30 महीने का इंतजार और टूटा सब्र, किराया न मिलने पर मकान मालिक ने MPDO दफ्तर पर जड़ा ताला

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले के पेड्डा वंगरा मंडल में मंगलवार को एक ऐसी ही अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली, जब मंडल परिषद विकास अधिकारी (MPDO) कार्यालय के मुख्य गेट पर मकान मालिक ने ताला लटका दिया. वजह बेहद जायज लेकिन प्रशासनिक रूप से शर्मनाक थी. पिछले 30 महीनों से कार्यालय का किराया नहीं चुकाया गया था. मंगलवार सुबह जब अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने के बजाय तपती धूप में बाहर खड़ा होना पड़ा. दोपहर तक दफ्तर के बाहर जनता की भीड़ लगी रही और सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप रहा. मंडल के गठन के बाद से किराए पर चल रहे कार्यालय पेड्डा वंगरा मंडल के गठन के बाद से ही सरकारी कार्यालय किराए के भवनों में चल रहे हैं. प्रभावित मकान मालिक ने अपना भवन सरकारी दफ्तर के लिए इस उम्मीद में दिया था कि सरकारी पैसा समय पर आएगा. लेकिन हकीकत इसके उलट निकली. मकान मालिक का आरोप है कि पिछले ढाई साल (30 महीने) से प्रशासन ने उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं दी है. कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाने और मिन्नतें करने के बाद भी जब उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिले, तो मजबूर होकर उन्होंने विरोध का यह रास्ता चुना. कृपया मेरा बकाया किराया दिलवा दीजिए: मकान मालिक ने लगाई गुहार मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया के सामने मकान मालिक का दर्द साफ छलक रहा था. उन्होंने हाथ जोड़कर अधिकारियों से गुहार लगाई, 'कृपया मेरा बकाया किराया दिलवा दीजिए. मैंने लंबे समय तक इंतजार किया, लेकिन अब घर चलाना मुश्किल हो रहा है.'  दफ्तर पर ताला लगने के कारण कामकाज के सिलसिले में दूर-दराज के गांवों से आए ग्रामीण घंटों बाहर बैठे रहे. कुछ लोग जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए आए थे, तो कुछ कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के लिए, लेकिन ताला बंद होने से सबको निराशा हाथ लगी. यह घटना केवल एक किराए के विवाद की नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर सरकारी तंत्र किस कदर फंड की कमी या फाइलों की देरी से जूझ रहा है. एक तरफ सरकार 'सुशासन' का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ तहसील और मंडल स्तर के कार्यालयों का किराया न चुका पाना व्यवस्था की साख पर बट्टा लगाता है.

Jan 14, 2026 - 03:30
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30 महीने का इंतजार और टूटा सब्र, किराया न मिलने पर मकान मालिक ने MPDO दफ्तर पर जड़ा ताला

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले के पेड्डा वंगरा मंडल में मंगलवार को एक ऐसी ही अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली, जब मंडल परिषद विकास अधिकारी (MPDO) कार्यालय के मुख्य गेट पर मकान मालिक ने ताला लटका दिया. वजह बेहद जायज लेकिन प्रशासनिक रूप से शर्मनाक थी. पिछले 30 महीनों से कार्यालय का किराया नहीं चुकाया गया था. मंगलवार सुबह जब अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने के बजाय तपती धूप में बाहर खड़ा होना पड़ा. दोपहर तक दफ्तर के बाहर जनता की भीड़ लगी रही और सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप रहा.

मंडल के गठन के बाद से किराए पर चल रहे कार्यालय

पेड्डा वंगरा मंडल के गठन के बाद से ही सरकारी कार्यालय किराए के भवनों में चल रहे हैं. प्रभावित मकान मालिक ने अपना भवन सरकारी दफ्तर के लिए इस उम्मीद में दिया था कि सरकारी पैसा समय पर आएगा. लेकिन हकीकत इसके उलट निकली. मकान मालिक का आरोप है कि पिछले ढाई साल (30 महीने) से प्रशासन ने उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं दी है. कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाने और मिन्नतें करने के बाद भी जब उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिले, तो मजबूर होकर उन्होंने विरोध का यह रास्ता चुना.

कृपया मेरा बकाया किराया दिलवा दीजिए: मकान मालिक ने लगाई गुहार

मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया के सामने मकान मालिक का दर्द साफ छलक रहा था. उन्होंने हाथ जोड़कर अधिकारियों से गुहार लगाई, 'कृपया मेरा बकाया किराया दिलवा दीजिए. मैंने लंबे समय तक इंतजार किया, लेकिन अब घर चलाना मुश्किल हो रहा है.' 

दफ्तर पर ताला लगने के कारण कामकाज के सिलसिले में दूर-दराज के गांवों से आए ग्रामीण घंटों बाहर बैठे रहे. कुछ लोग जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए आए थे, तो कुछ कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के लिए, लेकिन ताला बंद होने से सबको निराशा हाथ लगी. यह घटना केवल एक किराए के विवाद की नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर सरकारी तंत्र किस कदर फंड की कमी या फाइलों की देरी से जूझ रहा है. एक तरफ सरकार 'सुशासन' का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ तहसील और मंडल स्तर के कार्यालयों का किराया न चुका पाना व्यवस्था की साख पर बट्टा लगाता है.

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