PM Modi Briefcase: पीएम मोदी के बॉडीगार्ड्स के हाथ में दिखने वाला ब्रीफकेस क्या है? जानिए इसके पीछे का सच?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उनके साथ काले सूट और काला चश्मा पहने सुरक्षाकर्मी दिखाई देते हैं. इनमें से एक चीज लोगों का खास ध्यान खींचती है, बॉडीगार्ड्स के हाथ में मौजूद काला ब्रीफकेस. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इस ब्रीफकेस में क्या होता है. कई बार अफवाहें भी फैलती हैं कि इसमें परमाणु कोड या कोई बेहद गुप्त दस्तावेज रखा होता है, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. इस खास ब्रीफकेस को तकनीकी भाषा में पोर्टेबल बैलिस्टिक शील्ड कहा जाता है. देखने में यह बिल्कुल एक सामान्य अटैची जैसा लगता है, लेकिन खतरे की स्थिति में यही ब्रीफकेस प्रधानमंत्री की ढाल बन जाता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ते ही यह एक मजबूत बुलेटप्रूफ दीवार में बदल जाए. कैसे बन जाता है बुलेटप्रूफ दीवार अमैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के एसोसिएट प्रोफेसर नारंग के मुताबिक अगर किसी हमले का खतरा हो तो बॉडीगार्ड इस ब्रीफकेस को नीचे की ओर झटका देते हैं. ऐसा करते ही यह कुछ ही पलों में खुलकर एक बुलेटप्रूफ शील्ड का रूप ले लेता है. यह शील्ड NIJ लेवल 3 की सुरक्षा देती है. यानी यह एके-47 जैसी खतरनाक राइफल और छोटे हथियारों की गोलियों को भी रोक सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य हमले के शुरुआती पलों में प्रधानमंत्री की जान की रक्षा करना होता है. हथियार और टेक्नोलॉजी का अनोखा मेल यह ब्रीफकेस सिर्फ एक ढाल नहीं है, बल्कि इसमें तकनीक और सुरक्षा का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है. इसमें एक छुपी हुई जेब भी होती है, जिसमें सुरक्षा कर्मी पिस्तौल रखते हैं. ऐसे में यह शील्ड बचाव के साथ-साथ जवाबी कार्रवाई में भी मददगार साबित होती है. परमाणु कोड वाली अफवाह कितनी सही इंटरनेट पर यह अफवाह आम है कि इस ब्रीफकेस में परमाणु हमले से जुड़े कोड रखे होते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरी तरह गलत है. यह ब्रीफकेस किसी भी तरह के गुप्त दस्तावेज या न्यूक्लियर कोड के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए होता है. किस तकनीक से बना है यह ब्रीफकेस इस ब्रीफकेस को केवेलर और अल्ट्रा हाई मॉलिक्यूलर वेट पॉलीथीन जैसे मजबूत मैटीरियल से तैयार किया जाता है. इसमें कई परतों में फाइबर बुना होता है, जो गोली या हमले के झटके को काफी हद तक सोख लेता है. यह सॉफ्ट और हार्ड आर्मर का मिश्रण होता है, जिससे इसकी ताकत और बढ़ जाती है. एक सेकंड में खुलने वाली खास तकनीक इस ब्रीफकेस की सबसे खास बात इसका ग्रेविटी असिस्टेड डिप्लॉयमेंट सिस्टम है. इसमें मौजूद क्विक रिलीज लैच को खींचते ही फोल्डिंग पैनल गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरते हैं और एक सेकंड से भी कम समय में यह पूरी तरह खुल जाता है. खुलते ही यह एक ठोस दीवार बन जाता है, जिसके पीछे खड़े व्यक्ति को पूरी सुरक्षा मिलती है. ये भी पढ़ें: 10 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, 50 KMPH की स्पीड से चलेंगी हवाएं, दिल्ली-UP का मौसम कैसा?

Feb 2, 2026 - 12:30
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PM Modi Briefcase: पीएम मोदी के बॉडीगार्ड्स के हाथ में दिखने वाला ब्रीफकेस क्या है? जानिए इसके पीछे का सच?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उनके साथ काले सूट और काला चश्मा पहने सुरक्षाकर्मी दिखाई देते हैं. इनमें से एक चीज लोगों का खास ध्यान खींचती है, बॉडीगार्ड्स के हाथ में मौजूद काला ब्रीफकेस. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इस ब्रीफकेस में क्या होता है. कई बार अफवाहें भी फैलती हैं कि इसमें परमाणु कोड या कोई बेहद गुप्त दस्तावेज रखा होता है, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है.

इस खास ब्रीफकेस को तकनीकी भाषा में पोर्टेबल बैलिस्टिक शील्ड कहा जाता है. देखने में यह बिल्कुल एक सामान्य अटैची जैसा लगता है, लेकिन खतरे की स्थिति में यही ब्रीफकेस प्रधानमंत्री की ढाल बन जाता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ते ही यह एक मजबूत बुलेटप्रूफ दीवार में बदल जाए.

कैसे बन जाता है बुलेटप्रूफ दीवार

अमैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के एसोसिएट प्रोफेसर नारंग के मुताबिक अगर किसी हमले का खतरा हो तो बॉडीगार्ड इस ब्रीफकेस को नीचे की ओर झटका देते हैं. ऐसा करते ही यह कुछ ही पलों में खुलकर एक बुलेटप्रूफ शील्ड का रूप ले लेता है. यह शील्ड NIJ लेवल 3 की सुरक्षा देती है. यानी यह एके-47 जैसी खतरनाक राइफल और छोटे हथियारों की गोलियों को भी रोक सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य हमले के शुरुआती पलों में प्रधानमंत्री की जान की रक्षा करना होता है.

हथियार और टेक्नोलॉजी का अनोखा मेल

यह ब्रीफकेस सिर्फ एक ढाल नहीं है, बल्कि इसमें तकनीक और सुरक्षा का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है. इसमें एक छुपी हुई जेब भी होती है, जिसमें सुरक्षा कर्मी पिस्तौल रखते हैं. ऐसे में यह शील्ड बचाव के साथ-साथ जवाबी कार्रवाई में भी मददगार साबित होती है.

परमाणु कोड वाली अफवाह कितनी सही

इंटरनेट पर यह अफवाह आम है कि इस ब्रीफकेस में परमाणु हमले से जुड़े कोड रखे होते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरी तरह गलत है. यह ब्रीफकेस किसी भी तरह के गुप्त दस्तावेज या न्यूक्लियर कोड के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए होता है.

किस तकनीक से बना है यह ब्रीफकेस

इस ब्रीफकेस को केवेलर और अल्ट्रा हाई मॉलिक्यूलर वेट पॉलीथीन जैसे मजबूत मैटीरियल से तैयार किया जाता है. इसमें कई परतों में फाइबर बुना होता है, जो गोली या हमले के झटके को काफी हद तक सोख लेता है. यह सॉफ्ट और हार्ड आर्मर का मिश्रण होता है, जिससे इसकी ताकत और बढ़ जाती है.

एक सेकंड में खुलने वाली खास तकनीक

इस ब्रीफकेस की सबसे खास बात इसका ग्रेविटी असिस्टेड डिप्लॉयमेंट सिस्टम है. इसमें मौजूद क्विक रिलीज लैच को खींचते ही फोल्डिंग पैनल गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरते हैं और एक सेकंड से भी कम समय में यह पूरी तरह खुल जाता है. खुलते ही यह एक ठोस दीवार बन जाता है, जिसके पीछे खड़े व्यक्ति को पूरी सुरक्षा मिलती है.

ये भी पढ़ें: 10 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, 50 KMPH की स्पीड से चलेंगी हवाएं, दिल्ली-UP का मौसम कैसा?

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