9 घंटे हाई वोल्टेज ड्रामा और 2 घंटे की हिरासत..., दिनभर चले राहुल के प्रदर्शन में क्या-क्या हुआ?

दिल्ली में मंगलवार को चुनाव प्रणाली में कथित अनियमितताओं और एसआईआर में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर 'इंडिया' गठबंधन के सांसद और नेता चुनाव आयोग का घेराव करने सड़क पर उतर आए. प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा लहराते नजर आए तो वहीं तो वहीं विपक्षी नेताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प देखी गई. इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी. वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन परिसर में पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए. लगभग 9 घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद दिल्ली पुलिस ने रात करीब 8 बजे इन सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया. पुलिस राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर किंग्सवे कैंप पहुंची और 2 घंटे बाद दोनों को छोड़ दिया. इसके बाद राहुल और प्रिंयका गांधी दोनों एक ही गाड़ी में बैठकर वहां से निकले. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया. दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के मुताबिक की गई है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कानूनी निर्देशों का उल्लंघन किया था, जिसके चलते स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 260 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे. इन सभी को दिल्ली के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई. इसके बाद ज्यादातर प्रदर्शनकारी मौके से चले गए, लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, मनीष चतरथ और लगभग 50-60 समर्थक बिना अनुमति के आकाशवाणी भवन परिसर में घुस गए और वहीं धरने पर बैठ गए. पुलिस के मुताबिक, राहुल गांधी ने परिसर छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि जब तक सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग से मिलने का समय नहीं मिल जाता, वे वहां से नहीं हटेंगे. स्थिति को बिगड़ने से रोकने और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया. आकाशवाणी भवन परिसर कैसे घुसे राहुल गांधी विपक्षी सांसदों ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे संसद भवन परिसर से जोरदार नारेबाजी करते हुए चुनाव आयोग की ओर कूच किया, लेकिन उन्हें गंतव्य से करीब 200 मीटर पहले रोक दिया गया और अधिकतर लोगों को बस में बैठाकर दूसरे स्थानों पर ले जाया गया. दोपहर के समय यह लगने लगा था कि विपक्ष का मार्च और धरना खत्म हो गया है, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के एक कदम ने वहां की पूरी तस्वीर ही बदल दी. प्रियंका गांधी पुलिस द्वारा वहां लगाई गई एक बस के अंदर बैठ गई थीं, लेकिन राहुल गांधी से बातचीत के बाद वह नीचे उतर गईं. कुछ देर ही में कांग्रेस के ये दोनों नेता दोपहर करीब 12.20 बजे संसद मार्ग की तरफ खुलने वाले आकाशवाणी भवन के स्वागत कक्ष वाले प्रवेश द्वार की ओर तेजी से बढ़े और अंदर घुस गए. उनके इस कदम से कई विपक्षी सांसद, यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेता भी हैरान रह गए.   उनके आकाशवाणी परिसर में दाखिल होने से पहले विपक्षी सांसदों के मार्च से जुड़ा पूरा घटनाक्रम संसद मार्ग पर केंद्रित था, जहां सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती थी ताकि विपक्ष के नेताओं को निर्वाचन सदन जाने से रोका जा सके. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन और महुआ मोइत्रा और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास उन नेताओं में शामिल थे, जिन्हें बसों में बैठाया गया. कई नेताओं, सांसदों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद ऐसा कोई संकेत नहीं था कि विरोध-प्रदर्शन आकाशवाणी भवन के परिसर तक पहुंचने वाला है. आकाशवाणी भवन के गेट नंबर तीन के पास स्वागत कक्ष वाले प्रवेश द्वार पर कर्मचारियों ने राहुल गांधी को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बनी रही. अंततः वह अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ जबरन अंदर चले गए. आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे राहुल करीब 12.30 बजे प्रियंका गांधी बस से उतरीं, एंट्री गेट गेट से भीतर घुसी. दोनों (राहुल और प्रियंका गांधी) गेट नंबर चार के पास एक पेड़ के नीचे बैठ गए. इस दौरान प्रसारण भवन के कर्मचारी बाहर आकर घटनाक्रम देखने लगे. कई कर्मचारियों ने राहुल गांधी के साथ सेल्फी ली, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. कुछ लोग इमारत की छत पर चढ़ गए, ताकि घटनाक्रम को देख सकें. बाद में पुलिस ने उन्हें नीचे उतरने को कहा.  बाहर कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया और उन्होंने राहुल गांधी के साथ अंदर जाने की मांग की.  इसके बाद करीब 12.45 बजे पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा वहां पहुंचे और गेट से अंदर जाने की अनुमति मांगी. नयी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा भी मौके पर पहुंचे और नेताओं के साथ बातचीत शुरू की. इसके बाद उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई. कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे, दीपेंद्र हुड्डा और चरणजीत सिंह चन्नी और सेवा दल प्रमुख श्रीनिवास बी.वी. भी वहां मौजूद थे. राहुल गांधी के कार्यालय से जुड़े अलंकार सवाई और श्रीवत्स भी अंदर थे. ब्रिटास समेत कई सांसद हिरासत से रिहा होने के बाद दोबारा विरोध-प्रदर्शन स्थल पर लौट आए. आकाशवाणी परिसर में मौजूद नेताओं के लिए जलपान की व्यवस्था शुरू हो गई. मैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां खड़ा हूं: राहुल गांधी न्यूज एजेंसी आईएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग के बाहर एक दुकान से आलू के चिप्स, भुजिया और चॉकलेट के पैकेट, पानी की बोतलें मंगाए गए. पटेल चौक से डाइट कोक भी लाया गया. बाद में श्रीनिवास को नेताओं के जमावड़े वाले स्थान के आसपास इस्तेमाल किए गए पैकेट हटाते देखा गया. दोपहर करीब 2.30 बजे पत्रकारों ने जाली के बीच से अपने माइक्रोफोन आगे बढ़ाए और राहुल

Oct 7, 2026 - 07:30
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9 घंटे हाई वोल्टेज ड्रामा और 2 घंटे की हिरासत..., दिनभर चले राहुल के प्रदर्शन में क्या-क्या हुआ?

दिल्ली में मंगलवार को चुनाव प्रणाली में कथित अनियमितताओं और एसआईआर में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर 'इंडिया' गठबंधन के सांसद और नेता चुनाव आयोग का घेराव करने सड़क पर उतर आए. प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा लहराते नजर आए तो वहीं तो वहीं विपक्षी नेताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प देखी गई. इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी. वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन परिसर में पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए. लगभग 9 घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद दिल्ली पुलिस ने रात करीब 8 बजे इन सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया. पुलिस राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर किंग्सवे कैंप पहुंची और 2 घंटे बाद दोनों को छोड़ दिया. इसके बाद राहुल और प्रिंयका गांधी दोनों एक ही गाड़ी में बैठकर वहां से निकले.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया. दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के मुताबिक की गई है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कानूनी निर्देशों का उल्लंघन किया था, जिसके चलते स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 260 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे. इन सभी को दिल्ली के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई.

इसके बाद ज्यादातर प्रदर्शनकारी मौके से चले गए, लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, मनीष चतरथ और लगभग 50-60 समर्थक बिना अनुमति के आकाशवाणी भवन परिसर में घुस गए और वहीं धरने पर बैठ गए. पुलिस के मुताबिक, राहुल गांधी ने परिसर छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि जब तक सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग से मिलने का समय नहीं मिल जाता, वे वहां से नहीं हटेंगे. स्थिति को बिगड़ने से रोकने और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया.


आकाशवाणी भवन परिसर कैसे घुसे राहुल गांधी

विपक्षी सांसदों ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे संसद भवन परिसर से जोरदार नारेबाजी करते हुए चुनाव आयोग की ओर कूच किया, लेकिन उन्हें गंतव्य से करीब 200 मीटर पहले रोक दिया गया और अधिकतर लोगों को बस में बैठाकर दूसरे स्थानों पर ले जाया गया. दोपहर के समय यह लगने लगा था कि विपक्ष का मार्च और धरना खत्म हो गया है, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के एक कदम ने वहां की पूरी तस्वीर ही बदल दी. प्रियंका गांधी पुलिस द्वारा वहां लगाई गई एक बस के अंदर बैठ गई थीं, लेकिन राहुल गांधी से बातचीत के बाद वह नीचे उतर गईं. कुछ देर ही में कांग्रेस के ये दोनों नेता दोपहर करीब 12.20 बजे संसद मार्ग की तरफ खुलने वाले आकाशवाणी भवन के स्वागत कक्ष वाले प्रवेश द्वार की ओर तेजी से बढ़े और अंदर घुस गए. उनके इस कदम से कई विपक्षी सांसद, यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेता भी हैरान रह गए.  

उनके आकाशवाणी परिसर में दाखिल होने से पहले विपक्षी सांसदों के मार्च से जुड़ा पूरा घटनाक्रम संसद मार्ग पर केंद्रित था, जहां सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती थी ताकि विपक्ष के नेताओं को निर्वाचन सदन जाने से रोका जा सके. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन और महुआ मोइत्रा और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास उन नेताओं में शामिल थे, जिन्हें बसों में बैठाया गया. कई नेताओं, सांसदों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद ऐसा कोई संकेत नहीं था कि विरोध-प्रदर्शन आकाशवाणी भवन के परिसर तक पहुंचने वाला है. आकाशवाणी भवन के गेट नंबर तीन के पास स्वागत कक्ष वाले प्रवेश द्वार पर कर्मचारियों ने राहुल गांधी को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बनी रही. अंततः वह अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ जबरन अंदर चले गए.


आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे राहुल

करीब 12.30 बजे प्रियंका गांधी बस से उतरीं, एंट्री गेट गेट से भीतर घुसी. दोनों (राहुल और प्रियंका गांधी) गेट नंबर चार के पास एक पेड़ के नीचे बैठ गए. इस दौरान प्रसारण भवन के कर्मचारी बाहर आकर घटनाक्रम देखने लगे. कई कर्मचारियों ने राहुल गांधी के साथ सेल्फी ली, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. कुछ लोग इमारत की छत पर चढ़ गए, ताकि घटनाक्रम को देख सकें. बाद में पुलिस ने उन्हें नीचे उतरने को कहा.  बाहर कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया और उन्होंने राहुल गांधी के साथ अंदर जाने की मांग की. 

इसके बाद करीब 12.45 बजे पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा वहां पहुंचे और गेट से अंदर जाने की अनुमति मांगी. नयी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा भी मौके पर पहुंचे और नेताओं के साथ बातचीत शुरू की. इसके बाद उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई. कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे, दीपेंद्र हुड्डा और चरणजीत सिंह चन्नी और सेवा दल प्रमुख श्रीनिवास बी.वी. भी वहां मौजूद थे. राहुल गांधी के कार्यालय से जुड़े अलंकार सवाई और श्रीवत्स भी अंदर थे. ब्रिटास समेत कई सांसद हिरासत से रिहा होने के बाद दोबारा विरोध-प्रदर्शन स्थल पर लौट आए. आकाशवाणी परिसर में मौजूद नेताओं के लिए जलपान की व्यवस्था शुरू हो गई.


मैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां खड़ा हूं: राहुल गांधी

न्यूज एजेंसी आईएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग के बाहर एक दुकान से आलू के चिप्स, भुजिया और चॉकलेट के पैकेट, पानी की बोतलें मंगाए गए. पटेल चौक से डाइट कोक भी लाया गया. बाद में श्रीनिवास को नेताओं के जमावड़े वाले स्थान के आसपास इस्तेमाल किए गए पैकेट हटाते देखा गया. दोपहर करीब 2.30 बजे पत्रकारों ने जाली के बीच से अपने माइक्रोफोन आगे बढ़ाए और राहुल गांधी ने परिसर के अंदर से उनसे बात की. उन्होंने कहा, ‘बीजेपी क्या कहती है, मुझे इसकी परवाह नहीं है. मैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां खड़ा हूं.’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘देश के साथ जो किया गया है, वह देशद्रोह है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, अमित शाह हों, आरएसएस प्रमुख हों या ज्ञानेश कुमार, किसी को बख्शा नहीं जाएगा.’

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