Heart Attack Treatment Time: भरी मीटिंग में हार्ट अटैक से बीजेपी विधायक की मौत, ऐसे केस में जान बचाने को कितना होता है वक्त?

Can A Person Be Saved After Heart Attack: उत्तर प्रदेश के हार्ट अटैक से भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का शुक्रवार को निधन हो गया. वह बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक थे.  जानकारी के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें पीलीभीत रोड स्थित मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. उन्होंने एक दिन पहले ही 1 जनवरी को अपना 60वां जन्मदिन मनाया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक को सर्किट हाउस में अचानक दिल का दौरा पड़ा. इससे कुछ देर पहले ही वह कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ एक बैठक में शामिल हुए थे.  बैठक के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. हालांकि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. चलिए आपको बताते हैं कि हार्ट अटैक के कितने देर बाद तक किसी की जान बचाई जा सकती है? हार्ट अटैक के कितने देर में बचाई जा सकती है जान? अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि हार्ट अटैक के बाद मरीज को बचाया नहीं जा सकता, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. हार्ट अटैक के बाद जान बचना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को गोल्डन ऑवर, यानी पहले एक घंटे के भीतर किस तरह का इलाज मिलता है। अगर इस समय सही इलाज शुरू हो जाए, तो मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. फोर्टिस नई दिल्ली के हृदय रोग एक्सपर्ट डॉक्टर प्रमोद कुमार बताते हैं बताते हैं कि "हार्ट अटैक के बाद पहले 60 से 90 मिनट बेहद अहम होते हैं. इस दौरान अगर दिल तक ब्लड की सप्लाई बहाल नहीं होती, तो हार्ट मसल्स को नुकसान शुरू हो जाता है. करीब 6 घंटे बाद यह नुकसान स्थायी हो सकता है, क्योंकि तब तक दिल के कई हिस्से काम करना बंद कर देते हैं." वे आगे बताते हैं कि इसी वजह से हार्ट अटैक के लक्षण दिखते ही मरीज को 60 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचाना बहुत जरूरी होता है. इससे डॉक्टरों को जरूरी जांच करने और तुरंत इलाज शुरू करने का पर्याप्त समय मिल जाता है, जो जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है. डॉक्टर से कब मिलना जरूरी? डॉक्टर प्रमोद कुमार बताते हैं कि सिर्फ गंभीर हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि हल्के सीने के दर्द को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार हार्ट अटैक साइलेंट होता है, जिसमें हल्का सीने का दर्द, चक्कर आना, पसीना आना या कंधे में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इन्हें अक्सर गैस या सामान्य दर्द समझकर टाल दिया जाता है, जबकि ये मामूली या साइलेंट हार्ट अटैक के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है. इसे भी पढ़ें- Heart Attack Causes In Men: पुरुषों के लिए 'साइलेंट किलर' बन रहा है माइक्रोप्लास्टिक, आर्टरीज को पहुंचा रहा सीधा नुकसान Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jan 2, 2026 - 21:30
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Heart Attack Treatment Time: भरी मीटिंग में हार्ट अटैक से बीजेपी विधायक की मौत, ऐसे केस में जान बचाने को कितना होता है वक्त?

Can A Person Be Saved After Heart Attack: उत्तर प्रदेश के हार्ट अटैक से भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का शुक्रवार को निधन हो गया. वह बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक थे.  जानकारी के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें पीलीभीत रोड स्थित मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. उन्होंने एक दिन पहले ही 1 जनवरी को अपना 60वां जन्मदिन मनाया था.

रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक को सर्किट हाउस में अचानक दिल का दौरा पड़ा. इससे कुछ देर पहले ही वह कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ एक बैठक में शामिल हुए थे.  बैठक के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. हालांकि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. चलिए आपको बताते हैं कि हार्ट अटैक के कितने देर बाद तक किसी की जान बचाई जा सकती है?

हार्ट अटैक के कितने देर में बचाई जा सकती है जान?

अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि हार्ट अटैक के बाद मरीज को बचाया नहीं जा सकता, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. हार्ट अटैक के बाद जान बचना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को गोल्डन ऑवर, यानी पहले एक घंटे के भीतर किस तरह का इलाज मिलता है। अगर इस समय सही इलाज शुरू हो जाए, तो मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

फोर्टिस नई दिल्ली के हृदय रोग एक्सपर्ट डॉक्टर प्रमोद कुमार बताते हैं बताते हैं कि "हार्ट अटैक के बाद पहले 60 से 90 मिनट बेहद अहम होते हैं. इस दौरान अगर दिल तक ब्लड की सप्लाई बहाल नहीं होती, तो हार्ट मसल्स को नुकसान शुरू हो जाता है. करीब 6 घंटे बाद यह नुकसान स्थायी हो सकता है, क्योंकि तब तक दिल के कई हिस्से काम करना बंद कर देते हैं." वे आगे बताते हैं कि इसी वजह से हार्ट अटैक के लक्षण दिखते ही मरीज को 60 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचाना बहुत जरूरी होता है. इससे डॉक्टरों को जरूरी जांच करने और तुरंत इलाज शुरू करने का पर्याप्त समय मिल जाता है, जो जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है.

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी?

डॉक्टर प्रमोद कुमार बताते हैं कि सिर्फ गंभीर हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि हल्के सीने के दर्द को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार हार्ट अटैक साइलेंट होता है, जिसमें हल्का सीने का दर्द, चक्कर आना, पसीना आना या कंधे में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इन्हें अक्सर गैस या सामान्य दर्द समझकर टाल दिया जाता है, जबकि ये मामूली या साइलेंट हार्ट अटैक के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है.

इसे भी पढ़ें- Heart Attack Causes In Men: पुरुषों के लिए 'साइलेंट किलर' बन रहा है माइक्रोप्लास्टिक, आर्टरीज को पहुंचा रहा सीधा नुकसान

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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