सामने कोई बेहोश हो जाए तो कैसे बचाएं जान? डॉक्टर ने बताए 5 जरूरी नियम

आपातकालीन स्थिति के दौरान किसी व्यक्ति के अचानक अचेत होकर जमीन पर गिरने की स्थिति में बिना पैनिक हुए तुरंत उठाया गया कदम उसकी जिंदगी सुरक्षित कर सकता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक कभी भी किसी व्यक्ति को अचानक गिरते देखकर घबराने के बजाय उसे प्राथमिक उपचार देना सबसे आवश्यक होता है. अचानक दिल की धड़कन रुकने या बेहोश होने की स्थिति में मरीज के पास मौजूद हर एक सेकंड बेहद कीमती माना जाता है. इसके लिए किसी भी तरह की मेडिकल डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि सही समय पर ही गई सामान्य मदद भी पीड़ित व्यक्ति के बचने की संभावना को दो से तीन गुना तक बढ़ा देती है.  स्थिति को देखते ही तुरंत करें ये काम यदि आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक अचेत होकर गिर जाता है, तो सबसे पहले बिना समय गंवाए उसकी शारीरिक स्थिति की गंभीरता को जांचना चाहिेए, आपको तुरंत यह देखना होगा कि सामने वाला व्यक्ति आपकी आवाज या स्पर्श का कोई जवाब दे रहा है या नहीं, और उसकी सांसें सामान्य रूप से चल रही हैं या केवल हांफ रहा है. स्थिति गंभीर लगते ही तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करना चाहिए. इसके साथ ही यदि उस परिसर में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर की सुविधा उपलब्ध हो, तो उसे तुरंत मंगवाने की कोशिश करें, ताकि मरीज को जल्द से जल्द मेडिकल सपोर्ट मिल सके.  हैंड्स-ओनली सीपीआर देने की सही और सटीक तकनीक अस्पताल या डॉक्टरों की मदद पहुंचने से पहले मरीज को हैंड्स-ओनली सीपीआर देना सबसे बड़ा जीवन रक्षक कदम साबित होता है. इसके तहत बिना मुंह से सांस दिए सिर्फ छाती को दबाकर मरीज के शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रखा जाता है. इसके लिए मरीज के सीने के बिल्कुल बीचोबीच दोनों हाथों को एक के ऊपर एक रखकर 100 से 120 प्रति मिनट की रफ्तार से तेजी और मजबूती से दबाना शुरू करना होता है. यह प्रक्रिया तब तक लगातार जारी रखनी चाहिए, जब तक कि मेडिकल टीम वहां न पहुंच जाए.  यह भी पढ़ें: सिर्फ धूप दिखाने से नहीं जाएगी तकिए की गंदगी, साफ करने के लिए करें ये काम प्राथमिक उपचार के दौरान भूलकर भी न करें यह गलतियां आपातकालीन सहायता देते समय अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे मरीज की स्थिति सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ जाती है. सबसे पहली बात यह ध्यान रखनी चाहिए कि बेहोश व्यक्ति को कभी भी जबरन उठाने या सीधे बैठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसे हमेशा पीठ के बल बिल्कुल सीधा ही लेटा रहने देना चाहिए. इसके अलावा एक और बड़ी गलती जो अक्सर देखी जाती है, वह है बेहोश या हांफते हुए मरीज के मुंह में पानी, भोजन या कोई दवा डालना. अचेत अवस्था में मरीज के मुंह में कुछ भी डालने से वह उसकी सांस नली में बुरी तरह फंस सकता है, जो वेहद जानलेवा साबित हो सकता है.  पारंपरिक और आधुनिक प्राथमिक उपचार में आया यह अंतर आपातकालीन सुरक्षा गाइडलाइंस के मुताबिक आम नागरिकों के लिए प्राथमिक उपचार के नियमों को अब पहले से कहीं अधिक सरल और प्रभावी बना दिया गया है. पुराने तरीकों में मुंह से सांस देने को बेहद जरूरी माना जाता था, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के अनुसार आम लोगों के लिए सिर्फ हाथों से छाती दबाना यानी हैंड्स-ओनली सीपीआर ही सबसे सुरक्षित तरीका है. समय पर दी गई यह बुनियादी सहायता ही मरीज को अस्पताल पहुंचने तक सुरक्षित रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है.  यह भी पढ़ें: सावधान! भारत में हर साल 1.9 लाख लोग इस बड़ी वजह से हो रहे कैंसर के शिकार

Oct 5, 2026 - 17:30
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सामने कोई बेहोश हो जाए तो कैसे बचाएं जान? डॉक्टर ने बताए 5 जरूरी नियम

आपातकालीन स्थिति के दौरान किसी व्यक्ति के अचानक अचेत होकर जमीन पर गिरने की स्थिति में बिना पैनिक हुए तुरंत उठाया गया कदम उसकी जिंदगी सुरक्षित कर सकता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक कभी भी किसी व्यक्ति को अचानक गिरते देखकर घबराने के बजाय उसे प्राथमिक उपचार देना सबसे आवश्यक होता है. अचानक दिल की धड़कन रुकने या बेहोश होने की स्थिति में मरीज के पास मौजूद हर एक सेकंड बेहद कीमती माना जाता है. इसके लिए किसी भी तरह की मेडिकल डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि सही समय पर ही गई सामान्य मदद भी पीड़ित व्यक्ति के बचने की संभावना को दो से तीन गुना तक बढ़ा देती है. 

स्थिति को देखते ही तुरंत करें ये काम

यदि आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक अचेत होकर गिर जाता है, तो सबसे पहले बिना समय गंवाए उसकी शारीरिक स्थिति की गंभीरता को जांचना चाहिेए, आपको तुरंत यह देखना होगा कि सामने वाला व्यक्ति आपकी आवाज या स्पर्श का कोई जवाब दे रहा है या नहीं, और उसकी सांसें सामान्य रूप से चल रही हैं या केवल हांफ रहा है.

स्थिति गंभीर लगते ही तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करना चाहिए. इसके साथ ही यदि उस परिसर में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर की सुविधा उपलब्ध हो, तो उसे तुरंत मंगवाने की कोशिश करें, ताकि मरीज को जल्द से जल्द मेडिकल सपोर्ट मिल सके. 

हैंड्स-ओनली सीपीआर देने की सही और सटीक तकनीक

अस्पताल या डॉक्टरों की मदद पहुंचने से पहले मरीज को हैंड्स-ओनली सीपीआर देना सबसे बड़ा जीवन रक्षक कदम साबित होता है. इसके तहत बिना मुंह से सांस दिए सिर्फ छाती को दबाकर मरीज के शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रखा जाता है.

इसके लिए मरीज के सीने के बिल्कुल बीचोबीच दोनों हाथों को एक के ऊपर एक रखकर 100 से 120 प्रति मिनट की रफ्तार से तेजी और मजबूती से दबाना शुरू करना होता है. यह प्रक्रिया तब तक लगातार जारी रखनी चाहिए, जब तक कि मेडिकल टीम वहां न पहुंच जाए. 

यह भी पढ़ें: सिर्फ धूप दिखाने से नहीं जाएगी तकिए की गंदगी, साफ करने के लिए करें ये काम

प्राथमिक उपचार के दौरान भूलकर भी न करें यह गलतियां

आपातकालीन सहायता देते समय अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे मरीज की स्थिति सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ जाती है. सबसे पहली बात यह ध्यान रखनी चाहिए कि बेहोश व्यक्ति को कभी भी जबरन उठाने या सीधे बैठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसे हमेशा पीठ के बल बिल्कुल सीधा ही लेटा रहने देना चाहिए.

इसके अलावा एक और बड़ी गलती जो अक्सर देखी जाती है, वह है बेहोश या हांफते हुए मरीज के मुंह में पानी, भोजन या कोई दवा डालना. अचेत अवस्था में मरीज के मुंह में कुछ भी डालने से वह उसकी सांस नली में बुरी तरह फंस सकता है, जो वेहद जानलेवा साबित हो सकता है. 

पारंपरिक और आधुनिक प्राथमिक उपचार में आया यह अंतर

आपातकालीन सुरक्षा गाइडलाइंस के मुताबिक आम नागरिकों के लिए प्राथमिक उपचार के नियमों को अब पहले से कहीं अधिक सरल और प्रभावी बना दिया गया है. पुराने तरीकों में मुंह से सांस देने को बेहद जरूरी माना जाता था, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के अनुसार आम लोगों के लिए सिर्फ हाथों से छाती दबाना यानी हैंड्स-ओनली सीपीआर ही सबसे सुरक्षित तरीका है. समय पर दी गई यह बुनियादी सहायता ही मरीज को अस्पताल पहुंचने तक सुरक्षित रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है. 

यह भी पढ़ें: सावधान! भारत में हर साल 1.9 लाख लोग इस बड़ी वजह से हो रहे कैंसर के शिकार

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