ISRO का मिशन फेल, लेकिन DRDO ने सुनाई खुशखबरी, इस खतरनाक मिसाइल की हुई सफल टेस्टिंग, जानें खासियत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) की PSLV-C62 की लॉन्चिंग असफल हो गई, लेकिन सोमवार का दिन भारत के एक अच्छी खबर लेकर भी आया. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की हैदराबाद स्थित लैब DRDL ने फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 12 मिनट से अधिक लंबा ग्राउंड टेस्ट पूरा कर लिया है. इस टेस्ट को हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM) का दिल माना जाता है. दुनिया के अधिकतर टेस्ट 100 सेकंड से कम चलते हैं लेकिन भारत ने 720 सेकंड (12 मिनट) का रिकॉर्ड बनाया है. इसे हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में भारत को आगे ले जाने वाला कदम बताया जा रहा है. क्या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल? हाइपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की गति से 5 गुना ज्यादा स्पीड से चलती है. इसमें स्क्रैमजेट इंजन लगा होता है जो एक एयर-ब्रीदिंग इंजन है और हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है. सामान्य जेट इंजन से अलग यह सुपरसोनिक स्पीड पर काम करता है.  Mach 6-7 पर तापमान हजारों डिग्री पहुंच जाता है. यह सिस्टम ईंधन या कूलेंट को इंजन की दीवारों से गुजारकर ठंडा रखता है, ताकि इंजन न पिघले. इसे एक्टिव कूलिंग कहा जाता है. ये टेस्ट हैदराबाद की SCPT (Scramjet Connect Pipe Test) फैसिलिटी में हुआ, जहां इंजन ने 12 मिनट से ज्यादा लगातार जलन (कम्बशन) बनाए रखी. बैलिस्टिक VS हाइपरसोनिक  बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंची उड़ान भरती हैं और आसानी से ट्रैक हो जाती हैं. हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें नीचे उड़ती हैं जो तेज और घुमावदार रास्ता लेती हैं और इस कारण रडार से बचना आसान होता है. S-400 या पैट्रियट जैसे सिस्टम को इन तेज मिसाइलों को ट्रैक करने में मुश्किल होती है. आत्मनिर्भर भारत 100 फीसदी घरेलू तकनीक और भारतीय इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ ये काम किया जा रहा है इसलिए इन पर कोई विदेशी प्रतिबंध नहीं लग सकता. बता दें कि चीन और अमेरिका भी इस रेस में हैं जबकि भारत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है. DRDO के हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स  LRASHM (Long Range Anti-Ship Missile) इसकी रेंज 1500 किमी तक है और ये सॉलिड बूस्टर से शुरू होती है, फिर क्रूज और ग्लाइड मोड में जाती है. ये मिसाइल जहाजों को भी मार सकती है.AL-HCM (Air-Launched Hypersonic Cruise Missile): हवा से लॉन्च DCR (Dual Combustion Ramjet) से वजन कम और एयर-ब्रीदिंग बेहतर होती है. रैमजेट से स्क्रैमजेट में हॉट फ्यूल इंजेक्ट हो सकता है. Agni-1P  2 स्टेज मिसाइल, सॉलिड प्रोपेलेंट. री-एंट्री व्हीकल C-HGB जैसा, बूस्ट ग्लाइड मैन्यूवर, इसकी रेंज 1500 किमी है. BM-04  3 स्टेज प्लेटफॉर्म, Agni-P बेस पर और एडवांस C-HGB 4 कंट्रोल फिन्स के साथ, इसकी रेंज भी 1500 किमी है.  ये भी पढ़ें टैरिफ पर तनातनी के बीच डोनाल्ड ट्रंप आएंगे भारत? अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने किया खुलासा

Jan 13, 2026 - 03:30
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ISRO का मिशन फेल, लेकिन DRDO ने सुनाई खुशखबरी, इस खतरनाक मिसाइल की हुई सफल टेस्टिंग, जानें खासियत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) की PSLV-C62 की लॉन्चिंग असफल हो गई, लेकिन सोमवार का दिन भारत के एक अच्छी खबर लेकर भी आया. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की हैदराबाद स्थित लैब DRDL ने फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 12 मिनट से अधिक लंबा ग्राउंड टेस्ट पूरा कर लिया है. इस टेस्ट को हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM) का दिल माना जाता है. दुनिया के अधिकतर टेस्ट 100 सेकंड से कम चलते हैं लेकिन भारत ने 720 सेकंड (12 मिनट) का रिकॉर्ड बनाया है. इसे हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में भारत को आगे ले जाने वाला कदम बताया जा रहा है.

क्या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल?

हाइपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की गति से 5 गुना ज्यादा स्पीड से चलती है. इसमें स्क्रैमजेट इंजन लगा होता है जो एक एयर-ब्रीदिंग इंजन है और हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है. सामान्य जेट इंजन से अलग यह सुपरसोनिक स्पीड पर काम करता है. 

Mach 6-7 पर तापमान हजारों डिग्री पहुंच जाता है. यह सिस्टम ईंधन या कूलेंट को इंजन की दीवारों से गुजारकर ठंडा रखता है, ताकि इंजन न पिघले. इसे एक्टिव कूलिंग कहा जाता है. ये टेस्ट हैदराबाद की SCPT (Scramjet Connect Pipe Test) फैसिलिटी में हुआ, जहां इंजन ने 12 मिनट से ज्यादा लगातार जलन (कम्बशन) बनाए रखी.

बैलिस्टिक VS हाइपरसोनिक 

बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंची उड़ान भरती हैं और आसानी से ट्रैक हो जाती हैं. हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें नीचे उड़ती हैं जो तेज और घुमावदार रास्ता लेती हैं और इस कारण रडार से बचना आसान होता है. S-400 या पैट्रियट जैसे सिस्टम को इन तेज मिसाइलों को ट्रैक करने में मुश्किल होती है.

आत्मनिर्भर भारत

100 फीसदी घरेलू तकनीक और भारतीय इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ ये काम किया जा रहा है इसलिए इन पर कोई विदेशी प्रतिबंध नहीं लग सकता. बता दें कि चीन और अमेरिका भी इस रेस में हैं जबकि भारत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है.

DRDO के हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स 

LRASHM (Long Range Anti-Ship Missile) इसकी रेंज 1500 किमी तक है और ये सॉलिड बूस्टर से शुरू होती है, फिर क्रूज और ग्लाइड मोड में जाती है. ये मिसाइल जहाजों को भी मार सकती है.
AL-HCM (Air-Launched Hypersonic Cruise Missile): हवा से लॉन्च DCR (Dual Combustion Ramjet) से वजन कम और एयर-ब्रीदिंग बेहतर होती है. रैमजेट से स्क्रैमजेट में हॉट फ्यूल इंजेक्ट हो सकता है. 
Agni-1P  2 स्टेज मिसाइल, सॉलिड प्रोपेलेंट. री-एंट्री व्हीकल C-HGB जैसा, बूस्ट ग्लाइड मैन्यूवर, इसकी रेंज 1500 किमी है. 
BM-04  3 स्टेज प्लेटफॉर्म, Agni-P बेस पर और एडवांस C-HGB 4 कंट्रोल फिन्स के साथ, इसकी रेंज भी 1500 किमी है. 

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