India-US Trade Deal: 'विदेश नीति कंट्रोल करने के लिए हथियार...', टैरिफ को एक्सपर्ट ने बताया US-इंडिया ट्रेड डील में ट्रंप की चाल

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड डील (FTA) को जहां दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद माना गया, वहीं अमेरिका के साथ भारत के हुए अंतरिम ट्रेड डील को लेकर अभी भी कई तरह से विवाद जारी हैं. दोनों देशों के बीच हुए इस व्यापार समझौते को एक्सपर्ट्स अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत की विदेश नीति कंट्रोल करने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की चाल करार दे रहे हैं.  यूएस-इंडिया ट्रेड डील में नहीं है बराबरी- चेलानी रणनीतिक एक्सपर्ट्स डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने यूएस-इंडिया ट्रेड डील में कई एकतरफा कदमों के जरिए इस व्यवस्था को बराबरी की साझेदारी के बजाए पैट्रन-क्लाइंट नैरेटिव के रूप में पेश किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, ‘इसकी शुरुआत सोमवार (2 फरवरी, 2026) को डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भारतीय समय के मुताबिक रात करीब 10:42 बजे की गई एकतरफा घोषणा से की. जिसमें उन्होंने इस समझौते को मोदी के अनुरोध पर दिया गया एक एहसान बताया और कहा कि यह दोस्ती और सम्मान के तहत किया गया है.’  उन्होंने कहा कि ट्रंप की घोषणा के करीब 40 मिनट बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए टैरिफ में कटौती के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इस दौरान ट्रेड डील शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और ट्रंप की ओर से बताए गए किसी भी शर्त की पुष्टि नहीं की Unlike the EU–India free trade agreement, which was almost universally celebrated as a “win-win” outcome, the U.S.–India interim trade deal has sparked significant controversy. Through a series of unilateral moves, the Trump administration has framed the arrangement in a… — Dr. Brahma Chellaney (@Chellaney) February 8, 2026 .  US ने भारत को अधीन दिखाने की कोशिश की- चेलानी चेलानी ने कहा कि इसके कुछ दिन बाद शनिवार (7 फरवरी, 2026) को भारतीय समयानुसार सुबह 5 बजे अमेरिका के व्हाइट हाउस ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जो कूटनीतिक प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना गया. इसमें समय, कई टर्म्स और डील के प्रमुख बिंदुओं, जिसमें विशेष रूप से भारत की ओर से 500 अरब डॉलर की खरीद की प्रतिबद्धता और रूस से तेल खरीद बंद करने के कथित तौर पर वादे, को एकतरफा तरीके से पेश कर भारत को अपने अधीन दिखाने के तौर पर पेश किया गया.  उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान जारी करने के एक घंटे के बाद व्हाइट हाउस ने इस डील में सबसे ज्यादा दबाव बनाने वाली बात का खुलासा किया, जो राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश में शामिल स्नैपबैक मैकेनिज्म था. इसके तहत रूस से सीधे या किसी तीसरे देश के जरिए कच्चा तेल खरीद को बंद करने की शर्त पर ही भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया गया है. इसी तरह अमेरिका ने भारत की विदेश नीति को कंट्रोल करने के लिए ट्रेड को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है.  यह ट्रेड डील शर्त पर बनाई हुई व्यवस्था है- चेलानी चेलानी ने कहा, ‘हालांकि, भारत सरकार ने टैरिफ में कमी को एक आर्थिक उपलब्धि के तौर पर पेश किया है, लेकिन यह समझौता एक स्थायी तौर पर संवेदनशीलता की स्थिति भी पैदा करता है. इसमें अमेरिका को भारत की शर्त पालन की निगरानी करने का भी अधिकार मिलता है, जबकि भारत अगर अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनोमी पर जोर देता है तो उस पर तुरंत 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ दोबारार से लगाए जा सकते हैं.’ उन्होंने कहा कि इस तरह से जिसे ट्रेड डील की तरह से पेश किया जा रहा है, वह असल में एक शर्त के आधार पर बनाई हुए व्यवस्था बन जाती है, जिसमें भारत की आर्थिक स्थिरता और एनर्जी सिक्योरिटी वाशिंगटन की जियो-पॉलिटिकल प्राथमिकताओं के अनुरूप रहने पर निर्भर दिखाई देती है.

Feb 9, 2026 - 12:30
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India-US Trade Deal: 'विदेश नीति कंट्रोल करने के लिए हथियार...', टैरिफ को एक्सपर्ट ने बताया US-इंडिया ट्रेड डील में ट्रंप की चाल

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड डील (FTA) को जहां दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद माना गया, वहीं अमेरिका के साथ भारत के हुए अंतरिम ट्रेड डील को लेकर अभी भी कई तरह से विवाद जारी हैं. दोनों देशों के बीच हुए इस व्यापार समझौते को एक्सपर्ट्स अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत की विदेश नीति कंट्रोल करने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की चाल करार दे रहे हैं. 

यूएस-इंडिया ट्रेड डील में नहीं है बराबरी- चेलानी

रणनीतिक एक्सपर्ट्स डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने यूएस-इंडिया ट्रेड डील में कई एकतरफा कदमों के जरिए इस व्यवस्था को बराबरी की साझेदारी के बजाए पैट्रन-क्लाइंट नैरेटिव के रूप में पेश किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, ‘इसकी शुरुआत सोमवार (2 फरवरी, 2026) को डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भारतीय समय के मुताबिक रात करीब 10:42 बजे की गई एकतरफा घोषणा से की. जिसमें उन्होंने इस समझौते को मोदी के अनुरोध पर दिया गया एक एहसान बताया और कहा कि यह दोस्ती और सम्मान के तहत किया गया है.’ 

उन्होंने कहा कि ट्रंप की घोषणा के करीब 40 मिनट बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए टैरिफ में कटौती के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इस दौरान ट्रेड डील शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और ट्रंप की ओर से बताए गए किसी भी शर्त की पुष्टि नहीं की

US ने भारत को अधीन दिखाने की कोशिश की- चेलानी

चेलानी ने कहा कि इसके कुछ दिन बाद शनिवार (7 फरवरी, 2026) को भारतीय समयानुसार सुबह 5 बजे अमेरिका के व्हाइट हाउस ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जो कूटनीतिक प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना गया. इसमें समय, कई टर्म्स और डील के प्रमुख बिंदुओं, जिसमें विशेष रूप से भारत की ओर से 500 अरब डॉलर की खरीद की प्रतिबद्धता और रूस से तेल खरीद बंद करने के कथित तौर पर वादे, को एकतरफा तरीके से पेश कर भारत को अपने अधीन दिखाने के तौर पर पेश किया गया. 

उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान जारी करने के एक घंटे के बाद व्हाइट हाउस ने इस डील में सबसे ज्यादा दबाव बनाने वाली बात का खुलासा किया, जो राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश में शामिल स्नैपबैक मैकेनिज्म था. इसके तहत रूस से सीधे या किसी तीसरे देश के जरिए कच्चा तेल खरीद को बंद करने की शर्त पर ही भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया गया है. इसी तरह अमेरिका ने भारत की विदेश नीति को कंट्रोल करने के लिए ट्रेड को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है. 

यह ट्रेड डील शर्त पर बनाई हुई व्यवस्था है- चेलानी

चेलानी ने कहा, ‘हालांकि, भारत सरकार ने टैरिफ में कमी को एक आर्थिक उपलब्धि के तौर पर पेश किया है, लेकिन यह समझौता एक स्थायी तौर पर संवेदनशीलता की स्थिति भी पैदा करता है. इसमें अमेरिका को भारत की शर्त पालन की निगरानी करने का भी अधिकार मिलता है, जबकि भारत अगर अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनोमी पर जोर देता है तो उस पर तुरंत 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ दोबारार से लगाए जा सकते हैं.’

उन्होंने कहा कि इस तरह से जिसे ट्रेड डील की तरह से पेश किया जा रहा है, वह असल में एक शर्त के आधार पर बनाई हुए व्यवस्था बन जाती है, जिसमें भारत की आर्थिक स्थिरता और एनर्जी सिक्योरिटी वाशिंगटन की जियो-पॉलिटिकल प्राथमिकताओं के अनुरूप रहने पर निर्भर दिखाई देती है.

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