NEET PG 2025: अब एक ही शिफ्ट में होगी नीट पीजी परीक्षा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

NEET PG 2025 की तैयारी कर रहे लाखों मेडिकल छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि अब नीट पीजी 2025 की परीक्षा सिर्फ एक ही शिफ्ट में कराई जाएगी. यह फैसला परीक्षा की पारदर्शिता और सभी छात्रों को समान अवसर देने के मकसद से लिया गया है. पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि नीट पीजी जैसी बड़ी परीक्षाएं दो अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाती रही हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो शिफ्टों में आयोजित परीक्षा में सवालों की कठिनाई का स्तर अलग हो सकता है, जिससे कुछ छात्रों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है. कोर्ट ने कहा किसी भी दो प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को पूरी तरह से समान नहीं माना जा सकता. यह स्थिति असमानता और मनमानी को जन्म देती है. ऐसे में सभी छात्रों के साथ न्याय करने के लिए परीक्षा एक ही शिफ्ट में कराना जरूरी है. यह भी पढ़ें: सरकारी अफसर बनने का सुनहरा मौका, असिस्टेंट कमिश्नर के बंपर पदों भर्ती शुरू, लाखों में है सैलरी मेडिकल छात्रों के लिए राहत इस फैसले से मेडिकल छात्रों को राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें किसी और शिफ्ट के कठिन या आसान पेपर की चिंता नहीं करनी होगी. सभी उम्मीदवार एक ही समय पर एक जैसे प्रश्नों के साथ परीक्षा देंगे, जिससे परिणामों की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहेगी. यह भी पढ़ें - इंस्टाग्राम पर फोटो पोस्ट करके हर महीने इतने करोड़ रुपये कमा लेते हैं विराट कोहली, IITian की सैलरी भी पड़ जाएगी कम

May 30, 2025 - 17:30
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NEET PG 2025: अब एक ही शिफ्ट में होगी नीट पीजी परीक्षा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

NEET PG 2025 की तैयारी कर रहे लाखों मेडिकल छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि अब नीट पीजी 2025 की परीक्षा सिर्फ एक ही शिफ्ट में कराई जाएगी. यह फैसला परीक्षा की पारदर्शिता और सभी छात्रों को समान अवसर देने के मकसद से लिया गया है.

पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि नीट पीजी जैसी बड़ी परीक्षाएं दो अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाती रही हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो शिफ्टों में आयोजित परीक्षा में सवालों की कठिनाई का स्तर अलग हो सकता है, जिससे कुछ छात्रों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है.

कोर्ट ने कहा किसी भी दो प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को पूरी तरह से समान नहीं माना जा सकता. यह स्थिति असमानता और मनमानी को जन्म देती है. ऐसे में सभी छात्रों के साथ न्याय करने के लिए परीक्षा एक ही शिफ्ट में कराना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: सरकारी अफसर बनने का सुनहरा मौका, असिस्टेंट कमिश्नर के बंपर पदों भर्ती शुरू, लाखों में है सैलरी

मेडिकल छात्रों के लिए राहत

इस फैसले से मेडिकल छात्रों को राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें किसी और शिफ्ट के कठिन या आसान पेपर की चिंता नहीं करनी होगी. सभी उम्मीदवार एक ही समय पर एक जैसे प्रश्नों के साथ परीक्षा देंगे, जिससे परिणामों की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहेगी.

यह भी पढ़ें - इंस्टाग्राम पर फोटो पोस्ट करके हर महीने इतने करोड़ रुपये कमा लेते हैं विराट कोहली, IITian की सैलरी भी पड़ जाएगी कम

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