यूक्रेन से लड़ाई में जबरन रूसी सेना में भर्ती किए गए 139 लोगों को भारत वापस लाया गया, 49 की युद्ध मे हुई मौत: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई. भारतीयों को जबरन रूसी सेना में शामिल किए जाने की शिकायत करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि उसके प्रयासों से 139 लोग वापस आए हैं. केंद्र ने याचिकाकर्ताओं पर मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. कोर्ट ने कहा कि वहां अभी भी फंसे लोगों की सहायता और मारे गए लोगों के लिए मुआवजे पर विचार किया जाए. क्या है मामला? 26 लोगों ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके परिवार के सदस्य टूरिस्ट, स्टूडेंट या दूसरे वैध वीजा पर रूस गए थे. नौकरी के लिए भर्ती करने वाले एजेंटों ने उन्हें अच्छे रोजगार का वादा किया था. लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर जबरन रूसी सेना में शामिल करवा दिया. कुछ समय तक वह लोग परिवार के संपर्क में रहे, पर अब उनका पता नहीं चल रहा है. 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था. केंद्र ने क्या बताया? शुक्रवार, 22 मई को केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को जानकारी दी गई कि लगभग 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए थे. इनमें से 49 की जान जा चुकी है और छह के लापता होने की पुष्टि हुई है. रूस में भारतीय दूतावास के प्रयासों से 139 लोगों को उनके सैन्य कॉन्ट्रैक्ट से मुक्त किया गया. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने यह भी बताया कि जिन 26 लोगों के लिए याचिका दाखिल हुई है, उनमें से 14 की मौत हो चुकी है. 11 के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, जबकि 1 रूस में एक आपराधिक केस के चलते जेल में बंद है. याचिकाकर्ता पक्ष की आपत्ति याचिकाकर्ताओं के लिए पेश वकील ने मृत भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर वापस लाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि कुछ शव बेहद क्षत-विक्षत स्थिति में मिले हैं. इसके चलते उनके परिवारों को भारी मानसिक आघात से गुजरना पड़ा. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भाटी ने इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सनसनी पैदा की जा रही है. यह एक जटिल मानवीय और कूटनीतिक परिस्थिति है. कोर्ट ने क्या कहा? केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि विदेश मंत्रालय प्रभावित परिवारों की मदद के लिए लगातार कूटनीतिक और मानवीय स्तर पर प्रयास कर रहा है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को मुआवजा या दूसरे कानूनी लाभ देने पर कानून के दायरे में विचार करे. जुलाई में मामले की अगली सुनवाई होगी. यह भी पढ़ें : ट्विसा सुसाइड केस: पुलिस हिरासत में फरार पति, कोर्ट की फटकार, CBI के हवाले किया सरकार... 10 दिनों में कब क्या हुआ
रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई. भारतीयों को जबरन रूसी सेना में शामिल किए जाने की शिकायत करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि उसके प्रयासों से 139 लोग वापस आए हैं. केंद्र ने याचिकाकर्ताओं पर मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. कोर्ट ने कहा कि वहां अभी भी फंसे लोगों की सहायता और मारे गए लोगों के लिए मुआवजे पर विचार किया जाए.
क्या है मामला?
26 लोगों ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके परिवार के सदस्य टूरिस्ट, स्टूडेंट या दूसरे वैध वीजा पर रूस गए थे. नौकरी के लिए भर्ती करने वाले एजेंटों ने उन्हें अच्छे रोजगार का वादा किया था. लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर जबरन रूसी सेना में शामिल करवा दिया. कुछ समय तक वह लोग परिवार के संपर्क में रहे, पर अब उनका पता नहीं चल रहा है. 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था.
केंद्र ने क्या बताया?
शुक्रवार, 22 मई को केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को जानकारी दी गई कि लगभग 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए थे. इनमें से 49 की जान जा चुकी है और छह के लापता होने की पुष्टि हुई है. रूस में भारतीय दूतावास के प्रयासों से 139 लोगों को उनके सैन्य कॉन्ट्रैक्ट से मुक्त किया गया. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने यह भी बताया कि जिन 26 लोगों के लिए याचिका दाखिल हुई है, उनमें से 14 की मौत हो चुकी है. 11 के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, जबकि 1 रूस में एक आपराधिक केस के चलते जेल में बंद है.
याचिकाकर्ता पक्ष की आपत्ति
याचिकाकर्ताओं के लिए पेश वकील ने मृत भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर वापस लाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि कुछ शव बेहद क्षत-विक्षत स्थिति में मिले हैं. इसके चलते उनके परिवारों को भारी मानसिक आघात से गुजरना पड़ा. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भाटी ने इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सनसनी पैदा की जा रही है. यह एक जटिल मानवीय और कूटनीतिक परिस्थिति है.
कोर्ट ने क्या कहा?
केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि विदेश मंत्रालय प्रभावित परिवारों की मदद के लिए लगातार कूटनीतिक और मानवीय स्तर पर प्रयास कर रहा है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को मुआवजा या दूसरे कानूनी लाभ देने पर कानून के दायरे में विचार करे. जुलाई में मामले की अगली सुनवाई होगी.
यह भी पढ़ें : ट्विसा सुसाइड केस: पुलिस हिरासत में फरार पति, कोर्ट की फटकार, CBI के हवाले किया सरकार... 10 दिनों में कब क्या हुआ
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