Atal Canteen: 1 रुपये या 5 रुपये की कैंटीन का खाना कितना होता है हेल्दी, कैसे कर सकते हैं इसकी जांच?
देश के कई राज्यों में गरीबों और मजदूरों के लिए सस्ती कैंटीन चलाई जा रही हैं. इनमें तमिलनाडु में अम्मा उनवागम (अम्मा कैंटीन) काफी फेमस है, जहां एक रुपये में इडली तो पांच रुपये में सांभर राइस मिलता है. इसी तरह पश्चिम बंगाल में मां कैंटीन है, जहां पांच रुपये में दाल-चावल, सब्जी और अंडा मिलता है. इसी तरह दिल्ली में भी अटल कैंटीन शुरू हो चुकी है, जहां पांच रुपये में दाल-चावल, सब्जी और रोटी की थाली मिल रही है. अब सवाल यह उठता है कि क्या इतना सस्ता मिलने वाला खाना सच में हेल्दी होता है? जानते हैं कि इस बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर्स? दिल्ली में कैसी है अटल कैंटीन? दिसंबर 2025 में दिल्ली सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी पर 100 अटल कैंटीन शुरू की हैं. ये कैंटीन झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और गरीब बस्तियों में हैं. यहां हर थाली की कीमत सिर्फ पांच रुपये रखी गई है, जबकि असली लागत 25-30 रुपये तक है. बाकी सब्सिडी सरकार देती है. इसके मेन्यू में दाल-चावल, रोटी (300 ग्राम तक), सब्जी (100 ग्राम) और अचार दिया जा रहा है. हर कैंटीन दिन में दो बार (सुबह-शाम) खाना देती है और करीब 1000 लोगों को थाली परोसती है. FSSAI और लैब टेस्टिंग से खाने की सफाई चेक होती है. कैसा है अम्मा कैंटीन का खाना? तमिलनाडु में 2013 से चल रहीं ये कैंटीन अब भी बहुत लोकप्रिय हैं. इनमें एक रुपये में इडली, पांच रुपये में पोंगल, पांच रुपये में सांभर-राइस, लेमन राइस और करी लीव राइस मिलते हैं. वहीं, तीन रुपये में दही राइस मिलता है. यह खाना हाइजीनिक होता है, जिसे महिलाओं के सेल्फ-हेल्प ग्रुप बनाते हैं. मां कैंटीन कितनी बेस्ट? पश्चिम बंगाल में 2021 से मां कैंटीन शुरू की गई थी. यहां पांच रुपये में चावल, दाल और सब्जी मिलती है. इसमें सरकार सब्सिडी देती है. यह थाली गरीबों-मजदूरों और आर्थिक रूप से परेशान लोगों के लिए काफी मददगार साबित होती है. ऐसी थालियों पर क्या है डॉक्टर की राय? दिल्ली में न्यूट्रिशन एक्सपर्ट और फूड सिक्योरिटी रिसर्चर डॉ. रितिका खेरा के मुताबिक, ये कैंटीन बहुत अच्छी हैं. इनमें सरकारी स्कीम्स के तहत ताजा और गर्म खाना मिलता है, जो सड़क के ठेलों से ज्यादा हेल्दी होता है. इनकी थालियों में कार्बोहाइड्रेट्स (चावल/रोटी), प्रोटीन (दाल) और सब्जियां होती हैं, जो कुपोषण कम करने में मदद करती हैं. ये कैंटीन गरीबों के लिए फूड सिक्योरिटी का अच्छा तरीका हैं. ये माल्न्यूट्रिशन और हाइजीन प्रॉब्लम कम करती हैं. हालांकि, काफी समय तक सिर्फ यह खाना खाने से एनीमिया या विटामिन की कमी हो सकती है. कैसे चेक करें कि खाना हेल्दी है या नहीं? इन कैंटीन में मिलने वाली थाली में दाल (प्रोटीन), रोटी/चावल (एनर्जी), सब्जी (विटामिन) होने चाहिए. कैंटीन FSSAI अप्रूव्ड हो. स्टाफ ग्लव्स पहनता हो और साफ पानी इस्तेमाल किया जाता हो. खाना ताजा, गर्म और स्वादिष्ट होना चाहिए. इनमें ज्यादा तेल-मसाले नहीं होने चाहिए. ये भी पढ़ें: किस फल को कहा जाता है फलों का भगवान? नाम जानकर हैरान हो जाएंगे आप Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
देश के कई राज्यों में गरीबों और मजदूरों के लिए सस्ती कैंटीन चलाई जा रही हैं. इनमें तमिलनाडु में अम्मा उनवागम (अम्मा कैंटीन) काफी फेमस है, जहां एक रुपये में इडली तो पांच रुपये में सांभर राइस मिलता है. इसी तरह पश्चिम बंगाल में मां कैंटीन है, जहां पांच रुपये में दाल-चावल, सब्जी और अंडा मिलता है. इसी तरह दिल्ली में भी अटल कैंटीन शुरू हो चुकी है, जहां पांच रुपये में दाल-चावल, सब्जी और रोटी की थाली मिल रही है. अब सवाल यह उठता है कि क्या इतना सस्ता मिलने वाला खाना सच में हेल्दी होता है? जानते हैं कि इस बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर्स?
दिल्ली में कैसी है अटल कैंटीन?
दिसंबर 2025 में दिल्ली सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी पर 100 अटल कैंटीन शुरू की हैं. ये कैंटीन झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और गरीब बस्तियों में हैं. यहां हर थाली की कीमत सिर्फ पांच रुपये रखी गई है, जबकि असली लागत 25-30 रुपये तक है. बाकी सब्सिडी सरकार देती है. इसके मेन्यू में दाल-चावल, रोटी (300 ग्राम तक), सब्जी (100 ग्राम) और अचार दिया जा रहा है. हर कैंटीन दिन में दो बार (सुबह-शाम) खाना देती है और करीब 1000 लोगों को थाली परोसती है. FSSAI और लैब टेस्टिंग से खाने की सफाई चेक होती है.
कैसा है अम्मा कैंटीन का खाना?
तमिलनाडु में 2013 से चल रहीं ये कैंटीन अब भी बहुत लोकप्रिय हैं. इनमें एक रुपये में इडली, पांच रुपये में पोंगल, पांच रुपये में सांभर-राइस, लेमन राइस और करी लीव राइस मिलते हैं. वहीं, तीन रुपये में दही राइस मिलता है. यह खाना हाइजीनिक होता है, जिसे महिलाओं के सेल्फ-हेल्प ग्रुप बनाते हैं.
मां कैंटीन कितनी बेस्ट?
पश्चिम बंगाल में 2021 से मां कैंटीन शुरू की गई थी. यहां पांच रुपये में चावल, दाल और सब्जी मिलती है. इसमें सरकार सब्सिडी देती है. यह थाली गरीबों-मजदूरों और आर्थिक रूप से परेशान लोगों के लिए काफी मददगार साबित होती है.
ऐसी थालियों पर क्या है डॉक्टर की राय?
दिल्ली में न्यूट्रिशन एक्सपर्ट और फूड सिक्योरिटी रिसर्चर डॉ. रितिका खेरा के मुताबिक, ये कैंटीन बहुत अच्छी हैं. इनमें सरकारी स्कीम्स के तहत ताजा और गर्म खाना मिलता है, जो सड़क के ठेलों से ज्यादा हेल्दी होता है. इनकी थालियों में कार्बोहाइड्रेट्स (चावल/रोटी), प्रोटीन (दाल) और सब्जियां होती हैं, जो कुपोषण कम करने में मदद करती हैं. ये कैंटीन गरीबों के लिए फूड सिक्योरिटी का अच्छा तरीका हैं. ये माल्न्यूट्रिशन और हाइजीन प्रॉब्लम कम करती हैं. हालांकि, काफी समय तक सिर्फ यह खाना खाने से एनीमिया या विटामिन की कमी हो सकती है.
कैसे चेक करें कि खाना हेल्दी है या नहीं?
इन कैंटीन में मिलने वाली थाली में दाल (प्रोटीन), रोटी/चावल (एनर्जी), सब्जी (विटामिन) होने चाहिए. कैंटीन FSSAI अप्रूव्ड हो. स्टाफ ग्लव्स पहनता हो और साफ पानी इस्तेमाल किया जाता हो. खाना ताजा, गर्म और स्वादिष्ट होना चाहिए. इनमें ज्यादा तेल-मसाले नहीं होने चाहिए.
ये भी पढ़ें: किस फल को कहा जाता है फलों का भगवान? नाम जानकर हैरान हो जाएंगे आप
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
What's Your Reaction?