा इजाफा; क्या पूरी होगी मांग?</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग और कर्मचारी यूनियनों के बीच भले ही इस हफ्ते औपचारिक बातचीत पूरी हो गई हो, जिसमें यूनियनों की तरफ से 3.83x के फिटमेंट फैक्टर पर कम से कम 69,000 रुपये की सैलरी की मांग की गई है. अगर यह डिमांड मान ली जाती है, तो इसका मतलब कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी में 283 परसेंट का इजाफा होगा.
फिलहाल, 7वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों को हर महीने कम से कम 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी मिलती है, जिसे 6वें वेतन आयोग के 7,000 रुपये से बढ़ाया गया था. नई दिल्ली में 28 से 30 अप्रैल तक हुई बैठक में नेशनल काउंसिल (NC-JCM) ने लगभग 36 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन में बढ़ोतरी, वेतन ढांचे में बदलाव और ज्यादा पेंशन व भत्तों की मांग की थी.&amp;nbsp;
कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले
NC-JCM के स्टाफ साइड ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, जो 7वें वेतन आयोग के तहत 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के मुकाबले 126 बेसिस पॉइंट्स (bps) ज्यादा है. अगर 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग मान ली जाती है, तो इसका नतीजा 283 परसेंट की सैलरी हाइक के रूप में निकलेगा.
इसका मतलब यह होगा कि अभी अगर किसी की बेसिक सैलरी 18000 रुपये है, तो उसकी सैलरी बढ़कर लगभग 69000 रुपये तक पहुंच जाएगी, जबकि मध्यम स्तर के वेतन में भी सभी वेतन बैंड में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?&amp;nbsp;
फिटमैंट फैक्टर एक ऐसा Multiplier है, जिसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए नई बेसिक सैलरी या पेंशन तय करने में किया जाता है. फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से अगर आपकी मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 है, तो नई बेसिक सैलरी = 18,000 रुपये &amp;times; 3.83 = 68,940 रुपये होगी. फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों की सैलरी उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी, जिसका असर पेंशन पर भी दिखेगा.&amp;nbsp;
69,000 न्यूनतम वेतन की क्यों की जा रही मांग? 
कर्मचारी यूनियनों ने मिनिमम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये तय करने का प्रस्ताव दिया है. पहले 7वें वेतन आयोग के तहत मिनिमम सैलरी की गणना परिवार के 3 सदस्यों &amp;nbsp;(पति, पत्नी और 2 बच्चे, जिन्हें 2 यूनिट माना जाता था) के आधार पर होती थी. अब यूनियनों का कहना है कि परिवार में बुजुर्ग माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिससे परिवार का आकार बढ़कर 5 यूनिट हो जाता है. 5 लोगों के खर्च के हिसाब से सैलरी की यह नई मांग रखी गई है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, 283, परसेंट, बढ़कर, आ, सकती, है, सैलरी, पेंशन, में, भी, होगा, इजाफा, क्या, पूरी, होगी, मांग</media:keywords>
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        <title>नीरव मोदी&amp;विजय माल्या समेत 21 भगोड़े अपराधी घोषित, 2178 करोड़ की संपत्ति भी जब्त, ED का बड़ा प्रहार</title>
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        <description><![CDATA[ Enforcement Directorate Action: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में अपनी FEO (फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर) लिस्ट जारी की है, इस लिस्ट में नीरव मोदी और विजय माल्या समेत 21 लोगों के नाम शामिल हैं. इन लोगों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने इन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया है. इतना ही नहीं बल्कि एजेंसी ने तो इन आरोपियों की कुल 2178 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी जब्त कर लिया है.
ईडी की रिपोर्ट में लिखा है...सेंट्रल एजेंसी की वार्षिक रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई है. जिसके मुताबिक अब तक 54 लोगों के खिलाफ फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (FEOA) के तहत कार्रवाई शुरू की गई है. इनमें से 21 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है. साथ ही साथ इनकी करीब 2178.34 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इन 21 में से 9 लोगों को सिर्फ 2025-26 के दौरान ही भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया.
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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वित्तीय वर्षों 2024-25 और 2025-26 में FEOA के तहत ईडी का काम काफी प्रभावी रहा है. इस दौरान बड़ी मात्रा में संपत्ति जब्त की गई है और भगोड़ा घोषित किए गए आरोपियों की संख्या भी बढ़ी है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इससे ये साफ होता है कि ईडी उन लोगों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाते हैं.
लिस्ट में और किसका नाम?प्रवर्तन निदेशालय की इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात सालों में एजेंसी ने 21 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया है. इनमें बिजनेसमैन नीरव मोदी और विजय माल्या के अलावा यूके में रहने वाले आर्म्स कंसल्टेंट संजय भंडारी और हाजरा इकबाल मेमन (दाऊद इब्राहिम के सहयोगी इकबाल मिर्ची की पत्नी) शामिल हैं. हालांकि इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि हीरा कारोबारी मेहुल चौकसी, इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक और महादेव ऐप से जुड़े सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने का मामला अभी अदालत में लंबित है.
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क्या है FEO?बता दें कि FEO यानी भगोड़ा आर्थिक अपराधी वो होता है जिसके खिलाफ भारत की किसी भी अदालत ने कम से कम 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का घोटाला करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया हो और वो शख्स सजा से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाए और भारत लौटने से मना कर दे. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इस एयरलाइन कंपनी ने रद्द की सभी फ्लाइट्स, बंद होने की कगार पर पहुंची, जानें अपनी बुकिंग&amp;रिफंड का हाल</title>
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        <description><![CDATA[ American Spirit Airlines Cancels Flight: यूएस- ईरान युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल की कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है. एविएशन इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं रही है, ATF की कीमतें बढ़ने का असर भी तेजी से दिखाई दे रहा है. कई एयरलाइंस अपनी कुछ उड़ाने रद्द कर रही हैं, तो वहीं कई पूरी तरह से बंद की जा रही है. इसी कड़ी में अमेरिकन स्पिरिट एयरलाइंस ने भी अपनी फ्लाइट्स तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला कर लिया है.
स्पिरिट एयरलाइंस की फ्लाइटें हुईं रद्दइकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की लो-कॉस्ट स्पिरिट एयरलाइंस ने बढ़ती ईंधन की कीमतों के दबाव के चलते अपनी सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से रद्द करने का फैसला किया है. कंपनी का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में हो रही इतनी तेजी से बढ़ोतरी की वजह से ऑपरेशन की लागत काफी बढ़ गई है, जिससे मौजूदा किराए पर उड़ानें चलाना आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है.
ये भी पढ़ें: एयर इंडिया का बड़ा फैसला, रोजाना 100 फ्लाइट्स की होगी कटौती, महंगाई ने रोकी उड़ान
एयरलाइन की तरफ से बयानइस फैसले के बारे में बात करते हुए स्पिरिट एयरलाइंस के प्रेसिडेंट और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर डेव डेविस ने कहा कि, &#039;स्पिरिट एयरलाइंस ने 30 से भी ज्यादा सालों से यात्रा को सुलभ बनाने और लोगों को एक साथ लाने में भूमिका निभाई है, साथ ही पूरे उद्योग में किफायती दरों को सुनिश्चित करने में भी योगदान दिया है.&#039; उन्होंने आगे ये भी बताया कि मार्च 2026 में उन्होंने अपने बॉन्डहोल्डर्स के साथ बैठक में रिस्ट्रक्चरिंग का प्लान तैयार किया था, लेकिन अचानक से बढ़ी ईंधन की कीमतों के कारण ये फैसला किया गया है.
जानें क्या है रिफंड प्रोसेस?वहीं पैसेंजर्स की सहूलियत के लिए एयरलाइन ने बताया है कि, जिन यात्रियों ने सीधे क्रेडिट या डेबिट कार्ड से टिकट खरीदे हैं, उनके पैसे अपने आप वापस कर दिए जाएंगे. जिन्होंने ट्रैवल एजेंट के जरिए टिकट बुक किया था, उन्हें रिफंड के लिए अपने एजेंट से संपर्क करना होगा. वहीं, वाउचर, क्रेडिट या लॉयल्टी पॉइंट्स से की गई बुकिंग के पैसे या मुआवजे का फैसला बाद में दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा.
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बता दें कि बीते दिन ही ईंधन की कीमतों में वृद्धि की खबरों के बाद एयर इंडिया ने भी अपनी रोजाना की 100 उड़ानें रद्द कर दी हैं. ये फैसला ईंधन की कीमतें बढ़ने के बाद आया है. ऐसे में यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए भी एडवायजरी जारी की जा रही है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>इस, एयरलाइन, कंपनी, ने, रद्द, की, सभी, फ्लाइट्स, बंद, होने, की, कगार, पर, पहुंची, जानें, अपनी, बुकिंग-रिफंड, का, हाल</media:keywords>
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        <title>Gold News: विदेशों से अपना सोना क्यों वापस ला रहा भारत, RBI के कदम से वित्तीय बाजारों में हलचल</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Brings Back Gold: यूएस और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है. इसी वजह से भारत की अर्थव्यवस्था भी गड़बड़ा रही है. तनाव की स्थिति इस कदर बिगड़ रही है कि अब भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेज हो गया है. इसके लिए विदेशों में रखा भारत का सोना वापस लाया जा रहा है.
भारत तेजी से उठा रहा कदमइकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर को ये डर है, कि अन्य देशों में रखा उनका सोना सुरक्षित है या नहीं. ऐसे में सभी अन्य देश इसकी जुगत में लगे हैं. हालांकि भारत के सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेशों के बैंकों, खासकर ब्रिटेन जैसे देशों में सुरक्षित रहता है. लेकिन मौजूदा हालातों के चलते लगाए गए प्रतिबंध और युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और RBI अब सोने को अपने देश में ही सुरक्षित रखने की तैयारी में है.
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क्या कहते हैं RBI के ताजा आंकड़ेवहीं RBI की अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 की रिपोर्ट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास इस वक्त कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है. इसका लगभग 77% हिस्सा यानी करीब 680 टन अब देश में ही सुरक्षित रखा गया है. वहीं 197.67 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास है, जबकि 2.8 टन जमा के रूप में है.
वैश्विक जोखिम से बचने का तरीकाफिलहाल के हालातों को देखते हुए वैश्विक जोखिम से खुद को बचाने के लिए भारत तेजी से ये कदम उठा रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ छह महीने में ही 104.23 टन सोना देश वापस लाया गया है. बता दें कि मार्च 2023 तक हमारा केवल 37% सोना ही देश में था. ये तेजी बताती है कि भारत अब किसी भी तरह के बाहरी जोखिम को हल्के में नहीं ले रहा है.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सप्लाई संकट और बढ़ता भाव... महंगाई से वेंडरों के सामने आजीविका का संकट, ग्राहकों ने भी फेरा मुंह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सप्लाई-संकट-और-बढ़ता-भाव-महंगाई-से-वेंडरों-के-सामने-आजीविका-का-संकट-ग्राहकों-ने-भी-फेरा-मुंह</link>
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        <description><![CDATA[ Commercial LPG Price Hike: यूएस- ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से तेल और एलपीजी के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हाल ही में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में वृद्धि देखी गई. जिससे होटल इंडस्ट्री से लेकर स्ट्रीट वेंडर्स तक सभी लोग परेशान हो रहे हैं. खासकर वो लोग जो खाना बनाने के लिए पूरी तरह से गैस पर निर्भर हैं. एलपीजी की बढ़ती लागत के कारण लोगों को अपना कारोबार चलाने में मुश्किलों का सामना कर रहा है.
क्या बोले दिल्ली के स्ट्रीट वेंडर्स?टाइम्स ऑफ इंडिया ने कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़ने के बाद दिल्ली के कई स्ट्रीट वेंडर्स के साथ बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि गैस खरीदना मुश्किल हो रहा है और इतना ही नहीं इसकी वजह से ग्राहकों की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है. जिसके चलते कई लोगों को अपना काम बंद करना पड़ रहा है, तो कई लोगों घरेलू सिलेंडर और अंगीठी से काम चलाने पर मजबूर हैं.
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एक वेंडर ने बताया कि, उसने दो हफ्ते पहले ही कमर्शियल सिलेंडर ना मिलने की वजह से अपना स्टॉल बंद कर दिया था, अब वो कोयले से अपने बिजनेस को चलाने पर मजबूर है. वेंडर का कहना है कि इससे उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है.
ग्राहकों ने भी फेरा मुंहइस महंगाई ने जहां वेंडर्स के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है, तो वहीं अब ग्राहकों ने भी उनका मुंह फेर दिया है. कई वेंडर्स जिनका पूरा परिवार इसी पर डिपेंड करता है, ऐसे में उन्हें काफी संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में महंगाई की वजह से आम आदमी की जेब पर भी खर्च का बोझ बढ़ रहा है. जिसके चलते वो भी बाहर खाने से बच ही रहे हैं.
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बता दें कि हाल ही में शुक्रवार को 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी की कीमत में 993 रुपये की वृद्धि हुई है. जिसके बाद इसकी कीमत दिल्ली में 3071.5 रुपये हो गई है. तो वहीं 5 किलो के एलपीजी सिलेंडर में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी कीमत 810.5 रुपये हो गई है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price: पेट्रोल 4 से 5 रुपए तक हो सकता है महंगा, डीजल के भी बढ़ सकते हैं दाम, जानें आज क्या हैं रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-पेट्रोल-4-से-5-रुपए-तक-हो-सकता-है-महंगा-डीजल-के-भी-बढ़-सकते-हैं-दाम-जानें-आज-क्या-हैं-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today:&amp;nbsp;मई का महीना महंगाई के मोर्चे पर जनता को झटके दे सकता है. इसकी शुरूआत एक मई को कमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने के साथ हो गई. अब एक और खबर आपको परेशान कर सकती है. सरकारी सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, वो आम आदमी की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है. आने वाले कुछ ही दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा सकता है.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल के दाम 4 से 5 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ सकते हैं, क्योंकि तेल कंपनियां घाटे में चल रही हैं. सरकार ईंधन की कीमतों में संशोधन पर गंभीरता से विचार कर रही है. अगर ऐसा होता है तो इसका असर सीधे तौर पर माल ढुलाई और आपके सफर की लागत पर पड़ेगा. यानी सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि सब्जी से लेकर दूध तक, हर चीज महंगी हो जाएगी.
एयर इंडिया का बड़ा फैसला, रोजाना 100 फ्लाइट्स की होगी कटौती, महंगाई ने रोकी उड़ान
आज क्या हैं आपके शहर में पेट्रोल डीजल के दाम? देखें लिस्ट



शहर (City)
पेट्रोल (Petrol)
डीजल (Diesel)




1. नई दिल्ली (New Delhi)
₹ 94.77
₹ 87.67


2. मुंबई (Mumbai)
₹ 103.54
₹ 90.03


3. कोलकाता (Kolkata)
₹ 105.45
₹ 92.02


4. चेन्नई (Chennai)
₹ 100.80
₹ 92.39


5. बेंगलुरु (Bengaluru)
₹ 102.92
₹ 90.99


6. हैदराबाद (Hyderabad)
₹ 107.41
₹ 95.65


7. अहमदाबाद (Ahmedabad)
₹ 94.56
₹ 90.25


8. जयपुर (Jaipur)
₹ 104.88
₹ 90.36


9. लखनऊ (Lucknow)
₹ 94.65
₹ 87.76


10. पटना (Patna)
₹ 105.18
₹ 92.04


11. भोपाल (Bhopal)
₹ 106.52
₹ 91.89


12. गुवाहाटी (Guwahati)
₹ 93.23
₹ 89.46


13. अमृतसर (Amritsar)
₹ 98.29
₹ 88.06


14. भुवनेश्वर (Bhubaneswar)
₹ 101.10
₹ 92.69


15. चंडीगढ़ (Chandigarh)
₹ 94.30
₹ 82.45


16. रांची (Ranchi)
₹ 97.86
₹ 92.62


17. रायपुर (Raipur)
₹ 99.44
₹ 93.39


18. देहरादून (Dehradun)
₹ 93.17
₹ 88.01


19. शिमला (Shimla)
₹ 95.27
₹ 87.31


20. श्रीनगर (Srinagar)
₹ 100.70
₹ 86.88



पेट्रोल-डीजल क्यों महंगा हो सकता है?
दरअसल ईरान वॉर और होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है. तेल कंपनियां लंबे समय से अपने घाटे की भरपाई करने के लिए कीमतों में इजाफे का दबाव बना रही हैं. हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह फैसला किसी भी वक्त लिया जा सकता है.
जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है तो इसका असर केवल गाड़ी चलाने वालों पर नहीं पड़ता, बल्कि खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले पंप सेट से लेकर डिलीवरी करने वाले लड़कों तक, हर कोई इसकी जद में आ जाता है. यानी हर सामान की कीमत बढ़ जाती है.
होटल एसोसिएशन का बड़ा फैसला, ग्राहकों को ही देना होगा महंगे सिलेंडर का पैसा, रेस्टोरेंट्स में बढ़ेंगे दाम
पिछले कुछ समय से ईंधन की कीमतें स्थिर थीं, जिससे जनता को थोड़ी राहत मिली हुई थी. लेकिन अब यह संभावित बढ़ोत्तरी &#039;महंगाई की आग में घी&#039; का काम करने वाली है. अगर आप अपनी टंकी फुल कराना चाहते हैं तो शायद अभी सही समय है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, पेट्रोल, से, रुपए, तक, हो, सकता, है, महंगा, डीजल, के, भी, बढ़, सकते, हैं, दाम, जानें, आज, क्या, हैं, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Price Today: रसोई गैस हुई बेकाबू! 40 से 50 रुपए महंगा हो सकता है घरेलू सिलेंडर, जानें अपने शहर के दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-रसोई-गैस-हुई-बेकाबू-40-से-50-रुपए-महंगा-हो-सकता-है-घरेलू-सिलेंडर-जानें-अपने-शहर-के-दाम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-रसोई-गैस-हुई-बेकाबू-40-से-50-रुपए-महंगा-हो-सकता-है-घरेलू-सिलेंडर-जानें-अपने-शहर-के-दाम</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Domestic Gas Cylinder Price Today: रसोई में चूल्हा जलाना अब और भी महंगा होने जा रहा है. आप भी इस बात से बेखबर हैं तो संभल जाइए. सरकार की ओर से ऐसे संकेत मिल रहे हैं जो आपकी जेब पर सीधा असर डालने वाले हैं. खबर है कि बहुत जल्द घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. एक मई को कमर्शियल सिलेंडर में करीब एक हजार रुपए की बढोतरी हुई थी.
सूत्रों ने बताया है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 40 से 50 रुपए प्रति सिलेंडर तक की बढ़ोतरी की जा सकती है. वो सिलेंडर जो पहले से ही आपकी रसोई के बजट को हिलाए हुए था, अब और भी महंगा होने की कगार पर है. बड़ी बात यह है कि सिलेंजर के दाम में अगले 5 से 7 दिनों में इजाफा हो सकता है.&amp;nbsp;
कमर कस लें, पेट्रोल-डीजल के दाम जल्द बढ़ने को हैं... सरकार ने कही ये बात
आज क्या हैं दाम?



शहर
घरेलू सिलेंडर का दाम (₹)




दिल्ली (Delhi)
₹913.00


मुंबई (Mumbai)
₹912.50


कोलकाता (Kolkata)
₹939.00


चेन्नई (Chennai)
₹928.50


बेंगलुरु (Bengaluru)
₹915.50


हैदराबाद (Hyderabad)
₹965.00


लखनऊ (Lucknow)
₹950.50


पटना (Patna)
₹1,002.50


नोएडा (Noida)
₹910.00



कमर्शियल के बाद अब घेरलू सिलेंडर की बारी!
दरअसल ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर डोमेस्टिक फ्यूल प्राइसेज पर पड़ता है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि लागत और बिक्री के बीच बढ़ते अंतर को पाटने के लिए यह फैसला लेना मजबूरी बनता जा रहा है. हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय की अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है, लेकिन सुगबुगाहट तेज़ है कि ये फैसला किसी भी वक्त लागू किया जा सकता है.
कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी देखें

याद रहे कि 50 रुपए की एकमुश्त बढ़ोत्तरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि करोड़ों थालियों से निवाला छीनने जैसी कड़वी सच्चाई है. जब गैस महंगी होती है तो सिर्फ खाना बनाना महंगा नहीं होता, बल्कि होटल से लेकर रेस्तरां तक और टिफिन सर्विस से लेकर मिड-डे मील तक, सब कुछ महंगा हो जाता है. यानी बड़ा हो या छोटा, सब पर महंगाई का बम फूटता है.
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महंगाई को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा
राजनीतिक गलियारों में भी इस खबर के बाद हलचल बढ़ गई है. विपक्ष कमर्शियल सिलेंडर को दाम बढ़ने को लेकर पहले ही सरकार को घेर रहा है. ऐसे में अगर ये कीमतें बढ़ती हैं तो सड़क से लेकर संसद तक हंगामा होना तय है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Today:, रसोई, गैस, हुई, बेकाबू, से, रुपए, महंगा, हो, सकता, है, घरेलू, सिलेंडर, जानें, अपने, शहर, के, दाम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>क्यों हर UPI यूजर के पास होना चाहिए एक अलग बैंक अकाउंट? ये हैं बड़े फायदे, ठगी से बचेंगे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्यों-हर-upi-यूजर-के-पास-होना-चाहिए-एक-अलग-बैंक-अकाउंट-ये-हैं-बड़े-फायदे-ठगी-से-बचेंगे</link>
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        <description><![CDATA[ UPI Payment: आज के इस डिजिटल समय में हर कोई UPI पेमेंट करना पसंद करता है. इसके आने के बाद से कैश लेकर घूमने का झंझट काफी हद तक खत्म हो गया है. हम दिनभर में कई छोटे-बड़े ट्रांजेक्शन करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है जिस बैंक अकाउंट में आपकी पूरी कमाई और साथ ही सेविंग्स हैं, उसी को हर जगह UPI लिंक करना सही है या नहीं? इस बात पर एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि UPI पेमेंट्स के लिए एक अलग बैंक अकाउंट होना जरूरी और समझदारी भरा कदम है.
UPI के लिए रखें अलग अकाउंट
UPI के लिए अलग अकाउंट रखने का सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा है. क्योंकि जब आप अपना मेन अकाउंट हर ऐप और QR कोड से लिंक करते हैं तो स्कैम होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. अगर कभी आपका UPI पिन लीक हो जाए या फिर आप किसी फिशिंग स्कैम का शिकार हो जाएं तो पूरा बैंक बैलेंस खाली हो सकता है. इसलिए सुरक्षा रखना ही एकमात्र समझदारी है. वहीं अगर आप एक सेकेंडरी अकाउंट रखते हैं और उसमें सीमित पैसा रखते हैं तो नुकसान भी सीमित ही रहेगा.
बजट और बैंक स्टेटमेंट रहेगा क्लियर
अगर आप हर ट्रांजेक्शन मेन पेमेंट अकाउंट से करते हैं तो बैंक स्टेटमेंट में कई छोटे ट्रांजेक्शन भर जाते हैं, जिसके कारण खर्च ट्रैक करना और टैक्स फाइलिंग के टाइम स्टेटमेंट समझना मुश्किल हो जाता है. अलग UPI अकाउंट रखने से आप महीने की शुरुआत में एक तय रकम ट्रांसफर कर सकते हैं. इससे आपको साफ पता रहेगा कि आपने कितना खर्च किया और कहां किया.&amp;nbsp;
तकनीकी दिक्कतों से होगा बचाव
कई बार बैंक सर्वर डाउन होने की वजह से पेमेंट फेल हो जाता है. अगर आपके पास दो अलग-अलग बैंक अकाउंट है तो आप दूसरे अकाउंट की मदद ले सकते हैं और बड़ी ही आसानी से पेमेंट कर सकते हैं और साथ ही आप इसके लिए किसी छोटे प्राइवेट बैंक या फिर डिजिटल बैंक का उपयोग कर सकते हैं.
कैसे करें शुरुआत?

UPI के लिए दूसरा अकाउंट खोलना काफी आसान है.
आप किसी भी बैंक में Zero Balance Account खोल सकते हैं.
वहीं कई बैंक Video KYC के जरिए भी घर बैठे अकाउंट खोले की सुविधा देते हैं.

 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्यों, हर, UPI, यूजर, के, पास, होना, चाहिए, एक, अलग, बैंक, अकाउंट, ये, हैं, बड़े, फायदे, ठगी, से, बचेंगे</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price: खतरे की बज गई घंटी! अगले 5&amp;7 दिनों में बढ़ सकते हैं पेट्रोल&amp;डीजल के दाम, इतनी होगी बढ़ोतरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-खतरे-की-बज-गई-घंटी-अगले-5-7-दिनों-में-बढ़-सकते-हैं-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-इतनी-होगी-बढ़ोतरी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-खतरे-की-बज-गई-घंटी-अगले-5-7-दिनों-में-बढ़-सकते-हैं-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-इतनी-होगी-बढ़ोतरी</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Hike News: देश में महंगाई का एक ऐसा तूफान आने वाला है जो आपके घर के पूरे गणित को बिगाड़ कर रख देगा. सरकारी गलियारों से ऐसी खबरें छन कर बाहर आ रही हैं, जो सीधे आपकी जेब पर डाका डालने वाली हैं. सूत्रों ने बताया है कि अगले पांच से सात दिनों के भीतर तेल कीमतों पर सरकार एक बड़ा फैसला लेने जा रही है.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बदलते हालातों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले इसके असर पर सरकार की पैनी नजर है. अभी भले ही अंतिम मुहर न लगी हो, लेकिन संकेत साफ हैं कि बहुत जल्द पेट्रोल, डीजल की कीमतों में तगड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. सिर पर तलवार लटक रही है, क्योंकि आंतरिक चर्चाएं जोरों पर हैं और अधिकारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि आखिर कितना बोझ जनता पर डाला जाए.
एयर इंडिया का बड़ा फैसला, रोजाना 100 फ्लाइट्स की होगी कटौती, महंगाई ने रोकी उड़ान
पेट्रोल-डीजल के दाम में 4 से 5 रुपए तक के उछाल की आशंका
बता दें कि पेट्रोल-डीजल के दाम में 4 से 5 रुपए तक के उछाल की आशंका है. सरकार इस समय &#039;दोराहे&#039; पर खड़ी है. एक तरफ तेल कंपनियों का वित्तीय दबाव है तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई का डर. लेकिन जनता को अब फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है, क्योंकि अगर ये कीमतें बढ़ीं तो इसका असर सीधे आपकी थाली और आपके सफर पर पड़ेगा.
ईंधन और रसोई गैस की कीमतों में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का व्यापक असर होता है. जब डीजल महंगा होता है तो ट्रकों का किराया बढ़ता है और जब किराया बढ़ता है तो फल-सब्जियों से लेकर हर जरूरत का सामान महंगा हो जाता है. मध्यम वर्ग के लिए यह लोहे के चने चबाने जैसा होने वाला है, क्योंकि घरेलू बजट पहले से ही खिंचा हुआ है.&amp;nbsp;
होटल एसोसिएशन का बड़ा फैसला, ग्राहकों को ही देना होगा महंगे सिलेंडर का पैसा, रेस्टोरेंट्स में बढ़ेंगे दाम
 संतुलन बनाने की कोशिश कर रही सरकार- सूत्र
सूत्रों ने बताया कि सरकार फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, ताकि महंगाई बेकाबू न हो, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में यह एक बेहद संवेदनशील नीतिगत फैसला है. खतरे की घंटी बज चुकी है और अगले एक हफ्ते में तस्वीर बिल्कुल साफ होने की उम्मीद है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, खतरे, की, बज, गई, घंटी, अगले, 5-7, दिनों, में, बढ़, सकते, हैं, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, इतनी, होगी, बढ़ोतरी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>3 बदलाव और 5 बड़े वादे... मजदूर दिवस पर गौतम अडाणी ने किया ऐलान, नए रूप में दिखेगा Adani Group</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/3-बदलाव-और-5-बड़े-वादे-मजदूर-दिवस-पर-गौतम-अडाणी-ने-किया-ऐलान-नए-रूप-में-दिखेगा-adani-group</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/3-बदलाव-और-5-बड़े-वादे-मजदूर-दिवस-पर-गौतम-अडाणी-ने-किया-ऐलान-नए-रूप-में-दिखेगा-adani-group</guid>
        <description><![CDATA[ Adani Group Chairman Gautam Adani News: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक लंबा संदेश दिया. उन्होंने इस संवाद को अपनी बात, अपनों के साथ नाम दिया और इसे संगठन के हर कर्मचारी के साथ जुड़ने का एक खास माध्यम बताया. अपने संबोधन में उन्होंने मेहनत, राष्ट्र निर्माण, संगठन की विकास यात्रा और फ्यूचर की योजनाओं पर विस्तार से बात की.
गौतम अडाणी ने कहा कि मेरा मानना है कि जीवन &#039;कल, आज और कल&#039; की एक सतत यात्रा है, जहां हम अतीत से सीखते हैं, वर्तमान को समझते हैं और भविष्य को आकार देते हैं. Adani Group की हमारी विकास यात्रा भी इसी सोच पर आधारित रही है, हर अनुभव, हर निर्णय और हर उपलब्धि, हमारी साझा सीख का हिस्सा है.
उन्होंने आगे कहा कि एक परिवार के रूप में यह जरूरी है कि हम इन सीखों और विचारों को खुलकर साझा करें, ताकि हम मिलकर अपने व्यवसाय, अपने लोगों और सभी stakeholders को भविष्य के लिए और ज्यादा सक्षम व सशक्त बना सकें. अपनी बात, अपनों के साथ उसी भावना का एक प्रयास है, जहां समय समय पर संवाद के माध्यम से हम अपनी यात्रा को और स्पष्ट, सशक्त, सार्थक और सहभागी बनाएंगे.

मजदूर दिवस को बताया खास
गौतम अडाणी ने कहा कि आज हमारा दिन है, हम सबका दिन है. हर वह शख्स जो मेहनतकश है, आज उसका दिन है. हर वो शख्स जिसका विश्वास मेहनत पर है, जो अपने पसीने की ताकत को समझता है, जो मुश्किलों से भागता नहीं, बल्कि उनसे जूझना जानता है, आज उसका दिन है. जिसमें हिम्मत है, हौसला है, कुछ कर गुजरने का जज्बा है. आज का दिन उन सब का है. इसलिए, ये दिन मेरा दिन है, आपका दिन है, हम सबका दिन है. आज अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस है. ये केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उस भावना का उत्सव है जो इंसान को अपने सपनों को साकार करने की शक्ति देता है और साथियों, मेरे लिए ये दिन एक और कारण से भी बहुत विशेष है.
आज ही के दिन शादी के बंधन में बंधे थे गौतम अडाणी
गौतम अडाणी ने बताया कि 1 मई 1986 को ही, आज से 40 साल पहले मैं प्रीति के साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंधा था और मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के साथ जीवन का नया सफर शुरू किया था और आज के दिन की शुरुआत इससे बेहतर क्या हो सकती थी कि आज सुबह अपनी धर्मपत्नी प्रीति के साथ केदारनाथ धाम जाकर महादेव के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला.
वहां हमने मिलकर भगवान से प्रार्थना की, कि उन्होंने मुझे इस महान देश भारत में जन्म दिया और मुझे इस देश की सेवा करने का अवसर मिला, मुझे आप सबका स्नेह और विश्वास मिला, इसके लिए हम उनके प्रति आभारी हैं. आज के दिन हमने ये भी प्रार्थना की, कि हमारा देश निरंतर प्रगति करता रहे, समृद्ध होता रहे, और आप सभी का जीवन सुख, शांति और स्वास्थ्य से भरा रहे. और वहीं हमने ये संकल्प भी लिया कि हम सब मिलकर, नए जोश और नई ऊर्जा के साथ, और भी बड़े मकसद के लिए काम करेंगे.
हम एक ऐसे कालखंड में खड़े हैं जो असाधारण रूप से महत्वपूर्ण है. एक लंबे समय की गुलामी के बाद, 1947 में हमारा देश स्वतंत्र हुआ. आज उस स्वतंत्रता को लगभग अस्सी वर्ष होने को हैं, और आज हम अपने परिश्रम और पराक्रम से उस मुकाम पर खड़े हैं, जहां दुनिया भारत की तरफ उम्मीदों के साथ देख रही है. ये एक ऐसा समय है जब हमारा हर प्रयास, केवल व्यक्तिगत या संस्थागत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का हो जाता है.
भारत 2047 विजन पर दिया जोर
गौतम अडाणी ने आगे कहा कि देश के सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने भारत की युवा शक्ति, उसकी ऊर्जा और उसकी संभावनाओं पर भरोसा करते हुए, 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है. लेकिन ये संकल्प किसी एक व्यक्ति, किसी एक संस्था, या किसी एक सरकार के प्रयास से पूरा नहीं होगा. इसके लिए 140 करोड़ देशवासियों को पूरी निष्ठा, पूरी ऊर्जा और पूरे समर्पण के साथ जुटना होगा. अदाणी समूह भी इसी देश का हिस्सा है. इसलिए ये केवल हमारा अवसर नहीं, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इस राष्ट्र को विकसित बनाने की यात्रा में अपना योगदान दें.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के मन में ये विचार आ सकता है कि इतने बड़े देश में इतनी विशाल आबादी के बीच, मेरे अकेले के योगदान से क्या फर्क पड़ेगा? अगर मैं कुछ नहीं करूं तो भी क्या हो जाएगा? साथियों, यही भावना हम सबके भीतर होनी चाहिए. ये महत्वपूर्ण नहीं है कि आपका योगदान कितना बड़ा है या छोटा. महत्वपूर्ण ये है कि आपने अपना योगदान दिया या नहीं.
बड़े प्रोजेक्ट्स का किया जिक्र
अडाणी ने कहा कि जब हम काम पर आते हैं तो हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि हम केवल एक नौकरी कर रहे हैं. हमें ये समझना होगा कि हमारा हर काम राष्ट्र निर्माण से जुड़ा हुआ है. जब हम एक project पूरा करते हैं तो हम सिर्फ एक काम नहीं करते, हम देश के भविष्य को आकार देते हैं. इस बात को अगर समझना हो तो मुंद्रा को देखिए. एक समय था जब वहां कुछ भी नहीं था. रेत थी, खाली ज़मीन थी. आज वही मुंद्रा भारत का सबसे बड़ा पोर्ट बन चुका है, देश के व्यापार को गति दे रहा है और भारत को दुनिया से जोड़ रहा है.
इसी तरह, केरलम का विझिंजम पोर्ट, भारत को global maritime map पर एक नई पहचान देगा और हमें एक मजबूत transshipment hub बनने की दिशा में आगे ले जाएगा और कच्छ में खावड़ा, जहां हम दुनिया के सबसे बड़े green energy projects में से एक बना रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की नींव रख रहा है और अब नवी मुंबई एयरपोर्ट, ये केवल एक airport नहीं है. ये हमारे देश का गौरव है, दुनिया के सबसे बेहतरीन airports में से एक है. ये भारत की aviation capacity को नया आयाम देगा, connectivity को बढ़ाएगा और लाखों लोगों के लिए नए अवसर खोलेगा. ये सिर्फ एक airport नहीं है, ये भारत की बढ़ती हुई ताक़त और क्षमता का प्रतीक है.
धारावी प्रोजेक्ट को बताया सबसे चुनौतीपूर्ण
अदाणी न ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 23:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एयर इंडिया का बड़ा फैसला, रोजाना 100 फ्लाइट्स की होगी कटौती, महंगाई ने रोकी उड़ान</title>
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        <description><![CDATA[ US-Iran War: यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत पर भी तेजी से पड़ रहा है. जिसके चलते रोजाना किसी ना किसी तरह से महंगाई बढ़ रही है. हाल ही में ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतों में इजाफा हुआ है. जिसका असर एविएशन इंडस्ट्री पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. जिसके चलते एयरलाइंस अब फ्लाइट्स में कटौती करने का मन बना रही हैं.
एयर इंडिया की उड़ानें रद्दईटी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयर इंडिया ने अपनी रोजाना की उड़ानों में कटौती करने का फैसला कर लिया है. फिलहाल एयर इंडिया की फ्लाइट रोजाना इंटरनेशनल और डोमेस्टिक मिलाकर 11,00 उड़ानें चलती हैं. अब नए फैसले के मुताबिकक इनमें से 100 फ्लाइट्स की उड़ानों को रद्द करने का फैसला कर लिया गया है, ये कटौती जून तक चलने वाली है.
ये भी पढ़ें: 380 रुपये के नुकसान पर सिलेंडर बेच रहीं तेल कंपनियां, मई तक हो सकता है 40484 करोड़ का घाटा
पाकिस्तान भी है फासले की वजहदरअसल ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण इन दिनों पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भी बंद पड़ा है. जिसकी वजह से भारत से उड़ान भरने वाली कई यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर की फ्लाइट्स को लंबे रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे इनमें ईंधन की ज्यादा खपत तो हो रही है साथ ही क्रू का भी खर्चा बढ़ रहा है. इसके चलते भी ये फैसला किया गया है.
शुक्रवार को फिर हुई ATF में बढ़ोतरीबता दें कि शुक्रवार को दिल्ली में एटीएफ यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल का दाम 1,36,082 रुपये से बढ़कर 1,43,335 रुपये प्रति किलोलीटर हो गया है. लगातार दूसरे महीने में की गई ये बढ़ोतरी 5.33 फीसदी की है. जिसके कारण इसका प्रभाव उड़ानों पर भी पड़ रहा है. इससे पहले सोमवार को इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट को रिप्रेजेंट करते हुए फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार लागत का बोझ कम करने के लिए कदम नहीं उठाती है तो सेवाएं सस्पेंड ही रहेंगी.
ये भी पढ़ें: ATF News: हवाई ईंधन की कीमतें दोगुनी, लगातार दूसरे महीने बढ़े दाम, विदेश यात्रा पर बढ़ेगा सरचार्ज ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 23:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price Hike: कमर कस लें, पेट्रोल&amp;डीजल के दाम जल्द बढ़ने को हैं... सरकार ने कही ये बात</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price News: आपकी जेब पर महंगाई का एक और बड़ा बम फूटने वाला है. देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने वाले हैं.&amp;nbsp;सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि निकट भविष्य में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता. यानी पिछले चार सालों से जो कीमतें स्थिर थीं, अब वह आपके बजट को बिगाड़ने के लिए तैयार खड़ी हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
समाचार एजेंसी पीटीआई से सरकारी सूत्रों ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग और शांति वार्ता रुकने की वजह से वैश्विक तेल बाज़ार में हड़कंप मचा हुआ है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें इस बार 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गईं हैं. अब पूरी दुनिया की नज़रें &#039;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#039; पर टिकी हैं.
भारत में कीमतें क्यों बढ़ेंगी? 
दरअसल सरकारी तेल कंपनियों का नुकसान अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है. पिछले चार सालों से खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई थीं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. तेल मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 20 रुपए और डीजल पर लगभग 100 रुपए प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. कच्चा तेल जो पिछले साल 70 डॉलर था, अब औसत 114 डॉलर के पार है.
इससे पहले अनुमान लगाया गया था कि देश में तेल की कीमतों में 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक का उछाल आ सकता है. हालांकि इन खबरों को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया था.
हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने उद्योग की ओर से एक बयान जारी करते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा लागत में भारी बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल, डीज़ल और घरेलू LPG की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है.
आज महंगा हुआ एलपीजी गैस सिलेंडर
बता दें कि आज मई की पहली तारीख को&amp;nbsp;कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी, इंडस्ट्रियल डीजल और जेट फ्यूल के दाम बढ़ा दिए हैं. अब बारी आम आदमी के पेट्रोल और डीज़ल की है. दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल 94.77 रुपए और डीजल 87.67 रुपए है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 23:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मल्टीपल क्रेडिट कार्ड EMI के जाल में फंसे हैं? ऐसे निकलें बाहर, एक बार में खत्म हो जाएगा तनाव</title>
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        <description><![CDATA[ Banking Tips: क्रेडिट कार्ड्स हमारी आर्थिक स्थिति को बैलेंस करने का एक जरिया बन गए हैं. लेकिन अगर इसे स्मार्टली इस्तेमाल नहीं किया तो ये आपके लिए बहुत भारी पड़ सकते हैं. क्रेडिट कार्ड एक ऐसा मायाजाल है, जिसमें फंसने के बाद लोग ब्याज और ईएमआई के दलदल में फंसते ही चले जाते हैं. अगर आप भी मल्टिपल क्रेडिट कार्ट्स इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके EMI के साथ ही लंबा चौड़ा इंटरेस्ट भर रहे हैं. तो हम आपको यहां पर कुछ आसान तरीके बताने वाले हैं, जिससे आप इस बोझ से मुक्ति पा सकते हैं.
पर्सनल लोन करेगा मददअगर आप भी कई क्रेडिट कार्ड और उसकी EMI के मायाजाल में फंस चुके हैं, तो आपको इससे पर्सनल लोन बाहर निकाल सकता है. आइये बताते हैं कैसे:
मान लीजिए आपने एक लंब- संब अमाउंट का पर्सनल लोन ले लिया, अब इससे आप अपने सभी क्रेडिट कार्ड्स की EMI को क्लोज कर सकते हैं. उसके बाद आपके पास केवल एक ही EMI बचेगी और इंटरेस्ट भी काफी हद कम लगोगा.
ये भी पढ़ें: एयर इंडिया का बड़ा फैसला, रोजाना 100 फ्लाइट्स की होगी कटौती, महंगाई ने रोकी उड़ान
ऐसे करें प्लानिंगयहां आप क्रमशः समझिए कि आपको कैसे पर्सनल लोन लेना है और कैसे अपना बिल भरना है.

सबसे पहले आपका क्रेडिट कार्ड्स का कितना बकाया है वो अमाउंट जोड़ लें और एग्जेक्ट अमाउंट का पर्सनल लोन लें. इसमें आप सारे कार्ड्स की EMI का इंटरेस्ट रेट, बाकी बचा हुआ टेन्योर सबकुछ जोड़ लें.
इसके बाद पर्सनल लोन के ऑफर्स चेक कर लें, इंटरेस्ट रेट, प्रोसेसिंग फीस और प्रिपेमेंट चार्जेज भी देख लें.
लोन का टेन्योर सही तरीके से चुनें, किसी चाल में ना फंसें. लोन चुकाने के लिए ज्यादा लंबा टेन्योर ना चुनें, 3 से 5 साल का टेन्योर काफी है.
लोन मिल जाने के बाद जितने भी कार्ड्स हैं 2, 3, 4 या 5 सभी की EMI को तत्काल प्रभाव से बंद कर दें. किसी भी संशय की स्थिति ना रखें.
इसके बाद अपने सारे क्रेडिट कार्ड्स को लॉक कर दें. चाहें तो क्रेडिट स्कोर को बनाए रखने के लिए केवल एक कार्ड को चालू रख सकते हैं.

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पर्सनल लोन से क्रेडिट कार्ड की EMI चुकाने के फायदेएक पर्सनल लोन आपकी टुकड़ों भरी जिंदगी को किस तरह से फायदा पहुंचा सकता है, आइये बताते हैं.

पहले जहां आप 5 कार्ड की EMI दे रहे थे, वहीं अब ये महज 1 ही EMI होगी जो आप भर रहे होंगे.
5 कार्ड की EMI पर आपका इंटरेस्ट भी कार्ड का अलग जा रहा था. इससे आप बच जाएंगे.
मान लीजिए आप 5 कार्ड की कुल 70 हजार EMI दे रहे थे, वो अब केवल 1 EMI यानी 50 हजार (मान लीजिए) ही बची है.
कम से कम 20 हजार रुपये तक का आपका फायदा हो सकता है.

हालांक इसी के साथ आपको कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी है, जैसे कि आपको 14 प्रतिशत से ज्यादा के इंटरेस्ट पर लोन नहीं लेना है. इसके अलावा लोन लेकर कार्ड का पूरा बिल चुकाने के बाद आपको कार्ड का इस्तेमाल दोबारा से नहीं करना है. खासतौर से किसी लंबे- चौड़े अमाउंट के लिए तो बिलकुल भी नहीं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 23:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मल्टीपल, क्रेडिट, कार्ड, EMI, के, जाल, में, फंसे, हैं, ऐसे, निकलें, बाहर, एक, बार, में, खत्म, हो, जाएगा, तनाव</media:keywords>
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        <title>डेंजर जोन में दफ्तर&amp;फैक्ट्रियां! चोट के दावों में 31% का बड़ा उछाल, सुरक्षा नियमों की खुली पोल</title>
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        <description><![CDATA[ Workplace Risk Report 2026: आज के टाइम में बड़े-छोटे हर सेक्टर में कर्मचारियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. बढ़ते काम के दबाव, मशीनों के ज्यादा इस्तेमाल के चलते हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है. इसी बीच भारत के MSME सेक्टर में काम की जगह पर होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है.
1 मई लेबर डे यानी आज से पहले जारी बीमाकवच वर्कप्लेस रिस्क रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में वर्कप्लेस इंजरी क्लेम्स में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह औद्योगिक गातिविधियों का बढ़ना, बेहतर रिपोर्टिंग सिस्टम और बीमा कवरेज का विस्तार है.
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे ज्यादा हुआ प्रभावित
रिपोर्ट में 6 हजार से ज्यादा MSME कंपनियों के डेटा का अध्ययन किया गया है. इस रिपोर्ट में सामने आया कि सबसे ज्यादा हादसे फैक्ट्री और मैक्युफैक्चरिंग में हो रहे हैं.
इन हादसों के पीछे की मुख्य वजह है जैसे...

मशीनों से जुड़े हादसे
साथ ही फिसलकर गिरना
कंस्ट्रक्शन वर्क के दौरान गंभीर चोट लगना

वहीं IT और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बीमा पॉलिसी लेने वाली कंपनियों की संख्या ज्यादा होने के बाद भी दुर्घटना के दावे लगभग जीरो रहे.
इस मौसम में बढ़ जाता है खतरा&amp;nbsp;
रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच वर्कप्लेस दुर्घटनाओं का खतरा ज्यादा रहता है. कुल दावों में 43 प्रतिशत हिस्सा मॉनसून महीनों का रहा है. हैरानी की बात तो यह है कि अकेले जुलाई में 13.4 प्रतिशत दावे दर्ज हुए. क्योंकि भारी बारिश होने के कारण फिसलने का खतरा बढ़ जाता है.
इन राज्यों में सबसे ज्यादा जोखिम&amp;nbsp;
वर्कप्लेस जोखिम सबसे ज्यादा औद्योगिक राज्यों में देखा गया है. महाराष्ट्र 20 प्रतिशत, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली. ये चारों राज्य मिलकर कुल पॉलिसियों के आधे से ज्यादा हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं.
नियमों का पालन अभी भी मुख्य वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, 94.6 प्रतिशत MSME कंपनियां वर्कमेन कंपनसेशन इंश्योरेंस केवल कानूनी नियमों को पूरा करने के लिए खरीदती हैं. लेकिन अब धीरे-धीरे कंपनियों की सोच बदल रही है और वे कर्मचारियों की सुरक्षा को गंभीरता से ले रहे हैं.
डिजिटल प्रोसेस से तेजी
बीमा सेक्टर में डिजिटल बदलाव के चलते पॉलिसी जारी होने की प्रक्रिया काफी तेज हुई है.

69.1 प्रतिशत पॉलिसी उसी दिन जारी हुईं
82 प्रतिशत पॉलिसी तीन दिन के अंदर एक्टिवेट हुईं

यह पारंपरिक 3-7 दिनों की प्रक्रिया से काफी तेज है.
क्या बोले BimaKavach के CEO?
BimaKavach के फाउंडर और CEO &amp;nbsp;तेजस जैन ने कहा कि अब वर्कप्लेस रिस्क को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है. &amp;nbsp;उनके मुताबिक क्योंकि जोखिम केवल शारीरिक चोट तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों की अनदेखी और वित्तीय कमजोरियां भी बड़ा खतरा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>डेंजर, जोन, में, दफ्तर-फैक्ट्रियां, चोट, के, दावों, में, 31, का, बड़ा, उछाल, सुरक्षा, नियमों, की, खुली, पोल</media:keywords>
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        <title>SBI Credit Card: एसबीआई कार्ड यूजर्स ध्यान दें! 1 मई से बदल रहे हैं ये जरूरी नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर</title>
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        <description><![CDATA[ SBI Credit Card Latest News: अगर आप भी एसबीआई क्रेडिट कार्ड का रोजाना इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. 1 मई से एसबीआई के क्रेडिट कार्ड के नियमों में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इस बार लेट पेमेंट चार्ज समेत फीस माफी को भी शामिल किया गया है.&amp;nbsp;
यह तो सभी जानते हैं कि मई के महीने को फाइनेंशियल चेंज के तौर पर देखा जाता है. जहां, इस महीने में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जाते हैं. क्रेडिट कार्ड के अलावा और भी जगह बैंकिंग नियमों में कल नए बदलाव किए जाएंगे.
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एनुअल चार्ज की लिमिट में होगा बदलाव
अगर आप भी SBI क्रेडिड कार्ड का अपनी रोज़ाना की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं तो कल का दिन आपके लिए बेहद ही महत्वपूर्ण होने वाला है. एसबीआई कार्ड की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, 1 मई 2026 से पेमेंट पर लागू चार्ज के अलावा सालाना फीस के नियमों में कुछ बदलाव किए जाएंगे. इसके साथ ही अब ग्राहकों को ज्यादा खर्च करने पर एनुअल फीस रिवर्स की सुविधा भी दी जाएगी.
क्रेडिट कार्ड के बकाया पर क्या हैं सजा के प्रावधान?
दरअसल, यह बड़ा बदलाव एसबीआई बीपीसीएल क्रेडिट कार्ड (SBI BPCL Credit Card) के लिए ही लागू किया जा रहा है. जहां, बैंक ने पिछले महीने 29 मार्च को एक नोटिस जारी कर यह बताया था कि 1 मई से कार्ड धारकों को एनुअल फीस माफी एक लाख रुपए तक का वार्षिक खर्च करने पर दी जाएगी. ग्राहकों को 1 लाख रुपए से कम के खर्च पर फीस का पेमेंट करना होगा.
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लेट पेमेंट की लिमिट में क्या होगा बदलाव?&amp;nbsp;
वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, पहले 500 रुपए तक के पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लिया जाता था, लेकिन अब इस छूट को केवल 100 रुपए तक पूरी तरह से सीमित कर दिया गया है. &amp;nbsp;
500 से लेकर 1000 रुपए के बकाया पर लगेगा चार्ज?&amp;nbsp;
500 से 1000 रुपए तक के बकाया पर अब 400 रुपए की जगह 500 रुपए शुल्क देना अनिवार्य माना जाएगा. जहां, 50, 000 रुपए से अधिक बकाया पर 1300 रुपए शुल्क लागू रहेगा. फिलहाल, अधिक बकाया राशि पर शुल्क स्लैब में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>Gold Rates: आम आदमी की पहुंच से बाहर होगा सोना! इतने रुपए तक जाएंगे दाम, एक्सपर्ट ने चेताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-rates-आम-आदमी-की-पहुंच-से-बाहर-होगा-सोना-इतने-रुपए-तक-जाएंगे-दाम-एक्सपर्ट-ने-चेताया</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Rate: यूएस- ईरान वॉर का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. जिसकी वजह से भारत की भी अर्थव्यवस्था डगमगा रही है. जिसके चलते रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल किए जाने वाली चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी नजर आ रही है. हाल ही में ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है.
एक्सपर्ट ने बताया...दरअसल हाल ही में बिजनेस टुडे के साथ पाइनट्री मैक्रो के संस्थापक रितेश जैन ने बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने बताया है कि सोने की कीमत का कनेक्शन अब आय की वृद्धि से भी टूटता जा रहा है. उन्होंने बताया कि, &#039;अगर आप पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव को देखें, चाहे वो अमेरिकी डॉलर में हो या भारतीय रुपये में, तो आय में उस हिसाब से वृद्धि नहीं हुई है. वैश्विक स्तर पर वास्तविक बिक्री में कोई सुधार नहीं हुआ है&#039;.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान ने भी माना भारत का लोहा! पाक पेट्रोलियम मंत्री ने बताया क्यों भारत का एनर्जी मॉडल है बेस्ट
रितेश ने आगे ये भी बताया कि लोग पहले से ही सोने की कीमत के कारण उसकी क्वालिटी के मामले में कॉम्प्रोमाइज करने लगे हैं. रितेश ने कहा, &#039;आप पहले से ही लोगों को 24 कैरेट से 22 कैरेट, यहां तक ​​कि 16 या 12 कैरेट सोने की ओर बढ़ते हुए देख रहे हैं. शुद्ध सोना आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है.&#039;
सोने की कीमत अपने उच्च स्तर से काफी नीचे आ गई है. MCX पर अपने सबसे ऊंचे भाव 2,02,984 से लगभग 26% (करीब ₹53,000 प्रति 10 ग्राम) की गिरावट आई है. इस समय कीमतें एक सीमित दायरे में चल रही हैं क्योंकि बाजार में कोई नया बड़ा कारण नहीं है. हल्की रिकवरी जरूर हुई है, लेकिन ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली हो रही है, जिसकी वजह से कीमत ज्यादा ऊपर नहीं जा पा रही है.
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>25096 करोड़... चौथी तिमाही में इस कंपनी ने की छप्परफाड़ कमाई, रच दिया इतिहास</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/25096-करोड़-चौथी-तिमाही-में-इस-कंपनी-ने-की-छप्परफाड़-कमाई-रच-दिया-इतिहास</link>
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        <description><![CDATA[ Vedanta Limited Q4 Results: वेदांता लिमिटेड कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 का Q4 रिजल्ट फाइनली आ गया है. जिसमें कंपनी ने शानदार प्रदर्शन से सभी को हैरान कर दिया है. कंपनी ने 25,096 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है. कंपनी के इस मजबूत नतीजे से उसकी वित्तीय स्थिति में मजबूती देखने को मिली है.
खास बात ये रही कि चौथी तिमाही (Q4) में कंपनी का प्रॉफिट साल की दर के हिसाब से 89% बढ़ गया, जो निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
कैसे हुआ मुनाफा?कंपनी के मुताबिक, ये वृद्धि मुख्य रूप से बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन, लागत में कमी और प्रमुख कमोडिटी की कीमतों में सुधार की वजह से हुई है. वेदांता लिमिटेड के कई बिजनेस सेगमेंट जैसे जिंक, एल्यूमिनियम, ऑयल एंड गैस और आयरन ने भी इस दौरान अच्छा योगदान दिया. खासतौर से जिंक और एल्यूमिनियम कारोबार में स्थिर मांग और बेहतर कीमतों ने कंपनी के राजस्व को मजबूत बनाया.
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कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 1.74 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व भी दर्ज किया, जो एक साल पहले की तुलना में 15 प्रतिशत ज्यादा है, जबकि चौथी तिमाही में राजस्व 29 प्रतिशत बढ़कर 51,524 करोड़ रुपये हो गया है. वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस मजबूत बना रहा, जिसमें EBITDA में साल-दर-साल 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई और ये वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 55,976 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि चौथी तिमाही में EBITDA 59 प्रतिशत बढ़कर 18,447 करोड़ रुपये हो गया.&amp;nbsp;
कंपनी के अधिकारी क्या बोलेवेदांता लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अरुण मिश्रा ने कहा, &#039;वित्त वर्ष 2026 वेदांता के लिए मजबूत प्रदर्शन का वर्ष रहा, जिसमें पूरे पोर्टफोलियो में रिकॉर्ड ऑपरेशन परफॉर्मेंस दर्ज की गई है.&#039; इस दौरान उन्होंने नई क्षमताओं के विस्तार और वर्ष के दौरान लगभग 15,000 करोड़ रुपये के विकास पूंजीगत व्यय के निवेश पर भी प्रकाश डाला.
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Rules Change from 1st May: आज से लागू होंगे कई जरूरी बदलाव, जानें क्या होगा रसोई से मोबाइल गेमिंग पर असर</title>
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        <description><![CDATA[ Rules Change from May 1: मई की पहली तारीख से देश में कई जरूरी बदलाव लागू होने वाले हैं. इनमें सबसे सीधा असर आपके घर की रसोई, सफर और मोबाइल गेमिंग पर पड़ेगा.
LPG सिलेंडर
हर महीने की तरह 1 मई को तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के नए दाम जारी कर सकती हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जिस तरफ जाएंगी उसी हिसाब से दाम तय होंगे. इसके अलावा डिलीवरी सिस्टम में भी बदलाव की तैयारी है. OTP बेस्ड डिलीवरी कन्फर्मेशन और eKYC को स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है.&amp;nbsp;
ATF यानी हवाई ईंधन
1 मई को एयर टर्बाइन फ्यूल के नए रेट भी जारी हो सकते हैं. पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें उथल-पुथल में हैं. अगर ATF महंगा हुआ तो एयरलाइंस एक बार फिर हवाई किराया बढ़ा सकती हैं.
पेट्रोल-डीजल
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं लेकिन वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए इन पर भी नजर रखनी होगी. सरकार किसी भी वक्त दाम रिवाइज कर सकती है.
ऑनलाइन गेमिंग पर नई लगाम
Online Gaming Rules 2026 के तहत सरकार ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी OGAI का गठन करेगी. अब गेम्स को तीन कैटेगरी में बांटा जाएगा, पैसे वाले गेम, सोशल गेम और ई-स्पोर्ट्स.
जिन गेम्स में रियल मनी लगती है उनके लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. बच्चों की सुरक्षा के लिए टाइम लिमिट, एज वेरिफिकेशन और पैरेंटल कंट्रोल भी जरूरी किया जाएगा.
NOTE - LPG और ATF के नए दाम 1 मई की सुबह ऑफिशियल घोषणा के बाद ही कन्फर्म होंगे.

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नौकरी के लिए ये हैं भारत की बेस्ट कंपनियां, करियर ग्रोथ में सबको पछाड़ा, देखें लिंक्डइन की लिस्ट&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नौकरी के लिए ये हैं भारत की बेस्ट कंपनियां, करियर ग्रोथ में सबको पछाड़ा, देखें लिंक्डइन की लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ LinkedIn Top Companies List 2026: आज के समय में नौकरी की तलाश करना बेहद मुश्किल काम है. अगर आप बेहतर करियर ग्रोथ और शानदार नौकरी के अवसरों की तलाश में हैं तो यह खबर आपके लिए है. लिंक्डइन की 2026 टॉप कंपनियां लिस्ट में इन्फोसिस को भारत में करियर विकास के लिए सबसे बेहतर कंपनी बताया गया है. इसके बाद एक्सेंचर और अमेजन का नाम शामिल है.
यह लिंक्डइन की सालाना जारी होने वाली 10वीं लिस्ट है. इसमें भारत की 25 बड़ी कंपनियों को शामिल किया गया है, जहां कर्मचारियों को बेहतर करियर ग्रोथ के अवसर मिलते हैं. अगर बात करें इस बार की लिस्ट की तो इसमें टेक्नोलॉजी, कंसल्टिंग और फाइनेंस सेक्टर की बड़ी कंपनियों का दबदबा देखने को मिला है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - ईरान वॉर से &#039;अकाल&#039; जैसी स्थिति का खतरा, भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने डराया
टॉप 5 में कौन-कौन सी कंपनी है?

लिंक्डइन की लिस्ट के मुताबिक इन्फोसिस पहले नंबर पर है.
वहीं दूसरे पर एक्सेंचर
तीसरे पर अमेजन है.
चौथे पर जेपी मॉगर्न चेस है.
और पांचवे स्थान पर एसएपी है.

साल 2026 की इस लिस्ट में 10 नई कंपनियों ने जगह बनाई है. इनमें कई बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं जैसे...

एसएपी
एनवीडिया
एचपी
माइक्रोसॉफ्ट
सैंडिस्क मार्वेल
टेक्नोलॉजी
थॉमसन रॉयटर्स

इन कंपनियों के लिस्ट में जुड़ने से साफ हो गया है कि टेक सेक्टर में करियर के मौके लगातार बढ़ रहे हैं.
जानिए नौकरी के लिए कौन से शहर सबसे आगे है?
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु अभी भी भारत का सबसे बड़ा टैलेंट हब बना हुआ है और वहीं इसके बाद हैदराबाद का स्थान है.&amp;nbsp; इसके अलावा दिल्ली, मुंबई और चेन्नई भी बड़ी कंपनियों के प्रमुख भर्ती केंद्र बने हुए हैं.
कंपनियां किन स्किल्स को ज्यादा महत्व दे रही हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, अब कंपनियां केवल टेक्निकल जानकारी रखने वाले लोगों को ही नहीं महत्व दे रही हैं, बल्कि ऐसे लोगों को ज्यादा पसंद कर रही हैं, जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ ही अच्छी बातचीत करने की, समझदारी और साथ ही समस्या को सुलझाने की स्किल्स हो. इसका साफ मतलब यह है कि ऐसी स्किल्स होनी चाहिए, जो AI आसानी से रिप्लेस नहीं कर सकता है जैसे...

अच्छी कम्युनिकेशन
टीमवर्क
क्रिटिकल थिंकिंग
प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स

क्या कहा लिंक्डइन एक्सपर्ट ने?
लिंक्डइन की करियर एक्सपर्ट और भारत में वरिष्ठ प्रबंध संपादक निरजीता बनर्जी ने कहा कि टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और सॉफ्टवेयर कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स चाहती हैं, जो AI के साथ मिलकर काम कर सकें और अच्छे रिजल्ट दे सकें.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 19:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नौकरी, के, लिए, ये, हैं, भारत, की, बेस्ट, कंपनियां, करियर, ग्रोथ, में, सबको, पछाड़ा, देखें, लिंक्डइन, की, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>पाकिस्तान में &amp;apos;ब्लैकआउट&amp;apos; का डर! पश्चिम एशिया युद्ध के बीच तेल के लिए तड़पा पड़ोसी देश</title>
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        <description><![CDATA[ Pakistan Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कई देशों के हालात बिगड़ गए हैं. इन दिनों पाकिस्तान बढ़ते तेल संकट और महंगे आयात बिल से जूझ रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली मलिक ने माना कि देश के पास कोई रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास केवल 5 से 7 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है, जबकि केस विपणन कंपनियों के पास मौजूद रिफाइंड ईंधन का स्टॉक लगभग 20 से 21 दिनों तक चल सकता है.
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि ईरान युद्ध के चलते देश का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ा है. पहले पाकिस्तान हर हफ्ते लगभग 300 मिलियन डॉलर का तेल आयात करता था, लेकिन अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर प्रति हफ्ते पहुंच गया है. यानी तेल बिल में लगभग 167 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
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भारत से तुलना क्यों कर रहा पाकिस्तान?
अली मलिक ने भारत की ऊर्जा तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान भारत की तरह नहीं है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत अपने भंडार से तेल जारी कर सके. उनके मुताबिक भारत के पास 60 से 70 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, जिससे आपूर्ति संकट की स्थिति में राहत मिल सकती है.
भारत ऐसा क्या अलग कर रहा है?
भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं.
जानें भारत की रणनीति की मुख्य बातें

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए.
साथ ही तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई.
मध्य पूर्व पर निर्भरता कम की.
रूस से बड़े पैमाने पर तेल भी खरीदा.
2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से आयात फिर से शुरू किया.

इन्हीं सब कदमों के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
LPG की कीमतों पर क्या असर?
भारत में 1 अप्रैल को 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़े थे. इसके बाद से कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. यह दिखाता है कि भारत वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता के बीच भी स्थिति को संतुलित रखने में सफल रहा है.
पाकिस्तान ने बनाई विशेष टास्क फोर्स
बढ़ते तेल संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने एक खास टास्क फोर्स बनाई है. इसका काम तेल सप्लाई की निगरानी करना और ईंधन की कीमतों की रोज समीक्षा करना है. हालांकि, बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान में ईंधन की खपत में थोड़ी कमी भी दर्ज की गई है, जो मांग में गिरावट का संकेत देती है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का असर
मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे टाइम तक नाकेबंदी के चलते पूरी दुनिया में तेल बाजार प्रभावित हुआ है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रूट्स में से एक है. इसके चलते &amp;nbsp;गुरुवार को दुनिया भर में तेल की कीमतें और बढ़ गईं. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2022 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. जून के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 0057 GMT तक $1.91 या 1.62 प्रतिशत बढ़कर $119.94 प्रति बैरल हो गया, जबकि जून के लिए US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट वायदा 63 सेंट या 00.59 प्रतिशत बढ़कर $107.51 प्रति बैरल हो गया.
पाकिस्तान क्यों बढ़ा रहा मध्यस्थता की कोशिश?
ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव को देखते हुए पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है. शहबाज शरीफ ने दावा किया कि 11 अप्रैल को पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच करीब 21 घंटे चली बातचीत में मदद की थी.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पाकिस्तान, में, ब्लैकआउट, का, डर, पश्चिम, एशिया, युद्ध, के, बीच, तेल, के, लिए, तड़पा, पड़ोसी, देश</media:keywords>
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        <title>12600 करोड़ की नेटवर्थ वाले सुंदर पिचाई ने बताई अपनी डाइट, गूगल चीफ को कहां से मिलता है प्रोटीन?</title>
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        <description><![CDATA[ Google CEO Sundar Pichai Daily Routine: दुनियाभर में बड़े और सफल लोगों की चर्चा सिर्फ उनकी उपलब्धियों के कारण नहीं होती है, बल्कि उनकी आदतें और दिनचर्या भी लोगों को काफी प्रभावित करती है. कई युवा उनकी लाइफस्टाइल को अपनाने की कोशिश करते हैं ताकि ने भी अपने जीवन में बेहतर काम कर सकें.
ऐसे ही एक शख्सियत हैं सुंदर पिचाई, जो Google के CEO हैं. फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स के मुताबिक, सुंदर पिचाई की वर्तमान कुल संपत्ति 1.5 बिलियन डॉलर है. रुपए में ये 12 हजार 600 करोड़ रुपए से ज्यादा है. उनकी शांत नेतृत्व शैली और साथ ही समझदारी से फैसले लेने की क्षमता और अनुशासित जीवनशैली उन्हें दुनियाभर के प्रोफेशनल्स के लिए प्रेरणा बनाती है. अब जानते हैं उनकी दिनचर्या के बारे में.
यह भी पढ़ें - नौकरी के लिए ये हैं भारत की बेस्ट कंपनियां, करियर ग्रोथ में सबको पछाड़ा, देखें लिंक्डइन की लिस्ट
सुबह कितने बजे उठते हैं सुंदर पिचाई?
सुंदर पिचाई आमतौर पर सुबह 6:30 से 7:00 बजे के बीच उठते हैं. वे अपने दिन की शुरुआत जल्दबाजी में नहीं करते, बल्कि शांत और व्यवस्थित तरीके से अपने दिन की शुरुआत करना ज्यादा पसंद करते हैं. आजकल ज्यादातर लोग सुबह उठकर मोबाइल देखते हैं तो वहीं सुंदर पिचाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे सुबह उठकर आराम से अखबार पढ़ना पसंद करते हैं.
खानपान में रखते हैं सादगी
सुंदर पिचाई का खानपान काफी सादा और सुंतलित है. वे अपनी डाइट में पोषण का खास ध्यान रखते हैं. साथ ही वे शाकाहारी जीवनशैली को पसंद करते हैं, लेकिन वे अपने नाश्ते में शरीर की जरूरत के हिसाब से प्रोटीन शामिल करते हैं. क्योंकि उनका मानना है कि अच्छी सेहत ही लंबे समय तक बेहतर काम करने की ताकत देती है.
नाश्ते में क्या खाते हैं सुंदर पिचाई?
इनका नाश्ता बिल्कुल साधारण होता है, लेकिन काफी हेल्दी. उनके नाश्ते में आमतौर पर एक कप चाय, ऑमलेट, टोस्ट शामिल होता है. ऑमलेट उनके नाश्ते का जरूरी हिस्सा है क्योंकि यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है.
चाय से खास लगाव
चाय भारतीय घरों का अहम हिस्सा है और सुंदर पिचाई भी इससे जुडे़ हुए हैं. भारतीय चाय एक पेय नहीं है, बल्कि एक आदत और संस्कृति का हिस्सा है. सुबह की शुरुआत चाय के साथ करना दिमाग को शांत और तरोताजा महसूस कराता है.
सफलता के पीछे क्या राज है?
सुंदर पिचाई की दिनचर्या यह बताती है कि सफलता पाने के लिए हमेशा बहुत जटिल चीजें करने की जरूरत नहीं होती. उनकी सुबह की आदतें शांत शुरुआत, अखबार पढ़ना, संतुलित नाश्ता और अनुशासन उन्हें पूरे दिन बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती हैं.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>नॉमिनी की मौत और अधूरे कागजात, ओडिशा बैंक मामले से सीखें कैसे सुरक्षित करें अपना जमा पैसा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नॉमिनी-की-मौत-और-अधूरे-कागजात-ओडिशा-बैंक-मामले-से-सीखें-कैसे-सुरक्षित-करें-अपना-जमा-पैसा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नॉमिनी-की-मौत-और-अधूरे-कागजात-ओडिशा-बैंक-मामले-से-सीखें-कैसे-सुरक्षित-करें-अपना-जमा-पैसा</guid>
        <description><![CDATA[ Odisha Bank Case: हाल ही में ओडिशा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया. एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने कंधे पर एक कंकाल लेकर बैंक जाता हुआ दिखा. ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. वीडियो वायरल होने के बाद इसकी सच्चाई का पता चला, कि ये एक भाई है जो बैंक से कुछ पैसे निकालने के लिए अपनी बहन के कंकाल को बैंक लेकर गया था. जिसे दिखाकर वो बैंक कर्मियों को पुष्टि कर सकते कि उसकी बहन का निधन हो गया है. ये मामला इतना छोटा नहीं है बल्कि हर किसी के लिए सबक सीखने वाला है.
ये मामला कई सवाल खड़े करने वाला है. इस मामले में खाता धारक और नॉमिनी दोनों का ही निधन हो चुका है. ऐसे में जब एक भाई अपनी बहन के खाते से महज 20 हजार रुपये निकालने पहुंचा, तो अधूरे कागजात के कारण उसे बहन का मृत शरीर प्रूफ के तौर पर बैंक लेकर जाना पड़ा.
ये भी पढ़ें: क्रेडिट कार्ड बिल नहीं भरा तो क्या मारपीट कर सकते हैं रिकवरी एजेंट्स? जानें अपने अधिकार, कोई टच भी नहीं करेगा
बहुत कुछ सिखाता है ये मामलाये मामला बैंक के कामों को लापरवाही से लेने वाले लोगों के लिए एक बड़ा सबक है. खाता धारकों को बैंक में सारे कागजात अच्छी तरह से जमा करना चाहिए. क्योंकि जब खाता धारक की मृत्यु हो जाए और नॉमिनी की भी मृत्यु हो जाए, तब खाते से पैसा निकालना काफी मुश्किल हो जाता है. खासतौर से तब जब बैंक में मृत्यु के बाद से डॉक्युमेंट्स जमा ना हो पाएं.
नॉमिनी होगा तो आसान होगी प्रक्रियायदि खाता धारक की मृत्यु हो जाए और खाते का नॉमिनी जीवित हो, तब ये प्रक्रिया आसान होती है. ऐसे में नॉमिनी इन पैसों का वारिस कहलाता है और आसानी से पैसे निकाल सकता है. हालांकि जब नॉमिनी की भी मृत्यु हो जाए तब खाते से पैसे निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जब लीगल वारिस पैसे निकाले तो उसे इसी तरह की परेशानियां उठाना पड़ती हैं.
खाता धारक और नॉमिनी दोनों की मृत्यु होने पर क्या करें?अगर खाता धारक की मृत्यु हो जाए और नॉमिनी भी ना हो तो उस स्थिति में थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं. इससे निपटने के लिए बैंक कानूनी वारिसों से कुछ दस्तावेज मांगता है, जैसे:

लीगल हेयर (वारिस) सर्टिफिकेट
परिवार रजिस्टर या शपथ पत्र
सभी वारिसों की सहमति
मृत्यु प्रमाणपत्र

दस्तावेज अधूरे हों तो क्या करें?अगर आपके पास अधूरे दस्तावेज हैं, तो भी ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है, आपके पास कुछ विकल्प होते हैं, जैसे:

इंडेम्निटी बॉन्ड (Indemnity Bond) देकर बैंक से क्लेम लिया जा सकता है.
अन्य वारिसों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेकर प्रक्रिया आसान हो सकती है.
छोटे अमाउंट (जैसे 5-10 लाख तक) के मामलों में कई बैंक आसान प्रक्रिया अपनाते हैं.

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खाता विवादित हो तो क्या करें?यदि खाता विवादित हो, यानी उसके कई हकदार हों और आपस में झगड़ रहे हों तब एक सक्सेशन सर्टिफिकेट भी जमा करवाया जाता है.

ये जिला अदालत से जारी होता है.
इससे बैंक को ये स्पष्ट हो जाता है कि असली हकदार कौन है.

आपको बता दें कि हर बैंक की अपनी अलग प्रक्रिया होती है, जल्दीबाजी में गलत या अधूरे दस्तावेज देने से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. विवाद की स्थिति में कानूनी सलाह लेना बेहतर रहता है. ऐसे मामलों में सलाह मशवरा करके काम किया जाए तो ये आसान और बेहतर होता है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ट्रेड का प्लान B! होर्मुज संकट के बीच पाक ने बदला रूट, सप्लाई के लिए ईरान को दिए 6 नए जमीनी रास्ते</title>
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        <description><![CDATA[ Pakistan amid Hormuz Blockade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दिया है. इसके तहत, ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर हमले करना और उन्हें जब्त करना शामिल है.
अमेरिका सेना द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी किए जाने से ईरान का समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है. इसके चलते न तो ईरान वैश्विक बाजारों तक अपनी पहुंच बना पा रहा है और न ही अपने देश में जरूरी चीजों की सप्लाई करा पा रहा है.
ट्रंप की नाकेबंदी का काम तमाम&amp;nbsp;
इस बीच, पाकिस्तान ने एक रणनीतिक कदम उठाकर इस नाकेबंदी में सेंध लगा दी है. अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी के चलते कराची और कासिम पोर्ट जैसे पाकिस्तानी बंदरगाहों पर 3000 से ज्यादा कंटेनर फंसे हुए हैं. दरअसल, पाकिस्तान ने ईरान के लिए 6 नए जमीनी रास्ते खोल दिए हैं, जिसकी मदद से अब ये सामान सड़क मार्ग के जरिए सीधे ईरान भेजा जा सकेगा.
6 प्रमुख जमीनी रास्ते

ग्वादर से गब्द- यह सबसे छोटा, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है. यह ट्रांजिट पर लगने वाले समय में 87 परसेंट तक कम कर सकता है.
कराची/पोर्ट कासिम- ल्यारी-औरमारा-पसनी-गब्द- यह एक तटीय राजमार्ग है.&amp;nbsp;
कराची/पोर्ट कासिम- खुजदार-दालबंदिन-ताफ्तान- यह ईरान और पाकिस्तान के बीच का सबसे पुराना और पारंपरिक व्यापारिक मार्ग है.&amp;nbsp;
ग्वादर-तुरबत-पंजगुर-क्वेटा-ताफ्तान- यह बलूचिस्तान के अंदरूनी इलाकों को जोड़ने वाला एक मार्ग है.
ग्वादर-ल्यारी-खुजदार-क्वेटा-ताफ्तान- यह बंदरगाह को वैकल्पिक राजमार्गों से जोड़ने वाला एक मार्ग है.&amp;nbsp;
कराची/पोर्ट कासिम-ग्वादर-गब्द- बंदरगाहों के बीच और सीमा तक पहुंच के लिए बना सुगम रास्ता.

पाकिस्तान ने पलट दिया पासा&amp;nbsp;
ट्रंप के नाकेबंदी का मकसद ईरान के आयात-निर्यात को पूरी तरह से रोकना था, लेकिन पाकिस्तान ने इन रास्तों को खोलकर ईरान के लिए लाइफलाइन का काम किया है.&amp;nbsp; इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु जैन ने इस कदम को एक अहम मोड़ बताया और कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिकी नाकेबंदी में &#039;कानूनी तौर पर एक सेंध लगा दी है&#039;, जबकि अमेरिका लगातार पाबंदियां और कड़ी करता जा रहा है.
उन्होंने कहा, &quot;अब खेल बदल गया है. पाकिस्तान ने ठीक उस समय ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी में कानूनी तौर पर एक सेंध लगा दी है, जब ट्रंप ने संघर्ष-विराम की बातचीत रद्द कर दी और नई पाबंदियां लगा दीं.

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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI हम सबको खत्म कर देगा... एलन मस्क की डरावनी चेतावनी, दुनिया के सबसे अमीर शख्स ने ऐसा क्यों कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk on AI: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों को खत्म कर सकता है? दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क का तो यही मानना है. टेस्ला के सीईओ मस्क ने एक बार फिर दुनिया को आगाह किया है कि अगर हमने सावधानी नहीं बरती तो आने वाले समय में एआई मानव सभ्यता के लिए काल बन सकता है. दिलचस्प बात यह है कि यह चेतावनी मस्क ने कहीं और नहीं, बल्कि एक अदालत के भीतर दी है.
दरअसल मस्क और ओपन-एआई के बीच कानूनी जंग शुरू हो चुकी है. मस्क ने ओपन-एआई और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन पर मुकदमा दायर किया है. उनका आरोप है कि जिस कंपनी को उन्होंने &#039;मानवता की भलाई&#039; के लिए शुरू किया था, वह अब सिर्फ मुनाफा कमाने वाली मशीन बन गई है.
यह भी पढ़ें- ईरान वॉर से &#039;अकाल&#039; जैसी स्थिति का खतरा, भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने डराया
सालों से AI के खतरों के बारे में बोल रहा हूं- मस्क
कोर्ट रूम में मस्क ने अपनी पुरानी चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि वो सालों से एआई के खतरों के बारे में बोल रहे हैं. उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया. एलन मस्क के मुताबिक, साल 2015 में जब उन्होंने गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज से एआई सेफ्टी पर बात की तो लैरी ने उन्हें &#039;स्पेशिस्ट&#039; कह दिया था.
मस्क का कहना है कि लैरी पेज को लगता था कि एआई एक &#039;यूटोपिया&#039; यानी स्वर्ग जैसी दुनिया बनाएगा, लेकिन मस्क को डर था कि यह पूरी मानव जाति को मिटा सकता है. मस्क ने अदालत में दो हॉलीवुड फिल्मों का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि हम एक &#039;टर्मिनेटर&#039; जैसा भविष्य नहीं चाहते, बल्कि हम &#039;स्टार ट्रेक&#039; जैसी उम्मीदों वाली दुनिया चाहते हैं.
यह भी पढ़ें- इकोनॉमी की रफ्तार पर &#039;ब्रेक&#039;, मार्च में 5 महीने के निचले स्तर पर आई औद्योगिक ग्रोथ, बिजली उत्पादन ने बढ़ाई चिंता
इंसानी बुद्धिमत्ता को पीछे छोड़ देगा एआई- मस्क
मस्क ने चेतावनी दी कि वो दिन दूर नहीं जब एआई इंसानी बुद्धिमत्ता को पीछे छोड़ देगा. उनकी नजर में यह तकनीक जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतना ही बड़ा खतरा पैदा कर रही है. मस्क का आरोप है कि ओपन-एआई ने अपने मूल मिशन को धोखा दिया है और माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर सिर्फ पैसे के पीछे भाग रही है.
बता दें कि ओपन-एआई के खिलाफ शुरू हुआ यह ट्रायल अब कई हफ्तों तक चलेगा. यह केस सिर्फ पैसों या कॉन्ट्रैक्ट का नहीं है, बल्कि उस भविष्य का है जहां इंसान और मशीन एक साथ रहेंगे. क्या मस्क का डर जायज है? या AI वाकई एक सुनहरा भविष्य लाएगा? इस मुकदमे के फैसले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 07:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>ईरान वॉर: हार्मुज &amp;apos;ब्लॉकहेड&amp;apos; के बीच $115 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, भारत में बढ़ सकती है महंगाई</title>
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        <description><![CDATA[ Iran war hormuz crisis: अमेरिका से युद्ध के बीच ईरान की ओर से तेल आपूर्ति के ब्लॉकेज की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस भू-राजनीतिक तनाव ने न केवल सप्लाई चेन के टूटने का डर पैदा कर दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई का नया संकट भी खड़ा कर दिया है.
भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत में भारी बढ़ोत्तरी की आशंका बढ़ जाती है.
ये भी पढ़ें: ईरान वॉर से &#039;अकाल&#039; जैसी स्थिति का खतरा, भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने डराया
ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिशवॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स में बताया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश की है. उन्होंने इसके लिए ईरान के बंदरगाहों की चल रही नाकाबंदी को बढ़ाने के लिए अपने सहयोगियों को निर्देश दिए हैं. इन रिपोर्ट्स के बाद ही ये खबरें सामने आई हैं. तो वहीं ईरान ने भी कहा है कि वो अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात को बाधित करना जारी रखेगा.
तेल की कीमतों में दिखा भारी उतार चढ़ावबता दें कि जब से ईरान और यूएस के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तभी से तेल की कीमतों में लगातार उतार- चढ़ाव देखने को मिला है. इस युद्ध की वजह से होर्मुज पर होने वाली जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हो रही है, जिसके चलते दुनियाभर में क्रूड ऑयल की कमी देखने को मिल रही है. तो वहीं भारत में भी घरेलू गैस और पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला. इसके अलावा गैस की किल्लत का भी लोगों को सामना करना पड़ा है.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: चुनाव खत्म, जेब ढीली करने के लिए कमर कस लें, पेट्रोल&amp;डीजल के दाम बढ़ने के दावे क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-चुनाव-खत्म-जेब-ढीली-करने-के-लिए-कमर-कस-लें-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-बढ़ने-के-दावे-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही सबसे बड़ी फिक्र लग गई है- पेट्रोल और डीजल के दामों की. बीते एक महीने से चर्चा है कि चुनाव के बाद तेल की कीमतें 25 से 28 रुपए तक बढ़ जाएंगी. इस खबर के चलते आंध्र प्रदेश में पैनिक बाइंग देखने को मिली, जहां 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप सूख गए. दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तो हो गया, लेकिन होर्मुज पर तनातनी बनी हुई है. जमीनी स्तर पर तेल की किल्लत से आम जनता परेशान है. अब तो चुनाव भी खत्म हो गए हैं, तो क्या यह मान लिया जाए कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाएंगे?
सवाल 1: क्या बीते चुनावों के फौरन बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े?जवाब: बीते 8 सालों में चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़े:

2022 विधानसभा चुनाव: यह सबसे ताजा और बड़ा झटका था. 10 मार्च 2022 को चुनाव खत्म होने के बाद, 22 मार्च से 137 दिनों से लगी रोक हटाकर कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ. 22 मार्च 2022 को पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक साथ 80 पैसे प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई. यह दैनिक मूल्य संशोधन शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की बढ़ोतरी थी. इसके बाद लगातार चार दिनों तक हर रोज 80 पैसे की ही बढ़ोतरी की गई. महज 5 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल 3.20 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए थे.
2021 विधानसभा चुनाव: 2 मई 2021 को चुनावी नतीजे आने के बाद, 4 मई से 18 दिनों से जमी कीमतों में रोजाना इजाफा शुरू हुआ. शुरुआती तीन दिनों (4, 5 और 6 मई) में हर रोज पेट्रोल 25 पैसे और डीजल 30 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया. इन तीन दिनों में ही पेट्रोल 59 पैसे और डीजल 69 पैसे बढ़ गया. इस दौर में कीमतें लगातार ऊपर गईं और उसी साल जुलाई तक पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया था.
2019 लोकसभा चुनाव: 19 मई 2019 को चुनाव खत्म होते ही, अगले दिन से करीब 30 दिनों की स्थिरता के बाद दाम बढ़ने शुरू हुए. 20 मई 2019 को पेट्रोल 9 पैसे और डीजल 15 पैसे प्रति लीटर बढ़ा. शुरुआती बढ़ोतरी भले ही कम लगे, लेकिन इसके बाद लगातार 16 दिनों तक दाम बढ़े और कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल करीब 3.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए.
2018 कर्नाटक विधानसभा चुनाव: 12 मई 2018 को मतदान के बाद, 14 मई से 19 दिनों का इंतजार खत्म हुआ. 14 मई 2018 को पेट्रोल 17 पैसे और डीजल 21 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. अनुमान है कि जिस दौरान सरकारी कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए, उस दौरान उन्हें करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जिसकी भरपाई बाद में धीरे-धीरे की गई.

सवाल 2: तो क्या अब चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम 25 रुपये तक बढ़ जाएंगे?जवाब: नहीं, केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह से &#039;फेक न्यूज&#039; करार दिया है. 23 अप्रैल 2026 को ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए साफ कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है. मंत्रालय ने ऐसी खबरों को &#039;शरारतपूर्ण और भ्रामक&#039; बताया, जो नागरिकों में डर और दहशत पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं.

????FAKE NEWS!An order circulating on social media claims to be issued by the Ministry of Petroleum and Natural Gas, stating that petrol and diesel prices have been increased by ₹10 and ₹12.50, respectively.#PIBFactCheck:❌ This order is #FAKE .✅ The Government of India&amp;hellip; pic.twitter.com/tMmJa0Y4qA
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) April 29, 2026



28 अप्रैल 2026 को यानी चुनाव खत्म होने से एक दिन पहले, सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में फिर से इसी बात को दोहराया. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, &#039;पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.&#039; उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और पैनिक बाइंग से बचें.
हालांकि, होर्मुज पर तनाव के चलते सूरत-ए-हाल कुछ और ही कह रही है.
सवाल 3: होर्मुज स्ट्रेट पर आखिर चल क्या रहा है और इसका हम पर क्या असर है?जवाब: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित किया है. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जिससे होकर दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल की सप्लाई गुजरती है. ईरान की ओर से इसे बंद करने की धमकी के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है.
इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं. 30 मार्च 2026 को कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था और मार्च के दौरान भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की औसत कीमत लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल रही. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है.
&amp;nbsp;

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार है

सवाल 4: भारत की तेल कंपनियां कितने घाटे में चल रही हैं? &amp;nbsp;जवाब: सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) भारी नुकसान उठा रही हैं. वे अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा कच्चा तेल खरीदकर उसे भारत में काफी सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत में कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी यानी घाटा हो रहा था. वहीं, 28 अप्रैल को पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अब डीजल पर यह नुकसान बढ़कर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. कुल मिलाकर, इन कंपनियों का रोजाना का घाटा लगभग 2,400 करोड़ रुपये का है ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्रेडिट कार्ड बिल नहीं भरा तो क्या मारपीट कर सकते हैं रिकवरी एजेंट्स? जानें अपने अधिकार, कोई टच भी नहीं करेगा</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Rules: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति को भरे बाजार में जमकर पीट रहे हैं. वीडियो में शख्स की पत्नी भी साथ में नजर आ रही है, जो बीच बचाव कर रही है. बताया जा रहा है कि वीडियो में जो पीट रहे हैं वो क्रेडिट कार्ड रिकवरी एजेंट्स हैं. जो इस शख्स से पेमेंट की रिकवरी करने आए थे.
वीडियो ने छेड़ी बहसइस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तगड़ी बहस छेड़ दी है. कई लोग इस वीडियो को देखने के बाद रिकवरी एजेंट्स के बर्ताव पर सवाल उठा रहे हैं. तो वहीं कई लोग कह रहे हैं कि मामला कुछ और ही लगता है. हालांकि इसी बीच ये सवाल भी खड़े हो रहे हैं क्या वाकई में रिकवरी एजेंट्स इस तरह की बदसलूकी कंज्यूमर के साथ कर सकते हैं? क्या उन्हें हाथ उठाने का हक है? तो आइये बताते हैं इस पर RBI का क्या कहना है.
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क्रेडिट कार्ड रिकवरी के लिए RBI के नियमRBI की गाइडलाइंस के मुताबिक कुछ बातों का ख्याल रिकवरी एजेंट्स, बैंक और कंज्यूमर को भी रखना जरूरी है. जिससे कि कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े.

RBI के नियमों के मुताबिक कोई भी रिकवरी एजेंट, कंज्यूमर के साथ मारपीट या बदसलूकी नहीं कर सकता हैं.
रिकवरी एजेंट्स को कंज्यूमर को फोन करने का समय भी सुबह 8 बजे से शाम के 7 बजे तक का ही है. इसके अलावा किसी ऑड समय पर कॉल करना मना है.
रिकवरी एजेंट्स बिना पूर्व नोटिस या इन्फॉर्मेशन के कंज्यूमर के घर पर नहीं जा सकते हैं.
एजेंट्स के पास बैंक से ऑथराइज्ड डॉक्युमेंट्स होने चाहिए, इसके अलावा उनके पास अपना आईडी कार्ड भी होना चाहिए.
RBI के नियम के अनुसार बैंक या रिकवरी एजेंट्स की तरफ से कंज्यूमर की किसी भी तरह की कोई इंफॉर्मेशन लीक नहीं होना चाहिए.
कंज्यूमर और बैंक या कंज्यूमर और रिकवरी एजेंट्स के बीच की गई फोन पर बातचीत की हमेशा रिकॉर्डिंग होना चाहिए.

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कंज्यूमर के हक क्या हैं?क्रेडिट कार्ड का बिल यदि किसी वजह से नहीं भर पाते हैं और रिकवरी एजेंट्स आपको परेशान कर रहे हैं तो आपके पास पूरा हक है कि आप उनकी शिकायत कर सकते हैं. पहले बैंक में और फिर पुलिस में भी शिकायत दर्ज की जा सकती है. इसके अलावा कंज्यूमर परेशान होने पर लीगल एक्शन भी ले सकता है. आप चाहें तो एजेंट्स से एक तय समय पर कॉल करने के लिए भी कह सकते हैं. आप एजेंट्स से तहजीब से बात करने और प्रोफेशनल कन्वर्सेशन करने के लिए भी कह सकते हैं. यदि रिक्वेस्ट पर भी वो ना मानें तो आप बैंक में भी शिकायत कर सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>क्रेडिट, कार्ड, बिल, नहीं, भरा, तो, क्या, मारपीट, कर, सकते, हैं, रिकवरी, एजेंट्स, जानें, अपने, अधिकार, कोई, टच, भी, नहीं, करेगा</media:keywords>
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        <title>अब OPEC का हिस्सा नहीं रहेगा UAE, जानें भारत पर इस फैसले का असर: क्या फिर से बढ़ेगी तेल की कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-opec-का-हिस्सा-नहीं-रहेगा-uae-जानें-भारत-पर-इस-फैसले-का-असर-क्या-फिर-से-बढ़ेगी-तेल-की-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ UAE&amp;rsquo;s exit from OPEC: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) छोड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके चलते ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 3-हफ्ते के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं.
यह कदम 1 मई से प्रभावी होगा. UAE ने यह फैसला एक ऐसे वक्त पर लिया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग के चलते वैश्विक तेल बाजारों में पहले से अस्थिरता का माहौल है.&amp;nbsp;
कितनी बढ़ गई तेल की कीमतें?
आज WTI क्रूड 100.36 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया है. वहीं, ब्रेंट क्रूड भी कीमतों में 1.25 परसेंट से अधिक की तेजी के साथ 104.95 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंची है.&amp;nbsp;
UAE के फैसले से अमेरिका को फायदा
ईरान में जंग और इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से पहले से ही सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित है, जिससे बीते दिनों तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं. अब OPEC का साथ छोड़ने के इस फैसले से कीमतों पर और दबाव बढ़ने की संभावना है.
कतर और अंगोला के बाद अब UAE का OPEC से बाहर निकलना यह दिखाता है कि अब बड़े तेल उत्पादक देश अपनी प्रोडक्शन लिमिट खुद तय करना चाहते हैं ताकि भविष्य में कीमतों में और अधिक स्थिरता लाई जा सके.
इधर, एक्सपर्ट्स का मानना है कि UAE के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अप्रत्याशित भू-राजनीतिक फायदा मिलेगा. अमेरिका लंबे समय से OPEC को एक &#039;कार्टेल&#039; मानता है, जो तेल की कीमतों को अपने हिसाब से बढ़ाती है. UAE जैसे बड़े उत्पादक देशों के निकलने से संगठन की बाजार पर पकड़ कमजोर होगी, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट को नया आकार में अमेरिका की स्थिति मजबूत होगी.
क्या मजबूत होगी ट्रंप की पॉलिसी?&amp;nbsp;
चूंकि, ईरान में तनाव के चलते खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में रुकावट आई है. ऐसे में अपनी जरूरतें पूरा करने के लिए दुनिया भर के देश अमेरिकी शेल कंपनियों का रूख कर रहे हैं. इससे अमेरिकी एक्सपोटर्स को फायदा हो रहा है.
इधर, UAE का अमेरिका के साथ अच्छे संबंध है. ऐसे में हो सकता है कि OPEC से बाहर निकलकर UAE सऊदी अरब के बजाय अमेरिका की रणनीतियों के करीब आ जाए. यह ट्रंप की एनर्जी पॉलिसी के मुताबिक है क्योंकि ट्रंप चाहते हैं कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स में OPEC का एकाधिकार खत्म हो.&amp;nbsp;
OPEC क्या है?&amp;nbsp;
ओपेक दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक शक्तिशाली गुट है, जिसकी स्थापना 1960 में बगदाद में हुई. इसका काम ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखना और सप्लाई को मैनेज करना है. OPEC यह सुनिश्चित करता है कि तेल उत्पादक देशों को उनके तेल का सही दाम मिले. इसका हेडक्वॉर्टर विएना, ऑस्ट्रिया में है. UAE के बाद अब OPEC में मुख्य रूप से सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं.&amp;nbsp;
UAE के फैसले का भारत पर असर?&amp;nbsp;
भारत के लिए यह स्थिति किसी चुनौती से कम नहीं, जो तेल के आयात पर काफी निर्भर है. 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ दोनों से UAE के बाहर होने के फैसले से ग्लोबल ऑयल मार्केट में भूचाल आ गया है. इससे कीमतें भी 100 डॉलर के पार चली गई हैं. अब जाहिर सी बात है कि आयात महंगा होगा, जो देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे कई जरूरी चीजों के भी दाम बढ़ जाएंगे.
तेल की कीमतें बढ़ने पर सरकार को भी सब्सिडी देनी पड़ती सकती है या एक्साइज ड्यूटी कम करना पड़ सकता है. इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, जिससे दूसरे विकास कार्यों के लिए खर्च में कमी आ सकती है.

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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, OPEC, का, हिस्सा, नहीं, रहेगा, UAE, जानें, भारत, पर, इस, फैसले, का, असर:, क्या, फिर, से, बढ़ेगी, तेल, की, कीमत</media:keywords>
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        <title>Share Market: शेयर मार्केट ने दिखाया दम, 358 अंक उछला सेंसेक्स; निफ्टी भी 101 अंक ऊपर</title>
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        <description><![CDATA[ Share Market Today on April 29: आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत उम्मीद से बढ़कर हुई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए.
बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 358 अंकों की बढ़त के साथ 77245 पर खुला, जबकि एनएसई के निफ्टी ने 101 अंक की तेजी के साथ 24096 पर कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में Adani Ports, L&amp;amp;T और Maruti Suzuki के शेयरों में 1 परसेंट से ज्यादा की बढ़त देखी गई.&amp;nbsp;
UAE ने छोड़ा OPEC&amp;nbsp;
UAE नेOPEC और OPEC+ से अलग होने का फैसला लिया है, जिससे तेल निर्यात करने वाले देशों को एक बड़ा झटका लगा है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ईरान में जंग के चलते पहले से ही एनर्जी सप्लाई बाधित है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है.&amp;nbsp;
OPEC के लंबे समय से सदस्य रहे UAE के अलग होने से अराजकता फैल सकती है और इस समूह की ताकत कमजोर पड़ सकती है. यह समूह आमतौर पर भू-राजनीति और उत्पादन कोटे जैसे विभिन्न मुद्दों पर आंतरिक मतभेदों के बावजूद एक एकजुट रुख पेश करने का लक्ष्य रखता रहा है.&amp;nbsp;
एशियाई बाजार
बुधवार सुबह एशियाई बाजारों में कारोबार की शुरुआत सतर्कता के साथ हुई क्योंकि निवेशक OPEC से जुड़े ताजा घटनाक्रमों के साथ-साथ OpenAI के कमजोर होने की एक रिपोर्ट का आकलन कर रहे हैं. इसके चलते दक्षिण कोरिया के Kospi में 0.39% की गिरावट आई, जबकि स्मॉल-कैप Kosdaq सपाट रहा. हालांकि, हांगकांग का Hang Seng फ्यूचर्स 25,762 पर रहा, जो पिछली क्लोजिंग 25,679.78 से हल्की बढ़त पर है. वहीं, जापानी बाजार छुट्टी के कारण बंद हैं.&amp;nbsp;
अमेरिकी बाजार&amp;nbsp;
अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए. ब्रॉड मार्केट इंडेक्स 0.49% गिरकर 7,138.80 पर बंद हुआ, जबकि टेक-हैवी Nasdaq Composite 0.9% गिरकर 24,663.80 पर बंद हुआ. Dow Jones Industrial Average 25.86 अंक या 0.05% गिरकर 49,141.93 पर बंद हुआ.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: UAE ने 59 साल बाद OPEC और OPEC+ को छोड़ा! क्या बिखर जाएगा तेल का कोटा तय करने वाला संगठन, US&amp;भारत को फायदा कैसे?</title>
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        <description><![CDATA[ यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन OPEC और OPEC+ से अलग होने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है. लंबे समय से OPEC का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है. अब सवाल है कि इससे OPEC पर क्या असर पड़ेगा, क्या वह बिखर जाएगा और भारत को कैसे फायदा मिलेगा? जानेंगे एक्सप्लेनर में...
सवाल 1: OPEC क्या है और इसका काम क्या है?जवाब: OPEC का पूरा नाम ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज है. यह 14 सितंबर 1960 को बगदाद में स्थापित किया गया था. इसके शुरुआती पांच संस्थापक सदस्य थे, ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला. UAE ने 1967 में OPEC जॉइन किया था.
OPEC का मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों को समन्वयित और एकीकृत करना है ताकि तेल उत्पादकों को बेहतर और स्थिर कीमतें मिलें, उपभोक्ता देशों को कुशल और नियमित तेल आपूर्ति हो और उद्योग में निवेश करने वालों को उचित रिटर्न मिले.
वर्तमान में OPEC के 12 सदस्य देश हैं, जिनमें 5 संस्थापक देश और UAE के अलावा अल्जीरिया, कांगो, नाइजीरिया, लीबिया, गैबॉन और भूमध्यरेखीय गिनी शामिल हैं. यह संगठन दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 30% कंट्रोल करता है. 2016 से OPEC+ बना, जिसमें रूस, कजाकिस्तान आदि गैर-OPEC देश भी शामिल हो गए, जिससे कुल उत्पादन दुनिया के लगभग 40-41% तक पहुंच गया. OPEC को अक्सर कार्टेल कहा जाता है क्योंकि यह तेल की कीमतें कंट्रोल करने के लिए उत्पादन कोटा तय करता है. जब कीमतें गिरती हैं तो उत्पादन कम करता है और जब जरूरत पड़ती है तो बढ़ाता है.
&amp;nbsp;

OPEC तेल उत्पादन का कोटा तय करता है

सवाल 2: UAE ने OPEC क्यों छोड़ा?जवाब: 28 अप्रैल 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने औपचारिक घोषणा की कि वह OPEC और OPEC+ दोनों को 1 मई 2026 से छोड़ रहा है. UAE ने कहा कि यह फैसला उसके &#039;राष्ट्रीय हितों&#039; और &#039;लंबी अवधि की रणनीतिक और आर्थिक विजन को ध्यान में रखकर लिया गया है. UAE अब अपनी घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और ग्लोबल एनर्जी मार्केट में ज्यादा स्वतंत्र भूमिका निभाने पर फोकस करना चाहता है.
यह फैसला ईरान युद्ध के बीच आया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (दुनिया के करीब 20% तेल और LNG गुजरने वाला रास्ता) प्रभावित है. UAE के राष्ट्रपति के डिप्लोमैटिक एडवाइजर अनवर मोहम्मद गर्गश ने कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों (GCC) का रुख काफी कमजोर रहा. उन्होंने लॉजिस्टिक मदद की बात जरूर की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर समर्थन की कमी पर निराशा जताई. यह कदम सऊदी अरब की अगुवाई वाले OPEC के लिए बड़ा झटका है. UAE OPEC का एक महत्वपूर्ण और अनुशासित सदस्य था.
&amp;nbsp;

अनवर मोहम्मद गर्गश ने सैन्य मदद की कमी पर निराशा जताई

सवाल 3: क्या OPEC बिखर रहा है, अगर हां तो यह कितना बड़ा बिखराव है?जवाब: UAE का जाना OPEC के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन अभी पूरा बिखराव नहीं कहा जा सकता. UAE OPEC का तीसरा या चौथा सबसे बड़ा उत्पादक था. इसके जाने से OPEC की उत्पादन क्षमता में करीब 15% की कमी आ सकती है.
पिछले सालों में भी कई सदस्य आए-गए हैं, जैसे इंडोनेशिया, कतर, इक्वाडोर, अंगोला आदि ने सदस्यता छोड़ी या निलंबित की. लेकिन UAE जैसे मजबूत और अनुपालन करने वाले सदस्य का जाना अलग मायने रखता है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह OPEC की एकता को कमजोर करता है और सऊदी अरब की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाता है. अगर और UAE जैसे अन्य खाड़ी देश भी इसी रास्ते पर चले तो भविष्य में OPEC का प्रभाव और घट सकता है. अभी यह एक सदस्य का जाना है, लेकिन ईरान युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह संगठन के लिए चिंताजनक संकेत है.
सवाल 4: इस बिखराव से किसका नुकसान होगा?जवाब: इस बिखराव से 4 बड़े नुकसान होंगे:

OPEC और खासकर सऊदी अरब का नुकसान: उत्पादन कोटा तय करने और कीमतें कंट्रोल करने की ताकत कम होगी. सऊदी अरब को अकेले ज्यादा बोझ उठाना पड़ सकता है, जो OPEC का डी-फैक्टो लीडर है.
तेल निर्यातक देशों का: अगर OPEC कमजोर हुआ तो तेल की कीमतें ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली हो सकती हैं, जिससे उनकी आय प्रभावित होगी.
दुनिया भर के तेल उपभोक्ताओंका फायदा-नुकसान: UAE अब कोटा से मुक्त होकर ज्यादा तेल उत्पादन कर सकता है, जिससे आपूर्ति बढ़ने और कीमतें गिरने की संभावना है. ईरान युद्ध के कारण फिलहाल ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है. UAE के बाहर निकलने से लंबे समय में कीमतें स्थिर या नीचे आ सकती हैं. भारत जैसे बड़े आयातक देशों (जो 80% से ज्यादा तेल आयात करते हैं) को राहत मिल सकती है.
ट्रंप प्रशासन के लिए: कई रिपोर्ट्स इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक जीत बता रही हैं. ट्रंप लंबे समय से OPEC पर आरोप लगाते रहे हैं कि यह तेल की कीमतें जानबूझकर बढ़ाकर दुनिया को लूट रहा है. UAE का जाना OPEC को कमजोर करता है और अमेरिका की ऊर्जा बाजार में प्रभाव बढ़ा सकता है.

सवाल 5: तो फिर इस मामले में आगे क्या हो सकता है?जवाब: UAE का जाना तत्काल तेल आपूर्ति पर असर नहीं डालेगा क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी प्रभावित है, लेकिन लंबे समय में यह OPEC+ की एकता को चुनौती देगा. अगर कीमतें गिरती हैं तो सऊदी अरब और अन्य सदस्यों को बजट घाटा बढ़ सकता है.
एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि यह कदम UAE की अपनी ऊर्जा विविधीकरण और स्वतंत्र नीति की ओर बढ़ने का संकेत है. दुनिया के तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. एक तरफ ईरान युद्ध है, तो दूसरी तरफ OPEC जैसे संगठनों का कमजोर होना. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, UAE, ने, साल, बाद, OPEC, और, OPEC, को, छोड़ा, क्या, बिखर, जाएगा, तेल, का, कोटा, तय, करने, वाला, संगठन, US-भारत, को, फायदा, कैसे</media:keywords>
    </item>
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        <title>Gold&amp;Silver Price Today: सोना हुआ सस्ता, चांदी की भी फीकी पड़ी चमक; जानें आपके शहर में कितना है लेटेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सोना-हुआ-सस्ता-चांदी-की-भी-फीकी-पड़ी-चमक-जानें-आपके-शहर-में-कितना-है-लेटेस्ट-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: आज देश में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. ग्लोबल मार्केट में सुस्ती और स्थानीय मांग में कमी के बीच सोने की कीमत में आज 1,300 रुपये और चांदी में करीब 6,500 रुपये तक की गिरावट आई है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,51,070 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,490 रुपये प्रति 10 ग्रामउ
आज सोने की कीमत



शहर&amp;nbsp;
22 कैरेट सोने की कीमत&amp;nbsp;
24 कैरेट सोने की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
1,38,490 रुपये&amp;nbsp;
1,51,070 रुपये


मुंबई
1,38,340 रुपये
1,50,920 रुपये


कोलकाता
1,38,340 रुपये
1,50,920 रुपये


चेन्नई
1,39,140 रुपये
1,51,790 रुपये


बेंगलुरु
1,38,340 रुपये
1,50,920 रुपये


हैदराबाद&amp;nbsp;
1,38,340 रुपये
1,50,920 रुपये


पुणे&amp;nbsp;
1,38,340 रुपये
1,50,920 रुपये


अहमदाबाद&amp;nbsp;
1,38,390 रुपये
1,50,970 रुपये


लखनऊ
1,38,490 रुपये
1,51,070 रुपये



&amp;nbsp;बता दें कि इन कीमतों में 3 परसेंट जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य स्थानीय टैक्स शामिल नहीं है. फाइनल रेट के लिए आपको अपने नजदीकी किसी ज्वेलरी की दुकान पर संपर्क करना होगा.&amp;nbsp;
चांदी की कीमत
आज चांदी की भी कीमत में गिरावट देखी जा रही है. बुधवार को चांदी प्रति किलोग्राम 2,43,284 रुपये-2,60,000 रुपये के बीच कारोबार कर रही है. इसमें कल के मुकाबले लगभग 6,500 रुपये की गिरावट देखी जा रही है.&amp;nbsp;
क्यों आई गिरावट?

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में Spot Gold के दाम गिरे हैं, जिसका भारत के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत पर असर पड़ा है.
आज डॉलर इंडेक्स में दूसरी करेंसीज के मुकाबले आई मजबूती की वजह से अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हुआ है, जिससे इसकी मांग कम हुई है और कीमतें घटी हैं.
आज भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी जा रही है. शेयर बाजार जब भी अच्छा परफॉर्म करता है, तब निवेशक सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों से पैसा निकालकर स्टॉक्स में लगाते हैं.&amp;nbsp;
ग्राहकों ने भी इस बीच शादियों के सीजन के दौरान ऊंची कीमत की चलते खरीदारी कम की है, जिससे हाजिर बाजार पर दबाव बढ़ा है.


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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Price, Today:, सोना, हुआ, सस्ता, चांदी, की, भी, फीकी, पड़ी, चमक, जानें, आपके, शहर, में, कितना, है, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
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        <title>अनंत अंबानी ने कोलंबिया से की दरियाई घोड़ों की जान बचाने की अपील, वनतारा में आजीवन घर देने का रखा प्रस्ताव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अनंत-अंबानी-ने-कोलंबिया-से-की-दरियाई-घोड़ों-की-जान-बचाने-की-अपील-वनतारा-में-आजीवन-घर-देने-का-रखा-प्रस्ताव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अनंत-अंबानी-ने-कोलंबिया-से-की-दरियाई-घोड़ों-की-जान-बचाने-की-अपील-वनतारा-में-आजीवन-घर-देने-का-रखा-प्रस्ताव</guid>
        <description><![CDATA[ Vantara News: दक्षिणी अमेरिका के देश कोलंबिया की मैग्डालियाना नदी घाटी में रहने वाले 80 दरियाई घोड़ों को मारने का आदेश दिया गया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और दुनिया के सबसे बड़े वन्यजीव बचाव एवं संरक्षण केंद्रों में से एक वनतारा के संस्थापक अनंत मुकेश अंबानी ने औपचारिक रूप से कोलंबिया सरकार से इन हिप्पो या दरियाई घोड़ों की जान बख़्शने का आग्रह किया है. उन्होंने एक मानवीय विकल्प का प्रस्ताव दिया है: एक सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से इन जानवरों को जामनगर, गुजरात स्थित वनतारा में लाया जाए, जहां उन्हें स्थायी घर मिल सकेगा.
​कोलंबिया की पर्यावरण मंत्री आइरीन वेलेज़ टोरेस को लिखे पत्र में अनंत अंबानी ने ये अपील की है. इसमें कोलंबियाई अधिकारियों की देखरेख और मंजूरी के साथ पूरी सहायता देने की बात कही गई है. यह प्रस्ताव पशु कल्याण के प्रति अनंत अंबानी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके लिए उन्हें हाल ही में ग्लोबल ह्यूमेन अवार्ड से सम्मानित किया गया था. वह यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति और पहले एशियाई हैं.
हमारी जिम्मेदारी है कि हम हर संभव प्रयास करें- अनंत अंबानी
​अनंत अंबानी ने कहा, &#039;&#039;ये 80 दरियाई घोड़े संवेदनशील प्राणी हैं जो बदलती परिस्थितियों का शिकार हैं. यदि हमारे पास उन्हें सुरक्षित और मानवीय तरीके से बचाने की क्षमता है तो यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उसके लिए हर संभव प्रयास करें.&#039;&#039;
वनतारा ने कोलंबियाई अधिकारियों को एक विस्तृत योजना सौंपी है, जिसमें पशु-चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, सुरक्षित लाने की व्यवस्था, बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और उनके प्राकृतिक वातावरण जैसा आवास प्रदान करना शामिल है.
प्रकृति की रक्षा करते हुए जानवरों को भी बचाना संभव- अनंत अंबानी
अनंत ​अंबानी ने आगे कहा, &#039;&#039;करुणा और जानवरों की जान की सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. सही वैज्ञानिक सोच और योजनाबद्ध तरीके के साथ काम करें तो समुदायों और प्रकृति की रक्षा करते हुए जानवरों को भी बचाना संभव है. वनतारा के पास इस कार्य को पूरा करने के लिए विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचा मौजूद है.&#039;&#039;
वनतारा ने औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि जब तक इस विकल्प पर पूरी तरह विचार नहीं हो जाता, तब तक जानवरों को मारने के फैसले को टाल दिया जाए. साथ ही वनतारा ने कहा है कि वे कोलंबिया के अधिकारियों के साथ सीधे जुड़कर एक विस्तृत वैज्ञानिक, परिचालन और कल्याणकारी प्रस्ताव पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
हर जीव अमूल्य है- प्रस्ताव में वनतारा
यह प्रस्ताव वनतारा के मूल विचार को दर्शाता है कि हर जीव अमूल्य है. यह वन्यजीवों से जुड़ी जटिल वैश्विक चुनौतियों के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञान-आधारित समाधान देने में भारत की उभरती भूमिका को भी रेखांकित करता है. इस योजना पर कोई भी अमल कोलंबिया और भारत की सरकारों से आवश्यक मंज़ूरी और संबंधित अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद ही किया जाएगा.
बता दें कि ​कोलंबिया की मैग्डालियाना नदी घाटी में लगभग 200 दरियाई घोड़े यानि हिप्पो हैं, जो 1980 के दशक में लाए गए एक छोटे समूह के वंशज हैं. इस घाटी में हिप्पो का शिकार करनेवाले जानवरों की कमी और अनुकूल वातावरण के कारण उनकी संख्या काफी बढ़ गई है. इससे इलाक़े की जैव-विविधता और सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो गया है. इसके मद्देनज़र अधिकारियों ने 80 जानवरों को मारने की अनुमति दी थी, जिनको अब वनतारा ने बचाने की पहल की है.
वनतारा के बारे में जानिए
​गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा, दुनिया के सबसे बड़े और सबसे आधुनिक वन्यजीव बचाव, देखभाल और संरक्षण केंद्रों में से एक है. यहां हाथियों, बाघों और शेरों (बिग कैट्स), प्राइमेट्स, रेंगने वाले जीवों (रेप्टाइल्स) और अन्य स्तनधारी जानवरों के लिए विशेषज्ञ पशु चिकित्सा सहायता, दीर्घकालिक देखभाल और विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं. ये वे जानवर हैं जिन्हें संकट, शोषण या विस्थापन जैसी कठिन परिस्थितियों से बचाया गया है.
​वनतारा दुनिया भर के संरक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय सरकारों और अंतरराष्ट्रीय &amp;nbsp;वन्यजीव अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता है. इसने सीमाओं के पार वन्यजीवों के बचाव, पुनर्वास और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने (ट्रांसलोकेशन) की वैश्विक पहलों में सहयोग किया है. ​प्राकृतिक आवासों को पुनर्जीवित करने, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, जेनेटिक प्रोफाइलिंग और विज्ञान-आधारित संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वनतारा एक ऐसे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का निर्माण कर रहा है जहां वन्यजीव सुरक्षित रूप से फल-फूल सकें. साथ ही, यह लुप्तप्राय: प्रजातियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस भेजने (रीवाइल्डिंग) की दिशा में भी काम करता है.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 23:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jewellery Insurance: सोना तो खरीद लिया, क्या उसका बीमा कराया? जानिए क्यों जरूरी है ज्वेलरी इंश्योरेंस</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Jewellery Isurance: भारत में सोना खरीदना शुभ तो माना ही जाता है लेकिन ये निवेश का भी एक बड़ा साधन है. लोग त्यौहारों के मौके पर गोल्ड खरीदते हैं और उसे एक निवेश की तरह अपने पास संभालकर रखते हैं. लेकिन इसकी सुरक्षा का क्या? ये सवाल कई बार मन में आता है. क्योंकि चोरी, सेंधमारी जैसी घटनाएं आजकल आम हो गई हैं. ऐसे में भारी मात्रा तो क्या थोड़ी मात्रा में भी सोना घर पर रखना सुरक्षित नहीं है. ऐसे में क्या किया जा सकता है?
सोने का कराएं बीमाअगर आपके पास अच्छी- खासी मात्रा में सोना है, तो आप उसे सुरक्षित रखने के लिए उसका बीमा करवा सकते हैं. इससे ये सुरक्षित रहेगा और आप टेंशन फ्री रहेंगे. इसमें आप गहने, सोने के सिक्के, बिस्किट आदि का बीमा करवा सकते हैं. इस बीमा में चोरी, लूटपाट, बैंक लॉकर से चोरी और ट्रैवल के दौरान गोल्ड खो जाने के नुकसान भी शामिल हैं. इसका प्रीमियम हर साल के हिसाब से सोने की कीमत का महज 1 प्रतिशत या 2 प्रतिशत तक ही होता है. ये बहुत ही आसान और सुरक्षित तरीका है, अपने गहनों को सिक्योर करने का.
क्यों है जरूरी?कई लोगों को लगता है कि उनके घर में यदि गोल्ड है तो वो सुरक्षित ही होगा. लेकिन ऐसा नहीं है, अनहोनी कभी भी और कहीं भी हो सकती है. यहां आपको जरूरी पॉइंट्स के साथ बताते हैं कि गोल्ड का बीमा क्यों जरूरी है.

ये आम लोगों की जमापूंजी का सुरक्षा कवच है.
सोने का बीमा करवाने से भावनाएं भी सुरक्षित रहती हैं, क्योंकि सोना या कोई भी ज्वेलरी लोगों की भावनाओं से भी जुड़ी होती है.
सोना चोरी होने पर क्लेम मिल जाता है और ज्यादा नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता है.
किसी प्राकृतिक आपदा के तहत अगर सोना खो गया है तब भी आपको क्लेम मिल जाएगा.
यदि सोना किसी गलती से खो गया है तो इसका नुकसान भी कवर कर लिया जाता है.

यदि आपने अब तक इस बारे में नहीं सोचा है, तो अभी भी समय है क्योंकि सोने की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. ऐसे में इस पर खतरा भी मंडरा रहा है, किसी भी परेशानी और टेंशन से बचने के लिए आप जल्दी ही इसका बीमा करवा सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 23:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>निवेशकों के लिए खुशखबरी! दिग्गज ऑटो कंपनी देगी ₹140 डिविडेंड, जानिए Q4 नतीजे और रिकॉर्ड डेट की पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Maruti Suzuki Dividend: देश की सबसे बड़ी पैसेंजर कार बनाने वाली कंपनी Maruti Suzuki India Limited के चौथी तिमाही के नतीजे इस बार उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहे. हालांकि, कंपनी ने निवेशकों को राहत देते हुए 140 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने की सिफारिश की है. जिससे शेयरहोल्डर्स को कुछ हद तक फायदा मिलने की उम्मीद हैं. आइए जानते हैं, इस बारे में.
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
Maruti Suzuki India Limited का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट इस बार सालाना आधार पर करीब 7 फीसदी घटकर 3,591 करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया है. जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 3,857 करोड़ रुपये था. कंपनी की कमाई पर कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है. जिससे कंपनी मुनाफे में दबाव दिखा.&amp;nbsp;
हालांकि, कंपनी की कुल आय में अच्छी बढ़त देखने को मिली. मार्च तिमाही में रेवेन्यू 28 प्रतिशत उछलकर 52,449 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. जो पिछले साल इसी अवधि में 40,910 करोड़ रुपये था.&amp;nbsp;
डिविडेंड पर फैसला, कब मिलेगा पैसा?
Maruti Suzuki India Limited ने तिमाही नतीजों के साथ ही FY26 के लिए 140 रुपये प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है. कंपनी ने साफ किया है कि यह भुगतान शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद ही होगा. जिसके लिए AGM 31 अगस्त 2026 को आयोजित की जाएगी.
रिकॉर्ड डेट 7 अगस्त तय की गई है. यानी इस दिन तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होंगे, वही डिविडेंड पाने के हकदार होंगे. कंपनी की योजना है कि 9 सितंबर तक यह रकम निवेशकों के खाते में भेज दी जाए.

शेयर में गिरावट के बीच मिला-जुला ट्रेंड
Maruti Suzuki India Limited के शेयर में हाल के दिनों में अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिले हैं. 28 अप्रैल के कारोबारी दिन यह स्टॉक 2.53 प्रतिशत गिरकर 12891.70 रुपये पर बंद हुआ. जबकि पिछले एक महीने में इसमें 4.75 फीसदी की हल्की बढ़त भी दर्ज की गई है.
लंबी अवधि में कंपनी शेयर के प्रदर्शन की बात करें तो, बीते 6 महीनों में शेयर करीब 20.97 प्रतिशत और इस साल अब तक इसमें 22.85 फीसदी की गिरावट रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>निवेशकों, के, लिए, खुशखबरी, दिग्गज, ऑटो, कंपनी, देगी, ₹140, डिविडेंड, जानिए, नतीजे, और, रिकॉर्ड, डेट, की, पूरी, जानकारी</media:keywords>
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        <title>Hormuz Crisis: अब कोल्ड ड्रिंक्स की बारी! गर्मी के बीच मार्किट से गायब हुई कैन, क्या है कारण?</title>
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        <description><![CDATA[ Hormuz Crisis Aluminium Supply: गर्मी बढ़ते ही कोल्ड ड्रिंक की डिमांड बढ़ जाती है. हर कोई गर्मी से बचने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेता है और अगर आप भी कोल्ड ड्रिंक पीने के शौकीन हैं तो ये खबर आपको थोड़ा उदास कर सकती है. ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे महायुद्ध का असर अब दिल्ली की दुकानों तक दिखने लगा है. यहां डाइट कोल्ड ड्रिंक के कैन दुकानों से गायब होते जा रहे हैं.
इतना ही नहीं अगर अगर स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले कुछ दिनों में नॉर्मल कोल्ड ड्रिंक्स के लिए जनता को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है. पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में कोल्ड ड्रिंक्स के एक डिस्ट्रीब्यूटर नवीन शर्मा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए कहा, &amp;ldquo;पिछले दस दिनों में एक तो तापमान 10 डिग्री तक चढ़ गया है, इसलिए डिमांड तो 50-60 प्रतिशत बढ़ गई है, लेकिन ये बात भी सच है कि पीछे से स्टॉक ही नहीं आ रहा.&amp;rdquo;
डाइट कोल्ड ड्रिंक के कैन की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित
नवीन ने आगे बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन पर नॉर्मल कोला, ऑरेंज जैसी अन्य कोल्ड ड्रिंक्स अभी भी उपलब्ध हैं, लेकिन डाइट कोल्ड ड्रिंक के कैन की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. नवीन शर्मा ने बताया, &amp;ldquo;आजकल युवाओं में डाइट कोल्ड ड्रिंक के कैन पीना फैशन बन गया है. लेकिन इस वक्त ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण डाइट कोल्ड ड्रिंक के कैन की पूरी सप्लाई चेन में दिक्कत आ गई है.&amp;rdquo;
डिस्ट्रीब्यूटर के मुताबिक, असली समस्या खाड़ी देशों से आने वाले एल्यूमिनियम में है. डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया कि भारत खाड़ी देशों से 10-15 फीसदी एल्यूमिनियम आयात करता है और उसी में से कैन बनाने में काम आते है. युद्ध की वजह से कई शिपमेंट अटके हुए हैं, जिससे कैन की सप्लाई लगभग ठप पड़ गई.
एल्यूमिनियम की सप्लाई ठप
इस एल्यूमिनियम की सप्लाई ठप होने से कैसे उनके व्यापार पर फर्क पड़ा है. इसका उदाहरण देते हुए नवीन ने कहा, &quot;मानो जैसे मैंने 100 प्रतिशत ऑर्डर प्लेस किया था, लेकिन अभी मुझे सिर्फ 50 प्रतिशत ही मिल पा रहा है. जो बड़े व्यापारी हैं उनको तो और भी ज्यादा परेशानी हो रही है.&amp;rdquo;&amp;nbsp;
तो क्या डाइट कोल्ड ड्रिंक के साथ नॉर्मल कोल्ड ड्रिंक्स भी महंगी हो जाएगी? इस पर डिस्ट्रीब्यूटर का जवाब साफ था, &amp;ldquo;पेट्रोलियम या एल्यूमिनियम से बनी किसी भी चीज की कॉस्ट बढ़ेगी तो बोझ आखिर में ग्राहक तक ही आएगा. कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर, दुकानदार और फिर कंज्यूमर ये एक चेन है. अगर कंपनी को महंगा पड़ेगा तो महंगा बेचना पड़ेगा.&amp;rdquo;
डिस्ट्रीब्यूटर ने आगे बताया कि पहले रेस्तरां में 300 एमएल का कैन 40 रुपये में मिलता था, लेकिन अब बड़े कैन कम हो गए हैं, क्योंकि एल्यूमिनियम की सप्लाई लगभग ठप है और जो बचा है उस से अब सिर्फ छोटे साइज के कैन ही बन कर मार्केट में आ रहे हैं.
बढ़ सकते हैं प्लास्टिक की बोतलों वाली ड्रिंक्स के दाम
डिस्ट्रीब्यूटर ने ये भी माना कि अगर युद्ध नहीं रुका और हालात सामान्य नहीं हुए तो आने कुछ दिनों में ही प्लास्टिक की बोतलों वाली ड्रिंक्स के दामों पर भी कुछ असर पड़ सकता है, हालांकि अभी सबसे ज्यादा दबाव डाइट कोल्ड ड्रिंक के कैन पर दिख रहा है. उन्होंने आगे कहा कि गर्मी के ये चार महीने डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. अगर इस पीक सीजन में माल नहीं बिका तो नुकसान होगा, हमारा व्यापार सिर्फ इन 4 महीनों पर सबसे ज्यादा टिका होता है. फिलहाल कंपनी सप्लाई ठीक करने की कोशिश कर रही है, लेकिन युद्ध कब शांत होता है, ये अभी कोई नहीं बता सकता.
यानी कुल मिला कर बात साफ है कि सॉफ्ट ड्रिंक्स इंडस्ट्रीज पर भी अब इस युद्ध का असर दिखने लगा है, एल्यूमिनियम की सप्दिलाई ठप होने से दिल्ली समेत कई शहरों में ठंडा पीने के शौकीन अब डाइट कॉल ड्रिंक के &amp;nbsp;कैन की तलाश में भटक रहे हैं. इधर गर्मी भी बढ़ रही है, शौकीन लोगों की प्यास बढ़ रही है, लेकिन कैन कम पड़ रहे हैं. युद्ध की आग अब आपके फ्रिज तक आ पहुंची है.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Spice Prices: जंग ने बिगाड़ा मसालों का स्वाद! निर्यात ठप होने से जीरा, धनिया&amp;हल्दी के दाम गिरे, व्यापारियों की टूटी कमर</title>
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        <description><![CDATA[ Spice Prices in India: मिडिल ईस्ट में करीब 40 दिनों तक चले युद्ध और उसके बाद बने तनावपूर्ण हालात का असर अब राजस्थान के मसाला बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिपिंग चार्ज बढ़ने और निर्यात में आई रुकावट के कारण राज्य में तैयार और कच्चे मसालों की मांग तेजी से घट गई है. इसका सीधा असर किसानों और व्यापारियों पर पड़ रहा है.
हालांकि युद्ध और उसके बाद जारी तनाव के हालात के चलते ज्यादातर दूसरे सामानों के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन राजस्थान में पैदा होने वाले मसालों की कीमत कम हो गई है. मसालों के दाम घटने से जहां एक तरफ आम उपभोक्ता खुश हैं और उन्हें थोड़ी राहत मिल गई है, वहीं दूसरी तरफ किसान और व्यापारी परेशान हैं.&amp;nbsp;
जमा हो गया मसालों का भारी स्टॉक&amp;nbsp;
राजस्थान की प्रमुख मंडियों में इन दिनों मसालों का भारी स्टॉक जमा हो गया है. व्यापारियों के अनुसार विदेशों से ऑर्डर कम हो गए हैं, जिसके चलते माल बाहर नहीं जा पा रहा. खासतौर पर हल्दी, धनिया, जीरा और अन्य मसालों के दाम में गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि मिर्च के दाम अभी स्थिर बने हुए हैं या कुछ जगहों पर बढ़े भी हैं, क्योंकि मिर्च की पैदावार इस बार कम हुई थी.
जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट के कई देश भारतीय मसालों के बड़े खरीदार हैं. युद्ध और तनाव के कारण वहां की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे आयात कम हो गया है. इसके अलावा समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ने से शिपिंग कंपनियों ने किराया बढ़ा दिया है, जिससे निर्यात और महंगा हो गया है.
बाजार में नकदी का प्रवाह भी हुआ कम
मंडी व्यापारियों का कहना है कि पहले जहां नियमित रूप से माल की सप्लाई होती थी, अब वहां अनिश्चितता का माहौल है. इससे बाजार में नकदी का प्रवाह भी कम हुआ है. किसान भी अपनी फसल का सही दाम नहीं मिलने से परेशान हैं. कई जगहों पर किसानों को लागत से कम कीमत पर मसाले बेचने पड़ रहे हैं.
हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति थोड़ी राहत लेकर आई है. मसालों की कीमतों में गिरावट से रसोई का बजट कुछ हद तक कम हुआ है. लेकिन व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है.
सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग
व्यापारियों और किसानों की मांग है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाए. साथ ही शिपिंग लागत को कम करने और नए बाजार तलाशने की दिशा में प्रयास किए जाएं, ताकि मसाला उद्योग को इस संकट से बाहर निकाला जा सके.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG News: डिस्ट्रीब्यूटर के पास गैस सिलेंडर है या नहीं? सरकार ने बताया, सप्लाई पर दिया बड़ा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ US- Iran war: यूएस और ईरान के बीच चल रह तनाव के चलते देश में कुछ महत्वपूर्ण चीजों की आपूर्ति को लेकर कमी देखी गई. जिसमें सबसे महत्वपूर्ण तो LPG गैस है, हालांकि अब लगता है कि इन चीजों की आपूर्ति में अब थोड़ी बढ़त हुई है. अब हाल ही में सरकार की तरफ से भी LPG और खाद- यूरिया की आपूर्ति को लेकर भी बड़े अपडेट सामने आया है.
LPG सप्लाई बढ़ीहाल ही में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने LPG को लेकर एक बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने बताया है कि अब देश में कमर्शियल LPG का आवंटन 70 प्रतिशत तक बढ़ गया है. हालांकि कुछ वितरक केंद्रों पर पैनिक होकर लोग सिलेंडर खरीदने पहुंच रहे थे, बावजूद इसके सरकार के पास एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति है और किसी भी वितरक के पास कमी नहीं है. सुजाना ने कहा, &#039;अधिकांश डिलीवरी अब प्रमाणीकरण प्रणाली (DAC) के जरिए हो रही हैं और करीब 93 प्रतिशत एलपीजी सिलेंडरों को ऑथेंटिकेशन कोड के साथ ही डिलीवर किया गया है. अब तक 1,65,000 टन से ज्यादा कमर्शियल LPG सिलेंडर बेचे जा चुके हैं&#039;.
खाद और उर्वरकों की नहीं है कमीइसके अलावा उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने भी सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उर्वरकों की कमी के बारे में बात करते हुए कहा, &#039;उर्वरकों की अवेलेबिलिटी मजबूत बनी हुई है और आपूर्ति जरूरत से भी ज्यादा है और अब तक किसी भी प्रकार की कमी की कोई सूचना नहीं मिली है. 1 अप्रैल 2026 से 26 अप्रैल 2026 तक यूरिया की उपलब्धता 71.58 लाख मीट्रिक टन है, जबकि जरूरत केवल 18.17 लाख मीट्रिक टन की थी. इसी तरह DAP की अवेलेबिलिटी भी 22.35 लाख मीट्रिक टन है जबकि देशभर में इसकी जरूरत 5.90 लाख मीट्रिक टन ही है.
बता दें कि पिछले दिनों सामने आई कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया था कि भारत में यूरिया की सप्लाई को सिक्योर करने के लिए ज्यादा कीमतों पर इसे खरीदा जा रहा है, जिससे सप्लाई प्रभावित ना हो सके. हालांकि सरकार ने ऐसे किसी भी दावे को खारिज कर दिया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>महंगाई की दोहरी मार: खाने का तेल ₹182 के पार, रिटेल इंफ्लेशन 3.4% पर पहुंची, बड़े झटके की चेतावनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महंगाई-की-दोहरी-मार-खाने-का-तेल-182-के-पार-रिटेल-इंफ्लेशन-34-पर-पहुंची-बड़े-झटके-की-चेतावनी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/महंगाई-की-दोहरी-मार-खाने-का-तेल-182-के-पार-रिटेल-इंफ्लेशन-34-पर-पहुंची-बड़े-झटके-की-चेतावनी</guid>
        <description><![CDATA[ US-Iran War: लगभग दो महीने से चल रही ईरान-अमेरिका की जंग के कारण अब हालात यह हैं कि खाने का तेल, रसोई गैस, साबुन, बिस्किट हर चीज़ धीरे-धीरे महंगी हो रही है और सबसे बड़ा झटका आम आदमी को पाम ऑयल दे रहा है. साबुन, बिस्किट, हेयर ऑयल, नूडल्स और खाने का तेल. इन सबमें पाम ऑयल होता है. बाज़ार में मिलने वाले Fortune, Gemini, Ruchi Gold जैसे खाने के तेल के ब्रांड्स में भी बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का होता है. यही वजह है कि पाम ऑयल की कीमत बढ़ने का असर सीधे रसोई के बजट पर पड़ता है.
आता इंडोनेशिया से है - जंग ने महंगा कर दिया
भारत हर साल करीब 1.67 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा करीब 40 फीसदी पाम ऑयल का होता है जो इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है. यह तेल Strait of Malacca के रास्ते समुद्री जहाज़ों से भारत पहुंचता है लेकिन ईरान-अमेरिका जंग के कारण पूरी दुनिया में समुद्री जहाज़रानी का बीमा महंगा हो गया है और freight costs बढ़ गई हैं यह सारा बोझ आखिरकार उस तेल की कीमत पर आया जो आप बाज़ार से खरीदते हैं.
दूसरी तरफ इंडोनेशिया ने तो अब &amp;nbsp;बोल दिया कि वो अब इसको बाहर बेचने पर कंट्रोल लगाएगा ख़ुद ही इस्तेमाल करेगा क्योंकि पाम ऑयल से बायो-डीज़ल भी बनाया जाता है और इंडोनेशिया में तो डीज़ल में इसको मिलाया भी जाता है तो इसकी सप्लाई को लेकर लगातार संशय बना हुआ है.
मार्च में 19 फीसदी कम आया Palm ऑयल
मार्च 2026 में भारत का पाम ऑयल आयात 19 फीसदी गिरकर तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया. वजह साफ है कीमतें इतनी बढ़ गईं कि भारतीय आयातकों ने खरीद ही कम कर दी लेकिन मुसीबत यहीं नहीं रुकी फरवरी 2026 में सनफ्लावर ऑयल का आयात भी करीब आधा हो गया West Asia संकट और बढ़ती कीमतों की वजह से.
अप्रैल में भी सनफ्लावर ऑयल की सप्लाई दबाव में बनी हुई है. जब दोनों बड़े आयातित तेल एक साथ कम हों तो बाज़ार में दाम चढ़ेंगे ही और यही हो भी रहा है. कुछ बाज़ारों में तो &amp;nbsp;खाने का तेल ₹182 प्रति लीटर तक पहुंच गया है. ईरान-अमेरिका युद्ध के असर से खाने का तेल औसतन 7 फीसदी महंगा हुआ है.
साबुन, हेयर ऑयल, बिस्किट - पाम ऑयल हर जगह&amp;nbsp;
पाम ऑयल सिर्फ खाने के तेल में नहीं होता. Lux, Lifebuoy, Cinthol जैसे साबुनों में पाम ऑयल डेरिवेटिव होता है. बालों में लगाने वाले कई हेयर ऑयल प्रोडक्ट्स palm kernel oil से बनते हैं. Parle, Britannia जैसी बड़ी कंपनियां बिस्किट और नमकीन बनाने में पाम ऑयल का भारी इस्तेमाल करती हैं. अब जब पाम ऑयल की input cost बढ़ गई है तो FMCG कंपनियां दो में से एक रास्ता अपना रही हैं या तो कीमत बढ़ाओ या फिर उतने ही दाम में मात्रा घटा दो. इसे Shrinkflation कहते हैं. दोनों में नुकसान आपका ही है.
ईरान संकट के बाद घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पहले ही ₹60 महंगा हो चुका है. Commercial LPG यानी जो ढाबों, छोटे रेस्टोरेंट और होटलों में इस्तेमाल होती है उसमें ₹195.50 की बढ़ोतरी हो चुकी है. इसका मतलब यह है कि जो खाना आप बाहर खाते हैं वो भी अब पहले से महंगा होगा. एक तरफ घर की रसोई का बजट बिगड़ रहा है दूसरी तरफ बाहर खाना भी अब राहत नहीं देता.
सरकारी महंगाई के आंकड़े भी चढ़ रहे हैं
मार्च 2026 में भारत की खुदरा महंगाई यानी Retail Inflation बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई जो फरवरी में यह 3.2 फीसदी थी. खाना पकाने के ईंधन की महंगाई 4 फीसदी से ऊपर चली गई. Wholesale Price Inflation मार्च में 3.88 फीसदी हो गई crude rates में उछाल की वजह से और अब तो एक्सपर्ट्स की चेतावनी यह है कि अप्रैल में food inflation और भी ऊपर जा सकती है यानी जो आंकड़ा अभी दिख रहा है वो पूरी तस्वीर नहीं है असली असर अभी आना बाकी है.
यहां तक की Reserve Bank of India ने खुद माना है कि ईरान-अमेरिका युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. RBI ने पांच बड़े खतरे गिनाए हैं और भारत की high growth, low inflation &amp;nbsp;दबाव में है. सरकार ने तेल आपूर्ति बचाने के लिए Russia से crude imports बढ़ाए हैं. लेकिन खाद्य तेल की कहानी अलग है क्योंकि वहां रूस से कोई substitute नहीं आता.
अब इसको ऐसे समझ लीजिये की एक सामान्य चार लोगों के मध्यमवर्गीय परिवार का हिसाब लगाएं तो 5 लीटर खाने के तेल पर करीब ₹45 ज़्यादा खर्च, LPG सिलेंडर पर ₹60 ज़्यादा, साबुन-हेयर ऑयल-बिस्किट &amp;nbsp;पर मिलाकर ₹45 से ₹60 ज़्यादा यानी हर महीने ₹150 से ₹165 का अतिरिक्त बोझ. साल भर में यह रकम ₹1,800 से ₹2,000 तक बनती है और यह सिर्फ शुरुआत है FMCG कंपनियों पर FY27 में भी input cost का दबाव बना रहेगा.
यह समझे की सरकार के पास क्या विकल्प हैं?
सरकार के पास आयात शुल्क घटाने का विकल्प है जो 2024 में भी आज़माया जा चुका है. NMEO-OP यानी National Mission on Edible Oils - Oil Palm के तहत देश में पाम ऑयल की खेती बढ़ाने की कोशिश भी जारी है लेकिन खेती बढ़ाना एक लंबी प्रक्रिया है - इसका असर तुरंत नहीं दिखता. फिलहाल जब तक कोई ठोस राहत नहीं मिलती रसोई का बजट आम आदमी को खुद ही संभालना होगा.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>महंगाई, की, दोहरी, मार:, खाने, का, तेल, ₹182, के, पार, रिटेल, इंफ्लेशन, 3.4, पर, पहुंची, बड़े, झटके, की, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>Hormuz Crisis: एक जहाज को रास्ता देने के बदले 37 करोड़ वसूलता है ये देश, कर रहा तगड़ी कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ Panama Canal: यूएस- ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर विश्वभर में देखने को मिल रहा है. इसके चलते क्रूड ऑइल की आवाजाही पर काफी असर पड़ रहा है. जिसकी वजह से भारत समेत दुनियाभर में भी इसकी कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. हालांकि इस युद्ध का कई अन्य छोटे देश फायदा भी उठा रहे हैं. युद्ध के नाम पर क्रूड ऑइल की आवाजाही पर यहां करोड़ों रुपये की वसूली की जा रही है.
कौन-सा देश कर रहा वसूली?दरअसल युद्ध के कारण हॉर्मुज ब्लॉक है, जिसके चलते तेल और गैस के जहाज दूसरे रास्ते से निकल रहे हैं. ये दूसरा रास्ता है पनामा कैनाल, लेकिन ये रास्ता भी इन जहाजों के लिए आसान नहीं है. बल्कि इस रास्ते से निकलने पर इनसे अच्छी- खासी वसूली की जा रही है. यहां से निकलने के लिए जहाजों की नीलामी की जा रही है जिसमें बोली करीब 4 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से 37 करोड़ रुपये तक पहुंच रही है. जिससे पनामा कैनाल की तो चांदी ही चांदी हो रही है.
प्रायॉरिटी एक्सेस के नाम पर वसूलीइस समय जहां कंपनियां एक जहाज के 4 मिलियन डॉलर ले रही हैं, तो वहीं इससे पहले इस कैनाल से जहाजों के निकलने पर 3 से 4 लाख डॉलर का खर्च आता था, लेकिन अब प्रायॉरिटी एक्सेस के नाम पर तगड़ी वसूली की जा रही है. पहले, फास्ट-ट्रैक स्लॉट पर ढाई से तीन लाख डॉलर का एक्स्ट्रा खर्च लगता था, लेकिन इन दिनों हालात ये हैं कि एक्स्ट्रा खर्च बढ़कर 4.25 लाख डॉलर से भी ज्यादा हो गया है.
बता दें कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनियाभर की खपत के लिए करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. ये तेल सीधे भारत के गुजरात राज्य में पहुंचता है, जहां से इसकी अन्य शहरों में सप्लाई होती है. फिलहाल अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते ये आवाजाही बंद है. जिसकी वजह से पनामा सरकार की कैनाल अथॉरिटी तगड़ी कमाई कर रही है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>70 साल पुराना बंगला 221 करोड़ में बिका, ₹2.60 लाख प्रति वर्गफुट में हुई डील, जानिए किसने खरीदा?</title>
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        <description><![CDATA[ Mumbai Costliest Bunglow: मुंबई सिर्फ सपनों की नगरी नहीं है, बल्कि इसे देश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है. यहां अक्सर महंगी प्रॉपर्टी डील्स सुर्खियों में रहती है. इसी बीच जुहू तारा रोड पर स्थित एक सी-फेसिंग बंगला अपनी कीमत को लेकर चर्चा में है. लगभग 70 साल पुराने इस लीला बंगला की कीमत जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसकी कीमत 221 करोड़ रुपये लगाई गई है. हेरिटेज वैल्यू के चलते यह प्रॉपर्टी काफी खास मानी जा रही है और कई बिल्डर्स इसमें दिलचस्पी दिखा चुके हैं.
जुहू तारा रोड पर स्थित यह लीला बंगला आर्ट डेको स्टाइल में बना है और इसे IIB ग्रेड का हेरिटेज दर्जा मिला हुआ है. इसका साफ मतलब यह है कि इसे खरीदने के बाद इसमें ज्यादा बदलाव नहीं किया जा सकता है. यह बंगला नानावती परिवार का है, जो Nanavati Max Super Speciality Hospital से जुड़ा हुआ है.
जानिए किसने खरीदा यह महंगा बंगला?
इस सी-फेसिंग बंगले को Notandas Realty ने खरीदा है, जो नोटनदार ज्वैलर्स ग्रुप का हिस्सा है. इस डील में स्टांर ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन पर भी बड़ी रकम खर्च की गई है. इसे महेश नोटनदार जगवानी और उनके बेटे हर्ष जगवानी ने मिलकर खरीदा है. यह परिवार ज्वैलरी बिजनेस से जुड़ा है.
बंगले की खासियत क्या है?

यह दो मंजिला बंगला लगभग 1355 वर्गमीटर के प्लॉट पर बना है.
इसमें 8480.60 वर्गफुट का बिल्ट-अप एरिया है.
साथ ही इसमें 2500 &amp;nbsp;वर्गफुट का टैरेस है.
और 5000 वर्गफुट का गार्डन भी मौजूद है.

इस डील के हिसाब से कीमत लगभग ₹2.60 लाख प्रति वर्गफुट रही. हालांकि इससे पहले मुंबई में एक और महंगी डील में ₹2.89 लाख प्रति वर्गफुट तक कीमत जा चुकी है.
250 करोड़ तक पहुंची थी कीमत
इस डील को JLL India ने मैनेज किया. पहली बार इस बंगले को 2022 में 210-220 करोड़ रुपये में बेचने के लिए लिस्ट किया गया था, लेकिन बाद में इसकी कीमत बढ़कर लगभग 250 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी. मुंबई का यह लीला बंगला सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं है, बल्कि हेरिटेज और लग्जरी का बेहतरीन मेल है.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>वसीयत के बिना मौत: जानें पत्नी, बेटे और बेटी में कैसे बंटेगी संपत्ति, कौन होगा असली वारिस?</title>
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        <description><![CDATA[ Property Rights: किसी की मौत के बाद यदि कोई विवाद सबसे ज्यादा सामने आता है, तो वो है प्रॉपर्टी का विवाद. इसके लिए अपने, अपनों के ही दुश्मन तक बन जाते हैं. कई लोग इसके नियमों को भी नहीं जानते हैं, केवल सुनी- सुनाई बातों पर ही भरोसा करते हैं और आपस में ही झगड़ते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के मुखिया की मौत हो जाए और उन्होंने कोई वसीयत भी ना बनाई हो, तब उनकी प्रॉपर्टी का वारिस कौन होता है?
कौन होगा असली वारिस?यदि घर के मुखिया का आकस्मिक निधन हो जाता है और वो अपनी वसीयत नहीं बना पाता है, तब प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन होता है? ये सवाल कई लोगों के मन में होता है, इस सवाल का जवाब आज आपको बताते हैं. दरअसल हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 8 के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए ही मृत्यु हो जाती है, तो उसकी सारी संपत्ति उसके कानूनी वारिसों को दी जाती है. यदि घर के मुखिया की मृत्यु हो जाती है तो उसकी पत्नी, बेटा और बेटी तीनों के बीच बराबरी से सम्पत्ति बांट दी जाती है. जिनमें से हर एक को संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा मिलता है.
वसीयत बनाने के बाद मृत्यु हो तब?यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के पहले ही अपनी वसीयत बनाकर जाता है तो उसे, उसी अनुसार फॉलो किया जाता है. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के मुताबिक कोई व्यक्ति अपनी पूरी या आधी संपत्ति किसी को भी दे सकता है. यहां तक ​​कि अजनबियों या किसी ट्रस्ट को भी वसीयत के जरिए अपनी प्रॉपर्टी दे सकता है. वसीयत को वैध मानने के लिए उस पर वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर होना चाहिए और कम से कम दो व्यक्ति गवाह के रूप में होना चाहिए. जिन्हें भले ही ये ना पता हो कि वसीयत में लिखा क्या है. वसीयत का पंजीकरण जरूर होना चाहिए, इससे ये वैध मानी जाती है और इसे लेकर कोई विवाद नहीं होता. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>34 साल की वफादारी और सुबह 6 बजे का &amp;apos;Exit&amp;apos; ईमेल, ओरेकल कर्मचारी का भावुक पोस्ट वायरल</title>
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        <description><![CDATA[ Oracle layoffs Viral Post: दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनी Oracle में हाल ही में हुई छंटनी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. महिला कर्मचारी ने LinkedIn पर अपने अनुभव शेयर किए हैं. जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया है. इस पोस्ट से कंपनी को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं.&amp;nbsp;
कंपनी ने दुनियाभर में करीब 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की है. यह असर अमेरिका, भारत, कनाडा और लैटिन अमेरिका जैसे कई देशों में देखा गया है. &amp;nbsp;आइए जानते हैं, इस बारे में.&amp;nbsp;
30 हजार कर्मचारियों की छंटनी से मचा हड़कंप
टेक कंपनी Oracle में बड़े स्तर पर छंटनी की खबर सामने आई है. जिसमें दुनियाभर में करीब 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया हैं. मिली जानकारी के अनुसार, इस छंटनी का बड़ा असर भारतीय कर्मचारियों पर भी पड़ा है. कुल निकाले गए कर्मचारियों में भारतीयों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा बताई जा रही है.
महिला कर्मचारी की पोस्ट से छंटनी पर उठे सवाल

एक महिला कर्मचारी की पोस्ट के बाद Oracle में हुई छंटनी फिर चर्चा में आ गई है. LinkedIn पर शेयर की गई इस पोस्ट में बताया गया कि कंपनी ने इस साल की शुरुआत में करीब 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. कर्मचारियों को सुबह करीब 6 बजे ईमेल के जरिए इसकी जानकारी दी गई थी.
यह पोस्ट Nina Lewis ने शेयर की, जो करीब 33 साल तक कंपनी में सिक्योरिटी अलर्ट मैनेजर के पद पर काम कर चुकी हैं. उन्होंने दावा किया कि छंटनी किसी एल्गोरिदम के आधार पर की गई. जिसमें खास तौर पर मिड-लेवल मैनेजर और सीनियर कर्मचारियों को निशाना बनाया गया. उनकी यह पोस्ट वायरल हो गई और कई अन्य प्रभावित कर्मचारियों ने भी अपनी बात खुलकर सामने रखी.

पोस्ट के बाद सामने आई अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
Nina Lewis की पोस्ट सामने आने के बाद LinkedIn पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कई यूजर्स ने उनके साथ सहानुभूति जताई और इस स्थिति को काफी मुश्किल भरा बताया. वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी के इस तरीके पर सवाल भी उठाए. कुल मिलाकर यह पोस्ट कई लोगों के अनुभव से जुड़ गई. जिससे इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होने लगी है.
ग्रोथ के बीच कंपनी ने की छंटनी&amp;nbsp;
दिलचस्प बात यह है कि Oracle ने ऐसे समय में कर्मचारियों की कटौती की हैं, जब उसका कारोबार मजबूत बना हुआ है. कंपनी की कमाई में सालाना करीब 22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. खासकर क्लाउड से जुड़े बिजनेस में तेज उछाल देखने को मिला है.

यह भी पढ़ें:
ईंधन की किल्लत! सड़कों पर पेट्रोल-डीजल का &#039;पैनिक&#039;, देश के इस राज्य में बंद हो गए 421 पंप
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चॉकलेट&amp;आइसक्रीम पर महंगाई का साया, सप्लाई चेन में रुकावट, कई ब्रांड्स बढ़ाएंगे दाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चॉकलेट-आइसक्रीम-पर-महंगाई-का-साया-सप्लाई-चेन-में-रुकावट-कई-ब्रांड्स-बढ़ाएंगे-दाम</link>
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        <description><![CDATA[ Chocolate Ice Cream Price Hike: गर्मी के मौसम में सबकी फेवरेट आईसक्रीम अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है. ऐसा गर्मी या इसकी ज्यादा मार्केट डिमांड की वजह से नहीं बल्कि यूएस- ईरान वॉर की वजह से है. दरअसल यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं, जिनमें घरेलू गैस पेट्रोल डीजल तो है ही, अब और भी अन्य चीजों के नाम इसमें जुड़ गए हैं. इसी के चलते आईसक्रीम और चॉकलेट्स की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है.
क्या है पूरा मामला?टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस-ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर दुनियाभर में अलग- अलग चीजों की किल्लत के साथ देखने को मिल रहा है. इसी वजह से आइसक्रीम और चॉकलेट में इस्तेमाल होने वाली ऐसी चीजें जो मिडिल-ईस्ट से इम्पोर्ट की जाती हैं, उनकी लागत बढ़ गई है और मौसम के मुताबिक बाजार में डिमांड भी बढ़ गई है, जिसके चलते ही एक्सपोर्टर्स को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है.
किन चीजों की हो रही कमी?ऐसी कंपनीज जो केवल नट्स, ड्राय फ्रूट्स और कोको पाउडर या रॉ कोको पर ही निर्भर हैं, उनका कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में ही कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, साथ ही माल ढुलाई और पैकेजिंग की लागत भी बढ़ गई है. इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी ने TOI को बताया कि नट्स और सूखे मेवों की कीमतें अब पहले के मुताबिक 15% से 22% तक बढ़ गई हैं.
मौसम की मार के ऊपर महंगाई की मारये स्थिति ऐसे समय पर बनी है जब भीषण गर्मी पड़ रही है और आईसक्रीम की डिमांड भी बहुत हाई रहती है. ऐसे में अचानक से दाम बढ़ने की वजह से इसकी बिक्री पर भी असर देखने को मिल सकता है. कई ब्रांड्स के लिए तो ये बहुत बड़ी दिक्कत है क्योंकि ऐसे समय में ये महंगाई की मार पड़ी है, जब गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, अब ऐसे में दोबारा से डिजाइनिंग और सोर्सिंग योजनाओं पर काम करना भी मुश्किल है.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>इंडिया&amp;न्यूजीलैंड बिजनेस मीट: &amp;apos;विश्व की शू कैपिटल&amp;apos; बनेगा आगरा, निर्यात&amp;रोजगार में आएगा भारी उछाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इंडिया-न्यूजीलैंड-बिजनेस-मीट-विश्व-की-शू-कैपिटल-बनेगा-आगरा-निर्यात-रोजगार-में-आएगा-भारी-उछाल</link>
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        <description><![CDATA[ India-New Zealand Business Meet:&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक शहर आगरा अब केवल &#039;ताज नगरी&#039; के रूप में ही नहीं, बल्कि &quot;विश्व की शू कैपिटल&quot; &amp;nbsp;के रूप में भी वैश्विक पटल पर अपनी धाक जमाने जा रहा है. रविवार को होटल अमर विलास में आयोजित &#039;इंडिया-न्यूजीलैंड बिज़नेस मीट&#039; में इस ऐतिहासिक पहल का शंखनाद किया गया. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया है कि आगरा का फुटवियर उद्योग उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है. इस पहल से प्रदेश के व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार को अभूतपूर्व फायदे होंगे.
निर्यात में 3 से 5 गुना वृद्धि: यूपी बनेगा विदेशी मुद्रा का बड़ा केंद्र
आगरा पहले से ही भारत के लेदर फुटवियर निर्यात में 75% से अधिक का महत्वपूर्ण योगदान देता है. इस मीट में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), CEPA और द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश से होने वाले निर्यात में 3 से 5 गुना तक वृद्धि की संभावना जताई गई है. न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ कच्चे माल की आपूर्ति और डिजाइन इनोवेशन में साझेदारी से यूपी के उत्पादों की यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व के बाजारों में पैठ और मजबूत होगी, जिससे प्रदेश के राजस्व में भारी वृद्धि होगी.
एमएसएमई सेक्टर को संजीवनी, लाखों नए रोजगार का होगा सृजन
उत्तर प्रदेश का आगरा क्लस्टर वर्तमान में 5,000 से अधिक एमएसएमई इकाइयों का संचालन करता है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 4 से 5 लाख लोगों को रोजगार प्रदान कर रही हैं. उद्योग को वैश्विक हब बनाने की इस पहल और विदेशी निवेश आने से इन एमएसएमई इकाइयों का विस्तार होगा. इसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश के युवाओं और कारीगरों के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पलायन रुकेगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स से यूपी के व्यापार को मिलेगी उड़ान
आगरा को वैश्विक स्तर पर चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का भरपूर लाभ मिलेगा. जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) में प्रस्तावित फुटवियर पार्क आगरा के लॉजिस्टिक्स को विश्वस्तरीय बना देंगे. इससे यूपी के माल की ढुलाई सस्ती और तेज होगी, जो विदेशी खरीदारों को राज्य की ओर आकर्षित करने का एक प्रमुख कारण बनेगा.
&#039;ब्रांड आगरा&#039; को नई पहचान, विदेशी निवेश और तकनीक का होगा आगमन
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश को एक नई ग्लोबल ब्रांडिंग मिलेगी. आगरा को &quot;फुटवियर उत्कृष्टता की नगरी&quot; के रूप में स्थापित किया जाएगा और उत्पादों को जीआई टैग के जरिये अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी. न्यूज़ीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई चर्चा के बाद यह तय है कि यूपी में अब केवल माल नहीं बनेगा, बल्कि संयुक्त उत्पादन और विश्वस्तरीय डिजाइन इनोवेशन के लिए बड़ा विदेशी निवेश (एफडीआई) भी आएगा, जिससे प्रदेश की तकनीकी क्षमता में इजाफा होगा.
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार उद्योग को हर संभव नीतिगत समर्थन (जैसे 2030 तक कंपोनेंट्स पर शून्य ड्यूटी और ब्याज सब्सिडी) देने के लिए प्रतिबद्ध है. काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के चेयरमैन रमेश कुमार जुनेजा और फुटवियर विकास परिषद के चेयरमैन पूरन डावर सहित तमाम उद्योगपतियों ने इसे एक युगांतकारी कदम बताया. निश्चित रूप से यह पहल उत्तर प्रदेश को &#039;वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी&#039; बनाने के लक्ष्य में एक मील का पत्थर साबित होगी. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इंडिया-न्यूजीलैंड, बिजनेस, मीट:, विश्व, की, शू, कैपिटल, बनेगा, आगरा, निर्यात-रोजगार, में, आएगा, भारी, उछाल</media:keywords>
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        <title>वंदे भारत के बाद अब पटरी पर सरपट दौड़ेगी बुलेट ट्रेन! जानें कब तक ले सकेंगे सफर का मजा?</title>
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        <description><![CDATA[ India&#039;s First Bullet Train: भारत रेल टेक्नोलॉजी के मामले में नए-नए मुकाम हासिल करते जा रहा है. इस क्रम में एक और नई उपलब्धि भारत अपने नाम करने जा रहा है. दरअसल, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में BEML के &#039;आदित्य प्लांट&#039; का उद्घाटन किया और इसके साथ ही भारत की पहली बुलेट ट्रेन B-28 का निर्माण कार्य शुरू हो गया है.

#WATCH | Bengaluru, Karnataka: Minister of Railways, Ashwini Vaishnaw says, &quot;The bullet train&amp;rsquo;s Atmanirbhar version B-28 is being designed jointly by ICF and BEML. Manufacturing will take place at BEML&amp;rsquo;s specially designed facility, Aditya Plant, equipped with advanced,&amp;hellip; pic.twitter.com/H1JISeTGxu
&amp;mdash; ANI (@ANI) April 25, 2026



2024 में BEML को मिला था कॉन्ट्रैक्ट
इस प्लांट में 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट तैयार किए जाएंगे, जिनमें से पहला ट्रेनसेट मार्च 2027 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है. यह उपलब्धि अक्टूबर 2024 में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा BEML को डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग के लिए दिए गए अनुबंध के बाद हासिल हुई है. उम्मीद है कि इस ट्रेन को अगस्त 2027 तक चालू कर दिया जाए.&amp;nbsp;
बुलेट ट्रेन को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई और BEML दोनों साथ में मिलकर डिजाइन करेंगे. अक्टूबर 2024 में BEML को दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन और निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. इसे बनाने में लगभग 866.87 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है.&amp;nbsp;
शुरुआत में इस ट्रेन को सूरत और वापी के बीच 97 किलोमीटर लंबे रूट पर चलाने का प्लान है, जो मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का हिस्सा है. 2027 की पहली तिमाही (मार्च-अप्रैल के बीच) तक इस ट्रेन के रोल आउट होने की संभावना है, जिसके बाद ट्रायल शुरू होगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
ट्रेन की क्या है खासियत?&amp;nbsp;

इसमें फुल एसी चेयर-कार कोच होंगे.
ट्रेन में लगीं कुर्सियां 360 डिग्री घूमने और झुकने वाली होंगी. इसमें ऑनबोर्ड इंफोटेनमेंट सिस्टम और वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज दी जाएंगी.
हाई-स्पीड ट्रेन टेक्नोलॉजी में जापान जैसे देशों पर निर्भरता कम करने और भारत को इस ओर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.


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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 4 गुना सैलरी बढ़ाने की मांग, मिलेगी खुशखबरी?</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Latest Update: इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर पूरे देश में चर्चाएं तेजी से बढ़ती दिख रही हैं. अलग-अलग कर्मचारी संगठन केंद्र सरकार से वेतन, भत्तों और अन्य बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं.
संगठनों की ओर से सरकार को कई सुझाव भी दिए गए हैं. अगर इन प्रस्तावों को सरकार की मंजूरी मिलती हैं, तो यह पिछले कुछ सालों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन स्ट्रक्चर में सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता हैं. आइए जानते हैं, इस बारे में.
वेतन स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग
केंद्र शासित प्रदेशों के सरकारी शिक्षकों का संगठन &amp;lsquo;प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच&amp;rsquo; (PSNM) ने वेतन और भत्तों की पूरी व्यवस्था में बदलाव करने की मांग रखी है.
संगठन ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि लेवल 1 के कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 50,000 से 60,000 रुपये तक किया जाना चाहिए. यह मौजूदा 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाले 18,000 रुपये के मूल वेतन से बहुत ज्यादा है.&amp;nbsp;
फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट पर जोर

यूनियन ने फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 2.62 से 3.83 के बीच करने का सुझाव दिया है. साथ ही सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत से बढ़ाकर करीब 6&amp;ndash;7 फीसदी करने की मांग रखी गई है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;संगठन का कहना हैं कि महंगाई को देखते हुए ये बदलाव जरूरी हैं. इन बदलावों से कर्मचारियों की इनकम में इजाफा हो सकेगा.&amp;nbsp;

वेतन 4 गुना करने की मांग
1. भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर करीब 72,000 रुपये करने की मांग रखी है. यह मौजूदा लेवल से 4 गुना ज्यादा है.
2. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर &amp;nbsp;को 4 करने की मांग भी की जा रही है. टॉप लेवल के पदों के लिए अधिकतम वेतन 10 लाख रुपये तक करने का सुझाव भी दिया गया है. अगर केंद्र सरकार इन सुझावों को मान लेती हैं तो, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में जोरदार इजाफा देखने को मिल सकता हैं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 07:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>क्रेडिट कार्ड अब आपके मोबाइल में! PNB लाया ग्राहकों के लिए UPI पर उधारी की सुविधा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रेडिट-कार्ड-अब-आपके-मोबाइल-में-pnb-लाया-ग्राहकों-के-लिए-upi-पर-उधारी-की-सुविधा</link>
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        <description><![CDATA[ PNB Digital Credit Card Launch: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने करीब 18 करोड़ ग्राहकों के लिए डिजिटल पेमेंट को और आसान बनाने के लिए फिनटेक कंपनी Kiwi के साथ समझौता किया हैं. Kiwi को क्रेडिट-ऑन-UPI प्लेटफॉर्म के तौर पर जाना जाता है. इस पहल का मकसद ग्राहकों को UPI के जरिए भी क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराना हैं. जिससे ग्राहकों के लिए पेमेंट का तरीका और ज्यादा सुविधाजनक बन सके.
इसके तहत बैंक RuPay नेटवर्क पर PNB Kiwi क्रेडिट कार्ड लॉन्च करेगा. इसके जरिए ग्राहक बैंक बैलेंस न होने पर भी UPI से भुगतान कर पाएंगे. आइए जानते हैं, इस बारे में.
आसान इस्तेमाल, साथ में कैशबैक
यह कार्ड पूरी तरह डिजिटल होगा और UPI से आसानी से जुड़ जाएगा. जिससे पेमेंट करना काफी आसान हो जाएगा. इसके साथ ही ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 0.5 से 1.5 प्रतिशत तक कैशबैक भी मिलेगा. यानी यूजर्स को सुविधा के साथ-साथ कैशबैक का भी लाभ मिलेगा. &amp;nbsp;
बिना फीस के डिजिटल कार्ड
यह कार्ड पूरी तरह डिजिटल तरीके से जारी होगा. यानी ग्राहक इसके लिए घर बैठे ऑनलाइन ही अप्लाई कर सकेंगे. आवेदन करने के लिए ज्यादा कागजी झंझट भी नहीं है. जिससे प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी.
सबसे खास बात यह है कि इस कार्ड पर न कोई जॉइनिंग फीस लगेगी और न ही कोई सालाना शुल्क. जिससे यह आम लोगों के लिए और ज्यादा सुविधाजनक बन जाता हैं.
ग्रामीण इलाकों तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी
पंजाब नेशनल बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Bibhu Prasad Mahapatra का कहना हैं कि, देश में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं. इसमें UPI अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने बताया कि बैंक के पास पूरे देश में 10,000 से ज्यादा शाखाओं का मजबूत नेटवर्क है. जिनमें से करीब 60 प्रतिशत सेमी-अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. इस नेटवर्क के जरिए बैंक उन लोगों तक भी औपचारिक क्रेडिट सुविधा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, जो अब तक इससे दूर रहे हैं.

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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्रेडिट, कार्ड, अब, आपके, मोबाइल, में, PNB, लाया, ग्राहकों, के, लिए, UPI, पर, उधारी, की, सुविधा</media:keywords>
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    <item>
        <title>TA और बच्चों की पढ़ाई के भत्ते में बढ़ोतरी की उम्मीद, 8वां वेतन आयोग ले सकता है बड़ा फैसला; जानिए डिटेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ta-और-बच्चों-की-पढ़ाई-के-भत्ते-में-बढ़ोतरी-की-उम्मीद-8वां-वेतन-आयोग-ले-सकता-है-बड़ा-फैसला-जानिए-डिटेल</link>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Latest Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर हलचल लगातार बढ़ रही है. अलग-अलग शहरों में बैठकों का सिलसिला जारी है. 24 अप्रैल को देहरादून में मीटिंग होने के बाद अब दिल्ली में भी चर्चा आगे बढ़ने वाली है.&amp;nbsp;
इस दौरान कई कर्मचारी संगठन अपनी-अपनी मांग आयोग के सामने रख रहे हैं. इनमें प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) भी शामिल हैं. जो केंद्र सरकार के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करता है. न्याय मंच ने भी अपनी मांगे आयोग को सौंपी हैं. जिसमें कई मांगो के साथ-साथ TA और बच्चों की पढ़ाई के भत्ते में बढ़ोतरी भी एक हैं. आइए जानते हैं, इस विषय में &amp;nbsp;
&amp;nbsp;एजुकेशन भत्तों को बढ़ाने की उठी मांग

PSNM ने मांग की हैं कि, चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस को अभी के करीब 2,812.59 रुपये महीने से बढ़ाकर 7,000 रुपये महीने किया जाए. ताकि कर्मचारी बच्चों की पढ़ाई का खर्च आसानी से संभाल सके.
यह भत्ता बच्चों की 12वीं तक की पढ़ाई के लिए मिलता है. संगठन चाहती है कि इसे आगे बढ़ाकर ग्रेजुएशन तक लागू किया जाए.
इसके अलावा हर महीने 2,000 रुपये का डिजिटल सपोर्ट अलाउंस (जैसे ब्रॉडबैंड और AI से जुड़ी जरूरतें) देने की भी मांग की गई है. जो अभी तक किसी वेतन आयोग में नहीं था.

ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ाने की मांग

कर्मचारी संगठन चाहता है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बढ़ाकर बेसिक सैलरी का 12&amp;ndash;15 प्रतिशत करने का फैसला सरकार की तरफ से लिया जाए. या फिर इसे कम से कम 9,000 रुपये + डीए के हिसाब से तय किया जाए.
अभी अलग-अलग लेवल पर यह अलाउंस 1800 रुपये, 3600 रुपये और 7200 रुपये मिलता है. जिसे बढ़ाने की मांग की जा रही है.&amp;nbsp;

छुट्टियों में बढ़ोतरी का सुझाव

संगठन की ओर से &amp;nbsp;कैजुअल लीव बढ़ाकर साल में 14 दिन करने, 30 दिन की अर्नड लीव और 20 दिन की मेडिकल लीव देने की मांग रखी गई है.
रिटायरमेंट के समय अर्नड लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने का भी प्रस्ताव रखा गया है.


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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>और, बच्चों, की, पढ़ाई, के, भत्ते, में, बढ़ोतरी, की, उम्मीद, 8वां, वेतन, आयोग, ले, सकता, है, बड़ा, फैसला, जानिए, डिटेल</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel: कहीं 106 रुपये तो कहीं 93 रुपये प्रति लीटर... जानें आज आपके शहर में पेट्रोल&amp;डीजल का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-कहीं-106-रुपये-तो-कहीं-93-रुपये-प्रति-लीटर-जानें-आज-आपके-शहर-में-पेट्रोल-डीजल-का-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-कहीं-106-रुपये-तो-कहीं-93-रुपये-प्रति-लीटर-जानें-आज-आपके-शहर-में-पेट्रोल-डीजल-का-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate Today on April 26: पेट्रोल-डीजल की कीमतें इंसान की जेब पर असर डालती हैं, जो हर रोज सुबह तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अपडेट करती हैं. इसकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपये एक्सचेंज रेट के आधार पर तय होती हैं. इसकी कीमतें ऑटो-रिक्शा चालकों से लेकर ऑफिस जाने वाले व्यक्ति को भी प्रभावित करती हैं. रही आज की बात, तो आज 26 अप्रैल को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि ईरान में जंग के चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है. इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के जरिए एनर्जी सप्लाई में आ रही रुकावटका असर पूरी दुनिया पर पड़ता नजर आ रहा है.&amp;nbsp;
आज पेट्रोल-डीजल का रेट&amp;nbsp;



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
94.77
87.67


मुंबई
&amp;nbsp;103.54
90.03


कोलकाता
105.45
92.02


चेन्नई
100.80
92.39


बेंगलुरु
&amp;nbsp;102.92
90.99


भोपाल
106.52
&amp;nbsp;91.89


भुवनेश्वर
101.10
&amp;nbsp;92.69


देहरादून
93.17
&amp;nbsp;88.01


गंगटोक
103.35
90.45



कैसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत?

जैसा कि पहले ही कहा चुका हैकि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तय होती हैं. पेट्रोल और डीजल दोनों का ही उत्पादन कच्चे तेल से होता है इसलिए ग्लोबल ऑयल मार्केट में कीमतें बढ़ने से इसका असर देश में फ्यूल रेट पर पड़ता है.
इसके अलावा, केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाया जाता है. यही वजह है कि राज्यों में पेट्रोल और डीजल की दरें अलग-अलग होती हैं. उपभोक्ताओं द्वारा पंप पर देखे जाने वाले खुदरा मूल्य में परिवहन लागत और प्रचलित मांग-आपूर्ति की स्थितियां भी शामिल होती हैं.
साथ ही कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने के लिए उसकी रिफाइनिंग की जाती है. इस पर आए खर्च से भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय होती है. रिफाइनिंग की लागत आमतौर पर कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है.
भारत कच्चे तेल का भारी मात्रा में आयात करता है, जिसकी खरीदारी डॉलर में होती है. ऐसे में अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, तो इससे कच्चे तेल के आयात पर अधिक खर्च बैठता है. इसका असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है.


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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel:, कहीं, 106, रुपये, तो, कहीं, रुपये, प्रति, लीटर..., जानें, आज, आपके, शहर, में, पेट्रोल-डीजल, का, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Rate: पटना में 1000 तो दिल्ली में 913 रुपये है गैस सिलेंडर की कीमत, जानें अपने शहर का रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-पटना-में-1000-तो-दिल्ली-में-913-रुपये-है-गैस-सिलेंडर-की-कीमत-जानें-अपने-शहर-का-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-rate-पटना-में-1000-तो-दिल्ली-में-913-रुपये-है-गैस-सिलेंडर-की-कीमत-जानें-अपने-शहर-का-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG cylinder rate on 26 April: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है. ऐसे में लोग LPG रेट्स को लेकर फिक्रमंद है कि कहीं कीमतें बढ़ न जाएं. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश में अभी गैस की कोई कमी नहीं है इसलिए घबराने जैसी कोई बात नहीं है. इस बीच, होर्मुज स्ट्रेट (Starit of Hormuz) पर एनर्जी सप्लाई में आई रुकावटों के बीच देश में अभी मौजूदा घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी जा रही है.
सरकार ने फिलहाल नए LPG कनेक्शन पर अस्थायी रूप से रोक लगा रखा है. इसके साथ ही निर्देश दिया गया है कि जहां पीएनजी सप्लाई है वहां एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने होंगे. रही कीमतों की बात, ताे आज 26 अप्रैल को भारत के प्रमुख शहरों में 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 910-950 रुपये के बीच बनी हुई हैं. इधर, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में 194 रुपये और फिर 218 रुपये की बढ़ोतरी की गई.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
आज गैस सिलेंडर की कीमत



शहर
14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत
19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत


दिल्ली&amp;nbsp;
913.0 रुपये
&amp;nbsp;2078.5 रुपये


मुंबई
912.5 रुपये
2031.0 रुपये


कोलकाता
&amp;nbsp;939.0 रुपये
2208.5 रुपये


चेन्नई
&amp;nbsp;928.5 रुपये
&amp;nbsp;2246.5 रुपये


बेंगलुरु
915.5 रुपये
2161.0 रुपये


पटना
1002.5 रुपये
2353.5 रुपये


पुडुचेरी
925.0 रुपये
2245.5 रुपये


शिमला
958.5 रुपये
2191.5 रुपये


श्रीनगर
1029.0 रुपये
2385.0 रुपये



सरकार ने दिलाया भरोसा
इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और तेल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश में फिलहाल LPG, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य है. इसके चलते डिस्ट्रीब्यूटरों के पास भी स्टॉक खत्म होने जैसी कोई खबरें नहीं है. सप्लाई की सुनिश्चितता को मजबूत करते हुए सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादन को भी बढ़ाया है. ऐसे में अफवाहों पर भरोसा ना करें.

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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Rate:, पटना, में, 1000, तो, दिल्ली, में, 913, रुपये, है, गैस, सिलेंडर, की, कीमत, जानें, अपने, शहर, का, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बाप रे बाप! इस बैंक में फंसे हैं ग्राहकों के 800 करोड़ रुपये, कहीं आपका भी तो नहीं है अकाउंट‌?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाप-रे-बाप-इस-बैंक-में-फंसे-हैं-ग्राहकों-के-800-करोड़-रुपये-कहीं-आपका-भी-तो-नहीं-है-अकाउंट</link>
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        <description><![CDATA[ Paytm Payments Bank: डिजिटल बैंकिंग सेक्टर से एक बेहद चौंकानेवाली खबर सामने आई है. मामला पेटीएम पेमेंट बैंक (Paytm Payments Bank) में करीब ₹800 करोड़ की राशि अभी तक फंसे रहने का है. जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के इसके संचालन पर रोक लगाते हुए करीब दो साल बीत चुके हैं.
400 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड
CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, परिचालन रुकने के लगभग दो साल बाद भी ग्राहकों का ₹800 करोड़ से अधिक पैसा पेटीएम पेमेंट्स बैंक में फंसा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, अभी जितनी रकम फंसी हु्ई है उसमें से लगभग आधी रकम ऐसे खातों में फंसी है, जो फ्रीज हैं.
वहीं, बाकी के ₹400 करोड़ ऐसे हैं, जिन्हें अब तक किसी ने क्लेम ही नहीं किया है. हैरान करने वाली बात यह भी है कि पिछले एक साल में अनक्लेम्ड राशि में कोई खास कमी नहीं आई है. यानी कि कई बार याद दिलाए जाने के बावजूद ग्राहकों ने इसे निकालने का प्रयास या दावा ही नहीं किया है.&amp;nbsp;
बैंक का कस्टमर बेस था मजबूत
नियामक कार्रवाई से पहले इस बैंक में 5500 करोड़ से अधिक की जमा राशि थी, जो अब घटकर 800 करोड़ रुपये तक सीमित रह गई है. बैंक के पास &amp;nbsp;लगभग 35 करोड़ अकाउंट्स के साथ कस्टमर्स का एक बड़ा बेस भी था. इनमें से बाद में केवल 10-10.5 करोड़ अकाउंट्स ही एक्टिव रहे, जबकि बाकी के फ्रोजन, डॉरमेंट और म्यूल अकाउंट्स में कन्वर्ट हो गए.
सूत्रों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम समूह को यूजर्स के साथ सक्रिय रूप से संवाद करने के लिए कहा था, जिसमें उनकी जमा राशि की निकासी की सुविधा के लिए अलर्ट और अनुस्मारक भेजना शामिल था. बता दें कि रिजर्व बैंक ने 24 अप्रैल 2026 से पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है.&amp;nbsp;
कैसे निकालें पैसा?

अगर आपका अकाउंट फ्रीज नहीं है, तो आप सामान्य रूप से किसी दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर निकाल सकते हैं या Wallet से बैंक में भेज सकते हैं.
अगर आप किसी कारणवश ऐप एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको PPBL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Claim Form भरना होगा. इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, कैंसिल चेक की जरूरत पड़ेगी.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाप, रे, बाप, इस, बैंक, में, फंसे, हैं, ग्राहकों, के, 800, करोड़, रुपये, कहीं, आपका, भी, तो, नहीं, है, अकाउंट‌</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Price: आज कितनी है 24 और 22 कैरेट सोने की कीमत? कितने में बिक रही चांदी, जानें लेटेस्ट रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: आज 26 अप्रैल, रविवार को देश में सोने-चांदी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. आज 24 कैरेट सोने की कीमत 15,404 रुपये प्रति ग्राम है. इसी तरह से 8 ग्राम की कीमत 1,23,232 रुपये और 10 ग्राम की कीमत 1,54,040 रुपये है. थोक खरीदारों के लिए 100 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 15,40,400 रुपये है.
22 और 18 कैरेट का रेट
गहनों के रूप में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत आज 14,120 रुपये प्रति ग्राम है. 8 ग्राम &amp;nbsp;22 कैरेट सोने की कीमत 1,12,960 रुपये है, जबकि 10 ग्राम सोने की कीमत 1,41,200 रुपये है।.बड़े पैमाने पर देखें, तो 100 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 14,12,000 रुपये है. भारत में आज 18 कैरेट सोने की कीमत 11,553 रुपये प्रति ग्राम पर स्थिर बनी हुई है. 8 ग्राम की कीमत 92,424 रुपये है, जबकि 10 ग्राम की कीमत 1,15,530 रुपये ह. 100 ग्राम के लिए रेट 11,55,300 रुपये है.
आज प्रमुख शहरों में सोने की कीमत



शहर
24 कैरेट सोने की कीमत
22 कैरेट सोने की कीमत


दिल्ली
1,54,200 रुपये
1,41,360 रुपये


मुंबई
1,54,050 रुपये
1,41,210 रुपये


कोलकाता
1,54,050 रुपये
1,41,210 रुपये


चेन्नई
1,53,810 रुपये
1,40,990 रुपये


बेंगलुरु
&amp;nbsp;1,54,040 रुपये
1,41,120 रुपये


गाजियाबाद
&amp;nbsp;1,52,990 रुपये
1,41,200 रुपये



चांदी की आज कीमत
भारत में आज चांदी की कीमतें स्थिर हैं और कई प्रमुख शहरों में इसकी कीमत प्रति किलोग्राम 2,60,000 रुपये है. इसी तरह से आज 1 ग्राम चांदी की कीमत 260 रुपये, 10 ग्राम की कीमत 2,600 रुपये, 100 ग्राम की कीमत 26,000 रुपये और 1 किलोग्राम की कीमत 2,60,000 रुपये है.
अगले हफ्ते के लिए सोने का आउटलुक
अगले हफ्ते (27 अप्रैल-2 मई) के लिए सोने का आउटलुक मिला-जुला है. हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा रही हैं. इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना बढ़ गई है. यह आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक होता है क्योंकि इससे डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत होते हैं. इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी सोने की कीमत को प्रभावित करते हैं. इससे बढ़ती कीमतों को सहारा मिलेगा.

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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Price:, आज, कितनी, है, और, कैरेट, सोने, की, कीमत, कितने, में, बिक, रही, चांदी, जानें, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>8th Central Pay Commission: 50000 मिनिमम सैलरी, 7 परसेंट इंक्रीमेंट... जानें शिक्षकों की रखी बड़ी मांगें</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लिए नेशनल काउंसिल-ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने बीते 14 अप्रैल को आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम वेतन 69000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.833 करने की मांग की है. वहीं, प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) जैसे शिक्षक संगठनों ने केंद्रीय शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे 50000-60000 करने का प्रस्ताव दिया है. PSNM केंद्र शासित प्रदेशों के केंद्र सरकार के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है. &amp;nbsp;
PSNM की दूसरी मांगे
शिक्षकों के लिए PSNM की कई और मांगे हैं जैसे कि मकान किराया भत्ता (HRA) को बढ़ाकर 36 परसेंट तक करना, सालाना वेतन वृद्धि को 7 परसेंट तक करना, जब महंगाई भत्ता (DA) 50 परसेंट तक पहुंच जाए तो उसे मूल वेतन में मिला देना, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना और हर 6, 12, 18 और 24 साल के बाद न्यूनतम सुनिश्चित पदोन्नति देना.

कर्मचारी संगठन की यह भी मांग है कि लेवल 1 के कर्मचारी का न्यूनतम मूल वेतन 50000 रुपये से 60000 रुपये के बीच होना चाहिए.
कर्मचारी संगठन की मांग फिटमेंट फैक्टर 2.62 से 3.83 के दायरे में रखने की भी है.&amp;nbsp;
PSNM ने 6 परसेंट-7 परसेंट एनुअल सैलरी हाइक की भी मांग की है, जिससे वेतन में सालाना लगभग 10 परसेंट की बढ़ोतरी सुनिश्चित हो सके.

अलाउंस और प्रोमोशन

कर्मचारी संगठन ने प्रस्ताव दिया है कि विभिन्न शहरों के लिए HRA की मौजूदा दर 10%, 20% और 30% से बढ़ाकर 12%, 24% और 36% कर दी जाए.
बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता (Children Education Allowance) को बढ़ाकर प्रति माह 7000 रुपये करने का प्रस्ताव है.&amp;nbsp;
30 साल की सेवा के दौरान कम से कम 5 प्रोमोशन देने की भी मांग है.&amp;nbsp;

संगठन की यह भी है डिमांड
कर्मचारी संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बढ़ाकर बेसिक सैलरी का 12%-15% कर दिया जाए (कम से कम 9000 रुपये + DA प्रतिशत के हिसाब से बढ़ोतरी). कर्मचारियों के अलग-अलग लेवल के लिए TA की दरें 1800 रुपये, 3600 रुपये और 7200 रुपये हैं.
कर्मचारियों ने हर महीने 2000 रुपये के डिजिटल सपोर्ट अलाउंस (ब्रॉडबैंड और AI सपोर्ट के लिए) की भी मांग की है. 7वां वेतन आयोग ऐसा कोई अलाउंस नहीं देता है.

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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 03:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Central, Pay, Commission:, 50000, मिनिमम, सैलरी, परसेंट, इंक्रीमेंट..., जानें, शिक्षकों, की, रखी, बड़ी, मांगें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CNG Price: आज किस शहर में सबसे सस्ते में बिक रहा है CNG? चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cng-price-आज-किस-शहर-में-सबसे-सस्ते-में-बिक-रहा-है-cng-चेक-करें-लेटेस्ट-रेट</link>
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        <description><![CDATA[ CNG Prices Today on April 25: CNG की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच अब रोज सफर करने वाले लोग इसके रेट को लेकर चिंता में रहने लगे हैं. कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर बजट पर पड़ता है इसलिए कीमतों की सही जानकारी होना जरूरी है.
भारत में CNG की कीमतें शहरवार लोकल टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर्स के हिसाब से तय की जाती हैं. ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि CNG कहां से भरवाई जाए, जिससे हर महीने काफी बचत हो सकती है.&amp;nbsp;
दिल्ली में कितनी है कीमत?
मिली जानकारी के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में आज सीएनजी की औसत कीमत 77.09 रुपये है. हालांकि, कहीं-कहीं रेट 100.90 रुपये तक पहुंचने की बात कही जा रही है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
नोएडा-गाजियाबाद में कितनी है CNG की कीमत?&amp;nbsp;
नोएडा और गाजियाबाद में IGL के स्टेशनों पर CNG की कीमत प्रति किलो क्रमश: 85.70 रुपये और 85.71 रुपये है. यहां पिछले कुछ दिनों से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.&amp;nbsp;
देश के बाकी हिस्सों में रेट्स



शहर
CNG की कीमत


मुंबई
80.50 रुपये


अहमदाबाद&amp;nbsp;
81.77 रुपये


गुरुग्राम
82.12 रुपये


दादर एवं नागर हवेली
81.16 रुपये


पुडुचेरी
74.60 रुपये



किन शहरों में महंगा है रेट?
ऊपर दी गई जानकारी से साफ है आज सबसे सस्ता CNG पुडुचेरी में बिक रहा है. वहीं, सबसे महंगा हिमाचल प्रदेश में है. यहां CNG की कीमत 124.75 रुपये प्रति किलो है. इसके बाद हैदराबाद में कीमत 97 रुपये, लखनऊ में कीमत 95.75 रुपये, चेन्नई में कीमत 91.50 रुपये और बेंगलुरु में कीमत 88.95 रुपये है.
बता दें कि सीएनजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला साल 2022 से शुरू हुआ. फिर 2023 में कुछ स्थिरता आई. 2024-25 से देश में घरेलू गैस की कमी के चलते कीमतें फिर से ऊपर-नीचे हो रही हैं. गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का 50 परसेंट से अधिक नैचुरल गैस विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधा देश में सीएनजी के रेट्स पर पड़ता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 03:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CNG, Price:, आज, किस, शहर, में, सबसे, सस्ते, में, बिक, रहा, है, CNG, चेक, करें, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold Silver Price: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने&amp;चांदी की कीमतों में हल्की तेजी, जानिए आज का ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-वैश्विक-अनिश्चितताओं-के-बीच-सोने-चांदी-की-कीमतों-में-हल्की-तेजी-जानिए-आज-का-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-वैश्विक-अनिश्चितताओं-के-बीच-सोने-चांदी-की-कीमतों-में-हल्की-तेजी-जानिए-आज-का-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: दुनिया भर के बाजारों में चल रही अनिश्चितता का सीधा असर भारत के सर्राफा बाजार पर भी दिखने लगा हैं. पिछले कारोबारी दिन MCX पर सोना-चांदी तेजी के साथ कारोबार करते हुए बंद हुए थे. आज यानी 25 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार Comex में भी कीमतों में मामूली सुधार देखा गया.&amp;nbsp;
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क करने का काम किया हैं. यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से इन बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. आइए जानते हैं, आपके शहर में आज इन्हें खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करना होगा?&amp;nbsp;&amp;nbsp;
सोने-चांदी के कीमतों में हल्की तेजी
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सत्र में MCX पर मई डिलीवरी वाली चांदी में मजबूत उछाल देखने को मिला था. यह 1.38 प्रतिशत उछलकर 2,44,845 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थी. वहीं सोना भी 0.70 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ था.
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो आज Comex पर सोना हल्की बढ़त के साथ 4,725.40 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है. जबकि चांदी भी 0.24 फीसदी चढ़कर 75.685 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है.
चांदी की कीमत
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,600 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 26,000 रुपये देने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,700 रुपये चल रही है.&amp;nbsp;
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,190 रुपए22 कैरेट - 1,41,350 रुपए18 कैरेट - 1,15,680 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,040 रुपए22 कैरेट - 1,41,200 रुपए18 कैरेट - 1,15,530 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,910 रुपए22 कैरेट - 1,42,000 रुपए18 कैरेट - 1,18,500 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,040 रुपए22 कैरेट - 1,41,200 रुपए18 कैरेट - 1,15,530 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,090 रुपए22 कैरेट - 1,41,250 रुपए18 कैरेट - 1,15,580 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,190 रुपए22 कैरेट - 1,41,350 रुपए18 कैरेट - 1,15,680 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,090 रुपए22 कैरेट - 1,41,250 रुपए18 कैरेट - 1,15,580 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,54,040 रुपए22 कैरेट - 1,41,200 रुपए18 कैरेट - 1,15,530 रुपए

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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price:, वैश्विक, अनिश्चितताओं, के, बीच, सोने-चांदी, की, कीमतों, में, हल्की, तेजी, जानिए, आज, का, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>221 करोड़ का बंगला! मुंबई के पॉश इलाके में हुई साल की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डील</title>
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        <description><![CDATA[ Mumbai Bungalow Deal: मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में एक बार फिर एक लग्जरी प्रॉपर्टी सुर्खियों में है. जुहू तारा रोड पर स्थित यह सी-फेसिंग बंगला करीब 70 साल पुराना है. हालांकि, इसकी खास लोकेशन और हेरिटेज महत्व के कारण इसकी कीमत 221 करोड़ रुपये तय की गई है. दिलचस्प बात यह है कि इतनी ऊंची कीमत होने के बावजूद इसे खरीदने के लिए कई बड़े बिल्डर्स ने रुचि दिखाई. जिसके बाद यह प्रॉपर्टी बाजार में चर्चा का विषय बनी हुई है.&amp;nbsp;
बंगला को मिला है हेरिटेज स्टेटस&amp;nbsp;
जुहू तारा रोड पर बना &amp;lsquo;लीला बंगला&amp;rsquo; करीब 70 साल पुराना है और इसे आर्ट डेको स्टाइल में तैयार किया गया है. इस प्रॉपर्टी को IIB ग्रेड का हेरिटेज स्टेटस मिला हुआ है. जिसकी वजह से इसे खरीदने वाला इसमें ज्यादा बदलाव नहीं कर पाएगा. हिंदुस्&amp;zwj;तान टाइम्&amp;zwj;स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बंगला गौतम नानावती परिवार का है. जो मुंबई के नानावती मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से जुड़ा हुआ है.
बंगला की खासियत
यह दो मंजिला बंगला करीब 1,355 वर्गमीटर के प्लॉट पर बना हुआ है. जिसमें लगभग 8,480.68 वर्गफुट का बिल्ट-अप एरिया है. इसके साथ ही करीब 2,500 वर्गफुट का टैरेस और करीब 5,000 वर्गफुट का गार्डन भी मौजूद है. अगर कीमत को बिल्ट-अप एरिया के हिसाब से देखें, तो यह डील करीब 2,60,592 रुपये प्रति वर्गफुट के रेट पर हुई है.
पहले भी लग चुकी थी ऊंची कीमत
इस डील को JLL India फर्म ने मैनेज किया है. जानकारी के मुताबिक, इस बंगले को पहली बार साल 2022 में करीब 210 से 220 करोड़ रुपये के बीच बेचने के लिए बाजार में उतारा गया था. इसके बाद इस साल की शुरुआत में इसकी कीमत बढ़कर लगभग 250 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी.
किसने लगाया बंगला पर दांव
मुंबई के इस सी-फेसिंग बंगले को नोटनदास रियलिटी ने अपने नाम किया हैं. जो नोटनदास ज्वैलर्स ग्रुप से जुड़ी कंपनी है. इस डील में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन पर भी अच्छी-खासी रकम खर्च की गई है.&amp;nbsp;
यह डील कंपनी के डायरेक्टर महेश नोटनदास जगवानी और उनके बेटे हर्ष महेश जगवानी ने साथ मिलकर पूरी की हैं. महेश जगवानी नोटनदास ज्वैलर्स के भी निदेशक हैं और बांद्रा में इसका शोरूम चलाते हैं. इस कारोबार की नींव नोटनदास परिवार के किशिन जगवानी ने 1983 में रखी थी.

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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Paytm पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द, इसका आप पर क्या होगा असर, क्या अब पेमेंट नहीं कर पाएंगे लोग?</title>
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        <description><![CDATA[ Paytm Payment Bank News: पेटीएम को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. आज भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है. इसका मतलब है कि पेटीएम अब भविष्य में बैंकिंग से जुड़ा कारोबार नहीं कर पाएगा. आरबीआई ने कहा है कि पेटीएम बार-बार लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन कर रहा था. इसके बाद गंभीर नियामक चिंताओं को देखते हुए कंपनी का बैंकिंग लाइसेंस रद्द करना पड़ा. आरबीआई के इस कदम के बाद हर किसी के मन में सवाल है कि अब पेटीएम एप से पेमेंट हो पाएगा या नहीं. जानिए.
दरअसल पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग का लाइसेंस रद्द होने का असर पेटीएम यूजर्स पर भी पड़ेगा. अब लोग पेटीएम बैंक में नया पैसा जमा नहीं कर पाएंगे. इससे आपके सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट और वॉलेट में मौजूद सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा.
कई छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले Paytm बैंक का ही इस्तेमाल करते थे, उनके लिए अचानक पेमेंट रिसीव करने और सेटलमेंट करने में दिक्कतें आ सकती हैं. हालांकि पेटीएम से डायरेक्ट पेमेंट करने के लिए बैंक लिंक होना जरूरी है. ऐसे में जब आप क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट करते हैं तो पैसा सीधा आपके बैंक अकाउंट से कटता है. ऐसे में इसपर लाइसेंस रद्द होने का असर नहीं पड़ेगा.
FASTag रिचार्ज करना होगा मुश्किल!
लेकिन बड़ी बात यह है कि अगर आपका FASTag या वॉलेट पेटीएम बैंक से लिंक है तो उसे रिचार्ज करना या इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि लाइसेंस रद्द करना इस बात का संकेत है कि सरकार आपके पैसे को किसी बड़े जोखिम में डूबने से बचाना चाहती है. ऐसी सख्ती से अन्य बैंक भी सतर्क रहेंगे और नियमों का पालन करेंगे, जिससे भविष्य में किसी बड़े बैंकिंग घोटाले की संभावना कम होगी.
परेशान न हों, आपका पैसा सुरक्षित है
अगर आपके खाते में बैलेंस है तो घबराएं नहीं. आरबीआई आमतौर पर ग्राहकों को अपना पैसा निकालने या दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने के लिए समय और सुविधा देता है. फिलहाल आप अपने UPI और अन्य पेमेंट माध्यमों को किसी दूसरे मुख्यधारा के बैंक से लिंक कर सकते हैं, ताकि आपको पेमेंट करने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े.
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Paytm, पेमेंट्स, बैंक, का, बैंकिंग, लाइसेंस, रद्द, इसका, आप, पर, क्या, होगा, असर, क्या, अब, पेमेंट, नहीं, कर, पाएंगे, लोग</media:keywords>
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        <title>SIP Calculator: ₹1 करोड़ का टारगेट अब दूर नहीं, 10 और 20 साल के लिए अपनाएं ये स्मार्ट प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ SIP Calculator: क्या आप भी हर महीने इनवेस्टमेंट करके मोटी रकम अपने भविष्य के लिए जोड़ना चाहते हैं? क्या आपको भी लगता है कि 1 करोड़ रुपये जोड़ना आपके लिए किसी सपने की तरह है? तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है, बस थोड़े से इनवेस्टमेंट से ही आप इस रकम को भविष्य के लिए जोड़ सकते हैं. ये बातें पढ़कर आपको थोड़ा अचंभा हो रहा होगा, लेकिन ये बिलकुल सही बात है. यहां हम आपको SIP का ऐसा गणित बताएंगे जिसे पढ़कर आपको ये सपना अपने सामने ही नजर आने लगेगा.
SIP से जमा होगी 1 करोड़ तक की रकमSIP यानी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान के बारे में तो लगभग हर कोई जानता ही है. इसके जरिए आप हर महीने के हिसाब से एक निश्चित रकम निकालते हैं जो इस इनवेस्टमेंट प्लान में जमा होती है. इस रकम पर हर महीने कुछ ब्याज दर लगती है, जिससे ये पैसा लगातार बढ़ता जाता है. कई सालों में आपके द्वारा जमा की गई रकम और ब्याज दर मिलकर आपके भविष्य के लिए जमा पूंजी बन जाती है. अगर आप भी 10 या 20 साल में 1 करोड़ रुपये तक जोड़ना चाहते हैं, तो यहां हम आपको बताते हैं इसका तरीका.
20 साल में ऐसे जोड़ें 1 करोड़ रुपयेयदि आप 20 साल में करीब 1 करोड़ रुपये तक जोड़ना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक छोटा सा गणित समझना होगा. उदाहरण के लिए मान लीजिए कि आप हर महीने 12,000 रुपये की SIP दे रहे हैं. इस पर 11 प्रतिशत का ब्याज आपको मिल रहा है. तब आप 20 साल बाद 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा जोड़ पाएंगे. आइये बताते हैं इसका गणित:
हर महीने की SIP: 12,000साल: 20 साल के लिएरिटर्न: 11%कुल इनवेस्टमेंट: 28,80,000 रुपयेभविष्य की वैल्यू: करीब 1.04 करोड़ रुपये
इसी तरह से यदि आपको 10 साल में 1 करोड़ रुपये तक जोड़ना है, तो उसके लिए आपको ऊपर बताई गई हर महीने की राशि से दोगुना राशि निकालना होगी, यानी करीब 25 से 30 हजार रुपये तक. हालांकि दोगुना SIP के लिए निकालना हर किसी के लिए आसान नहीं है. ऐसे में आप जब भी निवेश करें अपने हाल फिलहाल के खर्चों को देखते हुए ही करें. जिससे आपके किसी भी तरह की तंगहाली का सामना भी ना करना पड़े. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SIP, Calculator:, ₹1, करोड़, का, टारगेट, अब, दूर, नहीं, और, साल, के, लिए, अपनाएं, ये, स्मार्ट, प्लान</media:keywords>
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        <title>अंधेरे में डूबने की कगार पर पाकिस्तान! नहीं मिल रही गैस, सप्लाई ठप, अब खरीदना पड़ेगा मंहगा ईंधन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अंधेरे-में-डूबने-की-कगार-पर-पाकिस्तान-नहीं-मिल-रही-गैस-सप्लाई-ठप-अब-खरीदना-पड़ेगा-मंहगा-ईंधन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अंधेरे-में-डूबने-की-कगार-पर-पाकिस्तान-नहीं-मिल-रही-गैस-सप्लाई-ठप-अब-खरीदना-पड़ेगा-मंहगा-ईंधन</guid>
        <description><![CDATA[ Pakistan LNG News: ईरान और यूएस के बीच चल रहे तनाव के चलते दुनियाभर में एलपीजी संकट देखने को मिल रहा है. भारत में भी एलपीजी की किल्लत का निराकरण निकाला जा रहा है. तो वहीं पाकिस्तान भी पिछले कई दिनों से इससे जूझ रहा है. LPG और LNG की कमी का असर यहां बिजली उत्पादन और उद्योग क्षेत्र पर भी पड़ रहा है. जिसको देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने फैसला किया है कि वो अंतर्राष्ट्रीय स्पॉट मार्केट से ज्यादा दाम देकर LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) खरीदने वाला है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल पाकिस्तान की सरकारी कंपनी Pakistan LNG Ltd ने LNG की खरीद के लिए एक रेयर टेंडर जारी किया है. कंपनी ने अप्रैल के आखिरी हफ्ते से लेकर मई के बीच तक डिलीवरी के लिए तीन LNG कार्गो की मांग की है. ये जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर जारी एक दस्तावेज में दी गई है. इस जारी नोटिस के मुताबिक, सप्लायर्स को शुक्रवार तक अपने ऑफर जमा करने के लिए कहा गया है. माना जा रहा है कि गैस की बढ़ती कमी को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, ताकि समय पर आपूर्ति की जा सके.
पाकिस्तान की बिजली गुलएलएनजी की किल्लत की वजह से पाकिस्तान पिछले कई दिनों से ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. यहां पिछले कई दिनों से बिजली संकट देखा जा रहा है, जिससे वहां की आवाम परेशान हो रही है. इसी संकट और जनता की परेशानी को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ये फैसला किया है और महंगा ईंधन खरीदने की प्लानिंग कर ली है.
कतर से खरीदी थी पिछले साल LNGपाकिस्तान ने पिछले साल अपनी अधिकतर LNG कतर से खरीदी थी, उसे मार्च की शुरुआत के बाद से कोई नई शिपमेंट नहीं मिली. ये स्थिति तब बनी जब अमेरिका- इजराइल- ईरान के बीच तनाव शुरू हुआ और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया. इसी दौरान कतर को भी अपने सबसे बड़े LNG निर्यात प्लांट को बंद करना पड़ा, क्योंकि उस पर ईरान की ओर से हमला हुआ था. इसके चलते कतर को अपने ग्राहकों को गैस की सप्लाई रद्द करना पड़ी. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अंधेरे, में, डूबने, की, कगार, पर, पाकिस्तान, नहीं, मिल, रही, गैस, सप्लाई, ठप, अब, खरीदना, पड़ेगा, मंहगा, ईंधन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Rate Today: आज आपके शहर में कितना है पेट्रोल&amp;डीजल का रेट? मुंबई से बेंगलुरु तक चेक करें कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-rate-today-आज-आपके-शहर-में-कितना-है-पेट्रोल-डीजल-का-रेट-मुंबई-से-बेंगलुरु-तक-चेक-करें-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-rate-today-आज-आपके-शहर-में-कितना-है-पेट्रोल-डीजल-का-रेट-मुंबई-से-बेंगलुरु-तक-चेक-करें-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Rate Today on April 25: आज शनिवार 25 अप्रैल को भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है. वहीं, ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट्स में कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी जारी है. अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में रिटेल ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है.
रोज सुबह जारी होते रेट़्स
भारत की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs) &amp;mdash; इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) &amp;mdash; रोज सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपये की विनिमय दर में आए बदलावों के आधार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें जारी करती हैं. इन कीमतों का असर एक सब्जी बेचने वाले से लेकर ऑटो-रिक्शा चलाने वाले तक पर पड़ता है. ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना जरूरी है.&amp;nbsp;हालांकि, हाल के दिनों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.&amp;nbsp;
क्या बढ़ जाएंगी ईंधन की कीमतें?
देश के कई राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीटर की संभावित बढ़ोतरी की खबरें इन दिनों खूब वायरल हो रही हैं, जिन्हें सिरे से नकारते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने X पर एक पोस्ट में कहा, &#039;&#039;सरकार के विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.&quot;
भारत सरकार की तरफ से गुरुवार को बताया गया कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है क्योंकि वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद पिछले लगभग चार सालों से पंप की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. मंत्रालय ने कहा कि खुदरा ईंधन की दरें बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है.
आज पेट्रोल-डीजल का रेट



शहर
पेट्रोल की कीमत
डीजल की कीमत


दिल्ली
&amp;nbsp;94.77 रुपये
&amp;nbsp;87.67 रुपये


मुंबई
103.54 रुपये
90.03 रुपये


कोलकाता
105.45 रुपये
&amp;nbsp;92.02 रुपये


चेन्नई
100.80 रुपये
92.39 रुपये


बेंगलुरु
102.92 रुपये
90.99 रुपये


अमृतसर
98.29 रुपये
&amp;nbsp;88.06 रुपये


अगरतला
&amp;nbsp;97.53 रुपये
86.55 रुपये


अहमदाबाद
&amp;nbsp;94.56 रुपये
90.25 रुपये


भोपाल
106.52 रुपये
91.89 रुपये



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Rate, Today:, आज, आपके, शहर, में, कितना, है, पेट्रोल-डीजल, का, रेट, मुंबई, से, बेंगलुरु, तक, चेक, करें, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Toxic Work Culture: जहरीले वर्क कल्चर से हर साल मर रहे साढ़े 8 लाख लोग, ऑफिस बन रहे &amp;apos;किलर&amp;apos;&amp; रिपोर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/toxic-work-culture-जहरीले-वर्क-कल्चर-से-हर-साल-मर-रहे-साढ़े-8-लाख-लोग-ऑफिस-बन-रहे-किलर-रिपोर्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/toxic-work-culture-जहरीले-वर्क-कल्चर-से-हर-साल-मर-रहे-साढ़े-8-लाख-लोग-ऑफिस-बन-रहे-किलर-रिपोर्ट</guid>
        <description><![CDATA[ International Labour Organization Report: आज के समय में नौकरी करने वाले लोगों से लेकर बेरोजगार तक दोनों ही किसी न किसी वजह से परेशान है. नौकरी कर रहे लोग काम के बढ़ते तनाव से, लंबे घंटों और नौकरी की टेंशन से जूझ रहे हैं. चाहे ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, मानसिक थकान एक आम समस्या बनती जा रही है. International Labour Organization (ILO) की एक हालिया रिपोर्ट यही दिखाती है कि यही तनाव अब दुनिया भर के लाखों लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रहा है.
हर साल 8 लाख 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत&amp;nbsp;
ILO की नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल 8 लाख 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत काम से जुड़े साइकोसोशल जोखिमों की वजह से होती है. इन जोखिमों में लंबे काम के घंटे, नौकरी की अनिश्चितता और ऑफिस उत्पीड़न जैसी समस्याएं शामिल हैं. &amp;lsquo;The Psychosocial Working Environment: Global Developments and Pathways for Action&amp;rsquo; नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ये जोखिम दिल की बीमारी, मानसिक परेशानी और यहां तक कि सुसाइड तक से जुड़े हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह समस्या न सिर्फ कर्मचारियों के स्वास्थ्य बल्कि संगठनों की उत्पादकता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रही है. हर साल लगभग 45 मिलियन DALYs (विकलांगता-समायोजित जीवन साल) का नुकसान होता है और वैश्विक GDP का करीब 1.37 प्रतिशत हिस्सा इन कारणों से प्रभावित होता है.
ILO की सिफारिशें क्या है?

बेहतर नीति और नियामक ढांचा तैयार करना
कार्यस्थल पर सुरक्षित और स्वस्थ माहौल बनाना
कर्मचारियों की भागीदारी और सामूहिक संगठन को मजबूत करना
काम के बोझ, नियंत्रण और न्याय जैसे पहलुओं पर ध्यान देना

क्या है समाधान?
अगर इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि सही नीतियां बनाई और लागू की जा सकें. साथ ही कार्यस्थल पर निगरानी और नियमित मूल्यांकन बढ़ाना चाहिए, जिससे कर्मचारियों की समस्याओं को टाइम रहते समझा जा सके. सबसे जरूरी बात है कि काम करने की जगह सुरक्षित और संतुलित हो, ताकि कर्मचारियों का मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहें.
 ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 19:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Toxic, Work, Culture:, जहरीले, वर्क, कल्चर, से, हर, साल, मर, रहे, साढ़े, लाख, लोग, ऑफिस, बन, रहे, किलर-, रिपोर्ट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अनंत अंबानी ने पहनी हीरों से जड़ी ₹12 करोड़ की घड़ी, बीच में बैठे हैं भगवान शिव, बेमिसाल है लुक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अनंत-अंबानी-ने-पहनी-हीरों-से-जड़ी-12-करोड़-की-घड़ी-बीच-में-बैठे-हैं-भगवान-शिव-बेमिसाल-है-लुक</link>
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        <description><![CDATA[ Anant Ambani Luxury Watch: भारत के जाने-माने उद्योगपति परिवारों में से एक है अंबानी परिवार, जो हमेशा ही अपनी लग्ज़री लाइफस्टाइल को लेकर चर्चा में रहता है. इसी बीच अनंत अंबानी को हाल ही में Jacob &amp;amp; Co. की कस्टम Opera Godfather Baguette &amp;ldquo;Shiva&amp;rdquo; &amp;nbsp;घड़ी पहने हुए देखा गया है, जिसकी कीमत लगभग 12 करोड़ बताई जा रही है. यह घड़ी अपनी खास डिजाइन और बारीक कारीगरी की वजह से बेहद अलग मानी जा रही है. इसमें 18K रोज़ गोल्ड का केस, 300 से ज्यादा बैगेट-कट हीरे और अंदर भगवान शिव की हाथ से बनाई गई छोटी मूर्ति शामिल है, जो इसे और खास बनाती है.
यह घड़ी सिर्फ लग्ज़री आइटम नहीं बल्कि आस्था, कला और एडवांस इंजीनियरिंग का अनोखा मेल है. यह घड़ी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है और साथ ही लोगों को काफी पसंद आ रही है. बात करें अगर इस घड़ी की तो इसमें ट्रिपल-एक्सिस टूरबिलोन जैसे जटिल मैकेनिज्म के साथ 120 नोट वाला म्यूजिक बॉक्स भी है, जो The Godfather का थीम म्यूज़िक बजाता है. यही वजह है कि यह घड़ी देखने के साथ-साथ एक अनोखा अनुभव भी देती है.&amp;nbsp;

Anant Ambani wears a custom Opera Godfather Baguette &amp;ldquo;Shiva&amp;rdquo;, a true pi&amp;egrave;ce unique, brought to life in 18K rose gold and set with over 300 baguette-cut diamonds across the case alone.At its heart, a bespoke Shiva figurine rises within a flying triple-axis tourbillon, while the&amp;hellip; pic.twitter.com/8qgUnVaIDh
&amp;mdash; Jacob&amp;amp;Co (@_Jacobandco) April 21, 2026



आस्था और लग्ज़री का अनोखा मेल&amp;nbsp;
घड़ी में भगवान शिव की ध्यान मुद्रा में बनी हाथ से तराशी गई मूर्ति है और साथ ही मूर्ति के चारों ओर ऊं का निशान बना हुआ है. घड़ी में 18K रोज़ गोल्ड केस में 300 से ज्यादा बैगेट-कट हीरे जड़े हैं. इसमें आस्था और शान-शौकत का शानदार कॉम्बिनेशन है.
इसमें ट्रिपल-एक्सिस टूरबिलोन लगा है, जो सटीकता बनाए रखता है. इसे गुरुत्वाकर्षण के असर को कम करके घड़ी की सटीकता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें 658 पुर्ज़े हैं, जिनमें से हर एक उस जीवंत हलचल में योगदान देता है, जिससे भगवान शिव की मूर्ति सजीव हो उठती है
लग्ज़री कलेक्शन का हिस्सा
इस घड़ी की कीमत करीब 12 करोड़ है. अनंत अंबानी के वॉच क्लेक्शन की कुल कीमत लगभग 200 करोड़ बताई जाती है. बात करें कलेक्शन की तो इसमें Patek Philippe और Richard Mille जैसी ब्रांड्स शामिल हैं. उनकी घड़ियां अक्सर पर्सनल स्टोरी और लग्जरी का खास मेल दिखाती है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अनंत, अंबानी, ने, पहनी, हीरों, से, जड़ी, ₹12, करोड़, की, घड़ी, बीच, में, बैठे, हैं, भगवान, शिव, बेमिसाल, है, लुक</media:keywords>
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        <title>करोड़ों का रसूख, पर अपनी कोई जमीन नहीं! राघव चड्ढा ने शेयरों&amp;बॉन्ड्स में किया है इतने लाख का निवेश</title>
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        <description><![CDATA[ Raghav Chaddha BJP News: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP से इस्तीफा दे दिया है. उनका बीते कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी के साथ कलेश चल रहा था. अब उन्होंने बीजेपी का दामन थामने का ऐलान किया है. राघव अकेले ही बीजेपी में शामिल नहीं हुए बल्कि उनके साथ कई आप सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं. इसी बीच क्या आप जानते हैं कि राघव चड्ढा के नाम पर कितने शेयर्स और बॉन्ड्स हैं और उनका बैंक बैलेंस कितना है?
राघव चड्ढा के इनवेस्टमेंट
राघव चड्ढा ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से पढ़ाई की है. इसके अलावा उन्होंने इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंट्स ऑफ इंडिया से CA की पढ़ाई की है. ऐसे में उनकी निवेश संबंधी जानकारी बहुत अच्छी है. साल 2022 में उन्होंने अपने इनकमटैक्स रिटर्न्स में डिक्लेयर किया था कि उनके पास 37 लाख की चल सम्पत्ति है. जिसमें उन्होंने 30 हजार रुपये कैश और 6.35 लाख के बॉन्ड्स और शेयर्स का भी जिक्र किया था.
 स्विफ्ट डिजायर से चलते हैं राघवइसके अलावा इस टैक्स डिक्लेरेशन में राघव ने इस बात का भी खुलासा किया था कि वो एक साधारण सी कार से चलते हैं. उनके पास एक स्विफ्ट डिजायर कार है, जिसकी कीमत महज 1.32 लाख रुपये बताई गई है. इस एफिडेविट में उन्होंने अपनी अचल सम्पत्ति का कोई जिक्र नहीं किया. राघव का दिल्ली में एक घर भी है, जिसकी कीमत करीब 36 लाख रुपये बताई जा रही है. ये घर दिल्ली के न्यू राजेंद्र नजर में स्थित है, जिसका सारा इंटीरियर हैरिटेज इंस्पायर्ड है.
बता दें कि बीते दिनों राघव चड्ढा संसद में आम जनता से जुड़े कई मुद्दों को उठाने को लेकर चर्चा में थे. करीब 20 दिन पहले आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था. तभी से यह कयास लगने शुरू हो गए थे कि राघव चड्ढा कभी भी AAP को छोड़ किसी और पार्टी में जा सकते हैं. बीते कई दिनों से राघव ने चुप्पी साधे रखी थी, लेकिन अब उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उन्होंने सब साफ कर दिया है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>AI के लिए इंसानों की बलि? Meta ने 8000 लोगों को निकालने के बाद रोकीं 6000 भर्तियां, HR मेमो लीक</title>
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        <description><![CDATA[ Meta Laysoff 2026: Meta ने 23 अप्रैल को अपने लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों को निकालने की पुष्टि की है, जिससे करीब 8 हजार लोग प्रभावित होंगे. इसके साथ ही कंपनी 6 हजार से ज्यादा खाली पदों को भी खत्म करने जा रही है. पिछले कुछ हफ्तों से छंटनी की खबरें सामने आ रही थी और अब एक अंदरूनी मेमो के जरिए इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई है.&amp;nbsp;
छंटनी की वजह क्या है?
कंपनी का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अपना खर्च बढ़ाने और काम को ज्यादा कुशल बनाने के लिए यह कदम उठा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह छंटनी केवल एक बार नहीं होगी, बल्कि दो चरणों में हो सकती है. पहले मई में और दूसरा इस साल के लास्ट तक, लेकिन Meta ने प्रभावित कर्मचारियों को सेवरेंस, पैकेज, हेल्थकेयर और नई नौकरी ढूंढ़ने में मदद देने का भी भरोसा दिया है.
कर्मचारियों के लिए राहत पैकेज
कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए एक अच्छा सेवरेंस पैकेज देने की बात कही है. इसके तरह कर्मचारियों को 16 हफ्तों की बेसिक सैलरी दी जाएगी और साथ ही कंपनी में बिताए गए हर साल के लिए 2 हफ्तों की अतिरिक्त सैलरी भी मिलेगी.
अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए 18 महीनों तक COBRA के तहत हेल्थकेयर कवरेज का खर्च भी कंपनी उठाएगी. वहीं अन्य देशों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसी तरह के लाभ दिए जाएंगे, हालांकि देश के नियमों के अनुसार इनमें थोड़ा बदलाव हो सकता है.
कर्मचारियों को करियर सपोर्ट दिया जाएगा
इसके साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि प्रभावित कर्मचारियों को नई नौकरी ढूंढ़ने में मदद के लिए करियर सपोर्ट दिया जाएगा. साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें इमिग्रेशन से जुड़ी मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वह बिना किसी परेशानी के आगे के ऑप्शन तलाश सकें. इसके अलावा जिन कर्मचारियों पर इस फैसले का असर पड़ेगा, उन्हें इसकी जानकारी उनके ऑफिस और पर्सनल ईमेल के जरिए दी जाएगी.
कर्मचारियों के लिए क्या जरूरी है?

Workday पर अपना निजी ईमेल अपडेट रखें.
People Portal पर जाकर FAQs और जानकारी चेक करें.
कपंनी मई के लास्ट तक और जानकारी शेयर करेगी.

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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>देश में खाली हो रहे तेल के कुएं? उत्पादन में पिछड़ा भारत, 11वें साल दर्ज हुई गिरावट, मुश्किलें बढ़ीं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-में-खाली-हो-रहे-तेल-के-कुएं-उत्पादन-में-पिछड़ा-भारत-11वें-साल-दर्ज-हुई-गिरावट-मुश्किलें-बढ़ीं</link>
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        <description><![CDATA[ India&#039;s Crude oil Production Falls: भारत में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन में लगातार गिरावट अब बड़ी चिंता बन गई है. 2025-26 में कच्चे तेल का उत्पादन लगातार 11वें साल घटा है, जबकि गैस उत्पादन भी दूसरे साल कम हुआ. अगर इसके कारण की बात करें तो पुराने तेल क्षेत्रों का खत्म होना और नए बड़े भंडार न मिलना है. इसी कारण भारत की आयात पर निर्भरता बढ़कर कच्चे तेल में 89 प्रतिशत और गैस में 51 प्रतिशत हो गई है. इसी बीच मिडिल ईस्ट तनाव जैसी घटनाओं ने हालात और मुश्किल बना दिए है, जिससे तेल महंगा भी हुआ है और कमी भी देखने को साफ तौर पर मिल रही है.
कच्चा तेल 22 प्रतिशत तक कम हुआ
पिछले कुछ सालों में सरकार ने कई ऐसे सुधार लागू किए हैं जिनका उद्देश्य तेल की खोज (एक्सप्लोरेशन) से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जैसे डेटा रिपॉजिटरी बनाना और नियम आसान करना, लेकिन बड़ी विदेशी कंपनियां अब भी कम रुचि दिखा रही हैं. पिछले 10 सालों में उत्पादन लगातार घटा है. कच्चा तेल 22 प्रतिशत तक कम हुआ है.&amp;nbsp;
उत्पादन में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
पुराने तेल क्षेत्रों का खत्म होना
टाइम के साथ पुराने भंडार खाली होते जा रहे हैं, जिससे उत्पादन स्वाभाविक रूप से घट रहा है.
नई बड़ी खोजों का अभाव
पिछले एक दशक में कोई बड़ा तेल या गैस भंडार नहीं मिला है, जिससे उत्पादन बढ़ नहीं पाया.
कमर्शियलाइजेशन में देरी
जिन संसाधनों की पहचान हो चुकी है, उनका तेजी से विकास नहीं हो पाया है.
उत्पादन से जुड़े आंकड़े
कच्चा तेल2025&amp;ndash;26 में उत्पादन 2.5 प्रतिशत गिरकर 28 मिलियन मीट्रिक टन पुहंचा और वहीं 2014&amp;ndash;15 से अब तक कुल 22 प्रतिशत गिरावट देखी गई.
प्राकृतिक गैस2025&amp;ndash;26 में 3.7 प्रतिशत गिरकर 34,776 mmscm2011&amp;ndash;12 से 2020&amp;ndash;21 तक लगभग 40 प्रतिशत गिरावट2021&amp;ndash;22 में कुछ सुधार, लेकिन अब उत्पादन स्थिर
ऊर्जा क्षेत्र में भारत को बनना चाहिए आत्मनिर्भर
इन सबसे यह समझ आता है कि अब भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से खोज, विकास और इन्वेस्टमेंट बढ़ाने की बेहज जरूरत है, क्योंकि आयात पर बढ़ती निर्भरता फ्यूचर में और बड़ी चुनौती बन सकती है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 07:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>क्या आपका बैंक सुरक्षित है? सरकारी बैंकों के मुकाबले प्राइवेट पर ज्यादा &amp;apos;बैड लोन&amp;apos;, टेंशन बढ़ा देगी ये रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Bank NPA Rise: बैंक में खाता होना आजकल आम बात है, बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर किसी का एक ना एक खाता बैंक में होता ही है. अब ये सरकारी बैंक होगा या प्राइवेट बैंक ये पूरी तरह से उपभोक्ता और उसकी जरूरत पर निर्भर करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका बैंक सुरक्षित है या नहीं? अगर नहीं जानते हैं तो ये रिपोर्ट पढ़ने के बाद आपको होश उड़ने वाले हैं.
प्राइवेट बैंकों पर &#039;बैड लोन&#039; की माररेटिंग एजेंसी ICRA (Investment Information and Credit Rating Agency of India Limited) की रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट बैंकों में &#039;बैड लोन&#039; (NPA) बढ़ने की रफ्तार सरकारी बैंकों से कहीं ज्यादा है. FY27 (वित्त वर्ष 2027) में प्राइवेट बैंकों के नए बैड लोन लगभग 2.0% तक पहुंच सकते हैं, जो वित्त वर्ष 2026 में 1.8% था. तो वहीं सरकारी बैंकों में ये करीब 1.2% रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में 0.9% था. यानी सरकारी बैंक से प्राइवेट बैंकों से ज्यादा सुरक्षित हैं.
क्या है &#039;बैड लोन&#039;जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि &#039;बैड लोन&#039; को NPA (Non Performing Assset) भी कहते हैं. ये वो लोन है जिसमें बैंक उपभोक्ता को लोन तो देता है, लेकिन उसे वसूल नहीं पाता है. लोन देने के बाद बैंक एक निश्चित किश्त बांध देता है, जो हर महीने में उपभोक्ता को अदा करना होती है. लेकिन जब ये किश्त चुकाने में उपभोक्ता समर्थ नहीं होता तब ये लोन &#039;बैड लोन&#039; की श्रेणी में आ जाता है. हालांकि इसके लिए ग्राहक को 90 दिन (तीन महीने) का समय मिलता है.
प्राइवेट बैंक देते हैं बिना गारंटी वाले लोनआपको बता दें कि प्राइवेट बैंक बिना गारंटी वाला और MSME लोन देते हैं. इस वजह से उनके &#039;बैड लोन&#039; में तब्दील होने का खतरा बढ़ जाता है. खासतौर से जब ये लोन छोटे व्यापारियों और पर्सनल लोन के तौर पर दिया जाता है तब इसके डूबने का खतरा ज्यादा बना रहता है. कोई व्यवसाय डूब गया या कारोबार पर कोई भी छोटी सी भी आंच आई तो व्यापारी इसे चुका नहीं पाते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 07:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8th Pay Commission: कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग को सौंपा नया मांग पत्र, न्यूनतम बेसिक सैलरी पर की ये मांग</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission News: बीते दिन ही वित्त मंत्रालय ने ज्ञापन जारी कर केंद्रीय कर्मचारियों के 8वें वेतनमान को लागू किया है. जिसके बाद अब कई कर्माचारी यूनियन एक्टिव हो गए हैं. सरकार के इस फैसले से नाखुश कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष अपना नया मांग पत्र सौंप दिया है, जिसमें न्यूनतम बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी की मांग की है. यूनियनों का कहना है कि मौजूदा सैलरी बढ़ती महंगाई के हिसाब से ठीक नहीं है, ऐसे में इसमें संशोधन किया जाना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?दरअसल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के गठन की प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार ने सुझाव और राय लेने के लिए एक अवसर खोला है. जिसमें भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने अपना मांग पत्र जमा किया है. इस मांग पत्र में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग की गई है. संघ का कहना है कि बेसिक पे को बढ़ाकर 72,000 रुपये हर महीने के हिसाब से किया जाना चाहिए. जो कि 7वें CPC के तहत निर्धारित मौजूदा 18,000 रुपये वेतन का चार गुना है.
लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव के जरिए ऐसी रकम तय की जा रही है, जो मौजूदा आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की जरूरतों का ख्याल रखेगी. BPMS का कहना है कि अगर इन बदलावों को मान लिया जाता है, तो शुरुआती स्तर के कर्मचारियों को एक स्थिर और बेहतर जीवन स्तर मिल सकेगा.&amp;nbsp;
और क्या हैं यूनियन की मांगे?एक अन्य मांग में यूनियन ने कहा है कि फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 4.0 किया जाना चाहिए. क्योंकि ये तय करता है कि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी कितनी बढ़ेगी. अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 4.0 कर दिया जाता है, तो कर्मचारियों की सैलरी काफी अच्छी- खासी बढ़ेगी. इसके अलावा, यूनियन ने महंगाई भत्ता (DA) को भी सही तरीके से तय करने की मांग की है, जिससे बढ़ती महंगाई के असर से कर्मचारियों की आय सुरक्षित रहे. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Rate: महंगा होगा पेट्रोल&amp;डीजल? सरकार ने सोशल मीडिया पर खुद बता दिया, जानें क्या कहा है</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-rate-महंगा-होगा-पेट्रोल-डीजल-सरकार-ने-सोशल-मीडिया-पर-खुद-बता-दिया-जानें-क्या-कहा-है</link>
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        <description><![CDATA[ Petrol- Diesel Hike News: ईरान- यूएस युद्ध के बीच लगातार पेट्रोल डीजल की कीमतों में इजाफा हो &amp;nbsp;रहा है. ऐसे में कोई सीधे ये अनुमान लगा ले कि आने वाले समय में 25-30 रुपये की बढ़ोतरी और होने वाली है. ऐसी खबरों से किसी का भी बी.पी हाई हो सकता है. सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही खबर फैल रही है, जिसको लेकर अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी अपना रिएक्शन दिया है. उन्होंने बताया कि है कि क्या ऐसा वाकई में होने वाला है?
क्या है पूरा मामला?दरअसल एक मीडिया हाउस ने अपने प्लेटफॉर्म पर 22 अप्रैल को खबर लगाई थी कि, &#039;पेट्रोल- डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीडर के हिसाब से इजाफा होने वाला है&#039;. खबर की ये हैडलाइन थी और अंदर इसमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के हालातों का हवाला देते हुए बताया है कि इसी की वजह से इन कीमतों में वृद्धि होने वाली है. इस खबर से यूजर्स के बीच डर की स्थिति बन गई थी. जिसके बाद खुद पेट्रोलियम मंत्रालय ने सामने आकर इस बात की सच्चाई से पर्दा उठाया है.
क्या है सच्चाई?पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) हैंडल के जरिए इस खबर की सच्चाई लोगों के सामने लाई है. उन्होंने इसका स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इस पर &#039;फेक न्यूज अलर्ट&#039; लिखा. साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा, &#039;कुछ न्यूज रिपोर्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है. आपको ये स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. ऐसी खबरें लोगों में भय और दहशत फैलाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं और ये पूरी तरह से मिसलीडिंग खबर है&#039;.

FAKE NEWSThere are some news reports suggesting a price hike of petrol and diesel. It is hereby clarified that there is no such proposal under consideration by the Government. Such news items are designed to create fear and panic amongst the citizens and are mischievous and&amp;hellip; pic.twitter.com/yTAfJdah2o
&amp;mdash; Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) April 23, 2026



उन्होंने आगे लिखा, &#039;वास्तव में, भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार सालों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है. भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए निरंतर कदम उठाए हैं&#039;. ऐसे में मंत्रालय ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है. यदि आप भी ऐसी किसी खबर को पढ़कर परेशान हो रहे हैं तो पहले आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें. उसके बाद ही कोई कदम उठाएं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली के इस बाजार में मिलते हैं सबसे सस्ते बर्तन, किलो के भाव खरीद लो, 2 रुपए से शुरू होती है कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi Utensil Market: ईरान- यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से जहां एक तरफ कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं, तो वहीं कई ऐसी चीजें हैं जिनकी डिमांड बढ़ भी गई है. जैसे इंडक्शन, इसके साथ ही इंडक्शन के बर्तन भी. इंडक्शन के साथ ही इसके बर्तनों की डिमांड भी अब इतनी ज्यादा बढ़ गई है जिसकी वजह से लोग सस्ते और अपने बजट में आने वाले बाजारों को खोज रहे हैं. तो अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है. हम आपको बताते हैं कि यहां पर आप सस्ते और अच्छे बर्थन कहां से खरीद सकते हैं.
दिल्ली का सबसे सस्ता बर्तन बाजारएशिया का सबसे बड़ा बर्तनों का बाजार दिल्ली में है. यदि आप भी इस बाजर के बारे में नहीं जानते हैं, तो इस खबर को ध्यान से पढ़ें. दिल्ली के सदर बाजार स्थित &#039;डिप्टी गंज मार्केट&#039; में बर्तनों का भंडार आपको मिल जाएगा. इस बाजार में आपको हर तरह के बर्तन मिलेंगे, चाहे वो इंडक्शन के हों, गैस पर खाना बनाने वाले हों, चूल्हे के लिए हो. इसी के साथ तांबा, पीतल, एल्युमीनियम जैसी धातु के भी सारे बर्तन आपको यहां मिल जाएंगे वो भी बजट में.
रस्ते माल सस्ते मेंइस बाजार में 2 रुपये से बर्तनों की कीमत शुरू होती है. ऐसे में आप समझ ही सकते हैं कि आप थोक के भाव में बर्तन ले जा सकते हैं. यहां पर 2 रुपये के गिलास, कटोरी, चम्मच मिल जाते हैं. तो वहीं 5 रुपये, 10 रुपये, 15 रुपये में थाली, भगोनी, लोटा, पतीला आदि को खरीद सकते हैं. &amp;nbsp;इतना ही नहीं इस बाजार में आपको इडली का सांचा, बाटी का ओवन, बर्तनों का स्टैंड सबकुछ किफायती दामों में मिल सकता है.
किलो के भाव में भी खरीद सकते हैंइस बाजार में आने के बाद आपको ये बर्तनों की जन्नत की तरह से महसूस होगा. अगर आप कोई बिजनेस चलाते हैं तो आप इस मार्केट से किलो के भाव में बर्तन खरीद सकते हैं. यहां तक कि आपको कुछ स्पेशल तरह के एस्थैटिक बर्तन खरीदना हैं तो वो भी आप इस बाजार से खरीद सकते हैं. इसके अलावा आप यहां से शादी- ब्याह के बर्तन ले सकते हैं और महज 10 रुपये में उन पर नाम भी लिखवा सकते हैं. अगर आपने अब तक ये डिप्टी गंज मार्केट एक्सप्लोर नहीं किया है, तो आप यहां जल्दी जाएं और ढेर सारे बर्तन ले आएं. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली में दोपहर 12 से 3 बजे तक बंद होगी डिलीवरी? भीषण गर्मी के बीच गिग वर्कर्स ने कर दी ये बड़ी मांग</title>
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        <description><![CDATA[ Gig Workers Delivery News: दिल्ली NCR में अप्रैल की शुरुआत में ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं खास तौर पर दोपहर के वक्त तो हालात बेहद मुश्किल भरे होते जा रहे हैं. दिल्ली में अप्रैल के महीने में ही पड़ रही भीष्ण गर्मी ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि कुछ मिनट खड़े रहना भी बेहद मुश्किल पड़ रहा है. लेकिन जरा सोचिए उन लाखों जिंग वर्कर के बारे में जो इस तपती झुलसा देने वाली भीषण कर्मी में अपना घर चलाने के दिल्ली की सड़कों पर अपनी जान की परवाह किए बैगर तोड़ते रहते हैं.
लेकिन जिस तरह से गर्मी अपना तेवर दिखा रही है और मौसम विभाग ने जो पूर्वानुमान जताया उसके हिसाब से आने वाले दिन और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाले है क्यों कि आने वाले दिनों में दिल्ली NCR का तापमान 44 डिग्री को पर कर जाएगा. इसलिए ये कहा जा सकता है कि यही तेज धूप गिग वर्कर्स के लिए बड़ा खतरा बन कर उत्पन हो रही है. इसलिए इस झुलसा देने वाली गर्मी के इसी बीच गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने सरकार से राहत देने की मांग उठाई है.
तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंचने का खतरा&amp;nbsp;
दरहसल गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि राजधानी में तापमान लगातार 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऊपर से उमस के कारण &amp;ldquo;फील्स लाइक&amp;rdquo; तापमान और ज्यादा महसूस हो रहा है, जिससे मैदान में काम कर रहे वर्कर्स की स्थिति और जायदा खराब हो रही है.
यूनियन के मुताबिक, डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर और अन्य ऐप-बेस्ड वर्कर्स को लंबे समय तक सड़कों पर बिना पर्याप्त आराम और सुरक्षा के काम करना पड़ रहा है. ऐसे में हीट एक्सॉशन, डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जो कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है.
दोपहर 12 से 3 बजे तक काम रोकने की मांग&amp;nbsp;
इन सब जोखिम को देखते हुए गिग वर्कर्स ने सरकार से अब सबसे अहम मांग रखी है कि इस भीषण गर्मी के दौरान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक उनका काम अस्थायी रूप से रोका जाए, ताकि पीक हीट के समय उन्हें राहत मिल सके. यूनियन का कहना है कि इस दौरान काम जारी रखना वर्कर्स की सेहत के साथ बड़ा खतरा है.
इसके अलावा यूनियन के द्वारा सरकार को लिखे गए पत्र में यह भी मांग की गई है कि शहर में अलग-अलग जगहों पर छायादार रेस्ट एरिया, पीने के पानी और इमरजेंसी मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए. साथ ही दिल्ली बजट में घोषित रेस्ट फैसिलिटी और अटल कैंटीन जैसी योजनाओं को जल्द से जल्द लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि लाखों गीग वर्कर्स को ग्राउंड पर राहत मिल सके.
वर्कर्स की सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर&amp;nbsp;
इस पत्र में यूनियन ने सरकार से कहा है कि कंपनियों की जिम्मेदारी तय की जाए और इसके साथ ही ऐप-बेस्ड प्लेटफॉर्म अपने वर्कर्स को मुफ्त में कॉटन जैकेट या गर्मी से बचाव के लिए जरूरी कपड़े उपलब्ध कराएं. वहीं महिला वर्कर्स के लिए सुरक्षित और साफ-सुथरी सुविधाएं, पीने का पानी, सैनिटेशन और इमरजेंसी हेल्प सपोर्ट की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई है.
कुल मिला के यूनियन का साफ कहना है कि शहर की सर्विस इकॉनमी लाखों गिग वर्कर्स पर टिकी हुई है, और वो ही सबसे ज्यादा जोखिम भी वही उठा रहे हैं. ऐसे में समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि लाखों वर्कर्स को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Stock Market 23 April: शेयर बाजार लहूलुहान, सेंसेक्स 640 अंक टूटा;  निफ्टी भी टमाटर की तरह लाल</title>
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        <description><![CDATA[ Stock Market Today: भारतीय शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार, 23 अप्रैल की शुरुआत जोरदार गिरावट के साथ हुई. प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 लाल निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए.
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स 532.83 अंक या 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ ओपन हुआ था. दिन की शुरुआत सेंसेक्स ने 77,983.66 के लेवल पर की है. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने भी दिन की शुरुआत नकारात्मक की थी. निफ्टी 50 &amp;nbsp;175.75 अंक या 0.72 फीसदी फिसलकर 24,202.5 के लेवल पर ओपन हुआ था.
सुबह करीब 9:20 बजे तक, सेंसेक्स 630 अंक की गिरावट के साथ 77,886 अंक पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 50 172 अंक फिसल गई थी और 24,205 के लेवल पर ट्रेड कर रही थी.
बीएसई के टॉप गेनर और लूजर
बीएसई बास्केट से पावरग्रिड, टीसीएस और एचसीएल टेक टॉप गेनर थे. वहीं टॉप लूजर की बात करें तो इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट रहे थे.
बुधवार को कैसा रहा था मार्केट?
भारतीय शेयर मार्केट में बुधवार, 22 अप्रैल के कारोबारी दिन जोरदार गिरावट देखने को मिली थी. प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 लाल निशान पर ट्रेड करते हुए दिन की समाप्ति की थी. सेंसेक्स 756.84 अंक या 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,516.49 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 198.50 अंक या 0.81 प्रतिशत फिसलकर 24,378.10 के लेवल पर बंद हुए थे.
कौन थे टॉप गेनर-लूजर?
बीएसई बास्केट से एनटीपीसी, एटरनल, ट्रेंट, एशियन पेंट और रिलायंस टॉप गेनर थे. टॉप लूजर की बात करें तो एचसीएल टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, टेक महिंद्रा और आईसीआईसीआई बैंक रहे थे.
निफ्टी 100, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी और निफ्टी बैंक के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी. वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी एफएमसीजी के शेयरों में तेजी थी. बुधवार के कारोबारी दिन बीएसई बास्केट से 11 शेयर हरे निशान पर बंद हुए थे और 19 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Silver Price: शादी सीजन से पहले निवेशकों को मिल गया मौका, सोने&amp;चांदी के दाम गिरे; जानिए आज का ताजा रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-शादी-सीजन-से-पहले-निवेशकों-को-मिल-गया-मौका-सोने-चांदी-के-दाम-गिरे-जानिए-आज-का-ताजा-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-शादी-सीजन-से-पहले-निवेशकों-को-मिल-गया-मौका-सोने-चांदी-के-दाम-गिरे-जानिए-आज-का-ताजा-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: घरेलू फ्यूचर मार्केट में गुरुवार, 23 अप्रैल को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 540 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था.
एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,52,051 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,52,657 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.
सुबह करीब 9:50 बजे, गोल्ड वायदा 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,52,115 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,53,200 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपके शहर में इन बहुमूल्य धातुओं को कीमत क्या चल रही हैं?&amp;nbsp;
चांदी की कीमत
एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 1.55 प्रतिशत या 3,850 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,42,501 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,44,730 रुपये था.
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,600 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 26,000 रुपये देने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,700 रुपये चल रही है.&amp;nbsp;
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,700 रुपए22 कैरेट - 1,40,900 रुपए18 कैरेट - 1,15,310 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,550 रुपए22 कैरेट - 1,40,750 रुपए18 कैरेट - 1,15,160 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,450 रुपए22 कैरेट - 1,42,490 रुपए18 कैरेट - 1,18,810 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,550 रुपए22 कैरेट - 1,40,750 रुपए18 कैरेट - 1,15,160 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,600 रुपए22 कैरेट - 1,40,800 रुपए18 कैरेट - 1,15,210 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,700 रुपए22 कैरेट - 1,40,900 रुपए18 कैरेट - 1,15,310 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,600 रुपए22 कैरेट - 1,40,800 रुपए18 कैरेट - 1,15,210 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,550 रुपए22 कैरेट - 1,40,750 रुपए18 कैरेट - 1,15,160 रुपए

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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price:, शादी, सीजन, से, पहले, निवेशकों, को, मिल, गया, मौका, सोने-चांदी, के, दाम, गिरे, जानिए, आज, का, ताजा, रेट</media:keywords>
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        <title>होर्मुज संकट से भारत को मिला सबक, अनिल अग्रवाल बोले&amp; &amp;apos;अब ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने का है सही वक्त&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/होर्मुज-संकट-से-भारत-को-मिला-सबक-अनिल-अग्रवाल-बोले-अब-ऊर्जा-में-आत्मनिर्भर-बनने-का-है-सही-वक्त</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/होर्मुज-संकट-से-भारत-को-मिला-सबक-अनिल-अग्रवाल-बोले-अब-ऊर्जा-में-आत्मनिर्भर-बनने-का-है-सही-वक्त</guid>
        <description><![CDATA[ US Iran War: हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर भारत की एक बड़ी कमजोरी को उजागर कर दिया है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और आधे से ज्यादा गैस बाहर से मंगवाता है. ऐसे में जब भी दुनिया के किसी हिस्से में संघर्ष या तनाव होता है तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का मानना है कि यह स्थिति हमें एक बड़ा सबक देती है. भारत को अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम करना होगा.
संसाधनों की कमी नहीं, खोज की जरूरत
अनिल अग्रवाल के मुताबिक, भारत तेल और गैस के मामले में गरीब नहीं है. उनका कहना है कि देश में करीब 300 अरब बैरल तेल के बराबर संसाधन हो सकते हैं. समस्या यह नहीं है कि हमारे पास संसाधन नहीं है, बल्कि यह है कि हमने अभी तक उन्हें पूरी तरह खोजा और इस्तेमाल नहीं किया है. इन्वेस्टमेंट और आधुनित तकनीक की कमी इस क्षेत्र में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है. भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता केवल एक सामान्य समस्या नहीं है, बल्कि यह एक स्ट्रक्चरल रिस्क है. इसका साफ मतलब यही है कि यह खतरा हमेशा बना रहेगा.
&amp;nbsp;वेदांता ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया
आज के टाइम में आधुनिक तकनीक जैसे AI, डिजिटल ऑयलफील्ड सिस्टम और एडवांस्ट सीस्मिक इमेजिंग के जरिए तेल की खोज और उत्पादन को तेज किया जा सकता है. अब वेदांता ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जिसमें 5 अरब डॉलर इन्वेस्ट करने की योजना बनाई गई है और साथ ही आने वाले टाइम में उत्पादन को 10 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. अनिल अग्रवाल का मानना है कि भारत में कई बार काम की गति सरकारी प्रक्रियाओं के कारण धीमी हो जाती है. उनका सुझाव है कि ज्यादा कागजी कार्रवाई में उलझने के बजाय काम को जल्दी शुरू करना चाहिए. इससे परियोजनाओं में तेजी आएगी और परिणाम जल्दी मिलेंगे.
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बहुत जरूरी- अनिल अग्रवाल
अनिल अग्रवाल का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बहुत जरूरी है, खासकर अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के साथ जो गहरे समुद्र में तेल निकालने की आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता रखती हैं. ये कंपनियां सिर्फ पैसा नहीं लातीं, बल्कि Gulf of Mexico और North Sea जैसे मुश्किल इलाकों में बड़े पैमाने पर काम करने का असली तजुर्बा भी साथ लाती हैं. यह साझेदारी भारत की सीखने की रफ्तार को तेज कर सकती है और देश के भीतर मौजूद तेल भंडार को जल्दी खोलने में मदद कर सकती है.
नीति सही है, अमल में कमी है&amp;nbsp;
भारत ने अपने तेल-गैस क्षेत्र में कई सुधार किए हैं. लाइसेंसिंग के नियम बेहतर हुए हैं और नियामक रवैया भी पहले से ज्यादा सहूलियत देने वाला हुआ है. लेकिन अनिल अग्रवाल कहते हैं कि नीति और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा फासला अभी भी बना हुआ है. मंजूरियों में देरी और काम-काज में अड़चनें अब भी खोज के नतीजों को धीमा कर रही हैं.
बदलती सोच: खनन अब बाधा नहीं, बदलाव का रास्ता है&amp;nbsp;
अनिल अग्रवाल एक बड़े बदलाव की तरफ भी ध्यान दिलाते हैं. पहले खनन और तेल-गैस उत्पादन को पर्यावरण के लिए खतरा माना जाता था. लेकिन अब दुनिया की सोच बदल रही है. विकासशील देशों के लिए खनन और हाइड्रोकार्बन उत्पादन को ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) का एक जरूरी हिस्सा माना जाने लगा है. होर्मुज संकट ने यह साफ कर दिया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सिर्फ बाहरी सप्लाई चेन पर नहीं टिक सकती. होर्मुज संकट से हमें यह सबक मिलता है कि भारत को ऊर्जा के लिए दूसरों पर निर्भर रहना बंद करना होगा और अपने देश के भीतर ही तेल और गैस निकालने के काम में तेजी लानी होगी. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>होर्मुज, संकट, से, भारत, को, मिला, सबक, अनिल, अग्रवाल, बोले-, अब, ऊर्जा, में, आत्मनिर्भर, बनने, का, है, सही, वक्त</media:keywords>
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        <title>इस देश में 2008 के बाद जन्मे लोगों के लिए धूम्रपान पर बैन, घटेगा टैक्स रेवेन्यू, होगा अरबों का नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ UK Smoking and Tobacco Ban: ब्रिटेन में आने वाले टाइम में एक बड़ा बदलाव होने वाला है, यहां एक पूरी पीढ़ी को सिगरेट और तंबाकू खरीदने की परमिशन नहीं मिलेगी, क्योंकि तंबाकू और वेप्स बिल संसद से पास हो चुका है और शाही मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा. मतलब साफ है कि इसके तहत 1 जनवरी 2009 या उसके बाद पैदा हुए लोग जीवनभर सिगरेट या तंबाकू नहीं खरीद पाएंगे.
क्या है सरकार का प्लान?

अभी सिगरेट खरीदने की उम्र 18 साल है.
लेकिन 2027 से हर साल यह उम्र सीमा 1 साल बढ़ती चली जाएगी.
मतलब साफ है कि नई पीढ़ी के लिए तंबाकू पूरी तरह बंद हो जाएगा.
ये नियम पूरे UK ( इंग्लैंड, स्कॉटलैंड,वेल्स,उत्तरी आयरलैंड) में लागू होंगे.

निवेशकों के लिए क्यों है चिंता?

इस मामले में देखा जाए तो सबसे बड़ी बात यह है कि यह कानून सिर्फ एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे पूरे तंबाकू बाजार को खत्म करने की दिशा में कदम है.
इसके बाद अब तंबाकू कंपनियों को अपना बिजनेस मॉडल बदलना पड़ेगा.
साथ ही नए बाजार तलाशने की जरूरत पड़ेगी.
इन्वेस्टर्स का भरोसा कमजोर हो सकता है.

सरकार की कमाई पर होगा असर
क्योंकि ब्रिटेन सरकार तंबाकू से काफी बड़ी कमाई करती है. अगर बात करें...

2024-25 में लगभग &amp;nbsp;&amp;pound;8.8 बिलियन (लगभग ₹95,000 करोड़) की कमाई की.
2025-26 में यह घटकर &amp;pound;8 बिलियन (लगभग ₹80,000&amp;ndash;85,000) करोड़ रहने का अनुमान है.

अगर वहीं नई पीढ़ी पर बैन लागू होता है तो यह कमाई धीरे-धीरे करके खत्म हो जाएगी.
नुकसान होगा या फायदा?

बात करें नुकसान की तो टैक्स रेवेन्यू में गिरावट आएगी.
वहीं फायदे के बारे में देखें तो हेल्थ सिस्टम (NHS) पर खर्च कम होगा.
लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी.
साथ ही वर्कफोर्स ज्यादा प्रोडक्टिव होगी.

बिजनेस और मार्केट पर होगा असर

छोटे दुकानदारों की बिक्री पर गहरा असर पड़ेगा.
साथ ही अवैध तस्करी यानी ब्लैक मार्केट बढ़ने का खतरा है.
अभी की &amp;pound;2.8 बिलियन (लगभग ₹28,000&amp;ndash;30,000 करोड़) का नुकसान अवैध कारोबार से हो रहा है.

शेयर बाजार पर असर

बड़ी कंपनियां जैसे British American Tobacco (BAT) और Imperial Brands प्रभावित होंगी.
इन्वेस्टर्स को अब यह डर है कि कहीं दूसरे देश भी ऐसे नियम न लागू कर दें.

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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इस, देश, में, 2008, के, बाद, जन्मे, लोगों, के, लिए, धूम्रपान, पर, बैन, घटेगा, टैक्स, रेवेन्यू, होगा, अरबों, का, नुकसान</media:keywords>
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        <title>बड़ी खबर: इथेनॉल पर सरकार ने बदला नियम, ATF में ब्लेंडिंग का रास्ता साफ, महंगा हवाई सफर होगा सस्ता!</title>
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        <description><![CDATA[ Ethanol Blending in ATF News: देश में हवाई सफर को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारत सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ में इथेनॉल को मिलाने की अनुमति दे दी है. इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. अब एटीएफ में इथेनॉल के अलावा अन्य सिंथेटिक या मानव-निर्मित हाइड्रोकार्बन को भी मिलाया जा सकेगा.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना के जरिए एटीफ की मार्केटिंग से जुड़े नियमों को भी अपडेट किया है और इसके प्रवर्तन प्रावधानों को संशोधित आपराधिक प्रक्रियाओं के अनुरूप बनाया है. यह फैसला आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी &#039;एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग का विनियमन) आदेश 2001&#039; में किए गए संशोधनों के बाद लिया गया है.
हालांकि सरकार ने अभी इस नियम के लिए कोई तत्काल अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है. साथ ही इस अधिसूचना में कोई समय-सीमा भी तय नहीं की गई है.
इथेनॉल ब्लेंडिंग क्यों जरूरी है?
दरअसल अब तक विमान सिर्फ पारंपरिक तेल पर चलते थे, लेकिन अब इसमें सिंथेटिक ईंधन मिलाने से खर्च कम होगा. क्योंकि सरकार का टारगेट विदेशों से आने वाले महंगे कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को घटाना है. जब कच्चा तेल कम इस्तेमाल होगा तो विमानन कंपनियों का खर्च कम होगा और हवाई किराया सस्ता होगा.
सरकार का टारगेट प्रदूषण को कम करना भी है. यह कदम भारत को &#039;नेट ज़ीरो&#039; उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर ले जाएगा. जब विमानों में प्रदूषण कम करने वाला ईंधन डलेगा तो आसमान भी साफ रहेगा.
अब ईंधन को IS 17081 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ मिलाया जा सकेगा. अभी सरकार ने कोई अनिवार्य लक्ष्य तो तय नहीं किया है कि कितना मिश्रण जरूरी है, लेकिन नियमों में बदलाव करके यह साफ कर दिया है कि भविष्य &#039;क्लीन एनर्जी&#039; का ही है.
भारत ने ₹1.63 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई
इतना ही नहीं भारत ने 2014 से अब तक इथनॉल ब्लेंडिंग के जरिए ₹1.63 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है. इथनॉल मुख्य रूप से गन्ने के शीरे, मक्का और खराब अनाज से बनाया जाता है. इससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलता है और अब तक उन्हें लगभग ₹1.43 लाख करोड़ का भुगतान किया जा चुका है.
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इस देश में 2008 के बाद जन्मे लोगों के लिए धूम्रपान पर बैन, घटेगा टैक्स रेवेन्यू, होगा अरबों का नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Online Games Rules: पैसे वाले गेम्स पर सख्ती! रियल मनी और ई&amp;स्पोर्ट्स होंगे अलग, सट्टेबाजी पर लगेगी लगाम</title>
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        <description><![CDATA[ Online Mobile Games In India News: ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए सरकार के नए नियम अब लागू होने जा रहे हैं. &#039;प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026&#039; 1 मई 2026 से प्रभावी होंगे, जिससे देश में ऑनलाइन गेमिंग के पूरे ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
&amp;nbsp;ये नियम 2025 में बने कानून के तहत तैयार किए गए हैं और इनका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन पैसे वाले गेम्स से होने वाले आर्थिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान को रोकना है साथ ही सुरक्षित और वैध गेमिंग प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देना है.
रियल मनी और ई-स्पोर्ट्स होंगे अलग
नए नियम लागू होने के बाद अब हर ऑनलाइन गेम की प्रकृति को लेकर स्पष्टता लाई जाएगी. एक तय प्रक्रिया के तहत यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन सा गेम &#039;पैसे वाला गेम&#039; है और कौन सा सामान्य सोशल गेम या ई-स्पोर्ट्स के दायरे में आता है.
इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि गेम में पैसे लगते हैं या नहीं, जीतने पर आर्थिक लाभ मिलता है या नहीं, कंपनी का रेवेन्यू मॉडल क्या है और रिवॉर्ड किस तरीके से दिए जाते हैं. नियमों के अनुसार इस पूरी जांच प्रक्रिया को यथासंभव 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा और इसका परिणाम एक आधिकारिक आदेश के रूप में दर्ज होगा.
Online Gaming Authority of India करेगा निगरानी
इन नियमों के तहत एक नई नियामक संस्था &#039;Online Gaming Authority of India&#039; बनाई जा रही है जो पूरे ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर की निगरानी करेगी. यह संस्था MeitY के अधीन काम करेगी और इसका मुख्यालय दिल्ली में होगा.&amp;nbsp;
इसे एक डिजिटल कार्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा जो गेम्स की सूची जारी करने शिकायतों की जांच करने, दिशा-निर्देश जारी करने और विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर नियमों को लागू कराने का काम करेगी. &amp;nbsp;
रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू लेकिन हर गेम के लिए अनिवार्य नहीं
नए नियमों के तहत ऑनलाइन गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी लागू की जा रही है, हालांकि यह हर गेम के लिए अनिवार्य नहीं होगी.&amp;nbsp; सरकार केवल उन गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी करेगी, जिनमें यूजर्स के लिए जोखिम अधिक है जहां बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन होता है या जिन्हें ई-स्पोर्ट्स के रूप में पेश किया जाता है.
रजिस्ट्रेशन मिलने पर संबंधित गेम या प्लेटफॉर्म को एक डिजिटल सर्टिफिकेट और यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा जो अधिकतम 10 सालों तक मान्य रहेगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी पैसे वाला गेम ई-स्पोर्ट्स के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं कर सकेगा.
कंपनियों को लागू करने होंगे जरूरी फीचर्स
इन नियमों में यूजर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. इसके तहत गेमिंग कंपनियों को कई अनिवार्य सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे, जिनमें उम्र की पुष्टि, समय सीमा तय करना, पैरेंटल कंट्रोल, शिकायत दर्ज करने की सुविधा, काउंसलिंग सपोर्ट और फेयर प्ले की निगरानी शामिल हैं.&amp;nbsp;
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ये सभी फीचर्स पारदर्शी तरीके से यूजर्स के सामने उपलब्ध हों और उन्हें पहले से इसकी जानकारी दी जाए. इसका उद्देश्य खासकर बच्चों और कमजोर वर्ग के यूजर्स को ऑनलाइन गेमिंग के नकारात्मक प्रभाव से बचाना है.
30 दिन में अपील का अधिकार
यूजर्स की शिकायतों के समाधान के लिए नए नियमों में दो-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है. पहले स्तर पर संबंधित गेमिंग कंपनी को ही शिकायत का समाधान करना होगा. अगर यूजर कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है या समय पर समाधान नहीं मिलता है तो वह 30 दिनों के भीतर नियामक अथॉरिटी के पास अपील कर सकता है. इसके बाद भी यदि मामला सुलझता नहीं है तो अंतिम अपील MeitY के सचिव के पास की जा सकती है जहां 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा.&amp;nbsp;
नियम तोड़ने पर 90 दिन में कार्रवाई और पेनल्टी तय
नए नियमों के तहत उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है. जांच की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से पूरा किया जाएगा और इसे 90 दिनों के भीतर समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है.
&amp;nbsp;पेनल्टी तय करते समय यह देखा जाएगा कि कंपनी ने नियमों के उल्लंघन से कितना लाभ कमाया, यूजर्स को कितना नुकसान हुआ, गलती की गंभीरता क्या थी और क्या यह गलती बार-बार की गई है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;नजर आता है कि सरकार का मन ऑनलाइन गेमिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं बल्कि उसे नियमों के दायरे में लाकर सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है ताकि यूजर्स का भरोसा बना रहे और इंडस्ट्री भी व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सके.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>बीयर पीने वाले सावधान! अब इसकी भी होने वाली है कमी, एक तो गर्मी ऊपर से अब ड्रिंक्स पर संकट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बीयर-पीने-वाले-सावधान-अब-इसकी-भी-होने-वाली-है-कमी-एक-तो-गर्मी-ऊपर-से-अब-ड्रिंक्स-पर-संकट</link>
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        <description><![CDATA[ US- Iran Tensions: यूएस और ईरान के बीच चल रहे टेंशन के बीच अब भारत में रहने वाले लोगों के लिए एक बुरी खबर आई है. अगर आप भी गर्मी से निपटने के लिए ठंडी- ठंडी बीयर पीते हैं तो इसका स्टॉक लाकर रख लीजिए. क्योंकि हो सकता है आने वाले दिनों में इसकी कमी पड़ जाए और कीमत में भी इजाफा हो जाए. ये जानकारी सिर्फ बीयर पीने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि डायट कोक या कोई भी सॉफ्ट ड्रिंक पीने वालों के लिए भी है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल यूएस और ईरान के युद्ध की वजह से भारत में एल्युमीनियम सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. जिसकी वजह से अब भारत में कैन वाली बीयर और डायट कोक की कमी की खबरें सामने आने लगी हैं. बढ़ती हुई गर्मी में ये खबर लोगों के लिए काफी परेशानी भरी है. ये समस्या सबसे पहले मुंबई से सामने आई, इसके बाद दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और पुणे में भी कमी देखने को मिल रही है.
एल्युमीनियम कैन की हो रही कमीकोल्ड ड्रिंक्स और कैन वाली सारी ही ड्रिंक्स की इन दिनों कमी है, क्योंकि ईरान युद्ध की वजह से ग्लोबली एल्युमीनियम कैन की सप्लाई प्रभावित हो रही है. जिससे कैन बनाने के लिए कच्चा माल समय पर नहीं मिल पा रहा है. इसके अलावा शीशे की बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाली LPG की कमी की वजह से भी उत्पादन प्रभावित हो रहा है.
महंगी हो सकती हैं ड्रिंक्स!कैन की कमी के चलते अब कंपनियां UAE, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया से एल्युमीनियम कैन मंगवा रही हैं. जो पहले से 25- 30 प्रतिशत तक महंगे हैं. ग्लास बोतलों की कीमत में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है और बाकी पैकेजिंग मटेरियल भी 20&amp;ndash;25 प्रतिशत महंगे हो गए हैं. इसके चलते ही अब लगता है कि आने वाले समय में कैन वाली ड्रिंक्स के साथ ही बोतल में आने वाली ड्रिंक्स की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>FD पर 8% ब्याज, क्या महंगाई को मात दे पाएंगे आप, जानें निवेश करने का ये सही वक्त है या नहीं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fd-पर-8-ब्याज-क्या-महंगाई-को-मात-दे-पाएंगे-आप-जानें-निवेश-करने-का-ये-सही-वक्त-है-या-नहीं</link>
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        <description><![CDATA[ Fixed Deposite Interest Rate: किसी भी व्यक्ति के पास जब कुछ रकम इकट्ठा हो जाती है, तो उसे भविष्य के बारे में सोचते हुए बैंक में एफडी के रूप में जमा कर दिया जाता है. इस एफडी पर उपभोक्ता को ब्याज भी मिलता है जिससे ये रकम जब कई साल बाद निकालते हैं तो ये बढ़कर हमें मिलती है. क्या आप भी सच रहे हैं कि कुछ रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रख लें, जिससे उन पैसों से आगे आने वाले समय में आपको मदद मिल सकेगी. तो यहां हम आपको कुछ बैंकों के इंटरेस्ट रेट बताते हैं, जिससे आपके लिए फैसला करना आसान हो जाएगी कि आपको किस बैंक में अपने पैसे FD के रूप में जमा करना हैं.
स्मॉल फाइनेंस बैंक के इंटरेस्ट रेटसबसे पहले बात करते हैं छोटे बैंकों से मिलने वाले इंटरेस्ट रेट के बारे में. जैसे सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 30 महीने के लिए FD करने पर 8.10 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है. जो सीनियर सिटिजन के लिए 8.25 प्रतिशत है. तो वहीं शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक 21 महीने से 22 महीनों तक के लिए 7.80 प्रतिशत ब्याज देने को तैयार है. सीनियर सिटीजन के लिए ये ब्याद दर 8.30 प्रतिशत है. जना स्मॉल फाइनेंस बैंक 3 साल 1 दिन से 5 सालों के बीच में कभी भी एफडी तुड़वाने पर 7.77 प्रतिशत की ब्याज दर दे रहा है. हालांकि ये बैंक सीनियर सिटिजन को कोई फायदा नहीं दे रहा है.
प्राइवेट बैंक के इंटरेस्ट रेटहर बैंक के इंटरेस्ट रेट अपने आप में अलग होते हैं. यदि आपको लगता है कि प्राइवेट बैंकों में एफडी करने पर इंटरेस्ट रेट अच्छा मिलेगा, तो इसे पहले आप इंटरेस्ट रेट जान लें. IDFC फर्स्ट बैंत 390 दिन की एफडी के लिए 7.40 प्रतिशत ब्याद दे रहा है. जबकि सीनियर सिटिजन के लिए ये इंटरेस्ट रेट 7.90 प्रतिशत है. RBL बैंक 18 महीने से 36 महीने तक के लिए 7.20 प्रतिशत इंटरेस्ट रेट दे रहा है. ये दर सीनियर सिटिजन के लिए बढ़कर 7.70 प्रतिशत रखी गई है. यस बैंक की ब्याज दर देखें तो ये 36 महीने के ऊपर और 60 महीने के नीचे आपको 7 प्रतिशत की ब्याज दर दे रहा है. जो सीनियर सिटिजन के लिए 7.75 प्रतिशत है.ICICI बैंक और HDFC बैंक की ब्याज दर बराबर है 6.50 प्रतिशत. तो सीनियर सिटिजन के लिए ये ब्याज दर 7.10 और 7 प्रतिशत है.
पब्लिक सेक्टर बैंकों के इंटरेस्ट रेटपब्लिक सेक्टर बैंकों की भी अपनी ब्याज दर होती है. इनका टेन्योर काफी आकर्षक होता है जैसे 666 दिन, 444 दिन, 555 दिन इस तरह से. जैसे पंजाब एंड सिंध बैंक 666 दिनों के लिए 6.75 प्रतिशत का इंटरेस्ट दे रहा है. जो सीनियर सिटिजन के लिए 7.25 प्रतिशत है. इसके अलावा इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, कैनरा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया 6.60 प्रतिशत की बराबर ब्याज दर दे रहे हैं. तो वहीं सीनियर सिटिजन को ये सभी बैंक 7.10 प्रतिशत का इंटरेस्ट दे रहे हैं. हालांकि इन सभी का टेन्योर अलग- अलग है.
किस बैंक में करवाएं FDइन बैंकों की ब्याज दरें देखने के बाद हर किसी को सोच समझकर ये फैसला लेना चाहिए. जिस बैंक से उन्हें अच्छी ब्याज दर मिलती है उसमें ही फिक्स्ड डिपॉजिट करवाना चाहिए. 8% तक की ब्याज दरें एफडी को आकर्षक जरूर बनाती हैं, लेकिन निवेश से पहले आपको हमेशा अपनी वित्तीय जरूरतों, लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के बारे में सोच समझकर ही ये जोखिम उठाना चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पर, ब्याज, क्या, महंगाई, को, मात, दे, पाएंगे, आप, जानें, निवेश, करने, का, ये, सही, वक्त, है, या, नहीं</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Tax Saving Tips: EMI की झंझट से बचाएगी किराए वाली कार, लाखों के टैक्स की भी होगी बचत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tax-saving-tips-emi-की-झंझट-से-बचाएगी-किराए-वाली-कार-लाखों-के-टैक्स-की-भी-होगी-बचत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/tax-saving-tips-emi-की-झंझट-से-बचाएगी-किराए-वाली-कार-लाखों-के-टैक्स-की-भी-होगी-बचत</guid>
        <description><![CDATA[ Tax Saving: टैक्स भरने वाले सभी व्यक्ति अक्सर उन टिप्स और ट्रिक्स के बारे में सोचते हैं जिनकी मदद से वो अपना ज्यादा से ज्यादा टैक्स बचा पाएं. कोई भी बड़ी चीज खरीदने से पहले व्यक्ति का दिमाग इसी जगह पर लगता है कि कैसे इसका टैक्स बचाया जाए. जैसे जब कोई व्यक्ति कार खरीदता है तो उसका लाखों का टैक्स लग जाता है. इसका एक आसान उपाय है हमारे पास और वो है लीज पर कार लेना. इससे लाखों का टैक्स बचाया जा सकता है.
कार लीजिंग क्या है?जो लोग नहीं जानते हैं उन्हें बता दें कि कार लीजिंग का आसान भाषा में मतलब है कार को किराए पर लेना. इसके लिए हर महीने आपको एक बंधा किराया देना पड़ता है. कार आपके नाम पर नहीं होती, उस कंपनी के नाम पर होती है जिससे आपने लीज पर कार ली है. लेकिन मालिकाना हक जब तक आप लीज भर रहे हैं तब तक आपके ही पास होता है. ये बिलकुल वैसे ही होता है जैसे हम किराए के मकन में रहते हैं.
कार लीजिंग से बचेगा टैक्सकार को किराए पर लेने से के बहुत सारे फायदे होते हैं, नमें से एक फायदा है टैक्स की बचत, आइये बताते हैं इससे कैसे आपका लाखों का टैक्स बचाया जा सकता है.

आप जिस कंपनी में काम करते हैं वही कंपनी आपको लीज पर कार देती है.
कार लीज की लागत आपकी ग्रॉस सैलरी में एडजस्ट की जाती है. पैकेज की संरचना को उसी हिसाब से डिजाइन किया जाता है.
कंपनी की तरफ से दी गई कार में टैक्स की गिनती वास्तविक व्यय के बजाय कर नियमों के आधार पर जैसे इंजन का आकार और उपयोगिता पर की जाती है.
ये वैल्यू खरीदी हुई कार की लागत से कम हो सकती है.
लीज पर ली गई कार का पेट्रोल- डीजल या गैस, ड्राइवर का खर्च ये सब कंपनी के द्वारा ही दिया जाता है.
ये खर्चे आपके पर्सनल खर्चे से तो बचते ही हैं साथ ही साथ टैक्स के लिहाज से भी ये काफी किफायती होते हैं.

क्या कहता है नया टैक्स रिजाइमनए टैक्स रिजाइम का फोकस टैक्स की कीमतों को कम करने पर है, जिससे मिनिमम छूट मिल सके. जिसके परिणामस्वरूप, टैक्स प्लानिंग में क्लेम डिडक्शन की जगह नियमों के दायरे में मुआवजे की संरचना पर जोर दिया जा रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Tax, Saving, Tips:, EMI, की, झंझट, से, बचाएगी, किराए, वाली, कार, लाखों, के, टैक्स, की, भी, होगी, बचत</media:keywords>
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        <title>Tim Cook Net Worth: टिम कुक को हर साल मिलते थे 525 करोड़, अब कितनी है उनकी नेटवर्थ? जानकर चौंक जाएंगे आप</title>
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        <description><![CDATA[ Apple CEO Tim Cook Net Worth: दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक &#039;एप्पल&#039; से एक बहुत बड़ी खबर आई है. एप्पल में अब एक युग का अंत होने जा रहा है. एप्पल के सीईओ टिम कुक की अब सीईओ के पद से विदाई होने जा रही है. टिम कुक ने &amp;nbsp;करीब 15 साल तक कंपनी की कमान संभाली और इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. एप्पल ने जॉन टर्नस को अगला सीईओ नियुक्त किया है, जो 1 सितंबर 2026 से कार्यभार संभालेंगे.
15 सालों से एप्पल के सीईओ हैं टिम कुक
टिम कुक के पद छोड़ने की खबर ने पूरी टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. अब सवाल यह है कि इन 15 सालों में टिम कुक ने एप्पल को क्या दिया और उन्होंने खुद कितनी संपत्ति बनाई? क्या आप जानते हैं कि जब टिम कुक ने कार्यभार संभाला था, तब एप्पल कहां थी और आज कहां है? चलिए आपको बताते हैं टिम कुक के इस शानदार सफर और उनकी अरबों की नेटवर्थ के बारे में.
24000 करोड़ रुपए है टिम कुक की नेटवर्थ
फोर्ब्स के आंकड़ों के मुकाबिक, टिम कुक की कुल संपत्ति लगभग 2.9 बिलियन डॉलर यानी करीब 24000 करोड़ रुपए है. उनका हालिया सालाना पैकेज लगभग $63 मिलियन (करीब ₹525 करोड़) है. &amp;nbsp;उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा एप्पल के शेयरों से आता है. उनके पास एप्पल के 30 लाख से ज्यादा शेयर हैं. टिम कुक के कार्यकाल में एप्पल की मार्केट वैल्यू 350 बिलियन डॉलर से बढ़कर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई. कंपनी का सालाना राजस्व साल 2011 में 108 बिलियन डॉलर था.
स्टीव जॉब्स के निधन से पहले बने थे सीईओ
टिम कुक करीब 28 साल से एप्पल के साथ जुड़े हुए हैं. उन्होंने साल 2011 में स्टीव जॉब्स के निधन से ठीक पहले सीईओ का पद संभाला था. उनके नेतृत्व में एप्पल के एक्टिव डिवाइसेज की संख्या 2.5 बिलियन के पार पहुंच गई.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 19:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>इनसाइडर ट्रेडिंग: क्या हर्षद मेहता जैसे स्कैम में शामिल ट्रंप? उनके बयान से मिनटों पहले होती मोटी कमाई, समझें पूरा खेल</title>
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        <description><![CDATA[ साल 1992... भारत का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला तो आप सभी को याद होगा. जब गुजरात के हर्षद मेहता ने बैंकिंग सिस्टम और स्टॉक मार्केट को हिला दिया था और इनसाइडर ट्रेडिंग से करीब 5 हजार करोड़ रुपए का स्कैम किया था. वैसे ही आरोपों के कुछ छींटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी पड़ रहे हैं. ट्रंप के कई बड़े ऐलानों से ठीक पहले शेयर बाजार, ऑयल फ्यूचर्स और प्रेडिक्शन मार्केट में चौंकाने वाली ट्रेडिंग एक्टिविटीज देखी जा रही है. क्या होती है इनसाइडर ट्रेडिंग और ट्रंप का मामला क्या? जानते हैं एक्सप्लेनर में...&amp;nbsp;
सवाल 1: इनसाइडर ट्रेडिंग क्या है और यह क्यों गैरकानूनी माना जाता है? &amp;nbsp;
जवाब: इनसाइडर ट्रेडिंग का मतलब है कि ऐसी गोपनीय और गैर-सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल करके शेयर, फ्यूचर्स, ऑप्शंस या अन्य सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग करना, जिसकी जानकारी आम जनता को नहीं होती है. उदाहरण के लिए, युद्ध संबंधी फैसला या टैरिफ पॉलिसी जैसी कोई जरूरी सरकारी घोषणा, जिसका पहले पता हो और उसी आधार पर दांव लगा दिया जाए. यह अवैध है क्योंकि इससे उन लोगों को फायदा होता है जिनके पास अंदरूनी जानकारी है, जबकि आम निवेशक नुकसान उठाते हैं. इससे बाजार में नाइंसाफी होती है और निवेशकों का भरोसा टूटता है.
ट्रंप के मामले में देखें, तो कई बार उनके बयान सार्वजनिक होने से कुछ देर पहले ट्रेडिंग में अचानक तेज उछाल आ जाता है. एक्सपर्ट्स इसे गैरकानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग का संकेत मानते हैं, यानी कुछ खास लोग पहले से ही सीक्रेट इन्फॉर्मेशन का पता लगा लेते हैं, जो आम आदमी के पास नहीं होती. इससे वे कमाते हैं करोड़ों-अरबों रुपए और आम आदमी को मिलता है नुकसान.
सवाल 2: ट्रंप और इनसाइडर ट्रेडिंग के कौन-कौन से बड़े उदाहरण सामने आए हैं?
जवाब: बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के ऐलान से पहले ट्रेडिंग का पैटर्न साफ दिखता है. इसके 5 बड़े उदाहरण हैं:
1. 9 मार्च 2026: ईरान युद्ध पर &#039;युद्ध लगभग पूरी तरह खत्म है&#039;ट्रंप ने CBS न्यूज को फोन इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ संघर्ष लगभग खत्म हो गया है. जनता को इसकी जानकारी 19:16 GMT पर मिली, जब रिपोर्टर ने X पर पोस्ट किया, लेकिन ऑयल फ्यूचर्स में दांव 47 मिनट पहले, यानी 18:29 GMT पर बढ़ गए थे. नतीजतन तेल की कीमतें 25% गिर गईं. जिन ट्रेडर्स ने शॉर्ट सेलिंग की थी, उन्होंने लाखों-करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमाया.
2. 23 मार्च 2026: तेहरान के साथ &#039;पूर्ण और अंतिम समाधान&#039;ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शत्रुता का पूरा समाधान हो गया है. पोस्ट 11:04 GMT पर हुआ, लेकिन तेल में भारी दांव 14 मिनट पहले (10:48-10:50 GMT) लग चुके थे. नतीजतन, अमेरिकी तेल कीमतें 11% गिर गईं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय करीब 580 मिलियन डॉलर (लगभग 4.66 हजार करोड़ रुपये) के ट्रेड्स हुए, जिससे कुछ ट्रेडर्स को भारी फायदा हुआ.
3. 28 फरवरी 2026: ईरान पर अमेरिकी हमले का दांवब्लॉकचेन एनालिसिस साइट BubbleMaps ने खुलासा किया कि फरवरी में अचानक 6 नए अकाउंट बने. इन सबने ईरान पर हमले के पक्ष में भारी दांव लगाया. ट्रंप ने हमले की पुष्टि की तो इन अकाउंट्स ने कुल 12 लाख डॉलर कमाए. पांच अकाउंट तो इसके बाद कभी एक्टिव नहीं हुए.
4. 3 जनवरी 2026: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का मामलाPolymarket जैसे ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट पर &#039;BurdenSome-Mix&#039; नाम का नया अकाउंट दिसंबर 2025 में बना. 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक इसने मादुरो के पद छोड़ने पर 32,500 डॉलर लगाए. 3 जनवरी को मादुरो को पद से हटा दिया गया. अकाउंट ने 4.36 लाख डॉलर जीते और तुरंत यूजरनेम बदलकर इनएक्टिव हो गया.
5. 2-9 अप्रैल 2025: (लिबरेशन डे टैरिफ और 90 दिन का सीजफायर)ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को दुनिया भर से आयात पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे शेयर बाजार गिर गए, लेकिन एक हफ्ते बाद 9 अप्रैल को उन्होंने चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए 90 दिन का टैरिफ विराम घोषित किया. इस ऐलान से S&amp;amp;P 500 इंडेक्स 9.5% उछल गया, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी बढ़त थी. ट्रेडिंग डेटा दिखाता है कि 18:00 BST के बाद स्टॉक मार्केट ऊपर जाने पर अचानक भारी दांव लगाए गए और 18:18 BST पर ट्रंप का ऐलान आया. इस उछाल से कुछ ट्रेडर्स को करीब 20 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ.
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने मार्च 2026 में आरोप लगाया कि ट्रंप के करीबियों ने क्रूड ऑयल मार्केट में अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर करोड़ों कमाए.
सवाल 3: तो क्या ट्रंप सचमुच इनसाइडर ट्रेडिंग के मास्टरमाइंड हैं?
जवाब: कुछ विश्लेषक इसे इनसाइडर ट्रेडिंग का साफ संकेत मानते हैं क्योंकि समयबद्ध ट्रेडिंग और गोपनीय जानकारी का मिलान संदिग्ध लगता है, लेकिन दूसरे कहते हैं कि ट्रेडर्स ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल स्टाइल को अब समझ चुके हैं, इसलिए वे पहले से पोजीशन ले लेते हैं. फिर भी, पैटर्न इतना दोहराया गया है कि जांच की मांग बढ़ गई है.
अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमिशन (CFTC) ने मार्च 2026 के ईरान पॉलिसी शिफ्ट (23 मार्च और 7 अप्रैल) से पहले के तेल फ्यूचर्स ट्रेड्स की जांच शुरू कर दी है. CME ग्रुप और ICE प्लेटफॉर्म पर हुए ट्रेड्स की जांच हो रही है. कुछ सीनियर डेमोक्रेट सांसदों ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (SEC) को चिट्ठी लिखकर जांच की मांग की. व्हाइट हाउस ने स्टाफ को इनसाइडर ट्रेडिंग न करने की चेतावनी दी थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत या गिरफ्तारी नहीं हुई है.
सवाल 4: आम निवेशकों और बाजार पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
जवाब: इनसाइडर ट्रेडिंग का सबसे बड़ा असर यह है कि बाजार में समानता खत्म हो रही है. कुछ चुनिंदा ट्रेडर्स को ट्रंप के ऐलान से पहले गोपनीय जानकारी मिल जाती है, जिससे वे मिनटों या घंटों पहले भारी दांव लगा लेते हैं. इससे बाजार की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं.
आम लोग सोचते हैं कि बाजार पहले से ही ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>इनसाइडर, ट्रेडिंग:, क्या, हर्षद, मेहता, जैसे, स्कैम, में, शामिल, ट्रंप, उनके, बयान, से, मिनटों, पहले, होती, मोटी, कमाई, समझें, पूरा, खेल</media:keywords>
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        <title>LPG गैस की अफवाहों के बीच सरकार का बड़ा बयान, ऑनलाइन बुकिंग का डेटा बताया, सप्लाई पर क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Booking Increased: यूएस- ईरन के बीच की स्थिति में फिलहाल कोई सुधार नहीं हुआ है, जिसका असर दुनियाभर में होने वाली गैस और पेट्रोल- डीजल की सप्लाई पर पड़ रहा है. इसी बीच अब सरकार ने खुलासा किया है कि एलपीजी गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग्स में इजाफा हुआ है. घरेलू एलपीजी गैस को प्रायॉरिटी दी जा रही है और इसकी डिलीवरी भी इंडस्ट्री के आधार पर 99 प्रतिशत कर दी गई है.
DAC आधारित डिलीवरी बढ़ींसरकार की तरफ से हाल ही में बताया गया है कि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) आधारित डिलीवरीज बढ़ गई हैं. इसके साथ सिलेंडर की डिलीवरी करीब 92 प्रतिशत बढ़ी है. DAC आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर रिसीव होता है. पेट्रेलियम मंत्रालय ने बताया कि, &#039;कई LPG की के डिस्ट्रीब्यूटर्स रविवार को भी काम कर रहे हैं जिससे घरेलू एलपीजी सिलेंडर की की कमी किसी को ना हो.&#039; साथ ही उन्होंने बताया कि कुल कमर्शियल एलपीजी आवंटन को भी प्री-क्राइसिस लेवल्स पर लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें 10 प्रतिशत सुधार-संबंधी आवंटन शामिल है.
कमर्शियल सिलेंडर की स्थितिमंत्रालय ने ये भी बताया कि, 23 मार्च, 2026 से अब तक 18.45 लाख से भी ज्यादा 5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं. IOCL, HPCN और BPCL के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशन का प्लान योजना बनाने के लिए राज्य अधिकारियों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ बातचीत में जुटी हुई है. पिछले 5 दिनों में औसतन 7 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा हर रोज कमर्शियल एलपीजी बेची गई है.
पीएनजी कनेक्शन भी करवा रहे लोगइसके अलावा सरकारी आंकड़ों में ये भी बताया गया है कि, मार्च 2026 से अब तक 4.93 लाख से भी ज्यादा PNG कनेक्शंस का गैसीकरण किया जा चुका है. साथ ही, 5.51 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं ने नए कनेक्शनों के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. 19 अप्रैल तक, लगभग 39,200 पीएनजी उपभोक्ताओं ने MYPNGD.in वेबसाइट के जरिए अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, गैस, की, अफवाहों, के, बीच, सरकार, का, बड़ा, बयान, ऑनलाइन, बुकिंग, का, डेटा, बताया, सप्लाई, पर, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>Hormuz Crisis: होर्मुज की घेराबंदी का भारत पर बुरा असर, मार्च में आठ प्रमुख उद्योगों की रफ्तार हुई धीमी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hormuz-crisis-होर्मुज-की-घेराबंदी-का-भारत-पर-बुरा-असर-मार्च-में-आठ-प्रमुख-उद्योगों-की-रफ्तार-हुई-धीमी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/hormuz-crisis-होर्मुज-की-घेराबंदी-का-भारत-पर-बुरा-असर-मार्च-में-आठ-प्रमुख-उद्योगों-की-रफ्तार-हुई-धीमी</guid>
        <description><![CDATA[ Iran War Impact on Indian Economy: ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग का असर अब सीधे भारत के किसान तक पहुंच गया है. मार्च 2026 में देश में खाद और यूरिया का उत्पादन एक साल पहले यानी मार्च 2025 के मुकाबले 24.6 फीसदी गिर गया है, मतलब करीब एक चौथाई कम खाद बनी. यह आंकड़ा केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने &amp;nbsp;जारी किया है.
जंग की वजह से कम बनने लगा यूरिया&amp;nbsp;
खाद उत्पादन मार्च 2025 के मुकाबले मार्च 2026 में 24.6 फीसदी गिर गया है यानी करीब एक चौथाई कम खाद बनी. यूरिया बनाने के लिए नेचुरल गैस चाहिए. यह गैस बड़े पैमाने पर मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों से आती है, लेकिन ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज़ यानी वो समुद्री रास्ता जिससे खाड़ी का तेल और गैस दुनिया भर में जाता है, वहां आवाजाही लगभग ठप हो गई. दुनिया का करीब एक तिहाई खाद इसी रास्ते से गुजरता है. रास्ता बंद हुआ तो गैस नहीं आई और गैस नहीं आई तो यूरिया नहीं बना.
अभी खरीफ सीजन यानी धान, मक्का, सोयाबीन की बुवाई का वक्त आने वाला है. इस सीजन में यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. देश की 45 फीसदी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है. अगर यूरिया कम पड़ा तो या तो किसान को महंगे दाम पर खाद खरीदनी होगी या फसल कम होगी दोनों ही हालात में नुकसान किसान का है.&amp;nbsp;
सिर्फ खाद नहीं और भी सेक्टर लड़खड़ाए
कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल का उत्पादन 5.7 फीसदी घट गया है. कोयला 4 फीसदी नीचे आया है. बिजली उत्पादन भी 0.5 फीसदी कम हुआ. कोयला कम तो बिजली कम यह सीधा कनेक्शन है. नेचुरल गैस का घरेलू उत्पादन 6.4 फीसदी बढ़ा इससे थोड़ी राहत मिली है. स्टील यानी लोहा-इस्पात उत्पादन 2.2 फीसदी बढ़ गया है. सीमेंट 4 फीसदी से ऊपर रहा, क्योंकि देश में सड़क और मकान बनाने का काम जारी रहा.
आठों बड़े उद्योगों का मिला-जुला सूचकांक मार्च 2026 में 0.4 फीसदी गिरा. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में यह सिर्फ 2.6 फीसदी बढ़ा, जो पिछले कई सालों के मुकाबले बहुत कम है. अब जब होर्मुज़ का रास्ता अभी भी बंद है तो अप्रैल और मई के आंकड़े और खराब आ सकते हैं. सरकार को जल्द से जल्द यूरिया की वैकल्पिक सप्लाई का इंतजाम करना होगा वरना किसान और महंगाई दोनों मुसीबत बन सकते हैं.
ईरान युद्ध के बीच भारत के 8 बड़े सेक्टर का हाल

कोयला- 4% गिरा- शिपिंग रुट बाधित होने से आयातित कोयले की सप्लाई पर असर
खाद- 24.6% गिरा- सबसे बड़ा झटका. ईरान से यूरिया और फॉस्फेट की सप्लाई ठप होने से उत्पादन धड़ाम
कच्चा तेल- 5.7% गिरा- होर्मुज़ पर तनाव से घरेलू रिफाइनरियों को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित
बिजली &amp;mdash; 0.5% घटी- कोयले की कमी और महंगे LNG ने बिजली उत्पादन को थोड़ा दबाया.
नेचुरल गैस- 6.4% बढ़ा- घरेलू उत्पादन ने राहत दी लेकिन LNG आयात महंगा हुआ.
रिफाइनरी प्रोडक्ट्स- सिर्फ 0.1% बढ़ा. युद्ध के बावजूद रिफाइनरियां किसी तरह चलती रहीं बड़ी राहत.
स्टील- 2.2% बढ़ा- घरेलू मांग मजबूत रही युद्ध का सीधा असर कम.
सीमेंट- 4% बढ़ा- इंफ्रा प्रोजेक्ट जारी रहे बाजार में डिमांड बनी रही.

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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Hormuz, Crisis:, होर्मुज, की, घेराबंदी, का, भारत, पर, बुरा, असर, मार्च, में, आठ, प्रमुख, उद्योगों, की, रफ्तार, हुई, धीमी</media:keywords>
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        <title>नौकरी छोड़ बनें बॉस, ये हैं 5 सबसे सफल बिजनेस जो 2026 में आपको बना देंगे मालामाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-छोड़-बनें-बॉस-ये-हैं-5-सबसे-सफल-बिजनेस-जो-2026-में-आपको-बना-देंगे-मालामाल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-छोड़-बनें-बॉस-ये-हैं-5-सबसे-सफल-बिजनेस-जो-2026-में-आपको-बना-देंगे-मालामाल</guid>
        <description><![CDATA[ Business Ideas: आज के टाइम में काफी लोग अपनी नौकरी से खुश नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण है कहीं सैलरी कम है तो कहीं वर्कलोड ज्यादा है. कई बार ग्रोथ न मिलना भी बड़ी वजह बन जाता है, जिसके चलते लोग अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचते हैं, लेकिन नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करना बहुत रिस्की हो सकता है, क्योंकि अगर आपका बिजनेस नहीं चला तो यह फैसला आपके लिए भारी पड़ सकता है. इसलिए सही प्लानिंग और मार्केट ट्रेंड को समझकर ही आप इसमें सफलता पा सकते हैं. ये जबरदस्त 5 आइडियाज आपकी कर सकते हैं काफी मदद.&amp;nbsp;
1. कंसल्टेंसी या फ्रीलांसिंग एजेंसी
अगर आपने पहले कभी IT, HR, फाइनेंस या फिर मार्केटिंग में काम किया है तो आप अपनी कंसल्टेंसी या फ्रीलांस एजेंसी शुरू कर सकते हैं. इसमें आपका कम इन्वेस्टमेंट लगता है और आप घर से काम शुरू कर सकते हैं. अगर बात करें कमाई की तो शुरुआत में 50 हजार से 1.5 लाख रुपये महीने कमा सकते हैं और अगर वहीं बड़े क्लाइंट हुए तो यह 5 लाख रुपये तक जा सकता है. &amp;nbsp;इसे 10-50 हजार रुपये के बजट में शुरू किया जा सकता है.
2. क्लाउड किचन
आजकल काफी लोग घर बैठे पैसा कमाने के बारे में सोचते हैं तो क्लाउड किचन एक अच्छा ऑप्शन है. क्योंकि काफी लोग घर से खाना ऑर्डर करना पसंद करते हैं तो आप क्लाउड किचन खोलने के बारे में सोच सकते हैं. इसमें रेस्टोरेंट के तरह भारी खर्च नहीं लगता है और आप घर से या छोटे किचन से शुरुआत कर सकते हैं और Swiggy या Zomato जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर कर सकते हैं.
3. ई-कॉमर्स और ड्रॉपशिपिंग
आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड काफी बढ़ गया है, जिसके चलते यह बिजने, तेजी से बढ़ रहा है. आप Amazon, Flipkart या Meesho जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट बेच सकते हैं. सबसे जरूरी बात कि ड्रॉपशिपिंग में आपको स्टॉक रखने की जरूरत नहीं होती है, जिससे खर्च कम होता है और पैसिव इनकम भी मिलती है.
4.EV चार्जिंग स्टेशन और मेंटेनेंस
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती मांग और संख्या के कारण EV चार्जिंग स्टेशन का बिजनेस फ्यूचर में काफी बड़ा होने वाला है. आप पार्किंग एरिया या फिर सोसाइटी में चार्जिंग पॉइंट लगाकर कमाई कर सकते हैं और साथ में मेंटेनेंस सर्विस भी दे सकते हैं.&amp;nbsp;
5. डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन कोर्स
अगर आपके पास कोई खास स्किल है तो आप डिजिटल कंटेंट या ऑनलाइन कोर्स शुरू कर सकते हैं. जैसे स्टॉक मार्केट, कोडिंग, योगा, कुकिंग या टीचिंग. आज के समय में &amp;nbsp;क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट की डिमांड बहुत ज्यादा है, जिससे आप अच्छी कमाई कर सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नौकरी, छोड़, बनें, बॉस, ये, हैं, सबसे, सफल, बिजनेस, जो, 2026, में, आपको, बना, देंगे, मालामाल</media:keywords>
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        <title>बेरोजगार 8वीं पास को मिलेंगे 10 लाख वो भी बिना ब्याज, सरकार की ये योजना नौकर से बना देगी &amp;apos;मालिक&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ CM Youth Self-Employment Scheme 2026: समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाती हैं. इसी कड़ी में राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना 2026 शुरू की है. इस योजना के तहत 30 हजार युवाओं को लोन देने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वह खुद का बिजनेस शुरू कर सकें.&amp;nbsp;
क्या है यह योजना?
यह योजना उद्योग और वाणिज्य विभाग लागू कर रहा है. इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई ब्याज नहीं देना होगा. यह योजना जनवरी 2026 में शुरू हुई है और अब 3 मार्च 2029 तक लागू रहेगी. सरकार का लक्ष्य यह है कि आने वाले सालों में 1 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें.
कितनी मिलेगी मदद?
बता दें कि इस योजना के तहत अधिकतम 10 लाख तक का लोन दिया जाता है. साथ ही इस पर पूरा ब्याज सरकार के सब्सिडी के रूप में दिया जाता है. इसका साफ मतलब यह है कि लाभार्थी को कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा. लोन पर बीमा कवर और बैंक गारंटी भी मिलती है.
जानिए कौन ले सकता है फायदा?

जरूरी बात राजस्थान का स्थायी निवासी होना जरूरी.
आपकी उम्र 18 से 45 साल के बीच होनी चाहिए.
आप कम से कम 8वीं पास होने चाहिए.
बैंक डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए.
व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों अप्लाई कर सकते हैं.

किन कामों के लिए लोन मिलेगा?
यह जानना जरूरी है कि लोन मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और ट्रेड सेक्टर के बिजनेस के लिए दिया जाता है. यानी आप दुकान, स्टार्टअप, सर्विस बिजनेस या फिर छोटा उद्योग शुरू करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
कितना मिलेगा लोन अमाउंट?
8वीं से 12वीं पास- ₹3.5 लाख &amp;ndash; ₹7.5 लाखग्रेजुएट/डिप्लोमा- ₹5 लाख &amp;ndash; ₹10 लाख
कैसे करें अप्लाई?

इस योजना में अप्लाई करने के लिए आपको Rajasthan SSO Portal पर लॉगिन करना होगा.
उसके बाद योजना का ऑप्शन चुनें, फिर फॉर्म भरें.
जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और लास्ट में सबमिट कर दें.

यह है जरूरी दस्तावेज

आधार कार्ड
जन आधार
बैंक पासबुक
निवास प्रमाण पत्र
प्रोजेक्ट रिपोर्ट
एजुकेशन सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी.

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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>SIP Tips: एसआईपी बाउंस हो गई तो क्या होगा? जान लें बैंक के ये नियम, नहीं तो माथा पकड़ पछताएंगे आप!</title>
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        <description><![CDATA[ SIP Charges: अगर आप भी SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको उससे जुड़े चार्ज के बारे में जरूर पता होना चाहिए. क्योंकि इसकी सही जानकारी न होने पर आपको काफी नुकसान हो सकता है. कई बार लोग सिर्फ इन्वेस्टमेंट पर ध्यान देते हैं, लेकिन छोटे-छोटे चार्ज उनकी वेल्थ को कम कर सकते हैं. ऐसा ही एक चार्ज है SIP किस्त फेल होने पर लगने वाला जुर्माना.&amp;nbsp;
किस्त फेल होने पर क्या होता है?
अगर आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है और SIP की किस्त कट नहीं पाती तो बैंक 250 रुपये से 750 रुपये तक का जुर्माना प्रति ट्रांजैक्शन लगा सकता हैं. सिर्फ इतना ही नहीं इसके साथ ही 18 प्रतिशत GST भी जुड़ता है. इसके चलते आपको हर महीने भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. खासकर तब जब आपकी कई SIP एक साथ चल रही हैं.
कैसे हो सकता है ₹2950 तक नुकसान?
म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर एक ही दिन में आपकी कई SIP की किस्त फेल हो जाती है तो जुर्माना तेजी से बढ़ जाता है. उदाहरण के तौर पर समझें अगर आपकी हर ट्रांजैक्शन पर लगभग 500 रुपये चार्ज लगता है और आपकी 5 SIP फेल हो जाती है तो 2500 रुपये का जुर्माना लगेगा और साथ ही जब इसमें GST को जोड़ा जाएगा तब कुल नुकसान करीब 2950 तक पहुंच सकता है.
क्यों है यह गंभीर बात?
कई इन्वेस्टर्स इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि यह चार्ज हर ट्रांजैक्शन पर लगता है न कि हर दिन. इसलिए अगर आपने एक ही तारीख पर कई SIP सेट की है तो नुकसान काफी बढ़ सकता है.
कैसे काम करता है सिस्टम?
भारत में SIP आमतौर पर National Payments Corporation of India के ऑपरेट किए जाने वाले NACH सिस्टम के जरिए चलती है. यह सिस्टम एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को तय तारीख पर आपके बैंक खाते से ऑटोमैटिक पैसा डेबिट करने की अनुमति देता है.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>SIP, Tips:, एसआईपी, बाउंस, हो, गई, तो, क्या, होगा, जान, लें, बैंक, के, ये, नियम, नहीं, तो, माथा, पकड़, पछताएंगे, आप</media:keywords>
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    <item>
        <title>24 साल के लड़के ने 4 महीने में खड़ी की 1 करोड़ की कंपनी, कंटेंट क्रिएशन ने बना दिया स्टार्टअप स्टार</title>
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        <description><![CDATA[ Startup Story: आज के दौर में जहां लोग नौकरी को तवज्जो देते हैं और उसे सिक्योर करने में लगे रहेत हैं. वहीं एक 24 साल के लड़के ने इसके उलट नौकरी को छोड़कर स्टार्टअप करने का रिस्क लिया. इस लड़के ने ना केवल ये रिस्क लिया बल्कि अपनी अलग पहचान भी बनाई. जिसके बारे में इस लड़के ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया.
वीडियो शेयर कर बताया स्ट्रगल
दरअसल सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. जिसमें एक 24साल के लड़के ने बताया कि कैसे उसने अच्छी खासी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर बिजनेस करने का फैसला किया. महज 4 महीने में ही इस लड़के ने करीब 1 करोड़ रुपये का सफल कारोबार खड़ा कर सबको हैरान कर दिया है. इस वीडियो को शेयर कर लड़के ने कैप्शन में लिखा, &#039;मैंने अपनी नौकरी छोड़ी और सपना बनाया, 2026 में मैंने भारत का बेस्ट इंस्टाग्राम ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म बनाया है क्रिएटर्स के लिए.&#039;



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डिजिटल क्रिटिव्स की परेशानी की हल
इस वीडियो में उज्जवल ने बताया है कि उन्होंने और उनके को-फाउंडर ने एक आसान लक्ष्य के साथ अपना ये सफर शुरू किया, डिजिटल क्रिएटिव्स की उस वास्तविक समस्या का समाधान किया जिसका वो अक्सर सामना करते हैं. उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स के सामने आने वाली चुनौतियों की बारीकी से जांच परख के साथ इसकी शुरुआत की.
क्या बोले उज्जवल
उज्जवल वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं कि, क्रिएटर्स लगातार हाई क्वलिटी वाला कंटेंट बना रहे थे, लेकिन उनमें से कई डायरेक्ट मैसेज और ऑडियंस एंगेजमेंट की बढ़ती तादाद को मैनेज करने के लिए संघर्ष कर रहे थे. उन्होंने कहा, &#039;क्रिएटर्स बेहतरीन कंटेंट पोस्ट कर रहे थे, लेकिन डायरेक्ट मैसेज को हैंडल न कर पाने के कारण उनकी ग्रोथ धीमी हो रही थी, और यहीं से हमें एहसास हुआ कि एक बड़ा बाजार मौजूद है&#039;. उन्होंने इस समस्या को समझा और क्रिएटर ऑटोमेशन के काम में घुस गए.
हालांकि उज्जवल ने ये भी बताया कि उनकी शुरुआत आसान नहीं थी. शुरुआती दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जैसे फंड की कमी, सही रणनीति बनाना और ग्राहकों तक पहुंच बनाना. यहां तक कि तन्मय भट्ट ने भी उनका आईडिया रिजेक्ट कर दिया था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने काम पर फोकस बनाए रखा. महज 4 महीने में ही उन्होंने 1 करोड़ का कारोबार खड़ा कर लिया है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 07:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Stocks to Watch: निवेशक पैसे रखें तैयार, आज इन शेयरों में दिख सकती है हलचल; जानिए पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Stocks to Watch Today: भारतीय शेयर बाजार में 17 अप्रैल के कारोबारी दिन जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी. दोनों ही प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए थे.
इसी बीच कई कंपनियों ने अपने तिमाही नतीजों का ऐलान किया हैं. इस वजह से आज, यानी सोमवार 20 अप्रैल को इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. आइए जानते हैं, इन कुछ चुनिंदा शेयरों के बारे में.
ICICI Bank शेयर&amp;nbsp;
आईसीआईसीआई बैंक ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है. इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट बढ़कर 13,702 करोड़ रुपये हो गया. जो पिछले साल इसी अवधि में 12,630 करोड़ रुपये था. यानी बैंक ने करीब 8.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है.&amp;nbsp;
बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम भी बढ़कर 22,979 करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया है. यह आंकड़ा एक साल पहले 21,193 करोड़ रुपये था. नतीजों के साथ बैंक ने निवेशकों को 12 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है. ऐसे में आज कंपनी शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;
Jio Financial शेयर&amp;nbsp;
जियो फाइनेंशियल के नतीजों में इस बार मुनाफे में गिरावट देखने को मिली है. कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर 272 करोड़ रुपये रह गया है. जो पिछले साल 316 करोड़ रुपये था. यानी करीब 14 फीसदी की कमी आई है.
इस गिरावट की बड़ी वजह कंपनी के बढ़ते खर्च को बताया जा रहा है. जो 145 करोड़ रुपये से बढ़कर 692 करोड़ रुपये हो गया है. &amp;nbsp;हालांकि, कंपनी की कुल आय में अच्छी बढ़त दर्ज हुई और यह 518 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,020 करोड़ रुपये तक पहुंच गया हैं. कंपनी के वित्तीय नतीजे निवेशकों को अपनी ओर खींच सकते हैं.
HDFC Bank शेयर&amp;nbsp;
एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही के मुनाफे में अच्छी बढ़त दर्ज की है. आंकड़ों की बात करें तो, बैंक का नेट प्रॉफिट 19,221 करोड़ रुपए पहुंच गया है. जो पिछले साल इसी अवधि के 17,616 करोड़ रुपये से करीब 9 प्रतिशत तेजी को दिखाता है. हालांकि, इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में हल्की गिरावट देखने को मिली.
यह आंकड़ा 1.1 फीसदी गिरकर 76,610 करोड़ रुपये रह गया. साथ ही बैंक ने अपने निवेशकों के लिए 13 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है. इस खबर के बाद आज बैंक शेयर निवेशकों के रडार पर हो सकते हैं.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:30:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol Diesel Price Today: कच्चे तेल में लगी आग, देश में स्थिर है दाम; जानिए आज पेट्रोल&amp;डीजल की कीमतें बढ़ी या घटी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-कच्चे-तेल-में-लगी-आग-देश-में-स्थिर-है-दाम-जानिए-आज-पेट्रोल-डीजल-की-कीमतें-बढ़ी-या-घटी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-कच्चे-तेल-में-लगी-आग-देश-में-स्थिर-है-दाम-जानिए-आज-पेट्रोल-डीजल-की-कीमतें-बढ़ी-या-घटी</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol Price Rate 20 April: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रही है. ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत से इनकार कर दिया है. जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है.
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 5.51 डॉलर प्रति बैरल की तेजी आई है और यह बढ़कर करीब 95.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. इसी बीच भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आइए जानते हैं, आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल का ताजा भाव.
देश में बनी हुई है राहत&amp;nbsp;
वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बावजूद भी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. आने वाले दिनों में कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में सरकार लोगों को राहत देने के लिए कीमतों में इजाफा करने से बच रही हैं. हालांकि, कई प्राइवेट कंपनियों तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं.&amp;nbsp;
पेट्रोल का ताजा रेट (गुट रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली - 94.77 रुपये (प्रति लीटर)
मुंबई - 103.50 रुपये (प्रति लीटर)
कोलकाता - 105.45 रुपये (प्रति लीटर)
हैदरबाद - 107.46 रुपये (प्रति लीटर)
चेन्नई - 100.90 रुपये (प्रति लीटर)
लखनऊ - 94.85 रुपये (प्रति लीटर)
अहमदाबाद - 94.68 रुपये (प्रति लीटर)
इंदौर - 106.81 रुपये (प्रति लीटर)
नाशिक - 104.76 रुपये (प्रति लीटर)
पटना - 103.82 रुपये (प्रति लीटर)
पुणे - 105.60 रुपये (प्रति लीटर)
डीजल का ताजा रेट (गुट रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली - 87.67 रुपये (प्रति लीटर)
मुंबई - 90.03 रुपये (प्रति लीटर)
कोलकाता - 92.02 रुपये &amp;nbsp;(प्रति लीटर)
हैदराबाद - 95.70 रुपये (प्रति लीटर)
चेन्नई - 92.48 रुपये (प्रति लीटर)
लखनऊ - 87.99 रुपये (प्रति लीटर)
अहमदाबाद - 90.35 रुपये (प्रति लीटर)
इंदौर - 92.18 रुपये (प्रति लीटर)
नाशिक - 91.27 रुपये (प्रति लीटर)
पटना - 91.84 रुपये (प्रति लीटर)
पुणे - 90.35 रुपये (प्रति लीटर)
पड़ोसी देशों में पेट्रोल के दाम
पड़ोसी देशों की कीमतों पर नजर डालें तो पेट्रोल की कीमतों में काफी फर्क देखने को मिलता है. बांग्लादेश में पेट्रोल करीब 90.95 रुपये प्रति लीटर है, जबकि म्यांमार में यह बढ़कर 146.82 रुपये तक पहुंच गया है.&amp;nbsp;
वहीं पाकिस्तान में इसका रेट 122.42 रुपये और चीन में 130.11 रुपये प्रति लीटर है. श्रीलंका में पेट्रोल 134.38 रुपये प्रति लीटर की रेट पर बिक रहा है. नेपाल में कीमतें और ज्यादा हैं. जहां एक लीटर पेट्रोल के लिए करीब 136.86 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं.

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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:30:41 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Petrol, Diesel, Price, Today:, कच्चे, तेल, में, लगी, आग, देश, में, स्थिर, है, दाम, जानिए, आज, पेट्रोल-डीजल, की, कीमतें, बढ़ी, या, घटी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Stock Market 20 April: शेयर मार्केट की तेज शुरुआत, सेंसेक्स 160 अंक उछला; निफ्टी 24,410 के पार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/stock-market-20-april-शेयर-मार्केट-की-तेज-शुरुआत-सेंसेक्स-160-अंक-उछला-निफ्टी-24410-के-पार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/stock-market-20-april-शेयर-मार्केट-की-तेज-शुरुआत-सेंसेक्स-160-अंक-उछला-निफ्टी-24410-के-पार</guid>
        <description><![CDATA[ Stock Market Today: भारतीय शेयर मार्केट में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 20 अप्रैल की शुरुआत पॉजिटिव रही. प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए. &amp;nbsp;हालांकि, शुरुआती कारोबार में ही शेयर बाजार में जोरदार हलचल शुरू हो गई. सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर फिसल गए पर तुरंत बाद ही फिर इनमें रौनक लौट आई.&amp;nbsp;
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स 139.36 अंक या 0.18 प्रतिशत की तेजी के साथ ओपन हुआ था. दिन की शुरुआत सेंसेक्स ने 78,632.90 के लेवल पर की है. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने भी दिन की शुरुआत पॉजिटिव की थी. निफ्टी 50 &amp;nbsp;37.95 अंक या 0.16 फीसदी उछलकर 24,391.50 के लेवल पर ओपन हुआ था.
सुबह करीब 9:20 बजे तक, सेंसेक्स 55 अंक की तेजी के साथ 78,549 अंक पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 50 7 अंक उछल गई थी और 24,360 के लेवल पर ट्रेड कर रही थी.
बीएसई के टॉप गेनर और लूजर
बीएसई बास्केट से ट्रेंट, एसबीआईएन, आईसीआईसीआई बैंक, अडानी पोर्ट और एलएंडटी टॉप गेनर थे. वहीं टॉप लूजर की बात करें तो एचडीएफसी बैंक, कोटक बैंक, रिलायंस और टाटा स्टील थे.
शुक्रवार को कैसा रहा था मार्केट?
भारतीय शेयर मार्केट में शुक्रवार, 17 अप्रैल के कारोबारी दिन जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी. प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए दिन की समाप्ति की थी. सेंसेक्स 504.86 अंक या 0.65 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,493.54 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 156.80 अंक या 0.65 प्रतिशत उछलकर 24,353.55 के लेवल पर बंद हुए थे.
बीएसई बास्केट से पावरग्रिड, रिलायंस, अडानी पोर्ट, टाइटन और टेक महिंद्रा टॉप गेनर थे. टॉप लूजर की बात करें तो सनफॉर्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक, एलएंडटी और एटरनल रहे थे.
निफ्टी 100, निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी बैंक, निफ्टी स्मॉलकैप 100, निफ्टी मिडकैप 100 के शेयरों में तेजी देखने को मिली थी. वहीं, निफ्टी आईटी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी. शुक्रवार के कारोबारी दिन बीएसई बास्केट से 24 शेयर हरे निशान पर बंद हुए थे और 6 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:30:36 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Stock, Market, April:, शेयर, मार्केट, की, तेज, शुरुआत, सेंसेक्स, 160, अंक, उछला, निफ्टी, 24, 410, के, पार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सोने&amp;चांदी ने खोई अपनी चमक, चांदी 5000 रुपये फिसली; जानिए आज आपके शहर में किस रेट पर बिक रहा सोना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोने-चांदी-ने-खोई-अपनी-चमक-चांदी-5000-रुपये-फिसली-जानिए-आज-आपके-शहर-में-किस-रेट-पर-बिक-रहा-सोना</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोमवार, 20 अप्रैल को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. कारोबार के शुरूआत में दोनों बहुमूल्य धातु लुढक गए थे. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 1600 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था.
एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,53,158 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,54,609 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.
सुबह करीब 10:05 बजे, गोल्ड वायदा 1.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,018 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,53,251 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपके शहर में इन बहुमूल्य धातुओं को कीमत क्या चल रही हैं?&amp;nbsp;
चांदी की कीमत
एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 1.99 प्रतिशत या 5,110 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,53,453 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,54,089 रुपये था.
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,750 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 27,500 रुपये देने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,800 रुपये चल रही है.&amp;nbsp;
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,440 रुपए22 कैरेट - 1,42,500 रुपए18 कैरेट - 1,16,620 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,290 रुपए22 कैरेट - 1,42,350 रुपए18 कैरेट - 1,16,470 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,56,650 रुपए22 कैरेट - 1,43,590 रुपए18 कैरेट - 1,19,790 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,290 रुपए22 कैरेट - 1,42,350 रुपए18 कैरेट - 1,16,470 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,340 रुपए22 कैरेट - 1,42,400 रुपए18 कैरेट - 1,16,520 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,440 रुपए22 कैरेट - 1,42,500 रुपए18 कैरेट - 1,16,620 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,340 रुपए22 कैरेट - 1,42,400 रुपए18 कैरेट - 1,16,520 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,290 रुपए22 कैरेट - 1,42,350 रुपए18 कैरेट - 1,16,470 रुपए

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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:30:33 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोने-चांदी, ने, खोई, अपनी, चमक, चांदी, 5000, रुपये, फिसली, जानिए, आज, आपके, शहर, में, किस, रेट, पर, बिक, रहा, सोना</media:keywords>
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        <title>Petrol Diesel Price Today: कच्चे तेल में उतार&amp;चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल&amp;डीजल के दाम स्थिर, जानिए आपके शहर का लेटेस्ट रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-कच्चे-तेल-में-उतार-चढ़ाव-के-बावजूद-देश-में-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-स्थिर-जानिए-आपके-शहर-का-लेटेस्ट-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-कच्चे-तेल-में-उतार-चढ़ाव-के-बावजूद-देश-में-पेट्रोल-डीजल-के-दाम-स्थिर-जानिए-आपके-शहर-का-लेटेस्ट-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price on April 19: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से एक ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वहीं, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई है. आज यानी रविवार, 19 अप्रैल को भी पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है. देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है.&amp;nbsp;
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोजाना तय होती हैं. जिनमें मुख्य रूप से तीन बड़ी तेल मार्केटिंग कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल हैं. हालांकि, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बीच देश में ईंधन की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं. आइए जानते हैं, आपके शहर का ताजा भाव.
प्रीमियम फ्यूल के दाम में हुई थी बढ़ोतरी
1 अप्रैल को प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी. इंडियन ऑयल के XP100 पेट्रोल का रेट 11 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 149 रुपये से 160 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया था. वहीं प्रीमियम डीजल की कीमत में भी इजाफा हुआ था. जिसके बाद इसका रेट 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचा था.&amp;nbsp;
पेट्रोल का ताजा रेट (गुट रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली - 94.77 रुपये (प्रति लीटर)
मुंबई - 103.54 रुपये (प्रति लीटर)
कोलकाता - 104.21 रुपये (प्रति लीटर)
हैदरबाद - 94.49 रुपये (प्रति लीटर)
चेन्नई - 100.75 रुपये (प्रति लीटर)
लखनऊ - 94.69 रुपये (प्रति लीटर)
अहमदाबाद - 94.49 रुपये (प्रति लीटर)
इंदौर - 106.48 रुपये (प्रति लीटर)
नाशिक - 95.50 रुपये (प्रति लीटर)
पटना - 105.58 रुपये (प्रति लीटर)
पुणे - 104.04 रुपये (प्रति लीटर)
डीजल का ताजा रेट (गुट रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली - 94.77 रुपये (प्रति लीटर)
मुंबई - 90.03 रुपये (प्रति लीटर)
कोलकाता - 90.76 रुपये &amp;nbsp;(प्रति लीटर)
हैदराबाद - 95.70 रुपये (प्रति लीटर)
चेन्नई - 92.34 रुपये (प्रति लीटर)
लखनऊ - 90.57 रुपये (प्रति लीटर)
अहमदाबाद - 90.17 रुपये (प्रति लीटर)
इंदौर - 91.88 रुपये (प्रति लीटर)
नाशिक - 89.59 रुपये (प्रति लीटर)
पटना - 93.80 रुपये (प्रति लीटर)
पुणे - 90.57 रुपये (प्रति लीटर)

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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol, Diesel, Price, Today:, कच्चे, तेल, में, उतार-चढ़ाव, के, बावजूद, देश, में, पेट्रोल-डीजल, के, दाम, स्थिर, जानिए, आपके, शहर, का, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नौकरी खा रहा AI, 16000 कर्मचारियों को निकालेगी ये दिग्गज कंपनी, 20 मई से शुरू होगा छंटनी का दौर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-खा-रहा-ai-16000-कर्मचारियों-को-निकालेगी-ये-दिग्गज-कंपनी-20-मई-से-शुरू-होगा-छंटनी-का-दौर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-खा-रहा-ai-16000-कर्मचारियों-को-निकालेगी-ये-दिग्गज-कंपनी-20-मई-से-शुरू-होगा-छंटनी-का-दौर</guid>
        <description><![CDATA[ Meta Layoffs 2026: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बुरी खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के मालिक मार्क जुकरबर्ग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसके कारण कंपनी में बड़े पैमाने पर 16000 कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी चल रही है.
मई में इस छंटनी का पहला चरण शुरू होगा. पता चला है कि 20 मई से शुरू होने वाले पहले राउंड में ही लगभग 8 हजार लोगों की नौकरी जा सकती है. टेक इंडस्ट्री में एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण कर्मचारियों में दहशत फैल गई है.
पहले चरण में 10 प्रतिशत स्टाफ पर पड़ेगा असर
शुरुआती चरण में मेटा के दुनिया भर के कुल स्टाफ में से 10 प्रतिशत कर्मचारियों पर असर होगा. हालांकि कंपनी ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन आंतरिक सूत्रों का कहना है कि 2026 के आखिर तक कुल 16 हजार लोग नौकरी खो सकते हैं. फिलहाल कंपनी के शीर्ष अधिकारी इस बारे में फाइनल लिस्ट बना रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि जिन कर्मचारियों का काम AI संभाल सकता है, उनकी नौकरी जाने का खतरा सबसे ज्यादा है.
AI पर 135 बिलियन डॉलर खर्च करेंगे जुकरबर्ग
इस बड़ी छंटनी के पीछे का मुख्य कारण मार्क जुकरबर्ग की AI को लेकर बढ़ी महत्वाकांक्षा है. वह मेटा को AI की दुनिया में लीडर बनाना चाहते हैं. इस बड़े बदलाव के लिए कंपनी इस साल लगभग 135 बिलियन डॉलर का भारी खर्च करने की योजना बना रही है. इतनी बड़ी रकम का बड़ा हिस्सा नए डेटा सेंटर, एडवांस चिप्स और एआई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर खर्ज होगा.
पहले भी 21 हजार लोगों को निकाला गया था
आपको बता दें कि मेटा में छंटनी का यह कोई पहला राउंड नहीं है. इससे पहले 2022 और 2023 में भी जुकरबर्ग ने कोरोना के बाद के समय में कार्यक्षमता का साल कहकर लगभग 21 हजार कर्मचारियों को घर बैठा दिया था. कंपनी अब अपना ढांचा एकदम पतला और स्मार्ट बनाना चाहती है, जिसमें इंसानों की तुलना में AI पर अधिक निर्भर रहा जाए. इसके लिए कई इंजीनियरों को अब केवल AI केंद्रित प्रोजेक्ट्स में ही शिफ्ट कर दिया गया है.
पूरी टेक इंडस्ट्री में नौकरियों पर संकट
नौकरियां जाने का यह ट्रेंड केवल मेटा तक सीमित नहीं है. पूरी टेक इंडस्ट्री में अभी कंपनियां अपना स्टाफ घटाकर AI के पीछे निवेश बढ़ा रही हैं. अमेज़ॅन ने भी हाल ही में 30 हजार लोगों की छंटनी की है, जो उनके कॉर्पोरेट स्टाफ के 10 प्रतिशत के बराबर है. फिनटेक कंपनी ब्लॉक ने भी ऐसा ही कदम उठाया है. Layoffs.fyi के डेटा के अनुसार, इस साल अब तक दुनिया भर की 95 बड़ी टेक कंपनियों ने 73 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है.
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नौकरी, खा, रहा, AI, 16000, कर्मचारियों, को, निकालेगी, ये, दिग्गज, कंपनी, मई, से, शुरू, होगा, छंटनी, का, दौर</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Akshaya Tritiya 2026: 22K या 24K? सोने की खरीदारी से पहले जानें असली&amp; नकली में फर्क, कहीं हो ना जाए नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/akshaya-tritiya-2026-22k-या-24k-सोने-की-खरीदारी-से-पहले-जानें-असली-नकली-में-फर्क-कहीं-हो-ना-जाए-नुकसान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/akshaya-tritiya-2026-22k-या-24k-सोने-की-खरीदारी-से-पहले-जानें-असली-नकली-में-फर्क-कहीं-हो-ना-जाए-नुकसान</guid>
        <description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया के मौके पर सोना- चांदी या कोई भी धातु खरीदने की परंपरा है. खासतौर से इस दिन सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है. ऐसे में इस दिन बड़ी संख्या में शोरूम पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिलती है. लोग सोने के सिक्के या ज्वेलरी खरीदते हैं, हालांकि ये एक बड़ी चुनौती की तरह भी होता है. सोने की खरीदारी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती होती है सोने की शुद्धता की सही पहचान करना. 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के बीच क्या आप अंतर समझते हैं? अगर नहीं, तो हम आपको बताते हैं कि कैसे सोना परखा जा सकता है.
22k vs 24k सोनासोना खरदीते समय आपने इस बात पर गौर किया होगा कि शोरूम में आपसे पूछा जाता है कि 22k या 24k कौनसा सोना दिखाया जाए. इस सवाल के जवाब में सभी पहले तो कंफ्यूज हो जाते हैं, लेकिन आपको कंफ्यूज होने की जरूरत नहीं है. सोना लेने से पहले ये जान लें कि 24k गोल्ड 99.9% शुद्ध होता है, लेकिन ये काफी मुलायम होने के कारण ज्वेलरी बनाने के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं होता है. जबकि 22K गोल्ड 91.6% शुद्ध सोना होता है और बाकी अन्य धातुएं इसमें मिलाई जाती हैं, जिससे ये मजबूत बनता है और ज्वेलरी के लिए अच्छा माना जाता है.
सोना खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातेंसोने की खरीदारी के समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है, जैसे:

सोना खरीदने से पहले हॉलमार्क जरूर चेक करें. भारत में BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है.
22k सोने पर आमतौर पर 916 और 24k पर 999 लिखा होता है.
जिस भी शोरूम से खरीदारी कर रहे हैं उनकी विश्वसनीयता भी जांच करना भी जरूरी है.
सोना खरीदते समय मैग्नेट टेस्ट कर सकते है, असली सोना चुंबक से नहीं चिपकता, जबकि नकली या मिलावटी सोना आकर्षित हो सकता है.
एसिड टेस्ट और कैरेट मीटर के जरिए भी सोने की शुद्धता की जांच की जा सकती है, हालांकि ये किसी एक्सपर्ट से ही करवाना बेहतर होता है.
सोना खरीदते समय उसका बिल लेना भी बेहद जरूरी होता है. बिल में सोने का वजन, कैरेट और कीमत स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए.
सोना लेने के समय मेकिंग चार्ज और टैक्स की जानकारी भी ध्यान से पढ़कर ही लेना चाहिए.

तो अगर आप भी इस अक्षय तृतीया के मौके पर सोना खरीदने जा रहे हैं तो इन टिप्स को अच्छे से जान लें और सही तरीके से निवेश करें. ऐसा करने से आप धोखाधड़ी और नुकसान से भी बच सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026:, 22K, या, 24K, सोने, की, खरीदारी, से, पहले, जानें, असली-, नकली, में, फर्क, कहीं, हो, ना, जाए, नुकसान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सावधान! चांदी खरीदने वाले 30% लोग हुए ठगी का शिकार, आपकी चांदी भी तो &amp;apos;नकली&amp;apos; नहीं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सावधान-चांदी-खरीदने-वाले-30-लोग-हुए-ठगी-का-शिकार-आपकी-चांदी-भी-तो-नकली-नहीं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सावधान-चांदी-खरीदने-वाले-30-लोग-हुए-ठगी-का-शिकार-आपकी-चांदी-भी-तो-नकली-नहीं</guid>
        <description><![CDATA[ Silver Purchase News: क्या आप भी चांदी खरीदते हैं, या खरीदने के बारे में सोच रहे हैं? तो सावधान हो जाइये, कहीं आप भी ठगी का शिकार ना हो जाए. क्योंकि हाल ही में जारी एक सर्वे के अनुसार, पिछले पांच सालों में करीब 30 प्रतिशत से भी ज्यादा ग्राहक चांदी खरीदते समय ठगी या धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं. ये आंकड़ा बताता है कि बाजार में कितनी पारदर्शिता है और साथ ही साथ ग्राहकों को सावधान रहने की भी हिदायत देता है.
चांदी पर हॉलमार्किंगइस सर्वे में ये भी खुलासा हुआ है कि 93 प्रतिशत लोगों ने चांदी के सामान पर हॉलमार्किंग को जरूरी बनाने का समर्थन किया है. जिससे वो और उन जैसे अन्य कई लोग ठगी का शिकार ना हो पाएं. जिसके बाद सरकार ने भी चांदी के गहनों और सामानों के लिए हॉलमार्किंग शुरू की है, जिसे एक डिजिटल पहचान प्रणाली से जोड़ा गया है. ये व्यवस्था 1 सितंबर 2025 से लागू हुई, ताकि सामान की शुद्धता के बारे में पता चल सके. बता दें कि हॉलमार्किंग से सोने याचांदी की शुद्धता पर ऑफिशियल मुहर या निशानी लग जाती है.
इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि, &#039;कुछ ऑफिशियल अपडेट्स के मुताबिक, ग्राहक खुद भी BIS Care मोबाइल ऐप के जरिए कई जरूरी जानकारियां जैसे आर्टिकल टाइप, शुद्धता, हॉलमार्क की तारीख, जांच केंद्र की जानकारी और ज्वेलर का रजिस्ट्रेशन नंबर भी वेरिफाई कर पाएंगे&#039;.
10 में से 3 लोग होते हैं ठगी का शिकारइस सर्वे में शामिल करीब 8 प्रतिशत लोगों ने बताया कि चांदी खरीदते समय उनके साथ एक बार धोखाधड़ी हुई. वहीं 42 प्रतिशत लोगों ने किसी भी तरह की ठगी की शकिायत नहीं की है. जबकि 27 प्रतिशत लोगों ने इस बारे में साफतौर पर कुछ भी नहीं कहा. इसका मतलब है कि लगभग हर 10 में से 3 लोगों के साथ चांदी खरीदते वक्त ठगी या धोखाधड़ी होती है.
इस सर्वे से पता चलता है कि हमें सोना या चांदी खरीदते वक्त कितना सतर्क रहना चाहिए, जिससे किसी भी तरह की ठगी का शिकार ग्राहक ना हो सके. हर उपभोक्ता को विश्वसनीय या प्रमाणिक ज्वेलर के पास से ही चांदी खरीदना चाहिए और जाने से पहले इसकी जानकारी भी रखना चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सावधान, चांदी, खरीदने, वाले, 30, लोग, हुए, ठगी, का, शिकार, आपकी, चांदी, भी, तो, नकली, नहीं</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर ₹1.58 लाख का सोना भी नहीं रोक पाया ग्राहकों का जोश, महंगाई पर भारी पड़ी परंपरा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/akshaya-tritiya-2026-अक्षय-तृतीया-पर-158-लाख-का-सोना-भी-नहीं-रोक-पाया-ग्राहकों-का-जोश-महंगाई-पर-भारी-पड़ी-परंपरा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/akshaya-tritiya-2026-अक्षय-तृतीया-पर-158-लाख-का-सोना-भी-नहीं-रोक-पाया-ग्राहकों-का-जोश-महंगाई-पर-भारी-पड़ी-परंपरा</guid>
        <description><![CDATA[ Akshaya Tritiya Gold Silver Sale 2026: अक्षय तृतीया पर इस बार आस्था और अर्थव्यवस्था का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. सोना-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद बाजार में जबरदस्त रौनक है और देशभर में करीब 20,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान जताया गया है. यह पिछले साल के मुकाबले बड़ी छलांग है और यह साफ संकेत देता है कि महंगाई के बावजूद लोगों का भरोसा इस परंपरा पर कायम है.
इस साल सोने की कीमत जहां करीब 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है, वहीं चांदी 2.55 लाख रुपयेप्रति किलो के स्तर पर पहुंच चुकी है. पिछले साल के मुकाबले यह बढ़ोतरी चौंकाने वाली है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में मांग कमजोर नहीं पड़ी है. फर्क सिर्फ इतना आया है कि अब ग्राहक पहले की तरह खुलकर नहीं, बल्कि सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं.
परंपरा का असर, निवेश का भरोसा कायम
चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि अक्षय तृतीया आज भी सोना खरीदने के सबसे शुभ मौकों में से एक मानी जाती है. लोगों का विश्वास है कि इस दिन किया गया निवेश कभी घटता नहीं है और समृद्धि लेकर आता है. हालांकि, बढ़ती कीमतों ने खरीदारी के तरीके को जरूर बदल दिया है.
ज्वैलर्स ने बदली रणनीति, हल्के आभूषणों पर जोर
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया के मुताबिक ज्वैलर्स अब ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए हल्के और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले आभूषणों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. इसके साथ ही चांदी और हीरे के उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज में छूट और छोटे गोल्ड कॉइन जैसे ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं.
मूल्य बढ़ा, लेकिन मात्रा में गिरावट साफ
पंकज अरोड़ा द्वारा साझा किए गए आंकड़े बताते हैं कि कुल व्यापार का मूल्य भले बढ़ रहा हो, लेकिन वास्तविक खपत में कमी आई है. 16,000 करोड़ रुपये के सोने के कारोबार का मतलब करीब 10 टन सोने की बिक्री है, जो देशभर के लाखों ज्वैलर्स में बांटने पर प्रति ज्वैलर बहुत कम मात्रा में तब्दील हो रहा है. इसी तरह 4,000 करोड़ रुपये के चांदी के व्यापार के बावजूद औसतन प्रति ज्वैलर बिक्री सीमित ही रह रही है. इससे साफ है कि ग्राहक बड़ी खरीदारी से बचते हुए छोटे और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.
डिजिटल गोल्ड और नए निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग
बदलते दौर में अब लोग सिर्फ पारंपरिक खरीद तक सीमित नहीं हैं. डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और ETF जैसे विकल्पों की ओर भी तेजी से रुझान बढ़ रहा है. ये विकल्प सुरक्षा के साथ-साथ लिक्विडिटी और सुविधा भी प्रदान करते हैं, जिससे नई पीढ़ी इन्हें ज्यादा पसंद कर रही है.
हॉलमार्किंग पर सख्ती, ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह
व्यापारी संगठनों ने ज्वैलर्स से हॉलमार्किंग नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है. साथ ही ग्राहकों को भी खरीदारी के समय शुद्धता और प्रमाणिकता की जांच करने की सलाह दी गई है, ताकि उनका निवेश सुरक्षित रहे.
परंपरा और समझदारी का नया संतुलन
अक्षय तृतीया 2026 यह दिखा रही है कि आस्था अब भी बाजार को मजबूती देती है, लेकिन इसके साथ ही ग्राहकों की सोच भी बदली है. लोग अब भावनाओं के साथ-साथ आर्थिक समझदारी को भी महत्व दे रहे हैं और यही बदलाव इस बार के बाजार की सबसे बड़ी कहानी बनकर उभरा है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026:, अक्षय, तृतीया, पर, ₹1.58, लाख, का, सोना, भी, नहीं, रोक, पाया, ग्राहकों, का, जोश, महंगाई, पर, भारी, पड़ी, परंपरा</media:keywords>
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        <title>होर्मुंज से चमका देकर आए जया, डोरना और फेलिसिटी! भारत पहुंचा 60 लाख बैरल ईरानी तेल, दुनिया हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Iran Crude Oil News: ईरान युद्ध के बाद होर्मुज पर तनाव, कड़े प्रतिबंधों और नाकाबंदी के बीच भारतीय जहाज धुरंधर बन गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान से कच्चे तेल की एक बड़ी खेप भारतीय तट पर पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि पिछले एक हफ्ते में भारत ने ईरान से लगभग 60 लाख बैरल तेल खरीदा है. इसकी तीसरी खेप आज बंदरगाहों पर पहुंच गई है.
जहां एक और युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है. ताजा जानकारी के अनुसार ईरानी सुपरटेंकर &#039;डोरना&#039; 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत के दक्षिणी तट पर पहुंच चुका है. &amp;nbsp;पिछले सात दिनों के भीतर भारत पहुंचने वाली यह तीसरी बड़ी खेप है. इससे पहले &#039;फेलिसिटी&#039; और &#039;जया&#039; नामक टैंकरों ने भी भारतीय बंदरगाहों पर तेल पहुंचाया है. कुल मिलाकर भारत अब तक 60 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल प्राप्त कर चुका है.
 स्थानीय रिफाइनरी में उतरने वाला है तेल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, &#039;डोरना&#039; को आखिरी बार ईरानी जलक्षेत्र में तब देखा गया था, जब वहां नाकाबंदी लागू होने वाली थी. यह टैंकर ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम पर फिर से भारतीय तट के पास दिखाई दिया और जल्द ही तेल को स्थानीय रिफाइनरी में उतारने वाला है.&amp;nbsp;
आपको बता दें कि यह खेप ऐसे समय में आई है, जब ईरान ने हॉर्मुज को कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने के एक दिन बाद बंद कर दिया. &amp;nbsp;हालांकि यह खेप होर्मुज के बंद होने से पहले गुजर चुकी थी. अब ईरान ने वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ा नियंत्रण रखने की घोषणा की है. आज ही खबर आई कि ईरान ने होर्मुज पार कर रहे एक भारतीय जहाज पर फायरिंग कर दी.&amp;nbsp;
भारत ने सात साल बाद ईरान से खरीदा तेल
ईरान भारत डील की बड़ी बात यह है कि भारत इस तेल के बदले भुगतान के लिए डॉलर के बजाय चीनी युआन का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि प्रतिबंधों के प्रभाव से बचा जा सके.&amp;nbsp;भारत ने करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरान से तेल का आयात फिर से शुरू किया है. अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट का फायदा उठाते हुए भारत ने यह रणनीतिक कदम उठाया था.
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चुपके से US को झटका देकर &#039;धुरंधर&#039; बना भारत, ईरान को चीनी युआन में किया तेल का बड़ा पेमेंट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>होर्मुंज, से, चमका, देकर, आए, जया, डोरना, और, फेलिसिटी, भारत, पहुंचा, लाख, बैरल, ईरानी, तेल, दुनिया, हैरान</media:keywords>
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        <title>अक्षय तृतीया: सोना खरीदें या हीरा? कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा? सोच&amp;समझकर लें फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व भारत में मनाया जाएगा. इस खास मौके पर सोना-चांदी के गहने या चीजें खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन हम कोई भी निवेश करते हैं तो वो अक्षय होता है, यानी कभी ना खत्म होने वाला. ऐसे में हर साल भारी मात्रा में लोग सोना- चांदी या हीरा खरीदते हैं. इस बार भी अगर आप गोल्ड या सिल्वर में निवेश करने की सोच रहे हैं तो आइये हम आपको बताते हैं कि किसमें निवेश करना फायदेमंद होगा.
सोने में निवेश होगा कैसा?सबसे पहले बात करते हैं सोने की, ये सदियों से पारिपरिक और सुरक्षित निवेश का माना जाता रहा है. सोने की कीमतों में समय के साथ लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलती है. आर्थिक हालातों या महंगाई के दौर में भी सोना मजबूत रहता है. यही कारण है कि निवेश के लिहाज से ज्यादातर विशेषज्ञ सोने को बेहतर ऑप्शन मानते हैं. इसके अलावा, सोने को आसानी से बेचा जा सकता है और इसकी लिक्विडिटी भी ज्यादा होती है.
हीरे में निवेश होगा कैसा?यदि इस बार अक्षय तृतीया के मौके पर डायमंड में निवेश करने का मन बा रहे हैं तो ये जान लें कि ये फैशन ज्वेलरी है. ये आपको लग्जरी से जोड़ेगा लेकिन निवेश के लिहाज से ज्यादा खास ऑप्शन नहीं है. हीरे की कीमत सोने की तरह पारदर्शी नहीं होती और इसमें मेकिंग चार्ज और ब्रांड वैल्यू का बड़ा हिस्सा शामिल होता है. सबसे जरूरी बात ये है कि हीरे को बेचने पर उसकी कीमत अक्सर कम मिलती है, यानी रीसेल वैल्यू कमजोर होती है. ऐसे में हीरे में निवेश करना एक अच्छा ऑप्शन तो नहीं ही है.
चांदी में निवेश भी है ऑप्शनचांदी में निवेश करना भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. चांदी की कीमतों में भी हर दिन की तरह बदलाव आता है. इसके रेट्स भी लगातार बढ़ ही रहे हैं ऐसे में आप कम दाम में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो चांदी भी एक अच्छा ऑप्शन है.
सोना खरीदें या हीरा?अगर आप ज्वोलरी को पहनने के तौर पर खरीदारी कर रहे हैं और स्टाइल या डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं, तो हीरा एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. लेकिन अगर आपका उद्देश्य निवेश है और भविष्य में अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं, तो आपको सोने में ही निवेश करना ज्यादा बेहतर होगा. क्योंकि सोने का रिटर्न आपको आज की कीमत के आधार पर मिलेगा, जो भविष्य के लिए बहुत अच्छा है. आपको समझदारी से फैसला लेना होगा कि आपको क्या खरीदना चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अक्षय, तृतीया:, सोना, खरीदें, या, हीरा, कहां, होगा, सबसे, ज्यादा, फायदा, सोच-समझकर, लें, फैसला</media:keywords>
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        <title>होर्मुज तनाव के बीच भारतीय जहाजों को मिला &amp;apos;वॉर रिस्क&amp;apos; इंश्योरेंस, सरकार ने बनाया 12980 करोड़ का फंड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/होर्मुज-तनाव-के-बीच-भारतीय-जहाजों-को-मिला-वॉर-रिस्क-इंश्योरेंस-सरकार-ने-बनाया-12980-करोड़-का-फंड</link>
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        <description><![CDATA[ ईरान- यूएस में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने 12,980 करोड़ रुपये के भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल को मंजूरी दे दी है. ये फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब आज ही होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान द्वारा भारतीय जहाजों पर फायरिंग की खबर सामने आई हैं, जिससे समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
सोशल मीडिया पर दी जानकारीभारतीय वित्त मंत्रालय ने अपने ऑफिशियल x (ट्विटर) हैंडल से एक ट्वूट कर इस बारे में जानकारी दी है. इस पोस्ट में लिखा गया है, &#039;कैबिनेट ने &#039;भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल&#039; (BMIP) बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके लिए सरकार लगभग 12,980 करोड़ रुपये की गारंटी देगी, ताकि जहाजों को लगातार बीमा सुरक्षा मिलती रहे.&#039; आगे लिखा गया, &#039;ये घरेलू इंश्योरेंस पूल दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता और देशों के बीच तनाव जैसी स्थितियों से निपटने में मदद करता है और भारतीय जहाजों को विदेशी बीमा कंपनियों पर निर्भर रहने की जरूरत को कम करता है.&#039;

✅ Cabinet has approved the proposal for creation of &amp;lsquo;Bharat Maritime Insurance Pool&amp;rsquo; (BMIP) with a sovereign guarantee of Rs 12,980 crores to facilitate continuous maritime insurance coverages✅The Domestic Insurance Pool addresses global volatility, geopolitical instability&amp;hellip; pic.twitter.com/xMz5kZWRKU
&amp;mdash; Ministry of Finance (@FinMinIndia) April 18, 2026



इस पोस्ट में आगे लिखा गया है, &#039;ये इंश्योरेंस पूल समुद्र से जुड़े सभी तरह के जोखिमों को कवर करता है, जैसे जहाज (हुल और मशीनरी), माल (कार्गो), जहाज मालिक की जिम्मेदारी (P&amp;amp;I) और युद्ध से जुड़े खतरे. यह उन जहाजों को भी सुरक्षा देता है जो दुनिया के किसी भी देश से सामान लेकर भारत आ रहे होते हैं, चाहे उन्हें रास्ते में किसी संवेदनशील या जोखिम भरे समुद्री इलाके से ही क्यों न गुजरना पड़े.&#039;
जरूरी था ये फैसलाइस योजना के तहत भारतीय जहाजों को कम प्रीमियम पर बीमा कवर मिलेगा. अगर किसी जहाज को युद्ध या संघर्ष के कारण नुकसान होता है, तो इस फंड से मुआवजा दिया जाएगा. इससे शिपिंग कंपनियों का जोखिम कम होगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिना रुकावट जारी रह सकेगा. होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को देखते हुए ये फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है, और ऐसे में जहाजों की सुरक्षा का ख्याल रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Gold Silver Price: शादी सीजन से पहले सोने&amp;चांदी की कीमतों में हलचल जारी, जानिए आज इन बहुमूल्य धातुओं के ताजा भाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-शादी-सीजन-से-पहले-सोने-चांदी-की-कीमतों-में-हलचल-जारी-जानिए-आज-इन-बहुमूल्य-धातुओं-के-ताजा-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-शादी-सीजन-से-पहले-सोने-चांदी-की-कीमतों-में-हलचल-जारी-जानिए-आज-इन-बहुमूल्य-धातुओं-के-ताजा-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today: मिडिल ईस्ट से आ रही शांति की खबर के बीच भी सोने-चांदी की कीमतों में हलचल देखने को मिल रही है. पिछले कुछ दिनों से इन बहुमूल्य धातुओं के दाम उछल गए हैं. शादियों का सीजन शुरू होने से खरीदारी बढ़ने की उम्मीद भी की जा रही है. आइए जानते हैं, आज यानी 18 अप्रैल को आपके शहर में कितना है भाव.&amp;nbsp;
शादी के सीजन में बनी हुई है मांग
देश में शादी का सीजन शुरू हो गया है. सोने-चांदी की कीमतों में आई तेजी के बाद भी ज्वेलरी शोरूम्स में ग्राहकों की भीड़ बनी हुई है. सोने-चांदी की कीमतों में तेजी के बाद भी खरीदारी पर खास असर नहीं दिख रहा है.
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कॉमेक्स पर कीमतों में गिरावट आती है, तो इसका असर स्थानीय बाजार में भी दिख सकता है. कीमतें कम होने से ग्राहकों को राहत मिल सकती हैं. &amp;nbsp;
चांदी की कीमत
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,750 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 27,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,749 रुपये चल रही है.&amp;nbsp;
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,120 रुपए22 कैरेट - 1,42,200 रुपए18 कैरेट - 1,16,380 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,780 रुपए22 कैरेट - 1,42,800 रुपए18 कैरेट - 1,16,840 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,010 रुपए22 कैरेट - 1,42,090 रुपए18 कैरेट - 1,18,590 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,780 रुपए22 कैरेट - 1,42,800 रुपए18 कैरेट - 1,16,840 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,830 रुपए22 कैरेट - 1,42,850 रुपए18 कैरेट - 1,16,890 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,930 रुपए22 कैरेट - 1,42,950 रुपए18 कैरेट - 1,16,990 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,830 रुपए22 कैरेट - 1,42,850 रुपए18 कैरेट - 1,16,890 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,55,780 रुपए22 कैरेट - 1,42,800 रुपए18 कैरेट - 1,16,840 रुपए

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&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price:, शादी, सीजन, से, पहले, सोने-चांदी, की, कीमतों, में, हलचल, जारी, जानिए, आज, इन, बहुमूल्य, धातुओं, के, ताजा, भाव</media:keywords>
    </item>
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        <title>PAN कार्ड नहीं होने से अटक जाते हैं ये काम, ध्यान दें! मेहनत की कमाई न हो जाए बेकार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pan-कार्ड-नहीं-होने-से-अटक-जाते-हैं-ये-काम-ध्यान-दें-मेहनत-की-कमाई-न-हो-जाए-बेकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/pan-कार्ड-नहीं-होने-से-अटक-जाते-हैं-ये-काम-ध्यान-दें-मेहनत-की-कमाई-न-हो-जाए-बेकार</guid>
        <description><![CDATA[ PAN Card Mandatory: पैन कार्ड (PAN) आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है. इसका इस्तेमाल केवल टैक्स से संबंधित कामों तक नहीं सीमित नहीं है. आज बैंक से लेकर, कार, प्रॉपर्टी खरीदने जैसे कामों में इसका इस्तेमाल होता हैं. अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं हैं तो, आप बहुत से जरूरी काम नहीं कर पाएंगे.
सरकार की ओर कई वित्तीय लेनदेन की लिस्ट जारी की गई हैं, जहां पर पैन अनिवार्य रूप से जरूरी होगा. आइए जानते हैं, कौन-कौन से काम करने के लिए पैन की आवश्यकता होगी?
सरकार की ओर से जारी कामों की लिस्ट
1. निवेश से जुड़े मामलों में भी PAN कार्ड देना जरूरी होता है. अगर आप म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर या RBI बॉन्ड्स में 50,000 रुपये से ज्यादा का निवेश करते हैं, तो इस प्रक्रिया के दौरान आपको अपना PAN नंबर देना जरूरी हैं.
2. प्रॉपर्टी और शेयर से जुड़े खरीद-बिक्री में भी PAN कार्ड देना अनिवार्य है. अगर आप 10 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदते या बेचते हैं या फिर 1 लाख रुपये से अधिक के अनलिस्टेड शेयरों की डील करते हैं, तो इस दौरान PAN नंबर देना अनिवार्य होता है.
3. बैंकिंग से जुड़े लेनदेन में भी PAN कार्ड जरूरी हो जाता है. अगर आप एक दिन में 50,000 रुपये से अधिक नकद जमा करते हैं या इसी राशि का डिमांड ड्राफ्ट या पे-ऑर्डर बनवाते हैं, तो इस प्रक्रिया के दौरान PAN नंबर देने की जरूरत होती है.&amp;nbsp;
4. नियमों के तहत बैंक और डीमैट अकाउंट खुलवाते वक्त पैन कार्ड लगता है. नया बैंक खाता (बेसिक अकाउंट छोड़कर) या डीमैट अकाउंट खुलवाते समय PAN कार्ड देना होगा.
5. इंश्योरेंस और वॉलेट: साल में 50,000 रुपये से ज्यादा का लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम या डिजिटल वॉलेट में इतना खर्च करने पर PAN कार्ड देना जरूरी है.
6. वाहन खरीद-बिक्री: दोपहिया छोड़कर किसी भी मोटर वाहन की खरीद या बिक्री में PAN कार्ड की आवश्यकता होती है.&amp;nbsp;
7. लग्जरी और ट्रेवल खर्च: होटल/रेस्टोरेंट में 50,000 रुपये से ज्यादा कैश पेमेंट करने पर पैन कार्ड की जरूरत होती है.
पैन कार्ड नियमों में हुआ है बदलाव
पैन कार्ड के नए नियमों के तहत अब पैन कार्ड बनाना आसान नहीं रह गया है. पहले जहां केवल आधार कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट को दिखाकर पैन कार्ड बड़ी आसानी से बन जाता था.
नए नियमों के अनुसार, अब पैन कार्ड बनवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट या वोटर आईडी कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी. सरकार ने यह फैसला पैन कार्ड को और अधिक सुरक्षित करने के लिए उठाया हैं.&amp;nbsp;

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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>PAN, कार्ड, नहीं, होने, से, अटक, जाते, हैं, ये, काम, ध्यान, दें, मेहनत, की, कमाई, न, हो, जाए, बेकार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>500&amp;1000 के पुराने नोट पर RBI लाया नए नियम? क्या है दावे की सच्चाई, सरकार ने खुद बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/500-1000-के-पुराने-नोट-पर-rbi-लाया-नए-नियम-क्या-है-दावे-की-सच्चाई-सरकार-ने-खुद-बताया</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/500-1000-के-पुराने-नोट-पर-rbi-लाया-नए-नियम-क्या-है-दावे-की-सच्चाई-सरकार-ने-खुद-बताया</guid>
        <description><![CDATA[ 500-1000 Notes RBI News: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत का सेंट्रल बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 500 और 1000 के पुराने नोटों को बदलने के लिए नए नियम लेकर आया है. इस दावे को लेकर हर ओर चर्चाएं हो रही हैं. अब पीआईबी ने खुद इस दावे की सच्चाई बताई है.
सबसे पहले जानें दावा क्या है?
सोशल मीडिया पर एक खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है. इस खबर की हेडलाइन है, &#039;&#039;RBI Issues New Rules for old 500 and 1000 notes, know the complete information.&#039;&#039; इतना ही नहीं खबर के साथ आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का फोटा भी लगा है. साथ में पांच सौ के पुराने नोट की तस्वीर भी है.
पीआईबी ने बताई दावे की सच्चाई
पीआईबी ने इस दावे का फैक्ट चेक किया. पीआईबी ने एक्स पर लिखा है, &#039;&#039;यह दावा फ़र्ज़ी है. RBI ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है. वित्तीय नियमों और करेंसी से जुड़ी घोषणाओं के अपडेट के लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट ही एकमात्र भरोसेमंद ज़रिया है.&#039;&#039;

Has RBI really announced &#039;new rules&#039; for exchanging old ₹500 &amp;amp; ₹1000 notes❓Some news reports claim that the Reserve Bank of India (@RBI) has issued new guidelines to exchange discontinued currency notes.#PIBFactCheck❌ This claim is FAKE!❌RBI has made NO such&amp;hellip; pic.twitter.com/8ph2mlCrLT
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) April 17, 2026



इसके सात ही पीआईबी ने जनता से अपील भी की है. पीआईबी ने लिखा है, &#039;&#039;कभी भी बिना जांचे-परखे मैसेज आगे न भेजें. सावधान रहें और सिर्फ़ भरोसेमंद आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी ही शेयर करें. &amp;nbsp;अगर आपको केंद्र सरकार से जुड़ा कोई भी संदिग्ध मैसेज, फ़ोटो या वीडियो मिलता है तो उसे हमें भेजें. &amp;nbsp;हम आपके लिए उसकी जांच करेंगे.&#039;&#039;
भारत में कब बंद हुए थे 500 और 1000 के नोट?
बता दें कि &amp;nbsp;8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब चल रहे ₹500 और एक हजार के नोटों को बंद करने का ऐलान किया था. ये नोटबंदी थी. आरबीआई ने 500 के पुराने नोट के स्थान पर 500 का नया नोट छापा था. वहीं एक हजार के नोट के बदले 2000 का नोट आया था. हालांकि आरबीआई ने 2000 रुपए के नोटों को भी चलन से बाहर करने का फैसला किया था, जिन्हें बदलने या जमा करने की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है. सरकार के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य काले धन पर लगाम लगाना, जाली नोटों के चलन को समाप्त करना और भ्रष्टाचार व आतंकवाद की फंडिंग को रोकना था.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चुपके से US को झटका देकर &amp;apos;धुरंधर&amp;apos; बना भारत, ईरान को चीनी युआन में किया तेल का बड़ा पेमेंट</title>
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        <description><![CDATA[ India-Iran Oil Deal: अमेरिका के प्रतिबंधों से मिली एक महीने की अस्थायी राहत का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनर्स कंपनियों ने ईरान से तेल की खरीदारी की है. सबसे खास बात यह रही कि इस बार भुगतान डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन में किया गया. जो पिछले कई सालों में एक अलग रुख दिखाता है. भारतीय रिफाइनर्स के ईरान से फिर से तेल खरीदने के बीच इस पूरे सौदे में पेमेंट का तरीका सबसे ज्यादा चर्चा में है.&amp;nbsp;
युआन में क्यों की गई डील?
भारत और ईरान के बीच हुए इस सौदे में भुगतान का तरीका सबसे खास रहा. भारतीय कंपनियों ने डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन में पेमेंट की हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस ने ICICI बैंक के जरिए यह भुगतान किया हैं. जिसे बैंक की शंघाई शाखा से प्रोसेस किया गया है. हालांकि, इन विक्रेताओं की पहचान अभी साफ नहीं हो पाई है.
ईरान पर लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते डॉलर में भुगतान करना लगभग संभव नहीं है. ऐसे में अमेरिका की ओर से मिली 30 दिनों की अस्थायी छूट का फायदा उठाने के लिए भारतीय कंपनियों ने चीनी मुद्रा को विकल्प के तौर पर चुना.&amp;nbsp;
भारत को क्या होगा फायदा?
युआन में पेमेंट होने से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत अब ऐसे सौदों में सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहता हैं. देश दूसरे विकल्प भी तलाश रहा हैं. खासकर जब बात प्रतिबंधित देशों से तेल खरीदने की हो. ईरान जैसे देशों से दूसरी मुद्रा में भारत की यह डील नए रास्ते खोल सकता है. &amp;nbsp;
ऐसे कदमों से आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में बदलाव आ सकते हैं. जहां अलग-अलग देशों की करेंसी में लेनदेन का चलन बढ़ सकता है. जिससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में सहायता होगी. &amp;nbsp;
अमेरिका ने दी राहत
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल के दाम तेजी से ऊपर जा रहे थे. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने थोड़ी राहत देने का फैसला लिया हैं. रूसी और ईरानी कच्चा तेल जो पहले से समुद्र में था, उसे खरीदने पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी गई है. जिससे कीमतों को कुछ समय तक कंट्रोल में रखा जा सके.&amp;nbsp;

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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>ईरान ने होर्मुज खोला, अब एक के बाद एक LPG और तेल लेकर भारत पहुंचेंगे जहाज, क्या है लेटेस्ट अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ Iran War LPG Supply India: सीज़फायर के बाद ईरान ने समुद्री व्यापार को लेकर एक अहम घोषणा की है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अब सभी कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया है. ईरान के इस फैसले से भारत ने चैन की सांस ली है. युद्ध शुरू होने के कारण भारत में एलपीजी गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई का संकट शुरू हो गया था, लेकिन अब यह संकट टलता नजर आ रहा है.&amp;nbsp;
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर जानकारी दी कि जब तक युद्धविराम लागू है, तब तक सभी कमर्शियल जहाज सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से बिना किसी रुकावट के गुजर सकेंगे. ईरान ने यह फैसला लेबनान में हाल ही में घोषित 10 दिनों के युद्धविराम के बाद लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने ईरान के इस फैसले का स्वागत किया है और धन्यवाद दिया है.
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई चैन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.इससे वैश्विक व्यापार को मजबूती मिलेगी.
भारत पर क्या असर होगा?
होर्मुज का खुलना भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आता है. अब खाड़ी देशों सऊदी अरब, इराक और यूएई से तेल के टैंकर सीधे भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकेंगे.
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, महीनों के तनाव और ब्लॉकलेड के बाद अब इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही शुरू हो रही है. आज ही खबर आई है कि 50 लाख बैरल तेल लेकर तीन ईरानी टैंकर होर्मुज के रास्ते रवाना हुए हैं, जो सप्लाई चेन के दोबारा सक्रिय होने का संकेत है. इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है.
एलपीजी पर टेंशन खत्म
बता दें कि भारत की एलपीजी यानी रसोई गैस की आधी से ज्यादा सप्लाई होर्मुज के रास्ते आती थी, जो संकट के दौरान गिरकर आधी रह गई थी. रास्ता खुलने से अब कतर और यूएई से आने वाली गैस की कमी दूर होगी, जिससे देश में रसोई गैस की किल्लत और ऊंचे दामों से राहत मिलने की उम्मीद है.
होर्मुज पर ताजा स्थिति क्या है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज में भारत के कुल 15 से 16 जहाज फंसे हुए थे. इनमें मुख्य रूप से एलपीजी और कच्चे तेल के टैंकर शामिल थे. हाल ही में &#039;जग विक्रम&#039;, &#039;ग्रीन साल्वी&#039; और &#039;ग्रीन आशा&#039; जैसे जहाजों ने सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार किया है. अभी भी कुछ जहाज रास्ते में हैं, &amp;nbsp;जिनकी सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना निगरानी कर रही है.
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ट्रंप के &#039;थैंक यू&#039; पोस्ट से बाजार में उछाल, होर्मुज खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी गिरावट ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ईरान, ने, होर्मुज, खोला, अब, एक, के, बाद, एक, LPG, और, तेल, लेकर, भारत, पहुंचेंगे, जहाज, क्या, है, लेटेस्ट, अपडेट</media:keywords>
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        <title>ट्रंप के &amp;apos;थैंक यू&amp;apos; पोस्ट से बाजार में उछाल, होर्मुज खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी गिरावट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ट्रंप-के-थैंक-यू-पोस्ट-से-बाजार-में-उछाल-होर्मुज-खुलते-ही-कच्चे-तेल-की-कीमतों-में-10-की-भारी-गिरावट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ट्रंप-के-थैंक-यू-पोस्ट-से-बाजार-में-उछाल-होर्मुज-खुलते-ही-कच्चे-तेल-की-कीमतों-में-10-की-भारी-गिरावट</guid>
        <description><![CDATA[ Iran Hormuz Open News: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खोल दिया है. इसकी घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट कर की है. समाचार एजेंसी एपी ने बताया है कि ईरान के इस फैसले के तुरंत बाद&amp;nbsp; कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है.
पिछले काफी समय से दुनिया को डर था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से तेल की सप्लाई रुक जाएगी, लेकिन ट्रंप के इस बयान के बाद वो डर कम हो गया है. बाज़ार को अब उम्मीद है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का जल्द ही समाधान निकल जाएगा. अब आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और गिर सकती हैं, जिससे आम आदमी की जेब को बड़ी राहत मिल सकती है.

BREAKING: President Trump and Iran&#039;s foreign minister say the Strait of Hormuz is now fully open. Crude oil prices tumble 10% after the announcements. https://t.co/d44au7X8UP
&amp;mdash; The Associated Press (@AP) April 17, 2026



ईरान के विदेश मंत्री ने क्या बताया?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने &amp;lsquo;एक्स&amp;rsquo; पर एक पोस्ट में लिखा है, &amp;lsquo;&amp;lsquo;लेबनान में हुए सीजफायर के मद्देनजर, होर्मुज से होकर गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह से खुला घोषित किया गया है.&amp;rsquo;&amp;rsquo;
 आपूर्ति में रुकावटों को लेकर कम हुई चिंता&amp;nbsp;
तेल के दामों में गिरावट के बाद चॉइस ब्रोकिंग में तकनीकी शोध विभाग (जिंस) की कावेरी मोरे ने कहा है, &amp;lsquo;&amp;lsquo;डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर उम्मीद जताने के बाद कच्चा तेल वायदा कीमतों में गिरावट आई, जिससे लंबे समय से आपूर्ति में रुकावटों को लेकर चिंता कम हुई है.&#039;&#039;&amp;nbsp;
ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और &amp;lsquo;मुफ्त तेल&amp;rsquo; देने जैसी शर्तें मान सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में पश्चिम एशिया में संघर्ष का जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद जगने से कच्चा तेल वायदा भाव नीचे आ गया है.&amp;nbsp;
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&#039;राष्ट्रीय हित&#039; पहले, भारत का बड़ा एलान, US की पाबंदी के बावजूद नहीं रुकेगा रूसी तेल, जारी रहेगी खरीद ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ट्रंप, के, थैंक, यू, पोस्ट, से, बाजार, में, उछाल, होर्मुज, खुलते, ही, कच्चे, तेल, की, कीमतों, में, 10, की, भारी, गिरावट</media:keywords>
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        <title>महंगा होगा सोना, इम्पोर्ट पर लगी रोक, कस्टम में फंसा 5 टन सोना&amp;8 टन चांदी, बैंकों ने रोके नए ऑर्डर</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price: अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को है, ऐसे में पिछले कुछ दिनों से सोने और चांदी के बाजारों में काफी रौनक देखी जा रही है. इसी बीच भारत में सोने और चांदी के आयात को लेकर भी एक बड़ा अपडेट सामने आ रहा है. खबरें हैं कि सोने और चांदी के आयात पर इस समय भारत ने रोक लगा दी है. इस खबर से अक्षय तृतीया का पर्व संकट में पड़ता नजर आ रहा है.
कस्टम में फंसा है सोना- चांदीदरअसल भारतीय बैंकों ने विदेशों से मंगाया जाने वाला सोना और चांदी के ऑर्डर पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है. ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार की तरफ से इसे लेकर देरी की जा रही है. इससे घरेलू बाजार के साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा. सरकार की तरफ से आदेश फिलहाल लंबित है जिसकी वजह से 5 टन सोना और 8 टन चांदी कस्टम में फंसी हुई है.&amp;nbsp;
वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असरइस रोक केकारण वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी के बाजारों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. भारत सोने- चांदी का एक बड़ा और प्रमुख उपभोक्ता है, ऐसे में यहां से मांग की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें गिर सकती हैं. हालांकि, इससे भारत के ट्रेड घाटे को कम करने और रुपये को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है. जो इस वर्ष एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक रहा है.
क्यों रोका गया इम्पोर्ट?वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) आमतौर पर हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में एक आदेश जारी करता है. इस आदेश में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सोने और चांदी के आयात के लिए ऑथराइज्ड बैंकों की लिस्ट होती है. इससे पहेल साल 2025 में ऐसा ही आदेश जारी किया गया था, जो 31 मार्च 2026 तक वेलिड था. बैंक अब डीजीएफटी के नए निर्देश का इंतजार कर रहे हैं.
अक्षय तृतीया पर संकटइस आयात रुकने और सोना-चांदी के फंसे होने के चलते अक्षय तृतीया पर भारी संकट मंडरा रहा है. ऐसी ही स्थिति बनी रही तो अक्षय तृतीया पर इन दोनों ही धातुओं की कीमतें बढ़ जाएगी, जिससे बाजार पर तो दबाव पड़ेगा ही, साथ ही साथ लोगों की जेब पर भी असर पड़ेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 07:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG बुकिंग पर घटा वेटिंग टाइम, एजेंसियों ने बढ़ाई डिलीवरी स्पीड, सप्लाई चैन में सुधार से ग्राहकों को फायदा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-बुकिंग-पर-घटा-वेटिंग-टाइम-एजेंसियों-ने-बढ़ाई-डिलीवरी-स्पीड-सप्लाई-चैन-में-सुधार-से-ग्राहकों-को-फायदा</link>
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        <description><![CDATA[ LPG Booking News: ईरान- यूएस वॉर के बीच भारत में कच्चे तेल और एलपीजी गैस की किल्लत चल रही थी. जो अब धीरे- धीरे करके ठीक होने लगी हैं. इसी बीच अब गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. बीते कई दिनों से ग्राहकों को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बाद भी बहुत देरी से सिलेंडर मिल पा रहे थे. लेकिन अब एजेंसियों ने सप्लाई चैन में सुधार करने का मन बना लिया है. अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
डिलीवरी प्रक्रिया में हो रहा सुधारहाल ही में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, &#039;फिलहाल रोज की बुकिंग 46-50 लाख के बीच है. डिलीवरी सामान्य है. 16 अप्रैल को लगभग 50 लाख रिफिल सिलेंडर उपभोक्ताओं के घर-घर पहुंचाए गए. आंकड़े धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने की ओर अग्रसर हैं.&#039; आगे उन्होंने ये भी कहा कि गर्मी के मौसम की शुरुआत से भी इसमें मदद मिल रही है, क्योंकि इस दौरान हीटिंग की जरूरत कम हो जाती है.
सामान्य है आपूर्तिउन्होंने बताया कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और डिस्ट्रिब्यूटर्स केंद्रों पर किसी भी तरह की कमी की सूचना नहीं मिली है. कुल मांग का लगभग 98 प्रतिशत ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से पूरा हुआ है और अवैध आपूर्ति को रोकने के लिए प्रमाणित डिलीवरी बढ़कर 90 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है. प्रवासी श्रमिकों के लिए छोटे सिलेंडरों का ज्यादा आवंटन और सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने डिलीवरी अभियानों का विस्तार जैसे टारगेटेड मेजर्स के समर्थन से कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति संकट-पूर्व स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक बहाल कर दी गई है.
उन्होंने ये भी बताया कि 23 मार्च से अब तक 16.41 लाख से ज्यादा बाजार मूल्य वाले 5 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर उन लोगों को बेचे जा चुके हैं जिनके पास घरेलू खाना पकाने के गैस कनेक्शन नहीं हैं. इनमें प्रवासी मजदूर, छात्र, वर्किंग प्रोफेशनल्स और छोटे व्यवसाय शामिल हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, बुकिंग, पर, घटा, वेटिंग, टाइम, एजेंसियों, ने, बढ़ाई, डिलीवरी, स्पीड, सप्लाई, चैन, में, सुधार, से, ग्राहकों, को, फायदा</media:keywords>
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        <title>Share Market: लाल से हरा हुआ शेयर बाजार, गिरावट के बाद तेजी से की रिकवरी; सेंसेक्स&amp;निफ्टी दोनों उछले</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/share-market-लाल-से-हरा-हुआ-शेयर-बाजार-गिरावट-के-बाद-तेजी-से-की-रिकवरी-सेंसेक्स-निफ्टी-दोनों-उछले</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/share-market-लाल-से-हरा-हुआ-शेयर-बाजार-गिरावट-के-बाद-तेजी-से-की-रिकवरी-सेंसेक्स-निफ्टी-दोनों-उछले</guid>
        <description><![CDATA[ Share Market Today on April 17: घरेलू शेयर बाजार अभी हरे निशान पर है. कारोबार की शुरुआत भले ही गिरावट के साथ हुई, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद दोनों बेंचमार्क इंडेक्स- सेंसेक्स और निफ्टी पटरी पर लौट आए हैं. 154 अंकों की तेजी के साथ सेंसेक्स 78142 पर पहुंच गया है. वहीं, निफ्टी 16 अंक चढ़कर 24216 पर कारोबार करता नजर आ रहा है.&amp;nbsp;
आज हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी. इस दौरान सेंसेक्स 12 बंक लुढ़ककर 77976 पर खुला. वहीं, निफ्टी भी 30 अंक नीचे 24166 के लेवल पर कारोबार की शुरुआत की.
बीते गुरुवार को सेंसेक्स 122.56 अंक या 0.16 परसेंट की गिरावट के साथ 77988.68 पर बंद हुआ. इसी तरह से निफ्टी भी 34.55 अंक या 0.14 परसेंट के नुकसान के साथ 24196.76 पर बंद हुआ. इस दौरान बैंक निफ्टी में भी गिरावट दर्ज की गई, जो 215.55 अंक गिरकर 56086.40 के स्तर पर बंद हुआ.
एशियाई बाजार
आज एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल है. निवेशकों को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के नतीजों का इंतजार है. शुक्रवार को कारोबार के दौरान जापान का निक्केई 225 लगभग 1 परसेंट की गिरावट के साथ 58930.987 के लेवल पर कारोबार कर रहा है. हांगकांग का हैंग सेंग भी 0.69 परसेंट टूटकर 26,210 पर खुला. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.4 परसेंट लुढ़कर 6204.25 और ऑस्ट्रेलिया का S&amp;amp;P/ASX 200 भी 0.3 परसेंट नीचे आकर 8919.70 पर है. इनमें से सिर्फ चीन का शंघाई कम्पोजिट मामूली बढ़त के साथ 4055 के आसपास स्थर बना हुआ है.&amp;nbsp;
वॉल स्ट्रीट का हाल&amp;nbsp;
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुए. S&amp;amp;P 500 0.26 परसेंट की बढ़त के साथ 7041.28 पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq 0.36 परसेंट की उछाल के साथ 24,102.70 पर सेटल हुआ. Dow Jones Industrial Average में भी बढ़त देखने को मिली, जो 115 अंक या 0.24 परसेंट उछलकर 48578.72 पर बंद होने में कामयाब रहा.&amp;nbsp;
कच्चे तेल की कीमतें
शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.4 परसेंट गिरकर 93.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 1 परसेंट की गिरावट के साथ 98.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
अमेरिकी डॉलर&amp;nbsp;
US डॉलर इंडेक्स (DXY)शुक्रवार सुबह 0.01 परसेंट बढ़कर 98.21 पर ट्रेड करता नजर आया. यह इंडेक्स प्रमुख मुद्राओं की तुलना में US डॉलर की मजबूती या कमजोरी का मूल्यांकन करता है. इस बास्केट में ब्रिटिश पाउंड, यूरो, स्वीडिश क्रोना, जापानी येन, स्विस फ्रैंक आदि जैसी करेंसीज शामिल हैं.&amp;nbsp;
पश्चिम एशिया में तनाव में कमी
रिपोर्टों के मुताबिक, एक तरफ इजरायल और लेबनान 10 दिनों के संघर्ष-विराम पर सहमत हो गए हैं. वहीं, दूसरी तरफ ईरान ने कहा है कि इजरायली हमलों को रोकना अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी बातचीत के लिए जरूरी है. चूंकि, मौजूदा संघर्ष विराम 21 अप्रैल को खत्म हो रहा है इसलिए अगले हफ्ते तक नई बातचीत शुरू हो सकती है. ट्रंप ने तो यह तक कह दिया है कि जंग खत्म होने के करीब है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Market:, लाल, से, हरा, हुआ, शेयर, बाजार, गिरावट, के, बाद, तेजी, से, की, रिकवरी, सेंसेक्स-निफ्टी, दोनों, उछले</media:keywords>
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        <title>एशिया छोड़ो, यूरोप भी बर्बाद! बस 6 हफ्ते का बचा जेट फ्यूल, ईरान युद्ध के बाद सबसे बड़ा संकट</title>
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        <description><![CDATA[ Europe Fuel Crisis: ईरान जंग के बीच अब वैश्विक ऊर्जा आसमान तक पहुंच चुका है, जिससे हवाई यात्रा पर खतरा गहराने लगा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IAE) ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास शायद अब सिर्फ छह हफ्तों का जेट फ्यूल बचा है. इसी बीच अगर मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई का बड़ा हिस्सा जल्द पूरा नहीं किया गया तो जून तक हालात ज्यादा गंभीर हो जाएंगे.
दरअसल, गल्फ से जेट फ्यूल लाने का अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पिछले छह हफ्तों से बंद है, जिसके चलते सप्लाई पर ज्यादा असर पड़ा है. इसी कारण जेट फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ रही है और कमी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. IEA के प्रमुख फतेह बिरोल के मुताबिक, अगर यही स्थिति जारी रही तो कई उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं.&amp;nbsp;
फ्यूल संकट बढ़ने की आशंका
IEA ने बताया कि यूरोप पहले अपने जेट फ्यूल का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से मंगाता था, लेकिन अब इसी कमी को पूरा करने के लिए यूरोपीय देश अमेरिका और नाइजीरिया जैसे देशों से सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पूरी कमी पूरी नहीं हो पाएगी.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर यूरोप अपने मिडिल ईस्ट आयात का 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं कर पाया तो कुछ एयरपोर्ट्स पर फ्यूल की कमी हो सकती है, जिससे उड़ानें रद्द होने लगेंगी. वहीं अगर 75 प्रतिशत तक सप्लाई बदल भी ली जाती है, तब भी अगस्त से पहले दबाव बना रह सकता है. ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि वह एयरलाइंस और फ्यूल सप्लायर्स के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रही है. फिलहाल UK में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है.
यूरोप में 160 उड़ानें रद्द &amp;nbsp;
दूसरी तरफ, एयरलाइंस भी इस संकट से प्रभावित हो रही हैं. जेट फ्यूल की कीमतें अप्रैल में रिकॉर्ड स्तर $1,838 (लगभग 1.53 लाख) प्रति टन तक पहुंच गई थीं, जो पहले करीब $831( लगभग ₹69,000 &amp;ndash; ₹70,000) थीं. इससे एयरलाइंस की लागत बढ़ गई है, क्योंकि फ्यूल उनके खर्च का 20-40 प्रतिशत हिस्सा होता है. कुछ एयरलाइंस ने कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं.
EasyJet को मार्च में ही ईंधन पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा, जबकि KLM ने बढ़ती लागत के चलते अगले महीने यूरोप में 160 उड़ानें रद्द करने का फैसला लिया है. हालांकि, यूरोपीय आयोग का कहना है कि फिलहाल ईंधन की कमी के स्पष्ट संकेत नहीं हैं, लेकिन आने वाले समय में सप्लाई से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एशिया, छोड़ो, यूरोप, भी, बर्बाद, बस, हफ्ते, का, बचा, जेट, फ्यूल, ईरान, युद्ध, के, बाद, सबसे, बड़ा, संकट</media:keywords>
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        <title>Gold&amp;Silver Price: अक्षय तृतीया से पहले गिरा सोने&amp;चांदी का भाव, जानें कितनी कम हुई कीमत? चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today Live: लगातार तीन सेशन तक अपनी बढ़त बनाने के बाद शुक्रवार को सोने ने अपनी बढ़त खो दी है. आज 24K, 22K और 18K सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली. यह गिरावट भारतीय रुपये के शुरुआती कारोबार में मजबूत होने के बीच आई है. हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बुलियन बाजार में इसका रुझान मजबूत बना रहा. आज सोने की कीमत में आई हालिया गिरावट से रिटेल आभूषण खरीदारों और निवेशकों के लिए राहत की बात है क्योंकि 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया से पहले सोने की कीमत घटने से पैसों की अच्छी-खासी बचत होगी.
सोने की कितनी कम हुई कीमत?&amp;nbsp;
बता दें कि आज देश में 24 कैरेट सोने की कीमत 137 रुपये प्रति ग्राम गिरकर 15,420 रुपये प्रति ग्राम हो गई है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने का रेट 125 रुपये प्रति ग्राम घटकर 14,135 रुपये प्रति ग्राम रह गई है. 18 कैरेट सोने की दर 103 रुपये प्रति ग्राम फिसलकर 11,565 रुपये प्रति ग्राम हो गई. शुक्रवार को सोने की कीमतों में आई गिरावट का मतलब है कि भारत में 24 कैरेट सोने के प्रति 100 ग्राम की कीमत 13,400 रुपये कम होकर 15,42,000 रुपये हो गई.&amp;nbsp;
चांदी में भी आई गिरावट&amp;nbsp;
भारत में शुक्रवार, 17 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई। भारत में चांदी की कीमत 5 रुपये प्रति ग्राम गिरकर 265 रुपये प्रति ग्राम हो गई. इस हिसाब से प्रति किलोग्राम इसमें 5000 रुपये की गिरावट आई है. इसी के साथ देश में अभी चांदी की कीमत 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है. इस साल जनवरी और फरवरी के महीने में काफी उतार-चढ़ाव के बाद चांदी अपने अब तक के सबसे हाई लेवल 4 लाख रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन अगले ही महीने कीमत &amp;nbsp;3 लाख रुपये से नीचे गिर गई.
जहां शुक्रवार को भारत में सोने और चांदी की कीमतें गिरीं, वहीं इन कीमती धातुओं की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें स्थिर रहीं. ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, शुक्रवार 17 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय सोने की कीमत 4,800 डॉलर प्रति औंस के करीब बनी रही. इसी के साथ यह कीमती धातु लगातार चौथे हफ्ते की बढ़त की ओर अग्रसर है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tata Trusts विवाद में आया नया मोड़, मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने कर दी ये डिमांड</title>
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        <description><![CDATA[ Tata Group Row: टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी हिस्सेदार और चैरिटी संस्था टाटा ट्रस्ट्स में विवाद गहराता जा रहा है. दरअसल, पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के प्रशासन में गंभीर गैर-कानूनी कामों का आरोप लगाया है और ट्रस्ट को चलाने के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति की मांग की है.
उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि ट्रस्ट में सबकुछ पारदर्शी तरीके से नहीं चल रहा है. उनका आरोप है कि ट्रस्ट के वर्तमान वरिष्ठ सदस्य नियमों के खिलाफ जाकर काम कर रहे हैं. मिस्त्री ने ट्रस्टी बोर्ड की वैधता पर सवाल उठाया और तर्क दिया कि हाल के दिनों में की गई नियुक्तियां महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 की धारा 30A का उल्लंघन करके की गई थीं. ट्रस्टी बोर्ड में अब नोएल टाटा (चेयरमैन), वेणु श्रीनिवासन (वाइस चेयरमैन), विजय सिंह, डेरियस खंबाटा, भास्कर भट और नेविल टाटा शामिल हैं.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
पिछले साल नवंबर में मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स से ट्रस्टी के तौर पर इस्तीफा दे दिया था. 28 अक्टूबर 2025 को ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर तीन साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन बोर्ड के तीन सदस्यों- नोएल टाटा, वेणू श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इसके खिलाफ वोट दिया था. इसके बाद अपने इस्तीफे पत्र में मिस्त्री ने कहा था कि वह टाटा ट्रस्ट्स की साख को किसी भी सार्वजनिक विवाद में नहीं लाना चाहते हैं.
हालांकि, पद से हटने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 के एक प्रस्ताव के तहत सभी ट्रस्टियों को आजीवन पद पर रहने का अधिकार है. ऐसे में उन्हें हटाया जाना अवैध है. उनके हटने के बाद भास्कर भट और नेविल टाटा की उनकी जगह पर नियुक्ति की गई.
हालांकि, इस महीने की शुरुआत में मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर के पास एक आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन में ट्रस्टी के तौर पर वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की मौजूदगी पर सवाल उठाया था. उन्होंने इसका आधार यह बताया था कि वे पारसी नहीं हैं और न ही मुंबई के निवासी हैं, जैसा कि ट्रस्ट डीड में जरूरी है.
क्या चाहते हैं मिस्त्री?
मिस्त्री चाहते हैं कि ट्रस्ट के मौजूदा बोर्ड को हटाकर एक स्वतंत्र प्रशासक को नियुक्त किया जाए, जो निष्पक्ष होकर ट्रस्ट की जांच करें और उसे चलाए. कुछ ट्रस्टियों का यह भी मानना है कि इस अंदरूनी कलह की वजह से ट्रस्ट की छवि खराब हो रही है. ऐसे में सरकार अपनी तरफ से एक या दो निष्पक्ष सदस्यों को बोर्ड में शामिल करें ताकि बोर्ड की बैठकों में पारदर्शिता आए.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Tata, Trusts, विवाद, में, आया, नया, मोड़, मेहली, मिस्त्री, ने, महाराष्ट्र, चैरिटी, कमिश्नर, के, सामने, कर, दी, ये, डिमांड</media:keywords>
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        <title>दो दिन में 25 परसेंट चढ़े RailTel के शेयर, यूपी पुलिस और RVNL जैसी कंपनियों से मिला 700 करोड़ का ठेका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दो-दिन-में-25-परसेंट-चढ़े-railtel-के-शेयर-यूपी-पुलिस-और-rvnl-जैसी-कंपनियों-से-मिला-700-करोड़-का-ठेका</link>
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        <description><![CDATA[ RailTel Share: देश की नवरत्न पीएसयू कंपनी रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. गुरुवार को कारोबार के दौरान रेलटेक के स्टॉक 5 परसेंट से ज्यादा चढ़कर 353.90 &amp;nbsp;रुपये के अपने हाई लेवल पर पहुंच गए. कंपनी के शेयरों में आई इस तेजी के पीछे कई बड़े ऑर्डर है. रेलटेल को 700 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर मिले हैं. इसी के चलते बीते दो दिनों में इसके शेयर 25 परसेंट तक चढ़ गए.&amp;nbsp;
UP पुलिस से लेकर RVNL तक से मिला ऑर्डर
रेलेटल को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से 44 करोड़ रुपये का एक कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इसके तहत, रेलटेल इस विभाग में भर्ती परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा और डिजिटल निगरानी से जुड़ी सेवाएं प्रदान करेगा. इसे रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) से भी लगभग 564 करोड़ रुपये के दो ऑर्डर मिले हैं.
यह प्रोजेक्ट रेलवे टनल (T8 से T11) में इंटीग्रेटेड टनल कम्युनिकेशन सिस्टम के डिजाइन, सप्लाई और इंस्टॉलेशन से जुड़ा है. कंपनी को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) से भी डिजिटल शिक्षा पहलों के लिए ऑर्डर मिले हैं. इसके तहत, कंपनी को डिजिटल क्लासरूम और ICT लैब डेवलप करने हैं. इन ऑर्डर्स के चलते आज रेलटेल के शेयरों में तूफानी तेजी देखने को मिली है. इन नए ऑडर्स के साथ रेलटेल का ऑर्डरबुक 7200 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है.&amp;nbsp;
माइनिंग सेक्टर में भी बढ़ रही आगे&amp;nbsp;
मुख्य रूप से टेलीकॉम प्रोवाइडर रेलटेल खुद को फिलहाल डिजिटल प्रोवाइडर में बदलने की दिशा में काम कर रही है. कंपनी माइनिंग सेक्टर में भी हाथ आजमा रही है. इसे कोकण डिवीजन के संभागीय आयुक्त से भी 1000 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिल रखा है. इसके तहत, इसका काम यहां सिस्टम इंटीग्रेटर की भूमिका निभाना है. 5 साल लंबे इस प्रोजेक्ट में कंपनी साइट पर &#039;लघु खनिजों&#039; की निगरानी करने के लिए एक इंटीग्रेटेड आईटी सॉल्यूशन डेवलप करना है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;


डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दो, दिन, में, परसेंट, चढ़े, RailTel, के, शेयर, यूपी, पुलिस, और, RVNL, जैसी, कंपनियों, से, मिला, 700, करोड़, का, ठेका</media:keywords>
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        <title>बड़ी खबर: LPG सप्लाई सुधरने में लग सकते हैं 4 साल, सरकारी अधिकारी का दावा, जनता की बढ़ी टेंशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बड़ी-खबर-lpg-सप्लाई-सुधरने-में-लग-सकते-हैं-4-साल-सरकारी-अधिकारी-का-दावा-जनता-की-बढ़ी-टेंशन</link>
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        <description><![CDATA[ LPG Gas Supply in India: ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध के बाद से भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई चैन पर बुरा असर पड़ा है. अब जानकारी सामने आई है कि भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी LPG की सप्लाई बहाल होने में करीब चार साल का वक्त लगेगा. यह बात एक सरकारी अधिकारी ने कही है. हालांकि सरकार की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है कि एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने अंग्रेजी वेबसाइट मनी कंट्रोल से बातचीत में कहा है कि सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल एलपीजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई पर है. कोशिशें की जा रही हैं कि सभी घरों तक एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई जारी रहे और कोई भी कमी होती है तो उसे तुरंत दूर किया जाए.
बंद हो गए बहुत ही ज़रूरी सप्लाई के स्रोत- अधिकारी
अधिकारी ने आगे कहा, &#039;&#039;प्रभावित सप्लायर्स से सरकार लगातार जानकारी ले रही है. इसी जानकारी के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि एलपीजी की सप्लाई पहले की तरह बेहतर होने में अभी तीन से चार साल लग सकते हैं या इससे भी ज्यादा वक्त लगे.&#039;&#039; अधिकारी ने बताया कि कुछ बहुत ही ज़रूरी सप्लाई के स्रोत बंद हो गए हैं, इसलिए यह दिक्कतें आ रही हैं.
अधिकारी ने यह भी कहा, &#039;&#039;स्रोत बंद होने का मतलब अभी साफ नहीं है कि क्या पूरे कुएं खाली हो गए हैं या फिर उत्पादन ही रुक गया है. सप्लायर्स खुद कह रहे हैं कि इसमें कम से कम तीन साल तो लगेंगे ही.&#039;&#039;
अस्थिरता की वजह से सप्लाई में रुकावट
बता दें कि 27 फरवरी को ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद से भारत में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर संकट पैदा हो गया था, जो अभी भी जारी है. हालांकि अब ईरान में सीजफायर लागू है, लेकिन होर्मुज को लेकर लगातार विवाद हो रहा है. इसी अस्थिरता की वजह से एलपीजी गैस की सप्लाई पर खतरा बना हुआ है. होर्मुज के रास्ते से भारत को लगभग 90 फीसदी एलपीजी सप्लाई होती है.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चीन की चाल से ट्रंप को लगेगा झटका, सब लड़ते रहे... ड्रैगन ने GDP ग्रोथ से दुनिया को चौंकाया</title>
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        <description><![CDATA[ China GDP Growth: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से एक ओर तो कई देशों पर दबाव देखने को मिल रहा हैं, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश चीन के हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी चीन की अर्थव्यवस्था ने साल के पहले तीन महीनों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है.
ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान चीन की जीडीपी सालाना आधार पर 5 फीसदी बढ़ी है. विशेषज्ञों ने इसके लिए करीब 4.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. ये मजबूत आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब यूएस-ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.
चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत
बीजिंग ने हाल ही में अपने सालाना जीडीपी का लक्ष्य घटाकर 4.5 फीसदी से 5 फीसदी के बीच तय किया है. जो 1991 के बाद सबसे कम माना जा रहा है. हालांकि, पिछली तिमाही के 4.5 फीसदी की तुलना में कुछ सुधार जरूर देखने को मिल रहा है. &amp;nbsp;
विशेषज्ञ की राय
Brookings Institution के एनालिस्ट Kyle Chan का मानना है कि, देश के लिए कार और दूसरे निर्यात के आंकड़े इस बार सबसे मजबूत पहलू बने हैं.&amp;nbsp;इस ग्रोथ में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका रही है. लेकिन प्रॉपर्टी सेक्टर में अब भी दबाव देखने को मिल रहा है.&amp;nbsp;
Kyle Chan ने ईरान युद्ध और इसके असर पर भी अपनी बात रखी हैं. उनके अनुसार, इस टकराव का असर आने वाले तिमाही नतीजों की जीडीपी पर दिख सकता है. साथ ही उन्होंने अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी धीमी होने की बात भी कही हैं.&amp;nbsp;
ट्रंप टैरिफ को लगा झटका
अमेरिका की ओर से चीन के ज्यादातर सामानों पर फिलहाल 10 फीसदी टैरिफ लगा हुआ है. इसके बावजूद भी चीन की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है.
मजबूत जीडीपी ग्रोथ के ये आंकड़े डोनाल्ड ट्रंप के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं. टैरिफ के दबाव के बाद भी चीन की आर्थिक रफ्तार में आई तेजी देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ को दिखाता है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;

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8वां वेतन आयोग: सैलरी के हिसाब से क्या होगा नया पे-स्केल और कितनी बढ़ेगी रकम? ये रही लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ईरान वॉर से हजारों करोड़ का नुकसान, टूरिज्म&amp;एविएशन पर संकट के बादल, सरकार के सामने उठी ये मांग</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. देश के उद्योगपतियों के संगठन पीएचडीसीसीआई यानी पीएचडी चैंबर ऑफ कोमर्स एंड इंडस्ट्री ने आज एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि इस संघर्ष की वजह से पर्यटन, ऐविएशन और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर को भारी नुकसान हो रहा है.
ऐविएशन को सबसे बड़ा झटका लगा है. मध्य पूर्व का एयरस्पेस बंद होने और फ्लाइट्स रूट्स बदलने की वजह से फ्लाइट्स 2 से 4 घंटे लंबी हो गई हैं. इससे ईंधन की खपत और एयरलाइंस का खर्च काफी बढ़ गया है. पहले से ही एयरलाइंस के कुल खर्च का 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा ईधन का था और अब यह बोझ और भी भारी हो गया है.
विदेशी पर्यटकों में गिरावट&amp;nbsp;
विदेशी पर्यटक भारत आने से कतरा रहे हैं. जंग की वजह से दुनियाभर के यात्री घबराए हुए हैं और भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत की गिरावट आई है. इससे पर्यटन उद्योग को Rs. 18,000 करोड़ का नुकसान हुआ है. वहीं भारतीय पर्यटक भी अब दुबई या यूरोप की बजाय थाईलैंड, सिंगापूर और वियतनाम जाना पसंद कर रहे हैं.
रेस्टोरेंट और होटल सेक्टर पर बढ़ा दबाव&amp;nbsp;
रेस्टोरेंट सेक्टर को हर महीने Rs. 79,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है. देश के 10 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं. आयातित सामान, ट्रांसपोर्ट और बिजली महंगी होने से लागत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ी है. सबसे ज़्यादा मार छोटे और मझोले रेस्टोरेंट मालिकों पर पड़ी है हालांकि फूड डिलीवरी से कुछ राहत है कई रेस्टोरेंट की 20 से 30 प्रतिशत कमाई अभी भी से डिलीवरी आ रही है.
होटल अभी टिकी हुई हैं लेकिन दबाव है. घरेलू यात्रा मज़बूत होने की वजह से ऑक्यूपेंसी ठीक है लेकिन जो प्रीमियम और व्यावसायिक होटल विदेशी मेहमानों पर निर्भर हैं उनकी कमाई पर दबाव साफ़ दिख रहा है.
सरकार से राहत की मांग, घरेलू पर्यटन बना सहारा&amp;nbsp;
पीएचडीसीसीआई ने सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं - संगठन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्गों में विविधता किए जाएं और मध्य पूर्व पर निर्भरता कम हो और ऐविएशन ईंधन यानी एटीएफ पर टैक्स घटाया जाए.
इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट पर भी टैक्स का बोझ कम हो. छोटे कारोबारियों को आसान लोन मिले और वीजा प्रोसेस सरल बनाई जाए.
पीएचडीसीसीआई का कहना है कि घरेलू पर्यटन अभी सबसे बड़ा सहारा है. रीवेन्ज ट्रैवल, स्टाइकेशंस और एक्सप्रिएंटियल डाइनिंग जैसे ट्रेंड्स डिमांड को थामे हुए हैं. संगठन का मानना है कि यह संकट एक मौका भी है भारत इससे सीखकर एक मज़बूत और आत्मनिर्भर पर्यटन इकोसिस्टम बना सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>पाकिस्तान के खाली खजाने में आई जान, PAK सेंट्रल बैंक की इस बात से झूम उठेगी &amp;apos;कंगाल&amp;apos; आवाम</title>
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        <description><![CDATA[ Pakistan Saudi Arab News: आखिरकार वो दिन आ गया, जिसका इंतजार पाकिस्तान कई दिनों से कर रहा था. पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की है कि उसे सऊदी अरब से दो अरब अमेरिकी डॉलर मिल गए हैं. यह रकम उस तीन अरब डॉलर की सहायता का ही हिस्सा है, जिसकी घोषणा पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने एक दिन पहले की थी. सऊदी अरब से मिली ये रकम पाकिस्तान के असंतुलित विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है.
पाकिस्तान के लिए सऊदी बना संकट मोचक
दरअसल आर्थिक तंगी और गिरते विदेशी मुद्रा भंडार से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब एक बार फिर &#039;संकटमोचक&#039; बनकर उभरा है. यह वित्तीय सहायता ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आई है जब पाकिस्तान पर विदेशी कर्जों की अदायगी का भारी दबाव है. वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने इस मदद का स्वागत करते हुए इसे देश की स्थिरता के लिए आवश्यक बताया है.
हाल ही में सऊदी गए थे पीएम शरीफ
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हालिया सऊदी अरब यात्रा के दौरान इस सहायता को अंतिम रूप दिया गया. सऊदी अरब ने न केवल यह नई राशि प्रदान की है, बल्कि पाकिस्तान के लिए अपनी 5 अरब डॉलर की पुरानी जमा सुविधा को भी अगले तीन सालों के लिए बढ़ा दिया है. इसके साथ ही सऊदी अरब अब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में कुल 8 अरब डॉलर की राशि रखने वाला सबसे बड़ा निवेशक देश बन गया है.
यह वित्तीय मदद पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि उसे इसी महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मिलेगी मजबूती- विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब से मिले इस फंड से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी साख को कुछ हद तक सहारा मिलेगा. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>20 लाख बैरल तेल लेकर गुजरात पहुंचा ईरानी जहाज, लेकिन भारत ने लेने से किया इनकार, क्या है कारण?</title>
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        <description><![CDATA[ ईरान-यूएस युद्ध के चलते इस समय तेल की किललत चल रही है, इस बीच हाल ही में ईरान से एक तेल का टैंकर करीब 20 लाख बैरेल क्रूड ऑइल लेकर गुजरात पहुंचा, लेकिन इसकी जानकारी किसी को भी नहीं थी. ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का मानना है कि ये तेल के टैंकर इंडियन रिफाइनर्स एक्सेप्ट नहीं करने वाले हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इनके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं हैं, कि इसे किसने खरीदा है? कहां से ये आया है आदि.
क्यों एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा तेल?एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर (VLCC) डेर्या मंगलवार को गुजरात के बंदरगाह पर पहुंचा. Kpler के वेसल ट्रैकिंग डाटा के मुताबिक टैंकर में 28 मार्च को ईरानी कच्चा तेल भरा गया था. इससे ये उस समय सीमा से आगे निकल गया है जो अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट के तहत निर्धारित है और जिसके अनुसार 20 मार्च से पहले टैंकरों में लदे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति है.
20 मार्च को ट्रम्प के एडमिनिस्ट्रेशन ने ग्लोबल आपूर्ति दबाव को कम करने के उद्देश्य से समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देते हुए 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दी थी. अमेरिकी वित्त विभाग के लाइसेंस के अनुसार, इस छूट के तहत 20 मार्च से 19 अप्रैल के बीच जहाजों पर पहले से ही लदे ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी गई है.
इस छूट के तहत, समय सीमा के बाद लोड किए गए माल को एक्सेप्ट करने से खरीदारों पर अमेरिका के द्वारा लगाए गए सेकेंडरी प्रतिबंधों का खतरा हो सकता है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनरियां इस शिपमेंट को नहीं ले सकतीं. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि हालांकि भारत ने हाल ही में छूट के बाद कुछ ईरानी तेल खरीदा है, लेकिन ये शिपमेंट निर्धारित समय सीमा के भीतर ही खरीदी गई थीं.
नहीं बढ़ेगी छूट की अवधिइतना ही नहीं अमेरिका ने ये भी संकेत दिया है कि वो प्रतिबंधों में छूट की समय सीमा नहीं बढ़ाएगा. सोमवार को, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत सफल नहीं रही, जिसके बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक डेर्या टैंकर के लिए चीन के अलावा और कोई भी खरीदार मिलना मुश्किल हो सकता है. ग्लोबल शिपिंग डेटाबेस के अनुसार, ये टैंकर अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित है और ईरान की नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी इन्हें चला रही है.&amp;nbsp;
Keplr की मरीनट्रैफिक सेवा के आंकड़ों से पता चला है कि बुधवार दोपहर तक ये जहाज गुजरात के पास ही रहा और आने के बाद से इसमें बहुत कम हलचल हुई है. अमेरिका द्वारा छूट दिए जाने के बाद, हाल के दिनों में कम से कम दो ईरानी तेल ले जाने वाले टैंकर और एक लिक्विड पेट्रोलियम गैस ले जाने वाला टैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे हैं, जो लगभग सात सालों में ईरान से भारत के लिए पहली बाद ही आए होंगे.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>क्या UPI ट्रांजेक्शन बिगाड़ सकते हैं आपका सिबिल स्कोर? डिजिटल पेमेंट करने वाले जरूर पढ़ें यह खबर</title>
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        <description><![CDATA[ UPI और डिजिटल पेमेंट्स पर हम इतने निर्भर हो गए हैं कि कैश रखना ही छोड़ दिया है. अब कहीं जाने के लिए कार्ड या कैश की जरूरत ही नहीं होती है. केवल अपना फोन उठाया और जहां जाना है चलते बने, क्योंकि अब इंडिया केवल इंडिया नहीं बल्कि डिजिटल इंडिया जो बन गया है. बड़े- बड़े शोरूम्स से लेकर छोटे हाथ ठेले और रिक्शा वाले तक यूपीआई के जरिए पेमेंट ले पा रहे हैं. लेकिन क्या आपके दिमाग में भी ये सवाल घूमता है कि यूपीआई पमेंट्स की वजह से आपका सिविल स्कोर खराब हो रहा है? अगर हां, तो आइये देते हैं आपको इस सवाल का जवाब.
क्या UPI पेमेंट्स से पड़ता है CIBIL स्कोर पर फर्क?जब भी आप किसी लोन के लिए अप्लाय करते हैं, खासतौर से पर्सनल लोन या कोई अनसेक्योर्ड लोन के लिए, तब लेंडर्स आपका सिर्फ क्रेडिट स्कोर नहीं देखते हैं. बल्कि वो और भी गहराई से जांच करते हुए बैंक स्टेटमेंट पर भी नजर रखते हैं कि आप किस तरह से अपने पैसों का मैनेजमेंट करते हैं. यहीं पर आपकी डिजिटल पेमेंट्स भी नजर आती हैं. ऐसे में ये सीधे तौर पर तो आपके CIBIL स्कोर पर कोई असर नहीं डालती हैं.
जीरो बैलेंस कर सकता है दिक्कतलोन देने वाले हमेशा आपके अकाउंट को जब गहराई से देखते हैं तो उन्हें आपका एक साइकल नजर आता है. जिसमें आपके अकाउंट में एक पर्टिकुलर तारीख पर सैलरी आती है, उसके बाद आप बिल्स भरते हैं पेमेंट्स करते हैं. तब ये लेंडर्स देखते हैं कि आपके खाते में फ्रीक्वेंटली जीरो बैलेंस तो नहीं बना है, या आपके पैसे आते ही खर्च हो जाते हैं. ये सभी बातें थोड़ा सा ध्यान लेंडर्स का अपनी ओर खींचती हैं. हालांकि ये डाटा आपके स्कोर को तो इफैक्ट नहीं करता लेकिन इसे देखकर लेंडर्स अपना डिसीजन बदल सकते हैं.
क्या मायने रखता है क्रेडिट स्कोर?CIBIL या क्रेडिट स्कोर पर UPI का डायरेक्टली तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. यूपीआई पेमेंट्स आप कितनी भी कर लें, इससे ना आपका क्रेडिट स्कोर कम होगा ना ही बढ़ेगा. हां लेकिन आपकी ट्रांसेक्शन हिस्ट्री आपके बारे में बहुत कुछ बताती है. इससे लोन देने वाले इस बात का अंदाजा लगा लेते हैं कि आप लोन चुका पाएंगे कि नहीं या फिर आपकी ब्याज दर पर भी इसका फर्क पड़ता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Snapchat News: स्नैपचैट पर छंटनी की गाज, सैंकड़ों नौकरियां खत्म, कंपनी क्यों कम कर रही है स्टॉफ?</title>
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        <description><![CDATA[ Snapchat Layoff: बुधवार को स्नैप के शेयरों उछाल देखा गया है, इसी बीच कंपनी ने अपने स्टॉफ को कम करने का भी मन बना लिया है. खबरें हैं कि कंपनी जल्दी ही अपेन स्टॉफ में से कुछ लोगों की छंटनी करने वाली है. ये नौकरियां AI की वजह से जा रही हैं. कंपनी ने हाल ही में अपने 16 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करने की घोषणा भी कर दी है.
कंपनी के सीईओ ने लिखा लेटरदरअसल बुधवार को स्नैप कंपनी के शेयरों में लगभग 7% की उछाल देखी गई. जब कंपनी ने एआई-ड्रिवन एफिशिएंसी का हवाला देते हुए ग्लोबली अपने कर्मचारियों में 16% तक की कटौती प्लान कर ली है. सीईओ इवान स्पीगल ने कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में कहा कि इस कटौती से लगभग 1,000 कर्मचारी प्रभावित होंगे और कम से कम 300 खाली पड़े पदों को भी बंद किया जाएगा.
AI बना कर्मचारियों के लिए दुश्मनअपने कर्मचारियों को लिखे पत्र में स्पीगल ने बताया, &#039;पिछली बार मैंने बताया था कि स्नैप एक निर्णायक दौर से गुजर रही है, जिसमें एक नए, तेज और ज्यादा कुशल कार्यप्रणाली की ज़रूरत है, साथ ही प्रोफिटेबल ग्रोथ की ओर बढ़ना भी ज़रूरी है. हमारा मानना ​​है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में हो रही तेजी से प्रगति हमारी टीमों को दोहराव वाले कामों को कम करने, गति बढ़ाने और हमारी कम्युनिटी, पार्टनर्स और एडवर्टाइजर्स को बेहतर सपोर्ट देने में सक्षम बनाती है.&#039;
उन्होंने आगे लिखा, &#039;हमने पहले ही देखा है कि छोटी टीमें एआई उपकरणों का उपयोग करके कई महत्वपूर्ण पहलों में सार्थक प्रगति कर रही है, जिनमें स्नैपचैट+, विज्ञापन प्लेटफॉर्म के बेहतर प्रदर्शन और हमारे स्नैप लाइट इंफ्रास्ट्रक्चर में एफिशिएंटली सुधार शामिल हैं&#039;.
कर्मचारियों को मिलेगा चार महीने का वेतनकंपनी का कहना है कि ये फैसले उनके लिए भी मुश्किल हैं, लेकिन भविष्य को देखते हुए ये फैसला भी जरूरी है. कंपनी ने ये भी कहा है कि जिन कर्मचारियों को निकाला जा रहा है, उनके सपोर्ट में कंपनी पूरी तरह से है. कर्मचारियों को चार महीने का वेतन, हेल्थ इंश्योरेंस, इक्विटी वेस्टिंग और करियर ट्रांजिशन सपोर्ट दिया जाएगा. स्पीगल ने कहा कि छंटनी से कंपनी की सालाना लागत में 2026 की दूसरी छमाही तक 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आएगी. स्नैप ने पहली तिमाही के लिए 1.5 बिलियन डॉलर के रेवेन्यू का अनुमान लगाया है, जो वार्षिक आधार पर 12% की वृद्धि है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>आधार कार्ड पर ₹3 लाख का लोन? सावधान! कहीं आप भी तो नहीं हो रहे इस बड़े घोटाले का शिकार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आधार-कार्ड-पर-3-लाख-का-लोन-सावधान-कहीं-आप-भी-तो-नहीं-हो-रहे-इस-बड़े-घोटाले-का-शिकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आधार-कार्ड-पर-3-लाख-का-लोन-सावधान-कहीं-आप-भी-तो-नहीं-हो-रहे-इस-बड़े-घोटाले-का-शिकार</guid>
        <description><![CDATA[ PM Yojna Loan Fraud: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक नया स्कैम तेजी से वायरल हो रहा है. यूट्यूब, इंस्टाग्राम, जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दावा किया जा रहा है कि PM लोन योजना के तहत लोगों को आधार कार्ड पर 3 लाख रुपये का लोन मिल रहा है. क्या आप भी ऐसे किसी दावों की चपेट में आ रहे हैं? तो ऐसी गलती बिलकुल भी ना करें, क्योंकि ये एक स्कैम है, जिसमें आप भी फंस सकते हैं.
क्या है पूरा मामला?दरअसल इस स्कैम में दावा किया जा रहा है कि किसी &#039;प्रधानमंत्री लोन योजना&#039; के तहत सिर्फ आधार कार्ड के जरिए 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. कई मामलों में लोगों को ये भी कहा जाता है कि लोन पाने के लिए पहले एक छोटी रकम जमा करनी होगी. ये रकम प्रोसेसिंग फीस या इंश्योरेंस चार्ज के रूप में आपसे ली जाएगी. &amp;nbsp;हालांकि, सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी ने साफ किया है कि ऐसी कोई आधिकारिक योजना नहीं है. यानी आधार कार्ड पर तुरंत 3 लाख लोन का दावा पूरी तरह फर्जी है.
कैसे रहें सुरक्षित?

किसी भी &#039;तुरंत लोन&#039; वाले ऑफर पर भरोसा न करें.
बिना जांच किए आधार या बैंक डिटेल शेयर न करें.
किसी भी सरकारी योजना की जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही लें.
अगर कोई पहले पैसे मांगता है, तो समझ लें कि ये स्कैम हो सकता है.
किसी भी अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड करने से बचें.

आपको बता दें कि सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन जरूर मिलता है, लेकिन ये सीधे आधार कार्ड पर नहीं दिया जाता है. इसके लिए बैंक या NBFC के जरिए आवेदन करना होता है और पात्रता के लिए दावेदारी करना होती है. जिसके लिए आपको अपने दस्तावेज और क्रेडिट प्रोफाइल के बारे में बताना होता है, जिसकी अधिकारी जांच करते हैं, इसके बाद ही ये लोन आपको मिलता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आधार, कार्ड, पर, ₹3, लाख, का, लोन, सावधान, कहीं, आप, भी, तो, नहीं, हो, रहे, इस, बड़े, घोटाले, का, शिकार</media:keywords>
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        <title>भारत पर टूटेगा दुखों का पहाड़, ईरान युद्ध से बढ़ेगी गरीबी! 25 लाख लोगों पर मंडराया संकट</title>
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        <description><![CDATA[ India Poverty Report: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए बुरी खबर सामने आ रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वैश्विक संकट से भारत में करीब 25 लाख लोग गरीबी के जाल में फंस सकते हैं. साथ ही मानव विकास की गति में रूकावट और अन्य नुकसानों का भी सामना करना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
संयुक्त राष्ट्र की संस्था संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने अपनी रिपोर्ट में इन बातों का खुलासा किया हैं. आइए जानते हैं, भारत पर इस युद्ध का क्या असर पड़ने वाला है?
25 लाख लोगों पर संकट के बादल
यूएनडीपी की ताजा रिपोर्ट में संकेत दिया गया हैं कि दुनिया भर में करीब 88 लाख लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं. रिपोर्ट यह भी बताती है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य खर्च और लगातार बने तनाव का असर केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
अनुमान के मुताबिक करीब 299 अरब अमेरिकी डॉलर के नुकसान की संभावना है. भारत को लेकर रिपोर्ट में कहा गया हैं कि, देश में गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग 4 लाख से बढ़कर 25 लाख तक पहुंच सकती हैं.
गरीबी दर में भी इजाफा&amp;nbsp;
रिपोर्ट में देश की गरीबी दर को लेकर भी बातें कही गई हैं. भारत की गरीबी दर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 फीसदी तक जा सकती है. इसके चलते करीब 24,64,698 अतिरिक्त लोग गरीबी के दायरे में आ सकते हैं. साथ ही, अनुमान यह भी है कि इस संकट के बाद देश में कुल लगभग 35,40,33,698 लोग गरीबी में जीवन बिता सकते हैं. इससे पहले यह आंकड़ा 35,15,69,000 बताया गया था.
मिडिल ईस्ट पर देश की निर्भरता
यूएनडीपी की रिपोर्ट में देश की मिडिल ईस्ट पर निर्भरता की बात भी बताई गई हैं. रिपोर्ट के अनुसार देश अपनी तेल जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है. इनमें से 40 फीसदी कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी पश्चिम एशिया के देशों से आता है. साथ ही मिडिल ईस्ट से ही 45 प्रतिशत से ज्यादा उर्वरक की आपूर्ति होती है. इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि, देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किस हद तक मिडिल ईस्ट देशों पर निर्भर हैं. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, पर, टूटेगा, दुखों, का, पहाड़, ईरान, युद्ध, से, बढ़ेगी, गरीबी, लाख, लोगों, पर, मंडराया, संकट</media:keywords>
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        <title>TCS Nashik News: जरूरतमंदों को बनाया शिकार, यौन शोषण और टारगेटेड धर्मांतरण के सनसनीखेज आरोप</title>
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        <description><![CDATA[ TCS Nashik Case: टीसीएस की नासिक ब्रांच से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है, जिसमें कुछ गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आरोपों के अनुसार धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां, यौन शोषण और धर्मांतरण जैसी बातें सामने आ रही हैं. फिलहाल यह पूरा मामला सुर्खियों में है और इस पर कई सवाल उठ रहे हैं. पुलिस अपनी जांच में जुटी हुई है.
जांच में सामने आ रही गंभीर बातें
पुलिस सूत्रों के अनुसार शिकायत करने वालों ने एक ऐसे नेटवर्क की जानकारी दी है, जिसमें कुछ सीनियर स्टाफ और एक HR मैनेजर शामिल बताए गए हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ट्रेनिंग टीम का हिस्सा थे और नए जॉइन करने वाले कर्मचारियों की पूरी जानकारी उनके पास होती थी.&amp;nbsp;
इसी जानकारी के आधार पर वे ऐसे लोगों को चुनते थे जिन्हें पैसों की दिक्कत है या फिर उनके परिवार में किसी तरह का विवाद चल रहा हो. जांच में सामने आए इन तथ्यों के बाद पूरा मामला और गंभीर माना जा रहा है.
ऐसे दिया जाता था प्लान को अंजाम&amp;nbsp;
जांच में पता चला है कि, ट्रेनिंग सेशन के दौरान हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कही जाती थी. जब इन बातों को लेकर कोई कर्मचारी आहत होता तो कथित आरोपी HR मैनेजर निदा खान उनसे संपर्क कर उनका भरोसा जीतने की कोशिश करती थी.
जांच एजेंसियों का कहना है कि धीरे-धीरे उस व्यक्ति पर अपनी सोच, जीवनशैली और पहनावे में बदलाव लाने का दबाव बनाया जाता था. एक मामला तो ऐसा भी सामने आया कि महिला इन बातों से इतनी प्रभावित हुई कि उसने अपने फैमिली से लड़ाई कर ली और घर में रखी हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों को हटा दिया. &amp;nbsp;इस मामले में अब तक सात लोगों को हिरासत में लिया गया है. जिनमें आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्ता शामिल है.&amp;nbsp;
व्हाट्सऐप ग्रुप से मिले संकेत
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी कथित तौर पर एक व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए &amp;lsquo;टारगेट्स&amp;rsquo; को लेकर बातचीत करते थे. सूत्रों के मुताबिक, इस ग्रुप में सिर्फ लोगों की पहचान ही नहीं, बल्कि धार्मिक विचारों और कंपनी के भीतर चल रही चीजों पर भी चर्चा होती थी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8वें वेतन आयोग का बड़ा अपडेट, न्यूनतम वेतन 69000 करने की मांग, सालाना 6% इंक्रीमेंट का प्रस्ताव, अड़ीं यूनियन</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सुगबुगाहट तेज है. वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विभिन्न शहरों में हितधारकों के साथ बातचीत का शेड्यूल भी जारी किया गया है. इसके तहत, दिल्ली, पुणे, देहरादून जैसे तमाम शहरों में बैठके आयोजित की जा रही हैं.
नेशनल काउंसिल- ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) केकर्मचारी पक्ष ने बीते 14 अप्रैल को 51-पन्नों का अपना अंतिम ज्ञापन सौंपा. इसमें मिनिमम बेसिक सैलरी को 18000 से बढ़ाकर 69000 करने और एनुअल इंक्रीमेंट को 3 परसेंट से बढ़ाकर 6 परसेंट तक करने जैसी मांगे शामिल हैं. CNBC TV-18 की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मांग 8वें वेतन आयोग में 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की भी है. यह एक ऐसा पैमाना है जिसका उपयोग वेतन संशोधन के लिए किया जाता रहा है.&amp;nbsp;
18000 में अब नहीं हो रहा गुजारा
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग 5-सदस्यों के परिवार को ध्यान में रखकर की गई है. मौजूदा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के मुताबिक, 18000 (7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन) अब एक औसत परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, खानपान, पहनने-ओढ़ने व रहने पर खर्च बढ़ा है. यही वजह है कि 3.83 फिटमेंट फैक्टर रखने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि वेतन और महंगाई के बीच अंतर को पाटने में मदद मिल सके.&amp;nbsp;
कब से बढ़कर मिलेगी सैलरी?
सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 में किया था. इसे अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया. आयोग का कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा रहा है, लेकिन सैलरी में हुई वृद्धि और एरियर का भुगतान 2027 की शुरुआत में ही किए जाने की संभावना है.&amp;nbsp;
कर्मचारी यूनियनों की ये भी मांगें
सभी मांगों में से एक प्रमुख मांग HRA (मकान किराया भत्ता) की संरचना में संशोधन करना भी है. HRA के स्लैब को बढ़ाकर शहरों के आधार पर 30%, 35% और 40% करने का सुझाव दिया गया है. शहरों को X ( 40%), Y (35%) Z (30%) की कैटेगरी में बांटा गया है. यह मांग इसलिए की गई है ताकि कर्मचारी का न्यूनतम HRA एक निश्चित राशि से कम न हो ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों को भी ठीकठाक आवास मिल सके.
इसके अलावा, यूनियनों की मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और पेंशन की राशि कर्मचारी के अंतिम आहरित मूल वेतन (Last Drawn Salary Pay) का 67 परसेंट होने की भी है. वर्तमान व्यवस्था में यह लिमिट 50 परसेंट है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8वें, वेतन, आयोग, का, बड़ा, अपडेट, न्यूनतम, वेतन, 69000, करने, की, मांग, सालाना, इंक्रीमेंट, का, प्रस्ताव, अड़ीं, यूनियन</media:keywords>
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        <title>बैंक FD या स्मॉल सेविंग्स? 2026 में निवेश के लिए कौनसा विकल्प है सबसे दमदार? जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ Bank FDs VS Small Savings Schemes: आजकल महंगाई दर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते काफी लोग अब अपने और अपने परिवार के फ्यूचर के लिए सेविंग करना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि कब, कौन-सी इमरजेंसी आ जाए कुछ नहीं पता होता. ऐसे में लोग अपने पैसों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ अच्छा रिटर्न भी चाहते हैं. बैंक FD और स्मॉल सेविंग्स योजनाएं दो सबसे लोकप्रिय ऑप्शन बनकर सामने आते हैं, लेकिन दोनों के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं, इसलिए लोगों को सही ऑप्शन का चुनाव करना चाहिए.
सबसे जरूरी बात यह है कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही में सरकार ने स्मॉल सेविंग्स योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है तो वहीं बैंक FD की दरें लगभग 6.25 प्रतिशत से 6.66 प्रतिशत के बीच हैं, जबकि स्मॉल सेविंग्स योजनाएं अब भी 8.2 प्रतिशत तक रिटर्न दे रही हैं. ऐसे में इन्वेस्टर्स के सामने सवाल है कि वे FD की सुविधा चुनें या ज्यादा रिटर्न के लिए सरकारी योजनाओं में इन्वेस्ट करें.
ब्याज दरों में कौन आगे?
अगर रिटर्न की बात करें तो स्मॉल सेविंग्स योजनाएं बैंक FD से बेहतर नजर आती हैं जानिए कैसे?

सुकन्या समृद्धि योजना: 8.2 प्रतिशत
NSC: 7.7 प्रतिशत
किसान विकास पत्र: 7.5 प्रतिशत
मासिक आय योजना: 7.4 प्रतिशत
PPF: 7.1 प्रतिशत
पोस्ट ऑफिस सेविंग: 4 प्रतिशत

वहीं बैंक FD दरें देखी जाए तो

SBI, HDFC, ICICI: 6.25 प्रतिशत
कोटक महिंद्रा: 6.50 प्रतिशत
Yes बैंक: 6.66 &amp;nbsp;प्रतिशत

लॉक-इन और लिक्विडिटी
बता दें कि बैंक FD ज्यादा लचीली होती हैं. आप कम या ज्यादा समय के लिए इन्वेस्ट कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पैसे निकाल भी सकते हैं (पेनल्टी के साथ). अगर वहीं बात करें स्मॉल सेविंग्स योजनाओं का तो इसमें लॉक-इन ज्यादा होता है.

NSC: 5 साल
PPF: 15 साल
सुकन्या योजना: लंबी अवधि (बेटी की उम्र तक)

इसलिए ये योजनाएं लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए बेहतर होती हैं.
टैक्स में किसका फायदा?
स्मॉल सेविंग्स योजनाओं में इन्वेस्ट करने पर धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है. कुछ योजनाओं में ब्याज पर भी टैक्स छूट मिलती है. वहीं दूसरी तरफ, बैंक FD का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है, जिससे असली रिटर्न कम हो सकता है.
कौन ज्यादा सुरक्षित है?
दोनों ही ऑप्शन सुरक्षित माने जाते हैं. स्मॉल सेविंग्स योजनाएं सरकार के समर्थित होती हैं, वहीं जबकि बैंक FD भी बड़ें बैंकों में सुरक्षित रहती हैं. इसलिए जोखिम के मामले में दोनों भरोसेमंद हैं.
क्या दोनों में इन्वेस्ट करना सही है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ एक ऑप्शन चुनने के बजाय दोनों में इन्वेस्ट करना बेहतर होता है. इससे आपको FD से लिक्विडिटी और स्मॉल सेविंग्स योजनाओं से ज्यादा रिटर्न और टैक्स फायदा मिल सकता है.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैंक, या, स्मॉल, सेविंग्स, 2026, में, निवेश, के, लिए, कौनसा, विकल्प, है, सबसे, दमदार, जानिए</media:keywords>
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        <title>फिजिकल गोल्ड vs गोल्ड ETF: खरीदने का कौन सा तरीका है बेस्ट, किससे ज्यादा अमीर बनेंगे आप?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फिजिकल-गोल्ड-vs-गोल्ड-etf-खरीदने-का-कौन-सा-तरीका-है-बेस्ट-किससे-ज्यादा-अमीर-बनेंगे-आप</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/फिजिकल-गोल्ड-vs-गोल्ड-etf-खरीदने-का-कौन-सा-तरीका-है-बेस्ट-किससे-ज्यादा-अमीर-बनेंगे-आप</guid>
        <description><![CDATA[ Gold vs Gold ETF: भारत में ज्यादातर निवेशक आज भी सोने को एक सुरक्षित निवेश के तौर पर देखते हैं. खासकर फिजिकल गोल्ड जैसे ज्वेलरी, सिक्के या बार के तौर पर निवेशक इन पर अपना दांव लगाते हैं. इसके पीछे की वजह सिर्फ निवेश नहीं है बल्कि परंपरा और वर्षों का भरोसा भी फिजिकल गोल्ड को खास बनाता है.&amp;nbsp;
रिटर्न के आंकड़ों की बात करें तो, समय के साथ सोने ने अच्छा रिटर्न दिया है. India Bullion and Jewellers Association के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 सालों में सोने ने करीब 9 से 10 प्रतिशत सालाना और पिछले 10 सालों में लगभग 12 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया है. जिसकी वजह से यह यह लोगों की पसंद बना हुआ है. फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ गोल्ड ईटीएफ भी निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है. आइए जानते हैं, इन दोनों विकल्पों के विषय में.
फिजिकल गोल्ड&amp;nbsp;
फिजिकल गोल्ड खरीदते समय निवेशकों को मेकिंग चार्ज समेत अन्य बातों का ध्यान रखना होता है. कई ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज 25 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. साथ ही इसे सुरक्षित रखना और इसकी शुद्धता को लेकर भी चिंता होती है.
बेचने के समय भी कई बार पूरी कीमत नहीं मिलती है. जिसके कारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है.
गोल्ड ETF
निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना बहुत आसान है. वर्ष 2007 में शुरू हुए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) ने सोने में निवेश के तरीके को काफी आसान बना दिया है. इसमें ये फंड शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं. जिससे इन्हें खरीदना-बेचना आसान हो जाता है.
रिटर्न की बात करें तो लंबे समय में, यानी 10 से 15 साल के दौरान, गोल्ड ETF ने लगभग फिजिकल गोल्ड जैसा ही प्रदर्शन किया है. हालांकि, फंड मैनेजमेंट लागत के कारण रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है. जो आमतौर पर 0.3 से 1 फीसदी के बीच होता है.
निवेशकों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर
अगर कोई निवेशक लंबे समय तक निवेश करना चाहते हैं तो गोल्ड ईटीएफ एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें निवेश आसान और पारदर्शी होता है. फिजिकल गोल्ड की तुलना में रिटर्न भी करीब बराबर है. वहीं, अगर सोने के साथ भावनात्मक रिश्ता है या फिर किसी को गिफ्ट देने का प्लान हैं तो फिजिकल गोल्ड में निवेश किया जा सकता है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 07:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फिजिकल, गोल्ड, गोल्ड, ETF:, खरीदने, का, कौन, सा, तरीका, है, बेस्ट, किससे, ज्यादा, अमीर, बनेंगे, आप</media:keywords>
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    <item>
        <title>नीता अंबानी ने बताया कैसे हुई थी पति मुकेश अंबानी से पहली मुलाकात, शेयर किया दिलचस्प किस्सा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नीता-अंबानी-ने-बताया-कैसे-हुई-थी-पति-मुकेश-अंबानी-से-पहली-मुलाकात-शेयर-किया-दिलचस्प-किस्सा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नीता-अंबानी-ने-बताया-कैसे-हुई-थी-पति-मुकेश-अंबानी-से-पहली-मुलाकात-शेयर-किया-दिलचस्प-किस्सा</guid>
        <description><![CDATA[ Nita Ambani Story: भारत समेत पूरी दुनिया में अपने बिजनेस से पहचान बनाने वाले मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी की कहानी किसी फिल्म के प्लाट से कम नहीं है.
दोनों की पहली मुलाकात भी बेहद खास तरीके से हुई थी. एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से नीता अंबानी की पूरी जिंदगी बदल गई थी. आइए जानते हैं, आखिर दोनों की मुलाकात कैसे हुई और कैसे यह मुलाकात धीरे-धीरे एक मजबूत रिश्ते में बदली?
बचपन से शुरू हुआ डांस का सफर
एक कार्यक्रम में नीता अंबानी ने खुद बताया है कि वह मुकेश अंबानी से कैसे मिलीं. वह बताती हैं कि उनकी जिंदगी की कई खूबसूरत यादें उनके बचपन से जुड़ी हुई है. वह याद करती हैं कि जब वह छोटी थी, तो उनकी मां उन्हें सांता क्रूज से माटुंगा तक डांस क्लास और प्रतियोगिताओं के लिए ट्रेन से लेकर जाती थी.
नीता अंबानी आगे बताती हैं कि उनकी मां घंटों बाहर बैठकर उनका इंतजार करती थी. जैसे-जैसे वह बड़ी होती गईं, उनका ये सफर और लंबा होता गया और वे चर्चगेट तक जाने लगी.



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यहीं से जुड़ी एक खास मुलाकात
नीता अंबानी बताती हैं कि, समय के साथ डांस से उनका लगाव और अधिक बढ़ता गया. इसी दौरान एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में धीरूभाई अंबानी ने उन्हें पहली बार देखा. उन्हें नीता का प्रदर्शन इतना पसंद आया कि उन्होंने अपने बेटे मुकेश अंबानी के लिए रिश्ता भेजा. यहीं से उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया.
डांस ने मिलाया जीवनसाथी
नीता अंबानी बताती हैं कि इसी वजह से करीब 42 साल पहले उनकी मुलाकात मुकेश अंबानी से हो पाई थी. उन्होंने बताया कि डांस ने उन्हें जीवनसाथी, सबसे अच्छे दोस्त और पति से मिलवाया.
उनका मानना हैं कि मंच सिर्फ परफॉर्म करना नहीं सिखाता, बल्कि यह हमें खुद को समझने और पहचानने में भी मदद करता है. नीता बताती हैं कि आज&amp;nbsp; भी डांस उनकी मदद करता हैं और वे डांस के जरिए खुद को जानने के नए तरीके खोजती रहती हैं. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 07:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>ट्रंप की होर्मुज करतूत से एक्शन में सरकार, पेट्रोल&amp;डीजल और LPG पर कसी कमर, राज्यों को दिए ये निर्देश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ट्रंप-की-होर्मुज-करतूत-से-एक्शन-में-सरकार-पेट्रोल-डीजल-और-lpg-पर-कसी-कमर-राज्यों-को-दिए-ये-निर्देश</link>
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        <description><![CDATA[ US Iran War Impact: मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है. सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. साथ ही देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है. सरकार ने जानकारी दी हैं कि, देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक बरकरार है. जिससे आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
सरकार की ओर से राज्य सरकारों और आम जनता से भी अपील की गई हैं. ताकि इस स्थिति से आसानी से निपटा जा सके. आइए जानते हैं, इस विषय में विस्तार से.
एलपीजी सप्लाई और सरकार की तैयारी
वॉर की वजह से एलपीजी की सप्लाई पर कुछ असर जरूर पड़ा है. हालांकि, सरकार ने घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी (ट्रांसपोर्ट) की 100 प्रतिशत आपूर्ति बनाए रखने का भरोसा दिया हैं. साथ ही एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे विकल्प भी उपलब्ध कराए गए हैं. प्रवासी मजदूरों की जरूरत को देखते हुए 5 किलो वाले FTL सिलेंडर की सप्लाई को दोगुना कर दिया गया है.&amp;nbsp;
राज्य सरकारों को निर्देश
सरकार ने राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत बाजार पर कड़ी नजर रखने और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा हैं. इसी के तहत 13 अप्रैल 2026 तक पूरे देश में 2,950 से ज्यादा छापेमारी की जा चुकी है. जिससे कालाबाजारी पर लगाम लगाया जा सके.
जनता से सरकार की अपील&amp;nbsp;
सरकार ने लोगों से अपील की हैं कि, वे बुकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें और वितरकों के पास जाने से बचें. साथ ही सरकार लोगों को पीएनजी (PNG) और इलेक्ट्रिक या इंडक्शन कुकटॉप्स जैसे विकल्प अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं. जिससे गैस पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सके.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 07:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>क्या है SEBI का BER, म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है इसे समझना?</title>
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        <description><![CDATA[ Investment Tips: अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो शुरुआत से ही कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है. जिनमें बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) को समझना काफी अहम है.&amp;nbsp;
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने खर्च दिखाने के तरीके में बदलाव करते हुए BER को लागू किया हैं. ताकि निवेशकों को फंड के असली खर्च की ज्यादा जानकारी मिल सके. आइए जानते हैं, आखिर क्या होता है बेस एक्सपेंस रेशियो.
पहले खर्च समझना था मुश्किल
पहले निवेशक म्यूचुअल फंड के खर्च को टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के जरिए समझते थे. जिसमें फंड मैनेजमेंट फीस के साथ-साथ जीएसटी और STT जैसे टैक्स और दूसरे चार्ज भी शामिल होते थे. इससे यह साफ-साफ समझ पाना मुश्किल हो जाता था कि असल में फंड हाउस कितना चार्ज ले रहा है, क्योंकि सभी खर्च एक साथ जोड़ कर दिखाए जाते थे.
BER से खर्च समझना हुआ आसान
अब बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में सिर्फ म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने से जुड़े खर्च को ही दिखाया जाता है. वहीं, जीएसटी और STT जैसे दूसरे चार्ज अलग से दिखाए जाते हैं.
इससे निवेशकों को यह साफ समझ में आता है कि फंड हाउस वास्तव में कितना पैसा निवेशकों से चार्ज कर रही है. साथ ही बाकी चार्ज की जानकारी भी अलग होने से समझने में आसानी होती है.&amp;nbsp;
BER में क्या शामिल होता है?
बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में म्यूचुअल फंड से जुड़ी जरूरी जानकारी को शामिल किया जाता है. जैसे फंड मैनेजमेंट फीस, डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन और रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंट (RTA) चार्ज. जिससे निवेशकों को साफ पता चलता है कि, उनका पैसा किन चीजों पर खर्च हो रहा हैं.&amp;nbsp;
BER और TER में क्या फर्क है?
बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) और टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के बीच अंतर की बात करें तो, BER सिर्फ फंड हाउस के खर्च को दिखाता है. यानी इसमें केवल ऑपरेटिंग लागत शामिल होती है. वहीं TER वह कुल खर्च होता है जो निवेशकों को देना पड़ता है. इसमें BER के साथ-साथ सभी टैक्स और रेगुलेटरी चार्ज भी जुड़े होते हैं.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें:
ट्रंप की होर्मुज करतूत से एक्शन में सरकार, पेट्रोल-डीजल और LPG पर कसी कमर, राज्यों को दिए ये निर्देश
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>निवेशकों के लिए जरूरी खबर, अगले हफ्ते इस दिन बंद रहेगा शेयर बाजार; जानिए डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Stock Market Holiday: अगले सप्ताह ट्रे़डिंग करने वालों के लिए एक ट्रेडिंग सेशन कम मिलने वाला है. अंबेडकर जयंती के कारण 14 अप्रैल को प्रमुख एक्सेंजों नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)और Bombay Stock Exchange (बीएसई) पर कोई कारोबार नहीं होगा. यानी शेयरों की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी.
भारतीय घरेलू बाजार में शनिवार और रविवार को साप्ताहिक छुट्टी होती है. इस तरह अगले हफ्ता निवेशक केवल 4 दिन ही ट्रेडिंग कर पाएंगे. निवेशकों को इस छुट्टी को ध्यान में रखते हुए अपने ट्रेडिंग प्लान तैयार करने चाहिए.
कमोडिटी बाजार पर भी दिखेगा असर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में भी अंबेडकर जयंती की वजह से सुबह के समय कारोबार नहीं होगा. हालांकि शाम के सत्र में ट्रेडिंग फिर से शुरू हो जाएगी. वहीं NCDEX पर पूरे दिन के दोनों सत्रों में कोई कारोबार नहीं होगा, यानी वहां पूरे दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी.
2026 में कब-कब बंद रहेगा बाजार
2026 में शेयर बाजार में कुल 16 छुट्टियां होने वाली है. इनमें से 6 छुट्टियां पहले ही बीत चुकी हैं. यानी आगे भी कई दिन ऐसे आएंगे जब बाजार में कोई कारोबार नहीं होगा. 14 अप्रैल के बाद ट्रेडिंग फिर शुरू होगी, लेकिन उसके बाद भी अलग-अलग मौकों पर बाजार बंद रहेगा.
1 मई (महाराष्ट्र दिवस) और 28 मई (बकरीद) को ट्रेडिंग नहीं होगी. इसके अलावा 26 जून (मुहर्रम), 14 सितंबर (गणेश चतुर्थी), 2 अक्टूबर (गांधी जयंती), 20 अक्टूबर (दशहरा), 10 नवंबर (दिवाली) और 24 नवंबर (गुरु नानक जयंती) पर भी बाजार बंद रहने वाला है. साल के अंत में 25 दिसंबर (क्रिसमस) को आखिरी छुट्टी होने वाली है.&amp;nbsp;
हर हफ्ते दो दिन बंद रहता है बाजार
शेयर बाजार में हर सप्ताह शनिवार और रविवार को कामकाज नहीं होता है. इन दो दिनों को साप्ताहिक छुट्टी रहती है, इसलिए इन दिनों निवेशक किसी भी तरह की खरीद-बिक्री नहीं कर सकते. आमतौर पर सोमवार से शुक्रवार तक ही बाजार खुला रहता है. ऐसे में ट्रेडिंग प्लान बनाते समय इन छुट्टियों का ध्यान रखना जरूरी होता है.
यह भी पढ़ें: क्या है FD लैडरिंग? ₹1 लाख के निवेश को अधिकतम मुनाफे में बदलने का आसान तरीका
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>बाजार में बढ़ेगी रौनक, कई कंपनियों ने किया कॉरपोरेट ऐलान; निवेशकों के लिए मौका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाजार-में-बढ़ेगी-रौनक-कई-कंपनियों-ने-किया-कॉरपोरेट-ऐलान-निवेशकों-के-लिए-मौका</link>
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        <description><![CDATA[ Share Market Stocks: 13 अप्रैल से शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में हलचल की उम्मीद बनी हुई है. ये कंपनी शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. इसके पीछे कंपनियों के कॉरपोरेट ऐलानों को मुख्य वजह बताया जा रहा है. डिविडेंड, स्टॉक स्प्लिट और डिमर्जर जैसे फैसलों से शेयर चर्चा का विषय बने हुए हैं. आइए जानते हैं, ऐसे ही कुछ शेयरों के बारे में.
Muthoot Finance शेयर
मुथूट फाइनेंस ने अपने शेयरधारकों के लिए 30 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है. कंपनी की ओर से यह जानकारी दी गई है कि इस डिविडेंड के लिए शुक्रवार, 17 अप्रैल को एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट दोनों निर्धारित की गई हैं. यानी की इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास कंपनी शेयर होंगे, वे इस डिविडेंड के हकदार माने जाएंगे.&amp;nbsp;
कंपनी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ शेयरधारकों को लगातार रिटर्न दे रही है. इस घोषणा से निवेशकों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है.&amp;nbsp;
Prima Plastics Ltd
Prima Plastics के शेयर धारकों को 1 कंपनी शेयर के बदले Prima Innovation में एक शेयर दी जा रही है. यह फैसला डिमर्जर के तहत की गई है. कंपनी और Prima Innovation के बीच 1 अप्रैल 2026 से यह डिमर्जर प्रभावी माना जा रहा है. इस खबर के बाद निवेशकों की नजर कंपनी शेयरों पर हो सकती है. &amp;nbsp;
Pashupati Cotspin Ltd
Pashupati Cotspin कंपनी 1:10 के रेशियो में स्टॉक स्प्लिट करने जा रही है. यानी की एक शेयर 10 हिस्सों में बंट जाएगा. जिससे छोटे निवेशक बड़ी आसानी से कंपनी शेयरों पर अपना दांव लगा सकते है. इस कदम के बाद निवेशकों की दिलचस्पी कंपनी शेयरों पर हो सकती है.&amp;nbsp;
Aurobindo Pharma Ltd
Aurobindo Pharma Ltd ने अपने शेयर बायबैक से जुड़ी प्रक्रिया के लिए शुक्रवार, 17 अप्रैल को एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट का फैसला लिया है. इसका मतलब यह है कि जिन निवेशकों के पास इस तारीख तक कंपनी के शेयर मौजूद होंगे, वे इस बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे.
आमतौर पर बायबैक की घोषणा के बाद शेयरों में खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है. जिससे शेयर की कीमत पर भी असर देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: निवेशकों के लिए जरूरी खबर, अगले हफ्ते इस दिन बंद रहेगा शेयर बाजार; जानिए डिटेल
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>PNG Connection: सिलेंडर के झंझट से मिलेगी मुक्ति, PNG पाइपलाइन से हर घर पहुंचेगी गैस, सरकार ने बना लिया प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ PNG Connection: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. पेट्रेल- डीजल से लेकर गैस सिलेंडर तक की किल्लत से लोग परेशान हैं. अब इन हालातों को देखते हुए सरकार ने अपना मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. इस बारे में खुद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में बताया है. मंत्रालय ने बताया है कि गैस की किल्लत से बचने के लिए अब PNG की पाइपलाइन बिछाई जाएंगी.
मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारीन्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आदेश दिया है कि PNG पाइप बिछाने के लिए फ्रेमवर्क तैयार किया जाए. मंत्रालय ने बताया है कि, &#039;इस आदेश से पीएनजी नेटवर्क के विकास में तेजी आने, आखिरी-माइल कनेक्टिविटी में सुधार होने और साफ ईंधन की ओर ट्रांजीशन को समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और भारत की गैस-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।&#039;
इस समय की भोगौलिक स्थित को देखते हुए एलपीजी आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं. मंत्रालय ने कहा है कि, &#039;एलपीजी वितरकों में आपूर्ति की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और इंडस्ट्रीज में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग बढ़कर लगभग 98 प्रतिशत हो गई है.
घरेलू LPG सिलेंडर डिलीवरी है सामान्यफिलहाल अवैध आपूर्ति को रोकने के लिए, डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DCA) आधारित डिलीवरी लगभग 93% तक बढ़ा दी गई है. इस बारे में मंत्रालय ने बताया कि, &#039;घरेलू एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी सामान्य बनी हुई है. 11.04.2026 को 52.3 लाख से ज्यादा घरेलू LPG सिलेंडर की डिलीवरी की गई&#039;. सरकार ने ये भी बताया कि कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए हैं, जिसमें कुल आवंटन को संकट-पूर्व स्तरों के लगभग 70% तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें 10% सुधार-संबंधित आवंटन शामिल है.
मजदूरों को मिलेगा 5 किलो सिलेंडर मिलेगाइसके अलावा सरकार ने ये भी बताया है क उन्होंने 5 किलो FTL सिलेंडर की आपूर्ति को दोगुना कर दिया गया है. प्रवासी मजदूरों और छात्रों को आसानी से ये मिल जाएगा. उन्हें इसके लिए कोई एड्रेस प्रूफ की जरूरत भी नहीं होगी. बल्कि केवल आईडी दिखाकर ही उन्हें FTL मिल जाएंगे. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>हर दिन 100 करोड़ खर्च कर रहा देश का ये बड़ा शहर, इतना पैसा जाता कहां है? जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हर-दिन-100-करोड़-खर्च-कर-रहा-देश-का-ये-बड़ा-शहर-इतना-पैसा-जाता-कहां-है-जानें</link>
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        <description><![CDATA[ देश की आईटी राधानी के नाम से मशहूर बेंगलुरु, दूर से तो हमें विकासशील दिखता है. लेकिन आए दिन ये राजधानी सड़क में गड्ढे, ट्रैफिक जाम, जल भराव जैसी चीजों के लिए सुर्खियों में बना रहता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर यहां विकास हो भी रहा है या नहीं? हाल ही में इस शहर को लेकर चल रही खबरों को सुनकर तो आप और भी ज्यादा सोच में पड़ जाएंगे. क्योंकि खबरों की मानें तो इस शहर पर हर रोज 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन ये पैसा जा कहां रहा है?
100 करोड़ होते हैं हर रोज खर्चहाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया ने जानााग्रह नाम की संस्था की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि, वित्त वर्ष 2021-22 में शहर पर कुल 38,455 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इस रकम का औसत निकाला जाए तो वो 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. राज्य सरकार और कई सारी पब्लिक एजेंसियां मिलकर ये खर्च कर रही हैं. जब सड़कों के गड्ढे जस के तस हैं, जलभराव हर बारिश में हो जाता है और ट्रैफिक जाम लगातार बढ़ता ही जा रहा है, तो ऐसे में सवाल यही उठता है कि ये पैसा आखिर जा कहां रहा है?
कौन देखा है बेंगलुरु का खर्च?बेंगलुरु के कुल खर्च का लगभग 20% हिस्सा ही नगर निगम उठाता है. बाकी का 80% खर्च बेंगलुरु इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी, बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवेज बोर्ड और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन जैसी कई एजेंसियां नियंत्रित करती हैं. ये सभी एजेंसियां महत्वपूर्ण सुविधाएं जैसे बिजली, ट्रांसपोर्ट और पानी संभालती हैं, लेकिन इन सभी सर्विसेज में कोई ना कोई खोट है, ऐसे में जनता का सवाल करना भी जायज है.
हालातों में क्यों नहीं आता सुधार?सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े खर्च के बावजूद शहर के हालतों में सुधार क्यों नहीं नजर आता है? एक्सपर्ट्स की मानें तो इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं:

सबसे पहले तो ये पैसा अलग- अलग एजेंसियों में बिखरा हुआ है, जिसकी वजह से ये सिटमैटिक तरीके से खर्च नहीं किया जाता है. इस पैसे को खर्च करने के लिए एक केंद्रीकृत सिस्टम होना चाहिए, जो पूरे खर्च का हिसाब देखे.
कई एजेंसियां हैं जो अपने खर्च का ब्योरा नहीं देती हैं, अपने डाटा को सार्वजनिक नहीं करतीं जिससे सिस्टम में पारदर्शिता की कमी नजर आती है.
एजेंसियों की तरफ से कोई जवाबदेही या जिम्मेदारी जैसी चीज नहीं है, जिसकी वजह से व्यवस्था कमजोर नजर आती है.

इन्हीं समस्याओं की वजह से हालात ऐसे बने हुए हैं कि हर रोज 100 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी आम जन समस्याओं से घिरा हुआ है. लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है, गड्ढों की वजह से एक्सिडेंट होते हैं, बिजली की आपूर्ति नहीं होती, पानी की किल्लत रहती है. ऐसे में जनता का आक्रोश भी सही है. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग पर हर सवाल का जवाब जानें, सैलरी में आएगा 34 फीसदी का उछाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-8वें-वेतन-आयोग-पर-हर-सवाल-का-जवाब-जानें-सैलरी-में-आएगा-34-फीसदी-का-उछाल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/8th-pay-commission-8वें-वेतन-आयोग-पर-हर-सवाल-का-जवाब-जानें-सैलरी-में-आएगा-34-फीसदी-का-उछाल</guid>
        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के बीच आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा बनी हुई है. माना जा रहा है कि इसके लागू होने पर उनकी आय में बढ़ोतरी होगी. जिससे उन्हें सीधा तौर पर आर्थिक फायदा मिलेगा.
इस समय सबसे ज्यादा ध्यान फिटमेंट फैक्टर, वेतन आयोग के लागू होने के समय, सैलरी में होने वाली बढ़त और एरियर जैसे विषयों पर टिकी हुई है. इन्हीं फैक्टरों से तय होने वाला है कि कर्मचारियों को कितना लाभ मिलेगा. आइए जानते हैं, इस विषय में.&amp;nbsp;
किन बातों पर फैसला करेगा आयोग?
8वां पे कमीशन आयोग अपनी सिफारिशें तय करते समय कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखने वाला हैं. इसमें देश की आर्थिक हालत, विकास और सरकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध पैसा, और पेंशन पर आने वाला खर्च शामिल होने वाले हैं.
साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इन फैसलों का राज्यों की आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा. इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, सुविधाएं और काम करने की स्थिति की तुलना की जाएगी. जिससे सही फैसला लेने में मदद हो सके.&amp;nbsp;
फिटमेंट फैक्टर से तय होगी सैलरी बढ़ोतरी
आठवां वेतन आयोग में कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह काफी हद तक फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करने वाला है. अगर फिटमेंट फैक्टर करीब 2.57 रहता है, तो बेसिक पे में लगभग 30&amp;ndash;34 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. साथ ही सैलरी की रेंज करीब 46,260 रुपये से 6,42,500 रुपये तक जा सकती है.
आयोग फिटमेंट फैक्टर 3.0 करने का फैसला लेती है तो सैलरी बढ़कर 54,000 रुपये से 7,50,000 रुपये के बीच हो सकती है. वहीं 3.25 के स्तर पर यह दायरा करीब 58,500 रुपये से 8,12,500 रुपये तक पहुंच सकता है. फिटमेंट फैक्टर अधिक तय होने से कर्मचारिओं को ज्यादा लाभ मिलने की संभावना होती है.&amp;nbsp;
कब लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग?
पिछले वेतन आयोग के लागू होने के समय को देखें तो, नए वेतन आयोग को लागू होने में थोड़ा समय लग सकता है. 7वां पे कमीशन लागू होने में करीब 2.5 साल का समय लगा था. वहीं, 6th Pay Commission को लगभग 2 साल और पांचवां वेतना आयोग करीब 3.5 साल में लागू हुआ था.&amp;nbsp;
कितना मिल सकता है एरियर?&amp;nbsp;
आठवां वेतन आयोग की देरी होने पर कर्मचारियों को एरियर का लाभ मिलेगा. अनुमान के मुताबिक निचले स्तर के कर्मचारियों को करीब 3 लाख रूपये से ज्यादा का एरियर लाभ मिलने की संभावना है. वहीं, लेवल 5 के कर्मचारियों का एरियर 9 लाख रुपये से भी अधिक हो सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानिए इन्हें खरीदने के लिए कितना करना होगा खर्च
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:30:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>8th, Pay, Commission:, 8वें, वेतन, आयोग, पर, हर, सवाल, का, जवाब, जानें, सैलरी, में, आएगा, फीसदी, का, उछाल</media:keywords>
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        <title>94 लाख में बेची प्रॉपर्टी और एक लम्हें में गंवा दिए 21 लाख; जानें फिर कैसे Form 71 ने दिलाई राहत?</title>
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        <description><![CDATA[ इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), दिल्ली ने एक फैसला सुनाते हुए कहा कि जब कोई विक्रेता किसी प्रॉपर्टी को बेचता है और असेसमेंट ईयर (AY) 2022-23 में बिक्री की पूरी रकम बताकर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की रिपोर्ट करता है और बिक्री वाले साल में ही TDS का दावा करता है, तो उसे TDS का क्रेडिट मिलना चाहिए. यह बात तब भी सही मानी जाएगी, भले ही खरीदार ने गलती से यह TDS किसी गलत साल में जमा कर दिया हो.
यह फैसला एक मामले की सुनवाई करते हुए सुनाया गया. इसमें एक NRI ने AY 2022-23 में अपनी कोई प्रॉपर्टी बेची थी. हालांकि, खरीदार ने TDS का भुगतान AY 2023-24 में किया, जिसके चलते आयकर विभाग ने विक्रेता को TDS क्रेडिट देने से मना कर दिया. विक्रेता का 20 परसेंट TDS काटा गया, जिसकी राशि लगभग 20.99 लाख रुपये थी.&amp;nbsp;
क्या है Form 71?&amp;nbsp;
Form 71 के तहत आयकर विभाग खरीदार द्वारा TDS जमा में हुई देरी की गलती को सुधारकर विक्रेता को उसका रिफंड पाने में मदद करता है. अगर TDS गलत वित्तीय वर्ष में जमा हो गया है, तो इस फॉर्म की मदद से उसे सही वर्ष के Form 26AS में ट्रांसफर करवाकर टीडीएस का अमाउंट क्रेडिट करा दिया जाता है. आप चाहे तो आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Form 71 फाइल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या है मामला?&amp;nbsp;
प्रॉपर्टी बेचने वाले शख्स ने सितंबर 2021 में 94.06 लाख में एक प्रॉपर्टी बेची. खरीदार ने 20,99,240 रुपये का टीडीएस काट लिया, लेकिन इसे गलत असेसमेंट ईयर 2023-24 में जमा कर दिया. जबकि विक्रेता ने जब &amp;nbsp;27 जुलाई, 2022 को असेसमेंट ईयर (AY) 2022-23 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, जिसमें उसने 4.86 लाख रुपये की टैक्सेबल इनकम दिखाई.
इस 4.86 लाख रुपये की इनकम में से &amp;nbsp;4.64 लाख रुपये घर की प्रॉपर्टी से हुई इनकम थी. जबकि दूसरे सोर्स से हुई इनकम 32,115 रुपये थी. उसने 5.55 लाख रुपये के लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस और 21.6 लाख रुपये के TDS क्रेडिट का दावा भी किया. इसका मतलब है कि अगर उसे TDS क्रेडिट मिल जाता, तो उसे टैक्स रिफंड मिल जाता.&amp;nbsp;
TDS क्रेडिट के बिना उसका देय टैक्स 12,301 रुपये था. उनके इनकम टैक्स रिटर्न को प्रोसेस करते समय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सेंट्रलाइज़्ड प्रोसेसिंग सेंटर ने 21.6 लाख रुपये के उनके दावे के मुकाबले 60,872 रुपये का TDS क्रेडिट मंजूर किया. CPC ने 20.99 लाख रुपये के उस TDS क्रेडिट को मंजूरी नहीं दी, जिसे खरीदार ने प्रॉपर्टी की बिक्री पर काटा और जमा किया था.
कोर्ट ने क्या कहा?&amp;nbsp;
विक्रेता ने CIT (A) में अपील दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया. इसके बाद, उसने ITAT दिल्ली में अपील दायर की. 12 नवंबर, 2025 को कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि कैपिटल गेन उसी साल टैक्सेबल होता है, जिस साल संपत्ति का लेनदेन हुआ है. ऐसे में आयकर विभाग को Matching Principle का पालन करते हुए उन्हें उस साल का टीडीएस क्रेडिट कर देना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:30:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लाख, में, बेची, प्रॉपर्टी, और, एक, लम्हें, में, गंवा, दिए, लाख, जानें, फिर, कैसे, Form, ने, दिलाई, राहत</media:keywords>
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        <title>शेयर बाजार की सुरक्षा अब और कड़ी, SEBI ने पेश किया साइबर सिक्योरिटी का &amp;apos;त्रिशूल&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शेयर-बाजार-की-सुरक्षा-अब-और-कड़ी-sebi-ने-पेश-किया-साइबर-सिक्योरिटी-का-त्रिशूल</link>
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        <description><![CDATA[ SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड लगातार ने हाल ही में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के मकसद से तीन नए डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं. ये IT (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) प्लेटफॉर्म्स कारोबार को और ज्यादा आसान बनाने का काम करेंगे. SEBI की इस नई पहल से शेयर मार्केट में पारदर्शिता, दक्षता और डिजिटल सुरक्षा बढ़ेगी.
ये नए पोर्टल किए लॉन्चइन तीन नए प्लेटफॉर्म्स के जरिए SEBI ने पारंपरिक सिस्टम को डिजिटल और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है. आइये बताते हैं इन तीनों नए आईटी प्लेटफॉर्म के बारे में:

SUPCOMS (Single Universal Platform for Communications)
ई-एज्यूडिकेशन पोर्टल
C-SAC (Cyber-Sec Audit Compliance)

तीनों डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के फायदे
SUPCOMS: इस प्लेटफॉर्म के जरिए कम्युनिकेशन सुरक्षित होगा. ये प्लेटफॉर्म ईमेल आधारित सिस्टम के रूप में काम करेगा, जिससे सभी ऑफिशियल कम्युनिकेशंस एक ही जगह पर सुरक्षित हो पाएंगे और डेटा ट्रैक करना आसान होगा.
ई-एज्यूडिकेशन पोर्टल: इस पोर्टल के जरिए कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी. इससे कंपनियां ऑनलाइन नोटिस देख सकेंगी, जवाब दाखिल कर सकेंगी और वर्चुअल सुनवाई में हिस्सा ले सकेंगी. इस पोर्टल की मदद से सिस्टम में पारदर्शिता और तेजी बढ़ेगी.
C-SAC: इस पोर्टल के जरिए AI के माध्यम से साइबर सुरक्षा निगरानी मजबूत होगी. ये एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम है, जो साइबर ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण कर जोखिम और कमियों की पहचान करेगा. इसके साथ ही ये संस्थाओं को रिस्क स्कोर भी देगा.
अहम है ये कदमबता दें कि SEBI के द्वारा लिया गया ये कदम ऐसे समय आया है जब वित्तीय बाजार तेजी से डिजिटल हो रहे हैं. साइबर सिक्योरिटी पर सेंध लगाने के लिए हैकर्स बैठे ही हैं. आए दिन लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं. ऐसे में ये एक अहम और महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरा है. इन नए प्लेटफॉर्म्स के जरिए पारदर्शिता बढ़ेगी और काम करना भी आसान होगा. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:30:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या है FD लैडरिंग? ₹1 लाख के निवेश को अधिकतम मुनाफे में बदलने का आसान तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-है-fd-लैडरिंग-1-लाख-के-निवेश-को-अधिकतम-मुनाफे-में-बदलने-का-आसान-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ FD Laddering Strategy: निवेशक जो बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं, वे फिक्स्ड डिपॉजिट को एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर देखते हैं. एफडी में निवेशकों को तय ब्याज दर के साथ सुरक्षित रिटर्न भी &amp;nbsp;मिलता है. जिससे निवेशक को ज्यादा जोखिम नहीं उठाना पड़ता. हालांकि, अगर आप FD लैडरिंग की प्लानिंग को शामिल करें तो आपके रिटर्न में बदलाव दिख सकता है. आइए जानते हैं, आखिर FD लैडरिंग क्या होता है और कैसे काम करता है?&amp;nbsp;
FD लैडरिंग क्या है?
FD लैडरिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें निवेशक अलग-अलग समय के लिए कई फिक्स्ड डिपॉजिट करते हैं. ताकि हर कुछ समय पर एक-एक एफडी पूरी होती रहे. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी होता है, जो लंबे समय तक सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं.
FD लैडरिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको समय-समय पर पैसा मिलता रहता है. साथ ही, अलग-अलग अवधि में निवेश होने की वजह से बेहतर ब्याज दरों का लाभ लेने का मौका भी बनता है.
FD लैडरिंग के फायदे
FD लैडरिंग अपनाने से निवेशक को कई तरह के लाभ मिलते हैं. अलग-अलग समय में पैसे लगाने से बेहतर ब्याज दरों का फायदा मिल सकता है. साथ ही कुल रिटर्न भी बढ़ने की संभावना रहती है.
यह तरीका टैक्स प्लानिंग में भी मदद करता है और जोखिम को कम करता है. मैच्योरिटी के वक्त अगर बेहतर ब्याज दरें मिल रही हैं तो, आप इसे दोबारा से निवेश कर सकते हैं. &amp;nbsp;
1 लाख रुपये से FD लैडरिंग&amp;nbsp;
अगर आप 1 लाख रुपये को FD में लगाना चाहते हैं, तो इसे एक साथ निवेश करने की जगह छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना ज्यादा समझदारी भरा होता है. उदाहरण के लिए आप इसे 20-20 हजार रुपये में बांटकर अलग-अलग समय के लिए FD कर सकते हैं. जिससे हर साल एक-एक FD पूरी होती रहेगी.
जब कोई FD पूरी हो जाए, तो उस पैसे को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर बचे हुए पैसों को दोबारा निवेश कर सकते हैं. इसी तरह बाकी FD के साथ भी यही तरीका अपनाने से आपका पैसा लगातार रन करता है. साथ ही ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद भी रहती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: SIP में सिर्फ 5 साल की देरी और 3 करोड़ का नुकसान! ये है कंपाउंडिंग का खौफनाक गणित, आलस छोड़ें
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:30:46 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Gold&amp;Silver News: कहां से खरीदें सोना? शोरूम, बैंक या मोबाइल ऐप? कौनसा ऑप्शन है सबसे बेस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-news-कहां-से-खरीदें-सोना-शोरूम-बैंक-या-मोबाइल-ऐप-कौनसा-ऑप्शन-है-सबसे-बेस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Shopping: भारत में सोना खरीदना केवल परंपरा नहीं बल्कि एक मजबूत इन्वेस्टमेंट भी है. तीज त्यौहारों पर लोग सोना &amp;nbsp;खरीदना शुभ मानते हैं. अक्षय तृतीया, पुष्य नक्षत्र, धनतेरस ऐसे त्यौहारों के मौके पर गोल्ड शोरूम पर भीड़ लगी रहती है. इसके अलाव शादी के सीजन में भी जमकर भीड़ होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल शोरूम ही नहीं बल्कि कई और जगहें हैं जहां से आप सोना खरीद सकते हैं. तो आज हम आपको बताते हैं कि शोरूम के अलावा भी और कहां- कहां से आप सोना खरीद सकते हैं, साथ ही कहां से सोना खरीदना किफायती होगा.
कहां- कहां से खरीद सकते हैं सोना?सोना खरीदने के तीन तरीके हैं, पहला पारंपरिक तरीका यानी शोरूम जाकर सोने की ज्वेलरी या सामान खरीदना. दूसरा है कम निवेश में मोबाइल एप्स के जरिए सोना खरीदना और तीसरा तरीका है बैंक के जरिए सोना खरीदना. तीनों ही ऑप्शंस के बारे में डीटेल में जानें...
ज्वेलरी शोरूम: आपके शहरों में कई ज्वेलरी शोरूम होते हैं, जहां से सोने- चांदी गहने और चीजें खरीदी जा सकती हैं. ये सबसे पुराना और पारंपरिक तरीका है. शोरूम से खरीदने पर व्यक्ति को इन पर भरोसा भी होता है. यहां से खरीदा गया सोना BIS हॉलमार्क वाला होता है, जिसकी शुद्धता पर कोई संदेह नहीं होता है. हालांकि शोरूम से खरीदने पर मेकिंग चार्जेस और वेस्टेज भी जुड़ता है, जिससे कीमत थोड़ी बढ़ जाती है.
बैंक: सोना खरीदने का दूसरा ऑप्शन है बैंक, जहां से आप इंवेस्टमेंट के लिए सोना खरीद सकते हैं. यहां पर 24 कैरेट शुद्ध सोने के सिक्के और बार मिल जाते हैं, जो पूरी तरह प्रमाणित होते हैं. हालांकि बैंक से खरीदे गए सोने की कीमत बाजार से थोड़ी ज्यादा होती है. बैंक से लिया गया सोना वापस नहीं खरदा जाता, जिससे इनवेस्टमेंट के ऑप्शन सीमित हो जाते हैं.
मोबाइल एप्स: सोना खरीदने का तीसरा ऑप्शन है मोबाइल एप्स, ये तरीका इन दिनों काफी ज्यादा चलन में है. मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल गोल्ड खरीदा जाता है. PhonePe, Paytm जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग कम रुपयों में भी गोल्ड में इन्वेस्ट कर लेते हैं. यहां से खरीदा गया सोना 24 कैरेट शुद्धता के साथ आता है, ये सुरक्षित भी है और जरूरत पड़ने पर इसे बेचा भी जा सकता है. यहां तक कि इसे आप फिजिकल गोल्ड में भी बदल सकते हैं. हालांकि ये पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया होती है, ऐसे में कई लोगों को इस पर भरोसा भी नहीं होता है.
तीनों में से कौन का ऑप्शन है बेस्ट?वैसे तो अपनी- अपनी जगह पर तीनों ही ऑप्शंस बेस्ट होते हैं. यदि आप गहने खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए शोरूम ही सबसे बेस्ट होते हैं. तो वहीं यदि किसी को छोटा निवेश करना है तो उसके लिए मोबाइल एप बेहतर ऑप्शन है. हालांकि यदि आप बैंक से सोना खरीदते हैं तो इसकी कीमत ज्यादा हो सकती है लेकिन शुद्धता के लिए आपको परेशान नहीं होना पड़ेगा.
इसके अलावा ये आपके उद्देश्य पर भी निर्भर करता है कि आप किस मकसद से सोना खरीद रहे हैं. यदि समय की कमी है और छोटी रकम है तो आप एप्स के जरिए भी सोना खरीद सकते हैं. तो वहीं यदि आपको जल्दी है और घर में कोई फंक्शन है तो आपका शोरूम से ही सोना खरीदना समझदारी भरा कदम होगा. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 04:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Tax on Diesel: सरकार ने डीजल पर दोगुना किया टैक्स, हवाई ईंधन भी शामिल, जानें इससे आप पर क्या फर्क पड़ेगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tax-on-diesel-सरकार-ने-डीजल-पर-दोगुना-किया-टैक्स-हवाई-ईंधन-भी-शामिल-जानें-इससे-आप-पर-क्या-फर्क-पड़ेगा</link>
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        <description><![CDATA[ Tax on Diesel and ATF: ईरान वॉर और होर्मुज संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है. सरकार ने आज डीजल और एविएशन टर्बाइन फ़्यूल यानी ATF के एक्सपोर्ट पर विंडफ़ॉल टैक्स बढ़ा दिया है. इस बात की जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने दी है. सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि घरेलू सप्लाई को मैनेज किया जा सके और रिफ़ाइनरों के विंडफ़ॉल मुनाफ़े पर रोक लगाई जा सके.
सरकार के इस फैसले से देश की जनता को फायदा मिलेगा, क्योंकि घरेलू सप्लाई में और ज्यादा तेजी आएगी. साथ ही डीजल के दाम बढ़ने की आशंका भी कम होगी.
आज जारी एक नोटिफ़िकेशन के ज़रिए, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी को पहले के ₹21.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹55.5 प्रति लीटर कर दिया है, जो कि पहले से दोगुने से भी ज़्यादा है. इसके अलावा एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को ₹29.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी अभी भी शून्य बनी हुई है.
सरकार ने 2024 में खत्म कर दिया था ये टैक्स
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच सरकार ने विंडफॉल टैक्स यानी ईंधन के निर्यात पर &#039;विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क&#039; को फिर से लागू कर दिया है. इस टैक्स को दिसंबर 2024 में खत्म कर दिया गया था. लेकिन अब रिफाइनरियों को हो रहे भारी मुनाफ़े और देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंताओं के चलते सरकार ने इसे फिर से लागू कर दिया है.
सरकार ने पिछले महीने घटाई थी एक्साइज ड्यूटी
बता दें कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को भी कम कर दिया था. 26 मार्च को वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दी, जबकि डीज़ल पर ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी थी.
ऐसा इसलिए किया गया था ताकि तेल मार्केटिंग कंपनियों को ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से बचाया जा सके. ईरान अमेरिका वॉर के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें $119 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, लेकिन अब ये कम होकर लगभग $98 प्रति बैरल पर आ गई हैं.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 04:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UPI के 10 साल: सब्जी वाले से शोरूम तक, ऐसे बदला भारत का पेमेंट अंदाज, विदेश में भी बजा डंका</title>
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        <description><![CDATA[ UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, ने लोगों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है. अब हर जगह एटीएम लेकर जाने की जरूरत नहीं है. ना ही मोटा कैश लेकर कहीं जाने की जरूरत है. केवल हाथ में मोबाइल लिया और निकल पड़े. ये है यूपीआई का कमाल और इस कमाल को अब भारत में पूरे 10 साल हो गए हैं. UPI ने भारत को डिजिटल भारत बना दिया है, इतना ही नहीं इसने भारत को दुनियाभर की डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में एक अलग ही मुकाम दे दिया है.
ग्लोबली रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में हिस्सेदारीयूपीआई के 10 साल पूरे होने पर सरकार ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं, इसी के साथ बताया है कि डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में वैश्विक रूप से क्या हिस्सेदारी रही है. सरकार के अनुसार ग्लोबली रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में भारत की 49% की हिस्सेदारी है. ये बताता है कि हमारा देश कितनी तेजी से तरक्की कर रहा है और आगे बढ़ रहा है.
जनवरी 2026 में हुए ट्रांजेक्शनडिजिटल पेमेंट्स पर ही हर कोई इस समय डिपेंडेंट है. जनवरी 2026 में ही यूपीआई के जरिए 21.70 अरब ट्रांजेक्शन हुए है. जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए रही. भारत में कुल रिटेल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इसकी पॉपुलैरिटी और ज़रूरत के बारे में बताता है. इंटरनेशनल मोनेटरी फंड IMF ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है. खास बात ये है कि इसे 10 साल से भी कम समय में विकसित किया गया, और इस दौरान इसमें 12,000 गुना से ज्यादा ट्रांजेक्शन वॉल्यूम और 4,000 गुना से ज्यादा वैल्यू की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
सब्जी वाले से रिक्शावाले तक कर रहे इस्तेमालUPI की असली ताकत सिर्फ इसके आंकड़े ही नहीं बल्कि इसका लोगों के द्वारा किया जा रहा उपयोग भी है. सब्जी- फल वाले, ऑटो रिक्शा, दुकानदार, बड़े से बड़े शोरूम वालों के साथ ही आम लोग जो खरीदारी करने जाते हैं वो भी यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं. शहरें हों या ग्रामीण क्षेत्र हर जगह पर इसका इस्तेमाल हो रहा है. इसने लोगों के जीवन को काफी आसान बना दिया है. इसलिए हर किसी ने इसे बढ़ावा ही दिया है.
अंतरराष्ट्रीय हुआ दायरायूपीआई ने केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपना डका बजाया है. ये सिस्टम सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों तक भी पहुंच गया है. जिससे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन और रेमिटेंस आसान हो गए हैं. सरकार का मानना है, यूपीआई अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं रहा, बल्कि ये एक व्यापक फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 04:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, के, साल:, सब्जी, वाले, से, शोरूम, तक, ऐसे, बदला, भारत, का, पेमेंट, अंदाज, विदेश, में, भी, बजा, डंका</media:keywords>
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    <item>
        <title>TCS कर्मचारियों की चांदी, इस साल मिल सकता है &amp;apos;Double&amp;Digit&amp;apos; सैलरी इंक्रीमेंट</title>
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        <description><![CDATA[ मिडिल- ईस्ट में चल रही वॉर का असर हर जगह देखने को मिल रहा है. जिसके चलते दुनियाभर में भी मंदी का दौर देखने को मिल रहा है. इसी बीच देश की सबसे बड़ी IT कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने अपने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने का मन बना लिया है. कंपनी ने हाल ही में ऐलान किया है वो अपने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने वाली है. यानी इस बार कंपनी अपने कर्मचारियों का &#039;डबल डिजिट&#039; इंक्रिमेंट करने वाली है.
कर्मचारियों को मिला इंक्रिमेंटTCS ने हाल ही में ऐलान किया है कि वो अपने सभी जॉब रोल्स और ग्रेड के कर्मचारियों की सैलरी बढ़ा दी जाएगी. ये इंक्रिमेंट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. ये घोषणा कंपनी के चौथे तिमाही (Q4) के नतीजे आने के बाद आई है. जिसमें टीसीएस ने मुनाफे में 29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है. ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आईटी कंपनीज में वेतन बढ़ोतरी, भर्ती की मांग और नौकरी पर कड़ी नजर रखी जा रही है.&amp;nbsp;
कंपनी ने किया कंफर्मकंपनी की तरफ से बताया गया है कि, कंपनी सालाना सैलरी इंक्रीमेंट को 1 अप्रैल से लागू कर रही है. उन्होंने ये भी बताया कि चौथी तिमाही में कंपनी ने अनुभवी टैलेंट और कैंपस हायरिंग के जरिए अपनी टीम को और मजबूत किया है. कंपनी की प्राथमिकता अब &#039;AI फर्स्ट कल्चर&#039; बनाने की है, जिससे कर्मचारी भविष्य की जरूरतों और एआई स्किल्स के लिए पूरी तरह तैयार रहें.
कंपनी के बारे मेंवित्तीय वर्ष 2026 के आखिर में TCS के पास 584,519 कर्मचारी थे. कंपनी ने ये भी बताया कि मार्च तिमाही में कुल कर्मचारियों की संख्या में 2,000 से ज्यादा हो गए. इसके अलावा नोकरी छोड़ने वालों संख्या भी 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 13.7 प्रतिशत हो गई है. हालांकि ये मामूली सी बढ़त है, जिससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 04:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TCS, कर्मचारियों, की, चांदी, इस, साल, मिल, सकता, है, Double-Digit, सैलरी, इंक्रीमेंट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>इनकट टैक्स भरने वाले ध्यान दें, TRACES 2.0 पोर्टल लॉन्च, अब चुटकियों में होगा आपका काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इनकट-टैक्स-भरने-वाले-ध्यान-दें-traces-20-पोर्टल-लॉन्च-अब-चुटकियों-में-होगा-आपका-काम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/इनकट-टैक्स-भरने-वाले-ध्यान-दें-traces-20-पोर्टल-लॉन्च-अब-चुटकियों-में-होगा-आपका-काम</guid>
        <description><![CDATA[ Income Tax: आयकर विभाग ने हाल ही में TDS/TCS से संबंधित सेवाओं के लिए एक नया पोर्टल लॉन्च किया है. पिछले हफ्ते ही डिपार्टमेंट की ने TRACES (टीडीएस रिकॉन्सिलिएशन एनालिसिस एंड करेक्शन इनेबलिंग सिस्टम) 2.0 पोर्टल लॉन्च किया है. ये पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आयकर अधिनियम 2025 के अनुसार TDS अनुपालन को व्यवस्थित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पोर्टल की मदद से जनता के लिए अपना क्लेम करना आसान हो जाएगा.
कैस है पोर्टल?आयकर विभाग की ये नई वेबसाइट traces.tdscpc.gov.in है, इस वेबसाइट को अपने सिस्टर पर अपयोगकर्ता आसानी से खोल सकते हैं. इस नए पोर्टल का इंटरफेस पूरी तरह से नया बनाया गया है. इसे पहले से ज्यादा बेहतर और आसान बनाया गया है. जिससे उपयोगकर्ता को बेहतर अनुभव, आसान नेविगेशन और ज्यादा अच्छा काम करने को मिले. इस नए पोर्टल में आपके TDS फॉर्म, TDS सर्टिफिकेट डाउनलोड करने, TDS क्रेडिट ट्रैक करने और सुधार सबमिट करने के लिए एक डैशबोर्ड भी है.
TRACES पोर्टल को कैसे कपेंगे उपयोग?

इसके लिए सबसे पहले आपको अपने कमप्यूटर या लेपटॉप ओपन करना होगा. इसके बाद गूगल क्रोम या जो भी आप सर्च इंजर इस्तेमाल करते हैं उसे खोलना होगा.
इसके बाद ऊपर की तरफ सर्च बार में traces.tdscpc.gov.in लिखकर एंटर कर देंगे. आपके सामने TRACES की नई वेबसाइट खुल जाएगी.
अगर आप पुराने TRACES वेबसाइट को भी खोलेंगे तो भी ये लिंक आपको नए पोर्टल पर ही लेकर जाएगी.
इसके अलावा NRI टैक्स पेयर्स के लिए nriservices.tdscpc.gov.in एक अलग TRACES पोर्टल भी उपलब्ध कराया गया है.

प्रॉपर्टी खरीदने वाले नहीं कर पाएंगे इस्तेमालएक्सपर्ट्स के मुताबिक प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोग टीडीएस जमा करने के लिए TRACES 2.0 पोर्टल का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि आयकर अधिनियम, 2025 के तहत TRACES 2.0 का उपयोग अच्छे से करने के लिए, टैक्स पेयर्स को नियमित रूप से अपने डैशबोर्ड पर टीडीएस क्रेडिट करना चाहिए. प्रमाणपत्रों को तुरंत डाउनलोड और एडिट करना, सही टैक्स इयर का उपयोग, सुधार के लिए निर्धारित समय सीमा के अंदर किसी भी त्रुटि को ठीक करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 04:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इनकट, टैक्स, भरने, वाले, ध्यान, दें, TRACES, 2.0, पोर्टल, लॉन्च, अब, चुटकियों, में, होगा, आपका, काम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>₹10900 करोड़ का कोई वारिस नहीं! PF खातों में पड़ी है लावारिस दौलत, कहीं ये पैसा आपका तो नहीं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/10900-करोड़-का-कोई-वारिस-नहीं-pf-खातों-में-पड़ी-है-लावारिस-दौलत-कहीं-ये-पैसा-आपका-तो-नहीं</link>
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        <description><![CDATA[ Unclaimed EPF: अपने करियर में लोग कई बार बेहतर मौके और अच्छी सैलरी की तलाश में नौकरी बदलते हैं, लेकिन क्या नई जॉब लगने के बाद आपने अपने पुराने PF खातों का हिसाब रखा है? एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि बहुत से लोगों को अपने पुराने पीएफ अकाउंट्स की कोई खबर ही नहीं है. जबकि इन अकाउंट्स में बड़ी रकम है.
1 Finance Magazine की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस समय 31.87 लाख से ज्यादा ऐसे EPF खाते हैं जो अब चालू नहीं हैं और उनमें करीब 10,915 करोड़ रुपये जमा हैं. इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि चीजों को आसान बनाने के लिए सिस्टम होने के बावजूद पिछले कुछ सालों में यह संख्या तेजी से बढ़ी है.
एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड (EPF) लंबे समय तक बचत का एक ऐसा तरीका है, जो रिटायरमेंट के बाद इंसान को फाइनेंशियली सिक्योर बनाता है. हालांकि, जब अकाउंट तीन साल तक इनएक्टिव रहते हैं, तो उन्हें इनऑपरेटिव (निष्क्रिय) मान लिया जाता है. एक स्टडी से पता चला है कि ऐसे अकाउंट की संख्या 2020 में 9.8 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 31.9 लाख हो गई है&amp;mdash;यानी सिर्फ पांच सालों में तीन गुना बढ़ोतरी.
क्यों बढ़ रहे अनक्लेम्ड अकाउंट?

कई बार नौकरी बदलते वक्त लोग अपने पुराने पीएफ अकाउंट को नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के साथ मर्ज नहीं करते हैं. इसके चलते पुराने खातों का कोई हिसाब नहीं रहता है.
2014 में UAN शुरू होने से पहले के लाखों खाते अभी भी लिंक नहीं हुए हैं. ऐसे में उन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है.&amp;nbsp;
कई अकाउंट्स ऐसे भी है, जिनमें बैंक डिटेल, आधार या पैन अपडेटनहीं है. ऐसे में ऑनलाइन विदड्रॉल में मुश्किलें आती हैं.&amp;nbsp;
1000 से कम बैलेंस वाले लगभग 7.11 लाख अकाउंट्स हैं. कई बार लोग छोटे-मोटे अमाउंट के लिए जटिल कागजी कार्रवाई से बचना बेहतर समझते हैं.
नॉमिनी के अभाव में भी कई बार पैसा रूक जाता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

अब आगे क्या?
सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए &#039;ऑटो-रिफंड&#039; के नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत, जिन इनऑपरेटिव अकाउंट्स में 1000 या उससे कम बैलेंस होंगे, उनके लिए अलग से अप्लाई करने की जरूरत नहीं है. EPFO ऐसे खातों की पहचान कर आपका पैसा आपके बैंक अकाउंट में सीधे ट्रांसफर कर देगा. इससे बड़ी रकम के लिए आप UAN पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन क्लेम कर सकते हैं.&amp;nbsp;
मान लीजिए कि आपके पास UAN नहीं है या ऑनलाइन क्लेम में कोई परेशानी आ रही है, तो आप फॉर्म 19/10C डाउनलोड कर उसे भरकर अपने पास के किसी EPFO ऑफिस में जमा करा सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price: आज आपके नजदीकी पंप स्टेशन में कितने में मिल रहा पेट्रोल&amp;डीजल? जानें ताजा रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol, Diesel Prices on April 11, 2026: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच 11 अप्रैल, 2026 को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहीं. तेल विपणन कंपनियां (OMCs) रोजाना सुबह 6 बजे ईंधन की कीमतें अपडेट करती हैं. इनमें वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत और करेंसी एक्सचेंज रेट के हिसाब से बदलाव किए जाते हैं.
क्यों रोज अपडेट होती हैं कीमतें?&amp;nbsp;
कीमतों में हर रोज बदलाव करने का यह मैकेनिज्म पारदर्शिता को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि उपभोक्ताओं को खुदरा ईंधन की कीमतों के बारे में ताजा जानकारी मिले. हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत सरकार ने संकेत दिया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी स्थिर रहने की उम्मीद है. तेल विपणन कंपनियां कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का कुछ हिस्सा खुद वहन करेंगी ताकि उपभोक्ताओं को कीमतों में अचानक होने वाले झटकों से बचाया जा सके.
मिडिल ईस्ट में जंग से बढ़ी टेंशन
हाल के दिनों में मिडिल ईस्टमें ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बीच कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें बहुत अस्थिर रहीं. इस संकट ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की शिपमेंट में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. यह एनर्जी सप्लाई का एक बहुत जरूरी रूट है, जिससे दुनिया की लगभग 20 परसेंटतेल की सप्लाई होती है.&amp;nbsp;
आज पेट्रोल डीजल का रेट



शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटा)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)


दिल्ली
94.77 रुपये
87.67 रुपये


मुंबई
103.54 रुपये
90.03 रुपये


कोलकाता
105.45 रुपये
92.02 रुपये


चेन्नई
100.80 रुपये
92.39 रुपये


बेंगलुरु
102.92 रुपये
90.99 रुपये


भोपाल
106.52 रुपये
91.89 रुपये


अमृतसर&amp;nbsp;
98.29 रुपये
&amp;nbsp;88.06 रुपये


भुवनेश्वर&amp;nbsp;
101.10 रुपये
&amp;nbsp;92.69 रुपये


देहरादून
93.17 रुपये
&amp;nbsp;88.01 रुपये



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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol-Diesel, Price:, आज, आपके, नजदीकी, पंप, स्टेशन, में, कितने, में, मिल, रहा, पेट्रोल-डीजल, जानें, ताजा, रेट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG prices: कितने में मिल रहा आज 14.2 किलो वाला गैस सिलेंडर? जानें दिल्ली से कोलकाता तक क्या है भाव?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-prices-कितने-में-मिल-रहा-आज-142-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-दिल्ली-से-कोलकाता-तक-क्या-है-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-prices-कितने-में-मिल-रहा-आज-142-किलो-वाला-गैस-सिलेंडर-जानें-दिल्ली-से-कोलकाता-तक-क्या-है-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ LPG cylinder price on April 11: फरवरी के महीने में ईरान में अमेरिका और इजरायल के जंग का ऐलान करने के बाद से घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर महंगे हो गए हैं. इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में उथल-पुथल सी मची हुई है. पिछले दो महीनों में घरेलू LPG की कीमतों में एक बार बदलाव किया गया है, जबकि कमर्शियल कुकिंग गैस की दरों में दो बार बदलाव किया जा चुका है. लगभग पांच हफ्तों के संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान दो हफ्तों के सशर्त युद्धविराम पर सहमत हुए हैं.
इस बीच, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार LPG, पेट्रोल और डीजल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है. राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले 40 दिनों में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से किसी और देश के मुकाबले सबसे ज्यादा जहाजों को सुरक्षित निकालने का काम किया है. उन्होंने कहा, &#039;&#039;कुल आठ LPG जहाज, जिनमें लगभग 340 TM (हजार मीट्रिक टन) LPG थी&amp;mdash;जो भारत की लगभग 11 दिनों की आयात जरूरत के बराबर है&amp;mdash;ने सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य को पार कर लिया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिरता मजबूत हुई है.&#039;&#039;
आज एलपीजी सिलेंडर के रेट



शहर
14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत&amp;nbsp;
19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
913.0 रुपये
2078.5 रुपये


मुंबई
912.5 रुपये
2031.0 रुपये


कोलकाता
939.0 रुपये
2208.5 रुपये


चेन्नई
928.5 रुपये
2246.5 रुपये


बेंगलुरु
915.5 रुपये
2161.0 रुपये


फतेहाबाद
942.0 रुपये
2157.5 रुपये


इम्फॉल
1064.5 रुपये
2552.5 रुपये


जयपुर
916.5 रुपये
2106.0 रुपये


लखनऊ
950.5 रुपये
2201.0 रुपये



अब तक कितनी बढ़ी LPG की कीमत?
सप्लाई में रुकावटों के बीच सरकार ने घरेलू और कमर्शियल- दोनों तरह के LPG सिलेंडरों की कीमतें बढ़ा दी हैं. खास बात यह है कि मार्च में 14.2 &amp;nbsp;किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ाई गई थी, लेकिन उसके बाद कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे पूरे देश में घरेलू LPG की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
वहीं, 19 किलो वाले LPG सिलेंडर की कीमत मार्च में पहले 144 रुपये बढ़ाई गई थी, जिसके बाद 1 अप्रैल को इसमें करीब 200 रुपये की और बढ़ोतरी की गई. इससे रेस्टोरेंट, होटल और अन्य जगहों के लिए लागत बढ़ गई है.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, prices:, कितने, में, मिल, रहा, आज, 14.2, किलो, वाला, गैस, सिलेंडर, जानें, दिल्ली, से, कोलकाता, तक, क्या, है, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में महिलाओं ने लिया 76 लाख करोड़ का कर्ज, इतने पैसे का करती क्या हैं? इस रिपोर्ट से समझिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-महिलाओं-ने-लिया-76-लाख-करोड़-का-कर्ज-इतने-पैसे-का-करती-क्या-हैं-इस-रिपोर्ट-से-समझिए</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-महिलाओं-ने-लिया-76-लाख-करोड़-का-कर्ज-इतने-पैसे-का-करती-क्या-हैं-इस-रिपोर्ट-से-समझिए</guid>
        <description><![CDATA[ Women&#039;s Credit Growth in India: भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में महिलाएं भी जोर कदम से अपना योगदान दे रही हैं. घर की चारदीवारी से निकलकर महिलाएं आजकल हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. यहां तक की बिजनेस की दुनिया में भी नए-नए मुकाम हासिल कर रही हैं.
नीति आयोग की रिपोर्ट भी कुछ ऐसा ही कह रही है. NITI Aayog की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिला कर्जदारों के पास कुल 76 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट पोर्टफोलियो है. यह 2025 तक कुल सिस्टम क्रेडिट का 26 परसेंट है और 2017 के बाद से इसमें 4.8 गुना की बढ़ोतरी हुई है.
कारोबार में बढ़ रही महिलाओं की हिस्सेदारी
&#039;From Borrowers to Builders: Women and India&#039;s Evolving Credit Market&#039; (उधारकर्ताओं से निर्माताओं तक: महिलाएं और भारत का उभरता क्रेडिट बाजार) शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में आयोग ने कहा कि दिसंबर 2017 से दिसंबर 2025 के बीच क्रेडिट लेने वाली सक्रिय महिला उधारकर्ताओं की संख्या 9 परसेंट CAGR से बढ़ी है, जबकि उनके बीच क्रेडिट की पहुंच 19 परसेंट से बढ़कर 36 परसेंट हो गई है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस ग्रोथ की मुख्य वजह कमर्शियल क्रेडिट है- 2022 से 2025 के बीच महिला कारोबारी कर्जदारों को दिए गए लोन में 31 परसेंट की CAGR दर्ज की गई, जबकि कुल कमर्शियल क्रेडिट में यह 17 परसेंट रही.
इन क्षेत्रों में महिलाएं सबसे आगे
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि महिलाओं की क्रेडिट तक पहुंच का दायरा लगातार बढ़ रहा है. दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी महिलाएं बढ़-चढ़कर लोन ले रही हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, &quot;पर्सनल और गोल्ड लोन सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट बने हुए हैं, जबकि हाउसिंग लोन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जो महिलाओं के बीच एसेट ओनरशिप में हो रही बढ़ोतरी का संकेत है.&#039;&#039;
इसके अलावा, पर्सनल लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या में भी 25 परसेंट से ज्यादा का इजाफा हुआ है. एजुकेशन लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी हैं.&amp;nbsp;
लोन चुकाने में महिलाएं आगे
नीति आयोग की ही रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का क्रेडिट स्कोर (CIBIL) बेहतर है. साथ ही महिलाओं में लोन डिफॉल्ट (NPA) की दर काफी कम है, जिससे बैंक उन्हें Low-risk borrowers मानते हैं.&amp;nbsp;
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        <enclosure url="http://hindi.attentionindia.com/uploads/images/202604/image_870x580_69da29bb3b06f.jpg" length="91155" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, में, महिलाओं, ने, लिया, लाख, करोड़, का, कर्ज, इतने, पैसे, का, करती, क्या, हैं, इस, रिपोर्ट, से, समझिए</media:keywords>
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        <title>SpiceJet Layoffs:भारी कर्ज और वित्तीय संकट, क्या डूब जाएगी SpiceJet? तनाव में पायलट और क्रू</title>
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        <description><![CDATA[ देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस में से एक स्पाइसजेट फिलहाल बड़ी ही मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रही है. जिसके चलते कंपनी ने अपने साथ काम कर रहे स्टाफ को कम करने का फैसला किया है. कंपनी ने इस वित्तीय संकट से निपटने के लिए अपने स्टाफ में से 20 प्रतिशत को कम करने का मन बना लिया है. खबरों की मानें तो कंपनी जल्दी ही अपने कई कर्मचारियों को बिना वेतन दिए अस्थाई रूप से अवकाश पर भेजने वाली है.
सीनियर अफसरों को नहीं मिला वेतनफिलहाल कंपनी में 6,800 कर्मचारी हैं, इन्हीं में से कई छटनी में बाहर कर दिए जाएंगे. तो वहीं कंपनी के पास अपने केवल 13 ही प्लेन बाकी रह गए हैं, जिनमें 10 बोइंग विमान हैं और 3 Q400 शामिल हैं. इसके अलावा 14 प्लेन लीज पर भी चल रहे हैं. अपनी वित्तीय परेशानियों के बीच कंपनी ने अन्य सीनियर कर्मचारियों की 2-3 महीने की सैलेरी भी नहीं दी है. TDS और PF की 100 करोड़ से भी ज्यादा की राशि बाकी है.
कर्ज में डूबी है SpiceJetये समस्या इसलिए आ रही है क्योंकि स्पाइसजेट के ऊपर काफी कर्ज है. हाल ही में इंग्लैंड की अदालत ने विमान पट्टे से जुड़े विवाद में एयरलाइन को लगभग 68 करोड़ रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं. इस नए फैसले की वजह से पहले से ही घाटे में चल रही कंपनी के ऊपर और भी ज्यादा वित्तीय संकट बढ़ गया है. एयरलाइंस ने अप्रैल 2025 से टीडीएस और जीएसटी भी जमा नहीं किया है. ऐसे में एयरलाइंस के स्टाफ और पायलटों के बीच भी टेंशन का माहौल है.
पायलट और क्रू तनाव मेंSpiceJet में स्टाफ की कटौती से कई कर्मचारियों और उनके परिवारों में काफी तनाव का माहौल है. इस छंटनी में केबिन क्रू, ग्राउंड स्टाफ और कुछ अधिकारियों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है. कंपनी ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि कितनी नौकरियां जा रही हैं, लेकिन कंपनी के अंदर और आसपास से संकेत मिल रहे हैं कि छंटनी कई चरणों में हो रही है. तो वहीं पायलट्स को 21 दिन काम दिया जाएगा और 9 दिन उन्हें छुट्टी लेना होगी. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>ट्रंप लड़ते रहे, अमेरिका में महंगाई ने तोड़ दिया 2 साल का रिकॉर्ड, ईरान से युद्ध के बाद जनता पर गिरा &amp;apos;ऑयल बम&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों ईरान से युद्ध करने में बिजी हैं, लेकिन उनके खुद के देश की हालात सही नहीं है. अमेरिका में महंगाई ने पिछले 2 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
अमेरिका के श्रम विभाग ने बताया है कि मार्च तक के 12 महीनों में उपभोक्ता कीमतें 3.3 फीसदी बढ़ीं हैं, जो फरवरी के 2.4% के मुकाबले ज़्यादा थीं. कहा जा रहा है कि इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध तेल की बढ़ती कीमतें हैं.
तेल की कीमतें छू रहीं आसमानश्रम विभाग की रिपोर्ट की मानें तो उपभोक्ता कीमतों में मार्च तक के 12 महीनों में 3.3 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जो फरवरी में 2.4 प्रतिशत थी. ये उछाल साल 2022 के बाद से सबसे बड़े मासिक परिवर्तनों में से एक है. जब दुनिया रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के कारण संकट से जूझ रही थी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने पेट्रोल पंपों पर भी कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला, क्योंकि युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू गई हैं.
राज्यों पर भी हो रहा असरगैस की कीमतों में फरवरी से मार्च तक 21.2 प्रतिशत का उछाल देखा गया. 1967 में सरकार ने आंकड़े जारी करना शुरू किए थे, जिसके बाद से ये सबसे बड़ी वृद्धि है. तेल और ईंधन की कीमतों में 30 प्रतिशत से भी ज्यादा उछाल देखने को मिला, जो फरवरी 2000 के बाद से सबसे बड़ी वृद्धि है. इसका असर खासतौर पर कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में देखने को मिल रहा है, जहां गैस की कीमतें पहले से ही अमेरिका के बाकी हिस्सों की तुलना में ज्यादा थी.
आम जन हो रहे परेशानअमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के अनुसार, गुरुवार को कैलिफोर्निया में एक गैलन गैस की कीमत लगभग 5.93 डॉलर (भारतीय 550.67 रुपये) थी, जबकि देशभर में लगभग 4.16 डॉलर (भारतीय 386.3 रुपये) थी. कीमतों में आ रहे इस उछाल का असर आम जन पर भी पड़ रहा है. आम जन इन कीमतों को भयानक बता रहे हैं. लोगों का कहना है कि कीमतों में हो रही इस बढ़त को देखते हुए उन्होंने अब कम से कम गाड़ी निकालना शुरू कर दिया है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>मुंबई में 38 करोड़ का 30 किलो सोना जब्त, 24 महिलाओं ने कहां&amp;कहां छुपा रखा था गोल्ड? उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Smuggling: मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हाल ही में DRI ने सोने की तस्करी करते हुए गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस गिरोह में 24 महिलाएं थीं जो करीब 38 करोड़ रुपये के सोने की तस्करी करती हुई पकड़ी गई हैं. ये सभी महिला स्मगलर्स केन्या की बताई जा रही हैं. निदेशालय को इसकी सूचना मिली थी, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई कर इन महिला तस्करो को हिरासत में लिया गया है.
क्या- किया गया जब्त?गुप्त सूचना के आधार पर DRI ने कार्रवाई कर इन महिला तस्करों को पकड़ा है. राजस्व खुफिया निदेशालय ने ऑपरेशन धहाबू ब्लिट्ज चलाकर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया. इस कार्रवाई में गिरोह से 37.74 करोड़ रुपये कीमत का 29.37 किलो सोना जब्त किया है. जिसमें 25.10 किलोग्राम सोने की छड़ें और 4.27 किलोग्राम सोने के गहने बरामद किए हैं. इसे लेकर वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर बताया कि इस ऑपरेशन में 24 महिला तस्करों को भी हिरासत में लिया गया है.&amp;nbsp;
कहां छुपा रखा था सोना?सूत्रों ने बताया है कि इन महिलाओं को अच्छी- खासी ट्रेनिंग मिली हुई थी. इन्होंने तस्करी वाला सोना जूतों, कपड़ों के अंदर और शरीर पर विशेष रूप से बनाए गए पाउच में छिपाया था. इससे पता चलता है कि इनको पूरी तरह से ट्रेन्ड किया गया था. इस बारे में DRI के अधिकारी ने भी बताया है.
डीआरआई के एक अधिकारी ने पीटीआई को दी जानकारी में बताया कि, &#039;महिलाओं को सोना छुपाने और जांच से बचने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे पता चलता है कि एक सुनियोजित गिरोह हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल कर रहा था. इन महिलाओं को अदालत में पेश किया जाएगा, जबकि गिरोह के सरगनाओं को पकड़ने के लिए आगे की जांच जारी है.&#039;
जांच में जुटी पुलिसबता दें कि ये कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी जिसके बाद अब भी जांच जारी है. निदेशालय का मानना है कि ये गिरोह केवल इतने में ही सिमटा हुआ नहीं है, बल्कि ये एक बड़ा नेटवर्क है. जिसका जल्दी से जल्दी भंडाफोड़ करना जरूरी है. ऐसे में DRI इस जांच को आगे बढ़ाते हुए गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है. साथ ही साथ एयरपोर्ट की सिक्योरिटी में सेंध लगाने वालों की तलाश भी जारी है.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गुजरात: जामनगर में &amp;apos;वाइल्डलाइफ एंड वेटरनरी यूनिवर्सिटी&amp;apos; स्थापित करेगा अनंत अंबानी का &amp;apos;वनतारा&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी की ओर से स्थापित वन्यजीव संरक्षण पहल वंतारा ने गुजरात के जामनगर में &#039;वंतारा यूनिवर्सिटी&#039; स्थापित करने की योजना का अनावरण किया है. वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा विज्ञान को समर्पित दुनिया के पहले इंटीग्रेटेड ग्लोबल यूनिवर्सिटी के रूप में प्रचारित इस संस्थान का टारगेट विशिष्ट शिक्षा में एक नया मानक स्थापित करने का है.
यह यूनिवर्सिटी पशु कल्याण, वैज्ञानिक नवाचार और दीर्घकालिक संरक्षण के सिद्धांतों पर आधारित है. यह भारत की ज्ञान परंपराओं से प्रेरणा लेते हुए पशु चिकित्सा, वन्यजीव देखभाल और संरक्षण के क्षेत्र में भविष्य के पेशेवरों को तैयार करने की कोशिश करती है.
प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी से लेते हैं प्रेरणा- अंबानी
इस पहल पर बोलते हुए अंबानी ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी संकट में फंसे जानवरों को देखने के उनके व्यक्तिगत अनुभवों और देखभाल प्रणालियों में कमियों को पहचानने से प्रेरित है. उन्होंने आगे कहा कि यह संस्थान प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी की भावना और &quot;आ नो भद्राः क्रतवो यंतु विश्वतः&quot; यानी &#039;सभी दिशाओं से हमारे पास कल्याणकारी विचार आएं&#039; के दर्शन से प्रेरणा लेता है, ताकि जीवन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध पीढ़ी का निर्माण किया जा सके.
स्थापना स्थल का प्रतीकात्मक डिज़ाइन इस विज़न को दर्शाता है. नालंदा से जुड़ी प्राचीन विंध्य भूगर्भीय संरचना से प्राप्त &#039;बिजोलिया सैंडस्टोन&#039; के दो ब्लॉकों को इस परिवेश में शामिल किया गया था, जो भारत की सीखने की स्थायी परंपरा को रेखांकित करते हैं.
हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित स्थापना समारोह में शिक्षा जगत, संरक्षण, विज्ञान और सार्वजनिक जीवन की प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें अंबानी के शिक्षक और गुरु भी थे. एक मुख्य अनुष्ठान में भारत भर के जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों, जंगलों और आर्द्रभूमि से लेकर शुष्क क्षेत्रों और हिमालयी परिदृश्यों से इकट्ठा की गई मिट्टी, जल और पत्थर रखे गए, जो देश की पारिस्थितिक विविधता और प्राकृतिक विरासत में यूनिवर्सिटी की जड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
दृष्टिकोण और वैश्विक शैक्षणिक महत्वाकांक्षाएं
वंतारा यूनिवर्सिटी को एक बहुविषय केंद्र के रूप में डिजाइन किया गया है, जो वास्तविक दुनिया के संरक्षण अभ्यासों को शैक्षणिक शिक्षा के साथ जोड़ता है. वंतारा के परिचालन अनुभवों का लाभ उठाते हुए संस्थान का लक्ष्य क्षेत्रीय अनुभव को संरचित शैक्षणिक कार्यक्रमों, पेशेवर प्रशिक्षण और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक रूपरेखाओं में बदलना है.
यूनिवर्सिटी वन्यजीव चिकित्सा और सर्जरी, पोषण, व्यवहार विज्ञान, आनुवंशिकी, महामारी विज्ञान, वन हेल्थ, संरक्षण नीति और पशु आवास डिजाइन जैसे विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर, फेलोशिप और विशिष्ट पाठ्यक्रम देने योजना बना रही है. ये कार्यक्रम वंतारा की मौजूदा क्षमताओं के हिसाब से विशेष कॉलेजों में आयोजित किए जाएंगे.
सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों की मदद के लिए स्कॉलरशिप शुरू की जाएगी, जिससे संस्थान की सुविधाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो सके.
परिसर में उन्नत शैक्षणिक और क्लिनिकल बुनियादी ढांचे के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आवासीय सुविधाएं भी होंगी. यह वन्यजीव स्वास्थ्य, संरक्षण प्रथाओं और पशु कल्याण को मजबूत करने पर केंद्रित क्रिया-उन्मुख अनुसंधान को प्राथमिकता देगा. शैक्षणिक मॉडल प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को वैज्ञानिक देखभाल और दीर्घकालिक प्रबंधन रणनीतियों के साथ जोड़ते हुए, &#039;इन-सिटू&#039; और &#039;एक्स-सिटू&#039; दोनों प्रकार के संरक्षण को एकीकृत करेगा.
संरक्षण शिक्षा और इनोवेशन के लिए कोशिशें
यूनिवर्सिटी का शुभारंभ भारत में संरक्षण-केंद्रित शिक्षा के विस्तार की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है. समारोह के दौरान वंतारा ने &#039;वंतारा यूनिवर्सिटी फाउंडिंग फेलोज&#039; कार्यक्रम और &#039;एवरी लाइफ मैटर्स&#039; स्कॉलरशिप जैसी पहलों की घोषणा की, साथ ही ज्ञान को सुरक्षा के साथ जोड़ने का आह्वान किया.
एक शैक्षणिक संस्थान से कहीं बढ़कर वंतारा यूनिवर्सिटी एक ऐसे दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो वैज्ञानिक कठोरता के साथ करुणा को जोड़ता है. इसका घोषित दृष्टिकोण इस बात पर जोर देता है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि मजबूत प्रणालियों, कुशल पेशेवरों और निरंतर संस्थागत समर्थन की भी जरूरत है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गुजरात:, जामनगर, में, वाइल्डलाइफ, एंड, वेटरनरी, यूनिवर्सिटी, स्थापित, करेगा, अनंत, अंबानी, का, वनतारा</media:keywords>
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        <title>LPG Crisis: होर्मुज से 1 दिन में सिर्फ 15 जहाजों को मंजूरी, ईरान ने तय की कड़ी शर्तें, सप्लाई चेन पर पड़ेगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ Iran on Hormuz Vessels: अमेरिका-ईरान युद्ध विराम के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी &#039;तास&#039;की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि अब ईरान एक दिन में होर्मुज से सिर्फ 15 जहाजों को गुजरने की मंजूरी देगा. ईरान के इस फैसले से भारत में एलपीजी और कच्चे तेज की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. सीमित आवाजाही के ईरान के इस फैसले ने अब वैश्विक ट्रांसपोर्टरों की चिंता भी बढ़ा दी है.
भारत सरकार का क्या कहना है?
देश में एलीपी, क्रूड ऑयल और रसायन प्रोडेक्ट की सप्लाई को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि सरकार देश में एलीपी संकट से लड़ने की कोशिशें कर रही है. फिलहाल देश में एलपीजी गैस सिलेंडर्स की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी हुई है. मंत्रालय ने जानकारी दी कि देश में हर दिन 58 लाख से ज्यादा घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं. इतना ही नहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर्स की उपलब्धता को भी बढ़ा दिया गया है, जो अब करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने मीडिया को बताया कि देश में एक दिन के भीतर 6 हजार 700 टन कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हुई, जो लगभग 3.5 लाख सिलेंडर्स के बराबर है. इतना ही नहीं इस दौरान पांच किलो वाले करीब 1.06 लाख सिलेंडर भी बेचे गए.
इतना अहम क्यों है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
ईरान और ओमान के बीच समंदर का एक छोटा सा हिस्सा है, जिसे &#039;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#039; कहा जाता है. यह पानी की एक पतली पट्टी जैसी है, जिसकी चौड़ाई सिर्फ 34 किलोमीटर है, लेकिन इसकी अहमियत इतनी ज्यादा है कि इसे दुनिया की &#039;आर्थिक नस&#039; माना जाता है. यह रास्ता खाड़ी के देशों को हिंद महासागर से जोड़ता है. पूरी दुनिया में जितना भी कच्चा तेल सप्लाई होता है, उसका पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. सिर्फ तेल ही नहीं, खेती के लिए जरूरी उर्वरक और अन्य जरूरी सामान भी इसी समुद्री रास्ते से दुनिया भर में पहुंचते हैं.
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold&amp;Silver Rate: डेढ़ लाख के नीचे आया सोना, एक दम से कम हो गए इतने रुपए, चांदी की कीमतों में भी गिरावट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-rate-डेढ़-लाख-के-नीचे-आया-सोना-एक-दम-से-कम-हो-गए-इतने-रुपए-चांदी-की-कीमतों-में-भी-गिरावट</link>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में हर रोज क्या बल्कि हर घंटे में बदलाव देखने को मिल जाता है. गुरुवार यानी 9 अप्रैल 2026 की शाम भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. सोना और चांदी की कीमतों में क्रमश: करीब 1,200 रुपए और 8,000 रुपए की कमी देखी गई. जिससे बाजार में खरीदारों के बीच भी खुशी की लहर दौड़ गई है.
सोने की कीमत में कितनी आई गिरावट?इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 1,184 रुपए कम होकर 1,49,937 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है. 24 कैरेट गोल्ड की पहले कीमत 1,51,121 रुपए प्रति 10 ग्राम थी. 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,427 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,37,342 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है. 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,12,453 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है. इसकी कीमत पहले 1,13,341 रुपए प्रति 10 ग्राम थी.
चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट दर्ज की गई?सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है. चांदी का दाम 7,883 रुपए कम होकर 2,36,158 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,44,041 रुपए प्रति किलो था. वायदा बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हुआ है. खबर लिखे जाने तक सोने के 05 जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.47 प्रतिशत बढ़कर 1,52,488 रुपए हो गया है और चांदी के 05 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.60 प्रतिशत कम होकर 2,38,483 रुपए हो गया है.
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हालतअंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में बिकवाली देखी गई. सोना 0.11 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 4,770 डॉलर प्रति औंस और चांदी 74 डॉलर प्रति औंस पर थी. जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह हाल की तेजी के बाद आई मुनाफावसूली है, इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी सोने और चांदी पर दबाव बनाने का दाम किया है. सोने और चांदी ने बीते एक साल में शानदार रिटर्न दिया है. इस दौरान सोने की कीमत में करीब 54 प्रतिशत और चांदी की कीमत में 144 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold-Silver, Rate:, डेढ़, लाख, के, नीचे, आया, सोना, एक, दम, से, कम, हो, गए, इतने, रुपए, चांदी, की, कीमतों, में, भी, गिरावट</media:keywords>
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        <title>पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं? इन 7 गलतियों को करने से बचें, वरना लग सकता है भयंकर चूना</title>
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        <description><![CDATA[ Personal Loan: फाइनेंशियल जरूरतें ऐसी होती हैं जो कभी भी किसी भी व्यक्ति के जीवन में आ जाती हैं. इसके लिए कई सारे बैंकों ने लोन की सुविधाएं दे रखी है. लोन हर तरह का होता है, कार लोन, होम लोन, एजुकेशन लोन आदि. लेकिन कई बार छोटी जरूरत के लिए लोग पर्सनल लोन लेना भी प्रिफर करते हैं. ऐसा करने में कई बार ये लोग फंस भी जाते हैं और इन्हें लंबा- चौड़ा चूना लग जाता है. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि यदि आप पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको कुछ सावधानियां बरतना चाहिए.
पर्सनल लोन क्या होता है?पर्सनल लोन को अनसिक्योर्ड लोन भी कहते हैं. ये लोन बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से मिलता है. पर्सनल लोन आप छोटे अमाउंट का किसी भी पर्सनल काम जैसे, शादी, मेडिकल इमरजेंसी या घर की मरम्मत जैस कामों के लिए ले सकते हैं. इसके लिए आपको अपने पास से कोई भी चीज गिरवी नहीं रखना पड़ती है. आपको सीधे लोन मिल जाता है वो भी आसान सी प्रक्रिया के जरिए. हालांकि हो सकता है कि इसके लिए आपको ब्याज दर ज्यादा देना पड़े.
पर्सनल लोन लेते समय बरतें सावधानियांपर्सनल लोन लेने का प्रोसेस तो बहुत आसान है, ना ज्यादा डॉक्युमेंट्स जमा करना, ना ही बैंक के चक्कर लगाना, बल्कि इन दिनों तो ऑनलाइन भी पर्सनल लोन मिल जाता है. लेकिन इसे लेते समय आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती हैं. वरना आपको अच्छा- खासा चूना भी लग सकता है. ऐसे में हम आपको सात ऐसी गलतियां बताते हैं, जिनको करने से आपको बचना ही चाहिए.
ब्याज दरों की तुलना (Interest Rate)पर्सनल लोन लेने से पहले आपको हमेशा कई सारे बैंकों की ब्याज दरों की आपस में तुलना कर लेना चाहिए. इससे आपको पता चलेगा कि किस बैंक में कम ब्याज मिल रहा है, किस बैंक से लोन लेना फायदेमंद है, तो आपको उसी से लोन लेंगे.
क्रेडिट स्कोर का रखें ख्याल (Credit Score)लोन लेने के लिए सबसे जरूरी क्रेडिट स्कोर होता है. यदि आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ज्यादा है तो आपको कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा. यदि इसस कम आपका क्रेडिट स्कोर है तो आपको लोन लेने के बाद ज्यादा ब्याज देना होगा.
हिडन चार्ज का रखें ख्याल (Hidden Charges)पर्सनल लोन लेने से पहले हमेशा आपको हिडन चार्जेज पर नजर रखना चाहिए. कहीं लोन के एवज में आपसे हिडन चार्जेस के नाम पर लंबी- चौड़ी फीस ना बटोरी जा रही हो. जैसे प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव फीस और प्री-पेमेंट वाले चार्जेस के बारे में पहले से ही पता कर लें.
EMI का निर्धारण (EMI Scheduling)लोन लेते समय इस बात को सुनिश्चित करें कि आपके लोन की ईएमआई हमेशा आपके सालेरी की 40% होना चाहिए. इससे ज्यादा अगर ईएमआई होगी तो आपको हर महीने भरने में परेशानी होगी. इसके अलावा अन्य खर्चों में भी परेशानियां हो सकती हैं.
अवधि का रखें ध्यान (Loan Tenure)आप लोन कम भी लेंगे तो उसकी भरपाई के लिए टेन्योर थोड़ा कम ही रखें. यदि बहुत ज्यादा लंबे समय तक आप लोन चुकाते ही रहेंगे तो आपको ब्याद ज्यादा देना पड़ेगा. ज्यादा से ज्यादा आपके लोन की अवधि 5 साल होना चाहिए. उससे ज्यादा में ब्याज का बोझ आपके ऊपर बढ़ जाएगा.&amp;nbsp;
जरूरी कागजात (Important Documents)वैसे तो पर्सनल लोन लेने से पहले आपको बहुत ज्यादा दस्तावेजों की जरूरत नहीं होती है. लेकिन फिर भी कभी- कभी आपको कुछ दस्तावेजों की जरूरत होती है तो आप अपनी आय का प्रमाण, एड्रेस का प्रमाण, और रोजगार का प्रमाण तैयार रखना चाहिए. यदि इनमें से कुछ एक भी ना हो तो बैंक से बात करके कोई तोड़ भी निकाल लेना चाहिए. इससे लोन लेते समय परेशानी नहीं होगी.
फर्जी एप्स से बचें (Fake Apps)आजकल डिजिटल वर्ल्ड का चलन है, ऐसे में बाजार में कई सारी ऐसी एप्स हैं जिनसे घर बैठे ही आपको लोन मिल जाता है. लेकिन इसमें फंसने से बचना चाहिए. क्योंकि सभी एप्स भरोसेमंद नहीं होतीं. ये एप्स आपसे इतने हिडन चार्जेस ले लेती हैं जिनके बारे में आपको पता भी नहीं चलता है. बस हर महीने आपका कर्ज बढ़ता ही जाता है. ऐसे में आपको केवल भरोसेमंद एप्स से ही लोन लेना चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पर्सनल, लोन, लेने, के, बारे, में, सोच, रहे, हैं, इन, गलतियों, को, करने, से, बचें, वरना, लग, सकता, है, भयंकर, चूना</media:keywords>
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        <title>यहां लावारिस पड़े हैं ₹2.2 लाख करोड़ रुपए, इतनी बड़ी रकम का मालिक कोई नहीं, पढ़ें पूरी रिपोर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यहां-लावारिस-पड़े-हैं-22-लाख-करोड़-रुपए-इतनी-बड़ी-रकम-का-मालिक-कोई-नहीं-पढ़ें-पूरी-रिपोर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ हम में से कई भारतीय लोग कई तरह का इन्वेस्टमेंट करते हैं. ये इन्वेस्टमेंट लॉन्ग टर्म होते हैं जिनको भविष्य के बारे में सोचकर हम जमा करवाते हैं. लेकिन ऐसी ही रकम भारतीयों की शेयर मार्केट और बैंकों में लावारिस पड़ी है. ये रकम कोई छोटी या थोड़ी नहीं बल्कि करोड़ों की रकम और एसेट्स हैं. इस बात का खुलासा 1 फाइनेंस रिसर्च द्वारा की गई एक स्टडी में हुई है.
करोड़ों में है रकम1 फाइनेंस मैग्जीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 तक करीब 89,000 करोड़ रुपये की रकम 1671 लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में फंसी हुई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक ये सम्पत्ति बैंक डिपॉजिट, शेयर, इंश्योरेंस और EPF जैसे सेक्टर में लावारिस पड़ी है. ये सम्पत्ति कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की होगी, जिसका दावेदार कोई भी नहीं है. इतना ही नहीं ये पैसा और एसेट्स ना केवल लावारिस पड़े हैं बल्कि धीरे- धीरे महंगाई की मार भी झेल रहे हैं और अपनी वैल्यू कम करते जा रहे हैं.
कहां कितना पैसा है लावारिस?ये पैसा बैंक से लेकर शेयर मार्केट तक में फंसा हुआ है. जिसमें बैंक डिपॉजिट में 97,545 करोड़ रुपये पड़े हैं, जिनका दावेदार कोई नहीं है. ये पैसा RBI के DEA फंड में जाता है. इस पैसे पर फंड के मुताबिक महज 3 प्रतिशत साधारण ब्याज मिलता है. इसके अलावा इक्विटी शेयर्स में 89,004 करोड़ रुपये 1671 लिस्टेड कंपनियों के शेयर में फंसी है. तो वहीं बीमा में 20,062 करोड़ रुपये पड़े हैं. ये रकम मैच्योरिटी, डेथ क्लेम या सरेंडर वैल्यू के रूप में है. तो वहीं ईपीएफ में 10,915 करोड़ रुपये पड़े हुए हैं, जनको क्लेम करने वाला कोई नहीं है. इसमें से 38 प्रतिशत ईपीएफ अकाउंट सालों से निष्क्रिय हैं. इसके अलावा म्यूचुअल फंड में भी करोड़ों रुपये लोगों के फंसे हैं. इसमें 3452 करोड़ रुपये ऐसे हैं जिनका कोई दावेदार नहीं है.
क्यों है ऐसी हालत?इन्वेस्मेंट करते समय कुछ लोग ज़रूरी काम करना भूल जाते हैं. जैसे कई लोग इस दौरान नॉमिनी का नाम जोड़ना भूल जाते हैं या समय के साथ अपडेट नहीं करते हैं, इस वजह से ये पैसा फंस जाता है. निवेश के दौरान परिवार की जानकारी ना देना भी इसका एक बड़ा कारण है. कई लोगों को ये ही नहीं पता होता है कि क्लेम कैसे करना है, इस वजह से भी उनका पैसा अटका रह जाता है. इस वजह से निवेश करने के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए. साथ ही साथ परिवार के सदस्यों को भी अपने निवेश की जानकारी देना चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रुपया vs रुपी:  युद्ध के बीच भारत या पाकिस्तान; किसकी करेंसी है ज्यादा मजबूत, देखें ग्लोबल रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Rupee vs Pakistani Rupee: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और महंगाई की चिंता के बीच गुरुवार, 9 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ खुला. भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 92.66 पर ओपन हुआ है. रुपये के कमजोर होने के पीछे ईरान में सीजफायर और होर्मुज को लेकर अनिश्चितता को बताया जा रहा है. अभी भी चिंता होने के कारण रिस्की एसेट्स पर दबाव बढ़ने की आशंका है. रुपये में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव जारी है.&amp;nbsp;
पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो, एक डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया 279.02 पर चल रहा है. आइए जानते हैं, भारत और पाकिस्तान में किसकी करेंसी है ज्यादा मजबूत.
भारत-पाकिस्तान में किसकी करेंसी ज्यादा मजबूत?
अगर भारतीय रुपये और पाकिस्तानी रुपये की तुलना करें, तो भारतीय करेंसी ज्यादा मजबूत मानी जाती है. मौजूदा स्थिति में 1 भारतीय रुपया लगभग 3 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है. यानी समान मूल्य के लिए पाकिस्तान को ज्यादा मुद्रा देनी पड़ती है. यह अंतर दोनों देशों की आर्थिक स्थिति, महंगाई दर और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे कारकों पर निर्भर करता है. जहां भारत की स्थिति तुलनात्मक तौर पर बेहतर मानी जाती है.
दोनों करेंसी में तुलना
दोनों देशों की करेंसी की तुलना करें तो मे 1 भारतीय रुपया लगभग 3 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है. साथ ही डॉलर में तुलना करें तो एक डॉलर की कीमत भारतीय रुपये में करीब 92.66 रुपये बनती है. वहीं पाकिस्तानी रुपये में यह 279.02 होती है.&amp;nbsp;
संकट और महंगाई की दोहरी मार में पाकिस्तान
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. मार्च में महंगाई दर में फिर से तेज उछाल देखने को मिली है. पहले से कर्ज के बोझ तले दबे देश के लिए हालात और मुश्किल हो गए हैं, क्योंकि नया कर्ज देने के लिए कोई तैयार नहीं है. ऐसे में आर्थिक संकट और गहराने की आशंका बढ़ रही है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालात का असर भी सीधे पाकिस्तान पर पड़ रहा है. तेल की सप्लाई प्रभावित होने से ईंधन की कीमतों में इजाफा है. पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें: ईरान वॉर से बिगड़ा पड़ोसी देशों का बजट, LPG-पेट्रोल डीजल के दाम आसमान पर, भारत की बढ़ी धड़कनें
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रुपया, रुपी:,  युद्ध, के, बीच, भारत, या, पाकिस्तान, किसकी, करेंसी, है, ज्यादा, मजबूत, देखें, ग्लोबल, रिपोर्ट</media:keywords>
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        <title>Summer Business: गर्मी के मौसम में शुरू करें ये बिजनेस, कम निवेश में होगी बंपर कमाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/summer-business-गर्मी-के-मौसम-में-शुरू-करें-ये-बिजनेस-कम-निवेश-में-होगी-बंपर-कमाई</link>
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        <description><![CDATA[ Low Investment Business: अप्रैल के महीने से ही गर्मी अपने तेवर दिखाने लगी है. देश के कई राज्यों में गर्मी की शुरूआत हो गई है. आने वाले महीनों में तो हालात और भी खराब हो सकती है. हालांकि, अपना खुद का बिजनेस करने की सोच रहे लोगों के लिए यह एक मौका भी बन सकता है.
गर्मी के सीजन में ऐसे कुछ बिजनेस किए जा सकते हैं, जिनसे अच्छी कमाई की उम्मीद रहती है. अगर आप भी नौकरी छोड़कर कुछ खुद का करना चाहते हैं, तो आप इन आइडिया पर विचार कर सकते है.&amp;nbsp;
जूस स्टॉल से कमाई का मौका
गर्मी का मौसम आते ही ठंडे पेय की मांग तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे में जूस का छोटा स्टॉल खोलकर आप अपनी बिजनेश की शुरूआत कर सकते हैं. आम, गन्ना या संतरा जैसे फलों के जूस बेचकर इस काम को कम निवेश में शुरू किया जा सकता है. बेसिक सामान के साथ आप इसकी शुरूआत 50 हजार से 1 लाख रुपये में कर सकते है.
अनुमान के तौर पर 40&amp;ndash;50 प्रतिशत तक का प्रॉफिट इससे हो सकता है. अगर आप हर रोज 5 हजार का धंधा भी करते हैं तो आपको 2000 रुपये तक की बचत आराम से हो सकती है. &amp;nbsp;
गर्मियों में बर्फ के बिजनेस से कमाई
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे बर्फ की जरूरत भी तेजी से बढ़ जाती है. कोल्ड ड्रिंक, जूस, शादी-पार्टी हर जगह इसकी मांग रहती है. ऐसे में बर्फ की सिल्लियां या पैक्ड आइस क्यूब बनाकर बाजार में बेचना एक अच्छा बिजनेस विकल्प हो सकता है. करीब 1 से 2 लाख रुपये में आप इसकी छोटी शुरूआत कर सकते हैं. अगर आपने मार्केटिंग और दूसरी चीजों पर अच्छे से ध्यान दिया तो 30 से 40 हजार रुपये की मंथली इनकम हो सकती है.&amp;nbsp;
आइसक्रीम का बिजनेस &amp;nbsp;
इस गर्मी के सीजन में आइसक्रीम का बिजनेस करके भी अच्छी कमाई की जा सकती है. आइसक्रीम ब्रांड की फ्रेंचाइजी लेकर काम शुरू कर सकते हैं. करीब 4 से 5 लाख के निवेश से इस बिजनेस की शुरुआत की जा सकती है. अच्छी लोकेशन होने और बिक्री बढ़ने पर हर महीने करीब 1 लाख रुपये तक कमाई की संभावना बन सकती है.
यह भी पढ़ें:
Gold Silver Price: शादी सीजन से पहले आज फिर गिरे सोने-चांदी के भाव, चांदी 2,700 रुपये फिसली; जानिए आपके शहर का ताजा रेट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>LPG Upadte: होर्मुज पर ब्लॉकेज, अब तेल के जहाज भारत आ रहे हैं या नहीं? सरकार ने दिया अपडेट, ये है प्लान B</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में पिछले कई दिनों से एलपीजी गैस की किल्लत चल रही है. इसी बीच अब सरकार ने इसे लेकर एक बड़ा अपडेट दिया है. केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि यूएस ईरान के युद्ध के बीच भारत में रसोई गैस की को कोई दिक्कतें नहीं आएंगी. उन्होंने साफ कर दिया है कि देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. ऐसे में घबराने की या परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या जानकारी दी?दरअसल गुरुवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्रेटरी नीरज मित्तल ने मीडिया के साथ बातचीत में एलपीजी संकट को लेकर कहा कि, &#039;मुझे कहीं कोई समस्या नहीं दिख रही है. सभी घरेलू आपूर्ति 100% है&#039;. इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि लगभग 70 प्रतिशत पैक्ड एलपीजी पहले ही जारी की जा चुकी है. उन्होंने ये भी कहा कि हो सकता है कि स्थानीय आपूर्ति में कुछ मामूली सी समस्याएं आएं, लेकिन वो कोई बड़ी बात नहीं बल्कि सामान्य ही है, क्योंकि ऐसी दिक्कतें हर रोज आती हैं और उनका समाधान भी किया जाता है.
शिपमेंट के बारे में भी की बातइतना ही नहीं मित्तल ने जहाजों की आवाजाही के बार में भी बात की है. उन्होंने बताया है कि इसमें कोई रुकावट नहीं है, शिपमेंट की आवाजाही आसानी से हो रही है. मित्तल ने कहा, &#039;नाकाबंदी होने के बावजूद भी जहाज लगातार आ रहे हैं. वो अपने सामान्य यात्रा समय का पालन करते हैं. हम जलडमरूमध्य पार करने में किसी देरी की बात नहीं कर रहे हैं. सरकार हर रोज इसकी समीक्षा कर रही है. यदि कोई बदलाव करना होगा, तो वो भी किया जाएगा&#039;.
क्या है प्लान B?मित्तल ने ऊर्जा सुरक्षा और भारत की बढ़ती गैस मांग पर सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस बात पर भी जोर दिया कि, हाल ही में पश्चिम एशिया में हुए संकट ने प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए योजना बनाने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के महत्व को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि भारत 41 देशों से कच्चा तेल, 30 देशों से प्राकृतिक गैस और 13 देशों से एलपीजी प्राप्त करता है, और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा नीतियों को तैयार करते समय इन कारकों को ध्यान में रखना आवश्यक है. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि सरकार सभी संस्थाओं को गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लगी हुई है, और इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि आगे कबी ऐसे संकट से ना जूझना पड़े.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>LPG पर बड़ी खबर, हॉर्मुज पार कर भारत आ रहा गैस से लदा जहाज &amp;apos;आशा&amp;apos;, सप्लाई चेन में सुधार शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ Iran War Hormuz Update LPG Ship: देश में गैस, पेट्रोल जैसी जरूरी चीजें और रसायन क्षेत्र से जुड़ी सप्लाई और मांग को लेकर हालात पर नजर रखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने अहम जानकारी शेयर की है. मंत्रालय के मुताबिक, LPG की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत एक ही दिन में 58 लाख से ज्यादा घरेलू LPG सिलेंडर वितरित किए गए. वहीं, कमर्शियल LPG की उपलब्धता भी बढ़कर करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे बाजार में राहत देखने को मिल रही है.
मंत्रालय ने बताया कि एक दिन में 6700 टन कमर्शियल LPG की बिक्री हुई, जो लगभग 3.5 लाख सिलेंडर के बराबर है, जबकि 5 किलो वाले करीब 1.06 लाख सिलेंडर भी बेचे गए. इसके अलावा, फर्टिलाइजर प्लांट्स के लिए 95 प्रतिशत तक नेचुरल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और LPG का दैनिक उत्पादन भी 48,000 टन तक पहुंच गया है.
दवाओं की कीमत स्थिर, LPG जहाज ने होर्मुज़ पार किया
वहीं, केमिकल और फर्टिलाइजर सेक्टर में वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कुछ दवाओं के कच्चे माल पर असर पड़ा है, लेकिन दवाओं की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. शिपिंग अपडेट में बताया गया कि 5 अप्रैल को LPG लेकर आ रहा जहाज होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर आगे बढ़ चुका है, जिससे सप्लाई में और सुधार की उम्मीद है.
भारतीयों के लिए सुरक्षित वापसी की सलाह दी- विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि होर्मूज पर टोल को लेकर भारत और ईरान के बीच अब तक कोई बात नहीं हुई है. मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत पिछले कई सालों से बांग्लादेश को एनर्जी प्रोडक्ट दे रहा है और फिलहाल ईरान में अभी लगभग 7500 भारतीय नागरिक मौजूद है.
मंत्रायल ने कहा कि वर्तमान में शांति और युद्धविराम की स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षित माहौल में आर्मेनिया या अजरबैजान के रास्ते भारत लौट सकते हैं तो वहीं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को लेकर किसी भी टिप्पणी से इनकार किया गया. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Iran US War: बना लें लिस्ट! ईरान&amp;यूएस सीजफायर के बाद ये चीजें हो जाएंगी सस्ती!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iran-us-war-बना-लें-लिस्ट-ईरान-यूएस-सीजफायर-के-बाद-ये-चीजें-हो-जाएंगी-सस्ती</link>
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        <description><![CDATA[ US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है, लेकिन अब दोनों देशों के बीच दो हफ्तों के सीजफायर यानी युद्ध विराम की घोषणा ने ग्लोबल मार्केट में हलचल पैदा कर दी है. काफी लंबे समय से चल रहे तनाव के चलते पूरी दुनिया महंगाई और सप्लाई चेन की समस्याओं से परेशान थी, लेकिन अब इस फैसले ने राहत की उम्मीद जगा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसे ही दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की खबर सामने आई, वैसे ही इसका सबसे बड़ा और पॉजिटिव असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से 17 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.
इस घटनाक्रम में होमुर्ज स्ट्रेट की अहम भूमिका है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LPG सप्लाई का प्रमुख रास्ता माना जाता है. ईरान के साथ तनाव की वजह से इस मार्ग पर खतरा बना हुआ था, लेकिन अब सीजफायर के बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद ज्यादा बढ़ गई है. सप्लाई सुचारू होने से ऊर्जा की कीमतों में गिरावट आने लगती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और साथ ही इसका फायदा भारत जैसे देशों को भी मिलेगा जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं, उन्हें इससे सीधा फायदा मिल सकता है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी गिरावट
अगर हम भारत के नजरिए से देखें तो सबसे पहले राहत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में देखने को मिल सकता है. लेकिन भारत में कीमतों में बदलाव तुरंत नहीं होता है, क्योंकि तेल कंपनियां टैक्स और पुराने घाटे को भी ध्यान में रखती हैं. अगर फिर भी, अंतरराष्ट्रीय कीमतें नीचे बनी रहती हैं तो अगले 7 से 10 दिनों में राहत मिल सकती है. यहीं नहीं बल्कि रसोई गैस यानी LPG के मोर्चे पर भी अच्छी खबर मिल सकती है.
ईरान के साथ चल रहे तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने की वजह से LPG महंगी हो गई थी, जिसकी वजह से घरेलू और कर्मशियल सिलेंडरों के दाम बढ़ गए, लेकिन ताजा हालात को देखते हुए लगता है कि अगर आयात सस्ता हुआ तो घरेलू LPG सिलेंडरों के दाम घट सकते हैं. इससे होटल और ढाबों में खाने की चीजें भी सस्ती हो सकती है.&amp;nbsp;
ये सामान हो सकता है सस्ता!

पेट्रोल और डीजल
सब्जियां और फल
खाने का तेल
दालें
खाघ पदार्थ
स्मार्टफोन
लैपटॉप-पीसी
टीवी
फ्रिज
वॉशिंग मशीन
गाड़ियां
विदेश से आने वाले कपड़े

हवाई टिकटों के दाम में हो सकता है बदलाव
हवाई यात्रियों के लिए भी यह खबर राहत भरी हो सकती है. क्योंकि कच्चे तेल की कीमत कम होने से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) सस्ता होता है, जो एयरलाइंस की लागत का बड़ा हिस्सा होता है. ऐसे में आने वाले समय में हवाई टिकटों के दाम कम होने की भी ज्यादा संभावना है. तेल की कीमतों में गिरावट का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है. डीजल सस्ता होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होती है, जिससे सब्जियां, दूध, अनाज और अन्य जरूरी सामान सस्ते हो सकते हैं. इसके अलावा प्लास्टिक, पैकेजिंग, टायर और सिंथेटिक कपड़ों जैसी चीजों की लागत भी कम होने की उम्मीद है.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इन बदलावों का असर तुरंत नजर नहीं आता. सप्लाई चेन को सामान्य होने और नई कीमतों को लागू होने में 1 से 3 हफ्तों का समय लग सकता है. साथ ही, यह सीजफायर फिलहाल अस्थायी है. अगर यह स्थायी शांति में बदलता है और सरकार टैक्स में भी राहत देती है, तभी आम जनता को इसका पूरा फायदा मिल सकेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 04:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG पर सबका कोटा तय! उद्योगों की नहीं चलेगी मनमानी, PNG कनेक्शन पर मिलेगा डिस्काउंट</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Shortage: एलपीजी गैस की पिछले कई दिनों से किल्लत चल रही है, जिसके चलते अब सरकार ने भी एक बड़ा फैसला किया है. इस फैसले के तहत अब राज्यों में चल रहे उद्योगों को एलपीजी लिमिट में मिलेगी. जिसके लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश भी दिया है कि वो इंडस्ट्रियल यूज के लिए गैस की आपूर्ति को लिमिट करें.
LPG के सप्लाय से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने ये कदम उठाया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वो नॉन डोमेस्टिक एलपीजी का 70% हिस्सा अन्य क्षेत्रों को आवंटित करें, इसके साथ ही औद्योगिक उपयोगकर्ताओं की आपूर्ति को सीमित करें. इसके अलावा सरकार ने सुधार को मद्देनजर रखते हुए एक और योजना भी शुरू की है, जिसके तहत PNG जैसे वैकल्पिक ईंधनों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने वाले राज्यों को एलपीजी का अतिरिक्त 10% आवंटन दिया जाएगा.
औद्योगिक आपूर्ति होगी लिमिटेडइस निर्देश को देने का एक मुख्य कारण औद्योगिक खपत पर लगाम लगाना भी है. कई सेक्टर्स जैसे फार्मा, प्रोसेसिंग फूड, स्टील, ग्लास, सिरेमिक, पैकेजिंग और केमिकल्स को अब मार्च 2026 से पहले के बल्क एलपीजी कंजंप्शन लेवल का केवल 70% ही दिया जाएगा. इसके अलावा, ये आपूर्ति 0.2 मीट्रिक टन प्रतिदिन के हिसाब से तय की गई है, जिससे उद्योगों के लिए उपलब्ध कुल मात्रा प्रभावी रूप से सीमित हो जाएगी. सरकार के इस फैसले से उन उद्योगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा जो पूरी तरह से एलपीजी पर ही निर्भर हैं.
इन कंपनियों को मिलेगी पहले LPGसरकार के इस फैसले के बाद सबसे पहले उन फैक्ट्रियों या कंपनियों को एलपीजी दी जाएगी जहां नैचुरल गैस का इस्तेमाल नहीं हो सकता. इसके साथ ही कंपनियों को OMCS यानी तेल कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा और पीएनजी कनेक्शन के लिए शहरी गैस वितरण कंपनियों को आवेदन देना होगा. इस फैसले के बाद उन राज्यों को ज्यादा फायदा होगा जो PNG गैस के कनेक्शन को बढ़ावा देगा. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 04:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>भारत के लिए गुड न्यूज़! ईरान वॉर के बीच वर्ल्ड बैंक ने बढ़ाया GDP का अनुमान, जानें कितना किया</title>
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        <description><![CDATA[ ईरान और इजरायल के युद्ध के बीच हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने भरत की GDP का अनुमान बढ़ा दिया है. जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत, साउथ एशिया की अर्थव्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ के रूप में मजबूती से खड़ा रहेगा. वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के ग्रोथ फोरकास्ट को 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत तक कर दिया है.
दरअसल वर्ल्ड बैंक ने बुधवार को साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट जारी की है. इसी अपडेट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अनुमान बढ़ाया गया है. ये रिवाइज्ड आउटलुक उस समय सामने आया है जब साउथ एशिया जियोपॉलिटिकल टेंशंस से गुजर रहा है. जहां एक तरफ विकास की गति धीमी हो रखी है, इसी बीच इंडिया स्टेबिलिटी के साथ खड़ा है.
दक्षिण एशिया का घटा ग्रोथ रेटइसी के साथ विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया की ग्रोथ रेट को भी घटा दिया है. बैंक का कहना है कि दक्षिण एशिया की कुल ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 में घटकर 6.3% होने की संभावना है. साल 2025 की दर के मुकाबले 7.0% तक घटाई गई है. इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आई रुकावटें हैं. इसी के साथ विश्व बैंक ने ये भी कहा कि 2027 में ग्रोथ के फिर से बढ़कर 6.9% होने की उम्मीद है.
वर्ल्ड बैंक ने दी चेतावनीइतना ही नहीं वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी भी दी है कि कई जोखिम दक्षिण एशिया को आसानी से पटरी से उतार भी सकते हैं. उनका मानना है कि भविष्य बेहद ही अनिश्चित बना हुआ है. इसका एक प्रमुख कारण आयातित ऊर्जा पर इस क्षेत्र की ज्यादा निर्भरता है, जो इसे वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है. मिडिल-ईस्ट के बतनाव के बीच किसी भी प्रकार का इजाफा मौद्रिक नीति को बढ़ा सकता है, इससे अर्थव्यवस्थाएं गड़बड़ा सकती हैं.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 04:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>Loan News: महंगाई के बीच इस बैंक ने सस्ता कर दिया लोन, ब्याज दरों पर दिया अच्छा डिस्काउंट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/loan-news-महंगाई-के-बीच-इस-बैंक-ने-सस्ता-कर-दिया-लोन-ब्याज-दरों-पर-दिया-अच्छा-डिस्काउंट</link>
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        <description><![CDATA[ देशभर में महंगाई की मार से हर कोई परेशान है. इसी बीच एचडीएफसी बैंक ने अपने लोन धारकों को थोड़ी राहत दी है. दरअसल एचडीएफसी बैंक ने अपनी ब्याज दरों में थोड़ा बदलाव किया है, जिसका असर सीधे अब ईएमआई पर पड़ेगा. बैंक ने अलग- अलग टेन्&amp;zwj;योरे के लोन रेट कम किए हैं. ये नई दरें 7 अप्रैल, 2026 मंगलवार से लागू हो गई हैं.
कितनी घटा रेट?बैंक की वेबसाइट पर दी जानकारी के मुताबिक कुछ सिलेक्टेड लोन पर एमसीएलआर में 0.05% की कटौती की गई है. जसके बाद इससे जुड़े लोन लेने वालों को फायदा होने की उम्मीद है. एमसीएलआर में कटौती के बाद अब एचडीएफसी बैंक की दरें लोन टेन्योर के आधार पर 8.15 प्रतिशत से घटकर 8.10 प्रतिशत हो गई है. ये लोन आपकी लोन अवधि पर निर्भर करता है.
छोटी अवधि के लोन पर फायदाबैंक की तरफ से आए इस बदलाव के बाद जिन लोगों की लोन की अवधि छह महीने से तीन साल तक की है उन लोगों को सीधे तौर पर फायदा होने वाला है. जिन लोगों ने लंबी अवधि के लिए लोन लिया है उन लोगों को इससे कोई फायदा नहीं मिलने वाला है. खासतौर से ओवरनाइट और एक महीने के MCLR रेट्स को 8.15 फीसदी से घटाकर 8.10 फीसदी कर दिया गया है. तीन महीने का MCLR 8.25 फीसदी से घटकर 8.20 फीसदी हो गया है. तो वहीं छह महीने,एक साल, दो साल और तीन साल के MCLR रेट्स जैसे थे वैसे ही हैं.



अवधि
पुराना MCLR
नया MCLR
बदलाव


ओवरनाइट
8.15
8.10
0.5%


एक महीना
8.15
8.10
0.5%


तीन महीना
8.25
8.20
0.5%


छह महीना
8.35
8.35
कोई बदलाव नहीं


एक साल
8.35
8.35
कोई बदलाव नहीं


दो साल
8.45
8.45
कोई बदलाव नहीं


तीन साल
8.45
8.45
कोई बदलाव नहीं



बता दें कि इसके बाद ओवरनाइट से लेकर तीन महीने तक का लोन लेने वालों की ईएमआई में भी बदलाव आ जाएगा. अब उन्हें लोन के हिसाब से कम ईएमआई देना होगी. हालांकि ये बदलाव लॉन्ग टर्म लोन लेने वालों के लिए नहीं है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 04:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Loan, News:, महंगाई, के, बीच, इस, बैंक, ने, सस्ता, कर, दिया, लोन, ब्याज, दरों, पर, दिया, अच्छा, डिस्काउंट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG Price Today: आज आपके शहर में क्या है एलपीजी की कीमत? दिल्ली से गुवाहाटी तक के जाने के रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-आज-आपके-शहर-में-क्या-है-एलपीजी-की-कीमत-दिल्ली-से-गुवाहाटी-तक-के-जाने-के-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lpg-price-today-आज-आपके-शहर-में-क्या-है-एलपीजी-की-कीमत-दिल्ली-से-गुवाहाटी-तक-के-जाने-के-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Price Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने बीते बुधवार को कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया. 19 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी का असर रेस्टोरेंट मालिकों और आम लोगों दोनों पर दिखा.
कीमतों में इस बदलाव के बाद 5 किलोग्राम वाले मिनी सिलेंडरों की कीमतें 51 रुपये बढ़ा दी गईं, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में 195 रुपये से लेकर 218 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई. हालांकि, इस दौरान तेल कंपनियों ने घरेलू कुकिंग गैस की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की. 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार 7 मार्च को 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है.
देश के प्रमुख शहरों में आज LPG सिलेंडरों की कीमत&amp;nbsp;
बता दें कि आज देश में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहं देखने को मिल रहा है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद आज LPG सिलेंडरों की कीमत में कोई बदलाव नहीं है. आज 8 अप्रैल को वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट या US क्रूड वेरिएंट की कीमत 17 परसेंट तक गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गई है. ब्रेंट क्रूड भी लगभग 16 परसेंट टूटकर 92 डॉलर के लेवल पर पहुंच गई है.
चेक करें रेट्स



शहर
घरेलू सिलेंडर की कीमत&amp;nbsp;
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
913.0 रुपये
2078.5 रुपये


मुंबई
912.5 रुपये
2031.0 रुपये


कोलकाता
939.0 रुपये
2208.5 रुपये


चेन्नई
928.5 रुपये
2246.5 रुपये


बेंगलुरु
915.5 रुपये
2161.0 रुपये


भोपाल
918.5 रुपये
2084.0 रुपये


चंडीगढ़&amp;nbsp;
922.5 रुपये
2099.5 रुपये


देहरादून
932.0 रुपये
2131.5 रुपये


फतेहाबाद
942.0 रुपये
2157.5 रुपये



क्यों नहीं कम हुई कीमत?
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद घरेलू एलपीजी की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं देखा जा रहा है क्योंकि आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को इनके रेट्स में संशोधन किए जाते हैं. एलपीजी की कीमतें डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में &#039;सऊदी अरामको&#039; के LPG दामों पर बेस्ड होता है.&amp;nbsp;
एलपीजी की बढ़ी हुई कीमतों के बीच सरकार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक अकाउंट में दे रही है, जिससे उनके लिए दिल्ली जैसे तमाम शहरों में कीमतों में कुछ राहत मिली है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:30:50 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>LPG, Price, Today:, आज, आपके, शहर, में, क्या, है, एलपीजी, की, कीमत, दिल्ली, से, गुवाहाटी, तक, के, जाने, के, रेट</media:keywords>
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        <title>Share Market: शेयर मार्केट में तूफानी तेजी जारी, 2800 अंक उछला सेंसेक्स; निफ्टी भी 821 अंक ऊपर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/share-market-शेयर-मार्केट-में-तूफानी-तेजी-जारी-2800-अंक-उछला-सेंसेक्स-निफ्टी-भी-821-अंक-ऊपर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/share-market-शेयर-मार्केट-में-तूफानी-तेजी-जारी-2800-अंक-उछला-सेंसेक्स-निफ्टी-भी-821-अंक-ऊपर</guid>
        <description><![CDATA[ Share Market Today: शेयर बाजार की तूफानी तेजी अब भी जारी है. सेंसेक्स लगभग 2833 अंक या 3.8 परसेंट की भारी बढ़त के साथ 77450 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. इसी तरह से निफ्टी भी 821 अंक या 3.5 परसेंट उछलकर अभी 23900 के स्तर के ऊपर बना हुआ है. शेयर बाजार में आज आईइस जबरदस्त तेजी से निवेशकों की संपत्ति में लगभग 15 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है.&amp;nbsp;
बता दें कि आज 8 अप्रैल को ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक तेजी देखी जा रही है. सुबह बीएसई सेंसेक्स लगभग 2674 अंकों की उछाल के साथ 77290 पर खुला. निफ्टी भी 761 अंक या 3.61 परसेंट की जबरदस्त तेजी के बाद 23855 के लेवल पर कारोबार की शुरुआत की थी.&amp;nbsp;
आज के टॉप परफॉर्मर

तेल सस्ता होने से एटीएफ की लागत घटने की उम्मीद में इंडिगो के शेयर में 10 परसेंट का उछाल आया है.&amp;nbsp;
ट्रंप के सीजफायर के प्रस्ताव और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद में दिग्गज इंफ्री कंपनी लॉर्सन एंड ट्रुबो (L&amp;amp;T) के शेयर में 8 परसेंट की तेजी है.
HDFC और ICICI जैसे बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी तेजी देखी जा रही है.&amp;nbsp;

अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर
ट्रंप ने ईरान पर होने वाले हमले को दो हफ्तों के लिए टाल दिया है. उन्होंने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर लिखा कि यह फैसला इस शर्त पर लिया गया है कि ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो. दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में देश की &#039;सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद&#039; की ओर से कहा कि तेहरान की सेना &quot;अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगी.&quot;
एशियाई बाजार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर किए जाने वाले हमलों को दो हफ्तों के लिए टालने पर सहमत होने और इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद आज एशियाई बाजारों में जबरदस्त रौनक देखी जा रही है. जापान के निक्केई 225 में &amp;nbsp;1.79 परसेंट का उछाल देखा गया, जबकि टॉपिक्स में 1.69 परसेंट की बढ़त दर्ज की गई. दक्षिण कोरिया के कोस्पी में भी 5.99 परसेंट और स्मॉल-कैप कोस्डैक में लगभग 5 परसेंट की तेजी आई.&amp;nbsp;
वॉल स्ट्रीट
कच्चे तेल में भारी गिरावट के बाद अमेरिकी शेयर वायदा (Futures) में उछाल आया. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में 967 अंक या 2.1 परसेंट की शानदार बढ़त देखी गई. S&amp;amp;P 500 फ्यूचर्स में 2.1 परसेंट का उछाल दर्ज किया और Nasdaq 100 फ्यूचर्स 2.3 परसेंट ऊपर चढ़कर ट्रेड कर रहा है.&amp;nbsp;
क्रूड ऑयल की कीमत
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा 14 परसेंट गिरकर 97.49 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे है. इसका मतलब है कि बाजार को अब युद्ध की तत्काल आशंका नहीं है. ब्रेंट क्रूड वायदा आज सुबह 13 परसेंट गिरकर 95.63 डॉलर पर आ गया. COMEX पर क्रूड की कीमतों में 13.33 परसेंट की गिरावट आई है और यह 97.890 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.
रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.25 परसेंट पर स्थिर रखा है. यह बाजार की उम्मीदों के मुताबिक है. इससे बैंकिंग और होम लोन के सेक्टर में निवेशकों का सेंटिमेंट EMI न बढ़ने की वजह से पॉजिटिव बना हुआ है. शेयर बाजार में आज आई तेजी की यह भी एक वजह है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:30:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Share, Market:, शेयर, मार्केट, में, तूफानी, तेजी, जारी, 2800, अंक, उछला, सेंसेक्स, निफ्टी, भी, 821, अंक, ऊपर</media:keywords>
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        <title>RBI MPC Meeting: नहीं बदला रेपो रेट, 5.25 परसेंट पर बरकरार, जानें EMI बढ़ेगी या घटेगी?</title>
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        <description><![CDATA[ RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25 परसेंट पर बरकरार रखा. रिजर्व बैंक गवर्नर ने इसका ऐलान किया.उनकी अध्यक्षता में छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक सोमवार को शुरू हुई. RBI MPC की यह बैठक एक ऐसे समय पर हुई, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और रुपये में गिरावट आई है. ऐसे में उम्मीद है कि आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.25 परसेंट पर बरकरार रखेगा.&amp;nbsp;
RBI ने फरवरी 2025 से अब तक रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है. 2019 के बाद पहली बार रिजर्व बैंक ने इतनी तेजी के साथ दरों को नीचे लाया. फरवरी 2026 में हुई पिछली बैठक में रिजर्व बैंक ने दरों को स्थिर रखा था ताकि पहले हुई कटौतियों का आकलन किया जा सके. इससे पहले दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी.&amp;nbsp;
कितना रहेगा GDP ग्रोथ?&amp;nbsp;
RBI को उम्मीद थी कि FY27 में आर्थिक गतिविधियां अच्छी बनी रहेंगी. केंद्रीय बैंक ने Q1FY27 के लिए GDP में वृद्धि का अनुमान 6.7 परसेंट से बढ़ाकर 6.9 परसेंट कर दिया है, जबकि Q2FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.8 परसेंट से बढ़ाकर 7 परसेंट &amp;nbsp;कर दिया. फरवरी की नीति में MPC ने Q1FY27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान भी बढ़ाकर 4.0 परसेंट &amp;nbsp;कर दिया और Q2FY27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.2 परसेंट कर दिया. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने इस दौरान यह भी कहा कि ग्रीनफील्ड FDI परियोजनाओं के लिए भारत एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है.
रेपो रेट क्या है?&amp;nbsp;


रेपो रेट ब्याज की वह दर होती है, जिस पर देश का केंद्रीय बैंक कमर्शियल बैंक को उधार देता है. दरअसल, जब भी बैंकों के पास फंड की कमी होती है, वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए RBI से पैसा उधार लेते हैं. इस उधार पर उन्हें जो ब्याज चुकाना पड़ता है उसे रेपो रेट कहते हैं. बाजार में महंगाई बढ़ने पर रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ा देता है. इससे बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है और बे ग्राहकों के लिए लोन की दरें बढ़ा देते हैं. कर्ज महंगा होगा, तो लोग खर्च कम करेंगे. इससे महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलती है.
इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ जाती है तो RBI&amp;nbsp; रेपो रेट को घटा देता है ताकि लोगों को सस्ता लोन मिल सके और बाजार में खरीदारी को बढ़ावा मिले और निवेश ज्यादा से ज्यादा हो.&amp;nbsp;
रेपो रेट का EMI से कनेक्शन
बैंक रेपो रेट के आधार पर ही लेडिंग रेट तय करते हैं. अगर बैंकों को RBI से सस्ता फंड मिलता है, तो बैंक भी अपने फ्लोटिंग रेट लोन पर ब्याज दरें कम कर देते हैं. अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट या रेपो-लिंक्ड है, तो बैंक ब्याज दर को कम कर देते हैं, जिससे लोन पर आपकी ईएमआई या तो कम हो जाती है या लोन का टेन्योर घट सकता है.
वहीं, जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है और इसका बोझ ग्राहकों पर डाल दिया जाता है. इससे लोन पर ईएमआई भी बढ़ जाती है. इस बार रेपो रेट स्थिर रखने का मतलब है कि आपकी अभी बैंक, होम या कार लोन पर जितनी ईएमआई चल रही थी, उतनी ही चलेगी. इसमें राहत की अभी गुंजाइश नहीं है.


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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:30:45 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold&amp;Silver Price Today: 13000 रुपये महंगी हुई चांदी, 3000 से ऊपर चढ़ी सोने की कीमत; क्यों एकाएक बढ़े भाव?</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today: आज 8 अप्रैल को सोने-चांदी की कीमतों में गजब की तेजी देखने को मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत अभी 2,44,770 प्रति किलोग्राम है. इसमें लगभग 6 परसेंट की तेजी के साथ 13000 रुपये का उछाल आया है.
वहीं, लगभग 2.4 परसेंट की तेजी के साथ सोना 3,600 रुपये की बढ़त के साथ 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा गया है. इसी तरह से इंटरनेशन मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3 परसेंट की रैली के साथ 4,811.26 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है. वहीं,अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 3.3 परसेंट की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुआ है.&amp;nbsp;
क्यों एकाएक बढ़ी सोने-चांदी की कीमत?&amp;nbsp;

सोने-चांदी की कीमत पर आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर का असर दिख रहा है. इससे वापस से निवेशकों का भरोसा लौटा है.&amp;nbsp;
क्रूड ऑयल में जबरदस्त गिरावट भी इस उछाल के लिए जिम्मेदार है. कच्चे तेल की कीमतों में करीब 15-20 परसेंट की भारी गिरावट के चलते वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है. इससे निचले स्तरों पर सोने-चांदी की खरीदारी बढ़ी है.&amp;nbsp;
तेल की कम हुई कीमतों के बीच महंगाई कम होने की भी उम्मीद बढ़ गई है. इससे निवेशकों का सेंटिमेंट मजबूत हुआ है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.25 परसेंट पर स्थिर रखने का फैसला लिया है. इससे बाजार में तेजी के बीच कीमती धातुओं की कीमतें बढ़ी हैं.&amp;nbsp;

देश के बडे़ शहरों में सोने-चांदी के दाम

दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,53,540 रुपये है. यहां 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 1,40,745 रुपये है. दिल्ली में चांदी की कीमत 2,44,100 रुपये प्रति किलोग्राम है.&amp;nbsp;
मुंबई में 24 और 22 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 1,53,810 रुपये और 1, 40,993 रुपये प्रति 10 ग्राम है. यहां चांदी की कीमत 2,44,520 रुपये प्रति किलोग्राम है.&amp;nbsp;
चेन्नई में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,54,260 रुपये है. यहां 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,40,400 रुपये है. चेन्नई में चांदी की कीमत 2,45,230 रुपये प्रति किलोग्राम है.&amp;nbsp;
कोलकाता में आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,49,950 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,37,350 रुपये है. यहां चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 2,49,900 रुपये है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:30:42 +0530</pubDate>
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        <title>12000 लोगों को निकाला, अब Oracle ने इस महिला को करोड़ों देकर नौकरी पर रखा, कौन है ये?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/12000-लोगों-को-निकाला-अब-oracle-ने-इस-महिला-को-करोड़ों-देकर-नौकरी-पर-रखा-कौन-है-ये</link>
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        <description><![CDATA[ Oracle New CFO Hillary Maxon: दुनिया की सबसे बड़ी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक ओरेकल ने हिलरी मैक्सन को अपना नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है. उन्हें एक बहुत ही आकर्षक सैलरी पैकेज दिया गया है. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब कंपनी ने हाल ही में दुनिया भर में लगभग 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है, जिसमें भारत के लगभग 12,000 कर्मचारी भी शामिल हैं.
इस नियुक्ति का समय और सैलरी पैकेज का बड़ा आकार लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच सकता है, क्योंकि कंपनी एक तरफ खर्चों में कटौती कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ बड़े पदों पर नई नियुक्तियां भी कर रही है. ओरेकल की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मैक्सन को सालाना $950,000 की बेसिक सैलरी मिलेगी, जो भारतीय रुपये में लगभग 7.8 करोड़ रुपये के बराबर है. इसके अलावा उन्हें परफॉर्मेंस के आधार पर बोनस भी मिलेगा, जिसका लक्ष्य $2.5 मिलियन रखा गया है, जो करीब 20.75 करोड़ रुपये होता है.
लंबे समय के इंसेंटिव के लिए इक्विटी ग्रांट
यह बोनस कुछ खास परफॉर्मेंस पैमानों को पूरा करने पर निर्भर करेगा और मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (जो 31 मई, 2026 को खत्म होगा) के लिए यह बोनस आनुपातिक रूप से (pro-rated) दिया जाएगा. इस तरह, स्टॉक-आधारित इंसेंटिव को छोड़कर, उनकी कुल सालाना कैश सैलरी संभावित रूप से $3.45 मिलियन तक पहुंच सकती है, जो 29 करोड़ रुपये सालाना है.
मैक्सन की सैलरी का एक बड़ा हिस्सा स्टॉक-आधारित रिवॉर्ड के रूप में मिलेगा. ओरेकल ने उन्हें $26 मिलियन मूल्य की इक्विटी दी है, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹215&amp;ndash;₹216 करोड़ के बराबर है. इसमें से $20.8 (करीब ₹172 करोड़) मिलियन की इक्विटी समय-आधारित होगी, जो चार साल की अवधि में उन्हें पूरी तरह से मिल जाएगी. बाकी $5.2 मिलियन (करीब ₹43 करोड़) की इक्विटी परफॉर्मेंस-आधारित होगी, जो कंपनी के लक्ष्यों और लंबे समय के उद्देश्यों से जुड़ी होगी.
मैक्सन 6 अप्रैल को CFO का पद संभालेंगी
कंपनी के फैसलों के आधार पर इस इक्विटी में स्टॉक ऑप्शन और &#039;restricted stock units&#039; (RSUs) शामिल हो सकते हैं. सैलरी और इक्विटी के अलावा, मैक्सन को &#039;relocation support&#039; (एक जगह से दूसरी जगह जाने में मदद) भी मिलेगी. ओरेकल ने 12 महीने की अवधि में relocation से जुड़े खर्चों के लिए $250,000 (करीब ₹2 करोड़) तक की रकम वापस करने (reimburse करने) पर सहमति जताई है.
उनकी नौकरी &quot;at-will&quot; आधार पर है, जो अमेरिका में कॉर्पोरेट नौकरियों के लिए एक आम बात है. इसका मतलब है कि दोनों में से कोई भी पक्ष किसी भी समय नौकरी खत्म कर सकता है. मैक्सन 6 अप्रैल, 2026 को CFO का पद संभालेंगी और CEO Safra Catz को रिपोर्ट करेंगी. वह ओरेकल के वैश्विक वित्त कार्यों का नेतृत्व ऐसे समय में करेंगी जब कंपनी को क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और AI से जुड़ी सेवाओं की भारी मांग देखने को मिल रही है. एक सोची-समझी योजना के तहत किए जा रहे बदलावों के हिस्से के रूप में, वह मौजूदा वित्त नेतृत्व की जगह लेंगी.
हिलरी मैक्सन कौन हैं?
मैक्सन के पास कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री और MBA की डिग्री है. वह एंग्लो अमेरिकन plc में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर भी काम करती हैं और ऑडिट कमिटी की चेयरपर्सन हैं. ओरेकल में शामिल होने से पहले, मैक्सन ने Schneider Electric में Executive Vice President और Group CFO के तौर पर काम किया था. यह कंपनी इलेक्ट्रिफिकेशन, ऑटोमेशन और डिजिटल सिस्टम के क्षेत्र में अपने काम के लिए दुनिया भर में जानी जाती है और इसकी सालाना कमाई $45 बिलियन से ज़्यादा है, जो भारतीय रुपये में 3.7 लाख करोड़ (लगभग) होता है.
कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बाद हुई नियुक्ति
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ओरेकल में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की गई है. खबरों के मुताबिक, कंपनी ने हाल के महीनों में करीब 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिसमें अकेले भारत में ही करीब 12,000 नौकरियां कम की गई हैं. ये छंटनियां लागत कम करने के बड़े उपायों का हिस्सा थीं, क्योंकि ओरेकल ने अपने कामकाज को फिर से व्यवस्थित किया और क्लाउड और AI-आधारित ग्रोथ पर ज़्यादा ध्यान दिया.
हालांकि टेक इंडस्ट्री में इस तरह का पुनर्गठन आम बात है, लेकिन बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती और अधिकारियों के ऊंचे वेतन के बीच का अंतर शायद चर्चा का विषय बना रहेगा. दुनिया भर के टेक सेक्टर में, कंपनियां कर्मचारियों की संख्या कम करती रही हैं, जबकि वे लीडरशिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में भारी निवेश कर रही हैं. ओरेकल का यह कदम इसी बड़े ट्रेंड को दिखाता है, जिसमें कंपनियां कुछ क्षेत्रों में लागत कम कर रही हैं, जबकि भविष्य की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए दूसरे क्षेत्रों में जमकर खर्च कर रही हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>12000, लोगों, को, निकाला, अब, Oracle, ने, इस, महिला, को, करोड़ों, देकर, नौकरी, पर, रखा, कौन, है, ये</media:keywords>
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    <item>
        <title>युद्ध के बीच सस्ती हो गई थाली, आलू&amp;प्याज ने दी राहत, जानें वेज&amp;नॉनवेज प्लेट का हाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/युद्ध-के-बीच-सस्ती-हो-गई-थाली-आलू-प्याज-ने-दी-राहत-जानें-वेज-नॉनवेज-प्लेट-का-हाल</link>
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        <description><![CDATA[ Crisil Report on Nonveg Thali: ईरान में जंग के बीच क्रिसिल (CRISIL) की रिपोर्ट में एक चौंकानेवाली रिपोर्ट सामने आई है. इसके मुताबिक, मार्च 2026 में घर पर बनी नॉन-वेज थाली की कीमत में पिछले साल के मुकाबले एक परसेंट की गिरावट आई है. जबकि इस दौरान शाकाहारी थाली की कीमतें स्थिर रहीं.
दरअसल, इस दौरान आलू, प्याज और दाल की कीमत में आई कमी ने टमाटर, वनस्पति तेल और ईंधन से जुड़े बढ़ते खर्चों की भरपाई कर दी है, जिससे कीमतों में अंतर देखी जा रही है.&amp;nbsp;
Crisil की रिपोर्ट में खुलासा
Crisil Intelligence की हालिया &#039;रोटी राइस रेट&#039; रिपोर्ट के अनुसार, वेज और नॉन-वेज थाली को बनाने की औसत लागत का हिसाब पूरे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में चल रही इनपुट कीमतों के आधार पर लगाया गया. इस मासिक रिपोर्ट में आम आदमी के खर्च पर इन कीमतों में बदलाव के असर को दिखाया गया है और अनाज, ब्रॉयलर चिकन और मसालों जैसी खास चीजों इस बदलाव का मुख्य कारण बताया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है, &quot;मार्च में नॉन-वेज थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले 1 परसेंट कम हुई है, जबकि वेज थाली की कीमत स्थिर रही. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आलू, प्याज और दालों की कम कीमतों ने टमाटर, वनस्पति तेल और ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों के असर को कम कर दिया.&quot;
इस तरह से बैलेंस हुआ कॉस्ट&amp;nbsp;
बेशक इस साल मार्च में पश्चिम एशिया में तनाव के बीच एडिबल ऑयल (6%), कुकिंग गैस (14%), &amp;nbsp;टमाटर की कीमतें (33%) बढ़ीं, लेकिन इसी बीच आलू-प्याज की कम हुई कीमत ने बढ़ती हुई लागत को कम कर दिया. नॉन-वेज थाली भी मार्च 2025 के मुकाबले मार्च 2026 में 1 परसेंटसस्ती इसलिए रही क्योंकि इस दौरान ब्रॉयलर की कीमतों में 2 परसेंट तक की गिरावट आई है. &amp;nbsp;
क्यों सस्ता हुआ आलू-प्याज?
मार्च में आलू की कीमत में 13 परसेंट और प्याज की कीमत में 25 परसेंट तक की गिरावट आई. ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान इन फसलों की आवक बंपर रही. ऊपर से जंग के चलते निर्यात में आई मुश्किलों से देश में स्टॉक बढ़ता गया. कोल्ड स्टोरेज और मंडियों से पुराने स्टॉक निकाले जाने लगे, इससे कीमत कम हो गई.&amp;nbsp;
ब्रॉयलर की क्यों कम हुई कीमत?&amp;nbsp;
एक तो मार्च में नवरात्रि के चलते डिमांड कम हुई. ऊपर से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रॉफिट मार्जिन को लेकर चिकन रिटेलर्स और पोल्ट्री कंपनियों के बीच विवाद के चलते भी कीमत में 2 परसेंट तक की गिरावट आई.&amp;nbsp;
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ईरान वॉर से बिगड़ा पड़ोसी देशों का बजट, LPG-पेट्रोल डीजल के दाम आसमान पर, भारत की बढ़ी धड़कनें&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>युद्ध, के, बीच, सस्ती, हो, गई, थाली, आलू-प्याज, ने, दी, राहत, जानें, वेज-नॉनवेज, प्लेट, का, हाल</media:keywords>
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        <title>टाटा के लिए बर्डन बनी एयर इंडिया! 2000 करोड़ का था बजट, हो गया 20000 करोड़ का नुकसान, प्लान फेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टाटा-के-लिए-बर्डन-बनी-एयर-इंडिया-2000-करोड़-का-था-बजट-हो-गया-20000-करोड़-का-नुकसान-प्लान-फेल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/टाटा-के-लिए-बर्डन-बनी-एयर-इंडिया-2000-करोड़-का-था-बजट-हो-गया-20000-करोड़-का-नुकसान-प्लान-फेल</guid>
        <description><![CDATA[ Air India loss: टाटा संस के नए बिजनेस में उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ नहीं दिख रही है. जिससे कंपनी पर आर्थिक दबाव बढ़ता नजर आ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन नए वेंचर्स का कुल घाटा वित्त वर्ष 2026 के अंत तक करीब 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से ज्यादा है.
इस बढ़ते नुकसान का असर कंपनी की आगे की योजनाओं पर पड़ सकता है, क्योंकि ऐसे हालात में विस्तार की रणनीति पर अतिरिक्त दबाव बनना स्वाभाविक है. आइए जानते हैं, इस विषय में.
एयर इंडिया से बढ़ता वित्तीय दबाव
एयर इंडिया इस समय ग्रुप के लिए सबसे बड़ा नुकसान देने वाला कारोबारी हिस्सा बन कर उभरा है. भारी निवेश और बढ़ती ऑपरेशनल लागत के कारण यह नुकसान देखने को मिल रहा है.&amp;nbsp;
अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में इसका घाटा करीब 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. जबकि वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. वहीं पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा करीब 11,000 करोड़ रुपये था. आंकड़ों से साफ पता चलता है कि कंपनी पर भारी दबाव है.&amp;nbsp;
नए बिजनेस से बढ़ रहा नुकसान
टाटा संस के नए कारोबारों में घाटा तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में ही करीब 21,700 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है. जो पिछले पूरे साल के 16,550 करोड़ से भी ज्यादा है.
जिन कारोबार में नुकसान हो रहा है, उनमें &amp;nbsp;Air India, Tata Digital, Tata Electronics और Tejas Networks शामिल हैं. जहां बढ़ती लागत टाटा संस के कारोबार को नुकसान की ओर ले जा रही है.&amp;nbsp;
दूसरे कारोबार भी दबाव में
Tata Sons के लिए मुश्किलें केवल बड़े बिजनेस तक सीमित नहीं हैं. इसके अन्य वेंचर्स भी भारी दबाव में हैं. उदाहरण के लिए Tata Electronics में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है.
साथ ही, Tejas Networks भी घाटे की कगार पर है. जहां नुकसान करीब 1,000 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>टाटा, के, लिए, बर्डन, बनी, एयर, इंडिया, 2000, करोड़, का, था, बजट, हो, गया, 20000, करोड़, का, नुकसान, प्लान, फेल</media:keywords>
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        <title>होर्मुज पर बवाल! सामान लाने वाले जहाजों का बीमा 10 गुना महंगा, आपकी ही जेब से वसूले जाएंगे पैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Shipping Insurance Cost Rise: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब समुद्री कारोबार पर भी नजर आने लगा है. कई जगह जहाजों के लिए बीमा लेना महंगा हो गया है. कुछ बीमा कंपनियां जोखिम के चलते कवर देने से भी बच रही है. जिससे शिपिंग गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.
इस बार स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है. बात होर्मुज स्ट्रेट की तेल रूट समस्या तक नहीं रह गई है. बीमा लागत खुद एक बड़ी परेशानी बन रही है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर-रिस्क प्रीमियम पहले के करीब 0.2&amp;ndash;0.25 फीसदी से बढ़कर अब 1 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो गया है. जिससे ऑपरेशन खर्च तेजी से बढ़ रहा है. आइए जानते हैं, इस विषय में.
महंगे बीमा से बढ़ी शिपिंग की चुनौती
एक बड़े ऑयल टैंकर की कीमत करीब 1,500 करोड़ से 2,500 करोड़ रुपये तक होती है. ऐसे में बीमा की रेट में 1 फीसदी का अंतर होने पर सिर्फ एक सफर में ही खर्च कई करोड़ रुपये तक बढ़ जाता है. जिससे पूरी लागत पर असर पड़ता है.
कंपनियों की बढ़ रही ऑपरेशनल लागत
होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में कई कंपनियां सुरक्षित रास्ता चुनते हुए अफ्रीका के रास्ते लंबा सफर कर रही हैं. जिससे 10&amp;ndash;15 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है और ईंधन के साथ ऑपरेशनल लागत भी बढ़ रही है. कई मामलों में तो इंश्योरेंस कंपनियां बीमा करने से मना भी कर रही है.&amp;nbsp;
बीमा न मिलने से बढ़ी मुश्किलें
न्यूज एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में समुद्री बीमा कंपनियां अब जहाजों को वॉर-रिस्क कवर देने से मना कर रही है. इससे शिपिंग कंपनियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि बिना बीमा के जहाजों का संचालन नहीं किया जा सकता है.
कार्गो की फाइनेंसिंग, पोर्ट एंट्री या कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने के लिए बीमा का होना जरूरी है. ऐसे में जहाज मालिकों के सामने एक चुनौती खड़ी हो गई है. उनके पास दो ही विकल्प बच रहे हैं, या तो वे महंगे प्रीमियम पर बीमा खरीदें या फिर जोखिम वाले रूट से कारोबार न करें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: युद्ध के बीच सस्ती हो गई थाली, आलू-प्याज ने दी राहत, जानें वेज-नॉनवेज प्लेट का हाल
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>LPG Cylinder Crisis Iran War: &amp;apos;गैस को करो GST मुक्त&amp;apos;, CTI का PM को पत्र, LPG और PNG पर VAT हटाने की उठाई आवाज</title>
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        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Crisis Iran War: पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है. देशभर और खासकर दिल्ली में LPG की किल्लत बढ़ती जा रही है, वहीं PNG की मांग तेजी से बढ़ रही है. हालांकि इन दोनों ईंधनों पर लगे टैक्स आम जनता और व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं.
दिल्ली और देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने LPG और PNG को पूरी तरह टैक्स फ्री करने की मांग उठाई है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके.
LPG पर अलग-अलग टैक्स का बोझ
संगठन के अनुसार, भारत में रेजिडेंशियल LPG पर फिलहाल 5 प्रतिशत GST लगता है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर पर यह टैक्स 18 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. ऐसे में व्यवसायिक गतिविधियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.
PNG भी टैक्स से अछूती नहीं
हालांकि PNG अभी GST के दायरे में नहीं आता, लेकिन विभिन्न राज्यों में इस पर 3 प्रतिशत से लेकर 14.5 प्रतिशत तक VAT लगाया जाता है. दिल्ली में PNG पर 5 प्रतिशत VAT लागू है, जो इसकी लागत को बढ़ाता है.
बृजेश गोयल का कहना है कि केंद्र सरकार को LPG पर GST को शून्य कर देना चाहिए और PNG पर लगने वाला VAT भी पूरी तरह समाप्त करना चाहिए. उनका मानना है कि इससे देशभर के उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी.
वैश्विक संकट का घरेलू असर
सीटीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अनुसार पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस संकट खड़ा कर दिया है. इसका असर भारत में साफ दिखाई दे रहा है, जहां LPG की कमी और PNG की मांग में तेजी देखने को मिल रही है.
दिल्ली में PNG कनेक्शन में तेज उछाल
महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने बताया कि दिल्ली में PNG कनेक्शन लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. फरवरी 2026 में जहां रोजाना औसतन 686 कनेक्शन दिए जा रहे थे, वहीं मार्च में यह आंकड़ा करीब 2000 तक पहुंच गया है.
इसके बावजूद दिल्ली में LPG के लगभग 56 लाख घरेलू कनेक्शन मौजूद हैं. ऐसे में गैस की उपलब्धता और कीमत दोनों ही आम लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>महंगाई का ड्रेस कोड! ईरान युद्ध के कारण 25% तक महंगे होंगे कपड़े, आपकी जेब पर बड़ा बोझ</title>
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        <description><![CDATA[ Inflation in Textile Business:&amp;nbsp;पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की आम जनता की जेब पर अलग अलग तरह से दिखने लगा है. खाने-पीने के सामान से लेकर गाड़ी चलाने और उसकी मेंटेनेंस तक हर चीज महंगी हो रही है. एबीपी न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है. अब आपको आने वाले समय में कपड़े भी 20 से 25 फीसदी तक महंगे मिल सकते हैं.
दिल्ली-NCR में स्थित एक टेक्सटाइल मिल में एबीपी न्यूज़ ने जमीनी पड़ताल की, जहां टेक्सटाइल एसोसिएशन इंडिया के दिल्ली अध्यक्ष कमल मिश्रा एबीपी न्यूज से खास बातचीत में बताते हैं कि इस युद्ध का असर हमारी इंडस्ट्रीज पर सबसे बड़ा असर फ्यूल और रॉ मैटेरियल की लागत पर पड़ा है. कॉटन कपड़े की प्रोसेसिंग महंगी हो गई है, जबकि सिंथेटिक फैब्रिक में इस्तेमाल होने वाला क्रूड ऑयल महंगा होने से पॉलिएस्टर के दाम पिछले दो-तीन महीनों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. गैस सिलेंडर न मिलने और ऊर्जा लागत बढ़ने से इंडस्ट्री की कुल लागत पर 8 से 10 फीसदी तक अतिरिक्त दबाव आ गया है.
अलग-अलग पोर्ट्स पर फंसे हुए हैं 40 से 45 हजार कंटेनर&amp;nbsp;
कमल मिश्रा बताते है शिपिंग कॉस्ट भी महंगी हो गई है,जहां पहले हमलों 40 फुट कंटेनर का खर्च 1200 डॉलर पड़ता था, अब वह 1900 से 2000 डॉलर तक पहुंच गया है और इस युद्ध के कारण टेक्सटाइल इंडस्टरी के कम से कम 40 से 45 हजार कंटेनर अलग-अलग पोर्ट्स पर फंसे हुए हैं, जिससे पूरी की पूरी सप्लाई चेन में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है.
एबीपी न्यूज से बातचीत में एक कॉटन मिल के मालिक पवन कुमार गुप्ता बताते हैं कि इस युद्ध के चलते उनकी यूनिट में उत्पादन 40 फीसदी तक गिर चुका है. पहले जहां उनकी मिल में हर महीने 15 लाख मीटर कपड़ा बनता था, अब यह घटकर 8-9 लाख मीटर रह गया है. पावन आगे बताते है कि पीएनजी की कमी, बढ़ती केमिकल लागत और घटती लेबर उपलब्धता ने इस इंडस्ट्री को हालात और बिगाड़ दिए हैं, पिछले 1 महीने में प्रोसेसिंग कॉस्ट में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है जो प्रिंटिंग पहले 40 रुपये में होती थी, अब &amp;nbsp;वो बढ़ कर 50 रुपये तक पहुंच गई है.
100 से भी ज्यादा केमिकल्स का होता है इस्तेमाल
इसी मिल में डायरेक्टर और पवन गुप्ता के बेटे देवांश गुप्ता ने एबीपी न्यूज को ये पूरी प्रक्रिया बताई कि आखिर ये कपड़ा कैसे प्रोसेस होता है और फिर कैसे ये आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है. देवांश बताते हैं कि एक कपड़े के तैयार होने की पूरी प्रक्रिया में कई चरण होते हैं स्पिनिंग, वीविंग, डाइंग और प्रिंटिंग. इन सभी में 100 से ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल होता है और तब जाकर वो हमारी मिल से मैन्युफैक्चर लेते है और वो गारमेंट बनाते है तब जाकर वो आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है.
आयेगा देवांश बताते है कि इनका रॉ मैटेरियल चीन और तुर्की से आता है. युद्ध की वजह से मौजूदा हालात में इन कच्चे माल की सप्लाई बाधित है और कीमतें 40 से 50 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं. इसका सीधा असर फाइनल प्रोडक्ट पर आम उपभोक्ताओं पर महंगाई के रूप में पड़ रहा है.
25 से 30 फीसदी तक बढ़ गए दाम
टेक्सटाइल एसोसिएशन इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट योगेश महाजन का कहना है कि सिंथेटिक फिलामेंट्स के दाम पिछले 1 से 2 महीने में 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं. उनका कहना है कि कई टेक्सटाइल मिलों ने उत्पादन समय 18 घंटे से घटाकर 10 घंटे कर दिया है, जिसका असर कालीन, कंबल और बेडशीट जैसे प्रोडक्ट्स पर भी दिखने लगा है. योगेश बताते हैं कि सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी है, लेकिन रॉ मैटेरियल की बढ़ती कीमतें प्रॉडक्शन कॉस्ट बड़ा रही है.
बड़ी संख्या में अपने गांव लौट रहे हैं मजदूर
वहीं, टेक्सटाइल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी डीके सिंह ने जमीनी हकीकत को और साफ किया. उनका कहना है कि गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई के चलते बड़ी संख्या में मिलों से मजदूर अपने गांव लौट रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सिलवासा जैसे औद्योगिक इलाकों में 20 फीसदी तक लेबर कम हो चुकी है, जिससे पॉलिएस्टर उत्पादन में 30 फीसदी तक गिरावट आई है. उनके मुताबिक, देशभर में करीब 20 फीसदी टेक्सटाइल मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि 30 से 40 फीसदी यूनिट्स अपनी आधी क्षमता पर काम कर रही हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>दुनिया का सबसे महंगा और सबसे सस्ता पेट्रोल, हांगकांग में ₹340 पार तो इस देश में ₹3 से भी कम</title>
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        <description><![CDATA[ Most Expensive Petrol Countries: दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब सीधे पेट्रोल और डीजल के दामों पर दिखने लगा है. ईरान से जुड़े तनाव और सप्लाई में आई रुकावट के चलते ईंधन महंगा हुआ है. जिससे आम लोगों का खर्च बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
पड़ोसी देश पाकिस्तान में तो हाल और भी खराब है. पाकिस्तान में तो हालात ऐसे हैं कि डीजल की कीमत करीब 54.9 फीसदी बढ़कर 520.35 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है. जबकि पेट्रोल लगभग 42.7 प्रतिशत महंगा होकर 458.40 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है. आइए जानते हैं दुनिया का सबसे सस्ता और महंगा पेट्रोल कहां मिलता है.
हांगकांग में बिकता है सबसे मंहगा पेट्रोल?
वैश्विक स्तर पर अगर पेट्रोल की कीमतों की बात करें तो हांगकांग सबसे ऊपर नजर आता है. यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 4.10 डॉलर तक पहुंच चुकी है. भारतीय रुपयों में यह करीब 340 रुपए के आस-पास होती है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि यहां इस्तेमाल होने वाला लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोलियम चीन से आयात किया जाता है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रहती हैं.
यूरोप के कई देशों में महंगा मिलता है पेट्रोल
दुनिया के अलग-अलग देशों में पेट्रोल की कीमतों में काफी अंतर देखने को मिलता है. इस सूची में हांगकांग के बाद मलावी 2.85 डॉलर (264.94 रुपये) और नीदरलैंड 2.73 डॉलर (253.81 रुपये) जैसे देश शामिल हैं.
यूरोप के कई देशों में भी पेट्रोल काफी महंगा है. डेनमार्क में इसकी कीमत 2.66 डॉलर (247.25 रुपये) है, जबकि सिंगापुर में 2.54 डॉलर (236.1 रुपये) और जर्मनी में 2.42 (224.95 रुपये) डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गई है. इसके अलावा लिचटेंस्टाइन में यह 2.41 डॉलर (224.02 रुपये) दर्ज की गई है.
सूची में आगे अल्बानिया 2.39 डॉलर (222.13 रुपये), ग्रीस 2.36 डॉलर (219.34 रुपये) और नॉर्वे 2.36 डॉलर (219.34 &amp;nbsp;रुपये) जैसे देश भी शामिल हैं, जहां पेट्रोल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.
सबसे सस्ता पेट्रोल कहां मिलता है?
अगर दुनिया में सबसे कम कीमत वाले पेट्रोल की बात करें, तो ईरान सबसे आगे है. जहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 0.029 डॉलर (लगभग 2.69 रुपये) है. यह देश बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है, इसलिए यहां कीमतें काफी कम रहती हैं.&amp;nbsp;
हालांकि, देश में अभी युद्ध के कारण अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. इसके बाद वेनेजुएला का नाम आता है, जहां पेट्रोल लगभग 0.035 डॉलर (करीब 2.70 रुपये) प्रति लीटर के आसपास मिलता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>दुनिया, का, सबसे, महंगा, और, सबसे, सस्ता, पेट्रोल, हांगकांग, में, ₹340, पार, तो, इस, देश, में, ₹3, से, भी, कम</media:keywords>
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        <title>जल्द हाेगा DA का ऐलान! अकाउंट में कई गुना बढ़कर आएगी सैलरी, जानें कितने महीने का मिलेगा एरियर?</title>
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        <description><![CDATA[ DA Hike Announcement: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक अच्छी खबर है. हो सकता है कि अब एक या दो हफ्ते में (DA) में बढ़ोतरी का सरकार ऐलान कर दे. चूंकि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से मानी जाएगी इसलिए कर्मचारियों को पिछले महीनों (जनवरी से लेकर मार्च) का एरियर (Arrears) भी मिलेगा. यानी कि इस महीने अकाउंट में कई गुना मोटी सैलरी आएगी.
अगर वाकई में जल्द ही सरकार डीए का ऐलान कर देते हैं, तो यह लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहतभरी बात है, जो लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इस बार DA में लगभग 3 परसेंट की बढ़ोतरी कर सकती है. चूंकि अभी DA की दर 58 परसेंट है इसलिए इस बार की बढ़ोतरी के बाद यह बढ़कर 61 परसेंट हो जाएगा. इससे पहले, अक्टूबर 2025 में DA को 55 परसेंट से बढ़ाकर 58 परसेंट किया गया था, जो 1 जुलाई 2025 से लागू हुआ था.&amp;nbsp;
कितनी बढ़ेगी सैलरी?&amp;nbsp;
DA का कैलकुलेशन हमेशा कर्मचारी की बेसिक सैलरी पर बेस्ड होता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 56,100 रुपये है, तो अभी के 58 परसेंट के DA पर उसे 32,538 रुपये मिलते हैं. लेकिन 61 परसेंट DA होने पर यह बढ़कर 34,221 रुपये हो जाएगा.
इसका मतलब है कि हर महीने लगभग 1,683 रुपये की बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा, जनवरी से मार्च तक के तीन महीनों का बकाया भी इसमें जोड़ा जाएगा. नतीजतन, अप्रैल की सैलरी के साथ लगभग 6,732 रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिल सकता है. हालांकि, यह रकम हर कर्मचारी की बेसिक सैलरी के हिसाब से अलग-अलग होगी. बता दें कि DA बढ़ने पर TA (Transport Allowance) भी बढ़ेगा, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रैच्युटी की रकम भी बढ़ेगी.&amp;nbsp;
किन्हें होगा फायदा?
DA में इस बढ़ोतरी से लगभग 4.9 मिलियन केंद्र सरकार के कर्मचारियों और लगभग 6.8 मिलियन पेंशनभोगियों को फायदा होगा. बढ़ती महंगाई के बीच उनके लिए यह राहत बहुत जरूरी मानी जा रही है.
महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) सरकारी कर्मचारियों की सैलरी का एक हिस्सा होता है, जो महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है. इसका मकसद कर्मचारियों की खरीदने की क्षमता को बनाए रखना है, ताकि वे बढ़ती कीमतों के बावजूद अपने खर्चों को संभाल सकें.
8वें वेतन आयोग पर भी नजर
सरकार 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया भी जारी रखे हुए है. हालांकि, इसे मूल रूप से 1 जनवरी, 2026 को लागू किया जाना था, लेकिन अब इसके 2027 के मध्य तक लागू होने की उम्मीद है. फिलहाल, कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत DA में बढ़ोतरी हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol, diesel prices on 7 April: आपके शहर में आज कितना है पेट्रोल&amp;डीजल का भाव? फटाफट यहां चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price Today: ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों में बीच एक तरफ जहां निजी कंपनियां ईंधन की कीमतें बढ़ा रही हैं. वहीं, सरकारी कंपनियां काफी हद तक स्थिर है. इससे देश की आम जनता को राहत है. अभी पिछले ही हफ्ते शेल इंडिया ने पेट्रोल की कीमतों में 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 25.01 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की, जो बढ़ते इनपुट कॉस्ट के बीच कंपनियों पर दबाव को दर्शाता है.
हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने हाल ही में अपने प्रीमियम XP100 पेट्रोल की कीमत में 11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की, जिससे इसकी कीमत 160 रुपये के पार पहुंच गई. इसके प्रीमियम डीजल XtraGreen की कीमत भी बढ़ाकर 92.99 प्रति लीटर कर दी गई.
सरकार ने उठाया बड़ा कदम
बता दें कि उपभोक्ताओं और सरकारी तेल कंपनियों- दोनों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने हस्तक्षेप करते हुए सामान्य पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की और डीजल पर इसे पूरी तरह से हटा दिया. सरकार के इस कदम ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को वैश्विक कीमतों में आए झटके के कुछ हिस्से को झेलने और ईंधन की मूल दरों को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने में मदद की है, भले ही उनका मुनाफा अभी भी दबाव में है.
7 अप्रैल को भी पूरे भारत में फ्यूल की कीमतें स्थिर रहीं, भले ही ग्लोबल क्रूड मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और खास शिपिंग रूट पर दिक्कतें आ रही हैं. बिना बदलाव वाले रेट ऐसे समय में आए हैं, जब आने वाले राज्यों के चुनावों से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
पेट्रोल-डीजल की ताजा कीमत



शहर
पेट्रोल प्रति लीटर कीमत&amp;nbsp;
डीजल प्रति लीटर कीमत&amp;nbsp;


दिल्ली
&amp;nbsp;94.77 रुपये
&amp;nbsp;87.67 रुपये


मुंबई
103.54 रुपये
90.03 रुपये


कोलकाता
&amp;nbsp;105.45 रुपये
92.02 रुपये


चेन्नई&amp;nbsp;
100.80 रुपये
&amp;nbsp;92.39 रुपये


बेंगलुरु
102.92 रुपये
90.99 रुपये


जयपुर
104.88 रुपये
90.36 रुपये


पटना&amp;nbsp;
105.18 रुपये
92.04 रुपये


पोर्ट ब्लेयर&amp;nbsp;
82.46 रुपये
78.05 रुपये


रांची&amp;nbsp;
97.86 रुपये
92.62



&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol, diesel, prices, April:, आपके, शहर, में, आज, कितना, है, पेट्रोल-डीजल, का, भाव, फटाफट, यहां, चेक, करें, लेटेस्ट, रेट</media:keywords>
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    <item>
        <title>Gold Silver Price Today: सोने&amp;चांदी की कीमतों में हलचल जारी, जानें आज आपको 10 ग्राम सोना खरीदने के लिए कितना करना होगा खर्च</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोमवार, 6 अप्रैल को सोना-चांदी फ्लैट कारोबारी कर रही है. कारोबार के शुरूआत में सोने-चांदी दोनों के दाम टूट गए थे. हालांकि, बाद में इनमें थोड़ी रिकवरी देखनी को मिली.
खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 220 रुपये की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा था.
एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,48,847 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,49,680 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.
सुबह करीब 11:10 बजे, गोल्ड वायदा 0.15 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,49,904 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,50,319 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपको इन बहुमूल्य धातुओं को खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करना होगा.
चांदी की कीमत
एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर करीब फ्लैट कारोबार कर रहा था. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,30,716 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,33,479 रुपये था.
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,500 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,550 रुपये चल रही है.&amp;nbsp;
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,280 रुपए22 कैरेट - 1,36,850 रुपए18 कैरेट - 1,12,000 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,130 रुपए22 कैरेट - 1,36,700 रुपए18 कैरेट - 1,11,850 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,50,660 रुपए22 कैरेट - 1,38,110 रुपए18 कैरेट - 1,15,200 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,130 रुपए22 कैरेट - 1,36,700 रुपए18 कैरेट - 1,11,850 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,180 रुपए22 कैरेट - 1,36,750 रुपए18 कैरेट - 1,11,900 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,280 रुपए22 कैरेट - 1,36,850 रुपए18 कैरेट - 1,12,000 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,180 रुपए22 कैरेट - 1,36,750 रुपए18 कैरेट - 1,11,900 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,49,130 रुपए22 कैरेट - 1,36,700 रुपए18 कैरेट - 1,11,850 रुपए
यह भी पढ़ें: Share Market Today: चंद मिनट में हरे से लाल निशान पर आया शेयर बाजार, सेंसेक्स में 300 से ज्यादा की गिरावट; निफ्टी 66 अंक नीचे
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price, Today:, सोने-चांदी, की, कीमतों, में, हलचल, जारी, जानें, आज, आपको, ग्राम, सोना, खरीदने, के, लिए, कितना, करना, होगा, खर्च</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Flipkart उठाएगा आपके हवाई सफर का पूरा खर्च! गर्मियों की छुट्टी में फटाफट कर लें वेकेशन की प्लानिंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/flipkart-उठाएगा-आपके-हवाई-सफर-का-पूरा-खर्च-गर्मियों-की-छुट्टी-में-फटाफट-कर-लें-वेकेशन-की-प्लानिंग</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/flipkart-उठाएगा-आपके-हवाई-सफर-का-पूरा-खर्च-गर्मियों-की-छुट्टी-में-फटाफट-कर-लें-वेकेशन-की-प्लानिंग</guid>
        <description><![CDATA[ Flipkart: अप्रैल साल का वह महीना होता है, जब स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियों के बीच कहीं घूमने जाने का प्लान बनता है. ऐसे में अगर आप भी कहीं फैमिली ट्रिप पर जाने का सोच रहे हैं, तो Flipkart आपका एयर टिकट स्पॉन्सर कर सकती है. दरअसल, Flipkart और Air India के बीच हाल ही में हुई पार्टनरशिप से आप Flipkart में शॉपिंग के बदले मिलने वाले SuperCoins को Air India के Maharaja Club Points में बदल सकते हैं.
दोनों कंपनियों के बीच हुई इस पार्टनरशिप से कोई भी Flipkart मेंबर अपने Flipkart SuperCoins को 5:2 के अनुपात में Maharaja Club में ट्रांसफर कर सकता है. इसमें आपको &amp;nbsp;5 Flipkart SuperCoins के बदले 2 Maharaja Points मिलेंगे. SuperCoins को Maharaja Points में बदलने के लिए आपके पास इसकी संख्या कम से कम 50 होने चाहिए. ट्रांसफर किए गए पॉइंट्स आपके Maharaja Club Accounts 193 वर्किंग डेज में दिखने लगेंगे. यहां यह ध्यान रखने वाली बात है कि एक बार Maharaja Club अकाउंट में जमा हो जाने के बाद Maharaja Points को वापस Flipkart SuperCoins में नहीं बदला जा सकता.
महाराजा क्लब अपने मेंबर्स को Air India और Star Alliance की पार्टनर एयरलाइंस पर फ्लाइट बुक करने पर &#039;महाराजा पॉइंट्स&#039; कमाने का मौका देता है. कोई भी सदस्य इन महाराजा पॉइंट्स का इस्तेमाल करके Air India और Star Alliance की पार्टनर एयरलाइंस पर &#039;अवार्ड फ्लाइट्स&#039; बुक कर सकता है.&amp;nbsp;
क्या है Maharaja Club?&amp;nbsp;
Maharaja Club, Air India का फ्रीक्वेंट फ्लायर प्रोग्राम (FFP) है, जो फ्लायर्स को अवार्ड सीट्स, केबिन अपग्रेड और भी बहुत कुछ देता है. 30 मार्च 2026 को Maharaja Club ने Flipkart SuperCoins को अपने पॉइंट्स कन्वर्ज़न पार्टनर के तौर पर जोड़ने का ऐलान किया. इस पार्टनरशिप के तहत कोई भी Flipkart मेंबर अपना SuperCoins 5:2 के रेशियो में Maharaja Club अकाउंट में ट्रांसफर कर सकता है. इसका मतलब है कि 5 Flipkart SuperCoins, 2 महाराजा पॉइंट्स में बदल जाएंगे.
महाराजा पॉइंट्स में बदलने के लिए किसी सदस्य के पास कम से कम 50 Flipkart SuperCoins होने चाहिए. एक बार महाराजा क्लब अकाउंट में जमा हो जाने के बाद, महाराजा पॉइंट्स को वापस Flipkart SuperCoins में नहीं बदला जा सकता. इन पॉइंट्स का इस्तेमाल आप एयर टिकट बुकिंग, लाउंज एक्सेस, इकोनॉमी को बिजनेस क्लास में अपग्रेड करने, एक्स्ट्रा बैगेज अलाउंस के लिए कर सकते हैं.&amp;nbsp;
Flipkart SuperCoins को Maharaja Points में कैसे बदलें?

सबसे पहले Flipkart App खोलें, Categories सेक्शन में जाएं और SuperCoins चुनें.
&amp;lsquo;SuperCoin Partners&amp;rsquo; को सिलेक्ट करें और Air India Maharaja Clubसर्च करें.
अपनी Maharaja Club ID का इस्तेमाल करके अपना Maharaja Club अकाउंट लिंक करें.
जितने SuperCoins आप बदलना चाहते हैं, उनकी संख्या डालें.
ट्रांसफर कन्फर्म करें.
आपके Maharaja Points आपके अकाउंट में जमा हो जाएंगे.

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&#039;रामायण&#039; बना रही कंपनी ने शेयर बाजार में उड़ाया गर्दा! 1 साल में दिया 3 गुना रिटर्न; निवेशक मालामाल&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Flipkart, उठाएगा, आपके, हवाई, सफर, का, पूरा, खर्च, गर्मियों, की, छुट्टी, में, फटाफट, कर, लें, वेकेशन, की, प्लानिंग</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अमीर और अमीर, गरीब और गरीब! देश के 1688 रईसजादों के पास है 50% GDP के बराबर दौलत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अमीर-और-अमीर-गरीब-और-गरीब-देश-के-1688-रईसजादों-के-पास-है-50-gdp-के-बराबर-दौलत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अमीर-और-अमीर-गरीब-और-गरीब-देश-के-1688-रईसजादों-के-पास-है-50-gdp-के-बराबर-दौलत</guid>
        <description><![CDATA[ India Wealth Inequality Report 2026: देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के अनुसार, भारत में सिर्फ 1,688 अमीर लोगों के पास लगभग 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो कुल जीडीपी का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बनती है. जानिए इस रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
क्या कहती है रिपोर्ट?
देश में पैसों को लेकर इस असमानता पर बड़ी बात कही गई है. रिपोर्ट में इशारा किया गया है कि मौजूदा हालात किसी हद तक औपनिवेशिक समय वाली असमानता की याद दिला रहे हैं. रिपोर्ट में इस स्थिति को संतुलित करने के लिए सुझाव भी दिए गए है.&amp;nbsp;
देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर जारी &amp;lsquo;Wealth Tracker India 2026&amp;rsquo; रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है. जिसे सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी ने &amp;lsquo;Tax the Top&amp;rsquo; अभियान के साथ 1 अप्रैल 2026 को जारी किया है.
रिपोर्ट बताती है कि 2019 से 2025 के बीच ऊपरी वर्ग की संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ. जबकि निचले तबके की हिस्सेदारी में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला.
आंकड़ों से समझिए पूरा गणित
आंकड़ों की बात करें तो, देश के टॉप 1 प्रतिशत लोगों के पास 40 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति है. वहीं निचले 50 फीसदी लोग कुल आय के सिर्फ 15 प्रतिशत हिस्से पर निर्भर हैं.
इसी दौरान 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति रखने वालों की संख्या 77 प्रतिशत से बढ़ी है. जबकि उनकी कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. जो करीब 227 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है.&amp;nbsp;
अमीर हो रहे और अमीर
बीते कुछ सालों में देश के सबसे अमीर परिवारों की दौलत में तेज उछाल देखने को मिला है. मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल, सुनील मित्तल और शिव नादर जैसे बड़े नामों की कुल संपत्ति 2019 से 2025 के बीच करीब 400 प्रतिशत तक बढ़ गई है.
आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान मुकेश अंबानी की संपत्ति में लगभग 153 प्रतिशत का इजाफा हुआ. जबकि गौतम अडानी की दौलत 625 फीसदी तक बढ़ी. इन पांचों परिवारों की कुल संपत्ति 2019 में करीब 6.68 लाख करोड़ रुपये थी. जो 2025 तक बढ़कर लगभग 26.54 लाख करोड़ रुपये हो गई है.&amp;nbsp;
अमीरों पर टैक्स से बढ़ सकती है सरकार की कमाई
रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि बेहद अमीर लोगों पर progressive वेल्थ टैक्स लागू करने से सरकार की इनकम में बड़ा इजाफा हो सकता है. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के मुताबिक, 1,688 सबसे धनी परिवारों पर 2 से 6 प्रतिशत तक का टैक्स और साथ में एक-तिहाई इनहेरिटेंस टैक्स लगाया जाए, तो हर साल करीब 10.63 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं.
इन पैसों का उपयोग सामाजिक योजनाओं पर किया जा सकता है. जिससे गरीब परिवारों तक पहले की तुलना में ज्यादा मदद पहुंचेगी. जिससे दोनों वर्गों के बीच असमानता को कम करने में मदद मिलेगी. &amp;nbsp;
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 Ujjwala Yojana Update: उज्ज्वला लाभार्थियों की मौज, अब गैस सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 की सब्सिडी &amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अमीर, और, अमीर, गरीब, और, गरीब, देश, के, 1688, रईसजादों, के, पास, है, 50, GDP, के, बराबर, दौलत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ईरान वॉर: डबल डिजिट में कमाई पर लगा &amp;apos;ग्रहण&amp;apos;, कैसे $110 का कच्चा तेल चकनाचूर करेगा आपका ख्वाब?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ईरान-वॉर-डबल-डिजिट-में-कमाई-पर-लगा-ग्रहण-कैसे-110-का-कच्चा-तेल-चकनाचूर-करेगा-आपका-ख्वाब</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ईरान-वॉर-डबल-डिजिट-में-कमाई-पर-लगा-ग्रहण-कैसे-110-का-कच्चा-तेल-चकनाचूर-करेगा-आपका-ख्वाब</guid>
        <description><![CDATA[ Iran-Israel War: कच्चे तेल की कीमत का 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना और ईरान में बढ़ता तनाव भारतीय इकोनॉमी के साथ-साथ India Inc. के लिए भी किसी अलर्ट से कम नहीं है. इससे कारोबारी साल 2026-27 के लिए कॉर्पोरेट कमाई में डबल-डिजिट (Double digit) ग्रोथ का सपना सिंगल डिजिट में सिमट सकता है. FY26 की चौथी तिमाही के लिए कंपनियों ने अपने नतीजे का ऐलान करना शुरू कर दिया है.
कमाई में जबरदस्त कटौती की आशंका
IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) भी 9 अप्रैल को अपने नतीजे घोषित करेगी. जिस तिमाही से India Inc. की रिकवरी की राह पक्की होने की उम्मीद थी, उसी दौरान सभी सेक्टरों में मुनाफे की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. &amp;nbsp;
Geojit Investments Limited के चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. V K Vijayakumar चेतावनी देते हुए कहते हैं, &quot;अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और गैस की उपलब्धता पर पाबंदियां जारी रहती हैं, तो कमाई में कटौती का एक और दौर आना तय है.&quot; &quot;कमाई में कटौती उन सेक्टरों में होगी, जो ज्यादा आयात पर निर्भर हैं और कच्चे तेल से जुड़े हैं.&quot;
क्या है India Inc.?&amp;nbsp;
India Inc. देश के कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला टर्म है. इसमें सरकारी के साथ रिलायंस, अडानी और टाटा जैसे बड़े बिजनेस घरानों के अलावा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी आती है. इनका देश की नॉमिनल जीडीपी में लगभग 60 परसेंट का योगदान होता है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, बिजनेस सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेक्टर्स आते हैं.
India Inc. के लिए खतरे की घंटी

कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी, तो इसका पेंट, लुब्रिकेंट्स, प्लास्टिक और केमिकल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा. क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन पर बेस्ड इन प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन का कॉस्ट बढ़ेगा. इससे कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटेगा क्योंकि बढ़े हुए इनपुट कॉस्ट का बोझ तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला जाता है.&amp;nbsp;
तेल महंगा होगा, तो ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ेगा. इससे चौतरफा महंगाई बढ़ेगी. महंगाई बढ़ेगी, तो लोगों के खर्च करने की क्षमता कम हो जाएगी. इससे FMCG और ऑटो जैसे सेक्टरों में डिमांड कम होगी.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर पर बनी रहती है, तो इससे भारत की GDP 6 परसेंट के नीचे गिर सकती है, जिसके पहले 7 परसेंट के ऊपर बने रहने का अनुमान लगाया गया था.&amp;nbsp;
जंग ज्यादा लंबे समय तक खींचने पर Nifty-50 में शामिल कंपनियों की कमाई 4 परसेंट तक गिर सकती है.&amp;nbsp;

किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो मूल रूप से एनर्जी-बेस्ड हैं. विजयकुमार बताते हैं, &quot;पेंट्स, एडहेसिव और टायर्स जैसे पेट्रोलियम इनपुट का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों पर इसका असर पड़ेगा. विट्रिफाइड टाइल्स जैसे उत्पादों के निर्माण में LNG को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने वाले निर्माताओं को तो भारी नुकसान हुआ है.&quot;
वह आगे कहते हैं कि इस असर की सबसे ज्यादा तीव्रता Q4 के बजाय FY27 की पहली तिमाही (Q1) में महसूस की जाएगी. &amp;nbsp;Swastika Investmart में रिसर्च हेड संतोष मीना कहते हैं, &#039;&#039;सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर वे हैं जिनमें ऊर्जा की खपत ज़्यादा होती है&amp;mdash;जैसे कि फर्टिलाइजर, केमिकल, सिरेमिक, पेंट, कांच और टायर, जिन्हें LPG/LNG की भारी कमी, प्लांट बंद होने और इनपुट लागत में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण मार्जिन पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. ऑटो और एविएशन सेक्टर भी इसी तरह उत्पादन में रुकावटों और ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर मुनाफा कम हो रहा है और ग्राहकों की मांग घट रही है.
IT सेवाओं के लिए उम्मीद है कि वित्त वर्ष का अंत धीमा रहेगा, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के कारण ऑडर्स के पूरे होने में देरी हो रही है. &amp;nbsp;इनके अलावा, तेल विपणन कंपनियां, लॉजिस्टिक्स और रत्न व आभूषण जैसे निर्यात-प्रधान सेक्टर भी व्यापक मंदी का सामना कर रहे हैं. &amp;nbsp;इसके विपरीत, अपस्ट्रीम और रक्षा क्षेत्र अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं.
ये भी पढ़ें:
पहले तेल और अब पानी... क्यों ईरान में जंग के बीच भारत में बढ़ी Bisleri की कीमत?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ईरान, वॉर:, डबल, डिजिट, में, कमाई, पर, लगा, ग्रहण, कैसे, 110, का, कच्चा, तेल, चकनाचूर, करेगा, आपका, ख्वाब</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ये 5 कारण... जिनका शेयर बाजार पर अगले हफ्ते दिखेगा असर, अमेरिका से भी है कनेक्शन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ये-5-कारण-जिनका-शेयर-बाजार-पर-अगले-हफ्ते-दिखेगा-असर-अमेरिका-से-भी-है-कनेक्शन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ये-5-कारण-जिनका-शेयर-बाजार-पर-अगले-हफ्ते-दिखेगा-असर-अमेरिका-से-भी-है-कनेक्शन</guid>
        <description><![CDATA[ Indian stock market: भारतीय शेयर बाजार के लिए 6 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा हफ्ता काफी खास होने वाला है. इस हफ्ते कई बड़े घटनाक्रमों का असर शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है. हम आज आपको इस खबर के जरिए 5 ऐसे ही कारक बताने जा रहे हैं, जो अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं.&amp;nbsp;
RBI की MPC बैठक
भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की वित्त वर्ष 2026&amp;ndash;27 (FY27) के लिए बैठकें सोमवार, 6 अप्रैल से बुधवार, 8 अप्रैल तक चलेंगी. रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च SVP अजीत मिश्रा ने कहा, &quot;भारतीय रिजर्व बैंक का मॉनेटरी पॉलिसी फैसला एक अहम घटना होगी, जिसमें शामिल लोग ब्याज दरों और महंगाई के अनुमान पर मिलने वाले संकेतों पर बारीकी से नजर रखेंगे.&quot;
बाजार को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक रेपो रेट को स्थिर रखेगा या उसमें मामूली बदलाव की संभावना है. इसके अलावा, देश के GDP ग्रोथ और महंगाई पर गवर्नर की टिप्पणी का भी निवेशकों के सेंटिमेंट्स पर असर देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
मिडिल ईस्ट में तनाव
अमेरिका और ईरान में जंग का छठवां हफ्ता चल रहा है. तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है. खबरों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के दो विमानों को मार गिराया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान किसी समझौते पर राजी नहीं होता या होर्मुज के रास्ते को फिर से नहीं खोलता, तो वह तबाही मचा देंगे.
दोनों देशों के बीच अगर तनाव और बढ़ता है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने या डॉलर जैसे सुरक्षित निवेश में लगाएंगे. इससे शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ेगी और कंपनियों व निवेशकों को तगड़ा नुकसान होगा.&amp;nbsp;
कच्चे तेल की कीमतें
होमुर्ज स्ट्रेट की नाकाबंदी और ईरान व लाल सागर में संकट के कारण तेल की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है. शनिवार को ब्रेंट क्रूड का बेंचमार्क 109 डॉलर तक पहुंच गया. जंग शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा था, लेकिन 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से इसकी कीमतों में 50 परसेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80 परसेंट तेल आयात करता है. ऐसे में कच्चा तेल महंगा होगा, तो आयात पर भी खर्च बढ़ेगा. इससे रुपया कमजोर होगा और पेंट, टायर व लुब्रिकेंट्स जैसी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ेगा.&amp;nbsp;
चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे
कंपनियां इसी हफ्ते से चौथी तिमाही के नतीजों का ऐलान करने लगी हैं. ऐसे में कंपनियों के नतीजे और उनके कमाए गए मुनाफे का असर उनके शेयरों पर दिखेगा.&amp;nbsp;
FIIs की बिकवाली और अमेरिकी डेटा
सोमवार से शुरू हो रहे हफ्ते में शेयर बाजार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयान और वहां महंगाई के आंकड़ों का असर देखने को मिलेगा. अगर अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो फेड रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा सकता है. ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने से इसका नकारात्मक असर ग्लोबल शेयर बाजारों पर पड़ता है. इसी तरह से अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो भी भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 08:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ये, कारण..., जिनका, शेयर, बाजार, पर, अगले, हफ्ते, दिखेगा, असर, अमेरिका, से, भी, है, कनेक्शन</media:keywords>
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        <title>RBI MPC Meeting: ग्लोबल टेंशन के बीच रेपो रेट पर क्या होगा फैसला? जानिए SBI रिपोर्ट का दावा</title>
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        <description><![CDATA[ RBI MPC Meeting April 2026: कल यानी 6 अप्रैल से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की नई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक शुरू होने जा रही है. जिस पर लोगों की खास नजर बनी हुई है. मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट भी यही संकेत देती है कि इस समय केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाते हुए ब्याज दरों को स्थिर रख सकती है. आइए जानते हैं, इस विषय में...
रेपो रेट पर क्या रह सकता है RBI का फैसला?
मौजूदा हालात को देखते हुए आरबीआई इस बार रेपो रेट में बदलाव करने से बच सकती है. एसबीआई की रिसर्च के मुताबिक, दरें करीब 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रह सकती हैं. इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी तनाव है.
जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जारी रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
वैश्विक स्तर पर बनी इन परिस्थितियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है. भारतीय करेंसी रुपया लगातार कमजोर हो रही है. रुपया अब तक के अपने सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गया था. ऐसे में RBI रेपो रेट में बदलाव करने से दूरी बना सकती हैं.&amp;nbsp;
महंगाई को लेकर आगे की राह कठिन
आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव कम होने की संभावना कम दिख रही है. State Bank of India की रिसर्च के अनुसार, अगले तीन तिमाहियों तक CPI महंगाई 4.5 फीसदी से ऊपर बनी रह सकती है.&amp;nbsp;
इसके साथ ही संभावित सुपर अल नीनो का असर भी कीमतों को और बढ़ा सकता है. जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. ऐसे में रेपो रेट में बदलाव की उम्मीद कम है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 08:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>RBI, MPC, Meeting:, ग्लोबल, टेंशन, के, बीच, रेपो, रेट, पर, क्या, होगा, फैसला, जानिए, SBI, रिपोर्ट, का, दावा</media:keywords>
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        <title>सोमवार को इन इंफ्रा कंपनियों के शेयरों पर रखें नजर! बड़े ऑर्डर मिलने से चमक सकती है किस्मत, जानिए डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Stocks in Focus: वैश्विक बाजार में मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता के बीच भारतीय घरेलू मार्केट में 6 अप्रैल से शुरू हो रहे ट्रेडिंग सेशन में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कुछ कंपनियां निवेशकों के रडार पर रह सकती हैं. हाल ही में इन कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर से उनके बिजनेस की आगे की संभावनाएं मजबूत बनती दिख रही हैं.&amp;nbsp;
ऐसे में बाजार की उतार-चढ़ाव भरी स्थिति के बावजूद इन शेयरों में शॉर्ट टर्म में अच्छी हलचल की उम्मीद है. आइए जानते हैं, इन शेयरों के बारे में विस्तार से...
J Kumar Infraprojects को मिला बड़ा प्रोजेक्ट
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की J Kumar Infraprojects Limited को हाल ही में एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ है. जिससे कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत हुई है. यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लखनऊ में वृंदावन योजना, सेक्टर-15 में 10,000 लोगों की क्षमता वाले इंटरनेशनल एग्जीबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से जुड़ा है.
कंपनी को इसके लिए 1,184 करोड़ रुपये देने की बात सामने आई है. निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय तय किया गया है.&amp;nbsp;
RVNL को मिला नया रेलवे प्रोजेक्ट
साउथ सेंट्रल रेलवे ने Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) को 242 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया है. जिसके तहत ओंगोल से गुडूर सेक्शन में काम किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट विजयवाड़ा डिवीजन में आता है. कंपनी को इस काम के लिए 24 महीने का समय दिया गया है. &amp;nbsp;
इस प्रोजेक्ट में मौजूदा 1x25 kV सिस्टम को अपग्रेड कर 2x25 kV AT फीडिंग सिस्टम में बदला जाएगा. साथ ही इस डील में ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) का डिजाइन, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग जैसे काम भी शामिल हैं.
GR Infraprojects को मिला बड़ा EPC कॉन्ट्रैक्ट
GR Infraprojects Limited ने वेस्ट सेंट्रल रेलवे के साथ 1,898 करोड़ रुपये का बड़ा EPC एग्रीमेंट किया है. इस डील से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत हुई है.
लगातार मिल रहे प्रोजेक्ट यह संकेत दे रहे हैं कि अलग-अलग सेगमेंट में कंपनी का ऑर्डर फ्लो स्थिर बना हुआ है. जो आगे की ग्रोथ के लिए पॉजिटिव माना जा रहा है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
यह भी पढ़ें: RBI MPC Meeting: ग्लोबल टेंशन के बीच रेपो रेट पर क्या होगा फैसला? जानिए SBI रिपोर्ट का दावा ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 08:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोमवार, को, इन, इंफ्रा, कंपनियों, के, शेयरों, पर, रखें, नजर, बड़े, ऑर्डर, मिलने, से, चमक, सकती, है, किस्मत, जानिए, डिटेल</media:keywords>
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        <title>बाजार में हलचल के बीच ये शेयर रॉकेट की तरह भागा, दिया 265% का रिटर्न; निवेशकों की हो गई मौज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाजार-में-हलचल-के-बीच-ये-शेयर-रॉकेट-की-तरह-भागा-दिया-265-का-रिटर्न-निवेशकों-की-हो-गई-मौज</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बाजार-में-हलचल-के-बीच-ये-शेयर-रॉकेट-की-तरह-भागा-दिया-265-का-रिटर्न-निवेशकों-की-हो-गई-मौज</guid>
        <description><![CDATA[ Prime Focus Multibagger Stock: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कुछ स्टॉक्स ऐसे भी होते हैं जो निवेशकों को शानदार रिटर्न देकर चौंका देते हैं. Prime Focus Limited ऐसा ही एक मल्टीबैगर स्टॉक बनकर उभरा है. जिसने कम समय में ही जबरदस्त तेजी दिखाई है.&amp;nbsp;
सबसे खास बात यह है कि यह तेजी ऐसे दौर में आई है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और ओवरऑल मार्केट में गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है. आइए जानते हैं, इस मल्टीबैगर स्टॉक के विषय में...
चर्चा में बनी हुई है कंपनी&amp;nbsp;
हाल के समय में प्राइम फोकस के शेयरों में आई तेजी के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं. जिनमें बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी चर्चा भी शामिल है. मिली जानकारी के अनुसार, कंपनी ने 46 करोड़ से ज्यादा शेयरों के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दी थी. जिसमें फिल्म अभिनेता रणबीर कपूर भी संभावित निवेशकों में शामिल बताए गए थे.
उनके करीब 12.5 लाख शेयर लेने की बात सामने आई थी. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने अब तक निवेश पूरा किया है या नहीं. लेकिन इस खबर ने निवेशकों के बीच उत्साह जरूर बढ़ाया है.
मजबूत रिटर्न से निवेशकों को किया मालामाल
हाल के महीनों में कंपनी शेयरों के प्रदर्शन की बात करें तो, इसने निवेशकों को तगड़ा मुनाफा कमाने का मौका दिया है. स्टॉक ने 347.80 रुपये का अपना 52 हफ्तों का उच्च स्तर भी छुआ है.
आखिरी 6 महीनों में इसमें करीब 88.08 की तेजी देखने को मिली है, जबकि एक साल में यह लगभग 265 फीसदी तक उछल गया है. जो इसे एक मजबूत मल्टीबैगर स्टॉक के रूप में पेश करता है.
क्या करती है कंपनी?
प्राइम फोकस लिमिटेड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ी एक प्रमुख कंपनी है. जो पर्दे के पीछे रहकर फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी प्रोग्राम और विज्ञापनों को आकर्षक बनाने का काम करती है.
कंपनी खासतौर पर VFX, एनीमेशन और प्रोडक्शन से जुड़े काम संभालती है. जिससे कंटेंट को बेहतर और हाई-टेक लुक दिया जा सके.
शेयर बाजार में कंपनी का हाल
बीएसई पर आखिरी कारोबारी दिन प्राइम फोकस के शेयरों में हल्की गिरावट देखने को मिली थी. शेयर 0.97 प्रतिशत या 3.25 रुपये की गिरावट के साथ 331.35 रुपये पर ट्रेड करते हुए दिन की समाप्ति की थी.&amp;nbsp;
दिन का इंट्रा डे हाई 340 रुपये था. कंपनी शेयरों के 52 सप्ताह के हाई लेवल की बात करें तो, इस दौरान शेयरों ने 347.80 रुपये का आंकड़ा छूआ था. वहीं, 52 सप्ताह का लो लेवल 85.84 रुपये है. कंपनी का मार्केट कैप करीब 25,712.45 करोड़ रुपये आंकी गई है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
यह भी पढ़ें: सोमवार को इन इंफ्रा कंपनियों के शेयरों पर रखें नजर! बड़े ऑर्डर मिलने से चमक सकती है किस्मत, जानिए डिटेल&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 08:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाजार, में, हलचल, के, बीच, ये, शेयर, रॉकेट, की, तरह, भागा, दिया, 265, का, रिटर्न, निवेशकों, की, हो, गई, मौज</media:keywords>
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    <item>
        <title>ईरान में जंग से बीकानेरी भुजिया और पापड़ पर टूटी आफत, काराेबारियों के सामने आई नई चुनौती</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ईरान-में-जंग-से-बीकानेरी-भुजिया-और-पापड़-पर-टूटी-आफत-काराेबारियों-के-सामने-आई-नई-चुनौती</link>
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        <description><![CDATA[ Bikaner namkeen export crisis: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले और इससे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब मशहूर नमकीन एवं स्नैक्स ब्रांड बीकानेर (Bikaner) पर भी पड़ने लगा है. जंग के जारी रहने रहने से नमकीन एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है. राजस्थान के बीकानेर इलाके के एक्सपोटर्स को खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में भुजिया, पापड़ और मसालों की खेप भेजने में काफी रुकावटें आ रही हैं.&amp;nbsp;
एक्सपोर्टर्स के सामने नई चुनौती
बीकानेर अपने नमकीन इंडस्ट्री के लिए बहुत मशहूर है. यहां से नमकीन और पापड़ ईरान, इराक, कतर, बहरीन, ओमान, यूएई जैसे खाड़ी देशों और ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में भेजे जाते हैं. अब ईरान में जंग के बीच एक्सपोर्टर्स का कहना है कि इस टकराव की वजह से कंटेनरों की भारी कमी हो गई है.
पहले 15-20 कंटेनरों में भरकर सामान भेजे जाते थे, लेकिन अब इनकी कमी होने से करोड़ों रुपयों का माल बंदरगाहों पर या ट्रांजिट में फंसा हुआ है. ऊपर से एक्सपोर्ट का अभी पीक सीजन है, ऐसे में सामान भेजने में हो रही देरी और बढ़ती लागत से बीकानेर के एक्सपोर्ट-बेस्ड इंडस्ट्री पर संकट गहराता जा रहा है.&amp;nbsp;
डिलीवरी में अधिक समय
कंटेनरों की कमी के साथ-साथ सुरक्षित समुद्री रास्ते की तलाश में जहाजों को लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं. इसके चलते पहले जो शिपमेंट 30 दिनों में पहुंच जाता था, उसे पहुंचने में अब 60 दिन का समय लग रहा है. यानी कि डिलीवरी में अब दोगुना समय लग रहा है. इस बीच, समुद्री रास्ते में जोखिम बढ़ने के कारण फ्रेंट चार्जेस में भी कई गुना इजाफा हुआ है, बीमा कंपनियां भी अब जहाजों के लिए ज्यादा &#039;रिस्क प्रीमियम&#039; वसूल रही हैं.&amp;nbsp;
क्या महंगे हो जाएंगे बीकानेरी नमकीन?
जंग के कारण कच्चे माल की भी कीमतें बढ़ी हैं. पिछले एक महीने में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल (Edible oil) की कीमतें 20 परसेंट तक बढ़ी हैं. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच पैकेजिंग पर आ रहा खर्च भी 30-40 परसेंट तक बढ़ा है. इन सबके बीच मैन्युफैक्चररर्स को डर है कि जंग के कारण पैदा हुई इस अस्थिरता के बीच प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम आदमी की जेबों पर पड़ेगा. यानी कि आने वाले समय में बीकानेरी नमकीन और भुजिया के चटकारे लेना महंगा साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
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पहले तेल और अब पानी... क्यों ईरान में जंग के बीच भारत में बढ़ी Bisleri की कीमत?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ईरान, में, जंग, से, बीकानेरी, भुजिया, और, पापड़, पर, टूटी, आफत, काराेबारियों, के, सामने, आई, नई, चुनौती</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol Diesel Price Today: 7.41 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल में 25 रुपये का उछाल; इस कंपनी ने एकाएक बढ़ाई कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-741-रुपये-महंगा-हुआ-पेट्रोल-डीजल-में-25-रुपये-का-उछाल-इस-कंपनी-ने-एकाएक-बढ़ाई-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-741-रुपये-महंगा-हुआ-पेट्रोल-डीजल-में-25-रुपये-का-उछाल-इस-कंपनी-ने-एकाएक-बढ़ाई-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price: सरकारी तेल कंपनियों ने आज भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे पुराने वाले रेट पर बरकरार रखा है. पेट्रोल वही 94 से 105-106 के रेंज में बिक रहा है. डीजल भी 78-97 रुपये प्रति लीटर के दायरे में है. सरकारी कंपनियों ने भले ही तेल की कीमतें स्थिर रखी हों, लेकिन निजी कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं. Nayara Energy के बाद Shell India ने 1 अप्रैल को ईंधन की कीमतें बढ़ा दीं.
कितनी बढ़ी कीमत?&amp;nbsp;
ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल 100 &amp;nbsp;डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है. ऐसे में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के बीच प्राइवेट कंपनियां अपने नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि 1 अप्रैल के बाद Shell India ने पेट्रोल के रेट में 7.41 रुपये और डीजल के रेट में 25 रुपये की भारी बढ़ोतरी की है. इस तरह से निजी कंपनियों के आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमश: 119 और 123 रुपये के आसपास पहुंच गई हैं.
आज देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत



शहर
पेट्रोल (प्रति लीटर)
डीजल (प्रति लीटर)


दिल्ली
&amp;nbsp;94.77 रुपये
87.67 रुपये&amp;nbsp;


मुंबई
&amp;nbsp;103.54 रुपये
90.03 रुपये


कोलकाता
105.45 रुपये
92.02 रुपये


बेंगलुरु
102.92 रुपये
90.99 रुपये


चेन्नई
&amp;nbsp;100.80 रुपये
92.39 रुपये


पटना&amp;nbsp;
105.18 रुपये
&amp;nbsp;92.04 रुपये


जयपुर
104.88 रुपये
&amp;nbsp;90.36 रुपये


पोर्ट ब्लेयर
82.46 रुपये
&amp;nbsp;78.05 रुपये


तिरुवनंतपुरम
107.48 रुपये
96.48 रुपये



प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में तेजी
हाल ही में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई गई हैं. 1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने XP100 की कीमत में प्रति लीटर 11 रुपये की बढ़ोतरी की.इसके बाद कीमतें 149 रुपये प्रति लीटर से सीधे छलांग लगाते हुए 160 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं. इसी तरह से प्रीमियम डीजल वैरिएंट एक्स्ट्रा ग्रीन की भी कीमत 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Petrol, Diesel, Price, Today:, 7.41, रुपये, महंगा, हुआ, पेट्रोल, डीजल, में, रुपये, का, उछाल, इस, कंपनी, ने, एकाएक, बढ़ाई, कीमत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Petrol&amp;Diesel Price Today: 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आज कितनी है कीमत? जानें घरेलू LPG का भी रेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-19-किलो-वाले-कमर्शियल-सिलेंडर-की-आज-कितनी-है-कीमत-जानें-घरेलू-lpg-का-भी-रेट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/petrol-diesel-price-today-19-किलो-वाले-कमर्शियल-सिलेंडर-की-आज-कितनी-है-कीमत-जानें-घरेलू-lpg-का-भी-रेट</guid>
        <description><![CDATA[ LPG Cylinder Price Today: LPG संकट के बीच सप्लाई में हो रही कमी और बढ़ती कीमतों के बीच लोग चिंता में हैं. खबरों के मुताबिक, देश भर के कई परिवार अनियमित सप्लाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बढ़ते बोझ से जूझ रहे हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय टैंकर &#039;ग्रीन सांवरी&#039; 46,650 टन LPG लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर चुका है. यह भारत की लगभग आधे दिन की खपत को पूरा कर सकती है. । वहीं, ईरान से आया एक और जहाज मंगलौर बंदरगाह पर पहुंच गया है. यह इस बात का संकेत है कि लाल सागर में तनाव के बावजूद ईंधन की सप्लाई जारी है.&amp;nbsp;
पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर अपडेट देते हुए शनिवार को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया, &quot;LPG जहाज &#039;ग्रीन सांवरी&#039; ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है. इस जहाज पर 46,650 टन LPG कार्गो और 25 नाविक सवार थे.&quot; न्यूज एजेंसी PTI ने बताया कि ग्रीन सांवरी सातवां ऐसा भारतीय LPG टैंकर है, जिसने इस बीच होर्मुज के रास्ते को पार किया है. यह जलमार्ग 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद तेहरान की कड़ी जवाबी कार्रवाई के बाद से लगभग बंद ही था.&amp;nbsp;
LPG सिलेंडरों की अभी कीमत
कमर्शियल LPG की कीमतों में एक अप्रैल से 195.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार, दिल्ली में अब 19 kg वाले कमर्शियल LPG की कीमत 2,078.50 रुपये है. 14.2 किलो वाले घरेलू LPG के रेट में पिछली बार 7 मार्च को 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. दिल्ली में अभी इनकी कीमत 913 रुपये है.&amp;nbsp;
घरेलू LPG के रेट&amp;nbsp;

कोलकाता- 939 रुपये
मुंबई- 912.50 रुपये
चेन्नई- 929 रुपये

कमर्शियल सिलेंडर के रेट&amp;nbsp;

कोलकाता- 2192.50 रुपये
मुंबई- 2030.50 रुपये
चेन्नई- 2243.50 रुपये

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855 FIR और 48000 सिलेंडर ज़ब्त, 141 डिस्ट्रीब्यूटरों पर गिरी गाज, LPG संकट के बीच बड़ी खबर&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>हाई&amp;रिस्क AT1 बॉन्ड्स की मिस&amp;सेलिंग के मामले में HDFC Bank ने15 अधिकारियों के खिलाफ की कार्रवाई</title>
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        <description><![CDATA[ AT-1 bond mis-selling case: AT-1 (Additional Tier-1) बॉन्ड्स की कथित तौर पर गलत तरीके से बिक्री (Mis-selling) से जुड़े मामले में HDFC बैंक ने अपने 15 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. निवेशकों ने आरोप लगाया है कि बैंक के कुछ अधिकारियों ने Credit Suisse के AT-1 बॉन्ड बेचते समय उन्हें इसके जोखिमों के बारे में जानकारी नहीं दी.
निवेशकों में मचा हंगामा
2020 के आखिर में जब बैंक को यह एहसास हुआ कि Credit Suisse की हालत ठीक नहीं है, तो उसने ये बॉन्ड्स निवेशकों को बेच दिए. जब ​​2023 में Credit Suisse को उसकी स्विस साथी कंपनी UBS ने खरीद लिया, तो नियामक आदेश के तहत इन बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डाल दिया गया, जिससे निवेशकों में भारी हंगामा मच गया.
बैंक ने पहले 20 मार्च को तीन अधिकारियों&amp;mdash;ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड संपत कुमार, Middle East, Africa और NRI ऑनशोर बिजनेस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हर्ष गुप्ता और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पायल मंध्यान&amp;mdash;के खिलाफ बॉन्ड्स की गलत बिक्री में उनकी कथित संलिप्तता के लिए कार्रवाई की थी. सूत्रों ने बताया कि अब यह बात सामने आई है कि 12 और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. यानी कि कुल 15 अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं.&amp;nbsp;
AT-1 बॉन्ड्स में क्या हैं रिस्क?
सबसे पहले तो इसमें पूंजी डूबने का डर होता है. अगर बैंक की वित्तीय स्थिति खराब हो जाती है, तो RBI के पास इस बॉन्ड्स की वैल्यू जीरो करने या उन्हें इक्विटी में बदलने का अधिकार होता है. मार्च 2020 में जब Yes Bank डॅबने के कगार पर था, तब RBI ने 8415 करोड़ रुपये के बॉन्ड्स को पूरी तरह से राइट-ऑफ कर दिया था. इससे इन बॉन्ड्स में पैसा लगाने वाले निवेशकों को झटका लगा क्याेंकि इसकी वैल्यू रातोंरात जीरो हो गई.&amp;nbsp;
AT-1 बॉन्ड्स में बैंक बिना किसी पेनल्टी के इन पर मिलने वाले ब्याज को रोकने का अधिकार रखते हैं. इन जोखिमों के चलते SEBI ने AT-1 बॉन्ड्स की बिक्री के लिए नियम और कड़े कर दिए हैं. अब केवल संस्थागत निवेशक (Institutional buyers) या हाई नेटवर्थ वाले व्यक्ति को ही इसमें निवेश की अनुमति है. इसमें न्यूनतम निवेश की राशि भी बढ़ाकर 10 लाख रुपये से 1 करोड़ कर दी गई है ताकि आम निवेशक इसमें न फंसे.&amp;nbsp;
HDFC Bank के शेयर
पिछले हफ्ते HDFC बैंक के शेयर NSE पर 1.17 परसेंटकी बढ़त के साथ 750.90 रुपये पर बंद हुए थे. मार्च 2026 में शेयर की कीमत 887 रुपये से गिरकर 781 रुपये पर आ गई है. यह मार्च 2020 के बाद इसका अब तक का सबसे खराब परफॉर्मेंस है. अब सोमवार को HDFC बैंक के शेयर फोकस में रहेंगे.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें:
इंक्रीमेंट पर रोक, एम्पलॉई स्टॉक ऑप्शंस भी कैंसिल; HDFC बैंक ने 12 अधिकारियों के खिलाफ लिया तगड़ा एक्शन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Silver Price Today: शादी सीजन से पहले सोने&amp;चांदी की कीमतों में हलचल जारी, जानिए आज आपके शहर में किस रेट पर बिक रहा सोना</title>
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        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today: भारतीय घरेलू बाजार में पिछले कुछ दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक स्तर पर पैदा हुई अनिश्चितता ने इनकी कीमतों को प्रभावित करने का काम किया है.
निवेशक भी सतर्क होकर इन बहुमूल्य धातुओं पर अपना दांव लगा रहे हैं. आइए जानते हैं, आज यानी 4 अप्रैल को आपके शहर में सोना-चांदी किस भाव पर बिक रहा है.
बाजार में सतर्कता का माहौल
मौजूदा हालात को देखते हुए बड़े निवेशक अभी सोना-चांदी जैसी कमोडिटी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए ज्यादातर निवेशक फिलहाल इंतजार करने की योजना पर काम कर रहे हैं.
इसी वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ गिरावट का रुख भी देखा जा रहा है. क्योंकि निवेशक जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं.
चांदी की कीमत
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,500 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,550 रुपये चल रही है.
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,51,080 रुपए22 कैरेट - 1,38,500 रुपए18 कैरेट - 1,13,350 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,50,930 रुपए22 कैरेट - 1,38,350 रुपए18 कैरेट - 1,13,200 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,52,180 रुपए22 कैरेट - 1,39,500 रुपए18 कैरेट - 1,16,350 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,50,930 रुपए22 कैरेट - 1,38,350 रुपए18 कैरेट - 1,13,200 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,50,980 रुपए22 कैरेट - 1,38,400 रुपए18 कैरेट - 1,13,250 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,51,080 रुपए22 कैरेट - 1,38,500 रुपए18 कैरेट - 1,13,350 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,50,980 रुपए22 कैरेट - 1,38,400 रुपए18 कैरेट - 1,13,250 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,50,930 रुपए22 कैरेट - 1,38,350 रुपए18 कैरेट - 1,13,200 रुपए
क्या अभी खरीदारी का सही समय है?
कीमतों में आई हालिया गिरावट आम लोगों के लिए एक अच्छा मौका बनकर सामने आई है. खासकर भारत में शादी का सीजन शुरू होते ही गहनों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. सर्राफा दुकानों पर लोगों की भीड़ लगती है.
ऐसे माहौल में कमोडिटी मार्केट में आई यह गिरावट उन लोगों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. जो लंबे समय से कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे थे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: अमीर बनना है तो छोड़नी होंगी ये 5 आदतें, वॉरेन बफे की ये सीख आपके आएगी काम ; जानिए डिटेल
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price, Today:, शादी, सीजन, से, पहले, सोने-चांदी, की, कीमतों, में, हलचल, जारी, जानिए, आज, आपके, शहर, में, किस, रेट, पर, बिक, रहा, सोना</media:keywords>
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    <item>
        <title>अमीर बनना है तो छोड़नी होंगी ये 5 आदतें, वॉरेन बफे की ये सीख आपके आएगी काम ; जानिए डिटेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अमीर-बनना-है-तो-छोड़नी-होंगी-ये-5-आदतें-वॉरेन-बफे-की-ये-सीख-आपके-आएगी-काम-जानिए-डिटेल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अमीर-बनना-है-तो-छोड़नी-होंगी-ये-5-आदतें-वॉरेन-बफे-की-ये-सीख-आपके-आएगी-काम-जानिए-डिटेल</guid>
        <description><![CDATA[ Middle Class Money Mistakes: अक्सर मध्यम वर्ग के लोग सोचते हैं कि आर्थिक संकट अचानक आता है, लेकिन ऐसा नहीं है. दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे के अनुसार, यह धीरे-धीरे बनने वाली स्थिति होती है. जो रोजमर्रा की छोटी-छोटी गलतियों से शुरू होती है.&amp;nbsp;
ये गलतियां शुरुआत में मामूली लगती हैं, लेकिन समय के साथ इससे बड़ा नुकसान होने की संभावनाएं बनी रहती है. जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है. आइए जानते हैं, वॉरेन बफे की सलाह के विषय में...
क्रेडिट कार्ड का ब्याज बनता है बोझ
कई लोग बिना सोचे-समझे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका ऊंचा ब्याज धीरे-धीरे बड़ी परेशानी बन सकता है. वॉरेन बफे का कहना है कि 18 प्रतिशत या उससे ज्यादा ब्याज देना मतलब अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खोना है.
उनका मानना है कि सबसे पहले महंगे कर्ज को खत्म करना जरूरी है. जितनी जल्दी हो सके इस ब्याज के चक्कर से निकलना चाहिए. ऐसा करना आर्थिक स्थिति के लिए फायदेमंद होता है. &amp;nbsp;
जल्दी अमीर बनने की सोच पड़ती है भारी
आजकल कई लोग कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह में जल्दबाजी कर बैठते हैं. लेकिन यही आदत आगे चलकर नुकसान का कारण बन सकती है. बफे का मानना है कि पैसे को बढ़ने के लिए समय देना जरूरी होता है. ठीक वैसे ही जैसे एक पेड़ को बड़ा होने में सालों लगते हैं.
वे बताते हैं कि अक्सर लोग पहले अपनी कमाई खर्च कर देते हैं और जो बचता है, उसे निवेश करते हैं. जबकि सही तरीका यह है कि सबसे पहले निवेश को प्राथमिकता दी जाए और बाकी पैसों को खर्च किया जाएं.&amp;nbsp;
जरूरत से बड़ा घर बन सकता है आर्थिक बोझ
अक्सर लोग अपनी जरूरत से बड़ा घर लेने के लिए भारी लोन उठा लेते हैं, जो आगे चलकर उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव डालता है. बफे के मुताबिक, ऐसा करने से आमदनी का बड़ा हिस्सा EMI चुकाने में चला जाता है.
जिससे बचत और निवेश के मौके कम हो जाते हैं. उनका मानना है कि घर रहने की जगह होनी चाहिए न कि दिखावे की.
किस्मत पर दांव लगाना
लोग जल्दी अमीर होने के लिए जुआ और लौटरी जैसी चीजों पर पैसे खर्च करने लगते है. हालांकि, इनमें लगने वाली छोटी- छोटी रकम भविष्य में बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है. इसलिए इन चीजों से दूरी बनाने की सलाह बफे देते हैं.&amp;nbsp;
स्टेटस के लिए नई कार खरीदना
मध्यम वर्ग के लोग दिखावे के कारण नई कार लोन लेकर खरीद लेते हैं. इसके बाद बहुत लंबे समय तक ईएमआई के बोझ तले दबे रहते है. वहीं, कार धीरे-धीरे अपनी कीमत खोती जाती है.
वॉरेन बफे कई सालों तक पुरानी कार ही चलाते रहे हैं. उनका मानना है कि स्टेटस के चक्कर में नई कार लेना कोई समझदारी भरा कदम नहीं है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: दादा ने बेची झाड़ू, मां ने गहने बेचकर पाला, खुद जमीन पर सोया... संघर्ष ने इस लड़के को बनाया बड़ा बिजनेसमैन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अमीर, बनना, है, तो, छोड़नी, होंगी, ये, आदतें, वॉरेन, बफे, की, ये, सीख, आपके, आएगी, काम, जानिए, डिटेल</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पहले तेल और अब पानी पर संकट... क्यों ईरान में जंग के बीच भारत में बढ़ी Bisleri की कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पहले-तेल-और-अब-पानी-पर-संकट-क्यों-ईरान-में-जंग-के-बीच-भारत-में-बढ़ी-bisleri-की-कीमत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पहले-तेल-और-अब-पानी-पर-संकट-क्यों-ईरान-में-जंग-के-बीच-भारत-में-बढ़ी-bisleri-की-कीमत</guid>
        <description><![CDATA[ Iran-Israel War: ईरान-इजरायल ओर अमेरिका के बीच जारी लड़ाई का यह दूसरा महीना चल रहा है. इसका दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर पहले से ही बुरा असर है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं. होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से पैदा हुई इस रुकावट का असर तेल, खेती-बाड़ी, एविएशन, केमिकल और दूसरे कई उद्योगों पर पड़ रहा है.अब, भारत के बोतलबंद पानी के सेक्टर को भी सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
भारत में इस सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी (Bisleri) ने हाल ही में कीमतों में 11 परसेंट की बढ़ोतरी की है, जिससे 12 एक-लीटर वाली बोतलों के एक बॉक्स की कीमत 24 रुपये ज्यादा हो गई है. Bailley और Clear Premium Water जैसे दूसरे ब्रांड्स ने भी अपनी कीमतें बढ़ा दी हैं.
बिसलेरी के CEO एंजेलो जॉर्ज ने रॉयटर्स को बताया, &quot;पैकेजिंग मटेरिलय की लागत में भारी बढ़ोतरी की वजह से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की कीमत बढ़कर 20 रुपये प्रति लीटर हो गई है. पिछले एक पखवाड़े में पैकेजिंग मटीरियल की लागत में 70 परसेंट से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.&quot;
क्यों बढ़ रही मिनरल वॉटर की कीमत? 
ईरान में जंग के बीच देश में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की कीमत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि बोतलबंद पानी के लिए इस्तेमाल होने वाली PET बोतलें कच्चे तेल से बने पॉलिमर (Plymer) से बनाए जाते हैं. युद्ध के चलते पॉलिमर की कीमतों में लगभग 50 परसेंट तक का उछाल आया है. इससे प्लास्टिक के दानों (Resing) की कीमत 115 रुपये से बढ़कर 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. BBC की एक रिपोर्ट में Chemco Plastic Industries Pvt Ltd के डायरेक्टर वैभव सराओगी के हवाले से कहा गया है, &amp;ldquo;PET प्रीफॉर्म की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरी पैकेजिंग इंडस्ट्री पर पड़ता है, न कि सिर्फ बोतलबंद पानी पर.&amp;rdquo; PET पैकेजिंग का इस्तेमाल पेय पदार्थों, फ़ूड डिलीवरी, दवाइयों और कॉस्मेटिक्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है.
भारत के लिए बढ़ी मुश्किलें
&#039;डेटा फॉर इंडिया&#039; के एक अध्ययन के मुताबिक, लगभग 15 परसेंट शहरी परिवार और 6 परसेंट ग्रामीण परिवार अपनी पीने की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं. महाराष्ट्र बोतलबंद पानी निर्माता संघ के अध्यक्ष विजयसिंह दुब्बल ने भी बोतलबंद पानी के महंगा होने का कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को बताया. उन्होंने कहा, &quot;प्रीफॉर्म की कीमत 115 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 180 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. साथ ही, प्रीफॉर्म की आपूर्ति में भी कमी आई है.&quot;
उन्होंने आगे बताया कि राज्य में बोतल बनाने वाले लगभग 20 परसेंटप्लांट अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. यह एक चिंताजनक बात है क्योंकि भारत में साफ पानी की उपलब्धता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है. रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 70 परसेंट भूजल दूषित है. ऐसे में शहरी और ग्रामीण परिवार बोतलबंद पानी पर निर्भर रहते हैं, जो अब युद्ध के कारण पैदा हुए तेल संकट की वजह से महंगा होता जा रहा है.&#039;&#039;
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 00:30:18 +0530</pubDate>
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    </item>
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        <title>निवेश का गोल्डन मौका! ब्रोकरेज फर्म ने बताए ऐसे शेयर, जहां 55% तक दिख रहा है दमदार अपसाइड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/निवेश-का-गोल्डन-मौका-ब्रोकरेज-फर्म-ने-बताए-ऐसे-शेयर-जहां-55-तक-दिख-रहा-है-दमदार-अपसाइड</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/निवेश-का-गोल्डन-मौका-ब्रोकरेज-फर्म-ने-बताए-ऐसे-शेयर-जहां-55-तक-दिख-रहा-है-दमदार-अपसाइड</guid>
        <description><![CDATA[ Best Stocks to Buy: वैश्विक स्तर पर चल अनिश्चितताओं का असर भारत समेत अन्य बाजारों पर देखने को मिला है. उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बीच घरेलू ब्रोकरेज फर्म Axis Direct ने मार्केट को लेकर पॉजिटिव रूख अपनाया है.
ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के अंत तक निफ्टी 29,480 के लेवल तक पहुंच सकती है. यह मौजूदा स्तर से करीब 30 फीसदी की अपसाइट दिखाता है. साथ ही फर्म ने कुछ स्टॉक्स को खरीदने की सलाह भी दी है. आइए जानते हैं, इन कुछ चुनिंदा शेयरों के विषय में...&amp;nbsp;
SBI शेयर पर ब्रोकरेज को भरोसा
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर को लेकर ब्रोकरेज हाउस पॉजिटिव नजर आ रहे हैं. फर्म ने शेयरों के लिए 1,350 रुपये का टारगेट दिया गया है. जो मौजूदा कीमत से लगभग 32.6 प्रतिशत तक की बढ़त की ओर इशारा करता है.
एक्सिस सिक्योरिटीज का मानना है कि एसबीआई का प्रदर्शन दूसरे बैंकों की तुलना में मजबूत रहा है. खासकर कॉर्पोरेट लोन के साथ-साथ रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई सेगमेंट में भी अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है.
एटरनल शेयरों में तेजी
ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक Eternal Ltd का क्विक कॉमर्स बिजनेस तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिसमें Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म अहम भूमिका निभा रहे हैं. इसी ग्रोथ को देखते हुए फर्म ने कंपनी के शेयर पर करीब 360 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया गया है. यह स्तर मौजूदा कीमत से लगभग 55 फीसदी तक की संभावित बढ़त को दर्शाता है.
एयरटेल के शेयर पर ब्रोकरेज का भरोसा
भारती एयरटेल को लेकर ब्रोकरेज हाउस काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं. फर्म ने कंपनी शेयर के लिए 2,530 रुपये का टारगेट तय किया गया है. जो मौजूदा स्तर से करीब 41 फीसदी की संभावित तेजी को दिखाता है.
कंपनी ग्रामीण इलाकों में अपना कारोबार बढ़ा रही है. साथ ही 4G कवरेज बढ़ाने और नेटवर्क में लगातार निवेश के जरिए अपनी पकड़ भी मजबूत कर रही है.&amp;nbsp;
कोटक महिंद्रा बैंक&amp;nbsp;
ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिल रहा है. साथ ही बैंक ने अनसिक्योर्ड लोन मामलों में खुद को बेहतर साबित किया है.
इसी वजह से बैंक शेयर फर्म की पसंदीदा लिस्ट में शामिल है. फर्म ने शेयरों के लिए 515 रुपये का टारगेट तय किया है. जो कि मौजूदा शेयर कीमतों से लगभग 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी की ओर इशारा करता है.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8वें वेतन आयोग पर अपडेट! कर्मचारियों के लिए आई राहत की खबर, जानिए पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ 8th Pay Commission Latest Update: केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से आठवें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे है. जिसको लेकर अब फिर से हलचल तेज हो गई है. आयोग ने अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न संगठनों, यूनियनों और हितधारकों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है.&amp;nbsp;
आयोग के पास अपनी रिपोर्ट देने के लिए अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. 3 नवंबर 2025 को आयोग का गठन किया गया था. तय समय के अनुसार आयोग के पास करीब 13 महीने का वक्त शेष है.
हालिया नोटिस के मुताबिक वेतन, भत्तों और पेंशन सुधार से जुड़े सुझावों पर काम अब अहम मोड़ पर पहुंच चुका है. जिससे कर्मचारियों के बीच उम्मीद की लहर दौड़ गई है. आइए जानते हैं, नए अपडेट के विषय में...
सुझाव भेजने की समय सीमा
आठवां वेतन आयोग ने साफ किया है कि जो भी संगठन या यूनियन आयोग की विजिटिंग टीम से बातचीत करना चाहते हैं. उन्हें 10 अप्रैल 2026 तक ईमेल के जरिए अपॉइंटमेंट लेना होगा. इसके साथ ही, वेतन और पेंशन से जुड़े अपने सुझाव और फीडबैक भेजने के लिए 30 अप्रैल 2026 की डेडलाइन तय की गई है.
इसी फीडबैक के आधार पर आगे की सिफारिशें तैयार की जाएंगी. जो आने वाले समय में लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स का भविष्य तय करने वाली है.
राज्यों के दौरे से जुटाए जाएंगे सुझाव
आयोग अब सीधे जमीनी स्तर पर फीडबैक लेने की तैयारी में है. आयोग ने अपने दौरों की शुरुआत करने का फैसला लिया है. 30 मार्च की घोषणा के मुताबिक टीम की पहली विजिट उत्तराखंड से होगी. इस दौरान टीम वहां के संगठनों और संस्थानों से बातचीत कर उनकी राय लेगी. ताकि रिपोर्ट को और बेहतर बनाया जा सके.
बैठकों से जुड़ी जगह और समय की जानकारी संबंधित लोगों को ईमेल के जरिए दी जाएगी. साथ ही, ज्यादा से ज्यादा सुझाव मिल सकें, इसके लिए तारीखों में पहले ही बदलाव किया जा चुका है. जिससे आयोग को ज्यादा इनपुट मिल सके.
एरियर के साथ मिल सकता है फायदा
7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 8th Pay Commission की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जा सकती हैं. अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर के रूप में भी अच्छा खासा लाभ मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें: जिंदगी भर की भागदौड़ के बाद अब चाहिए सुकून, छोटे शहरों में बस रहे लोग; ये शहर बने पहली पसंद ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>डंकिन डोनट्स का भारत में सफर खत्म! बंद होने जा रहे हैं स्टोर्स, जानें इसकी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Dunkin&#039; Donuts India Exit: अमेरिकी फूड ब्रांड डंकिन डोनट्स के भारत में कारोबार को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. कंपनी के भारतीय पार्टनर जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड ने फ्रेंचाइजी समझौते को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है.
यह एग्रीमेंट 31 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है. जिसके बाद देशभर में डंकिन डोनट्स के स्टोर्स को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा. इसके ऑपरेशन्स धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे....
फैसले के पीछे की वजह क्या है?
Jubilant FoodWorks Ltd का यह कदम बताता है कि कंपनी अब अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है. अपने मुख्य ब्रांड्स व अहम बाजारों पर ज्यादा फोकस करना चाहती है. बोर्ड की मंजूरी और आधिकारिक फाइलिंग के बाद डंकिन से जुड़े कारोबार को बंद करने का फैसला लिया गया है.
आने वाले समय में स्टोर्स के धीरे-धीरे बंद किया जाएगा. साथ ही और अपडेट सामने आ सकते हैं. मिली जानकारी के अनुसार लगातार हो रहे नुकसान और बिजनेस में उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ न मिलना इस समझौते के टूटने की बड़ी वजह माना जा रहा है.&amp;nbsp;
कंपनी की आगे की योजना
कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि डंकिन के स्टोर्स को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा. बल्कि धीरे-धीरे इनके ऑपरेशन कम किए जाएंगे. कुछ जगहों पर दुकानें पूरी तरह बंद हो सकती हैं.
जबकि कुछ को बेचने या किसी और को देने का फैसला लिया जा सकता है. यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों के मुताबिक होगी, ताकि कोई परेशानी न हो और ग्राहकों पर इसका असर भी कम से कम पड़े.
कई देशों में फैला है कंपनी का कारोबार
जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड की शुरुआत 1995 में हुई थी और आज यह 6 देशों में अपना कारोबार कर रही हैं. भारत समेत तुर्की, बांग्लादेश, श्रीलंका, अजरबैजान और जॉर्जिया में कंपनी के &amp;nbsp;3,500 से ज्यादा स्टोर्स है.
कंपनी Domino&#039;s और Popeyes जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स को भी मैनेज करने का काम करती है. साथ ही खुद के ब्रांड्स जैसे Hong&#039;s Kitche और तुर्की में CAFE brand COFFY भी चलाती है.
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 08:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>855 FIR और 48000 सिलेंडर ज़ब्त, 141 डिस्ट्रीब्यूटरों पर गिरी गाज, LPG संकट के बीच बड़ी खबर</title>
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        <description><![CDATA[ LPG&amp;nbsp;Supply News: दुनिया भर के एनर्जी बाज़ारों पर मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात का असर देखने को मिल रहा है, लेकिन भारत में घरेलू एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह स्थिर और पर्याप्त बनी हुई है. इंडियन ऑयल ने पुष्टि की है कि घरेलू एलपीजी को लगातार सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है और घरों तक डिलीवरी बिना किसी रुकावट के जारी है.
इंडियन ऑयल के रोज़ाना लगभग 28 लाख एलपीजी सिलेंडर डिलीवर किए जा रहे हैं, जो मौजूदा तनाव शुरू होने से पहले के सामान्य स्तर के बराबर हैं. ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए SMS और IVRS जैसी डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है. फिलहाल, लगभग 87 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से हो रही हैं. डिलीवरी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC OTP) का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि सिलेंडर सही ग्राहक तक पहुंचे.
141 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरों के खिलाफ कार्रवाई की गई&amp;nbsp;
सोशल मीडिया और ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर कुछ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरों के की गई गड़बड़ियों की रिपोर्ट मिली है. इस पर लगाम लगाने के लिए 7,500 से ज्यादा निरीक्षण किए जा चुके हैं और 141 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनमें से 5 डिस्ट्रीब्यूटरों को सस्पेंड किया गया है.
देश में एलपीजी की सप्लाई पर्याप्त- इंडियन ऑयल
इसके अलावा, इंडियन ऑयल और अन्य ऑयल मार्केटिंग कंपनियां राज्य सरकारों के सहयोग से गड़बड़ियों और जमाखोरी को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रही हैं. अब तक लगभग 68,000 छापे मारे गए हैं, 855 FIR दर्ज की गई हैं और 48,000 से ज्यादा सिलेंडर ज़ब्त किए जा चुके हैं.
इंडियन ऑयल Indane ने अपने ग्राहकों से अपील की है कि वे अफ़वाहों पर विश्वास न करें, लाइन में खड़े होकर घबराहट में सिलेंडर बुकिंग या जमाखोरी न करें, और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें. इंडियन ऑयल ने आश्वासन दिया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई पर्याप्त, स्थिर और पूरी तरह निगरानी में है. घरेलू गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रतिबद्धता लगातार जारी रहेगी. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 08:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;आज ही आखिरी दिन है&amp;apos;, Oracle के मेल ने उड़ा दी नींद, लेऑफ के बाद क्या हुआ? कर्मचारियों ने बताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-ही-आखिरी-दिन-है-oracle-के-मेल-ने-उड़ा-दी-नींद-लेऑफ-के-बाद-क्या-हुआ-कर्मचारियों-ने-बताया</link>
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        <description><![CDATA[ Oracle Layoffs: हाल ही में अमेरिकी मल्टीनेशनल कंप्यूटर टेक्नोलॉजी कंपनी Oracle ने बड़े स्तर पर छंटनी करने का निर्णय लिया है. इसकी जानकारी कर्मचारियों को एक ईमेल के माध्यम से दी गई है. ईमेल में बताया गया कि ये फैसला कंपनी की जरूरतों और संगठन में बदलाव के चलते लिया गया है. साथ ही ये भी बताया गया कि आज का दिन ही उनका आखिरी कामकाजी दिन है. यानी कोई अतिरिक्त समय या ट्रांजिशन पीरियड नहीं दिया जाएगा.&amp;nbsp;
अब तक इस छंटनी में करीब 12,000 लोग प्रभावित हुए हैं. बाजार विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक, यह संख्या 20,000 से 30,000 तक पहुंच सकती है. जो Oracle की कुल 162,000 कर्मचारियों का लगभग 18 प्रतिशत होती है.
Oracle ने छंटनी के बाद कर्मचारियों को दिए निर्देश
ईमेल में कर्मचारियों को जल्दी से जल्दी कार्रवाई करने के लिए कहा गया, क्योंकि उनका एक्सेस जल्द ही बंद होने वाला था. ईमेल में पहले उनके मेहनत और योगदान की सराहना की गई. हालांकि, इसके तुरंत बाद जरूरी प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई.
कर्मचारियों को बताया गया कि वे सेवरेंस पैकेज के लिए योग्य हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें टर्मिनेशन डॉक्युमेंट्स DocuSign के जरिए साइन करना होगा. जो उनके Oracle ईमेल पर भेजे गए थे.
कर्मचारियों को मिला थोड़े समय का विंडो
ईमेल में ये भी बताया गया कि कंप्यूटर, ईमेल, वॉइसमेल और फाइल्स तक उनका एक्सेस जल्दी ही बंद कर दिया जाएगा. इसका मतलब यह था कि कर्मचारियों के पास सिर्फ थोड़े समय की विंडो थी, जिसमें वे सभी जरूरी काम पूरी कर सकें.
छंटनी के बाद कर्मचारियों पर बढ़ रहा दबाव
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक Reddit पोस्ट खूब चर्चा में है. जिसमें खुद को Oracle का कर्मचारी बताने वाले एक यूजर बाकी कर्मचारियों को सलाह दे रहे हैं कि वे छंटनी के बाद खाली हुई भूमिकाओं को संभालने के लिए ज्यादा मेहनत न करें.
एक कर्मचारी ने बताया कि बड़े पैमाने की छंटनी के बाद कंपनियां अक्सर बाकी कर्मचारियों से उम्मीद करती हैं कि वे अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालेंगी. इससे लोग ज्यादा घंटों तक काम करने और अपनी सीमाओं से बाहर जाकर काम करने के दबाव में आ जाते हैं. जबकि इसके लिए उन्हें आमतौर पर कोई अतिरिक्त वेतन नहीं मिलती है.
Oracle की छंटनी में सीनियर कर्मचारियों पर असर
Oracle में 34 साल से काम कर रही Nina Lewis ने एक पोस्ट में दावा किया है कि हाल की छंटनी में खास तौर पर सीनियर एक्जिक्यूटिव और मिड-लेवल मैनेजर को टारगेट किया गया है.&amp;nbsp;
पोस्ट के अनुसार, कंपनी की ने उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई जिनके पास ज्यादा स्टॉक ऑप्शंस और इक्विटी थे. इससे कंपनी अपने लंबे समय के वित्तीय दायित्वों को कम कर सकती थी.
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>भारतीय फार्मा कंपनियों पर गिरी गाज, ट्रंप ने दवाओं पर लगाया 100 परसेंट टैरिफ; किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Trump Tariff on Pharma: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं और उनके एक्टिव इंग्रीडिएंट्स पर 100 परसेंट टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. उनका यह फैसला अमेरिकी बाजारों में इनोवेटिव दवाओं के सेगमेंट में अपनी अच्छी-खासी मौजूदगी रखने वाली भारतीय दवा कंपनियों पर असर डाल सकता है.
हालांकि, ज्यादातर भारतीय दवा एक्सपोर्टर इस टैरिफ से बचे रहेंगे क्योंकि इसमें जेनेरिक और बिना ब्रांड वाली दवाएं शामिल नहीं है. &amp;nbsp;वहीं Sun Pharma और Glenmark Pharmaceuticals पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है क्योंकि ये पेटेंटेड प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान देते हें और अमेरिका के स्पेशिलिटी वाले दवाओं के सेगमेंट में इनकी कमर्शियल मौजूदगी है.&amp;nbsp;
पेटेंटेड प्रोडक्ट्स क्या होते हैं?
जब किसी प्रोडक्ट पर उस कंपनी का कानूनी अधिकार होता है तो उसे पेटेंटेड कहा जाता है. इसी तरह से सन फार्मा या ग्लेनमार्क जैसी कंपनियां जब खूब सारा पैसा और समय लगाकर कोई नई दवा की खोज करती है, तो वह सरकार से उसका पेटेंट ले लेती है. पेटेंड मिलने के बाद एक निश्चित समय तक (अमूमन 20 साल) कोई दूसरी कंपनी उस दवा को बना या बेच नहीं सकती है. इसके चलते बाजार में उस दवा पर जब किसी एक कंपनी का अधिकार होता है, तो उसकी कीमत भी वही तय करती है. यही वजह है कि ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाएं अकसर महगी होती हैं.
सन फार्मा पर असर
भारत की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी सन फार्मा की अमेरिकी बाजारों में अच्छी-खासी पहचान है. अमेरिकी बाजारों में कंपनी की पेटेंटेड दवाओं की बड़े पैमाने पर बिक्री होती है. सन फार्मा के टोटल रेवेन्यू का 30-35 परसेंट अकेले अमेरिका से आता है. कारोबारी साल 2025 में Sun Pharma के पेटेंटेड प्रोडक्ट्स से ग्लोबल बिक्री 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर रही.
Sun Pharma के पेटेंटेड प्रोडक्ट्स की 85&amp;ndash;90 परसेंट बिक्री अमेरिका में ही होती है. टैरिफ लगने से ये दवाएं और महंगी हो जाएगी. खासतौर पर, Sun Pharma के स्पेशलिटी ब्रांड्स (Ilumya, Winlevi, Cequa, Sezaby) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है क्योंकि ये सभी टैरिफ के दायरे में आएंगे.&amp;nbsp;
ग्लेनमार्क पर असर
ग्लेनमार्क के लिए उसकी प्रमुख दवा Ryaltris पर टैरिफ का सबसे ज्यादा असर दिख सकता है क्योंकि यह एक ब्रांडेड दवा है और अमेरिका में इसका मार्केट शेयर तेजी से बढ़ रहा है. 100 परसेंट टैरिफ लगने से दवा की कीमत दोगुनी हो जाएगी. इससे अमेरिकी बाजारों में इसकी मांग में कमी देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;
शेयर बाजार पर असर
बीते 2 अप्रैल को ट्रंप के इस ऐलान के बाद Nifty Pharma Index में भारी गिरावट देखी गई. यह 3.5-5 परसेंट तक लुढ़क गया. इस दौरान सन फार्मा और ग्लेनमार्क के शेयर भी 5-6 परसेंट तक टूट गए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>सैलरी आते ही हो जाती है खत्म? इन 5 आदतों को बदलें और महीने के आखिरी हफ्ते की &amp;apos;कंगाली&amp;apos; को कहें अलविदा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-आते-ही-हो-जाती-है-खत्म-इन-5-आदतों-को-बदलें-और-महीने-के-आखिरी-हफ्ते-की-कंगाली-को-कहें-अलविदा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सैलरी-आते-ही-हो-जाती-है-खत्म-इन-5-आदतों-को-बदलें-और-महीने-के-आखिरी-हफ्ते-की-कंगाली-को-कहें-अलविदा</guid>
        <description><![CDATA[ Monthly Budget Planning Tips: हर महीने सैलरी आने के कुछ ही दिनों बाद जेब पूरी तरह से खाली हो जाना आज कई लोगों की समस्या बन चुकी है. महीने के आखिरी हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते खर्च चलाने लायक पैसे भी हाथ में नहीं बचते हैं.&amp;nbsp;
छोटे-छोटे खर्च संभालना भी मुश्किल लगने लगता है. हालांकि, अगर आप अपनी कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें, तो न सिर्फ पैसे बचाए जा सकते हैं बल्कि पूरे महीने बिना तनाव के खर्च भी मैनेज किया जा सकता है. आइए जानते हैं, ऐसे कुछ टिप्स के बारे में...
1. लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से रहें सतर्क
अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही इनकम में थोड़ी बढ़ोतरी होती है तो लोग तुरंत अपने खर्च को भी बढ़ा देते हैं. नया फोन, महंगी गाड़ी या लग्जरी लाइफस्टाइल अपनाने लगते हैं.
इस आदत को लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है. ऐसे में जरूरी है कि कमाई बढ़ने के साथ खर्च नहीं, बल्कि निवेश को प्राथमिकता दी जाए. जिससे आपको आर्थिक परेशानी न हो.&amp;nbsp;
2. पर्सनल लोन लेने से बचें&amp;nbsp;
पर्सनल लोन लेना आसान जरूर होता है, लेकिन यह अक्सर महंगा पड़ता है. क्योंकि इस पर ब्याज दर ज्यादा होती है और EMI का बोझ लंबे समय तक बना रहता है. छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लोन लेने की आदत आपको परेशानी में डाल सकती है.&amp;nbsp;
साथ ही इससे महीने का बजट तो बिगड़ता ही है. इसलिए जब तक बहुत जरूरी न हो पर्सनल लोन के बारे में नहीं सोचना चाहिए. अगर जरूरत ज्यादा हो तो दूसरे विकल्पों को ट्राय किया जा सकता है.&amp;nbsp;
3. इनकम के अनुसार ही लोन लें
लोन लेते समय अपनी आय की सही अंदाजा लगाना बेहद जरूरी होता है. विशेषज्ञों की मानें तो, आपकी EMI आपकी कुल इनकम के 25-30 प्रतिशत के भीतर ही रहनी चाहिए.
जिससे बाकी जरूरी खर्चों के लिए पैसा बचा रहे. अगर आप इससे ज्यादा लोन लेते हैं, तो हर महीने का बजट बिगड़ सकता है. इसलिए हमेशा सोच-समझकर ही लोन लेने का फैसला करें.
4. इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं
लाइफ में कभी भी किसी तरह की इमरजेंसी आ सकती है. इमरजेंसी के वक्त आपका बचाया हुआ पैसा आपका सच्चा साथी बनता है. इसलिए वित्तीय सलाहकार इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं. ऐसा करने से अगर कोई बात बिगड़ती है तो भी आप अपने महीने का खर्च आसानी से पूरा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
5. क्रेडिट कार्ड का समझदारी से करें इस्तेमाल
बहुत से लोग क्रेडिट कार्ड को फ्री मनी समझने की गलती करते हैं. जिसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ता है. भारी-भरकम ब्याज दरें आपकी मंथली बजट को बिगाड़ देती है.
इसलिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल समझेदारी से करने की सलाह दी जाती है. कार्ड लिमिट के 30 से 40 प्रतिशत से ज्यादा खर्च करना आपको कर्ज के जाल में फंसा सकता हैं. &amp;nbsp;
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सैलरी, आते, ही, हो, जाती, है, खत्म, इन, आदतों, को, बदलें, और, महीने, के, आखिरी, हफ्ते, की, कंगाली, को, कहें, अलविदा</media:keywords>
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        <title>Pepsi की बॉटलिंग पार्टनर Varun Beverages ने डिविडेंड पर दिया बड़ा अपडेट, जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Varun Beverages Dividend: Varun Beverages अपने निवेशकों पर पैसे लुटाने जा रही है. दरअसल, कंपनी ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है और इसके लिए रिकॉर्ड डेट भी तय कर ली गई है.
बीते बुधवार को शेयर बाजार बंद होने के बाद कंपनी ने बताया कि उसने 2 रुपये के फेस वैल्यू वाले प्रति इक्विटी शेयर पर 0.5 रुपये के अंतिम डिविडेंड का फैसला लिया है. कंपनी ने इसके लिए 8 अप्रैल को रिकॉर्ड डेट तय की है. यानी कि इस दिन तक जिन शेयरधारकों के डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होंगे, वे इस मुनाफे के हकदार होंगे. डिविडेंड का भुगतान 10 अप्रैल से किया जाना है.&amp;nbsp;
डिविडेंड देने में माहिर कंपनी
2017 में लिस्टिंग के बाद से कंपनी लगातार अपने निवेशकों पर पैसे लुटाती रही है. कंपनी अब तक 13 बार से ज्यादा डिविडेंड का ऐलान कर चुकी है. कंपनी ने 2019, 2021 और 2022 में 1:2 के अनुपात में बोनस शेयर भी दे चुकी है. कंपनी ने 2023 में 10 से 5 और 2024 में 5 से 2 की फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट भी किया है.
एक ग्रोथ स्टॉक होने के नाते वरुण बेवरेजेस अपने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा लगभग 80 परसेंट से ज्यादा कारोबार में लगाती है और बाकी पैसों (करीब 15-17 परसेंट) का इस्तेमाल डिविडेंड देने में करती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन
बुधवार को वरुण बेवरेजेस के शेयर 4.60 परसेंट की तेजी के साथ 401.75 रुपये पर बंद हुए. पिछले पांच सालों में इसने 347.93 परसेंट का रिटर्न दिया है. हालांकि, पिछले एक साल में कंपनी के शेयरों में 25.43 परसेंट की बड़ी गिरावट भी आई है.&amp;nbsp;
क्या करती है कंपनी?
वरुण बेवरेजेस PepsiCo के सबसे बड़े फ्रेंचाइजी बॉटलर्स में से एक है. कंपनी पेप्सीको के लिए कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने, उन्हें बोतलों में भरने और उनके डिस्ट्रीब्यूशन का काम संभालती है. कंपनी के पास भारत सहित विदेशों में बॉटलिंग प्लांट्स के साथ बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है, जो प्रोडेक्ट्स को शहरों से लेकर गांवों-कस्बों तक पहुंचाती है.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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6 साल में 3600% रिटर्न! इस शेयर से मालामाल हो गए निवेशक, ब्रोकरेज को 80% अपसाइड की उम्मीद ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Pepsi, की, बॉटलिंग, पार्टनर, Varun, Beverages, ने, डिविडेंड, पर, दिया, बड़ा, अपडेट, जानें, डिटेल</media:keywords>
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        <title>आम आदमी की पहुंच से बाहर हुआ हवाई सफर! आसमान छूने लगा किराया, फ्लाइट 35% तक महंगी</title>
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        <description><![CDATA[ Iran War Price Rise in Air Travel: ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध जैसे हालात का असर अब हिंदुस्तान के आम यात्री की जेब पर सीधा पड़ रहा है. कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से एविएशन टर्बाइन फ्यूल ATF की कीमतें बढ़ चुकी हैं और एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज भी थोप दिया है और नतीजा सामने है. देश के तकरीबन हर बड़े रूट पर फ्लाइट का टिकट पिछले दिनों में 30-35 फीसदी तक महंगा हो गया है.
हाल ही में डोमेस्टिक एयरलाइंस के लिए ATF 8.5 फीसदी बढ़ा है. ATF किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का 35 से 45 फीसदी हिस्सा होता है इसलिए जैसे ही ईंधन महंगा होता है टिकट की कीमत सीधे ऊपर चढ़ जाती है तो इसका असर अब देखिए जनता पर कितना पड़ रहा है.
दिल्ली से उड़ान पहले कितना, अब कितना?
हवाई किराए को लेकर 16 अप्रैल की बुकिंग देखें तो दिल्ली से गोवा का सबसे सस्ता नॉन-स्टॉप टिकट अभी ₹8,384 से शुरू होता है. IndiGo पर यही रूट ₹9,038 से ₹11,098 के बीच चल रहा है. कुछ हफ्ते पहले यही टिकट ₹4,500 से ₹6,000 के बीच मिल जाता था और अगर अगले दिन की बुकिंग दिल्ली जाए तो यह रेट15 हज़ार तक भी नजर आ जाते है. दिल्ली से बेंगलुरु का हाल और भी बुरा है 16 अप्रैल को किराया ₹12,596 तक पहुंचा हुआ है और इसमें भी अगले दिन का किराया 15 से 17 हजार तक आ जाता है .
जयपुर से कितना लगेगा किराया?
जयपुर से बेंगलुरु रूट पर 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी न्यूनतम किराया ₹11,568 से लेकर अधिकतम ₹24,129 तक. जयपुर से अहमदाबाद ₹7,036 से ₹12,443 के बीच, पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा. जयपुर से मुंबई ₹6,305 से ₹13,481 तक करीब 10 फीसदी महंगा. जयपुर से गोवा ₹13,128 रुपये और मांग इतनी ज्यादा है कि ऊपरी सीमा बताना मुश्किल हो गया है.
रांची और नागपुर के यात्री भी परेशान
रांची से दिल्ली का किराया जो आम दिनों ₹8,000-₹10,000 था वो अब ₹12,000-₹15,000 तक पहुंच गया है. मुंबई का टिकट ₹14,000-₹16,000 हो गया है. कोलकाता ₹8,000-₹10,000 और हैदराबाद ₹10,000-₹13,000 के बीच चल रहा है. नागपुर से दिल्ली का किराया महज एक दिन में ₹10,228 से उछलकर ₹13,495 हो गया. जबकि कुछ हफ्ते पहले यही टिकट ₹5,500-₹6,000 में मिल रहा था.
चंडीगढ़ से बेंगलुरु का किराया 31 मार्च तक ₹12,000 था जो अब ₹16,000 तक पहुंच गया. चेन्नई से हैदराबाद का टिकट जो सामान्यत ₹6,000 में मिलता था वो इस वीकेंड ₹19,000 तक बिका. कोच्चि का टिकट ₹4,000 से तीन गुना उछलकर ₹18,000 पर पहुंच गया.
IndiGo ने 14 मार्च से सभी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाया रूट के हिसाब से ₹425 से ₹2,300 प्रति सीट है. Air India और Air India Express ने 12 मार्च से घरेलू टिकटों पर ₹399 का फ्यूल सरचार्ज लागू किया. Akasa Air ने भी 15 मार्च से अपना सरचार्ज जोड़ा है.
फ्यूल सरचार्ज भी एक्स्ट्रा वसूली&amp;nbsp;
IndiGo ने 2 अप्रैल से नया सरचार्ज ढांचा लागू किया है. डोमेस्टिक रूट्स पर दूरी के हिसाब से ₹275 से ₹950 तक अतिरिक्त लगेगा. Air India और Akasa Air ने भी इसी तरह के सरचार्ज लागू किए हैं.दिल्ली से लखनऊ जैसे शॉर्ट रूट पर ₹275 - मुंबई-कोलकाता पर ₹600 - बेंगलुरु-हैदराबाद पर ₹800 और चेन्नई पर ₹950 अतिरिक्त देना होगा.
इंटरनेशनल उड़ानों में तो राहत ही नहीं है . खाड़ी और मिडिल ईस्ट रूट्स पर ₹3,000 से ₹5,000 और यूरोप-यूके के लिए ₹10,000 तक का फ्यूल सरचार्ज लग रहा है. जब तक ईरान संकट कम नहीं होता और कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती हवाई किराए में गिरावट की उम्मीद नहीं है और सरकार ने डोमेस्टिक एयरलाइंस को आंशिक राहत दी है पूरा ATF बोझ यात्रियों पर नहीं डाला जाएगा, लेकिन इंटरनेशनल रूट्स पर ऐसी कोई ढाल नहीं है. फिलहाल जितनी जल्दी टिकट बुक करें उतना बेहतर. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आम, आदमी, की, पहुंच, से, बाहर, हुआ, हवाई, सफर, आसमान, छूने, लगा, किराया, फ्लाइट, 35, तक, महंगी</media:keywords>
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        <title>Iran War Impact: न गैस सिलेंडर, न कच्चा माल... उद्यमियों का बुरा हाल, सरकार ने मांगा विशेष राहत पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ देश के तमाम राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों पर ईरान-इज़राइल युद्ध का बुरा असर पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश में कानपुर के दादा नगर स्थित औद्योगिक क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा. कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और ट्रांजिट टाइम बढ़ने से यहां की इंडस्ट्री गंभीर संकट से गुजर रही है.
यूरोप में निर्यात करने वाले निर्यातक संदीप मल्होत्रा ने बताया कि उनके कारोबार में 180 से 210 दिन का कमिटमेंट रहता है, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के कारण उन्होंने 15 मार्च से नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है. पॉलिएस्टर यार्न, कॉटन और अन्य कपड़ों के दाम रोज बढ़ रहे हैं. पुराने ऑर्डर अभी पुराने रेट पर पूरे किए जा रहे हैं, लेकिन आगे नए रेट लागू करना मजबूरी होगी. ट्रांजिट टाइम बढ़ने और रूट बदलने से निर्यात लागत भी बढ़ गई है.
&#039;अब ब्लैक में भी नहीं मिल रहा सिलेंडर&#039;
टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े मयंक बिज के अनुसार, उनकी इंडस्ट्री में कच्चा माल 25 से 30 प्रतिशत तक महंगा हो गया है. स्पेशलाइज्ड लेबर बाहर से आती है, लेकिन गैस सिलेंडर न मिलने से मजदूर खाना नहीं बना पा रहे और वापस लौट रहे हैं. सिलेंडर की किल्लत इतनी है कि ब्लैक में भी उपलब्ध नहीं है. बढ़ती लागत के कारण उत्पादन लागत और बाजार भाव में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है.
उद्योगपति विजय कपूर का कहना है कि दादा नगर में करीब 2500 इंडस्ट्री हैं. वर्तमान हालात में 50 प्रतिशत इंडस्ट्री महज 10 से 20 प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं, 30 प्रतिशत इंडस्ट्री 50 से 60 प्रतिशत क्षमता पर और केवल 20 प्रतिशत इंडस्ट्री 80 प्रतिशत क्षमता तक काम कर पा रही हैं. किसी के पास रॉ मटेरियल नहीं है, किसी के पास लेबर की कमी है तो किसी के पास गैस सिलेंडर नहीं है. उनका कहना है कि हालात कोरोना काल से भी बदतर हो चुके हैं.
प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित
बता दें कि दादा नगर में मसाला, रोलिंग मिल, बिस्किट, प्लास्टिक, पैकेजिंग, एक्सपोर्ट, साइकिल पार्ट्स और फूड इंडस्ट्री समेत विभिन्न इकाइयां संचालित होती हैं. प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां 100 रुपए का कच्चा माल 180 रुपए तक पहुंच गया है. केमिकल इंडस्ट्री में 100 रुपए का माल 200 रुपए का हो गया है, जबकि लोहे के दाम में करीब 20 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है.
उद्योगपतियों का कहना है कि जब तक गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक हालात सामान्य नहीं होंगे. विजय कपूर ने प्रशासन से मार्च माह के टैक्स और रिकवरी टारगेट स्थगित करने, हाउस टैक्स, वॉटर टैक्स, बिजली बिल और जीएसटी में राहत देने की मांग की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
व्यापारियों ने सीएम योगी से मांगी मदद
व्यापारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष पैकेज की मांग की है. उनका कहना है कि जिस तरह प्राकृतिक आपदा में किसानों को राहत दी जाती है, उसी तरह उद्योगों को भी विशेष सहायता दी जाए, ताकि फैक्ट्रियां बंद होने से बच सकें और रोजगार व राजस्व दोनों सुरक्षित रहे. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Iran, War, Impact:, न, गैस, सिलेंडर, न, कच्चा, माल..., उद्यमियों, का, बुरा, हाल, सरकार, ने, मांगा, विशेष, राहत, पैकेज</media:keywords>
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        <title>6 साल में 3600% रिटर्न! इस शेयर से मालामाल हो गए निवेशक, ब्रोकरेज को 80% अपसाइड की उम्मीद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/6-साल-में-3600-रिटर्न-इस-शेयर-से-मालामाल-हो-गए-निवेशक-ब्रोकरेज-को-80-अपसाइड-की-उम्मीद</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/6-साल-में-3600-रिटर्न-इस-शेयर-से-मालामाल-हो-गए-निवेशक-ब्रोकरेज-को-80-अपसाइड-की-उम्मीद</guid>
        <description><![CDATA[ Aurionpro Solutions Multibagger Stock: निवेशक हमेशा ऐसे शेयरों की तलाश में रहते हैं, जो समय के साथ मल्टीबैगर रिटर्न दे सकें. जिससे उनका निवेश कई गुना बढ़े. बाजार में ऐसे कुछ स्टॉक्स समय-समय पर सामने आते हैं, जिन्होंने कुछ ही सालों में हजारों प्रतिशत तक रिटर्न दिया है.
अब एक ऐसा ही शेयर चर्चा में है, जिसने पिछले 6 साल में 3,600 फीसदी तक का शानदार मल्टीबैगर रिटर्न दिया है. खास बात यह है कि ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा को कंपनी शेयरों में 80 फीसदी तक की अपसाइड की उम्मीद है. आइए जानते हैं, इस विषय में...
निवेशकों को कर दिया मालामाल
ऑरियनप्रो सॉल्यूशन्स लिमिटेड ने अपने निवेशकों की झोली खुशियों से भर दी है. कंपनी शेयरों ने निवेशकों को मालामाल बनने का मौका दिया है. आंकड़ों की बात करें तो, मई 2020 के बाद से इस शेयर की कीमत में 39 गुना से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है. जिससे यह एक दमदार मल्टीबैगर साबित हुआ है.
ऑरियनप्रो सॉल्यूशन्स के शेयरों ने पिछले छह साल में 3,800 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है. शेयरों की कीमत 20 रुपये से उछलकर 781.50 रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि, पिछले कुछ समय की तुलना करें तो इसमें गिरावट देखी गई है. कंपनी शेयर अपने 52 सप्ताह के हाई लेवल से 55 प्रतिशत फिसल चुके हैं. &amp;nbsp; &amp;nbsp;
ब्रोकरेज फर्म का भरोसा
ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा ने ऑरियनप्रो सॉल्यूशन्स शेयरों को खरीदने की सलाह देते हुए कवरेज शुरू कर दी है. फर्म ने शेयरों के लिए 1,352 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है. ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी की पकड़ ग्लोबल ट्रांजैक्शन बैंकिंग, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन (AFC) और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में है.&amp;nbsp;
जहां कंपनी अपने इनोवेटिव प्लेटफॉर्म और रिसर्च के दम पर बेहतर मौके हासिल कर सकती है. इसके अलावा भारत में डेटा सेंटर क्षमता FY35 तक 15&amp;ndash;17 GW तक जाने का अनुमान है, जिसे क्लाउड, AI और डेटा लोकलाइजेशन की बढ़ती मांग से सपोर्ट मिलेगा. कुल मिलाकर आने वाले समय में कंपनी शेयरों में पॉजिटिव बदलाव हो सकते हैं.&amp;nbsp;
शेयर बाजार में प्रदर्शन
बीएसई पर गुरुवार के कारोबारी दिन कंपनी शेयरों में हल्की गिरावट देखने को मिली है. कंपनी शेयर 0.77 प्रतिशत या 6.05 रुपये फिसलकर 775.45 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुए है. दिन का इंड्रा डे हाई 784.20 रुपये था.
कंपनी शेयरों के 52 सप्ताह के हाई लेवल की बात करें तो, इस दौरान शेयरों ने 1663.15 रुपये का आंकड़ा छूआ था. वहीं 52 सप्ताह का लो लेवल 720.10 रुपये है. कंपनी का मार्केट कैप 4,281.53 करोड़ रुपये है.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
यह भी पढ़ें: कर्ज के चक्रव्यूह से आजादी: क्रेडिट कार्ड के बिल और पर्सनल लोन के बोझ को कम करने के लिए एक्सपर्ट्स की ये सलाह बदल देगी आपकी जिंदगी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साल, में, 3600, रिटर्न, इस, शेयर, से, मालामाल, हो, गए, निवेशक, ब्रोकरेज, को, 80, अपसाइड, की, उम्मीद</media:keywords>
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        <title>अब पसंदीदा गाड़ी खरीदना होगा और मुश्किल! हॉर्मुज संकट की तपिश से स्टील से टायर तक सब महंगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-पसंदीदा-गाड़ी-खरीदना-होगा-और-मुश्किल-हॉर्मुज-संकट-की-तपिश-से-स्टील-से-टायर-तक-सब-महंगा</link>
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        <description><![CDATA[ ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन पर दबाव ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी है. युद्ध का सबसे पहला और सबसे बड़ा असर गाड़ी बनाने वाले कच्चे माल पर पड़ा है. स्टील, एल्युमीनियम, रबर, प्लास्टिक, पेंट और केमिकल गाड़ी के हर हिस्से की कीमत बढ़ रही है.
दुनिया का तेल बेंचमार्क बेरंट क्रूड 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. पेट्रोकेमिकल से बनने वाले पेंट और केमिकल की कीमत तो सबसे पहले और सबसे तेज़ बढ़ती है, क्योंकि ये सीधे क्रूड से जुड़े हैं. इसको ऐसे समझे कि अब गाड़ी का हर हिस्सा महंगा बन रहा है और यह महंगाई कंपनियों तक पहुंच रही है.
कंपनियों पर दबाव की कीमत बढ़ाएं या मार्जिन घटाएं?
ब्रोकरेज फर्म Elara Securities ने रिपोर्ट में बताया है कि भारतीय ऑटो सेक्टर दो तरफ से दबाव में है. एक तरफ मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट बंद होने का सीधा नुकसान है और दूसरी तरफ महंगे कच्चे माल बढ़े हुए माल-भाड़ा दरें और टूटी हुई सप्लाई चेन का दबाव.&amp;nbsp;असर उन कंपनियों पर भी पड़ रहा है, जिनका मिडिल ईस्ट से सीधा कारोबार कम है.&amp;nbsp;

टाटा मोटर्स ने 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल-डीज़ल-CNG वाहनों के दाम औसतन 0.5% बढ़ाए हैं और कमर्शियल व्हीकल्स पर 1.5% तक की बढ़ोतरी की है.
जेएसडब्लू एमजी मोटर&amp;nbsp;पूरी रेंज पर 2% दाम बढ़ाए हैं.
बीएमडब्लू और Mercedes-Benz ने भी 2% की बढ़ोतरी की है.
किआ इंडिया ने भी लागत बढ़ने का संकेत दिया है.

Maruti Suzuki और Mahindra &amp;amp; Mahindra फिलहाल कीमत नहीं बढ़ा रहे, लेकिन दोनों कंपनियों ने साफ कह दिया है अगर हालात लंबे चले तो दाम बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा.
फ्यूल महंगा तो EV की डिमांड तेज़
युद्ध के चलते पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों को लेकर जो डर और अनिश्चितता बनी है उसने बाज़ार में एक नया ट्रेंड शुरू कर दिया है. लोग EV को सेफ ऑप्शन मानकर खरीद रहे हैं, क्योंकि EV running cost कम है फ्यूल प्राइज का जोखिम नहीं है और सरकार की सपोर्ट भी है. फरवरी 2026 में देशभर में EV की बिक्री 25% से ज़्यादा बढ़ी. Mahindra की EV बिक्री तो करीब दोगुनी हो गई.
ओवरऑल EV retail sales 44% बढ़ीं यह भारत का अब तक का सबसे ऊँचा monthly EV retail record था. इस पूरे बदलाव का सबसे ज़्यादा फायदा Tata Motors और Mahindra को मिल रहा है.
शिपिंग और सप्लाई चेन है छुपा हुआ बड़ा खतरा!
होरमुज़ जलडमरूमध्य की करीब-करीब बंदी के बाद दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों ने वो रास्ता छोड़ दिया है. इससे भाड़ा बढ़ा है डिलीवरी में देरी आई है और पार्ट्स का इमोर्ट महंगा हो गया है.
Elara Securities के मुताबिक ज़्यादातर भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए freight cost कुल revenue का 1% से 3% होता है. यह आंकड़ा छोटा लगता है, लेकिन ऑटो जैसे सेक्टर में जहां मार्जिन्स पहले से बहुत पतले होते हैं, वहां यह सीधे मुनाफे पर चोट करता है. इसका असर सिर्फ बड़ी गाड़ी कंपनियों पर नहीं बल्कि पूरे ऑटो कंपोनेन्ट सेक्टर पर पड़ रहा है.
टायर और केमिकल सेक्टर पर सबसे ज़्यादा मार
टायर कंपनियों में auto ancillary सेक्टर में सबसे ज़्यादा दबाव में है. रबर और क्रूड से जुड़ा कच्चा माल तेज़ी से महंगा हो रहा है लेकिन टायर कंपनियां फोरन अपनी कीमतें नहीं बढ़ा सकतीं, क्योंकि उनके बड़े ग्राहक खुद ओईएम कंपनियां हैं.&amp;nbsp;
नतीजा यह है कि margin की सबसे ज़्यादा squeeze यहीं हो रही है. मार्च 2026 में natural gas की कमी की खबरें आते ही Nifty Auto 2.6% गिर गया. Bharat Forge, TVS Motor और Tata Motors के शेयर 3% से ज़्यादा टूटे.
आगे क्या? अब पूरा खेल युद्ध पर निर्भर करेगा&amp;nbsp;
&amp;nbsp;oil और gas सप्लाई में बाधा और बढ़ती ब्याज दरें मिलकर ऑटो सेक्टर की कमाई पर असर डाल सकती हैं. जानकारों का कहना है कि अगर जंग 3 से 6 महीने और चली तो हालात और मुश्किल होंगे. गाड़ियों की कीमतें और बढ़ेंगी, कंपनियों के मुनाफे घटेंगे और EV की तरफ रुझान और तेज़ होगा.
ऑटो सेक्टर अभी दबाव में है. लागत बढ़ रही है और मांग अनिश्चित है. कंपनियां जितना हो सके दाम बढ़ाने से बच रही हैं, लेकिन बाज़ार धीरे-धीरे बदल रहा है,&amp;nbsp; पेट्रोल-डीज़ल की गाड़ियों से EV की तरफ.&amp;nbsp; यह बदलाव, जंग जितनी लंबी चलेगी, उतनी तेज़ रफ्तार पकड़ता जाएगा. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अब, पसंदीदा, गाड़ी, खरीदना, होगा, और, मुश्किल, हॉर्मुज, संकट, की, तपिश, से, स्टील, से, टायर, तक, सब, महंगा</media:keywords>
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        <title>बड़ी राहत! प्लास्टिक से लेकर टेक्सटाइल तक, 30 जून तक इन उत्पादों की कस्टम ड्यूटी पर मिलेगी छूट</title>
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        <description><![CDATA[ Petrochemical Import Duty Cut: वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. वित्त मंत्रालय ने कुछ जरूरी पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटाने का फैसला किया है.
इन उत्पादों का उपयोग प्लास्टिक, कपड़ा और दवा जैसे कई सेक्टर में होता है. इसलिए इस फैसले से कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद की जा रही है. जिसका सीधा फायदा आम लोगों को होगा. चीजों की कीमतें कम होने से राहत मिलने की उम्मीद है...
इन सेक्टर्स पर दिखेगा सीधा असर
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन इंडस्ट्रीज को होगा, जहां पेट्रोकेमिकल उत्पाद कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं. प्लास्टिक और पैकेजिंग सेक्टर में लागत घटने से उत्पादन बढ़ सकता है. वहीं फार्मा कंपनियों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि कई दवाओं के निर्माण में इनका उपयोग होता है. जिससे दवाएं सस्ती हो सकती है.&amp;nbsp;
इसके अलावा टेक्सटाइल इंडस्ट्री में सिंथेटिक फाइबर और कपड़ों की लागत पर इस फैसले का असर होगा. ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्लास्टिक और रबर पार्ट्स सस्ते बनने से मैन्युफैक्चरिंग खर्च घटेगा.
जिससे चीजों की कीमतें कम होगी. साथ ही केमिकल और अन्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को भी इस कदम से काफी फायदा मिलने की उम्मीद है.
कई अहम केमिकल्स में दी गई राहत
सरकार ने जिन पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर छूट दी है, उनमें कई जरूरी इंडस्ट्रियल केमिकल शामिल हैं. इस लिस्ट में एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मेथनॉल, आइसोप्रोपाइल अल्कोहल, मोनोएथिलीन ग्लाइकोल और फिनोल जैसे पदार्थ शामिल हैं.
इसके अलावा एसिटिक एसिड, विनाइल एसीटेट मोनोमर, प्यूरीफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड, अमोनियम नाइट्रेट, एथिलीन पॉलिमर, एपॉक्सी रेजिन, फॉर्मल्डिहाइड, यूरिया-फॉर्मल्डिहाइड और मेलामाइन-फॉर्मल्डिहाइड जैसे अन्य उत्पादों को भी इस छूट का फायदा मिलेगा.
आम लोगों तक पहुंचेगा राहत का असर
सरकार के अनुसार उद्योगों को मिली इस छूट का फायदा आखिरकार आम लोगों को मिलेगा. जब कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी, तो प्लास्टिक उत्पाद, कपड़े, दवाइयों और वाहनों जैसी चीजों की कीमतें कम होने की उम्मीद है. जिससे लोगों को फायदा पहुंच सकता हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: 6 साल में 3600% रिटर्न! इस शेयर से मालामाल हो गए निवेशक, ब्रोकरेज को 80% अपसाइड की उम्मीद
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बड़ी, राहत, प्लास्टिक, से, लेकर, टेक्सटाइल, तक, जून, तक, इन, उत्पादों, की, कस्टम, ड्यूटी, पर, मिलेगी, छूट</media:keywords>
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        <title>मिडिल ईस्ट की जंग जेब पर भारी! जयपुर में लुब्रिकेंट्स के दाम 40% तक उछले, वाहनों की सर्विसिंग हुई महंगी</title>
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        <description><![CDATA[ Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर न सिर्फ लोगों के कारोबार पर पड़ रहा है, बल्कि हमारी आपकी जेब पर भी सीधे तौर पर पड़ना शुरू हो गया है. युद्ध की वजह से कच्चे तेल का आयात काफी कम हो गया है, लिहाजा इससे तैयार होने वाले लुब्रिकेंट्स यानी वाहनों और इंडस्ट्रीज समेत दूसरी मशीनों में इस्तेमाल होने वाले तमाम तरह के आयल और ग्रीस का उत्पादन घट गया है.
इसका सीधा प्रभाव ल्यूब्रिकेंट्स आइटम्स की कीमतों पर पड़ने लगा है. जयपुर समेत में कई दुकानदारों ने युद्ध की वजह से कीमतें बढ़ने के पोस्टर भी अपनी दुकानों पर लगा दिए हैं. एक दुकान पर तो पोस्टर पर बेहद भावुक संदेश लिखा गया हैं.
कीमतों में भारी बढ़ोतरी&amp;nbsp;
पिंक सिटी जयपुर की बात की जाए तो यहां ल्युब्रिकेंट्स आइटम्स के दाम 35 से 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं. इंजन, मोबिल और गियर आयल के साथ ही ग्रीस व दूसरे आइटम्स के दाम बढ़ने से अब दो पहिया और चार पहिया वाहनों की सर्विसिंग भी महंगी हो गई है. वाहनों की सर्विसिंग महंगी होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना शुरू हो गया है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
दरअसल वाहनों, इंडस्ट्रियल फैक्टरीज और दूसरी मशीनों में घर्षण और हीटिंग को कम करने के लिए कई तरह के आयल, ग्रीस और दूसरे ल्यूब्रिकेंट्स आइटम्स का इस्तेमाल किया जाता है. यह सभी कच्चे तेल से तैयार किए जाते हैं. ज्यादातर कच्चा तेल मिडल ईस्ट और खाड़ी के देशों से आता है. युद्ध की वजह से कच्चे तेल का आयात कम हुआ तो भारत में इसका उत्पादन घटने लगा. कुछ जगहों पर कालाबाजारी के लिए स्टॉक को डंप किए जाने की भी आशंका है.&amp;nbsp;
इसका यह नतीजा यह हुआ कि महीने भर में ही ल्यूब्रिकेंट्स आइटम्स के दाम 35 से 40 फ़ीसदी तक बढ़ गए हैं. दाम बढ़ने की वजह से इनकी बिक्री भी प्रभावित हुई है. करीब 40 फ़ीसदी तक बिक्री कम हो गई है. सबसे खराब असर वाहनों में इस्तेमाल होने वाले लुब्रिकेंट्स पर पड़ा है.&amp;nbsp;
दुकानदारों की मजबूती और ग्राहकों की परेशानी&amp;nbsp;
जयपुर शहर के 22 गोदाम इलाके में दुकान चलाने वाले राजेंद्र लखानी ने अपनी दुकान पर पोस्टर लगा रखे हैं. हाथ से ही तैयार किए गए इस पोस्टर में साफ़ तौर पर कहा गया है कि ईरान इजरायल और अमेरिका में छेड़ युद्ध की वजह से कीमतें बढ़ गई है. इस वजह से उन्हें मजबूरी में ज्यादा दाम पर सामान बेचना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
पोस्टर में भावुक संदेश लिखा गया है कि वह ग्राहक को अपना भगवान मानते हैं. उसे कतई नाराज नहीं करना चाहते हैं, लेकिन युद्ध की वजह से ज्यादा दाम पर सामान बेचना उनकी मजबूरी है. पोस्टर पर लिखा भावुक संदेश मन को छू लेने वाला है. वाहनों की सर्विसिंग के लिए आयल और दूसरे आइटम्स खरीदने के लिए आने वाले लोगों का कहना है कि अगर सर्विसिंग में इस्तेमाल होने वाले सामान ही महंगे मिलेंगे तो सर्विसिंग का कुल खर्च बढ़ना स्वाभाविक है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>मिडिल, ईस्ट, की, जंग, जेब, पर, भारी, जयपुर, में, लुब्रिकेंट्स, के, दाम, 40, तक, उछले, वाहनों, की, सर्विसिंग, हुई, महंगी</media:keywords>
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        <title>Stock Market 2 April: शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1417 अंक टूट; निफ्टी भी टमाटर की तरह लाल</title>
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        <description><![CDATA[ Stock Market Today: भारतीय शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार, 2 अप्रैल को गिरावट देखने को मिल रही है. प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 टूटकर कारोबार कर रहे है.&amp;nbsp;
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स 872.27 अंक या 1.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ ओपन हुआ था. दिन की शुरुआत सेंसेक्स ने 72,262.05 के लेवल पर की है. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने भी दिन की शुरुआत निगेटिव की थी. निफ्टी 50 296.00 अंक या 1.31 फीसदी फिसलकर 22,383.40 के लेवल पर ओपन हुआ था.
सुबह करीब 9:20 बजे तक, सेंसेक्स 1401 अंक की गिरावट के साथ 71,733 अंक पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 50 456 अंक फिसल गई थी और 22,222 के लेवल पर ट्रेड कर रही थी.
बीएसई के टॉप गेनर और लूजर
बीएसई बास्केट से केवल एचसीएल टेक के शेयरों में तेजी थी. वहीं सनफॉर्मा, इंडिगो, अडानी पोर्ट, एटरनल और एलएंडटी टॉप लूजर थे.
बुधवार को कैसा रहा था मार्केट?
भारतीय शेयर मार्केट में बुधवार, 1 अप्रैल के कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिली थी. प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए दिन की समाप्ति की थी. सेंसेक्स 1186.77 अंक या 1.65 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,134.32 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 348.00 अंक या 1.56 फीसदी उछलकर 22,679.40 के लेवल पर बंद हुए थे.
बीएसई बास्केट से ट्रेंट, इंडिगो, अडानी पोर्ट, एसबीआईएन और एटरनल टॉप गेनर थे. टॉप लूजर की बात करें तो एनटीपीस, सनफॉर्मा, पावरग्रिड और भारती एयरटेल रहे थे.
निफ्टी 100, निफ्टी ऑटो, निफ्टी स्मॉलकैप 100, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी बैंक, निफ्टी आईटी और निफ्टी मिडकैप 100 &amp;nbsp;के शेयरों में तेजी थी. बुधवार के कारोबारी दिन बीएसई बास्केट से 25 शेयर हरे निशान पर बंद हुए थे और 5 शेयर में गिरावट दर्ज की गई थी.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
यह भी पढ़ें: New Income Tax Rule: क्या 50000 से ज्यादा दे रहे किराया, तो समझ लें टैक्स का पूरा A to Z&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 12:30:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Stock, Market, April:, शेयर, बाजार, में, भूचाल, सेंसेक्स, 1417, अंक, टूट, निफ्टी, भी, टमाटर, की, तरह, लाल</media:keywords>
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        <title>Gold Silver Price Today: युद्ध के साये में सोने&amp;चांदी की चमक हुई फीकी, सोना 3200 रुपये टूटा; चांदी ₹11,900 लुढ़की</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-युद्ध-के-साये-में-सोने-चांदी-की-चमक-हुई-फीकी-सोना-3200-रुपये-टूटा-चांदी-11900-लुढ़की</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-युद्ध-के-साये-में-सोने-चांदी-की-चमक-हुई-फीकी-सोना-3200-रुपये-टूटा-चांदी-11900-लुढ़की</guid>
        <description><![CDATA[ Gold Silver Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में गुरुवार, 2 अप्रैल को सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है. सोने-चांदी दोनों के दाम टूट गए हैं. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 3,200 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था.
एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,52,490 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,53,708 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.
सुबह करीब 9:55 बजे, गोल्ड वायदा 2.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,50,495 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,52,490 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपको इन बहुमूल्य धातुओं को खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करना होगा.
चांदी की कीमत
एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 4.90 फीसदी या करीब 11,900 रुपये की गिरावट के साथ 2,43,501 रुपये (प्रति किलो) पर ट्रेड कर रहा था. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,42,800 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,42,800 रुपये था.
दिल्ली में 10 ग्राम चांदी आज 2,551 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 25,510 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,550 रुपये चल रही है. मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी खरीदने के लिए 2,500 रुपये खर्च करने होंगे.
आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)
दिल्ली में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,110 रुपए22 कैरेट - 1,40,360 रुपए18 कैरेट - 1,14,870 रुपए
मुंबई में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,52,960 रुपए22 कैरेट - 1,40,210 रुपए18 कैरेट - 1,14,720 रुपए
चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,280 रुपए22 कैरेट - 1,40,510 रुपए18 कैरेट - 1,17,110 रुपए
कोलकाता में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,52,960 रुपए22 कैरेट - 1,40,210 रुपए18 कैरेट - 1,14,720 रुपए
अहमदाबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,010 रुपए22 कैरेट - 1,40,260 रुपए18 कैरेट - 1,14,770 रुपए
लखनऊ में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,110 रुपए22 कैरेट - 1,40,360 रुपए18 कैरेट - 1,14,870 रुपए
पटना में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,53,010 रुपए22 कैरेट - 1,40,260 रुपए18 कैरेट - 1,14,770 रुपए
हैदराबाद में सोने के दाम &amp;nbsp;(प्रति 10 ग्राम)
24 कैरेट - 1,51,420 रुपए22 कैरेट - 1,38,800 रुपए18 कैरेट - 1,13,570 रुपए
यह भी पढ़ें: Stock Market 2 April: शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1417 अंक टूट; निफ्टी भी टमाटर की तरह लाल
 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 12:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gold, Silver, Price, Today:, युद्ध, के, साये, में, सोने-चांदी, की, चमक, हुई, फीकी, सोना, 3200, रुपये, टूटा, चांदी, ₹11, 900, लुढ़की</media:keywords>
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        <title>मुंबई में घर खरीदने की मची होड़! मार्च में टूटा 14 साल का रिकॉर्ड, सरकार की तिजोरी में आए 1492 करोड़</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मुंबई-में-घर-खरीदने-की-मची-होड़-मार्च-में-टूटा-14-साल-का-रिकॉर्ड-सरकार-की-तिजोरी-में-आए-1492-करोड़</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/मुंबई-में-घर-खरीदने-की-मची-होड़-मार्च-में-टूटा-14-साल-का-रिकॉर्ड-सरकार-की-तिजोरी-में-आए-1492-करोड़</guid>
        <description><![CDATA[ Mumbai Real Estate Sector News: मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर ने मार्च 2026 में अपनी मज़बूत रफ़्तार जारी रखी. रजिस्ट्रेशन में साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई और स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन में भी तेज़ी से उछाल आया, जो ज़्यादा कीमत वाले घरों की बढ़ती मांग को दिखाता है. नाइट फ्रैंक इंडिया के शेयर किए गए डेटा के मुताबिक, महाराष्ट्र के रजिस्ट्रेशन और स्टैंप विभाग के दर्ज किए गए रजिस्ट्रेशन से पता चला कि मार्च 2026 में BMC के अधिकार क्षेत्र में 15,516 से ज़्यादा प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन हुए. यह पिछले 14 सालों में मार्च महीने के लिए सबसे ज़्यादा आंकड़ा था.
इसे फरवरी 2026 में देखी गई ज़बरदस्त बढ़ोतरी से भी समर्थन मिला, जिसमें रजिस्ट्रेशन और स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन दोनों में साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई थी. संयोग से, जनवरी में रिहायशी यूनिट्स (15,771 यूनिट्स) की लॉन्चिंग में साल-दर-साल 11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी. &quot;मुंबई के रिहायशी बाज़ार ने मार्च 2026 में रजिस्ट्रेशन के साथ एक उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखाई है.
इन रजिस्ट्रेशन ने पिछले साल के पहले से ही ऊंचे आधार को पार करते हुए, एक दशक से ज़्यादा समय में मार्च महीने का सबसे मज़बूत प्रदर्शन दर्ज किया है. यह बढ़ोतरी शहर में अंतिम-उपभोक्ता की मांग की गहराई को दोहराती है, जिसे स्थिर आर्थिक स्थितियों और खरीदारों के लगातार भरोसे से समर्थन मिला है.
मिडिल क्लास की बढ़ती मांग से मजबूत हो रहा रियल एस्टेट बाजार
यह रफ़्तार खास तौर पर मध्यम-आय वर्ग में साफ़ दिखाई देती है, जहां घर खरीदने के इच्छुक लोग आसानी से मिलने वाली कीमतों के दायरे में बेहतर गुणवत्ता वाले घरों में अपग्रेड कर रहे हैं. जहां स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन में उतार-चढ़ाव टिकट साइज़ के मिश्रण में बदलाव को दिखाते हैं, वहीं लेन-देन की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी एक संरचनात्मक रूप से स्वस्थ बाज़ार को उजागर करती है.
नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, &#039;&#039;हमें उम्मीद है कि मांग पर आधारित यह रुझान निकट भविष्य में भी जारी रहेगा, जिसे अनुकूल बुनियादी बातों और एक रिहायशी जगह के तौर पर मुंबई की स्थायी अपील से बल मिलेगा.&#039;&#039;
रजिस्ट्रेशन में उछाल, मिड-रेंज प्रॉपर्टी की बढ़ी हिस्सेदारी
फरवरी 2026 की तुलना में रजिस्ट्रेशन में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन में महीने-दर-महीने आधार पर 32 प्रतिशत की तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन लगभग 1,492 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. सालाना आधार पर, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन स्थिर रहा, जबकि मार्च 2025 की तुलना में स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन में 6 प्रतिशत की गिरावट आई. यह अंतर इस बात का संकेत है कि मांग में कमी के बजाय, लेन-देन के तरीके में बदलाव हो रहा है.
इस बंटवारे पर करीब से नज़र डालने पर पता चलता है कि रुझान मध्यम-आय वर्ग की ओर बढ़ रहा है. मार्च 2026 में, 1 करोड़ रुपये से 2 करोड़ रुपये के बीच की कीमत वाली प्रॉपर्टीज़ का कुल रजिस्ट्रेशन में 38 प्रतिशत हिस्सा था. यह पिछले साल की तुलना में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. हालांकि, 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों का हिस्सा 46 प्रतिशत से घटकर 39 प्रतिशत रह गया है. दूसरी ओर, इस बाज़ार में ज़्यादा कीमत वाला सेगमेंट 2 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये और उससे ऊपर स्थिर बना रहा. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 12:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>GST Collection: ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा जीएसटी कलेक्शन, पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार, जानें इसके मायने</title>
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        <description><![CDATA[ GST Collection March 2026: वैश्विक स्तर पर चल रही अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. मार्च 2026 में सकल माल एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में 9 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है. इस उछाल के साथ ही मासिक राजस्व 2 लाख करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह तीसरा मौका है, जब कलेक्शन इस स्तर पर पहुंचा है.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में कुल जीएसटी कलेक्शन ₹2,00,344 करोड़ रहा. इस वृद्धि में सबसे बड़ी भूमिका आयात की रही, जिससे प्राप्त राजस्व 17.8 प्रतिशत बढ़कर 53,861 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, घरेलू मोर्चे पर भी 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला.
कर कटौती के बाद भी बढ़ा राजस्व
दिलचस्प बात यह है कि सरकार द्वारा सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में बड़े बदलाव किए गए थे. लगभग 375 वस्तुओं पर टैक्स कम कर दिया गया और कर स्लैब को सरल बनाकर मुख्य रूप से 5% और 18% की श्रेणियों में सीमित कर दिया गया. शुरुआत में नवंबर में राजस्व गिरकर 1.70 लाख करोड़ रुपये रह गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार रिकवरी देखी गई है.
पूरे साल का लेखा-जोखा
वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए ऐतिहासिक रहा है. पूरे साल का कुल जीएसटी राजस्व 8.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22.27 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया. अप्रैल 2025 में अब तक का सर्वाधिक ₹2.36 लाख करोड़ का कलेक्शन हुआ था.
जीएसटी कलेक्शन में महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यों की बात करें तो जीएसटी कलेक्शन में महाराष्ट्र का योगदान सबसे ज्यादा रहा, जहां से करीब 0.13 लाख करोड़ रुपये जमा हुए. इसके अलावा कर्नाटक और गुजरात से भी सरकार को अच्छा कलेक्शन मिला. जिससे कुल जीएसटी आंकड़ों को मजबूती मिली है. मार्च 2026 के दौरान आंध्र प्रदेश में नेट जीएसटी कलेक्शन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
आम लोगों के लिए इसके क्या मायने हैं?
आसान भाषा में बताएं तो रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन के कई मायने हैं. कर दरों में कटौती और स्लैब को सरल (5% और 18%) करने के बावजूद जीएसटी कलेक्शन का ₹2 लाख करोड़ के पार जाना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाता है. आयात में 17.8% की भारी वृद्धि यह बताती है कि देश की औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां तेज हैं, जबकि घरेलू बिक्री में स्थिरता उपभोक्ताओं के भरोसे का प्रतीक है.
कुल मिलाकर यह वृद्धि सरकार के राजकोष को मजबूती प्रदान करती है, जिससे विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं होगी और यह सिद्ध होता है कि कम टैक्स दरों के बावजूद व्यापार बढ़ने से सरकारी खजाना ज्यादा तेजी से भर सकता है.
डेलॉयट इंडिया के एम. एस. मणि के अनुसार, ये आंकड़े मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं. हालांकि, ईवाई इंडिया के सौरभ अग्रवाल ने आगाह किया है कि वैश्विक चुनौतियों और महंगाई के कारण भविष्य में मांग पर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्य वृद्धि की अगुवाई कर रहे हैं, जिससे देश की राजकोषीय स्थिति और मजबूत होगी.
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 12:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Share Market: शेयर बाजार में &amp;apos;ट्रंप कार्ड&amp;apos; का जादू! ईरान युद्ध खत्म होने के संकेत से कैसे उछला सेंसेक्स?</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Stock Market Rally: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 1 अप्रैल के कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. कुछ समय की उतार-चढ़ाव वाली स्थिति के बाद स्टॉक मार्केट में रिकवरी जारी है.
वैश्विक स्तर पर हालात में सुधार और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण निवेशकों का भरोसा फिर से बाजार की ओर बढ़ा है. हालांकि इस तेजी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रफ्तार लंबे समय तक बनी रह पाएगी? आइए जानते हैं, इस विषय में...
ग्लोबल संकेतों से बाजार में सुधार
1 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार ने दो दिन की गिरावट के बाद जोरदार वापसी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकती है. जिससे लंबे समय तक संकट बने रहने की आशंका कम हुई है.&amp;nbsp;
साथ ही मिडिल ईस्ट में पैदा हुई अनिश्चितता पर लगाम लगने की उम्मीद भी की जा रही है. इस खबर का असर ग्लोबल बाजारों पर भी देखने को मिला है. एशियाई बाजार में भी बढ़त दिख रही है. साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
बाजार में सुधार के साथ उतार-चढ़ाव का स्तर भी कम हुआ है. बाजार अस्थिरता को मापने वाले इंडिया VIX करीब 10 प्रतिशत गिरकर 25 के आसपास आ गया है. आमतौर पर कम वोलैटिलिटी को निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बाजार में स्थिरता के संकेत के रूप में देखा जाता है. हालांकि इतनी तेजी के बावजूद जानकार अभी भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.
बाजार की मौजूदा तेजी भले ही आकर्षक लग रही हो, लेकिन इसे पूरी तरह मजबूत बुल मानना अभी जल्दबाजी हो सकती है. आगे बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी.
वैल्यू बाइंग से बाजार में आई तेजी
बाजार में गिरावट को बहुत से निवेशक मौके के तौर पर देखते हैं. निवेशक उन सेक्टर्स में दिलचस्पी दिखाते है, जहां पहले तेज गिरावट आई थी. इसका असर पूरे बाजार पर देखने को मिला है.
सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में खुले, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: अप्रैल में बैंक छुट्टियों की भरमार... कुल 14 दिन बंद रहने वाले हैं बैंक, ब्रांच जाने से पहले देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 00:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>खाली जेब और भारी तनाव? अपनी &amp;apos;फाइनेंशियल हेल्थ&amp;apos; को बूस्ट करने के 5 अचूक तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ Personal Finance Tips: आज के समय में कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं जब खर्च और कमाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है. अचानक से आने वाला मेडिकल खर्च हो या बढ़ती महंगाई हर स्थिति में लोगों को परेशान होना पड़ता हैं.
ऐसे हालात में टेंशन होना भी आम बात है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि थोड़ी समझदारी और सही योजना के साथ स्थिति को संभाला जा सकता है. कुछ जरूरी आदतों और छोटे बदलावों को अपनाकर धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं, इस बारे में...
हालात को समझना ही पहला कदम
जब पैसों की कमी होती है तो कई लोग अपने खर्च और बैलेंस को नजरअंदाज करने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना उन्हें और मुश्किल में डाल सकता है. ऐसे समय में जरूरी है कि आप अपनी आमदनी और हर छोटे-बड़े खर्च को किसी पन्ने पर साफ-साफ लिखें.
जब सब कुछ कागज पर सामने होता है, तो मन की उलझन कम होती है और आगे क्या करना है, इसका रास्ता भी समझ में आता है.&amp;nbsp;
जरूरत को दें प्राथमिकता
पैसों की तंगी के समय यह समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि कौन-सा खर्च जरूरी है और किसे टाला जा सकता है. ऐसे में अपने खर्चों को दो हिस्सों में बांटकर आप अपनी मदद कर सकते हैं.&amp;nbsp;
किराया, राशन और बिल जैसे जरूरी चीजों पर खर्च को प्राथमिकता देनी चाहिए. वहीं, दूसरे खर्च जैसे बाहर खाना या सब्सक्रिप्शन इन्हें बंद किया जा सकता है या फिर कम करना आपके लिए सही रहेगा. क्योंकि इससे बजट पर दबाव कम होता है और बचत की गुंजाइश बढ़ती है.
इमरजेंसी फंड बनाएं
अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा इमरजेंसी फंड में रखना चाहिए. मेडिकल इमरजेंसी या अचानक से आने वाले दूसरे खर्चों से यह फंड आपको बचाता है. विषय की समझ रखने वाले जानकार बताते हैं कि, 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड जरूर रखनी चाहिए.
कमाई के दूसरे रास्ते खोजें
अगर आपकी आमदनी से खर्च पूरा नहीं हो रहा हैं तो, ऐसे में कमाई के दूसरे रास्ते खोजने की कोशिश करनी चाहिए. फ्रीलांसिंग या ट्यूशन पढ़ाने जैसे विकल्प अपनाए जा सकते है. शुरुआत में भले ही आमदनी कम हो पर समय के साथ अच्छी कमाई के अवसर बन सकते हैं. &amp;nbsp;
थोड़ा इंतजार करें
अगर आप अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना चाहते हैं तो, इन सब बातों को ध्यान में रखकर आपको अपनी प्लानिंग बनानी चाहिए और इसके बाद थोड़ा इंतजार करना चाहिए. अचानक से किसी भी चीज में बदलाव नहीं हो सकता है. इसलिए थोड़ा धैर्य रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: शेयर बाजार की जोरदार वापसी, निवेशकों में उत्साह; जानिए एक्सपर्ट की क्या है राय... ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 00:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>खाली, जेब, और, भारी, तनाव, अपनी, फाइनेंशियल, हेल्थ, को, बूस्ट, करने, के, अचूक, तरीके</media:keywords>
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        <title>जंग की आग में झुलसा कश्मीर का कालीन उद्योग! खाड़ी देशों से 60% निर्यात ठप, लाखों की आजीविका दांव पर</title>
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        <description><![CDATA[ Kashmir Handicraft Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के चलते जहां कश्मीर का हस्तशिल्प क्षेत्र एक बड़े संकट का सामना कर रहा है वहीं कश्मीर का कालीन उद्योग इससे विशेष रूप से प्रभावित हुआ है! जहां युद्ध ने इस उद्योग के सबसे अहम बाज़ारों को बुरी तरह प्रभावित किया है वहीं निर्यातकों का कहना है कि जहां पुराने ऑर्डर कैंसिल हो रहे है और नए ऑर्डर लगभग पूरी तरह से बंद हो गए हैं!&amp;nbsp;
सरकारी की तरफ़ से दुबई के बाद अभ चीन और डेनमार्क में हस्तकला के लिए लगने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदीर्शैनियों के सीतागीत होने से नए ऑर्डर्स के मिलने की उम्मीद भी ख़त्म हो गई है और &amp;nbsp;व्यापार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका दांव पर लग गई है.
निर्यात और खाड़ी देशों पर भारी असर&amp;nbsp;
कश्मीर के कालीन, जो अपनी बारीक कारीगरी और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं, लगभग 25 देशों को निर्यात किए जाते हैं, जिसमें पश्चिम एशिया एक प्रमुख बाजार के रूप में उभरा है. हाथ से बुने हुए कालीनों के साथ-साथ, पारंपरिक हस्तशिल्प-जैसे कि पैपियर-मैशे, पश्मीना शॉल, कानी बुनाई, सोज़नी कढ़ाई, खाताबंद लकड़ी का काम, और अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी-घाटी की निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
लेकिन अभ खाड़ी संघर्ष ने कश्मीर की निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर ही चोट की है, जो खाड़ी देशों पर बहुत ज़्यादा निर्भर है; इन देशों की हिस्सेदारी कुल हस्तशिल्प निर्यात में लगभग 60 प्रतिशत है. युद्ध के चलते जहां नए शिपमेंट की लागत में भारी बढ़ोतरी और पुराने ऑर्डर के अटके हुए भुगतानों ने इस उद्योग को गंभीर आर्थिक संकट में भी डाल दिया है.
व्यापारियों और कारीगरों की मुश्किल&amp;nbsp;
कश्मीर चैम्बर ऑफ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तारिक़ गाणी के अनुसार, इसका सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव यह हुआ है कि पूरे क्षेत्र के खरीदारों से आने वाले नए ऑर्डरों में अचानक भारी गिरावट आ गई है. अनिश्चितता, व्यापार के बाधित रास्ते और आर्थिक चिंताओं के चलते आयातकों ने भी खरीदारी रोक दी है.
ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने कश्मीर के हस्तशिल्प क्षेत्र को एक गहरा झटका दिया है. खाड़ी देशों की कुल मिलाकर कश्मीर से होने वाले निर्यात में लगभग 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. इस लिहाज़ से ये देश कश्मीरी हस्तशिल्प, पश्मीना, कालीनों और इनसे जुड़े अन्य उत्पादों के लिए सबसे अहम बाज़ार हैं.
शिपमेंट की लागत और हवाई मार्ग में बढ़ोतरी
कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCC&amp;amp;I) के अध्यक्ष, जावेद अहमद टेंगा ने कहा कि यह स्थिति अभूतपूर्व है, और व्यापार का पारंपरिक चक्र पूरी तरह से बाधित हो गया है. &quot;परंपरागत रूप से, रमज़ान का महीना खाड़ी देशों में बिक्री और भुगतान का सबसे व्यस्त और अहम समय माना जाता है. इसी दौरान, कश्मीरी निर्यातकों को पूरे साल किए गए शिपमेंट के बदले अपनी वार्षिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है. मौजूदा अस्थिरता के कारण, न केवल बैंकिंग और व्यापारिक भुगतान के रास्ते बाधित हुए हैं, बल्कि खरीदारों से आने वाले नए ऑर्डर भी लगभग पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं.&quot;
इससे कश्मीर के हज़ारों एक्सपोर्टर्स, कारीगरों और बुनकरों के लिए एक अभूतपूर्व लिक्विडिटी संकट पैदा हो गया है. इन्होंने भरोसे के साथ अपना सामान भेजा था, लेकिन अब उनके पास एक्सपोर्ट के बकाया बिल, बढ़ता ब्याज़ का बोझ और इस बात की कोई पक्की जानकारी नहीं है कि पेमेंट कब आएगी. ऑर्डर्स का आना बंद होना इस समय सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि इसका सीधा असर भविष्य के प्रोडक्शन साइकल और पूरे सेक्टर में रोज़गार पर पड़ता है.
&quot;इस व्यापार से हमारे कई परिवार जुड़े हुए हैं-बुनकरों से लेकर धोने वालों तक, और डीलरों से लेकर निर्यातकों तक. और अगर कोई ऑर्डर नहीं आता है, तो हम सभी को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.&quot; श्रीनगर के एक एक्सपोर्टर, फ़ारूक़ अहमद ने हालात की गंबीरता दर्शाते हुवे कहा कि पहलगाम हमले के बाद पर्यटकों की आमद में पहले ही कमी आ गई थी.&amp;nbsp;
आमतौर पर पर्यटक सीज़न शुरू होने के साथ ही मांग में भी तेज़ी आती है, लेकिन इस साल स्थिति पूरी तरह से उलट थी. &amp;ldquo;ऑर्डर पूरी तरह से बंद हो गए हैं. इस क्षेत्र में बनी अनिश्चितता के कारण खरीदार नए सामान खरीदने का कोई पक्का वादा नहीं कर रहे हैं. यहां तक कि हमारे पुराने ग्राहक भी अपने फ़ैसले टाल रहे हैं. इसके अलावा, पेमेंट्स में भी देरी हो रही है, इसलिए हम दोनों तरफ़ से मार झेल रहे हैं &amp;ndash; न तो पैसा आ रहा है और न ही कोई नया बिज़नेस मिल रहा है.&amp;rdquo;
बढ़ोतरी के कारण बढ़ीं शिपमेंट की लागत
उन्होंने कहा,&amp;nbsp;इस संकट की गंभीरता शिपमेंट की लागत में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण और भी बढ़ गई है. हवाई मार्गों में आई रुकावट, जोखिम की बढ़ी हुई आशंका और इंश्योरेंस प्रीमियम में हुई वृद्धि के चलते इंटरनेशनल कार्गो की दरें तेज़ी से बढ़ी हैं.&amp;nbsp;
एक्सपोर्टर्स का कहना है कि युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतें तो बढ़ी ही हैं, साथ ही हवाई और समुद्री, दोनों तरह के माल-भाड़े में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई है. इससे वैश्विक बाज़ारों में उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता और भी कमज़ोर हो गई है.
इन चुनौतियों को और भी बढ़ाने वाली बात यह है कि दुबई में स्थित &amp;lsquo;ग्लोबल विलेज&amp;rsquo; लगभग 15 दिनों के लिए बंद हो गया है. यह एक प्रमुख इंटरनेशनल रिटेल प्लेटफ़ॉर्म है, जहां कश्मीर के कई व्यापारी अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाते हैं और उन्हें बेचते हैं. इस बंदी के कारण बिक्री का एक अहम ज़रिया, ठीक ऐसे समय में बंद हो गया है जब उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. इसका सीधा असर व्यापारियों की आमदनी पर पड़ा है. इस संकट का असर पूरी उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया पर पड़ रहा है.&amp;nbsp;
एक्सपोर्टर्स को अपना काम-काज जारी रखने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, व्यापारियों की बिक्री में लगातार गि ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 00:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जंग, की, आग, में, झुलसा, कश्मीर, का, कालीन, उद्योग, खाड़ी, देशों, से, 60, निर्यात, ठप, लाखों, की, आजीविका, दांव, पर</media:keywords>
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        <title>अलविदा आयकर अधिनियम 1961: नए एक्ट 2025 में क्या छूटा और क्या नया जुड़ा? 5 बड़े बदलाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अलविदा-आयकर-अधिनियम-1961-नए-एक्ट-2025-में-क्या-छूटा-और-क्या-नया-जुड़ा-5-बड़े-बदलाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अलविदा-आयकर-अधिनियम-1961-नए-एक्ट-2025-में-क्या-छूटा-और-क्या-नया-जुड़ा-5-बड़े-बदलाव</guid>
        <description><![CDATA[ Income Tax Rules April 2026: देश में आज यानी 1 अप्रैल से टैक्स से जुड़े नियमों में अहम बदलाव लागू हो गए हैं. जिनका असर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइन करने वाले समेत अन्य लोगों पर पड़ने वाला हैं. अब तक लागू 1961 का पुराना आयकर कानून हटाकर उसकी जगह नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू किया गया है.
इस बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य नियमों को ज्यादा आसान और समझने योग्य बनाना है. ताकि टैक्सपेयर्स को प्रक्रिया में कम दिक्कत हो और वे बिना उलझन के नियमों का पालन कर सकें. आइए जानते हैं, इनमें से कुछ प्रमुख बदलावों के बारे में...
टैक्स सिस्टम को किया गया और आसान
नए नियमों के तहत अब टैक्स से जुड़े प्रावधानों के लिए आसान भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा. जिससे आम लोग भी इसे आसानी से समझ सकें. इसके साथ ही पहले जो वित्त वर्ष और असेसमेंट ईयर का अलग-अलग सिस्टम था, उसे हटाकर अब एक ही &amp;lsquo;टैक्स ईयर&amp;rsquo; लागू किया गया है. यानी जिस साल आय होगी, उसी को सीधे टैक्स के लिए माना जाएगा.
इसके अलावा जो लोग टैक्स नहीं भरते हैं, उनके लिए अलग से फॉर्म भरने की जरूरत भी खत्म कर दी गई है. जिससे पूरी प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा आसान हो गई है.
गिफ्ट और वाउचर पर बढ़ी टैक्स छूट
अब कंपनियों की ओर से मिलने वाले गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ा दिया गया है. पहले जहां यह सीमा 5,000 रुपये सालाना थी, उसे बढ़ाकर 15,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है.
खास बात यह है कि यह छूट पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्था के तहत लागू रहेगी. जिससे कर्मचारियों को ज्यादा फायदा मिले सकेगा.&amp;nbsp;
मुआवजे के ब्याज पर टैक्स से राहत
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) से मिलने वाले मुआवजे पर जो ब्याज मिलता है, उसे अब पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है. यानी इन पैसों पर किसी भी तरह की टैक्स कटौती नहीं होगी. जिससे प्रभावित लोगों को पूरी रकम का लाभ मिल सकेगा.
क्रेडिट कार्ड खर्च पर बढ़ी निगरानी
अब क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले बड़े खर्चों की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी. नए नियमों के तहत 10 लाख रुपये से ज्यादा के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और 1 लाख रुपये से अधिक के नकद खर्च करने पर इसके बारे में विभाग को बताना होगा.&amp;nbsp;
HRA क्लेम के नियम हुए सख्त
मकान किराया भत्ता के नियमों में बदलाव किया गया है. नए नियमों के तहत फर्जी रसीदों के जरिए टैक्स बचाना आसान नहीं रहेगा. अब कर्मचारियों को किराये से जुड़ा सबूत देना होगा. इसके लिए मकान मालिक का PAN नंबर भी साझा करना जरूरी होगा.
वहीं कुछ मामलों में उनकी पूरी जानकारी भी मांगी जा सकती है. इसके साथ ही बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शहरों की सूची में शामिल किया गया है. जहां अब HRA पर 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी, जो पहले 40 फीसदी थी.
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 00:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अलविदा, आयकर, अधिनियम, 1961:, नए, एक्ट, 2025, में, क्या, छूटा, और, क्या, नया, जुड़ा, बड़े, बदलाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Gold&amp;Silver Price Today: 24 और 22 कैरेट के सोने में तेजी, जानें प्रति ग्राम कीमत में कितने का आया उछाल? चेक करें लेटेस्ट रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today: मार्च के महीने की आखिरी तारीख को सोने की कीमत में बढ़त देखने को मिल रही है. आज 31 मार्च, मंगलवार को महावीर जयंती के मौके पर 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति ग्राम 103 रुपये का उछाल आया है. इसी के साथ कीमत 14,944 रुपये पर पहुंच गई है.
इसी तरह से पिछले सेशन के मुकाबले 95 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 22 कैरेट सोना 13,700 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया है. बता दें कि बीते दो दिनों में 24 कैरेट सोने की कीमत में 122 रुपये प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत में 110 रुपये का उछाल आया है.&amp;nbsp;
कितनी बढ़ी 24 कैरेट की कीमत?&amp;nbsp;
मंगलवार को 24 कैरेट वाले सेगमेंट में कीमत में प्रति ग्राम 103 रुपये की तेजी आई है. इसी के साथ अब 24 कैरेट का सोना 14,944 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है. इसी तरह से 8 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत कल के 1,18,728 रुपये से 824 रुपये की तेजी के साथ आज 1,19,552 रुपये पर पहुंच गई है. 10 ग्राम 24 कैरेट सोने में 1,030 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और कीमत 1,48,410 रुपये से बढ़कर 1,49,440 रुपये पर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
आज दिल्ली में कितनी है 22 कैरेट की कीमत?
दिल्ली में आज 1 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत कल के 13,605 रुपये से 95 रुपये बढ़कर 13,700 रुपये तक पहुंच गई है. इसी तरही से 8 ग्राम की कीमत 1,08,840 रुपये से 760 रुपये बढ़कर 1,09,600 रुपये और 10 ग्राम की कीमत 1,36,050 रुपये से 950 रुपये बढ़कर 1,37,000 रुपये पर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;18 कैरेट का क्या है हाल?&amp;nbsp;
18 कैरेट वाले सोने की कीमत में कल के मुकाबले 78 रुपये का उछाल आया है. इसकी कीमत आज 11,134 रुपये प्रति ग्राम है, जबकि कल कीमत 11,212 रुपये थी. इसी तरह से 8 ग्राम की कीमत 624 रुपये बढ़कर 89,072 से 89,696 रुपये हो गई है. 10 ग्राम की कीमत में 780 का इजाफा हुआ है और कीमत अब 1,11,340 रुपये से बढ़कर 1,12,120 रुपये पर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
चांदी की कितनी है कीमत?
मंगलवार को, 1 ग्राम चांदी की कीमत बढ़कर 250 रुपये हो गई, जो पिछले सत्र के 245 रुपये से 5 रुपये ज्यादा है. &amp;nbsp;8 ग्राम के लिए रेट बढ़कर 2,000 रुपये हो गई, जो पहले के 1,960 रुपये की तुलना में 40 रुपये की बढ़ोतरी को दर्शाता है. इसी तरह से मंगलवार को 10 ग्राम चांदी की कीमत बढ़कर 2,500 रुपये हो गई, जो कल के 2,450 रुपये से 50 रुपये ज्यादा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी की कीमत 25,000 रुपये थी, जिसमें कल के 24,500 रुपये से 500 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
31 मार्च 2026 को 1 किलोग्राम चांदी की कीमत बढ़कर 2,50,000 रुपये हो गई, जो 2,45,000 रुपये से 5,000 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी है. गुड रिटर्न्स की रिपोर्ट के मुताबिक रिद्धि सिद्धि बुलियंस लिमिटेड के MD और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा, &quot;कम समय में सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, लेकिन मोटे तौर पर ये एक दायरे में ही रहेंगे. इसकी वजह सुरक्षित निवेश (safe-haven) की मांग और आर्थिक चुनौतियों के बीच चल रही खींचतान है. भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का जोखिम कीमतों को गिरने से रोकते हैं, जबकि मजबूत डॉलर और ज्यादा बॉन्ड यील्ड कीमतों में तेजी से बढ़ने से रोकता है.&quot;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत या आफगानिस्तान, किसकी करेंसी ज्यादा मजबूत, बीते 1 महीने में रुपया घटा या बढ़ा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-या-आफगानिस्तान-किसकी-करेंसी-ज्यादा-मजबूत-बीते-1-महीने-में-रुपया-घटा-या-बढ़ा</link>
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        <description><![CDATA[ India and Afghanistan Currency News: वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और ईरान-अमेरिका वॉर के बीच इस साल मार्च का महीना करेंसी के मामने में काफी हलचल भरा रहा है. भारतीय करेंसी यानी रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि मार्च महीने में अफगान अफगानी (AFN) ने भारतीय रुपए (INR) के मुकाबले अधिक मजबूती दिखाई है.
एक मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच दोनों करेंसी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चौंकाने वाली बात देखने को मिलती है.
पहले बात भारतीय रुपया की
ईरान युद्ध के चलते मार्च के महीने में रुपया भारी दबाव में रहा. 30 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में रुपये में 9.88% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 14 सालों में इसकी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है. मार्च के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को भी पार कर गया है.
अब बात अफगानी मुद्रा की
ध्यान देने वाली बात है कि रुपए के तुलना में अफगानिस्तान की मुद्रा ने मजबूती दर्ज की है. अफगान सेंट्रल बैंक के अनुसार, 20 मार्च 2026 को समाप्त हुए उनके कैलेंडर वर्ष में अफगानी डॉलर के मुकाबले 9.93% मजबूत हुई है, हालांकि मार्च के पहले हफ्ते में इसमें मामूली 4.2% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन महीने के अंत तक यह रुपए की तुलना में अफगानी करेंसी स्थिर रही.
ताजा स्थिति क्या है?
मार्च 2026 के आखिर में एक्सचेंज रेट लगभग इस तरह है- 1 भारतीय रुपया (INR) &amp;asymp; 0.67 अफगान अफगानी (AFN). इसका मतलब है कि मूल्य के मामले में 1 रुपया 1 अफगानी से छोटा है. हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अफगानिस्तान से कहीं बड़ी है, लेकिन करेंसी की &#039;यूनिट वैल्यू&#039; और हालिया &#039;मजबूती की दर&#039; के मामले में अफगानी फिलहाल बेहतर प्रदर्शन कर रही है.
भारतीय रुपया कमजोर होने के कारण क्या है?
विदेशी फंड की निकासी- विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है.
कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमतें $105 - $115 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है.
अमेरिकी टैरिफ: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों यानी टैरिफ ने भी रुपए पर दबाव बनाया है.
व्यापार घाटा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ऊर्जा व्यापार प्रभावित हुआ, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर असर पड़ा है.
अफगानी करेंसी मजबूत होने के कारण क्या हैं?
सख्त मौद्रिक नीतियां: अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक ने बाजार में डॉलर की निरंतर आपूर्ति की और मुद्रा के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया है.
डिजिटल बैंकिंग और नए नोट: पुराने नोटों को चलन से बाहर करने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से मुद्रा की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहा है.
सीमित वैश्विक व्यापार जुड़ाव: वैश्विक वित्तीय बाजारों से कम जुड़ाव होने के कारण, अफगानिस्तान वैश्विक मंदी या डॉलर की मजबूती से उस तरह प्रभावित नहीं हुआ जैसे भारत हुआ.&amp;nbsp;
आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 में भारतीय रुपया कमजोर हुआ है, जबकि अफगान अफगानी ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है. जहां भारत को बाहरी झटकों (तेल और भू-राजनीति) का सामना करना पड़ा, वहीं अफगानिस्तान ने आंतरिक नियंत्रण और सीमित बाजार जोखिमों के कारण अपनी करेंसी को गिरने से बचाए रखा. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>बदल गया टैक्स का गणित! अब अप्रैल में बिना सैलरी बढ़े ज्यादा मिलेगा पैसा, मिडिल क्लास की बल्ले&amp;बल्ले</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बदल-गया-टैक्स-का-गणित-अब-अप्रैल-में-बिना-सैलरी-बढ़े-ज्यादा-मिलेगा-पैसा-मिडिल-क्लास-की-बल्ले-बल्ले</link>
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        <description><![CDATA[ New Income Tax Act 2025: अगर आप हर महीने सैलरी स्लिप देखकर ये सोचते हैं कि पैसा आखिर कट कहां रहा है तो ये बदलाव सीधे आपकी जेब से जुड़ा है. 1 अप्रैल 2026 से 64 साल पुराना आयकर अधिनियम 1961 हटाकर नया आयकर अधिनियम 2025 लागू कर दिया गया है. इसका मतलब ये है कि अब टैक्स सिस्टम सिर्फ बदला नहीं है बल्कि आपको समझ में आने लायक भी बनाया गया है और इसका असर आपकी टेक-होम सैलरी पर दिखेगा.
पहले बच्चों का एजुकेशन अलाउंस सिर्फ 100 रुपये था, जो नाम के बराबर था. अब इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है. हॉस्टल अलाउंस भी 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है. सीधी भाषा में समझें पहले ये भत्ते सिर्फ कागज पर थे अब इनसे टैक्स बचाकर आपकी जेब में सच में ज्यादा पैसा आएगा.
12.75 लाख तक कमाई पर टैक्स नहीं&amp;nbsp;
सरकार ने 12 लाख रुपये तक की इनकम पर सेक्शन 87A के तहत टैक्स शून्य रखा है. इसके अलावा 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता रहेगा. इसका मतलब साफ है अगर आपकी सैलरी 12.75 लाख रुपये तक है तो आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा यानी आपकी पूरी कमाई आपके काम आएगी.
कानून क्यों बदला गया? आसान भाषा में समझें
पुराना टैक्स कानून बहुत बड़ा और जटिल हो चुका था जिसमें 800 से ज्यादा धाराएं थीं. नए कानून में इन्हें घटाकर करीब 536 कर दिया गया है. सरकार का मकसद है कि आम आदमी भी बिना किसी एक्सपर्ट के टैक्स को समझ सके और फालतू के केस और विवाद कम हों.
FY और AY का झंझट खत्म, अब सीधी भाषा में टैक्स
पहले फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर का फर्क समझना लोगों के लिए मुश्किल होता था. अब इस कन्फ्यूजन को खत्म कर दिया गया है. अब आप सीधे &amp;ldquo;Tax Year 2026-27&amp;rdquo; के नाम से अपनी कमाई और टैक्स को समझेंगे और उसी नाम से ITR भरेंगे आसान, सीधा और बिना उलझन.
HRA में राहत, बड़े शहरों में काम करने वालों को फायदा
अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी मेट्रो शहरों में शामिल कर लिया गया है ! इसका मतलब ये है कि इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को अब ज्यादा HRA छूट मिलेगी यानी किराए के बाद भी आपकी जेब में ज्यादा पैसा बचेगा.
किराए पर सख्ती, फर्जीवाड़ा रोकने की कोशिश
अगर आप साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो अब मकान मालिक का PAN देना जरूरी होगा. साथ ही ये भी बताना होगा कि मकान मालिक आपका रिश्तेदार है या नहीं ताकि लोग फर्जी रसीद बनाकर टैक्स न बचा सकें.
मेडिकल लोन, मुश्किल समय में राहत
अगर आपकी कंपनी इलाज के लिए लोन देती है तो पहले सिर्फ 20,000 रुपये तक ही टैक्स छूट मिलती थी. अब इसे बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है यानि बीमारी के समय मिलने वाली मदद अब टैक्स के बोझ से काफी हद तक बाहर रहेगी.
खाने के खर्च पर राहत
ऑफिस में मिलने वाले खाने या मील वाउचर पर पहले सिर्फ 50 रुपये तक टैक्स छूट मिलती थी जो बहुत कम थी. अब इसे बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है. यानि अगर आप रोज ऑफिस में खाना लेते हैं तो साल भर में करीब 1 लाख रुपये तक का खर्च टैक्स-फ्री हो सकता है ये छोटी-छोटी बचत मिलकर बड़ी राहत बनती है.
अब फॉर्म-16 की जगह फॉर्म-130 आ गया है. इसके साथ ही बाकी फॉर्म भी बदले गए हैं. अब आपके टैक्स से जुड़ी हर जानकारी ज्यादा साफ और डिजिटल तरीके से मिलेगी, जिससे गलती और गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी.
सीनियर सिटीजन के लिए भी राहत
अब 15G और 15H जैसे अलग-अलग फॉर्म की जरूरत नहीं होगी. इन्हें मिलाकर एक नया फॉर्म बना दिया गया है यानि बुजुर्गों को अब कम झंझट और कम भागदौड़ में काम हो जाएगा.
इस बात का रखें ध्यान
ध्यान रखने वाली बात ये है कि अभी जो ITR आप भरेंगे वो पुराने कानून के हिसाब से ही होगा ! नया कानून 1 अप्रैल 2026 के बाद होने वाली कमाई पर लागू होगा, इसलिए अभी कोई जल्दबाजी या कन्फ्यूजन की जरूरत नहीं है.
सरकार ने टैक्स बढ़ाया नहीं है बल्कि राहत देने का तरीका बदला है. भत्तों को बढ़ाकर और नियम आसान बनाकर सैलरी क्लास को फायदा देने की कोशिश की गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बदल, गया, टैक्स, का, गणित, अब, अप्रैल, में, बिना, सैलरी, बढ़े, ज्यादा, मिलेगा, पैसा, मिडिल, क्लास, की, बल्ले-बल्ले</media:keywords>
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        <title>चोरों की बिजनेस खोपड़ी! यूरोप के बदमाशों ने 12 टन KitKat से भरा ट्रक ही क्यों चोरी किया? ये हैं कारण</title>
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        <description><![CDATA[ KitKat Heist: आज का जमाना ही कुछ ऐसा हैकि चोरी-डकैती और लूट की घटनाएं रोज पढ़ने-सुनने को मिल जाती है. कहीं पैसों की लूट की जा रही है, तो कहीं सोने-चांदी के महंगे जेवरात गायब किए जा रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी चॉकलेट चुराने का कोई वाक्या सुना है? शायद ही पहले कभी किसी ने इस तरह का किस्सा सुना होगा. यूरोप से एक ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां Nestle कंपनी के मशहूर चॉकलेट ब्रांड Kitkat के करीब 12 टन (लगभग 4,13,793 बार) चोरी हो गए.&amp;nbsp;
बीच रास्ते गायब हुआ ट्रक
बता दें कि हाल ही में 12 टन Kitkat चॉकलेट से लदा ट्रक सेंट्रल इटली की फैक्ट्री से निकला, जिसे पोलैंड जाना था. इसमें कंपनी की नई &#039;Formula One (F1)&#039; रेंज की चॉकलेट भी थी. चॉकलेट की इस बेशकीमती खेप से भरा ट्रक बीच रास्ते से ही एकाएक गायब हो गया.
Nestle ने AFP से इस बारे में बता करते हुए कहा कि यूरोप में ट्रांसपोर्ट के दौरान हमारी नई चॉकलेट रेंज की 413,793 यूनिट्स ले जा रहा एक ट्रक चोरी हो गया है. Nestle ने अपने पंच लाइन या स्लोगन &#039;Have a break&#039; पर चुटकी लेते हुए कहा कि चोरों ने इस बात को गंभीरता से ले लिया और &amp;nbsp;वे हमारी 12 टन से ज्यादा चॉकलेट लेकर ही &#039;ब्रेक&#039; पर चले गए. कंपनी ने मजाकिया लहजे में चोरो के &#039;बेहतरीन स्वाद&#039; की भी तारीफ की. ट्रक और उसमें लदा सारा सामान अभी भी लापता है और स्थानीय अधिकारियों व सप्लाई पार्टनर्स के साथ मिलकर इस मामले की जांच की जा रही है.&amp;nbsp;
चोरी की हुई चॉकलेट के हर पैकेट पर एक यूनिक बैच कोर्ड है. इसके चलते अवैध तरीके से बाजार में इन्हें बेचे जाने पर स्कैन कर ट्रैक किए जाने का खतरा है. बड़े पैमाने पर हुई चॉकलेट की इस चोरी को लेकर कंपनी ने सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ने का भी आश्वासन दिया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
क्यों चोरों ने की चॉकलेट की चोरी?&amp;nbsp;

आसानी से बेचना (Liquidity)- इलेक्ट्रॉनिक्स या लग्जरी सामानों की तुलना में चॉकलेट और कन्फेक्शनरी को &quot;ब्लैक मार्केट&quot; या छोटे स्थानीय किराना स्टोरों पर बेचना बहुत आसान होता है. इन पर कोई सीरियल नंबर नहीं होता जिसे ट्रैक किया जा सके.
ऊंची मांग- इटली में किटकैट जैसे ब्रांड्स की मांग हमेशा बनी रहती है. 12 टन चॉकलेट की कीमत हजारों यूरो में होगी, जिससे यह एक मोटा मुनाफा देने वाला सौदा बन गया.
ग्रे मार्केट और छोटे रिटेलर्स (Grey Market)- चोर अक्सर इन चॉकलेट्स को बड़े सुपरमार्केट में नहीं बेचते क्योंकि वहां कागजी कार्रवाई (Invoices) की रूरत होती है. इसके बजाय ये छोटे-मोटे&amp;nbsp;किराना स्टोरों या दुकानों को निशाना बनाते हैं. वे दुकानदार को भारी डिस्काउंट (जैसे बाजार भाव से 40-50 परसेंट कम) का लालच देते हैं. दुकानदार भी &#039;बिना बिल&#039; के माल खरीदकर अपना मुनाफा बढ़ा लेते हैं.
री-पैकेजिंग का खेल (Re-packaging)- अगर माल पर किसी विशेष शिपमेंट या लॉट नंबर के निशान हों, जिससे पुलिस उसे पहचान सके, तो अपराधी बड़े बॉक्स को खोलकर उन्हें छोटे अनमार्क्ड पैकेटों में बदल देते हैं. कई बार वे एक्सपायरी डेट या बैच नंबर को मिटाकर नए स्टिकर लगा देते हैं, जिससे यह पता लगाना नामुमकिन हो जाता है कि यह माल उसी चोरी हुए ट्रक का है.
स्ट्रीट वेंडर्स और साप्ताहिक बाजार- इटली और यूरोप के कई हिस्सों में खुले बाजार (Open-air markets) लगते हैं. यहां नकद (Cash) में लेन-देन होता है. चोर इन चॉकलेट्स को रेहड़ी-पटरी वालों या फेरियों में बेच देते हैं, जहां ग्राहकों को सस्ता सामान मिलने से मतलब होता है. उन्हें उसकी उत्पत्ति (Origin) से कोई लेना-देना नहीं होता है.&amp;nbsp;
डिजिटल ब्लैक मार्केट- आजकल चोर टेलीग्राम (Telegram) या डार्क वेब जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. वे वहां &#039;होलसेल डील&#039; के विज्ञापन डालते हैं. पेमेंट अक्सर क्रिप्टोकरेंसी में ली जाती है ताकि पैसे के लेनदेन को ट्रैक न किया जा सके.
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 05:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर! 1 अप्रैल से बढ़ेगी FASTag एनुअल पास की फीस</title>
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        <description><![CDATA[ FASTag annual pass hike: अगर आप भी उन राहगीरों में से हैं, जिनका हाईवे से अकसर आना-जाना होता है, तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) नए वित्त वर्ष (2026-27) के लिए FASTag का सालाना फीस बढ़ाने जा रही है.
1 अप्रैल, 2026 से FASTag एनुअल पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी है. यानी कि कीमत में 75 रुपये (लगभग 2.5 परसेंट) की बढ़ोतरी की गई है. &amp;nbsp;FASTag एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बिना कैश के सफर करने की सुविधा देता है. यह एनुअल पास अकसर सफर करने वालों के लिए एक प्रीपेड ऑप्शन है, जिससे यूजर्स एक बार पेमेंट करके बिना किसी रुकावट के टोल से गुजर सकते हैं.&amp;nbsp;
एनुअल पास कब तक रहेगा वैलिड?&amp;nbsp;
यह एनुअल पास 1 साल के लिए या 200 टोल क्रॉसिंग (जो भी पहले हो) के लिए वैध होगा. 200 ट्रिप पूरे होने के बाद पास अपने आप सामान्य FASTag (Pay-per-use) में बदल जाएगा. इसे आपको फिर दोबारा से एक्टिव कराना होगा. फीस की रकम में भले ही मामूली बढ़ोतरी की गई है, लेकिन यह उन यूजर्स के लिए अहम है, जो अकसर हाईवे पर सफर करते हैं.
इस बीच, जो लोग अपना एनुअल पास खरीदना या रिन्यू करवाना चाहते हैं, वे नई दरें लागू होने से पहले अभी भी मौजूदा कीमत पर ऐसा कर सकते हैं. FASTag एनुअल के कई फायदे हैं- बिना किसी परेशानी के टोल पेमेंट, टोल प्लाजा पर इंतजार का कम समय और अक्सर सफर करने वालों के लिए किफायती सफर.
कौन-कौन करते सकते हैं इस्तेमाल?
एनुअल पास का इस्तेमाल प्राइवेट और कमर्शियल दोनों तरह के वाहनों के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इसका कवरेज सीमित है. यानी कि यह देशभर के लगभग 1,150 टोल प्लाजा (National Highways और Expressways) पर मान्य है. स्टेट हाईवे या प्राइवेट टोल रोड पर यह काम नहीं करेगा.&amp;nbsp;
एनुअल पास को रिन्यू या एक्टिवेट कैसे करें?&amp;nbsp;

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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 05:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हाईवे, पर, सफर, करने, वालों, के, लिए, बड़ी, खबर, अप्रैल, से, बढ़ेगी, FASTag, एनुअल, पास, की, फीस</media:keywords>
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        <title>FASTag News: उत्तर से दक्षिण तक... 1 अप्रैल से किन राज्यों के नेशनल हाईवे पर सफर होगा सबसे ज्यादा महंगा?</title>
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        <description><![CDATA[ FASTag News: अगर आप भी उनमें से हैं, जिनका नेशनल हाईवे से आना-जाना लगा रहता है, उनके लिए अब यह सफर महंगा होने वाला है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 1 अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष से नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे पर टोल प्लाजा की दरों में इजाफा किया है. यानी कि अगले 1 तारीख से आपको इन पर सफर के दौरान अपनी जेबें थोड़ी और ढीली करनी पड़ सकती हैं. बता दें कि देशभर के टोल प्लाजा पर औसतन 4-5 परसेंट तक का इजाफा हुआ है.&amp;nbsp;
किन रूटस पर पड़ेगा असर?&amp;nbsp;



रूट्स
टोल में होने वाले संभावित बदलाव
कितना पड़ेगा महंगा?


दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे
5 परसेंट का इजाफाLCV/Truck&amp;nbsp;
कारों, जीपों, वैन या हल्के मोटर वाहनों सहित हल्के वाहनों के लिए एक तरफा यात्रा का किराया 175 रुपये होगा, जो पहले 170 रुपये था.वापसी का किराया 265 रुपये होगा, जो पहले 255 रुपये था.


बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे
3-5 परसेंट का इजाफा
कारों के लिए टोल चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और यह 120 रुपये के आसपास बना रहेगा. हालांकि, LCV/Truck जैसे बड़े वाहनों के लिए किराया 5-15 रुपये के बीच बढ़गा.&amp;nbsp;


दिल्ली-जयपुर हाईवे&amp;nbsp;
5-20 परसेंट तक की बढ़ोतरी
शाहजहांपुर जैसे प्रमुख टोल प्लाजा पर कमर्शियल वाहनों के लिए किराए में इजाफा.


यूपी के अन्य रूट्स&amp;nbsp;
5-10 परसेंट तक की वृद्धि
लखनऊ से कानपुर, अयोध्या और रायबरेली जाने वाले रास्तों पर निजी वाहनों के लिए मामूली बढ़ोतरी.



विभिन्न रूटों पर कितना बढ़ेगा टोल?&amp;nbsp;

यूपी में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-9 और लखनऊ-कानपुर जैसे रूट्स पर टोल पर खर्च 5 परसेंट तक बढ़ जाएगा. इससे दिल्ली से मेरठ या लखनऊ से कानपुर सफर करने वाले यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
राजस्थान में जयपुर-दिल्ली, जयपुर-अजमेर और जयपुर-किशनगढ़ जैसे रूट्स पर भी टोल प्लाजा पर खर्च बढ़ने की संभावना है. बताया जा रहा है कि जयपुर-किशनगढ़ रुट्स पर कारों के लिए टोल 140 रुपये से 155 हो जाएगा. वहीं, लंबी दूरी के लिए जैसे कि दिल्ली से मुंबई वाया राजस्थान होकर सफर करने वालों को हर टोल पर एक्स्ट्रा 5-15 रुपये देने होंगे.&amp;nbsp;
दक्षिण भारत के तमिलनाड़ु में 65 से ज्यादा टोल है. 1 अप्रैल से इनमें टोल चार्जेस में बढ़ोतरी के संभावित अनुमान का असर चेन्नई बाईपास और चेन्नई-तिरुपति हाईवे पर सफर करने वालों को अब पहले के मुकाबले अब अधिक पैसे खर्च करने होंगे.&amp;nbsp;
बेंगलुरु-मैसूर और बेंगलुरु एयरपोर्ट रोड पर भी औसतन 3-5 परसेंट टोल बढ़ने की संभावना है. इन रूट्स पर भारी ट्रैफिक रहती है.
दिल्ली-सोनीपत-पानीपत और अंबाला-चंडीगढ़ रूट पर कमर्शियल वाहनों के साथ-साथ प्राइवेट व्हीकल्स पर भी टोल पर खर्च 5-15 रुपये के बीच बैठ सकता है.

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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 05:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Coal India के शेयरों में आज दिख सकती है हलचल, कंपनी को मिला 1057 करोड़ रुपये का ऑर्डर</title>
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        <description><![CDATA[ Coal India: भारत में माइनिंग सेक्टर से जुड़ी दिग्गज सरकारी कंपनी कोल इंडिया (Coal India) के शेयरों में आज हलचल दिख सकती है क्योंकि कंपनी को 1057.09 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है.
कंपनी को यह कॉन्ट्रैक्ट तेलंगाना पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TGGENCO) की तरफ से मिला है. इसके तहत, कोल इंडिया को तेलंगाना के चौटुप्पल में एक बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का प्लांट लगाना होगा. यह कोल माइनिंग से हटकर क्लीन एनर्जी की दिशा में उठाया गया एक कदम है.
कंपनी के लिए कमाई का जरिया
कोल इंडिया के बनाए जाने वाले इस प्लांट की कैपेसिटी 750 MWH होगी, जो 4 घंटे तक बिजली स्टोर कर सकेगी. कंपनी को 18 महीनों के भीतर इस प्रोजेक्ट पर काम पूरा करना है. TGGENCO से मिला कोल इंडिया के लिए कमाई का एक जरिया भी है क्योंकि समझौते के तहत, कोल इंडिया 3.14 लाख मेगावाट प्रति माह के टैरिफ पर बिजली की सप्लाई करेगी.
आमतौर पर कोल इंडिया कोयले के खनन के लिए जानी जाती रही है, लेकिन अब सोलर और विंड जैसी रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर करने वाली तकनीक में दांव लगा रही है. इससे बिजली की भारी मांग के समय सप्लाई स्थिर रखने में मदद मिलेगी. इस ऑर्डर के लिए कंपनी को 15 दिनों के भीतर परफॉरमेंस बैंक गारंटी और अन्य डॉक्यूमेंट्स जमा करने हाेंगे और तब जाकर फॉर्मल एग्रीमेंट पर साइन होंगे. &amp;nbsp;
कोल इंडिया के शेयर&amp;nbsp;
कोल इंडिया ने पिछले एक साल में निवेशकों को दमदार रिटर्न के साथ शानदार डिविडेंड भी दिया है. 27 मार्च, 2026 तक कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 445 रुपये के आसपास रही. बीते एक साल में इससे 11-13 परसेंट का पॉजिटिव रिटर्न दिया है. कंपनी ने बीते 12 महीनों में 26.40 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड का भी ऐलान किया है. इसके 52-वीक का हाई लेवल 476 रुपये और लो लेवल 350 रुपये है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें.&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Coal, India, के, शेयरों, में, आज, दिख, सकती, है, हलचल, कंपनी, को, मिला, 1057, करोड़, रुपये, का, ऑर्डर</media:keywords>
    </item>
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        <title>Gold&amp;Silver Price Today: सोने की कम हुई कीमत, जानें एक दिन में कितना घटा रेट; चांदी के क्या हैं भाव?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सोने-की-कम-हुई-कीमत-जानें-एक-दिन-में-कितना-घटा-रेट-चांदी-के-क्या-हैं-भाव</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/gold-silver-price-today-सोने-की-कम-हुई-कीमत-जानें-एक-दिन-में-कितना-घटा-रेट-चांदी-के-क्या-हैं-भाव</guid>
        <description><![CDATA[ Gold-Silver Rate Today: भारत में आज सोने की कीमत में मामूली गिरावट देखी जा रही है. 24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक सभी सेगमेंट्स में कीमतों में कुछ कमी आई है. कल यानी कि रविवार, 29 मार्च के 1,48, 090 रुपये के मुकाबले आज सोने की कीमत 1,48, 080 रुपये प्रति 10 ग्राम है. यानी कि इसमें 10 रुपये की मामूली गिरावट आई है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत भी प्रति 10 ग्राम है कल के 1,35,750 रुपये के मुकाबले आज 1,35,740 रुपये है.&amp;nbsp;
आज सोने का ताजा भाव&amp;nbsp;



शहर
24 कैरेट गोल्ड (प्रति 10 ग्राम)
22 कैरेट गोल्ड (प्रति 10 ग्राम)


मुंबई
1,48, 080
1,35,740


दिल्ली
1,48, 210
1,35,890


चेन्नई
1,49, 010
1,36,590


कोलकाता
1,48, 080
1,35,740


बेंगलुरु
1,48, 080
1,35,740


हैदराबाद
1,48, 080
1,35,740


अहमदाबाद
1,48, 110
1,35,790


जयपुर
1,48, 210
1,35,890


पुणे&amp;nbsp;
1,48, 080
1,35,740



इससे साफ है कि चेन्नई में सोने के दाम दूसरे महानगरों के मुकाबले कुछ ज्यादा है. वहीं, दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों में कीमतें एक ही लेवल पर बनी हुई हैं. सोने की कीमतें स्थानीय कर और ट्रांसपोर्टेशन शुल्क की वजह से अलग-अलग शहरों में अलग-अलग होती हैं. कीमतों में 10-100 रुपये का अंतर देखा जा सकता है. ऐसी भी खबरें हैं कि कुछ केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार (Gold Reserve) को बेचने पर विचार कर रहे हैं. इससे सप्लाई बढ़ने की आशंका है, जिससे कीमतें दबाव में हैं.&amp;nbsp;
क्यों गिरी सोने की कीमत?
बता दें कि वैश्विक बाजारों में कीमतों में आई नरमी और डॉलर की मजबूती के चलते सोने की कीमतों में आज गिरावट आई है. इसके अलावा, MCX पर भी भाव गिरा है. MCX पर आज सुबह सोने की कीमतें 0.66 परसेंट तक लुढ़ककर 1,43,331 के स्तर पर देखी गई. यह बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत दे रहा है.&amp;nbsp;
चांदी की कीमत
भारत में आज की कीमत में कल के मुकाबले प्रति किलोग्राम 2,210 रुपये की गिरावट दर्ज की गई. कल चांदी की कीमत 2,51,090 रुपये थी. वहीं, आज कीमत 2,48,880 रुपये है. इस तरह से आज 1 और 10 ग्राम चांदी की कीमत क्रमश: 248.88 रुपये और 2,488.80 रुपये है. 100 ग्राम चांदी की कीमत 24,888 रुपये है.
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:30:23 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Gold-Silver, Price, Today:, सोने, की, कम, हुई, कीमत, जानें, एक, दिन, में, कितना, घटा, रेट, चांदी, के, क्या, हैं, भाव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Stock Market Updates: गिरकर संभल रहा शेयर बाजार, 544 अंक नीचे सेंसेक्स, 136 अंक लुढ़ककर 22683 के लेवल पर निफ्टी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/stock-market-updates-गिरकर-संभल-रहा-शेयर-बाजार-544-अंक-नीचे-सेंसेक्स-136-अंक-लुढ़ककर-22683-के-लेवल-पर-निफ्टी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/stock-market-updates-गिरकर-संभल-रहा-शेयर-बाजार-544-अंक-नीचे-सेंसेक्स-136-अंक-लुढ़ककर-22683-के-लेवल-पर-निफ्टी</guid>
        <description><![CDATA[ Stock Market Updates: ईरान-अमेरिका और इजरायल में जारी जंग के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत आज गिरावट के साथ हुई. बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1018 अंक लुढ़ककर 72565 पर कारोबार की शुरुआत की. इसी तरह से निफ्टी भी 269 अंकों की गिरावट के साथ 22549 के लेवल पर खुला. हालांकि, अब इसमें थोड़ी रिकवरी देखी जा रही है. सेंसेक्स अभी 544 अंक नीचे 73038 पर है. निफ्टी भी 136 अंकों की गिरावट के साथ अभी 22683 पर कारोबार करता नजर आ रहा है.&amp;nbsp;
शेयर बाजार में गिरावट के कारण&amp;nbsp;
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का आज पांचवा हफ्ता है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता चरम पर है. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 115-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है. ऊपर से विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी शेयर बाजार पर दबाव है. अकेले मार्च में ही विदेशी निवेशकों ने अब तक 1,13,810 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. इस बीच, रुपया भी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक सबसे निचले स्तर 94.82 पर आ गया है. इससे विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट गड़बड़ाया है.&amp;nbsp;
एशियाई बाजार
आज 30 मार्च, सोमवार को एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है. पश्चिम एशिया में तनाव अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है और कच्चे तेल में उछाल के कारण निवेशकों में घबराहट है. जापान का निक्केई आज &amp;nbsp;225 3.97 परसेंट गिर गया, टॉपिक्स में भी 3.9 परसेंट की गिरावट आई. इसी तरह से बेंचमार्क कोस्पी में 5 परसेंट से अधिक की गिरावट देखी गई, जबकि स्मॉल-कैन कोस्डैक 3.97 परसेंट नीचे रहा. हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 24630 पर कारोबार करता नजर आया, जो इसके पिछले बंद भाव 24951.88 से कम है.&amp;nbsp;
अमेरिकी शेयर बाजार
अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई. शुक्रवार को डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 793.47 अंक या 1.73 परसेंट गिरकर 45166.64 पर बंद हुआ. &amp;nbsp;S&amp;amp;P 500 में 1.67 परसेंट की गिरावट आई और यह सेशन के आखिर में सात महीने के निचले स्तर 6368.85 पर बंद हुआ. नैस्डेक कम्पोजिट भी 2.15 परसेंट गिरकर 20948.36 पर सेटल हुआ.
कच्चा तेल
सोमवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में ब्रेंट वायदा ऊंचे स्तर पर खुला, जिसमें 2.7 परसेंट की बढ़त हुई और यह लगभग 115.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा. यह 27 मार्च के 112.57 डॉलर के बंद भाव से ऊपर है. 27 फरवरी को 72.48 डॉलर प्रति बैरल के बंद भाव से इसमें 59 परसेंट तक का उछाल आ चुका है. इसी दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला था. COMEX पर, कच्चे तेल की कीमतें 2.96 परसेंट बढ़कर 102.59 डॉलर प्रति बैरल हो गईं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Stock, Market, Updates:, गिरकर, संभल, रहा, शेयर, बाजार, 544, अंक, नीचे, सेंसेक्स, 136, अंक, लुढ़ककर, 22683, के, लेवल, पर, निफ्टी</media:keywords>
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        <title>25 सालों में जो न हुआ वो अब हो रहा... क्यों गोल्ड रिजर्व से सोना निकालकर धड़ाधड़ बेच रहा रूस?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/25-सालों-में-जो-न-हुआ-वो-अब-हो-रहा-क्यों-गोल्ड-रिजर्व-से-सोना-निकालकर-धड़ाधड़-बेच-रहा-रूस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/25-सालों-में-जो-न-हुआ-वो-अब-हो-रहा-क्यों-गोल्ड-रिजर्व-से-सोना-निकालकर-धड़ाधड़-बेच-रहा-रूस</guid>
        <description><![CDATA[ Russia Gold Reserve: रूस ने बीते 25 सालों में पहली बार अपने सेंट्रल बैंक के रिजर्व से सोना बेचना शुरू किया है. बर्लिन बेस्ड न्यूज आउटलेट bne IntelliNews की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि रेगुलेटरी डेटा से पता चलता है कि 2022 और 2025 के बीच रूस ने 15 ट्रिलियन RUB (150 बिलियन डॉलर) से ज्यादा का सोना और विदेशी मुद्रा बेचा है. इसके बाद 2026 के शुरुआती दो महीनों में 3.5 ट्रिलियन रुबल (35 बिलियन डॉलर) की अतिरिक्त बिक्री हुई है. अकेले जनवरी में रूस के सेंट्रल बैंक ने 300000 औंस और फरवरी में 200000 औंस सोना बेचा.&amp;nbsp;
क्यों सोना बेच रहा रूस?
यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध लंबा खींचता जा रहा है. इसके चलते सैन्य खर्च में भारी बढ़ोतरी भी हुई है. यूक्रेन में जारी रूसी जंग का यह चौथा साल है. इस साल रूस ने अपने डिफेंस बजट में रिकॉर्ड 14.5 ट्रिलियन रुबल से अधिक अलॉट किए. यह कुल सरकारी खर्च का लगभग 40 परसेंट है. सिर्फ टैक्स की वसूली से इसकी भरपाई मुमकिन नहीं है.
रूस का बजट घाटा 2025 में 2.6-3.4 परसेंट तक पहुंच गया है क्योंकि यूक्रेन में युद्ध के चलते कई पश्चिमी देशों ने रूस के तेल और गैस पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं, जो इसकी कमाई का मुख्य जरिया है. इन्हीं सबकी भरपाई करने के लिए रूस अपने गोल्ड रिजर्व का इस्तेमाल कर रहा है.&amp;nbsp;
रूस ने बदली रणनीति
पहले रूस का केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय केवल कागज तौर पर सोने का ट्रांसफर करते थे, लेकिन अब गोल्ड रिजर्व से निकालकर असली सोने की ईंटें बाजार में बेची जा रही हैं. इस भारी बिक्री के चलते रूस का गोल्ड रिजर्व पिछले चार सालों के निचले स्तर (74.3 मिलियन) पर चला गया है. इससे पता चलता है कि युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करने के साथ वहां की इकोनॉमी पर दबाव किस हद तक बढ़ गया है.&amp;nbsp;
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जॉब कट का खतरा! 600 कर्मचारियों पर गिर सकती है छंटनी की गाज... जानिए डिटेल&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सालों, में, जो, न, हुआ, वो, अब, हो, रहा..., क्यों, गोल्ड, रिजर्व, से, सोना, निकालकर, धड़ाधड़, बेच, रहा, रूस</media:keywords>
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        <title>महंगा ईंधन&amp;महंगा टिकट! जानिए क्यों 1 अप्रैल से ढीली होगी आपकी जेब, ऐसे बिगड़ेगा आपका बजट</title>
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        <description><![CDATA[ Aviation Turbine Fuel Prices Increased: 1अप्रैल से हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन Aviation Turbine Fuel यानी ATF के नए दाम लागू होंगे और इस बार संकेत अच्छे नहीं नज़र आ रहे हैं. कच्चे तेल के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दामों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि दबाव बढ़ने वाला है. हर महीने एक तारीख को ही इसके दाम अपडेट होते है तो पिछले महीने जंग की शुरुआत में 1 मार्च में जंग का असर नहीं दिखा था पर अब स्थिति अलग हो चुकी है.
आज भी पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पहले से ऊपर हैं रुपया भी कमज़ोर है दोनों मिलकर ATF महंगा करने का पूरा माहौल बना रहे हैं. अगर ATF महंगा होता है तो इसका सीधा असर आपके टिकट पर दिखेगा. एयरलाइंस की लागत बढ़ेगी और उसका बोझ आखिरकार आम यात्री को ही उठाना पड़ेगा. छुट्टी का प्लान हो, इमरजेंसी में फ्लाइट लेनी हो या अचानक कहीं जाना पड़े तो सबका बजट बिगड़ सकता है.
ATF महंगा तो टिकट महंगा, यह गणित कैसे काम करता है?
हर महीने की 1 तारीख को IOC, BPCL और HPCL मिलकर ATF के नए दाम तय करते हैं. बेस प्राइस, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य VAT और डीलर कमीशन इन सबको जोड़कर जो कीमत बनती है वही एयरलाइंस को चुकानी पड़ती है और किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का 30 से 40 फीसदी हिस्सा अकेले ATF होता है यानी ATF थोड़ा भी महंगा हुआ तो एयरलाइन की लागत सीधे बढ़ती है और वह बोझ आखिरकार यात्री के टिकट पर आ जाता है.
राज्यों का VAT है असली पेंच
ATF की कीमत में सबसे बड़ा पेच राज्यों का VAT यानी बिक्री कर है. महाराष्ट्र में ATF पर करीब 25 फीसदी VAT है, दिल्ली में 20 फीसदी से ऊपर जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने VAT घटाकर 1 फीसदी तक कर दिया और नतीजा यह रहा कि वहां एविएशन तेज़ी से बढ़ा ! एक ही ATF मुंबई में महंगा और हैदराबाद में सस्ता सिर्फ राज्य के टैक्स की वजह से केंद्र चाहकर भी सीधे दखल नहीं दे सकता यही दिक्कत है.
ATF अभी तक GST के दायरे में नहीं आया है.पेट्रोल-डीज़ल की तरह यह भी राज्यों के हाथ में है. इसीलिए केंद्र सरकार चाहे तो भी सीधे VAT तय नहीं कर सकती सिर्फ अपील कर सकती है. यही वजह है कि Aviation Minister को राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखने की तैयारी &amp;nbsp;में है जिसमें ATF पर VAT घटाने की गुज़ारिश होगी. राज्यों के वित्त विभागों को भी अलग से पत्र भेजा जाएगा.
एयरपोर्ट चार्जेस की भी होगी समीक्षा
Aviation Ministry का कहना है कि वो एयरलाइंस, यात्री और एयरपोर्ट तीनों को ध्यान में रखकर विकल्प तलाश रही है. इसी कड़ी में एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ भी बैठक होगी जिसमें यात्रियों से वसूले जाने वाले विभिन्न शुल्कों की समीक्षा की जाएगी और मकसद यह है कि एक तरफ ईंधन महंगा हो तो दूसरी तरफ से राहत दी जा सके. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>1 अप्रैल से लागू होंगे RBI के लिए डिजिटल पेमेंट्स के नए नियम, जानें क्या कुछ बदलेगा?</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Digital Payments Rule from 1st April: डिजिटल पेमेंट्स के लिए RBI के नियम 1 अप्रैल, 2026 से बदलने जा रहे हैं. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक डिजिटल पेमेंट्स के लिए एक नया &#039;प्रिंसिपल बेस्ड फ्रेमवर्क&#039; (Priciple-based framework) लागू करने जा रहा है. इसका मकसद फिशिंग और सिम-स्वैप जैसे ऑनलाइन फ्रॉड को रोकना और डिजिटल पेमेंट को अधिक सिक्योर बनाना है.&amp;nbsp;
1 अप्रैल से होने वाले बदलाव

अब से सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन (UPI, कार्ड, वॉलेट) के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा.
ट्रांजैक्शन के दौरान अब सिर्फ SMS पर आया OTP काफी नहीं होगा. लेनदेन को प्रमाणित करने के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा स्तर की आवश्यकता होगी.&amp;nbsp;
नए नियमों के तहत, कम से कम एक ऑथेंटिकेशन फैक्टर डायनेमिक होने चाहिए, जो खासतौर पर उसी ट्रांजैक्शन के लिए बना हो.&amp;nbsp;
वेरिफिकेशन के लिए बैंक और पेमेंट कंपनियों के पास बायोमेट्रिक्स, पिन/पासवर्ड, बैंकिंग ऐप टोकन जैसे कई ऑप्शंस होंगे.&amp;nbsp;

अगर सिक्योरिटी सिस्टम में किसी भूल-चूक से ग्राहक को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जवाबदेही बैंकिंग और संबंधित संस्थानों की होगी.&amp;nbsp;
क्या होंगे इसके फायदे?

नए नियम के चलते मान लीजिए अगर किसी को आपके मोबाइल पर आए OTP के बारे में पता भी लग जाए, तो भी वह पेमेंट नहीं कर पाएगा क्योंकि उसके पास आपका फिंगरप्रिंट या दूसरा सिक्योरिटी लेवल नहीं होगा. पहले आप दुकान पर जाकर सीधे स्कैन कर पेमेंट कर देते थे, लेकिन अब PIN डालने के साथ आपसे फिंगरप्रिंट, डिजिटल कोड वगैरह मांगा जा सकता है.&amp;nbsp;
इससे सिम-स्वैप से भी सुरक्षा मिलेगी. कई बार हैकर्स आपके नाम से दूसरा सिम निकाल लेते हैं, लेकिन अब सिर्फ किसी के नाम से अपने पास सिम होना काफी नहीं होगा.
अब से अगर कोई आपके फोन से बड़ी रकम ट्रांजैक्शन करने की कोशिश करेगा, तो उससे सिस्टम अपने आप ही एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन मिलेगा.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>नौकरी की टेंशन छोड़िए! घर बैठे शुरू करें ये बिजनेस, कम लागत में होगी शानदार कमाई...</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नौकरी-की-टेंशन-छोड़िए-घर-बैठे-शुरू-करें-ये-बिजनेस-कम-लागत-में-होगी-शानदार-कमाई</link>
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        <description><![CDATA[ Organic Farming Business Ideas: बदलती जरूरतों और तेजी से विकसित हो रही नई टेक्नोलॉजी के दौर में सिर्फ नौकरी के भरोसे बने रहना एक मुश्किल भरा कदम हो सकता है. क्योंकि नौकरियों के मौके सीमित हैं और कमाई भी तय नहीं रहती. वहीं, लोगों की एक लंबी लाइन नौकरी की तलाश कर रही है.
ऐसे में कई लोग अब अपने स्तर पर कुछ शुरू करने की ओर बढ़ रहे हैं. छोटा सा बिजनेस भी अगर सही तरीके से किया जाए तो धीरे-धीरे अच्छी आमदनी देने लगता है. अगर आप भी कुछ खुद का शुरू करना चाहते हैं तो, खेती से जुड़े काम इन दिनों लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. जहां कम संसाधनों में भी कमाई के नए रास्ते बनते दिख रहे हैं. आइए जानते हैं, इस बारे में...
वर्मी-कम्पोस्ट का बिजनेस
वर्मी कम्पोस्ट एक तरह की जैविक खाद होती है, जिसे केंचुओं की मदद से तैयार किया जाता है. इस खाद का इस्तेमाल खेती में बढ़ रहा है. इसकी मांग लगातार बनी रहने की वजह से यह एक अच्छा कमाई का जरिया बन सकता है.
इस काम को शुरू करने के लिए ज्यादा जगह या बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती. वहीं सही तरीके से करने पर इससे पूरे साल आय भी मिल सकती है. इसलिए कम लागत में बिजनेस शुरू करने वालों के लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही है वर्मी-कम्पोस्ट की मांग
खेती में बढ़ रहे कीटनाशक के उपयोग के कारण अब बहुत से किसान जैविक या ऑर्गेनिक खेती की तरफ अपना कदम बढ़ रहे हैं. इसके पीछे कारण यह है कि, लोग ऑर्गेनिक फलों और सब्जियों के लिए ज्यादा पैसा देने को लिए तैयार हैं.&amp;nbsp;
जिससे किसानों को ज्यादा मुनाफा कमाने के अवसर मिल रहे हैं. जैविक खेती के लिए वर्मी कम्पोस्ट खाद की जरूरत होती है. जैसे-जैसे जैविक खेती की मांग बढ़ रही है, वैसे ही इसका बिजनेस भी रफ्तार पकड़ रहा है. किसान अपनी भाषा में वर्मी कम्पोस्ट को काला सोना भी कहते हैं. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
कम निवेश में बेहतर मुनाफा
इस काम को शुरू करने के लिए बहुत बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती. करीब 50 से 60 हजार रुपये में इसकी शुरुआत की जा सकती है. इसमें सबसे ज्यादा खर्च केंचुओं को खरीदने पर आता है.
जिनकी कीमत बाजार में लगभग 1,000 से 1,200 रुपये प्रति किलो होती है. खास बात यह है कि ये केंचुए तेजी से बढ़ते हैं और करीब 3 महीने में इनकी संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है. जिससे उत्पादन भी तेजी से बढ़ता है और कमाई के मौके बेहतर हो जाते हैं.&amp;nbsp;
अगर आपके पास थोड़ी सी जगह हो तो आप आसानी से इस बिजनेस की शुरूआत कर सकते हैं. हालांकि, काम चालू करने से पहले इस संबंध में जानकारी लेना और संभव हो तो ट्रेनिंग लेना सही कदम हो सकता है. इससे आपके नुकसान की संभावना कम हो जाएगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: बाजार को ऐसी लगी नजर! टॉप कंपनियों की मार्केट वैल्यू में बड़ी गिरावट, 1.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नौकरी, की, टेंशन, छोड़िए, घर, बैठे, शुरू, करें, ये, बिजनेस, कम, लागत, में, होगी, शानदार, कमाई...</media:keywords>
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        <title>बाजार को ऐसी लगी नजर! टॉप कंपनियों की मार्केट वैल्यू में बड़ी गिरावट, 1.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाजार-को-ऐसी-लगी-नजर-टॉप-कंपनियों-की-मार्केट-वैल्यू-में-बड़ी-गिरावट-175-लाख-करोड़-रुपये-का-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ Top Companies Market Cap Loss: पिछले सप्ताह शेयर बाजार में कमजोरी का असर साफ दिखा, जहां टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 7 की कुल मार्केट वैल्यू करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये घट गई. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ. इस दौरान बीएसई सेंसेक्स 949.74 अंक यानी 1.27 प्रतिशत गिरा, जबकि एनएसई निफ्टी भी 294.9 अंक नीचे आ गई.
बाजार में गिरावट के पीछे रुपये की कमजोरी और बढ़ती अस्थिरता को मुख्य वजह माना जा रहा है. हालांकि, बीच में अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से थोड़ी रिकवरी जरूर हुई थी. लेकिन शुक्रवार को फिर से बिकवाली बढ़ने से बाजार पर दोबारा से दबाव देखने को मिला है...
किन कंपनियों पर पड़ा ज्यादा असर
बीते सप्ताह हुई गिरावट से सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ और उसका मार्केट कैप करीब 89,720.3 करोड़ रुपये घटकर 18,24,515.62 करोड़ रुपये के स्तर पर &amp;nbsp;गया. इसके अलावा HDFC बैंक का मार्केट कैप 37,248.59 करोड़ घटकर 11,64,018.69 करोड़ और भारतीय स्टेट बैंक का 35,399.42 करोड़ गिरकर 9,41,569.15 करोड़ रह गया.
वहीं ICICI बैंक के मार्केट कैप में 8,121.76 करोड़ की कमी आई और यह 8,83,551.30 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. भारती एयरटेल का मार्केट कैप 2,480.42 करोड़ घटकर 10,50,413.33 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का 2,091.13 करोड़ कम होकर 4,87,540.19 करोड़ रुपये रह गया. वहीं टीसीएस को इसकी तुलना में कम नुकसान हुआ है. टीसीएस का मार्केट कैप 271.35 करोड़ रुपये घटकर 8,64,668.65 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.
वैल्यूएशन में टॉप कंपनियों की लिस्ट
पिछले हफ्ते देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर बनी रही. इसके बाद HDFC बैंक, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक और ICICI बैंक का नंबर रहा.
वहीं टॉप कंपनियों की सूची में टीसीएस, बजाज फाइनेंस, इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी शामिल रहे. जिन्होंने वैल्यूएशन के आधार पर अपनी जगह बनाए रखी है.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
यह भी पढ़ें: पैसे आते ही हो जाते हैं खर्च? इन आसान तरीकों से शुरू करें अपनी बचत की जर्नी, मनी मैनेजमेंट टिप्स आएंगे काम... ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बाजार, को, ऐसी, लगी, नजर, टॉप, कंपनियों, की, मार्केट, वैल्यू, में, बड़ी, गिरावट, 1.75, लाख, करोड़, रुपये, का, नुकसान</media:keywords>
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        <title>जॉब कट का खतरा! 600 कर्मचारियों पर गिर सकती है छंटनी की गाज... जानिए डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ KPMG UK layoffs: अकाउंटिंग फर्म KPMG UK में कर्मचारियों की छंटनी को लेकर खबरें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि कंपनी के ऑडिट और एडवाइजरी विभाग में काम करने वाले करीब 600 लोगों की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है. जिससे इन विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ हैं...
ऑडिट और एडवाइजरी टीम पर असर
ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के अंदर जारी एक मेमो में कर्मचारियों को संकेत दिया गया है कि छंटनी की संभावना है. अंतिम फैसला रेडंडेंसी कंसल्टेशन प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा.
मिली जानकारी के अनुसार ऑडिट डिविजन में करीब 7,100 कर्मचारी काम करते हैं. इसमें से लगभग 440 लोगों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. जिससे इस विभाग में चिंता का माहौल बना हुआ है. साथ ही एडवाइजरी विभाग के करीब 120 लोगों पर छंटनी का खतरा मंडरा रहा है. बैक ऑफिस स्टाफ और इकोनॉमिक्स टीम के सदस्य भी इस छंटनी से प्रभावित हो सकते हैं.&amp;nbsp;
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, फर्म में बेंच पर बैठे कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होना इस छंटनी की वजह हो सकती है. साथ ही नए प्रोजेक्ट्स का कम मिलना और पहले से चल रहे कुछ प्रोजेक्ट्स का खत्म होना या नुकसान में जाना इस छंटनी की वजह बताई जा रही है.&amp;nbsp;
बाजार हालात के चलते लिया जा रहा फैसला
KPMG UK के प्रवक्ता के मुताबिक, मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए ऑडिट डिवीजन के कुछ हिस्सों में कर्मचारियों की संख्या को संतुलित करना जरूरी हो गया है. उनका कहना है कि यह निर्णय सोच-समझकर लिया जा रहा है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रक्रिया का असर मुख्य रूप से असिस्टेंट मैनेजर और क्वालिफाइड अकाउंटेंट्स पर पड़ सकता है. अनुमान है कि ऑडिट विभाग के करीब 6 प्रतिशत कर्मचारी इससे प्रभावित हो सकते हैं.
यह भी पढ़ें: नौकरी की टेंशन छोड़िए! घर बैठे शुरू करें ये बिजनेस, कम लागत में होगी शानदार कमाई... ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>1 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव, हर बार होगा डबल सिक्योरिटी चेक; जानिए डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ UPI New Rules April 2026: 1 अप्रैल से डिजिटल भुगतान के तरीके में बदलाव होने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) ने इसकी तैयारी की हैं. नए नियम के अनुसार अब UPI, नेट बैंकिंग या मोबाइल वॉलेट से ट्रांजेक्शन करते समय केवल एक पिन या पासवर्ड काफी नहीं होगा.
हर पेमेंट के लिए दो चरणों में पहचान करना अनिवार्य कर दिया गया है. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ऑनलाइन लेन-देन पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बन जाएगा. साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी लगाम लगाने में मदद मिल सकेगी. आइए जानते हैं, आखिर यह बदलाव कैसे काम करने वाला है?
हर पेमेंट के साथ बदलेगा सिक्योरिटी कोड
अभी तक ज्यादातर लोग एक ही पिन का बार-बार इस्तेमाल करते थे, जिसे हैकर्स के लिए ट्रैक करना आसान हो जाता था. लेकिन नए नियम आने के बाद बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अब दो तरह की सिक्योरिटी देनी होगी.
जिसमें एक हर बार बदलने वाला यानी डायनेमिक विकल्प होगा. आसान भाषा में कहें तो, हर ट्रांजेक्शन पर नया कोड जैसे OTP जेनरेट होगा. साथ ही अब ग्राहक अपनी सुविधा के हिसाब से OTP + पिन, बायोमीट्रिक के साथ डिवाइस लिंक करना या टोकन बेस्ड ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन चुन सकेंगे. जिससे ऑनलाइन पेमेंट पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा.
धोखाधड़ी से बचाव में मिलेगी मदद
इस नए सिस्टम का सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा. इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और फिशिंग जैसे मामलों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी. अगर किसी तरह आपका पासवर्ड किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग भी जाए, तब भी वह बिना फिंगरप्रिंट या फिर हर बार आने वाले ओटीपी के बिना पैसे नहीं निकाल पाएगा.&amp;nbsp;
इसके अलावा ये सुरक्षा व्यवस्था विदेशी ट्रांजेक्शन पर भी लागू होगी. जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1 अक्टूबर से लागू करने की योजना है. जिससे बाहर होने वाले पेमेंट भी ज्यादा सुरक्षित हो जाएंगे.
यह भी पढ़ें: बिजनेस का शानदार आइडिया! घर से ही हर महीने हो सकती है अच्छी कमाई, जानिए स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिजनेस का शानदार आइडिया! घर से ही हर महीने हो सकती है अच्छी कमाई, जानिए स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बिजनेस-का-शानदार-आइडिया-घर-से-ही-हर-महीने-हो-सकती-है-अच्छी-कमाई-जानिए-स्टेप-बाय-स्टेप-प्रोसेस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बिजनेस-का-शानदार-आइडिया-घर-से-ही-हर-महीने-हो-सकती-है-अच्छी-कमाई-जानिए-स्टेप-बाय-स्टेप-प्रोसेस</guid>
        <description><![CDATA[ T Shirt Printing Business India: अगर आप कम पूंजी में कोई बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो टी-शर्ट प्रिंटिंग का काम एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसकी शुरुआत आप खुद के घर से कर सकते हैं. कई लोग बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन सही आइडिया या ज्यादा निवेश की जरूरत के कारण आगे नहीं बढ़ पाते.
ऐसे में यह काम कम लागत में भी शुरू किया जा सकता है. साथ ही सही प्लानिंग और थोड़ी क्रिएटिविटी के साथ टी-शर्ट प्रिंटिंग का बिजनेस धीरे-धीरे एक मजबूत कमाई का जरिया बन सकता है. आइए जानते हैं, इस बारे में...
प्रिंटिंग टी-शर्ट की बढ़ रही मांग
कोई बड़ा इवेंट हो या क्रिकेट-फुटबॉल का मैच हर कोई अपनी पसंदीदा टीम या फिर प्लेयर की जर्सी नंबर वाली टी-शर्ट पहनना पसंद करता है. छोटी-छोटी दुकानों से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियां तक अपने नाम और लोगो डिजाइन का टी-शर्ट बनवाती है. जिससे उनकी कंपनी के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोग जान सके.&amp;nbsp;
इसी सोच के बीच प्रिंटिंग टी-शर्ट का बिजनेस अपनी जगह बना रहा है. अगर आप छोटे शहर में रहते हैं तो भी यह बिजनेस आपके लिए फायदे का सौदा बन सकता हैं. साथ ही किसी फैमिली फंक्शन में भी लोग बड़ी संख्या में अपनी पसंद की टी- शर्ट बनवाते हैं. यानी कि अगर आप थोड़ी सी मेहनत करें तो यह बिजनेस जल्द ही अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है.&amp;nbsp;
जरूरी सामान के साथ घर से कर सकते है शुरुआत&amp;nbsp;
टी-शर्ट प्रिंटिंग का काम शुरू करने के लिए कुछ बेसिक चीजों की जरूरत होती है. जैसे प्लेन टी-शर्ट, टेफलॉन शीट, सब्लिमेशन टेप, सब्लिमेशन प्रिंटर और इंक. सबसे अच्छी बात यह है कि इस बिजनेस की शुरुआत आप घर से ही कर सकते हैं.
इसके लिए अलग से दुकान या ऑफिस लेने की जरूरत नहीं होती. बल्कि घर के एक कमरे में ही पूरा सेटअप लगाया जा सकता है. वहीं उसी जगह पर आप अपना रॉ मटेरियल भी रख सकते हैं और प्रिंटिंग का काम आसानी से संभाल सकते हैं.
शुरुआत में अगर ऑर्डर कम हो तो आप खुद से ही सारा काम कर सकते हैं. हालांकि, ऑर्डर की संख्या बढ़ने पर आपको दूसरे लोगों को मदद के लिए रखना होगा.&amp;nbsp;
कम लागत में शुरुआत और मुनाफे की संभावना
टी-शर्ट प्रिंटिंग का बिजनेस आप करीब 50,000 से 70,000 रुपये के निवेश के साथ शुरू कर सकते हैं. हालांकि बड़े सेटअप के लिए आपको ज्यादा पूंजी की जरूरत होगी. आप अपने घर के पास के बड़े शहर से जरूरी सामान और मशीनें मंगवा सकते हैं.&amp;nbsp;
मुनाफा बढ़ाने के लिए टी-शर्ट्स को थोक में खरीदना फायदेमंद रहता है. जहां एक टी-शर्ट आपको लगभग 80 से 100 रुपये में मिल सकती है. इसी टी-शर्ट को प्रिंटिंग के बाद आप बाजार में 150 से 300 रुपये तक में बेच सकते हैं. अगर आपका यह बिजनेस लोकल मार्केट में अपनी जगह बना लेता हैं तो आप हर महीने अच्छी कमाई कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अडानी डिफेंस से भारतीय सेना को मिला ‘प्रहार’ LMG का तोहफा, 2000 यूनिट की डिलीवरी से बढ़ी ताकत; जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Prahar LMG Adani Defence: भारतीय सेना के लिए शनिवार का दिन बेहद खास रहा. आज &amp;lsquo;प्रहार&amp;rsquo; 7.62 मिमी लाइट मशीन गन (एलएमजी) की 2,000 यूनिट सेना को सौंपी गई हैं. जो देश में ही तैयार की गई हैं.
यह आपूर्ति अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने की है, जो अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड का हिस्सा है. इस कदम को छोटे हथियार निर्माण के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. जिससे स्वदेशी रक्षा क्षमता को और मजबूती मिली है. आइए जानते हैं, इस विषय में विस्तार से...
कहां बनाई जा रही है प्रहार?
प्रहार एलएमजी का निर्माण मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की स्मॉल आर्म्स फैसिलिटी में किया जा रहा है. जिसे निजी क्षेत्र की देश की पहली पूरी तरह इंटीग्रेटेड यूनिट माना जाता है. इस पहल से विदेशों से हथियारों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
करीब 100 एकड़ में फैली इस यूनिट में हथियार निर्माण से जुड़ी लगभग सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं. यहां बैरल, बोल्ट कैरियर और रिसीवर बनाने से लेकर एडवांस सीएनसी मशीनिंग, रोबोटिक्स, सरफेस ट्रीटमेंट और सटीक माप की व्यवस्था है. इसके अलावा मेटलर्जी लैब और 25 मीटर लंबी अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. जो इसे एक आधुनिक निर्माण यूनिट बनाती हैं.
आधुनिक फीचर्स से लैस प्रहार एलएमजी
&amp;lsquo;प्रहार&amp;rsquo; लाइट मशीन गन की डिजाइन की बात करें तो, यह ओपन बोल्ट सिस्टम पर काम करती है और इसमें गैस पिस्टन व रोटेटिंग बोल्ट लॉकिंग जैसी तकनीक दी गई है. इसमें सेफ, सेमी-ऑटोमैटिक और फुली ऑटोमैटिक तीनों मोड में फायरिंग की सुविधा मिलती है. साथ ही अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर काम करने के लिए गैस रेगुलेटर भी दिया गया है.
यह 120 राउंड के असॉल्ट ड्रम या बेल्ट चेन के जरिए फीड होती है. इसके अलावा इसमें मजबूत बायपॉड, आसानी से खोलकर मेंटेनेंस करने की सुविधा, एडजस्ट होने वाला बट स्टॉक और चीक रेस्ट जैसे फीचर्स भी मौजूद हैं. सुरक्षा के लिहाज से इसमें अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स और बैकअप आयरन साइट्स भी दिए गए हैं, जो इसे और ज्यादा उपयोगी बनाते हैं.
समय से पहले हुई डिलीवरी
पहली खेप की सप्लाई तय समय से काफी पहले पूरी कर ली गई और इसे पूरा होने में सिर्फ 7 महीने लगे है. जो तय समय से करीब 11 महीने पहले है. इतना ही नहीं, प्रोडक्शन का पहला मॉडल भी महज 6 महीने में तैयार हो गया. जबकि इसके लिए 18 महीने का समय तय किया गया था.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>ITR&amp;U filing: 31 मार्च है आखिरी मौका! क्या होता है अपडेटेड रिटर्न? कौन इसे फाइल कर सकता है?</title>
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        <description><![CDATA[ ITR-U filing before 31st March: अगर आप आयकर विभाग को किसी तरह से अपनी इनकम की जानकारी देना भूल गए हैं या आपने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में कोई गलती कर दी है, तो उसे अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) के जरिए ठीक करने का ऑप्शन अभी भी आपके पास है.
31 मार्च की डेडलाइन तक आपको ये काम निपटा लेना है इसलिए जो टैक्सपेयर अपने पुराने रिटर्न को अपडेट करना चाहते हैं, उन्हें अब और देर नहीं करनी चाहिए. नहीं तो आपको पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को इनकम-टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की इजाजत देता है ताकि छूटी हुई इनकम की जानकारी देने, गलतियों को सुधारने का उन्हें एक आखिरी मौका मिल सके.&amp;nbsp;
ITR-U देर से फाइल करने के नुकसान
टैक्सपेयर्स संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने के 48 महीनों के अंदर ITR-U फाइल कर सकते हैं. इसका मतलब है कि असेसमेंट ईयर 2021-22 के लिए अपडेटेड रिटर्न सिर्फ 31 मार्च, 2026 तक ही फाइल किया जा सकता है. इस तारीख के बाद उस साल का रिटर्न अपडेट करने का विकल्प उपलब्ध नहीं रहेगा. बाद के सालों के लिए, यह विंडो ज्यादा समय तक खुली रहती है. उदाहरण के लिए, AY 2025-26 के लिए अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च, 2030 तक फाइल किया जा सकता है. हालांकि, हर साल 31 मार्च एक अहम तारीख बनी रहती है, क्योंकि रिटर्न फाइल करने में जितनी ज्यादा देर होती है, चुकाए जाने वाले अतिरिक्त टैक्स की रकम उतनी ही बढ़ जाती है.
अतिरिक्त टैक्स स्लैब (Additional Tax Slab)

12 महीने के अंदर- कुल टैक्स और अतिरिक्त 25 परसेंट ब्याज का भुगतान
12 से 24 महीने के बीच- कुल टैक्स और ब्याज का 50 परसेंट अतिरिक्त भुगतान
24 से 36 महीने के बीच- कुल टैक्स और ब्याज का 60 परसेंट भुगतान
36 से 48 महीने के बीच- कुल टैक्स और ब्याज का 70 परसेंट भुगतान
अगर आपने मूल रिटर्न ही फाइल नहीं किया है, तो धारा 234F के तहत 5000 (आय 5 लाख से अधिक होने पर) या 1000 (आय 5 लाख तक होने पर) रुपये की लेट फीस देनी होगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

ITR-U फाइल करने के फायदे
ITR-U फाइल करने के कई फायदे हैं. इसके जरिए आप अपनी छूटी हुई आय (बैंक ब्याज, डिविडेंड) या गलत टैक्स रेट जैसी गलतियों को सुधार सकते हैं. आयकर विभाग से नोटिस मिले इससे पहले ही आप अपनी गलतियां सुधारकर सेफ जोन में बने रहते हैं. हालांकि, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ITR-U का इस्तेमाल टैक्स रिफंड क्लेम करने या रिफंड अमाउंट बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रुपये में ऐतिहासिक गिरावट! 10 साल में सबसे बड़ी कमजोरी, जानिए आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल...</title>
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        <description><![CDATA[ Indian Rupee Fall: भारतीय करेंसी में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार के कारोबारी दिन रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ. रुपया पहली बार 94 के पार चला गया. दिन के दौरान यह गिरकर 94.84 तक पहुंच गया था, जबकि कारोबार के अंत में 94.81 पर बंद हुआ.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ईरान में बढ़ते तनाव का असर रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है. आंकड़ों की बात करें तो, इस वित्त वर्ष में अब तक रुपया करीब 11 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है. भारतीय करेंसी का यह हाल पिछले एक दशक से ज्यादा समय में किसी भी वित्त वर्ष के मुकाबले सबसे कमजोर माना जा रहा है. आइए जानते हैं, इस विषय में...
रुपये में गिरावट की वजह
1. रुपये में हो रही गिरावट के पीछे विशेषज्ञ कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे बदलाव को बता रहे हैं. विषय की समझ रखने वाले जानकारों का कहना है कि, आने वाले कई सप्ताहों तक कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रह सकती है. जिससे देश में महंगाई का खतरा बढ़ने वाला है. जिसका सीधा असर रुपये पर देखने को मिल रहा है.&amp;nbsp;
2. वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेशक भारतीय घरेलू बाजार से लगातार दूरी बना रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने आखिरी एक महीने में करीब 13 अरब डॉलर की निकासी भारतीय शेयर बाजार से की है. जिसकी वजह से भी रूपया लगातार टूट रहा है.&amp;nbsp;
3. मिडिल ईस्ट में पैदा हुए तनाव से भी रुपया पर दबाव बना हुआ है. युद्ध की शुरूआत से अब तक रुपया करीब 4 फीसदी तक फिसल गया है. जारी अनिश्चित भरे माहौल के बीच रुपये की इस गिरावट ने निवेशकों का भरोसा डगमगाने का काम किया है. &amp;nbsp;
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल?
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब तक ईरान-इजरायल के बीच जारी यह युद्ध रुक नहीं जाता, तक तक रुपये में बड़ी रिकवरी की उम्मीद कम है. हालांकि, सरकार अपने स्तर से रुपये को सपोर्ट देने में लगी हुई है.&amp;nbsp;
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला लिया है. जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, इस कदम का असर सरकारी खजाने पर पड़ सकता है और सरकार के राजस्व में कमी आने की संभावना होगी. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 17:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रुपये, में, ऐतिहासिक, गिरावट, साल, में, सबसे, बड़ी, कमजोरी, जानिए, आगे, कैसी, रहेगी, रुपये, की, चाल...</media:keywords>
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        <title>क्या क्रेडिट कार्ड से भी भरा जा सकता है इनकम टैक्स? जानिए क्या है पूरा प्रॉसेस?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-क्रेडिट-कार्ड-से-भी-भरा-जा-सकता-है-इनकम-टैक्स-जानिए-क्या-है-पूरा-प्रॉसेस</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/क्या-क्रेडिट-कार्ड-से-भी-भरा-जा-सकता-है-इनकम-टैक्स-जानिए-क्या-है-पूरा-प्रॉसेस</guid>
        <description><![CDATA[ Income Tax Bill: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जाती है, टैक्सपेयर्स में हड़बड़ी मच जाती है. अगर टैक्स भरने की समयसीमा नजदीक है और आपके पास पैसों का जुगाड़ नहीं है, तो आप क्रेडिट कार्ड का भी इस्तेमाल की सकते हैं. यह बात बहुत कम लोगों को ही पता है कि नेट बैंकिंग, UPI या डेबिट कार्ड जैसे ऑप्शंस से भी इनकम टैक्स का पेमेंट किया जा सकता है.&amp;nbsp;
BankBazaar.com के CEO अधिल शेट्टी ने The Economic Times से बात करते हुए कहा, &quot;इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को आपके टैक्स का पेमेंट करने के लिए क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने से कोई दिक्कत नहीं है. पेमेंट गेटवे आपको सभी डिजिटल पेमेंट का ऑप्शन देता है, जिनमें UPI, नेट बैंकिंग, और डेबिट और क्रेडिट कार्ड शामिल हैं.&quot;
क्या है इसके फायदे?

अगर टैक्स भरने की डेडलाइन सामने है और पैसे नहीं है, तो यह आपके लिए काम का साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
क्रेडिट कार्ड आपको 30-45 दिनों की ब्याज-मुक्त अवधि प्रदान करता है, जिससे आप भुगतान को अगले बिलिंग साइकिल तक पूरा कर सके. हालांकि, ब्याज-मुक्त अवधि का लाभ तभी मिलता है, जब आप ड्यू डेट पर पूरा बिल चुकाते हैं.&amp;nbsp;
HDFC BizBlack जैसे कुछ प्रीमियम या बिजनेस कार्ड टैक्स के भुगतान पर रिवाॅर्ड पॉइंट्स या कैश देते हैं.
बड़ा टैक्स अमाउंट भरने पर आपको कार्ड का सालाना खर्च का Milestone Spend पूरा करने में मदद मिलती है, जिससे एनुअल फीस माफ हो सकती है.

जानें इसके नुकसान

क्रेडिट कार्ड से इनकम टैक्स के भुगतान पर आमतौर पर 0.72-1.25 परसेंट तक प्रोसेसिंग चार्ज लगता है, जिस पर 18 परसेंट जीएसटी भी लागू होता है.&amp;nbsp;
समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुकाने पर सालाना 36-42 परसेंट का भारी ब्याज देना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
भारी टैक्स पेमेंट से आपका क्रेडिटयूटिलाइजेशन बढ़ सकता है, जिससे क्रेडिट स्कोर में गिरावट आ सकती है. मान लीजिए कि आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 200000 है और आप 150000 रुपये का इनकम टैक्स भरते हैं, तो आपका CUR 75 परसेंट हो जाता है. CUR 30 परसेंट से ऊपर जाता है, तो क्रेडिट ब्यूरो इसे जोखिम के तौर पर देखता है. उन्हें लगता है कि आप अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए क्रेडिट कार्ड पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं.&amp;nbsp;
1 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित नए नियम के तहत, अगर आपका सालाना क्रेडिट कार्ड बिल 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आयकर विभाग इसकी जांच कर सकता है.&amp;nbsp;

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31st March Deadline: 2-3 दिन में निपटा लें ये काम, 31 मार्च तक का है समय; देखें लिस्ट&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 17:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, क्रेडिट, कार्ड, से, भी, भरा, जा, सकता, है, इनकम, टैक्स, जानिए, क्या, है, पूरा, प्रॉसेस</media:keywords>
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        <title>पेपर वाला नहीं, अब आएगा E&amp;Cheque! RBI ने &amp;apos;पेमेंट्स विजन 2028&amp;apos; डॉक्यूमेंट में रखा प्रस्ताव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पेपर-वाला-नहीं-अब-आएगा-e-cheque-rbi-ने-पेमेंट्स-विजन-2028-डॉक्यूमेंट-में-रखा-प्रस्ताव</link>
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        <description><![CDATA[ E-cheques: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 27 मार्च 2026 को अपना &#039;पेमेंट्स विजन 2028&#039; डॉक्यूमेंट जारी किया. इसमें पारंपरिक कागज वाले चेक की जगह ई-चेक (Electronic Cheques) पेश करने का प्रस्ताव है. इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को और आसान, तेज और सिक्योर बनाना है.&amp;nbsp;
रिजर्व बैंक ने कहा कि वह ई-चेक शुरू करने की संभावनाओं की जांच करेगा ताकि कागजी इंस्ट्रूमेंट्स के फायदों को डिजिटल पेमेंट्स की रफ्तार और भरोसे के साथ जोड़ा जा सके. RBI ने कहा, &#039;&#039;कागजी इंस्ट्रूमेंट्स के अनोखे फायदों और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स की रफ्तार और भरोसे का लाभ उठाने और नए बिजनेस इस्तेमाल के मामलों को पूरा करने के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक चेक शुरू करने की संभावना की जांच की जाएगी.&#039;&#039;
RBI का यह भी है प्लान
RBI का प्लान आगे आने वाले समय में पारंपरिक चेक की विशेषताओं को डिजिटल तकनीक के साथ मिलाकर &#039;ई-चेक&#039; लाने की योजना बना रहा है. इसका मकसद चेक भुगतान में तेजी लाना और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम करना है. &amp;nbsp;RBI ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म जैसी एंटिटीज को शामिल करने के लिए रेगुलेटरी दायरे को बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है, जो डिजिटल ट्रांजैक्शन को आसान बनाने में बढ़ती भूमिका निभा रही हैं.
डॉक्यूमेंट में कहा गया है, &quot;इसके अलावा, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां ले रहे हैं, जिनका पेमेंट इकोसिस्टम के ठीक से काम करने पर असर पड़ सकता है. इन पहलुओं की विस्तार से जांच की जाएगी और अगर जरूरत पड़ी, तो ऐसी एंटिटीज को कवर करने के लिए सीधे रेगुलेशन का दायरा बढ़ाया जाएगा.&quot; ऐसा करने के पीछे केंद्रीय बैंक का मकसद यह सुनिश्चित करना हैकि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल सभी संस्थाएं जवाबदेह हो.&amp;nbsp;
डिजिटल फ्रॉड पर लगाम&amp;nbsp;
विजन डॉक्यूमेंट में यह प्रस्ताव भी है कि यूजर्स को डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग तरीकों से होने वाले ट्रांजैक्शन को चालू या बंद करने की सुविधा दी जाए, ठीक वैसे ही जैसे कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए कंट्रोल उपलब्ध होते हैं. जैसे अभी डेबिट या क्रेडिट काड्र को ऐप के जरिए चालू या बंद किया जा सकता है. वैसी ही सुविधा UPI, नेट बैंकिंग जैसे सभी डिजिटल भुगतान मोड के लिए उपलब्ध कराई जाए. इससे ग्राहकों का अपने लेनदेन पर नियंत्रण बढ़ेगा और सुरक्षा भी बढ़ेगी.
धोखाधड़ी के जोखिमों से निपटने के लिए RBI एक &#039;साझा जिम्मेदारी फ्रेमवर्क&#039; पर विचार कर रहा है, जिसके तहत अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन के मामलों में जारी करने वाला बैंक और लाभार्थी बैंक, दोनों ही जिम्मेदारी साझा करेंगे. यानी कि अब डिजिटल फ्रॉड के मामले में ग्राहक का बैंक अकेला जिम्मेदार नहीं होगा.
अन्य पहलों में &#039;आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम&#039; (AePS) में व्हाइट-लेबल समाधानों की खोज करना, &#039;ट्रेड रिसीवेबल्स ई-डिस्काउंटिंग सिस्टम&#039; (TReDS) में इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करना और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के माइग्रेशन को आसान बनाने के लिए &#039;पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस&#039; शुरू करना शामिल है.
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 17:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>गिरते बाजार में इस डिफेंस स्टॉक पर दांव! गोल्डमैन सैक्स ने दी Buy रेटिंग, 40% तक रिटर्न की उम्मीद...</title>
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        <description><![CDATA[ Azad Engineering Share Price Target: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर भारतीय घरेलू बाजार में देखने को मिल रहा है. शुक्रवार के कारोबारी दिन शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी. प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 लाल निशान पर फिसल गए थे.
अनिश्चितता भरे माहौल के बीच ब्रोकरेज हाउस कुछ खास स्टॉक्स पर ध्यान बनाए हुए हैं. फिलहाल वे सेक्टर आधारित रणनीति अपनाते हुए डिफेंस सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में निवेश की सलाह दे रहे हैं. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने आजाद इंजीनियरिंग लिमिटेड के शेयरों को अपनी पसंदीदा लिस्ट में जगह दी है. आइए जानते हैं, इस बारे में विस्तार से...
ब्रोकरेज फर्म ने दी बॉय रेटिंग
ब्रोकरेज फ्रर्म गोल्डमैन सैक्स ने आजाद इंजीनियरिंग के स्टॉक पर अपना सकारात्मक नजरिया बनाए रखते हुए &amp;lsquo;बाय&amp;rsquo; रेटिंग दी है. फर्म ने इसके लिए 2,200 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 40 फीसदी तक की बढ़त की संभावना दिखाता है.
मजबूत ऑर्डर बुक से भरोसा कायम
ब्रोकरेज फर्म ने आजाद इंजीनियरिंग पर अपना पॉजिटिव रुख मजबूत ऑर्डर बुक और लंबे समय में बेहतर ग्रोथ की संभावनाओं को देखते हुए रखा है. कंपनी के मार्जिन प्रोफाइल में सुधार की उम्मीद भी इस भरोसे को और मजबूत कर रही है.
हाल ही में कंपनी ने मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज के साथ एक समझौता किया है. जिसमें कंपनी को एकमात्र सप्लायर के रूप में चुना गया है. यह डील कंपनी के लिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे ग्लोबल सप्लाई चेन में उसकी पकड़ और मजबूत होगी.
शेयर बाजार में कंपनी का प्रदर्शन
बीएसई पर शुक्रवार, 27 मार्च के कारोबारी दिन कंपनी शेयरों में तेजी देखने को मिली थी. कंपनी शेयर 0.89 प्रतिशत या 13.05 रुपये की उछाल के साथ 1484.40 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था. दिन का इंट्रा डे हाई 1600 रुपये था. कंपनी के मार्केट कैप की बात करें तो, यह 9,586.51 करोड़ रुपये है.&amp;nbsp;
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
यह भी पढ़ें: एयरपोर्ट के साथ बदली जेवर के रियल एस्टेट की तस्वीर, कीमतें आसमान छूने को तैयार; जानें डिटेल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 17:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एयरपोर्ट के साथ बदली जेवर के रियल एस्टेट की तस्वीर, कीमतें आसमान छूने को तैयार; जानें डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Noida International Airport Jewar Impact Real Estate: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद जेवर का रियल एस्टेट बाजार तेजी से उभर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया. परियोजना के पहले चरण में करीब 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है. जिसमें हर साल 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी.
पूरी तरह विकसित होने के बाद इस एयरपोर्ट की कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों की होगी. एयरपोर्ट पूरी तरह से बन जाने के बाद भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होने की बात कही जा रही है. यह छह रनवे वाला एयरपोर्ट 7,200 एकड़ में फैला होगा. आइए जानते हैं, इस बारे में विस्तार से...&amp;nbsp;
लोकेशन से बढ़ेगी जेवर एयरपोर्ट की अहमियत
उत्तर प्रदेश में स्थित जेवर एयरपोर्ट अपनी रणनीतिक लोकेशन के चलते खास महत्व रखता है. खासकर आगरा के नजदीक होने के कारण, जहां ताजमहल मौजूद है. एयरपोर्ट के आसपास करीब 174 एकड़ में कार्गो और वेयरहाउसिंग जोन विकसित करने की योजना है.
इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स हब के निर्माण के लिए अडानी ग्रुप समेत कई निजी कंपनियां बोली लगा रही हैं. ऐसे में एयरपोर्ट के आस-पास रियल एस्टेट में तेजी की बात को नकारा नहीं जा सकता है.&amp;nbsp;
बडे़ खिलाड़ियों की बढ़ती मौजूदगी
इस इलाके में प्रस्तावित बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के चलते नए एयरपोर्ट पर लोगों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है. ईटी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इनमें फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर यूनिट, सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब और केबल बनाने वाली हैवेल्स इंडिया लिमिटेड के नए कारखाने शामिल हैं.&amp;nbsp;
जिससे पूरे इलाके को नए रफ्तार मिलने की उम्मीद की जा रही है. बड़ी कंपनियों के कारखाने बनने से लोगों के लिए नई रोजगार के रास्ते भी खुल सकते हैं. जिससे एयरपोर्ट के आस-पास के इलाके में जमीन, घरों और दूसरे प्रोजेक्ट्स की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता हैं.&amp;nbsp;
इंफ्रास्ट्रक्चर और मांग से रियल एस्टेट में जबरदस्त उछाल
पिछले छह सालों में नोएडा के कुछ माइक्रो-मार्केट्स में प्रॉपर्टी ने करीब पांच गुना तक रिटर्न दिया है. InvestoXpert Advisors के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेसवे एनसीआर का सबसे मजबूत रियल एस्टेट कॉरिडोर बनकर उभरा है. यहां 2020 से 2025 के बीच फ्लैट्स की कीमतों में 158 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है.
आंकड़ों के अनुसार यह 3,950 रुपये से बढ़कर 10,200 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई. वहीं प्लॉट की कीमतों में 536 फीसदी का उछाल देखा गया है. जो 1,650 रुपये से बढ़कर 10,500 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है.
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 17:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>ईरान वॉर के बीच भारत उठाने जा रहा ऐसा कदम, भर जाएगा गैस भंडार, बस एक इजाजत की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ India Russia LNG Deal: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है. चूंकि दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. ऐसे हालात में भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. भारत के इस कदम को जानकर जहां एक तरफ चीन-पाकिस्तान हैरान होगा तो वहीं दूसरी ओर भारत का एलएनजी भंडार भर सकता है और किल्लत दूर हो सकती है.
दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका से रूस से खरीद पर छूट मांगी है. अगर यह छूट मिलती है, तो इससे देश में गैस आपूर्ति की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है.
ऊर्जा संकट के बीच एक्शन में सरकार
सूत्रों के अनुसार, रूस से LNG खरीद को लेकर फिर से बातचीत शुरू हो चुकी है. यूक्रेन संघर्ष के बाद जिस आयात पर रोक लगाई गई थी, अब ऊर्जा संकट को देखते हुए उसे दोबारा शुरू करने पर विचार हो रहा है. इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने भी संकेत दिए थे कि भारत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है. वहीं, एलपीजी आयात जो घरेलू रसोई गैस के लिए अहम है, रूस से जारी रहेगा, क्योंकि इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
बताया जा रहा है कि अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो एक हफ्ते के भीतर समझौते पर मुहर लग सकती है. हालांकि, इस कदम के साथ पश्चिमी देशों के संभावित प्रतिबंधों का जोखिम भी बना रहेगा.
जल्द खरीद पर लग सकती है मुहर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति को और आक्रामक बना दिया है. खबरों के मुताबिक, सरकार ने घरेलू ऊर्जा आयातकों से कहा है कि वे रूस से एलएनजी खरीद के लिए तैयार रहें. इसके लिए अमेरिका प्रशासन के साथ बातचीत भी शुरू कर दी गई है, ताकि प्रतिबंधों में जरूरी छूट हासिल की जा सके.
दरअसल, Middle East में बढ़ते तनाव और आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए भारत वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से निर्भरता बढ़ा रहा है. यही वजह है कि रूस से कच्चे तेल की खरीद भी बढ़ाई गई है. केप्लर के अनुमान के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने करीब 50 से 60 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है.
अमेरिका की ओर से भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने में छूट देने का उद्देश्य भी वैश्विक बाजार को स्थिर रखना बताया गया है. इससे एक तरफ भारत को ऊर्जा सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है. यानी मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भारत &amp;ldquo;मल्टी-सोर्स एनर्जी स्ट्रेटेजी&amp;rdquo; अपनाते हुए अलग-अलग देशों से आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है, ताकि घरेलू बाजार में किसी भी तरह की कमी या कीमतों में बेकाबू बढ़ोतरी से बचा जा सके.
ये भी पढ़ें: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक्शन में सरकार, राज्यों को 20% ज्यादा LPG आवंटन, क्या है इसके मायने ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 05:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ईरान, वॉर, के, बीच, भारत, उठाने, जा, रहा, ऐसा, कदम, भर, जाएगा, गैस, भंडार, बस, एक, इजाजत, की, जरूरत</media:keywords>
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        <title>टीवी&amp;एसी से वाशिंग मशीन तक… ईरान वॉर की दोहरी मार, 10&amp;15% महंगा हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स सामान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टीवी-एसी-से-वाशिंग-मशीन-तक-ईरान-वॉर-की-दोहरी-मार-10-15-महंगा-हुआ-इलेक्ट्रॉनिक्स-सामान</link>
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        <description><![CDATA[ Electronic Goods Price Rise: गैस सिलेंडर की किल्लत से लेकर अब घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स तक पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के झटके आम आदमी की जिंदगी को हर मोर्चे पर झकझोर रहे हैं. एबीपी न्यूज की टीम ने इस बार राजधानी दिल्ली में स्थित एशिया की सबसे पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार ओल्ड लाजपत राय मार्केट में जाकर जमीनी हकीकत टटोली. यहां टीवी से लेकर वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर तक के दाम अब अचानक से आसमान छू रहे हैं.
बाजार के अध्यक्ष संजय नागपाल ने एबीपी न्यूज से बातचीत में साफ कहा कि, &amp;ldquo;युद्ध के साइड इफेक्ट्स सिर्फ युद्ध में शामिल देशों तक सीमित नहीं रह गए है. हम जैसे तटस्थ देशों पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है. हमारी इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में सबसे बड़ी जरूरत चिपसेट की होती है, जो अभी भी इंपोर्ट होती है. लेकिन इस युद्ध के चलते एयर और सी शिपमेंट दोनों होल्ड पर हो चुके हैं. यहां फैक्टरियां कच्चे माल की किल्लत से अब जूझ रही हैं.&amp;rdquo;
आसमान छू रहे इलैक्ट्रोनिक्स की कीमत
नागपाल ने आगे बताया, &amp;ldquo;यहां इस मार्केट में &amp;lsquo;मेड इन इंडिया&amp;rsquo; प्रोडक्ट्स भी बिक रहे हैं, लेकिन उन प्रोडक्ट्स के रॉ मटेरियल की कमी से अब इलेक्ट्रॉनिक गुड्स में 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. चाहे वो एलईडी टीवी हो, ऑडियो सिस्टम, वॉशिंग मशीन, फ्रिज या फिर एसी &amp;nbsp;हर चीज पर असर पड़ा है और अभी तो ये सिर्फ शुरुआत है. असली झटका 1 अप्रैल के बाद आएगा आम जनता पर.&amp;rdquo;
नागपाल ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि, &amp;ldquo;मेरा माल अगर चीन, ताइवान या दुबई में पड़ा है तो उसे लाने का खर्चा पहले 2 लाख रुपये कंटेनर आता था जो अब 3 लाख रुपये में आ रहा है. इसकी प्रभावी लागत सीधे जो सामान आ रहा है उस पर पड़ रही है. सबसे दर्द की बात ये है कि हमारा मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट पूरी तरह से ठप हो चुका है. वहां के कस्टमर ही नहीं हैं. वहां बाजार बंद पड़े हैं और इलैक्ट्रिक इंडस्ट्री का करीब 4.5 बिलियन डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक सामान रुका पड़ा है.&amp;rdquo;
32 इंच टीवी 5700 से बढ़कर 6400, 65 इंच 28 हजार से 32 हजार
इसी मुद्दे पर एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए एक दुकानदार अरुण तुली ने बताया, &amp;ldquo;हमारे पास 24 इंच से लेकर 100 इंच तक के टीवी हैं और हर साइज के टीवी के दाम अब बढ़ गए हैं. अभी तो युद्ध का असर और बढ़ेगा. प्लास्टिक के दाने और कॉपर के भाव भी आसमान छू रहे हैं, जिसकी वजह से एयर कंडीशनर तो और भी महंगे हो गए हैं. अगर युद्ध लंबा चला तो अभी 10-15 प्रतिशत की और बढ़ोतरी होने उम्मीद हैं.&quot;
बाजार के वाइस प्रेसिडेंट सुरेंद्र आडवाणी ने कहा, &amp;ldquo;हमारे कंटेनर अब युद्ध क्षेत्र से बड़ी मुश्किल से घूम-घूम कर आ रहे हैं. ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ गया है. पीछे से आने वाला माल महंगा पड़ रहा है. 65 इंच का टीवी जो 28 हजार में बिकता था, अब 32 हजार का हो गया है. आधे से ज्यादा ग्राहक दाम सुनकर वापस लौट जाते हैं. सिर्फ पुराने विश्वास वाले कस्टमर ही ले जा रहे हैं.&amp;rdquo;
जेब पर दोहरी मार!
आडवाणी ने आगे ये भी बताया कि, &amp;ldquo;मैन्युफैक्चरर्स हमें बता रहे हैं अभी तो देखते जाओ, आगे तो किसी भी कीमत पर माल नहीं मिलेगा.&amp;rdquo; ग्राहक बोले पहले गैस महंगी, अब टीवी भी&amp;hellip; होटल में खाना खा रहे हैं.
एलईडी टीवी खरीदने आए एक ग्राहक ने एबीपी न्यूज को बताया, &amp;ldquo;पहले 6500 रुपये में टीवी ले गया था. अब दुकानदार 6800 रुपये बता रहा है बिना वारंटी के. वारंटी वाला साढ़े सात हजार का है. कह रहे हैं पीछे से माल महंगा आ रहा है. हर जगह रेट बढ़े हुए हैं. हम कैसे खरीदें? बहुत परेशानी हो रही है. पहले गैस महंगी हुई, अब धीरे-धीरे हर चीज महंगी हो रही है और मैं पिछले एक हफ्ते से होटल में खाना खा रहा हूं क्योंकि घर के लिए सिलेंडर नहीं मिल रहा.&amp;rdquo;
बाजार में घूमने पर साफ नजर आ रहा है कि ग्राहक अब सिर्फ जरूरी सामान देख रहे हैं. कई दुकानों पर चर्चा का केंद्र यही है कि युद्ध कब थमेगा और कब सामान्य स्थिति लौटेगी. फिलहाल तो आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है घरेलू गैस से लेकर घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स तक.
ये भी पढ़ें: ईरान वॉर के बीच भारत उठाने जा रहा ऐसा कदम, भर जाएगा गैस भंडार, बस एक इजाजत की जरूरत ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 05:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच 200 डॉलर तक पहुंच सकता है कच्चा तेल, नई वॉर्निंग से वैश्विक बाजार में हड़कंप</title>
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        <description><![CDATA[ Crude Oil Price Jumps: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है और अब तेल की कीमतों को लेकर बेहद गंभीर चेतावनियां सामने आ रही हैं. Macquarie Group के विश्लेषकों का कहना है कि हालात को अभी कमतर आंका जा रहा है. अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो क्रूड ऑयल 150 डॉलर ही नहीं बल्कि 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है.
150 नहीं 200 डॉलर तक पहुंचने की वॉर्निंग
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 27 मार्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर Strait of Hormuz लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा और मांग के मुकाबले तेल की उपलब्धता बेहद कम हो सकती है. इससे कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, आगे क्या होगा यह तीन बातों पर निर्भर करेगा.
हॉर्मुज कब तक बंद रहता है&amp;nbsp;एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को कितना नुकसान होता हैसप्लाई चेन कितनी जल्दी सामान्य होती है
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद का असर
फिलहाल ब्रेंट क्रूड हाल के उच्च स्तर 119.50 डॉलर से गिरकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर है, लेकिन इतिहास बताता है कि हालात बिगड़ने पर कीमतें कितनी तेजी से बढ़ सकती हैं. साल 2008 में यह 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी थी.
दरअसल, दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी हॉर्मुज मार्ग से गुजरती है. ऐसे में इस रास्ते में रुकावट का मतलब है- सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर.
इस बीच ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी टकराव को करीब चार हफ्ते हो चुके हैं और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही कुछ समय के लिए हमले टालने की बात कही हो, लेकिन जंग खत्म होने के कोई स्पष्ट संकेत अभी नजर नहीं आ रहे. ऐसे में अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो दुनिया को सिर्फ महंगे तेल ही नहीं बल्कि एक बड़े आर्थिक झटके का भी सामना करना पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: टीवी-एसी से वाशिंग मशीन तक&amp;hellip; ईरान वॉर की दोहरी मार, 10-15% महंगा हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स सामान ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 05:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रोपर्टी में भारी उछाल, जानें अगले 2 साल में कहां पहुंच सकती है कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Noida Real Estate News: ऑनलाइन प्रॉपटेक प्लेटफॉर्म Square Yards की ताजा रिपोर्ट के अनुसार Noida International Airport के निर्माण ने Noida और Yamuna Expressway Corridor के आसपास रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त तेजी ला दी है. रिपोर्ट बताती है कि 2020 से 2025 के बीच अपार्टमेंट की कीमतें लगभग तीन गुना बढ़ी हैं, जबकि प्लॉट की कीमतों में औसतन 1.5 गुना उछाल आया है, और कुछ माइक्रो-मार्केट में यह वृद्धि 5 गुना तक पहुंच गई है.
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार के अवसर और कनेक्टिविटी में सुधार के कारण आने वाले दो वर्षों में भी कीमतों में क्रमशः 28% (प्लॉट) और 22% (अपार्टमेंट) की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है.
प्रोपर्टी कीमतों में उछाल
यह एयरपोर्ट, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री Narendra Modi की तरफ से 28 मार्च 2026 को किया जाना प्रस्तावित है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है. अपने अंतिम चरण में यह सालाना लगभग 225 मिलियन यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा, जिससे एनसीआर की विमानन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.
रिपोर्ट में &amp;ldquo;एयरोट्रोपोलिस&amp;rdquo; मॉडल का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें एयरपोर्ट के आसपास आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जाते हैं. यह मॉडल Amsterdam Airport Schiphol जैसे वैश्विक उदाहरणों से प्रेरित है. इससे क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर शहरी इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है, जो निवेश और रोजगार दोनों को गति देगा.
निवेश का बना हॉट-स्पॉट
विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट के कारण नोएडा का रियल एस्टेट बाजार अब सिर्फ एंड-यूजर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से एक बड़े निवेश हॉटस्पॉट में बदल रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क इस क्षेत्र को आने वाले समय में एनसीआर के सबसे प्रमुख विकास केंद्रों में बदल सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 05:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नोएडा, इंटरनेशनल, एयरपोर्ट, से, प्रोपर्टी, में, भारी, उछाल, जानें, अगले, साल, में, कहां, पहुंच, सकती, है, कीमत</media:keywords>
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        <title>Gold&amp;Silver Price: सिर्फ दो दिन में 39800 रुपये महंगा हुआ सोना, जानें आज कितना है 24 से लेकर 18 कैरेट का भाव?</title>
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        <description><![CDATA[ Gold-Silver Price Today: भारत में आज सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. हफ्ते की शुरुआत में आई गिरावट के बाद अब सोना फिर से पटरी पर लौटता नजर आ रहा है. पिछले दो सेशन में सोने की कीमत में भारी उछाल आया है. इस दौरान 100 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में लगभग 39800 रुपये और इतने ही ग्राम के 22 कैरेट सोने की कीमत में 36500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. यह सोने में लोगों की फिर से बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है. &amp;nbsp;
सोने की कीमतों में यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को लेकर मिल रहे अलग-अलग संकेतों की वजह से हो रही है. एक तरफ अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को शांति प्रस्ताव भेजा है. वहीं, दूसरी तरफ ईरान ने बातचीत में शामिल होने की किसी भी इच्छा से इंकार कर दिया है. ऊपर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strair of Hormuz) पर &amp;nbsp;अपना पूरा अधिकार (संप्रभु नियंत्रण) की शर्त रख दी है. इसने तनाव को फिर से चरम पर पहुंचा दिया है. दुनिया का लगभग 20 परसेंट कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी तरह का नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है.&amp;nbsp;
आज सोने की कीमत&amp;nbsp;
24 कैरेट&amp;nbsp;
आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 14689 रुपये है, जो कल के 14667 रुपये से 22 रुपये ज्यादा है. वहीं, 176 रुपये के इजाफे के साथ आज 8 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,17,512 रुपये है. 10 ग्राम की कीमत 220 रुपये बढ़कर 1,46,890 रुपये और 100 ग्राम की कीमत 2,200 की बढ़ोतरी के साथ 14,68,900 रुपये हो गई है.&amp;nbsp;
22 कैरेट
22 कैरेट की कैटेगरी में भी सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली. 1 ग्राम की कीमत आज 13,465 है, जो पिछले सेशन से 20 रुपये ज्यादा है. 8 ग्राम के लिए रेट बढ़कर 1,07,720 हो गया, जिसमें कल के मुकाबले 160 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई. 10 ग्राम की कीमत 200 रुपये बढ़कर 1,34,650 रुपये, जबकि 100 ग्राम की कीमत 2,000 रुपये बढ़कर 13,46,500 तक पहुंच गई है.
18 कैरेट
आज 18 कैरेट सेगमेंट में भी सोने की कीमतें बढ़ीं. 1 ग्राम का रेट 11,017 है, जो 16 रुपये ज्यादा है. 8 ग्राम के लिए कीमत बढ़कर 88,136 हो गई, जिसमें 128 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. 10 ग्राम का रेट बढ़कर 1,10,170 हो गया, जो 160 रुपये ज्यादा है, जबकि 100 ग्राम की कीमत 11,01,700 है, जिसमें 1,600 की बढ़ोतरी हुई है.
चांदी की कितनी है कीमत?&amp;nbsp;
भारत में आज चांदी की कीमतें 240 रुपये प्रति ग्राम और 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम है. वैश्विक अनिश्चितता के बीच देश में आज चांदी की कीमत में 10,000 रुपये प्रति किलो तक की बड़ी गिरावट देखी जा रही है.&amp;nbsp;
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Petrol-Diesel Price: आम जनता को राहत! पेट्रोल-डीजल पर घटाई गई एक्साइज ड्यूटी, जानें आपके शहर का ताजा भाव&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Petrol&amp;Diesel Price: आम जनता को राहत! पेट्रोल&amp;डीजल पर घटाई गई एक्साइज ड्यूटी, जानें आपके शहर का ताजा भाव</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol-Diesel Price: पेट्रोल-डीजल की कीमत में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है. आज 27 मार्च को भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज (Excise Duty) पर भारी कटौती की है. पेट्रोल पर सरकार ने अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है.
वहीं, डीजल पर लगने वाली 10 रुपये की ड्यूटी को पूरी तरह से कम कर दिया है. यह कदम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के रेंज को पार करने और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण बढ़ते दबाव के बीच उठाया गया है.
सेस में कटौती के बावजूद आज देश के विभिन्न राज्यों में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है. सरकार ने यह कटौती ही इसलिए की है ताकि तेल कंपनियां जनता पर अतिरिक्त बोझ न डालें और कीमतें न बढ़ाएं. इस बीच, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अपने VAT में कटौती करने की अपील की है ताकि जनता को 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सीधा लाभ मिल सके.&amp;nbsp;
देश के प्रमुख शहरों और राज्यों में पेट्रोल-डीजल की संभावित



शहर/राज्य
पेट्रोल (प्रति लीटर)
डीजल (प्रति लीटर)


दिल्ली
94.77 रुपये
&amp;nbsp;87.67 रुपये


महाराष्ट्र
103.54 रुपये
&amp;nbsp;90.03 रुपये


उत्तर प्रदेश
94.65 रुपये
&amp;nbsp;87.76 रुपये


कर्नाटक
102.92 रुपये
&amp;nbsp;90.99 रुपये


पश्चिम बंगाल
105.45 रुपये
&amp;nbsp;92.02 रुपये


राजस्थान&amp;nbsp;
104.88 रुपये
&amp;nbsp;90.36 रुपये


हिमाचल प्रदेश
95.27 रुपये
87.31 रुपये


हरियाणा
95.36 रुपये
88.40 रुपये


गुवाहाटी
93.23 रुपये
89.46 रुपये


देहरादून
&amp;nbsp;93.17 रुपये
88.01 रुपये


पोर्ट ब्लेयर
&amp;nbsp;82.46 रुपये
&amp;nbsp;78.05 रुपये


आंध्र प्रदेश
109.53 रुपये
95.70 रुपये



सेस घटाने के बाद भी कीमतें आज स्थिर रखने के ये हो सकते हैं कारण:-&amp;nbsp;

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ओपेक (OPEC) देशों की तरफ से सप्लाई कम होने की वजह से कच्चे तेल की लागत का बढ़ जाना.&amp;nbsp;
IOC, BPCL, HPCL जैसी भारतीय तेल कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कीमत बढ़ने के बावजूद लंबे समय से तेल की कीमतें नहीं बढ़ा रही थीं. इससे इन्हें घाटा हो रहा था. सरकार ने टैक्स कम किया है ताकि इनके घाटे की भरपाई हो और जनता के लिए इन्हें दाम न बढ़ानी पड़े.&amp;nbsp;
सरकारी कंपनियों ने भले ही दाम स्थिर रखे हैं, लेकिन Nayara Energy जैसी प्राइवेट कंपनियों ने अपना मुनाफा निकालने के लिए पेट्रोल पर 5.30 रुपये और डीजल पर 3 रुपये की बढ़ोतरी की है.&amp;nbsp;

सेस में कटौती से कितनी मिलेगी राहत?&amp;nbsp;
अगर कंपनियां केंद्र सरकार की 10 रुपये प्रति लीटर की टैक्स में पूरी कटौती का लाभ ग्राहकों को देने का फैसला ले लें, तो पेट्रोल-डीजल की कीमत में 10-12 रुपये तक की कमी आ सकती है. हालांकि, पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत पर राज्य सरकारें VAT लगाती हैं. अगर बेसिक प्राइस में 10 रुपये की कटौती होगी, तो उस पर लगने वाला VAT भी कम हो जाएगा. इससे 10-12 रुपये की राहत मिलने का अनुमान है.&amp;nbsp;
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150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी कच्चे तेल की कीमत! ऑप्शन मार्केट में ट्रेडर्स लगा रहे बड़ा दांव&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे पर बड़ी खबर, इस वजह से एकाएक छोड़ी अपनी जिम्मेदारी</title>
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        <description><![CDATA[ HDFC Bank: HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव शशिधर जगदीशन के साथ सत्ता को लेकर खींचतान के चलते अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया. इस खबर से देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक में लीडरशिप की स्थिरता को लेकर नए सवाल हो गए हैं. FT ने इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि महीनों से सुलग रहा यह तनाव मुख्य रूप से रणनीतिक मतभेदों, गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों और CEO के जल्द होने वाले दोबारा अपॉइंटमेंट पर केंद्रित था.
बता दें कि पिछले हफ्ते 18 मार्च को अतनु चक्रवर्ती ने अचानक से अपना इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने बैंक के कुछ ऐसी कार्यप्रणालियों का जिक्र किया, जो उनकी नैतिकता और सिद्धांतों के खिलाफ है. अब सामने आ रही मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनका यह इस्तीफा सीईओ शशिधर जगदीशन के साथ मतभेदों का परिणाम है. रिपोर्ट के मुताबिक, अतनु सीईओ जगदीशन का कार्यकाल आगे बढ़ाए जाने के पक्ष में नहीं थे, जबकि बोर्ड के अधिकतर सदस्यों ने इसका समर्थन किया.
पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे ने मचाई हलचल
अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे पर बीते दिनों बैंक के अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री और खुद सीईओ जगदीशन ने बोर्डरूम में किसी तरह के सत्ता संघर्ष या गंभीर विवाद की खबरों को सिरे से नकार दिया था. बैंक ने मामले की जांच के लिए दो बाहरी लॉ फर्मों की नियुक्ति भी की थी ताकि नैतिकता को लेकर अतनु के सवालों की जांच हो सके. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी मामले का संज्ञान लिया. इधर, अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे देने का बाजार में कुछ ऐसा असर हुआ कि HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. शेयर 52-वीक के अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गए. बैंक की मार्केट वैल्यू में भी 1 लाख करोड़ रुपये ये ज्यादा की गिरावट आई.&amp;nbsp;
अब सामने आएगी सच्चाई&amp;nbsp;
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC बैंक ने अतनु चक्रवर्ती के जाने से जुड़ी परिस्थितियों की कानूनी समीक्षा शुरू कर दी है. इस मामले से परिचित लोगों ने ET को बताया कि बैंक ने इस मुद्दे की जांच के लिए वाडिया गांधी और ट्राईलीगल जैसी लॉ फर्मों के साथ-साथ एक अंतरराष्ट्रीय फर्म को भी नियुक्त किया है.
इस समीक्षा में पिछले दो वर्षों की बोर्ड की कार्यवाही की बारीकी से जांच की जाएगी - जिसमें रिकॉर्डिंग, मिनट्स और एजेंडा शामिल हैं - ताकि यह पता लगाया जा सके कि चक्रवर्ती के कार्यकाल के दौरान शासन या नैतिक आचरण से संबंधित कोई चिंताएं उठाई गई थीं या नहीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें बोर्ड तक पहुंचाई गई व्हिसलब्लोअर शिकायतों को भी शामिल किया जाएगा और यह आकलन किया जाएगा कि उन शिकायतों को कैसे निपटाया गया.
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        <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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