10वीं में 54%, फिर JEE Advanced पास कर IIT Bombay पहुंचा युवक
जिंदगी में कई बार हमें लगता है कि एक बुरा रिजल्ट हमारा पूरा भविष्य तय कर देता है, लेकिन असल में यह सिर्फ एक पड़ाव होता है, मंजिल नहीं. कुछ ऐसी ही कहानी है जैनेंद्रजीत की, जिन्होंने दसवीं कक्षा में मिले कमजोर नंबरों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि बदलाव की शुरुआत बनाया. उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यही रिजल्ट आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा. आइए जानते हैं कैसे एक साधारण से लड़के ने हार को हिम्मत में बदला और देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज तक का सफर तय किया. शुरुआत एक छोटी सी हार से हुई यह कहानी है जैनेंद्रजीत की, जिन्होंने दसवीं कक्षा में सिर्फ 54% अंक हासिल किए थे. मैथ्स में तो उनके सिर्फ 41 नंबर आए थे और साइंस में 48. वृंदावन के जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई करने वाले जैनेंद्रजीत को खुद भी अपने रिजल्ट पर यकीन नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वेबसाइट खोलकर अपना स्कोर देखा, तो वह वहीं जम गए और उन्हें लगा कि यह उनका रिजल्ट हो ही नहीं सकता. उनकी परेशानी और बढ़ गई जब उन्होंने देखा कि उनके कई साथियों के 90% से ज्यादा नंबर आए थे. लेकिन तीन साल बाद यही लड़का JEE Advanced पास करके देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज IIT Bombay पहुंच गया. यह कहानी बताती है कि एक बुरा रिजल्ट किसी की पूरी जिंदगी तय नहीं करता. जैनेंद्रजीत के दसवीं के खराब नतीजों के पीछे एक बड़ी वजह उनकी सेहत भी थी. बोर्ड परीक्षाओं से पहले वह करीब 40 से 50 दिनों तक बेड रेस्ट पर थे, जिसकी वजह से वह ठीक से तैयारी नहीं कर पाए थे. रिजल्ट आने के बाद उन्हें लोगों की आलोचना और ताने भी झेलने पड़े, कई लोगों ने उनके कम नंबरों को लेकर मजाक भी बनाया. लेकिन जैनेंद्रजीत ने इस नतीजे को अपनी काबिलियत का सबूत नहीं माना. उन्होंने इसे एक संकेत की तरह लिया कि उन्हें अपनी पढ़ाई का तरीका बदलने की जरूरत है. यहीं से उनकी असली मेहनत की शुरुआत हुई और उन्होंने ठान लिया कि वह अपने आगे के सफर में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे. यह भी पढ़ेंः UPSSSC कनिष्ठ सहायक भर्ती रिजल्ट जारी, 50 अभ्यर्थियों का चयन पढ़ाई का तरीका बदला, नतीजा भी बदल गया दसवीं के बाद जैनेंद्रजीत ने सिर्फ पढ़ाई के घंटे नहीं बढ़ाए, बल्कि पढ़ने का तरीका ही पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने एक फिक्स टाइम-टेबल बनाया, सोशल मीडिया और बाकी चीजों से ध्यान हटाया और धीरे-धीरे रोजाना करीब 10 घंटे पढ़ाई करने लगे. क्लास में जाने से पहले वह उस टॉपिक से जुड़े एजुकेशनल वीडियो देख लेते थे, ताकि क्लास में समझने में आसानी हो. उन्होंने बड़े सिलेबस को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटा और हर दिन का टारगेट तय करके उसे पूरा करने की कोशिश की. पिछले सालों के पेपर हल करना भी उनकी तैयारी का अहम हिस्सा बन गया. इसी मेहनत का नतीजा रहा कि JEE Main 2023 में उन्हें 99.98 पर्सेंटाइल मिला और JEE Advanced में उन्होंने AIR 349 हासिल की. यह भी पढ़ेंः BPSC LDC भर्ती परीक्षा रद्द, टंकण टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी निरस्त
जिंदगी में कई बार हमें लगता है कि एक बुरा रिजल्ट हमारा पूरा भविष्य तय कर देता है, लेकिन असल में यह सिर्फ एक पड़ाव होता है, मंजिल नहीं. कुछ ऐसी ही कहानी है जैनेंद्रजीत की, जिन्होंने दसवीं कक्षा में मिले कमजोर नंबरों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि बदलाव की शुरुआत बनाया. उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यही रिजल्ट आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा. आइए जानते हैं कैसे एक साधारण से लड़के ने हार को हिम्मत में बदला और देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज तक का सफर तय किया.
शुरुआत एक छोटी सी हार से हुई
यह कहानी है जैनेंद्रजीत की, जिन्होंने दसवीं कक्षा में सिर्फ 54% अंक हासिल किए थे. मैथ्स में तो उनके सिर्फ 41 नंबर आए थे और साइंस में 48. वृंदावन के जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई करने वाले जैनेंद्रजीत को खुद भी अपने रिजल्ट पर यकीन नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वेबसाइट खोलकर अपना स्कोर देखा, तो वह वहीं जम गए और उन्हें लगा कि यह उनका रिजल्ट हो ही नहीं सकता. उनकी परेशानी और बढ़ गई जब उन्होंने देखा कि उनके कई साथियों के 90% से ज्यादा नंबर आए थे. लेकिन तीन साल बाद यही लड़का JEE Advanced पास करके देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज IIT Bombay पहुंच गया. यह कहानी बताती है कि एक बुरा रिजल्ट किसी की पूरी जिंदगी तय नहीं करता.
जैनेंद्रजीत के दसवीं के खराब नतीजों के पीछे एक बड़ी वजह उनकी सेहत भी थी. बोर्ड परीक्षाओं से पहले वह करीब 40 से 50 दिनों तक बेड रेस्ट पर थे, जिसकी वजह से वह ठीक से तैयारी नहीं कर पाए थे. रिजल्ट आने के बाद उन्हें लोगों की आलोचना और ताने भी झेलने पड़े, कई लोगों ने उनके कम नंबरों को लेकर मजाक भी बनाया. लेकिन जैनेंद्रजीत ने इस नतीजे को अपनी काबिलियत का सबूत नहीं माना. उन्होंने इसे एक संकेत की तरह लिया कि उन्हें अपनी पढ़ाई का तरीका बदलने की जरूरत है. यहीं से उनकी असली मेहनत की शुरुआत हुई और उन्होंने ठान लिया कि वह अपने आगे के सफर में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे.
यह भी पढ़ेंः UPSSSC कनिष्ठ सहायक भर्ती रिजल्ट जारी, 50 अभ्यर्थियों का चयन
पढ़ाई का तरीका बदला, नतीजा भी बदल गया
दसवीं के बाद जैनेंद्रजीत ने सिर्फ पढ़ाई के घंटे नहीं बढ़ाए, बल्कि पढ़ने का तरीका ही पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने एक फिक्स टाइम-टेबल बनाया, सोशल मीडिया और बाकी चीजों से ध्यान हटाया और धीरे-धीरे रोजाना करीब 10 घंटे पढ़ाई करने लगे. क्लास में जाने से पहले वह उस टॉपिक से जुड़े एजुकेशनल वीडियो देख लेते थे, ताकि क्लास में समझने में आसानी हो. उन्होंने बड़े सिलेबस को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटा और हर दिन का टारगेट तय करके उसे पूरा करने की कोशिश की. पिछले सालों के पेपर हल करना भी उनकी तैयारी का अहम हिस्सा बन गया. इसी मेहनत का नतीजा रहा कि JEE Main 2023 में उन्हें 99.98 पर्सेंटाइल मिला और JEE Advanced में उन्होंने AIR 349 हासिल की.
यह भी पढ़ेंः BPSC LDC भर्ती परीक्षा रद्द, टंकण टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी निरस्त
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