सोहराबुद्दीन केस: अमित शाह को राहत बरकरार, बरी हुए 22 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने CBI और आरोपियों से जवाब मांगा है. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया है कि वह गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को आरोप-मुक्त करने के मामले को दोबारा नहीं खोलेगा. अमित शाह को 2014 में ही इस केस से डिस्चार्ज कर दिया गया था. 30 दिसंबर 2014 को मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में अमित शाह को आरोप-मुक्त करार दिया था. स्पेशल CBI जज एम.बी. गोसावी ने कहा था कि रिकॉर्ड को देखने पर अमित शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता. इसके बाद 2018 में मुकदमे पर ट्रायल कोर्ट का अंतिम फैसला आया. इसमें 22 आरोपियों को बरी किया गया. इस साल मई में बॉम्बे हाई कोर्ट के ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. जो 22 आरोपी बरी हुए हैं, उनमें से 21 गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के पुलिसकर्मी हैं. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन ने याचिका दायर की है. इसी याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने नोटिस जारी किया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में बड़ी संख्या में गवाहों के अपने बयान से मुकरने पर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान कुल 210 गवाहों में से 92 गवाह अपने पहले के बयानों से पलट गए थे. ऐसे में यह अहम सवाल है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हुई या नहीं. इसी पहलू की समीक्षा की जाएगी. सोहराबुद्दीन शेख के खिलाफ गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हत्या, अपहरण, जबरन वसूली और हथियारों से जुड़े कई आपराधिक मामले दर्ज थे. 26 नवंबर 2005 को उसकी मौत गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस एनकाउंटर में हुई थी. इसके बाद उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत का मामला भी सामने आया. उसके परिवार ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया था.

Sep 29, 2026 - 11:30
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सोहराबुद्दीन केस: अमित शाह को राहत बरकरार, बरी हुए 22 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने CBI और आरोपियों से जवाब मांगा है. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया है कि वह गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को आरोप-मुक्त करने के मामले को दोबारा नहीं खोलेगा. अमित शाह को 2014 में ही इस केस से डिस्चार्ज कर दिया गया था.

30 दिसंबर 2014 को मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में अमित शाह को आरोप-मुक्त करार दिया था. स्पेशल CBI जज एम.बी. गोसावी ने कहा था कि रिकॉर्ड को देखने पर अमित शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता. इसके बाद 2018 में मुकदमे पर ट्रायल कोर्ट का अंतिम फैसला आया. इसमें 22 आरोपियों को बरी किया गया.

इस साल मई में बॉम्बे हाई कोर्ट के ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. जो 22 आरोपी बरी हुए हैं, उनमें से 21 गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के पुलिसकर्मी हैं. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन ने याचिका दायर की है. इसी याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने नोटिस जारी किया है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में बड़ी संख्या में गवाहों के अपने बयान से मुकरने पर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान कुल 210 गवाहों में से 92 गवाह अपने पहले के बयानों से पलट गए थे. ऐसे में यह अहम सवाल है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हुई या नहीं. इसी पहलू की समीक्षा की जाएगी.

सोहराबुद्दीन शेख के खिलाफ गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हत्या, अपहरण, जबरन वसूली और हथियारों से जुड़े कई आपराधिक मामले दर्ज थे. 26 नवंबर 2005 को उसकी मौत गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस एनकाउंटर में हुई थी. इसके बाद उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत का मामला भी सामने आया. उसके परिवार ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया था.

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