60 के बाद शरीर देता है साफ संकेत, जानें दर्द और असहजता में फर्क समझना क्यों है जरूरी?

उम्र बढ़ना जीवन की एक आम प्रक्रिया है और इसके साथ शरीर में बदलाव आना भी तय है. वहीं 60 की उम्र के बाद कई लोगों को सुबह उठते ही पीठ में जकड़न, थोड़ी देर चलने पर घुटनों में दर्द या शरीर में ऐसी तकलीफ महसूस होने लगती है, जो पहले कभी नहीं थी. ऐसे में अक्सर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि यह नॉर्मल उम्र के साथ बढ़ने वाली असहजता है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत. एक्सपर्ट्स के अनुसार समय रहते इस फर्क को समझना बहुत जरूरी है, ताकि सही इलाज सही समय पर शुरू किया जा सके. 60 के बाद दर्द और असहजता में क्या है फर्क? एक्सपर्ट्स के अनुसार 60 की उम्र के बाद शरीर में नई तरह की अकड़न, जकड़न और हर तरह की तकलीफ महसूस होना आम बात है. लेकिन यह जानना जरूरी है कि जो महसूस हो रहा है, वह दर्द है या केवल असहजता है, क्योंकि दोनों का इलाज अलग-अलग होता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि असहजता आमतौर पर हल्की होती है, सुबह उठने पर शरीर में जकड़न, देर तक बैठने के बाद मांसपेशियों का कड़ा लगना या हल्की एक्टिविटी के बाद शरीर में दर्द महसूस होना उम्र बढ़ाने के सामान्य लक्षण है. ऐसी कंडीशन में आराम, हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और गर्म पानी की सिकाई से राहत मिल जाती है. यह बदलाव जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर की मुद्रा में उम्र के साथ होने वाले नेचुरल बदलावों के कारण होते हैं. दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी वहीं दर्द की बात करें तो यह ज्यादा गंभीर और लंबे समय तक रहने वाला होता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दर्द अक्सर नींद, चलने-फिरने और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करता है. अगर दर्द समय के साथ बढ़ता जाए, अचानक शुरू हो या उसके साथ सूजन, सुन्नता या कमजोरी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह गठिया, नसों से जुड़ी समस्या, फ्रैक्चर या किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है. क्या कहती है इंटरनल मेडिसिन की राय? डॉक्टरों के अनुसार 60 के बाद शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता है. इसलिए पहचानना जरूरी है कि कौन सी परेशानी नॉर्मल है और कौन सी मेडिकल समस्या का संकेत है. उनका कहना है कि असहजता आमतौर पर हल्की, धीमी और थोड़ी-थोड़ी देर में होने वाली होती है, जो आराम हल्की, कसरत या दिनचर्या में छोटे बदलाव से ठीक हो जाती है. वहीं सुबह घुटनों में जकड़न या पूरे दिन के बाद शरीर में भारीपन महसूस होना उम्र का सामान्य असर है. लेकिन अगर दर्द तेज हो लंबे समय तक बना रहे या समय के साथ बढ़ता जाए तो यह चिंता का विषय है. ऐसा दर्द नींद, भूख और  रोजाना की एक्टिविटी को प्रभावित करता है और आराम करने से भी ठीक नहीं होता है. यह लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिले एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर दर्द के साथ तेज या चुभने वाला दर्द, सूजन, बुखार, अचानक वजन कम होना, शून्यता या कमजोरी या फिर रात में नींद से जगाने वाला दर्द दिखाई दें तो तुरंत मेडिकल सलाह जरूरी होती है. एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि कई बुजुर्ग दर्द को उम्र का हिस्सा मानकर सहते रहते हैं, जिससे गठिया, नसों का दबना, हड्डियों में फ्रैक्चर या अंगों से जुड़ी बीमारियों की पहचान देर से होती है. ये भी पढ़ें-आवाज में हो रहा बदलाव तो हल्के में न लें, इन डेंजरस बीमारियों का मिलता है सिग्नल Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jan 25, 2026 - 09:30
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60 के बाद शरीर देता है साफ संकेत, जानें दर्द और असहजता में फर्क समझना क्यों है जरूरी?

उम्र बढ़ना जीवन की एक आम प्रक्रिया है और इसके साथ शरीर में बदलाव आना भी तय है. वहीं 60 की उम्र के बाद कई लोगों को सुबह उठते ही पीठ में जकड़न, थोड़ी देर चलने पर घुटनों में दर्द या शरीर में ऐसी तकलीफ महसूस होने लगती है, जो पहले कभी नहीं थी. ऐसे में अक्सर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि यह नॉर्मल उम्र के साथ बढ़ने वाली असहजता है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत. एक्सपर्ट्स के अनुसार समय रहते इस फर्क को समझना बहुत जरूरी है, ताकि सही इलाज सही समय पर शुरू किया जा सके.

60 के बाद दर्द और असहजता में क्या है फर्क?

एक्सपर्ट्स के अनुसार 60 की उम्र के बाद शरीर में नई तरह की अकड़न, जकड़न और हर तरह की तकलीफ महसूस होना आम बात है. लेकिन यह जानना जरूरी है कि जो महसूस हो रहा है, वह दर्द है या केवल असहजता है, क्योंकि दोनों का इलाज अलग-अलग होता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि असहजता आमतौर पर हल्की होती है, सुबह उठने पर शरीर में जकड़न, देर तक बैठने के बाद मांसपेशियों का कड़ा लगना या हल्की एक्टिविटी के बाद शरीर में दर्द महसूस होना उम्र बढ़ाने के सामान्य लक्षण है. ऐसी कंडीशन में आराम, हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और गर्म पानी की सिकाई से राहत मिल जाती है. यह बदलाव जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर की मुद्रा में उम्र के साथ होने वाले नेचुरल बदलावों के कारण होते हैं.

दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

वहीं दर्द की बात करें तो यह ज्यादा गंभीर और लंबे समय तक रहने वाला होता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दर्द अक्सर नींद, चलने-फिरने और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करता है. अगर दर्द समय के साथ बढ़ता जाए, अचानक शुरू हो या उसके साथ सूजन, सुन्नता या कमजोरी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह गठिया, नसों से जुड़ी समस्या, फ्रैक्चर या किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है.

क्या कहती है इंटरनल मेडिसिन की राय?

डॉक्टरों के अनुसार 60 के बाद शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता है. इसलिए पहचानना जरूरी है कि कौन सी परेशानी नॉर्मल है और कौन सी मेडिकल समस्या का संकेत है. उनका कहना है कि असहजता आमतौर पर हल्की, धीमी और थोड़ी-थोड़ी देर में होने वाली होती है, जो आराम हल्की, कसरत या दिनचर्या में छोटे बदलाव से ठीक हो जाती है. वहीं सुबह घुटनों में जकड़न या पूरे दिन के बाद शरीर में भारीपन महसूस होना उम्र का सामान्य असर है. लेकिन अगर दर्द तेज हो लंबे समय तक बना रहे या समय के साथ बढ़ता जाए तो यह चिंता का विषय है. ऐसा दर्द नींद, भूख और  रोजाना की एक्टिविटी को प्रभावित करता है और आराम करने से भी ठीक नहीं होता है.

यह लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिले

एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर दर्द के साथ तेज या चुभने वाला दर्द, सूजन, बुखार, अचानक वजन कम होना, शून्यता या कमजोरी या फिर रात में नींद से जगाने वाला दर्द दिखाई दें तो तुरंत मेडिकल सलाह जरूरी होती है. एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि कई बुजुर्ग दर्द को उम्र का हिस्सा मानकर सहते रहते हैं, जिससे गठिया, नसों का दबना, हड्डियों में फ्रैक्चर या अंगों से जुड़ी बीमारियों की पहचान देर से होती है.

ये भी पढ़ें-आवाज में हो रहा बदलाव तो हल्के में न लें, इन डेंजरस बीमारियों का मिलता है सिग्नल

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