PM मोदी ने की प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप से बात, ट्रेड डील और डिफेंस पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर बात की. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के मुद्दे पर बात हुई. पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया, 'राष्ट्रपति ट्रंप के साथ सार्थक बातचीत हुई. हमने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अहम टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में अपने आपसी सहयोग की समीक्षा की. हम अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए. हमने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रयास भी शामिल हैं.' पीएम मोदी और ट्रंप के बीच ये ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश ग्लोबल सप्लाई चेन, डिफेंस टेक्नोलॉजी के संयुक्त विकास, एआई, स्वच्छ और पारंपरिक ऊर्जा व्यापार में अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. यह बातचीत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ट्रेड टॉक को नई दिशा देने के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है. भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता बढ़ी ट्रंप के इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. 30 दिनों में लागू होने वाला यह कानून अमेरिकी प्रशासन को उन देशों से आने वाले सामानों पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदते हैं. इसके अलावा, यह रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली संस्थाओं और शैडो फ्लीट पर भी सख्त प्रतिबंध लगाता है. चूंकि भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए उन पर इस कदम का सबसे अधिक जोखिम है. हालांकि, कानून में स्पष्ट रूप से किसी देश का नाम नहीं दिया गया है. भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती आपूर्ति का हवाला देते हुए हमेशा रूसी तेल की खरीद का बचाव किया है और साथ ही अमेरिका को आगाह किया है कि इस तरह के नए टैरिफ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं. वहीं, इस कानून में उन देशों को गैस संबंधी शुल्कों से छूट का प्रावधान भी दिया गया है, जिनका रूसी गैस आयात रूस के कुल निर्यात के 15 फीसदी से कम रहा हो और जिन्होंने इस आयात को कम करने के लिए ठोस और महत्वपूर्ण कदम उठाए हों. अंतिम चरण में भारत-यूएस ट्रेड डील भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत लगभग अपने आखिरी चरण में है. दोनों देश मिलकर एक शुरुआती समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, हालांकि अमेरिकी टैरिफ से जुड़े कानूनी बदलावों के कारण इसमें कुछ देरी हुई है. इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सामानों पर लगने वाली ड्यूटी को कम या खत्म करेंगे. इसके अलावा, भारत ने अमेरिका से एनर्जी, कोयला और तकनीक से जुड़े उत्पाद ज्यादा खरीदने की इच्छा जताई है. यह शुरुआती समझौता आगे चलकर दोनों देशों के बीच एक बड़े और मजबूत व्यापार समझौते का रास्ता साफ करेगा.

Oct 1, 2026 - 07:30
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PM मोदी ने की प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप से बात, ट्रेड डील और डिफेंस पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर बात की. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के मुद्दे पर बात हुई. पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया, 'राष्ट्रपति ट्रंप के साथ सार्थक बातचीत हुई. हमने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अहम टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में अपने आपसी सहयोग की समीक्षा की. हम अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए. हमने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रयास भी शामिल हैं.'

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच ये ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश ग्लोबल सप्लाई चेन, डिफेंस टेक्नोलॉजी के संयुक्त विकास, एआई, स्वच्छ और पारंपरिक ऊर्जा व्यापार में अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. यह बातचीत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ट्रेड टॉक को नई दिशा देने के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है.

भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता बढ़ी

ट्रंप के इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. 30 दिनों में लागू होने वाला यह कानून अमेरिकी प्रशासन को उन देशों से आने वाले सामानों पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदते हैं. इसके अलावा, यह रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली संस्थाओं और शैडो फ्लीट पर भी सख्त प्रतिबंध लगाता है. चूंकि भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए उन पर इस कदम का सबसे अधिक जोखिम है. हालांकि, कानून में स्पष्ट रूप से किसी देश का नाम नहीं दिया गया है.

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती आपूर्ति का हवाला देते हुए हमेशा रूसी तेल की खरीद का बचाव किया है और साथ ही अमेरिका को आगाह किया है कि इस तरह के नए टैरिफ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं. वहीं, इस कानून में उन देशों को गैस संबंधी शुल्कों से छूट का प्रावधान भी दिया गया है, जिनका रूसी गैस आयात रूस के कुल निर्यात के 15 फीसदी से कम रहा हो और जिन्होंने इस आयात को कम करने के लिए ठोस और महत्वपूर्ण कदम उठाए हों.

अंतिम चरण में भारत-यूएस ट्रेड डील

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत लगभग अपने आखिरी चरण में है. दोनों देश मिलकर एक शुरुआती समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, हालांकि अमेरिकी टैरिफ से जुड़े कानूनी बदलावों के कारण इसमें कुछ देरी हुई है. इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सामानों पर लगने वाली ड्यूटी को कम या खत्म करेंगे. इसके अलावा, भारत ने अमेरिका से एनर्जी, कोयला और तकनीक से जुड़े उत्पाद ज्यादा खरीदने की इच्छा जताई है. यह शुरुआती समझौता आगे चलकर दोनों देशों के बीच एक बड़े और मजबूत व्यापार समझौते का रास्ता साफ करेगा.

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