India's First Civil Engineer: ये थे देश के पहले सिविल इंजीनियर, जानें तब कितनी मिलती थी सैलरी?

India's First Civil Engineer: विश्व में सबसे अधिक इंजीनियर्स वाले देशों में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर आता है और आप जो बड़ी-बड़ी इमारतें या पुल देखते हो, उनको बनाने के पीछे मेहनत होती है इन्हीं सैकड़ों सिविल इंजीनियर्स की. ऐसे में आज बात करते हैं भारत के पहले और सबसे महान सिविल इंजीनियर Sir Mokshagundam Visvesvaraya की. उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के एक छोटे से गांव में हुआ था. बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज थे और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. उन्होंने पुणे के इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और अपने ज्ञान व मेहनत के दम पर देश में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई. करियर की शुरुआत और सैलरी कितनी थी? Sir Mokshagundam Visvesvaraya ने अपने करियर की शुरुआत बॉम्बे पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) में एक इंजीनियर के रूप में की थी. उस समय इंजीनियरों की सैलरी आज की तुलना में बहुत कम होती थी, लेकिन उनकी काबिलियत और काम के प्रति समर्पण से उन्हें कम समय में ही काफी अच्छी पहचान मिली. शुरुआती दौर में उनकी सैलरी कुछ सौ रुपये प्रति महीना थी, जो उस समय एक सम्मानजनक आय मानी जाती थी, यह आंकड़ा अनुमानित है, हालांकि उनकी सटीक सैलरी की जानकारी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने अपने टैलेंट से यह साबित किया कि सीमित साधनों में भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है. यह भी पढ़ेंः इस जेल में किराएदार की तरह रह सकते हैं आप, केवल इतने रुपये में एक दिन के लिए मिलती है एंट्री प्रसिद्ध कार्य और इंजीनियरिंग में योगदान Sir Mokshagundam Visvesvaraya ने देश में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अपना योगदान दिया. उन्होंने कृष्ण राजा सागर बांध के निर्माण में अहम भूमिका निभाई, जो आज भी कर्नाटक के लिए काफी अहम माना जाता है. इसके अलावा उन्होंने बाढ़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनकी इन योजनाओं ने खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन को नई दिशा दी. सम्मान और उपलब्धियां इंजीनियरिंग के क्षेत्र में Sir Mokshagundam Visvesvaraya के योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने देश के सबसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bharat Ratna से सम्मानित किया. उनका जन्मदिन 15 सितंबर को पूरे भारत में Engineers' Day के रूप में मनाया जाता है. उनके जीवन की कहानियां और उनकी उपलब्धियां आज के समय में युवाओं के लिए प्रेरणा हैं. वे इस बात का साफ उदाहरण देते हैं कि मेहनत से आप किसी भी क्षेत्र में अपना नाम बना सकते हैं. यह भी पढ़ेंः कैसे काम करते हैं अमेरिका के न्यूक्लियर कोड्स, हमले से पहले इसका क्या होता है प्रोसीजर?

Apr 24, 2026 - 13:30
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India's First Civil Engineer: ये थे देश के पहले सिविल इंजीनियर, जानें तब कितनी मिलती थी सैलरी?

India's First Civil Engineer: विश्व में सबसे अधिक इंजीनियर्स वाले देशों में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर आता है और आप जो बड़ी-बड़ी इमारतें या पुल देखते हो, उनको बनाने के पीछे मेहनत होती है इन्हीं सैकड़ों सिविल इंजीनियर्स की. ऐसे में आज बात करते हैं भारत के पहले और सबसे महान सिविल इंजीनियर Sir Mokshagundam Visvesvaraya की. उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के एक छोटे से गांव में हुआ था. बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज थे और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. उन्होंने पुणे के इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और अपने ज्ञान व मेहनत के दम पर देश में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई.

करियर की शुरुआत और सैलरी कितनी थी?

Sir Mokshagundam Visvesvaraya ने अपने करियर की शुरुआत बॉम्बे पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) में एक इंजीनियर के रूप में की थी. उस समय इंजीनियरों की सैलरी आज की तुलना में बहुत कम होती थी, लेकिन उनकी काबिलियत और काम के प्रति समर्पण से उन्हें कम समय में ही काफी अच्छी पहचान मिली. शुरुआती दौर में उनकी सैलरी कुछ सौ रुपये प्रति महीना थी, जो उस समय एक सम्मानजनक आय मानी जाती थी, यह आंकड़ा अनुमानित है, हालांकि उनकी सटीक सैलरी की जानकारी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने अपने टैलेंट से यह साबित किया कि सीमित साधनों में भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है.

यह भी पढ़ेंः इस जेल में किराएदार की तरह रह सकते हैं आप, केवल इतने रुपये में एक दिन के लिए मिलती है एंट्री

प्रसिद्ध कार्य और इंजीनियरिंग में योगदान

Sir Mokshagundam Visvesvaraya ने देश में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अपना योगदान दिया. उन्होंने कृष्ण राजा सागर बांध के निर्माण में अहम भूमिका निभाई, जो आज भी कर्नाटक के लिए काफी अहम माना जाता है. इसके अलावा उन्होंने बाढ़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनकी इन योजनाओं ने खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन को नई दिशा दी.

सम्मान और उपलब्धियां

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में Sir Mokshagundam Visvesvaraya के योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने देश के सबसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bharat Ratna से सम्मानित किया. उनका जन्मदिन 15 सितंबर को पूरे भारत में Engineers' Day के रूप में मनाया जाता है. उनके जीवन की कहानियां और उनकी उपलब्धियां आज के समय में युवाओं के लिए प्रेरणा हैं. वे इस बात का साफ उदाहरण देते हैं कि मेहनत से आप किसी भी क्षेत्र में अपना नाम बना सकते हैं.

यह भी पढ़ेंः कैसे काम करते हैं अमेरिका के न्यूक्लियर कोड्स, हमले से पहले इसका क्या होता है प्रोसीजर?

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