Mahashivratri 2026: रात 12:09 से 1 बजे तक बनेगा दुर्लभ ग्रह योग, पुंडरीक महाराज ने बताया क्यों जागना जरूरी?
Pundrik Maharaj on Mahashivratri: इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026, रविवार के दिन है. आने वाली शिवरात्रि को लेकर साधु-संतों और आध्यात्मिक गुरुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. प्रसिद्ध कथावाचक श्री पुंडरीक महाराज ने इस साल की शिवरात्रि को बेहद ही खास बताते हुए कहा कि, इस दिन रात के समय बेहद ही खास ग्रहों का ऐसा संयोग बन रहा है, जो साधना और ऊर्जा जागरण के लिहाज से दुर्लभ माना जा सकता है. Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 1, 2 नहीं 3 ग्रहों की बदलेगी चाल, कई राशियां की किस्मत होगी बुलंद पुंडरीक महाराज से जानिए ये शिवरात्रि क्यों हैं खास? पुंडरीक महाराज के मुताबिक, इस बार रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजे तक एक ऐसा “प्लैनेटरी सिस्टम” सक्रिय रहेगा, जिसमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह सामान्य दिनों की तुलना में काफी अलग रहने वाला है. उन्होंने बताया कि, आमतौर पर ग्रहों की चाल की वजह से ऊर्जा कभी नीचे की ओर बहती है और कभी ऊपर की ओर, लेकिन इस बार शिवरात्रि की रात यह ऊर्जा उर्ध्वगामी यानी ऊपर की ओर प्रवाहित होने वाली होगी. View this post on Instagram A post shared by Pundrik Goswami (@sripundrik) ध्यान और शिव का स्मरण का लाभ महाराज ने इसे ऊर्जा का शोर कहा है, यानी उस समय वातावरण में काफी ज्यादा सूक्ष्म ऊर्जा सक्रिय रहेगी. उनके मुताबिक, अगर व्यक्ति उस दौरान जागकर मात्र ध्यान करने बैठ जाए या शिव का स्मरण कर ले तो इसका सकारात्मक प्रभाव मन और शरीर पर अच्छा प्रभाव डाल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि, अगर कोई पूरी रात जाग नहीं सकता, तो कम से कम 45 मिनट का एक मुहूर्त जरूर निकालकर साधना करें. पुंडरीक महाराज ने इस ग्रह योग की तुलना चुंबकीय प्रभाव से की, जैसे मैग्नेट कभी आकर्षित करता है और कभी किसी चीज को रिपेयर करता है, वैसे ही ग्रहों की स्थिति इंसान के भीतर की ऊर्जा पर प्रभाव डालती है. उनका मानना है कि, इस बार शिवरात्री की रात ब्रह्मांड की ऊर्जा मानो किसी दिव्य लीला के तहत मानव चेतना को ऊपर उठाने के लिए सक्रिय हो रही हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि, यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि ऊर्जा और प्रकृति के नियमों पर आधारित है. इसलिए एस खास समय में जागना, ध्यान करना या शिव का नाम लेना एक साधारण धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि अपने अंदर की चेतना को सक्रिय करने का मौका हो सकता है. महाशिवरात्रि को हमेशा से ही साधना और आत्मिक जागरण की रात कहा गया है, लेकिन इस साल यह दुर्लभ ग्रह योग इसे ओर भी खास बना रहा है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Pundrik Maharaj on Mahashivratri: इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026, रविवार के दिन है. आने वाली शिवरात्रि को लेकर साधु-संतों और आध्यात्मिक गुरुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है.
प्रसिद्ध कथावाचक श्री पुंडरीक महाराज ने इस साल की शिवरात्रि को बेहद ही खास बताते हुए कहा कि, इस दिन रात के समय बेहद ही खास ग्रहों का ऐसा संयोग बन रहा है, जो साधना और ऊर्जा जागरण के लिहाज से दुर्लभ माना जा सकता है.
पुंडरीक महाराज से जानिए ये शिवरात्रि क्यों हैं खास?
पुंडरीक महाराज के मुताबिक, इस बार रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजे तक एक ऐसा “प्लैनेटरी सिस्टम” सक्रिय रहेगा, जिसमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह सामान्य दिनों की तुलना में काफी अलग रहने वाला है.
उन्होंने बताया कि, आमतौर पर ग्रहों की चाल की वजह से ऊर्जा कभी नीचे की ओर बहती है और कभी ऊपर की ओर, लेकिन इस बार शिवरात्रि की रात यह ऊर्जा उर्ध्वगामी यानी ऊपर की ओर प्रवाहित होने वाली होगी.
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ध्यान और शिव का स्मरण का लाभ
महाराज ने इसे ऊर्जा का शोर कहा है, यानी उस समय वातावरण में काफी ज्यादा सूक्ष्म ऊर्जा सक्रिय रहेगी. उनके मुताबिक, अगर व्यक्ति उस दौरान जागकर मात्र ध्यान करने बैठ जाए या शिव का स्मरण कर ले तो इसका सकारात्मक प्रभाव मन और शरीर पर अच्छा प्रभाव डाल सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि, अगर कोई पूरी रात जाग नहीं सकता, तो कम से कम 45 मिनट का एक मुहूर्त जरूर निकालकर साधना करें.
पुंडरीक महाराज ने इस ग्रह योग की तुलना चुंबकीय प्रभाव से की, जैसे मैग्नेट कभी आकर्षित करता है और कभी किसी चीज को रिपेयर करता है, वैसे ही ग्रहों की स्थिति इंसान के भीतर की ऊर्जा पर प्रभाव डालती है. उनका मानना है कि, इस बार शिवरात्री की रात ब्रह्मांड की ऊर्जा मानो किसी दिव्य लीला के तहत मानव चेतना को ऊपर उठाने के लिए सक्रिय हो रही हैं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि, यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि ऊर्जा और प्रकृति के नियमों पर आधारित है. इसलिए एस खास समय में जागना, ध्यान करना या शिव का नाम लेना एक साधारण धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि अपने अंदर की चेतना को सक्रिय करने का मौका हो सकता है. महाशिवरात्रि को हमेशा से ही साधना और आत्मिक जागरण की रात कहा गया है, लेकिन इस साल यह दुर्लभ ग्रह योग इसे ओर भी खास बना रहा है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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