Delhi HC: जेपी नड्डा के घर के बाहर ऐसा क्या हुआ, आरोपी को HC ने नहीं दी राहत, कहा-' विरोध का अधिकार है, लेकिन...'

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर के बाहर पुतला जलाने के मामले में आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा या कानून हाथ में लेना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब कुछ लोगों ने दिल्ली में जेपी नड्डा के घर के बाहर प्रदर्शन किया था. आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन किया गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया. पुलिस के अनुसार, इस घटना से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी और सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया था. मामले में आरोपी ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ लगी गंभीर धाराओं को हटाने की मांग की थी, लेकिन सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया. ये भी पढ़ें: PM Modi Trump Meeting: ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार मिलेंगे PM मोदी, कब और किस देश में होगी मुलाकात? कोर्ट ने मामले पर क्या कहा? कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने, सरकार की आलोचना करने और विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह अधिकार केवल शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने तक सीमित है. अगर प्रदर्शन हिंसक हो जाए, आगजनी हो या किसी की सुरक्षा को खतरा पहुंचे तो उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं माना जा सकता. कानून-व्यवस्था बिगाड़ना सही नहीं- दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि असहमति जताने के लिए कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके मौजूद हैं. सार्वजनिक जगहों पर हंगामा करना, आग लगाना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना सही नहीं है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि विरोध प्रदर्शन और हिंसा दोनों अलग बातें हैं. कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. अदालत ने अपने फैसले में यह मैसेज दिया कि लोकतंत्र में विरोध की जगह जरूर है, लेकिन हिंसा और अव्यवस्था की कोई जगह नहीं हो सकती. ये भी पढ़ें: West Bengal Reservation: बंगाल में धर्म आधारित आरक्षण खत्म! शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, किसको फायदा किसको नुकसान?

May 20, 2026 - 14:30
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Delhi HC: जेपी नड्डा के घर के बाहर ऐसा क्या हुआ, आरोपी को HC ने नहीं दी राहत, कहा-' विरोध का अधिकार है, लेकिन...'

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर के बाहर पुतला जलाने के मामले में आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा या कानून हाथ में लेना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता.

यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब कुछ लोगों ने दिल्ली में जेपी नड्डा के घर के बाहर प्रदर्शन किया था. आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन किया गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया. पुलिस के अनुसार, इस घटना से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी और सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया था. मामले में आरोपी ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ लगी गंभीर धाराओं को हटाने की मांग की थी, लेकिन सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया.

ये भी पढ़ें: PM Modi Trump Meeting: ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार मिलेंगे PM मोदी, कब और किस देश में होगी मुलाकात?

कोर्ट ने मामले पर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने, सरकार की आलोचना करने और विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह अधिकार केवल शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने तक सीमित है. अगर प्रदर्शन हिंसक हो जाए, आगजनी हो या किसी की सुरक्षा को खतरा पहुंचे तो उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं माना जा सकता.

कानून-व्यवस्था बिगाड़ना सही नहीं- दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि असहमति जताने के लिए कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके मौजूद हैं. सार्वजनिक जगहों पर हंगामा करना, आग लगाना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना सही नहीं है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि विरोध प्रदर्शन और हिंसा दोनों अलग बातें हैं. कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. अदालत ने अपने फैसले में यह मैसेज दिया कि लोकतंत्र में विरोध की जगह जरूर है, लेकिन हिंसा और अव्यवस्था की कोई जगह नहीं हो सकती.

ये भी पढ़ें: West Bengal Reservation: बंगाल में धर्म आधारित आरक्षण खत्म! शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, किसको फायदा किसको नुकसान?

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