IAS कितने प्रमोशन में बनता है चुनाव आयुक्त, कितनी बढ़ जाती है सैलरी?
भारतीय निर्वाचन आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के बीच कामकाज और अधिकारों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है. इस पूरे विवाद ने देश के युवाओं और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच एक नया सवाल खड़ा कर दिया है. आइए जानते हैं कि आखिर एक IAS अधिकारी को चुनाव आयुक्त बनने में कितना समय लगता हैं और इस दौरान उनकी सैलरी में कितना इजाफा होता है. शुरूआत होती है SDM से IAS करियर की शुरुआत सातवें वेतन आयोग के लेवल 10 से होती है, जिसमें अधिकारी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर तैनात होते हैं. इस दौरान बेसिक सैलरी करीब 56,100 रुपये प्रति माह होती है. करीब 4 से 9 साल की सेवा के बाद अधिकारी डिप्टी कलेक्टर या अंडर सेक्रेटरी बनते हैं, जो लेवल 11 में आता है और बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 67,700 रुपये हो जाती है. जिलाधिकारी से डिवीजनल कमिश्नर तक का सफर करीब 9 से 13 साल की सेवा पूरी करने के बाद अधिकारी जिलाधिकारी या ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद तक पहुंचते हैं, जो लेवल 12 में आता है और बेसिक सैलरी करीब 78,800 रुपये तक हो जाती है. इसके बाद 14 से 16 साल की सेवा पर अधिकारी डिवीजनल कमिश्नर या डायरेक्टर बनते हैं, जो लेवल 13 है और सैलरी बढ़कर करीब 1,18,500 रुपये तक पहुंच जाती है. सचिव पद तक पहुंचना है सबसे बड़ी शर्त चुनाव आयुक्त बनने के लिए सबसे अहम शर्त है कि अधिकारी भारत सरकार में सचिव के पद पर रह चुका हो. यह पद आमतौर पर 16 से 20 साल की सेवा पर सेक्रेटरी-कम-कमिश्नर, फिर 20 से 25 साल पर प्रिंसिपल सेक्रेटरी, 25 से 30 साल पर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और आखिर में 30 साल से ज्यादा की सेवा पर सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के पद तक पहुंचता है, जो लेवल 17 में आता है. इस स्तर पर बेसिक सैलरी करीब 2,25,000 रुपये प्रति माह हो जाती है. एक IAS अधिकारी को लगभग 6 से 7 बड़े प्रमोशन पार करके, करीब 30 साल की सेवा के बाद ही चुनाव आयुक्त बनने लायक योग्यता हासिल होती है. यह भी पढ़ें: चीफ जस्टिस या फिर मुख्य चुनाव आयुक्त, कौन है ज्यादा ताकतवर? चुनाव आयुक्त बनने पर कितनी बदलती है सैलरी? दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त, दोनों को जो अपेक्स पे स्केल मिलता है, वह भी करीब 2,25,000 रुपये प्रति माह ही है, यानी सेक्रेटरी पद की सैलरी के लगभग बराबर. ऐसे में सिर्फ बेसिक सैलरी के आंकड़े में बहुत बड़ा उछाल नहीं आता, लेकिन इस पद के साथ मिलने वाला प्रोटोकॉल दर्जा, सुरक्षा, सुविधाएं और देश की सबसे अहम संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने का अवसर इसे बाकी सचिव पदों से अलग बना देता है. यह भी पढ़ें: भारत में कैसे बन सकते हैं चुनाव आयुक्त? क्या है पूरी प्रक्रिया
भारतीय निर्वाचन आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के बीच कामकाज और अधिकारों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है. इस पूरे विवाद ने देश के युवाओं और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच एक नया सवाल खड़ा कर दिया है. आइए जानते हैं कि आखिर एक IAS अधिकारी को चुनाव आयुक्त बनने में कितना समय लगता हैं और इस दौरान उनकी सैलरी में कितना इजाफा होता है.
शुरूआत होती है SDM से
IAS करियर की शुरुआत सातवें वेतन आयोग के लेवल 10 से होती है, जिसमें अधिकारी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर तैनात होते हैं. इस दौरान बेसिक सैलरी करीब 56,100 रुपये प्रति माह होती है. करीब 4 से 9 साल की सेवा के बाद अधिकारी डिप्टी कलेक्टर या अंडर सेक्रेटरी बनते हैं, जो लेवल 11 में आता है और बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 67,700 रुपये हो जाती है.
जिलाधिकारी से डिवीजनल कमिश्नर तक का सफर
करीब 9 से 13 साल की सेवा पूरी करने के बाद अधिकारी जिलाधिकारी या ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद तक पहुंचते हैं, जो लेवल 12 में आता है और बेसिक सैलरी करीब 78,800 रुपये तक हो जाती है. इसके बाद 14 से 16 साल की सेवा पर अधिकारी डिवीजनल कमिश्नर या डायरेक्टर बनते हैं, जो लेवल 13 है और सैलरी बढ़कर करीब 1,18,500 रुपये तक पहुंच जाती है.
सचिव पद तक पहुंचना है सबसे बड़ी शर्त
चुनाव आयुक्त बनने के लिए सबसे अहम शर्त है कि अधिकारी भारत सरकार में सचिव के पद पर रह चुका हो. यह पद आमतौर पर 16 से 20 साल की सेवा पर सेक्रेटरी-कम-कमिश्नर, फिर 20 से 25 साल पर प्रिंसिपल सेक्रेटरी, 25 से 30 साल पर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और आखिर में 30 साल से ज्यादा की सेवा पर सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के पद तक पहुंचता है, जो लेवल 17 में आता है. इस स्तर पर बेसिक सैलरी करीब 2,25,000 रुपये प्रति माह हो जाती है. एक IAS अधिकारी को लगभग 6 से 7 बड़े प्रमोशन पार करके, करीब 30 साल की सेवा के बाद ही चुनाव आयुक्त बनने लायक योग्यता हासिल होती है.
यह भी पढ़ें: चीफ जस्टिस या फिर मुख्य चुनाव आयुक्त, कौन है ज्यादा ताकतवर?
चुनाव आयुक्त बनने पर कितनी बदलती है सैलरी?
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त, दोनों को जो अपेक्स पे स्केल मिलता है, वह भी करीब 2,25,000 रुपये प्रति माह ही है, यानी सेक्रेटरी पद की सैलरी के लगभग बराबर. ऐसे में सिर्फ बेसिक सैलरी के आंकड़े में बहुत बड़ा उछाल नहीं आता, लेकिन इस पद के साथ मिलने वाला प्रोटोकॉल दर्जा, सुरक्षा, सुविधाएं और देश की सबसे अहम संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने का अवसर इसे बाकी सचिव पदों से अलग बना देता है.
यह भी पढ़ें: भारत में कैसे बन सकते हैं चुनाव आयुक्त? क्या है पूरी प्रक्रिया
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