Diwali 2025: जहां भगवान राम ने किया था वनवास, वह जगह अब कहां? समझें वहां पहुंचने का तरीका

पूरा देश आज दीपावली का त्योहार मना रहा है. हर तरफ रोशनी बिखरी हुई है और मिठाइयों की खुशबू हर किसी का दिल जीत रही है. इस त्योहार का कनेक्शन भगवान राम से है, जिन्होंने लंका के राजा रावण का वध करके संपूर्ण जगत को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी. क्या आप जानते हैं कि भगवान राम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ जहां वनवास किया था, वह जगह कहां है? अगर आप वहां जाना चाहे तो कैसे पहुंच सकते हैं? अगर नहीं तो आइए आपको बताते हैं. छत्तीसगढ़ से रामायण का कनेक्शन गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य वन आज नक्सलियों का ठिकाना माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस जंगल का कनेक्शन भगवान राम से भी है. दरअसल, यह वही जगह है, जहां रामायण की कहानी शुरू हुई और रावण वध की नींव पड़ी. भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने इसी जंगल में वनवास के 12 साल बिताए थे. दरअसल, दंडकारण्य वन छत्तीसगढ़ के जंगलों में फैला हुआ है, जहां नक्सली अपनी गतिविधियां चलाते हैं. पुरानी कहानियों के मुताबिक, यह वन कभी राक्षसों और खूंखार जानवरों का घर था. मान्यता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जब वनवास पर थे तो यह जंगल उनकी शरणस्थली बना. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस वन में शूर्पणखा की कहानी भी जुड़ी है. छत्तीसगढ़ में कहां है यह जगह? अब सवाल उठता है कि छत्तीसगढ़ के किस हिस्से में दंडकारण्य जंगल आता है? दरअसल, रामायण के इस पौराणिक जंगल का बड़ा हिस्सा आज छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में फैला हुआ है. ये जगह इतनी खूबसूरत है कि इसे 'छत्तीसगढ़ का कश्मीर' भी कहते हैं. यहां जंगल के साथ-साथ झरने और प्राचीन मंदिर हैं. हालांकि, नक्सली इलाका होने की वजह से थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है.  यहां कैसे मनाते हैं दिवाली? दंडकारण्य में नक्सली भले ही एक्टिव हो, लेकिन यहां के लोग दिवाली का त्योहार काफी जोश के साथ  को पूरे जोश के साथ मनाते हैं. इस जंगल में भी धनतेरस, छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली को खास अंदाज में सेलिब्रेट किया जाता है. नरकासुर वध की कथा यहां प्रचलित है और लोग दीए जलाकर खुशियां मनाते हैं. लोग कहते हैं कि भगवान राम की याद में यहां रोशनी का यह पर्व मनाया जाता है.  दंडकारण्य में घूमने के लिए क्या-क्या? आज यह जंगल करीब 92,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है. मुख्य रूप से यह जंगल छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से यानी बस्तर जिले में आता है, लेकिन यह तेलंगाना, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक तक फैला हुआ है. बस्तर को दंडकारण्य का दिल माना जाता है. यहां राम-सीता के नाम पर कई मंदिर और गुफाएं हैं. चित्रकोट झरना भी यहीं है, जो घोड़े की नाल जैसा दिखता है. इसके अलावा तीरथगढ़ झरना और कांगेर घाटी नेशनल पार्क भी रामायण से जुड़े हैं. कैसे जा सकते हैं दंडकारण्य? अगर आप रामायण काल की दुनिया से रूबरू होना चाहते हैं तो बस्तर सबसे अच्छी जगह है. यहां कालाराम मंदिर है, जहां भगवान राम की पूजा होती है. सीता गुफा वह जगह है, जहां सीता को छिपाया गया था. तपोवन और राम कुंड भी देखने लायक हैं. दूधसागर झरना और सुला वाइनयार्ड्स के पास प्राकृतिक सौंदर्य है. ध्यान रखें कि यह जंगल घना है तो गाइड के साथ जाएं. छत्तीसगढ़ सरकार ने 'राम वन गमन पथ' नाम से एक पर्यटन सर्किट बनाया है, जिसमें अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक 248 जगहें शामिल हैं. बस्तर इसका मुख्य हिस्सा है. फ्लाइट से जाने वाले रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट का रुख कर सकते हैं, जहां से बस्तर की दूरी 264 किमी है. आप टैक्सी लेकर यहां पहुंच सकते हैं. इसके अलावा रायपुर से जगदलपुर के लिए कई ट्रेनें चलती हैं, जो बस्तर तक के सफर को आसान बना सकती हैं. ये भी पढ़ें: इस बार की दिवाली बनाएं और भी रंगीन, अपनाएं ये लेटेस्ट रंगोली डिजाइन

Oct 20, 2025 - 11:30
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Diwali 2025: जहां भगवान राम ने किया था वनवास, वह जगह अब कहां? समझें वहां पहुंचने का तरीका

पूरा देश आज दीपावली का त्योहार मना रहा है. हर तरफ रोशनी बिखरी हुई है और मिठाइयों की खुशबू हर किसी का दिल जीत रही है. इस त्योहार का कनेक्शन भगवान राम से है, जिन्होंने लंका के राजा रावण का वध करके संपूर्ण जगत को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी. क्या आप जानते हैं कि भगवान राम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ जहां वनवास किया था, वह जगह कहां है? अगर आप वहां जाना चाहे तो कैसे पहुंच सकते हैं? अगर नहीं तो आइए आपको बताते हैं.

छत्तीसगढ़ से रामायण का कनेक्शन

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य वन आज नक्सलियों का ठिकाना माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस जंगल का कनेक्शन भगवान राम से भी है. दरअसल, यह वही जगह है, जहां रामायण की कहानी शुरू हुई और रावण वध की नींव पड़ी. भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने इसी जंगल में वनवास के 12 साल बिताए थे. दरअसल, दंडकारण्य वन छत्तीसगढ़ के जंगलों में फैला हुआ है, जहां नक्सली अपनी गतिविधियां चलाते हैं. पुरानी कहानियों के मुताबिक, यह वन कभी राक्षसों और खूंखार जानवरों का घर था. मान्यता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जब वनवास पर थे तो यह जंगल उनकी शरणस्थली बना. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस वन में शूर्पणखा की कहानी भी जुड़ी है.

छत्तीसगढ़ में कहां है यह जगह?

अब सवाल उठता है कि छत्तीसगढ़ के किस हिस्से में दंडकारण्य जंगल आता है? दरअसल, रामायण के इस पौराणिक जंगल का बड़ा हिस्सा आज छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में फैला हुआ है. ये जगह इतनी खूबसूरत है कि इसे 'छत्तीसगढ़ का कश्मीर' भी कहते हैं. यहां जंगल के साथ-साथ झरने और प्राचीन मंदिर हैं. हालांकि, नक्सली इलाका होने की वजह से थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है. 

यहां कैसे मनाते हैं दिवाली?

दंडकारण्य में नक्सली भले ही एक्टिव हो, लेकिन यहां के लोग दिवाली का त्योहार काफी जोश के साथ  को पूरे जोश के साथ मनाते हैं. इस जंगल में भी धनतेरस, छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली को खास अंदाज में सेलिब्रेट किया जाता है. नरकासुर वध की कथा यहां प्रचलित है और लोग दीए जलाकर खुशियां मनाते हैं. लोग कहते हैं कि भगवान राम की याद में यहां रोशनी का यह पर्व मनाया जाता है. 

दंडकारण्य में घूमने के लिए क्या-क्या?

आज यह जंगल करीब 92,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है. मुख्य रूप से यह जंगल छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से यानी बस्तर जिले में आता है, लेकिन यह तेलंगाना, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक तक फैला हुआ है. बस्तर को दंडकारण्य का दिल माना जाता है. यहां राम-सीता के नाम पर कई मंदिर और गुफाएं हैं. चित्रकोट झरना भी यहीं है, जो घोड़े की नाल जैसा दिखता है. इसके अलावा तीरथगढ़ झरना और कांगेर घाटी नेशनल पार्क भी रामायण से जुड़े हैं.

कैसे जा सकते हैं दंडकारण्य?

अगर आप रामायण काल की दुनिया से रूबरू होना चाहते हैं तो बस्तर सबसे अच्छी जगह है. यहां कालाराम मंदिर है, जहां भगवान राम की पूजा होती है. सीता गुफा वह जगह है, जहां सीता को छिपाया गया था. तपोवन और राम कुंड भी देखने लायक हैं. दूधसागर झरना और सुला वाइनयार्ड्स के पास प्राकृतिक सौंदर्य है. ध्यान रखें कि यह जंगल घना है तो गाइड के साथ जाएं. छत्तीसगढ़ सरकार ने 'राम वन गमन पथ' नाम से एक पर्यटन सर्किट बनाया है, जिसमें अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक 248 जगहें शामिल हैं. बस्तर इसका मुख्य हिस्सा है. फ्लाइट से जाने वाले रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट का रुख कर सकते हैं, जहां से बस्तर की दूरी 264 किमी है. आप टैक्सी लेकर यहां पहुंच सकते हैं. इसके अलावा रायपुर से जगदलपुर के लिए कई ट्रेनें चलती हैं, जो बस्तर तक के सफर को आसान बना सकती हैं.

ये भी पढ़ें: इस बार की दिवाली बनाएं और भी रंगीन, अपनाएं ये लेटेस्ट रंगोली डिजाइन

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