हिमाचल में छात्रा की मौत मामले में NCW ने लिया स्वतः संज्ञान, DGP को लिखी चिट्ठी, 7 दिन में मांगी स्टेटस रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 19 साल की छात्रा के साथ कथित रैगिंग, मानसिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न के बाद मौत के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने शनिवार (3 जनवरी, 2026) को स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए इसे छात्रा के जीवन, गरिमा और अधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है. इसके अलावा शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा तंत्र की विफलता पर भी सवाल उठाया है और हिमाचल प्रदेश के डीजीपी को पत्र लिखकर मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. NCW ने मामले को लेकर दिए सख्त निर्देश राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मामले में बयान जारी कर कहा कि आयोग ने धर्मशाला स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में रैगिंग, शारीरिक उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें 19 वर्षीय छात्रा की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई. आयोग इस जघन्य, अमानवीय और निंदनीय कृत्य की कड़ी भर्त्सना करता है, जो छात्रा के जीवन, गरिमा और अधिकारों का घोर उल्लंघन है और शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करता है. हिमाचल प्रदेश के डीजीपी को लिखा पत्र महिला आयोग ने कहा कि माननीय अध्यक्ष ने हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर तत्काल प्राथमिकी पंजीकरण, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, पोस्टमार्टम और चिकित्सीय अभिलेखों के संरक्षण और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, यौन उत्पीड़न निरोधक कानूनों और रैगिंग निषेध नियमों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. वहीं, महिला आयोग ने दोषी/लापरवाह संकाय सदस्यों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, कॉलेज में एंटी-रैगिंग तंत्र की समीक्षा और परिसर सुरक्षा, जागरूकता और परामर्श व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी निर्देश दिए हैं. साथ ही अगले पांच दिनों के भीतर विस्तृत कार्यवाही आख्या (ATR) आयोग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस? धर्मशाला पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 115(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें यौन उत्पीड़न, स्वेच्छा से चोट पहुंचाना और समान आशय जैसी धाराएं शामिल हैं. इसके साथ, हिमाचल प्रदेश एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन (रैगिंग निषेध) एक्ट, 2009 की धारा 3 भी लगाई गई है. इस केस में चार छात्राओं और एक कॉलेज प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है. यह भी पढ़ेंः कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ आंदोलन की कार्ययोजना का किया ऐलान, संसद से पंचायत तक होगा संग्राम
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 19 साल की छात्रा के साथ कथित रैगिंग, मानसिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न के बाद मौत के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने शनिवार (3 जनवरी, 2026) को स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए इसे छात्रा के जीवन, गरिमा और अधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है. इसके अलावा शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा तंत्र की विफलता पर भी सवाल उठाया है और हिमाचल प्रदेश के डीजीपी को पत्र लिखकर मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
NCW ने मामले को लेकर दिए सख्त निर्देश
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मामले में बयान जारी कर कहा कि आयोग ने धर्मशाला स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में रैगिंग, शारीरिक उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें 19 वर्षीय छात्रा की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई. आयोग इस जघन्य, अमानवीय और निंदनीय कृत्य की कड़ी भर्त्सना करता है, जो छात्रा के जीवन, गरिमा और अधिकारों का घोर उल्लंघन है और शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करता है.
हिमाचल प्रदेश के डीजीपी को लिखा पत्र
महिला आयोग ने कहा कि माननीय अध्यक्ष ने हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर तत्काल प्राथमिकी पंजीकरण, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, पोस्टमार्टम और चिकित्सीय अभिलेखों के संरक्षण और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, यौन उत्पीड़न निरोधक कानूनों और रैगिंग निषेध नियमों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
वहीं, महिला आयोग ने दोषी/लापरवाह संकाय सदस्यों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, कॉलेज में एंटी-रैगिंग तंत्र की समीक्षा और परिसर सुरक्षा, जागरूकता और परामर्श व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी निर्देश दिए हैं. साथ ही अगले पांच दिनों के भीतर विस्तृत कार्यवाही आख्या (ATR) आयोग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस?
धर्मशाला पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 115(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें यौन उत्पीड़न, स्वेच्छा से चोट पहुंचाना और समान आशय जैसी धाराएं शामिल हैं. इसके साथ, हिमाचल प्रदेश एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन (रैगिंग निषेध) एक्ट, 2009 की धारा 3 भी लगाई गई है. इस केस में चार छात्राओं और एक कॉलेज प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है.
यह भी पढ़ेंः कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ आंदोलन की कार्ययोजना का किया ऐलान, संसद से पंचायत तक होगा संग्राम
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