40 हस्की कुत्तों को बेसहारा सड़क पर छोड़ गया अज्ञात शख्स, हैदराबाद में चौंकाने वाली खबर
इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना तेलंगाना के शंकरपल्ली-पटानचेरु मार्ग पर सामने आई है, जहां करीब 40 हस्की नस्ल के कुत्तों को बेरहमी से सड़क किनारे छोड़ दिया गया. 28 अप्रैल 2026 को सामने आई इस घटना ने पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों को गहरे सदमे में डाल दिया है. जानकारी के मुताबिक, सुबह एक व्यक्ति ने पशु बचाव संगठनों को फोन कर इन कुत्तों की बेहद खराब हालत के बारे में सूचना दी. कॉल करने वाले ने बताया कि कुछ अज्ञात लोग ट्रक में भरकर इन कुत्तों को एक सुनसान इलाके में छोड़कर फरार हो गए. भीषण गर्मी में ठंडे मौसम में रहने वाले हस्की कुत्तों की हालत बेहद दयनीय थी. आसरा फाउंडेशन और स्वान ने तुरंत किया रेस्क्यू ऑपरेशन सूचना मिलते ही आसरा फाउंडेशन और स्वान (SWAN) एनजीओ की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. लेकिन जब तक टीम वहां पहुंची, हालात और भी खराब हो चुके थे. कुछ कुत्तों को राहगीर अपने साथ ले गए, कुछ ठंडे माहौल की तलाश में पास के जंगलों की ओर भाग गए, जबकि एक कुत्ते की मौके पर ही मौत हो गई. केवल छह कुत्तों को सुरक्षित बचाया जा सका, जिन्हें एनजीओ के आश्रय में ले जाकर इलाज और देखभाल की जा रही है. बाकी कुत्तों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है, जिससे उनकी जिंदगी को लेकर चिंता और बढ़ गई है. इस मामले में कुत्तों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था स्वान के संस्थापक हर्ष किशोर भटनागर ने एबीपी न्यूज से बातचीत में चौंकाने वाली आशंका जताई. उन्होंने कहा कि संभव है इन कुत्तों को किसी मेडिकल प्रयोगशाला में प्रयोग के लिए लाया गया हो और प्रयोग के बाद उन्हें इस तरह छोड़ दिया गया हो. उनका कहना था कि अगर कोई इन्हें पालने के लिए लाता, तो एक या दो कुत्ते रखता, न कि 40 कुत्तों को एक साथ. हस्की कुत्ते की देखभाल बेहद ही चुनौतीपूर्ण होती है हस्की कुत्ते अपनी खूबसूरत नीली या बहुरंगी आंखों, घने फर और भेड़िये जैसी शक्ल के लिए जाने जाते हैं. इनकी उत्पत्ति साइबेरिया (रूस) से मानी जाती है और ये ठंडे इलाकों जैसे अमेरिका, कनाडा और यूरोप में अधिक पाए जाते हैं. इन्हें स्लेज खींचने जैसे कठिन कार्यों के लिए पाला जाता था, जबकि आजकल लोग इन्हें उनकी आकर्षक बनावट और वफादार स्वभाव के कारण पालते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गर्म देशों में इनकी देखभाल बेहद चुनौतीपूर्ण होती है. पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों की तलाश जारी है. यह भी पढ़ें: Assam Exit Poll 2026: असम में फिर खिल सकता है 'कमल', जानें NDA को कितनी सीटें मिल सकती हैं?
इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना तेलंगाना के शंकरपल्ली-पटानचेरु मार्ग पर सामने आई है, जहां करीब 40 हस्की नस्ल के कुत्तों को बेरहमी से सड़क किनारे छोड़ दिया गया. 28 अप्रैल 2026 को सामने आई इस घटना ने पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों को गहरे सदमे में डाल दिया है.
जानकारी के मुताबिक, सुबह एक व्यक्ति ने पशु बचाव संगठनों को फोन कर इन कुत्तों की बेहद खराब हालत के बारे में सूचना दी. कॉल करने वाले ने बताया कि कुछ अज्ञात लोग ट्रक में भरकर इन कुत्तों को एक सुनसान इलाके में छोड़कर फरार हो गए. भीषण गर्मी में ठंडे मौसम में रहने वाले हस्की कुत्तों की हालत बेहद दयनीय थी.
आसरा फाउंडेशन और स्वान ने तुरंत किया रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही आसरा फाउंडेशन और स्वान (SWAN) एनजीओ की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. लेकिन जब तक टीम वहां पहुंची, हालात और भी खराब हो चुके थे. कुछ कुत्तों को राहगीर अपने साथ ले गए, कुछ ठंडे माहौल की तलाश में पास के जंगलों की ओर भाग गए, जबकि एक कुत्ते की मौके पर ही मौत हो गई.
केवल छह कुत्तों को सुरक्षित बचाया जा सका, जिन्हें एनजीओ के आश्रय में ले जाकर इलाज और देखभाल की जा रही है. बाकी कुत्तों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है, जिससे उनकी जिंदगी को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
इस मामले में कुत्तों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था स्वान के संस्थापक हर्ष किशोर भटनागर ने एबीपी न्यूज से बातचीत में चौंकाने वाली आशंका जताई. उन्होंने कहा कि संभव है इन कुत्तों को किसी मेडिकल प्रयोगशाला में प्रयोग के लिए लाया गया हो और प्रयोग के बाद उन्हें इस तरह छोड़ दिया गया हो. उनका कहना था कि अगर कोई इन्हें पालने के लिए लाता, तो एक या दो कुत्ते रखता, न कि 40 कुत्तों को एक साथ.
हस्की कुत्ते की देखभाल बेहद ही चुनौतीपूर्ण होती है
हस्की कुत्ते अपनी खूबसूरत नीली या बहुरंगी आंखों, घने फर और भेड़िये जैसी शक्ल के लिए जाने जाते हैं. इनकी उत्पत्ति साइबेरिया (रूस) से मानी जाती है और ये ठंडे इलाकों जैसे अमेरिका, कनाडा और यूरोप में अधिक पाए जाते हैं. इन्हें स्लेज खींचने जैसे कठिन कार्यों के लिए पाला जाता था, जबकि आजकल लोग इन्हें उनकी आकर्षक बनावट और वफादार स्वभाव के कारण पालते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गर्म देशों में इनकी देखभाल बेहद चुनौतीपूर्ण होती है.
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों की तलाश जारी है.
यह भी पढ़ें: Assam Exit Poll 2026: असम में फिर खिल सकता है 'कमल', जानें NDA को कितनी सीटें मिल सकती हैं?
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