सितंबर में 7.9% बढ़ी भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ, उद्योगों के बेहतर प्रदर्शन ने बढ़ाई विकास दर

भारत की आर्थिक विकास दर ने इस साल तेजी दिखाई है. इस वित्त वर्ष में भारत ने अच्छी खासी ग्रोथ की है. इसके लिए देश का कोर सेक्टर भी बराबरी से भागीदार है. तो वहीं वृद्धि दर रुकी नहीं है बल्कि तेजी से आगे भी बढ़ रही है. इसी कड़ी में भारत के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर सेक्टर) की विकास दर में सितंबर के महीने में भी इजाफा देखा गया है. इस महीने में ये विकास दर बढ़कर 7.9% हो गई है. अगस्त में ये दर 5.9% थी, सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, कोयला उत्पादन में सुधार और बिजली, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों और लौह अयस्क के बेहतर प्रदर्शन से विकास दर में तेजी आई. 2024 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ी विकास दरये आंकड़ा अप्रैल 2024 के बाद का सबसे अधिक वृद्धि वाला आंकड़ा है. इन आठ प्रमुख उद्योगों का देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में करीब 40% योगदान है. इसलिए इनकी ग्रोथ से देश की औद्योगिक गतिविधियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है. किन क्षेत्रों में हुई कितनी बढ़ोतरी? उद्योग क्षेत्र सितंबर विकास दर अगस्त विकास दर बिजली उत्पादन 11.4% 13.1% पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन 10.3% 5.6% कोयला उत्पादन 10.7% 3.8% लौह अयस्क 18.4% 5.5% सीमेंट 9.8% 11.7% स्टील 4.9% 3.5% इन उद्योगों के प्रदर्शन में आई गिरावटऐसा नहीं है कि कोर सेक्टर में आने वाले हर एक उद्योग ने अच्छा ही प्रदर्शन किया है. कई ऐसे उद्योग भी हैं जिनका प्रदर्शन खासा कमजोर नजर आया. यहां देखें उन उद्योगों की लिस्ट: कच्चे तेल के उत्पादन में 1.4% की गिरावट आई, अगस्त में ये गिरावट 3.6% थी. प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.6% घटा, जबकि अगस्त में 4.9% की गिरावट दर्ज की गई थी. खाद (फर्टिलाइजर) के उत्पादन में 11.7% की गिरावट आई, अगस्त में ये 12.4% घटा था. कोर सेक्टर की ग्रोथ है जरूरीबता दें कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर तक, आठ प्रमुख उद्योगों का कुल उत्पादन 5.1% बढ़ा. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ये वृद्धि केवल 2.5% थी. कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं. ये उद्योग बिजली उत्पादन, निर्माण, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इनकी विकास दर के बढ़ने से देश की आर्थिक विकास दर पर भी असर दिखाई देता है. ये भी पढ़ें: सोने में बड़ी गिरावट से खरीदारों की मौज, एक महीने में 5% लुढके दाम

Oct 22, 2026 - 00:30
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सितंबर में 7.9% बढ़ी भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ, उद्योगों के बेहतर प्रदर्शन ने बढ़ाई विकास दर

भारत की आर्थिक विकास दर ने इस साल तेजी दिखाई है. इस वित्त वर्ष में भारत ने अच्छी खासी ग्रोथ की है. इसके लिए देश का कोर सेक्टर भी बराबरी से भागीदार है. तो वहीं वृद्धि दर रुकी नहीं है बल्कि तेजी से आगे भी बढ़ रही है. इसी कड़ी में भारत के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर सेक्टर) की विकास दर में सितंबर के महीने में भी इजाफा देखा गया है. इस महीने में ये विकास दर बढ़कर 7.9% हो गई है.

अगस्त में ये दर 5.9% थी, सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, कोयला उत्पादन में सुधार और बिजली, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों और लौह अयस्क के बेहतर प्रदर्शन से विकास दर में तेजी आई.

2024 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ी विकास दर
ये आंकड़ा अप्रैल 2024 के बाद का सबसे अधिक वृद्धि वाला आंकड़ा है. इन आठ प्रमुख उद्योगों का देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में करीब 40% योगदान है. इसलिए इनकी ग्रोथ से देश की औद्योगिक गतिविधियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है.

किन क्षेत्रों में हुई कितनी बढ़ोतरी?

उद्योग क्षेत्र सितंबर विकास दर अगस्त विकास दर
बिजली उत्पादन 11.4% 13.1%
पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन 10.3% 5.6%
कोयला उत्पादन 10.7% 3.8%
लौह अयस्क 18.4% 5.5%
सीमेंट 9.8% 11.7%
स्टील 4.9% 3.5%

इन उद्योगों के प्रदर्शन में आई गिरावट
ऐसा नहीं है कि कोर सेक्टर में आने वाले हर एक उद्योग ने अच्छा ही प्रदर्शन किया है. कई ऐसे उद्योग भी हैं जिनका प्रदर्शन खासा कमजोर नजर आया. यहां देखें उन उद्योगों की लिस्ट:

  • कच्चे तेल के उत्पादन में 1.4% की गिरावट आई, अगस्त में ये गिरावट 3.6% थी.
  • प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.6% घटा, जबकि अगस्त में 4.9% की गिरावट दर्ज की गई थी.
  • खाद (फर्टिलाइजर) के उत्पादन में 11.7% की गिरावट आई, अगस्त में ये 12.4% घटा था.

कोर सेक्टर की ग्रोथ है जरूरी
बता दें कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर तक, आठ प्रमुख उद्योगों का कुल उत्पादन 5.1% बढ़ा. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ये वृद्धि केवल 2.5% थी. कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं. ये उद्योग बिजली उत्पादन, निर्माण, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इनकी विकास दर के बढ़ने से देश की आर्थिक विकास दर पर भी असर दिखाई देता है.

ये भी पढ़ें: सोने में बड़ी गिरावट से खरीदारों की मौज, एक महीने में 5% लुढके दाम

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