Explained: चुनाव खत्म, जेब ढीली करने के लिए कमर कस लें, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के दावे क्यों?

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही सबसे बड़ी फिक्र लग गई है- पेट्रोल और डीजल के दामों की. बीते एक महीने से चर्चा है कि चुनाव के बाद तेल की कीमतें 25 से 28 रुपए तक बढ़ जाएंगी. इस खबर के चलते आंध्र प्रदेश में पैनिक बाइंग देखने को मिली, जहां 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप सूख गए. दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तो हो गया, लेकिन होर्मुज पर तनातनी बनी हुई है. जमीनी स्तर पर तेल की किल्लत से आम जनता परेशान है. अब तो चुनाव भी खत्म हो गए हैं, तो क्या यह मान लिया जाए कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाएंगे? सवाल 1: क्या बीते चुनावों के फौरन बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े?जवाब: बीते 8 सालों में चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़े: 2022 विधानसभा चुनाव: यह सबसे ताजा और बड़ा झटका था. 10 मार्च 2022 को चुनाव खत्म होने के बाद, 22 मार्च से 137 दिनों से लगी रोक हटाकर कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ. 22 मार्च 2022 को पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक साथ 80 पैसे प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई. यह दैनिक मूल्य संशोधन शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की बढ़ोतरी थी. इसके बाद लगातार चार दिनों तक हर रोज 80 पैसे की ही बढ़ोतरी की गई. महज 5 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल 3.20 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए थे. 2021 विधानसभा चुनाव: 2 मई 2021 को चुनावी नतीजे आने के बाद, 4 मई से 18 दिनों से जमी कीमतों में रोजाना इजाफा शुरू हुआ. शुरुआती तीन दिनों (4, 5 और 6 मई) में हर रोज पेट्रोल 25 पैसे और डीजल 30 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया. इन तीन दिनों में ही पेट्रोल 59 पैसे और डीजल 69 पैसे बढ़ गया. इस दौर में कीमतें लगातार ऊपर गईं और उसी साल जुलाई तक पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया था. 2019 लोकसभा चुनाव: 19 मई 2019 को चुनाव खत्म होते ही, अगले दिन से करीब 30 दिनों की स्थिरता के बाद दाम बढ़ने शुरू हुए. 20 मई 2019 को पेट्रोल 9 पैसे और डीजल 15 पैसे प्रति लीटर बढ़ा. शुरुआती बढ़ोतरी भले ही कम लगे, लेकिन इसके बाद लगातार 16 दिनों तक दाम बढ़े और कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल करीब 3.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए. 2018 कर्नाटक विधानसभा चुनाव: 12 मई 2018 को मतदान के बाद, 14 मई से 19 दिनों का इंतजार खत्म हुआ. 14 मई 2018 को पेट्रोल 17 पैसे और डीजल 21 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. अनुमान है कि जिस दौरान सरकारी कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए, उस दौरान उन्हें करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जिसकी भरपाई बाद में धीरे-धीरे की गई. सवाल 2: तो क्या अब चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम 25 रुपये तक बढ़ जाएंगे?जवाब: नहीं, केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह से 'फेक न्यूज' करार दिया है. 23 अप्रैल 2026 को ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए साफ कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है. मंत्रालय ने ऐसी खबरों को 'शरारतपूर्ण और भ्रामक' बताया, जो नागरिकों में डर और दहशत पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं. ????FAKE NEWS!An order circulating on social media claims to be issued by the Ministry of Petroleum and Natural Gas, stating that petrol and diesel prices have been increased by ₹10 and ₹12.50, respectively.#PIBFactCheck:❌ This order is #FAKE .✅ The Government of India… pic.twitter.com/tMmJa0Y4qA — PIB Fact Check (@PIBFactCheck) April 29, 2026 28 अप्रैल 2026 को यानी चुनाव खत्म होने से एक दिन पहले, सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में फिर से इसी बात को दोहराया. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, 'पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.' उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और पैनिक बाइंग से बचें. हालांकि, होर्मुज पर तनाव के चलते सूरत-ए-हाल कुछ और ही कह रही है. सवाल 3: होर्मुज स्ट्रेट पर आखिर चल क्या रहा है और इसका हम पर क्या असर है?जवाब: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित किया है. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जिससे होकर दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल की सप्लाई गुजरती है. ईरान की ओर से इसे बंद करने की धमकी के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है. इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं. 30 मार्च 2026 को कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था और मार्च के दौरान भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की औसत कीमत लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल रही. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है.   अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार है सवाल 4: भारत की तेल कंपनियां कितने घाटे में चल रही हैं?  जवाब: सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) भारी नुकसान उठा रही हैं. वे अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा कच्चा तेल खरीदकर उसे भारत में काफी सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत में कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी यानी घाटा हो रहा था. वहीं, 28 अप्रैल को पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अब डीजल पर यह नुकसान बढ़कर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. कुल मिलाकर, इन कंपनियों का रोजाना का घाटा लगभग 2,400 करोड़ रुपये का है

Apr 30, 2026 - 07:30
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Explained: चुनाव खत्म, जेब ढीली करने के लिए कमर कस लें, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के दावे क्यों?

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही सबसे बड़ी फिक्र लग गई है- पेट्रोल और डीजल के दामों की. बीते एक महीने से चर्चा है कि चुनाव के बाद तेल की कीमतें 25 से 28 रुपए तक बढ़ जाएंगी. इस खबर के चलते आंध्र प्रदेश में पैनिक बाइंग देखने को मिली, जहां 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप सूख गए. दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तो हो गया, लेकिन होर्मुज पर तनातनी बनी हुई है. जमीनी स्तर पर तेल की किल्लत से आम जनता परेशान है. अब तो चुनाव भी खत्म हो गए हैं, तो क्या यह मान लिया जाए कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाएंगे?

सवाल 1: क्या बीते चुनावों के फौरन बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े?
जवाब: बीते 8 सालों में चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़े:

  • 2022 विधानसभा चुनाव: यह सबसे ताजा और बड़ा झटका था. 10 मार्च 2022 को चुनाव खत्म होने के बाद, 22 मार्च से 137 दिनों से लगी रोक हटाकर कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ. 22 मार्च 2022 को पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक साथ 80 पैसे प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई. यह दैनिक मूल्य संशोधन शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की बढ़ोतरी थी. इसके बाद लगातार चार दिनों तक हर रोज 80 पैसे की ही बढ़ोतरी की गई. महज 5 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल 3.20 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए थे.
  • 2021 विधानसभा चुनाव: 2 मई 2021 को चुनावी नतीजे आने के बाद, 4 मई से 18 दिनों से जमी कीमतों में रोजाना इजाफा शुरू हुआ. शुरुआती तीन दिनों (4, 5 और 6 मई) में हर रोज पेट्रोल 25 पैसे और डीजल 30 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया. इन तीन दिनों में ही पेट्रोल 59 पैसे और डीजल 69 पैसे बढ़ गया. इस दौर में कीमतें लगातार ऊपर गईं और उसी साल जुलाई तक पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया था.
  • 2019 लोकसभा चुनाव: 19 मई 2019 को चुनाव खत्म होते ही, अगले दिन से करीब 30 दिनों की स्थिरता के बाद दाम बढ़ने शुरू हुए. 20 मई 2019 को पेट्रोल 9 पैसे और डीजल 15 पैसे प्रति लीटर बढ़ा. शुरुआती बढ़ोतरी भले ही कम लगे, लेकिन इसके बाद लगातार 16 दिनों तक दाम बढ़े और कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल करीब 3.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए.
  • 2018 कर्नाटक विधानसभा चुनाव: 12 मई 2018 को मतदान के बाद, 14 मई से 19 दिनों का इंतजार खत्म हुआ. 14 मई 2018 को पेट्रोल 17 पैसे और डीजल 21 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. अनुमान है कि जिस दौरान सरकारी कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए, उस दौरान उन्हें करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जिसकी भरपाई बाद में धीरे-धीरे की गई.

सवाल 2: तो क्या अब चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम 25 रुपये तक बढ़ जाएंगे?
जवाब: नहीं, केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह से 'फेक न्यूज' करार दिया है. 23 अप्रैल 2026 को ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए साफ कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है. मंत्रालय ने ऐसी खबरों को 'शरारतपूर्ण और भ्रामक' बताया, जो नागरिकों में डर और दहशत पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं.

28 अप्रैल 2026 को यानी चुनाव खत्म होने से एक दिन पहले, सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में फिर से इसी बात को दोहराया. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, 'पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.' उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और पैनिक बाइंग से बचें.

हालांकि, होर्मुज पर तनाव के चलते सूरत-ए-हाल कुछ और ही कह रही है.

सवाल 3: होर्मुज स्ट्रेट पर आखिर चल क्या रहा है और इसका हम पर क्या असर है?
जवाब: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित किया है. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जिससे होकर दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल की सप्लाई गुजरती है. ईरान की ओर से इसे बंद करने की धमकी के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है.

इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं. 30 मार्च 2026 को कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था और मार्च के दौरान भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की औसत कीमत लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल रही. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है.

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार है

सवाल 4: भारत की तेल कंपनियां कितने घाटे में चल रही हैं?  
जवाब: सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) भारी नुकसान उठा रही हैं. वे अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा कच्चा तेल खरीदकर उसे भारत में काफी सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत में कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी यानी घाटा हो रहा था. वहीं, 28 अप्रैल को पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अब डीजल पर यह नुकसान बढ़कर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. कुल मिलाकर, इन कंपनियों का रोजाना का घाटा लगभग 2,400 करोड़ रुपये का है.

सवाल 5: इतने घाटे के बावजूद सरकार दाम क्यों नहीं बढ़ा रही है?
जवाब: सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता और अर्थव्यवस्था को वैश्विक तेल की कीमतों की अस्थिरता से बचाना है ताकि महंगाई पर काबू रखा जा सके. इसके लिए सरकार ने कीमतें बढ़ाने के बजाय खुद राजस्व का बड़ा नुकसान उठाने का फैसला किया.

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी. अगर यह कटौती पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में बनी रही, तो सरकार को 1.3 लाख करोड़ से 1.7 लाख करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है. इसके अलावा, सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी अतिरिक्त शुल्क लगा दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घरेलू बाजार में सप्लाई प्रभावित न हो और विदेशों में अनावश्यक मुनाफा न कमाया जाए.

सरकार का कहना है कि वह हर दो हफ्ते में स्थिति की समीक्षा कर रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम पिछले चार सालों से स्थिर हैं, जो एक रिकॉर्ड है, जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा. सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए रूस जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात बढ़ाने और अपने रणनीतिक भंडारण का उपयोग करने जैसे कदम भी उठाए हैं.

सवाल 6: तो आखिरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों का क्या होगा?
जवाब: फिलहाल, सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को राहत है क्योंकि कीमतें नहीं बढ़ने जा रही हैं. दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर की स्थिर दर पर बिक रहा है. हालांकि, यह स्थिति पूरी तरह से पश्चिम एशिया के तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर निर्भर करती है. लेकिन बीते चुनावों के दौरान कीमतों के ट्रेंड कुछ और ही कहानी कहते हैं.

अगर वैश्विक सप्लाई सामान्य होती है और कच्चे तेल के दाम नीचे आते हैं तो सरकार और कंपनियों पर दबाव कम होगा. अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो लंबे समय तक सरकार के लिए राजस्व और कंपनियों के लिए यह घाटा सहना मुश्किल हो सकता है. हालांकि सरकार ने अभी किसी भी बढ़ोतरी के प्रस्ताव से साफ इनकार किया है.

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