Kartik Swami Murugan Temple: देवभूमि उत्तराखंड का अनोखा मंदिर, जहां अस्थियों की होती है पूजा

Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड की पवित्र धरती को देवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां कई मंदिर हैं. यहां स्थित मंदिर और तीर्थस्थल आस्था का केंद्र है. लेकिन उत्तराखंड में भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित एक ऐसा मंदिर है, जोकि अपनी अनोखी  आस्था के लिए प्रसिद्ध है. कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कनकचौरी गांव के निकट कार्तिक स्वामी मंदिर है. पहाड़ की चोटी पर स्थित यह मंदिर अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए आकर्षक का केंद्र मानी जाती है. खासकर सावन और शिवरात्रि जैसे अवसरों पर मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान होते हैं. कार्तिक स्वामी मंदिर त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, जहां किसी मूर्ति या प्रतिमा की नहीं अस्थियों की पूजा होती है. जी हां, आपको भले ही सुनकर हैरानी हो रही है, लेकिन यह सत्य है कि, इस मंदिर में कोई मूर्ति स्थापित नहीं है. वहीं मंदिर का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना है. दुनियाभर में प्रतिमा, शिला, पेड़, पहाड़ या नदी के रूप में पूजा होती है. लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के कार्तिक स्वामी मंदिर (मुरुगन मंदिर) अपनी दिव्य आभा, पवित्रता और अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर में प्रतिमा के बजाय प्राकृतिक शिला है, जिसे कार्तिकेय की अस्थियां माना जाता है. स्कंद पुराण में वर्णित क्राउंट पर्वत पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर को वह स्थान माना जाता है, जहां भगवान कार्तिकेय ने ध्यान किया था. कार्तिक स्वामी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा कथा के अनुसार, एक बार गणेश और कार्तिकेय के बीच प्रतिस्पर्धा (प्रतियोगिता) हुई. भगवान गणेश से प्रतियोगिता में पराजित होने पर कार्तिकेय आहत होकर पहाड़ों पर चले गए और अपने माता-पिता शिव-पार्वती को प्रेम का प्रमाण देते हुए शरीर का त्याग कर दिया. इसलिए इस मंदिर को प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. ये भी पढ़ें: Panchgrahi Yog: होलाष्टक से पहले कुंभ राशि में 5 ग्रहों की टोली, पंचग्रही योग से दो राशियों पर मंडराया संकट ! Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Feb 23, 2026 - 14:30
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Kartik Swami Murugan Temple: देवभूमि उत्तराखंड का अनोखा मंदिर, जहां अस्थियों की होती है पूजा

Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड की पवित्र धरती को देवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां कई मंदिर हैं. यहां स्थित मंदिर और तीर्थस्थल आस्था का केंद्र है. लेकिन उत्तराखंड में भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित एक ऐसा मंदिर है, जोकि अपनी अनोखी  आस्था के लिए प्रसिद्ध है.

कार्तिक स्वामी मंदिर

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कनकचौरी गांव के निकट कार्तिक स्वामी मंदिर है. पहाड़ की चोटी पर स्थित यह मंदिर अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए आकर्षक का केंद्र मानी जाती है. खासकर सावन और शिवरात्रि जैसे अवसरों पर मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान होते हैं. कार्तिक स्वामी मंदिर त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, जहां किसी मूर्ति या प्रतिमा की नहीं अस्थियों की पूजा होती है. जी हां, आपको भले ही सुनकर हैरानी हो रही है, लेकिन यह सत्य है कि, इस मंदिर में कोई मूर्ति स्थापित नहीं है. वहीं मंदिर का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना है.

दुनियाभर में प्रतिमा, शिला, पेड़, पहाड़ या नदी के रूप में पूजा होती है. लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के कार्तिक स्वामी मंदिर (मुरुगन मंदिर) अपनी दिव्य आभा, पवित्रता और अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर में प्रतिमा के बजाय प्राकृतिक शिला है, जिसे कार्तिकेय की अस्थियां माना जाता है. स्कंद पुराण में वर्णित क्राउंट पर्वत पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर को वह स्थान माना जाता है, जहां भगवान कार्तिकेय ने ध्यान किया था.

कार्तिक स्वामी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, एक बार गणेश और कार्तिकेय के बीच प्रतिस्पर्धा (प्रतियोगिता) हुई. भगवान गणेश से प्रतियोगिता में पराजित होने पर कार्तिकेय आहत होकर पहाड़ों पर चले गए और अपने माता-पिता शिव-पार्वती को प्रेम का प्रमाण देते हुए शरीर का त्याग कर दिया. इसलिए इस मंदिर को प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.

ये भी पढ़ें: Panchgrahi Yog: होलाष्टक से पहले कुंभ राशि में 5 ग्रहों की टोली, पंचग्रही योग से दो राशियों पर मंडराया संकट !

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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