India Muslim Population: भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी! हिंदुओं की आबादी कितनी? आंकड़े चौंका रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में असम की रैली में आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ के जरिए जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की साजिश चल रही है. उनके अनुसार यह केवल सामाजिक ढांचे का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी सवाल है. पीएम ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने घुसपैठियों को बसाने का काम किया. यह बयान ऐसे समय आया है जब 2011 के बाद से कोई नई जनगणना नहीं हुई, लेकिन जनसंख्या का मुद्दा और गहराता जा रहा है. भारत की जनगणना के अनुसार हिंदू और मुस्लिम दोनों की संख्या बढ़ी, लेकिन प्रतिशत हिस्सेदारी में बदलाव आया. 1951 में हिंदुओं की हिस्सेदारी 84.10% और मुस्लिमों की 9.80% थी. 2011 में हिंदुओं की हिस्सेदारी घटकर 79.80% और मुस्लिमों की बढ़कर 14.20% हो गई. यानी 60 साल में हिंदुओं की हिस्सेदारी 4.3% घटी और मुस्लिमों की 4.4% बढ़ गई. बिहार सीमांचल मुस्लिम बहुल क्षेत्रबिहार का सीमांचल इलाका—किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल—तेजी से मुस्लिम बहुल होता जा रहा है. 2001 से 2011 के बीच यहां मुस्लिम आबादी लगभग 30% बढ़ी. बीजेपी का आरोप है कि बांग्लादेश और नेपाल सीमा से घुसपैठ इसकी वजह है. असम सबसे तेज बढ़ोतरीअसम में मुस्लिम आबादी का ग्रोथ रेट 2001-2011 के बीच 29.6% रहा, जो हिंदुओं की तुलना में 2.7 गुना ज्यादा है. अनुमान है कि 2041 तक हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर हो सकती है. असम के धुबरी, गुवालपाड़ा, बोंगाईगांव, बारपेटा, दरंग, नगांव और मोरीगांव जिलों में मुस्लिम आबादी पहले ही बहुसंख्यक हो चुकी है. पश्चिम बंगाल सीमावर्ती जिलों पर असरपश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 2001 में 25.25% से बढ़कर 2011 में 27.01% हो गई. उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम जनसंख्या अधिक है. इन इलाकों में अक्सर घुसपैठ और वोटबैंक की राजनीति के आरोप लगते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक असरबीजेपी का कहना है कि जनसंख्या संतुलन बिगड़ना राष्ट्रीय सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है. वहीं विपक्ष का कहना है कि बीजेपी “घुसपैठ” का मुद्दा उठाकर मुसलमानों को टारगेट करती है और इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बनाती है. प्यू रिसर्च की रिपोर्ट में खुलासाप्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर हमेशा भारत की कुल जनसंख्या वृद्धि दर से अधिक रही है. 1951 से 1961 के बीच मुस्लिम वृद्धि दर 32.7 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 21.6 प्रतिशत रहा. यह अंतर 11 प्रतिशत अंक का था. 2001 से 2011 के बीच मुस्लिम वृद्धि दर 24.7 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 17.7 प्रतिशत रहा. इस समय अंतर केवल 7 प्रतिशत अंक का रह गया. इससे साफ होता है कि अंतर लगातार घट रहा है. ये भी पढ़ें: India-China Fighter Jet: भारत का Rafale F4 या चीन का J-35A फाइटर जेट! कौन ज्यादा ताकतवर, जानें मिलिट्री कंपैरिजन

Sep 16, 2025 - 11:30
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India Muslim Population: भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी! हिंदुओं की आबादी कितनी? आंकड़े चौंका रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में असम की रैली में आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ के जरिए जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की साजिश चल रही है. उनके अनुसार यह केवल सामाजिक ढांचे का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी सवाल है. पीएम ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने घुसपैठियों को बसाने का काम किया.

यह बयान ऐसे समय आया है जब 2011 के बाद से कोई नई जनगणना नहीं हुई, लेकिन जनसंख्या का मुद्दा और गहराता जा रहा है. भारत की जनगणना के अनुसार हिंदू और मुस्लिम दोनों की संख्या बढ़ी, लेकिन प्रतिशत हिस्सेदारी में बदलाव आया. 1951 में हिंदुओं की हिस्सेदारी 84.10% और मुस्लिमों की 9.80% थी. 2011 में हिंदुओं की हिस्सेदारी घटकर 79.80% और मुस्लिमों की बढ़कर 14.20% हो गई. यानी 60 साल में हिंदुओं की हिस्सेदारी 4.3% घटी और मुस्लिमों की 4.4% बढ़ गई.

बिहार सीमांचल मुस्लिम बहुल क्षेत्र
बिहार का सीमांचल इलाका—किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल—तेजी से मुस्लिम बहुल होता जा रहा है. 2001 से 2011 के बीच यहां मुस्लिम आबादी लगभग 30% बढ़ी. बीजेपी का आरोप है कि बांग्लादेश और नेपाल सीमा से घुसपैठ इसकी वजह है.

असम सबसे तेज बढ़ोतरी
असम में मुस्लिम आबादी का ग्रोथ रेट 2001-2011 के बीच 29.6% रहा, जो हिंदुओं की तुलना में 2.7 गुना ज्यादा है. अनुमान है कि 2041 तक हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर हो सकती है. असम के धुबरी, गुवालपाड़ा, बोंगाईगांव, बारपेटा, दरंग, नगांव और मोरीगांव जिलों में मुस्लिम आबादी पहले ही बहुसंख्यक हो चुकी है.

पश्चिम बंगाल सीमावर्ती जिलों पर असर
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 2001 में 25.25% से बढ़कर 2011 में 27.01% हो गई. उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम जनसंख्या अधिक है. इन इलाकों में अक्सर घुसपैठ और वोटबैंक की राजनीति के आरोप लगते हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक असर
बीजेपी का कहना है कि जनसंख्या संतुलन बिगड़ना राष्ट्रीय सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है. वहीं विपक्ष का कहना है कि बीजेपी “घुसपैठ” का मुद्दा उठाकर मुसलमानों को टारगेट करती है और इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बनाती है.

प्यू रिसर्च की रिपोर्ट में खुलासा
प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर हमेशा भारत की कुल जनसंख्या वृद्धि दर से अधिक रही है. 1951 से 1961 के बीच मुस्लिम वृद्धि दर 32.7 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 21.6 प्रतिशत रहा. यह अंतर 11 प्रतिशत अंक का था. 2001 से 2011 के बीच मुस्लिम वृद्धि दर 24.7 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 17.7 प्रतिशत रहा. इस समय अंतर केवल 7 प्रतिशत अंक का रह गया. इससे साफ होता है कि अंतर लगातार घट रहा है.

ये भी पढ़ें: India-China Fighter Jet: भारत का Rafale F4 या चीन का J-35A फाइटर जेट! कौन ज्यादा ताकतवर, जानें मिलिट्री कंपैरिजन

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