2000 करोड़ रुपये पर अटकी बात... ईरान के इस फैसले का लगा भारत को झटका, जानें क्या है मामला?
India Rice Export to Iran: भारत बड़े पैमाने पर चावल का निर्यात करता है. दुनियाभर के 165 देशों में भारत से चावल एक्सपोर्ट किए जाते हैं. इनमें से बांग्लादेश, नेपाल, कैमरून, पापुआ न्यू गिनी, आइवरी कोस्ट, अफ्रीकी देश बेनिन भारत से नॉन-बासमती चरवल खरीदते हैं. वहीं, इराक, ईरान और सऊदी अरब भारत से प्रीमियम बासमती चावल खरीदते हैं. इस बीच, भारत को ईरान में प्रीमियम बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि ग्लोबल ट्रेड में 45 मिलियन टन चावलों का निर्यात होता है. इनमें से अकेले भारत की हिस्सेदारी 22 मिलियन टन है. इनमें बासमती और नॉन-बासमती चावल दोनों ही शामिल हैं. भारत के सामने आईं ये मुश्किलें इस बीच भारत को ईरान के लिए प्रीमियम बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि यहां की सरकार ने खाने-पीने के सामानों के आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी को वापस ले लिया है. इसके चलते भारतीय एक्सपोटर्स ने अपनी शिपमेंट रोक दी है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 2000 करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट फिलहाल इंटरनेशनल पोर्ट्स पर अटके हुए हैं, जिन्हें ईरान से क्लीयरेंस मिलने का इंतजार है. बताया जा रहा है कि ईरान की करेंसी रियाल के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद ईरानी सरकार ने खाने-पीने के सामानों के इंपोर्ट पर दी जाने वाली सब्सिडी एक्सचेंज रेट को बंद कर दिया है. सब्सिडी हटने से एक्सपोर्ट्स को नुकसान सब्सिडी हटने से एक्सपोटर्स को नुकसान होता है क्योंकि इससे उन्हें अपने उत्पादों पर करों और शुल्कों का पूरा भुगतान करना पड़ता है. इससे लागत बढ़ती है, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सामान और महंगा हो जाता है. सब्सिडी हटने से एक्सपोटर्स के मुनाफे पर सीधे असर पड़ता है और कई बार ये दूसरे देशों के निर्यातकों से पिछड़ भी जाते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान के इस फैसले से भारत के मुख्य बासमती उगाने वाले राज्य पंजाब और हरियाणा के प्रोड्यूसर्स और प्रोसेसर्स प्रभावित हुए हैं. क्यों ईरान की सरकार ने लिया यह फैसला? ईरान की सरकार ने यह फैसला लिया है कि अब सब्सिडी का पैसा सीधे देश के नागरिकों के अकाउंट्स में डाले जाएंगे ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से खाने-पीने का सामान खरीद सके. सरकार चाहती है कि सब्सिडी का लाभ लोगों तक सीधे पहुंचे. इसी सिलसिले में ईरान ने अपने हर नागरिकों को अगले 4 महीने तक 600-600 रुपये की सब्सिडी देने का ऐलान किया है. सरकार का ऐसा मानना है कि सब्सिडी वाले एक्सचेंज रेट पर अरबों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इसका फायदा देश की आम जनता को नहीं मिल पा रहा है, लोग बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं. आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि सब्सिडी वाले एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल कई सेक्टर्स आयात होने वाले सामानों की कीमत मनमानी तरीके से तय करने में कर रहे हैं. इससे कालाबाजारी बढ़ रही है. भारतीय एक्सपोटर्स के माथे पर शिकन पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट रंजीत सिंह जोसन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल में भारी गिरावट के कारण, जो रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, ईरानी सरकार ने खाने के सामान के इंपोर्ट पर कई सालों से दी जा रही सब्सिडी को जारी रखने से इनकार कर दिया है. इससे एक्सपोर्टर्स ट्रेड जारी रखने में हिचकिचा रहे हैं." ईरान के साथ ट्रेड पहले बार्टर सिस्टम (सामानों के एक्सचेंज के जरिए) के जरिए किया जाता था क्योंकि अमेरिका के लगाए प्रतिबंधों के कारण बैंकिंग चैनल सीमित हो गए थे. वह सिस्टम तब खत्म हो गया जब भारत ने ईरानी तेल का इंपोर्ट बंद कर दिया. जोसन ने कहा, "इसके बावजूद, ईरान भारत से चाय, बासमती चावल और दवाओं जैसे खाने के प्रोडक्ट्स का इंपोर्ट करता रहा, लेकिन अब ऐसा लगता है कि इन इंपोर्ट में भी कटौती की जा रही है." ये भी पढ़ें: एक दिन में सीधे 10000 रुपये कम हुई चांदी की कीमत, क्या अभी और गिरेगा भाव या होगा जोरदार कमबैक?
India Rice Export to Iran: भारत बड़े पैमाने पर चावल का निर्यात करता है. दुनियाभर के 165 देशों में भारत से चावल एक्सपोर्ट किए जाते हैं. इनमें से बांग्लादेश, नेपाल, कैमरून, पापुआ न्यू गिनी, आइवरी कोस्ट, अफ्रीकी देश बेनिन भारत से नॉन-बासमती चरवल खरीदते हैं.
वहीं, इराक, ईरान और सऊदी अरब भारत से प्रीमियम बासमती चावल खरीदते हैं. इस बीच, भारत को ईरान में प्रीमियम बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि ग्लोबल ट्रेड में 45 मिलियन टन चावलों का निर्यात होता है. इनमें से अकेले भारत की हिस्सेदारी 22 मिलियन टन है. इनमें बासमती और नॉन-बासमती चावल दोनों ही शामिल हैं.
भारत के सामने आईं ये मुश्किलें
इस बीच भारत को ईरान के लिए प्रीमियम बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि यहां की सरकार ने खाने-पीने के सामानों के आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी को वापस ले लिया है. इसके चलते भारतीय एक्सपोटर्स ने अपनी शिपमेंट रोक दी है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 2000 करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट फिलहाल इंटरनेशनल पोर्ट्स पर अटके हुए हैं, जिन्हें ईरान से क्लीयरेंस मिलने का इंतजार है. बताया जा रहा है कि ईरान की करेंसी रियाल के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद ईरानी सरकार ने खाने-पीने के सामानों के इंपोर्ट पर दी जाने वाली सब्सिडी एक्सचेंज रेट को बंद कर दिया है.
सब्सिडी हटने से एक्सपोर्ट्स को नुकसान
सब्सिडी हटने से एक्सपोटर्स को नुकसान होता है क्योंकि इससे उन्हें अपने उत्पादों पर करों और शुल्कों का पूरा भुगतान करना पड़ता है. इससे लागत बढ़ती है, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सामान और महंगा हो जाता है. सब्सिडी हटने से एक्सपोटर्स के मुनाफे पर सीधे असर पड़ता है और कई बार ये दूसरे देशों के निर्यातकों से पिछड़ भी जाते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान के इस फैसले से भारत के मुख्य बासमती उगाने वाले राज्य पंजाब और हरियाणा के प्रोड्यूसर्स और प्रोसेसर्स प्रभावित हुए हैं.
क्यों ईरान की सरकार ने लिया यह फैसला?
ईरान की सरकार ने यह फैसला लिया है कि अब सब्सिडी का पैसा सीधे देश के नागरिकों के अकाउंट्स में डाले जाएंगे ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से खाने-पीने का सामान खरीद सके. सरकार चाहती है कि सब्सिडी का लाभ लोगों तक सीधे पहुंचे. इसी सिलसिले में ईरान ने अपने हर नागरिकों को अगले 4 महीने तक 600-600 रुपये की सब्सिडी देने का ऐलान किया है.
सरकार का ऐसा मानना है कि सब्सिडी वाले एक्सचेंज रेट पर अरबों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इसका फायदा देश की आम जनता को नहीं मिल पा रहा है, लोग बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं. आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि सब्सिडी वाले एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल कई सेक्टर्स आयात होने वाले सामानों की कीमत मनमानी तरीके से तय करने में कर रहे हैं. इससे कालाबाजारी बढ़ रही है.
भारतीय एक्सपोटर्स के माथे पर शिकन
पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट रंजीत सिंह जोसन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल में भारी गिरावट के कारण, जो रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, ईरानी सरकार ने खाने के सामान के इंपोर्ट पर कई सालों से दी जा रही सब्सिडी को जारी रखने से इनकार कर दिया है. इससे एक्सपोर्टर्स ट्रेड जारी रखने में हिचकिचा रहे हैं."
ईरान के साथ ट्रेड पहले बार्टर सिस्टम (सामानों के एक्सचेंज के जरिए) के जरिए किया जाता था क्योंकि अमेरिका के लगाए प्रतिबंधों के कारण बैंकिंग चैनल सीमित हो गए थे. वह सिस्टम तब खत्म हो गया जब भारत ने ईरानी तेल का इंपोर्ट बंद कर दिया. जोसन ने कहा, "इसके बावजूद, ईरान भारत से चाय, बासमती चावल और दवाओं जैसे खाने के प्रोडक्ट्स का इंपोर्ट करता रहा, लेकिन अब ऐसा लगता है कि इन इंपोर्ट में भी कटौती की जा रही है."
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