सिमसा माता मंदिर निःसंतान महिलाओं की आस्था का केंद्र, जहां देवी खुद देती हैं संतान का संकेत!

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित Simsa Mata Temple अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं और गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के बीच जाना जाता है, जो संतान सुख की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं. दरअसल नवरात्रि उत्सव के दौरान मंदिर में सालिंद्रा उत्सव मनाया जाता है, जिसका मतलब है कि, स्वप्न दर्शन. इस दौरान नि:संतान महिलाएं अक्सर मंदिर में विश्राम करते समय देवी के सपने देखने की बात बताती हैं. महिलाएं यहां न केवल रात में बल्कि दिन में भी सोती हुई पाई जा सकती हैं.  सपने में अलग-अलग चीजों से मिलता संतान का संकेत सच्ची आस्था के साथ मंदिर जाने वाली महिलाएं देवी से आशीर्वाद प्राप्त करने का दावा करती हैं. चाहे वह मानव स्वरूप में हों या प्रतीकों के रूप में. इसके साथ ही वे अक्सर फलो या धातुओं के सपने देखती हैं, जिन्हें शगुन माना जाता है. सपनों में दिखाई देने वाली अलग-अलग चीजों के अलग मायने होते हैं.  उदाहरण के लिए फलो का स्वप्न देखना भी किसी अच्छी खबर का संकेत है. खास तौर पर सपने में अमरूद देखना एक लड़के के जन्म का संकेत देता है, जबकि भिंडी का सपना देखना एक लड़की के जन्म का संकेत है. इसके विपरीत धातु या लकड़ी के सपने देखना अशुभ माना जाता है.  ऐसा भी कहा जाता है कि, यदि कोई महिला लकड़ी, पत्थर या धातु से जुड़ा सपना देखती हैं, तो इसका मतलब वह कभी मां नहीं बनेगी. यदि ऐसी शंकाएं आने के बाद भी कोई महिला मंदिर में रहती है, तो उसके शरीर पर लाल निशान देखने को मिल सकते हैं, जो उसे मंदिर छोड़ने के लिए बाध्य कर सकते हैं. Cursed Temple: भारत से जापान तक रहस्यमय मंदिरों के श्राप! जानें शापित स्थलों की अनकही कहानियां? मंदिर से जुड़ी संपूर्ण जानकारी सिमसा माता मंदिर, जिन्हें स्थानीय लोग संतान दात्री मंदिर के नाम से भी पुकारते हैं. यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लडभड़ोल तहसील के सिमस गांव में स्थित एक प्रसिद्ध सिद्ध पीठ है, जहां निसंतान महिलाएं संतान सुख के लिए आते हैं.  यह मंदिर जोगिंद्रनगर से करीब 50 किमी और बैजनाथ से करीब 25 से 30 किमी की दूरी पर स्थित है. मंदिर के पास एक चमत्कारी शीला भी मौजूद है. कहा जाता है कि, इस शीला को पूरी ताकत लगाकर दोनों हाथों से हिलाने पर भी यह टस से मस नहीं होती है, लेकिन छोटी उंगली से हिलाने पर ये हिलने लगती है. मां के इस चमत्कार के आगे विज्ञान भी हैरान है. निःसंतान औरतें संतान प्राप्ति के लिए मंदिर में दूर-दूर से आती है.  दिल्ली से सिमसा माता मंदिर कैसे जाएं? बस से कैसे करें यात्रा?अगर आप भी हिमाचल प्रदेश स्थित सिमसा माता मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो दिल्ली ISBT से बस पकड़ें, जो बैजनाथ, कांगड़ा और मंडी के लिए जाती हो. इन तीनों जगहों में से कहीं भी उतरकर टैक्सी या लोकल जीप ले, जो आपको मंदिर तक आसानी से पहुंचा देगी. इस पूरी यात्रा में 10 से 12 घंटे का समय लग सकता है.  ट्रेने से कैसे करें यात्रा?वहीं ट्रेन से यात्रा करने के लिए दिल्ली से पठानकोट, कांगड़ा या बैजनाथ के लिए ट्रेन लें. इसके बाद वहां से टैक्सी या लोकल बस के जरिए सिमसा माता मंदिर पहुंच सकते हैं.  फ्लाइट के जरिए कैसे करें यात्रा?वहीं फ्लाइट से जाने के लिए दिल्ली से कांगड़ा स्थित गग्गल एयरपोर्ट पहुंचे. इसके बाद टैक्सी या कैब के जरिए आसानी से सिमसा माता मंदिर पहुंच सकते हैं.  नरेंद्रनगर राजमहल की खास परंपरा: तिल से बनता पवित्र गाडू घड़ा तेल, जिससे होता है बदरी विशाल का श्रृंगार! Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Apr 10, 2026 - 09:30
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सिमसा माता मंदिर निःसंतान महिलाओं की आस्था का केंद्र, जहां देवी खुद देती हैं संतान का संकेत!

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित Simsa Mata Temple अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं और गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के बीच जाना जाता है, जो संतान सुख की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं.

दरअसल नवरात्रि उत्सव के दौरान मंदिर में सालिंद्रा उत्सव मनाया जाता है, जिसका मतलब है कि, स्वप्न दर्शन. इस दौरान नि:संतान महिलाएं अक्सर मंदिर में विश्राम करते समय देवी के सपने देखने की बात बताती हैं. महिलाएं यहां न केवल रात में बल्कि दिन में भी सोती हुई पाई जा सकती हैं. 

सपने में अलग-अलग चीजों से मिलता संतान का संकेत

सच्ची आस्था के साथ मंदिर जाने वाली महिलाएं देवी से आशीर्वाद प्राप्त करने का दावा करती हैं. चाहे वह मानव स्वरूप में हों या प्रतीकों के रूप में. इसके साथ ही वे अक्सर फलो या धातुओं के सपने देखती हैं, जिन्हें शगुन माना जाता है. सपनों में दिखाई देने वाली अलग-अलग चीजों के अलग मायने होते हैं. 

उदाहरण के लिए फलो का स्वप्न देखना भी किसी अच्छी खबर का संकेत है. खास तौर पर सपने में अमरूद देखना एक लड़के के जन्म का संकेत देता है, जबकि भिंडी का सपना देखना एक लड़की के जन्म का संकेत है. इसके विपरीत धातु या लकड़ी के सपने देखना अशुभ माना जाता है. 

ऐसा भी कहा जाता है कि, यदि कोई महिला लकड़ी, पत्थर या धातु से जुड़ा सपना देखती हैं, तो इसका मतलब वह कभी मां नहीं बनेगी. यदि ऐसी शंकाएं आने के बाद भी कोई महिला मंदिर में रहती है, तो उसके शरीर पर लाल निशान देखने को मिल सकते हैं, जो उसे मंदिर छोड़ने के लिए बाध्य कर सकते हैं.

Cursed Temple: भारत से जापान तक रहस्यमय मंदिरों के श्राप! जानें शापित स्थलों की अनकही कहानियां?

मंदिर से जुड़ी संपूर्ण जानकारी

सिमसा माता मंदिर, जिन्हें स्थानीय लोग संतान दात्री मंदिर के नाम से भी पुकारते हैं. यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लडभड़ोल तहसील के सिमस गांव में स्थित एक प्रसिद्ध सिद्ध पीठ है, जहां निसंतान महिलाएं संतान सुख के लिए आते हैं. 

यह मंदिर जोगिंद्रनगर से करीब 50 किमी और बैजनाथ से करीब 25 से 30 किमी की दूरी पर स्थित है.

मंदिर के पास एक चमत्कारी शीला भी मौजूद है. कहा जाता है कि, इस शीला को पूरी ताकत लगाकर दोनों हाथों से हिलाने पर भी यह टस से मस नहीं होती है, लेकिन छोटी उंगली से हिलाने पर ये हिलने लगती है. मां के इस चमत्कार के आगे विज्ञान भी हैरान है. निःसंतान औरतें संतान प्राप्ति के लिए मंदिर में दूर-दूर से आती है. 

दिल्ली से सिमसा माता मंदिर कैसे जाएं?

बस से कैसे करें यात्रा?
अगर आप भी हिमाचल प्रदेश स्थित सिमसा माता मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो दिल्ली ISBT से बस पकड़ें, जो बैजनाथ, कांगड़ा और मंडी के लिए जाती हो.

इन तीनों जगहों में से कहीं भी उतरकर टैक्सी या लोकल जीप ले, जो आपको मंदिर तक आसानी से पहुंचा देगी. इस पूरी यात्रा में 10 से 12 घंटे का समय लग सकता है. 

ट्रेने से कैसे करें यात्रा?
वहीं ट्रेन से यात्रा करने के लिए दिल्ली से पठानकोट, कांगड़ा या बैजनाथ के लिए ट्रेन लें. इसके बाद वहां से टैक्सी या लोकल बस के जरिए सिमसा माता मंदिर पहुंच सकते हैं. 

फ्लाइट के जरिए कैसे करें यात्रा?
वहीं फ्लाइट से जाने के लिए दिल्ली से कांगड़ा स्थित गग्गल एयरपोर्ट पहुंचे. इसके बाद टैक्सी या कैब के जरिए आसानी से सिमसा माता मंदिर पहुंच सकते हैं. 

नरेंद्रनगर राजमहल की खास परंपरा: तिल से बनता पवित्र गाडू घड़ा तेल, जिससे होता है बदरी विशाल का श्रृंगार!

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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