Christian Wedding: कैसे होती है ईसाई शादी? जानिए रीति-रिवाज और रस्मों की रहस्य

Christian Wedding: ईसाई धर्म में शादी सिर्फ दो लोगों के मिलन की बात नहीं होती, बल्कि इसमें उनके परिवार और दोस्तों की भी अहम भूमिका होती है. इसे एक पवित्र और खास बंधन माना जाता है. ईसाई धर्म के अनुसार, शादी की शुरुआत अक्सर चर्च से होती है, जहां पादरी आशीर्वाद देते हैं और दुल्हा-दुल्हन अपनी कसमें लेते हैं. अंगूठी पहनाना, सफेद कपड़े और वचन लेना इसके मुख्य रिवाज हैं. शादी के बाद परिवार और दोस्त मिलकर जश्न मनाते हैं, नाच-गाना करते हैं और खुशियां बांटते हैं. चलिए जानते हैं कि ईसाई शादी आखिर होती कैसे है. शादी से पहले की खास रस्में: शादी से पहले कुछ खास रस्में होती हैं जो शादी को और भी यादगार बनाती हैं. सबसे पहले होती है सगाई, जिसमें दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार एक-दूसरे को मानते हैं और अंगूठी पहनाई जाती है. उसके बाद होती है तैयारी, जहां दूल्हा और दुल्हन अपने-अपने घरों में शादी के लिए सज-धज कर तैयार होते हैं, और दुल्हन के कपड़े या आभूषणों को कभी पुजारी से आशीर्वाद भी दिलाया जाता है. चर्च में शादी का महत्व: ईसाई शादी का सबसे अहम हिस्सा चर्च का समारोह होता है. इस दौरान पादरी या पुरोहित दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार को आशीर्वाद देते हैं. यह सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि उनके रिश्ते को मजबूत बनाने का तरीका भी है. चर्च में होने वाली ये परंपराएं दूल्हा-दुल्हन के बीच प्यार, भरोसा और सम्मान को बढ़ाती हैं. परिवार और दोस्त भी इस समारोह में शामिल होकर खुशी और आशीर्वाद साझा करते हैं. यही वजह है कि ईसाई शादी में चर्च का महत्व बहुत बड़ा माना जाता है. शादी की खास परंपराएं: ईसाई शादी में दूल्हा और दुल्हन दोनों खास अंदाज में तैयार होते हैं. दूल्हा आमतौर पर सफेद गाउन पहनती है और दूल्हा ब्लैक सूट या टक्सीडो में सजता है. शादी के दौरान परिवार और दोस्त पास खाई रहते हैं और आशीर्वाद देते हैं.  वेदी पर प्रतिज्ञा: ईसाई शादी में दूल्हा और दुल्हन वेदी के सामने खड़े होकर अपने प्यार और साथ निभाने की प्रतिज्ञा करते हैं. यह पल बहुत खास होता है क्योंकि दोनों ईश्वर के सामने अपने जीवनभर साथ रहने का वचन देते हैं. अंगूठी और कसमों का महत्व: शादी में अंगूठी पहनाना और कसमें लेना मुख्य रस्म होती है. यह दोनों के प्यार और जिम्मेदारी का प्रतीक है और जीवनभर साथ रहने की निशानी माना जाता है. शादी के बाद उत्सव और भोज: चर्च समारोह के बाद परिवार और मित्र मिलकर जश्न मनाते हैं. इस दौरान खाना, नाच-गाना और हंसी-खुशी का माहौल होता है. यह शादी के सुखद और यादगार पल होते हैं. ये भी पढ़ें: बिहार बौध धर्म की 'कर्मभूमि', जहां बुद्ध को मिला ज्ञान और मगध बना शिक्षा का केंद्र Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Sep 20, 2025 - 22:30
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Christian Wedding: कैसे होती है ईसाई शादी? जानिए रीति-रिवाज और रस्मों की रहस्य

Christian Wedding: ईसाई धर्म में शादी सिर्फ दो लोगों के मिलन की बात नहीं होती, बल्कि इसमें उनके परिवार और दोस्तों की भी अहम भूमिका होती है. इसे एक पवित्र और खास बंधन माना जाता है. ईसाई धर्म के अनुसार, शादी की शुरुआत अक्सर चर्च से होती है, जहां पादरी आशीर्वाद देते हैं और दुल्हा-दुल्हन अपनी कसमें लेते हैं. अंगूठी पहनाना, सफेद कपड़े और वचन लेना इसके मुख्य रिवाज हैं. शादी के बाद परिवार और दोस्त मिलकर जश्न मनाते हैं, नाच-गाना करते हैं और खुशियां बांटते हैं. चलिए जानते हैं कि ईसाई शादी आखिर होती कैसे है.

शादी से पहले की खास रस्में: शादी से पहले कुछ खास रस्में होती हैं जो शादी को और भी यादगार बनाती हैं. सबसे पहले होती है सगाई, जिसमें दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार एक-दूसरे को मानते हैं और अंगूठी पहनाई जाती है. उसके बाद होती है तैयारी, जहां दूल्हा और दुल्हन अपने-अपने घरों में शादी के लिए सज-धज कर तैयार होते हैं, और दुल्हन के कपड़े या आभूषणों को कभी पुजारी से आशीर्वाद भी दिलाया जाता है.

चर्च में शादी का महत्व: ईसाई शादी का सबसे अहम हिस्सा चर्च का समारोह होता है. इस दौरान पादरी या पुरोहित दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार को आशीर्वाद देते हैं. यह सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि उनके रिश्ते को मजबूत बनाने का तरीका भी है. चर्च में होने वाली ये परंपराएं दूल्हा-दुल्हन के बीच प्यार, भरोसा और सम्मान को बढ़ाती हैं. परिवार और दोस्त भी इस समारोह में शामिल होकर खुशी और आशीर्वाद साझा करते हैं. यही वजह है कि ईसाई शादी में चर्च का महत्व बहुत बड़ा माना जाता है.

शादी की खास परंपराएं: ईसाई शादी में दूल्हा और दुल्हन दोनों खास अंदाज में तैयार होते हैं. दूल्हा आमतौर पर सफेद गाउन पहनती है और दूल्हा ब्लैक सूट या टक्सीडो में सजता है. शादी के दौरान परिवार और दोस्त पास खाई रहते हैं और आशीर्वाद देते हैं. 

वेदी पर प्रतिज्ञा: ईसाई शादी में दूल्हा और दुल्हन वेदी के सामने खड़े होकर अपने प्यार और साथ निभाने की प्रतिज्ञा करते हैं. यह पल बहुत खास होता है क्योंकि दोनों ईश्वर के सामने अपने जीवनभर साथ रहने का वचन देते हैं.

अंगूठी और कसमों का महत्व: शादी में अंगूठी पहनाना और कसमें लेना मुख्य रस्म होती है. यह दोनों के प्यार और जिम्मेदारी का प्रतीक है और जीवनभर साथ रहने की निशानी माना जाता है.

शादी के बाद उत्सव और भोज: चर्च समारोह के बाद परिवार और मित्र मिलकर जश्न मनाते हैं. इस दौरान खाना, नाच-गाना और हंसी-खुशी का माहौल होता है. यह शादी के सुखद और यादगार पल होते हैं.

ये भी पढ़ें: बिहार बौध धर्म की 'कर्मभूमि', जहां बुद्ध को मिला ज्ञान और मगध बना शिक्षा का केंद्र

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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