MP Board 12th Result 2026: एमपी बोर्ड 12वीं में मजदूर की बेटी ने रचा इतिहास, पूरे प्रदेश में हासिल की तीसरी रैंक
छिंदवाड़ा जिले में रहने वाले एक मजदूर की बेटी ने अपनी लगन और मेहनत से सबको चौंका दिया. दरअसल, इस लड़की ने मध्य प्रदेश बोर्ड 12वीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की. हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय से पढ़ने वाली दीपाली सोनी की, जिसने आर्थिक तंगी को दरकिनार करके कामयाबी की नई दास्तान लिख दी. हर मुश्किल को ऐसे किया पार दीपाली छिंदवाड़ा के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की छात्रा हैं. उनके पिता रोज मजदूरी पर जाते हैं. परिवार में बहुत आर्थिक परेशानियां हैं. कई बार पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें या अन्य सामान खरीदना मुश्किल हो जाता है, लेकिन दीपाली ने इन सभी अभावों को अपनी राह में नहीं आने दिया. वह कहती हैं कि मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है. संसाधनों की कमी होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. अगर इरादा मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है. दीपाली को इतने मिले नंबर इस बार की परीक्षा में दीपाली की सबसे बड़ी उपलब्धि अकाउंट्स विषय में रही. उन्होंने इस विषय में 100 में से पूरे 100 अंक हासिल किए. 500 में से कुल 488 अंकों के साथ वह प्रदेश की मेरिट लिस्ट में तीसरे नंबर पर रहीं. वैसे तो कई अन्य छात्राएं भी तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन दीपाली की कहानी अलग है, क्योंकि वह गरीबी से लड़कर यहां तक पहुंचीं. पैरेंट्स को दिया पूरा श्रेय दीपाली की मां और पिता दोनों ही बहुत मेहनती हैं. पिता दिन भर मजदूरी करते हैं तो मां घर संभालती हैं. दोनों ने कभी दीपाली की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं डाली. दोनों अपनी बेटी को हमेशा प्रोत्साहित करते रहे. दीपाली बताती हैं कि उनके माता-पिता ने उनके लिए काफी त्याग किया. उनका सहारा न होता तो मैं यह मुकाम हासिल न कर पाती. टीचर्स के लिए कही यह बात स्कूल के शिक्षकों ने भी दीपाली की बहुत मदद की. वह नियमित रूप से क्लास में जाती और टीचर्स से डाउट क्लियर करती थी. टीचर्स के मुताबिक, दीपाली क्लास में ध्यान से सुनती थी और घर पर भी रोज रिवीजन करती थी. बिना कोचिंग लिए, सिर्फ सरकारी स्कूल की पढ़ाई से उन्होंने यह कामयाबी हासिल की. क्या है दीपाली का सपना? दीपाली बताती हैं कि वह चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनना चाहती हैं. उनका सपना है कि वह अच्छी नौकरी करके अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारें. पिता को मजदूरी की जिंदगी से बाहर निकालना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई कभी मत छोड़ो. चाहे घर में कितनी भी परेशानी हो, पढ़ाई जारी रखो. ये भी पढ़ें: CBSE 10वीं के रिजल्ट में हर्षा ने कर दिया कमाल, 500 में 500 अंक लाकर रचा इतिहास
छिंदवाड़ा जिले में रहने वाले एक मजदूर की बेटी ने अपनी लगन और मेहनत से सबको चौंका दिया. दरअसल, इस लड़की ने मध्य प्रदेश बोर्ड 12वीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की. हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय से पढ़ने वाली दीपाली सोनी की, जिसने आर्थिक तंगी को दरकिनार करके कामयाबी की नई दास्तान लिख दी.
हर मुश्किल को ऐसे किया पार
दीपाली छिंदवाड़ा के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की छात्रा हैं. उनके पिता रोज मजदूरी पर जाते हैं. परिवार में बहुत आर्थिक परेशानियां हैं. कई बार पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें या अन्य सामान खरीदना मुश्किल हो जाता है, लेकिन दीपाली ने इन सभी अभावों को अपनी राह में नहीं आने दिया. वह कहती हैं कि मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है. संसाधनों की कमी होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. अगर इरादा मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है.
दीपाली को इतने मिले नंबर
इस बार की परीक्षा में दीपाली की सबसे बड़ी उपलब्धि अकाउंट्स विषय में रही. उन्होंने इस विषय में 100 में से पूरे 100 अंक हासिल किए. 500 में से कुल 488 अंकों के साथ वह प्रदेश की मेरिट लिस्ट में तीसरे नंबर पर रहीं. वैसे तो कई अन्य छात्राएं भी तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन दीपाली की कहानी अलग है, क्योंकि वह गरीबी से लड़कर यहां तक पहुंचीं.
पैरेंट्स को दिया पूरा श्रेय
दीपाली की मां और पिता दोनों ही बहुत मेहनती हैं. पिता दिन भर मजदूरी करते हैं तो मां घर संभालती हैं. दोनों ने कभी दीपाली की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं डाली. दोनों अपनी बेटी को हमेशा प्रोत्साहित करते रहे. दीपाली बताती हैं कि उनके माता-पिता ने उनके लिए काफी त्याग किया. उनका सहारा न होता तो मैं यह मुकाम हासिल न कर पाती.
टीचर्स के लिए कही यह बात
स्कूल के शिक्षकों ने भी दीपाली की बहुत मदद की. वह नियमित रूप से क्लास में जाती और टीचर्स से डाउट क्लियर करती थी. टीचर्स के मुताबिक, दीपाली क्लास में ध्यान से सुनती थी और घर पर भी रोज रिवीजन करती थी. बिना कोचिंग लिए, सिर्फ सरकारी स्कूल की पढ़ाई से उन्होंने यह कामयाबी हासिल की.
क्या है दीपाली का सपना?
दीपाली बताती हैं कि वह चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनना चाहती हैं. उनका सपना है कि वह अच्छी नौकरी करके अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारें. पिता को मजदूरी की जिंदगी से बाहर निकालना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई कभी मत छोड़ो. चाहे घर में कितनी भी परेशानी हो, पढ़ाई जारी रखो.
ये भी पढ़ें: CBSE 10वीं के रिजल्ट में हर्षा ने कर दिया कमाल, 500 में 500 अंक लाकर रचा इतिहास
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