Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी पर कर सकते हैं ये 5 शुभ काम, मां लक्ष्मी घर में करती हैं वास

Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि ये जल से जुड़ा त्योहार है. 'निर्जला' का अर्थ है 'बिना जल के', अर्थात इस व्रत में भक्त न तो भोजन करते हैं और न ही पानी ग्रहण करते हैं. मानव जीवन में जल का विशेष महत्व है, हमारा शरीर भी पंचतत्व से मिलकर बना है जिसमें जल की अहम भूमिका है. यही वजह है कि इस खास एकादशी पर जो बिना जल का व्रत कर, दान पुण्य करता है और विधि विधान से विष्णु जी का पूजन करता है उसके सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन में अनेकों सुखों की प्राप्ति होती है. निर्जला एकादशी बेहद पावन दिन है, ऐसे में इस दिन कुछ खास कार्य जरुर करें, इससे अनंत काल तक शुभ फल मिलते हैं. निर्जला एकादशी 2025 कब ? निर्जला एकादशी इस साल 6 जून 2025 को है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 जून 2025 को सुबह 2.15 मिनट पर शुरू होगी और 7 जून 2025 को सुबह 4.47 मिनट पर इसका समापन होगा. पूजा मुहूर्त - सुबह 5.23 - सुबह 10.36 व्रत पारण समय - दोपहर 1.44 - शाम 4.31 (7 जून 2025) निर्जला एकादशी पर जरुर करें ये 5 काम जल से भरा मटका - शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ माह की गर्मी में निर्जला एकादशी पर जो व्यक्ति जल से भरा मटका जरुरतमंद या ब्राह्मण को दान करता है उसे रोग, पितृ और चंद्र दोष दूर होते हैं. क्योंकि चंद्रमा जल का प्रतीक है और एकादशी का दिन पितरों को संतुष्टी पहुंचाता है. आर्थिर रूप से संकट खत्म होते हैं. मंदिर में लगाएं ये पौधा - इस दिन मंदिर के प्रांगण या किसी खाली स्थान पर पीपल वृक्ष लगाने से राहु-केतु का अशुभ प्रभाव भी कम होता है. कहा जाता है कि पीपल में पितरों का भी वास होता है घर लाएं ये यंत्र - वेदों के अनुसार श्रीयंत्र में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. मान्यता है कि एकादशी या शुक्रवार के दिन घर में श्रीयंत्र की स्थापना करने और विधिवत श्रीयंत्र की पूजा,उपासना से प्राणी को सभी सुख प्राप्त होते हैं,धन की घर में कमी नहीं रहती. मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं. बृहस्पति को मजबूत करने - इस दिन पीले और सफेद रंग के नए वस्त्र खरीदना भी शुभ माना जाता है. साथ ही, धार्मिक चीजें जैसे भगवद गीता, रामायण, विष्णु सहस्रनाम जैसी किताबें भी इस दिन खरीदना शुभ माना जाता है. तुलसी या रुद्राक्ष की माला, भगवान विष्णु का शंख और पीतल या तांबे का कलश भी खरीदना चाहिए. इससे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. घर में बरकत आती है. वास्तु दोष दूर - इसके लिए पानी में गुलाब, मोगरा जैसे सुंगधित फूलों की पंखुड़ियां डालें और इस जल से भगवान का अभिषेक करें. इसके लिए पानी में गुलाब, मोगरा जैसे सुंगधित फूलों की पंखुड़ियां डालें और इस जल से भगवान का अभिषेक करें. Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला व्रत क्यों सबसे कठिन माना गया है, सबसे पहले इस व्रत को किसने रखा था Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

May 27, 2025 - 20:30
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Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी पर कर सकते हैं ये 5 शुभ काम, मां लक्ष्मी घर में करती हैं वास

Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि ये जल से जुड़ा त्योहार है. 'निर्जला' का अर्थ है 'बिना जल के', अर्थात इस व्रत में भक्त न तो भोजन करते हैं और न ही पानी ग्रहण करते हैं. मानव जीवन में जल का विशेष महत्व है, हमारा शरीर भी पंचतत्व से मिलकर बना है जिसमें जल की अहम भूमिका है.

यही वजह है कि इस खास एकादशी पर जो बिना जल का व्रत कर, दान पुण्य करता है और विधि विधान से विष्णु जी का पूजन करता है उसके सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन में अनेकों सुखों की प्राप्ति होती है. निर्जला एकादशी बेहद पावन दिन है, ऐसे में इस दिन कुछ खास कार्य जरुर करें, इससे अनंत काल तक शुभ फल मिलते हैं.

निर्जला एकादशी 2025 कब ?

निर्जला एकादशी इस साल 6 जून 2025 को है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 जून 2025 को सुबह 2.15 मिनट पर शुरू होगी और 7 जून 2025 को सुबह 4.47 मिनट पर इसका समापन होगा.

  • पूजा मुहूर्त - सुबह 5.23 - सुबह 10.36
  • व्रत पारण समय - दोपहर 1.44 - शाम 4.31 (7 जून 2025)

निर्जला एकादशी पर जरुर करें ये 5 काम

जल से भरा मटका - शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ माह की गर्मी में निर्जला एकादशी पर जो व्यक्ति जल से भरा मटका जरुरतमंद या ब्राह्मण को दान करता है उसे रोग, पितृ और चंद्र दोष दूर होते हैं. क्योंकि चंद्रमा जल का प्रतीक है और एकादशी का दिन पितरों को संतुष्टी पहुंचाता है. आर्थिर रूप से संकट खत्म होते हैं.

मंदिर में लगाएं ये पौधा - इस दिन मंदिर के प्रांगण या किसी खाली स्थान पर पीपल वृक्ष लगाने से राहु-केतु का अशुभ प्रभाव भी कम होता है. कहा जाता है कि पीपल में पितरों का भी वास होता है

घर लाएं ये यंत्र - वेदों के अनुसार श्रीयंत्र में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. मान्यता है कि एकादशी या शुक्रवार के दिन घर में श्रीयंत्र की स्थापना करने और विधिवत श्रीयंत्र की पूजा,उपासना से प्राणी को सभी सुख प्राप्त होते हैं,धन की घर में कमी नहीं रहती. मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं.

बृहस्पति को मजबूत करने - इस दिन पीले और सफेद रंग के नए वस्त्र खरीदना भी शुभ माना जाता है. साथ ही, धार्मिक चीजें जैसे भगवद गीता, रामायण, विष्णु सहस्रनाम जैसी किताबें भी इस दिन खरीदना शुभ माना जाता है. तुलसी या रुद्राक्ष की माला, भगवान विष्णु का शंख और पीतल या तांबे का कलश भी खरीदना चाहिए. इससे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. घर में बरकत आती है.

वास्तु दोष दूर - इसके लिए पानी में गुलाब, मोगरा जैसे सुंगधित फूलों की पंखुड़ियां डालें और इस जल से भगवान का अभिषेक करें. इसके लिए पानी में गुलाब, मोगरा जैसे सुंगधित फूलों की पंखुड़ियां डालें और इस जल से भगवान का अभिषेक करें.

Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला व्रत क्यों सबसे कठिन माना गया है, सबसे पहले इस व्रत को किसने रखा था

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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