378 दिन बाद आज आसमान में सबसे बड़ा और चमकीला दिखेगा शनि, नंगी आंखों से भी कर सकेंगे दीदार
गोरखपुर: खगोल प्रेमियों और विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए आज यानी 4 अक्टूबर 2026 की रात बेहद खास होने जा रही है. 378 दिनों के अंतराल के बाद शनि ग्रह (Saturn) पृथ्वी के सबसे निकट और अपनी अधिकतम चमक में दिखाई देगा. सूर्यास्त के बाद से लेकर अगली सुबह सूर्योदय तक इस रोमांचक नजारे का दीदार किया जा सकेगा. वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 4 अक्टूबर 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे शनि ग्रह अपनी विपरीत स्थिति (Opposition) में पहुंच रहा है. यह वर्ष 2026 का सबसे चमकीला और स्पष्ट दृश्य होगा. क्या होती है शनि की 'विपरीत स्थिति' (Opposition)? विपरीत स्थिति वह खगोलीय घटना है जब सूर्य की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी सीधे सूर्य और किसी बाहरी ग्रह (जैसे शनि, बृहस्पति या मंगल) के बीच आ जाती है. इस स्थिति में शनि, सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में होता है. जैसे ही सूर्य अस्त होता है, यह ग्रह उदित होता है और सूर्योदय के समय पश्चिम में अस्त होता है. शनि की विपरीत स्थिति लगभग हर 378 दिनों (54 सप्ताह) में आती है. पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 1 वर्ष लगता है, जबकि शनि को 29.4 वर्ष लगते हैं. हर साल पृथ्वी को शनि से आगे निकलने के लिए अपनी कक्षा में कुछ अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे यह घटना हर वर्ष करीब दो सप्ताह देरी से आती है. दिशा, दूरी और चमक के आंकड़े दिशा व तारामंडल: शनि ग्रह सीट्स (Cetus) तारामंडल में दिखेगा. यह पूर्वी क्षितिज से हल्का सा उत्तर दिशा की तरफ से ऊपर आएगा. पृथ्वी से दूरी: इस दौरान शनि पृथ्वी से लगभग 1.26 बिलियन किलोमीटर (784 मिलियन मील या 8.43 AU) दूर होगा. चमक (Magnitude): इसकी चमक +0.32 मैग्नीट्यूड होगी, जो इसे प्रमुख चमकीले तारों के समकक्ष बनाती है. डिस्क का आकार: दूरबीन से देखने पर शनि 19.7 आर्कसेकंड व्यास का दिखाई देगा. मार्च 2025 में इसके छल्ले पृथ्वी के सापेक्ष किनारे पर (Edge-on) आने से लगभग अदृश्य हो गए थे, लेकिन अब वे फिर से खुलने लगे हैं. वर्तमान में इसके वलय -7.5 डिग्री दक्षिण की ओर झुके हैं, जिसे छोटी दूरबीन से आसानी से देखा जा सकता है. 4 से 7 अक्टूबर: रात के आकाश में सजेगी ग्रहों की महफिल खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 4 से 7 अक्टूबर तक आकाश में अन्य ग्रह और तारे भी दिखाई देंगे: चंद्रमा और तारे: रात लगभग 12:30 बजे कर्क तारामंडल में चंद्रमा (-9.57 मैग्नीट्यूड) उदित होगा, जिसके ठीक ऊपर कैस्टर और पोलैक्स तारे दिखेंगे. मंगल ग्रह: रात 12:50 बजे पूर्व-उत्तर में मंगल ग्रह (+1.10 मैग्नीट्यूड) चंद्रमा के नीचे दिखेगा. बृहस्पति ग्रह: रात 2:05 बजे बृहस्पति (-1.74 मैग्नीट्यूड) सिंह तारामंडल में निकलेगा. रेगुलस तारा: रात 2:50 बजे सिंह राशि का चमकीला तारा रेगुलस (+1.40 मैग्नीट्यूड) उगेगा. विशेष युति: 7 अक्टूबर को रात 2:40 बजे के बाद चंद्रमा और रेगुलस तारे की शानदार युति (Conjunction) दिखाई देगी. कैसे देखें? शनि इतना चमकीला होता है कि इसे देखने के लिए किसी दूरबीन की आवश्यकता नहीं है; इसे सामान्य आंखों से भी देखा जा सकता है. हालांकि, इसके खूबसूरत छल्लों (Rings) और अंडाकार डिस्क को देखने के लिए किसी सामान्य तिपाई (Tripod) पर लगी दूरबीन का उपयोग करना सबसे उपयुक्त रहेगा. अक्टूबर में शनिश्चरी अमावस्या का संयोग, पितरों के साथ शनि देव की कृपा पाने के लिए क्या करें Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
गोरखपुर: खगोल प्रेमियों और विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए आज यानी 4 अक्टूबर 2026 की रात बेहद खास होने जा रही है. 378 दिनों के अंतराल के बाद शनि ग्रह (Saturn) पृथ्वी के सबसे निकट और अपनी अधिकतम चमक में दिखाई देगा. सूर्यास्त के बाद से लेकर अगली सुबह सूर्योदय तक इस रोमांचक नजारे का दीदार किया जा सकेगा.
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 4 अक्टूबर 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे शनि ग्रह अपनी विपरीत स्थिति (Opposition) में पहुंच रहा है. यह वर्ष 2026 का सबसे चमकीला और स्पष्ट दृश्य होगा.
क्या होती है शनि की 'विपरीत स्थिति' (Opposition)?
विपरीत स्थिति वह खगोलीय घटना है जब सूर्य की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी सीधे सूर्य और किसी बाहरी ग्रह (जैसे शनि, बृहस्पति या मंगल) के बीच आ जाती है. इस स्थिति में शनि, सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में होता है. जैसे ही सूर्य अस्त होता है, यह ग्रह उदित होता है और सूर्योदय के समय पश्चिम में अस्त होता है.
शनि की विपरीत स्थिति लगभग हर 378 दिनों (54 सप्ताह) में आती है. पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 1 वर्ष लगता है, जबकि शनि को 29.4 वर्ष लगते हैं. हर साल पृथ्वी को शनि से आगे निकलने के लिए अपनी कक्षा में कुछ अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे यह घटना हर वर्ष करीब दो सप्ताह देरी से आती है.
दिशा, दूरी और चमक के आंकड़े
दिशा व तारामंडल: शनि ग्रह सीट्स (Cetus) तारामंडल में दिखेगा. यह पूर्वी क्षितिज से हल्का सा उत्तर दिशा की तरफ से ऊपर आएगा.
पृथ्वी से दूरी: इस दौरान शनि पृथ्वी से लगभग 1.26 बिलियन किलोमीटर (784 मिलियन मील या 8.43 AU) दूर होगा.
चमक (Magnitude): इसकी चमक +0.32 मैग्नीट्यूड होगी, जो इसे प्रमुख चमकीले तारों के समकक्ष बनाती है.
डिस्क का आकार: दूरबीन से देखने पर शनि 19.7 आर्कसेकंड व्यास का दिखाई देगा. मार्च 2025 में इसके छल्ले पृथ्वी के सापेक्ष किनारे पर (Edge-on) आने से लगभग अदृश्य हो गए थे, लेकिन अब वे फिर से खुलने लगे हैं. वर्तमान में इसके वलय -7.5 डिग्री दक्षिण की ओर झुके हैं, जिसे छोटी दूरबीन से आसानी से देखा जा सकता है.
4 से 7 अक्टूबर: रात के आकाश में सजेगी ग्रहों की महफिल
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 4 से 7 अक्टूबर तक आकाश में अन्य ग्रह और तारे भी दिखाई देंगे:
चंद्रमा और तारे: रात लगभग 12:30 बजे कर्क तारामंडल में चंद्रमा (-9.57 मैग्नीट्यूड) उदित होगा, जिसके ठीक ऊपर कैस्टर और पोलैक्स तारे दिखेंगे.
मंगल ग्रह: रात 12:50 बजे पूर्व-उत्तर में मंगल ग्रह (+1.10 मैग्नीट्यूड) चंद्रमा के नीचे दिखेगा.
बृहस्पति ग्रह: रात 2:05 बजे बृहस्पति (-1.74 मैग्नीट्यूड) सिंह तारामंडल में निकलेगा.
रेगुलस तारा: रात 2:50 बजे सिंह राशि का चमकीला तारा रेगुलस (+1.40 मैग्नीट्यूड) उगेगा.
विशेष युति: 7 अक्टूबर को रात 2:40 बजे के बाद चंद्रमा और रेगुलस तारे की शानदार युति (Conjunction) दिखाई देगी.
कैसे देखें?
शनि इतना चमकीला होता है कि इसे देखने के लिए किसी दूरबीन की आवश्यकता नहीं है; इसे सामान्य आंखों से भी देखा जा सकता है. हालांकि, इसके खूबसूरत छल्लों (Rings) और अंडाकार डिस्क को देखने के लिए किसी सामान्य तिपाई (Tripod) पर लगी दूरबीन का उपयोग करना सबसे उपयुक्त रहेगा.
अक्टूबर में शनिश्चरी अमावस्या का संयोग, पितरों के साथ शनि देव की कृपा पाने के लिए क्या करें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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