50 पर्यटन स्थल होंगे विकसित, होमस्टे और होटल कारोबार को रफ्तार, निर्मला सीतारमण ने टूरिज्म को लेकर किए बड़े ऐलान
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में छोटे और मझोले शहरों के विकास पर बड़ा फोकस किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि अगले पांच साल में टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर मंदिर और धार्मिक शहरों की शहरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि ये शहर देश की आर्थिक ताकत को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. छोटे शहर भी बनेंगे विकास के केंद्रबजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अब विकास सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा. टियर-2 और टियर-3 शहरों में बेहतर सड़क, पानी, सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी ताकि ये शहर भी रोजगार और निवेश के नए केंद्र बन सकें. सिटी इकोनॉमिक रीजन की पहचानसरकार शहरों को उनके विकास के आधार पर ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (CER) के रूप में चिन्हित करेगी. यह पहचान पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं या लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर की जाएगी. हर रीजन को 5,000 करोड़ रुपये की मददप्रस्ताव के तहत हर सिटी इकोनॉमिक रीजन को पांच साल में 5,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इस राशि से शहरों की आधारभूत सुविधाएं बेहतर की जाएंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. पर्यटन को रोजगार का बड़ा जरिया बतायावित्त मंत्री ने पर्यटन को रोजगार आधारित विकास का मजबूत स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि पर्यटन सिर्फ कमाई का साधन नहीं है, बल्कि इससे युवाओं, स्थानीय लोगों और छोटे कारोबारियों को सीधे रोजगार मिलता है. युवाओं के लिए विशेष स्किल ट्रेनिंगबजट में युवाओं के लिए पर्यटन से जुड़े खास स्किल प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की गई है. इसमें होटल सेवा, टूर गाइड, ट्रैवल मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं पर जोर होगा.ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के तहत आसान लोन दिए जाएंगे. इससे लोगों को स्वरोजगार के नए मौके मिलेंगे. 50 बड़े पर्यटन स्थलों का विकाससरकार राज्यों के साथ मिलकर देशभर में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास करेगी. इन जगहों पर बेहतर कनेक्टिविटी, होटल और जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. होटलों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा ताकि निवेश बढ़े. धार्मिक और बौद्ध स्थलों पर खास ध्यानबजट में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के साथ-साथ भगवान बुद्ध से जुड़े स्थानों के विकास पर भी जोर दिया गया है. इससे देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा. मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावानिजी क्षेत्र की मदद से मेडिकल टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को भी बढ़ाया जाएगा. इसके लिए बेहतर सुविधाएं और आसान वीजा नियम लागू किए जाएंगे. ज्ञान भारतम मिशन के तहत एक करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों को सुरक्षित और डिजिटल किया जाएगा. इसके लिए शिक्षण संस्थानों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ मिलकर काम किया जाएगा. साथ ही भारतीय ज्ञान प्रणाली का एक राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह भी बनाया जाएगा. देश को मिलेंगे 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरदेश में रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना बनाई गई है. इसके तहत मुंबई-पुणे के बीच सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान होगा. पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर महाराष्ट्र और तेलंगाना को सीधे जोड़ेगा, जबकि हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु दक्षिण भारत के बड़े शहरों और आईटी हब्स के बीच तेज कनेक्शन देंगे. इसके अलावा चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड लिंक तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच आवागमन को सरल बनाएगा. उत्तर भारत में दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर राजधानी को पवित्र शहर वाराणसी से जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. वहीं वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मजबूत रेल कनेक्टिविटी साबित होगा.
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में छोटे और मझोले शहरों के विकास पर बड़ा फोकस किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि अगले पांच साल में टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर मंदिर और धार्मिक शहरों की शहरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि ये शहर देश की आर्थिक ताकत को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
छोटे शहर भी बनेंगे विकास के केंद्र
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अब विकास सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा. टियर-2 और टियर-3 शहरों में बेहतर सड़क, पानी, सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी ताकि ये शहर भी रोजगार और निवेश के नए केंद्र बन सकें.
सिटी इकोनॉमिक रीजन की पहचान
सरकार शहरों को उनके विकास के आधार पर ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (CER) के रूप में चिन्हित करेगी. यह पहचान पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं या लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर की जाएगी.
हर रीजन को 5,000 करोड़ रुपये की मदद
प्रस्ताव के तहत हर सिटी इकोनॉमिक रीजन को पांच साल में 5,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इस राशि से शहरों की आधारभूत सुविधाएं बेहतर की जाएंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
पर्यटन को रोजगार का बड़ा जरिया बताया
वित्त मंत्री ने पर्यटन को रोजगार आधारित विकास का मजबूत स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि पर्यटन सिर्फ कमाई का साधन नहीं है, बल्कि इससे युवाओं, स्थानीय लोगों और छोटे कारोबारियों को सीधे रोजगार मिलता है.
युवाओं के लिए विशेष स्किल ट्रेनिंग
बजट में युवाओं के लिए पर्यटन से जुड़े खास स्किल प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की गई है. इसमें होटल सेवा, टूर गाइड, ट्रैवल मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं पर जोर होगा.ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के तहत आसान लोन दिए जाएंगे. इससे लोगों को स्वरोजगार के नए मौके मिलेंगे.
50 बड़े पर्यटन स्थलों का विकास
सरकार राज्यों के साथ मिलकर देशभर में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास करेगी. इन जगहों पर बेहतर कनेक्टिविटी, होटल और जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. होटलों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा ताकि निवेश बढ़े.
धार्मिक और बौद्ध स्थलों पर खास ध्यान
बजट में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के साथ-साथ भगवान बुद्ध से जुड़े स्थानों के विकास पर भी जोर दिया गया है. इससे देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा.
मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा
निजी क्षेत्र की मदद से मेडिकल टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को भी बढ़ाया जाएगा. इसके लिए बेहतर सुविधाएं और आसान वीजा नियम लागू किए जाएंगे. ज्ञान भारतम मिशन के तहत एक करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों को सुरक्षित और डिजिटल किया जाएगा. इसके लिए शिक्षण संस्थानों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ मिलकर काम किया जाएगा. साथ ही भारतीय ज्ञान प्रणाली का एक राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह भी बनाया जाएगा.
देश को मिलेंगे 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
देश में रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना बनाई गई है. इसके तहत मुंबई-पुणे के बीच सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान होगा. पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर महाराष्ट्र और तेलंगाना को सीधे जोड़ेगा, जबकि हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु दक्षिण भारत के बड़े शहरों और आईटी हब्स के बीच तेज कनेक्शन देंगे.
इसके अलावा चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड लिंक तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच आवागमन को सरल बनाएगा. उत्तर भारत में दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर राजधानी को पवित्र शहर वाराणसी से जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. वहीं वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मजबूत रेल कनेक्टिविटी साबित होगा.
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