Global Warming Risk: 3°C ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने से 80 पर्सेंट बुजुर्गों पर मौत का खतरा, जानें वजह

Global Warming Risk : बढ़ता तापमान बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा बनता जा रहा है. द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक नई स्टडी ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर पेश की है. अध्ययन के मुताबिक, अगर दुनिया का औसत तापमान औद्योगिक दौर से पहले के स्तर की तुलना में 3°C या उससे ज्यादा बढ़ता है, तो भारत समेत दक्षिण एशिया के करोड़ों बुजुर्गों को दिन और रात दोनों समय खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. भारत इस खतरे में दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में शामिल है. 3°C तापमान बढ़ा तो 80 पर्सेंट बुजुर्गों पर खतरा स्टडी के अनुसार, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले बुजुर्गों को 3°C ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति में साल के करीब तीन महीने तक दिन-रात खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. इन चार देशों में दुनिया की करीब 73 फीसदी बुजुर्ग आबादी रहती है.  भारत में स्थिति और भी चिंताजनक बताई गई है. 3°C तापमान बढ़ने की स्थिति में भारत की आधी से ज्यादा आबादी और 80 फीसदी से ज्यादा बुजुर्गों को हर साल औसतन कम से कम 180 घंटे ऐसी गर्मी झेलनी पड़ सकती है, जिसे शरीर के लिए सहन करना बेहद मुश्किल माना गया है.  दिल्ली और इंडो-गंगेटिक प्लेन में ज्यादा असर स्टडी में दिल्ली और बड़े इंडो-गंगेटिक प्लेन को खास तौर पर संवेदनशील क्षेत्र बताया गया है. यहां बुजुर्गों को 1.5°C ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति में ही सालाना करीब 1,000 या उससे ज्यादा घंटे असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. यह तापमान स्तर करीब 2030 के आसपास पहुंचने की उम्मीद जताई गई है.  वहीं अगर ग्लोबल वार्मिंग 3°C तक पहुंचती है तो यह अवधि 2,000 घंटे से ज्यादा हो सकती है. खास बात यह है कि यह गर्मी पूरे साल समान रूप से नहीं फैलेगी, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा मई से सितंबर के बीच केंद्रित रहेगा.  कई महीनों तक दिन-रात झेलनी पड़ सकती है गर्मी स्टडी की प्रमुख लेखिका प्रोफेसर किंगकिंग कोंग के मुताबिक, 3°C से ज्यादा तापमान बढ़ने पर बुजुर्गों को लगातार कई महीनों तक दिन और रात दोनों समय असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में कूलिंग की सुविधा, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और हीट-रिस्पॉन्स प्रोग्राम पर काफी दबाव पड़ सकता है.  यह भी पढ़ें - Global Anxiety Statistics: एंग्जायटी लेवल 3 क्या है, भारत-पाकिस्तान समेत दुनिया में कितने लोग परेशान? बुजुर्गों के लिए कम तापमान पर भी ज्यादा खतरा रिसर्च के मुताबिक, बुजुर्गों का शरीर गर्मी को कंट्रोल करने में युवाओं की तुलना में कम सक्षम होता है. वे कम पसीना बहाते हैं, उनकी ब्लड वेसल्स की प्रतिक्रिया धीमी होती है और गर्मी में उनके दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसी वजह से पहले किए गए कुछ अध्ययनों में बुजुर्गों पर पड़ने वाले खतरे का अनुमान कम लगाया गया हो सकता है. अध्ययन में 15-39 साल, 40-59 साल और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की गर्मी सहने की क्षमता को अलग-अलग देखा गया. इसके आधार पर अलग-अलग तापमान स्तरों पर खतरे और प्रभावित होने वाली आबादी का अनुमान लगाया गया.  दक्षिण एशिया को बताया गया सबसे संवेदनशील क्षेत्र अध्ययन के मुताबिक भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और नाइजर जैसे देश ज्यादा जोखिम में हैं. इसकी एक वजह बड़ी आबादी का गर्मी के संपर्क में आना और गरीबी का ज्यादा होना है, जिससे गर्मी से बचने की क्षमता प्रभावित होती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी कंट्रोल करने की क्षमता कम होती जाती है. उनके मुताबिक दक्षिण एशिया में बुजुर्गों के लिए बढ़ता हीट स्ट्रेस एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी है. विशेषज्ञों के मुताबिक, हीट-हेल्थ सिस्टम में उम्र, तापमान, नमी, गर्मी के संपर्क की अवधि और रात के तापमान जैसे कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. यह भी पढ़ें - Viruses Reactivated After Covid: कोविड के बाद सुप्त वायरस सक्रिय, भविष्य का फ्लू फेफड़ों के लिए घातक Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Aug 21, 2026 - 01:30
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Global Warming Risk: 3°C ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने से 80 पर्सेंट बुजुर्गों पर मौत का खतरा, जानें वजह

Global Warming Risk : बढ़ता तापमान बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा बनता जा रहा है. द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक नई स्टडी ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर पेश की है. अध्ययन के मुताबिक, अगर दुनिया का औसत तापमान औद्योगिक दौर से पहले के स्तर की तुलना में 3°C या उससे ज्यादा बढ़ता है, तो भारत समेत दक्षिण एशिया के करोड़ों बुजुर्गों को दिन और रात दोनों समय खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. भारत इस खतरे में दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में शामिल है.

3°C तापमान बढ़ा तो 80 पर्सेंट बुजुर्गों पर खतरा

स्टडी के अनुसार, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले बुजुर्गों को 3°C ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति में साल के करीब तीन महीने तक दिन-रात खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. इन चार देशों में दुनिया की करीब 73 फीसदी बुजुर्ग आबादी रहती है.  भारत में स्थिति और भी चिंताजनक बताई गई है. 3°C तापमान बढ़ने की स्थिति में भारत की आधी से ज्यादा आबादी और 80 फीसदी से ज्यादा बुजुर्गों को हर साल औसतन कम से कम 180 घंटे ऐसी गर्मी झेलनी पड़ सकती है, जिसे शरीर के लिए सहन करना बेहद मुश्किल माना गया है. 

दिल्ली और इंडो-गंगेटिक प्लेन में ज्यादा असर

स्टडी में दिल्ली और बड़े इंडो-गंगेटिक प्लेन को खास तौर पर संवेदनशील क्षेत्र बताया गया है. यहां बुजुर्गों को 1.5°C ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति में ही सालाना करीब 1,000 या उससे ज्यादा घंटे असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. यह तापमान स्तर करीब 2030 के आसपास पहुंचने की उम्मीद जताई गई है.  वहीं अगर ग्लोबल वार्मिंग 3°C तक पहुंचती है तो यह अवधि 2,000 घंटे से ज्यादा हो सकती है. खास बात यह है कि यह गर्मी पूरे साल समान रूप से नहीं फैलेगी, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा मई से सितंबर के बीच केंद्रित रहेगा. 

कई महीनों तक दिन-रात झेलनी पड़ सकती है गर्मी

स्टडी की प्रमुख लेखिका प्रोफेसर किंगकिंग कोंग के मुताबिक, 3°C से ज्यादा तापमान बढ़ने पर बुजुर्गों को लगातार कई महीनों तक दिन और रात दोनों समय असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में कूलिंग की सुविधा, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और हीट-रिस्पॉन्स प्रोग्राम पर काफी दबाव पड़ सकता है. 

यह भी पढ़ें - Global Anxiety Statistics: एंग्जायटी लेवल 3 क्या है, भारत-पाकिस्तान समेत दुनिया में कितने लोग परेशान?

बुजुर्गों के लिए कम तापमान पर भी ज्यादा खतरा

रिसर्च के मुताबिक, बुजुर्गों का शरीर गर्मी को कंट्रोल करने में युवाओं की तुलना में कम सक्षम होता है. वे कम पसीना बहाते हैं, उनकी ब्लड वेसल्स की प्रतिक्रिया धीमी होती है और गर्मी में उनके दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसी वजह से पहले किए गए कुछ अध्ययनों में बुजुर्गों पर पड़ने वाले खतरे का अनुमान कम लगाया गया हो सकता है. अध्ययन में 15-39 साल, 40-59 साल और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की गर्मी सहने की क्षमता को अलग-अलग देखा गया. इसके आधार पर अलग-अलग तापमान स्तरों पर खतरे और प्रभावित होने वाली आबादी का अनुमान लगाया गया. 

दक्षिण एशिया को बताया गया सबसे संवेदनशील क्षेत्र

अध्ययन के मुताबिक भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और नाइजर जैसे देश ज्यादा जोखिम में हैं. इसकी एक वजह बड़ी आबादी का गर्मी के संपर्क में आना और गरीबी का ज्यादा होना है, जिससे गर्मी से बचने की क्षमता प्रभावित होती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी कंट्रोल करने की क्षमता कम होती जाती है. उनके मुताबिक दक्षिण एशिया में बुजुर्गों के लिए बढ़ता हीट स्ट्रेस एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी है. विशेषज्ञों के मुताबिक, हीट-हेल्थ सिस्टम में उम्र, तापमान, नमी, गर्मी के संपर्क की अवधि और रात के तापमान जैसे कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

यह भी पढ़ें - Viruses Reactivated After Covid: कोविड के बाद सुप्त वायरस सक्रिय, भविष्य का फ्लू फेफड़ों के लिए घातक

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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