Ram Navami 2026: कान्हा की नगरी से अयोध्या तक आस्था का महासंगम; 11 मन पंजीरी और विशेष उपहारों के साथ रथ रवाना
Ram Navami 2026: मथुरा, 23 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश की पावन धरती पर आज भक्ति और सौहार्द का एक अद्भुत संगम देखने को मिला. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या धाम के लिए विशेष प्रसाद और उपहारों की खेप रवाना की गई. चैत्र शुक्ल नवमी यानी 27 मार्च 2026 को मनाये जाने वाले आगामी रामनवमी उत्सव के उपलक्ष्य में, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा यह पहल की गई है. भक्ति और उल्लास के बीच प्रस्थान सोमवार की सुबह मथुरा का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया. हल्की रिमझिम बारिश के बीच जब 'जय श्रीराम' और 'राधे-राधे' के जयघोष गूंजे, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रकृति भी इस मिलन का स्वागत कर रही हो. इस अवसर पर कलाकारों ने मनमोहक कृष्ण लीलाओं की प्रस्तुति दी, जिसने वहां उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. मंदिर परिसर से एक सुसज्जित वाहन को विधि-विधान और शास्त्रीय परंपराओं के साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. यह वाहन मथुरा की श्रद्धा को समेटे हुए अब अयोध्या की ओर अग्रसर है. प्रसाद में क्या है खास? श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार, रामलला के लिए भेजे गए इस 'भेंट' में ब्रज की परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया है. उपहार सामग्री में मुख्य रूप से निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं: 11 मन (लगभग 440 किलो) धनिया की पंजीरी: ब्रज में विशेष उत्सवों पर बनने वाला मुख्य प्रसाद. लड्डू और पंचमेवा: शुद्धता और स्वाद से भरपूर मिष्ठान. रामलला के वस्त्र एवं श्रृंगार: प्रभु के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए सुंदर पोशाक और आभूषण. सुगंधित द्रव्य और फल: पूजा-अर्चना के लिए ताजे फल और दिव्य इत्र. परंपरा और सौहार्द का प्रतीक संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी और सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि यह केवल प्रसाद नहीं, बल्कि दो पवित्र धामों के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक है. पूर्व में भी श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मध्य होली और शिवरात्रि पर इसी तरह के आध्यात्मिक नवाचार देखे गए हैं. "यह ब्रज और अवध के प्रेम का मिलन है. रामनवमी के पावन पर्व पर जब मथुरा का यह प्रसाद रामलला को भोग लगाया जाएगा, तो यह करोड़ों भक्तों की आस्था को एक नए सूत्र में पिरोएगा." रामनवमी पर होगी विशेष भेंट यह समस्त सामग्री 27 मार्च को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को सौंपी जाएगी. रामनवमी के दिन, दोपहर के मुख्य अभिषेकम और भोग के समय इस पंजीरी और लड्डुओं का उपयोग किया जाएगा. अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. मथुरा की इस भेंट ने आगामी राम जन्मोत्सव की रौनक को दोगुना कर दिया है. Kal Ka Rashifal 24 March 2026: मेष को खर्च की चिंता, कन्या को बड़ा लाभ, जानें सभी राशियों का हाल Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Ram Navami 2026: मथुरा, 23 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश की पावन धरती पर आज भक्ति और सौहार्द का एक अद्भुत संगम देखने को मिला. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या धाम के लिए विशेष प्रसाद और उपहारों की खेप रवाना की गई. चैत्र शुक्ल नवमी यानी 27 मार्च 2026 को मनाये जाने वाले आगामी रामनवमी उत्सव के उपलक्ष्य में, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा यह पहल की गई है.
भक्ति और उल्लास के बीच प्रस्थान
सोमवार की सुबह मथुरा का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया. हल्की रिमझिम बारिश के बीच जब 'जय श्रीराम' और 'राधे-राधे' के जयघोष गूंजे, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रकृति भी इस मिलन का स्वागत कर रही हो. इस अवसर पर कलाकारों ने मनमोहक कृष्ण लीलाओं की प्रस्तुति दी, जिसने वहां उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया.
मंदिर परिसर से एक सुसज्जित वाहन को विधि-विधान और शास्त्रीय परंपराओं के साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. यह वाहन मथुरा की श्रद्धा को समेटे हुए अब अयोध्या की ओर अग्रसर है.
प्रसाद में क्या है खास?
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार, रामलला के लिए भेजे गए इस 'भेंट' में ब्रज की परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया है. उपहार सामग्री में मुख्य रूप से निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं:
- 11 मन (लगभग 440 किलो) धनिया की पंजीरी: ब्रज में विशेष उत्सवों पर बनने वाला मुख्य प्रसाद.
- लड्डू और पंचमेवा: शुद्धता और स्वाद से भरपूर मिष्ठान.
- रामलला के वस्त्र एवं श्रृंगार: प्रभु के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए सुंदर पोशाक और आभूषण.
- सुगंधित द्रव्य और फल: पूजा-अर्चना के लिए ताजे फल और दिव्य इत्र.
परंपरा और सौहार्द का प्रतीक
संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी और सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि यह केवल प्रसाद नहीं, बल्कि दो पवित्र धामों के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक है. पूर्व में भी श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मध्य होली और शिवरात्रि पर इसी तरह के आध्यात्मिक नवाचार देखे गए हैं.
"यह ब्रज और अवध के प्रेम का मिलन है. रामनवमी के पावन पर्व पर जब मथुरा का यह प्रसाद रामलला को भोग लगाया जाएगा, तो यह करोड़ों भक्तों की आस्था को एक नए सूत्र में पिरोएगा."
रामनवमी पर होगी विशेष भेंट
यह समस्त सामग्री 27 मार्च को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को सौंपी जाएगी. रामनवमी के दिन, दोपहर के मुख्य अभिषेकम और भोग के समय इस पंजीरी और लड्डुओं का उपयोग किया जाएगा. अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. मथुरा की इस भेंट ने आगामी राम जन्मोत्सव की रौनक को दोगुना कर दिया है.
Kal Ka Rashifal 24 March 2026: मेष को खर्च की चिंता, कन्या को बड़ा लाभ, जानें सभी राशियों का हाल
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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