Parivartini Ekadashi Paran 2026: सुबह 8:35 बजे तक व्रत नहीं खोल पाए तो क्या करें? जानें सही नियम

Ekadashi Paran 2026: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा गया है और इसका पारण 23 सितंबर 2026, बुधवार को किया जाएगा. पारण के लिए सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक का समय सबसे उपयुक्त बताया गया है. लेकिन नौकरी, यात्रा, पूजा की तैयारी या किसी दूसरी वजह से इस अवधि में व्रत नहीं खोल पाए तो क्या पारण अगले दिन करना चाहिए? जानिए एकादशी व्रत खोलने का शास्त्रीय नियम और सही विधि. परिवर्तिनी एकादशी पारण का समय पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8 बजे शुरू हुई और 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हुई. उदया तिथि के आधार पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा गया. व्रत का पारण 23 सितंबर को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट के बीच किया जा सकता है. शहर और सूर्योदय के समय के कारण इसमें कुछ मिनट का अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा. सुबह 8:35 बजे तक पारण न कर पाएं तो क्या करें? सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक पारण न कर पाने का अर्थ यह नहीं है कि व्रत अगले दिन तक जारी रखना होगा. यह पारण का सबसे शुभ और प्राथमिक समय है, लेकिन इसे चूक जाने पर व्रती द्वादशी तिथि के भीतर बाद में भी पारण कर सकता है. एकादशी पारण का मूल नियम है कि व्रत द्वादशी तिथि के भीतर ही खोला जाए. यदि प्रातःकाल का निर्धारित समय निकल जाए तो मध्याह्न के समय पारण करने से बचना चाहिए. मध्याह्न समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करके पारण किया जा सकता है. द्वादशी रहते हुए पारण कर लेना, उसे अगले दिन तक टालने से बेहतर माना गया है. शास्त्रीय नियमों में भी प्रातःकाल पारण को प्राथमिकता देते हुए, समय चूकने पर मध्याह्न के बाद पारण करने की व्यवस्था बताई गई है. यहां एक बात स्पष्ट समझनी जरूरी है, सुबह 8:35 बजे पारण की शुभ अवधि समाप्त होगी, द्वादशी तिथि नहीं. इसलिए निर्धारित समय निकलते ही घबराने या व्रत भंग होने की आशंका रखने की जरूरत नहीं है. देर से पारण करने की विधि यदि किसी कारण से सुबह पारण नहीं कर पाए हैं तो स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें. भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और कोई सात्विक मिठाई अर्पित करें. इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. भगवान से देरी के लिए क्षमा मांगते हुए पहले तुलसी युक्त जल ग्रहण करें. इसके बाद फल या प्रसाद लें और फिर सात्विक भोजन करें. पारण के भोजन में प्याज, लहसुन, मांसाहार और नशीले पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. बहुत तला-भुना या भारी भोजन भी तुरंत न लें, क्योंकि लंबे उपवास के बाद इससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. क्या केवल पानी पीकर पारण किया जा सकता है? यदि भोजन करने का समय न हो तो तुलसी डालकर जल ग्रहण करने से सांकेतिक पारण किया जा सकता है. इसके बाद सुविधा मिलने पर सात्विक भोजन करें. ध्यान रखें कि केवल पूजा कर लेना पारण नहीं माना जाता; व्रत पूरा करने के लिए जल, प्रसाद अथवा अनुमत आहार ग्रहण करना आवश्यक है. भूल से द्वादशी भी निकल जाए तो क्या करें? यदि लापरवाही या भ्रम के कारण द्वादशी तिथि के भीतर भी पारण न हो सके तो भगवान विष्णु से क्षमा मांगें. विष्णु मंत्र का जाप करें और जरूरतमंद को भोजन, फल या पीले वस्त्र का दान कर सकते हैं. इसके बाद व्रत खोल लें. धार्मिक नियमों में द्वादशी के भीतर पारण का विशेष महत्व है, लेकिन बीमारी, दवा, यात्रा या अनिवार्य परिस्थिति में स्वास्थ्य को खतरे में डालकर उपवास खींचना उचित नहीं है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Sep 22, 2026 - 20:30
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Parivartini Ekadashi Paran 2026: सुबह 8:35 बजे तक व्रत नहीं खोल पाए तो क्या करें? जानें सही नियम

Ekadashi Paran 2026: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा गया है और इसका पारण 23 सितंबर 2026, बुधवार को किया जाएगा. पारण के लिए सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक का समय सबसे उपयुक्त बताया गया है. लेकिन नौकरी, यात्रा, पूजा की तैयारी या किसी दूसरी वजह से इस अवधि में व्रत नहीं खोल पाए तो क्या पारण अगले दिन करना चाहिए? जानिए एकादशी व्रत खोलने का शास्त्रीय नियम और सही विधि.

परिवर्तिनी एकादशी पारण का समय

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8 बजे शुरू हुई और 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हुई. उदया तिथि के आधार पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा गया.

व्रत का पारण 23 सितंबर को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट के बीच किया जा सकता है. शहर और सूर्योदय के समय के कारण इसमें कुछ मिनट का अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा.

सुबह 8:35 बजे तक पारण न कर पाएं तो क्या करें?

सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक पारण न कर पाने का अर्थ यह नहीं है कि व्रत अगले दिन तक जारी रखना होगा. यह पारण का सबसे शुभ और प्राथमिक समय है, लेकिन इसे चूक जाने पर व्रती द्वादशी तिथि के भीतर बाद में भी पारण कर सकता है.

एकादशी पारण का मूल नियम है कि व्रत द्वादशी तिथि के भीतर ही खोला जाए. यदि प्रातःकाल का निर्धारित समय निकल जाए तो मध्याह्न के समय पारण करने से बचना चाहिए. मध्याह्न समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करके पारण किया जा सकता है. द्वादशी रहते हुए पारण कर लेना, उसे अगले दिन तक टालने से बेहतर माना गया है. शास्त्रीय नियमों में भी प्रातःकाल पारण को प्राथमिकता देते हुए, समय चूकने पर मध्याह्न के बाद पारण करने की व्यवस्था बताई गई है.

यहां एक बात स्पष्ट समझनी जरूरी है, सुबह 8:35 बजे पारण की शुभ अवधि समाप्त होगी, द्वादशी तिथि नहीं. इसलिए निर्धारित समय निकलते ही घबराने या व्रत भंग होने की आशंका रखने की जरूरत नहीं है.

देर से पारण करने की विधि

यदि किसी कारण से सुबह पारण नहीं कर पाए हैं तो स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें. भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और कोई सात्विक मिठाई अर्पित करें. इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें.

भगवान से देरी के लिए क्षमा मांगते हुए पहले तुलसी युक्त जल ग्रहण करें. इसके बाद फल या प्रसाद लें और फिर सात्विक भोजन करें. पारण के भोजन में प्याज, लहसुन, मांसाहार और नशीले पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. बहुत तला-भुना या भारी भोजन भी तुरंत न लें, क्योंकि लंबे उपवास के बाद इससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है.

क्या केवल पानी पीकर पारण किया जा सकता है?

यदि भोजन करने का समय न हो तो तुलसी डालकर जल ग्रहण करने से सांकेतिक पारण किया जा सकता है. इसके बाद सुविधा मिलने पर सात्विक भोजन करें. ध्यान रखें कि केवल पूजा कर लेना पारण नहीं माना जाता; व्रत पूरा करने के लिए जल, प्रसाद अथवा अनुमत आहार ग्रहण करना आवश्यक है.

भूल से द्वादशी भी निकल जाए तो क्या करें?

यदि लापरवाही या भ्रम के कारण द्वादशी तिथि के भीतर भी पारण न हो सके तो भगवान विष्णु से क्षमा मांगें. विष्णु मंत्र का जाप करें और जरूरतमंद को भोजन, फल या पीले वस्त्र का दान कर सकते हैं. इसके बाद व्रत खोल लें. धार्मिक नियमों में द्वादशी के भीतर पारण का विशेष महत्व है, लेकिन बीमारी, दवा, यात्रा या अनिवार्य परिस्थिति में स्वास्थ्य को खतरे में डालकर उपवास खींचना उचित नहीं है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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