Diabetes Skin Symptoms: ये 7 लक्षण नजर आएं तो समझ लें अनकंट्रोल हो रहा डायबिटीज, डॉक्टर को तुरंत करें कॉल

Warning Signs Of High Blood Sugar On Skin: डायबिटीज दुनिया भर में सबसे आम क्रॉनिक मेटाबॉलिक बीमारियों में से एक है. यह न सिर्फ रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, बल्कि लंबे समय में गंभीर परेशानियों का कारण भी बन सकती है. हाई ब्लड शुगर के संकेत कई बार त्वचा पर साफ दिखाई देने लगते हैं. इन लक्षणों को समय पर पहचान लेना जरूरी है, ताकि बीमारी के गंभीर रूप लेने से पहले इलाज शुरू किया जा सके. चलिए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े ऐसे 7 स्किन संकेत, जो अनकंट्रोल्ड शुगर की ओर इशारा करते हैं. शिन स्पॉट्स शिन स्पॉट्स या डायबिटिक डर्मोपैथी, डायबिटीज से जुड़ी सबसे आम त्वचा समस्याओं में से एक है. इसे स्पॉटेड लेग सिंड्रोम भी कहा जाता है. ये गोल या अंडाकार धब्बे होते हैं, जिनका रंग भूरा या लाल-भूरा हो सकता है. आमतौर पर ये नुकसानदेह नहीं होते, लेकिन इनका दिखना ब्लड शुगर जांच की ज़रूरत का संकेत देता है. दर्द या खुजली न होने की वजह से कई लोग इन्हें उम्र के धब्बे समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.  त्वचा का सख्त या मोटा होना लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से त्वचा में कोलेजन का असामान्य जमाव हो सकता है, जिससे स्किन की इलास्टिसिटी कम हो जाती है और त्वचा मोटी लगने लगती है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में स्क्लेरिडेमा डायबिटिकोरम कहा जाता है. यह आमतौर पर गर्दन, कंधों या ऊपरी पीठ पर दिखती है. यह बिना दर्द के होती है और ज्यादातर कॉस्मेटिक समस्या मानी जाती है. खुले घाव और जख्म डायबिटीज शरीर की घाव भरने की क्षमता को प्रभावित करती है. लंबे समय तक हाई शुगर से ब्लड सर्कुलेशन खराब हो जाता है और नर्व डैमेज भी हो सकता है. इसकी वजह से खासकर पैरों में बने घाव जल्दी ठीक नहीं होते,  इन्हें डायबिटिक अल्सर कहा जाता है. समय पर इलाज न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है और अंग काटने तक की नौबत आ सकती है. त्वचा पर छोटे-छोटे दाने अगर अचानक त्वचा पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगें, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. अनकंट्रोल्ड डायबिटीज में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ सकता है. शुरुआत में ये दाने दिखाई देते हैं और बाद में हल्की त्वचा पर पीले रंग के हो सकते हैं. शुगर कंट्रोल में आते ही ये दाने आमतौर पर गायब हो जाते हैं. कुछ हिस्सों में त्वचा का काला पड़ना गर्दन, बगल या जांघों के पास त्वचा का काला और मोटा होना डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का संकेत हो सकता है. इस स्थिति को एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है. ज्यादातर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती. पलकों के आसपास पीले धब्बे पलकों के आसपास पीले रंग के चिकने धब्बे या उभार दिखना खून में फैट का स्तर ज्यादा होने का संकेत हो सकता है. इन्हें जैंथेलाज़्मा कहा जाता है. ऐसे लोगों में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स अक्सर ज्यादा पाए जाते हैं. स्किन टैग्स स्किन टैग्स आमतौर पर हानिरहित होते हैं, लेकिन अगर ये ज्यादा संख्या में हों, खासकर गर्दन, बगल, जांघों या पलकों के पास हो, तो यह टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ा संकेत हो सकता है. मेडिकल भाषा में इन्हें एक्रोकोर्डन्स कहा जाता है. रिसर्च बताती है कि जिन लोगों में स्किन टैग्स ज्यादा होते हैं, उनमें डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा होता है. यह भी पढ़ें: ब्रश करते वक्त हो सकता है ये हादसा, दुनियाभर में ऐसे सिर्फ 10 मामले Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jan 12, 2026 - 17:30
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Diabetes Skin Symptoms: ये 7 लक्षण नजर आएं तो समझ लें अनकंट्रोल हो रहा डायबिटीज, डॉक्टर को तुरंत करें कॉल

Warning Signs Of High Blood Sugar On Skin: डायबिटीज दुनिया भर में सबसे आम क्रॉनिक मेटाबॉलिक बीमारियों में से एक है. यह न सिर्फ रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, बल्कि लंबे समय में गंभीर परेशानियों का कारण भी बन सकती है. हाई ब्लड शुगर के संकेत कई बार त्वचा पर साफ दिखाई देने लगते हैं. इन लक्षणों को समय पर पहचान लेना जरूरी है, ताकि बीमारी के गंभीर रूप लेने से पहले इलाज शुरू किया जा सके. चलिए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े ऐसे 7 स्किन संकेत, जो अनकंट्रोल्ड शुगर की ओर इशारा करते हैं.

शिन स्पॉट्स

शिन स्पॉट्स या डायबिटिक डर्मोपैथी, डायबिटीज से जुड़ी सबसे आम त्वचा समस्याओं में से एक है. इसे स्पॉटेड लेग सिंड्रोम भी कहा जाता है. ये गोल या अंडाकार धब्बे होते हैं, जिनका रंग भूरा या लाल-भूरा हो सकता है. आमतौर पर ये नुकसानदेह नहीं होते, लेकिन इनका दिखना ब्लड शुगर जांच की ज़रूरत का संकेत देता है. दर्द या खुजली न होने की वजह से कई लोग इन्हें उम्र के धब्बे समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.

 त्वचा का सख्त या मोटा होना

लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से त्वचा में कोलेजन का असामान्य जमाव हो सकता है, जिससे स्किन की इलास्टिसिटी कम हो जाती है और त्वचा मोटी लगने लगती है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में स्क्लेरिडेमा डायबिटिकोरम कहा जाता है. यह आमतौर पर गर्दन, कंधों या ऊपरी पीठ पर दिखती है. यह बिना दर्द के होती है और ज्यादातर कॉस्मेटिक समस्या मानी जाती है.

खुले घाव और जख्म

डायबिटीज शरीर की घाव भरने की क्षमता को प्रभावित करती है. लंबे समय तक हाई शुगर से ब्लड सर्कुलेशन खराब हो जाता है और नर्व डैमेज भी हो सकता है. इसकी वजह से खासकर पैरों में बने घाव जल्दी ठीक नहीं होते,  इन्हें डायबिटिक अल्सर कहा जाता है. समय पर इलाज न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है और अंग काटने तक की नौबत आ सकती है.

त्वचा पर छोटे-छोटे दाने

अगर अचानक त्वचा पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगें, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. अनकंट्रोल्ड डायबिटीज में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ सकता है. शुरुआत में ये दाने दिखाई देते हैं और बाद में हल्की त्वचा पर पीले रंग के हो सकते हैं. शुगर कंट्रोल में आते ही ये दाने आमतौर पर गायब हो जाते हैं.

कुछ हिस्सों में त्वचा का काला पड़ना

गर्दन, बगल या जांघों के पास त्वचा का काला और मोटा होना डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का संकेत हो सकता है. इस स्थिति को एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है. ज्यादातर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती.

पलकों के आसपास पीले धब्बे

पलकों के आसपास पीले रंग के चिकने धब्बे या उभार दिखना खून में फैट का स्तर ज्यादा होने का संकेत हो सकता है. इन्हें जैंथेलाज़्मा कहा जाता है. ऐसे लोगों में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स अक्सर ज्यादा पाए जाते हैं.

स्किन टैग्स

स्किन टैग्स आमतौर पर हानिरहित होते हैं, लेकिन अगर ये ज्यादा संख्या में हों, खासकर गर्दन, बगल, जांघों या पलकों के पास हो, तो यह टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ा संकेत हो सकता है. मेडिकल भाषा में इन्हें एक्रोकोर्डन्स कहा जाता है. रिसर्च बताती है कि जिन लोगों में स्किन टैग्स ज्यादा होते हैं, उनमें डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा होता है.

यह भी पढ़ें: ब्रश करते वक्त हो सकता है ये हादसा, दुनियाभर में ऐसे सिर्फ 10 मामले

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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