3500 रुपये महीना कमाने वाले पर लगा 1.46 करोड़ टैक्स, ITAT ने कैसे दी राहत?

अगर आप केवल महीने का 4000 या 5000 रुपये कमाते हैं, लेकिन सोचिए एक दिन अचानक आपके नाम का करोड़ों रुपये का टैक्स निकल आए तो जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में कोई भी परेशान हो जाएगा. ऐसा ही कुछ मामला मुंबई से सामने आया है. एक व्यक्ति जो महीने के केवल 3500 रुपये कमाता था, हैरानी की बात ये है कि उस पर इनकम टैक्स विभाग ने 1.46 करोड़ का टैक्स असेसमेंट कर दिया. ऐसे में पहले जानते हैं कि आखिर मामला क्या है और व्यक्ति को आखिर में कैसे राहत मिली? बैंक अकाउंट में मिले करोड़ों रुपये दरअसल, इनकम टैक्स विभाग को एक बिजनेस में गड़बड़ी का शक हुआ. जब जांच की गई तो जांच में एक फर्म से जुड़े बैंक अकाउंट में 1.27 करोड़ के पैसे निकलने की जानकारी मिली. इतना ही नहीं, बल्कि 18.25 लाख जमा होने की भी सूचना मिली.  शख्स ने क्या बोला? जरूरी बात ये है कि इस मामले में शख्स का कहना था कि उसका इन लेन-देन से कोई संबंध ही नहीं है. शख्स ने कहा कि वह एक ऑफिस बॉय के तौर पर काम करता है और उसे हर महीने 3500 रुपये वेतन मिलता है.  आगे क्या हुआ? बता दें कि ये मामला ट्रिब्यूनल पहुंचा. इस मामले पर शख्स का आरोप था कि नौकरी के दौरान ही उसके साइन और केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल बिना उनकी जानकारी के किया गया है. शख्स ने कहा कि उसका संबंधित पैन और बैंक अकाउंट के लेने-देन से कोई मतलब नहीं है.  इनकम टैक्स विभाग ने क्या किया? बड़ी बात ये है कि इनकम टैक्स विभाग ने इस फर्म को शख्स का बिजनेस माना. फिर विभाग ने 1.27 करोड़ के खर्च और 18.85 लाख की जमा राशि को हिसाब सही नहीं माना. इस तरह उसके नाम पर कुल 1,46,57,500 का टैक्स असेसमेंट किया गया. दरवाजे पर चिपकाया नोटिस आगे इनकम टैक्स विभाग ने शख्स को नोटिस भेजा था. इस नोटिस को पहले बांद्रा के एड्रेस पर भेजा गया था, लेकिन नोटिस नहीं पहुंचा. जिसके बाद भिवंडी के किसी अपार्टमेंट में एक बंद कमरे के दरवाजे पर नोटिस को चिपकाया गया. बड़ी बात ये है कि विभाग ये साबित ही नहीं कर पाया कि उस एड्रेस से शख्स का कोई कनेक्शन था. रद्द क्यों हुआ असेसमेंट? अहम बात ये है कि ITAT मुंबई ने अपने फैसले में कुछ जरूरी बात कहीं. उन्होंने कहा कि केवल नोटिस जारी करना काफी नहीं होता है. उस नोटिस को संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है. विभाग ये साबित ही नहीं कर पाया कि नोटिस शख्स को सही से दिया गया. यही कारण है कि ट्रिब्यूनल ने करोड़ों का टैक्स असेसमेंट रद्द कर दिया. लेकिन ट्रिब्यूनल ने ये फैसला नहीं दिया कि जो लेन-देन किया गया था वो फेक था या फिर बैंक और पैन का उपयोग गलत किया गया था.  इनकम टैक्स नोटिस आने पर क्या करें? अगर कभी आपको इनकम टैक्स विभाग की तरफ से कोई नोटिस भेजा जाता है तो उसे नजरअंदाज करने की गलती न करें. सबसे पहले तो आप उस नोटिस को पढ़े और उसमें दी गई जानकारी और जवाब देने की आखिरी तारीख देखें. अगर उसमें किसी ऐसे बैंक ट्रांजैक्शन के बारे में है, जिसके बारे में आपको कुछ जानकारी नहीं है तो आप अपने बैंक स्टेटमेंट और दूसरे जरूरी दस्तावेज की जांच करें. अब अगर आपको ये लग रहा है कि किसी ने आपके पैन या दस्तावेज का गलत उपयोग किया है, जिसकी जानकारी आपको नहीं है तो सबसे पहले इससे जुड़े सबूत इकठ्ठा करें. वहीं ध्यान रखें कि इनकम टैक्स विभाग को समय पर जवाब देना न भूलें. वहीं जरूरत पड़ने पर किसी टैक्स एक्सपर्ट की सहायता लें.  त्योहारी सीजन में होगी धनवर्षा, 7 लाख करोड़ के पार पहुंचेगा देश का कारोबार

Oct 17, 2026 - 04:30
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3500 रुपये महीना कमाने वाले पर लगा 1.46 करोड़ टैक्स, ITAT ने कैसे दी राहत?

अगर आप केवल महीने का 4000 या 5000 रुपये कमाते हैं, लेकिन सोचिए एक दिन अचानक आपके नाम का करोड़ों रुपये का टैक्स निकल आए तो जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में कोई भी परेशान हो जाएगा. ऐसा ही कुछ मामला मुंबई से सामने आया है. एक व्यक्ति जो महीने के केवल 3500 रुपये कमाता था, हैरानी की बात ये है कि उस पर इनकम टैक्स विभाग ने 1.46 करोड़ का टैक्स असेसमेंट कर दिया. ऐसे में पहले जानते हैं कि आखिर मामला क्या है और व्यक्ति को आखिर में कैसे राहत मिली?

बैंक अकाउंट में मिले करोड़ों रुपये

दरअसल, इनकम टैक्स विभाग को एक बिजनेस में गड़बड़ी का शक हुआ. जब जांच की गई तो जांच में एक फर्म से जुड़े बैंक अकाउंट में 1.27 करोड़ के पैसे निकलने की जानकारी मिली. इतना ही नहीं, बल्कि 18.25 लाख जमा होने की भी सूचना मिली. 

शख्स ने क्या बोला?

जरूरी बात ये है कि इस मामले में शख्स का कहना था कि उसका इन लेन-देन से कोई संबंध ही नहीं है. शख्स ने कहा कि वह एक ऑफिस बॉय के तौर पर काम करता है और उसे हर महीने 3500 रुपये वेतन मिलता है. 

आगे क्या हुआ?

बता दें कि ये मामला ट्रिब्यूनल पहुंचा. इस मामले पर शख्स का आरोप था कि नौकरी के दौरान ही उसके साइन और केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल बिना उनकी जानकारी के किया गया है. शख्स ने कहा कि उसका संबंधित पैन और बैंक अकाउंट के लेने-देन से कोई मतलब नहीं है. 

इनकम टैक्स विभाग ने क्या किया?

बड़ी बात ये है कि इनकम टैक्स विभाग ने इस फर्म को शख्स का बिजनेस माना. फिर विभाग ने 1.27 करोड़ के खर्च और 18.85 लाख की जमा राशि को हिसाब सही नहीं माना. इस तरह उसके नाम पर कुल 1,46,57,500 का टैक्स असेसमेंट किया गया.

दरवाजे पर चिपकाया नोटिस

आगे इनकम टैक्स विभाग ने शख्स को नोटिस भेजा था. इस नोटिस को पहले बांद्रा के एड्रेस पर भेजा गया था, लेकिन नोटिस नहीं पहुंचा. जिसके बाद भिवंडी के किसी अपार्टमेंट में एक बंद कमरे के दरवाजे पर नोटिस को चिपकाया गया. बड़ी बात ये है कि विभाग ये साबित ही नहीं कर पाया कि उस एड्रेस से शख्स का कोई कनेक्शन था.

रद्द क्यों हुआ असेसमेंट?

अहम बात ये है कि ITAT मुंबई ने अपने फैसले में कुछ जरूरी बात कहीं. उन्होंने कहा कि केवल नोटिस जारी करना काफी नहीं होता है. उस नोटिस को संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है. विभाग ये साबित ही नहीं कर पाया कि नोटिस शख्स को सही से दिया गया. यही कारण है कि ट्रिब्यूनल ने करोड़ों का टैक्स असेसमेंट रद्द कर दिया. लेकिन ट्रिब्यूनल ने ये फैसला नहीं दिया कि जो लेन-देन किया गया था वो फेक था या फिर बैंक और पैन का उपयोग गलत किया गया था. 

इनकम टैक्स नोटिस आने पर क्या करें?

अगर कभी आपको इनकम टैक्स विभाग की तरफ से कोई नोटिस भेजा जाता है तो उसे नजरअंदाज करने की गलती न करें. सबसे पहले तो आप उस नोटिस को पढ़े और उसमें दी गई जानकारी और जवाब देने की आखिरी तारीख देखें. अगर उसमें किसी ऐसे बैंक ट्रांजैक्शन के बारे में है, जिसके बारे में आपको कुछ जानकारी नहीं है तो आप अपने बैंक स्टेटमेंट और दूसरे जरूरी दस्तावेज की जांच करें.

अब अगर आपको ये लग रहा है कि किसी ने आपके पैन या दस्तावेज का गलत उपयोग किया है, जिसकी जानकारी आपको नहीं है तो सबसे पहले इससे जुड़े सबूत इकठ्ठा करें. वहीं ध्यान रखें कि इनकम टैक्स विभाग को समय पर जवाब देना न भूलें. वहीं जरूरत पड़ने पर किसी टैक्स एक्सपर्ट की सहायता लें. 

त्योहारी सीजन में होगी धनवर्षा, 7 लाख करोड़ के पार पहुंचेगा देश का कारोबार

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