Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती कब ? कैसे बने शिरोमणि रविदास बने संत

Guru Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती 1 फरवरी 2026 को है. गुरु रविदास की इस बार 649वीं जयंती मनाई जाएगी. इन्हें भक्ति आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें गुरु रविदास, रैदास और भगत रविदास जैसे नामों से भी जाना जाता है. अपने जीवन में संत रविदास समानता और मानव अधिकारों की शिक्षा दिया करते थे.  संत शिरोमणि रविदास ने अपने उच्च विचारों से पूरी दुनिया को जागरूक किया. कैसे बने शिरोमणि रविदास संत इतिहासकारों के अनुसार, एक बार जब संत रविदास को उनके पिता ने घर से निकाल दिया, तो वे एक कुटिया बनाकर रहने लगे और साधु-संतों की सेवा करने लगे. वे जूते-चप्पल बनाने का कार्य करते थे और भक्ति आंदोलन का हिस्सा बन गए. उनके उच्च विचारों से अन्य संत भी प्रभावित हुए, और धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई. इसके बाद, संत रविदास शिरोमणि के रूप में प्रसिद्ध हो गए. छुआछूत के खिलाई उठाई आवाज संत रविदास एक समाज सुधारक भी थे. उन्होंने जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई, सभी मनुष्यों को समान बताया और प्रेम व भाईचारे का संदेश दिया. मन चंगा तो कठौती में गंगा उन्होंने ईश्वर को हर जगह मानते हुए बाहरी आडंबरों और मूर्ति पूजा का विरोध किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया, जैसे उनके प्रसिद्ध कथन "मन चंगा तो कठौती में गंगा" में निहित है. कर्म और सच्ची भक्ति रविदास जी ने निष्काम कर्म और भक्ति को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भक्ति में सच्चाई, प्रेम और सेवा होनी चाहिए, तभी उसका सही फल मिलेगा. समानता और भाईचारे का संदेश संत रविदास जी ने हमेशा समाज में समानता और भाईचारे पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कर्म ही मनुष्य की सच्ची पहचान है, न कि उसकी जाति या जन्म. Laxmi Ji: आपकी इन गलत आदतें से नाराज होती है देवी लक्ष्मी, धनवान भी बन जाता है कंगाल Disclaimer : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Jan 8, 2026 - 09:30
 0
Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती कब ? कैसे बने शिरोमणि रविदास बने संत

Guru Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती 1 फरवरी 2026 को है. गुरु रविदास की इस बार 649वीं जयंती मनाई जाएगी. इन्हें भक्ति आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें गुरु रविदास, रैदास और भगत रविदास जैसे नामों से भी जाना जाता है. अपने जीवन में संत रविदास समानता और मानव अधिकारों की शिक्षा दिया करते थे.  संत शिरोमणि रविदास ने अपने उच्च विचारों से पूरी दुनिया को जागरूक किया.

कैसे बने शिरोमणि रविदास संत

इतिहासकारों के अनुसार, एक बार जब संत रविदास को उनके पिता ने घर से निकाल दिया, तो वे एक कुटिया बनाकर रहने लगे और साधु-संतों की सेवा करने लगे. वे जूते-चप्पल बनाने का कार्य करते थे और भक्ति आंदोलन का हिस्सा बन गए. उनके उच्च विचारों से अन्य संत भी प्रभावित हुए, और धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई. इसके बाद, संत रविदास शिरोमणि के रूप में प्रसिद्ध हो गए.

छुआछूत के खिलाई उठाई आवाज

संत रविदास एक समाज सुधारक भी थे. उन्होंने जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई, सभी मनुष्यों को समान बताया और प्रेम व भाईचारे का संदेश दिया.

मन चंगा तो कठौती में गंगा

उन्होंने ईश्वर को हर जगह मानते हुए बाहरी आडंबरों और मूर्ति पूजा का विरोध किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया, जैसे उनके प्रसिद्ध कथन "मन चंगा तो कठौती में गंगा" में निहित है.

कर्म और सच्ची भक्ति

रविदास जी ने निष्काम कर्म और भक्ति को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भक्ति में सच्चाई, प्रेम और सेवा होनी चाहिए, तभी उसका सही फल मिलेगा.

समानता और भाईचारे का संदेश

संत रविदास जी ने हमेशा समाज में समानता और भाईचारे पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कर्म ही मनुष्य की सच्ची पहचान है, न कि उसकी जाति या जन्म.

Laxmi Ji: आपकी इन गलत आदतें से नाराज होती है देवी लक्ष्मी, धनवान भी बन जाता है कंगाल

Disclaimer : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow