India Petrol-Disel Price: पेट्रोल-डीजल पर अचानक 10 रुपए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी क्यों घटाई, ये है इसके पीछे की बड़ी वजह

पिछले एक महीने से जारी ईरान युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. इस तेज उछाल का असर दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर साफ दिख रहा है, लेकिन भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बदलीं हैं..  अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दबाव को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च 2026) को पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी. इस कटौती के बाद पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर यह शून्य हो गई, यानी डीजल पर अब कोई केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं है. इस फैसले से सरकारी खजाने पर सीधा बोझ पड़ेगा, लेकिन मकसद यही है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और होर्मुज की नाकेबंदी से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट का असर भारत के आम उपभोक्ता पर कम से कम पड़े. दुनियाभर में कितना महंगा हुआ ईंधन? अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 74 फीसदी का उछाल आने के बाद अलग-अलग देशों ने अपने नागरिकों पर यह बोझ डाल दिया है. अफ्रीकी देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 50 फीसदी तक बढ़े हैं. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में 30 से 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उत्तरी अमेरिका में करीब 30 फीसदी और यूरोप में लगभग 20 फीसदी दाम बढ़े हैं. भारत में क्या स्थिति ?  सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन इसकी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दरों पर तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. IOCL, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां इस वक्त भारी अंडर-रिकवरी झेल रही हैं. एक्सपोर्ट टैक्स का फैसला सरकार ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर एक्सपोर्ट टैक्स भी लगाया है. दरअसल, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम ज्यादा होते हैं तो रिफाइनरियां देश में बेचने की बजाय विदेश में निर्यात करना ज्यादा फायदेमंद समझती हैं. इस टैक्स का मकसद यही है कि देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो. अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें इसी ऊंचाई पर टिकी रहीं तो तेल कंपनियों का घाटा और गहरा होता जाएगा. इससे सरकार के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा होगा कि आखिर कब तक कीमतों को थामे रखा जा सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखना वित्तीय दबाव बढ़ाता है. ये भी पढ़ें: Lockdown in India: क्या देश में लगेगा लॉकडाउन? भारत सरकार ने बताया, हरदीप पुरी का सामने आया बड़ा बयान

Mar 27, 2026 - 16:30
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India Petrol-Disel Price: पेट्रोल-डीजल पर अचानक 10 रुपए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी क्यों घटाई, ये है इसके पीछे की बड़ी वजह

पिछले एक महीने से जारी ईरान युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. इस तेज उछाल का असर दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर साफ दिख रहा है, लेकिन भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बदलीं हैं.. 

अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दबाव को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च 2026) को पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी. इस कटौती के बाद पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर यह शून्य हो गई, यानी डीजल पर अब कोई केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं है. इस फैसले से सरकारी खजाने पर सीधा बोझ पड़ेगा, लेकिन मकसद यही है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और होर्मुज की नाकेबंदी से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट का असर भारत के आम उपभोक्ता पर कम से कम पड़े.

दुनियाभर में कितना महंगा हुआ ईंधन?

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 74 फीसदी का उछाल आने के बाद अलग-अलग देशों ने अपने नागरिकों पर यह बोझ डाल दिया है. अफ्रीकी देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 50 फीसदी तक बढ़े हैं. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में 30 से 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उत्तरी अमेरिका में करीब 30 फीसदी और यूरोप में लगभग 20 फीसदी दाम बढ़े हैं.

भारत में क्या स्थिति ? 

सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन इसकी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दरों पर तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. IOCL, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां इस वक्त भारी अंडर-रिकवरी झेल रही हैं.

एक्सपोर्ट टैक्स का फैसला

सरकार ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर एक्सपोर्ट टैक्स भी लगाया है. दरअसल, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम ज्यादा होते हैं तो रिफाइनरियां देश में बेचने की बजाय विदेश में निर्यात करना ज्यादा फायदेमंद समझती हैं. इस टैक्स का मकसद यही है कि देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो. अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें इसी ऊंचाई पर टिकी रहीं तो तेल कंपनियों का घाटा और गहरा होता जाएगा. इससे सरकार के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा होगा कि आखिर कब तक कीमतों को थामे रखा जा सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखना वित्तीय दबाव बढ़ाता है.

ये भी पढ़ें: Lockdown in India: क्या देश में लगेगा लॉकडाउन? भारत सरकार ने बताया, हरदीप पुरी का सामने आया बड़ा बयान

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