Fastag Technology: टोल पर पीछे खड़ी कार का पैसा क्यों नहीं काटता फास्टैग, क्या है इसकी तकनीक?

Fastag Technology: हाईवे पर सफर करते वक्त टोल प्लाजा पर लंबी लाइन लगना आम बात है. अक्सर जब हम अपनी कार लेकर टोल बूथ की लाइन में खड़े होते हैं. तो आगे वाली गाड़ी से हमारी दूरी मुश्किल से दो-तीन फीट की होती है. ऐसे में कई बार दिमाग में यह सवाल जरूर आता है कि टोल का स्कैनर आगे वाली गाड़ी की जगह हमारी कार के फास्टैग से पैसे क्यों नहीं काट लेता.  इस सवाल का जवाब समझने के लिए सबसे पहले फास्टैग की तकनीक को समझना होगा. कार के शीशे पर लगा फास्टैग स्टीकर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी आरएफआईडी (RFID) तकनीक पर काम करता है. इस छोटे से स्टीकर के अंदर एक बेहद पतली चिप और एक छोटा सा एंटीना लगा होता है. इसमें कोई बैटरी नहीं होती बल्कि यह टोल बूथ के स्कैनर से मिलने वाली रेडियो तरंगों से ही एक्टिव होता है. जानें कैसे काम करता है यह स्कैनर. क्या होता है रीडिंग जोन? टोल प्लाजा के ऊपर लगे उस सफेद रंग के बॉक्स यानी आरएफआईडी रीडर इस काम में मदद करता है. यह कोई नार्मल कैमरा नहीं होता जो दूर तक की हर चीज को देख ले. इस स्कैनर को खास तौर पर इस तरह से सेट किया जाता है कि इसकी रेडियो तरंगें एक बेहद सीमित दायरे में ही काम करें.  इंजीनियरिंग की भाषा में इस तय की गई जगह को रीडिंग जोन कहा जाता है. यह रीडिंग जोन टोल बूथ के बैरियर से ठीक थोड़ा सा पहले सड़क के एक छोटे से हिस्से पर ही फोकस करता है. ऊपर लगा स्कैनर तिरछे कोण में नीचे की तरफ एक न दिखने वाली टॉर्च की रोशनी जैसा घेरा बनाता है.   कैसे काम करता है स्कैनर? जब कोई कार चलकर ठीक उस तय घेरे के अंदर आती है तभी स्कैनर की तरंगें उस कार के विंडशील्ड पर लगे फास्टैग से टकराती हैं और उसे पढ़ पाती हैं. यही वजह है कि अगर आपकी कार आगे वाली गाड़ी से बिल्कुल सटाकर भी खड़ी है तब भी वह उस खास स्कैनिंग घेरे से बाहर रहती है. टोल का स्कैनर सिर्फ चार से पांच मीटर की रेंज और एक फिक्स एंगल पर ही काम करता है. इसलिए पीछे खड़ी गाड़ियों के फास्टैग तक उसकी रेडियो तरंगें पहुंच ही नहीं पातीं और आपका पैसा कटने से पूरी तरह बच जाता है. सड़क के नीचे लगा सेंसर और सिग्नल स्ट्रेंथ का कमाल इसके अलावा टोल लेन में सड़क के नीचे एक और स्मार्ट सिस्टम लगा होता है जिसे लूप डिटेक्टर या व्हीकल सेंसर कहते हैं. जब कोई गाड़ी आगे बढ़कर ठीक स्कैनर के नीचे पहुंचती है. तो सड़क के नीचे लगा यह मैग्नेटिक सेंसर गाड़ी के वजन और लोहे की बॉडी को महसूस करता है. जब तक यह सेंसर सिग्नल नहीं देता तब तक ऊपर लगा फास्टैग स्कैनर किसी भी स्टीकर को स्कैन करना शुरू नहीं करता.  मान लीजिए कि किसी वजह से दो गाड़ियां बहुत करीब आ जाएं और स्कैनर को दो फास्टैग के सिग्नल मिलने लगें, तब भी सिस्टम कंफ्यूज नहीं होता. इसमें एंटी-कोलिजन और सिग्नल स्ट्रेंथ तकनीक काम करती है. जो गाड़ी स्कैनर के ठीक नीचे और सबसे करीब होती है उसके फास्टैग का सिग्नल सबसे ज्यादा मजबूत होता है. सिस्टम तुरंत कमजोर सिग्नल वाली पीछे की गाड़ी को इग्नोर करके सिर्फ मजबूत सिग्नल वाले टैग से पैसे काटता है. यह भी पढ़ें:कैसे काम करता है Where is my train ऐप, ट्रेन से कैसे होता है कनेक्ट? एक कार निकलने के बाद ऐसे रीसेट होता है पूरा सिस्टम एक बार जब आगे वाली गाड़ी का टोल कट जाता है तो बैरियर खुलता है और वह गाड़ी वहां से आगे निकल जाती है. गाड़ी के निकलते ही सड़क के नीचे लगा सेंसर सिस्टम को बताता है कि लेन खाली हो चुकी है और बैरियर वापस गिर जाता है. इसके बाद ही स्कैनर अगली गाड़ी को रीड करने के लिए खुद को रीसेट करता है. यानी एक बार में सिर्फ एक ही गाड़ी का ट्रांजैक्शन पूरा हो सकता है.  अगली बार जब आप टोल प्लाजा की लंबी लाइन में अपनी कार लेकर खड़े हों तो बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए. NHAI का यह पूरा सिस्टम मिलीसेकंड के हिसाब से काम करता है. जब तक आपकी कार का अगला पहिया टोल बूथ के उस खास सेंसर के ऊपर नहीं पहुंचेगा तब तक आपके फास्टैग अकाउंट से एक रुपया भी नहीं कट सकता. यह भी पढ़ें: Phone Safety Tips: फोन चोरी होने पर भी चोर नहीं कर पाएगा स्विच ऑफ, अभी ऑन करें यह सेटिंग

Nov 7, 2026 - 05:30
 0
Fastag Technology: टोल पर पीछे खड़ी कार का पैसा क्यों नहीं काटता फास्टैग, क्या है इसकी तकनीक?

Fastag Technology: हाईवे पर सफर करते वक्त टोल प्लाजा पर लंबी लाइन लगना आम बात है. अक्सर जब हम अपनी कार लेकर टोल बूथ की लाइन में खड़े होते हैं. तो आगे वाली गाड़ी से हमारी दूरी मुश्किल से दो-तीन फीट की होती है. ऐसे में कई बार दिमाग में यह सवाल जरूर आता है कि टोल का स्कैनर आगे वाली गाड़ी की जगह हमारी कार के फास्टैग से पैसे क्यों नहीं काट लेता. 

इस सवाल का जवाब समझने के लिए सबसे पहले फास्टैग की तकनीक को समझना होगा. कार के शीशे पर लगा फास्टैग स्टीकर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी आरएफआईडी (RFID) तकनीक पर काम करता है. इस छोटे से स्टीकर के अंदर एक बेहद पतली चिप और एक छोटा सा एंटीना लगा होता है. इसमें कोई बैटरी नहीं होती बल्कि यह टोल बूथ के स्कैनर से मिलने वाली रेडियो तरंगों से ही एक्टिव होता है. जानें कैसे काम करता है यह स्कैनर.

क्या होता है रीडिंग जोन?

टोल प्लाजा के ऊपर लगे उस सफेद रंग के बॉक्स यानी आरएफआईडी रीडर इस काम में मदद करता है. यह कोई नार्मल कैमरा नहीं होता जो दूर तक की हर चीज को देख ले. इस स्कैनर को खास तौर पर इस तरह से सेट किया जाता है कि इसकी रेडियो तरंगें एक बेहद सीमित दायरे में ही काम करें. 

इंजीनियरिंग की भाषा में इस तय की गई जगह को रीडिंग जोन कहा जाता है. यह रीडिंग जोन टोल बूथ के बैरियर से ठीक थोड़ा सा पहले सड़क के एक छोटे से हिस्से पर ही फोकस करता है. ऊपर लगा स्कैनर तिरछे कोण में नीचे की तरफ एक न दिखने वाली टॉर्च की रोशनी जैसा घेरा बनाता है. 

 कैसे काम करता है स्कैनर?

जब कोई कार चलकर ठीक उस तय घेरे के अंदर आती है तभी स्कैनर की तरंगें उस कार के विंडशील्ड पर लगे फास्टैग से टकराती हैं और उसे पढ़ पाती हैं. यही वजह है कि अगर आपकी कार आगे वाली गाड़ी से बिल्कुल सटाकर भी खड़ी है तब भी वह उस खास स्कैनिंग घेरे से बाहर रहती है. टोल का स्कैनर सिर्फ चार से पांच मीटर की रेंज और एक फिक्स एंगल पर ही काम करता है. इसलिए पीछे खड़ी गाड़ियों के फास्टैग तक उसकी रेडियो तरंगें पहुंच ही नहीं पातीं और आपका पैसा कटने से पूरी तरह बच जाता है.


सड़क के नीचे लगा सेंसर और सिग्नल स्ट्रेंथ का कमाल

इसके अलावा टोल लेन में सड़क के नीचे एक और स्मार्ट सिस्टम लगा होता है जिसे लूप डिटेक्टर या व्हीकल सेंसर कहते हैं. जब कोई गाड़ी आगे बढ़कर ठीक स्कैनर के नीचे पहुंचती है. तो सड़क के नीचे लगा यह मैग्नेटिक सेंसर गाड़ी के वजन और लोहे की बॉडी को महसूस करता है. जब तक यह सेंसर सिग्नल नहीं देता तब तक ऊपर लगा फास्टैग स्कैनर किसी भी स्टीकर को स्कैन करना शुरू नहीं करता. 

मान लीजिए कि किसी वजह से दो गाड़ियां बहुत करीब आ जाएं और स्कैनर को दो फास्टैग के सिग्नल मिलने लगें, तब भी सिस्टम कंफ्यूज नहीं होता. इसमें एंटी-कोलिजन और सिग्नल स्ट्रेंथ तकनीक काम करती है. जो गाड़ी स्कैनर के ठीक नीचे और सबसे करीब होती है उसके फास्टैग का सिग्नल सबसे ज्यादा मजबूत होता है. सिस्टम तुरंत कमजोर सिग्नल वाली पीछे की गाड़ी को इग्नोर करके सिर्फ मजबूत सिग्नल वाले टैग से पैसे काटता है.


यह भी पढ़ें:कैसे काम करता है Where is my train ऐप, ट्रेन से कैसे होता है कनेक्ट?

एक कार निकलने के बाद ऐसे रीसेट होता है पूरा सिस्टम

एक बार जब आगे वाली गाड़ी का टोल कट जाता है तो बैरियर खुलता है और वह गाड़ी वहां से आगे निकल जाती है. गाड़ी के निकलते ही सड़क के नीचे लगा सेंसर सिस्टम को बताता है कि लेन खाली हो चुकी है और बैरियर वापस गिर जाता है. इसके बाद ही स्कैनर अगली गाड़ी को रीड करने के लिए खुद को रीसेट करता है. यानी एक बार में सिर्फ एक ही गाड़ी का ट्रांजैक्शन पूरा हो सकता है. 

अगली बार जब आप टोल प्लाजा की लंबी लाइन में अपनी कार लेकर खड़े हों तो बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए. NHAI का यह पूरा सिस्टम मिलीसेकंड के हिसाब से काम करता है. जब तक आपकी कार का अगला पहिया टोल बूथ के उस खास सेंसर के ऊपर नहीं पहुंचेगा तब तक आपके फास्टैग अकाउंट से एक रुपया भी नहीं कट सकता.

यह भी पढ़ें: Phone Safety Tips: फोन चोरी होने पर भी चोर नहीं कर पाएगा स्विच ऑफ, अभी ऑन करें यह सेटिंग

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow