Eye drops side effects: क्या बिना डॉक्टर से पूछे आप भी डाल लेते हैं आई ड्रॉप? छिन सकती है आंखों की रोशनी
Eye drops side effects: आज के समय में स्क्रीन पर ज्यादा देर तक काम करने और गेम खेलने के चलते हैं आंखों में कई तरह की दिक्कत हो जाती है. वहीं कई बार हल्की सी आंखों की समस्या होने पर लोग सीधे मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीद कर इस्तेमाल कर लेते हैं. आंखों में होने वाली रेडनेस, जलन या सूखापन जैसी दिक्कतों में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना अब नॉर्मल सा हो गया है. लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह आदत आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. कई बार गलत दवा न सिर्फ असली बीमारी को छुपा देती है, बल्कि आगे चलकर बड़ी समस्या भी खड़ी कर सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या आप बिना डॉक्टर से पूछे आई ड्रॉप डाल लेते हैं तो इससे आपकी आंखों की रोशनी कैसे छीन सकती है? हर लक्षण एक जैसा नहीं, बीमारी अलग-अलग आंखों में होने वाली हर परेशानी का कारण अलग-अलग हो सकता है. यह एलर्जी, बैक्टीरिया या वायरल इनफेक्शन, ड्राई आई या फिर ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में बिना जांच के आई ड्रॉप इस्तेमाल करने से सही बीमारी का पता नहीं लग पाता है और इलाज में देरी हो सकती है. डॉक्टर के अनुसार बिना सलाह के वाले आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. यह दवाएं तुरंत राहत जरूर देती है. लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर आंखों का प्रेशर बढ़ा सकता है, इससे ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा अगर आंख में पहले से कोई इंफेक्शन है तो स्टेरॉयड उसे और ज्यादा गंभीर बना सकता है. ये भी पढ़ें-Onion And Baking Soda For Pests: क्या वाकई कीड़ों को खत्म करता है बेकिंग सोडा? जानें प्याज के साथ इसके इस्तेमाल का सही तरीका एंटीबायोटिक और रेडनेस ड्रॉप्स का गलत इस्तेमाल अक्सर लोग आंख लाल होने पर एंटीबायोटिक ड्रॉप्स इस्तेमाल कर लेते हैं, जबकि हर बार यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन नहीं होता, वायरल या एलर्जी में यह दवाएं बेअसर रहती है. ऐसे में बार-बार इस्तेमाल से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ सकता है. यानी दावों का असर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है. वहीं रेडनेस रिलीफ ड्रॉप्स कुछ समय के लिए आराम देती है, लेकिन इनके ज्यादा इस्तेमाल से आंखों में दोबारा ज्यादा लालिमा और सूखापन हो सकता है. वहीं आर्टिफीशियल टीयर्स जैसे ड्रॉप्स को लोग सुरक्षित मानते हैं, लेकिन अगर इन्हें बार-बार इस्तेमाल करना पड़ रहा है तो यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकते हैं. खासकर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को बिना सलाह कोई भी ड्रॉप इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है. आंखों के लिए कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना? अगर आपकी आंखों में तेज दर्द हो, रोशनी चुभे, धुंधला दिखाई दे, चोट लगे या फिर 2 से 3 दिन में समस्या ठीक न हो तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से कांटेक्ट करना चाहिए. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. वहीं डॉक्टरों का कहना है कि आंख शरीर का बहुत संवेदनशील हिस्सा है और गलत तरीके, गलत दवा का असर सीधे नजर पर पड़ सकता है. कई आई ड्रॉप सिर्फ लक्षणों को दबाते हैं, लेकिन बीमारी को खत्म नहीं करते हैं. ऐसे में बिना सलाह के दवा लेने से कंडीशन और बिगड़ सकती है. ये भी पढ़ें-Pancreatic Cancer Causes: साइलेंट किलर है पेनक्रियाज कैंसर! समय रहते पहचानें पीलिया और पाचन में बदलाव के ये संकेत Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Eye drops side effects: आज के समय में स्क्रीन पर ज्यादा देर तक काम करने और गेम खेलने के चलते हैं आंखों में कई तरह की दिक्कत हो जाती है. वहीं कई बार हल्की सी आंखों की समस्या होने पर लोग सीधे मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीद कर इस्तेमाल कर लेते हैं. आंखों में होने वाली रेडनेस, जलन या सूखापन जैसी दिक्कतों में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना अब नॉर्मल सा हो गया है. लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह आदत आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. कई बार गलत दवा न सिर्फ असली बीमारी को छुपा देती है, बल्कि आगे चलकर बड़ी समस्या भी खड़ी कर सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या आप बिना डॉक्टर से पूछे आई ड्रॉप डाल लेते हैं तो इससे आपकी आंखों की रोशनी कैसे छीन सकती है?
हर लक्षण एक जैसा नहीं, बीमारी अलग-अलग
आंखों में होने वाली हर परेशानी का कारण अलग-अलग हो सकता है. यह एलर्जी, बैक्टीरिया या वायरल इनफेक्शन, ड्राई आई या फिर ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में बिना जांच के आई ड्रॉप इस्तेमाल करने से सही बीमारी का पता नहीं लग पाता है और इलाज में देरी हो सकती है. डॉक्टर के अनुसार बिना सलाह के वाले आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. यह दवाएं तुरंत राहत जरूर देती है. लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर आंखों का प्रेशर बढ़ा सकता है, इससे ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा अगर आंख में पहले से कोई इंफेक्शन है तो स्टेरॉयड उसे और ज्यादा गंभीर बना सकता है.
एंटीबायोटिक और रेडनेस ड्रॉप्स का गलत इस्तेमाल
अक्सर लोग आंख लाल होने पर एंटीबायोटिक ड्रॉप्स इस्तेमाल कर लेते हैं, जबकि हर बार यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन नहीं होता, वायरल या एलर्जी में यह दवाएं बेअसर रहती है. ऐसे में बार-बार इस्तेमाल से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ सकता है. यानी दावों का असर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है. वहीं रेडनेस रिलीफ ड्रॉप्स कुछ समय के लिए आराम देती है, लेकिन इनके ज्यादा इस्तेमाल से आंखों में दोबारा ज्यादा लालिमा और सूखापन हो सकता है. वहीं आर्टिफीशियल टीयर्स जैसे ड्रॉप्स को लोग सुरक्षित मानते हैं, लेकिन अगर इन्हें बार-बार इस्तेमाल करना पड़ रहा है तो यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकते हैं. खासकर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को बिना सलाह कोई भी ड्रॉप इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है.
आंखों के लिए कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना?
अगर आपकी आंखों में तेज दर्द हो, रोशनी चुभे, धुंधला दिखाई दे, चोट लगे या फिर 2 से 3 दिन में समस्या ठीक न हो तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से कांटेक्ट करना चाहिए. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. वहीं डॉक्टरों का कहना है कि आंख शरीर का बहुत संवेदनशील हिस्सा है और गलत तरीके, गलत दवा का असर सीधे नजर पर पड़ सकता है. कई आई ड्रॉप सिर्फ लक्षणों को दबाते हैं, लेकिन बीमारी को खत्म नहीं करते हैं. ऐसे में बिना सलाह के दवा लेने से कंडीशन और बिगड़ सकती है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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