India UK FTA: भारत-ब्रिटेन एफटीए के लिए 18 साल पहले ही डाले गए बीज, फिर कैसे लग गया इतना लंबा वक्त?

India UK FTA: भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लग गई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इसके बाद भारत के लिए एक बड़ा बाजार खुल गया. एफटीए को लागू होने के लिए अभी ब्रिटेन की संसद से पास कराना होगा, जबकि भारत में भी केन्द्रीय मंत्रिडमंडल की इजाजत की जरूरत होगी. इसमें करीब सालभर का वक्त लग सकता है. पिछले करीब एक दशक में ऐसा पहला मौका है जब भारत दुनिया के किसी विकसित अर्थव्यवस्था के साथ इस तरह की डील पर आगे बढ़ा. एफटीए से पहले कई बाधाएं दरअसल, भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बातचीत भले ही तीन साल से चल रही थी, लेकिन इसके लिए बीज 18 साल पहले ही 28 जून 2007 को उस वक्त डाले गए थे, जब भारत ने यूके के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते पर बातचीत की शुरुआत की थी. हालांकि, उसके फौरन बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से टोनी ब्लेयर को इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन, आगे की बातचीत के लिए वो कुछ ग्राउंडवर्क्स तैयार कर चले गए. इसके बावजूद बातचीत की शुरुआत तब तक आगे नहीं बढ़ी पायी, जब तक कि ब्रिटेन ने ब्रेक्जिट से बाहर निकलने का फैसला किया और भारत ने RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) यानी चीन की अगुवाई वाले क्षेत्रीय व्यापाक आर्थिक साझेदारी) से. कैसे लगे इतने साल? इसके बाद भारत ने अपने सामान और सेवाओं के लिए नए बाजार की तलाश के रूप में ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन और ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत की शुरुआत की. इसके बाद तेजी के साथ बातचीत आगे बढ़ी, क्योंकि मोदी सरकार पहले कार्यकाल के दौरान ही एफटीए पर काफी मशक्कत कर रही थी. बोरिस जॉनसन के कार्यकाल के दौरान भारत-ब्रिटेन एफटीए पर तेजी के साथ काम हुआ. महीनों तक इस पर चली गहन बातचीत के बाद ही जॉनसन ने इसको अंतिम रूप देने के लिए एक नई समय सीमा तय कर दी. हालांकि, उसके तीन महीने के भीतर ही बोरिस जॉनसन को पद से इस्तीफा देना पड़ गया और भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता अधर में पड़ गया. ऋषि सुनक कैबिनेट के कई मंत्रियों के वीजा रियायत को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जता चुके हैं, हालांकि उनकी वो ऑब्जेक्शंस बिजनेस वीजा को लेकर थे. आखिरकार कीर अमेरिका से पड़े रहे दबाव के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस पर आगे बढ़ने का फैसला किया. हालांकि, इसको अमलीजामा पहनाने में तीन साल और चौदह राउंड की बातचीत हुई और ऑपरेशन सिंदूर से कुछ घंटे पहले इसे अंतिम रूप दिया गया. ये भी पढ़ें: इंडिया-यूके के बीच FTA पर मुहर, भारत के लिए खुला बाजार, कार से व्हिस्की तक, छठी इकोनॉमी के साथ डील के क्या-क्या फायदे? जानें

Jul 25, 2025 - 11:30
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India UK FTA: भारत-ब्रिटेन एफटीए के लिए 18 साल पहले ही डाले गए बीज, फिर कैसे लग गया इतना लंबा वक्त?

India UK FTA: भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लग गई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इसके बाद भारत के लिए एक बड़ा बाजार खुल गया. एफटीए को लागू होने के लिए अभी ब्रिटेन की संसद से पास कराना होगा, जबकि भारत में भी केन्द्रीय मंत्रिडमंडल की इजाजत की जरूरत होगी. इसमें करीब सालभर का वक्त लग सकता है. पिछले करीब एक दशक में ऐसा पहला मौका है जब भारत दुनिया के किसी विकसित अर्थव्यवस्था के साथ इस तरह की डील पर आगे बढ़ा.

एफटीए से पहले कई बाधाएं

दरअसल, भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बातचीत भले ही तीन साल से चल रही थी, लेकिन इसके लिए बीज 18 साल पहले ही 28 जून 2007 को उस वक्त डाले गए थे, जब भारत ने यूके के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते पर बातचीत की शुरुआत की थी. हालांकि, उसके फौरन बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से टोनी ब्लेयर को इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन, आगे की बातचीत के लिए वो कुछ ग्राउंडवर्क्स तैयार कर चले गए.

इसके बावजूद बातचीत की शुरुआत तब तक आगे नहीं बढ़ी पायी, जब तक कि ब्रिटेन ने ब्रेक्जिट से बाहर निकलने का फैसला किया और भारत ने RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) यानी चीन की अगुवाई वाले क्षेत्रीय व्यापाक आर्थिक साझेदारी) से.

कैसे लगे इतने साल?

इसके बाद भारत ने अपने सामान और सेवाओं के लिए नए बाजार की तलाश के रूप में ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन और ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत की शुरुआत की. इसके बाद तेजी के साथ बातचीत आगे बढ़ी, क्योंकि मोदी सरकार पहले कार्यकाल के दौरान ही एफटीए पर काफी मशक्कत कर रही थी.

बोरिस जॉनसन के कार्यकाल के दौरान भारत-ब्रिटेन एफटीए पर तेजी के साथ काम हुआ. महीनों तक इस पर चली गहन बातचीत के बाद ही जॉनसन ने इसको अंतिम रूप देने के लिए एक नई समय सीमा तय कर दी.

हालांकि, उसके तीन महीने के भीतर ही बोरिस जॉनसन को पद से इस्तीफा देना पड़ गया और भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता अधर में पड़ गया. ऋषि सुनक कैबिनेट के कई मंत्रियों के वीजा रियायत को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जता चुके हैं, हालांकि उनकी वो ऑब्जेक्शंस बिजनेस वीजा को लेकर थे.

आखिरकार कीर अमेरिका से पड़े रहे दबाव के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस पर आगे बढ़ने का फैसला किया. हालांकि, इसको अमलीजामा पहनाने में तीन साल और चौदह राउंड की बातचीत हुई और ऑपरेशन सिंदूर से कुछ घंटे पहले इसे अंतिम रूप दिया गया.

ये भी पढ़ें: इंडिया-यूके के बीच FTA पर मुहर, भारत के लिए खुला बाजार, कार से व्हिस्की तक, छठी इकोनॉमी के साथ डील के क्या-क्या फायदे? जानें

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