Ramadan 2026: रमजान में हर तरफ इबादत का दौर, रोजेदारों ने चौथा रोजा पूरा कर अल्लाह को किया याद
Ramadan 2026: रोजेदार बंदों ने आज 22 फरवरी 2026 को माह-ए-रमजान का चौथा रोजा रखकर अल्लाह के हुक्म को पूरा किया. मस्जिद व घरों में रौनक है. चारों तरफ कुरआन-ए-पाक पढ़ा जा रहा है. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व उनकी आल पर दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया जा रहा है. मस्जिदों में बच्चे, नौजवान व बुजुर्ग नमाज अदा कर रहे हैं. वहीं घरों में महिलाएं इबादत, तिलावत के साथ खुद रोजा रखकर सहरी-इफ्तारी व खाना भी पका रही है और बाजार से खरीदारी भी कर रही है. दर्जियों की दुकानों पर लोग ईद का कपड़ा सिलवाने पहुंच रहे हैं. बाजार गुलजार होता जा रहा है. सेवई, खजूर, टोपी, इस्लामी किताब, तस्बीह, इत्र की मांग बढ़ गई है. रमजान की सुबह-शाम नूरानी है. इफ्तार के समय का नजारा तो बहुत ही प्यारा है, जब एक दस्तरख्वान पर अमीर-गरीब एक होकर अल्लाह की हम्द बयां कर रोजा खोल रहे हैं. तरावीह की नमाज में भीड़ उमड़ रही है. तरावीह नमाज में कुरआन शरीफ के दस तो कहीं पंद्रह पारे मुकम्मल हो चुके हैं. रहमत के अशरे में चंद दिन गुजर चुके हैं. रहमत के अशरे के बाद मगफिरत का अशरा शुरू होगा. रमजानुल मुबारक का हर पल हर लम्हा कीमती है. माह-ए-रमजान में नाजिल हुआ कुरआन-ए-पाक : मुफ्ती अख्तर हुसैन मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि रमजान के इस मुकद्दस महीने में कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक का पढ़ना देखना, छूना, सुनना सब इबादत में शामिल है. कुरआन-ए-पाक पूरी दुनिया के लिए हिदायत है. हमें कुरआन-ए-पाक के मुताबिक बताए उसूलों पर जिंदगी गुजारनी चाहिए. अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर कुरआन-ए-पाक 23 साल में नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक पर अमल करके ही पूरी दुनिया में अमन ओ शांति कायम की जा सकती है. पूरा कुरआन-ए-पाक एक दफा इकट्ठा नहीं नाजिल हुआ बल्कि जरूरत के मुताबिक 23 वर्षों में थोड़ा-थोड़ा नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक के किसी एक हर्फ लफ्ज या नुक्ते को बदलना मुमकिन नहीं. अगली किताबें नबियों को ही जबानी याद होती थी लेकिन कुरआन-ए-पाक का यह मोजजा है कि मुसलमानों का बच्चा-बच्चा उसको याद कर लेता है. माह-ए-रमजान में हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर सहीफे 3 तारीख को उतारे गए. हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम को जबूर 18 या 21 रमजान को मिली और हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को तौरेत 6 रमजान को मिली. हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को इंजील 12 रमजान को मिली. मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल रखें : मौलाना फिरोज मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर के इमाम मौलाना फिरोज निजामी ने कहा कि रमजान का महीना हर साल रहमत, बरकत, और मगफिरत का न मिटने वाला खजाना लेकर हमारे बीच आता है. इस महीने का एक खास मकसद यह है कि हम परहेजगार बन जाएं. इस मुबारक महीने की कुछ ऐसी अहम जिम्मेदारियां हैं जिसे पूरा करना हर खास‌ ओ आम मुसलमान का दीनी फरीजा है. रोजे की हालत में भूख व प्यास के एहसास के जरिया हमें अपने आस-पास के मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल करना चाहिए. रोजा हमें यह तालीम देता है कि हम खुद ही लजीज खानों और शर्बतों से पेट न भरें बल्कि अपने गरीब मुफलिस, भूखे और खाली हाथ मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल रखते हुए उनकी हरसंभव मदद करें. सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो तो रोजा छोड़ सकती है गर्भवती महिला : उलमा किराम रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर रविवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. उलमा किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया. 1. सवाल: हामिला (गर्भवती) महिला के लिए रोजे का क्या हुक्म है?जवाब: अगर हामिला (गर्भवती) महिला को रोजा रखने की वजह से खुद की या बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो तो रोजा छोड़ने की इजाजत है. हां बाद में इनकी कजा करना जरूरी है. 2. सवाल : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना कैसा? जवाब : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना जायज है, इससे रोजा नहीं टूटेगा, अगरचे उसका जायका हलक में महसूस हो. 3. सवाल : रोजे की हालत में जख्म पर मरहम या दवा लगा सकते हैं? जवाब : हां। लगा सकते हैं. 4. सवाल : इंजेक्शन के ज़रिए खून निकाला तो वुजू टूट जाएगा? जवाब : हां। वुजू टूट जाएगा. ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: रमजान में अल्लाह की रजा में गुजर रहा दिन, जकात और गरीबों की मदद को भी बढ़ रहे रोजेदार के हाथ Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Ramadan 2026: रोजेदार बंदों ने आज 22 फरवरी 2026 को माह-ए-रमजान का चौथा रोजा रखकर अल्लाह के हुक्म को पूरा किया. मस्जिद व घरों में रौनक है. चारों तरफ कुरआन-ए-पाक पढ़ा जा रहा है. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व उनकी आल पर दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया जा रहा है. मस्जिदों में बच्चे, नौजवान व बुजुर्ग नमाज अदा कर रहे हैं. वहीं घरों में महिलाएं इबादत, तिलावत के साथ खुद रोजा रखकर सहरी-इफ्तारी व खाना भी पका रही है और बाजार से खरीदारी भी कर रही है.
दर्जियों की दुकानों पर लोग ईद का कपड़ा सिलवाने पहुंच रहे हैं. बाजार गुलजार होता जा रहा है. सेवई, खजूर, टोपी, इस्लामी किताब, तस्बीह, इत्र की मांग बढ़ गई है. रमजान की सुबह-शाम नूरानी है. इफ्तार के समय का नजारा तो बहुत ही प्यारा है, जब एक दस्तरख्वान पर अमीर-गरीब एक होकर अल्लाह की हम्द बयां कर रोजा खोल रहे हैं. तरावीह की नमाज में भीड़ उमड़ रही है. तरावीह नमाज में कुरआन शरीफ के दस तो कहीं पंद्रह पारे मुकम्मल हो चुके हैं. रहमत के अशरे में चंद दिन गुजर चुके हैं. रहमत के अशरे के बाद मगफिरत का अशरा शुरू होगा. रमजानुल मुबारक का हर पल हर लम्हा कीमती है.
माह-ए-रमजान में नाजिल हुआ कुरआन-ए-पाक : मुफ्ती अख्तर हुसैन
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि रमजान के इस मुकद्दस महीने में कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक का पढ़ना देखना, छूना, सुनना सब इबादत में शामिल है. कुरआन-ए-पाक पूरी दुनिया के लिए हिदायत है. हमें कुरआन-ए-पाक के मुताबिक बताए उसूलों पर जिंदगी गुजारनी चाहिए. अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर कुरआन-ए-पाक 23 साल में नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक पर अमल करके ही पूरी दुनिया में अमन ओ शांति कायम की जा सकती है. पूरा कुरआन-ए-पाक एक दफा इकट्ठा नहीं नाजिल हुआ बल्कि जरूरत के मुताबिक 23 वर्षों में थोड़ा-थोड़ा नाजिल हुआ.
कुरआन-ए-पाक के किसी एक हर्फ लफ्ज या नुक्ते को बदलना मुमकिन नहीं. अगली किताबें नबियों को ही जबानी याद होती थी लेकिन कुरआन-ए-पाक का यह मोजजा है कि मुसलमानों का बच्चा-बच्चा उसको याद कर लेता है. माह-ए-रमजान में हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर सहीफे 3 तारीख को उतारे गए. हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम को जबूर 18 या 21 रमजान को मिली और हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को तौरेत 6 रमजान को मिली. हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को इंजील 12 रमजान को मिली.
मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल रखें : मौलाना फिरोज
मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर के इमाम मौलाना फिरोज निजामी ने कहा कि रमजान का महीना हर साल रहमत, बरकत, और मगफिरत का न मिटने वाला खजाना लेकर हमारे बीच आता है. इस महीने का एक खास मकसद यह है कि हम परहेजगार बन जाएं. इस मुबारक महीने की कुछ ऐसी अहम जिम्मेदारियां हैं जिसे पूरा करना हर खास ओ आम मुसलमान का दीनी फरीजा है.
रोजे की हालत में भूख व प्यास के एहसास के जरिया हमें अपने आस-पास के मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल करना चाहिए. रोजा हमें यह तालीम देता है कि हम खुद ही लजीज खानों और शर्बतों से पेट न भरें बल्कि अपने गरीब मुफलिस, भूखे और खाली हाथ मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल रखते हुए उनकी हरसंभव मदद करें.
सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो तो रोजा छोड़ सकती है गर्भवती महिला : उलमा किराम
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर रविवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. उलमा किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.
1. सवाल: हामिला (गर्भवती) महिला के लिए रोजे का क्या हुक्म है?
जवाब: अगर हामिला (गर्भवती) महिला को रोजा रखने की वजह से खुद की या बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो तो रोजा छोड़ने की इजाजत है. हां बाद में इनकी कजा करना जरूरी है.
2. सवाल : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना कैसा?
जवाब : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना जायज है, इससे रोजा नहीं टूटेगा, अगरचे उसका जायका हलक में महसूस हो.
3. सवाल : रोजे की हालत में जख्म पर मरहम या दवा लगा सकते हैं?
जवाब : हां। लगा सकते हैं.
4. सवाल : इंजेक्शन के ज़रिए खून निकाला तो वुजू टूट जाएगा?
जवाब : हां। वुजू टूट जाएगा.
ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: रमजान में अल्लाह की रजा में गुजर रहा दिन, जकात और गरीबों की मदद को भी बढ़ रहे रोजेदार के हाथ
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
What's Your Reaction?