Christmas 2025 Wishes Live: दुनियाभर में क्रिसमस धूम, Christmas Eve पर रंग-बिरंगी लाइट्स से सजे चर्च
Christmas 2025 Wishes Live: दुनिया में 25 दिसंबर को प्रभु यीशु के जन्मोत्सव यानी क्रिसमस को धूमधाम से मनाया जाता है. यह दिन ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है, ये दिन उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करने का अवसर है. यह दिन दुनिया में आशा, विश्वास और मोक्ष का प्रतीक है, जो हर साल खुशी और उल्लास लाता है. क्रिसमस के मौके पर घर-ऑफिस और हर जगह को सजाया जाता है. क्रिसमस ट्री लगाते हैं. इस ट्री को घंटियों, चॉकलेट, लाइट्स और गुब्बारों से सजाया जाता है. क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले यानी 24 दिसंबर को क्रिसमस ईव पर गिरिजाघरों में प्रार्थनाएं होती है. कैरोल गाए जाते हैं और लोग यीशु के जन्मोत्सव को लेकर खुशियां बांटते हैं. इस त्योहार पर दोस्त और परिवार के सभी लोग इकट्ठा होते हैं, एक-दूसरे को तोहफे देते हैं और साथ में मिलकर स्वादिष्ट खाना खाते हैं. क्रिसमस का इतिहास मान्यताओं के अनुसार, प्रभु यीशु यानी जीसस क्राइस्ट का जन्म बैथलहम में मैरी और जोसेफ के घर हुआ था. सेक्सटस जूलियस अफ्रीकानस ने 221 ई. में पहली बार 25 दिसंबर को जीसस का बर्थडे सेलिब्रेट किया था. इसे क्रिसमस-डे कहने के पीछे भी एक कहानी है. दरअसल, रोमन लोग विंटर सोल्सटाइस के दौरान 25 दिसंबर को सूर्य के जन्मदिवस के रूप में मनाते थे. ऐसी भी मान्यताएं हैं कि मदर मैरी ने दुनिया के निर्माण की चौथी तारीख यानी 25 मार्च को गर्भधारण किया था. इसके 9 महीने बाद 25 दिसंबर को यीशु का जन्म हुआ. 2025 में क्रिसमस मनाने के लिए चर्च में तैयारियां जोरों पर है. इस त्योहार से जुड़ी तमाम जानकारी जानने के लिए अपडेट्स देखें - Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Christmas 2025 Wishes Live: दुनिया में 25 दिसंबर को प्रभु यीशु के जन्मोत्सव यानी क्रिसमस को धूमधाम से मनाया जाता है. यह दिन ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है, ये दिन उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करने का अवसर है. यह दिन दुनिया में आशा, विश्वास और मोक्ष का प्रतीक है, जो हर साल खुशी और उल्लास लाता है.
क्रिसमस के मौके पर घर-ऑफिस और हर जगह को सजाया जाता है. क्रिसमस ट्री लगाते हैं. इस ट्री को घंटियों, चॉकलेट, लाइट्स और गुब्बारों से सजाया जाता है. क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले यानी 24 दिसंबर को क्रिसमस ईव पर गिरिजाघरों में प्रार्थनाएं होती है. कैरोल गाए जाते हैं और लोग यीशु के जन्मोत्सव को लेकर खुशियां बांटते हैं. इस त्योहार पर दोस्त और परिवार के सभी लोग इकट्ठा होते हैं, एक-दूसरे को तोहफे देते हैं और साथ में मिलकर स्वादिष्ट खाना खाते हैं.
क्रिसमस का इतिहास
मान्यताओं के अनुसार, प्रभु यीशु यानी जीसस क्राइस्ट का जन्म बैथलहम में मैरी और जोसेफ के घर हुआ था. सेक्सटस जूलियस अफ्रीकानस ने 221 ई. में पहली बार 25 दिसंबर को जीसस का बर्थडे सेलिब्रेट किया था. इसे क्रिसमस-डे कहने के पीछे भी एक कहानी है. दरअसल, रोमन लोग विंटर सोल्सटाइस के दौरान 25 दिसंबर को सूर्य के जन्मदिवस के रूप में मनाते थे. ऐसी भी मान्यताएं हैं कि मदर मैरी ने दुनिया के निर्माण की चौथी तारीख यानी 25 मार्च को गर्भधारण किया था. इसके 9 महीने बाद 25 दिसंबर को यीशु का जन्म हुआ.
2025 में क्रिसमस मनाने के लिए चर्च में तैयारियां जोरों पर है. इस त्योहार से जुड़ी तमाम जानकारी जानने के लिए अपडेट्स देखें -
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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