RCOM फ्रॉड केस में ED की बड़ी कार्रवाई, 1452 करोड़ की संपत्ति अटैच, अब तक इतने हजार करोड़ की प्रॉपर्टी सीज
RCOM यानि रिलायंस कम्युनिकेशन फ्रॉड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. कंपनी की 1452.51 करोड़ की संपत्ति को अटैच किया गया है. इन प्रॉपर्टीज में नवी मुंबई के धीरुभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC), मिलिनियम बिजनेस पार्क की बिल्डिंग्स और पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर की जमीनें और बिल्डिंग्स शामिल है. इससे पहले भी ईडी ने कार्रवाई करते हुए RCOM और उससे जुड़े केसों में 7545 करोड़ की कीमतों के संपत्तियां अटैच कर चुकी है. यानि कि इस मामले में अबतक 9 हजार करोड़ की संपत्ति को अटैच किया जा चुका है. ईडी ने यह मामला तब संज्ञान में लिया था, जब सीबीआई की FIR के आधार पर इस मामले में जांच शुरू की थी. इस एफआईआर में RCOM,अनिल अंबानी समेत अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगे थे. इस पूरी जांच में सामने आया है कि 2010 से 2012 के बीच RCOM ने देश विदेश के बैंकों से बड़े लोन लिए थे. इनमें से अबतक 40185 करोड़ रुपए अभी भी बकाया है. इससे पहले 9 बैंक इन अकाउंट्स को फ्रॉड घोषित कर चुकी है. ईडी ने जो जानकारी साझा की है, उसके मुताबिक, एक कंपनी ने बैंक से जो लोन लिया, उसे दूसरी कंपनी के पुराने लोन की पेमेंट में इस्तेमाल किया गया है. यानि एक कंपनी के नाम पर लोन लेकर दूसरी कंपनी का बकाया लोन चुकाया गया. मतलब इसके तहत 13600 करोड़ रुपए पुराने लोन को नया दिखाकर एवरग्रीनिंग करने में लगाया गया. साथ ही करीबन 1600 करोड़ रुपए ग्रुप्स और कंपनियों को ट्रांसफर किए गए. इसके अलावा 1800 करोड़ रुपए FD और म्यूचुअल फंड में लगाए गए. बाद में फिर से ग्रुप कंपनियों को भेज दिए गए. साथ ही बिल डिस्काउंटिंग का भी इस्तेमाल कर पैसे जुड़े लोगों तक पहुंचाए गए. इनके अलावा कुछ रकमों को विदेशों में भेजकर बाहर निकाली गई. ईडी अब इस मामले में और गहराई तक जांच कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है.
RCOM यानि रिलायंस कम्युनिकेशन फ्रॉड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. कंपनी की 1452.51 करोड़ की संपत्ति को अटैच किया गया है. इन प्रॉपर्टीज में नवी मुंबई के धीरुभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC), मिलिनियम बिजनेस पार्क की बिल्डिंग्स और पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर की जमीनें और बिल्डिंग्स शामिल है. इससे पहले भी ईडी ने कार्रवाई करते हुए RCOM और उससे जुड़े केसों में 7545 करोड़ की कीमतों के संपत्तियां अटैच कर चुकी है. यानि कि इस मामले में अबतक 9 हजार करोड़ की संपत्ति को अटैच किया जा चुका है.
ईडी ने यह मामला तब संज्ञान में लिया था, जब सीबीआई की FIR के आधार पर इस मामले में जांच शुरू की थी. इस एफआईआर में RCOM,अनिल अंबानी समेत अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगे थे. इस पूरी जांच में सामने आया है कि 2010 से 2012 के बीच RCOM ने देश विदेश के बैंकों से बड़े लोन लिए थे. इनमें से अबतक 40185 करोड़ रुपए अभी भी बकाया है. इससे पहले 9 बैंक इन अकाउंट्स को फ्रॉड घोषित कर चुकी है.
ईडी ने जो जानकारी साझा की है, उसके मुताबिक, एक कंपनी ने बैंक से जो लोन लिया, उसे दूसरी कंपनी के पुराने लोन की पेमेंट में इस्तेमाल किया गया है. यानि एक कंपनी के नाम पर लोन लेकर दूसरी कंपनी का बकाया लोन चुकाया गया. मतलब इसके तहत 13600 करोड़ रुपए पुराने लोन को नया दिखाकर एवरग्रीनिंग करने में लगाया गया. साथ ही करीबन 1600 करोड़ रुपए ग्रुप्स और कंपनियों को ट्रांसफर किए गए.
इसके अलावा 1800 करोड़ रुपए FD और म्यूचुअल फंड में लगाए गए. बाद में फिर से ग्रुप कंपनियों को भेज दिए गए. साथ ही बिल डिस्काउंटिंग का भी इस्तेमाल कर पैसे जुड़े लोगों तक पहुंचाए गए. इनके अलावा कुछ रकमों को विदेशों में भेजकर बाहर निकाली गई. ईडी अब इस मामले में और गहराई तक जांच कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है.
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