Pakistan Wheat Crisis: पाकिस्तान में भुखमरी की नौबत? खाने को नहीं दाने, चले अफगानिस्तान से जंग लड़ने

Pakistan Food Crisis: एक ओर Pakistan और Afghanistan के बीच बढ़ते तनाव की खबरें हैं, तो दूसरी ओर पाकिस्तान के सामने गंभीर खाद्यान्न संकट का खतरा मंडरा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वर्ष देश में गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है, जिससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है. United States Department of Agriculture (USDA) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस वर्ष पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन 2 से 2.2 मिलियन टन तक कम हो सकता है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बड़ी आबादी रोटी, नान, ब्रेड और अन्य गेहूं आधारित खाद्य पदार्थों पर निर्भर है, इसलिए उत्पादन में कमी से आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है. पाकिस्तान के सामने बड़ा संकट स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पाकिस्तान पहले ही चावल और बाजरा जैसी अन्य फसलों का बड़े पैमाने पर निर्यात कर चुका है. ऐसे में घरेलू खाद्य सुरक्षा काफी हद तक गेहूं पर निर्भर हो गई है. यदि अनुमानित गिरावट होती है, तो सरकार को आयात बढ़ाने, भंडारण प्रबंधन मजबूत करने या सब्सिडी जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, अन्यथा महंगाई और खाद्य संकट गहरा सकता है. इसके अलावा देश आंतरिक और सीमावर्ती चुनौतियों से भी जूझ रहा है. Balochistan और Khyber Pakhtunkhwa जैसे क्षेत्रों में अस्थिरता का असर कृषि गतिविधियों पर पड़ा है. इन इलाकों में अशांति और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के कारण उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. कई मोर्चे पर घिरा पाकिस्तान कुल मिलाकर पाकिस्तान इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है. एक ओर संभावित गेहूं की कमी और दूसरी ओर सुरक्षा संबंधी तनाव. आने वाले समय में सरकारी नीतियां और वैश्विक बाजार से आयात की उपलब्धता ही स्थिति की दिशा तय करेंगी. ये भी पढ़ें: बेहतर परफॉर्मेंस, शानदार मुनाफा… फिर क्यों ये कंपनी दिखाने जा रही 4000 स्टाफ को बाहर का रास्ता?

Feb 27, 2026 - 17:30
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Pakistan Wheat Crisis: पाकिस्तान में भुखमरी की नौबत? खाने को नहीं दाने, चले अफगानिस्तान से जंग लड़ने

Pakistan Food Crisis: एक ओर Pakistan और Afghanistan के बीच बढ़ते तनाव की खबरें हैं, तो दूसरी ओर पाकिस्तान के सामने गंभीर खाद्यान्न संकट का खतरा मंडरा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वर्ष देश में गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है, जिससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है.

United States Department of Agriculture (USDA) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस वर्ष पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन 2 से 2.2 मिलियन टन तक कम हो सकता है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बड़ी आबादी रोटी, नान, ब्रेड और अन्य गेहूं आधारित खाद्य पदार्थों पर निर्भर है, इसलिए उत्पादन में कमी से आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है.

पाकिस्तान के सामने बड़ा संकट

स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पाकिस्तान पहले ही चावल और बाजरा जैसी अन्य फसलों का बड़े पैमाने पर निर्यात कर चुका है. ऐसे में घरेलू खाद्य सुरक्षा काफी हद तक गेहूं पर निर्भर हो गई है. यदि अनुमानित गिरावट होती है, तो सरकार को आयात बढ़ाने, भंडारण प्रबंधन मजबूत करने या सब्सिडी जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, अन्यथा महंगाई और खाद्य संकट गहरा सकता है.

इसके अलावा देश आंतरिक और सीमावर्ती चुनौतियों से भी जूझ रहा है. Balochistan और Khyber Pakhtunkhwa जैसे क्षेत्रों में अस्थिरता का असर कृषि गतिविधियों पर पड़ा है. इन इलाकों में अशांति और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के कारण उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है.

कई मोर्चे पर घिरा पाकिस्तान

कुल मिलाकर पाकिस्तान इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है. एक ओर संभावित गेहूं की कमी और दूसरी ओर सुरक्षा संबंधी तनाव. आने वाले समय में सरकारी नीतियां और वैश्विक बाजार से आयात की उपलब्धता ही स्थिति की दिशा तय करेंगी.

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