AIIMS Remote Ultrasound: AIIMS में बैठे-बैठे डॉक्टरों ने अंटार्कटिका में की मरीज का जांच, क्या है टेलीरॉबोटिक सिस्टम?

Doctors In Delhi Examine Patient In Antarctica: आज के आधुनिक समय में हर चीज बदल चुकी है और इसमें सबसे ज्यादा सुधार मेडिकल के फील्ड में देखने को मिला है. दिल्ली में बैठे डॉक्टरों ने अंटार्कटिका में मौजूद मरीज की जांच की, वह भी वीडियो कॉल से नहीं, बल्कि लाइव अल्ट्रासाउंड के जरिए. AIIMS के डॉक्टरों द्वारा किया गया यह डेमो दिखाता है कि आधुनिक तकनीक की मदद से एक्सपर्ट इलाज अब महाद्वीपों की दूरी भी पार कर सकता है. AIIMS रिसर्च डे 2026 के दौरान, डॉक्टरों ने भारत के अंटार्कटिक स्टेशन पर लगाए गए एक रोबोटिक आर्म पर लगे अल्ट्रासाउंड प्रोब को दूर से कंट्रोल किया. जैसे ही प्रोब को मूव किया गया, उसकी रियल-टाइम इमेज दिल्ली तक पहुंचती रहीं. इससे डॉक्टरों को ऐसा अनुभव मिला, मानो वे मरीज के पास खड़े होकर खुद जांच कर रहे हों. कई बार हो चुका है ट्रायल इस सिस्टम को अब तक कई ट्रायल्स में परखा जा चुका है. इन परीक्षणों के दौरान डॉक्टरों ने एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड, ट्रॉमा स्कैन, हार्ट इमेजिंग, डॉप्लर स्टडी और गर्दन से जुड़ी जांच सफलतापूर्वक की. प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इतनी लंबी दूरी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इमेज क्वालिटी क्लिनिकल फैसले लेने के लिए पर्याप्त रही. एक्सपर्ट का क्या कहना है? AIIMS के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने बताया कि फिलहाल यह तकनीक टेस्टिंग फेज में है, लेकिन दूर-दराज और संसाधनविहीन इलाकों के लिए इसमें जबरदस्त संभावनाएं हैं. आने वाले समय में इसके इस्तेमाल को और बड़े स्तर पर लागू करने की योजना है. अंटार्कटिका में मेडिकल केयर किसी भी आम जगह जैसी नहीं होती. वहां काम कर रहे लोग बेहद ठंडे मौसम, पूरी तरह अलग-थलग हालात और सीमित मेडिकल सुविधाओं के बीच रहते हैं. ऐसे में अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो डॉक्टरों को तुरंत फैसला लेना पड़ता है कि मरीज का इलाज वहीं संभव है या उसे बाहर ले जाना पड़ेगा, जो कई बार मौसम के कारण दिनों तक संभव नहीं हो पाता. ऐसे हालात में तुरंत जांच की सुविधा न होना जानलेवा साबित हो सकता है. AIIMS दिल्ली और IIT ने मिलकर डेवलेप किया यह टेलीरॉबोटिक सिस्टम AIIMS दिल्ली और IIT दिल्ली के साथ मिलकर डेवलेप किया गया है. इसमें IHFC, नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का भी सहयोग रहा है. डॉक्टरों का मानना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल आपदा प्रभावित इलाकों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों, समुद्र में मौजूद इंस्टॉलेशंस और भारत के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में भी किया जा सकता है, जहां एक्सपर्ट इलाज तक पहुंच अक्सर देर से या बिल्कुल नहीं हो पाती. इसे भी पढ़ें- World Cancer Day 2026: हर साल बढ़ रहा कैंसर का ग्राफ, एक्सपर्ट से जानें वे संकेत, जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ता है भारी

Feb 4, 2026 - 18:30
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AIIMS Remote Ultrasound: AIIMS में बैठे-बैठे डॉक्टरों ने अंटार्कटिका में की मरीज का जांच, क्या है टेलीरॉबोटिक सिस्टम?

Doctors In Delhi Examine Patient In Antarctica: आज के आधुनिक समय में हर चीज बदल चुकी है और इसमें सबसे ज्यादा सुधार मेडिकल के फील्ड में देखने को मिला है. दिल्ली में बैठे डॉक्टरों ने अंटार्कटिका में मौजूद मरीज की जांच की, वह भी वीडियो कॉल से नहीं, बल्कि लाइव अल्ट्रासाउंड के जरिए. AIIMS के डॉक्टरों द्वारा किया गया यह डेमो दिखाता है कि आधुनिक तकनीक की मदद से एक्सपर्ट इलाज अब महाद्वीपों की दूरी भी पार कर सकता है.

AIIMS रिसर्च डे 2026 के दौरान, डॉक्टरों ने भारत के अंटार्कटिक स्टेशन पर लगाए गए एक रोबोटिक आर्म पर लगे अल्ट्रासाउंड प्रोब को दूर से कंट्रोल किया. जैसे ही प्रोब को मूव किया गया, उसकी रियल-टाइम इमेज दिल्ली तक पहुंचती रहीं. इससे डॉक्टरों को ऐसा अनुभव मिला, मानो वे मरीज के पास खड़े होकर खुद जांच कर रहे हों.

कई बार हो चुका है ट्रायल

इस सिस्टम को अब तक कई ट्रायल्स में परखा जा चुका है. इन परीक्षणों के दौरान डॉक्टरों ने एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड, ट्रॉमा स्कैन, हार्ट इमेजिंग, डॉप्लर स्टडी और गर्दन से जुड़ी जांच सफलतापूर्वक की. प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इतनी लंबी दूरी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इमेज क्वालिटी क्लिनिकल फैसले लेने के लिए पर्याप्त रही.

एक्सपर्ट का क्या कहना है?

AIIMS के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने बताया कि फिलहाल यह तकनीक टेस्टिंग फेज में है, लेकिन दूर-दराज और संसाधनविहीन इलाकों के लिए इसमें जबरदस्त संभावनाएं हैं. आने वाले समय में इसके इस्तेमाल को और बड़े स्तर पर लागू करने की योजना है. अंटार्कटिका में मेडिकल केयर किसी भी आम जगह जैसी नहीं होती. वहां काम कर रहे लोग बेहद ठंडे मौसम, पूरी तरह अलग-थलग हालात और सीमित मेडिकल सुविधाओं के बीच रहते हैं. ऐसे में अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो डॉक्टरों को तुरंत फैसला लेना पड़ता है कि मरीज का इलाज वहीं संभव है या उसे बाहर ले जाना पड़ेगा, जो कई बार मौसम के कारण दिनों तक संभव नहीं हो पाता. ऐसे हालात में तुरंत जांच की सुविधा न होना जानलेवा साबित हो सकता है.

AIIMS दिल्ली और IIT ने मिलकर डेवलेप किया

यह टेलीरॉबोटिक सिस्टम AIIMS दिल्ली और IIT दिल्ली के साथ मिलकर डेवलेप किया गया है. इसमें IHFC, नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का भी सहयोग रहा है. डॉक्टरों का मानना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल आपदा प्रभावित इलाकों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों, समुद्र में मौजूद इंस्टॉलेशंस और भारत के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में भी किया जा सकता है, जहां एक्सपर्ट इलाज तक पहुंच अक्सर देर से या बिल्कुल नहीं हो पाती.

इसे भी पढ़ें- World Cancer Day 2026: हर साल बढ़ रहा कैंसर का ग्राफ, एक्सपर्ट से जानें वे संकेत, जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ता है भारी

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