Republic Day 2026: भारतीय संविधान की असली कॉपी 'गैस चैंबर'में रखी, अगर बाहर निकाला जाए तो क्या होगा?

भारत का संविधान लोकतंत्र की आत्मा माना जाता है. 26 जनवरी 1950 को इसके लागू होने के साथ ही भारत एक संप्रभु गणतंत्र राष्ट्र बना. इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर वर्ष कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन न केवल राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि संविधान के महत्व और उसकी सर्वोच्चता का भी प्रतीक है. भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है. जब इसे पहली बार लागू किया गया था, तब इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां शामिल थीं. समय के साथ इसमें कई संशोधन किए गए, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी कायम है. भारतीय संविधान की एक खास बात यह है कि इसकी मूल प्रति न तो टाइप की गई थी और न ही छापी गई थी, बल्कि इसे पूरी तरह हाथ से लिखा गया था. कहां सुरक्षित रखी गई है संविधान की मूल प्रति जर्मन न्यूज वेबसाइट DW की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय संविधान की मूल प्रतियां नई दिल्ली स्थित संसद भवन के पुस्तकालय में रखी गई हैं. इन्हें एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए सुरक्षित कक्ष में संरक्षित किया गया है. इस कक्ष में उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है, जहां तापमान और नमी को पूरी तरह नियंत्रित किया जाता है. यहां प्रवेश केवल अधिकृत अधिकारियों को ही दिया जाता है. हीलियम गैस से बनी सुरक्षा प्रणाली संविधान की मूल प्रति पार्चमेंट पेपर पर लिखी गई है, जो बहुत संवेदनशील माना जाता है. सामान्य वातावरण में नमी और ऑक्सीजन के कारण यह कागज पीला पड़ सकता है या खराब हो सकता है. इसी वजह से संविधान को हीलियम गैस से भरे एक पारदर्शी बॉक्स में रखा गया है. हीलियम एक इनर्ट गैस है, जो किसी भी रासायनिक प्रतिक्रिया में भाग नहीं लेती. इससे ऑक्सीजन बाहर रहती है और कीड़े, फंगस या बैक्टीरिया पनप नहीं पाते, जिससे स्याही और कागज दोनों सुरक्षित रहते हैं. वैज्ञानिक तरीकों से होती है लगातार निगरानी संविधान की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक मानकों का सख्ती से पालन किया जाता है. पूरे वर्ष एक समान तापमान और नमी बनाए रखी जाती है, जिसकी निगरानी विशेष सेंसर के माध्यम से की जाती है. सीधी रोशनी और अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने के लिए नियंत्रित प्रकाश व्यवस्था का उपयोग किया जाता है. इन सभी उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संविधान की मूल प्रति आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे. सुरक्षा व्यवस्था का इतिहास शुरुआती वर्षों में संविधान की मूल प्रति को फलालैन कपड़े में लपेटकर और नेफथलीन बॉल्स के साथ रखा जाता था. समय के साथ यह तरीका अपर्याप्त माना गया. इसके बाद वर्ष 1994 में भारत सरकार ने आधुनिक संरक्षण तकनीक को अपनाया और अमेरिका की सहायता से हीलियम गैस चैंबर तैयार किए गए, जो आज भी संविधान की सुरक्षा में उपयोग किए जा रहे हैं. संविधान से जुड़े रोचक तथ्य भारतीय संविधान को तैयार करने में लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था. इसकी मूल प्रति आज भी उसी हाथ से लिखी अवस्था में सुरक्षित है. संविधान का हर पन्ना एक कलाकृति की तरह सजाया गया है और इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित दस्तावेजों में से एक माना जाता है. ये भी पढ़ें: Republic Day 2026: 1950 में पहली परेड राजपथ पर नहीं, बल्कि एक स्टेडियम में हुई थी—जानिए क्यों?

Jan 26, 2026 - 11:30
 0
Republic Day 2026: भारतीय संविधान की असली कॉपी 'गैस चैंबर'में रखी, अगर बाहर निकाला जाए तो क्या होगा?

भारत का संविधान लोकतंत्र की आत्मा माना जाता है. 26 जनवरी 1950 को इसके लागू होने के साथ ही भारत एक संप्रभु गणतंत्र राष्ट्र बना. इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर वर्ष कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन न केवल राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि संविधान के महत्व और उसकी सर्वोच्चता का भी प्रतीक है.

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है. जब इसे पहली बार लागू किया गया था, तब इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां शामिल थीं. समय के साथ इसमें कई संशोधन किए गए, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी कायम है. भारतीय संविधान की एक खास बात यह है कि इसकी मूल प्रति न तो टाइप की गई थी और न ही छापी गई थी, बल्कि इसे पूरी तरह हाथ से लिखा गया था.

कहां सुरक्षित रखी गई है संविधान की मूल प्रति

जर्मन न्यूज वेबसाइट DW की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय संविधान की मूल प्रतियां नई दिल्ली स्थित संसद भवन के पुस्तकालय में रखी गई हैं. इन्हें एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए सुरक्षित कक्ष में संरक्षित किया गया है. इस कक्ष में उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है, जहां तापमान और नमी को पूरी तरह नियंत्रित किया जाता है. यहां प्रवेश केवल अधिकृत अधिकारियों को ही दिया जाता है.

हीलियम गैस से बनी सुरक्षा प्रणाली

संविधान की मूल प्रति पार्चमेंट पेपर पर लिखी गई है, जो बहुत संवेदनशील माना जाता है. सामान्य वातावरण में नमी और ऑक्सीजन के कारण यह कागज पीला पड़ सकता है या खराब हो सकता है. इसी वजह से संविधान को हीलियम गैस से भरे एक पारदर्शी बॉक्स में रखा गया है. हीलियम एक इनर्ट गैस है, जो किसी भी रासायनिक प्रतिक्रिया में भाग नहीं लेती. इससे ऑक्सीजन बाहर रहती है और कीड़े, फंगस या बैक्टीरिया पनप नहीं पाते, जिससे स्याही और कागज दोनों सुरक्षित रहते हैं.

वैज्ञानिक तरीकों से होती है लगातार निगरानी

संविधान की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक मानकों का सख्ती से पालन किया जाता है. पूरे वर्ष एक समान तापमान और नमी बनाए रखी जाती है, जिसकी निगरानी विशेष सेंसर के माध्यम से की जाती है. सीधी रोशनी और अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने के लिए नियंत्रित प्रकाश व्यवस्था का उपयोग किया जाता है. इन सभी उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संविधान की मूल प्रति आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे.

सुरक्षा व्यवस्था का इतिहास

शुरुआती वर्षों में संविधान की मूल प्रति को फलालैन कपड़े में लपेटकर और नेफथलीन बॉल्स के साथ रखा जाता था. समय के साथ यह तरीका अपर्याप्त माना गया. इसके बाद वर्ष 1994 में भारत सरकार ने आधुनिक संरक्षण तकनीक को अपनाया और अमेरिका की सहायता से हीलियम गैस चैंबर तैयार किए गए, जो आज भी संविधान की सुरक्षा में उपयोग किए जा रहे हैं.

संविधान से जुड़े रोचक तथ्य

भारतीय संविधान को तैयार करने में लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था. इसकी मूल प्रति आज भी उसी हाथ से लिखी अवस्था में सुरक्षित है. संविधान का हर पन्ना एक कलाकृति की तरह सजाया गया है और इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित दस्तावेजों में से एक माना जाता है.

ये भी पढ़ें: Republic Day 2026: 1950 में पहली परेड राजपथ पर नहीं, बल्कि एक स्टेडियम में हुई थी—जानिए क्यों?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow